Category: अपराध

  • कानून माफिया की शह से खूब चला ठगी का कंप्यूटर

    कानून माफिया की शह से खूब चला ठगी का कंप्यूटर


    बूटकॉम सिस्टम्स के प्रकाश गुप्ता पर देश भर के व्यापारियों ने दर्ज कराए अमानत में खयानत के केस


    भोपाल,25 जून(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)। यूपी के लालगंज से आकर राजधानी में कंप्यूटर का कारोबार चलाने वाले प्रकाशचंद गुप्ता ने ठगी और लूट के लिए कानून की पेचीदगियों को अपना हथियार बना रखा है। पिछले तीस सालों में उसने हजारों लोगों के साथ धोखाघड़ी और ठगी की है लेकिन हर बार वह कानून की पकड़ से बचता रहा है। लूट के धन को उसने इस्कान फाऊंडेशन और राजधानी के एक बड़े माफिया समूह में निवेश कर दिया है। कई इमारतें और फार्महाऊस खरीदकर उसने अपनी स्थायी आय का इंतजाम किया है। कंप्यूटर की दूकान तो महज आय दिखाने और टर्नओवर बढ़ाने के लिए खोल ऱखी है। अपना बढ़ा कारोबार दिखाने के लिए वह दूसरे व्यापारियों का माल लेकर सस्ते में बेच देता है और उन व्यापारियों का धन गड़प लेता है। राजधानी में ही उसके विरुद्ध ढेरों केस लंबित पड़े हैं। वह हर मुकदमे को अदालत तक पहुंचने की राह सरल करता है फिर दांवपेंच और कुछ जजों से सांठगांठ करके बच निकलता है।

    प्रकाश चंद्र गुप्ताः चरित्रहीनता, धोखाधड़ी और चालबाजियों ने कारोबारी परंपराओं को तार तार किया.


    राजधानी की पुलिस बरसों से इस ठग की चालबाजियों के सामने लाचार है। कभी भ्रष्ट पुलिस अफसर उसके लिए ढाल बन जाते हैं तो कभी भ्रष्ट न्यायाधीश उसके अपराधों के अभिभावक बन जाते हैं। शहर के एक नामी गिरामी वकील तो उसके अघोषित पार्टनर बनकर करोड़ों रुपये कमा रहे हैं। उसने एक रखैल रख छोड़ी है जिससे उसके एक बेटी है। एक बेटी पहली शादी से है। इन दोनों परिवारों की शान शौकत के लिए वह करोड़ों रुपए खर्च करता है। सोने के जेवर और विलासिता की वस्तुएं तो वह ऐसे खरीदता है जैसे किसी रियासत का महाराजा हो। जजों और अफसरों को सप्लाई की जाने वाली लड़कियों को वह स्कूटर और कारें गिफ्ट में देता है। अपना धन मांगने वालों को डराने के लिए उसने कई बंदूकें और तलवारें ले रखी हैं। रौब जमाने के लिए वह पुलिस अफसरों के साथ शूटिंग अकादमी में शामिल होता है। जजों और पुलिस अफसरों को रिश्वत देने के लिए उसने उनका पैसा ब्याज पर चलाने के नाम पर खासा निवेश कर रखा है। यही पुलिस अफसर जनता से लूट में उसके सहयोगी बनते रहते हैं।
    प्रकाश चंद गुप्ता ने पिछले तीन दशकों में हजारों नागरिकों से ठगी और धोखाघड़ी की है। अपनी दूकान बूट काम सिस्टम पर वह कई बार ग्राहकों को असली कीमत से कम दाम पर कंप्यूटर बेच देता है और कई बार तीस हजार का कंप्यूटर डेढ़ लाख में भी बेच देता है।ग्राहक की अज्ञानता का लाभ लेकर वह लोगों की आंखों में धूल झोंकने का काम कारोबार चला रहा है। यदि कोई जांच एजेंसी का अफसर या सिपाही उसकी दूकान पर जाकर छानबीन करने की कोशिश करे तो वह झग़ड़ा करने पर उतारू हो जाता है और अपने टुकड़खोर पुलिस वालों के माध्यम से उसे गालियां पड़वाता है। उसके चंगुल में फंसे व्यापारी यदि उसे माफ कर दें और दुबारा धंधा करने पर राजी हो जाएं तब भी वह उन्हें दुबारा ठगने से नहीं चूकता।

    अयोध्यानगर पुलिस थानाः समाज से गद्दारी को सलाखों के पीछे पहुंचाने का साहस


    बड़े व्यापारियों और निवेशकों को ठगने के लिए वह उनसे पारिवारिक संबंध बढ़ाता है और घर की महिलाओं को गिफ्ट देकर अपने पक्ष में खड़ा कर लेता है। बाद में जब उनके परिवार से बड़ी रकम लेकर ठगी की बात सामने आती है तो इन्हीं महिलाओं को लालच देकर वह अपना मुखबिर बना लेता है। बड़े धन्नासेठों पर अड़ी बाजी और उन पर झूठे मुकदमे दर्ज कराकर ठगने के लिए वह वकीलों और भ्रष्ट जजों का सहारा लेता है। जब किसी मुकदमे की वजह से उसे जेल यात्रा करनी पड़े तो उसकी खबर अखबारों में न छप सके इसके लिए वह मोटी रकम खर्च करता है। उसके गिरोह में कई ऐसे पत्रकार भी शामिल हैं जो सही खबर छापने वाले पत्रकारों के विरुद्ध ही दुष्प्रचार करने में जुट जाते हैं। इसके बावजूद उसकी ठगी और धोखाधड़ी के कई मुकदमे आज भी अदालतों में विचाराधीन है।
    कई बैंकों मैनेजरों से सांठ गांठ करके उसने करोड़ों रुपए हासिल किए हैं। इन बैंकों से मुकदमा जीतने में और मुआवजा पाने में वकीलों और भ्रष्ट जज उसके सलाहकार होते हैं। वे साक्ष्य बनवाते हैं और अदालती प्रक्रिया पूरी करके उसे मोटी रकम दिलवाते हैं। इसी राशि का बड़ा हिस्सा जजों और वकीलों में भी बंटता है। इस विषय पर आरोप लगाने वालों को धमकाने के लिए अवमानना कानून का सहारा लिया जाता है।
    उससे पीड़ित लोगों में कलकत्ता , मुंबई , दिल्ली ,इंदौर, भोपाल और कई थोक व्यापारी भी शामिल हैं।अफसरों औंर न्यायाधीशों की तो बड़ी फेरहिस्त है।कई अफसरों और न्यायाधीशों को तो इसके चंगुल में फंसकर अपनी नौकरियां भी गंवानी पड़ी हैं।कुख्यात अपराधी मुख्तयार मलिक ने जब एक जज राजीव भटजीवाले की रकम गड़प जाने की वजह से इसे धमकाया तो इसने पुलिस अफसरों और न्यायाधीशों की मदद से उसके एनकाऊंटर का आदेश तक करवा दिया था।


    प्रकाश चंद गुप्ता से पीड़ित व्यापारियों में सवेरा इंडिया प्राईवेट लिमिटेड के चौबीस मुकदमे मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट कलकत्ता के समक्ष विचाराधीन हैं। स्काईलाईन सिस्टम्स इंदौर ,बाईट पेरी फेरल्स इंदौर, हस्ती कंप्यूटर्स इंदौर, सेन्ट्रोनिक्स इंदौर, शर्ललाईन सिस्टम्स इंदौर, मित्तल इंफोटेक इंदौर, आई प्लांट इंदौर, एमीट्रान डिजिटेक इंदौर, विनायक इंफोटेक इंदौर, डीबी इंफोटेक इंदौर, लेटेस्ट डिवाईस प्राईवेट लिमिटेड भोपाल, दीप कंप्यूटर्स भोपाल, सेज विश्वविद्यालय भोपाल, शिवांकरी सिंह, रंजना सिंह, छोटी बाई, डब्ल्यूपीजी सीएंडसी कंप्यूटर्स एंड पेरीफेरल्स इंडिया प्राईवेट लिमिटेड दिल्ली, सवेरा डिजिटल इंडिया प्राईवेट लिमिटेड कोलकाता, राज्य सरकार, संदीप जैन माईक्रोलैंड कंप्यूटर्स जबलपुर, विक्रमादित्य सिंह, अभिलाषा राहते, समेत कई अन्य व्यापारियों के मुकदमे भी अदालतों में विचाराधीन हैं। इसके अलावा प्रकाश गुप्ता ने फाईनेंस फर्म भी पंजीकृत करा रखी है जिस पर उसने सैकड़ों लोगों से करोड़ों रुपए ऊंचा ब्याज देने के नाम पर ले रखे हैं। उन्हें उसने ब्याज देना बंद कर रखा है। कई लोगों के तो मूल चैक बापस ले लिए हैं और वे अपनी रकम पाने के लिए दर दर की ठोकरें खा रहे हैं। पक्की लिखा पढी न होने से तो वह सैकड़ों लोगों की रकम गड़प कर चुका है। हुंडी कारोबार के कई अगड़िए इसके गोपनीय अड्डे पर व्यापारियों का करोड़ों रुपया पहुंचाते हैं जिसे गड़प करने के लिए इसने विभिन्न तरीके अपना रखे हैं।लोगों को झांसा देने के लिए उसने कई नोटरियों, वकीलों, पत्रकारों,जजों,पुलिस अफसरों को अपने जाल में फंसा रखा है। अवैध हथियारों की तस्करी हो या फिर नशे का गोरखधंधा सभी कारोबारों में उसकी हिस्सेदारी है। वह कई बार बड़बोले पन में कहता है कि बूचड़खानों से जुड़े अपराधियों की मदद से वह अधिक दबाव डालने वाले लोगों की हत्याएं भी करवा देता है। राजधानी पुलिस के सामने यह सफेद कालर अपराधी अब एक अनसुलझी पहेली बन गया है। हाल ही में एक बालिका पर यौन हमले के आरोप में इस पर पास्को एक्ट में मुकदमा दर्ज किया गया है। यदि अदालतों, पुलिस और राजनीति में जड़े जमाए अपराधियों का संरक्षण नहीं मिल सका तो इस बार प्रकाश गुप्ता की लंका राख हो सकती है।

  • यौन हमले का आरोपी बूटकॉम का प्रकाश गुप्ता फरार

    यौन हमले का आरोपी बूटकॉम का प्रकाश गुप्ता फरार


    लालगंज के माफिया परिवार से जुड़े गुप्ता पर यौन हमले के आरोप में पास्को एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज


    भोपाल, 23 जून(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर). राजधानी के एमपीनगर में बूटकॉम सिस्टम्स नाम से दूकान चलाने वाले बदनाम व्यापारी प्रकाश चंद्र गुप्ता के खिलाफ पुलिस ने नाबालिग बच्ची से यौन शोषण करने के आरोप में पास्को एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज किया है। इस अपराध में प्रकाश चंद्र गुप्ता को जिंदा रहने तक जेल या फांसी की सजा हो सकती है। प्रकरण दर्ज करने के बाद से वह फरार है और पुलिस उसकी तलाश सरगर्मी से कर रही है।
    सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार धोखाधड़ी और जालसाजी से अरबों रुपयों की दौलत कमाने वाले कंप्यूटर व्यापारी प्रकाश चंद्र गुप्ता के पापों का घड़ा तेजी से भरता जा रहा है। अदालतों और पुलिस से सांठ गांठ करके लगातार तीस सालों तक सरेआम लूटमार करने वाला ठग प्रकाश चंद्र गुप्ता इस बार नाबालिग का यौन शोषण करने की वजह से पास्को एक्ट में फंस गया है। उसके खिलाफ राजधानी के अयोध्यानगर पुलिस थाने में विगत बीस जून को लैंगिक अपराधों से बालकों के संरक्षण अधिनियम 2012 के अंतर्गत मुकदमा दर्ज किया गया है। पुलिस थाना गोविंदपुरा में सब इंस्पेक्टर के पद पर पदस्थ दीपिका गौतम ने ये शिकायत दर्ज की है। पुलिस थाना अयोध्यानगर को बच्ची के विरुद्ध अपराध की शिकायत प्राप्त होने की वजह से कंट्रोल रूम ने उन्हें वहीं जाकर रिपोर्ट दर्ज करने का आदेश दिया था।
    फरियादिनी अपने माता पिता के साथ पुलिस थाने पहुंची थी और उसने बताया कि अयोध्या बायपास के कंफर्ट पार्क के मकान नंबर 9 में रहने वाले प्रकाश चंद्र गुप्ता ने उसके खिलाफ यौन उत्पीड़न किया था जिसे वह दंडित करवाना चाहती है। पुलिस ने फरियादिनी की हस्तलिखित शिकायत पर प्रथम दृष्टया भादवि की धारा 354,354(क), 506, 9(एम),(एन)। 10 पास्को एक्ट के तहत प्रकरण दर्ज किया है। बच्ची ने बताया कि उसके माता पिता के प्रकाश चंद्र गुप्ता के साथ पारिवारिक संबंध रहे हैं । मेरे माता पिता 18से 20 जुलाई 2015 को मेरी बड़ी बहन का एडमीशन दिल्ली विश्विद्यालय में करवाने गए थे इस दौरान उन्होंने उसे प्रकाश गुप्ता के घर छोड़ दिया था। मेरी मम्मी प्रकाश गुप्ता को राखी बांधती थी और पारिवारिक संबंधों की वजह से उन्होंने मुझे सुरक्षित माना था।

    बताते हैं गुप्ता ने सतगढ़ी में सात एकड़ जमीन खरीदी और एक एकड़ में जजों अफसरों की ऐशगाह बनाई है.


    बीस जुलाई 2015 को जब प्रकाश गुप्ता की पत्नी और बेटी ऊपर के कमरे में थे तब मैं खाना खाने के बाद नीचे के कमरे में बैठकर टीवी देख रही थी। टीवी देखते समय मेरी आंख लग गई। इसी दौरान प्रकाश गुप्ता ने आपत्तिजनक स्थिति में आकर मेरे शरीर से खिलवाड़ करना शुरु कर दिया। जब मैंने चिल्लाने की कोशिश की तो उसने मेरा मुंह दबा दिया और धमकाया कि यदि तूने किसी को बताने की कोशिश की तो मैं तुम्हारी मां और बड़ी बहन की हत्या कर दूंगा। इसके बाद जब मेरे माता पिता लौट आए तो उसके बाद भी प्रकाश गुप्ता मुझे जान से मारने की धमकी देता रहता था। मैं डर गई और इसी वजह से मैंने उस घटना के बारे में किसी को नहीं बताया।
    पीड़िता ने बताया कि मैंने इस तरह की घटनाओं के बारे में आनलाईन कई आलेख पढ़े । स्कूल में सैक्सुअल अवेयरनेस के कार्यक्रमों में भी लड़कियों को इस तरह के अपराधों के बारे में बताया गया। मी टू मूवमेंट किस तरह से समाज के काले चेहरे को उजागर करता है ये भी मालूम पड़ा। इससे मुझमें हिम्मत आई और मैंने उस घटना के बारे में अपने मम्मी पापा को जानकारी दी। मैं पुलिस के सामने सहायता की अपेक्षा करके हाजिर हुई हूं ताकि प्रकाश चंद गुप्ता जैसे भेड़ियों को कानून सम्मत सजा दिलवाई जा सके। अयोध्यानगर पुलिस ने दीपिका गौतम की आईडी थाने में न होने की वजह से प्रधान आरक्षक 2928 धर्मेन्द्र सिंह गुर्जर की आईडी से ये प्रकरण कायम किया है।
    गौरतलब है कि प्रकाश चंद्र गुप्ता के विरुद्ध राजधानी के पुलिस थानों में लगभग साढ़े तीन दशकों के दौरान कई आपराधिक प्रकरण दर्ज किए गए हैं। कुछ प्रकरणों में तो उसे जेल भी भेजा गया है। इसके बावजूद बताते हैं कि वह अदालतों में वकीलों और जजों की सांठ गांठ से झूठे साक्ष्य प्रस्तुत करके बच निकलता है। इस तरह के अपराधों से उसने और उसके सहयोगी वकीलों जजों ने अरबों रुपयों की दौलत एकत्रित कर ली है। सूत्र बताते हैं कि उसने कई गर्ल्स हास्टल भी चला रखे हैं जिनमें वह ऐसी लड़कियां रखता है जिन्हें कथित तौर पर जजों और पुलिस के अफसरों,नेताओं को गिफ्ट के तौर पर पेश किया जाता है। अपने अपराधों को छुपाने के लिए राजधानी में एक टीवी चैनल भी चला रखा है जिसका संचालन एक बड़े टीवी चैनल से निष्कासित पत्रकार करता है। वह और उसकी सहयोगी पत्रकार समाज के प्रभावशाली लोगों को पुरस्कार देकर इस आपराधिक कारोबार पर पर्दा डालने का काम करते हैं। भारतीय जनता पार्टी के एक स्वर्गवासी नेता के संरक्षण में वह करोड़ों रुपयों के ठेके लेता रहा है। पुलिस ने अपनी जांच में ऐसे कई बिंदुओं को भी शामिल किया है जिससे प्रकाश गुप्ता के अपराधों को उजागर किया जा सके और उसे दंडित किया जा सके। प्रकाश गुप्ता इन समय फरार है और उसने अपने अदालती संपर्कों के माध्यम से पुलिस पर दबाव बनाना शुरु कर दिया है।
    पास्को यानि प्रोटेक्शन आफ चिल्ड्रन फ्राम सेक्सुअल अफेंस एक्ट नाम का ये कानून 2012 में लाया गया था। इसमें बच्चों के विरुद्ध होने वाले अपराधों पर फैसला किया जाता है। ये कानून 18 साल से कम उम्र के लड़के और लड़कियों दोनों पर लागू होता है। पास्को कानून को 2019 में संशोधित करके मौत की सजा का भी प्रावधान कर दिया गया। इस कानून के तहत यदि आरोपी को उम्रकैद की सजा मिले तो वह जेल से जिंदा बाहर नहीं आ सकता।इसके अलावा दोषी व्यक्ति पर भारी आर्थिक जुर्माना भी लगाया जाता है। बच्चों के खिलाफ पोर्नोग्राफी करने वाले अपराधी को भी तीन से सात साल की जेल और जुर्माने की सजा से दंडित किया जाता है।

  • हाईकोर्ट ने खारिज की राघवजी के खिलाफ शिकायत

    हाईकोर्ट ने खारिज की राघवजी के खिलाफ शिकायत

    भोपाल,18 जून(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)। प्रदेश के पूर्व वित्त मंत्री राघवजी के विरुद्ध कथित दुराचार के मामले को हाईकोर्ट ने खारिज कर दिया है। हाईकोर्ट जस्टिस संजय द्विवेदी की एकलपीठ ने अपने आदेश में कहा है कि प्रदेश की राजनीति में वित्त मंत्री जैसा महत्तपूर्ण पोर्ट फोलियों रखने वाले व्यक्ति की छबि धूमिल करने के लिए प्रतिद्वंदियों ने दबाव डालकर ये प्राथमिकी दर्ज कराई थी। इस प्रकरण में साफ तौर पर दुर्भावना के तथ्य पाए गए हैं। हाईकोर्ट ने भोपाल के हबीबगंज पुलिस थाने में दर्ज एफआईआर को खारिज करने के आदेश दिये है।


    पूर्व वित्त मंत्री राधव जी की ओर से दायर की गयी याचिका में भोपाल के हबीबगंज थाने में उनके खिलाफ धारा 377, 506 तथा 34 के तहत 7 जुलाई 2013 को दर्ज की गयी एफआईआर खारिज किये जाने की राहत चाही गयी थी। याचिकाकर्ता की ओर से तर्क दिया गया था कि शिकायत कर्ता ने कहा है कि वह 2010 में नौकरी के लिए विदिशा से भोपाल आया था। तब उन्हीं की अनुशंसा पर उसे सोम डिस्टिलरी के एकाऊंट विभाग में नौकरी मिली थी। अभियुक्त शेर सिंह चौहान ने उसे वित्तमंत्री राघवजी के चार इमली स्थित बी 19 बंगले के कर्मचारी आवास में रहने का मौका दिया था।


    शिकायतकर्ता ने अपने बयानों में कहा है कि उसने एक अन्य पीडि़त की मदद से वित्तमंत्री का छुपकर विडियों बनाया था। कथित तौर पर सहमति के साथ एकांत में अप्राकृतिक यौन करने का वीडियों उसने साजिश के तहत बनाया था जिसके आधार पर वह उन्हें ब्लैकमेल करना चाहता था । उसने यह भी स्वीकार किया कि उसने याचिकाकर्ता का सरकारी निवास मई 2013 में छोड़ दिया था। इसके लगभग तीन माह बाद उसने रिपोर्ट दर्ज करवाई। शिकायतकर्ता साल 2010 से 2013 तक याचिकाकर्ता के सरकारी निवास में रहता था, इस दौरान उसने किसी प्रकार की कोई शिकायत नहीं की। राजनीतिक प्रतिद्वंदियो के इशारे तथा आपसी रंजिश के कारण शिकायतकर्ता ने यह एफआईआर दर्ज कराई है।


    एकलपीठ ने अपने आदेश में कहा है कि उक्त याचिका साल 2016 से लंबित है और न्यायालय का अभिमत है कि अपराधिक मामले में अभियुक्त को ट्रायल का सामना करना चाहिये। न्यायालय के आदेश है कि अपराधिक मामला दुर्भावना व निजी रंजिश के कारण दर्ज करवाया जाता है तो एफआईआर निरस्त की जा सकती है। इस प्रकरण में अपराधिक कार्रवाई से स्पष्ट है कि दुर्भावना के कारण प्राथमिकी दर्ज कराई गयी है। प्रदेश में सबसे लंबे समय तक वित्तमंत्री रहने वाले महत्वपूर्ण व्यक्ति की छबि धूमिल करने के लिए प्रतिद्वंदियों के इशारे पर शिकायत दर्ज कराई गई थी। इसी के आधार पर न्यायालय ने एफआईआर निरस्त करने के आदेश दिये।

    गौरतलब है कि राघवजी भाई के वित्त मंत्री रहते हुए तीन सालों तक भारत सरकार जीएसटी लागू नहीं कर पाई थी। उन्होंने इस मसले पर हर बैठक में जीएसटी की खामियों की ओर सरकार का ध्यान आकर्षित कराया था। बताते हैं कि इसके बाद जो अंतर्राष्ट्रीय वित्तीय संस्थाएं जीएसटी लागू करने के लिए भारत सरकार पर दबाव बना रहीं थीं उन्हीं के इशारे पर राघवजी को राह से हटाने के लिए ये मामला दर्ज कराया गया था। मध्यप्रदेश को वित्तीय दुर्दशा से बाहर लाकर ऊंचाईयों पर ले जाने वाले राघवजी को पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती के कार्यकाल में ये विभाग सौंपा गया था।इसके बाद से ही कर्ज में डूबे मध्यप्रदेश को दुनिया भर की वित्तीय संस्थाओं से मदद मिलनी शुरु हो गई। बाद में बाबूलाल गौर और शिवराज सिंह चौहान ने भी उनकी उल्लेखनीय सेवाओं के लिए उन्हें ही वित्तीय प्रबंधन की जवाबदारी सौंपी। बताते हैं कि ये मामला सामने आने के बाद जीएसटी लागू करने में आ रही बड़ी अड़चन समाप्त हो गई और तभी से राज्यों को वित्तीय संकटों से जूझना पड़ रहा है।

  • कोरोमंडल रेल हादसे की वजह उजागरःअश्विनी वैष्णव

    कोरोमंडल रेल हादसे की वजह उजागरःअश्विनी वैष्णव

    बालासोर 13 जून(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर) । केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा है कि विगत 2 जून को ओडिशा में हुए ट्रेन हादसे (Odisha Train Accident) की मूल वजह का पता चल गया है। इस बात का पता लगा लिया गया है कि हादसा क्यों हुआ।


    अश्विनी वैष्णव ने कहा, “जांच पूरी हो गई है। रेलवे सेफ्टी कमिश्नर जल्द रिपोर्ट देंगे। जल्द सारे तथ्य सामने आएंगे। यह साफ है कि रूट कॉज का पता चल गया है। जल्द ही सच सबके सामने लाया जाएगा। रेलवे सुरक्षा आयुक्त ने मामले की जांच की है। जांच रिपोर्ट आने दीजिए। हमने घटना के कारणों और इसके लिए जिम्मेदार लोगों की पहचान कर ली है। यह इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग में बदलाव के कारण हुआ।” दरअसल, इस ट्रेन हादसे में 288 लोगों की मौत हुई है। एक हजार से अधिक लोग घायल हुए हैं।


    इस बीच सूत्रों के मिली जानकारी के अनुसार कोरोमंडल एक्सप्रेस ट्रेन सिग्नल में गड़बड़ी के चलते मालगाड़ी से टकराई थी। कोरोमंडल एक्सप्रेस को पहले आगे बढ़ने के लिए सिग्नल मिला फिर वापस ले लिया गया। अब यह गड़बड़ी तकनीकी खराबी के चलते हुई या इसमें किसी इंसान की भागीदारी थी इसकी जांच की गई है।
    गौरतलब है कि 2 जून की शाम करीब 7 बजे हाल के वर्षों में सबसे बड़ा रेल हादसा हुआ था। हादसे में तीन ट्रेनें (दो यात्री ट्रेन और एक मालगाड़ी) शामिल थी। प्रारंभिक रिपोर्ट के अनुसार कोरोमंडल एक्सप्रेस बहानागा बाजार स्टेशन के पास ट्रैक पर पहले से खड़ी मालगाड़ी से टकरा गई थी। इसके चलते कोरोमंडल एक्सप्रेस के डिब्बे पटरी से उतर गए थे। ये डिब्बे दूसरे ट्रैक पर चले गए थे जिसपर बेंगलुरु-हावड़ा सुपरफास्ट एक्सप्रेस तेज रफ्तार से आ रही थी। इसने पटरी पर मौजूद डिब्बों को टक्कर मार दी। दोनों पैसेंजर ट्रेनों के 17 डिब्बे पटरी से उतर गए थे।


    रेल दुर्घटना ओड़िशा के बालासोर और भद्रक स्थानों के बीच में पड़ते बहानगा नामक स्थान पर हुआ ।कोरामंडल एक्सप्रेस ट्रेन को उस स्टेशन पर रूकना नहीं था, इसको ग्रीन सिग्नल दे दिया गया, ट्रेन के नज़दीक आने पर ग्रीन सिग्नल वापिस ले लिया गया और एक्सप्रेस ट्रेन को लूप लाईन की तरफ़ मोड़ भी दिया गया जबकि लूप लाईन पर पहले ही 2 माल गाडियां खड़ीं थी । कोरामंडल एक्सप्रेस ट्रेन पूरी स्पीड में थी और माल गाड़ी से टक्कर इतनी जोर से हुई कि कोरामंडल एक्सप्रेस का इंजन और कई बोगियाँ माल गाड़ी के ऊपर चढ़ गई और और पास से गुजर रही अप लाईन पर गिर गई । थोड़ी ही देर में अप लाईन पर आ रही बंगलौर हावड़ा दुरंतो ट्रेन रेलवे लाइन पर गिरी हुई बोगियों से टकरा गई ।


    2012 में एक सुरक्षा प्रणाली कवच विकसित कर ली गई थी जिसमें गाड़ियों के आमने सामने आने पर भी गाड़ियों में टक्कर नहीं होती और गाड़ियाँ अपने आप रूक जाती हैं । आज के समाचारों के अनुसार आज भी भारतीय रेलवे के 19 संभागों में से सिर्फ़ एक संभाग ( सिकंदराबाद) में लगभग 1200 किलोमीटर रेल ट्रैक पर यह कवच नामक प्रणाली काम कर रही है । देश में रेलवे के पास 13215 रेलवे इंजन हैं जिनमें से सिर्फ़ 65 इस प्रणाली से लैस हैं । जानकारों का कहना है कि अगर कवच प्रणाली लगी होती तो दुरंतो ट्रेन का इंजन 400 मीटर पहले ही रूक जाता और जान माल का नुक़सान बहुत कम होता ।


    लगभग एक साल पहले 4मई को सिकंदराबाद संभाग में कवच प्रणाली का परीक्षण हुआ था जिसमें रेलमंत्री अश्विन वैष्णव ने भी भाग लिया था और परीक्षण सफल रहने पर रेलमंत्री ने कवच प्रणाली से रेल इंजनों को लैस करने की घोषणा की थी परन्तु एक वर्ष में सिर्फ़ 65 रेल इंजन ही इससे लैस किए जा सके । रेलवे के सरकारी अधिकारी यदि यात्री और रेलवे की संपत्ति की सुरक्षा को अपनी प्राथमिकता में लेते तो ये हादसा नहीं होता ।ओडिशा में ट्रेन इसलिए टकराई क्योंकि वह गलत ट्रैक पर चली गई थी, लेकिन उसे गलत ट्रैक पर भेजा किसने? क्या कोई आदमी ट्रैक चेंज करने के लिए नियुक्त होता है जिसने लापरवाही की?

  • सिख कत्लेआम के आरोपी कमलनाथ जेल जाएंगेःसारंग

    सिख कत्लेआम के आरोपी कमलनाथ जेल जाएंगेःसारंग

    भोपाल,21मई(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)। श्रीमती इंदिरा गांधी की हत्या के बाद 1984 के सिखों के कत्लेआम के आरोपी कमलनाथ को जल्दी ही सजा पड़ जाएगी। सीबीआई कोर्ट में दूसरे अभियुक्त जगदीश टाईटलर के खिलाफ आरोप पत्र प्रस्तुत हो चुका है। प्रदेश सरकार के चिकित्सा शिक्षा मंत्री विश्वास सांरग ने प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ को लेकर कांग्रेस नेतृत्व से सवाल किया है कि क्या, कांग्रेस सिख दंगों के आरोपी के नेतृत्व में मध्यप्रदेश विधानसभा के चुनाव लड़ेगी? यह बात भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश कार्यालय में रविवार को पत्रकार-वार्ता के दौरान कही।


    श्री सारंग ने पूरे घटनाक्रम का उल्लेख करते हुए कहा कि इस देश के इतिहास में 1984 का सिख कत्लेआम काले धब्बों में से एक है। तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के हत्या के बाद कांग्रेस के नेताओं ने सिख भाई बहनों का कत्लेआम किया था। हजारों भाई बहन उस कत्लेआम में प्रभावित हुए थे। सबसे दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति यह थी कि उस कत्लेआम में जिन्होंने भीड़ का नेतृत्व किया था वह कांग्रेस के नेता थे। विशेष रूप से दिल्ली में जो बड़े स्तर पर कत्लेआम किया गया था उसमें तीन कांग्रेस के नेताओं का हिस्सा लेना अलग अलग विषय पर सबूत के साथ जनता के सामने प्रस्तुत हुआ था। एक सज्जन कुमार दूसरे नं पर जगदीश टाईटलर और तीसरे कमलनाथ थे चौथे नेता इस दुनिया में नहीं हैं। यह तीन लोगों का नाम बहुत ही प्रमुखता से उस समय की घटनाओं में लिया गया था।

    नानावटी आयोग एवं जांच एजेंसी के कारण सज्जन जेल में, टाईटलर की बारी
    श्री सारंग ने कहा कि सन् 2000 के बाद इस पूरे विषय पर नानावटी आयोग ने जांच की और इसके बाद सीबीआई में यह मामला गया। परंतु वहीं दुर्भाग्य यह हुआ कि 2004 में कांग्रेस की सरकार आई और उसने इस मामले में लीपा-पोती कर दी और किसी दोषी पर कोई कार्यवाही नहीं हुई। 2014 के बाद इस पूरे मामले में जांच एजेंसियों ने काम किया और उसका परिणाम निकला कि सज्जन कुमार जेल में हैं और उन्हें उम्रकैद की सजा सुनाई गई है। कल भी सीबीआई कोर्ट ने इस पूरे मामले में जिस दूसरे कांग्रेस के बड़े नेता का नाम आता है जगदीश टाईटलर का, उनके खिलाफ भी जार्चशीट प्रस्तुत की है और वो भी जल्द ही जेल में होंगे। तीसरा नाम कमलनाथ है, निश्चित ही आने वाले समय में जो इस पूरे मामले में दोषी हैं, उनपर भी कार्यवाही होगी ऐसी उम्मीद है। जांच एजेंसी अपना काम कर रही हैं।

    गवाहों की किताब में कमलनाथ का जिक्र
    उन्होंने कहा की जो बातें में तथ्य के रूप में बोल रहा हॅू। यह केवल हमने नहीं बोला अलग-अलग स्तर पर इस पूरे मामले में जो चश्मदीद गवाह हैं, उन्होंने भी विभिन्न स्तरों पर अलग-अलग किताबों में इन दंगों को लेकर वास्तविकता का जिक्र किया है। श्री सारंग ने तत्कालीन क्राइम रिपोर्टर संजय सूरी की बात का जिक्र किया है कि उस दौरान वह गुरूद्वारा रकाबगंज में स्वयं उपस्थित थे। उस समय वहां 4-5 हजार की भीड़ का नेतृत्व कमलनाथ कर रहे थे और उन्होंने उस गुरूद्वारे में पानी की सेवा करने वालो को कमलनाथ के इशारे पर जिंदा जलाया गया था। इस बात का जिक्र एच.एस. फुल्का ने भी अपनी किताब में किया था।

    सिख समाज के विरोध के कारण कमलनाथ को पंजाब प्रभारी पद से हटाया
    कमलनाथ को लेकर सिख समाज में यह बात है कि उन्होंने इस समय सिख दंगों का नेतृत्व किया था। कमलनाथ को जब 2016 में पंजाब का प्रभारी बनाया गया था, तो इसी बात का विद्रोह पंजाब में हुआ था और कांग्रेस नेतृत्व को उन्हें तत्काल प्रभाव से प्रभारी के पद से हटाना पड़ा। उस समय यह बात स्थापित हुई थी कि यदि एक नेता सिख कत्लेआम का दोषी है तो फिर वह राजनीतिक क्षेत्र में काम कैसे कर सकता है। इसी तरह विगत दिनों इंदौर में एक बड़े कीर्तन करने वाले सिख संत मनप्रीत कनपुरिया जब इंदौर पहुंचे थे, तो उन्हांने भी इस चींज का विरोध किया था कि जो व्यक्ति सिख दंगों का दोषी है, वह सिख गुरूद्वारे में या सिख कीर्तन में, गुरू के प्रकाश पर्व में कैसे आ सकता है। यह सब बातें आज जनता के बीच में हैं, दो अभियुक्त जिनकों कांग्रेस सरकार ने 1984 से लेकर अभी तक बचाने का काम किया। चाहे वह सज्जन कुमार हों या जगदीश टाईटलर हों जांच एजेंसियों की तत्परता के कारण उनको सजा मिलना निश्चित हो चुका है। सज्जन कुमार जेल में हैं और और जगदीश टाईटलर को भी जल्दी जेल में जाना होगा, तीसरे अभियुक्त जो कि हर तरह से उनका नाम स्थापित हो चुका है कि वह सिख दंगों में शामिल थे, मैं कांग्रेस के नेतृत्व से यह पूछना चाहता हॅू कि जो सिख कत्लेआम का अभियुक्त है, जिन्होंने सिख कत्लेआम किया। क्या, उनके नेतृत्व में कांग्रेस मध्यप्रदेश विधानसभा का चुनाव लड़ेगी। कांग्रेस को इस बात का जवाब देना होगा कि जो व्यक्ति सिख कत्लेआम में स्वयं सामने खड़े होकर सिखों के कत्लेआम का दोशी है, जिसके दामन पर सिख दंगों के दाग हैं, क्या वह कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष होने के लायक हैं।

    सिख समाज की उम्मीद तीसरे दोषी कमलनाथ को भी मिले सजा
    श्री सारंग ने कहा कि सिख परिवार इस बात की अपेक्षा करते हैं कि तीसरे अभियुक्त कमलनाथ ने सिख दंगों के समय भीड़ का उकसाने का काम किया था, उन्हें भी सजा मिले। जब हम सार्वजनिक क्षेत्र या राजनीतिक क्षेत्र में काम करते हैं तो किसी भी राजनीतिक दल का यह दायित्व है कि उसके किसी नेता पर इस प्रकार के कत्लेआम के दाग हैं, तो तुरंत प्रभाव से उनपर कार्यवाही होनी चाहिए। अगर कांग्रेस नेतृत्व कमलनाथ को पद से नहीं हटाता है, तो इससे यह स्पष्ट होता है कि उस समय के सिख कत्लेआम में कांग्रेस नेतृत्व का पूरा आशीर्वाद था और उसको करने के पीछे कांग्रेस नेतृत्व की मंशा थी। संपूर्ण देश का सिख समाज और पीड़ित परिवार वह इस बात का इंतजार कर रहे हैं कि जल्द से जल्द कमलनाथ को भी इसकी सजा मिलेगी।

  • कलु रैकवार के हत्यारों के घर तोड़ने की मांग में प्रदर्शन

    कलु रैकवार के हत्यारों के घर तोड़ने की मांग में प्रदर्शन

    दमोह,17 मई(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)। दमोह के मछली ठेकेदार कलू रैकवार की हत्या के सभी आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया है। पुलिस अधीक्षक राकेश कुमार सिंह ने पत्रकार वार्ता में कहा कि पुलिस को सीधी चुनौती देने वाले इस कांड का राज फाश कर दिया गया है। कलू के बेटे समान बाडी गार्ड विक्की वाल्मिकी, शिवा रैकवार, अजय उर्फ अज्जू अहिरवार, ऐफाज खान समेत आठ आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। चर्चा के बहाने कमरे में ले जाकर कलु पर कतन्ने और गोलियों से वार किए जाने के षड़यंत्र में प्रयुक्त वाहन, मोबाईल फोन और कट्टे भी बरामद कर लिए गए हैं। कलु रैकवार कई धार्मिक और सामाजिक गतिविधियां भी चलाते थे और उनसे जुड़े कई समर्थकों ने प्रदर्शन करके हत्यारों के घर तोड़े जाने की मांग की है।
    पुलिस के अनुसार विगत छह मई को मछली ठेकेदार, कलु रैकवार पिता श्री कन्हैया रैकवार,उम्र लगभग 45 साल,निवासी फुटेरा वार्ड नंबर 5 को पुरानी अदावट के चलते सौरभ वंशवर्ती, दीपक वंशवर्ती, और उनके साथियों ने गोलियां मारी थीं । हत्या सुनिश्चित करने के लिए तेज धारदार कतन्ने से चेहरे, गर्दन और सीने पर कई वार किए गए थे। इससे घटना स्थल पर ही उसकी मौत हो गई थी। जिला अस्पताल में डाक्टरों ने उसे मृत घोषित किया था। पुलिस ने भारी सुरक्षा के बीच शव का पोस्ट मार्टम कराया था। पुलिस ने अपराध क्रमांक 393 । 2023 में धारा 302,34 एवं ता.हिं. 25 । 27 आर्म्स एक्ट के तहत अपराध पंजीबद्ध करके विवेचना शुरु की थी।


    पुलिस अधीक्षक राकेश कुमार सिंह ने बताया कि सूचना के आधार पर आरोपियों तक पहुंचने के लिए पुलिस ने एसआईटी का गठन किया था। आरोपियों की गिरफ्तारी पर दस दस हजार रुपए का इनाम भी घोषित किया गया था। एसडीओपी हटा वीरेन्द्र सिंह ठाकुर के नेतृत्व में कोतवारी इंस्पेक्टर विजय राजपूत की टीमों ने हरियाणा, दिल्ली, इंदौर, भोपाल, जबलपुर, कटनी में पुलिस टीम भेजकर आरोपियों और उनके रिश्तेदारों की तलाश की थी।
    पुलिस की साईबर टीम को दो आरोपियों के भोपाल में होने की सूचना मिली थी जिसके आधार पर भोपाल पुलिस से सहयोग लिया गया और दीपक वंशवर्ती व सौरभ वंशवर्ती को भोपाल से धर दबोचा गया। दो आरोपियों शिवा और आशीष रैकवार को पुलिस पहले ही जबलपुर से गिरफ्तार कर चुकी थी।


    पुलिस ने अब तक सौरभ पिता महेश वंशवर्ती, उम्र 25 साल ,दीपक पिता महेश वंशवर्ती उम्र 30 साल, राहुल पिता संतोष यादव उम्र 26 साल, मत्था उर्फ मथुरा पिता बाबूलाल वंशकार उम्र 20 साल, अजय उर्फ अज्जू पिता ईश्वर प्रसाद अहिरवार उम्र 30 साल, निक्की उर्फ नितिन पिता नत्थू बाल्मिकी उम्र 33 साल, शिवा पिता श्री राजेन्द्र रैकवार उम्र 31 साल, अहफाज पिता इलयास खाना उम्र 20 साल, एवं अन्य सहयोगियों को भी हिरासत में लिया है।

  • छत्रपति संभाजी पर नृशंसता ने जगाई मुगलों से नफरत

    छत्रपति संभाजी पर नृशंसता ने जगाई मुगलों से नफरत

    -संजय गोविंद खोचे-

    सम्भाजी राजे, शिवाजी महाराज के ज्येष्ठ पुत्र थे, संभाजी का जन्म 14 मई 1657 में हुआ था। माता का देहांत उनकी अल्प आयु में ही हो गया और फिर उनका पालन पोषण दादी जीजाबाई ने किया। 16 जनवरी सन 1681 ई. को सम्भाजी महाराज का विधिवत राज्याभिषेक हुआ और वो हिंदवी स्वराज्य के दूसरे छत्रपति बने। शम्भाजी बहुत बड़े विद्वान् और धर्मशास्त्रो के ज्ञाता थे, उन्होंने 14 वर्ष की उम्र में ही संस्कृत में कई ग्रन्थ लिख दिये थे।

    विदेशी पुर्तगालियों को हमेशा उनकी औकात में रखने वाले सम्भाजी को धर्म परिवर्तन कर मुस्लिम बन गए हिन्दुओं का शुद्धिकरण कर उन्हें फिर से स्वधर्म में शामिल करने वाले, एक ऐसे राजा जिन्होंने एक स्वतंत्र विभाग की ही स्थापना इस उद्देश्य हेतु की थी।

    छत्रपति सम्भाजी महाराज ने अपने जीवन में 140 युद्ध लड़े जिनमे एक में भी उनकी हार नही हुई, लेकिन आखिर में धोखे से उन्हें पकड़ कर मुग़लो द्वारा कैद कर लिया गया। औरँगजेब ने उन्हें इस्लाम स्वीकार करने के लिये अनेको भयंकर अमानवीय यातनाए दी। उनकी जुबान काट ली गई और आँखे निकाल ली, लेकिन उन्होंने सनातन हिन्दू धर्म छोड़कर इस्लाम स्वीकार नही किया। क्रोधित औरंगजेब ने अपने सामने ही इंसानों की खाल उतारने में प्रवीण जल्लादों को बुलाया और सम्भाजी की नख से शिख तक खाल उतरवा दी। उस दृश्य को देखने वाले प्रत्यक्षदर्शी मुगल सरदारों के हवाले से इतिहासकारों ने लिखा है कि खाल उतर जाने के बाद औरंगजेब ने उन्हें आसान मौत देने का प्रस्ताव यह कहते हुए दिया कि वह इस हालत में इस्लाम कबूल कर लें तो उन्हें आसान मौत दे दी जाएगी, लेकिन सम्भाजी ने फिर एक बार उसे ठुकरा दिया।

    इसके बाद उनके खाल उतरे शरीर को रोजाना सुबह नीबूरस में नमक और मिर्च मिलाकर नहलाया जाता था। सम्भाजी की पीड़ा को शब्द देने वाले एक इतिहासकार के अनुसार पहले दो दिन सम्भाजी तथा कलश स्नान के वक्त खूब चीखते थे, लेकिन तीसरे दिन से उन्होंने पीड़ा पर काबू पा लिया। औरंगजेब को जब यह जानकारी मिली तो वह आगबबूला हो गया और उसने एक हाथ कटवा दिया, फिर भी सम्भाजी ने उफ नहीं की तो उनका पैर काट दिया गया, आखिरकार करीब पन्द्रह दिन तक नीबूरस में मिले नमक मिर्च के स्नान के बाद सम्भाजी ने 11 मार्च 1689 को कैद में ही दम तोड़ दिया।

    मराठा इतिहासकारों के अलावा यूरोपियन इतिहासकार डेनिस किनकैड़ ने भी अपने लेखन में इस प्रकरण की पुष्टि की है। इतनी भयंकर यातनाओं के बावजूद अपने धर्म पर टिके रहने और इस्लाम के बदले मृत्यु का वरण करने के कारण उन्हें धर्मवीर भी कहा गया है। औरंगजेब को लगता था कि छत्रपति संभाजी के समाप्त होने के पश्चात् हिन्दू साम्राज्य भी समाप्त हो जायेगा या जब सम्भाजी मुसलमान हो जायेगा तो सारा का सारा हिन्दू मुसलमान हो जायेगा, लेकिन वह नहीं जनता था कि वह वीर पिता का धर्म वीर पुत्र विधर्मी होना स्वीकार न कर मौत को गले लगाएगा। वह नहीं जानता था कि सम्भाजी किस मिट्टी के बना हुए हैं।

    सम्भाजी मुगलों के लिए रक्त बीज साबित हुये, सम्भाजी की मौत ने मराठों को जागृत कर दिया और सारे मराठा एक साथ आकर लड़ने लगे। यहीं से शुरू हुआ एक नया संघर्ष जिसमें इस जघन्य हत्याकांड का प्रतिशोध लेने के लिए हर मराठा सेनानी बन गया और अंत में मुग़ल साम्राज्य कि नींव हिल ही गयी और हिन्दुओं के एक शक्तिशाली साम्राज्य का उदय हुआ।

    औरंगजेब दक्षिण क्षेत्र में मराठा हिंदवी स्वराज्य को खत्म करने आया था, लेकिन शिवाजी महाराज और शम्भाजी महाराज की रणनीति और बलिदान के कारण उसका ये सपना मिट्टी में मिल गया और उसको दक्षिण के क्षेत्र में ही दफन होना पड़ा।
    आज का इतिहास सच में सिर्फ महाराष्ट्र में रहने वाले मराठो के बीच में ही सिमित रह गया, ऐसा मुझे इअलिये कहना पड़ा की मराठो को छोड़ कर बाकी लोगो ये भी नहीं मालूम की धर्मवीर छत्रपति संभाजी राजे कौन थे।
    (धर्मवीर छत्रपति संभाजी राजे भोसले) या शम्भाजी (1657-1689) मराठा सम्राट और छत्रपति शिवाजी के उत्तराधिकारी। उस समय मराठाओं के सबसे प्रबल शत्रु मुगल बादशाह औरंगजेब बीजापुर और गोलकुण्डा का शासन हिन्दुस्तान से समाप्त करने में उनकी प्रमुख भूमिका रही।

    सम्भाजी अपनी शौर्यता के लिये काफी प्रसिद्ध थे। सम्भाजी ने अपने कम समय के शासन काल मे 140 युद्ध किये और इसमे एक प्रमुख बात ये थी कि उनकी सेना एक भी युद्ध मे पराभूत नहीं हुई। इस तरह का पराक्रम करने वाले वह शायद एकमात्र योद्धा होंगे। उनके पराक्रम की वजह से परेशान हो कर दिल्ली के बादशाह औरंगजेब ने कसम खायी थी के जब तक छत्रपती संभाजी पकडे नहीं जायेंगे, वो अपना किमोंश सर पर नहीं चढ़ाएगा।

    इनको मुसलमान बनाने के लिए औरंगजेब ने कई कोशिशें की। किन्तु धर्मवीर छत्रपति संभाजी महाराज और कवि कलश ने धर्म परिवर्तन से इनकार कर दिया। औरंगजेब ने दोनों की जुबान कटवा दी, आँखें निकाल दी किन्तु शेर छत्रपति शिवाजी महाराज के इस सुपुत्र ने अंत तक धर्म का साथ नहीं छोड़ा। उस समय 11 मार्च 1689 को हिन्दू नववर्ष का दिन था जब औरंगजेब ने दोनों के शरीर के टुकडे कर के हत्या कर दी। किन्तु ऐसा कहते है की हत्या पूर्व औरंगजेब ने छत्रपति संभाजी महाराज से कहा के मेरे 4 पुत्रों में से एक भी तुम्हारे जैसा होता तो सारा हिन्दुस्थान कब का मुग़ल सल्तनत में समाया होता। जब छत्रपति संभाजी महाराज के टुकडे तुलापुर की नदी में फेंकें गए तो उस किनारे रहने वाले लोगों ने वो इकठ्ठा कर के सिला के जोड़ दिए (इन लोगों को आज ” शिवले ” इस नाम से जाना जाता है) जिस के उपरांत उनका विधिपूर्वक अंत्यसंस्कार किया। औरंगजेब ने सोचा था की मराठी साम्राज्य छत्रपति संभाजी महाराज के मृत्यु पश्चात ख़त्म हो जाएगा। छत्रपति संभाजी महाराज के हत्या की वजह से सारे मराठा एक साथ आकर लड़ने लगे। अत: औरंगजेब को दक्खन में ही प्राणत्याग करना पड़ा। उसका दक्खन जीतने का सपना इसी भूमि में दफन हो देश धरम पर मिटने वाला।

    शेर शिवा का छावा था ।।
    महापराक्रमी परम प्रतापी। एक ही शंभू राजा था ।।
    तेज:पुंज तेजस्वी आँखें। निकलगयीं पर झुकी नहीं ।।
    दृष्टि गयी पर राष्ट्रोन्नति का। दिव्य स्वप्न तो मिटा नहीं ।।
    दोनो पैर कटे शंभू के। ध्येय मार्ग से हटा नहीं ।।
    हाथ कटे तो क्या हुआ?। सत्कर्म कभी छुटा नहीं ।।
    जिव्हा कटी, खून
    शिवाजी का बेटा था वह। गलत राह पर चला नहीं ।।
    वर्ष तीन सौ बीत गये अब। शंभू के बलिदान को ।।
    कौन जीता, कौन हारा। पूछ लो संसार को ।।
    कोटि कोटि कंठो में तेरा। आज जयजयकार है ।।
    अमर शंभू तू अमर हो गया। तेरी जयजयकार है ।।
    मातृभूमि के चरण कमलपर। जीवन पुष्प चढाया था ।।
    है दुजा दुनिया में कोई। जैसा शंभू राजा था।।

    #संजय_गोविंद_खोचे

  • पुलिस के कानूनों का भ्रम दूर करेगा नया ग्रंथ

    पुलिस के कानूनों का भ्रम दूर करेगा नया ग्रंथ

    एडीजी अनुराधा शंकर तथा पुलिस मुख्यालय से से‍वानिवृत्‍त लायब्रेरियन डॉ फरीद बज्मी ने पुलिस रेगुलेशन एक्ट की अपडेट पुस्तक का किया विमोचन

    भोपाल,09 मई (प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)। अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक प्रशिक्षण श्रीमती अनुराधा शंकर तथा पुलिस मुख्यालय से सेवानिवृत्‍त लायब्रेरियन डॉ फरीद बज्मी ने आज 09 मई 2023 मंगलवार को पुलिस रेगुलेशन एक्‍ट की अपडेट पुस्‍तक का विमोचन किया।

     उल्लेखनीय है कि पुलिस रेगुलेशन एक्ट में समय समय पर संशोधन किए जाते रहे है। उन संशोधनों को शामिल करते हुए पुलिस रेगुलेशन को अद्यतन किए जाने की आवश्यकता लंबे समय से महसूस की जा रही थी। इस कार्य हेतु स्वतः पहल पुलिस मुख्यालय के लायब्रेरियन के रूप में पदस्थ रहे उप पुलिस अधीक्षक डॉ. फरीद बज्मी ने की। उन्होंने अथक प्रयासों के साथ इन सभी संशोधनों को समेकित करते हुए पुस्तक के रूप में तैयार किया जो कि पुलिस विभाग के प्रत्येक कर्मचारी के लिए यह नवीनतम संशोधनों सहित एक प्रमाणिक एवं उपयोगी दस्तावेज सिद्ध होगा। इस कार्य को पूरा करने में बज्मी जी को 4 वर्ष लगे। उन्होंने गंभीर रूप से अस्वस्थ होने के बावजूद पूर्व में प्रकाशित एक्ट की सभी त्रुटियां दूर करने के साथ –साथ पुलिस एक्ट में बने नए कानूनों को भी इस पुस्तक में संकलित किया। बज्मी के गंभीर रूप से अस्वस्थ्य होने के कारण अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक श्रीमती अनुराधा शंकर ने पालीवाल अस्‍पताल जाकर उनका कुशलक्षेम जाना। इसके साथ ही इस पुलिस रेगुलेशन एक्ट की नवीनतम किताब का विमोचन भी फरीद बज्मी के हाथों कराया। अपनी इस अथक प्रयासों को सफल होता देख डॉ फरीद बज्मी काफी प्रसन्न हुए और उन्होंने एडीजी को बहुत धन्यवाद दिया।

    इस अवसर पर डिप्टी डायरेक्टर मध्यप्रदेश पुलिस अकादमी भौंरी श्री मलय जैन, एडिशनल डीसीपी श्री महावीर मुजाल्दे, एआईजी इरमीन शाह सहित फरीद बज्मी के परिवार के सदस्य भी उपस्थित थे।

  • जीपीएफ के धन से जेल में चला सट्टे का शेयर बाजार

    जीपीएफ के धन से जेल में चला सट्टे का शेयर बाजार

    उज्जैन,(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर) केंद्रीय भैरवगढ़ जेल की पूर्व अधीक्षक उषा राज, फर्जी मुंशी जगदीश परमार आदि का एक गिरोह जेल में समानांतर अर्थव्यवस्था चला रहा था.जीपीएफ के धन से काली कमाई के लिए इस गिरोह ने सट्टे का कारोबार चला रखा था। ऊषा ने जगदीश को जेल के कैदियों को तंबाकू, बीड़ी, सिगरेट, हशीश, गांजा, शराब और मटन मोटी कीमत पर बेचने का ठेका भी दिया था। तत्कालीन जेल अधीक्षक के संरक्षण में, जगदीश का वास्तव में जेल मामलों का पूरा कंट्रोल था एक तरह से वही पूरा जेल अधीक्षक बन गया था।
    उषा और जगदीश दोनों वर्तमान में क्रमशः जिला जेल, इंदौर और महिदपुर उप-जेल में बंद हैं। वे शुरू में केंद्रीय भैरवगढ़ जेल में अपनी शाखाओं को फैलाने वाले 15 करोड़ रुपये के डीपीएफ/जीपीएफ गबन मामले में मुख्य आरोपी के रूप में दोषी पाए गए हैं। 15 दिन की पुलिस रिमांड के दौरान इनके खिलाफ बंदियों से रंगदारी के दो और मामले भी दर्ज किए गए हैं।
    इस बीच, शहर का एक व्यवसायी, जो जेल में एक विचाराधीन कैदी था और हाल ही में रिहा हुआ था, ने बताया कि जेल में सक्रिय कॉकस ने अपनी आपराधिक शैली से जेल को नरक में बदल दिया था। जगदीश बलात्कार के आरोप में लगभग 18 महीने तक वहीं रहा था, हालांकि बाद में उसे सबूतों के अभाव में बरी कर दिया गया था। सितंबर 2021 में जब उषा राज ने पदभार संभाला, तो उसने यू ट्यूब समाचार चैनल रिपोर्टर होने के नाते धीरे-धीरे उनके साथ निकटता अर्जित की।
    बाद में उषा और जगदीश दोनों की करीबियां बढ़ती गईं । सूत्रों से पता चला है कि बाहर से जेल प्रहरियों के जरिए लाए गए तंबाकू, बीड़ी, सिगरेट, चरस, गांजा, शराब और मटन को बंद कर दिया गया . दरअसल, जगदीश को ऐसी प्रतिबंधित सामग्री का 40 हजार रुपए प्रतिदिन के हिसाब से ठेका मिला था। वह इन सामानों को अपने साथियों के जरिए जरूरतमंद कैदियों को बेचता था। बाजार में 5 रुपये में मिलने वाली तंबाकू की थैली 500 रुपये में बिक रही थी। इसी तरह बाजार में 200 रुपये में मिलने वाली मीडियम रेंज की व्हिस्की का एक चौथाई हिस्सा 2 हजार रुपये में बिक रहा था।
    सूत्रों के मुताबिक अगर किसी के पास पर्याप्त पैसा होता तो सब कुछ जेल के अंदर उपलब्ध होता। कॉकस ने टेलीफोन एक्सचेंज चलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई जिसके लिए 6 मिनट के लिए 100 रुपये लिए गए। जगदीश कैदियों और जेल में आने वाले नए बंदियों की पारिवारिक पृष्ठभूमि खंगालने में माहिर था।इसी वजह से वह उन्हें अच्छी बैरक दिलवाने के एवज में खासा धन वसूलता था।शुरुआत में बंदियों को उन्हें लगभग 4×6 कक्षों में रखा जाता था जहां लगभग हवा या धूप नहीं होती थी। उषा ऐसे लोगों के इलाज के लिए अंदर पर्ची भेजती थी जिन्हें बाद में चप्पलों से पिटवाकर बैरक से घसीट कर कोठरियों में ले जाया जाता था। जेल नियमों का सरेआम माखौल उड़ाते हुए जगदीश शाम के बाद भी अपना मोबाईल लेकर जेल के भीतर आता जाता रहता था। जेल महानिदेशक जेल अरविंद कुमार ने स्वीकार किया कि ऐसी सभी बातें संज्ञान में हैं. उन्होंने कहा, ‘दरअसल हमने पूरे मामले की जांच के लिए एक उच्च स्तरीय कमेटी का गठन किया है, लेकिन इससे पहले कि वे जेल जाते, डीपीएफ-जीपीएफ घोटाला सामने आ गया।’ उनके अनुसार, वे अनियमित तरीके से पैरोल देने संबंधी शिकायतों पर कार्रवाई कर रहे हैं। इसी तरह सेंट्रल जेल में लंबे समय से तैनात कुछ जेल कर्मचारियों के खिलाफ विभागीय जांच शुरू कर दी गई है. डीजी ने कहा कि उन्हें जल्द ही अन्यत्र स्थानांतरित कर दिया जाएगा।
    घोटाले की जांच कर रही एसआईटी के प्रमुख एएसपी इंद्रजीत बाकलवार ने कहा कि उषा राज के खिलाफ भ्रष्टाचार निरोधक अधिनियम के तहत मामला पहले ही दर्ज किया जा चुका है. उन्होंने कहा कि आवश्यक कार्रवाई करने के लिए आयकर विभाग को पत्र भेजे गए हैं।

  • जेल के 15 करोड़ गबन करने वाली अधीक्षक ऊषा राज बयानों से बचने अस्पताल में भर्ती

    जेल के 15 करोड़ गबन करने वाली अधीक्षक ऊषा राज बयानों से बचने अस्पताल में भर्ती

    अधीक्षक के पद से हटाते ही जेलकर्मियों के परिजनों ने फोड़े पटाखे, मनवारे ने लिया चार्ज

    उज्जैन (प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)। केंद्रीय जेल भैरवगढ़ लगातार सुर्खियों में बनी हुई है। वजह डीपीएफ घोटाले में जेल अधीक्षक उषाराज को हटाने पर दोपहर में जेलकर्मियों के परिजनों ने पटाखे फोडक़र खुशियां मनाई। वहीं गबन केस में नोटिसों के बाद भी बयान नहीं देने पर शाम को पुलिस उन्हें जबरन भैरवगढ़ थाने ले गई। इस दौरान प्रभारी जेल अधीक्षक हिमानी मनवारे ने चार्ज लेकर काम शुरू कर दिया।

    भैरवगढ़ जेल के 68कर्मचारियों के भविष्य निधि खाते से करीब १५ करोड़ रुपए का घोटाले में जांच के बाद डीजी अरविंद कुमार ने जेल अधीक्षक उषाराज को वित्तीय अनियमितता का दोषी मानते हुए पद से हटाने के आदेश दे दिए। पता चलते ही कर्मचारी के परिजनों ने जेल परिसर में पटाखे फोड़े और ढोल बजाते हुए मिठाई बांटकर खुशी मनाई। इसी दौरान नवागत प्रभारी जेल अधीक्षक हिमानी मनवारे जेल पहुंचीं और उषा राज से चार्ज लिया।

    वहीं गबन मामले में लगातार तीन नोटिस के बाद भी बयान नहीं देने पर टीआई प्रवीण पाठक, जितेंद्र भास्कर, एसआई बल्लू मंडलोई जेल पहुंचे। बावजूद शाम तक इंतजार के बाद भी उषा राज सहयोग के लिए तैयार नहीं हुई। नतीजतन जेल पहुंचे सीएसपी अनिल मौर्य ने महिला थाना प्रभारी रेखा वर्मा और उनकी टीम को बुलाया और उषा राज को हिरासत में लेकर थाने ले गए,जहां रात तक एएसपी इंद्रजीत बाकलवाल, मौर्य व टीम उनसे पूछताछ करते रहे।

    आदेश आते ही सुविधा छीनी

    जेल अधीक्षक उषाराज को तबादला का मुख्यालय में पदस्थ करने का आदेश आते ही सुबह से ही जेलर सुनील शर्मा, डिप्टी जेलर सुरेश गोयल मातहतों के साथ परिसर में जमा हो गए। बताया जाता है कि कर्मचारियों को शक था कि उषा राज गबन से संबंधित दस्तावेज और ऑफिस का सामान ले जा सकती है। इसलिए उन्हें रोकने के लिए वह तैनात हो गए थे।

    यहीं नहीं जेल अधीक्षक की स्थिति ऐसी थी कि उनके घंटी बजाने पर भी कोई कर्मचारी सुनने को तैयार नहीं था। इसे लेकर उन्होंने मीडिया के सामने आपत्ति भी जताई कहा गाड़ी छीनकर ड्राईवर व कंप्यूटर ऑपरेटर तक को हटा दिया।

    पटाखे फोडक़र बांटी मिठाई

    खास बात यह है कि किसी अधिकारी का तबादला होने पर मातहत स मान पूर्वक बिदा करते है, लेकिन जेल पर आज नजारा दूसरा ही था। यहां दोपहर में जेलकर्मियों के परिजन पहुंचे और जमकर पटाखे फोडऩे के बाद ढोल बजाकर मिठाई बांटी। प्रहरी गोर्वधन सिंह रघुवंशी के पुत्र नितिन ने बताया कि डीपीएफ घोटाले से कर्मचारियों के घर में मातम मना हुआ है। मेडम ने घोटाले के साथ ही काफी भ्रष्टाचार किया है इसलिए उन्हें हटाने पर खुशी मना रहे है।

    नई जेल अधीक्षक सचेत

    प्रभारी जेल अधीक्षक हिमानी मनवारे फिलहाल देवास में पदस्थ हैं। उन्हें भैरवगढ़ का अस्थाई रुप से अतिरिक्त चार्ज दिया गया है। मरवारे ने चार्ज लेने के बाद बताया कि उन्हें जेल के वर्तमान हालात की जानकारी है। मुख्यालय ने उन्हें सजग रहने का कहा है। जेल का निरक्षण कर आगे की रुपरेखा बनाएगी।

    डीपीएफ कांड : अब तक कब-क्या

    • १० मार्च : दो कर्मचारियों के राशि निकालने के आवेदन में एक ही आईआईएफसी कोड नंबर होने से ट्रैजरी ऑफिसर को शक हुआ। कलेक्टर ने जेल से रिकार्ड तलब किया। प्रथम दृष्टया१० करोड़ रुपए घोटाले का पता चलते ही कलेक्टर कुमार पुरुषोत्तम ने शासन व जेल डीजी को सूचना दी। रात १० बजे लेखा-जोखा संभालने वाला प्रहरी रिपूदमन घोटाला उजागर होने पर जेल अधीक्षक के सामने रोया और देर रात परिवार सहित फरार हो गया।
    • ११ मार्च : मामले में जिला कोषालय अधिकारी सुरेंद्र भामर ने भैरवगढ़ थाने में रिपूदमन के खिलाफ केस दर्ज कराया।
    • १३ मार्च : जेल डीआईजी मंशाराम पटेल सात सदस्यीय टीम के साथ भैरवगढ़ जेल पहुंचे,जांच शुरू।
    • १४ मार्च : प्रहरी शैलेंद्र सिकरवार व धर्मेद्र लोधी के खाते में १० करोड का ट्रांजेक्शन सामने आते ही फरार हुए,,घोटाले की राशि १४ करोड़ पहुंची।
    • १५ मार्च : जेल अधीक्षक को हटाने की मांग करते हुए कर्मचारी परिवार सहित अनशन पर बैठे। विधायक महेश परमार ने विधानसभा में प्रश्र लगाकर गृहमंत्री को ज्ञापन सौंपा।
    • १६ मार्च : जांच रिपोर्ट जेल डीजी अरविंदकुमार के पास पहुंची।
    • १७ मार्च : डीजी ने जेल अधीक्षक उषाराज को वित्तीय अनियमितता के आरोप में पद से हटाने और मनवारे का प्रभारी बनाने के आदेश जारी किए।
    • १८ मार्च : जेलकर्मियों के परिजनों ने खुशियां मनाई, नई अधीक्षक ने चार्ज लिया, उषा राज हिरासत में ले ली गईं, पूछताछ के बाद उन्हें दूसरे दिन सुबह आने को कहा गया था लेकिन वे इंदौर के एक निजी अस्पताल में भर्ती हो गईं।
    • गौरतलब है कि ऊषा राज को अपने एक रिश्तेदार की हत्या करने के आरोप में सागर जेल की सजा काटनी पड़ी थी।लेकिन बाद में सबूतों के अभाव में वे बरी हो गईं। तत्कालीन जेल अधीक्षक लालजी मिश्र की कृपा से वे जेल की नौकरी में आ गईं और जेल विभाग की नारकीय परिपाटियों ने उन्हें प्रदेश की सबसे बड़ी जेल का अधीक्षक बना दिया। जेल विभाग ने उन्हें सुधरने का जो अवसर दिया था उसका उन्होंने बेजा लाभ उठाया और अरबों रुपयों की दौलत बनाई। रिश्तेदारों से अनबन ने उन्हें अलग थलग कर दिया। इस घटना के बाद जब वे देवास रोड स्थित एक रेस्टोरेंट में अपने किसी मित्र के साथ पहुंची थीं तो कुछ लोगों ने उनकी वीडियो फिल्म बना ली। इस पर उन्होंने आपत्ति की तो युवकों ने उन्हें पीट दिया। जिसकी शिकायत उन्होंने उज्जैन पुलिस से की है।
  • दमोह के जुझार गांव की सुरक्षा अब गांव वाले करेंगे

    दमोह के जुझार गांव की सुरक्षा अब गांव वाले करेंगे

    दमोह,2 मार्च। घरों और खलिहानों से कटकर आने वाले खाद्यान्न की सुरक्षा में पुलिस की नाकामी को देखते हुए दमोह के जुझार गांव में घरों की सुरक्षा का बीड़ा गांव वाले स्वयं उठा रहे हैं। यहां के एक किसान और प्रेस इंफार्मेशन सेंटर के संपादक ने अपने खाद्यानों की सुरक्षा करने की जवाबदारी गांव वालों को ही थमा दी है। इसके लिए उन्होंने कल 3 मार्च को अपने घर के बाहर एक आयोजन किया है जिसमें चाभी खो चुके ताले को काटकर गोदाम की सफाई का कार्य कराया जाएगा और फिर गांव के ही लोगों के सामने उसमें खाद्यान्न रखा जाएगा। इसके बाद ग्रामीणों और बच्चों को मिठाई वितरण किया जाएगा। इस आयोजन में शामिल होने के लिए जिले के कलेक्टर, पुलिस अधीक्षक,पत्रकारों और हिंडोरिया पुलिस को भी आमंत्रित किया गया है।

    प्रेस इंफार्मेशन सेंटर के कृषि फार्म के संचालक और पत्रकार आलोक सिंघई ने बताया कि पिछले साल उनके गांव स्थित घर से खाद्यान्न की बोरियां चोरी हो गईं थी। इसकी शिकायत हिंडोरिया पुलिस और तत्कालीन पुलिस अधीक्षक से भी की गई थी। पुलिस ने शिकायत मिलने पर छानबीन तो की लेकिन न तो अपराधियों को गिरफ्तार किया और न ही उनसे चोरी गया खाद्यान्न जब्त किया। इस बार जब खलिहानों से फसल कटकर गोदामों में आ रही है तब एक बार फिर खाद्यान्न की सुरक्षा का मामला गहरा गया है। इसे देखते हुए खाद्यान्न की सुरक्षा की जवाबदारी गांव के लोग स्वयं निभाने जा रहे हैं।

    उन्होंने बताया कि आज के इस आयोजन में गांव वालों के सामने ही ताले को तोड़कर गोदाम की सफाई कराई जाएगी और मिष्ठान्न वितरण किया जाएगा। इस संबंध में जिला प्रशासन और नवागत पुलिस अधीक्षक को भी सूचना भेजी गई है।

    इस कार्यक्रम का प्रसारण फेसबुक पर लाइव उपलब्ध रहेगा।

  • तांत्रिक ऊर्जा से चीन के सफाए का अनुष्ठान करेगा राष्ट्रीय सुरक्षा जागरण मंच

    तांत्रिक ऊर्जा से चीन के सफाए का अनुष्ठान करेगा राष्ट्रीय सुरक्षा जागरण मंच

    भोपाल,27 दिसंबर(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)। राष्ट्रीय सुरक्षा जागरण मंच के राष्ट्रीय महामंत्री गोलोक बिहारी राय ने कहा है कि देश में सामूहिक तांत्रिक क्रियाओं के जरिए चीन का खात्मा किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि विश्व में चीन दुष्ट शक्ति के रूप में स्थापित हुआ है। चीन सिर्फ विस्तारवादी नहीं है, बल्कि मानव सभ्यताओं के लिए ख़तरा है। चीन का अस्तित्व न सिर्फ विश्व- मानवता, वरन जीव-मात्र के लिए ख़तरा है । ये राष्ट्र हत्या, नृशंसता, क्रूरता, हिंसा, अनाचार, अत्याचार, पापाचार, अधर्म का केंद्र बन चुका है। वह जीव और प्रकृति के लिए भी ख़तरा है। इसलिए चीन का नाश, विश्व के लिए शुभ होगा।


    इसके लिए हमें उन सभी शक्तियों, विद्याओं, तंत्रों, प्रक्रियाओं, विधाओं और साधनों का समर्थन करना चाहिए जो चीन के लिए विनाशक हों। भारत सहित दुनिया के अनेक देशों में दुष्ट और नकारात्मक शक्तियों के विनाश के लिए महाविद्याओं का प्रयोग होता रहा है। प्राचीन भारत का पूर्वोत्तर इन विद्याओं का मुख्य केंद्र रहा है। देश के अनेक संगठन, तांत्रिक, साधक और विद्वान चीन के विनाश की कामना कर रहे हैं। विश्व-कल्याण और मानवता की रक्षा के लिए राष्ट्रीय सुरक्षा जागरण मंच इन सभी शक्तियों को जोड़ने और सक्रिय करने की कोशिश करेगा। इसके तहत भारत सहित दुनियाभर में जन-जागरण का अभियान चलाया जाएगा। यह जानकारी राष्ट्रीय सुरक्षा जागरण मंच के राष्ट्रीय महामंत्री गोलोक बिहारी राय ने राजधानी भोपाल में आयोजित एक पत्रकार वार्ता में दी।
    गोलोक बिहारी राय ने बताया कि राष्ट्रीय सुरक्षा जागरण मंच लोक-जागरण को दिशा और गति देने में महत्वपूर्ण भूमिका अदा करेगा। यह अभियान सरकार और सेना से इतर तो होगा, लेकिन कई मायनों में यह सहयोगी भी होगा। इस अभियान का साधन होगा महाविद्या अर्थात तंत्र-विद्या। देश-दुनिया के तांत्रिकों, महाविद्या के विशेषज्ञों, साधकों और देशभक्त विद्वानों का आशीर्वाद और सहयोग से यह अभियान सफल होगा। आने वाले समय में देश कि विभिन्न हिस्सों में तांत्रिक सम्मलेन, यंत्रज्ञ सम्मलेन, अनुष्ठान, मन्त्र-जप आदि का आयोजन किया जाएगा । इस विद्या के द्वारा देशभक्ति और मानवता की भावना जागृत होगी। मन्त्र का जाप और अनुष्ठान देशभक्ति की अभिव्यक्ति का सहज-स्वाभाविक माध्यम बनेगा। राष्ट्रीय सुरक्षा जागरण मंच ने देश-दुनिया की सज्जन शक्ति, देशभक्त संगठनों, विद्वानों, विशेषज्ञों, अध्येताओं, शोधार्थियों, विद्यार्थियों, किसानों, कलाकारों, मीडिया सहित सभी नागरिकों से इस अभियान में शामिल होने और इसे समर्थन देने का आह्वान किया है।


    राष्ट्रीय सुरक्षा जागरण मंच के अध्यक्ष राय ने पत्रकारों और विद्वानों की उपस्थिति में चीन विनाश के लिए साधकों द्वारा प्रयुक्त मन्त्र – ‘‘ऊँ हं हं हं उमापतये कैलाशपतये नम: l चीनस्य विनाशं कुरु कुरु स्वाहा ll’’ प्रस्तुत किया। उन्होंने देशभक्त और मानवता प्रिय लोगों से इस मन्त्र के जप का आग्रह भी किया।राय ने कहा कि यह मन्त्र चीन के विनाश का सहज-सरल, किन्तु अत्यन्त प्रभावी उपाय है। यह चीन के लिए मारक-मन्त्र सिद्ध होगा। दुनिया की करोड़ों मानवता-प्रिय जनता जब विभिन्न भाषाओं में इस मारक-मन्त्र का जाप करेगी तो निश्चित ही एक विराट शक्ति का जागरण होगा। यह शक्ति पूरी मानवता, विश्व-कल्याण और चीन के विनाश का साधन बनेगी।
    पत्रकार वार्ता में मंच के प्रदेश अध्यक्ष और पूर्व डीजीपी एस के राऊत भी उपस्थित थे।

  • खुल गई राजा पटेरिया के अपराधों की डायरी

    खुल गई राजा पटेरिया के अपराधों की डायरी


    दमोह,13 दिसंबर(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की ह्त्या के लिए उकसाने वाले कांग्रेस नेता राजा पटेरिया की जमानत अर्जी को पवई की अदालत ने खारिज कर दिया है और उन्हें न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया है। उनके बयान के बाद कार्यकर्ताओं के प्रदर्शन को देखते हुए पुलिस ने दो और धाराएं बढ़ा दी हैं जिससे अब सत्र न्यायालय से भी उनकी जमानत की संभावनाएं धूमिल हो गईं हैं।
    पुलिस सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक जब राजा पटेरिया ने बयान दिया तो भाजपा नेताओं ने इसका विरोध किया। जिसे देखते हुए गृह मंत्री डॉ.नरोत्तम मिश्रा ने पुलिस को मुकदमा दर्ज करने के निर्देश दिए थे। पुलिस ने आज सुबह राजा पटेरिया को हटा स्थित उनके घर से गिरफ्तार किया और पबई की अदालत में पेश किया था। पबई थाना प्रभारी ने भादवि की धारा 451,504,505(1)(स),506,153(1)(स),115,117,के अंतर्गत राजा पटेरिया पुत्र हरबंस पटेरिया के विरुद्ध मामला दर्ज किया है। आज उन्हें जेएमएफसी पबई के समक्ष प्रस्तुत किया गया जहा से उन्हें जेल भेज दिया गया।

    पुलिस ने लगे हाथ सभी पेंडिंग मामलों का निपटारा करने की तैयारी भी कर ली है। उनके विरुद्ध पहले भी बूथ लूटने और वनवासियों को नक्सली बना देने जैसे प्रकरण दर्ज हो चुके हैं।

    पटेरिया को पार्टी से निष्कासित करने वाले भाजपा नेताओं के सवाल पर कमलनाथ ने कहा कि मैं भाजपा नेताओं के टुच्चे सवालों का जवाब नहीं देता। इस पर भाजपा के विधायक रामेश्वर शर्मा ने कहा कि रिटायरमेंट की उम्र में लफंगों जैसी भाषा शोभा नहीं देती। कमलनाथ को मुख्यमंत्री की तीर्थदर्शन योजना में जाना चाहिए। इससे उनके विचार निर्मल होंगे।

  • भूमाफिया से सुपारी लेने लगी इंदौर की पुलिस

    भूमाफिया से सुपारी लेने लगी इंदौर की पुलिस


    भोपाल,16 अक्टूबर(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)। पुलिस भी भू माफिया का गुर्गा बन सकती है ये पुलिस कमिश्नर प्रणाली के किसी पैरवीकोर ने कभी सोचा नहीं होगा। इंदौर की एक टाऊनशिप के नागरिक इन दिनों पुलिस की भूमिका को लेकर सशंकित हैं और उसकी माफियागिरी का तांडव झेल रहे हैं। माना ये जाता था कि राजस्व अधिकारी अक्सर दबाव में आकर माफिया की काली करतूतों के सामने सरेंडर कर देते हैं तो इन हालात से निपटने में पुलिस प्रभावी हो सकती है। इंदौर पुलिस की वर्तमान कारगुजारियों ने इन कयासों को धूल धूसरित कर दिया है।
    मामला सिल्वर स्प्रिंग्स, बायपास रोड, नायता मुंडला स्थित, सैकड़ों एकड़ में विस्तृत एकीकृत टाउनशिप का है। भूमाफिया ने इस पर अपना आधिपत्य बनाए रखने के लिए उसे अनेक टुकड़ों में बांट दिया है । टाऊनशिप के फेज़ 1 में हाल ही में उच्च न्यायालय की इंदौर पीठ से मिले आदेश के बाद चुनाव हुए और बिल्डर का विधिवत सफाया हो गया ।टाऊनशिप के फेज़ 2 में रखरखाव के लिए गठित बिल्डर की कंपनी के सहयोगी संगठन की विशेष आमसभा में एकीकृत टाऊनशिप की संघर्ष समिति के वर्तमान अध्यक्ष आलोक जैन और एक अन्य रहवासी सुबोध गुप्ता के बीच मामूली धक्का मुक्की के बाद (1) हीरालाल जोशी (2) सुबोध गुप्ता,(3) अभय कटारे (4) विकास मल्होत्रा (5) सत्यम राठौर (6) ऋषभ विश्वकर्मा व अन्य बाहरी अनधिकृत व्यक्तियों (7) परमजीत सिंह (8) जीतू सोलंकी (9) देवेश्वर द्विवेदी (10) प्रयास द्विवेदी (11) नरेंद्र पाटीदार ने एक तयशुदा रणनीति बनाकर आलोक जैन के ऊपर घातक जानलेवा हमला कर दिया । इस घटना के बाद इन सभी लोगों ने पुलिस थाने में झूठे बयान देकर श्री जैन के ही विरुद्ध शिकायत जमा करा दी। विवाद टालने के लिए आलोक जैन ने समझौते पर हस्ताक्षर कर दिए। उन्होंने इस मामले को समाप्त समझ लिया। इस समझौते के बाद बिल्डर के गुर्गों ने श्री जैन को निष्कासित करने के लिए जाल बिछाना शुरु कर दिया । इस टाऊनशिप के बिल्डर डेवलपर के कंपनी सचिव नीलेश गुप्ता (12) ने एक पत्र के माध्यम ये कहना शुरु कर दिया कि आलोक जैन को निष्कासित कर दिया गया है। सुबोध गुप्ता की ओर से समिति अध्यक्ष श्री जैन को सोसायटी से बाहर करने संबंधी आवेदन कार्यालय में जमा कराया गया । तभी से ये सभी लोग श्री जैन को डराने धमकाने के निरंतर प्रयास कर रहे हैं।
    मालूम हो कि सैकड़ों एकड़ में विस्तृत सिल्वर स्प्रिंग्स टाउनशिप के निदेशक अभिषेक झवेरी (13) और मुकेश झवेरी (14) ने सैकड़ों करोड़ रुपयों की शासकीय / रहवासियों की साझा धन संपत्ति पर अवैध कब्जा कर लिया है । रहवासियों के सभागार पर कब्ज़ा कर वहां चलाए जा रहे अवैध शराबखाने व अन्य संदिग्ध गतिविधियों को पुलिस की पहल पर ही बंद किया गया था । हालांकि बताया जाता है कि अभी भी खाली मकानों से बिल्डर और उसके सहयोगी (विपक्षी क्रमांक 1 से 11) अवैध अनैतिक गतिविधियों का संचालन कर रहे हैं । एकीकृत टाउनशिप के बहुसंख्यक रहवासियों की एकमात्र प्रतिनिधि संगठन यह संघर्ष समिति शासन प्रशासन न्यायालय के हर स्तर पर बिल्डर डेवलपर की अनियमितताओं / गबन / घोटालों को चुनौती दे रही है ।
    WP 5586/2021 उच्च न्यायालय, इंदौर
    CC/114/2022 उपभोक्ता आयोग, इंदौर
    इसी से क्षुब्ध होकर बिल्डर व उसके नियमित कर्मचारियों / प्रायोजित प्रतिनिधियों (विपक्षी क्रमांक 1 से 14) द्वारा समिति के अध्यक्ष पर यह सुनियोजित-निर्धारित जानलेवा हमला किया गया । अन्य उपस्थित रहवासियों के हस्तक्षेप से कोई अनहोनी तो नहीं हो सकी,लेकिन विपक्षी क्रमांक 1 से 14 तक के लोगों से प्रार्थी समिति के अध्यक्ष श्री आलोक जैन व उनके परिवार को जानमाल का खतरा निरंतर बना हुआ है ।
    ज्ञातव्य है कि विपक्षी क्रमांक 3 अभय कटारे के विरुद्ध पहले ही अनेक आपराधिक प्रकरण विचाराधीन हैं. इस टाऊनशिप में भी यह व्यक्ति बिल्डर की ओर से कब्जा जमाने,अतिक्रमण करने, गबन करने और अवैध वसूली करने का काम संभालता है।इसके इशारे पर विपक्षी क्रमांक 1 हीरालाल (पप्पू) जोशी ने सरेआम श्री जैन को जान से मारने की धमकी भी दी है।वर्तमान में टाऊनशिप के सर्वेसर्वा सूत्रधार होने के कारण इन्हीं के पास पूरे घटनाक्रम के आडियो और वीडियो साक्ष्य सुरक्षित हैं । जो दो अन्य वीडियो पक्ष विपक्ष की ओर से प्रस्तुत किए गए वह सुश्री शीतल राय के मोबाइल से बनाए गए, जिसमें से बीच का गंभीर मारपीट / बलवा वाला हिस्सा संपादित कर छुपा दिया गया है ।ये वीडियो दिखाकर बिल्डर के गुर्गे पुलिस को गुमराह कर रहे हैं।

  • नई अर्थव्यवस्था के लिए तय हो पुलिस की भूमिका

    नई अर्थव्यवस्था के लिए तय हो पुलिस की भूमिका



    मध्यप्रदेश, हिंदुस्तान के उन गिने चुने राज्यों में शामिल है जिन्होंने पुलिस कमिश्नर प्रणाली लागू करके भारतीय पुलिस अधिनियम 1861 के प्रावधानों को आज के संदर्भों में नया रूप देने का प्रयास किया है।केन्द्रीय गृहमंत्री अमित शाह कहते रहे हैं कि आज हमें डंडे वाली नहीं बल्कि नॉलेज बेस्ड टेक्नोसेवी पुलिस की जरूरत है। अंग्रेजों ने 1857 की क्रांति को कुचलने के बाद जो पुलिस अधिनियम लागू किया था उसका मकसद आजादी की ललक को कुचलना था। आज की पुलिस के सामने अपराध नियंत्रण के साथ साथ देश के उद्यमियों को सुरक्षा प्रदान करने का भी लक्ष्य है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने देश के सामने 2024 तक पांच ट्रिलियन डॉलर(350 लाख करोड़ रुपए) की अर्थव्यवस्था बनाने का स्वप्न प्रस्तुत किया है। इसे साकार करने के लिए पुलिस की भूमिका को भी नए सिरे से परिभाषित किया जाना जरूरी है। ये पुलिस जाति, धर्म, संप्रदाय के आधार पर मुरौव्वत करने वाली नहीं बल्कि फोरेंसिक साईंस की कसौटी पर साईबर अपराधों को भी नियंत्रित करने वाली भी बनाई जा रही है।क्योंकि अर्थव्यवस्था उद्यमियों के हाथ हो चोरों के हाथ नहीं ये प्रक्रिया का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा है।
    मध्यप्रदेश के गृहमंत्री डॉ.नरोत्तम मिश्रा कहते हैं कि जिस तरह सरदार वल्लभ भाई पटेल ने रियासतों के एकीकरण से देश को अखंड भारत बनाने का भगीरथ किया था उसी तरह केन्द्रीय गृहमंत्री अमित शाह पुलिस की भूमिका सार्थक बनाने का जतन कर रहे हैं। ये पुलिस अब ऐसे व्यक्तियों का निकाय बनती जा रही है जो कानूनों को लागू करने , संपत्तियों की रक्षा करने, संगठित अपराध पर अंकुश लगाने के साथ साथ देश के दीर्घ लक्ष्यों का भी समर्थन कर रही है। भोपाल और इंदौर में पुलिस कमिश्नर प्रणाली से पुलिस के जिम्मेदारी भरे बर्ताव की तस्वीर उभर रही है। अब पुलिस ऐसे सभी अपराधियों पर निगाह रख रही है जो समाज, धर्म या राजनीति की आड़ में आपराधिक गतिविधियों को अंजाम देते रहे हैं। सबसे बड़ी बात तो ये है कि ये निगरानी बाकायदा फोरेंसिक साक्ष्यों के आधार पर की जा रही है। पुलिस के कर्मठ सेवक जो जानकारियां जुटाते हैं उनसे अदालत में अपराध के तरीके को तफसील से प्रस्तुत करना संभव हो गया है। पुलिस के जुटाए साक्ष्य अपराधी को दंड की देहरी तक ले जा रहे हैं। ये संतोष की बात है।
    भारतीय साक्ष्य अधिनियम ने तथ्यों को संकलित करने और उसके आधार पर आरोपी का अपराध साबित करने की विधि हमें दी थी। अब तक पुलिस इसी अधिनियम के दायरे में अपराध को प्रमाणित करने का काम करती रही है। अब बढ़ते साईबर क्राईम ने पुलिस का काम बढ़ा दिया है। अब पुलिस को टेक्नोसेवी होना जरूरी है।अपराधी अब किसी दूसरे देश में बैठकर भी अपराध कारित कर देता है। प्रशिक्षण से पुलिस बल को शिक्षित करने का भरपूर प्रयास किया गया है लेकिन इसके बावजूद पुलिस बल की कार्यक्षमता में क्रांतिकारी बदलाव नहीं आया है। जो पुलिस कर्मी लंबे समय से पुलिस बल में काम कर रहे हैं उनके लिए आज अपराध की विवेचना दुरूह कार्य नजर आता है। पुलिस कर्मियों के चयन के मापदंड भी कुछ ऐसे रहे हैं जिनमें खिलाड़ी, पहलवान और तकनीकी पढ़ाई से विमुख कर्मचारियों की भरती की जाती रही है। यही वजह है कि पुलिस में दो तरह के कर्मचारी हैं। कुछ कंप्यूटर कक्ष में बैठकर कार्य कर रहे हैं तो कुछ को मैदानी दौड़ भाग में लगाया गया है। इनके बीच काम के असंतुलन को लेकर तकरार भी चलती रहती है। साथ में महिला पुलिस कर्मियों की बढ़ती संख्या ने भी पुलिस की कार्यप्रणाली में कई बदलाव किए हैं।
    इन सबके बावजूद पुलिस का चरित्र अभी नहीं बदला है। जब तक उच्च स्तर से अपने बल को बार बार संदेश नहीं दिया जाता कि उनकी भूमिका ठसके वाली थानेदारी करने की नहीं बल्कि ज्ञान आधारित शक्तिप्रदर्शन की हो गई है तब तक पुलिस को नवजीवन नहीं मिल सकता। कहा जाता है कि ज्ञान शेरनी के दूध की तरह होता है जो पिएगा वह दहाड़ेगा। इस सूत्रवाक्य को अपराधियों ने ज्यादा तेजी से अपनाया है। तकनीकों की आड़ लेकर वे तरह तरह के अपराध कर रहे हैं और पुलिस की निगाह से भी बचते रहते हैं। किसी चोरी की घटना में जब फरियादी पुलिस थाने पहुंचता है तो पुलिस का बर्ताव टालने वाला होता है। पुलिस वाले चाहते हैं कि फरियादी ही जांच करे, हमें साक्ष्य लाकर दे, साथ में सेवाशुल्क भी दे तब हम मुकदमा दर्ज करेंगे। हम अपने रजिस्टर में मुकदमों की संख्या क्यों बढ़ाएं।जबकि इन मुकदमों का खर्च सरकार स्वयं उठाती है। पुलिस का प्रयास रहता है कि मामले को दीवानी बताकर व्यक्ति को अदालत की ओर ठेल दे। क्षेत्राधिकार की पुरानी कहानी तो आज भी जस की तस है। अब यदि अपराधी की धरपकड़ किसी नागरिक को स्वयं करनी है तो फिर पुलिस की जरूरत क्या है। क्यों पुलिस वालों के लिए आवास, बजट और भरती की मांग की जाती है। आपराधिक मामले भी यदि व्यक्ति को स्वयं निपटाना है तो फिर बिहार की तरह निजी सेनाएं या बाऊंसर रखने की परिपाटी शुरु हो ही जाएगी।
    आज पुलिस बल के कई काम आऊटसोर्स किए जा रहे हैं। निर्माण, यातायात और अभियोजन के लिए वैसे भी पुलिस निजी एजेंसियों पर निर्भर रही है। क्या अब समय नहीं आ गया है कि जब राज्य की ओर से निजी एजेंसियों को भी पुलिस की तरह अधिकार दिए जाएं ताकि वे अनुसंधान करके अपराध नियंत्रण का काम संभाल सकें। जब पुलिस अपना दायित्व न निभा सके तो क्यों न इस विकल्प पर भी गौर किया जाए। अब यदि कोई किसान खेती करके अनाज का उत्पादन कर रहा है। मजदूरों को वेतन बांट रहा है। सरकारी मंडियों में शुल्क चुका रहा है। साबुन से लेकर खाद, कीटनाशक बीज ,वाहन आदि सभी पर टैक्स चुका रहा है। नगरीय या ग्रामीण निकायों का टैक्स भर रहा है और वो चोरी की शिकायत लेकर पुलिस के पास जाए तो पुलिस उससे कहे कि वह तो बड़ा आदमी है चोरी हो गई तो क्या फर्क पड़ता है। ऐसे में पुलिस की भूमिका पर एक बार फिर चिंतन क्यों न किया जाए। पुलिस यदि उद्यमियों के साथ न खड़ी हो और अपनी अक्षमता से अपराधियों को संरक्षण प्रदान करने का कारण बनने लगे तो उसकी भूमिका पर नए सिरे से विचार करना जरूरी हो जाता है।
    दरअसल नई सदी का भारत तेजी से करवट ले रहा है। जिस देश की अर्थव्यवस्था लगभग ढाई सौ सालों तक अंग्रेजों के षड़यंत्रों का शिकार रही हो, और वो अपनी तेज प्रगति से सारे मानदंड पीछे छोड़ रहा हो, उसे उपनिवेशिक मानसिकता वाली संस्थाओं से मुक्ति दिलानी ही होगी। शासकों और प्रशासकों को समय की इस मांग की पहचान करनी होगी। अपराध नियंत्रण का पुराना ढर्रा बदलना होगा तभी इन संस्थाओं का अस्तित्व बचा रह पाएगा। आज पुलिस कानूनों में बदलाव या सुधार की बात हो रही है कल पुलिस को ही बदलने की बात होने लगे तो कोई आश्चर्य नहीं होगा। पांच ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था के लक्ष्य के लिए यदि पुलिस का मौजूदा ढांचा होम करना पड़े तो भी ये सस्ता सौदा होगा।

  • अर्जुनसिंह की कृपा की आड़ में डॉन बन बैठा था मुख्तयार मलिक

    अर्जुनसिंह की कृपा की आड़ में डॉन बन बैठा था मुख्तयार मलिक


    भोपाल,5 जून(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)। राजस्थान के झालावाड़ में मारा गया भोपाल का डॉन मुख्तयार मलिक मध्यप्रदेश में इसलिए सुरक्षित रहा क्योंकि यहां के कई राजनेताओं का उसे संरक्षण मिलता रहा। इस सीमा से बाहर कारोबार फैलाने की ख्वाहिश उसकी मौत की वजह बनी। झालावाड़ के असनावर थाना क्षेत्र के कासखेडली गांव के नजदीक स्थित उजाड़ नदी और भीमसागर डैम अपस्ट्रीम में अब्दुल बंटी गेंग से उसकी झड़प हुई थी। पहली गोली मलिक ने चलाई थी लेकिन स्थानीय लोगों ने पथराव और गोलीबारी करके मुख्तयार के सहयोगियों को भागने पर मजबूर कर दिया था। इस घटनाक्रम के दौरान मुख्तयार के साथ 11 शूटर थे लेकिन उसका रसूख कोई काम नहीं आया और पानी के लिए तड़प तड़पकर उसे मरने को मजबूर होना पड़ा।
    मुख्तयार पर दर्ज अपराधों की सूची बहुत बड़ी है, उस पर विभिन्न धाराओं के 58 मामले दर्ज हैं। सैकड़ों अन्य मामले ऐसे भी हैं जिनकी जानकारी तो खुली पर वे पुलिस रिकार्ड तक नहीं पहुंचे। कई मामले उसने आपसी रजामंदी से बंद करा दिए। कई मामले उसके राजनैतिक आकाओं की वजह से दर्ज नहीं हो सके। पहली बार 21 साल की उम्र में बलात्कार के अपराध में वह जेल पहुंचा था। उसके बाद उसकी अपराध की दुनिया का साम्राज्य शुरु हो गया। पूर्व मुख्यमंत्री सुंदरलाल पटवा को धमकाने की वजह से 1990 में वह चर्चा में आया था। इसकी वजह थी कि पटवा हमेशा से अर्जुनसिंह के चहेते रहे और बाद में मध्यप्रदेश की राजनीति में दो बार उन्हें मुख्यमंत्री बनने का मौका भी मिला। तब भी मध्यप्रदेश पुलिस ने मुख्तयार को नहीं निपटाया क्योंकि राजनेताओं ने उसे पटवा से माफी मंगवा दी थी। फिरौती वसूलने के लिए उसने रायसेन के तीन बच्चों का अपहरण किया था तब पुलिस ने मुठभेड़ में बच्चों को सकुशल बचा लिया लेकिन तब भी मुख्तयार नहीं मारा गया। पुलिस के जांबाज अफसर सलीम ने जब उसे घसीटकर सड़कों से गुजारा तो भय के कारण उसने पेंट गीला कर दिया था। ये सारे घटनाक्रम होते रहे लेकिन मध्यप्रदेश उसकी शरण स्थली बना रहा।एक बार मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के निवास पर उसकी मौजूदगी भी अखबारों की सुर्खियां बनीं लेकिन फिर सीएम आवास में उसका प्रवेश निरुद्ध कर दिया गया।
    गैस कांड के मुआवजे की सुनवाई करने वाली अदालतें भी उस पर काफी मेहरबान रहीं। वह जिस व्यक्ति को अदालत में पेश कर देता उसका अवार्ड पारित हो जाता। यह रकम सीधे मुख्तयार के पास पहुंच जाती थी। इस तरह उसने गैस कांड के मुआवजे में से करोड़ों रुपए जुटाए। उसे पनाह देने वाले अंकल जज राजीव भटजीवाले की रकम जब ब्याज पर चलाने वाले एमपीनगर के एक व्यापारी ने गड़प ली तो मुख्तयार ने उसकी दूकान पर जाकर कट्टा तानकर धमकाया था। उस व्यापारी ने अपने प्रभाव का इस्तेमाल करके मुख्तयार का शूटआऊट कराने की तैयारी कर ली थी। बाद में व्यापारी की गवाही पर राजीव भटजीवाले का भ्रष्टाचार प्रमाणित हो गया और राजीव भटजीवाले को बर्खास्त कर दिया गया,लेकिन मुख्तयार मलिक साफ बच निकला।
    हालिया मामले में उसे भीमसागर डैम से करोड़ों रुपए के मुनाफे का लालच दिया गया था। प्रस्ताव लाने वाला विक्की वाहिद उसका बहुत खास था। मुख्तयार उसे बेटे के समान मानता था। घटाक्रम के दौरान मलिक ने वाहिद का ही साथ लिया था लेकिन वाहिद उसे छोड़कर फरार हो गया। झालावाड़ के असनावर थाना क्षेत्र के कासखेडली गांव के नजदीक स्थित उजाड़ नदी और भीमसागर डैम अपस्ट्रीम में ये गैंगवार हुई थी। मंगलवार रात दो बजे कांस खेडली के अब्दुल बंटी गैंग और मुख्तार मलिक गैंग के बीच गोलियां चली। इसमें एक की मौत हुई। मुख्तार मलिक गुट के भोपाल निवासी कमलकिशोर की गैंगवार में मौत हुई थी। जिसका शव पुलिस ने बुधवार रात को ही पोस्टमार्टम के बाद शव परिजनों को सौंपा था। संघर्ष में लापता हुए गैंगस्टर मुख्तार मलिक और विक्की का गुरुवार रात को भी कोई पता नहीं चला। लेकिन विक्की के भोपाल पहुंचने की सूचना लगी। विक्की भी गैंगस्टर बताया जा रहा है। उजाड़ नदी के भीमसागर डैम क्षेत्र में मछली पकडने का ठेका दिल्ली के ईरशाद के पास था। 31 मई को उसने भोपाल के मुख्तार मलिक को ठेका बेच दिया। सौदा दिन में हुआ और घटना रात में नाव लेने को लेकर हो गई।
    समाचार पत्रों में छपी कहानी के अनुसार मुख्तार को जब भीम सागर डैम में उसकी बोट नहीं दिखी तो वह अपने गुर्गे विक्की वाहिद के साथ कालीसिंध के भंवरासा डैम से भीम सागर में बोट तलाशने निकला। पता चला कि उसकी नाव को गैंगस्टर बंटी अब्दुल लेकर चला गया। बंटी का पूर्व मछली ठेकेदार इरशाद से लेनदेन को लेकर विवाद था। इसकी जानकारी होने पर मलिक वापस भंवरासा डैम आया। एक मिनी ट्रक में अपनी दूसरी नाव रखी, विक्की की फॉर्च्यूनर और अपनी ब्लैक पजेरो में गुर्गों के साथ वापस भीम सागर आया। बंटी अब्दुल की गैंग से नाव वापस लेने के लिए मुख्तार समेत 11 लोग कांसखेडली गांव के लिए रवाना हुए।
    मलिक की नाव में साथ बैठा गुर्गा शकील (निवासी रीछवा, झालावाड़) उसके हर मूवमेंट की जानकारी बंटी गैंग को फोन से देता रहा। इससे बंटी गैंग पूरी तरह अलर्ट हो चुकी थी। बंटी ने अपने चार गुर्गे झालावाड़ से भी बुला लिए थे। विक्की शराब के नशे में था। वह नाव में भी शराब पी रहा था। रात डेढ़ बजे कांसखेडली गांव में डैम के बैकवॉटर के किनारे पहुंचकर विक्की ने बंटी को ललकारा। पहले से हमले की ताक में बैठी बंटी गैंग ने पथराव शुरू कर दिया। यह देख मुख्तार ने 32 बोर की रिवॉल्वर से फायर करने शुरू कर दिए। जवाब में बंटी गैंग ने भी फायरिंग शुरू कर दी। पथराव और गोलीबारी से बचने के लिए मुख्तार के साथ नाव में बैठे उसके गुर्गे पानी में कूदने लगे। डिसबैलेंस होने से नाव पानी में समा गई। इसी दौरान भोपाल निवासी कमल मीणा के नाक के पास गोली लगी। वो पानी में गिर गया और डूबने से उसकी मौत हो गई। शकील के बांह में गोली लगी। आठ गुर्गे जंगल में भाग गए, जो अलग-अलग ग्रुप में सुबह सारोला थाना इलाके की तरफ से जंगल से बाहर निकले। मुख्तार, विक्की, कमल का पता नहीं चला। कमल की लाश बाद में बरामद की गई।
    पुलिस सूत्रों के मुताबिक गैंगवार की रात बोट में उसके साथ 11 लोग थे,इनमें खुद मुख्तार मलिक, भोपाल, विक्की वाहिद, शफीक मोहम्मद, रीछवा, थाना बकानी, शकील मोहम्मद, रीछवा, थाना बकानी, सलमान, रीछवा, थाना बकानी, शोएब हुसैन, गागरोन थाना मंडावर, विजय कुमार, रीछवा, थाना बकानी, बृजराज, रीछवा थाना बकानी, अखलाक खां विराट नगर उज्जैन, आरिफ, खिलचीपुर, राजगढ़, कमल किशोर मीणा, भोपाल । राजधानी भोपाल की जिला अदालत में मुन्ने पेंटर गैंग के बीच हुए गैंगवार में मुख्तार को 2006-07 में हाईकोर्ट ने फांसी की सजा सुनाई थी। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट में वह बरी हो गया था। मामलों में वह समर्पण करके पुलिस से बचता था और अदालतों में दबाव से समझौता करके मामले रफा दफा करवा लेता था।

  • जबलपुर में शराब तस्कर का मकान  जमींदोज

    जबलपुर में शराब तस्कर का मकान जमींदोज

    भोपाल,4 मई, (प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)।मध्य प्रदेश शासन द्वारा भू-मफिया राशन की काला बाजारी, मिलावटखोरों, भू-माफियाओं/चिटफंड कंपनी के कारोबारियों एवं सूदखोरों के विरूद्ध सख्त कार्यवाही करने के निर्देश प्रशासन व पुलिस विभाग को दिये गये हैं। इन निर्देशों के तहत पुलिस, प्रशासन तथा नगर निगम की संयुक्त टीम के द्वारा इस प्रकार के माफियाओं की लिस्ट एवं उनके द्वारा किये गये अवैध निर्माण एवं कब्जे की जानकारी तैयार की गई है तथा उनके विरूद्ध कार्यवाही की योजना तैयार कर लगातार कार्यवाही की जा रही है।

    इसी क्रम में आज कलेक्टर जबलपुर डॉ. इलैयाराजा टी. एवं पुलिस अधीक्षक जबलपुर श्री सिद्धार्थ बहुगुणा तथा नगर निगम कमिश्नर श्री आशीष वशिष्ठ के मार्गदर्शन में थाना हनुमानताल अंतर्गत महिला शराब तस्कर मीरा बाई सोनकर जिसके विरूद्ध 21 अपराध आबकारी एक्ट के एवं मीरा बाई सोनकर के पांच बेटे बाबा सोनकर के विरूद्ध 31 अपराध, बोरा उर्फ मोनू सोनकर के विरूद्ध 30 अपराध, कल्लू उर्फ श्याम सोनकर के विरूद्ध 28 अपराध, सोनू सोनकर के विरूद्ध 27 अपराध, राजा सोनकर के विरूद्ध 12 अपराध हत्या का प्रयास, एनडीपीएस एक्ट, अवैघ वसूली, आर्म्स एक्ट, बलवा कर घर में घुसकर मारपीट तोड़फोड़ , आबकारी एक्ट , जुआ आदि के दर्ज हैं, के द्वारा बाबा टोला सिंध केम्प में लगभग 3000 वर्गफुट भूमि जिसकी अनुमानित कीमत लगभग 3 करोड़  रूपये है पर अनाधिकृत रूप से लगभग 50 लाख रूपये की लागत से निर्मित दो मकान को जमींदोज किया गया।

    विवाद होने की आशंका को ध्यान मे रखते हुये कार्यवाही के दौरान एस.डी.एम. आधारताल श्री नमः शिवाय अरजरिया, नगर पुलिस अधीक्षक गोहलपुर श्री अखिलेश गौर, नगर पुलिस अधीक्षक अधारताल श्रीमती प्रियंका करचाम, नायब तहसीलदार श्री संदीप जायसवाल एवं श्री श्याम आनंद, थाना प्रभारी हनुमानताल श्री उमेश गोल्हानी, थाना प्रभारी कैंट श्री विजय तिवारी, थाना प्रभारी बेलबाग सुश्री प्रियंका केवट, टूआईसी अधारताल, टूआईसी गोहलपुर, नगर निगम भवन अधिकारी श्री मनीष तड़से, नगर निगम अतिक्रमण दस्ता प्रभारी श्री लक्ष्मण कोरी, श्री अहसान खान सहित थाने एवं नगर निगम के कर्मचारी मौजूद थे।

  • सिद्धार्थ चौधरी को गोली मारने वाला धराया

    सिद्धार्थ चौधरी को गोली मारने वाला धराया

    खरगोन,22 अप्रैल(अनिल सारसर)। खरगोन पुलिस अधीक्षक सिद्धार्थ चौधरी को गोली मारने वाले को गिरफ्तार कर लिया गया है। डीआईजी तिलक सिंह ने बताया कि आरोपी मोहसीन उर्फ वसीम को पुलिस ने कसरावद क्षेत्र से पकड़ा है।

    डीआईजी तिलक सिंह ने बताया कि आरोपी खरगोन के संजय नगर का रहने वाला है। उसी ने रामनवमी के दौरान जुलूस के दौरान एसपी चौधरी पर गोली चलाई थी, जिसे सायबर सेल की टीम ने कसरावद क्षेत्र से गिरफ्तार कर लिया है। मोहसीन आदतन अपराधी है, उस पर पहले से चार प्रकरण दर्ज हैं, जिसमें आर्म्स एक्ट समेत मारपीट के प्रकरण हैं। आरोपी मोहसीन से पूछताछ की जा रही। पुलिस तलवार चलाने वाले आरोपी की तलाश कर रही है। 10 अप्रैल को खरगोन हिंसा में 50 लोग से ज्यादा घायल हुए थे। घायलों में एसपी सहित 6 पुलिस के जवान भी शामिल थे।

    अब तक 159 आरोपियों की गिरफ्तारी हो चुकी
    खरगोन उपद्रव के फरार 106 फरार आरोपियों पर 10-10 हजार रुपये का इनाम घोषित किया गया है। कमांडेंट अंकित जायसवाल ने बताया है कि रामनवमी जुलूस हिंसा के मामले में अब तक 159 आरोपियों की गिरफ्तारी हो चुकी है।

    इब्रीश खान मौत मामले में 5 आरोपियों पर केस दर्ज
    खरगोन उपद्रव में युवक इब्रीश उर्फ सद्दाम खान की मौत के मामले में पुलिस ने 5 आरोपियों पर केस दर्ज किया है। 5 में से 2 आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका हैं वहीं, 3 आरोपी अब भी फरार हैं। पकड़े गए एक आरोपी पर एनएसए लगाया है। अब तक खरगोन हिंसा मामले में पुलिस तीन आरोपियों पर एनएसए लगा चुकी है।

    सुबह 8 से शाम 5 बजे तक की ढील
    खरगोन में हालात लगभग सामान्य हो चुके हैं। प्रशासन भी अब सख्ती में ढील बढ़ा रहा है। कलेक्टर के आदेश के मुताबिक शनिवार को खरगोन में सुबह 8 से शाम 5 बजे तक की ढील दी जा रही है। इस दौरान सभी तरह की दुकानें खोली जा सकेंगी।

    अपर कलेक्टर ने अधिकारियों के अवकाश किए प्रतिबंधित
    शहर में निर्मित विषम परिस्थितियों को चलते कोई भी जिलाधिकारी बिना सक्षम अधिकारी की अनुमति के बगैर मुख्यालय छोड़कर अवकाश पर नहीं जा पाएंगे। इस संबंध में अपर कलेक्टर एसएस मुजाल्दा ने आदेश जारी किए हैं।

  • सिद्धार्थ चौधरी के हमलावर को गोली कब पड़ेगी

    सिद्धार्थ चौधरी के हमलावर को गोली कब पड़ेगी


    खरगोन में पुलिस अधीक्षक सिद्धार्थ चौधरी जब दंगाईयों को तलवारबाजी से रोक रहे थे तो किसी दंगाई ने उन पर गोली चला दी। ये तो संयोग ही था कि गोली उनके पैर में लगी। चौधरी मध्यप्रदेश पुलिस के एक जांबाज अफसर हैं। सहृदयता और कर्तव्यनिष्ठा उनमें कूट कूटकर भरी है। ऐसे बेशकीमती अफसर के खिलाफ यदि प्रदेश का ही कोई नौजवान नफरत का खेल खेलने लगे तो निश्चित रूप से ये चिंता की बात है। ये न केवल पुलिस बल्कि समूचे प्रशासनिक तंत्र और सरकार के लिए भी खतरे की घंटी है। आप इसे जातीय उन्माद, आतंकवाद, नक्सलवाद या धर्मांधता कहकर खारिज नहीं कर सकते। आप इसे बहके हुए युवाओं की गलती कहकर दबा भी नहीं सकते। यदि इस घटना से प्रदेश ने मुंह चुराने की कोशिश की तो निश्चित तौर पर हम भविष्य में किसी बड़ी घटना को फलित होने का अवसर प्रदान कर रहे हैं।


    कश्मीर में आजादी के बाद से नेहरू के वंशजों ने कांग्रेस के बैनर तले जो खून की होली खेली उसने कश्मीर की तरुणाई को बरसों पीछे धकेल दिया था। हजारों युवाओं ने अपनी जान गंवाई और महिलाओं का सुहाग उजड़ गया। अलगाववादियों के हौसले इतने बुलंद हो गए थे कि वे सशस्त्र सेना पर हमला करने से भी नही चूकते थे। सैनिक कैम्पों पर बम फेंकना या सैनिकों को झांपड़ मार देना वहां आम बात थी। सैनिकों की मजबूरी ये थी कि वे बगैर आदेश के गोली नहीं चला सकते थे। सेना के ही कई अफसर ऐसे मामलों में कोर्ट मार्शल को अपनी ही सेना के खिलाफ हथियार के रूप में इस्तेमाल करते थे। वजह साफ थी कि तत्कालीन सत्ताधीशों के चरण चूमकर वे प्रमोशन पाते रहते थे। जब मौजूदा राष्ट्रवादी सरकार ने कश्मीर की समस्या को समाधान के अंजाम तक पहुंचाने का फैसला कर लिया तब जाकर कश्मीर को देश की मुख्यधारा में लाने का ख्वाब साकार हो सका है।


    जब सेना का रुतबा धूल धूसरित कर दिया गया था तब असम के एक मेजर ने अलगाववादियों को सबक सिखाने का नायाब तरीका ढूंढ़ निकाला। उपचुनाव के दौरान चार पांच सौ लोगों की भीड़ ने सेना की टुकड़ी को घेर लिया और पथराव करने लगे। इस बीच सेना के कंपनी कमांडर लीतुल गोगोई ने एक उपद्रवी को पकड़ा और सेना की जीप के बोनट पर बांध दिया। उस जीप के पीछे चल रही बख्तरबंद गाड़ी से चेतावनी दी जा रही थी कि उपद्रवियों का यही हाल होगा। उसे नौ गांवों में इसी तरह घुमाया गया। चुनाव कराने गई टीम को सकुशल बाहर निकाल लाने वाले इस उपाय की दुनिया भर में तारीफ की गई। तत्कालीन मुख्यमंत्री फारूख अब्दुल्ला ने इसे अत्याचार बताकर सैन्य अफसर पर कोर्ट आफ इंक्वायरी कराने का दबाव बनाया। हालांकि जांच में अफसर को बेकसूर करार दिया गया। इस तरह के उपाय समाज में दंगा भड़काने वालों के विरुद्ध किए जाते हैं तो भले ही इनकी निंदा की जाए पर ये अपरिहार्य होते हैं। खरगोन में दंगा भड़काने वालों के बीच से भी अफसर पर गोली चलाने वाले शख्श को खोज निकालना और उसे सरे चौराहे गोली मारकर दंडित करना जरूरी हो गया है।
    दरअसल कानून को अपने घर की मुर्गी मानने का मुगालता एक दिन में ही नहीं पनपा है। बरसों से सरकारी अफसरों और पुलिस के लोगों ने जिस तरह से शोषकों और अत्याचारियों को पनाह देने का सोच अपना रखा है उसकी सजा सिद्धार्थ चौधरी जैसे युवा अफसरों को भुगतनी पड़ रही है। आज के युवा अफसरों ने भले ही कोई अपराध नहीं किया हो लेकिन बरसों से एसडीएम कार्यालयों, तहसीलियों,पुलिस थानों में चंदा वसूली का खुला खेल चल रहा है उसके कारण प्रशासनिक न्याय तंत्र का खौफ खत्म हो गया है। सरकारी नौकरियों में अफसरों को वेतन और पेंशन मिलने के बावजूद कई अफसर चंदा वसूली को ही अपनी मुख्य ड्यूटी समझते हैं। उनके पास जानकारी तो होती है कि किसी आपराधिक घटना के पीछे मास्टर माइंड कौन है लेकिन वे उनके गिरेबान पर हाथ नहीं डालते। यही वजह है कि जब ये संरक्षित अपराधी पुलिस या कानून पर ही हाथ डालने लगते हैं तो हाहाकार मच जाता है।
    खरगोन में उपद्रव फैलाने वालों पर अंकुश लगाने के लिए सरकार ने सख्त आपरेशन चलाया है लेकिन उपद्रवियों के घर तोड़ देने और उन्हें जेलों में भर देने से समस्या का समाधान नहीं हो सकता है. धार्मिक पाखंडों की आड़ में पल रहे इस अपराध बोध को सार्वजनिक मंचों पर दंडित करने की जरूरत है।
    दमोह के कुंडलपुर में लाखों करोड़ों रुपयों की दानराशि हड़पने का ख्वाब देखने वाले चंद ठगों ने जब पंचकल्याणक महोत्सव के दौरान बखेड़ा खड़ा करने और पदाधिकारियों से मारपीट करने का जो प्रयास किया उसे लेकर पुलिस ने कुछ लोगों के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज की। चंद लोग तो पुलिस की निगाह में आ गए लेकिन युवाओं को भड़काकर मारपीट के लिए उकसाने वाले कुछ असली अपराधी पुलिस के रिकार्ड में नहीं दर्ज हो पाए। आज वही अपराधी नए नए षड़यंत्र रचने का काम कर रहे हैं। पुलिस का मुखबिर तंत्र इतना ढीला है कि न तो वो उन्हें उजागर कर पा रहा है न ही उन्हें दंडित करके भविष्य के खतरों की सुरक्षा का प्रबंध कर पा रहा है। एक अपराधी ने तो अपने निवास पर बैठक बुलाकर कमेटी के तख्तापलट की साजिश भी रची लेकिन पुलिस इसे महज राजनीतिक दांव पेंच मान रही है। जबकि आरोपियों के विरुद्ध तीर्थ क्षेत्र में ठगी करने का इतिहास पहले से उजागर है। अब यदि ऐसे अपराधियों पर समय रहते कोई अंकुश नहीं लगाया जाएगा तो जाहिर है कि भविष्य में किसी बड़ी घटना की संभावना खारिज नहीं की जा सकती।
    ऐसा नहीं कि इन असामाजिक तत्वों के विरुद्ध कार्रवाई के लिए पुलिस को किसी अपराध के घटित होने का इंतजार करना पड़े। अपराधियों की खोज और उन्हें निरंतर नसीहत देने का काम पुलिस की जवाबदारी में पहले से ही शामिल है। इसके लिए तीन दशकों पहले पत्रकारों के नेटवर्क को पुलिस के साथ जोड़ा गया था लेकिन चंद आपराधिक तत्वों ने पत्रकारों के इस नेटवर्क में अपराधियों को भर दिया। नतीजतन हालात वही ढाक के तीन पात होकर रह गए।


    खरगोन में सिद्धार्थ चौधरी पर हमले ने एक बार फिर पुलिस और प्रशासन को सावधान किया है। कमलनाथ जैसे भौंदू राजनेता ने तो अपनी राजनीति को चमकाने के लिए पत्रकारों को खलनायक बताने का अभियान चला दिया था। मौजूदा शिवराज सिंह चौहान की सरकार समाज के सूचना तंत्र को संवारने के बजाए उसे कचराघर बनाने का काम करती रही है। पिछले विधानसभा चुनावों में शिवराज सरकार की शर्मनाक हार के बावजूद सूचना तंत्र का महत्व भाजपा के कर्णधार नहीं समझ सके । अब जबकि प्रदेश गहरे आर्थिक संकटों से जूझ रहा है। कर्ज का बोझ बढ़ता जा रहा है। विकास योजनाओं के लिए पूंजी जुटाना टेढ़ी खीर हो गया है तब जरूरी है कि सामाजिक विद्वेष फैलाने वाले ठगों की पहचान करके उन्हें निर्मूल किया जाए। पूंजी का सफल निर्माण तभी संभव है जब शासन तंत्र के एक हाथ में योजनाओं का खाका हो और दूसरे हाथ में दंड का शमशीर,तभी मध्यप्रदेश को आधुनिक भारत का सफल प्रदेश बनाया जा सकता है।

  • गोल्डन सिम के लिए धोखाधड़ी करने वाले धराए

    गोल्डन सिम के लिए धोखाधड़ी करने वाले धराए

    भोपाल, 17 मार्च(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)। थाना गोरखपुर में 15 मार्च को हरजिन्दर सिंह उम्र 53 वर्ष निवासी गुप्तेश्वर वार्ड गुडलक अपार्टमेंट के सामने महानद्दा गोरखपुर ने लिखित शिकायत की थी कि वह स्पेयर पार्टस की दुकान चलाता है। दो फरवरी 22 को एक अज्ञात व्यक्ति द्वारा उसके साढू भाई हरविन्दर सिंह निवासी प्रेमनगर के मोबाइल में गोल्डन नम्बर सीरीज के लिये टेक्सट मैसेज भेजा गया। जिसमें गोल्डन नम्बर सीरीज के लिये 49 हजार 999 रूपये के आफर में मोबाइल में बात करने तथा व्हाटसएप मैसेज करने के लिये लिखा था। तब हरविंदर सिंह ने इस स्कीम के बारे में मुझे बताया था। हरविंदर सिंह से मेने वह नंबर लेकर उक्त मोबाइल नम्बर के धारक से कॉल एवं व्हाटसएप पर मैसेज से बात की। मोबाइल नम्बर के धारक ने स्वयं को एयरटेल का एजेन्ट बताया एवं एयरटेल के गोल्डन मोबाइल नम्बर 900000000 की सिम के एलाटमेंट के लिये व्हाटसएप में टेक्सट इन्वाइस भेजी। जिसमें अकाउण्ट नम्बर, आईएफएससी कोड देते हुये बैंक खाते नम्बर पर 41 हजार 300 रूपये पेमेण्ट करने के लिये कहा गया था। मेने एयू स्माल फायनेंस बैंक शाखा नेपियर टाउन के खाते से बताये गये बैंक खाते में पेमेण्ट कर दी गई। किंतु अभी तक मुझे गोल्‍डन सिम प्राप्‍त नहीं हुई और न ही मोबाईल धारक उसका फोन उठा रहा है। अज्ञात व्यक्ति द्वारा मेरे साथ 41 हजार 300 रूपये की धोखाधडी की गयी है। शिकायत पर अज्ञात मोबाइल धारक के विरूद्ध अपराध पंजीबद्ध कर प्रकरण विवेचना में लिया गया।

    पुलिस अधीक्षक जबलपुर श्री सिद्धार्थ बहुगुणा ने घटित हुई घटना को गंभीरता से लेते हुये अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक शहर दक्षिण/अपराध श्री गोपाल खाण्डेल के मार्गदर्शन में नगर पुलिस अधीक्षक गोरखपुर श्री आलोक शर्मा के नेतृत्व में थाना गोरखपुर, क्राइम ब्रांच एवं सायबर सेल की संयुक्त टीम गठित कर अज्ञात आरोपी को शीघ्र गिरफ्तार करने के निर्देश दिए।

    विवेचना के दौरान ज्ञात हुआ कि भरतीपुर के रहने वाले अशोक तीरथानी के बैंक अकाउंट में शिकायतकर्ता का पैसा ट्रांसफर कराया गया है। जिस पर अशोक तीरथानी को अभिरक्षा में लेते हुये सघन पूछताछ की गयी तो उसने अपने मित्र दिलीप कुकरेजा तथा शुभम उर्फ शिवम राय के साथ कई बैंक अकाउंट खोलकर धोखाधडी का पैसा बैंक अकाउंट में ट्रांजैक्शन करना स्वीकार किया।

    टीम ने दिलीप कुकरेजा एवं शुभम राय को गिरफ्तार कर पूछताछ करने पर जानकारी प्राप्त हुई कि मुम्बई में रहने वाले रवि मिश्रा एवं राज के कहने पर शुभम राय ने जबलपुर शहर में कई लोगों के नाम से विभिन्न बैंकों में कई बैंक अकाउंट खुलवाये हैं। जिसमें रवि मिश्रा एवं राज एयरटेल कम्पनी का एजेंट बताकर लोगों को गोल्डन सिम प्रोवाईड कराने का लालच देकर अपने गिरोह के लोगों के खाते में पैसे ट्रांसफर कराते थे। इन पैसों में से शुभम राय अपना हिस्सा लेकर शेष राशि रवि मिश्रा को ट्रांसफर कर देता था। इस तरह शुभम राय ने अन्य लोगों को भी फर्जी खाता खोलने के लिए प्रेरित किया और 52 बैंक अकाउंट में लगभग तीन करोड रूपये का ट्रांजेक्शन कराया और अपने साथी रवि मिश्रा के साथ शेयर किया।

    आरोपी शुभम राय की निशानदेही पर घटना में प्रयुक्त 52 बैंक अकाउंट के ट्रांजेक्शन, सात नग एटीएम डेबिट कार्ड, एक पासबुक, दो चैक बुक, दो आधार कार्ड, एक पेनकार्ड, एक केवायसी फार्म, आठ मोबाईल फोन, एक स्कूटी जप्त की गयी है। आरोपीगण के बैंक खातो की जानकारी प्राप्त की गयी। जिसके अनुसार लगभग तीन करोड रुपये का धोखाधडी की गयी है। तीनों आरोपियों को प्रकरण में विधिवत गिरफ्तार करते हुये मान्नीय न्यायालय के समक्ष पेश करते हुये आरोपी शुभम राय को रिमाण्ड पर लिया जा रहा है।

    गिरोह का मुख्य आरोपी मुम्बई निवासी रवि मिश्रा मूलतः बिहार पटना का रहने वाला है। वह लोगों को मैसेज एवं काल करके एयरटेल कम्पनी का वीआईपी नम्बर/फैंसी नम्बर देने का लालच देकर पैसों की मांग करता था। शुभम राय जबलपुर में लोगों को प्रति खाता 1000 रुपये का लालच देकर उनसे खाते खुलवाकर चैक बुक, एटीएम अपने पास रख लेता था तथा उक्त खातों में जालसाजी का पैसा डलवाकर शुभम राय अपना हिस्सा रखने के बाद शेष रूपए रवि मिश्रा के अकाउंट में ट्रांसफर कर देता था।

    आरोपी शुभम राय, रवि मिश्रा का दोस्त है जो कि पहले मुम्बई में लगभग पांच साल वर्ष 2007-2012 तक फिल्म सिटी में साथ में काम कर चुका है। पूर्व में शुभम राय इसी प्रकार की जालसाजी में वर्ष 2017 में लखनउ उत्तर प्रदेश में पकड़ा जा चुका है। आरोपी शुभम राय ने महाराष्ट्र, तमिलनाडू, केरल के अलावा कई राज्यों में धोखाधडी करना स्वीकारा किया है। अभी तक की पूछताछ में लगभग 500 से ज्यादा व्यक्तियों के साथ धोखाधडी एवं लगभग 52 बैंक अकाउंट खुलवाने एवं उसमें लगभग तीन करोड रुपये के ट्रांजेक्शन की जानकारी प्राप्त हुई है।