Category: मध्यप्रदेश

  • सत्ता माफिया से मुक्ति दिलाने एमपी आया जाणता राजा

    सत्ता माफिया से मुक्ति दिलाने एमपी आया जाणता राजा


    कांग्रेस की अराजक सरकारों से मुक्ति के दो दशक बाद तक मध्यप्रदेश किताबी प्रयोगों से गुजरता रहा है। पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती ने जिस पंच ज अभियान की नींव रखी थी वह साकार हो पाती इसके पहले ही अंतर्राष्ट्रीय सूदखोरों के एजेंटों ने मध्यप्रदेश की सत्ता हथिया ली थी। बाबूलाल गौर हों या शिवराज सिंह चौहान और थोड़े समय के लिए आए कांग्रेस के कमलनाथ सभी कर्ज आधारित अर्थव्यवस्था के पक्षधर रहे हैं। यही वजह है कि सरकारों का आकलन करने में जनता को खासी परेशानी महसूस होती थी। भाजपाई उन्हें एक तरह से कांग्रेसी ही नजर आते थे। जाहिर है कि जब विकास की अवधारणा कर्ज लेकर घी पीने के सूत्रवाक्य पर टिकी हो तो राज्य की उत्पादकता बढ़ाने की ओर किसका ध्यान जाता।कर्ज लेना और फिर सत्ता के इर्द गिर्द जुटे माफिया के माध्यम से उसे हड़प लेना सरकार की शैली बन गई थी। पहली बार महाकाल ने एमपी में सुशासन के लिए अपने ऐसे भक्त को भेजा है जो सुशासन की पाठशाला में तपकर सामने आया है।


    मुख्यमंत्री रहते हुए शिवराज सिंह चौहान ने किसानों का नाम जपना शुरु किया था। एमपी की कृषि ही एकमात्र ऐसा क्षेत्र है जो बगैर निवेश किए खासी उत्पादकता देता है। औद्योगिक विकास में तो भारी निवेश करने के बाद भी उत्पादकता की कोई गारंटी नहीं होती। फिर जब उद्योगों को जबरिया थोपा गया हो तब तो वे अपनी स्थापना के समय ही उपसंहार का अध्याय भी लिख देते हैं। ऐसे में प्रदेश को आत्मनिर्भरता की परंपरा की जरूरत लंबे समय से महसूस की जा रही थी। शिवराज सिंह चौहान के होनोलुलु शासन से हर कोई खफा था लेकिन कांग्रेस न आ जाए इस भय से सभी खामोश रहते थे। हवाई जहाजों में फुदककर गांव खेड़ों में जाना और मैं हूं न कहकर लोगों को हूल देना कोई शिवराज सिंह चौहान से सीख सकता है।अभी ये भ्रम फैलाया जा रहा है कि मामा के जाने से लाड़ली बहना योजना बंद कर दी जाएगी,जबकि ये तो शासन की योजना है। ये बात लाड़ली बहनों को थोड़े दिनों में जरूर समझ में आ जाएगी।


    भाजपा के नेता रघुनंदन शर्मा ने तो शिवराज जी को घोषणावीर का तमगा देकर उनकी कार्यशैली पर सवालिया निशान लगा दिया था लेकिन अखिल भारतीय क्षत्रिय महासभा के समर्थन से उनकी नैया चलती रही। क्या भाजपा और क्या कांग्रेसी सभी उनके समर्थन में खामोश रहे। शिवराज सिंह चौहान विनम्र शासक रहे हैं और बीस सालों बाद भी उनमें अहंकार नहीं पनप पाया है इसी वजह से उनकी सारी नाकामियों पर पार्टी और संगठन दोनों परदा डालते रहे। खोखली ललकार के सहारे उन्होंने सत्ता चलाने की कोशिश जरूर की लेकिन वे शुरु से लेकर अंत तक नौकरशाही और पुलिस प्रशासन पर लगाम नहीं लगा सके।


    भारतीय जनता पार्टी कार्यालय में जब विधायक दलकी बैठक हो रही थी तब पार्टी का संगठन और सरकार के नुमाइंदे सभी अपनी नाकामियों का सबूत पेश कर रहे थे। भारतीय जनता पार्टी संगठन ने कोई प्लान नहीं बनाया था कि जब नए नेता की घोषणा होगी तो किस तरह वो आने वाले नागरिकों, पदाधिकारियों या प्रेस को संबोधित करेंगे। बैठक समाप्त होते ही प्रेस के प्रतिनिधियों को जब फैसले की जानकारी मिली तो वे पार्टी कार्यालय में भीतर घुस गए। भारी धक्कामुक्की और अव्यवस्था के बीच जनता तक जानकारी पहुंचाने की कोई व्यवस्था नहीं थी।

    नए नेता के चयन की सूचना जनता तक पहुंचाने के लिए प्रेस मीडिया को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा।


    ऐसा लगता है कि ये अराजकता पार्टी के प्रदेश हाईकमान के निर्देश पर ही की गई थी। व्यवस्थित चुनाव प्रचार अभियान चलाने वाला भाजपा का संगठन फैसला सुनने के बाद ऐसा शून्य हो गया था कि उसने अव्यवस्था का लांछन नए नेता पर थोपने की तैयारी पहले से ही कर रखी थी। महिलाएं और युवा पत्रकार इसी धक्कामुक्की के बीच जनता को जानकारियां पहुंचा रहे थे। नाकाम पुलिस प्रशासन भी तैयार नहीं था। वह तय ही नहीं कर पाया कि किस तरह वह उत्साहित कार्यकर्ताओं के इस सैलाब का प्रबंधन कर पाएगा। माईक संभाले पुलिस के अधिकारी स्वयं अपनी अव्यवस्था के शिकार बने और भीड़ ने उन्हें धकेलकर गिरा दिया।

    विदा होती सत्ता ने नए मुख्यमंत्री के चयन की सूचना के मार्ग में दरवाजा बंद करके कई बाधाएं खड़ी कर दीं थीं.


    डॉ.मोहन यादव सख्त प्रशासक माने जाते हैं। वे स्वर्गीय वीरेन्द्र सखलेचा की तरह आदर्शवाद के तले दबने वाले व्यक्ति भी नहीं हैं। उन्हें अच्छी तरह मालूम है कि समाज और भीड़ का प्रबंधन कैसे करना होता है। उज्जैन में लगने वाले कुंभ की व्यवस्था संभालने का उन्हें लंबा अनुभव है। ऐसे में जनता को क्या सुविधाएं कब उपलब्ध करवाना है वे अच्छी तरह जानते हैं। किन पाखंडियों की सत्ता में घुसपैठ रोकना है वे ये भी अच्छी तरह समझते हैं।समर्पित भाव से जनसेवा करने का उनका लंबा इतिहास है। पार्टी को जाति या वर्ग के दायरे से बाहर निकलकर व्यवस्था संभालने में भी उनकी युक्तियां सदैव से चर्चित रहीं हैं।

    भारत सरकार की योजनाएं हों या फिर राज्य सरकार की उन्होंने अपने क्षेत्र के लोगों को मुहैया कराने में रिकार्ड स्थापित किया है। योजनाओं को जरूरतमंदों तक पहुंचाना और इनमें घोटाला करने वालों को उनकी हैसियत बताना उनका प्रिय शगल है। इसलिए अराजकता के दौर के आदी हो चुके मध्यप्रदेश के सत्ता माफिया को अब सावधान हो जाना चाहिए। सत्ता की आड़ में बजट की चोरी करने वालों का गिरोह भी अब सावधान हो जाए तो ही बेहतर होगा क्योंकि सत्ता के लुटेरों की खाल खींचने वाला जांबाज अब मैदान पर आ गया है। ऐसे ठग समझ लें कि उनका सामना अब तक शिवराज जी जैसे भलेमानस से पड़ा था। पहली बार उन्हें जाणता राजा मिला है। जो एमपी को नई ऊंचाईयों पर ले जाने के लिए कमर कसकर तैयार है।फिर मोदीजी का डबल इंजन तो पहले ही उनके साथ मौजूद है।

  • आरएसएस से निष्कासित भाजपा नेता ने किया अतिक्रमण, एनजीटी ने मांगी राहत रिपोर्ट

    आरएसएस से निष्कासित भाजपा नेता ने किया अतिक्रमण, एनजीटी ने मांगी राहत रिपोर्ट


    एनजीटी ने दिया नागरिकों को राहत देने का निर्देश
    भोपाल,06 दिसंबर(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)। भारतीय जनता पार्टी सरकार की आड़ में कतिपय असामाजिक तत्वों ने प्रशासन को कुछ इस तरह पंगु बना दिया है कि वह नागरिकों के प्रति अपने दायित्वों को ही भूल चला है। चुनावी प्रक्रियाओं के चलते अब तक खामोश रही प्रशासनिक मशीनरी ने प्रकाश नगर में कल दौरा किया और अवैध निर्माण के चलते चोक हुई सीवेज लाईनों को खोलने के निर्देश दिए हैं। एनजीटी के आदेश के अनुपालन में प्रशासन ने अवैध निर्माण गिराने की तैयारी भी की है। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि कि वे किसी राजनैतिक हस्तक्षेप को अब बर्दाश्त नहीं करेंगे और प्रशासन यदि अपना दायित्व नहीं निभाता है तो वे इस संबंध में वैकल्पिक तरीकों का भी इस्तेमाल करने से नहीं चूकेंगे।
    मामला गोविंदपुरा विधानसभा क्षेत्र स्थित प्रकाश नगर का है।यहां अनैतिक आचरण के चलते राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से बर्खास्त किए गए एक असामाजिक तत्व ने सीवेट ट्रीटमेंट के प्लाट पर अवैध निर्माण खड़ा कर लिया है।नागरिकों के विरोध के बावजूद वह बेशर्मी से ढांचे का निर्माण करता जा रहा है। इस वजह से सीवेज ट्रीटमेंट के लिए छोड़े गए प्लाट की नालियां चोक हो गईं और कालोनी में पानी भर गया है।
    नागरिकों ने इस समस्या के खिलाफ पुलिस व प्रशासन को भी शिकायत की लेकिन चुनावी प्रक्रियाओं में उलझी भाजपा सरकार और अधिकारियों ने नागरिकों की परेशानी पर गौर नहीं किया। उस चरित्रहीन असामाजिक तत्व जो खुद को नेता और पत्रकार बताता है ने अवैध निर्माण जारी रखा। अब ये हालत हो गई है कि परिसर की नालियां चोक हो गईं हैं और नागरिकों को खासी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। भाजपा सरकार की आड़ में पनप रही गंदगी का ये अनूठा उदाहरण है।
    नागरिकों ने इस संबंध में जब एनजीटी की भोपाल बैंच को शिकायत की तो उसने प्रकरण क्रमांक ओए 139।2023 कृष्णारानी विरुद् मध्यप्रदेश शासन एवं अन्य के विरुद्ध 12 अक्टूबर 2023 को पारित आदेश के अनुपालन के निर्देश दिए हैं। एनजीटी के सदस्य सचिव आईएएस चंद्रमोहन ठाकुर ने नगर निगम कमिश्नर और भोपाल कलेक्टर को नागरिकों को राहत दिलाने के निर्देश दिए हैं। इस संबंध में एक कमेटी की भी स्थापना की गई है।इस आदेश के अनुपालन की रिपोर्ट 18 दिसंबर के पहले एनजीटी के समक्ष पेश की जानी है।
    गौरतलब है कि अतिक्रमण के कारण प्रकाश नगर रहवासियों को जलभराव और मुसीबतों का सामना करना पड़ रहा है। वार्ड 70,गोविंदपुरा की प्रकाश नगर, बिजली कॉलोनी, #Bhopal जहां पर अधिकतर रिटायर्ड MPEB के अधिकारी, बुजुर्ग महिलाएं रहते हैं वहां पर एक #भाजपा नेता के द्वारा नाले पर अतिक्रमण कर लिया गया और निर्माण प्रारंभ कर दिया । उसने संलग्न भूमि जो सेप्टिक टैंक के लिए निर्धारित थी उस पर भी निर्माण शुरु कर दिया है ।जिसके कारण सारे सीवरेज चेंबर ओवरफ्लो हो गये टॉयलेट गंदगी फैल गई और कई पेड़ धराशाई हो गए ।पिछले 3 माह से की जा रही विभिन्न विभागों एवं नेताओं को की गई शिकायतों का कोई निराकरण नहीं हुआ । विधायक, क्षेत्रीय पार्षद यहां तक कि संभाग आयुक्त ,कलेक्टर और #प्रदूषण निवारण मंडल में भी इसकी शिकायत की गई कि ओपन में जल-मल-मूत्र बह रहा है और सेप्टिक टैंक का निर्माण नहीं हो रहा। कथित भाजपा नेता के निजी स्वार्थ के कारण प्रकाश नगर के बुजुर्ग, महिलाओं, पुरुषों को अत्यंत दुख तकलीफों का सामना करना पड़ रहा है।

  • जरूरत थी संजीवनी की पूरा पहाड़ उठा लाए सरकार

    जरूरत थी संजीवनी की पूरा पहाड़ उठा लाए सरकार


    आलोक सिंघई
    चुनाव की बेला में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान भोपाल में मीडिया सेंटर की आधारशिला रखने जा रहे हैं। भूमिपूजन के इस विशाल समागम में प्रदेश भर से पत्रकारों को ढो ढोकर लाया गया है। होटलों में ठहराया गया है। सरकार ये दर्शाने का जतन कर रही है कि कांग्रेस के बदमिजाज कमलनाथ की तुलना में मौजूदा सरकार पत्रकार हितैषी है।कमलनाथ कांग्रेस के छोटे से कार्यकाल को देखकर ये बात गले भी उतरती है। कमलनाथ ने जिस तरह मीडिया पर लांछन लगाए उसे देखते हुए तो शिवराज सिंह चौहान की भाजपा सरकार पत्रकारों को सम्मान देने वाली सरकार ही नजर आती है। इसके बावजूद उसे चुनाव की बेला में पत्रकार भवन का प्रहसन क्यों खेलना पड़ रहा है। लगातार साढ़े अठारह सालों तक मीडिया पर मोटा बजट खर्च करने वाली भाजपा सरकार को दूरदराज के छोटे पत्रकारों तक का आशीर्वाद क्यों बटोरना पड़ रहा है।पत्रकार खुद हतप्रभ हैं कि अचानक सरकार उन पर क्यों मेहरबान हो गई है।
    सत्ताधीशों का लंबा अनुभव रहा है कि चुनाव जिताने वाले अलग होते हैं और सत्ता का सुख लूटने वाले अलग हैं। भाजपा को लंबा शासन करने का अवसर मिला है। इसके बावजूद पिछले चुनावों में कांग्रेस को मिला मत प्रतिशत बताता है कि संगठन, जनता और पत्रकार कोई भी मतदान की आंधी की दिशा नहीं बदल सकते हैं। जनता के बीच से उठने वाली मनोभावों की आंधी जनमत बनाती है और वही सत्ता की असली कुंजी है। पिछले चार कार्यकालों में भाजपा सरकार ने पत्रकारों को कल्पनातीत तरीके से उपकृत किया है। उसका उपकार पाने वाले पत्रकारों की तादाद भी बहुत ज्यादा है। जब मनीष सिंह को जनसंपर्क आयुक्त बनाया गया तो उन्हें आश्चर्य हुआ कि सरकार इतना बडा बजट पत्रकारों पर खर्च करती है फिर भी सरकार के कार्यकलापों को सही परिप्रेक्ष्य में प्रस्तुत करने वाला कंटेट नदारद है। पिछली सरकारों के मंत्रियों, प्रशासकों ने इतने बोगस पत्रकार पाल रखे हैं जिनकी बुद्दि केवल चापलूसी की योग्यता रखती है। जनसंपर्क की भाषा बोलने वाले इन पत्रकारों ने दो दशकों में जन संवाद को इतना भौंथरा बना दिया है कि सरकार पर जनता का नजला गिरना सुनिश्चित है।


    चमचों की इस फौज में से असली पत्रकारों को तलाशना और फिर जनहित में उनका उपयोग करना भूसे में सुई तलाशने जैसा कठिन कार्य है। यही सोचकर आयुक्त महोदय ने हनुमान जी वाला फार्मूला अपना लिया। संजीवनी लाने के साथ साथ वे पूरा पर्वत ही उठा लाए हैं । सरकार ने उनके प्रयासों को हरी झंडी दिखाई क्योंकि वह पिछले चुनावों में मिली बारीक हार का जोखिम दुबारा नहीं उठाना चाहती थी। शिवराज जी आज आलोचना का केन्द्र बिंदु बने हुए हैं। उन्होंने भाग भागकर प्रचार किया और जनता से सीधा संवाद करने की कोशिश की । इस आपाधापी में वे भूल गए थे कि नौकरशाही कभी विधायिका का रूप नहीं ले सकती है। मोटी तनख्वाह पाने वाले अफसरों को इस बात से क्या लेना देना कि वे जिन पत्रकारों को पाल रहे हैं वे असरकारी संवाद कर रहे हैं या कि सिर्फ खानापूरी।


    राजधानी का पत्रकार भवन पिछले तीन दशकों से समस्या ग्रस्त रहा है। पूर्व मुख्यमंत्री अर्जुन सिंह ने अपनी मनमानी को मीडिया के माध्यम से सही दर्शाने के लिए जिस ढांचे का गठन किया था वह आज खलनायक बन चुका है। एडीजी इंटेलीजेंस ए.एन सिंह के घिसे पिटे फार्मूले ने प्रदेश की पूरी पत्रकारिता को धूल धूसरित कर दिया है। कोई भी सैन्य या पुलिसिया सोच जन संवाद की भूमिका नहीं निभा सकता है। इसके बावजूद सत्ता माफिया ने अपने काले कारनामों को छुपाने के लिए इस ढांचे को बरकार रखा। एएन सिंह की सलाह पर तत्कालीन अर्जुनसिंह सरकार ने कम्युनिस्ट ढांचे में रंगे श्रमजीवी पत्रकार संघ का प्रोजेक्ट चलाया था। इसकी फंडिंग जनसंपर्क विभाग के बजट और पुलिस के मुखबिर तंत्र के लिए मिलने वाले एसएस फंड से की जानी थी। यही वजह थी कि प्रदेश की पत्रकारिता नागरिकों को नक्सली ,चरित्रहीन, भ्रष्टाचारी और शराबी के तौर पर पहचानने लगी।


    भाजपा सरकार के सत्ता में आते ही उमा भारती ने इस आततायी संगठन को उखाड़ फेंका। तभी उनके इर्द गिर्द जुट रहे लोधियों को निशाना बनाकर उमा भारती को कुर्सी छोड़ने के लिए मजबूर कर दिया गया। इसके बाद वही ढाक के तीन पात वाली पुरानी कहानी चल पड़ी। बाबूलाल गौर तो अघोषित तरीके से अर्जुनसिंह जी के ही प्यादे थे। उन्होंने उमा भारती सरकार के फैसलों को पलट दिया। सरकार से वे सभी फाईलें गायब हो गईं जिन्हें लौह महिला और आयुक्त जनसंपर्क अरुणा शर्मा ने विशेष परिश्रम से तैयार किया था। इसके बाद आई शिवराज सरकार ने यही नीति जारी रखी। शिवराज सिंह के गुरु सुंदरलाल पटवा भाजपा में अर्जुनसिंह गुट के ही खासमखास माने जाते थे सो उन्होंने पत्रकार भवन पर वही पत्रकार विरोधी व्यवस्था कायम रखी। लगभग डेढ़ दशक के शासनकाल में पत्रकारों की तमाम मांगों पर सहमति जताने के बावजूद शिवराज सिंह ने इस व्यवस्था पर कोई प्रहार नहीं किया बल्कि पर्दे के पीछे वे इस बदनाम संगठन के पदाधिकारियों को उपकृत करते रहे।


    जनता ने पिछली बार जब इस व्यवस्था को पलटने का जनादेश दिया तो कमलनाथ सरकार ने आते ही पत्रकार भवन को जमींदोज करके पत्रकारों की बरसों पुरानी मांग पूरी कर दी थी। उनके इर्द गिर्द भी किताबी पत्रकारों का जमावड़ा हो गया था सो उन्होंने इन बदमाशों के साथ पूरी पत्रकार बिरादरी को लांछित करना शुरु कर दिया। यही वजह थी कि कमलनाथ की भ्रष्ट सरकार के उखाड़ फेंकने में मीडिया के सभी वर्गों ने भाजपा को भरपूर साथ दिया। भाजपा ने दुबारा सत्ता में आने के बाद कमलनाथ की नीति को जारी ऱखा और पत्रकारों से दूरियां बनाए रखीं। ये भी महज दिखावा साबित हुआ। लुटेरे पत्रकारों की फौज को जनसंपर्क के भ्रष्ट अधिकारियों ने दुबारा सरकार के गले में लटका दिया। नतीजतन असली पत्रकार फिर भी वंचित ही रहे। बल्कि वे खामखां जनता के निशाने पर आते रहे जबकि मलाई खाने वाला तबका तो सरकार के साथ मजे लूटता रहा।

    दरअसल स्व. माखनलाल चतुर्वेदी के एक बदमाश रिश्तेदार ने जनसंपर्क विभाग में रहते हुए दिग्विजय सिंह की सामंती सरकार की आंखों में धूल झोंककर जो विश्विद्यालय सरकार के गले में बांध दिया वह उसे डुबाने वाला बोझा साबित हो रहा है। बरसों से सरकारें अपने चमचों को इस विवि में उपकृत करती रहीं हैं। कभी दिग्विजय सिंह सरकार जो करती थी उसे भाजपा सरकार ने कई सौ गुना तरीके से किया। अन्य प्रदेशों से लाए गए हवा हवाई पत्रकारों को यहां पत्रकारिता का शिक्षक बनाया गया और उन्हें यूजीसी के निर्धारित वेतनमानों से उपकृत किया जाने लगा। वास्तव में पत्रकारिता की आड़ में एक ऐसे चरोखर खुल गई जिस पर पत्रकार भी खामोश थे।


    यही वजह है कि आज ऐसा लगता है कि सरकार पत्रकारों पर भारी बजट खर्च कर रही है लेकिन वह वास्तव में सरकार का जेबी प्रचार तंत्र है जो हर बार बोगस साबित होता रहा है।असली पत्रकार तो आज भी झुनझुना पकड़कर घूम रहा है। इस बार जब भाजपा सरकार को बिजली सड़क और पानी के नाम पर भारी बजट खर्च करने मिला तो निर्माण माफिया को लगने लगा है कि ये व्यवस्था जारी रहनी चाहिए। भ्रष्ट अफसरशाही के लिए इससे अनुकूल सरकार दूसरी कोई हो नहीं सकती। यही वजह है कि मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान मैं हूं का नारा देते हुए भाजपा हाईकमान के निशाने पर आ गए हैं। बजट का आंकड़ा तो जारी करने वाली संस्थाओं की बैलेंस शीट से पढ़ा जा सकता है। जो रकम प्रदेश पर खर्च की गई उसकी तुलना में उत्पादकता कितनी बढ़ी। ये आंकड़े कितने असली और कितने फर्जी हैं इसे जांचना आज तकनीकी के दौर में कठिन नहीं है। सरकार के बजट का कितना हिस्सा माफिया की भेंट चढ़ गया इसका आकलन अच्छी तरह कर लिया गया है। यही वजह है कि शिवराज जी के शासनकाल को जनता की कसौटी पर तो बाद में परखा जाएगा अभी तो पार्टी के अंदरूनी आडिट ने इसका अध्ययन अच्छी तरह कर लिया है। जाहिर है कि सरकार ने अब पत्रकार भवन का नाम मीडिया सेंटर रखा है। वह नहीं चाहती कि फिर कोई माफिया इस पर कब्जा जमा ले और प्रदेश के विकास की कहानी को पटरी से उतार कर चलता बने।उम्मीद की जानी चाहिए कि इस बार मीडिया सेंटर मध्यप्रदेश में प्रोफेशनल जनसंवाद कायम करेगा। हां यदि कोई जनहितैषी व्यक्ति सत्ता के शीर्ष पर आ जाए तो फिर जनधन लूटकर भागने वाले माफिया को भी जमींदोज किया जा सकेगा।

  • भाजपा के शक्ति संधान से चौखाने चित्त कमलनाथ कांग्रेस

    भाजपा के शक्ति संधान से चौखाने चित्त कमलनाथ कांग्रेस


    भाजपा ने तीसरी सूची में आदिवासी नेता रहे मनमोहन शाह बट्टी की बेटी मोनिका बट्टी को अमरवाड़ा से टिकिट देकर खलबली मचा दी है। कभी सनातन परंपरा के खिलाफ मोर्चा खोलने वाले आदिवासी नेता मनमोहन शाह बट्टी की बेटी को चुनाव मैदान में उतारकर भाजपा ने कांग्रेस के अरमानों पर घड़ों पानी उढ़ेल दिया है। मनमोहन शाह बट्टी आदिवासी सम्मान का नारा देकर राजनीति में उतरे थे। गोंडवाना गणतंत्र पार्टी बनाई। इस पार्टी ने समय समय पर अपनी मौजूदगी भी दर्ज कराई लेकिन राजनीतिक बदलाव लाना रेत में नाव खेने के समान होता है। गोंडवाना गणतंत्र पार्टी में फूट भी पड़ी और पार्टी अप्रासंगिक भी हो गई। इसके बावजूद पिछले विधानसभा चुनावों में कमलनाथ कांग्रेस ने हीरालाल अलावा के नेतृत्व में जयस संगठन के नेतृत्व तले आदिवासियों को लामबंद करने में सफलता पा ली थी. आदिवासी वोट बैंक प्रदेश की 36 सीटों पर निर्णायक होता है। नतीजतन वोट का गणित गड़बड़ाया और भारतीय जनता पार्टी अधिक वोट पाने के बावजूद सत्ता से दूर रह गई थी। कमलनाथ की कूटनीति ने उन्हें सत्ता तक तो पहुंचा दिया था लेकिन शुचिता के अभाव ने सत्ता की लूट का जो नंगा नाच किया उससे क्षुब्ध होकर ज्योतिरादित्य सिंधिया के नेतृत्व में कांग्रेस के विधायकों ने विद्रोह कर दिया। कमलनाथ की सरकार औंधे मुंह गिर गई। तबसे भाजपा ने अपना खोया जनाधार वापस समेटने का अनुष्ठान शुरु कर दिया और आज वह मजबूत स्थिति में चुनावी कीर्तिमान स्थापित करने चल पड़ी है।
    प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के हालिया भोपाल दौरे के बाद तरह तरह की अटकलबाजियां शुरु हो गईं थीं लेकिन लोग तब भौंचक्के रह गए जब उनके दौरे के तुरंत बाद भाजपा हाईकमान ने अपने प्रत्याशियों की दूसरी सूची जारी कर दी। इस सूची में भाजपा ने तीन केन्द्रीय मंत्रियों और चार सांसदों को मैदान में उतारकर सभी को चौंका दिया। टिकिट बांटकर लौटे नरेन्द्र सिंह तोमर, प्रहलाद पटेल और फग्गन सिंह कुलस्ते को भी शायद अंदाजा नहीं था कि उन्हें मैदान में दो दो हाथ करना पड़ेंगे। बरसों से मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की शासन शैली के खिलाफ शिकायतें आती रहीं हैं। भाजपा के कई दिग्गज स्वयं को मुख्यमंत्री के रूप में प्रस्तुत करते रहे हैं। खुद शिवराज सिंह चौहान बार बार खुद को चुनौतियों के सामने असहाय पाते रहे हैं। पिछले विधानसभा चुनावों में जब उनकी सरकार चली गई तो उन्होंने ये कहते हुए संतोष व्यक्त किया था कि मैं मुक्त हो गया। आखिर उन्हें किसने बांध रखा था। खुला हाथ मिलने के बावजूद वे खुद को बंधक क्यों महसूस कर रहे थे।
    दरअसल शिवराज सिंह चौहान लगभग अठारह सालों तक प्रदेश में ऐसी सरकार चलाते रहे हैं जो सत्ता माफिया की गिरफ्त में जकड़ी रही है। वे चाहकर भी इस गिरोह पर लगाम नहीं लगा सके। इस माफिया गिरोह ने एक क्लब बना रखा है और सारे कमाऊ ठेके इसी गिरोह के चंगू मंगू हड़प लेते रहे हैं। सत्ता की इस लूटपाट में आईएएस अफसरों का एक गिरोह भी शामिल रहा है। आज राजधानी की सड़कों पर रोज वाहनों का जाम लगता है। इसकी वजह सत्ता की लूट से आई काली कमाई रही है। अरबों रुपयों का विदेशी कर्ज लेकर जन कल्याणकारी योजनाओं के नाम पर जन धन की लूट ने ये हालात निर्मित किए हैं। कल्याणकारी योजनाएं सफल भी हुईं हैं जनता को उनका लाभ भी मिला है लेकिन ये लाभ उस कर्ज की तुलना में बहुत कम है जिसका ब्याज आम जनता को भुगतना पड़ रहा है।
    प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भाजपा कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए कहा कि मोदी है तो मुमकिन है।इस पर शिवराज के एक करीबी मंत्री ने कहा कि ये बड़बोला पन है किसी को अपने मुंह मियां मिट्ठू थोड़ी बनना चाहिए। भाजपा संगठन से जुड़े समर्पित स्वयंसेवक जानते हैं कि जिन नेताओं ने खुद को ब्रांड के रूप में स्थापित करके जनता के दिलों तक सफर किया है उन्होंने मतदाताओं को भरोसा दिलाने के लिए खुदकी मौजूदगी बताई है। कभी नारा दिया जाता था बच्चा बच्चा अटल बिहारी । शिवराज खुद मैं हूं न बोलकर लोगों को भरोसा दिलाने का प्रयास करते रहे हैं। इसके बावजूद उनकी सरकार की घोषणाएं सौ फीसदी सफल नहीं रहीं। यही वजह है कि भाजपा के ही वरिष्ठ नेता ने उन्हें घोषणा वीर की संज्ञा दे डाली थी।
    भाजपा हाईकमान के पास स्पष्ट फीड बैक था कि शिवराज सिंह चौहान के नाम को लेकर लोगों में बैचेनी है। खास तौर पर युवा वर्ग बदलाव चाहता है। उसने जबसे होश संभाला है भाजपा सरकार ही देखी है। ये सरकार न तो उसे रोजगार दे पाई न ही पूंजी निर्माण का कोई माहौल बना पाई है। ऐसे में कांग्रेस ने उसे पिछले विधानसभा चुनावों में बरगला लिया था। इस बार फिर ऐसा न हो इसके लिए हाईकमान ने शिवराज सिंह चौहान को हटाया तो नहीं है। इसकी वजह ये है कि शिवराज पर पिछले दो दशकों में भाजपा ने करोड़ों रुपए खर्च किए हैं। उन्हें ब्रांड के रूप में स्थापित किया है। इसलिए उन पर ही जवाबदारी है कि पार्टी को एक बार फिर सत्ता में लाएं। शिवराज के इर्द गिर्द जुटे सत्ता माफिया ने पंचायतों से लेकर स्वास्थ्य ,सड़क, बिजली, पानी और उद्योग सभी क्षेत्रों में जो लूट मचाई है उससे सभी खफा हैं। जाहिर है कि भाजपा को यदि 2024 में लोकसभा का चुनाव जीतना है तो उसे मध्यप्रदेश की अपनी सत्ता बचानी पड़ेगी। यही वजह है कि मोदी शाह की जोड़ी और भाजपा हाईकमान पूरी गंभीरता से मध्यप्रदेश में अपना परचम फहराने में जुट गए हैं।
    नरेन्द्र मोदी ने देश की अर्थव्यवस्था को 5 ट्रिलियन डॉलर का टारगेट रखकर जो योजनाएं बनाई हैं उसमें वे कोई चूक नहीं होने देना चाहते हैं। कांग्रेस जहां डिफाल्टरों को पालने पोसने में जुटी रही है वहीं भाजपा ने किसानों और महिलाओं को अपना साथी बनाया है। आधी आबादी को मजबूती देकर वे अर्थ व्यवस्था में लंबी छलांग लगाना चाहते हैं। उन्होंने जाति,धर्म, वर्ग की राजनीति नहीं खेली। उन्होंने देश के विशाल वर्कफोर्स पर अपना ध्यान केन्द्रित किया है। यही वजह है कि मोदी ने जब अपने भाषण में शिवराज सिंह चौहान का नाम नहीं लिया तो उनके समर्थक बौखला गए। उनके समर्थक एक मंत्री ने कहा कि जब शिवराज सिंह इस चुनावी रण के दूल्हे हैं तो उन्हें नजरंदाज नहीं किया जाना चाहिए। जबकि दूसरी सूची में जिन दिग्गजों और क्षेत्रीय क्षत्रपों को चुनाव में भेजकर भाजपा ने उन्हें चुनाव जिताने की जो जवाबदारी सौंपी है उससे साफ है कि भाजपा हाईकमान शिवराज का साफ विकल्प तैयार करना चाहती है। ये जनता की मांग पर लिया गया फैसला है जो भले ही कड़वा लगे पर समस्या का इससे अच्छा समाधान दूसरा नहीं हो सकता। इस फैसले से फिलहाल कांग्रेस तो चौखाने चित्त नजर आ रही है।

  • सत्ता की दौड़ से बाहर होती कमलनाथ कांग्रेस

    सत्ता की दौड़ से बाहर होती कमलनाथ कांग्रेस


    चुनावों की आचार संहिता लागू होने में समय है लेकिन कमलनाथ की कांग्रेस अभी से पंचर हो गई है। भारतीय जनता पार्टी ने कारगर कार्यशैली अपनाकर जनता से जो संवाद स्थापित किया है उससे कांग्रेस के रणनीतिकार बौखला गए हैं। पिछले चुनावों में बिल्ली के भाग्य से छींका टूट गया था और सत्ता में पहुंचे कमलनाथ का दंभ सत्रहवें आसमान पर पहुंच गया था । ज्योतिरादित्य सिंधिया ने जब उनके लटके झटके करीब से देखे तो उन्होंने जनता से की जा रही गद्दारी से अपना नाता तोड़ लिया था । नाथ की सरकार जब औंधे मुंह गिरी तभी से वे विक्षिप्त हो गए हैं। अपनी मनोदशा पर वे जैसे तैसे काबू बनाए हुए थे लेकिन इस चुनाव के पहले जनता में भाजपा के प्रति जो प्रेम और विश्वास उमड़ रहा है उसे देखकर तो कमलनाथ अपना आपा खो बैठे हैं। इंदौर में मतंग समाज के कार्यक्रम में उन्होंने साजिशन पत्रकारों को धक्के देकर बाहर निकाल दिया। ऐसा नहीं कि पत्रकारों को गरियाने का उनका ये पहला मामला है। वे हमेशा से प्रेस को धकियाने का प्रयास करते रहते हैं। इसके बावजूद मीडिया उनकी बातों को जनता तक पहुंचाने का अपना दायित्व निभाता रहा है। पिछले चुनावों में अधिक वोट पाने के बावजूद जब भाजपा सत्ता से दूर रह गई तब कमलनाथ ने कुर्सी पाते ही पत्रकारों को गरियाना शुरु कर दिया था। उन्होंने बदतमीजी भरे अंदाज में कहा कि मैं अखबारों में अपनी फोटो नहीं छपवाना चाहता हूं इसलिए आप पत्रकारिता छोड़कर कोई दूसरा धंधा अपना लो। दंभ से चूर गांधी परिवार के इस प्यादे को बुढ़ापा आ जाने तक ये नहीं मालूम पड़ा कि पत्रकारिता करने वाले किसी सरकार के भरोसे अखबार बाजी नहीं करते हैं। भारत की प्रेस अपने पैरों पर खड़ी है । वह वास्तव में जनता का उपकरण है। जनता ही उसे जिंदा रखती है। किसी सरकार की इतनी हैसियत नहीं कि वह प्रेस को कुचल पाए। इसके बावजूद कुर्सी पाते ही कुछ लोगों को मुगालता हो जाता है कि वे प्रेस को अपने घर के बाहर बंधा कुत्ता बना लेंगे। दरअसल अंग्रेजों की एजेंट रही कांग्रेस हमेशा से प्रेस पर लगाम लगाने का प्रयास करती रही है। सत्ता में आने के बाद कांग्रेस के तमाम बड़े नेता योजनाओं में भ्रष्टाचार करके जन धन की चोरी करते रहे हैं। वे चाहते हैं कि उनकी काली करतूतें अखबारों में न छपें मीडिया पर न दिखाई जाएं । इसके लिए मीडिया को गुलाम बनाए रखने का प्रयास करते रहे हैं । कमलनाथ को इस उठा पटक में महारथ हासिल रहा है। वे आपातकाल के प्रमुख अत्याचारी रहे हैं। नीरा राडिया टेप कांड में उन्हें मिस्टर फिफ्टीन परसेंट कहा गया था। उनकी पूरी राजनीतिक सोच इंस्पेक्टर राज और कमीशनबाजी पर केन्द्रित रही है। यही वजह है कि वे मीडिया का मुंह बंद करने का प्रयास करते रहते हैं । भारतीय जनता पार्टी की शिवराज सिंह चौहान के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार ने समाज के सभी वर्गों को सत्ता में भागीदार बनाया है। जनता के संसाधनों को मिल बांटकर विकास की गति बढ़ाने के उसके प्रयास सफल रहे हैं और आज मध्यप्रदेश सर्वाधिक उत्पादकता कायम रख पाने वाला राज्य बन गया है। भाजपा ने इन प्रयासों को अपने नेतृत्व वाले सभी राज्यों में दुहराया है। यही वजह है कि भाजपा शासित राज्य विकास की पायदानों पर कारगर साबित हुए हैं। ये बात अलग है कि कुछ राज्यों में भाजपा नेतृत्व अपना दायित्व ठीक तरह नहीं निभा पाया और वहां उनकी सरकारें गिर गईं । इसके बावजूद उन विपक्ष शासित राज्यों में विकास भी परवान नहीं चढ़ पाया है। पुरातन सोच रही है कि रोटी को पलटते रहना चाहिए नहीं तो वह जल जाती है। जबकि ये जुगाड़ वाला फार्मूला केवल बकवास है। जैसे ही नए व्यक्ति को सत्ता थमाई जाती है वह भ्रष्टाचार करके अपना घर भरने जुट जाता है। विकास की पद्धतियां बदलती जा रहीं हैं। कांग्रेस की विकास की अवधारणा असफल साबित हुई है। उसका दौर बीत गया है। भाजपा ने लोकतांत्रिक सरकारों की अवधारणा बदलकर रख दी है। देश को समझ लेना चाहिए कि भाजपा का विकल्प अब कांग्रेस या कोई दूसरी पार्टी नहीं है। अब भाजपा का विकल्प केवल भाजपा ही हो सकती है। ये बात जरूर है कि भाजपा के विकल्प के रूप में हमें सुधरी और साफ सुथरी भाजपा बनाना पड़ेगी। ऐसी भाजपा बनाने की जवाबदारी भाजपा को तो निभानी ही है जनता को भी निभानी है। जनता अपनी ये जवाबदारी प्रेस के माध्यम से ही निभाती है। प्रेस तो केवल माध्यम है उसे चुनाव नहीं लड़ना और न जीतना है। ऐसे में वह उन कड़े फैसलों को लागू करने के लिए सरकार पर दबाव बना सकती है जिन्हें सरकारें आमतौर पर न्यायपालिका की ओर खिसका देती हैं।या फिर अपने वोट बैंक को नाराज न करने का जतन करते हुए ठंडे बस्ते के हवाले कर देती हैं। प्रेस की लोकतांत्रिक जवाबदारी है कि वह जनहित के फैसलों को राजनीतिक दलों के बीच संवाद स्थापित करके सख्ती से दबाव बनाकर लागू करवाए । वह मीडिया है लेकिन नपुंसक माध्यम नहीं है। उसकी विचारधारा जनता की विचारधारा है। आधुनिक भारत की जनता देश को आगे बढ़ाना चाहती है। आगे बढ़ाने के उपाय लागू करना चाहती है।इसलिए मीडिया से अपेक्षा करती है कि वह उसकी भावनाओं को लागू करवाएगा। सरकारों ने मीडिया को अपना पुछल्ला बनाने के लिए बड़े मीडिया घरानों को कर्ज के दलदल में फंसा लिया है। आज वह मीडिया को गरियाकर उसे अपनी ताबेदारी के लिए मजबूर करना चाहती है। इसके बावजूद कमलनाथ जैसे कांग्रेसियों को या अन्य राजनीतिक दलों के लोगों को समझ लेना चाहिए कि सौ फीसदी मीडिया उसका गुलाम नहीं है और न कभी ऐसा हो सकता है। नई पीढ़ी के युवा पत्रकार अब धीरे धीरे सरकारों के चंगुल से बाहर निकलते जा रहे हैं। सोशल मीडिया ने उनके हाथों में बड़ी ताकत दे दी है। ऐसे में उन्हें मीडिया से पंगा लेने का मानस बदलना होगा। यदि वे सोचते हैं कि मीडिया को गाली देने से वे मीडिया पर दबाव बना लेंगे तो ये उनकी बड़ी भूल है। इंदौर में मीडिया से की गई उनकी बदतमीजी ने बंद बोतल का ढक्कन खोल दिया है। जिन्न बाहर आ चुका है। अभी चुनाव के लिए कई दौर बाकी हैं। समूचा देश देखेगा कि किस तरह जनता का मीडिया घमंडिया गठबंधन के इस आततायी सोच को खदेड़ बाहर करता है। जो लोग समझते हैं कि वे मीडिया को गाली देंगे तो वह उनकी नालायकी भरी सोच को संबल प्रदान करने लगेगा वे अपनी गलती सुधार लें। मीडिया के कुछ लोग भी अपनी अज्ञानता में ऊटपटांग बयान देने लग जाते हैं वे भी सावधान हो जाएं क्योंकि कमलनाथ जैसे भ्रष्टाचार में निपुण राजनेता कल काम निकल जाने पर उन्हें भी धकेलकर सत्ता से गलियारों से बाहर कर देंगे । जिंदा प्रेस उन्हें जेल की सलाखों के पीछे भी पहुंचा देता है।

  • विकास का खलनायक बना घमंडिया गठबंधन

    विकास का खलनायक बना घमंडिया गठबंधन


    प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने विपक्षी गठबंधन इंडियन नेशनल डेवलपमेंटल इन्क्लूसिव अलायंस (इंडिया) पर निशाना साधते हुए कहा कि देश के लोगों को इससे सतर्क रहने की जरूरत है क्योंकि यह गठबंधन भारत की संस्कृति और भारत को मिटाना चाहता है. प्रधानमंत्री मोदी ने कहा है कि गांधी जी से लेकर स्वामी विवेकानंद तक और माता अहिल्या बाई होलकर से लेकर मीराबाई तक हजारों हजार साल तक यह सनातन धर्म, सनातन संस्कृति हर किसी को प्रेरित करती रही है.उन्होंने कहा कि यह सनातन संस्कृति है जो संत रविदास, संत कबीरदास को संत शिरोमणि कहती है. प्रधानमंत्री ने कहा कि ऐसी सनातन संस्कृति को समाप्त करने की कोशिश ‘इंडी’ गठबंधन के लोगों ने की है.पूरे देश के लोगों को इनसे बहुत सतर्क रहना है क्योंकि ये भारत की हजारों साल की संस्कृति को मिटाना चाहते हैं, ये भारत को मिटाना चाहते हैं.उन्होंने कहा कि इन लोगों ने मिलकर एक ‘इंडी’ गठबंधन बनाया है जिसे कुछ लोग घमंडिया गठबंधन भी कहते हैं, लेकिन ‘इंडी’ गठबंधन ने तय किया है कि वह भारत की सनातन संस्कृति को समाप्त करके रहेगा. पीएम मोदी ने कहा, “सनातन संस्कृति वह है जिसमें भगवान राम शबरी को मां कहकर उनके झूठे बेरों को खाने का आनंद लेते हैं. सनातन संस्कृति वह है, जहां राम वनवासियों को, निषाद राज को अपने भाई से भी बढ़कर बताते हैं. सनातन संस्कृति वह है जहां राम नाव चलाने वाले केवट को गले लगाते हैं. सनातन संस्कृति वह है जो किसी परिवार में जन्म को नहीं, व्यक्ति के कर्म को प्रधानता देती है.”
    विकास की अपील और आर्थिक सुधारों की आंधी से उत्साहित भारत का प्रगतिशील समुदाय इन दिनों प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की इस आवाज को गौर से सुन रहा है। वे देश भर में घूम घूमकर विपक्ष को ललकार रहे हैं। सरकारी कार्यक्रमों में भी वे अपनी बात इतने सधे अंदाज में बोलते हैं कि उनके जवाब की प्रासंगिकता खुद ब खुद प्रमाणित हो जाती है। केन्द्र की भाजपा सरकार ने किसान सम्मान निधि जैसी सार्थक योजना से देश को एकसूत्र में बांधने का भगीरथ किया है। वहीं राज्यों की शिवराज सिंह चौहान जैसी सरकारें लाड़ली बहना योजना लाकर जन जन तक अपनी पैठ बना रहीं हैं। मुफ्त योजनाओं की तुलना में नकद भुगतान की योजनाएं भाजपा सरकार की समाधान देने की अपील को कारगर बना रहीं हैं। ऐसे में विपक्ष हताश है। वह जाति, संप्रदाय और परिवारवाद के मुद्दों पर देश के सामने उतरा है। विपक्ष की वैमनस्य से भरी राजनीतिक चालें भी भाजपा की डायरेक्ट भुगतान वाली शैली के सामने चिचिया रहीं हैं। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी अपने भाषणों में जनधन खातों, प्रधानमंत्री आवास योजना, उज्ज्वला गैस कनेक्शन, किसान सम्मान निधि जैसी योजनाओं की जानकारी देते हैं। वहीं शिवराज सिंह चौहान जैसी राज्य सरकारों लाड़ली बहना योजना जैसी तमाम हितग्राही मूलक योजनाओं का हवाला देकर खुद को जनता का असली सेवक बताने में जुटी हैं। ऐसे में विपक्षकी तमाम जाति संप्रदाय आधारित राजनीति अप्रासंगिक नजर आ रही है। आदिवासियों को बरगलाने का जो प्रयास मध्यप्रदेश में पिछले चुनावों में कांग्रेस ने किया था उसके जवाब में भाजपा ने अपनी हितग्राही मूलक योजनाओं का रेला ठेल दिया है। ऐसे में देश विकास के नए जोश से भरता जा रहा है। जाहिर है जन जन में बढ़ रहा ये उत्साह भारत को विश्व की तीसरी बड़ी अर्थव्यवस्था बनाने की दिशा में बढ़ चला है। ऐसे में कथित घमंडिया गठबंधन की फूट डालो राज करो की नीति कब तक अपना असर बचा सकेगी नहीं कहा जा सकता।उसकी राजनीति विकास का खलनायक बनकर रह गई है।

  • ब्रांड असंतुलन साधने के लिए बदली गई ये चुनावी फील्डिंग

    ब्रांड असंतुलन साधने के लिए बदली गई ये चुनावी फील्डिंग


    भारतीय जनता पार्टी ने मध्यप्रदेश में 39सीटों पर प्रत्याशी घोषित करके जिस आक्रामक रणनीति का परिचय दिया था उसी तर्ज पर उसने तीन नए मंत्री बनाकर कथित तौर पर डगमगाती नैया के छेद भी बंद कर दिए हैं। कहा जा रहा था कि विंध्य का ब्राह्मण मतदाता इस बार भाजपा से नाराज है और वह कमलनाथ कांग्रेस के साथ जाने के लिए तैयार है। राजनीतिक क्षेत्र के जानकार होने का दावा करने वाले कुछ लाल बुझक्कड़ी पंडितों की इस कहानी में कोई सिर पैर ही नहीं था। इसकी वजह थी कि राजेन्द्र शुक्ल मंत्री न बनाए जाने से कतई नाराज नहीं थे। उनके करीबियों को जिस तरह से बड़े ठेके देकर महत्वपूर्ण कार्यों की जवाबदारी दी गई थी ये उनके मंत्री रहते संभव नहीं था.पिछले विधानसभा चुनावों में विंध्य का इलाका एकजुट होकर भाजपा के साथ आया था। शिवराज जी के लंबे कार्यकाल के कारण राजनीतिक मेधा से लबरेज वहां के मतदाताओं में थोड़ी बेचैनी जरूर देखी जा रही थी उन्हें लगता था कि हमारे इलाके को उपेक्षित किया जा रहा है लेकिन जिस तरह के ठोस कार्यों में विंध्य के प्रमुख लोगों को सत्ता का सहोदर बनाया गया उसे जानकर विंध्य के मतदाता में कहीं कोई संशय नहीं बचा है। नारायण त्रिपाठी अलग विंध्य प्रदेश के राजनीतिक नारे को हवा देकर खुद का औचित्य सिद्ध कर रहे थे। ऐसे में कांग्रेस के हवा दिएजाने के बावजूद अलगाव की मांग परवान नहीं चढ़ पाई । इधर विधानसभा अध्यक्ष गिरीश गौतम ने विंध्य की कमान को मजबूती से थाम रखा है। ऐसे में विंध्य कहीं खिसकने वाला नहीं है।


    बालाघाट और महाकौशल से संवाद करने वाले एक शिल्पी की जरूरत लंबे समय से महसूस की जा रही थी। जबलपुर से अजय विश्नोई जिस तरह रह रहकर अपने राजनीतिक वनवास की कराह सुनाते रहे हैं उसे देखकर सात बार के विधायक और लोकप्रिय मंत्री रहे गौरीशंकर बिसेन को मंत्री बनाकर भेजा गया है। महाकौशल को भड़काने और भरमाने के प्रयासों के लिए बिसेन अकेले ही काफी हैं। भाजपा ने हितग्राही मूलक जिन योजनाओं की बौछार पूरे प्रदेश में की है उसका असर महाकौशल में भी पर्याप्त है।


    उमा भारती अपनी राजनीतिक महत्वाकांक्षा के चलते जिस तरह लोधी वोटों को लामबंद करने में जुटी हैं उसे केन्द्रीय मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल का अंदरूनी सपोर्ट मिलता रहा है। ऐसे में राहुल लोधी को राज्यमंत्री बनाकर भाजपा ने लोधी समाज की एक बड़ी आकांक्षा पूरी कर दी है।उमा भारती को सत्ता में भागीदारी का संदेश देने में भी ये प्रयास सफल रहा है।


    दरअसल ये तीनों नियुक्तियां न तो मंत्रियों का जलवा बढ़ाने के लिए हैं और न ही उन नेताओं को इस नए पदभार से कोई लाभ मिलने वाला है। उन्हें तो उस ब्रांड असंतुलन को ठीक करने के लिए मैदान में उतारा गया है जो शिवराज सिंह चौहान के चेहरे के अति प्रचार से बिगड़ रहा है। चुनावी प्रचार के केन्द्र में शिवराज सिंह चौहान की छवि को भरपूर उभारा गया है। लगभग 20 सालों की सत्ता ने शिवराज जी को सामने आने का पूरा मौका दिया है। आगामी विधानसभा चुनाव के लिए भाजपा की केन्द्रीय कमान ने राज्य भाजपा को भरपूर संसाधन मुहैया कराए हैं। ऐसे में तीन महत्वपूर्ण पदाधिकारियों को मैदान में उतारकर भाजपा हाईकमान ने लड़खड़ाते शिवराज ब्रांड को सहारा देने का जतन किया है। जिस तरह से कहा जा रहा है कि योजनाओं के हितग्राही मिलकर पार्टी को गुजरात जैसी बंपर जीत दिला सकते हैं तो ऐसी स्थिति में शिवराज की आड़ में सत्ता का उपभोग करते रहे लोग इस जीत को शिवराज की जीत बताने में जुट जाएंगे। तब पार्टी को ये चुनावी फील्डिंग काम आएगी।

    बेशक तीनों मंत्री शिवराज के सहयोगी रहे हैं लेकिन राजनीतिक पतंग की डोर यदि थामकर न रखी जाए तो फिर ये मैदान में कोहराम मचाने लगती है। शिवराज जी के कार्यकाल को पार्टी में अलौकिक नहीं माना जाता है। वे मजबूरी का नाम महात्मा गांधी बनकर कार्य करते रहे हैं। ऐसे में तीन मंत्रियों का ब्रेक उनका भ्रम तोड़ने के लिए सहयोगी साबित होगा। शिवराज सिंह जिस लाबी की कठपुतली बनकर सरकार चलाते रहे हैं उसे शिकस्त देने की कोशिश करती कांग्रेस अपने दांत तुड़वा चुकी है। जाहिर है कि भाजपा ये गलती दुहराने वाली तो नहीं है।

  • संसाधन हड़पने वाले खलनायक को कौन कुचलेगा

    संसाधन हड़पने वाले खलनायक को कौन कुचलेगा


    प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने स्वाधीनता दिवस पर लाल किले की प्राचीर से देश को जगाने का जो प्रयास किया है आज पूरा देश उस पर सकारात्मक प्रतिक्रिया दे रहा है। प्रधानमंत्री ने आज कोई कलात्मक भाषण की झांकी न देकर जिन तथ्यों और योजनाओं से देश को अवगत कराया है वह भविष्य के हिंदुस्तान की एक रूपरेखा प्रस्तुत करते हैं। प्रधानमंत्री ने भ्रष्टाचार, परिवारवाद और तुष्टिकरण जैसी तीन बुराईयों को समाप्त करने का संकल्प खुलेआम दुहराया और कहा कि मेरा वादा है कि मैं जीवन भर इनसे लड़ता रहूंगा। प्रधानमंत्री ने कहा कि अगले साल भी मैं लाल किले पर आऊंगा और देश के सामर्थ्य और सफलता का गौरवगान करूंगा। उन्हें देश के प्रमुख विपक्षी दल की विचारधारा पर प्रहार करते हुए कहा कि आजादी के अमृत महोत्सव तक वे केवल बातें करते रहे जबकि हमने सरकार में आकर देश के संकल्पों को साकार कर दिखाया है। दरअसल कांग्रेस जिसे देश की विचारधारा कहती रही है वह एक परिवार के चंद सहयोगी परिवारों को पुष्ट करने का षड़यंत्र रहा है। देश के करोड़ों हाथों को काम देना कोई उपकार की बात नहीं बल्कि मानव बल का सदुपयोग करके उत्पादकता बढ़ाना है। जबकि सर्वाधिक सत्ता संभालने वाली कांग्रेस इसे देश पर उपकार गिनाते नहीं थकती।राजाओं, मुगलों, अंग्रेजों, जमींदारों, साहूकारों, जमाखोरों, मिलावटखोरों से लड़ने का काम देश की आम जनता आगे बढ़कर संभालती रही है लेकिन कांग्रेसी इसे अपना किया अहसान बताने में ही लगे रहते हैं। किसी भी कांग्रेसी से पूछिए वह यही दुहराता है हमने देश को आजादी दिलाई। जबकि हकीकत ये है कि करोड़ों हिंदुस्तानियों ने बलिदान देकर अंग्रेजों को देश से भागने पर विवश किया था। गांधी नेहरू की कांग्रेस ने तो अंग्रेजों को निकल भागने के लिए सुरक्षित पैसेज उपलब्ध कराया और उसका इनाम बटोरा। हिंदुओं और मुसलमानों के बीच वैमनस्य के बीज बोकर पाकिस्तान बंटवारा स्वीकार करना इसी गहरे षड़यंत्र का हिस्सा था। आजादी के बाद से लेकर जब तक कांग्रेस सत्ता में रही वह केवल फूट डालो राज करो की नीति पर ही अमल करती रही। आज भी देश में कांग्रेस को वोट देने वाला बड़ा तबका इसी तरह वैमनस्य की खेती करके अपना उल्लू सीधा करता है।केवल डेढ़ दो प्रतिशत लोगों को मंहगी सरकारी नौकरियां देकर शेष हिंदुस्तान के विरुद्ध षड़यंत्र की कलई तब खुल रही है जब भारतीय जनता पार्टी ने अंत्योदय के विचार पर अमल करके हर नागरिक को संसाधनों का बंटवारा करने की नीति पर अमल शुरु किया है। दरअसल हमेशा से यही समस्या रही है कि समाज के संसाधनों पर कुछ लोग कब्जा जमा लेते थे। कभी राजा,कभी मुगल, कभी अंग्रेज, कभी जमींदार,साहूकार और आज उन पर कब्जा बेतहाशा बढ़ते सरकारी तंत्र ने जमा लिया है। शोषण का ये कहर इतना अधिक बढ़ गया है कि लोग त्राहिमाम कर उठे हैं। जनता विद्रोह पर उतारू है। वह ये नहीं समझ पा रही है कि उसका असली खलनायक कौन है। कांग्रेस को अपना तारणहार मानने वाला तबका भाजपा को खलनायक बताने में जुटा है । भाजपा पर ये आरोप इसलिए चिपक रहा है क्योंकि लगभग दो दशक तक शासन करने के बाद भी भाजपा जनता के कंधे पर रखा ये जुआ नहीं उतार सकी है। सरकारी नौकरियों का वेतन लगातार बढ़ता जा रहा है और अमीरी गरीबी की खाई भी बढ़ती जा रही है।भाजपा ने अपने समर्थकों को सरकारी नौकरियों में भेज दिया तो शोषण का ये आंकड़ा और बढ़ गया। दिन भर में दो सौ रुपए की मजदूरी पाने वाला श्रमिक दाल,चावल,सब्जी उसी भाव पर खरीद रहा है जिस भाव पर ढाई तीन लाख रुपए मासिक वेतन पाने वाला अफसर खरीद रहा है। उपभोक्ता मूल्य सूचकांक पच्चीस लाख रुपए का पैकेज पाने वाले अमीर तबके से तय हो रहा है जबकि गरीब वर्ग बेवजह उसमें पिसा जा रहा है। मोदी जी जब मेरे प्यारे परिवारजन का संबोधन देते हैं को उन्हें और उनकी भाजपा को सोचना होगा कि वह अपने परिवारजनों के लिए मुखिया कैसे साबित हों। कहा गया है मुखिया मुख सो चाहिए, खान पान को एक, पाले पोसे सकल अंग तुलसी सहित विवेक । यदि मोदी जी और उनकी भाजपा कांग्रेस की छाया से बाहर नहीं निकल पाएगी और देश के संसाधनों का न्यायोचित बंटवारा नहीं कर पाएगी तो वह लाख बार कांग्रेस के परिवार वाद को गाली देती रहे जनता की समस्याओं का समाधान नहीं हो पाएगा। चंद परिवारों को जरूरत से ज्यादा संसाधन बांटने से उपभोक्ता सामग्री बनाने बेचने वाला कार्पोरेट सेक्टर तो मजबूत होता जा रहा है लेकिन वह सरकार और आम जनता दोनों का धन उलीचता जा रहा है। जनता इससे परेशान है और इससे अमीरी गरीबी के बीच खाई बढ़ती जा रही है। भाजपा ने हितग्राही मूलक योजनाओं से संसाधनों का बंटवारा आम जनता तक पहुंचाने की पहल तो की है लेकिन इसमें भी इतनी सारी शर्तें थोप दी गईं हैं कि वह संसाधन हर व्यक्ति को लाभ नहीं पहुंचा पा रहे हैं। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के सामने खुली चुनौती है कि वे हर नागरिक तक देश के संसाधन पहुंचाना सुनिश्चित करें। मध्यप्रदेश में शिवराज सिंह चौहान की भाजपा भी चीन्ह चीन्ह के रेवड़ी बांटने की शैली पर कार्य कर रही है। जाहिर है कि इससे जन आक्रोश बढ़ेगा और आने वाले विधानसभा चुनावों और लोकसभा चुनावों में भाजपा को इसकी मंहगी कीमत चुकानी पड़ेगी। संसाधन तो सीमित हैं। कर्ज लेकर बांटने की सीमा भी निश्चित है। जाहिर है कि सरकार को निष्पक्ष होकर शल्यक्रिया करनी होगी। संसाधन रिसकर आम जनता तक पहुंचाने वाला कांग्रेसी मॉडल उसे न केवल छोड़ना होगा बल्कि अंत्योदय की विचारधारा पर अमल की नाटकबाजी छोड़कर सख्ती से अमल शुरु करना होगा। अनुत्पादक सरकारी तंत्र को पालते रहने से वह भले ही चुनावी हेराफेरी करने में थोड़ी हद तक सफल हो जाए लेकिन जन आक्रोश का सैलाब उसे न घर का रहने देगा न घाट का ।

  • सेडमैप को सफल बनाया तो मिली अग्निपरीक्षा की चुनौती

    सेडमैप को सफल बनाया तो मिली अग्निपरीक्षा की चुनौती


    भोपाल,14 अगस्त(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)।प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, हिंदुस्तान को पांच ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने का जो महा अभियान चला रहे हैं उसे सफल बनाने के लिए मध्यप्रदेश की अनुराधा सिंघई जैसी उद्यमी अपने हुनर का इस्तेमाल करके योग्य मानव बल उपलब्ध करा रहीं हैं। नौकरियां बेचने के गोरखधंधे में शरीक न होने की वजह से सैडमेप की इस एक्जीक्यूटिव डायरेक्टर को अग्निपरीक्षा देने के लिए मजबूर किया जा रहा है। इसके पीछे कई ऐसे दिग्गज भी अपने गुंताड़े फिट कर रहे हैं जो खुद को महान देशभक्त बताते नहीं थकते।

    तैतीस साल की अपनी यात्रा में सैडमेप को महज एक एचआर मैनेजर की तरह ही इस्तेमाल किया जाता रहा है। इस संस्थान की बेहतरी के लिए किसी ने इसलिए प्रयास नहीं किए क्योंकि उनके लिए तो ये केवल नौकरियां बेचने की आड़ थी। संयुक्त राष्ट्र की भ्रष्टाचार विरोधी मुहिम में चार बार देश का नेतृत्व कर चुकीं अनुराधा सिंघई ने दो साल पहले जब मध्य प्रदेश सरकार के एमएसएमई विभाग के तहत इस स्वायत्त शासी निकाय CEDMAP (Centre for Entrepreneurship Development Madhya Pradesh) (उद्यमिता विकास केंद्र मध्य प्रदेश) की कार्यकारी निदेशक का पदभार संभाला तो ये संस्थान लगभग बंद होने की कगार पर पहुंच गया था। आज भी इसे वेतन और प्रशासनिक खर्चों के लिए भी सरकार से कोई धन सहायता नहीं मिलती है। संस्थान में कर्मचारियों का दस महीनों से वेतन नहीं बंटा था।एक महीने का वेतन पाने के लिए, नई ईडी को कार्यभार संभालते ही पिछले 10 महीनों का राजस्व अर्जित करना था । वह अगस्त 2021 से सभी स्टाफ को वेतन दिलवाने लगीं,लेकिन उन्होंने तय किया कि 10 महीने का पूरा वेतन देने से दक्षता हासिल किए बगैर वे अपना वेतन नहीं लेंगी। कार्यभार संभालने के चार महीने बाद उन्होंने पहला वेतन लिया।नतीजतन आज संस्थान अपना बोझ उठाने लगा है।

    जब उन्होंने संस्थान की काया पलटने का प्रमाण दे दिया तब उनकी नियुक्ति पर सवालिया निशान लगाए जा रहे हैं । प्रदेश की पंद्रह दिग्गज प्रमुख हस्तियों ने जो चयन किया उसे गलत ठहराने से पहले षड़यंत्रकारियों ने सैडमेप के इतिहास को पढ़ने का प्रयास भी नहीं किया। सैडमेप का गठन प्रदेश को प्रशिक्षित और उत्कृष्ट मानव बल मुहैया कराने के लिए किया गया था। संस्थान के संस्थापकों ने लंबी छानबीन के बाद ऐसे फार्मूले तैयार किए जिनके माध्यम से उद्यमी युवाओं की पहचान आसानी से की जा सकती थी। इसके बावजूद सत्ता के कई खिलाडियों के हस्तक्षेप से नौकरियां बेचने वालों का एक गिरोह भी इस प्रक्रिया के इर्दगिर्द इकट्ठा हो गया था। आज वही गिरोह खुद का सूरज अस्त होते देख रहा है।

    वार करने का जब कोई अवसर नहीं दिखा तो कुछ अधूरे दस्तावेजों को आधार बनाकर एक्जीक्यूटिव डायरेक्टर के विरुद्ध अदालती हस्तक्षेप की मुहिम छेड़ दी गई। हालांकि मुहिम चलाने वाले स्वयं जानते हैं कि वे एक हारी लड़ाई लड़ रहे हैं क्योंकि देश अब एक अलग दौर में प्रवेश कर गया है।आज जबकि कॉरपोरेट सेक्टर में नए प्रबंधकों के लिए 25लाख का वेतन पैकेज आम बात हो गई है तब कंगाल सोच वाले षड्यंत्र कारी संस्थान की नई कार पर ही सवाल उठा रहे हैं।

    पहली बार जब मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की सरकार के लघु एवं सूक्ष्म उद्योग विभाग के मंत्री ओमप्रकाश सखलेचा ने अपने पिता स्वर्गीय वीरेंद्र कुमार सखलेचा की परंपरा को आगे बढ़ाकर अधीनस्थों को तथ्यात्मक कार्य करने की सुविधा उपलब्ध कराई तो एक बार फिर प्रशासनिक दक्षता को घेरा जाने लगा है।वहीं घर की गृहिणी की तरह साज संभाल करने वाली अनुराधा सिंघई ने अपने सुदीर्घ आर्थिक प्रबंधन ज्ञान का उपयोग करके संस्थान को नई राह पर अग्रसर कर दिया है।


    कौन हैं अनुराधा सिंघई

    पहले वह इंडो यूरोपियन चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री की संस्थापक अध्यक्ष रहीं हैं, जो एक अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त विकास क्षेत्र संगठन है, जिसे संयुक्त राष्ट्र आर्थिक और सामाजिक संगठन की विशेष सलाहकार स्थिति प्राप्त है। वह 21 साल के अनुभव के साथ इंस्टीट्यूट ऑफ कंपनी सेक्रेटरीज ऑफ इंडिया की फेलो हैं।

    कानूनी, वित्त, कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व, क्लस्टर विकास, व्यवसाय मॉडलिंग, उद्यमिता, प्रशिक्षण, आजीविका, अनुसंधान और अध्ययन, कॉर्पोरेट समाधान, अंतर्राष्ट्रीय व्यापार और सहित विकास और कॉर्पोरेट क्षेत्र में 21 वर्षों से अधिक के विशाल और बहुमुखी अनुभव के साथ एक अनुभवी उच्च प्रबंधन पेशेवर हैं ।प्रमुख आंदोलन- “पर्पल मार्च” के माध्यम से विकास क्षेत्र में सुधार, लैंगिक समानता और महिला सशक्तिकरण में एक अनुभवी शख्सियत हैं । किसी भी क्षेत्र में संकल्पना से लेकर कार्यान्वयन तक अत्यधिक उद्यमशील, परिणामोन्मुखी, समाधान चाहने वाला संगठन उनकी सेवाओं को अव्वल मानता है । वे कॉर्पोरेट मामलों के मंत्रालय, भारत सरकार के लिए कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (सीएसआर) की विशेषज्ञ और पर्यटन सलाहकार भी हैं।

    उन्हें भारत के प्रतिनिधि के रूप में तीन बार रॉटरडैम, नीदरलैंड में सीबीआई (आयात संवर्धन केंद्र-नीदरलैंड मंत्रालय का एक निकाय) ने चुना और आमंत्रित किया । उन्होंने भारत से यूरोपीय देशों और संबद्ध विषयों पर निर्यात बाजार विकास पर 2001, 2007 में प्रशिक्षण प्राप्त किया।

    उन्होंने चार बार अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत का प्रतिनिधित्व किया, जिसमें 2014 में मलेशिया के कुआलालंपुर में भ्रष्टाचार के खिलाफ संयुक्त राष्ट्र कन्वेंशन और इसके समीक्षा तंत्र पर नशीली दवाओं और अपराध पर संयुक्त राष्ट्र कार्यालय (यूएनओडीसी) में प्रतिनिधित्व भी शामिल है।

    भारतीय ज्ञान प्रणाली और प्राचीन भारतीय विरासत में उनकी गहरी रुचि के कारण, उनके पास भारतीय प्राचीन ज्ञान प्रणाली- “वेद, वेदांग और दर्शन”, “उपनिषद”, “पुराण” और “गीता” और “भारतीय कला और साहित्य” में प्रशिक्षण और प्रमाण पत्र भी है। वास्तुकला”।

    उनके कुछ प्रतिष्ठित पुरस्कार और सम्मान हैं- 2012 में एमपी और सीजी राज्य के लिए दैनिक भास्कर द्वारा “बिजनेस वुमेन ऑफ द ईयर” पुरस्कार, 2019 में “अनहद नाद” सामाजिक कार्यकर्ता पुरस्कार, द इंटरनेशनल एसोसिएशन ऑफ लायंस द्वारा “सेवा सम्मान”। 2020 में क्लब, आदि।
    वह विभिन्न मंचों पर अतिथि संकाय और नियमित वक्ता हैं, जैसे – राज्य कृषि शिक्षा और प्रशिक्षण संस्थान (एसआईएईटी), केंद्रीय पुलिस प्रशिक्षण अकादमी, भारतीय वन प्रबंधन संस्थान (आईआईएफएम), भोपाल, पर्यावरण और वन मंत्रालय, भारत सरकार, बैंक ऑफ भारत, स्टाफ ट्रेनिंग कॉलेज, भारतीय कंपनी सचिव संस्थान (आईसीएसआई), अन्य प्रबंधन कॉलेज, आदि।

    उन्होंने स्विट्जरलैंड, नीदरलैंड, जर्मनी, फ्रांस, बेल्जियम, डेनमार्क, सिंगापुर, मलेशिया, दुबई, थाईलैंड और श्रीलंका का अध्ययन दौरा किया है।

    वह बिजनेस मॉडलिंग में विशेषज्ञ हैं और उन्होंने लगभग 1200 उद्यमियों का मार्गदर्शन किया है जिन्होंने विभिन्न क्षेत्रों में सफलतापूर्वक अपने उद्यम स्थापित किए हैं।

    Profile of Ms Anuradha Singhai

    Anuradha Singhai is Executive Director of CEDMAP (Centre for Entrepreneurship Development Madhya Pradesh), an autonomous body under Department of MSME, Government of Madhya Pradesh. 

    Previously she was founder president of Indo European Chamber of Commerce and Industry, an internationally recognized development sector organization having Special Consultative Status of United Nations Economic and Social Organisation.

    She is fellow of the Institute of Company Secretaries of India with 21 years of post qualification experience.

    A seasoned upper management professional with vast and versatile experience of over 21 years in development and corporate sector including legal, finance, Corporate Social Responsibility, Cluster development, business modelling, entrepreneurship, training, livelihood,  research & studies, corporate solutions, international trade and government advisory.

    A veteran in development sector reforms, Gender equality and women empowerment through flagship movement-“Purple March”.  A highly enterprising, result-oriented, solution seeker, right from conceptualization to implementation, in any sector.

    Ms Singhai is also an expert on Corporate Social Responsibility  (CSR) for Ministry of Corporate Affairs, GOI and tourism consultant. 

    She was selected and invited by CBI (Centre for Promotion of Imports- a body of Ministry of Netherlands) at Rotterdam, Netherlands for three times as India representative & received training on Export market development from India to European countries & allied topics in 2001, 2007 and 2009.

    She represented India on international forum for four times, including representation at United Nations Office on Drug and Crime (UNODC) on United Nations Convention against Corruption and its review mechanism at Kualalumpur, Malaysia in 2014.

    Out of her profound interest in Indian Knowledge System and ancient Indian heritage, she also posses training and certificate in Indian ancient knowledge system- “Ved, vedang & Darshan”, “Upanishads”, “Puraan” and “Gita” and “Indian art and architecture”.

    Some of her prestigious awards and honors are-“Business Women of the year”  award by Dainik Bhaskar for the state of MP and CG in 2012, “Anhad Naad” social worker award in 2019, “Sewa Samman” by The International Association of Lions Club in 2020, etc.

    She is guest faculty and regular speaker at various forums like -State Institute of Agriculture Education and Training (SIAET), Central Academy for Police training, Indian Institute of Forest Management (IIFM), Bhopal, Ministry of Environment & Forest, GOI, Bank of India, Staff Training College, Institute of Company Secretaries of India (ICSI), Other Management colleges, etc.

    She has undertaken study visits at Switzerland, Netherlands, Germany, France, Belgium, Denmark, Singapore, Malaysia, Dubai, Thailand and Srilanka.

    She is an expert in business modelling and mentored around 1200 entrepreneurs who have successfully established their ventures in various sectors.

  • तिजारत बने स्कूलों में शासन की सक्रियता से मचा हड़कंप

    तिजारत बने स्कूलों में शासन की सक्रियता से मचा हड़कंप


    अगस्त का महीना हिंदुस्तान की लोकतांत्रिक व्यवस्था की उपलब्धियों के मंथन का समय होता है। विकास की हर इबारत बोध के बिना अधूरी है। ज्ञान प्रसारित करने वाले विद्यालयों को लोकतांत्रिक गिरावट ने तिजारत का अड्डा बना दिया है। सरकारी स्कूल और इसके शिक्षक छुटभैये नेताओं तक के सामने नाक रगड़ने को मजबूर हैं। मध्यप्रदेश की स्कूली शिक्षा प्रशासनिक मुखिया ने निजी हनक का इस्तेमाल करके शैक्षणिक तंत्र को सुधारने का उपाय निकाला है। स्कूल शिक्षा प्रमुख सचिव रश्मि अरुण शमी एक ऐसी अफसर हैं जो शिक्षा तंत्र को व्यवस्थित करने की कमान खुद संभालती हैं।


    भोपाल,06 अगस्त(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर) सरकार का प्रयास है कि वह शासकीय स्कूलों के माध्यम से गांव गांव तक ज्ञान का प्रकाश निशुल्क पहुंचाए । शासन के सिवाय कोई दूसरा इतना बड़ा तंत्र नहीं जो दूर दराज के गांवों तक बच्चों को प्रमाणिक शिक्षा मुहैया कराता हो। लगभग तीन दशक पहले स्कूलों में राजनैतिक आधार पर शिक्षक नियुक्त करने की परंपरा शुरु की गई थी। दिग्विजय सिंह की असफल कांग्रेसी सरकार ने पंचायती राज का शिगूफा छेड़कर सत्ता का समानांतर ढांचा खड़ा करने का प्रयास किया था। तब गुंडे मवालियों तक को पंचायतों की शिक्षा समिति में चयनित कर लिया गया था। तभी से गांव गांव तक सरकारी अमले से चंदा वसूली का खेल शुरु हो गया। लोमड़ी की दाढ़ में इंसानी रक्त की खुशबू लग जाए तो वह आदमखोर हो जाती है।


    सीधी विकासखंड की प्राथमिक शाला बुसिया टोला करवाही की शिक्षिका श्रीमती बबिता गुप्ता ने जब प्रमुख सचिव महोदया से अपनी जान की सुरक्षा करने की गुहार लगाई तो उन्होंने इसे गंभीरता से लिया। शिक्षिका की पूरी बात गौर से सुनने के बाद उन्होंने अपने अमले को मामले की जांच के निर्देश दिए हैं। प्रशासनिक जांच के अलावा उन्होंने पुलिस महकमे को भी जांच में सहयोग करने के लिए ताकीद किया है। पुलिस महकमे के तमाम आला अफसर प्रमुख सचिव महोदया को उनके पद के अलावा व्यवहार के कारण बहुत इज्जत देते हैं। उनके पतिदेव संजीव शमी मध्यप्रदेश कैडर के निर्भीक और प्रतिभाशाली आईपीएस हैं। प्रदेश के दस्यु प्रभावित इलाकों में उनका खौफ इतना ज्यादा रहा है कि डकैत गिरोह और उनकी आड़ में काम करने वाले बदमाश अपनी आपराधिक गतिविधियों से ही तौबा कर लेते हैं। उन्हें अपने कार्य का जुनून है और सूचना मिलते ही वे जूते पहिनकर घटनास्थल पर पहुंच जाते हैं। उनकी इसी पहचान की वजह से आपराधिक चरित्र के लोग खौफ खाते हैं और नहीं चाहते कि वे सीधे टकराव वाली किसी पोस्ट पर मौजूद रहें। हालांकि उनकी इसी खूबी की वजह से पुलिस महकमे में उनकी बहुत इज्जत की जाती है।उनकी इस छवि का लाभ जाने अनजाने में शिक्षा जगत को भी मिल रहा है।


    शिक्षा विभाग में प्रमुख सचिव रश्मि अरुण शमी बहुत विनम्र अधिकारी हैं लेकिन शिक्षा माफिया के लोग उनकी सक्रिय भूमिका देखकर अपनी चालबाजियां भूल जाते हैं। जब श्रीमती बबिता गुप्ता ने बताया कि वे अपने स्कूल के बच्चों को अपने वेतन में से ड्रेस खरीदकर देती हैं पढाई का सामान देती हैं इस वजह से कलेक्टर महोदय उन्हें सम्मानित भी कर चुके हैं। उन्होंने पहल करके स्कूल की दीवारों पर रंगरोगन करवाया है और बच्चों की पढ़ाई को रुचिकर बना रहीं हैं। इसके विपरीत स्कूल के षड्यंत्रकारी ने उनके फर्जी हस्ताक्षर बनाकर शाला विकास समिति के फंड में से रुपए निकाल लिए हैं और झूठी शिकायत उनके ही विरुद्ध कर रहे हैं। श्रीमती गुप्ता ने इस मामले की शिकायत सीधी पुलिस को भी की है।


    उन्होंने बताया कि उनके स्कूल के हेडमास्टर ने उन्हें और उनके बच्चों को जान से मारने की धमकी दी है। इससे वे बहुत भयभीत हैं और उन्होंने अपने स्वास्थ्य के कारणों की वजह से फिलहाल महीने भर की छुट्टी ले ली है। प्रमुख सचिव महोदया ने शिक्षिका की बात गौर से सुनी और उन्हें हरसंभव मदद दिलाने का आश्वासन देकर विदा कर दिया। इसके साथ ही उन्होंने स्कूल शिक्षा विभाग को सख्त निर्देश देकर मामले की जांच करवाने और दोषियों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं। वहीं सीधी पुलिस तक भी इस मामले की सूचना पहुंच गई है। इससे पुलिस अमला सक्रिय हो गया है। पुलिस ने कथित तौर पर धमकी देने वाले शिक्षक अंजनी गुप्ता को भी सख्त हिदायत दी है कि यदि उनके विरुद्ध शिकायत जांच में सही साबित होती है तो उनके विरुद्ध प्रकरण दर्ज कर लिया जाएगा।

    स्कूल के एक अन्य शिक्षक धीरज सिंह ने बताया कि शिक्षिका के दयालु स्वभाव की वजह से गांव के लोगों और स्थानीय प्रशासन के बीच उनकी छवि अच्छी है। जबकि उन्होंने जो शिकायतें की हैं वे कागज पर खरी साबित नहीं हो रहीं हैं। ऐसे में प्रशासन ने उन्हें लिखित पत्र देकर अपनी बात प्रमाणित करने का निर्देश दिया है। वे अपना स्पष्टीकरण दे देंगी तो बहुत सी शिकायतों को निदान हो जाएगा।


    अब तक शिक्षा विभाग में इस तरह के मामलों में फाईलों पर धीमी गति से कार्रवाई चलती रही है लेकिन प्रमुख सचिव महोदया की सक्रियता से शिक्षा विभाग की जांच गतिविधियों में पंख लग गए हैं।संकुल चौफाल जिला सीधी म.प्र. के प्रिंसिपल दोमनीक खाखा ने इस मामले में हस्तक्षेप करके प्रधानाध्यापक अंजनी कुमार गुप्ता का पक्ष लेने की कोशिश की है,जिनकी जांच चल रही है।सुदूर ग्रामीण इलाके में शासन की उपस्थिति से सीधी जिले में हड़कंप मचा है। इस समय जब प्रदेश में प्रशासनिक कसावट का दौर चल रहा है तब प्रमुख सचिव की सक्रियता और न्यायप्रियता चर्चा का विषय बन गई है।

  • पंच परमेश्वर यशोधरा जी की राय पर गौर कीजिए

    पंच परमेश्वर यशोधरा जी की राय पर गौर कीजिए


    तकनीकी शिक्षा और कौशल विकास मंत्री यशोधरा राजे सिंधिया ने जाने अनजाने में लोकतंत्र की एक बड़ी कमजोरी की ओर लोगों का ध्यान आकर्षित किया है। उन्होंने सिंधिया खेमें के सहयोगी मंत्री डॉ.प्रभुराम चौधरी की आईटीआई खोलने की मांग ठुकराते हुए बड़ी मार्के की बात कही है। वे चाहती तो अपने ही भतीजे के प्रिय सहयोगी की बात मान लेती और वाहवाही बटोर लेतीं, लेकिन उन्होंने जनहित को देखते हुए पंच परमेश्वर बनकर अपनी बात कह डाली। उनकी स्नेहिल फटकार ने पूरे लोकतंत्र और इसके मालिकों को चेतावनी दी है। डॉ.प्रभुराम चौधरी ने ये सोचकर प्रस्ताव रखा था कि राजे तो कृपा बरसाती हैं और वे चुनाव की बेला में एक सफलता की कहानी उन्हें भेंट कर देंगी। वे अपने क्षेत्र में कह सकेंगे कि उन्होंने जनहित में कितने सारे कार्य किए हैं। उनका प्रस्ताव शालीन था उचित था लेकिन विभागीय मंत्री यशोधरा जी ने सच का साथ दिया। वे जानती हैं कि डॉ.प्रभुराम चौधरी तो बदमिजाज डॉ.गौरीशंकर शेजवार की हर चुनौती को सामना कर चुके हैं। उनके बेटे मुदित शेजवार भी जनता की कसौटी पर फिसड्डी साबित हो चुके हैं। इसलिए आईटीआई का शिगूफा गढने की उन्हें कोई जरूरत नहीं हैं। स्वास्थ्य मंत्री रहते हुए वे भरपूर जनसेवा कर रहे हैं। आईटीआई के संस्थान आज केवल डिग्री बांटने के लिए उपयोगी रह गए हैं। जिन्हें तकनीकी शिक्षा लेकर मिस्त्री, कारपेंटर, मैकेनिक, आदि बनना होता है वे तो निजी तौर पर प्रशिक्षण प्राप्त कर लेते हैं और अपना सेवा कार्य चालू कर देते हैं। सैकड़ों यू ट्यूब चैनल बच्चों को तकनीकी ज्ञान घर बैठे प्रदान करने लगे हैं। ऐसे में आईटीआई से ज्यादा जरूरत उत्पादन के अवसरों की है। रोजगार प्रशिक्षण केन्द्रों में लगभग सारे गुर सिखाए जा रहे हैं। आसपास के जिलों में आईटीआई संस्थान पहले से चालू हैं और उनमें से कई तो उन्नत उपकरणों से भी लैस हैं। करीबी जिले भोपाल में ही तकनीकी शिक्षा के ढेरों संस्थान हैं। जिन्हें वाकई काम धंधा सीखना है वे दिखावे की डिग्री बटोरने में अपना समय थोड़ी बर्बाद करेंगे। भुनभुनाते गौरीशंकर शेजवार जब पार्टी संगठन के प्रति नाराजगी दिखाते हुए गुर्रा रहे हैं तब प्रभुराम चौधरी को ये दूर के ढोल वाली कवायद करने की कोई जरूरत नहीं है। ऐसा करते हुए यशोधरा जी ने शिवराज सरकार की चिंतन प्रक्रिया को भी झिंझोड़ दिया है। बरसों से भाजपा सरकार वही घिसी पिटी पुरानी कांग्रेस की नीति को ढो रही है जिसमें वह शैक्षणिक संस्थानों की घोषणा करती रही है,जबकि आज जरूरत शैक्षणिक ढांचे में मूलभूत सुधार करने की है। यशोधरा जी ने ठीक ही कहा कि यदि आईटीआई खोल देते हैं तो फिर वही ट्रांसफर पोस्टिंग का खेल शुरु हो जाएगा। राजधानी में निवास करने वालों के लिए वह आईटीआई समय काटने का अड्डा बन जाएगा। जहां वे जाना पसंद नहीं करेंगे पर उनका वेतन जरूर खजाने से निकलता रहेगा। दरअसल वक्त कार्पोरेट सेक्टर को अपने पैरों पर खड़ा करने का अवसर देने का है। सरकार की आर्थिक हालत खस्ता है टैक्स और अन्य साधनों से उसकी आय बढ़ी है इसके बावजूद वह सरकारी अमले का वेतन भत्ता अपनी आय से नहीं निकाल पा रही है। वेतन के लिए भी उसे इसकी टोपी उसके सिर वाली कवायद करनी पड़ती है। कर्ज जनता के सिर लदता जा रहा है। आज जब एक शिक्षक पूरे देश के बच्चों को बेहतर शिक्षा टीवी कंप्यूटर मोबाईल के माध्यम से दे सकता है तब दिखावे के संस्थान खड़े करने का कोई औचित्य नहीं है। जरूरी है कि आय के उपक्रम खड़े किए जाएं। केन्द्र सरकार का सूक्ष्म एवं लघु उद्योग मंत्रालय उद्यमियों को आत्मनिर्भर बनाने का अभियान चला रहा है। ऐसे में कांग्रेसी औद्योगिकीकरण की असफल विचारधारा को ढोना फिजूल है। आप डिग्री देंगे और युवा नौकरी पाएंगे इससे बेहतर है कि वे काम सीखें और देश के लिए पूंजी का निर्माण करें। यशोधरा जी का यह संदेश पूरे राजनेताओं को समझना होगा। खासतौर से शिवराज सरकार की पैरवी करने वाले महान चिंतकों को भी इस विषय पर गौर करना चाहिए।

  • इस खाई को कितना भर पाएगा अंत्योदय का विचार

    इस खाई को कितना भर पाएगा अंत्योदय का विचार


    देश में राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन को दीनदयाल अंत्योदय योजना के नाम से जाना जाता है। लगभग एक दशक से ज्यादा पुरानी इस योजना का इतिहास इससे भी ज्यादा पुराना है।आजादी के बाद से सरकारें लगातार गरीबी दूर करने के कार्यक्रम चलाती रहीं हैं। इनके लिए वैश्विक कर्जदाताओं से साफ्ट लोन भी लिए जाते रहे हैं। यदि ये सभी अभियान सफल हो गए होते तो भारत काफी साल पहले विकसित देशों की सूची में शामिल होकर चहुंमुखी विकास की होड़ में शामिल हो चुका होता। अपने लंबे अनुभवों से कांग्रेस की निवृत्तमान सरकारों ने पाया कि नौकरशाही इस अभियान की राह में सबसे बड़ा रोड़ा है। गरीबी दूर करने के लिए सरकारों ने जो संसाधन भेजे वे भ्रष्ट नौकरशाही की भेंट चढ़ गए। इस समस्या से निपटने के लिए कांग्रेस ने पंचायती राज जैसा मूर्खतापूर्ण उपाय ढूंढ़ा था। जो अपनी स्थापना से लेकर कभी सफल नहीं हो सका है। दिग्विजय सिंह की सरकार ने तो पंचायती राज को इतना पावरफुल बना दिया कि गांव गांव में सरपंच,सचिवों और उनकी मंडलियों ने लूट का कोहराम मचा दिया। सत्ता से समानांतर तंत्र खड़ा कर दिए जाने से नौकरशाही खफा हो गई। जनता को तब तक ये नहीं मालूम था कि नौकरशाही और पंचायती राज में असली अपराधी कौन है। जन आक्रोश पंचायती राज के खिलाफ था तो लोग उमा भारती की जन क्रांति में शामिल हो लिए और भाजपा की मजबूत सरकार सत्ता में पहुंच गई। बाद की भाजपा सरकारों ने नौकरशाही से पंगा नहीं लिया और कहानी जस की तस चलती रही। कांग्रेस की कमलनाथ सरकार ने इंसपेक्टरराज लौटाकर नौकरशाही को सब्जबाग दिखाए थे। वह तो भाजपा के रणनीतिकारों और ज्योतिरादित्य सिंधिया की आपसी समझबूझ थी जो करप्टनाथ के षड़यंत्र का भांडा बीच राह में ही फूट गया। इस बार फिर एक बार जनता को समाधान देने में असफल नौकरशाही निशाने पर है। कमलनाथ ने जिस नौकरशाही को सत्ता में आते ही धोबी का कुतका बना दिया था वे आज उसी नौकरशाही के सामने दाना डाल रहे हैं। क्योंकि उन्हें कांग्रेस के संगठन से ज्यादा भरोसा नौकरशाही के भ्रष्टाचार की शैली पर है। हालांकि सोशल मीडिया का चहुंमुखी विकास और संचार के बेहतर साधनों के बीच इस बार कमलनाथ की नाव वहीं डगमगाने लगी है जहां से उसने अपनी यात्रा शुरु की थी। भाजपा के रणनीतिकारों ने एकात्म मानवता वाद के प्रणेता पंडित दीन दयाल उपाध्याय के अंत्योदय वाले फार्मूले को मैदान में उतार दिया है। उन्होंने भ्रष्ट नौकरशाही से तो पंगा नहीं लिया लेकिन जनता को हितग्राही मूलक योजनाओं से भरपूर लाभ पहुंचाया। उसकी लाड़ली बहना योजना ने तो रिकार्ड सफलता अर्जित की है। इस योजना के दूसरे चरण को अधिकारी ये कहकर असफल बनाने में जुटे हैं कि सरकार ने योजना का लाभ लेने के लिए घर में टै्क्टर होना अनिवार्य शर्त बना दिया है। इस तरह नौकरशाही इस योजना की राह में अड़ंगे लगा रही है। ये कहा जा रहा है कि लाड़ली बहनों को देने लायक धन आखिर सरकार लाएगी कहां से। फिर जब उसने भविष्य में तीन हजार रुपए मासिक देने का वायदा किया है तो ये धन आखिर आएगा कहां से। भाजपा ने तो नौकरशाही कोसत्ता की बागडोर थमा रखी थी लेकिन भ्रष्ट अफसरों ने अपनी बदमाशी का ठीकरा भाजपा पर ही फोड़ना शुरु कर दिया। भाजपा के नेतागण खुलकर अपनी बात नहीं कह पाए और आज वे लाड़ली बहना योजना की सफलता का भरोसा भी नहीं दिला पा रहे हैं। कांग्रेस की नकल करते और अफसरशाही पर निर्भर भाजपाईयों की स्वतंत्र चेतना विलीन सी हो गई है। वे जनता को नहीं समझा पा रहे हैं कि उनके कार्यकाल में विकास के क्या क्या प्रतिमान गढ़े गए हैं। उसने लाड़ली बहना योजना, किसान सम्मान निधि,प्रधानमंत्री आवास, युवाओं को लैपटाप जैसी योजनाओं से नौकरशाही और सत्ता के विरुद्ध विद्रोह की आंधी को लगभग रोक दिया है। हालांकि ये अभी केवल अर्धविराम है।सत्ताधीशों को ये जान लेना चाहिए कि कांग्रेस के बनाए जिस ढांचे पर भाजपा अब तक चलती रही है वह ढांचा ही आक्रोश की असली वजह है। पंडित दीनदयाल उपाध्याय ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ में कार्य करते हुए जाना कि कांग्रेस अंग्रेजों की फूट डालो राज करो की नीति पर चल रही है। ये चंद लोगों को साथ लेकर बहुसंख्यक जनता को कुचलने वाली अंग्रेजों की ही रणनीति अपनाए हुए है। तब उन्होंने वसुधैव कुटुंबकम की भावना में रचे बसे एकात्म मानवतावाद का सिद्धांत दिया। जिसमें समाज के हर व्यक्ति को परिवार का सदस्य मानकर उसे मजबूत बनाने का लक्ष्य रखा गया था। अंत्योदय इसी से उपजा विचार था जिसमें समाज के दबे कुचले पिछड़े,दलित वर्ग को साथ लेकर चलने का लक्ष्य था। शिवराज सिंह सरकार ने अपने पूरे कार्यकाल में नौकरशाही को छूट दी लेकिन अब जब चुनाव की बेला नजदीक आ गई है तब वह अंत्योदय के सहारे जनता के आक्रोश को नई दिशा में धकेलने का प्रयास कर रहे हैं। नौकरशाही ने अपनी लापरवाही, अनिच्छा, अपना घर भरने के लालच और शोषणवादी मानसिकता से जनधन की खूब लूट मचाई है। जनता शोषण से उसी तरह त्रस्त है जैसे कभी मुगलों, अंग्रेजों, जमींदारों, राजदरबारों, सूदखोरों से त्रस्त रही है,और वह लगभग विद्रोह पर उतारू है।कानून और व्यवस्था दूर के ढोल बने हुए हैं। ऐसे में लाड़ली बहना योजना जैसे कदम उसकी नाराजगी पर ठंडा पानी छिड़कने का काम कर रहे हैं।उन योजनाओं का असर भी हुआ है लेकिन कितना अभी ये कहना जल्दबाजी होगी।

  • कांग्रेस के डिफाल्टर प्रेम की धूल उड़ाता भाजपा का अंत्योदय

    कांग्रेस के डिफाल्टर प्रेम की धूल उड़ाता भाजपा का अंत्योदय


    -आलोक सिंघई-


    किसान का कर्जा माफ, मुफ्त बिजली, सरकारी नौकरियों का खोखला उद्घोष, जाति और धर्म आधारित वर्ग भेद जैसे मसालों के भरोसे कमलनाथ कांग्रेस मध्यप्रदेश में काठ की हांडी चढ़ाने का प्रयास कर रही है। कांग्रेस का वचन पत्र कमलनाथ की थोथी शोशेबाजी से मुक्त नहीं हो पाया है। इसके विपरीत भारतीय जनता पार्टी अपने अंत्योदय के फार्मूले से जन जन तक पैठ बढ़ाती जा रही है। शिवराज सिंह चौहान की भाजपा सरकार पर घोषणाओं का आरोप उस वक्त फीका पड़ गया है जब चुनावी बेला में सरकार ने दनादन हितग्राही मूलक योजनाओं का सैलाब ला दिया है। लाड़ली बहना योजना से भाजपा ने घर घर में पैठ बना ली है। इस योजना का दूसरा चरण 20 अगस्त तक चलेगा। इस बीच पंद्रह अगस्त का राष्ट्रीय त्यौहार भी है। इसमें मुख्यमंत्री शिवराज सिंह अपने बीस साल के कार्यकाल में आए बदलाव की झांकी भी पेश करेंगे। भाजपा सरकार के पिटारे में सफलताओं के इतने मुद्दे हैं कि अच्छा भला कांग्रेसी भी खामोश रह जाता है।आम जनता को अब ये समझ में आ गया है कि जाति धर्म और वर्गभेद की राजनीति से इतर भारतीय जनता पार्टी का अंत्योदय समाज के हर तबके के लिए सुखद संदेश ला रहा है। कांग्रेस ने भाजपा पर जो अडानी अंबानी जैसे व्यापारियों की पार्टी होने का आरोप लगाया था वह हकीकत में मुंह के बल गिरा है। जन जन तक ये संदेश पहुंचाने में भाजपा कामयाब रही है कि वह वास्तव में देश के उद्यमियों के साथ खड़ी है और एकनया भारत समृद्ध भारत बनाने में सफलताएं हासिल कर रही है।


    जनता का ये भरोसा एक दिन में नहीं जमा बल्कि मध्यप्रदेश में लगातार बीस सालों तक भाजपा ने ये शहनाई बजाई है। बीच में कांग्रेस की कमलनाथ सरकार ने जिस तरह वैमनस्य और संकीर्ण नजरिये से इंस्पेक्टरराज की कलह मचाई उससे लोगों को दोनों पार्टियों की मानसिकता का अंतर समझ में आ गया है। कांग्रेस आज भी डिफाल्टरों के साथ खड़ी है। कमलनाथ कह रहे हैं कि वे सत्ता में आने पर कर्जा माफ करेंगे। कांग्रेस उन फोकटियों का कर्जा माफ करने और उन्हें अपने साथ लाने का प्रयास कर रही है जो विकास करने वाले नहीं बल्कि मुफ्तखोर हैं। भाजपा कर्मठ किसानों को नकद राशि देकर आगे बढ़ने में मदद कर रही है। सरकारी नौकरियों के नाम पर एक दो फीसदी लोगों तक लाखों रुपए का वेतन बांटकर कांग्रेस ने जिस उपभोक्तावाद की नींव रखी थी भाजपा ने उसे तो नहीं छेड़ा है लेकिन इसके साथ वह जन जन तक सरकारी योजनाओं का संदेश लेकर पहुंच रही है। ऐसा कोई वर्ग नहीं कोई नागरिक नहीं जो सरकार की योजनाओं का सीधा लाभ नहीं उठा रहा हो। ऐसे में आने वाले चुनाव की तस्वीर इकतरफा नजर आने लगी है।


    कांग्रेस के दंभी नेता आज भी अपनी विचारधारा छोड़ने तैयार नहीं हैं। जो विचारधारा अप्रासंगिक हो चली। समय की आंधी ने जिसके परखचे उड़ा दिए उसे ही गले लगाए बैठी कांग्रेस को आने वाला पंद्रह अगस्त एक तगड़ा पंच साबित होने वाला है। जब प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी लाल किले से देश को संदेश देंगे और बताएंगे कि उनकी सरकारों ने क्या बदलाव किए हैं जो जनता महसूस कर रही है तो देश की जनता को अपना मानस बनाने में सरलता होगी।


    विकास की ये कहानी तब लिखी जा रही है जब सरकारी बैंक ऊंची दूकान फीका पकवान बनकर असहयोग कर रहे हैं। सरकारी बैंकों का स्थापना व्यय उपभोक्ता कंपनियों के लिए तो मुनाफे का सौदा बना हुआ है जबकि आम जनता बैंकों के राष्ट्रीयकरण से लेकर अब तक वंचित बनी रही है। आज जब हर नागरिक को बैंक की चौखट तक पहुंचाने का प्रयास चल रहा है तब सरकारी बैंक हांफ रहे हैं। इसके विपरीत निजी क्षेत्र के स्माल फाईनेंस बैंक तक धड़ल्ले से आगे बढ़ते जा रहे हैं। आईडीएफसी फर्स्ट बैंक हो या इक्विटास स्माल फाईनेंस बैंक, एयू स्माल फाईनेंस बैंक, बंधन बैंक सभी तेजी से लोन बांट रहे हैं और मुनाफा बटोर रहे हैं। इसके विपरीत सरकारी बैंक ग्राहकों के धन की अघोषित चोरियां कर रहे हैं। कोई टीडीएस के नाम पर रकम उड़ा रहा है तो कोई बैंक लाकर के किराए के नाम पर ऊटपटांग बिलिंग कर रहा है। इसके बावजूद निगरानी तंत्र खामोश है।


    मध्यप्रदेश की सुशासन और विकास रिपोर्ट-2022 के अनुसार राज्य में आए बदलाव से मध्यप्रदेश बीमारू से विकसित प्रदेशों की पंक्ति में उदाहरण बन कर खड़ा हुआ है। इस उपलब्धि में प्रदेश में जन-भागीदारी से विकास के मॉडल ने अहम भूमिका निभाई है। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के नेतृत्व में केन्द्र और राज्य की डबल इंजन सरकार ने मध्यप्रदेश को अन्य राज्यों के लिये अनुकरणीय बना दिया है। इस अरसे में सड़क, बिजली, पानी, कृषि, पर्यटन, जल-संवर्धन, सिंचाई, निवेश, स्व-रोजगार और अधो-संरचना विकास के साथ उन सभी पहलुओं पर सुविचारित एवं सर्वांगीण विकास की नवीन गाथा लिखी गई जो जन-कल्याण के साथ विकास के लिये जरूरी हैं।


    बेहतर वित्तीय प्रबंधन और चौतरफा विकास से आज प्रदेश की विकास दर 19.7 प्रतिशत है, जो देश में सर्वाधिक है। देश की अर्थ-व्यवस्था में मध्यप्रदेश 4.6 प्रतिशत का योगदान दे रहा है। सकल घरेलू उत्पाद में बीते दशक में 200 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। मध्यप्रदेश की आर्थिक वृद्धि दर निरंतर बढ़ रही है। वर्ष 2001-02 में 4.43 प्रतिशत की दर आज बढ़ कर 16.43 प्रतिशत हो गई है प्रदेश का सकल घरेलू उत्पाद 71 हजार 594 करोड़ रूपये से बढ़ कर 13 लाख 22 हजार 821 रूपये हो गया है। वर्ष 2001-02 में प्रति व्यक्ति आय 11 हजार 718 रूपये थी, जो वर्ष 2022-23 में बढ़ कर एक लाख 40 हजार 583 रूपये हो गई है। राज्य की जीएसडीपी की वृद्धि दर विगत एक दशक में राष्ट्रीय जीडीपी वृद्धि दर से अधिक रही है।


    विकास प्रक्रिया में राज्य का अधो-संरचना विकास निरंतर हो रहा है। अधो-संरचना बजट जो वर्ष 2002-03 में 3873 करोड़ रूपए था, वह वर्ष 2023-24 में बढ़ कर 56 हजार 256 करोड़ रुपए हो गया है। एक समय था जब बिजली आती कम थी और जाती ज्यादा थी। आज प्रदेश बिजली क्षेत्र में आत्म-निर्भर है और 24 घंटे बिजली की उपलब्धता है। वर्ष 2003 में ऊर्जा क्षमता 5173 मेगावाट थी, जो बढ़ कर 28 हजार मेगावाट हो गई है।


    अच्छी सड़कें विकास की धुरी होती है। एक समय था, तब यह पता ही नहीं चलता था कि सड़क में गड्डे हैं या गड्डे में सड़क है। अब गाँव-गाँव, शहर-शहर अच्छी गुणवत्तायुक्त सड़कों का जाल बिछाया गया हैं। शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में वर्ष 2001-02 में 44 हजार किलोमीटर सड़कें थी, अब 4 लाख 10 हजार किलोमीटर सड़कें बन गई हैं। राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजना में लगभग 1500 किलोमीटर लंबाई के 40 हजार करोड़ की लागत के 35 कार्य स्वीकृत हैं। अटल, नर्मदा और विंध्य प्रगति पथ के साथ मालवा, बुंदेलखंड और मध्य विकास पथ निर्मित किए जा रहे हैं।


    प्रदेश में सभी रेलवे क्रॉसिंग समाप्त करने के लिए 105 रेलवे ओवर ब्रिज के साथ 334 पुलों का निर्माण हो रहा है। साथ ही 86 हजार करोड़ से अधिक की रेल परियोजनाओं के कार्य चल रहे हैं। वर्ष 2009 से 2014 के बीच जहाँ प्रदेश को औसतन 632 करोड़ रूपए का रेलवे बजट मिलता था, वहीं वर्ष 2022-23 में 13 हजार 607 करोड़ का रेलवे बजट प्रावधान मिला है, जो इक्कीस गुना अधिक है। अमृत भारत रेलवे स्टेशन योजना में प्रदेश के 80 रेलवे स्टेशन विश्व स्तरीय बनाए जाएंगे। अत्याधुनिक रानी कमलापति स्टेशन देश में एक मॉडल बना है। एक वंदे भारत ट्रेन प्रारंभ हो चुकी है.


    प्रदेश में कृषि को लाभ का धंधा बनाना के लिए सिंचाई क्षमताओं का निरंतर विकास किया जा रहा है। वर्ष 2003 में सिंचाई क्षमता केवल 7 लाख 68 हजार हेक्टेयर थी, जो वर्ष 2022 में बढ़ कर 45 लाख हेक्टेयर से अधिक हो गई है। वर्ष 2025 तक सिंचाई क्षमता को बढ़ा कर 65 लाख हेक्टेयर किये जाने पर भी तेजी से काम किया जा रहा है। हर घर जल से नल योजना पर तेज गति से कार्य हो रहा है, अभी तक लगभग 50% घरों तक नल से जल पहुँच चुका है। कृषि विकास दर जो वर्ष 2002-03 में 03 प्रतिशत थी, वह वर्ष 2020-21 में बढ़ कर 18.89 प्रतिशत हो गई है। खेती और एलाइड सेक्टर का बजट भी 600 करोड़ से बढ़ कर 53 हजार 964 करोड़ हो गया। खाद्य उत्पादन भी इस अवधि में 159 लाख मीट्रिक टन से बढ़ कर 619 लाख मीट्रिक टन हो गया है।


    उद्यानिकी फसलों का रकबा 4 लाख 67 हजार हेक्टेयर से बढ़ कर 25 लाख हेक्टेयर हो गया है। फसल उत्पादन 224 लाख मीट्रिक टन से बढ़ कर 725 लाख मीट्रिक टन से अधिक हो गया है। फसल उत्पादकता 1195 किलोग्राम से बढ़ कर 2421 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर हो गई है। किसान-कल्याण के ध्येय से प्रदेश में गत 3 वर्षों में फसलों की नुकसानी पर 4000 करोड़ से अधिक की राहत राशि वितरित की गई है। प्रदेश के 11 लाख से अधिक डिफाल्टर किसानों का 2123 करोड़ का ब्याज माफ करने के लिए मुख्यमंत्री कृषक ब्याज माफी योजना प्रारंभ की गई है। पिछले 3 वर्षों में किसानों को विभिन्न शासकीय योजनाओं में 2 लाख 69 हजार 686 करोड़ रुपये से अधिक के हितलाभ वितरण किए गए हैं। फसल क्षति प्रतिपूर्ति दरों में भी कई गुना वृद्धि की गई है।


    कांग्रेस जहां एक तरफ मुफ्तखोर प्रभावशाली वर्ग को सहेजने का जतन कर रही है वहीं भाजपा ने हर घर तक अपनी योजनाओं का लाभ पहुंचाया है। ऐसे में अब भाजपा को केवल नई भाजपा ही मात दे सकती है। कांग्रेस के हौसलों की हवा दिन ब दिन निकलती नजर आ रही है।

  • सिंधिया जी की पहल से आर्थिक विकास की राह प्रशस्त हुईःडॉ.प्रभुराम चौधरी

    सिंधिया जी की पहल से आर्थिक विकास की राह प्रशस्त हुईःडॉ.प्रभुराम चौधरी


    भोपाल, 27 जुलाई(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)। प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री डॉ.प्रभुराम चौधरी ने कहा है कि सिंधिया घराना हमेशा जनता की बेहतरी के उपाय करता रहा है यही वजह है कि जनता हमेशा से सिंधिया परिवार के प्रति आशा की निगाह से देखती है। प्रदेश में जब कुछ स्वार्थी तत्वों ने आर्थिक सुधारों की चाल बिगाड़ी तो श्रीमंत ज्योतिरादित्य सिंधिया ने आगे आकर जनता का मार्ग प्रशस्त किया। हम विकास के जिन सिद्धांतों पर अमल कर रहे हैं उससे राज्य को आर्थिक महाशक्ति बनाने में मदद मिलेगी।
    स्वास्थ्य मंत्री ने अपने व्यस्त कामकाज के बीच वक्त निकालकर पत्रकार साथियों से कहा कि मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की सरकार तो तिहरे इंजन की सरकार है। मोदी सरकार की नीतियों के साथ शिवराज जी की जन जन से जुडाव की नीतियां और ज्योतिरादित्य सिंधिया के आर्थिक विकास के फार्मूले सभी एक साथ प्रदेश की स्वर्णिम इबारत लिख रहे हैं।
    उन्होंने कहा कि जन स्वास्थ्य को बेहतर बनाने के लिए हमने जहां अस्पतालों की व्यवस्थाएं सुधारी हैं वहीं हम दवा सप्लाई का पूरा नेटवर्क खड़ा कर रहे हैं। हमने फार्मा सेक्टर में आ रहे बदलावों के साथ चलने के लिए पूरा खाका तैयार किया है। इससे हम न केवल जनता को सस्ती दवाईयां मुहैया करा पाएंगे बल्कि हम दवा निर्माण का हब भी बनने जा रहे हैं। मोदी जी की सरकार ने मेक इन इंडिया का जो नारा दिया था हम दवा निर्माण के ऐसे फार्मूले लागू कर रहे हैं कि जल्दी ही मध्य प्रदेश दवा निर्माण के लिए दुनिया भर की बड़ी कंपनियों का चहेता राज्य बन जाएगा।
    डॉ.प्रभुराम चौधरी ने कहा कि प्रदेश में डाक्टरों की कमी को दूर करने के साथ हम आधुनिक तकनीकों का भी इस्तेमाल कर रहे हैं जिससे लोगों को उनके घरों के आसपास ही स्वास्थ्य सुविधाएं मिलने लगी हैं। जो इलाके छूट गए हैं उन्हें जल्दी ही कवर कर लिया जाएगा।

  • आर्थिक सुधारों के साथ चलें तो घर घर बरसेगी खुशहालीःजगदीश देवड़ा

    आर्थिक सुधारों के साथ चलें तो घर घर बरसेगी खुशहालीःजगदीश देवड़ा


    भोपाल,27 जुलाई(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)। मध्यप्रदेश के वित्तमंत्री जगदीश देवड़ा ने प्रदेश के नागरिकों से कहा है कि भारत सरकार जो वित्तीय सुधार लागू कर रही है वे आजादी के बाद से अपेक्षित थे। जनता इन सुधारों के साथ कदमताल करेगी तो जल्दी ही घर घर में खुशहाली फैल जाएगी। कटनी दौरे से लौटने के बाद आज पत्रकारों से मुलाकात में उन्होंने प्रदेश के मजबूत होते वित्तीय ढांचे को लेकर कई संकेत दिए। उन्होंने कहा कि प्रदेश में जिस तरह आधारभूत ढांचे को विकसित किया गया है उसका लाभ प्रदेश की जनता भरपूर उठा रही है। लोगों की अपेक्षाएं बढ़ीं हैं और सरकार उन्हें पूरा करने का हर संभव प्रयास कर रही है।
    पत्रकारों के सवालों के जवाब में हरफन मौला वित्तमंत्री श्री देवड़ा ने कहा कि आर्थिक चुनौतियों के बीच जिन परिवारों की समरसता बिगड़ रही है उन्हें हमारी सांस्कृतिक विरासत से प्रेरणा लेनी चाहिए। हमारे देश में बचत की परंपरा बहुत मजबूत रही है अब हमें अपने आर्थिक संसाधनों को बढ़ाने के तरीके सीखना होंगे। भारत सरकार की वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने टैक्स में छूट की जो सीमा बढ़ाई है उससे काली अर्थव्यवस्था समाप्त होगी। भारत का विदेशी व्यापार संतुलन सुधरेगा और लोगों की आय बढ़ेगी।सबसे बड़ी बात है कि लोगों के जीवन में सुकून बढ़ेगा अब तक जिन छोटे और मध्यम आयवर्ग के लोगों को अपनी आय छिपानी पड़ती थी वे अब बेखौफ होकर अपना जीवनयापन कर पाएंगे।
    वित्तमंत्री ने कहा कि केन्द्र सरकार ने जिस तरह माईक्रोफाईनेंस और सूक्षम व लघु उद्योगों को अवसर दिए हैं, किसानों के लिए एफपीओ गठित किए हैं, सहकारिता के क्षेत्र को मजबूत बनाया है उससे जल्दी मुद्रा निर्माण बढ़ेगा और देश की क्षमताओं का उचित प्रतिफल हम जन जन तक पहुंचा पाएंगे। उन्होंने कहा कि लोग वित्तीय प्रबंधन की बारीकियां समझ रहे हैं और सरकार पर उनकी निर्भरता घट रही है। हमारा प्रयास है कि लोग लाचार न रहें और वे अपने हुनर का इस्तेमाल करके खूब समृद्धि हासिल करें।
    एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश सरकार कुशल वित्तीय प्रबंधन के माध्यम से जनता को लाभ पहुंचाने वाले वित्तीय संस्थानों की पहचान कर रही है और उन्हें भरपूर संरक्षण भी दे रही है। हम ढर्रे की सोच से बाहर निकलना चाहते हैं। प्रदेश की पुरानी परंपराओं के साथ हमने कई ऐसे नवाचार भी किए हैं जो आज जनता की समृद्धि के प्रकाश स्तंभ बनते जा रहे हैं।

  • सरकारी कालेजों को दुबारा बजट देकर किसने किया भ्रष्टाचार

    सरकारी कालेजों को दुबारा बजट देकर किसने किया भ्रष्टाचार

    भोपाल, 21 जुलाई,(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर) उच्च शिक्षा विभाग के महाविद्यालय जोकि शिक्षा की सबसे ऊंची इकाई मानी जाती है,उनकी गरिमा ताक पर रखकर नियम विरुद्ध प्रक्रियाओं से उन्हें भ्रष्टाचार का केंद्र बनाया जा रहा है | उच्च शिक्षा विभाग ने अपने पत्र क्रमांक 291/272/आउशि/योजना/2023 दिनांक 6.6.23से महाविद्यालयों की एक सूची प्रकाशित की थी जिसमें यह निर्देश दिए गए थे की जो महाविद्यालय विश्व बैंक पोषित योजना ऑब्लिक रूसा योजना अंतर्गत आ रहे हैं उन कॉलेजों को प्रस्ताव नहीं भेजना है इन महाविद्यालयों को सम्मिलित नहीं किया जाएगा इसका प्रमाण पत्र भी कॉलेजों से मंगवाया गया था उसके बावजूद उन्हीं कॉलेजों को दुबारा बजट आवंटन कर दिया गया I जिन कॉलेजों पिपरई, मंदसौर पी जी कॉलेज , मंदसौर गर्ल्स ,नलखेडा , दालोदा को पिछले साल बजट आवंटित हुआ था उन्हें इस बार फिर बजट आबंटित कर दिया गया। उच्च अधिकारियों ने ही इस प्रक्रिया को डबल अपनाने के आदेश जारी किए हैं।
    यह प्रक्रिया प्रदेश के उच्च शिक्षा विभाग के अधिकांश महाविद्यालयों में एक जैसी की जा रही है और एक ही व्यक्ति विशेष फर्म एवं अधिकारियों को लाभ दिलाने की दृष्टि से यह कार्य किया जा रहा है| उच्च शिक्षा विभाग द्वारा वर्तमान में नामली ,जीरन,रावती ,अजयगढ़,मंदसौर , पवई,पिपरई , जैतवारा ,नलखेडा ,दलोदा एवं अन्य महाविद्यालयों को बजट आवंटित किया गया है निविदा की शर्त निम्नानुसार है :-

    1.सभी महाविद्यालय की निविदा में निविदाकारो से समस्त उत्पादों कि टेस्ट रिपोर्ट थर्ड पार्टी अन्य लैब से चाही गयी है, जबकि निर्माता द्वारा प्रदाय किये जा रहे उत्पादों को निर्माता कंपनी द्वारा अपनी टेस्टिंग लैब में टेस्ट करवाकर ही सप्लाई कर दिया गया। निविदा में न्यूनतम दर आने वाली फर्म को सामान देने के पूर्व थर्ड पार्टी इंस्पेक्शन/विभाग की तकनीकी समिति से कराना होता है I

    2.सभी महाविद्यालय कि निविदा में निविदाकार का पास्ट एक्सपीरियंस 50% मांगा गया है जिसमे बिड वैल्यू नहीं दर्शायी गई है। जिससे निविदाकार का पास्ट एक्सपीरियंस 50% उपकरणों कि संख्या के आधार पर आकलन होना है I जबकि आश्चर्य की बात यह है कि निविदा कि अतिरिक्त निविदा बिंदु क़ 6 की शर्तो में निविदाकार द्वारा पिछले 3 वर्षों में ₹ 1 करोड़ का एकल ऑर्डर एवं ₹ 47- 47 लाख रुपए के पृथक – पृथक दो आर्डर उपलब्ध कराने होंगे नहीं तो निविदा पत्रक के अभाव में अमान्य कर दी जावेगीI

    1. जेम पोर्टल पर उपलब्ध निविदा क्रमांक GEM/2023/B/3669315 DT. 11.7.23, GEM/2023/B/3669485, DT. 11.7.23, GEM/2023/B/3668564 DT.10.7.23 , GEM/2023/B/3667558 DT.11.7.23 , GEM/2023/B/3667559 Dt.11.7.2023 को प्रकाशित हुई | जिसमें GEM/2023/B/3669315 DT. 11.7.23 निविदा में विभाग का नाम डिपार्टमेंट ऑफ हायर एजुकेशन प्रदर्शित हो रहा है एवं निविदा में ऑर्गेनाइजेशन का नाम गवर्नमेंट कॉलेज ऑफ़ मध्य प्रदेश प्रदर्शित है, निविदा के प्रपत्र में कहीं भी महाविद्यालय का नाम प्रदर्शित नहीं हो रहा है और उच्च शिक्षा विभाग में कोई भी ऐसा महाविद्यालय नहीं है जिसका नाम गवर्नमेंट कॉलेज ऑफ़ मध्य प्रदेश हैI निविदा में धरोहर राशि की मांग की गई है जिसमें बेनेफिशरी के नाम के लिए गवर्नमेंट कॉलेज ऑफ़ मध्य प्रदेश के नाम पर धरोहर राशि जमा करनी है , निविदा में महाविद्यालय का ऐसा कोई भी खाता नंबर नहीं है जिसमें यह राशि जमा की जा सके निविदाकारों के साथ मिलकर महाविद्यालय के अधिकारी/कर्मचारी एवं संस्था विशेष लोगो द्वारा राशी कि बंदरबांट करने का प्रयास किया जा रहा है |
  • जनसंवेदना ने सेवा कार्य करके दिखाया:विधानसभा अध्यक्ष गिरीश गौतम

    जनसंवेदना ने सेवा कार्य करके दिखाया:विधानसभा अध्यक्ष गिरीश गौतम

    भोपाल,11जुलाई(प्रेस इंफॉर्मेशन सेंटर)जनसंवेदना सामाजिक संस्था के 19 वें स्थापना दिवस पर प्रकाशित मानव सेवा ही माधव सेवा स्मारिका का विमोचन आज विधानसभा परिसर में  विधानसभा अध्यक्ष गिरीश गौतम ने किया। इस अवसर पर संस्था के संस्थापक राधेश्याम अग्रवाल ,उदयवीर सिंह एवं कई अन्य गणमान्य लोग भी उपस्थित थे ।

     विधानसभा अध्यक्ष श्री गौतम ने कहा कि मानव सेवा ही माधव सेवा के मूल मंत्र से जनसंवेदना अपना सेवा कार्य कर रही है जिससे जरूरतमंदों को सहायता मिल रही है । निराश्रित बेसहारा लावारिस की  मृत्यु हो  जाने पर उसका अंतिम संस्कार का सेवा कार्य गहरे समर्पण और धीरज से ही संभव है।संस्था ने अपनी उपयोगिता साबित की है

     

  • सहकारी आंदोलन को सार्थक करते मुकुंद राव भैंसारे

    सहकारी आंदोलन को सार्थक करते मुकुंद राव भैंसारे

    भोपाल,27जून( प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)। सहकारिता का क्षेत्र भारत के विकास में एक महत्वपूर्ण भूमिका रखता है। विकास की दौड़ में आज सहकारिता अप्रासंगिक होता नजर आ रहा है, इसके बावजूद मध्य प्रदेश का एक छोटा सा अधिकारी आज सहकारिता को सामाजिक बदलाव की कडी बनाए हुए है। राजधानी भोपाल में जिस तरह से सहकारिता को बदलाव की भूमिका में देखा जा रहा है उसके लिए विभाग के एक डिप्टी ऑडिटर मुकुंद राव भैंसारे पर प्रशासन की भी निगाह है।प्रशासन ने उनके कार्य को पुरस्कृत किया है और सहकारिता के मॉडल के रूप में प्रस्तुत भी

              मुकुंदराव भैंसारे को मध्य प्रदेश का सहकारिता विभाग फायर ब्रिगेड की तरह इस्तेमाल करता है । जिस गृह समिति में गड़बड़ियों की शिकायत मिलती है उन्हें वहां प्रशासक के रूप में तैनात कर दिया जाता है । उन्होंने राजधानी के भारत नगर कि जिस तरह से कायापलट की उससे नगर निगम सहकारिता विभाग और प्रशासन का हर तबका अचंभित है ।श्री भैंसारे ने भारत नगर को ना केवल एक साफ-सुथरे मोहल्ले में तब्दील कर दिया है बल्कि उसे आत्मनिर्भर आर्थिक आजादी भी प्रदान की है।इसी के परिणामस्वरूप भारत नगर को स्वच्छता पुरुस्कारों से सम्मानित किया जा चुका है।परिश्रम के इस पुरस्कार ने तीन बार समूचे सहकारिता विभाग की शान बढ़ाई है।

            स्वच्छता के मापदंडों पर खरा उतरने वाले भारत नगर को मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने द्वितीय पुरस्कार से सम्मानित किया था। भोपाल नगर पालिक निगम क्षेत्र में अव्वल आने वाली ये एकमात्र रहवासी समिति है जिसका संचालन राज्य का सहकारिता विभाग कर रहा है। विभाग की ओर से नियुक्त तत्कालीन प्रशासक मुकुंद राव भैंसारे के आव्हान पर रहवासियों ने विभिन्न चरणों में सफल सामाजिक आयोजन किए थे।

     रोहित नगर के रहवासी लंबे समय से अपने प्लाट पर मकान बनाने के लिए निवर्तमान पूर्व अध्यक्ष घनश्याम सिंह राजपूत के घर के चक्कर काट रहे थे । उन्हें उनकी जमीन ही नहीं मिल रही थी ।समिति के 550 सदस्यों में से 330सदस्य अपना आशियाना आज भी तलाश रहे हैं।श्री भैसारे ने कार्यभार संभालने के बाद खाली पड़ी लगभग ढाई एकड़ जमीन पर प्लाट दर्शाने की कार्यवाही शुरू कर दी।उन्होंने चुनाव कराने की भी प्रक्रिया जारी रखी है। एक स्कूल संचालक जो इस जमीन पर कब्जा जमाना चाहता था उसने अपने राजनीतिक संबंधों का इस्तेमाल करके श्री भैंसारे को हटाने का षड्यंत्र रचा लेकिन उनके कुशल प्रशासन को देखकर आला अफसरों ने रोहित नगर की विकास यात्रा बदस्तूर जारी रखी। इस गृह निर्माण समिति के नागरिकों की दूसरी पीढ़ी अपने हक की लड़ाई लड़ रही है। सहकारिता विभाग के अफसर अपने सामाजिक उद्देश्यों को पूरा करने के लिए आज संकल्पित होकर खड़े हैं।मैदान में उनके बुलंद इरादों को साकार करने की जवाबदारी श्री भैंसारे कुशलता पूर्वक निभा रहे हैं,ये राहत की बात है।

  • भाजपा ने प्रदेश में जो विकास किया वो कांग्रेस के पोस्टरों से नहीं छिपेगा : विष्णुदत्त शर्मा

    भाजपा ने प्रदेश में जो विकास किया वो कांग्रेस के पोस्टरों से नहीं छिपेगा : विष्णुदत्त शर्मा


    भोपाल,24 जून(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)।जनता ने जब कांग्रेस के कुशासन को खारिज करके 2003 में भाजपा को सत्ता सौंपी तबसे लेकर अब तक उसने प्रदेश को सम्मान, समृद्धि और विकास की हर कसौटी पर अव्वल बनाया है। पहले मध्यप्रदेश दुरावस्था का शिकार और बीमारू राज्य था। भ्रष्टाचार का बोलबाला था । सड़क, बिजली, पानी के लिए जनता तरस रही थी। मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान के नेतृत्व वाली भाजपा की सरकार ने प्रदेश को उस स्थिति से निकाल कर विकसित प्रदेश बनाया। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ के अपने ही लोगों ने जिस तरह से उनके भ्रष्टाचार का कच्चा चिट्ठा खोला है, उससे बौखलाई कांग्रेस मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान पर अनर्गल आरोप लगा रही है। लेकिन कांग्रेस अपने इन कुत्सित प्रयासों से न तो अपने भ्रष्टाचार को छिपा सकती है और न ही भाजपा सरकार के प्रयासों से किए गए विकास को झुठला सकती है। कांग्रेस ने अपनी हरकत से प्रदेश में हुए विकास के अपमान का जो प्रयास किया है, उसका जवाब प्रदेश की जनता देगी। यह बात भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष व सांसद विष्णुदत्त शर्मा ने शनिवार को प्रदेश कार्यालय में पत्रकार वार्ता को संबोधित करते हुए कही।
    प्रदेश अध्यक्ष श्री शर्मा ने कहा कि हाल ही में शहर में कुछ ऐसे पोस्टर लगे थे, जिनमें प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ को करप्शननाथ बताया गया था और पोस्टर को स्कैन करने पर उनके भ्रष्टाचार का कच्चा-चिट्ठा सामने आ जाता था। कांग्रेस इस पोस्टर से बौखला गई है, लेकिन उसे इस घटना के बारे में गंभीरता से विचार करना चाहिए। यह सोचना चाहिए कि इस घटना के बारे में पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजयसिंह या नेता प्रतिपक्ष डॉ. गोविंद सिंह की कोई प्रतिक्रिया क्यों नहीं आई? कांग्रेस को यह विचार करना चाहिए कि कहीं यह पार्टी में चल रहे अंतर्द्वंद और नेताओं के बेटों के बीच चल रही लड़ाई का परिणाम तो नहीं है?
    प्रदेश अध्यक्ष विष्णुदत्त शर्मा ने कहा कि मि. बंटाढार के जमाने में प्रदेश की दुरावस्था किसी से छिपी नहीं है। बाद में 15 महीनों के लिए बनी कांग्रेस की सरकार ने गरीबों के हक छीने। जनहित की सारी योजनाएं बंद कर दीं। इंदौर में आईफा अवार्ड के लिए करोड़ों का प्रावधान किया, लेकिन मैचिंग ग्रांट न होने का बहाना बनाकर लाखों प्रधानमंत्री आवास लौटा दिए और गरीबों के सिर से छत छीन ली। श्री शर्मा ने कहा कि कांग्रेस सरकार के भ्रष्टाचार की स्वीकारोक्ति तो स्वयं कांग्रेस के एक प्रधानमंत्री ने यह कहते हुए दी थी कि हम दिल्ली से 1 रुपया भेजते हैं, तो संबंधित व्यक्ति तक 15 पैसा ही पहुंचता है। उन्होंने कहा कि अगर पोस्टर में कमलनाथ जी को करप्शननाथ लिखा गया था, तो इसमें गलत क्या है? प्रदेश की जनता यह जानना चाहती है कि प्रवीण कक्कड़ और आरके मिगलानी के यहां से छापे में जो 281 करोड़ रुपये नकद मिले थे, वो कहां से आए? श्री शर्मा ने कहा कि कांग्रेस की सरकार के समय में वरिष्ठ नेता डॉ. गोविंद सिंह और कुछ कैबिनेट मंत्रियों ने ही यह आरोप लगाए थे कि सरकार भ्रष्टाचार में आकंठ डूबी है और उसका पैसा ऊपर तक जाता है। श्री शर्मा ने कहा कि कमलनाथ को यह बताना चाहिए कि उनकी सरकार ने 7 बांध और नहर परियोजनाओं के काम से पहले 877 करोड़ रुपये का भुगतान क्यों किया? ई-टेंडर मामले की आरोपी कंपनी को 244 करोड़ और जनसंपर्क को 131 करोड़ क्यों दिए थे?
    श्री शर्मा ने कहा कि आज प्रदेश में सड़कों का जाल बिछा है और बिजली सरप्लस है। मि. बंटाढार के समय प्रदेश में सिर्फ 7 लाख हेक्टेयर में सिंचाई होती थी, आज 45 लाख हेक्टेयर में सिंचाई हो रही है। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी की सरकार ने केन-बेतवा लिंक परियोजना के लिए 44605 करोड़ रुपये का प्रावधान किया है, जिससे सूखा बुंदेलखंड अब हरा-भरा और समृद्ध होगा। मि. बंटाढार के समय प्रदेश का बजट जहां 23161 करोड़ था, उसे श्री शिवराजसिंह चौहान की सरकार ने 3.14 लाख करोड़ से ऊपर पहुंचा दिया है। प्रदेश की आर्थिक वृद्धि दर जो उस समय 4.4 प्रतिशत थी, आज 16.43 प्रतिशत है। प्रदेश का सकल घरेलू उत्पाद 71594 करोड़ रुपये से बढ़कर 1322821 करोड़ रुपये हो गया है। प्रतिव्यक्ति आय 11718 रुपये से 1,40,583 करोड़ रुपये हो गई है। श्री शर्मा ने कहा कि भाजपा की केंद्र और राज्य सरकार हर गरीब का जीवन बदलने का अभियान चला रही हैं और इसी अभियान के अंतर्गत प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी 1 करोड़ से अधिक आयुष्मान कॉर्ड वितरित करेंगे, ताकि गरीबों को मुफ्त उपचार मिल सके। उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने जिस तरह झूठ, छल कपट का सहारा लिया था, उससे प्रदेश के किसान डिफाल्टर हो गए थे। इन किसानों के 2100 करोड़ रुपये प्रदेश की शिवराज सरकार ने चुकाये हैं। श्री शर्मा ने कहा कि भाजपा की सरकारें गुड गवर्नेंस, सेवा के भाव, गरीब कल्याण और विकास के मंत्र पर काम कर रही हैं और इन नीतियों से प्रदेश की जिस गरीब जनता के चेहरे पर मुस्कान खिली है, वही जनता कांग्रेस को उसकी हरकत का जवाब देगी।
    प्रदेश अध्यक्ष श्री शर्मा ने कहा कि आज का दिन मध्यप्रदेश और पूरे देश के लिए बड़ा महत्वपूर्ण दिन है। भारतीय इतिहास में आज ही के दिन रानी दुर्गावती का बलिदान हुआ था। श्री शर्मा ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी कहते हैं कि देश का चहुंमुखी विकास करेंगे, लेकिन विकास के साथ ही अपनी विरासत को भी संजोकर रखेंगे। श्री शर्मा ने रानी दुर्गावती को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि भारतीय जनता पार्टी की यही सोच उसके निर्णयों में भी परिलक्षित होती है। मध्यप्रदेश में हमारी सरकार ने ऐसे जनजातीय क्रांतिवीरों, योद्धाओं और महानायकों की स्मृतियों को संजोने के लिए कदम उठाए हैं, जिनका देश की आजादी व भारतीय इतिहास में बड़ा योगदान रहा है। इसी को देखते हुए जनजातीय गौरव दिवस मनाने की शुरूआत की गई।
    प्रदेश अध्यक्ष श्री शर्मा ने कहा कि प्रदेश भाजपा के लिए 27 जून बहुत ही महत्वपूर्ण है। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी अपनी अमेरिका की ऐतिहासिक यात्रा पूरी करके भारत आएंगे और उसके बाद उनका पहला दौरा भोपाल का होगा। यहां पार्टी कार्यकर्ता रोड शो के माध्यम से उनका स्वागत करेंगे, जिसकी तैयारियां चल रही हैं। प्रधानमंत्री भोपाल में मेरा बूथ सबसे मजबूत के संकल्प को लेकर देश के 3 हजार बूथ कार्यकर्ताओं से संवाद करेंगे। इस दौरान प्रधानमंत्री देश के 10 लाख बूथों से डिजिटली जुड़े रहेंगे। यहां से प्रधानमंत्री जी शहडोल जाएंगे, जहां रानी दुर्गावती गौरव यात्रा का समापन करेंगे और आयुष्मान हितग्राहियों को कार्ड का वितरण करेंगे। इससे पहले 26 जून को राष्टीय अध्यक्ष जेपी नड्डा भोपाल आएंगे। श्री शर्मा ने कहा कि प्रधानमंत्री जी और राष्ट्रीय अध्यक्ष के स्वागत के लिए प्रदेश का एक-एक कार्यकर्ता उत्साहित और आतुर है। मध्यप्रदेश की धरती पर उनका भव्य एवं ऐतिहासिक स्वागत किया जाएगा।

  • बाजार बैठकी से ठेकेदार बाहर, रोज नहीं होगी वसूली

    बाजार बैठकी से ठेकेदार बाहर, रोज नहीं होगी वसूली

    भोपाल,15 जून( प्रेस इंफार्मेशन सेंटर) नगरीय विकास एवं आवास मंत्री भूपेन्द्र सिंह ने सभी नगरपालिक निगम आयुक्तों और मुख्य नगरपालिका अधिकारियों को निर्देशित किया है कि ठेकेदारों के माध्यम से बाजार बैठकी-तहबाजारी शुल्क की वसूली नहीं की जाए। साथ ही इसकी प्रतिदिन वसूली भी नहीं होना चाहिए। उल्लेखनीय है कि मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान द्वारा 29 मई 2023 को हाथठेला, फेरी एवं रेहड़ी वालों की महापंचायत में हितग्राहियों के अनुरोध पर बाजार बैठकी-तहबाजारी शुल्क की प्रतिदिन की वसूली और वसूली में ठेकेदारी प्रथा को बंद करने की घोषणा की गई थी।

    मंत्री श्री सिंह ने कहा है कि जिन नगरीय निकायों में बाजार बैठकी-तहबाजारी शुल्क की प्रतिदिन वसूली के लिये ठेके किये गये हैं, उन्हें प्राप्त होने वाली आय का आकलन करके शेष अवधि के लिये ठेके निरस्त करने की कार्यवाही परिषद की बैठक में की जाए। साथ ही बैठक में प्रतिदिन वसूली के स्थान पर अर्द्धवार्षिक-वार्षिक दरों का निर्धारण किया जाए। की गई कार्यवाही की जानकारी समय-सीमा में आयुक्त नगरीय प्रशासन एवं विकास को भेजने के निर्देश भी दिए गए हैं।