Category: मध्यप्रदेश

  • सतपुड़ा भवन में भीषण आग,एयरकंडीशनर फटे

    सतपुड़ा भवन में भीषण आग,एयरकंडीशनर फटे

    भोपाल, 12 जून( प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)। मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल के सतपुड़ा भवन में सोमवार को आग लग गई। तीसरी मंजिल से शुरू हुई यह आग देखते ही देखते छठी मंजिल तक पहुंच गई। देर रात तक आग नहीं बुझाई जा सकी थी। इस आग से बड़ी संख्या में महत्वपूर्ण दस्तावेज और फर्नीचर जल गया है। 30 से ज्यादा एयर कंडीशनरों में ब्लास्ट होने की बात कही जा रही है। कांग्रेस ने आग लगने की टाइमिंग पर सवाल किए हैं। आरोप लगाया है कि शिवराज सरकार की चला-चली की बेला है। इस वजह से आग लगाकर घोटालों की फाइलें जलाई गई हैं। वहीं सीएम शिवराज ने पीएम नरेंद्र मोदी, गृहमंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह को जानकारी दी है। वायुसेना की मदद मांगी है।
    जानकारी के मुताबिक आग सोमवार को करीब चार बजे लगी। आग की शुरुआत अनुसूचित जनजाति क्षेत्रीय विकास योजना के दफ्तर से हुई। फिर चौथी मंजिल पर स्थित स्वास्थ्य संचालनालय को भी इसने अपनी चपेट में ले लिया। पहले तो कर्मचारियों और सुरक्षाकर्मियों ने आग बुझाने की कोशिश की, लेकिन वे उस पर काबू नहीं पा सके । एसी में ब्लास्ट हुए, जिससे आग तेजी से फैली। आग की वजह से पूरी इमारत में हड़कम्प मच गया। सीआईएसएफ और एसडीईआरएफ की टीमें भी मौके पर पहुंचीं। आग के कारणों का पता नहीं चल सका है। अधिकारियों का कहना है कि जांच समिति की निगरानी में आग से हुई क्षति का अनुमान लगाया जाएगा। सतपुड़ा भवन में कई विभागों के संचालनालय हैं, जिनमें आईएएस अफसर भी बैठते हैं।
    मुख्यमंत्री चौहान ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से फोन पर चर्चा कर उन्हें सतपुड़ा में दुर्भाग्यपूर्ण आगजनी की घटना की जानकारी दी। मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री मोदी को आग बुझाने के प्रदेश सरकार के प्रयासों और केंद्र सरकार के विभिन्न विभागों (आर्मी, एयरफोर्स, भेल, सीआईएएसएफ, एयरपोर्ट एवं अन्य) से मिली मदद से भी अवगत कराया। प्रधानमंत्री ने मुख्यमंत्री को केंद्र से हरसंभव मदद का आश्वासन दिया।
    मुख्यमंत्री चौहान ने गृहमंत्री अमित शाह से फोन पर चर्चा कर सतपुड़ा भवन में आग की घटना की जानकारी दी एवं आवश्यक मदद मांगी। सतपुड़ा के जिन मंजिलों में आग लगी है, वहां मूलतः तीन विभाग हैं, आदिम जाति कल्याण विभाग, परिवहन विभाग और स्वास्थ्य विभाग । तीसरी, चौथी, पांचवीं व छठवीं मंजिल में इनमें से किसी भी विभाग का टेंडर, प्रैक्योरमेंट संबंधित कोई भी कार्य नहीं होता है। मूलतः यहां स्थापना संबंधित विभागीय कार्य होते हैं। मुख्यमंत्री चौहान ने गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा को भी सतपुड़ा भेजा और सुरक्षा उपायों की निगरानी करने को कहा है।
    इधर मुख्यमंत्री शिवराज सिंह ने रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह से भी बात की। उन्होंने आग बुझाने के लिए एयरफोर्स की मदद मांगी। रक्षा मंत्री ने एयरफोर्स को निर्देशित किया। रक्षा मंत्री के निर्देश पर एएन 32 विमान और एमआई 15 हेलीकॉप्टर भोपाल पहुंचने के निर्देश दिए थे लेकिन आग पर काबू कर लिया गया है। आग दुबारा न भड़क सके और विमानों व हेलीकाप्टरों की आवाजाही सुनिश्चित हो सके इसके लिए एयरपोर्ट को रात भर खुला रखा गया है।
    मुख्यमंत्री चौहान ने आग के प्रारंभिक कारणों को जानने के लिए कमेटी घोषित की है। कमेटी में एसीएस होम राजेश राजौरा, पीएस अर्बन नीरज मंडलोई, पीएस पीडब्ल्यूडी सुखबीर सिंह और एडीजी फायर रहेंगे। कमेटी जांच के प्रारंभिक कारणों का पता कर रिपोर्ट मुख्यमंत्री चौहान को सौंपेगी।
    सूत्रों का दावा है कि स्वास्थ्य विभाग के कई मामलों की शिकायत ईओडब्ल्यू और लोकायुक्त को हुई थी। इनसे जुड़ी जांच की फाइलों को भी आग से नुकसान पहुंचा है। इसी तरह आदिम जाति विभाग और स्वास्थ्य विभाग के कई अन्य महत्वपूर्ण दस्तावेज भी जले हैं। स्वास्थ्य विभाग में कुछ महीनों पहले रिनोवेशन का काम हुआ था। पुरानी अलमारियों और फर्नीचर को निकाला गया था, जिसे आग ने पूरी तरह नष्ट कर दिया।
    आदिम जाति विभाग के दफ्तर को सबसे अधिक नुकसान पहुंचा है। आग तीसरी मंजिल पर ही लगी थी। आग की लपटों की वजह से फर्नीचर पूरी तरह से जल गया। पांचवें और छठी मंजिल पर रखा सामान भी जला है। प्लास्टर टूटकर गिर गया है। पूरी इमारत में मधुमक्खियों के पुराने छत्ते हैं। इस वजह से छत्तों से मधुमक्खियों के उड़ने की दहशत भी थी।
    सतपुड़ा भवन में इससे पहले भी आग लग चुकी है। 25 जून 2012 में भी चौथी मंजिल पर आग लगी थी। तब यहां तकनीकी शिक्षा विभाग का दफ्तर था। यह आग शॉर्ट सर्किट से लगी थी।
    पूर्व केंद्रीय मंत्री और कांग्रेस नेता अरुण यादव ने सतपुड़ा भवन में लगी आग पर सवाल उठाया है। उन्होंने ट्वीट किया कि प्रियंका गांधी जी ने जबलपुर में “विजय शंखनाद रैली” में घोटालों को लेकर हमला बोला तो सतपुड़ा भवन में भीषण आग लग गई। इसमें महत्वपूर्ण फाइलें जलकर राख हो गई है। कहीं आग के बहाने घोटालों के दस्तावेज जलाने की साज़िश तो नहीं। यह आग मप्र में बदलाव के संकेत दे रही है। पूर्व मंत्री और विधायक जीतू पटवारी ने कहा कि पचास प्रतिशत कमीशन वाली सरकार ने अपने दस्तावेज जला दिए। सितंबर 2018 में भी सतपुड़ा भवन में भी आग लगी थी। सर्वे कांग्रेस के पक्ष में है। आम लोगों में राय है कि कांग्रेस की सरकार आ रही है। साफ है कि भ्रष्टाचार छिपाने के लिए आग लगी है। मेरा मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान से सीधा सवाल है – यह आग लगी है या लगाई गई है? आम तौर पर माना जाता है कि चुनाव से पहले सबूत मिटाने के लिए सरकार ऐसी ‘हरकत’ करती है! हार रही है भाजपा। अब यह भी बताए कि पुराने ‘अग्निकांड’ में दोषी कौन थे? किसे/कितनी सजा मिली?

  • जनजातीय ग्रामसभाओं की ताकत है पेसा एक्टःशिवराज

    जनजातीय ग्रामसभाओं की ताकत है पेसा एक्टःशिवराज

    भोपाल 2 जून(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)। मुख्यमंंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा है कि बड़ा देव भगवान में हमारी गहरी आस्था और श्रद्धा है। सीधी जिले के कुसमी गौरव दिवस पर बड़ा देव भगवान के नव-निर्मित मंदिर में बड़ा देव भगवान की मूर्ति की प्राण-प्रतिष्ठा कार्यक्रम में शामिल होते हुए हृदय प्रफुल्लित है। मुख्यमंत्री ने भगवान बड़ा देव से प्रदेशवासियों के सुख-समृद्धि और निरंतर प्रगति-पथ पर अग्रसर होने की कामना की। मुख्यमंत्री श्री चौहान सीधी जिले के कुसमी गौरव दिवस पर बड़ा देव मूर्ति कुसमी की प्राण-प्रतिष्ठा के अवसर पर जनजातीय सम्मेलन को छतरपुर में वीडियो कांफ्रेंसिंग से संबोधित कर रहे थे।

    मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि प्रदेश में पेसा एक्ट से जनजातीय विकासखंडों की ग्राम सभाओं को अधिकार सम्पन्न बनाया गया है। प्रदेश की 268 ग्राम सभाएँ स्वयं तेंदूपत्ता तुड़ाई का कार्य कर रही हैं। ग्राम सभाओं को गाँव में शराब की दुकान खोलने का फैसला करने का अधिकार दिया गया है। गाँव में छोटे-छोटे विवादों के निराकरण के लिए शांति और विवाद निवारण समितियाँ बनी हैं। गाँव से यदि किसी श्रमिक को काम के लिए बाहर ले जाया जाता है तो उसकी सूचना ग्राम सभा को देनी होती है।

    मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि प्रदेश सरकार सभी वर्गों के विकास के लिए निरंतर कार्य कर रही है। महिलाओं के आर्थिक स्वावलंबन के लिए मुख्यमंत्री लाड़ली बहना योजना में 10 जून से प्रत्येक पात्र बहन के खाते में एक हजार रूपये डाले जाएंगे। इससे बहनों को अपनी छोटी-छोटी जरूरतों के लिए किसी के आगे हाथ नहीं फैलाना पड़ेगा। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी द्वारा गरीबों के कल्याण के लिए अनेक योजनाओं का संचालन किया जा रहा है। सभी को निःशुल्क खाद्यान्न, प्रधानमंत्री आवास योजना से पक्का आवास, बीमारी पर आयुष्मान कार्ड से निःशुल्क इलाज की सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है। प्रदेश में मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना से बेटियों का धूमधाम से विवाह संपन्न किया जा रहा है। किसानों को केंद्र तथा राज्य सरकार द्वारा प्रतिवर्ष 10 हजार रुपये की सम्मान निधि दी जा रही है। मुख्यमंत्री ने कहा कि वे भगवान बड़ा देव की प्रेरणा से निरंतर प्रदेशवासियों की प्रगति के लिए कार्य करते रहेंगे।

    जनजातीय कार्य एवं अनुसूचित जाति कल्याण तथा सीधी जिले की प्रभारी मंत्री सुश्री मीना सिंह ने कहा कि मुख्यमंत्री श्री चौहान के कुसमी प्रवास के दौरान जनजातीय समुदाय के लोगों द्वारा भगवान बड़ा देव के मंदिर निर्माण तथा मूर्ति की प्राण-प्रतिष्ठा की माँग की गई थी। मुख्यमंत्री द्वारा पूरी श्रद्धा से माँग को पूरा करते हुए मंदिर का निर्माण कराया गया है।

    कार्यक्रम में मुख्यमंत्री लाड़ली बहना योजना के हितग्राहियों को स्वीकृत-पत्र वितरित किए गए। साथ ही कुसमी क्षेत्र के विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले नागरिकों को सम्मानित किया गया।

  • भोपाल विलीनीकरण दिवस पर छुट्टी रहेगी-शिवराज सिंह

    भोपाल विलीनीकरण दिवस पर छुट्टी रहेगी-शिवराज सिंह

    भोपाल,1 जून(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा है कि अगले वर्ष से गौरव दिवस पर एक जून को भोपाल में अवकाश रहेगा। आने वाली पीढ़ी भोपाल के इतिहास से रू-ब-रू हो सके, इस उद्देश्य से भोपाल के इतिहास पर केंद्रित शोध संस्थान की स्थापना की जाएगी। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने भोपाल गौरव दिवस पर भोपाल गेट पहुँच कर सफाई मित्रों का सम्मान किया। उन्होंने भोपाल विलीनीकरण दिवस की शुभकामनाएँ देते हुए कहा कि असंख्य लोगों के बलिदान और वीर सपूतों के संघर्ष के परिणामस्वरूप देश की स्वतंत्रता के 2 साल बाद एक जून 1949 को भोपाल, भारत का अभिन्न अंग बना।

    मुख्यमंत्री श्री चौहान ने रंग-गुलाल, पुष्प-वर्षा और आतिशबाजी के बीच राष्ट्रीय ध्वज फहराया। उन्होंने जन-गण-मन गान के बाद भारत माता को पुष्पांजलि अर्पित की और मशाल जला कर विलीनीकरण के शहीदों का स्मरण किया। शहीदों के चित्र पर पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि भी दी। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने भोपाल विलीनीकरण आंदोलन पर केंद्रित चित्र प्रदर्शनी का अवलोकन भी किया।

    मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि नई पीढ़ी को यह नहीं मालूम कि 15 अगस्त 1947 को भारत के स्वतंत्र होने के साथ भोपाल स्वतंत्र नहीं हुआ था। नवाब ने भोपाल के भारत में विलय से इंकार कर दिया था। इस स्थिति में भोपाल में विलीनीकरण आंदोलन आरंभ हुआ। उन्होंने श्रद्धेय उद्धव दास मेहता, बालकृष्ण गुप्ता और डॉ. शंकर दयाल शर्मा के संघर्ष का स्मरण करते हुए बोरास के शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित की। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने लगभग 100 सफाई मित्रों का शॉल पहना कर सम्मान किया। जानकारी दी गई कि भोपाल के सभी वार्डों में स्वच्छता कर्मियों का सम्मान किया जा रहा है।

    चिकित्सा शिक्षा मंत्री श्री विश्वास कैलाश सारंग ने कहा कि मुख्यमंत्री श्री चौहान द्वारा एक जून को भोपाल का गौरव दिवस मनाने की पहल से आने वाली पीढ़ी भोपाल के इतिहास से अवगत होगी। महापौर श्रीमती मालती राय ने भोपालवासियों को गौरव दिवस की शुभकामनाएँ दी। पूर्व महापौर श्री आलोक शर्मा उपस्थित थे।

  • स्ट्रीट वेंडर्स से अब रोज वसूली नहीं होगी

    स्ट्रीट वेंडर्स से अब रोज वसूली नहीं होगी

    भोपाल, 29 मई( प्रेस इंफार्मेशन सेंटर) मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि मध्यप्रदेश में कहीं भी किसी भी नगर में स्ट्रीट वेंडर्स से रोज शुल्क वसूली नहीं होगी, यह तत्काल बंद की जाएगी। स्ट्रीट वेंडर्स के रजिस्ट्रेशन के लिए नाममात्र का शुल्क लिया जाएगा। आपकी जिंदगी को आसान बनाने के लिए कोई कमी नहीं छोड़ी जाएगी। हाथठेला लगाने के लिए व्यवस्थित और उपयुक्त स्थान तैयार किए जाएंगे। गरीबों की जिंदगी में खुशियाँ लाने का प्रयास हमेशा जारी रहेगा। हाथ ठेला रोजी-रोटी का साधन है। आज मैं तत्काल प्रभाव से निर्देश दे रहा हूँ कि कोई भी हाथ ठेला जब्त नहीं होगा। इसके लिए नगरीय प्रशासन विभाग द्वारा नियम बना दिए जाएँ। जिनके पास हाथ ठेला नहीं है उनको सब्सिडी पर हाथ ठेला देने की योजना बनाई जाएगी। इसके लिए सरकार 5 हजार रूपए सब्सिडी देगी। गरीबों की तकलीफों को दूर करना शिवराज का धर्म है। मुख्यमंत्री श्री चौहान, मुख्यमंत्री निवास पर नगरीय क्षेत्र के हाथ ठेला चालक, फेरी एवं रेहड़ी वालों की महापंचायत को संबोधित कर रहे थे।

    मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा है कि स्ट्रीट वेंडर्स मेहनतकश भाई-बहन हैं। अपना खून-पसीना एक कर रोजी-रोटी कमाते हैं। आप श्रम साधक हैं, आपके बिना दुनिया नहीं चल सकती है। आप घर-घर पहुँच कर लोगों को सामान की बिक्री करते हैं। जरूरत की हर छोटी-बड़ी चीज आसानी से लोगों तक पहुँचाते हैं।

    मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि गाँव से शहर में आने वाले गरीबों के रहने की व्यवस्था की जाएगी। माफिया से छुड़ाई गई 23 हजार एकड़ जमीन पर गरीबों को पट्टा दिया जाएगा। जनता की तकलीफों को दूर करना सरकार का धर्म है। मुख्यमंत्री लाड़ली बहना योजना में 1000 रूपए हर महीना बहनों के खाते में डाले जायेंगे। संबल योजना का लाभ मिलता रहेगा। इस योजना में महिलाओं के पोषण, बच्चों की पढ़ाई, इलाज, शादी, दुर्घटना में मृत्यु पर सहायता की व्यवस्था की गई है। सभी पात्रों को योजना में शामिल कर लाभान्वित किया जाएगा। उन्होंने कहा कि बिना किसी भेदभाव के योजनाओं का लाभ मिलेगा। बारहवीं पास बच्चों को अलग-अलग संस्थाओं में काम सीखने के लिए भेजने की व्यवस्था की जाएगी। उनको काम सीखने के दौरान प्रतिमाह 8 हजार रूपए भी दिए जायेंगे। मैं आपके परिवार का सदस्य की तरह हूँ । इसलिए आपको योजनाओं का लाभ देने के लिए पंचायत बुलाई गई है। सामाजिक क्रांति लाकर स्ट्रीट विक्रेताओं की हालत को बदल दिया जाएगा। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि कमजोर नहीं ताकतवर बनें। इसके लिये जरूरी है कि संगठित होकर काम करें। अपना एक संगठन बनायें। हाथठेला में कचरा पेटी रखें और सोलर बेट्री लगायें। शराब नहीं पियें।

    मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कन्या-पूजन और दीप प्रज्ज्वलित कर महापंचायत का शुभारंभ किया। उन्होंने पुष्प-वर्षा कर स्ट्रीट वेंडर्स का स्वागत किया। स्ट्रीट वेंडर्स की ओर से मुख्यमंत्री श्री चौहान को तुलसी का पौधा भेंट किया गया। लाड़ली बहना योजना की पात्र बहनों ने धन्यवाद-पत्र भेंट किया। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने पीएम स्व-निधि योजना में प्रतीकस्वरूप हितग्राहियों को लाभान्वित किया। प्रदेश में योजना से कुल 51 हजार हितग्राही लाभान्वित किए गए हैं।

    नगरीय विकास एवं आवास मंत्री भूपेन्द्र सिंह ने कहा कि हाथठेला-चालक और पथ-विक्रेताओं के लिये शहरों में हॉकर्स जोन बनाये जाना चाहिये। उन्हें शासन की सभी जन-कल्याणकारी योजनाओं का लाभ मिले। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कोरोना काल में लगातार पथ-विक्रेताओं की चिंता की। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने पीएम स्व-निधि योजना लागू कर कोरोना काल में पथ-विक्रेताओं को बहुत बड़ी राहत दी। इस योजना में मध्यप्रदेश देश में नम्बर-1 है। योजना में 9 लाख 50 हजार रजिस्ट्रेशन हुए हैं। इनमें से 7 लाख एक हजार पथ-विक्रेताओं को योजना का लाभ दिया जा रहा है। आज पूरे प्रदेश में 51 हजार पथ-विक्रेताओं को ऋण स्वीकृति-पत्र वितरित किये जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री के निर्देशानुसार स्टॉम्प शुल्क 2500 के स्थान पर मात्र 50 रूपये लिया जा रहा है।

    नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग के आयुक्त भरत यादव ने योजना के उद्देश्यों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि हितग्राहियों को 10 हजार, 20 हजार और 50 हजार रूपये का ब्याजमुक्त ऋण दिया जाता है। पथ-विक्रेताओं से उनकी समस्याओं की भी जानकारी ली जा रही है। नगरपालिक निगम भोपाल की महापौर श्रीमती मालती राय ने आभार माना। विधायक रामेश्वर शर्मा और श्रीमती कृष्णा गौर, प्रमुख सचिव नगरीय विकास एवं आवास नीरज मण्डलोई और बड़ी संख्या में पथ-विक्रेता और रेहड़ी वाले उपस्थित थे।

  • दमोह में बिजली सुधारों के लिए 95 करोड़ मंजूर

    दमोह में बिजली सुधारों के लिए 95 करोड़ मंजूर

    भोपाल,28 मई( प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)। ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर ने कहा है कि दमोह जिले की विद्युत अधो-संरचना को सुदृढ़ करने एवं विद्युत हानियों को कम करने के उद्देश्य से 95 करोड़ रूपये स्वीकृत किये गए हैं। इसमें से केन्द्र सरकार द्वारा रिवेम्पड डिस्ट्रीब्यूशन सेक्टर स्कीम के प्रथम चरण में 49 करोड़ रूपये और राज्य सरकार द्वारा 46 करोड़ रूपये स्वीकृत किये गए हैं।

    स्वीकृत कार्यों में 220/132 के.व्ही. अति उच्च दाब पॉवर ट्रांसफार्मर की क्षमता वृद्धि, 220/132 के.व्ही. अतिरिक्त अति उच्च दाब पॉवर ट्रांसफार्मर स्थापना, 2 नवीन 33/11 के.व्ही. उप केंद्र निर्माण, वोल्टेज व्यवस्था में सुधार के लिए 28 स्थान पर कैपेसिटर बैंक स्थापना, 48 उच्च दाब फीडरों का विभक्तिकरण कार्य, 975 वितरण ट्रांसफार्मर स्थापना, 3308 किलोमीटर निम्न दाब लाइनों का केबलिंग कार्य, 396 उच्च दाब फीडरों का विभक्तिकरण और कंडक्टर क्षमता वृद्धि के कार्य शामिल हैं। इससे दमोह जिले की लगभग 13 लाख की जनसंख्या लाभान्वित होगी। साथ ही आगामी 10 वर्षों की विद्युत माँग की सफलतापूर्वक पूर्ति हो सकेगी।

  • उपहारों की खैरात रोकने का भी कानून बने

    उपहारों की खैरात रोकने का भी कानून बने

    -अजय व्यास-

    राजनीतिक दलों द्वारा प्रदान किए जाने वाले मुफ्त उपहारों को रोकने या विनियमित करने के लिए कानूनों का अधिनियमन एक संभावना है, लेकिन यह कानूनी ढांचे, राजनीतिक अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और एक लोकतांत्रिक समाज में सरकार की भूमिका के बारे में महत्वपूर्ण विचार करता है।

    कानूनी ढांचा और संवैधानिकता: राजनीतिक दलों द्वारा मुफ्त उपहारों को प्रतिबंधित या प्रतिबंधित करने के उद्देश्य से किसी भी कानून को देश के संवैधानिक प्रावधानों का पालन करने की आवश्यकता होगी। यह सुनिश्चित करना आवश्यक है कि इस तरह के कानून मौलिक अधिकारों का उल्लंघन नहीं करते हैं, जिसमें संविधान द्वारा गारंटीकृत भाषण, संघ और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता शामिल है।

    परिभाषा और दायरा: कानून को स्पष्ट रूप से परिभाषित करने की आवश्यकता होगी कि फ्रीबी क्या है और इसकी प्रयोज्यता की सीमाएं निर्धारित करें। इससे अस्पष्टता से बचने और इसके कार्यान्वयन में निरंतरता सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी।

    प्रवर्तन और दंड: कानून को लागू करने के लिए प्रभावी तंत्र स्थापित करना और गैर-अनुपालन के लिए दंड लगाना महत्वपूर्ण होगा। इसके लिए उचित कार्यान्वयन सुनिश्चित करने के लिए पर्याप्त संसाधन, निगरानी प्रणाली और निष्पक्ष निरीक्षण की आवश्यकता होगी।

    जनता की भावना और राजनीतिक इच्छाशक्ति: इस तरह के कानून की व्यवहार्यता और स्वीकृति प्रचलित सार्वजनिक भावना और इस मुद्दे को हल करने की राजनीतिक इच्छाशक्ति पर निर्भर करेगी। यदि परिवर्तन के लिए अपर्याप्त सार्वजनिक मांग है तो राजनीतिक दल विरोध कर सकते हैं या कानून को दरकिनार करने के तरीके खोज सकते हैं।

    लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं पर प्रभाव: राजनीतिक दलों की मुफ्त उपहार देने की क्षमता को सीमित करना राजनीतिक अभियानों में राज्य के हस्तक्षेप की सीमाओं के बारे में सवाल उठाता है। संसाधनों के दुरुपयोग को रोकने और निष्पक्ष और प्रतिस्पर्धी चुनावी प्रक्रिया सुनिश्चित करने के बीच संतुलन बनाना महत्वपूर्ण है।

    केवल कानून पर निर्भर रहने के बजाय, राजनीतिक दलों द्वारा मुफ्त उपहारों के मुद्दे को संबोधित करने के लिए एक व्यापक दृष्टिकोण की आवश्यकता है। इसमें मुफ्त उपहारों के परिणामों के बारे में मतदाताओं के बीच जागरूकता बढ़ाना, जिम्मेदार शासन को प्रोत्साहित करना और अभियान के वित्तपोषण में पारदर्शिता को बढ़ावा देना शामिल है। इसमें जवाबदेही और नागरिक भागीदारी की संस्कृति को बढ़ावा देना भी शामिल है, जहां मतदाता अल्पकालिक लाभों के बजाय पार्टी की व्यापक दृष्टि और नीतियों के आधार पर सूचित विकल्प चुनते हैं।

    आखिरकार, मुफ्त उपहारों को विनियमित करने और लोकतांत्रिक सिद्धांतों को बनाए रखने के बीच सही संतुलन बनाना एक जटिल चुनौती है। यह सुनिश्चित करने के लिए कानूनी, संवैधानिक और सामाजिक कारकों पर सावधानीपूर्वक विचार करने की आवश्यकता है कि कोई भी उपाय प्रभावी, निष्पक्ष और लोकतंत्र के सिद्धांतों के अनुरूप हो।

    इस आलेख को श्री अजय व्यास , पूर्व कार्यपालक निदेशक, देना बेंक ने लिखा है।अजय का बेंकिग में महत्वपूर्ण पदों पर 35 साल का अनुभव है एवं वह राष्ट्रीय, सामाजिक समस्याओं पर सटीक, बेबाक बातचीत कर विचार रखते हैं।

  • देश की आत्मा के साथ खड़े होंः अमिताभ अग्निहोत्री

    देश की आत्मा के साथ खड़े होंः अमिताभ अग्निहोत्री

    देवर्षि नारद जंयती पर विश्‍व संवाद केंद्र द्वारा आयोजित किया गया पत्रकार पुरस्कार एवं सम्मान समारोह


    भोपाल। हर देश और संस्कृति का अपना ‘स्व’ होता है।‌ ब्रिटेन लोकतांत्रिक देश है लेकिन जब वहां राजा का राजतिलक होता है तो ईसाई पद्धति से होता है। यह वहां का ‘स्व’ है। इसका कोई विरोध नहीं होता है। इसीलिए आवश्यक है कि हम अपने ‘स्व’ की तलाश करें और उसके साथ खड़े हों। यह बात टेलीविजन समाचार माध्यम के देश के जाने-माने पत्रकार अमिताभ अग्निहोत्री ने रविवार को रवीन्‍द्र भवन में आयोजित देवर्षि नारद जयंती एवं पत्रकार सम्मान समारोह में बतौर मुख्‍य अतिथि कही।

    श्री अग्निहोत्री ने कहा कि अमेरिका का राष्ट्रपति बाइबिल पर हाथ रखकर शपथ लेता है और कोई आपत्ति नहीं होती। इसका कारण यह है कि एक धर्मनिरपेक्ष राष्ट्र होने पर भी उन्होंने अपने ‘स्व’ को नहीं बदला। हमें भी हमारे देश के ‘स्व’ को समझकर उसकी पुनर्स्थापना करना होगी। विश्‍व संवाद केंद्र मध्यप्रदेश की ओर से आयोजित इस समारोह के मुख्‍य वक्‍ता राष्‍ट्रीय स्‍वयंसेवक संघ के सह क्षेत्र कार्यवाह हेमंत मुक्तिबोध थे। अध्‍यक्षता विश्‍व संवाद केंद्र न्‍यास के अध्‍यक्ष डॉ अजय नारंग ने की। मुख्य अतिथि श्री अमिताभ अग्निहोत्री ने कहा कि इस्लाम के उदय से 2600 साल पहले बुद्ध का परिनिर्वाण हो गया था।हिंदू धर्म तो इससे भी हजारों साल पुराना है। इसलिए यहां यह झगड़ा तो होना ही नहीं चाहिए कि पहले कौन यहां था। उन्होंने इस बात पर भी प्रश्न उठाए कि ऐसा इतिहास क्यों रचा गया जिसमें विदेश से आए लोगों को महान बताया गया जबकि वे अपने साथ सांस्कृतिक मूल्य लेकर नहीं आए थे। अयोध्या, मथुरा, काशी कभी भारत में आर्थिक महत्व के केंद्र नहीं रहे, यह सामरिक केंद्र भी नहीं रहे इसके पश्चात भी इन पर हमले क्यों किये गए? इस पर विचार करना आवश्यक है। खिलजी से लेकर औरंगजेब तक भारत के माथे पर सिर रखकर खड़े होना चाहते थे। कोई मेरे आत्म तत्व को दबाए तो इसे स्वीकार नहीं किया जाना चाहिए।

    उन्होंने कहा कि अब देश अपेक्षाकृत अधिक जागृत है। सूचनाएं सब तक पहुंच रही हैं। अब कोई समाचार को दबा नहीं सकता। ऐसे में हमारी जिम्मेदारी बनती है कि हम दुनिया को बता सकें कि हम सांस्कृतिक पुनर्जागरण क्यों करना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि इस देश में 1000 साल की परतंत्रता के दौर में भी धर्म जीवित रहा क्योंकि यह सत्ता पर आश्रित नहीं रहा। धार्मिक पुनर्जागरण सत्ता के आधार पर नहीं होता, यह लोक की चेतना का विषय है। जब भी लोक चेतना सत्ताश्रित हो जाती है तब राष्ट्र का भला नहीं हो सकता। किसी सत्ता का घोषणा पत्र रामचरितमानस या गीता नहीं बना।

    उन्होंने उपस्थित पत्रकारों से आह्वान किया कि शब्दों को मंत्र बनाना पड़ेगा। हमें इसे अपने तप से सिद्ध करना पड़ेगा। देह अमर नहीं होती अपितु यश और कीर्ति अमर होती है। इतिहास को निरपेक्ष होकर लिखा जाए और यदि निरपेक्ष होकर लिखेंगे तो इसके खतरे भी उठाने पड़ेंगे।

    उन्होंने कहा कि भारत की सांझी चेतना जागृत होगी तो भारत का पुनर्जागरण होगा। सांस्कृतिक पुनर्जागरण का काम अपनी व्यक्तिगत स्वार्थों से ऊपर उठे बिना नहीं हो सकता। हम अपना नुकसान उठाकर भी धर्म के साथ खड़े हो सकते हैं। यदि हां तो आप मातृभूमि के ऋण से मुक्त हो सकते हैं। उन्होंने आह्वान किया कि यदि हम नेपथ्य में रहकर बलिदान करने को तैयार हैं तो सांस्कृतिक पुनर्जागरण हो सकता है। प्रत्येक व्यक्ति को केवल एक बात ध्यान में रखनी चाहिए कि हम राष्ट्र के साथ हैं।
    कार्यक्रम के मुख्‍य वक्‍ता राष्‍ट्रीय स्‍वयंसेवक संघ के क्षेत्र सह कार्यवाह हेमंत मुक्तिबोध ने कहा कि यूरोप और अरब की संस्कृति अन्य देशों एवं उनकी संस्कृतियों को प्रभावित करना चाहती हैं। दुनिया भर की दूसरी संस्कृतियों के लोग जब बाहर के देशों में गए तो सबसे पहले उन्होंने वहां की संस्कृति को नष्ट किया। उन्होंने वहां की इतिहास, कला, संस्कृति और शिल्प को नष्ट किया। इसके उलट भारत जब बाहर गया तो उनको समाप्त करने नहीं गया अपितु उनको समृद्ध ही किया। भारतीय संस्कृति की विशेषताओं को देखते हुए यदि हम उसके अनुसार जीवन जीना शुरू कर देंगे तो सांस्कृतिक पुनर्जागरण हो सकेगा।

    उन्होंने इस बात पर भी चिंता जताई कि मीडिया में संपादक से अधिक प्रबंध संपादक की भूमिका हो गई है। पत्रकारों की भी अपनी विवशताएं हैं। एजेंडा पत्रकारिता से सनसनी तो मिल जाती है लेकिन कराहता हुआ सत्य नहीं मिलता। सांस्कृतिक पुनर्जागरण के लिए मीडिया को निजी स्वार्थ से हटकर स्थान देना चाहिए। सकारात्मक और समाजहित में कार्य करने वाले लोगों के समाचार सामने आएं, इस दिशा में कार्य करना चाहिए।

    अध्‍यक्षता कर रहे डॉ. अजय नारंग ने कहा कि देवर्षि नारद को हम सब लोक संचालक के रूप में जानते हैं। यह समझना आवश्यक है कि देवर्षि नारद के समय में उनके कार्य का लाभ किसको होता, निश्चित ही वह जन सामान्य को होता। संवाद केंद्र प्रतिवर्ष देवर्षि नारद जयंती पर यह आयोजन करता है। विश्व संवाद केंद्र का कार्य पत्रकारों के माध्यम से लोक कल्याण के लिए है। उन्होंने कहा कि हमने पिछले एक माह के समाचार पत्रों का विश्लेषण किया। इसमें पता चला कि ‘द केरल स्टोरी’, समलैंगिक विवाह, पहलवानों का धरना, मध्यप्रदेश में मदरसों जैसे मुद्दों पर पत्रकारों ने मात्र समाचार से आगे जाकर उसके सच का विश्लेषण मीडिया द्वारा किया गया। समाचार पत्र सांस्कृतिक पुनर्जागरण में सकारात्मक भूमिका निभाते हैं। जब मध्यप्रदेश में नगरों को उनके पूर्व नाम मिले तो समाचार पत्रों ने लोगों को इसका स्मरण कराया। सांस्कृतिक पुनर्जागरण के लिए मीडिया अपना योगदान दे रहे हैं, यह किसी से छिपा नहीं है। विश्वास है कि हमारा मीडिया सांस्कृतिक पुनर्जागरण में अपनी भूमिका को अग्रणी रखेगा। कार्यक्रम का प्रारंभ संगीत प्रस्‍तुति के साथ हुआ। निनाद अधिकारी के संतूर वादन ने श्रोताओं का मन मोह लिया।

    विश्‍व संवाद केंद्र द्वारा दिए जा रहे पुरस्‍कारों एवं सम्‍मान की जानकारी, चयन प्रक्रि‍या एवं चयन समिति के संबंध में जानकारी पत्रकार मनोज जोशी ने दी। मंच पर अतिथियों का स्‍वागत किया गया। कार्यक्रम के अंत में आभार विश्‍व संवाद केंद्र के सचिव दिनेश जैन ने व्‍यक्‍त किया। मंच संचालन डॉ वंदना गांधी ने किया। राष्‍ट्रगान के साथ समारोह का समापन किया गया।

    इन पत्रकारों को दिए गए देवर्षि नारद पत्रकारिता सम्‍मान एवं पुरस्‍कार :
    कार्यक्रम में वरिष्‍ठ पत्रकार एवं संपादक रमेश शर्मा को देवर्षि नारद सार्थक (पत्रकारिता) जीवन सम्‍मान–2023 से सम्‍मानित किया गया। वहीं प्रदेश के पांच पत्रकारों को देवर्षि नारद पत्रकारिता पुरस्कार प्रदान किए गए। पुरस्‍कृत पत्रकारों में नवदुनिया सीहोर के आकाश माथुर, स्वदेश ग्वालियर के डॉ. अजय खेमरिया, पत्रिका भोपाल के श्री श्‍याम सिंह तोमर, स्वदेश भोपाल के दीपेश कौरव, दैनिक भास्कर भोपाल के राहुल शर्मा सम्मिलित रहे। मंच पर सम्मानित होने के बाद अपने वक्तव्य में श्री रमेश शर्मा ने कहा कि पत्रकार यदि नारद को अपना आदर्श मानते हैं तो राष्ट्र, संस्कृति के संबंध में कोई समझौता नहीं होना चाहिए। पत्रकारिता को इस बात को उठाना चाहिए कि हमारी पहचान क्या है। अपने ऊपर बलिदानियों का ऋण है। पत्रकार अपने–अपने क्षेत्र के अनाम अमर बलिदानी के योगदान को सबके सामने लाएं।


  • सिविल सेवकों का जीवन सिर्फ अपने लिए नहीं, अपनों के लिए होता है : मुख्यमंत्री श्री चौहान

    सिविल सेवकों का जीवन सिर्फ अपने लिए नहीं, अपनों के लिए होता है : मुख्यमंत्री श्री चौहान

    भोपाल,21 अप्रैल(अशोक मनवानी )। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने सिविल सेवकों से कहा कि आपका जीवन सिर्फ अपने लिए नहीं अपनों के लिए होता है। जन-कल्याण सबसे बड़ी प्राथमिकता होती है। आम जनता से जुड़े छोटे-छोटे कार्य, वास्तव में बड़े-बड़े कार्य होते हैं। सिविल सेवक इन कार्यों को समय पर पूरा करवा लें, यही सुशासन है। मुख्यमंत्री श्री चौहान आज आर.सी.वी.पी. नरोन्हा प्रशासन एवं प्रबंधकीय अकादमी, भोपाल के सभा कक्ष में सिविल सर्विस-डे के शुभारंभ कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि हमारा मूल काम समाज सेवा है। हम जो भी कार्य करते हैं, आम नागरिकों के लिए ही होता है। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने टीम मध्यप्रदेश को सिविल सेवा दिवस की बधाई और शुभकामनाएँ दी। सिविल सेवा दिवस पर हुए इस विशेष कार्यक्रम के मुख्य अतिथि शिक्षाविद, लेखक इन्फोसिस के पूर्व सदस्य और वर्तमान में मणिपाल ग्लोबल एजुकेशनल के अध्यक्ष श्री मोहनदास पाई थे।

    मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि सिविल सर्विस-डे का अर्थ यही है कि हम लोक सेवक हैं और देश की सेवा हमारा मुख्य उद्देश्य है। लोकतंत्र में जनता का, जनता के लिए और जनता द्वारा शासन होता है। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि सिविल सेवा दिवस 2023 की थीम “विकसित भारत, नागरिकों को सशक्त करना और अंतिम व्यक्ति तक पहुँचना है।” उन्होंने टीम मध्यप्रदेश को बधाई देते हुए कहा कि उन्हें गर्व है कि सबने मिल कर मध्यप्रदेश को समृद्ध और विकसित बनाने में बहुत महत्वपूर्ण योगदान दिया है। टीम मध्यप्रदेश ने जुट कर कार्य किया है। मध्यप्रदेश में तेजी से सकारात्मक परिवर्तन आया है। सिंचाई की क्षमता को हमने आश्चर्यजनक रूप से साढ़े 7 लाख हेक्टयर से बढ़ा कर 45 लाख हेक्टेयर तक पहुँचा दिया है। इसे क्रास कर अब 65 लाख हेक्टेयर पर काम करेंगे। आज 4 लाख किलोमीटर सड़कें प्रदेश में बन चुकी हैं। किसी समय यह सिर्फ 71 हजार किलोमीटर हुआ करती थी और टूटी-फूटी हालत में होती थी। अब प्रदेश में शानदार सड़कें हैं। प्रदेश में ऊर्जा सहित विभिन्न क्षेत्रों में अद्भुत कार्य हुआ है। प्रदेश में अच्छे संसाधन हैं, इसलिए हम कार्य कर पा रहे हैं। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि प्रदेश में निर्माण विभाग भी सक्रिय रहे। मध्यप्रदेश की गिनती आज विकसित प्रांतों में है, मध्यप्रदेश बीमारू नहीं है। इसका श्रेय टीम मध्यप्रदेश के असाधारण परिश्रम को है। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि आम जन के बिना हमारा कार्य नहीं होता, हम हितग्राही तक पहुँच जाते हैं। प्रदेश में विकास यात्राएँ जन- कल्याण यात्राएँ बन गई।

    मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि प्रदेश में अधो-संरचना की बात करें तो यह देखने को मिलता है कि काफी सकारात्मक परिवर्तन आया है। कृषि उत्पादन में कई गुना वृद्धि हुई है। अनाज के भंडार भरे हैं। प्रति व्यक्ति आय बड़ी है। देश की जीएसडीपी में मध्यप्रदेश का योगदान बढ़ा है। वर्ष 2005-06 में प्रदेश में का बजट आकार 25 हजार करोड़ होता था, वो बढ़ कर वर्ष 2012-13 में एक लाख करोड़, वर्ष 2020-21 में दो लाख करोड़ और इस बार 3 लाख करोड़ को पार कर गया है, यह आसान बात नहीं है। असाधारण उपलब्धि है। मध्यप्रदेश ने तुलनात्मक रूप से लम्बी छलांग लगाई है, जिसका श्रेय टीम मध्यप्रदेश को जाता है।

    सुशासन से जनता और प्रशासन की दूरी हुई है समाप्त

    मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि प्रदेश में जनता और प्रशासन के बीच की दूरी समाप्त की गई है, जो सुशासन के प्रयासों से संभव हुआ है। मुख्यमंत्री जन-सेवा अभियान से केन्द्र और राज्य सरकार की योजनाओं से 83 लाख से अधिक हितग्राहियों को जोड़ने में सफलता मिली। हमारे कार्यक्रम जनता के कार्यक्रम बन गए। जनता की निर्णयों में भी भागीदारी हो गई है। आगामी 10 से 25 मई तक समस्याओं के निराकरण के लिए पुन: अभियान संचालित किया जाएगा। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि सिविल सेवकों को यह चुनौती स्वीकार करना है कि नागरिकों को अपने कामों के लिए भटकना न पड़े। गाँव और शहरों के वार्डों में शिविरों के माध्यम से समस्याएँ हल की जाएँ। सीएम हेल्प लाइन सहित सुशासन की दिशा में अनेक उपायों को लागू किया गया। जन सुनवाई, वन-डे गर्वेनेंस और समाधान ऑनलाइन ऐसे ही उपाय हैं। इनको तकनीकी से जोड़ कर कार्यों के निपटारे के साथ सामने आने वाली विसंगतियों को भी दूर करने पर ध्यान देना है। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने गीता के श्लोकों के माध्यम से सिविल सेवक की भूमिका कैसी हो, इसका विस्तारपूर्वक उल्लेख भी किया।

    मध्यप्रदेश में सुशासन और अधिकारियों की श्रेष्ठ भूमिका

    मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि मध्यप्रदेश में सुशासन के क्षेत्र में निरंतर कार्य हुआ है। बुरहानपुर में हर घर जल पहुँचाने और गति शक्ति प्रोजेक्ट के क्रियान्वयन के कार्य हुए हैं। प्रदेश में अनेक नवाचार भी प्रशासनिक स्तर पर हुए हैं। अधिकांश सिविल सेवक श्रेष्ठ भूमिका का निर्वहन करते हुए सरकार की जन-कल्याणकारी नीतियों को जमीन पर उतारने का कार्य कुशलता से कर रहे हैं। प्रदेश के सिविल सेवक तेजी से क्रियान्वयन का गुण भी रखते हैं, मुख्यमंत्री लाड़ली बहना योजना बनने के बाद दो माह में आवश्यक वातावरण निर्माण और एक करोड़ से अधिक पंजीयन इसका उदाहरण है।

    मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि सिविल सेवक एक लीडर भी हैं और उनका दायित्व सभी को सम दृष्टि से देख कर सबका उत्साह भी बढ़ाना है। व्यक्ति में अहंकार न हो। उत्साह में कमी न हो। धैर्य के साथ समस्याओं के समाधान का रास्ता निकाला जाए। मनोवृत्ति यह होना चाहिए कि किसी निराशा से घिरे व्यक्ति को भी उत्साहित कर दें। व्यक्ति जैसा सोचता है वैसा बन भी जाता है। सिविल सेवक सिर्फ अपने लिए कार्य नहीं करता बल्कि उसके कार्य से जनता और पूरा देश प्रभावित होता है। अप्रासंगिक कार्य को भी प्रासंगिक बनाने की कला होना चाहिए। एक व्यक्ति चाहे तो देश के प्रति विश्व की धारणा बदल सकता है। यह बात समस्त देशवासियों ने अनुभव की है। इसी तरह एक सिविल सेवक सही दिशा में कार्य कर विभाग को बदल सकता है। सिविल सेवक अधिकतम योगदान देने का प्रयास करें। इसलिए सिविल सेवाएँ सिर्फ व्यक्ति के लिए न होकर, राष्ट्र के लिए उपयोगी मानी गई हैं।

    आनंद और प्रसन्नता के साथ करें कार्य

    मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि स्वामी विवेकानंद ने मनुष्य को अनंत शक्तियों का भंडार बताया है। किसी कार्य में पूरी तरह प्रयत्न करना आवश्यक है। यदि एक बार सफल नहीं हुए तो पुन: प्रयास करना ही चाहिए। समय का भी सद्पयोग करना चाहिए। एक-एक क्षण कीमती है। जब तक व्यक्ति का जीवन है, दूसरों की जिन्दगी को बेहतर बनाने के लिए हर पल का उपयोग किया जाए। प्राय: धन-दौलत से सुख प्राप्त नहीं होता। ईमानदारी पूर्वक कार्य करने से अच्छे परिणाम निकलते हैं। कोरोना काल में अधिकारियों ने जिस जज्बे से कार्य किया वो गर्व करने लायक है। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने सिविल सेवकों से आहवान किया कि आनंद और प्रसन्नता से कार्य करें। परिवार में सभी सदस्यों का ध्यान रखते हुए मनोयोग पूर्वक अपने शासकीय दायित्वों को निभाना आसान होता है। ऐसा ही जीवन प्रासंगिक होता है। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि आत्म-निर्भर मध्यप्रदेश के लक्ष्य के लिए हम तेजी से कार्य करते हुए आगे बढ़ रहे हैं। इस कार्य को पूरी निष्ठा से पूर्ण करना है।

    योजनाएँ जनता के सुझावों पर बनी

    मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि मध्यप्रदेश की जनता भी विकास कार्यों में भागीदारी कर रही है। मध्यप्रदेश जन-अभियान परिषद हो या अन्य संगठन, सभी मिल कर योजनाओं के क्रियान्वयन में भागीदार हैं। मध्यप्रदेश में अनेक योजनाएँ आम जनता के सुझावों पर बनी हैं। प्रदेश में एक आदर्श कार्य-संस्कृति निर्मित हुई है। जिलों में जनता और कलेक्टर के बीच की दूरी खत्म हुई है।

    अपेक्षाओं पर खरे उतरे हैं सिविल सेवक

    मुख्य सचिव श्री इकबाल सिंह बैंस ने कहा कि सिविल सर्विसेज की लंबी परंपरा देश में रही है। विशेष परिस्थितियों और चुनौतीपूर्ण स्थितियों का हमारी प्रशासनिक व्यवस्था डट कर मुकाबला करती है। श्री बैंस ने कहा कि अपने लंबे कार्यकाल में उन्हें ऐसा अवसर याद नहीं आता जब हमें कोई विशेष दायित्व दिया गया हो और अपेक्षा पर खरे नहीं उतरे हों। मुख्य सचिव ने कहा कि ऐसी दक्ष टीम के साथ काम करने का सौभाग्य मिला है, इस बात का संतोष है और गर्व भी है। उन्होंने कहा कि चाहे कोरोना काल की बात हो या सिंहस्थ के आयोजन की बात हो या फिर माफिया के खिलाफ कार्रवाई का समय हो, अधो-संरचना का विकास हो या जनता की समस्याओं के निराकरण की व्यवस्था हो, मध्यप्रदेश में सभी प्रशासनिक आयामों पर अनेक उपलब्धियों का इतिहास रचा गया है। मुख्य सचिव ने कहा कि हम जो भी कार्य करते हैं उसका विश्लेषण भी किया जाता है। अनेक कमियाँ भी सामने आती हैं और बहुत सा अच्छा कार्य कमियों के आगे दब जाता है। अपने श्रेष्ठ कार्यों को प्रचारित करने और उनकी व्याख्या करने के प्रति भी हमें सजग रहना चाहिए।

    प्रारंभ में मुख्यमंत्री श्री चौहान और अतिथियों ने दीप जला कर सिविल सर्विस-डे का शुभारंभ किया। मुख्यमंत्री श्री चौहान का श्री अनिरुद्ध मुखर्जी ने स्वागत किया। मुख्य सचिव और अन्य अतिथियों का भी स्वागत पुष्प-गुच्छ से किया गया। पुलिस महानिदेशक श्री सुधीर कुमार सक्सेना, अपर मुख्य सचिव सामान्य प्रशासन श्री विनोद कुमार सहित बड़ी संख्या में भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारी, भारतीय पुलिस सेवा और वन सेवा के अधिकारी उपस्थित थे। कलेक्टर्स, कमिश्नर्स और मुख्य कार्यपालन अधिकारी भी वर्चुअली जुड़े।

  • कुबेरेश्वर धाम से अब साल भर बंटेंगे रुद्राक्ष

    कुबेरेश्वर धाम से अब साल भर बंटेंगे रुद्राक्ष

    सीहोर में पंडित प्रदीप मिश्रा की कथा सुनने पहुंचा करोड़ों श्रद्धालुओं का रेला सनातन धर्म का जयकारा लगा रहा है।  बीस लाख लोगों ने पहले ही दिन लगभग पांच लाख अभिमंत्रित रुद्राक्ष प्राप्त कर लिए थे। प्रशासन और खुद आयोजकों को भी भरोसा नहीं था कि उनका आयोजन इतना सुपर हिट होगा। भोपाल इंदौर मार्ग पर लगे कई किलोमीटर लंबे जाम को देखते हुए आयोजकों ने फिलहाल रुद्राक्ष वितरण रोक दिया है। जनता की आस्था को देखते हुए अब ये रुद्राक्ष साल भर बांटे जाएंगे। इस विशाल आयोजन की सफलता पर तरह तरह की अटकलें लगाई जा रहीं हैं। कई सयाने इसे पाखंड और सरकार का वोट बटोरने का अनुष्ठान बताने में जुट गए हैं। उनका आरोप है कि पाखंडी बाबाओं की तरह पंडित प्रदीप मिश्रा भी जनता को बरगला रहे हैं। वे कहते हैं कि रुद्राक्ष का पानी पीने से कैंसर जैसे रोग भी ठीक हो जाते हैं। इस तरह के कई आरोप कथावाचक पर चिपकाने का प्रयास किया जा रहा है। कहा जा रहा है कि वे सरकार के लिए वोटों की खेती कर रहे हैं इसलिए भाजपा सरकार उनके आयोजन को बढ़ावा दे रही है। सरकार से वेतन और सुविधाएं प्राप्त करने वाले कथित सुधारवादी इसके लिए आयोजक और शासन को कटघरे में खड़ा करने का बचकाना प्रयास कर रहे हैं। इसके विपरीत लोगों की आस्थाएं परवान चढ़ती जा रही हैं। दूसरे दिन भी श्रद्धालुओं का सीहोर पहुंचना जारी रहा है। प्रशासन ने भोपाल इंदौर हाईवे खुलवा दिया है लेकिन कोसने वाले कई तरह की अफवाहें फैला रहे हैं। आयोजन में पहुंचे बीस लाख लोगों में से दो महिलाओं और एक बच्चे ने अपने स्वास्थ्य कारणों से दम तोड़ दिया तो कुछ लोगों ने ये कहना चालू कर दिया कि अव्यवस्था की वजह से इन लोगों का निधन हुआ है। जबकि हकीकत ये है कि आयोजकों ने लाखों लोगों के भोजन की व्यवस्थाएं की हैं। भीड़ की वजह से पानी के टैंकर नहीं पहुंच पा रहे हैं तो आसपास के नलकूपों से पाईप डलवाकर पानी पहुंचाया जा रहा है।इस तरह के कई उपाय किए जा रहे हैं कि दूरदराज से और अन्य प्रांतों से आने वाले लोगों को भी कोई परेशानी न हो। ये लोग मध्यप्रदेश के वोटर नहीं हैं।कथा सुनने के लिए पहुंचने वाले सभी श्रद्धालु भाजपाई कार्यकर्ता नहीं हैं। कुछ तो कट्टर कांग्रेसी भी हैं। इसके बावजूद ये सभी सनातन धर्म की उस धारा में स्नान करने पहुंच रहे हैं जो सबके सुखी और स्वस्थ होने की कामना करती है। कुबेर को यक्षों का राजा माना जाता है। वे स्थायी धन के देवता भी हैं। लक्ष्मी जहां चंचला होती है वहीं कुबेर स्थायी संपदा के प्रतीक हैं। पंडित प्रदीप मिश्रा अपनी कथाओं में जिस नजरिए से सनातन धर्म को समझाने का प्रयास करते हैं उनसे लोग धर्म को आज के संदर्भ में समझ पा रहे हैं। यही वजह है कि लोग अपने अपने इंतजाम करके अपने वाहनों से सीहोर पहुंच रहे हैं पर ये सभी सुविधाएं सभी के पास नहीं हैं । ऐसे में लोग ट्रेनों और बसों से भी कुबेरेश्वर धाम पहुंच रहे हैं। इस सफल आयोजन से किनके पेट में दर्द हो रहा है और क्यों ये जानकर असली षड़यंत्रकारियों की पहचान करना सरल हो जाता है।

    पंडित प्रदीप मिश्राःसनातन को सरल बनाकर किया पाखंडियों को बेनकाब

    दरअसल पंडित प्रदीप मिश्रा सनातन को सरल भाषा में समझा रहे हैं वे कह रहे हैं कि ईश्वर के प्रति आस्था प्रकट करने के लिए आपको ढपोरशंखियों के जंजाल में उलझने की जरूरत नहीं हैं। आप अपने घर में भी भोले का अभिषेक कर सकते हैं।इससे खासतौर पर वे पंडित और नकली ब्राह्मण खासे नाराज हैं जो अपने जजमानों की जेब से चढ़ावा निकलवाने के लिए ऊटपटांग उपाय सुझाते रहते हैं। ऐसे लोग  वास्तव में सनातन को भौतिकवादी पाखंडों में घसीट रहे हैं। ऐसे में पंडित प्रदीप मिश्रा का मार्गदर्शन उन्हें सनातन की महिमा समझने का अवसर दे रहा है। गुरु और शिष्यों के बीच का ये प्रेम अद्भुत है। वे गुरु कथाओं में अपने आसपास के उदाहरणों से लोगों को पाखंड के दलदल से बाहर निकाल रहे हैं। संघ और भाजपा ने जबसे सनातन और हिंदुत्व की चमचमाती आभा को पाखंड के पर्दे से बाहर लाने का अभियान चलाया है तबसे सुधारवादी कथावाचक और साधु संतों को सनातन के प्रति खोया सम्मान जगाने में सरलता होने लगी है। परेशानी तो उन पाखंडियों को हो रही है जिन्होंने भोली भाली जनता को जातियों में बांटकर वैमनस्य की खेती की है। धर्म की दीवारें खींचकर उन्हें एक दूसरे के विरुद्ध बरगलाया है। समाज को बड़ी संख्या में मनोवैज्ञानिकों की जरूरत है जो लोगों का मार्गदर्शन कर सकें। ऐसे में पंडित प्रदीप मिश्रा जैसे कथावाचक दीपक बनकर लोगों का मार्ग निष्कंटक बना रहे हैं। कुबेरेश्वर धाम में बंटने वाले रुद्राक्षों के प्रति लोगों का अनुराग देखकर आयोजकों ने अब साल भर रुद्राक्ष बांटने की व्यवस्था कर दी है। जाहिर है इससे रुद्राक्ष पाने के लिए भगदड़ की कोई जरूरत नहीं रह गई है। हर श्रद्धालु को रुद्राक्ष मिलेगा और कथाओं से निकला ज्ञान पुंज उनके जीवन में स्थायी सुख समृद्धि और स्वास्थ्य का श्रीगणेश करेगा।

  • पांच नंबर मार्केट की बेशकीमती जमीनें हड़पने की तैयारी में आशुतोष तिवारी

    पांच नंबर मार्केट की बेशकीमती जमीनें हड़पने की तैयारी में आशुतोष तिवारी


    भोपाल, 14 फरवरी(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)। मध्यप्रदेश हाऊसिंग एवं इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट बोर्ड के चेयरमेन आशुतोष तिवारी के निर्देश पर पांच नंबर मार्केट की सभी दूकानें गिराकर वहां पांच मंजिला बाजार बनाने की तैयारी की जा रही है। ये दूकानें अगले चुनाव से पहले मंहगे दामों पर बेचने की योजना बनाई गई है। आज इस संबंध में कमिश्नर चंद्रमौली शुक्ला ने स्वयं बाजार स्थल पहुंचकर भाजपा कार्यकर्ताओं से चर्चा की । उन्होंने आश्वासन दिया कि इस बाजार में भाजपा समर्थित आबंटितियों का ध्यान रखा जाएगा।
    अरेरा कालोनी स्थित पांच नंबर मार्केट नए भोपाल की मौके की जगह है और यहां जमीनों का मूल्य सबसे अधिक है। इसे देखते हुए चेयरमेन आशुतोष तिवारी ने यहां नया मार्केट बनाने की लंबित योजना को शीघ्र पूरा करने के निर्देश दिए हैं। आज कमिश्नर चंद्रमौली शुक्ला ने स्वयं स्थल निरीक्षण किया और भाजपा समर्थित व्यापारियों की मांगों पर गौर करते हुए उन्हें सहयोग किए जाने का आश्वासन दिया। इस चर्चा को गोपनीय रखा गया और अन्य लोगों को वहां से हटा दिया गया था.

    कमिश्नर चंद्रमौली शुक्ला को बरगलाते हुए तिवारी के गुर्गे


    सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार भाजपा संगठन से करीबी रखने वाले कुछ व्यापारियों ने इस बेशकीमती जमीन को हड़पने के लिए बगैर शोरगुल मचाए बाजार को गिराने की रणनीति बनाई है। सूत्र बताते हैं कि अधिकतर आबंटितियों ने कई सालों से हाऊसिंग बोर्ड को न तो किराया दिया है और न ही दूकानों की रजिस्ट्री कराई है। तयशुदा अनुबंध के मुताबिक अब वे इन दूकानों के मालिक भी नहीं रह गए हैं। कुछ पर इतना अधिक किराया लंबित है कि वे अब न तो किराया जमा कर सकते हैं और न ही रजिस्ट्री करा सकते हैं।
    भाजपा संगठन से करीबी रखने वाले कुछ व्यापारियों की मांग पर गौर करते हुए चेयरमेन आशुतोष तिवारी ने इस पूरी बेशकीमती जमीन को हड़पने की तैयारी कर ली है। भाजपा संगठन से जुड़े व्यापारियों ने अपनी चर्चा को गोपनीय रखने के लिए स्थानीय व्यापारियों को यह कहकर वार्ता स्थल से हटा दिया था कि कमिश्नर शुक्ला ने केवल उनके प्रतिनिधियो से चर्चा के लिए वक्त दिया है।
    व्यापारियों ने कमिश्नर को बताया कि चार इमली जाने वाला मुख्य सड़क मार्ग बहुत चौड़ा है इसलिए बाजार का एफएआर .5 से लगभग डेढ़ प्रतिशत और ज्यादा बढ़ाया जा सकता है। बाजार को लगभग पांच मंजिला तक बनाया जा सकता है। इसे देखते हुए बाजार को शीघ्रातिशीघ्र जमींदोज किया जाए और सघनीकरण योजना को जल्दी शुरु किया जाए। उन्होंने बताया कि बाजार में मूल आबंटिती नहीं बचे हैं इसलिए किसी भी प्रकार का विरोध होने की संभावना नहीं है। जो लोग विरोध के लिए आगे आएंगे उन्हें हम संभाल लेंगे। चर्चा के दौरान हाऊसिंग बोर्ड के अधिकारी और कर्मचारी भी उपस्थित थे।

  • गद्दार दोस्त मोहम्मद के जाल से मुक्त हुआ जगदीशपुर

    गद्दार दोस्त मोहम्मद के जाल से मुक्त हुआ जगदीशपुर

    भोपाल,14 फरवरी(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा है कि 308 वर्ष बाद जगदीशपुर को खोई हुई पहचान मिल रही है। इस्लामनगर अब जगदीशपुर के नाम से जाना जाएगा। मुख्यमंत्री श्री चौहान जगदीशपुर के चमन महल में गौरव दिवस कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने 26 करोड़ 71 लाख 86 हजार रूपए के कार्यों का लोकार्पण और शिलान्यास किया। उन्होंने जगदीशपुर नामकरण शिला का अनावरण भी किया।

    मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि ऐतिहासिक दृष्टि से जगदीशपुर देवड़ा राजपूतों का गढ़ था। दोस्त मोहम्मद खान ने जगदीशपुर पर अधिकार कर इसका नाम इस्लामनगर रख दिया। पर्यटन स्थल जगदीशपुर में गोंड महल, रानी महल एवं चमन महल प्रमुख हैं। सांसद सुश्री साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर, विधायक श्री विष्णु खत्री, अध्यक्ष एमपी स्टेट इलेक्ट्रॉनिक्स डेवलपमेंट कार्पोरेशन श्री शैतान सिंह पाल और श्री केदार सिंह मण्डलोई उपस्थित थे।

    मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि आज हम सबका मन आनंद और प्रसन्नता से भरा हुआ है। अफगानी ने 308 साल पहले अन्याय और बर्बरता की थी। उसने धोखा दिया था। जगदीशपुर राजपूतों ने बसाया था। यहाँ के शासक नरसिंह देवड़ा थे। जगदीशपुर का किला अपनी वास्तु-कला के लिए जाना जाता है। दोस्त मोहम्मद खान ने राजा नरसिंह देवड़ा को निमंत्रण दिया था और भोजन करते समय हत्या कर दी गई। रानियों ने जल जौहर कर लिया था। आजादी के 75 साल बाद आज हम फिर से जगदीशपुर नाम कर पाए हैं।

    मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि असंभव को संभव करने का कार्य प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी और वर्तमान सरकार कर रही है। पुराने और गौरवशाली नामों को पुर्नस्थापित किया जाना चाहिए। इतिहास की घटनाओं को ध्यान में रखकर नाम बदलने का क्रम चल रहा है। हबीबगंज रेलवे स्टेशन का नाम बदलकर रानी कमलापति किया गया है। ऐसे कई नामों को बदला जाएगा। जगदीशपुर का वैभव पुन: स्थापित किया जाएगा। उन्होंने प्रशासन को निर्देश दिए कि गाँवों का मास्टर प्लान बनाया जाए। जगदीशपुर ऐसा गाँव बने कि लोग देखते रह जाये। उन्होंने कहा कि यहाँ राजाओं का स्मारक बनाया जाएगा।

    मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि विकास यात्रा से विकास की नई गंगा बह रही है। उन्होंने कहा कि बेटी को वरदान बनाने के लिए लाड़ली लक्ष्मी योजना बनाई गई। अब तक प्रदेश में 44 लाख लाड़ली लक्ष्मी हो चुकी हैं। इसी तरह मेधावी विद्यार्थी योजना बनाई गई। अब बहनों को सशक्त बनाने के लिए लाड़ली बहना योजना बनाई गई है। इस योजना में गरीब बहनों के खातों में एक-एक हजार रूपए की राशि हर माह दी जाएगी। उन्होंने कहा कि किसानों को प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री की ओर से सम्मान निधि दी जा रही है।

    मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि एक के बाद एक योजना बन रही है। जनता की जिंदगी बदलने की कोशिश है। वृद्धावस्था पेंशन राशि 600 से बढ़ा कर 1000 रूपये कर दी जाएगी। आगामी 5 मार्च से मुख्यमंत्री बहना योजना के गाँव-गाँव में शिविर लगा कर कार्य कराए जाएंगे। जून माह से पैसा आना शुरू हो जाएगा। जनता की जिंदगी बदलने का अभियान है। उन्होंने कहा कि हम परिवार की भाँति ध्यान रखने की कोशिश कर रहे हैं। सबका मंगल और कल्याण हो। सब सुखी हों। मुख्यमंत्री ने विकास कार्यों में जनता का सहयोग भी मांगा।

    सांसद सुश्री प्रज्ञा सिंह ठाकुर ने कहा कि जगदीशपुर का जन-जन चाहता था कि इस्लामनगर का नाम पुन: जगदीशपुर हो जाए। उन्होंने कहा कि जब हम परतंत्र थे तब इसका नाम इस्लामनगर था। जगदीशपुर का अपना एक इतिहास है। इसी को ध्यान में रख कर पुन: जगदीशपुर नामकरण किया गया है। जगदीशपुर अपने पुराने वैभव में लौटा है। केन्द्र और प्रदेश सरकार द्वारा विकास के लिए निरंतर कार्य किए जा रहे हैं। सांसद सुश्री ठाकुर ने गाँव में भगवान जगदीश का भव्य मंदिर निर्माण कराने का सुझाव रखा।

    बैरसिया विधायक श्री विष्णु खत्री ने स्वागत उद्बोधन देते हुए कहा कि आज जगदीशपुर में गौरव दिवस मनाने का अवसर मिला है। यह ऐतिहासिक क्षण है। उन्होंने कहा कि 308 वर्ष बाद यह क्षण देखने को मिला है। जब इस्लामनगर का नाम बदल कर पुन: जगदीशपुर कर दिया गया है। मुख्यमंत्री श्री चौहान की सक्रियता से यह संभव हो पाया है। उन्होंने कहा कि जगदीशपुर को आदर्श पंचायत बनाने के लिए विकास कार्यों की कोई कमी नहीं छोड़ी जाएगी। सामाजिक सरोकार और जन-भागीदारी से कार्यों को आगे बढ़ाया जाएगा। श्री खत्री ने बाणगंगा के किनारे बलिदानी राजाओं का स्मारक बनाने की मांग रखी।

    प्रारंभ में मुख्यमंत्री श्री चौहान ने मंच पर पहुँच कर साधु-संतों का शाल-श्रीफल से स्वागत और कन्या-पूजन किया। उन्होंने दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम की शुरुआत की। वंदे-मातरम का गायन हुआ। ग्रामीणों ने साफा पहना कर अतिथियों का स्वागत किया। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने लाम्बाखेड़ा से जगदीशपुर मार्ग, भदभदा से निपानिया जाट मार्ग मजबूतीकरण, लाम्बाखेड़ा से निपालिया बाजखां मार्ग और ईंटखेड़ी से अचारपुरा मार्ग के चौड़ीकरण, 33:11 केव्ही विद्युत उपकेन्द्र परेवाखेड़ा, ईंटखेड़ी एमआरएफ सेंटर, स्वच्छता परिसर ग्राम पंचायत अचारपुरा, गोलखेड़ी, जगदीशपुर, ईंटखेड़ी सड़क सहित अनेक विकास कार्यों का लोकार्पण और शिलान्यास किया। कार्यक्रम में जन-प्रतिनिधि और बड़ी संख्या में ग्रामीणजन मौजूद रहे।

  • विकास के उपाय स्थायी समाधान देंगे बोले उद्यम मंंत्री सखलेचा

    विकास के उपाय स्थायी समाधान देंगे बोले उद्यम मंंत्री सखलेचा

    भोपाल, 9 फरवरी(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)। सुक्ष्म, लघु, मध्यम उद्यम, विज्ञान एवं विज्ञान प्रौद्योगिकी मंत्री ओम प्रकाश सखलेचा के नेतृत्व में गुरूवार को जावद क्षेत्र में ग्राम लुहारिया चुण्डावत से विकास यात्रा का शुभारम्भ हुआ। इस अवसर पर मंत्री श्री सखलेचा ने मनरेगा के तहत 7.70 लाख की लागत से स्वीकृत नाला निर्माण कार्य का भूमिपूजन कर शिलान्यास किया। इस मौके पर अन्य जनप्रतिनिधि, अधिकारी, कर्मचारी और एवं ग्रामीण उपस्थित थे।

    मंत्री श्री सखलेचा ने कहा कि प्रदेश सरकार द्वारा प्रत्येक वर्ग के सर्वागीण विकास के लिए विशेष ध्यान दिया जा रहा है। महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने के लिए प्रतिमाह एक हजार रूपये की राशि भुगतान करने का निर्णय लिया गया है। इसके लिए सरकार द्वारा शीघ्र ही “लाडली बहना योजना” प्रारम्भ की जा रही है। उन्होने जावद क्षैत्र में हुए, विभिन्न विकास एवं निर्माण कार्यो की विस्तार से जानकारी देते हुए कहा कि मुख्यमंत्री जन सेवा अभियान में हितग्राहियों को चिन्हित कर योजनाओं का लाभ दिया जा रहा है। मंत्री श्री सखलेचा ने विभिन्न हितग्राहीमूलक योजनाओं के लाभार्थियों और लाड़ली लक्ष्मियों को हितलाभ भी वितरित किए।

    जावद क्षैत्र में गुरूवार को विकास यात्रा लुहारिया चुण्डावत से प्रारम्भ होकर खजुरिया, आलोरी गरवाडा, देहपुर, नीम का खेड़ा होते हुए, नगर रतनगढ़ पहुँची। मंत्री श्री सखलेचा ने लगभग 3 लाख रूपये की लागत के सीमेन्ट कांक्रीट सड़क निर्माण कार्यो का शिलान्यास एवं आरसीसी दीवार निर्माण कार्य का लोकार्पण किया। उन्होंने प्रधानमंत्री आवास के हितग्राहियों को प्रथम किश्त की राशि का वितरण तथा लाड़ली लक्ष्मी योजना के आश्वासन पत्र भी वितरित किये।

    रतनगढ़ में विकास यात्रा ने सभी वार्डो को भ्रमण किया। ग्राम कसमारिया, विरमपुर, पालछां, चावड़िया, डोराई, होते हुए सांडा, जाट पहुँची। विकास यात्रा के दौरान गाँव में ग्रामीणों काफी उत्साह देखने को मिला। गाँव-गाँव में विकास यात्रा के साथ पहुँचे मंत्री श्री सखलेचा का ग्रामीण ने उत्साहपूर्वक आत्मीय स्वागत किया।

  • अक्षय पात्र फाऊंडेशन खाने लगी बच्चों का भोजन

    अक्षय पात्र फाऊंडेशन खाने लगी बच्चों का भोजन


    भोपाल,30 जनवरी,(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)। स्कूली बच्चों के लिए चलाई जा रही मध्यान्ह भोजन योजना(मिड डे मील) पूरे प्रदेश में अव्यवस्था की शिकार हो गई है। राजधानी भोपाल और इसके आसपास के इलाकों में भोजन सप्लाई का काम जिस अक्षयपात्र फाऊंडेशन को दिया गया है वह बच्चों को उनकी संख्या से बहुत कम भोजन सप्लाई कर रही है जिसकी वजह से बच्चों को भूखा ही घर लौटना पड़ रहा है। विगत 25 जनवरी से शुरु हुई ये व्यवस्था अधिकारियों की मानीटरिंग में भी अव्यस्थित है लेकिन इसके बावजूद किन्हीं ऊंची पहुंच वाले लोगों के निजी हितों के मद्देनजर वे कोई कार्रवाई नहीं कर पा रहे हैं।
    राजधानी के शहरी और आसपास के ग्रामीण इलाकों से लेकर रायसेन तक मध्यान्ह भोजन योजना सप्लाई करने का ठेका अक्षयपात्र फाऊंडेशन को दे दिया गया है। ये तर्क दिया गया था कि बच्चों को अच्छी गुणवत्ता का भोजन अत्याधुनिक प्लांट में बनवाकर सप्लाई किया जाएगा। महिला स्व सहायता समूह के माध्यम से की जाने वाली इस कथित सप्लाई ने पूरी व्यवस्था इस तरह बिगाड़ दी है कि बच्चों को भोजन मिलना भी दूभर हो गया है।

    खाली कंटेनर सप्लाई घोटाले की कहानी बयां कर रहे हैं।


    बताया जा रहा है कि इस फाऊंडेशन को कई बड़ी कंपनियों ने अपनी सीएसआर राशि का हिस्सा दिया है। मंडीदीप स्थित एचईजी कंपनी ने भी अपनी सीएसआर राशि इस फाऊंडेशन को मिड डे मील सप्लाई करने के लिए दी है। बताते हैं कि संस्था ने कंपनियों से बड़ी राशि डकार ली है इसके बाद भी बच्चों को घटिया भोजन वह भी सिर्फ खाना पूरी के अंदाज में सप्लाई किया जा रहा है।
    बताते हैं कि ज्वाईंट डायरेक्टर नकीजा कुरैशी ने मध्यान्ह भोजन योजना सप्लाई का काम कई स्थानीय संस्थाओं को दिया था और उनसे कथित तौर पर वादा भी किया गया था कि भोजन उनके माध्यम से ही सप्लाई कराया जाएगा। अब उन्होंने इस अक्षयपात्र फाऊंडेशन को सप्लाई का ठेका दिलवा दिया है जिससे स्थानीय संस्थाओं के संचालक खासे नाराज बताए जा रहे हैं।
    स्थानीय संस्थाओं से जुड़े सूत्रों ने बताया कि विश्वकर्मा नगर, अयोध्यानगर, प्राथमिक शाला पिपलिया पेंदे खां,
    नरेला हनुमंत, दामखेड़ा, दौलतपुर,टीआरटी, जीवन ज्योति गैस राहत कालोनी, बंजारी ,बागमुगलिया नई बस्ती,प्राथमिक शाला अरेरा कालोनी, अमरावद खुर्द ,पिपलिया केशव बीडीए कालोनी में भी खाना जरूरत से बहुत कम आ रहा है। जिसकी वजह से बच्चों के बीच छीना झपटी की स्थितियां देखी जा रहीं हैं। बतातें हैं कि किसी मदरसे में भी खाना सप्लाई नहीं किया जा रहा है। बैरागढ़ चीचली, रतनपुर स़ड़क,बिलखिरिया खुर्द बरखेड़ी खुर्द में भी पूरी सब्जी केवल नाममात्र के लिए ही सप्लाई की जा रही है।

  • इ कुबेेर प्रणाली ने हितग्राही को रिजर्व बैंक से जोड़ा

    इ कुबेेर प्रणाली ने हितग्राही को रिजर्व बैंक से जोड़ा

    भोपाल, 16 जनवरी(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)।वित्त विभाग के आई.एफ.एम.आई.एस. सॉफ्टवेयर में ई-कुबेर प्रणाली विकसित की गई है। इस प्रणाली से कोषालय अधिकारियों द्वारा लाभांवितों के बैंक खातों में सीधे आर.बी.आई के माध्यम से राशि हस्तांतरित की जा सकेगी। महापौर श्रीमती मालती राय ने वल्लभ भवन कोषालय में सोमवार को प्रणाली का शुभारंभ किया। इस दौरान महापौर ने प्रणाली से लाभांवितों को भुगतान भी किया। आयुक्त कोष एवं लेखा श्री ज्ञानेश्वर पाटिल, संचालक कोष एवं लेखा डॉ. राजीव सक्सेना, संभागीय संयुक्त संचालक कोष एवं लेखा श्री आर.आर. अहिरवार उपस्थित रहे।

    वरिष्ठ कोषालय अधिकारी श्री प्रदीप ओमकार ने बताया कि पूर्व में कोषालय अधिकारी ई-फाईल भारतीय स्टेट बैंक की वेबसाईट पर अपलोड करते थे। इसके बाद भारतीय स्टेट बैंक द्वारा लाभांवितों को भुगतान किया जाता था, जिससे कई बार एक-दो दिन का समय भी लग जाता था। अब ई-कुबेर प्रणाली से तत्काल भुगतान हो सकेगा और समय भी कम लगेगा।

    आयुक्त कोष एवं लेखा श्री पाटिल द्वारा आई.एफ.एम.आई.एस. सॉफ्टवेयर को अत्याधुनिक बनाने के लिये अनेक सुधार किए गए हैं। गत दिसंबर माह में आधार आधारित भुगतान प्रणाली से भुगतान प्रारंभ करने वाला मध्यप्रदेश पहला राज्य बना। इसके बाद अब ई-कुबेर की नई सुविधा विकसित कर संबंधितों को सीधे आर.बी.आई से भुगतान की प्रक्रिया शुरू की गई है।

  • सम्मान से शुरु हुआ सहकारिता के उप अंकेक्षकों का नया साल

    सम्मान से शुरु हुआ सहकारिता के उप अंकेक्षकों का नया साल


    भोपाल,7 जनवरी(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)। सहकारिता विभाग के प्रदेश भर से आए अंकेक्षकों ने आज राजधानी में नव वर्ष मिलन समारोह 2023 मनाया । श्यामला हिल्स स्थित होटल विंड एंड वेव्वज में आयोजित इस कार्यक्रम में विभाग के वरिष्ठ अफसरों ने भी शिरकत की और प्रदेश में सहकारिता आंदोलन को नई ऊंचाईयां देने के लिए अंकेक्षकों को प्रोत्साहित किया। अफसरों ने कहा कि जनता की वित्तीय संस्थाओं को साफसुथरा बनाकर प्रदेश को विकास की नई ऊंचाईयों तक पहुंचाया जा सकता है। इसके लिए अंकेक्षक बिना डरे जिस मुस्तैदी से कार्य कर रहे हैं वह सराहनीय है । उनका काम सरल बनाने के लिए सरकार की मंशा के अनुरूप सभी उपाय किए जाएंगे।
    मुख्य अतिथि के तौर पर कार्यक्रम में शामिल सहकारिता विभाग के संयुक्त आयुक्त अभय खरे ने कहा कि आमतौर पर सरकारी बैठकों में अनौपचारिक वार्तालाप नहीं हो पाता है। गंभीर दायित्वों का निर्वहन करने वाले आडिटरों को चुनौतियों का सामना अकेले करना पड़ता है। इस तरह के सामाजिक कार्यक्रम अफसरों और कर्मचारियों में उमंग का संचार करते हैं जिसका लाभ प्रदेश के आम आदमी को मिलता है। आडिटरों को जो स्मृति चिन्ह दिए गए वे दैनंदिनी कामकाज के बीच उन्हें प्रकाश स्तंभ की तरह प्रोत्साहित करते रहेंगे।
    कार्यक्रम के मुख्य आयोजक उप अंकेक्षक मुकंद राव भैंसारे ने कहा कि प्रदेश भर की सहकारी संस्थाओं की लेखा पुस्तिकाओं की शुद्धता और सत्यता का परीक्षण करने का काम दुरूह होता है। अशुद्धियों और कपट का परीक्षण करना और उनकी रोकथाम के उपाय करने से आडिटरों को नाराजगी का सामना भी करना पड़ता है। ऐसे में उन्हें शासन की ओर से प्रोत्साहन और संबल मिलता रहे तो सहकारिता आंदोलन को सफल बनाया जा सकता है। भारत सरकार की ओर से सहकारिता के क्षेत्र में जो तकनीकी सुधार किए गए हैं उनसे वित्तीय गड़बड़ियों को रोकना सरल होता जा रहा है।
    नववर्ष मिलन समारोह में अंकेक्षकों ने गीत संगीत की रंगारंग प्रस्तुतियां दीं। कविता पाठ और चुटकुलों से उपस्थित अधिकारियों और कर्मचारियों के बीच संवाद की नई कड़ी का सूत्रपात किया गया। महिला उप अंकेक्षकों ने अपनी प्रस्तुतियों से सभी अधिकारियों को संवाद के नए धरातल पर ला दिया। कई अधिकारियों ने कहा कि वे रिटारमेंट की आयु तक पहुंच गए लेकिन कभी विभाग की ओर से उनकी पीठ नहीं थपथपाई गई। पहली बार स्मृति चिन्ह पाकर उन्हें अपनी जीविका सार्थक महसूस हो रही है।


    कार्यक्रम में संयुक्त आयुक्त सहकारिता बीएस शुक्ला,प्रबंध संचालक अपेक्स एवं संयुक्त आयुक्त पीएस तिवारी,सहकारिता विभाग के सचिव मनोज सिन्हा, संयुक्त आयुक्त अनिल वर्मा, उपायुक्त सहकारिता एवं सचिव मार्कफेड यतीश त्रिपाठी, उपायुक्त शिवेन्द्र पांडेय, उपायुक्त आरएस विश्वकर्मा, उपायुक्त श्रीमती अनिता उइके, श्रीमती श्वेता रावत, सहायक आयुक्त संजय सिंह, मप्र कार्यपालिक तृतीय वर्ग सहकारिता विभाग कर्मचारी संघ के प्रांताध्यक्ष संजय सिंह, शोधकर्ता अविनाश सिंह समेत पूरे प्रदेश के आए उप अंकेक्षकों ने आयोजन में हिस्सा लिया। उप अंकेक्षक वर्ग की ओर से वरिष्ठ अधिकारियों और कर्मचारियों को स्मृति चिन्ह भेंट किए गए। श्री भैंसारे ने आयोजन को सफल बनाने वाली टीम के सदस्यों श्री रामचंद अहिरवार, श्री विनोद जैन, एवं अन्य अंकेक्षकों व उप अंकेक्षकों के योगदान का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि इस तरह के आयोजन बार बार होंगे और राज्य के विकास में अपना योगदान देने वाले उप अंकेक्षकों को पुरस्कृत भी किया जाएगा।

  • चौपाल से चलती है शिवराज सिंह सरकार बोले गोविंद सिंह राजपूत

    चौपाल से चलती है शिवराज सिंह सरकार बोले गोविंद सिंह राजपूत

    अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा जारी, आज आएगा मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान का जवाब

    भोपाल,21 दिसंबर(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)। मध्य प्रदेश विधानसभा के शीतकालीन सत्र में तीसरे दिन बुधवार को सदन की कार्यवाही गहमागहमी भरी रही . कई सालों बाद सदन में लगभग साढ़े तेरह घंटों तक चर्चा जारी रही। सुबह ग्यारह बजे समवेत हुआ सदन समयकाल बढ़ाने के साथ रात्रि 12.37 बजे तक चलता रहा। कार्यवाही के दौरान कई बार पक्ष और विपक्ष के नेताओं में तीखी बहस देखने को मिली. कांग्रेस की ओर से नेता प्रतिपक्ष डॉ.गोविंद सिंह ने ये प्रस्ताव प्रस्तुत किया जिस पर हुई चर्चा ने सत्ता पक्ष को अपने कामकाज पर सफाई देने का अवसर मिल गया। कई बार तो विपक्ष स्वयं अपने आरोपों में घिरता नजर आया।


    कांग्रेस के अविश्वास प्रस्ताव पर प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान कल गुरुवार को जवाब प्रस्तुत करेंगे. इधर विधानसभा सत्र के महत्वपूर्ण तीसरे दिन सदन की कार्यवाही के दौरान प्रदेश कांग्रेस कमेटी के प्रमुख कमलनाथ नदारद रहे. पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ बुधवार को विदिशा जिले के सिरोंज जिले के दौरे पर थे . जबकि मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान पूरी कार्यवाही के दौरान मौजूद रहे.


    सदन में अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा में कांग्रेस विधायक जीतू पटवारी ने कहा कि सरकारी पैसे से भाजपा ने अपने दफ्तर में 40 करोड़ रुपए का खाना खिला दिया. जीतू पटवारी के इस बयान पर नगरीय प्रशासन राज्यमंत्री ओपीएस भदौरिया भडक़ उठे. मंत्री भदौरिया अपनी सीट से उठकर विपक्ष की और बढऩे लगे जिस पर विपक्षी नेताओं ने हंगामा शुरु कर दिया. मामले को बढ़ता देख स्पीकर ने जैसे तैसे मामले को शांत कराया. इसके बाद जीतू पटवारी ने पुन: बोलना शुरू किया.


    हंगामे के बीच कांग्रेस के वरिष्ठ नेता सज्जन सिंह वर्मा ने ओपीएस भदौरिया को बिल्ली कहकर संबोधित किया. सज्जन सिंह वर्मा ने कहा कि ओपीएस अपने क्षेत्र में भीगी बिल्ली बने फिरते हैं और यहां पहलवानी बता रहे हैं। पूर्व मंत्री सज्जन सिंह वर्मा के तेवर इसलिए तेज हो रहे थे. क्योंकि पूर्व मंत्री जीतू पटवारी के वक्तव्य के दौरान मंत्री ओपीएस भदौरिया अपनी सीट से उठ खड़े हुए ,जिन्हें मंत्री रामखेलावन सिंह बार बार हाथ पकडक़र बिठाते नजर आए.

    परिवहन मंत्री गोविंद सिंह राजपूत ने कहा कि कमलनाथ सरकार में हम अपने क्षेेत्र के गरीब नागरिकों के नाम गरीबी रेखा में जुड़वाने के लिए प्रयास करते रहे लेकिन डेढ़ साल तक पोर्टल ही नहीं खोला गया। जबकि शिवराज सिंह चौहान की सरकार आते ही पच्चीस लाख लोगों के नाम गरीबी रेखा में जोड़ दिए गए। कांग्रेस सरकार अप्राकृतिक मृत्यु होने पर पचास हजार रुपए हर्जाना देती थी जबकि शिवराज सरकार ने चार लाख रुपए मुआवजा देना शुरु कर दिया। ये सरकार भोपाल के मंत्रालय से नहीं बल्कि प्रदेश के चौपालों से चलने वाली सरकार है।

    सुश्री हिना लिखीराम कांवरे ने सरकार की कार्यप्रणाली को घेरे में लेते हुए कहा कि गृहमंत्री बड़े बड़े दावे करते हैं कि उनके शासनकाल में डकैतों,नक्सलियों पर कार्रवाई हुई है लेकिन हकीकत ये है कि बालाघाट और इसके आसपास नक्सलवादियों ने इतने घर बना लिए हैं कि सरकार किस किस घर में घुसकर उन्हें मार पाएगी। आतंकी हरकतों की वजह से कान्हा नेशनल पार्क में पर्यटक आखिर क्यों आएंगे। बालाघाट को नक्सली अपना रेस्ट जोन मानते हैं। नक्सलियों ने इलाके के नागरिकों का हक छीना है वहां कोई उद्योगपति अपना कारोबार शुरु नहीं करना चाहते।


    शीतकालीन विधानसभा सत्र के तीसरे दिन की कार्रवाई में पक्ष और विपक्ष के नेताओं में व्यंग्य तंज का भी दौर चला. नेता प्रतिपक्ष गोविंद सिंह ने कहा कि हमने अविश्वास प्रस्ताव में जो मुद्दे उठाए, उनपर जवाब देना चाहिए. इस पर मंत्री गोपाल भार्गव वने कहा कि आपने आज क्या भाषण दिया वो आपको खुद याद नहीं होगा. इस पर संसदीय मंत्री नरोत्तम मिश्रा ने तंज कसते हुए कहा कि नेता प्रतिपक्ष गोविंद सिंह तो ढोर डॉक्टर हैं.

  • विदेशी धन कमाने का माध्यम बनी एमपी की वन संपदा

    विदेशी धन कमाने का माध्यम बनी एमपी की वन संपदा


    वनमंत्री विजय शाह ने बताया 20 से 26 दिसंबर तक भोपाल के लाल परेड ग्राऊंड में लगेगा 9 वां अंतर्राष्ट्रीय हर्बल मेला
    भोपाल,18 दिसंबर(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)। वनों से प्राप्त जड़ी बूटियां वनवासियों की समृद्धि का साधन बन रही हैं और विदेशी मुद्रा कमाने का साधन भी बन गईं हैं। मध्यप्रदेश सरकार के वन विभाग की रणनीति की कामयाबी की ये कहानी वर्ष 2011 से आयोजित हो रहे अंतर्राष्ट्रीय हर्बल मेलों की वजह से लिखी जा सकी है। लगातार नौवें वर्ष आयोजित किए जा रहे इस वन मेले की सफलता से उत्साहित राज्य के वन विभाग ने इस बार 20 से 26 दिसंबर तक लगातार सात दिनों तक इस मेले की मेजबानी करने की तैयारी की है। वनमंत्री कुंवर विजय शाह ने आज भोपाल में आयोजित पत्रकार वार्ता में बताया कि वनवासियों की समृद्धि के लिए इस बार भी वनसंपदा के विक्रेताओं और खरीददारों को आपस में जोड़कर राज्य सरकार वनौषधियों की मंडी को सफल बनाएगी।
    कुंवर विजय शाह ने पत्रकारों के सवालों के जवाब में बताया कि लगातार आयोजित होने वाले वनमेलों से वन संपदा अब वैश्विक बाजारों में पहचान बनाने लगी हैं। महुए के च्वनप्राश की लोकप्रियता इतनी तेजी से बढ़ रही है कि वन समितियों ने अब महुआ इकट्ठा कराकर उसकी मिठाई, अचार और च्वनप्राश जैसे उत्पादों की मार्केटिंग शुरु कर दी है। लघुवनोपज संघ को लंदन से अठारह क्विंटल महुआ उपलब्ध कराने का आर्डर मिला है। इस तरह कई अन्य वनौषधियां भी विदेशी मुद्रा कमाने का साधन बन रहीं हैं।

    वनमंत्री कुंवर विजय शाह ने बताया कि सरकार के प्रयासों से वनवासियों को रोजगार के नए साधन मिले हैं.इस अवसर पर लघुवनोपज संघ के एमडी पुष्कर सिंह भी उपस्थित थे.


    श्री शाह ने बताया कि इस सात दिवसीय आयोजन के लिए भारत के बारह राज्यों के साथ भूटान, नेपाल और इंडोनेशिया की सरकारों ने भी अपनी भागीदारी सुनिश्चित की है। मेले में चौबीस दिसंबर को बायर सेलर मीट का आयोजन किया जाएगा जिससे स्थानीय वनसंपदा के विक्रेताओं के लिए वैश्विक बाजार के खरीदार भी उपलब्ध हो सकेंगे। कई सरकारी और गैर सरकारी प्रतिष्ठान भी मेले में अपने उत्पादों के स्टाल लगा रहे हैं। पिछले साल इस मेले में लगभग सवा लाख लोग पहुंचे थे इस बार सात दिनों के मेले में इससे भी ज्यादा तादाद में दर्शक और खरीददार पहुंचेंगे।
    उन्होंने बताया कि मध्यप्रदेश की वनौषधियों में लोगों की रुचि को देखते हुए वन विभाग ने कई सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया है.मेले में प्रसिद्ध गायक विनोद राठौर, हास्य कलाकार सुनील पाल, कबीर कैफे, आदिवासी लोक नृत्य जैसे कई कार्यक्रमों का आयोजन होगा।
    इस मेले की थीम हर बार की तरह लघुवनोपज से आत्मनिर्भरता रहेगी। पिछले साल बड़ी कंपनियों ने ग्रामीण वनोपज समितियों से 14 करोड़ रुपए के अनुबंध किए थे। इस बार हमें लगभग बीस करोड़ रुपए से अधिक के अनुबंध होने का अनुमान है। हमारा प्रयास है कि विक्रेताओं को सीधे खरीददार उपलब्ध हों और वे दलालों के चंगुल में न फंसें। ये सारे प्रयास मप्र लघुवनोपज संघ और वन विभाग के सहयोग से सफल हो पाए हैं।

  • किसान अब ऊर्जादाता भी बनेगाःगडकरी

    किसान अब ऊर्जादाता भी बनेगाःगडकरी

    भोपाल,7 नवंबर(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)। केन्द्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री श्री नितिन गडकरी ने कहा है कि मध्यप्रदेश में कृषि क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य हुआ है। मुख्यमंत्री श्री चौहान के नेतृत्व में मध्यप्रदेश को निरंतर कृषि कर्मण पुरस्कार से सम्मानित किया जा रहा है। अब मध्यप्रदेश कृषि उत्पादों का निर्यात भी करने लगा है। किसान अन्नदाता के साथ अब ऊर्जादाता भी बनेगा।

    केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री श्री गडकरी ने मंडला में मंडला और डिंडोरी जिले के लिए 1261 करोड़ रूपये लागत की 5 सड़क परियोजना का शिलान्यास किया। केन्द्रीय मंत्री श्री गडकरी ने कहा कि मंडला में प्रकृति का निवास है, यह रानी दुर्गावती की भूमि है तथा यहाँ कान्हा जैसा विश्व प्रसिद्ध राष्ट्रीय उद्यान है। जनजातीय कार्यों के विकास के लिए सड़कें अत्यंत जरूरी हैं। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री श्री चौहान, केंद्रीय राज्य मंत्री श्री फग्गन सिंह कुलस्ते सहित स्थानीय जन-प्रतिनिधियों द्वारा दिए गए सड़क विकास के प्रस्तावों पर विस्तृत अध्ययन कर योजनाओं को स्वीकृति दी जाएगी।

    केन्द्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री श्री गडकरी ने देशभर में ऊर्जा के क्षेत्र में परिवहन मंत्रालय द्वारा प्रारंभ की गई नई परियोजनाओं की विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने मध्यप्रदेश में परिवहन के क्षेत्र में इलेक्ट्रिक बसों के संचालन की आवश्यकता बताई। उन्होंने कहा कि मंडला, डिंडौरी एवं अन्य जनजातीय क्षेत्रों में बाँस के उत्पादन को बढ़ावा दिया जा सकता है। बाँस से भविष्य में इथेनॉल का निर्माण होगा, जिससे परिवहन एवं अन्य क्षेत्रों के लिए ऊर्जा पैदा की जा सकेगी। केन्द्रीय मंत्री श्री गडकरी ने कान्हा-बालाघाट क्षेत्र में सड़क विकास के लिए नए प्रोजेक्ट को ‘गति शक्ति योजना’ में शामिल करने की बात कही।

    मंडला-जबलपुर हाई-वे का गुणवत्तापूर्ण निर्माण कराने के निर्देश

    केन्द्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री श्री गडकरी ने मंडला-जबलपुर हाई-वे के बारे में चर्चा की। उन्होंने हाई-वे निर्माण में गुणवत्ता से असंतुष्टि जाहिर की और मंडला एवं आसपास के क्षेत्र की जनता को सड़क से हुई परेशानी के लिए मंच से माफी मांगी। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को निर्देशित किया कि राष्ट्रीय राजमार्ग के पुराने कार्य को रिपेयर करें तथा सड़क के खराब हिस्से के निर्माण के लिए जल्द नया टेंडर जारी करें। केन्द्रीय मंत्री श्री गडकरी ने आगामी वर्षों में अलग-अलग परियोजनाओं से सड़क एवं पुलों के विकास के बारे में चर्चा की।

    नर्मदा एक्सप्रेस-वे पर अध्ययन जारी

    केन्द्रीय मंत्री श्री गडकरी ने कहा कि केन्द्र सरकार द्वारा देश के सभी धार्मिक स्थानों तक पहुँचने के लिए लगातार बारह-मासी सड़कों का निर्माण जारी है। उन्होंने अमरकंटक से लेकर धार-झाबुआ तक नर्मदा एक्सप्रेस-वे के निर्माण के संबंध में कहा कि इस मार्ग के निर्माण के लिए मंत्रालय द्वारा अध्ययन जारी है। इस मार्ग के विकास से नर्मदा प्रदक्षिणा करने वाले श्रद्धालुओं को निश्चित रूप से लाभ होगा। केन्द्रीय मंत्री श्री गडकरी ने मध्यप्रदेश में मेडिकल की पढ़ाई हिंदी भाषा में भी प्रारंभ करने पर मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान को सभी विद्यार्थियों की ओर से शुभकामनाएँ दी। उन्होंने कहा कि गरीब एवं वंचित वर्गों तक विकास को पहुँचाना हमारा संकल्प है।

    मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि राज्य सरकार चारों तरफ सड़कों के जाल बिछाने के लिए लगातार प्रयास कर रही है। उन्होंने मंडला और डिंडोरी जिले के लिए केंद्र सरकार द्वारा दी गई नई 5 सड़क परियोजना की स्वीकृति के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एवं केंद्रीय मंत्री श्री गडकरी को धन्यवाद दिया। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने बताया कि वर्ष 2003 के बाद प्रदेश सरकार द्वारा अब तक 3 लाख किलोमीटर से अधिक लंबाई की सड़कें बनाई जा चुकी हैं। उन्होंने कहा कि नर्मदा उद्गम से लेकर धार-झाबुआ तक ’नर्मदा एक्सप्रेस-वे’ बनाने का प्रस्ताव है। ‘नर्मदा एक्सप्रेस-वे’ के दोनों ओर औद्योगिक क्षेत्र के विकास का प्रयास किया जाएगा, जहाँ स्थानीय उत्पादों पर आधारित उद्योग लगाए जाएंगे।

    मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि सरकार विकास के कार्यों में कमी नहीं होने देगी। उन्होंने मंडला-डिंडौरी क्षेत्र में घर-घर पानी पहुँचाने के लिए केंद्र एवं राज्य सरकार के कार्यों की जानकारी दी। उन्होंने सीएम जनसेवा अभियान में मंडला जिले में प्राप्त तथा स्वीकृत आवेदनों की जानकारी देते हुए बताया कि जिले में कुल एक लाख 84 हजार 753 आवेदन में से एक लाख 56 हजार 944 को स्वीकृत किया जा चुका है। उन्होंने केन्द्रीय मंत्री श्री गडकरी से कान्हा क्षेत्र को मुख्य सड़क मार्गों से जोड़ने तथा नर्मदा सौन्दर्यीकरण और विकास के लिए नए प्रस्तावों को स्वीकृति प्रदान करने का आग्रह किया। मुख्यमंत्री ने मंडला जिले में नए सीएम राईज स्कूलों के संचालन, विशेष कोचिंग के माध्यम से नीट परीक्षा में जनजाति बहुल जिलों के विद्यार्थियों की सफलता तथा मध्यप्रदेश में मेडिकल की पढ़ाई हिंदी माध्यम में शुरू किए जाने की जानकारी दी।

    15 नवंबर से लागू होगा ’पेसा एक्ट’

    मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि 15 नवंबर को प्रदेश में जनजातीय गौरव दिवस मनाया जाएगा। इसमें प्रदेश में पंचायत से लेकर जिला स्तर तक समारोहपूर्वक अनेक कार्यक्रम होंगे। मुख्यमंत्री ने कहा कि 15 नवंबर से ही संपूर्ण प्रदेश में सामाजिक समरसता के साथ ’पेसा एक्ट’ भी लागू किया जाएगा। उन्होंने मेडिकल कॉलेज के भूमि-पूजन के लिए जल्द मंडला आने की बात भी कही।

    सड़क परियोजनाओं के शिलान्यास महाकौशल क्षेत्र के लिए अत्यंत गौरव का पल

    केंद्रीय इस्पात एवं ग्रामीण विकास राज्य मंत्री श्री फग्गन सिंह कुलस्ते ने कहा कि पाँच सड़क परियोजना का शिलान्यास महाकौशल क्षेत्र के लिए अत्यंत गौरव का पल है। उन्होंने सड़क परियोजनाओं की स्वीकृति के लिए प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी एवं सड़क परिवहन मंत्री श्री गडकरी का मंडला एवं डिंडोरी की जनता तथा स्थानीय जन-प्रतिनिधियों की ओर से अभिनंदन किया। श्री कुलस्ते ने जबलपुर-नैनपुर बाईपास, कान्हा क्षेत्र को प्रमुख मार्गों से जोड़ने, नैनपुर-सिवनी हाई-वे, मंडला-लखनादौन के लिए नई परियोजनाओं की स्वीकृति का आग्रह किया।

    केन्द्रीय मंत्री श्री गडकरी विजनरी, दृष्टिवान तथा नवाचार के धनी

    प्रदेश के लोक निर्माण कुटीर एवं ग्रामोद्योग मंत्री श्री गोपाल भार्गव ने केंद्रीय मंत्री श्री गडकरी को नई सड़क परियोजनाओं की स्वीकृति के लिए धन्यवाद दिया। उन्होंने वर्ष 2014 के बाद से मध्यप्रदेश में सड़क एवं अन्य बड़ी परियोजनाओं के विकास कार्यों की जानकारी दी। मंत्री श्री भार्गव ने सड़क, पुलिया एवं फ्लाईओवर निर्माण के क्षेत्र में बेहतरीन कार्य करने वाले केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री श्री गडकरी को विजनरी, दृष्टिवान एवं नवाचार का धनी बताया।

    कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलन से हुआ। केन्द्रीय मंत्री श्री गडकरी तथा मुख्यमंत्री श्री चौहान का स्थानीय जन-प्रतिनिधियों ने कलगी-साफा पहना कर स्वागत किया। कार्यक्रम में 5 सड़क परियोजना पर आधारित लघु फिल्म का प्रदर्शन किया गया। अतिथियों ने सड़क परियोजनाओं पर आधारित प्रदर्शनी का अवलोकन भी किया।

    कार्यक्रम में राज्यसभा सांसद सुश्री संपतिया उईके, विधायकगण सर्वश्री देवसिंह सैयाम, डॉ. अशोक मर्सकोले और श्री नारायण पट्टा, जिला पंचायत अध्यक्ष श्री संजय कुशराम, नगरपालिका अध्यक्ष श्री विनोद कछवाहा और जिला पंचायत उपाध्यक्ष श्री कमलेश टेकाम उपस्थित रहे।

  • पुरानी पेंशन बहाली बनी राजनैतिक हथकंडा

    पुरानी पेंशन बहाली बनी राजनैतिक हथकंडा

    डॉ.अजय खेमरिया

    सत्ता के लिए राष्ट्र के दीर्धकालिक हित क्या वाकई महत्वहीन होते हैं।वस्तुतः संसदीय राजनीति का चरित्र कुछ ऐसा ही ढलता जा रहा है।इस समय देश में सरकारी कार्मिकों के लिए पुरानी पेंशन का मुद्दा खूब छाया हुआ है।गले तक कर्ज में डूबे पंजाब ने अपने 1.60 लाख कार्मिकों के लिए एनपीएस के स्थान पर पुरानी पेंशन बहाली के लिए कदम बढ़ाएं हैं।राजस्थान,छत्तीसगढ़ ,झारखंड पहले ही एनपीएस को अपने यहां बंद कर 1972 की पेंशन योजना को बहाल करने की घोषणा कर चुके है।मप्र में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने वित्त विभाग को इस मामले का परीक्षण करने के लिये कहा है और देर सबेर मप्र भी अगले कुछ महीनों में अपने 4.5 लाख कर्मचारियों को पुरानी पेंशन बहाल करने वाला राज्य होगा।गुजरात में कांग्रेस एवं आप भी अपने वादों में इसे दोहरा रहे हैं।स्पष्ट है पुरानी पेंशन मुद्दा एक चुनावी हथकंडा बन गया है और इसकी बहाली में राजनीतिक दल सत्ता की चाबी अंतर्निहित मान चुके हैं।यह जानते समझते हुए भी कि सरकारी कर्मचारियों के लिए पुरानी पेंशन देना सही मायनों में आर्थिक रूप से एक जोखिमपूर्ण नीति है।यह भी एक तरह से रेवड़ी संस्कृति ही है जिसका सामाजिक न्याय या सुरक्षा के साथ कोई तार्किक औऱ युक्तियुक्त संबंध नही है।2004 में अटल बिहारी वाजपेयी सरकार ने 1972 के पेंशन उपबन्धों के स्थान पर भागीदारी केंद्रित एनपीएस योजना को आकार दिया था जिसे बाद में यूपीए सरकार ने भी परिवर्धित रूप से सशक्त बनाया।बंगाल को छोड़कर सभी राज्यों ने इसे अपने यहां लागू किया और आज भी सभी राज्यों एवं केंद्र के कार्मिकों के लिए यह लागू ही है।पुरानी पेंशन असल में 70 के दशक की सामाजिक आर्थिक परिस्थितियों की मांग पर निर्भर थी।यह रिटायरमेंट के समय अंतिम वेतन पर 50 फीसदी रकम को पेंशन के रूप में निर्धारित करती थी और कर्मचारी की मृत्यु उपरांत कुछ अंतर के बाद परिवार पेंशन में यानी पत्नी के नाम हो जाती हैं। यह वह दौर था जब वेतन आज की तरह ऊंचे नही थे।औसत आयु भी कम थी।इसमें कर्मचारियों को सीधे कुछ भी नही देना होता था जबकि एनपीएस में उन्हें 10 फीसद का अंशदान देना होता है।सरकार भी अपनी ओर से 14 फीसद जमा कर पेंशन फंड में अपना योगदान देतीं हैं।इस एनपीएस के स्थान पर कर्मचारियों द्वारा पुरानी पेंशन को बहाल करने के लिए संगठित रूप से देश भर में दबाव बनाया जा रहा है।सरकार में बैठे और बाहर सत्ता में आने को आतुर राजनीतिक दलों को लगता है कि कर्मचारियों के थोक वोट बैंक से उनकी किस्मत खुल सकती है, इसलिए वे इस योजना के पुराने एवं पश्चावर्ती दुष्परिणामों से वाकिफ होने के बाबजूद आगे बढ़ रहे है।ऐसा इसलिए क्योंकि हर दल को लगता है कि उसकी घोषणा से उस राज्य में तत्काल आर्थिक संकट खड़ा नही होगा इस स्थिति में 10 से 15 साल लगेंगे। इसलिए सत्ता के लिए 15 साल की कड़वी सच्चाई को आज क्यों स्वीकृति दी जाए।वस्तुतः पुरानी पेंशन उस समाजवादी सोच की उपज रही है जिसने राज्य की अवधारणा में नागरिकों को राज्य पर आश्रित बनाकर रखना चाहा है।आज भारत समाजवाद से आगे वैशविक आर्थिक शक्ति के रूप में अपनी जगह बना रहा है।1991 के बाद से जिन आर्थिक नीतियों पर देश आगे बढ़ा है वहां पुरानी पेंशन जैसे प्रकल्प स्वीकार नही हैं।सवाल यह भी कि 2004में इस पुरानी पेंशन को एनपीएस में बदलने की आवश्यकता ही क्यों पड़ी?असल मे 1990 तक आते आते केंद्र एवं राज्यों की अधिकतर सरकार अपने कार्मिकों को समय पर वेतन एवं पेंशन देनें की स्थिति में नही रह गई थीं।58 साल में रिटायरमेंट की आयु 60 फिर कुछ मामलों में 62 औऱ 65 तक कर दी गई। और यह भी तथ्य है कि आज औसतन आयु के मामले में भी 15 से 20 बर्ष का इजाफा हुआ है।ऐसे में पुरानी पेंशन का बोझ करदाताओं के साथ अन्याय तो है ही साथ ही लोकधन के समावेशी वितरण पर भी सवाल उठाता है।

    सेंटर फॉर मॉनिटरिंग इंडियन इकोनॉमी के मुताबिक राज्यों के अपने राजस्व में पेंशन खर्च का हिस्सा तेजी से बढ़ रहा है। यह 1990 तक 8.7 फीसद था और 2020-21 तक बढ़कर करीब 26 फीसद पर आ चुका था। चुनावी लिहाज से अगर राज्य पुरानी पेंशन पर वापिस आते हैं तो परिणाम बहुत खतरनाक हो सकते हैं। यह राज्यों की खस्ताहाल वित्तीय स्थिति को और जर्जर कर देगा।

    एसबीआई रिसर्च के आंकड़ों को देखे तो अधिकतर राज्य अपने कुल राजस्व संग्रहन का अधिकांश हिस्सा अपने कार्मिकों के वेतन,भत्ते,पेंशन पर खर्च कर रहे हैं। बिहार 58.9%उत्तराखंड 58.3%झारखंड 31.5%पश्चिम बंगाल 32.8% कुल राजस्व का खर्च सरकारी कार्मिकों पर खर्च हो रहा है।जिस राजस्थान ने एनपीएस को खत्म करने का निर्णय लिया है वहां हालात यह है कि कुल राजस्व के 58 हजार करोड़ में से 48 हजार करोड़ वेतन भत्तों औऱ 19 हजार करोड़ पेंशन पर खर्च करने पड़ते रहे हैं।उत्तरप्रदेश में कुल 6 लाख करोड़ के बजट में से 55 फीसद अपने कर्मचारियों के वेतन,पेंशन पर जा रहा है।पंजाब में पिछले पांच साल में 44 फीसद कर्ज बढ़ा है और वह अपने डेढ़ लाख करोड़ के बजट में से करीब 61 हजार करोड़ कर्मचारियों के वेतन पेंशन पर खर्च कर रही है।मप्र में भी करीब 52फीसद बजट की राशि इसी मद में व्यय की जा रही है।कुल मिलाकर सभी राज्यों की कहानी एक सी ही है।

    बुनियादी सवाल यह है कि क्या यह आर्थिक सामाजिक न्याय के नजरिये से उचित है? देश मे करीब 12 करोड़ लोग 60 साल से ऊपर है जिनमें से 90 फीसद को किसी प्रकार की संस्थागत पेंशन नही मिलती है।साढ़े पांच करोड़ विधवा महिलाएं इस देश मे है जो अफ्रीका औऱ तंजानिया की कुल आबादी से अधिक हैं।इनमें से अधिकतर आर्थिक सुरक्षा कवच से बाहर है।दुरूह सरकारी तंत्र की दया पर इनमें से कुछ को ही 300 से 600 रुपए मासिक पेंशन मिलती है।देश मे करीब 3 करोड़ दिव्यांग भी है जिन्हें कमोबेश इसी राशि के समतुल्य पेंशन नसीब होती है।31 मार्च 2022 तक एनपीएस में केंद्र सरकार के 2283671 एवं बंगाल छोड़कर राज्यों के मिलाकर कुल 7860657 सरकारी कर्मचारी पंजीबद्ध हैं।यह संख्या 2004 के बाद सरकारी सेवा में आने वालों की है शेष इस तिथि से पहले के भी कार्यरत है जिन्हें पुरानी पेंशन योजना 1972 के तहत लाभ मिलने हैं।एनपीएस में कारपोरेट के 140492,असंगठित क्षेत के 2291660,स्वावलंबन क्षेत्र के 4186943 लोग भी शामिल हैं।अकेले सरकारी कार्मिकों का 7860657 करोड़ एनपीएस में जमा है।जो जीडीपी का करीब 2.4 फीसद है।चुनावी मुहाने पर खड़े राज्यों को लगता है कि वे इस मामले से चुनाव जीत सकते है लेकिन ताजा उत्तरप्रदेश ,उत्तराखंड के उदाहरण सामने है जहां भाजपा को विपक्षी दल इस वादे के बाबजूद हरा नही पाए हैं।बेहतर होगा केंद्र सरकार की तरह सभी राज्य सरकारे भी इस मांग को राष्ट्रीय हितों के साथ विश्लेषित करने का साहस दिखाएं।ऐसा नही होना चाहिये कि विपक्षी दल भाजपा के विरुद्ध इसे एक चुनावी हथियार के रूप में प्रयुक्त करें।राज्यों को यह भी सोचना होगा कि उन्होंने 2004 में इस एनपीएस को अपनाया ही क्यों था?देश में वास्तविक जरूरतमंदों को सामाजिक आर्थिक सुरक्षा का कवच कैसे उपलब्ध हो इस दिशा में चुनावी नही एक सर्वस्पर्शी औऱ समावेशी दृष्टि की आवश्यकता है।एक बार एनपीएस के दायरे में शामिल कुल कर्मचारियों की संख्या और वास्तविक जरूरतमंदों की संख्या का तुलनात्मक अध्ययन भी किया जाना चाहिए।

  • रामराज को अब महाकाल का भी आशीर्वाद

    रामराज को अब महाकाल का भी आशीर्वाद


    क्रांतिदीप अलूने
    शिव सर्वगत अचल आत्मा है, शिव की आराधना शक्ति की आराधना है। शिव अव्यक्त है, उनके सहस्त्रों रूप है। भारत की विशिष्ट सांस्कृतिक विरासत को “श्री महाकाल लोक” में जिस सुंदर ढंग से प्रदर्शित किया गया है वह अतुलनीय है। यहाँ शांति और निश्चिन्तता के साकार रूप शिव ही शिव है। “श्री महाकाल लोक” सनातन संस्कृति की पौराणिकता,ऐतिहासिकता और गौरवशाली परम्परा का अद्भुत संगम और अद्वितीय नूतन रूप है। इसे जिस भव्यता और सुंदरता से प्रदर्शित किया गया है, वह चमत्कृत कर देता है।

    दरअसल प्राचीन पुण्य सलिला माँ क्षिप्रा के तट पर बसी प्राचीनतम नगरी उज्जैन का “श्री महाकाल लोक” भगवान शिव के भक्तों के स्वागत के लिए तैयार है। महाकाल मंदिर के नवनिर्मित कॉरिडोर को 108 स्तंभ पर बनाया गया है, 910 मीटर का ये पूरा महाकाल मंदिर इन स्तंभों पर टिका होगा। महाकवि कालिदास के महाकाव्य मेघदूत में महाकाल वन की परिकल्पना को जिस सुंदर ढंग से प्रस्तुत किया गया था, सैकड़ों वर्षों के बाद उसे साकार रूप दे दिया गया है। दुनिया भर से उज्जैन आने वाले शिव भक्तों के लिए यह शिव महिमा का सम्पूर्ण अनुभव देने का अनूठा और अद्भुत प्रयास है।

    “श्री महाकाल लोक” आधुनिक व्यवस्थाओं और संसाधनों से भी परिपूर्ण बनाया गया है। इसकी व्यवस्था इतनी उत्कृष्ट है कि भक्तों और पर्यटकों को अभिभूत कर देगी। मंदिरों के साथ ही पूजा सामग्री और हार-फूल की दुकानों को भी विशिष्ट तरीके से लाल पत्थर से बनाया गया है,जिन पर सुंदर नक्काशी की गई है। “श्री महाकाल लोक” के निर्माण से भगवान शिव की जिन कथाओं का महाभारत, वेदों तथा स्कंद पुराण के अवंती खंड में उल्लेख है, उनका जीवंत अनुभव शिव भक्त धर्मनगरी उज्जैन में कर पाएंगे। महाकाल ज्योतिर्लिंग एक मात्र ज्योतिर्लिंग है जो दक्षिणमुखी है। सनातन धर्म में महाकाल के दर्शन जीवन का एक महत्वपूर्ण और आवश्यक भाग माना जाता है, जिससे शांति मिलती है। इसलिए लाखों भक्त नित्य इस देव स्थान पर आते हैं। “श्री महाकाल लोक” के जरिए शिव के सभी स्वरूप एक स्थान पर लाना मध्यप्रदेश की शिवराज सरकार का ऐसा दुर्लभ कार्य है जिसकी और कोई मिसाल नहीं हो सकती।

    शिव मंगल, शुभ और सौभाग्यसूचक देव है, वे सदाशिव है, जो ब्रह्मा से सृष्टि रचवाते है, विष्णु से उसका पालन करवाते है तथा रूद्र से उसका नाश करवाते है। “श्री महाकाल लोक” में शिव, शम्भू, शशिशेखर के सहस्त्रों रूप और उनकी महिमा को सुंदर ढंग से उकेरा गया है। शिवलिंग सार्वभौमिक रूप से सृजन का प्रतीक है और “श्री महाकाल लोक” भारतीय सांस्कृतिक विरासत को साक्षात् प्रतिबिम्बित कर रहा है। यहाँ शिव का मृत्युंजय रूप भी है, जिसकी उपासना से मृत्यु को भी मात दी जा सकती है। यहाँ महादेव भी है जिसकी उपासना से हर ग्रह नियंत्रित रहता है।

    मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान स्वयं शिव भक्त है, वे सावन माह की शाही सवारी में कई वर्षों से शामिल होते रहे है। उनके कार्यकाल में वर्ष 2016 में उज्जैन में ऐतिहासिक सिंहस्थ सम्पन्न हुआ था। व्यवस्थाओं और संसाधनों की दृष्टि से इसे भारत का अब तक का सबसे सफलतम धार्मिक आयोजन माना जाता है। वे उज्जैन को धार्मिक पर्यटन नगरी के रूप में उभारने को लेकर प्रतिबद्ध रहे और इसी के दृष्टिगत सिंहस्थ के ठीक बाद वर्ष 2017 में “श्री महाकाल लोक” की योजना बनी। यह करोड़ों भारतीयों का सौभाग्य है कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी भी शिव भक्त है और उनके नेतृत्व में देश भर में आध्यात्मिक और धार्मिक स्थानों का निरंतर कायाकल्प हो रहा है। इस प्रकार प्रधानमंत्री की दूरदर्शिता तथा मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान की कार्यकुशलता से ही “श्री महाकाल लोक” का सपना साकार हो सका है।

    हम सभी जानते हैं कि महाकाल दर्शन का बड़ा धार्मिक महत्व है। इसे मोक्ष प्रदान करने वाला स्थल माना जाता है। स्कंदपुराण के अनुसार इसे मंगल ग्रह की उत्पत्ति का स्थान माना जाता है। उज्जैन का इतिहास अनादि काल से माना जाता है और राजनीतिक, आध्यात्मिक और साहित्यिक दृष्टि से भी इसे उत्कृष्ट स्थान माना जाता है। भारत की पौराणिक और धार्मिक महत्व की सात प्रसिद्ध पुरियों या नगरियों में उज्जैन प्रमुख स्थान रखता है बल्कि यहाँ साक्षात दैवीय शक्तियों का आज भी वास है। उज्जयिनी को विशाला, प्रतिकल्पा, कुमुदवती, स्वर्णश्रंगा और अमरावती के नाम से भी जाना जाता है तथा यहाँ स्थित महाकालेश्वर मंदिर भारत के बारह ज्योतिर्लिंगों में से एक है। पुराणों, महाभारत और कालिदास जैसे महाकवियों की रचनाओं में इस मंदिर का मनोहर वर्णन मिलता है।

    उज्जैन में “श्री महाकाल लोक” के निर्माण का फायदा न केवल शिव भक्तों को मिलेगा बल्कि रोजगार और पर्यटन की दृष्टि से भी यह फलदायी होगा। “श्री महाकाल लोक” में लाखों लोग एक साथ भ्रमण कर सकते हैं और रुकने की दृष्टि से भी इसे सर्व सुविधायुक्त बनाया गया है। अब शिव भक्त यहाँ महाकाल के दर्शन के लिए आएंगे भी और आराम से वे रुक भी सकेंगे। ऐसे में रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे। उज्जैन के पास मंदसौर का प्रसिद्ध पशुपतिनाथ का मंदिर, मांडू और ओंकारेश्वर भी है। अत: मध्य प्रदेश में मालवा का यह सम्पूर्ण क्षेत्र धार्मिक कॉरिडोर के रूप में पहचान बनाने में निश्चित ही सफल होगा। मालवा के क्षेत्र को शांत और मौसम के लिहाज से उत्कृष्ट माना जाता है, अब “श्री महाकाल लोक” की लोकप्रियता और आकर्षण से इस क्षेत्र में नये-नये उद्योग भी बढ़ेंगे। बहरहाल उज्जैन में नवनिर्मित “श्री महाकाल लोक” भारत के धार्मिक और आध्यात्मिक स्थानों के लिए उत्कृष्ट उदाहरण बनने जा रहा है। सांस्कृतिक विरासत,रोजगार और पर्यटन के अदभुत केंद्र के रूप में दुनिया भर में अपना विशिष्ट स्थान बनाने में यह सफल होगा, इसकी स्वर्णिम संभावनाएं है।