Category: मध्यप्रदेश

  • विकास का झूठ और कर्ज का पहाड़

    विकास का झूठ और कर्ज का पहाड़

    सरयूसुत मिश्र

    सरकारों द्वारा लिए जाने वाले कर्ज और विकास पर पक्ष विपक्ष के बीच बहस और बयानबाजी अक्सर होती रहती है| जहां सत्ता पक्ष का तर्क होता है कि ऋण लेकर प्रदेश का विकास किया गया है, वहीं विपक्ष आरोप लगाता है कि सरकार द्वारा कर्ज लेकर घी  पीने का काम किया जा रहा है|
    जैसे ही सत्ता और विपक्ष का स्थान बदलता है वैसे ही वक्तव्य भी बदल जाते हैं| इसकी वास्तविकता क्या है यह हमेशा राजनीतिक बयानों के बीच छिपा रहता है|
    वित्तीय आंकड़े और बजटीय भाषा कुछ इस तरह की होती है जो आम समझ के बाहर होती है| विशेषज्ञों के लिए राज्यों का कर्ज कोई महत्वपूर्ण विषय नहीं होता इसलिए उनकी आंखों से भी यह ओझल ही रहता है|
    कर्ज और विकास की सच्चाई सरकारें बताना नहीं चाहती|
    मध्यप्रदेश विधानसभा में 21 दिसंबर 2021 को एक प्रश्न में यह पूछा गया था कि सरकार द्वारा लिए गए ऋण से कौन-कौन से विकास कार्य कराए गए हैं?
    सरकार ने उत्तर में यह बताया कि कर्ज किसी योजना के लिए नहीं लिया जाता| इसलिए इससे कराए गए कार्यों की जानकारी नहीं दी जा सकती|
    विकास के लिए  कर्ज लिया जाना आवश्यक होता है| लेकिन आम लोगों को जानने का हक है कि  जो कर्ज लिया गया है उससे कौन-कौन से विकास कार्य कराए गये| यह सही है कि किसी योजना के लिए सरकार द्वारा कर्ज नहीं लिया जाता, सरकार तो अपने बजट के अंतर्गत विकास कार्यों के लिए धनराशि की कमी को पूरा करने के लिए लोन लेती है| वित्त विभाग के लिए यह कठिन नहीं है कि वह साफ-साफ बताए कि जो भी ऋण राज्य द्वारा लिया गया है उसके अंतर्गत मुख्य रूप से कौन-कौन से विकास के कार्य कराए गए हैं| यह समझ के बाहर है कि यह जानकारी सरकारें छुपाती क्यों है|
    मध्य प्रदेश सरकार पर 31 मार्च की स्थिति में 2 लाख 53 हजार करोड़ का कर्ज है|  इसके बाद  नवंबर 21 तक 14000 करोड का कर्ज और लिया गया है, यानि नवम्बर 2021 की स्थिति में कर्ज 267000 करोड हो चुका है|  पिछले साल लिए गए ऋण की प्रवृत्तियों के अनुसार, यदि लोन लिया जाता है तो चालू वित्तीय वर्ष में यह आंकड़ा तीन लाख करोड़ के ऊपर पहुंचने की संभावना है| 
    वर्ष 2003 में मध्यप्रदेश में कांग्रेस की सरकार के बाद उमा भारती के नेतृत्व में सरकार बनी थी तब सरकार द्वारा  राज्य की आर्थिक स्थिति पर एक श्वेत पत्र जारी किया गया था| इसके अनुसार मध्य प्रदेश गठन के बाद 2003 तक 33 हजार करोड़ का कर्ज था जो 20 सालों में बढ़कर 3 लाख करोड़ पंहुच रहा है| यानी 2003 के बाद सरकार द्वारा लिए गए लोन में से 33000 करोड रुपए घटा देने पर 18 सालों में 2 लाख 34 हज़ार करोड़ का कर्ज मध्य प्रदेश सरकार द्वारा लिया गया है|
    इनको अगर माह अनुसार बांटा जाए तो हर महीने 1083 करोड़ का कर्ज सरकार ने लिया है|
    विकास के लिए कर्ज जरूरी है इसलिए यह देखना भी जरूरी है कि जो भी कर्ज लिया गया है उसका क्या सदुपयोग विकास (पूंजीगत व्यय) में किया गया है?
    वैसे तो सरकार की आय और व्यय में भी पूंजीगत व्यय के लिए राशि दी जाना चाहिए| लेकिन अगर उसको छोड़ भी दें और केवल  कर्ज को ही विकास के लिए माना जाए तब भी आंकड़े ऐसा बताते हैं कि कर्ज की पूरी राशि शायद  पूंजीगत व्यय में खर्च नहीं की जाती है|
    पूंजीगत व्यय के अंतर्गत पुल पुलिया सड़क आदि स्थाई परिसंपत्तियों का निर्माण किया जाता है| जब तक स्थाई परिसंपत्तियों का निर्माण सही मात्रा में नहीं होगा तब तक विकास की सही परिकल्पना पूरी नहीं हो सकती है| नियंत्रक महालेखा परीक्षक द्वारा 31 मार्च 2020 को समाप्त हुए वर्ष के लिए दिए गए लेखा परीक्षा प्रतिवेदन में यह बताया गया है कि राज्य में पूंजीगत परिव्यय 15-16 से 20-21 तक इस प्रकार है|
    2015-16    16 835 करोड़2016-17    27 288 करोड़2017-18    30 913 करोड़2018-19    29 424 करोड़2019-20    29 241 करोड़2021-22    33 490 करोड़(बजट)

    लेखा प्रतिवेदन में यह बताया गया है कि पिछले 5 वर्षों के दौरान राज्य का पूंजीगत व्यय दो हजार अट्ठारह उन्नीस को छोड़कर 2015-16 से 2019-20 तक परिसंपत्तियों के सृजन पर आवंटित बजट का उपयोग नहीं किया जा सका|
    जितने भी छोटे-छोटे निर्माण कार्य होते हैं, उन पर योजना की लागत और निर्माण एजेंसी का नाम राज्य सरकार पारदर्शिता के लिए प्रदर्शित करती है|
    जब यह सामान्य भाषा में बताया जा सकता है तो सरकार स्तर पर वित्त विभाग सामान्य भाषा में यह क्यों नहीं बता सकता कि कुल बजट और कुल लिए गए कर्ज में से विकास के कौन-कौन से काम कराए गए और सामाजिक सेवाओं या अन्य प्रतिबद्ध खर्चों पर कितना व्यय किया गया|
    वैसे आजकल विकास का पैमाना भी बदल गया है| पहले विकास के हर काम सरकारों को स्वयं करने पड़ते थे| चाहे सड़क हो,बिजली संयंत्र हों या कोई भी विकास की योजना हो, सरकार ही पैसा खर्च करती थी और सरकार ही उनका निर्माण करती थी| अब तो विकास की प्रक्रिया बदल गई है| अब BOT जैसे प्रोसेस आ गए हैं| जिसमें सरकारी संपत्ति निर्माण के लिए प्राइवेट लोगों को दे दी जाती है और प्राइवेट लोग अपना पैसा खर्च कर निर्माण करते हैं| उस संपत्ति का उपयोग करने वालों से वह सेवा शुल्क प्राप्त करते हैं| इनके विकास पर अब सरकारें पैसा नहीं खर्च करती हैं| सड़कों को ही अगर देखा जाए तो आज अधिकांश सड़कें चाहे वह राजमार्ग हो या राष्ट्रीय राजमार्ग, उनका निर्माण BOT के अंतर्गत निजी लोगों द्वारा किया गया है, उन पर टोल वसूला जा रहा है| वैसे तो जो सड़क सरकार की संपत्ति थी, जिस पर चलने पर किसी को कोई टैक्स नहीं देना पड़ता था, वह अब लोगों को टैक्स देने के बाद ही आवागमन  के लिए मिलती है| अगर यात्री टोल की सड़कों पर 1000 किलोमीटर यात्रा करेगा तो कम से कम इतनी ही राशि उसे टोल टैक्स के रूप में देनी पड़ेगी| सड़कों के अलावा अन्य क्षेत्रों में भी अब इस तरह की नीतियां सरकारों द्वारा लागू कर दी गई हैं|
    आज सभी राज्यों में लोकतांत्रिक सरकारों द्वारा चुनाव जीतने के लिए निजी लाभ को ज्यादा प्रोत्साहित किया जाता है| ऐसी योजनाएं घोषित की जाती हैं, और लागू की जाती है जिससे लोगों को उनके खातों में पैसा या कोई न कोई लाभ मिल सके| जिससे कि उस सरकार के प्रति लोग उपकृत महसूस करें और चुनाव के समय राजनीतिक दलों को उसका लाभ मिले|
    सरकारों की निजी लाभ देने की  जो प्रवृत्ति आजकल दिखाई पड़ रही है वह चिंतित करती है| 
    सरकारें अनाप-शनाप ऐसे काम पर खर्च करती हैं जो पूरी तरह से अनुत्पादक हैं| उत्पादक खर्चों पर ध्यान नहीं दिया जाता|
    एक पहेली में एक मजदूर अपनी मजदूरी और खर्च बताते हुए कहता है कि उसे ₹4 की मजदूरी मिलती है उसमें से ₹1 वह अपने परिवार के भरण पोषण पर खर्च करता है, ₹1 कर्ज देता है(अर्थात अपने बच्चों के भविष्य निर्माण पर खर्च करता है), ₹1 कर्ज लौटाता है, अर्थात बूढ़े माता-पिता पर खर्च करता है, क्योंकि उन्होंने उसका पालन पोषण किया है, ₹1 फेंक देता है अर्थात सेवा में समाज के लिए दान में खर्च करता है| यह सामान्य पहेली किसी भी व्यक्ति और सरकार को अपनी आय और व्यय को संतुलित रखने का बहुत मार्मिक संदेश देती है| कोई भी सरकार अगर भविष्य निर्माण पर अपनी आय का एक चौथाई नहीं खर्च करेगी तो व्यवस्था गड़बड़ा जाएगी| इसी प्रकार सामाजिक सेवाओं के लिए मुफ्त में लोगों को लाभान्वित करने के लिए 25% से ज्यादा नहीं खर्च किया जाना चाहिए| सिस्टम पर खर्च भी लगातार बढ़ता जा रहा है| यह भी सरकार पर भारी पड़ रहा है| जबकि सरकारी कर्मचारियों की संख्या लगातार घटती जा रही है| आज के 15 साल पहले जहां लगभग 7 लाख कर्मचारी थे आज उनकी संख्या चार लाख के आसपास ही है|
    सरकार विज्ञापन निकालकर नए बजट के लिए आम लोगों से सुझाव मांगती है| क्या इसी विज्ञापन में यह नहीं दिया जा सकता कि पिछले साल हमने आम लोगों के लिए कितनी कितनी राशि किस बात पर किस विकास कार्य पर खर्च की| अगर यह दिया जाता तब लोग बजट के लिए सुझाव देने पर अधिक उत्साहित होते| आज तो यह औपचारिकता जैसी हो गई है| सरकार से जुड़े कुछ लोग सुझाव देकर इस औपचारिकता को पूरी कर देते हैं|
    सूचना के अधिकार कानून में जहां लोगों को सुरक्षा और कुछ महत्वपूर्ण विषयों को छोड़कर सभी चीजें जानने का हक है, तो फिर इस बात से क्यों वंचित किया जा रहा है, कि सरकार ने कर्ज लेकर उसके अंतर्गत कौन-कौन से विकास के काम किए हैं|
    भले ही इसके लिए विभाग को थोड़ी मेहनत कर विवरण तैयार कर देना पड़े लेकिन दिया जाना चाहिए| इससे सरकार की विश्वसनीयता बढ़ेगी और विकास की प्रमाणिकता भी स्थापित होगी|
    केवल बांटने से अहम की संतुष्टि हो सकती है, लेकिन राज्य का विकास नहीं हो सकता है| जनता  के टैक्स का पैसा खर्च करते समय उसकी उपयोगिता और प्रमाणिकता सबसे महत्वपूर्ण होती है| सरकारें इस पर ध्यान नहीं देंगी तो पक्ष विपक्ष के बीच में तर्क वितर्क होता रहेगा और राज्य के टैक्सपेयर चिंता व्यक्त करते रहेंगे|

    न्यूज पुराण से साभार

  • बेअसर रही पिछड़ा वर्ग का वोट बैंक छीनने की राजनीति

    बेअसर रही पिछड़ा वर्ग का वोट बैंक छीनने की राजनीति


    अंग्रेजों की फूट डालो और राज करो की नीति का अनुसरण करने वाली कांग्रेस पार्टी इन दिनों मध्यप्रदेश में इसी पुरातन फार्मूले का प्रयोग कर रही है। पिछले विधानसभा चुनाव में कमलनाथ कांग्रेस ने आदिवासियों को बरगलाकर सत्ता पाने में जो सफलता पाई थी उससे उत्साहित होकर उन्होंने इस बार पिछड़ों को निशाना बनाया है। पिछड़ा वर्ग के इस बड़े वोट बैंक की खेती करने की शुरुआत वैसे तो कांग्रेस की अर्जुनसिंह सरकार ने की थी लेकिन उसे परिणाम मूलक बनाने का काम भारतीय जनता पार्टी ने किया । पिछड़ा वर्ग से ही लगातार तीन मुख्यमंत्री देकर भाजपा ने इस बड़े वोट बैंक को संवारने में सफलता पाई है। इस मजबूत वोट बैंक में सेंध लगाने की हसरत पाले कमलनाथ कांग्रेस ने कानूनी दांव पेंच से अपनी पार्टी को जिस तरह पिछड़ों का हितैषी बताने का अभियान चलाया उसने राज्य की राजनीति में भारी भूचाल मचा दिया। कई दिनों तक लगता रहा कि पिछड़ों की ये पैरवी कांग्रेस को बड़ा जनाधार दिलवाएगी। कमलनाथ के इस दांव के सूत्रधार राज्यसभा सांसद विवेक तनखा बने। उन्होंने कमलनाथ के मीडिया प्रभारी सैय्यद जाफर और अन्य की याचिकाओं को लेकर अदालती लड़ाई लड़ी। विशेष विमान से इन योद्धाओं को सुप्रीम कोर्ट भेजा गया और बड़ी धनराशि खर्च करके अदालत में पिछड़ों को आरक्षण की रोटेशन प्रणाली का पालन करवाने की पैरवी की गई। ये दांव उल्टा पड़ा और अदालत ने इसे फेब्रिकेटेड मानते हुए खारिज कर दिया। रिपट पड़े की हर गंगे करने वाले कमलनाथ ने सरकार पर दबाव बनाना शुरु कर दिया कि वह पिछड़ों को आरक्षण दिलाने के लिए अदालत जाए। विधानसभा में जो स्थगन प्रस्ताव लाया गया उसमें कांग्रेस ने सरकार पर आरोप लगाने की कोशिश की थी कि वह पिछड़ों को आरक्षण का लाभ न देकर पंचायतों के जो चुनाव करवा रही है उससे प्रदेश के एक बड़े वर्ग के हितों की अनदेखी होगी। कमलनाथ और उनकी चिल्लर पार्टी ने सदन में जिस तरह इस मुद्दे को उठाया उससे तो कांग्रेस छोड़कर भाजपा में गए विधायकों मंत्रियों को भी एकबारगी लगा कि सरकार पर किया जा रहा ये वार बहुत घातक साबित होगा। पर ऐसा कुछ हुआ नहीं। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान, उनके सहयोगी गृहमंत्री डाक्टर नरोत्तम मिश्रा और नगरीय विकास एवं आवास मंत्री ठाकुर भूपेन्द्र सिंह ने जिस तरह इस राजनीतिक वार का डटकर सामना किया उससे विपक्ष की धार भौंथरी हो गई। भूपेन्द्र सिंह जो कि स्वयं पिछड़ा वर्ग से आते हैं उन्होंने कहा कि यदि हमारी सरकार पर लगाए जा रहे आरोपों में थोड़ी भी सच्चाई हुई और मैंने जिन कानूनी प्रक्रियाओं का हवाला दिया है उनमें यदि कोई झूठी साबित हुईं तो मैं राजनीति छोड़ दूंगा। पिछड़ा वर्ग के हित के लिए मैं जान देने को भी तैयार हूं। कमलनाथ ने सदन में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान पर दबाव बनाया कि वे पिछड़ा वर्ग को लेकर जो दावे कर रहे हैं उसके लिए उनकी सरकार को अदालत जाकर आरक्षण सुनिश्चित करना चाहिए। मुख्यमंत्री ने विपक्ष के आरोपों पर तीखे हमले किए। उन्होंने कहा कि भाजपा ने पिछड़े वर्ग से लगातार तीन मुख्यमंत्री देकर इस वर्ग को जितनी नौकरियां दी हैं या अन्य लाभ दिलाए हैं उन्हें वे सदन के पटल पर रखने को तैयार हैं। हमने पिछड़े वर्ग को सत्ता का लाभ दिलाने का पाखंड नहीं किया बल्कि उसे लाभ दिलाया है। हमने सभी समाजों और वर्गों के विकास की जो राजनीति की है उससे समाज में सामंजस्य बढ़ा है और सभी वर्गों को लाभ मिला है। जिस 27 प्रतिशत आरक्षण न दिलाए जाने के आरोप हम पर लगाए जा रहे हैं, हमने पिछड़े वर्ग के लोगों को उससे भी कई गुना ज्यादा लाभ दिया है। हमें इसके लिए किसी अग्निपरीक्षा देने की जरूरत नहीं है। उन्होंने सदन के नेता के रूप में कहा कि हमने जाति धर्म की संकीर्णताओं से ऊपर उठकर जनहित को सर्वोपरि रखा है। जिस तरह कमलनाथ कांग्रेस की टीम वैमनस्य फैलाने की राजनीति कर रही है हम उसका जवाब देने में सक्षम हैं। सरकार के रुख ने कांग्रेस से भाजपा में आए नेताओं के सामने घिरे असमंजस को भी दूर कर दिया है और जनता में फैलाए जा रहे भ्रम को भी हटा दिया है। कांग्रेस के इस वार ने सरकार को समय से पहले सावधान कर दिया है कि वह कांग्रेस की इस वैमनस्य फैलाने वाली राजनीति के लिए भी भविष्य में तैयार रहे।

  • इस देश को हिंदुत्व के विचार से चलाईएःपुष्पेन्द्र कुलश्रेष्ठ

    इस देश को हिंदुत्व के विचार से चलाईएःपुष्पेन्द्र कुलश्रेष्ठ

    भोपाल, 21 दिसंबर (प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)।भारत की बहुसंख्यक 90 करोड़ की जनता समान नागरिक अधिकारों की भीख मांग रही है और कुछ उन्मादी लोग अपने विशेष नागरिक अधिकारों का आनंद ले रहे हैं, जबकि लोकतंत्र संख्या बल का खेल होता है। आज के समय में लगता है जैसे सबसे अधिक हिन्दू बिकाऊ है, दो रुपये किलो चावल और एक रुपये किलो गेहूं, सस्ती बिजली में दिल्ली की सरकार चुन ली जाती है। सरकारों को चुनते वक्त हमारे मन में क्या रहता है? इतने सस्ते में हम सत्ता ऐसे लोगों को सौंप देते हैं, जिनके अपने निजी एजेण्डे हैं, उन्हें राष्ट्र और राज्य दोनों से कोई मतलब नहीं। याद रखो, सरकारें बदलने से राष्ट्र नहीं बदलते। आपके वर्तमान को देखकर दुनिया भविष्य में आपको याद रखेगी, यह आप पर निर्भर है कि किस प्रकार का आप इतिहास बना रहे हैं। उक्त विचार वरिष्ठ पत्रकार एवं चिंतक पुष्पेंद्र कुलश्रेष्ठ ने सोमवार रात राजधानी भोपाल में आयोजित विचार संगोष्ठी ”विश्व पटल पर सनातन संस्कृति की शाश्वतता” पर व्यक्त किए।
    उन्होंने कहा कि पिछले सत्तर सालों से हमें पढ़ाया जा रहा है कि बाबर, औरंगजेब ने क्या किया, क्या इससे पहले भारत नहीं था? दुनिया भर में सरकारें राष्ट्र नहीं चलातीं, वह देश चलाती हैं। हम किसी सरकार का समर्थन या विरोध नहीं करते हैं, हम तो बस इतना जानते हैं कि जब तक संस्कृति है तब तक यह देश और राष्ट्र है। देश को अखंड रखना है तो राष्ट्र को जागृत करना होगा उसके बगैर यह संभव नहीं है। सरकार के साथ ही यह हम सबकी भी जिम्मेदारी है कि आनेवाले वक्त की आहट को पहचानें। उन्होंने वक्फ प्रॉपर्टी एक्ट 2013, सच्चर कमेटी, अल्पसंख्यक आयोग समेत तमाम मुददों पर विस्तार से बोला और कहा कि स्थितियां अराजकता की तरफ बढ़ रही हैं। 90 करोड़ हिन्दुओं को पता ही नहीं चल रहा है कि उनके साथ कौन सा खेल खेला जा रहा है? बहुसंख्यक होने के बाद भी हिन्दू को पता ही नहीं कि सरकारें किस तरह से उनके भविष्य के साथ खिलवाड़ कर रहीं हैं।
    आंध्रप्रदेश के एक जज के हवाले से उन्होंने कहा कि देश में सबसे ज्यादा जमीन रेलवे के पास है। उसके बाद डिफेंस और फिर वक्फ बोर्ड के पास है। आपके इतने मठ, मंदिर हैं, बहुसंख्यक आप हो, लेकिन आपके पास इतनी जमीन नहीं। संकट तो यह है कि यह वक्फ प्रॉपर्टी एक्ट 2013 इसका एक प्रावधान आर्टिकल 40 बेहद खतरनाक है। यह आर्टिकल बोर्ड को यह अधिकार देता है कि वक्फ बोर्ड के दो सदस्यों को देश में अगर कहीं भी यह लगे कि कोई संपत्ति पहले वक्फ की थी तो वह उसे अपने कब्जे में ले सकता है। बीते 10 सालों में इस कानून के चलते देश में सरकारी जमीनों को कब्जाने का अभियान चल रहा है। इसके लिए उन्हें कोई साक्ष्य देने की जरूरत नहीं है। दोनों सदस्य जिला मजिस्ट्रेट या किसी भी जिम्मेदार अधिकारी को 24 से 72 घंटे में उसे खाली करने का आदेश दे सकते हैं। ऐसी सूरत में पूरी मशीनरी को उस आदेश पर अमल कराना होता है। हाई कोर्ट में ऐसे मामलों की सुनवाई नहीं हो सकती।
    उन्होंने इलाहाबाद में चंद्रशेखर आजाद अल्फ्रेड पार्क का हवाला देते हुए कहा कि कोरोनाकाल में पार्क में मस्जिद, मजार और दूसरे कई निर्माण हो गए। मामला जानकारी में आया तो हमारी टीम के एक सदस्य विष्णु शंकर जैन ने हाई कोर्ट में पिटीशन डाली। तब हाई कोर्ट ने यूपी सरकार से जवाब मांगा, लताड़ लगाई गई। तब कहीं जाकर वहां से वे मजारें हटाई गईं। फिर भी वहां एक मजार बनी रह गई थी, जब उसे हटाने के लिए कोर्ट ने तारीख दी तो कम्प्यूटर में उस दिन को ही नहीं चढ़ाया गया, वह तो विष्णु शंकर जैन हैं जो न्यायाधीश के समक्ष पहुंच गए और बोले कि आज आपने सुनवाई के लिए हमारा भी दिन तय किया है। तब कहीं जाकर पता चला कि खेल किस तरह से खेला जा रहा है और एक हम बहुसंख्यक हिन्दू हैं, समूह में यह समझ ही नहीं पा रहे हैं। उन्होंने कहा कि इस एक्ट के बाद से सरकारी जमीन घेरने का सिलसिला देशभर में चल रहा है।
    वरिष्ठ पत्रकार पुष्पेन्द्र ने 2005 में बनी सच्चर कमेटी के अस्तित्व पर सवाल उठाते हुए कहा कि यह कमेटी संवैधानिक नहीं है। वास्तविकता यही है कि तत्कालीन प्रधानमंत्री ने अपनी मर्जी से मुस्लिम समुदाय की सामाजिक, आर्थिक और शैक्षिक स्थिति का परीक्षण करने के लिए समिति नियुक्त करने का निर्देश जारी किया जबकि अनुच्छेद 14 और 15 के आधार पर किसी भी धार्मिक समुदाय के साथ अलग व्यवहार नहीं किया जा सकता। सामाजिक और शैक्षणिक रूप से पिछड़े वर्गों की स्थिति की जाँच के लिए एक आयोग नियुक्त करने की शक्ति भारत के संविधान के अनुच्छेद-340 के तहत भारत के राष्ट्रपति के पास निहित है, लेकिन इस पर राष्ट्रपति ने हस्ताक्षर ही नहीं किए हैं। समिति का गठन भारतीय संविधान के अनुच्छेद-77 के उल्लंघन है और 2006 से इसके बहाने हजारों करोड़ रुपये मुसलमानों के अपलिफ्टमेंट के नाम पर खर्च हो रहे हैं।
    अल्पसंख्यक होने के क्राइटेरिया को लेकर सरकार के पास कोई नीति नहीं है। फिर भी इस कमेटी की सिफारिश पर देश में 5000 करोड़ का सालाना बजट हर साल मुसलमानों को दिया जाता है। इस तरह से यह भारतीय संविधान के समानता के अधिकार का उल्लंघन है। जो लोग टैक्स देते हैं उन्हें सरकार से यह पूछना चाहिए कि आखिर हमारे लिए और हमारे बच्चों के लिए कहां क्या सुविधाएं दे रहे हैं। उन्होंने अल्पसंख्यक आयोग पर भी तार्किक रूप से सवाल उठाए तथा उसके दुरुपयोग की बात कही। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग के साथ ही राज्यों में भी अल्पसंख्यक आयोग बने हैं। अल्पसंख्यकों को दोनों आयोगों से आर्थिक सहायता दी जा रही है।
    पुष्पेंद्र कुलश्रेष्ठ ने कहा कि कुछ राज्यों में हिंदुओं की संख्या नगण्य है, इसके बाद भी मुस्लिम ही अल्पसंख्यक हैं। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि लक्षद्वीप में दो प्रतिशत, मेघालय में 11 प्रतिशत, नगालैंड में आठ प्रतिशत, मणिपुर में 31 प्रतिशत, अरुणाचल में 29 प्रतिशत, मिजोरम में दो प्रतिशत, जम्मू-कश्मीर में 28 प्रतिशत और पंजाब में 38 प्रतिशत हिंदू हैं। इन राज्यों में वास्तव में हिंदू अल्पसंख्यक हैं, लेकिन इसके बाद भी यहां मुसलमान ही अल्पसंख्यक कहलाते हैं और वे ही सारी अल्पसंख्यक से जुड़ी सुविधाएं लेते हैं। आखिर यह कहां का न्याय है और संविधान के समानता के अधिकार का पालन कहां हो रहा है।
    उन्होंने गंभीरता पूर्वक एक मामला प्राचीन हिन्दू मंदिरों को लेकर भी उठाया और इशारों-इशारों में मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान से अपील की कि वे कम से कम भोजशाला धार को तो पूरी तरह से हिन्दुओं को साधना के लिए सौंप दें। कुलश्रेष्ठ ने 1991 में बने प्लेसिस ऑफ वरशिप एक्ट का जिक्र करते हुए कहा कि इस कानून के चलते देशभर के 30 हजार मंदिरों से हिन्दुओं का दावा बिना अपना पक्ष रखे खारिज कर दिया गया है। भारत की संसद को इस बात का कोई अधिकार नहीं है कि मेरे बाप-दादाओं के जिन मंदिरों को लुटेरों ने लूट लिया है उसे हम वापस न ले सकें। उन्होंने कहा कि रातोंरात अपने राजनीतिक स्वार्थ के लिए किसी के दबाव में प्लेसेज ऑफ वर्शिप एक्ट बनाया।
    उन्होंने देश के समक्ष आंतरिक चुनौतियों की जानकारी देने के साथ ही उसके समाधान भी बताए। साथ ही कहा कि लोकतंत्र संख्या बल का खेल होता है। सनातन संस्कृति के साथ शुरू से खिलवाड़ पिछली सरकारें करती रही हैं। यह पहली सरकार है, जो भगवान राम के भव्य मंदिर के लिए आगे आई है। काशी विश्वनाथ कोरिडोर हो या अन्य देव स्थान आपको इस सरकार के काम स्पष्ट दिखाई देंगे। एक पिछला वक्त था जब इसी देश के किसी प्रधानमंत्री ने सेक्युलर देश के नाम पर मूर्ति स्थापना कार्यक्रम के लिए मना कर दिया था, लेकिन आज प्रधानमंत्री मोदी केदारधाम जा रहे हैं। वे गुफा में ध्यान भी कर रहे हैं, इससे समझ जाना चाहिए कि देश की 90 करोड़ हिन्दू जनता को वह क्या संदेश देना चाहते हैं। इसके बाद भी यदि भारत का हिन्दू नहीं जागता है तो फिर कोई कुछ नहीं कर सकता है। उन्होंने कहा कि सरकार के साथ ही यह हम सबकी भी जिम्मेदारी है कि आनेवाले वक्त की आहट को पहचानें।
    कुलश्रेष्ठ ने कहा कि सरकार बहुत छोटी चीज है, देश और राष्ट्र के बीच में जो फर्क नहीं समझते, उनकी दुर्दशा होती है। सच कहने की प्रवृति डालें, समाज सुधरेगा। जब तक विचार नहीं बदला जाएगा, तब तक भारत में परिवर्तन नहीं हो पाएगा। उन्होंने अपने जागरुकता के संबंध में संविधान के अनुच्छेद 333 खत्म करने के प्रयासों के बारे में भी प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि भारत जाति प्रधान नहीं, कर्म प्रधान देश है। यहां त्यागी की पूजा होती है, भगवान श्रीराम क्षत्रिय थे, उनकी पूजा होती है। भगवान परशुराम और रावण भी ब्राह्मण थे, दोनों के कर्म में अंतर है। एक को पूजा जाता है और एक को जलाया जाता है।
    पुष्पेन्द्र कुलश्रेष्ठ ने इस दौरान राजनैतिक भारत के साथ-साथ सांस्कृतिक भारत की व्याख्या की और देश में सांस्कृतिक भारत के उन पहलुओं से परिचित कराया जिसमें तुलसी, पीपल, नदी समेत सभी तरह से पर्यावरणीय संरक्षण को महत्व दिया गया है। उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी का नाम लिए बगैर कहा, बहुत वर्षों बाद आपने एक व्यक्ति को सत्ता में बैठाया और आप चाहते हैं कि सबकुछ एक दिन में ठीक हो जाए, सरकार को अपना काम करने के लिए समय भी दीजिए। हम अपने ही आदमी में कमियां और खामियां ढूंढने की कोशिश करते हैं, लेकिन हमने उन्हें चुना है तो उन्हें काम करने का मौका भी तो दो। अगर वे गलत रास्ते पर जाएं तो उन पर दबाव भी बनाएं।
    वरिष्ठ पत्रकार कुलश्रेष्ठ ने कहा, हर बार सनातन बनकर वोट दीजिए। यह मौका पांच साल में एक बार मिलता है। सरकार सिर्फ देश चलाती है, लेकिन हम पूरा समाज राष्ट्र को संचालित करते हैं। देश से बड़ा है राष्ट्र। इसलिए एकजुट होकर सामाजिक शक्ति का इस्तेमाल करना चाहिए। उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी और गृहमंत्री अमित शाह द्वारा देशहित में पूर्व में लिए गए निर्णयों की सराहना की। उनका कहना यही था कि सब कुछ की चाबी सरकार के पास है, ऐसा हमें नहीं मानना चाहिए। राष्ट्र क्या है यह हम सभी समझें, वह देश से बड़ा होता है। देश आखिर एक जमीन का टुकड़ा है, उस छोटे से जमीन के टुकड़े को सरकार चलाती है, यह किसी ना किसी विधान से चलती है। उसमें मैं, आप कोई हों, उन्हें उस विधान को मानना होता है। इस सबसे अलग होकर होता है राष्ट्र, उसे चलाने की जिम्मेदारी समाज की होती है, राष्ट्र चलता है मेरे और आपके विश्वास से, परम्पराओं, संस्कारों से। इसलिए हम सभी अपने राष्ट्र के स्व को पहचानें और उसके लिए कार्य करें। इसे हिन्दू राष्ट्र बनाने के लिए जो-जो भी करना चाहिए वह सब कुछ करें।
    राजधानी के एमपीनगर जोन-एक प्रेस काम्प्लेक्स के पास रविवार को हिन्दू राष्ट्र शक्ति के प्रदेश कार्यालय का लोकार्पण किया गया। मुख्य अतिथि हिन्दू राष्ट्र शक्ति के संरक्षक व संस्थापक डा सिकंदर रिज्वी, राष्ट्रीय अध्यक्ष मुत्युंजय ने प्रदेश कार्यालय का लोकार्पण किया। पुष्पेंद्र कुलश्रेष्ठ ने कहा कि पाकिस्तान की आबादी से अधिक उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ संभाल रहे हैं। हमारे आगे पाकिस्तान की कोई औकात नहीं है। हमारे यहां महंगाई बहुत है, हमारे यहां बेरोजगारी बहुत है। हम पिछड़े हुए हैं, लेकिन कभी आपके लोगों ने आपके आत्म विश्वास को ताकत नहीं दी। पूरे विश्व में आपकी क्या हैसियत है।
    आजादी के बाद 1947 के बाद का रिकार्ड निकाल कर देख लीजिए, जो लोग आपको गाली दे रहे हैं, जो हीन भावना भर रहे हैं। उनकी औकात ही नहीं है आपसे बात करने की। 244 साल में अमेरिका दुनिया का बड़ा विकास की पराकष्ठा पर पहुंचने वाला देश है। पूरी दुनिया को ज्ञान दे रहा है। वो अमेरिका हमे और आपको तमीज सिखा रहे हैं। वो अमेरिका हमे बता रहे हैं कि महिलाओं की बराबरी का मतलब क्या है? भारतीयों को जेंडर जस्टिस्ट नहीं आता। जो ताकत हमारे पास है, जो इतिहास हमारे पास हैं, वो किसी के पास नहीं है।
    हम आत्मविश्वास से किसी दूसरे देशों को बता ही नहीं पा रहे हैं। शर्म आती है अपने देश की बात रखने में। अमेरिका में कोई महिला राष्ट्रपति नहीं बनी। हमारे देश में 16 साल तक एक महिला प्रधानमंत्री रही, एक महिला राष्ट्रपति रही। सारे काम प्रधानमंत्री नहीं करेगा। ऐसा नहीं होता। हम सब को अपना आत्म विश्वास बढ़ाने व ऊर्जा जगाने की जरूरत है, तभी हम अपने देश की उन्नति के बारे में दुनिया को बता पाएंगे। कार्यक्रम में राजपूत महापंचायत के अध्यक्ष राघवेंद्र सिंह तोमर सहित बड़ी संख्या में गणमान्य लोग मौजूद रहे।

  • देश के हर घर को पीने का पानी मिलेगाः प्रहलाद पटेल

    देश के हर घर को पीने का पानी मिलेगाः प्रहलाद पटेल

    भोपाल,18 दिसंबर(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)।मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा है कि जल जीवन मिशन में जल सम्मेलन आयोजित कर जन-भागीदारी को प्रोत्साहित किया जाएगा। गाँव-गाँव में पानी का पैसा जमा कराने के लिए लोगों में दायित्व बोध विकसित करने के उद्देश्य से अभियान चलाया जाएगा। मिशन में पन्ना, दमोह क्षेत्र में सिंचाई के लिए केनाल इरिगेशन के क्रियान्वयन का हरसंभव प्रयास किया जाएगा। लक्ष्य पूरा करने के लिए कार्य में जल्दबाजी नहीं की जाए। जहाँ भूमिगत जल का प्रामाणिक स्रोत हो, वहीं से जल प्रदाय की व्यवस्था मिशन में सुनिश्चित की जाए। बुंदेलखंड क्षेत्र में भूमिगत जल स्तर लगातार नीचे जा रहा है। इस क्षेत्र में समूह योजनाओं पर अधिक ध्यान केंद्रित करने की आवश्यकता है। मुख्यमंत्री श्री चौहान मंत्रालय में केन्द्रीय जल-शक्ति एवं खाद्य प्र-संस्करण, उद्योग राज्य मंत्री प्रहलाद पटेल, केन्द्रीय जलशक्ति एवं जनजातीय मामलों के राज्य मंत्री विश्वेश्वर टुडू तथा प्रदेश के लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी राज्य मंत्री बृजेन्द्र सिंह यादव की उपस्थिति में जल जीवन मिशन और केन-बेतवा लिंक परियोजना संबंधी बैठक को संबोधित कर रहे थे। जल संसाधन मंत्री तुलसी सिलावट भी आन लाईन तरीके से शामिल हुए।

    मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि जल जीवन मिशन में आँगनवाड़ी और स्कूलों को प्राथमिकता के आधार पर नल कनेक्शन उपलब्ध कराया जाए। नल से जल उपलब्ध कराने के उद्देश्य से जिन बसाहटों में पूर्व से पाइप-लाइन डली हुई हैं, वे पाइप लाइन यदि कमजोर हैं तो योजना के कनेक्शन उन पाइप लाइनों से नहीं किए जाएँ। पुरानी कमजोर पाइप-लाइनों के स्थान पर पूरी नई पाइप-लाइन बिछाई जाए। इससे नई योजना का लाभ बसाहट के सभी लोगों को समान रूप से उपलब्ध हो सकेगा। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने जानकारी दी कि पिछली सरकार में जल जीवन मिशन में कोई कार्य नहीं हुआ था। उसके बाद कोरोना की चुनौती से निपटने के परिणाम स्वरूप जल जीवन मिशन का कार्य प्रभावित हुआ है। इन परिस्थितियों के बाद भी राज्य में जल जीवन मिशन की प्रगति संतोषजनक है।

    केन्द्रीय राज्य मंत्री श्री प्रहलाद पटेल ने कहा कि सभी परियोजनाओं का थर्ड पार्टी मूल्यांकन आवश्यक रूप से कराया जाए। मूल्यांकन का कार्य तकनीकी रूप से दक्ष एवं सक्षम समूहों और व्यक्तियों को ही सौंपा जाए। जल जीवन मिशन में हितग्राहियों को साथ लेकर योजना बनाने और उन्हें क्रियान्वित करने से अधिक से अधिक क्षेत्र में सिंचाई सुविधा और अधिक बसाहटों में पेयजल सुविधा उपलब्ध कराने में सफलता मिलेगी। इस संबंध में मालवा और निमाड़ क्षेत्र में हो रहे नवाचारों का अनुसरण राज्य के अन्य भागों में भी किया जाना चाहिए।

    जानकारी दी गई कि केन-बेतवा लिंक परियोजना में मध्यप्रदेश को 8.11 लाख हेक्टेयर वार्षिक सिंचाई सुविधा उपलब्ध होगी। प्रदेश के केन-कछार में 18 तहसील और 1376 गाँवों को सिंचाई और पेयजल की सुविधा प्राप्त होगी। बेतवा-कछार में 10 तहसील और 673 ग्रामों को सिंचाई और पेयजल की सुविधा प्राप्त होगी। जल जीवन मिशन में समूह नल-जल योजना में मई- 2020 से अब तक 26 लाख 88 हजार परिवारों को नल से जल उपलब्ध कराया गया है। गुणवत्तापूर्ण जल उपलब्ध कराने के लिए सभी जिलों की पेयजल परीक्षण प्रयोगशालाएँ एन.ए.बी.एल प्रमाणित हैं।

    बैठक में मुख्य सचिव श्री इकबाल सिंह बैंस, अपर मुख्य सचिव जल संसाधन श्री एस.एन. मिश्रा, अपर मुख्य सचिव लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी श्री मलय श्रीवास्तव, प्रमुख सचिव पंचायत एवं ग्रामीण विकास श्री उमाकांत उमराव तथा अन्य अधिकारी उपस्थित थे।

  • गुटखा मैन से वायरल हुए शख्स ने दी गुटखा छोड़ने की सलाह

    गुटखा मैन से वायरल हुए शख्स ने दी गुटखा छोड़ने की सलाह

    कानपुर गुटखा मैन से वायरल हुए शख्स ने दी गुटखा छोड़ने की सलाह

    गुटखा खाकर हूं..हां… करने वालों को गुटखा मैन का संदेश

    क्रिकेट मैच में वायरल हुए गुटखा मैन ने क्यों कहा Saynototobacco

    कानपुर,18 दिसंबर,(Koo).भारत और न्यूजीलैंड के बीच कानपुर टेस्ट मैच के दौरान कथित रूप से गुटखा चबाते हुए शोभित पांडे नामक युवक का एक वीडियो वायरल हुआ था, जिसके बाद सोशल मीडिया पर तहलका मचा गया। हालांकि, मैच के अगले ही दिन उन्होंने संदेश दिया था की गुटखा खाना गलत बात है।

    अब आज फिर शोभित अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म Koo App पर एक वीडियो पोस्ट करने के कारण चर्चा में हैं, जिसमें उन्होंने गुटखा छोड़ने की अपील की है। हालांकि यह वीडियो काफी मज़ाकिया अंदाज में बनाया गया है और पोस्ट में भी शोभित ने लिखा है, “ज़रूरी नहीं कि हूं…हां… में जवाब देने वाला आदमी आपसे रूठा हुआ हो, हो सकता है की वो अपने मुंह में गुटखा दबा कर रखे हो… हूं ….हां….हां से बचो और अपनी बात दिल खोल कर कहो….”

    इसके ज़रिए उन्होंने समाज से तंबाकू और गुटखा छोड़ने के लिए भी अपील की है। शोभित Koo पर इसी प्रकार की कई पोस्ट साझा करते रहते हैं और मज़ाकिया अंदाज़ में यूजर्स को तंबाकू से दूर रहने का संदेश देते हैं। Koo पर उन्होने अपने हैंडल का नाम भी @kanpuriya_guthkebaz रखा है।

    आपको बता दें कि मैच के दौरान कानपुर के शोभित उस वक्‍त चर्चा में आ गए थे, जब उनकी तस्‍वीर लाइव मैच के दौरान टीवी पर दिखाई गई। देखते ही देखते ये वीडियो सोशल मीडिया पर छा गया और यह शख्‍स वायरल हो गया। उत्‍तर प्रदेश का कानुपर शहर पहले ही पान मसाला और तम्बाकू खाने के लिए काफी चर्चा में रहता है। इसे लेकर अक्‍सर सोशल म‍ीडिया पर तरह-तरह के मीम्‍स भी वायरल होते रहते हैं। यही वजह है कि मैच के दौरान गुटखा मैन की तस्‍वीर कैमरे पर आने के बाद एकाएक वायरल हो गई।

  • अपराध नियंत्रण के साथ उन्हें उभारती भी है पुलिस कमिश्नर प्रणाली

    अपराध नियंत्रण के साथ उन्हें उभारती भी है पुलिस कमिश्नर प्रणाली


    विनीत नारायण
    देश भर में पुलिस कमिश्नर प्रणाली को अपराध नियंत्रण की दवाई समझा जा रहा है जबकि हकीकत में जिन शहरों में पुलिस कमिश्नर प्रणाली को लागू किया गया है वहां पुलिस ने अपराध की पहचान करने का तो काम किया है लेकिन अपराध को नियंत्रित करने में पुलिस का तंत्र बुरी तरह असफल रहा है। देश में पुलिस प्रणाली, पुलिस अधिनियम 1861 पर आधारित है। आज भी ज्यादातर शहरों में पुलिस प्रणाली इसी अधिनियम से चलती है। लेकिन कुछ शहर पहले उत्तर प्रदेश में लखनऊ और नोयडा में पुलिस कमिश्नर प्रणाली लागू की गई थी।दावा यह किया गया था कि इसमें अपराध को रोकने और कानून व्यवस्था सुधारने में लाभ होगा,पर असल में हुआ क्या। पुलिस व्यवस्था में पुलिस कमिश्नर सर्वोच्च पद होता है। वैसे ये व्यवस्था अंग्रेजों के जमाने की है जो तब कोलकाता, मुंबई और चेन्नई में ही हुआ करती थी। जिसे धीरे धीरे और राज्यों में लाया गया।
    भारतीय पुलिस अधिनियम 1861 के भाग (4) के तहत हर जिलाधिकारी के पास पुलिस पर नियंत्रण रखने के कुछ अधिनियम होते हैं। साथ ही, दंड प्रक्रिया संहिता(सीआरपीसी) एक्जुकेटिव मैजिस्ट्रेट को कानून और व्यवस्था को विनियमित करने के लिए कुछ शक्तियां भी प्रदान करता है। साधारण शब्दों में कहा जाए तो पुलिस अधिकारी कोई भी फैसला लेने के लिए स्वतंत्र नहीं है। वह आकस्मिक परिस्थितियों में डीएम या मंडल कमिश्नर या फिर शासन के आदेश के तहत ही कार्य करते हैं। परंतु पुलिस कमिश्नर सिस्टम लागू हो जाने से जिलाधिकारी और एग्जीक्यूटिव मैजिस्ट्रेट के अधिकार पुलिस अधिकारियों को ही मिल जाते हैं। जिससे वह किसी भी परिस्थिति में निर्णय लेने के लिए स्वतंत्र रहता है।
    बड़े शहरों में अक्सर आपराधिक गतिविधियों की दर भी उच्च होती है। ज्यादातर आपातकालीन परिस्थितियों में लोग उग्र हो जाते हैं। क्योंकि पुलिस के पास तत्काल निर्णय लेने के अधिकार नहीं होते। कमिश्नर प्रणाली में पुलिस प्रतिबंधात्मक कार्रवाई के लिए खुद ही मैजिस्ट्रेट की भूमिका निभाती है। इस सिस्टम में पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी के पास सीआरपीसी के तहत कई अधिकार आ जाते हैं और वह कोई भी फैसला लेने के लिए स्वतंत्र होता है। साथ ही साथ कमिश्नर सिस्टम लागू होने से पुलिस अधिकारियों की जवाबदेही भी बढ़ जाती है।हर दिन के अंत में पुलिस कमिश्नर, जिला पुलिस अधीक्षक, पुलिस महानिदेशक को अपने कार्यों की रिपोर्ट अपर मुख्य सचिव (गृह मंत्रालय) को देनी होती है। इसके बाद ये रिपोर्ट मुख्य सचिव को दी जाती है।
    पुलिस आयुक्त शहर में उपलब्ध स्टाफ का उपयोग अपराधों को सुलझाने, कानून और व्यवस्था को बनाए रखने, अपराधियों और असामाजिक लोगों की गिरफ्तारी, ट्रेफिक सुरक्षा आदि के लिए करता है। साथ ही साथ पुलिस कमिश्नर सिस्टम से त्वरित पुलिस प्रतिक्रिया, पुलिस जांच की उच्च गुणवत्ता सार्वजनिक शिकायतों के निवारण की उच्च संवेदनशीलता, प्रौद्योगिकी का अधिक से अधिक उपयोग आदि भी बढ़ जाता है।
    उत्तर प्रदेश में नागरिकता कानून के खिलाफ प्रदर्शन और उससे भड़की हिंसा के समय ये देखा गया था कि कई जिलों में एसएसपी व डीएम के बीच तालमेल नहीं था। इसीलिए भीड़ पर काबू पाने में वहां की पुलिस नाकामयाब रही। इसके बाद ही सुश्री मायावती के शासन के दौरान 2009 से लंबित पड़े इस प्रस्ताव को गंभीरता से लेते हुए योगी सरकार ने पुलिस कमिश्नर व्यवस्था को लागू करने का विचार बनाया। सवाल यह आता है कि इस व्यवस्था से क्या वास्तव में अपराध कम हुआ। जानकारों की मानें तो कुछ हद तक अपराध रोकने में ये व्यवस्था ठीक है जैसे दंगों के समय लाठीचार्ज करना हो तो मौके पर मौजूद पुलिस अधिकारी को डीएम से अनुमति नहीं लेनी पड़ेगी। इसके साथ ही कुछ अन्य धाराओं के तहत जैसे धारा 144 लगाने, कर्फ्यु लगाने, 151 में गिरफ्तार करने, 107।16 में चालान करने जैसे कई अधिकार भी सीधे पुलिस को मिल जाते हैं।
    प्रायः देखा जाता है कि यदि किसी मुजरिम को गिरफ्तार किया जाता है तो साधारण पुलिस व्यवस्था में उसे 24 घंटों के भीतर डीएम के समक्ष पेश करना अनिवार्य होता है। दोनों पक्षों को सुनने के बाद डीएम के निर्णय पर ही मुजरिम दोषी है या नहीं ये तय होता है। लेकिन कमिश्नर व्यवस्था में पुलिस के आला अधिकारी ही ये तय कर लेते हैं कि मुजरिम को जेल भेजा जाए या नहीं।
    चौंकाने वाली बात ये है कि राष्ट्रीय अपराध रिकार्ड ब्यूरो के आंकड़े के अनुसार जिन जिन शहरों में ये व्यवस्था लागू हुई है वहां प्रतिलाख व्यक्ति अपराध की दर में कोई कमी नहीं आई है। मिसाल के तौर पर जयपुर में 2011 में जब ये व्यवस्था लागू हुई उसके बाद से अपराध की दर में 50 प्रतिशत की दर तक बढ़ोत्तरी हुई है। 2009 के बाद से लुधियाना में यही आंकड़ा 30 प्रतिशत है। फरीदाबाद में 2010 के बाद से ये आंकड़ा 40 प्रतिशत से अधिक है। गुवाघाटी में 2015 में जब कमिश्नर व्यवस्था लागू हुई तो वहीं भी 50 प्रतिशत तक अपराध दर में वृद्धि हुई है।
    ब्यूरो के आंकड़ों से ये पता चलता है कि कमिश्नर व्यवस्था में पुलिस द्वारा गिरफ्तार किए गए लोगों में से दोष सिद्धि दर में भी भारी गिरावट आई है। पुणे में 14.14 प्रतिशत, चेन्नई में 7.97 प्रतिशत, मुंबई में 16.36 प्रतिशत, दिल्ली में 17.20 प्रतिशत,बेंगलुरु में 17.32 वहीं इंदौर में जहां सामान्य पुलिस व्यवस्था है वहां इसकी दर 40.13 प्रतिशत है। यानि पुलिस कमिश्नर व्यवस्था में पुलिस द्वारा नाहक गिरफ्तार किए गए लोगों की संख्या दोषियों से काफी अधिक है।
    जिस तरह आनन फानन में सरकार ने बिना गंभीर विचार किए कृषि कानूनों को लागू करने के बाद उन्हें वापस लिया, उसी तरह देश के अन्य शहरों में पुलिस व्यवस्था में बदलाव लाने से पहले,सरकार को इस विषय में जानकार लोगों के सहयोग से इस विषय पर गंभीर चर्चा कर ही निर्णय लेना चाहिए। गृहमंत्री अमित शाह को विशेषज्ञों की एक टीम गठित कर इस बात पर अवश्य गौर करना चाहिए कि आंकड़ों को अनुसार पुलिस कमिश्नर व्यवस्था से अपराध घटे नहीं बल्कि बढ़े हैं और निर्दोष नागरिकों को नाहक प्रताड़ित किया गया है।

  • शिक्षा विभाग एमपी के हर जिले में चलाएगा विश्वस्तरीय स्कूल

    शिक्षा विभाग एमपी के हर जिले में चलाएगा विश्वस्तरीय स्कूल

    शिक्षा विभाग की बड़ी तैयारी, हर जिले में खुलेंगे नए स्कूल और होगी ग्लोबल ब्रांडिंग

    इस योजना को सभी विद्यालयों के लिए शिक्षा योजना का नाम दिया गया है

    भोपाल,8 दिसंबर(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)। मध्य प्रदेश स्कूल (MP School) शिक्षा मुक्त बोर्ड (School Education Open Board) ने सांस्कृतिक मूल्यों के साथ छात्रों को शिक्षित करेंगे। इसके लिए तैयारी पूरी कर ली गई है। राज्य में अंतरराष्ट्रीय मानकों (international standards) के साथ 52 स्कूल स्थापित करने के लिए मंगलवार को स्कूल शिक्षा विभाग (school education department) और महर्षि पतंजलि संस्कृत संस्थान के साथ एक समझौता ज्ञापन (MOU) पर हस्ताक्षर किए हैं। जिसके बाद संस्कृत पाठ्यक्रम (Sanskrit) का अनिवार्य हिस्सा होगा। प्रत्येक जिले में ऐसा एक स्कूल स्थापित किया जाएगा।

    ये स्कूल पारंपरिक सांस्कृतिक मूल्यों के साथ शिक्षा पर ध्यान देंगे। एमपी ओपन स्कूल एजुकेशन बोर्ड के निदेशक पीआर तिवारी ने कहा कि स्कूल परिसर का उपयोग स्कूल के समय के बाद व्यावसायिक प्रशिक्षण के लिए किया जाएगा। इस योजना को सभी विद्यालयों के लिए शिक्षा योजना का नाम दिया गया है। एमओयू दस्तावेज में कहा गया है कि अकादमिक गतिविधियों में समकालीन इतिहास पर लघु फिल्मों का निर्माण, स्क्रीनिंग और अध्ययन शामिल है।

    तिवारी ने कहा कि इन स्कूलों को अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप अत्याधुनिक सुविधाओं से विकसित किया जाएगा। ये आवासीय विद्यालय लोअर किंडरगार्टन (LKG) से बारहवीं कक्षा तक के छात्रों को शिक्षा प्रदान करेंगे। उन्होंने कहा कि बुनियादी ढांचा ओपन बोर्ड द्वारा स्थापित किया जाएगा।

    इन स्कूलों की ग्लोबल ब्रांडिंग अमेरिका स्थित एजेंसी- नॉर्थवेस्ट एक्रिडिटेशन कमीशन (NWAC) की मदद से की जाएगी। 42 देशों में मान्यता प्राप्त एनडब्ल्यूएसी की मदद से छात्रों की मार्कशीट और सर्टिफिकेट जारी किए जाएंगे। शिक्षकों को सीखने और सिखाने के लिए एक टैबलेट के साथ एक मेमोरी और सिम कार्ड प्रदान किया जाएगा। सभी क्लासरूम स्मार्ट होंगे और शिक्षण में प्रोजेक्टर और प्रेजेंटेशन का व्यापक रूप से उपयोग किया जाएगा।

    छात्रों को व्यावसायिक प्रशिक्षण दिया जाएगा। जिसके मॉड्यूल उद्यमिता विकास संस्थान द्वारा तैयार किए जाएंगे। स्कूल भवनों को हरित परिसरों के रूप में विकसित किया जाएगा। जहां छात्रों को जलवायु परिवर्तन और इसके प्रभावों के बारे में भी पढ़ाया जाएगा।

    Koo App
    ईएफए (एजुकेशन फॉर ऑल)स्कूल योजना के तहत प्रदेश के जिला मुख्यालयों में स्थित 53 शासकीय विद्यालयों को विश्व-स्तरीय विद्यालय के रूप में कायाकल्प करने के उद्देश्य से लोक शिक्षण संचालनालय,मध्यप्रदेश राज्य ओपन बोर्ड और महर्षि पतंजलि संस्कृत संस्थान के बीच संयुक्त रूप से एमओयू साइन हुआ। – इन्दरसिंह परमार (@Inder_Singh_Parmar) 8 Dec 2021
  • नई शिक्षा नीति 2020 में सार्थक शिक्षा पर जोर बोले राज्यमंत्री इंदर सिंह परमार

    नई शिक्षा नीति 2020 में सार्थक शिक्षा पर जोर बोले राज्यमंत्री इंदर सिंह परमार

    मध्य प्रदेश: नई शिक्षा नीति 2020 के विभिन्न पहलुओं को प्रभावी तौर पर लागू के निर्देश दे दिए गए हैं- राज्यमंत्री इन्दर सिंह परमार

    भोपाल,7 दिसंबर(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)। स्कूल शिक्षा (स्वतंत्र प्रभार) और सामान्य प्रशासन राज्य मंत्री इंदर सिंह परमार ने कहा कि मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की मंशा के अनुरूप प्रदेश में नई शिक्षा नीति का प्रभावी क्रियान्वयन किया जाएगा। परमार ने बताया कि मुख्यमंत्री चौहान ने राज्य शासन द्वारा गठित टास्क फोर्स की बैठक में प्रदेश में स्कूल शिक्षा की गुणवत्ता विकास और नई शिक्षा नीति 2020 के विभिन्न पहलुओं को प्रभावी तौर पर लागू करने के निर्देश दिए गए है। इसी तारतम्य में मंत्रालय में टास्क फोर्स के सदस्यों को चार समूह में बांटकर नई शिक्षा नीति के विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से चर्चा की गई। टास्क फोर्स सदस्यों के मंथन से उपजे सुझावों और मार्गदर्शन संबंधी पहलुओं पर आधारित प्रेजेंटेशन दिया गया।

    परमार ने बताया कि टास्क फोर्स की बैठक में नई शिक्षा नीति के अनुरूप शिक्षकों में फंक्शनल लिट्रेसी और नुमरेसी के प्रशिक्षण ऑनलाइन के साथ ऑफलाइन संचालित किए जाने, राष्ट्रीय शिक्षा नीति की समझ विकसित करने के लिए मॉड्यूल द्वारा प्रशिक्षण, प्रदेश में क्षेत्र के हिसाब से क्लस्टर आधारित शिक्षा व्यवस्था बनाने, कक्षा आठवीं में गणित और अंग्रेजी विषय पर कैप्सूल रिच कोर्स, स्थानीय कॉलेज के युवा छात्रों की मैपिंग कर वॉलिंटियर बनाए जाने, राज्य ओपन स्कूल में सेंटर बढ़ाने, मातृभाषा में प्रारंभिक शिक्षा, शिक्षा कैलेंडर में सह शैक्षणिक गतिविधियों को शामिल करने, प्रारंभिक- बाल्यावस्था देखभाल एवं शिक्षा में आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं के प्रशिक्षण, अनुभव और परिणाम आधारित शिक्षकों का चयन और पदस्थापना सहित भारत सरकार द्वारा प्रौढ़ शिक्षा हेतु चलाए जा रहे ‘पढ़ना लिखना अभियान’ और ‘नव भारत साक्षरता कार्यक्रम’ आदि विभिन्न विषयो पर मंथन किया गया और सदस्य गणों के सुझाव लिए गए। राज्यमंत्री परमार ने कहा कि सदस्यों द्वारा दिए गए महत्वपूर्ण सुझावों पर राज्य शासन द्वारा गंभीरतापूर्वक विचार कर निर्णय लिया जाएगा।
    सभी के सुझाव के आधार पर नई शिक्षा नीति के क्रियान्वयन से प्रदेश का शैक्षणिक माहौल बदलेगा और प्रदेश शिक्षा के क्षेत्र में देश के अग्रणी राज्य में शामिल होगा।

    राज्यमंत्री परमार की अध्यक्षता में टास्क फोर्स में सदस्य सचिव के रूप में प्रमुख सचिव स्कूल शिक्षा रश्मि अरुण शमी, संचालक सदस्य के रूप में आयुक्त, लोक शिक्षण अभय वर्मा, आयुक्त राज्य शिक्षा केंद्र धनराजू एस, पदेन सदस्य के रूप में सचिव मप्र माध्यमिक शिक्षा मंडल अनिल सुचारी, संचालक राज्य मुक्त स्कूल शिक्षा बोर्ड और निदेशक,महर्षि पतंजलि संस्कृत संस्थान प्रभात राज तिवारी शामिल है। शासकीय क्षेत्र के प्रतिनिधि के रूप में उपसचिव, स्कूल शिक्षा विभाग मंत्रालय के. के. द्विवेदी,
    अपर संचालक, लोक शिक्षण संचालनालय धीरेन्द्र चतुर्वेदी,

    उपसंचालक, मप्र राज्य मुक्त स्कूल शिक्षा बोर्ड संजय पटवा, सहायक निदेशक महर्षि पतंजलि संस्कृत संस्थान छत्रवीर सिंह राठौर, सहायक प्राध्यापक शासकीय शिक्षा महाविद्यालय उज्जैन राजीव पांड्या, सहायक संचालक जबलपुर संभाग घनश्याम सोनी, विकासखंड शिक्षा अधिकारी जिला अलीराजपुर प्रताप सिंह डाबर,
    प्राचार्य शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय पोलायकला, जिला शाजापुर घनश्याम दीक्षित, प्राचार्य शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय भरड़ जिला शाजापुर विवेक दुबे l

    प्राचार्य शासकीय कन्या उच्चतर माध्यमिक विद्यालय उमरिया उदय सिंह उइके, प्राचार्य शासकीय बालक उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, आगर मालवा रामचंद्र खंदार, प्रधानाध्यापक शासकीय जे ए सिंह माध्यमिक विद्यालय नं 1, ग्वालियर वीरेंद्र भदौरिया, व्याख्याता,जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान, सीधी गौतम मणि अग्निहोत्री, व्याख्याता केंद्रीय विद्यालय
    क्र.2 ग्वालियर श्री दिवाकर शर्मा,
    शिक्षक शासकीय कन्या उच्चतर माध्यमिक विद्यालय पनागर जबलपुर श्री अमृत लाल बारले, उच्च श्रेणी शिक्षक सावित्री बाई फूले शासकीय कन्या उच्चतर माध्यमिक विद्यालय बुरहानपुर श्री संजय राउत, शिक्षक शासकीय कन्या उच्चतर माध्यमिक विद्यालय कंदवार जिला सीधी श्री संदीप मिश्रा,
    सहायक शिक्षक शासकीय माध्यमिक विद्यालय क्र.51 कुलकर्णी भट्टा इंदौर श्री राजेंद्र आचार्य, प्र प्रधानाध्यापक शासकीय प्राथमिक विद्यालय बदीपूरा बेटमा,
    जिला इंदौर श्री अनिल सरसिया शामिल है।

    इसी तरह अशासकीय क्षेत्र के प्रतिनिधि के रूप में संस्कृत भाषा विशेषज्ञ,श्री आनंद दीक्षित, शिक्षाविद् श्री शिरोमणि दुबे, श्री राव कुलदीप सिंह, सामाजिक कार्यकर्ता, पत्रकार श्री अखिलेश श्रीवास्तव, शिशु शिक्षा विशेषज्ञ श्री प्रभात सिंह, सेवानिवृत्त प्राचार्य श्री आर पी प्रजापति, प्राचार्य श्रीमती नीतू सरावगी, प्राचार्य श्री विवेक शर्मा, शिक्षाविद् श्री शिवानंद सिन्हा, सेवानिवृत प्राचार्य श्री अशोक कंडेल, सेवानिवृत व्याख्याता श्री श्याम ताहेड, सामाजिक कार्यकर्ता डॉ शालिनी रातोरिया, शिक्षाविद् श्री जयशंकर शर्मा, प्राचार्य श्रीमती पुनीता नेहरू, प्राचार्य श्री अरुण शुक्ला, शिक्षाविद् श्री देवकीनंदन चौरसिया, डीन डीपीएस श्रीमती मेघा मुक्तिबोध, प्राचार्य डीपीएस डॉ अजय कुमार शर्मा, परियोजना निदेशक डॉ अशोक जनवदे, शिशु शिक्षा विशेषज्ञ श्री सत्यनारायण शर्मा, शिक्षाविद् श्री राघवेन्द्र शुक्ल, सामाजिक कार्यकर्ता श्री मोहन नागर, श्री चंद्रदेव अष्ठाना और शिशु शिक्षा विशेषज्ञ सुश्री रेखा चूड़ासमा शामिल है।

  • #JNU देश  विरोधी वामपंथी  विचारधारा का अड्डा – गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा

    #JNU देश विरोधी वामपंथी विचारधारा का अड्डा – गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा

    मध्य प्रदेश में पिछले 24 घंटे में कोरोना के 16 नए मामले, प्रदेश में तीसरी लहर को रोकने के लिए सरकार पूरी तरह से सक्रिय

    भोपाल,7 दिसंबर,(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)।मध्य प्रदेश में कोरोना के नए केस स्थिर बने हुए हैं। पिछले 24 घंटे में पूरे प्रदेश में 16 नए केस सामने आए हैं और 13 लोगो स्वस्थ होकर घर लौटें है |
    कुल मिलाकर 140 केस इस समय मध्य प्रदेश में एक्टिव है और 98.60 फीसदी रिकवरी रेट चल रहा है | ओमिक्रॉन वैरिएंट जिन राज्यों में मिले हैं, उनकी सीमाओं पर सतर्कता पहले से ही बढ़ा दी गई है। 

    मध्य प्रदेश के गृह मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा ने मंगलवार को नियमित प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि मध्य प्रदेश में कोरोना के मामलों में रिकवरी दर 98.60% बनी हुई है।

    राजधानी भोपाल में सोमवार को कोरोना से 1004वीं मौत हुई थी । इससे पहले शहर में 25 नवंबर को एक मौत रिपोर्ट हुई थी। एक निजी अस्पताल में 84 वर्षीय कोरोन…
    फ़ारूख़ अब्दुल्ला के बाद नरोत्तम मिश्रा ने साधा रशीद अल्वी और सलमान खुर्शीद पर निशाना, कहा जनता की गाढ़ी कमाई पर मुफ्त में पढ़ाई कराने वाला #JNU देश विरोधी वामपंथी विचारधारा का अड्डा बना दिया गया है

    अक्सर विवादों में रहने वाली जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी (Jawaharlal Nehru University) एक बार फिर चर्चा में है। जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी स्टूडेंट यूनियन (जेएनयूएसयू) द्वारा सोमवार 6 दिसंबर की रात कथित तौर पर बाबरी मस्जिद (Babri Masjid) के समर्थन में नारे लगाए जाने का मामला सामने आया है। इसके साथ ही बाबरी मस्जिद को दोबारा बनाने की मांग भी उठाई गई।

    इसी के बीच आज मध्य प्रदेश के ग्रह मंत्री नरोत्तम मिश्रा ने एक बड़ा बयान दे दिया है है जिसमें उन्होंने फ़ारूक़ अब्दुला समेत रशीदअल्वी और कांग्रेस नेता सलमान खुर्शीद पर सीधा निशाना साधते हुए कहा है कि देश विरोधी वामपंथी गतिविधियों का अड्डा बना दिया गया है जेएनयू (JNU) को | इसी के साथ वो कहते है कि टुकड़े-टुकड़े गैंग देश में फिर से माहौल बिगाड़ने की कोशिश कर रहा है और JNU में देश‌ विरोधी नारे इसी क्रोनोलॉजी के तहत लगे हैं।
    जनता की गाढ़ी कमाई पर मुफ्त में पढ़ाई कराने वाला #JNU अब देश विरोधी वामपंथी विचारधारा का अड्डा बन गया है। अब इस पर गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए।

    जानकारी के अनुसार, JNU कैंपस में एक नए विवाद की चिंगारी सुलगनी शुरू हो गई है। जेएनयूएसयू की ओर से 6 दिसंबर की रात एक प्रोटेस्ट मार्च निकाला गया। 6 दिसंबर 1992 में अयोध्या में बाबरी मस्जिद तोड़ी गई थी, जिसके खिलाफ यह प्रदर्शन किया गया। इस दौरान JNU छात्रसंघ के कार्यकर्ताओं और यहां मौजूद लेफ्ट संगठनों के कार्यकर्ताओं ने बाबरी मस्जिद को दोबारा बनाने की मांग की।

    इस दौरान छात्रसंघ कार्यकर्ताओं की ओर से “नहीं सहेंगे हाशिमपुरा, नहीं करेंगे दादरी, फिर बनाओ बाबरी” जैसे नारे लगाए गए, जिनको लेकर विवाद उठना लाजिमी है। बाबरी विध्वंस की घटना के 29 साल बाद जेएनयू कैंपस में छात्र संघ ने इस घटना के विरोध में प्रोटेस्ट मार्च निकाला, जिसमें कहा गया की बाबरी मस्जिद दोबारा से बननी चाहिए।

    दरअसल इस प्रदर्शन की कॉल जेएनयूएसयू द्वारा रात को 8:30 बजे दी गई थी। जेएनयू कैंपस के गंगा ढाबा पर रात 8:30 बजे काफी संख्या में लेफ्ट विंग के छात्र जमा हो गए और यहां से यह प्रदर्शन मार्च चंद्रभागा हॉस्टल तक पहुंचा। इससे पहले भी लेफ्ट समर्थक छात्रों द्वारा कई विवादित बयान दिए गए हैं और 6 दिसंबर को चंद्रभागा हॉस्टल के चौखट पर एक बार फिर लेफ्ट समर्थक छात्रों ने एक नए विवाद की शुरुआत कर दी है। इसके बाद यह प्रदर्शन हॉस्टल तक पहुंचा, जिसके बाद छात्र यूनियन के नेताओं ने अपनी-अपनी बातों को रखा। इसी दौरान जेएनयू छात्र संघ के वाइस प्रेसिडेंट साकेत मून ने अपनी स्पीच के दौरान कहा कि बाबरी मस्जिद दोबारा बनाकर उसे इंसाफ लिया जाएगा।

  • एमपी में बन रहा गौशालाओं का नेटवर्क

    एमपी में बन रहा गौशालाओं का नेटवर्क

    भोपाल,(सुनीता दुबे).वर्तमान में मध्यप्रदेश देश का सर्वाधिक गौवंश और गौशालाओं वाला प्रदेश है। यहाँ गौवंश के विकास, गौ-पालन, गौ-संरक्षण, गौ-संवर्धन और गौ आधारित उत्पादों के संवर्धन के लिये सार्थक प्रयास किये जा रहे हैं। मुख्यमंत्री गौ-सेवा योजना और अशासकीय स्वयंसेवी संस्थाओं द्वारा संचालित 1768 गौ-शालाओं में ढाई लाख से ज्यादा गौ-वंश की देखभाल की जा रही है। शासन द्वारा प्रति गौवंश प्रति दिवस के मान से 20 रुपये का अनुदान दिया जाता है। मुख्यमंत्री गौ-सेवा योजना में अब तक पूर्ण 1141 गौ-शालाओं में 76 हजार 941 गौ-वंश का पालन किया जा रहा है। स्वयंसेवी संस्थाओं की पंजीकृत 627 गौ-शालाओं में भी करीब एक लाख 74 हजार गौ-वंश की देखभाल की जा रही है।

    विकसित होंगे गौवंश वन्य विहार

    गौ-वंश को जंगल से आहार और वन को गोबर से खाद मिलने की व्यवस्था प्राकृतिक है। गौपालन एवं पशुधन संवर्धन बोर्ड द्वारा जंगलों के पास गौ-वंश वन्य विहार विकसित किये जा रहे हैं। रीवा जिले के बसावन मामा क्षेत्र में 51 एकड़ क्षेत्र में गौ-वंश वन्य विहार विकसित किया गया है, जिसमें 4 हजार गौ-वंश हैं। जबलपुर जिले के गंगईवीर में 10 हजार और दमोह जिले में 4 हजार गौ-वंश की क्षमता वाला वन्य विहार विकसित किया जा रहा है। आगर-मालवा के सुसनेर में 400 एकड़ में कामधेनु अभयारण्य विकसित किया गया है, जिसमें वर्तमान में 3400 बेसहारा, वृद्ध और बीमार गायों की देखभाल की जा रही है। इसी माह सागर विश्वविद्यालय में कामधेनु पीठ की स्थापना भी की गई है।

    मध्यप्रदेश में गौ हत्या संज्ञेय अपराध

    मध्यप्रदेश में गौ हत्या संज्ञेय अपराध है। यहाँ आरोप सिद्ध होने पर सजा का प्रावधान है। मध्यप्रदेश में चार प्रजाति का देशी गौ-वंश पाया जाता है, जिनका दूध गिर गाय की तरह ही स्वर्णयुक्त एवं उच्च गुणवत्ता वाला है। देशी गाय के दूध में मानव स्वास्थ्य के लिये आवश्यक सभी पोषक तत्व पाये जाते हैं।

    प्रतिदिन 9.13 लाख किलो लीटर दूध का संकलन

    प्रदेश में लगभग सवा 7 हजार दुग्ध सहकारी समितियाँ कार्यरत हैं, जिनके माध्यम से पिछले वित्त वर्ष में प्रतिदिन औसतन 9 लाख 13 हजार किलो लीटर दुग्ध संकलन और औसत 6 लाख 38 हजार लीटर पैकेट दुग्ध विक्रय हुआ है। लॉकडाउन के दौरान दुग्ध संघों द्वारा 2 करोड़ 54 लाख लीटर दूध अतिरिक्त रूप से खरीदा गया। उल्लेखनीय यह भी है कि कोरोना लॉकडाउन के कारण जहाँ कई व्यवसाइयों को आर्थिक तंगी से गुजरना पड़ा, वहीं दुग्ध उत्पादक किसानों को 94 करोड़ रुपये राशि का अतिरिक्त भुगतान किया गया।

    आइसक्रीम, पनीर आदि संयंत्रों का निर्माण

    पिछले एक साल में इंदौर में 4 करोड़ रुपये की लागत से आइसक्रीम संयंत्र और खण्डवा में 25 हजार लीटर क्षमता के संयंत्र निर्माण का कार्य पूरा हुआ। जबलपुर में पौने 10 करोड़ रुपये की लागत से 10 मीट्रिक टन प्रतिदिन क्षमता के स्वचलित पनीर निर्माण संयंत्र की स्थापना का काम भी पूरा हो चुका है। सागर में भी एक लाख लीटर क्षमता के संयंत्र की स्थापना की गई।

    सौर ऊर्जा को बढ़ावा

    दुग्ध संयंत्रों को ऊर्जा में आत्म-निर्भर बनाने के लिये सौर ऊर्जा संयंत्र स्थापना की कार्यवाही को प्रोत्साहित किया जा रहा है। प्रदेश के 5 संयंत्रों में 4 करोड़ 13 लाख रुपये की लागत से सौर ऊर्जा आधारित गर्म पानी के संयंत्रों की स्थापना की जा रही है।

     अतिरिक्त दूध का उपयोग मिल्क पावडर बनाने में

    दुग्ध संघों द्वारा वितरण से बचे हुए दूध का मिल्क पावडर बनाकर महिला-बाल विकास विभाग की “टेक होम राशन” योजना के लिये प्रदाय किया जाता है। आँगनवाड़ियों के लिये सुगंधित मीठा दुग्ध चूर्ण भी पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के माध्यम से प्रदाय किया जा रहा है।

    देश की दूसरी सीमन प्रयोगशाला भोपाल में

    केन्द्रीय वीर्य संस्थान द्वारा साढ़े 47 करोड़ रुपये की लागत से देश की दूसरी सेक्स सार्टेड सीमन प्रयोगशाला भोपाल में स्थापित की गई है। प्रयोगशाला में अब तक 21 हजार 580 सीमन का उत्पादन किया जा चुका है। सागर जिले के रतौना में राष्ट्रीय गोकुल मिशन में गोकुल ग्राम और कृत्रिम गर्भाधान प्रशिक्षण संस्थान की स्थापना की गई है। बुंदेलखण्ड क्षेत्र विकास योजना में दतिया जिले के नौनेर में आत्म-निर्भर मध्यप्रदेश के तहत प्रदेश का दूसरा वीर्य उत्पादन संस्थान स्थापित किया गया है। पिछले साल राष्ट्रीय कृषि विकास योजना में 1500 और गोकुल मिशन में 850 मैत्री को प्रशिक्षण दिया गया।

    स्वास्थ्य सुरक्षा के लिये टीकाकरण

    प्रदेश के सभी गौ-भैंस वंशीय पशुओं को नेशनल एनीमल डिजीज कंट्रोल प्रोग्राम में एफएमडी और ब्रूसेल्ला का टीका लगाया गया। समस्त पशुओं को यूआईडी टेग लगाकर इनाफ पोर्टल पर दर्ज किया जा रहा है। राष्ट्रीय पशु रोग नियंत्रण कार्यक्रम में ढाई करोड़ से अधिक पशुओं का एफएमडी रोग के विरुद्ध टीकाकरण किया गया है। उद्देश्य वर्ष 2025 तक मुँहपका, खुरपका (एफएमडी) और ब्रूसेल्ला रोग पर नियंत्रण पाना और वर्ष 2030 तक इनका उन्मूलन करना है। दुधारु पशुओं के निरोगी होने से दूध, पशुधन और उत्पादों में वृद्धि होगी। परिणाम स्वरूप किसानों और पशुपालकों की आय में वृद्धि सुनिश्चित होगी। टीकाकरण का प्रथम चरण 31 जनवरी, 2021 को पूरा हो चुका है।

    राष्ट्रव्यापी कृत्रिम गर्भाधान कार्यक्रम

    कार्यक्रम के प्रथम चरण में 7 लाख 65 हजार गौ-भैंस वंशीय पशुओं का कृत्रिम गर्भाधान, 5 लाख 91 हजार गर्भधारण परीक्षण और एक लाख 62 हजार वत्सोत्पादन किया गया। द्वितीय चरण में 19 लाख 15 हजार गौ-भैंस वंशीय पशुओं का कृत्रिम गर्भाधान, 9 लाख 29 हजार का गर्भधारण परीक्षण और 38 हजार 365 वत्सोत्पादन हुआ। तीसरा चरण एक अगस्त, 2021 से प्रारंभ होकर 31 मई, 2022 तक चलेगा। इसमें अब तक डेढ़ लाख कृत्रिम गर्भाधान और 3 हजार से अधिक गर्भ परीक्षण किये जा चुके हैं। इनकी प्रविष्टि भी इनाफ पोर्टल पर की जा रही है।

    बकरी दूध विक्रय आरंभ

    जनजातीय गौरव दिवस 15 नवम्बर से प्रदेश में ग्राहकों को बकरी का दूध भी मिलना आरंभ हो गया है। बकरी दूध विक्रय की शुरूआत जनजातीय बहुल जिलों सिवनी, बालाघाट और धार, झाबुआ और बड़वानी जिलों में उत्पादित 50 से 70 रूपये प्रतिकिलो की दर से खरीदे गये दूध से की गई है। उच्च गुणवत्ता वाला पौष्टिक बकरी का दूध फिलहाल जबलपुर और इंदौर संघ के पार्लर पर उपलब्ध है।

  • सीएम शिवराज सिंह बोले कि कांग्रेस ने टंट्या मामा को भुला दिया

    सीएम शिवराज सिंह बोले कि कांग्रेस ने टंट्या मामा को भुला दिया

    इंदौर,(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)। जननायक टंट्या मामा स्मृति समारोह का मुख्य कार्यक्रम शनिवार को इंदौर के नेहरू स्टेडियम में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान और राज्यपाल मंगू भाई पटेल की उपस्थिति में आयोजित किया गया। इंदौर में मंच पर आदिवासी गीत पर सीएम खूब थिरके। स्मृति समारोह में गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा, उषा ठाकुर, मीना सिंह, अतर सिंह आर्य, तुलसी सिलावट, राज्यसभा सांसद सुमेर सिंह सोलंकी, मंत्री विजय शाह, भाजपा प्रदेशाध्यक्ष वीडी शर्मा मौजूद रहे। राज्यपाल ने क्रांतिसूर्य जननायक टंट्या भील स्मारक स्थल पातालपानी का वर्चुअल लोकार्पण किया। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने प्रशासनिक संकुल का अनावरण किया।

    कार्यक्रम के दौरान सीएम शिवराज सिंह बोले कि कांग्रेस ने टंट्या मामा को भुला दिया है। कांग्रेस अपने 50 साल के कार्यकाल में आदिवासी मंत्रालय भी नहीं दे सकी। यह काम अटल जी की सरकार में हुआ।

    इससे पहले स्मृति कार्यक्रम के तहत पातालपानी में दोपहर 12 बजे राज्यपाल मंगू भाई पटेल, मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान पहुंचे। यहां उन्होंने टंट्या मामा की कांस्य प्रतिमा का अनावरण किया। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि जननायक टंट्या मामा की स्मृति में हर साल 4 दिसंबर को पातालपानी में मेला लगेगा। क्षेत्र का विकास किया जाएगा। उनकी स्मृतियों को संजोया जाएगा, जिससे देश को उनके व्यक्तित्व और बलिदान से प्रेरणा मिल सके। जननायक टंट्या मामा की स्मृति में 4 करोड़ 55 लाख की लागत से पातालपानी में नवतीर्थ स्थल बनाया जाएगा।

    इंदौर का भंवरकुआं चौराहा अब होगा जननायक टंट्या भील चौराहा

    पातालपानी में कार्यक्रम के बाद सीएम और राज्यपाल इंदौर के लिए रवाना हुए जहा सभा-प्रदर्शनी के अलावा सांस्कृतिक कार्यक्रम भी आयोजित किये गए और इंदौर के भंवरकुआं चौराहे का नाम बदलकर जननायक टंट्या भील किया गया। इस मौके पर जननायक टंट्या भील के परिजन और भाजपा नगर अध्यक्ष गौरव रणदिवे भी मौजूद रहे।

  • गायक सिद्धू मूस वाला कांग्रेस में शामिल

    गायक सिद्धू मूस वाला कांग्रेस में शामिल

    गायक सिद्धू मूस वाला कांग्रेस में शामिल

    गायक को उनके हिट पंजाबी ट्रैक जैसे “लीजेंड”, “डेविल”, “जस्ट सुनो”, “तिबेयन दा पुट”, “जट्ट दा मुकाबाला”, “ब्राउन बॉयज़” और “हथियार” के लिए जाना जाता है।

    उन्होंने पहली बार अपने अभी भी लोकप्रिय “सो हाई” के साथ पहचान हासिल की, जिसे 2017 में रिलीज़ किया गया था। उनका नाम 2018 में बिलबोर्ड कनाडाई एल्बम में भी दिखाया गया है।

    मूसेवाला और पांच पुलिस कर्मियों के खिलाफ पिछले साल मई में भी पंजाब पुलिस ने मामला दर्ज किया था।

    वीडियो वायरल होने के बाद, गुप्ता ने संगरूर में वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक को प्रारंभिक जांच करने का निर्देश दिया था, जिससे प्रथम दृष्टया यह स्थापित होता है कि डीएसपी ने बड़बर गांव में फायरिंग रेंज में उस समय शूटिंग की सुविधा प्रदान की थी जब पूरे राज्य के अधीन था। कर्फ्यू।

  • भू अधिकार पुस्तिका अब आनलाईन उपलब्ध

    भू अधिकार पुस्तिका अब आनलाईन उपलब्ध

    भोपाल,1 दिसंबर (प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान द्वारा भू-अधिकार पुस्तिका प्राप्त करने का सुगम और आसान तरीका बनाने के निर्देशों के अनुपालन में मध्यप्रदेश शासन के राजस्व विभाग ने भू-अधिकार पुस्तिका उपलब्ध कराने के संबंध में संशोधित नियम जारी किए हैं। अब भू-अधिकार पुस्तिका आवेदक को ऑनलाइन प्राप्त होगी। भू-स्वामी अपनी भू-अधिकार पुस्तिका प्राप्त करने के लिए आईटी सेंटर, एम.पी. ऑनलाइन, लोक सेवा केन्द्र, कियोस्क सेंटर और शासन द्वारा प्राधिकृत सेवा प्रदाता के माध्यम से ऑनलाइन आवेदन कर सकेंगे।

    ऑनलाइन मिलने वाली भू-अधिकार पुस्तिका सामान्यत: दो पृष्ठों की होगी। इसके लिए शासन द्वारा 45 रुपये शुल्क निर्धारित किया गया है। प्रकरण विशेष में पुस्तिका यदि अधिक पृष्ठों की है, तो प्रत्येक पृष्ठ के लिए 15 रुपये अतिरिक्त देय होंगे। प्रदेश में भू-अधिकार पुस्तिका अब ऑनलाइन प्रदाय की जायेगी। पूर्व में प्राप्त की गई भू-अधिकार पुस्तिका यथावत उपयोग में ली जा सकेगी। राजस्व विभाग द्वारा भू-अधिकार पुस्तिका प्रदाय करने के लिए समय-सीमा लोक सेवा प्रबंधन विभाग द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार निर्धारित की गई है। भूलेख पोर्टल से भू-अधिकार पुस्तिका की डिजिटल हस्ताक्षरित प्रति डाउनलोड कर आवेदक को निर्धारित समय-सीमा में प्रदाय की जायेगी।

    ऑनलाइन भू-अधिकार पुस्तिका प्राप्त करने के लिए कृषक/आवेदक को अपना आधार कार्ड, फोटो, मोबाइल नम्बर, समग्र आईडी, पटवारी हल्का और सेक्टर क्रमांक आदि अभिलेख उपलब्ध कराना होंगे। इन अभिलेखों के आधार पर ऑनलाइन सेवा प्रदाता संस्था आवेदक का आवेदन प्रस्तुत कर देगी। आवेदक द्वारा भू-अधिकार पुस्तिका का आवेदन किए जाने के लिए यदि आधार नम्बर उपलब्ध नहीं है, तो आवेदक का फोटो लेकर क्षेत्र के पटवारी से सत्यापित करवाया जायेगा। पटवारी का दायित्व है कि वह आवेदक का फोटो तीन कार्य दिवस में सत्यापित अथवा अमान्य करें। पटवारी द्वारा ऐसा नहीं किए जाने की दशा में फोटो को सही मानकर भू-अधिकार पुस्तिका जारी की जायेगी।

    भू-अधिकार पुस्तिका का आवेदन अमान्य किए जाने अथवा समय-सीमा में निराकरण नहीं होने पर आवेदक को अपील करने का अधिकार होगा। आवेदक प्रथम अपील 30 दिवस और द्वितीय अपील 60 दिवस में प्रस्तुत कर सकेगा। दोनों ही अपील निराकरण करने की समय-सीमा 15 दिवस निर्धारित की गई है।

  • गोंडों का सम्मान रानी कमलापति रेलवे स्टेशन

    गोंडों का सम्मान रानी कमलापति रेलवे स्टेशन

    भोपाल,(शिवराज सिंह चौहान )।इतिहास के पन्नों को पलटने से ज्ञात होता है कि 1600 से सन् 1715 तक गिन्नौरगढ़ किले पर गोंड राजाओं का आधिपत्य् रहा तथा भोपाल पर भी उन्हीं का शासन था। गोंड राजा निज़ाम शाह की सात पत्नियाँ थीं, जिनमें कमलापति सबसे सुंदर थीं। उनकी इच्छा से तालाब के तट पर एक महल का निर्माण किया गया, जो सन् 1702 में पूर्ण हुआ, जिसे आज रानी कमलापति महल के नाम से जाना जाता है। आज इसके अवशेष छोटे और बड़े तालाब के पार्क में देखे जाते हैं। ईसवी सन् 1989 से भारतीय पुरातत्व विभाग ने इस महल को अपने संरक्षण में ले लिया। इसमें एक छोटी चित्र प्रदर्शनी भी है।

    गोंड समुदाय का राजवंश गिन्नौरगढ़ से बाड़ी तक फैला हुआ था। उनका साम्राज्य गढ़ा कटंगा (मंडला) 52 गढ़ के आधिपत्य में था। रायसेन किला ईस्वी सन् 1362 से 1419 तक 57 वर्ष राजा रायसिंह के आधिपत्य में था। यह किला इनके द्वारा बनवाया गया था। ईस्वी 14वीं में जगदीशपुर (इस्लाम नगर) में गोंड राजाओं का आधिपत्य रहा। इस महल को भी गोंड राजाओं के द्वारा बनवाया गया था। सन् 1715 में अंतिम गौंड राजा नरसिंह देवड़ा रहे। भोपाल शाही ईस्वी 476 से 533 लगभग 60 वर्षों तक इनका शासन रहा। गोंड समाज के प्रथम धर्मगुरू पारी कुपार लिंगो बाबा ने पाँच देव सगा समाज वाले के लिये बैरागढ़ का स्थान निश्चित किया था। तभी से गोंडवाना समाज के लोग बैरागढ़ से हजारों किलोमीटर की दूरी पर निवास करने के बावजूद भी बैरागढ़ में बड़ा देव की पूजा-अर्चना करने आते हैं। यह गोंडों का सबसे बड़ा देव-स्थल है।

    बाड़ी जिला रायसेन का अंतिम शासक चैन सिंह 16वी ईस्वीं में रहा। ईसवी 16वी सदी में सलकनपुर जिला सीहोर रियासत के राजा कृपाल सिंह सरौतिया थे। उनके शासन काल में वहाँ की प्रजा बहुत खुश और समपन्न थी। उनके यहाँ एक खूबसूरत कन्या का जन्म हुआ। वह बचपन से ही कमल की तरह बहुत सुंदर थी। उसकी सुंदरता को देखते हुए उसका नाम कमलापति रखा गया। वह बचपन से ही बहुत बुद्धिमान और साहसी थी और शिक्षा, घुड़सवारी, मल्लयुद्ध, तीर-कमान चलाने में उसे महारत हासिल थी। वह अनेक कलाओं में पारंगत होकर कुशल प्रशिक्षण प्राप्त कर सेनापति बनी। वह अपने पिता के सैन्य बल के साथ और अपने महिला साथी दल के साथ युद्धों में शत्रुओं से लोहा लेती थी। पड़ोसी राज्य अकसर खेत, खलिहान, धन-सम्पत्ति लूटने के लिए आक्रमण किया करते थे और सलकनपुर राज्य की देख-रेख करने की पूरी जिम्मेदारी राजा कृपाल सिंह सरौतिया और उनकी टी राजकुमारी कमलापति की थी, जो आक्रमणकारियों से लोहा लेकर अपने राज्य की रक्षा करती रही।

    राजकुमारी धीरे-धीरे बड़ी होने लगी और उसकी खूबसूरती की चर्चा चारों दिशाओं में होने लगी। इसी सलकनपुर राज्य में बाड़ी किले के जमींदार का लड़का चैन सिंह जो राजा कृपाल सिंह सरौतिया का भांजा लगता था, वह राजकुमारी कमलापति से विवाह करने की इच्छा रखता था। लेकिन उस छोटे से गाँव के जमीदार से राजकुमारी कमलापति ने शादी करने से मना कर दिया।

    16वीं सदी में भोपाल से 55 किलो मी. दूर 750 गाँवों को मिलाकर गिन्नौरगढ़ राज्य बनाया गया, जो देहलावाड़ी के पास आता है। इसके राजा सुराज सिंह शाह (सलाम) थे। इनके पुत्र निजामशाह थे, जो बहुत बहादुर, निडर तथा हर कार्य-क्षेत्र में निपुण थे। उन्हीं से रानी कमलापति का विवाह हुआ।
    राजा निजाम शाह ने रानी कमलापति के प्रेम स्वरूप ईस्वी 1700 में भोपाल में सात मंजिला महल का निर्माण करवाया, जो लखौरी ईंट और मिट्टी से बनवाया गया था। यह सात मंजिला महल अपनी भव्यता, सुंदरता और खूबसूरती से लिए प्रसिद्ध था।रानी कमलापति का वैवाहिक जीवन काफी खुशहाल व्यतीत हो रहा था। वह अपना वैवाहिक जीवन हँसी-खुशी के साथ राजा निजामशाह के साथ व्यतीत कर रही थी। उनको एक पुत्र की प्राप्ति हुई, जिसका नाम नवल शाह था।

    बाड़ी किले के जमींदार का लड़का चैन सिंह राजा निजामशाह का भतीजा था। वह राजकुमारी कमलापति की शादी होने के बावजूद भी अभी उससे विवाह करने की इच्छा रखता था। उसने अनेक बार राजा निजामशाह को मारने की कोशिश की, जिसमें वह असफल रहा। एक दिन प्रेम पूर्वक उसने राजा निजामशाह को भोजन पर आमंत्रित किया और भोजन में जहर देकर उनकी धोखे से हत्या कर दी। राजा निजामशाह की मौत की खबर से पूरे गिन्नौरगढ़ में खलबली हो गई। चैनसिंह ने रानी कमलापति को अकेले जानकर उन्हें पाने की नीयत से गिन्नौरगढ़ के किले पर हमला कर दिया। रानी कमलापति ने उस समय अपने कुछ वफादारों और 12 वर्षीय बेटे नवलशाह के साथ भोपाल में बने इस महल में छुप जाने का निर्णय लिया, जो उस समय सुरक्षा की दृष्टि से काफी महत्वपूर्ण था। कुछ दिन भोपाल में समय बिताने के बाद रानी कमलापति को पता चला कि भोपाल की सीमा के पास कुछ अफगानी आकर रूके हुए हैं, जिन्होंने जगदीशपुर (इस्लाम नगर) पर आक्रमण कर उसे अपने कब्जे में ले लिया था। इन अफगानों का सरदार दोस्त मोहम्मद खान था, जो पैसा लेकर किसी की तरफ से भी युद्ध लड़ता था। लोक मान्यता है कि रानी कमलापति ने दोस्त मोहम्मद को एक लाख मुहरें देकर चैनसिंह पर हमला करने को कहा।

    दोस्त मोहम्मद ने गिन्नौरगढ़ के किले पर हमला कर दिया जिसमें चैनसिंह मारा गया और किले को हड़प लिया गया। रानी कमलापति को अपने छोटे बेटे की परवरिश की चिंता थी इसीलिए उन्होंने दोस्त मोहम्मद के इस कदम पर कोई आपत्ति नहीं जताई। दोस्त मोहम्मद अब सम्पूर्ण भोपाल की रियासत पर कब्जा करना चाहता था। उसने रानी कमलापति को अपने हरम (धर्म) में शामिल होने और शादी करने का प्रस्ताव रखा। वह वास्तव में रानी को अपने हरम में रखना चाहता था।

    दोस्त मोहम्मद खान के इस नापाक इरादे को देखते हुए रानी कमलापति का 14 वर्षीय बेटा नवल शाह अपने 100 लड़ाकों के साथ लाल घाटी में युद्ध करने चला गया। इस घमासान युद्ध में दोस्त मोहम्मद खान ने नवल शाह को मार दिया। इस स्थान पर इतना खून बहा कि यहाँ की जमीन लाल हो गई और इसी कारण इसे लाल घाटी कहा जाने लगा। इस युद्ध में रानी कमलापति के 2 लड़के बच गये थे, जो किसी तरह अपनी जान बचाते हुए मनुआभान की पहाड़ी पर पहुँच गये। उन्होंने वहाँ से रानी कमलापति को काला धुंआ कर संकेत किया कि ‘हम युद्ध हार गये हैं और आपकी जान को खतरा है।

    रानी कमलापति ने विषम परिस्थति को देखते हुए अपनी इज्जत को बचाने के लिए बड़े तालाब बाँध का सँकरा रास्ता खुलवाया जिससे बड़े तालाब का पानी रिसकर दूसरी तरफ आने लगा। इसे आज छोटा तालाब के रूप में जाना जाता हैं। इसमें रानी कमलापति ने महल की समस्त धन-दौलत, जेवरात, आभूषण डालकर स्वयं जल-समाधि ले ली।

    दोस्त मोहम्मद खान जब तक अपनी सेना को साथ लेकर लाल घाटी से इस किले तक पहुँचा उतनी देर में सब कुछ खत्म हो गया था। दोस्त मोहम्मद खान को न रानी कमलापति मिली और न ही धन-दौलत। जीते जी उन्होंने भोपाल पर परधर्मी को नहीं बैठने दिया। स्रोतों के अनुसार रानी कमलापति ने सन् 1723 में अपनी जीवन-लीला खत्म की थी। उनकी मृत्यु के बाद दोस्त मोहम्मद खान के साथ ही नवाबों का दौर शुरू हुआ और भोपाल में नवाबों का राज्य हुआ।

    नारी अस्मिता और अपनी संस्कृति की रक्षा के लिए रानी कमलापति ने जल-समाधि लेकर इतिहास में अमिट स्थान बनाया है। उनका यह कदम उसी जौहर परंपरा का पालन था, जिसमें हमारी नारी शक्ति ने अदम्य साहस के साथ अपनी अस्मिता, धर्म और संस्कृति को बचाया है। उसी परंपरा का निर्वाह करते हुए रानी कमलापति ने भी जीवित रहते अपनी नारी गरिमा को विधर्मियों से बचा लिया और पीढ़ियों के लिए यह प्रेरणा प्रदान की कि अपने धर्म की रक्षा के लिए किसी को भी बलिदान देने से पीछे नहीं हटना चाहिए।

    गोंड रानी कमलापति आज तीन सौ वर्ष बाद भी प्रासंगिक हैं और उनके बलिदान का सम्मान करके हम कृतज्ञ हैं। भोपाल का हर हिस्सा उनकी कहानी सुनाता है। यहाँ के तालाबों के पानी में उनके बलिदान की गूंज आज भी सुनी जा सकती है। ऐसा लगता है मानो वे स्वयं यहाँ की कल-कल धारा हैं। गोंड रानी अब पानी बनकर भोपाल की रवानी में अविरल बहती हैं।

    (लेखक – मुख्यमंत्री, म.प्र. शासन)

  • पर्यूषण पर्व में जीवन सूत्रों की साधना का दौर

    पर्यूषण पर्व में जीवन सूत्रों की साधना का दौर

    भोपाल,04सितंबर(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)।राजधानी में अरेरा कालोनी स्थित जैन स्थानक भवन में आज आठ दिनों तक चलने वाले पर्यूषण पर्व का श्रद्धा पूर्वक शुभारंभ हुआ।अरेरा कालोनी इ-3। 40 में स्वाध्यायी बहनें बैतूल की श्राविका शकुंतला जैन और महेश्वर की हेमलता वाणी के सानिध्य में प्रातः 6 बजे से हर दिन बारह घंटों का नवकार मंत्र जाप कराया जाएगा।


    आज के प्रवचनों में बहन शकुंतला जैन ने बताया कि जीवन में ज्ञान सर्वोपरि है। ज्ञान के बगैर किसी कार्य की सिद्धि नहीं की जा सकती। अच्छे और संस्कारयुक्त ज्ञान से मनुष्य का जीवन सार्थक हो जाता है।ज्ञानी व्यक्तियों से जीवन के रहस्य सरलता पूर्वक समझे जा सकते हैं। हम प्रतिष्ठित डाक्टरों, वकीलों और इंजीनियरों के पास जाकर जिस तरह अपनी समस्याओं का समाधान प्राप्त करते हैं उसी तरह संतों के पास जाकर जीवन दर्शन को समझते हैं। अपने क्षेत्र के इन विशेषज्ञों ने कड़ी साधना करके ज्ञान अर्जन किया है,इसी वजह से लोग उनकी ओर अपेक्षा भरी निगाहों से देखते हैं।


    उन्होंने कहा कि पर्यूषण पर्व भी ऐसा ही एक अवसर है जिसके दौरान हम धर्म के माध्यम से जीवन को सफल बनाने के गुर सीखते हैं। यदि हम श्रद्दा के साथ जीवन के सूत्रों को सीखने का प्रयास करेंगे तो धीरे धीरे हम भी अपनी जाग्रत अवस्था को हासिल कर लेंगे।


    बहन हेमलता वाणी ने श्रावकों को संदेश देते हुए बताया कि स्थानक भवन में हर दिन सुबह 7 बजे से प्रार्थना और साढ़े आठ बजे से अंतगड़ सूत्र का वाचन किया जाएगा। इसके बाद धार्मिक प्रवचन और प्रतियोगिताएं भी होंगी। ये सभी कार्यक्रम 11 सितंबर तक लगातार होंगे। सायंकालीन प्रतिक्रमण में साढ़े छह बजे से धार्मिक भजनों का भी आयोजन होगा। इस दौरान धर्मप्रेमी बंधुओं के निवास और भोजन की व्यवस्था भी रहेगी,जिससे उन्हें साधना में व्यवधान न हो। हर दिन अलग अलग जीवन सूत्रों पर व्याख्यान और शंका समाधान भी होगा। आज इस धार्मिक अनुष्ठान के शुभारंभ अवसर पर राजधानी के स्थानकवासी परिवारों ने बड़ी संख्या में उपस्थित होकर इस संस्कार शिविर का लाभ प्राप्त किया।

  • भारतीय मजदूर संघ ने किया वृक्षारोपण

    भारतीय मजदूर संघ ने किया वृक्षारोपण

    सागर,28 अगस्त(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)। मजदूर संघ के तत्वाधान में आज जिला इकाई सागर ने श्रीमती अमृता देवी विश्नोई जी के बलिदान को पर्यावरण दिवस के रूप में केंद्रीय बीड़ी अस्पताल सागर के परिसर में वृक्षारोपण कर मनाया।
    इस अवसर पर माननीय नगर विधायक शैलेंद्र जैन के मुख्य आतिथ्य में एवं भारतीय मजदूर संघ के प्रदेश मंत्री आशीष सिंह जिला चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी सुरेश बौद्ध , स्वास्थ्य विभाग से सिविल सर्जन श्रीमती डॉक्टर ज्योति चौहान डॉक्टर प्रदीप चौहान सहायक श्रम आयुक्त भगवत प्रसाद कोरी बीड़ी अस्पताल की मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ श्रीमती बरूआ ,जिला मलेरिया अधिकारी डॉ शैलेंद्र शाक्य प्रदेश महामंत्री कंस्ट्रक्शन मजदूर महासंघ से डॉ प्रदीप पाठक बीड़ी श्रमिक संगठन से राष्ट्रीय सचिव श्रीमती राजकुमारी पवार शहर के समाजसेवी मस्तराम घोसी के विशिष्ट आतिथ्य एवं कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे भारतीय मजदूर संघ के जगदीश जी जारोलिया की अध्यक्षता में कार्यक्रम का शुभारंभ मां भारती एवं भारतीय मजदूर संघ के संस्थापक श्रीमान दत्तोपंत जी ठेंगड़ी की छाया चित्र के समक्ष दीप प्रज्वलन कर किया गया। इसी क्रम में स्वागत की श्रंखला में मुख्य अतिथि एवं विशिष्ट अतिथियों का स्वागत सम्मान विभिन्न संगठनों से पधारे हुए अध्यक्ष एवं पदाधिकारियों द्वारा तिलक एवं पुष्प गुच्छ एवं मालाओं के माध्यम से किया गया।
    तत्पश्चात स्वागत उद्बोधन के लिए राकेश श्रीवास्तव मध्य प्रदेश राज्य कर्मचारी संघ के अध्यक्ष के द्वारा किया गया, कार्यक्रम का मंच संचालन भारतीय मजदूर संघ सागर के जिला मंत्री राहुल जैन के द्वारा किया गया।
    इसी क्रम में कार्यक्रम को संबोधित करते हुए माननीय विधायक शैलेंद्र जैन ने कहा कि अमृता देवी विश्नोई एवं विश्नोई समाज के द्वारा जो पर्यावरण को बचाने के लिए बलिदान दिया गया हम सभी आज यहां आज भारतीय मजदूर संघ की इस परंपरा को भारतीय पर्यावरण दिवस के रूप में मनाने एकत्रित हुए हैं ।मैं जनता का एक जनप्रतिनिधि होने के नाते आप सभी को यह विश्वास दिलाना चाहता हूं कि विधानसभा में इस प्रस्ताव को विशेष रुप से लाऊंगा जिससे आगामी आने वाले वर्ष में हम सभी एक साथ पूर्व तैयारी कर बड़े स्तर पर इस पर्यावरण दिवस को आयोजन संपूर्ण मध्यप्रदेश में एक साथ वृक्षारोपण कर मनाने का प्रयास करेंगे,इस अवसर पर उन्होंने भारतीय मजदूर संघ के पदाधिकारियों एवं कार्यकर्ताओं से आवाहन किया कि श्रमिकों की शत-प्रतिशत वैक्सीनेशन के लिए चिन्हित क्षेत्रों में अभियान चलाकर वैक्सीनेशन कराने के लिए स्वास्थ्य विभाग के साथ वैक्सीनेशन के कार्यक्रम को सफल बनाने का प्रयास हम और आप सभी मिलकर करेंगे।

    आज के वृक्षारोपण कार्यक्रम में भारतीय मजदूर संघ से संबंधित विभिन्न संगठनों ने बढ़-चढ़कर सहभागिता की, जिसमें प्रमुख रूप से भारतीय मजदूर संघ के कार्यकारी जिला अध्यक्ष दीपक मिश्रा, कार्यालय मंत्री राम ठाकुर , के साथ दामोदर प्रजापति ब्रजमोहन पांडे विशाल खरे मध्य प्रदेश राज्य कर्मचारी संघ से ऐसी द्विवेदी अशोक तिवारी अवधेश उपाध्याय अजय खरे डीके तिवारी विकास उपाध्याय दिनेश कनौजिया रघुवर प्रसाद दुलीचंद पटेल , कैलाश सोनी , देवेंद्र पंथी एवं मध्य प्रदेश बिजली कर्मचारी महासंघ से केशव प्रसाद तिवारी , राम विवेक गौतम ,सतीश मेहता ,महेंद्र प्रजापति श्रीमान कक्का , एवं बीड़ी संगठन के अध्यक्ष श्याम चरण जाटव, शीतल प्रसाद वर्मा , दीपेश जाटव , कृषि एवं ग्रामीण मजदूर महासंघ से अमित उपाध्याय, सर्वानंद पांडे ,कंस्ट्रक्शन मजदूर महासंघ के विभिन्न पदाधिकारी और पर्यावरण संयोजक अमित रैकवार, बहन श्रीमती रश्मि कुशवाहा , संजय भाटी ,एम ई एस कार्यकारी यूनियन से नितेश साहू , संतोष शर्मा के साथ समस्त संबद्ध संगठनों के कार्यकर्ताओं के साथ शहर वासियों ने सामूहिक रूप से वृक्षारोपण कर कार्यक्रम को सफल बनाया, इसी क्रम में जिला अध्यक्ष की ओर से सभी का आभार व्यक्त किया गया।

  • केन्द्र का आर्थिक पैकेज संजीवनी साबित होगाःदेवड़ा

    केन्द्र का आर्थिक पैकेज संजीवनी साबित होगाःदेवड़ा

    भोपाल 29 जून (प्रेस इंफार्मेंशन सेंटर)

    वित्त मंत्री जगदीश देवड़ा ने कहा है कि केन्द्र सरकार द्वारा की अर्थ-व्यवस्था को गति देने के लिए 6.29 लाख करोड़ का प्रोत्साहन पैकेज देने से कोविड-19 प्रभावित भारत की अर्थ-व्यवस्था में नया मोड़ आयेगा। उन्होने प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी को इस पहल के लिये धन्यवाद देते हुए कहा कि उनके नेतृत्व में केन्द्रीय वित्त मंत्री श्रीमती निर्मला सीतारमण एवं वित्त राज्य मंत्री श्री अनुराग ठाकुर द्वारा घोषित किया गया आर्थिक पैकेज अर्थ-व्यवस्था के लिये संजीवनी साबित होगा और बूस्टर डोज का काम करेगा। श्री देवड़ा ने मध्यप्रदेश की अर्थ-व्यवस्था को पुनर्जीवित करने के लिये मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान का भी आभार व्यक्त करते हुए कहा कि केन्द्र सरकार के नये पैकेज से मध्यप्रदेश को भरपूर लाभ होगा।

    मंत्री श्री देवडा ने कहा कि यह राहत पैकेज स्वास्थ्य, एमएसएमई, पर्यटन, निर्यात एवं आत्म-निर्भर भारत रोजगार योजना सहित विभिन्न क्षेत्रों के लिये संजीवनी की तरह है। इन क्षेत्रों को फिर से जीवन मिलेगा। उन्होंने कहा कि यह प्रोत्साहन पैकेज समय की मांग के अनुसार है। उन्होंने कोरोना प्रभावित उघमियों को कम ब्याज दर पर 1.1 लाख करोड़ आर्थिक पैकेज देने की घोषणा का स्वागत करते हुए कहा कि प्रभावित क्षेत्रों को कोरोना महामारी से उपजे आर्थिक संकट से उबरने में मदद मिलेगी।

    छोटे उद्यमियों को बढ़ावा मिलेगा

    मंत्री श्री देवड़ा ने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा किए गए इन उपायों से निजी निवेश, निर्यात, कृषि उत्पादकता में वृद्धि को मदद मिलेगी तथा छोटे शहरों में भी स्वास्थ्य संबंधी ढाँचागत सुविधाएँ मजबूत होगी। अर्थ-व्यवस्था के पुर्नद्धार को गति मिलेगी और आर्थिक गतिविधियों में भी तेजी आएगी। यह राहत पैकेज अर्थ-व्यवस्था के लिए जीवन रक्षक साबित होगा। इन उपायों से उत्पादन भी बढ़ेगा और रोजगार के अवसर भी पैदा होंगे। साथ ही छोटे उद्यमियों, व्यवसायियों और पर्यटन को बढावा मिलेगा। चिकित्सा क्षेत्र में निवेश बढ़ने से इस क्षेत्र में मजबूती मिलेगी। स्वास्थ्य सुविधाओं को लेकर किए गए प्रावधानों से पिछड़े क्षेत्रों में भी स्वास्थ्य सुविधाएँ बढ़ सकेंगी।

    मंत्री श्री देवड़ा ने कहा कि देश में 18 वर्ष से अधिक आयु के प्रत्येक नागरिक को फ्री वैक्सीन देने का क्रांतिकारी कदम उठा चुकी केंद्र सरकार ने अब इन आर्थिक उपायों से वित्तीय क्षेत्र को भी जरूरी वैक्सीन प्रदान कर दी है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री गरीब कल्याण योजना का लाभ नागरिकों को मिला है। अब इस योजना को नवंबर तक बढ़ाए जाने से गरीब लोगों को फायदा पहुँचेगा।

  • मीडिया के शोर में प्रेस की साख आज भी कायमःकुलपति केजी सुरेश

    मीडिया के शोर में प्रेस की साख आज भी कायमःकुलपति केजी सुरेश

    भोपाल,07 मार्च(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)। सोशल मीडिया और डिजिटल क्रांति के दौर में पत्रकारों की समाज के प्रति संवेदनशीलता और लोक दायित्व का भाव ही प्रेस की पहचान है। प्रेस ने बड़ी हद तक अपनी इस साख को बचाकर रखा है। तकनीक और भाषा के सहारे चलने वाला दुष्प्रचार कभी लोकदायित्व से भरी प्रेस की जगह नहीं ले सकता।इसके बावजूद पत्रकारिता की मुख्य धारा यदि आज कहीं सवालों के घेरे में है तो उसे अपनी सार्थकता बनाए रखने के लिए खुद में बदलाव लाना होगा।प्रदेश के मूर्धन्य आंचलिक पत्रकार स्वर्गीय भुवन भूषण देवलिया की स्मृति में आयोजित व्याख्यान माला में पं. माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय के कुलपति के.जी. सुरेश ने प्रमुख वक्ता के रूप में ये विचार व्यक्त किए।

    पंडित माखनलाल चतुर्वेदी विश्वविद्यालय परिसर में आज रविवार को जूम एप और फेसबुक लाईव पर (पत्रकारिता का लोक दायित्व) विषय पर आयोजित व्याख्यानमाला में प्रोफेसर के.जी. सुरेश के अलावा अमर उजाला डिजिटल के संपादक जयदीप कार्णिक, भारतीय जन संचार संस्थान के महानिदेशक प्रो.संजय द्विवेदी, पद्मश्री विजयदत्त श्रीधर, ने अपने विचार व्यक्त किए। लगातार दसवें वर्ष हुए इस आयोजन में विषय का प्रवर्तन वरिष्ठ पत्रकार शिव अनुराग पटैरिया ने किया। इसके अलावा वरिष्ठ पत्रकार राजेश सिरोठिया. और वरिष्ठ पत्रकार अजय त्रिपाठी ने श्री देवलिया जी के साथ जुड़ीं यादों के संस्मरण सुनाए।इस अवसर पर सागर के वरिष्ठ पत्रकार विनोद आर्य को स्वर्गीय भुवन भूषण देवलिया स्मृति अलंकरण से सम्मानित किया गया। इसमें आंचलिक पत्रकारों के लिए ग्यारह हजार रुपए नकद, शाल श्रीफल और स्मृति चिन्ह से सम्मानित किया जाता है। मंच संचालन युवा पत्रकार आदित्य श्रीवास्तव ने किया।

    प्रो.के.जी.सुरेश ने कहा कि कोई भी नागरिक अभिनंदन हमेशा प्रायोजित सम्मानों से ज्यादा मूल्यवान होता है। नागरिक अभिनंदन की कसौटी हमेशा ठोस होती है। मुझे स्वर्गीय देवलिया जी से मिलने का अवसर तो प्राप्त नहीं हुआ लेकिन उनके बारे में जो पढ़ा और उनके छात्रों में समाज के प्रति जो प्रतिबद्धता देखी उससे मालूम चलता है कि वे आंचलिक पत्रकारिता के पुरोधा रहे हैं। उन्होंने कहा कि आज एक शिक्षक के नाते मुझे लगता है कि पत्रकारों की चयन प्रक्रिया पर हमें विशेष गौर करना होगा। हम पत्रकारों को भाषा और तकनीक के आधार पर बेहतर बनाने का प्रयास करते हैं लेकिन उनकी समाज के प्रति संवेदनशीलता पर गौर नहीं करते।

    श्री केजी सुरेश ने कहा कि समाज के बीच जनसंचार कायम करने के लिए हमें सामुदायिक रेडियो को बढ़ावा देना होगा। आज बोलचाल की भाषा में कहा जाता है कि पत्रकार तो पक्षकार हो गए हैं जबकि उनका तो एक ही पक्ष होता है वो है जनपक्ष या लोकपक्ष। मैं स्वयं तीन दशकों तक पत्रकार रहा हूं इस आधार पर कह सकता हूं कि रोज शाम को टीवी की बहसें पत्रकारिता नहीं हैं। ये बात भी सही है कि टेबल टाप रिपोर्टिंग मीडिया की मजबूरी है लेकिन यदि वो जमीनी स्तर की सच्चाई उजागर नहीं करती तो उसका महत्व कुछ नहीं। मुख्यधारा का मीडिया यदि अपने भीतर बदलाव नहीं लाएगा तो आगे चलकर उसका महत्व ही समाप्त हो जाएगा। जमीनी स्तर पर मीडिया को लेकर कई प्रयोग चल रहे हैं। यदि उन मुद्दों को नहीं उठाया जाएगा तो पढ़ने देखने के प्रति लोगों का लगाव नहीं बढ़ाया जा सकेगा। आज ब्लॉगों और यू ट्यूब पर पाठकों और दर्शकों की रुचि की सामग्री बढ़ती जा रही है। पाठकों की ये बदलती अभिरुचियां प्रेस के लिए खतरे की घंटी बन गई है। उन्होंने कहा कि प्रेस की 70 फीसदी आय विज्ञापनों से होती है, ऐसे में लोक दायित्व के भाव को बचा पाना कठिन हो जाता है। जनता को भी इस मुद्दे पर गौर करना होगा कि वह ऐसे प्रेस को संबल दे जो केवल जनता के हित के लिए काम करता हो। प्रेस के हित में हमारा विश्वविद्यालय भुवन भूषण देवलिया स्मृति व्याख्यानमाला समिति के साथ काम करने के लिए तैयार है। आंचलिक पत्रकारिता को मजबूत करने के लिए यूनिसेफ के सहयोग से हम हर जिले में अच्छी पत्रकारिता को बढ़ावा देने का काम कर रहे हैं।

    भारतीय जनसंचार संस्थान,नईदिल्ली के महानिदेशक प्रो.संजय द्विवेदी ने कहा कि स्वर्गीय भुवन भूषण देवलिया का जीवन पत्रकारिता के लोक दायित्व का स्थापित उदाहरण है। लोकमंगल उनके संवाद का प्रमुख स्तंभ था। मीडिया की आलोचना करने से जनसंवाद का उद्देश्य पूरा नहीं होता। समाज के सभी स्तंभों में गिरावट देखी जाती है ऐसे में मीडिया अछूता नहीं रह सकता। पत्रकारिता विहीन समाज के बीच कभी भी लोक कल्याणकारी राज्य नहीं बनाया जा सकता। उन्होंने कहा कि कुछ लोग आंदोलनकारी बनकर खुद को पत्रकार बताने का प्रयास करते हैं ऐसा करके वे पत्रकारों की तपस्या पर पानी फेर देते हैं। पत्रकारिता के पीछे जनता का विश्वास प्रमुख होता है। पत्रकार तो कोई भी बन सकता है लेकिन पत्रकारिता करने वाले लोग अलग होते हैं। हमें ऐसे लोगों को संरक्षण देना होगा जो वास्तव में पत्रकारिता कर रहे हैं। इस तरह के आयोजन उन्हीं पत्रकारों को संबल देने में सहायक होते हैं। इस लिहाज से ये विमर्श बहुत मूल्यवान बन गया है।

    अमर उजाला डिजिटल के संपादक जयदीप कार्णिक ने कहा कि जैसे कोई भी सच्ची खबर छुप नहीं सकती उसी तरह पत्रकारिता की गंदगी भी छुपाई नहीं जा सकती। पत्रकारिता में आत्म अवलोकन का भाव हमेशा अच्छी पत्रकारिता को जिंदा रखता है। सोशल मीडिया पर तो लोग झूठ भी प्रचारित कर देते हैं लेकिन प्रेस का संपादक केवल तथ्यों को ही प्रस्तुत करता है। यही प्रेस का महत्व भी है। उन्होंने कहा कि आज वक्त आ गया है कि हम पत्रकारिता की अर्थव्यवस्था पर भी बात करें।

    पत्रकारिता का लोक दायित्व विषय पर आयोजित इस व्याख्यानमाला में विषय का प्रवर्तन करते हुए वरिष्ठ पत्रकार शिव अनुराग पटैरिया ने कहा कि बिल्डर माफिया और शराब के व्यापारियों ने जबसे अखबारों में घुसपैठ कर ली है तबसे समाज की जन पक्षधरता लड़खड़ाने लगी है। अच्छे अखबारों का समर्थक बाजार न होने की वजह से लोकदायित्व की लड़ाई पिछड़ जाती है। इस सबके बावजूद ये भी सच है कि यदि पत्रकार न झुकना चाहें तो कोई शक्ति उन्हें नहीं झुका सकती। आज भी पत्रकारों को थानेदार, कलेक्टर और मुख्यमंत्री को खुश करके चलना होता है, ऐसे में जो लोग समझौते नहीं करते वे पिछड़ जाते हैं। साधनों के अभाव में ये पत्रकारिता पिछड़ रही है।

    अध्यक्षीय भाषण में पद्मश्री विजयदत्त श्रीधर ने कहा कि अच्छाई या बुराई हमारे ही कर्मों से निकलती हैं। हर दौर में अच्छी बुरी पत्रकारिता दोनों रहीं हैं। जो लोग किसी पार्टी के प्रवक्ता बन जाते हैं या फिर मुखबिरी करके लाभ उठाते हैं वे लोग ज्यादा खतरनाक हैं। बाजार तो हमेशा से समाज का हिस्सा रहा है,वह सहयोगी और सेवक रहे तब तक तो ठीक है लेकिन जब वह स्वामी बन जाता है तो प्रेस का लोक दायित्व भाव लड़खड़ा जाता है। उन्होंने कहा कि प्रेस काऊंसिल आज महत्वहीन हो चुकी है ऐसे में जरूरी है कि उसे समाप्त कर दिया जाए और प्रेस की स्थितियों पर नए सिरे से विचार करने के लिए तीसरे प्रेस आयोग का गठन किया जाए। प्रेस यदि साक्ष्य अधिनियम की तरह तथ्य आधारित संवाद करेगा तो उसकी विश्वसनीयता हमेशा कायम रहेगी। जनता की लोक मान्यताओं के आधार पर ही प्रेस को चौथे स्तंभ का दर्जा मिला हुआ है।

    आयोजन में दैनिक दोपहर मेट्रो के संपादक राजेश सिरोठिया और आईएनएच टीवी के ब्यूरो प्रमुख अजय त्रिपाठी ने भी स्वर्गीय देवलिया जी के संस्मरण सुनाए। आभार प्रदर्शन मुख्यमंत्री प्रकोष्ठ के जनसंपर्क अधिकारी अशोक मनवानी ने किया। आयोजन में स्वर्गीय देवलिया जी की धर्म पत्नी श्रीमती कीर्ति देवलिया और पुत्र आशीष देवलिया जी ने आनलाईन भागीदारी की। उनकी बेटियों सुश्री अरुणा और अपर्णा देवलिया भी आयोजन में शामिल थीं। समिति के पदाधिकारियों ने पुष्प गुच्छ भेंटकर अतिथियों का अभिनंदन किया। इनमें श्री राजेश सिरोठिया,राजीव सोनी,बृजेश राजपूत,ओपी दुबे,राकेश पाठक,आलोक-शैलजा सिंघई एवं अन्य पूर्व छात्र भी शामिल थे।

  • विंध्य की सत्ता को मजबूती देंगे नए विधानसभा अध्यक्ष गिरीश गौतम

    विंध्य की सत्ता को मजबूती देंगे नए विधानसभा अध्यक्ष गिरीश गौतम

    भोपाल,21 फरवरी( प्रेस सूचना केन्द्र)। मध्यप्रदेश विधानसभा का बजट सत्र सोमवार 22 फरवरी से प्रारंभ होने जा रहा है। नए अध्यक्ष के चुनाव के बाद एक बार फिर विंध्यक्षेत्र में रीवा जिले के देवतालाब से चौथी बार विधायक निर्वाचित हुए भाजपा के वरिष्ठ नेता गिरीश गौतम इस सत्र की अध्यक्षता करेंगे। आज हुई बैठक के बाद श्री गौतम ने विधानसभा अध्यक्ष पद के लिए नामांकन दाखिल किया। प्रमुख विपक्षी दल कांग्रेस ने उनके विरोध में कोई प्रत्याशी नहीं उतारने का निर्णय लिया है।

    मध्यप्रदेश की पंद्रहवीं विधानसभा का ये बजट सत्र कल 22 फरवरी से प्रारंभ होकर 26 मार्च 2021 तक चलेगा।इस विधानसभा का ये अष्टम सत्र होगा। इस 33 दिवसीय सत्र में कुल 23 बैठकें होंगी।इस दौरान आगामी वित्तीय वर्ष 2021-22 का बजट प्रस्तुत होगा। अध्यक्ष के निर्वाचन के बाद राज्यपाल का अभिभाषण होगा।

    भाजपा के वरिष्ठ विधायक गिरीश गौतम को विधानसभा अध्यक्ष के रूप में अवसर देकर भाजपा ने विंध्यक्षेत्र को एक बार फिर सत्ता में मजबूत भागीदारी दी है। मध्यप्रदेश के पिछले विधानसभा चुनाव में विंध्य क्षेत्र ने भाजपा को सर्वाधिक सीटें दीं थीं। इसके बावजूद मंत्रिमंडल में विंध्य क्षेत्र को अधिक प्रतिनिधित्व नहीं मिल पाया था। चंबल, मालवा, निमाड़,बुंदेलखंड और निमाड़ में तो कांग्रेस ने 2018 में अच्छा प्रदर्शन किया था लेकिन विंध्य के साथ न देने से ही कांग्रेस की सरकार कमजोर रही और अंततः उसे सत्ता से बाहर होना पड़ा। इसके बावजूद शिवराज सिंह सरकार में विंध्य क्षेत्र के केवल तीन विधायकों को ही जगह मिल सकी थी। मैहर के विधायक तो विंध्य क्षेत्र को प्रतिनिधित्व दिए जाने को लेकर खुला विरोध दर्ज करा चुके हैं।

    विंध्य क्षेत्र के ही श्रीनिवास तिवारी कांग्रेस सरकार में 1993 से 2003 तक स्पीकर रह चुके हैं। उन्हें मझगंवा से चुनाव हराकर 2003 में श्री गिरीश गौतम विधानसभा पहुंचे थे। परिसीमन के बाद वे देवतालाब से 2008 में भाजपा विधायक निर्वाचित हुए थे।

  • सहकारिता के दोषियों को बख्शा नहीं जाएगाः भदौरिया

    सहकारिता के दोषियों को बख्शा नहीं जाएगाः भदौरिया

    भोपाल,31जनवरी(प्रेस सूचना केन्द्र)। सहकारिता मंत्री अरविंद सिंह भदौरिया ने कहा है कि प्राथमिक सहकारी समितियों के लिए आबंटित धन की हेराफेरी करने वाले किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा। सतना और शिवपुरी जिले के अलावा अन्य जिलों मे जिन ऐसे मामलों में प्राथमिकी दर्ज की गई है उनमें दोषियों को अवश्य दंड मिलेगा। उन्होंने किसी भी सहकारी बैंक के बंद होने की खबरों को निराधार बताया। आज भोपाल में आयोजित पत्रकार वार्ता में उन्होंने पैक्स संस्थाओं में 3629 कनिष्ठ संविदा विक्रेताओं की नियुक्ति के आदेश जारी करने की जानकारी भी दी।

    सहकारिता और लोकसेवा प्रबंधन विभागों की विभिन्न गतिविधियों पर जानकारी देने के लिए अपेक्स बैंक में आयोजित पत्रकार वार्ता में आयुक्त सहकारिता और पंजीयक सहकारी संस्थाएं नरेश पाल, प्रभारी प्रबंध संचालक प्रदीप नीखरा और संचालक मंडल के सदस्य भी उपस्थित थे। श्री अरविंद भदौरिया ने बताया कि वर्ष 2018 में जिन कनिष्ठ संविदा विक्रेताओं को परीक्षा के माध्यम से चुना गया था उन्हें अब 10 फरवरी तक नियुक्ति दे दी जाएगी। युवाओं को रोजगार देने की दिशा में कदम बढ़ाते हुए शिवराज सरकार पुलिस विभाग में भी 5200 युवाओं को नौकरी देने जा रही है। उन्होंने बताया कि पैक्स संस्थाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए उन्हें आवश्यकता के अनुसार व्यवसाय करने की छूट भी प्रदान की गई है। प्रदेश की लगभग 17472 दूकानों में लगभग साढ़े तेरह हजार विक्रेता हैं।

    श्री भदौरिया ने बताया कि आत्मनिर्भर मध्यप्रदेश अभियान के तहत पैक्स संस्थाओं को दो करोड़ रुपयों तक का ऋण भी मुहैया कराया जा रहा है। सहकारिता आंदोलन को मजबूती देने के लिए तेलांगाना में जिस तरह की प्रक्रिया अपनाई गई है उसी तर्ज पर मध्यप्रदेश की सहकारी संस्थाओं को भी सफल बनाया जा रहा है। ये पूरा नेटवर्क कंप्यूटरीकृत होगा। इस आधुनिक नेटवर्क को बाजार की जरूरतों के आधार पर विकसित किया जा रहा है। आधुनिक दौर में कृषि तकनीकों में क्या फेरबदल जरूरी है उसे लेकर सहकारिता विभाग कई बदलाव कर रहा है।

    लोकसेवा प्रबंधन विभाग के मंत्री श्री भदौरिया ने बताया कि विभाग ने अपनी तकनीकी दक्षताओं से लगभग सात करोड़ लोगों की जरूरतों को पूरा करने की प्रक्रिया सरल बनाई है। युवाओं को जाति और निवास प्रमाणपत्र जैसी सुविधाएं सिर्फ मोबाईल पर आधार कार्ड टाईप करके चंद घंटों में मिलने लगी है। खसरों और खातों की प्रति भी अब आनलाईन उपलब्ध है।

    श्री भदौरिया ने एक सवाल के जवाब में बताया कि किसान कर्जमाफी का शोर मचाकर पूर्ववर्ती कमलनाथ सरकार ने केवल धोखाघड़ी की थी। किसान कर्जमाफी का बजटीय प्रावधान ही नहीं किया था। उस सरकार का कदम सहकारी बैंकों को बर्बाद करने का था। अब हमारी सरकार उन किसानों को भी मदद कर रही है जो कांग्रेस सरकार के झूठे वादों के फेर में डिफाल्टर हो गए थे। पैक्स संस्थाएं खत्म न हों इसके लिए सरकार ने आठ सौ करोड़ रुपए मुहैया कराए हैं।

    उन्होंने बताया कि सहकारी संस्थाओं को आबंटित राशि का दुरुपयोग करने वालों के खिलाफ अब कार्रवाई सुनिश्चित की जा रही है। ग्वालियर, छिंदवाड़ा ,सतना होशंगाबाद और कई जिलों में ऐसे अपराधियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई गई है। कुछ मामलों में कुर्की भी कराई जा चुकी है। गड़बड़ी रोकने के लिए अब पारदर्शी सिस्टम बनाया गया है।एक भी दोषी आदमी को बख्शा नहीं जाएगा।