Category: मध्यप्रदेश

  • डॉ.मोहन यादव सरकार नहीं तो कौन चला रहा है मध्यप्रदेश

    डॉ.मोहन यादव सरकार नहीं तो कौन चला रहा है मध्यप्रदेश


    भोपाल,23 सितंबर(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)। पचास लाख युवाओं को नौकरी दिलाने का अभियान चला रहे सैडमैप की कार्यकारी निदेशक अनुराधा सिंघई(शर्मा) को इकतरफा आदेश से सस्पेंड करने वाला मामला गहराता जा रहा है। ईडी ने इस अन्याय की शिकायत मध्यप्रदेश हाईकोर्ट से की तो मध्यप्रदेश सरकार की ओर से महाधिवक्ता समेत आठ कानूनविद हाईकोर्ट में कैविएट का जवाब लेकर पहुंच गए। हाईकोर्ट ने लताड़ लगाई तो जजों को मैनेज करने के लिए सैडमैप से ही नौ लाख रुपए निकालकर मुकदमेबाजी पर खर्च कर दिए गए। मजेदार बात तो ये है कि इस अवैधानिक कार्रवाई के बारे में सूक्ष्म एवं लघु उद्योग मंत्री को भी विश्वास में नहीं लिया गया। मुख्यमंत्री डाक्टर मोहन यादव के सुशासन की जवाबदारी संभालने वालों को इस मामले में कुछ पता नहीं। सचिव नवनीत कोठारी कहते हैं मैं बता नहीं सकता। जब किसी को कुछ पता नहीं तो आखिर प्रदेश सरकार को चला कौन रहा है।


    जब सैडमैप घाटे की घाटी पर लुढ़क रहा था कर्मचारियों को दस दस महीने क तनख्वाह नहीं मिल रही थी सरकार इसे बंद करने का विचार कर रही थी तब एक कंपनी सेक्रेटरी अनुराधा सिंघई ने अपनी हिकमतअमली से संस्थान को अपने पैरों पर खड़ा कर दिया। आते ही उन्होंने जब संस्थान में जोंक की तरह लिपटे नौकरी माफिया को निकाल बाहर किया तो इन लोगों नेऊटपटांग कहानियां गढ़कर ईडी के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज करवा दी। अदालत और सरकार को गुमराह करके की गई इस शिकायत की पोल हाईकोर्ट में खुल गई और श्रीमती सिंघई को बेदाग बरी कर दिया गया। उसी नौकरी माफिया ने इस बार सरकार के चोर दरवाजे से घुसकर संस्थान के निकाले गए भ्रष्ट अफसरों को दुबारा नौकरी में लाने की मुहिम चला दी है। इकतरफा सस्पेंशन के आदेश के माध्यम से सूक्ष्म एवं लघु उद्योग विभाग के एक जूनियर अधिकारी को यहां बिठा दिया गया उसने न तो विधिवत चार्ज लिया और न ही श्रीमती सिंघई के सस्पेंशन की प्रक्रिया पूरी की गई।


    प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के मेक इन इंडिया अभियान को सफल बनाने के लिए धड़ाधड़ नौकरियां जनरेट कर रहीं श्रीमती अनुराधा सिंघई को ये कहकर सस्पेंड किया गया कि वे आला अधिकारियों की बात नहीं मानती हैं। जबकि यही माईबाप संस्थान को कभी ठीक से नहीं चला सके । पिछले तीस सालों में संस्थान ने कोई करिश्मा नहीं किया। यहां पदस्थ ईडी और अन्य अधिकारी भ्रष्टाचार में लिप्त रहे। लोकायुक्त और ईओडब्ल्यू जैसे संस्थानों को छापे मारकर जांच करनी पड़ी। जब प्रदेश की एक हुनरमंद कंपनी सेक्रेटरी ने राज्य की पूंजी बनाने का पारदर्शी अभियान शुरु किया तो नौकरी माफिया ने तरह तरह के षड़यंत्र रचकर युवाओं की राह अवरुद्ध करने की मुहिम छेड़ दी है।


    हाईकोर्ट के पीठासीन जजों ने याचिका के निपटारे के लिए सरकार से जो सवाल जवाब किए उससे महाधिवक्ता समेत तमाम कानूनविद हकला गए। उन्होंने कई तरह के तर्क जुटाकर अदालत में रखे हैं इसके बावजूद वे किसी न्यायाधीश का सामना नहीं कर पा रहे हैं। नतीजतन रोटेशन के आधार पर किसी ऐसे जज का इंतजार किया जा रहा है जिसके माध्यम से शासन की काली करतूतों पर पर्दा डाला जा सके।


    सवाल तो ये है कि आखिर क्या वजह है कि राज्य सरकार स्वयं युवाओं को रोजगार दिलाने के अभियान में टांग फंसा रही है। सरकार में बैठे वो कौन लोग है जो राज्य की उत्पादकता बढ़ाने के अभियान में रोड़े अटका रहे हैं। यदि सैडमैप की ईडी कोई गलती कर रहीं थीं या कोई भ्रष्टाचार कर रहीं थीं तो राज्य मंत्रालय में बैठे आईएएस अफसरों में से ही कई अधिकारी उपलब्ध हैं जिनसे जांच करवाकर ईडी की गलतियां उजागर की जा सकतीं थीं। जिस नौकरी माफिया ने लोकायुक्त में शिकायत की उसी की जांच करवाकर ईडी के विरुद्ध कार्रवाई की जा सकती थी। ये न करते हुए शासन के विधि एवं न्याय विभाग ने मुकदमेबाजी पर मोटी फीस खर्च करने का फैसला ले लिया। सूत्र बताते हैं कि अपनी आत्मनिर्भरता की राह खोज रहे सैडमैप के ही फंड से नौ लाख रुपए वकीलों की फीस निकाली गई है।


    इस षड़यंत्र की भी पोल खुल गई है। कथित तौर पर शासन में सक्रिय जिस मंच के माध्यम से ये अभियान चलाया जा रहा है वह नौकरी माफिया का अड्डा बन गया है। सवा तीन लाख करोड़ रुपयों का बजट खर्च करने वाली मोहन यादव की भाजपा को पार्टी फंड के लिए कोई चंदे की जरूरत तो नहीं जो वह दिन को रात करने के लिए वकीलों और जजों की नाव पर डोल रही है।


    गौरतलब है कि प्रदेश के युवाओं में नौकरी की आकांक्षा होते हुए भी सरकार उन्हें रोजगार मुहैया नहीं करा पा रही है। लगभग अस्सी हजार करोड़ रुपयों के बजट से दस लाख अनुत्पादक सरकारी अमले को पाला पोसा जा रहा है। इसके विपरीत जब सरकार का ही एक संस्थान सरकारी के साथ कार्पोरेट,कोआपरेटिव, सेक्टर और उद्यमिता को बढ़ावा देकर रोजगार संवर्धन का पथ प्रशस्त कर रहा हो तो आखिर वो कौन है जो सरकार के इस अभियान में पलीता लगा रहा है। डाक्टर मोहन यादव की सरकार के नुमाईंदों को इसकी पड़ताल करनी होगी ताकि युवाओं को न्याय मिल सके और मोदी सरकार के राष्ट्रीय अनुष्ठान की आहूतियां बेरोकटोक जारी रह सकें।

    भारतीय जनता पार्टी स्वयं को विश्व का सबसे बड़ा राजनीतिक संगठन होने का दावा करती है। कहा जाता है कि उसके नेतागण देश को सबसे तेज बढ़ती इकानामी बनाना चाहते हैं। ऐसे में जब कोई संस्थान उसके ही वोटरों को रोजगार दिलाने का बीड़ा उठाए हुए है तब उसे अस्थिर करने से आखिर किसे लाभ होने वाला है। ये षड़यंत्र भी तब चल रहा है जब सूक्ष्म एवं लघु उद्योग मंत्री चेतन काश्यप स्वयं उद्यमिता को बढ़ावा देने की मुहिम चलाए हुए हैं। वे खुद उद्योगपति हैं और सरकार से कोई वेतन भत्ते नहीं लेते हैं। भाजपा को सोचना होगा कि वह वित्तीय संरचनाओं में देश को आगे ले जाने वाले युवाओं को भर्ती करना चाहते हैं या फिर भेड़िया धसान युवाओं के सहारे शेखचिल्ली ख्वाब देखते रहना चाहेंगे।भारत माता की आराधना सुपुत्रों से होती है माफियागिरी से तो केवल पप्पू पैदा होते हैं।

  • सैडमैप में सेंध लगाकर सरकार गिराने में जुटा नौकरी माफिया

    सैडमैप में सेंध लगाकर सरकार गिराने में जुटा नौकरी माफिया


    भोपाल,10 सितंबर(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर).देश में उद्यमिता को जनांदोलन बनाने में जुटे उद्यमिता विकास केन्द्र मध्यप्रदेश (सेडमैप) में एक बार फिर नौकरी माफिया ने घुसपैठ का प्रयास किया है।इस बार सरकारी तंत्र में सेंध लगाने के लिए सरकार में दखल रखने वाले एक संगठन की आड़ ली गई है।सूक्ष्म एवं लघु उद्योग मंत्री चेतन काश्यप को अंधेरे में रखकर रचा गया ये षड़यंत्र कामयाब भी हो सकता था लेकिन जिस तरह इस प्रयास की परतें खुल रहीं हैं उससे सरकार की बदनामी का एक नया शिलालेख तैयार होने लगा है।


    इस षडयंत्र का सूत्रधार कथित तौर पर रमन सिंह अरोरा नामक नौकरी माफिया बताया जा रहा है।ये व्यक्ति कांग्रेस के पूर्व मुख्यमंत्री अर्जुनसिंह के बेटे अजय सिंह के केरवा डैम स्थित रिसार्ट टचवुड का व्यवस्थापक भी बताया जाता है। इसने खुद की फर्म रतन एम्पोरियम बना रखी है जो सरकारी प्रतिष्ठानों में सिक्योरिटी गार्ड सप्लाई करने का ठेका लेती है। उसकी ये फर्म कथित तौर पर सरकारी दफ्तरों में फाईलें चोरी करवाने और अफसरों को रिश्वत देकर सरकारी धन को साईफन करवाने में जुटी रहती है।इसी वजह से कई सरकारी संस्थानों ने रीढ वाले अफसरों ने इसे ब्लैकलिस्टेड कर दिया है। खुद को उद्योगपति दर्शाने के लिए इसने कुछ समय पहले एक राष्ट्रीय अखबार से खुद को सम्मानित कराया था तभी से ये अफसरों और नेताओं पर दबाव बनाकर ठेके कबाड़ने की जुगाड़ कर रहा है।बताते हैं कि इसने अपने कई चमचों को प्रदेश के प्रमुख अखबारों में पे रोल पर नोकरी दिलवाई है जिनके माध्यम से ये सरकार को धमकाने के लिए उलटी सीधी खबरें प्लांट करवाता रहता है।


    जब इसकी फर्म को फर्जी बिलिंग और सुरक्षा गार्डों के वेतन में चिल्लरचोरी के आरोप में धरा गया तो इसने सूक्ष्म एवं लघु उद्योग विभाग के एक आला अधिकारी को बदनाम करने के लिए एक महिला अधिकारी से अश्लील चैट बनाकर वायरल किया था। इसकी पुलिस जांच हुई तो इसके कर्मचारी ने स्वीकार किया कि रमनवीर अरोरा ने ही उससे ये फर्जी चैट लिखवाया था।इस मामले में पुलिस जांच में सारे तथ्य उजागर हो गए हैं और संभावित जेल यात्रा से ये बुरी तरह बौखलाया हुआ है। इस षड़यंत्र के सूत्र विपक्ष के नेताओं से भी जुड़ रहे हैं इसलिए खुद को बचाने और सरकार को बदनाम करने के लिए इसने पूरा जाल बिछाया है।


    रमनवीर की रतन एम्परियम समेत जिन फर्मों और व्यक्तियों को एमएसएमई विभाग की निगरानी में चलने वाले सैडमैप संस्थान ने ब्लैकलिस्ट किया था उन्होंने इस बार सरकार को झांसा देने के लिए एक सांस्कृतिक संगठन से कथित तौर पर जुड़े हुए मंच की आड़ ली है।इस कहानी की पोल तब खुली जब एमएसएमई विभाग के सचिव डॉ.नवनीत कोठारी ने अचानक एक आदेश निकाला जिसमें सैडमैप की ईडी श्रीमती अनुराधा सिंघई(शर्मा) से लगभग सवा लाख पृष्ठों की जानकारी दो दिनों में देने का उल्लेख किया गया था। वे जवाब दे पातीं इसके पहले सचिव ने अनुराधा सिंघई को निलंबन का आदेश थमा दिया। एमएसएमई विभाग के एक जूनियर अधिकारी को आनन फानन में कार्यभार भी दिला दिया गया। इस अधिकारी ने सैडमैप पहुंचकर ईडी से कार्यभार छीन लिया और निगरानी के लिए लगाए गए कैमरे बंद करवा दिए। इस बदलाव को लोकप्रिय फैसला दर्शाने के लिए पर्दे के पीछे से सक्रिय रमनवीर और इसके गेंग में शामिल षड़यंत्रकारियों ने कर्मचारियों के बीच मिठाई बंटवाई और फटाके फोड़े। हालांकि इस असंवैधानिक कदम को मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय ने संज्ञान लिया है और केविएट लगाने पहुंचे सरकारी कानूनविदों को जमकर फटकार लगाई। अदालत ने कहा कि जब सैडमैप ने सारी कार्रवाई पारदर्शी तरीके से की है और अपने पिछले फैसले में हाईकोर्ट तमाम आरोपों की जांच करके ईडी को क्लीनचिट दे चुका है तब इस आपराधिक षड़यंत्र को छुपाने के लिए सरकार क्यों हाईकोर्ट पहुंच गई।


    गौरतलब है कि सैडमैप की ईडी अनुराधा सिंघई एक कुशल कंपनी सेक्रेटरी हैं और उन्होंने मोदी सरकार के मेक इन इंडिया अभियान को सफल बनाने के लिए अपने विभाग की मंशा अनुरूप पचास लाख रोजगार सृजित करने की मुहिम चला रखी है। उन्होंने इतने कम समय में CEDMAP जैसे संगठन को पूरी तरह बदलकर रख दिया है।उनके नेतृत्व में सैडमैप ने आधुनिक प्रबंधन के पारदर्शी तरीकों को अपनाकर वो कर दिखाया है जो पिछले तैतीस सालों के इतिहास में कभी नहीं हो सका था। उसी स्टाफ और वही अधिकारियों को साथ लेकर उन्होंने निजी क्षेत्र को रोजगार विस्तार के लिए आगे लाने में अभूतपूर्व योगदान दिया है।इस कार्य में उनका कंपनी प्रबंधक और कानूनी सलाहकार होने का सुदीर्घ अनुभव काम आ रहा है। मेक इन इंडिया अभियान हो या स्टार्टअप के माध्यम से देश की पूंजी और रोजगार के अवसर बढ़ाने का तरीका सिखाकर वे उद्यमियों को सफल बनाने में कारगर साबित हो रहीं हैं।उनके प्रयासों की गंभीरता को देखते हुए सरकार ने अपने ही स्वशासी निकाय सैडमैप को भंडार क्रय नियम के अंतर्गत सरकारी विभागों और उपक्रमों के लिए अनुबंध आधारित सेवा कर्मी उपलब्ध कराने को अधिकृत कर दिया है।


    जब अनुराधा सिंघई की नियुक्ति की गई थी तो फर्जी बिलिंग और ठगी में धरे गए इस नौकरी माफिया ने आरोप लगाया कि उन्होंने फर्जी दस्तावेज दिए हैं। हाईकोर्ट ने अपनी जांच के बाद आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया। जब सैडमैप लगभग बंद होने की कगार पर था और कर्मचारियों को लगभग दस दस महीनों से वेतन नहीं दे पा रहा था तब अनुराधा सिंघई की नियुक्ति की गई थी। इस संगठन को सरकार के बजट में से वेतन और प्रशासनिक खर्च नहीं दिया जाता है। ऐसे में उन्हें एक महीने का वेतन पाने के लिए, पहले पिछले 10 महीनों के लिए सभी कर्मचारियों के लिए राजस्व अर्जित करना था।श्रीमती सिंघई ने कुशल प्रबंधन की तकनीकें अपनाकर नियुक्ति के बाद अगस्त 2021 से ही पूरे स्टाफ को नियमित वेतन दिलवाना शुरु कर दिया। जब तक कर्मचारियों का बकाया भुगतान नहीं हो गया तब तक उन्होंने खुद का वेतन भी नहीं लिया। लगभग चार महीनों बाद उन्होंने खुद का वेतन लेना शुरु किया।


    इंडो यूरोपियन चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (IECCI) और कंपनी सेक्रेटरी प्रैक्टिस में सुश्री अनुराधा सिंघई के 21 वर्षों से अधिक का अनुभव रहा है। ये संगठन अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त है और वे खुद संयुक्त राष्ट्र की आर्थिक और सामाजिक परिषद की विशेष सलाहकार रहीं हैं। उन्हें डब्ल्यूटीओ मंत्रिस्तरीय सम्मेलन में शामिल होने का अवसर भी मिला। उन्होंने संयुक्त राष्ट्र कार्यालय की ओर से बनाए गए भ्रष्टाचार विरोधी समीक्षा तंत्र के साथ विभिन्न मंचों पर विदेश में 4 बार भारत का प्रतिनिधित्व भी किया है। कुआलालंपुर, मलेशिया में ड्रग एंड क्राइम (यूएनओडीसी) और आयात संवर्धन केंद्र, हेग, नीदरलैंड। जैसे अंतर्राष्ट्रीय संगठनों में काम कर चुकी इस कंपनी सेक्रेटरी ने न केवल सैडमैप बल्कि प्रदेश के उद्योग जगत में भी सरकार के भरोसे को जीवित करने में योगदान दिया है।


    फिलहाल तो सरकारी जांच एजेंसियां अब ये जानने का प्रयास कर रहीं हैं कि सैडमैप को चूना लगाकर खुद का घर भरने वाले षड़यंत्रकारी आर डी मंडावकर, शरद मिश्रा, दिनेश खरे, मनोज सक्सैना, आर के मिश्रा, प्रमोद श्रीवास्तव की संपत्ति उनकी आय से कई गुना अधिक कैसे हो गई । आरोप लगाया गया कि अनुराधा सिंघई ने कई पदों पर जैन लोगों को नियुक्त कर दिया है।श्रीमती सिंघई खुद जन्मजात ब्राह्रण हैं और वे अपनी टीम में केवल ईमानदार और योग्य लोगों का ही चयन करने पर जोर देती हैं। जब सभी आरोप फर्जी और ओछे साबित हुए और अदालती जांच में ये साबित हो गया कि वे एक कुशल प्रबंधन विशेषज्ञ हैं तो उन्हें पद से हटाने के लिए इस बार नया षड़यंत्र रचा गया है।


    अनुराधा सिंघई एक परिणाम प्रेरित कुशल शख्सियत हैं । उन्होंने भ्रष्टाचारियों के गिरोह में शामिल होने से साफ इनकार कर दिया।भ्रष्टाचार के सभी रास्ते जब बंद कर दिए तो CEDMAP के कुछ अत्यधिक भ्रष्ट कर्मचारी उन्हें पद से हटाने में घटिया स्तर के नए षड़यंत्र रचने लगे। अब, जब CEDMAP अभूतपूर्व ऊंचाइयों पर पहुंच गया है, तो भ्रष्ट लोगों के इस समूह को काली कमाई का भारी स्कोप नजर आने लग गया है। उन्हें लगता है कि CEDMAP उनकी निजी दुकान है।

    अनुराधा सिंघई ने अपनी कुशल टीम के माध्यम से CEDMAP के इन भ्रष्ट कर्मचारियों के कई घोटालों और उनकी कार्यप्रणाली को बार बार उजागर किया है। घोटालों का खुलासा होने पर बाकायदा निदेशक मंडल की मंजूरी से इन काली भेड़ों की परियोजनाओं का विशेष फोरेंसिक ऑडिट कराया गया, जिसमें करोड़ों रुपये का घोटाला और गबन पाया गया। ये सभी कार्रवाई पूरे पारदर्शी तरीके से कराई गई जिसके मिनिट्स अब सभी जांच एजेंसियों और अदालत के सामने चीख चीखकर सत्ता माफिया की काली करतूतों की पोल खोल रहे हैं।

    कार्यभार संभालने के बाद उन्होंने कर्मचारियों की हेराफेरी के खिलाफ कई सख्त फैसले लिए थे, कुछ कर्मचारियों को निलंबित और बर्खास्त भी किया गया।सभी भ्रष्टाचारों पर रोक लगायी गई,कर्मचारियों को अपने वेतन के बदले अपना दायित्व पूरा करने के लिए जवाबदेह बनाया गया। इससे नौकरी माफिया को रिश्वत देकर भर्ती हुए मक्कार कर्मचारियों ने कपोल कल्पित बातें करनी शुरु कर दीं।कुछ भ्रष्ट मीडिया कर्मियों को मिलाकर बदनामी का बवंडर खड़ा किया गया जो बार बार जांच की कसौटियों पर औंधे मुंह गिरता रहा है।


    सभी सरकारी एजेंसियों ईओडब्ल्यू, लोकायुक्त और फिर हाईकोर्ट में सवाल उठाए गए,आरोप लगाए गए। जांच में वे निर्दोष और बेदाग पाई गईं। हाईकोर्ट ने 2022 और 2024 में ही नियुक्ति में अनियमितता को लेकर उनकी याचिका खारिज कर दी है। झूठी खबरें छाप चुके मीडिया संस्थानों की जब भद पिटी तो वे चुपके से दाएं बाएं होने लगे हैं। एमएसएमई विभाग के सचिव डॉ.नवनीत कोठारी ने जिस अधिकारी को कार्यभार संभालने भेजा है उसने जाते ही वहां से निकाले गए आरडी मांडवकर एवं अन्य अधिकारियों की फाईल निकलवाईं हैं बताया जाता है कि वे संस्थान से निकाले गए भ्रष्ट अधिकारियों को दुबारा नौकरी पर रखवाने का प्रयास कर रहे हैं।


    गौरतलब है कि सैडमैप उद्यमियों को प्रशिक्षण देकर उनका परिचय औद्योगिक संस्थानों से करवाता है। इस प्रक्रिया में जिन कर्मचारियों को नौकरी पर रखा जाता है उसका एक तयशुदा कमीशन सैडमैप को मिलता है। इस राशि से ही संस्थान के कर्मचारियों और अधिकारियों का वेतन दिया जाता है। अनुराधा सिंघई ने आते ही कर्मचारियों से किसी भी प्रकार का कमीशन लिया जाना निषिद्ध कर दिया था जिसकी वजह से औद्योगिक संस्थानों को अच्छे और प्रशिक्षित कर्मचारी मिलने की राह प्रशस्त हो गई थी।अब सरकारी नौकरियों में भी गुणवत्ता पूर्ण वर्कफोर्स आसानी से उपलब्ध होने लगा है। कंपनियों ने अपने एचआर डिपार्टमेंट में सैडमैप को सहयोगी बनाकर उससे अपने संस्थानों के अन्य कार्य भी करवाने शुरु कर दिए हैं। जिसकी वजह से संस्थान की आय बढ़ी है। ऐसे में कमीशनखोर नियुक्ति माफिया को लगने लगा है कि वह यहां अब अच्छी कमाई कर सकता है। केन्द्र और प्रदेश की सरकार जब युवाओं को रोजगार मुहैया कराने में हैरान परेशान घूम रही है तब सैडमैप उनके लिए आशा की किरण बनकर उभरा है।ऐसे में यदि नौकरी लगवाने के कार्य में रिश्वतखोरी की परंपरा फिर शुरु कर दी जाएगी तो ये सरकार की बदनामी का कारण तो बनेगी ही साथ में रोजगार दिलाने के सरकारी संकल्प पर भी कुठाराघात करेगी। नौकरी माफिया के माध्यम से विपक्ष तो सरकार गिराने के इस षड़यंत्र में खुलकर सामने खड़ा है,लेकिन एमएसएमई विभाग और सरकार दोनों कई महत्वपूर्ण मंचों पर अपनी जग हंसाई किस मजबूरी के तहत करवा रहे हैं, इसका खुलासा होना अभी बाकी है।

  • एमपी की नौकरशाही को वसूली के नतीजों की चिंता नहीं

    एमपी की नौकरशाही को वसूली के नतीजों की चिंता नहीं


    -आलोक सिंघई-
    डाक्टर मोहन यादव की भाजपा सरकार सरकारी तंत्र के मकड़जाल में बुरी तरह उलझ गई है। नीति आयोग ने आय बढ़ाने के जो निर्देश दिए हैं उनसे सरकारी मशीनरी अपना रिकार्ड तो अपडेट कर रही है लेकिन आम जनता की आय बढ़ाने में ये कवायद बुरी तरह असफल साबित हो रही है। पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने तो कर्ज लेकर खूब खैरात बांटी और भरपूर लोकप्रियता बटोरी। खुद प्रधानमंत्री को कहना पड़ा था कि वे मध्यप्रदेश के अतिलोकप्रिय मुख्यमंत्री हैं। अब ये शोर तो शांत हो गया है लेकिन सुशासन की जिद ने राज्य के उद्यमियों की बैचेनी बढ़ा दी है।बजट में अस्सी हजार करोड़ रुपए का स्थापना व्यय देकर मोहन यादव समझ रहे हैं कि इतना मंहगा प्रशासन राज्य के विकास में चार चांद लगा देगा ।हकीकत ये है कि बोगस अफसर और नाकारा सरकारी तंत्र प्रदेश के विकास की राह में बेड़ियां बन गया है। शिवराज सिंह चौहान की सरकार लगभग दो दशकों से कर्ज लेकर आधारभूत ढांचे के विकास का जो शोर मचा रही थी उसे अब मोहन यादव की सरकार केवल आंकड़ों में बदल रही है।पिछले लगभग दस महीनों से डाक्टर मोहन यादव सुशासन पर जोर दे रहे हैं। वे इस सुशासन का ख्वाब उस सरकारी तंत्र के माध्यम से साकार करने का प्रयास कर रहे हैं जो प्रदेश के खोखले विकास का जनक ही साबित हुआ है।
    सरकार ने उत्पादकता के जिन पैमानों पर काम शुरु किया है उनमें सबसे बड़ा राजस्व महा अभियान खोखली कवायद साबित हो रहा है। नए साफ्टवेयर के माध्यम से पटवारियों और वित्तीय प्रबंधन को जिस तरह से कसा गया है उससे सरकारी तंत्र में आक्रोश और उदासीनता बढ़ी है नतीजा सिफर रहा है। भूमिसुधार के साथ राजस्व महाअभियान 2 के नतीजे सामने आने लगे हैं। जनता से कहा गया था कि वह आनलाईन माध्यम से और तहसील स्तर पर अपनी शिकायत दर्ज कराए। लोग सरकारी अमले के पास पहुंचे भी ।उन्होंने सरकारी अमले की सेवा में कोर्निशें भी बजाईं पर परिणाम केवल शिकायत के कागज पर खात्मे तक ही पहुंच पाया। सरकारी अमले का प्रयास रहा कि फिलहाल शिकायत बंद हो जाए और हम सरकार को अपनी कार्रवाई सुनिश्चित करने की सूचना दे दें। ये प्रक्रिया भी आनलाईन ही थी इसलिए जवाब पुख्ता तरीके से दिया जा रहा है। ये कुछ वैसे विकास का नमूना है जिसके बारे में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी लाल किले की प्राचीर से और विदेशों में किए जाने वाले आयोजनों में दहाड़कर सुनाते हैं। देश के आंकड़ें बताते हैं कि जून तिमाही में जीडीपी ग्रोथ रेट पिछली 5 तिमाही में सबसे कम रही है। अप्रैल-जून 2024 तिमाही में भारत की GDP ग्रोथ रेट 6.7% दर्ज की गई है। ये तयशुदा लक्ष्य से कम है।
    मुख्य मंत्री अपील कर रहे हैं कि आप अपनी कृषि भूमियां बेचें नहीं क्योंकि सरकार की नीतियों से जल्दी ही खेतों पर पैसा बरसेगा। बेशक खेती पर मुनाफा बरसने की तमाम संभावनाएं खुली पड़ीं हैं। रूस यूक्रेन युद्ध हो या इस्राईल फिलिस्तीन संग्राम, समूचे विश्व में तीसरे विश्व युद्ध के बादल मंडरा रहे हैं। ऐसे में भारत की जमीन विश्व की भूख शांत करने में उपयोगी साबित हो सकती है। इसके बावजूद सरकार इस अवसर को भुनाने लायक तंत्र विकसित नहीं कर पा रही है। तीन कृषि कानून देश की आर्थिक समृद्धि में सहायक साबित होने वाले थे। किसान की भी तकदीर बदल सकते थे। सरकार भले ही उन्हें देश भर में लागू न कर पाई हो लेकिन भाजपा शासित राज्यों पर तो कोई बंधन नहीं है कि वे अपनी कृषि का ढांचा इस तरह विकसित करें कि वे कृषि सुधारों के माडल बन जाएं। इसके विपरीत संघ के नाम पर भू माफिया जमीनों के दस्तावेजों का हेर फेर करने में जुटा हुआ है।
    फिलहाल जो आंकड़े हैं वे सरकारों के दावे की असलियत उजागर कर रहे हैं। MoSPI डेटा के अनुसार, चालू वित्त वर्ष 2024-25 की पहली तिमाही के लिए भारत के सकल घरेलू उत्पाद (GDP) की वृद्धि दर धीमी होकर 6.7% हो गई है। भारत के सबसे अहम सेक्टर माने जाने वाला एग्रीकल्चर और माइनिंग सेक्टर में बड़ी गिरावट देखी गई है. एग्रीकल्चर सेक्टर में ग्रोथ घटकर दो फीसदी हो गई है जबकि पिछले वर्ष ये 3.7 प्रतिशत थी। ये बताता है कि जब दुनिया को खाद्यान्न की सबसे अधिक जरूरत है तब भारत का कृषि ढांचा बाजार की मांग का उपयोग नहीं कर पा रहा है। मध्यप्रदेश भी इससे अछूता नहीं है। एमपी में तो सरकारी खरीद घटती जा रही है और आढ़तियों के चंगुल में फंसा किसान हर चौराहे पर छला जा रहा है। आम आदमी की खरीद क्षमता घटने से बाजार की रौनक भी उड़ गई है। संगठित रोजगार के क्षेत्र तो प्रसन्न हैं पर असंगठित क्षेत्र के लिए चुनौतियां जस की तस बनी हुई हैं।
    सरकारी तंत्र सोच रहा है कि लाड़ली बहना,किसान सम्मान निधि और अन्य हितग्राही मूलक योजनाओं से उनका पेट काटा जा रहा है जबकि हकीकत ये है कि उद्योगों को बल देने के लिए बढ़ाए गए सरकारी तंत्र का स्थापना व्यय आम नागरिकों का कचूमर निकाल रहा है। अपनी उपयोगिता साबित करने के लिए सरकारी तंत्र ने जो सख्ती अपनाई है उससे भी जनता के बीच आक्रोश गहराता जा रहा है। पिछले दिनों मध्यप्रदेश के प्रमुख विपक्षी दल कांग्रेस ने जिस आक्रामक शैली में आंदोलन किए उनसे भी उजागर हो रहा है कि विपक्षियों को सरकार और जनता के बीच जमी मिठाई की सड़ांध महसूस हो रही है।इसके बावजूद संगठन के दंभ में डूबे भाजपा के नेतागण और सरकार अपने पैरों तले खिसकती जमीन की हकीकत से बेखबर है। तख्त और ताज का गुमान शासकों को एक सुनहरे संसार की सैर कराता है। मुख्यमत्री डॉक्टर मोहन यादव तो राजा विक्रमादित्य के सुशासन की सौंधी महक में पले बढ़े हैं।उम्मीद है कि उन्हें राजा विक्रमादित्य के सिंहासन की बत्तीस पुतलियों की गवाही अच्छे से याद होगी।

    (द सूत्र में प्रकाशित आलेख के संपादित अंश)

    https://thesootr.com/state/madhya-pradesh/garbhakaal-cm-mohan-yadav-alok-singhai-thesootr-bhopal-7051775

  • बारिश में डामरीकरण करके जनधन की बर्बादी

    बारिश में डामरीकरण करके जनधन की बर्बादी


    भोपाल,2 सितंबर(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)। भारी बारिश ने राजधानी की सड़कें क्षतिग्रस्त कर दी हैं पोल खुलने के डर से इंजीनियरों और ठेकेदारों ने मरम्मत का कार्य भी शुरु कर दिया है। कई स्थानों पर भारी बारिश के बीच डामर की सड़कें बनाए जाने का कार्य भी चल रहा है जबकि सड़के उखड़ने की वजह ही बारिश का पानी रहा है।


    ऐसा ही एक दृश्य बिट्टन मार्केट के नजदीक वंदेमातरम चौराहे पर देखा जा सकता है। सड़कों की मरम्मत करने वाली रिकांडो कंपनी ने भारी बारिश से लबालब सड़कों पर भी डामर की मरम्मत जारी रखी है। डामर पानी में पकड़ता ही नहीं इसके बावजूद ठेकेदार धड़ल्ले से अपना काम जारी रखे हुए है।


    सोमवार दो सितंबर को पानी भरी सड़क पर रिकांडो कंपनी के कर्मचारियों ने सड़क पर डामर गिट्टी डालने का कार्य जारी रखा है। जब मौके पर मौजूद रिकांडो कंपनी के सुपरवाईजर आरएस राजपूत से पूछा गया कि वे बारिश में ये कार्य क्यों कर रहे हैं। उसने जबाब दिया कि हमने जब माल तैयार कर लिया है तो क्या हम उसे वापस ले जाएंगे। पीडब्यूडी तो हमेशा से बारिश के बाद ही सड़कों की मरम्मत शुरु करता है। सीमेंट की सड़कें जरूर इस सीजन में बनाई जा सकती हैं।


    लोक निर्माण विभाग के स्थानीय अफसरों ने तो इस मसले पर बात करने से ही इंकार कर दिया। उनका कहना था कि जनता की सुविधा के लिए सड़कों की मरम्मत करना हमारी मजबूरी है।इसके लिए हम बारिश खत्म होने का इंतजार नहीं कर सकते।उनसे पूछा गया कि खराब निर्माण की वजह से सड़कें क्षतिग्रस्त हुई हैं। इस पर विभाग के तमाम अफसरों ने चुप्पी साध ली है।
    गौरतलब है कि राजधानी में डामरीकरण की प्रक्रिया लगातार चलती रहती है। इससे सड़कें ऊंची हो रहीं हैं और मकानों में पानी भरने की शिकायत आ रही है। इसके विपरीत सरकारी अमला ऐसी ही सड़कें बनाता है जो बार बार टूटें और उनके रखरखाव का कार्य बार बार दिया जाता रहे।

    रिकांडो कंपनी के सुपरवाईजर पीएस राजपूत ने बताया कि हम केवल आदेश का पालन कर रहे हैं,
  • इंदौर के आईटी हब ने दुनिया में डंका बजायाःडॉ.मोहन यादव

    इंदौर के आईटी हब ने दुनिया में डंका बजायाःडॉ.मोहन यादव

    इंदौर,13 अगस्त(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि 21वीं सदी बौद्धिक युग की अग्रणी सदी है। कॉग्निजेंट कंपनी के आगमन से मध्यप्रदेश के युवाओं को रोजगार के नए अवसर मिलेंगे। उन्होंने कहा 18 एवं 19 वीं सदी खाद्य और कपास से आर्थिक विकास से जुडी थी। 20 वीं सदी पेट्रोकेमिकल से आर्थिक विकास का युग रहा। आज चहुँओर बौद्धिकता का बोलबाला है। दुनिया, भारत के ज्ञान का लोहा मानती है। उन्होंने कहा कि आईटी कम्पनियों को बेहतर वातावरण और सुविधाएं प्रदान करने के लिए मध्यप्रदेश सरकार सदैव तत्पर है। ये हमारे लिए बेहद खुशी की बात है कि कॉग्निजेंट ने अपने नए केंद्र के शुभारंभ के लिए इंदौर को चुना है। यह एक बड़ी उपलब्धि है, जिससे जाहिर होता है कि इंदौर अपने बढ़ते इन्फ्रास्ट्रक्चर और कुशल एवं प्रतिभाशाली लोगों की मौजूदगी की वजह से दुनिया भर की टेक्नोलॉजी कंपनियों के लिए बड़ी तेजी से पसंदीदा स्थान के रूप में उभर रहा है। आईटी सेक्टर में आज इंदौर के साथ ही प्रदेश को एक महत्वपूर्ण उपलब्धि मिली। लगभग 500 की संख्या में आईटी प्रोफेशनल्स को यहां रोजगार मिला है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव आईटी कम्पनी कॉग्निजेंट के इन्दौर सेन्टर के शुभारंभ अवसर पर संबोधित कर रहे थे।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि हम लगातार नई तकनीकी कंपनियों एवं उद्योगों को स्थापित करने में अपना सहयोग देने, व्यवसायों के लिए नए-नए अवसर पैदा करने के इरादे पर अटल हैं। हम एक ऐसा माहौल बनाना चाहते है जिससे इनोवेशन एवं टेक्नोलॉजी का लगातार विकास हो, जो हमारे राज्य को देश के अगले डिजिटल केंद्र के रूप में आगे बढ़ाते हुए हमारे युवाओं के लिए अवसर पैदा करें। कार्यक्रम में नगरीय प्रशासन एवं विकास मंत्री श्री कैलाश विजयवर्गीय, जल संसाधन मंत्री श्री तुलसीराम सिलावट, सांसद सांसद श्री शंकर लालवानी, विधायक श्री रमेश मेंदोला, श्री गोलू शुक्ला, गौरव रणदीवे, श्री चिंटू वर्मा, प्रमुख सचिव श्री संजय दुबे, संभागायुक्त दीपक सिंह, पुलिस कमिश्नर राकेश गुप्ता, कलेक्टर आशीष सिंह सहित गणमान्यजन, कॉग्निजेंट के प्रतिनिधि आदि उपस्थित थे।

    कॉग्निजेंट अमेरिका के ईवीपी एवं अध्यक्ष श्री सूर्या गुम्मादी ने कंपनी के बारे में विस्तार से जानकारी देते हुए बताया कि इंदौर शहर के मध्य में ब्रिलियंट टाइटेनियम में स्थित कंपनी का यह नया सेंटर 46 हजार वर्ग-फीट में फैला हुआ है। सेक्टर में 500 लोगों की बैठने की क्षमता है, यहॉ कामकाज के लिए हाइब्रिड मॉडल अपनाया गया है। इसी वजह से यहाँ 1250 एसोसिएट्स काम कर सकते हैं। इनोवेशन को बढ़ावा देने के लिए डिज़ाइन किए गए इस केंद्र में परस्पर सहयोग के लिए नेक्स्ट-जेनरेशन वर्क स्पेस मौजूद है, साथ ही यहाँ 110 सीटों वाला कैफ़ेटेरिया, वेलनेस के लिए विशेष स्थान तथा गर्भवती महिलाओं के लिए खास सुविधाओं वाली जगह भी उपलब्ध है। उन्होंने कहा इन्दौर बेहद प्रतिभाशाली लोगों और उत्कृष्टता मिसाल कायम करने वाले शैक्षणिक संस्थानों की मौजूदगी के साथ बड़ी तेजी से टेक्नोलॉजी के केंद्र के तौर पर उभर रहा है। लोगों को सबसे ज्यादा अहमियत देने की कॉग्निजेंट सेंटर की अपनी संस्कृति को इस शहर में लाकर हमें बेहद खुशी हो रही है। इंदौर पूरे भारत में मौजूद हमारे मौजूदा डिलीवरी नेटवर्क से बड़े ही सहज तरीके से जुड़ जाएगा। उन्होंने बताया कि कंपनी दुनिया भर में मौजूद अपने ग्राहकों के लिए इनोवेटिव सॉल्यूशंस पर विशेष ध्यान देगा। स्थानीय प्रतिभाओं के लिए नए-नए अवसर पैदा करेगा। साथ ही हमारे कार्यालयों को हमारे एसोसिएट्स के निवास स्थान के करीब लाएगा।

    कॉग्निजेंट कंपनी अलग-अलग उद्योगों के 30 स्टेकहोल्डर्स को अपनी सेवाएँ प्रदान कर रही

    कॉग्निजेंट आधुनिक व्यवसायों के इंजीनियर हैं। अपने ग्राहकों को तेजी से बदलती दुनिया में आगे रहने के लिए टेक्नोलॉजी को आधुनिक बनाने, प्रक्रियाओं को नए सिरे से तैयार करने तथा अनुभवों को और अधिक बेहतर करने में मदद करती हैं। कंपनी दुनिया भर में बैंकिंग, वित्तीय सेवाएँ एवं बीमा, संचार मीडिया, लाइफ साइंसेज, मैन्युफैक्चरिंग, लॉजिस्टिक्स, एनर्जी एवं यूटिलिटी, खुदरा एवं उपभोक्ता वस्तुएँ, तथा ट्रैवल एवं हॉस्पिटैलिटी जैसे अलग-अलग उद्योगों के 30 स्टेकहोल्डर्स को अपनी सेवाएँ प्रदान कर रही है। इस केंद्र में काम करने वाले एसोसिएट्स कई अलग-अलग तरह की एडवांस्ड टेक्नोलॉजी पर काम करने में सक्षम हैं, जिनमें एआई, एमएल, आईओटी, और डिजिटल इंजीनियरिंग शामिल हैं, जो विभिन्न क्षेत्रों में इनोवेशन को बढ़ावा देते हैं।

    कॉग्निजेंट में 3 लाख 36 हजार 300 कर्मचारी कार्यरत इसमें 70 प्रतिशत से ज़्यादा एसोसिएट्स भारत में

    दुनिया भर में कॉग्निजेंट के कर्मचारियों की संख्या 3 लाख 36 हजार 300 है, जिनमें से 70 प्रतिशत से ज़्यादा एसोसिएट्स भारत में हैं। कंपनी इंदौर के अलावा बेंगलुरु, भुवनेश्वर, चेन्नई, कोयंबटूर, दिल्ली-एनसीआर, हैदराबाद, कोच्चि, कोलकाता, मंगलुरु, मुंबई और पुणे में भी मौजूद है। कॉग्निजेंट दुनिया की सबसे बड़ी व्यवसायिक सेवा कंपनी में से एक है, जो अपनी सेवाओं के ज़रिये 20 अलग-अलग तरह के उद्योगों से जुड़े संगठनों को तेजी से बदलती दुनिया में आगे रहने के लिए टेक्नोलॉजी को आधुनिक बनाने, प्रक्रियाओं को नए सिरे से तैयार करने तथा अनुभवों में बदलाव लाने में मदद करती है। कंपनी का मुख्यालय अमेरिका में स्थित है, जो भारत से लेकर यूरोप, उत्तरी अमेरिका, दक्षिण अमेरिका और मध्य-पूर्व तक बड़ी तेजी से अपने दायरे का विस्तार कर रही है। कॉग्निजेंट अपने लोगों को एडवांस्ड टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में प्रशिक्षण देने में निवेश करने के संकल्प पर कायम है, जो वर्तमान के साथ भविष्य की नौकरियों के लिए आवश्यक है।

  • खजाने के लीकेज रोकने सरकार ने की नई टीम तैनात

    खजाने के लीकेज रोकने सरकार ने की नई टीम तैनात

    भोपाल,7अगस्त(प्रेस इनफॉर्मेशन सेंटर).मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में मंत्रि-परिषद की बैठक मंत्रालय में हुई। मंत्रि-परिषद द्वारा वित्त विभाग के अंतर्गत संचालनालय वित्तीय प्रबंधन सूचना प्रणाली (एफएमआईएस) के पुनर्गठन एवं 47 नवीन पदों के सृजन तथा नियमों में संशोधन एवं प्रोजेक्ट मैनेजमेंट यूनिट (पी.एम.यू) के गठन का अनुमोदन किया गया। इससे प्रदेश के वित्तीय प्रबंधन की गुणवत्ता एवं सटीकता में और सुधार होगा। संचालनालय वित्तीय प्रबंध सूचना प्रणाली वर्ष 1980 से अस्तित्व में है। इसके माध्यम से राज्य शासन के आय-व्यय का निरंतर अनुश्रवण, राज्य शासन के मुख्य तथा अनुपूरक बजट,राज्य शासन के नगद शेष का अनुश्रवण, राज्य शासन का ऋण प्रबंधन, महालेखाकार कार्यालय से प्राप्त आय-व्यय के आंकड़ों के आधार पर विभिन्न वित्तीय सूचनाएं एवं विश्लेषण के कार्य संपादित किये जाते हैं। बजट प्रक्रियाओं में निरन्तर परिवर्तन/सुधार तथा वित्तीय संव्यवहारों में अधिक सजगता व सतर्कता की आवश्यकता को दृष्टिगत रखते हुए वित्तीय प्रबंध सूचना प्रणाली संचालनालय की वर्तमान संगठनात्मक संरचना को सुद्दढ़ किये जाने का निर्णय लिया गया।

  • एमपी की पहचान बाघ को बचाएं बोले डॉ.मोहन यादव

    एमपी की पहचान बाघ को बचाएं बोले डॉ.मोहन यादव

    भोपाल,28 जुलाई(प्रेस इनफॉर्मेशन सेंटर).मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि यह हमारा सौभाग्य है कि मध्यप्रदेश सर्वाधिक बाघ वाला प्रदेश है। प्रदेश में बाघों की आबादी बढ़कर 785 पहुँच गई है। यह प्रदेश के लिये गर्व की बात है। उन्होंने अंतर्राष्ट्रीय बाघ दिवस पर प्रदेशवासियों को बधाई और शुभकामनाएँ दी हैं।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा है कि वन्य प्राणियों की सुरक्षा का कार्य अत्यंत मेहनत और परिश्रम का है। समुदाय के सहयोग के बिना वन्य प्राणियों की सुरक्षा संभव नहीं है। वन विभाग और वन्य प्राणियों की सुरक्षा में लगे सभी लोग बधाई के पात्र हैं, जिनके कारण मध्यप्रदेश एक बार फिर टाइगर स्टेट बन गया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने अंतर्राष्ट्रीय बाघ दिवस पर जंगलों में बाघों के भविष्य को सुरक्षित करने और प्राकृतिक संतुलन बनाए रखने के लिए एकजुट होकर कार्य करने का संकल्प लेने का आहवान किया है।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि बाघों के संरक्षण के लिये संवेदनशील प्रयासों की आवश्यकता होती है जो वन विभाग के सहयोग से संभव हुई है। हमारे प्रदेश के राष्ट्रीय उद्यानों में बेहतर प्रबंधन से जहाँ एक ओर वन्य प्राणियों को संरक्षण मिलता है, वहीं बाघों के प्रबंधन में लगातार सुधार भी हुए हैं।

    वन्य प्राणियों के प्रति संवेदनशीलता

    वन्य प्राणियों के प्रति संवेदनशीलता का हाल ही में सीहोर जिले में एक उदाहरण सामने आया था। सीहोर जिले के बुदनी के मिडघाट रेलवे ट्रेक पर बाघिन के तीन शावक ट्रेन की चपेट में आ गये थे, जिसमें दो गंभीर रूप से घायल शावकों को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के निर्देश पर जिला प्रशासन और वन्य प्राणी चिकित्सकों की टीम द्वारा एक डिब्बे की विशेष ट्रेन से उपचार के लिये भोपाल लाया गया था।

  • इस लोकतंत्र को रीसेट होने दीजिए

    इस लोकतंत्र को रीसेट होने दीजिए


    आजादी का पर्व नजदीक है। भारतीय लोकतंत्र और स्वाधीनता को लेकर राग जयजयवंती गाने वालों की टोलियां बाजार में निकलने वाली हैं। जिसने भी लाभ की मिठाई पा ली वह इस लोकतंत्र की का गुणगान करने लग जाएगा। जो वंचित रहा निश्चित तौर पर वह गाली देगा। दरअसल हम सोचने को राजी नहीं कि लोकतंत्र और आजादी के उल्लास में हमने क्या गंवा दिया है।हमें सोचना होगा कि आखिर भारत की तरुणाई को लगभग आधी सदी तक किन्होंने तरह तरह के षड़यंत्रों में फंसाकर रखा । भारत में किसी प्रतिष्ठान को चलाना कितना दुरूह कार्य है ये मध्यप्रदेश सैडमैप के प्रयासों को देखकर समझा जा सकता है। मध्यप्रदेश सरकार ने ये संस्थान इसलिए बनाया था ताकि इसके माध्यम से प्रदेश के गौरवशाली प्रतिष्ठानों के लिए अच्छी गुणवत्ता का प्रशिक्षित मानव बल तैयार किया जा सके। डिग्रियां लेकर तो हर साल युवाओं की बड़ी वर्कफोर्स तैयार हो रही है। उनमें से नतीजे देने वाले युवाओं की तलाश भूसे में सुई तलाशने जैसी होती है। यही सोचकर सरकार ने एक गुणवत्ता पूर्ण संस्था के माध्यम से वर्कफोर्स उपलब्ध कराने का इंतजाम किया था। अब तक की यात्रा में सैडमैप ने प्रदेश के विकास में बड़ी भूमिका निभाई है। सरकारी संरक्षण होने की वजह से इस संस्थान को अधिक अवसर उपलब्ध हो जाते हैं। संस्थान सरकारी नहीं है और एक तरह से निजी संस्था है इसलिए इसमें वैयक्तिक लाभ लेने के भी अवसर उपलब्ध हो जाते हैं। केवल नैतिकता की झीनी चंदरिया ही सामाजिक दायित्वों की रक्षा कर पाती है। सैडमैप की कार्यकारी संचालक अनुराधा सिंघई के पहले तक जिन लोगों ने जवाबदारियां संभालीं उनमें से कई पर आरोप लगे। जांच एजेंसियों ने उनके घरों पर छापे भी मारे और कई गड़बड़ियां भी पाईं । यही वजह है कि अब कोई भी यहां नवाचार करने का प्रयास करता है उसे भी संदेह की निगाह से देखा जाने लगता है। मध्यप्रदेश शासन ने अनुराधा सिंघई को उनकी विश्वस्तरीय योग्यताओं को देखते हुए संस्थान संभालने की जवाबदारी दी है। उन्होंने जब यहां चल रहे नाकारेपन की गंदगी को साफ करना शुरु किया तो यहां अड्डा जमाए बैठी तरह तरह की माफिया ताकतों ने हल्ला मचाना शुरु कर दिया।अब तक इस संस्थान को लेकर भी उनकी उपलब्धियों पर चर्चा कम हुई अखबारी सुर्खियां बने फड़तूस बयानों को चटखारे लेकर खूब सुना सुनाया गया। उनकी नियुक्ति को चुनौती देने के लिए जो कहानियां सुनाई गईं उन्हें आधार मानकर स्थानीय अदालत ने पुलिस को जांच की जवाबदारी दे दी । ईडी की नियुक्ति को चुनौती देने वाली याचिका के जवाब में श्रीमती अनुराधा सिंघई ने उच्च न्यायालय के सामने अपना पक्ष प्रस्तुत किया और अदालत ने उन्हें अपना काम जारी रखने के लिए क्लीनचिट दे दी। अदालत ने झूठे तथ्यों के आधार पर अदालत और प्रशासन का समय बर्बाद करने वाले षड़यंत्रकारियों को भी फटकार लगाई है। अदालत की कड़ी पड़ताल के बाद तो अब इन षडयंत्रकारियों को बाज आना चाहिए। शासन को भी अपने उन महत्वाकांक्षी उद्देश्यों की पूर्ति के लिए आगे आना होगा जिनसे मध्यप्रदेश में सुशासन स्थापित होने जा रहा है। कुशल युवाओं को साथ लेकर एक सफल प्रदेश का निर्माण होने जा रहा है। प्रदेश में अब तक की जो राजनीति चलती रही है उसकी वजह से आज भी प्रदेश के विकास की रफ्तार गुजरात या अन्य राज्यों की तरह तेज गति नहीं पकड़ सकी है। अब तक की कांग्रेसी सरकारें रहीं हों या लगभग दो दशकों का भाजपा का शासनकाल दोनों के दौरान कभी बंधे बंधाए ढर्रे से आगे देखने की परंपरा विकसित नहीं हो पाई।संघ और भाजपा संगठन की आड़ लेकर भी कई बार षड़यंत्रकारियों ने सुशासन को ध्वस्त करने के प्रयास किए।इसके बावजूद कुछ प्रतिभाशाली अफसरों ने पहल करके रचनाधर्मी युवाओं को आगे लाने की जो मुहिम चलाई वह अब सफलीभूत होती नजर आने लगी है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी कहते हैं कि कृषि पर बोझ घटाने के लिए हमें उद्यमिता को बढ़ावा देना होगा ताकि विशाल युवा वर्ग को हम नौकरियां उपलब्ध करा सकें। ऐसे में कंपनी सेकेट्री के रूप में लंबा अनुभव रखने वाली अनुराधा सिंघई जैसै प्रतिभाशाली प्रबंधकों पर हमें भरोसा करना होगा।उनके नेतृत्व में सैडमैप न केवल सरकारी प्रतिष्ठानों बल्कि कार्पोरेट जगत के लिए भी युवाओं की खेप तैयार कर रहा है। ऐसे में उन्हें सहारा देकर अवसर भी देना होगा ताकि प्रदेश एक नए दौर में प्रवेश कर सके। हम अपने पुरातनपंथी सोच को ही पकड़े बैठे रहेंगे और उसी के अनुसार लोगों को घुटने के स्तर पर लाते रहेंगे तो राज्य को ऊंचाईंयों तक नहीं पहुंचाया जा सकेगा। सेना की अग्निवीर योजना का विरोध करने वालों को अहसास भी नहीं कि पुरानी पेंशन स्कीम का शोर मचाकर वे युवाओं को किस अंधे कुएं में धकेल रहे हैं। कार्पोरेट सेक्टर में आरक्षण का षड़यंत्र करके किस तरह आरक्षित वर्ग के विशाल तबके को रोजगार के मंगलमयी अवसरों से वंचित कर रहे हैं। हमें पुराने शासकों और पुरानी सोच में ढल चुके लोगों को सख्ती से गो बैक कहना होगा। यदि लोकतंत्र के नाम पर लूजर्स को सत्ता के नजदीक जगह दी जाएगी तो विनर्स के माध्यम से रचे जा रहे नए संसार से हम प्रदेश को वंचित कर देंगे। हमें इस लोकतंत्र को नए संदर्भों में रीसेट होने देना होगा। सरकार ने अब तक अफवाहों पर ध्यान दिए बगैर स्वविवेक से फैसले लिए हैं। उसे इसी तरह आगे बढ़ते रहना होगा, तभी हम भारत माता के परम वैभव के लक्ष्य तक पहुंच पाएंगे।

  • अनुराधा सिंघई की नियुक्ति को हाईकोर्ट ने सही बताया

    अनुराधा सिंघई की नियुक्ति को हाईकोर्ट ने सही बताया

    पुलिस में दर्ज प्राथमिकी खारिज, शिकायत कर्ताओं को लगाई फटकार

    भोपाल। ईडी की नियुक्ति को चुनौती देने वाली याचिका क्रमांक 29833/2023 पर मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय ने अपना महत्वपूर्ण फैसला सुना दिया है। न्यायालय ने न केवल सेडमैप की कार्यकारी संचालक श्रीमती अनुराधा सिंघई की नियुक्ति को सही माना है, बल्कि उनके विरूद्ध लगाए गए सभी आरोपों को भी झूठा बताया है। कार्यकारी संचालक श्रीमती अनुराधा सिंधई की नियुक्ति उद्यमिता विकास केंद्र मध्यप्रदेश (सेडमैप) में 27 जुलाई 2021 को की गई थी। उनके कार्यभार संभालने से पहले ही नियुक्ति प्रक्रिया और उनकी योग्यता पर सवाल उठाए जाने लगे थे। अब कोर्ट का बहुप्रतीक्षित निर्णय आने के बाद यह साबित हो गया कि सभी आरोप झूठे और निराधार थे, जिससे विरोधियों को कोर्ट में पराजय का सामना करना पड़ा। न्यायालय के निर्णय के सम्मान में सेडमैप में खुशी मनाई गई। निर्णय आते ही ईडी श्रीमती अनुराधा सिंघई को सभी ओर से बधाइयां मिलना शुरू हो गईं।


    बता दें कि सेडमैप की कार्यकारी संचालक श्रीमती अनुराधा सिंघई की नियुक्ति के खिलाफ न केवल पुलिस थाना में झूठी और फर्जी शिकायत दर्ज कराई गई थी, बल्कि उन्हें परेशान करने के लिए न्यायालय में भी याचिका दायर की गई थी कि वह ईडी पद के लिए योग्य नहीं हैं और इस पद पर उनकी नियुक्ति में अनियमितताएं हुई हैं, लेकिन हाईकोर्ट का फैसला आने के बाद अब सब कुछ स्पष्ट हो गया है, साथ ही विरोधियों के झूठ का भी पर्दाफाश हो गया है।


    दरअसल, भ्रष्टाचार के विरूद्ध ‘‘जीरो टॉलरेंस’’ की नीति पर अडिग कार्यकारी संचालक श्रीमती अनुराधा सिंघई को पद से हटाने के लिए पिछले तीन वर्षाें से कतिपय तत्वों द्वारा हर तरह के हथकंडे अपनाए जा रहे थे। भ्रष्टाचार के मंसूबे पूरे न होते देख कुछ लोगों ने कार्यकारी संचालक की नियुक्ति को ही चुनौती दे डाली। बिना जांच पड़ताल किए एक के बाद एक प्रकरण दर्ज होने के बाद भी कार्यकारी संचालक श्रीमती अनुराधा सिंघई ने सबका डटकर मुकाबला किया, और जैसे-जैसे प्रकरण आगे बढ़ता गया, सभी को वास्तविकता का आभास होने लगा। ईडी के पक्ष में धीरे-धीरे लोग सामने आने लगे। कार्यकारी संचालक ने नियुक्ति सम्बंधी जो तथ्य प्रस्तुत किए, उनके सामने, विरोध में मुखर लोगों को हार मानने, के लिए विवश होना पड़ा।
    हालांकि इस मामले की बहस पिछले माह ही पूरी हो गई थी, परंतु कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रख लिया था। फैसला सुनने के बाद जहां सेडमैप के कर्मचारियों के चेहरे खिल उठे वहीं उद्यमिता भवन में खुशियां मनाई गईं। कार्यकारी संचालक ने कहा कि अदालत ने किसी भी धारा में उन्हें दोषी नहीं पाया। उन्हें न्याय प्रणाली पर पूरा भरोसा था। नियुक्ति सम्बंधी मामले में बीते तीन वर्षों से घिरीं कार्यकारी संचालक श्रीमती अनुराधा सिंधई ने गर्व से न्यायालय के फैसले का सम्मान किया। कर्मचारियों के बीच जीत की घोषणा करते ही उद्यमिता भवन में हर्ष की लहर दौड़ गई। उल्लेखनीय है कि इससे पूर्व संस्था के एक भ्रष्ट समूह ने षड़यंत्रपूर्वक ईडी को पद से हटाने के इरादे से पुलिस थाने में भी एफ.आई.आर. दर्ज कराई थी, जिसमें गहन जांच-पड़ताल के बाद यह पाया गया कि ईडी सही हैं और भोपाल जिला और सत्र न्यायालय ने गहन जांच और विचार-विमर्श के बाद, कार्यकारी संचालक के खिलाफ लगाए गए सभी आरोपों को झूठा करार दिया व एफ.आई.आर. खारिज कर दी गई।
    बताना चाहेंगे कि इससे पूर्व में हो चुकी विभागीय जांच में भी विभागीय अधिकारियों द्वारा श्रीमती अनुराधा सिंघई की नियुक्ति को सही ठहराया गया। अब हाईकोर्ट के निर्णय उपरांत उस पर मोहर लग गई है।
    हालांकि तीन साल तक कार्यकारी संचालक को कई आरोपों का सामना करना पड़ा, जिससे उनकी कार्यप्रणाली, उनकी उपलब्धियां और वित्तीय स्थिति के लिए उनकी प्रतिष्ठा पर आंच आने का खतरा मंडराने लगा था। कार्यकारी संचालक श्रीमती अनुराधा सिंघई ने फैसले के बाद सभी के प्रति आभार व्यक्त किया और राहत व्यक्त की।

    उन्होंने कहा कि न्यायालय का निर्णय एक कानूनी जीत से कहीं अधिक है। यह पारदर्शिता, नैतिक आचरण और भ्रष्टाचार के विरूद्ध छेड़ी गई मुहिम के प्रति अटूट आस्था का प्रतीक है। कानूनी विशेषज्ञों की एक प्रतिष्ठित टीम द्वारा हर प्रकार से मुकाबला किया गया और पूरी लगन से बहस की गई। एक अनुचित जांच का सामना करते हुए ईडी की प्रतिष्ठा पर गहरा असर पड़ा, परंतु चुनौतियों के बावजूद, उन्होंने अपनी बेगुनाही बरकरार रखी और कानूनी कार्यवाही में लगातार सहयोग किया।


    आरोपों के झूठा साबित होने पर अपनी प्रतिक्रिया में कार्यकारी संचालक श्रीमती अनुराधा सिंघई ने कहा कि आज उन्हें फिर से विश्वास हो गया कि ईश्वर के घर में देर है, अंधेर नहीं। उन्होंने कहा कि वे शुरू से स्वयं को निर्दाेष बता रहीं थीं। लेकिन किसी ने उनकी बात नहीं सुनी। आखिर सच की जीत हुई। न्यायालय का निर्णय आने के पश्चात कार्यकारी संचालक श्रीमती अनुराधा सिंघई ने अपने अधिवक्ताओं, परिवार, मित्रों, और प्रशंसकों के समर्थन के लिए, सभी की शुभकामनाओं के लिए उन्हें धन्यवाद दिया, जो इस कठिन समय के दौरान उनके समर्थन में अटूट रहे तथा जिनकी वजह से उन्हें साहस और संबल मिला और वे कठिनाइयों से जूझ सकीं, जिन्होंने पूरी प्रक्रिया में मार्गदर्शन प्रदान किया। उन सभी के प्रति उन्होंने धन्यवाद ज्ञापित किया।
    अनुराधा को ऐसे किया प्रताड़ित…!


    o संस्था में बाहरी एजेंसियों से मिला हुआ, कुछ कर्मचारियों का एक ऐसा अंदरूनी समूह (सिंडिकेट) था, जो वित्तीय अनियमितता में लिप्त था और संस्था के हितों से ऊपर अपने हितों को रखता था।
    o इस षडयंत्रकारी समूह ने ही कार्यकारी संचालक के कार्यभार संभालने से पूर्व ही दो प्रकरण दर्ज करा रखे थे, जिन्हें बाद में वापस ले लिया गया।
    o उसके बाद शुरू हुआ अनगिनत आर.टी.आई. (सूचना का अधिकार) लगाने और सी.एम. हेल्पलाइन में झूठी शिकायतों का सिलसिला
    o दुर्भावनापूर्ण इरादे और बुरी नियत से भद्दे, अशोभनीय पत्र लिखे गए
    o छवि धूमिल करने के इरादे से कई तरह की अफवाहें फैलाई गईं, कर्मचारियों को उनके विरूद्ध कार्य करने के लिए बरगलाया गया।
    o योग्यता और नियुक्ति को लेकर जनहित याचिका (पी.आई.एल.) क्रमांक 11889/2022 लगाई गई, जिसे माननीय उच्च न्यायालय ने दिनांक 23 मई 2022 को खारिज कर दिया और नियुक्ति को सही ठहराया।
    o कूटरचित, मिथ्या और भ्रामक दस्तावेज तैयार कर षडयंत्रपूर्वक आपराधिक प्रकरण दर्ज कराया गया, जो पुलिस जांच में झूठे पाए गए और न्यायालय ने भी पुष्टि करते हुए उन्हें खारिज कर दिया।
    o षडयंत्रकारी यहीं नहीं रूके, छवि धूमिल करने के लिए कतिपय तत्वों द्वारा गुमनाम, फर्जी और झूठी शिकायतें, अलग-अलग नामों से विभिन्न फोरम पर की जाती रहीं।
    o संस्था में कार्यरत कर्मचारियों के अतिरिक्त नवनियुक्त कर्मचारियों को ईडी के खिलाफ़ भड़काकर कार्य बाधित किया गया।
    o कोर्ट में अपील खारिज हो जाने से हताश लोगों ने मनगढ़ंता तरीके से मिथ्या, भ्रामक और काल्पनिक चैट बनाकर वायरल किया और चरित्र हनन का प्रयास किया। आपको बता दें कि क्राइम ब्रांच द्वारा जांच में साबित हो गया कि मनगढ़ंत और झूठी चैट बनाने के पीछे एक निष्कासित एजेंसी रतन एम्पोरियम का प्रबंधक रमनवीर अरोरा था। उसके विरूद्ध कोर्ट में चालान भी पेश हो गया है।
    o अपने मंसूबों में कामयाबी मिलते न देख और कोर्ट में अपील खारिज होने से हताश भ्रष्ट समूह की शह पर कई दफा ईडी की रैकी और पीछा करते हुए लोगों से भी जान का खतरा पाया गया, जिसकी शिकायत पुलिस कमिश्नर कार्यालय में की गई।
    o उक्त समूह द्वारा दहशत फैलाने का मकसद ईडी को मरवाने की कोशिश भी हो सकता है।
    o मीडिया को भी गुमराह करने की कोशिशें की गईं, झूठी, भ्रामक और मनगढ़ंता जानकारी देकर ईडी की छवि धूमिल करने और चरित्र हनन की साजिशें की गईं।


    § * योग्यता पर प्रश्नचिन्ह कैसे…?*
    o एक स्वशासी संस्था जो वर्ष 2021 में बंद की कगार पर थी और निरंतर कई वर्षों से घाटे में जा रही थी, उसे अपनी कार्यकुशलता से सफलतापूर्वक संचालित कर दिखाया। उन्होंने आर्थिक संकट की स्थिति में ईडी का कार्यभार संभालते हुए मात्र चार माह में 14 माह का (बीते 10 माह सहित) वेतन देकर संस्था को घाटे से उबार दिया।
    o ईडी के कार्यभार से पूर्व संस्था की हालत यह थी कि कर्मचारियों को 10 माह से वेतन नहीं मिल पा रहा था, जो कि उनके ज्वाइन करने के चार माह के भीतर ही 14 माह का वेतन प्रदान कर दिया गया और तब से अब तक कर्मचारियों को नियमित वेतन प्राप्त हो रहा है।
    o संस्था के क्षेत्रीय समन्वयकों की वित्तीय अनियमितता और दुराचार के कारण संविदा कर्मचारी और जिला समन्वयक काफी प्रताड़ित हो रहे थे, उनकी मुश्किलों को क्षेत्रीय समन्वयक का पद समाप्त करते हुए, दूर किया गया।
    o संस्था अपने अस्तित्व से लड़ रही थी और बेहद खराब छवि से गुजर रही थी, तब उन्होंने छवि निखारने के लिए सभी आवश्यक कदम उठाए और संस्था के प्रति विश्वास का वातावरण निर्मित करते हुए पहचान दिलाने का कार्य किया।
    o संस्था में गुणवत्ता पर ध्यान दिया गया। मैनपावर प्रभाग में चल रही विसंगतियों को दूर करते हुए सेडमैप को बतौर मॉनीटरिंग एजेंसी और फेसिलिटेटर के रूप में उभारा, जिसके परिणामस्वरूप मध्यप्रदेश भंडार क्रय नियम के अन्तर्गत प्रशिक्षण एवं आउटसोर्स सेवाओं के लिए संस्था को नामांकित किया गया।
    o संस्था के लक्ष्यों की प्रतिपूर्ति के लिए एक ब्लूपिं्रट तैयार किया गया, जिसके माध्यम से मध्यप्रदेश मंे कोई बेरोजगार न रहे, इस हेतु सभी को रोजगार-स्वरोजगार और आजीविका से जोड़ने का बीड़ा उठाया गया।
    o और भी कई ऐसे प्रेरक कार्य हैं जो शासन की मंशा के अनुरूप किये जा रहे हैं और उनके सुखद परिणाम भी आ रहे हैं।
    § क्या इसे कहेंगे अयोग्य होना?
    o जो कार्यभार संभालने के उपरांत महज 4-5 माह में ही संस्था को घाटे से उबार देता है।
    o जो गुणवत्ता पर ध्यान देते हुए संस्था को उत्तरोत्तर प्रगति की ओर अग्रसर करता है।
    o जो जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाते हुए भ्रष्टाचार के विरूद्ध कठोर कदम उठाता है।
    o जो संस्था के उद्देश्यों के अनुरूप रोजगार-स्वरोजगार और आजीविका संवर्धन के लिए नए-नए प्रयोग करता है।
    o जिन्हें कॉर्पाेरेट सामाजिक उत्तरदायित्व, क्लस्टर विकास, व्यवसाय मॉडलिंग, उद्यमिता, प्रशिक्षण, आजीविका, अनुसंधान और अध्ययन, कॉर्पाेरेट समाधान, अंतर्राष्ट्रीय व्यापार और सरकारी सलाह सहित विकास और कॉर्पाेरेट क्षेत्र में 21 वर्षों से अधिक का अनुभव है।
    o जो बहुमुखी प्रतिभा की धनी हैं और बिजनेस वुमेन ऑफ द ईयर सहित कई सामाजिक, सांस्कृतिक एवं शैक्षणिक संस्थाओं द्वारा पुरस्कृत हैं।
    o जो फैलो कंपनी सेक्रटरी की उपाधि से विभूषित हैं और वेद, वेदांग एवं उपनिषद में गहन अध्ययन के लिए सम्मानित हैं।
    o जो आजीविका संवर्द्धन के लिए किए जा रहे प्रयासों के लिए विदेशों में तीन बार भारत का प्रतिनिधित्व कर चुकी हैं।
    o जिन्होंने अपनी कार्यकुशलता और दूरदर्शिता से संस्था का कायापलट किया है।


    फैसले के बाद विधि विशेषज्ञों की राय
    न्यायालय के फैसले पर सेडमैप के विधिक सलाहकार एडिशनल एडवोकेट जनरल श्री भरत सिंह और वरिष्ठ हाईकोर्ट एडवोकेट श्री पंकज दुबे ने प्रसन्नता प्रकट की। कार्यकारी संचालक श्रीमती अनुराधा सिंघई के पक्ष में न्यायालय का निर्णय आने के उपरांत खुशी जताते हुए एडिशनल एडवोकेट जनरल श्री भरत सिंह ने कहा कि ईडी वाकई बहुत साहसी और जुझारू हैं, जिन्होंने अकेले इस विषम परिस्थिति का सामना किया और बुराई को जड़ से हटाया। यदि देश में ऐसे और लोग हों तो प्रदेश का कायापलट करने से कोई नहीं रोक सकता। उन्होंने शासन की राजस्व चोरी को रोका है। उन्हें सम्मानित किया जाना चाहिए।
    वरिष्ठ हाईकोर्ट एडवोकेट श्री पंकज दुबे का भी कहना है कि ईडी की नियुक्ति को कोर्ट ने पूरी तरह से सही ठहराया है। कोर्ट ने माना कि ईडी की नियुक्ति पूरी तरह से सही है और सक्षम प्राधिकारी द्वारा उनकी नियुक्ति को सही ठहराया गया है वह काफी योग्य हैं। इसलिए सभी आरोप झूठे और बेबुनियाद साबित हुए।


    शिकायतकर्ता मनोज शर्मा निष्कासित अकाउंटेंट है जो कि वित्तीय अनियमितता में भ्रष्ट समूह में शामिल था। इसके लिए उसके द्वारा दुर्भावनापूर्ण तरीके से फर्जी और झूठी शिकायत की गई। माननीय कोर्ट ने उसे बुरी तरह फटकार लगाई है।
    विभागीय जांच के विरूद्ध आर.डी. मांडवकर जब हाईकोर्ट में स्टे लेने गया तो माननीय हाईकोर्ट जज ने स्टे की पिटीशन को खारिज करते हुए आर.डी. मांडवकर को भी फटकार लगाई थी। ईडी ने विभागीय जांच शुरू की तो उसने बदला लेने के लिए ईडी के विरूद्ध झूठी एफ.आई.आर. दर्ज कराई।


    माननीय न्यायालय का निर्णय भ्रष्ट समूह में शामिल मनोज शर्मा, शरद कुमार मिश्रा, आर.डी. मांडवकर और रमनवीर अरोरा समेत समस्त अंदरूनी कर्मचारी और बाहरी उनके सहयोगी साजिश में जुटे अन्य लोगों के लिए एक बड़ा सबक है।

  • सरकार चाहती रोजगार मिले पर कलेक्टर वेतन देने राजी नहीं

    सरकार चाहती रोजगार मिले पर कलेक्टर वेतन देने राजी नहीं


    भोपाल 20 जुलाई(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)।सरकार के सूक्ष्म एवं लघु उद्योग विभाग ने जिन उद्यमियों को प्रशिक्षण देकर कुशल कामगार के रूप में जिलों में भेजा है उन्हें कई कलेक्टर वेतन ही नहीं देना चाहते हैं। गुना कलेक्टर ने ऐसे करीब दस कर्मचारियों से साल भर काम कराया और बाद में कर्मचारियों की चयन प्रक्रिया में शामिल सैडमैप को ये कहते हुए वापस लौटा दिया कि उन्हें काम करना नहीं आता है। कर्मचारियों ने अपना हक पाने के लिए शासन के दरवाजे खटखटाए हैं।


    मामला सैडमैप संस्था का है। इस अर्धशासकीय संस्था को सरकार ने नई पीढ़ी के उद्यमियों को प्रशिक्षित करने के लिए तैनात कर रखा है।संस्था विभिन्न रुचियों वाले उद्यमियों को प्रशिक्षण देकर तैयार करती है और कार्पोरेट व सरकारी संस्थानों को उपलब्ध कराती है। निजी क्षेत्रकी भी कई बड़ी कंपनियां कुशल कर्मचारियों के लिए सैडमैप को डिमांड भेजती हैं और उन्हें अपनी उद्यमिता बढ़ाने में मदद मिलती है। विभिन्न जिलों में पदस्थ संस्था के क्षेत्रीय अधिकारी युवाओं को उनकी रुचि के अनुरूप प्रशिक्षण उपलब्ध कराते हैं और शासन की निर्धारित दर पर सैडमेप को भी अपना खर्ची निकालने की जवाबदारी दी गई है। शासन सीधे तौर पर संस्था को अनुदान नहीं देता है।


    ताजा मामला गुना कलेक्टर सत्येन्द्र सिंह के उस इंकार से गरमाया है जिसमें उन्होंने चयन प्रक्रिया से चयनित कर्मचारियों का वेतन जारी करने से इंकार कर दिया। उनकी ओर से सैडमैप को पत्र जारी किया गया जिसमें कहा गया है कि वे कर्मचारी सक्षम नहीं हैं और उन्हें काम नहीं आता है। गुना कलेक्ट्रेट को ये अहसास तब हुआ जब उन कर्मचारियों ने कई महीनों का लंबित वेतन मांगते हुए कलेक्टर कार्यालय से संपर्क किया। कलेक्टर महोदय ने कर्मचारियों का वेतन तो जारी नहीं किया बल्कि उनके चयन का ठीकरा सैडमैप पर ही फोड़ दिया।


    गौरतलब है कि सैडमैप में इन पैनल्ड रूप से जुड़ी हुई एजाईल सिक्यूरिटी फोर्स प्राईवेट लिमिटेड फर्म की ओर से आयोजित चयन प्रक्रिया में जिला शिक्षा केन्द्र के परियोजना समन्वयक का भी एक प्रतिनिधि शामिल था। उनसे अपनी कसौटी पर जांचकर युवाओं का चयन किया था। लगभग साल भर तक परियोजना में काम करते रहने के बावजूद जब कर्मचारियों का वेतन नहीं दिया गया तब उन्होंने शोरगुल मचाना प्रारंभ कर दिया। उनकी जरूरतों को देखते हुए लगभग दो माह का वेतन सैडमैप ने अपने फंड से उपलब्ध कराया ताकि बजट जारी होने और वेतन मिलने तक कर्मचारियों का जीवनयापन हो सके।


    कलेक्टर गुना की ओर से जब कर्मचारियों को वेतन देने से इंकार कर दिया गया तब उन्होंने अपनी पीड़ा से शासन को अवगत कराया है। शोरगुल बढ़ता देख गुना कलेक्टर की ओर से जारी पत्र सार्वजनिक कर दिया गया जिसमें कर्मचारियों के चयन के लिए ठीकरा सैडमैप पर फोड़ा गया है।


    मामले में पेंच तो ये है कि यदि गुना जिला शिक्षा केन्द्र के समन्वयक के पास वेतन देने की हैसियत नहीं थी तो उन्होंने सैडमैप से कर्मचारी मांगे ही क्यों। कर्मचारियों का चयन भी उनके प्रतिनिधि ने स्वयं किया तब क्या कलेक्टर महोदय से अनुमति नहीं ली गई थी। गुना जिला प्रशासन यदि कर्मचारियों का वेतन देने में सक्षम नहीं था तो कलेक्टर महोदय ने उन्हें अन्य उद्यमों में रोजगार मुहैया कराने की जवाबदारी क्यों नहीं निभाई। लगभग साल भर कर्मचारियों से काम लिया गया और बाद में उनकी योग्यता पर सवालिया निशान लगाकर युवाओं के जीवन से खिलवाड़ क्यों किया गया।


    जनता के खजाने से लगभग अस्सी हजार करोड़ रुपयों का स्थापना व्यय वसूलने वाली नौकरशाही आखिर क्यों युवाओं को अपना दुश्मन मान रही है। इतना बड़ा बजट लेकर भी ये नौकरशाही उत्पादकता बढ़ाने के पैमाने पर लगातार फिसड्डी साबित होती जा रही है। तमाम कार्पोरेट संस्थान अपने कर्मचारियों की कुशलता बढ़ाने के लिए उन्हें नए नए प्रशिक्षण देते हैं ऐसे में सैडमैप से प्रशिक्षण पाकर सेवाएं उपलब्ध कराने वाले युवाओं के साथ ये खिलवाड़ क्यों किया जा रहा है इस पर शासन को विचार अवश्य करना होगा।

  • जगदीश देवड़ा ने बजट में समृद्धि के नए आयाम खोले

    जगदीश देवड़ा ने बजट में समृद्धि के नए आयाम खोले

    भोपाल,03 जुलाई (प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)। मध्य प्रदेश के उप-मुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा ने बुधवार को विधानसभा में वर्ष 2024-25 के लिए बजट पेश कर दिया है। 3.65 लाख करोड़ रुपये का बजट पेश किया गया है, जो पिछले साल के मुकाबले 16 प्रतिशत अधिक है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार में किसानों को ध्यान रखकर जो सुधार किए गए हैं उनके अनुरूप लगभग पांच हजार करोड़ रुपयों का प्रावधान किया गया है। केन्द्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान की ओर से मिलने वाली सौगातें इसमें शामिल नहीं हैं।


    विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार के नेतृत्व में कांग्रेस विधायकों ने जमकर हंगामा किया। उनकी मांग थी कि नर्सिंग कॉलेज घोटाले के लिए तत्कालीन चिकित्सा शिक्षा मंत्री विश्वास सारंग को बर्खास्त किया जाए। इस एकसूत्री मांग के साथ विधायकों ने आसंदी के पास आकर नारेबाजी की और बजट भाषण में व्यवधान डालने की कोशिश की। जब तक देवड़ा बोलते रहे, तब तक विपक्ष के विधायक हंगामा करते रहे। बाद में उन्होंने वॉकआउट कर लिया और बाहर जाकर धरना दिया। पत्रकारों से चर्चा में देवड़ा ने विपक्ष के इस रवैये को कष्टप्रद बताया है।


    देवड़ा ने 2024-25 के बजट में जो प्रमुख घोषणाएं की हैं, उनमें पीएम ई-बस योजनांतर्गत छह शहरों (इंदौर, भोपाल, जबलपुर, ग्वालियर, उज्जैन एवं सागर) में भारत सरकार की सहायता से 552 ई-बसों का संचालन करना शामिल है। इसके साथ ही सरकार ने पांच साल में वार्षिक बजट के आकार को दोगुना करने का लक्ष्य तय किया है। 2024-25 के लिए 3,65,067 करोड़ रुपये के व्यय का प्रावधान किया गया है, जो 2023-24 के 3,14,025 करोड़ रुपये के मुकाबले 16 प्रतिशत अधिक है।
    मध्य प्रदेश में अगले पांच साल में एक्सप्रेस-वे नेटवर्क के माध्यम से 299 किमी का अटल प्रगति पथ, 900 किमी का नर्मदा प्रगति पथ, 676 किमी के विंध्य एक्सप्रेस-वे, 450 किमी का मालवा-निमाड़ विकास पथ, 330 किमी का बुंदेलखंड विकास पथ एवं 746 किमी का मध्य भारत विकास पथ बनाया जाएगा। इनके दोनों ओर औद्योगिक कॉरीडोर विकसित होंगे। भोपाल, इन्दौर, जबलपुर एवं ग्वालियर में एलिवेटेड कॉरिडोर बन रहे हैं। सिंहस्थ-2028 को ध्यान में रखते हुए उज्जैन शहर में बायपास के साथ शहर में आने वाले सभी मार्गों को चार लेन अथवा आठ लेन किया जाएगा।


    राज्य सरकार ने संस्कृति विभाग के लिए 1,081 करोड़ रुपये रखे हैं। यह 2023-24 के मुकाबले 250 प्रतिशत अधिक है। इस राशि से भारत के कालजयी महानायकों की तेजस्विता का संग्रहालय वीर भारत न्यास स्थापित किया जा रहा है। यह देश और दुनिया का अपनी तरह का पहला संग्रहालय होगा। भगवान श्री राम ने वनवास के दौरान प्रदेश के विभिन्न स्थानों से पथ गमन किया। राज्य की सीमाओं के अंतर्गत राम पथ गमन के अंचलों के विभिन्न स्थलों को चिह्नांकित कर उनका विकास करेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने श्री कृष्ण पाथेय योजना की घोषणा की गई है। इसके माध्यम से प्रदेश में श्री कृष्ण पथ के पुनरावेषण और संबंधित क्षेत्रों के साहित्य, संस्कृति तथा संस्कार का संरक्षण, संवर्धन किया जाना प्रस्तावित है।
    कृषि क्षेत्र का बजट 15 प्रतिशत, स्वास्थ्य के साथ-साथ महिला एवं बाल विकास विभाग के बजट में 56 प्रतिशत की बढ़ोतरी की गई है। शिक्षा में चार प्रतिशत, एससी, एसटी और ओबीसी वर्गों की योजनाओं के लिए 10 प्रतिशत, इंफ्रास्ट्रक्चर क्षेत्र में 9 प्रतिशत, नगरीय एवं ग्रामीण विकास के लिए 13 प्रतिशत, संस्कृति संवर्धन के लिए 35 प्रतिशत, रोजगार के लिए 39 प्रतिशत की बढ़ोतरी की गई है।


    अगले पांच साल में एक्सप्रेस-वे नेटवर्क के माध्यम से 299 किमी का अटल प्रगति पथ, 900 किमी का नर्मदा प्रगति पथ, 676 किमी के विंध्य एक्सप्रेस-वे, 450 किमी का मालवा-निमाड़ विकास पथ, 330 किमी का बुंदेलखंड विकास पथ एवं 746 किमी का मध्य भारत विकास पथ बनाया जाएगा। इनके दोनों ओर औद्योगिक कॉरीडोर विकसित होंगे।


    सिंहस्थ-2028 को ध्यान में रखते हुए उज्जैन शहर में बायपास के साथ शहर में आने वाले सभी मार्गों को चार लेन अथवा आठ लेन किया जाएगा।
    प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के अंतर्गत 2024-25 में 1,000 किमी सड़क बनाएंगे और 2,000 किमी सड़कों के नवीनीकरण का लक्ष्य है।
    अमरकंटक एवं सतपुडा ताप विद्युत गृहों में 660-660 मेगावाट की नई विस्तार इकाइयों का निर्माण होगा। 603 सर्किट किमी पारेषण लाइनों एवं 2,908 मेगावाट क्षमता के अति उच्च दाब उपकेन्द्र के कार्य प्रस्तावित हैं।
    प्रति व्यक्ति आय 2023-24 में 1,42,565 रुपये रही, जो 2003-04 की 13,465 रुपये से लगभग 11 गुना हो गई है। नीति आयोग की जनवरी-2024 की रिपोर्ट के अनुसार 2013-14 से 2022-23 के बीच मध्य प्रदेश के 2.30 करोड़ लोग गरीबी से बाहर आए हैं।
    श्री अन्न उत्पादन को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से मध्यप्रदेश राज्य मिलेट मिशन गठित किया है। राज्य सरकार द्वारा श्री अन्न के उत्पादन तथा उत्पादकता में वृद्धि के लिये फेडरेशन के माध्यम से उपार्जित किये जा रहे कोदो-कुटकी पर प्रति किलोग्राम 10 रूपये की अतिरिक्त राशि भी दी जाएगी।
    डिंडोरी में श्री अन्न अनुसंधान केन्द्र की स्थापना होगी। क़ृषि क्षेत्र में अनुसंधान को बढ़ावा देने के लिए उज्जैन में चना तथा ग्वालियर में सरसों अनुसंधान संस्थान बनेंगे।


    पशुओं को घर पहुंच चिकित्साः मई 2023 से प्रारंभ 406 चलित पशु चिकित्सा इकाइयों ने अब तक 5.46 लाख से अधिक पशुओं को घर पर चिकित्सा सुविधा दी है। चलित पशु कल्याण सेवा योजना में 82 करोड़ रुपये खर्च होंगे।
    मुख्यमंत्री सहकारी दुग्ध उत्पादक प्रोत्साहन योजना प्रारंभ की जाएगी। इसके अंतर्गत दुग्ध उत्पादकों को सहकारी समितियों के माध्यम से प्रति लीटर प्रोत्साहन राशि दी जाएगी। इसके लिए 150 करोड़ रुपये का बजट।
    2,190 गौ-शालाओं का संचालन हो रहा है। इनमें लगभग तीन लाख गौ-वंश का पालन हो रहा है। प्रति गौ-वंश प्रति दिन 20 रुपये दिए जाते थे, जिसे दोगुना कर 40 रुपये किया जाएगा। तीन गुना वृद्धि करते हुए बजट में 250 करोड़ रुपये रखे हैं। 2024-25 को गौ-वंश रक्षा वर्ष के रूप में मनाया जाएगा।
    किसानों की आय बढ़ाने के लिए प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्यम उन्नयन योजना के महत्वपूर्ण घटक जैसे सूक्ष्म सिंचाई, फसल विस्तार, संरक्षित खेती, बागवानी, मधुमक्खी पालन की स्थापना पर फोकस।
    किसानों की आय बढ़ाने में फूड प्रोसेसिंग का महत्वपूर्ण योगदान है। उद्योग संवर्धन नीति के अंतर्गत फूड प्रोसेसिंग यूनिट्स को विशेष पैकेज दिया जा रहा है। फूड प्रोसेसिंग उद्योगों को पांच वर्ष तक मंडी शुल्क में शत-प्रतिशत तथा विद्युत टैरिफ में एक रुपये प्रति यूनिट की छूट।
    प्रदेश में उपलब्ध 4 लाख 42 हजार हैक्टेयर जलक्षेत्र में से 4 लाख 40 हजार हेक्टेयर जलक्षेत्र मछली पालन अन्तर्गत लाया जा चुका है। वर्ष 2023-24 में 3 लाख 82 हजार मैट्रिक टन मत्स्य उत्पादन तथा लगभग 215 करोड़ मत्स्य बीज का उत्पादन किया गया है, जो अब तक का सर्वाधिक है।
    अहमदाबाद में ग्लोबल फिशरीज कॉन्फ्रेंस में सिवनी को बेस्ट इनलेण्ड डिस्ट्रिक्ट का प्रथम पुरस्कार तथा बालाघाट की प्राथमिक सरस्वती मछुआ सहकारी समिति को मछुआ सहकारी समिति की श्रेणी में द्वितीय पुरस्कार मिला है।
    विद्यार्थियों में स्किल डेवलपमेंट एवं एमर्जिंग ट्रेण्डस के दृष्टिगत ए.आई, मशीन लर्निंग, कोडिंग आधारित शिक्षा उपलब्ध कराई जाएगी।


    प्रदेश सरकार ने सरकारी स्कूलों में नई शिक्षा नीति के तहत अभी तक 1,500 प्री-स्कूल क्लासेस संचालित कर रहे हैं। 2024-25 में 3,200 प्राथमिक शालाओं में प्री-स्कूल शुरू होंगे।
    सरकारी स्कूलों में विषयवार शिक्षकों की उपलब्धता के साथ खेल, नृत्य, संगीत शिक्षकों के 11 हज़ार पदों पर नियुक्ति की कार्यवाही की जा रही है।
    730 स्कूलों को पीएम श्री योजना अंतर्गत चिन्हित किया है। शैक्षिक गुणवत्ता सुधार के साथ भौतिक संसाधनों का उन्नयन भी किया जाएगा। प्रदेश के बैगा, भारिया, सहरिया जैसी विशेष पिछड़ी जनजाति समुदाय के बच्चों को बेहतर शिक्षा उपलब्ध कराने हेतु पीएम जन-मन योजना के अंतर्गत इस वर्ष 22 नवीन छात्रावास प्रारंभ किए जाएंगे।
    प्रदेश के विद्यार्थियों के लिए उच्च शिक्षा सुगम बनाने हेतु तीन नवीन शासकीय विश्वविद्यालयों यथा क्रांति सूर्य टंट्या भील विश्वविद्यालय खरगौन, तात्या टोपे विश्वविद्यालय गुना एवं रानी अवंतीबाई लोधी विश्वविद्यालय सागर की स्थापना की है। दो निजी विश्वविद्यालयों की स्थापना भी प्रदेश में हुई है।
    वर्ल्ड बैंक परियोजना के माध्यम से 247 महाविद्यालयों में राशि 244 करोड़ रुपये का बजट प्रावधान कर भौतिक एवं अकादमिक अधोसंरचना विकास के कार्य कराये जा रहे हैं।


    उच्च शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार और बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए शुरू की गई पीएम उषा परियोजना के तहत प्रदेश में 565 करोड़ की कार्ययोजना स्वीकृत हुई है।
    प्रत्येक जिले में एक कॉलेज को प्रधानमंत्री कॉलेज ऑफ एक्सीलेंस में अपग्रेड किया जाएगा। इन कॉलेजों के लिए दो हजार से अधिक नवीन पद भी सृजित किए गए हैं।
    प्रदेश में 22 नए आईटीआई शुरू होंगे। वर्तमान में 268 सरकारी आईटीआई संचालित हो हैं। नए आईटीआई में 5,280 नई सीट्स मिलेंगी। देवास, छिंदवाडा एवं धार को ग्रीन स्किलिंग आईटीआई में विकसित कर सोलर टेक्नीशियन एवं इलेक्ट्रिक व्हीकल मैकेनिक पाठ्यक्रम प्रांरभ किए हैं ।
    विद्यार्थियों को विशिष्ट कौशल एवं आधुनिक तकनीक का प्रशिक्षण प्रदान करने के उद्देश्य से प्रदेश के प्रत्येक संभाग में स्थित इंजीनियरिंग/पॉलीटेकनिक महाविद्यालय में कोडिंग लैब की स्थापना की जाएगी।

  • मुख्यमंत्री मोहन यादव की दहाड़ पर सदन में छाया सन्नाटा

    मुख्यमंत्री मोहन यादव की दहाड़ पर सदन में छाया सन्नाटा


    भोपाल,01 जुलाई(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)। मध्यप्रदेश विधानसभा के मानसून सत्र में आज मुख्यमंत्री डाक्टर मोहन यादव ने पहली बार जिस सख्त लहजे में जवाब दिया उससे पूरे सदन में अचानक सन्नाटा फैल गया। कमोबेश दो दशक बाद पहली बार सदन के नेता की दहाड़ ने नेतृत्व की मौजूदगी का अहसास कराया है।


    मामला कथित नर्सिंग भर्ती घोटाले का था जिसमें विपक्ष ये कहते हुए आक्रामक था कि सरकार इस मुद्दे पर चर्चा नहीं कराना चाहती क्योंकि इससे उसकी नाकामियां उजागर होने वाली हैं। विपक्ष में बैठे कांग्रेस के कई सदस्य सफेद एप्रिन पहिनकर सदन में आए थे। चिकित्सा शिक्षा विभाग पर दिए गए स्थगन प्रस्ताव पर चर्चा कराए जाने के लिए उन्होंने सदन में दबाव बनाना शुरु किया था। नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने विधानसभा अध्यक्ष नरेन्द्र सिंह तोमर से कहा कि हमारे तीस चालीस सदस्यों ने स्थगन प्रस्ताव देकर इस लोक महत्व के विषय पर चर्चा कराने की मांग की है। ये मामला युवाओं से जुड़ा है और परीक्षाओं व संचार घोटालों की वजह से वे परेशान हैं। इस विषय पर सदन में चर्चा की जानी चाहिए।


    इस पर संसदीय कार्य मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने कहा कि मध्यप्रदेश विधानसभा एवं कार्य संचालन संबंधी पुस्तिका के पेज क्रमांक साठ पर साफ लिखा है कि जो मुद्दे किसी न्यायाधिकरण आयोग आदि के सामने विचाराधीन हैं उन विषयों पर चर्चा नहीं की जाती है। इन मामलों में जांच एजेंसी जांच कर रही है। प्रकरण न्यायालय में भी चल रहा है जजों की कमेटी इस मामले पर विचार कर रही है ऐसे में नियमों और परंपराओं के अनुसार इस विषय पर चर्चा नहीं हो सकती।


    इस पर उमंग सिंघार ने कहा कि हम तो नर्सिंग परीक्षा के संबंध में बात करना चाह रहे हैं। सीबीआई तो कालेजों की जांच कर रही है। ये मामला न्यायालय में नहीं है। कैलाश विजयवर्गीय ने कहा कि स्थगन प्रस्ताव में जो मुद्दा उठाया गया है वो न्यायालय में विचाराधीन है। उमंग सिंघार ने कहा कि हम तो नर्सिंग काऊंसिल पर सरकार के बनाए गए नियमों राजपत्र में प्रकाशन आदि के विषय में बात करना चाह रहे हैं। सरकार इस पर बात क्यों नहीं करना चाहती वह बच क्यों रही है।


    अध्यक्ष नरेन्द्र सिंह तोमर ने कहा कि बजट का सत्र हो या न्यायालय में विचाराधीन प्रकरण उन पर सदन में चर्चा नहीं कराई जाती है क्योंकि चर्चा के दौरान कई तरह के आक्षेप भी लगा दिये जाते हैं जिनका जवाब न्यायालय के कार्य में हस्तक्षेप करना हो जाता है। इन्हीं सब चर्चाओं में पक्ष और विपक्ष के कई सदस्य तैश में आकर तर्क दे रहे थे ,शोरगुल के बीच अध्यक्ष ने सदन की कार्यवाही दोपहर एक बजे तक स्थगित कर दी।


    एक बार फिर जब सदन समवेत हुआ तो उमंग सिंघार ने एक बार फिर इस विषय पर चर्चा कराए जाने की मांग कर दी। इस पर कैलाश विजय वर्गीय ने कहा कि डाक्टर मोहन यादव की सरकार चर्चा से भाग नहीं रही है। ये कोई तात्कालिक घटना नहीं है तीन चार या पांच सत्र बीत चुके हैं पुराना मामला है इसलिए इस पर बजट चर्चा के दौरान आसानी से बात हो जाएगी।
    इस पर कांग्रेस के भंवर सिंह शेखावत ने गुस्से में भरकर कहा कि मामला कांग्रेस और भाजपा का नहीं है,प्रदेश के बच्चों के भविष्य का है। विधानसभा अध्यक्ष नरेन्द्र सिंह तोमर ने उन्हें ये कहकर समझाने का प्रयास किया कि सरकार ने कह दिया है कि वह चर्चा कराने को तैयार है। इस पर श्री शेखावत गुस्से से बोले कि फिर चर्चा कराईए न। मुख्यमंत्री मोहन यादव ने बात को संभालते हुए कहा कि हम किसी विषय पर पीछे नहीं हट रहे हैं। जन हितैषी विषय पर चर्चा कराने को तैयार है। विधानसभा का कामकाज रोककर स्थगन लाने और ध्यानाकर्षण में अंतर होता है इसे अगली बार ले आईए फिर चर्चा करा लेंगे।


    इस पर भंवर सिंह शेखावत ने तंज कसते हुए कहा कि आप चर्चा से नहीं घबराते आप बहादुर हैं आपको इसका प्रमाण पत्र दिया जाएगा। जवाब में कैलाश विजयवर्गीय ने कहा कि हमें आपके प्रमाण पत्र की जरूरत नहीं है। उच्च शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार ने कहा कि ये सर्टिफिकेट आप अपने पास रख लें हम पारदर्शी तरीके से सरकार चलाते हैं । सभी मुद्दों पर कार्रवाई हो रही है और हम चर्चा के लिए तैयार हैं। इस पर भी श्री शेखावत शांत नहीं हुए उन्होंने कहा कि आप चर्चा क्यों नहीं कराना चाहते जिन्होंने भ्रष्टाचार किया है उन्हें आप बचाना चाह रहे हैं।


    इस मुद्दे पर लगभग शांत बैठे मुख्यमंत्री डाक्टर मोहन यादव ने कहा कि हमने शुरु से स्वर रखा है कि हम हर विषय पर चर्चा कराने को तैयार हैं। किसी मसले पर हमारी सरकार डरने वाली नहीं है और न ही हम पीछे हटने वाले हैं। आपके स्वर किसी भी स्तर तक जा सकते हैं लेकिन हम संयम के साथ स्पष्टता से अपनी बात रखना चाहते हैं। यदि कोई उत्तेजना से बात करेगा तो ये सुनने की आदत हमारी भी नहीं है।माननीय सदस्य गण सुन लें अपनी बात को संयमित तरीके से रखें। तीखे स्वरों में कही गई उनकी बात पर पूरे सदन में खामोशी छा गई। नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने बात को संभालते हुए कहा कि हम विवाद के बजाए चर्चा कराना चाहते हैं। इस पर विधानसभा अध्यक्ष नरेन्द्र सिंह तोमर ने सदन को आश्वस्त करते हुए कहा कि ये चर्चा ग्राह्यता पर नहीं हो रही है। दोनों पक्षों ने इस विषय पर फैसला लेने का अवसर मुझे दिया है इसलिए कल मैं किसी उचित नियम के तहत इस पर चर्चा कराऊंगा।

  • नदी जोड़ो परियोजना में राजस्थान और एमपी के बीच करार

    नदी जोड़ो परियोजना में राजस्थान और एमपी के बीच करार


    भोपाल 30 जून(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)। पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने जिस नदी जोड़ो परियोजना का स्वप्न देखा था वह अब साकार होने जा रहा है। भारत की मोदी सरकार ने राजस्थान और मध्यप्रदेश दोनों की सरकारों को इस परियोजना पर शीघ्र अमल करने के निर्देश दिए हैं। इसके बाद आज मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डाक्टर मोहन यादव और राजस्थान के मुख्यमंत्री भजन लाल शर्मा की उपस्थिति में दोनों राज्यों के उच्चाधिकारियों ने अनुबंध पर हस्ताक्षर किए हैं। विस्तृत कार्ययोजना भी केन्द्र को भेज दी गई है जिसमें परियोजना की 90 फीसदी लागत केन्द्र सरकार और 10 फीसदी लागत राज्य सरकारों ने देने की सहमति जताई है।


    इस संबंध में आज पुरानी विधानसभा स्थित कंवेंशन हाल में हुए आयोजन में दोनों राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने इसे भारत को मजबूत बताने वाली महत्वाकांक्षी योजना बताया है। डाक्टर मोहन यादव ने कहा कि लगभग बीस साल पहले जब इस योजना की आधारशिला रखी गई थी तब से अब तक कई बार आर्थिक और कई बार राजनीतिक कारणों से इस परियोजना पर कार्य आरंभ नहीं हो पाया था। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की सरकार ने समय सीमा में इस परियोजना पूरी करने का निर्देश दिया है और इस संबंध में केन्द्र सरकार की ओर से हरसंभव योगदान देने का आश्वासन दिया है। इसपरियोजना से लगभग साढ़े तीन लाख हेक्टेयर नई कृषि भूमि सिंचित बनाई जा सकेगी। लगभग तीस लाख किसान परिवारों को इस परियोजना से सीधा लाभ मिलेगा। सत्रह बांध बनाए जाएंगे जिनमें लगभग पंद्रह सौ मिलियन घन मीटर पानी व्यर्थ बहने से रोका जा सकेगा।


    राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने बताया कि ये परियोजना काफी पहले पूरी हो जानी चाहिए थी। कांग्रेस की सरकारों ने इस परियोजना में कोई रुचि नहीं दिखाई जिसकी वजह से लगभग दो दशक बाद इस परियोजना पर अमल शुरु हो पाया है। इस परियोजना से राजस्तान की लगभग तीन लाख हेक्टेयर नई जमीनें सिंचाई के दायरे में आ जाएंगी। ये परियोजना देश की आर्थिक विकास की रीढ़ बनने जा रही है। इस परियोजना को समयसीमा में पूरा किया जाएगा और जल्दी ही जनता को इस परियोजना का सीधा लाभ मिलने लगेगा।


    जल संसाधन मंत्री तुलसीराम सिलावट , विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव राजेश राजौरा, राज्य मंत्री कृष्णा गौर, व राजस्थान के अतिरिक्त मुख्य सचिव अभय कुमार भी इस अवसर पर उपस्थित थे।

  • धर्मस्थलों के अतिक्रमण हटाने में अव्वल रहे उज्जैनवासी

    धर्मस्थलों के अतिक्रमण हटाने में अव्वल रहे उज्जैनवासी

    उज्जैन24 मई(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर) उज्जैन के लोगों ने आपसी सामंजस्य और समन्वय से धर्मस्थलों के अतिक्रमण हटाने की मिसाल पेश की है। बरसों से शहर के विकास में रोड़े बने इन धर्मस्थलों को हटाने में प्रशासन के बजाए जनता ने खुद बड़ी भूमिका निभाई है। केडी मार्ग चौड़ीकरण में नागरिकों की इस पहल में जो साम्प्रदायिक सौहार्द्र देखने मिला आम तौर पर वैसा अन्य इलाकों में नहीं देखा जाता है।
    जिला प्रशासन, पुलिस एवं नगर निगम की संयुक्त टीम द्वारा गुरुवार और शुक्रवार को केडी गेट तिराहें से तीन इमली चौराहे के जद में आने वाले 18 धार्मिक स्थलों को जनसहयोग से शांतिपूर्वक ढंग से हटाने की कार्रवाई की गई हैं। जिसमें धार्मिक स्थलों के व्यवस्थापकों , पुजारियों और लोगों द्वारा भी सहयोग किया गया। 18 धार्मिक स्थलों में 15 मंदिर, 2 मस्जिद, एक मजार हैं, जिन्हें पीछे करने और अन्यत्र स्थापित करने की कार्यवाही की गई हैं। हटाई गई प्रतिमाओं को प्रशासन द्वारा धार्मिक स्थलों के व्यवस्थापकों द्वारा बताए गए निर्धारित स्थान पर विधि विधान से स्थापित किया गया। साथ ही 20 से अधिक भवन जिनका गलियारा आगे बढ़ा लिया गया था। ऐसे भवनों के उस हिस्से को भी भवन स्वामियों द्वारा स्वेच्छा से तोड़ने की कार्यवाही की गई।


    केडी मार्ग के विकास के लिए विभिन्न धार्मिक संप्रदाय न केवल आगे आए बल्कि उन्होंने स्वयं अपने धार्मिक स्थलों को हटाने में सहयोग किया। जिला प्रशासन द्वारा भी विभिन्न धार्मिक संप्रदायों से आपसी सामंजस्य और समन्वय बनाने में सक्रिय भूमिका निभाई गई। कलेक्टर उज्जैन श्री नीरज कुमार सिंह और पुलिस अधीक्षक श्री प्रदीप शर्मा द्वारा लगातार कार्यों की मॉनिटरिंग की गई।

    धार्मिक भावना आहत न हो इसका रखा गया विशेष ध्यान

    कलेक्टर श्री नीरज कुमार सिंह और पुलिस अधीक्षक श्री प्रदीप शर्मा के निर्देशानुसार धार्मिक स्थलों को हटाने से पूर्व और दौरान प्रत्येक संप्रदाय के व्यस्थापकों और प्रमुख लोगों से चर्चा की गई और समन्वय स्थापित किया गया। कलेक्टर श्री सिंह के निर्देशानुसार किसी भी संप्रदाय की धार्मिक भावना आहत न हो इस बात का विशेष ध्यान रखा गया।

    प्रशासन, पुलिस और नगर निगम के अमले ने निभाई सक्रिय भूमिका

    केडी मार्ग चौड़ीकरण के लिए कलेक्टर व एसपी के मार्गदर्शन में निगम आयुक्त श्री आशीष पाठक, एडीएम श्री अनुकूल जैन, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक श्री जयंत सिंह राठौर सहित अन्य अधिकारियों द्वारा विभिन्न धार्मिक संगठनों से समन्वय और सामंजस्य में सक्रिय भूमिका निभाई गई। लगभग डेढ़ किलोमीटर लंबे केडी मार्ग के लिए विभिन्न सेक्टर्स में कार्यपालिक मेजिस्ट्रेट्स की ड्यूटी लगाई गई। प्रशासन पुलिस एवं नगर निगम का अमला भी मुस्तैद रहा।

  • जनता ने तो चुन लिया मोदी मार्ग

    जनता ने तो चुन लिया मोदी मार्ग


    मोदी सरकार को जनता तीसरी बार सत्ता में भेजने जा रही है। अब तक पांच चरणों के चुनाव में साफ हो गया है कि भाजपा और एनडीए गठबंधन भारी जनसमर्थन से सरकार में पहुंच रहा है। ये जनादेश देश के विकास का जनादेश होगा। पहली बार न तो कोई सहानुभूित की लहर है और न ही जाति धर्म के दलालों की जोड़ तोड़। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी सीधे जनता से संवाद कर रहे हैं और कारगर संवाद के माध्यम से अपनी सरकार के कार्यकलापों का उल्लेख करके कार्यकाल का जनादेश जुटा रहे हैं। भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जे.पी.नड्डा और अमित शाह के मार्गदर्शन में चल रहे इस महाभियान में दुनिया की सबसे विशाल लोकतांत्रिक पार्टी एक स्वर में चुनाव लड़ रही है। अंग्रेजों ने जब भारत के टुकड़े करके यहां धर्म आधारित फूट के बीज बोए थे तब उन्हें भी एहसास नहीं था कि कभी उनके तमाम प्रयासों को भारत का सनातन धता बता देगा। सनातन ने हमेशा से सभी धर्मों का सम्मान करना सिखाया है। वसुधैव कुटुंबकम का विचार पूरी दुनिया को परिवार मानने का संदेश देता है इसके बावजूद अंग्रेजों के प्रश्रय से पनपी कांग्रेस ने सतर सालों तक जाति ,धर्म,भाषा का ऐसा वैमनस्य बोया कि जनता सिर फुटौव्वल में ही लगी रही। सबको एक करने का विचार लिए जनसंघ हो या राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ इनके करोड़ों कार्यकर्ताओं की पीढ़ियां खप गईं। गरीबी दूर करने का स्वप्न दिखाकर नेहरू गांधी परिवार ने लगातार सत्तर सालों तक बहुराष्ट्रीय कंपनियों को लूट का साझीदार बनाए रखा। बाबा रामदेव के पातंजलि आर्युवेद जैसे सैकड़ों प्रकल्पों ने देश को पहली बार बताया कि अहिंसात्मक चिकित्सा ही समाज को बेहतर जीवन दे सकती है। इसके पहले तो एलोपैथी के माध्यम से समाज को स्वास्थ्य प्रदान करने का ऐसा अभियान चलाया गया था कि लोगों को लगता था यदि उन्हें दवा नहीं मिली तो उनका जीवन नष्ट हो जाएगा। स्वयंसेवकों ने इतने विशाल देश को जीवन संयम की डोर में बांधकर जैसा पुनर्जागरण चलाया उन्हें समझाया कि सर्जरी जैसी उपचार विधि आपातकाल में जरूरी होती है स्वस्थ्य रहने के लिए तो जीवनशैली में बदलाव लाना होंगे। आज भी देश की बड़ी आबादी जीवनशैली जनित बीमारियों से ग्रस्त है। उन्हें नहीं मालूम कि बहुत छोेटे उपाय उनका जीवन खुशहाल बना सकते हैं। नरेन्द्र मोदी अपने चुनाव प्रचार अभियान को लोकतंत्र का उत्सव बताते हैं। इसके विपरीत शैतान पर कंकर फेंकने की सोच से भरे कांग्रेस के राहुल गांधी बदतमीजी की भाषा में प्रधानमंत्री को गाली देते फिरते हैं। पश्चिम बंगाल में ममता बैनर्जी मुस्लिमों को उकसाकर दंगे करवाकर सत्ता में बने रहने का प्रयास कर रहीं हैं। अखिलेश यादव ,की समाजवादी पार्टी हो या केरल के वामपंथी सभी लड़ने मारने पर उतारू हैं।इसके विपरीत भाजपा के प्रचारक अपनी वोटर सूची का पन्ना संभाले लोगों से मतदान की अपील कर रहे हैं। चुनाव अभियान का असर ये है कि कांग्रेस का निराश मतदाता तो पोलिंग बूथ तक भी नहीं पहुंच रहा है। उसे लगता है कि इंडी गठबंधन की विचारधारा समय के साथ पिछड़ गई है। धारा 370 हो या राममंदिर निर्माण जैसे तमाम मुद्दों पर इस गठबंधन की पहले ही करारी हार हो चुकी है।आज वह खलनायक बनकर समाज के बीच खड़ा है ऐसे में आम जनता उससे दूरी बनाकर रखने में ही अपनी भलाई समझ रही है। जाहिर है इसका सीधा लाभ एनडीए गठबंधन को ही मिलना है। भाजपा की राज्य इकाईयां भले ही अब तक विकास की मुख्यधारा को आत्मसात नहीं कर पाईं हों लेकिन जिस तरह चुनाव प्रचार अभियान में हर बिंदु पर प्रवक्ता की तरह प्रकाश डाला गया उससे संगठन को बड़ा सहारा मिला है। मध्यप्रदेश में शिवराज सिंह चौहान की पूर्ववर्ती सरकार आत्मनिर्भरता के मुद्दे पर बहुत कुछ नहीं कर पाई थी। ऐसे में जनता के बीच असंतोष भी बढ़ गया था लेकिन चुनाव अभियान ने जनता से जिस तरह संवाद किया उससे वो नाराजगी दूर हो गई। डॉ.मोहन यादव की सरकार अभी तक अपना काम शुरु नहीं कर पाई है वह भी चुनाव अभियान की जिम्मेदारी उठाए हुए है। भाजपा का केन्द्रीय प्रचार अभियान इतना सफल जन शिक्षण कर रहा है कि उससे आम नागरिक तक को अपना लक्ष्य साफ नजर आने लगा है। मध्यप्रदेश की डॉ.मोहन यादव सरकार से देश को भारी अपेक्षाएं हैं। देखना है कि विकास की जो समझ देश के बीच विकसित हुई है उसकी कसौटी पर वर्तमान सरकार किस हद तक सफल होती है. फिलहाल मतदान के दो चरण बाकी हैं और बहुत सारी प्रमुख सीटों पर मतदान होना है । प्रचार की लय इतनी सुरीली है कि देश टकटकी लगाए उसे सुन रहा है। वोट कर रहा है। जाहिर है कि सकारात्मक अभियान अपने बड़े लक्ष्य को भी आसानी से वेध लेगा। एनडीए लगभग चार सौ सीटों पर पहले ही काबिज है अब वह चार सौ पार की ओर बढ़ रहा है।

  • सरकार ने तय किया तो विकास पथ पर बढ़ चला सैडमैप

    सरकार ने तय किया तो विकास पथ पर बढ़ चला सैडमैप


    कांग्रेस में भगदड़ मची है और सभी समझदार देशभक्त पुरानी लीक छोड़कर भाजपा में शामिल हो रहे हैं। इसकी वजह विकास की वो इबारत है जो मोदी सरकार ने बुलंद आवाज के रूप में उद्घोषित की है। मुक्त बाजार व्यवस्था का आगाज तो भारत में पूर्व प्रधानमंत्री पी व्ही नरसिंम्हाराव की सरकार ने किया था लेकिन उस पर अमल करने का भगीरथ नरेन्द्र मोदी की भाजपा ही कर पाई है। राहुल कांग्रेस आज भी मानने तैयार नहीं है कि उनके पूर्वज कितनी बड़ी गलती कर रहे थे। वे बार बार कांग्रेस की उसी विचारधारा के सहारे फूट के बीज बोकर गरीबी को संरक्षित करने का प्रयास कर रहे हैं जो उनकी दादी श्रीमती इंदिरा गांधी ने अपनी सत्ता मजबूत करने के लिए लागू की थी। जातिगत जनगणना हो या सरकारीकरण सभी का फटा ढोल पीटती राहुल कांग्रेस आज भी देश में भ्रमजाल फैलाने में जुटी है। अडानी अंबानी को गालियां देकर राहुल गांधी और उनकी चिलम भरने वाले कांग्रेसी बार बार विकास के पैरों में बेडियां पहनाने की कोशिश कर रहे हैं लेकिन जनता अब इस भ्रमजाल से बाहर निकल चुकी है। मध्यप्रदेश की भाजपा पर जबसे शिवराज सिंह चौहान की कांग्रेस की पूंछ पकड़कर चलने वाली सरकार का साया हटा है तबसे राज्य की भाजपा देश के मूलभूत विचार पथ पर मजबूती से कदम बढ़ाती नजर आ रही है। सरकार के निगम,मंडलों और संस्थाओं में सरकार की बदली कार्यप्रणाली की छाप स्पष्ट तौर पर दृष्टिगोचर होने लगी है। डॉक्टर मोहन यादव सरकार ने उन फिजूल योजनाओं को बंद कर दिया है जिनके माध्यम से सत्ता माफिया अपना उल्लू सीधा करता था। गरीब कल्याण की बात कहकर माफिया के गुर्गे ठेके, सप्लाई ,निर्माण आदि में खजाने की चोरी करते थे। हालांकि आज भी इन मुफ्तखोरों पर पूरी तरह अंकुश नहीं लग पाया है इसके बावजूद सरकार के प्रतिष्ठान इन नई राह पर धीरे धीरे बढ़ चले हैं। सरकार को प्रशिक्षित कार्यबल उपलब्ध कराने के लिए बनाया गया सैडमैप अपने काम को कुशलता पूर्वक अंजाम दे रहा है। सरकार के संरक्षण में यहां ऐसा प्रबंधन अपना कार्य कर रहा है जिससे संस्थान की आय में कई गुना इजाफा हो गया है। सिक्योरिटी एजेंसी, प्रशिक्षण संस्थाओं और नियोक्ताओं की आड़ में मलाई काटने वाले माफिया को खदेड़कर बाहर कर दिए जाने से मुफ्तखोरों का एक बड़ा वर्ग आहत हो गया है। भारत सरकार हो या राज्य सरकार दोनों आगे बढ़ते इस संस्थान को लगातार अपना संरक्षण और संबल प्रदान कर रहे हैं। वे जानते हैं कि विरोध या गड़बड़ियों के आरोप लगाने वाले कौन हैंऔर क्यों तिलमिला रहे हैं। जिन प्रशिक्षण कार्यक्रमों को बंद किया गया है उनके विकल्प के रूप में जो ढांचा खड़ा किया जा रहा है वह युवाओं के लिए ज्यादा उपयोगी और कारगर है। सरकार पर बोझ घटाने में भी ये सुधारात्मक उपाय सहयोगी साबित हो रहे हैं। दरअसल आजादी के बाद से संरक्षण वाद और बेचारगी को सहारा देने का जो भाव सरकारों के बीच पनप गया था उससे इतर कोई भी उपाय लोगों को आक्रामक नजर आता है। लोगों को लगता है कि यदि सरकार ने कृपा नहीं की तो देश भूखों मर जाएगा। जबकि जनता के विकास कार्यों को संरक्षण देने का सबसे उचित तरीका यह है कि उन पर से मुफ्तखोरों का बोझ हटा दिया जाए। यदि माफिया के संरक्षण में पनप रहे ये मुफ्तखोर खदेड़ दिए जाएंगे तो जाहिर है कि सरकार की कार्यक्षमता में जो इजाफा होगा उसका लाभ सीधे आम जन को मिलने लगेगा। सैडमैप अपने आर्थिक संसाधनों को लगातार विकसित कर रहा है और अपनी उपयोगिता स्थापित करता जा रहा है। कमोबेश ऐसे ही सुधार तमाम निगम मंडलों के लिए अपरिहार्य है। सरकार को कारगर और उपयोगी समूहों का नेतृत्व कर्ता बनाना है तो जाहिर है कि गरीबी और बेचारगी के नाम पर फल फूल रहे माफिया की विदाई करना सबसे उचित फैसला होगा। इसका विरोध करने वालों को भी अपनी सोच पर एक बार ठहरकर आत्ममंथन करना चाहिए ताकि वे अपनी गलतियों को सुधार सकें।

  • नर्मदा को सीवरेज से मुक्त बनाने में सहयोग की अपील

    नर्मदा को सीवरेज से मुक्त बनाने में सहयोग की अपील

    भोपाल19 फरवरी(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)। नगरीय विकास एवं आवास विभाग के उपक्रम मध्य प्रदेश अर्बन डेवलपमेंट कंपनी द्वारा नर्मदापुरम में जर्मन बैंक केएफडब्ल्यू की सहायता से सीवरेज परियोजना पर कार्य किया जा रहा है वर्तमान में 144 किलोमीटर में से 25 किलोमीटर सीवरेज लाइन बिछा दी गई है। मलजल के शोधन के लिए नगर में 21 एमएलडी क्षमता का सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट स्थापित किया जा रहा है। सीवर लाइन बिछाने के बाद खुदाई उपरांत अस्थाई रोड रेस्टोरेशन कर दिया जाता है। इसके उपरांत मेनहोल निर्माण, हाउस सर्विस चैम्बर निर्माण के उपरांत स्थाई रोड रेस्टोरेशन का कार्य किया जाता है इस पूरी प्रक्रिया में 20-25 दिन का समय लग जाता है। सीवरेज लाइन बिछाने का कार्य सडक के बीचो बीच में से किया जाता है जिसके कारण नल कनेक्शन एवं पाइप लाइन भी क्षतिग्रस्त होती है जिसका समय समय पर सुधार कार्य किया जाता है, ऐसी स्थिति में नागरिकों को भी असुविधा का सामना करना पडता है। मध्यप्रदेश अर्बन डेवलपमेंट कम्पनी सभी सम्मानीय नागरिकों से अपील करती है कि नर्मदापुरम सीवरेज परियोजना का कार्य मॉ नर्मदा की निर्मलता बनाऐं रखने के लिए किया जा रहा है अतः कार्य अवधि में धैर्य रखते हुए सहयोग करें। उल्लेखनीय है कि मध्यप्रदेश अर्बन डेवलपमेंट कम्पनी द्वारा प्रति सप्ताह कार्य की समीक्षा भी की जा रही है।

  • जगदीश देवड़ा ने पेश किया अंतरिम बजट

    जगदीश देवड़ा ने पेश किया अंतरिम बजट

    लेखानुदान में कोई नया कर नहीं लगाया.

    भोपाल, 12 फरवरी(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)।उप मुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा ने आज वित्तीय वर्ष 2024-25 का लेखानुदान विधानसभा में प्रस्तुत किया। संविधान के अनुच्छेद 206 (1) के अंतर्गत निरंतर व्यय के मदों के लिये नवीन सेवायें अथवा व्यय के नये मद/शीर्ष सम्मिलित नहीं हैं। लेखानुदान का उद्देश्य अंतिम आपूर्ति की स्वीकृति होने तक सरकार के क्रियान्वयन को जारी रखना है। करारोपण संबंधी नये प्रस्ताव तथा व्यय के नवीन मद सम्मिलित नहीं हैं। द्वितीय अनुपूरक अनुमान में सम्मिलित नवीन योजनाओं के लिये प्रावधान है। लेखानुदान की अवधि समाप्त होने के पूर्व अनुदान की पुनरीक्षित मांगें सदन के समक्ष प्रस्तुत की जायेंगी। लेखानुदान द्वारा प्राप्त राशि मुख्य बजट में समाहित की जायेंगी। लेखानुदान 4 माह (एक अप्रैल से 31 जुलाई, 2024) के लिये है। वित्तीय वर्ष हेतु बजट में सम्मिलित राशि 3,48,986.57 करोड़ है। लेखानुदान के लिये राशि रुपये 1,45,229.55 करोड़ है। लेखानुदान राशि में मतदेय राशि रुपये 1,19,453.05 करोड़ तथा भारित राशि रुपये 25,776.51 करोड़ है।

    बजट अनुमान 2024-25 का वार्षिक वित्तीय विवरण

    वर्ष 2024-25 के बजट अनुमान में कुल राजस्व प्राप्तियाँ राशि रुपये 2,52,268.03 करोड़ है। इसमें राज्य कर से राजस्व प्राप्तियाँ रुपये 96,553.30 करोड़ है। गैर कर राजस्व प्राप्तियाँ रुपये 18,077.33 करोड़ है। बजट अनुमान में राजस्व व्यय रुपये 2,51,825.13 करोड़ है। वर्ष 2023-24 में पुनरीक्षित अनुमान में राजस्व व्यय रुपये 2,31,112.34 करोड़ है। वर्ष 2024-25 में बजट अनुमान में राजस्व आधिक्य रुपये 442.90 करोड़ है। कुल पूँजीगत प्राप्तियाँ का बजट अनुमान रुपये 59,718.64 करोड़ है एवं वर्ष 2024-25 में कुल पूँजीगत परिव्यय का बजट अनुमान 59,342.48 करोड़ है।

  • गडकरी की टास्कफोर्स करेगी उद्योग और कृषि में सुधार

    गडकरी की टास्कफोर्स करेगी उद्योग और कृषि में सुधार

    भोपाल,31 जनवरी(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)।मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में मंत्रिपरिषद की बैठक मंत्रालय में वंदे मातरम् गान के साथ आरंभ हुई। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मंत्रिपरिषद की बैठक से पहले अपने संबोधन में प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी को पार्वती-कालीसिंध-चंबल लिंक परियोजना के लिए धन्यवाद दिया तथा प्रदेश को 10 हजार 405 करोड़ की सड़क परियोजनाओं की सौगात देने के लिए केंद्रीय मंत्री श्री नितिन गडकरी का आभार माना। मंत्रिपरिषद के सदस्यों ने मेजें थपथपाकर अभिवादन किया। मंत्रिपरिषद ने केन्द्रीय मंत्री नितिन गड़करी के फार्मूले पर टास्कफोर्स बनाने के लिए भी सहमति दी है जिससे कृषि और औद्योगिक विकास नई ऊंचाईयां छूने लगेगा.

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि लगभग दो दशक से लंबित पार्वती- कालीसिंध- चंबल लिंक परियोजना, प्रधानमंत्री श्री मोदी की पहल से अब मूर्त रूप ले सकेगी। इससे मध्य प्रदेश के मालवा और चंबल क्षेत्र के 12 जिले और पूर्वी राजस्थान के 13 जिले लाभान्वित होंगे, इन क्षेत्रों में पेयजल की उपलब्धता बढ़ेगी तथा सिंचाई और औद्योगिक उपयोग के लिए भी पानी उपलब्ध होगा। उन्होंने जानकारी दी की 75000 करोड़ की इस परियोजना में राज्यांश मात्र 10% है, 90% राशि केंद्र शासन द्वारा उपलब्ध कराई जाएगी। डॉ. यादव ने कहा कि केन-बेतवा लिंक परियोजना का भूमि पूजन फरवरी 2024 में होगा।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री श्री गडकरी द्वारा दी गई राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं की सौगात से प्रदेश के सभी संभागों में त्वरित और सुगम सड़क परिवहन की सुविधा मिलेगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि केंद्रीय मंत्री श्री गडकरी द्वारा कृषि और उद्योग क्षेत्र के संबंध में दिए गए सुझावों के क्रियान्वयन तथा आवश्यक समन्वय के लिए विशेष टास्क फोर्स गठित किया जाएगा।

  • नगरीय निकाय अपना बिजली बिल खुद भरें बोले विजयवर्गीय

    नगरीय निकाय अपना बिजली बिल खुद भरें बोले विजयवर्गीय


    भोपाल, 24 जनवरी(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)। नगरीय विकास और आवास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने नगरीय विकास संचालनालय का निरीक्षण किया तो उन्हें स्थानीय शासन की ढेरों गड़बड़ियों से सामना करना पड़ा। उन्होंने साफ निर्देश दिए हैं कि नगरीय निकाय अपनी कराधान व्यवस्था सुधारें और बिजली के बिल स्वयं भरें । शासन से मिलने वाली राशि में होने वाली कटौती से बचने के लिए स्थानीय निकायों को आत्मनिर्भर बनना होगा। मंत्री के आश्वासन के बाद वित्त विभाग ने नगरीय निकायों को दी जाने वाली लगभग तीन सौ तीस करोड़ रुपयों की धनराशि जारी कर दी है।


    विभागीय सूत्रों ने बताया कि शासन के वित्त विभाग ने कड़ा वित्तीय अनुशासन लागू करते हुए नगरीय निकायों को दी जाने वाली चुंगी क्षतिपूर्ति एवं अन्य राशि जारी करने पर रोक लगा रखी थी। नगरीय प्रशासन विभाग के अधिकारी इसे लेकर हो हल्ला मचा रहे थे। श्री विजय वर्गीय ने स्वयं पहुंचकर मामले का जायजा लिया तो नगरीय प्रशासन के कुशासन की पोल खुल गई। उनके साथ वित्त सचिव ज्ञानेश्वर पाटिल और नगरीय विकास आयुक्त भरत यादव भी मौजूद थे।

    वित्त विभाग ने कड़े वित्तीय अनुशासन के अंतर्गत नगरीय विकास विभाग पर अपनी उधारी चुकाने के लिए दबाव बनाया था। नगरीय निकायों की लापरवाही और उधार लेकर घी पीने की शैली के चलते मध्यप्रदेश का वित्तीय प्रबंधन प्रभावित हो रहा था। मंत्री कैलाश विजयवर्गीय के निर्देश के बाद वित्त विभाग ने इस बार पूरी राशि जारी कर दी है। आमतौर पर वित्त विभाग लगभग ढाई सौ करोड़ रुपए जारी करता है। बाकी राशि वह प्रोजेक्ट उदय योजना की शर्तों के कारण काट लेता है। नगरीय प्रशासन विभाग ने आश्वासन दिया है कि वह नगरीय निकायों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए टैक्स की वसूली समय पर कराने का प्रयास कर रहा है।


    विभागीय मंत्री ने अधिकारियों से कहा कि मूलभूत राज्य वित्त आयोग, सड़क अनुरक्षण और मुद्रांक शुल्क की राशि, जो करीब एक हजार करोड़ रुपए के पास है, को जल्दी जारी किया जाए। उन्होंने यूआईडीएफ के अंतर्गत नगरीय निकायों को अमृत योजना की पूर्ति के लिए 500 करोड़ रुपए शीघ्र जारी करने की मांग की है। वित्त सचिव ने बताया कि इस संबंध में अधिकारिक रूप से एक हफ्ते के अंदर कार्रवाई की जाएगी। मंत्री विजयवर्गीय की मौजूदगी में हुई बैठक में यह भी तय हुआ कि मेट्रो रेल के संबंध में 350 करोड़ रुपए की स्वीकृत राशि के लिए राज्य का अंश शीघ्र जारी किया जाए। बैठक में तय हुआ कि पूंजीगत मदों की योजनाओं को नगरीय निकायों द्वारा लागू करने के संबंध में मानक प्रक्रिया तय कर सभी नगरीय निकायों को जारी की जाए। नगरीय विकास विभाग के अधिकारियों ने मुख्यमंत्री शहरी अधो संरचना चतुर्थ चरण के अंतर्गत ऋण लिए जाने के संबंध में एमपीयूडीसी को अधिकृत किए जाने की स्वीकृति जल्द जारी किये जाने का आग्रह किया है। 552 ई-बसें छह शहरों में विजयवर्गीय ने प्रदेश के 6 प्रमुख नगरों में नगर परिवहन सेवा को मजबूत करने के लिए नगरीय विकास विभाग ने 552 ई-बसें लागू करने का प्रस्ताव वित्त विभाग को दिया है। नगरीय विकास मंत्री विजय वर्गीय ने कहा कि इस योजना में अन्य राज्यों ने गारंटी दी है, जिसे प्रदेश में भी वित्त विभाग द्वारा दी जाएगी।


    बैठक में वित्त विभाग ने बताया कि नगरीय निकायों की विभिन्न शासकीय विभागों पर अधिरोपित सेवा कर राशि की सूची उपलब्ध कराई जाए। इसके आधार पर वित्त विभाग द्वारा उक्त राशि शीघ्र दिलाए जाने के प्रयास किए जाएंगे। बैठक में मंत्री ने कहा कि नगरीय निकायों को देय चुंगी क्षतिपूर्ति की राशि से राज्य स्तर पर कटौती नहीं की जाना चाहिए। ऐसी व्यवस्था हो कि नगरीय निकाय बिजली बिल की राशि खुद बिजली कंपनियों को जमा कराएं। बैठक में नगरीय विकास मंत्री ने न्यू पेंशन स्कीम के कर्मचारियों को ग्रेच्युटी दिए जाने के संबंध में विभागीय प्रस्ताव को वित्त विभाग द्वारा एक सप्ताह में निराकरण करने के निर्देश दिए हैं। इससे पहले कैलाश विजयवर्गीय ने शिवाजी नगर पालिका भवन स्थित संचालनालय का निरीक्षण कर अधिकारियों को पेंशन, प्रशिक्षण जैसे मुद्दों पर आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।

    इस मौके पर अमृत योजना, मुख्यमंत्री अधोसंरचना योजना और प्रधानमंत्री आवास योजना के कार्यों की भी विस्तार से समीक्षा कर कार्य समय-सीमा में पूर्ण करने के निर्देश दिए। नगरीय क्षेत्रों में निर्मित हो चुके संजीवनी क्लीनिक को प्रारंभ कराने को भी कहा है। विजयवर्गीय ने कहा कि हमारा ध्येय है कि हर नागरिक तक सरकारी योजनाओं का लाभ पहुंचे और समाज के अंतिम छोर के व्यक्ति तक विकास की पहुंच सुनिश्चित हो। इस अवसर पर केश शिल्पी बोर्ड के अध्यक्ष श्री नंदकिशोर वर्मा जी सहित विभागीय अधिकारी उपस्थित रहे।विभाग के अपर आयुक्त शिवम वर्मा, कैलाश वानखेडे व प्रमुख अभियंता सुरेश सेजकर भी इस अवसर पर उपस्थित थे।

    श्री विजयवर्गीय ने 450 वर्गफिट तक के भवन निर्माण पर 24 घंटे के भीतर भवन अनुज्ञा की अनुमति देने पर विचार करने के लिए भी अधिकारियों को निर्देषित किया। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि इसके लिए नियम निर्माण से संबंधित वर्कशॉप आयोजित की जाये। विभागीय मंत्री ने आपदा प्रबंधन कार्यों की समीक्षा करते हुए कहा कि वर्षा पूर्व नालों की साफ सफाई करवायी जाये व अतिक्रमण हटाऐं जायें।