Category: स्वास्थ्य रहस्य

  • दवा माफिया ने नकली माल खपाने के लिए संघ के संगठन में भेजे बिहारी तस्कर

    दवा माफिया ने नकली माल खपाने के लिए संघ के संगठन में भेजे बिहारी तस्कर


    (अंग्रेजी अनुवाद सहित)

    भोपाल, 20 सितंबर(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)। बिहारी दवा माफिया ने एमपी में नकली माल खपाने के लिए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़े एक उपभोक्ता संगठन को अपना ठिकाना बनाया है। ये दवा माफिया मंहगी ब्रांडेड दवाओं की नकल बाजार में उतार रहा है। ब्रांडेड दवाओं की इस नकल को दवा विक्रेता छूट देकर बेच रहे हैं। जब इस कारोबार को रोकने के लिए आवश्यक कार्रवाई शुरु की गई तो दवा माफिया ने संघ से जुड़े उपभोक्ता संगठन की आड़ में दबाव बनाना शुरु कर दिया।
    वैश्विक स्तर पर दवाओं के मूल्य तय करने वाले कई कारक कार्य करते हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) मूल्य निर्धारण नीतियों पर दिशानिर्देश प्रदान करता है । भारत में राष्ट्रीय औषध मूल्य निर्धारण प्राधिकरण (एनपीपीए) राज्य सरकारों के निकायों के माध्यम से ये कार्य करता है। दवाओं की कीमतें घटाने के लिए मोदी सरकार ने प्रधानमंत्री जन औषधि केन्द्रों के माध्यम से सफल अभियान चलाया है। सरकार के इस पुनीत कार्य में कई निजी संगठन भी अपना सहयोग दे रहे हैं।कुछ दवाओं विशेष रूप से जीवन रक्षक दवाईयों पर वस्तु और सेवा कर (जीएसटी) घटाकर सरकार सस्ती दवाईयां उपलब्ध करा रही है।
    घरेलू दवा उद्योग को सक्रिय फार्मास्युटिकल सामग्री(APIs) और दवा मध्यवर्ती (drug intermediates) उपलब्ध करवाकर सरकार सस्ती दवाएं दिलाने का प्रयास कर रही है।इन प्रयासों से जेनरिक दवाओं का बाजार बढ़ा है और दवाओं की कीमतें काबू में आई हैं। भारत का औषध मूल्य नियंत्रण आदेश (DPCO) एक नियामक तंत्र है जो आवश्यक वस्तुओं के अधिनियम, 1955 के तहत स्थापित किया गया है। यह राष्ट्रीय औषधि मूल्य निर्धारण प्राधिकरण (NPPA) को आवश्यक दवाओं के मूल्यों की निगरानी और विनियमन करने का अधिकार देता है
    दवा माफिया ने इस निर्धारित ढांचे को चकमा देने के लिए उपभोक्ता संगठनों के माध्यम से भ्रम फैलाने की कोशिश शुरु कर दी है कि वह आम लोगों को सस्ती दवाएं उपलब्ध कराने का प्रयास कर रहा है। दवा माफिया की इस चाल की पोल न खुले इसके लिए संघ से जुड़े एक उपभोक्ता संगठन में उसने कुछ बिहारी युवाओं को स्वयंसेवक बताकर नौकरी पर रखवाया है। मध्यप्रदेश सरकार पर संघ का दबाव बनाकर उसने इस संगठन को एक सरकारी मकान भी आबंटित करवा दिया है। करोड़ों रुपए खर्च करके इस मकान में उपभोक्ता पंचायत के नाम पर एक हाल निर्मित कराया जा रहा है।
    दवा माफिया ने इस संगठन की आड़ में भारतीय औषधि महानियंत्रक (DCGI) से लेकर खाद्य एवं औषधि प्रशासन, मध्य प्रदेश (FDA MP) की ओर से नियुक्त ड्रग कंट्रोलर अथारिटी (औषधि नियंत्रक प्राधिकारी) पर दबाव बनाना शुरु कर दिया है। एक सर्वमान्य तथ्य है कि किसी भी नई दवा को बाजार तक लाने में दस साल लगते हैं। इस पर लगभग सत्रह हजार करोड़ रुपए का खर्च आता है। दस में से नौ क्लीनिकल ट्रायल नाकाम हो जाते हैं। यही वजह है कि ब्रांडेड दवाईयों की कीमतें अधिक होती हैं। जब दवाईयों की लागत वापस आ जाती है तब उन दवाओं को बाजार में सस्ती कीमत पर बेचा जा सकता है। यही वजह है कि भारत सरकार ने जेनरिक दवाईयों के वितरण के ढांचे को मजबूत बनाने का प्रयास किया है। दवा माफिया इसी अभियान की आड़ लेकर इथिकल दवाईयों की नकल बाजार में उतार रहा है।
    ये दवा विक्रेता अपनी दूकानों पर 20 से 90 प्रतिशत तक सस्ती दवाओं के बोर्ड लगाकर डुप्लीकेट माल ग्राहकों को उपलब्ध करवाते हैं। ये दवाईयां घटिया फैक्ट्रियों में बनाई जा रहीं हैं। चीन से इन दवाओं का सस्ता साल्ट लाकर उन्हें स्थानीय स्तर पर पंजीकृत दवा कंपनियों के माध्यम से बेचा जा रहा है। इन दवा कंपनियों पर शर्त है कि वे ब्रांडेड साल्ट से ही दवाएं बनाएं, जिसके दाम अधिक होते हैं। वास्तव में ये कंपनियां नकली साल्ट उपयोग करती हैं और तयशुदा मंहगी एमआरपी से कम मूल्य पर दवाईयां उपलब्ध करवाती हैं।
    नकली दवाओं का ये संगठित कारोबार निरंतर बढ़ता जा रहा है। पिछले तीन सालों में दिल्ली में 20 करोड़ से ज़्यादा की नकली दवाएं ज़ब्त की गई हैं और कई गिरफ्तारियां हुई हैं। कमजोर निगरानी तंत्र ,भ्रष्टाचार और मुनाफे के लालच के कारण यह कारोबार फल-फूल रहा है। पुलिस लगातार कार्रवाई कर रही है लेकिन ऑनलाइन प्लेटफॉर्म और पड़ोसी राज्यों से भी नकली दवाओं की सप्लाई जारी है।कैंसर, किडनी, लिवर, डायबिटीज हाइपरटेंशन और हृदय संबंधी गंभीर रोगों से संबंधित दवाओं की मांग अधिक होने से इनकी नकली दवाएं आसानी से खपाई जा रही हैं।
    आगरा में नामचीन दवा कंपनी ग्लेनमार्क, सनफार्मा, जायडस, सनोफी आदि कंपनियों की नकली दवाएं बरामद हुईं हैं।एसटीएफ के एडीशनल एसपी राकेश यादव के अनुसार सूचना पर एसटीएफ ने आगरा फोर्ट रेलवे स्टेशन से एक ऑटो को पकड़ा जिसमें दवाएं भरी थीं। इनमें एक करोड़ की दवाएं तो एंटी एलर्जी की सनोफी कंपनी की एलेग्रा 125 थी।
    दवा माफिया के एक बिहारी एजेंट से जब इस संबंध में बात की गई तो उसने कहा कि हम उपभोक्ता की सुविधा के लिए कार्य कर रहे हैं। जब उससे पूछा गया कि उपभोक्ता के अधिकारों के लिए वैधानिक दवा नियामक संस्थाएं पहले से मौजूद हैं आपका कार्य गैर कानूनी है तो उसने अपने बचाव में कहा कि हम केवल ड्रग इंस्पेक्टरों के कार्य में सहयोग कर रहे हैं।जब उससे कहा गया कि बाला साहब ठाकरे कहा करते थे कि एक बिहारी सौ बीमारी तो वह झेंप गया और उसने वार्तालाप बंद कर दिया।

    Drug Mafia Deploys Bihari Smugglers into Sangh’s Organization to Push Fake Medicines
    Bhopal, September 20 (Press Information Centre).
    The Bihari drug mafia has chosen a consumer organization linked to the Rashtriya Swayamsevak Sangh (RSS) in Madhya Pradesh as its base to distribute counterfeit medicines. These mafias are flooding the market with duplicates of expensive branded drugs. Retailers are selling these imitations at discounted rates. When the authorities initiated necessary action to curb this trade, the mafia began using the RSS-affiliated consumer organization as a cover to exert pressure.

    At the global level, several factors determine the pricing of medicines. The World Health Organization (WHO) provides guidelines on pricing policies. In India, the National Pharmaceutical Pricing Authority (NPPA) performs this function through state government bodies. To reduce drug prices, the Modi government has successfully launched the Pradhan Mantri Jan Aushadhi Kendras. Several private organizations are also supporting this noble initiative. By reducing GST on certain life-saving medicines, the government is making drugs more affordable.

    To support the domestic pharmaceutical industry, the government is ensuring the supply of Active Pharmaceutical Ingredients (APIs) and drug intermediates, thereby making cheaper medicines available. These efforts have boosted the generic drug market and helped keep prices in check. India’s Drug Price Control Order (DPCO), established under the Essential Commodities Act, 1955, empowers NPPA to monitor and regulate the prices of essential medicines.

    To evade this regulatory framework, drug mafias have begun spreading the illusion—through consumer organizations—that they are working to make medicines cheaper for the common man. To conceal their scheme, they employed several youths from Bihar as “volunteers” in an RSS-linked consumer organization. By leveraging pressure on the Madhya Pradesh government through the Sangh, they even managed to secure a government building for this organization. Spending crores of rupees, they are now constructing a hall in the name of “Consumer Panchayat.”

    Under the guise of this organization, the mafia has started exerting influence on the Drug Controller General of India (DCGI) and the state-appointed Drug Controller Authority under the Food and Drug Administration, Madhya Pradesh (FDA MP). It is a well-established fact that bringing a new medicine to market takes ten years and costs about ₹17,000 crore. Nine out of ten clinical trials fail, which is why branded medicines are expensive. Once the development cost is recovered, such medicines can be sold at cheaper rates. This is why the Indian government has been strengthening the distribution system of generic medicines. The mafia, however, is misusing this campaign to release imitations of ethical drugs in the market.

    These retailers attract customers with boards claiming 20% to 90% discounts and then supply counterfeit drugs. These medicines are produced in substandard factories. Cheap salts are imported from China and then sold locally through registered pharmaceutical companies. These companies are mandated to use branded salts, which are costlier, but in reality, they use fake salts and supply medicines at prices lower than the fixed high MRP.

    This organized trade of counterfeit medicines is continuously growing. In the last three years alone, fake medicines worth more than ₹20 crore have been seized in Delhi, with several arrests made. Weak monitoring mechanisms, corruption, and greed for profit are fueling this trade. Despite ongoing police action, counterfeit medicines continue to flow through online platforms and neighboring states. The demand for drugs related to cancer, kidney, liver, diabetes, hypertension, and heart diseases has made counterfeits easy to sell.

    In Agra, counterfeit medicines of well-known companies such as Glenmark, Sun Pharma, Zydus, and Sanofi have been seized. According to STF Additional SP Rakesh Yadav, acting on a tip-off, the STF caught an auto loaded with medicines at Agra Fort railway station. Among these, fake anti-allergy medicines worth ₹1 crore—specifically Sanofi’s Allegra 125—were found.

    When a Bihari agent of the drug mafia was confronted about this, he claimed, “We are working for the convenience of the consumer.” When asked why his activities were illegal when statutory drug regulatory authorities already exist to protect consumers’ rights, he defended himself by saying they were only “assisting drug inspectors.” When reminded that Balasaheb Thackeray once said, “One Bihari equals a hundred diseases,” he became embarrassed and ended the conversation.

  • डॉलर कमाना है तो इक्विटास बैंक से करें दोस्ती

    डॉलर कमाना है तो इक्विटास बैंक से करें दोस्ती

    भोपाल, 02 अगस्त(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)। कार्पोरेट क्षेत्र के इक्विटास स्मॉल फाइनेंस बैंक लिमिटेड अधिक मुनाफा दिलाने की वजह से निवेशकों की पसंद बनता जा रहा है। ग्राहकों से चाय पर चर्चा के दौरान बैंक के अधिकारियों ने अनिवासी भारतीयों को डॉलर में कमाई करने के रास्ते सुझाए।


    चाय पर चर्चा के लिए पधारे रियल इस्टेट व्यवसायी और समाजसेवी राजेन्द्र जैन (टीआई) ने अपने अनुभव सुनाते हुए कहा कि विदेशों के बैंकिंग लाऊंज में इक्विटास स्माल फायनेंस बैंक की सुविधाएं बहुत आसानी से उपलब्ध होती हैं। बैंक ने जिस तरह अपनी सामाजिक जिम्मेदारी निभाते हुए कैंसर के इलाज और पर्यावरण रक्षा की दिशा में अपने कदम बढ़ाए हैं वह एक सराहनीय कदम है। उन्होंने कहा कि बैंक के एफसीएनआर उपकरण से भारतीय उपभोक्ताओं को डालर कमाने का प्रवेश द्वार मिल गया है। उन्होंने कहा कि वे अब तक विश्व के चौंतीस देशों में भ्रमण कर चुके हैं, कई देशों में उन्होंने इक्विटास बैंक की सुविधाओं का लाभ उठाया है।

    बैंक मैनेजर लोकेश जैनः समृद्धि के साथ पर्यावरण मित्र वस्तुओं के उपयोग का संदेश


    बैंक के शाखा प्रबंधक लोकेश जैन ने बताया कि बैंक ने विदेशी मुद्रा कार्ड, विदेशी मुद्रा अनिवासी (एफसीएनआर) जमा और धन लाने ले जाने जैसी सुविधाओं को सरल बनाया है ।


    बैंक के अधिकारी मिनहाज खान ने बताया कि बैंक के ने अनिवासी भारतीयों को टैक्स बचाने और विभिन्न विदेशी मुद्राओं के साथ ज्यादा मुनाफा कमाने का मार्ग प्रशस्त किया है। इक्विटास बैंक बार बार विदेश जाने वाले और विदेश से भारत आने वाले ग्राहकों के लिए बहुत कम शुल्क में सारी सुविधाएं एक साथ उपलब्ध करा देता है।


    चाय पर चर्चा कार्यक्रम के दौरान आए ग्राहकों ने बैंक की गतिविधियों की जानकारी ली। बैंकिग से जुड़े अपने अनुभव सुनाए और अपने परिजनों को इक्विटास बैंक से जोड़ने में रुचि दिखाई।
    इक्विटास स्मॉल फाइनेंस बैंक अपने सेविंग एकाऊंट धारकों के लिए नए स्लैब के तहत 7% ब्याज देता है ।

  • बड़े बाबा के छोटे भक्त

    बड़े बाबा के छोटे भक्त

    इस महाकुंभ के शाही स्नान में बारह फरवरी से छह करोड़ से अधिक लोग एक साथ गंगा, यमुना और सरस्वती नदियों के संगम में स्नान करने जा रहे हैं। तीर्थयात्रियों के अखाड़ों से जुड़े लाखों सनातनी एक साथ महाकुंभ में होंगे। महाकुंभ पहली बार नहीं जा रहा है। ये परम्परा सनातनकाल से चली आ रही है। ऐसे भगवान के दरबार में दमोह जिले के कुंडपुर तीर्थ में बड़े बाबा के चंद ओछे भक्तों की जो थू थू हो रही है वह विचारणीय है। यहां जैन मुनि अंतरमना आचार्य आकर्षक सागर जी को मंदिर समिति के कुछ सदस्यों ने निराहार गमन करने के लिए मजबूर कर दिया। अंतरमना संघ के भक्तगण यहां नए साल के आगमन के अवसर पर भजन संध्या का आयोजन करना चाह रहे थे। मंदिर समिति का कहना था कि तीर्थ क्षेत्र की ओर से एक कार्यक्रम आयोजित किया गया है इसलिए दूसरे कार्यक्रम की अनुमति नहीं दी जा सकती। बांसुरी म्युजिकल ग्रुप के अक्षय पंड्या और डिशी जैन की भजन मंडली ये कार्यक्रम प्रस्तुत करने जा रही थी। समिति के कुछ कुटिल मंदिर समिति ने कहा कि लड़कियां नाचने के इस कार्यक्रम के बारे में विचार नहीं किया जा सकता है। कहा जा रहा है कि यह धार्मिक आयोजन आचार्य श्री आकर्षक सागर जी के नाम पर हो रहा था इसलिए मंदिर समिति ने इस पर रोक लगा दी। आकर्षक सागर जी तो अगले दिन सुबह क्षेत्र से निराहार गमन कर गए इस घटना पर कई सवाल कर दिए गए हैं। कुंडपुर में इस तरह की घटनाएं बार-बार क्यों घटती हैं। यहां आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज की कृपा से विशाल मंदिर बनकर तैयार हो गया है। सैकड़ों साज़िशों के मंदिर बने हुए हैं। ये विशाल तीर्थ पूरी दुनिया में जैन धर्म की कीर्ति पताका फहरा रहा है। पूर्ण होने के बाद आचार्यश्री मंदिर में विशाल पंच कल्याणक महोत्सव के लिए गए थे। आचार्यश्री ने भी तीर्थ क्षेत्र से यात्रा की थी। निर्यापक बनाये गये सुधा सागर जी महाराज ने भी तीर्थ क्षेत्र से कुछ ऐसी ही मनःस्थिति में गमन किया था। जबकि वे तो आचार्य श्री के ही नियुक्त किये गये निर्यापक संत थे। आचार्य सागर जी को गणाचार्य पुष्पदंत सागर जी ने चार शिष्यों के साथ आचार्य की पदवी प्रदान की है। ये समाधिनाथ पुलक सागर जी,प्रमुख सागर जी और प्रमुख सागर जी भी शामिल हैं। इस समारोह में जाने वाले प्रोफेसर के पदवी में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड एलेक्टोल ने प्रतिनिधि के रूप में अपने सलाहकार प्रोफेसर फिलिप एलेक्जेंड्रा को भी भेजा था। ये अमेरिकी सरकार की ओर से उनका सम्मान था। ऐसे विद्वान संत को कुंडलपुर समिति ने क्यों स्वीकार नहीं किया, इस पर पूरी दुनिया के जैन समाज के बीच गंभीर सांत्वना मनन चल रहा है। निश्चित रूप से आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज का वास्तुशिल्प अद्वितीय है। बड़े बाबा भगवान आदिनाथ की विशाल प्रतिमा बिना खंडित किस चमत्कारिक तरीके से नए मंदिर में हो गई ये अनोखी घटना। लाल पत्थर से बना कुंड, पुरी का जैन मंदिर, अयोध्या के भगवान श्रीराम के मंदिर की ऐसी ही अद्भुत संरचना है। इस तीर्थ क्षेत्र की वंदना करने के लिए दक्षिणी आचार्य श्री आकर्षक सागर जी की सेवा और साख लेकर यहां की प्रबंधन समिति तीर्थ क्षेत्र की यशोगाथा पूरी दुनिया में निकाली जा सकती थी, लेकिन समिति में पाई गई जगह पर कुछ ओछे लोगों ने इसे तीर्थ क्षेत्र की गरिमा का खंडन कर दिया। तीर्थ क्षेत्र समिति के अध्यक्ष चंद्रकुमार सराफ उस वक्त वहां मौजूद नहीं थे। इस घटना के बाद उन्होंने खेद भी व्यक्त किया। असल में उनके कुछ षडयंत्रकारी कार्यकर्ताओं ने ये कहा था कि निवृत्तमान अध्यक्ष संतोष सिंघई ने मंदिर की कमान दमोह के बाहर जैन धर्मावलंबियों के हाथों में दे दी है। दरअसल मंदिर निर्माण में पूरी दुनिया में अंतिम जैन धर्मावलंबियों ने बढ़-चढ़कर अपना योगदान दिया था। तब आचार्य श्री ने सकारात्मक लोगों को दिये महत्वपूर्ण उत्तर। कुछ लोगों को मंदिर निर्माण के कार्य से दूर रखा गया था। आज वही लोग मंदिर के आभूषण बन गए हैं और वे कुंडलपुर की चमक-दमक को फीका करने की वजह बन रहे हैं। आचार्यश्री ने इस मंदिर को पूरी दुनिया तक पहुंचाने के लिए जैन धर्म की वकालत का संदेश दिया था। आज भारत में जैन धर्म को अल्पसंख्यक माना जाता है। सनातन धर्म के विभिन्न मतावलंबियों में भी जैन धर्म के मतावलम्बियों को प्रेरणा लेनी होगी।

  • डाक्टरों को मनपसंद जिलों में नौकरी की छूटः राजेन्द्र शुक्ल

    डाक्टरों को मनपसंद जिलों में नौकरी की छूटः राजेन्द्र शुक्ल

    विशेषज्ञ स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए डिस्ट्रिक्ट रेसिडेंसी प्रोग्राम में हुआ संशोधन

    भोपाल,19 दिसंबर(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)। उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने कहा है कि ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं को सशक्त करने के लिये शासन प्रतिबद्ध है। ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य चिकित्सकों, विशेषज्ञों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिये डिस्ट्रिक्ट रेसिडेंसी प्रोग्राम में संशोधन किया गया है। 1 जनवरी 2025 से शुरू होने वाले इस कार्यक्रम के तहत शैक्षणिक सत्र 2022 के 319 स्नातकोत्तर छात्र चिकित्सकों को प्रदेश के विभिन्न जिला अस्पतालों में तैनात किया जाएगा। इस पहल से ग्रामीण इलाकों में विशेषज्ञ चिकित्सकों की उपस्थिति सुनिश्चित होगी, साथ ही चिकित्सा सेवाओं की गुणवत्ता में भी व्यापक सुधार होगा।

    स्वास्थ्य आयुक्त तरुण राठी ने बताया कि मध्यप्रदेश सरकार ने ग्रामीण और पिछड़े जिलों में विशेषज्ञ चिकित्सकों की उपलब्धता बढ़ाने के उद्देश्य से डिस्ट्रिक्ट रेसिडेंसी प्रोग्राम को संशोधित स्वरूप में लागू किया है। डिस्ट्रिक्ट रेसिडेंसी प्रोग्राम, जो 1 अप्रैल 2023 से मध्यप्रदेश में लागू हुआ था, अब 18 दिसंबर 2024 को जारी संशोधित नीति के तहत अधिक पारदर्शिता और प्रभावशीलता के साथ लागू किया जाएगा। प्रत्येक जिले में अधिकतम 12 छात्र चिकित्सकों की तैनाती की जाएगी, जिसमें प्रत्येक विषय के दो विशेषज्ञ शामिल होंगे।

    इस नीति के तहत छात्र चिकित्सकों को अपनी पसंद के अनुसार जिले का चयन करने का अवसर प्रदान किया गया है। पिछड़े जिलों में सेवा देने के लिए अतिरिक्त प्रोत्साहन राशि का प्रावधान भी किया गया है। साथ ही, निगरानी और पारदर्शिता के लिए “दर्पण पोर्टल” और “सार्थक एप” को आपस में जोड़ा गया है। इससे जिला अस्पतालों में विशेषज्ञ सेवाएं बेहतर होंगी, साथ ही छात्र चिकित्सकों को राष्ट्रीय स्वास्थ्य कार्यक्रमों का व्यावहारिक अनुभव भी प्राप्त होगा।

  • भीमाशंकर शनकुशल ने भारोत्तोलन में जीता स्वर्ण पदक

    भीमाशंकर शनकुशल ने भारोत्तोलन में जीता स्वर्ण पदक

    भोपाल,14 दिसंबर,(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)। राजधानी के भारतीय योग अनुसंधान केंद्र के नवयुवा खिलाड़ी भीमाशंकर शनकुशल ने दिल्ली में आयोजित भारोत्तोलन स्पर्धा में स्वर्ण पदक जीतकर मध्यप्रदेश का नाम रोशन किया है। स्वर्गीय आचार्य हुकुमचंद शनकुशल के सबसे छोटे पुत्र का ये कौशल अब राज्य के भाल पर नए मुकुट के रूप में उभरकर सामने आ गया है।

    भीमाशंकर शनकुशलः देश का परचम फहराने वाला लंबी दौड़ का घोड़ा.


    नई दिल्ली के प्रहलादपुर स्टेडियम में आयोजित 68th स्कूल गेम्स फेडरेशन आफ इंडिया (एस.जी.एफ.आई- 2024) के इस आयोजन में भारोत्तोलन राष्ट्रीय खेलों में 122kg स्नैच और 152kg क्लीन एंड जर्क लगाकर उन्होंने स्वर्ण पदक जीता है। प्रतियोगिता में देश भर के 24 अलग अलग राज्यों के प्रतियोगी शामिल हुए थे। इनके बीच मध्यप्रदेश के भीमाशंकर शनकुशल ने शानदार भारोत्तोलन का प्रदर्शन करके पहला स्थान प्राप्त किया है ।


    स्कूल गेम्स फेडरेशन आफ इंडिया, एशिया के खेल संगठनों की प्रतिनिधि संस्था है। भीमाशंकर ने दसवीं क्लास के 81 किलो से कम वजन वाले छात्रों के बीच वैयक्तिक मुकाबले में ये सफलता हासिल की है।


    एशियन खेलों को बढ़ावा देने और प्रतिभाशाली खिलाड़ियों की पहचान करने के लिए चीन के बीजिंग स्थित एशियन स्कूल स्पोर्टस् फेडरेशन के संयोजन में ये आयोजन हर साल किया जाता है। इसमें अच्छा प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ियों को ओलंपिक और अन्य वैश्विक मुकाबलों के लिए चयनित किया जाता है। आयोजन में स्वर्णपदक जीतकर लौट रहे भीमाशंकर शनकुशल का सोमवार दोपहर भोपाल स्टेशन पर भव्य नागरिक अभिनंदन किया जाएगा।

    भीमाशंकर के बेहतर प्रदर्शन से राज्य के खेल जगत में खुशी की लहर दौड़ पड़ी है.


    गौरतलब है कि उनके पिता स्वर्गीय हुकुमचंद शनकुशल विश्व के प्रख्यात योगाचार्य रहे हैं। उनके आयुर्वेदिक उपायों ने व्यक्तित्व निर्माण की कई गुत्थियों को सुलझाने में सफलता पाई है।भीमाशंकर की मां श्रीमती शुभ्रा शनकुशल आर्टिस्टिक योग की खिलाड़ी रहीं हैं और उन्होंने अपनी कला का श्रेष्ठ प्रदर्शन करके स्वर्णपदक हासिल किया था।


    राज्य के खेल विभाग को नवयुवक भीमाशंकर की प्रतिभा ने अब गौर करने पर मजबूर किया है। भीमाशंकर हथाईखेड़ा डैम स्थित ज्ञानचेतना स्कूल की कक्षा दसवीं का छात्र है। इसकी उम्र 18 वर्ष है। राजधानी यूथ क्लब की व्यायामशाला में प्रशिक्षण पाने वाले भीमाशंकर के बड़े भाई ज्ञानेश्वर शनकुशल ने इस संस्था को नई ऊंचाईयां दी हैं। उसकी बड़ी बहन खुशबू शनकुशल ने एशियन गेम्स में योग चैम्पयिन है।राजधानी यूथ क्लब में प्रशिक्षण पाने वाले कई अन्य युवा खिलाड़ी भी बेहतर प्रदर्शन करके खेलों में अपना झंड़ा गाड़ रहे हैं।

  • पाप करने वालों को उनके हाल पर छोड़ दो: आचार्य श्री

    पाप करने वालों को उनके हाल पर छोड़ दो: आचार्य श्री


    आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज की विरासत को हथियाने की होड़ इन दिनों जैन धर्मावलंबियों के जी का जंजाल बनी हुई है। ये लड़ाई इतनी कर्कश है कि इसमें कई षड़यंत्रकारी जीवित संतों को भी अपमानित करने में जुट गए हैं। राष्ट्रसंत आचार्य भगवान श्री विद्यासागर जी महामुनिराज ने साल 2019 में चातुर्मास की स्थापना दिवस पर मुनि श्री नियम सागर जी महाराज और मुनि श्री सुधा सागर जी मुनिराज को निर्यापक श्रमण की उपाधि दी थी. उन्होंने निर्यापक श्रमण व्यवस्था के बारे में भी जानकारी दी थी. उन्होंने बताया था कि जब संघ बड़ा होता है, तब निर्यापक श्रमण की व्यवस्था की जाती है. मुनियों को यह ज़िम्मेदारी दी जाती है कि वे देश भर में धर्म का संदेश लेकर भ्रमण करें.तभी से आचार्य सुधासागर जी देश भर में जैन समाज को एकजुट करने और तीर्थों के प्रबंधन को सुचारू बनाने का काम कर रहे हैं। इसके बावजूद आचार्यश्री के इर्द गिर्द जमे बैठे रहे षड़यंत्रकारियों ने उनकी विरासत को हड़पने के लिए तरह तरह के पाखंड शुरु कर दिए हैं। आचार्यश्री का जन्मदिन मनाना भी उसमें से एक है।
    ताजा विवाद की शुरुआत सागर से हुई है।यहां के मंगलगिरी जैन तीर्थ से जुड़े कुछ ट्रस्टियों ने खुद को जैन पंचायत का नेता लिखना शुरु कर दिया था। संकोच से भरे जैन धर्मावलंबियों ने चुप्पी साध रखी थी क्योंकि सामान्य कार्यक्रमों में ये लोग बड़ी बड़ी धनराशि दान की घोषणा करते रहते थे। जबकि हकीकत ये थी कि ये लोग जैन समाज की ही धनराशि विभिन्न मदों में निकालकर उसे अपने नाम की दानराशि बता देते थे। आचार्य सुधा सागर जी की जानकारी में जब ये तथ्य लाए गए तो उन्होंने दो टूक शब्दों में कह दिया कि हमें उस राशि का ब्याज नहीं चाहिए आप तो समाज की मूल राशि वापस कर दीजिए। इस घटनाक्रम के बाद कतिपय षड़यंत्रकारियों ने वाट्सएप ग्रुप पर अनर्गल बयानबाजी करना शुरु कर दिया।
    दबंग मुनि और सख्त प्रशासक सुधासागर जी को अपमानित करने के लिए उन्होंने सार्वजनिक मंच पर निवेदन किया कि आचार्यश्री विद्यासागर जी महाराज के जन्मदिवस शरद पूर्णिमा पर आयोजित होने जा रहे समारोह में आप भी शामिल होकर हमें आशीर्वाद प्रदान करें। इस पर सुधासागर जी ने फटकार लगाते हुए कहा कि आचार्यश्री किसी भौतिक शरीर के जन्मदिन मनाने के खिलाफ थे। हम तो उनके उपदेशों को आत्मसात किए हुए हैं और उन पर अमल भी करते हैं। उन्होंने जैन धर्म की प्रभावना का जो दायित्व हमें सौंपा है हम वो कर रहे हैं। अब यदि हम सार्वजनिक मंच से आयोजन में शामिल होने से इंकार करते हैं तो ये कहा जाएगा कि मैं आचार्यश्री का विरोधी हूं। इसके विपरीत यदि आयोजन में शामिल होते हैं तो कहा जाएगा कि ये अपने गुरु की आज्ञा का पालन नहीं कर रहे हैं।
    इस घटना पर पीठासीन आचार्य समयसागर जी ने तो कुछ नहीं कहा बल्कि संघ से जुड़े कुछ महंतों ने इशारा करके आचार्यश्री का जन्मदिन मनाने के निर्देश दिए। उनका प्रयास है कि सार्वजनिक तौर पर मना करने के बावजूद आचार्यश्री का जन्मदिन धूमधाम से मनाया जाएगा तो ये नैरेटिव गढ़ना सरल होगा कि आचार्य सुधासागर जी जैन समाज के सर्वमान्य संत नहीं हैं। आज शरदपूर्णिमा के अवसर पर जब प्रदेश के कुछ शहरों में आचार्यश्री का जन्मदिन मनाने की बात कही गई तो जैन समाज के बीच की अराजकता एक बार फिर उजागर हो गई है।
    इस तरह की गंदगी स्वयं आचार्यश्री विद्यासागर जी के समयकाल में भी छुटपुट तरीके से उजागर होती रही है। कई बार उनके शिष्यों ने इस विषय पर आचार्यश्री से भी शिकायत की थी। इस पर उन्होंने कहा कि हम लोग सामाजिक सहयोग से बड़े प्रकल्प शुरु कर रहे हैं। इतने विशाल कार्यों में जुड़े कुछ लोग गड़बड़ियां भी करते हैं इसकी जानकारी भी सामने आ जाती है। इसके बावजूद हमें अपना कार्य करते रहना है। जो पाप कर्म में लीन रहेगा उसका पाप ही उसकी गति सुनिश्चित करेगा। हम इस पर क्यों परेशान हों। वे अपने शिष्यों से कहते थे कि कई व्यक्ति अपने कर्म और भाव में सामंजस्य नहीं बिठा पाते हैं। इसलिए ऐसे व्यक्तियों की आलोचना उनके सामने एकांत में की जानी चाहिए । सार्वजनिक रूप से तो उसके अच्छे कार्यों का समर्थन किया जाना चाहिए।
    प्रख्यात दार्शनिक ओशो कहते थे कि जब कोई आत्मज्ञानी व्यक्ति अपना शरीर छोड़ता है तो वह जगह या तो मंदिर बन जाती है या फिर दूकान। उनका ये कथन इन दिनों जैन समाज के बीच कलंकित चेहरा लेकर सामने आ रहा है।मुनि संघ के सदस्य तो इन हालात को समझ रहे हैं। वे इस पर चर्चा भी कर रहे हैं। जैन मुनि विषद सागर जी ने तो सार्वजनिक तौर पर इस मुद्दे पर प्रकाश डाला और संघ के मन की व्यथा सार्वजनिक तौर पर बयान की है। इसके बावजूद कई दूकानदार अपना धंधा जारी रखे हुए हैं। आचार्यश्री का जन्मदिन मनाकर वे भक्तों की भावनाओं का दोहन करते रहते हैं। कई लोगों के लिए तो शरद पूर्णिमा पच्चीस लाख रुपयों से एक करोड़ रुपयों तक का धंधा दे जाती है। जाहिर है कि वे किसी तत्वज्ञानी की सलाह पर आखिर क्यों गौर करेंगे। मोक्ष किसने देखा है और हर कोई तो मोक्षगामी बनना भी नहीं चाहता। फिर पाप की गति क्या होगी ये तब देखा जाएगा जब इसके नतीजे आएंगे।

  • लावारिस लाशों का अंतिम संस्कार और जरूरत मंदों को भोजन कराने वाले वंदनीय

    लावारिस लाशों का अंतिम संस्कार और जरूरत मंदों को भोजन कराने वाले वंदनीय


    मुख्यमंत्री डॉ.मोहन यादव ने किया जनसंवेदना संस्था की स्मारिका का विमोचन

    भोपाल, 28 सितंबर। गरीब परिवारों के मृत परिजनों और लावारिस लाशों का अंतिम संस्कार करने वाली सामाजिक संस्था जन संवेदना के स्मारिका अंक(मानव सेवा ही माधव सेवा) का विमोचन आज मुख्यमंत्री डॉ.मोहन यादव ने अपने कर कमलों से किया। भारतीय जनता पार्टी मुख्यालय में आयोजित एक संक्षिप्त समारोह में उन्होंने जरूरतमंदों की सहायता को उत्कृष्ट समाजसेवा बताया।


    संस्था के संस्थापक अध्यक्ष राधेश्याम अग्रवाल ने बताया कि संस्था के सहयोगियों और हितग्राहियों के योगदान को याद करने के लिए हर साल इस स्मारिका का प्रकाशन किया जाता है। मानवसेवा के पुनीत कार्य के अक्षयपात्र में अपना योगदान देने वाले समाजसेवियों को देख सुनकर आम नागरिकों के मन में भी अपने सामाजिक दायित्वों का बोध हो सके इस उद्देश्य से संस्था ने अपनी वेवसाईट भी बनाई है। इसके बावजूद प्रमाणिक दस्तावेज के रूप में हम दानदाताओं और हितग्राहियों के नाम समाज के सामने लाते हैं।


    श्री अग्रवाल ने बताया कि माननीय मुख्यमंत्री डाक्टर मोहन यादव ने कहा कि उन्हें संस्था के पुनीत कार्यों की जानकारी पहले से है। इस तरह के सामाजिक कार्य ही वसुधैव कुटुंबकम की भावना को मजबूती प्रदान करते हैं। भारतीय जनता पार्टी मुख्यालय में आयोजित मानव सेवा ही माधव सेवा कार्यक्रम में उन्होंने संस्था की स्मारिका को आम नागरिकों के लिए लोकार्पित किया। इस दौरान भोपाल मध्य विधानसभा क्षेत्र के विधायक और भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश महामंत्री भगवान दास सबनानी,भाजपा मीडिया प्रभारी आशीष अग्रवाल,एवं हिमांशु अग्रवाल भी मौजूद थे।


    संस्था की ओर से पिछले सोलह सालों से लावारिस लाशों का अंतिम संस्कार किया जा रहा है। पुलिस को प्राप्त होने वाली लावारिस लाशें हों या फिर गरीबी से जूझते बेसहारा परिवारों के परिजनों का अंतिम संस्कार हो,संस्था आगे बढ़कर इस पुनीत कार्य को अपने हाथों से संपन्न कराती है। बीमारी से जूझते गरीब परिवारों और जरूरत मंदों को भी संस्था की ओर से भोजन कराया जाता है। आमतौर पर भोजन वितरण का कार्य एम्स या राजधानी के अन्य असपतालों में इलाज के लिए आने वाले मरीजों के परिजनों के बीच किया जाता है।


    उन्होंने बताया कि राजधानी के अलावा प्रदेश के अन्य स्थानों के लोग सहयोग देकर इस पुनीत कार्य की ज्योति जलाए हुए हैं। विदेशों में नौकरियां करने वाले युवा और वहां बस चुके बुजुर्ग भी अपने परिजनों की याद में समाजसेवा करके अपना जन्म सार्थक करने का अवसर तलाशते हैं। संस्था ने समाजसेवा के इस कार्य को पूरी पारदर्शिता से करने के लिए दान राशि को आन लाईन प्राप्त करने की सुविधा विकसित की है। इस कार्य को स्थानीय पुलिस के रिकार्ड के अनुसार ही संपन्न कराया जाता है। संस्था की विश्वसनीयता बनी रहे इसके लिए डाक्टर्स क्लब परिसर स्थित जनसंवेदना के कार्यालय में समाजसेवियों से योगदान लिया जाता है। संस्था के भवन निर्माण और शव वाहन व एंबुलेंस सेवा के लिए भी विभिन्न संगठनों और नागरिकों की ओर से योगदान दिया जाता है।

  • संविधान से सदियों पुराना कर्म सिद्धांत

    संविधान से सदियों पुराना कर्म सिद्धांत


    देश और दुनिया के दूर दराज के देशों में भी आज भगवान श्रीकृष्ण का जन्मदिन धूमधाम से मनाया जा रहा है। मध्यप्रदेश में जबसे मुख्यमंत्री डॉ.मोहन यादव ने आव्हान किया उसके बाद से तो गली गली और गांव गांव में जन्माष्टमी का माहौल सुरम्य बन चला है। हमेशा की तरह इस बार भी श्री कृष्ण जन्माष्टमी पर प्रदेश भर में बारिश के छींटे पड़ रहे हैं। कई इलाकों में तो इतना अधिक पानी गिर रहा है कि मानों भगवान स्वयं नंदलाला के जन्म से आल्हादित हैं। ऐसे में कई विपक्षी नेताओं ने सरकार के आव्हान से असहमति जताते हुए बेसुरा राग अलापना शुरु कर दिया है। उन नेताओं का कहना है कि जन्माष्टमी जनता मनाए, धार्मिक संगठन मनाएं तो ठीक है लेकिन सरकार क्यों आव्हान कर रही है। दरअसल ये सभी वे आवाजें हैं जो विदेशी धर्मों की गोद में फलती फूलती रहीं हैं। आयातित सोच में रंगे इन नेताओं ने हमेशा सनातन को निशाना बनाया है। विदेशी सोच की नकल करने वाले ये नादान कहते हैं कि देश को आगे बढ़ना है तो किसी एक धर्म को बढ़ावा नहीं दिया जा सकता। उन लोगों को ये नहीं मालूम कि समूची वसुधा को अपना कुटुंब मानने वाला सनातन किसी भी खंडशः सोच से मीलों आगे सोचता है। आक्रांता बनकर भारत में आए जो विदेशी सोच कभी भी भारत के अस्तित्व को कुचल नहीं पाए वे आज संविधान की दुहाई देकर कह रहे हैं कि कृष्ण जनमाष्टमी मनाने से अन्य धर्मों को असमानता भरे माहौल का सामना करना पड़ेगा। ऐसे बयान देने वालों को श्रीमद भगवत गीता के उपदेशों की जानकारी मिल सके इसीलिए तो जन्माष्टमी का आयोजन धूमधाम से मनाया जा रहा है। जब युद्ध की तलवारें खिंची हुई हों तब कर्म का उपदेश देने वाले देवकीनंदन के मंत्र और भी ज्यादा सार्थक हो जाते हैं। रूस और यूक्रेन के बीच चल रहे युद्ध के दौरान यही ज्ञान देने के लिए तो प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी युद्धभूमि तक गए थे। हठी जेलेंस्की यदि इस भाषा को समझ जाते तो यूक्रेन एक बार फिर खुशहाल देश बन सकता था। रूस के राष्ट्रपति ब्लादीमीर पुतिन ने तो भारत के प्रयासों का समर्थन करते हुए युद्ध रोक दिया। रूस भी चाहता है कि शांति का कोई मार्ग निकले। ये संभव इसलिए नहीं हो सका कि किसी ने यूक्रेन या अमेरिका को पहले कभी गीता के उपदेश नहीं सुनाए। युद्ध भूमि की हुंकार के बीच उन उपदेशों को समझने का सामर्थ्य आम योद्धा में नहीं होता। यदि श्रीकृष्ण दुर्योधन से कहते कि अनीति और अधर्म की राह पर चलोगे तो कर्म फल तुम्हें छोड़ेगा नहीं ऐसे में तुम्हारा नाश हो जाएगा,तो वो नहीं मानता। । कुछ ऐसी ही चुनौतियों के बावजूद प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भारत का दर्शन युद्धभूमि तक पहुंचाकर अपना दायित्व निभाया। कमोबेश यही प्रयास मुख्यमंत्री डॉक्टर मोहन यादव कर रहे हैं। जब विदेशी घुसपैठियों, आक्रांताओं और षड़यंत्रों के साथ कांग्रेस की पारिवारिक परंपरा के अध्यक्ष राहुल गांधी देश में जातिगत जनगणना का वैमनस्य फैलाने का प्रयास कर रहे हैं तब उन्हें गीता के उपदेश अवश्य पढ़ने चाहिए। मध्यप्रदेश की धरती से गीता का कर्म सिद्धांत पूरे विश्व को एक बार फिर सत्य के मार्ग पर चलने का आग्रह कर रहा है। चाहे असददुद्दीन औवेसी हों या फिर कांग्रेस के चंपू टाईप नेता उन सभी को समझना होगा कि भारत का संविधान लागू हुए तो मात्र 74 वर्ष हुए हैं। ये देश तो हजारों सालों से भगवान श्रीकृष्ण और भगवान श्री राम के बनाए आदर्शों पर चल रहा है। तबसे यहां कभी किसी अन्य धर्म या विचार को पद दलित करने का विचार नहीं फैला। चंद लुटेरों ने भले ही भारत की अस्मिता को कुचलने का प्रयास किया हो पर भारत आज भी अविचल और अडिग है। स्थिर है और संपूर्ण है। कितने ही आक्रांता आए और आकर चले गए। हम अपने शाश्वत सिद्धांतों पर लगातार चलते जा रहे हैं। मध्यप्रदेश सरकार भी तो यही समझाने का प्रयास कर रही है कि केवल और केवल सत्य के मार्ग पर चलिए। अन्य विचारों से गुमराह होकर सत्कर्म के मार्ग से विमुख होंगे तो फिर दंड भी आपको ही भोगना पड़ेगा। भारत अभी घोषित युद्ध के दौर में नहीं पहुंचा है इसलिए शायद नंदलाला के जीवनदर्शन की ये पुकार भटके हुए नौजवानों और नागरिकों का पुण्य मार्ग प्रशस्त करेगी।

  • संदीप डाकोलिया ने फिर संभाली जैन पत्रकारों की कमान

    संदीप डाकोलिया ने फिर संभाली जैन पत्रकारों की कमान

    अ.भा.जैन पत्रकार संघ प्रदेश कार्यसमिति की बैठक महेश्वर में हुई संपन्न ,

    महेश्वर,7अगस्त (प्रेस इनफॉर्मेशन सेंटर) अ.भा. जैन पत्रकार संघ मध्य प्रदेश की विशेष बैठक 6 अगस्त मंगलवार को महेश्वर (जिला खरगोन )में आयोजित की गई । बैठक की अध्यक्षता प्रदेश अध्यक्ष संदीप डाकोलिया ने की। प्रारंभ में सभी पधाधिकारियो ने मां सरस्वती के चित्र पर माल्यार्पण किया। मुख्य संरक्षक हिम्मत मेहता, ऋतुराज बुडावनवाला, संस्थापक अध्यक्ष संजय लोढ़ा, मुख्य सलाहकार जवाहर डोसी , राजेश नाहर, वरिष्ठ पत्रकार इंदर मल सांड आदि ने विशेष रूप से उपस्थित रह कर मार्गदर्शन प्रदान किया।
    प्रदेश महासचिव शिरीष सकलेचा ने बताया कि बैठक में प्रदेश के पदाधिकारी प्रदेश संयुक्त सचिव अरुण बुरड, प्रचार सचिव नेमीचंद कावड़िया, कार्यसमिति सदस्य विशाल वागमार, मनोज भंडारी, राजकुमार नाहर, अनिल जैन, ओमप्रकाश कोचर, देवेन्द्र जैन ,निलेश जैन, पियूष पटवा,पंकज खिंवसरा मोजूद रहे। सदस्यो ने अपने अपने सुझाव देकर संघटन को मजबूत बनाने पर जोर दिया। अध्यक्ष संदीप डाकोलिया ने कहा कि अ.भा.जैन पत्रकार संघ मप्र शासन द्वारा पंजीकृत संस्था होकर प्रदेश के जैन पत्रकारों को एकजुट कर उनके हितों के लिए संघर्षरत रहा हैं। संघटन द्वारा सदस्यो के लिए दो वर्ष के परिचय पत्र बनाने का काम इस वर्ष भी किया गया। आपने कहा कि हमारे सदस्यो को अन्य समानांतर संघटन की गतिविधियों व आयोजनों में शामिल होने से बचना होगा।
    क्योंकि हम यदि संघटित रहेंगे तो हमारा संघ और अधिक रचनात्मक कार्य करेगा।

    बैठक में नवंबर माह में संघ का एक मिलन समारोह श्री नागेश्वर तीर्थ ,या सैलाना में आयोजित करने का निर्णय हुआ। स्थान का चयन कोर कमेटी की बैठक में होगा। सदस्यता अभियान को लेकर भी चर्चा हुई।
    डाकोलिया पुनः अध्यक्ष…
    कार्य समिति की बैठक में वरिष्ठ जनों की समिति से प्रदेश अध्यक्ष पद पर पुनः संदीप डाकोलिया (करही)के नाम की घोषणा की गई। जिसका सभी ने करतल ध्वनि से व माला पहनाकर स्वागत किया। डाकोलिया ने सभी का आभार माना और कहा कि आप सभी के सहयोग से मैं पूरी जिम्मेदारी का पूरी ईमानदारी से निर्वाह करूंगा।

    इस अवसर पर संघ के प्रदेश उपाध्यक्ष पंकज जे.पटवा की सुपुत्री मुमुक्षु मीमांसा के संयम जीवन की राह पर चलने का निर्णय लेने पर पटवा का शाल ओढ़ाकर , श्री फल भेट कर बहुमान किया गया।
    राष्ट्र गीत के साथ बैठक का समापन हुआ।
    संचालन प्रदेश महासचिव शिरीष सकलेचा ने किया ।आभार अरुण बुरड ने माना। बैठक के बाद सभी पदाधिकारीयो ने महेश्वर भ्रमण किया।

  • भारतीय योग परंपरा की मशाल थामकर आगे आई आचार्य हुकुमचंद शनकुशल की नई पीढ़ी

    भारतीय योग परंपरा की मशाल थामकर आगे आई आचार्य हुकुमचंद शनकुशल की नई पीढ़ी


    भोपाल,21 जून(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)। प्रसिद्ध योग गुरु आचार्य हुकुमचंद शनकुशल की नई पीढ़ी ने उनकी समृद्ध योग परंपरा की मशाल थामकर एक नया अध्याय लिख डाला है। उनके पुत्रों,पुत्री और शिष्यों ने योग के क्षेत्र में नए कीर्तिमान गढ़ना आरंभ कर दिये हैं। अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर आनंद नगर स्थित आश्रम में योग शिविर का आयोजन किया गया जिसमें बच्चों और युवाओं ने अपने हुनर का प्रदर्शन करके उपस्थित जन समुदाय का मन मोह लिया।


    प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में चालू हुआ भारतीय योग दिवस आज अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के रूप में पूरी दुनिया में लोकप्रिय हो चला है। इस अवसर पर भोपाल में भी कई स्थानों पर योग दिवस के आयोजन हुए। आनंद नगर स्थित भारतीय योग अनुसंधान केन्द्र परिसर में ये आयोजन धूमधाम से मनाया गया। भारतीय योग अनुसंधान केन्द्र में योगमाता डाक्टर शुभ्रा शनकुशल, सचिव ज्ञानेश्वर शनकुशल, और खुशबू शनकुशल के नेतृत्व में आयोजित इस कार्यक्रम में शहर के कई गणमान्य लोग भी उपस्थित हुए।


    स्वर्गीय आचार्य हुकुमचंद शनकुशल ने जिस योग परंपरा के माध्यम से भारत की यशोगाथा लिखी थी उसी परंपरा को आगे बढ़ाने के लिए योग गीतों पर आसनों का लयबद्ध प्रदर्शन किया गया। गुरुमाता शुभ्रा शनकुशल ने बताया कि आचार्यश्री ने लगभग पंद्रह साल पहले रोम में जगत गुरु शंकराचार्य के नेतृत्व में सबसे पहले योग दिवस का शंखनाद किया था। आज प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के प्रयासों से यूनाईटेड नेशंस ने योग दिवस मनाने का अभियान पूरी दुनिया में शुरु कर दिया है।


    कार्यक्रम में मौजूद पूर्व शिक्षा मंत्री दीपक जोशी , वार्ड 62 की पार्षद सुश्री छाया ठाकुर, पार्षद सुश्री विश्वकर्मा आदि ने आयोजन का आनंद लिया और युवाओं की आगे बढ़ती नई पीढ़ी को अपना शुभाशीष प्रदान किया। इस अवसर पर भीमाशंकर शनकुशल ने नोली क्रिया और हैंड स्टैंडिंग के साथ एसओएस बालग्राम के बच्चों को प्रशिक्षण दिया। भीमाशंकर के कुशल योग प्रदर्शन को सभी आगंतुकों ने बहुत सराहा।


    योग दिवस के आयोजन में शामिल बच्चों और युवाओं को पुरस्कार एवं पुरस्कार वितरण श्री दीपक जोशी और अर्जुन यादव के कर कमलों से किया गया। ज्ञानेश्वर शनकुशल ने सभी आगंतुकों का आभार व्यक्त किया और योग परंपरा को एक बार फिर ऊंचाईयों पर ले जाने का आव्हान किया।

  • आयुर्वेद के उपायों से महिलाओं का उपचार सरल

    आयुर्वेद के उपायों से महिलाओं का उपचार सरल

    महिला स्वास्थ्य विषय पर सेमिनार कर आयुर्वेद डॉक्टर्स ने मनाया मकर संक्रांति पर्व

    • भोपाल,14 जनवरी(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)। शहर के महिला आयुर्वेद डॉक्टर के संगठन वीमेन ऑफ़ विजडम के भोपाल चैप्टर द्वारा अपोलो सेज हॉस्पिटल के सेज आनंदम विभाग के संयुक्त तत्वाधान में महिला स्वास्थ्य संरक्षण, एवं प्रसूति से संबंधित जटिल समस्याओं एवम उनके समाधान, विषय पर एक दिवसीय सेमिनार का आयोजन किया गया, जिसमें भोपाल संभाग की लगभग 100 आयुष महिला डॉक्टर्स ने हिस्सा लिया।

    • कार्यक्रम संयोजक डॉक्टर बबिता शर्मा ने बताया की यह संगठन नियमित रूप से स्वास्थ संबंधित महत्वपूर्ण विषयों पर सेमिनार, अतिथि व्याख्यान, कर्मशाला आदि का आयोजन करता रहता है। इस कार्यक्रम के प्रथम हिस्से में अपोलो सेज अस्पताल के स्त्री रोग विभाग के वरिष्ठ चिकित्सकों के साथ स्त्री रोग एवम प्रसव संबंधित जटिलताओं और उसके उपचार विषय पर हेल्थ टॉक के द्वारा अपना ज्ञानवर्धन किया तथा अगले हिस्से में संगठन के सभी सदस्यों ने मिलकर उत्तरायण पर्व के उपलक्ष्य में पीले रंग की ड्रेसेज पहनकर तथा पतंग प्रॉप के साथ रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रम का जमकर मजा उठाया, जिसमे समूह नृत्य प्रतियोगिता, रैंप वॉक में सभी डॉक्टर ने बढ़चढ़ कर हिस्सा लिया।
    • कार्यक्रम में आयुर्वेद के विकास और प्रचार के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य के लिए नगर की वरिष्ठ महिला आयुर्वेद विशेषज्ञ
      डॉक्टर निबेदिता मिश्र को लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड से सम्मानित किया गया । आयोजन समिति सदस्य डॉ गायत्री, डॉ प्रीति चोपड़ा, डॉ मोनिका, डॉ स्वाति, डॉ श्रद्धा डॉ आशी, डॉ नीरू कुंदवानी थीं।
  • दिव्यांगों की मुस्कान से खुलते हैं समृद्धि के नए द्वार बोले देशमुख

    दिव्यांगों की मुस्कान से खुलते हैं समृद्धि के नए द्वार बोले देशमुख


    भोपाल 08 अक्टूबर(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)।मध्यप्रदेश में अपनी आर्थिक सेवाओं के लिए तेजी से बढ़ता इक्विटास स्माल फाइनेंस बैंक अब सेवा के क्षेत्र में भी अपना दायित्व निभा रहा है। प्रदेश के करीबन डेढ़ हजार दिव्यांग बच्चों के खेल आयोजन में इक्विटास बैंक ने भी बढ़ चढ़कर अपनी भागीदारी निभाई है। दिव्यांग बच्चों ने समाज का स्नेह पाकर रविवार को भोपाल के टीटीनगर स्टेडियम में जो सतरंगा संसार रचा उसने सामान्य नागरिकों में संतोष का भाव जगाया है। शारीरिक चुनौतियों से जूझते इन बच्चों को उमंगों से भरने वाले संस्थानों के बीच इक्विटास बैंक ने भी अपनी पृष्ठभूमि से मिले संस्कारों का परिचय दिया है।


    इक्विटास स्माल फाईनेंस बैंक के क्षेत्रीय व्यापार प्रबंधक अमित देशपांडे ने इस अवसर पर कहा कि बैंक अपनी स्थापना काल से सामाजिक दायित्वों के प्रति सजग रहा है। इस श्रंखला में बैंक ने इन स्पेशल बच्चों के खेलों और सांस्कृतिक कार्यक्रमों में उत्साह से भागीदारी निभाई है। उन्होंने कहा कि समाज जब दिव्यांग बच्चों और नागरिकों के प्रति अपना सामाजिक दायित्वों का बढ़ चढ़कर निर्वहन करता है तो समृद्धि के नए द्वार भी खुलने लगते हैं। यह आयोजन भोपाल का रोटरी क्लब मिडटाऊन पिछले इक्कीस सालों से कर रहा है। सामाजिक संस्थाओं की बढ़ती भागीदारी के बीच इस प्रदेश व्यापी आयोजन में भाग लेने वाले बच्चों की संख्या भी निरंतर बढ़ती जा रही है।शाखा प्रबंधक लोकेश जैन ने बताया कि बैंक के सभी कर्मचारियों ने इस आयोजन में शामिल होकर बच्चों को अपना दुलार दिया और आयोजन में सहयोग देने का अपना दायित्व निभाया।


    इक्विटास स्माल फाईनेंस बैंक के क्षेत्रीय व्यापार प्रबंधक अमित देशपांडे और शाखा प्रबंधक लोकेश जैन ने दिव्यांग बच्चों के लिए पुरस्कार वितरित किए और उनके आयोजनों में अपनी सक्रिय भागीदारी भी की। इस कार्यक्रम में विभिन्न श्रेणी के 1500 स्पेशल बच्चे विदिशा, खरगोन, राजगढ़, होशंगाबाद, भोपाल, रीवा, जबलपुर, इंदौर, देवास, शुजालपुर , नरसिंहगढ़, नागदा से भाग लेने आए। स्पेशल ओलंपिक मापदंड के अनुसार दौड़, रिले दौड़, हिट द बाल, कैरम, पावर ऑफ रिस्ट, शॉटपुट के साथ सांस्कृतिक प्रस्तुतियां भी हुई।


    इस बार भोपाल के सभी रोटरी क्लब के सहयोग से भोपाल में टाउन ने ड्राइंग एंड पेंटिंग प्रतियोगिता का आयोजन भी किया गया । यह आयोजन सभी दर्शकों के लिए खुला है। भोपाल रोटरी क्लब मिड टाउन के वर्तमान अध्यक्ष अध्यक्ष आभास जैन ने बताया कि भोपाल और मध्य प्रदेश के लोगों से आने वाले सभी प्रतिभागियों का विशेष रूप से ध्यान रखा गया यहां उन्हें आवास और परिवहन की सुविधा क्लब की ओर से उपलब्ध कराई गई। विंटर गेम प्रोग्राम के चेयरपर्सन संजय निगम ने बताया कि आयोजन में शामिल होने वाले सभी दिव्यांग प्रतिभागियों को अनिवार्य रूप से प्रमाण पत्र और रिटर्न गिफ्ट 20 क्लब की ओर से उपलब्ध कराए गए हैं सभी विद्यार्थियों को विभिन्न प्रतियोगिताओं के प्रथम द्वितीय और तृतीय पुरस्कार दिए गए इस कार्यक्रम में एशियाई दिव्यांग खेलों में भाग लेने वाले कई प्रतिभागी भी शामिल हुए।


    आज के कार्यक्रम के मुख्य अतिथि मध्य प्रदेश शासन के अतिरिक्त मुख्य सचिव मोहम्मद सुलेमान, भोपाल जिला अस्पताल के अधीक्षक डॉक्टर प्रभाकर तिवारी, रोटरी डिस्ट्रिक्ट 3040 के डीजी ई अनीश मलिक, डीजीएन सुनील मल्होत्रा वर्तमान डीजी रितु ग्रोवर, पीजी डी गजेंद्र नारंग, आलोक बिल्लौर ,जितेंद्र जैन, कर्नल, महेंद्र मिश्रा और रोटेरियन धीरेंद्र दत्त प्रमुख रूप से उपस्थित थे । इस अवसर पर बिंटर गेम्स की स्मारिका का विमोचन की किया गया। कार्यक्रम में रोटरी क्लब भोपाल में टाउन के सुनील, भार्गव अमित तनेजा , राजेश नामदेव विनोद तिवारी , वीरेंद्र गुर्जर, हेम सिंह गुर्जर तरुण तनेजा, नीतू तिवारी, रूचिता अग्रवाल,श्रीमती शोभा भार्गव श्रीमती प्रीति उपाध्याय श्री शुभ्रांशु उपाध्याय सहित बड़ी संख्या में भोपाल के विभिन्न रोटरी क्लबो के सदस्य उपस्थित थे।

  • जीवन का बेहतर उपसंहार समृद्ध समाज की गारंटी है-राधेश्याम अग्रवाल

    जीवन का बेहतर उपसंहार समृद्ध समाज की गारंटी है-राधेश्याम अग्रवाल


    भोपाल, 03 जून(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर ). जिन लावारिस लाशों का पता ठिकाना पुलिस भी नहीं जानती राजधानी का एक आवारा मसीहा उन्हें सद्गति देकर पुण्य बटोर रहा है। उसके पुण्य भंडार को भरने में ऐसे सैकड़ों समाजसेवी जुटे हैं जिन्हें आम लोग नहीं जानते। हर दिन बीमार जरूरतमंदों को भोजन मुहैया कराना और लावारिस लाशों का अंतिम संस्कार करना उसकी दिनचर्या ही बन गई है। जनसंवेदना नाम की जिस संस्था को उन्होंने समाज में अनोखी पहचान दिलाई है उसमें कई चिकित्सक, पुलिस कर्मी, व्यापारी, उद्योगपति, इंजीनियर, लेखक और सामान्य लोग भी जुड़े हैं। हर दिन वे स्वेच्छा से संस्था को भोजन और कफन दफन की राशि मुहैया कराते हैं। लोगों का भरोसा जीतने में कामयाब राधेश्याम अग्रवाल नाम के ये समाजसेवी कहते हैं कि जनसहयोग ने मेरा जीवन सफल बना दिया है। गुमनाम लोगों की अंतिम यात्रा का बेहतर उपसंहार देखकर उन्हें लगता है कि यही एक समृद्ध समाज की गारंटी है।
    सत्तर वर्षीय राधेश्याम अग्रवाल हर दिन सुबह घर से नाश्ता करके निकलते हैं और जेल पहाड़ी स्थित अपनी संस्था के दफ्तर पहुंच जाते हैं। विभिन्न पुलिस थानों और अस्पतालों से जो जानकारियां आती हैं उसके अनुसार वे धनराशि मुहैया कराते हैं। ये दानराशि जुटाने के लिए वे दिन भर समाजसेवियों से जाकर मिलते हैं और उन्हें इस पुण्य कार्य से जोड़ते हैं। संस्था से जुड़े स्वयंसेवी और विभिन्न लोग इस दौरान दफ्तर आकर भी मिलते रहते हैं। संस्था के अभियान को जिस लगन से वे सफल बनाते रहे हैं उन्हें देखकर हर व्यक्ति नतमस्तक हो जाता है।
    आमतौर पर श्रेष्ठिवर्ग में पूजा, और अपने प्रतिष्ठान के प्रति लगाव देखा जाता है, लेकिन राधेश्याम अग्रवाल के लिए तो लाशों की अंतिम क्रिया ही पूजा है ।वे लगभग अठारह सालों से ये पुण्य कार्य कर रहे हैं और कभी विश्राम नहीं करते। वे कहते हैं कि हर दिन जरूरत मंदों को भूख लगती है और हर दिन कहीं न कहीं जीवन की डोर यमराज के हाथों में जा अटकती है। वे कहते हैं कि एक दुर्घटना में बाल बाल बचने के बाद उन्होंने संकल्प किया था कि वे किसी भी गुमनाम इंसान को लावारिस होकर नहीं जाने देंगे। उन्हें इस कार्य की प्रेरणा देने का काम मेडीकोलीगल एक्सपर्ट डॉक्टर डी.के.सत्पथी ने किया था। तब वे अपराध संवाददाता के रूप में उनके पास खबर लेने जाते थे। डाक्टर सत्पथी ने उन्हें बताया कि जिन लावारिस लाशों का वे पोस्टमार्टम करते हैं उनका अंतिम संस्कार पुलिस के लिए बड़ी समस्या होता है। यदि कोई समाजसेवी ये बीड़ा उठा ले तो बेगुनाह लोगों को भी बैकुंठयात्रा कराई जा सकती है। इसी विचार ने आगे चलकर जनसंवेदना संस्था को जन्म दिया और आज यह एक विशाल नेटवर्क का रूप ले चुकी है। हजारों दानदाता इससे जुड़कर अपना भी जन्म सफल बना रहे हैं और लावारिस मरने वालों के लिए आशा की किरण बन गए हैं।

  • केरल के मंदिरों में संघ की शाखा पर रोक

    केरल के मंदिरों में संघ की शाखा पर रोक

    नई दिल्ली ,23 मई(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)। त्रावणकोर देवस्वोम बोर्ड(टीडीबी) ने सर्कुलर जारी कर केरल में अपने अधीन आने वाले मंदिरों में आरएसएस के अलावा सभी राजनीतिक दलों के कार्यक्रमों पर रोक लगा दी है। टीडीबी ने सख्ती से उसके निर्देशों का पालन करने की बात कही है।
    दक्षिणी राज्य केरल में टीडीबी करीब 1200 मंदिरों का प्रबंधन देखता है। टीबीडी के सर्कुलर में कहा गया है कि उसके निर्देशों का सख्ती से सभी मंदिरों में पालन किया जाए और जो अधिकारी इसका पालन नहीं करेंगे, उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
    यह पहली बार नहीं है जब टीबीडी ने आरएसएस के खिलाफ ऐसे फैसले लिए हैं। इससे पहले 2016 में भी टीबीडी ने मंदिर परिसरों में आरएसएस द्वारा हथियारों के प्रशिक्षण पर प्रतिबंध लगा दिया था। साथ ही त्रावणकोर देवस्वोम बोर्ड ने इससे पहले 30 मार्च, 2021 को एक आदेश जारी किया था कि मंदिर परिसर का उपयोग मंदिर के अनुष्ठानों और त्योहारों के अलावा किसी अन्य उद्देश्य के लिए नहीं किया जाना चाहिए।

    त्रावणकोर देवास्वोम बोर्ड के अध्यक्ष के अनंतगोपन ने कहा, ‘आरएसएस की शाखाएं कई मंदिरों में चल रही थीं और वहां ड्रिल जारी था। यही वजह है कि ऐसा सर्कुलर जारी किया गया। मंदिर श्रद्धालुओं के लिए होते हैं, श्रद्धालुओं को कोई असुविधा नहीं होनी चाहिए। यही बोर्ड का स्टैंड है।’

    देवस्वोम बोर्ड के अधिकारियों ने कहा कि सिर्फ आरएसएस ही नहीं, किसी भी संगठन या राजनीतिक दलों को अन्य उद्देश्यों के लिए मंदिर परिसर का उपयोग करने की अनुमति नहीं दी जाएगी। बोर्ड के उपायुक्तों, सहायक आयुक्तों, प्रशासनिक अधिकारियों और उप-समूह अधिकारियों को इस तरह की गतिविधियों पर प्रतिबंध लगाने के लिए कदम उठाने और मुख्यालय को रिपोर्ट करने के लिए कहा गया है।

  • आसव और अरिष्ट से संवारें स्वास्थ्य

    आसव और अरिष्ट से संवारें स्वास्थ्य

    अर्जुनारिष्ट : शरीर में वायु अधिक होने से हृदय की धड़कन बढ़ना, पसीना अधिक आना, मुँह सूखना, नींद कम आना, दिल घबराना, फेफड़े के रोग तथा हृदय रोगों में लाभकारी।

    अभ्रयारिष्ट : सभी प्रकार के बवासीर की प्रसिद्ध दवा है। कब्जियत, मंदाग्नि आदि उदर रोगों को नष्ट कर अग्नि को बढ़ता है। पीलिया, तिल्ली, उदर रोग, झांई, अर्बुद, ग्रहणी तथा ज्वरनाशक है।

    अमृतारिष्ट : सब तरह के बुखार में लाभकारी। विषम ज्वर, जीर्ण ज्वर व पित्त ज्वर में विशेष लाभ करता है। बालकों के यकृत बढ़ने पर लाभकारी।

    अरविन्दासव : बालकों को सूखा रोग, अतिसार, दूध न पचना आदि रोगों को दूर कर उन्हें हृष्ट-पुष्ट, बलवान बनाता है। पाचन क्रिया ठीक होकर रक्त, मांस व बल वृद्धि होती है। बुद्धि वर्द्धक व रक्त शुद्धि कारक है।

    अशोकारिष्ट : स्त्रियों के सब प्रकार के रोग, प्रदर, (लाल, पीला, सफेद पानी), मासिक धर्म के विकार, सिर पेडू व कमर वगैरह के दर्द, पित्त दाह (हाथ व पाँव के तलवों की जलन), प्रमेह, अरुचि, उदरशूल आदि इसके सेवन से नष्ट होते हैं। शरीर की शक्ति व मुख की कांति बढ़ती है।

    अश्वगंधारिष्ट : दिमागी ताकत बढ़ाने और शरीर को पुष्ट करने में विशेष लाभकारी है। मूर्छा (बेहोशी), अकारण भय, दिल की घबराहट, चित्त भ्रम, अनिद्रा, याददाश्त की कमी, मंदाग्नि, बवासीर, कब्जियत, काम में चित्त न लगना, स्नायु दुर्बलता व कमजोरी दूर करता है, बुद्धि, बल-वीर्य बढ़ाता है।

    उशीरासव : समस्त पित्त विकारों में लाभदायक। रक्तपित्त, प्रमेह, बवासीर आदि में विशेष लाभकारी। पांडू रोग, कोढ़, सूजन आदि में लाभप्रद।

    कनकासव : नए- पुराने दमा (श्वास), खाँसी, कुकर खाँसी, क्षय रोग आदि में अत्यंत लाभकारी। पुराना बुखार, रक्तपित्त और उरुक्षत रोगों में लाभदायक।

    पुटजारिष्ट : खून के दस्त, संग्रहणी, खूनी बवासीर, आमांश, रक्तातिसार व जीर्ण ज्वर आदि रोगों में अत्यंत लाभदायक ।
    कुमारी असाव : सब प्रकार के उदर रोग, तिल्ली व जिगर बढ़ना, गुल्म (वायु गोला), भोजन के बाद पेट का दर्द आदि उदर रोग नष्ट होते हैं। भोजन ठीक से पचता है तथा अरुचि दूर होती है। श्वास, खाँसी, बवासीर, पीलिया, धातुक्षय, हृदय रोग, कब्जियत व वात व्याधि को नष्ट करता है। यकृत रोग में विशेष लाभकारी।

    कुमारी आसव (लौह युक्त) : ऊपर लिखे गुणों के अतिरिक्त पथरी, अपस्मार, प्रमेह व शूल रोग नष्ट करता है तथा खून बढ़ाता है। मूत्र कृच्छ, अपस्मार, कृमि रोग, शुक्रदोष आदि में लाभकारी है।

    खदिरादिष्ट : सब प्रकार के चर्म रोग (फोड़े-फुंसी, खुजली आदि) गण्डमाला एवं खून की तमाम खराबियों आदि में विशेष लाभकारी है।

    चन्दनासव : शुक्रमेह (सुजाक), प्रमेह, पेशाब की जलन, धातु का जाना, पथरी आदि मूत्र विकारों में अत्यंत लाभदायक। पित्त शामक, पुष्टिकारक व हृदय को ताकत देता है। बल- वीर्य वर्द्धक।

    जीरकाद्यरिष्ट : हाथ-पैरों की जलन, भूख कम लगना व उदर विकारों पर अतिसार, संग्रहणी व सूतिका रोगों पर लाभकारी।

    दशमूलारिष्ट : बल, वीर्य व तेज बढ़ाता है तथा बाजीकारक है। स्त्रियों के प्रसूत रोग, अरुचि, शूल सूतिका, संग्रहणी, मंदाग्नि, प्रदर रोग, श्वास, खांसी वात व्याधि, कमजोरी आदि रोगों की प्रसिद्ध दवा है। शरीर पुष्ट करता है। प्रसूता स्त्रियों तथा प्रसूति के बाद इसका सेवन अवश्य करना चाहिए।

    दयाल द्राक्षासव : ताकत और ताजगी से भरा सुमधुर टॉनिक है। यह भूख बढ़ाता है। दस्त साफ लाता है, खून में तेजी लाता है, काम की थकावट दूर करता है तथा नींद लाता है। दिल व दिमाग में ताजगी पैदा करता है। बल, वीर्य, रक्त मांस बढ़ाता है। कफ, खाँसी, सर्दी-जुकाम, क्षय की खाँसी, कमजोरी में लाभदायक। सब ऋतुओं में बाल, वृद्ध, स्त्री, पुरुष सभी सेवन कर सकते हैं।

    द्राक्षारिष्ट : उरक्षत छाती में दर्द होना, कुकर खाँसी, गले के रोग, श्वास, काँस, क्षय, फेफड़ों की कमजोर व कब्जियत में लाभकारी तथा बलवर्द्धक है।
    देवदार्व्यारिष्ट : प्रमेह, वातरोग, ग्रहणी, अर्श, मूत्र, कृच्छ, दद्रु व कुष्ठ नाशक।

    पत्रांगासव : सब तरह के प्रदर रोग, गर्भाशय की शिथिलता, सोमरस, ज्वर, पांडू, सूजन मंदाग्नि, अरुचि आदि रोगों को दूर करता है। वेदनायुक्त रक्त प्रदर व श्वेत प्रदर पर लाभकारी।

    पिपल्यासव : मंदाग्नि, क्षय, कफ, खांसी, गुल्म, उदर रोग, ग्रहणी तथा अर्श नाशक। शोथ, यकृत व प्लीहा वृद्धि, ज्वर व अतिसार में लाभप्रद।

    पुनर्नवारिष्ट : शोथ (सूजन) रोग, उदर रोग, प्लीहा वृद्धि, यकृत, जिगर बढ़ना, अम्लपित्त गुल्म आदि रोगों को नष्ट करता है तथा अधिक पेशाब लाता है। शोथ, यकृत तथा गुर्दों को विशेष लाभकारी है।

    बबूलारिष्ट : रक्त विकार, अतिसार, खांसी, दमा, तपेदिक, बहुमूत्र, प्रमेह, प्रदर, उरक्षत, सोम रोग आदि में लाभकारी। छाती का दर्द, पेशाब में जलन व पीड़ा होना, धातु क्षय व सूखी खांसी में लाभकारी है।

    वासारिष्ट : पुरानी खाँसी, श्वास, रक्तपित्त, बुखार में खाँसी के साथ कफ और खून का निकलना, सूखी खाँसी, गले के रोग आदि रोगों में अत्यंत लाभकारी है।

    भृंगराजासव : धातु क्षय, कमजोरी, स्मरण शक्ति की कमी, नेत्र रोग, बालों का सफेद होना, प्रमेह, खाँसी आदि रोग नष्ट करता है। बलकारक व कामोद्दीपक है तथा बन्ध्यापन नष्ट करता है व खून साफ करता है।
    मुस्तकारिष्ट : अग्निमांद्य, संग्रहणी, अजीर्ण, अतिसार, आदि अनेक रोगों को नष्ट करता है तथा भूख बढ़ाता है।

    महामंजिष्ठाद्यरिष्ट : सब प्रकार के कुष्ठ रोग, खून की खराबियाँ, उपदंश (गर्मी), फोड़े-फुंसी चकत्ते आदि रोगों पर लाभकारी तथा चर्म रोग नष्ट करता है।

    रोहितकारिष्ट : तिल्ली, जिगर (लीवर), गुल्म (वायु गोला), अग्निमांद्य, पांडू, संग्रहणी आदि रोगों को दूर करता है। जिगर व तिल्ली के बढ़ जाने पर इसके उपयोग से विशेष लाभ होता है।

    लोध्रासव : कफ तथा पित्त जनक प्रमेह, पेशाब की जलन, मूत्राशय में दर्द, पेशाब के रास्ते में सूजन, प्रदर आदि स्त्रियों के रोगों पर विशेष लाभकारी है। गर्भाशय की शुद्धि करता है। पांडू, बवासीर, ग्रहणी, खांसी, चक्कर आना आदि नष्ट करता है।

    लोहासव : खून बढ़ाने की सुप्रसिद्ध औषधि। खून की कमी, पीलिया, गुल्म रोग, बवासीर, भगंदर संग्रहणी, बढ़े हुए जिगर और तिल्ली में विशेष लाभदायक है। दमा, खाँसी, क्षय, जीर्ण ज्वर, हृदय रोग आदि में लाभप्रद तथा बलवर्धक।

    विडंगारिष्ट व विडंगासव : सब प्रकार के पेट के कृमि (कीड़ों) को नष्ट करता है तथा भगंदर, गण्डमाला, गुल्म, अश्मीर, विद्रधि, कफ, खांसी, श्वास आदि रोगों में भी लाभदायक है।

    सारस्वतारिष्ट : बुद्धिवर्द्धक, आयु, वीर्य एवं कांतिवर्धक है। स्मरण शक्ति बढ़ाता है तथा मज्जान्तु हृदय व दिमाग को ताकत पहुँचाता है। मानसिक एवं शारीरिक दुर्बलता, आवाज भारी होना, नींद न आना, स्वर भंग, रुक-रुककर बोलना, (तोतलापन), हकलाना, कानों में तरह-तरह की आवाजों का होना, कम सुनाई देना आदि में अच्छा लाभ होता है। दिमागी काम करने वालों के लिए उत्तम ब्रेन टॉनिक है। उन्माद ऋतु दोष, वीर्य रोग, मूर्च्छा व अपस्मार को नष्ट करता है और बच्चों के तोतलेपन व मंदबुद्धि में लाभकारी।

    सरिवाद्यासव : खून साफ करने की प्रसिद्ध दवा है। यह खून और पित्त की खराबी को मिटाता है। फोड़ा-फुंसी, खाज-खुजली, चकत्ते, वातरक्त आदि रक्त विकार, सुजाक, भगंदर, हाथ-पैर, आँख, छाती की जलन, गठिया, आमवात, वात व्याधि सभी प्रकार के रक्त दोष उपद्रव, कब्जियत, रक्त संचार की अनियमितता आदि की उत्तम औषधि है।

    नोट : अधिकांश आसव-आरिष्ट 10 से 25 मिलीलीटर तक बराबर पानी मिलाकर भोजन करने के बाद दोनों समय पिए जाते हैं।

  • मंदिर में दान आया तो खर्च करने जुट गए समाजसेवी

    मंदिर में दान आया तो खर्च करने जुट गए समाजसेवी

              जिसके कारण आज आपका अस्तित्व है उसके प्रति कृतज्ञता का भाव रखना जैन धर्म की मूल पहचान है।उदार हृदय होकर ईश्वर की आराधना करने वाले जैनियों की इसी साख की वजह से उन्हें समाज का खजांची माना जाता  है। सामाजिक संस्कार के इस भाव की पूजा मंदिर में श्री जी के अभिषेक से पुष्पित पल्लवित होती है। राजधानी के जैन धर्मावलंबी भी इस भाव से अछूते नहीं हैं और इसी वजह से राजधानी के जैनियों को प्रदेश की जैन समाज का शीर्ष  (अपेक्स ) प्रतिनिधि माना जाता रहा है। इसके बावजूद यहां कई बार जैनियों के बीच अप्रिय घटनाएं भी सामने आती रहती हैं जिसका कारण अज्ञानता, संकीर्णता और अहंकार का भाव होता है। कस्तूरबा नगर के धर्मावलंबियों के बीच कुप्रबंधन से जुड़ी कुछ इसी तरह की बैचेनी इन दिनों देखी जा रही है। कस्तूरबानगर, रचनानगर ,गौतम नगर, भारती निकेतन,  शांतिनिकेतन जैसी कालोनियों में रहने वाले जैन धर्मावलंबियों के पुण्य की आराधना के बीच पनपा कटुता का भाव इन दिनों सु स्वादु भोजन के बीच आए कंकड़ की तरह खटक रहा है।

            ये कहानी न केवल कस्तूरबानगर बल्कि देश भर की जैन संस्थाओं में देखी सुनी जा रही है। इसकी वजह समासेवा के नाम पर जुटने वाले अहंकारियों का कुप्रबंधन,मनमानी और अराजकता है।  राजधानी के कस्तूरबानगर और रचनानगर के लोगों ने वर्ष 2002-03 में एक सार्वजनिक वाचनालय और भगवान सुपार्श्वनाथ के संदेशों का प्रसार करने के लिए मंदिर का निर्माण किया था। मंदिर के संधारण और निर्माण का कार्य श्री महावीर कुंदकुंद दिगंबर जैन वाचनालय एवं पुस्तकालय समिति जिसका रजिस्ट्रेशन 10249/2002 है इसके अधीनस्थ श्री 1008 सुपार्श्वनाथ दिगंबर जैन मंदिर समिति कस्तूरबा नगर(उपसमिति) करती रही । मंदिर की स्थापना करने वाले समाजसेवियों की बनाई इस उप समिति का कार्यकाल 30 अप्रैल 2023 को समाप्त हो गया। उसके चुनाव की नई तिथि अभी तक घोषित नहीं हुई है। इसकी घोषणा मंदिरजी की स्थापना करने वाली श्री महावीर कुंद कुंद दिगंबर जैन वाचनालय एवं पुस्तकालय समिति को करना है। इस उपसमिति के अध्यक्ष का पद काल दो वर्ष रखा गया है। जाहिर है कि दो साल बाद उप समिति का अध्यक्ष बदला जाता है। वाचनालय के लिए बनी मूल समिति ने लगभग इक्कीस सालों के अथक प्रयासों और जन सहयोग से सुंदर सार्वजनिक स्थल का निर्माण किया है। यही नहीं दानराशि का एक बड़ा फंड सामाजिक गतिविधियों के लिए भी एकत्रित किया है। फंड के दुरुपयोग की भी कोई शिकायत कभी सामने नहीं आई। ये काम मंदिर समिति से जुड़े तमाम जैन धर्मावलंबी बडी पारदर्शिता और लगन से करते रहे हैं। सभी का एकमेव लक्ष्य है कि वे रोज सुबह भगवान के दर्शन कर सकें और सामाजिक मानदंडों की उत्कृष्टता का संकल्प ले सकें।

           ये सब गतिविधियां शुरुआती अवरोध के बाद से निर्बाध चल रहीं हैं और समाज के कई लोग इस अभियान से जुड़ते चले जा रहे हैं। इसमें न केवल जैन समाज बल्कि कई अन्य स्थानीय नागरिकों ने भी बढ़ चढ़कर अपनी हिस्सेदारी निभाई है। अदालतों के विभिन्न फैसलों की वजह से सरकार ने मंदिर स्थलों के निर्माण और नियमन को लंबे समय से रोक रखा है। यही वजह है कि कस्तूरबानगर जैन मंदिर को जमीन आबंटन की प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकी, मंदिर से जुड़े लोगों के सब्र का बांध अब टूटने लगा है। मंदिर की जिस उपसमिति का कार्यकाल हाल ही में 30 अप्रैल को समाप्त हुआ है, उसके अध्यक्ष रहे सुनील जैन(जैनाविन) ने मंदिर के नवनिर्माण पर पच्चीस लाख रुपए खर्च कर दिए। इस मनमानी पर श्री महावीर कुंदकुंद दिगंबर जैन वाचनालय एवं पुस्तकालय समिति के कई सदस्यों ने आपत्ति उठाई । उनका कहना था कि वाचनालय या मंदिर की जमीन आबंटन की प्रक्रिया पूरी नहीं हुई है इसलिए इस तरह की फिजूलखर्ची की अनुमति नहीं दी जा सकती। समिति के सदस्यों ने लोगों से प्राप्त धनराशि को पाई पाई करके जोड़ा है इसे बर्बाद नहीं किया जा सकता ।जिस तरह राम जन्मभूमि मंदिर का जमीन विवाद सुलझने के बाद ही मंदिर निर्माण शुरु किया गया उसी तरह यहां सरकार की मंजूरी का इंतजार किया जाना चाहिेए। इस पर व्यवस्था संभाल रहे कुछ लोगों और अध्यक्ष सुनील जैन ने आरोप लगाने शुरु कर दिये कि मूल समिति की जिद से मंदिर का नवनिर्माण नहीं हो पा रहा है। उन्होंने स्थानीय लोगों और समिति के सदस्यों को बरगलाया कि मंदिर के निर्माण में स्वर्गीय पंडित कस्तूरचंद जी का परिवार आड़े आ रहा है, इसलिए मंदिर का प्रबंधन उनके हाथ से छीन लिया जाए।ये भी कहा गया कि मूल समिति की स्थापना मुमुक्षु पंथ के लोगों ने की थी इसलिए मुनिभक्तों को उसे स्वीकार नहीं करना चाहिए। जबकि स्थापना से लेकर अभी तक इस तरह का कोई विवाद नहीं था।

    मध्यप्रदेश फार्मेसी काऊंसिल के अध्यक्ष और समिति के वर्तमान अध्यक्ष संजय जैन का कहना था कि श्री महावीर कुंदकुंद दिगंबर जैन वाचनालय एवं पुस्तकालय समिति ने इस सार्वजनिक स्थल के निर्माण के लिए सरकार के विभिन्न मंचों पर सहमति बना ली है जिस दिन सरकार मंदिरों के बारे में कोई फैसला करेगी यहां का भी गतिरोध टूट जाएगा और वाचनालय के साथ मंदिर भी भव्य बन जाएगा। बताया जाता है कि कार्यकाल समाप्त होने की तिथि सामने देख सुनील जैन ने एक पुरानी बंद पड़ी मिलते जुलते नाम वाली समिति की खाना पूर्ति करवाई और उसे असली समिति बताने लगे। इस समिति का नाम  श्री 1008 सुपार्शनाथ दिगंबर जैन समिति है जिसका रजिस्ट्रेशन क्रमांक 1402/1992है।इस समिति का कार्यालय चेतक ब्रिज की रचनानगर साईड है। ये समिति बी-83 के पते पर किसी अन्य व्यक्ति ने पंजीकृत करवाई थी और इस समिति का कस्तूरबा नगर जैन मंदिर से कोई भी लेना देना नहीं है।इसके रजिस्ट्रेशन के वक्त मंदिर का कोई अस्तित्व नहीं था।

           मंदिर निर्माण की ललक रखने वाले भोले भाले श्रद्धालुओं की आंखों में धूल झोंककर जो समिति आनन फानन में तैयार की गई उसकी नकल की पोल पहली बैठक में ही खुल गई। आरटीआई से प्राप्त जानकारी में साफ दिख रहा है कि किस तरह एक ही व्यक्ति ने फर्जी दस्तखत करके समिति को अद्यतन किया है । इसकी आपराधिक जांच भी चल रही है। संजय जैन ने बैंक मैनेजर को जब सारी जानकारी दी तो उन्होंने खाता सीज कर दिया। समस्या ये थी कि ये बैंक खाता अस्थायी उपसमिति के नाम से खोला गया था और उसकी केवाईसी में श्री महावीर कुंदकुंद दिगंबर जैन वाचनालय एवं पुस्तकालय समिति का पैन नंबर दर्ज किया गया था। समिति के सभी सदस्य समिति और उपसमिति दोनों के भी सदस्य थे इसलिए पहले किसी को कोई आपत्ति नहीं थी। बताते हैं कि रोक लगवाए जाने के बाद सुनील जैनाविन ने बैंक मैनेजर को धमकाया और कहा कि वे खाते का संव्यवहार जारी ऱखें क्योंकि खाते में रखा लगभग सवा करोड़ रुपया सदस्यों के प्रयासों से  ही एकत्रित हुआ है। मूल समिति के दस्तावेजों में हेरफेर करके एक फर्जी समिति खड़ी करके फंड पर कब्जा जमाने की ये कोशिश धोखाघड़ी के दायरे में आती है इसलिए संजय जैन ने इसकी शिकायत एसडीएम एमपीनगर श्री सतीश गुप्ता को भी की।  पुलिस कमिश्नर प्रणाली चालू होने के बाद राजस्व संबंधी धोखाघड़ी पर भी राजधानी पुलिस गभीरता से निगरानी कर रही है। जाहिर है गोविंदपुरा पुलिस की जांच में चोर दरवाजे से फंड पर कब्जा और फिजूलखर्ची करने की असली कहानी लोगों के सामने आ जाएगी।

           कस्तूरबानगर जैन मंदिर से जुड़े आम नागरिकों का कहना है कि सुनील जैन अपना रौब जमाने के लिए खुद को महापौर का खासमखास बताते हैं। जबकि वे नगर निगम के एक ब्लैकलिस्टेड ठेकेदार हैं जिन्हें घटिया बिजली का माल सप्लाई के कारण प्रतिबंधित किया गया था। बताते हैं कि वे मंदिर समिति के फंड से निर्माण का काम महापौर से जुड़े ठेकेदारों को दिलवाते रहे हैं। उनकी इस शैली का लाभ मंत्री और स्थानीय विधायक विश्वास सारंग के कई करीबी भी उठाते रहे हैं। पीड़ितों का कहना है कि सुनील खुद को एक बड़े समाचार पत्र समूह के मालिकों का फंड मैनेजर बताकर प्रभाव जमाते हैं। मंदिर समिति से जुड़े लोग ये सब जानते हैं लेकिन वे खुलकर विरोध नहीं कर पा रहे हैं। मंदिर के फंड पर कब्जा जमाने के लिए सुनील ने समानांतर बनाई गई समिति का चुनाव करवाने की तैयारी कर डाली जबकि मूल मंदिर समिति से इसकी कोई अनुमति नहीं ली गई। श्री महावीर कुंदकुंद दिगंबर जैन वाचनालय एवं पुस्तकालय समिति ने बाकायदा नोटिस चिपकाकर इस पर आपत्ति जताई और पुलिस से अनुरोध किया कि इस गैरकानूनी घुसपैठ को रोका जाए क्योंकि इससे शांति भंग होने की संभावना है। पुलिस ने आनन फानन में कार्रवाई की है। संजय जैन ने राजधानी में जैन समाज की प्रतिनिधि संस्था श्री चौक जैन मंदिर कमेटी ट्रस्ट से भी हस्तक्षेप करने का अनुरोध किया है। इस पर चौक कमेटी के अध्यक्ष मनोज जैन बांगा ने कहा कि दोनों पक्ष आपस में मिलजुलकर विवाद को सुलझा लें यदि समाज के लोग अनुरोध करेंगे तो चौक ट्रस्ट भी इसमें हस्तक्षेप करेगा। मामला अब पुलिस और अदालत की चौखट तक पहुंच गया है। जाहिर है इस विवाद ने न केवल जैन समाज बल्कि सभी धार्मिक संस्थाओं में पनप रही लूटपाट और अराजकता की ओर सरकार का ध्यान आकर्षित कराया है।

            धार्मिक संस्थाओं में विधि का पालन न किए जाने से दान दाताओं की भी अनदेखी हो रही है। परमार्थिक दान को आयकर अधिनियम में कई प्रकार की छूट प्रदान की गई है। इसके बावजूद मंदिर के फंड में दान करने वाले नागरिकों को छूट का लाभ नहीं मिल पा रहा है। टैक्स की चोरी और अनियमित लेखों को देखकर चार्टर्ड एकाऊंटेंट श्री नागेन्द्र पवैया ने आपत्ति दर्ज कराई थी और अंकेक्षण का कार्य करने इंकार कर दिया था। उनका कहना था कि मंदिर की प्रभारी समिति के सदस्य नकद आठ लाख रुपए तक अपने पास रखते हैं जो नियमानुसार नहीं है। मंदिर समिति को हाथखर्च के लिए पच्चीस हजार रुपए तक रखने की छूट होती है क्योंकि दान राशि की सीमा बीस हजार रुपए तक निर्धारित है। जैसे ही दान प्राप्त हो उसे समिति के बैंक खाते में जमा कराया जाना चाहिए। मंदिर के खर्चों के बिल और वाऊचर भी आडिट में सामने रखे जाने चाहिए। इस तरह की वित्तीय अनियमिताओं की ओर जब समिति का ध्यान आकर्षित किया गया तो सुनील जैनाविन और उनके कुछ सहयोगी कहने लगे कि हमने कोई घोटाला थोड़ी कर लिया है। जब उनसे कहा गया कि दान का पैसा खाते में जमा क्यों नहीं किया गया था तो उनका कहना था कि वे भूल गए थे। एक सदस्य ने तो अहसान जताते हुए ये भी कहा कि उन्होंने अपनी व्यक्तिगत एफडी तुड़वाकर समिति के खाते में धनराशि जमा कराई है जबकि ऐसा करने की नौबत क्यों आई इस पर समिति के सदस्य खामोश हैं। जाहिर है कि ये खामोशी जैन समाज के भीतर खदबदाते आक्रोश की आहट भी दे रही है। ऩई पीढ़ी के धर्मानुरागी जिस तरह दान देने में उदार हैं उसी तरह वे किसी अनियमितता के भाव को तिरस्कार की नजर से देखते हैं। समय आ गया है कि जब समाज के जिम्मेदार लोगों को गड़बड़ियां सुधारने के लिए आगे आना होगा।उत्तर प्रदेश में तो योगी जी की सरकार जन धन के अतिक्रमणकारियों का मुफीद इलाज कर रही है लेकिन मध्यप्रदेश की नौकरशाही में अभी सुशासन का जज्बा भरने की सख्त जरूरत है।

  • जांबाज पत्रकार तारेक फतेह को नहीं तोड़ पाए जिया

    जांबाज पत्रकार तारेक फतेह को नहीं तोड़ पाए जिया

    के. विक्रम राव

    पाकिस्तान हमेशा से ही अपने इस मशहूर पत्रकार की मौत चाहता रहा। कल ( 24 अप्रैल 2023 ) तारेक फतेह चले गए। कैंसर से रुग्ण थे। टोरंटो (कनाडा) में खाके सिपुर्द हो गए। वे 73 साल के थे। भारतीय मुसलमान घोर नफरत करते थे तारेक फतेह से क्योंकि वे शरीयत में बदलाव के पक्षधर थे। कराची में जन्मे (20 नवंबर 1949) तारेक फतेह सदैव पाकिस्तान के खिलाफ रहे। वे अखंड भारत के समर्थक थे। उनकी मां सुन्नी थी, मुंबई की। पत्नी नरगिस शिया, गुजराती दाऊदी बोहरा। स्वयं को फतेह बड़ी साफगोई से किस्मत का शिकार बताते थे। उनके पिता भी अन्य मुसलमानों की तरह जिन्ना की बात मानकर नखलिस्तान की तलाश में इस्लामी पाकिस्तान आए। मगर वह “मृगमरीचिका” निकली। “मैं पाकिस्तानी था। अब कनाडा का हूं। पंजाबी मुस्लिम कुटुंब का था, जो पहले सिख था। मेरा अकीदा इस्लाम में है, जिसकी जड़े यहूदी मजहब में रहीं।” अपनी जवानी में फतेह मार्क्सवादी छात्र नेता रहे। जैव रसायन में स्नातक डिग्री ली। पत्रकार के रूप में कराची पत्रिका “सन” के रिपोर्टर थे। जनरल जियाउल हक की सैन्य सरकार ने उन्हें दो बार जेल में डाला। देशद्रोह का आरोप लगाया।

    तारेक फतेह भारतीय मुसलमानों को राय देते रहे : “अपनी आत्मा को इस्लामी बनाओ। दिमाग को नहीं। गरूर पर हिजाब डालो, न कि शकल पर। बुर्का से सर ढको, चेहरा नहीं।” तारेक ने एंकर रजत शर्मा को “आपकी अदालत” में बताया था कि बाबर तो भारतीय इतिहास का कबाड़ था। वह हिंदुस्तानियों को काला बंदर मानता था। इसीलिए जब राम मंदिर का निर्माण प्रारंभ हुआ तो तारेक हर्षित थे। उस आधी रात, अगस्त माह 2018, में फतेह बारह हजार किलोमीटर दूर टोरंटो में अपने बिस्तर पर तहमत पहने नाचे थे। तभी टीवी पर खबर आई थी कि उसी सुबह नई दिल्ली नगरपालिका ने सात दशकों बाद औरंगजेब रोड का नाम बदलकर डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम पर रख दिया था। एक ऐतिहासिक कलंक मिटा था, फतेह की राय में। अपने लोकप्रिय टीवी शो में फतेह हमेशा ब्रिटिशराज द्वारा मुगलों के महिमा मंडन के कठोर आलोचक रहे। वे कई बार कह भी चुके थे कि जालिम औरंगजेब का नामोनिशान भारत से मिटाना चाहिए । फिर उनके सुझाव को पूर्वी दिल्ली से लोकसभा के भाजपाई सदस्य महेश गिरी ने गति दी। अपने भाषण में फतेह ने कहा भी था : “आज केवल हिंदुस्तानी ही इस्लामिक स्टेट के आतंक को नेस्तनाबूद कर सकता है। अतः क्या शुरुआत में आप नई दिल्ली में औरंगजेब रोड का नाम दारा शिकोह रोड रख सकते हैं ?” उनका सवाल था। अपने सगे अग्रज दारा शिकोह को औरंगजेब ने लाल किले के निकट हाथी से रौंदवाया था। उनका सर काटकर तश्तरी में रखकर पिता शाहजहां को नाश्ते के साथ परोसवाया था। मोदी सरकार ने तीन साल लगा दिए औरंगजेब रोड का नाम बदलने में।

    तारेक फतेह अपने टीवी कार्यक्रम में अक्सर कहा करते थे कि वे बलूचिस्तान को आजाद राष्ट्र के रूप में देखना चाहते हैं। पाकिस्तान ने उसे गुलाम बना रखा है। वे कश्मीर पर पाकिस्तान के हिंसक हमलों की हमेशा भर्त्सना करते रहे। मूलतः वे विभाजन के विरुद्ध रहे। अपनी पुस्तक “यहूदी मेरे शत्रु नहीं हैं” में फतेह ने स्पष्ट लिखा था कि भ्रामक इतिहास के फलस्वरुप यहूदियों के साथ अत्याचार किया गया। वे मुंबई में 9 नवंबर 2008 के दिन यहूदी नागरिकों पर गोलीबारी से संतप्त थे। उन्होंने इस वैमनस्य की जड़ों पर शोध किया। उन्होंने पाया कि यहूदी से उत्कट घृणा ही इस्लाम का मूल तत्व है। वे समाधान के हिमायती थे।

    तारेक फतेह ने इस्लामी राष्ट्रों के द्वारा असहाय मुसलमानों की उपेक्षा को मजहबी पाखंड करार दिया था। वे मानते थे कि रोहिंग्या मुसलमान न्याय के हकदार हैं, उपेक्षा के पात्र नहीं। एक मानवीय त्रासदी आई है जहां एक पूरी आबादी पर सबसे जघन्य अत्याचार ढाये जा रहे हैं। वे एक जातीय और धार्मिक अल्पसंख्यक हैं। म्यांमार में दसियों हज़ार रोहिंग्या मुसलमान एक तानाशाह की सेना द्वारा क्रूर कार्रवाई में खदेड़े गये। वे शरण मांग रहे हैं, विशेषतः मुस्लिम देशों से। मगर ये सारे इस्लामी राष्ट्र खामोश हैं। तारेक फतेह ने तत्कालीन पाकिस्तानी राष्ट्रपति परवेज मुशर्रफ की इस्लामाबाद में लाल मस्जिद तथा उसके अंदर आतंकवादियों पर कार्रवाई के पीछे की राजनीति की जांच की मांग की थी। उनकी दृष्टि में यह साजिश थी। तारेक फतेह ने लिखा था : “जनरल मुशर्रफ़ और उन्हें सहारा देने वाले अमेरिकियों, दोनों को यह महसूस करना चाहिए कि मलेरिया से लड़ने के लिए दलदल को खाली करने की ज़रूरत है, न कि अलग-अलग मच्छरों को मारने की। पाकिस्तान में इस्लामी कट्टरवाद से लड़ने का सबसे अच्छा तरीका ही है कि फर्जी मतदाता सूचियों को खत्म करें और लोकतांत्रिक चुनाव आयोजित किया जाए। निर्वासित राजनेताओं को देश में लौटने दिया जाए।”

    मगर तारेक फतेह को देशद्रोही कहा गया। अखिल भारतीय फैजान-ए-मदीना परिषद ने एक निजी समाचार चैनल पर तारेक फतेह के आकर्षक टेलीविजन कार्यक्रम ‘फतेह का फतवा’ पर तत्काल प्रतिबंध लगाने की मांग की थी। बरेली- स्थित एक मुस्लिम संगठन ने कथित रूप से अपने टीवी कार्यक्रम के माध्यम से “गैर-इस्लामिक” विचारों को बढ़ावा देने के लिए तारेक फतेह का सिर कलम करने वाले को 10 लाख रुपये के “इनाम” की घोषणा की थी ।

    फतेह को श्रद्धांजलि देते हुये टीवी समीक्षक शुभी खान बोली : “थोड़ी देर तो समझ नहीं पाई कि क्या कहूँ ? क्या सोंचू ? टीवी चैनल्स पर हम दोनों का सच के लिए और बहुत बार एक दूसरे के लिए लड़ना तो याद आया। तारेकभाई आपकी मशाल बुझी नहीं हैं। अब यह मुस्लिम युवाओं द्वारा ज्यादा तेज जलेगी”, कहा खान ने। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के साप्ताहिक “पांचजन्य” ने लिखा : “उनके योगदान को हमेशा याद रखा जाएगा। तारेक फतेह इस्लामी कट्टरता के घोर विरोधी थे।” हम IFWJ के श्रमजीवी पत्रकार सदस्य साथी तारेक फतेह के सम्मान में अपने लाल झंडा झुकाते हैं। उनकी पत्रकार-पुत्री नताशा के लिए शोक संवेदनायें ! सलाम योद्धा तारेक ! तुम्हारी फतेह हो !!

    K Vikram Rao

    Mobile : 9415000909

    E-mail: k.vikramrao@gmail.com

  • सिंधी समुदाय ने पुरुषार्थी बनकर दिखायाः मोहन भागवत

    सिंधी समुदाय ने पुरुषार्थी बनकर दिखायाः मोहन भागवत

    भोपाल,31 मार्च( प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)।राष्ट्रीय स्वयंसेवक के सरसंघचालक मोहन भागवत ने कहा कि सिंधी समुदाय सब कुछ गँवा कर भी शरणार्थी नहीं बना, उसने पुरूषार्थी बन कर दिखा दिया। वे आज भोपाल में शहीद हेमू कालानी जन्म शताब्दी समारोह को संबोधित कर रहे थे। इस अवसर पर मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि अमर शहीद हेमू कालानी ने भारत को स्वतंत्र कराने के लिए अपने जीवन का बलिदान किया। उन्होंने गले में फाँसी का फंदा पहनते हुए कहा था कि मैं फिर से जन्म लूँगा और भारत को स्वतंत्र करवाऊँगा। आज यदि हम शहीदों को नहीं पूजेंगे, तो राष्ट्र के लिए जीवन का बलिदान करने के लिए कोई आगे नहीं आएगा। नई पीढ़ी के लिए शहीदों का जीवन प्रेरक है। वीर सेनानियों के साथ ही सिंध संतों की भूमि रही है। सिंधु नदी के किनारे वेदों की ऋचाएँ रची गईं। सिंध की संस्कृति काफी प्राचीन है। इस समाज ने अनेक समाज-सुधारक, सफल उद्यमी और अन्य प्रतिभाएँ देने का कार्य किया है। अपने धर्म, संस्कृति और सभ्यता के लिए मातृ-भूमि को छोड़ने के बाद भी पुन: स्थापित होकर दिखाने वाले सिंधी समाज ने व्यवसाय के क्षेत्र में तो बुद्धि और परिश्रम से योग्यता का संदेश दिया है। समाज की युवा पीढ़ी को कठोर परिश्रम के गुण के साथ ही अपनी संस्कृति, वेशभूषा और खान-पान को नहीं भूलना है। मुख्यमंत्री चौहान आज भेल दशहरा मैदान पर अमर बलिदानी हेमू कालानी जन्म-शताब्दी समारोह को संबोधित कर रहे थे।
    मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि पिछले दशक में इंदौर में बसे पाकिस्तान के सिंधु प्रांत से आए नागरिकों की वीसा अवधि समाप्त होने के बाद भी उन्हें वापसी के लिए विवश नहीं किया गया। यह समस्या संज्ञान में आते ही प्रधानमंत्री श्री मोदी ने नागरिकता संबंधी प्रावधानों को लागू करवाया। देश की स्वतंत्रता के बाद विभाजन के कारण नए भू-भाग में जाकर बसने वाले सिंधी नागरिकों सहित बाद के वर्षों में भारत आए सिंधी नागरिकों को कठिनाई उत्पन्न नहीं होने दी जाएगी। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने ऐसे नागरिकों के लिए कहा कि पूरा देश आपका ही है। मुख्यमंत्री ने अनेक सिंधी व्यंजनों का उल्लेख करते हुए सिंधी समाज के साथ स्थापित अपनेपन के रिश्तों का उल्लेख किया। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने सिंधी समाज के हित में अनेक घोषणाएँ भी की।
    मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि भोपाल की मनुआभान टेकरी के साथ ही प्रदेश के जबलपुर और इंदौर में भी अमर शहीद हेमू कालानी की प्रतिमा की स्थापना की जाएगी। सिंधी संस्कृति प्राचीनतम संस्कृति है। इसकी विशेषताओं को दिखाने वाले एक संग्रहालय का निर्माण राजधानी भोपाल में किया जाएगा। सिंधी विस्थापितों को कम कीमत पर पट्टे प्रदान करने के लिए मापदंड निर्धारित किए गए हैं। इसके अनुसार प्रदेश के विभिन्न स्थानों पर पात्र सिंधी विस्थापितों को पट्टे प्रदान करने का कार्य किया जाएगा। विशेष शिविर लगा कर पात्र सिंधी विस्थापितों को जमीन का मालिकाना हक दिया जाएगा।
    मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि लद्दाख स्थित सिंधु नदी के घाट पर प्रतिवर्ष जून माह में होने वाले सिंधु दर्शन उत्सव में प्रदेश के यात्रियों को भिजवाने की व्यवस्था राज्य सरकार ने प्रारंभ की थी। कोरोना और अन्य कारणों से इसे निरंतरता नहीं मिली। इस वर्ष मुख्यमंत्री तीर्थ-दर्शन योजना में प्रति यात्री 25 हजार रूपए की राशि सिंधु दर्शन उत्सव में ले जाने के लिए प्रदान की जाएगी। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि सिंधी साहित्य अकादमी के बजट को बढ़ाकर पाँच करोड़ रूपए वार्षिक किया जाएगा।
    मुख्यमंत्री श्री चौहान ने समारोह में कहा कि सिंधी समाज की वर्षों पुरानी मांग पूरी करते हुए पट्टे प्रदान करने के लिए विधिवत प्रीमियम की दरों में विशेष छूट का निर्णय राज्य सरकार ने लिया है। इसके अनुसार 45 वर्ग मीटर तक नि:शुल्क पट्टा दिया जाएगा। वर्तमान में 150 वर्ग मीटर तक भूमि के क्षेत्र फल के लिए 5 प्रतिशत की दर लागू है, जिसे घटा कर एक प्रतिशत किया गया है। इसी तरह 150 वर्ग मीटर से 200 वर्ग मीटर तक प्रीमियम की वर्तमान 10 प्रतिशत की दर को घटा कर भी एक प्रतिशत करने का निर्णय लिया गया है। व्यावसायिक उपयोग के भूखंड के लिए 20 वर्ग मीटर तक वर्तमान में 25 प्रतिशत की दर प्रचलित है, इस श्रेणी में अब नई दर सिर्फ 5 प्रतिशत होगी। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि भोपाल, सीहोर मुख्य मार्ग पर भूखंड की स्थिति में 1614 वर्गफुट आवासीय क्षेत्र फल के लिए यदि एक करोड़ 8 लाख रूपए बाजार मूल्य है, तो देय राशि एक लाख 8 हजार रूपए मात्र होगी। इसी तरह 2152 वर्गफुट आवासीय के‍लिए यदि एक करोड़ चवालीस लाख बाजार मूल्य होने पर, एक लाख चवालीस हजार रूपए की राशि देय होगी। इसके अलावा 215 वर्ग फुट के व्यावसायिक दुकान के लिए 14 लाख 40 हजार बाजार मूल्य की स्थिति में प्रीमियम में छूट के प्रावधान के अंतर्गत मात्र 72 हजार रूपए की राशि देनी पड़ेगी।
    मुख्यमंत्री श्री चौहान ने संबोधन का प्रारंभ सिंधी भाषा में उपस्थित नागरिकों, भांजे-भांजियों संबोधित कर किया। श्री चौहान ने विभिन्न सिंधी व्यंजनों की विशेषताएँ भी बताईं। मुख्यमंत्री ने गुरूवार को इंदौर में हुई बावड़ी की घटना में दिवंगत सिंधी भाषी और अन्य नागरिकों के असामयिक निधन पर दुख व्यक्त करते हुए श्रद्धांजलि अर्पित की।
    राष्ट्रीय स्वयंसेवक के सरसंघचालक श्री मोहन भागवत ने कहा कि सिंधी समुदाय द्वारा स्वतंत्रता आंदोलन में दिए गए महत्वपूर्ण योगदान का उल्लेख कम होता है। शहीद हेमू कालानी ने बलूचिस्तान जाने वाली शस्त्रों से लदी उस रेल को पलटाने का प्रयास किया था जो, क्रांतिकारियों की हलचल को दबाने के लिए जा रही थी। शहीद हेमू अपने कार्य के परिणाम भी जानते थे। पकड़े जाने के बाद उन्होंने अपने मित्रों के नाम उजागर नहीं किए। उनका मानना था कि जीवन की सार्थकता बलिदान देने में है। तरूण आयु में किए गए उनके बलिदान की गूँज मुम्बई रेसीडेंसी से लेकर विश्व के देशों में हुई। उन्होंने हमें जीवन की राह दिखा कर जीवन दे दिया। शहीदों ने प्रामाणिकता के साथ अपने स्व को बचाने के लिए जीवन समर्पित किया। स्वराज का अर्थ नागरिकों को समझाया। शहीद हेमू कालानी की अटूट देश-भक्ति को ध्यान में रख कर संकुचित स्वार्थ को छोड़ कर उनके जैसा होने का प्रयास और एक समाज, एक देश की भावना, हम सभी को आत्मसात करना है।
    श्री भागवत ने कहा कि हेमू जी का मानना था कि हम तो चले जाएंगे, हम रहेंगे नहीं लेकिन भारत जरूर रहेगा। इसी आदर्श को लेकर संत कंवरराम जैसे देशभक्त भी बलिदान के लिए आगे आए। उन्होंने कहा कि सिंधी समुदाय ने भारत नहीं छोड़ा था, वे भारत से भारत में ही आए थे। सिंधु संस्कृति में वेदों के उच्चारण होते थे। हमने तो भारत बसा लिया लेकिन वास्तव में राष्ट्र खंडित हो गया। आज भी उस विभाजन को कृत्रिम मानते हुए सिंध के साथ लोग मन से जुड़े हैं। सिंधु नदी के प्रदेश सिंध से भारत का जुड़ाव रहेगा। वहाँ के तीर्थों को कौन भूल सकता है। श्री भागवत ने कहा कि आज भी अखंड भारत को सत्य और खंडित भारत को दु:स्वप्न माना जा सकता है। सिंधी समुदाय दोनों तरफ के भारत को जानता है। आदिकाल से सिंध की परम्पराओं को अपनाया गया। भारत ऐसा हो जो संपूर्ण विश्व को सुख-शांति देने का कार्य करें। तमाम उतार-चढ़ाव होंगे, लेकिन हम मिटेंगे नहीं। हम विश्व के नेतृत्व के लिए सक्षम हैं। सारे समाज के साथ कदम से कदम मिला कर चलना है। यह चिंतन आज की पीढ़ी को भी करना चाहिए कि हम कौन हैं और हमें क्या बनना है। विविधता में एकता को देखें और स्व के सच्चे अर्थ को समझ कर जीवन की दिशा तय करें।
    श्री भागवत ने डॉ. हेडगेवार और अन्य विचारकों के माध्यम से संपूर्ण दुनिया को दिखाए गए कल्याण के मार्ग का भी उल्लेख किया। उन्होंने सिंधी समुदाय द्वारा सनातनी परम्परा में रहने और अपने रीति-रिवाजों को कायम रख कर अपनी खुदी को बनाने की आवश्यकता बताई। उन्होंने कहा कि ऐसे तत्वों को असफल करना है, जो लोगों को झगड़ों के लिए उकसाते हैं। जीवन के विभिन्न क्षेत्रों में सद्गुणों को उजागर करने की जरूरत है। श्री भागवत ने इंदौर में कल हुई दुर्घटना का उल्लेख करते हुए कहा कि उन्हें गंगाजी के दर्शन के समय यह खबर मिली और तभी गंगाजी को प्रणाम कर दिवंगत लोगों को श्रद्धांजलि भी दी।
    कार्यक्रम को महामंडलेश्वर श्री हंसराम उदासीन और भारतीय सिंधु सभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री लधाराम नागवानी ने भी संबोधित किया। समारोह के संयोजक भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश महामंत्री श्री भगवानदास सबनानी ने स्वागत उद्बोधन दिया। युवा कलाकारों ने शहीदों के बलिदान पर केन्द्रित नृत्य नाटिका प्रस्तुत की। मंच पर शदाणी दरबार रायपुर के प्रमुख श्री युद्धिष्ठिर लालजी, श्री अशोक सोहनी, साधु समाज के श्री प्रियादास, सांसद श्री शंकर लालवानी, विधायक श्री अशोक रोहाणी, प्रख्यात गायक श्री घनश्याम वासवानी, बालक मंडली कटनी के वरिष्ठ गायक कलाकार श्री गोवर्धन उदासी, श्री दिलीप उदासी, राष्ट्रीय सिंधी भाषा विकास परिषद के उपाध्यक्ष श्री मोहन मंगनानी बैंगलुरु, निदेशक डॉ. रवि टेकचंदानी नई दिल्ली, अखिल भारतीय सिंधी बोली साहित्य सभा की महासचिव श्रीमती अंजलि तुलसियानी, मध्यप्रदेश सहित छत्तीसगढ़, कर्नाटक, महाराष्ट्र, गुजरात, राजस्थान, उत्तरप्रदेश आदि से आए सिंधी पंचायतों के पदाधिकारी, भोपाल के विभिन्न संगठन के सदस्य और बड़ी संख्या में सिंधी समाज के नागरिक उपस्थित थे।
    मुख्यमंत्री श्री चौहान और श्री मोहन भागवत ने समारोह स्थल पर लगी स्वतंत्रता संग्राम में सिंधी समाज के योगदान पर केंद्रित प्रदर्शनी देखी। प्रदर्शनी में सिंधी संतों, महापुरूषों, स्वतंत्रता सेनानियों, साहित्यकारों, सेना के अधिकारियों और समाज सुधारकों के चित्रों के साथ सिंध की परम्पराओं पर केन्द्रित चित्र भी प्रदर्शित किए गए।
    मुख्यमंत्री श्री चौहान और अतिथियों ने भारत में रक्त कैंसर के उपचार में अस्थिमज्जा प्रत्यारोपण के क्षेत्र के विशेषज्ञ डॉ. सुरेश एच. आडवाणी मुम्बई सहित खेल, साहित्य, समाज सेवा, चिकित्सा, सिनेमा और कला क्षेत्र की प्रमुख विभूतियों को सम्मानित किया। इनमें सर्वश्री सी.पी. गुरनानी, इंदर जयसिंघानी, राम बख्शानी, गायक महेश चंदर, लेखक राम जवाहरानी, प्रसिद्ध अधिवक्ता महेश राम जेठमलानी, श्रीमती अनीता गुरनानी, सतराम रामानी और मनोहर तेजवानी शामिल हैं। अतिथियों ने डॉ. सुधीर आजाद की नाट्य कृति “शेरे सिंध हेमू कालानी”, श्री राजेश वाधवानी के संपादन में प्रकाशित “हेमू कालानी की गौरव गाथा” और श्री राजेन्द्र प्रेमचंदानी की पुस्तक “सिंध के क्रांतिकारी : कही-अनकही गौरव गाथा” का विमोचन किया। संचालन श्री राजेश कुमार वाधवानी और श्रीमती कविता ईसरानी ने किया।

  • फेब्रिकेटेड शादियों से बढ़ रहे जैन समाज में तलाक के मामले

    फेब्रिकेटेड शादियों से बढ़ रहे जैन समाज में तलाक के मामले

    भोपाल,19 दिसंबर (प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)। दिगंबर जैन समाज में झूठी शान और दिखावे की वजह से कराई गई शादियां तलाक की वजह बन रहीं हैं। भोपाल में चल रहे जैन समाज के परिचय सम्मेलन में ये बात प्रमुखता से नजर आ रही है। अधिक प्रविष्टियां दिखाने के प्रलोभन में आयोजन के संचालकों ने जिन लोगों के आवेदन बुलाए हैं उनमें लोफर और बदनाम लड़के लड़कियों की भीड़ इकट्ठा हो रही है। ये अपने बारे में बढ़ा चढ़ाकर जो बातें बोलते  हैं उससे प्रभावित होकर शादियां तो हो जाती हैं लेकिन कुछ ही दिनों बाद मनमुटाव के चलते ये शादियां टूट जाती हैं।पत्रिका के तलाकशुदा युवाओं वाले सेक्शन में बढ़ती संख्या को देखकर पहली ही नजर में इस मामले की गंभीरता को समझा जा सकता है।ऐसे कई मामलों में लड़कियां घर के जेवर लेकर भाग गईं और अदालतों में मंहगे हर्जाने की मांग करते हुए मुकदमे दर्ज कराए हैं।

    अदालत के मीडिएशन सेंटर से जुड़े वकीलों से बात करने पर इस मामले की भयावहता सामने आ रही है। वकील आभा जैन बताती हैं कि जरूरत से ज्यादा उम्मीद युवाओं में तलाक की प्रमुख वजह बन रही है। जैन समाज में लड़की को मायके से मिलने वाला स्त्री धन हो या ससुराल से मिलने वाली जायदाद ये दोनों झगड़े की वजह होती हैं। वर्ष 2005 में बना संपत्ति का अधिकार भी झगड़े की वजह बन रहा है।जो फेब्रिकेटेड शादियां परिचय सम्मेलन की झूठी शान बढ़ाने के लिए कराई जा रहीं हैं उनमें शादी की वजह प्रेम या सम्मान नहीं है बल्कि लड़के लड़की का ऊंचा पैकेज और धनाड्य परिवारों की प्रतिष्ठा प्रमुख देखी जा रही है। लड़की को भारी जेवरात चढ़ाए जाते हैं जो लड़की और उसके परिजनों का मानसिक संतुलन बिगाड़ देते हैं। कई मामलों में लड़कियां अपने भाईयों से ज्यादा जायदाद हड़पने के लिए स्वयं माता पिता से अधिक दहेज दिए जाने की मांग करती हैं। जो लड़कियां आत्म निर्भर हैं उन्हें ससुराल की परिस्थितियों और लड़के की संपदा दोनों में खोट नजर आती है। वे शादी करते ही पति से कहने लगती हैं कि तुम्हारी हैसियत ही क्या है। जबकि 25-28 साल से लड़के तब अपने जीवन की शुरुआत ही कर रहे होते हैं।

    जब ये केस अदालत पहुंचते हैं तो वकीलों का धंधा शुरु  हो जाता है। वकील न तो तलाक होने देते हैं और न ही शादी को सफल बनाने का उपाय करते हैं। लड़कियों की शारीरिक और मानसिक कमियों को छुपाकर की गई शादियों में भी वकील जब ज्यादा मुआवजा दिलाने का लालच दिखाकर ज्यादा फीस कमाने का उपाय तलाशते हैं तो लड़कियों का दिमाग  ही फिर जाता है। फिर वे लड़कों पर ऐसे आरोप जड़ने लगती हैं जो हकीकत से कोसों दूर होते हैं।

    परिचय सम्मेलन के तलाकशुदा लड़के लड़कियों के सेक्शन में जो युवा प्रस्तुत हुए हैं उन सभी की कमोबेश इसी तरह की समस्याएं सामने आई हैं। कई मामलों में एक्स्ट्रा मेरिटल अफेयर, एक दूसरे के प्रति सम्मान में कमी, कम्युनिकेशन की समस्या, प्यार और इंटिमेसी की कमी, प्रमुख कारण हैं। लड़कियां जिस तरह की संपदा मिलने की उम्मीद कर रहीं हैं उन शर्तों को कोई राजकुमार युवक नहीं बल्कि कोई डाकू ही पूरा कर सकता है। ये जैन समाज में जगाई गई झूठी शान और लालच भरी सोच की वजह से हो रहा है। परिचय  सम्मेलन से जुड़े लोग समाजसेवा की भावना छोड़कर जिस तरह रिकार्ड बनाने की सोच से काम कर रहे हैं उससे ये समस्या बढ़ती जा रही है।

  • राम सीता की तरह समर्पित युवाओं को हमारा शुभाशीष बोले किशन सूर्यवंशी

    राम सीता की तरह समर्पित युवाओं को हमारा शुभाशीष बोले किशन सूर्यवंशी

    अखिल भारतवर्षीय दिगंबर जैन परिचय सम्मेलन का शुभारंभ

    विदेशों से आए युवाओं ने कहा हमें संस्कारित जीवनसाथी चाहिेए,दो दिन चलेगी परिचय की बेला

    भोपाल,03 दिसंबर,(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर ).नगर निगम भोपाल में सभापति किशन सूर्यवंशी का कहना है कि जिस तरह भगवान राम और माता सीता की जोड़ी आदर्श मानी जाती है उसी तरह भारतीय संस्कृति में संस्कारित युवा भी हमारे आदर्श हैं। चाहे परिस्थितियां कितनी भी विपरीत हों जीवनसाथी का हाथ पकड़कर चलने वाले युवाओं को हम ह्दय से आशीर्वाद देते हैं और उनके सफल जीवन की कामना करते हैं। अखिल भारतवर्षीय दिगंबर जैन समाज के परिचय सम्मेलन के शुभारंभ अवसर पर पहुंचे श्री सूर्यवंशी ने कहा कि जैन संतों की त्याग और तपस्या की आराधना करने वाला जैन समाज अपने नवाचारों के लिए पहचाना जाता है। जैन समाज ने परिचय की श्रंखला शुरु करके युवाओं की बड़ी समस्या का समाधान खोज निकाला है। इस परंपरा का अनुकरण समाज के हर तबके को करना चाहिए।

     परिचय सम्मेलन का आज राजधानी भोपाल में भव्य शुभारंभ हुआ। देश विदेश और प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों से आए युवाओं ने इस प्रतिष्ठापूर्ण आयोजन में अपने जीवन साथी की तलाश करते हुए परिचय की प्रक्रिया शुरु कर दी है। ये आयोजन आज और कल दो दिन चलेगा। रविवार को अवकाश होने और भोपाल में आज गैस त्रासदी दिवस पर स्थानीय अवकाश होने से आयोजन स्थल पर खासी चहल पहल देखी जा रही है।सकल दिगंबर जैन समाज भोपाल का ये आयोजन तात्याटोपे नगर खेल परिसर के नजदीक श्री महावीर दिगंबर जैन मंदिर,स्मार्ट सिटी,टिन शेड भोपाल में चल रहा है।इस अवसर पर प्रकाशित चयन पत्रिका के विमोचन के अवसर पर श्री सूर्यवंशी के साथ पूर्व आईएएस श्री सुरेश जैन,पूर्व आईपीएस श्री आर.के.दिवाकर भी उपस्थित थे।सभी अतिथियों का शाल और श्रीफल से अभिनंदन भी किया गया।

        श्री सूर्यवंशी ने कहा कि आयोजन समिति के अध्यक्ष प्रो.एन.सी.जैन कॉलेज में उनके शिक्षक रहे हैं।उनके दिए संस्कारों ने हमारी जीवनराह प्रशस्त की है। वे अब जैन युवक युवतियों का मार्गदर्शन कर रहे हैं।जाहिर है कि उनके मार्गदर्शन में हो रहा ये परिचय सम्मेलन समाज में नए प्रतिमान गढ़ेगा। उन्होंने कहा कि आमतौर पर शादियों को व्यक्तिगत आयोजन माना जाता है लेकिन ऐसे कुशल मार्गदर्शन में जुड़ने वाले परिवार, समाज का ताना बाना मजबूत करते हैं। ये परिचय सम्मेलन जिस तरह के संस्कार लेकर चल रहा है उसे देखकर मुझे पूरा विश्वास है कि यहां भगवान राम और माता सीता की तरह आदर्श जोड़ियां ही बनेंगी।इस तरह के आदर्श परिवार गढ़ने वाले समाजसेवी भी निश्चित रूप से आदर के पात्र हैं। समाज में बंधुत्व फैलाने वाला यह सम्मेलन नित नई ऊंचाईयां छुए हम यही कामना करते हैं।

    परिचय सम्मेलन में आज युवक युवतियों के बायोडाटा वाली चयन पत्रिका का विमोचन किया गया.

        आयोजन समिति के अध्यक्ष प्रो.डॉ.एन.सी.जैन ने बताया कि इस आयोजन में विदेशों में कारोबार और नौकरी करने वाले युवाओं ने अब तक की सर्वाधिक भागीदारी दर्ज कराई है। मध्यप्रदेश के भी विभिन्न इलाकों से युवाओं ने अपना बायोडाटा भेजकर स्वयं को उत्कृष्ट जीवनसाथी के रूप में रेखांकित किया है। युवाओं के बायोडाटा वाली परिचय पत्रिका में जिन युवाओं ने अपनी प्रविष्टियां भेजी हैं वे सभी ऊंची पढ़ाई करके सफल नागरिक के रूप में स्थापित हो चुके हैं। कई तो देश विदेश के प्रख्यात डॉक्टर,इंजीनियर और विदेशों में कारोबार करने वाले उद्यमी हैं। युवाओं का कहना है कि हम विदेशी मुद्रा भारत भेजते हैं लेकिन हमें भारतीय संस्कृति में पले बढ़े जीवनसाथी ही चाहिए।

         राजधानी के विभिन्न क्षेत्रों में बसे जैन कारोबारी और नागरिक इस आयोजन की व्यवस्था संभाल रहे हैं। आगंतुकों के ठहरने, भोजन और अमानती सामानगृह रखने की व्यवस्था टिन शेड जैन मंदिर में की गई है। कई आगंतुक शहर के होटलों में और रिश्तेदारों के घरों पर भी रुके हुए हैं। आयोजन स्थल पर युवाओं का मेला सा लगा हुआ है।युवा लड़के और लड़कियां अपने परिजनों के साथ परिचय के इस दौर में शामिल हैं। रिश्तेदारों के सहयोग से युवाओं के व्यक्तित्व,पारिवारिक पृष्ठभूमि, कारोबारी उपलब्धियों,और युवाओं के भावी जीवन के बारे में जानकारी जुटाई जा रही है।

    कोषाध्यक्ष प्रो.डॉ.विजय जैन ने बताया कि हमें इस बार पत्रिका के लिए 1624 प्रविष्टियां मिली हैं।युवाओं के बायोडाटा का प्रारंभिक विश्लेषण करने पर पाया गया कि डॉक्टर युवक 36 युवती 41,इंजीनियर युवक 298 युवती 189,प्रोफे/एडवोकेट युवक 17 युवती 14,सी ए/सी एस युवक 28 युवती 30 ,Govt युवक 21 प्राइवेट नौकरियां करने वाले युवक 99 युवती 146 ,व्यवसाय करने वाले युवक 318 युवती 39 ,अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कारोबार या नौकरी करने वाले युवक 20, युवती 12, व अन्य युवती 198 से अधिक हैं। परिचय की पत्रिका प्रकाशन होने के बाद आयोजन स्थल तक पहुंचने वाले इससे भी अधिक युवाओं की भागीदारी भी देखी जा रही है। पत्रिका में प्रकाशन के बाद भी जिन युवक युवतियों की जानकारियां प्राप्त हो रहीं हैं उऩ्हें अब आन लाईन जारी किया जाएगा। जो युवा अपनी प्रविष्टियां समय सीमा में नहीं भेज पाए हैं उनके लिए परिचय सम्मेलन का आयोजन एक महत्वपूर्ण मंच साबित हो रहा है।

    आयोजन की व्यवस्था संभाल रहे मुख्य संयोजक अनिल जैन नयापुरा ने बताया कि पिछले 27 साल से जैन समाज के युवाओं के परिवार बसा रहे समिति सदस्यों ने इस बार कई तकनीकी सुधार किए हैं। चयन पत्रिका में युवाओं की सहूलियत के लिए रिश्तों को व्यवसायगत आधार पर पहले से छांट दिया गया है।ये सम्मेलन समाज का है इसे किसी व्यक्ति की बपौती नहीं बनाया जा सकेगा। हम आयोजन के पूरे आय व्यय का ब्यौरा शीघ्र ही सार्वजनिक कर देंगे। भविष्य में युवाओं के लिए और क्या सुविधाएं दिला सकते हैं इस पर भी विचार किया जाएगा।

       अ भा दि जैन परिचय सम्मेलन में 3 व 4 दिसम्बर में ऑनलाइन जुड़ने के लिए फेस बुक लाइव https://m.facebook.com/100086714492304/

    और you tube channel पर लाइव देखे https://youtube.com/@muktajain

    प्रवक्ता आलोक सिंघई ने बताया कि आयोजन में अध्यक्ष प्रोफेसर डॉ.एन.सी.जैन,कार्याध्यक्ष और जैन समाज की सबसे पुरानी चौक जैन मंदिर कमेटी ट्रस्ट के अध्यक्ष श्री मनोज जैन बांगा,मुख्य संयोजक श्री अनिल जैन नयापुरा,स्वागताध्यक्ष और चौक मंदिर कमेटी के पूर्व अध्यक्ष श्री अशोक जैन पंचरत्न,इंजी.वीरेन्द्र जैन मंदाकिनी, श्री धीरेन्द्र जैन निवेश नगर, महामंत्री इंजी.राकेश लहरी,महामंत्री श्री जिनेन्द्र जैन, जैन रोडवेज, महामंत्री श्री चक्रेश शास्त्री, प्रधान संपादक मुकेश चौधरी,कोषाध्यक्ष प्रो.डॉ.विजय कुमार जैन,सह कोषाध्यक्ष श्री विनोद जैन भिंड, मीडिया प्रभारी श्री अखिलेश सेठी,संपादक प्रो.डॉ.प्रसन्न जैन,श्री विकास जैन(नितिन),त्रिशला महिला मंडल की अध्यक्ष श्रीमती विजय लक्ष्मी भारिल्ल,श्री आलोक जैन मेरठ,इंजी.सुरेश जैन, राजेन्द्र जैन(शाहगढ़), विकास गोधा, सेठ कमल टड़ैया, अमन जैन काला, निशंक जैन, समेत कई अन्य पदाधिकारी और देश विदेश से आए जैन युवाओं के अभिभावकगण भी उपस्थित थे।