Category: अपराध

  • चीनी साईबर ठगों के गिरोह का भांडा फूटा

    चीनी साईबर ठगों के गिरोह का भांडा फूटा


    साईबर अपराधियों को बैंक खाते किराए पर देने वाले भी जेल जाएंगे

    भोपाल,10 जनवरी(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)। भोपाल पुलिस ने चीन में बैठे ठगों के एक माड्यूल का नेटवर्क पकड़ने में सफलता पाई है। इस नेटवर्क से जुड़े अपराधी यहां से ठगी करके जुटाई रकम को क्रिप्टो करंसी में बदलकर चीन में बैठे अपराधियों तक पहुंचा देते हैं। पुलिस ने एक फरियादी से 90 लाख रुपए की ठगी करने वाले आरोपियों को गिरफ्तार करने में भी सफलता पाई है।अपराधियों के इस नेटवर्क में सीमा पार बैठे षड़यंत्रकारियों पर भी नजर ऱखी जा रही है।


    भोपाल पुलिस के अतिरिक्त पुलिस उपायुक्त जोन-1 नगरीय पुलिस श्रुतकीर्ति सोमवंशी ने कंट्रोल रूम में आयोजित पत्रकार वार्ता में बताया कि चायनीज माड्यूल के इस नेटवर्क की कई आईडी हमने पहचान लीं हैं। फरियादी ने रकम जिन खातों में जमा कराई थी उनकी भी पहचान हो गई है। अंतिम कडी़ के रूप में चीनी भाषा और चीनी आईपी एड्रेस से जुड़े अपराधियों को भी हमने पहचान लिया है। अंतर्राष्ट्रीय अपराधी गिरोह के नेटवर्क पर निगरानी रखने वाला तंत्र भी सक्रिय हो गया है। पहली बार हमने किराए पर खाता देने वाले आम नागरिकों को भी अपराध की कड़ी में हिस्सेदार बनाया है। साईबर पुलिस की अपील है कि लोग अनजान लोगों को थोड़े से पैसों के लालच में अपने बैंक खातों का इस्तेमाल करने की इजाजत न दें।


    अतिरिक्त पुलिस उपायुक्त ने आईसीआई सीआई बैंक में नकली सोना गिरवी रखने वाले गिरोह का भी पर्दाफाश किया है।इसमें बैंक के कई अधिकारियों और सोना परखने वाले जौहरियों को भी गिरफ्तार किया गया है।

  • अपराध के आंकड़ों में पुलिस को मिली शाबासी

    अपराध के आंकड़ों में पुलिस को मिली शाबासी

    भोपाल, 04 दिसम्बर(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)। राष्ट्रीय अपराध अभिलेख ब्यूरो, नई दिल्ली ने देशभर के 2022 के अपराध के आंकड़े जारी किए हैं। जिनके अनुसार मध्य प्रदेश में पिछले वर्षों की तुलना में प्रदेश में हत्या, हत्या के प्रयास, लूट, गृहभेदन जैसे गंभीर अपराधों में उल्लेखनीय कमी आई है। वहीं कुल अपराध में 1.80 प्रतिशत की कमी आई है ।


    वर्ष 2021 की तुलना में वर्ष 2022 में कुल भादवि अपराधों में 1.80 प्रतिशत की कमी
    राष्ट्रीय अपराध अभिलेख द्वारा वर्ष 2022 के प्रकाशित आंकड़ों के अनुसार मप्र में वर्ष 2021 की तुलना में आईपीसी के अपराध घटे हैं। जहां वर्ष 2021 में प्रदेश में कुल 304066 अपराध घटित हुए थे, वहीं वर्ष 2022 में अपराध घटकर मात्र 298578 अपराध दर्ज किए गए। यानि वर्ष 2021 की तुलना में वर्ष 2022 में अपराधों में 1.80 प्रतिशत की कमी आई है। वर्ष 2021 की तुलना में वर्ष 2022 में जहां के मामलों में हत्या में 2.75 प्रतिशत की, हत्या के प्रयास में 3.19 प्रतिशत, डकैती में 20.24, लूट के मामलों में 5.41, गृह भेदन के मामलों में 2.46 और भारतीय दंड विधान के तहत आने वाले अन्य अपराधों में 1.42 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई हैं।


    महिलाओं के प्रति अपराध वृद्धि दर घटकर एक तिहाई
    मध्य प्रदेश में महिलाओं के प्रति होने वाले अपराधों की वृद्धि दर वर्ष 2020-21 में जहां 19.63 प्रतिशत थी, जो वर्ष 2021-22 में घटकर लगभग एक तिहाई यानी मात्र 6.82 प्रतिशत ही रह गई। वर्ष 2022 के प्रथम छ: माह में जहां 4160 दुष्कर्म के मामले सामने आए थे, वहीं 2023 में जनवरी से जून तक 17.07 प्रतिशत कमी के साथ 3450 मामले दर्ज किए गए हैं। इसी प्रकार पॉक्सो एक्ट (POCSO Act) के अंतर्गत घटित अपराधों में 1.22 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई है। मध्य प्रदेश पुलिस द्वारा महिलाओं को समय पर सहायता उपलब्ध करवाने और उन्हें सुरक्षा प्रदान करने के उद्देश्य से जहां सभी थानों में ऊर्जा महिला हेल्प डेस्क बनाई गई है, वहीं आशा, मुस्कान और अभिमन्यु जैसे विशेष अभियान भी संचालित किए जा रहे हैं।


    अनुसूचित जाति के प्रति अपराध वृद्धि दर घटकर एक चाैथाई रही
    अनुसूचित जाति के प्रति प्रदेश में हुए अपराधों की वृद्धि दर में उल्लेखनीय कमी दर्ज की गई। जहां 2019-20 में अनुसूचित जाति के प्रति अपराध वृद्धि दर 30 प्रतिशत थी, वहीं वर्ष 2021-22 में यह घटकर एक चौथाई यानी मात्र 7.19 प्रतिशत रह गई । इसी प्रकार वर्ष 2022 के प्रथम छ: माह से तुलना की जाए तो वर्ष 2023 में प्रथम छ: माह में प्रदेश में अनुसूचित जाति (एससी) के विरुद्ध होने वाले अपराधों में 5.29 प्रतिशत की कमी आई है। वर्ष 2022 के प्रथम प्रथम छ: माह में अनुसूचित जाति के विरुद्ध 2213 अपराध घटित हुए जबकि 2023 के प्रथम प्रथम छ: माह में 2096 अपराध घटित हुए हैं। मध्य प्रदेश में वर्ष 2022 में हॉट स्पॉट की संख्या 906 थी, जो वर्ष 2023 में 566 रह गई है। यानी इनमें 37 प्रतिशत की कमी आई है। इसी प्रकार हॉट स्पॉट क्षेत्रों में कुल घटित औसत मासिक अपराध वर्ष 2021 में 96 थे, जो वर्ष 2023 में घटकर 65 रह गए हैं, यानि इनमें 31 प्रतिशत की कमी आई है।


    अनुसूचित जनजाति के प्रति अपराध वृद्धि दर 24 प्रतिशत से घटकर 13 प्रतिशत हुई
    अनुसूचित जाति के विरुद्ध हुए अपराधों की वृद्धि दर के पिछले तीन वर्षों के आंकड़ों पर गौर करें तो निरंतर अपराधों में कमी दर्ज की गई। जहां वर्ष 2019-20 में अनुसूचित जाति के प्रति हुए अपराधों की वृद्धि दर 24 प्रतिशत थी, जो वर्ष 2021-22 में घटकर मात्र 13.40 प्रतिशत रह गई। इसी प्रकार वर्ष 2022 के प्रथम छ: माह से तुलना की जाए तो 2023 में अनुसूचित जनजाति (एसटी) के प्रति होने वाले अपराधों में 14.99 प्रतिशत की कमी आई है। वर्ष 2022 में अनुसूचित जनजाति के विरुद्ध घटित अपराधों की संख्या जहां 1094 थी, जबकि इस वर्ष प्रथम छ: माह में इन अपराधों की संख्या 930 दर्ज की गई है।
    मध्य प्रदेश में अनुसूचित जनजाति के विरुद्ध घटित अपराध कुल 2979 रहे हैं। यहां यह उल्लेखनीय है कि मध्य प्रदेश में अनुसूचित जनजाति की कुल जनसंख्या (153 लाख)देश में सबसे अधिक है । मध्य प्रदेश में अनुसूचित जनजाति के विरुद्ध अपराध की दर देश में तीसरे नंबर पर है। यही दर केरल राज्य में 35.5 है तथा राजस्थान में 27.3 है जो कि मध्य प्रदेश में 19.4 है।


    प्रतिबंधात्मक कार्रवाईयों में वृद्धि
    वर्ष 2021 की तुलना में वर्ष 2022 में प्रतिबंधात्मक कार्यवाहियों में वृद्धि हुई है। जहां वर्ष 2021 में 907990 प्रतिबंधात्मक कार्रवाईयां की गई थी वहीं 2022 में पुलिस ने सक्रियता दिखाते हुए 937284 प्रतिबंधात्मक कार्रवाईयां की।

  • टावर पर चढ़कर राजनीतिक ड्रामेबाजी करने वाला गिरफ्तार

    टावर पर चढ़कर राजनीतिक ड्रामेबाजी करने वाला गिरफ्तार


    भोपाल, 20 सितंबर(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)। राजधानी के महाराणा प्रताप नगर चौराहे पर संचार टावर पर चढ़कर राजनीतिक मांग करना एक युवक को भारी पड़ गया है, पुलिस उसे समझाबुझाकर नीचे लाई और उसे गिरफ्तार करके मानसिक जांच के लिए ले गई है। घटनास्थल पर पहुंचे एसपी मुजाल्दे ने कहा कि इस युवक की मानसिकजांच कराने के बाद उसके करीबी संबंधों की जांच की जाएगी और इस तरह की घटना दुबारा न हो इसके लिए भी आवश्यक इंतजाम किए जाएंगे।


    आज शाम करीबन पांच बजे चौराहे के व्यस्त ट्रेफिक के बीच तब अफरा तफरी फैल गई जब लोगों ने एक युवक को ठीक चौराहे पर लगे टावर पर चढ़ते हुए देखा। लोग टावर के नीचे एकत्रित होकर उसे देख रहे थे तभी उसने अपने कंधे पर टंगे बैग से छपे हुए पर्चे निकाले और नीचे फेंककर लोगों का ध्यान आकर्षित किया। नागरिकों ने इसकी सूचना पुलिस को दे दी। इसके बाद एमपीनगर पुलिस के कुछ जवान और टीआई घटना स्थल पर पहुंच गए। पुलिस ने अपनी गाड़ी में लगे स्पीकर से उसे नीचे उतरने को कहा। इस दौरान पुलिस का अमला और फायर ब्रिगेड भी घटना स्थर पर पहुंच गईं।


    पुलिस ने किसी अनहोनी से बचने के लिए जाल भी बुलवा लिया और नीचे बिछा दिया। इसके बावजूद वह उतरने को राजी नहीं हुआ। टावर पर ही खड़े होकर उसने एक पाईप में लगा तिरंगा झंडा फहराना शुरु कर दिया। पुलिस ने जब उससे अनुरोध किया कि शाम के वक्त झंडा नहीं फहराया जाता तो उसने झंडा खोलकर अपने बैग में रख लिया और डंडा नीचे फेंक दिया। पुलिस ने प्रेस मीडिया की मौजूदगी को स्पष्ट करने के लिए आसपास की भीड़ को हटा दिया। उससे अनुरोध किया गया कि वह नीचे आकर मीडिया के सामने अपनी बात कहे। काफी मान मनौव्वल के बाद वह राजी हुआ और नीचे उतरकर उसने मीडिया के सामने अपनी बात कही।


    परचे में छपी बातों को दुहराते हुए उसने कहा कि सरकारी तंत्र की हीलाहवाली से वह क्षुब्ध है और इसीलिए उसने जनता और सरकार का ध्यान आकर्षित करने के लिए ये कदम उठाया था। उसने अपना नाम अर्जुन आर्य उर्फ जज्जाल साहब बताया। उसने कहा कि मेरी उम्र 29 साल है और मैं जनता की सेवा करने के लिए ही ये मांगे रख रहा हूं। पुलिस की मार से बचने के लिए उसने पहली मांग पुलिस के लिए ही कर डाली। उसने लिखा कि वह भारतीय पुलिस की ड्यटी 8 घंटे की करवाना चाहता है।उसने कहा कि पुलिस वालों का वेतन भी दस हजार रुपए बढ़ाया जाना चाहिए। पुलिस वालों को 52 साल की उम्र में रिटायरमेंट दिया जाए ताकि चुस्त दुरुस्त युवकों को पुलिस में जगह मिल सके। नगर निगम में काम करने वाले मजदूरों को नियमित किया जाए।


    अर्जुन आर्य ने टावर से उतरकर मीडिया से कहा कि वह सरकार से बेरोजगार युवकों को बेरोजगारी भत्ता दिए जाने की मांग करता है। शिक्षा नीति बदलकर निम्न वर्ग के गरीबों के बच्चों को उच्च शिक्षा प्रदान की जाए। उद्योगों में काम करने वाले मजदूरों को प्रतिदिन एक हजार रुपए के हिसाब से तीस हजार रुपए मासिक वेतन दिया जाए। राशन में मिलावट खोरी करने वाले अपराधियों के विरुद्ध सख्त कानून बनाया जाए। बाल शोषण और बलात्कारियों के विरुद्ध फास्टेग कोर्ट में मुकदमा चलाया जाए।
    युवाओं को संबल देने के लिए निजी कालेजों और स्कूलों में हर विद्यार्थी को मुफ्त कापी किताबें दी जाएं और वार्षिक फीस मात्र दस हजार रुपए निर्धारित की जाए। तंबाखू वाले गुटखों और पान मसालों का विज्ञापन करने वाले फिल्मी अभिनेताओं पर कड़ी कार्रवाई की जाए। सेना के आफिसरों का वेतन दस हजार रुपए बढ़ाया जाए।


    एसपी श्री मुजाल्दे ने घटनास्थल पर पत्रकारों के सवालों के जवाब में बताया कि पुलिस ने तमाशा करके जनजीवन में व्यवधान डालने वाले इसयुवक के विरुद्ध मुकदमा दर्ज कर लिया है और इसकेसंबंधों की छानबीन शुरु कर दी है। फिलहाल उसे चिकित्सकीय निगरानी में रखा गया है।

  • ठगी पकड़ी जाए तो बंदूक दिखाकर धमकाता है बूटकॉम का गुप्ता

    ठगी पकड़ी जाए तो बंदूक दिखाकर धमकाता है बूटकॉम का गुप्ता


    भोपाल,18 अगस्त(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)। कंप्यूटर ग्राहक से ठगी की पोल जब खुल जाए और व्यापारी अपनी गलती मानने की बजाए बंदूक दिखाने लगे तो ये कारोबार कानून की निगाह में अड़ीबाजी माना जाता है। सामान्य ग्राहक इसे नहीं जानते और वे आमतौर पर पुलिस में शिकायत नहीं करते लेकिन बूटकाम सिस्टम्स का ठग व्यापारी प्रकाश चंद गुप्ता इसे अपना कारोबारी हुनर मानने लगा है। उसने खुद पर फर्जी हमला करवाकर बंदूक का लाईसेंस बनवा लिया । अब वह नित नए पैंतरे आजमाकर मालदार कंप्यूटर ग्राहकों को गन दिखाकर धमकाता है। । शूटिंग अकादमी से जुड़कर इसने कई पुलिस अफसरों को भी अपने सूदखोरी के जाल में फांस लिया है। वे समय समय पर इसके चौकीदार बन जाते हैं।


    सूत्रों के अनुसार यूपी के लालगंज का रहने वाला प्रकाश चंद गुप्ता वल्द चंद्राभान गुप्ता एमपीनगर पुलिस थाने से महज चार सौ मीटर दूर ठगी का ये अड्डा चला रहा है ।कोई ग्राहक यदि उसकी ठगी को समझ जाता है और अपना पैसा वापस मांगने की जिद पर अड़ जाता है तो वह अपने कर्मचारियों को तेज आवाज में बोलकर वहीं रखी बंदूके उठाकर बाजू में रख लेता है। पुलिस कहती है कि वह साक्ष्य के अभाव में लाचार है। कोई इस बदमाश के खिलाफ तथ्यों पर शिकायत करे तो वह उसे सजा करवा सकती है । पुलिस जिन साक्ष्यों को प्रकरणों में इस्तेमाल करती है उन्हें गुप्ता के अदालती एजेंट धराशायी कर देते हैं। इसके लिए गुप्ता का गिरोह फर्जी दस्तावेज और साक्ष्य तैयार करता है। इस गिरोह में नामी वकील, नोटरी, डॉक्टर,जज ,बैंक मैनेजर, पुलिस वाले और हैंडराईटिंग एक्सपर्ट भी शामिल हैं। ये ऐसे फर्जी साक्ष्य गढ़ते हैं जिन्हें देखकर खासे जज भी चकरा जाते हैं ,फिर वह प्रकरण भ्रष्ट जजों की अदालतों में ट्रांसफर करवा लेता है और रिश्वत देकर बरी हो जाता है।


    बताते हैं कि तीन सौ पंद्रह बोर की बंदूक का लाईसेंस बनवाने के लिए उसने खुद पर हमले की फर्जी वारदात गढ़ी थी। हमलावरों को पुलिस ने बाकायदा कोर्ट में भी पेश किया और अदालत ने उन्हें दोषी ठहराकर सजा भी सुना दी। इस प्रकरण की आड़ में दलालों ने उसे आनन फानन में लाईसेंस मुहैया करवा दिया। ये कहानी उसके ठगी के पैटर्न का खुलासा करता है। जिस प्रकरण क्रमांक 108 । 2019 में पंचम अपर सत्र न्यायाधीश विनय कुमार भारद्वाज ने 31 जनवरी 2023 को सजा सुनाई उसके सजायाफ्ता सफदर,इमरान, शाहिद और हनीफ आज हर्जाना मांग रहे हैं।उन्हें अपराध का प्रकरण दर्ज होने तक चुप रहने की सुपारी दी गई थी।उन्हें तब नहीं पता था कि वास्तव में सजा पड़ जाएगी।


    घटना 25 अक्टूबर 2018 की बताई गई है। प्रकाश गुप्ता ने शिकायत की थी कि हमलावरों ने उससे साढे छह लाख रुपए भरा ब्रीफकेस छीन लिया था जिसे पुलिस ने बाद में जब्त कर लिया । इस मामले में अदालत ने चारों अभियुक्तों को तीन तीन साल की जेल और दो दो हजार रुपए के जुर्माने से दंडित किया है। चारों लड़के नए थे और अदालत ने पूर्व रिकार्ड देखते हुए उन्हें छोटी सजा सुनाई।अभियुक्तों ने खुद को निर्दोष बताते हुए फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती दी है।


    गुप्ता ने तब एसपी से निवेदन किया था कि उसे जान का खतरा है, आत्मरक्षा के लिए हथियार का लाईसेंस दिया जाए। प्रशासनिक मशीनरी को इतनी आड़ काफी थी। उसे लाईसेंस भी मिल गया और उसने हथियार भी खरीद लिए। यही नहीं पुलिस विभाग के आला अफसरों से दोस्ती गांठकर वह फायरिंग अकादमी का सदस्य भी बन गया और वहां उसने अपना साहूकारी का जाल फैलाकर कई आला पुलिस अफसरों को भी मोटे ब्याज का लालच दिखाकर अपने जाल में फांस लिया। इनमें से कई अफसरों के विरुद्ध उसने झूठे साक्ष्य बना लिये हैं और वे भी अपनी रकम वापस मांगने के लिए सामने आने तैयार नहीं हैं।


    ब्लैकमेलिंग की वारदातों को अंजाम देने के लिए उसने कई प्रतिष्ठित समाचार पत्रों,वेवसाईटों और चैनलों की सदस्यता ले रखी है जिनसे वह भारत ही नहीं चीन, दुबई, थाईलैंड, ब्रिटेन और अमेरिका के सप्लायर जब शिकायत करते हैं तो वहां के अफसरों को धमकाने के लिए वह मध्यप्रदेश और उत्तरप्रदेश पुलिस के अधिकारियों का सहारा लेता है। इसके लिए वह उन अधिकारियों को ब्याज के नाम पर रिश्वत पहुंचा देता है।

  • हाईकोर्ट ने जमानत दी तो रंगदारी दिखाने लगा पास्को आरोपी

    हाईकोर्ट ने जमानत दी तो रंगदारी दिखाने लगा पास्को आरोपी


    भोपाल,2 अगस्त(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)। फर्जी साक्ष्यों से अदालत को गुमराह करके जमानत लेने वाला पास्को आरोपी प्रकाश चंद वल्द चंद्रभान गुप्ता अब अपने गुर्गों से आतंक फैलाकर पीड़िता के परिजनों को डराने का प्रयास कर रहा है। उसके गुर्गे कंप्यूटर व्यवसायियों को धमका रहे हैं कि आरोपी की पकड़ बहुत ऊंची है और जो कोई उसके काले धंधे के बारे में जान जाता है उसे जान से हाथ धोना पड़ता है। वहीं हाईकोर्ट में उसने जो फर्जी दस्तावेज पेश किए थे और अपने वकीलों से झूठी दलीलें दिलवाई थीं उनकी शिकायत पुलिस के पास पहुंच गई है और पुलिस उनकी सत्यता की जांच कर रही है।


    नाबालिग पीड़िता ने बूटकाम सिस्टम्स नाम से कंप्यूटर की दूकान चलाने वाले प्रकाश चंद गुप्ता के खिलाफ अश्लील अनाचार की शिकायत की है जिसे पुलिस ने पास्को एक्ट के अंतर्गत दर्ज किया है। जिला अदालत ने तो मामले की गंभीरता को देखते हुए गुप्ता का जमानत आवेदन खारिज कर दिया था और उसे गिरफ्तार करने के निर्देश दिए थे। इस फैसले के विरुद्ध गुप्ता हाईकोर्ट पहुंचा और उसने वकीलों की फौज के साथ फर्जी दस्तावेजों का पुलिंदा पेश करके ये जताने की कोशिश की थी कि ये प्रकरण कारोबारी लेनदेन की वजह से दर्ज कराया गया है। जबकि पीडि़ता का कहना है कि हमारे पारिवारिक संबंध होने की वजह से मैं गुप्ता के घर थी तब उसने ये वारदात की थी।


    पुलिस ने अदालत में आरोपी के विरुद्ध जो साक्ष्य प्रस्तुत किए थे उनमें उसे ठग, और चरित्रहीन बताया गया था। व्यापार की आड़ में वह सूदखोरी का कारोबार चलाता है जिसमें लोगों को जमा राशि पर ऊंची ब्याज दर का भुगतान देने का लोभ दिखाता है।पुलिस ने उन प्रकरणों की सूची भी प्रस्तुत की थी जो विभिन्न व्यापारियों की ओर से इसके विरुद्ध भोपाल, इंदौर, दिल्ली, कलकत्ता समेत देश के कई शहरों में विचाराधीन हैं। लगभग एक महीने की फरारी के बाद अपने धंधे पर वापस लौटे गुप्ता ने व्यापारियों पर दबाव बनाने के लिए और आतंक फैलाने के लिए ये दुष्प्रचार अभियान चलाया है।


    गुप्ता का एक गुर्गा राहुल जैन कंप्यूटर व्यवसायी है और वह थद्दाराम काम्प्लेक्स एमपी नगर में कंप्यूटर से जुड़ी छोटी सामग्री और इसकी दूकान से बेकार बताकर बदले गए लैपटाप बेचता है। उसने इस मामले से जुड़े लोगों को धमकाते हुए कहा कि प्रकाश गुप्ता की पहुंच बहुत लंबी है। वह अदालतों को खरीदना और उनसे खेलना जानता है। पुलिस की क्या औकात जो उसका कुछ बिगाड़ सके। वह बड़े बड़े लोगों के करोड़ों रुपए ब्याज पर चलाता है। उसका हवाला कारोबार कई शहरों में फैला है। यूपी के लालगंज में उसके परिवार की सल्तनत चलती है।वह इतना खूंखार है कि जो उसके काले धंधे को जान लेता है उसे जान से हाथ धोना पड़ता है।जिन लोगों ने प्रकाश के विरुद्ध धोखाधड़ी की शिकायत की है वे केवल चक्कर खाते रहेंगे क्योंकि वह कई जजों को उलझे प्रकरणों में करोड़ों रुपए रिश्वत दिलाता है।


    राहुल ने दो पत्रकारों को देखकर जिस तरह की डींगें हांकी उससे प्रकाश गुप्ता के काले धंधे की एक नई तस्वीर सामने आई है। प्रकाश के इस गुर्गे ने कहा कि वह कई जजों, पुलिस वालों और अपराधियों को पालकर रखता है। हाईकोर्ट ने उसे उस मामले में भी जमानत दे दी जिसे भारत सरकार ने बाकायदा कानून बनाकर संगीन माना है। गौर तलब है कि जब इस मामले की जानकारी पुलिस को लगी तो उसने हाईकोर्ट में पेश किए इसके दस्तावेजों की छानबीन शुरु कर दी है।

  • हाईकोर्ट को गुमराह करके पास्को आरोपी प्रकाश गुप्ता ने फिर खरीदी जमानत

    हाईकोर्ट को गुमराह करके पास्को आरोपी प्रकाश गुप्ता ने फिर खरीदी जमानत


    भोपाल 28 जुलाई(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)। अदालतों को गुमराह करके ठगी के आरोपों से बच निकलने में माहिर बूटकाम सिस्टम्स के प्रकाश चंद गुप्ता को फिलहाल गिरफ्तारी से बच निकलने में सफलता मिल गई है।इसके बावजूद पास्को एक्ट में दर्ज ताजा मामले से उसके ठगी और व्यभिचार के अपराध पूरी तरह उजागर हो गए हैं। हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति विशाल धगट ने उसका जो जमानत आवेदन मंजूर किया उसमें उसे पुलिस के सामने सरेंडर करने ,पासपोर्ट जमा करने, विदेश भागने से रोकने, पचास हजार रुपए का निजी मुचलका भरने और पुलिस जांच अधिकारी के सामने जांच के लिए हर समय उपलब्ध रहने की शर्त लगाई है। आरोपी की जमानत के लिए उसने वकील मनीष दत्त से जो झूठे तथ्य पेश करवाए उसके आधार पर अदालत को अपने फैसले पर पुनर्विचार करने का निर्देश देने का रास्ता खुल गया है।


    सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार कंप्यूटर के कारोबार की आड़ में साहूकारी करके लोगों का धन हड़प जाने के जो मामले अदालतों में लंबित हैं उनमें वह साक्ष्यों को नष्ट करके अब तक बचता रहा है। पुलिस के रिकार्ड में ऐसे सैकड़ों मामले दर्ज हैं जिनमें उसने लोगों को झांसा देकर जमा राशि का चैक वापस ले लिया और फिर पैसा जमा करने वालों के खिलाफ ही कर्ज न लौटाने की शिकायत दर्ज करवा दी। पुलिस के देहाती अपराध रजिस्टर में प्रकाश चंद गुप्ता कुख्यात ठग के रूप में दर्ज है पर कुछ अदालतों को खरीदकर या उन्हें झांसा देकर वह अब तक बचता रहा है। इस बार एक बच्ची ने उसके खिलाफ यौन दुराचार की शिकायत दर्ज कराई है जिसमें गिरफ्तारी से बचने के लिए उसके वकीलों की फौज ने दलील दी कि बच्ची ने आठ सालों बाद शिकायत की है इसलिए उसे जमानत पर रिहा कर दिया जाना चाहिए। जबकि वह बच्ची अभी भी नाबालिग है।


    हमारे न्यायालयीन संवाददाता ने बताया कि अदालत ने आरोपी के वकीलों की ओर से पेश किए गए झूठे तथ्यों को भी स्वीकार कर लिया और उसे सशर्त जमानत दे दी है जबकि पास्को एक्ट में जोड़े गए उपबंधों में इस तरह की जमानत देने का प्रावधान बाधित किया गया है। आपराधिक संशोधन विधेयक 2018 ने धारा 438 में खंड 4 जोड़कर और कानून में अपवाद बनाए गए हैं । उक्त धारा के अनुसार, 16 वर्ष से कम उम्र की महिला के साथ बलात्कार, 12 वर्ष से कम उम्र की महिला के साथ सामूहिक बलात्कार और 16 वर्ष से कम उम्र की महिला के साथ सामूहिक बलात्कार के अपराध के आरोपी व्यक्ति को अग्रिम जमानत नहीं दी जा सकती है। 12 वर्ष से कम उम्र की महिला के विरुद्ध अपराध, भारतीय दंड संहिता, 1860 की क्रमशः धारा 376(3), 376 एबी, 376 डीए और 376 डीबी के तहत दंडनीय है।


    आरोपी प्रकाश चंद गुप्ता के विरुद्ध जब स्थानीय अदालत ने गिरफ्तारी के आदेश दिए तो आनन फानन में उसने झूठे दस्तावेज बनाकर पीड़िता के पिता के विरुद्ध ही पैसा हड़प जाने की कहानी गढ़ ली। पुलिस ने तो उसकी ये दलील नहीं सुनी लेकिन हाईकोर्ट में मनीष दत्त की ओर से प्रस्तुत झूठ तब उजागर हो गया जब उन्होंने कहा कि आरोपी ने पीडि़ता की मां को भारी रकम उधार दी है और उसे न लौटाने के लिए पीडि़ता ने उस पर आरोप लगाए हैं। जबकि हकीकत ये है कि पीडि़ता के परिवार से करीबी बढ़ाने के लिए आरोपी गुप्ता ने उनके पिता से लाखों रुपए ब्याज पर उधार लिए थे जिन्हें वो कथित तौर पर गड़प गया है।


    बताते हैं कि मनीष दत्त ने आरोपी के बचाव में एक और झूठी दलील दी कि आरोपी के पिता ने एक और व्यक्ति के विरुद्ध पहले व्यभिचार की शिकायत की थी जबकि ऐसा कोई मामला कभी कहीं दर्ज नहीं हुआ है।जबकि आरोपी ने जिन सैकड़ों लोगों की जमा राशि गड़प की है उसके मुकदमे भोपाल की जिला अदालत और दिल्ली, इंदौर, कलकत्ता की अदालतों में चल रहे हैं। आरोपी संभ्रांत व्यक्ति नहीं है और आईपीसी की धारा 438 के तहत जमानत पाने के लाभ का हकदार नहीं है क्योंकि उसके विरुद्ध वर्तमान में 4 करोड़ 27 लाख रुपए की धोखाधड़ी का एक मामला तो विक्रमादित्य सिंह पुत्र श्री राजेन्द्र सिंह की ओर से चलाया जा रहा है। इस मामले में वह जेल जा चुका है और जमानत पर रिहा है। उसके खिलाफ धारा 354 के अंतर्गत एक और महिला के ऊपर अश्लील तरीके से हमला करने का प्रकरण दर्ज हुआ था जिसमें उसने समझौता कर लिया था ।अदालत की भाषा में समझौता होना अपराध होने से बरी होना नहीं होता है।

    एक अन्य केस इसकी दुकान में कार्य करने वाली एक लड़की के साथ अवैध संबंध होने पर लड़की के गर्भवती हो जाने पर बलात्कार और अन्य धाराओं में दर्ज कराए गए थे। इस प्रकरण में भी प्रकाश गुप्ता ने अवैध रूप से समझौता करके लड़की के परिजनों को झांसा दिया कि मैं शादी कर लूंगा । कानून की निगाह में बलात्कार का आरोप भी समझौता होने के बावजूद बरी होना नहीं माना जाता। हिंदू विवाह अधिनिमय में दो विवाह की अनुमति भी नहीं है।


    पुलिस के सूत्र बताते हैं कि प्रकाश गुप्ता जिन व्यक्तियों से जमा राशि लेकर उनसे ठगी करता रहा है उनकी मूल रकम लौटाने से इंकार करने के लिए वह उनके नकली हस्ताक्षर बना लेता है और अदालत में जाली दस्तावेज पेश करता रहा है। अदालतें उसकी ओर से प्रस्तुत तथ्यों को क्यों स्वीकार कर लेती हैं ये भी जांच का विषय है। फर्जी दस्तावेज बनाकर वह ये सिद्ध करने की कोशिश करता है कि उसे विरोधी पक्षकार से पैसे लेने हैं। देने नहीं हैं। ये इसके अपराध करने का तरीका है।

  • लेडी किलर ठग प्रकाश चंद गुप्ता का आडियो वायरल

    लेडी किलर ठग प्रकाश चंद गुप्ता का आडियो वायरल


    भोपाल,26 जुलाई,(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)। पास्को एक्ट में लगभग एक महीने की फरारी के बाद हाईकोर्ट से सशर्त जमानत मिलने के साथ ही बूटकाम सिस्टम्स (Bootcom Systems) का प्रकाश चंद गुप्ता (Prakash Chand Gupta) अब एक और आडियो वायरल होने से चर्चाओं में आ गया है। ये आडियो उसके आकर्षक ब्याज के झांसे में लाखों रुपए गंवा चुकी एक महिला के करीबी ने रिकार्ड किया था। हाईकोर्ट ने पासपोर्ट जब्त करने के साथ उसे पुलिस थाने में हाजिरी की शर्त पर जमानत दी है।
    सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार फरारी के दौरान न केवल उसका कंप्यूटर कारोबार चलता रहा बल्कि उसका साहूकारी का धंधा भी बदस्तूर जारी था। इस कारोबार के सहारे ही वह लोगों का करोड़ों रुपया ब्याज पर लेकर कुछ बड़े व्यापारियों तक पहुंचाता है जो बैंकों के अरबों रुपये ब्याज पर लिए हुए हैं। इसी रकम उन कारोबारियों ने कर्ज पर चला रखा है। बैंक की किस्तें भरने के लिए वे बाजार का पैसा लेकर गड़प जाते हैं। इसी कड़ी में प्रकाश चंद गुप्ता भी कई जगह फ्रंट फेस तो कई जगह बैक कड़ी के रूप में काम करता है। हवाला के कारोबार से ये रकम शहर के विभिन्न इलाकों तक पहुंचाई जाती है।
    पिछले दिनों न्यायालय परिसर में नौकरी करने वाली ऐसी ही महिला ने अपनी रकम का ब्याज और मूलधन वापस मांगा तो गुप्ता ने उन्हें गालियां देकर दूकान से बाहर निकाल दिया। उसने महिला को विश्वास में लेकर पहले ही मूल चैक वापस ले लिया था और उसे फाड़ दिया था जबकि चैक की फोटो कापी महिला के पास है। उसने अपने दस्तावेजों के आधार पर पुलिस और अदालत में ठगी की शिकायत की है जो वाद अभी लंबित है।
    महिला और प्रकाश गुप्ता के बीच लेनदेन को लेकर जो झड़प हुई उसकी आडियो क्लिप हमारे पास मौजूद है। वार्तालाप में कुछ अश्लील गालियां भी मौजूद हैं जिन्हें मामले की गंभीरता को समझने के लिए सुनना जरूरी है। इसी के चलते हम अनकट आडियो आपके लिए प्रस्तुत कर रहे हैं। कृपया प्रकाश गुप्ता की असलियत को समझने के लिए इसे सुनें और गालियों को नजरंदाज करें। ये आडियो हमें फरियादी अभिलाषा राहते की ओर से उपलब्ध कराया गया है, प्रेस इंफार्मेशन सेंटर इस आडियो की सत्यता की कोई गारंटी नहीं लेता है।

  • नाबालिग के यौन अपचारी प्रकाश गुप्ता की अग्रिम जमानत अर्जी खारिज

    नाबालिग के यौन अपचारी प्रकाश गुप्ता की अग्रिम जमानत अर्जी खारिज


    भोपाल 18 जुलाई( प्रेस इनफार्मेशन सेंटर) जिला एवं सत्र सत्र न्यायालय मैं विगत 28 जून को दाखिल नाबालिग बालिका के योन उत्पीड़न आरोपी बूटकॉम सिस्टम के मालिक प्रकाश चंद्र गुप्ता कीअग्रिम जमानत की याचिका माननीय न्यायालय ने ये कहते हुए खारिज कर दी है कि आरोपी का क्रिमिनल रिकॉर्ड है,वह आदतन अपराधी है और महिलाओं से संबंधित अपराध करने का इसका पुराना रिकॉर्ड है । उपरोक्त तथ्यों को ध्यान में रखते हुए आरोपी को अग्रिम जमानत नहीं दी जा सकती।

    आरोपी के अधिवक्ता मेहता ने न्यायालय के समक्ष 30 मिनट तक अग्रिम जमानत देने के लिए तर्क दिए।उन्होंने कई न्याय दृष्टांत भी न्यायालय के समक्ष रखे लेकिन न्यायालय ने अधिवक्ता के सभी तर्कों को खारिज करते हुए आरोपी प्रकाश चंद्र गुप्ता की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी। माननीय न्यायालय ने प्रकाश गुप्ता के परिवार को कहा कि वे जल्द से जल्द आरोपी को पुलिस के सामने पेश करें। माननीय न्यायालय ने आरोपी के अधिवक्ता श्री मेहता के लगभग 150पन्नों के दलीलों से भरे आवेदन को निरस्त करते हुए अग्रिम जमानत का लाभ देने से इंकार कर दिया।
    ज्ञात हो कि दिनांक 21 जून को अयोध्या नगर थाने में आरोपी प्रकाश चंद गुप्ता के खिलाफ एफ आई आर दर्ज होने के बाद से ही वह फरार है। सूत्रों के अनुसार पुलिस का अमला पूरी कोशिश कर रहा है कि आरोपी को जल्द से जल्द गिरफ्तार कर न्यायालय के समक्ष पेश किया जाए।आरोपी ने अपने दोनों फोन बंद कर दिए गए हैं और किसी अन्य फोन नंबरों का इस्तेमाल कर रहा है।

    सूत्रों की माने तो प्रकाश गुप्ता की ओर से अब माननीय हाईकोर्ट के समक्ष अग्रिम जमानत का आवेदन लगाया गया है। विधि विशेषज्ञों का ऐसा कहना है कि जिस प्रकार से प्रकाश गुप्ता का आपराधिक रिकॉर्ड न्यायालय के संज्ञान में आया है उसे देखते हुए माननीय उच्च न्यायालय की ओर भी आरोपी को अग्रिम जमानत का लाभ मिलने की उम्मीद नहीं है

  • कानून माफिया की शह से खूब चला ठगी का कंप्यूटर

    कानून माफिया की शह से खूब चला ठगी का कंप्यूटर


    बूटकॉम सिस्टम्स के प्रकाश गुप्ता पर देश भर के व्यापारियों ने दर्ज कराए अमानत में खयानत के केस


    भोपाल,25 जून(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)। यूपी के लालगंज से आकर राजधानी में कंप्यूटर का कारोबार चलाने वाले प्रकाशचंद गुप्ता ने ठगी और लूट के लिए कानून की पेचीदगियों को अपना हथियार बना रखा है। पिछले तीस सालों में उसने हजारों लोगों के साथ धोखाघड़ी और ठगी की है लेकिन हर बार वह कानून की पकड़ से बचता रहा है। लूट के धन को उसने इस्कान फाऊंडेशन और राजधानी के एक बड़े माफिया समूह में निवेश कर दिया है। कई इमारतें और फार्महाऊस खरीदकर उसने अपनी स्थायी आय का इंतजाम किया है। कंप्यूटर की दूकान तो महज आय दिखाने और टर्नओवर बढ़ाने के लिए खोल ऱखी है। अपना बढ़ा कारोबार दिखाने के लिए वह दूसरे व्यापारियों का माल लेकर सस्ते में बेच देता है और उन व्यापारियों का धन गड़प लेता है। राजधानी में ही उसके विरुद्ध ढेरों केस लंबित पड़े हैं। वह हर मुकदमे को अदालत तक पहुंचने की राह सरल करता है फिर दांवपेंच और कुछ जजों से सांठगांठ करके बच निकलता है।

    प्रकाश चंद्र गुप्ताः चरित्रहीनता, धोखाधड़ी और चालबाजियों ने कारोबारी परंपराओं को तार तार किया.


    राजधानी की पुलिस बरसों से इस ठग की चालबाजियों के सामने लाचार है। कभी भ्रष्ट पुलिस अफसर उसके लिए ढाल बन जाते हैं तो कभी भ्रष्ट न्यायाधीश उसके अपराधों के अभिभावक बन जाते हैं। शहर के एक नामी गिरामी वकील तो उसके अघोषित पार्टनर बनकर करोड़ों रुपये कमा रहे हैं। उसने एक रखैल रख छोड़ी है जिससे उसके एक बेटी है। एक बेटी पहली शादी से है। इन दोनों परिवारों की शान शौकत के लिए वह करोड़ों रुपए खर्च करता है। सोने के जेवर और विलासिता की वस्तुएं तो वह ऐसे खरीदता है जैसे किसी रियासत का महाराजा हो। जजों और अफसरों को सप्लाई की जाने वाली लड़कियों को वह स्कूटर और कारें गिफ्ट में देता है। अपना धन मांगने वालों को डराने के लिए उसने कई बंदूकें और तलवारें ले रखी हैं। रौब जमाने के लिए वह पुलिस अफसरों के साथ शूटिंग अकादमी में शामिल होता है। जजों और पुलिस अफसरों को रिश्वत देने के लिए उसने उनका पैसा ब्याज पर चलाने के नाम पर खासा निवेश कर रखा है। यही पुलिस अफसर जनता से लूट में उसके सहयोगी बनते रहते हैं।
    प्रकाश चंद गुप्ता ने पिछले तीन दशकों में हजारों नागरिकों से ठगी और धोखाघड़ी की है। अपनी दूकान बूट काम सिस्टम पर वह कई बार ग्राहकों को असली कीमत से कम दाम पर कंप्यूटर बेच देता है और कई बार तीस हजार का कंप्यूटर डेढ़ लाख में भी बेच देता है।ग्राहक की अज्ञानता का लाभ लेकर वह लोगों की आंखों में धूल झोंकने का काम कारोबार चला रहा है। यदि कोई जांच एजेंसी का अफसर या सिपाही उसकी दूकान पर जाकर छानबीन करने की कोशिश करे तो वह झग़ड़ा करने पर उतारू हो जाता है और अपने टुकड़खोर पुलिस वालों के माध्यम से उसे गालियां पड़वाता है। उसके चंगुल में फंसे व्यापारी यदि उसे माफ कर दें और दुबारा धंधा करने पर राजी हो जाएं तब भी वह उन्हें दुबारा ठगने से नहीं चूकता।

    अयोध्यानगर पुलिस थानाः समाज से गद्दारी को सलाखों के पीछे पहुंचाने का साहस


    बड़े व्यापारियों और निवेशकों को ठगने के लिए वह उनसे पारिवारिक संबंध बढ़ाता है और घर की महिलाओं को गिफ्ट देकर अपने पक्ष में खड़ा कर लेता है। बाद में जब उनके परिवार से बड़ी रकम लेकर ठगी की बात सामने आती है तो इन्हीं महिलाओं को लालच देकर वह अपना मुखबिर बना लेता है। बड़े धन्नासेठों पर अड़ी बाजी और उन पर झूठे मुकदमे दर्ज कराकर ठगने के लिए वह वकीलों और भ्रष्ट जजों का सहारा लेता है। जब किसी मुकदमे की वजह से उसे जेल यात्रा करनी पड़े तो उसकी खबर अखबारों में न छप सके इसके लिए वह मोटी रकम खर्च करता है। उसके गिरोह में कई ऐसे पत्रकार भी शामिल हैं जो सही खबर छापने वाले पत्रकारों के विरुद्ध ही दुष्प्रचार करने में जुट जाते हैं। इसके बावजूद उसकी ठगी और धोखाधड़ी के कई मुकदमे आज भी अदालतों में विचाराधीन है।
    कई बैंकों मैनेजरों से सांठ गांठ करके उसने करोड़ों रुपए हासिल किए हैं। इन बैंकों से मुकदमा जीतने में और मुआवजा पाने में वकीलों और भ्रष्ट जज उसके सलाहकार होते हैं। वे साक्ष्य बनवाते हैं और अदालती प्रक्रिया पूरी करके उसे मोटी रकम दिलवाते हैं। इसी राशि का बड़ा हिस्सा जजों और वकीलों में भी बंटता है। इस विषय पर आरोप लगाने वालों को धमकाने के लिए अवमानना कानून का सहारा लिया जाता है।
    उससे पीड़ित लोगों में कलकत्ता , मुंबई , दिल्ली ,इंदौर, भोपाल और कई थोक व्यापारी भी शामिल हैं।अफसरों औंर न्यायाधीशों की तो बड़ी फेरहिस्त है।कई अफसरों और न्यायाधीशों को तो इसके चंगुल में फंसकर अपनी नौकरियां भी गंवानी पड़ी हैं।कुख्यात अपराधी मुख्तयार मलिक ने जब एक जज राजीव भटजीवाले की रकम गड़प जाने की वजह से इसे धमकाया तो इसने पुलिस अफसरों और न्यायाधीशों की मदद से उसके एनकाऊंटर का आदेश तक करवा दिया था।


    प्रकाश चंद गुप्ता से पीड़ित व्यापारियों में सवेरा इंडिया प्राईवेट लिमिटेड के चौबीस मुकदमे मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट कलकत्ता के समक्ष विचाराधीन हैं। स्काईलाईन सिस्टम्स इंदौर ,बाईट पेरी फेरल्स इंदौर, हस्ती कंप्यूटर्स इंदौर, सेन्ट्रोनिक्स इंदौर, शर्ललाईन सिस्टम्स इंदौर, मित्तल इंफोटेक इंदौर, आई प्लांट इंदौर, एमीट्रान डिजिटेक इंदौर, विनायक इंफोटेक इंदौर, डीबी इंफोटेक इंदौर, लेटेस्ट डिवाईस प्राईवेट लिमिटेड भोपाल, दीप कंप्यूटर्स भोपाल, सेज विश्वविद्यालय भोपाल, शिवांकरी सिंह, रंजना सिंह, छोटी बाई, डब्ल्यूपीजी सीएंडसी कंप्यूटर्स एंड पेरीफेरल्स इंडिया प्राईवेट लिमिटेड दिल्ली, सवेरा डिजिटल इंडिया प्राईवेट लिमिटेड कोलकाता, राज्य सरकार, संदीप जैन माईक्रोलैंड कंप्यूटर्स जबलपुर, विक्रमादित्य सिंह, अभिलाषा राहते, समेत कई अन्य व्यापारियों के मुकदमे भी अदालतों में विचाराधीन हैं। इसके अलावा प्रकाश गुप्ता ने फाईनेंस फर्म भी पंजीकृत करा रखी है जिस पर उसने सैकड़ों लोगों से करोड़ों रुपए ऊंचा ब्याज देने के नाम पर ले रखे हैं। उन्हें उसने ब्याज देना बंद कर रखा है। कई लोगों के तो मूल चैक बापस ले लिए हैं और वे अपनी रकम पाने के लिए दर दर की ठोकरें खा रहे हैं। पक्की लिखा पढी न होने से तो वह सैकड़ों लोगों की रकम गड़प कर चुका है। हुंडी कारोबार के कई अगड़िए इसके गोपनीय अड्डे पर व्यापारियों का करोड़ों रुपया पहुंचाते हैं जिसे गड़प करने के लिए इसने विभिन्न तरीके अपना रखे हैं।लोगों को झांसा देने के लिए उसने कई नोटरियों, वकीलों, पत्रकारों,जजों,पुलिस अफसरों को अपने जाल में फंसा रखा है। अवैध हथियारों की तस्करी हो या फिर नशे का गोरखधंधा सभी कारोबारों में उसकी हिस्सेदारी है। वह कई बार बड़बोले पन में कहता है कि बूचड़खानों से जुड़े अपराधियों की मदद से वह अधिक दबाव डालने वाले लोगों की हत्याएं भी करवा देता है। राजधानी पुलिस के सामने यह सफेद कालर अपराधी अब एक अनसुलझी पहेली बन गया है। हाल ही में एक बालिका पर यौन हमले के आरोप में इस पर पास्को एक्ट में मुकदमा दर्ज किया गया है। यदि अदालतों, पुलिस और राजनीति में जड़े जमाए अपराधियों का संरक्षण नहीं मिल सका तो इस बार प्रकाश गुप्ता की लंका राख हो सकती है।

  • यौन हमले का आरोपी बूटकॉम का प्रकाश गुप्ता फरार

    यौन हमले का आरोपी बूटकॉम का प्रकाश गुप्ता फरार


    लालगंज के माफिया परिवार से जुड़े गुप्ता पर यौन हमले के आरोप में पास्को एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज


    भोपाल, 23 जून(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर). राजधानी के एमपीनगर में बूटकॉम सिस्टम्स नाम से दूकान चलाने वाले बदनाम व्यापारी प्रकाश चंद्र गुप्ता के खिलाफ पुलिस ने नाबालिग बच्ची से यौन शोषण करने के आरोप में पास्को एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज किया है। इस अपराध में प्रकाश चंद्र गुप्ता को जिंदा रहने तक जेल या फांसी की सजा हो सकती है। प्रकरण दर्ज करने के बाद से वह फरार है और पुलिस उसकी तलाश सरगर्मी से कर रही है।
    सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार धोखाधड़ी और जालसाजी से अरबों रुपयों की दौलत कमाने वाले कंप्यूटर व्यापारी प्रकाश चंद्र गुप्ता के पापों का घड़ा तेजी से भरता जा रहा है। अदालतों और पुलिस से सांठ गांठ करके लगातार तीस सालों तक सरेआम लूटमार करने वाला ठग प्रकाश चंद्र गुप्ता इस बार नाबालिग का यौन शोषण करने की वजह से पास्को एक्ट में फंस गया है। उसके खिलाफ राजधानी के अयोध्यानगर पुलिस थाने में विगत बीस जून को लैंगिक अपराधों से बालकों के संरक्षण अधिनियम 2012 के अंतर्गत मुकदमा दर्ज किया गया है। पुलिस थाना गोविंदपुरा में सब इंस्पेक्टर के पद पर पदस्थ दीपिका गौतम ने ये शिकायत दर्ज की है। पुलिस थाना अयोध्यानगर को बच्ची के विरुद्ध अपराध की शिकायत प्राप्त होने की वजह से कंट्रोल रूम ने उन्हें वहीं जाकर रिपोर्ट दर्ज करने का आदेश दिया था।
    फरियादिनी अपने माता पिता के साथ पुलिस थाने पहुंची थी और उसने बताया कि अयोध्या बायपास के कंफर्ट पार्क के मकान नंबर 9 में रहने वाले प्रकाश चंद्र गुप्ता ने उसके खिलाफ यौन उत्पीड़न किया था जिसे वह दंडित करवाना चाहती है। पुलिस ने फरियादिनी की हस्तलिखित शिकायत पर प्रथम दृष्टया भादवि की धारा 354,354(क), 506, 9(एम),(एन)। 10 पास्को एक्ट के तहत प्रकरण दर्ज किया है। बच्ची ने बताया कि उसके माता पिता के प्रकाश चंद्र गुप्ता के साथ पारिवारिक संबंध रहे हैं । मेरे माता पिता 18से 20 जुलाई 2015 को मेरी बड़ी बहन का एडमीशन दिल्ली विश्विद्यालय में करवाने गए थे इस दौरान उन्होंने उसे प्रकाश गुप्ता के घर छोड़ दिया था। मेरी मम्मी प्रकाश गुप्ता को राखी बांधती थी और पारिवारिक संबंधों की वजह से उन्होंने मुझे सुरक्षित माना था।

    बताते हैं गुप्ता ने सतगढ़ी में सात एकड़ जमीन खरीदी और एक एकड़ में जजों अफसरों की ऐशगाह बनाई है.


    बीस जुलाई 2015 को जब प्रकाश गुप्ता की पत्नी और बेटी ऊपर के कमरे में थे तब मैं खाना खाने के बाद नीचे के कमरे में बैठकर टीवी देख रही थी। टीवी देखते समय मेरी आंख लग गई। इसी दौरान प्रकाश गुप्ता ने आपत्तिजनक स्थिति में आकर मेरे शरीर से खिलवाड़ करना शुरु कर दिया। जब मैंने चिल्लाने की कोशिश की तो उसने मेरा मुंह दबा दिया और धमकाया कि यदि तूने किसी को बताने की कोशिश की तो मैं तुम्हारी मां और बड़ी बहन की हत्या कर दूंगा। इसके बाद जब मेरे माता पिता लौट आए तो उसके बाद भी प्रकाश गुप्ता मुझे जान से मारने की धमकी देता रहता था। मैं डर गई और इसी वजह से मैंने उस घटना के बारे में किसी को नहीं बताया।
    पीड़िता ने बताया कि मैंने इस तरह की घटनाओं के बारे में आनलाईन कई आलेख पढ़े । स्कूल में सैक्सुअल अवेयरनेस के कार्यक्रमों में भी लड़कियों को इस तरह के अपराधों के बारे में बताया गया। मी टू मूवमेंट किस तरह से समाज के काले चेहरे को उजागर करता है ये भी मालूम पड़ा। इससे मुझमें हिम्मत आई और मैंने उस घटना के बारे में अपने मम्मी पापा को जानकारी दी। मैं पुलिस के सामने सहायता की अपेक्षा करके हाजिर हुई हूं ताकि प्रकाश चंद गुप्ता जैसे भेड़ियों को कानून सम्मत सजा दिलवाई जा सके। अयोध्यानगर पुलिस ने दीपिका गौतम की आईडी थाने में न होने की वजह से प्रधान आरक्षक 2928 धर्मेन्द्र सिंह गुर्जर की आईडी से ये प्रकरण कायम किया है।
    गौरतलब है कि प्रकाश चंद्र गुप्ता के विरुद्ध राजधानी के पुलिस थानों में लगभग साढ़े तीन दशकों के दौरान कई आपराधिक प्रकरण दर्ज किए गए हैं। कुछ प्रकरणों में तो उसे जेल भी भेजा गया है। इसके बावजूद बताते हैं कि वह अदालतों में वकीलों और जजों की सांठ गांठ से झूठे साक्ष्य प्रस्तुत करके बच निकलता है। इस तरह के अपराधों से उसने और उसके सहयोगी वकीलों जजों ने अरबों रुपयों की दौलत एकत्रित कर ली है। सूत्र बताते हैं कि उसने कई गर्ल्स हास्टल भी चला रखे हैं जिनमें वह ऐसी लड़कियां रखता है जिन्हें कथित तौर पर जजों और पुलिस के अफसरों,नेताओं को गिफ्ट के तौर पर पेश किया जाता है। अपने अपराधों को छुपाने के लिए राजधानी में एक टीवी चैनल भी चला रखा है जिसका संचालन एक बड़े टीवी चैनल से निष्कासित पत्रकार करता है। वह और उसकी सहयोगी पत्रकार समाज के प्रभावशाली लोगों को पुरस्कार देकर इस आपराधिक कारोबार पर पर्दा डालने का काम करते हैं। भारतीय जनता पार्टी के एक स्वर्गवासी नेता के संरक्षण में वह करोड़ों रुपयों के ठेके लेता रहा है। पुलिस ने अपनी जांच में ऐसे कई बिंदुओं को भी शामिल किया है जिससे प्रकाश गुप्ता के अपराधों को उजागर किया जा सके और उसे दंडित किया जा सके। प्रकाश गुप्ता इन समय फरार है और उसने अपने अदालती संपर्कों के माध्यम से पुलिस पर दबाव बनाना शुरु कर दिया है।
    पास्को यानि प्रोटेक्शन आफ चिल्ड्रन फ्राम सेक्सुअल अफेंस एक्ट नाम का ये कानून 2012 में लाया गया था। इसमें बच्चों के विरुद्ध होने वाले अपराधों पर फैसला किया जाता है। ये कानून 18 साल से कम उम्र के लड़के और लड़कियों दोनों पर लागू होता है। पास्को कानून को 2019 में संशोधित करके मौत की सजा का भी प्रावधान कर दिया गया। इस कानून के तहत यदि आरोपी को उम्रकैद की सजा मिले तो वह जेल से जिंदा बाहर नहीं आ सकता।इसके अलावा दोषी व्यक्ति पर भारी आर्थिक जुर्माना भी लगाया जाता है। बच्चों के खिलाफ पोर्नोग्राफी करने वाले अपराधी को भी तीन से सात साल की जेल और जुर्माने की सजा से दंडित किया जाता है।

  • हाईकोर्ट ने खारिज की राघवजी के खिलाफ शिकायत

    हाईकोर्ट ने खारिज की राघवजी के खिलाफ शिकायत

    भोपाल,18 जून(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)। प्रदेश के पूर्व वित्त मंत्री राघवजी के विरुद्ध कथित दुराचार के मामले को हाईकोर्ट ने खारिज कर दिया है। हाईकोर्ट जस्टिस संजय द्विवेदी की एकलपीठ ने अपने आदेश में कहा है कि प्रदेश की राजनीति में वित्त मंत्री जैसा महत्तपूर्ण पोर्ट फोलियों रखने वाले व्यक्ति की छबि धूमिल करने के लिए प्रतिद्वंदियों ने दबाव डालकर ये प्राथमिकी दर्ज कराई थी। इस प्रकरण में साफ तौर पर दुर्भावना के तथ्य पाए गए हैं। हाईकोर्ट ने भोपाल के हबीबगंज पुलिस थाने में दर्ज एफआईआर को खारिज करने के आदेश दिये है।


    पूर्व वित्त मंत्री राधव जी की ओर से दायर की गयी याचिका में भोपाल के हबीबगंज थाने में उनके खिलाफ धारा 377, 506 तथा 34 के तहत 7 जुलाई 2013 को दर्ज की गयी एफआईआर खारिज किये जाने की राहत चाही गयी थी। याचिकाकर्ता की ओर से तर्क दिया गया था कि शिकायत कर्ता ने कहा है कि वह 2010 में नौकरी के लिए विदिशा से भोपाल आया था। तब उन्हीं की अनुशंसा पर उसे सोम डिस्टिलरी के एकाऊंट विभाग में नौकरी मिली थी। अभियुक्त शेर सिंह चौहान ने उसे वित्तमंत्री राघवजी के चार इमली स्थित बी 19 बंगले के कर्मचारी आवास में रहने का मौका दिया था।


    शिकायतकर्ता ने अपने बयानों में कहा है कि उसने एक अन्य पीडि़त की मदद से वित्तमंत्री का छुपकर विडियों बनाया था। कथित तौर पर सहमति के साथ एकांत में अप्राकृतिक यौन करने का वीडियों उसने साजिश के तहत बनाया था जिसके आधार पर वह उन्हें ब्लैकमेल करना चाहता था । उसने यह भी स्वीकार किया कि उसने याचिकाकर्ता का सरकारी निवास मई 2013 में छोड़ दिया था। इसके लगभग तीन माह बाद उसने रिपोर्ट दर्ज करवाई। शिकायतकर्ता साल 2010 से 2013 तक याचिकाकर्ता के सरकारी निवास में रहता था, इस दौरान उसने किसी प्रकार की कोई शिकायत नहीं की। राजनीतिक प्रतिद्वंदियो के इशारे तथा आपसी रंजिश के कारण शिकायतकर्ता ने यह एफआईआर दर्ज कराई है।


    एकलपीठ ने अपने आदेश में कहा है कि उक्त याचिका साल 2016 से लंबित है और न्यायालय का अभिमत है कि अपराधिक मामले में अभियुक्त को ट्रायल का सामना करना चाहिये। न्यायालय के आदेश है कि अपराधिक मामला दुर्भावना व निजी रंजिश के कारण दर्ज करवाया जाता है तो एफआईआर निरस्त की जा सकती है। इस प्रकरण में अपराधिक कार्रवाई से स्पष्ट है कि दुर्भावना के कारण प्राथमिकी दर्ज कराई गयी है। प्रदेश में सबसे लंबे समय तक वित्तमंत्री रहने वाले महत्वपूर्ण व्यक्ति की छबि धूमिल करने के लिए प्रतिद्वंदियों के इशारे पर शिकायत दर्ज कराई गई थी। इसी के आधार पर न्यायालय ने एफआईआर निरस्त करने के आदेश दिये।

    गौरतलब है कि राघवजी भाई के वित्त मंत्री रहते हुए तीन सालों तक भारत सरकार जीएसटी लागू नहीं कर पाई थी। उन्होंने इस मसले पर हर बैठक में जीएसटी की खामियों की ओर सरकार का ध्यान आकर्षित कराया था। बताते हैं कि इसके बाद जो अंतर्राष्ट्रीय वित्तीय संस्थाएं जीएसटी लागू करने के लिए भारत सरकार पर दबाव बना रहीं थीं उन्हीं के इशारे पर राघवजी को राह से हटाने के लिए ये मामला दर्ज कराया गया था। मध्यप्रदेश को वित्तीय दुर्दशा से बाहर लाकर ऊंचाईयों पर ले जाने वाले राघवजी को पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती के कार्यकाल में ये विभाग सौंपा गया था।इसके बाद से ही कर्ज में डूबे मध्यप्रदेश को दुनिया भर की वित्तीय संस्थाओं से मदद मिलनी शुरु हो गई। बाद में बाबूलाल गौर और शिवराज सिंह चौहान ने भी उनकी उल्लेखनीय सेवाओं के लिए उन्हें ही वित्तीय प्रबंधन की जवाबदारी सौंपी। बताते हैं कि ये मामला सामने आने के बाद जीएसटी लागू करने में आ रही बड़ी अड़चन समाप्त हो गई और तभी से राज्यों को वित्तीय संकटों से जूझना पड़ रहा है।

  • कोरोमंडल रेल हादसे की वजह उजागरःअश्विनी वैष्णव

    कोरोमंडल रेल हादसे की वजह उजागरःअश्विनी वैष्णव

    बालासोर 13 जून(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर) । केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा है कि विगत 2 जून को ओडिशा में हुए ट्रेन हादसे (Odisha Train Accident) की मूल वजह का पता चल गया है। इस बात का पता लगा लिया गया है कि हादसा क्यों हुआ।


    अश्विनी वैष्णव ने कहा, “जांच पूरी हो गई है। रेलवे सेफ्टी कमिश्नर जल्द रिपोर्ट देंगे। जल्द सारे तथ्य सामने आएंगे। यह साफ है कि रूट कॉज का पता चल गया है। जल्द ही सच सबके सामने लाया जाएगा। रेलवे सुरक्षा आयुक्त ने मामले की जांच की है। जांच रिपोर्ट आने दीजिए। हमने घटना के कारणों और इसके लिए जिम्मेदार लोगों की पहचान कर ली है। यह इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग में बदलाव के कारण हुआ।” दरअसल, इस ट्रेन हादसे में 288 लोगों की मौत हुई है। एक हजार से अधिक लोग घायल हुए हैं।


    इस बीच सूत्रों के मिली जानकारी के अनुसार कोरोमंडल एक्सप्रेस ट्रेन सिग्नल में गड़बड़ी के चलते मालगाड़ी से टकराई थी। कोरोमंडल एक्सप्रेस को पहले आगे बढ़ने के लिए सिग्नल मिला फिर वापस ले लिया गया। अब यह गड़बड़ी तकनीकी खराबी के चलते हुई या इसमें किसी इंसान की भागीदारी थी इसकी जांच की गई है।
    गौरतलब है कि 2 जून की शाम करीब 7 बजे हाल के वर्षों में सबसे बड़ा रेल हादसा हुआ था। हादसे में तीन ट्रेनें (दो यात्री ट्रेन और एक मालगाड़ी) शामिल थी। प्रारंभिक रिपोर्ट के अनुसार कोरोमंडल एक्सप्रेस बहानागा बाजार स्टेशन के पास ट्रैक पर पहले से खड़ी मालगाड़ी से टकरा गई थी। इसके चलते कोरोमंडल एक्सप्रेस के डिब्बे पटरी से उतर गए थे। ये डिब्बे दूसरे ट्रैक पर चले गए थे जिसपर बेंगलुरु-हावड़ा सुपरफास्ट एक्सप्रेस तेज रफ्तार से आ रही थी। इसने पटरी पर मौजूद डिब्बों को टक्कर मार दी। दोनों पैसेंजर ट्रेनों के 17 डिब्बे पटरी से उतर गए थे।


    रेल दुर्घटना ओड़िशा के बालासोर और भद्रक स्थानों के बीच में पड़ते बहानगा नामक स्थान पर हुआ ।कोरामंडल एक्सप्रेस ट्रेन को उस स्टेशन पर रूकना नहीं था, इसको ग्रीन सिग्नल दे दिया गया, ट्रेन के नज़दीक आने पर ग्रीन सिग्नल वापिस ले लिया गया और एक्सप्रेस ट्रेन को लूप लाईन की तरफ़ मोड़ भी दिया गया जबकि लूप लाईन पर पहले ही 2 माल गाडियां खड़ीं थी । कोरामंडल एक्सप्रेस ट्रेन पूरी स्पीड में थी और माल गाड़ी से टक्कर इतनी जोर से हुई कि कोरामंडल एक्सप्रेस का इंजन और कई बोगियाँ माल गाड़ी के ऊपर चढ़ गई और और पास से गुजर रही अप लाईन पर गिर गई । थोड़ी ही देर में अप लाईन पर आ रही बंगलौर हावड़ा दुरंतो ट्रेन रेलवे लाइन पर गिरी हुई बोगियों से टकरा गई ।


    2012 में एक सुरक्षा प्रणाली कवच विकसित कर ली गई थी जिसमें गाड़ियों के आमने सामने आने पर भी गाड़ियों में टक्कर नहीं होती और गाड़ियाँ अपने आप रूक जाती हैं । आज के समाचारों के अनुसार आज भी भारतीय रेलवे के 19 संभागों में से सिर्फ़ एक संभाग ( सिकंदराबाद) में लगभग 1200 किलोमीटर रेल ट्रैक पर यह कवच नामक प्रणाली काम कर रही है । देश में रेलवे के पास 13215 रेलवे इंजन हैं जिनमें से सिर्फ़ 65 इस प्रणाली से लैस हैं । जानकारों का कहना है कि अगर कवच प्रणाली लगी होती तो दुरंतो ट्रेन का इंजन 400 मीटर पहले ही रूक जाता और जान माल का नुक़सान बहुत कम होता ।


    लगभग एक साल पहले 4मई को सिकंदराबाद संभाग में कवच प्रणाली का परीक्षण हुआ था जिसमें रेलमंत्री अश्विन वैष्णव ने भी भाग लिया था और परीक्षण सफल रहने पर रेलमंत्री ने कवच प्रणाली से रेल इंजनों को लैस करने की घोषणा की थी परन्तु एक वर्ष में सिर्फ़ 65 रेल इंजन ही इससे लैस किए जा सके । रेलवे के सरकारी अधिकारी यदि यात्री और रेलवे की संपत्ति की सुरक्षा को अपनी प्राथमिकता में लेते तो ये हादसा नहीं होता ।ओडिशा में ट्रेन इसलिए टकराई क्योंकि वह गलत ट्रैक पर चली गई थी, लेकिन उसे गलत ट्रैक पर भेजा किसने? क्या कोई आदमी ट्रैक चेंज करने के लिए नियुक्त होता है जिसने लापरवाही की?

  • सिख कत्लेआम के आरोपी कमलनाथ जेल जाएंगेःसारंग

    सिख कत्लेआम के आरोपी कमलनाथ जेल जाएंगेःसारंग

    भोपाल,21मई(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)। श्रीमती इंदिरा गांधी की हत्या के बाद 1984 के सिखों के कत्लेआम के आरोपी कमलनाथ को जल्दी ही सजा पड़ जाएगी। सीबीआई कोर्ट में दूसरे अभियुक्त जगदीश टाईटलर के खिलाफ आरोप पत्र प्रस्तुत हो चुका है। प्रदेश सरकार के चिकित्सा शिक्षा मंत्री विश्वास सांरग ने प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ को लेकर कांग्रेस नेतृत्व से सवाल किया है कि क्या, कांग्रेस सिख दंगों के आरोपी के नेतृत्व में मध्यप्रदेश विधानसभा के चुनाव लड़ेगी? यह बात भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश कार्यालय में रविवार को पत्रकार-वार्ता के दौरान कही।


    श्री सारंग ने पूरे घटनाक्रम का उल्लेख करते हुए कहा कि इस देश के इतिहास में 1984 का सिख कत्लेआम काले धब्बों में से एक है। तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के हत्या के बाद कांग्रेस के नेताओं ने सिख भाई बहनों का कत्लेआम किया था। हजारों भाई बहन उस कत्लेआम में प्रभावित हुए थे। सबसे दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति यह थी कि उस कत्लेआम में जिन्होंने भीड़ का नेतृत्व किया था वह कांग्रेस के नेता थे। विशेष रूप से दिल्ली में जो बड़े स्तर पर कत्लेआम किया गया था उसमें तीन कांग्रेस के नेताओं का हिस्सा लेना अलग अलग विषय पर सबूत के साथ जनता के सामने प्रस्तुत हुआ था। एक सज्जन कुमार दूसरे नं पर जगदीश टाईटलर और तीसरे कमलनाथ थे चौथे नेता इस दुनिया में नहीं हैं। यह तीन लोगों का नाम बहुत ही प्रमुखता से उस समय की घटनाओं में लिया गया था।

    नानावटी आयोग एवं जांच एजेंसी के कारण सज्जन जेल में, टाईटलर की बारी
    श्री सारंग ने कहा कि सन् 2000 के बाद इस पूरे विषय पर नानावटी आयोग ने जांच की और इसके बाद सीबीआई में यह मामला गया। परंतु वहीं दुर्भाग्य यह हुआ कि 2004 में कांग्रेस की सरकार आई और उसने इस मामले में लीपा-पोती कर दी और किसी दोषी पर कोई कार्यवाही नहीं हुई। 2014 के बाद इस पूरे मामले में जांच एजेंसियों ने काम किया और उसका परिणाम निकला कि सज्जन कुमार जेल में हैं और उन्हें उम्रकैद की सजा सुनाई गई है। कल भी सीबीआई कोर्ट ने इस पूरे मामले में जिस दूसरे कांग्रेस के बड़े नेता का नाम आता है जगदीश टाईटलर का, उनके खिलाफ भी जार्चशीट प्रस्तुत की है और वो भी जल्द ही जेल में होंगे। तीसरा नाम कमलनाथ है, निश्चित ही आने वाले समय में जो इस पूरे मामले में दोषी हैं, उनपर भी कार्यवाही होगी ऐसी उम्मीद है। जांच एजेंसी अपना काम कर रही हैं।

    गवाहों की किताब में कमलनाथ का जिक्र
    उन्होंने कहा की जो बातें में तथ्य के रूप में बोल रहा हॅू। यह केवल हमने नहीं बोला अलग-अलग स्तर पर इस पूरे मामले में जो चश्मदीद गवाह हैं, उन्होंने भी विभिन्न स्तरों पर अलग-अलग किताबों में इन दंगों को लेकर वास्तविकता का जिक्र किया है। श्री सारंग ने तत्कालीन क्राइम रिपोर्टर संजय सूरी की बात का जिक्र किया है कि उस दौरान वह गुरूद्वारा रकाबगंज में स्वयं उपस्थित थे। उस समय वहां 4-5 हजार की भीड़ का नेतृत्व कमलनाथ कर रहे थे और उन्होंने उस गुरूद्वारे में पानी की सेवा करने वालो को कमलनाथ के इशारे पर जिंदा जलाया गया था। इस बात का जिक्र एच.एस. फुल्का ने भी अपनी किताब में किया था।

    सिख समाज के विरोध के कारण कमलनाथ को पंजाब प्रभारी पद से हटाया
    कमलनाथ को लेकर सिख समाज में यह बात है कि उन्होंने इस समय सिख दंगों का नेतृत्व किया था। कमलनाथ को जब 2016 में पंजाब का प्रभारी बनाया गया था, तो इसी बात का विद्रोह पंजाब में हुआ था और कांग्रेस नेतृत्व को उन्हें तत्काल प्रभाव से प्रभारी के पद से हटाना पड़ा। उस समय यह बात स्थापित हुई थी कि यदि एक नेता सिख कत्लेआम का दोषी है तो फिर वह राजनीतिक क्षेत्र में काम कैसे कर सकता है। इसी तरह विगत दिनों इंदौर में एक बड़े कीर्तन करने वाले सिख संत मनप्रीत कनपुरिया जब इंदौर पहुंचे थे, तो उन्हांने भी इस चींज का विरोध किया था कि जो व्यक्ति सिख दंगों का दोषी है, वह सिख गुरूद्वारे में या सिख कीर्तन में, गुरू के प्रकाश पर्व में कैसे आ सकता है। यह सब बातें आज जनता के बीच में हैं, दो अभियुक्त जिनकों कांग्रेस सरकार ने 1984 से लेकर अभी तक बचाने का काम किया। चाहे वह सज्जन कुमार हों या जगदीश टाईटलर हों जांच एजेंसियों की तत्परता के कारण उनको सजा मिलना निश्चित हो चुका है। सज्जन कुमार जेल में हैं और और जगदीश टाईटलर को भी जल्दी जेल में जाना होगा, तीसरे अभियुक्त जो कि हर तरह से उनका नाम स्थापित हो चुका है कि वह सिख दंगों में शामिल थे, मैं कांग्रेस के नेतृत्व से यह पूछना चाहता हॅू कि जो सिख कत्लेआम का अभियुक्त है, जिन्होंने सिख कत्लेआम किया। क्या, उनके नेतृत्व में कांग्रेस मध्यप्रदेश विधानसभा का चुनाव लड़ेगी। कांग्रेस को इस बात का जवाब देना होगा कि जो व्यक्ति सिख कत्लेआम में स्वयं सामने खड़े होकर सिखों के कत्लेआम का दोशी है, जिसके दामन पर सिख दंगों के दाग हैं, क्या वह कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष होने के लायक हैं।

    सिख समाज की उम्मीद तीसरे दोषी कमलनाथ को भी मिले सजा
    श्री सारंग ने कहा कि सिख परिवार इस बात की अपेक्षा करते हैं कि तीसरे अभियुक्त कमलनाथ ने सिख दंगों के समय भीड़ का उकसाने का काम किया था, उन्हें भी सजा मिले। जब हम सार्वजनिक क्षेत्र या राजनीतिक क्षेत्र में काम करते हैं तो किसी भी राजनीतिक दल का यह दायित्व है कि उसके किसी नेता पर इस प्रकार के कत्लेआम के दाग हैं, तो तुरंत प्रभाव से उनपर कार्यवाही होनी चाहिए। अगर कांग्रेस नेतृत्व कमलनाथ को पद से नहीं हटाता है, तो इससे यह स्पष्ट होता है कि उस समय के सिख कत्लेआम में कांग्रेस नेतृत्व का पूरा आशीर्वाद था और उसको करने के पीछे कांग्रेस नेतृत्व की मंशा थी। संपूर्ण देश का सिख समाज और पीड़ित परिवार वह इस बात का इंतजार कर रहे हैं कि जल्द से जल्द कमलनाथ को भी इसकी सजा मिलेगी।

  • कलु रैकवार के हत्यारों के घर तोड़ने की मांग में प्रदर्शन

    कलु रैकवार के हत्यारों के घर तोड़ने की मांग में प्रदर्शन

    दमोह,17 मई(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)। दमोह के मछली ठेकेदार कलू रैकवार की हत्या के सभी आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया है। पुलिस अधीक्षक राकेश कुमार सिंह ने पत्रकार वार्ता में कहा कि पुलिस को सीधी चुनौती देने वाले इस कांड का राज फाश कर दिया गया है। कलू के बेटे समान बाडी गार्ड विक्की वाल्मिकी, शिवा रैकवार, अजय उर्फ अज्जू अहिरवार, ऐफाज खान समेत आठ आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। चर्चा के बहाने कमरे में ले जाकर कलु पर कतन्ने और गोलियों से वार किए जाने के षड़यंत्र में प्रयुक्त वाहन, मोबाईल फोन और कट्टे भी बरामद कर लिए गए हैं। कलु रैकवार कई धार्मिक और सामाजिक गतिविधियां भी चलाते थे और उनसे जुड़े कई समर्थकों ने प्रदर्शन करके हत्यारों के घर तोड़े जाने की मांग की है।
    पुलिस के अनुसार विगत छह मई को मछली ठेकेदार, कलु रैकवार पिता श्री कन्हैया रैकवार,उम्र लगभग 45 साल,निवासी फुटेरा वार्ड नंबर 5 को पुरानी अदावट के चलते सौरभ वंशवर्ती, दीपक वंशवर्ती, और उनके साथियों ने गोलियां मारी थीं । हत्या सुनिश्चित करने के लिए तेज धारदार कतन्ने से चेहरे, गर्दन और सीने पर कई वार किए गए थे। इससे घटना स्थल पर ही उसकी मौत हो गई थी। जिला अस्पताल में डाक्टरों ने उसे मृत घोषित किया था। पुलिस ने भारी सुरक्षा के बीच शव का पोस्ट मार्टम कराया था। पुलिस ने अपराध क्रमांक 393 । 2023 में धारा 302,34 एवं ता.हिं. 25 । 27 आर्म्स एक्ट के तहत अपराध पंजीबद्ध करके विवेचना शुरु की थी।


    पुलिस अधीक्षक राकेश कुमार सिंह ने बताया कि सूचना के आधार पर आरोपियों तक पहुंचने के लिए पुलिस ने एसआईटी का गठन किया था। आरोपियों की गिरफ्तारी पर दस दस हजार रुपए का इनाम भी घोषित किया गया था। एसडीओपी हटा वीरेन्द्र सिंह ठाकुर के नेतृत्व में कोतवारी इंस्पेक्टर विजय राजपूत की टीमों ने हरियाणा, दिल्ली, इंदौर, भोपाल, जबलपुर, कटनी में पुलिस टीम भेजकर आरोपियों और उनके रिश्तेदारों की तलाश की थी।
    पुलिस की साईबर टीम को दो आरोपियों के भोपाल में होने की सूचना मिली थी जिसके आधार पर भोपाल पुलिस से सहयोग लिया गया और दीपक वंशवर्ती व सौरभ वंशवर्ती को भोपाल से धर दबोचा गया। दो आरोपियों शिवा और आशीष रैकवार को पुलिस पहले ही जबलपुर से गिरफ्तार कर चुकी थी।


    पुलिस ने अब तक सौरभ पिता महेश वंशवर्ती, उम्र 25 साल ,दीपक पिता महेश वंशवर्ती उम्र 30 साल, राहुल पिता संतोष यादव उम्र 26 साल, मत्था उर्फ मथुरा पिता बाबूलाल वंशकार उम्र 20 साल, अजय उर्फ अज्जू पिता ईश्वर प्रसाद अहिरवार उम्र 30 साल, निक्की उर्फ नितिन पिता नत्थू बाल्मिकी उम्र 33 साल, शिवा पिता श्री राजेन्द्र रैकवार उम्र 31 साल, अहफाज पिता इलयास खाना उम्र 20 साल, एवं अन्य सहयोगियों को भी हिरासत में लिया है।

  • छत्रपति संभाजी पर नृशंसता ने जगाई मुगलों से नफरत

    छत्रपति संभाजी पर नृशंसता ने जगाई मुगलों से नफरत

    -संजय गोविंद खोचे-

    सम्भाजी राजे, शिवाजी महाराज के ज्येष्ठ पुत्र थे, संभाजी का जन्म 14 मई 1657 में हुआ था। माता का देहांत उनकी अल्प आयु में ही हो गया और फिर उनका पालन पोषण दादी जीजाबाई ने किया। 16 जनवरी सन 1681 ई. को सम्भाजी महाराज का विधिवत राज्याभिषेक हुआ और वो हिंदवी स्वराज्य के दूसरे छत्रपति बने। शम्भाजी बहुत बड़े विद्वान् और धर्मशास्त्रो के ज्ञाता थे, उन्होंने 14 वर्ष की उम्र में ही संस्कृत में कई ग्रन्थ लिख दिये थे।

    विदेशी पुर्तगालियों को हमेशा उनकी औकात में रखने वाले सम्भाजी को धर्म परिवर्तन कर मुस्लिम बन गए हिन्दुओं का शुद्धिकरण कर उन्हें फिर से स्वधर्म में शामिल करने वाले, एक ऐसे राजा जिन्होंने एक स्वतंत्र विभाग की ही स्थापना इस उद्देश्य हेतु की थी।

    छत्रपति सम्भाजी महाराज ने अपने जीवन में 140 युद्ध लड़े जिनमे एक में भी उनकी हार नही हुई, लेकिन आखिर में धोखे से उन्हें पकड़ कर मुग़लो द्वारा कैद कर लिया गया। औरँगजेब ने उन्हें इस्लाम स्वीकार करने के लिये अनेको भयंकर अमानवीय यातनाए दी। उनकी जुबान काट ली गई और आँखे निकाल ली, लेकिन उन्होंने सनातन हिन्दू धर्म छोड़कर इस्लाम स्वीकार नही किया। क्रोधित औरंगजेब ने अपने सामने ही इंसानों की खाल उतारने में प्रवीण जल्लादों को बुलाया और सम्भाजी की नख से शिख तक खाल उतरवा दी। उस दृश्य को देखने वाले प्रत्यक्षदर्शी मुगल सरदारों के हवाले से इतिहासकारों ने लिखा है कि खाल उतर जाने के बाद औरंगजेब ने उन्हें आसान मौत देने का प्रस्ताव यह कहते हुए दिया कि वह इस हालत में इस्लाम कबूल कर लें तो उन्हें आसान मौत दे दी जाएगी, लेकिन सम्भाजी ने फिर एक बार उसे ठुकरा दिया।

    इसके बाद उनके खाल उतरे शरीर को रोजाना सुबह नीबूरस में नमक और मिर्च मिलाकर नहलाया जाता था। सम्भाजी की पीड़ा को शब्द देने वाले एक इतिहासकार के अनुसार पहले दो दिन सम्भाजी तथा कलश स्नान के वक्त खूब चीखते थे, लेकिन तीसरे दिन से उन्होंने पीड़ा पर काबू पा लिया। औरंगजेब को जब यह जानकारी मिली तो वह आगबबूला हो गया और उसने एक हाथ कटवा दिया, फिर भी सम्भाजी ने उफ नहीं की तो उनका पैर काट दिया गया, आखिरकार करीब पन्द्रह दिन तक नीबूरस में मिले नमक मिर्च के स्नान के बाद सम्भाजी ने 11 मार्च 1689 को कैद में ही दम तोड़ दिया।

    मराठा इतिहासकारों के अलावा यूरोपियन इतिहासकार डेनिस किनकैड़ ने भी अपने लेखन में इस प्रकरण की पुष्टि की है। इतनी भयंकर यातनाओं के बावजूद अपने धर्म पर टिके रहने और इस्लाम के बदले मृत्यु का वरण करने के कारण उन्हें धर्मवीर भी कहा गया है। औरंगजेब को लगता था कि छत्रपति संभाजी के समाप्त होने के पश्चात् हिन्दू साम्राज्य भी समाप्त हो जायेगा या जब सम्भाजी मुसलमान हो जायेगा तो सारा का सारा हिन्दू मुसलमान हो जायेगा, लेकिन वह नहीं जनता था कि वह वीर पिता का धर्म वीर पुत्र विधर्मी होना स्वीकार न कर मौत को गले लगाएगा। वह नहीं जानता था कि सम्भाजी किस मिट्टी के बना हुए हैं।

    सम्भाजी मुगलों के लिए रक्त बीज साबित हुये, सम्भाजी की मौत ने मराठों को जागृत कर दिया और सारे मराठा एक साथ आकर लड़ने लगे। यहीं से शुरू हुआ एक नया संघर्ष जिसमें इस जघन्य हत्याकांड का प्रतिशोध लेने के लिए हर मराठा सेनानी बन गया और अंत में मुग़ल साम्राज्य कि नींव हिल ही गयी और हिन्दुओं के एक शक्तिशाली साम्राज्य का उदय हुआ।

    औरंगजेब दक्षिण क्षेत्र में मराठा हिंदवी स्वराज्य को खत्म करने आया था, लेकिन शिवाजी महाराज और शम्भाजी महाराज की रणनीति और बलिदान के कारण उसका ये सपना मिट्टी में मिल गया और उसको दक्षिण के क्षेत्र में ही दफन होना पड़ा।
    आज का इतिहास सच में सिर्फ महाराष्ट्र में रहने वाले मराठो के बीच में ही सिमित रह गया, ऐसा मुझे इअलिये कहना पड़ा की मराठो को छोड़ कर बाकी लोगो ये भी नहीं मालूम की धर्मवीर छत्रपति संभाजी राजे कौन थे।
    (धर्मवीर छत्रपति संभाजी राजे भोसले) या शम्भाजी (1657-1689) मराठा सम्राट और छत्रपति शिवाजी के उत्तराधिकारी। उस समय मराठाओं के सबसे प्रबल शत्रु मुगल बादशाह औरंगजेब बीजापुर और गोलकुण्डा का शासन हिन्दुस्तान से समाप्त करने में उनकी प्रमुख भूमिका रही।

    सम्भाजी अपनी शौर्यता के लिये काफी प्रसिद्ध थे। सम्भाजी ने अपने कम समय के शासन काल मे 140 युद्ध किये और इसमे एक प्रमुख बात ये थी कि उनकी सेना एक भी युद्ध मे पराभूत नहीं हुई। इस तरह का पराक्रम करने वाले वह शायद एकमात्र योद्धा होंगे। उनके पराक्रम की वजह से परेशान हो कर दिल्ली के बादशाह औरंगजेब ने कसम खायी थी के जब तक छत्रपती संभाजी पकडे नहीं जायेंगे, वो अपना किमोंश सर पर नहीं चढ़ाएगा।

    इनको मुसलमान बनाने के लिए औरंगजेब ने कई कोशिशें की। किन्तु धर्मवीर छत्रपति संभाजी महाराज और कवि कलश ने धर्म परिवर्तन से इनकार कर दिया। औरंगजेब ने दोनों की जुबान कटवा दी, आँखें निकाल दी किन्तु शेर छत्रपति शिवाजी महाराज के इस सुपुत्र ने अंत तक धर्म का साथ नहीं छोड़ा। उस समय 11 मार्च 1689 को हिन्दू नववर्ष का दिन था जब औरंगजेब ने दोनों के शरीर के टुकडे कर के हत्या कर दी। किन्तु ऐसा कहते है की हत्या पूर्व औरंगजेब ने छत्रपति संभाजी महाराज से कहा के मेरे 4 पुत्रों में से एक भी तुम्हारे जैसा होता तो सारा हिन्दुस्थान कब का मुग़ल सल्तनत में समाया होता। जब छत्रपति संभाजी महाराज के टुकडे तुलापुर की नदी में फेंकें गए तो उस किनारे रहने वाले लोगों ने वो इकठ्ठा कर के सिला के जोड़ दिए (इन लोगों को आज ” शिवले ” इस नाम से जाना जाता है) जिस के उपरांत उनका विधिपूर्वक अंत्यसंस्कार किया। औरंगजेब ने सोचा था की मराठी साम्राज्य छत्रपति संभाजी महाराज के मृत्यु पश्चात ख़त्म हो जाएगा। छत्रपति संभाजी महाराज के हत्या की वजह से सारे मराठा एक साथ आकर लड़ने लगे। अत: औरंगजेब को दक्खन में ही प्राणत्याग करना पड़ा। उसका दक्खन जीतने का सपना इसी भूमि में दफन हो देश धरम पर मिटने वाला।

    शेर शिवा का छावा था ।।
    महापराक्रमी परम प्रतापी। एक ही शंभू राजा था ।।
    तेज:पुंज तेजस्वी आँखें। निकलगयीं पर झुकी नहीं ।।
    दृष्टि गयी पर राष्ट्रोन्नति का। दिव्य स्वप्न तो मिटा नहीं ।।
    दोनो पैर कटे शंभू के। ध्येय मार्ग से हटा नहीं ।।
    हाथ कटे तो क्या हुआ?। सत्कर्म कभी छुटा नहीं ।।
    जिव्हा कटी, खून
    शिवाजी का बेटा था वह। गलत राह पर चला नहीं ।।
    वर्ष तीन सौ बीत गये अब। शंभू के बलिदान को ।।
    कौन जीता, कौन हारा। पूछ लो संसार को ।।
    कोटि कोटि कंठो में तेरा। आज जयजयकार है ।।
    अमर शंभू तू अमर हो गया। तेरी जयजयकार है ।।
    मातृभूमि के चरण कमलपर। जीवन पुष्प चढाया था ।।
    है दुजा दुनिया में कोई। जैसा शंभू राजा था।।

    #संजय_गोविंद_खोचे

  • पुलिस के कानूनों का भ्रम दूर करेगा नया ग्रंथ

    पुलिस के कानूनों का भ्रम दूर करेगा नया ग्रंथ

    एडीजी अनुराधा शंकर तथा पुलिस मुख्यालय से से‍वानिवृत्‍त लायब्रेरियन डॉ फरीद बज्मी ने पुलिस रेगुलेशन एक्ट की अपडेट पुस्तक का किया विमोचन

    भोपाल,09 मई (प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)। अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक प्रशिक्षण श्रीमती अनुराधा शंकर तथा पुलिस मुख्यालय से सेवानिवृत्‍त लायब्रेरियन डॉ फरीद बज्मी ने आज 09 मई 2023 मंगलवार को पुलिस रेगुलेशन एक्‍ट की अपडेट पुस्‍तक का विमोचन किया।

     उल्लेखनीय है कि पुलिस रेगुलेशन एक्ट में समय समय पर संशोधन किए जाते रहे है। उन संशोधनों को शामिल करते हुए पुलिस रेगुलेशन को अद्यतन किए जाने की आवश्यकता लंबे समय से महसूस की जा रही थी। इस कार्य हेतु स्वतः पहल पुलिस मुख्यालय के लायब्रेरियन के रूप में पदस्थ रहे उप पुलिस अधीक्षक डॉ. फरीद बज्मी ने की। उन्होंने अथक प्रयासों के साथ इन सभी संशोधनों को समेकित करते हुए पुस्तक के रूप में तैयार किया जो कि पुलिस विभाग के प्रत्येक कर्मचारी के लिए यह नवीनतम संशोधनों सहित एक प्रमाणिक एवं उपयोगी दस्तावेज सिद्ध होगा। इस कार्य को पूरा करने में बज्मी जी को 4 वर्ष लगे। उन्होंने गंभीर रूप से अस्वस्थ होने के बावजूद पूर्व में प्रकाशित एक्ट की सभी त्रुटियां दूर करने के साथ –साथ पुलिस एक्ट में बने नए कानूनों को भी इस पुस्तक में संकलित किया। बज्मी के गंभीर रूप से अस्वस्थ्य होने के कारण अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक श्रीमती अनुराधा शंकर ने पालीवाल अस्‍पताल जाकर उनका कुशलक्षेम जाना। इसके साथ ही इस पुलिस रेगुलेशन एक्ट की नवीनतम किताब का विमोचन भी फरीद बज्मी के हाथों कराया। अपनी इस अथक प्रयासों को सफल होता देख डॉ फरीद बज्मी काफी प्रसन्न हुए और उन्होंने एडीजी को बहुत धन्यवाद दिया।

    इस अवसर पर डिप्टी डायरेक्टर मध्यप्रदेश पुलिस अकादमी भौंरी श्री मलय जैन, एडिशनल डीसीपी श्री महावीर मुजाल्दे, एआईजी इरमीन शाह सहित फरीद बज्मी के परिवार के सदस्य भी उपस्थित थे।

  • जीपीएफ के धन से जेल में चला सट्टे का शेयर बाजार

    जीपीएफ के धन से जेल में चला सट्टे का शेयर बाजार

    उज्जैन,(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर) केंद्रीय भैरवगढ़ जेल की पूर्व अधीक्षक उषा राज, फर्जी मुंशी जगदीश परमार आदि का एक गिरोह जेल में समानांतर अर्थव्यवस्था चला रहा था.जीपीएफ के धन से काली कमाई के लिए इस गिरोह ने सट्टे का कारोबार चला रखा था। ऊषा ने जगदीश को जेल के कैदियों को तंबाकू, बीड़ी, सिगरेट, हशीश, गांजा, शराब और मटन मोटी कीमत पर बेचने का ठेका भी दिया था। तत्कालीन जेल अधीक्षक के संरक्षण में, जगदीश का वास्तव में जेल मामलों का पूरा कंट्रोल था एक तरह से वही पूरा जेल अधीक्षक बन गया था।
    उषा और जगदीश दोनों वर्तमान में क्रमशः जिला जेल, इंदौर और महिदपुर उप-जेल में बंद हैं। वे शुरू में केंद्रीय भैरवगढ़ जेल में अपनी शाखाओं को फैलाने वाले 15 करोड़ रुपये के डीपीएफ/जीपीएफ गबन मामले में मुख्य आरोपी के रूप में दोषी पाए गए हैं। 15 दिन की पुलिस रिमांड के दौरान इनके खिलाफ बंदियों से रंगदारी के दो और मामले भी दर्ज किए गए हैं।
    इस बीच, शहर का एक व्यवसायी, जो जेल में एक विचाराधीन कैदी था और हाल ही में रिहा हुआ था, ने बताया कि जेल में सक्रिय कॉकस ने अपनी आपराधिक शैली से जेल को नरक में बदल दिया था। जगदीश बलात्कार के आरोप में लगभग 18 महीने तक वहीं रहा था, हालांकि बाद में उसे सबूतों के अभाव में बरी कर दिया गया था। सितंबर 2021 में जब उषा राज ने पदभार संभाला, तो उसने यू ट्यूब समाचार चैनल रिपोर्टर होने के नाते धीरे-धीरे उनके साथ निकटता अर्जित की।
    बाद में उषा और जगदीश दोनों की करीबियां बढ़ती गईं । सूत्रों से पता चला है कि बाहर से जेल प्रहरियों के जरिए लाए गए तंबाकू, बीड़ी, सिगरेट, चरस, गांजा, शराब और मटन को बंद कर दिया गया . दरअसल, जगदीश को ऐसी प्रतिबंधित सामग्री का 40 हजार रुपए प्रतिदिन के हिसाब से ठेका मिला था। वह इन सामानों को अपने साथियों के जरिए जरूरतमंद कैदियों को बेचता था। बाजार में 5 रुपये में मिलने वाली तंबाकू की थैली 500 रुपये में बिक रही थी। इसी तरह बाजार में 200 रुपये में मिलने वाली मीडियम रेंज की व्हिस्की का एक चौथाई हिस्सा 2 हजार रुपये में बिक रहा था।
    सूत्रों के मुताबिक अगर किसी के पास पर्याप्त पैसा होता तो सब कुछ जेल के अंदर उपलब्ध होता। कॉकस ने टेलीफोन एक्सचेंज चलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई जिसके लिए 6 मिनट के लिए 100 रुपये लिए गए। जगदीश कैदियों और जेल में आने वाले नए बंदियों की पारिवारिक पृष्ठभूमि खंगालने में माहिर था।इसी वजह से वह उन्हें अच्छी बैरक दिलवाने के एवज में खासा धन वसूलता था।शुरुआत में बंदियों को उन्हें लगभग 4×6 कक्षों में रखा जाता था जहां लगभग हवा या धूप नहीं होती थी। उषा ऐसे लोगों के इलाज के लिए अंदर पर्ची भेजती थी जिन्हें बाद में चप्पलों से पिटवाकर बैरक से घसीट कर कोठरियों में ले जाया जाता था। जेल नियमों का सरेआम माखौल उड़ाते हुए जगदीश शाम के बाद भी अपना मोबाईल लेकर जेल के भीतर आता जाता रहता था। जेल महानिदेशक जेल अरविंद कुमार ने स्वीकार किया कि ऐसी सभी बातें संज्ञान में हैं. उन्होंने कहा, ‘दरअसल हमने पूरे मामले की जांच के लिए एक उच्च स्तरीय कमेटी का गठन किया है, लेकिन इससे पहले कि वे जेल जाते, डीपीएफ-जीपीएफ घोटाला सामने आ गया।’ उनके अनुसार, वे अनियमित तरीके से पैरोल देने संबंधी शिकायतों पर कार्रवाई कर रहे हैं। इसी तरह सेंट्रल जेल में लंबे समय से तैनात कुछ जेल कर्मचारियों के खिलाफ विभागीय जांच शुरू कर दी गई है. डीजी ने कहा कि उन्हें जल्द ही अन्यत्र स्थानांतरित कर दिया जाएगा।
    घोटाले की जांच कर रही एसआईटी के प्रमुख एएसपी इंद्रजीत बाकलवार ने कहा कि उषा राज के खिलाफ भ्रष्टाचार निरोधक अधिनियम के तहत मामला पहले ही दर्ज किया जा चुका है. उन्होंने कहा कि आवश्यक कार्रवाई करने के लिए आयकर विभाग को पत्र भेजे गए हैं।

  • जेल के 15 करोड़ गबन करने वाली अधीक्षक ऊषा राज बयानों से बचने अस्पताल में भर्ती

    जेल के 15 करोड़ गबन करने वाली अधीक्षक ऊषा राज बयानों से बचने अस्पताल में भर्ती

    अधीक्षक के पद से हटाते ही जेलकर्मियों के परिजनों ने फोड़े पटाखे, मनवारे ने लिया चार्ज

    उज्जैन (प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)। केंद्रीय जेल भैरवगढ़ लगातार सुर्खियों में बनी हुई है। वजह डीपीएफ घोटाले में जेल अधीक्षक उषाराज को हटाने पर दोपहर में जेलकर्मियों के परिजनों ने पटाखे फोडक़र खुशियां मनाई। वहीं गबन केस में नोटिसों के बाद भी बयान नहीं देने पर शाम को पुलिस उन्हें जबरन भैरवगढ़ थाने ले गई। इस दौरान प्रभारी जेल अधीक्षक हिमानी मनवारे ने चार्ज लेकर काम शुरू कर दिया।

    भैरवगढ़ जेल के 68कर्मचारियों के भविष्य निधि खाते से करीब १५ करोड़ रुपए का घोटाले में जांच के बाद डीजी अरविंद कुमार ने जेल अधीक्षक उषाराज को वित्तीय अनियमितता का दोषी मानते हुए पद से हटाने के आदेश दे दिए। पता चलते ही कर्मचारी के परिजनों ने जेल परिसर में पटाखे फोड़े और ढोल बजाते हुए मिठाई बांटकर खुशी मनाई। इसी दौरान नवागत प्रभारी जेल अधीक्षक हिमानी मनवारे जेल पहुंचीं और उषा राज से चार्ज लिया।

    वहीं गबन मामले में लगातार तीन नोटिस के बाद भी बयान नहीं देने पर टीआई प्रवीण पाठक, जितेंद्र भास्कर, एसआई बल्लू मंडलोई जेल पहुंचे। बावजूद शाम तक इंतजार के बाद भी उषा राज सहयोग के लिए तैयार नहीं हुई। नतीजतन जेल पहुंचे सीएसपी अनिल मौर्य ने महिला थाना प्रभारी रेखा वर्मा और उनकी टीम को बुलाया और उषा राज को हिरासत में लेकर थाने ले गए,जहां रात तक एएसपी इंद्रजीत बाकलवाल, मौर्य व टीम उनसे पूछताछ करते रहे।

    आदेश आते ही सुविधा छीनी

    जेल अधीक्षक उषाराज को तबादला का मुख्यालय में पदस्थ करने का आदेश आते ही सुबह से ही जेलर सुनील शर्मा, डिप्टी जेलर सुरेश गोयल मातहतों के साथ परिसर में जमा हो गए। बताया जाता है कि कर्मचारियों को शक था कि उषा राज गबन से संबंधित दस्तावेज और ऑफिस का सामान ले जा सकती है। इसलिए उन्हें रोकने के लिए वह तैनात हो गए थे।

    यहीं नहीं जेल अधीक्षक की स्थिति ऐसी थी कि उनके घंटी बजाने पर भी कोई कर्मचारी सुनने को तैयार नहीं था। इसे लेकर उन्होंने मीडिया के सामने आपत्ति भी जताई कहा गाड़ी छीनकर ड्राईवर व कंप्यूटर ऑपरेटर तक को हटा दिया।

    पटाखे फोडक़र बांटी मिठाई

    खास बात यह है कि किसी अधिकारी का तबादला होने पर मातहत स मान पूर्वक बिदा करते है, लेकिन जेल पर आज नजारा दूसरा ही था। यहां दोपहर में जेलकर्मियों के परिजन पहुंचे और जमकर पटाखे फोडऩे के बाद ढोल बजाकर मिठाई बांटी। प्रहरी गोर्वधन सिंह रघुवंशी के पुत्र नितिन ने बताया कि डीपीएफ घोटाले से कर्मचारियों के घर में मातम मना हुआ है। मेडम ने घोटाले के साथ ही काफी भ्रष्टाचार किया है इसलिए उन्हें हटाने पर खुशी मना रहे है।

    नई जेल अधीक्षक सचेत

    प्रभारी जेल अधीक्षक हिमानी मनवारे फिलहाल देवास में पदस्थ हैं। उन्हें भैरवगढ़ का अस्थाई रुप से अतिरिक्त चार्ज दिया गया है। मरवारे ने चार्ज लेने के बाद बताया कि उन्हें जेल के वर्तमान हालात की जानकारी है। मुख्यालय ने उन्हें सजग रहने का कहा है। जेल का निरक्षण कर आगे की रुपरेखा बनाएगी।

    डीपीएफ कांड : अब तक कब-क्या

    • १० मार्च : दो कर्मचारियों के राशि निकालने के आवेदन में एक ही आईआईएफसी कोड नंबर होने से ट्रैजरी ऑफिसर को शक हुआ। कलेक्टर ने जेल से रिकार्ड तलब किया। प्रथम दृष्टया१० करोड़ रुपए घोटाले का पता चलते ही कलेक्टर कुमार पुरुषोत्तम ने शासन व जेल डीजी को सूचना दी। रात १० बजे लेखा-जोखा संभालने वाला प्रहरी रिपूदमन घोटाला उजागर होने पर जेल अधीक्षक के सामने रोया और देर रात परिवार सहित फरार हो गया।
    • ११ मार्च : मामले में जिला कोषालय अधिकारी सुरेंद्र भामर ने भैरवगढ़ थाने में रिपूदमन के खिलाफ केस दर्ज कराया।
    • १३ मार्च : जेल डीआईजी मंशाराम पटेल सात सदस्यीय टीम के साथ भैरवगढ़ जेल पहुंचे,जांच शुरू।
    • १४ मार्च : प्रहरी शैलेंद्र सिकरवार व धर्मेद्र लोधी के खाते में १० करोड का ट्रांजेक्शन सामने आते ही फरार हुए,,घोटाले की राशि १४ करोड़ पहुंची।
    • १५ मार्च : जेल अधीक्षक को हटाने की मांग करते हुए कर्मचारी परिवार सहित अनशन पर बैठे। विधायक महेश परमार ने विधानसभा में प्रश्र लगाकर गृहमंत्री को ज्ञापन सौंपा।
    • १६ मार्च : जांच रिपोर्ट जेल डीजी अरविंदकुमार के पास पहुंची।
    • १७ मार्च : डीजी ने जेल अधीक्षक उषाराज को वित्तीय अनियमितता के आरोप में पद से हटाने और मनवारे का प्रभारी बनाने के आदेश जारी किए।
    • १८ मार्च : जेलकर्मियों के परिजनों ने खुशियां मनाई, नई अधीक्षक ने चार्ज लिया, उषा राज हिरासत में ले ली गईं, पूछताछ के बाद उन्हें दूसरे दिन सुबह आने को कहा गया था लेकिन वे इंदौर के एक निजी अस्पताल में भर्ती हो गईं।
    • गौरतलब है कि ऊषा राज को अपने एक रिश्तेदार की हत्या करने के आरोप में सागर जेल की सजा काटनी पड़ी थी।लेकिन बाद में सबूतों के अभाव में वे बरी हो गईं। तत्कालीन जेल अधीक्षक लालजी मिश्र की कृपा से वे जेल की नौकरी में आ गईं और जेल विभाग की नारकीय परिपाटियों ने उन्हें प्रदेश की सबसे बड़ी जेल का अधीक्षक बना दिया। जेल विभाग ने उन्हें सुधरने का जो अवसर दिया था उसका उन्होंने बेजा लाभ उठाया और अरबों रुपयों की दौलत बनाई। रिश्तेदारों से अनबन ने उन्हें अलग थलग कर दिया। इस घटना के बाद जब वे देवास रोड स्थित एक रेस्टोरेंट में अपने किसी मित्र के साथ पहुंची थीं तो कुछ लोगों ने उनकी वीडियो फिल्म बना ली। इस पर उन्होंने आपत्ति की तो युवकों ने उन्हें पीट दिया। जिसकी शिकायत उन्होंने उज्जैन पुलिस से की है।
  • दमोह के जुझार गांव की सुरक्षा अब गांव वाले करेंगे

    दमोह के जुझार गांव की सुरक्षा अब गांव वाले करेंगे

    दमोह,2 मार्च। घरों और खलिहानों से कटकर आने वाले खाद्यान्न की सुरक्षा में पुलिस की नाकामी को देखते हुए दमोह के जुझार गांव में घरों की सुरक्षा का बीड़ा गांव वाले स्वयं उठा रहे हैं। यहां के एक किसान और प्रेस इंफार्मेशन सेंटर के संपादक ने अपने खाद्यानों की सुरक्षा करने की जवाबदारी गांव वालों को ही थमा दी है। इसके लिए उन्होंने कल 3 मार्च को अपने घर के बाहर एक आयोजन किया है जिसमें चाभी खो चुके ताले को काटकर गोदाम की सफाई का कार्य कराया जाएगा और फिर गांव के ही लोगों के सामने उसमें खाद्यान्न रखा जाएगा। इसके बाद ग्रामीणों और बच्चों को मिठाई वितरण किया जाएगा। इस आयोजन में शामिल होने के लिए जिले के कलेक्टर, पुलिस अधीक्षक,पत्रकारों और हिंडोरिया पुलिस को भी आमंत्रित किया गया है।

    प्रेस इंफार्मेशन सेंटर के कृषि फार्म के संचालक और पत्रकार आलोक सिंघई ने बताया कि पिछले साल उनके गांव स्थित घर से खाद्यान्न की बोरियां चोरी हो गईं थी। इसकी शिकायत हिंडोरिया पुलिस और तत्कालीन पुलिस अधीक्षक से भी की गई थी। पुलिस ने शिकायत मिलने पर छानबीन तो की लेकिन न तो अपराधियों को गिरफ्तार किया और न ही उनसे चोरी गया खाद्यान्न जब्त किया। इस बार जब खलिहानों से फसल कटकर गोदामों में आ रही है तब एक बार फिर खाद्यान्न की सुरक्षा का मामला गहरा गया है। इसे देखते हुए खाद्यान्न की सुरक्षा की जवाबदारी गांव के लोग स्वयं निभाने जा रहे हैं।

    उन्होंने बताया कि आज के इस आयोजन में गांव वालों के सामने ही ताले को तोड़कर गोदाम की सफाई कराई जाएगी और मिष्ठान्न वितरण किया जाएगा। इस संबंध में जिला प्रशासन और नवागत पुलिस अधीक्षक को भी सूचना भेजी गई है।

    इस कार्यक्रम का प्रसारण फेसबुक पर लाइव उपलब्ध रहेगा।

  • तांत्रिक ऊर्जा से चीन के सफाए का अनुष्ठान करेगा राष्ट्रीय सुरक्षा जागरण मंच

    तांत्रिक ऊर्जा से चीन के सफाए का अनुष्ठान करेगा राष्ट्रीय सुरक्षा जागरण मंच

    भोपाल,27 दिसंबर(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)। राष्ट्रीय सुरक्षा जागरण मंच के राष्ट्रीय महामंत्री गोलोक बिहारी राय ने कहा है कि देश में सामूहिक तांत्रिक क्रियाओं के जरिए चीन का खात्मा किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि विश्व में चीन दुष्ट शक्ति के रूप में स्थापित हुआ है। चीन सिर्फ विस्तारवादी नहीं है, बल्कि मानव सभ्यताओं के लिए ख़तरा है। चीन का अस्तित्व न सिर्फ विश्व- मानवता, वरन जीव-मात्र के लिए ख़तरा है । ये राष्ट्र हत्या, नृशंसता, क्रूरता, हिंसा, अनाचार, अत्याचार, पापाचार, अधर्म का केंद्र बन चुका है। वह जीव और प्रकृति के लिए भी ख़तरा है। इसलिए चीन का नाश, विश्व के लिए शुभ होगा।


    इसके लिए हमें उन सभी शक्तियों, विद्याओं, तंत्रों, प्रक्रियाओं, विधाओं और साधनों का समर्थन करना चाहिए जो चीन के लिए विनाशक हों। भारत सहित दुनिया के अनेक देशों में दुष्ट और नकारात्मक शक्तियों के विनाश के लिए महाविद्याओं का प्रयोग होता रहा है। प्राचीन भारत का पूर्वोत्तर इन विद्याओं का मुख्य केंद्र रहा है। देश के अनेक संगठन, तांत्रिक, साधक और विद्वान चीन के विनाश की कामना कर रहे हैं। विश्व-कल्याण और मानवता की रक्षा के लिए राष्ट्रीय सुरक्षा जागरण मंच इन सभी शक्तियों को जोड़ने और सक्रिय करने की कोशिश करेगा। इसके तहत भारत सहित दुनियाभर में जन-जागरण का अभियान चलाया जाएगा। यह जानकारी राष्ट्रीय सुरक्षा जागरण मंच के राष्ट्रीय महामंत्री गोलोक बिहारी राय ने राजधानी भोपाल में आयोजित एक पत्रकार वार्ता में दी।
    गोलोक बिहारी राय ने बताया कि राष्ट्रीय सुरक्षा जागरण मंच लोक-जागरण को दिशा और गति देने में महत्वपूर्ण भूमिका अदा करेगा। यह अभियान सरकार और सेना से इतर तो होगा, लेकिन कई मायनों में यह सहयोगी भी होगा। इस अभियान का साधन होगा महाविद्या अर्थात तंत्र-विद्या। देश-दुनिया के तांत्रिकों, महाविद्या के विशेषज्ञों, साधकों और देशभक्त विद्वानों का आशीर्वाद और सहयोग से यह अभियान सफल होगा। आने वाले समय में देश कि विभिन्न हिस्सों में तांत्रिक सम्मलेन, यंत्रज्ञ सम्मलेन, अनुष्ठान, मन्त्र-जप आदि का आयोजन किया जाएगा । इस विद्या के द्वारा देशभक्ति और मानवता की भावना जागृत होगी। मन्त्र का जाप और अनुष्ठान देशभक्ति की अभिव्यक्ति का सहज-स्वाभाविक माध्यम बनेगा। राष्ट्रीय सुरक्षा जागरण मंच ने देश-दुनिया की सज्जन शक्ति, देशभक्त संगठनों, विद्वानों, विशेषज्ञों, अध्येताओं, शोधार्थियों, विद्यार्थियों, किसानों, कलाकारों, मीडिया सहित सभी नागरिकों से इस अभियान में शामिल होने और इसे समर्थन देने का आह्वान किया है।


    राष्ट्रीय सुरक्षा जागरण मंच के अध्यक्ष राय ने पत्रकारों और विद्वानों की उपस्थिति में चीन विनाश के लिए साधकों द्वारा प्रयुक्त मन्त्र – ‘‘ऊँ हं हं हं उमापतये कैलाशपतये नम: l चीनस्य विनाशं कुरु कुरु स्वाहा ll’’ प्रस्तुत किया। उन्होंने देशभक्त और मानवता प्रिय लोगों से इस मन्त्र के जप का आग्रह भी किया।राय ने कहा कि यह मन्त्र चीन के विनाश का सहज-सरल, किन्तु अत्यन्त प्रभावी उपाय है। यह चीन के लिए मारक-मन्त्र सिद्ध होगा। दुनिया की करोड़ों मानवता-प्रिय जनता जब विभिन्न भाषाओं में इस मारक-मन्त्र का जाप करेगी तो निश्चित ही एक विराट शक्ति का जागरण होगा। यह शक्ति पूरी मानवता, विश्व-कल्याण और चीन के विनाश का साधन बनेगी।
    पत्रकार वार्ता में मंच के प्रदेश अध्यक्ष और पूर्व डीजीपी एस के राऊत भी उपस्थित थे।