Category: मध्यप्रदेश

  • क्रांतिकारियों सा जज्बा जगेः शिवराज सिंह

    क्रांतिकारियों सा जज्बा जगेः शिवराज सिंह

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    भोपाल :15 अगस्त ,

    मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा है कि प्रदेश के विकास के लिये वैसे ही जोश, जूनून और जज्बे़ की जरूरत है जैसा स्वतंत्रता आंदोलन में क्रांतिकारियों ने दिखाया था। उन्होंने नागरिकों का आव्हान किया कि वे अपने दायित्‍वों का निर्वहन पूरी निष्‍ठा से करें और नये संकल्प के साथ मध्यप्रदेश के विकास में जुट जायें।

    स्वतंत्रता दिवस के पावन अवसर पर प्रदेशवासियों को शुभकामनाएँ देते हुए अपने संदेश में श्री चौहान ने कहा कि प्रदेश के विकास और लोगों की तरक्की के समर्पित प्रयासों की यात्रा निरंतर जारी है। श्री चौहान ने स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों और शहीदों को नमन किया। श्री चौहान ने आज राजधानी के मोतीलाल नेहरू स्टेडियम में स्वतंत्रता दिवस के राज्य स्तरीय मुख्य समारोह में ध्वजारोहण किया और परेड की सलामी ली।

    रोजगार केबिनेट बनाने की घोषणा

    श्री चौहान ने रोजगार की नई संभावनाएँ चिन्हित करने और पात्र लोगों को रोजगार पाने में मदद करने के लिये रोजगार केबिनेट बनाने की घोषणा की। इसके लिये अभियान चलाया जायेगा। उन्होंने कहा कि दैनिक वेतनभोगियों को स्थायी कर्मियों के रूप में लिया जायेगा ताकि उन्हें भी वेतनमान, वेतन वृद्धि और मंहगाई भत्ता आदि की सुविधाएँ मिलेंगी। साथ ही उनकी योग्यतानुसार अन्य विभागों में उनका समायोजन किया जायेगा। उन्होंने कहा कि कार्यभारित कर्मियों की मृत्यु होने पर उनके आश्रितों को अनुकंपा नियुक्ति का लाभ मिलेगा। शासकीय कर्मियों को सातवाँ वेतनमान दिया जायेगा। श्री चौहान ने सामाजिक सुरक्षा पेंशन राशि बढ़ाने की भी घोषणा की।

    प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी द्वारा अमर शहीद चन्द्रशेखर आजाद की जन्म स्थली आजादनगर, अलीराजपुर से “याद करो कुर्बानी” कार्यक्रम के शुभारंभ का उल्लेख करते हुए कहा कि भोपाल में शौर्य स्मारक एवं धावाबावड़ी, बड़वानी, में भीमा नायक स्मारक का शीघ्र लोकार्पण किया जायेगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री मोदी लोकप्रिय वैश्विक नेता के रूप में उभरे हैं जिनके नेतृत्व में दुनियाभर में भारत की साख बढ़ी है।

    श्री चौहान ने कहा कि राज्य सरकार ऐसे समतामूलक समाज की स्थापना के लिये प्रतिबद्ध है जिसमें बिना भेदभाव के सभी सभी को विकास का लाभ मिले। मध्यप्रदेश के आर्थिक विकास की चर्चा करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश तेज गति से आगे बढ़ रहा है। आर्थिक विकास दर प्रचलित मूल्‍यों पर निरंतर दो अंकों में बनी हुई है।

    आनंद विभाग का गठन

    मुख्यमंत्री ने कहा कि मध्यप्रदेश आनंद विभाग गठित करने वाला देश का पहला राज्य है। इसी के अंतर्गत राज्य आनंद संस्थान भी बनाया गया है। किसानों के हितों के संरक्षण के लिये अपनी प्रतिबद्धता दोहराते हुए श्री चौहान ने कहा कि विगत वर्ष प्राकृतिक आपदा प्रभावित किसानों को 5000 करोड़ से अधिक की राहत राशि भी वितरित की गई। कृषि से जुड़े क्षेत्रों में किये गये प्रयासों को रेखांकित करते हुए उन्होंने कहा कि वर्ष 2015-16 में जहाँ देश में दुग्ध उत्पादन की वार्षिक वृद्धि दर 6.27 प्रतिशत थी, वहीं मध्यप्रदेश की वृद्धि दर 12.70 प्रतिशत रही है।

    बिजली में सरप्लस

    विगत 10 साल में सिंचाई क्षमता में वृद्धि की चर्चा करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि सिंचाई का रकबा 40 लाख हेक्टेयर हो गया है। उन्होंने कहा कि बिजली के मामले में मध्यप्रदेश सरप्लस राज्य बन गया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि विद्युत उत्पादन क्षमता को वर्ष 2022 तक 22 हजार मेगावाट से अधिक किया जायेगा। वर्तमान में प्रदेश में 17 हजार 169 मेगावाट बिजली की उपलब्धता है। किसानों को विद्युत प्रदाय में विगत वर्ष लगभग सात हजार करोड़ की सब्‍सिडी दी गई। नवकरणीय ऊर्जा की क्षमता 3 हजार 176 मेगावाट हो गई है।

    ग्रामीण विकास को सर्वोच्च प्राथमिकता का क्षेत्र बताते हुए श्री चौहान ने कहा कि इस वित्तीय वर्ष में अभी तक 5 लाख 40 हजार ग्रामीण शौचालयों का निर्माण किया गया, जो देश में सर्वाधिक है। उन्होंने कहा कि त्रि-स्तरीय पंचायतों के चुनावों में भाग लेने वाले अभ्यर्थियों के आवास परिसर में शौचालय होना अनिवार्य किया गया है। आगामी तीन साल में सभी गाँव बारहमासी सड़कों से जुड़ जायेंगे।

    पर्यावरण विभाग का गठन

    वन सम्पदा समृ‍द्धि की चर्चा करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि राष्ट्रीय स्तर पर कान्हा टाइगर रिजर्व तथा सतपुड़ा टाइगर रिजर्व को पुरस्कृत किया गया। पहली बार तेन्दू पत्ता संग्राहकों को ई-पेमेंट से भुगतान किया गया है। प्रभावी रूप से पर्यावरण संरक्षण के लिये पर्यावरण विभाग का गठन किया गया है।

    मुख्यमंत्री अन्नपूर्णा योजना में एक करोड़ 16 लाख परिवारों को लाभ मिल रहा है। शहरी क्षेत्रों में पात्र परिवारों को शहर की किसी भी उचित मूल्य दुकान से सामग्री लेने की सुविधा भोपाल, इन्दौर एवं खण्डवा शहर में लागू कर दी गई है।

    श्री चौहान ने नगरों के सुनियोजित विकास के संबंध में कहा कि स्मार्ट सिटी योजना में भोपाल, इंदौर एवं जबलपुर शहर में कम्पनी का गठन हो गया है। उज्जैन में सिंहस्थ महाकुंभ के सफल आयोजन की चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी द्वारा मानवता के नाम 51 -सूत्रीय सार्वभौम अमृत संदेश जारी किया गया। उन्होंने सिंहस्थ के सफल आयोजन के लिये सभी को बधाई दी और कहा कि ऐसा आयोजन कहीं नहीं हुआ।

    2000 नये उप-स्वास्थ्य केन्द्र

    “स्वस्थ मध्यप्रदेश” की अवधारणा को साकार करने का संकल्प दोहराते हुए श्री चौहान ने कहा कि 11 नये चिकित्सा महाविद्यालयों की स्थापना हो रही है । स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार के लिए 2000 नये उप स्वास्थ्य केन्द्रों को मंजूरी दी गई है।

    लाडो अभियान से 82 हजार से अधिक बाल विवाह रोके गये। लाड़ली लक्ष्मी योजना का लाभ 23 लाख बालिकाओं को मिल चुका है। कक्षा छटवीं में आने पर 17 हजार लाड़लियों को 2000 रुपए की छात्रवृत्ति दी जा रही है। स्कूली शिक्षा सुविधा विस्तार के प्रयासों की चर्चा करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि अध्यापक संवर्ग को एक जनवरी 2016 से छठवाँ वेतनमान स्वीकृत किया गया है।

    सूक्ष्म और लघु उद्योगों के लिये विभाग

    उद्योग क्षेत्र की चर्चा करते हुए श्री चौहान ने कहा कि वर्ष 2014 में आयोजित ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट के बाद अब तक ढाई लाख करोड़ का निवेश हुआ है। सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्योगों को प्रोत्साहित करने के लिये अलग विभाग का गठन किया गया है।

    मुख्‍यमंत्री युवा उद्यमी योजना, मुख्यमंत्री स्व-रोजगार और मुख्यमंत्री आर्थिक कल्याण योजना में गत वर्ष 72 हजार हितग्राहियों को लाभ दिया गया। लगभग 48 हजार सूक्ष्‍म, लघु और मध्यम उद्यमों में पाँच हजार करोड़ रुपये का पूँजी निवेश और करीब दो लाख लोगों को रोजगार मिला है।

    अनुसूचित जाति – जनजाति के विकास के लिये प्रतिबद्ध

    अनुसूचित जाति एवं जनजाति के विकास के लिये संकल्प दोहराते हुए श्री चौहान ने कहा कि आदिवासी विकासखण्ड में सामुदायिक विकास प्रशिक्षण एवं रोजगार की योजनाओं में लगभग 5500 युवाओं को लाभ मिला। राज्य सरकार अनुसूचित जाति वर्ग के सर्वांगीण विकास और संवैधानिक हितों के संरक्षण के लिये कटिबद्ध है। सामाजिक न्याय की दिशा में प्रयासों का उल्लेख करते हुए श्री चौहान ने कहा कि मुख्यमंत्री कन्या विवाह सहायता योजना में अब तक कुल 3 लाख 68 हजार 431 जोड़ों और निकाह योजना में 8 हजार 353 जोड़ों का विवाह हुआ है।

    राष्ट्रीय स्तर पर प्रदेश को पाँच पर्यटन पुरस्कार मिलने की चर्चा करते हुए श्री चौहान ने कहा कि पिछले वर्षों में प्रदेश में पर्यटकों की संख्या में वृद्धि हुई है। खेलों को प्रोत्साहन देने के लिये सभी विधानसभा क्षेत्रों में विकास खंड स्तर पर ग्रामीण खेल परिसरों का निर्माण किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि कानून-व्यवस्था में निरंतर सुधार के पुलिस बल में 6250 नवीन पद की स्वीकृति दी गई है। सभी थानों का कम्प्यूटरीकरण पूरा हो गया है।

    भूमि स्वामी एवं बटाईदार के हितों का कानून

    किसानों की आय दोगुनी करने के लिए रोड-मेप तैयार कर लिया गया है। इस वर्ष सहकारिता के क्षेत्र में 15 हजार करोड़ का ऋण वितरण किया जायेगा। मुख्यमंत्री कृषक सहकारी ऋण सहायता योजना में किसानों को वस्तु ऋण के लिये 370 करोड़ का अनुदान उपलब्ध करवाया जा रहा है।

    प्रदेश में बटाई पर जमीन देने तथा लेने वाले दोनों के हित संरक्षण के लिए “मध्यप्रदेश भूमि स्वामी एवं बटाईदार के हितों का संरक्षण बिल-2016” बनाया गया है। इस कानून में भूमि-स्वामी अनुबंध के द्वारा अपनी भूमि दे सकेगा। भूमि पर स्वामित्व भू-स्वामी का ही रहेगा। इससे कृषि भूमि का रकबा तथा उत्‍पादन बढ़ेगा और जिससे बटाईदार और भू-स्वामी दोनों को लाभ होगा।

    उद्यानिकी को बढ़ावा

    मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्तमान में देश के प्रमाणीकृत जैविक खेती का 32 प्रतिशत क्षेत्रफल मध्यप्रदेश में है । इसे बढ़ाकर 50 प्रतिशत किया जायेगा। उद्यानिकी को बढ़ावा देने के लिये लगभग 600 क्लस्टर विकसित किये जायेंगे। आगामी एक साल में 50 हजार हेक्टेयर में उद्यानिकी फसलें ली जायेंगी। प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना में 15 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई की जायेगी। प्याज के बेहतर भण्डारण की व्यवस्था के लिये अगले दो साल में पाँच लाख मीट्रिक टन प्याज भण्डारण की क्षमता विकसित की जायेगी। किसानों को नुकसान से बचाने के लिये सरकार ने जो प्याज खरीदा है उसे गरीबों में बाँटा जायेगा।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि नर्मदा-मालवा-गंभीर लिंक योजना का काम जारी है। इससे 50 हजार हेक्टेयर सिंचाई क्षमता निर्मित होगी। नर्मदा घाटी की सिंचाई परियोजनाओं से अगले वर्ष पाँच लाख 50 हजार हेक्टेयर रकबा सिंचित किया जायेगा।

    “नमामि देवि नर्मदे’’ यात्रा नवंबर में

    “हरियाली चुनरी योजना” में नर्मदा नदी के तटीय क्षेत्रों में वृक्षारोपण एवं जलग्रहण क्षेत्र उपचार किया जा रहा है। माँ नर्मदा के जल को शुद्ध बनाये रखने में आमजन की सहभागिता के साथ “नमामि देवि नर्मदे” यात्रा नवम्बर में प्रारम्भ की जाएगी। नर्मदा नदी के दोनों तटों से एक-एक किलोमीटर चौड़ाई में एक वर्ष में 20 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में फल-पौध रोपण किया जायेगा।

    मध्यप्रदेश दीनदयाल अन्त्योदय राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन में गाँवों में रहने वाली 16 लाख 46 हजार निर्धन महिलाएँ सामाजिक और आर्थिक सशक्तिकरण का नया इतिहास लिख रही हैं। हर परिवार को भूखण्‍ड एवं आवास देने के लिये आवासीय भूखण्ड का पट्टा देने का अभियान चलाया गया है। वर्ष 2022 तक कोई भी नागरिक आवासहीन नहीं रहेगा।

    सार्वजनिक वितरण प्रणाली को सुदृढ़ और पारदर्शी बनाने के उद्देश्य से मुख्यमंत्री अन्नपूर्णा योजना में प्रदेश की एक तिहाई राशन दुकानें यथासंभव महिलाओं की संस्थाओं को आवंटित की जायेंगी। प्रत्येक ग्राम पंचायत में एक दुकान खोली जायेगी। प्रधानमंत्री उज्जवला योजना में गरीब महिलाओं को वर्ष के अंत तक 20 लाख नवीन गैस कनेक्शन दिये जायेंगे।

    श्री चौहान ने कहा कि स्मार्ट सिटी योजना के दूसरे चरण के लिये ग्वालियर, उज्जैन, सागर एवं सतना शहरों के प्रस्ताव भेजे गये हैं। राज्य सरकार अपने साधनों से अन्य शहरों को स्मार्ट सिटी का रूप देने की योजना बन रही है।

    स्वास्थ्य संवाद केन्द्रों की स्थापना

    स्वास्थ्य सुविधाओं की पहुँच बढ़ाने के लिये सभी जिला चिकित्सालयों में आज से “स्वास्थ्य संवाद केन्द्र” की स्थापना की जा रही है। जबलपुर में स्टेट केंसर इंस्टीट्यूट एवं ग्वालियर में केंसर केयर सेंटर की स्थापना की जा रही है। चिकित्सा महाविद्यालय भोपाल में 2000 बिस्तर के सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल के लिये करीब 436 करोड़ की स्‍वीकृति दी गयी है। ई-रक्त कोष का एकीकृत साफ्टवेयर शुरू किया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि बच्चों के पोषण स्तर में सुधार के लिये 4305 नवीन आँगनवाड़ी केन्द्र और 600 मिनी आँगनवाड़ी केन्द्र खोले जायेंगे।

    नैतिक शिक्षा और योग पाठ्यक्रम में शामिल

    श्री चौहान ने कहा कि नैतिक शिक्षा और योग को पाठ्यक्रम में सम्मिलित करने का फैसला लिया है। पाठ्यक्रमों में समय और आज की जरूरतों के अनुसार सुधार कर रोजगारोन्मुखी बनाया जायेगा।

    मुख्यमंत्री मेधावी छात्र सहायता योजना का शुभारंभ

    मुख्यमंत्री ने कहा कि आर्थिक कारणों से योग्य विद्यार्थी उच्च शिक्षा प्राप्त करने से वंचित नहीं रहें इसलिये मुख्यमंत्री मेधावी छात्र सहायता योजना प्रारम्भ की जायेगी। इसके लिये 1000 करोड़ तक का फण्ड बनाया जायेगा।

    शासकीय महाविद्यालयों में प्रवेश लेने वाले विद्यार्थियों को स्मार्टफोन प्रदाय किया जाना प्रारंभ हो गया है। इस साल साढ़े तीन लाख छात्रों को स्‍मार्टफोन दिये जायेंगे। शहडोल में पंडित एस.एन. शुक्ला महाविद्यालय को विश्वविद्यालय का दर्जा दिया गया है।

    नौ नये उद्योग क्षेत्रों की स्थापना

    औद्योगिक क्षेत्रों के विकास की प्राथमिकता रेखांकित करते हुए श्री चौहान ने कहा कि इस वर्ष 22-23 अक्टूबर को इन्दौर में “ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट-2016” किया जा रहा है। वर्ष 2020 तक 2600 हेक्टेयर भूमि पर 2000 करोड़ की लागत से नौ नवीन औद्योगिक क्षेत्रों की स्थापना की जायेगी। अब तक ढाई लाख करोड़ से ज्यादा का निवेश प्रदेश में आ चुका है।

    शिक्षा को और अधिक गुणवत्तायुक्त बनाने हेतु संविदा शाला शिक्षकों के लगभग 20 हजार पद भरे जाएंगे। ज्ञानोदय विद्यालय की सीट संख्या बढ़ाकर 6 हजार 400 की जा रही है। इन्‍दौर, जबलपुर और भोपाल में 720 सीटर आवासीय उत्‍कृष्‍ट विद्यालय ”गुरूकुलम्” प्रारंभ किए जाएंगे।

    सायबर अपराधों के निराकरण के लिए विशेष न्यायालय

    कानून-व्यवस्था की दृष्टि से मध्यप्रदेश को आदर्श राज्य बताते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि सूचना-प्रौद्योगिकी के उपयोग को बढ़ावा दिया जा रहा है। आगामी एक वर्ष में डायल-100 योजना में 200 वाहन और बढ़ाये जायेंगे। पचास नये शहरों में सी.सी.टी.वी. आधारित सुरक्षा एवं निगरानी प्रणाली स्थापित की जायेगी। सायबर और उच्च तकनीकी अपराधों के निराकरण के लिए जबलपुर, भोपाल, इंदौर और ग्वालियर में विशेष न्यायालयों का गठन किया जायेगा।

  • सूचना को कुचलने वाला आयोग

    सूचना को कुचलने वाला आयोग

    jyoti prakash भोपाल, ११ अगस्त। जिस म० प्र० राज्य सूचना आयोग पर प्रदेश भर में सूचना का अधिकार अधिनियम का पालन करवाने की जिम्मेदारी है, उसी ने मनमानी व्याख्या, कार्यवाही तथा टाल-मटोल करते हुए इस अधिकार का माखौल बना रखा है। स्वाभाविक रूप से ही, उसकी यही प्रवृत्ति प्रदेश भर के सरकारी कार्यालयों में तेजी से फैल रही है। परिणाम यह हो रहा है सूचना के अधिकार के तहत्‌ सूचना प्राप्त करने के इच्छुक लोगों का यह अधिकार अवरुद्ध हो रहा है। (more…)

  • टीम की तरह आगे बढ़ेगा देश :नरेन्द्र मोदी

    टीम की तरह आगे बढ़ेगा देश :नरेन्द्र मोदी

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    भोपाल,9 अगस्त(पीआईसीएमपीडॉटकॉम)। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने कहा है कि सवा सौ करोड़ देशवासी टीम इंडिया के रूप में देश को आगे बढ़ाने का संकल्प लें। जनशक्ति में देश को आगे बढ़ाने की ताकत होती है। प्रधानमंत्री श्री मोदी आज अलीराजपुर जिले के चन्द्रशेखर आजाद नगर (भाबरा) में ‘आजादी 70 – याद करो कुर्बानी’ कार्यक्रम का शुभारंभ कर रहे थे। उन्होंने राष्ट्रव्यापी तिरंगा यात्रा का शुभारंभ भी किया।

    प्रधानमंत्री श्री मोदी ने कहा कि आज अगस्त क्रांति दिवस है। आज महात्मा गाँधी ने अंग्रेजों से भारत छोड़ो का आव्हान किया था। आज फिर से अवसर है कि आजादी की लड़ाई में जिन लोगों ने अपना सर्वस्व समर्पित कर दिया उनका स्मरण करें। उन्होंने शहीदों और उनके बलिदान को याद करते हुये कहा कि वे जिन महान उद्देश्यों को लेकर लड़े, उन उद्देश्यों की पूर्ति का प्रण लें। उन्होंने जिस भारत का सपना देखा, उसे पूरा करने का हर देशवासी संकल्प लें। संकल्प लें कि देश के लिये जियें और गाँव, गरीब, पीड़ित और शोषित, वंचितों के जीवन में बदलाव लाने के लिये काम करें। आजादी के बाद 70 वर्षों में देश का जितना विकास होना चाहिये था उतना हुआ नहीं। आज भी देश में हजारों गाँव ऐसे हैं जिनमें बिजली नहीं है। केन्द्र सरकार ने एक हजार दिन में इन गाँवों में बिजली पहुँचाने का संकल्प लिया है। पिछले एक वर्ष में ऐसे आधे से अधिक गाँव में बिजली पहुँचाई जा चुकी है। आज भी देश में बहुत से बच्चे शिक्षा से वंचित है। हर बच्चे को स्कूल पहुँचाने का संकल्प लें।

    कश्मीर के विकास के लिये हरसंभव मदद

    प्रधानमंत्री ने कहा कि कश्मीर हर देशवासी के लिये स्वर्ग भूमि है। पूर्व प्रधानमंत्री श्री अटल बिहारी वाजपेयी ने इंसानियत, कश्मीरियत और जमहूरियत का मार्ग अपनाया था। हम इसी मार्ग पर आगे बढ़ रहे हैं। आजादी के सेनानियों ने जो आजादी देश को दिलाई वही आजादी हर कश्मीरी को भी मिली है। उन्होंने कहा कि मुट्ठीभर गुमराह हुए लोग कश्मीर की महान परंपरा को ठेस पहुँचा रहे हैं। हम कश्मीर को विकास की नई ऊँचाइयों पर ले जाना चाहते हैं और कश्मीर की युवा पीढ़ी को रोजगार के अवसर उपलब्ध करवाना चाहते हैं। उन्होंने कश्मीर के युवाओं का आव्हान किया कि कश्मीर को दुनिया का स्वर्ग बनाने के संकल्प के लिये मिलकर काम करें। कश्मीर में इंसानियत और कश्मीरियत को दाग नहीं लगने दिया जायेगा। देश के नौजवानों से उन्होंने आव्हान किया कि देश के विकास के लिये आगे आयें। विकास के मार्ग पर चलकर कठिनाइयों के हल खोजे जा सकते हैं। उन्होंने सभी राजनैतिक दलों का आभार व्यक्त किया जिन्होंने कश्मीर के मुद्दे पर एक स्वर से समर्थन किया। कश्मीर के विकास के लिये जो भी संभव होगा, वह किया जायेगा।

    श्री मोदी ने कहा कि पूरा हिन्दुस्तान आजादी के लिये एक होकर लड़ा था। आज फिर देश के रूप में एक सपने को लेकर आगे बढ़ने का अवसर है। देश के लिये कुछ करने का संकल्प लें। उत्साह और उमंग से काम करें, तो देश आगे बढ़ेगा।

    मुख्यमत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि क्रांतिकारी चन्द्रशेखर आजाद की जन्मभूमि पर आने वाले देश के पहले प्रधानमंत्री श्री मोदी है। देश को आजादी दिलाने में हजारों देशभक्त और क्रांतिकारियों के बलिदान का महत्वपूर्ण योगदान हैं। सम्पूर्ण देश में 9 से 23 अगस्त तक क्रांतिकारियों को याद करने का उत्सव मनाया जायेगा। केन्द्र सरकार का यह प्रयास अभिनंदनीय है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री मोदी के राष्ट्र निर्माण के स्वच्छता, डिजिटल इंडिया जैसे अभियानों में आगे आकर सहयोग करें। उन्होंने युवाओं का आव्हान किया कि देशभक्ति के जज्बे से काम करें।

    पशुपालन एवं मत्स्य-पालन मंत्री श्री अंतरसिंह आर्य ने आदिवासी बोली में स्वागत भाषण िदया। उन्होंने कहा कि विश्व आदिवासी दिवस पर आदिवासी बहुल जिले में आये प्रधानमंत्री का प्रदेशवासियों की ओर से स्वागत है।

    प्रधानमंत्री श्री मोदी ने इस अवसर पर लगाई गई प्रदर्शनी का अवलोकन किया। प्रधानमंत्री श्री मोदी का परम्परागत आदिवासी पगड़ी, जैकेट तथा कड़ा पहनाकर स्वागत किया गया। इसके पहले प्रधानमंत्री श्री मोदी ने शहीद चंद्रशेखर आजाद की जन्म-स्थली पहुँचकर श्रद्धा-सुमन अर्पित किये।

    कार्यक्रम में स्कूल शिक्षा मंत्री श्री विजय शाह, खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री श्री ओमप्रकाश धुर्वे, पर्यटन एवं संस्कृति राज्य मंत्री श्री सुरेन्द्र पटवा, सांसद श्री नंदकुमार सिंह चौहान और सांसद श्री विनय सहस्त्रबुद्धे, अन्य जन-प्रतिनिधि और बड़ी संख्या में जनता उपस्थित थी। आभार प्रदर्शन सहकारिता राज्य मंत्री एवं जिले के प्रभारी मंत्री श्री विश्वास सारंग ने किया।

  • सुविधाजनक बने प्रदेश के शहर

    सुविधाजनक बने प्रदेश के शहर

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    भोपाल (पीआईसीएमपीडॉटकॉम)।
    राज्य सरकार ने नगरीय क्षेत्र के विकास की सुनियोजित योजनाएँ बनायी हैं। अधोसंरचना हो या बुनियादी नागरिक सुविधाएँ, नागरिकों को उपलब्ध करवाने के लिये गुणवत्तापूर्ण काम सभी नगरीय क्षेत्र में किये गये हैं। मेट्रो रेल की परिकल्पना हो या लोक परिवहन का मामला, स्वच्छता की बात हो या ई-गवर्नेंस, शहरी गरीबों को आवास सुविधा या उनके लिये पेयजल उपलब्ध करवाना, इन सभी बुनियादी सुविधाओं के लिये नगरीय विकास एवं पर्यावरण विभाग के जरिये निरंतर काम किया जा रहा है।

    प्रदेश की 2 करोड़ 59 हजार की आबादी वाले नगरीय क्षेत्रों में नगरीय सुविधाओ के लिये हुए कामों ने शहरी अधोसंरचना की तस्वीर बदल दी है। इस उद्देश्य के लिये वर्ष 2015-16 में 7812 करोड़ 98 लाख रुपये का बजट था। वर्ष 2002-03 में यह बजट मात्र 738 करोड़ था। वर्ष 2005 से प्रदेश के 4 बड़े शहर- भोपाल, इंदौर, जबलपुर और उज्जैन में 2679 करोड़ की 28 परियोजना स्वीकृत की गयी हैं। अन्य छोटे तथा मझौले शहरों में 114 निकाय की 181 परियोजना स्वीकृत की गयी हैं। बारहवीं पंचवर्षीय योजना में 1500 करोड़ में से 288 नगरीय निकाय को 1403 करोड़ 15 लाख रुपये के कामों के लिये स्वीकृति दे दी गयी है।

    भोपाल एवं इंदौर के लिये देश का प्रथम लाइट मेट्रो सिस्टम प्रक्रिया में है। प्रदेश के शहरी क्षेत्रों में स्थित हेरीटेज स्मारकों/स्थलों/भवनों के संरक्षण एवं संवर्धन के लिये वर्ष 2013-14 में शहरी विरासत संरक्षण एवं संवर्धन योजना शुरू की गयी है। स्वर्ण जयंती शहरी स्व-रोजगार योजना में वर्ष 2013-14 तक 2 लाख 14 हजार 76 हितग्राही तथा प्रशिक्षण कार्यक्रम में 4 लाख 18 हजार 411 हितग्राही को प्रशिक्षण दिया गया। अक्टूबर, 2013 में इस योजना के स्थान पर राष्ट्रीय शहरी आजीविका मिशन शुरू किया गया है।

    मध्यप्रदेश अर्बन डेव्हलपमेन्ट कम्पनी

    नगरीय निकायों की वर्तमान क्षमता तथा मानव प्रबंधन में कमी के कारण परियोजनाओं को समय से पूरा करने में आ रही कठिनाइयों को दूर करने और अधोसंरचना के काम समय-सीमा में क्रियान्वित करने के लिये मध्यप्रदेश अर्बन डेव्हलपमेंट कम्पनी बनायी गयी है। कम्पनी द्वारा निकायों को तकनीकी तथा वित्तीय सहायता उपलब्ध करवाने के साथ निकाय-स्तर पर स्वीकृत परियोजनाओं का क्रियान्वयन भी किया जायेगा।

    स्मार्ट-सिटी

    भारत सरकार की स्मार्ट-सिटी योजना में पहले चरण में प्रदेश के 3 शहर भोपाल, इंदौर और जबलपुर का चयन किया गया है। स्मार्ट-सिटी योजना में प्रदेश के नागरिकों को मुख्य बुनियादी सुविधाएँ, स्वच्छ और टिकाऊ पर्यावरण, जीने के लिए उच्च-स्तरीय गुणवत्ता और स्मार्ट समाधान प्राप्त होगा। राज्य शासन स्तर पर अन्य शहरों को स्मार्ट-सिटी बनाने की कार्य-योजना भी तैयार की जा रही है।

    शहरी गरीबों को आवास

    शहरों में गरीबों के लिये आवास उपलब्ध करवाने के लिये ‘सबके लिए आवास” योजना बनाई गयी है। प्रधानमंत्री आवास योजना में भारत सरकार द्वारा ग्वालियर शहर के एक्शन प्लान को देश के सभी राज्य में मॉडल के रूप में मान्य किया गया है। वर्ष 2018 तक शहरी गरीबों के लिये 5 लाख घरों के निर्माण का लक्ष्य रखा गया है। एक हजार करोड़ रुपये की लागत से 50 हजार शहरी गरीब आवासों का निर्माण किया जायेगा।

    अटल मिशन फॉर रिज्युवेनेशन एण्ड अर्बन ट्रान्सफार्मेशन

    मध्यप्रदेश ने भारत सरकार की अटल मिशन फॉर रिज्युवेनेशन एण्ड अर्बन ट्रान्सफार्मेशन योजना में प्रथम स्थान प्राप्त किया है। योजना में स्वच्छ पेयजल, सीवरेज कनेक्शन, वर्षा जल के निकासी, हरित क्षेत्रों में विकसित एवं शहरी परिवहन को सुनिश्चित किये जाने के उद्देश्य से एक लाख से अधिक जनसंख्या वाले प्रदेश के 34 शहर का चयन किया गया है।

    प्रदेश के 10 लाख से अधिक आबादी वाले शहरों में केन्द्र शासन से 33 प्रतिशत, राज्य शासन से 50 प्रतिशत एवं नगरीय निकायों द्वारा 17 प्रतिशत अंशदान के साथ योजनाओं का क्रियान्वयन किया जा रहा है एवं प्रदेश के 10 लाख तक की आबादी वाले शहरों में केन्द्र शासन से 50 प्रतिशत, राज्य शासन से 40 एवं नगरीय निकायों के 10 प्रतिशत अंशदान के साथ योजनाओं का क्रियान्वयन किया जा रहा है।

    मुख्यमंत्री शहरी स्वच्छता मिशन एवं स्वच्छ भारत अभियान

    स्वच्छ भारत मिशन में आगामी 5 वर्ष के लिये 5209 करोड़ 14 लाख रुपये की स्वच्छता कार्य-योजना में व्यक्तिगत शौचालय, सामुदायिक/सार्वजनिक शौचालय का निर्माण, ठोस अपशिष्ट प्रबंधन जैसे काम करवाये जा रहे हैं। दिसम्बर-2015 तक 50 लाख घरों में शौचालय की सुविधा उपलब्ध करवायी जा चुकी है। सभी 52 हजार गाँव को खुले में शौच से मुक्त करने का लक्ष्य है। अभी 1500 से अधिक गाँव को खुले में शौच से मुक्त किया जा चुका है।

    राज्य सरकार ने शहरों की स्वच्छता के लिये मुख्यमंत्री शहरी स्वच्छता मिशन प्रारंभ किया था जिसे भारत सरकार द्वारा सर्वोच्च प्राथमिकता के स्वच्छ भारत मिशन में शामिल किया गया है। संपूर्ण राज्य में व्यक्तिगत शौचालयों का निर्माण तेजी से चल रहा है। चार लाख से अधिक शौचालयों को स्वीकृत कर डेढ़ लाख से अधिक शौचालयों का निर्माण कर मध्यप्रदेश पूरे देश में दूसरे स्थान पर है। सामुदायिक शौचालयों में 5068 से अधिक सीट्स का निर्माण करवाया जा चुका है।

    सार्वजनिक क्षेत्रों में स्वच्छता बनाये रखने के लिये 637 से अधिक सामुदायिक/सार्वजनिक शौचालयों की स्वीकृति दी गई है। इसमें से 208 से अधिक सामुदायिक/सार्वजनिक शौचालयों का निर्माण करवाया जा चुका है।

    नगरीय ठोस अपशिष्ट प्रबंधन के लिये सफाई उपकरण जैसे- छोटा कचरा वाहन, बेलिंग मशीन, काम्पेक्टर एवं मड पम्प आदि के लिये नगरीय निकायों को आर्थिक सहायता दी गई है। प्रदेश के निकायों के क्लस्टर बनाकर ठोस अपशिष्ट प्रबंधन जन-निजी भागीदारी के माध्यम से किया जा रहा है।

    योजना में घर-घर से कचरा एकत्रित कर क्षेत्रीय लेण्डफिल साईट तक ले जाकर वैज्ञानिक तरीके से उसका डिस्पोजल किया जायेगा। इससे पर्यावरण का संरक्षण होगा।

    घर-घर से कचरा एकत्रित करने की कार्यवाही प्रारंभ की जाकर वर्ष 2016-17 में 100 प्रतिशत लक्ष्य प्राप्ति का उद्देश्य है। स्वच्छता व्यवहार में परिवर्तन के लिये सूचना शिक्षा संप्रेषण के माध्यम से जन-जागरूकता का काम भी किया जा रहा है। स्वच्छ भारत मिशन भारत सरकार एवं राज्य सरकार के 50:50 प्रतिशत अंशदान के अनुपात में क्रियान्वित किया जा रहा है।

    मेट्रो रेल परियोजना

    राज्य शासन द्वारा प्रदेश के नागरिकों को उच्च स्तरीय लोक परिवहन सुविधा प्रदान करने तथा प्रदेश को विश्व परिवहन मानचित्र पर स्थान प्रदाय करने भोपाल एवं इंदौर शहरों में स्टेट-ऑफ-आर्ट मेट्रो परियोजना वर्ष 2021-2022 तक क्रियान्वित करने का निर्णय लिया गया है। जबलपुर एवं ग्वालियर के लिये भी मेट्रो रेल परियोजना के लिये डीपीआर प्रक्रिया में है।

    मेट्रो रेल परियोजना के क्रियान्वयन के लिये मध्यप्रदेश मेट्रो रेल कंपनी का गठन किया जा चुका है। योजना में भोपाल एवं इंदौर में मेट्रो के लिये प्रस्तावित नेटवर्क की कुल लंबाई क्रमशः 95 किलोमीटर एंव 103 किलोमीटर है। प्रथम चरण में भोपाल में 28 किलोमीटर और इंदौर में 31 किलोमीटर लागत 14 हजार करोड़ रुपये से निर्माण काम प्रस्तावित है।

    शहरी लोक परिवहन

    भोपाल, इंदौर, ग्वालियर, जबलपुर एवं उज्जैन नगर के लिये पार्किंग, लोक परिवहन एवं ट्रांजिट ओरिएन्टेड डेव्हलपमेंट मास्टर-प्लान की तैयारी की जा रही है।

    शहरों में बढ़ते शहरीकरण से वाहनों की संख्या में हो रही बढ़ोत्तरी से शहरी यातायात बेतरतीब हो रहा है तथा पर्यावरण भी प्रदूषित होता है। ऐसी स्थिति में शहरी लोक परिवहन अत्यंत महत्वपूर्ण काम है। इस कार्य को प्राथमिकता देते हुए इसे दृष्टि पत्र 2018 में मिशन के रूप में रखा गया है।

    सुरक्षित एवं सुगम यातायात के लिये प्रदेश के प्रमुख शहरों में यातायात सूचना प्रबंधन एवं नियंत्रण केन्द्र की स्थापना के लिये परियोजना प्रतिवेदन तैयार करवाया जा रहा है। भोपाल, इंदौर, ग्वालियर, जबलपुर एवं उज्जैन नगरों के लिये पार्किंग, लोक परिवहन, विज्ञापन एवं ट्रान्जिट ओरिएन्टेड डेव्हलपमेंट के मास्टर प्लान तैयार करवाये जा रहे हैं।

    प्रदेश के चार शहर- भोपाल में 225, इन्दौर में 175, जबलपुर में 119 एवं उज्जैन में 89 आधुनिक एवं आरामदायक बसों के माध्यम से लोक परिवहन बस सेवा संचालित है। प्रदेश के 21 शहर के लिये कम्प्रेहेन्सिव मोबेलिटी प्लान तैयार करवाये जा रहे हैं।

    प्रदेश के शहरों में लोक परिवहन व्यवस्था को सुदृढ़ किये जाने के लिये राज्य-स्तरीय डेडीकेटेड अर्बन ट्रांसपोर्ट फण्ड एवं शहर स्तरीय डेडीकेटेड अर्बन ट्रांसपोर्ट फण्ड का गठन किया गया है। इन दोनों फण्ड के लिये इस वित्त वर्ष में 48 करोड़ का बजट प्रावधान है।

    प्रदेश के 20 नगरीय निकायों में लोक परिवहन के लिये प्रस्ताव भारत सरकार को अमृत योजना में स्वीकृत की जा चुकी हैं।

    ई-गवर्नेंस एवं शहरी सुधार योजना

    बढ़ते शहरीकरण को देखते हुए नगरीय निकायों की कार्य-प्रणाली में सुधार की जरूरत है। शहरी सुधार कार्यक्रम में वित्तीय सुधार, प्रशासकीय सुधार, ई-गवर्नेंस, सम्पत्ति कर एवं उपभोक्ता प्रभार में सुधार इत्यादि शामिल है। इसके लिए वर्ष 2013-14 से ”शहरी सुधार कार्यक्रम” योजना शुरू की गयी है।

    नगरीय निकायों की कार्य-प्रणाली में पारदर्शिता तथा नागरिकों की सुविधा के लिये राज्य-स्तर से अनुदान देकर ”ई-नगरपालिका परियोजना” शुरू की गई है। प्रधानमंत्री की महत्वाकांक्षी डिजिटल इंडिया योजना को देखते हुए प्रदेश के सभी नगरीय निकायों में ई-गवर्नेंस रिफार्म का क्रियान्वयन किया जा रहा है।

    प्रदेश के सभी नगर निगमों में भवन अनुज्ञा की प्रक्रिया को सुगम बनाते हुए ऑटोमेटेड बिल्डिंग प्लान अप्रूवल सिस्टम लागू किया गया है। इस प्रक्रिया में ऑनलाईन भुगतान की व्यवस्था लागू की गई है। इस परियोजना में मैदानी जाँच के लिये भी मोबाईल ऐप की सुविधा भी उपलब्ध करवायी गयी है। नागरिकों को ”फायर एनओसी” ऑनलाईन देने का काम भी शुरू किया गया है।

    नगरीय निकायों में राजस्व वृद्धि के उद्देश्य से जियोग्राफिकल इन्फार्मेशन सिस्टम द्वारा आधुनिक सेटेलाईट नक्शे के माध्यम से घर-घर सर्वे का काम शुरू करवाया गया है। 44 निकायों में यह काम पूरा कर लिया गया है, 79 नगरीय निकायों में काम प्रगति पर है। कई निकायों में सम्पत्ति कर की वसूली में 50 से 60 प्रतिशत तक की वृद्धि हुई है।

    सूचना प्रौद्योगिकी उन्नयन

    सूचना प्रौद्योगिकी उन्नयन योजना में जी.आई.एस. तकनीक पर तैयार किये गये खसरावार भूमि उपयोग मानचित्र की जानकारी के लिये 4 नगरों को आनलाईन किया जा चुका हैं।

    राज्य नगर नियोजन संस्थान द्वारा 4 नगरों की वेबबेस्ड जी.आई.एस. एप्लीकेशन तैयार करवाये जाने की कार्यवाही प्रचलन में हैं।

    मुख्यमंत्री शहरी पेयजल योजना

    प्रदेश के ऐसे नगरीय निकाय जहाँ भारत सरकार की अमृत योजना और बाह्य पोषित योजना में पेयजल योजनाएँ प्रस्तावित नहीं है, ऐसे नगरीय निकाय को मुख्यमंत्री शहरी पेयजल योजना में शामिल किया गया है। योजना की शुरूआत वर्ष 2012-13 में की गई। कुल 135 नगरीय निकाय में योजना का क्रियान्वयन किया जा रहा है। इस वित्त वर्ष में इस योजना में 122 करोड़ से ज्यादा का बजट प्रावधान है। दृष्टि-पत्र 2018 के अनुसार प्रदेश के सभी नगरों में सतही तथा स्थाई जल-स्त्रोतों से 135 लीटर प्रति व्यक्ति प्रतिदिन पेयजल आपूर्ति सुनिश्चित की जाना है।

    नगरों में पेयजल उपलब्ध करवाने के लिये यूआईडीएसएसएमटी योजना में 114 शहर में 179 परियोजनाएँ क्रियान्वित की जा रही हैं। अपूर्ण योजनाओं को पूर्ण करने के लिये भी 322 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।

    सिंहस्थ-2016

    राज्य सरकार ने प्रदेश में 12 वर्ष के अन्तराल पर होने वाले महापर्व सिंहस्थ का सफल आयोजन करवाया। महापर्व की तैयारी नगरीय विकास एवं पर्यावरण विभाग ने अन्य सहयोगी विभाग के माध्यम से वर्ष 2011 से ही शुरू कर दी थी। इस अन्तर्राष्ट्रीय आयोजन को भव्य और चिरस्मरणीय बनाने के लिये श्रेष्ठ व्यवस्थाएँ और आवश्यक अधोसंरचना का निर्माण करवाया गया। श्रद्धालुओं को सुगमता के लिये उज्जैन, इंदौर, देवास, ओंकारेश्वर, मंदसौर शहर में रेलवे ओव्हर-ब्रिज, पुल, सीमेन्ट-कांक्रीट सड़क के साथ क्षिप्रा नदी को प्रवाहमान बनाने के लिये नर्मदा-क्षिप्रा लिंक परियोजना का निर्माण किया गया।

  • ऐसे ही डूबी कांग्रेस की महानता

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    कोयला नीलामी कांड से जनचर्चा के घेरे में आए नवीन जिंदल दावा कर रहे हैं कि कांग्रेस महान पार्टी है। लोग इसमें आते जाते रहते हैं इसकी सेहत पर कोई फर्क नहीं पड़ता। भारत में एक कहावत हमेशा कही जाती है कि रस्सी जल जाए पर बल न जाए। कमोबेश यही हालत इन दिनों कांग्रेस की है। मध्यप्रदेश में तो कांग्रेस और भी दुर्गति में है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अरुण यादव कांग्रेस को उसकी परंपराओं की नींव पर ही पुख्ता करने की कोशिश कर रहे हैं। उन्हें लगता है कि उनके प्रयास एक दिन मरने की कगार पर खड़ी कांग्रेस में जान फूंक देंगे। कांग्रेस के कई बड़े नेता इसी मुगालते में जी रहे हैं। हकीकत ये है कि गया हुआ समय कभी वापस नहीं आता। कांग्रेस का भी एक समय था। आजादी के दौर में तो पूरे देश के जमींदारों, सामंतों पूंजीपतियों ने कांग्रेस के बैनर पर ही गरीबों को लामबंद करने का करिश्मा किया था। तब मुगल शासकों को निपटाने में इस्तेमाल हुए अंग्रेज भारत के सेठों को ही लूटने में लग गए थे। उन्होंने नए नए कानून बनाकर रियासतों से लेकर राजे रजवाड़े तक हड़प लिए थे। जाहिर था कि तब अंग्रेजों से निपटना भारत के हर वर्ग हर जाति समूह और हर आम आदमी की जरूरत थी। उस सफलता के बाद निपटने और निपटाने की नीति का खात्मा कर दिया जाना था। गांधीजी ने तो बाकायदा अपने भाषणों में कहा कि कांग्रेस का काम खत्म हो गया है इसे अब भंग कर दिया जाना चाहिए। इसके बावजूद नेहरू और उनके सहयोगियों ने नए सिरे से कहानी लिखने के बजाए लोकप्रिय कांग्रेस के बैनर पर ही सवारी गांठने का फैसला कर लिया। उसके बाद कांग्रेसियों की हर नई पीढ़ी सफलता की गारंटी वाली इस सत्ता को छोड़ने राजी नहीं हुई। कभी अंग्रेजों से करीबी रखने वाली कांग्रेस अंग्रेजों के फार्मूलों पर ही देश में राज करने लगी। उसके नेताओं को अच्छी तरह पता है कि सत्ता में बने रहने के लिए हमें समाज के किस तबके को खुश रखना है। वे कौन से साधन अपनाने हैं कि गरीब का नाम लेकर अमीरों को खुश किया जाए। यही वजह है कि कांग्रेस हमेशा से गरीबी हटाओ का नारा तो लगाती रही लेकिन गरीबों को गरीब बनाए रखने की नीति पर ही काम करती रही। नतीजतन हिंदुस्तान में उत्पादकता का ग्राफ कभी नहीं बढ़ सका। जितनी उत्पादकता बढ़ी उतनी ही जनसंख्या बढ़ गई और संसाधन फिर कम पड़ गए। यही वजह है कि आज सवा सौ करोड़ आबादी वाले देश की मुद्रा ब्रिटेन की मुद्रा के सामने भिखारी बनी नजर आती है। डालर के सामने ही वह कराहती नजर आती है। कई छोटे छोटे देशों की मुद्रा भी भारत की मुद्रा के सामने पहलवान की तरह सीना ताने खड़ीं हैं। गरीबों और अमीरों के बीच लगातार बढ़ते इस अंतर के कारण ही असंतोष फैला और लोगों ने नरेन्द्र मोदी की आवाज में अपनी आवाज मिलाकर कांग्रेस को विदा कर दिया। हार के चीथड़े पहिनने के बाद भी कांग्रेस के नेताओं का दंभ जहां का तहां खड़ा है।रस्सी जल गई पर बल नहीं गया। कांग्रेस के नेता अपने ऐंठ भरे दावे करने से नहीं चूक रहे हैं। वहीं वे आम इंसान की भावनाओं को भी समझने तैयार नहीं है।
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    हाल में जब मुख्यमंत्री निवास पर दद्दाजी ने मिट्टी के शिवलिंग बनाने का अभियान चलाया तब भक्तों के बीच भजनों का कार्यक्रम भी आयोजित किया गया। इस आयोजन में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान भी अपने परिवार के साथ मौजूद थे। इस दौरान उनकी धर्मपत्नी साधना जी ने प्रफुल्लित मुख्यमंत्री के गाल में प्यार भरी चिकोटी काट ली। ये मुख्यमंत्री बने आम नागरिकों की भावनाएं ही थीं लेकिन कांग्रेस उसे तमाशा बनाने में लग गई। कांग्रेसियों का कहना है कि सार्वजनिक मंच पर इस तरह की हरकतें उचित नहीं हैं। ये बात सही है कि आमतौर पर स्त्री और पुरुष के बीच इस तरह की चुहलबाजियां घरों के भीतर ही होती हैं। पर ये भी सही है कि ये आयोजन मुख्यमंत्री निवास पर हो रहा था। इस आयोजन में भी मुख्यमंत्री जी सपत्नीक शामिल थे। ये आयोजन की सफलता ही कही जाएगी जिसने उसमें शामिल लोगों के बीच दूरियां घटा दीं। ऐसे आयोजन की तारीफ की जानी चाहिए। इसके बावजूद कांग्रेस के नेता निहायत पारिवारिक घटना को तूल देने में जुट गए हैं। कांग्रेस को प्रदेश के उन मुद्दों पर बात करनी चाहिए थी जो आम जनता को प्रभावित करते हैं। जिनसे प्रदेश के आम लोगों का जीवन संवारा जा सकता है। लेकिन वह ये नहीं कर रही है। ये भी उसकी परंपरा है। वह आम लोगों का नाम भले ही लेती रहती हो पर हमेशा वह बड़े लोगों के मुद्दे ही उठाती रही है। इस मामले में भी वह मुख्यमंत्री पर निशाना साधकर जनता के मूलभूत मुद्दों से लोगों का ध्यान भटकाने का काम कर रही है। उसे इस नीति से बाज आना चाहिए। अभी तो जनता ने उसे विपक्ष में बिठा दिया है। यदि उसने आम जनता की आवाज बनने के बजाए इसी तरह के दांव पेंच न छोड़े तो वह दिन दूर नहीं जब लोग कांग्रेसियों को देखते ही उन्हें हकालने लगेंगे।

  • स्वाभिमान रखो तो सुख बरसेगा – आचार्य विद्यासागर जी

    achrya shree1 भोपाल (पीआईसीएमपीडॉटकॉम)। अहिंसा के मार्ग पर चलकर जीवन संवारने के गुर सिखाने वाले राष्ट्रसंत आचार्य विद्यासागर जी महाराज का कहना है कि देश यदि स्वाभिमान जगाकर अपने इतिहास को ही समझ ले तो वह एक बार फिर दुनिया का सबसे सुखी और समृद्धिशाली देश बन सकता है। हिंदुस्तान जैसे विशाल लोकतंत्र में हमें पक्ष और विपक्ष छोड़कर राष्ट्रीय पक्ष मजबूत करना होगा। मध्यप्रदेश की विधानसभा में आज आयोजित धर्मसभा में उन्होंने राजनेताओं को समाज के अंतिम छोर पर खड़े व्यक्ति के कल्याण की चिंता करने का उपदेश दिया। इस अनूठे आयोजन में विधानसभा के अध्यक्ष डाक्टर सीतासरन शर्मा, मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान, विधानसभा के उपाध्यक्ष राजेन्द्र कुमार सिंह,प्रतिपक्ष के उपनेता बाला बच्चन ने श्रीफल भेंटकर आचार्यश्री का अभिनंदन किया और आशीर्वाद प्राप्त किया। (more…)