Category: अपराध

  • कांग्रेस की हांडी चढ़े भी तो कैसे

    कांग्रेस की हांडी चढ़े भी तो कैसे


    भारत की जनता अब कांग्रेस के नेताओं और प्रवक्ताओं की बदजुबानी झेलने तैयार नहीं है। कांग्रेस कुमार राहुल गांधी ने जिस अंदाज में ऊल जलूल बयानबाजी शुरु की उसी रौ को उनके कार्यकर्ताओं ने भी अपना लिया। शिव खेड़ा के बयान के बाद असम पुलिस ने जो छापामारी की उससे चिचियाते कांग्रेस नेताओं ने इसे राजनैतिक विद्वेष से की गई कार्रवाई बताना शुरु कर दिया था। इसी को लेकर शिव खेड़ा सुप्रीम कोर्ट भी दौड़े पर वहां उन्हें निराशा हाथ लगी।


    इस मामले में जब विषय सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा, तो अदालत ने प्रथम दृष्टया पुलिस की कार्रवाई को गलत नहीं माना। इसका सीधा अर्थ यह नहीं है कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को सीमित कर दिया गया है, बल्कि यह कि संविधान के तहत दी गई स्वतंत्रता पूर्णतः निरंकुश नहीं है। अनुच्छेद 19(1)(a) के साथ-साथ अनुच्छेद 19(2) भी लागू होते हैं, जो राज्य को सार्वजनिक व्यवस्था, शिष्टता और राष्ट्रीय एकता के हित में सीमाएं तय करने का अधिकार देते हैं।


    यहां मध्यप्रदेश में कांग्रेस के प्रवक्ता के.के.मिश्रा ने भी राजस्व विभाग के प्रमुख सचिव के फैसले को निशाना बनाकर पत्रकारों को उकसाने का प्रयास किया। सरकार ने तो इस विषय पर असम की तरह कोई प्रतिक्रिया नहीं दी लेकिन पत्रकारों ने इस दांव को रद्दी की टोकरी में फेंक दिया। इसकी वजह साफ थी कि मंत्रालय के गलियारों में घूमने वाले पत्रकार आला अफसर की सख्त और नियमों का पालन करने वाली शैली से पहले ही अवगत थे। उन्हें मालूम था कि राजस्व जैसे जिम्मेदार महकमे को संभालते हुए लिए वे प्रदेश हित को हमेशा सर्वोपरि रखते रहे हैं। कोई लाग लपेट, प्रलोभन या चमचागिरी उन्हें प्रभावित नहीं करती है।


    यही वजह है कि लगभग दो हफ्ते पहले जब कांग्रेस प्रवक्ता के.के.मिश्रा ने सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा कि पीएस महोदय ने लावारिस लाशों के अंतिम संस्कार के नाम पर एनजीओ चलाने वाले पत्रकार को धक्के मारकर अपने कमरे से बाहर निकाल दिया। इस पर कुछेक पत्रकारों को लगा कि ये तो पत्रकारों का अपमान हुआ है। के.के.मिश्रा की कांग्रेस से सहानुभूति रखने वाले कतिपय पत्रकारों ने भी सुर में सुर मिलाकर कहा कि हम ईंट से ईंट बजा देंगे।उस वक्त कांग्रेस के सेनानियों को लगा कि शायद अब पत्रकार भड़क उठेंगे और पीएस महोदय के विरुद्ध हमला बोल देंगे। आज लगभग दो हफ्ते बीत जाने के बाद भी कहीं कोई सुगबुगाहट सुनाई नहीं दी है। सरकार ने तो इस घटना को लगभग अनसुना कर दिया। प्रशासनिक तबके ने इसे खिसियानी बिल्ली खंभा नोचे जानकर मुंह फेर लिया। पत्रकारों ने आपस में पूछताछ की और उन्हीं पत्रकार महोदय को दर किनार कर दिया।


    पत्रकारों ने जब तहकीकात की तो पता चला कि एनजीओ चलाने वालों ने जेल पहाड़ी की बेशकीमती जमीन पर अतिक्रमण करके बड़ा भवन बना लिया है। इस पूरी तरह अवैध निर्माण को दिखाकर कई बैंकों ,सांसद,नेताओं और अफसरों से अच्छा खासा चंदा वसूला जाता है। लगभग चार एंबुलेंस जुटा ली हैं जो समाजसेवा का वजन बढ़ाने में इस्तेमाल होती हैं। हालांकि उनका इस्तेमाल लगभग न के बराबर होता है। इसकी वजह है कि नगर निगम भोपाल ने अपनी निःशुल्क शव वाहन सेवा चला रखी है। कई अन्य धार्मिक संस्थाएं भी शव वाहन उपलब्ध कराती हैं। फोन लगाकर बुलाई जाने वाली एंबुलेंस सेवा भी उपलब्ध है । राजधानी में आपातकालीन सेवाएं इतनी ज्यादा हो गईं हैं कि इन गाड़ियों की जरूरत ही नहीं पड़ती है।

    शवों की चीरफाड़ करने वाले कंपाऊंडर से भेलकर्मी बनकर रिटायर हुए इन समाजसेवी महोदय की वरिष्ठता को देखकर और अंतिम संस्कारों की कहानियों को सुनकर जनसंपर्क महकमा भी उनकी सेवा कर देता है। उन्हें श्रद्धानिधि के रूप में पेंशन भी मिलती है और एनजीओ के विशेषांक के नाम पर विज्ञापन भी मिलता है। कई अन्य अखबारों और संस्थाओं के नाम पर भी वे चंदा और विज्ञापन वसूल लेते हैं। उनके बेटे नामी बिल्डर हैं और अफसरों नेताओं के साथ मिलकर बेशकीमती जमीनों की खरीद फरोख्त भी करते रहते हैं। कुछ पत्रकारों को खुश करके वे अपनी समाजसेवा की शान में वाहवाही भी लिखवा लेते हैं।


    बरसों से चलती आ रही इस व्यवस्था की मजबूती देखकर उन्होंने जिला प्रशासन से जमीन आबंटन की फाईल भी चलवा ली। कलेक्टर और संभागायुक्त कार्यालय से भी फाईल चली जो मंत्रालय पहुंच गई। फाईल जब प्रमुख सचिव महोदय के कमरे में पहुंची तो पीछे से आदरणीय भी पहुंच गए। उन्होंने नाराजगी भरे लहजे में कहा कि इतना लंबा समय हो गया है और मेरी जमीन का आबंटन नहीं हो पाया है। इस पर आला अफसर ने ये कहते हुए फाईल लौटा दी कि वह करोड़ों रुपये मूल्य वाली बेशकीमती जमीन किसी अन्य शासकीय सेवा के लिए आरक्षित है । समाज की गैर जिम्मेदारियों और आपराधिक वारदातों की वजह से कथित तौर पर लावारिस लाशें मिलती हैं। हम इसे संस्थागत रूप देकर सामाजिक स्वीकृति नहीं दे सकते। ये आपराधिक षड़यंत्र है और इसका सख्ती से इलाज होना चाहिए। शासन इसके लिए मुफ्त में जमीन क्यों देगा।लाशों के अंतिम संस्कार के लिए कई प्रकल्प मौजूद हैं। सरकार भी इस पर खासी राशि खर्च करती है ।


    साहब का तमतमाया रुख देखकर एनजीओ संचालक के होश उड़ गए। तब उन्होंने पैंतरा बदला कि आप मेरी उम्र का तक लिहाज नहीं कर रहे हैं। इस पर अफसर महोदय ने कहा कि आप आदर से बैठिए हम अभी चाय भी पिलाते हैं। वहां से तो चाय पीकर वे वापस आ गए पर अपनी नाराजगी उन्होंने कई जगह साझा की। उन्होंने कहना शुरु कर दिया कि अफसर महोदय ने तो उनकी फाईल फेंक दी और कहा कि लावारिस लाशों के लिए सरकार जमीन थोड़ी बांटती फिरेगी।
    इस घटना की गूंज उन सभी लोगों के बीच हुई जिनके प्रस्ताव शासन से रिजेक्ट होकर वापस लौट चुके हैं। उनमें से कुछ लोगों ने कांग्रेस के खेमें में जाकर ये कहानी सुनाई। सत्ता पक्ष में घुसपैठ जमाए बैठे भू माफिया ने भी इस कहानी में नमक मिर्च लगाकर हवा दी। नतीजा के.के.मिश्रा के बयान के रूप में सामने आया।


    मध्यप्रदेश के इतिहास में लंबे समय बाद ऐसा कार्यकाल आया है जब प्रशासनिक मशीनरी को खैराती प्रदेश की छवि से बाहर निकलकर आत्म निर्भर प्रदेश के रूप में खड़ा करने के लिए निर्देशित किया गया है। खुद मुख्यमंत्री डाक्टर मोहन यादव अपनी राजनीतिक जरूरतों के लिए अफसरों को टोकने और प्रभावित करने से बचते हैं। भाजपा के लंबे शासनकाल के बावजूद मध्यप्रदेश की आर्थिक स्थिति कई चुनौतियों से घिर गई है। उमा भारती की भाजपा तो पंच ज जैसे आत्मनिर्भर सिद्धांत को लेकर सत्ता में आई थी। ये विचार चित्रकूट ग्रामोदय विश्वविद्यालय की प्रयोगशाला से निकला हुआ था। उनके बाद आए बाबूलाल गौर हों या शिवराज सिंह चौहान दोनों ने विकास की चमक दमक को जमीन पर उतारने के लिए भरपूर कर्ज लिया। बीच में आई कांग्रेस की कमलनाथ सरकार इंस्पेक्टर राज वापस ले आई और उस दौरान प्रशासन इतना बेलगाम हो गया कि हर सरकारी पद मंहगी कीमतों में बिकने लगा।


    अब जबकि प्रदेश लगभग साढ़े चार लाख करोड़ के कर्ज में डूबा हुआ है तब सरकार और शासन सभी को अनियंत्रित अर्थव्यवस्था की आहट सुनाई देने लगी है। वैश्विक चुनौतियों ने इन हालात को और गंभीर बना दिया है। सरकारी कर्मचारियों के मन में भी संदेह के बादल इस तरह घुमड़ रहे हैं कि वे पूछते हैं कि आगे हम लोगों का वेतन भी मिल पाएगा या नहीं ।ऐसे हालात में एक आला अफसर की सख्ती को निशाना बनाकर कांग्रेस के नेतागण अपनी खोखली और गैर जिम्मेदार सोच को ही उजागर कर रहे हैं। कांग्रेस के नेतागण अपनी हताशा में कभी प्रेस पर गोदी मीडिया का लेबल चिपकाने का प्रयास करते हैं कभी पत्रकारिता की आड़ में पल रहे भू माफिया को आगे करके सरकार और शासन को बदनाम करने की कोशिशें करते हैं। अपनी असफलताओं के लंबे दौर के बाद भी कांग्रेस के नेतागण ये मानने राजी नहीं हैं कि काठ की हांडी बार बार नहीं चढ़ती।

  • पुलिस को ठेंगा बताते प्रीतम लोधी का इलाज कौन करेगा

    पुलिस को ठेंगा बताते प्रीतम लोधी का इलाज कौन करेगा

    भोपाल, 23 अप्रैल(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)। मध्यप्रदेश की राजनीति में हालिया घटनाक्रम ने एक बार फिर सत्ता, पुलिस और प्रशासन के रिश्तों पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े कर दिए हैं। शिवपुरी जिले की पिछोर सीट से विधायक प्रीतम लोधी से जुड़ा विवाद केवल एक व्यक्तिगत बयानबाजी या दुर्घटना का मामला नहीं रह गया है, बल्कि यह राज्य में राजनीतिक प्रभाव, प्रशासनिक स्वतंत्रता और कानून के राज की वास्तविक स्थिति को उजागर करने वाला प्रकरण बन चुका है।
    घटना की पृष्ठभूमि में एक सड़क हादसा है, जिसमें विधायक के पुत्र की थार गाड़ी से पांच लोग घायल हुए। इस मामले में पुलिस कार्रवाई शुरू हुई, लेकिन इसके तुरंत बाद जिस तरह विधायक ने खुले मंच से पुलिस अधिकारी को धमकी दी—यह घटना प्रशासनिक तंत्र की गरिमा पर सीधा प्रहार मानी गई।

    पुलिस की गरिमा पर प्रहार मानी गई प्रीतम लोधी और उनके बेटे की बदमिजाजी.


    इस प्रकरण का सबसे चिंताजनक पक्ष यह रहा कि एक जनप्रतिनिधि की ओर से न केवल पुलिस की कार्यवाही पर सवाल उठाए गए, बल्कि सार्वजनिक रूप से दबाव बनाने की कोशिश भी की गई। “घर को गोबर से भर देने” जैसी भाषा ने राजनीतिक संवाद की गिरती मर्यादा को उजागर किया।
    यह प्रश्न स्वाभाविक है कि क्या पुलिस वास्तव में दबाव में थी या यह केवल धारणा का संकट है। रिपोर्टों में यह सामने आया कि प्रारंभिक स्तर पर पुलिस द्वारा कार्रवाई में हिचकिचाहट की बात भी उठी, खासकर आरोपी के नाम दर्ज करने को लेकर। हालांकि बाद में एफआईआर दर्ज हुई, लेकिन शुरुआती प्रतिक्रिया ने यह संकेत जरूर दिया कि राजनीतिक प्रभाव का मनोवैज्ञानिक दबाव प्रशासन पर मौजूद रहता है।
    मध्यप्रदेश में पिछले कुछ समय में जनप्रतिनिधियों द्वारा अधिकारियों को धमकाने या अपमानित करने की कई घटनाएं सामने आई हैं। यह प्रवृत्ति बताती है कि समस्या केवल एक व्यक्ति या एक घटना तक सीमित नहीं है, बल्कि यह व्यापक राजनीतिक संस्कृति का हिस्सा बनती जा रही है।
    विवाद बढ़ने के बाद पार्टी ने विधायक को कारण बताओ नोटिस जारी किया और तीन दिन में जवाब मांगा। यह कदम संगठनात्मक अनुशासन का संकेत अवश्य देता है, लेकिन सवाल यह है कि क्या यह पर्याप्त है? राजनीतिक दलों द्वारा नोटिस जारी करना अक्सर “डैमेज कंट्रोल” के रूप में देखा जाता है। जब तक ऐसे मामलों में ठोस और उदाहरणात्मक कार्रवाई नहीं होती, तब तक यह धारणा बनी रहती है कि सत्ता पक्ष अपने नेताओं को वास्तविक दंड से बचाता है और केवल औपचारिक कार्रवाई करता है।

    प्रीतम लोधी के बेटे के घमंड का इलाज फिर कौन करेगा.


    इस मामले में एक महत्वपूर्ण पहलू यह भी रहा कि आईपीएस एसोसिएशन और कर्मचारी संगठनों ने खुलकर नाराजगी जताई और कार्रवाई की मांग की। आईपीएस एसोसिएशन के अध्यक्ष और एडीजी चंचल शेखर ने क्षोभ व्यक्त करते हुए प्रीतम लोधी के बयानों की निंदा की है । यह संकेत है कि प्रशासनिक ढांचे के भीतर भी इस प्रकार के राजनीतिक हस्तक्षेप को लेकर असंतोष गहराता जा रहा है। जब पुलिस बल का मनोबल प्रभावित होता है, तो उसका सीधा असर कानून-व्यवस्था पर पड़ता है। अधिकारी यदि स्वयं को असुरक्षित या दबाव में महसूस करते हैं, तो निष्पक्ष कार्रवाई कठिन हो जाती है।
    अक्सर ऐसी परिस्थितियों में “यूपी मॉडल” की चर्चा होती है, जिसका आशय सख्त और त्वरित पुलिस कार्रवाई से है। लेकिन यह समझना जरूरी है कि किसी भी राज्य में कानून का शासन केवल कठोरता से नहीं, बल्कि संस्थागत संतुलन से चलता है। यदि पुलिस को राजनीतिक हस्तक्षेप से मुक्त कर दिया जाए और उसे विधिक ढांचे के भीतर स्वतंत्रता दी जाए, तो अलग से किसी “मॉडल” की आवश्यकता नहीं पड़ती। समस्या मॉडल की नहीं, राजनीतिक इच्छाशक्ति की है।मध्यप्रदेश में इसी राजनीतिक दबाव से पुलिस को मुक्त करने के लिए कुछ बड़े शहरों में पुलिस कमिश्नर प्रणाली भी शुरु की गई थी। इसके बावजूद पुलिस का समूचा ढांचा सरकार के साथ केवल कदमताल करता नजर आ रहा है।
    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के सामने यह एक महत्वपूर्ण परीक्षा है। यदि सत्ता पक्ष के विधायक ही कानून की सीमाओं को चुनौती देते नजर आएं, तो सरकार की विश्वसनीयता पर प्रश्न उठना स्वाभाविक है। राजनीतिक नेतृत्व की जिम्मेदारी केवल प्रशासन चलाना नहीं, बल्कि अपने दल के जनप्रतिनिधियों के आचरण को नियंत्रित करना भी है। यदि यह नियंत्रण कमजोर पड़ता है, तो प्रशासनिक तंत्र को “अतिरिक्त सक्रियता” दिखानी पड़ती है—जो लोकतांत्रिक संतुलन के लिए हमेशा स्वस्थ संकेत नहीं होता।
    प्रीतम लोधी प्रकरण केवल एक विवाद नहीं, बल्कि एक संकेत है—उस दिशा का जिसमें राजनीति और प्रशासन के संबंध विकसित हो रहे हैं। यदि समय रहते इस प्रवृत्ति पर अंकुश नहीं लगाया गया, तो यह कानून के राज को कमजोर कर सकता है। इसलिए समाधान किसी एक कठोर कार्रवाई में नहीं, बल्कि तीन स्तरों पर है—राजनीतिक दलों की वास्तविक अनुशासनात्मक प्रतिबद्धता, पुलिस की संस्थागत स्वतंत्रता, और शासन की स्पष्ट जवाबदेही। अन्यथा, ऐसे विवाद आते रहेंगे, नोटिस जारी होते रहेंगे, और जनता के मन में यह सवाल बना रहेगा कि कानून वास्तव में किसके लिए है। फिलहाल तो सवाल यही है कि कांग्रेस के केपी सिंह जैसे कुख्यात नेता को किनारे करके उभरे प्रीतम सिंह लोधी और उनके बेटे के विरुद्ध पुलिस क्या कार्रवाई करती है। उनके आपराधिक मामलों की सूची बड़ी लंबी है लेकिन पुलिस के आला अफसरों की नेताओं से जुगलबंदी जनता को न्याय दिलाने के मार्ग में बाधक बनती नजर आ रही है।

  • एमपी में नशे के नेटवर्क पर बरपा पुलिस का कहर

    एमपी में नशे के नेटवर्क पर बरपा पुलिस का कहर


    डीजीपी कैलाश मकवाणा के निर्देश पर प्रदेशभर में नशे के विरुद्धप्रभावी कार्रवाई


    भोपाल 6 अप्रैल(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)। पुलिस महानिदेशक कैलाश मकवाणा ने 01 अप्रैल से प्रदेशभर में विशेष अभियान संचालित कर मादक पदार्थों की तस्करी पर प्रभावी नियंत्रण के लिए सख्त कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं। इसी क्रम में बीते पांच दिनों में विभिन्न जिलों की पुलिस द्वारा समन्वित कार्रवाई करते हुए लगभग 1 करोड़ 22 लाख रुपये से अधिक मूल्य के मादक पदार्थ जप्त किए गए हैं।
    जिले में मादक पदार्थों के विरुद्ध कार्रवाई को आर्थिक स्तर तक प्रभावी बनाते हुए पुलिस द्वारा बड़ी वैधानिक कार्यवाही की गई है। थाना कालूखेड़ा क्षेत्र में अवैध ड्रग्स फैक्ट्री संचालित करने वाले आरोपियों की पहचान कर उनके द्वारा अर्जित अवैध संपत्तियों का विस्तृत विश्लेषण किया गया। इसके पश्चात एनडीपीएस एक्ट के तहत प्रकरण दर्ज कर तस्कर और विदेशी मुद्रा हेरफेर करने वाले (संपत्ति की ज़ब्ती) अधिनियम,(The Smugglers and Foreign Exchange Manipulators (Forfeiture of Property) Act, 1976 ) SAFEMAके तहत लगभग 16 करोड़ 16 लाख रुपये मूल्य की संपत्ति फ्रीज करने के आदेश जारी किए गए। यह कार्रवाई न केवल तस्करों के आर्थिक तंत्र को कमजोर करने की दिशा में महत्वपूर्ण है, बल्कि प्रदेश में मादक पदार्थों के अवैध कारोबार के विरुद्ध कड़ा संदेश भी देती है।
    नीमच
    जिले में नशा विरोधी अभियान के तहत तीन अलग-अलग प्रकरणों में लगभग 62 लाख रुपये मूल्य की 500 ग्राम एमडीएमए, 2 किलो 140 ग्राम अफीम एवं 67 किलो 200 ग्राम डोडाचूराजप्त किया गया। इस दौरान चार अंतरराज्यीय तस्करों को गिरफ्तार किया गया। पुलिस चौकी नयागांव, थाना जीरन एवं थाना सिंगोली की संयुक्त कार्रवाई में वाहन चेकिंग एवं मुखबिर सूचना के आधार पर यह कार्यवाही की गई।
    आगर मालवा
    कोतवाली पुलिस द्वारा नाकाबंदी कर एक कार से 148 ग्राम एमडी ड्रग्स जब्‍त की गई, जिसकी वाहन एवं अन्य सामग्री सहित कीमत लगभग 25 लाख 30 हजार रुपये आंकी गई है। इस कार्रवाई में दो आरोपियों को गिरफ्तार किया गया हैं।
    शिवपुरी
    थाना करैरा पुलिस द्वारा 52 ग्राम स्मैक (कीमत लगभग 10 लाख 40 हजार रुपये) के साथ आरोपी को गिरफ्तार किया गया। इसके अतिरिक्त थाना अमोला पुलिस ने भी 15 ग्राम स्मैक (कीमत लगभग 3 लाख रुपये) जप्त कर आरोपी को गिरफ्तार किया है।
    उज्जैन
    भाटपचलाना थाना पुलिस ने 1किलो84 ग्राम गांजा (कीमत लगभग 68 हजार रुपये) के साथ आरोपी को गिरफ्तार किया गया। वहीं एक अन्य बड़ी कार्रवाई में एमडीएमए ड्रग्स बनाने वाले अंतरराज्यीय नेटवर्क का भंडाफोड़ कर भारी मात्रा में केमिकल और नगदी सहित 8 लाख 50हजार रूपए की संपत्ति जब्त की है।
    इंदौर
    क्राइम ब्रांच इंदौर ने कार्रवाई करते हुए एक महिला सहित 4 आरोपियों को गिरफ्तार कर उनके कब्जे से 24.08 ग्राम एमडी ड्रग्स, कार एवं मोबाइल सहित लगभग 5 लाख रुपये की संपत्ति जब्‍त की है।
    मंदसौर
    थाना शामगढ़ पुलिस ने 1 किलो 245 ग्राम अवैध अफीम (कीमत लगभग 2 लाख 49 हजार रुपये) के साथ 3 आरोपियों को गिरफ्तार किया है।
    गुना
    बजरंगगढ़ थाना क्षेत्र में कार्रवाई करते हुए 1लाख50 हजार रुपये के लगभग 17.294 किलोग्राम100 गांजे के पौधे जप्तकर आरोपी को गिरफ्तार किया।
    उज्जैन
    थाना बड़नगर पुलिस ने 36.58 ग्राम एमडी ड्रग्स (कीमत लगभग 1 लाख रुपये) के साथ एक आरोपी को गिरफ्तार किया गया। आरोपी ने मादक पदार्थ रतलाम से लाकर बेचने की बात स्वीकार की है।
    नर्मदापुरम
    थाना इटारसी पुलिस ने 1 लाख रुपयेका 6 किलो 76 ग्राम गांजा जप्त कर आरोपी को गिरफ्तार किया है।
    खरगोन
    सनावद पुलिस ने 13.41 ग्राम ब्राउन शुगर (कीमत लगभग 1.30 लाख रुपये), मोटरसाइकिल एवं मोबाइल फोन जप्त कर तीन तस्करों को गिरफ्तार किया गया।
    छिंदवाड़ा
    थाना कुण्डीपुरा पुलिस ने 1 किलो492ग्राम गांजा (कीमत लगभग 20 हजार रुपये) जप्त कर आरोपी को गिरफ्तार किया गया।
    वहीं कोतवाली पुलिस ने प्रतिबंधित इलेक्ट्रॉनिक सिगरेट के 34 नग (कीमत लगभग 68 हजार रुपये) जप्त कर आरोपी के विरुद्ध प्रकरण दर्ज किया है।
    बैतूल में अंतरराज्यीय गांजा सप्लायर गिरफ्तार
    जिले में कोतवाली पुलिस द्वारा सतत विवेचना के दौरान गांजा तस्करी के एक अंतरराज्यीय नेटवर्क का खुलासा किया गया। पूर्व में दो आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद पुलिस ने तकनीकी एवं मुखबिर तंत्र के आधार पर मुख्य आरोपी को चिन्हित किया। कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार किया गया, जो उड़ीसा से गांजा लाकर जिले में सप्लाई करता था। पूछताछ में आरोपी ने बताया कि वह सब्जी परिवहन के बहाने उड़ीसा जाता था और वापसी में गांजा लाकर स्थानीय स्तर पर बेचता था। पुलिस द्वारा अब इस नेटवर्क के अन्य सदस्यों की तलाश कर आगे की कार्रवाई की जा रही है।
    मध्यप्रदेश पुलिस द्वारा की जा रही इन सतत एवं प्रभावी कार्यवाहियों से स्पष्ट है कि प्रदेश में मादक पदार्थों के विरुद्ध जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाई गई है। पुलिस मुख्यालय ने सभी जिलों को निर्देशित किया है कि न केवल तस्करों की गिरफ्तारी सुनिश्चित की जाए, बल्कि उनके नेटवर्क, वित्तीय स्रोत एवं अवैध संपत्तियों पर भी सख्त कार्रवाई की जाए।

  • पेट्रोलियम जमाखोरों पर सख्त कार्रवाई करेंः अनुराग जैन

    पेट्रोलियम जमाखोरों पर सख्त कार्रवाई करेंः अनुराग जैन

    मुख्य सचिव ने बैठक में कलेक्टर्स को दिए निर्देश


    भोपाल 2 अप्रैल(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)। संपूर्ण प्रदेश में एलपीजी सहित अन्य पेट्रोलियम पदार्थ पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध है । किसी भी जिले में इनकी कोई कमी नहीं है।इसके बावजूद यदि कोई व्यक्ति या व्यापारी इनकी जमाखोरी करता है तो उसके विरुद्द सख्त कार्रवाई की जाए। मुख्य सचिव अनुराग जैन ने पेट्रोलियम पदार्थों की सुगम उपलब्धता के लिए प्रदेश में किए जा रहे प्रयासों पर संतोष व्यक्त करते हुए कलेक्टर्स से कहा है कि वे प्रतिदिन मानीटरिंग करें और जमाखोरी के साथ कालाबाजारी की शिकायतों पर त्वरित तथा सख्त कार्यवाही करें। मुख्य सचिव श्री जैन ने गुरूवार को मंत्रालय में वरिष्ठ अधिकारियों और वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से कलेक्टर्स के साथ जिलों में पेट्रोलियम पदार्थों की उपलब्धता की समीक्षा की। बैठक में तय किया गया कि राज्य स्तर और जिला स्तर पर पेट्रोलियम पदार्थों की उपलब्धता पर प्रतिदिन रिव्यू होगा।
    मुख्य सचिव श्री जैन ने पीएनजी लाइन वाले जिलों में अधिकाधिक घरेलू कलेक्शन देने के लिए संबंधित एजेंसियों को जिला प्रशासन से नियमित समन्वय करने के साथ ही कलेक्टर्स को निर्देश दिए हैं कि वे एजेंसियों को वर्क फोर्स उपलब्ध करवाएं। उन्होंने कहा कि उपभोक्ताओं के बीच पीएनजी की विशेषताओं का प्रचार-प्रसार करें, जिससे अगले 3 महीने की समय-सीमा मे उन क्षेत्रों में अधिकतम घरों तक पाइप से गैस पहुंच सके। बैठक में विगत एक माह में पेट्रोलियम पदार्थों की उपलब्धता और आपूर्ति की समीक्षा की गई। पेट्रोल पंप तथा गैस एजेंसियों पर अब लाइन आदि समाप्त होने के साथ पैनिक बुकिंग बंद होने पर संतोष व्यक्त किया गया।
    मुख्य सचिव श्री जैन ने निर्देश दिए कि वैकल्पिक ऊर्जा का उपयोग बढ़ाने के लिए व्यापक प्रचार-प्रसार सुनिश्चित करें। मुख्य सचिव श्री जैन ने गैस की पर्याप्त उपलब्धता और निरंतर आपूर्ति पर संतोष व्यक्त किया। उन्होंने घरों में पीएनजी कनेक्शन की समीक्षा की और निर्देश दिए कि पाइप लाइन की क्षमता अनुरूप घरेलू कनेक्शन करें। कनेक्शन जो बंद हो गए हैं, उन्हें भी पुन: प्रारंभ करें। उन्होंने इन एजेंसियों के लिए विभागों से 24 घंटे में अनापत्ति प्रमाण-पत्र आदि जारी करने के साथ ही कालोनियों में कनेक्शन के लिए शिविर लगाने के निर्देश दिए।
    मुख्य सचिव श्री जैन ने प्रदेश में एलपीजी की जमाखोरी और कालाबाजारी करने वालों के विरूद्ध की गई कार्यवाही की समीक्षा की। उन्होंने कलेक्टर्स को निर्देश दिए कि आवश्यक वस्तु अधिनियम के लागू करने के साथ भारी अर्थदंड और एजेंसियों पर आवश्यक होने पर निलंबन की कार्रवाई की जाए। उन्होंने कहा कि एजेंसियाँ कई बार मुनाफे के लिए अपने कर्मियों से भी कालाबाजारी करवाती है। बैठक में बताया गया कि प्रदेश में अब तक 3029 गैस सिलेंडर जब्त किए गए हैं। 2759 छापे मारे गए हैं। दोषियों के विरूद्ध 11 एफआईआर भी दर्ज की गई हैं।
    बैठक में बताया गया कि प्रदेश में पेट्रोल एवं डीजल की पर्याप्त उपलब्धता है और ऑयल कंपनी के डिपो से निरंतर आपूर्ति जारी है। जिलों में गैस पाईप लाईन बिछाने के सभी आर.ओ.यू आवेदनों को आवेदन प्रस्तुत करने के 24 कार्यकारी घंटो के अंदर डीम्ड सीजीडी अनुमति प्रदान करने के आदेश अनुसार कार्यवाही की जा रही हैं।
    राज्य शासन को अतिरिक्त 10% एलपीजी आवंटन प्राप्त हो चुका है। 27 मार्च 2026 को भारत सरकार द्वारा कॉमर्शियल एलपीजी का अतिरिक्त 20% आवंटन उद्योरग जैसे-स्टील, ऑटोमोबाईल, टेक्सटाइल, डाई, केमिकल्स, प्लास्टिक्स आदि के लिए किया गया है और उद्योगों को कॉमर्शियल गैस सप्लाई उक्त अनुसार की जा रही है।
    बैठक में बताया गया कि केंद्र सरकार द्वारा प्रदेश को केरोसीन आवंटन और एवं प्रत्येक जिले में 2 पेट्रोल पंपों का आंकलन प्रक्रियाधीन है। विभाग द्वारा केरोसीन वितरण के दिशा निर्देश जारी किए गए हैं। केरोसीन का वितरण मांग के आधार पर होगा। इस दौरान वरिष्ठ अधिकारी और आयल कंपनी के प्रतिनिधि उपस्थित थे।

  • नशा माफिया पर मध्यप्रदेश पुलिस का कारगर प्रहार

    नशा माफिया पर मध्यप्रदेश पुलिस का कारगर प्रहार

    भोपाल,22 फरवरी(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)। मध्यप्रदेश में बीते दो वर्षों में नशा तस्करी के विरुद्ध पुलिस की कार्रवाई ने एक संगठित और निरंतर अभियान का रूप ले लिया है। राज्य सरकार के निर्देश पर मध्यप्रदेश पुलिस ने न केवल मादक पदार्थों की तस्करी पर अंकुश लगाने के लिए विशेष अभियान चलाए, बल्कि ड्रग माफिया की आर्थिक कमर तोड़ने के लिए भी सख्त कदम उठाए। यह संघर्ष केवल कानून-व्यवस्था का प्रश्न नहीं, बल्कि सामाजिक और पीढ़ीगत सुरक्षा से जुड़ा विषय बन चुका है।

    वर्ष 2024 और 2025 के दौरान राज्य के विभिन्न जिलों—इंदौर, भोपाल, ग्वालियर, जबलपुर और सीमावर्ती इलाकों—में पुलिस ने संयुक्त कार्रवाई कर करोड़ों रुपये मूल्य के मादक पदार्थ जब्त किए। पुलिस मुख्यालय के आंकड़ों के अनुसार, इन दो वर्षों में एनडीपीएस एक्ट के अंतर्गत हजारों प्रकरण दर्ज हुए और बड़ी संख्या में आरोपियों की गिरफ्तारी की गई। जब्त सामग्री में गांजा, अफीम, डोडाचूरा, ब्राउन शुगर, हेरोइन और प्रतिबंधित नशीली गोलियां शामिल रहीं।

    विशेष रूप से अंतरराज्यीय तस्करी के नेटवर्क पर प्रहार करते हुए पुलिस ने राजस्थान, उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र और छत्तीसगढ़ से जुड़े गिरोहों का भंडाफोड़ किया। कई मामलों में ट्रांजिट रिमांड लेकर अन्य राज्यों से जुड़े सरगनाओं को गिरफ्तार किया गया। पुलिस ने ड्रग्स की खेप के साथ-साथ परिवहन में प्रयुक्त वाहन, मोबाइल फोन, बैंक खाते और संपत्तियां भी जब्त कीं, जिससे तस्करों के आर्थिक तंत्र पर चोट पहुंची।

    बीते वर्षों में ड्रग माफिया ने तस्करी के तौर-तरीकों में भी बदलाव किया है। पुलिस जांच में सामने आया कि अब पारंपरिक ढंग से बड़े ट्रकों या बसों के जरिए खेप भेजने के बजाय छोटे-छोटे पैकेटों में कुरियर सेवाओं, निजी वाहनों और यहां तक कि ऑनलाइन डिलीवरी नेटवर्क का उपयोग किया जा रहा है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म और एन्क्रिप्टेड मैसेजिंग ऐप्स के माध्यम से ग्राहकों तक संपर्क साधा जाता है। भुगतान के लिए डिजिटल वॉलेट और फर्जी बैंक खातों का इस्तेमाल किया जाता है, जिससे लेन-देन का पता लगाना कठिन हो जाता है।

    कुछ मामलों में युवाओं और छात्रों को “कैरियर” के रूप में इस्तेमाल करने की प्रवृत्ति भी सामने आई है। उन्हें कम जोखिम और अधिक कमाई का लालच देकर नेटवर्क का हिस्सा बनाया जाता है। सीमावर्ती जिलों में खेतों और सुनसान इलाकों का उपयोग अस्थायी गोदाम के रूप में किया जाता है, जहां से स्थानीय सप्लायर छोटे स्तर पर वितरण करते हैं।

    इन चुनौतियों से निपटने के लिए मध्यप्रदेश पुलिस ने तकनीकी निगरानी और साइबर विश्लेषण को प्राथमिकता दी है। कॉल डिटेल रिकॉर्ड, बैंकिंग ट्रांजेक्शन और सीसीटीवी फुटेज के विश्लेषण से कई बड़े नेटवर्क का खुलासा हुआ। ड्रोन कैमरों और विशेष निगरानी टीमों की मदद से संवेदनशील क्षेत्रों में छापेमारी की गई।

    राज्य स्तर पर नारकोटिक्स प्रकोष्ठ को सक्रिय कर जिला पुलिस के साथ समन्वय बढ़ाया गया। स्कूलों और कॉलेजों में जागरूकता अभियान चलाकर युवाओं को नशे के दुष्परिणामों से अवगत कराया गया। “नशा मुक्त मध्यप्रदेश” अभियान के तहत पुलिस, प्रशासन और सामाजिक संगठनों ने मिलकर परामर्श शिविरों और जनसंवाद कार्यक्रमों का आयोजन किया।

    पुलिस ने केवल गिरफ्तारी तक कार्रवाई सीमित नहीं रखी, बल्कि ड्रग माफिया की अवैध संपत्तियों को चिह्नित कर कुर्क करने की प्रक्रिया भी शुरू की। एनडीपीएस एक्ट और अन्य संबंधित धाराओं के तहत करोड़ों रुपये मूल्य की चल-अचल संपत्तियां अटैच की गईं। इससे स्पष्ट संदेश गया कि नशे के कारोबार से अर्जित संपत्ति सुरक्षित नहीं रहेगी।

    हालांकि कार्रवाई के आंकड़े उत्साहजनक हैं, परंतु चुनौती पूरी तरह समाप्त नहीं हुई है। अंतरराज्यीय सीमाएं, ऑनलाइन प्लेटफॉर्म और संगठित अपराध का नेटवर्क लगातार नए रास्ते खोज रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि केवल पुलिस कार्रवाई पर्याप्त नहीं, बल्कि सामाजिक जागरूकता, पुनर्वास केंद्रों की मजबूती और पारिवारिक स्तर पर संवाद भी आवश्यक है।

    बीते दो वर्षों में मध्यप्रदेश पुलिस की कार्रवाई ने यह संकेत दिया है कि राज्य नशा तस्करी के विरुद्ध कठोर रुख अपनाए हुए है। बड़ी जब्तियां, अंतरराज्यीय गिरोहों का पर्दाफाश और आर्थिक कुर्की की कार्यवाही इस दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं। फिर भी यह लड़ाई लंबी है। जब तक समाज, प्रशासन और कानून प्रवर्तन एजेंसियां एकजुट होकर निरंतर प्रयास नहीं करेंगी, तब तक ड्रग माफिया नए रूप में उभरते रहेंगे।

    मध्यप्रदेश में चल रही यह मुहिम केवल अपराध के विरुद्ध नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के भविष्य की सुरक्षा का संकल्प है—और यही इसे एक निर्णायक सामाजिक आंदोलन का स्वरूप देता है।

  • फोरेंसिक साक्ष्यों ने दंड की प्रक्रिया ज्यादा सटीक बनाईःकैलाश मकवाना

    फोरेंसिक साक्ष्यों ने दंड की प्रक्रिया ज्यादा सटीक बनाईःकैलाश मकवाना


    भोपाल09 जनवरी(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)। भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 2023 (Indian Evidence Act, 2023) और भारतीय न्याय संहिता, 2023 (Bharatiya Nyaya Sanhita – BNS),ने दंड प्रक्रिया संहिता, 1973 (CrPC) को और भी ज्यादा सटीक बना दिया है। इससे अपराधियों को दंड दिलाना सरल हुआ है। यही वजह है कि अपराध की रोकथाम में पुलिस की पहल कानून के लिए ज्यादा उपयोगी हो गई है।मध्यप्रदेश में अपराधियों को दंड दिलाने के मामलों को देखकर कानून की सटीकता आसानी से समझी जा सकती है। नव वर्ष मिलन समारोह में पत्रकारों से अनौपचारिक चर्चा करते हुए पुलिस महानिदेशक कैलाश मकवाना ने कानून व्यवस्था के कई पहलुओं पर प्रकाश डाला।


    श्री मकवाना ने कहा कि मध्यप्रदेश की पुलिस अपनी सामाजिक जिम्मेदारी के मानदंडों पर खरी साबित हुई है। हमने पुलिसिया अत्याचार को रोका है लेकिन अपराध पर लगाम लगाने में सफलता पाई है। अपनी लोकतांत्रिक जिम्मेदारियों के बीच राज्य की पुलिस आम जनता के ज्यादा करीब पहुंची है। समाज के बीच से ही पुलिस के अधिकारी आते हैं और अपने अपने नजरिए से अपराध की रोकथाम के नवाचार करते हैं।


    उन्होंने बताया कि हमने जनता से लूटा गया माल वापस दिलाने में बड़ी कामयाबी पाई है। मोबाईल या वाहन चोरी की बरामदगी पहले की तुलना में ज्यादा सरल हुई है। नई पीढ़ी के पुलिस कर्मियों ने पुलिस की कई बुराईयां दूर की हैं। इसके बावजूद हमें अभी बहुत प्रयास करने हैं। हमने पुलिस सुधार का पूरा खाका बनाया है। हर पीढ़ी के नए अधिकारी आकर इसमें कुछ न कुछ सुधार करते जाते हैं। यही कड़ी हमें ज्यादा कारगर बना रही है। मैंने स्वयं अपने कार्यकाल में इस निरंतरता को बनाए रखने का प्रयास किया है। निश्चित तौर पर भविष्य में भी पुलिस की यही गरिमा बनी रहेगी।

  • पीड़िता पर दबाव बनाकर सजा से बचने का प्रयास कर रहा पास्को आरोपी प्रकाश गुप्ता

    पीड़िता पर दबाव बनाकर सजा से बचने का प्रयास कर रहा पास्को आरोपी प्रकाश गुप्ता


    भोपाल, 01 दिसंबर(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)। सैकड़ों लोगों से ठगी और महिलाओं के विरुद्ध यौन अपराध करने वाला कंप्यूटर व्यवसायी प्रकाश चंद्र गुप्ता इन दिनों जेल की सजा से बचने के लिए तरह तरह के कानूनी दांवपेंचों का इस्तेमाल कर रहा है। उसने अपने वकील के माध्यम से पीडि़ता पर दबाव बनाकर पास्को एक्ट की कड़ी सजा से बचने का जाल बिछाया है। वह अदालत के सामने पुलिस कार्रवाई के विरुद्ध भी शिकायतें करके खुद को निर्दोष बताने का प्रयास कर रहा है।


    बताया जाता है कि राजधानी के एमपीनगर में बूटकॉम सिस्टम नामक दूकान चलाने वाला गुप्ता अपने ग्राहकों को झांसा देकर ठगने के लिए कुख्यात रहा है। उसके विरुद्ध कई व्यापारियों और ग्राहकों ने भी ठगी की शिकायतें दर्ज कराई हैं। जब इस बार उसके विरुद्ध एक नाबालिग बालिका ने यौन उत्पीड़न की शिकायत दर्ज कराई और पुलिस ने सख्त जांच करके उसे अदालत के माध्यम से जेल पहुंचा दिया । तभी से वह अपने बचाव में कई तरह के षड़यंत्र कर रहा है।ये आदतन अपराधी अब तो सजा से बचने के लिए पुलिस और अदालतों के विरुद्ध भी तरह तरह की झूठी शिकायतें कर रहा है।


    पीड़िता की ओर से पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों को शिकायत की गई है कि आरोपी गुप्ता स्वयं एवं अपने वकील के माध्यम से मनगढ़ंत लिफाफे भेज रहा है जिन पर लीगल नोटिस लिखा है। वह पहले से अन्य प्रकरणों में भी इस तरह के लिफाफे भेजकर अदालत को गुमराह करने का प्रयास करता रहा है। पूर्व में वरिष्ठ अधिवक्ता विजय चौधरी ने ऐसे ही लिफाफे भेजने के कारण गुप्ता के विरुद्ध कानूनी कार्रवाई करने की चेतावनी दी थी। तब उन लिफाफों में ऊटपटांग चित्र और रद्दी कागज भेजे गए थे। श्री चौधरी ने लिखा था कि उनके पक्षकार मनीष बाधवानी को इस तरह की चिठ्ठियां भेजना बंद करें। इस प्रकार के षड़यंत्र करना न्याय के लिए घातक है। ये दस्तावेज पक्षकार की ओर से अदालत को भी दिए गए हैं।


    ज्ञात हुआ है कि विगत में एक लड़की अनन्या पाराशर ने एमपीनगर पुलिस थाने को शिकायत की थी कि जब गुप्ता ने उसे कबाड़ा कंप्यूटर बेचा और वह शिकायत करने पहुंची तो गुप्ता ने अपनी ही दूकान में बंदूक तानकर गाली देते हुए जान से मारने की धमकी दी। लड़की की शिकायत पर एमपीनगर पुलिस ने आरोपी के विरुद्ध अपराध क्रमांक 0210 । 2022 दर्ज कर न्यायालय में प्रस्तुत किया था। बाद में शिकायत कर्ता लड़की की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई।


    महिलाओं को जाल में फंसाने के लिए कुख्यात प्रकाश गुप्ता ने केनरा बैंक कोहेफिजा शाखा की मैनेजर सुधा दर्शिका से दो करोड़ इक्कीस लाख रुपयों की ठगी के आरोप में जेल की हवा खाना पड़ी थी। इससे बचने के लिए गुप्ता ने सुधा दर्शिका के विरुद्ध भोपाल जिला न्यायालय में एक झूठा प्रकरण दर्ज कराने का प्रयास किया । बाद में केनरा बैंक और सुधा दर्शिका को भी वह इसी तरह के फर्जी लिफाफे भेजने लगा। केनरा बैंक ने आम जनता को सावधान करने के लिए राजधानी के एक अखबार में आम सूचना प्रकाशित करवाई थी कि बैंक की ओर से गुप्ता से ये रकम वसूली जानी है। वह कूटरचित दस्तावेजों के आधार पर भ्रम फैलाने का प्रयास कर रहा है ।


    कमलानगर पुलिस ने भी महिलाओं की शिकायत पर प्रकाश गुप्ता के विरुद्द चार करोड़ सत्ताईस लाख रुपए की धोखाधड़ी की शिकायत की थी। पुलिस ने अपराध दर्ज करके गुप्ता को गिरफ्तार किया था तब न्यायालय ने उसे जेल भेज दिया था। यह प्रकरण क्रमांक आरटी 4137 । 20 अभी अदालत में विचाराधीन है।


    गुप्ता की ओर से न्यायाधीशों पर दबाव बनाने के लिए हाईकोर्ट तक में झूठी शिकायतें की जाती रहीं हैं। अपर सत्र न्यायाधीश विशाल अखंड और मुख्य न्यायायिक मजिस्ट्रेट विनोद पाटीदार की झूठी शिकायतें हाईकोर्ट के सतर्कता विभाग ने जांच के बाद झूठी पाए जाने पर खारिज कर दीं थीं।

  • फार्मासिस्ट ने काऊंसिल के गार्ड का सिर फोड़ा तो लड़कों ने तबियत से धुन दिया

    फार्मासिस्ट ने काऊंसिल के गार्ड का सिर फोड़ा तो लड़कों ने तबियत से धुन दिया


    भोपाल,28 नवंबर(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)। मध्यप्रदेश फार्मेसी काऊंसिल के कार्यालय में आज उस समय अफरातफरी मच गई जब इंदौर से आए एक कथित फार्मासिस्ट ने अपना पंजीयन कराने का दबाव बनाने के लिए वहां पदस्थ गार्ड का सिर फोड़ दिया। उसने रजिस्ट्रार और कर्मचारियों को भी धमकाया और गाली गलौच की। इसकी सूचना जब पुलिस को मिली तो पुलिस भी घटना स्थल पर पहुंच गई लेकिन तब तक अपना पंजीयन कराने आए कुछ लड़कों ने आरोपी को घसीटकर तबियत से धुन दिया। पुलिस ने गार्ड और आरोपी की शिकायत पर एफआईआर दर्ज की है। सरकारी कार्य में अड़चन करने की शिकायत भी दर्ज की गई है।


    प्राप्त जानकारी के अनुसार घटना आज पूर्वान्ह लगभग 11 बजे की है। खुद को इंदौर का फार्मेसी छात्र बताने वाला तुषार नाम का एक युवक वहां पदस्थ गार्ड से अंदर प्रवेश के लिए जिद कर रहा था। गार्ड ने उसे रोका तो उसने गार्ड से मारपीट शुरु कर दी। इससे गार्ड का सिर फट गया और उससे खून निकलने लगा। इसे देखकर वहां मौजूद छात्रों और कर्मचारियों ने भागते हुए इस आरोपी को पकड़ लिया और मन लगाकर धुन दिया। इस बीच पुलिस भी पहुंच गई और सूचना मिलते ही मध्यप्रदेश फार्मेसी काऊंसिल के अध्यक्ष संजय जैन भी पहुंच गए और उन्होंने बीच बचाव करके आरोपी को पुलिस के हवाले करवाया।


    श्री जैन ने पुलिस को दी सूचना में कहा है कि काऊंसिल में आनलाईन पंजीयन का कार्य होता है। एमपी आनलाईन के फार्म को भरने और सभी दस्तावेज भरने पर जांच के बाद स्वतः ही पंजीयन हो जाता है। इसके लिए किसी को काऊंसिल के दफ्तर आने की जरूरत नहीं होती है। इसके बावजूद हर दिन लगभग पचास अभ्यर्थी अपना आवेदन जमा कराने के लिए काऊंसिल आते हैं। इसके लिए काऊंसिल ने गार्ड की व्यवस्था की है जो एक एक करके अभ्यर्थियों को अंदर जाने देता है। उन्होंने पंजीयन के इस कार्य में आवश्यक सुरक्षा बल उपलब्ध कराने की मांग की है।


    गौरतलब है कि मध्यप्रदेश में फार्मासिस्टों के पंजीयन का कार्य लंबे समय से अव्यवस्था के दौर से गुजर रहा है। वर्तमान में काऊंसिल ने इस कार्य के लिए आनलाईन आवेदन जमा करने की व्यवस्था की है। इसके बावजूद कुछ अड़ीबाज फर्जी दस्तावेजों के आधार पर पंजीयन कराने का प्रयास करते हैं। काऊंसिल ने मेडीकल स्टोरों के पंजीयन की प्रक्रिया में जीवन प्रमाण पत्र देने के निर्देश जारी किए हैं। इससे प्रदेश भर के वे मेडीकल संचालक नाराज हैं जिनके संचालक बरसों पहले ही स्वर्गवासी हो चुके हैं। इसके बावजूद उनके नाम पर फर्जी मेडीकल स्टोर चलाए जा रहे हैं। यही वजह है कि नए नियमों से नाराज फार्मासिस्ट काऊंसिल पर दवाब बनाने का प्रयास कर रहे हैं।

    प्राप्त जानकारी के अनुसार पुलिस ने काऊंसिल के कर्मचारी गोपाल सिंह यादव की शिकायत पर आरोपी फार्मासिस्ट के विरुद्ध शासकीय कार्य में बाधा पहुंचाने की शिकायत दर्ज की है। गार्ड जितेन्द्र बैरागी की हालत खतरे से बाहर बताई गई है।

  • डायल 112 से बंटता है साढ़े पांच हजार पुलिस वालों का वेतन

    डायल 112 से बंटता है साढ़े पांच हजार पुलिस वालों का वेतन

    पुलिस ने खुद बताई ये कड़वी सच्चाई

    भोपाल, 15 सितंबर (प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)।जनता की सेवा के नाम पर जिस तरह नौकरियां बांटने की परिपाटी मध्यप्रदेश में चल रही है उसने सारे विकास कार्यों की राह बंद कर दी है। सरकार के पास इन कर्मचारियों को बांटने के लिए धन नहीं है। यही वजह है कि अपने अमले के स्थापना व्यय तक के लिए सरकार को योजनाओं के नाम पर भारी कर्ज लेना पड़ रहा है। इस तरह की योजनाएं वैसे तो तमाम विभागों में चल रही हैं लेकिन पुलिस विभाग की इस योजना के बारे में जब जनचर्चा फैली तो पुलिस को स्पष्टीकरण देने सामने आना पड़ा है।

    पुलिस सूत्रों का कहना है कि सोशल मीडिया पर डायल-112 परियोजना के अंतर्गत वाहनों की खरीद एवं खर्च से जुड़ी भ्रामक और असत्य जानकारी प्रसारित की जा रही है। इन पोस्टों में दावा किया गया है कि सरकार ने गाड़ियां 30-40 लाख रुपए की जगह 1 करोड़ रुपए से अधिक कीमत पर खरीदीं और इस पर कुल ₹1500 करोड़ खर्च हुए हैं। यह दावा पूरी तरह गलत और निराधार है।

    डायल-112 परियोजना से संबंधित कुछ तथ्यों को स्पष्ट करना आवश्यक है। इस योजना का कुल टेंडर लगभग ₹972 करोड़ का है, न कि ₹1500 करोड़, जैसा कि कुछ स्थानों पर गलत रूप से प्रस्तुत किया गया है। यह राशि किसी एक वर्ष के लिए नहीं, बल्कि पूरे पाँच वर्षों की अवधि के लिए निर्धारित है। इसमें केवल गाड़ियों का किराया शामिल नहीं है, बल्कि कई अन्य महत्वपूर्ण मदें भी सम्मिलित हैं। कुल बजट में से ₹719.75 करोड़ का प्रावधान 1200 फर्स्ट रिस्पॉन्स व्हीकल्स (FRVs) के संचालन, रख-रखाव और लगभग 5000 कर्मचारियों के वेतन के लिए किया गया है। इसी प्रकार, ₹78.5 करोड़ का प्रावधान स्टेट कमांड सेंटर, डेस्कटॉप्स तथा 500 से अधिक कर्मचारियों के वेतन के लिए है। इसके अतिरिक्त, ₹174 करोड़ आईटी इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे हार्डवेयर, सॉफ्टवेयर, सर्वर एवं उनके रख-रखाव पर खर्च किया जाएगा। यह भी स्पष्ट किया जाना चाहिए कि गाड़ियाँ खरीदी नहीं गई हैं, बल्कि किराए पर ली गई हैं—जहाँ बोलेरो वाहन का किराया ₹32,000 प्रति माह और स्कॉर्पियो वाहन का किराया ₹36,000 प्रति माह तय किया गया है। इस प्रकार पाँच वर्षों के लिए कुल अनुमानित खर्च लगभग ₹972 करोड़ है।

    मध्यप्रदेश पुलिस ने नागरिकों से आग्रह किया है कि वे इस प्रकार की भ्रामक और असत्य अफवाहों पर ध्यान न दें तथा सोशल मीडिया पर इनका प्रसार करने से बचें। सही एवं प्रमाणित जानकारी के लिए केवल मध्यप्रदेश पुलिस के आधिकारिक माध्यमों पर भरोसा करें।

    गौरतलब है कि कांग्रेस के बाद भाजपा की सरकारों ने भी नौकरियों की खैरात बांटने के लिए मुक्त हस्त से नियुक्तियां जारी रखीं हैं। इन नौकरियों की वजह से आम जनता को अपनी गाढ़ी कमाई कई स्तरों पर टैक्स के रूप में भुगतना पड़ रही है। मोदी सरकार जहां वन कंट्री वन टैक्स की लोरियां सुनाती है वहीं राज्यों की सरकारें वाहवाही लूटने के लिए कर्ज लेकर खैरात बांटने की मुहिम चलाए हुए हैं।

  • जैन मंदिर में जानलेवा हमला करने वाले सटोरिए को बचाने उतरे अहिंसा के पुजारी

    जैन मंदिर में जानलेवा हमला करने वाले सटोरिए को बचाने उतरे अहिंसा के पुजारी

    भोपाल 14 सितंबर(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)। जैन समाज के एक सटोरिए ने शिवाजी नगर जैन मंदिर के भीतर समाजसेवी प्रदीप जैन पर जो प्राणघातक हमला किया उसे छुपाने के लिए समाज के कई सफेदपोश नेता अब समझौते का दबाव बनाने में जुट गए हैं। घटना की प्राथमिकी दर्ज होने के बाद इन सफेदपोशों ने पुलिस मुख्यालय के आला अधिकारियों पर दबाव बनाकर प्रदीप जैन के खिलाफ लगभग ग्यारह घंटे बाद छेड़खानी की झूठी शिकायत दर्ज करवा दी। अब आपराधिक पृष्ठभूमि के यही नेता राजधानी में विराजमान मुनि श्री से समझौता करवाने के लिए निवेदन कर रहे हैं।
    पर्यूषण पर्व के उत्सवी माहौल के बाद लाड़ू चढ़ाने के कार्यक्रम में ये आपराधिक वारदात समाज के तमाम लोगों की मौजूदगी में घटित हुई थी। पुलिस रिपोर्ट के अनुसार प्रदीप कुमार जैन पिता स्वं. श्री अशोक कुमार जैन उम्र 61 साल निवासी म.न. डी 4 ग्रीन हाईट्स कालोनी ऑरा माल के पीछे थाना शाहपुरा जिला भोपाल एमपीनगर थाने में शिकायत दर्ज कराई है कि एमपीनगर में जैन स्वीट्स नाम से मेरी दूकान है। मैं जैन मंदिर शिवाजी नगर ,मानसरोवर के पास जोन 2 के ट्रस्ट मे संयोजक के पद पर हूँ । ये मंदिर जैन ट्रस्ट कमेटी चौक के अंतर्गत आता है। यहां विशाल जैन मंदिर का निर्माण चल रहा है।
    विगत छह तारीख को साढ़े दस बजे जब वे जैन मंदिर शिवाजी नगर ,मानसरोवर के पास जोन 2 एमपी नगर पूजा के लिए गए तभी आरोपियों ने घात लगाकर इस वारदात को अंजाम दिया। उनके साथ उनकी भतीजी प्रज्ञा जैन भी उपस्थित थी। वहां पर लाड़ू चढ़ने का प्रोसीजर चल रहा था पंडितजी वहां पर मंत्र पढ़ रहे थे मेरी भतीजी के हाथ मे लाडू थे जिसके ऊपर कपूर रखा था और मेरे हाथ मे माचिस थी उसी समय वहां पर कैलाश चंद्र जैन(सिंघई) औऱ उसका लड़का अंकित सिघंई आए और गाली गलौच करने लगे।


    कैलाश चंद्र के पुत्र अंकित ने उन्हें धक्का देकर माचिस छीन ली। विरोध करने पर अंकित सिघंई और कैलाश चंद्र ने मंदिर के भीतर ही प्रदीप जैन और उनकी भतीजी प्रज्ञा जैन को मां- बहन की गंदी-गंदी गालियां देने लगे । जब उनसे कहा गया कि मंदिर परिसर से बाहर निकलकर बात कीजिए तो दोनों फरियादी प्रदीप जैन पर पिल पड़े। इसी मारपीट में सहयोग करने के लिए उनके साथी नितिन जैन और जितेन्द्र जैन भी आ गए। चारों मिलकर उनके साथ हाथ मुक्को से मारपीट करने लगे । इस बीच कैलाश सिंघई ने किसी धारदार हथियार से प्रदीप जैन के सिर पर प्रहार किया। वे फर्श पर गिर पड़े और उनकी बायीं आंख व भौंह से खून बहने लगा। मारपीट में प्रदीप जैन को बायीं आँख मे एवं भौह मे ऊपर एवं दाहीने पैर के घुटने मे एवं शरीर मे अन्य जगह चोटे आयी है। इस वारदात के प्रत्यक्षदर्शी विजय मोदी और बलराम सैनी ने बताया कि उन्होंने हमलावरों को दूर करने की कोशिश की लेकिन वे नहीं माने। कैलाश चंद्र और उनके साथी बोल रहे थे कि आज तो बच गया आईंदा उलझा तो जान से खत्म कर देंगे।
    गौरतलब है कि कैलाश सिंघई कथित तौर पर गैरकानूनी सट्टे का फड़ संचालित करता है। इस वजह से पुलिस के कई आला अधिकारियों से उसके करीबी संपर्क भी हो गए हैं। समाज के कुछ सफेदपोश नेता भी इस मामले में कूद पड़े और उन्होंने पुलिस अधिकारियों को गुमराह करते हुए कहा कि ये तो सामाजिक मामला है। हम लोग आपस में समझौता करवा देंगे। आप पुलिस थाने को बोलकर हमलावरों की ओर से भी एक शिकायत दर्ज करवा दीजिए। बाकी हम निपट लेगें।इसके ग्यारह घंटे बाद पुलिस ने फरियादी के विरुद्ध छेड़खानी की झूठी शिकायत दर्ज कर ली है। जबकि इस मामले में भाजपा के एक बड़े नेता ने भी हस्तक्षेप करके पुलिस को निर्देश दिए हैं कि वह निष्पक्ष जांच करके प्रकरण अदालत भिजवाए ताकि अपराधियों को अपनी करनी पर दंड मिल सके।

  • मछली ठेके और नशा कारोबार से दुबई में बनाई दौलत

    मछली ठेके और नशा कारोबार से दुबई में बनाई दौलत

    भोपाल 06 सितंबर(प्रेस इंफार्मेशन सेंटऱ) मध्यप्रदेश की राजनीति में शरीफ मछली का नाम आज भी आदर से लिया जाता है। उनके निधन के बाद उनके परिवार ने जिस तरह अपराध जगत से नाता जोड़ा वो प्रदेश के लिए एक बड़ी समस्या बन गया था। अपराध की दुनिया में ‘मछली परिवार’ के नाम से कुख्यात यह गिरोह ड्रग तस्करी, यौन शोषण, जबरन वसूली जैसे संगीन आरोपों से जुड़ा रहा हैं। प्रशासन ने इस गिरोह की बनाई गई अवैध संपत्तियों को बुलडोजर से ध्वस्त कर एक स्पष्ट संदेश भेजा कि अपराध नहीं बख्शा जाएगा।

    1. बुलडोजर से अवैध संपत्तियों का ध्वंस
      30 जुलाई 2025 को प्रशासन ने मछली परिवार की लगभग ₹50 करोड़ की अवैध संपत्ति—जिसमें फार्म‑हाउस, वेयरहाउस, फैक्ट्री और आवासीय भवन शामिल थे—को अवैध अतिक्रमण की कार्रवाई में ध्वस्त किया। उसी दिन जिला प्रशासन, पुलिस और नगर निगम के संयुक्त टीम ने कई ठिकानों पर बुलडोजर चलाया जिसमें लगभग ₹100 करोड़ मूल्य की अवैध संपत्तियाँ शामिल थीं। 21 अगस्त 2025 को ‘मछली परिवार’ की तीन मंजिला कोठी (अनंतपुरा‑कोकता इलाके, वार्ड 62) को ध्वस्त किया गया, जिसकी कीमत ₹22–25 करोड़ आंकी गई थी। यह भी सरकारी जमीन पर बिना अनुमति निर्मित थी।
    2. गंभीर आरोप: ड्रग्स, यौन शोषण, ब्लैकमेलिंग
      गिरफ्तारी के बाद युवक यासीन अहमद उर्फ मछली और उनके चाचा शाहवर अहमद उर्फ मछली ने अपराध शाखा की गिरफ्त में आने पर कई खुलासे किए। आरोप है कि वे राजस्थान से ड्रग्स लाते, पब और लाउंज में पुरानी एवं भरोसेमंद ग्राहकों को पहुँचाते थे, और लड़कियों का उपयोग फिक्स डिलीवरी करने और उन्हें मुफ़्त ड्रग दे कर शोषित करने में करते थे। यासीन के मोबाइल में अश्लील वीडियो और पिस्टल भी बरामद हुए, जिससे यौन शोषण और ब्लैकमेलिंग का मामला और गंभीर हो गया।
    1. न्याय प्रक्रिया में ढिलाई—एफ़आईआर का अभाव
      लगभग ₹100 करोड़ की संपत्ति ध्वस्त कर दी गई परन्तु 34 दिनों बाद भी शारिक मछली के खिलाफ कोई FIR दर्ज नहीं की गई। शिकायतों और उपलब्ध सबूतों के बावजूद पुलिस कार्रवाई की निष्क्रियता पर सवाल उठे हुए हैं।
    2. नए उत्‍पन्न मामले—रेप और होटल में शोषण
      हाल ही में बीजेपी नेता के भतीजे यासीन मछली के खिलाफ और एक एफआईआर दर्ज हुई है जिसमें उन पर 5‑स्टार होटल में शादी का झांसा देकर रेप और मारपीट का आरोप लगाया गया है। यह वीडियो भी सामने आया है और अब पुलिस इस मामले की जांच कर रही है।
    3. राजनीतिक बयान और सरकार की प्रतिक्रिया
      मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने राज्य स्तरीय नशा मुक्ति कार्यक्रम में कहा कि “ड्रग्स तस्करों के खिलाफ ढूंढ‑ढूंढकर कार्रवाई की जा रही है” और कहा—“कोई कितनी भी पॉलिटिकल अप्रोच वाला हो, कोई कुछ भी — हम छोड़ेंगे नहीं।”–30 जुलाई 2025 ~₹50–100 करोड़ की अवैध संपत्ति (फार्म‑हाउस, वेयरहाउस आदि) ढहायी गई । 21 अगस्त 2025 तीन मंजिला कोठी (₹22–25 करोड़) ध्वस्त, सरकारी जमीन पर गिरफ्तारी यासीन और शाहवर सहित कई आरोपियों ने ड्रग तार्किक भय, यौन शोषण आदि खुलासे किए हैं।

    1. FIR मामला शारिक मछली के खिलाफ अभी तक FIR नहीं
      नया मामला यासीन के खिलाफ होटल में रेप व मारपीट की FIR का है। एक प्रताड़ित राजेश तिवारी ने मीडिया के सामने खुद के साथ हुई मारपीट और धोखाघड़ी की शिकायत की है।क्षेत्र के मुस्लिम नागरिकों ने भी इस परिवार की गुंडागर्दी के खिलाफ खुलकर बयान दिए हैं। लोगों का कहना है कि उनके कब्जे वाले तालाबों पर मछली मारने वालों को इस परिवार के गुर्गे उठा ले जाते थे और हवेली में बंद करके मारपीट करते थे।
      मुख्यमंत्री की टिप्पणी सख्त कार्रवाई का राजनीतिक संदेश जारी
      ‘मछली परिवार’ ने लंबे समय तक भोपाल में अपराधों के जरिए करोड़ों की संपत्ति और साम्राज्य का निर्माण किया। ड्रग तस्करी, यौन शोषण, ब्लैकमेलिंग जैसे अपराधों की घटित पृष्ठभूमि ने प्रशासन को कठोर कदम उठाने पर मजबूर किया। बुलडोजर द्वारा अवैध निर्माणों को ध्वस्त कर प्रशासन ने स्पष्ट संदेश दिया कि अपराध के लिए कोई स्थान नहीं होगा।
      हालांकि, कार्रवाई के बाद भी न्यायालयीन प्रक्रिया में विलंब, विशेषकर शारिक मछली के खिलाफ FIR का अभाव, चिंता का विषय है। इसके अलावा, नए अपराधों की झड़ी से यह मामला अभी समाप्त नहीं माना जा सकता। सरकार की प्रतिबद्धता और पुलिस की सक्रियता ही इस जटिल अपराधी नेटवर्क को सुलझा कर कानूनी रास्ता सुनिश्चित कर सकती है।
  • केनरा बैंक के ठग प्रकाश गुप्ता पर आयकर का छापा

    केनरा बैंक के ठग प्रकाश गुप्ता पर आयकर का छापा


    भोपाल, 03 सितंबर(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)। केनरा बैंक की कोहेफिजा शाखा से दो करोड़ इक्कीस लाख रुपए ठगने वाले प्रकाशचंद्र गुप्ता के ठिकानों पर आयकर महकमे ने अपना शिकंजा कस दिया है। पिछले दो दिनों से आयकर के अधिकारी गुप्ता की एमपीनगर वाली कंप्यूटर दूकान बूटकॉम सिस्टम्स और कम्फर्ट पार्क, अयोध्या बाईपास रोड स्थित निवास पर दस्तावेज खंगाल रहे हैं। उसकी अवैध पत्नी के 31A पार्क एवेन्यू गिरधर परिसर कोलार रोड स्थित आवास एवं गर्ल्स हास्टल्स और फार्म हाऊस आदि संपत्तियों पर भी निगाह बनाए हुए है।


    आयकर विभाग ने राजधानी के जिन सूदखोरों और ठेकेदारों पर छापे डाले हैं उन्हीं के साथ गुप्ता का कारोबारी लेनदेन पाया गया है। सूत्र बताते हैं कि इसके घर से जांच अमले को करोड़ों रुपए नकद, सोना और अवैध संपत्तियों के दस्तावेज भी बरामद हुए हैं। पिछले दो दिनों से एमपीनगर स्थित उसकी दूकान पर पुलिस दस्ते की मौजूदगी में अधिकारी तमाम दस्तावेज खंगाल रहे हैं।
    गुप्ता ने पुलिस और न्यायालय के समक्ष ये दावा किया था कि उसने केनरा बैंक की बुजुर्ग महिला मैनेजर को अपनी दूकान कार्यालय में बुलाकर एनपीए हो गए लोन एकाऊंट को बंद करने के लिए दो करोड़ इक्कीस लाख रुपए की बड़ी राशि कैश। नकद दी थी। आरोपी ने इतनी बड़ी नकद धनराशि उसके पास मौजूद होने का कोई कानूनी दस्तावेज प्रस्तुत नहीं किया था। इसी प्रकार एक अन्य प्रकरण क्रमांक आरसीटी 4137 । 2020 जो भोपाल जिला न्यायालय में लंबित है इसमें भी फरियादी को करोड़ों रुपए नकद भुगतान करने का उल्लेख किया गया है। इस नकद राशि का भी कोई वैध स्रोत नहीं बताया गया है। ये रकम उसके पास कहां से आई यही जांच का विषय है।
    गौरतलब है कि प्रकाश चंद्र गुप्ता लंबे समय से काले धन और हवाला का कारोबार कर रहा है। इसकी सूचनाएं कई बार पुलिस और अन्य जांच एजेंसियों को भी दी जा चुकी हैं। वह कंप्यूटर व्यवसायियों के अलावा समाज के हर वर्ग के लोगों को झांसा देकर करोड़ों रुपयों की ठगी करता रहा है। अधिक ब्याज का प्रलोभन देकर वह लोगों से रकम एंठता है फिर वह रकम डकार जाता है। इसके अपराध करने के तरीकों पर पुलिस ने लगभग पांच दर्जन प्रकरण दर्ज किए हुए हैं। पास्को एक्ट के एक अपराध में वह जमानत पर छूटा है। केनरा बैंक धोखाघड़ी प्रकरण में भी वह लगभग सवा महीने जेल में बंद रहा था। बाद में अदालत के सामने मामले का निपटारा करने की गुहार पर उसे जमानत पर छोड़ा गया था।
    ज्ञात हो कि वर्ष 2006-07 में भी प्रकाश चंद्र गुप्ता ने ठगी करते हुए पंजाब नेशनल बैंक की हबीबगंज शाखा से 32 लाख रुपए की धोखाधड़ी की थी। इस प्रकरण में उसने झूठे दस्तावेजों के आधार पर बैंक से लगभग पैंसठ लाख रुपए वसूले थे। पुलिस सूत्रों के अनुसार प्रकाश गुप्ता एक आदतन अपराधी है। पुलिस के पास विगत पच्चीस सालों से उसका आपराधिक रिकार्ड है। अपराध को छुपाने के लिए वह न्याय व्यवस्था के सामने झूठे साक्ष्य गढ़कर खुद को बचाता आ रहा है।

  • दवा माफिया पर सर्जिकल स्ट्राईक

    दवा माफिया पर सर्जिकल स्ट्राईक


    देश की प्रख्यात बड़ी बड़ी अस्पतालों के चढ़ते शेयर और आम जनता के घटते स्वास्थ्य ने दुनिया के तमाम देशों के बीच भारत की भारी बदनामी कराई है। बेशक भारत में स्वास्थ्य सुविधाओं का ढांचा मजबूत हुआ है ।बढ़ते संसाधनों के बीच आम नागरिक की औसत आयु भी बढ़ी है, इसके बाद भी आम आदमी को स्वस्थ रहने की जितनी बड़ी कीमत चुकानी पड़ रही है वह चिंताजनक है। दवा माफिया के इस मायाजाल को काटने के लिए केन्द्र सरकार ने प्रधानमंत्री जनऔषधि परियोजना शुरु की थी। अगले चरण के रूप में दवाईयों की कीमतें मनमाने ढंग से बढ़ाने वाले दवा माफिया पर प्रहार किया गया है। केन्द्र की फार्मेसी काऊंसिल और राज्यों की फार्मेसी काऊंसिलों ने फार्मेसी एक्ट के अधिकारों का प्रयोग करते हुए दवाईयों पर मनमानी एमआरपी प्रकाशित करने और छूट देकर ग्राहकों को आकर्षित करने के काले कारोबार पर करारा प्रहार किया है।


    मध्यप्रदेश में केमिस्ट्स एंड ड्रगिस्ट्स एसोसिएशन (एमपीसीडीए) ने दवाओं के अनुचित डिस्काउंट, प्रचार और छूट के माध्यम से होने वाले उपभोक्ता शोषण और स्वास्थ्य जोखिमों को दृष्टिगत रखते हुए मध्य प्रदेश राज्य फार्मेसी कौंसिल से निवेदन किया था कि वह इस पर रोक लगाने के लिए आवश्यक दिशा निर्देश जारी करे। इसके बाद 26 जुलाई 2025 को काऊंसिल ने दवाओं पर छूट के नाम पर अनुचित मुनाफा कमाने वाले दवा माफिया के विरुद्ध दिशा निर्देश जारी किए हैं। राज्य सरकार के ड्रग कंट्रोलर, ड्रग आफिसर और ड्रग इंस्पेक्टरों ने दवा माफिया के इस जाल के विरुद्ध जांच भी शुरु कर दी है। जल्दी ही दवाओं की मूल कीमतों और इनके बेमेल काम्बीनेशन के विरुद्ध कार्रवाई करने की तैयारियां भी कीं गईं हैं।


    इस आदेश के माध्यम से फार्मेसी कौंसिल ने यह निर्देशित किया है कि रजिस्टर्ड फार्मासिस्ट किसी भी प्रकार के छूट, ऑफर, बोर्ड, बैनर अथवा प्रचार सामग्री का उपयोग न करें, और उल्लंघन की स्थिति में नियमानुसार अनुशासनात्मक कार्यवाही की जाएगी। यह निर्णय न केवल फार्मेसी अधिनियम, 1948 तथा फार्मेसी प्रैक्टिस रेगुलेशन्स, 2015 की भावना के अनुरूप है, बल्कि आम नागरिकों की स्वास्थ्य सुरक्षा और जीवन रक्षा की दिशा में एक दूरदर्शी और प्रभावशाली पहल भी है।


    छूट आधारित दवा बिक्री के कारण घटिया या नकली दवाओं की आपूर्ति में वृद्धि हो रही है। डाक्टर जिन दवाओं को अनुशंसित करता है,केमिस्ट उन्हें बदलकर छूट के नाम पर दूसरी दवाएं थमा देता है। इससे रोगियों में दवाओं के विरुद्ध एंटीबायोटिक रेजिस्टेंस जैसी जटिलताएं बढ़ रहीं हैं।


    देश में दवाओं के मूल्य तय करने की जवाबदारी राष्ट्रीय औषधि मूल्य निर्धारण प्राधिकरण (NPPA) को दी गई है। उसने पहले से ही शेड्यूल दवाओं पर 8-16% और नॉन-शेड्यूल पर 10-20% तक मार्जिन निर्धारित कर रखा है। प्रतिस्पर्धा की अंधी दौड़ में कुछ प्रतिष्ठान छूट के नाम पर अनैतिक, अवैध एवं खतरनाक व्यापारिक प्रथाएं अपना रहे हैं — जिनमें सब-स्टैंडर्ड या नकली दवाओं की बिक्री, तथा डॉक्टर के प्रिस्क्रिप्शन में मनमर्जी से परिवर्तन शामिल हैं।
    प्रिस्क्रिप्शन से इतर या गलत दवा दिए जाने से जीवन संकट में पड़ सकता है, विशेषकर गंभीर बीमारियों, हार्ट, कैंसर, डायबिटीज या मानसिक रोगों के मामलों में ये दवाएं मरीज को नुक्सान पहुंचा सकती हैं। छूट के नाम पर घटिया गुणवत्ता की या एक्सपायर्ड दवाओं की खपत बढ़ रही है, जिससे रोग ठीक होने के बजाय और गंभीर हो सकता है। मरीजों में AMR एंटी माइक्रोबियल रेजिस्टेंस , एंटीबायोटिक रेजिस्टेंस, दवा का अप्रभावी होना, और एलर्जी या दुष्प्रभाव की घटनाएं बढ़ रही हैं।


    दवाएं बदल दिए जाने से मरीज को जो क्षति उठानी पड़ती है उससे डॉक्टर-फार्मासिस्ट के बीच भरोसे का रिश्ता कमजोर होने लगा है। समाज में फार्मेसी पेशे के प्रति विश्वास धीरे-धीरे समाप्त हो रहा है, जिससे पूरे हेल्थकेयर सिस्टम की छवि प्रभावित हो रही है।
    केरल उच्च न्यायालय ने 31 जनवरी 2025 को पारित आदेश में फार्मासिस्टों को डिस्काउंट आधारित विज्ञापन न करने के स्पष्ट निर्देश दिए गए थे। महाराष्ट्र, पंजाब, गोवा, मणिपुर, छत्तीसगढ़, आदि राज्यों की फार्मेसी काउंसिल्स और ड्रग कंट्रोलर जम्मू कश्मीर भी इस विषय में स्पष्ट परामर्श जारी कर चुके हैं।

    दवा कारोबारियों ने दवा माफिया की चुनौती पर प्रहार करने के बाद मध्यप्रदेश फार्मेसी काऊंसिल के अध्यक्ष संजय जैन का अभिनंदन किया।


    एसोसिएशन ने फार्मेसी काऊंसिल के इस निर्देश पर प्रभावी अमल करने के लिए मुख्यमंत्री डाक्टर मोहन यादव को पत्र लिखकर अनुरोध किया है कि वे संबंधित विभागों विशेष रूप से औषधि नियंत्रण प्रशासन (Drug Control Department) को आवश्यक निर्देश जारी करें, ताकि इस निर्णय का पालन सभी फार्मेसी आउटलेट्स को अनिवार्य रूप से करना पड़े।


    फार्मेसी क्षेत्र के जानकारों का कहना है कि दवाईयों की दूकानों पर अलग अलग डिस्काऊंट के बोर्ड लगे होते हैं जिनमें एक ही किस्म की अलग अलग कंपनियों से बनी दवाएं अलग अलग रेट पर बेची जा रहीं हैं। कुछ सालों से दवा माफिया ने दवा निर्माण के साथ साथ मार्केटिंग का जो तंत्र विकसित किया है उसमें डाक्टरों के साथ सांठ गांठ की गई है। इस दवा माफिया ने प्रचलित ब्रांडों की दवाओं से मिलते जुलते नामों से कंपनियां बना लीं हैं। ये दवाईयां थर्ड पार्टी के लाईसेंस से बनाई जा रहीं हैं।इन दवाईयों पर पहले से कई गुना अधिक एमआरपी लिखवा दी जाती है फिर उस पर डिस्काउंट देकर छूट का कारोबार चलाया जाता है।


    फार्मेसी प्रेक्टिस एक्ट 2015 के अध्याय 7 एवं 8 में उल्लेख किया गया है की फार्मासिस्ट कोई भी ऐसा कार्य यह प्रचार प्रसार नहीं कर सकता जो की जनता को भ्रमित करें । इसी के तहत डिस्काउंट के बोर्ड लगाकर जनता को भ्रमित करना एक्ट के विरुद्ध है। इन सब को देखते हुए देश के 6 प्रदेशों में इस तरह के कार्य नहीं करने के लिए काउंसिल द्वारा समाचार पत्रों में सूचना प्रकाशित की गई है इसी के क्रम में मध्य प्रदेश में भी यह सूचना जारी की गई है। फार्मेसी एक्ट के तहत नियमों का पालन कराना काउंसिल के दायरे में आता है इसमें उनके साथ फूड एंड ड्रग का योगदान महत्वपूर्ण होता है।जम्मू एवं कश्मीर के ड्रग कंट्रोलर ने ही इसी तरह के निर्देश जारी किए हैं।


    दवाओं की गुणवत्ता और इनके बाजार मूल्यों पर नियंत्रण के लिए भारत में पहली बार इस तरह का अभियान सरकारी तंत्र की पहल पर चलाया जा रहा है। इससे जहां कुकरमुत्तों की तरह उग आईं नकली दवाओं की कंपनियों पर रोक लगेगी वहीं दवा कंपनियों की सांठगांठ से चलने वाले असपतालों की लूट से भी उपभोक्ताओं को बचाया जा सकेगा।

    मध्यप्रदेश फार्मेसी काऊंसिल के अध्यक्ष संजय जैन कहते हैं कि दवाओं की गुणवत्ता स्थापित करने के लिए नकली दवा कंपनियों पर रोक लगाना जनहित का कार्य है। निश्चित रूप से भारत सरकार ने दवा माफिया पर लगाम लगाने की जो मुहिम चलाई है उसका लाभ देश के दवा उद्योग और दवाईयों का निर्यात करने वाली कंपनियों को भी मिलेगा।दवा निर्माण का लाईसेंस देने में स्थानीय अधिकारियों ने जो गोरख धंधा चला रखा है इस मुहिम से उसे भी नियंत्रित करने में मदद मिलेगी। भारत की दवाओं की साख बढ़ाने के इस अभियान से सरकारी अस्पतालों में सप्लाई की जाने वाली दवाओं पर भी पड़ेगा जो भारत के आम लोगों के स्वास्थ्य के पैमाने पर एक सार्थक प्रयास साबित होगा।

  • एमपी पुलिस ने चलाया नशा रोकने का अभियान

    एमपी पुलिस ने चलाया नशा रोकने का अभियान

    भोपाल, 15 जुलाई 2025। पुलिस महानिदेशक श्री कैलाश मकवाणा ने आज मंगलवार 15 जुलाई 2025 को पुलिस मुख्‍यालय, भोपाल में आयोजित प्रेस कॉंफ्रेंस में मध्‍यप्रदेश पुलिस द्वारा 15 जुलाई से 30 जुलाई तक चलाए जाने वाले वृहद नशा मुक्ति जन-जागरूकता अभियान ‘’नशे से दूरी-है जरूरी’’ का शुभारंभ माननीय मुख्‍यमंत्री डॉ. मोहन यादव के संदेश तथा अभियान के पोस्‍टर का विमोचन कर किया।

          डीजीपी श्री मकवाणा ने कहा कि माननीय मुख्‍यमंत्री जी की प्रेरणा से समाज में नशे की प्रवृत्ति की प्रभावी रोकथाम के यह जनजागरूकता अभियान ‘’नशे से दूरी-है जरूरी’’ मध्‍यप्रदेश पुलिस द्वारा चलाया जा रहा है। उन्‍होंने कहा कि ड्रग्‍स- ये शब्‍द सुनते ही दिमाग में कई दृश्‍य उभरते हैं- दुर्बल शरीर, नशीली आंखे, धुऐं का गुबार और अंधकार। मादक पदार्थों के सेवन की लत कई युवाओं को खोखला कर उनके परिवारों को भी बर्बाद कर रही है। देश एवं प्रदेश के शीर्षस्‍थ राजनैतिक नेतृत्‍व भी इस विकराल समस्‍या से चितिंत एवं इसके निदान हेतु प्रयासरत है। हम सभी की ये नैतिक जिम्‍मेदारी है कि इसके दुष्‍प्रभावों से विशेषकर किशोर बच्‍चों और युवाओं को अवगत कराएँ और नशे से दूर रखें। उन्‍होंने कहा कि ‘’हमारा है यही संदेश- नशा मुक्‍त हो मध्‍यप्रदेश’’

    इस अवसर पर विशेष पुलिस महानिदेशक सी आई डी श्री पवन श्रीवास्तव, अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक नारकोटिक्स श्री के.पी.वेंकटेश्वर, पुलिस महानिरीक्षक ए.एन. ओ. डॉ. आशीष, पी एस ओ टू डीजीपी श्री विनीत कपूर, सहायक पुलिस महानिरीक्षक श्री संजीव कुमार कंचन एवं एसओ टू डीजीपी श्री मलय जैन उपस्थित रहें।

    इनकी रहेगी महत्‍वपूर्ण भूमिका

    अभियान में उच्च शिक्षा विभाग, ग्रामीण विकास विभाग, सामाजिक न्याय विभाग, खेल एवं युवा कल्याण विभाग, तकनीकी शिक्षा विभाग, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग, नगरीय विकास एवं आवास विभाग, स्कूल शिक्षा विभाग सहित अन्‍य विभाग, एनजीओ, धार्मिक संस्‍थान आदि की सक्रिय सहभागिता रहेगी।  

  • राजा भोज हवाईअड्डे पर संदिग्ध लोगों की घुसपैठ

    राजा भोज हवाईअड्डे पर संदिग्ध लोगों की घुसपैठ


    भोपाल,14 मई(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)। राजा भोज विमान तल इन दिनों कई संदिग्ध गतिविधियों की वजह से संदेह के घेरे में आ गया है। संदिग्ध कर्मचारियों की घुसपैठ, हवाला तस्करों की आवाजाही और निर्माण संबंधी घोटालों की वजह से न केवल भोपाल बल्कि देशविदेश की हवाई यात्रा करने वालों के लिए ये विमानतल असुरक्षित होता जा रहा है। भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण और टाटा के स्वामित्व वाली इंडियन एयरलाईंस जैसी दो एजेंसियों के बीच तालमेल न बन पाने की वजह से कई असामाजिक तत्व भी हवाई यात्रा के मार्ग में विषकंटक बन गए हैं।


    ताजा मामला एक संदेहास्पद कर्मचारी को घुसपैठ कराने और फिर उसे बचाने का सामने आया है। भोपाल एअरपोर्ट पर एआईएएसएल का कर्मचारी गुलरेज आठ दिन की छुट्टी पर था, वापस आया और बिना किसी परमिशन के चुपके से ड्यूटी आरंभ कर दी।उसकी ड्यूटी आरंभ कराने में एअर इंडिया के ही एक सीनियर असिस्टेंट नासिर खान ने मुख्य रोल निभाया । हाइली सेंसटिव एरिया माने जाने वाले इस एअरपोर्ट पर युद्ध की आशंका से अतिरिक्त सुरक्षा ऐहतियात बरते जा रहे हैं । इस गुलरेज नाम के कर्मचारी का एयरपोर्ट एंट्री पास खत्म होने के बावजूद नासिर खान ने इसकी सूचना अपने अधिकारियों को नहीं दी। यह 9 मई से लगातार बिना पास के नौकरी करता रहा।बाहर मई को एअर इंडिया के एक सुरक्षा कर्मचारी ने विमान पर ड्यूटी कर रहे गुलरेज का पास चैक किया तो वह सदमे में आ गया कि किसी भी हो जाने वाली वारदात के चपेटे में वह स्वयं भी आ सकता है। एअरपोर्ट पर केन्द्रीय सुरक्षा एजेंसी सीआईएसएफ की इतनी बड़ी चूक को अब छुपाया जा रहा है।
    कर्मचारियों का कहना है कि गुलरेज खान के विरुद्ध कोई कार्रवाई केवल इसलिए नहीं की जा रही है क्योंकि एआईएएसएल के उत्तरी क्षेत्र का मुख्य अधिकारी अब्दुल गफ्फार खान है और नासिर खान, अब्दुल गफ्फार खान का खास कर्मचारी है।


    एक अन्य मामले में एअर इंडिया का एक संदिग्ध अधिकारी पारेश गांधी भोपाल में पदस्थ था। उसे महिला कर्मचारियों का यौन शोषण, भ्रष्टाचार, हेराफेरी आदि केसों में तीसरी बार सस्पेंड किया गया है। इस मामले में इन दिनों विजिलेंस की जांच भी भोपाल एयरपोर्ट पर चल रही है।बताते हैं कि इसने अब्दुल गफ्फार खान के साथ लगभग डेढ़ साल पहले ग्वालियर एअरपोर्ट पर हुई भर्ती में खुलकर भ्रष्टाचार किया । इस भर्ती के लिए हुए इंटरव्यू में कुछ लड़के भोपाल के भी चुने गए थे। भ्रष्टाचार में डूबे इन अधिकारियों ने इन योग्य लड़कों की सूची रोक ली। कुछ दिनों बाद अब्दुल गफ्फार खान ने इन लड़कों के स्थान पर कई मुस्लिम युवकों को भर्ती करवा दिया। अब्दुल गफ्फार खान उत्तरी क्षेत्र का सर्व सर्वा है और उसने चुपके से हुई इन भर्तियों की भनक किसी को नहीं लगने दी।ये सभी कर्मचारी बगैर पहचान पत्र जारी हुए आज भी नौकरी कर रहे हैं। इस बात की जानकारी कई राष्ट्रीय स्तर के मुस्लिम नेताओं को भी दी गई लेकिन उन्होंने जातिगत शोरशराबे में इस पर अपनी आंखें मूंद लीं।


    कतिपय कर्मचारियों का कहना है कि एक महिला अधिकारी का शारीरिक शोषण करके चुपके से छः छः महीने के अनुबंध पर भोपाल में ज्वाइनिंग दी गई थी,जब यह राज खुलने का अंदेशा हुआ तो से उस महिला अधिकारी को दिल्ली स्थानांतरित कर दिया। अब्दुल गफ्फार खान एयर इंडिया की उस ग्राऊंड हैंडलिंग कंपनी का मुखिया है जो पैंतीस हवाई अड्डों के प्रबंधन का कार्य संभालती है। यही वजह है कि छुटपुट सुगबुगाहट वहीं दबा दी जाती है। संदिग्ध कर्मचारी गुलरेज और अब्दुल गफ्फार खान के बीच क्या रिश्ता है ये व्यापक जांच में ही पता चल सकता है।सूत्रों का कहना है कि जब गुलरेज विमान पर बिना पास के पाया गया है और यह गतिविधी संदिग्धता की श्रेणी में आती है तो सीआईएसएफ ने उसपर केस दर्ज क्यों नहीं किया,उसपर थाने में प्राथमिकी दर्ज नहीं की गई।नासिर खान जो चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी सुपरवाइजर है, उसे निलंबित क्यों नहीं किया गया।

  • हवाला की आहूति से आईएएस कैसे बन पाएंगी माया अवस्थी

    हवाला की आहूति से आईएएस कैसे बन पाएंगी माया अवस्थी


    भोपाल,16 अप्रैल(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)। मध्यप्रदेश की फूड एंड ड्रग कंट्रोलर कार्यालय की संयुक्त नियंत्रक माया अवस्थी की महत्वाकांक्षाएं राज्य की भाजपा सरकार के लिए गले में बंधा पत्थर बनती जा रहीं हैं। प्रशासन का दुरुपयोग करके उन्होंने भजकलदारम का जो खेल शुरु कर दिया है उससे राज्य की जनता विषैले खाद्य पदार्थों का सेवन करने के लिए मजबूर हो गई है। यही नहीं राजा भोज एयरपोर्ट के विमानपत्तन निदेशक रामजी अवस्थी की पत्नी होने के नाते उन्होंने सरकार को जो वीआईपी ट्रीटमेंट दिलाना शुरु किया है उससे वे कई मंत्रियों की गुडबुक में पहुंच गईं हैं। हालांकि इस वीआईपी ट्रीटमेंट की आड़ में कथित तौर पर उन्होंने हवाला कारोबारियों को वायु मार्ग से रकम पहुंचाने का गोरख धंधा भी चला रखा है। हवाला की इसी कमीशन के बलबूते वे राज्य प्रशासनिक सेवा से पदोन्नति पाकर आईएएस बनने का ख्वाब देख रहीं हैं.


    सत्ता के गलियारों से जो खबरें छन छनकर बाहर आ रहीं हैं उनसे पता चल रहा है कि राज्य प्रशासनिक सेवा की अधिकारी माया अवस्थी इन दिनों आईएएस बनने का अनुष्ठान बड़ी तन्मयता से चला रहीं हैं। इसके लिए उन्होंने अपने पति की मदद से मंत्रियों को हवाई अड्डे पर वीआईपी ट्रीटमेंट दिलाना शुरु कर दिया है। मंत्रियों की इसी करीबी का लाभ लेकर उन्होंने खाद्य अपमिश्रण करने वाले व्यापारियों से अवैध वसूली का नेटवर्क चला रखा है। हर संभागीय और जिला फूड अधिकारी को हर महीने शहर के अनुसार पेटियां लेकर राजधानी पहुंचना पड़ता है। विभाग के ही त्रस्त अधिकारियों का कहना है कि मैडम का वसूली अंदाज बड़ा खौफनाक है। वे उप मुख्यमंत्री और स्वास्थ्य मंत्री राजेन्द्र शुक्ल को अपना मामा बताती हैं।विमानपत्तन निदेशक पद पर पदस्थ अपने पतिदेव रामजी अवस्थी की मदद से उन्होंने रीवा में हवाई अड्डा शुरु करने के प्रोजेक्ट को मंजूरी दिला दी है। इसी प्रोजेक्ट की आड़ में उन्होंने वसूली का कारोबार धड़ल्ले से खोल दिया है।

    रामजी अवस्थीःहवाला कारोबार की आड़ में पत्नी को आईएएस बनाने का बीड़ा उठाया


    स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा राज्य मंत्री नरेन्द्र शिवाजी पटेल पर तो मैडम ने वो जादू चला दिया है कि उन्हें आसमान से सोना झरता नजर आने लगा है। माया अवस्थी का फरमान राज्य के कोने कोने में व्यापारियों और सड़कों पर खड़े रेहड़ी वालों तक पहुंच गया है कि यदि उन्हें अपना कारोबार चलाना है तो सरकार की सेवा करनी होगी। तुम नकली खाद्य सामग्री बेचो या कम तौलो कोई तुम्हें नहीं छुएगा । यही वजह है कि राज्य में नकली खाद्य सामग्री धड़ल्ले से बिक रहीं हैं.


    जिन व्यापारियों की खाद्य सामग्री का नमूना फेल करना होता है तो उसे राज्य की सरकारी प्रयोगशाला में भिजवा दिया जाता है जहां नमूना मिलावटी पाया जाता है। जिन व्यापारियों को माफी देनी होती है तो उनके नमूने लैब की व्यस्तता का बहाना बनाकर निजी लैबों में भिजवा दिया जाता है। बताते हैं कि इन लैबों से हर महीने तगड़ी वसूली की जाती है। इसका प्रमाण उन लैबों के भुगतानों से सहज प्राप्त किया जा सकता है। मैडम खुद फाईल भेजकर उनके भुगतान जारी करवाती रहती हैं। खाद्य एवं औषधि प्रशासन के अधिकारियों कर्मचारियों के मामलों की फाईलें या तो ढंडे बस्तों में डाल दी जाती हैं या फिर दलालों के माध्यम से उन्हें भजकलदारम की पगडंडी पर धकेल दिया जाता है।

    नरेन्द्र शिवाजी पटेलः प्रदेश के उपमुख्यमंत्री को झमेले में फंसाने की नादानी


    इस कार्य के लिए मैडम ने स्थापना शाखा में एक तृतीय श्रेणी कर्मचारी को पदस्थ कर रखा है। राजेन्द्र मेहरा नाम का ये कर्मचारी वास्तव में चतुर्थ श्रेणी का कर्मचारी है। इसे गैरकानूनी तरीके से तृतीय श्रेणी अधिकारी बना दिया गया था। यह वहां पदस्थ अन्य कर्मचारियों को धमकाकर वसूली का कारोबार चलाता है। इसे पदोन्नति की पात्रता न होने की वजह से पदावनत किया जाना चाहिए था लेकिन मैडम की कृपा ने इसे विभाग का दबंग व्यक्ति बना दिया है।


    सूत्र बताते हैं कि हवाला का नेटवर्क चलाने वाले व्यापारियों के चंदे की आड में ही मैडम ने अपने पति की मदद से हवाई सेवा को कूरियर सर्विस की तरह चला रखा है। एयरपोर्ट का प्रबंधन भले ही विमानपत्तन प्राधिकरण के हाथ में हो लेकिन विमान तल की सुरक्षा का दायित्व टाटा के स्वामित्व वाली एयर इंडिया की एजेंसी सीएआईएएसएल के पास है। उसकी स्वयं की इनोवा गाडियां वीआईपी को विमान में बैठाने के लिए लगाई गईं हैं। मैडम अवस्थी के पतिदेव रामजी अवस्थी हर वीआईपी को अपने स्वागत कक्ष में बिठाते हैं और फिर उन्हें उनके निजी सामान समेत स्वयं अपनी कार में बिठाकर विमान के दरवाजे तक पहुंचाते हैं। इस पूरी प्रक्रिया में किसी प्रकार की चैकिंग नहीं की जाती है। सुरक्षा एजेंसी को मालूम रहता है कि वीआईपी को लाने ले जाने में जब इतना बड़ा अधिकारी स्वयं मौजूद है तो फिर हम क्यों पंगा लें।


    दरअसल एयर इंडिया के निजीकरण के दौरान लगभग पच्चीस हजार कर्मचारियों को निजी एजेंसियों के माध्यम से ठेके पर रखा गया है। टाटा वाली एयर इंडिया इनके मामले में ज्यादा दखलंदाजी नहीं करती क्योंकि उन कर्मचारियों का वेतन पुरानी शर्तों के आधार पर विमानपत्तन प्राधिकरण ही देता है। नियोक्ता एजेंसी उन कर्मचारियों का वेतन मनमर्जी से देती है । मजबूर कर्मचारी कुछ नहीं बोल पाते इसलिए विमानपत्तन अधिकारी होने का लाभ लेकर रामजी अवस्थी कथित तौर पर हवाला कारोबारियों को वीआईपी बताकर उनके लगेज समेत विमान में बिठाकर आते हैं। ग्राऊंड हैंडलिंग एजेंसी के कर्मचारी इसमें हस्तक्षेप नहीं कर पाते। जिस सीआईएसएफ को सुरक्षा के लिए तैनात किया गया है उसे गच्चा देकर इस मार्ग से हवाला की रकम और कारोबारी सुरक्षित बच निकलते हैं।


    हवाला का ये कारोबार इतना मजबूत है कि इसका लाभ सरकार में बैठे नेता और आला अफसर सभी उठाते हैं। राज्य से पिछले बीस सालों में चुराए गए लगभग साढ़े तीन लाख करोड़ रुपयों को इसी तरह अन्य प्रदेशों या देशों तक पहुंचाया जाता रहा है। यही वजह है कि माया अवस्थी आज सरकार के कई बड़े नेताओं की नाक का बाल बन गईं हैं। उन्हें पूरा भरोसा है कि राज्य सरकार उनका नाम आईएएस की प्रमोशन सूची में केन्द्र के पास पहुंचाएगी। केन्द्र सरकार में भी बैठे कई लोग उन्हें एक सुविधा प्रदान करने वाली अधिकारी के रूप में जानते हैं । इसका लाभ लेकर वे आईएएस जरूर बन जाएंगी। मैडम का कुर्सी अभियान भले ही सबकी आंखों में धूल झोंककर चल रहा हो लेकिन इससे सरकार की खूब किरकिरी हो रही है। राज्य के घोटाले बाजों की इस कड़ी पर मोदी की न खाऊंगा न खाने दूंगा वाली निगाह अब तक क्यों नही पहुंची ये शोध का विषय है।

  • बलूचिस्तान ट्रेन हाईजैक कांड के बाद पाक में तैनात होगी लाल सेना

    बलूचिस्तान ट्रेन हाईजैक कांड के बाद पाक में तैनात होगी लाल सेना

    China On Train Hijacking : बलूचिस्तान में ट्रेन हाईजैक के बाद से पाकिस्तान में हड़कंप मच गया है। वहां की सरकार समझ नहीं पा रही है कि अब वो क्या करें। वहीं पाकिस्तान से ज्यादा टेंशन इस वक्त चीन को सता रही है।

    इस घटना से चीन की सांसे अटकी हुई हैं। BLA पाकिस्तान के साथ-साथ चीन के लिए भी सिर दर्द बना हुआ है। बलूच विद्रोही पहले ही चीन को धमकी दे चुके हैं कि वो अपना कारोबार बलूचिस्तान से समेटकर यहां से निकल जाएं। बता दें कि चीन अब तक अपने CPEC प्रोग्राम में करोड़ो डॉलर लगा चुका है। अगर अब चीन अपने पैर वापस खिचता है तो उसको भारी नुकसान होगा। चीन का प्लान था कि वो बलूचिस्तान के रास्ते अपने एनर्जी ट्रेड को सुरक्षित करना चाह रहा था, लेकिन इस हमले के बाद CPEC ही सुरक्षित नही दिख रहा। वहीं इलाके में पाक सेना की हालत देख चीन की टेंशन और ज्यादा बढ़ गई है। पाकिस्तान की तरफ से चीन को हर संभव सुरक्षा देने का वादा किया गया था, जो होते हुए नजर नहीं आ रहा है। ट्रेन हाईजैक के बाद पहली बार इस हमले के लेकर चीन का बयान सामने आया है।

    चीन ने हमले के लेकर क्या कहा?

    ट्रेन हाईजैक को लेकर चीन की प्रवक्ता माओ निंग ने कहा, चीन हर तरह के आतंकवाद का विरोध करता है। चीन पाकिस्तान को आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में पूरी मजबूती के साथ सहयोग देता रहेगा। ताकि क्षेत्र में शांति, क्षेत्र में शांति, सुरक्षा और स्थिरता बनी रहे। इस बयान के बाद एक बार फिर से इस बात के कयास लगाए जा रहे है कि कहीं चीन अपनी सेना को ही पाकिस्तान में CPEC की सुरक्षा में तैनात ना कर दे। अब इस बयान के बाद ऐसे क्यास लगाए जा रहे हैं कि आने वाले समय में चीन अपनी सेना को पाकिस्तान में भेज सकता है।

    पाक में तैनात होगी चीनी सेना

    चीन की महत्वाकांक्षी परियोजना CPEC प्रोजेक्ट पर इस वक्त बड़ा खतरा मंडरा रहा है। अब तक उसने इसमें करोड़ो डॉलर खर्च कर चुका है। लेकिन पाकिस्तान चीनी नागरिकों की सुरक्षा को सुनिश्चित नहीं कर सका। रिपोट के मुताबिक 2022 से चीन लगातार CPEC के प्रोजेक्ट पर काम कर रहे चीनी इंजीनियरों और कर्मचारियों की सुरक्षा को लेकर चिंतित था। उनकी सुरक्षा के लिये चीनी सुरक्षाबलों की यूनिट तैनात करने को कहा था लेकिन रिपोर्ट की मानें तो पाकिस्तान ने उसे सिरे से खारिज कर दिया था लेकिन चीनी दबाव के चलते जल्द चीन और पाकिस्तान के बीच ज्वाइंट सिक्योरिटी कंपनीज फ्रेमवर्क ( एंटी टेररिज्म कॉपरेशन) पर दस्तखत हुए हैं। इसके बाद ऐसा माना जा रहा है कि बलूचिस्तान में चीनी सुरक्षाबलों की तैनाती हो सकती है। इस फ्रेमवर्क के तहत जिस जगह चीनी नागरिक काम कर रहे होंगे उनकी सुरक्षा घेरों की होंगे. अंदर वाला घेरा चीनी ट्रूप के पास को बाहरी घेरा पाकिस्तानी सुरक्षाबलों के हाथों में होगी।

  • हाईकोर्ट बोला केनरा बैंक ठगी में जेलबंद रहेगा प्रकाशचंद्र गुप्ता

    हाईकोर्ट बोला केनरा बैंक ठगी में जेलबंद रहेगा प्रकाशचंद्र गुप्ता



    भोपाल, 15 मार्च(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)। केनरा बैंक की मैनेजर से दो करोड़ इक्कीस लाख रुपए की ठगी करने वाले बूटकाम सिस्टम्स के प्रकाश चंद्र गुप्ता की जमानत याचिका को हाईकोर्ट ने केस डायरी आने तक लंबित कर दिया है। उसके आपराधिक रिकार्ड को देखते हुए अदालत ने कहा है कि गुप्ता को आपराधिक पृष्ठभूमि के कारण प्रकरण क्रमांक MCRC/11442/2025 में जमानत पर छोड़ने का कोई तर्क मान्य नहीं किया जा सकता।केनरा बैंक प्रबंधन ने अदालत में केविएट दायर की थी कि इस तरह के किसी जमानत आवेदन पर सुनवाई से पहले बैंक का पक्ष सुना जाए। गुप्ता फिलहाल भोपाल केन्द्रीय जेल में बंद है और उसकी जमानत के लिए कई बड़े सूदखोरों ने न्यायपालिका से जुड़े अपने दलालों को सक्रिय कर रखा है। केनरा बैंक और उसकी मैनेजर ने जो प्राथमिकी दर्ज कराई है उसमें गुप्ता प्रथम दृष्टया अपराधी नजर आ रहा है।


    विधिक जानकारों के अनुसार कंप्यूटर व्यवसायी के रूप में पहचान बनाने वाला लालगंज का ठग प्रकाशचंद्र गुप्ता वास्तव में सफेदपोश अपराधी है। उसने समाज के कई प्रतिष्ठित लोगों से ठगी करके वह रकम बैंकों से कई हजार करोड़ रुपये का कर्ज लेने वाले माफिया के पास जमा कराए हैं। इस राशि पर वह हर महीने मोटा ब्याज प्राप्त करता है। इसी धनराशि से वह अदालती दांवपेंच खेलकर जजों के अपने प्रभाव में लेता है और आपराधिक चरित्र के वकीलों की मदद से हर बार बच निकलता रहा है।इसके बावजूद भोपाल पुलिस ने जो तथ्य अदालत के समक्ष प्रस्तुत किए हैं वे उसके आपराधिक चरित्र के अटल साक्ष्य बन गए हैं।


    भोपाल पुलिस लंबे समय से उसके आपराधिक कारनामों के साक्ष्य जुटाती रही है। हर बार वह कुछ निजी हस्ताक्षर विशेषज्ञों और फोरेंसिक एक्सपर्ट की मदद से फर्जी साक्ष्य बनाकर अदालतों की आंखों में धूल झोंकता रहा है। इस बार केनरा बैंक घोटाले में वह साफ तौर पर अदालत के हत्थे चढ़ा है। उसके विरुद्ध पास्को एक्ट का भी एक गंभीर मुकदमा चल रहा है ।उसने अपने मकान को गिरवी रखकर केनरा बैंक से दो करोड़ साठ लाख रुपए का कर्ज लिया था। इस राशि पर उसे मासिक ब्याज की किस्त भरना पड़ती थी लेकिन उसने अप्रैल 2023 से ब्याज देना बंद कर दिया था। इसी वसूली के लिए जब केनरा बैंक कोहेफिजा की मैनेजर उसकी दूकान पर पहुंची तो उसने मैनेजर व उसके सहयोगी को एक लाख 21 हजार रुपए दिए पर अपनी जमा परची में इस राशि को दो करोड़ इक्कीस लाख बीस हजार रुपए लिख लिया । इन फर्जी दस्तावेजों के आधार पर वह सरफेसी एक्ट में मकान नीलामी के विरुद्ध अदालत जा पहुंचा। यहां धोखाघड़ी पकड़ी गई और साक्ष्यों के आधार पर ही उसे निचली अदालत ने जेल भेजा था।


    भोपाल के विशेष न्यायाधीश मनोज कुमार सिंह ने प्रकाश चंद्र गुप्ता उर्फ पीसी गुप्ता का जमानत आवेदन इस आधार पर खारिज किया था कि बैंक को सरफेसी एक्ट में उसका मकान नीलाम करने का पूरा हक है। इसके बावजूद उसने बैंक मैनेजर के साथ फर्जी दस्तावेज बनाकर ठगी की है। शासन की ओर से अपर लोक अभियोजक माधुरी पाराशर ने कहा कि गुप्ता ने कूटरचित दस्तावेजों के आधार पर बैंक अधिकारियों को झांसा देने का प्रयास किया है। इसलिए उसे समाज में आजाद रहकर व्यापार करने का कोई हक नहीं है।


    गौरतलब है कि उसकी दो पत्नियां और दो बेटियां इन दिनों उसका कारोबार संभाल रहीं हैं। इसके विरुद्ध कई शिकायत कर्ताओं ने अदालत में आवेदन देकर उसके पारिवारिक सदस्यों को भी ठगी का सहआरोपी बनाने का निवेदन किया है। विघानसभा के पूर्व उपाध्यक्ष राजेन्द्र सिंह जी के बेटे से भी तीन करोड़ रुपए की ठगी करने के आरोप में गुप्ता पहले भी जेल जा चुका है।भोपाल पुलिस ने जिस गंभीरता के साथ उसके विरुद्ध चल रहे सभी प्रकरणों को नत्थी करके अदालत से समक्ष प्रस्तुत किया है उसे देखते हुए गुप्ता की जेल यात्रा इस बार सजा तक जारी रहने की उम्मीद की जा रही है।गुप्ता ने जो धन आम नागरिकों से ठगी करके जुटाया है और ब्याज पर बड़े बैंक घोटालेबाजों के पास जमा कर ऱखा है उस पर उसे लगातार मोटा ब्याज मिल रहा है। इस रकम से वह अदालती खर्च को आसानी से वहन करता चला आ रहा है।

  • केनरा बैंक ठगी में जेल भेजा गया प्रकाश चंद्र गुप्ता

    केनरा बैंक ठगी में जेल भेजा गया प्रकाश चंद्र गुप्ता

    जमा पर्ची में हेरफेर करके बोला केनरा बैंक की मैनेजर स्कूटर पर ले भागी दो करोड़ इक्कीस लाख रुपए

    भोपाल,28 फरवरी (प्रेस इंफार्मेशन सेंटर).केनरा बैंक की मैनेजर से दो करोड़ इक्कीस लाख रुपयों की ठगी करने वाले प्रकाश चंद्र गुप्ता को आज ग्यारहवें जिला एवं अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश ने एक बार फिर जेल भेज दिया है। उसके विरुद्ध आर्थिक ठगी के अलावा पास्को एक्ट का भी प्रकरण दर्ज है। देश भर के विभिन्न शहरों में चल रहे मुकदमों की फेरहिस्त भी जब अदालत के सामने पहुंची तो विद्वान न्यायाधीश ने उसके आपराधिक चरित्र को देखते हुए जमानत आवेदन खारिज कर दिया। भोपाल पुलिस बरसों बाद प्रभावशाली लोगों को झांसा देकर बचते रहे इस सफेदपोश ठग को गिरफ्त में ले पाई है।


    केनरा बैंक में कारोबारी साख का फायदा उठाकर जब बूटकाम सिस्टम्स के प्रोप्राईटर प्रकाश चंद्र गुप्ता ने मकान फायनेंस कराया तब तक बैंक को नहीं पता था कि उसकी शातिर खोपड़ी में क्या चल रहा है। बैंक को तो उसके कारोबार का आयव्यय देखकर लगता था कि वह बड़ा व्यापारी है। हकीकत जब सामने आई तो पुलिस भी देखकर दंग रह गई कि उसकी नाक के नीचे बरसों से ये ठग कैसे लोगों की आंख में धूल झोंकता रहा है। कभी छुरेबाजी करके रायबरेली के लालगंज से फरार हुआ प्रकाश चंद्र गुप्ता कलकत्ता में चाय कारोबार में नौकरी करने लगा था। बाद में चाय का कारोबारी बनकर भोपाल आ गया।यहां भाजपा के छुटभैये नेता के साथ नकली चाय बेचने के आरोप में पकड़ा गया तो उसने अपना धंधा बदलकर कंप्यूटर की दूकान खोल ली। इस बार उस पर बैंक ठगी का जो प्रकरण दर्ज कराया गया है उसमें उसने वही तरीका अपनाया जिसमें वह पंजाब नेशनल बैंक से सफल ठगी कर चुका है।

    प्रकाश चंद्र गुप्ताः केनरा बैंक से ठगी के आरोप में अदालत ने गिरफ्तार करके जेल भेजा.


    राजधानी के कोहेफिजा पुलिस थाने में दर्ज प्राथमिकी क्रमांक 0317 दिनांक 18.05.2024 में थाना प्रभारी ने लिखा कि मै थाना कोहेफिजा मे थाना प्रभारी के पद पर पदस्थ हूं.दिनांक 29/04/2024 को आवेदिका सुधा प्रिया दर्शिका शाखा प्रबंधक केनरा बैंक शाखा कोहेफिजा भोपाल की ओर से एक टाईपशुदा आवेदन पत्र थानाध्यक्ष थाना कोहेफिजा भोपाल के नाम का प्रस्तुत किया गया जिसमे बताया कि अनावेदक प्रकाश चंद्र गुप्ता प्रोप्राईटर बूटकाम सिस्टम एम पी नगर भोपाल का लोन खाता केनरा बैंक शाखा कोहेफिजा मे है जिसके द्वारा केनरा बैंक शाखा कोहेफिजा भोपाल से 03 व्यवसायिक लोन कुल राशि 2,60,00,000/- लिया गया है जिसका अनावेदक प्रकाश चन्द्र गुप्ता को इंस्टालमेन्ट भरना पडता है जब ग्राहक की 3 इंस्टालमेन्ट due हो जाती है तो बैंक द्वारा लोन NPA (Non-Performing Asset) घोषित किया जाता है और बैंक द्वारा ग्राहक को demand notice जारी किया जाता है ।


    दिनांक 08/01/2024 को आवेदिका सुधा प्रिया दर्शिका शाखा प्रबंधक केनरा बैंक कोहेफिजा भोपाल द्वारा अनावेदक प्रकाश चंद्र गुप्ता प्रोप0 बूटकाम सिस्टम एम पी नगर भोपाल को demand Notice तामील कराने के लिए बैंक के दैनिक वेतन भोगी कर्मचारी रोहित नरवरे के साथ प्रकाश चंद्र गुप्ता के कार्यालय एम पी नगर भोपाल अपने व्यक्तिगत दो पहिया वाहन एक्टीवा से पहुंचे वहाँ पर अनावेदक से demand notice पर receiving प्राप्त कर अनावेदक के अनुरोध पर केनरा बैंक की एक जमा पर्ची जिसमें कुल राशि 1,20,000/- शब्दो ओर अंको मे पहले से ही भरी हुई थी. उसके साथ अनावेदक द्वारा उक्त नगद रकम 1,20,000/- दी गई अनावेदक द्वारा आवेदिका से काउन्टर जमा पर्ची पर हस्ताक्षर लिया गया सील ना होने से नही लगाई गई । उक्त नगद रकम को आवेदिका द्वारा लिफाफे मे रख कर अनावेदक के साथ रोहित को बुलाकर अवेदिका के मोबाईल से फोटो लिया गया बाद अनावेदक को शेष रकम भी जल्द जमा करने हेतु समझाईश देकर वापस बैंक आकर उक्त रकम 1,20,000/- केशियर को जमा पर्ची के साथ उसके खाते मे जमा करने हेतु दिये गये ।


    उसी समय प्रबंधक हर्षित द्वारा demand notice पर अनावेदक के हस्ताक्षर चैक किये गये तो अनावेदक प्रकाश चन्द्र गुप्ता दवारा demand notice पर अपने शासकीय कार्यालयीन में किये गये हस्ताक्षर के स्थान पर किसी अन्य प्रकार के हस्ताक्षर पाए गए।


    अनावेदक के हस्ताक्षर सही नही पाये जाने पर दिनांक 08/01/2024 को ही प्रबंधक हर्षित द्वारा पुनः अनावेदक के कार्यालय एम पी नगर मे जाकर हस्ताक्षर लिये गए. दिनांक 09.01.2024 को अनावेदक श्री प्रकाश चन्द्र गुप्ता ने प्रंबधक हर्षित को फोन कर तीनों ऋण खाते का बैलेंस सर्टिफिकेट उपलब्ध कराने के लिए कहा। जिस पर आवेदिका और प्रबंधक हर्षित अनावेदक के कार्यालय एमपी नगर जाकर बैलेंस प्रमाणपत्रों उपलब्ध कराये जाकर लोन खाता मे minimum required amount (11.50लाख लगभग) जमा करने हेतु समझाईश देकर वापस शाखा आ गये ।


    दिनांक 15.01.2024 को शाखा को उक्त अनावेदक श्री प्रकाश चन्द्र गुप्ता से मुख्य प्रबंधक के नाम से डाक से एक लिफाफा प्राप्त हुआ। इस लिफाफे को खोलने पर उसमें ड. बाबा साहब भीमराम अम्बेडकर से संबंधित एक पृष्ठ का नोट पाया गया जिसका श्री प्रकाश चंद्र गुप्ता या उनके खातों से इसका कोई लेना-देना नहीं था।


    दिनांक 08.02.2024 को, आवेदिका, रोहित नरवरे के साथ नियमित तरीके से एमपी नगर में अनावेदक श्री प्रकाश चंद्र गुप्ता के एम.पी. नगर स्थित कार्यालय गई। मुख्य प्रबंधक ने ऋण खातों को पूरी तरह से बंद करने के बजाय उन्हीं खातों को अपग्रेड करने की सलाह दी क्योंकि इसमें कम राशि की आवश्यकता थी जो कि लगभग 14 लाख रुपये हो सकती थी। अनावेदक द्वारा यह जानते हुए कि आवेदिका को हिन्दी नही आती है उन्हे एक पत्र (हिंदी भाषा मे) दिया जाकर आवेदिका से हस्ताक्षर करवाए सील नही होने से सील नही लगाई गई ।


    आवेदन पत्र के प्रत्येक पृष्ठ पर पावती ली गई । दिनांक 06/03/2024 को अनावेदक द्वारा केनरा बैंक शाखा कोहेफिजा को एक पत्र भेजा गया जिसमे उसके द्वारा 08/01/2024 को 2,21,20,000/- रुपये आवेदिका को उसके कार्यालय एम पी नगर मे नगद देना बताया गया और शेष लोन की राशि को उसकी जमा एफडी मे से काटने का उल्लेख किया गया तब जाकर आवेदिका के सज्ञांन मे यह बात आई ।


    जांच मे आवेदिका व साक्षीगण के कथन लेखबद्ध किये गए । पूर्व में प्रकाश चन्द्र गुप्ता दवारा श्रीमान पुलिस उपायुक्त जोन-03 भोपाल को एक आवेदन पत्र FIR दर्ज करने के संबंध में कैनरा बैंक शाखा प्रबंधक सुधा प्रियदर्शिका के विरूध 02,21,20,000/- रूपये कूटरचित दस्तावेज तैयार कर हडप कर लेने के संबंध में दिनांक 03/04/224 को दिया गया था । जो कार्यालय पुलिस उपायुक्त जोन-03 के माध्यम से जशि-177 दिनांक 08/04/2024 में इन्द्राज कर दिनांक 12/04/224 को थाना प्रभारी थाना कोहेफिजा को प्राप्त हुआ । शिकायत आवेदन पत्र के अनुक्रम में दिनांक 22/04/24 को शिकायत के संबंध में विस्तृृत पूछताछ कर कथन लेखबद्ध किये गये है ।


    आवेदिका सुधा प्रिया दर्शिका दवारा दिये गये आवेदन पत्र की जांच मे यह बात सामने आई है कि आमतौर पर expert द्वारा रुपये 2,21,20,000/-रूपये को मशीन से गिनने मे लगभग 03 घंटे का और हाथ से गिनने मे करीबन 15 घंटे का समय लगता है. जो कि दिनांक 08/01/2024 को आवेदिका अनावेदक के कार्यालय मे लगभग एक ही घंटे रुके थे अनावेदक के कार्यालय मे CCTV कैमरे भी लगे थे उसके बावजूद भी अनावेदक प्रकाश चन्द्र गुप्ता दवारा इतनी बडी राशि प्रदाय करने का कोई CCTV Footage संग्रहित नही किया गया और बैंक दवारा 02,21,20,000/- जमा करने की बात को अस्वीकार करने पर संबंधित पुलिस थाना व सबंधित बैंक को सूचना न देते हुए सीधे हाईकोर्ट मे 02,21,20,000/- रूपये जमा करने के उपरांत लोन की शेष राशि के समायोजन के लिए रिट पिटिशन क्र. 5100/2024 फाईल की और पर्याप्त समय निकलने के बाद सम्बंधित बैंक को सूचना दी गई ताकी कोई साक्ष्य उपलब्ध न हो सके ।


    अनावेदक द्वारा जो काउन्टर जमा पर्ची कोर्ट मे उपलब्ध कराई गई थी उसमे रुपये 2,21,20,000/- रूपये का अंको ओर शब्दो मे उल्लेख है और जो जमा पर्ची बैंक से प्राप्त हुई है उसमे शब्दो और अंको मे रुपये 1,20,000/- रू का उल्लेख है दोनो ही पर्चियों मे असमानता है । अनावेदक द्वारा जमा पर्ची कि counter file मे edit किया जाना प्रथम दृष्टया सम्भव प्रतीत होता है तथा अनावेदक द्वारा माननीय उच्च न्यायालय जबलपुर में कैनरा बैंक का दिनांक 09/01/2024 का balance certificate प्रस्तुत किया गया है जिसमे received cash 2,21,20,000/- होना लेख है जो कि edit किया जाना प्रथम दृष्यया प्रतीत होता है । बैंक से प्राप्त CCTV Footage अनुसार दिनांक 08/01/2024 के दोपहर लगभग 02.40 बजे अवेदिका सुधा प्रिया दर्शिका दो पहिया वाहन एक्टीवा से दैनिक बेतन भोगी रोहित नरवरे के साथ जाना व दोपहर लगभग 04.11 बजे शाखा कोहेफिजा वापस आना पाया गया इतने कम समय मे इतनी बडी राशि गिनकर वापस दो पहिया वाहन पर ले कर आना सम्भव प्रतीत नही होता है । अनावेदक द्वारा बैंक मे कभी भी इतनी बडी राशि पूर्व मे जमा नही की गई । बैंक से प्राप्त जानकारी अनुसार जाँच मे यह बात भी सामने आई कि अनावेदक प्रकाश चंद गुप्ता के मोबाइल नंबर 9826057899 जो कि केनरा बेंक शाखा मे उसके खाते से registered है, जिसमे दिनांक 08/01/2024 को बैंक द्वारा एस एम एस भेजा गया था जिसमे सिर्फ रुपये 1,20,000/- जमा होने का उल्लेख था। यदि अनावेदक द्वारा रुपये 2,21,20,000/- जमा किये होते तो अनावेदक एस एम एस प्राप्त होने के बाद तुरंत बैंक जाकर सूचना देकर सुधार करवाता ।


    इसके पश्चात भी अनावेदक प्रकाश चंद्र गुप्ता द्वारा केनरा बैंक मे बुटकाम सिस्टम के नाम से संचालित खाते कि net banking का user ID and password जिसकी जानकारी सिर्फ खाता धारक को होती है अनावेद्क द्वारा दिनांक 10.01.2024 एवम 15.01.2024 को उक्त user id and password के माध्यम से net banking से 16 बार लागिन किया गया था उसके बाद भी अनावेदक द्वारा पैसा जमा न होने के सम्बंध मे न तो बैंक को और न ही पुलिस को सूचना दी गई। यदि अनावेदक दवारा दिनांक 08/01/2024 को 02,21,20,000/- रूपये जमा किये जाते तो बैंक नियमानुसार जमा करने में cash handling charge एवं door step banking charge जमा राशि से काटा जाता। इस संबध मे अनावेदक द्वारा कोई आपत्ति क्यो नही उठाई गई जो संदेह उत्पन्न करता है।


    आवेदिका द्वारा काउंटर जमा पर्ची पर एवं दिनाक 08.01.24 को अनावेदक को दी गई पावती पर सिर्फ हस्ताक्षर किये गये सील नही लगाई गई जबकी अनावेदक द्वारा माननीय उच्च न्यायालय जबलपुर के समक्ष प्रस्तुत उक्त दस्तावेज की छाया प्रति मे सील लगी हुई है जो की बैंक की शासकीय कार्यालयीन उपयोग की सील न होकर अनावेदक दवारा तैयार कूटरचित सील है । बैंक की सील में दो स्टार है और अनावेदक द्वारा माननीय उच्च न्यायालय के समक्ष दिये गये दस्तावेजों मे चार स्टार है तथा सील मे लिखा हुआ कोहेफिजा अंग्रेजी व हिन्दी मे कोहे फिजा के बीच मे गेप है। आवेदिका दवारा हमेशा ही हस्ताक्षर करने के उपरांत सील हमेशा हस्ताक्षर के उपर लगाना बताया गया है परन्तु अनावेदक द्वारा माननीय न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत दस्तावेजो में हस्ताक्षर के बाजू मे सील लगाई गई है ।


    अनावेदक द्वारा माननीय उच्च न्यायालय जबलपुर के समक्ष रिट पिटीशन न. 5100/2024 में प्रस्तुत दस्तावेजो पर लगी सील कूटरचित है । अनावेदक प्रकाश चन्द्र गुप्ता द्वारा कूटरचित दस्तावेज तैयार कर अपने ऋण खाते मे बडी राशि जमा करने की प्रवंचना कर आवेदिका सुधा प्रिया दर्शिका शाखा प्रबंधक शाखा कोहेफिजा भोपाल एवं अन्य अधिकारी केनरा बैंक शाखा कोहेफिजा के विरूध षडयंत्र रचा गया है । आवेदन पत्र की जांच पर प्रथम दृष्टया अनावेदक प्रकाश चन्द्र गुप्ता के विरूध अपराध धारा-420,467,468,471 (भादवि) का पंजीबद्ध कर विवेचना में लिया जाता है ।


    नकल आवेदन पत्र केनरा लेटरपेड पर लिखा हुआ है। संदर्भ दिनांक-10.05.2024 श्रीमान थानाध्यक्ष महोदय,थाना- कोहेफिजा, भोपाल विषय- हमारी कोहेफ़िज़ा शाखा, भोपाल में मेसर्स बूटकम सिस्टम्स के नाम पर अपने ऋण खातों में दस्तावेज़ों की जालसाज़ी करने के लिए श्री प्रकाश चंद्र गुप्ता के खिलाफ प्रथम सूचना रिपोर्ट (एफआईआर) दर्ज करने के लिए। विषय के संदर्भ में यह भी सूचित किया जाता है कि अधोहस्ताक्षरी को मानसिक रूप से परेशान करने और यातना देने के लिए, मेरे खिलाफ आपके पुलिस स्टेशन में झूठी शिकायत दर्ज करने के अलावा, जिसकी जांच चल रही है, श्री प्रकाश चंद्र गुप्ता प्रोप एम/एस बूटकम सिस्टम्स निम्नलिखित मामले दर्ज किए हैं-1.श्री प्रकाश चंद्र गुप्ता प्रोप एम/एस बूटकम सिस्टम्स बनाम केनरा बैंक और अन्य द्वारा रिट याचिका संख्या 5100/2024 माननीय उच्च न्यायालय जबलपुर के समक्ष झूठे और मनगढ़ंत दस्तावेजों को संलग्न करके दायर की गई और माननीय को गुमराह करके आदेश प्राप्त करने में सफल रहे। ब्ले कोर्ट. माननीय उच्च न्यायालय के समक्ष दायर रिट याचिका की प्रमाणित प्रति अनुलग्नक-1 के रूप में संलग्न है2.न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी, भोपाल की अदालत में मेरे खिलाफ उन्हीं झूठे और मनगढ़ंत दस्तावेजों को संलग्न करके शिकायत संख्या यूएन सीआर/2143/2024, जिनका माननीय उच्च न्यायालय जबलपुर के समक्ष दुरुपयोग किया गया था। न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी, भोपाल की अदालत के समक्ष दायर उक्त शिकायत की प्रति अनुलग्नक – 2 के रूप में संलग्न है।3.बैंक और अधोहस्ताक्षरी के खिलाफ उन्हीं झूठे और मनगढ़ंत दस्तावेजों को संलग्न करके 11वें अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश, भोपाल की अदालत के समक्ष एक सिविल मुकदमा संख्या आरसीएस ए/397/2024 दायर किया गया है। 11वें अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश, भोपाल की अदालत के समक्ष दायर उक्त शिकायत की प्रति अनुलग्नक -3 के रूप में संलग्न है।


    मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय के जस्टिस सुशील नागू और जस्टिस विनय सराफ की बेंच ने कोहेफिजा बैंक का पक्ष सुनने के बाद प्रकाश चंद्र गुप्ता की रिट याचिका दो अप्रैल को खारिज कर दी थी। अब इस प्रकरण में पुलिस ने कई अन्य तथ्य भी जुटाए हैं। नए कानूनों के अनुसार साक्ष्यों में हेरफेर प्रथम दृष्टया तो साबित हो रही है जिसमें गुप्ता को जेल भेजा गया है।

  • ट्रांसपोर्ट माफिया सौरभ की अग्रिम जमानत अर्जी खारिज

    ट्रांसपोर्ट माफिया सौरभ की अग्रिम जमानत अर्जी खारिज



    भोपाल,26 दिसंबर(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)।ट्रांसपोर्ट माफिया सौरभ शर्मा की अग्रिम जमानत की याचिका खारिज हो गई है। भोपाल के विशेष न्यायाधीश रामप्रताप मिश्रा की अदालत ने मामले की गंभीरता को देखते हुए उसका आवेदन खारिज कर दिया है। आरोपी के वकील का कहना था कि सौरभ सरकारी कर्मचारी नहीं है इसलिए उसे अपने बचाव में तथ्य प्रस्तुत करने के लिए समय दिया जाए। अदालत ने कहा कि वह स्वैच्छिक सेवा निवृत्ति की वजह से सरकारी कर्मचारी है और मामले की गंभीरता को देखते हुए उसे जमानत नहीं दी जा सकती।


    ग्वालियर के वकील राकेश पाराशर का कहना है कि सौरभ सरकारी कर्मचारी नहीं है इसलिए लोकायुक्त ने उसके खिलाफ गलत कार्रवाई की है। जो संपत्ति उसकी बताई जा रही है वह उसकी नहीं है।सोने चांदी पर भी उसका नाम नहीं लिखा है। उन्हें शंका है कि कहीं माफिया के अन्य गुर्गे उसकी गोली मारकर हत्या न कर दें। सौरभ के जिन पार्टनर्स और बिल्डरों ने करोड़ों रुपयों की दौलत बनाई है और लगभग पांच सौ करोड़ से अधिक का आयकर चोरी किया है वे ही सौरभ की जान के दुश्मन बने हुए हैं। आठ करोड़ की संपत्ति और 52 किलो सोने की जब्ती का मामला इतना गंभीर है कि उसे अब किसी और अदालत से भी राहत मिलने की संभावना नहीं है। पुलिस को उम्मीद है कि उसका सहयोगी चेतन सिंह गौर पुलिस के लिए अहम गवाह साबित हो सकता है।

    चेतन गौरः पुलिस गवाह बनकर ठाठ से जिंदगी बिताने की तैयारी.


    भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की जिस धारा 482 में ये अग्रिम जमानत का आवेदन लगाया गया है उसमें गंभीर मामलों में जमानत दिए जाने की प्रक्रिया कठिन कर दी गई है। क्रिमिनल प्रोसीजर कोड की जिस धारा 438 के अंतर्गत अग्रिम जमानत की सुनवाई की जाती थी अब उसके खंड(1ए)और (1बी) को हटा दिया गया है। सीआरपीसी की धारा 438 के (2)(3) और (4) को उसी रूप में रखा गया है। जाहिर है कि अपराधियों के कानून से भागने की राह कठिन कर दी गई है। ऐसे में पुलिस को उसे अपनी अभिरक्षा में रखना आसान होगा।


    भारत की कई जांच एजेंसियां सौरभ की गतिविधियों पर नजर रखे हुए हैं और आज रात तक उसके भारत लौटने की सूचना भी मिली है। उसे भारत आते ही गिरफ्तार कर लिया जाएगा और पुलिस अभिरक्षा में उससे पूछताछ होगी।इस पूरी प्रक्रिया को कई जांच एजेंसियों ने अपने नियंत्रण में ले लिया है और अन्य आपराधिक तत्वों या माफिया के गुर्गों पर कड़ी नजर रखी जा रही है।