Category: मध्यप्रदेश

  • भाजपा की धुलाई का अंदाज समझिए नेताजी

    भाजपा की धुलाई का अंदाज समझिए नेताजी

    भारतीय जनता पार्टी के फैसलों को देखकर आज लोग हतप्रभ हैं। नरोत्तम मिश्रा जैसे दिग्गज की पतंग कटने से भाजपा के कार्यकर्ता और नेता सभी बौखलाए घूम रहे हैं। उन कार्यकर्ताओं की पूरी जमीन दरक गई है जिन्होंने नरोत्तम के लंबी दौड़ का घोड़ा मानकर अपनी पूरी जायदाद दांव पर लगा दी थी। भाजपा की राजनीति को जिन्होंने भी करीब से देखा है उन्होंने नरोत्तम की दबंगई से बैचेनी भी महसूस की है। ब्राह्मण राजनीति का संबल पाकर नरोत्तम सत्ता के जिस सत्रहवें आसमान पर पहुंच गए थे उसे देखकर कोई कल्पना भी नहीं कर सकता था कि पार्टी कभी उनका टिकिट काटने का फैसला भी ले सकती है। खुद को केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह का करीबी होने का अहसास भरने वाले नरोत्तम भी इस तरह की कोई उम्मीद नहीं कर रहे थे. उन्होंने अपनी चुनावी तैयारी पूरे आत्म विश्वास से चालू कर दी थी।

    भाजपा बार बार अपने नेताओं और कार्यकर्ताओं को संदेश देने का प्रयास कर रही है कि वे समय की मांग को देखते हुए अपने तौर तरीके बदलें। कांग्रेस के जमाने की राजनीतिक शैली की पूंछ पकड़कर चलने की कुनबे वाली राजनीति छोड़ें पर गमले में उगे हुए नेता ये समझने को राजी नहीं हैं। विधानसभा अध्यक्ष नरेन्द्र सिंह तोमर, पीडब्ल्यूडी मंत्री राकेश सिंह, पंचायत मंत्री प्रहलाद पटेल जैसे नेताओं को मध्यप्रदेश भेजकर भाजपा हाईकमान ने पार्टी की लाईन और लैंथ बदलने की कोशिश की लेकिन वह असफल रही। उमा भारती जैसी कद्दावर नेता को विदा करके संदेश देने का प्रयास किया कि भारत की राजनीतिक जरूरतें कुछ अलग हैं लेकिन कार्यकर्ता पुराना ढर्रा छोड़ने को तैयार नहीं हैं। गोपाल भार्गव , भूपेन्द्र सिंह, जयंत मलैया, हिम्मत कोठारी जैसे दिग्गजों को दर्शक दीर्घा में बिठाकर पार्टी ने अन्य नेताओं को नई राजनीति करने का संदेश दिया पर वे कांग्रेस के दिग्विजय सिंह की दगाबाजी को अपना माडल बनाकर चलने लगे। शिवराज सिंह चौहान को केन्द्र भेजकर पार्टी ने चाहा था मध्यप्रदेश में वह भाजपा को कांग्रेस की छत्रछाया बनकर चलने वाली पिछलग्गू छवि से मुक्त कर पाएगी। इसके बाद भी लगभग पांच लाख करोड़ रुपए डकारकर बैठे नेताओं के मुंह लगा खून उन्हें आदमखोर बनने से नहीं रोक पा रहा है। नरोत्तम के टिकिट कटने के बाद उनके समर्थकों ने जिस तरह भाजपा कार्यालय को बंधक बनाया, शहर के बाजार बंद कराने का प्रयास करके सरकार को ठेंगा दिखाया उससे लगता है कि नरोत्तम अपने पतन की नई इबारत लिख रहे हैं।

    आज भाजपा के सामने चुनौती है कि वह कांग्रेस के छोड़े गए पापों को भी ढोए और वैश्विक परिस्थितियों जन्य मंहगाई से भी जनता को बचाए। ऐसे में वह दंभी नेताओं की स्वयं का घर भरने वाली राजनीति को बर्दाश्त कैसे कर सकती है। जिन नेताओं को उसने घर बिठाया है वे सभी अरबों की जायदाद खड़ी करके किनारे किए जाने के बाद स्वयं को सहानुभूति का पात्र बताने का प्रयास कर रहे हैं। वे अपने स्थान पर अपनी औलादों को राजगद्दी दिलाने का पुरजोर प्रयास भी कर रहे हैं। भाजपा हाईकमान ने कई बार स्पष्ट कर दिया है कि वह कांग्रेस की तरह परिवारवादी पार्टी नहीं है। किसी कार्यकर्ता को केवल इसलिए सत्ता में नहीं उतारा जा सकता कि वह फलां राजनेता का बेटा या बेटी है। इसके बावजूद पार्टी के नेतागण चंद उदाहरणों का हवाला देकर अपनी नई पीढ़ी को अवसर दिए जाने की वकालत कर रहे हैं।

    मध्यप्रदेश भाजपा की प्रयोगशाला रही है। यहीं से भाजपा का संगठन परवान चढ़ा है। इसके बावजूद कुशाभाऊ ठाकरे,राजमाता विजयाराजे सिंधिया, वीरेन्द्र कुमार सखलेचा,प्यारेलाल खंडेलवाल,  कैलाश जोशी,सत्यनारायण जटिया, राघवजी भाई,जैसे अनेकानेक नेताओं ने जो भाजपा खडी की थी वह धीरे धीरे कांग्रेस में तब्दील हो गई। सुंदरलाल पटवा ने उस भाजपा को अर्जुनसिंह कांग्रेस की बी टीम बनाकर यहां केन्द्र विरोधी राजनीति की नींव रखी थी। कैलाश नारायण सारंग, बाबूलाल गौर, जैसे नेताओं को खड़ा करके कांग्रेस ने भाजपा को अपने अनुकूल बनाकर उपयोग किया। आज वह भाजपा कांग्रेस की लूटो और भागो की संस्कृति की वाहक बन गई है। दिग्विजय सिंह ने अपने गुरु अर्जुनसिंह की तरह शतरंज की चाल चलते हुए भाजपा को सत्ता में आने का अवसर देकर सोचा था कि समय आने पर हम इसे पटवा सरकार की तरह गिराकर दुबारा गद्दी संभाल लेंगें।उनका ये दांव वक्त की आंधी में धराशायी हो गया। अपने राजनीतिक जीवनकाल में उन्होंने भाजपा में कई नेता खड़े कर लिए थे जो हमेशा उनके हुकुम के गुलाम बने रहे। कैलाश विजयवर्गीय जैसे नेता तो खुलकर आज भी दिग्विजय सिंह का गुणगान करते नहीं थकते।

    भाजपा की इसी दुहरे मुंह वाली राजनीति देखकर हाईकमान के चिंतक और विचारक बैचेन हो गए हैं। मध्यप्रदेश की धीमी राजनीतिक विकास यात्रा, किसान कर्मण्य अवार्ड जीतकर फर्जी विकास के दावे करने वाली राजनीति की पोल राज्य की बैलेंसशीट बार बार खोल रही है। इसके बावजूद भ्रष्टाचार करके माफिया सरगना बन चुके दंभी नेताओं की धमकियों के सामने हाईकमान कई बार खुद को लाचार पाता रहा है। भाजपा संगठन की कमान युवा नेता विष्णुदत्त शर्मा को सौंपकर भाजपा ने सोचा था कि वे नई पीढ़ी के योग्य युवाओं को आगे लाएंगे पर वे ब्राह्रणवादी राजनीति के मोहपाश में इस कदर उलझे कि राजनीति के परिदृश्य में अलग थलग हो गए।

    भाजपा ने महाकाल लोक का निर्माण करके धर्म की राजनीति को सत्ता का सहायक बनाने का प्रयास किया है पर नरोत्तम मिश्रा दतिया में नवगृह मंदिर बनाकर राजनीति को धर्म का चेला बनाने चल निकले। आखिर कब तक भाजपा हाईकमान इस ब्लैकमेलिंग को बर्दाश्त कर सकता था। अपनी बारी आने पर उसने टिकिट काटकर संदेश देने का प्रयास किया है कि कार्यकर्ता यदि मालिक बनने का प्रयास करेगा तो फिर उसे उसकी भूमिका याद जरूर दिलाई जाएगी। शिवराज सिंह चौहान  की पिलपिली सरकार में मलखंभ पर चढ़कर राजनीति करने वाले नरोत्तम ये भूल गए हैं कि भाजपा आज विश्व की सबसे बड़ी राजनीतिक पार्टी है। उसके सामने चुनौती है कि वह भारत को विश्व की महाशक्ति बनाकर दिखलाए। किसी छुटभैये नेता की जयजयकार कराने के लिए भाजपा का मंच आज सीढ़ी नहीं बन सकता।हाईकमान ने पार्टी संगठन से कई नजरियों से छानबीन कराई और उसके बाद टिकिट काटने का फैसला लिया । जाहिर है कि कार्यकर्ताओं को इस फैसले का सम्मान करना पड़ेगा। आखिर कैप्टन को ये अधिकार तो होना ही चाहिए कि वह किस वक्त पर किस खिलाड़ी को कहां उतारे।

  • अब आधी आबादी को मिलेगा फैसले लेने का हक

    अब आधी आबादी को मिलेगा फैसले लेने का हक

    नारी शक्ति वंदन अधिनियम:

    मध्यप्रदेश विधानसभा में नारी शक्ति वंदन अधिनियम को पारित कर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की सरकार ने केवल एक विधायी पहल नहीं की, बल्कि उस व्यापक राष्ट्रीय एजेंडे को मजबूती दी है जिसमें भारत की आधी आबादी को आर्थिक और राजनीतिक रूप से निर्णायक भूमिका में लाने की परिकल्पना की गई है। यह अधिनियम महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण सुनिश्चित करने का प्रावधान रखता है और लोकतंत्र की संरचना में एक ऐसा बदलाव प्रस्तावित करता है, जो आने वाले समय में सत्ता और समाज दोनों के चरित्र को प्रभावित कर सकता है।


    भारतीय सामाजिक ढांचे की एक पुरानी सच्चाई यह रही है कि एक व्यक्ति कमाता है और कई लोग उसी आय पर निर्भर रहते हैं। इस व्यवस्था ने न केवल परिवारों की आर्थिक क्षमता को सीमित किया, बल्कि देश की उत्पादकता पर भी प्रतिकूल प्रभाव डाला। यदि महिलाओं को बड़े पैमाने पर कार्यबल और निर्णय-निर्माण की प्रक्रिया में शामिल किया जाता है, तो यह केवल सामाजिक न्याय नहीं बल्कि आर्थिक विकास का भी प्रश्न बन जाता है। नारी शक्ति वंदन अधिनियम इसी सोच को संस्थागत रूप देने का प्रयास करता है।


    मध्यप्रदेश और कई अन्य राज्यों में पहले ही लाड़ली बहना सरीखी योजनाएं लाकर भारतीय जनता पार्टी ने महिलाओं को विकास की मुख्य धारा में लाने का प्रयास किया था। ये योजनाएं सफलता पूर्वक चलती जा रही हैं। मुख्यमंत्री डाक्टर मोहन यादव ने सदन में भी संकल्प दुहराया है कि उनकी सरकार महिलाओं को दी जाने वाली राशि बढ़ाकर छह हजार रुपए तक कर देगी। जबकि राज्य सरकार के पास आर्थिक संसाधन पर्याप्त नहीं हैं। जाहिर है कि सरकार अपनी इस निर्णय प्रक्रिया में महिलाओं की भागीदारी भी बढ़ाना चाहती है जो वस्तुस्थिति स्वयं देखकर फैसला कर पाएंगी। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व वाली केन्द्र की भाजपा सरकार ने इस विधेयक का जो हश्र ऊंचे सदनों में देखा उसके बाद अब उनकी पार्टी ने राज्यों से एक तरह जन जागरण का ही प्रयास शुरु कर दिया है। सदन में प्रमुख विपक्षी दल कांग्रेस ने परिसीमन को मुद्दा बनाकर बहिर्गमन कर दिया और प्रस्ताव पारित नहीं किया इससे ये संदेश निचले स्तर तक चला गया है कि कांग्रेस आजादी के बाद से महिलाओं को सत्ता में संवैधानिक भागीदारी देने में अडंगा लगाती रही है। छुटपुट महिला नेतृत्व को अपनी उपलब्धियां बताते हुए कांग्रेस ने जो बात सदन में रखी उसका खमियाजा उसे आगामी चुनावी राजनीति में उठाना पड़ सकता है।
    स्थानीय निकायों—पंचायतों और नगरपालिकाओं—में महिलाओं को आरक्षण का अनुभव पहले ही सकारात्मक संकेत दे चुका है। अनेक महिला जनप्रतिनिधियों ने प्रशासनिक दक्षता और जनसरोकारों के प्रति संवेदनशीलता का परिचय दिया है। लेकिन विधायिका के उच्च स्तर पर उनकी भागीदारी अब तक सीमित रही है। ऐसे में यह अधिनियम महिलाओं को नीति-निर्माण की अग्रिम पंक्ति में लाने का अवसर प्रदान करता है, जिससे शासन की प्राथमिकताओं में भी संतुलन आने की उम्मीद की जा सकती है।


    राजनीतिक दृष्टि से यह कदम सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी के लिए भी महत्वपूर्ण है, जो लंबे समय से महिला सशक्तिकरण को अपने प्रमुख एजेंडे के रूप में प्रस्तुत करती रही है। यह पहल महिला मतदाताओं के बीच उसकी पकड़ को मजबूत कर सकती है। हालांकि, विपक्ष—विशेषकर भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस—इसे राजनीतिक लाभ के नजरिए से देखता है और इसके क्रियान्वयन को लेकर गंभीर सवाल उठा रहा है।


    यहीं से इस अधिनियम की सबसे जटिल और विवादास्पद परत सामने आती है—परिसीमन का प्रावधान। सरकार ने महिला आरक्षण को आगामी जनगणना और उसके बाद होने वाले परिसीमन से जोड़ दिया है। इसका सीधा अर्थ यह है कि आरक्षण तत्काल लागू नहीं होगा, बल्कि निर्वाचन क्षेत्रों के पुनर्निर्धारण के बाद ही प्रभावी होगा। यही कारण है कि यह नीति जितनी ऐतिहासिक कही जा रही है, उतनी ही राजनीतिक बहस का केंद्र भी बन गई है।


    कांग्रेस का तर्क है कि महिलाओं को उनका अधिकार देने के लिए परिसीमन का इंतजार करना अनावश्यक है। यदि सरकार की मंशा स्पष्ट है, तो वर्तमान सीटों पर ही 33 प्रतिशत आरक्षण लागू किया जा सकता है। विपक्ष इसे “विलंबित न्याय” के रूप में देखता है और आशंका जताता है कि यह प्रावधान महिलाओं को तत्काल लाभ से वंचित कर सकता है।


    इसके विपरीत, भाजपा इस निर्णय को दीर्घकालिक और रणनीतिक दृष्टि से उचित ठहराती है। उसका कहना है कि परिसीमन के बाद संसद और विधानसभाओं की सीटों में वृद्धि संभावित है। ऐसे में यदि आरक्षण उस समय लागू किया जाता है, तो महिलाओं को न केवल प्रतिशत के आधार पर बल्कि वास्तविक संख्या में भी अधिक प्रतिनिधित्व मिलेगा। यह तर्क अधिनियम को केवल प्रतीकात्मक न रखकर व्यापक प्रभाव वाला बनाने की कोशिश के रूप में प्रस्तुत किया जा रहा है।


    हालांकि, इस पूरे विमर्श में सबसे बड़ा प्रश्न समय-सीमा का है। भारत में आखिरी परिसीमन 2002 में हुआ था और उसके बाद 2026 तक इस पर रोक रही है। यदि नई जनगणना और परिसीमन में देरी होती है, तो महिला आरक्षण भी स्वतः टलता जाएगा। ऐसे में यह आशंका निराधार नहीं है कि यह ऐतिहासिक पहल कागजों तक सीमित रह सकती है, जब तक कि इसे समयबद्ध तरीके से लागू न किया जाए।
    परिसीमन का एक और आयाम क्षेत्रीय संतुलन से जुड़ा है। नई जनसंख्या के आधार पर सीटों का पुनर्वितरण कुछ राज्यों को अधिक प्रतिनिधित्व देगा, तो कुछ को अपेक्षाकृत कम। ऐसे में महिला आरक्षण इस व्यापक राजनीतिक पुनर्संरचना का हिस्सा बन जाएगा, जहां लैंगिक समानता के साथ-साथ संघीय संतुलन का प्रश्न भी जुड़ जाएगा।


    इन तमाम बहसों के बीच यह भी स्वीकार करना होगा कि केवल आरक्षण ही महिलाओं के वास्तविक सशक्तिकरण की गारंटी नहीं है। शिक्षा, राजनीतिक प्रशिक्षण और सामाजिक स्वीकृति जैसे कारक भी उतने ही महत्वपूर्ण हैं। कई बार ‘प्रॉक्सी प्रतिनिधित्व’ की समस्या सामने आती है, जिसे दूर किए बिना इस पहल के उद्देश्य अधूरे रह सकते हैं।


    अंततः, नारी शक्ति वंदन अधिनियम को भारत की विकास यात्रा के एक महत्वपूर्ण पड़ाव के रूप में देखा जाना चाहिए। यह आधी आबादी को केवल अधिकार देने की नहीं, बल्कि उन्हें देश की आर्थिक और राजनीतिक शक्ति का सक्रिय भागीदार बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है। अब यह सरकार और व्यवस्था पर निर्भर करेगा कि वह परिसीमन जैसी प्रक्रियाओं को कितनी गंभीरता और गति से पूरा करती है, ताकि यह ऐतिहासिक पहल अपने वास्तविक उद्देश्य को प्राप्त कर सके और भारतीय लोकतंत्र को अधिक समावेशी बना सके।

  • जनता स्वस्थ रहे इसलिए ज्यादा डाक्टर बना रहेःराजेन्द्र शुक्ला

    जनता स्वस्थ रहे इसलिए ज्यादा डाक्टर बना रहेःराजेन्द्र शुक्ला

    भोपाल, 26 फरवरी(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)। राजेन्द्र शुक्ला ने आज विधानसभा में प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ बनाने के लिए सरकार की प्रतिबद्धता दोहराते हुए कहा कि आमजन को गुणवत्तापूर्ण और सुलभ उपचार उपलब्ध कराना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य ढांचे के विस्तार, विशेषज्ञ डॉक्टरों की नियुक्ति और आधुनिक उपकरणों की उपलब्धता के लिए व्यापक कार्ययोजना पर अमल किया जा रहा है।उन्होंने कहा कि प्रदेश में डाक्टरों की कमी दूर करने के लिए एमबीबीएस में 1000 औ पोस्ट ग्रेजुएट विशेषज्ञता के लिए आठ सौ सीटें बढ़ाई गईं हैं। भारत सरकार हर लोकसभा क्षेत्र में एक मेडीकल कालेज खोलना सुनिश्चित कर रही है। इससे आने वाले समय में लोगों को डाक्टरी सुविधाएं सुलभ हो जाएंगी।

    विधानसभा में अपने वक्तव्य के दौरान मंत्री ने बताया कि जिला अस्पतालों और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में सुविधाओं के उन्नयन का कार्य तेज गति से चल रहा है। कई अस्पतालों में आईसीयू और मातृ-शिशु वार्डों का विस्तार किया गया है। उन्होंने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में डॉक्टरों और नर्सिंग स्टाफ की कमी दूर करने के लिए विशेष भर्ती अभियान चलाया जा रहा है, जिससे दूरस्थ अंचलों के मरीजों को भी बेहतर उपचार मिल सके।

    मंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि गंभीर बीमारियों के उपचार के लिए राज्य सरकार द्वारा संचालित योजनाओं के दायरे को बढ़ाया गया है। आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के मरीजों को निशुल्क उपचार उपलब्ध कराने के लिए बजट में पर्याप्त प्रावधान किए गए हैं। उन्होंने कहा कि दवाओं और जांच सुविधाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करने हेतु अस्पतालों की नियमित मॉनिटरिंग की जा रही है।

    विपक्ष के सवालों का जवाब देते हुए श्री शुक्ला ने कहा कि स्वास्थ्य सेवाओं में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए डिजिटल मॉनिटरिंग सिस्टम लागू किया जा रहा है। टेलीमेडिसिन सेवाओं का विस्तार कर विशेषज्ञ चिकित्सकों को ग्रामीण क्षेत्रों से जोड़ा जा रहा है।

    अंत में उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि सरकार के समन्वित प्रयासों से प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था में उल्लेखनीय सुधार होगा और आम नागरिकों को बेहतर एवं त्वरित चिकित्सा सेवाएं प्राप्त होंगी।

  • लोक कल्याण के लिए सख्त कार्रवाई बोले पीडब्ल्यूडी मंत्री राकेश सिंह

    लोक कल्याण के लिए सख्त कार्रवाई बोले पीडब्ल्यूडी मंत्री राकेश सिंह

    भोपाल, 25 फरवरी (प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)। मध्य प्रदेश विधानसभा के बजट सत्र में लोक निर्माण विभाग की अनुदान मांगों पर चर्चा के दौरान प्रदेश के लोक निर्माण मंत्री राकेश सिंह ने विभागीय कार्यों, गुणवत्ता नियंत्रण और पारदर्शिता पर विस्तृत वक्तव्य दिया। उन्होंने स्पष्ट कहा कि सड़क और पुल निर्माण में किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी तथा जवाबदेही तय कर सख्त कार्रवाई की जाएगी। हमने लोक निर्माण से लोक कल्याण का जो लक्ष्य तय किया है उसे सार्थक करने के लिए आवश्यक कार्रवाई की जा रही है।

    मंत्री ने सदन को अवगत कराया कि पिछले 13 महीनों में विभाग द्वारा 875 से अधिक औचक निरीक्षण किए गए। इन निरीक्षणों के आधार पर चार इंजीनियरों को निलंबित किया गया और 25 ठेकेदारों को ब्लैकलिस्ट किया गया है। उन्होंने बताया कि गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए थर्ड-पार्टी ऑडिट प्रणाली को और सुदृढ़ किया जा रहा है तथा प्रत्येक बड़े कार्य के लिए चरणबद्ध तकनीकी परीक्षण अनिवार्य किए गए हैं। निर्माण कार्यों में मानक सामग्री के उपयोग और समयसीमा का पालन सुनिश्चित करने के लिए जिला स्तर पर मॉनिटरिंग तंत्र सक्रिय किया गया है।

    भोपाल में चर्चित तथाकथित “90 डिग्री पुल” के संदर्भ में मंत्री ने कहा कि पुल का वास्तविक कोण 119 डिग्री है और इसे स्वीकृत डिजाइन के अनुरूप बनाया गया है। तकनीकी पेचीगदियों के बीच इस पुल को इसी प्रकार बना पाना संभव हुआ है। उन्होंने बताया कि मामले की तकनीकी जांच कराई गई है और यदि कहीं प्रक्रिया में त्रुटि पाई जाती है तो संबंधित एजेंसी के विरुद्ध दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी। मंत्री ने यह भी जोड़ा कि भविष्य में डिजाइन स्वीकृति और साइट सुपरविजन के बीच बेहतर समन्वय के लिए विशेष दिशानिर्देश जारी किए जा रहे हैं।

    विपक्ष की ओर से सड़क निर्माण की गुणवत्ता, गड्ढों की समस्या और अधूरी परियोजनाओं को लेकर प्रश्न उठाए गए। कांग्रेस विधायक महेश परमार ने इंदौर-भोपाल क्षेत्र की परियोजनाओं का उल्लेख करते हुए जवाब मांगा। इस पर मंत्री ने स्पष्ट किया कि मेट्रो परियोजना लोक निर्माण विभाग के अधीन नहीं आती, जबकि विभागीय सड़कों और पुलों पर निर्धारित भारतीय सड़क कांग्रेस (IRC) मानकों के अनुसार कार्य कराया जा रहा है। उन्होंने बताया कि वर्ष 2026-27 के लिए विभाग ने रखरखाव मद में अतिरिक्त प्रावधान का प्रस्ताव रखा है, ताकि गड्ढा-मुक्त सड़कों का लक्ष्य समयबद्ध तरीके से हासिल किया जा सके।

    चर्चा के दौरान कांग्रेस विधायक हेमंत कटारे की टिप्पणी पर मंत्री ने कहा कि सदन में गंभीर विषयों पर रचनात्मक बहस होनी चाहिए। उन्होंने सभी दलों से आग्रह किया कि विकास कार्यों को राजनीति से ऊपर उठकर देखा जाए। मंत्री ने यह भी बताया कि लोक शिकायतों के त्वरित निवारण के लिए ‘लोकपथ’ एप को अपग्रेड किया गया है, जिससे नागरिक सीधे फोटो और लोकेशन टैग के साथ शिकायत दर्ज कर सकते हैं। इसके अतिरिक्त विभाग ‘पीएम गति शक्ति’ प्लेटफॉर्म पर परियोजनाओं का डेटा एकीकृत कर रहा है, ताकि विभिन्न विभागों के बीच समन्वय बढ़े और दोहराव से बचा जा सके।

    मंत्री राकेश सिंह ने यह जानकारी भी दी कि ग्रामीण संपर्क सड़कों के उन्नयन के लिए चरणबद्ध योजना तैयार की गई है, जिसके तहत दूरस्थ और आदिवासी अंचलों को जिला मुख्यालय से जोड़ने वाली सड़कों को प्राथमिकता दी जाएगी। उन्होंने बताया कि वर्ष 2025-26 में हजारों किलोमीटर सड़कों के नवीनीकरण और मजबूतीकरण का लक्ष्य निर्धारित किया गया है, जिससे परिवहन लागत घटेगी और कृषि-उद्योग गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा। साथ ही, सड़क सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए ब्लैक स्पॉट चिन्हित कर सुधारात्मक कार्य किए जा रहे हैं।

    सदन में सड़कों पर आवारा पशुओं से दुर्घटनाओं की बढ़ती घटनाओं का मुद्दा भी उठा। मंत्री ने कहा कि यह विषय बहु-विभागीय है और स्थानीय निकायों व पशुपालन विभाग के साथ समन्वय स्थापित कर समाधान की दिशा में काम किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि प्रमुख राजमार्गों पर चेतावनी संकेतक, रिफ्लेक्टर और प्रकाश व्यवस्था को सुदृढ़ करने के निर्देश दिए गए हैं।

    विधानसभा में दिए गए इस विस्तृत वक्तव्य के माध्यम से मंत्री राकेश सिंह ने जहां विभाग की उपलब्धियों को रेखांकित किया, वहीं कमियों को दूर करने के लिए ठोस कदम उठाने का भरोसा भी दिलाया। बजट सत्र में लोक निर्माण विभाग पर हुई यह चर्चा प्रदेश में अधोसंरचना विकास की दिशा और सरकार की प्राथमिकताओं को स्पष्ट करती है।

  • कांग्रेसियों की औकात से बहुत बड़ा है कार्पोरेट का योगदान

    कांग्रेसियों की औकात से बहुत बड़ा है कार्पोरेट का योगदान


    -आलोक सिंघई-
    मध्यप्रदेश की सत्तारूढ़ भाजपा और प्रमुख विपक्षी कांग्रेस के बीच इन दिनों तनातनी का दौर चल रहा है। कई शहरों में आपसी गुत्थमगुत्थी आज की ताजा खबर है। इंदौर में कांग्रेसियों ने हमला किया तो भोपाल में भाजपाईयों ने कांग्रेस कमेटी के दफ्तर में कोहराम मचा दिया। ये सारा मामला उस मुद्दे पर जोर पकड़ा जिसमें अडानी का नाम आने पर भाजपा के वरिष्ठ नेता और संसदीय कार्य मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने कांग्रेस के नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार को औकात में रहने की नसीहत दे दी थी। कहा ये गया कि दिल्ली की ए आई समिट में कांग्रेस के अर्ध नग्न प्रदर्शन का विरोध है।कैलाश पिछले कुछ दिनों से इंदौर के भागीरथपुरा में गंदा पेयजल सप्लाई होने से होने वाली पैंतीस से चालीस मौतों के बाद से निशाने पर चल रहे हैं। भाजपा की अंदरूनी राजनीति भी कैलाश के अनुकूल नहीं है। ऐसे में उनके तैश में दिए बयान को उनकी दंभोक्ति माना गया। सदन में हंगामे के बाद उन्होंने अपने कथन पर दुख व्यक्त किया और मुख्यमंत्री ने भी माफी मांगी। जाने अन जाने में हुए इस संवाद ने न केवल मध्यप्रदेश बल्कि पूरे देश को सोचने पर मजबूर किया है कि कांग्रेसियों की मुफ्तखोरी और भिखारी सोच को आखिर कैसे बदला जा सकता है। अनुत्पादक सरकारी सेक्टर और डिफाल्टरों का कर्जा माफ करने वाली फोकटिया सोच को कुचलकर उत्पादकता बढ़ाने वाली सोच को कैसे विकसित किया जा सकता है।

    कांग्रेस के राजपुत्र राहुल गांधी को देश के लोग यदि पप्पू कहते हैं तो कांग्रेसी इसे भाजपाईयों का दुष्प्रचार कहकर आगे बढ़ जाते हैं। जवाहर लाल नेहरू के बाद श्रीमती इंदिरा गांधी ने जिस सरकारीकरण की नींव रखी थी उसकी वजह से देश की विकास दर बहुत धीमी गति से बढ़ सकी है। आज 357.14 लाख करोड़ रुपये (GDP USD 4.18 ट्रिलियन) अर्थव्यवस्था वाला हिंदुस्तान तब सामने आया है जब उसने 2026 की शुरुआत तक कुल सार्वजनिक ऋण (आंतरिक और बाहरी) लगभग 197-200 लाख करोड़ रुपये के बीच ले रखा है। हमें सोचने पर मजबूर होना ही पड़ेगा कि कथित आजादी के लगभग 78 सालों बात तक हम करते क्या रहे हैं। लगभग 147 करोड़ आबादी वाले जिस देश में लगभग सौ करोड़ कार्यबल मौजूद हो उसका उपयोग अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने में क्यों नहीं किया जा सका इस मुद्दे पर हमें विचार अवश्य करना होगा। आजादी के बाद यदि हमने केवल डेढ़ सौ लाख करोड़ रुपयों का योगदान किया तो इसकी वजह क्या रही होगी हमें इस पर अवश्य विचार करना होगा।

    भारत सरकार ने देश के लगभग पचास लाख लोगों को नौकरी दे ऱखी है। जबकि इसके विपरीत कार्पोरेट सेक्टर और निजी क्षेत्र मिलकर शेष लगभग सत्तर लाख परिवारों का जीवन रोशन कर रहा है । टाटा समूह में 7,50,000 कर्मचारी हैं। एल एंड टी में 3,38,000 लोग कार्यरत हैं। इंफोसिस में 2,60,000 कर्मचारी हैं। महिंद्रा एंड महिंद्रा के 2,60,000 कर्मचारी हैं। रिलायंस इंडस्ट्रीज के 2,36,000 लोग हैं। विप्रो में 2,10,000 कर्मचारी हैं। एचसीएल में 1,67,000 कर्मचारी हैं। एचडीएफसी बैंक में 1,20,000 कर्मचारी हैं। आईसीआईसीआई बैंक में 97,000 कर्मचारी हैं। टीवीएस समूह में 60,000 कर्मचारी हैं। मात्र ये दस कंपनियां मिलकर लगभग 25 लाख भारतीयों को रोजगार देती हैं वो भी सम्मानजनक वेतन के साथ।

    ये केवल वो आँकड़े हैं जो इनके डायरेक्ट पेरोल पर हैं। इनके अलावा ऑफ रोल्स, ऐसोशिएट्स, डीलर्स, एजेंट्स, इनके प्रोडक्ट्स से जुड़े सहायक प्रोडक्ट्स की कंपनियां। इनके सहारे जन्मी पैकेजिंग कंपनियां, ट्रांसपोर्ट सेक्टर। लिस्ट बहुत लंबी है। किसी कंपनी के अगर डायरेक्ट 1 लाख कर्मचारी हैं तो मान के चलिए कि कम से कम चार लाख ऐसे हैं जिनका चूल्हा उसी कम्पनी के कारण चलता है। यहां बात मात्र 10 बड़ी कंपनियों की हो रही है। हजारों ऐसी प्राइवेट कंपनियां हैं जो देश में रोजगार पैदा कर रही हैं। ये 25 लाख कॉर्पोरेट नौकरियां भारत में पिछले 78 वर्षों में सृजित कुल केंद्र सरकार की नौकरियों (48.34 लाख) के आधे से अधिक हैं।

    राहुल गांधी जिस तरह अडानी अंबानी की सरकार कहकर मोदी सरकार पर कीचड़ उछालते फिरते हैं इनमें से अधिकतर घराने तो कभी कांग्रेसियों की काली कमाई और संरक्षण से ही शुरु हुए थे। सरकारी खजाने से चुराया धन कार्पोरेट घरानों में लगाकर ब्याज खाने की आदत के कारण ही नेहरू गांधी परिवार आज एक अभेद्य विरासत वाला राजघराना बन सका है। बार बार उन्हें समझाया जाता है कि निजी क्षेत्र का सम्मान करें, उन्हें गालियों से मत नवाजें। अपने राजनैतिक एजेंडे और पसंद नापसंद के कारण उन लोगों का मजाक ना उड़ायें जो देश के विकास में बहुत बड़े सहभागी हैं। नौकरी देने वालों के लिए जयकार जयकार भले ना करें लेकिन उन्हें इज़्ज़त देना तो सीखिए।वे लाखों भारतीयों के लिए आजीविका पैदा कर रहे हैं।

    भारत के आर्थिक इतिहास पर दृष्टि डालें तो स्वतंत्रता के बाद सार्वजनिक क्षेत्र को मजबूत करने की नीति अपनाई गई थी। बाद के दशकों में उदारीकरण और निजीकरण की प्रक्रिया शुरू हुई, जिसने अर्थव्यवस्था को नई दिशा दी। आज आवश्यकता इस बात की है कि सरकारी और निजी—दोनों क्षेत्रों की ताकतों का संतुलित उपयोग हो।

    मध्यप्रदेश की हालिया राजनीतिक तनातनी इसी व्यापक राष्ट्रीय बहस का एक स्थानीय प्रतिबिंब है। व्यक्तिगत कटाक्ष और टकराव से न तो विकास का रास्ता निकलेगा और न ही लोकतांत्रिक गरिमा की रक्षा होगी। राज्य और देश, दोनों के हित में यही होगा कि राजनीतिक दल विचारधारात्मक मतभेदों को शालीन संवाद के माध्यम से सामने रखें और आर्थिक नीति पर ठोस, तथ्याधारित चर्चा करें।

    आखिरकार भारत जैसे 147 करोड़ से अधिक आबादी वाले देश के लिए सबसे बड़ी चुनौती है—रोजगार, उत्पादकता और वैश्विक प्रतिस्पर्धा। यदि आने वाली पीढ़ियों के लिए समृद्ध भविष्य का निर्माण करना है, तो सरकार और निजी क्षेत्र को परस्पर विरोधी ध्रुवों की तरह नहीं, बल्कि सहयोगी साझेदारों की तरह देखना होगा। राजनीति की गर्मी के बीच यही संतुलित दृष्टिकोण देश को आगे ले जा सकता है।

  • अब दुनिया भर में फैल रही एकात्म मानवतावाद की खुशबू

    अब दुनिया भर में फैल रही एकात्म मानवतावाद की खुशबू

    • डॉ. मोहन यादव

    व्यक्ति से समाज और समाज से राष्ट्र निर्माण का मार्ग दिखाने वाले , विलक्षण व्यक्तित्व के धनी , एकात्म मानव दर्शन और अंत्योदय के प्रणेता पं . दीनदयाल उपाध्याय जी के चरणों में कोटिशः नमन।

    पं . दीनदयाल जी का जीवन भारत राष्ट्र को दिशा देने वाला प्रकाश स्तंभ है। वे एक ऐसे ऋषि राजनेता थे जो समाज, संस्कृति और राष्ट्र के समग्र उत्थान के लिए समर्पित रहे। उन्होंने राजनीति को राष्ट्रधर्म की साधना का माध्यम माना। उनका स्पष्ट मत था कि स्वतंत्र भारत की यात्रा भारतीय दर्शन , संस्कृति और परंपरा के अनुरूप होनी चाहिए।

    पं . दीनदयाल जी ने राजनीतिक चिंतन को भारतीय मूल्यों से जोड़ते हुए एकात्म मानव दर्शन का सूत्र दिया। इसमें व्यक्ति , समाज , राष्ट्र और सृष्टि के बीच समन्वय और संतुलन समाहित है। यह जीवन और संपूर्ण सृष्टि को एक सूत्र में पिरोता है। यही दर्शन व्यष्टि से समष्टि की रचना करता है। इसमें श्रीकृष्ण के वसुधैव कुटुम्बकम के भाव से लेकर आज के वैश्विक परिदृश्य का समावेश है।

    पं . दीनदयाल जी भारत के भविष्य की कल्पना चतुर्पुरुषार्थ -धर्म , अर्थ , काम और मोक्ष के आधार पर की। उनका विश्वास था कि इन चारों का संतुलन ही व्यक्ति और समाज को पूर्णता की ओर ले जा सकता है। यदि व्यक्ति और समाज को विकास के समान अवसर दिए जाएँ , तो स्वावलंबी और समर्थ समाज का निर्माण संभव है। पं . दीनदयाल जी का मानना था कि राजनीति का अंतिम लक्ष्य सशक्त , समरस और स्वाभिमानी राष्ट्र का निर्माण है। उनका विकास मॉडल केवल आर्थिक प्रगति तक सीमित नहीं था , बल्कि उसमें सांस्कृतिक चेतना , सामाजिक समरसता और आध्यात्मिक संतुलन का समावेश था। वे चाहते थे कि विकास का लाभ अंतिम पंक्ति के अंतिम व्यक्ति तक पहुँचे , तभी वह सच्चा विकास कहलाएगा। यही अंत्योदय का भाव है।

    हमारे यशस्वी प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व में भारत जिस विकास पथ पर अग्रसर है , उसके मूल में पं . दीनदयाल जी का चिंतन है। विरासत से विकास , आत्मनिर्भर भारत , वोकल फॉर लोकल और सबका साथ – सबका विकास , यह सभी एकात्म मानव दर्शन के आधुनिक रूप हैं। प्रधानमंत्री श्री मोदी जी का संकल्प है कि वर्ष 2047 , स्वतंत्रता के शताब्दी वर्ष तक भारत को विश्व की सर्वोच्च शक्ति के रूप में स्थापित किया जाए। यह संकल्प पं . दीनदयाल जी के स्वप्निल भारत की ही साकार अभिव्यक्ति है।

    मुझे बताते हुए प्रसन्नता है कि प्रधानमंत्री श्री मोदी जी के आत्मनिर्भर और विकसित भारत निर्माण की परिकल्पना को मूर्तरूप देने की दिशा में प्रदेश के प्रत्येक अंचल को विकास की मुख्य धारा से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है। प्रदेश के हर क्षेत्र की क्षमता , मेधा और दक्षता को अवसर प्रदान करने के लिए जहां रीजनल इंडस्ट्री कॉन्क्लेव का नवाचार किया गया, वहीं भोपाल में संपन्न हुई ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट से स्थानीय उद्योगों को अंतर्राष्ट्रीय स्तर तक पहुंचाने का प्रयास किया गया। निवेश के लिये हमने यूके , जर्मनी , जापान और दावोस आदि यात्राएं कीं और हैदराबाद , कोयंबटूर सहित मुंबई में रोड-शो के माध्यम से उद्योगपतियों को आमंत्रित किया। यह क्षेत्रीय से वैश्विक स्तर तक उद्योग को जोड़ने का पहला सशक्त प्रयास है।

    मुझे यह बताते हुए संतोष है कि माननीय प्रधानमंत्री श्री मोदी जी के मार्गदर्शन में मध्यप्रदेश में पं . दीनदयाल उपाध्याय जी के चिंतन को व्यवहार में उतारने का प्रयत्न किया जा रहा है। समरस, संवेदनशील और उत्तरदायी शासन के माध्यम से अंतिम व्यक्ति तक योजनाएं और विकास के लक्ष्य धरातल पर पहुंच रहे हैं। प्रदेश में गरीब कल्याण, किसान कल्याण, युवा शक्ति और नारी सशक्तिकरण को केन्द्र में रखकर 4 मिशन के माध्यम से कार्य किया जा रहा है। इससे समाज के सभी वर्गों के कल्याण का लक्ष्य पूर्ण होगा।

    पं . दीनदयाल जी ने आर्थिक विकास के लिए कृषि , उद्योग , परिवहन , व्यापार समाज , सुरक्षा एवं सेवा का एक स्पष्ट और व्यावहारिक क्रम बताया। इस क्रम में कृषि प्रधान देश भारत में खेती को प्रथम स्थान देने की आवश्यकता व्यक्त की। उनका मानना था यदि देश में कृषि सुदृढ़ होगी , तो किसानों की आय बढ़ेगी , ग्रामीण जीवन में स्थिरता आएगी और उद्योगों को कच्चा माल एवं श्रम दोनों सहज रूप से उपलब्ध होगा। इससे किसान, उपभोक्ता और समाज तीनों का संतुलन बना रहेगा। पं . दीनदयाल जी खेती की मजबूती और किसानों की समृद्धि को समग्र विकास का आधार मानते थे। मुझे यह बताते हुए संतोष है कि मध्यप्रदेश में प्रधानमंत्री श्री मोदी जी के मार्गदर्शन में किसानों के स्वाभिमान, सुरक्षित जीवन और आत्मनिर्भरता को केन्द्र में रखकर वर्ष 2026 को कृषक कल्याण वर्ष के रूप में मनाया जा रहा है। इसमें आधुनिक तकनीक , उन्नत बीज , सिंचाई , भंडारण और बाजार तक बेहतर पहुंच के माध्यम से खेती को लाभ का व्यवसाय बनाया जाएगा। कृषि आजीविका के साधन के साथ प्रदेश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ है। कृषि क्षेत्र के सशक्तिकरण में कोई कसर नहीं छोड़ी जाएगी।

    मुझे बताते हुए प्रसन्नता है कि मध्यप्रदेश देश का पहला राज्य है जिसने वर्ष 2025-26 किसानों के कल्याण के लिए समर्पित किया है। मध्यप्रदेश में पार्वती-कालीसिंध-चंबल तथा केन-बेतवा नदी लिंक राष्ट्रीय परियोजना सहित ताप्ती ग्राउंड वॉटर रिचार्ज मेगा परियोजना से प्रदेश के 25 जिलों में 16 लाख हेक्टेयर से अधिक अतिरिक्त कृषि रकबा सिंचित होगा। प्रदेश के किसानों के समग्र कल्याण के लिए हर जरूरी कदम उठाया जायेगा।

    प्रदेश में श्रीअन्न , सरसों और चना अनुसंधान केंद्र की स्थापना की जा रही है। इससे श्रीअन्न का उत्पादन और पोषण सुरक्षा को नई ऊंचाई मिलेगी। इन केंद्रों के जरिए फसलों की गुणवत्ता और पैदावार बढ़ाने पर विशेष बल दिया जाएगा। प्रदेश के 30 लाख से अधिक किसानों को अगले तीन साल में सोलर पॉवर पम्प दिये जायेंगे। प्रदेश में सिंचाई का रकबा 65 लाख हैक्टेयर से बढ़ाकर 1 00 लाख हैक्टेयर किये जाने का लक्ष्य है।

    पं . दीनदयाल उपाध्याय जी ने स्वाभिमानी, स्वावलंबी और विश्व कल्याण में अग्रणी भारत की कल्पना की थी। माननीय प्रधानमंत्री श्री मोदी जी के नेतृत्व में देश इसी दिशा में आगे बढ़ रहा है। उनका जीवन और दर्शन हम सबको राष्ट्रधर्म के पथ पर निरंतर अग्रसर करता रहेगा।

    राष्ट्र निर्माण के अमर साधक पं . दीनदयाल जी की पुण्यतिथि पर पुनः कोटिशः वंदन।

    (लेखक, मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री हैं)

  • राज्य के विकास काआधार बनेगा केन्द्रीय बजटःडॉ.मोहन यादव

    राज्य के विकास काआधार बनेगा केन्द्रीय बजटःडॉ.मोहन यादव

    भोपाल, 03 फरवरी(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)।  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव एवं भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष व विधायक  हेमंत खण्डेलवाल ने केंद्रीय बजट 2026-27 को लेकर मंगलवार को कुशाभाऊ ठाकरे सभागार भोपाल में पत्रकार वार्ता को संबोधित किया। पत्रकार-वार्ता में पार्टी के प्रदेश प्रभारी डॉ. महेन्द्र सिंह एवं मध्यप्रदेश शासन के उप मुख्यमंत्री श्री जगदीश देवड़ा विशेष रूप से उपस्थित रहे। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने पत्रकार-वार्ता को संबोधित करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के मार्गदर्शन में और वित मंत्री श्रीमती निर्मला सीतारमण द्वारा प्रस्तुत केंद्रीय बजट प्रधानमंत्री जी के विकसित भारत के संकल्पों को सिद्ध करने वाला है। केंद्रीय बजट मध्यप्रदेश के आर्थिक-औद्योगिक और सामाजिक विकास का ऐतिहासिक अवसर सिद्ध होगा। पूंजीगत व्यय में वृद्धि, शहरों के विकास व लॉजिस्टिक्स इकोसिस्टम का विकास प्रदेश के लिए वरदान बनेगा। यह बजट सतत आर्थिक विकास के साथ जनअपेक्षाओं को पूरा करने वाला है। प्रधानमंत्री मोदी जी ने समय-समय पर अपने निर्णयों से देश को सशक्त बनाने के साथ दुनिया को भारत की ताकत का अहसास कराया है। इस बजट के माध्यम से उद्योगों को बढ़ावा मिलने के साथ अलग-अलग क्षेत्रों में रोजगार के अनेक अवसर पैदा होंगे। यह केंद्रीय बजट सभी वर्गों की आशा-आकांक्षाओं को पूरा करने के साथ उन्हें सशक्त बनाने में निर्णायक सिद्ध होगा। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष व विधायक श्री हेमंत खण्डेलवाल ने कहा कि केंद्रीय बजट 2026-27 में प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी की बताई चार जातियों गरीब, युवा, नारी शक्ति और अन्नदाता के साथ मध्यम वर्ग, उद्यमियों और हर वर्ग के कल्याण व शक्तिकरण के लिए प्रावधान किए गए हैं। केंद्रीय बजट सिर्फ बजट नहीं है, यह विकसित भारत और आत्मनिर्भर भारत का विजन डॉक्यूमेंट है। यह आने वाले वर्षों में भारत की दिशा तय करने वाला बजट सिद्ध होगा। यह सर्वस्पर्शी, सर्वव्यापी और सर्वसमावेशी बजट है। बजट में तीन कर्तव्यों-आर्थिक विकास, जन-आकांक्षाओं की पूर्ति और ‘सबका साथ, सबका विकास’ की परिकल्पना को साकार किया गया है। बजट में रिफॉर्म, परफॉर्म और ट्रांसफॉर्म स्पष्ट रूप से परिलक्षित हो रहा है। केन्द्रीय बजट में राजकोषीय घाटा को 4.5 प्रतिशत से घटाकर 4.3 प्रतिशत तक लाने का रोडमैप तैयार किया है। देश के कुल कर्ज को जीडीपी के 56 प्रतिशत से घटाकर 50 प्रतिशत तक लाने की भी योजना है। बजट में 7 हाई-स्पीड कॉरिडोर्स के निर्माण और 12.2 लाख करोड़ के कैपिटल एक्सपेंडिचर का प्रावधान किया गया है। सेमीकंडक्टर मिशन के लिए निवेश राशि को 22,500 करोड़ से बढ़ाकर 40,000 करोड़ करने का प्रस्ताव है।उन्होंने कहा कि इस बजट से मध्यप्रदेश को भी व्यापक लाभ होगा और यह बजट वर्ष 2047 के विकसित भारत की परिकल्पना को साकार करने में मील का पत्थर साबित होगा।

    मध्यप्रदेश को सुदृढ़ वित्तीय आधार प्राप्त होगा, निवेशकों का विश्वास और बढ़ेगा- डॉ. मोहन यादव

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि यह बजट युवा शक्ति प्रेरित बजट है। इस बजट का मूल उद्देश्य तेज एवं सतत आर्थिक वृद्धि, जन आकांक्षाओं की पूर्ति, क्षमता निर्माण तथा सभी परिवारों, क्षेत्रों और सेक्टरों को समान अवसर उपलब्ध कराना है। बजट में आत्मनिर्भरता को मार्गदर्शक सिद्धांत बनाकर उच्च विकास दर बनाए रखने के स्पष्ट प्रावधान किए गए हैं। यह बजट मध्यप्रदेश को सुदृढ़ वित्तीय आधार प्रदान करेगा। साथ ही निवेशकों का विश्वास और बढ़ेगा, जिससे मध्यप्रदेश के विकास की रफ्तार और तेज होगी और हमारा प्रदेश आत्मनिर्भर बनेगा। बजट में वैश्विक बाजारों से जुड़ाव, निर्यात विस्तार तथा दीर्घकालिक निवेश आकर्षण की रणनीति है, जिसका बहुत फायदा आने वाले सालों में मध्यप्रदेश को मिलेगा। उन्होंने कहा कि यह बजट केवल वित्तीय प्रावधानों का संकलन नहीं है, बल्कि ईज ऑफ डूइंग बिजनेस आधारित आर्थिक विकास का संरचित रोडमैप है। यह बजट मध्यप्रदेश को सतत विकासशील राज्य के रूप में स्थापित करने की दिशा में निर्णायक भूमिका अदा करेगा। बजट के प्रावधानों से मध्यप्रदेश में निवेश, उद्योग स्थापना, रोजगार सृजन, उत्पादन क्षमता, निर्यात उन्मुख विनिर्माण का बेहतर वातावरण तैयार होगा।

    मध्यप्रदेश स्वास्थ्य और ज्ञान आधारित अर्थव्यवस्था में तेजी से आगे बढ़ेगा

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि बायोफार्म शक्ति योजना से बायोटेक्नोलॉजी, बायो फार्मा, फार्मास्यूटिकल अनुसंधान और हेल्थ इंडस्ट्री आधारित स्टार्ट अप्स को बढ़ावा मिलेगा। मध्यप्रदेश ज्ञान आधारित अर्थव्यवस्था की दिशा में अग्रसर होगा, जिससे उच्च मूल्य रोजगार सृजित होंगे। सेमीकंडक्टर मिशन 2.0 से इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट मैन्युफैक्चरिंग और एआई आधारित तकनीकों के विकास से मध्यप्रदेश में हाई टेक उद्योग, डिजिटल निवेश और नवाचार आधारित उद्यमिता को बढ़ावा मिलेगा। बजट के प्रावधान मध्यप्रदेश के पारंपरिक औद्योगिक क्षेत्रों के लिए विशेष रूप से लाभकारी सिद्ध होगा। ग्रामीण और स्थानीय अर्थव्यवस्था रोजगार तथा औद्योगिक पुनर्जीवन को नई गति प्रदान करेंगे। 200 लेगेसी इंडस्ट्रियल क्लस्टर्स के पुनर्जीवन से मध्यप्रदेश के पारंपरिक औद्योगिक क्षेत्रों में अधोसंरचना सुधार, निवेश पुनर्स्थापन, उत्पादन विस्तार और स्थानीय रोजगार को नई ऊर्जा मिलेगी। उन्होंने कहा कि केंद्रीय बजट मध्यप्रदेश के एमएसएमई सेक्टर के लिए अत्यंत लाभकारी सिद्ध होगा। राज्य में उद्यमिता, स्वरोजगार तथा औद्योगिक विस्तार को मजबूती मिलेगी। मध्यप्रदेश के लघु एवं मध्यम उद्योग अधिक प्रतिस्पर्धी, आत्मनिर्भर और विस्तार उन्मुख बनेंगे। मध्यप्रदेश को आईटी, पर्यटन, स्वास्थ्य एवं शिक्षा सेवाओं के प्रमुख केंद्र के रूप में विकसित करने में यह बजट महती भूमिका निभाएगा।

    ग्रामीण क्षेत्र के साथ नारी शक्ति को आर्थिक सशक्तिकरण देगा बजट

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि बजट में वर्ष 2047 तक भारत को वैश्विक सेवा क्षेत्र में नेतृत्व दिलाने की दृष्टि से सेवा क्षेत्र को विकास का प्रमुख चालक बनाया गया है। यह बजट मध्यप्रदेश को आईटी, हेल्थ, एजुकेशन, टूरिज्म और प्रोफेशनल सर्विसेज के केंद्र के रूप में विकसित होने में सहायक सिद्ध होने के सथ भारत को सेवा क्षेत्र में वैश्विक नेतृत्व भी दिलाएगा। बजट में 10 हजार करोड़ की लागत से देश के प्रत्येक जिलों में महिला छात्रावास स्थापना का के साथ नारी शक्ति के लिए रोजगार के अवसर बढ़ाने 1.5 लाख सेवा प्रदाताओं और एक लाख स्वास्थ्य पेशेवरों को प्रशिक्षित करने का लक्ष्य रखा गया है। लखपति दीदी योजना पर आधारित सामुदायिक स्व-सहायता समूह उद्यम स्थापित करने का प्रावधान है, इससे महिलाओं को क्रेडिट लिंक्ड आजीविका से उद्यम स्वामित्व की ओर जाने में मदद मिलेगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि बजट के इन प्रावधनों से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को गति मिलेगी ही, साथ ही यह बजट नारी शक्ति को आर्थिक सशक्तिकरण देने वाला होगा। सिटी ईकोनॉमिक रीजन के अंतर्गत शहरी क्षेत्रों में नियोजित आर्थिक विकास, औद्योगिक व्यावसायिक क्लस्टरिंग और आधुनिक अधोसंरचना का निर्माण होगा। इसके साथ ही मध्यप्रदेश के प्रमुख शहर संगठित आर्थिक केंद्रों के रूप में विकसित होंगे, जिससे  निवेश अनुकूल शहरी अर्थव्यवस्था का निर्माण होगा।

    बजट मध्यप्रदेश के आर्थिक विकास के नए द्वार खोलता है

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि यह बजट मध्यप्रदेश के लिए आर्थिक विकास के नए द्वार खोलता है, जहां उद्योगों को सरल प्रक्रियाएं, निवेशकों को भरोसेमंद वातावरण, युवाओं को रोजगार के अवसर, महिलाओं को आर्थिक सशक्तिकरण, एमएसएमई को संस्थागत समर्थन और नागरिकों को बेहतर सेवाए प्राप्त होंगी। यह बजट मध्य प्रदेश के सर्वांगीण विकास, समावेशी प्रगति और दीर्घकालिक आर्थिक समृद्धि का एक मजबूत आधार बनेगा। साथ ही एक निवेश-आकर्षक, विकासोन्मुख और भविष्य-उन्मुख अर्थव्यवस्था के रूप में स्थापित करने की दिशा में निर्णायक भूमिका निभाएगा। यह बजट मध्यप्रदेश के लिए तेज विकास, संरचनात्मक परिवर्तन और सतत समृद्धि की एक सशक्त विकास यात्रा का प्रारंभ बिंदु सिद्ध होगा, जो राज्य के सामाजिक आर्थिक भविष्य को नई ऊंचाइयों तक ले जाने में अत्यंत सहायक एवं परिवर्तनकारी भूमिका निभाएगा।

    प्रदेश की प्रतिभाओं के बलबूते फार्मा सहित सभी क्षेत्रों में लगाएंगे छलांग

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि मध्य्रदेश अपनी प्रतिभाओं के बलबूते पर फार्मा सहित सभी क्षेत्रों में लंबी छलांग लगाएगा। सेमीकंडक्टर बड़ा सेक्टर है। मैं सेमीकंडक्टर को लेकर गुजरात के मुख्यमंत्री से कल ही बात करके आया हूं। सेमीकंडक्टर मिशन 2.0 भारतीय तकनीक है, जिसके आधार पर मध्यप्रदेश में अत्याधुनिक उद्योग, डिजिटल निवेश के साथ देश के साथ कदम से कदम मिलाकर चलेंगे। हमारे प्रदेश में जो उद्योग चल रहे हैं, वह अधिकांश परंपरागत आधारित हैं। आगे बढ़ने के लिए रिनोवेशन के साथ और अधिक प्रभावी कार्य किया जाएगा। मध्यप्रदेश में पहले कॉटन इंडस्ट्री चलती थी, लेकिन रिनोवेशन नहीं होने से वह डूब गई थी। प्रधानमंत्री मोदी जी ने धार में पीएम मित्र पार्क की सौगात दी है, जिसके आधार पर हमारी सरकार मध्यप्रदेश वस्त्र उद्योग को बढ़ावा दे रही है। उन्होंने कहा कि नए उद्योग लगाना अच्छी बात है, लेकिन जो चल रहे हैं उनका संवर्धन करना भी एक बड़ा कार्य है। हमारी सरकार इस क्षेत्र में भी कार्य कर रही है। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी टियर-2 और टियर-3 शहरों के लिए भी पर्याप्त धनराशि दी गई है। मध्यप्रदेश में प्रमुख शहर संगठित और आर्थिक रूप से समृद्ध होंगे और संरचना निवेश मॉडल मध्य प्रदेश के लिए अत्यंत लाभकारी होगा। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी की दूरदृष्टि आर्थिक विकास के नए राह दिखा रही है। मैं प्रधानमंत्री जी को बधाई देता हूं कि उन्होंने देश के आर्थिक विकास के लिए कई निर्णय लिए हैं। पाकिस्तान हमारे साथ आजाद हुआ। वहां की आर्थिक स्थिति दुनिया में किसी से छिपी नहीं है। हमारे प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी ने देश को सशक्त बनाने के साथ दुनिया को भारत की ताकत का अहसास कराया है।भारत को आत्मनिर्भर बनाने, देशवासियों के कल्याण और मध्यम वर्ग को राहत देने वाले इस क्रांतिकारी बजट के लिए यशस्वी प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी और केंद्रीय वित्त मंत्री श्रीमती निर्मला सीतारमण जी का मध्यप्रदेशवासियों की ओर से बहुत-बहुत आभार व्यक्त करता हूं।

    केंद्रीय बजट सशक्त भारत की नींव को और मजबूती प्रदान करेगा – श्री हेमंत खण्डेलवाल

    भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष श्री हेमंत खण्डेलवाल ने कहा कि केंद्रीय बजट 2026-27 प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के विकसित व आत्मनिर्भर भारत के विजन का सशक्त दस्तावेज़ है। गरीब, युवा, नारी शक्ति, अन्नदाता के साथ मध्यम वर्ग और उद्यमियों के कल्याण व सशक्तिकरण के प्रावधान बजट में किए गए हैं। यह सर्वस्पर्शी, सर्वसमावेशी बजट रिफॉर्म, परफॉर्म और ट्रांसफॉर्म की भावना को दर्शाता है, जो मध्यप्रदेश सहित देश को 2047 के विकसित भारत की ओर मजबूती से ले जाएगा। केंद्रीय बजट को राजनीति के दृष्टिकोण से नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माण की नजर से देखना आवश्यक है। देश के कुल कर्ज को जीडीपी के 56 प्रतिशत से घटाकर 50 प्रतिशत तक लाने की भी योजना है। बजट में 7 हाई-स्पीड कॉरिडोर्स के निर्माण और 12.2 लाख करोड़ के कैपिटल एक्सपेंडिचर का प्रावधान किया गया है। सेमीकंडक्टर मिशन के लिए निवेश राशि को 22,500 करोड़ से बढ़ाकर 40,000 करोड़ करने का प्रस्ताव है।उन्होंने कहा कि इस बजट से मध्यप्रदेश को भी व्यापक लाभ होगा और यह बजट वर्ष 2047 के विकसित भारत की परिकल्पना को साकार करने में मील का पत्थर साबित होगा। यह बजट भारत को आने वाले वर्षों में विश्व की अग्रणी अर्थव्यवस्था बनाने की दिशा में एक मजबूत कदम है। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में देश तेजी से सही दिशा में आगे बढ़ रहा है, और बजट 2026 उसी भरोसे और दूरदृष्टि का प्रमाण है। यह केंद्रीय बजट देश के आर्थिक विकास के साथ “रिफॉर्म एक्सप्रेस” की रफ्तार को भी दिखा रहा है। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व में प्रस्तुत केंद्रीय बजट तात्कालिक प्रभाव से अधिक अगले 10-20 वर्षों में भारत की दिशा तय करने वाला है। यह बजट सशक्त भारत की नींव को और मजबूती प्रदान करेगा।

    स्वास्थ्य के क्षेत्र में उल्लेखनीय सुधार के साथ ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती देगा बजट

    भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष श्री हेमंत खण्डेलवाल ने कहा कि केन्द्रीय बजट में फिस्कल डेफिसिट (राजकोषीय घाटा) को 4.5 प्रतिशत से घटाकर 4.3 प्रतिशत तक लाने का रोडमैप तैयार किया है। साथ ही देश के कुल कर्ज को जीडीपी के 56 प्रतिशत से घटाकर 50 प्रतिशत तक लाने की भी योजना है। रेयर अर्थ मिनरल्स के क्षेत्र में ओडिशा, आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु में बड़े निवेश की योजना बनाई गई है, जिससे इस क्षेत्र में चीन की निर्भरता कम होगी। सेमीकंडक्टर उद्योग को बढ़ावा देने के लिए लगभग 40 हजार करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। इसके अलावा केमिकल पार्क और नए इकोनॉमिक जोन स्थापित करने की भी घोषणा हुई है। स्वास्थ्य क्षेत्र में कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों की 17 दवाइयों पर कस्टम ड्यूटी शून्य कर दी गई है। एक लाख हेल्थ प्रोफेशनल्स की नियुक्ति, राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य संस्थान और हेल्थ टूरिज्म को बढ़ावा देने जैसे महत्वपूर्ण कदम उठाए गए हैं। जिला अस्पतालों का उन्नयन कर उनमें ट्रामा सेंटर स्थापित करने संबंधी प्रावधान स्वास्थ्य के क्षेत्र में उल्लेखनीय सुधार लाएंगे। महिलाओं के लिए हर जिले में हॉस्टल, डेढ़ लाख केयर वर्कर्स और पेंशनर्स को सुविधाएं देने का भी प्रावधान है। यह महिलाओं को आर्थिक सशक्तिकरण के लिए बड़ा कदम है। उन्होंने कहा कि ‘लखपति दीदी’ योजना, पशुपालन में पूंजी सब्सिडी, पशु चिकित्सकों की संख्या बढ़ाने तथा अमृत सरोवर योजना के माध्यम से रोजगार सृजन पर विशेष ध्यान दिया गया है। यह निर्णय ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करेंगे।

    युवाओं को रोजगार दिलाने में महती भूमिका निभाएगी कंटेंट क्रिएटर लैब

    भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष श्री हेमंत खण्डेलवाल ने कहा कि केंद्रीय बजट में 15 हजार माध्यमिक शालाओं में कंटेंट क्रिएटर लैब की स्थापना, आईआईएम के सहयोग से 10 हजार टूरिस्ट गाइड तैयार करने और ‘खेलो इंडिया’ के माध्यम से खेलों को प्रोत्साहन देने की घोषणाएं की गई हैं। क्रिएटर लैब युवाओं को रोजगार दिलाने में महती भूमिका निभाएगी। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी देश को हर क्षेत्र में आत्मनिर्भर बना रहे हैं। रक्षा बजट में 15 प्रतिशत की वृद्धि से देश की सुरक्षा और आत्मनिर्भरता को और बल मिलेगा। उन्होंने कहा कि बजट में महात्मा गांधी जी के ग्राम स्वराज की परिकल्पना का पालन करते हुए खादी, हथकरघा, हस्तशिल्प और एक जिला एक उत्पाद को बढ़ावा देने वाला है। रक्षा बजट में 15 फीसदी की बढ़ोतरी देश की सुरक्षा की प्रधानमंत्री जी की प्रतिबद्धता को रेखांकित करता है। पूर्वोत्तर राज्यों में बौद्ध स्थलों के संरक्षण, बुनियादी ढांचे के विकास और धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने का निर्णय प्रधानमंत्री जी की विरासत के विकास के मंत्र को साकार कर रहा है। कैंसर की 17 जीवनरक्षक दवाओं पर कस्टम ड्यूटी शून्य या न्यूनतम कर गरीबों को संबल देने का कार्य किया गया है। यह बजट महिला सशक्तिकरण को नई दिशा देने वाला है। बजट में किसानों की आय बढ़ाने और कृषि को आधुनिक बनाने पर स्पष्ट फोकस किया गया है। पशुपालन और मत्स्य पालन को मजबूती, पूंजी सब्सिडी से पशु चिकित्सकों की संख्या बढ़ेगी और जलाशयों, अमृत सरोवरों के निर्माण से ग्रामीण रोजगार को प्राथमिकता दी गई है।

    पत्रकार-वार्ता के दौरान पार्टी के प्रदेश महामंत्री श्री राहुल कोठारी, प्रदेश मीडिया प्रभारी श्री आशीष उषा अग्रवाल एवं जिला अध्यक्ष श्री रविन्द्र यति मंचासीन रहे।

  • ज्योतिरादित्य सिंधिया ने संजय जैन को डाक्टरेट की मानद उपाधि से सम्मानित किया

    ज्योतिरादित्य सिंधिया ने संजय जैन को डाक्टरेट की मानद उपाधि से सम्मानित किया


    भोपाल,03 फरवरी(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)। फार्मेसी और मेडीकल साईंस के क्षेत्र में विशेष योगदान के लिए केन्द्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने मध्यप्रदेश फार्मेसी काऊंसिल के अध्यक्ष संजय जैन को डाक्टरेट की मानद उपाधि से सम्मानित किया है। मध्यांचल प्रोफेशनल विश्वविद्यालय भोपाल के प्रथम दीक्षांत समारोह में उन्होंने कहा कि दुनिया के दवा बाजार में भारत की भागीदारी बढ़ाने के लिए हमारे युवा और फार्मासिस्ट महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। उन्होंने श्री संजय जैन को डाक्टरेट की उपाधि से सम्मानित किए जाने पर बधाई भी दी।


    इस कार्यक्रम में विश्वविद्यालय की चांसलर प्रीति पटेल. वाइस चांसलर श्री राय . राजीव गांधी विश्वविद्यालय के कुल गुरु डॉक्टर एस.सी. चौबे. कवि एवं साहित्यकार शैलेश लोढ़ा एवं डॉ प्रदीप कुमार जोशी पूर्व अध्यक्ष यूपीएससी भारत सरकार उपस्थित थे। कार्यक्रम में लगभग 500 छात्र-छात्राओं को भी उपाधि देकर सम्मानित किया गया।


    कार्यक्रम के समापन पर विश्वविद्यालय से संबंधित समिति के अध्यक्ष श्री अजीत पटेल ने अतिथियों का आभार प्रदर्शित किया।

  • शीश कटा लेंगे पर भोपाल चेंबर आफ कामर्स को जेबी संस्था नहीं बनने देंगेःतेजकुल पाल सिंह पाली

    शीश कटा लेंगे पर भोपाल चेंबर आफ कामर्स को जेबी संस्था नहीं बनने देंगेःतेजकुल पाल सिंह पाली


    भोपाल,30 जनवरी(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)। भोपाल के व्यापारियों का प्रतिष्ठापूर्ण नेतृत्व कर रहे प्रगतिशील पैनल के अध्यक्ष तेजकुल पाल सिंह पाली ने कहा है कि यदि वक्त आया तो वे शीश कटाना मंजूर करेंगे पर भोपाल चेंबर आफ कामर्स को कभी किसी नेता या कार्पोरेट घरानों की जेबी संस्था नहीं बनने देंगे। व्यापारियों का कहना है कि पाली का पिछला कार्यकाल उपलब्धियों के भरा पूरा रहा है। उन्होंने चुनाव न कराए जाने पर तीन साल नौ महीने बाद केवल इसलिए इस्तीफा दिया था कि संस्था के चुनाव निष्पक्ष रूप से कराए जा सकें। प्रतिद्वंदी के रूप में चुनाव लड़ रहे कांग्रेस के पूर्व कोषाध्यक्ष गोविंद गोयल ने पिछले सात सालों से खुद को Confedration of MP for Industry, Service & Trade (COMPIST) का स्वयंभू अध्यक्ष घोषित कर रखा है और संस्था के चुनाव तक नहीं कराए हैं।यह मुद्दा इस चुनाव में व्यापारियों को डराने वाला साबित हो रहा है।


    एक फरवरी रविवार को होने जा रहे भोपाल चेंबर आफ कामर्स के चुनावों में जो अंदरूनी कहानियां रिसकर बाहर आ रहीं हैं उनसे व्यापारियों के बीच नेतृत्व की खींचतान को लेकर खासी सरगर्मी देखी जा रही है। व्यापारियों का कहना है कि चुनाव को जातिगत गोलबंदी में धकेलने वाले कार्पोरेट के षड़यंत्र की पोल खुल चुकी है। खुद को पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह के प्रतिनिधि के तौर पर प्रस्तुत करने वाले गोविंद गोयल को हराने के लिए व्यापारियों ने पहले मतदान फिर जलपान का नारा दिया है। कार्यकारी अध्यक्ष के रूप में आकाश गोयल और उनके सहयोगियों ने जिस तरह अनाप शनाप पैसा खर्च करके संस्था को लगभग खरीदने की पेशकश की उससे भी व्यापारियों के बीच संदेह का माहौल गहरा गया है।

    गोविंद गोयलः कम्पिस्ट के चुनाव न कराकर खुद को स्वयंभू अध्यक्ष बनाना पड़ा भारी.


    सूत्र बताते हैं कि प्रगतिशील पैनल से उपाध्यक्ष पद का चुनाव लड़ रहे ट्रांसपोर्ट व्यवसायी कमल पंजवानी इस चुनाव में गेम चेंजर साबित हो रहे हैं। चेंबर के अध्यक्ष पद पर जब व्यापारियों ने आकाश गोयल के नाम पर असहमति जताई तो वे कमल पंजवानी को निर्विरोध अध्यक्ष के रूप में स्वीकार करने राजी हो गए थे। इस नाम पर गोविंद गोयल ने असहमति जता दी और अपना नामांकन भर दिया। यही वजह थी कि तेजकुल पाल सिंह पाली ने संस्था पर मंडराते काले बादलों का पटाक्षेप करने के लिए मैदान संभाल लिया।


    तेजकुल पाल सिंह पाली का नाम सामने आते ही भाजपा समर्थित व्यापारी भी प्रगतिशील पैनल के समर्थन में आ गए और चुनाव रोचक मोड़ पर पहुंच गया। इस चुनाव में सक्रिय भागीदारी निभा रहे व्यापारियों का कहना है कि वे चाहते हैं संस्था उनकी समस्याओं को सुलझाने के लिए सीना चौड़ा करके चले। पाली का पिछला कार्यकाल गौरवपूर्ण रहा है और किसी नेता के पिट्ठू को वे अपना प्रतिनिधि स्वीकार नहीं कर सकते। संस्था को अपनी स्थापना के बाद से पहली बार पाली जैसा दबंग नेतृत्व मिला इसलिए वे दुबारा उन्हें अध्यक्ष के रूप में देखना चाहते हैं।


    प्रगतिशील पैनल से ही महामंत्री पद का चुनाव लड़ रहे समाजसेवी ललित तांतेड़ का कहना है कि राजधानी के व्यापारी पहले कभी इतने सक्रिय नहीं रहते थे। चंद जेबी नेता मिलकर सरकार से अपने हित में सौदेबाजी कर लेते थे। इससे न तो व्यापारिक गतिविधियों को विस्तार मिलता था और न ही व्यापारियों के हितों की रक्षा हो पाती थी। ऐसे में तेजकुल पाल सिंह पाली जी ने राजधानी के सक्रिय और ईमानदार व्यापारियों को मिलाकर संस्था को नेतृत्व प्रदान करने की पहल की है जिसका व्यापार जगत में स्वागत किया जा रहा है। एक फरवरी को होने जा रहे चुनावों में व्यापारियों के इस भाव पर मुहर भी लग जाएगी।

  • बैंकों के हजारों करोड़ दबाए बैठे लोग नहीं चाहते दबंग नौकरशाही

    बैंकों के हजारों करोड़ दबाए बैठे लोग नहीं चाहते दबंग नौकरशाही

    भोपाल,23 जनवरी(प्रेस इंफार्मेशन सेंटऱ)। बैंकों की रकम दबाकर बैठा मीडिया माफिया हो या जमीनों पर कब्जा जमाने वाला भू माफिया,आपराधिक वारदातों में संलग्न दबंग, सरकारी योजनाओं को गड़प जाने वाले राजनेता और ठेकेदार कोई नहीं चाहता कि उनके विरुद्ध लंबित शिकायतें सुनी जाएं और उनका निराकरण हो। यही वजह  है कि जब मुख्य सचिव अनुराग जैन ने कलेक्टरों, पुलिस अधीक्षकों और राजस्व अधिकारियों को शिकायतों का निराकरण करने की नसीहत दी तो माफिया ताकतों के टुकड़खोरों ने बात का बतंगड़ बना दिया। सहज संवाद की घटना को इस तरह प्रस्तुत किया गया मानों मुख्यमंत्री डॉ.मोहन यादव कलेक्टरों को चोर कहना चाहते हैं। सरकार के मीडिया सलाहकारों ने इस मुद्दे पर खंडन जारी करवाकर तथ्य सामने रखे तो खबर का वैसा ही मंडन हो गया जैसा कि पहले से अपेक्षित था।

                   जनता के हित में उठी एक आवाज को कुचलने में जुटी माफिया ताकतें बार बार ये स्थापित करने का प्रयास कर रहीं हैं कि मानों सीएस ने नौकरशाही की मैली कुचैली तस्वीर को स्वीकार करके हथियार डाल दिए हों। कुछ नादान कलम घिस्सू ,जनहित की इस ललकार को  सीएस की चूक बताने में जुट गए हैं। शासन की ओर से कहा जा रहा है कि खबर को तोड़ मरोड़कर प्रस्तुत किया गया है पर कोई मानने को राजी नहीं है। अब इसे अनपढ़ प्रदेश नहीं तो क्या कहा जाए जो जनहित में उठी आवाज के विरोध में अपनी खुशी तलाश रहा है। सभी जानते हैं कि शिवराज सिंह चौहान ने सुशासन के नाम पर लगभग दो दशकों तक जिस नौकर शाही को अपने सिर पर बिठाकर रखा वह आज बेलगाम हो चुकी है। कहीं राजनेताओं ने नौकरशाही को अपने दरवाजे बंधा कुत्ता बना दिया है कहीं संघ के नाम पर अफसरों के हाथ बांध दिए गए हैं। विपक्ष तो पहले से उन मुद्दों पर राजनीति करता रहा है जो समाज को सुधारने के बजाए बांटने का काम करते हैं।

                  कांग्रेस के नेता जीतू पटवारी ने सीएस की आवाज को मुख्यमंत्री और सरकार की असफलता दर्शाने के लिए प्रेस वार्ता तक बुला डाली। उनका कहना है कि सीएस ने जाने अनजाने में एक सच्चाई उजागर कर दी है। वे शासन के पक्ष पर गौर करने को राजी नहीं हैं कि मुख्य सचिव ने जो नहीं कहा उसे खबर बनाने की शैतानी कौन कर रहा है और क्यों कर रहा है। अखबारों की सुर्खियां बटोरने के लिए कांग्रेस के नेता इस गंभीर मुद्दे पर हंसी ठिठोली करने में जुट गए हैं। अन्य विपक्षी दलों की तो कोई आवाज ही नहीं है। उनका प्रदेश हित की  राजनीति से कोई वास्ता भी नहीं है। कांग्रेस के जो नेता राज्य में ठेकेदारी करके अपना उल्लू सीधा करना चाहते हैं वे भी नहीं चाहते कि नागरिकों की शिकायतों का निराकरण हो जाए । क्योंकि इससे सत्ता माफिया की जुगलबंदी की उनकी पोल भी खुल सकती है।  जो सत्ता माफिया कांग्रेस के शासनकाल में अपने डैने पसार चुका था वही आज अपने सहयोगियों के साथ भाजपा सरकार के सुशासन को पंगु बनाए हुए हैं। वह चाहता भी नहीं कि किसी तरह का सुशासन स्थापित हो।

               अटल बिहारी सुशासन संस्थान के जिन विशेषज्ञों ने बार बार सलाह देकर सरकारी तंत्र को जवाबदेह बनाने की सलाह दी वह भी इस घटना पर मुंह सिले हुए बैठे है। ये आनलाईन कांफ्रेंस पांच मुद्दों पर केन्द्रित थी। इनमें सुशासन, कानून व्यवस्था, कृषि,स्वास्थ्य और नगरीय प्रशासन जैसे जनहित से जुड़े विषय शामिल थे। जिन अतिक्रमण के मुद्दों पर जनता ने सीएम हेल्पलाईन पर शिकायतें की हैं उन्हें दबंगों ने अफसरों के सहारे पेंडिंग करवा दिया है। समय सीमा में निराकरण न होने की वजह से आम नागरिक परेशान हैं और बार बार कई स्तरों पर अपनी बातें उठाते रहते हैं। कानून व्यवस्था के मुद्दों को अपराधियों ने पुलिस प्रशासन से सांठ गांठ करके डंप करवा रखा है। कृषि विभाग का तो पूरा अमला नदारद है। खाद वितरण जैसे सरल विषय पर सरकारी अमले ने किसानों को धोबी का कुतका बना रखा है। स्वास्थ्य के लिए सरकारी अस्पतालों पर हजारों करोड़ रुपए खर्च होने के बावजूद जनता को निजी और कार्पोरेट अस्पतालों में लुटने को मजबूर होना पड़ रहा है। नगर पालिकाएं हों या नगर निगम सभी में अफसरों ने अपने कान और आंख बंद कर रखे हैं। वे सीएम हेल्पलाईन की शिकायतों को दबाव डालकर बंद करा देते हैं या एक दूसरे की ओर भेजकर टल्ले खिलाते रहते हैं।

            ऐसे हालात में यदि कोई मुख्य सचिव, अपने मातहतों को मुख्यमंत्री का भय दिखाकर लाईन पर लाना चाह रहा है तो मध्यप्रदेश का कथित मुख्यधारा का मीडिया इसे उपहास का विषय बनाने में जुट गया है। घरों में मां अपने बच्चों को पिता की नाराजगी का भय दिखाकर अच्छा नागरिक बनाने का प्रयास करती है। क्या इसे माता पिता के बीच दुश्मनी की तरह प्रस्तुत किया जाने लगेगा। राज्य का लगभग पैंतालीस फीसदी बजट खा जाने वाली नौकरशाही यदि जनता की अपेक्षाओं पर खरी नहीं उतरेगी तो निश्चित रूप से जन आक्रोश बढ़ेगा । जनता का असंतोष सरकार पर भी भारी पड़ेगा । सरकार और नौकरशाही के हित में यदि मुख्य सचिव उसे शिकायतों के निवारण की जिम्मेदारी पूरा करने की नसीहत दे रहे हैं तो वे कौन लोग हैं जो इसे आरोप प्रत्यारोप या विवाद का विषय बनाना चाहते हैं।

            सत्ता रूढ़ भाजपा को इस मुद्दे पर गंभीर रूप से चिंतन करना चाहिए। सरकार को असफल बनाने में जुटे माफिया को नसीहत देने के लिए सरकार को उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की तरह सख्त फैसले लेने होंगे। माफिया की कमर तोड़े बगैर यदि सरकार इस मुद्दे को दबाने का प्रयास करेगी तो आने वाला भविष्य भाजपा को एक असफल पार्टी के रूप में ही याद करेगा।

  • खेती के हालात समझें तो बदल पाएंगे किसान का भाग्य

    खेती के हालात समझें तो बदल पाएंगे किसान का भाग्य


    Dr. Neeta Singh
    President
    Centre for Resources Development Studies
    Mob: 94250 09125
    Email: crdsbpl@gmail.com
    neetasingh20012@gmail.com

    आपने कभी सोचा है कि मध्य प्रदेश (एमपी) कृषि व्यवसाय की दुनिया में अपने लिए कैसे जगह बना रहा है, यदि हां तो आप एक उपहार के लिए तैयार हैं। राज्य के विशाल मैदान, विविध जलवायु और एक ऐसी सरकार जो पूरी तरह से डिजिटल और टिकाऊ खेती पर जोर दे रही है, ऐसी चर्चा पैदा कर रही है जिसे नजरअंदाज करना मुश्किल है। आइए कहानी, चुनौतियों, उज्ज्वल बिंदुओं और मध्य प्रदेश में कृषि उद्यमों का भविष्य क्या है, के बारे में एक दोस्ताना सैर करें।
    भारतीय कृषि में एमपी क्यों मायने रखता है?
    मध्य प्रदेश को अक्सर “मध्य भारत की रोटी की टोकरी” कहा जाता है, और अच्छे कारण के लिए। 15 मिलियन हेक्टेयर से अधिक भूमि पर खेती के साथ, राज्य भारत के कुल खाद्यान्न उत्पादन में लगभग 15% का योगदान देता है। हाल के वर्षों में, ध्यान केवल अधिक उत्पादन से हटकर बेहतर उच्च मूल्य वाली फसलें पैदा करने पर केंद्रित हो गया है, बागवानी और पशुपालन इस कार्य में अग्रणी हैं। राज्य का लक्ष्य कृषि से अपने सकल राज्य घरेलू उत्पाद (जीएसडीपी) को दोगुना करना है, एक ऐसा लक्ष्य जो नीति और निजी क्षेत्र दोनों को उत्साहित कर रहा है।
    भौगोलिक लाभ – मध्य प्रदेश में 15 मिलियन हेक्टेयर कृषि योग्य भूमि है, जो इसे कृषि योग्य क्षेत्र के मामले में दूसरा सबसे बड़ा राज्य बनाती है।
    फसल विविधता – यह गेहूं, चावल, दालें, सोयाबीन, मक्का और बागवानी फसलों (आम, अमरूद, टमाटर, आदि) की एक विस्तृत श्रृंखला का उत्पादन करती है।
    राष्ट्रीय उत्पादन में योगदान – भारत के कुल खाद्यान्न उत्पादन का लगभग 15% और देश के बागवानी उत्पादन का 10% मध्य प्रदेश से आता है।
    नीति फोकस – राज्य ने सार्वजनिक क्षेत्र के निवेश और निजी क्षेत्र के हित को आगे बढ़ाते हुए 2027 तक अपने कृषि जीएसडीपी को दोगुना करने का लक्ष्य रखा है।

    प्रमुख विकास चालक
    1.उच्च मूल्य वाली फसलें और बागवानी
    किसान पारंपरिक गेहूं और चावल की जगह सोयाबीन, दालें, मक्का और कई तरह के फल और सब्जियां उगा रहे हैं। उदाहरण के लिए, इंदौर डिवीजन में दालों और मक्के की खेती में ज़बरदस्त बढ़ोतरी देखी गई है, अनुकूल मौसम और बेहतर बाज़ार कीमतों के कारण एक ही सीज़न में मक्के की खेती का रकबा 50% से ज़्यादा बढ़ गया है। यह विविधीकरण न केवल किसानों की आय बढ़ाता है बल्कि मानसून पर निर्भर फसलों पर निर्भरता भी कम करता है।
    रकबे में बदलाव – पिछले पांच सालों में, इंदौर डिवीजन में मक्के की खेती का रकबा 50% से ज़्यादा बढ़ा है, जबकि सोयाबीन का रकबा स्थिर हो गया है क्योंकि किसान बेहतर कीमतों की तलाश में हैं।
    बागवानी में तेज़ी – मालवा क्षेत्र में आम के बाग और छत्तीसगढ़ सीमावर्ती इलाकों में टमाटर की खेती लगभग 12% CAGR की दर से बढ़ी है, जिसे राज्य के “मध्य प्रदेश बागवानी मिशन” से समर्थन मिला है।
    वैल्यू एडिशन – उत्पादन क्षेत्रों के पास छोटे पैमाने की प्रोसेसिंग यूनिट (जैसे, टमाटर प्यूरी, आम का गूदा) उभर रही हैं, जिससे फसल कटाई के बाद होने वाले नुकसान (वर्तमान में फलों के लिए लगभग 15%) में कमी आ रही है।

    1. पशुधन और मत्स्य पालन
      पशुधन क्षेत्र 13% (वास्तविक रूप से) और मत्स्य पालन 15% की प्रभावशाली दर से बढ़ रहा है। बलराम तालाब योजना और अन्य जल निकाय परियोजनाओं के साथ, MP ने लाखों हेक्टेयर सिंचित भूमि जोड़ी है, जिससे पहले के सूखे इलाके फलते-फूलते मछली फार्म और डेयरी हब में बदल गए हैं।
      पशुधन विकास – यह क्षेत्र डेयरी सहकारी समितियों और “बलराम तालाब योजना” द्वारा संचालित होकर सालाना लगभग 13% (वास्तविक रूप से) की दर से विस्तार कर रहा है, जिसने मछली पालन के लिए 2 मिलियन हेक्टेयर से ज़्यादा जल निकाय बनाए हैं।
      मत्स्य पालन की क्षमता – वार्षिक मछली उत्पादन 1 मिलियन टन से ज़्यादा हो गया है, जिसमें कार्प और पंगासियस पर ध्यान केंद्रित किया गया है। राज्य का लक्ष्य 2028 तक 2 मिलियन टन तक पहुंचना है।
      महिलाओं की भागीदारी – 30% से ज़्यादा पशुधन से संबंधित उद्यम महिलाओं के स्वामित्व या प्रबंधन में हैं, खासकर “मध्य प्रदेश महिला डेयरी विकास कार्यक्रम” में।
    2. डिजिटलीकरण और बाज़ार सुधार
      राज्य का ई-अनुज्ञा प्लेटफॉर्म और आने वाला एग्री स्टैक मंडी संचालन को सुव्यवस्थित कर रहे हैं, किसानों को वास्तविक समय में कीमतों की जानकारी दे रहे हैं और बिचौलियों को कम कर रहे हैं। ये उपकरण “डिजिटल मंडी” विज़न की दिशा में एक बड़ा कदम हैं जो उत्पादकों को राज्य के अंदर और बाहर दोनों जगह सीधे खरीदारों से जोड़ सकता है।
      ई-अनुज्ञा प्लेटफॉर्म – एक एकीकृत डिजिटल बाज़ार जो > 150 वस्तुओं के लिए वास्तविक समय में कीमतों की जानकारी प्रदान करता है, जिससे ≈ 3 मिलियन किसानों को लाभ होता है।
      एग्री स्टैक और GIS मैपिंग – भूमि उपयोग योजना, मिट्टी स्वास्थ्य निगरानी और लक्षित सब्सिडी वितरण में मदद करता है।
      कोल्ड चेन विस्तार – राज्य ने पिछले तीन वर्षों में ≈ 1,200 मीट्रिक टन रेफ्रिजरेटेड भंडारण क्षमता जोड़ी है, जिससे खराब होने वाली वस्तुओं के खराब होने में कमी आई है।
    3. सरकारी योजनाओं की भरमार
      मुख्य मंडी किसान कल्याण योजना (इनपुट के लिए वित्तीय सहायता) से लेकर भावांतर भुगतान योजना (कीमत में कमी का भुगतान) तक, MP ऐसी कई योजनाएँ शुरू कर रहा है जो खेती के जोखिम को कम करती हैं और आधुनिक तरीकों को प्रोत्साहित करती हैं। मृदा स्वास्थ्य कार्ड, सूक्ष्म सिंचाई सब्सिडी, और कृषि ऋण समाधान के तहत ब्याज मुक्त ऋण भी इस पैकेज का हिस्सा हैं।
      मुख्य मंडी किसान कल्याण योजना – बीज, उर्वरक और मशीनरी के लिए सीधी वित्तीय सहायता।
      भावांतर भुगतान योजना – चुनिंदा फसलों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य की गारंटी देती है, जिससे किसानों को बाज़ार की अस्थिरता से बचाया जा सके।
      मृदा स्वास्थ्य कार्ड और सूक्ष्म सिंचाई सब्सिडी – संतुलित उर्वरक उपयोग और जल बचत प्रौद्योगिकियों को प्रोत्साहित करती है; पात्र खेतों में इसका उपयोग बढ़कर ≈ 45% हो गया है।
      कृषि ऋण समाधान – छोटे पैमाने के कृषि उद्यमों के लिए ₹5 लाख तक का ब्याज मुक्त ऋण।
      सफलता की कहानियाँ जो प्रेरित करती हैं
    4. भोपाल में मशरूम का जादू – बायोकेमिस्ट्री ग्रेजुएट डॉ. बसु ने एक खाली कमरे में सिर्फ 50 मशरूम बैग से शुरुआत की। आज, उनका इंडोर फार्म हर महीने लगभग ₹5 लाख कमाता है, और वह दर्जनों महिलाओं को इस मॉडल को दोहराने की ट्रेनिंग दे रही हैं, जिससे एक साधारण फंगस का प्रयोग ₹60 लाख से ज़्यादा के एंटरप्राइज में बदल गया है।
    5. इंदौर में दालों और मक्के में उछाल – सांवेर के लखन पटेल जैसे किसानों ने अच्छे मार्केट संकेतों और अच्छी पैदावार के कारण अपनी कई एकड़ ज़मीन पर मक्का उगाना शुरू कर दिया है। नतीजा? मक्के की खेती के रकबे में 50% की बढ़ोतरी और क्षेत्रीय खाद्य सुरक्षा में एक खास सुधार।
    6. महिलाओं के नेतृत्व वाली वैल्यू चेन – मध्य प्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के ज़रिए, महिलाओं के सेल्फ हेल्प ग्रुप को सामुदायिक संस्थानों से जोड़ा जा रहा है, जिससे उन्हें पारंपरिक खेती से मार्केट-ओरिएंटेड कृषि उद्यमों की ओर बढ़ने में मदद मिल रही है। ये पहल ग्रामीण महिलाओं के लिए एजेंसी, गतिशीलता और आय बढ़ा रही हैं।
      बची हुई चुनौतियाँ
      इतनी तेज़ी के बावजूद, MP का कृषि क्षेत्र चुनौतियों से मुक्त नहीं है:
    7. सोयाबीन की कीमतों में उतार-चढ़ाव – सोयाबीन एक प्रमुख फसल बनी हुई है, लेकिन वैश्विक कीमतों में उतार-चढ़ाव इसे कई छोटे किसानों के लिए जोखिम भरा सौदा बना देता है। सोयाबीन की कीमतों में सालाना ± 20% का उतार-चढ़ाव होता है, जिससे छोटे किसानों के कैश फ्लो पर असर पड़ता है।
    8. मार्केटिंग उदारीकरण – जबकि ई-मंडियां आशाजनक हैं, फिर भी कई किसान टूटी हुई सप्लाई चेन और कोल्ड स्टोरेज तक सीमित पहुंच से जूझ रहे हैं। ई-मंडियों के बावजूद, कई किसान अभी भी सीमित परिवहन और भंडारण के कारण स्थानीय व्यापारियों पर निर्भर हैं।
    9. विस्तार सेवाएँ – कृषि विज्ञान केंद्रों (KVKs) की मांग उनके स्टाफ से कहीं ज़्यादा है, जिससे नवीनतम तकनीक को खेतों तक पहुंचाने में बाधा आती है। विस्तार सेवाओं में कमी – KVKs (कृषि विज्ञान केंद्र) केवल लगभग 30% किसान आबादी को सेवा देते हैं, जिससे कई लोग नवीनतम कृषि सलाह से वंचित रह जाते हैं।
    10. क्रेडिट की कमी – हालांकि योजनाएं मौजूद हैं, लेकिन औपचारिक क्रेडिट की पहुंच कुल कृषि क्रेडिट ज़रूरतों के लगभग 45% तक ही है।
      भविष्य कैसा दिखता है
      अगर मौजूदा ट्रेंड जारी रहा, तो MP भारत में टिकाऊ, ज़्यादा ग्रोथ वाली खेती के लिए एक मॉडल बन सकता है। राज्य का कन्वर्जेंस पर ज़ोर—KVKs, ATMA, और राज्य के एक्सटेंशन वर्कर्स को एक साथ लाना—हर साल हर ज़िले में कम से कम 5,000 किसानों तक एडवांस्ड टेक्नोलॉजी पहुँचाने का लक्ष्य रखता है। इसमें एग्रो फॉरेस्ट्री, प्रिसिशन फार्मिंग, और AI आधारित उपज के पूर्वानुमान को भी जोड़ दें, तो आपके पास मज़बूत, मुनाफ़े वाली खेती का नुस्खा तैयार है।
      टेक्नोलॉजी का कन्वर्जेंस – राज्य ने KVKs, ATMA (एग्रीकल्चरल टेक्नोलॉजी मैनेजमेंट एजेंसी), और AI आधारित उपज के पूर्वानुमान को इंटीग्रेट करके हर साल हर ज़िले में 5,000 किसानों तक प्रिसिशन एग्रीकल्चर टूल्स पहुँचाने की योजना बनाई है।
      एग्रो फॉरेस्ट्री पर ज़ोर – मिट्टी की सेहत सुधारने और कार्बन क्रेडिट जेनरेट करने के लिए पेड़ वाली फसलों के तहत अतिरिक्त 2 मिलियन हेक्टेयर ज़मीन को टारगेट करना।
      प्राइवेट सेक्टर के साथ पार्टनरशिप – ड्रोन आधारित स्प्रेइंग, मिट्टी की नमी के सेंसर, और मार्केट लिंकेज प्लेटफॉर्म के लिए एग्रीटेक स्टार्टअप के साथ नए सहयोग।
      सस्टेनेबिलिटी पर फोकस – खेती को क्लाइमेट रेज़िलिएंट बनाने के लिए पानी बचाने वाली फसलों (जैसे, बाजरा) और रिन्यूएबल एनर्जी से चलने वाली खेती पर ज़ोर।
      नए एग्री एंटरप्रेन्योर्स के लिए संदेश साफ़ है: ज़मीन उपजाऊ है, नीतियां सहायक हैं, और बाज़ार भूखा है। चाहे वह मशरूम का वेंचर हो, हाई वैल्यू वाला बागवानी प्रोजेक्ट हो, या टेक इनेबल्ड सप्लाई चेन हो, MP एक ऐसा खेल का मैदान देता है जहाँ आइडिया जल्दी से असर में बदल सकते हैं।
      निष्कर्ष:
      मध्य प्रदेश सिर्फ़ फसलें नहीं उगा रहा है—यह एग्री एंटरप्राइज़ का एक बिल्कुल नया इकोसिस्टम तैयार कर रहा है। डिजिटल टूल्स, सरकारी मदद, और इनोवेटिव किसानों की लहर के साथ, राज्य अपने खेतों को सचमुच दौलत पैदा करने वाले इंजन में बदलने की राह पर है। MP का एग्री एंटरप्राइज़ लैंडस्केप तेज़ी से बदल रहा है, जो हाई वैल्यू फसलों, पशुधन की ग्रोथ, डिजिटल मार्केटप्लेस, और सहायक नीतियों से प्रेरित है। हालांकि चुनौतियाँ बनी हुई हैं, टेक्नोलॉजी का कन्वर्जेंस और मज़बूत सरकारी समर्थन राज्य को टिकाऊ, मुनाफ़े वाली खेती के लिए एक राष्ट्रीय मॉडल बनने की स्थिति में लाता है। अगर आप इसमें उतरने की सोच रहे हैं, तो यही सही समय है!
      स्रोत:
    11. किस्मत के खेत: मध्य प्रदेश में उद्यम के रूप में कृषि… minutespedia.in
    12. अनुकूल मौसम के कारण इंदौर संभाग के किसान दालों और मक्के की खेती की ओर रुख कर रहे हैं… टाइम्स ऑफ इंडिया
    13. मध्य प्रदेश के कृषि मुनाफे में परिवर्तनकारी रुझान: 2020 से 2023 तक का एक व्यापक विश्लेषण… mpkonnect.com
    14. NRLM के सामुदायिक संस्थानों के माध्यम से SHG महिलाओं के नेतृत्व में वैल्यू चेन बनाना… imagogg.org
    15. भोपाल की महिला ने 50 मशरूम बैग को 60 लाख रुपये के वेंचर में बदला और स्थानीय महिलाओं को कमाने के लिए प्रशिक्षित किया… thebetterindia.com
    16. सतत कृषि विकास के मध्य प्रदेश मॉडल का पालन करें… arunanchaltimes.in
  • गुजरातियों का घंटा बजाने निकले कैलाश की छाती पर क्यों मच रहा तांडव

    गुजरातियों का घंटा बजाने निकले कैलाश की छाती पर क्यों मच रहा तांडव

    -आलोक सिंघई-

          “मालव धरती धीर गंभीर, डग डग रोटी पग पग नीर” (Malav dharti dheer gambhir, dag dag roti pag pag neer) यह कहावत मालवा क्षेत्र की उपजाऊ, समृद्ध और जल-संपन्न भूमि का वर्णन करती है, जिसका अर्थ है कि यह धरती बहुत उपजाऊ है जहाँ हर कदम पर रोटी (अनाज) और हर पग पर पानी (जल) उपलब्ध है ।पहली बार दुनिया को पता चला कि सफाई के तमगे जीतते इंदौर का पानी अब पूरी तरह जहरीला हो चुका है। इतना कि उसने लगभग दो दर्जन लोगों की बलि ले ली। वैसे तो शहर के भागीरथपुरा में दो सौ से अधिक लोग गंभीर स्तर पर बीमार पड़े लेकिन हजारों लोगों का मन आज भी घिन से भरा हुआ है जिन्हें स्थानीय निकाय और जन प्रतिनिधियों की लापरवाही की वजह से मलमूत्र भरा पानी पीने को मजबूर होना पड़ा। इस घटना के बावजूद खुद को शहर का भाग्यविधाता समझने का दंभ भरने वालों का दिल नहीं पसीजा। इन मौतों के बाद हाल ही में उनके परिवार की एक शादी का समारोह जितने बड़े पैमाने पर मनाया गया उससे पता चलता है कि वहां के जन प्रतिनिधि अब एक अलग ही नशे में मदमस्त घूम रहे हैं।

         कांग्रेस के राजकुमार राहुल गांधी सत्रह जनवरी को इंदौर आ रहे हैं। उनकी कांग्रेस इस घटना पर इसी दिन पूरे प्रदेश में भी विरोध प्रदर्शन करेगी। कांग्रेस का आरोप है कि भाजपा की राजनीति और स्थानीय नेताओं की अकुशलता की वजह से लोगों को अपने परिजनों का बिछोह सहना पड़ रहा है। दरअसल इंदौर की इस घटना से न केवल मालवा बल्कि पूरे प्रदेश और देश के लोगों का मन विक्षोभ से भरा हुआ है। यही वजह है कि कांग्रेस जैसे समयातीत हो चले राजनीतिक दल के नेता भी अंगड़ाई लेने लगे हैं। कुछ दिनों पहले मध्यप्रदेश का बंटाढ़ार करने में निपुण दिग्विजय सिंह ने भी एक अखबार में आलेख के माध्यम से भाजपा की कार्यशैली को कटघरे में खड़ा करने की कोशिश की थी। इस टसुए बहाते लेख के माध्यम से दिग्विजय ने गुजरातियों पर निशाना साधा था।उनका कहना था कि राज्य की पंचायतों तक में गुजरातियों को जो ठेके दिए गए उनसे राज्य की स्थिति बिगड़ी है। कई गुजराती ठेकेदार तो बगैर काम किए भुगतान लेकर रफूचक्कर हो गए। उन्होंने भाजपा के जिन नेताओं से जुड़े ठेकेदारों को पेटी कांट्रेक्ट दिए उन्होंने भी काम नहीं किया। इस वजह से राज्य और इंदौर की ये दुर्दशा हुई है।

    कवि दुष्यंत कुमार की साए में धूप की कुछ लाईनें आज ज्यादा प्रासंगिक हो रहीं हैं। कि

    कैसे मंज़र सामने आने लगे हैं,गाते-गाते लोग चिल्लाने लगे हैं।

    अब तो इस तालाब का पानी बदल दो,ये कँवल के फूल कुम्हलाने लगे हैं

         शहरी नियोजन की विफलता को दर्शाने के लिए दिग्विजय ने जो लेख लिखा वह वास्तव में एक गहरी और अंदरूनी राजनीति का प्रकटीकरण बताया जा रहा है। पिछले लगभग ढाई दशकों से दिग्विजय सिंह मंदड़िए की तरह दांव खेल रहे हैं। शतरंज के पांसे फेंकते चुन्नू मुन्नू ने जिस तरह भाजपा की सत्ता में अपने महल खड़े किए उससे मध्यप्रदेश की राजनीति को आसानी से समझा जा सकता है। महापौर रहते हुए कैलाश विजयवर्गीय पर जिस पेंशन घोटाले का आरोप लगा था उसे अदालत ने सत्रह सालों बाद इसलिए खारिज कर दिया क्योंकि सरकार ने इस मामले में अभियोजन की स्वीकृति ही नहीं दी।

          इस मामले में कांग्रेस के नेता के के मिश्रा का आरोप है कि कैलाश विजयवर्गीय ने महापौर बनने के बाद परिषद की पहली बैठक में ही संकल्प पारित करवा लिया कि पेंशनधारियों को नंदानगर सहकारी साख संस्था के माध्यम से भुगतान किया जाएगा। इसके बाद अपात्र लोगों को जमकर पेंशन का भुगतान किया गया। जांच में घोटाले की रकम 33 करोड़ से ज्यादा आंकी गई थी। मिश्रा ने कोर्ट में एक परिवाद दायर कर तत्कालीन महापौर कैलाश विजयवर्गीय, महापौर परिषद यानि एमआईसी के तत्कालीन सदस्य रमेश मेंदोला, पूर्व महापौर उमाशशि शर्मा, तत्कालीन सभापति और अब सांसद शंकर लालवानी, तत्कालीन निगमायुक्त संजय शुक्ला समेत 14 लोगों के खिलाफ धोखाधड़ी, अमानत में खयानत, कूट रचना का आरोप लगाते हुए इन पर आपराधिक प्रकरण चलाने की मांग की थी।

           इसके बाद इंदौर जिस तरह राजनेताओं के धन उलीचने का अड्डा बना उसने तो पूरे इंदौर को ही लुटेरा बना दिया। इंदौर के चमकते विकास की अंतर्कथा ये साबित करती है कि जैसा राजा हो प्रजा वैसी ही हो जाती है। इसे समझने के लिए वहां के अस्पतालों की कहानिया हीं काफी हैं। छह आठ महीने पहले मेडीकल कालेज के सामने स्थित एक अस्पताल में जब मरीज के परिजनों ने देखा कि उन्हें थमाए गए बिल में एक ही खर्च कई बार दुहराया गया है तो उन्होंने अस्पताल के मालिक से बात की। इसके साथ ही उन्होंने स्थानीय मंत्रीजी से भी निवेदन किया कि अस्पताल बेवजह वसूली जा रही इस राशि का बिल संशोधित कर ले। मंत्रीजी के कार्यालय से अस्पताल प्रबंधक को फोन भी किया गया। इस पर प्रबंधक ने मरीज के परिजनों को दो टूक इंकार करते हुए कहा कि चुनाव से पहले मंत्रीजी उनसे पचपन लाख रुपए का चंदा ले चुके हैं। ऐसे में यदि वे मरीजों से भरपाई नहीं करेंगे तो फिर उन्हें अस्पताल बंद करना पड़ेगा।

             यही स्थिति वहां के तमाम कारोबारियों की  हो गई है। इंदौर में पदस्थ रहे पुलिस के एक बड़े अधिकारी का कहना है कि अब ये शहर एक दूसरे पर टोपी धरने में महारथ हासिल कर चुका है। एक नागरिक का बेशकीमती प्लाट नेता नगरी के एक गुंडे ने हथिया लिया। जब वह बिल्डर मंत्रीजी के सामने पहुंचा तो उन्होंने अपने दरबार में गुंडे की पेशी करवाई। गुंडा पूरी तैयारी से दस्तावेज लेकर पहुंचा और उसने कहा कि प्लाट तो उसी का है, भैया बेवजह उस पर दावा जता रहे हैं। हूबहू कागज देखकर बिल्डर चकरा गया। नेताजी ने उसे समझाया कि आपस में समझ लो। बड़ी अनुनय विनय के बाद बिल्डर ने अपना ही प्लाट दो करोड़ रुपये की अड़ीबाजी चुकाकर वापस पाया।

           ये घटनाएं तो आज आम हैं। घर घर में ये विष फैल चुका है। बहनें भाई की संपत्ति पर अड़ी बाजी कर रहीं हैं। कोई ससुराल का जेवर हड़पकर भाग रही है कोई रिश्तेदारों को अच्छे इलाज का प्रलोभन दिखाकर उनकी संपत्तियां लुटवा रहा है। लड़के लड़कियां चमक दमक के फेर में टोपी पहिनते पहिनाते दिख रहे हैं। लगभग ढाई दशकों में भोला भाला इंदौर बिल्कुल बदल गया है। एक नया ही शैतान वहां के जेहन में बैठ गया है। जो इंदौर कभी उत्पादक था वह आज शातिर कारोबारी माफिया बन चुका है।

            भागीरथ पुरा की घटना भी इसी जहरीली राजनीति और काले धन की हवस की भेंट चढ़ा है। अपना दामन छुड़ा रहे भाजपा के नेताओं ने अपने जिस बंटाढार सरगना से गुजराती लाबी पर सवालिया निशान लगवाया है वह केवल आधा सच है। ये बात सही है कि गुजरात से आए कुछ ठेकेदारों ने शिवराज सिंह चौहान की पिलपिली सरकार को ठगी का पप्पू बना रखा था। शहरी नवीनीकरण के नाम पर आई योजनाओं में खुलेआम खा खा खैया का खेल खेला गया। लेकिन इससे भागीरथपुरा का अभिशाप नहीं ढांका जा सकता है।सबसे ज्यादा राजस्व उपार्जन करने वाला इंदौर नगर निगम अपनी जल मल व्यवस्था को चलाने के लिए खुद सक्षम है। उस पर किसी केन्द्रीय योजनाओं की लूट का कोई असर क्यों पड़ना चाहिए था। दरअसल योजनाओं की इस लूट में सहयोगी बने भाजपा के नेताओं को जरा भी फिक्र नहीं थी कि उनके शहर की पाईप लाईनें सड़ चुकी हैं। उन्हें बदला भी जाना चाहिए। तेज आबादी का बोझ झेलते शहर में नई पाईप लाईनें भी विकसित की जानी थी। वे तो बस उन कागजी योजनाओं में अपना हिस्सा लेकर खिसक लिए । नृशंस लापरवाही पर सवालों के जवाब में घंटा बताते नेताओं को देखकर भविष्य की राजनीति की दिशा आसानी से समझी जा सकती है।

             जबसे कैलाश जी को पश्चिम बंगाल का प्रभार दिया गया और भारी संसाधन झोंकने के बाद ममता दीदी का प्रसाद खाने वाले वामपंथियों ने वहां भाजपा की दाल नहीं गलने दी तबसे भाजपा में कई स्तरीय चिंतन चलता रहा है। इस बार एक लाबी कह रही थी कि पिछले अनुभवों का लाभ लेने के लिए कैलाश जी को दुबारा उस मोर्चे पर भेजा जाए। इस जमावट को करीब से देख रहे उनके विरोधियों ने कलकत्ता के उन उद्योगपतियों से चंदा वसूली के प्रमाण हाईकमान के समक्ष रख दिए कि जिन्हें केन्द्र ने युद्ध में सहयोग के लिए तैनात किया था। जाहिर है कि भाजपा हाईकमान अपनी इस गलती को दुबारा कैसे दुहरा सकता था। इस बीच भागीरथ पुरा हो गया और अपनी गलती को छुपाने के लिए गुजरातियों पर ठीकरा फोड़ने की नादानी भी सामने आ गई। इस एपीसोड के बाद भाजपा के कई अन्य नेताओं को आशा की किरणें दिखने लगी हैं और वे अपने कुर्ते पजामे पर कलफ लगवाने में जुट गए हैं। रही सही कसर पूरी करने के लिए कांग्रेसियों ने भी खम ठोक दिया है।

  • साइबर ठगी रोकेगी जीरो एफआईआर:अमित शाह

    साइबर ठगी रोकेगी जीरो एफआईआर:अमित शाह

    01 लाख से अधिक राशि की साइबर वित्तीय धोखाधड़ी पर लागू होगी ई-जीरो एफआईआर (e-Zero FIR)

    भोपाल 25दिसंबर(प्रेस इंफॉर्मेशन सेंटर)। ई-जीरो एफआईआर व्यवस्था प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के ‘साइबर सुरक्षित भारत’ के दृष्टिकोण और अक्टूबर 2024 में उनके ‘मन की बात’ संबोधन के अनुरूप है। 

         केंद्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह के नेतृत्व में देश में साइबर अपराध से निपटने हेतु ऐतिहासिक और तकनीक-आधारित कदम उठाए जा रहे हैं। इसी क्रम में पूर्व प्रधानमंत्री श्रद्धेय श्री अटल बिहारी वाजपेयी जी के जन्म दिवस को ‘सुशासन दिवस’ के रूप में मनाए जाने की परंपरा के अनुरूप, मध्यप्रदेश पुलिस द्वारा प्रशासनिक सुशासन को सुदृढ़ करने हेतु एक नवीन अभिनव पहल के रूप में  ई-जीरो एफआईआर (e-Zero FIR) व्‍यवस्‍था का शुभारंभ किया गया। जिसका उद्घाटन ग्वालियर में आयोजित अभ्युदय मध्यप्रदेश ग्रोथ समिट के दौरान माननीय केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह द्वारा किया गया। इस अवसर पर ई-जीरो एफआईआर की पहली प्रति माननीय मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को सौंपी गई। इसके साथ ही मध्यप्रदेश, दिल्ली के बाद देश का दूसरा राज्य बन गया है, जहाँ ई-जीरो एफआईआर प्रणाली को लागू किया गया है। यह पहल पुलिस को अपराधियों से एक कदम आगे रखने की दिशा में मील का पत्थर साबित होगी।

             इस अवसर पर केंद्रीय मंत्री श्री ज्योतिरादित्य सिंधिया (संचार एवं सूचना प्रौद्योगिकी, पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास), उप मुख्यमंत्री श्री जगदीश देवड़ा, अध्यक्ष मध्यप्रदेश विधानसभा श्री नरेन्द्र सिंह तोमर, मंत्री जल संसाधन एवं प्रभारी मंत्री ग्वालियर श्री तुलसीराम सिलावट तथा मंत्री सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम विभाग श्री चेतन्य काश्यप की विशिष्ट उपस्थिति रही।

           मध्यप्रदेश में बढ़ते साइबर अपराधों की चुनौतियों को देखते हुए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने तकनीक का दुरुपयोग कर जनता की गाढ़ी कमाई लूटने वाले अपराधियों पर प्रभावी अंकुश लगाने के निर्देश दिए थे। मुख्यमंत्री जी का मानना है कि जैसे हमने स्वच्छता को अपनी संस्कृति बनाया है, वैसे ही हमें साइबर स्वच्छता को भी अपनी संस्कृति बनाना होगा।

    प्रदेश में ई-जीरो एफआईआर व्यवस्था का संचालन पुलिस महानिदेशक श्री कैलाश मकवाणा के निर्देशन तथा अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक श्री ए. साईं मनोहर के मार्गदर्शन में किया जा रहा है। जिसका उद्देश्य पुलिस को अपराधियों से अधिक तेज, तकनीक-सक्षम और नागरिक-केंद्रित बनाना है।

    साइबर वित्तीय धोखाधड़ी पुलिस के समक्ष एक बड़ी चुनौती बनकर उभरी है। अक्सर पीड़ित की जीवनभर की कमाई कुछ ही पलों में अपराधियों के हाथों चली जाती है, जिससे वह स्वयं को असहाय महसूस करता है। इसी पीड़ा को समझते हुए, गृह मंत्रालय द्वारा ई-जीरो एफआईआर की अवधारणा को लागू किया गया है, ताकि तकनीक को अपराधियों के विरुद्ध प्रभावी हथियार बनाया जा सके।

     2024 से लागू हुए नए आपराधिक कानून—भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS)—नागरिक-केंद्रित हैं और इनका मूल उद्देश्य ‘दंड नहीं, बल्कि न्याय’ प्रदान करना है।

    BNSS की धारा 173 के अंतर्गत जीरो एफआईआर को कानूनी मान्यता दी गई है, जिससे नागरिक देश में कहीं से भी इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से शिकायत दर्ज करा सकते हैं, चाहे अपराध किसी भी क्षेत्राधिकार में घटित हुआ हो।

    -जीरो एफआईआर एक क्रांतिकारी व्यवस्था है जो साइबर वित्तीय धोखाधड़ी (विशेष रूप से 1 लाख से अधिक की हानि) के मामलों में एफआईआर दर्ज करने की प्रक्रिया को तेज करती है। इसका मुख्‍य उद्देश्‍य क्षेत्राधिकार (Jurisdiction) की बाधाओं को समाप्त कर जांच की प्रक्रिया को तुरंत प्रारंभ करना है। यह प्रणाली तीन प्रमुख डिजिटल मंचों को एकीकृत करती है, जिसमें नेशनल साइबरक्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल (NCRP), I4C – भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र एवं CCTNS – अपराध एवं आपराधिक ट्रैकिंग नेटवर्क एवं सिस्टम सम्मिलित है। 

    ई-जीरो एफआईआई पंजीकरण की प्रक्रिया पांच चरणों में संपन्‍न होती है। इसके अंतर्गत प्रथम चरण में शिकायत दर्ज कराना होती है, जिसमें पीड़ित 1930 हेल्पलाइन या NCRP पोर्टल पर शिकायत दर्ज करता है। 1 लाख रूपए से अधिक की धोखाधड़ी होने पर डेटा सीधे भोपाल स्थित केन्‍द्रीय साइबर पुलिस हब को भेजा जाता है। दूसरे चरण में ऑटोमेटिक जनरेशन के अंतर्गत CCTNS सर्वर के माध्यम से शिकायत स्वतः ई-जीरो एफआईआर में बदल जाती है। तीसरे चरण में स्‍वीकृति (Acknowledgement) के अंतर्गत पीड़ित को तुरंत ई-जीरो एफआईआर नंबर उपलब्ध कराया जाता है। चौथे चरण में समीक्षा एवं हस्‍तांतरण के अंतर्गत राज्य स्तरीय साइबर पुलिस स्टेशन द्वारा समीक्षा कर प्रकरण संबंधित क्षेत्रीय पुलिस थाने भेजा जाता है। पांचवे एवं अंतिम चरण में नियमित एफआईआर दर्ज की जाती है, जिसमें  शिकायतकर्ता को 3 दिवस के भीतर अपने नजदीकी साइबर पुलिस स्टेशन में ई-जीरो एफआईआर को नियमित एफआईआर में परिवर्तित कराने की प्रक्रिया पूर्ण करनी होती है।

    साइबर अपराध में ‘गोल्डन ऑवर’ का महत्व

    साइबर अपराध में धोखाधड़ी के बाद के पहले 2 घंटे को “गोल्डन ऑवर” माना जाता है। जिसमें यदि पीड़ित तुरंत 1930 पर संपर्क करता है, तो I4C बैंकों के सहयोग से अपराधी के खाते में पहुंचने से पहले ही राशि को फ्रीज (रोक) किया जा सकता है। ई-जीरो एफआईआर के माध्यम से आईपी लॉग, ट्रांजैक्शन आईडी जैसे महत्वपूर्ण डिजिटल साक्ष्य कानूनी रूप से तत्काल सुरक्षित किए जाते हैं।

    देश में कहीं से भी शिकायत दर्ज करने की सुविधा से क्षेत्राधिकार से मुक्ति मिलती है। डिजिटल रिकॉर्ड के माध्यम से केस की स्थिति ऑनलाइन देखने की सुविधा प्राप्‍त होती है। एफआईआर जल्दी दर्ज होने से बैंकिंग चैनल सक्रिय हो जाते हैं, जिससे पैसा वापस मिलने की संभावना बढ़ जाती है। पीड़ित सीधे पोर्टल पर स्क्रीनशॉट और रसीदें अपलोड कर सकते हैं। 

    मध्यप्रदेश पुलिस द्वारा इस प्रणाली के लागू होने से यह स्‍पष्‍ट है कि तकनीक के माध्यम से न्याय को न केवल तेज, बल्कि आम नागरिकों के लिए अधिक सुलभ बनाया गया है।

  • साईबर तहसील से समय सीमा में होने लगे नामांतरणःकरण सिंह वर्मा

    साईबर तहसील से समय सीमा में होने लगे नामांतरणःकरण सिंह वर्मा

    भोपाल 24 दिसंबर(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)। राजस्व मंत्री श्री करण सिंह वर्मा ने कहा है कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में पिछले दो वर्षों में राजस्व प्रशासन को अधिक पारदर्शी, त्वरित और जनोन्मुखी बनाने की दिशा में ऐतिहासिक कार्य किए गए हैं।राजस्व विभाग द्वारा चलाए गए अभियानों और तकनीकी नवाचारों से नागरिकों को बड़ी राहत मिली है तथा लंबे समय से लंबित मामलों का तेजी से निराकरण संभव हुआ है।राजस्व मंत्री श्री वर्मा बुधवार को कुशाभाऊ ठाकरे अंतर्राष्ट्रीय कन्वेंशन सेंटर में विभाग की दो वर्ष की उपलब्धियों एवं नवाचारों पर पत्रकारों से चर्चा कर रहे थे। इस दौरान प्रमुख सचिव राजस्व श्री विवेक पोरवाल, आयुक्त राजस्व श्रीमती अनुभा श्रीवास्तव सहित अन्य विभागीय अधिकारी उपस्थित थे।


    मंत्री श्री वर्मा ने कहा कि राजस्व विभाग ने प्रकरणों के त्वरित समाधान के लिए वर्ष 2024-25 में ‘’राजस्व महाअभियान” के तीन चरण संचालित किए,जिनमें एक करोड़ से अधिक राजस्व प्रकरणों का निराकरण किया गया।उन्होंने कहा कि प्रकरणों के शीघ्र निराकरण के लिए राजस्व न्यायालयों में न्यायिक एवं गैर-न्यायिक कार्यों के लिए पृथक-पृथक अधिकारियों की नियुक्ति की गई है। मध्यप्रदेश देश का पहला राज्य है 24 जिलों में जिसने राजस्व न्यायालयों के लिए समर्पित अधिकारियों की नियुक्ति कर त्वरित एवं नियमित न्यायिक कार्यवाही सुनिश्चित की है।


    मंत्री श्री वर्मा ने “सायबर तहसील” को विभाग की बड़ी उपलब्धि बताते हुए कहा कि 29 फरवरी 2024 से नामांतरण की प्रक्रिया पूरी तरह पेपरलेस और फेसलेस कर दी गई है। अब 20 दिनों के भीतर नामांतरण पूरा कर आदेश व्हाट्सएप एवं ई-मेल के माध्यम से उपलब्ध कराया जा रहा है। सायबर तहसील के माध्यम से अब तक 6 लाख 26 हजार से अधिक नामांतरण प्रकरणों का निराकरण किया गया है, जिसके लिए इसे प्रधानमंत्री उत्कृष्टता प्रमाण पत्र भी प्राप्त हुआ है। आंशिक खसरा प्रक्रिया को भी ऑनलाइन किया गया है, जिससे प्रतिवर्ष लगभग 8 लाख नागरिक लाभान्वित होंगे तथा विवादित प्रकरणों का आपसी सहमति से त्वरित समाधान संभव होगा।


    मंत्री श्री वर्मा ने कहा कि स्वामित्व योजना के तहत गांवों की आबादी में निवासरत नागरिकों को भू-अधिकार पत्र प्रदान किए गए हैं। अब तक 39 लाख 60 हजार से अधिक लोगों को स्वामित्व अधिकार पत्र वितरित किए जा चुके हैं। इस तरह प्रदेश में योजना का 94 प्रतिशत कार्य पूर्ण हो चुका है।


    मंत्री श्री वर्मा ने कहा कि मध्यप्रदेश देश का पहला राज्य है जहाँ ड्रोन एवं जियो फेंस तकनीक का उपयोग कर त्रुटिरहित फसल गिरदावरी कराई जा रही है। इससे किसानों को वास्तविक नुकसान का लाभ समय पर मिल सकेगा। वर्ष 2025-26 में अब तक बाढ़ एवं अतिवृष्टि से प्रभावित नागरिकों को 2 हजार 68 करोड़ 99 लाख रुपये की सहायता राशि वितरित की जा चुकी है।


    भू-अर्जन प्रक्रिया को पारदर्शी और समयबद्ध बनाने के लिए आरसीएमएस पोर्टल पर एलएएमएस मॉड्यूल विकसित किया गया है।आरसीएमएस के माध्यम से पिछले दो वर्षों में 41.68 लाख प्रकरणों में से 94% से अधिक प्रकरणों का समय सीमा में निराकरण किया गया। राजस्व संग्रहण में भी प्रदेश ने उल्लेखनीय प्रगति की है। वर्ष 2024-25 में 700 करोड़ रुपये के लक्ष्य के विरुद्ध 1048 करोड़ रुपये का संग्रहण किया गया है, जबकि वर्ष 2025-26 में 1000 करोड़ रुपये का संग्रहण संभावित है।


    मंत्री श्री वर्मा ने कहा कि प्रदेश में राजस्व प्रशासन को मजबूत करने के लिए 1974 करोड़ रुपये की लागत से 324 कार्यालय भवन पूर्ण किए जा चुके हैं तथा 114 भवन प्रगतिरत हैं। इसके अतिरिक्त 261 आवासीय भवनों को भी स्वीकृति दी गई है। विभाग को सुदृढ़ करने के लिए 5281 पटवारियों एवं 136 नायब तहसीलदारों की भर्ती की गई है।
    मंत्री श्री वर्मा ने कहा कि भू अभिलेख पोर्टल का नवीन संस्करण 2.0 पूरे प्रदेश में लागू किया गया है, जिससे नागरिक अपनी भूमि का अभिलेख, डिजिटल नक्शा एवं प्रमाणित प्रतिलिपि मोबाइल एप के माध्यम से प्राप्त कर सकते हैं।साथ ही भूमि अभिलेखों के डिजिटाइजेशन का बड़ा अभियान प्रारंभ किया गया है जिसके अंतर्गत 15 करोड़ पुराने अभिलेखों को डिजिटल स्वरूप में परिवर्तित किया जाएगा। अब तक 1.59 करोड़ स्कैनिंग पूर्ण की जा चुकी है
    मंत्री श्री वर्मा ने आगामी तीन वर्षों की कार्ययोजना की जानकारी देते हुए कहा कि विभाग द्वारा विश्वास आधारित डायवर्जन प्रक्रिया लागू करने की योजना है। प्रदेश के नक्शाविहीन ग्रामों का नक्शा तैयार किया जायेगा एवं भू-अर्जन प्रकरणों में संपूर्ण प्रक्रिया को ऑनलाइन किया जायेगा।

  • चुनाव नहीं हुए पर सहकारी आंदोलन सफल,विश्वास सारंग का दावा

    चुनाव नहीं हुए पर सहकारी आंदोलन सफल,विश्वास सारंग का दावा

    भोपाल,24 दिसंबर(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)। सहकारी पैक्स समितियों तक के चुनाव न कराए जाने से सहकारिता आंदोलन में आम किसानों की सहभागिता समाप्त हो गई है। इसके बावजूद राज्य के सहकारिता मंत्री विश्वास सारंग का दावा है कि सहकारी आंदोलन सफल हो रहा है।राजधानी के अपेक्स बैंक सभागार में पहले तो उन्होंने खेलों में पदक जीतने वाले युवाओं की सफलता को अपनी कुशलता बताया बाद में सहकारिता के क्षेत्र में केन्द्रीय सहयोग का हवाला देकर अपनी पीठ थपथपाई।


    सरकार के दो साल पूरे होने पर शाबासी लेने पहुंचे मंत्री से जब पूछा गया कि धारा 11 के मापदंडों के अनुसार बैंक पूंजी विहीन हो गए हैं इस पर सरकार क्या कर रही है तो उन्होंने कहा कि हमने बैंकों को पूंजी मुहैया कराई है । उन्होंने कहा कि संस्थाओं के चुनाव कानूनी तौर पर करा लिये जाते हैं इससे हमें कामकाज चलाने लायक वैधानिक अधिकार मिल जाते हैं। सहकारी समितियों ने किसानों को कर्ज भी मुहैया कराया है और वसूली की बिगड़ी चाल भी सुधारी है। उन्होंने कहा कि भविष्य में हम किसानों को घर घर खाद पहुंचाने की व्यवस्था कर रहे हैं जो देश में अनूठी मिसाल के रूप में गिनी जाएगी।


    कंपनी के तौर पर चलाई जा रही सहकारी योजनाओं के आरोप से असहमति जताते हुए उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की डबल इंजन सरकार की परिकल्पना जहाँ केंद्र और राज्य एक साझा लक्ष्य, साझा गति और साझा परिणाम के साथ काम करते हैं, आज मध्यप्रदेश में ज़मीन पर साकार रूप ले रही है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के सक्षम नेतृत्व में मध्यप्रदेश ने बीते दो वर्षों में सहकारिता, खेल एवं युवा कल्याण के क्षेत्र में ऐतिहासिक उपलब्धियाँ हासिल की हैं।


    मंत्री श्री सारंग ने कहा कि प्रदेश के खिलाड़ी आज राष्ट्रीय ही नहीं बल्कि अंतर्राष्ट्रीय मंचों पर पदक अर्जित कर देश और प्रदेश का नाम रोशन कर रहे हैं। वर्ष 2024 में पेरिस (फ्रांस) में आयोजित ओलम्पिक व पैरा ओलम्पिक 2024 में प्रदेश के खिलाड़ियों ने प्रतिभागिता कर पदक अर्जित किये। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय स्तर पर भी मध्यप्रदेश ने खेलों में निरंतर उत्कृष्ट प्रदर्शन किया है। खेलो इंडिया यूथ गेम्स, तमिलनाडु में भी प्रदेश के खिलाड़ियों ने 29 पदक जीतकर अपनी प्रतिभा का परिचय दिया। इसी प्रकार 38वें नेशनल गेम्स, उत्तराखण्ड में मध्यप्रदेश के खिलाड़ियों ने 67 पदक अर्जित कर राज्यों में तीसरा स्थान प्राप्त किया।


    वर्ष 2024-25 की उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए मंत्री श्री सारंग ने बताया कि प्रदेश के खिलाड़ियों ने अंतर्राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में कुल 57 पदक तथा राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में 391 पदक अर्जित किए। हॉकी एशिया कप 2025, 16वीं एशियन शूटिंग चैंपियनशिप कजाकिस्तान, खेलो इंडिया वाटर स्पोर्ट्स फेस्टिवल श्रीनगर एवं एशियन केनो स्लालम चैंपियनशिप चीन में मध्यप्रदेश के खिलाड़ियों ने शानदार प्रदर्शन कर प्रदेश को शीर्ष राज्यों की श्रेणी में स्थापित किया है।


    मंत्री श्री सारंग ने कहा कि किसानों को बेहतर सेवाएं प्रदान करने हेतु ऑनलाइन केसीसी आवेदन, एकीकृत साख सीमा तथा नकद-वस्तु ऋण की बाध्यता समाप्त करने जैसे सुधार प्रस्तावित हैं। सभी PACS में ई-PACS के माध्यम से ऑनलाइन सेवाएं और SMS सूचना अनिवार्य की जाएगी। उन्होने बताया कि कमजोर जिला सहकारी बैंकों को आर्थिक सहायता देकर 0% ब्याज पर फसल ऋण उपलब्ध कराया जाएगा। डिफॉल्टर किसानों को मुख्यधारा में लाने हेतु एकमुश्त समझौता योजना तथा आर्थिक अनियमितताओं से प्रभावित किसानों को जांच अवधि में राहत देने की व्यवस्था हेतु न्याय योजना प्रस्तावित है।


    मंत्री श्री सारंग ने बताया कि राष्ट्रीय सहकारिता नीति 2025 के अनुरूप राज्य की सहकारिता नीति में आवश्यक संशोधन किए जाएंगे। जनवरी 2026 में IBPS के माध्यम से 2000 से अधिक पदों पर भर्ती एवं सतत प्रशिक्षण की योजना है। उन्होंने कहा कि CPPP मॉडल के विस्तार से सहकारिता में निजी निवेश और नवाचार को बढ़ावा दिया जाएगा। अंतर्राष्ट्रीय सहकारिता वर्ष 2025 अंतर्गत उत्कृष्ट संस्थाओं को पुरस्कृत किया जाएगा तथा जिला सहकारी बैंकों में NEFT/RTGS, QR कोड एवं इंटरनेट बैंकिंग जैसी आधुनिक तकनीकी सुविधाएं लागू की जाएंगी।

  • कर्ज लेकर खरीदा अनाज न बेचा न घोटाला रोक पाया खाद्य विभाग

    कर्ज लेकर खरीदा अनाज न बेचा न घोटाला रोक पाया खाद्य विभाग


    मंत्री गोविंद राजपूत ने माना सरकार पर उधार है खाली गोदामों का किराया


    भोपाल, 24 दिसंबर(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)। खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री गोविंद सिंह राजपूत आज जब सरकार की दो सालों की उपलब्धियां सुनाने पहुंचे तो पत्रकारों ने उन्हें विभागीय अव्यवस्थाओं को लेकर घेर लिया। पत्रकारों ने पूछा कि जिन ट्रकों से खाद्य विभाग के सील लगे अनाज से भरे बोरे पकड़े गए उनके खिलाफ अब तक आपराधिक प्रकरण क्यों नही दर्ज करवाए गए हैं। इस पर मंत्रीजी निरुत्तर हो गए।


    पत्रकारों ने पूछा कि सरकार कर्ज लेकर खरीदा गया अनाज नहीं बेच पा रही है, अपनी नाकामी छुपाने के लिए वह केन्द्र पर खरीदी करने का दबाव बना रही है। ऐसे में सरकार के दो साल कैसे सफल कहे जा सकते हैं। इस पर मंत्री ने कहा कि हम आगामी सिंहस्थ को देखते हुए अनाज का भंडारण कर रहे हैं। सिंहस्थ के दौरान हमें करोड़ों लोगों को भोजन कराना पड़ेगा। अनाज खरीदी के लिए हमें बैंकों से कर्ज लेना पड़ता है। सरकार पर ब्याज चुकाने का बोझ बढ़ता जा रहा है ऐसे में हमें केन्द्र से अनुरोध करना पड़ता है। उन्होंने माना कि किसानों ने बड़ी तादाद में भंडारगृह बना लिए हैं ऐसे में सरकार पर किराए की उधारी बढ़ती जा रही है। हम चाहते हैं कि ये गोदाम खाली हों ताकि सरकार को बेवजह किराया न भुगतना पड़े।


    उन्होंने पहले से रटी रटाई कहानी सुनाते हुए कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में मध्यप्रदेश शासन के खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग ने विगत दो वर्षों में सार्वजनिक वितरण प्रणाली, उपभोक्ता संरक्षण, किसान हित तथा गैस आपूर्ति के क्षेत्र में कई महत्वपूर्ण उपलब्धियाँ अर्जित की हैं। विभाग की ओर से योजनाओं के क्रियान्वयन में पारदर्शिता एवं तकनीक आधारित निगरानी व्यवस्था को प्राथमिकता दी गई है।


    खाद्य मंत्री श्री राजपूत ने बताया कि प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना के अंतर्गत प्रदेश के 5 करोड़ 25 लाख से अधिक हितग्राहियों को लगभग 22 हजार 800 करोड़ रुपये मूल्य का नि:शुल्क खाद्यान्न वितरित किया गया। राशन वितरण प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के उद्देश्य से मुख्यमंत्री अन्न सेवा जागरूकता कार्यक्रम लागू किया गया, जिसके तहत हितग्राहियों को एसएमएस के माध्यम से राशन आगमन एवं वितरण की जानकारी दी जा रही है। इसके अतिरिक्त 26 जनवरी एवं 2 अक्टूबर को ग्राम सभाओं में पात्र हितग्राहियों की सूची का वाचन किया जा रहा है।


    खाद्य मंत्री श्री राजपूत ने बताया कि विभाग द्वारा ई-केवाईसी प्रक्रिया में उल्लेखनीय प्रगति की गई है। प्रदेश में दो वर्ष में लगभग 1 करोड़ 70 लाख से अधिक हितग्राहियों का ई-केवाईसी सत्यापन पूर्ण किया जा चुका है। अब तक 4 करोड़ 97 लाख हितग्राहियों के ई-केवाईसी कराये जा चुके हैं। इस तरह से अब तक लगभग 93 प्रतिशत ई-केवाईसी पूर्ण हो चुके हैं। बायोमेट्रिक के साथ-साथ फेस ऑथेंटिकेशन के माध्यम से भी ई-केवाईसी की सुविधा उपलब्ध कराई गई है। 5 वर्ष से कम आयु के बच्चों, 80 वर्ष से अधिक आयु के वृद्धों एवं दिव्यांगजनों सहित लगभग 15 लाख हितग्राहियों को ई-केवाईसी से छूट प्रदान की गई है। साथ ही 14 लाख नए पात्र हितग्राहियों को जोड़कर पात्रता पर्ची जारी की गई है।


    खाद्य मंत्री श्री राजपूत ने बताया कि वन नेशन–वन राशन कार्ड योजना के अंतर्गत प्रतिमाह औसतन 39 हजार परिवार अन्य राज्यों में तथा लगभग 6 हजार परिवार अन्य राज्यों से मध्यप्रदेश में नि:शुल्क राशन प्राप्त कर रहे हैं। इसके अलावा लगभग 16 लाख परिवार प्रतिमाह अंतर-जिला पोर्टेबिलिटी का लाभ ले रहे हैं। वहीं जनजाति एवं पहुंचविहीन 89 गांवों में “आपका राशन आपके द्वार” योजना के माध्यम से घर-घर राशन पहुंचाया जा रहा है। मुख्यमंत्री अन्नदूत योजना के अंतर्गत वाहनों में जीपीएस प्रणाली स्थापित कर राज्य स्तरीय कंट्रोल कमांड सेंटर से निगरानी की जा रही है। एलपीजी आपूर्ति के क्षेत्र में उज्ज्वला एवं गैर-उज्ज्वला योजनाओं के अंतर्गत प्रदेश की बहनों की 6 करोड़ 17 लाख गैस रिफिल कराई गईं, जिसमें 911 करोड़ रुपये का अनुदान प्रदान किया गया। शहरी क्षेत्रों में घर-घर पाइप के माध्यम से गैस पहुंचाने के लिए शहरी गैस वितरण नेटवर्क का विस्तार किया जा रहा है।


    खाद्य मंत्री श्री राजपूत ने बताया कि वेयरहाउसिंग व्यवस्था को सुदृढ़ करने के लिए वेयरहाउसिंग कॉर्पोरेशन द्वारा नमी मापक, फ्यूमिगेशन एवं निरीक्षण से संबंधित तीन मोबाइल ऐप विकसित किए गए हैं, जिससे अनाज भंडारण की रियल टाइम मॉनिटरिंग सुनिश्चित की जा रही है। किसान हित में विभाग द्वारा समर्थन मूल्य पर गेहूं एवं धान की खरीदी की गई। लगभग 28 लाख किसानों से फसल खरीदी कर 51 हजार करोड़ रुपये का भुगतान किया गया। गेहूं की खरीदी में 175 रुपये प्रति क्विंटल बोनस देकर 2600 रुपये प्रति क्विंटल की दर से भुगतान किया गया।


    खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री गोविंद सिंह राजपूत ने कहा है कि नाप-तौल विभाग द्वारा विगत दो वर्षों में सत्यापन एवं निरीक्षण के माध्यम से 49 करोड़ 14 लाख रुपये का राजस्व अर्जित किया गया है। निरीक्षण के दौरान अनियमितता पाए जाने पर 11 हजार 700 प्रकरण पंजीबद्ध कर लगभग 4 करोड़ 50 लाख रुपये की दंड राशि वसूल की गई। उपभोक्ता विवादों के त्वरित निराकरण के लिए उपभोक्ता आयोगों का कंप्यूटरीकरण किया गया, जिसके परिणामस्वरूप दो वर्षों में 3 लाख 7 हजार से अधिक प्रकरणों का निराकरण किया गया। विभाग द्वारा आगामी अवधि में राशन दुकानों को मुख्यमंत्री पोषण मार्ट के रूप में विकसित करने, सॉफ्टवेयर सिस्टम के एकीकरण, उन्नत तकनीक से राशन वितरण तथा सिंहस्थ 2028 के लिए मेला क्षेत्र में राशन एवं गैस आपूर्ति की विस्तृत व्यवस्था किए जाने की कार्य योजना भी तैयार की गई है।

  • राज्य की खेती अब सोलर ऊर्जा से होगी बोले मंत्री राकेश शुक्ल

    राज्य की खेती अब सोलर ऊर्जा से होगी बोले मंत्री राकेश शुक्ल


    नवीन और नवकरणीय ऊर्जा विभाग की उपब्धियों पर मंत्री राकेश शुक्ला ने प्रकाश डाला


    भोपाल23 दिसंबर(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)। मध्यप्रदेश आज ऊर्जा सरप्लस राज्य बनकर सामने आया है। हमने ताप ऊर्जा, जल ऊर्जा, पन बिजली परियोजनाओं के साथ साथ सोलर बिजली बनाने में भी रिकार्ड सफलता पाई है। हमारा प्रयास है कि जल्दी ही राज्य की खेती की जरूरतें हम सोलर ऊर्जा से पूरी कर सकें। इसके लिए हमने इस साल पचास हजार किसानों को सब्सिडी आधारित सोलर पंप देने का फैसला किया है। लगभग चौदह हजार किसानों ने अपनी राशि भी जमा कर दी है ।जिन्हें सब्सिडी आधारित सोलर पंप और पूरा सैटअप दिया जा रहा है।


    विभागीय मंत्री राकेश शुक्ला के साथ ,प्रदेश के अतिरिक्त मुख्य सचिव ऊर्जा श्री मनु श्रीवास्तव(आईएएस) और मध्य प्रदेश ऊर्जा विकास निगम लिमिटेड (MPUVNL) के प्रबंध संचालक (MD) अमनवीर सिंह बैंस (Amanbir Singh Bains) भी इस अवसर पर उपस्थित थे।


    श्री बैंस ने बताया कि नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय के अंतर्गत नवरत्न सीपीएसयू, सोलर एनर्जी कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (एसईसीआई) ने सीपीएसयू योजना के अंतर्गत धार में 200 मेगावाट की सौर परियोजना तथा राज्य में 1000 मेगावाट क्षमता की बैटरी स्टोरेज परियोजना स्थापित करने के लिए मध्य प्रदेश सरकार के साथ समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए हैं। ये प्रोजेक्ट राज्य की गैर पारंपरिक ऊर्जा जरूरतें पूरी करने में मील का पत्थर साबित होगा।


    उल्लेखनीय है कि समझौता ज्ञापन पर शिवकुमार वी वेपाकोम्मा, निदेशक (विद्युत प्रणाली) एसईसीआई और मनु श्रीवास्तव, आईएएस, अतिरिक्त मुख्य सचिव (एनआरई) ने मध्य प्रदेश के नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री राकेश शुक्ला और आर पी गुप्ता, आईएएस (सेवानिवृत्त) अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक, एसईसीआई की उपस्थिति में हस्ताक्षर किए थे।


    200 मेगावाट की सौर परियोजना 500 मेगावाट के उस समझौते का हिस्सा है जिसे 2023 में एमपी पावर मैनेजमेंट कंपनी लिमिटेड (एमपीपीएमसीएल) के साथ 25 साल की अवधि के लिए निष्पादित किया गया था जिसके तहत एसईसीआई राज्य को बिजली की आपूर्ति करेगी। एसईसीआई ने मध्य प्रदेश राज्य में नवीकरणीय ऊर्जा के विस्तार और विकास के लिए 2500 करोड़ रुपये का चरणबद्ध पूंजीगत व्यय प्रस्तावित किया है।

  • ट्रांसपोर्टरों से वसूला चंदा बांटते तो आलोचना न होतीःराव उदय प्रताप सिंह

    ट्रांसपोर्टरों से वसूला चंदा बांटते तो आलोचना न होतीःराव उदय प्रताप सिंह


    राव उदयप्रताप सिंह ने गिनाई परिवहन विभाग की दो साल की उपलब्धियां


    भोपाल 22 दिसंबर(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)। परिवहन मंत्री राव उदय प्रताप सिंह ने भरी पत्रकार वार्ता में स्वीकार किया कि यदि परिवहन माफिया की अवैध वसूली की राशि हम बांटते रहते तो हमारे विभाग की आलोचना नहीं हो रही होती। हमने परिवहन नाके बंद करके जो जांच चौकियां स्थापित की हैं उनसे टैक्स चोरी का गैरकानूनी माल ढोने वालों में हड़कंप मचा हुआ है। अच्छा कारोबार करने वाले ट्रांसपोर्टरों को परेशान करने वाले अधिकारियों कर्मचारियों के खिलाफ भी कड़ी कार्रवाई की गई है। परिवहन सुधार के कई अन्य कार्यक्रम भी लगातार जारी रहेंगे।


    कुशाभाऊ ठाकरे सभागृह में आयोजित इस पत्रकार वार्ता में प्रदेश की परिवहन व्यवस्था को लेकर कई तीखे सवाल किए गए । इन सवालों से बचने के लिए मंत्रीजी ने शिक्षा विभाग के कार्यकलापों पर अधिक समय दिया और ट्रांसपोर्ट विभाग की बखिया उधेड़े जाने से बचने का पूरा जतन किया। परिवहन विभाग को लेकर मंत्री ने कहा कि जनवरी से आम जनता को सार्वजनिक परिवहन सेवा का लाभ मिलेगा। वाहन और सारथी पोर्टल पर कई सेवाएं उपलब्ध कराई गई हैं। ई-ड्राइविंग लाइसेंस की सुविधा शुरू की गई है और एमपी ऑनलाइन सेंटरों को सुविधा केंद्र के रूप में मान्यता दी गई है। इलेक्ट्रिक वाहनों पर टैक्स पूरी तरह माफ किया गया है और पुराने वाहनों को स्क्रैप कराने पर टैक्स में छूट दी जा रही है। ग्वालियर, इंदौर, भोपाल, जबलपुर, सतना, सिंगरौली, उज्जैन और देवास में ऑटोमेटिक टेस्टिंग स्टेशन स्थापित किए गए हैं।


    मंत्री ने बताया कि 1 जुलाई 2024 से चेकपोस्ट बंद हैं और चलित व्यवस्था के तहत काम हो रहा है। डेढ़ साल में करीब 6 फीसदी कर्मचारियों पर कार्रवाई की गई है। आरटीओ दलालों को लेकर उन्होंने कहा कि सभी सेवाएं ऑनलाइन हैं, जनता को दलालों के चक्कर में नहीं पड़ना चाहिए।

  • नीतिश के हिजाब उठाने पर हंगामा क्यों

    नीतिश के हिजाब उठाने पर हंगामा क्यों


    बिहार के मुख्यमंत्री नीतिश कुमार ने जब यूनानी चिकित्सा की डॉक्टर नुसरत परवीन का हिजाब उठाकर उसकी आंखों की चमक देखने का प्रयास किया तो कट्टर पंथियोंऔर नीतिश विरोधियों ने अपनी ओछी राजनीति शुरु कर दी। इस घटनाक्रम को नीतिश विरोधियों ने महिला और इस्लाम का अपमान बताना शुरु कर दिया । इस शोरगुल से घबराई नुसरत अब सरकारी नौकरी ज्वाईन करने को तैयार हो गई है। नीतिश ने कभी नरक बन चुके बिहार को तेजी से विकसित और आत्मनिर्भर हो रहे प्रांत में बदलने का भगीरथ किया है। दंगे,लूट और अराजकता के दौर में जा चुके बिहार की गाड़ी को पटरी पर लाना कभी लगभग असंभव माना जाता रहा है। ऐसे में बिहार की तरुणाई की आंखों में विकास को लेकर जो संकल्प और दृढ़ विश्वास पनपा है वह अद्भुत है। युवाओं के मुस्कुराते चेहरे आज बिहार के नव सूर्योदय की झलक दिखाते हैं। कोई शिल्पकार अनगढ़ पत्थर को तराशकर उसमें मूर्ति का सौंदर्य उभारता है तो वह बार बार हर कोण से उसकी मुस्कान को उभारने का प्रयास करता है । नीतिश कुमार भी कुछ इसी तरह बिहार के नागरिकों के चेहरों पर मुस्कान लाने का प्रयास कर रहे हैं। उम्र के 74 वें पड़ाव पर वे आश्वस्त होना चाहते हैं कि बिहार के युवाओं की आंखों में आगे बढ़ने के कैसे स्वप्न पल रहे है।उनकी राजनीतिक पारी का लंबा इतिहास रहा है। उस यात्रा में नुसरत जैसी न जाने कितनी नारियां उनके साथ कदम मिलाकर चलती रहीं हैं। इतने लंबे इतिहास में कभी नीतिश कुमार को अय्याश या चरित्र हीन व्यक्ति नहीं माना गया है। वे एक संवेदनशील राजनेता हैं जो अपने राज्य की बेहतरी के लिए दुर्दांत माफिया से भी टकराता रहा है। बिहार के आपराधिक गिरोह जिस तरह संसाधनों को लूटते रहे हैं और वहां की तरुणाई मजबूर होकर अन्य राज्यों व दूर देशों में काम करने को मजबूर की जाती रही हो वहां एक युवती वो भी मुस्लिम समाज के बीच से निकलकर डाक्टर बनने जा रही हो ये सुखद आश्चर्य से कम नहीं है। उसकी आंखों की चमक देखने का प्रयास करने वाले नीतिश कुमार अकेले व्यक्ति नहीं हैं । जिन चयनकर्ताओं ने उसे एक बड़ी सामाजिक जिम्मेदारी के लिए चुना वे भी उसकी योग्यता और सामाजिक समर्पण के कायल थे तभी तो उन्होंने उसे नौकरी के लिए चुना। ये नियुक्ति नीतिश कुमार के निर्देश पर नहीं हुई थी। जाहिर है कि उस क्षण को जिसे नीतिश कुमार भाव विभोर होकर देखने का प्रयास कर रहे थे उसे पूरी दुनिया में रह रहे बिहारी भी प्रसन्न भाव से देख रहे हैं। केवल कुछ कट्टरपंथी और विरोधी इस पर बखेड़ा खड़ा करने की कोशिश कर रहे हैं। जिन्होंने इतिहास पढ़ा है उन्होंने अंग्रेजों, मुगलों, जमींदारों, छुटभैये राजाओं की वे कहानियां खूब पढ़ी हैं जिनमें वे राज्य की नवयुवतियों को अपनी सेज पर ले जाने का कुकर्म करते देखे गए थे। इन्हीं बैचैनियों से निकलकर लोकतांत्रिक व्यवस्था ने जन्म लिया। आज कोई भी शासक या राजा ऐसी जुर्रत भी नहीं कर सकता है। नुसरत की उम्र तो उनके नाती पोतियों के बराबर है।वे सार्वजनिक स्थल पर उसके साथ अश्लील व्यवहार करने की सोच भी कैसे सकते हैं। वे जिस प्रशंसा भरे भाव से नुसरत को देख रहे थे वह दृश्य न केवल बिहार की आगे बढ़ती एक लड़की की कहानी सुनाता है बल्कि भारत के मुसलमानों की आगे बढ़ती नई पीढ़ी का दृष्टांत भी देता है। मुस्लिम वोटरों के जो ठेकेदार बरसों से भाजपा और उसके सहयोगी गैर कांग्रेसी राजनीतिक दलों को मुस्लिम विरोधी बताते रहे हैं वे इस घटनाक्रम से जरूर बैचेन घूम रहे हैं। उन्हें भय है कि यदि भारत के मुसलमानों की नई पीढ़ी के बीच से हिंदुत्व वादी राजनीति को मुस्लिम विरोधी बताने वाला नेरेटिव टूट गया तो वे कभी सत्ता का ख्वाब भी नहीं देख पाएंगे। जिस तरह हिंदू मुस्लिम और जातिगत व भाषाई राजनीति करके उन्होंने भारतीय समाज में फूट के बीज बोए थे वह षड़यंत्र धराशायी हो जाएगा। इसीलिए वे तरह तरह के दुष्प्रचार करके समाज को भ्रमित करने का प्रयास कर रहे हैं। ये अच्छा है कि नुसरत ने उनके बहकावे में न आकर अपने पैरों पर खड़े होकर चिकित्सा के माध्यम से समाजसेवा का निर्णय लिया है वह प्रशंसनीय है और स्वागत करने योग्य है। नुसरत के समान देश के सभी युवाओं को संकरे पैमानों से बाहर आकर विकास यात्रा का सहयात्री बनना है,तभी हम एक नए भारत का स्वप्न साकार कर पाएंगे।

  • विश्व स्तरीय सुविधाओं का लक्ष्य पूरा करेंगे शहरी निकायःकैलाश विजय वर्गीय

    विश्व स्तरीय सुविधाओं का लक्ष्य पूरा करेंगे शहरी निकायःकैलाश विजय वर्गीय

    भोपाल, 18 दिसंबर(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)। नगरीय विकास एवं आवास मंत्री श्री कैलाश विजयवर्गीय ने कहा है कि एक अनुमान के मुताबिक वर्ष 2047 में मध्यप्रदेश की कुल आबादी का लगभग 50 प्रतिशत आबादी शहरी क्षेत्रों में निवास करेगी। इस बात को ध्यान रखते हुए शहरी क्षेत्रों में अधोसंरचना कार्यों की योजना तैयार की जा रही है। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश ने स्वच्छता के क्षेत्र में देश में विशिष्ठ स्थान बनाया है। हमारे विभाग की कोशिश होगी कि प्रदेश के शहरी क्षेत्रों का एयर क्वालिटी इंडेक्स अच्छा हो। इस वजह से शहरी क्षेत्रों में बगीचों के विकास के साथ-साथ नगरवन को भी प्रोत्साहित किया जा रहा है। मंत्री श्री विजयवर्गीय भोपाल में राज्य सरकार के विकास और सेवा के दो वर्ष पूरा होने पर आयोजित पत्रकार वार्ता को संबोधित कर रहे थे।
    मंत्री श्री विजयवर्गीय ने बताया कि प्रदेश के जो शहर नर्मदा नदी के किनारे में आते है, वहां शहरों का दूषित पानी नदीं में न मिलें। इस पर विभाग लगातार काम कर रहा है। मेट्रोपॉलिटन सिटी की चर्चा करते हुए मंत्री श्री विजयवर्गीय ने बताया कि विभाग ने इंदौर-उज्जैन और भोपाल मेट्रोपॉलिटन सिटी के विकास का कार्य शुरू कर दिया है। भोपाल मेट्रोपॉलिटन सिटी में भोपाल, सीहोर, रायसेन, विदिशा, राजगढ़ और नर्मदापुरम जिलों की प्रमुख तहसीलों को शामिल किया है। इंदौर-उज्जैन मेट्रोपॉलिटन सिटी में इंदौर, उज्जैन, देवास, शाजापुर, रतलाम और धार जिलों की प्रमुख तहसीलों को शामिल किया गया है। प्रदेश की 2 मेट्रोपॉलिटन सिटी इस तरह विकसित की जाएंगी। जहां शहरी आबादी को सभी आवश्यक बुनियादी सुविधाएं मिल सकें। मेट्रोपॉलिटन सिटी में निवेश और रोजगार पर भी ध्यान दिया जाएगा।
    मंत्री श्री विजयवर्गीय ने बताया कि विभाग की कोशिश है कि शहरी क्षेत्रों में रहने वाले नागरिकों की अधिक से अधिक सेवाओं का डिजिटलीकरण ऑनलाइन हों। इसको ध्यान में रखते हुए हमने ई-नगरपालिका विकसित की है। प्रदेश के शहरों को ग्रीन सिटी के रूप में विकसित किया जा रहा है। नगरीय सेवाओं में सोलर एनर्जी का अधिक से अधिक उपयोग किया जाएं। इसको सुनिश्चित किया जा रहा है। राज्य सरकार का प्रयास है कि नगरीय निकाय आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर हो। इसके लिये शहरी क्षेत्रों की सम्पत्तियों का जीआई मेपिंग किया जा रहा है।
    प्रधानमंत्री आवास योजना शहरी में एक लाख 60 हजार से अधिक आवासों का निर्माण पूरा। प्रधानमंत्री आवास योजना के क्रियान्वयन में मध्यप्रदेश को बेस्ट परफॉर्मिंग अवार्ड की श्रेणी में दूसरा स्थान।
    उल्लेखनीय बिंदु-
    अमृत 2.0 में 300 परियोजनाओं का कार्य पूर्ण।
    जल गंगा संवर्द्धन अभियान में 3 हजार 323 जल संरचनाओं का, 74 जल संग्रहण संरचनाओं का लोकार्पण।
    स्वच्छ सर्वेक्षण 2024 में 8 शहरों का राष्ट्रीय पुरस्कार। साथ ही इंदौर ने देश के नम्बर वन शहर का सम्मान लगातार 8 साल बनायें रखा।
    कार्बन क्रेडिट से राशि अर्जित करने वाले इंदौर देश का प्रथम शहर
    दीनदयाल रसोई योजना में संचालित 56 केन्द्रों को बढ़कर इन्हें 191 केन्द्र किया गया।
    पीएम स्वनिधि योजना अंतर्गत 9 लाख से अधिक रहणी पटरी वालों को 14 लाख से अधिक ऋण प्रकरण मबजूत। मध्यप्रदेश को नवाचार और सर्वोत्तम अभ्यास की श्रेणी में पहला स्थान,
    आजीविकास मिशन में 3 लाख युवाओं को कौशल प्रशिक्षण दिलाया गया। 1 लाख 70 हजार युवाओं को स्व-रोजगार से जोड़ा गया।
    प्रदेश में 65 हजार स्व सहायता समूह का गठन। 6 लाख से अधिक परिवारों को स्व-सहायता समूह में जोड़ा गया।
    इंदौर में मेट्रो परिचालन शुरू भोपाल में दिसम्बर 2025 में ही शुरू होगा मेट्रो।
    हाउसिंग बोर्ड द्वारा एमपी ऑनलाईन के माध्यम से 532 करोड़ की सम्पत्तियों का विक्रय।
    गीता भवन स्थापना योजना 5 महीनों के लिये स्वीकृत।
    प्रदेश में इंटीग्रटेड टाउनशिप पॉलिसी-2025 मंजूर। प्रदेश में इलेक्ट्रिक व्हीकल पॉलिसी को भी मंजूरी।