Category: मध्यप्रदेश

  • शिक्षा विभाग एमपी के हर जिले में चलाएगा विश्वस्तरीय स्कूल

    शिक्षा विभाग एमपी के हर जिले में चलाएगा विश्वस्तरीय स्कूल

    शिक्षा विभाग की बड़ी तैयारी, हर जिले में खुलेंगे नए स्कूल और होगी ग्लोबल ब्रांडिंग

    इस योजना को सभी विद्यालयों के लिए शिक्षा योजना का नाम दिया गया है

    भोपाल,8 दिसंबर(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)। मध्य प्रदेश स्कूल (MP School) शिक्षा मुक्त बोर्ड (School Education Open Board) ने सांस्कृतिक मूल्यों के साथ छात्रों को शिक्षित करेंगे। इसके लिए तैयारी पूरी कर ली गई है। राज्य में अंतरराष्ट्रीय मानकों (international standards) के साथ 52 स्कूल स्थापित करने के लिए मंगलवार को स्कूल शिक्षा विभाग (school education department) और महर्षि पतंजलि संस्कृत संस्थान के साथ एक समझौता ज्ञापन (MOU) पर हस्ताक्षर किए हैं। जिसके बाद संस्कृत पाठ्यक्रम (Sanskrit) का अनिवार्य हिस्सा होगा। प्रत्येक जिले में ऐसा एक स्कूल स्थापित किया जाएगा।

    ये स्कूल पारंपरिक सांस्कृतिक मूल्यों के साथ शिक्षा पर ध्यान देंगे। एमपी ओपन स्कूल एजुकेशन बोर्ड के निदेशक पीआर तिवारी ने कहा कि स्कूल परिसर का उपयोग स्कूल के समय के बाद व्यावसायिक प्रशिक्षण के लिए किया जाएगा। इस योजना को सभी विद्यालयों के लिए शिक्षा योजना का नाम दिया गया है। एमओयू दस्तावेज में कहा गया है कि अकादमिक गतिविधियों में समकालीन इतिहास पर लघु फिल्मों का निर्माण, स्क्रीनिंग और अध्ययन शामिल है।

    तिवारी ने कहा कि इन स्कूलों को अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप अत्याधुनिक सुविधाओं से विकसित किया जाएगा। ये आवासीय विद्यालय लोअर किंडरगार्टन (LKG) से बारहवीं कक्षा तक के छात्रों को शिक्षा प्रदान करेंगे। उन्होंने कहा कि बुनियादी ढांचा ओपन बोर्ड द्वारा स्थापित किया जाएगा।

    इन स्कूलों की ग्लोबल ब्रांडिंग अमेरिका स्थित एजेंसी- नॉर्थवेस्ट एक्रिडिटेशन कमीशन (NWAC) की मदद से की जाएगी। 42 देशों में मान्यता प्राप्त एनडब्ल्यूएसी की मदद से छात्रों की मार्कशीट और सर्टिफिकेट जारी किए जाएंगे। शिक्षकों को सीखने और सिखाने के लिए एक टैबलेट के साथ एक मेमोरी और सिम कार्ड प्रदान किया जाएगा। सभी क्लासरूम स्मार्ट होंगे और शिक्षण में प्रोजेक्टर और प्रेजेंटेशन का व्यापक रूप से उपयोग किया जाएगा।

    छात्रों को व्यावसायिक प्रशिक्षण दिया जाएगा। जिसके मॉड्यूल उद्यमिता विकास संस्थान द्वारा तैयार किए जाएंगे। स्कूल भवनों को हरित परिसरों के रूप में विकसित किया जाएगा। जहां छात्रों को जलवायु परिवर्तन और इसके प्रभावों के बारे में भी पढ़ाया जाएगा।

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    ईएफए (एजुकेशन फॉर ऑल)स्कूल योजना के तहत प्रदेश के जिला मुख्यालयों में स्थित 53 शासकीय विद्यालयों को विश्व-स्तरीय विद्यालय के रूप में कायाकल्प करने के उद्देश्य से लोक शिक्षण संचालनालय,मध्यप्रदेश राज्य ओपन बोर्ड और महर्षि पतंजलि संस्कृत संस्थान के बीच संयुक्त रूप से एमओयू साइन हुआ। इन्दरसिंह परमार (@Inder_Singh_Parmar) 8 Dec 2021
  • नई शिक्षा नीति 2020 में सार्थक शिक्षा पर जोर बोले राज्यमंत्री इंदर सिंह परमार

    नई शिक्षा नीति 2020 में सार्थक शिक्षा पर जोर बोले राज्यमंत्री इंदर सिंह परमार

    मध्य प्रदेश: नई शिक्षा नीति 2020 के विभिन्न पहलुओं को प्रभावी तौर पर लागू के निर्देश दे दिए गए हैं- राज्यमंत्री इन्दर सिंह परमार

    भोपाल,7 दिसंबर(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)। स्कूल शिक्षा (स्वतंत्र प्रभार) और सामान्य प्रशासन राज्य मंत्री इंदर सिंह परमार ने कहा कि मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की मंशा के अनुरूप प्रदेश में नई शिक्षा नीति का प्रभावी क्रियान्वयन किया जाएगा। परमार ने बताया कि मुख्यमंत्री चौहान ने राज्य शासन द्वारा गठित टास्क फोर्स की बैठक में प्रदेश में स्कूल शिक्षा की गुणवत्ता विकास और नई शिक्षा नीति 2020 के विभिन्न पहलुओं को प्रभावी तौर पर लागू करने के निर्देश दिए गए है। इसी तारतम्य में मंत्रालय में टास्क फोर्स के सदस्यों को चार समूह में बांटकर नई शिक्षा नीति के विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से चर्चा की गई। टास्क फोर्स सदस्यों के मंथन से उपजे सुझावों और मार्गदर्शन संबंधी पहलुओं पर आधारित प्रेजेंटेशन दिया गया।

    परमार ने बताया कि टास्क फोर्स की बैठक में नई शिक्षा नीति के अनुरूप शिक्षकों में फंक्शनल लिट्रेसी और नुमरेसी के प्रशिक्षण ऑनलाइन के साथ ऑफलाइन संचालित किए जाने, राष्ट्रीय शिक्षा नीति की समझ विकसित करने के लिए मॉड्यूल द्वारा प्रशिक्षण, प्रदेश में क्षेत्र के हिसाब से क्लस्टर आधारित शिक्षा व्यवस्था बनाने, कक्षा आठवीं में गणित और अंग्रेजी विषय पर कैप्सूल रिच कोर्स, स्थानीय कॉलेज के युवा छात्रों की मैपिंग कर वॉलिंटियर बनाए जाने, राज्य ओपन स्कूल में सेंटर बढ़ाने, मातृभाषा में प्रारंभिक शिक्षा, शिक्षा कैलेंडर में सह शैक्षणिक गतिविधियों को शामिल करने, प्रारंभिक- बाल्यावस्था देखभाल एवं शिक्षा में आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं के प्रशिक्षण, अनुभव और परिणाम आधारित शिक्षकों का चयन और पदस्थापना सहित भारत सरकार द्वारा प्रौढ़ शिक्षा हेतु चलाए जा रहे ‘पढ़ना लिखना अभियान’ और ‘नव भारत साक्षरता कार्यक्रम’ आदि विभिन्न विषयो पर मंथन किया गया और सदस्य गणों के सुझाव लिए गए। राज्यमंत्री परमार ने कहा कि सदस्यों द्वारा दिए गए महत्वपूर्ण सुझावों पर राज्य शासन द्वारा गंभीरतापूर्वक विचार कर निर्णय लिया जाएगा।
    सभी के सुझाव के आधार पर नई शिक्षा नीति के क्रियान्वयन से प्रदेश का शैक्षणिक माहौल बदलेगा और प्रदेश शिक्षा के क्षेत्र में देश के अग्रणी राज्य में शामिल होगा।

    राज्यमंत्री परमार की अध्यक्षता में टास्क फोर्स में सदस्य सचिव के रूप में प्रमुख सचिव स्कूल शिक्षा रश्मि अरुण शमी, संचालक सदस्य के रूप में आयुक्त, लोक शिक्षण अभय वर्मा, आयुक्त राज्य शिक्षा केंद्र धनराजू एस, पदेन सदस्य के रूप में सचिव मप्र माध्यमिक शिक्षा मंडल अनिल सुचारी, संचालक राज्य मुक्त स्कूल शिक्षा बोर्ड और निदेशक,महर्षि पतंजलि संस्कृत संस्थान प्रभात राज तिवारी शामिल है। शासकीय क्षेत्र के प्रतिनिधि के रूप में उपसचिव, स्कूल शिक्षा विभाग मंत्रालय के. के. द्विवेदी,
    अपर संचालक, लोक शिक्षण संचालनालय धीरेन्द्र चतुर्वेदी,

    उपसंचालक, मप्र राज्य मुक्त स्कूल शिक्षा बोर्ड संजय पटवा, सहायक निदेशक महर्षि पतंजलि संस्कृत संस्थान छत्रवीर सिंह राठौर, सहायक प्राध्यापक शासकीय शिक्षा महाविद्यालय उज्जैन राजीव पांड्या, सहायक संचालक जबलपुर संभाग घनश्याम सोनी, विकासखंड शिक्षा अधिकारी जिला अलीराजपुर प्रताप सिंह डाबर,
    प्राचार्य शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय पोलायकला, जिला शाजापुर घनश्याम दीक्षित, प्राचार्य शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय भरड़ जिला शाजापुर विवेक दुबे l

    प्राचार्य शासकीय कन्या उच्चतर माध्यमिक विद्यालय उमरिया उदय सिंह उइके, प्राचार्य शासकीय बालक उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, आगर मालवा रामचंद्र खंदार, प्रधानाध्यापक शासकीय जे ए सिंह माध्यमिक विद्यालय नं 1, ग्वालियर वीरेंद्र भदौरिया, व्याख्याता,जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान, सीधी गौतम मणि अग्निहोत्री, व्याख्याता केंद्रीय विद्यालय
    क्र.2 ग्वालियर श्री दिवाकर शर्मा,
    शिक्षक शासकीय कन्या उच्चतर माध्यमिक विद्यालय पनागर जबलपुर श्री अमृत लाल बारले, उच्च श्रेणी शिक्षक सावित्री बाई फूले शासकीय कन्या उच्चतर माध्यमिक विद्यालय बुरहानपुर श्री संजय राउत, शिक्षक शासकीय कन्या उच्चतर माध्यमिक विद्यालय कंदवार जिला सीधी श्री संदीप मिश्रा,
    सहायक शिक्षक शासकीय माध्यमिक विद्यालय क्र.51 कुलकर्णी भट्टा इंदौर श्री राजेंद्र आचार्य, प्र प्रधानाध्यापक शासकीय प्राथमिक विद्यालय बदीपूरा बेटमा,
    जिला इंदौर श्री अनिल सरसिया शामिल है।

    इसी तरह अशासकीय क्षेत्र के प्रतिनिधि के रूप में संस्कृत भाषा विशेषज्ञ,श्री आनंद दीक्षित, शिक्षाविद् श्री शिरोमणि दुबे, श्री राव कुलदीप सिंह, सामाजिक कार्यकर्ता, पत्रकार श्री अखिलेश श्रीवास्तव, शिशु शिक्षा विशेषज्ञ श्री प्रभात सिंह, सेवानिवृत्त प्राचार्य श्री आर पी प्रजापति, प्राचार्य श्रीमती नीतू सरावगी, प्राचार्य श्री विवेक शर्मा, शिक्षाविद् श्री शिवानंद सिन्हा, सेवानिवृत प्राचार्य श्री अशोक कंडेल, सेवानिवृत व्याख्याता श्री श्याम ताहेड, सामाजिक कार्यकर्ता डॉ शालिनी रातोरिया, शिक्षाविद् श्री जयशंकर शर्मा, प्राचार्य श्रीमती पुनीता नेहरू, प्राचार्य श्री अरुण शुक्ला, शिक्षाविद् श्री देवकीनंदन चौरसिया, डीन डीपीएस श्रीमती मेघा मुक्तिबोध, प्राचार्य डीपीएस डॉ अजय कुमार शर्मा, परियोजना निदेशक डॉ अशोक जनवदे, शिशु शिक्षा विशेषज्ञ श्री सत्यनारायण शर्मा, शिक्षाविद् श्री राघवेन्द्र शुक्ल, सामाजिक कार्यकर्ता श्री मोहन नागर, श्री चंद्रदेव अष्ठाना और शिशु शिक्षा विशेषज्ञ सुश्री रेखा चूड़ासमा शामिल है।

  • #JNU देश  विरोधी वामपंथी  विचारधारा का अड्डा – गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा

    #JNU देश विरोधी वामपंथी विचारधारा का अड्डा – गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा

    मध्य प्रदेश में पिछले 24 घंटे में कोरोना के 16 नए मामले, प्रदेश में तीसरी लहर को रोकने के लिए सरकार पूरी तरह से सक्रिय

    भोपाल,7 दिसंबर,(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)।मध्य प्रदेश में कोरोना के नए केस स्थिर बने हुए हैं। पिछले 24 घंटे में पूरे प्रदेश में 16 नए केस सामने आए हैं और 13 लोगो स्वस्थ होकर घर लौटें है |
    कुल मिलाकर 140 केस इस समय मध्य प्रदेश में एक्टिव है और 98.60 फीसदी रिकवरी रेट चल रहा है | ओमिक्रॉन वैरिएंट जिन राज्यों में मिले हैं, उनकी सीमाओं पर सतर्कता पहले से ही बढ़ा दी गई है। 

    मध्य प्रदेश के गृह मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा ने मंगलवार को नियमित प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि मध्य प्रदेश में कोरोना के मामलों में रिकवरी दर 98.60% बनी हुई है।

    राजधानी भोपाल में सोमवार को कोरोना से 1004वीं मौत हुई थी । इससे पहले शहर में 25 नवंबर को एक मौत रिपोर्ट हुई थी। एक निजी अस्पताल में 84 वर्षीय कोरोन…
    फ़ारूख़ अब्दुल्ला के बाद नरोत्तम मिश्रा ने साधा रशीद अल्वी और सलमान खुर्शीद पर निशाना, कहा जनता की गाढ़ी कमाई पर मुफ्त में पढ़ाई कराने वाला #JNU देश विरोधी वामपंथी विचारधारा का अड्डा बना दिया गया है

    अक्सर विवादों में रहने वाली जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी (Jawaharlal Nehru University) एक बार फिर चर्चा में है। जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी स्टूडेंट यूनियन (जेएनयूएसयू) द्वारा सोमवार 6 दिसंबर की रात कथित तौर पर बाबरी मस्जिद (Babri Masjid) के समर्थन में नारे लगाए जाने का मामला सामने आया है। इसके साथ ही बाबरी मस्जिद को दोबारा बनाने की मांग भी उठाई गई।

    इसी के बीच आज मध्य प्रदेश के ग्रह मंत्री नरोत्तम मिश्रा ने एक बड़ा बयान दे दिया है है जिसमें उन्होंने फ़ारूक़ अब्दुला समेत रशीदअल्वी और कांग्रेस नेता सलमान खुर्शीद पर सीधा निशाना साधते हुए कहा है कि देश विरोधी वामपंथी गतिविधियों का अड्डा बना दिया गया है जेएनयू (JNU) को | इसी के साथ वो कहते है कि टुकड़े-टुकड़े गैंग देश में फिर से माहौल बिगाड़ने की कोशिश कर रहा है और JNU में देश‌ विरोधी नारे इसी क्रोनोलॉजी के तहत लगे हैं।
    जनता की गाढ़ी कमाई पर मुफ्त में पढ़ाई कराने वाला #JNU अब देश विरोधी वामपंथी विचारधारा का अड्डा बन गया है। अब इस पर गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए।

    जानकारी के अनुसार, JNU कैंपस में एक नए विवाद की चिंगारी सुलगनी शुरू हो गई है। जेएनयूएसयू की ओर से 6 दिसंबर की रात एक प्रोटेस्ट मार्च निकाला गया। 6 दिसंबर 1992 में अयोध्या में बाबरी मस्जिद तोड़ी गई थी, जिसके खिलाफ यह प्रदर्शन किया गया। इस दौरान JNU छात्रसंघ के कार्यकर्ताओं और यहां मौजूद लेफ्ट संगठनों के कार्यकर्ताओं ने बाबरी मस्जिद को दोबारा बनाने की मांग की।

    इस दौरान छात्रसंघ कार्यकर्ताओं की ओर से “नहीं सहेंगे हाशिमपुरा, नहीं करेंगे दादरी, फिर बनाओ बाबरी” जैसे नारे लगाए गए, जिनको लेकर विवाद उठना लाजिमी है। बाबरी विध्वंस की घटना के 29 साल बाद जेएनयू कैंपस में छात्र संघ ने इस घटना के विरोध में प्रोटेस्ट मार्च निकाला, जिसमें कहा गया की बाबरी मस्जिद दोबारा से बननी चाहिए।

    दरअसल इस प्रदर्शन की कॉल जेएनयूएसयू द्वारा रात को 8:30 बजे दी गई थी। जेएनयू कैंपस के गंगा ढाबा पर रात 8:30 बजे काफी संख्या में लेफ्ट विंग के छात्र जमा हो गए और यहां से यह प्रदर्शन मार्च चंद्रभागा हॉस्टल तक पहुंचा। इससे पहले भी लेफ्ट समर्थक छात्रों द्वारा कई विवादित बयान दिए गए हैं और 6 दिसंबर को चंद्रभागा हॉस्टल के चौखट पर एक बार फिर लेफ्ट समर्थक छात्रों ने एक नए विवाद की शुरुआत कर दी है। इसके बाद यह प्रदर्शन हॉस्टल तक पहुंचा, जिसके बाद छात्र यूनियन के नेताओं ने अपनी-अपनी बातों को रखा। इसी दौरान जेएनयू छात्र संघ के वाइस प्रेसिडेंट साकेत मून ने अपनी स्पीच के दौरान कहा कि बाबरी मस्जिद दोबारा बनाकर उसे इंसाफ लिया जाएगा।

  • एमपी में बन रहा गौशालाओं का नेटवर्क

    एमपी में बन रहा गौशालाओं का नेटवर्क

    भोपाल,(सुनीता दुबे).वर्तमान में मध्यप्रदेश देश का सर्वाधिक गौवंश और गौशालाओं वाला प्रदेश है। यहाँ गौवंश के विकास, गौ-पालन, गौ-संरक्षण, गौ-संवर्धन और गौ आधारित उत्पादों के संवर्धन के लिये सार्थक प्रयास किये जा रहे हैं। मुख्यमंत्री गौ-सेवा योजना और अशासकीय स्वयंसेवी संस्थाओं द्वारा संचालित 1768 गौ-शालाओं में ढाई लाख से ज्यादा गौ-वंश की देखभाल की जा रही है। शासन द्वारा प्रति गौवंश प्रति दिवस के मान से 20 रुपये का अनुदान दिया जाता है। मुख्यमंत्री गौ-सेवा योजना में अब तक पूर्ण 1141 गौ-शालाओं में 76 हजार 941 गौ-वंश का पालन किया जा रहा है। स्वयंसेवी संस्थाओं की पंजीकृत 627 गौ-शालाओं में भी करीब एक लाख 74 हजार गौ-वंश की देखभाल की जा रही है।

    विकसित होंगे गौवंश वन्य विहार

    गौ-वंश को जंगल से आहार और वन को गोबर से खाद मिलने की व्यवस्था प्राकृतिक है। गौपालन एवं पशुधन संवर्धन बोर्ड द्वारा जंगलों के पास गौ-वंश वन्य विहार विकसित किये जा रहे हैं। रीवा जिले के बसावन मामा क्षेत्र में 51 एकड़ क्षेत्र में गौ-वंश वन्य विहार विकसित किया गया है, जिसमें 4 हजार गौ-वंश हैं। जबलपुर जिले के गंगईवीर में 10 हजार और दमोह जिले में 4 हजार गौ-वंश की क्षमता वाला वन्य विहार विकसित किया जा रहा है। आगर-मालवा के सुसनेर में 400 एकड़ में कामधेनु अभयारण्य विकसित किया गया है, जिसमें वर्तमान में 3400 बेसहारा, वृद्ध और बीमार गायों की देखभाल की जा रही है। इसी माह सागर विश्वविद्यालय में कामधेनु पीठ की स्थापना भी की गई है।

    मध्यप्रदेश में गौ हत्या संज्ञेय अपराध

    मध्यप्रदेश में गौ हत्या संज्ञेय अपराध है। यहाँ आरोप सिद्ध होने पर सजा का प्रावधान है। मध्यप्रदेश में चार प्रजाति का देशी गौ-वंश पाया जाता है, जिनका दूध गिर गाय की तरह ही स्वर्णयुक्त एवं उच्च गुणवत्ता वाला है। देशी गाय के दूध में मानव स्वास्थ्य के लिये आवश्यक सभी पोषक तत्व पाये जाते हैं।

    प्रतिदिन 9.13 लाख किलो लीटर दूध का संकलन

    प्रदेश में लगभग सवा 7 हजार दुग्ध सहकारी समितियाँ कार्यरत हैं, जिनके माध्यम से पिछले वित्त वर्ष में प्रतिदिन औसतन 9 लाख 13 हजार किलो लीटर दुग्ध संकलन और औसत 6 लाख 38 हजार लीटर पैकेट दुग्ध विक्रय हुआ है। लॉकडाउन के दौरान दुग्ध संघों द्वारा 2 करोड़ 54 लाख लीटर दूध अतिरिक्त रूप से खरीदा गया। उल्लेखनीय यह भी है कि कोरोना लॉकडाउन के कारण जहाँ कई व्यवसाइयों को आर्थिक तंगी से गुजरना पड़ा, वहीं दुग्ध उत्पादक किसानों को 94 करोड़ रुपये राशि का अतिरिक्त भुगतान किया गया।

    आइसक्रीम, पनीर आदि संयंत्रों का निर्माण

    पिछले एक साल में इंदौर में 4 करोड़ रुपये की लागत से आइसक्रीम संयंत्र और खण्डवा में 25 हजार लीटर क्षमता के संयंत्र निर्माण का कार्य पूरा हुआ। जबलपुर में पौने 10 करोड़ रुपये की लागत से 10 मीट्रिक टन प्रतिदिन क्षमता के स्वचलित पनीर निर्माण संयंत्र की स्थापना का काम भी पूरा हो चुका है। सागर में भी एक लाख लीटर क्षमता के संयंत्र की स्थापना की गई।

    सौर ऊर्जा को बढ़ावा

    दुग्ध संयंत्रों को ऊर्जा में आत्म-निर्भर बनाने के लिये सौर ऊर्जा संयंत्र स्थापना की कार्यवाही को प्रोत्साहित किया जा रहा है। प्रदेश के 5 संयंत्रों में 4 करोड़ 13 लाख रुपये की लागत से सौर ऊर्जा आधारित गर्म पानी के संयंत्रों की स्थापना की जा रही है।

     अतिरिक्त दूध का उपयोग मिल्क पावडर बनाने में

    दुग्ध संघों द्वारा वितरण से बचे हुए दूध का मिल्क पावडर बनाकर महिला-बाल विकास विभाग की “टेक होम राशन” योजना के लिये प्रदाय किया जाता है। आँगनवाड़ियों के लिये सुगंधित मीठा दुग्ध चूर्ण भी पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के माध्यम से प्रदाय किया जा रहा है।

    देश की दूसरी सीमन प्रयोगशाला भोपाल में

    केन्द्रीय वीर्य संस्थान द्वारा साढ़े 47 करोड़ रुपये की लागत से देश की दूसरी सेक्स सार्टेड सीमन प्रयोगशाला भोपाल में स्थापित की गई है। प्रयोगशाला में अब तक 21 हजार 580 सीमन का उत्पादन किया जा चुका है। सागर जिले के रतौना में राष्ट्रीय गोकुल मिशन में गोकुल ग्राम और कृत्रिम गर्भाधान प्रशिक्षण संस्थान की स्थापना की गई है। बुंदेलखण्ड क्षेत्र विकास योजना में दतिया जिले के नौनेर में आत्म-निर्भर मध्यप्रदेश के तहत प्रदेश का दूसरा वीर्य उत्पादन संस्थान स्थापित किया गया है। पिछले साल राष्ट्रीय कृषि विकास योजना में 1500 और गोकुल मिशन में 850 मैत्री को प्रशिक्षण दिया गया।

    स्वास्थ्य सुरक्षा के लिये टीकाकरण

    प्रदेश के सभी गौ-भैंस वंशीय पशुओं को नेशनल एनीमल डिजीज कंट्रोल प्रोग्राम में एफएमडी और ब्रूसेल्ला का टीका लगाया गया। समस्त पशुओं को यूआईडी टेग लगाकर इनाफ पोर्टल पर दर्ज किया जा रहा है। राष्ट्रीय पशु रोग नियंत्रण कार्यक्रम में ढाई करोड़ से अधिक पशुओं का एफएमडी रोग के विरुद्ध टीकाकरण किया गया है। उद्देश्य वर्ष 2025 तक मुँहपका, खुरपका (एफएमडी) और ब्रूसेल्ला रोग पर नियंत्रण पाना और वर्ष 2030 तक इनका उन्मूलन करना है। दुधारु पशुओं के निरोगी होने से दूध, पशुधन और उत्पादों में वृद्धि होगी। परिणाम स्वरूप किसानों और पशुपालकों की आय में वृद्धि सुनिश्चित होगी। टीकाकरण का प्रथम चरण 31 जनवरी, 2021 को पूरा हो चुका है।

    राष्ट्रव्यापी कृत्रिम गर्भाधान कार्यक्रम

    कार्यक्रम के प्रथम चरण में 7 लाख 65 हजार गौ-भैंस वंशीय पशुओं का कृत्रिम गर्भाधान, 5 लाख 91 हजार गर्भधारण परीक्षण और एक लाख 62 हजार वत्सोत्पादन किया गया। द्वितीय चरण में 19 लाख 15 हजार गौ-भैंस वंशीय पशुओं का कृत्रिम गर्भाधान, 9 लाख 29 हजार का गर्भधारण परीक्षण और 38 हजार 365 वत्सोत्पादन हुआ। तीसरा चरण एक अगस्त, 2021 से प्रारंभ होकर 31 मई, 2022 तक चलेगा। इसमें अब तक डेढ़ लाख कृत्रिम गर्भाधान और 3 हजार से अधिक गर्भ परीक्षण किये जा चुके हैं। इनकी प्रविष्टि भी इनाफ पोर्टल पर की जा रही है।

    बकरी दूध विक्रय आरंभ

    जनजातीय गौरव दिवस 15 नवम्बर से प्रदेश में ग्राहकों को बकरी का दूध भी मिलना आरंभ हो गया है। बकरी दूध विक्रय की शुरूआत जनजातीय बहुल जिलों सिवनी, बालाघाट और धार, झाबुआ और बड़वानी जिलों में उत्पादित 50 से 70 रूपये प्रतिकिलो की दर से खरीदे गये दूध से की गई है। उच्च गुणवत्ता वाला पौष्टिक बकरी का दूध फिलहाल जबलपुर और इंदौर संघ के पार्लर पर उपलब्ध है।

  • सीएम शिवराज सिंह बोले कि कांग्रेस ने टंट्या मामा को भुला दिया

    सीएम शिवराज सिंह बोले कि कांग्रेस ने टंट्या मामा को भुला दिया

    इंदौर,(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)। जननायक टंट्या मामा स्मृति समारोह का मुख्य कार्यक्रम शनिवार को इंदौर के नेहरू स्टेडियम में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान और राज्यपाल मंगू भाई पटेल की उपस्थिति में आयोजित किया गया। इंदौर में मंच पर आदिवासी गीत पर सीएम खूब थिरके। स्मृति समारोह में गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा, उषा ठाकुर, मीना सिंह, अतर सिंह आर्य, तुलसी सिलावट, राज्यसभा सांसद सुमेर सिंह सोलंकी, मंत्री विजय शाह, भाजपा प्रदेशाध्यक्ष वीडी शर्मा मौजूद रहे। राज्यपाल ने क्रांतिसूर्य जननायक टंट्या भील स्मारक स्थल पातालपानी का वर्चुअल लोकार्पण किया। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने प्रशासनिक संकुल का अनावरण किया।

    कार्यक्रम के दौरान सीएम शिवराज सिंह बोले कि कांग्रेस ने टंट्या मामा को भुला दिया है। कांग्रेस अपने 50 साल के कार्यकाल में आदिवासी मंत्रालय भी नहीं दे सकी। यह काम अटल जी की सरकार में हुआ।

    इससे पहले स्मृति कार्यक्रम के तहत पातालपानी में दोपहर 12 बजे राज्यपाल मंगू भाई पटेल, मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान पहुंचे। यहां उन्होंने टंट्या मामा की कांस्य प्रतिमा का अनावरण किया। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि जननायक टंट्या मामा की स्मृति में हर साल 4 दिसंबर को पातालपानी में मेला लगेगा। क्षेत्र का विकास किया जाएगा। उनकी स्मृतियों को संजोया जाएगा, जिससे देश को उनके व्यक्तित्व और बलिदान से प्रेरणा मिल सके। जननायक टंट्या मामा की स्मृति में 4 करोड़ 55 लाख की लागत से पातालपानी में नवतीर्थ स्थल बनाया जाएगा।

    इंदौर का भंवरकुआं चौराहा अब होगा जननायक टंट्या भील चौराहा

    पातालपानी में कार्यक्रम के बाद सीएम और राज्यपाल इंदौर के लिए रवाना हुए जहा सभा-प्रदर्शनी के अलावा सांस्कृतिक कार्यक्रम भी आयोजित किये गए और इंदौर के भंवरकुआं चौराहे का नाम बदलकर जननायक टंट्या भील किया गया। इस मौके पर जननायक टंट्या भील के परिजन और भाजपा नगर अध्यक्ष गौरव रणदिवे भी मौजूद रहे।

  • गायक सिद्धू मूस वाला कांग्रेस में शामिल

    गायक सिद्धू मूस वाला कांग्रेस में शामिल

    गायक सिद्धू मूस वाला कांग्रेस में शामिल

    गायक को उनके हिट पंजाबी ट्रैक जैसे “लीजेंड”, “डेविल”, “जस्ट सुनो”, “तिबेयन दा पुट”, “जट्ट दा मुकाबाला”, “ब्राउन बॉयज़” और “हथियार” के लिए जाना जाता है।

    उन्होंने पहली बार अपने अभी भी लोकप्रिय “सो हाई” के साथ पहचान हासिल की, जिसे 2017 में रिलीज़ किया गया था। उनका नाम 2018 में बिलबोर्ड कनाडाई एल्बम में भी दिखाया गया है।

    मूसेवाला और पांच पुलिस कर्मियों के खिलाफ पिछले साल मई में भी पंजाब पुलिस ने मामला दर्ज किया था।

    वीडियो वायरल होने के बाद, गुप्ता ने संगरूर में वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक को प्रारंभिक जांच करने का निर्देश दिया था, जिससे प्रथम दृष्टया यह स्थापित होता है कि डीएसपी ने बड़बर गांव में फायरिंग रेंज में उस समय शूटिंग की सुविधा प्रदान की थी जब पूरे राज्य के अधीन था। कर्फ्यू।

  • भू अधिकार पुस्तिका अब आनलाईन उपलब्ध

    भू अधिकार पुस्तिका अब आनलाईन उपलब्ध

    भोपाल,1 दिसंबर (प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान द्वारा भू-अधिकार पुस्तिका प्राप्त करने का सुगम और आसान तरीका बनाने के निर्देशों के अनुपालन में मध्यप्रदेश शासन के राजस्व विभाग ने भू-अधिकार पुस्तिका उपलब्ध कराने के संबंध में संशोधित नियम जारी किए हैं। अब भू-अधिकार पुस्तिका आवेदक को ऑनलाइन प्राप्त होगी। भू-स्वामी अपनी भू-अधिकार पुस्तिका प्राप्त करने के लिए आईटी सेंटर, एम.पी. ऑनलाइन, लोक सेवा केन्द्र, कियोस्क सेंटर और शासन द्वारा प्राधिकृत सेवा प्रदाता के माध्यम से ऑनलाइन आवेदन कर सकेंगे।

    ऑनलाइन मिलने वाली भू-अधिकार पुस्तिका सामान्यत: दो पृष्ठों की होगी। इसके लिए शासन द्वारा 45 रुपये शुल्क निर्धारित किया गया है। प्रकरण विशेष में पुस्तिका यदि अधिक पृष्ठों की है, तो प्रत्येक पृष्ठ के लिए 15 रुपये अतिरिक्त देय होंगे। प्रदेश में भू-अधिकार पुस्तिका अब ऑनलाइन प्रदाय की जायेगी। पूर्व में प्राप्त की गई भू-अधिकार पुस्तिका यथावत उपयोग में ली जा सकेगी। राजस्व विभाग द्वारा भू-अधिकार पुस्तिका प्रदाय करने के लिए समय-सीमा लोक सेवा प्रबंधन विभाग द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार निर्धारित की गई है। भूलेख पोर्टल से भू-अधिकार पुस्तिका की डिजिटल हस्ताक्षरित प्रति डाउनलोड कर आवेदक को निर्धारित समय-सीमा में प्रदाय की जायेगी।

    ऑनलाइन भू-अधिकार पुस्तिका प्राप्त करने के लिए कृषक/आवेदक को अपना आधार कार्ड, फोटो, मोबाइल नम्बर, समग्र आईडी, पटवारी हल्का और सेक्टर क्रमांक आदि अभिलेख उपलब्ध कराना होंगे। इन अभिलेखों के आधार पर ऑनलाइन सेवा प्रदाता संस्था आवेदक का आवेदन प्रस्तुत कर देगी। आवेदक द्वारा भू-अधिकार पुस्तिका का आवेदन किए जाने के लिए यदि आधार नम्बर उपलब्ध नहीं है, तो आवेदक का फोटो लेकर क्षेत्र के पटवारी से सत्यापित करवाया जायेगा। पटवारी का दायित्व है कि वह आवेदक का फोटो तीन कार्य दिवस में सत्यापित अथवा अमान्य करें। पटवारी द्वारा ऐसा नहीं किए जाने की दशा में फोटो को सही मानकर भू-अधिकार पुस्तिका जारी की जायेगी।

    भू-अधिकार पुस्तिका का आवेदन अमान्य किए जाने अथवा समय-सीमा में निराकरण नहीं होने पर आवेदक को अपील करने का अधिकार होगा। आवेदक प्रथम अपील 30 दिवस और द्वितीय अपील 60 दिवस में प्रस्तुत कर सकेगा। दोनों ही अपील निराकरण करने की समय-सीमा 15 दिवस निर्धारित की गई है।

  • गोंडों का सम्मान रानी कमलापति रेलवे स्टेशन

    गोंडों का सम्मान रानी कमलापति रेलवे स्टेशन

    भोपाल,(शिवराज सिंह चौहान )।इतिहास के पन्नों को पलटने से ज्ञात होता है कि 1600 से सन् 1715 तक गिन्नौरगढ़ किले पर गोंड राजाओं का आधिपत्य् रहा तथा भोपाल पर भी उन्हीं का शासन था। गोंड राजा निज़ाम शाह की सात पत्नियाँ थीं, जिनमें कमलापति सबसे सुंदर थीं। उनकी इच्छा से तालाब के तट पर एक महल का निर्माण किया गया, जो सन् 1702 में पूर्ण हुआ, जिसे आज रानी कमलापति महल के नाम से जाना जाता है। आज इसके अवशेष छोटे और बड़े तालाब के पार्क में देखे जाते हैं। ईसवी सन् 1989 से भारतीय पुरातत्व विभाग ने इस महल को अपने संरक्षण में ले लिया। इसमें एक छोटी चित्र प्रदर्शनी भी है।

    गोंड समुदाय का राजवंश गिन्नौरगढ़ से बाड़ी तक फैला हुआ था। उनका साम्राज्य गढ़ा कटंगा (मंडला) 52 गढ़ के आधिपत्य में था। रायसेन किला ईस्वी सन् 1362 से 1419 तक 57 वर्ष राजा रायसिंह के आधिपत्य में था। यह किला इनके द्वारा बनवाया गया था। ईस्वी 14वीं में जगदीशपुर (इस्लाम नगर) में गोंड राजाओं का आधिपत्य रहा। इस महल को भी गोंड राजाओं के द्वारा बनवाया गया था। सन् 1715 में अंतिम गौंड राजा नरसिंह देवड़ा रहे। भोपाल शाही ईस्वी 476 से 533 लगभग 60 वर्षों तक इनका शासन रहा। गोंड समाज के प्रथम धर्मगुरू पारी कुपार लिंगो बाबा ने पाँच देव सगा समाज वाले के लिये बैरागढ़ का स्थान निश्चित किया था। तभी से गोंडवाना समाज के लोग बैरागढ़ से हजारों किलोमीटर की दूरी पर निवास करने के बावजूद भी बैरागढ़ में बड़ा देव की पूजा-अर्चना करने आते हैं। यह गोंडों का सबसे बड़ा देव-स्थल है।

    बाड़ी जिला रायसेन का अंतिम शासक चैन सिंह 16वी ईस्वीं में रहा। ईसवी 16वी सदी में सलकनपुर जिला सीहोर रियासत के राजा कृपाल सिंह सरौतिया थे। उनके शासन काल में वहाँ की प्रजा बहुत खुश और समपन्न थी। उनके यहाँ एक खूबसूरत कन्या का जन्म हुआ। वह बचपन से ही कमल की तरह बहुत सुंदर थी। उसकी सुंदरता को देखते हुए उसका नाम कमलापति रखा गया। वह बचपन से ही बहुत बुद्धिमान और साहसी थी और शिक्षा, घुड़सवारी, मल्लयुद्ध, तीर-कमान चलाने में उसे महारत हासिल थी। वह अनेक कलाओं में पारंगत होकर कुशल प्रशिक्षण प्राप्त कर सेनापति बनी। वह अपने पिता के सैन्य बल के साथ और अपने महिला साथी दल के साथ युद्धों में शत्रुओं से लोहा लेती थी। पड़ोसी राज्य अकसर खेत, खलिहान, धन-सम्पत्ति लूटने के लिए आक्रमण किया करते थे और सलकनपुर राज्य की देख-रेख करने की पूरी जिम्मेदारी राजा कृपाल सिंह सरौतिया और उनकी टी राजकुमारी कमलापति की थी, जो आक्रमणकारियों से लोहा लेकर अपने राज्य की रक्षा करती रही।

    राजकुमारी धीरे-धीरे बड़ी होने लगी और उसकी खूबसूरती की चर्चा चारों दिशाओं में होने लगी। इसी सलकनपुर राज्य में बाड़ी किले के जमींदार का लड़का चैन सिंह जो राजा कृपाल सिंह सरौतिया का भांजा लगता था, वह राजकुमारी कमलापति से विवाह करने की इच्छा रखता था। लेकिन उस छोटे से गाँव के जमीदार से राजकुमारी कमलापति ने शादी करने से मना कर दिया।

    16वीं सदी में भोपाल से 55 किलो मी. दूर 750 गाँवों को मिलाकर गिन्नौरगढ़ राज्य बनाया गया, जो देहलावाड़ी के पास आता है। इसके राजा सुराज सिंह शाह (सलाम) थे। इनके पुत्र निजामशाह थे, जो बहुत बहादुर, निडर तथा हर कार्य-क्षेत्र में निपुण थे। उन्हीं से रानी कमलापति का विवाह हुआ।
    राजा निजाम शाह ने रानी कमलापति के प्रेम स्वरूप ईस्वी 1700 में भोपाल में सात मंजिला महल का निर्माण करवाया, जो लखौरी ईंट और मिट्टी से बनवाया गया था। यह सात मंजिला महल अपनी भव्यता, सुंदरता और खूबसूरती से लिए प्रसिद्ध था।रानी कमलापति का वैवाहिक जीवन काफी खुशहाल व्यतीत हो रहा था। वह अपना वैवाहिक जीवन हँसी-खुशी के साथ राजा निजामशाह के साथ व्यतीत कर रही थी। उनको एक पुत्र की प्राप्ति हुई, जिसका नाम नवल शाह था।

    बाड़ी किले के जमींदार का लड़का चैन सिंह राजा निजामशाह का भतीजा था। वह राजकुमारी कमलापति की शादी होने के बावजूद भी अभी उससे विवाह करने की इच्छा रखता था। उसने अनेक बार राजा निजामशाह को मारने की कोशिश की, जिसमें वह असफल रहा। एक दिन प्रेम पूर्वक उसने राजा निजामशाह को भोजन पर आमंत्रित किया और भोजन में जहर देकर उनकी धोखे से हत्या कर दी। राजा निजामशाह की मौत की खबर से पूरे गिन्नौरगढ़ में खलबली हो गई। चैनसिंह ने रानी कमलापति को अकेले जानकर उन्हें पाने की नीयत से गिन्नौरगढ़ के किले पर हमला कर दिया। रानी कमलापति ने उस समय अपने कुछ वफादारों और 12 वर्षीय बेटे नवलशाह के साथ भोपाल में बने इस महल में छुप जाने का निर्णय लिया, जो उस समय सुरक्षा की दृष्टि से काफी महत्वपूर्ण था। कुछ दिन भोपाल में समय बिताने के बाद रानी कमलापति को पता चला कि भोपाल की सीमा के पास कुछ अफगानी आकर रूके हुए हैं, जिन्होंने जगदीशपुर (इस्लाम नगर) पर आक्रमण कर उसे अपने कब्जे में ले लिया था। इन अफगानों का सरदार दोस्त मोहम्मद खान था, जो पैसा लेकर किसी की तरफ से भी युद्ध लड़ता था। लोक मान्यता है कि रानी कमलापति ने दोस्त मोहम्मद को एक लाख मुहरें देकर चैनसिंह पर हमला करने को कहा।

    दोस्त मोहम्मद ने गिन्नौरगढ़ के किले पर हमला कर दिया जिसमें चैनसिंह मारा गया और किले को हड़प लिया गया। रानी कमलापति को अपने छोटे बेटे की परवरिश की चिंता थी इसीलिए उन्होंने दोस्त मोहम्मद के इस कदम पर कोई आपत्ति नहीं जताई। दोस्त मोहम्मद अब सम्पूर्ण भोपाल की रियासत पर कब्जा करना चाहता था। उसने रानी कमलापति को अपने हरम (धर्म) में शामिल होने और शादी करने का प्रस्ताव रखा। वह वास्तव में रानी को अपने हरम में रखना चाहता था।

    दोस्त मोहम्मद खान के इस नापाक इरादे को देखते हुए रानी कमलापति का 14 वर्षीय बेटा नवल शाह अपने 100 लड़ाकों के साथ लाल घाटी में युद्ध करने चला गया। इस घमासान युद्ध में दोस्त मोहम्मद खान ने नवल शाह को मार दिया। इस स्थान पर इतना खून बहा कि यहाँ की जमीन लाल हो गई और इसी कारण इसे लाल घाटी कहा जाने लगा। इस युद्ध में रानी कमलापति के 2 लड़के बच गये थे, जो किसी तरह अपनी जान बचाते हुए मनुआभान की पहाड़ी पर पहुँच गये। उन्होंने वहाँ से रानी कमलापति को काला धुंआ कर संकेत किया कि ‘हम युद्ध हार गये हैं और आपकी जान को खतरा है।

    रानी कमलापति ने विषम परिस्थति को देखते हुए अपनी इज्जत को बचाने के लिए बड़े तालाब बाँध का सँकरा रास्ता खुलवाया जिससे बड़े तालाब का पानी रिसकर दूसरी तरफ आने लगा। इसे आज छोटा तालाब के रूप में जाना जाता हैं। इसमें रानी कमलापति ने महल की समस्त धन-दौलत, जेवरात, आभूषण डालकर स्वयं जल-समाधि ले ली।

    दोस्त मोहम्मद खान जब तक अपनी सेना को साथ लेकर लाल घाटी से इस किले तक पहुँचा उतनी देर में सब कुछ खत्म हो गया था। दोस्त मोहम्मद खान को न रानी कमलापति मिली और न ही धन-दौलत। जीते जी उन्होंने भोपाल पर परधर्मी को नहीं बैठने दिया। स्रोतों के अनुसार रानी कमलापति ने सन् 1723 में अपनी जीवन-लीला खत्म की थी। उनकी मृत्यु के बाद दोस्त मोहम्मद खान के साथ ही नवाबों का दौर शुरू हुआ और भोपाल में नवाबों का राज्य हुआ।

    नारी अस्मिता और अपनी संस्कृति की रक्षा के लिए रानी कमलापति ने जल-समाधि लेकर इतिहास में अमिट स्थान बनाया है। उनका यह कदम उसी जौहर परंपरा का पालन था, जिसमें हमारी नारी शक्ति ने अदम्य साहस के साथ अपनी अस्मिता, धर्म और संस्कृति को बचाया है। उसी परंपरा का निर्वाह करते हुए रानी कमलापति ने भी जीवित रहते अपनी नारी गरिमा को विधर्मियों से बचा लिया और पीढ़ियों के लिए यह प्रेरणा प्रदान की कि अपने धर्म की रक्षा के लिए किसी को भी बलिदान देने से पीछे नहीं हटना चाहिए।

    गोंड रानी कमलापति आज तीन सौ वर्ष बाद भी प्रासंगिक हैं और उनके बलिदान का सम्मान करके हम कृतज्ञ हैं। भोपाल का हर हिस्सा उनकी कहानी सुनाता है। यहाँ के तालाबों के पानी में उनके बलिदान की गूंज आज भी सुनी जा सकती है। ऐसा लगता है मानो वे स्वयं यहाँ की कल-कल धारा हैं। गोंड रानी अब पानी बनकर भोपाल की रवानी में अविरल बहती हैं।

    (लेखक – मुख्यमंत्री, म.प्र. शासन)

  • पर्यूषण पर्व में जीवन सूत्रों की साधना का दौर

    पर्यूषण पर्व में जीवन सूत्रों की साधना का दौर

    भोपाल,04सितंबर(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)।राजधानी में अरेरा कालोनी स्थित जैन स्थानक भवन में आज आठ दिनों तक चलने वाले पर्यूषण पर्व का श्रद्धा पूर्वक शुभारंभ हुआ।अरेरा कालोनी इ-3। 40 में स्वाध्यायी बहनें बैतूल की श्राविका शकुंतला जैन और महेश्वर की हेमलता वाणी के सानिध्य में प्रातः 6 बजे से हर दिन बारह घंटों का नवकार मंत्र जाप कराया जाएगा।


    आज के प्रवचनों में बहन शकुंतला जैन ने बताया कि जीवन में ज्ञान सर्वोपरि है। ज्ञान के बगैर किसी कार्य की सिद्धि नहीं की जा सकती। अच्छे और संस्कारयुक्त ज्ञान से मनुष्य का जीवन सार्थक हो जाता है।ज्ञानी व्यक्तियों से जीवन के रहस्य सरलता पूर्वक समझे जा सकते हैं। हम प्रतिष्ठित डाक्टरों, वकीलों और इंजीनियरों के पास जाकर जिस तरह अपनी समस्याओं का समाधान प्राप्त करते हैं उसी तरह संतों के पास जाकर जीवन दर्शन को समझते हैं। अपने क्षेत्र के इन विशेषज्ञों ने कड़ी साधना करके ज्ञान अर्जन किया है,इसी वजह से लोग उनकी ओर अपेक्षा भरी निगाहों से देखते हैं।


    उन्होंने कहा कि पर्यूषण पर्व भी ऐसा ही एक अवसर है जिसके दौरान हम धर्म के माध्यम से जीवन को सफल बनाने के गुर सीखते हैं। यदि हम श्रद्दा के साथ जीवन के सूत्रों को सीखने का प्रयास करेंगे तो धीरे धीरे हम भी अपनी जाग्रत अवस्था को हासिल कर लेंगे।


    बहन हेमलता वाणी ने श्रावकों को संदेश देते हुए बताया कि स्थानक भवन में हर दिन सुबह 7 बजे से प्रार्थना और साढ़े आठ बजे से अंतगड़ सूत्र का वाचन किया जाएगा। इसके बाद धार्मिक प्रवचन और प्रतियोगिताएं भी होंगी। ये सभी कार्यक्रम 11 सितंबर तक लगातार होंगे। सायंकालीन प्रतिक्रमण में साढ़े छह बजे से धार्मिक भजनों का भी आयोजन होगा। इस दौरान धर्मप्रेमी बंधुओं के निवास और भोजन की व्यवस्था भी रहेगी,जिससे उन्हें साधना में व्यवधान न हो। हर दिन अलग अलग जीवन सूत्रों पर व्याख्यान और शंका समाधान भी होगा। आज इस धार्मिक अनुष्ठान के शुभारंभ अवसर पर राजधानी के स्थानकवासी परिवारों ने बड़ी संख्या में उपस्थित होकर इस संस्कार शिविर का लाभ प्राप्त किया।

  • भारतीय मजदूर संघ ने किया वृक्षारोपण

    भारतीय मजदूर संघ ने किया वृक्षारोपण

    सागर,28 अगस्त(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)। मजदूर संघ के तत्वाधान में आज जिला इकाई सागर ने श्रीमती अमृता देवी विश्नोई जी के बलिदान को पर्यावरण दिवस के रूप में केंद्रीय बीड़ी अस्पताल सागर के परिसर में वृक्षारोपण कर मनाया।
    इस अवसर पर माननीय नगर विधायक शैलेंद्र जैन के मुख्य आतिथ्य में एवं भारतीय मजदूर संघ के प्रदेश मंत्री आशीष सिंह जिला चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी सुरेश बौद्ध , स्वास्थ्य विभाग से सिविल सर्जन श्रीमती डॉक्टर ज्योति चौहान डॉक्टर प्रदीप चौहान सहायक श्रम आयुक्त भगवत प्रसाद कोरी बीड़ी अस्पताल की मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ श्रीमती बरूआ ,जिला मलेरिया अधिकारी डॉ शैलेंद्र शाक्य प्रदेश महामंत्री कंस्ट्रक्शन मजदूर महासंघ से डॉ प्रदीप पाठक बीड़ी श्रमिक संगठन से राष्ट्रीय सचिव श्रीमती राजकुमारी पवार शहर के समाजसेवी मस्तराम घोसी के विशिष्ट आतिथ्य एवं कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे भारतीय मजदूर संघ के जगदीश जी जारोलिया की अध्यक्षता में कार्यक्रम का शुभारंभ मां भारती एवं भारतीय मजदूर संघ के संस्थापक श्रीमान दत्तोपंत जी ठेंगड़ी की छाया चित्र के समक्ष दीप प्रज्वलन कर किया गया। इसी क्रम में स्वागत की श्रंखला में मुख्य अतिथि एवं विशिष्ट अतिथियों का स्वागत सम्मान विभिन्न संगठनों से पधारे हुए अध्यक्ष एवं पदाधिकारियों द्वारा तिलक एवं पुष्प गुच्छ एवं मालाओं के माध्यम से किया गया।
    तत्पश्चात स्वागत उद्बोधन के लिए राकेश श्रीवास्तव मध्य प्रदेश राज्य कर्मचारी संघ के अध्यक्ष के द्वारा किया गया, कार्यक्रम का मंच संचालन भारतीय मजदूर संघ सागर के जिला मंत्री राहुल जैन के द्वारा किया गया।
    इसी क्रम में कार्यक्रम को संबोधित करते हुए माननीय विधायक शैलेंद्र जैन ने कहा कि अमृता देवी विश्नोई एवं विश्नोई समाज के द्वारा जो पर्यावरण को बचाने के लिए बलिदान दिया गया हम सभी आज यहां आज भारतीय मजदूर संघ की इस परंपरा को भारतीय पर्यावरण दिवस के रूप में मनाने एकत्रित हुए हैं ।मैं जनता का एक जनप्रतिनिधि होने के नाते आप सभी को यह विश्वास दिलाना चाहता हूं कि विधानसभा में इस प्रस्ताव को विशेष रुप से लाऊंगा जिससे आगामी आने वाले वर्ष में हम सभी एक साथ पूर्व तैयारी कर बड़े स्तर पर इस पर्यावरण दिवस को आयोजन संपूर्ण मध्यप्रदेश में एक साथ वृक्षारोपण कर मनाने का प्रयास करेंगे,इस अवसर पर उन्होंने भारतीय मजदूर संघ के पदाधिकारियों एवं कार्यकर्ताओं से आवाहन किया कि श्रमिकों की शत-प्रतिशत वैक्सीनेशन के लिए चिन्हित क्षेत्रों में अभियान चलाकर वैक्सीनेशन कराने के लिए स्वास्थ्य विभाग के साथ वैक्सीनेशन के कार्यक्रम को सफल बनाने का प्रयास हम और आप सभी मिलकर करेंगे।

    आज के वृक्षारोपण कार्यक्रम में भारतीय मजदूर संघ से संबंधित विभिन्न संगठनों ने बढ़-चढ़कर सहभागिता की, जिसमें प्रमुख रूप से भारतीय मजदूर संघ के कार्यकारी जिला अध्यक्ष दीपक मिश्रा, कार्यालय मंत्री राम ठाकुर , के साथ दामोदर प्रजापति ब्रजमोहन पांडे विशाल खरे मध्य प्रदेश राज्य कर्मचारी संघ से ऐसी द्विवेदी अशोक तिवारी अवधेश उपाध्याय अजय खरे डीके तिवारी विकास उपाध्याय दिनेश कनौजिया रघुवर प्रसाद दुलीचंद पटेल , कैलाश सोनी , देवेंद्र पंथी एवं मध्य प्रदेश बिजली कर्मचारी महासंघ से केशव प्रसाद तिवारी , राम विवेक गौतम ,सतीश मेहता ,महेंद्र प्रजापति श्रीमान कक्का , एवं बीड़ी संगठन के अध्यक्ष श्याम चरण जाटव, शीतल प्रसाद वर्मा , दीपेश जाटव , कृषि एवं ग्रामीण मजदूर महासंघ से अमित उपाध्याय, सर्वानंद पांडे ,कंस्ट्रक्शन मजदूर महासंघ के विभिन्न पदाधिकारी और पर्यावरण संयोजक अमित रैकवार, बहन श्रीमती रश्मि कुशवाहा , संजय भाटी ,एम ई एस कार्यकारी यूनियन से नितेश साहू , संतोष शर्मा के साथ समस्त संबद्ध संगठनों के कार्यकर्ताओं के साथ शहर वासियों ने सामूहिक रूप से वृक्षारोपण कर कार्यक्रम को सफल बनाया, इसी क्रम में जिला अध्यक्ष की ओर से सभी का आभार व्यक्त किया गया।

  • केन्द्र का आर्थिक पैकेज संजीवनी साबित होगाःदेवड़ा

    केन्द्र का आर्थिक पैकेज संजीवनी साबित होगाःदेवड़ा

    भोपाल 29 जून (प्रेस इंफार्मेंशन सेंटर)

    वित्त मंत्री जगदीश देवड़ा ने कहा है कि केन्द्र सरकार द्वारा की अर्थ-व्यवस्था को गति देने के लिए 6.29 लाख करोड़ का प्रोत्साहन पैकेज देने से कोविड-19 प्रभावित भारत की अर्थ-व्यवस्था में नया मोड़ आयेगा। उन्होने प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी को इस पहल के लिये धन्यवाद देते हुए कहा कि उनके नेतृत्व में केन्द्रीय वित्त मंत्री श्रीमती निर्मला सीतारमण एवं वित्त राज्य मंत्री श्री अनुराग ठाकुर द्वारा घोषित किया गया आर्थिक पैकेज अर्थ-व्यवस्था के लिये संजीवनी साबित होगा और बूस्टर डोज का काम करेगा। श्री देवड़ा ने मध्यप्रदेश की अर्थ-व्यवस्था को पुनर्जीवित करने के लिये मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान का भी आभार व्यक्त करते हुए कहा कि केन्द्र सरकार के नये पैकेज से मध्यप्रदेश को भरपूर लाभ होगा।

    मंत्री श्री देवडा ने कहा कि यह राहत पैकेज स्वास्थ्य, एमएसएमई, पर्यटन, निर्यात एवं आत्म-निर्भर भारत रोजगार योजना सहित विभिन्न क्षेत्रों के लिये संजीवनी की तरह है। इन क्षेत्रों को फिर से जीवन मिलेगा। उन्होंने कहा कि यह प्रोत्साहन पैकेज समय की मांग के अनुसार है। उन्होंने कोरोना प्रभावित उघमियों को कम ब्याज दर पर 1.1 लाख करोड़ आर्थिक पैकेज देने की घोषणा का स्वागत करते हुए कहा कि प्रभावित क्षेत्रों को कोरोना महामारी से उपजे आर्थिक संकट से उबरने में मदद मिलेगी।

    छोटे उद्यमियों को बढ़ावा मिलेगा

    मंत्री श्री देवड़ा ने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा किए गए इन उपायों से निजी निवेश, निर्यात, कृषि उत्पादकता में वृद्धि को मदद मिलेगी तथा छोटे शहरों में भी स्वास्थ्य संबंधी ढाँचागत सुविधाएँ मजबूत होगी। अर्थ-व्यवस्था के पुर्नद्धार को गति मिलेगी और आर्थिक गतिविधियों में भी तेजी आएगी। यह राहत पैकेज अर्थ-व्यवस्था के लिए जीवन रक्षक साबित होगा। इन उपायों से उत्पादन भी बढ़ेगा और रोजगार के अवसर भी पैदा होंगे। साथ ही छोटे उद्यमियों, व्यवसायियों और पर्यटन को बढावा मिलेगा। चिकित्सा क्षेत्र में निवेश बढ़ने से इस क्षेत्र में मजबूती मिलेगी। स्वास्थ्य सुविधाओं को लेकर किए गए प्रावधानों से पिछड़े क्षेत्रों में भी स्वास्थ्य सुविधाएँ बढ़ सकेंगी।

    मंत्री श्री देवड़ा ने कहा कि देश में 18 वर्ष से अधिक आयु के प्रत्येक नागरिक को फ्री वैक्सीन देने का क्रांतिकारी कदम उठा चुकी केंद्र सरकार ने अब इन आर्थिक उपायों से वित्तीय क्षेत्र को भी जरूरी वैक्सीन प्रदान कर दी है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री गरीब कल्याण योजना का लाभ नागरिकों को मिला है। अब इस योजना को नवंबर तक बढ़ाए जाने से गरीब लोगों को फायदा पहुँचेगा।

  • मीडिया के शोर में प्रेस की साख आज भी कायमःकुलपति केजी सुरेश

    मीडिया के शोर में प्रेस की साख आज भी कायमःकुलपति केजी सुरेश

    भोपाल,07 मार्च(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)। सोशल मीडिया और डिजिटल क्रांति के दौर में पत्रकारों की समाज के प्रति संवेदनशीलता और लोक दायित्व का भाव ही प्रेस की पहचान है। प्रेस ने बड़ी हद तक अपनी इस साख को बचाकर रखा है। तकनीक और भाषा के सहारे चलने वाला दुष्प्रचार कभी लोकदायित्व से भरी प्रेस की जगह नहीं ले सकता।इसके बावजूद पत्रकारिता की मुख्य धारा यदि आज कहीं सवालों के घेरे में है तो उसे अपनी सार्थकता बनाए रखने के लिए खुद में बदलाव लाना होगा।प्रदेश के मूर्धन्य आंचलिक पत्रकार स्वर्गीय भुवन भूषण देवलिया की स्मृति में आयोजित व्याख्यान माला में पं. माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय के कुलपति के.जी. सुरेश ने प्रमुख वक्ता के रूप में ये विचार व्यक्त किए।

    पंडित माखनलाल चतुर्वेदी विश्वविद्यालय परिसर में आज रविवार को जूम एप और फेसबुक लाईव पर (पत्रकारिता का लोक दायित्व) विषय पर आयोजित व्याख्यानमाला में प्रोफेसर के.जी. सुरेश के अलावा अमर उजाला डिजिटल के संपादक जयदीप कार्णिक, भारतीय जन संचार संस्थान के महानिदेशक प्रो.संजय द्विवेदी, पद्मश्री विजयदत्त श्रीधर, ने अपने विचार व्यक्त किए। लगातार दसवें वर्ष हुए इस आयोजन में विषय का प्रवर्तन वरिष्ठ पत्रकार शिव अनुराग पटैरिया ने किया। इसके अलावा वरिष्ठ पत्रकार राजेश सिरोठिया. और वरिष्ठ पत्रकार अजय त्रिपाठी ने श्री देवलिया जी के साथ जुड़ीं यादों के संस्मरण सुनाए।इस अवसर पर सागर के वरिष्ठ पत्रकार विनोद आर्य को स्वर्गीय भुवन भूषण देवलिया स्मृति अलंकरण से सम्मानित किया गया। इसमें आंचलिक पत्रकारों के लिए ग्यारह हजार रुपए नकद, शाल श्रीफल और स्मृति चिन्ह से सम्मानित किया जाता है। मंच संचालन युवा पत्रकार आदित्य श्रीवास्तव ने किया।

    प्रो.के.जी.सुरेश ने कहा कि कोई भी नागरिक अभिनंदन हमेशा प्रायोजित सम्मानों से ज्यादा मूल्यवान होता है। नागरिक अभिनंदन की कसौटी हमेशा ठोस होती है। मुझे स्वर्गीय देवलिया जी से मिलने का अवसर तो प्राप्त नहीं हुआ लेकिन उनके बारे में जो पढ़ा और उनके छात्रों में समाज के प्रति जो प्रतिबद्धता देखी उससे मालूम चलता है कि वे आंचलिक पत्रकारिता के पुरोधा रहे हैं। उन्होंने कहा कि आज एक शिक्षक के नाते मुझे लगता है कि पत्रकारों की चयन प्रक्रिया पर हमें विशेष गौर करना होगा। हम पत्रकारों को भाषा और तकनीक के आधार पर बेहतर बनाने का प्रयास करते हैं लेकिन उनकी समाज के प्रति संवेदनशीलता पर गौर नहीं करते।

    श्री केजी सुरेश ने कहा कि समाज के बीच जनसंचार कायम करने के लिए हमें सामुदायिक रेडियो को बढ़ावा देना होगा। आज बोलचाल की भाषा में कहा जाता है कि पत्रकार तो पक्षकार हो गए हैं जबकि उनका तो एक ही पक्ष होता है वो है जनपक्ष या लोकपक्ष। मैं स्वयं तीन दशकों तक पत्रकार रहा हूं इस आधार पर कह सकता हूं कि रोज शाम को टीवी की बहसें पत्रकारिता नहीं हैं। ये बात भी सही है कि टेबल टाप रिपोर्टिंग मीडिया की मजबूरी है लेकिन यदि वो जमीनी स्तर की सच्चाई उजागर नहीं करती तो उसका महत्व कुछ नहीं। मुख्यधारा का मीडिया यदि अपने भीतर बदलाव नहीं लाएगा तो आगे चलकर उसका महत्व ही समाप्त हो जाएगा। जमीनी स्तर पर मीडिया को लेकर कई प्रयोग चल रहे हैं। यदि उन मुद्दों को नहीं उठाया जाएगा तो पढ़ने देखने के प्रति लोगों का लगाव नहीं बढ़ाया जा सकेगा। आज ब्लॉगों और यू ट्यूब पर पाठकों और दर्शकों की रुचि की सामग्री बढ़ती जा रही है। पाठकों की ये बदलती अभिरुचियां प्रेस के लिए खतरे की घंटी बन गई है। उन्होंने कहा कि प्रेस की 70 फीसदी आय विज्ञापनों से होती है, ऐसे में लोक दायित्व के भाव को बचा पाना कठिन हो जाता है। जनता को भी इस मुद्दे पर गौर करना होगा कि वह ऐसे प्रेस को संबल दे जो केवल जनता के हित के लिए काम करता हो। प्रेस के हित में हमारा विश्वविद्यालय भुवन भूषण देवलिया स्मृति व्याख्यानमाला समिति के साथ काम करने के लिए तैयार है। आंचलिक पत्रकारिता को मजबूत करने के लिए यूनिसेफ के सहयोग से हम हर जिले में अच्छी पत्रकारिता को बढ़ावा देने का काम कर रहे हैं।

    भारतीय जनसंचार संस्थान,नईदिल्ली के महानिदेशक प्रो.संजय द्विवेदी ने कहा कि स्वर्गीय भुवन भूषण देवलिया का जीवन पत्रकारिता के लोक दायित्व का स्थापित उदाहरण है। लोकमंगल उनके संवाद का प्रमुख स्तंभ था। मीडिया की आलोचना करने से जनसंवाद का उद्देश्य पूरा नहीं होता। समाज के सभी स्तंभों में गिरावट देखी जाती है ऐसे में मीडिया अछूता नहीं रह सकता। पत्रकारिता विहीन समाज के बीच कभी भी लोक कल्याणकारी राज्य नहीं बनाया जा सकता। उन्होंने कहा कि कुछ लोग आंदोलनकारी बनकर खुद को पत्रकार बताने का प्रयास करते हैं ऐसा करके वे पत्रकारों की तपस्या पर पानी फेर देते हैं। पत्रकारिता के पीछे जनता का विश्वास प्रमुख होता है। पत्रकार तो कोई भी बन सकता है लेकिन पत्रकारिता करने वाले लोग अलग होते हैं। हमें ऐसे लोगों को संरक्षण देना होगा जो वास्तव में पत्रकारिता कर रहे हैं। इस तरह के आयोजन उन्हीं पत्रकारों को संबल देने में सहायक होते हैं। इस लिहाज से ये विमर्श बहुत मूल्यवान बन गया है।

    अमर उजाला डिजिटल के संपादक जयदीप कार्णिक ने कहा कि जैसे कोई भी सच्ची खबर छुप नहीं सकती उसी तरह पत्रकारिता की गंदगी भी छुपाई नहीं जा सकती। पत्रकारिता में आत्म अवलोकन का भाव हमेशा अच्छी पत्रकारिता को जिंदा रखता है। सोशल मीडिया पर तो लोग झूठ भी प्रचारित कर देते हैं लेकिन प्रेस का संपादक केवल तथ्यों को ही प्रस्तुत करता है। यही प्रेस का महत्व भी है। उन्होंने कहा कि आज वक्त आ गया है कि हम पत्रकारिता की अर्थव्यवस्था पर भी बात करें।

    पत्रकारिता का लोक दायित्व विषय पर आयोजित इस व्याख्यानमाला में विषय का प्रवर्तन करते हुए वरिष्ठ पत्रकार शिव अनुराग पटैरिया ने कहा कि बिल्डर माफिया और शराब के व्यापारियों ने जबसे अखबारों में घुसपैठ कर ली है तबसे समाज की जन पक्षधरता लड़खड़ाने लगी है। अच्छे अखबारों का समर्थक बाजार न होने की वजह से लोकदायित्व की लड़ाई पिछड़ जाती है। इस सबके बावजूद ये भी सच है कि यदि पत्रकार न झुकना चाहें तो कोई शक्ति उन्हें नहीं झुका सकती। आज भी पत्रकारों को थानेदार, कलेक्टर और मुख्यमंत्री को खुश करके चलना होता है, ऐसे में जो लोग समझौते नहीं करते वे पिछड़ जाते हैं। साधनों के अभाव में ये पत्रकारिता पिछड़ रही है।

    अध्यक्षीय भाषण में पद्मश्री विजयदत्त श्रीधर ने कहा कि अच्छाई या बुराई हमारे ही कर्मों से निकलती हैं। हर दौर में अच्छी बुरी पत्रकारिता दोनों रहीं हैं। जो लोग किसी पार्टी के प्रवक्ता बन जाते हैं या फिर मुखबिरी करके लाभ उठाते हैं वे लोग ज्यादा खतरनाक हैं। बाजार तो हमेशा से समाज का हिस्सा रहा है,वह सहयोगी और सेवक रहे तब तक तो ठीक है लेकिन जब वह स्वामी बन जाता है तो प्रेस का लोक दायित्व भाव लड़खड़ा जाता है। उन्होंने कहा कि प्रेस काऊंसिल आज महत्वहीन हो चुकी है ऐसे में जरूरी है कि उसे समाप्त कर दिया जाए और प्रेस की स्थितियों पर नए सिरे से विचार करने के लिए तीसरे प्रेस आयोग का गठन किया जाए। प्रेस यदि साक्ष्य अधिनियम की तरह तथ्य आधारित संवाद करेगा तो उसकी विश्वसनीयता हमेशा कायम रहेगी। जनता की लोक मान्यताओं के आधार पर ही प्रेस को चौथे स्तंभ का दर्जा मिला हुआ है।

    आयोजन में दैनिक दोपहर मेट्रो के संपादक राजेश सिरोठिया और आईएनएच टीवी के ब्यूरो प्रमुख अजय त्रिपाठी ने भी स्वर्गीय देवलिया जी के संस्मरण सुनाए। आभार प्रदर्शन मुख्यमंत्री प्रकोष्ठ के जनसंपर्क अधिकारी अशोक मनवानी ने किया। आयोजन में स्वर्गीय देवलिया जी की धर्म पत्नी श्रीमती कीर्ति देवलिया और पुत्र आशीष देवलिया जी ने आनलाईन भागीदारी की। उनकी बेटियों सुश्री अरुणा और अपर्णा देवलिया भी आयोजन में शामिल थीं। समिति के पदाधिकारियों ने पुष्प गुच्छ भेंटकर अतिथियों का अभिनंदन किया। इनमें श्री राजेश सिरोठिया,राजीव सोनी,बृजेश राजपूत,ओपी दुबे,राकेश पाठक,आलोक-शैलजा सिंघई एवं अन्य पूर्व छात्र भी शामिल थे।

  • विंध्य की सत्ता को मजबूती देंगे नए विधानसभा अध्यक्ष गिरीश गौतम

    विंध्य की सत्ता को मजबूती देंगे नए विधानसभा अध्यक्ष गिरीश गौतम

    भोपाल,21 फरवरी( प्रेस सूचना केन्द्र)। मध्यप्रदेश विधानसभा का बजट सत्र सोमवार 22 फरवरी से प्रारंभ होने जा रहा है। नए अध्यक्ष के चुनाव के बाद एक बार फिर विंध्यक्षेत्र में रीवा जिले के देवतालाब से चौथी बार विधायक निर्वाचित हुए भाजपा के वरिष्ठ नेता गिरीश गौतम इस सत्र की अध्यक्षता करेंगे। आज हुई बैठक के बाद श्री गौतम ने विधानसभा अध्यक्ष पद के लिए नामांकन दाखिल किया। प्रमुख विपक्षी दल कांग्रेस ने उनके विरोध में कोई प्रत्याशी नहीं उतारने का निर्णय लिया है।

    मध्यप्रदेश की पंद्रहवीं विधानसभा का ये बजट सत्र कल 22 फरवरी से प्रारंभ होकर 26 मार्च 2021 तक चलेगा।इस विधानसभा का ये अष्टम सत्र होगा। इस 33 दिवसीय सत्र में कुल 23 बैठकें होंगी।इस दौरान आगामी वित्तीय वर्ष 2021-22 का बजट प्रस्तुत होगा। अध्यक्ष के निर्वाचन के बाद राज्यपाल का अभिभाषण होगा।

    भाजपा के वरिष्ठ विधायक गिरीश गौतम को विधानसभा अध्यक्ष के रूप में अवसर देकर भाजपा ने विंध्यक्षेत्र को एक बार फिर सत्ता में मजबूत भागीदारी दी है। मध्यप्रदेश के पिछले विधानसभा चुनाव में विंध्य क्षेत्र ने भाजपा को सर्वाधिक सीटें दीं थीं। इसके बावजूद मंत्रिमंडल में विंध्य क्षेत्र को अधिक प्रतिनिधित्व नहीं मिल पाया था। चंबल, मालवा, निमाड़,बुंदेलखंड और निमाड़ में तो कांग्रेस ने 2018 में अच्छा प्रदर्शन किया था लेकिन विंध्य के साथ न देने से ही कांग्रेस की सरकार कमजोर रही और अंततः उसे सत्ता से बाहर होना पड़ा। इसके बावजूद शिवराज सिंह सरकार में विंध्य क्षेत्र के केवल तीन विधायकों को ही जगह मिल सकी थी। मैहर के विधायक तो विंध्य क्षेत्र को प्रतिनिधित्व दिए जाने को लेकर खुला विरोध दर्ज करा चुके हैं।

    विंध्य क्षेत्र के ही श्रीनिवास तिवारी कांग्रेस सरकार में 1993 से 2003 तक स्पीकर रह चुके हैं। उन्हें मझगंवा से चुनाव हराकर 2003 में श्री गिरीश गौतम विधानसभा पहुंचे थे। परिसीमन के बाद वे देवतालाब से 2008 में भाजपा विधायक निर्वाचित हुए थे।

  • सहकारिता के दोषियों को बख्शा नहीं जाएगाः भदौरिया

    सहकारिता के दोषियों को बख्शा नहीं जाएगाः भदौरिया

    भोपाल,31जनवरी(प्रेस सूचना केन्द्र)। सहकारिता मंत्री अरविंद सिंह भदौरिया ने कहा है कि प्राथमिक सहकारी समितियों के लिए आबंटित धन की हेराफेरी करने वाले किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा। सतना और शिवपुरी जिले के अलावा अन्य जिलों मे जिन ऐसे मामलों में प्राथमिकी दर्ज की गई है उनमें दोषियों को अवश्य दंड मिलेगा। उन्होंने किसी भी सहकारी बैंक के बंद होने की खबरों को निराधार बताया। आज भोपाल में आयोजित पत्रकार वार्ता में उन्होंने पैक्स संस्थाओं में 3629 कनिष्ठ संविदा विक्रेताओं की नियुक्ति के आदेश जारी करने की जानकारी भी दी।

    सहकारिता और लोकसेवा प्रबंधन विभागों की विभिन्न गतिविधियों पर जानकारी देने के लिए अपेक्स बैंक में आयोजित पत्रकार वार्ता में आयुक्त सहकारिता और पंजीयक सहकारी संस्थाएं नरेश पाल, प्रभारी प्रबंध संचालक प्रदीप नीखरा और संचालक मंडल के सदस्य भी उपस्थित थे। श्री अरविंद भदौरिया ने बताया कि वर्ष 2018 में जिन कनिष्ठ संविदा विक्रेताओं को परीक्षा के माध्यम से चुना गया था उन्हें अब 10 फरवरी तक नियुक्ति दे दी जाएगी। युवाओं को रोजगार देने की दिशा में कदम बढ़ाते हुए शिवराज सरकार पुलिस विभाग में भी 5200 युवाओं को नौकरी देने जा रही है। उन्होंने बताया कि पैक्स संस्थाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए उन्हें आवश्यकता के अनुसार व्यवसाय करने की छूट भी प्रदान की गई है। प्रदेश की लगभग 17472 दूकानों में लगभग साढ़े तेरह हजार विक्रेता हैं।

    श्री भदौरिया ने बताया कि आत्मनिर्भर मध्यप्रदेश अभियान के तहत पैक्स संस्थाओं को दो करोड़ रुपयों तक का ऋण भी मुहैया कराया जा रहा है। सहकारिता आंदोलन को मजबूती देने के लिए तेलांगाना में जिस तरह की प्रक्रिया अपनाई गई है उसी तर्ज पर मध्यप्रदेश की सहकारी संस्थाओं को भी सफल बनाया जा रहा है। ये पूरा नेटवर्क कंप्यूटरीकृत होगा। इस आधुनिक नेटवर्क को बाजार की जरूरतों के आधार पर विकसित किया जा रहा है। आधुनिक दौर में कृषि तकनीकों में क्या फेरबदल जरूरी है उसे लेकर सहकारिता विभाग कई बदलाव कर रहा है।

    लोकसेवा प्रबंधन विभाग के मंत्री श्री भदौरिया ने बताया कि विभाग ने अपनी तकनीकी दक्षताओं से लगभग सात करोड़ लोगों की जरूरतों को पूरा करने की प्रक्रिया सरल बनाई है। युवाओं को जाति और निवास प्रमाणपत्र जैसी सुविधाएं सिर्फ मोबाईल पर आधार कार्ड टाईप करके चंद घंटों में मिलने लगी है। खसरों और खातों की प्रति भी अब आनलाईन उपलब्ध है।

    श्री भदौरिया ने एक सवाल के जवाब में बताया कि किसान कर्जमाफी का शोर मचाकर पूर्ववर्ती कमलनाथ सरकार ने केवल धोखाघड़ी की थी। किसान कर्जमाफी का बजटीय प्रावधान ही नहीं किया था। उस सरकार का कदम सहकारी बैंकों को बर्बाद करने का था। अब हमारी सरकार उन किसानों को भी मदद कर रही है जो कांग्रेस सरकार के झूठे वादों के फेर में डिफाल्टर हो गए थे। पैक्स संस्थाएं खत्म न हों इसके लिए सरकार ने आठ सौ करोड़ रुपए मुहैया कराए हैं।

    उन्होंने बताया कि सहकारी संस्थाओं को आबंटित राशि का दुरुपयोग करने वालों के खिलाफ अब कार्रवाई सुनिश्चित की जा रही है। ग्वालियर, छिंदवाड़ा ,सतना होशंगाबाद और कई जिलों में ऐसे अपराधियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई गई है। कुछ मामलों में कुर्की भी कराई जा चुकी है। गड़बड़ी रोकने के लिए अब पारदर्शी सिस्टम बनाया गया है।एक भी दोषी आदमी को बख्शा नहीं जाएगा।

  • किसान को खुशहाल बनाएंगे नए कानूनःकमल पटेल

    किसान को खुशहाल बनाएंगे नए कानूनःकमल पटेल

    अन्नदाताओं के जीवन में आसानी, समृद्धि, किसानी में आधुनिकता और प्रगति का मूल मंत्र लिए मोदी सरकार निरंतर कार्य कर रही है।इसका लाभ देश के करोड़ों किसानों को लगातार मिल रहा है।नए कृषि कानूनों के आने से यह सुनिश्चित हो गया है कि किसान अपनी फसलों को चाहे मंडी में बेचें या फिर मंडी के बाहर, ये उनकी मर्जी होगी। अब जहां किसान को लाभ मिलेगा वह बिना किसी अवरोध और रोक-टोक के वहां अपनी उपज बेच सकेगा।किसान पुत्र कृषिगत उद्योग धंधे अपने गांवों में ही लगा सकेंगे। किसान अब इन नवीन विधेयकों की बदौलत उद्योगपति भी बनेंगे।

    मोदी सरकार ने प्राथमिकता से स्वामीनाथन कमेटी की सिफारिशों के अनुरूप प्रगतिशील कदम उठाए है।देश के हर गांव का किसान अपनी फसलों की सुरक्षा को लेकर आश्वस्त रहे इसलिए भंडारण की आधुनिक व्यवस्थाएं बनाने, कोल्ड स्टोरेज बनाने और फूड प्रोसेसिंग के नए उपक्रम लगाने के लिए सरकार ने तेजी से कदम बढ़ाते हुए नए द्वार खोल दिए हैं।यदि बात न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) की करें, तो मोदी सरकार किसानों को बेहतर लागत मूल्य देकर किसानों के जीवन में क्रांतिकारी परिवर्तन लाने में सफल हुई है। वर्ष 2014 के पूर्व और वर्ष 2014 के बाद एमएसपी का तुलनात्मक अध्ययन करें, तो हम पायेंगे कि विभिन्न फसलों पर न्यूनतम समर्थन मूल्य वर्ष 2014 के बाद निरंतर बढ़ा है। यूपीए सरकार में गेहूँ का एमएसपी 1400 रुपये प्रति क्विंटल था, जबकि आज 1975 रुपये प्रति क्विंटल है। मूंग दाल पर एमएसपी 4500 रुपये था, जबकि वर्तमान सरकार में 7200 रुपये है। मसूर दाल की एमएसपी 2950 रुपये से बढ़कर आज 5100 रुपये है। ज्वार 1520 रुपये से बढ़कर 2640 रुपये है। धान की एमएसपी 1310 रुपये से बढ़कर 1870 रुपये है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी ने हाल ही में मध्यप्रदेश के किसानों से बात करते हुए इन उपलब्धियों का जिक्र भी किया और पूरी विनम्रता से अन्नदाताओं के हितों के लिए सभी सकारात्मक कदम उठाने का भरोसा भी दिलाया।

    किसान हितों के लिए दूरगामी और प्रभावकारी योजनाएँ केन्द्र सरकार लागू कर रही है। नवीन कृषि विधेयक किसानों के आर्थिक सशक्तिकरण के मार्ग को सरल और सुगम बनाएंगे। यह विधेयक किसानों के आर्थिक उत्थान का मुख्य साधन बनेंगे। मध्यप्रदेश के लोकप्रिय मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान स्वयं किसान है और वे किसानों के हितों के लिए प्रतिबद्धता से कार्य करने के लिए जाने जाते हैं। वे लगातार प्रदेश के किसानों से संवाद कर रहे है। ये कानून उनके हित में हैं। मैंने हरदा जिले में किसान चौपाल अभियान प्रारंभ किया है। नवीन कृषि कानूनों के समर्थन में किसान चौपालों में नये कृषि कानूनों पर मैं स्वयं बात कर रहा हूँ। हम सभी को मिलकर नये कृषि कानूनों को लेकर किसानों से बातचीत करना चाहिए। इससे इन कानूनों को लेकर किसानों में फैले भ्रम को दूर किया जा सकेगा। सही मायनों में इन विधेयकों से किसानों की तकदीर और प्रदेश एवं देश की तस्वीर बदलेगी। इन विधेयकों में वे तमाम प्रावधान किए गए हैं, जिनसे किसानों में खुशहाली आये और वे समृद्द हों। राष्ट्र में सुख और समृद्धि बढ़े। अंततः हम सबका लक्ष्य अपने राष्ट्र की खुशहाली है और सरकार लोककल्याणकारी नीतियों से देश के करोड़ों लोगों के सपनों को साकार कर रही है।

    वर्ष 2014 के बाद केंद्र की मोदी सरकार की लोककल्याणकारी नीतियों से देश के किसानों के जीवन में बेहद सुधार हुआ है। प्रधानमंत्री किसान सम्मान योजना से किसानों के बैंक खातों में रुपये छ: हजार की राशि सीधे ट्रांसफर होती है। इतना ही नहीं प्रदेश सरकार भी मुख्यमंत्री किसान सम्मान योजना अंतर्गत चार हजार रुपये की अतिरिक्त राशि किसानों के खातों में ट्रांसफर कर रही है। यह क्रांतिकारी बदलाव है जिससे करोड़ों भोले-भाले किसानों को सीधे उनके बैंक खातों में पूरे पैसे मिलना सुनिश्चित किया है। देश के हर किसान को पानी मिले और हर खेत तक पानी पहुंचे इस दिशा में मोदी सरकार लगातार काम कर रही है और हजारों करोड़ रुपए खर्च करके इन सिंचाई परियोजनाओं को मिशन मोड में पूरा करने में जुटी है। इसके साथ ही मधुमक्खी पालन,पशुपालन पालन और मछली पालन को भी लगातार बढ़ावा दिया जा रहा है।

    इस साल पंचायती राज स्थापना दिवस 24 अप्रैल को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशभर के सरपंचों से बात करते हुए किसानों के जीवन में बदलाव के लिए प्रधानमंत्री स्वामित्व योजना की रूप में एक स्वर्णिम योजना की शुरुआत की थी। जिससे भारत  के किसान,ग्रामीण समाज का विकास और प्रगति से सीधे जुडने का मार्ग प्रशस्त हुआ है। प्रधानमंत्री स्वामित्व योजना के तहत गांवों में ड्रोन से गाँव,खेत और भूमि की मैपिंग की जा रही है। इससे गांवों में संपत्ति को लेकर विवाद खत्म हो जाएंगे। इससे भूमि की सत्यापन प्रक्रिया में तेजी और भूमि भ्रष्टाचार को रोकने में सहायता मिलेगी। पहले गांव की जमीन पर लोन मिलना मुश्किल होता था,इसी कारण जोत की जमीन बेचकर किसान परिवार शहर की ओर पलायन कर जाते थे। अब गांवों में भी लोग बैंकों से लोन ले सकेंगे और इन सब सुविधाओं के कारण ग्रामों के विकास कार्यों को प्रगति मिलेगी। जमीन की मैपिंग के बाद गांव के लोगों को उस संपत्ति का मालिकाना प्रमाण-पत्र दिया जाएगा। ग्रामीणों के पास स्वामित्व होगा तो उस संपत्ति के आधार पर ग्रामीण बैंक से लोन ले सकेंगे। नये विधेयकों के आने से किसान आगे बढ़कर उद्यमी बनेंगे। हम सब मिलकर आत्मनिर्भर मध्यप्रदेश और आत्मनिर्भर भारत के सपने को साकार करेंगे।

  • आंगनबाड़ियों में गाय का दूध देने का फैसला सराहनीयः संदीप डाकोलिया

    आंगनबाड़ियों में गाय का दूध देने का फैसला सराहनीयः संदीप डाकोलिया


    भोपाल,28 नवंबर( प्रेस सूचना केन्द्र) अखिल भारतीय जैन पत्रकार महासंघ के प्रदेश अध्यक्ष संदीप डाकोलिया व प्रदेश महासचिव शिरीष सकलेचा का कहना है कि राज्य की शिवराज सिंह चौहान सरकार ने आंगनबाड़ियों में अंडे की जगह दूध देने के फैसले के अमल पर जो सक्रियता दिखाई है वह सराहनीय है। सरकार के इस निर्णय से पूरा अहिंसक समाज प्रसन्नता जाहिर कर रहा है।


    उन्होंने प्रेस से चर्चा में कहा कि कांग्रेस सरकार की पूर्व महिला एवं बाल विकास मंत्री इमरती देवी ने आंगनवाड़ी में बच्चों को अंडे देने का निर्णय लिया गया था। इस फैसले का अखिल भारतीय जैन पत्रकार महासंघ ने भी पुरजोर विरोध किया था।कमलनाथ सरकार के पतन के बाद अब प्रदेश की गौ प्रेमी सरकार ने इस निर्णय को पलटते हुए बच्चों को कुपोषण से मुक्त करने के लिए गाय के दूध देने का जो निर्णय लिया है वह सभी के हित में है।

    उन्होंने कहा कि गाय का दूध सभी तरह से पौष्टिक होता है। इसे सभी धर्म के लोग स्वीकार करते हैं। आंगनवाड़ी में अब सभी बच्चे एक साथ दूध ग्रहण कर सकेंगे ।किसी को कोई परहेज नहीं होगा।इस सराहनीय निर्णय के लिए अखिल भारतीय जैन पत्रकार महासंघ के पदाधिकारियों ने प्रदेश सरकार का साधुवाद ज्ञापित किया है।

    इस सरहानीय निर्णय के लिए अखिल भारतीय जैन पत्रकार महासंघ के पदाधिकारियों संस्थापक अध्यक्ष संजय लोढा, संरक्षक हिम्मत मेहता, ऋतुराज बुड़ावनवाला, सलाहकार राजेश नाहर, जवाहर डोसी उपाध्यक्ष देवेन्द्र सांड, पंकज पटवा, सचिव संदीप जैन, मयंक बाफना, संगठन सचिव विमल कटारिया, संयुक्त सचिव मेहुल बम, अरुण बुरड़, प्रचार सचिव प्रदीप जैन सिंगोली, गौरव दुग्गड़ आदि ने प्रदेश सरकार का साधुवाद ज्ञापित किया है.

  • भावनाओं के सूर्य भगवान गणेश

    भावनाओं के सूर्य भगवान गणेश

    के. विक्रम राव

    अगर इतिहासकार अलबरूनी की बात स्वीकारें तो श्रेष्ठतम सम्पादक हैं गणेश। इसे वेदव्यास ने भी प्रमाणित किया था। वर्तनी, लेखनी, प्रवाह और त्रुटिहीनता की कसौटी पर गणेश खरे उतरते है। इस पूरी गणेशकथा में हम श्रमजीवी पत्रकारों के लिये रूचिकर वाकया यह है कि गणेश सर्वप्रथम लेखक और उपसम्पादक हैं। यूं तो देवर्षि नारद को प्रथम घुमन्तू संवाददाता और संजय को सर्वप्रथम टीवी एंकर कहा जा सकता है, मगर गणेश का रिपोर्ताज में योगदान अनूठा है। मध्येशियाई इतिहासकार, गणितज्ञ, चिन्तक और लेखक अल बरूनी ने एक हजार वर्ष पूर्व लिखा था कि वेद व्यास ने ब्रह्मा से आग्रह किया था कि किसी को तलाशे जो उनसे महाभारत का इमला ले सके। ब्रह्मा ने हाथीमुखवाले गणेश को नियुक्त किया। वेदव्यास की शर्त यह थी कि गणेश लिखते वक्त रुकेंगे नहीं और वही लिखेंगेगे जो वे समझ पायेंगे। इससे गणेश सोचते हुए, समझते हुये लिखते रहे और व्यास भी बीच-बीच में विश्राम करते रहे। (एडवार्ड सी.सचान, अलबरूनीज इंडिया, मुद्रक एस. चान्द, दिल्ली, 1964, भाग एक, पृष्ट 134)।अब एक आधुनिक पहलू पर गौर करें। एडोल्फ हिटलर ने अपनी नेशनल सोशलिस्ट (नाजी) पार्टी का निशान (1930) स्वस्तिक बनाया था, तो प्राच्य के मनीषियों का व्यग्र होना सहज था। ओमकार स्वरूप गणेश के इस सौर प्रतीकवाले शुभ संकेत को उसने वीभत्स बना डाला था। हिटलर ने अपने अमांगलिक और अमानुषिक कार्ययोजना में इस वैदिक प्रतीक का जुगुप्सित प्रयोग किया था। स्वस्तिक को गणेश पुराण के अनुसार गजानन का स्वरूप तथा हर कार्यों में मांगलिक स्थापना हेतु शुरूआत को मानते हैं। श्रीगणेशाय नमः के उच्चारण के पूर्व स्वस्तिक चिन्ह बनाकर ”स्वस्ति न इन्द्रो बुद्धश्रवाः“ स्वस्तिवचन करने का विधान है। अपने स्वराष्ट्रवासी प्राच्यशास्त्री मेक्सम्यूलर को पढ़कर इस जर्मन नाजी तानाशाह ने अपने पैशाचिक अभीष्ट को हासिल करने हेतु स्वस्तिक को अपनाया था। लेकिन हिटलर का वही हश्र हुआ जो सूर्यपुत्र अहंतासुर का हुआ जिसका भगवान गजानन ने धूम्रवर्ण के अवतार में जगद् कल्याणार्थ वध किया। ब्रह्मा द्वारा कर्माध्यक्ष पद पाकर सूर्य को अहंकार हो गया था और तभी उनके नथुनों के वायु से अहंतासुर का जन्म हुआ था। वह भी अभिमानी होकर समस्त ब्रह्माण्ड का शासक, अमर तथा अजेय होना चाहता था। दैत्यगुरू शुक्राचार्य से गणेश मंत्र की दीक्षा प्राप्त कर अहन्तासुर राक्षस ने पार्वतीपुत्र की घोर उपासना की। भोले बाबा के आत्मज ने इस दैत्य को तथास्तु कहकर वर दे डाला। फिर वही हुआ जो हर दैत्य करता आया है। वही जो हिटलर ने गत सदी में किया था। पापाचार, नरसंहार, तबाही आदि। लाचार, निरीह देवताओं तथा मानवों ने गणेश की उपासना की। अपने भक्तों की रक्षा में गजानन ने उग्रपाश फेंक कर सभी असुरों का वध कर दिया। घमण्ड तजकर अहंतासुर गणेश का शरणागत हो गया। उसे आदेश मिला कि जहां गणेश की आराधना न होती हो वहीं जा कर वास करे।राजनीतिक रूप में गणेश का राष्ट्रवादी तथा जनकल्याणकारी उपयोग स्वाधीनता सेनानी, महाराष्ट्र केसरी लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक ने हिटलर के आविर्भाव के पैंतीस वर्ष पूर्व पुणे में सर्वप्रथम किया था। अंग्रेजी साम्राज्यवादियों ने अपने भारतीय उपनिवेश में हर प्रकार की सार्वजनिक क्रियाशीलता पर प्रतिबंध लगा दिया था। प्रथम स्वतंत्रता संग्राम (1857) कुचल दिया गया था। शासकों ने भारतीयों को जाति तथा मजहब के आधार पर विभाजित कर दिया था। महाराष्ट्र के पेशवा शासक 1893 के पूर्व तक गणेश चतुर्थी भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को मनाते थे। लोकमान्य तिलक ने इस धार्मिक उत्सव के जनवादी पहलू को पहचाना। उसे जनान्दोलन बनाया। तभी भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की स्थापना मुम्बई में हुये आठ वर्ष हो चुके थे। मगर सार्वजनिक आयोजन पर रोक बरकरार थी। हिन्दू चेतना को तिलक ने जगाया और जनपदीय स्तर से उठाकर गणेश चतुर्थी को राष्ट्रीय रूप दिया। चूंकि अन्य ईश्वरों की तुलना में गणेश किसी जाति या वर्ग विशेष के नहीं थे, अतः सर्वजन के इष्ट बन गये। गणेशोत्सव में सभी हिन्दू शरीक हो गये। उन्हीं दिनों तिलक के उग्र संपादकीय (समाचारपत्र मराठा तथा केसरी में) छपते थे जिनसे साम्राज्यवाद-विरोधी भावना को बल मिलता था। उनका सिंहनाद कि ”स्वतंत्रता मेरा जन्मसिद्ध अधिकार है, मैं इसे लेकर रहूंगा“ काफी ख्यात हुआ। गणेश चतुर्थी को तिलक ने जनविरोध का माध्यम बनाया। बौद्धिक चर्चायें, नुक्कड़ नाटक, कविता पाठ, संगीत आदि माध्यम अपना कर गणेश चतुर्थी को मात्र लोकरंजन ही नहीं लोकराज के संघर्ष का मंच भी बनाया गया। स्वतंत्रता के बाद तो गणेश चतुर्थी को राष्ट्रीय पर्व की मान्यता मिल गई।गणेश के गृहस्थ होने की बात विवादित है। दक्षिण भारत, विशेषकर तमिलनाडु में, उन्हें ब्रह्मचारी मानते हैं। उत्तर भारत में प्रसंग भिन्न है। यह जानीमानी घटना है कि दोनों भ्राताओं (कार्तिकेय) में प्रतिस्पर्धा हुई कि पहले किसका पाणिग्रहण हो। दुनिया की परिक्रमा की शर्त रखी थी माता-पिता ने तो गणेश ने शार्टकट का रास्ता अपनाया और शिवपार्वती की परिक्रमा कर अपना दावा पुख्ता कर लिया। नाराज होकर देवताओं के सेनापति कार्तिकेय दक्षिण भारत में बस गये और अविवाहित रहे। गणेश की दो भार्या थीः ऋद्धि और सिद्धि तथा दो सन्ताने हुई क्षेम और लाभ जिसकी वणिकवर्ग और श्रेष्ठिजन पूजा करते हैं।यूं शिव ने देवताओं के शुभकार्य हेतु गणेश की सृष्टि की मगर अन्य गमनीय विभूतियां और विलक्षणतायें भी गणेश में हैं। शिव के रौद्ररूप की धार कम करना हो तो गणेशोपासना कीजिए। निर्विघ्नता, कर्मनाश और धर्मप्रवर्तन के अलावा गणेश ललित कलाओं और संस्कृति के संरक्षक हैं। एक बार वे मृदंग बजा रहे थे कुपित शिव ने उसे त्रिशूल से तोड़ दिया। तबला की उत्पत्ति तभी से हुई। जटिलता को सुगम बनाने में उन्हें महारत है जैसे भारीभरकम हाथीवाला शरीर नन्हे चूहे पर टिके, यह भौतिक संतुलन मुमकिन कर दिखाया।चूहे का ही प्रसंग है। एक बार सांप दिख गया था तो चूहा भागा और गड़बडा कर गणेश जी घराशायी हो गये। इस नजारे पर चन्द्रमा हंस पड़े। गणेश ने शाप दे दिया कि उसका आकार घटता बढ़ता रहेगा। तभी से चन्द्रमा के लिए बालेन्दु से पूर्णचन्द्र और फिर प्रतिपदा से अमावस तक का दौर चलता है। तो उस महान सम्पादक व लेखक वक्रतुण्ड, एकदन्त, गजवक्त्र, लम्बोदर, विकट, विघ्नराज, धूम्रवर्ण, भालचन्द्र, विनायक, गणपति, गजानन को उनके जन्मोत्सव पर हमारा सादर नमन।K Vikram RaoMobile :9415000909E-mail: k.vikramrao@gmail.com

  • मास्टर प्लान में माफिया की घुसपैठ बोले बिहारीलाल जी

    मास्टर प्लान में माफिया की घुसपैठ बोले बिहारीलाल जी

    भोपाल,26 जून(प्रेस सूचना केन्द्र)। नगर विकास मंच मध्यप्रदेश के संयोजक बिहारीलाल जी का कहना है कि राजधानी के सुनियोजित विकास के लिए प्रस्तावित मास्टर प्लान के ड्राफ्ट में आमूलचूल बदलाव करना जरूरी है। ये मास्टर प्लान विधि सम्मत नहीं है और इसे इतनी जल्दबाजी में बनाया गया है कि इसके ऊटपटांग स्वरूप का लाभ लेते हुए माफिया ताकतों ने बेशकीमती जमीनों को हथियाने और बेचने का जाल बुन डाला है। भू माफिया ने राजधानी में रोजगार के अवसर विकसित किए बगैर लोगों को गांवों से खदेड़कर भीड़ जुटाने का षड़यंत्र रचा है। प्रदेश के समन्वित विकास के लिए प्रदेश के विभिन्न शहरों के मास्टर प्लान के साथ ही राजधानी का नगर निवेश भी किया जाना जरूरी हो गया है।

    आज एक पत्रकार वार्ता में नगर विकास मंच मध्यप्रदेश के पदाधिकारियों के साथ नगर तथा ग्राम निवेश विभाग मध्यप्रदेश के सेवानिवृत्त असिस्टेंट डायरेक्टर श्री बिहारी लाल ने कहा कि राजधानी के मास्टर प्लान के ड्राफ्ट में भारी गड़बड़ियां हैं। इसका महाविशाल स्वरूप वेवसाईट पर इस तरह दर्शाया गया है कि जिसे आम लोग पढ़ समझ नहीं सकते। इसके संपादित स्वरूप को पुस्तकाकार रूप में प्रकाशित किया जाना जरूरी है। शहर के विकास में रुचि रखने वाले लोग इससे नगर विकास के संबंध में अपनी कीमती राय से शासन को अवगत करा सकेंगे। प्रेस वार्ता में मंच के अजय लखवानी समेत कई अन्य पदाधिकारी भी उपस्थित थे।

    उन्होंने कहा कि राजधानी की वर्तमान भूमियों के मानचित्र बनाकर उन्हें वार्डवार प्रदर्शित किया जाना जरूरी है ताकि लोग भविष्य की योजनाओं के संबंध में अपनी भागीदारी सुनिश्चित कर सकें। इस मास्टर प्लान को संक्षिप्त पुस्तक के रूप में और हिंदी भाषा में प्रकाशित किया जाना जरूरी है। मास्टर प्लान का ये ड्राफ्ट राजधानी के ही 284 गांवों की पंचायतों के अधिकारों का दमन कर रहा है। इससे पंचायतों के अधिकार समाप्त हो जाएंगे।

    श्री बिहारीलाल ने कहा कि एक ओर जब भारत सरकार आत्मनिर्भर भारत की योजना पर कार्य कर रही है वहां राजधानी में रोजगार के अवसर न होने पर ही अंधे शहरीकरण को बढ़ावा दिया जा रहा है।शहर में लगभग 50 हजार से ज्यादा आवासीय प्रकोष्ठ खाली पड़े हैं। इसके बावजूद माफिया ताकतें शहर में और भी ज्यादा भवन बनाने का षड़यंत्र रच रही है।चीन में विकास के नाम पर ऐसे ही कई शहर खाली पड़े हैं जिन्हें भूतिया शहर कहा जाता है।सरकार की ये जवाबदारी है कि वो बेतरतीब शहरीकरण को रोककर लोगों को मौजूदा आवासों की सुविधा उपलब्ध कराए।

    पत्रकार वार्ता में मौजूद नागरिकों ने जब उनसे सवाल किया कि पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में नगरीय विकास मंंत्री जयवर्धन सिंह किन माफिया ताकतों के इशारे पर ये मास्टर प्लान लागू कर रहे थे तो उन्होंने कहा कि कई अन्य ताकतें भी शहरी विकास की आड़ में अपना उल्लू सीधा करना चाह रहीं हैं। गौरतलब है कि पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह के इशारे पर कमलनाथ सरकार ने प्रदेश के कई शहरों में एक साथ मास्टर प्लान लागू करके गांवों से लोगों को खदेड़ने की तैयारी की थी,सरकार के अवसान के बाद ये स्थितियां बदल गईं हैं। इस स्थिति में शहरों और गांवों के समन्वित नियोजन की जरूरत महसूस की जा रही है। कोरोना के कहर के बाद तो इस योजना की प्रासंगिकता कई सवालों से घिर गई है।

  • कृतघ्न महाराष्ट्र सरकार

    कृतघ्न महाराष्ट्र सरकार

    कोरोना संकट के बाद चल रहे लंबे लॉक डाऊन ने सरकारों की धूल निकाल दी है। खुद को प्रदेशों और देश का भाग्य विधाता कहलाने वाली सरकारों की चूलें हिल गईं हैं। अधिकतर राज्यों की सरकारें अब लोगों को घरों पर बैठकर नहीं खिला पा रहीं हैं। उनके पास अनाज के तो भंडार हैं लेकिन उन्हें सप्लाई करने वाला ढांचा नहीं है। वे किसानों से खरीदा गया अनाज फोकट में नहीं बांट पा रहीं हैं। इसकी वजह से निम्न मध्यमवर्गीय लोगों में भगदड़ मच गई है। देश में असंतुलित विकास के ढांचे की वजह से महाराष्ट्र को निर्माण का हब तो बना दिया गया लेकिन उसमें आजादी के 73 सालों बाद भी जिम्मेदारी का भाव नहीं आया है। पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकारों ने यूपी, बिहार,झारखंड, मध्यप्रदेश जैसे राज्यों में उद्योगों को अनुमति देने के बजाए महाराष्ट्र से समुद्र तटीय इलाकों में उद्योगों की भरमार कर दी थी। यही वजह है कि देश भर के कई राज्यों से करोड़ों लोग इन क्षेत्रों में कामकाज की तलाश में पहुंच गए। मुंबई और महाराष्ट्र में यूपी, बिहार, मध्यप्रदेश,पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों से करीबन तीस लाख मजदूर रह रहे हैं। जब तक उद्योगों को सस्ते मजदूरों की जरूरत थी महाराष्ट्र ने उन्हें गले लगाया लेकिन अब जबकि लॉक डाऊन चल रहा है तब महाराष्ट्र की शिवसेना, कांग्रेस और एनसीपी सरकार मजदूरों से पल्ला झाड़ रही है। ऐसे ही औरंगाबाद से लौट रहे 16 मजदूरों की रेल की पटरियों पर मालगाड़ी से कुचलकर मौत हो गई है। सड़क मार्ग बंद होने की वजह से वे रेल की पटरियों के सहारे अगले स्टेशन पर किसी रेलगाड़ी की उम्मीद में जा रहे थे। थकान की वजह से वे पटरियों पर ही बैठ गए और थकान की वजह से उनकी आंख लग गई। इस बीच मालगाडी आ गई और वे मारे गए। इस दुर्घटना के बाद उद्धव सरकार की अमानवीय सोच की पूरे देश में निंदा हो रही है। अभी दो दिन पहले ही शिवसेना के मुखपत्र सामना ने संपादकीय में लिखा था कि राज्यों की सरकारें अपने मजदूरों को वापस नहीं आने दे रहीं हैं वे कह रहीं हैं कि सरकारें मजदूरों का कोरोना टेस्ट कराएं और फिर अपने खर्चे से उन्हें घर भेजें। वोट बैंक का कचरा अब किसी को अपने आंगन में नहीं चाहिए।जिन मजदूरों ने महाराष्ट्र के विकास में उसकी समृद्धि के लिए अपना जीवन नारकीय परिस्थितियों में होम कर दिया उन्हें शिवसेना की सोच आज वोट बैंक का कचरा बता रही है। ये शर्मनाक है। जब सरकारें उद्योगों को मंजूरी देती हैं तब वे उनके लिए आवश्यक मजदूरों की व्यवस्था करने की छूट भी देती हैं। उन मजदूरों के निवास भोजन की व्यवस्था करने की जवाबदारी भी लेती हैं। जब तक विकास की लोरियां सुनीं सुनाई जा रहीं थीं तब यही मजदूर महाराष्ट्र को अच्छे लग रहे थे और जब संकटकाल में उन्हें पालने की जवाबदारी आई है तो सरकार हाथ ऊंचे कर रही है। सरकार को ये होश ही नहीं है कि वह अपने मजदूरों के भोजन निवास की व्यवस्था कर पाए। वे अभागे मजदूर रेल की पटरियों पर जा रहे थे या उन्हें किसी ने मारकर पटरी पर फेंक दिया इसकी जांच होनी अभी बाकी है। पर इतना तो साफ है कि महाराष्ट्र सरकार अपना दायित्व निभाने में असफल रही है। अपने राज्य में निवास कर रहे मजदूरों का पालन करना उसकी जवाबदारी है। कोरोना का संक्रमण रोकने के लिए उन्हें मौजूदा स्थान पर ही रोकना जरूरी है। 135 करो़ड़ की आबादी वाले देश में केवल 56 हजार संक्रमितों को देखें तो केन्द्र सरकार की रणनीति कारगर रही है। लेकिन अब राज्य सरकारें यदि अपनी जवाबादारी नहीं निभाएंगी तो ये संक्रमण देश के अनेक राज्यों में गांव गांव तक फैल सकता है। एम्स के विशेषज्ञों ने भी चिंता व्यक्त की है कि जून जुलाई का महीना संक्रमण को फैलाने वाला साबित हो सकता है। जाहिर है कि सरकारों को दीर्घ रणनीति बनानी होगी और मजदूरों को सामाजिक दूरी बनाकर रोजगार और उत्पादन की कड़ी शुरु करनी होगी ताकि देश में भगदड़ न मचे और कोरोना से होने वाली संभावित मौतों को टाला जा सके।

  • इंस्पेक्टर राज से उद्योगों को राहत

    इंस्पेक्टर राज से उद्योगों को राहत

    भोपाल,5मई(प्रेस सूचना केन्द्र) उद्योगों और श्रमिकों के हित में 4 केन्द्रीय और 3 राज्य अधिनियमों में संशोधन की अधिसूचना जारी कर दी गई है। इसके साथ ही लोक सेवा प्रदाय गारंटी अधिनियम में 18 सेवाओं को एक दिन में देने का प्रावधान किया जा रहा है। मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने अधिकारियों के साथ बैठक में विभिन्न अधिनियमों में प्रस्तावित संशोधनों में बिन्दुवार चर्चा कर कोरोना के बाद उत्पन्न स्थिति में आगामी एक हजार दिनों में उद्योगों को विभिन्न रियायतें देने की जरूरत बताई थी। श्री चौहान ने आज के प्रतिस्पर्धी दौर में निवेश बढ़ाने और श्रमिकों को रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने के उद्देश्य से श्रम कानूनों में आवश्यक संशोधन के प्रस्ताव तैयार करने के निर्देश दिए थे।

    कारखाना अधिनियम 1948 के अंतर्गत कारखाना अधिनियम 1958 की धारा 6,7,8 धारा 21 से 41 (एच), 59,67,68,79,88 एवं धारा 112 को छोड़कर सभी धाराओं से नवीन उद्योगों को छूट रहेगी। इससे अब उद्योगों को विभागीय निरीक्षणों से मुक्ति मिलेगी। उद्योग अपनी मर्जी से थर्ड पार्टी इंस्पेक्शन करा सकेंगे। रजिस्टर के संधारण में छूट मिलेगी। फेक्ट्री इंस्पेक्टर द्वारा जाँच एवं निरीक्षण से मुक्ति मिलेगी। उद्योग अपनी सुविधा में शिफ्टों में परिवर्तन कर सकेंगे।

    मध्यप्रदेश औद्योगिक संबंध अधिनियम 1960 में संशोधन के साथ इस अधिनियम के प्रावधान उद्योगों पर लागू नहीं होंगे। इससे किसी एक यूनियन से समझौते की बाध्यता समाप्त हो जायेगी। औद्योगिक विवाद अधिनियम 1947 में संशोधन के बाद नवीन स्थापनाओं को एक हजार दिवस तक औद्योगिक विवाद अधिनियम में अनेक प्रावधानों से छूट मिल जायेगी। संस्थान अपनी सुविधानुसार श्रमिकों को सेवा में रख सकेगा। उद्योगों द्वारा की गयी कार्यवाही के संबंध में श्रम विभाग एवं श्रम न्यायालय का हस्तक्षेप बंद हो जायेगा।

    मध्यप्रदेश औद्योगिक नियोजन (स्थायी आदेश) अधिनियम 1961 में संशोधन के बाद 100 श्रमिक तक नियोजित करने वाले कारखानों को अधिनियम के प्रावधानों से छूट मिल जायेगी। इससे श्रमिक निष्ठापूर्वक उत्पादन में सहयोग करेंगे। मध्यप्रदेश श्रम कल्याण निधि अधिनियम 1982 के अंतर्गत जारी किये जाने वाले अध्यादेश के बाद सभी नवीन स्थापित कारखानों को आगामी एक हजार दिवस के लिये मध्यप्रदेश श्रम कल्याण मण्डल को प्रतिवर्ष प्रति श्रमिक 80 रूपये के अभिदाय के प्रदाय से छूट मिल जायेगी। इसके साथ ही वार्षिक रिटर्न से भी छूट मिलेगी।

    लोक सेवा प्रदाय गारंटी अधिनियम 2010 के अंतर्गत जारी अधिसूचना के अनुसार श्रम विभाग की 18 सेवाओं को पहले तीस दिन में देने का प्रावधान था। अब इन सेवाओं को एक दिन में देने का प्रावधान किया गया है। कारखाना अधिनियम 1948, दुकान एवं स्थापना अधिनियम 1958, ठेका श्रम अधिनियम 1970, अंतर्राज्यीय प्रवासी कर्मकार अधिनियम 1979, मोटर परिवहन कर्मकार अधिनियम 1961, मध्यप्रदेश भवन एवं अन्य संनिर्माण कर्मकार अधिनियम 1996 और बीड़ी एवं सिगार कामगार (नियोजन की शर्ते) अधिनियम 1966 में पंजीयन के लिये ऑनलाइन आवेदन करने पर एक दिन में ही ऑनलाइन पंजीयन मिल जाएगा। इससे पंजीयन के लिये बेवजह कार्यालयों के चक्कर काटने से मुक्ति मिलेगी।

    दुकान एवं स्थापना अधिनियम 1958 में संशोधन के बाद कोई भी दुकान एवं स्थापना सुबह 6 से रात 12 बजे तक खुली रह सकेगी। इससे दुकानदारों के साथ ही ग्राहकों को भी राहत मिलेगी। पचास से कम श्रमिकों को नियोजित करने वाले स्थापनाओं में श्रम आयुक्त की अनुमति के बाद ही निरीक्षण किया जा सकेगा। निरीक्षण में पारदर्शिता होगी। कारखानों को दो रिटर्न के स्थान पर एक ही रिटर्न भरना पड़ेगा।

    ठेका श्रमिक अधिनियम 1970 में संशोधन के बाद ठेकेदारों को 20 के स्थान पर 50 श्रमिक नियोजित करने पर ही पंजीयन की बाध्यता होगी। 50 से कम श्रमिक नियोजित करने वाले ठेकेदार बिना पंजीयन के कार्य कर सकेंगे। इस अधिनियम में संशोधन के लिये प्रस्ताव केन्द्र सरकार को भेजा गया है।

    कारखाना अधिनियम के अंतर्गत कारखाने की परिभाषा में विद्युत शक्ति के साथ 10 के स्थान पर 20 श्रमिक और बगैर विद्युत के 20 के स्थान पर 40 श्रमिक किया गया है। इस संशोधन का प्रस्ताव भी केन्द्र शासन को भेजा गया है। इससे छोटे उद्योगों को कारखाना अधिनियम के पंजीयन से मुक्ति मिलेगी। इसके पूर्व 13 केन्द्रीय एवं 4 राज्य कानूनों में आवश्यक श्रम संशोधन किये जा चुके हैं।