Category: अपराध

  • खुल गई राजा पटेरिया के अपराधों की डायरी

    खुल गई राजा पटेरिया के अपराधों की डायरी


    दमोह,13 दिसंबर(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की ह्त्या के लिए उकसाने वाले कांग्रेस नेता राजा पटेरिया की जमानत अर्जी को पवई की अदालत ने खारिज कर दिया है और उन्हें न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया है। उनके बयान के बाद कार्यकर्ताओं के प्रदर्शन को देखते हुए पुलिस ने दो और धाराएं बढ़ा दी हैं जिससे अब सत्र न्यायालय से भी उनकी जमानत की संभावनाएं धूमिल हो गईं हैं।
    पुलिस सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक जब राजा पटेरिया ने बयान दिया तो भाजपा नेताओं ने इसका विरोध किया। जिसे देखते हुए गृह मंत्री डॉ.नरोत्तम मिश्रा ने पुलिस को मुकदमा दर्ज करने के निर्देश दिए थे। पुलिस ने आज सुबह राजा पटेरिया को हटा स्थित उनके घर से गिरफ्तार किया और पबई की अदालत में पेश किया था। पबई थाना प्रभारी ने भादवि की धारा 451,504,505(1)(स),506,153(1)(स),115,117,के अंतर्गत राजा पटेरिया पुत्र हरबंस पटेरिया के विरुद्ध मामला दर्ज किया है। आज उन्हें जेएमएफसी पबई के समक्ष प्रस्तुत किया गया जहा से उन्हें जेल भेज दिया गया।

    पुलिस ने लगे हाथ सभी पेंडिंग मामलों का निपटारा करने की तैयारी भी कर ली है। उनके विरुद्ध पहले भी बूथ लूटने और वनवासियों को नक्सली बना देने जैसे प्रकरण दर्ज हो चुके हैं।

    पटेरिया को पार्टी से निष्कासित करने वाले भाजपा नेताओं के सवाल पर कमलनाथ ने कहा कि मैं भाजपा नेताओं के टुच्चे सवालों का जवाब नहीं देता। इस पर भाजपा के विधायक रामेश्वर शर्मा ने कहा कि रिटायरमेंट की उम्र में लफंगों जैसी भाषा शोभा नहीं देती। कमलनाथ को मुख्यमंत्री की तीर्थदर्शन योजना में जाना चाहिए। इससे उनके विचार निर्मल होंगे।

  • भूमाफिया से सुपारी लेने लगी इंदौर की पुलिस

    भूमाफिया से सुपारी लेने लगी इंदौर की पुलिस


    भोपाल,16 अक्टूबर(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)। पुलिस भी भू माफिया का गुर्गा बन सकती है ये पुलिस कमिश्नर प्रणाली के किसी पैरवीकोर ने कभी सोचा नहीं होगा। इंदौर की एक टाऊनशिप के नागरिक इन दिनों पुलिस की भूमिका को लेकर सशंकित हैं और उसकी माफियागिरी का तांडव झेल रहे हैं। माना ये जाता था कि राजस्व अधिकारी अक्सर दबाव में आकर माफिया की काली करतूतों के सामने सरेंडर कर देते हैं तो इन हालात से निपटने में पुलिस प्रभावी हो सकती है। इंदौर पुलिस की वर्तमान कारगुजारियों ने इन कयासों को धूल धूसरित कर दिया है।
    मामला सिल्वर स्प्रिंग्स, बायपास रोड, नायता मुंडला स्थित, सैकड़ों एकड़ में विस्तृत एकीकृत टाउनशिप का है। भूमाफिया ने इस पर अपना आधिपत्य बनाए रखने के लिए उसे अनेक टुकड़ों में बांट दिया है । टाऊनशिप के फेज़ 1 में हाल ही में उच्च न्यायालय की इंदौर पीठ से मिले आदेश के बाद चुनाव हुए और बिल्डर का विधिवत सफाया हो गया ।टाऊनशिप के फेज़ 2 में रखरखाव के लिए गठित बिल्डर की कंपनी के सहयोगी संगठन की विशेष आमसभा में एकीकृत टाऊनशिप की संघर्ष समिति के वर्तमान अध्यक्ष आलोक जैन और एक अन्य रहवासी सुबोध गुप्ता के बीच मामूली धक्का मुक्की के बाद (1) हीरालाल जोशी (2) सुबोध गुप्ता,(3) अभय कटारे (4) विकास मल्होत्रा (5) सत्यम राठौर (6) ऋषभ विश्वकर्मा व अन्य बाहरी अनधिकृत व्यक्तियों (7) परमजीत सिंह (8) जीतू सोलंकी (9) देवेश्वर द्विवेदी (10) प्रयास द्विवेदी (11) नरेंद्र पाटीदार ने एक तयशुदा रणनीति बनाकर आलोक जैन के ऊपर घातक जानलेवा हमला कर दिया । इस घटना के बाद इन सभी लोगों ने पुलिस थाने में झूठे बयान देकर श्री जैन के ही विरुद्ध शिकायत जमा करा दी। विवाद टालने के लिए आलोक जैन ने समझौते पर हस्ताक्षर कर दिए। उन्होंने इस मामले को समाप्त समझ लिया। इस समझौते के बाद बिल्डर के गुर्गों ने श्री जैन को निष्कासित करने के लिए जाल बिछाना शुरु कर दिया । इस टाऊनशिप के बिल्डर डेवलपर के कंपनी सचिव नीलेश गुप्ता (12) ने एक पत्र के माध्यम ये कहना शुरु कर दिया कि आलोक जैन को निष्कासित कर दिया गया है। सुबोध गुप्ता की ओर से समिति अध्यक्ष श्री जैन को सोसायटी से बाहर करने संबंधी आवेदन कार्यालय में जमा कराया गया । तभी से ये सभी लोग श्री जैन को डराने धमकाने के निरंतर प्रयास कर रहे हैं।
    मालूम हो कि सैकड़ों एकड़ में विस्तृत सिल्वर स्प्रिंग्स टाउनशिप के निदेशक अभिषेक झवेरी (13) और मुकेश झवेरी (14) ने सैकड़ों करोड़ रुपयों की शासकीय / रहवासियों की साझा धन संपत्ति पर अवैध कब्जा कर लिया है । रहवासियों के सभागार पर कब्ज़ा कर वहां चलाए जा रहे अवैध शराबखाने व अन्य संदिग्ध गतिविधियों को पुलिस की पहल पर ही बंद किया गया था । हालांकि बताया जाता है कि अभी भी खाली मकानों से बिल्डर और उसके सहयोगी (विपक्षी क्रमांक 1 से 11) अवैध अनैतिक गतिविधियों का संचालन कर रहे हैं । एकीकृत टाउनशिप के बहुसंख्यक रहवासियों की एकमात्र प्रतिनिधि संगठन यह संघर्ष समिति शासन प्रशासन न्यायालय के हर स्तर पर बिल्डर डेवलपर की अनियमितताओं / गबन / घोटालों को चुनौती दे रही है ।
    WP 5586/2021 उच्च न्यायालय, इंदौर
    CC/114/2022 उपभोक्ता आयोग, इंदौर
    इसी से क्षुब्ध होकर बिल्डर व उसके नियमित कर्मचारियों / प्रायोजित प्रतिनिधियों (विपक्षी क्रमांक 1 से 14) द्वारा समिति के अध्यक्ष पर यह सुनियोजित-निर्धारित जानलेवा हमला किया गया । अन्य उपस्थित रहवासियों के हस्तक्षेप से कोई अनहोनी तो नहीं हो सकी,लेकिन विपक्षी क्रमांक 1 से 14 तक के लोगों से प्रार्थी समिति के अध्यक्ष श्री आलोक जैन व उनके परिवार को जानमाल का खतरा निरंतर बना हुआ है ।
    ज्ञातव्य है कि विपक्षी क्रमांक 3 अभय कटारे के विरुद्ध पहले ही अनेक आपराधिक प्रकरण विचाराधीन हैं. इस टाऊनशिप में भी यह व्यक्ति बिल्डर की ओर से कब्जा जमाने,अतिक्रमण करने, गबन करने और अवैध वसूली करने का काम संभालता है।इसके इशारे पर विपक्षी क्रमांक 1 हीरालाल (पप्पू) जोशी ने सरेआम श्री जैन को जान से मारने की धमकी भी दी है।वर्तमान में टाऊनशिप के सर्वेसर्वा सूत्रधार होने के कारण इन्हीं के पास पूरे घटनाक्रम के आडियो और वीडियो साक्ष्य सुरक्षित हैं । जो दो अन्य वीडियो पक्ष विपक्ष की ओर से प्रस्तुत किए गए वह सुश्री शीतल राय के मोबाइल से बनाए गए, जिसमें से बीच का गंभीर मारपीट / बलवा वाला हिस्सा संपादित कर छुपा दिया गया है ।ये वीडियो दिखाकर बिल्डर के गुर्गे पुलिस को गुमराह कर रहे हैं।

  • नई अर्थव्यवस्था के लिए तय हो पुलिस की भूमिका

    नई अर्थव्यवस्था के लिए तय हो पुलिस की भूमिका



    मध्यप्रदेश, हिंदुस्तान के उन गिने चुने राज्यों में शामिल है जिन्होंने पुलिस कमिश्नर प्रणाली लागू करके भारतीय पुलिस अधिनियम 1861 के प्रावधानों को आज के संदर्भों में नया रूप देने का प्रयास किया है।केन्द्रीय गृहमंत्री अमित शाह कहते रहे हैं कि आज हमें डंडे वाली नहीं बल्कि नॉलेज बेस्ड टेक्नोसेवी पुलिस की जरूरत है। अंग्रेजों ने 1857 की क्रांति को कुचलने के बाद जो पुलिस अधिनियम लागू किया था उसका मकसद आजादी की ललक को कुचलना था। आज की पुलिस के सामने अपराध नियंत्रण के साथ साथ देश के उद्यमियों को सुरक्षा प्रदान करने का भी लक्ष्य है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने देश के सामने 2024 तक पांच ट्रिलियन डॉलर(350 लाख करोड़ रुपए) की अर्थव्यवस्था बनाने का स्वप्न प्रस्तुत किया है। इसे साकार करने के लिए पुलिस की भूमिका को भी नए सिरे से परिभाषित किया जाना जरूरी है। ये पुलिस जाति, धर्म, संप्रदाय के आधार पर मुरौव्वत करने वाली नहीं बल्कि फोरेंसिक साईंस की कसौटी पर साईबर अपराधों को भी नियंत्रित करने वाली भी बनाई जा रही है।क्योंकि अर्थव्यवस्था उद्यमियों के हाथ हो चोरों के हाथ नहीं ये प्रक्रिया का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा है।
    मध्यप्रदेश के गृहमंत्री डॉ.नरोत्तम मिश्रा कहते हैं कि जिस तरह सरदार वल्लभ भाई पटेल ने रियासतों के एकीकरण से देश को अखंड भारत बनाने का भगीरथ किया था उसी तरह केन्द्रीय गृहमंत्री अमित शाह पुलिस की भूमिका सार्थक बनाने का जतन कर रहे हैं। ये पुलिस अब ऐसे व्यक्तियों का निकाय बनती जा रही है जो कानूनों को लागू करने , संपत्तियों की रक्षा करने, संगठित अपराध पर अंकुश लगाने के साथ साथ देश के दीर्घ लक्ष्यों का भी समर्थन कर रही है। भोपाल और इंदौर में पुलिस कमिश्नर प्रणाली से पुलिस के जिम्मेदारी भरे बर्ताव की तस्वीर उभर रही है। अब पुलिस ऐसे सभी अपराधियों पर निगाह रख रही है जो समाज, धर्म या राजनीति की आड़ में आपराधिक गतिविधियों को अंजाम देते रहे हैं। सबसे बड़ी बात तो ये है कि ये निगरानी बाकायदा फोरेंसिक साक्ष्यों के आधार पर की जा रही है। पुलिस के कर्मठ सेवक जो जानकारियां जुटाते हैं उनसे अदालत में अपराध के तरीके को तफसील से प्रस्तुत करना संभव हो गया है। पुलिस के जुटाए साक्ष्य अपराधी को दंड की देहरी तक ले जा रहे हैं। ये संतोष की बात है।
    भारतीय साक्ष्य अधिनियम ने तथ्यों को संकलित करने और उसके आधार पर आरोपी का अपराध साबित करने की विधि हमें दी थी। अब तक पुलिस इसी अधिनियम के दायरे में अपराध को प्रमाणित करने का काम करती रही है। अब बढ़ते साईबर क्राईम ने पुलिस का काम बढ़ा दिया है। अब पुलिस को टेक्नोसेवी होना जरूरी है।अपराधी अब किसी दूसरे देश में बैठकर भी अपराध कारित कर देता है। प्रशिक्षण से पुलिस बल को शिक्षित करने का भरपूर प्रयास किया गया है लेकिन इसके बावजूद पुलिस बल की कार्यक्षमता में क्रांतिकारी बदलाव नहीं आया है। जो पुलिस कर्मी लंबे समय से पुलिस बल में काम कर रहे हैं उनके लिए आज अपराध की विवेचना दुरूह कार्य नजर आता है। पुलिस कर्मियों के चयन के मापदंड भी कुछ ऐसे रहे हैं जिनमें खिलाड़ी, पहलवान और तकनीकी पढ़ाई से विमुख कर्मचारियों की भरती की जाती रही है। यही वजह है कि पुलिस में दो तरह के कर्मचारी हैं। कुछ कंप्यूटर कक्ष में बैठकर कार्य कर रहे हैं तो कुछ को मैदानी दौड़ भाग में लगाया गया है। इनके बीच काम के असंतुलन को लेकर तकरार भी चलती रहती है। साथ में महिला पुलिस कर्मियों की बढ़ती संख्या ने भी पुलिस की कार्यप्रणाली में कई बदलाव किए हैं।
    इन सबके बावजूद पुलिस का चरित्र अभी नहीं बदला है। जब तक उच्च स्तर से अपने बल को बार बार संदेश नहीं दिया जाता कि उनकी भूमिका ठसके वाली थानेदारी करने की नहीं बल्कि ज्ञान आधारित शक्तिप्रदर्शन की हो गई है तब तक पुलिस को नवजीवन नहीं मिल सकता। कहा जाता है कि ज्ञान शेरनी के दूध की तरह होता है जो पिएगा वह दहाड़ेगा। इस सूत्रवाक्य को अपराधियों ने ज्यादा तेजी से अपनाया है। तकनीकों की आड़ लेकर वे तरह तरह के अपराध कर रहे हैं और पुलिस की निगाह से भी बचते रहते हैं। किसी चोरी की घटना में जब फरियादी पुलिस थाने पहुंचता है तो पुलिस का बर्ताव टालने वाला होता है। पुलिस वाले चाहते हैं कि फरियादी ही जांच करे, हमें साक्ष्य लाकर दे, साथ में सेवाशुल्क भी दे तब हम मुकदमा दर्ज करेंगे। हम अपने रजिस्टर में मुकदमों की संख्या क्यों बढ़ाएं।जबकि इन मुकदमों का खर्च सरकार स्वयं उठाती है। पुलिस का प्रयास रहता है कि मामले को दीवानी बताकर व्यक्ति को अदालत की ओर ठेल दे। क्षेत्राधिकार की पुरानी कहानी तो आज भी जस की तस है। अब यदि अपराधी की धरपकड़ किसी नागरिक को स्वयं करनी है तो फिर पुलिस की जरूरत क्या है। क्यों पुलिस वालों के लिए आवास, बजट और भरती की मांग की जाती है। आपराधिक मामले भी यदि व्यक्ति को स्वयं निपटाना है तो फिर बिहार की तरह निजी सेनाएं या बाऊंसर रखने की परिपाटी शुरु हो ही जाएगी।
    आज पुलिस बल के कई काम आऊटसोर्स किए जा रहे हैं। निर्माण, यातायात और अभियोजन के लिए वैसे भी पुलिस निजी एजेंसियों पर निर्भर रही है। क्या अब समय नहीं आ गया है कि जब राज्य की ओर से निजी एजेंसियों को भी पुलिस की तरह अधिकार दिए जाएं ताकि वे अनुसंधान करके अपराध नियंत्रण का काम संभाल सकें। जब पुलिस अपना दायित्व न निभा सके तो क्यों न इस विकल्प पर भी गौर किया जाए। अब यदि कोई किसान खेती करके अनाज का उत्पादन कर रहा है। मजदूरों को वेतन बांट रहा है। सरकारी मंडियों में शुल्क चुका रहा है। साबुन से लेकर खाद, कीटनाशक बीज ,वाहन आदि सभी पर टैक्स चुका रहा है। नगरीय या ग्रामीण निकायों का टैक्स भर रहा है और वो चोरी की शिकायत लेकर पुलिस के पास जाए तो पुलिस उससे कहे कि वह तो बड़ा आदमी है चोरी हो गई तो क्या फर्क पड़ता है। ऐसे में पुलिस की भूमिका पर एक बार फिर चिंतन क्यों न किया जाए। पुलिस यदि उद्यमियों के साथ न खड़ी हो और अपनी अक्षमता से अपराधियों को संरक्षण प्रदान करने का कारण बनने लगे तो उसकी भूमिका पर नए सिरे से विचार करना जरूरी हो जाता है।
    दरअसल नई सदी का भारत तेजी से करवट ले रहा है। जिस देश की अर्थव्यवस्था लगभग ढाई सौ सालों तक अंग्रेजों के षड़यंत्रों का शिकार रही हो, और वो अपनी तेज प्रगति से सारे मानदंड पीछे छोड़ रहा हो, उसे उपनिवेशिक मानसिकता वाली संस्थाओं से मुक्ति दिलानी ही होगी। शासकों और प्रशासकों को समय की इस मांग की पहचान करनी होगी। अपराध नियंत्रण का पुराना ढर्रा बदलना होगा तभी इन संस्थाओं का अस्तित्व बचा रह पाएगा। आज पुलिस कानूनों में बदलाव या सुधार की बात हो रही है कल पुलिस को ही बदलने की बात होने लगे तो कोई आश्चर्य नहीं होगा। पांच ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था के लक्ष्य के लिए यदि पुलिस का मौजूदा ढांचा होम करना पड़े तो भी ये सस्ता सौदा होगा।

  • अर्जुनसिंह की कृपा की आड़ में डॉन बन बैठा था मुख्तयार मलिक

    अर्जुनसिंह की कृपा की आड़ में डॉन बन बैठा था मुख्तयार मलिक


    भोपाल,5 जून(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)। राजस्थान के झालावाड़ में मारा गया भोपाल का डॉन मुख्तयार मलिक मध्यप्रदेश में इसलिए सुरक्षित रहा क्योंकि यहां के कई राजनेताओं का उसे संरक्षण मिलता रहा। इस सीमा से बाहर कारोबार फैलाने की ख्वाहिश उसकी मौत की वजह बनी। झालावाड़ के असनावर थाना क्षेत्र के कासखेडली गांव के नजदीक स्थित उजाड़ नदी और भीमसागर डैम अपस्ट्रीम में अब्दुल बंटी गेंग से उसकी झड़प हुई थी। पहली गोली मलिक ने चलाई थी लेकिन स्थानीय लोगों ने पथराव और गोलीबारी करके मुख्तयार के सहयोगियों को भागने पर मजबूर कर दिया था। इस घटनाक्रम के दौरान मुख्तयार के साथ 11 शूटर थे लेकिन उसका रसूख कोई काम नहीं आया और पानी के लिए तड़प तड़पकर उसे मरने को मजबूर होना पड़ा।
    मुख्तयार पर दर्ज अपराधों की सूची बहुत बड़ी है, उस पर विभिन्न धाराओं के 58 मामले दर्ज हैं। सैकड़ों अन्य मामले ऐसे भी हैं जिनकी जानकारी तो खुली पर वे पुलिस रिकार्ड तक नहीं पहुंचे। कई मामले उसने आपसी रजामंदी से बंद करा दिए। कई मामले उसके राजनैतिक आकाओं की वजह से दर्ज नहीं हो सके। पहली बार 21 साल की उम्र में बलात्कार के अपराध में वह जेल पहुंचा था। उसके बाद उसकी अपराध की दुनिया का साम्राज्य शुरु हो गया। पूर्व मुख्यमंत्री सुंदरलाल पटवा को धमकाने की वजह से 1990 में वह चर्चा में आया था। इसकी वजह थी कि पटवा हमेशा से अर्जुनसिंह के चहेते रहे और बाद में मध्यप्रदेश की राजनीति में दो बार उन्हें मुख्यमंत्री बनने का मौका भी मिला। तब भी मध्यप्रदेश पुलिस ने मुख्तयार को नहीं निपटाया क्योंकि राजनेताओं ने उसे पटवा से माफी मंगवा दी थी। फिरौती वसूलने के लिए उसने रायसेन के तीन बच्चों का अपहरण किया था तब पुलिस ने मुठभेड़ में बच्चों को सकुशल बचा लिया लेकिन तब भी मुख्तयार नहीं मारा गया। पुलिस के जांबाज अफसर सलीम ने जब उसे घसीटकर सड़कों से गुजारा तो भय के कारण उसने पेंट गीला कर दिया था। ये सारे घटनाक्रम होते रहे लेकिन मध्यप्रदेश उसकी शरण स्थली बना रहा।एक बार मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के निवास पर उसकी मौजूदगी भी अखबारों की सुर्खियां बनीं लेकिन फिर सीएम आवास में उसका प्रवेश निरुद्ध कर दिया गया।
    गैस कांड के मुआवजे की सुनवाई करने वाली अदालतें भी उस पर काफी मेहरबान रहीं। वह जिस व्यक्ति को अदालत में पेश कर देता उसका अवार्ड पारित हो जाता। यह रकम सीधे मुख्तयार के पास पहुंच जाती थी। इस तरह उसने गैस कांड के मुआवजे में से करोड़ों रुपए जुटाए। उसे पनाह देने वाले अंकल जज राजीव भटजीवाले की रकम जब ब्याज पर चलाने वाले एमपीनगर के एक व्यापारी ने गड़प ली तो मुख्तयार ने उसकी दूकान पर जाकर कट्टा तानकर धमकाया था। उस व्यापारी ने अपने प्रभाव का इस्तेमाल करके मुख्तयार का शूटआऊट कराने की तैयारी कर ली थी। बाद में व्यापारी की गवाही पर राजीव भटजीवाले का भ्रष्टाचार प्रमाणित हो गया और राजीव भटजीवाले को बर्खास्त कर दिया गया,लेकिन मुख्तयार मलिक साफ बच निकला।
    हालिया मामले में उसे भीमसागर डैम से करोड़ों रुपए के मुनाफे का लालच दिया गया था। प्रस्ताव लाने वाला विक्की वाहिद उसका बहुत खास था। मुख्तयार उसे बेटे के समान मानता था। घटाक्रम के दौरान मलिक ने वाहिद का ही साथ लिया था लेकिन वाहिद उसे छोड़कर फरार हो गया। झालावाड़ के असनावर थाना क्षेत्र के कासखेडली गांव के नजदीक स्थित उजाड़ नदी और भीमसागर डैम अपस्ट्रीम में ये गैंगवार हुई थी। मंगलवार रात दो बजे कांस खेडली के अब्दुल बंटी गैंग और मुख्तार मलिक गैंग के बीच गोलियां चली। इसमें एक की मौत हुई। मुख्तार मलिक गुट के भोपाल निवासी कमलकिशोर की गैंगवार में मौत हुई थी। जिसका शव पुलिस ने बुधवार रात को ही पोस्टमार्टम के बाद शव परिजनों को सौंपा था। संघर्ष में लापता हुए गैंगस्टर मुख्तार मलिक और विक्की का गुरुवार रात को भी कोई पता नहीं चला। लेकिन विक्की के भोपाल पहुंचने की सूचना लगी। विक्की भी गैंगस्टर बताया जा रहा है। उजाड़ नदी के भीमसागर डैम क्षेत्र में मछली पकडने का ठेका दिल्ली के ईरशाद के पास था। 31 मई को उसने भोपाल के मुख्तार मलिक को ठेका बेच दिया। सौदा दिन में हुआ और घटना रात में नाव लेने को लेकर हो गई।
    समाचार पत्रों में छपी कहानी के अनुसार मुख्तार को जब भीम सागर डैम में उसकी बोट नहीं दिखी तो वह अपने गुर्गे विक्की वाहिद के साथ कालीसिंध के भंवरासा डैम से भीम सागर में बोट तलाशने निकला। पता चला कि उसकी नाव को गैंगस्टर बंटी अब्दुल लेकर चला गया। बंटी का पूर्व मछली ठेकेदार इरशाद से लेनदेन को लेकर विवाद था। इसकी जानकारी होने पर मलिक वापस भंवरासा डैम आया। एक मिनी ट्रक में अपनी दूसरी नाव रखी, विक्की की फॉर्च्यूनर और अपनी ब्लैक पजेरो में गुर्गों के साथ वापस भीम सागर आया। बंटी अब्दुल की गैंग से नाव वापस लेने के लिए मुख्तार समेत 11 लोग कांसखेडली गांव के लिए रवाना हुए।
    मलिक की नाव में साथ बैठा गुर्गा शकील (निवासी रीछवा, झालावाड़) उसके हर मूवमेंट की जानकारी बंटी गैंग को फोन से देता रहा। इससे बंटी गैंग पूरी तरह अलर्ट हो चुकी थी। बंटी ने अपने चार गुर्गे झालावाड़ से भी बुला लिए थे। विक्की शराब के नशे में था। वह नाव में भी शराब पी रहा था। रात डेढ़ बजे कांसखेडली गांव में डैम के बैकवॉटर के किनारे पहुंचकर विक्की ने बंटी को ललकारा। पहले से हमले की ताक में बैठी बंटी गैंग ने पथराव शुरू कर दिया। यह देख मुख्तार ने 32 बोर की रिवॉल्वर से फायर करने शुरू कर दिए। जवाब में बंटी गैंग ने भी फायरिंग शुरू कर दी। पथराव और गोलीबारी से बचने के लिए मुख्तार के साथ नाव में बैठे उसके गुर्गे पानी में कूदने लगे। डिसबैलेंस होने से नाव पानी में समा गई। इसी दौरान भोपाल निवासी कमल मीणा के नाक के पास गोली लगी। वो पानी में गिर गया और डूबने से उसकी मौत हो गई। शकील के बांह में गोली लगी। आठ गुर्गे जंगल में भाग गए, जो अलग-अलग ग्रुप में सुबह सारोला थाना इलाके की तरफ से जंगल से बाहर निकले। मुख्तार, विक्की, कमल का पता नहीं चला। कमल की लाश बाद में बरामद की गई।
    पुलिस सूत्रों के मुताबिक गैंगवार की रात बोट में उसके साथ 11 लोग थे,इनमें खुद मुख्तार मलिक, भोपाल, विक्की वाहिद, शफीक मोहम्मद, रीछवा, थाना बकानी, शकील मोहम्मद, रीछवा, थाना बकानी, सलमान, रीछवा, थाना बकानी, शोएब हुसैन, गागरोन थाना मंडावर, विजय कुमार, रीछवा, थाना बकानी, बृजराज, रीछवा थाना बकानी, अखलाक खां विराट नगर उज्जैन, आरिफ, खिलचीपुर, राजगढ़, कमल किशोर मीणा, भोपाल । राजधानी भोपाल की जिला अदालत में मुन्ने पेंटर गैंग के बीच हुए गैंगवार में मुख्तार को 2006-07 में हाईकोर्ट ने फांसी की सजा सुनाई थी। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट में वह बरी हो गया था। मामलों में वह समर्पण करके पुलिस से बचता था और अदालतों में दबाव से समझौता करके मामले रफा दफा करवा लेता था।

  • जबलपुर में शराब तस्कर का मकान  जमींदोज

    जबलपुर में शराब तस्कर का मकान जमींदोज

    भोपाल,4 मई, (प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)।मध्य प्रदेश शासन द्वारा भू-मफिया राशन की काला बाजारी, मिलावटखोरों, भू-माफियाओं/चिटफंड कंपनी के कारोबारियों एवं सूदखोरों के विरूद्ध सख्त कार्यवाही करने के निर्देश प्रशासन व पुलिस विभाग को दिये गये हैं। इन निर्देशों के तहत पुलिस, प्रशासन तथा नगर निगम की संयुक्त टीम के द्वारा इस प्रकार के माफियाओं की लिस्ट एवं उनके द्वारा किये गये अवैध निर्माण एवं कब्जे की जानकारी तैयार की गई है तथा उनके विरूद्ध कार्यवाही की योजना तैयार कर लगातार कार्यवाही की जा रही है।

    इसी क्रम में आज कलेक्टर जबलपुर डॉ. इलैयाराजा टी. एवं पुलिस अधीक्षक जबलपुर श्री सिद्धार्थ बहुगुणा तथा नगर निगम कमिश्नर श्री आशीष वशिष्ठ के मार्गदर्शन में थाना हनुमानताल अंतर्गत महिला शराब तस्कर मीरा बाई सोनकर जिसके विरूद्ध 21 अपराध आबकारी एक्ट के एवं मीरा बाई सोनकर के पांच बेटे बाबा सोनकर के विरूद्ध 31 अपराध, बोरा उर्फ मोनू सोनकर के विरूद्ध 30 अपराध, कल्लू उर्फ श्याम सोनकर के विरूद्ध 28 अपराध, सोनू सोनकर के विरूद्ध 27 अपराध, राजा सोनकर के विरूद्ध 12 अपराध हत्या का प्रयास, एनडीपीएस एक्ट, अवैघ वसूली, आर्म्स एक्ट, बलवा कर घर में घुसकर मारपीट तोड़फोड़ , आबकारी एक्ट , जुआ आदि के दर्ज हैं, के द्वारा बाबा टोला सिंध केम्प में लगभग 3000 वर्गफुट भूमि जिसकी अनुमानित कीमत लगभग 3 करोड़  रूपये है पर अनाधिकृत रूप से लगभग 50 लाख रूपये की लागत से निर्मित दो मकान को जमींदोज किया गया।

    विवाद होने की आशंका को ध्यान मे रखते हुये कार्यवाही के दौरान एस.डी.एम. आधारताल श्री नमः शिवाय अरजरिया, नगर पुलिस अधीक्षक गोहलपुर श्री अखिलेश गौर, नगर पुलिस अधीक्षक अधारताल श्रीमती प्रियंका करचाम, नायब तहसीलदार श्री संदीप जायसवाल एवं श्री श्याम आनंद, थाना प्रभारी हनुमानताल श्री उमेश गोल्हानी, थाना प्रभारी कैंट श्री विजय तिवारी, थाना प्रभारी बेलबाग सुश्री प्रियंका केवट, टूआईसी अधारताल, टूआईसी गोहलपुर, नगर निगम भवन अधिकारी श्री मनीष तड़से, नगर निगम अतिक्रमण दस्ता प्रभारी श्री लक्ष्मण कोरी, श्री अहसान खान सहित थाने एवं नगर निगम के कर्मचारी मौजूद थे।

  • सिद्धार्थ चौधरी को गोली मारने वाला धराया

    सिद्धार्थ चौधरी को गोली मारने वाला धराया

    खरगोन,22 अप्रैल(अनिल सारसर)। खरगोन पुलिस अधीक्षक सिद्धार्थ चौधरी को गोली मारने वाले को गिरफ्तार कर लिया गया है। डीआईजी तिलक सिंह ने बताया कि आरोपी मोहसीन उर्फ वसीम को पुलिस ने कसरावद क्षेत्र से पकड़ा है।

    डीआईजी तिलक सिंह ने बताया कि आरोपी खरगोन के संजय नगर का रहने वाला है। उसी ने रामनवमी के दौरान जुलूस के दौरान एसपी चौधरी पर गोली चलाई थी, जिसे सायबर सेल की टीम ने कसरावद क्षेत्र से गिरफ्तार कर लिया है। मोहसीन आदतन अपराधी है, उस पर पहले से चार प्रकरण दर्ज हैं, जिसमें आर्म्स एक्ट समेत मारपीट के प्रकरण हैं। आरोपी मोहसीन से पूछताछ की जा रही। पुलिस तलवार चलाने वाले आरोपी की तलाश कर रही है। 10 अप्रैल को खरगोन हिंसा में 50 लोग से ज्यादा घायल हुए थे। घायलों में एसपी सहित 6 पुलिस के जवान भी शामिल थे।

    अब तक 159 आरोपियों की गिरफ्तारी हो चुकी
    खरगोन उपद्रव के फरार 106 फरार आरोपियों पर 10-10 हजार रुपये का इनाम घोषित किया गया है। कमांडेंट अंकित जायसवाल ने बताया है कि रामनवमी जुलूस हिंसा के मामले में अब तक 159 आरोपियों की गिरफ्तारी हो चुकी है।

    इब्रीश खान मौत मामले में 5 आरोपियों पर केस दर्ज
    खरगोन उपद्रव में युवक इब्रीश उर्फ सद्दाम खान की मौत के मामले में पुलिस ने 5 आरोपियों पर केस दर्ज किया है। 5 में से 2 आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका हैं वहीं, 3 आरोपी अब भी फरार हैं। पकड़े गए एक आरोपी पर एनएसए लगाया है। अब तक खरगोन हिंसा मामले में पुलिस तीन आरोपियों पर एनएसए लगा चुकी है।

    सुबह 8 से शाम 5 बजे तक की ढील
    खरगोन में हालात लगभग सामान्य हो चुके हैं। प्रशासन भी अब सख्ती में ढील बढ़ा रहा है। कलेक्टर के आदेश के मुताबिक शनिवार को खरगोन में सुबह 8 से शाम 5 बजे तक की ढील दी जा रही है। इस दौरान सभी तरह की दुकानें खोली जा सकेंगी।

    अपर कलेक्टर ने अधिकारियों के अवकाश किए प्रतिबंधित
    शहर में निर्मित विषम परिस्थितियों को चलते कोई भी जिलाधिकारी बिना सक्षम अधिकारी की अनुमति के बगैर मुख्यालय छोड़कर अवकाश पर नहीं जा पाएंगे। इस संबंध में अपर कलेक्टर एसएस मुजाल्दा ने आदेश जारी किए हैं।

  • सिद्धार्थ चौधरी के हमलावर को गोली कब पड़ेगी

    सिद्धार्थ चौधरी के हमलावर को गोली कब पड़ेगी


    खरगोन में पुलिस अधीक्षक सिद्धार्थ चौधरी जब दंगाईयों को तलवारबाजी से रोक रहे थे तो किसी दंगाई ने उन पर गोली चला दी। ये तो संयोग ही था कि गोली उनके पैर में लगी। चौधरी मध्यप्रदेश पुलिस के एक जांबाज अफसर हैं। सहृदयता और कर्तव्यनिष्ठा उनमें कूट कूटकर भरी है। ऐसे बेशकीमती अफसर के खिलाफ यदि प्रदेश का ही कोई नौजवान नफरत का खेल खेलने लगे तो निश्चित रूप से ये चिंता की बात है। ये न केवल पुलिस बल्कि समूचे प्रशासनिक तंत्र और सरकार के लिए भी खतरे की घंटी है। आप इसे जातीय उन्माद, आतंकवाद, नक्सलवाद या धर्मांधता कहकर खारिज नहीं कर सकते। आप इसे बहके हुए युवाओं की गलती कहकर दबा भी नहीं सकते। यदि इस घटना से प्रदेश ने मुंह चुराने की कोशिश की तो निश्चित तौर पर हम भविष्य में किसी बड़ी घटना को फलित होने का अवसर प्रदान कर रहे हैं।


    कश्मीर में आजादी के बाद से नेहरू के वंशजों ने कांग्रेस के बैनर तले जो खून की होली खेली उसने कश्मीर की तरुणाई को बरसों पीछे धकेल दिया था। हजारों युवाओं ने अपनी जान गंवाई और महिलाओं का सुहाग उजड़ गया। अलगाववादियों के हौसले इतने बुलंद हो गए थे कि वे सशस्त्र सेना पर हमला करने से भी नही चूकते थे। सैनिक कैम्पों पर बम फेंकना या सैनिकों को झांपड़ मार देना वहां आम बात थी। सैनिकों की मजबूरी ये थी कि वे बगैर आदेश के गोली नहीं चला सकते थे। सेना के ही कई अफसर ऐसे मामलों में कोर्ट मार्शल को अपनी ही सेना के खिलाफ हथियार के रूप में इस्तेमाल करते थे। वजह साफ थी कि तत्कालीन सत्ताधीशों के चरण चूमकर वे प्रमोशन पाते रहते थे। जब मौजूदा राष्ट्रवादी सरकार ने कश्मीर की समस्या को समाधान के अंजाम तक पहुंचाने का फैसला कर लिया तब जाकर कश्मीर को देश की मुख्यधारा में लाने का ख्वाब साकार हो सका है।


    जब सेना का रुतबा धूल धूसरित कर दिया गया था तब असम के एक मेजर ने अलगाववादियों को सबक सिखाने का नायाब तरीका ढूंढ़ निकाला। उपचुनाव के दौरान चार पांच सौ लोगों की भीड़ ने सेना की टुकड़ी को घेर लिया और पथराव करने लगे। इस बीच सेना के कंपनी कमांडर लीतुल गोगोई ने एक उपद्रवी को पकड़ा और सेना की जीप के बोनट पर बांध दिया। उस जीप के पीछे चल रही बख्तरबंद गाड़ी से चेतावनी दी जा रही थी कि उपद्रवियों का यही हाल होगा। उसे नौ गांवों में इसी तरह घुमाया गया। चुनाव कराने गई टीम को सकुशल बाहर निकाल लाने वाले इस उपाय की दुनिया भर में तारीफ की गई। तत्कालीन मुख्यमंत्री फारूख अब्दुल्ला ने इसे अत्याचार बताकर सैन्य अफसर पर कोर्ट आफ इंक्वायरी कराने का दबाव बनाया। हालांकि जांच में अफसर को बेकसूर करार दिया गया। इस तरह के उपाय समाज में दंगा भड़काने वालों के विरुद्ध किए जाते हैं तो भले ही इनकी निंदा की जाए पर ये अपरिहार्य होते हैं। खरगोन में दंगा भड़काने वालों के बीच से भी अफसर पर गोली चलाने वाले शख्श को खोज निकालना और उसे सरे चौराहे गोली मारकर दंडित करना जरूरी हो गया है।
    दरअसल कानून को अपने घर की मुर्गी मानने का मुगालता एक दिन में ही नहीं पनपा है। बरसों से सरकारी अफसरों और पुलिस के लोगों ने जिस तरह से शोषकों और अत्याचारियों को पनाह देने का सोच अपना रखा है उसकी सजा सिद्धार्थ चौधरी जैसे युवा अफसरों को भुगतनी पड़ रही है। आज के युवा अफसरों ने भले ही कोई अपराध नहीं किया हो लेकिन बरसों से एसडीएम कार्यालयों, तहसीलियों,पुलिस थानों में चंदा वसूली का खुला खेल चल रहा है उसके कारण प्रशासनिक न्याय तंत्र का खौफ खत्म हो गया है। सरकारी नौकरियों में अफसरों को वेतन और पेंशन मिलने के बावजूद कई अफसर चंदा वसूली को ही अपनी मुख्य ड्यूटी समझते हैं। उनके पास जानकारी तो होती है कि किसी आपराधिक घटना के पीछे मास्टर माइंड कौन है लेकिन वे उनके गिरेबान पर हाथ नहीं डालते। यही वजह है कि जब ये संरक्षित अपराधी पुलिस या कानून पर ही हाथ डालने लगते हैं तो हाहाकार मच जाता है।
    खरगोन में उपद्रव फैलाने वालों पर अंकुश लगाने के लिए सरकार ने सख्त आपरेशन चलाया है लेकिन उपद्रवियों के घर तोड़ देने और उन्हें जेलों में भर देने से समस्या का समाधान नहीं हो सकता है. धार्मिक पाखंडों की आड़ में पल रहे इस अपराध बोध को सार्वजनिक मंचों पर दंडित करने की जरूरत है।
    दमोह के कुंडलपुर में लाखों करोड़ों रुपयों की दानराशि हड़पने का ख्वाब देखने वाले चंद ठगों ने जब पंचकल्याणक महोत्सव के दौरान बखेड़ा खड़ा करने और पदाधिकारियों से मारपीट करने का जो प्रयास किया उसे लेकर पुलिस ने कुछ लोगों के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज की। चंद लोग तो पुलिस की निगाह में आ गए लेकिन युवाओं को भड़काकर मारपीट के लिए उकसाने वाले कुछ असली अपराधी पुलिस के रिकार्ड में नहीं दर्ज हो पाए। आज वही अपराधी नए नए षड़यंत्र रचने का काम कर रहे हैं। पुलिस का मुखबिर तंत्र इतना ढीला है कि न तो वो उन्हें उजागर कर पा रहा है न ही उन्हें दंडित करके भविष्य के खतरों की सुरक्षा का प्रबंध कर पा रहा है। एक अपराधी ने तो अपने निवास पर बैठक बुलाकर कमेटी के तख्तापलट की साजिश भी रची लेकिन पुलिस इसे महज राजनीतिक दांव पेंच मान रही है। जबकि आरोपियों के विरुद्ध तीर्थ क्षेत्र में ठगी करने का इतिहास पहले से उजागर है। अब यदि ऐसे अपराधियों पर समय रहते कोई अंकुश नहीं लगाया जाएगा तो जाहिर है कि भविष्य में किसी बड़ी घटना की संभावना खारिज नहीं की जा सकती।
    ऐसा नहीं कि इन असामाजिक तत्वों के विरुद्ध कार्रवाई के लिए पुलिस को किसी अपराध के घटित होने का इंतजार करना पड़े। अपराधियों की खोज और उन्हें निरंतर नसीहत देने का काम पुलिस की जवाबदारी में पहले से ही शामिल है। इसके लिए तीन दशकों पहले पत्रकारों के नेटवर्क को पुलिस के साथ जोड़ा गया था लेकिन चंद आपराधिक तत्वों ने पत्रकारों के इस नेटवर्क में अपराधियों को भर दिया। नतीजतन हालात वही ढाक के तीन पात होकर रह गए।


    खरगोन में सिद्धार्थ चौधरी पर हमले ने एक बार फिर पुलिस और प्रशासन को सावधान किया है। कमलनाथ जैसे भौंदू राजनेता ने तो अपनी राजनीति को चमकाने के लिए पत्रकारों को खलनायक बताने का अभियान चला दिया था। मौजूदा शिवराज सिंह चौहान की सरकार समाज के सूचना तंत्र को संवारने के बजाए उसे कचराघर बनाने का काम करती रही है। पिछले विधानसभा चुनावों में शिवराज सरकार की शर्मनाक हार के बावजूद सूचना तंत्र का महत्व भाजपा के कर्णधार नहीं समझ सके । अब जबकि प्रदेश गहरे आर्थिक संकटों से जूझ रहा है। कर्ज का बोझ बढ़ता जा रहा है। विकास योजनाओं के लिए पूंजी जुटाना टेढ़ी खीर हो गया है तब जरूरी है कि सामाजिक विद्वेष फैलाने वाले ठगों की पहचान करके उन्हें निर्मूल किया जाए। पूंजी का सफल निर्माण तभी संभव है जब शासन तंत्र के एक हाथ में योजनाओं का खाका हो और दूसरे हाथ में दंड का शमशीर,तभी मध्यप्रदेश को आधुनिक भारत का सफल प्रदेश बनाया जा सकता है।

  • गोल्डन सिम के लिए धोखाधड़ी करने वाले धराए

    गोल्डन सिम के लिए धोखाधड़ी करने वाले धराए

    भोपाल, 17 मार्च(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)। थाना गोरखपुर में 15 मार्च को हरजिन्दर सिंह उम्र 53 वर्ष निवासी गुप्तेश्वर वार्ड गुडलक अपार्टमेंट के सामने महानद्दा गोरखपुर ने लिखित शिकायत की थी कि वह स्पेयर पार्टस की दुकान चलाता है। दो फरवरी 22 को एक अज्ञात व्यक्ति द्वारा उसके साढू भाई हरविन्दर सिंह निवासी प्रेमनगर के मोबाइल में गोल्डन नम्बर सीरीज के लिये टेक्सट मैसेज भेजा गया। जिसमें गोल्डन नम्बर सीरीज के लिये 49 हजार 999 रूपये के आफर में मोबाइल में बात करने तथा व्हाटसएप मैसेज करने के लिये लिखा था। तब हरविंदर सिंह ने इस स्कीम के बारे में मुझे बताया था। हरविंदर सिंह से मेने वह नंबर लेकर उक्त मोबाइल नम्बर के धारक से कॉल एवं व्हाटसएप पर मैसेज से बात की। मोबाइल नम्बर के धारक ने स्वयं को एयरटेल का एजेन्ट बताया एवं एयरटेल के गोल्डन मोबाइल नम्बर 900000000 की सिम के एलाटमेंट के लिये व्हाटसएप में टेक्सट इन्वाइस भेजी। जिसमें अकाउण्ट नम्बर, आईएफएससी कोड देते हुये बैंक खाते नम्बर पर 41 हजार 300 रूपये पेमेण्ट करने के लिये कहा गया था। मेने एयू स्माल फायनेंस बैंक शाखा नेपियर टाउन के खाते से बताये गये बैंक खाते में पेमेण्ट कर दी गई। किंतु अभी तक मुझे गोल्‍डन सिम प्राप्‍त नहीं हुई और न ही मोबाईल धारक उसका फोन उठा रहा है। अज्ञात व्यक्ति द्वारा मेरे साथ 41 हजार 300 रूपये की धोखाधडी की गयी है। शिकायत पर अज्ञात मोबाइल धारक के विरूद्ध अपराध पंजीबद्ध कर प्रकरण विवेचना में लिया गया।

    पुलिस अधीक्षक जबलपुर श्री सिद्धार्थ बहुगुणा ने घटित हुई घटना को गंभीरता से लेते हुये अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक शहर दक्षिण/अपराध श्री गोपाल खाण्डेल के मार्गदर्शन में नगर पुलिस अधीक्षक गोरखपुर श्री आलोक शर्मा के नेतृत्व में थाना गोरखपुर, क्राइम ब्रांच एवं सायबर सेल की संयुक्त टीम गठित कर अज्ञात आरोपी को शीघ्र गिरफ्तार करने के निर्देश दिए।

    विवेचना के दौरान ज्ञात हुआ कि भरतीपुर के रहने वाले अशोक तीरथानी के बैंक अकाउंट में शिकायतकर्ता का पैसा ट्रांसफर कराया गया है। जिस पर अशोक तीरथानी को अभिरक्षा में लेते हुये सघन पूछताछ की गयी तो उसने अपने मित्र दिलीप कुकरेजा तथा शुभम उर्फ शिवम राय के साथ कई बैंक अकाउंट खोलकर धोखाधडी का पैसा बैंक अकाउंट में ट्रांजैक्शन करना स्वीकार किया।

    टीम ने दिलीप कुकरेजा एवं शुभम राय को गिरफ्तार कर पूछताछ करने पर जानकारी प्राप्त हुई कि मुम्बई में रहने वाले रवि मिश्रा एवं राज के कहने पर शुभम राय ने जबलपुर शहर में कई लोगों के नाम से विभिन्न बैंकों में कई बैंक अकाउंट खुलवाये हैं। जिसमें रवि मिश्रा एवं राज एयरटेल कम्पनी का एजेंट बताकर लोगों को गोल्डन सिम प्रोवाईड कराने का लालच देकर अपने गिरोह के लोगों के खाते में पैसे ट्रांसफर कराते थे। इन पैसों में से शुभम राय अपना हिस्सा लेकर शेष राशि रवि मिश्रा को ट्रांसफर कर देता था। इस तरह शुभम राय ने अन्य लोगों को भी फर्जी खाता खोलने के लिए प्रेरित किया और 52 बैंक अकाउंट में लगभग तीन करोड रूपये का ट्रांजेक्शन कराया और अपने साथी रवि मिश्रा के साथ शेयर किया।

    आरोपी शुभम राय की निशानदेही पर घटना में प्रयुक्त 52 बैंक अकाउंट के ट्रांजेक्शन, सात नग एटीएम डेबिट कार्ड, एक पासबुक, दो चैक बुक, दो आधार कार्ड, एक पेनकार्ड, एक केवायसी फार्म, आठ मोबाईल फोन, एक स्कूटी जप्त की गयी है। आरोपीगण के बैंक खातो की जानकारी प्राप्त की गयी। जिसके अनुसार लगभग तीन करोड रुपये का धोखाधडी की गयी है। तीनों आरोपियों को प्रकरण में विधिवत गिरफ्तार करते हुये मान्नीय न्यायालय के समक्ष पेश करते हुये आरोपी शुभम राय को रिमाण्ड पर लिया जा रहा है।

    गिरोह का मुख्य आरोपी मुम्बई निवासी रवि मिश्रा मूलतः बिहार पटना का रहने वाला है। वह लोगों को मैसेज एवं काल करके एयरटेल कम्पनी का वीआईपी नम्बर/फैंसी नम्बर देने का लालच देकर पैसों की मांग करता था। शुभम राय जबलपुर में लोगों को प्रति खाता 1000 रुपये का लालच देकर उनसे खाते खुलवाकर चैक बुक, एटीएम अपने पास रख लेता था तथा उक्त खातों में जालसाजी का पैसा डलवाकर शुभम राय अपना हिस्सा रखने के बाद शेष रूपए रवि मिश्रा के अकाउंट में ट्रांसफर कर देता था।

    आरोपी शुभम राय, रवि मिश्रा का दोस्त है जो कि पहले मुम्बई में लगभग पांच साल वर्ष 2007-2012 तक फिल्म सिटी में साथ में काम कर चुका है। पूर्व में शुभम राय इसी प्रकार की जालसाजी में वर्ष 2017 में लखनउ उत्तर प्रदेश में पकड़ा जा चुका है। आरोपी शुभम राय ने महाराष्ट्र, तमिलनाडू, केरल के अलावा कई राज्यों में धोखाधडी करना स्वीकारा किया है। अभी तक की पूछताछ में लगभग 500 से ज्यादा व्यक्तियों के साथ धोखाधडी एवं लगभग 52 बैंक अकाउंट खुलवाने एवं उसमें लगभग तीन करोड रुपये के ट्रांजेक्शन की जानकारी प्राप्त हुई है।

  • सवालों का फतवा जारी करने से पहले जान तो लें

    सवालों का फतवा जारी करने से पहले जान तो लें

    • प्रशांत पोळ

    द कश्मीर फाईल्स की जबरदस्त सफलता के कारण तमाम वामपंथी और इस्लामिस्ट्स बौखला गए हैं. आज तक खड़ा किया सारा विमर्श उन्हे बिखरता हुआ नजर आ रहा हैं. इसलिए राष्ट्रवाद के इस नए तूफान को भ्रमित करने, वे सोशल मीडिया के तमाम मंचों पर यह प्रश्न उठा रहे हैं, “तब आप क्या कर रहे थे..? दिल्ली में सरकार आपकी थी. राज्यपाल जगमोहन आपके थे. फिर भी यह नरसंहार क्यूँ हुआ.? क्या किया आपने तब ?”

    ‘उल्टा चोर कोतवाल को डांटे’ इस मुहावरे का इससे अच्छा प्रयोग नहीं हो सकता.

    1984 में आठवी लोकसभा के चुनाव में काँग्रेस को राक्षसी बहुमत मिला था. कुल 514 में से 404 सीट्स. भाजपा के मात्र 2 सांसद चुन कर आए थे. किन्तु परिस्थिति तेजी से बदली. 1989 के चुनाव मे, उन्ही राजीव गांधी के नेतृत्व में काँग्रेस बहुमत का आंकड़ा भी नहीं छूं सकी. उन्हे मिली 197 सीटें. नवगठित ‘जनता दल’ के 143 सदस्य चुनकर आए. रामजन्मभूमि आंदोलन के कारण पहली बार, भाजपा का आंकड़ा 2 से बढ़कर 85 तक पहुंचा था. मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी को 33 सीटें मिली थी. अतः जनता दल की सरकार बनी, जिसे भाजपा और कम्युनिस्ट पार्टी ने बाहर से समर्थन दिया. विश्वनाथ प्रताप सिंह प्रधानमंत्री बने.

    इधर कश्मीर की परिस्थिति क्या थी.? नेहरू के चहेते, शेख अब्दुल्ला के बेटे फारुख अब्दुल्ला मुख्यमंत्री थे. कश्मीर से ही चुने गए मुफ़्ती मोहम्मद सईद देश के गृहमंत्री थे. 1987 के विधानसभा चुनाव में 76 में से फारुख अब्दुल्ला की नेशनल कॉन्फ्रेंस को 40 और काँग्रेस को 26 सीटें मिली थी. जम्मू क्षेत्र से भाजपा के मात्र 2 विधायक चुन कर आए थे. इस चुनाव के बाद, सन 1988 से ही, कश्मीर घाटी में पाकिस्तानीयों की घुसपैठ बढ़ गई थी. हिंदुओं को घाटी से भगाने का आंदोलन प्रारंभ हो गया था. यासीन मलिक (जिसे फिल्म में ‘बिट्टा’ के रूप में दिखाया हैं), यह आतंकवादी गुट, ‘जम्मू – कश्मीर लिबरेशन फ्रंट’ (JKLF) का नेता था. अनेक आतंकवादी गुटों के साथ, वह खुले आम केंद्र शासन को चुनौती देता था. चुन – चुन कर घाटी के हिन्दू नेताओं को मारता था. 1986 के काश्मीर दंगों में इसकी बड़ी भूमिका थी. 14 सितंबर 1989 को ‘टीका लाल टपलू’ की दिन दहाड़े, खुले आम हत्या कर के दहशत फैलाने का काम प्रारंभ हो गया था. टीका लाल टपलू यह राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के निष्ठावान और समर्पित स्वयंसेवक थे. कश्मीरी पंडित उन्हे अतीव आदर से देखते थे.

    1989 में कश्मीर में हो रही इन हत्याओं के दौर में दिल्ली में वी. पी. सिंह की सरकार थी, जिसमे मुफ़्ती मोहम्मद सईद गृहमंत्री थे और इश्कबाजी में डुबे हुए फारुख अब्दुल्ला मुख्यमंत्री..! इसी बीच 8 दिसंबर 1989 को, गृहमंत्री मुफ़्ती साहब की लड़की, रूबिया सईद का आतंकवादी अपहरण कर लेते हैं. उसके बदले कश्मीर के जेल में बंद पांच खूंखार आतंकवादियों को रिहा करने की मांग रखी जाती हैं. अपहरण की ज़िम्मेदारी जेकेएलएफ और उसका नेता यासीन मलिक लेते हैं. पांच दिन यह नाटक चलता हैं. पांच दिनों के बाद रूबिया सईद को सुरक्षित लौटाया जाता हैं और वहां पांच खूंखार आतंकवादी रिहा किए जाते हैं..!

    इस पूरे प्रकरण में, ना तो जेकेएलएफ़ का कोई नेता गिरफ्तार होता हैं, ना ही यासीन मलिक को गिरफ्तार किया जाता हैं. गिरफ्तारी छोड़िए, पुंछताछ के लिए भी नहीं बुलाया जाता… 1989 के दिसंबर और 1990 के जनवरी महीने में पूरा कश्मीर आतंकवादियों के हवाले कर दिया गया हैं. जैसा कश्मीर फाईल्स में दिखाया गया हैं, बिलकुल वैसा ही कश्मीर का माहौल हैं. रोज रात को मशाल जुलूस निकाल रहे हैं जिसमे हिंदुओं को, उनकी औरतों को कश्मीर में छोड़कर, भाग जाने के लिए कहा जा रहा हैं. 4 जनवरी 1990 को श्रीनगर से प्रकाशित होने वाले दैनिक ‘आफताब’ ने एक बड़ा सा विज्ञापन प्रकाशित किया, जिसमे हिजबूल मुजाहिदीन ने सारे हिन्दू – सीख समुदाय को घाटी छोड़ के जाने के लिए कहा गया था. पूरे घाटी में पाकिस्तानी करेंसी का प्रयोग हो रहा था.

    कश्मीर में हो रहे हिंदुओं के हत्याकांड पर जब भाजपा ने आवाज उठाना चालू किया, चिल्लाना शुरू किया, तब फारुख अब्दुल्ला को हटाकर राष्ट्रपति शासन लगाया गया. यह दिन था, 19 जनवरी 1990. आतंकवादियों को यह पहले से पता चल गया था, की 19 जनवरी को राज्यपाल का शासन लगेगा. इसलिए 18 जनवरी की रात और 19 जनवरी को पूरे दिन भर कश्मीर घाटी में हिंदुओं के खून की होली खेली गई. इसी दिन राज्यपाल के रूप में जिस व्यक्ति को दिल्ली ने भेजा, वह थे – जगमोहन !

    इस समय तक जगमोहन का और भाजपा का, दूर – दूर तक कोई संबंध नहीं था. जगमोहन काँग्रेस के आदमी थे. विशेषतः गांधी परिवार के खास. आपातकाल (1975 – 1977) में संजय गांधी की आज्ञा से तुर्कमान गेट और अन्य स्थानों के अतिक्रमण तोड़ने वाले प्रशासक. संजय गांधी के कारण ही वे ‘नाम’ समिट के समय गोवा के और एशियाड के समय दिल्ली के उप-राज्यपाल बने. इन आयोजनों की सफलता के कारण वे इंदिरा गांधी और बाद में राजीव गांधी के चहेते बने. वे कुशल प्रशासक थे.

    जगमोहन ने कश्मीर के हिंदुओं की जो स्थिति देखी, उससे वो अंदर तक हिल गए. उन दिनों पर उन्होने पुस्तक लिखी हैं – My Frozen Turbulence in Kashmir’. कश्मीर के राज्यपाल के नाते उनका कार्यकाल मात्र पांच महीनों का ही रहा. जब वे वहां मुस्लिम आतंकवादियों पर कहर बरसाने लगे, तो उन्हे गृहमंत्री मुफ़्ती मोहम्मद सईद ने राज्यपाल पद से हटा दिया. इस के बाद जगमोहन ने भाजपा में शामिल होने का निर्णय लिया.

    कश्मीर की इन तत्कालीन घटनाओं पर सबसे ज्यादा आवाज उठाई तो राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने. उस समय नए बनने जा रहे ‘पुनुन कश्मीर’ (हमारा कश्मीर) के शीर्ष नेताओं को, जिसमे ‘अग्निशेखर जी’ प्रमुख थे, संघ ने देश भर, विभिन्न स्थानों पर लोगों से, पत्रकारों से मिलवाया. कश्मीर की स्थिति को लोगों तक लेकर जाने के पूरे प्रयास किए. दुर्भाग्य से उन दिनों संघ को उतना नहीं सुना जाता था, जितना आज सुना जाता हैं !

    इसलिए कोई अगर यह कहे की ‘उस समय आप क्या कर रहे थे?’ तो उनसे पूछिए –

    • शेख अब्दुल्ला, फारुख अबुल्ला और ओमर अब्दुल्ला की खासमखास काँग्रेस पार्टी क्या कर रही थी ?
    • जितने वामपंथी यह सवाल उठा रहे हैं, उनसे पूछना हैं, वे क्या कर रहे थे? वी. पी. सिंह सरकार को उनका भी तो समर्थन था.
    • देश के तमाम बुध्दीजीवी मुस्लिम नेताओं ने इस घटना पर क्या कहा? किसी एक मुसलमान नेता ने भी इस घटना का विरोध किया?
    • फारुख अब्दुल्ला परिवार की खास समर्थक काँग्रेस सरकार दस साल तक दिल्ली में राज करती रही. उस ने एक बार, एक बार भी इस समस्या का हल ढूँढने की कोशिश की?
    • और सिनेमा जगत…. दुनिया भर के प्रश्नों पर सिनेमा बनाने वाले हमारे बॉलीवुड के निर्माता, कश्मीर के इस सच को इतने वर्षों तक क्यूँ नहीं पर्दे पर लाये?
  • दुष्कर्म के आरोपी राजेश विश्वकर्मा की अवैध प्रॉपर्टी जमींदोज

    दुष्कर्म के आरोपी राजेश विश्वकर्मा की अवैध प्रॉपर्टी जमींदोज

    भोपाल,17 जनवरी(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)। इंदौर जिले के थाना क्षिप्रा पर 15 जनवरी 2022 को एक महिला ने शिकायत की थी कि उसका पति राजेश विश्वकर्मा अपने अन्य साथियों अंकेश, विवेक, विपिन, और आनंद को लेकर उसके साथ सामूहिक दुष्कर्म और अप्राकृतिक कृत्य करता है। पीड़िता की रिपोर्ट पर थाना क्षिप्रा ने इन पांच आरोपियों के विरुद्ध अपराध क्रमांक 24/2022 पंजीबद्ध करके जांच शुरु की। पुलिस ने पाया कि महिला की शिकायत सही है और आरोपी गण अपने सामाजिक रसूख की आड़ में अन्य लोगों से भी अभद्रता करते हैं। उनकी हरकतें अशोभनीय और आततायी श्रेणी की हैं। पुलिस टीम ने सक्रियता से कार्रवाई करते हुए घटना के सभी आरोपियों की पहचान की और उन्हें गिरफ्तार भी कर लिया।
    महिला की दुर्दशा और प्रकरण की गंभीरता को देखते हुए पुलिस तथा जिला प्रशासन ने संयुक्त कार्रवाई की और आरोपी राजेश विश्वकर्मा की अवैध संपत्तियों की जानकारी निकाली। पुलिस और प्रशासन ने पाया कि उसने अवैध तरीकों से संपत्तियां बनाई हैं और इसी वजह से उसके हौसले बुलंद हो गए हैं। प्रशासन ने आरोपी राजेश विश्वकर्मा के अवैध फार्म हाऊस और मकान को आनन फानन में जमींदोज कर दिया।अन्य आरोपियों की संपत्तियों और उनसे प्रताड़ित महिलाओं की जानकारी भी प्राप्त की जा रही है।

  • घुसपैठियों को बसाने वालों को बख्शने पर  सतना डीएम को लोकायुक्त ने तलब किया

    घुसपैठियों को बसाने वालों को बख्शने पर सतना डीएम को लोकायुक्त ने तलब किया

    भोपाल,13 जनवरी(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)। सतना जिले की नयागांव ग्राम पंचायत में बंग्लादेशी घुसपैठियों को इंदिरा आवास देकर बसाने वाले अफसर पर कार्रवाई न किए जाने से लोकायुक्त जस्टिस एन के गुप्त खासे नाराज हैं। पिछले ढाई सालों से आरोपी सीईओ पर कार्रवाई न किए जाने पर लोकायुक्त ने सतना कलेक्टर और एसपी को अपने सम्मुख हाजिर होने के निर्देश दिए हैं।

    सतना कलेक्टर अनुराग वर्मा और एसपी धर्मवीर सिंह यादव को लोकायुक्त कार्यालय में 11 फरवरी को जांच प्रकरण 503। 2016 के संबंध में हाजिर होने के निर्देश दिए गए हैं। शिकायत प्राप्त होने पर ये प्रारंभिक जांच राजीव गांधी जल ग्रहण क्षेत्र प्रबंधन मिशन भोपाल के अतिरिक्त संचालक से कराई गई थी। जांच प्रतिवेदन में सतना जिलेके मझगंवा विकासखंड की वीरसिंह पुर तहसील के अंतर्गत नयागांव ग्रामपंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी संदीप शर्मा को दोषी पाया गया है। आरोप है कि श्री शर्मा ने इंदिरा आवास योजना के अंतर्गत हितग्राही अब्दुल कय्यूम, इरफान खान, मेहरून खान, सलीम खान,श्रीमती पुरवहिया खान,और रुबाब खान को वर्ष 2013-14 में आवास स्वीकृत किए थे और पहली किस्त के रूप में 35000 रुपए की राशि भी दे दी थी।

    शिकायत मिलने पर पाया गया कि ये सभी हितग्राही बंग्लादेशी हैं और अवैध रूपसे घुसपैठिए बनकर यहां रह रहे हैं। अतिरिक्त संचालक के जांच प्रतिवेदन के आधार पर लोकायुक्त कार्यालय ने लगभग ढाईसाल पहले सतना कलेक्टर से पूछा था कि इस संबंध में वे वस्तुस्थिति से अवगत कराएं। इसके बावजूद सतना कलेक्टर ने न तो कोई कार्रवाई की न ही संगठन को वस्तुस्थिति से अवगत कराया। इससे नाराज लोकायुक्त ने कलेक्टर और एसपी दोनों को 11 फरवरी को हाजिर होने के निर्देश दिए हैं।

    सूत्रों का कहना है कि सतना में कांग्रेस के विधायक सिद्धार्थ कुशवाहा  और चित्रकूट के कांग्रेसी विधायक नीलांशु चतुर्वेदी के संरक्षण की वजह से ये कार्रवाई नहीं हो पा रही है। वे अपने क्षेत्र में इसी तरह के घुसपैठियों को बसाकर वोट बैंक बढ़ा रहे हैं। घुसपैठियों के कारण विंध्य क्षेत्र के हालात पश्चिम बंगाल की तरह विस्फोटक बनते जा रहे हैं।

    जन न्याय दल के प्रदेश प्रवक्ता आलोक सिंघई ने आरोप लगाया है कि  मैहर के विधायक नारायण त्रिपाठी और अन्य कांग्रेसी नेता लंबे समय से विंध्य प्रांत की मांग उठाकर सरकार पर दबाव बना रहे हैं। इस वोट बैंक की राजनीति की आड़ लेकर वे सरकारी नौकरियां बेचने का कारोबार करते हैं और सरकारी बजट छीनने का षड़यंत्र भी रचते हैं। अवैध घुसपैठियों की वजह से देश की सुरक्षा पर खतरा तो बढ़ ही रहा है साथमें आम नागरिकों के टैक्स से प्राप्त संसाधनों का भी दुरुपयोग हो रहा है।

  • आर्टिफिशल  इंटेलिजेंस आधारित स्मार्ट आई से हो सकेगी छात्रों की निगरानी

    आर्टिफिशल इंटेलिजेंस आधारित स्मार्ट आई से हो सकेगी छात्रों की निगरानी

    आर्टिफिशल इंटेलिजेंस आधारित स्मार्ट आई से हो सकेगी छात्रों की निगरानी

    चंडीगढ़: पिछले कई वर्षों से आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पर काफी चर्चा हो रही है। दुनिया में भी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के इस्तेमाल पर जोर दिया जा रहा है। यह तकनीक फोन या कंप्यूटर में उपलब्ध शतरंज जैसे गेम, गूगल और एलेक्सा वॉयस असिस्टेंट समेत रोबोट जैसी डिवाइस के रूप में मौजूद है। हालांकि, इस तकनीक पर अब भी काम चल रहा है। आज हम आपको बता रहे हैं आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से कैसे स्कूल में छात्रों की निगरानी की जा सकती है गवर्मेंट मॉडल सीनियर सेकेंडरी स्कूल, सेक्टर 33 चंडीगढ़ के एक छात्र संजीत सोनी ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की मदद से एक स्मार्ट आई प्रोजेक्ट बनाया है। यह प्रोजेक्ट छात्रों की उपस्थिति को चिह्नित करने और कक्षाओं और लेक्चर्स में उनकी हाज़िरी की जांच करने के लिए फ़ेस रिकगनिशन मॉडल यानी चेहरे पहचानने वाली तकनीक के रूप में काम करता है। डिजिटल इंडिया ने माइक्रो-ब्लॉगिंग प्लेटफॉर्म एप्प कू पर संजीत सोनी का एक वीडियो शेयर कर बताया कि कैसे काम करेगा यह स्मार्ट आई प्रोजेक्ट। क्या है आर्टिफिशियल इटेलिजेंस
    आर्टिफिशियल इटेलिजेंस, दुनिया की श्रेष्ठ तकनीकों में से एक है। यह दो शब्दों आर्टिफिशियल और इंटेलिजेंस से मिलकर बना है। इसका अर्थ है “मानव निर्मित सोचने की ताक़त। इस तकनीक की सहायता से ऐसा सिस्टम तैयार किया जा सकता है, जो मानव बुद्धिमत्ता यानी इंटेलिजेंस के बराबर होगा। इस तकनीक के माध्यम से एल्गोरिदम सीखने, पहचानने, समस्या-समाधान, भाषा, लॉजिकल रीजनिंग, डिजिटल डेटा प्रोसेसिंग, बायोइंफार्मेटिक्‍स तथा मशीन बायोलॉजी को आसानी से समझा जा सकता है। इसके अलावा यह तकनीक खुद सोचने, समझने और कार्य करने में सक्षम है।

  • इत्र कारोबारी पीयुष जैन से ढाई सौ करोड़ नकद, हजार करोड़ की जायदाद बरामद

    इत्र कारोबारी पीयुष जैन से ढाई सौ करोड़ नकद, हजार करोड़ की जायदाद बरामद

    पीयूष जैन के बाद अब कन्नौज में GST विजिलेंस टीम की जांच, इत्र कारोबारी रानू मिश्रा के यहां बड़ी कार्रवाई
    कानपुर,27 दिसंबर(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)।इत्र कारोबारी पीयुष जैन के ठिकानों से आज सोमवार को भी नोटों की गड्डियों के मिलने का सिलसिला जारी है। कानपुर के बाद आज कन्नौज स्थित उसके एक घर पर आरबीआई और सीबीआई कर्मी भी नोट गिनने पहुंचे हैं। अब तक कुल 257 करोड़ रुपयों की बरामदगी हो चुकी है और पीयुष जैन को गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश किया गया है। अबतक पीयुष जैन के ठिकानों से 257 करोड़ कैश, 125 किलो सोना और अरबों की संपत्ति के दस्तावेज मिले हैं। छापे में करीब 1000 करोड़ रुपये से अधिक की संपत्ति का खुलासा हो चुका है।

    गिरफ्तारी के बाद कानपुर कोर्ट में पीयुष जैन पेश

    इधर पीयूष जैन को कानपुर में गिरफ्तार कर लिया गया। थाने में अंदर उसके ठिकानों से मिले नोटों का अंबार लगा था जबकि पुलिस स्टेशन की फर्श पर धनकुबेर इत्र कारोबारी बेहाल लेटा हुआ था। ताजा समाचार में बताया गया कि पीयुष जैन का पुलिस ने मेडिकल चेकअप कराया है। इसके बाद उसे आज ही कानपुर कोर्ट में पेश किया जाएगा।

    RBI और एसबीआई की टीम भी लगाई गई

    इत्र माफिया के घर पिछले 4 दिनों से जारी छापेमारी सोमवार को भी जारी रही। कन्नौज में उसके घर पर नोटों की गिनती के लिए आरबीआई के साथ स्टेट बैंक के अफसरों की भी टीम लगायी गई है। नोट गिनने की तीन बड़ी और दो छोटी मशीनों को बढ़ाते हुए कुल 7 मशीनों का प्रयोग किया जा रहा है।

    अफसरों ने जब उससे पूछा कि ये पैसा किसका है तो उसने कहा कि मेरा है। मैंने अपने घर का पुश्तैनी 400 किलो सोना बेचकर इसे इकट्ठा किया है। ये रकम मैं अपने कारोबार में लगाना चाहता था।
    कन्नौज में इत्र कारोबारी पीयूष जैन के बेटे को लेकर शुक्रवार को जीएसटी इंटेलिजेंस महानिदेशालय गुजरात (DGGI) की टीम छिपट्टी मोहल्ला पहुंची थी, वहीं टीम ने शहर के दूसरे बडे़ कंपाउंड और इत्र कारोबारी रानू मिश्रा के घर छापा मारा और उनके स्टॉफ से पूछताछ की जा रही है, वहीं टीम ने कुछ दस्तावेज भी जब्त किए है।

    सूत्रों का कहना है कि जांच में पता चला है कि मुखौटा कंपनियां बनाकर लोन लिया गया है और कर की चोरी की गई है। जैन मूल रूप से कन्नौज के रहने वाले हैं। इनका इत्र का बड़ा कारोबार है। इनकी संपत्तियां, शोरूम एवं कार्यालय मुंबई में भी है। जांच में पता चला है कि इनका कारोबार सऊदी अरब सहित मध्य पूर्व के देशों में फैला है। पीयूष जैन की फैक्टरी से ही निर्मित ‘समाजवादी इत्र’ की लॉन्चिंग नवंबर में समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने की जैन को अखिलेश यादव का करीबी बताया जाता है।
    अधिकारियों के मुताबिक जैन की करीब 40 कंपनियां हैं जिनमें से दो कंपनियां मध्य पूर्व के देशों में हैं। जैन का कारोबार तो कई क्षेत्रों में हैं लेकिन इनका मूल व्यवसाय इत्र का है। इनका एक शो रूम मुंबई में है जहां से वह अपने इत्र का निर्यात देश और दुनिया में करते हैं। आयकर विभाग की टीम ने पीयूष जैन की फैक्ट्री, कार्यालय, कोल्ड स्टोर और पेट्रोल पंप पर छापेमारी की और इस दौरान करोड़ों की कर चोरी सामने आई।कल उनके घर से डेढ़ सौ करोड़ रुपए नकद बरामद होने के बाद टीम के सदस्यों ने घर के गुप्त तहखानों को तोड़कर रकम जब्त करने का अभियान चलाया है।

  • पुलिसिंग का मॉडल बनेगी पुलिस कमिश्नर प्रणालीःनरोत्तम मिश्रा

    पुलिसिंग का मॉडल बनेगी पुलिस कमिश्नर प्रणालीःनरोत्तम मिश्रा

    भोपाल,20 दिसंबर(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)।गृह मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा ने कहा कि भोपाल में लागू की गई पुलिस कमिश्नर प्रणाली को प्रभावी रूप से अमल में लाया जाए। आम नागरिकों को इसका एहसास भी होना चाहिए। पुलिस जनता के साथ मित्रतापूर्ण व्यवहार करे और अपराधियों के दिल में खौफ पैदा हो। कानून व्यवस्था को बनाए रखने के लिए पुलिस आधुनिक तकनीक को अपनाए। इसके प्रभावी क्रियान्वयन के लिये अत्याधुनिक तकनीक का अधिकतम इस्तेमाल करने के निर्देश भी दिये। उन्होंने पुलिस कमिश्नर प्रणाली के लाभों से जनता को अवगत कराने को कहा है।

    गृह मंत्री डॉ. मिश्रा पुलिस कमिश्नर प्रणाली लागू होने के बाद सोमवार को इसके प्रभावी क्रियान्वयन के लिये पुलिस कंट्रोल रूप भोपाल में दिये जा रहे प्रशिक्षण का जायजा ले रहे थे। प्रशिक्षण में भोपाल के पुलिस आयुक्त श्री मकरंद देउस्कर भी मौजूद थे।

    डॉ. मिश्रा ने पुलिस के आला अधिकारियों को निर्देश दिये कि प्रशिक्षण व्यवहारिक हो, जिससे पुलिस कमिश्नर प्रणाली का प्रभावी क्रियान्वयन हो। उन्होंने कहा कि इस नये सिस्टम के लागू होने के बाद अपराध नियंत्रण के सकारात्मक परिणाम अपेक्षित है।

    गृह मंत्री डॉ. मिश्रा ने सभी प्रतिभागी अधिकारियों से बेहतर परिणाम की अपेक्षा की। उन्होंने कहा कि पुलिस को सौंपे गये नये दायित्वों में कोई लापरवाही न बरतें। उन्होंने सिस्टम के क्रियान्वयन को देश में सबसे अच्छा बनाने के लिये सभी से अपना शत-प्रतिशत सर्वश्रेष्ठ योगदान देने का आव्हान किया।

  • मकरंद देऊस्कर बने भोपाल के पहले पुलिस कमिश्नर,हरिनारायण चारी मिश्रा ने संभाली इंदौर की कमान

    मकरंद देऊस्कर बने भोपाल के पहले पुलिस कमिश्नर,हरिनारायण चारी मिश्रा ने संभाली इंदौर की कमान

    भोपाल,10 दिसंबर(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)। भोपाल और इंदौर में लागू की गई पुलिस आयुक्त प्रणाली के तहत भारतीय पुलिस सेवा, राज्य पुलिस सेवा के अधिकारियों के पद-स्थापना आदेश जारी कर दिये गये हैं। पुलिस आयुक्त प्रणाली के अंतर्गत भोपाल में मकरन्द देऊस्कर (भापुसे) को और इंदौर में हरिनारायण चारी मिश्रा (भापुसे) को पुलिस आयुक्त पदस्थ किया गया है।

  • भोपाल और इंदौर मेट्रोपोलिटियन क्षेत्र घोषित, पुलिस आयुक्त प्रणाली लागू

    भोपाल और इंदौर मेट्रोपोलिटियन क्षेत्र घोषित, पुलिस आयुक्त प्रणाली लागू


    पुलिस आयुक्त प्रणाली के लिये अधिसूचना जारी

    भोपाल, 09 दिसंबर(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)। राज्य सरकार ने ऐतिहासिक निर्णय लेते हुए प्रदेश के महानगर भोपाल और इंदौर में पुलिस आयुक्त प्रणाली को लागू कर दिया है। इस संबंध में आज अधिसूचना जारी कर दी गई है। गृह मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा ने पुलिस मुख्यालय में आयोजित पत्रकारवार्ता में बताया कि कानून-व्यवस्था के प्रभावी क्रियान्वयन और दोनों शहरों की जनसंख्या 10 लाख से अधिक होने पर राज्य सरकार ने संवैधानिक प्रावधानों के मुताबिक नगरीय क्षेत्रों एवं सीमाओं को मेट्रो पोलिटियन क्षेत्र घोषित किया है। मंत्री डॉ. मिश्रा ने सरकार द्वारा लिये गये बहु-प्रतीक्षित ऐतिहासिक निर्णय के लिये मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान का आभार माना। पुलिस मुख्यालय भोपाल में पुलिस आयुक्त प्रणाली को लागू किये जाने संबंधी जानकारी की उद्घोषणा के समय पुलिस महानिदेशक श्री विवेक जौहरी और अपर मुख्य सचिव गृह डॉ. राजेश राजौरा भी मौजूद थे।

    गृह मंत्री डॉ. मिश्रा ने बताया कि पुलिस आयुक्त प्रणाली में इंदौर नगरीय पुलिस जिले में 36 थानों और भोपाल नगरीय पुलिस जिले में 38 थानों की सीमाओं को समाविष्ट किया गया है। दोनों शहरों में पुलिस महानिरीक्षक स्तर के अधिकारी पुलिस आयुक्त रहेंगे। उन्होंने बताया कि दोनों महानगरों में पुलिस आयुक्त प्रणाली के लिये अधिकारियों के पद और जोन का भी निर्धारण किया गया है।

    मंत्री डॉ. मिश्रा ने बताया कि पुलिस आयुक्त प्रणाली के लागू हो जाने से इंदौर और भोपाल के पुलिस आयुक्त की शक्तियों एवं प्राधिकारों को मध्यप्रदेश के पुलिस महानिदेशक तथा महानिरीक्षक के सामान्य नियंत्रण एवं पर्यवेक्षण के अधीन निहित किया गया है। पुलिस आयुक्त को कार्यपालक मजिस्ट्रेट की शक्तियाँ होंगी। मंत्री डॉ. मिश्रा ने बताया है कि भारतीय दण्ड प्रक्रिया संहिता-1973 (1974 का 2) की धारा-21 द्वारा प्रदत्त शक्तियों में इंदौर और भोपाल नगरीय पुलिस जिले में पदस्थ पुलिस उपायुक्तों एवं पुलिस सहायक आयुक्तों को अपने-अपने अधिकारिता क्षेत्र में विशेष कार्यपालक मजिस्ट्रेट नियुक्त कर शक्तियाँ प्रदान की गई हैं।

    मंत्री डॉ. मिश्रा ने बताया कि पुलिस एक्ट-1861 के अनुसार मेट्रोपोलिटिन क्षेत्र में पुलिस आयुक्त के अधीन पुलिस का प्रशासन रहेगा। पुलिस आयुक्त पुलिस महानिदेशक के सामान्य नियंत्रण एवं परिवेक्षण में रहेंगे। उन्होंने बताया कि बंदी अधिनियम-1900 अनुसार जेल में बंद कैदियों को पैरोल और आपातकाल में पैरोल बोर्ड की अनुशंसा पर सशर्त छोड़ा जा सकेगा। विष अधिनियम-1919 के तहत गैर कानूनी ज़हर या तेज़ाब रखने अथवा बेचने वालों की तलाशी से बरामद ज़हर या तेज़ाब जप्त किया जा सकेगा। अनैतिक व्यापार अधिनियम-1956 में निहित प्रावधान अनुसार वैश्यावृत्ति के विरुद्ध कार्यवाही की जा सकेगी और इस पेशे में धकेली गई महिलाओं को मुक्त कराया जाकर उन्हें संरक्षण-गृह में भेजा जा सकेगा।

    मंत्री डॉ. मिश्रा ने बताया कि पुलिस आयुक्त प्रणाली लागू हो जाने से विधि विरुद्ध क्रिया-कलाप निवारण अधिनियम-1967 अनुसार केन्द्र सरकार द्वारा मेट्रोपोलिटिन क्षेत्र में प्रतिबंधित संगठनों को गैर कानूनी गतिविधियों को रोकने के लिये प्रतिबंधित किया जा सकेगा। मोटर यान अधिनियम-1988 (1988 का 59) का प्रयोग करते हुए वाहनों की पार्किंग अथवा उनके रुकने के स्थान स्थानीय अधिकारियों से समन्वय कर निर्धारित किये जा सकेंगे। वाहनों की गति सीमा निर्धारित की जा सकेगी। लोक सुरक्षा के हित में या उनकी सहूलियत के लिये या किसी सड़क या पुल की स्थिति को देखते हुए, वाहनों की अधिकतम गति निर्धारित करने के लिये उपयुक्त ट्रैफिक साइन लगाये जा सकेंगे।

    मंत्री डॉ. मिश्रा ने बताया कि लोक सुरक्षा के हित में या उनकी सहूलियत के लिये या किसी सड़क या पुल की स्थिति को देखते हुए, श्रेणी विशेष के वाहनों के उपयोग को सामान्यत: अथवा निर्धारित क्षेत्र या निर्धारित सड़क पर प्रतिबंधित किये जा सकेंगे या सशर्त अनुमति दी जा सकेगी। मध्यप्रदेश सुरक्षा अधिनियम-1990 के अंतर्गत गुण्डे-बदमाशों और ऐसे अपराधी तत्वों के गैंग और आदतन अपराधियों को जिलाबदर किया जा सकेगा। उन्होंने बताया कि शासकीय गुप्त बात अधिनियम-1923 अंतर्गत सरकारी गोपनीय दस्तावेज रखने और इस अधिनियम के विरुद्ध की गई गतिविधियों पर कार्यवाही की जा सकेगी।

  • भारत के पहले सीडीएस जनरल विपिन रावत का हेलीकाप्टर दुर्घटना में निधन, एक  पायलट जख्मी

    भारत के पहले सीडीएस जनरल विपिन रावत का हेलीकाप्टर दुर्घटना में निधन, एक पायलट जख्मी

    सीडीएस बिपिन रावत समेत 14 लोगों के साथ भारतीय वायुसेना का हेलिकॉप्टर तमिलनाडु में दुर्घटनाग्रस्त

    नई दिल्ली 8 दिसंबर (प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)। भारतीय वायु सेना का एक हेलीकॉप्टर बुधवार को तमिलनाडु के कुन्नूर के पास दुर्घटनाग्रस्त हो गया। हादसे में चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (CDS) जनरल बिपिन रावत के साथ उनकी पत्नी मधुलिका रावत, उनके कर्मचारी और अन्य अधिकारी भी मौजूद थे। IAF Mi-17V5 हेलीकॉप्टर में चालक दल सहित 14 लोग सवार थे, जिनमें से चार के शव बरामद कर लिए गए हैं और तीन घायलों को अस्पताल पहुँचाया गया है। हादसे की जानकारी मिलते ही देश की दिग्गज शख़्सियतों ने Koo App पर पोस्ट करते हुए सभी की सलामती की दुआएँ माँगी।

    अधिकारियों के मुताबिक़ हेलिकॉप्टर में सवार लोगों में देश के पहले सीडीएस बिपिन रावत के रक्षा सहायक ब्रिगेडियर एलएस लिड्डर और उनके स्टाफ़ ऑफिसर लेफ्टिनेंट कर्नल हरजिंदर सिंह भी शामिल थे। भारतीय वायुसेना ने कहा कि दुर्घटना के कारणों का पता लगाने के लिए जांच के आदेश दे दिए गए हैं। हेलिकॉप्टर सुलूर हवाई अड्डे से वेलिंगटन के डिफेंस सर्विसेज स्टाफ कॉलेज की ओर जा रहा था। घटनास्थल पर राहत एवं बचाव कार्य चल रहा है और घायलों को नज़दीकी सरकारी अस्पताल और सेना अस्पताल में ले जाया गया है।

    रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह स्थिति पर नजर रखे हुए हैं और रक्षा मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों की बैठक हो चुकी है। राजनाथ सिंह ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को हादसे की जानकारी दी। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय मामले की जानकारी देने के लिए संसद पहुंचे।

    घटना की जानकारी मिलने के बाद केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने Koo App पर एक पोस्ट में कहा, “CODS श्री बिपिन रावत जी के साथ हेलीकॉप्टर के दुखद दुर्घटना के बारे में सुनकर स्तब्ध हूँ। मैं सभी की सुरक्षा, भलाई के लिए प्रार्थना करता हूं।”

    वहीं, उत्तराखंड के पूर्व सीएम और वरिष्ठ कांग्रेस नेता हरीश रावत ने Koo पोस्ट में लिखा, “चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल बिपिन रावत जी, उनकी धर्मपत्नी सहित 14 लोगों के कुन्नूर तमिलनाडु में एम.आई.17 के दुर्घटनाग्रस्त होने से घायल होने का समाचार प्राप्त हुआ, जिनको उपचार हेतु अस्पताल में भर्ती किया गया है। मैं भगवान से CDS बिपिन रावत जी एवं उनकी धर्मपत्नी जी व अन्य लोगों की शीघ्र स्वास्थ्य लाभ की कामना करता हूँ। #CDSBipinRawat”

    Koo App
    चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल बिपिन रावत जी, उनकी धर्मपत्नी सहित 14 लोगों के कुन्नूर तमिलनाडु में एम.आई.17 के दुर्घटनाग्रस्त होने से घायल होने का समाचार प्राप्त हुआ, जिनको उपचार हेतु अस्पताल में भर्ती किया गया है। मैं भगवान से CDS बिपिन रावत जी एवं उनकी धर्मपत्नी जी व अन्य लोगों की शीघ्र स्वास्थ्य लाभ की कामना करता हूँ। #CDSBipinRawat – Harish Rawat (@harishrawatcmuk) 8 Dec 2021

    छिंदवाड़ा, मध्य प्रदेश से लोकसभा सांसद नकुल नाथ ने Koo करते हुए लिखा, “तमिलनाडु के कुन्नूर में सेना का हेलिकॉप्टर क्रैश होने की दुर्भाग्यपूर्ण घटना का समाचार प्राप्त हुआ, जिसमें चीफ़ आफ डिफेंस विपिन रावत जी के भी होने का समाचार है, विपिन रावत जी एवं साथियों को अस्पताल ले जानी की सूचना है। ईश्वर से उनके व समस्त घायलों की सकुशलता की प्रार्थना करता हूँ ।”

    बॉलीवुड अभिनेत्री और टीवी प्रस्तोता अर्चना पूरन सिंह ने अपनी Koo पोस्ट में कहा, “CDS बिपिन रावत को ले जा रहा हेलिकॉप्टर क्रैश। सुनकर बहुत दुःख हुआ । पैसेंजर्स की सेफ्टी के लिए प्रार्थना. 🙏🏽🙏🏽🙏🏽 बताया जा रहा है कि खराब मौसम की वजह से ये हादसा हुआ है.”

    क्रिकेटर प्रज्ञान ओझा ने अपनी कू पोस्ट में लिखा, “आपकी सुरक्षा के लिए प्रार्थना सीडीएस जनरल बिपिन रावत जी। सब कुछ ठीक होने की उम्मीद करता हूं!”

    ग़ौरतलब है कि जनरल बिपिन रावत ने सेना प्रमुख के रूप में सेवा करने के बाद 31 दिसंबर, 2019 को पूरे तीन साल के कार्यकाल के लिए भारत के पहले सीडीएस के रूप में कार्यभार संभाला था। रावत 3 फरवरी, 2015 को नागालैंड के दीमापुर में एक चीता दुर्घटना में बाल-बाल बचे थे और तब वह लेफ्टिनेंट जनरल थे।

  • राज्यपाल पहुंचे पुलिस के पचमढ़ी शिविर

    राज्यपाल पहुंचे पुलिस के पचमढ़ी शिविर

    भोपाल, 10 अक्टूबर(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)।मध्यप्रदेश के राज्यपाल महामहिम मंगुभाई पटेल ने शनिवार 09
    अक्टूबर को पुलिस प्रशिक्षण शाला पचमदी का भ्रमण किया। भ्रमण के दौरान महामहिम ने
    प्रशिक्षण शाला में प्रशिक्षणरत नव आरक्षकों के हथियार प्रशिक्षण की गतिविधियों का अवलोकन
    किया। साथ ही नव आरक्षकों की आवास व्यवस्था,भोजन व्यवस्था, विभिन्न प्रकार के प्रशिक्षणों
    के लिए परिसर में उपलब्ध सुविधाओं का जायजा लिया।

    पुलिस प्रशिक्षण शाला परिसर स्थित ब्रिटिशकालीन भवनों तथा प्रशिक्षण शाला परिसर के विस्तार के संबंध में भी जानकारी ली। इस अवसर पर होशंगाबाद जोन की पुलिस महानिरीक्षक श्रीमती दीपिका सूरी एवं पुलिस प्रशिक्षण
    शाला की पुलिस अधीक्षक श्रीमती निमिषा पाण्डेय ने महामहिम राज्यपाल महोदय को नव
    आरक्षकों के वर्ष भर चलने वाले प्रशिक्षण कार्यक्रम के बारे में विस्तृत जानकारी दी।

    श्रीमती निमिषा पाण्डेय ने बताया कि पुलिस प्रशिक्षण शाला पचमदी वर्ष 1960 में जबलपुर से
    स्थानांतरित कर पचमढ़ी लाई गई जिसमें वर्तमान में 72वें बैच के 126 नव आरक्षक प्रशिक्षणरत
    हैं। प्रशिक्षण कार्य में संलग्न स्टॉफ एवं उनके आवास और कल्याण संबंधी जानकारी भी दी गई।
    इस अवसर पर राज्यपाल महोदय द्वारा परिसर में स्थित शहीद स्मारक पर पुष्पांजलि अर्पित
    कर शहीदों को श्रद्धांजली दी। साथ ही परिसर में वृक्षारोपण भी किया। राज्यपाल महोदय ने नव
    आरक्षकों को सफलतापूर्वक प्रशिक्षण करने हेतु अग्रिम बधाई दी।

  • राज्यपाल मंगूभाई पटेल बोले साईबर सुरक्षा की मजबूती अनिवार्य

    राज्यपाल मंगूभाई पटेल बोले साईबर सुरक्षा की मजबूती अनिवार्य

    सायबर क्राइम इंवेस्टिगेशन एवं इंटेलिजेंस समिट-2021 का समापन

    भोपाल01 अक्टूबर,(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)। तेजी से बदलती हुई दुनिया में भूमि, समुद्र, वायु और अंतरिक्ष के साथ ही सायबर डोमेन का भी व्‍यापक एवं महत्‍वपूर्ण स्‍थान हो गया है। इसके असीमित उपयोग की संभावना है। नवीन तकनीक के सदुपयोग से जहाँ आमजन लाभांवित हो रहे हैं वहीं असामाजिक तत्‍व इसके दुरूपयोग से विभिन्‍न अपराधों को भी अंजाम दे रहे हैं। इस तरह की समि‍ट सायबर सुरक्षा और अपराध नियंत्रण का प्रासंगिक और सराहनीय प्रयास है। उक्‍त उद्गार आज मध्‍यप्रदेश पुलिस अकादमी, भौंरी के सभागार में दस दिवसीय सायबर क्राइम एवं इंटेलिजेंस समिट-2021 के समापन अवसर पर मुख्‍य अतिथि‍ के रूप में मध्‍यप्रदेश के राज्‍यपाल मंगूभाई पटेल ने व्‍यक्‍त किए। उन्‍होंने कहा कि अर्थव्‍यवस्‍था डिजीटल, कैशलेस की ओर अग्रसर है अत: सायबर सुरक्षा की मजबूती अनिवार्य है। इंटरनेट का कल्‍याणकारी कार्यों में सदुपयोग हो। सभी राज्‍यों की सहभागिता तथा अंतर्राष्‍ट्रीय विशेषज्ञों का मार्गदर्शन निश्चित ही सायबर सुरक्षा और सायबर अपराध नियंत्रण में सहायक होगा। राज्‍यपाल श्री पटेल ने विद्यालयीन/महाविद्यालयीन पाठ्यक्रम में भी सायबर सुरक्षा जागरूकता को शामिल करने की आवश्‍यकता बताई।

          पुलिस महानिदेशक विवेक जौहरी ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि कोविड काल में सायबर अपराधों में अत्‍यधिक बढ़ोत्‍तरी देखी गई। शहरों के साथ-साथ ग्रामीण क्षेत्रों में भी इस तरह के अपराध घटित हुए हैं। इस समिट में सायबर अपराध के निराकरण/विवेचना/नियंत्रण हेतु अधिकतम प्रयास किए गए हैं। विशेषज्ञों और सहभागियों ने अपना ज्ञान और तकनीक साझा की। डीजीपी ने कहा कि ” समिट के प्रतिभागी इस दौरान प्राप्‍त ज्ञान को अपने सहकर्मी/अधीनस्‍थों से भी साझा कर प्रशिक्षित करेंगे ताकि इन अपराधों पर त्‍वरित कार्यवाही संभव हो।

          विशेष पुलिस महानिदेशक (प्रशिक्षण) श्रीमती अरूणा मोहन राव ने बताया कि समिट में तीन हजार से अधिक अधिकारियों ने सहभागिता की है। 56 से अधिक राष्‍ट्रीय/अंतर्राष्‍ट्रीय विषय विशेषज्ञों से मार्गदर्शन प्राप्‍त हुआ है। सभी राज्‍यों में समन्‍वय और तकनीकी जानकारी का आदान-प्रदान त्‍वरित और प्रभावी कार्यवाही में सहयोगी होगा। उन्‍होंने कहा कि समिट आशानुकूल रही। समापन कार्यक्रम में यूनीसेफ की श्रीमती मारग्रेट ने भी सायबर क्राइम एंड द इम‍रजिंग टेक्‍नोलॉजी पर वर्चुअल संबोधन दिया।

    समिट के समापन अवसर पर अतिरिक्‍त पुलिस महानिदेशक  प्रशिक्षण श्रीमती अनुराधा शंकर, पुलिस अकादमी के निदेशक राजेश चावला, अतिरिक्‍त पुलिस महानिदेशक सायबर सेल योगेश देशमुख, सेवानिवृत्‍त पुलिस महानिदेशक मध्‍यप्रदेश ऋषि कुमार शुक्‍ला व क्‍लीयर ट्रेल संस्‍था के वाईस प्रेसीडेंट मनोहर कटोच सहित समिट के आयोजन से जुड़ीं संस्थाओं के प्रतिनिधि एवं अधिकारी  मौजूद थे। आभार प्रदर्शन उप निदेशक पुलिस अकादमी डॉ विनीत कपूर ने किया।

    समिट में मध्यप्रदेश सहित अन्‍य राज्‍यों के तीन हजार से अधिक पुलिस अधिकारियों ने सायबर क्राइम से निपटने एवं आधुनिक तरीकों से खुफिया जानकारी जुटाने की बारीकियाँ सीखीं।  इस समिट का आयो‍जन मध्‍यप्रदेश पुलिस द्वारा सॉफ्ट क्लिक फाउंडेशन, यूनीसेफ व क्‍लीयर ट्रेल कम्‍यूनिकेशन एनालिटिक्‍स के सहयोग से किया गया। समिट में देश एवं दुनिया के विख्‍यात सायबर क्राइम व इंटेलीजेंस विशेषज्ञों द्वारा सायबर क्राइम रोकथाम के गुर सिखाए गए। इस समिट में ऑनलाइन गेमिंग और गेम्बलिंग, किप्टोकरेंसी और क्रिप्‍टो-ट्रेड अपराधों जैसे महत्वपूर्ण विषयों के साथ वित्तीय धोखाधडी, एन्क्रिप्टेड व्हीओआईपी संचार पर अपराध को हल करने, ड्रोन तकनीक इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT), आर्टिफीशियल इंटेलिजेंस (AI), मशीन लर्निंग (ML) और अन्य विषयों पर मंथन हुआ। यह समिट महिलाओं एवं बच्चों के खिलाफ होने वाले सायबर अपराध रोकने एवं पुलिस अधिकारियों की कार्य क्षमता बढ़ाने के उद्देश्य से भी आयोजित की गई थी।

  • जन संतोष हमारा दायित्वःविवेक जौहरी

    जन संतोष हमारा दायित्वःविवेक जौहरी

    महिला अपराध अनुसंधान कौशल उन्‍नयन विकास प्रशिक्षण कार्यक्रम सम्‍पन्‍न

    भोपाल, 23 सिंतबर (प्रेस इंफार्मेशन सेंटर). पुलिस मुख्‍यालय में दो दिवसीय महिला अपराध अनुसंधान कौशल विकास प्रशिक्षण कार्यक्रम का समापन पुलिस महानिदेशक विवेक जौहरी के मुख्‍य आतिथ्‍य तथा जिला एवं सत्र न्‍यायाधीश सुश्री गिरीबाला सिंह के विशेष आतिथ्‍य में संपन्‍न हुआ।

          डीजीपी श्री जौहरी ने प्रशिक्षुओं को संबोधित करते हुए कहा कि महिला अपराध की विवेचना तथा की जाने वाली कार्यवाहियों में संवेदनशीलता अत्‍यावश्‍यक है। पीडि़त के साथ सहानुभूति पूर्ण सद्व्‍यवहार करें। कानून की जानकारी अद्यतन (अपडेट) रखें। सर्वोच्‍च न्‍यायालय, उच्‍च न्‍यायालय के नवीन निर्णयों का अध्‍ययन करें। पीडि़ता को शासन द्वारा उपलब्‍ध कराई जा रही सहायता और सुविधाओं से सुविज्ञ रहें। प्रशिक्षण लगातार चलने वाली प्रक्रिया है। जनअपेक्षाओं पर खरा उतरना हमारा दायित्‍व है, आदर्श पुलिसिंग करने का प्रयास करें।

          जिला एवं सत्र न्‍यायाधीश सुश्री गिरीबाला सिंह ने कहा कि न्‍याय होने के साथ-साथ होता हुआ दिखना भी चाहिए। विवेचना में निष्‍पक्षता एवं तथ्‍यात्‍मक दृष्टिकोण होना चाहिए। पीडि़त पक्ष की शिकायत दर्ज करते समय पूर्वागृहों से पूर्णत: मुक्‍त रहें। पीडि़त की आस्‍था और विश्‍वास का केन्‍द्र आप ही होते हैं अत: अपने उत्‍तरदायित्‍व से पूरा न्‍याय करें। अनुसंधान में तथ्‍यों की स्‍पष्‍टता पर पूरा ध्‍यान दें। अपने काम का खुद ऑडिट करें तभी सकारात्‍मक परिवर्तन ला सकेंगें।

          अतिरिक्‍त पुलिस महानिदेशक (महिला अपराध) श्रीमती प्रज्ञा ऋचा श्रीवास्‍तव ने बताया कि विगत दो वर्षों से पहला ऑफलाईन प्रशिक्षण कार्यक्रम रहा। जिसमें अच्‍छी सहभागिता रही है। प्रशिक्षण कार्यक्रम का फीडबेक उप पुलिस अधीक्षक आशुतोष पटेल तथा निरीक्षक सुश्री ज्‍योति सिंह ने दिया। प्रशिक्षुओं में उत्‍कृष्‍ट प्रदर्शन करने वाले प्रतिभागियों में निरीक्षक सुश्री प्रियंका पाठक, उप पुलिस अधीक्षक संदीप मालवीय, सुश्री यशस्‍वी शिंदे, सुश्री कीर्ति बघेल तथा अनिल कुमार को अतिथियों द्वारा प्रशस्ति पत्र प्रदान किए गए।