Category: मध्यप्रदेश

  • स्वास्थ्य और चिकित्सा शिक्षा का विलय मंजूर

    स्वास्थ्य और चिकित्सा शिक्षा का विलय मंजूर

    भोपाल,23 जनवरी(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में आज मंत्रालय में हुई मंत्रि-परिषद की बैठक में लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग तथा चिकित्सा शिक्षा विभाग के विलय की स्वीकृति दी गई। लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग तथा चिकित्सा शिक्षा विभाग का विलय कर “लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग” के रूप में पुनर्गठित किया जायेगा। मेडिकल कॉलेज रूटीन चिकित्सा सेवाएं देने के बजाय अति गंभीर/विशिष्ट उपचार, चिकित्सा शिक्षा पर ध्यान केन्द्रित कर सकेंगे। शिशु मृत्यु दर, मातृ मृत्यु दर की प्रभावी निगरानी हो सकेगी। मेडिकल कॉलेजों की बेस्ट प्रेक्टिसेस का स्वास्थ्य केन्द्रों में उपयोग किया जा सकेगा। मेडिकल कॉलेजों से जिला चिकित्सालयों को संबद्ध करना आसान हो जाएगा। स्वास्थ्य नीति और विभागीय योजनाओं के बेहतर क्रियान्वयन एवं नियंत्रण में सुविधा मिलेगी। आत्म-निर्भर मध्यप्रदेश के रोडमैप में दोनों विभागों के विलय की अनुशंसा की गई थी।

    मध्यप्रदेश आयुर्विज्ञान विश्वविद्यालय अधिनियम, 2011 के प्रावधानों में संशोधन

    मंत्रि-परिषद द्वारा मध्यप्रदेश आयुर्विज्ञान विश्वविद्यालय अधिनियम, 2011 के प्रावधानों में संशोधन की स्वीकृति दी गई है। वर्तमान में आयुर्विज्ञान विश्वविद्यालय चिकित्सा, दंत चिकित्सा, नर्सिंग, आयुर्वेद, यूनानी, होम्योपैथी, नेचरोपैथी आदि में पाठ्यक्रम संचालित करता है। नर्सिंग और पैरामेडिकल संस्थाओं और छात्र-छात्राओं की संख्या में वृद्धि को देखते हुए आयुर्विज्ञान विश्वविद्यालय को नर्सिंग एवं पैरामेडिकल को छोड़कर अन्य विषयों के पाठ्यक्रम संचालित करने का दायित्व दिया जायेगा। नर्सिंग एवं पैरामेडिकल विषयो से संबंधित पाठ्यक्रम का संचालन उच्च शिक्षा विभाग द्वारा स्थापित अन्य विश्व विद्यालयों के माध्यम से किया जायेगा।

    मल्हारगढ़ उद्वहन सिंचाई परियोजना के लिए 87 करोड़ 25 लाख रूपये से अधिक की स्वीकृति

    मंत्रि-परिषद द्वारा अशोकनगर की तहसील मुंगावली में बेतवा नदी पर 87 करोड़ 25 लाख रूपये लागत की मल्हारगढ़ उद्वहन सिंचाई परियोजना की प्रशासकीय स्वीकृति दी गयी है। परियोजना से मुंगावली तहसील के 26 ग्रामों के 7500 हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई हो सकेगी।

    रतलाम जिले में तलावड़ा बैराज के निर्माण के लिये 264 करोड़ रूपये की स्वीकृति

    मंत्रि-परिषद ने रतलाम जिले में पेयजल आपूर्ति विस्तारित करने के लिए माही एवं मझोडिया समूह जल प्रदाय योजना अंतर्गत तलावड़ा बैराज (बांध) लागत रुपए 264 करोड़ 1 लाख रूपए की स्वीकृति दी है। जल जीवन मिशन के अंतर्गत परियोजना से रतलाम जिले के 1011 ग्राम लाभान्वित होंगे। इसका निर्माण एवं रखरखाव जल संसाधन विभाग द्वारा किया जायेगा।

    जल (प्रदूषण निवारण और नियंत्रण) अधिनियम, 1974 में संशोधन

    मंत्रि-परिषद ने जल (प्रदूषण निवारण और नियंत्रण) अधिनियम, 1974 में संशोधन के लिए संसद को भेजे जाने वाले प्रस्ताव का अनुमोदन किया है। कानून में जल प्रदूषण से जुड़े छोटे अपराधों को अपराध की श्रेणी से हटाने और जुर्माने का प्रावधान करने जैसे संशोधन प्रस्तावित है।

    सभी जिलों में प्रधानमंत्री कॉलेज ऑफ एक्सीलेन्स की स्थापना का निर्णय

    मंत्रि-परिषद द्वारा राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अतंर्गत प्रदेश के सभी जिलों में 1-1 प्रधानमंत्री कॉलेज ऑफ एक्सीलेन्स स्थापित करने की स्वीकृति दी है। प्रदेश के 55 जिलों में प्रधानमंत्री कॉलेज ऑफ एक्सीलेन्स स्थापित किया जायेगा। चयनित महाविद्यालयों में अतिरिक्त 1845 शैक्षणिक पदों व 387 अशैक्षणिक पदों की स्वीकृति दी गयी है। इसके लिए कुल 485 करोड़ रूपये के व्यय की स्वीकृति दी गयी।

    छठवें वेतनमान की स्वीकृति

    मंत्रि-परिषद द्वारा जनजातीय कार्य विभाग अंतर्गत अनुदान प्राप्त अशासकीय संस्थाओं के शिक्षकों/कर्मचारियों को 1 जनवरी 2006 से छठवें वेतनमान का लाभ देने एवं 206 करोड़ 80 लाख रूपये के अनुमानित व्यय का अनुमोदन दिया गया है।

    अन्य निर्णय

    मंत्रि-परिषद द्वारा मध्यप्रदेश माल एवं सेवा कर (संशोधन) अध्यादेश, 2024 में संशोधन की स्वीकृति दी गई।

  • सोशल मीडिया से विधि का ज्ञान बढ़ाएं,प्रतिक्रिया देने से बचें – सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधिपति श्री अभय एस. ओक

    सोशल मीडिया से विधि का ज्ञान बढ़ाएं,प्रतिक्रिया देने से बचें – सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधिपति श्री अभय एस. ओक

    भोपाल,14 जनवरी(मुकेश मोदी)। माननीय सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधिपति श्री अभय एस. ओक ने सोशल मीडिया का उपयोग विधि का ज्ञान बढ़ाने, साथियों और परिवार के सदस्यों के स्वास्थ्य संबंधी जानकारियाँ लेने, अच्छे कार्यों को करने में प्रयोग करने की सलाह दी है। उन्होने न्यायाधीश को सोशल मीडिया पर दी जाने वाली प्रतिक्रियाओं पर ध्यान न देने और विभिन्न घटनाओं पर सोशल मीडिया के कमेंट पर प्रतिक्रिया न देने की सलाह दी है। वे आज भोपाल के रवीन्द्र भवन में मध्यप्रदेश न्यायाधीश संघ के दसवें द्विवर्षीय सम्मेलन के दूसरे एवं अंतिम दिन “आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस और सोशल मीडिया का न्यायपालिका पर प्रभाव’’ पर अपना संबोधन दे रहे थे।

    न्यायाधिपति श्री अभय एस. ओक की अध्यक्षता और माननीय उच्च न्यायालय मध्यप्रदेश के मुख्य न्यायाधीश श्री रवि मलिमठ की उपस्थिति में अकादमिक सत्र में उन्होने आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस और सोशल मीडिया के न्यायपालिका पर प्रभाव के संबंध में विस्तृत चर्चा की। उन्होने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस का उपयोग दैनिक न्यायालयीन कार्यों में एक सहायक की तरह करें। यह मानव मस्तिष्क, मानवीय संवेदनाओं को प्रतिस्थापित नहीं कर सकता। आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस का प्रयोग करते समय सावधानीपूर्वक कार्य करें।

    उच्च न्यायालय मध्यप्रदेश के न्यायमूर्ति श्री रोहित आर्य और श्री विवेक रूसिया ने भी अपने अनुभवों को साझा करते हुए आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस का उपयोग सावधानीपूर्वक और सहायक कार्यों में करने की सलाह दी।

    माननीय सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधिपति माननीय श्री सूर्यकांत ने वीडियो मैसेज के माध्यम से मध्यप्रदेश न्यायाधीश संघ को शुभकामनाएँ देते हुए मध्यप्रदेश के न्यायाधीशों को उत्साहपूर्वक कार्य करने के लिये प्रोत्साहित किया।

    मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधिपति माननीय श्री रवि मलिमठ ने कहा कि न्यायाधीशों को मेहनत और लगन और ईमानदारी से मानवीय संवेदनाओं के साथ कार्य करते हुए पक्षकारों की पीड़ा को विचार में लेने की अपेक्षा की। उन्होने कहा कि लंबित प्रत्येक मामला न्यायाधीशों के लिये एक ऋण की तरह है, जिसे न्यायाधीशों को त्वरित निराकृत कर विमुक्त होना चाहिये। मध्यप्रदेश न्यायाधीश संघ की वेबसाइट का अनावरण किया गया ।

    श्री सुबोध जैन, अध्यक्ष मध्यप्रदेश न्यायाधीश संघ द्वारा माननीय मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधिपति के प्रति आभार प्रकट करते हुए एक अनूठे कार्यक्रम के आयोजन के लिये न्यायाधीशों को बधाई दी और भविष्य में इसी प्रकार के कार्यक्रम आयोजित करने के लिये न्यायाधीशों को प्रोत्साहित किया।

    अधिवेशन में माननीय उच्च न्यायालय मध्यप्रदेश के तीनों खण्डपीठ के सभी न्यायामूर्ति उपस्थित थे। जिला न्यायालय के लगभग 1500 न्यायाधीश उपस्थित थे। न्यायाधीश संघ के सचिव श्री धर्मेन्द्र टाडा ने आभार व्यक्त किया ।

  • मोदी के ड्रीम प्रोजेक्ट से क्यों हटाए गए संजय बंदोपाध्याय

    मोदी के ड्रीम प्रोजेक्ट से क्यों हटाए गए संजय बंदोपाध्याय


    भोपाल,13 जनवरी (प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)। भारतीय प्रशासनिक सेवा में मध्यप्रदेश कैडर से 1988 बैच के अधिकारी संजय बंदोपाध्याय केन्द्र सरकार से दिए गए एक हजार करोड़ के काम शुरू भी नहीं कर पाए और उन्हें अचानक मध्यप्रदेश वापस भेज दिया गया।इससे सत्ता के गलियारों में तरह तरह की अटकलें लगाई जाने लगीं हैं। केन्द्रीय कार्मिक मंत्रालय से अचानक आदेश जारी होने के बाद ही मध्यप्रदेश के लोगों को पता चल सका कि मुख्य सचिव स्तर का कोई अधिकारी प्रदेश भेजा जा रहा है। कहा जाने लगा कि उनका रिटायरमेंट अगस्त महीने में है जबकि उन्हीं के बैच की अधिकारी वीरा राणा वर्तमान में मुख्य सचिव हैं जिनका रिटायरमेंट मार्च में होना है इसलिए चुनावों को संपन्न कराने के लिए बंदोपाध्याय को मुख्य सचिव बनाया जा सकता है।हालांकि इसके बाद जिस तरह की खबरें सत्ता के गलियारों में फैलीं हैं उनसे लगता है कि डाक्टर मोहन यादव सरकार फिलहाल उन्हें कोई दूसरा काम देने जा रही है।


    बताया जाता है कि केन्द्र में सचिव के समकक्ष होने के बावजूद भारत सरकार ने उन्हें सचिव नहीं बनाया है । वे भारतीय अंतर्देशीय जलमार्ग प्राधिकरण में दिसंबर 2021 से अध्यक्ष थे । यह निगम दरअसल पत्तन पोत परिवहन एवं जलमार्ग मंत्रालय के ही अधीन आता है। जहाजरानी तथा जलमार्ग मंत्रालय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का सबसे प्रिय विभाग रहा है । मोदी सरकार ने जहाजरानी यानी शिपिंग मंत्रालय (Shipping Ministry) का नाम बदलकर मिनिस्ट्री ऑफ पोर्ट्स, शिपिंग और वाटरवेज (Ministry of Ports, Shipping and Waterways) कर दिया था। तभी से यह मंत्रालय बंदरगाह, जहाजरानी एवं जलमार्ग मंत्रालय के नाम से जाना जाने लगा।

    मोदी सरकार ने जैसी कार्यप्रणाली अपनाई है उससे ये विभाग देश का कमाऊ सपूत बन गय़ा है। विदेशी कारोबार बढ़ाने के लिए मंत्रालय ने दुनिया के व्यस्ततम बंदरगाहों पर अपना दखल बढ़ाया है। पिछले दिनों जलमार्गों पर बढ़ते लुटेरों के हमलों के बाद खुफिया सूत्रों को जानकारी मिली थी कि मंत्रालय के ही कुछ अधिकारी जानकारियां लीक करते थे। भारत के पोत परिवहन में अडंगा लगाने में कई विपक्षी राजनेताओं की गतिविधियां भी उजागर हो गईँ हैं। इन राजनेताओं ने कई जहाजरानी कंपनियों में अपना पैसा लगाया हुआ है और नियम कानूनों का पालन होने से उन्हें खासा टैक्स देना पड़ रहा है। इन जहाज कंपनियों के एजेंट लुटेरों के मुखबिरों के रूप में मंत्रालय में सक्रिय पाए गए थे।


    मंत्रालय के सूत्र बताते हैं कि जब श्री बंदोपाध्याय राज्य में ऊर्जा सचिव थे तब बिरसिंहपुर में 500 मेगावाट का बिजलीघर तैयार किया गया था। अपने वरिष्ठ अफसर राकेश साहनी के निर्देश पर उन्होंने बिजलीघर निर्माण में प्राप्त एक बडी धनराशि का निवेश दुबई के शेयर बाजार में करवाया था। बताते हैं कि ये राशि शेयर बाजार में डूब गई । तभी से उन्होंने किसी संभावित जांच से बचने के लिए भारत सरकार में पोस्टिंग करवा ली।


    पत्तन पोत परिवहन एवं जलमार्ग मंत्रालय की कमान सौंपने के लिए जब किसी अधिकारी की खोज की जा रही थी तब बताते हैं कि संजय बंदोपाध्याय की कुंडली खुल गई और भारत सरकार ने उन्हें प्रमोशन देने के बजाए वापस भेज दिया। हालांकि उनके करीबी सूत्र बताते हैं कि श्री बंदोपाध्याय की पत्नी इंडियन इंजीनियरिंग सेवा की अधिकारी हैं और वर्तमान में जबलपुर में जनरल मैनेजर के पद पर पदस्थ हैं। श्री बंदोपाध्याय का रिटायरमेंट नजदीक है इसलिए उन्होंने घर वापिसी का फैसला लिया है।

  • स्काऊट आंदोलन को राघवजी जैसे तपस्वियों ने सफल बनायाः पारस जैन

    स्काऊट आंदोलन को राघवजी जैसे तपस्वियों ने सफल बनायाः पारस जैन


    भोपाल,09 जनवरी(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर) भारत स्काउट एवं गाइड मध्य प्रदेश के पूर्व राज्य मुख्य आयुक्त, पूर्व राज्य सचिव व वर्तमान राज्य आयुक्त कब श्री दलबीर सिंह राघव आज हमारे बीच नहीं है मध्य प्रदेश ही नहीं अपितु राष्ट्रीय स्तर पर स्काउट आंदोलन के लिए है यह अपूर्णीय क्षति है, श्री राघव जी व्यक्ति नहीं व्यक्तित्व थे जिन्होंने स्काउटिंग आंदोलन को गति प्रदान करने के लिए अपनी निजी संपत्ति तक गिरबी रखकर इस पवित्र आंदोलन को आगे बढ़ाने का कार्य किया था। उन्होंने मध्य प्रदेश में जो स्काउटिंग का बीज बोया था वह आज बंट वृक्ष के रूप में हमारे सामने है हमारे द्वारा उनकी इस धरोहर को सहेज कर उनके आदर्शों पर चलना ही उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी यह बात भारत स्काउट एवं गाइड मध्य प्रदेश के राज्य मुख्य आयुक्त श्री पारस चंद्र जैन ने आज स्वर्गीय श्री डी.एस. राघव जी की श्रद्धांजलि सभा के दौरान राज्य मुख्यालय के सभा कक्ष में स्काउट परिवार के समक्ष कहीं।
    श्री जैन ने स्वर्गीय श्री राघव जी के कर्मठ, निर्भीक व जनहितैषी जीवनकाल को याद करते हुए उन्हें मध्य प्रदेश में स्काउटिंग के पितृ पुरुष की संज्ञा से संबोधित किया । इस श्रद्धांजलि सभा में राज्य कोषाध्यक्ष श्री रमेश चंद्र शर्मा ने स्वर्गीय श्री डी.एस. राघव जी को याद करते हुए कहा कि उनमे विषम परिस्थितियों में कड़े निर्णय लेने की जो क्षमता थी वह विरले व्यक्तियों में होती है स्काउटिंग के प्रति उनका समर्पण किसी से छुपा नहीं है। राज्य सचिव श्री राजेश प्रसाद मिश्रा सेवा निवृत्त आईएएस ने स्वर्गीय श्री राघव जी को याद करते हुए कहा कि जब भी कही स्काउटिंग की बात होती है तो श्री राघव जी का नाम सबसे पहले आता है, उन्होंने अपने आप को स्काउटिंग व समाज सेवा के लिए समर्पित कर दिया था ऐसे व्यक्तित्व युगों पश्चात धरा पर जन्म लेते हैं।
    राज्य आयुक्त रोवर श्री राजीव जैन ने कहा कि स्वर्गीय श्री राघव जी ने अपनी धर्मपत्नी की स्मृति में एक विशाल हॉल का निर्माण गांधीनगर में करवाया है साथ ही कारगिल युद्ध के दौरान शहीद हुए अमर जवानों की स्मृति में अमर जवान कारगिल शहीद स्मारक बनवाया , प्रकृति व पर्यावरण संरक्षण के लिए स्वर्गीय श्री डी.एस. राघव जी ने जो कार्य किए हैं वह अतुलनीय है , गांधीनगर प्रशिक्षण केंद्र में जितने भी पौधे आज वृक्ष के रूप में है वह सभी उन्हीं की बदौलत है श्री राघव जी की दूरदृष्टिता इस बात से समझी जा सकती है कि गांधीनगर में पानी न होने के कारण पौधे पनप नही पा रहे थे तभी उन्होंने वहां लगभग एक एकड़ क्षेत्र में तालाब निर्माण करा कर उस जल संकट को दूर किया हम ऐसी महान विभूति के श्री चरणों में नमन करते हैं ।
    कर्मचारियों की ओर से श्री श्री राम सैनी ने श्री राघव जी के जीवन चरित्र पर विस्तृत रूप से प्रकाश डालते हुए मध्य प्रदेश में स्काउटिंग के प्रारंभिक काल में आई परेशानियां के समय स्वर्गीय श्री राघव जी की कार्यशैली व दूरदर्शिता से सबको अवगत कराते हुए वर्तमान में प्रदेश की स्काउटिंग के सफर को बयां किया । श्रद्धांजलि सभा का संचालन राज्य प्रशिक्षण आयुक्त स्काउट श्री बी.एल. शर्मा ने किया इस दौरान श्री संतोष यादव ,श्री सुरेश गोस्वामी, श्री एस साहू, श्री भारत सिंह यादव ,श्री रामेश्वर दयाल सेन ,श्री जयदीप सिंह, श्री मनोज कवर्शे ,श्री पदम सिंह चौहान, श्री देवेंद्र मालवीय, श्री विनोद मिश्रा,श्रीमती आशा चारव्या, श्रीमती कल्पना कुलश्रेष्ठ ,श्रीमती सुनीता पांडे ,श्रीमती निशा परतेती , श्रीमती संध्या श्रीवास्तव,श्री सुभाष श्रीवास, श्री विष्णु श्रीवास ,श्री राजेंद्र दुबे,श्री दीपक साऊलरकर, श्री कपिल रायकवार,श्री संजय कुमार ,श्री राजेंद्र धौलपुरिया, श्री जमाल कटारे,श्रीमती लाली सहित समस्त कार्यालय स्टाफ उपस्थित रहा । श्रद्धांजलि सभा में सभी ने स्वर्गीय श्री डी.एस. राघव जी सहित राज्य उपाध्यक्ष श्री प्रकाश चित्तौड़ा जी की माताजी के देहावसान ,श्री सुरेश गोस्वामी जी के पिताजी के देहावसान ,श्री रवि यादव जी की माता जी के देहावसान तथा श्रीमती कविता वर्मा की दादी जी के देहावसान पर गहन दुख प्रकट करते हुए 2 मिनट का मौन धारण कर दिवंगत आत्माओ की शांति हेतु ईश्वर से प्रार्थना की ।।

  • अब बिट्वीन द लाईंस भी देखना पड़ेगा मुख्यमंत्री जी

    अब बिट्वीन द लाईंस भी देखना पड़ेगा मुख्यमंत्री जी


    अवैध हड़ताल से देश को ठप करने वालों की औकात क्या इतनी हो सकती है कि वे जनता की सरकार को भी चुनौती देने लगें। मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने सारे तथ्यों पर विचार करके कहा कि हड़ताल अवैध है, सरकार जनसुविधाएं बहाल करे । ऐसे में प्रशासन को आगे बढ़कर गतिरोध हटाना ही था। हाईकोर्ट के निर्देश के बाद शाजापुर कलेक्टर जब पूरे देश को चुनौती देने वाले किसी अपराधी को ललकार लगाए तो उसमें भाषा के लालित्य पर सवाल नहीं उठाया जा सकता । देश के हमलावर को आत्मरक्षा में तैनात सैनिक बंदूक की गोली से मारे या लाठी से या फिर मुक्के लात से,ये थोड़ी देखा जाता । उसका तो उद्देश्य शत्रु पर विजय पाना है। कुछ लाल बुझक्कड़ बुद्धिजीवी ऐसे टसुए बहाने निकल पड़े कि सरकार ने अपने ही कलेक्टर को हटाकर मंत्रालय में बिठा दिया। इस पहले मूव ने सरकार को कटघरे में खड़ा कर दिया है। डॉक्टर मोहन यादव को जिन्होंने करीब से देखा है वे जानते हैं कि मुख्यमंत्री लीक पकड़कर चलने वालों में से नहीं हैं। इसके बावजूद सत्ता के इर्द गिर्द झुंड जमा लेने वाले दरबारियों के सामने तो राजा विक्रमादित्य की भी मति मारी जाए। लगभग दो दशकों में शिवराज सिंह चौहान ने अपने इर्द गिर्द चमचों और चिलमकारों की ऐसे फौज जमा कर रखी थी कि सरकार किसी और पटरी पर चली गई थी। इन कुकर्मों को छुपाने के लिए इन चमचों ने एक स्वर में इसे संघ का फरमान बताना शुरु कर दिया था। जन आक्रोश की इसी अभिव्यक्ति के रूप में कमलनाथ गिरोह को सत्ता में घुसपैठ का अवसर मिल गया था। ज्योतिरादित्य सिंधिया की एंट्री न हुई होती तो हालिया चुनाव भाजपा को विपक्ष में बैठकर लड़ना पड़ता। सिंधिया के आने के बावजूद सरकार का कामकाज इतना लचर और जड़ था कि उसे किसी नजरिए से सुशासन नहीं कहा जा सकता। ये तो गनीमत है कि जनता की और पार्टी कार्यकर्ताओं की टीस को भाजपा हाईकमान ने सुन लिया और शिवराज को पैवेलियन में भेजकर सत्ता परिवर्तन की जन आकांक्षा पूरी कर दी। समस्या ये है कि सत्ता के सिंहासन पर बदलाव अभी पूरी तरह नहीं हुआ है। शिवराज के बहरे सत्ताभोगियों को साथ लेकर सुशासन करने निकले मोहन यादव अभी तक अपना राज स्थापित नहीं कर सके हैं। किशोर कान्याल को हटाने के फैसले से इतना तो साफ झलकता है कि वे अपनी सोच और पार्टी की विचारधारा को स्थापित करने के लिए बदलाव करना चाहते हैं। ये बदलाव गलत मोड़ पर हुआ है। किशोर कान्याल मध्यप्रदेश के जमीनी प्रशासन को समझने वाले प्रतिभाशाली अफसर हैं। राज्य प्रशासनिक सेवा के कई जिम्मेदार पदों पर रहते हुए उन्होंने जमीनी हकीकत को करीब से देखा है। जनोन्मुखी शासन शैली का तो खुमार उन पर इतना अधिक है कि वे अपना हर कार्य सार्वजनिक तौर पर करते हैं। जब ड्राईवरों की हड़ताल पर चर्चा के लिए कलेक्टर के चेंबर में बातचीत चल रही थी तब भी उन्होंने मीडिया को चर्चा में उपस्थित रहने की अनुमति दे रखी थी। ड्राईवरों की हड़ताल को विपक्ष ने पूरे देश में कुछ इस तरह प्रचारित किया था मानों वे देश के कर्मठ सिपाही हैं और सरकार उन्हें कुचलकर मार देना चाहती है। हिट एंड रन पर बना कानून एक दिन में अस्तित्व में नहीं आया। पूरी सुविचारित प्रक्रिया से इसे तैयार किया गया है। विपक्ष का कहना था कि जब वे सदन में कम संख्या में मौजूद थे तब सरकार ने बगैर चर्चा के इसे पास करा लिया। जबकि हकीकत ये है कि विपक्ष के जो सदस्य सदन में मौजूद थे उन्होंने भी बिल का समर्थन किया था। कानून से ड्राईवरों को खतरा क्यों महसूस हो रहा है। यदि वे सही चल रहे हैं और कोई व्यक्ति अपनी गलती से उनके वाहन के नीचे कुचलकर मर जाता है तो इसे अदालत में साबित करके वे साफ बच सकते हैं। अब नेशनल हाईवे पर जंगल में यदि कोई दुर्घटना होती है जहां कोई जनता मौजूद नहीं है तो ड्राईवर को भागने की जरूरत क्या है। वह जाकर प्रशासन को सूचना दे सकता है कि फलां राहगीर शराब के नशे में या किसी तकनीकी खामी की वजह से उसके वाहन के नीचे आ गया है कृपया उसे उपचार उपलब्ध कराएं। कोई कानून इतना अंधा तो है नहीं कि गलती न होने के बावजूद ड्राईवर को सात साल की जेल और दस लाख रुपए के जुर्माने की सजा दे दे। सभी ट्रकों में अभी तक कैमरे और जीपीएस नहीं लगाए गए हैं। निजी कंपनियां थर्ड पार्टी बीमे का प्रीमियम समय पर भरती नहीं। राहगीरों की सुरक्षा वे सुनिश्चित करती नहीं। इस पर ड्राईवरों को ऐसा भयभीत कर दिया कि वे बेचारे कानून के भय से कांपने लगे। कानूनी प्रावधान यदि गलत हैं तो सही प्रक्रिया अपनाकर उन्हें बदला भी जा सकता है। इसके बावजूद विपक्ष और खासतौर पर कांग्रेस ने हो हल्ला मचाकर देश भर में भय का वातावरण निर्मित कर दिया। लोकहित में लड़ने वाले शूरवीर अधिकारियों को सलाम किया जाना चाहिए कि उन्होंने विपरीत हालात में भी मोर्चा संभाला और नागरिकों को जरूरी सामानों की सप्लाई बाधित नहीं होने दी। कलेक्टर महोदय की क्लीपिंग वायरल करने वाले टीआरपी प्रेमी पत्रकारों मौका हाथ से नहीं जाने दिया। दरअसल जिन पत्रकारों ने ये काम किया उनकी ये समझने की औकात भी नहीं थी कि सामाजिक दायित्वों का निर्वहन कैसे किया जाता है। शायद यही वजह है कि राजनेता और प्रशासन अक्सर मीडिया कर्मियों को विमर्श स्थल से बाहर खदेड़ देते हैं। सीधी भर्ती वाले आईएएस अफसरों की टीस तो समझी जा सकती है पर सत्ता पर आसीन राजा विक्रमादित्य की सोच में पले बढ़े राजनेता की आंख पर भी वे पट्टी बांध दें ये कैसे संभव हो सकता है। भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारियों को तो कम से कम सुशासन का समर्थन करते हुए कलेक्टर को अपना संरक्षण देना था। वे भी एक गलत नारे की रौ में बह निकले। ये अंग्रेजों की विदेशी सरकार तो है नहीं। संवैधानिक कानून का विरोध करने के लिए अब जनांदोलन जरूरी नहीं है। कानून उनकी ही सरकार ने बनाया है वे अपनी ही सरकार से इसमें सुधार करवा सकते हैं। इसके लिए आंदोलन की तो जरूरत ही नहीं है। सरकार ने कानून को लागू करने की अवधि बढ़ाने की बात कहकर मौजूदा गतिरोध तो टाल दिया है लेकिन उसे नहीं भूलना चाहिए कि वह जनता की निर्वाचित सरकार है। दबाव की राजनीति करने वाले चंद बदमाशों के दबाव में वह अपने दायित्व से मुकर नहीं सकती। नए नए मुख्यमंत्री जी को भी यही सलाह है कि वे अब बिट्वीन द लाईन्स भी देखना शुरु करें। सत्ता के शीर्ष पर बैठकर जो दिखाया जाता है वह हमेशा सही नहीं होता।यदि इस तरह के फैसले सामने आएंगे तो फिर कौन अधिकारी जनहित की लड़ाई लड़ने की हिम्मत करेगा।

  • हिट एंड रन पर सरकार सख्त,मुख्यमंत्री के निर्देश नागरिक सेवाएं बहाल करें

    हिट एंड रन पर सरकार सख्त,मुख्यमंत्री के निर्देश नागरिक सेवाएं बहाल करें


    भोपाल,2 जनवरी(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने आज मंत्रालय में कमिश्नर, कलेक्टर और एसपी के साथ वीसी के माध्यम से चर्चा कर ट्रक ड्राइवरों की हड़ताल के मद्देनजर किए जा रहे आवश्यक उपायों की जानकारी प्राप्त की और जरूरी निर्देश दिए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि नागरिकों को आवश्यक सामग्री के लिए परेशानी नही हो, इसके लिए सभी जरूरी उपाय किए जाएं।


    मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को हड़ताल खत्म कराने के निर्देश दिए हैं। दो याचिकाओं पर मंगलवार को हुई सुनवाई में हाईकोर्ट ने कहा, ‘हड़ताल को तुरंत खत्म करवाया जाए। सरकार परिवहन बहाल करवाए।’ इस पर सरकार की तरफ से महाधिवक्ता ने कहा, ‘आज शाम तक इस मामले में अहम निर्णय लिया जा रहा है।’ ये याचिकाएं नागरिक उपभोक्ता मंच और अखिलेश त्रिपाठी की ओर से दायर की गईं।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश में पेट्रोल-डीजल की सप्लाई प्रभावित न हो। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि पेट्रोल-डीजल को लेकर कोई अवरोध पैदा करेगा तो उसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। इसके लिए सभी आवश्यक उपाय सुनिश्चित किए जाएं, जनता को किसी भी प्रकार का कष्ट न हो। पेट्रोल पंप और एलपीजी गैस के डीलर्स जिनके अपने वाहन हैं, उनके माध्यम से सप्लाई सुनिश्चित की जाए।


    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने जबलपुर, ग्वालियर, कटनी, रीवा, उज्जैन, सागर समेत विभिन्न जिलों के कलेक्टर, एसपी से चर्चा करते हुए कहा कि किसी भी मार्ग पर अवरोध और बाधा न हो। रास्ते की सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करें। सभी डीलर्स, एसोसिएशन के साथ बैठक करें। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि हमारा मैदान में मूवमेंट दिखे। सोशल मीडिया, इलेक्ट्रॉनिक मीडिया आदि प्लेटफार्म का उपयोग करते हुए स्थिति सामान्य होने की जानकारी दी जाए।

    बैठक में अपर मुख्य सचिव गृह डॉ. राजेश राजौरा, डीजीपी श्री सुधीर कुमार सक्सेना, मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव श्री राघवेंद्र सिंह सहित वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे।

  • अमीरी की आधारशिला पर खुशहाल बनेगा मध्यप्रदेशःगौतम टेटवाल

    अमीरी की आधारशिला पर खुशहाल बनेगा मध्यप्रदेशःगौतम टेटवाल


    भोपाल, 2 जनवरी(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)। कौशल विकास एवं रोजगार राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) गौतम टेटवाल ने कहा है कि हमारे युवा हमारी संपदा हैं। हम इस युवा शक्ति ऊर्जा को बेहतर दृष्टिकोण से संवार रहे हैं। इससे स्थायी रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे और युवाओं का जीवन स्तर बेहतर होगा. पिछली सरकारें गरीबी को संरक्षित करती रहीं हैं मुख्यमंत्री डॉक्टर मोहन यादव के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार अमीरी की आधारशिला पर काम कर रही है। इसके नतीजे जल्दी ही सबको खुशहाल बनाएंगे।


    उन्होंने मंगलवार को वल्लभ भवन क्र. 3 में कक्ष क्र. 318 में पूजा अर्चना कर पदभार ग्रहण किया। श्री टेटवाल ने विभागीय योजनाओं की जानकारी भी ली। इस दौरन अपर मुख्य सचिव तकनीकी शिक्षा एवं कौशल विकास श्री मनु श्रीवास्तव एवं अन्य अधिकारी उपस्थित थे।

    श्री टेटवाल ने एक मुलाकात में कहा कि प्रदेश अब रोजगार निर्माण के एक नए दौर में प्रवेश करने जा रहा है।अब तक भाजपा सरकार ने युवाओं के कौशल के आधार पर उनका जीवन संवारने के लिए विभिन्न उद्यमों की मदद ली थी। इस प्रक्रिया में युवाओं को फौरी राहत भी मिली । अब स्थायी रोजगार स्थापित करने के लिए हम वो फार्मूला लागू कर रहे हैं जिसके माध्यम से आत्मनिर्भर प्रदेश के निर्माण की राह प्रशस्त होगी। प्रदेश के करोड़ों युवा आज अपने हुनर के मुताबिक काम न मिलने के कारण परेशान हैं।अब सरकार जिन उद्यमों को बढ़ावा दे रही है उससे युवाओं के जीवन में समृद्धि आएगी और प्रदेश भी समृद्ध होगा।

  • उमाजी की अर्थनीति के असली हीरो चेतन काश्यप

    उमाजी की अर्थनीति के असली हीरो चेतन काश्यप


    दिग्विजय सिंह की दिग्भ्रमित सरकार को 2003 में घाटी पर उतारकर उमाश्री भारती ने जिस भारतीय जनता पार्टी की सरकार को सत्ता दिलाई थी वह सत्ता में आते ही आत्मनिर्भर मध्यप्रदेश के फार्मूले पर काम करने लगी। वैश्विक सूदखोरों की लॉबी ने उमाजी के पंच ज अभियान को सत्ता से धकेलकर जिस कर्ज आधारित विकास की अर्थव्यवस्था को सत्तासीन कराया वह बीस सालों तक छायी रही । बिजली ,सड़क और पानी की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए वैश्विक संस्थाओं ने राज्य को भरपूर कर्ज मुहैया कराया। शिवराज जी को इस दौर के लिए सत्ता में भेजा गया था तो उन्होंने आधारभूत ढांचे का धन जनता के बीच बांटकर खूब वाहवाही बटोरी। आज शिवराज सिंह चौहान जनता के बीच बड़ा ब्रांड बन चुके हैं लेकिन अब राज्य उस अंधी गली में पहुंच गया है कि उसे विकास के नए प्रतिमान तलाशने पड़ रहे हैं। नए मुख्यमंत्री डॉक्टर मोहन यादव के सामने चुनौती है कि वे विकास के उत्पादक मॉडल को जमीन पर उतारें और राज्य की समस्याओं का उचित समाधान तलाशें । ऐसे में पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती ने रतलाम शहर के विधायक और डॉ.मोहन यादव केबिनेट के मंत्री चेतन काश्यप के माध्यम से जो संदेश दिया है वह गौर करने लायक है।
    रतलाम शहर के विधायक चेतन काश्यप अपनी दानशीलता और जमीनी विकास को महत्व देने के लिए मॉडल बन चुके हैं। उनके बेटे कारोबार करते हैं जबकि चेतन काश्यप राजनीति की रीढ़ बने हुए हैं। उन्होंने जिन प्रकल्पों को साकार किया है वे आत्मनिर्भर समाज के लिए मार्गदर्शक बन गए हैं। उन्होंने सौ लोगों को ऐसे आवास बनवाकर दिए हैं जो आत्मिर्भरता की राह पर चलकर समृद्ध हो रहे हैं। प्रधानमंत्री आवास योजना के अंतर्गत उन्होंने रोजगार को जोड़कर सुखमय संसार की गारंटी सुनिश्चित की है। उनके विशाल आवास की भोजनशाला कार्यकर्ताओं और जरूरतमंदों को समाजसेवा का मंच देती है। पूरे नगर और आसपास के गांवों में चेतन काश्यप को लक्ष्मी पुत्र माना जाता है। लोग जानते हैं कि भाई जी यदि खड़े हैं तो वहां सुशासन खुद ब खुद हाथ बांधे खड़ा हो जाएगा। यही वजह है कि वे चुनाव में गली गली की धूल नहीं फांकते। जनता स्वयं उनके लिए चुनाव लड़ती है।ऐसे आदर्श लोक सेवक यदि हर विधानसभा को मिलने लगें तो एक पंचवर्षीय योजना में राज्य की काया ही पलट जाए।
    कांग्रेस जिस भाजपा को सेठों और बनियों की पार्टी कहकर उपहास उड़ाती थी उस भाजपा ने उन्हें पार्टी का कोषाध्यक्ष बनाया। राज्य की अर्थव्यवस्था में किस ढांचे की जरूरत है वे अच्छी तरह जानते हैं। पिछले दो दशकों में भाजपा ढांचागत विकास पर कार्य कर रही थी तब चेतन काश्यप की भूमिका का उपयोग किया जा सकता था लेकिन शिवराज जी और उनके बटोरनाथ मंत्री अपने काम में किसी प्रकार का खलल नहीं चाहते थे। यही वजह है कि उन्होंने चेतन काश्यप की प्रतिभा का इस्तेमाल करने पर कोई गौर नहीं किया। चेतन काश्यप रतलाम में जो गोल्ड सोक (सोने का बाजार)बनवा रहे हैं। वह जब आकार ले लेगा तो रतलाम देश की प्रमुख सोने की मंडी बन जाएगा। यहां बनने वाले गोल्ड के आभूषण दुबई की तरह देश और विदेश के लिए आकर्षण का केन्द्र बन जाएंगे। सोने के कारोबार को इससे पहले इतनी कुशलता से दुनिया में कहीं नहीं खड़ा किया गया है।ऐसे ढेरों विचार काश्यप की झोली में हर वक्त मौजूद रहते हैं।
    खुद चेतन काश्यप बताते हैं कि जैन साध्वी ने उन्हें प्रेरणा दी थी कि वे अपने हुनर और भाग्य की सौगात समाज के पिछड़े और दलित लोगों को मुख्यधारा में लाने के दें। तबसे काश्यप का लक्ष्य बन गया है कि वे विकास की दौड़ में पिछड़ चुके नागरिकों का जीवन संवारने में जुट गए हैं। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने जब मध्यप्रदेश में अपने चुनाव प्रचार अभियान की शुरुआत की तो उन्होंने रतलाम शहर को ही चुना। पहली चुनावी सभा में उनके साथ चेतन काश्यप और मंदसौर के सांसद सुधीर गुप्ता भी मौजूद थे। सुधीर गुप्ता संसद में लोक लेखा समिति, वित्त समिति, रसायन व उर्वरक समितिके अलावा लोकसभा आवास समिति की जवाबदारी भी संभालते हैं। वे प्रधानमंत्री के उन प्रमुख सहयोगियों में शामिल हैं जो भाजपा की विकास की अवधारणा की आधारशिला हैं।
    चेतन काश्यप को मंत्री बनाकर डॉक्टर मोहन यादव सरकार ने जता दिया है कि मध्यप्रदेश अब भाजपा की उस सुविचारित विकास नीतियों पर अमल करने जा रहा है जो देश को न केवल पांच ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बना देंगे बल्कि इस लक्ष्य से भी कई गुना आगे निकल जाएंगे। ऐसे में पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती ने चेतन काश्यप को सलाह देकर विकास के इस मॉडल के प्रति अपनी सहमति जताई है।
    उमा भारती अपने भाषणों में कहती रहीं हैं कि वे दलितों और पिछड़ों को विकसित तभी मानेंगी जब वे खुद शहरों के प्रमुख बाजारों में अपने प्रतिष्ठान खड़े करके देश की अर्थव्यवस्था में योगदान देने लगें। समाज में वैमनस्य फैलाती कांग्रेस और बहुजन समाज पार्टी जैसे दलों के लिए भाजपा ने जो प्रतिमान खड़े किए हैं वे हतप्रभ कर देने लायक हैं। पचहत्तर सालों के बाद मध्यप्रदेश की सरकारी नौकरियों में मात्र चार लाख दलितों और पिछड़ों को रोजगार मिल सके हैं जबकि भारतीय जनता पार्टी ने अकेले लाड़ली बहना योजना से चालीस लाख दलितों के घर में आय का दीपक जला दिया है। अन्य योजनाओं का आंकड़ा देखा जाए तो पिछड़ों और दलितों की राजनीति करने वाले तमाम राजनीतिक दल अवाक रह जाएंगे। विकास का वामपंथी मॉडल जिन श्रमिकों की बात करता है भाजपा ने उन्हें समाज की उत्पादकता में हिस्सेदार बनाकर सारे रिकार्ड तोड़ दिए हैं। सत्ता संभालते ही मुख्यमंत्री डॉक्टर मोहन यादव ने हुकुमचंद मिल और ग्वालियर की विनोद मिल के परिसमापन की जो पहल की वह भाजपा के श्रमिकों के प्रति समर्पण की आहट है।
    नई सरकार राज्य में पूंजी उत्पादन का जो मॉडल खड़ा करना चाह रही है उसकी झलक अभी से मिल गई है। उमा भारती ने चेतन काश्यप के बहाने एक बड़ी बहस को जन्म दिया है। वे कह रहीं हैं कि चेतन काश्यप को वेतन लेना चाहिए और अपने कर कमलों से उसे समाज की बेहतरी के लिए खर्च करना चाहिए। उनके सेवा कार्य तभी भाजपा के समर्पण के प्रकाश स्तंभ बन पाएंगे। आने वाले समय में राज्य एक बड़ी बहस में शामिल होने जा रहा है जिसमें एक ओर राज्य को कर्जदार बनाकर वाहवाही लूटने वाली लॉबी खड़ी होगी वहीं दूसरी ओर वित्तीय संसाधनों का विकास करके देश को बुलंदी पर पहुंचाने वाले स्वयंसेवक खड़े होंगे। तब विकास की अवधारणा का अंतर साफ समझा जा सकेगा।

  • जनता की कोई योजना बंद नहीं होगीः डॉ.मोहन यादव

    जनता की कोई योजना बंद नहीं होगीः डॉ.मोहन यादव

    भोपाल 21 दिसंबर(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव (Chief Minister Dr. Mohan Yadav) ने कहा कि मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) की कोई योजना बंद नहीं होगी। मध्य प्रदेश में पैसे (Paise) की कोई कमी नहीं है। लाडली बहना (Ladli Bahna) के लिए जो तारीख नियत है उसी पर राशि डाली जा रही है। सीएम ने गुरुवार को राज्यपाल के अभिभाषण पर कृतज्ञता प्रकट करते हुए अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि भाजपा का संकल्प पत्र (resolution letter) धर्म ग्रंथ रामायण-गीता (Ramayana-Geeta) की तरह है।उन्होंने कहा कि अभी तो उनकी सरकार की आंखें भी नहीं खुली है। लोगों को धीरे धीरे पता चल जाएगा कि हमारी सरकार जनता की कसौटी पर किस तरह खरी उतरेगी।

    संकल्प पत्र के वादे को अक्षरशः पूरा किया जाएगा। 5 साल की सरकार में हर वादे पूरे होंगे। ये एक दिन की सरकार नहीं है, न ही 15 महीने की सरकार है। हम पांच साल बाद बात करेंगे। उन्होंने कहा कि पश्चिम के लोगों ने भारतीय संस्कृति को लज्जित करने का काम किया है। कुछ लोग सूर्य उदय से दिन की शुरुआत करते हैं, जबकि कुछ सूर्यास्त के बाद जागते हैं। सीएम ने कहा कि मोदी ने दुनिया में देश का मान बढ़ाया है। ऐसे में उनका जिक्र तो होगा ही।

    सीएम यादव ने कहा कि कांग्रेस के कारण विक्रम संवत की परंपरा खत्म हुई है। योगी आदित्यनाथजी ने बताया था कि 2 हजार साल पहले विक्रमादित्य ने अयोध्या का मंदिर बनाया। दुनिया में तीन भाई प्रसिद्ध हैं राम-लक्ष्मण, कृष्ण-बलराम और विक्रमादित्य-भर्तृहरि। नई शिक्षा नीति लागू कर गलती सुधारी गई है। उन्होंने कहा कि 55 एक्सीलेंस कॉलेज खोले जाएंगे। रजिस्ट्री के साथ नामांतरण होगा। सुप्रीम कोर्ट के तीन तलाक का फैसला कांग्रेस ने लोकसभा में बदला। कांग्रेस ने राम मंदिर के मामले को भी अटकाया।

    सीएम ने कहा कि जो यात्री अयोध्या जाना चाहेंगे उन्हें तीर्थ दर्शन योजना से अयोध्या भेजा जाएगा। ट्रेन, बस से मध्य प्रदेश की जनता को सरकार राम लला के दर्शन के लिए अयोध्या भेजेगी। हम राम भक्तों का स्वागत करेंगे। राम भक्तों के लिए मध्य प्रदेश की सरकार फूल बिछाएगी।

    सीएम ने सदन में एलान किया कि मध्य प्रदेश में कृष्णजी ने जहां-जहां लीलाएं की हैं। प्रदेश सरकार उन स्थानों को विकसित करेगी। कांग्रेस को पहले राम पर आपत्ति थी अब कृष्ण से हो रही है। सीएम ने कहा कि अब जो सिंहस्थ होगा वो पुराने सिंहस्थ से और अच्छा होगा। सिंहस्थ में किसी भी प्रकार की कमी नहीं होगी।

  • सत्ता माफिया से मुक्ति दिलाने एमपी आया जाणता राजा

    सत्ता माफिया से मुक्ति दिलाने एमपी आया जाणता राजा


    कांग्रेस की अराजक सरकारों से मुक्ति के दो दशक बाद तक मध्यप्रदेश किताबी प्रयोगों से गुजरता रहा है। पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती ने जिस पंच ज अभियान की नींव रखी थी वह साकार हो पाती इसके पहले ही अंतर्राष्ट्रीय सूदखोरों के एजेंटों ने मध्यप्रदेश की सत्ता हथिया ली थी। बाबूलाल गौर हों या शिवराज सिंह चौहान और थोड़े समय के लिए आए कांग्रेस के कमलनाथ सभी कर्ज आधारित अर्थव्यवस्था के पक्षधर रहे हैं। यही वजह है कि सरकारों का आकलन करने में जनता को खासी परेशानी महसूस होती थी। भाजपाई उन्हें एक तरह से कांग्रेसी ही नजर आते थे। जाहिर है कि जब विकास की अवधारणा कर्ज लेकर घी पीने के सूत्रवाक्य पर टिकी हो तो राज्य की उत्पादकता बढ़ाने की ओर किसका ध्यान जाता।कर्ज लेना और फिर सत्ता के इर्द गिर्द जुटे माफिया के माध्यम से उसे हड़प लेना सरकार की शैली बन गई थी। पहली बार महाकाल ने एमपी में सुशासन के लिए अपने ऐसे भक्त को भेजा है जो सुशासन की पाठशाला में तपकर सामने आया है।


    मुख्यमंत्री रहते हुए शिवराज सिंह चौहान ने किसानों का नाम जपना शुरु किया था। एमपी की कृषि ही एकमात्र ऐसा क्षेत्र है जो बगैर निवेश किए खासी उत्पादकता देता है। औद्योगिक विकास में तो भारी निवेश करने के बाद भी उत्पादकता की कोई गारंटी नहीं होती। फिर जब उद्योगों को जबरिया थोपा गया हो तब तो वे अपनी स्थापना के समय ही उपसंहार का अध्याय भी लिख देते हैं। ऐसे में प्रदेश को आत्मनिर्भरता की परंपरा की जरूरत लंबे समय से महसूस की जा रही थी। शिवराज सिंह चौहान के होनोलुलु शासन से हर कोई खफा था लेकिन कांग्रेस न आ जाए इस भय से सभी खामोश रहते थे। हवाई जहाजों में फुदककर गांव खेड़ों में जाना और मैं हूं न कहकर लोगों को हूल देना कोई शिवराज सिंह चौहान से सीख सकता है।अभी ये भ्रम फैलाया जा रहा है कि मामा के जाने से लाड़ली बहना योजना बंद कर दी जाएगी,जबकि ये तो शासन की योजना है। ये बात लाड़ली बहनों को थोड़े दिनों में जरूर समझ में आ जाएगी।


    भाजपा के नेता रघुनंदन शर्मा ने तो शिवराज जी को घोषणावीर का तमगा देकर उनकी कार्यशैली पर सवालिया निशान लगा दिया था लेकिन अखिल भारतीय क्षत्रिय महासभा के समर्थन से उनकी नैया चलती रही। क्या भाजपा और क्या कांग्रेसी सभी उनके समर्थन में खामोश रहे। शिवराज सिंह चौहान विनम्र शासक रहे हैं और बीस सालों बाद भी उनमें अहंकार नहीं पनप पाया है इसी वजह से उनकी सारी नाकामियों पर पार्टी और संगठन दोनों परदा डालते रहे। खोखली ललकार के सहारे उन्होंने सत्ता चलाने की कोशिश जरूर की लेकिन वे शुरु से लेकर अंत तक नौकरशाही और पुलिस प्रशासन पर लगाम नहीं लगा सके।


    भारतीय जनता पार्टी कार्यालय में जब विधायक दलकी बैठक हो रही थी तब पार्टी का संगठन और सरकार के नुमाइंदे सभी अपनी नाकामियों का सबूत पेश कर रहे थे। भारतीय जनता पार्टी संगठन ने कोई प्लान नहीं बनाया था कि जब नए नेता की घोषणा होगी तो किस तरह वो आने वाले नागरिकों, पदाधिकारियों या प्रेस को संबोधित करेंगे। बैठक समाप्त होते ही प्रेस के प्रतिनिधियों को जब फैसले की जानकारी मिली तो वे पार्टी कार्यालय में भीतर घुस गए। भारी धक्कामुक्की और अव्यवस्था के बीच जनता तक जानकारी पहुंचाने की कोई व्यवस्था नहीं थी।

    नए नेता के चयन की सूचना जनता तक पहुंचाने के लिए प्रेस मीडिया को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा।


    ऐसा लगता है कि ये अराजकता पार्टी के प्रदेश हाईकमान के निर्देश पर ही की गई थी। व्यवस्थित चुनाव प्रचार अभियान चलाने वाला भाजपा का संगठन फैसला सुनने के बाद ऐसा शून्य हो गया था कि उसने अव्यवस्था का लांछन नए नेता पर थोपने की तैयारी पहले से ही कर रखी थी। महिलाएं और युवा पत्रकार इसी धक्कामुक्की के बीच जनता को जानकारियां पहुंचा रहे थे। नाकाम पुलिस प्रशासन भी तैयार नहीं था। वह तय ही नहीं कर पाया कि किस तरह वह उत्साहित कार्यकर्ताओं के इस सैलाब का प्रबंधन कर पाएगा। माईक संभाले पुलिस के अधिकारी स्वयं अपनी अव्यवस्था के शिकार बने और भीड़ ने उन्हें धकेलकर गिरा दिया।

    विदा होती सत्ता ने नए मुख्यमंत्री के चयन की सूचना के मार्ग में दरवाजा बंद करके कई बाधाएं खड़ी कर दीं थीं.


    डॉ.मोहन यादव सख्त प्रशासक माने जाते हैं। वे स्वर्गीय वीरेन्द्र सखलेचा की तरह आदर्शवाद के तले दबने वाले व्यक्ति भी नहीं हैं। उन्हें अच्छी तरह मालूम है कि समाज और भीड़ का प्रबंधन कैसे करना होता है। उज्जैन में लगने वाले कुंभ की व्यवस्था संभालने का उन्हें लंबा अनुभव है। ऐसे में जनता को क्या सुविधाएं कब उपलब्ध करवाना है वे अच्छी तरह जानते हैं। किन पाखंडियों की सत्ता में घुसपैठ रोकना है वे ये भी अच्छी तरह समझते हैं।समर्पित भाव से जनसेवा करने का उनका लंबा इतिहास है। पार्टी को जाति या वर्ग के दायरे से बाहर निकलकर व्यवस्था संभालने में भी उनकी युक्तियां सदैव से चर्चित रहीं हैं।

    भारत सरकार की योजनाएं हों या फिर राज्य सरकार की उन्होंने अपने क्षेत्र के लोगों को मुहैया कराने में रिकार्ड स्थापित किया है। योजनाओं को जरूरतमंदों तक पहुंचाना और इनमें घोटाला करने वालों को उनकी हैसियत बताना उनका प्रिय शगल है। इसलिए अराजकता के दौर के आदी हो चुके मध्यप्रदेश के सत्ता माफिया को अब सावधान हो जाना चाहिए। सत्ता की आड़ में बजट की चोरी करने वालों का गिरोह भी अब सावधान हो जाए तो ही बेहतर होगा क्योंकि सत्ता के लुटेरों की खाल खींचने वाला जांबाज अब मैदान पर आ गया है। ऐसे ठग समझ लें कि उनका सामना अब तक शिवराज जी जैसे भलेमानस से पड़ा था। पहली बार उन्हें जाणता राजा मिला है। जो एमपी को नई ऊंचाईयों पर ले जाने के लिए कमर कसकर तैयार है।फिर मोदीजी का डबल इंजन तो पहले ही उनके साथ मौजूद है।

  • आरएसएस से निष्कासित भाजपा नेता ने किया अतिक्रमण, एनजीटी ने मांगी राहत रिपोर्ट

    आरएसएस से निष्कासित भाजपा नेता ने किया अतिक्रमण, एनजीटी ने मांगी राहत रिपोर्ट


    एनजीटी ने दिया नागरिकों को राहत देने का निर्देश
    भोपाल,06 दिसंबर(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)। भारतीय जनता पार्टी सरकार की आड़ में कतिपय असामाजिक तत्वों ने प्रशासन को कुछ इस तरह पंगु बना दिया है कि वह नागरिकों के प्रति अपने दायित्वों को ही भूल चला है। चुनावी प्रक्रियाओं के चलते अब तक खामोश रही प्रशासनिक मशीनरी ने प्रकाश नगर में कल दौरा किया और अवैध निर्माण के चलते चोक हुई सीवेज लाईनों को खोलने के निर्देश दिए हैं। एनजीटी के आदेश के अनुपालन में प्रशासन ने अवैध निर्माण गिराने की तैयारी भी की है। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि कि वे किसी राजनैतिक हस्तक्षेप को अब बर्दाश्त नहीं करेंगे और प्रशासन यदि अपना दायित्व नहीं निभाता है तो वे इस संबंध में वैकल्पिक तरीकों का भी इस्तेमाल करने से नहीं चूकेंगे।
    मामला गोविंदपुरा विधानसभा क्षेत्र स्थित प्रकाश नगर का है।यहां अनैतिक आचरण के चलते राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से बर्खास्त किए गए एक असामाजिक तत्व ने सीवेट ट्रीटमेंट के प्लाट पर अवैध निर्माण खड़ा कर लिया है।नागरिकों के विरोध के बावजूद वह बेशर्मी से ढांचे का निर्माण करता जा रहा है। इस वजह से सीवेज ट्रीटमेंट के लिए छोड़े गए प्लाट की नालियां चोक हो गईं और कालोनी में पानी भर गया है।
    नागरिकों ने इस समस्या के खिलाफ पुलिस व प्रशासन को भी शिकायत की लेकिन चुनावी प्रक्रियाओं में उलझी भाजपा सरकार और अधिकारियों ने नागरिकों की परेशानी पर गौर नहीं किया। उस चरित्रहीन असामाजिक तत्व जो खुद को नेता और पत्रकार बताता है ने अवैध निर्माण जारी रखा। अब ये हालत हो गई है कि परिसर की नालियां चोक हो गईं हैं और नागरिकों को खासी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। भाजपा सरकार की आड़ में पनप रही गंदगी का ये अनूठा उदाहरण है।
    नागरिकों ने इस संबंध में जब एनजीटी की भोपाल बैंच को शिकायत की तो उसने प्रकरण क्रमांक ओए 139।2023 कृष्णारानी विरुद् मध्यप्रदेश शासन एवं अन्य के विरुद्ध 12 अक्टूबर 2023 को पारित आदेश के अनुपालन के निर्देश दिए हैं। एनजीटी के सदस्य सचिव आईएएस चंद्रमोहन ठाकुर ने नगर निगम कमिश्नर और भोपाल कलेक्टर को नागरिकों को राहत दिलाने के निर्देश दिए हैं। इस संबंध में एक कमेटी की भी स्थापना की गई है।इस आदेश के अनुपालन की रिपोर्ट 18 दिसंबर के पहले एनजीटी के समक्ष पेश की जानी है।
    गौरतलब है कि अतिक्रमण के कारण प्रकाश नगर रहवासियों को जलभराव और मुसीबतों का सामना करना पड़ रहा है। वार्ड 70,गोविंदपुरा की प्रकाश नगर, बिजली कॉलोनी, #Bhopal जहां पर अधिकतर रिटायर्ड MPEB के अधिकारी, बुजुर्ग महिलाएं रहते हैं वहां पर एक #भाजपा नेता के द्वारा नाले पर अतिक्रमण कर लिया गया और निर्माण प्रारंभ कर दिया । उसने संलग्न भूमि जो सेप्टिक टैंक के लिए निर्धारित थी उस पर भी निर्माण शुरु कर दिया है ।जिसके कारण सारे सीवरेज चेंबर ओवरफ्लो हो गये टॉयलेट गंदगी फैल गई और कई पेड़ धराशाई हो गए ।पिछले 3 माह से की जा रही विभिन्न विभागों एवं नेताओं को की गई शिकायतों का कोई निराकरण नहीं हुआ । विधायक, क्षेत्रीय पार्षद यहां तक कि संभाग आयुक्त ,कलेक्टर और #प्रदूषण निवारण मंडल में भी इसकी शिकायत की गई कि ओपन में जल-मल-मूत्र बह रहा है और सेप्टिक टैंक का निर्माण नहीं हो रहा। कथित भाजपा नेता के निजी स्वार्थ के कारण प्रकाश नगर के बुजुर्ग, महिलाओं, पुरुषों को अत्यंत दुख तकलीफों का सामना करना पड़ रहा है।

  • प्रतिबंधित कंपनी को ठेका देने की तैयारी में ग्वालियर नगर निगम

    प्रतिबंधित कंपनी को ठेका देने की तैयारी में ग्वालियर नगर निगम

    भोपाल, 04 दिसंबर(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर) ग्वालियर नगर पालिक निगम ने अब प्रदेश के स्थापित प्रशासनिक मापदंडों को ताक पर रख दिया है। महल के कथित राजनीतिक हस्तक्षेप से कमिश्नर ने एक ऐसी कंपनी को ठेका देने की तैयारी कर ली है जिसे राजस्थान वाटर सप्लाई एंड सीवरेज मैनेजमेंट बोर्ड जयपुर की फायनेंस कमेटी ने अनियमित लेनदेन और अक्षमता को देखते हुए काली सूची में डाल रखा है।


    नगर निगम कमिश्नर ने बदनाम शुदा एन्विराड प्रोजेक्ट प्राईवेट लिमिटेड और जयंती सुपर के ज्वाईंट वेंचर को न केवल निविदा में भाग लेने का अवसर दिया बल्कि उसे अनियमितताओं के माध्यम से ठेका भी देने की तैयारी कर ली है। निगम ने यह टेंडर चंबल नदी से कच्चा पानी निकालकर देवरी, मुरैना, और आसन नदी पर बने कोटवार बांध के जल ग्रहण क्षेत्र तक पहुंचाने के लिए निकाला है। इस प्रोजेक्ट में कंपनी मुरैना और ग्वालियर शहर में भी पानी सप्लाई करेगी। निगम ने संदर्भित टेंडर क्रमांक एमपीजीएमसी । 17 आई । अमृत 2.0 । 2023-24 के अंतर्गत जारी टेंडर क्रमांक आईडी 2023-यूएडी-2756126-3 के तहत इस कार्य की प्रक्रिया निर्धारित की है। कानपुर की जयंती सुपर कंपनी को गैर जिम्मेदारी पूर्ण कार्य और अनियमितताओं के चलते राजस्थान की फायनेंस कमेटी ने विगत तीस मई 2023 को ब्लैक लिस्टेड किया है।


    राजस्थान की फायनेंस कमेटी ने जल प्रदाय एवं सीवरेज प्रबंधन बोर्ड की 30.05.2023 को आयोजित 856 वीं बैठक में एजेंडा 17 के अंतर्गत ये फैसला लिया है। बोर्ड ने जयंती सुपर और जीईओ मिलर के संयुक्त उपक्रम को तीम सालों के लिए प्रतिबंधित किया है। इस प्रकार की ब्लैक लिस्टेड संस्था को निविदा में भाग लेने का अधिकार भी नहीं होता है। ऐसी निविदा खोलना भी अनाचरण के दायरे में आता है।


    इसके बावजूद ग्वालियर नगर पालिक निगम की जल प्रदाय योजना की निविदा क्रमांक 2023-यूएडी-275616 -3 में एनिवराड प्रोजेक्ट प्राईवेट लिमिटेड एवं जयंती सुपर ने संयुक्त उपक्रम के रूप में टेंडर प्रस्तुत किया था, जिसे अब ठेका देने की तैयारी की जा रही है।

  • चुनावी रण में फैली भाजपा की राजनैतिक शुचिता की खुशबू

    चुनावी रण में फैली भाजपा की राजनैतिक शुचिता की खुशबू

    भारतीय जनता पार्टी की केन्द्र और राज्य सरकारों ने अपनी अंत्योदय की विचारधारा पर अमल करते हुए गरीब कल्याण की जो योजनाएं शुरु की हैं उनका असर चुनाव प्रचार अभियान में साफ नजर आने लगा है। मध्यप्रदेश के आदिवासी अंचल रतलाम से चुनाव प्रचार अभियान की शुरुआत करने पहुंचे प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का अभिनंदन जिन उमंगों से भरे जन समुदाय ने किया उसे देखकर साफ अंदाजा लगाया जा सकता है कि ऊंट किस करवट बैठने जा रहा है। इस चुनाव प्रचार अभियान में भाजपा के नेतागण जन शिक्षण के लिए सिलसिलेवार संवाद कर रहे हैं। इससे चंद दिनों पहले जिन सर्वेक्षणों के अनुमानों में भाजपा पिछड़ी बताई जा रही थी उनके आकलन अब बदलने लगे हैं। रतलाम में प्रधानमंत्री की सभा आयोजित कराने का फैसला भी पार्टी ने केवल इसीलिए लिया क्योंकि पिछले चुनावों से लेकर अब तक भाजपा ने आदिवासी समुदाय तक अपनी ढेरों योजनाओं की सीरीज पहुंचा दी है। पिछले चुनावों में आदिवासी समुदाय कांग्रेस की लफ्फाजियों का कड़वा घूंट भी पी चुकी है। ऐसे में भाजपा की योजनाएं उसे राहत महसूस करा रहीं हैं। चंद दिनों पहले ये हवा बनाई गई कि शिवराज सिंह चौहान और एमपी की भाजपा से जनता ऊब चुकी है। चुनावी सभाओं में भाजपा नेतृत्व को जो समर्थन मिलता दिख रहा है उसे भी ये कथित चुनावी पंडित नहीं देखना चाहते। हकीकत ये है कि कांग्रेस अपने कड़वे और ओछे बर्ताव से लगातार जन समर्थन खोती जा रही है। आज मध्यप्रदेश का बजट तीन लाख चौदह हजार करोड़ रुपए का है। भाजपा ने हर वर्ग और समुदाय के लिए योजना बनाकर उत्पादकता बढ़ाने का अभियान चला रखा है। जबकि प्रदेश की आय मात्र पचासी हजार करोड़ रुपए है। ऐसे में सरकार ने अपनी निर्धारित सीमा में कर्ज लिया है और योजनाओं पर अमल किया है। दरअसल सरकार जिन दस लाख लोगों को नियमित वेतन देती है उसमें सरकार की आय में से पचास फीसदी से अधिक राशि खर्च हो जाती है। ऐसे में वह मात्र तीस -चालीस हजार करोड़ रुपए से योजनाएं चलाकर आय बढ़ाने के साधन विकसित कर रही है। अकेले वेतन-भत्ते को देखें तो वित्तीय वर्ष की समाप्ति तक पचास हजार करोड़  रुपये से अधिक इस पर व्यय हो रहे हैं। पेंशन और ब्याज भुगतान की सीमाएं भी बढ़ती जा रहीं हैं। सरकार की लाड़ली बहना योजना, लाड़ली लक्ष्मी योजना ,किसान सम्मान निधि,मुफ्त राशन वितरण, उज्जवला योजना, घर घऱ जल पहुंचाने वाले जल जीवन मिशन आदि को लेकर ये भ्रम फैलाया जा रहा है कि शिवराज सिंह जनता के टैक्स की गाढ़ी कमाई फिजूल लुटा रहे हैं। जबकि हकीकत बिल्कुल विपरीत है। जिस राज्य की आय मात्र पिचासी हजार करोड़ रुपए हो और वह तीन लाख चौदह हजार करोड़ रुपए खर्च करे तो ये उसके कुशल वित्तीय प्रबंधन के बगैर संभव नहीं है। सरकार की इन योजनाओं पर देश विदेश और प्रदेश से जिस तरह धन बरस रहा है वह सरकार की साख के बगैर आना संभव नहीं है। भारतीय जनता पार्टी ने इस कार्य में वित्तीय प्रबंधन में कुशल लोगों की सेवाएं ली हैं। कभी लाचार रहे मध्यप्रदेश को वित्तीय साधन उपलब्ध कराने वाले राघवजी भाई आज भले ही नेपथ्य में हों लेकिन रतलाम में आयोजित जनसभा में मंदसौर सांसद सुधीर गुप्ता और रतलाम विधायक चेतन काश्यप के माध्यम से प्रधानमंत्री मोदी ने ये संदेश देने की कोशिश की है कि भाजपा का अक्षय पात्र कभी खाली नहीं हो सकता। पार्टी ने पूर्व वित्तमंत्री जयंत मलैया को दमोह से प्रत्याशी बनाया है जो अर्थव्यवस्था के खासे जानकार हैं।जावद से ओमप्रकाश सखलेचा हैं जो पूर्व मुख्यमंत्री वीरेन्द्र सखलेचा के पुत्र हैं और औद्योगिकीकरण के विशेषज्ञ हैं।लघु और मध्यम उद्योगों के विकास में उन्होंने नए माडल विकसित किए हैं।सागर के शैलेन्द्र जैन प्रसिद्ध बीड़ी घराने से आते हैं।स्थिति ये है कि उनकी साख की काट के रूप में कांग्रेस ने उनके ही छोटे भाई सुनील जैन की धर्मपत्नी को मैदान में उतार दिया है। ये कांग्रेस की हताशा नहीं तो क्या है। शिवपुरी से देवेन्द्र जैन, निवाड़ी से अनिल जैन,जैसे प्रत्याशी उतारकर भाजपा ने अपने उद्यमी समर्थकों का भरोसा जीतने का प्रयास किया है।कांग्रेस बरसों से भाजपा के ऐसे सहयोगियों को काटने का प्रयास करती रही है। इसी फेर में उसने भी कई जैन प्रत्याशी मैदान में उतारे हैं लेकिन नकली ढोल की पोल चुनावी दौड़ में फटती नजर आ रही है।  ये समुदाय अपनी उद्यम शीलता और दान शीलता के लिए जाना जाता है।केवल रतलाम में चैतन्य काश्यप फाऊंडेशन के माध्यम से लोकसेवा की परिभाषा बदल दी गई है। गरीबी से मुक्ति, सामाजिक उत्थान, धार्मिक सद्भाव,खेल और शिक्षा के प्रोत्साहन के लिए फाऊंडेशन ने जो कार्य किए हैं वे अदभुत हैं। यहां अहिंसा ग्राम बनाकर लगभग सौ परिवारों को निःशुल्क आवास दिए गए हैं। यहां आजीविका, रोजगार प्रशिक्षण,संस्कार, शिक्षा और स्वास्थ्य की व्यवस्थाएं एक ही परिसर में उपलब्ध हैं। इसी तरह मंदसौर के बिलांत्री गांव में पंडित दीन दयाल शताब्दी ग्राम बसाया गया है। फाऊंडेशन की ओर से कुपोषित बच्चों का जीवन संवारने के लिए विशेष अभियान चलाया जा रहा है। समाजसेवा में संलग्न लोगों के लिए स्थायी भोजनशाला ही बना दी गई है।यहां बनाया जा रहा गोल्ड काम्पलेक्स आने वाले समय में देश की सबसे बड़ी सोने की मंडी साबित होने जा रहा है। भाजपा ये संदेश देने का प्रयास कर रही है कि राजनीति सेवा का माध्यम है न कि सत्ता की लूट का उपाय। आदिवासी अंचल में इन योजनाओं के माध्यम से भाजपा ने तस्वीर ही बदलकर रख दी है। जिस आदिवासी अंचल का माछलिया घाट लूट के लिए जाना जाता था वह आज खेती और विकास के लिए जाना जाता है। पिछले चुनाव में कांग्रेस की कमलनाथ दिग्विजय सिंह ब्रिगेड ने जयस के माध्यम से आदिवासियों को बरगलाने का प्रयास किया था जो भाजपा के बहुमत से पिछड़ने की बड़ी वजह बना था। इस बार काठ की वो हांडी चढ़ने लायक नहीं बची है। लाड़ली बहना योजना से लगभग एक लाख तीस हजार करोड़ महिलाओं को लाभ दिया जा रहा है। ये परिवार प्रदेश की प्रगति में वर्कफोर्स को बढ़ाने का साधन बन रहे हैं। इन योजनाओं को बदनाम करने वाले आरोप लगाते हैं कि इससे शराबखोरी और मक्कारी बढ़ रही है जबकि वे ये नहीं देखते कि किस तरह उत्पादकता में लगे लोगों को सरकार की योजनाएं संबल प्रदान कर रहीं हैं। किसान सम्मान निधि ने कृषकों को इतना उत्साहित किया है कि आज कृषि उत्पादन सारे पिछले रिकार्ड तोड़ रहा है। सिंचाई की योजनाओं ने खेती का उत्पादन बढ़ाया है। इसके बावजूद सत्ता को चोरी और ठगी का माध्यम बनाने वाले मक्कार लगातार भ्रम फैलाकर सत्ता पर काबिज होने का प्रयास कर रहे हैं जिस कांग्रेस ने देश को भाषा, जाति, धर्म, समुदाय के आधार पर बांटकर अपनी रोटियां सेंकी वही ये कहती फिर रही है कि सत्ता की रोटी पलटते रहना चाहिए नहीं तो जल जाती है। इसके बावजूद प्रदेश की जनता ने चार बार से भाजपा को सत्ता पर बिठाया और पांचवी बार भी उसका यही इरादा नजर आ रहा है। कई चूक भी हुई हैं। भाजपा ने सत्ता और संगठन के महत्वपूर्ण पद अपने चहेतों से भर दिए , इसके कारण जनसंवाद की निरंतरता बाधित हुई है। अब चुनावी जन शिक्षण के दौरान भाजपा के नेता अलग अलग अंदाज में अपनी बात कह रहे हैं। इससे जनता में फैलाए गए भ्रम का कुहासा छंटने लगा है। भाजपा ने अपना यही जन शिक्षण जारी रखा तो कोई आश्चर्य नहीं कि वह मध्यप्रदेश में  गुजरात से भी ज्यादा बंपर जीत का रिकार्ड बना सकती है। मध्यप्रदेश भाजपा के अध्यक्ष विष्णुदत्त शर्मा कहते हैं कि हमारे 41 लाख कार्यकर्ता यदि हमारे दो करोड़ 51 लाख हितग्राहियों को वोट डलवाने में सफल हो जाते हैं तो हमारी सरकार ज्यादा मत प्रतिशत से विजयी हो जाएगी। जिन एक करोड़ नागरिकों को हमने प्रदेश में गरीबी के जंजाल से बाहर निकाला है वे भाजपा की सेवा भावी राजनीति के एंबेसेडर बन चुके हैं।कुल पांच करोड़ 61 लाख मतदाताओं में से 56 फीसदी तक भाजपा की हितग्राही मूलक योजनाओं का लाभ पहुंचा है ऐसे में हमारी जीत का आंकड़ा पिछले सभी रिकार्ड तोड़ सकता है। लोकतंत्र और निष्पक्षता की दुहाई देकर कांग्रेस या किसी अन्य राजनीतिक दल की पैरवी करने वालों को समझ लेना होगा कि भाजपा का विकल्प अब केवल बेहतर भाजपा ही हो सकती है। भाजपा हाईकमान को भी अपनी जवाबदारी समझना होगी और उसे भ्रष्ट सत्तामाफिया के कठपुतली शासकों को विदा करके खांटी जनसेवकों को कमान थमानी होगी,तभी दीनदयाल उपाध्याय जी का अंत्योदय प्रदेश को नई ऊंचाईयों तक ले जा सकेगा।

  • छोटे अखबारों को साल में छह विज्ञापन मिलेंगे

    छोटे अखबारों को साल में छह विज्ञापन मिलेंगे

    70 वर्ष से अधिक आयु के पत्रकारों को स्थायी अधिमान्यता कार्ड मिलेगा
    महिला पत्रकारों को महिला कल्याण कार्यों के अध्ययन के लिए मिलेगी फैलोशिप
    मुख्यमंत्री श्री चौहान ने आधुनिक और देश में अनूठे भोपाल स्टेट मीडिया सेंटर के निर्माण के लिए किया भूमिपूजन

    भोपाल 3अक्टूबर(अशोक मनवानी) मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा है कि पत्रकार समाज और सरकार के मध्य सेतु की भूमिका निभाते हैं। पत्रकार समाज के अंतिम पंक्ति के व्यक्ति की आवाज होते हैं। पत्रकारिता एक धर्म है, जिसके निर्वहन के लिए पत्रकार युद्ध, बाढ़, भूकम्प जैसी विपरीत स्थितियों में भी जीवन दांव पर लगाकर कार्य करते हैं। जब विपत्तियों में लोग सुरक्षित स्थान खोजते हैं, तब पत्रकार समाधान खोजते हैं। स्टेट मीडिया सेंटर भविष्य के ऐसे वृट वृक्ष के बीज रोपे जा रहे हैं, जिनसे अनुभवों की शाखाओं पर अनंत आशाएं साकार होंगी।

    मुख्यमंत्री श्री चौहान आज मालवीय नगर भोपाल में स्टेट मीडिया सेंटर के लिए भूमि पूजन समारोह को संबोधित कर रहे थे। इस अवसर पर जनसंपर्क मंत्री राजेंद्र शुक्ला, आयुक्त जनसंपर्क मनीष सिंह उपस्थित थे।

    मुख्यमंत्री श्री चौहान ने लघु समाचार पत्रों को एक माह के अंतराल से विज्ञापन जारी करने और 70 वर्ष से अधिक आयु के पत्रकारों को स्थायी अधिमान्यता कार्ड प्रदान करने की घोषणा की। हर साल पांच महिला पत्रकारों को महिला विकास कार्यों पर अध्ययन के लिए फैलोशिप प्रदान की जाएगी। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि पत्रकार समाज को प्राप्त वो आश्वासन है, जिनके होने से सुनवाई सुनिश्चित है। राष्ट्र निर्माण में पत्रकारों के स्याही का अमूल्य योगदान है।

    मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि पत्रकार और पत्रकारिता लोकतंत्र के प्राण हैं। मध्यप्रदेश की भूमि से पंडित माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता के पुरोधा बने। इसी धरती पर श्री हरिशंकर परसाई जैसे व्यंग्यकार हुए जिन्होंने समाज को आईना दिखाने का कार्य किया। स्व. श्री वेदप्रताप वैदिक ने हिंदी की प्रतिष्ठा के लिए कार्य किया। स्व. श्री प्रभाष जोशी ने नई भाषा दी। एक दौर था जब स्वतंत्रता आंदोलन में पत्रकारों ने भागीदारी की और परतंत्रता की बेड़ियां तोड़ने का कार्य किया। आपातकाल के खिलाफ भी पत्रकार लड़े। कोविड के कठिन दौर में पत्रकारों ने अपना दायित्व निभाया। पत्रकार समाजसेवी भी होते हैं, उनका सरोकारों से ऐसा रिश्ता होता है, जैसे शरीर और आत्मा का रिश्ता।

    मीडिया सेंटर बनेगा पत्रकारिता के छात्रों का गुरूकुल

    मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि आज इलेक्ट्रानिक और सोशल मीडिया के दौर में कहीं-कहीं विश्वसनीयता का संकट देखने को मिलता है। संवाद, संचार और सम्पर्क पत्रकारिता के प्राण होते हैं। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने आशा व्यक्त की कि स्टेट मीडिया सेंटर इन पत्रकारों के संवाद, खबरों के संचार और हमारे सम्पर्क का केन्द्र बनेगा। यह केन्द्र पत्रकारिता के छात्रों का गुरूकुल बनेगा। यह केन्द्र वरिष्ठों के अनुभवों और युवाओं की ऊर्जा का उपयोग करेगा। साथ ही पुराने घर की स्मृतियां भी संजोएगा।

    पुराने भवन की यादों के साथ नए आंगन में प्रवेश

    मुख्यमंत्री श्री चौहान ने पत्रकार भवन की नींव रखने वाले पुरोधा पत्रकारों का स्मरण भी किया और इस पत्रकार भवन में एक युग में पत्रकारों से भेंट और पत्रकार वार्ता आयोजित करने के अपने अनुभव भी साझा किए। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि गत 7 सितम्बर को उन्होंने मुख्यमंत्री निवास में पत्रकार समागम में इस मीडिया सेंटर के संबंध में घोषणा की थी जिसे आज मूर्त रूप देते हुए भूमिपूजन का कार्य सम्पन्न हुआ है। अब पत्रकार बंधु इस मीडिया सेंटर के रूप में पुराने पत्रकार के भवन की यादों के साथ नए आंगन में प्रवेश करेंगे। पत्रकार भवन के पुनर्निर्माण का सपना पूरा होगा। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने प्रदेशभर से पधारे पत्रकारों को स्टेट मीडिया सेंटर के शिलान्यास अवसर पर बधाई और शुभकामनाएं दीं।

    जिलों में पत्रकारों को भूखंड प्रदान करने की चल रही है कार्रवाई- जनसंपर्क मंत्री श्री शुक्ल

    जनसंपर्क मंत्री श्री राजेंद्र शुक्ल ने स्वागत उद्बोधन में कहा कि आज स्टेट मीडिया सेंटर के शिलान्यास में प्रदेश भर से पत्रकार आए हैं। पत्रकार लोकतंत्र को वरदान बनाने का कार्य करते हैं। उन्हें मूलभूत सुविधाएं प्राप्त होना चाहिए। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने प्रदेश को बीमारू प्रदेश होने की पहचान को समाप्त कर तेजी से विकास कर रहे प्रदेश की पहचान दी है। अब हम नहीं जमाना कहता है कि मध्यप्रदेश विकसित प्रदेश में शामिल हो रहा है। उन्होंने समय-समय पर सभी वर्गों के हित में कदम उठाए हैं। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने पत्रकारों के लिए भी स्वास्थ्य बीमा योजना लागू की जिससे अनेक परिवारों को राहत मिली। गत 7 सितंबर को मुख्यमंत्री निवास में पत्रकार समागम में स्टेट मीडिया सेंटर प्रारंभ करने के साथ पत्रकारों कोजिला स्तर पर भूखंड प्रदान करने की घोषणा की थी। जिलों में पत्रकारों को भूखंड प्रदान करने के लिए आवश्यक कार्यवाही भी प्रारंभ हो गई है। जनसंपर्क विभाग के अधिकारियों को भी लंबे समय से उच्च पद के प्रभार के लिए पात्र अधिकारियों और नये सहायक संचालकों को लंबित वार्षिक वेतन वृद्धि का लाभ दिया जायेगा।

    वरिष्ठ पत्रकारों को सम्मान निधि

    मुख्यमंत्री श्री चौहान ने आज स्टेट मीडिया सेंटर के शिलान्यास समारोह में प्रदेश के 10 वरिष्ठ पत्रकारों को बढ़ी हुई सम्मान निधि प्रतीक स्वरूप प्रदान की। उल्लेखनीय है कि प्रतिमाह 10,000 के स्थान पर अब 20,000 की राशि का भुगतान सम्मान निधि के अंतर्गत जनसंपर्क विभाग द्वारा किया जा रहा है। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने आज स्टेट मीडिया सेंटर के शिलान्यास समारोह में प्रदेश के जिन वरिष्ठ पत्रकारों को सम्मान निधि प्रदान की उनमें श्री विजय दत्त श्रीधर भोपाल, श्री ओम प्रकाश फरक्या इंदौर, श्री परमानंद तिवारी जबलपुर, श्री देव श्रीमाली ग्वालियर, श्री अंजनी कुमार शास्त्री रीवा, श्री राजेंद्र पुरोहित उज्जैन, श्री सिद्ध गोपाल तिवारी सागर, श्री कमलेश सिंह परिहार चंबल, श्री पंकज पटेरिया नर्मदापुरम और श्री रामावतार गुप्ता शहडोल शामिल हैं।

    मुख्यमंत्री श्री चौहान ने पत्रकार भवन परिसर में अनुष्ठान और विधि-विधान पूर्वक स्टेट मीडिया सेंटर के निर्माण के लिए भूमिपूजन किया। उन्होंने शिला पट्टिका का अनावरण भी किया। मंचीय कार्यक्रम का शुभारंभ कन्या पूजन से हुआ। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने मंच पर आते ही प्रदेश के सभी जिलों से आये समस्त पत्रकार बंधुओं का स्वागत किया। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने पौधा भेंट कर वरिष्ठ पत्रकारों को सम्मानित भी किया। कार्यक्रम में स्टेट मीडिया सेंटर की विशेषताओं और पत्रकार कल्याण पर केन्द्रित लघु फिल्म का प्रदर्शन भी किया गया।

    प्रत्येक जिले के पत्रकारों से मिले मुख्यमंत्री श्री चौहान

    स्टेट मीडिया सेंटर के भूमिपूजन के औपचारिक कार्यक्रम के पश्चात मुख्यमंत्री श्री चौहान ने प्रदेश के जिलों से पधारे प्रिंट मीडिया, इलेक्ट्रानिक मीडिया, सोशल मीडिया से जुड़े पत्रकारों, टी.वी. कैमरा पर्सन और प्रेस छायाकारों से भेंट कर संवाद किया। मुख्यमंत्री श्री चौहान पत्रकारों के साथ भोजन में शामिल हुए।

    मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान की अहम घोषणाएं

    • मध्य प्रदेश में महिला विकास एवं कल्याण के कार्यों पर अध्ययन करने के लिए माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्वविद्यालय एवं संस्थान द्वारा जनसम्पर्क विभाग के सहयोग से प्रतिवर्ष 5 महिला पत्रकारों को फैलोशिप दी जाएगी।
    • प्रदेश में अब 1 महीने के अंतराल से हर छोटे समाचार-पत्र को विज्ञापन देने की व्यवस्था की जाएगी।
    • प्रदेश के 70 साल से अधिक की आयु वाले वरिष्ठ पत्रकारों को स्थायी अधिमान्यता कार्ड दिया जायेगा।
    • जनसंपर्क विभाग के अधिकारियों को वरिष्ठ पद के प्रभार के आदेश जारी किए जा रहे हैं।
    • सहायक संचालक पद पर कार्य कर रहे अधिकारियों की जो वेतन वृद्धि देय है उसके भी आदेश जारी किये जा रहे हैं।

    कैसा होगा स्टेट मीडिया सेंटर

    भोपाल में स्टेट मीडिया सेंटर का निर्माण 28 करोड़ रुपए की लागत से होगा। यह सर्व सुविधा युक्त मीडिया सेंटर होगा। इस सेंटर में निर्माण एजेंसी मध्यप्रदेश भवन विकास निगम है। अगले दो वर्ष में निर्माण पूर्ण करने का लक्ष्य है। कुल 66 हजार 981 वर्गफीट में तीन मंजिल के भवन में लोअर ग्राउण्ड फ्लोर पर वाहन पार्किंग, ड्रायवर्स रूम, मेंटेनेंस रूम, बैंक, शॉप्स और डिस्पेंसरी निर्माण होगा। ग्राउण्ड फ्लोरपर एक्जीबिशन हॉल, आर्ट गैलरी, मिनी ऑडिटोरियम, प्रेस कॉन्फ्रेंस कक्ष, प्रशासनिक कक्ष, रिसेप्शन कक्ष, कॉरीडोर, बैंक्वेट हॉल, बैंडमिंटन कोर्ट, रेस्टारेंट, टेरिस गार्डन होंगे। प्रथम मंजिल पर लायब्रेरी, प्रेस कॉन्फ्रेंस हॉल, मल्टी मीडिया रूम, लाउन्ज, जिम्नेशियम और इन्डोर गेम हॉल होगा। दूसरे मंजिल पर ओपन टेरिस, वर्किंग स्पेस, केबिन मिनी मीटिंग रूम, क्यूबिकल वर्क स्टेशन होंगे। तीसरी मंजिल पर पत्रकारों के लिए वर्क स्पेस, न्यूज और मीडिया के ऑफिस स्पेस रहेगा।

  • जरूरत थी संजीवनी की पूरा पहाड़ उठा लाए सरकार

    जरूरत थी संजीवनी की पूरा पहाड़ उठा लाए सरकार


    आलोक सिंघई
    चुनाव की बेला में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान भोपाल में मीडिया सेंटर की आधारशिला रखने जा रहे हैं। भूमिपूजन के इस विशाल समागम में प्रदेश भर से पत्रकारों को ढो ढोकर लाया गया है। होटलों में ठहराया गया है। सरकार ये दर्शाने का जतन कर रही है कि कांग्रेस के बदमिजाज कमलनाथ की तुलना में मौजूदा सरकार पत्रकार हितैषी है।कमलनाथ कांग्रेस के छोटे से कार्यकाल को देखकर ये बात गले भी उतरती है। कमलनाथ ने जिस तरह मीडिया पर लांछन लगाए उसे देखते हुए तो शिवराज सिंह चौहान की भाजपा सरकार पत्रकारों को सम्मान देने वाली सरकार ही नजर आती है। इसके बावजूद उसे चुनाव की बेला में पत्रकार भवन का प्रहसन क्यों खेलना पड़ रहा है। लगातार साढ़े अठारह सालों तक मीडिया पर मोटा बजट खर्च करने वाली भाजपा सरकार को दूरदराज के छोटे पत्रकारों तक का आशीर्वाद क्यों बटोरना पड़ रहा है।पत्रकार खुद हतप्रभ हैं कि अचानक सरकार उन पर क्यों मेहरबान हो गई है।
    सत्ताधीशों का लंबा अनुभव रहा है कि चुनाव जिताने वाले अलग होते हैं और सत्ता का सुख लूटने वाले अलग हैं। भाजपा को लंबा शासन करने का अवसर मिला है। इसके बावजूद पिछले चुनावों में कांग्रेस को मिला मत प्रतिशत बताता है कि संगठन, जनता और पत्रकार कोई भी मतदान की आंधी की दिशा नहीं बदल सकते हैं। जनता के बीच से उठने वाली मनोभावों की आंधी जनमत बनाती है और वही सत्ता की असली कुंजी है। पिछले चार कार्यकालों में भाजपा सरकार ने पत्रकारों को कल्पनातीत तरीके से उपकृत किया है। उसका उपकार पाने वाले पत्रकारों की तादाद भी बहुत ज्यादा है। जब मनीष सिंह को जनसंपर्क आयुक्त बनाया गया तो उन्हें आश्चर्य हुआ कि सरकार इतना बडा बजट पत्रकारों पर खर्च करती है फिर भी सरकार के कार्यकलापों को सही परिप्रेक्ष्य में प्रस्तुत करने वाला कंटेट नदारद है। पिछली सरकारों के मंत्रियों, प्रशासकों ने इतने बोगस पत्रकार पाल रखे हैं जिनकी बुद्दि केवल चापलूसी की योग्यता रखती है। जनसंपर्क की भाषा बोलने वाले इन पत्रकारों ने दो दशकों में जन संवाद को इतना भौंथरा बना दिया है कि सरकार पर जनता का नजला गिरना सुनिश्चित है।


    चमचों की इस फौज में से असली पत्रकारों को तलाशना और फिर जनहित में उनका उपयोग करना भूसे में सुई तलाशने जैसा कठिन कार्य है। यही सोचकर आयुक्त महोदय ने हनुमान जी वाला फार्मूला अपना लिया। संजीवनी लाने के साथ साथ वे पूरा पर्वत ही उठा लाए हैं । सरकार ने उनके प्रयासों को हरी झंडी दिखाई क्योंकि वह पिछले चुनावों में मिली बारीक हार का जोखिम दुबारा नहीं उठाना चाहती थी। शिवराज जी आज आलोचना का केन्द्र बिंदु बने हुए हैं। उन्होंने भाग भागकर प्रचार किया और जनता से सीधा संवाद करने की कोशिश की । इस आपाधापी में वे भूल गए थे कि नौकरशाही कभी विधायिका का रूप नहीं ले सकती है। मोटी तनख्वाह पाने वाले अफसरों को इस बात से क्या लेना देना कि वे जिन पत्रकारों को पाल रहे हैं वे असरकारी संवाद कर रहे हैं या कि सिर्फ खानापूरी।


    राजधानी का पत्रकार भवन पिछले तीन दशकों से समस्या ग्रस्त रहा है। पूर्व मुख्यमंत्री अर्जुन सिंह ने अपनी मनमानी को मीडिया के माध्यम से सही दर्शाने के लिए जिस ढांचे का गठन किया था वह आज खलनायक बन चुका है। एडीजी इंटेलीजेंस ए.एन सिंह के घिसे पिटे फार्मूले ने प्रदेश की पूरी पत्रकारिता को धूल धूसरित कर दिया है। कोई भी सैन्य या पुलिसिया सोच जन संवाद की भूमिका नहीं निभा सकता है। इसके बावजूद सत्ता माफिया ने अपने काले कारनामों को छुपाने के लिए इस ढांचे को बरकार रखा। एएन सिंह की सलाह पर तत्कालीन अर्जुनसिंह सरकार ने कम्युनिस्ट ढांचे में रंगे श्रमजीवी पत्रकार संघ का प्रोजेक्ट चलाया था। इसकी फंडिंग जनसंपर्क विभाग के बजट और पुलिस के मुखबिर तंत्र के लिए मिलने वाले एसएस फंड से की जानी थी। यही वजह थी कि प्रदेश की पत्रकारिता नागरिकों को नक्सली ,चरित्रहीन, भ्रष्टाचारी और शराबी के तौर पर पहचानने लगी।


    भाजपा सरकार के सत्ता में आते ही उमा भारती ने इस आततायी संगठन को उखाड़ फेंका। तभी उनके इर्द गिर्द जुट रहे लोधियों को निशाना बनाकर उमा भारती को कुर्सी छोड़ने के लिए मजबूर कर दिया गया। इसके बाद वही ढाक के तीन पात वाली पुरानी कहानी चल पड़ी। बाबूलाल गौर तो अघोषित तरीके से अर्जुनसिंह जी के ही प्यादे थे। उन्होंने उमा भारती सरकार के फैसलों को पलट दिया। सरकार से वे सभी फाईलें गायब हो गईं जिन्हें लौह महिला और आयुक्त जनसंपर्क अरुणा शर्मा ने विशेष परिश्रम से तैयार किया था। इसके बाद आई शिवराज सरकार ने यही नीति जारी रखी। शिवराज सिंह के गुरु सुंदरलाल पटवा भाजपा में अर्जुनसिंह गुट के ही खासमखास माने जाते थे सो उन्होंने पत्रकार भवन पर वही पत्रकार विरोधी व्यवस्था कायम रखी। लगभग डेढ़ दशक के शासनकाल में पत्रकारों की तमाम मांगों पर सहमति जताने के बावजूद शिवराज सिंह ने इस व्यवस्था पर कोई प्रहार नहीं किया बल्कि पर्दे के पीछे वे इस बदनाम संगठन के पदाधिकारियों को उपकृत करते रहे।


    जनता ने पिछली बार जब इस व्यवस्था को पलटने का जनादेश दिया तो कमलनाथ सरकार ने आते ही पत्रकार भवन को जमींदोज करके पत्रकारों की बरसों पुरानी मांग पूरी कर दी थी। उनके इर्द गिर्द भी किताबी पत्रकारों का जमावड़ा हो गया था सो उन्होंने इन बदमाशों के साथ पूरी पत्रकार बिरादरी को लांछित करना शुरु कर दिया। यही वजह थी कि कमलनाथ की भ्रष्ट सरकार के उखाड़ फेंकने में मीडिया के सभी वर्गों ने भाजपा को भरपूर साथ दिया। भाजपा ने दुबारा सत्ता में आने के बाद कमलनाथ की नीति को जारी ऱखा और पत्रकारों से दूरियां बनाए रखीं। ये भी महज दिखावा साबित हुआ। लुटेरे पत्रकारों की फौज को जनसंपर्क के भ्रष्ट अधिकारियों ने दुबारा सरकार के गले में लटका दिया। नतीजतन असली पत्रकार फिर भी वंचित ही रहे। बल्कि वे खामखां जनता के निशाने पर आते रहे जबकि मलाई खाने वाला तबका तो सरकार के साथ मजे लूटता रहा।

    दरअसल स्व. माखनलाल चतुर्वेदी के एक बदमाश रिश्तेदार ने जनसंपर्क विभाग में रहते हुए दिग्विजय सिंह की सामंती सरकार की आंखों में धूल झोंककर जो विश्विद्यालय सरकार के गले में बांध दिया वह उसे डुबाने वाला बोझा साबित हो रहा है। बरसों से सरकारें अपने चमचों को इस विवि में उपकृत करती रहीं हैं। कभी दिग्विजय सिंह सरकार जो करती थी उसे भाजपा सरकार ने कई सौ गुना तरीके से किया। अन्य प्रदेशों से लाए गए हवा हवाई पत्रकारों को यहां पत्रकारिता का शिक्षक बनाया गया और उन्हें यूजीसी के निर्धारित वेतनमानों से उपकृत किया जाने लगा। वास्तव में पत्रकारिता की आड़ में एक ऐसे चरोखर खुल गई जिस पर पत्रकार भी खामोश थे।


    यही वजह है कि आज ऐसा लगता है कि सरकार पत्रकारों पर भारी बजट खर्च कर रही है लेकिन वह वास्तव में सरकार का जेबी प्रचार तंत्र है जो हर बार बोगस साबित होता रहा है।असली पत्रकार तो आज भी झुनझुना पकड़कर घूम रहा है। इस बार जब भाजपा सरकार को बिजली सड़क और पानी के नाम पर भारी बजट खर्च करने मिला तो निर्माण माफिया को लगने लगा है कि ये व्यवस्था जारी रहनी चाहिए। भ्रष्ट अफसरशाही के लिए इससे अनुकूल सरकार दूसरी कोई हो नहीं सकती। यही वजह है कि मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान मैं हूं का नारा देते हुए भाजपा हाईकमान के निशाने पर आ गए हैं। बजट का आंकड़ा तो जारी करने वाली संस्थाओं की बैलेंस शीट से पढ़ा जा सकता है। जो रकम प्रदेश पर खर्च की गई उसकी तुलना में उत्पादकता कितनी बढ़ी। ये आंकड़े कितने असली और कितने फर्जी हैं इसे जांचना आज तकनीकी के दौर में कठिन नहीं है। सरकार के बजट का कितना हिस्सा माफिया की भेंट चढ़ गया इसका आकलन अच्छी तरह कर लिया गया है। यही वजह है कि शिवराज जी के शासनकाल को जनता की कसौटी पर तो बाद में परखा जाएगा अभी तो पार्टी के अंदरूनी आडिट ने इसका अध्ययन अच्छी तरह कर लिया है। जाहिर है कि सरकार ने अब पत्रकार भवन का नाम मीडिया सेंटर रखा है। वह नहीं चाहती कि फिर कोई माफिया इस पर कब्जा जमा ले और प्रदेश के विकास की कहानी को पटरी से उतार कर चलता बने।उम्मीद की जानी चाहिए कि इस बार मीडिया सेंटर मध्यप्रदेश में प्रोफेशनल जनसंवाद कायम करेगा। हां यदि कोई जनहितैषी व्यक्ति सत्ता के शीर्ष पर आ जाए तो फिर जनधन लूटकर भागने वाले माफिया को भी जमींदोज किया जा सकेगा।

  • भाजपा के शक्ति संधान से चौखाने चित्त कमलनाथ कांग्रेस

    भाजपा के शक्ति संधान से चौखाने चित्त कमलनाथ कांग्रेस


    भाजपा ने तीसरी सूची में आदिवासी नेता रहे मनमोहन शाह बट्टी की बेटी मोनिका बट्टी को अमरवाड़ा से टिकिट देकर खलबली मचा दी है। कभी सनातन परंपरा के खिलाफ मोर्चा खोलने वाले आदिवासी नेता मनमोहन शाह बट्टी की बेटी को चुनाव मैदान में उतारकर भाजपा ने कांग्रेस के अरमानों पर घड़ों पानी उढ़ेल दिया है। मनमोहन शाह बट्टी आदिवासी सम्मान का नारा देकर राजनीति में उतरे थे। गोंडवाना गणतंत्र पार्टी बनाई। इस पार्टी ने समय समय पर अपनी मौजूदगी भी दर्ज कराई लेकिन राजनीतिक बदलाव लाना रेत में नाव खेने के समान होता है। गोंडवाना गणतंत्र पार्टी में फूट भी पड़ी और पार्टी अप्रासंगिक भी हो गई। इसके बावजूद पिछले विधानसभा चुनावों में कमलनाथ कांग्रेस ने हीरालाल अलावा के नेतृत्व में जयस संगठन के नेतृत्व तले आदिवासियों को लामबंद करने में सफलता पा ली थी. आदिवासी वोट बैंक प्रदेश की 36 सीटों पर निर्णायक होता है। नतीजतन वोट का गणित गड़बड़ाया और भारतीय जनता पार्टी अधिक वोट पाने के बावजूद सत्ता से दूर रह गई थी। कमलनाथ की कूटनीति ने उन्हें सत्ता तक तो पहुंचा दिया था लेकिन शुचिता के अभाव ने सत्ता की लूट का जो नंगा नाच किया उससे क्षुब्ध होकर ज्योतिरादित्य सिंधिया के नेतृत्व में कांग्रेस के विधायकों ने विद्रोह कर दिया। कमलनाथ की सरकार औंधे मुंह गिर गई। तबसे भाजपा ने अपना खोया जनाधार वापस समेटने का अनुष्ठान शुरु कर दिया और आज वह मजबूत स्थिति में चुनावी कीर्तिमान स्थापित करने चल पड़ी है।
    प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के हालिया भोपाल दौरे के बाद तरह तरह की अटकलबाजियां शुरु हो गईं थीं लेकिन लोग तब भौंचक्के रह गए जब उनके दौरे के तुरंत बाद भाजपा हाईकमान ने अपने प्रत्याशियों की दूसरी सूची जारी कर दी। इस सूची में भाजपा ने तीन केन्द्रीय मंत्रियों और चार सांसदों को मैदान में उतारकर सभी को चौंका दिया। टिकिट बांटकर लौटे नरेन्द्र सिंह तोमर, प्रहलाद पटेल और फग्गन सिंह कुलस्ते को भी शायद अंदाजा नहीं था कि उन्हें मैदान में दो दो हाथ करना पड़ेंगे। बरसों से मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की शासन शैली के खिलाफ शिकायतें आती रहीं हैं। भाजपा के कई दिग्गज स्वयं को मुख्यमंत्री के रूप में प्रस्तुत करते रहे हैं। खुद शिवराज सिंह चौहान बार बार खुद को चुनौतियों के सामने असहाय पाते रहे हैं। पिछले विधानसभा चुनावों में जब उनकी सरकार चली गई तो उन्होंने ये कहते हुए संतोष व्यक्त किया था कि मैं मुक्त हो गया। आखिर उन्हें किसने बांध रखा था। खुला हाथ मिलने के बावजूद वे खुद को बंधक क्यों महसूस कर रहे थे।
    दरअसल शिवराज सिंह चौहान लगभग अठारह सालों तक प्रदेश में ऐसी सरकार चलाते रहे हैं जो सत्ता माफिया की गिरफ्त में जकड़ी रही है। वे चाहकर भी इस गिरोह पर लगाम नहीं लगा सके। इस माफिया गिरोह ने एक क्लब बना रखा है और सारे कमाऊ ठेके इसी गिरोह के चंगू मंगू हड़प लेते रहे हैं। सत्ता की इस लूटपाट में आईएएस अफसरों का एक गिरोह भी शामिल रहा है। आज राजधानी की सड़कों पर रोज वाहनों का जाम लगता है। इसकी वजह सत्ता की लूट से आई काली कमाई रही है। अरबों रुपयों का विदेशी कर्ज लेकर जन कल्याणकारी योजनाओं के नाम पर जन धन की लूट ने ये हालात निर्मित किए हैं। कल्याणकारी योजनाएं सफल भी हुईं हैं जनता को उनका लाभ भी मिला है लेकिन ये लाभ उस कर्ज की तुलना में बहुत कम है जिसका ब्याज आम जनता को भुगतना पड़ रहा है।
    प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भाजपा कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए कहा कि मोदी है तो मुमकिन है।इस पर शिवराज के एक करीबी मंत्री ने कहा कि ये बड़बोला पन है किसी को अपने मुंह मियां मिट्ठू थोड़ी बनना चाहिए। भाजपा संगठन से जुड़े समर्पित स्वयंसेवक जानते हैं कि जिन नेताओं ने खुद को ब्रांड के रूप में स्थापित करके जनता के दिलों तक सफर किया है उन्होंने मतदाताओं को भरोसा दिलाने के लिए खुदकी मौजूदगी बताई है। कभी नारा दिया जाता था बच्चा बच्चा अटल बिहारी । शिवराज खुद मैं हूं न बोलकर लोगों को भरोसा दिलाने का प्रयास करते रहे हैं। इसके बावजूद उनकी सरकार की घोषणाएं सौ फीसदी सफल नहीं रहीं। यही वजह है कि भाजपा के ही वरिष्ठ नेता ने उन्हें घोषणा वीर की संज्ञा दे डाली थी।
    भाजपा हाईकमान के पास स्पष्ट फीड बैक था कि शिवराज सिंह चौहान के नाम को लेकर लोगों में बैचेनी है। खास तौर पर युवा वर्ग बदलाव चाहता है। उसने जबसे होश संभाला है भाजपा सरकार ही देखी है। ये सरकार न तो उसे रोजगार दे पाई न ही पूंजी निर्माण का कोई माहौल बना पाई है। ऐसे में कांग्रेस ने उसे पिछले विधानसभा चुनावों में बरगला लिया था। इस बार फिर ऐसा न हो इसके लिए हाईकमान ने शिवराज सिंह चौहान को हटाया तो नहीं है। इसकी वजह ये है कि शिवराज पर पिछले दो दशकों में भाजपा ने करोड़ों रुपए खर्च किए हैं। उन्हें ब्रांड के रूप में स्थापित किया है। इसलिए उन पर ही जवाबदारी है कि पार्टी को एक बार फिर सत्ता में लाएं। शिवराज के इर्द गिर्द जुटे सत्ता माफिया ने पंचायतों से लेकर स्वास्थ्य ,सड़क, बिजली, पानी और उद्योग सभी क्षेत्रों में जो लूट मचाई है उससे सभी खफा हैं। जाहिर है कि भाजपा को यदि 2024 में लोकसभा का चुनाव जीतना है तो उसे मध्यप्रदेश की अपनी सत्ता बचानी पड़ेगी। यही वजह है कि मोदी शाह की जोड़ी और भाजपा हाईकमान पूरी गंभीरता से मध्यप्रदेश में अपना परचम फहराने में जुट गए हैं।
    नरेन्द्र मोदी ने देश की अर्थव्यवस्था को 5 ट्रिलियन डॉलर का टारगेट रखकर जो योजनाएं बनाई हैं उसमें वे कोई चूक नहीं होने देना चाहते हैं। कांग्रेस जहां डिफाल्टरों को पालने पोसने में जुटी रही है वहीं भाजपा ने किसानों और महिलाओं को अपना साथी बनाया है। आधी आबादी को मजबूती देकर वे अर्थ व्यवस्था में लंबी छलांग लगाना चाहते हैं। उन्होंने जाति,धर्म, वर्ग की राजनीति नहीं खेली। उन्होंने देश के विशाल वर्कफोर्स पर अपना ध्यान केन्द्रित किया है। यही वजह है कि मोदी ने जब अपने भाषण में शिवराज सिंह चौहान का नाम नहीं लिया तो उनके समर्थक बौखला गए। उनके समर्थक एक मंत्री ने कहा कि जब शिवराज सिंह इस चुनावी रण के दूल्हे हैं तो उन्हें नजरंदाज नहीं किया जाना चाहिए। जबकि दूसरी सूची में जिन दिग्गजों और क्षेत्रीय क्षत्रपों को चुनाव में भेजकर भाजपा ने उन्हें चुनाव जिताने की जो जवाबदारी सौंपी है उससे साफ है कि भाजपा हाईकमान शिवराज का साफ विकल्प तैयार करना चाहती है। ये जनता की मांग पर लिया गया फैसला है जो भले ही कड़वा लगे पर समस्या का इससे अच्छा समाधान दूसरा नहीं हो सकता। इस फैसले से फिलहाल कांग्रेस तो चौखाने चित्त नजर आ रही है।

  • सत्ता की दौड़ से बाहर होती कमलनाथ कांग्रेस

    सत्ता की दौड़ से बाहर होती कमलनाथ कांग्रेस


    चुनावों की आचार संहिता लागू होने में समय है लेकिन कमलनाथ की कांग्रेस अभी से पंचर हो गई है। भारतीय जनता पार्टी ने कारगर कार्यशैली अपनाकर जनता से जो संवाद स्थापित किया है उससे कांग्रेस के रणनीतिकार बौखला गए हैं। पिछले चुनावों में बिल्ली के भाग्य से छींका टूट गया था और सत्ता में पहुंचे कमलनाथ का दंभ सत्रहवें आसमान पर पहुंच गया था । ज्योतिरादित्य सिंधिया ने जब उनके लटके झटके करीब से देखे तो उन्होंने जनता से की जा रही गद्दारी से अपना नाता तोड़ लिया था । नाथ की सरकार जब औंधे मुंह गिरी तभी से वे विक्षिप्त हो गए हैं। अपनी मनोदशा पर वे जैसे तैसे काबू बनाए हुए थे लेकिन इस चुनाव के पहले जनता में भाजपा के प्रति जो प्रेम और विश्वास उमड़ रहा है उसे देखकर तो कमलनाथ अपना आपा खो बैठे हैं। इंदौर में मतंग समाज के कार्यक्रम में उन्होंने साजिशन पत्रकारों को धक्के देकर बाहर निकाल दिया। ऐसा नहीं कि पत्रकारों को गरियाने का उनका ये पहला मामला है। वे हमेशा से प्रेस को धकियाने का प्रयास करते रहते हैं। इसके बावजूद मीडिया उनकी बातों को जनता तक पहुंचाने का अपना दायित्व निभाता रहा है। पिछले चुनावों में अधिक वोट पाने के बावजूद जब भाजपा सत्ता से दूर रह गई तब कमलनाथ ने कुर्सी पाते ही पत्रकारों को गरियाना शुरु कर दिया था। उन्होंने बदतमीजी भरे अंदाज में कहा कि मैं अखबारों में अपनी फोटो नहीं छपवाना चाहता हूं इसलिए आप पत्रकारिता छोड़कर कोई दूसरा धंधा अपना लो। दंभ से चूर गांधी परिवार के इस प्यादे को बुढ़ापा आ जाने तक ये नहीं मालूम पड़ा कि पत्रकारिता करने वाले किसी सरकार के भरोसे अखबार बाजी नहीं करते हैं। भारत की प्रेस अपने पैरों पर खड़ी है । वह वास्तव में जनता का उपकरण है। जनता ही उसे जिंदा रखती है। किसी सरकार की इतनी हैसियत नहीं कि वह प्रेस को कुचल पाए। इसके बावजूद कुर्सी पाते ही कुछ लोगों को मुगालता हो जाता है कि वे प्रेस को अपने घर के बाहर बंधा कुत्ता बना लेंगे। दरअसल अंग्रेजों की एजेंट रही कांग्रेस हमेशा से प्रेस पर लगाम लगाने का प्रयास करती रही है। सत्ता में आने के बाद कांग्रेस के तमाम बड़े नेता योजनाओं में भ्रष्टाचार करके जन धन की चोरी करते रहे हैं। वे चाहते हैं कि उनकी काली करतूतें अखबारों में न छपें मीडिया पर न दिखाई जाएं । इसके लिए मीडिया को गुलाम बनाए रखने का प्रयास करते रहे हैं । कमलनाथ को इस उठा पटक में महारथ हासिल रहा है। वे आपातकाल के प्रमुख अत्याचारी रहे हैं। नीरा राडिया टेप कांड में उन्हें मिस्टर फिफ्टीन परसेंट कहा गया था। उनकी पूरी राजनीतिक सोच इंस्पेक्टर राज और कमीशनबाजी पर केन्द्रित रही है। यही वजह है कि वे मीडिया का मुंह बंद करने का प्रयास करते रहते हैं । भारतीय जनता पार्टी की शिवराज सिंह चौहान के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार ने समाज के सभी वर्गों को सत्ता में भागीदार बनाया है। जनता के संसाधनों को मिल बांटकर विकास की गति बढ़ाने के उसके प्रयास सफल रहे हैं और आज मध्यप्रदेश सर्वाधिक उत्पादकता कायम रख पाने वाला राज्य बन गया है। भाजपा ने इन प्रयासों को अपने नेतृत्व वाले सभी राज्यों में दुहराया है। यही वजह है कि भाजपा शासित राज्य विकास की पायदानों पर कारगर साबित हुए हैं। ये बात अलग है कि कुछ राज्यों में भाजपा नेतृत्व अपना दायित्व ठीक तरह नहीं निभा पाया और वहां उनकी सरकारें गिर गईं । इसके बावजूद उन विपक्ष शासित राज्यों में विकास भी परवान नहीं चढ़ पाया है। पुरातन सोच रही है कि रोटी को पलटते रहना चाहिए नहीं तो वह जल जाती है। जबकि ये जुगाड़ वाला फार्मूला केवल बकवास है। जैसे ही नए व्यक्ति को सत्ता थमाई जाती है वह भ्रष्टाचार करके अपना घर भरने जुट जाता है। विकास की पद्धतियां बदलती जा रहीं हैं। कांग्रेस की विकास की अवधारणा असफल साबित हुई है। उसका दौर बीत गया है। भाजपा ने लोकतांत्रिक सरकारों की अवधारणा बदलकर रख दी है। देश को समझ लेना चाहिए कि भाजपा का विकल्प अब कांग्रेस या कोई दूसरी पार्टी नहीं है। अब भाजपा का विकल्प केवल भाजपा ही हो सकती है। ये बात जरूर है कि भाजपा के विकल्प के रूप में हमें सुधरी और साफ सुथरी भाजपा बनाना पड़ेगी। ऐसी भाजपा बनाने की जवाबदारी भाजपा को तो निभानी ही है जनता को भी निभानी है। जनता अपनी ये जवाबदारी प्रेस के माध्यम से ही निभाती है। प्रेस तो केवल माध्यम है उसे चुनाव नहीं लड़ना और न जीतना है। ऐसे में वह उन कड़े फैसलों को लागू करने के लिए सरकार पर दबाव बना सकती है जिन्हें सरकारें आमतौर पर न्यायपालिका की ओर खिसका देती हैं।या फिर अपने वोट बैंक को नाराज न करने का जतन करते हुए ठंडे बस्ते के हवाले कर देती हैं। प्रेस की लोकतांत्रिक जवाबदारी है कि वह जनहित के फैसलों को राजनीतिक दलों के बीच संवाद स्थापित करके सख्ती से दबाव बनाकर लागू करवाए । वह मीडिया है लेकिन नपुंसक माध्यम नहीं है। उसकी विचारधारा जनता की विचारधारा है। आधुनिक भारत की जनता देश को आगे बढ़ाना चाहती है। आगे बढ़ाने के उपाय लागू करना चाहती है।इसलिए मीडिया से अपेक्षा करती है कि वह उसकी भावनाओं को लागू करवाएगा। सरकारों ने मीडिया को अपना पुछल्ला बनाने के लिए बड़े मीडिया घरानों को कर्ज के दलदल में फंसा लिया है। आज वह मीडिया को गरियाकर उसे अपनी ताबेदारी के लिए मजबूर करना चाहती है। इसके बावजूद कमलनाथ जैसे कांग्रेसियों को या अन्य राजनीतिक दलों के लोगों को समझ लेना चाहिए कि सौ फीसदी मीडिया उसका गुलाम नहीं है और न कभी ऐसा हो सकता है। नई पीढ़ी के युवा पत्रकार अब धीरे धीरे सरकारों के चंगुल से बाहर निकलते जा रहे हैं। सोशल मीडिया ने उनके हाथों में बड़ी ताकत दे दी है। ऐसे में उन्हें मीडिया से पंगा लेने का मानस बदलना होगा। यदि वे सोचते हैं कि मीडिया को गाली देने से वे मीडिया पर दबाव बना लेंगे तो ये उनकी बड़ी भूल है। इंदौर में मीडिया से की गई उनकी बदतमीजी ने बंद बोतल का ढक्कन खोल दिया है। जिन्न बाहर आ चुका है। अभी चुनाव के लिए कई दौर बाकी हैं। समूचा देश देखेगा कि किस तरह जनता का मीडिया घमंडिया गठबंधन के इस आततायी सोच को खदेड़ बाहर करता है। जो लोग समझते हैं कि वे मीडिया को गाली देंगे तो वह उनकी नालायकी भरी सोच को संबल प्रदान करने लगेगा वे अपनी गलती सुधार लें। मीडिया के कुछ लोग भी अपनी अज्ञानता में ऊटपटांग बयान देने लग जाते हैं वे भी सावधान हो जाएं क्योंकि कमलनाथ जैसे भ्रष्टाचार में निपुण राजनेता कल काम निकल जाने पर उन्हें भी धकेलकर सत्ता से गलियारों से बाहर कर देंगे । जिंदा प्रेस उन्हें जेल की सलाखों के पीछे भी पहुंचा देता है।

  • विकास का खलनायक बना घमंडिया गठबंधन

    विकास का खलनायक बना घमंडिया गठबंधन


    प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने विपक्षी गठबंधन इंडियन नेशनल डेवलपमेंटल इन्क्लूसिव अलायंस (इंडिया) पर निशाना साधते हुए कहा कि देश के लोगों को इससे सतर्क रहने की जरूरत है क्योंकि यह गठबंधन भारत की संस्कृति और भारत को मिटाना चाहता है. प्रधानमंत्री मोदी ने कहा है कि गांधी जी से लेकर स्वामी विवेकानंद तक और माता अहिल्या बाई होलकर से लेकर मीराबाई तक हजारों हजार साल तक यह सनातन धर्म, सनातन संस्कृति हर किसी को प्रेरित करती रही है.उन्होंने कहा कि यह सनातन संस्कृति है जो संत रविदास, संत कबीरदास को संत शिरोमणि कहती है. प्रधानमंत्री ने कहा कि ऐसी सनातन संस्कृति को समाप्त करने की कोशिश ‘इंडी’ गठबंधन के लोगों ने की है.पूरे देश के लोगों को इनसे बहुत सतर्क रहना है क्योंकि ये भारत की हजारों साल की संस्कृति को मिटाना चाहते हैं, ये भारत को मिटाना चाहते हैं.उन्होंने कहा कि इन लोगों ने मिलकर एक ‘इंडी’ गठबंधन बनाया है जिसे कुछ लोग घमंडिया गठबंधन भी कहते हैं, लेकिन ‘इंडी’ गठबंधन ने तय किया है कि वह भारत की सनातन संस्कृति को समाप्त करके रहेगा. पीएम मोदी ने कहा, “सनातन संस्कृति वह है जिसमें भगवान राम शबरी को मां कहकर उनके झूठे बेरों को खाने का आनंद लेते हैं. सनातन संस्कृति वह है, जहां राम वनवासियों को, निषाद राज को अपने भाई से भी बढ़कर बताते हैं. सनातन संस्कृति वह है जहां राम नाव चलाने वाले केवट को गले लगाते हैं. सनातन संस्कृति वह है जो किसी परिवार में जन्म को नहीं, व्यक्ति के कर्म को प्रधानता देती है.”
    विकास की अपील और आर्थिक सुधारों की आंधी से उत्साहित भारत का प्रगतिशील समुदाय इन दिनों प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की इस आवाज को गौर से सुन रहा है। वे देश भर में घूम घूमकर विपक्ष को ललकार रहे हैं। सरकारी कार्यक्रमों में भी वे अपनी बात इतने सधे अंदाज में बोलते हैं कि उनके जवाब की प्रासंगिकता खुद ब खुद प्रमाणित हो जाती है। केन्द्र की भाजपा सरकार ने किसान सम्मान निधि जैसी सार्थक योजना से देश को एकसूत्र में बांधने का भगीरथ किया है। वहीं राज्यों की शिवराज सिंह चौहान जैसी सरकारें लाड़ली बहना योजना लाकर जन जन तक अपनी पैठ बना रहीं हैं। मुफ्त योजनाओं की तुलना में नकद भुगतान की योजनाएं भाजपा सरकार की समाधान देने की अपील को कारगर बना रहीं हैं। ऐसे में विपक्ष हताश है। वह जाति, संप्रदाय और परिवारवाद के मुद्दों पर देश के सामने उतरा है। विपक्ष की वैमनस्य से भरी राजनीतिक चालें भी भाजपा की डायरेक्ट भुगतान वाली शैली के सामने चिचिया रहीं हैं। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी अपने भाषणों में जनधन खातों, प्रधानमंत्री आवास योजना, उज्ज्वला गैस कनेक्शन, किसान सम्मान निधि जैसी योजनाओं की जानकारी देते हैं। वहीं शिवराज सिंह चौहान जैसी राज्य सरकारों लाड़ली बहना योजना जैसी तमाम हितग्राही मूलक योजनाओं का हवाला देकर खुद को जनता का असली सेवक बताने में जुटी हैं। ऐसे में विपक्षकी तमाम जाति संप्रदाय आधारित राजनीति अप्रासंगिक नजर आ रही है। आदिवासियों को बरगलाने का जो प्रयास मध्यप्रदेश में पिछले चुनावों में कांग्रेस ने किया था उसके जवाब में भाजपा ने अपनी हितग्राही मूलक योजनाओं का रेला ठेल दिया है। ऐसे में देश विकास के नए जोश से भरता जा रहा है। जाहिर है जन जन में बढ़ रहा ये उत्साह भारत को विश्व की तीसरी बड़ी अर्थव्यवस्था बनाने की दिशा में बढ़ चला है। ऐसे में कथित घमंडिया गठबंधन की फूट डालो राज करो की नीति कब तक अपना असर बचा सकेगी नहीं कहा जा सकता।उसकी राजनीति विकास का खलनायक बनकर रह गई है।

  • ब्रांड असंतुलन साधने के लिए बदली गई ये चुनावी फील्डिंग

    ब्रांड असंतुलन साधने के लिए बदली गई ये चुनावी फील्डिंग


    भारतीय जनता पार्टी ने मध्यप्रदेश में 39सीटों पर प्रत्याशी घोषित करके जिस आक्रामक रणनीति का परिचय दिया था उसी तर्ज पर उसने तीन नए मंत्री बनाकर कथित तौर पर डगमगाती नैया के छेद भी बंद कर दिए हैं। कहा जा रहा था कि विंध्य का ब्राह्मण मतदाता इस बार भाजपा से नाराज है और वह कमलनाथ कांग्रेस के साथ जाने के लिए तैयार है। राजनीतिक क्षेत्र के जानकार होने का दावा करने वाले कुछ लाल बुझक्कड़ी पंडितों की इस कहानी में कोई सिर पैर ही नहीं था। इसकी वजह थी कि राजेन्द्र शुक्ल मंत्री न बनाए जाने से कतई नाराज नहीं थे। उनके करीबियों को जिस तरह से बड़े ठेके देकर महत्वपूर्ण कार्यों की जवाबदारी दी गई थी ये उनके मंत्री रहते संभव नहीं था.पिछले विधानसभा चुनावों में विंध्य का इलाका एकजुट होकर भाजपा के साथ आया था। शिवराज जी के लंबे कार्यकाल के कारण राजनीतिक मेधा से लबरेज वहां के मतदाताओं में थोड़ी बेचैनी जरूर देखी जा रही थी उन्हें लगता था कि हमारे इलाके को उपेक्षित किया जा रहा है लेकिन जिस तरह के ठोस कार्यों में विंध्य के प्रमुख लोगों को सत्ता का सहोदर बनाया गया उसे जानकर विंध्य के मतदाता में कहीं कोई संशय नहीं बचा है। नारायण त्रिपाठी अलग विंध्य प्रदेश के राजनीतिक नारे को हवा देकर खुद का औचित्य सिद्ध कर रहे थे। ऐसे में कांग्रेस के हवा दिएजाने के बावजूद अलगाव की मांग परवान नहीं चढ़ पाई । इधर विधानसभा अध्यक्ष गिरीश गौतम ने विंध्य की कमान को मजबूती से थाम रखा है। ऐसे में विंध्य कहीं खिसकने वाला नहीं है।


    बालाघाट और महाकौशल से संवाद करने वाले एक शिल्पी की जरूरत लंबे समय से महसूस की जा रही थी। जबलपुर से अजय विश्नोई जिस तरह रह रहकर अपने राजनीतिक वनवास की कराह सुनाते रहे हैं उसे देखकर सात बार के विधायक और लोकप्रिय मंत्री रहे गौरीशंकर बिसेन को मंत्री बनाकर भेजा गया है। महाकौशल को भड़काने और भरमाने के प्रयासों के लिए बिसेन अकेले ही काफी हैं। भाजपा ने हितग्राही मूलक जिन योजनाओं की बौछार पूरे प्रदेश में की है उसका असर महाकौशल में भी पर्याप्त है।


    उमा भारती अपनी राजनीतिक महत्वाकांक्षा के चलते जिस तरह लोधी वोटों को लामबंद करने में जुटी हैं उसे केन्द्रीय मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल का अंदरूनी सपोर्ट मिलता रहा है। ऐसे में राहुल लोधी को राज्यमंत्री बनाकर भाजपा ने लोधी समाज की एक बड़ी आकांक्षा पूरी कर दी है।उमा भारती को सत्ता में भागीदारी का संदेश देने में भी ये प्रयास सफल रहा है।


    दरअसल ये तीनों नियुक्तियां न तो मंत्रियों का जलवा बढ़ाने के लिए हैं और न ही उन नेताओं को इस नए पदभार से कोई लाभ मिलने वाला है। उन्हें तो उस ब्रांड असंतुलन को ठीक करने के लिए मैदान में उतारा गया है जो शिवराज सिंह चौहान के चेहरे के अति प्रचार से बिगड़ रहा है। चुनावी प्रचार के केन्द्र में शिवराज सिंह चौहान की छवि को भरपूर उभारा गया है। लगभग 20 सालों की सत्ता ने शिवराज जी को सामने आने का पूरा मौका दिया है। आगामी विधानसभा चुनाव के लिए भाजपा की केन्द्रीय कमान ने राज्य भाजपा को भरपूर संसाधन मुहैया कराए हैं। ऐसे में तीन महत्वपूर्ण पदाधिकारियों को मैदान में उतारकर भाजपा हाईकमान ने लड़खड़ाते शिवराज ब्रांड को सहारा देने का जतन किया है। जिस तरह से कहा जा रहा है कि योजनाओं के हितग्राही मिलकर पार्टी को गुजरात जैसी बंपर जीत दिला सकते हैं तो ऐसी स्थिति में शिवराज की आड़ में सत्ता का उपभोग करते रहे लोग इस जीत को शिवराज की जीत बताने में जुट जाएंगे। तब पार्टी को ये चुनावी फील्डिंग काम आएगी।

    बेशक तीनों मंत्री शिवराज के सहयोगी रहे हैं लेकिन राजनीतिक पतंग की डोर यदि थामकर न रखी जाए तो फिर ये मैदान में कोहराम मचाने लगती है। शिवराज जी के कार्यकाल को पार्टी में अलौकिक नहीं माना जाता है। वे मजबूरी का नाम महात्मा गांधी बनकर कार्य करते रहे हैं। ऐसे में तीन मंत्रियों का ब्रेक उनका भ्रम तोड़ने के लिए सहयोगी साबित होगा। शिवराज सिंह जिस लाबी की कठपुतली बनकर सरकार चलाते रहे हैं उसे शिकस्त देने की कोशिश करती कांग्रेस अपने दांत तुड़वा चुकी है। जाहिर है कि भाजपा ये गलती दुहराने वाली तो नहीं है।

  • संसाधन हड़पने वाले खलनायक को कौन कुचलेगा

    संसाधन हड़पने वाले खलनायक को कौन कुचलेगा


    प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने स्वाधीनता दिवस पर लाल किले की प्राचीर से देश को जगाने का जो प्रयास किया है आज पूरा देश उस पर सकारात्मक प्रतिक्रिया दे रहा है। प्रधानमंत्री ने आज कोई कलात्मक भाषण की झांकी न देकर जिन तथ्यों और योजनाओं से देश को अवगत कराया है वह भविष्य के हिंदुस्तान की एक रूपरेखा प्रस्तुत करते हैं। प्रधानमंत्री ने भ्रष्टाचार, परिवारवाद और तुष्टिकरण जैसी तीन बुराईयों को समाप्त करने का संकल्प खुलेआम दुहराया और कहा कि मेरा वादा है कि मैं जीवन भर इनसे लड़ता रहूंगा। प्रधानमंत्री ने कहा कि अगले साल भी मैं लाल किले पर आऊंगा और देश के सामर्थ्य और सफलता का गौरवगान करूंगा। उन्हें देश के प्रमुख विपक्षी दल की विचारधारा पर प्रहार करते हुए कहा कि आजादी के अमृत महोत्सव तक वे केवल बातें करते रहे जबकि हमने सरकार में आकर देश के संकल्पों को साकार कर दिखाया है। दरअसल कांग्रेस जिसे देश की विचारधारा कहती रही है वह एक परिवार के चंद सहयोगी परिवारों को पुष्ट करने का षड़यंत्र रहा है। देश के करोड़ों हाथों को काम देना कोई उपकार की बात नहीं बल्कि मानव बल का सदुपयोग करके उत्पादकता बढ़ाना है। जबकि सर्वाधिक सत्ता संभालने वाली कांग्रेस इसे देश पर उपकार गिनाते नहीं थकती।राजाओं, मुगलों, अंग्रेजों, जमींदारों, साहूकारों, जमाखोरों, मिलावटखोरों से लड़ने का काम देश की आम जनता आगे बढ़कर संभालती रही है लेकिन कांग्रेसी इसे अपना किया अहसान बताने में ही लगे रहते हैं। किसी भी कांग्रेसी से पूछिए वह यही दुहराता है हमने देश को आजादी दिलाई। जबकि हकीकत ये है कि करोड़ों हिंदुस्तानियों ने बलिदान देकर अंग्रेजों को देश से भागने पर विवश किया था। गांधी नेहरू की कांग्रेस ने तो अंग्रेजों को निकल भागने के लिए सुरक्षित पैसेज उपलब्ध कराया और उसका इनाम बटोरा। हिंदुओं और मुसलमानों के बीच वैमनस्य के बीज बोकर पाकिस्तान बंटवारा स्वीकार करना इसी गहरे षड़यंत्र का हिस्सा था। आजादी के बाद से लेकर जब तक कांग्रेस सत्ता में रही वह केवल फूट डालो राज करो की नीति पर ही अमल करती रही। आज भी देश में कांग्रेस को वोट देने वाला बड़ा तबका इसी तरह वैमनस्य की खेती करके अपना उल्लू सीधा करता है।केवल डेढ़ दो प्रतिशत लोगों को मंहगी सरकारी नौकरियां देकर शेष हिंदुस्तान के विरुद्ध षड़यंत्र की कलई तब खुल रही है जब भारतीय जनता पार्टी ने अंत्योदय के विचार पर अमल करके हर नागरिक को संसाधनों का बंटवारा करने की नीति पर अमल शुरु किया है। दरअसल हमेशा से यही समस्या रही है कि समाज के संसाधनों पर कुछ लोग कब्जा जमा लेते थे। कभी राजा,कभी मुगल, कभी अंग्रेज, कभी जमींदार,साहूकार और आज उन पर कब्जा बेतहाशा बढ़ते सरकारी तंत्र ने जमा लिया है। शोषण का ये कहर इतना अधिक बढ़ गया है कि लोग त्राहिमाम कर उठे हैं। जनता विद्रोह पर उतारू है। वह ये नहीं समझ पा रही है कि उसका असली खलनायक कौन है। कांग्रेस को अपना तारणहार मानने वाला तबका भाजपा को खलनायक बताने में जुटा है । भाजपा पर ये आरोप इसलिए चिपक रहा है क्योंकि लगभग दो दशक तक शासन करने के बाद भी भाजपा जनता के कंधे पर रखा ये जुआ नहीं उतार सकी है। सरकारी नौकरियों का वेतन लगातार बढ़ता जा रहा है और अमीरी गरीबी की खाई भी बढ़ती जा रही है।भाजपा ने अपने समर्थकों को सरकारी नौकरियों में भेज दिया तो शोषण का ये आंकड़ा और बढ़ गया। दिन भर में दो सौ रुपए की मजदूरी पाने वाला श्रमिक दाल,चावल,सब्जी उसी भाव पर खरीद रहा है जिस भाव पर ढाई तीन लाख रुपए मासिक वेतन पाने वाला अफसर खरीद रहा है। उपभोक्ता मूल्य सूचकांक पच्चीस लाख रुपए का पैकेज पाने वाले अमीर तबके से तय हो रहा है जबकि गरीब वर्ग बेवजह उसमें पिसा जा रहा है। मोदी जी जब मेरे प्यारे परिवारजन का संबोधन देते हैं को उन्हें और उनकी भाजपा को सोचना होगा कि वह अपने परिवारजनों के लिए मुखिया कैसे साबित हों। कहा गया है मुखिया मुख सो चाहिए, खान पान को एक, पाले पोसे सकल अंग तुलसी सहित विवेक । यदि मोदी जी और उनकी भाजपा कांग्रेस की छाया से बाहर नहीं निकल पाएगी और देश के संसाधनों का न्यायोचित बंटवारा नहीं कर पाएगी तो वह लाख बार कांग्रेस के परिवार वाद को गाली देती रहे जनता की समस्याओं का समाधान नहीं हो पाएगा। चंद परिवारों को जरूरत से ज्यादा संसाधन बांटने से उपभोक्ता सामग्री बनाने बेचने वाला कार्पोरेट सेक्टर तो मजबूत होता जा रहा है लेकिन वह सरकार और आम जनता दोनों का धन उलीचता जा रहा है। जनता इससे परेशान है और इससे अमीरी गरीबी के बीच खाई बढ़ती जा रही है। भाजपा ने हितग्राही मूलक योजनाओं से संसाधनों का बंटवारा आम जनता तक पहुंचाने की पहल तो की है लेकिन इसमें भी इतनी सारी शर्तें थोप दी गईं हैं कि वह संसाधन हर व्यक्ति को लाभ नहीं पहुंचा पा रहे हैं। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के सामने खुली चुनौती है कि वे हर नागरिक तक देश के संसाधन पहुंचाना सुनिश्चित करें। मध्यप्रदेश में शिवराज सिंह चौहान की भाजपा भी चीन्ह चीन्ह के रेवड़ी बांटने की शैली पर कार्य कर रही है। जाहिर है कि इससे जन आक्रोश बढ़ेगा और आने वाले विधानसभा चुनावों और लोकसभा चुनावों में भाजपा को इसकी मंहगी कीमत चुकानी पड़ेगी। संसाधन तो सीमित हैं। कर्ज लेकर बांटने की सीमा भी निश्चित है। जाहिर है कि सरकार को निष्पक्ष होकर शल्यक्रिया करनी होगी। संसाधन रिसकर आम जनता तक पहुंचाने वाला कांग्रेसी मॉडल उसे न केवल छोड़ना होगा बल्कि अंत्योदय की विचारधारा पर अमल की नाटकबाजी छोड़कर सख्ती से अमल शुरु करना होगा। अनुत्पादक सरकारी तंत्र को पालते रहने से वह भले ही चुनावी हेराफेरी करने में थोड़ी हद तक सफल हो जाए लेकिन जन आक्रोश का सैलाब उसे न घर का रहने देगा न घाट का ।