Category: अर्थ संसार

  • ट्रकों में ओवरलोडिंग बंद पर चेकपोस्ट पर छानबीन शुरु

    ट्रकों में ओवरलोडिंग बंद पर चेकपोस्ट पर छानबीन शुरु

    भोपाल,25 अप्रैल,(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)। मध्यप्रदेश में परिवहन नाकों (चेकपोस्ट) को दोबारा शुरू करने के फैसले ने एक बार फिर सड़क परिवहन व्यवस्था को बहस के केंद्र में ला खड़ा किया है। राज्य सरकार इसे नियमों के बेहतर पालन, राजस्व में वृद्धि और अवैध गतिविधियों पर अंकुश लगाने की दिशा में जरूरी कदम बता रही है, लेकिन ट्रांसपोर्टरों के बीच इस निर्णय को लेकर गहरी चिंता और असंतोष देखने को मिल रहा है।

    दरअसल, पिछले कुछ वर्षों में चेकपोस्ट व्यवस्था को समाप्त कर परिवहन प्रणाली को अधिक डिजिटल और पारदर्शी बनाने की कोशिश की गई थी। ऑनलाइन परमिट, ई-वे बिल और हाल ही में लागू किए गए व्हीकल लोकेशन ट्रैकिंग डिवाइस (VLTD) जैसे उपायों के जरिए वाहनों की निगरानी को आधुनिक स्वरूप दिया गया। ट्रांसपोर्टरों का मानना है कि इन व्यवस्थाओं के बाद ओवरलोडिंग और नियमों के उल्लंघन में काफी कमी आई है। ऐसे में चेकपोस्ट की वापसी उन्हें पुराने ढर्रे की ओर लौटने जैसा प्रतीत हो रही है।

    परिवहन सचिव मनीष सिंह और परिवहन आयुक्त उमेश जोगा को दिए गए ज्ञापन में भोपाल के ट्रक आपरेटरों का कहना है कि जब तकनीकी माध्यमों से हर वाहन की गतिविधियों पर नजर रखी जा रही है, तब भौतिक चेकपोस्ट की जरूरत समझ से परे है। उनका यह भी आरोप है कि चेकपोस्ट व्यवस्था पहले भी देरी, अनावश्यक रोक-टोक और भ्रष्टाचार के कारण बदनाम रही है। लंबी कतारों में फंसे ट्रक न केवल समय की बर्बादी का कारण बनते हैं, बल्कि इससे माल की समय पर डिलीवरी भी प्रभावित होती है, जिसका सीधा असर व्यापार और उद्योग पर पड़ता है।

    दूसरी ओर, परिवहन विभाग का तर्क है कि केवल डिजिटल सिस्टम पर निर्भर रहना पर्याप्त नहीं है। विभाग के अधिकारियों का कहना है कि कई बार तकनीकी खामियों, डेटा में हेरफेर या नेटवर्क समस्याओं के कारण नियमों का उल्लंघन पकड़ में नहीं आ पाता। ऐसे में चेकपोस्ट एक अतिरिक्त सुरक्षा परत के रूप में काम करते हैं, जिससे ओवरलोडिंग, बिना परमिट संचालन और टैक्स चोरी जैसे मामलों पर प्रभावी नियंत्रण रखा जा सकता है।

    इस पूरे घटनाक्रम के बीच आर्थिक पहलू भी महत्वपूर्ण है। पहले से ही बढ़ती लागत, ईंधन की कीमतों और नई तकनीकी अनिवार्यताओं के कारण ट्रांसपोर्टर दबाव में हैं। VLTD जैसे उपकरणों पर अतिरिक्त खर्च और उनके रखरखाव की लागत ने उनकी परेशानियों को और बढ़ा दिया है। ऐसे में चेकपोस्ट पर संभावित देरी और अनौपचारिक खर्च की आशंका उन्हें और चिंतित कर रही है।

    विशेषज्ञ मानते हैं कि यह विवाद केवल चेकपोस्ट की वापसी तक सीमित नहीं है, बल्कि यह उस व्यापक असंतुलन को दर्शाता है, जो नीति निर्माण और जमीनी हकीकत के बीच मौजूद है। जहां सरकार एक सुदृढ़ और नियंत्रित परिवहन तंत्र स्थापित करना चाहती है, वहीं ट्रांसपोर्टर व्यावहारिक कठिनाइयों और आर्थिक दबावों को सामने रख रहे हैं।

    स्थिति की संवेदनशीलता को देखते हुए यह आवश्यक हो गया है कि सरकार और ट्रांसपोर्टर आपसी संवाद के माध्यम से समाधान तलाशें। यदि चेकपोस्ट व्यवस्था को आधुनिक तकनीक के साथ जोड़ते हुए पारदर्शी और समयबद्ध बनाया जाए, तो संभव है कि दोनों पक्षों की चिंताओं का संतुलन स्थापित किया जा सके।

    फिलहाल, परिवहन नाकों की वापसी ने यह स्पष्ट कर दिया है कि सुधार के प्रयास तभी सफल होंगे, जब वे जमीनी स्तर पर व्यावहारिक और सभी हितधारकों के लिए स्वीकार्य हों। मध्यप्रदेश की परिवहन व्यवस्था एक बार फिर ऐसे मोड़ पर खड़ी है, जहां लिए गए फैसले आने वाले समय में इसके भविष्य की दिशा तय करेंगे।

  • समृद्धि की वैश्विक दौड़ में भारत का बजट बना ग्रोथ का इंजन

    समृद्धि की वैश्विक दौड़ में भारत का बजट बना ग्रोथ का इंजन

     “स्पीड, स्केल और संकल्प का केंद्रीय बजट”  – सीए अखिलेश जैन

    प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी ना तो छोटा सोचते हैं, ना छोटा करते हैं। स्पीड और स्केल अपने आप में भिन्न होती है। कार्यों के परिणाम भी भिन्न होते हैं। प्रधानमंत्री जी के लक्ष्य भी भिन्न होते हैं। प्रधानमंत्री जी कार्य शुरू करके उसको 100% तक पूरा करने का प्रयास करते हैं। यह बात बिल्कुल सही है प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी ने 2014 में जब से देश की सत्ता संभाली है, देश के स्थापित लक्ष्यों को पीछे छोड़ते हुए जिस स्पीड और स्केल से कार्य किया है, रात दिन एक करके बिना विश्राम लिए, वह किसी भी विश्लेषक को आश्चर्यचकित करने के लिए पर्याप्त है। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी की अगुवाई वाली सरकार ने हमेशा निर्णायक रूप से, अस्पष्टता की जगह काम को, बातों की जगह सुधार को और लोक-लुभावन नीतियों की जगह लोगों को प्राथमिकता दी है।

    सन् 2014 में प्रति व्यक्ति की आय 86647 रुपए सालाना थी,  2023 में बढ़कर 172000 रुपए सालाना हो गई, 2026 में लगभग 2.5 लाख से 2.72 लाख रुपए सालाना के बीच तक पहुंचने का अनुमान है, इस बीच में कोरोना जैसी वैश्विक महामारी का भी देश ने सामना किया। कोरोना के बावजूद 2022-23 में प्रति व्यक्ति आय 172000 रुपए सालाना, मतलब लगभग 9 वर्षों में प्रति व्यक्ति आय को दोगुना करने में, प्रधानमंत्री जी वैश्विक अनिश्चिताओं, वैश्विक उथल-पुथल, वैश्विक महामारी के बाद भी 172000 रुपए सालाना आय के लक्ष्य प्राप्त करने में सफल रहे। यही प्रति व्यक्ति आय 2024 – 2025 में 235000 रुपए सालाना तक पहुंच गई। यही प्रधानमंत्री जी की अर्थनीति, स्पीड और स्केल है, यही मोदी जी का 13 वर्षों का बजट है।

    2014-15 में प्रति व्यक्ति जीडीपी 98405 रुपए सालाना के लगभग थी, 2024 – 2025 में प्रति व्यक्ति जीडीपी 234859 रुपए सालाना तक पहुंच गई। यही मोदी जी का 13 वर्षों का बजट है।

    भारत का कुल निर्यात 2013-14 के दौरान 465 अरब अमेरिकी डॉलर के बराबर था जो 2024 – 2025 में भारत का कुल निर्यात 825.3 अरब अमेरिकी डॉलर पहुंच गया। अर्थात् 11 वर्षों में भारत का निर्यात 177.5 % की दर से सकारात्मक वृद्धि दर को प्राप्त किया। यही मोदी जी का 13 वर्षों का बजट है।

    मंदी के दौरान भी भारत ने पर्याप्त प्रत्यक्ष विदेशी निवेशकों को आकर्षित किया है। मोदी सरकार के लगातार सुधारों एवं प्रयासों के परिणाम स्वरूप एफडीआई 2013-14 में लगभग 36 अरब अमेरिकी डॉलर था। 2024-25 में 80 अरब अमेरिकी डॉलर से अधिक हो गया, 222.23 % की दर से सकारात्मक वृद्धि दर को प्राप्त किया। जो निवेशकों के निरंतर विश्वास और सेवा, डिजिटल, विनिर्माण एवं बुनियादी अवसंरचनात्मक क्षेत्रों में निवेश की तेज गति को दर्शाता है। यही प्रधानमंत्री मोदी जी की अर्थनीति और 13 वर्षों बजट है।

    2014 में हाई- स्पीड कॉरिडोर की लंबाई 550 किलोमीटर थी, वित्त वर्ष 2025- 2026 में दिसंबर तक 5,364 किलोमीटर हो गई है। लगभग दस गुना बढ़ गई है। यही प्रधानमंत्री मोदी जी की स्पीड और स्केल है।

    हवाई अड्डों की संख्या 2014 में 74 थी, 2025 में 164 हो गई है। भारत घरेलू विमानन के क्षेत्र में विश्व का तीसरा सबसे बड़ा बाजार बन गया है। यही प्रधानमंत्री मोदी जी की अर्थनीति है।

    नवकरणीय ऊर्जा तथा संस्थापित सौर ऊर्जा क्षमता के मामले में भारत मार्च 2014 में 76.38 गीगावॉट पर था, नवंबर 2025 तक 253.96 गीगावाट हो गई, वैश्विक स्तर पर तीसरे स्थान पर है और स्थापित पवन ऊर्जा क्षमता में चौथे स्थान पर है। कुल नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता पिछले दशक में तीन गुना से अधिक बढ़ गई है। यही प्रधानमंत्री मोदी जी की अर्थनीति है।

    2014 में उच्च गति क्षमता वाली पटरियों की लंबाई 31,445 किमी थी, 2025 तक लगभग दोगुनी से भी ज्यादा होकर होकर 84,244 किमी हो गई है, जिससे राष्ट्रीय रेल नेटवर्क के लगभग 80% हिस्से पर 110 किमी प्रति घंटे से अधिक की गति से परिचालन संभव हो पा रहा है।

    उद्योग को समर्थन देना उद्योग को बढ़ाने में सहायक सिद्ध होता है। इसलिए उच्च स्तरीय उच्च गति की रेल कॉरिडोर का विकास औद्योगिक क्षेत्र के लिए विशेष सहायक होगा।
    प्रधानमंत्री मोदी जी ने सभी महत्वपूर्ण औद्योगिक क्षेत्र को हाई स्पीड रोड से जोड़ने का प्रयास किया है। यही प्रधानमंत्री मोदी जी की स्पीड और स्केल है।

    रक्षा बजट 2013-14 में 2.53 लाख करोड़ रुपये था, वर्ष 2026-27 में 7.85 लाख करोड़ रुपये हो गया है, अर्थात इसमें लगभग 5.32 लाख करोड़ रुपये की बढ़ोत्तरी हुई है, जो लगभग तीन गुना वृद्धि को दर्शाता है। इस बढ़े हुए प्रावधान के माध्यम से, सरकार ने आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य की दिशा में रणनीतिक बदलाव के साथ सशस्त्र बलों और उनकी क्षमताओं को दुनिया के उच्चतम मानकों में बदलने के अपने संकल्प की पुष्टि की है। वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं में रुकावट और विदेशी विक्रेताओं की तुलना में घरेलू आवश्यकताओं को प्राथमिकता देने ने आयात प्रतिस्थापन की आवश्यकता पर फिर से जोर दिया है और न केवल निर्वाह के लिए बल्कि भविष्य के आधुनिकीकरण के लिए स्वदेशीकरण की ओर बढ़ रहा है। यही मोदी जी का बजट है।

    13 सालों के बजट की चर्चा इसलिए भी आवश्यक है कि आज देश जिस स्थिति में खड़ा है उस स्थिति को प्राप्त करने में कोई एक बजट महत्वपूर्ण नहीं है, आज की स्थिति जो भारत ने प्राप्त की है इस स्थिति को प्राप्त करने के लिए मोदी जी को विरासत में मिला भारत और विरासत को मोदी जी के द्वारा सजाया संवारा गया है। इन दोनों चीजों का परिणाम आज का वर्तमान भारत है और भविष्य का भारत आज के भारत से आगे के भारत के लिए की गई तैयारी का परिणाम होगा।

    मोदी जी भारत को तेज गति से आगे बढ़ाने के लिए प्रयासरत हैं। तेज गति को प्राप्त करने के लिए आवश्यक सुधारों पर बल दिया गया है। सरकार के प्राथमिकताओं में परिवर्तन किया गया है। सरकार ने युवा शक्ति को भविष्य का भारत बनाने के लिए तैयार करने डेवलप करने और नेतृत्व करने के लिए रचनात्मक प्रयास किए हैं। राजकोषीय अनुशासन, सतत् विकास, मुद्रास्फीति की दर को कम करने का शानदार प्रयास किया है। मोदी सरकार ने आत्मनिर्भरता को लक्ष्य मान करके घरेलू उत्पादन क्षमता को बढ़ाने का प्रयास किया है। ऊर्जा सुरक्षा को सुरक्षा प्रदान करने का प्रयास किया है। मेक इन इंडिया जैसे कार्यक्रमों को चला करके आयात पर निर्भरता कम करने का प्रयास किया है। सरकार की पूरी अर्थनीति का अगर विश्लेषण करेंगे तो उसके केंद्र बिंदुओं में सरकार का लक्ष्य आत्मनिर्भरता, रोजगारसृजन, कृषि उत्पादन क्षमता का विकास, नागरिकों की क्रय शक्ति का बढ़ना, नागरिकों के जीवन स्थान में सुधार लाना अपनाया गया है। सरकार ने 7% उच्च वृद्धि दर को सुनिश्चित करके गरीबी घटाने और नागरिकों के जीवन को बेहतर बनाने के प्रयासों में उल्लेखनीय सफलता प्राप्त की है।

    जो देश कृषि उत्पादों को आयात करता था, अनाज की कमी से जुझता था, आज वही देश ढाई लाख करोड़ रुपए से अधिक के कृषि उत्पादों को निर्यात करता है, कितना फर्क है,

    सरकार की अर्थ नीति कर्तव्य नीति ज्यादा दिखाई देती है। जिसके चलते सरकार ने 25 करोड़ लोगों को गरीबी से बाहर निकलने में सफलता प्राप्त की है।

    इसलिए मोदी सरकार के बजट में, मोदी सरकार की अर्थनीति में, स्पीड और स्केल में, हर क्षेत्र की तरफ, नभ, जल और आकाश सभी तरफ नए कीर्तिमान स्थापित होते दिखते हैं। क्योंकि हमारे पूर्व की क्षमताओं से हम एक नए स्तर पर आ गए हैं। मोदी सरकार का लक्ष्य तो इससे कहीं ऊपर है। देश को वापस अपना खोया हुआ गौरव हासिल करना है। देश को विश्व की अर्थव्यवस्था में अपनी हिस्सेदारी सुनिश्चित करना है। इसीलिए भारत विश्व का ग्लोबल ग्रोथ इंजन है। कोई भी इस विकास की दौड़ में पीछे ना छूटे, कोई भी विकास की भागीदारी में रह ना जाए, समग्र विकास के साथ-साथ समग्र दृष्टिकोण केवल भाजपा सरकार, प्रधानमंत्री मोदी जी ही कर सकते हैं।

    (लेखक- अखिलेश जैन सीए व भाजपा मप्र के प्रदेश कोषाध्यक्ष हैं)

  • बीना में पचास हजार करोड़ रुपयों की एथिलीन क्रेकर परियोजना का काम शुरु

    बीना में पचास हजार करोड़ रुपयों की एथिलीन क्रेकर परियोजना का काम शुरु


    भोपाल,12 फरवरी (प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)।प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 14 सितंबर 2023 को बीना में लगभग 50 हजार करोड़ रुपये की लागत वाली जिस एथिलीन क्रैकर परियोजना की आधारशिला रखी थी उसके लिए नए केन्द्रीय बजट में आवश्यक प्रावधान कर दिया गया है। इंजीनियर्स इंडिया लिमिटेड की कंसल्टेंसी में प्रोजेक्ट का काम यहां जोरों शोरों से चालू है। राज्य सरकार इस परियोजना को सफल बनाने के लिए आवश्यक सुविधाएं जुटाने का प्रयास भी कर रही है।


    बीना रिफायनरी के सहयोगी प्रतिष्ठान के रूप में ये प्रोजेक्ट देश को दुनिया के पेट्रोकेमिकल क्षेत्र में प्रमुख स्थान दिलाएगा। केन्द्रीय बजट में बीना पेट्रोलियम क्रेकर्स परियोजना को लगभग पचास हजार करोड़ रुपए जुटाने की मंजूरी मिल गई है। भारत पेट्रोलियम कार्पोरेशन लिमिटेड BPCL की सागर जिले स्थित बीना रिफाइनरी (Bina Refinery) के विस्तार और वहां ₹49,000 करोड़ से अधिक की लागत से एक विश्वस्तरीय पेट्रोकेमिकल्स कॉम्प्लेक्स स्थापित करने का काम चल रहा है । यह परियोजना ‘मेक इन इंडिया’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ के तहत भारत को तैयार पेट्रोकेमिकल प्रोडेक्ट का आयात कम करने और निर्यात बढ़ाने में प्रमुख भूमिका निभाएगी।


    प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने जब इस परियोजना की आधारशिला रखी थी तब किसी को ये अनुमान नहीं था कि इतनी जल्दी ये परियोजना आकार ले लेगी। प्रदेश के कुछ सांसदों और विधायकों ने इस परियोजना को अन्यत्र स्थानांतरित किए जाने की लाबिंग भी की थी। शासन के कुछ अधिकारियों ने इसके लिए तमाम तर्क दिए थे,लेकिन प्रधानमंत्री कार्यालय ने कहा कि इस परियोजना का कच्चा माल नेप्था बीना रिफायनरी से ही प्राप्त होता है। यहां स्थित टाऊनशिप भी काफी सुविधाजनक है। जमीन उपलब्ध है। सरकार का अमला मुआवजे आदि की प्रक्रियाएं भी पूरी कर चुका है। ऐसे में परियोजना को जल्दी पूरा करने के अलावा कोई सोच विचार नहीं किया जा सकता।


    बीना पेट्रोकेमिकल परियोजना की मुख्य बातें:
    परियोजना लागत: लगभग ₹49,000 करोड़ (लगभग ₹52,000 करोड़ तक अनुमानित) के निवेश से 1.2 MTPA एथिलीन क्रैकर यूनिट स्थापित की जा रही है।
    क्षमता विस्तार: परियोजना में रिफाइनरी की क्षमता 7.8 MTPA से बढ़ाकर 11 MTPA करने का प्रावधान शामिल है।
    उत्पादन: यह परियोजना Linear Low-density Polyethylene (LLDPE), High-density Polyethylene (HDPE), Polypropylene (PP) और अन्य पेट्रोकेमिकल उत्पादों का उत्पादन करेगी।
    रोजगार: निर्माण चरण में 15,000 से अधिक और चालू होने के बाद 1 लाख से अधिक प्रत्यक्ष/अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर पैदा होंगे।


    इस परियोजना का उद्देश्य बुंदेलखंड क्षेत्र को औद्योगिक केंद्र बनाना और आयात पर निर्भरता कम करना है। परियोजना के लिए भारत सरकार (SBI के नेतृत्व में) और मध्य प्रदेश सरकार (औद्योगिक प्रोत्साहन के माध्यम से) वित्तीय सहायता व बुनियादी ढांचा प्रदान कर रही हैं। यह परियोजना 2028 तक चालू होने की उम्मीद है।

  • मोहन ने लगाया छन्ना तो उखड़ पड़े खैराती नगर सेठ

    मोहन ने लगाया छन्ना तो उखड़ पड़े खैराती नगर सेठ

    भले ही भारत की अर्थव्यवस्था वृद्धि दर के लिहाज़ से मजबूत मानी जा रही है, लेकिन देश पर बढ़ते कर्ज को कई विदेशी ताकतें भाजपा सरकारों की असफलता ठहराने का प्रयास कर रहीं हैं। केंद्र और राज्यों दोनों का कर्ज लगातार बढ़ रहा है और इसका प्रत्यक्ष असर राज्यीय अर्थव्यवस्थाओं पर भी दिख रहा है। मध्यप्रदेश भी इससे अछूता नहीं है। यहाँ सरकार लगातार बड़े बजट और जनकल्याण योजनाओं के साथ आर्थिक गतिविधियों को तेज़ करने का प्रयास कर रही है, लेकिन इन पहलों का वित्तीय भार राज्य की ऋण-प्रणाली को चुनौती देता बताया जा रहा है।ये सारा शोर कमोबेश वही लोग मचा रहे हैं जो अब तक शिवराज सिंह चौहान की सरकार के दौरान मलाई छानते रहे हैं।


    भारत में पिछले कुछ वर्षों में सरकारी एवं घरेलू—दोनों स्तरों पर कर्ज तेज़ी से बढ़ा है। कोविड के बाद पुनरुद्धार पैकेज, बुनियादी ढाँचे में निवेश, सामाजिक सुरक्षा योजनाएँ और वैश्विक आर्थिक अस्थिरता ने सरकारी उधारी पर निर्भरता बढ़ाई है। राष्ट्रीय स्तर पर बढ़ते ऋण का सीधा असर राज्यों की उधारी सीमा, बाजार ब्याज दरों और उधार की लागत पर पड़ता है। केंद्र की उधारी बढ़ने से बाजार में बांडों की मांग प्रभावित होती है और राज्यों को ऊँचे ब्याज पर ऋण लेना पड़ता है। यही स्थिति आज मध्यप्रदेश समेत कई राज्यों के सामने है।


    विधानसभा के हालिया सत्र में अनुपूरक बजट प्रस्तावों पर चर्चा करते हुए प्रमुख विपक्षी दल कांग्रेस के वरिष्ठ नेता डाक्टर राजेन्द्र सिंह ने कहा कि सरकार पर कर्ज का बोझ लगभग चार लाख अस्सी हजार करोड़ से ज्यादा हो गया है। ये राज्य के कुल बजट से भी ज्यादा है। राज्य पर ब्याज का बोझ भी बढ़ता जा रहा है और सरकार की विकास योजनाएं प्रभावित हो रहीं हैं। मध्यप्रदेश का वार्षिक बजट जहाँ लगातार बढ़ा है, वहीं राज्य का कर्ज उससे भी तेज़ी से ऊपर गया है। 2025 तक उपलब्ध सरकारी आँकड़ों के अनुसार, राज्य पर बकाया ऋण लगभग 4.4–4.6 लाख करोड़ रुपयों तक पहुँच चुका है—जो राज्य के वार्षिक बजट (लगभग 4.21 लाख करोड़) से भी अधिक है।
    इसके अलावा, वर्ष 2025 के भीतर सरकार ने कई बार तात्कालिक उधारी (short-term borrowing) ली—जो यह संकेत देती है कि योजनाओं और भुगतान दायित्वों को पूरा रखने के लिए सरकार को बाजार से बार-बार धन जुटाना पड़ रहा है। राज्य की ऋण-से-GSDP अनुपात (Debt-to-GSDP Ratio) भी बढ़कर 31% के आसपास पहुँच गया है, जो आदर्श वित्तीय सीमा से अधिक माना जाता है।


    ऐसा कहा जा रहा है कि लाड़ली बहना योजना की वजह से सरकार झमेले में पड़ रही है। हालांकि ये योजना डाक्टर मोहन यादव को विरासत में मिली थी।वर्तमान सरकार ने महिलाओं को आर्थिक आधार देने के लिए ‘लाडली बहना’ योजना को सर्वोच्च प्राथमिकता दी है। उन्हें दी जाने वाली रकम भी बढ़ाई है। योजना की मासिक किश्तें और लगातार बढ़ती पात्रता संख्या के कारण राज्य को हर माह बड़ी राशि खर्च करनी पड़ती है। यह योजना सामाजिक रूप से अत्यंत प्रभावी है, लेकिन इसके लिए आवश्यक बजट का एक बड़ा हिस्सा उधार पर निर्भर है।


    सरकारी कर्मचारियों के वेतन-संशोधन, महंगाई भत्ते और पेंशन दायित्व बढ़े हैं, जिससे सरकार का नियमित राजस्व व्यय लगातार ऊपर जा रहा है। मेडिकल कॉलेज, नदी-लिंक, पर्यटन अवसंरचना और औद्योगिक इकाइयों पर बड़े निवेश की पहल की गई है। ये प्रोजेक्ट दीर्घकाल में लाभ देंगे, लेकिन शुरुआती वर्षों में इन पर भारी पूंजी खर्च की आवश्यकता होती है—जो उधारी के सहारे पूरी की जा रही है। सरकार ने मई से अक्टूबर 2025 के बीच कई बार 3,000–5,000 करोड़ रुपये के कर्ज लिए। यह नकदी-अभाव और बढ़ते भुगतान दायित्वों की ओर संकेत बताया जा रहा है। जबकि वित्तीय विशेषज्ञों का कहना है कि ये रकम देश की अर्थव्यवस्था का आकार बढ़ाने में प्रयुक्त हो रही है इसलिए इस पर ज्यादा चिंतित होने की जरूरत नहीं है।


    डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में राज्य सरकार की प्राथमिकता जनकल्याण, महिलाओं का सशक्तिकरण, बड़े बुनियादी प्रोजेक्ट पर कार्य, औद्योगिक विकास, शिक्षा और स्वास्थ्य पर नए निवेश के रूप में जारी है। इन सभी पहलों को जनता का समर्थन भी प्राप्त है। परंतु यह भी सच है कि इतनी व्यापक योजनाओं के लिए राज्य को सशक्त राजस्व आय की आवश्यकता है,जो अभी सीमित है। यही कारण है कि सरकार को बार-बार उधार लेकर नीतियों को गति देनी पड़ रही है। राजनीतिक दृष्टि से ये योजनाएँ मजबूत आधार बनाती हैं, लेकिन आर्थिक दृष्टि से ऋण-पोषित कल्याण मॉडल लंबे समय में चुनौती बन सकता है।


    वित्तीय तरलता घटने से कई कार्यक्रम गड़बड़ा जाते हैं। जब कर्ज बढ़ता है, तो बजट का बड़ा हिस्सा ब्याज भुगतान में जाता है। इससे शिक्षा, स्वास्थ्य और बुनियादी ढाँचे में निवेश कम पड़ने का खतरा होता है। उच्च ऋण/GSDP अनुपात से राज्य की क्रेडिट रेटिंग प्रभावित होती है, और आने वाले वर्षों में उधार लेना महंगा हो सकता है। कर्ज जितना बढ़ता जाएगा, नीति-निर्माताओं के पास नई योजनाओं के लिए वित्तीय गुंजाइश उतनी ही कम होती जाएगी।
    मुख्यमंत्री डाक्टर मोहन यादव ने आय बढ़ाने वाले विभागों पर तेजी से कार्य करने का फैसला लिया है। उसका प्रयास है कि राजस्व आय बढ़े,उद्योग और पर्यटन पर निवेश बढ़ाने की नई नीतियां लाई जाएं। जीएसटी की प्रक्रिया मजबूत हो और कर संग्रहण की स्थितियों में सुधार हो। राज्य के संसाधनों और संपत्तियों का इस तरह से पुर्ननियोजन किया जाए कि उनसे आय बढ़ाई जा सके और बर्बादी रोकी जा सके। कल्याण योजनाओं के लिए लाभार्थियों की नियमित समीक्षा कर खर्च की दक्षता बेहतर की जा सकती है। सरकारी खरीद और प्रशासनिक खर्च में कटौती कर कर्ज निर्भरता को कम किया जा सकता है। ऐसे प्रोजेक्ट जिनसे सीधे राजस्व आय बढ़ती है — कृषि वैल्यू चेन, पर्यटन, स्वास्थ्य सेवाएँ, स्टार्टअप इकॉनमी — इन्हें प्राथमिकता मिलनी चाहिए।


    मध्यप्रदेश आज दो राहे पर खड़ा है उसे अपनी जन हितकारी योजनाएं जारी रखनी हैं लेकिन उसे अपने कर्ज के निवेश से आय के नए संसाधन भी विकसित करने हैं। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की नीतियाँ सकारात्मक सामाजिक बदलाव ला रही हैं, किंतु इन नीतियों की वित्तीय स्थिरता तभी सुनिश्चित हो पाएगी जब राज्य कर्ज-निर्भरता से निकलकर मजबूत राजस्व-आधारित अर्थव्यवस्था की ओर बढ़ेगा। राज्य के लिए चुनौती यह नहीं कि योजनाएँ जारी रहें या नहीं—बल्कि यह है कि उन्हें वित्तीय दृष्टि से टिकाऊ कैसे बनाया जाए। यही वह बिंदु है जो आने वाले वर्षों में मध्यप्रदेश की आर्थिक सेहत और विकास गति दोनों तय करेगा।

  • बैलेंसशीट के मुनाफे में जन भागीदारी से ही सफल होगा मध्यप्रदेश

    बैलेंसशीट के मुनाफे में जन भागीदारी से ही सफल होगा मध्यप्रदेश

    -आलोक सिंघई-

    मध्यप्रदेश को अक्सर “भारत का हृदय” कहा जाता है — और आर्थिक संकेतक बताते हैं कि यह राज्य अब सचमुच भारत के विकास-मानचित्र पर एक अहम स्थान लेता जा रहा है। वर्ष 2024–25 में राज्य का सकल राज्य घरेलू उत्पाद (GSDP) लगभग 15.03 लाख करोड़ रुपए तक पहुँच गया है, जो 11.05 प्रतिशत की प्रभावशाली वृद्धि दर्शाता है। यह दर राष्ट्रीय औसत से बेहतर है और राज्य की आर्थिक गतिशीलता का संकेत देती है। राज्य की प्रति व्यक्ति आय भी बढ़कर लगभग 1.52 लाख रुपए तक पहुँची है। हालांकि यह वृद्धि उत्साहजनक है, फिर भी यह महाराष्ट्र, गुजरात और कर्नाटक जैसे अग्रणी राज्यों से कम है।
    मध्यप्रदेश की अर्थव्यवस्था अब केवल खेती पर निर्भर नहीं है। सोयाबीन, गेहूँ और तिलहन के उत्पादन प्रेोसेसिंग में अग्रणी होने के साथ, राज्य ने अब औद्योगिक निवेश और निर्यात में भी उल्लेखनीय प्रगति की है। वर्ष 2024–25 में राज्य की निर्यात रैंकिंग 15वें से सुधरकर ग्यारहवें स्थान पर पहुँच गई है। इंदौर, भोपाल, पीथमपुर और मंडीदीप जैसे औद्योगिक क्षेत्र अब तकनीक, इंजीनियरिंग और फार्मा उत्पादों के नए केंद्र बन रहे हैं। राज्य ने पिछले वर्ष ढाई हजार करोड़ रुपयों से अधिक के तकनीकी निवेशों को आकर्षित किया है। यही वजह है कि राज्य अब धीरे-धीरे एक “डिजिटल पावरहाउस” के रूप में उभर रहा है।
    विकास के इन सकारात्मक संकेतों के बावजूद, सामाजिक क्षेत्र अभी भी मध्यप्रदेश की कमजोर कड़ी है। राज्य की साक्षरता दर लगभग सत्तर फीसदी है, जो राष्ट्रीय औसत से कम है। स्कूलों में इंटरनेट कनेक्टिविटी सिर्फ पैंतीस प्रतिशत तक सीमित है, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों से प्रतिभाओं की प्राप्ति कठिन बनी हुई है। जो ग्रामीण अपने बच्चों को बेहतर शिक्षा देना चाहते हैं उन्हें इसकी मंहगी कीमत चुकाकर बच्चों को बड़े शहरों में भेजना पड़ता है।
    स्वास्थ्य के पैमाने पर भी राज्य कठिन संकटों से जूझ रहा है। भारी धनराशि खर्च करने के बावजूद कार्यकुशल आबादी का सवास्थ्य चिंताजनक बना हुआ है। शिशु मृत्यु दर लगभग 43 प्रति 1000 जन्म है, और ग्रामीण इलाकों में डॉक्टरों की उपलब्धता सीमित है। मानव विकास सूचकांक (HDI)0.611 के आसपास है, जो भारत के कई अन्य राज्यों से नीचे है।
    यदि कोई क्षेत्र है जिसमें मध्यप्रदेश ने राष्ट्रीय स्तर पर नाम कमाया है, तो वह है स्वच्छता और आधारभूत ढाँचे का विकास। इंदौर लगातार सातवीं बार भारत का सबसे स्वच्छ शहर घोषित हुआ है। बिजली, सड़क, और ग्रामीण कनेक्टिविटी के क्षेत्र में पिछले दशक में उल्लेखनीय सुधार हुए हैं। राज्य ने वर्ष 2024–25 में 1.01 लाख मिलियन यूनिट बिजली ट्रांसमिट कर नया रिकॉर्ड बनाया।
    राज्य सरकार ने लाड़ली बहना योजना,मुख्यमंत्री उद्यम क्रांति योजना और कृषि निवेश प्रोत्साहन कार्यक्रमों के ज़रिए सामाजिक व आर्थिक समावेशन को बढ़ावा देने का प्रयास किया है इसके बावजूद बेरोज़गारी, महिला सुरक्षा और भ्रष्टाचार जैसी समस्याएँ अब भी जनता के बीच चिंता का कारण हैं।
    अन्य राज्यों से तुलना

    संकेतकमध्यप्रदेशगुजरातमहाराष्ट्रकर्नाटकउत्तरप्रदेश
    GSDP वृद्धि दर (2024–25)11.05%9.3%8.1%9.8%9.1%
    प्रति व्यक्ति आय (₹)1.52 लाख2.74 लाख2.85 लाख2.65 लाख1.45 लाख
    साक्षरता दर (%)7079827668
    HDI0.6110.6820.6960.6850.613

    *स्रोत: NITI Aayog, आर्थिक सर्वेक्षण 2024–25, Free Press Journal, Times of India, ET Government Reports
    मध्यप्रदेश आज एक तेजी से बढ़ता, परंतु चुनौतियों से जूझता राज्य है। जहाँ आर्थिक प्रगति ने एक ठोस आधार तैयार किया है, वहीं शिक्षा, स्वास्थ्य और मानव विकास को मजबूत किए बिना “सफल राज्य” की उपाधि अधूरी रहेगी। संक्षेप में कहा जाए तो — मध्यप्रदेश अब भारत का “उभरता हुआ विकासशील राज्य” है, पर वास्तविक सफलता की मंज़िल तक पहुँचने के लिए सामाजिक विकास पर केंद्रित नई रफ्तार की जरूरत है।

    1. शिक्षा और डिजिटल पहुँच में तेज़ निवेश के माध्यम से हर स्कूल तक इंटरनेट व स्मार्ट क्लास की पहुंच आज की अनिवार्य पहल बन गई है।
    2. ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाओं का सशक्तीकरण करने के लिए हमें अपने प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में डॉक्टर और उपकरणों की उपलब्धता सुनिश्चित करनी होगी।
    3. कृषि से उद्योग तक वैल्यू-चेन विकसित करना होगी ताकि किसानों की आय स्थायी रूप से बढ़ाई जा सके और उन्हें सरकारी मदद की बाट न जोहनी पड़े।
    4. महिला सुरक्षा व कौशल विकास कार्यक्रमों को वास्तविक परिणामों तक पहुँचाना होगा। लाड़ली बहना योजना का लाभ हर महिला तक न तो पहुंच पा रहा है और न ही ये संभव होगा। महिलाएं आर्थिक विकास की चेन का हिस्सा बनें तभी इन लक्ष्यों को हासिल किया जा सकता है।
    5. नवाचार और स्टार्टअप निवेश के लिए विशेष औद्योगिक ज़ोन बनाना होंगे जो नव उद्यमियों को सहारा देकर उत्पादन बढ़ाने में सहयोगी साबित हो। कल्याणकारी राज्य की कहानियां बहुत सुनी सुनाई जा चुकी हैं। अब तो चुनौतीपूर्ण नतीजे लाने की प्रतिस्पर्धा ही एमपी को सिरमौर बना सकती है।
  • धार अब फैशन की दुनिया में लगाएगा नई छलांग

    धार अब फैशन की दुनिया में लगाएगा नई छलांग

    प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी 17 को भैंसोला में लिखेंगे नई इबारत


    भोपाल,13 सितंबर(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी आगामी सत्रह सितंबर को धार के दौरे पर आ रहे हैं। वे फैशन की दुनिया में धार के बढ़ते सोपानों की आधार शिला रखेंगे। भारत सरकार ने वस्त्र उद्योग को सशक्त और आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से पीएम मित्रा पार्क योजना (PM MITRA Parks Scheme) की शुरुआत की है। यह योजना प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के “आत्मनिर्भर भारत” और “मेक इन इंडिया” विज़न को साकार करने का एक बड़ा कदम है।

    पीएम मित्रा पार्क योजना की घोषणा केंद्रीय बजट 2021-22 में की गई थी। इस योजना के अंतर्गत देशभर में 7 मेगा इंटीग्रेटेड टेक्सटाइल रीजन एंड अपैरल (MITRA) पार्क स्थापित किए जाएंगे। इन पार्कों का उद्देश्य वस्त्र क्षेत्र को एक ही स्थान पर पूरी वैल्यू चेन—कपास से लेकर तैयार कपड़े और निर्यात तक—उपलब्ध कराना है।मध्यप्रदेश का निमाड़ और मालवा अंचल कपास की खेती करके देश के लिए सूती कपड़े बनाने का प्रमुख आधार मुहैया कराता रहा है।

    इस वस्त्र हबका उद्देश्य भारत को वैश्विक स्तर पर वस्त्र निर्माण का हब बनाना है। रोटी कपड़ा और मकान उपलब्ध कराने की श्रंखला में राज्य का धार अंचल अब कपड़ा प्रोसेसिंग से रोजगार के नए अवसर पादा करेगा। निर्माण की पूरी प्रक्रिया एक ही जगह होने से यहां उत्पादित वस्त्रों की लागत घटेगी। उद्योग को बढ़ावा देने की तमाम प्रक्रिया नए अनुसंधानों को बढ़ावा भी देगी। विकसित मशीनें पूरी दुनिया के लिए उत्तम गुणवत्ता का कपड़ा बनाकर देंगी। खेतों में कपड़े के रेशे उत्पादन के बाद फैक्ट्री में प्रोसेसिंग ,फैशन डिजाईनिंग और वैश्विक बाजार में कपड़ा भेजने के फाईव एफ(Farm to Fibre to Factory to Fashion to Foreign) विजन को भी यहां साकार किया जा सकेगा।

    गौरतलब है कि देश के अलग अलग राज्यों में कुल सात मित्रा पार्क स्थापित किए जा रहे हैं। ये सभी पार्क केन्द्र और राज्य सरकारों की साझेदारी में बनाए जाएंगे। केन्द्र सरकार इन पार्कों पर लगभग चार हजार चार सौ पैंतालीस करोड़ का निवेश करेगी।
    इस विशेष क्षेत्र में कामन प्रोसेसिंग हाऊस होंगे जो वस्त्र निर्माण की लागत घटाने में मददगार होंगे। औद्योगिक जरूरतों के लिए पर्याप्त क्षेत्र उपलब्ध होगा। ट्रांसपोर्ट एवं लॉजिस्टिक्स सुविधाएं भी होंगी। नई तकनीकों और ट्रेंडिंग तकनीकी नवाचारों के लिए पर्याप्त अवसर भी उपलब्ध हो सकेंगे। इस विशेष औद्योगिक प्रक्षेत्र में लगभग 1 लाख प्रत्यक्ष और 2 लाख अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर उपलब्ध होंगे जो सामाजिक रोजगार जरूरतों के लिए काफी बड़ा स्रोत साबित होगा।

    इस औद्योगिक क्षेत्र की वजह से वस्त्र उद्योग की उत्पादन क्षमता और गुणवत्ता बढ़ेगी। छोटे एवं मध्यम उद्योगों (SMEs) को सपोर्ट मिलेगा। निर्यात क्षमता बढ़ेगी और विदेशी मुद्रा का अर्जन भी होगा। कपड़ा क्षेत्र में ग्लोबल सप्लाई चेन में भारत की भागीदारी मजबूत होगी। किसानों को कपास और रेशम जैसी कच्ची सामग्री का बेहतर मूल्य मिलेगा।

    सरकार ने योजना के अंतर्गत विभिन्न राज्यों को मित्रा पार्क स्थापित करने की स्वीकृति दी है। इनमें तमिलनाडु, कर्नाटक, मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र, गुजरात, आंध्रप्रदेश और उत्तरप्रदेश शामिल हैं। इन राज्यों में ज़मीन और उद्योगों की संभावनाओं के आधार पर पार्क का निर्माण कार्य आगे बढ़ाया जा रहा है।

    पीएम मित्रा पार्क योजना वस्त्र उद्योग में क्रांतिकारी बदलाव लाने वाली है। इससे न केवल रोजगार के अवसर बढ़ेंगे, बल्कि भारत को वैश्विक स्तर पर एक टेक्सटाइल पॉवरहाउस के रूप में पहचान मिलेगी। यह योजना “आत्मनिर्भर भारत” और “मेक इन इंडिया” को मजबूती देने के साथ-साथ ग्रामीण अर्थव्यवस्था और किसानों को भी लाभ पहुँचाएगी।

  • इक्विटास स्मॉल फाइनेंस बैंक ने मनाई अपनी 9वीं वर्षगांठ

    इक्विटास स्मॉल फाइनेंस बैंक ने मनाई अपनी 9वीं वर्षगांठ


    Equitas Small Finance Bank Celebrates Its 9th Anniversary
    इक्विटास बैंक – 9 साल विश्वास और प्रगति के।
    Equitas Bank – 9 Years of Trust and Progress.

    भोपाल, 06 सितंबर (प्रेस इंफार्मेशन सेंटर) इक्विटास स्मॉल फाइनेंस बैंक ने आज अपनी स्थापना के 9 गौरवशाली वर्ष पूरे कर लिए। इस अवसर पर देशभर की सभी शाखाओं में विविध कार्यक्रम आयोजित किए गए, जिनमें ग्राहकों, कर्मचारियों और स्थानीय समुदायों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।भोपाल की एमपीनगर शाखा में भी इस अवसर पर ग्राहक मिलन कार्यक्रम आयोजित किया गया।

    Bhopal, 06 September(Press Information Centre).Equitas Small Finance Bank proudly marked the completion of its 9 successful years today. To celebrate the occasion, a series of events were held across all its branches nationwide, with enthusiastic participation from customers, employees, and local communities.

    ग्राहकों के प्रति आभार | Gratitude Towards Customers
    बैंक ने इस अवसर पर अपने ग्राहकों को विशेष धन्यवाद देते हुए कहा कि उनकी निरंतर विश्वास और सहयोग से ही इक्विटास आज इस मुकाम तक पहुँचा है। बैंक ने यह दोहराया कि ग्राहकों को बेहतर सेवा और आधुनिक वित्तीय समाधान प्रदान करना उसकी सर्वोच्च प्राथमिकता है।

    On this special day, the bank expressed heartfelt gratitude to its customers, stating that their continued trust and support have been the foundation of Equitas’ growth. The bank reaffirmed its commitment to delivering excellent service and innovative financial solutions.

    कार्यक्रमों की झलक | Highlights of the Celebrations
    ग्राहक सम्मान समारोह

    वित्तीय जागरूकता अभियान

    सामुदायिक सेवा गतिविधियाँ

    Customer Appreciation Events

    Financial Literacy Drives

    Community Service Initiatives

    डिजिटल पहल: Equitas 2.0 ऐप लॉन्च | Digital Leap: Launch of Equitas 2.0 App
    अपने डिजिटल दृष्टिकोण को आगे बढ़ाते हुए, बैंक ने अपने नए और उन्नत मोबाइल बैंकिंग ऐप – Equitas 2.0 के लॉन्च की विधिवत घोषणा की। यह ऐप बेहतर ग्राहक अनुभव, आसान ट्रांजैक्शन और नई सुविधाओं से लैस है।

    Reinforcing its focus on digital transformation, the bank announced the launch of its advanced mobile banking app – Equitas 2.0. The app is designed to offer a smoother user experience, seamless transactions, and enhanced features.

    भविष्य की दिशा | Vision Ahead
    इक्विटास स्मॉल फाइनेंस बैंक ने अपने मिशन “हर ग्राहक तक बैंकिंग” को दोहराया और वादा किया कि आने वाले वर्षों में वह और अधिक नवाचारों और सेवाओं के साथ हर वर्ग तक सुलभ बैंकिंग पहुँचाएगा।

    Equitas SFB reiterated its mission of “Banking for Every Customer” and pledged to bring more innovation and inclusive services in the coming years to reach every segment of society.

  • ड्राईवरों का स्वास्थ्य सुधारिए बोलीं ट्रांसपोर्ट कमिश्नर रजनी सिंह

    ड्राईवरों का स्वास्थ्य सुधारिए बोलीं ट्रांसपोर्ट कमिश्नर रजनी सिंह

    भोपाल,12 जुलाई(ट्रांसपोर्ट रिपोर्टर)।सड़क दुर्घटनाओं में कमी लाने के लिए सरकार ने अब मूलभूत सुधार शुरु किए हैं।श्रम विभाग की ओर से भारी वाहनों जैसे बस, ट्रक, टैक्सी आदि का संचालन करने वाले ड्रायवरों तथा अन्य स्टाफ जैसे कंडक्टर और क्लीनर के कार्य के घंटे के संबंध में प्रावधानों को प्रभावी रूप से लागू किए जाने की पहल की जा रही है।इसी सिलसिले में मोटर ट्रांसपोर्ट नियोजकों की कार्यशाला शुक्रवार 18 जुलाई को श्रमायुक्त कार्यालय, इंदौर में सम्पन्न हुई।

    कार्यशाला में श्रमायुक्त श्रीमती रजनी सिंह ने मोटर परिवहन कर्मकार अधिनियम, 1961 के अंतर्गत ट्रांसपोर्ट कार्यों में संलग्न ड्राइवरों और अन्य स्टाफ के कार्य के घंटों, विश्राम अवधि और अन्य सुविधाओं के बारे में विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया कि अधिनियम के अंतर्गत ट्रांसपोर्ट वर्कर्स के लिए प्रतिदिन 8 घंटे और साप्ताहिक 48 घंटे कार्य की अवधि निर्धारित है। इन प्रावधानों का गंभीरता से पालन किया जाना आवश्यक है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि ड्रायवरों और स्टाफ के लगातार लंबी अवधि तक कार्य करने और विश्राम का समय न मिलने से थकान और तनाव की स्थितियाँ उत्पन्न होती हैं, जिससे सड़क दुर्घटनाओं की संभावना बढ़ जाती है।

    श्रमायुक्त ने वाहनचालकों के समय-समय पर नियमित स्वास्थ्य परीक्षण, विशेषकर नेत्र परीक्षण, सुनिश्चित करने का सुझाव भी दिया। उन्होंने जोर देकर कहा कि विभिन्न तकनीकों और उपकरणों की सहायता से, साथ ही जागरूकता और प्रचार-प्रसार के माध्यम से सड़क दुर्घटनाओं की संभावनाओं को कम किया जा सकता है। इसके लिए ड्रायवरों के कार्य समय और विश्राम अवधि की निगरानी करने तथा अन्य सुरक्षा मानकों को सुनिश्चित करने हेतु मोटर वाहनों में सीसीटीवी कैमरे, जीपीएस प्रणाली जैसे तकनीकी उपकरणों के उपयोग को बढ़ावा दिया जाना चाहिए।

    कार्यशाला में अटल इंदौर सिटी ट्रांसपोर्ट सर्विसेस लिमिटेड (AICTSL) के अधिकारी श्री अभिनव चौहान ने भी भाग लिया। उन्होंने बताया कि उनके संस्थान में संभावित वाहन दुर्घटनाओं को रोकने के लिए ड्रायवर और पैसेंजर मैनेजमेंट सिस्टम का भविष्य में उपयोग किया जाएगा। इस संबंध में कार्यशाला में एक प्रस्तुति भी दी गई, जिससे सड़क दुर्घटनाओं की रोकथाम में मदद मिलेगी। कार्यशाला में ट्रांसपोर्टर एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने अधिनियम के परिपालन के लिए सकारात्मक सुझाव प्रस्तुत किए और मोटर यातायात श्रमिक अधिनियम के प्रावधानों के अनुपालन में सहयोग देने का आश्वासन भी दिया। कार्यशाला में श्रम विभाग से श्री प्रभात दुबे, श्री आशीष पालीवाल, जिला परिवहन अधिकारी श्री प्रदीप शर्मा, अटल इंदौर ट्रांसपोर्ट सर्विसेस लिमिटेड (AICTSL) के अधिकारी श्री अभिनव चौहान, प्राइम रूट बस ऑनर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष श्री गोविंद शर्मा, इंदौर ट्रक ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन के श्री सी. एल. मुकाती एवं अन्य ट्रांसपोर्टर्स उपस्थित थे।

  • नई दवाएं मानवता का उपहारःसंजय जैन

    नई दवाएं मानवता का उपहारःसंजय जैन

    भोपाल,27 जून(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)।

    मध्यप्रदेश फार्मेसी काऊंसिल के अध्यक्ष और फार्मेसी काऊंसिल आफ इंडिया के सदस्य संजय जैन ने कहा है कि आर्टीफीशियल इंटेलिजेंस से बन रहीं आधुनिक दवाएं मानवता के लिए उपहार बनकर सामने आई हैं। ये दवाएं जल्दी बन जाती हैं और व्यक्ति विशेष के लिए खास तौर पर बनाई जा सकती हैं। एल एन सी टी संस्थान भोपाल के फार्मेसी विभाग में आयोजित अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी में उन्होंने ये विचार व्यक्त किए। संगोष्ठी के मुख्य अतिथि विज्ञान एवं साइंस टेक्नोलॉजी विभाग मध्य प्रदेश के संचालक डॉक्टर अनिल कोठारी थे।


    कार्यक्रम में विशेष अतिथि के रूप में स्टेट फार्मेसी काउंसिल मध्य प्रदेश के अध्यक्ष .एवं फार्मेसी काउंसिल आफ इंडिया के सदस्य संजय कुमार जैन ने भाग लिया । संस्थान के डायरेक्टर श्री अशोक राय एवं फार्मेसी विभाग की विभाग अध्यक्ष श्रीमती पारुल मेहता ने अतिथियों का पुष्प एवं मालाओं से स्वागत किया । श्री कोठारी ने अपने अपने उद्बोधन में कहा कि फार्मेसी के बगैर विज्ञान अधूरी है विज्ञान की विभिन्न विभिन्न शाखों द्वारा फार्मेसी के क्षेत्र में विभिन्न शोध कार्य किया जा रहे हैं।


    मध्य प्रदेश स्टेट फार्मेसी काउंसिल के अध्यक्ष श्री संजय जैन ने संगोष्ठी में फार्मेसी के क्षेत्र में हो रहे विकास कार्य पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि आज देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में देश में जितनी उन्नति फार्मेसी के क्षेत्र में हुई है। उतनी आजादी के बाद कभी नहीं हुई थी। इसी का कारण है कि दुनिया के अधिकतम देश औषधि के क्षेत्र में भारत पर निर्भर हैं।


    मध्य प्रदेश में भी फार्मेसी औद्योगिक क्षेत्र एवं शिक्षा के क्षेत्र में प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव एवं उपमुख्यमंत्री श्री राजेंद्र शुक्ल के मार्गदर्शन में निरंतर आगे बढ़ रहे हैं। इसी का कारण है कि मध्य प्रदेश आज फार्मेसी के क्षेत्र में विकासशील प्रदेशों में जाना जाता है।
    इस संगोष्ठी में देश प्रदेश एवं विदेश के कई फार्मासिस्ट विभिन्न माध्यमों के द्वारा भाग ले रहे हैं।

  • उद्यमियों का सफल मंच बना राष्ट्रीय स्वदेशी मेला-किशन सूर्यवंशी

    उद्यमियों का सफल मंच बना राष्ट्रीय स्वदेशी मेला-किशन सूर्यवंशी


    भोपाल, 13 अप्रैल(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)। राजधानी के बिट्टन मैदान पर 7 से 13 अप्रैल तक आयोजित राष्ट्रीय स्वदेशी मेला का आज विधिवत समापन हो गया।मेले के भव्य आयोजन के स्वरूप को देखते हुए नगर पालिक निगम के सभापति किशन सूर्यवंशी ने कहा कि ये आयोजन प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के मेक इन इंडिया कार्यक्रम की सफलता का बुलंद उद्घोष है।ये उद्यमियों को संबल देने वाला बड़ा मंच बनकर सामने आया है।

    राजेश पोरवालः स्वदेशी के विचार को देशव्यापी बनाने में उल्लेखनीय योगदान.


    अखिल भारतीय स्वदेशी संघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष राजेश पोरवाल ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के स्वप्न को साकार करने के लिए मुख्यमंत्री डाक्टर मोहन यादव ने जिस तरह मेले के आयोजन को सफल बनाने के लिए आशीर्वाद दिया उससे नागरिकों की जन भागीदारी बढ़ी है। उन्होंने मेले के समापन अवसर पर विशेष अतिथि के रूप में आमंत्रित नगर निगम सभापति किशन सूर्यवंशी का हार्दिक अभिनंदन किया। श्री सूर्यवंशी ने मेले का भ्रमण किया और देश भर से आए शिल्प कलाकारों की सफलता की कहानियां भी सुनीं। उन्होंने बताया कि जिस तरह युवा उद्यमियों ने अपनी कला अभिरुचि को व्यावसायिक तौर पर प्रस्तुत किया है उसे देखकर कहा जा सकता है कि भारत की अर्थव्यवस्था में जन भागीदारी बढ़ती जा रही है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री डाक्टर मोहन यादव ने राज्य की उद्यमिता को बढ़ावा देने के लिए जो उपाय किए हैं उनमें इस तरह के मेलों के आयोजन से युवाओं को ज्यादा अवसर मिल रहे हैं।


    भारत सरकार के सूक्ष्म एवं लघु उद्योग मंत्रालय के प्रतिनिधि चेतन कुमार गुप्ता ने बताया कि भारत सरकार के उद्देश्यों को पूरा करने के लिए मंत्रालय ने उद्यमियों के लिए कई फ्लैगशिप योजनाएं चलाई हैं। उद्यमियों को आर्थिक सहयोग प्रदान करके राष्ट्र के विकास सूचकांक को बढ़ाने में मदद मिली है। इस मेले में भी विभाग ने सक्रिय सहयोग करके युवाओं का मार्गदर्शन किया है।राज्य सरकार ने जिस तरह आगे बढ़कर उद्यमियों को अवसर उपलब्ध कराया उससे मध्यप्रदेश को राष्ट्रीय स्तर पर विशेष पहचान मिली है.


    अखिल भारतीय स्वदेशी संघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष राजेश पोरवाल ने बताया कि महावीर जयंती तक मेले की सूचना राजधानी के दूरदराज के इलाकों तक पहुंच चुकी थी। इससे दस अप्रैल से मेला स्थल पर खासा जमघट लगने लगा था। छुट्टी के दिनों में तो मेले में पहुंचे नागरिकों ने भरपूर खरीददारी की। मेला स्थल पर वाहन पार्किंग, पेयजल, बैठक व्यवस्था, प्रकाश संयोजन और व्यंजनों की सुविधा और बच्चों के लिए खेल जैसी तमाम सुविधाएं उपलब्ध कराईं गईँ थीं जिसका लोगों ने भरपूर आनंद लिया। मेले के संचालक प्रणम्य अग्रवाल ने सभी सहयोगियों और नागरिकों के प्रति आभार व्यक्त किया है।

  • एमपी में उद्यमियों को नहीं झेलना पड़ेगा सत्ता की दलाली का बोझ

    एमपी में उद्यमियों को नहीं झेलना पड़ेगा सत्ता की दलाली का बोझ


    प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भारत की सत्ता संभालते ही गुजरातियों के व्यापारिक सोच से पूरे देश को रोशन करने का अभियान चलाया हुआ है। भारत ही नहीं बल्कि वे पूरे देश में अपने इसी सोच की वजह से वे आज आकर्षण का केन्द्र बन गए हैं। भोपाल में जब ग्लोबल इंवेस्टर्स समिट का आयोजन तय किया गया तभी से पूरी दुनिया के भारत मित्रों की निगाह देश के दिल की ओर लगी हुईं थीं। फ्रांस,जर्मनी, अमेरिका समेत विश्व के तमाम देशों में जाकर प्रधानमंत्री ने निवेशकों को भारत आने का न्यौता दिया है। यही वजह है कि एमपी आज निवेशकों के लिए एक प्रमुख डेस्टिनेशन बनकर सामने आया है। उद्योग अनुकूल माहौल बनाने के लिए भाजपा ने लगभग दो दशक पहले आधारभूत ढांचे को विकसित करने पर जोर दिया था। बिजली, सड़क और पानी की मूलभूत जरूरतें पूरी करने के साथ प्रधानमंत्री आवास योजना, जल नल योजना जैसी तमाम योजनाओं ने एमपी के इंफ्रास्टक्चर को मजबूती प्रदान की है। आज प्रदेश की तस्वीर पूरी तरह बदली हुई नजर आती है। कल्याणकारी हितग्राही मूलक योजनाओं से यहां के आम नागरिक की खरीद क्षमता भी बढ़ी है जिससे राज्य आज एक सफल बाजार के रूप में उभरकर सामने आया है। इस सबसे अलग जो बात आज श्री मोदी ने इंवेस्टर्स समिट में आए निवेशकों को समझाने का प्रयास किया वो यह कि देश का दिल आज निवेशकों को मुनाफे की गारंटी वाला राज्य बन गया है।


    इसके लिए हमें दो दशक पहले मध्यप्रदेश पर गौर करना होगा। तब राज्य में न तो सड़कें थीं, न बिजली पानी की मूलभूत व्यवस्थाएं थीं। कांग्रेस की सरकारों ने राज्य में लूटपाट का माहौल बना रखा था। वोट बटोरने के लिए तुष्टिकरण और जनता को बरगलाने के लिए उद्योगपतियों, व्यापारियों, सेठों को खलनायक बताने की राजनीति की जाती थी। शोषण की कहानियां सुनाकर कांग्रेस के नेता लोगों को बरगलाते थे। व्यापारियों और उद्योगपतियों को चोर व शोषक बताया जाता था। उनकी पैरवी करने वाली भाजपा को व्यापारियों की पार्टी बताकर लांछित किया जाता था। चंबल में डकैतों का आतंक इतना गहरा था कि लोग शाम के वक्त घरों से बाहर नहीं निकलते थे। उन्हीं डकैतों की कहानियां दिखाकर मुंबई की फिल्म नगरी कांग्रेस की जीवनरेखा बनी हुई थी। मीडिया की अपराध कथाएं भी उद्यमियों को कलंकित करती होती थीं। यही वजह है कि न तो यहां उद्योग विकसित हो पाए और न ही पूंजी का निर्माण हो पाया । आर्थिक रूप से बुरी तरह टूट चुका मध्यप्रदेश एक दुःस्वप्न बनकर रह गया था।


    बदले माहौल में आज इन्हीं पिछड़ेपन की नीतियों को मार भगाया गया है। लगभग दो दशकों की भाजपा की सरकारों ने पहले डकैतों, माफियाओं, ठगों और षड़यंत्र कारियों के विरुद्ध अभियान चलाया। अब वह सत्ता के दलालों को मार भगाने में जुटी हुई है। शिवराज सिंह की भाजपा सरकार ने आधारभूत ढांचे को तो विकसित किया लेकिन वह राज्य को सत्ता के दलालों से मुक्ति नहीं दिला पाई थी। डकैतों और माफियाओं ने जंगल छोड़ दिए लेकिन वे बस्तियों में आकर सेठ बन गए। राज्य की आय तो नहीं बढ़ी लेकिन कर्ज बढ़कर साढ़े तीन लाख करोड़ हो गया। चोरों मवालियों और ठगों ने अपनी आय बढ़ाई लेकिन वे न तो उद्योग स्थापित कर रहे थे और न ही उन्होंने अपनी काली कमाई का टैक्स चुकाया ।


    इस बार प्रदेश की जनता ने जैसे ही भाजपा को एक बार फिर सत्ता सौंपी तो सबसे पहले सत्ता के दलालों के आगे नतमस्तक नेताओं को सत्ता से बाहर किया और नई पीढ़ी को बागडोर सौंपी। डाक्टर मोहन यादव जैसे जमीनी नेता के हाथों कमान सौंपकर केन्द्र सरकार ने सत्ता के दलालों को घर बैठने का संदेश दिया। लाठी लेझम चलाने वाले पहलवान मोहन यादव हों या फिर वित्तमंत्री जगदीश देवड़ा जैसे समर्पित राजनेताओं तो आगे लाकर उन्होंने जड़ हो चुकी राजनीति को एक खुला आसमान सौप दिया है। इसके साथ ही काला धन बटोरकर जिन राजनेताओं ने अपने चहेते व्यापारियों के माध्यम से निवेश किया और महाराजा बन बैठे उनसे काला धन भी निकलवाया जाने लगा है।इस सब कार्य के लिए मोहन यादव ने अफसरशाही को खुला अवसर दिया है।


    मुख्य सचिव के रूप में अनुराग जैन को भेजकर राज्य में निवेश अनुकूल वातावरण बनाया गया है।जिन अफसरों के हाथों में आज राज्य की कमान है,योजनाओं को लागू करने की जवाबदारी है वे अपेक्षाकृत रूप से साफ सुथरे हैं। ये भी कहा जा सकता है कि अफसरशाही पर शिकंजा कसकर उसे औद्योगिक विकास के अनुकूल बनाया गया है। यही वजह है कि इस बार की इंवेस्टर समिट पिछले तमाम सम्मेलनों से अलग तस्वीर लेकर सामने आई है। निवेशकों की परख के लिए राज्य की पूरी जानकारी डिजिटल कर दी गई है। उनके आवेदनों की प्रक्रिया भी इतनी सरल कर दी गई है कि वे निवेश का प्रस्ताव देकर आसानी से अपना कारोबार शुरु कर सकते हैं।दुनिया के बहुराष्ट्रीय बैंकों में कार्य कर चुके भोपाल के ही युवा उद्यमी अंकेश मेहरा ने बताया कि उन्होंने अलान्ना ब्रांड नेम से राजधानी में एक स्टार्टअप शुरु किया है। उनका प्रोडक्ट होंठों की सुंदरता के लिए दुनिया का आधुनिकतम आविष्कार है। अपने माल को सस्ता और आम जनता की पहुंच का बनाने के लिए उन्हें कुछ पैकिंग मटेरियल आज भी चीन से बुलाना पड़ता है। जल्दी ही वे ये सामान भी भारत में बनाने लगेंगे। राज्य की औद्योगिक नीतियां उद्यमियों के लिए दोस्ताना हैं ।ये माहौल बना रहेगा तो राज्य जल्दी ही एक सफल स्टेट के रूप में अपना नाम रौशन करेगा।


    इसके पहले तक राज्य में एक कुप्रथा छाई हुई थी कि टेंडर किसी भी उद्यमी के नाम खुले उसे एक विशेष प्रजाति का साईलेंट पार्टनर रखना पड़ता था। कांग्रेस के आपराधिक चरित्र वाले मुख्यमंत्रियों की चलाई इस प्रथा का पालन भाजपा की सरकारें भी दो दशक तक करती रहीं।इसका सबसे बड़ा नुक्सान ये होता था कि निवेशक यदि गुणवत्ता का कार्य करे और कम मुनाफा ले तब भी उसे सत्ता के दलालों को मुनाफे का कट देना पड़ता था। सत्ता का पेट भरते भरते उसे यहां कारोबार करना घाटे का सौदा बन जाता था और वो यहां की परंपराओं से घबराकर निवेश से पीछे हट जाता था। पहली बार डाक्टर मोहन यादव की सरकार ने निवेशकों को सत्ता के दलालों के भय से मुक्ति दिलाकर स्वच्छंद वातावरण मुहैया कराया है। यही वजह है कि राज्य में निवेशकों ने धड़ाधड़ निवेश शुरु कर दिया है।


    लोक निर्माण विभाग के प्रमुख सचिव आईएएस नीरज मंडलोई ने बताया कि इंवेस्टर्स समिट की सफलता का आलम ये है कि आज पहले दिन ही उनके विभाग को लगभग ढाई सौ करोड़ रुपयों के निवेश के प्रस्ताव मिल चुके हैं। कल तक ये आंकडा़ नया रिकार्ड स्थापित करेगा। इसी तरह एमपी इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट कार्पोरेशन लिमिटेड के अध्यक्ष राघवेन्द्र कुमार सिंह ने बताया कि उद्यमियों में जो उत्साह देखने मिल रहा है वह अद्वितीय है। हमें अब तक के अनुभवों और निरंतर संवाद का लाभ भी मिला है। ये बात सही है कि राज्य में कई मूलभूत बदलाव हुए हैं लेकिन अब तक भाजपा के कई स्थानीय नेता भी इस बदलाव को स्वीकार नहीं कर पा रहे हैं। उन्हें कांग्रेस से आए ज्योतिरादित्य सिंधिया गुट के नेताओं के नाम पर भड़काया जा रहा है। अब तक जो हुआ सो हुआ पर जीआईएस के आयोजन की सफलता की जो तस्वीर उभरी है वह मध्यप्रदेश और देश में मेक इन इंडिया का एक सफल माडल दुनिया के सामने लाने में सफल हुई है।

  • राजधानी में अंतर्राष्ट्रीय वनमेले का शुभारंभ

    राजधानी में अंतर्राष्ट्रीय वनमेले का शुभारंभ

    भोपाल,16 दिसंबर(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)। 10वां अंतर्राष्ट्रीय वन मेला 17 से 23 दिसंबर तक लाल परेड मैदान में आयोजित होने जा रहा है। मेले का उद्घाटन शाम पांच बजे राज्यपाल मंगूभाई पटेल करेंगे। कार्यक्रम की अध्यक्षता मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव करेंगे, विशिष्ट अतिथि के रूप में वन एवं पर्यावरण, राज्य मंत्री दिलीप अहिरवार भी उपस्थित रहेंगे। मंत्री दिलीप अहिरवार ने आज एक भीड़ भरी पत्रकार वार्ता में बताया कि मेले की थीम ‘लघु वनोपज से महिला सशक्तिकरण’ रखी गई है। लघु वनोपजों के प्रबंधन में महिलाओं की महत्वपूर्ण भूमिका है, प्रदेश में लघु वनोपज संग्रहण कार्य में लगभग 50 प्रतिशत महिलाओं की भागीदारी है।
    मंत्री दिलीप अहिरवार ने बताया कि मेले में 300 स्टाल्स लगाए जाएंगे। प्रदेश के जिला यूनियन, वन धन केंद्र, जड़ी-बूटी संग्राहक, उत्पादक, कृषक, आयुर्वेदिक औषधि निर्माता, परंपरागत भोजन सामग्री के निर्माता एवं विक्रेतागण अपने उत्पादों का प्रदर्शन एवं विक्रय करेंगे। उन्होंने कहा कि मेले में लघु वनोपज एवं औषधीय पौधों के क्षेत्र की गतिविधियों, उत्पादों एवं अवसरों को प्रदर्शित करने एवं इससे जुड़े संग्राहकों, उत्पादकों, व्यापारियों, उद्यमियों, वैज्ञानिकों, प्रशासकों एवं नीति निर्धारकों के बीच संवाद स्थापित करने के लिए एक व्यापक मंच उपलब्ध कराया जाएगा।
    मेले में विभिन्न शासकीय विभागों की प्रदर्शनी लगाई जाएगी। साथ ही 19 एवं 20 दिसंबर को मेला स्थल पर ‘लघु वनोपज से महिला सशक्तिकरण’ पर दो दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया जाएगा। जिसमें श्रीलंका, नेपाल एवं ऑस्ट्रेलिया के प्रतिनिधिगण भाग लेंगे। 21 दिसंबर को क्रेता-विक्रेता सम्मेलन आयोजित होगा,जिसमें उच्च गुणवत्ता युक्त लघु वनोपजों (औषधीय पौधों ) कच्ची जड़ी-बूटियों एवं एमएफपी-पार्क की बनाईं हुईं आयुर्वेदिक औषधियों के क्रय-विक्रय के लिए अनुबंध किए जाएंगे।
    मंत्री दिलीप अहिरवार ने बताया कि मेले में ओपीडी संचालन किया जाएगा। जिसमें आयुर्वेदिक पद्धति के चिकित्सकों, उपचार करने वाले विशेषज्ञों द्वारा निशुल्क चिकित्सा परामर्श दिया जाएगा। जिसमें 25 हजार लोगों के उपचार कराने की संभावना है।
    वन राज्य मंत्री ने बताया कि मेले में सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जाएगा। जिसमें आर्केस्टा, नुक्कड़ नाटक एवं लोक नृत्य, स्कूली छात्र-छात्राओं के लिए चित्रकला, फैंसी ड्रेस, गाय कार्यक्रम आयोजित होंगे, साथ ही 18 दिसंबर को लोक गायिका मालिनी अवस्थी एवं 19 को हास्य कलाकार एहसान कुरैशी, 20 को सूफी बैंड, 21 फिडली क्राफ्ट और 22 को ‘एक शाम वन विभाग के नाम’ कार्यक्रम का आयोजन होगा।
    अंतर्राष्ट्रीय वन मेला, 2024, प्रदेश की वन संपदा और महिला सशक्तिकरण को समर्पित एक ऐसा मंच है, जो पर्यावरण, संस्कृति और अर्थव्यवस्था के सामंजस्य को प्रदर्शित करता है।

  • फिर लौटेगी राज्य के बीड़ी उद्योग की रौनक

    फिर लौटेगी राज्य के बीड़ी उद्योग की रौनक


    भोपाल,16 दिसंबर(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)। मध्यप्रदेश बीड़ी उद्योग संघ के प्रतिनिधि मंडल ने आज मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से भेंट कर बीड़ी उद्योग में रोजगार के अवसरों को बढ़ाने के लिए कारोबार में आ रही कई तकनीकी अड़चनों को दूर करने का अनुरोध किया। संघ के प्रतिनिधियों ने मुख्यमंत्री को बताया कि बीड़ी श्रमिकों को श्रम कानूनों का लाभ दिलाने के लिए बीड़ी निर्माताओं को राज्य की ओर से आवश्यक संरक्षण प्रदान किया जाए। इससे श्रमिकों को साल भर रोजगार देने वाले इस कारोबार से प्रदेश को आत्मनिर्भर बनाया जा सकेगा।
    विधानसभा के मुख्यमंत्री कक्ष में उन्होंने डाक्टर मोहन यादव को बताया कि बरसों से इस उद्योग को अनदेखा किए जाने की वजह से पूरा कारोबार अराजकता का शिकार हो गया है। बीड़ी उद्योग संघ के सचिव श्री अर्जुन खन्ना के नेतृत्व में मिले प्रतिनिधि मंडल ने बताया कि बीड़ी निर्माण एक श्रम आधारित कुटीर ग्रामोद्योग है, जिसमें न्यूनतम पूंजी और बुनियादी ढांचे की आवश्यकता होती है। संघ ने बताया कि प्रदेश के जंगलों से प्राप्त होने वाले अच्छी गुणवत्ता के तेंदूपत्ते से बीड़ी उत्पादन बढ़ाया जा सकता है। प्रति मानक बोरी तेंदूपत्ते पर सब्सिडी बढ़ाकर श्रमिकों का भी भला किया जा सकता है। प्रति मानक बोरी तेंदूपत्ते पर सब्सिडी बढ़ाने से मध्यप्रदेश बीड़ी निर्यात की अपनी खोई विरासत दुबारा हासिल कर सकता है।
    संघ के प्रतिनिधियों ने बताया कि उत्पादन बढ़ाने का प्रोत्साहन देकर राज्य को संगठित और स्थायी बीड़ी उत्पादन के केन्द्र के रूप में मजबूती से खड़ा किया जा सकता है। तेंदूपत्ता की स्थानीय खपत बढ़ने से प्रदेश में ही पूंजी का उत्पादन बढ़ाया जा सकेगा। बीड़ी का स्थानीय निर्माण होने से बेरोजगारी की समस्या का समाधान भी किया जा सकेगा। मुख्यमँत्री डाक्टर मोहन यादव ने प्रतिनिधि मंडल को आश्वासन दिया कि राज्य सरकार बीड़ी उद्योग संघ के सुझावों पर अमल करने के लिए आवश्यक सुधार लागू करेगी।
    गौरतलब है कि राज्य में तेंदूपत्ते का राष्ट्रीयकरण के साथ ही छोटी सिगरेट को बढ़ावा मिलने की वजह से राज्य का बीड़ी उद्योग अन्य राज्यों में पहुंच गया था। इससे स्थानीय रोजगार घटा था और सिगरेट कंपनियों का मुनाफा बढ़ गया था। कांग्रेस की पूर्ववर्ती अर्जुनसिंह की सरकार ने श्रमिकों को अधिक मजदूरी का प्रलोभन देकर खूब वाहवाही बटोरी थी। राज्य का बीड़ी उद्योग समाप्त हो जाने की वजह से स्थानीय श्रमिकों का रोजगार छिन गया था। अन्य राज्यों में ट्रांसफर हुए बीड़ी उद्योग की वजह से उन राज्यों में तो श्रमिकों को लाभ होने लगा लेकिन यहां के मजदूर लाचार हो गये थे। धीरे धीरे तेंदूपत्ते की चोरी बढ़ी और स्थानीय स्तर पर स्थापित ब्रांडों की और बगैर लेवल वाली नकली बीड़ी का निर्माण बढ़ गया था। इससे राज्य को टैक्स के रूप में होने वाली आय भी प्रभावित हुई थी और अपंजीकृत मजदूरों को श्रम कानूनों का लाभ मिलना भी बंद हो गया था।

  • शराब की खपत बढ़ी तो आय भी बढ़ाइए

    शराब की खपत बढ़ी तो आय भी बढ़ाइए

    भोपाल01 अक्टूबर(अजय खेमरिया).
    प्रदेश की मौजूदा आबकारी नीति में बड़े बदलाब की आवश्यकता है क्योंकि जिस व्यापक पैमाने पर शराब का अवैध कारोबार मैदानी स्तर पर हो रहा है उसे आबकारी विभाग रोक पाने में नाकाम साबित हो रहा है। सीमित मानव संसाधन और केंद्रीयकृत नियंत्रण तंत्र के अभाव में सरकार को इस अवैध कारोबार से राजस्व की क्षति भी हजारों करोड़ में हो रही है।
    तथ्य यह है कि प्रदेश में जितनी आधिकारिक शराब दुकानें है उससे दोगुने अनुपात में शराब का अवैध विक्रय संगठित तौर पर किया जा रहा है।प्रदेश में एक भी गांव ऐसा नही है जहां सरकारी दुकानों से अवैध परिवहन कर शराब नही बेची जा रही हो। यही नही इसी अनुपात में अवैध रूप से शराब निर्माण भी गांव-गांव में किया जा रहा है। इसके दुष्परिणाम सरकारी राजस्व में चपत के साथ आम नागरिकों की अमानक शराब से असमय मौत के रूप में भी सामने आ रहे हैं। मुरैना जिले में पिछले सालों जिस तरह से अवैध शराब भट्टियों से निर्मित शराब पीने से जो मौते हुई थी उससे सरकार ने कोई सबक नही सीखा।
    सरकार नहीं कर सकती शराब दुकानें बंद?
    मध्यप्रदेश सरकार बिहार या गुजरात की तरह शराब बंदी नहीं कर सकती है, क्योंकि राज्य के राजस्व का एक बड़ा हिस्सा उसे आबकारी से ही प्राप्त होता है। प्रदेश में अभी तीन हजार 600 शराब दुकानों से सरकार को 13 हजार 916 करोड़ का राजस्व चालू वित्तीय बर्ष में मिला है। 2003 में यह आंकड़ा लगभग 750 करोड़ रुपए था। जाहिर है कि औधोगिक एवं खनिज संसाधनों रूप में बीमारू मप्र के लिए सरकारी राजस्व का बड़ा स्रोत शराब भी है।
    वर्तमान तीन हजार छह सौ दुकानों की संख्या आंकड़े के रूप में तो बहुत नजर आती है, लेकिन जो जमीनी हकीकत है वह इन आंकड़ों से जुदा है क्योंकि बिना सरकारी दुकानों के भी हजारों जगह शराब का अवैध विक्रय हो रहा है और इसी अनुपात में अवैध भट्टियों का संचालन भी जारी है। यह दोनों तथ्य सरकार से छिपे हुए नहीं है।
    सरकार के राजस्व का इतना महत्वपूर्ण स्रोत होने के बाबजूद आबकारी महकमा मानव संसाधन की गंभीरतम कमी से जूझ रहा है। अधिकतर जिलों में आबकारी उपनिरीक्षक, हवलदार, आरक्षक के आधे से ज्यादा पद खाली है। एक एक उपनिरीक्षक के पास दो से तीन सर्किल का प्रभार है। नतीजतन अवैध भट्टियों पर कारवाई के लिए महकमें के पास कोई संसाधन ही नहीं हैं । इस अवैध कारोबार को स्थानीय दबंगो के अलावा राजनीतिक स्तर पर भी खुला संरक्षण मिला हुआ है। जब भी आबकारी महकमा अवैध बिक्री या निर्माण पर कारवाई करता है उसे स्थानीय माफिया और नेता कारवाई नहीं करने देते हैं। नेताओं के संरक्षण के कारण ही उन अवैध कारोबारियों को न तो पुलिस का भय है और न ही आबकारी विभाग का।

    अवैध शराब के लिए बाजार की उपलब्धता होना है, वर्तमान में मध्य प्रदेश में संपूर्ण प्रदेश को दो ,तीन या चार-चार दुकानों के समूहों में बांटा गया है, प्रत्येक समूह किसी न किसी ठेकेदार को टेंडर के माध्यम से आवंटित किया जाता है जिसके एवज में सरकार को राजस्व की प्राप्ति होती है। दुकानें शासकीय होती हैं और ड्यूटी पेड शराब सरकारी वेयर हाउस से उनको प्रदान की जाती हैं जिनको वो एमएसपी और एमआरपी के बीच अपने सुविधा जनक रेट पर विक्रय करने हेतु स्वतंत्र होते हैं। अब सवाल ये उठता है कि अवैध शराब यदि दुकानों से नहीं बिकती तो फिर कहां बिकती है? प्रत्येक मदिरा समूह में ठेकेदार को आवंटित दुकानों की संख्या कम होने और उन दुकानों से संबद्ध क्षेत्र बहुत बड़ा होने से प्रति व्यक्ति दुकान तक मदिरा खरीदने जाने के लिए सक्षम नहीं होता इसलिए ठेकेदार प्रत्येक गांव में अपना एक कमीशन किसी सामान्य पान या परचून दुकानदार को दे देते हैं जिस से प्रत्येक गांव में ड्यूटी पेड शराब प्रत्येक व्यक्ति को आसानी से स्थानीय स्तर पर उपलब्ध हो जाती है।
    अवैध शराब विक्रय को रोकने के लिये प्रत्येक गांव में अघोषित रूप से खुली हुई कलारियों को सरकार नियमों के अंतर्गत लाकर उनके नियमित लाइसेंस प्रदान करने की कार्यवाही करें, जिससे सरकार के राजस्व में वृद्धि होगी और जनहानि की संभावना भी खत्म हो जाएगी। इसके अलावा शराब की कीमतों में कमी की जानी चाहिए क्योंकि जो शराब का आदि है, वह तो शराब पियेगा, फिर चाहे जहरीली ही क्यों न हो। ऐसे में यदि कीमत कम होगी, तो यह मौतों का सिलसिला भी कम होगा। आबकारी विभाग द्वारा की जाने वाली कार्यवाहियों का पूर्ण अधिकार विभाग को ही दिया जाना चाहिए, ताकि विभागीय अधिकारियों का अवैध करोबार पर अंकुश लगाए जाने के प्रति रूझान बढ सके। अन्यथा पुलिस द्वारा की जाने वाली कार्यवाहियों के कारण आबकारी अपने कर्तव्यों के प्रति उदासीन हो जाती है, फलस्वरूप दिखावे की कार्यवाहियां कर अपने काम की इतिश्री कर ली जाती है। आबकारी अधिनियम में कठोर दण्ड का प्रावधान करना और पालन करना चाहिए। दुकानों की संख्या में वृद्धि की जाकर ड्यूटी पेड मदिरा की उपलब्धता में वृद्धि की जानी चाहिए।

  • विकसित बुंदेलखंड के लिए होंगे तमाम उपायःडॉ.मोहन यादव

    विकसित बुंदेलखंड के लिए होंगे तमाम उपायःडॉ.मोहन यादव

    सागर, 27 सितंबर(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि भविष्य का बुन्देलखंड, विकसित बुन्देलखंड होगा। प्रदेश में उद्योगों के विकास का कार्य निरंतर जारी रहेगा। छोटे से छोटे उद्यमी की सहायता के लिए भी राज्य सरकार पूर्ण सहयोग प्रदान करेगी। केन-बेतवा परियोजना के क्रियान्वयन से बुन्देलखंड के ढाई लाख हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई क्षमता की वृद्धि होगी, जिससे बुन्देलखंड क्षेत्र का स्वरूप बदल जायेगा। सागर में एयरपोर्ट का निर्माण होगा। इससे एविएशन क्षेत्र में संभावनाएं बढ़ेगी। प्रदेश के कई स्थानों पर विमानन की गतिविधियों के लिए केन्द्र सरकार का पूर्ण सहयोग मिल रहा है, इससे रोजगार भी बढेगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव सागर में रीजनल इंडस्ट्री कॉन्क्लेव के शुभारंभ सत्र को संबोधित कर रहे थे।
    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने आरआईसी सागर के शुभारंभ अवसर पर मध्यप्रदेश में औद्योगिक निवेश के अवसरों पर केन्द्रित लघु फिल्म “एडवांटेज एमपी” का प्रदर्शन किया गया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने एमपीआईडीसी के सागर स्थित क्षेत्रीय कार्यालय का वर्चुअल भूमि-पूजन किया। उन्होंने सागर संभाग के 6 जिलों सागर, पन्ना, टीकमगढ़, निवाड़ी, छतरपुर और दमोह में इन्वेस्टमेंट फेसिलिटेशन सेंटर और संभागीय मुख्यालय में एमपीआईडीसी के रीजनल ऑफिस का शुभारंभ किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने इसके साथ ही कोयंबटूर (तमिलनाडू) में एमपीआईडीसी के कार्यालय का भी वर्चुअल शुभारंभ किया। इस अवसर पर औद्योगिक क्षेत्र से सिंधगवां की जलापूर्ति के लिए नगर निगम सागर और एमपीआईडीसी के मध्य ट्रीटेड वाटर प्रदाय के लिए एमओयू का संपादन भी हुआ। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने 96 औद्योगिक इकाइयों के आशय-पत्र जारी किए। इन इकाइयों को 240 एकड़ भूमि आवंटित की जाना है। इससे 1 हजार 560 करोड़ का पूंजी निवेश एवं 5 हजार 900 से अधिक व्यक्तियों को रोजगार प्रदाय किया जाना प्रस्तावित है।
    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बुंदेलखंड इनोवेशन चैलेंज (हैकाथॉन) के विजेताओं बेम्बू वर्ल्ड के श्री सुजीत तिवारी, सेवा हब के श्री आशीष शर्मा, निम्बस गेमिंग के श्री विपुल सिंह परमार को क्रमशः प्रथम, द्वितीय और तृतीय पुरस्कार प्रदान किए। जय अनाग गायत्री प्राइवेट लिमिटेड की सुश्री निलय शर्मा को सर्वश्रेृष्ठ महिला उद्यमी के रूप में पुरस्कृत किया गया। इस अवसर पर बुक ऑडियो के लिए सोशल मीडिया क्रिऐटर श्री राजीव यादव भी पुरस्कृत किए गए।
    क्षेत्रीय इंडस्ट्री कॉन्क्लेव के शुभारंभ सत्र में मंगोलिया के राजदूत श्री गनबोल्ड डंबजाव, टीड्व्ल्यू के सीईओ श्री इंगो सोईलर, थाईलैंड के महावाणिज्यदूत श्री डोनाविट पूलसावत, मंत्री श्री गोविंद सिंह राजपूत, मंत्री श्री चैतन्य काश्यप, मंत्री श्री धर्मेन्द्र भाव सिंह लोधी, मंत्री श्री लखन पटेल, राज्यमंत्री श्री दिलीप अहिरवार, खजुराहो सांसद श्री वी.डी. शर्मा, पूर्व मंत्री श्री गोपाल भार्गव और श्री भूपेन्द्र सिंह सहित कई वरिष्ठ जनप्रतिनिधि, राष्ट्रीय व अंतर्राष्ट्रीय उद्योग समूहों के प्रतिनिधि उपस्थित थे।
    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने जनसंपर्क विभाग द्वारा हिन्दी में प्रकाशित “मध्यप्रदेश संदेश” के अंग्रेजी संस्करण का लोकार्पण किया। इस अंक में राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु की मध्यप्रदेश यात्रा, प्रदेश की पहली जनमन कॉलोनी शिवपुरी और अन्य उपलब्धियों का समावेश है। इस अवसर पर सचिव तथा आयुक्त जनसंपर्क डॉ. सुदाम खाड़े विशेष रूप से उपस्थित रहे।
    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि बड़े पैमाने पर निवेश से स्थानीय व्यापार को प्रोत्साहन मिलता है। इस कॉन्क्लेव से पूरा संभाग लाभान्वित होगा। संभाग के सभी जिलों में उद्योग तथा व्यापारिक गतिविधियां प्रारंभ होंगी। बीना में कई इकाइयां आएंगी। साथ ही 120 करोड़ की लागत से पेट्रोलियम क्षेत्र में भी निवेश हो रहा है। प्रदेश में सागर में चलने वाले डेटा सेंटर की स्थापना महत्वपूर्ण कदम है। यह 1700 करोड़ का निवेश है और इससे लगभग एक हजार लोगों को रोजगार मिलेगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि नये 6 लेन और 4 लेन मार्गों का लाभ भी बुन्देलखंड क्षेत्र को प्राप्त होगा। उन्होंने कहा कि नवकरणीय ऊर्जा क्षेत्र में भी निवेश आ रहा है। कृषि और पशुपालन क्षेत्र में सरकार सहयोग प्रदान कर गतिविधियों को प्रोत्साहित कर रही है। खनिज क्षेत्र में भी बुन्देलखंड सहित संपूर्ण प्रदेश में प्रोत्साहन दिया जा रहा है।
    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि बुन्देलखंड ने कला, संस्कृति, वीरता से इतिहास में अपना स्थान बनाया है। इस क्षेत्र में चांदी का कार्य करने वालों, बीड़ी तथा अगरबत्ती उद्योग से जुड़े लोगों को पूर्ण सहयोग प्रदान किया जायेगा। सागर में चांदी से जुड़ी गतिविधियों को प्रोत्साहित करने क्लस्टर विकसित किया जायेगा। उन्होंने कहा कि संभागीय कॉन्क्लेव से स्थानीय स्तर पर नई इकाइयों की स्थापना के लिए अनुकूल वातावरण बन रहा है। क्षेत्रीय इंडस्ट्री कॉन्क्लेव से स्थानीय गतिविधियों के साथ प्रदेश स्तर पर महत्व रखने वाले उद्योगों की स्थापना को भी गति देने में मदद मिल रही है।
    खाद्य नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री श्री राजपूत ने कहा कि क्षेत्रीय इंडस्ट्री कॉन्क्लेव से युवा उद्यमियों को प्रोत्साहन मिल रहा है और उनका सपना साकार हो रहा है। सागर के पुराने अगरबत्ती और बीड़ी उद्योग को पुनर्जीवित करने की पहल भी हुई है। कैंसर चिकित्सा के क्षेत्र में नागरिकों को सुविधा देने के प्रयोग किये जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. यादव सागर अंचल में सभी तरह के उद्योगों की स्थापना के लिए प्रयासरत हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव के प्रयासों से बुन्देलखंड अंचल को नई पहचान मिलेगी।
    एमएसएमई मंत्री श्री कश्यप ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. यादव की पहल और दूरदर्शिता से ही क्षेत्रीय इंडस्ट्री कॉन्क्लेव के आयोजन संभव हो पा रहे हैं। इससे प्रदेश में स्थानीय स्तर पर उद्यमिता के लिए उत्साह का वातावरण बन रहा है। यह देश में अपनी तरह का अनूठा नवाचार है। इससे कृषि पर निर्भर उद्योगों के साथ व्यापार, व्यवसाय की गतिविधियों को भी प्रोत्साहन मिला है।
    सांसद एवं प्रदेश अध्यक्ष श्री वी.डी. शर्मा ने कहा कि बुन्देलखंड अंचल में खनिज, पर्यटन और अन्य क्षेत्रों में उद्योगों के विकास की अपार संभावनाएं हैं। मध्यप्रदेश ने स्वच्छता के क्षेत्र में देश में अपनी विशिष्ट छाप छोड़ी है। खजुराहों को फिल्म सिटी के रूप में विकसित करने की दिशा में विशेष प्रयास किये जा रहे है
    पेसिफिक मेटा-स्टील के श्री जे. पी. अग्रवाल ने कहा कि वे निवाड़ी में 3200 करोड़ की लागत से इंटीग्रेटेड स्टील प्लांट लगा रहे हैं। इससे 10 हजार लोगों को रोजगार मिलेगा और प्रतिवर्ष लगभग 1 हजार करोड़ का राजस्व भी शासन को प्राप्त होगा। उन्होंनें मध्यप्रदेश में मेडीकल क्षेत्र में भी गतिविधियां आरंभ करने की योजना सांझा की।
    मुख्यमंत्री डॉ. यादव के प्रयासों की निवेशकों ने सराहना की। कॉन्क्लेव में आए बंसल समूह के श्री सुनील बंसल ने कहा कि चिकित्सा उद्योग क्षेत्र में बंसल समूह कार्य कर रहा है। सागर में किडनी प्रत्यारोपण की सुविधा समूह द्वारा प्रारंभ की गई है। श्री बंसल ने प्रदेश में 4 सुपर स्पेशियेलिटी हॉस्पीटल, एक पांच सितारा होटल और ऊर्जा क्षेत्र में 1350 करोड़ रुपये के निवेश का प्रस्ताव दिया।
    सागर ग्रुप के उद्योगपति श्री सुधीर अग्रवाल ने कहा कि भोपाल के पास तामोट में उनकी इकाइयां कार्य कर रही हैं। टेक्सटाईल क्षेत्र में नए निवेश के प्रयास सागर ग्रुप कर रहा है। शिक्षा, स्वास्थ्य, रोटी, कपड़ा, मकान सभी क्षेत्रों में ग्रुप कार्य कर रहा हैं। उनके समूह की डाईंग एण्ड प्रोसेसिंग क्षेत्र में लगभग 1400 करोड़ रूपये के निवेश की योजना है, इससे रोजगार के अवसर निर्मित होंगे। उन्होंने कहा कि उनका समूह कॉम्पटीशन नहीं, को-आपरेशन के सिद्धांत पर कार्य करता है।
    मध्य भारत एग्रो के श्री पंकज ओसवाल ने कहा कि उनके समूह का सर्वाधिक निवेश मध्यप्रदेश में है। निवेश की उद्योग मित्र नीति तथा शासन का सहयोगी रवैया अतुलनीय है। उनका समूह सागर में सिंगल सुपर फॉस्फेट का उत्पादन कर रहा है। श्री ओसवाल ने बताया कि उनके समूह की सागर के बंडा के पास 500 करोड़ रूपये निवेश की योजना है।
    प्रमुख सचिव, औद्योगिक नीति एवं निवेश प्रोत्साहन श्री राघवेन्द्र कुमार सिंह ने कहा कि प्रदेश में 3 संभागीय कॉन्क्लेव के बाद आज सागर रीजनल इंडस्ट्री कॉन्क्लेव हो रही है। बैंगलुरू, कोयम्बटूर, मुम्बई और कोलकाता में इंटरैक्टिव सेशन भी इस वर्ष संपन्न हुए हैं। मध्यप्रदेश औद्योगिक दृष्टि से देश का दूसरा सबसे बड़ा राज्य है, यहाँ भारत का सबसे बड़ा सौर ऊर्जा संयंत्र स्थापित किया गया हैं। अनेक क्षेत्रों में उद्योगों के विकास की प्रदेश में व्यापक संभावनाएं हैं। अधोसंरचना की दृष्टि से महत्वपूर्ण कार्य होने से निवेशकों के लिए प्रदेश अनुकूल है। राज्य सरकार की उद्योग नीतियों से उद्योगपति मध्यप्रदेश में उद्योग लगाने के लिए इच्छुक रहते हैं।
    अपर मुख्य सचिव श्री संजय दुबे ने सूचना प्रोद्योगिकी क्षेत्र में उद्योगों के विकास के लिए तैयार की गई राज्य की नीतियों की जानकारी प्रदान की। उन्होंने बताया कि डेटा सेंटर स्थापना की दृष्टि से मध्यप्रदेश सर्वाधिक अनुकूल प्रदेश है। श्री दुबे ने आईटी क्षेत्र में संचालित गतिविधियों की जानकारी दी।
    प्रमुख सचिव खनिज श्री संजय कुमार शुक्ला ने प्रदेश में उपलब्ध खनिज संपदा और संचालित उद्योगों की विस्तार से जानकारी दी। श्री शुक्ला ने मध्यप्रदेश में खनिज आधारित उद्योगों की संभावनाओं पर विस्तृत प्रेजेंटेशन दिया। उन्होंने कहा कि उद्योगों को सभी विभागों से जुड़ी अनुमतियां आसानी से प्राप्त होती हैं। उन्होंने बताया कि 17-18 अक्टूबर को भोपाल में खनन व खनिज गतिविधियों पर केंद्रित राष्ट्रीय स्तर का आयोजन प्रस्तावित है। उन्होंने बताया कि सागर की ढाना हवाईपट्टी को एयरपोर्ट के रूप में विकसित करने संबंधी प्रस्ताव प्राप्त हुआ है।
    एम.डी. पर्यटन श्री इलैया राजा टी. ने बताया कि पर्यटन क्षेत्र में निवेश से बड़ी संख्या में प्रदेश के युवाओं को रोजगार मिल रहा है। सचिव सूक्ष्म, लघु, मध्यम उद्यम श्री नवनीत मोहन कोठारी ने कुटीर उद्योगों के विकास के लिए किए जा रहे प्रयासों की जानकारी दी। प्रबंध संचालक हस्तशिल्प विकास निगम श्री मोहित बुन्दस ने मध्यप्रदेश में कुटीर उद्योग क्षेत्र में विद्यमान अवसरों के बारे में जानकारी दी। कॉन्क्लेव में बड़ी संख्या में जन-प्रतिनिधि, अधिकारी और नागरिक उपस्थित थे।

  • बेहिचक तय कीजिए बीड़ी कारोबार का कार्पोरेटीकरण

    बेहिचक तय कीजिए बीड़ी कारोबार का कार्पोरेटीकरण

    -आलोक सिंघई-

    पिछले 36 सालों से बीड़ी उद्योग के कथित सहकारीकरण और सुधारों ने राज्य के लाखों मजदूरों को लाचार बना दिया है ।जिन मजदूरों को साल भर बीड़ी बनाने का रोजगार मिलता था वह लगभग समाप्त हो गया है। राज्य को अपने श्रमबल से होने वाली आय समाप्त हो चुकी है। तंबाखू की खपत सिगरेट और गुटखे से जारी है अंग्रेजों की बनाई आईटीसी कंपनी अपनी सिगरेट बेचकर मुनाफा कमा रही है ।  तेंदूपत्ता मजदूरों को बोनस बांटने का शिगूफा छेड़कर पूर्व मुख्यमंत्री अर्जुन सिंह और उसके बाद उनके अनुचरों ने सरकारों में शामिल होकर बीड़ी मजदूरों के साथ जो छल किया उसके पटाक्षेप का समय अब नजदीक आ गया है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने सत्ता में आते ही जीरो बैलैंस वाले  बैंक खाते खुलवाकर गरीब श्रमिकों को पहली बार बैंकों की चौखट तक पहुंचाया था। अब श्रमिकों के पंजीयन के बाद पीएफ खाते खोलकर मजदूरों का भविष्य सुरक्षित बनाने का प्रयास जारी है। राष्ट्रीय प्रतिदर्श सर्वेक्षण कार्यालय (एनएसएसओ) के आवधिक श्रम बल सर्वेक्षण (पीएलएफएस) के मुताबिक देश में रोजगार की संख्या बढ़ी है,ऐसे में मध्यप्रदेश की डाक्टर मोहन यादव सरकार ने सागर में इन्वेस्टर्स समिट का आयोजन करके बीड़ी उद्योग को प्रबंधित करने का जो मन बनाया है वह तारीफ के काबिल लगता है।

             तमाम प्रयासों के बावजूद लोगों में धूम्रपान की लत बरकार है । भारत के साथ पाकिस्तान, श्रीलंका,नेपाल, म्यांमार, जैसे कई पडौसी देश भी लोगों की धूम्रपान की जरूरतों को पूरी करने के लिए अपना बाजार खोले बैठे हैं । ऐसे में बीड़ी हमेशा से सिगरेट की राह में अडंगा बनी हुई है । मध्यप्रदेश इस मायने में सौभाग्यशाली है  कि इसके जंगलों में तेंदूपत्ता बहुतायत से पाया जाता है। कथित सहकारीकरण के पहले राज्य के जंगलों से लगभग अस्सी लाख मानक बोरा तेंदूपत्ता तोड़ा जाता था। जब से लघुवनोपज संघ ने ये काम संभाला तबसे तेंदूपत्ते के संग्रहण में लगातार गिरवट आती रही है । आज संघ का संग्रहण लक्ष्य ही  16 लाख मानक बोरा बचा है । जंगलों का रखरखाव घटने से तेंदूपत्ते की गुणवत्ता भी धराशायी  गई है। ये सारा षड़यंत्र कथित तौर पर आईटीसी कंपनी की छोटी सिगरेट को लाभ पहुंचाने की मंशा से रचा गया था।

         स्वर्गीय अर्जुन सिंह जब खुद को भावी प्रधानमंत्री के रूप में प्रोजेक्ट कर रहे थे तब उन्होंने बहुराष्ट्रीय कंपनियों की लुटियन गेंग को खुश करने के लिए छोटी सिगरेट का मार्ग प्रशस्त किया था।कांग्रेस के ही उनके करीबी बताते हैं कि कंपनी ने उन्हें अपना पार्टनर बना लिया था।ऐसे में राज्य को अपना कारोबार गंवाने की मंहगी कीमत चुकानी पड़ी। उनके बाद आए तमाम मुख्यमंत्रियों ने इस बर्रों के छत्ते में हाथ नहीं डाला। दिग्विजय सिंह जैसे पुतला पूजने वाले शासक हों या फिर शिवराज सिंह जैसी लंबी पारी खेलने वाले मुख्यमंत्री सभी साहब की लाबी का हाथ पकड़कर चलते रहे। अर्जुन सिंह से उपकृत स्वर्गीय सुंदरलाल पटवा हों या उनकी भजन मंडली के बाबूलाल गौर, कैलाश नारायण सारंग सभी ने सिगरेट की राह में अड़ंगा न लगाने की परिपाटी जारी रखी।बाद में तो विश्वास सारंग पर लघु वनोपज संघ में खुद को श्रमिक के तौर पर पंजीकृत करवाने का आरोप भी लगा।  शिवराज सिंह चौहान और उनके मंत्रिमंडलीय सहयोगियों की तो क्या बिसात थी कि वे कोई स्वतंत्र फैसला ले सकते। उनके मंत्रिमंडल में  शामिल रहे पंडित गोपाल भार्गव ने दिग्विजय सिंह सरकार के सामने खूब उछलकूद मचाई और बीड़ी कारोबार को व्यवस्थित करने की नौटंकी भी की। दिग्विजय सिंह ने उन्हें बीड़ी कारोबार के अध्ययन के लिए कई राज्यों की सैर भी कराई इसके बाद वे भी सिगरेट लाबी की गोदी में जाकर बैठ गए। सत्ता में आने के बाद उन्होंने अपना मुंह बंद रखा। अब जबकि रोजगार के साधन बढ़ाने की मुहिम देश भर में चलाई जा रही है तब वे आगे आकर बीड़ी उद्योग की पुरानी सूरत लौटाने की आवाज उठाने लगे हैं।

            जब अर्जुनसिंह जी इस कारोबार को लपेटना चाह रहे थे  तब उनके वामपंथी सहयोगियों और मजदूर नेताओं ने खूब शोरगुल मचाया कि बीड़ी मजदूरों का शोषण किया जा रहा है। उन्हें ज्यादा मजदूरी मिलनी चाहिए। इस शोरगुल में उन्होंने बीड़ी मजदूरों की न्यूनतम मजदूरी भी बढ़ा दी और तेंदूपत्ते के राष्ट्रीयकरण की आड़ में लघु वनोपज संघ के माध्यम से तेंदूपत्ते का कारोबार भी छीन लिया। कहा गया कि इस तेंदूपत्ते को बेचकर राज्य की आय बढ़ाई जाएगी और पत्ता संग्राहकों को बोनस भी बांटा जाएगा। तबसे लेकर हर साल बोनस बांटने की नौटंकी की जाती रही है। जब पत्ता एक्सपोर्ट होने लगा तो जिस बीड़ी मजदूर को साल भर रोजगार मिलता था वो छिन गया। मजदूरी बढ़ने से बीड़ी कारोबार की कमर टूट गई और यह धंधा पश्चिम बंगाल पहुंच गया।

           बीड़ी सेठ तो मध्यप्रदेश कांग्रेस कमेटी के कोषाध्यक्ष भी हुआ करते थे लेकिन अर्जुन सिंह के सामने उनकी एक न चली। बीड़ी श्रमिकों के नेताओं ने शोषण और अत्याचारों की ऐसी कहानियां गढ़ीं और सुनाईं कि बीड़ी कारोबारियों को खलनायक बना दिया गया। जिन परिवारों ने अपनी पीढ़ियों की साधना के बल पर गांव गांव में अपनी शाखाएं खोलीं और सट्टेदार स्थापित करके बीड़ी बनवाने व उसे एक्सपोर्ट करने का कारोबार विकसित किया वह शनैःशनैः धराशायी हो गया। बेशक बीड़ी कारोबारियों के कई सट्टेदार शोषण करके बीड़ी छांट देते थे और इस छंटी हुई बीड़ी की मजदूरी काट लेते थे। इस बीड़ी को बाद में नकली लेवल लगाकर बाजार में पिछले दरवाजे से बेच दिया जाता था। शोषण के कई तरीके विकसित किए गए थे लेकिन उन्हें पूरी शह सरकारी तंत्र की थी। रिश्वत लेकर सरकारी अमला मजदूरों के शोषण की राह प्रशस्त करता रहा और मुनाफा कूटता रहा। निश्चित तौर पर शोषण रोकना सरकार की जवाबदारी थी। तब आनलाईन खातों की व्यवस्था भी नहीं थी। मजदूरी नकद दी जाती थी। ऐसे में मजदूरों खासतौर पर महिलाओं का शोषण भी आम था। इन्हें रोकने की सख्ती करने के बजाए फैक्टरी की सिगरेट बाजार में उतारकर पूरा कारोबार धराशायी कर दिया गया।

            आज जब सभी धंधों के कार्पोरेटीकरण से निजीकरण की सीमाओं और सरकारीकरण की धूर्तताओं से अलग हटकर कारोबार को व्यवस्थित करने की सुविधा आ गई है। मजदूरी को व्यवस्थित करने की आनलाईन सुविधा आ गई है तब बीड़ी कारोबार पर नए संदर्भों में विचार किया जाना अनिवार्य हो गया है। सरकार जब एक क्लिक से किसान सम्मान निधि, लाड़ली बहना योजना जैसी बहुउद्देश्यीय योजनाएं सफलता पूर्वक चला रहीं हैं तब श्रमिकों को उनके खातों के साथ देश के पूंजी निर्माण में पार्टनर बनाना सरल हो गया है। बीड़ी कारोबार हो या असंगठित क्षेत्र का खेतीहर मजदूर सभी को आनलाईन प्लेटफार्म पर जोड़ना जरूरी है। मध्यप्रदेश से जो बीड़ी कारोबार पश्चिम बंगाल, या आंध्रप्रदेश शिफ्ट हो चुका  है उसे एक बार फिर राज्य में स्थापित करना चुनौतीपूर्ण कार्य  हो गया है।कथित सहकारीकरण का मॉडल फेल घोषित होने के बाद तो अब तय हो गया है कि बीडी़ का धंधे को कुचलकर राजनेताओं ने मजदूरों की रीढ़ तोड़ने का षडयंत्र किया था। बीड़ी कारोबारी परिवार से आए सागर के विधायक शैलैन्द्र जैन कहते हैं कि लंबी उपेक्षा के बाद तमाम बीड़ी कारोबारियों ने दूसरे धंधे शुरु कर दिए हैं और बीड़ी का कारोबार बंद कर दिया है ऐसे में इस कारोबार की पुरानी सूरत कैसै लौटाई जा सकती है। मुख्यमंत्री मोहन यादव ने सत्ता संभालते ही मिल श्रमिकों के कल्याण के लिए जो ठोस फैसले लिए थे उन्हें देखते हुए उम्मीद की जानी चाहिए कि खासतौर पर बुंदेलखंड के बीड़ी श्रमिकों के हित में भी वे बगैर किसी दबाव के फैसले ले सकेंगे। सागर में आयोजित इन्वेस्टर समिट में कम से कम यह एक ठोस फैसला लिए जाने की तो उम्मीद की ही जा सकती है।

  • दुनिया के दवा उद्योग में छलांग लगाने को तैयार है प्रदेश

    दुनिया के दवा उद्योग में छलांग लगाने को तैयार है प्रदेश

    भोपाल, 25 सितंबर (प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)। मध्यप्रदेश के फार्मा सेक्टर के युवाओं ने गुणवत्ता युक्त दवाओं के निर्माण में नए कीर्तिमान स्थापित करके प्रदेश का नाम रोशन किया है। राज्य में बनाई जा रहीं कई जीवन रक्षक दवाएं वैश्विक बाजारों में साख अर्जित कर रहीं हैं। प्रदेश सरकार ने फार्मा सेक्टर को मजबूती देने के लिए जो उपाय किए हैं उनके नतीजे मिलने शुरु हो गए हैं। जल्दी ही प्रदेश के फार्मेसिस्ट अपनी रचनाधर्मिता से राज्य को औषधि निर्माण,विदेशी मुद्रा अर्जित करने और रोजगार मुहैया कराने में बड़ी भूमिका निभाने जा रहे हैं। विश्व फार्मासिस्ट दिवस के अवसर पर एक विशेष मुलाकात में काऊंसिल के अध्यक्ष संजय जैन ने इस क्षेत्र की कई बारीकियों की जानकारी दी।


    काउंसिल के अध्यक्ष संजय कुमार जैन ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि आज के समय में फार्मासिस्ट का औषधि निर्माण हॉस्पिटल मेडिकल स्टोर शोध कार्य एवं कई विधाओं में महत्वपूर्ण योगदान है। काउंसिल अपने मापदंडों के अनुरूप फार्मेसी के क्षेत्र में कार्य कर रही है और भविष्य में भी कई योजनाएं बनाई जा रही हैं।इन्हें जल्दी लागू किया जाएगा।


    काउंसिल की सचिब एवं रजिस्ट्रार सुश्री दिव्या पटेल ने कहा कि काउंसिल के माध्यम से फार्मेसी के छात्रों को कम समय में फार्मेसी के रजिस्ट्रेशन प्रदान करने का प्रयास किए जा रहे हैं। काउंसिल के अध्यक्ष एवं सचिव ने विश्व फार्मेसी दिवस पर सभी को अपनी शुभकामनाएं प्रकट की।


    कार्यक्रम का संचालन एवं आभार काउंसिल के ही गोपाल यादव ने किया । उन्होंने बताया कि आए हुए आवेदनों पर सक्रियता से फैसले लिए जा रहे हैं।

  • सस्ती जेनरिक दवाएं अब हर जिले में उपलब्ध

    सस्ती जेनरिक दवाएं अब हर जिले में उपलब्ध

    भोपाल, 17 सितंबर(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)।देश के यशस्वी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्म दिवस पर मध्य प्रदेश में प्रधानमंत्री जन औषधि परियोजना के तहत 50 जिलों के जिला अस्पतालों में रेड क्रॉस सोसाइटी के माध्यम से मेडिकल स्टोर का शुभारंभ मध्य प्रदेश के राज्यपाल माननीय मंगू भाई पटेल एवं प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव के कर कमलो से संपन्न हुआ
    कार्यक्रम मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में आयोजित किया गया।

    इस अवसर पर मध्य प्रदेश के उपमुख्यमंत्री माननीय राजेंद्र शुक्ल ,नगरीय प्रशासन मंत्री कैलाश विजय वर्गीय,श्रीमती कृष्णा गौर, विश्वास सारंग,विजय शाह, प्रदेश भाजपा अध्यक्ष सांसद बी डी शर्मा भी अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। कार्यक्रम में मध्य प्रदेश शासन के मंत्री गण , सांसद , विधायक गण मध्य प्रदेश शासन के कई वरिष्ठ अधिकारी भी सम्मिलित हुए।मध्यप्रदेश फार्मेसी काऊंसिल के अध्यक्ष संजय जैन ने इस अवसर पर भोपाल में जनऔषधि केन्द्र पहुंचकर व्यवस्थाओं का जायजा लिया।

    संजय जैनःमध्यप्रदेश राज्य फार्मेसी काऊंसिल, जनोपयोगी दवाओं के लिए फार्मासिस्टों का मार्गदर्शन कर रही है।


    मध्य प्रदेश शासन की ओर से स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण प्रमुख सचिव संदीप यादव भी कार्यक्रम में उपस्थित थे। प्रधानमंत्री जन औषधि परियोजना के प्रदेश संयोजक संजय जैन ने बताया कि देश में मध्य प्रदेश एक ऐसा राज्य बन गया है जहां हर जिला अस्पताल में प्रधानमंत्री जन औषधि परियोजना का मेडिकल स्टोर उपलब्ध है। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश स्टेट फार्मेसी काऊंसिल ने सभी जन औषधि केन्द्रों पर प्रशिक्षित फार्मासिस्ट की सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए काऊंसिल की पंजीयन प्रणाली में विशेष सुविधा का प्रावधान किया है। आम जनता को सस्ती दवाएं आसानी से उपलब्ध हो सकें इसके लिए काऊंसिल की तरफ से मार्गदर्शन उपलब्ध कराया जा रहा है।नए फार्मासिस्टों को उन आवश्यक दवाओं की सूची उपलब्ध कराई जा रही है जिनके माध्यम से जन औषधि केन्द्रों के माध्यम से जनता को सस्ती दवाएं दिलाकर राहत दिलाई जा सकेगी। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने देश को दवाओं की कालाबाजारी और मंहगी दवाओं के मकड़जाल से मुक्त कराने के लिए प्रधानमंत्री जन औषधि केन्द्र परियोजना शुरु की थी जिसके संकट में फंसे आम नागरिकों की आंखों में धूल झोंकने वाले दवा माफिया को नियंत्रण में करना सरल हो गया है।


    अनुसूचित जाति कल्याण मंत्री श्री नागरसिंह चौहान ने आज अलीराजपुर से स्वच्छता ही सेवा अभियान की शुरुआत की। इस अवसर पर उन्होंने अलीराजपुर में जन औषधि केन्द्र का शुभारंभ भी किया।
    कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मंत्री श्री चौहान ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के जन्मदिवस के अवसर पर राज्यपाल मंगुभाई पटेल एवं मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव द्वारा जिले को जन औषधि केन्द्र का वर्चुअल शुभारंभ कर जिले को सौगात दी है। उन्होंने कहा कि औषधि केन्द्र के माध्यम से आम नागरिकों को 2000 हजार से अधिक उच्च गुणवत्ता वाली दवाइयां प्राप्त होगी और 300 से अधिक सर्जिकल उपकरण भी उपलब्ध होंगे जो गंभीर बीमारियों के उपचार में उपयोगी होंगे, जिनकी कीमत बाजार मूल्य से 50 से 90 प्रतिशत तक सस्ती होगी।


    मंत्री श्री चौहान ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री मोदी की अनुपम सोच के कारण आज हर जरूरतमंद को कम कीमतों में दवा उपलब्ध होगी। निश्चित ही आदिवासी अंचलों के साथ- साथ शहरी क्षेत्रों के लोगों को भी जन औषधि केंद्र का लाभ मिलेगा ।
    इस अवसर पर सांसद श्रीमती अनीता नागर सिंह चौहान, कलेक्टर डॉ. अभय अरविंद बेडेकर, मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री प्रखर सिंह, मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. देवेन्द्र सुनहरे सहित जनप्रतिनिधिगण उपस्थित रहे।

  • हर जिला चिकित्सालय में खुलेगा  भारतीय जनऔषधि केन्द्र

    हर जिला चिकित्सालय में खुलेगा भारतीय जनऔषधि केन्द्र

    भोपाल,16 सितंबर(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)। राज्यपाल मंगुभाई पटेल और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव 17 सितम्बर से शुरू हो रहे स्वच्छता ही सेवा पखवाड़ा 2024 के पहले दिन सभी जिला चिकित्सालयों में प्रधानमंत्री भारतीय जन औषधि केंद्रों के संचालन का शुभारंभ करेंगे। यह कदम प्रदेश के नागरिकों को सस्ती और गुणवत्तापूर्ण जेनेरिक दवाइयां उपलब्ध कराने का महत्वपूर्ण प्रयास है। चिकित्सालयों में जन औषधि केंद्र का शुभारम्भ, स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच को बेहतर बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है।

    राजधानी भोपाल के कुशाभाऊ ठाकरे अंतर्राष्ट्रीय कन्वेन्शन सेंटर में सुबह 10 बजे आयोजित होने वाले समारोह में उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल, नगरीय विकास एवं आवास कैलाश विजयवर्गीय, पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री प्रहलाद पटेल, लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा राज्य मंत्री नरेन्द्र शिवाजी पटेल, नगरीय विकास एवं आवास राज्य मंत्री श्रीमती प्रतिमा बागरी, पंचायत एवं ग्रामीण विकास राज्य मंत्री श्रीमती राधा सिंह विशेष रूप से उपस्थित रहेंगे।

    प्रधानमंत्री भारतीय जन औषधि केंद्र परियोजना का शुभारंभ वर्ष 2008 में सस्ती और गुणवत्तापूर्ण जेनेरिक दवाइयां उपलब्ध कराने के उद्देश्य से किया गया था। वर्ष 2015 के बाद से इस योजना में और गति आयी। इसका उद्देश्य पूरे देश में सस्ती दवाइयों की पहुंच को व्यापक बनाना था। वर्तमान में इस परियोजना में देश में प्रधानमंत्री भारतीय जन औषधि केंद्र खोले जा रहे हैं, जिससे ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में लोग सस्ती जेनेरिक दवाओं का लाभ उठा सकें।

    वर्तमान में मध्य प्रदेश में 500 से अधिक जन औषधि केंद्र कार्यरत हैं, जो प्रदेश के विभिन्न जिलों में संचालित हैं। ये केंद्र शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों में स्थापित किए गए हैं, जिससे सभी नागरिकों को सस्ती दवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित हो सके। इन केंद्रों के माध्यम से प्रतिदिन हजारों लोग सस्ती और गुणवत्तापूर्ण दवाइयां खरीद रहे हैं। उनके मासिक चिकित्सा खर्चों में बड़ी बचत हो रही है। अब सभी ज़िला चिकित्सालयों में भी प्रधानमंत्री भारतीय जन औषधि केंद्र खोले जा रहे हैं।

    सभी को सस्ती दरों पर गुणवत्तापूर्ण जेनेरिक दवाइयां उपलब्ध कराना मुख्य उद्देश्य है। मरीजों को ब्रांडेड दवाओं की तुलना में 50% से 90% तक कम दाम पर दवाइयां उपलब्ध होंगी।

    ग्रामीण और शहरी परिवारों को सस्ती दवाइयां मिलेंगी। मासिक चिकित्सा खर्चों में बड़ी बचत होगी। आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए विशेष रूप से फायदेमंद होगी।

    सस्ती और सुलभ दवाओं के माध्यम से लोग अपने उपचार को निरंतर जारी रख सकेंगे, जिससे स्वास्थ्य परिणामों में सुधार होगा। विशेष रूप से मधुमेह, उच्च रक्तचाप और हृदय रोग जैसी पुरानी बीमारियों के प्रबंधन में यह केंद्र महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

    प्रधानमंत्री जन औषधि केंद्र के माध्यम से जेनेरिक दवाओं की गुणवत्ता और प्रभावशीलता को लेकर जागरूकता बढ़ेगी, जिससे लोग ब्रांडेड दवाओं पर निर्भरता कम करेंगे और सस्ती जेनेरिक दवाओं को अपनाएंगे।

    स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर भी उत्पन्न होंगे। प्रत्येक केंद्र के चालन के लिए फार्मासिस्ट और अन्य कर्मचारी आवश्यक होंगे, जिससे राज्य में नए रोजगार के अवसर पैदा होंगे।

    प्रधानमंत्री जन औषधि केंद्र राज्य में सस्ती और सुलभ स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता किए जाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। यह केंद्र प्रदेश के नागरिकों को सस्ती और गुणवत्तापूर्ण दवाइयां उपलब्ध कराकर उनकी चिकित्सा आवश्यकताओं को पूरा करने में अहम भूमिका निभाएगा।

    स्वच्छता ही सेवा पखवाड़ा 2024 के पहले दिन इसी स्थान पर प्रात: 10:30 बजे प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) में देश के 4 लाख आवासों का गृह प्रवेश कार्यक्रम होगा। इनमें मध्यप्रदेश के 51 हजार आवासों में गृह प्रवेश होगा। प्रधानमंत्री आवास योजना शहरी 2-0 का शुभारंभ तथा पीएम स्वनिधि अंतर्गत पीआरएआईएसई अवार्ड वितरित किये जायेंगे। इस कार्यक्रम में नगरीय विकास एवं आवास श्री कैलाश विजयवर्गीय मुख्य अतिथि होंगे। नगरीय विकास एवं आवास राज्य मंत्री श्रीमती प्रतिमा बागरी अध्यक्षता करेंगी। भोपाल नगर पालिग निगम की महापौर श्रीमती मालती राय, नगर पालिग निगम भोपाल के परिषद अध्यक्ष श्री किशन सूर्यवंशी विशेष रूप से उपस्थित रहेंगे।

  • इक्विटास बैंक के मुनाफे में हिस्सेदारी से ग्राहकों में संतोष

    इक्विटास बैंक के मुनाफे में हिस्सेदारी से ग्राहकों में संतोष


    भोपाल,05 सितंबर(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर).इक्विटास बैंक ने आधुनिक बैंकिंग में जो सुधार लागू किए हैं वे देश के संपदा निर्माताओं को बहुत पसंद आ रहे हैं। बैंक की वर्षगांठ पर पहुंचे नागरिकों उद्यमियों और श्रेष्ठी वर्ग ने इक्विटास बैंक को जन जन का बैंक बनने की शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि बैंक के ऊर्जावान कर्मचारियों ने निवेशकों की जरूरतों पर खरा उतरने के लिए जो रुचि दिखाई है उससे आने वाले समय में ये बैंक प्रदेश भर में ग्राहकों की पहली पसंद बन जाएगा।


    इक्विटास स्माल फायनेंस बैंक की स्थापना के आठ साल पूरे होने पर राजधानी की एमपीनगर शाखा में प्रबंधन ने जीवंत आयोजन किया था जो लगभग दिन भर चला। बैंक के क्षेत्रीय प्रबंधक अमित देशपांडे ने सभी ग्राहकों,उद्यमियों और निवेशकों को बैंक की प्रगति के विभिन्न आयामों की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि हम अपनी आनलाईन सेवाओं के माधयम से देश की संपदा बढ़ाने में उल्लेखनीय योगदान दे रहे हैं। देश के अठारह राज्यों और केन्द्र शासित प्रदेशों में हमारी 964 शाखाएं हैं जिनमें 57 लाख 22 हजार कर्मचारी कार्य कर रहे हैं।


    भोपाल शाखा के प्रबंधक लोकेश जैन ने बताया कि हम अपनी ग्राहक हितैषी बैंकिंग के माध्यम से आम नागरिकों का दिल जीत रहे हैं। ग्राहकों की छोटी छोटी सुविधाओं को हम तत्काल समाधान देकर उनका उचित मार्गदर्शन भी करते हैं। ग्राहकों के बताए अनुसार हम अपनी सेवाओं में लगातार सुधार और विस्तार भी कर रहे हैं। हमारा प्रबंधन हर निवेश की सुरक्षा पर विशेष ध्यान रखता है जिसकी वजह से हम देश के बैंकिंग मानकों पर लगातार खरे उतर रहे हैं।

    बैंक के ऊर्जावान कार्यकर्ताओं की वजह से ग्राहक सेवा सफल हो रही है.


    राजधानी के गणमान्य नागरिकों और श्रेष्ठि वर्ग ने बैंक पहुंचकर वर्षगांठ के आयोजन में हिस्सा लिया। दीप प्रज्जवलन के बाद केक काटा गया और सभी ने इक्विटास बैंक की सफलताओं की कहानियां सुनाईं। श्री मनोहर लाल टोंग्या ने कहा कि बैंक के कर्मचारियों के अच्छे व्यवहार और बैंक की सरल योजनाओं की वजह से हमें ज्यादा मुनाफा हो रहा है। बैंक में अनावश्यक नियमों का बोझ नहीं है। वरिष्ठ जनों को तो घर पहुंच सेवाएं उपलब्ध कराई जाती हैं। ज्यादातर काम बैंक के एप से निपट जाते हैं इसलिए हमें बार बार शाखा जाने की जरूरत नहीं पड़ती है।


    कार्यक्रम में पहुंचे श्री महावीर मेडीकल कालेज के प्रशासक आईएएस राजेश जैन ने कहा कि बैंक के नीति निर्धारकों ने उद्यमियों की सुविधा के लिए जो आधुनिक बैंकिंग दी है उससे संपदा निर्माण में मदद मिल रही है। श्री देवेन्द्र जैन ने कहा कि बैंक अपने ग्राहकों को मुनाफे का हिस्सेदार बना रहा है और इसके साथ साथ समाज कल्याण की भी योजनाओं में अपनी भागीदारी सुनिश्चित कर रहा है। आयोजन में पहुंचे श्री कमलेश सेन, श्रीमती प्रीति टोंग्या, श्री डी.आर.सोनी श्री सुरेश चंद्र प्रमोद सिन्हा, श्री देवेन्द्र जैन, श्री महेश सिंघल, सुरेश जैन आईएएस, श्री त्रिलोक जाजू, श्री प्रवीण कुमार सक्सेना, सीए मयंक अग्रवाल के अलावा बड़ी तादाद में गणमान्य नागरिकों ने बैंक पहुंचकर अपना स्नेह प्रदर्शित किया।


    क्षेत्रीय प्रबंधक अमित देशपांडे ने अपने स्टाफ के साथ ग्राहकों के प्रति आभार प्रकट किया और उन्हें कहा कि आपके बताए सुझावों पर अमल करके बैंक ग्राहकों को अपने मुनाफे में भागीदार बनाता रहेगा। इस अवसर पर सागर मल्टिसिटी हास्पिटल के सौजन्य से हेल्थ चैकअप शिविर भी आयोजित किया गया। जिसमें नागरिकों के रक्तचाप और डायबिटीज की मुफ्त जांच की गई।