Category: अपराध

  • क्राईम सीन को कागज पर उकेरते नितिन महादेव

    क्राईम सीन को कागज पर उकेरते नितिन महादेव

    मुंबई 23 अगस्त(प्रेस इंफार्मेशन सेंटऱ) शक्ति मिल्‍स गैंगरेप से लेकर जर्मनी बेकरी ब्‍लास्‍ट, कसाब और दाभोलकर मर्डर केस तक के अपराधियों को अपने स्‍केच के जरिए जेल की सलाखों तक पहुँचाने वाले नितिन महादेव यादव आज अपराध जगत की अबूझ पहेली बन गए हैं।उन्हें लोग प्यार से “आधा पुलिसवाला” भी कहते हैं। कई लोग इन्हें ‘यादव साहब’ कह कर भी बुलाते है।

    नितिन मात्र 5वीं कक्षा के छात्र थे जब उन्होंने कागज़ को बीस रुपये के नोट के आकार में काटा और अपने पेंट ब्रश की मदद से हूबहू असली नोट जैसा पेंट कर दिया। उस नोट को लेकर नितिन एक होटल में गये और काउंटर पर वह नोट पकड़ा दिया। नोट इतना हूबहू पेंट हुआ था कि सामने खड़े व्यक्ति ने उसे असली नोट समझ कर रख लिया।जब नितिन ने बताया के वह नोट नकली है तो सभी लोग पाँचवीं कक्षा के इस छात्र की प्रतिभा का लोहा मान गये।

    एक रोज़ नितिन मुम्बई के ही एक पुलिस स्टेशन में नेमप्लेट पेंट कर रहे थे।थाने में एक मर्डर केस आया, मर्डर का गवाह होटल में काम करने वाला एक वेटर था। पुलिस उससे मर्डर करने वाले व्यक्ति का हुलिया पूछ रही थी और वेटर समझा नहीं पा रहा था।नितिन थानेदार के पास गये और उनसे कहा कि अगर वह वेटर को केवल आधा घंटा उसके साथ बैठने दें तो वह मर्डर करने वाले व्यक्ति का हूबहू स्केच तैयार कर सकता है। पहले थानेदार ने नितिन की बात को मज़ाक में लिया पर नितिन के बार बार आग्रह पर थानेदार मान गया।उसके बाद जो हुआ वह चमत्कार था।

    वेटर से मर्डर करने वाले का हुलिया पूछने के बाद नितिन ने थानेदार के हाथ में एक स्केच पकड़ाया। वह चेहरा हूबहू मर्डर करने वाले व्यक्ति से मिलता था।स्केच की मदद से 48 घंटे के अंदर वह आरोपी पकड़ा गया। सारा पुलिस महकमा अब नितिन का मुरीद बन चुका था।

    कुछ समय के पश्चात एक लड़की से बलात्कार हुआ जो मूक बधिर थी। ना बोल सकती थी, ना सुन सकती थी। नितिन को तत्कालीन डीएसपी ने याद किया और बच्ची से मिलवाया। नितिन बलात्कारी का चेहरा बच्ची की आँखों में देख चुके थे। नितिन ने एक एक कर के कई स्केच बनाये। कई तरह की आँखें, कई तरह का चेहरा। कई तरह के नैन-नक्श। एक एक कर इशारे के ज़रिये बच्ची बताती गयी की बलात्कारी कैसा दिखता है।आठ घँटे की अथक मेहनत के बाद नितिन मनोहर यादव ने डीएसपी के हाथ में बलात्कारी का स्केच थमा दिया।स्केच की मदद से अगले 72 घण्टे में बलात्कारी को पकड़ा गया।

    नितिन अब मुम्बई पुलिस के लिये संजीवनी बूटी बन चुके थे। हर एक केस में नितिन के स्केच ऐसी जान फूँक देते के पुलिस उसे आसानी से सुलझा लेती।बीते 30 वर्ष के अंतराल में यादव पुलिस के लिये करीबन 4000 से अधिक स्केच बना चुके हैं।उल्लेखनीय है के केवल यादव की बनायी हुई तस्वीर की बदौलत मुम्बई पुलिस 450 से अधिक खूँखार अपराधी को गिरफ्तार कर चुकी है।

    अब वह विषय, जिसके लिये यह पूरा लेख लिखा गया है….

    30 साल में किसी भी स्केच या तस्वीर के लिये नितिन ने पुलिस या किसी भी अन्य व्यक्ति से “एक नया पैसा” भी नहीं लिया है।बार-बार पुलिस महकमे के बड़े से बड़े अफसर ने नितिन को ईनामस्वरूप धनराशि देने का प्रयास किया पर नितिन ने एक रुपया भी लेने से इनकार कर दिया।”नितिन मनोहर यादव” चेम्बूर एजूकेशन सोसाइटी के एक स्कूल में शिक्षक रहे।जो तनख्वाह आती उसी से गुज़र बसर करते रहे।

    वह कहते हैं कि स्केच बना कर वह एक तरह से राष्ट्र की सेवा कर रहे हैं। असामाजिक तत्वों की पहचान होती है तो वह सलाखों के पीछे जाते हैं।नितिन 30 साल तक अपना काम राष्ट्र सेवा के भाव से करते रहे और आज भी एक बुलावे पर सब कामकाज छोड़ कर हाज़िर हो जाते हैं।30 साल की इस सेवा में नितिन को करीबन 164 प्रतिष्ठित संस्थाओं ने सम्मानित किया है।

    नितिन बड़े फक्र से सम्मानपत्र और ट्रॉफी दिखाते हुये कहते हैं….

    “यही मेरी कमाई है। यही मेरी जमापूँजी है!”कभी कभी लगता है के यह राष्ट्र कैसे चल रहा है। चहुँओर बेईमानी का दबदबा है। चहुँओर भ्रष्ट आचरण का बोलबाला है।फिर किसी दिन नितिन महादेव यादव जैसे किसी समर्पित व्यक्ति के विषय में पढ़ कर ऐसा लगता है कि राष्ट्र के प्रति समर्पित यादव जैसा एक व्यक्ति भी हज़ारों #बेईमानों पर भारी है।।

  • बीडीए का बाबू घूस लेते धराया

    बीडीए का बाबू घूस लेते धराया

    भोपाल,23 अगस्त(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)। लोकायुक्त भोपाल की सतर्क टीम ने आज भोपाल विकास प्राधिकरण कार्यालय में एक बाबू को रिश्वत लेते रंगे हाथों गिरफ्तार किया है। बीडीए का ये बाबू एक किसान से मकान की लीज के नवीनीकरण के लिए तीन लाख पैंतीस हजार रुपए की रिश्वत मांग रहा था।


    लोकायुक्त पुलिस के अनुसार आज विशेष स्थापना पुलिस की टीम ने पुलिस अधीक्षक मनु व्यास के मार्गदर्शन में ये सफलता पाई है। BDA कार्यालय मे पदस्थ बाबू सहायक ग्रेड 1 तारकचंद दास के द्वारा आवेदक से उसके रत्नागिरी रायसेन रोड पिपलानी स्थित मकान की लीज के नवीनीकरण के लिए335000 रुपयों की रिश्वत की मांग की थी. आवेदक किसान अपने मकान की लीज के नवीनीकरण के लिए पिछले 6 महीनों से बावू तारकचंद दास के चक्कर लगा लगा कर परेशान हो गया था परन्तु बाबू बिना रिश्वत लिए काम नहीं कर रहा था.

    लंबे समय की प्रताडऩा से तंग आकर खेती किसानी करने वाले इस व्यक्ति ने लोकायुक्त कार्यालय पहुंचकर विशेष पुलिस स्थापना के पुलिस अधीक्षक से अपनी परेशानी के बारे में शिकायत की. शिकायत पर त्वरित कार्यवाही करते हुए इंस्पेक्टर नीलम पटवा की अगुवाई में तैनात पुलिस टीम ने आज BDA के भ्रष्ट बाबू टी सी दास उर्फ़ तारक चंद दास पिता स्वर्गीय श्री कालीपत दास उम्र 58 वर्ष सहायक ग्रेड 1 निवासी मकान नंबर 10 पंचशील नगर भोपाल क़ो आवेदक से 40000 रूपये लेने पर पकड़ा.आरोपी दास के विरुद्ध धारा 7 भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के अंतर्गत कार्यवाही BDA कार्यालय मे जारी है.टीम के अन्य सदस्य निरीक्षक रजनी तिवारी,निरीक्षक घनश्याम मर्सकोले,प्रधान आरक्षक रामदास कुर्मी, मुकेश सिंह,राजेंद्र पावन,नेहा परदेसी आरक्षक मनमोहन साहू शामिल थे.

  • बिल्डर झंवेरी को दंड का फैसला अब कोर्ट करेगा

    बिल्डर झंवेरी को दंड का फैसला अब कोर्ट करेगा

    इंदौर । सिल्वर स्प्रिंग के बिल्डर मुकेश झवेरी और अभिषेक झवेरी समेत 10 लोगों के खिलाफ जिला न्यायालय इंदौर ने विभिन्न आपराधिक धाराओं में प्रकरण पंजीबध्द करते हुए सभी को 30 अगस्त को न्यायालय के समक्ष उपस्थिति दर्ज करने के लिए समन जारी किये हैं ।
    सिल्वर स्प्रिंग फेज 2 के रहवासियों ने आलोक जैन पिता सुदेश जैन के माध्यम से एक परिवाद धारा 452, 323, 352, 506, 341, 294, 34 और 120बी के अंतर्गत प्रस्तुत किया था। माननीय न्याधीश श्री राहुल डोंगरे साहब की कोर्ट ने 31 जुलाई 2024 को हीरालाल जोशी, सुबोध गुप्ता, अभय कटारे, विकास मल्होत्रा, सत्यम राठौर, ऋषभ विश्वकर्मा, परमजीतसिंह, , जितेंद्रसिंह सोलंकी समेत बिल्डर पिता-पुत्र मुकेश झवेरी और अभिषेक झवेरी के खिलाफ विभिन्न धाराओं में प्रकरण पंजीबध्द करने के आदेश प्रदान किये है । 30 अगस्त को इन सभी आरोपियों को माननीय न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत होना है।
    अधिवक्ता राजेश जोशी ने बताया कि माननीय न्यायालय के समक्ष एक परिवाद प्रस्तुत किया गया था, इसमें परिवादी आलोक जैन समेत आधा दर्जन रहवासियों के बयान दर्ज करवाए गए थे, इन बयानों, वीडियो और पुलिस की रिपोर्ट के आधार पर माननीय न्यायालय ने आपराधिक धाराओं में प्रकरण पंजीबध्द करने के आदेश प्रदान किये है ।
    यह है मामला :
    सिल्वर स्प्रिंग टाउनशिप में मालिकाना हक वाले प्लॉट धारकों जिन्हें शेयर होल्डर्स कहा जाता है, इनकी जुलाई 2022 की विशेष आमसभा में बिल्डर की शह पर कई बाहरी गुंडातत्व भी जबरन घुस आए और जानबूझकर आमसभा में मारपीट के उद्देश्य से बहसबाजी, गाली गलौज और विवाद करने लगे थे । इस दौरान परिवादी आलोक जैन के साथ सभी आरोपियों ने मिलकर मारपीट की और छिपाकर लाए गए हथियारों से जान से मारने की धमकी दी और बीच-बचाव में अन्य शेयर होल्डर्स आए तो आरोपीगण वहां से भाग निकले । पुलिस तेजाजी नगर थाने पहुंचकर परिवादी ने पूरी जानकारी दी, वरिष्ठतम अधिकारियों तक शिकायत की, इसके बावजूद बिल्डर के दबाव में पुलिस ने प्रकरण पंजीबध्द नहीं किया था। दोबारा 4 अगस्त 2022 को परिवादी और सिल्वर स्प्रिंग्स संघर्ष एवं समन्वय समिति सदस्यों ने थाना तेजाजी नगर समेत आला अधिकारियों को एक शिकायत परिवादी पर हमला करने वालों और बिल्डर के खिलाफ की थी, इसके बावजूद कोई कार्यवाही नहीं की गई उल्टा परिवादी और रहवासियों को बिल्डर और उसके सहयोगियों द्वारा लगातार धमकाया जाता रहा ।
    रहवासियों की बडी जीत
    सिल्वर स्प्रिंग्स के बिल्डर पिता-पुत्र मुकेश और अभिषेक झवेरी रसूखदार होने के साथ साथ राजनीतिक पैठ रखने वाले बिल्डर है । यही वजह है कि सैकडों शिकायतें होने के बावजूद इनके खिलाफ आज दिनांक तक पुलिस ने कोई प्रकरण पंजीबध्द नहीं किया है। रहवासी क्षेत्र में जहां एक ओर बिल्डर ने मनमानी करते हुए शराब परोसने के क्लब शुरू किये, बिल्डिंग की छतों पर मोबाइल टावर लगवा दिये, नाले की जमीनों पर कब्जा करके प्लॉट बेच दिये यही नहीं कुछ बेसमेंट में सुपर मार्केट भी बनवा रखे हैं। बायपास रोड की सबसे बड़ी बसाहट वाली इस टाऊनशिप में बिल्डर डेवलपर एम झवेरी समूह ने निर्माण पश्चात भी छल बलपूर्वक अवैध अधिपत्य बनाए रखा है । घोषित एकीकृत टाऊनशिप को अनेक हिस्सों में बांटकर बिल्डर ने रहवासियों के साझा हित की सैकड़ों करोड़ रुपये मूल्य की सार्वजनिक / शासकीय धनसंपदा पर अवैध कब्जा कर रखा है । एकीकृत टाऊनशिप के हजारों रहवासियों के हित में गठित संघर्ष समिति के माध्यम से वर्तमान अध्यक्ष आलोक जैन द्वारा उपभोक्ता आयोग, उच्च न्यायालय व रेरा सहित हर संभव मंच पर शिकायतें परिवाद दर्ज किए गए हैं । जिनसे छुब्ध होकर बिल्डर पिता पुत्र मुकेश झवेरी व अभिषेक झवेरी द्वारा प्रायोजित कुछ रहवासियों व बाहरी गुंडों के माध्यम से 31 जुलाई 22 को रहवासियों की आमसभा में आलोक जैन के ऊपर किए गए हमले के ठीक 2 साल बाद 31 जुलाई 24 को माननीय न्यायालय के द्वारा यह प्रकरण दर्ज हो सका । भारी अनियमितताएं होने के बावजूद बिल्डर पिता-पुत्र के खिलाफ आज दिनांक तक कोई भी सख्त कार्यवाही नहीं हो पाई थी। रहवासियों का कहना है कि इस तरह की कार्यवाही से न्याय व्यवस्था के प्रति आस्था और उम्मीद जगी है।

    न्यायालयीन केस की जानकारी: अधिवक्ता Rajesh Joshi 8462000010
    Alok jain 9425063650

  • अग्निवीरों को चिंतामुक्त करने के उपाय करेगी सेना

    अग्निवीरों को चिंतामुक्त करने के उपाय करेगी सेना


    नई दिल्ली,13 जुलाई(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)। इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के अनुसार, भारतीय सेना वर्तमान में सशस्त्र बलों के लिए अग्निपथ भर्ती कार्यक्रम का आंतरिक मूल्यांकन कर रही है और कुछ समायोजन का सुझाव दे सकती है ।
    केंद्र सरकार ने 2022 में इस महत्वाकांक्षी योजना को शुरु किया था। लोकसभा चुनाव के दौरान कांग्रेस ने इस योजना पर सवाल उठाए थे इसके बाद सेना ने आंतरिक मूल्यांकन करके योजना में और भी नए सुधार शामिल करने की तैयारी की है। रिपोर्ट में कहा गया है कि इस समीक्षा का उद्देश्य आने वाली सरकार को कार्यक्रम में संभावित संशोधन करने में सहायता प्रदान करना है।


    इंडियन एक्सप्रेस ने जिन अधिकारियों के हवाले से ये खबर जारी की है उसमें बताया गया है कि , सेना का सर्वेक्षण अग्निवीरों सहित विभिन्न हितधारकों से फीडबैक एकत्र कर रहा है, साथ ही विभिन्न रेजिमेंटल केंद्रों में भर्ती और प्रशिक्षण कर्मियों, तथा अग्निवीरों की देखरेख करने वाले यूनिट और सब-यूनिट कमांडरों से भी फीडबैक एकत्र कर रहा है।रिपोर्ट में बताया गया है कि सेना ने संबंधित पक्षों को 10 सवालों वाली प्रश्नावली भेजी थी। मई माह तक उसने प्राप्त फीडबैक के आधार पर नए सुधार लागू करके योजना को कारगर बनाया है।


    फीडबैक में योजना के शुरू होने से पहले भर्ती किए गए सैनिकों के साथ अग्निवीरों के तुलनात्मक प्रदर्शन का विश्लेषण, साथ ही उनके सकारात्मक और नकारात्मक गुणों पर टिप्पणियां शामिल होंगी।
    इस फीडबैक के आधार पर, सेना योजना में संभावित समायोजन का प्रस्ताव करेगी। इसके अतिरिक्त, अग्निवीरों से रक्षा सेवाओं में शामिल होने के उनके उद्देश्यों, उनके पिछले नौकरी प्रयासों और क्या उन्हें लगता है कि उन्हें स्थायी रूप से सेना में शामिल किया जाना चाहिए, के बारे में इनपुट मांगा जाएगा। वे अपनी चार साल की सेवा पूरी होने के बाद अपने पसंदीदा करियर विकल्पों के बारे में भी जानकारी देंगे और क्या वे सेना में सेवा जारी रखना चाहते हैं।इसके अलावा, सर्वेक्षण में यह भी पूछा जाएगा कि क्या ये सैनिक अपने परिचितों को अग्निवीर बनने के लिए प्रोत्साहित करेंगे।


    अग्निपथ योजना के तहत सेना, नौसेना और वायु सेना के लिए पुरुष और महिला दोनों उम्मीदवारों की भर्ती की जाती है, जिन्हें अग्निवीर के नाम से जाना जाता है। उन्हें या तो सीधे शैक्षणिक संस्थानों से या भर्ती रैलियों के माध्यम से भर्ती किया जाता है। सैनिकों से अपेक्षा की जाती है कि वे पेंशन के लिए पात्रता के बिना चार साल की अवधि तक सेवा करें।
    योजना की शर्तों ने विवाद को जन्म दिया है, तथा सेवानिवृत्त सैनिकों और इच्छुक व्यक्तियों ने सेवारत कार्मिकों पर इसके संभावित प्रभाव, सशस्त्र बलों की व्यावसायिकता और नागरिक समाज के संभावित सैन्यीकरण के संबंध में चिंताएं व्यक्त की हैं।


    हरियाणा में हाल ही में एक रैली में कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने दावा किया कि सेना अग्निपथ योजना का विरोध करती है, जिसका श्रेय उन्होंने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को दिया तथा कहा कि यदि कांग्रेस सत्ता में आई तो वह इसे बंद कर देंगे।
    हालाँकि, केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने पहले कहा था कि यदि आवश्यक हो तो सरकार अग्निपथ योजना में समायोजन करने के लिए तैयार है।
    वर्तमान में, 40,000 अग्निवीरों के दो बैच सेना में सेवारत हैं, जिनमें से 7,385 अग्निवीरों के तीन बैचों ने नौसेना में प्रशिक्षण पूरा कर लिया है, तथा 4,955 अग्निवीर वायु प्रशिक्षु वायु सेना में प्रशिक्षण पूरा कर चुके हैं।

    गौरतलब है कि कांग्रेस के इस दुष्प्रचार अभियान से सेना के भीतर भी असमंजस की स्थितियां बन गईं थीं। जिस प्रकार नई पेंशन स्कीम को लेकर कांग्रेस ने हंगामा मचाया था उसी प्रकार सेना की पेंशन के आधार पर वैमनस्य के बीज बोने की कोशिश की गई है।गृह मंत्रालय के सूत्र इस हंगामे को विदेश प्रवर्तित मानने से इंकार नहीं कर रहे हैं। उनका कहना है कि भले ही ये दुष्प्रचार किन्हीं विदेशी ताकतों के इशारे पर किया जा रहा हो लेकिन इससे हमें आंतरिक सुधार का अवसर मिला है और हम अपने सैनिकों और उनके परिवारों के बेहतर भविष्य के लिए आवश्यक सुधार की संभावना पर पूरी गंभीरता से विचार कर रहे हैं।

  • छेड़खानी के मामलों में अपराधियों की ढाल बनी भोपाल पुलिस

    छेड़खानी के मामलों में अपराधियों की ढाल बनी भोपाल पुलिस


    भोपाल,10 अप्रैल(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)। कार्यस्थल पर महिलाओं के विरुद्ध होने वाले अपराधों और छेड़छाड़ के मामलों में भोपाल पुलिस रसूखदारों के सामने उसी तरह लाचार नजर आती है जैसे कभी बिहार और उत्तर प्रदेश की पुलिस देखी जाती थी। मुख्यमंत्री डॉ.मोहन यादव का नाम लेकर किए जाने वाले अपराधों पर तो पुलिस इतनी डरी हुई होती है कि उसकी कार्रवाई घोड़े को उड़ना सिखाने जैसी हो जाती है। हबीबगंज पुलिस की महिला थानेदार ने यहां दर्ज एक छेड़छाड़ के प्रकरण की कार्रवाई केवल इसलिए विलंबित कर रखी है ताकि आरोपी को पीड़ित पक्ष पर समझौते के लिए दबाव बनाने का भरपूर अवसर मिल जाए।
    मामला विगत पांच अप्रैल को घटित प्रकरण क्रमांक 0189 का है। जिसमें आरोपी ने युवाओं को विदेशों में शिक्षा दिलाने का मार्गदर्शन करने वाली एक छात्रा से न केवल छेड़खानी की बल्कि उससे मारपीट भी कर डाली थी। पहले से इसी संस्थान में कार्य कर रहे इस युवक को डर था कि यदि लड़की ने अपना काम बखूबी संभाल लिया तो उसकी नौकरी जा सकती है। कथित तौर पर कबूतरबाजी में लिप्त इस युवक से संस्थान पहले से इतना परेशान था कि उसके संचालक ने छात्रा को सारी जवाबदारी सौंपना शुरु कर दिया था। बताया जाता है कि आरोपी ने षड़यंत्र पूर्वक संस्थान का कैमरा दूसरी दिशा में मोड़ दिया। तमाम कर्मचारियों को छुट्टी पर भेज दिया और फिर संस्थान के ही कक्ष में छात्रा से छेड़खानी कर डाली। यही नहीं जब छात्रा ने आपत्ति की तो आरोपी ने उसके साथ मारपीट भी कर दी।
    छात्रा ने जैसे तैसे भागकर अपने मित्र को बुलाया और अपनी बड़ी बहन व अन्य मित्रों को इस घटना की जानकारी दी। छात्रा की बड़ी बहन जो कि बड़ी कंपनी में अधिवक्ता है उसने छात्रा के साथ हबीबगंज पुलिस थाने पहुंचकर वारदात की शिकायत दर्ज कराई।शुक्रवार को पुलिस ने शिकायत पर प्राथमिकी तो दर्ज कर ली लेकिन अब तक आरोपी को गिरफ्तार करके चालान प्रस्तुत नहीं किया है। आरोपी को पुलिस ने बुलाकर अपनी निगरानी में ले लिया है लेकिन उसे घर जाने दिया जाता है और उसे छात्रा पर दबाव बनाकर समझौता करने के लिए राजी करने का अवसर दिया जा रहा है।
    छात्रा के बताए अनुसार जब उसने आपत्ति की तो आरोपी ने अपने पत्रकार चाचा का मुख्यमंत्री डाक्टर मोहन यादव के साथ फोटो दिखाया और धमकाया कि मेरा परिवार मुख्यमंत्री का करीबी है। मैं तुम्हें कहीं भी उठवा लूंगा।मेरे चाचा पत्रकार भले हैं लेकिन वे असल में माफिया सरगना हैं। पत्रकारों का एक अपराधी संगठन उनके साथ है ऐसे में तुम्हारी आवाज मीडिया भी नहीं सुनेगा। पुलिस को तो मैं इतना धमका दूंगा कि वो तुम्हारी शिकायत पर कोई कार्रवाई नहीं करेगी। इसलिए तुम कहीं शिकायत करने की तो सोचना भी मत।
    छात्रा के पिता भी पत्रकार हैं और वो असली पत्रकारों की अहमियत अच्छी तरह समझती थी। उसने बहादुरी दिखाते हुए आरोपी के विरुद्ध पुलिस थाने में शिकायत दर्ज करवा दी। उसकी अधिवक्ता बहिन के तर्कों के सामने पुलिस ने प्रकरण तो कायम कर लिया लेकिन आरोपी को जेल भेजने के बजाए वह उसे अवसर उपलब्ध करवा रही है।
    हबीबगंज थाना प्रभारी श्रीमती सरिता बर्मन का कहना है कि हमने प्रकरण कायम कर लिया है। अभी पीड़िता उसकी बहिन और उसकी मां के बयान लिए जाने हैं। आसपास के अन्य साक्ष्य भी एकत्रित किए जाने हैं। इसके बाद ही कोई कार्रवाई होगी। जब चालान कोर्ट में पेश किया जाएगा तभी आरोपी के विरुद्ध कोई दंडात्मक कार्रवाई हो पाएगी। आरोपी भी अपनी बात कह रहा है इसलिए हम उसकी बात को भी अनसुना नहीं कर सकते। सभी पक्षों के बयान पूरे होते ही चालान कोर्ट में पेश हो पाएगा। जब उनसे पूछा गया कि कोई दबाब तो नहीं है तो उन्होंने कहा पुलिस ने प्रकरण कायम कर लिया है।
    बिट्टन मार्केट स्थित मैट्रो प्लाजा में संचालित फिनटेक एडु (FINTECH_EDU) संस्थान ने इस मामले को गंभीरता से लिया है और आरोपी को नौकरी से निकाल दिया है लेकिन पुलिस इस आरोपी के प्रति नरमी बरत रही है। सत्यम त्रिपाठी नामक इस आरोपी के चाचा ने कथित तौर पर कई पत्रकारों के माध्यम से छात्रा के पिता पर दबाव बनाने का प्रयास किया है कि वे अपनी बेटी को समझा लें क्योंकि यदि आरोपी को जेल जाना पड़ेगा तो बेटी को खामखां बदनामी झेलना पड़ेगी। जबकि छात्रा अपनी बात पर कायम है और उसका कहना है कि आरोपी को कड़े से कड़ा दंड मिलना चाहिए ताकि घर से बाहर काम करने निकलने वाली युवतियों के प्रति होने वाले अपराधों पर अंकुश लगाया जा सके।कार्यस्थल पर यौन उत्पीडन के मुद्दे पर बड़ी बड़ी कार्यशालाएं करने वाली मध्यप्रदेश पुलिस की अपराधियों पर मेहरबानी का ये मुद्दा आगे चलकर उसकी बदनामी का सबब भी बनने जा रहा है।

  • पास्को एक्ट के आरोपी प्रकाश चंद्र गुप्ता के खिलाफ पुलिस पहुंची अदालत

    पास्को एक्ट के आरोपी प्रकाश चंद्र गुप्ता के खिलाफ पुलिस पहुंची अदालत


    भोपाल, 12 मार्च(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर) । पास्को एक्ट के आरोपी और कतिपय भ्रष्ट जजों के टुकड़खोर प्रकाश चंद्र गुप्ता के खिलाफ पास्को एक्ट में प्राप्त शिकायत और सबूतों को लेकर आज भोपाल पुलिस ने जिला अदालत में चालान प्रस्तुत कर दिया। पुलिस कार्रवाई को बरसों से धता बता रहे गुप्ता के विरुद्ध पुलिस के पास ढेरों कहानियां हैं लेकिन अब तक वह झूठे साक्ष्यों का इस्तेमाल करके अदालतों को झांसा देता रहा है। पुलिस ने पास्को एक्ट में लगभग नौ महीनों की जांच के बाद ये चालान प्रस्तुत किया है।
    अदालत के सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार बूटकॉम कंप्यूटर नाम से एमपीनगर में दूकान चलाने वाले गुप्ता के विरुद्ध उसके एक करीबी मित्र की बेटी ने शिकायत की है कि गुप्ता ने उसके साथ अनैतिक संबंध बनाने की नियत से छेड़खानी की थी। पुलिस ने कानूनी विशेषज्ञों की सलाह के बाद ही पास्को एक्ट में ये पकरण दर्ज किया है। कथित तौर पर बैंकों , व्यवसायियों और आम नागरिकों से धोखाघड़ी करने वाले इस कुख्यात आरोपी के विरुद्ध बरसो से पुलिस के पास शिकायतें तो प्राप्त होती रहीं हैं लेकिन साक्ष्यों के अभाव में वह अक्सर बच निकलता था।
    सूत्र बताते हैं कि प्रकाश गुप्ता को न्यायपालिका के कुछ भ्रष्ट जजों, बैंकों से अरबों रुपयों का लोन लेकर गड़प जाने वाले ठगों और पुलिस के कुछ भ्रष्ट अफसरों का संरक्षण रहा है। कुछ जजों के विरुद्ध ठगी करने वाले गुप्ता को एक समय में कुख्यात अपराधी रहे मुख्तयार मलिक ने भी धमकी दी थी लेकिन अदालतों और पुलिस अफसरों की शरण लेकर वह बच निकला। करोड़ों रुपयों की ठगी के बाद कई व्यापारियों ने अपराध जगत की शरण लेकर भी गुप्ता से अपनी रकम वापस पाने का प्रयास किया लेकिन हर बार वह चकमा देकर बच निकलता था।
    पुलिस को इस बार उसकी पास्को एक्ट की वारदात की सूचना मिली तो उसने पूरी छानबीन करके चालान प्रस्तुत किया है। गुप्ता ने अपने अदालती सहयोगियों के माध्यम से जमानत पाने का आवदेन प्रस्तुत किया है। हालांकि उसके विरुद्ध शिकायत करने वाली पुलिस और फरियादी ने अदालत से अनुरोध किया है कि अपराध की गंभीरता को देखते हुए उसका जमानत आवेदन खारिज करके उसे जेल भेजा जाए।
    उत्तर प्रदेश के लालगंज का रहने वाले गुप्ता का परिवार कथित तौर पर भाजपा से भी जुड़ा है और इलाके का कुख्यात माफिया है।नाबालिग लड़कियों से रेप के अपराधी प्यारे मियां को तो शिवराज सिंह चौहान की पुलिस ने जेल के सीखचों में पहुंचा दिया था लेकिन गुप्ता ने सरकार में अपनी जमावट करके कानूनी प्रक्रियाओं को कमजोर करवा लिया था। देखना है कि डॉ. मोहन यादव की पुलिस के सामने गुप्ता की चालबाजियां चल पाती हैं या नहीं। हालांकि गुप्ता कई बार अंडरवर्ल्ड की धमकियों को लेकर पुलिस संरक्षण हासिल करता रहा है।

  • पोस्टिंग बेचने वाले संजय चौधरी को बरी करने से खुली पोल

    पोस्टिंग बेचने वाले संजय चौधरी को बरी करने से खुली पोल


    भोपाल 08 मार्च(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)। भैरवगढ़ केन्द्रीय जेल की पूर्व अधीक्षक ऊषा राज से कथित तौर पर तीन करोड़ रुपए लेकर पोस्टिंग देने वाले पूर्व जेल डीजी संजय चौधरी को क्लीनचिट दिए जाने के बाद आईपीएस कैलाश मकवाना अब बुरी तरह उलझ गए हैं। लोकायुक्त संगठन ने संजय चौधरी के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज कर जांच फिर शुरु कर दी है लेकिन सीआर के नंबर बढ़वाने के फेर में कैलाश मकवाना की कथित ईमानदारी सवालों के घेरे में आ गई है। लोकायुक्त की जांच रिपोर्ट सामने आ जाने के बाद मकवाना की कथित तौर पर सुधार दी गई गोपनीय चरित्रावली के आदेश जारी करने को अब कोई अफसर राजी नहीं है।


    आईपीएस कैलाश मकवाना को पूरा भरोसा था कि वरिष्ठता क्रम में आगे होने की वजह से वे एक बार मध्यप्रदेश के पुलिस मुखिया बन जाएंगे लेकिन लोकायुक्त संगठन से हटाए जाने के बाद अब पूरी न्यायपालिका उन्हें सींखचों में धकेलने में जुट गई है। दरअसल शिवराज सिंह सरकार के कतिपय भ्रष्ट अफसरों की सलाह पर मकवाना को विशेष पुलिस स्थापना लोकायुक्त में भेजा गया था। इन भ्रष्ट अधिकारियों के मामले बंद करने की सुपारी लेकर गए मकवाना ने कार्यभार संभालते ही संगठन के रिकार्ड रूम की सफाई शुरु करवा दी। कहा गया कि बरसों पुराना कचरा पड़ा होने से पुलिस की कार्रवाई में व्यवधान होता है। उन्होंने कई लंबित प्रकरणों में भी खात्मा लगाना शुरु कर दिया । उन्हें उम्मीद थी कि यदि कोई शोरगुल नहीं हुआ तो धीरे धीरे फालतू प्रकरण बताकर कई भ्रष्ट अफसरों को भी बरी करवा लिया जाएगा।

    इस श्रंखला में मकवाना ने प्रेमवती खैरवार, डीएसपी श्रीनाथ सिंह बघेल, राकेश कुमार जैन, डीएसपी रामखिलावन शुक्ला, मोहित तिवारी, नरेश सिंह चौहान को क्लीनचिट देकर उनके प्रकरण बंद कर दिए। इन प्रकरणों में न तो प्रक्रिया का पालन किया गया, न जांच की गई और न ही लोकायुक्त संगठन के विधि सलाहकारों की टीप ली गई। लोकायुक्त से स्वीकृति का इंतजार भी नहीं किया गया। इस बात से संगठन में पदस्थ विधि अधिकारी(न्यायाधीश) चौंक गए। उनकी अनुशंसा पर लोकायुक्त जस्टिस एनके गुप्ता ने जो जांच कमेटी बिठाई उसने पाया कि सभी प्रकरणों को गैरकानूनी ढंग से बंद किया गया है।


    तभी उज्जैन की केन्द्रीय जेल की अधीक्षक ऊषा राज का घोटाला सामने आ गया। उनके संरक्षण में काम करने वाले जेल के सहायक लेखाधिकारी ने लगभग सौ कर्मचारियों के भविष्य निधि खातों से लगभग तेरह करोड़ से ज्यादा रुपया निकाल लिया। इसमें से कुछ रकम उन्होंने अपने खातों में डाली और कुछ रकम ऊषा राज को भेंट की। पुलिस जांच में पता चला कि इसी रकम का एक हिस्सा कथित तौर पर पूर्व डीजी संजय चौधरी को भी पोस्टिंग के एवज में पहुंचाया गया था। इधर जेल डीजी संजय चौधरी के खिलाफ चल रही लोकायुक्त जांच मकवाना ने उनकी बताई कहानी को सच मानकर बंद कर दी ।संजय चौधरी का कहना था कि उनके पास मौजूद आय अधिक संपत्ति उन्होंने घोड़ों की जगह खच्चर बेचकर नहीं कमाई है। उनकी स्कूल मास्टरनी सास ने अपनी करोड़ों रुपयों की चल संपत्ति और सोना अपनी बेटी के बच्चों को गिफ्ट के रूप में दिया है । सागर के एक स्कूल से रिटायर सास के पास इतनी दौलत कभी रही ही नही ये बात सभी जानते थे। इन दिनों इंदौर जेल में बंद ऊषा राज भी सागर की ही मूल निवासी रही है। जब उन्हें उज्जैन की केन्द्रीय जेल भैरवगढ़ में पोस्टिंग दी गई तो विभाग के कई अफसरों ने हो हल्ला भी मचाया था।


    अब लोकायुक्त संगठन की जांच कमेटी की अनुशंसा पर जो छानबीन शुरु हुई है उसमें संजय चौधरी तो झमेले में पड़े ही हैं साथ में कैलाश मकवाना भी उलझ गए हैं। खुद को कथित तौर पर बेगुनाह बताने के लिए मकवाना कह रहे हैं कि उनके पूर्व तीन डीजी संजय राणा, अनिल कुमार, और राजीव टंडन भी संजय चौधरी के प्रकरण को बंद करने की सिफारिश कर चुके थे पर केवल उनकी खात्मा रिपोर्ट को ही गलत ठहराया जा रहा है। दरअसल जांच कमेटी की निगाह में जो तथ्य आए थे उनके आधार पर ही फैसला लेने वाले मकवाना को दोषी पाया गया है। देखना है कि पुलिस मुखिया पद का ये खिलाड़ी कहीं खुद अपराधी न करार दिया जाए।

  • विक्टिम कार्ड खेलकर भी सीआर नहीं सुधरवा पाए मकवाना

    विक्टिम कार्ड खेलकर भी सीआर नहीं सुधरवा पाए मकवाना


    भोपाल, 07 मार्च(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)। मध्यप्रदेश के लोकायुक्त जस्टिस एन.के.गुप्ता के खिलाफ अनर्गल आरोप लगाकर खुद को ईमानदार दिखाने का जतन करने वाले आईपीएस कैलाश मकवाना की सीआर फिर खटाई में पड़ गई है। उन्हें लोकायुक्त संगठन से विदा करने वाली जांच रिपोर्ट की वजह से विभाग और शासन दोनों ने गोपनीय चरित्रावली के सुधार पर चुप्पी साध ली है। ऐसे में मकवाना की बिगड़ी सीआर सुधरना तो दूर बल्कि उनकी समूची प्रशासनिक दक्षता पर सवालिया निशान लग गए हैं। मुख्यमंत्री डॉ.मोहन यादव ने भले ही भोले भंडारी बनकर मकवाना की सीआर अपग्रेड कर दी थी लेकिन बताते हैं कि जांच रिपोर्ट की असलियत सामने आने के बाद उन्होंने भी इससे किनारा कर लिया है और अब तक उसका आदेश जारी नहीं हो पाया है। मकवाना की बात को सही मानकर जिन लोगों ने उनकी सीआर सही होने की खबर छापना शुरु कर दी थी वे अब अपना समाचार असत्य हो जाने से परेशान हैं।
    मकवाना को जब शिवराज सिंह चौहान की सरकार ने लोकायुक्त संगठन भेजा था तब कतिपय भ्रष्ट अफसरों के हरकारों ने ढोल पीटा था कि अब लोकायुक्त संगठन में बेईमानों को बचाना संभव नहीं होगा। उन्होंने चंद प्रकरणों का हवाला देकर जताने की कोशिश की थी कि मकवाना ईमानदार अधिकारी हैं इसलिए अब तक उन्हें फील्ड से दूर रखा जाता रहा है। पहली बार उन्हें बड़ी जिम्मेदारी दी जा रही है। मकवाना ने भी संगठन में जाते ही ताबड़तोड़ ढंग से आधे दर्जन अफसरों के विरुद्ध दर्ज प्रकरण बंद कर दिए और उन्हें दोषमुक्त करार दे दिया। इसके लिए उन्होंने न तो लोकायुक्त एनके गुप्ता से कोई राय मशविरा किया और न ही उनकी विधिवत अनुमति प्राप्त की।जबकि इस प्रक्रिया में कई विधिवेत्ता और जांच अधिकारी शामिल होते हैं जिनकी रायशुमारी और कानूनी सलाह के बाद ही किसी को दोषमुक्त करार दिया जाता है।
    लोकायुक्त संगठन के सूत्र बताते हैं कि जब मकवाना ने संगठन के कानून वेत्ताओं को खलनायक बताते हुए खुद को राबिनहुड की तरह पेश करना शुरु कर दिया तो वहां पदस्थ कई जजों के कान खड़े हो गए। उन्होंने इसकी शिकायत लोकायुक्त जस्टिस एन.के.गुप्ता से की।इस पर संगठन की ओर से एक जांच समिति नियुक्त की गई जिसने पाया कि मकवाना ने अपने अधिकारों से इतर जाकर इन प्रकरणों में खात्मा लगाया है। भ्रष्टाचार के तथ्यों को तोड़ मरोड़कर उन्होंने आरोपियों को बरी कर दिया। जब जांच समिति ने अपनी रिपोर्ट तैयार की तो इसका अवलोकन कानून वेत्ताओं से करवाया गया। इसके बाद पुर्नावलोकन भी कराया गया। जब सभी ने पाया कि भ्रष्ट अधिकारियों को गैरकानूनी ढंग से बरी किया गया है तो ये जांच रिपोर्ट लोकायुक्त जस्टिस एन.के.गुप्ता के पास पहुंची। यहां से इसे मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के संज्ञान में लाया गया। तब जाकर मात्र छह महीनों के भीतर मकवाना को विशेष पुलिस स्थापना लोकायुक्त संगठन से बाहर कर दिया गया। जिन प्रकरणों में मकवाना ने खात्मा लगवाया था उनके विरुद्ध दुबारा प्राथमिकी दर्ज करके जांच शुरु की गई।
    आईपीएस कैलाश मकवाना इससे बहुत क्षुब्ध हुए और उन्होंने विक्टिम कार्ड खेलना शुरु कर दिया। सार्वजनिक ट्वीट और परिजनों के ट्वीट के साथ उन्होंने अपने कई समर्थकों के सहारे मीडिया में हल्ला मचाना शुरु कर दिया ताकि उनके खिलाफ जांच रिपोर्ट के तथ्यों को अत्याचार करार दिया जा सके। कुछ सूत्रों का कहना है कि मकवाना ने विशेष पुलिस स्थापना में अपनी पोस्टिंग केवल इसलिए कराई थी ताकि वह शिवराज सरकार में आका बने बैठे कतिपय वरिष्ठ अधिकारियों के खिलाफ दर्ज प्रकरणों में खात्मा लगाकर उन्हें बचा सकें और पुरस्कार के रूप में खुद को पुलिस महानिदेशक के रूप में पदस्थ करवा सकें। वरिष्ठता क्रम में वे आगे जरूर हैं लेकिन उनकी गोपनीय चरित्रावली की वजह से वे दौड़ से बाहर हो रहे थे।
    उनके विक्टिम कार्ड का असर इतना तो जरूर पड़ा कि बाद में आई कमलनाथ सरकार ने उन्हें अपने लिए उपयोगी समझा और उन्हें फिर एक बार मैदानी नियुक्ति दे दी गई। इस बार कमलनाथ सरकार को भी चार महीनों में समझ में आ गया कि मकवाना की तोड़ फोड़ और व्यक्तिगत लाभ उठाने की प्रवृत्ति उसके लिए खतरनाक साबित हो रही है। इसे देखते हुए उन्हें एक बार फिर विभागीय कामकाज संभालने के लिए पुलिस हाऊसिंग कार्पोरेशन भेज दिया गया।
    पुलिस हाऊसिंग कार्पोरेशन में संविदा नियुक्त वाली एक इंजीनियर हेमा मीणा के पास जब करोड़ों रुपयों की जायदाद बरामद हुई तब एक बार फिर मकवाना सवालों के घेरे में आ गए. आईपीएस उपेन्द्र जैन के साथ उन पर भ्रष्टाचार के छींटे उड़े क्योंकि उनके अधीनस्थ कर्मचारी इतने लंबे समय तक भ्रष्टाचार करती रही और विभाग के प्रमुखों को कानों कान खबर भी न हो ऐसा तो संभव नहीं हो सकता था।
    आईपीएस अधिकारी कैलाश मकवाना के औंधे मुंह गिर पड़ने से पुलिस विभाग के कई अफसरों ने राहत की सांस ली है। पुलिस महानिदेशक पद के लिए दौड़ में शामिल इस विकेट के गिर जाने से शैलेष सिंह, अरविंद कुमार, सुधीर कुमार शाही जैसे कई अफसरों को अब अपनी राह आसान दिखने लगी है। केन्द्र सरकार ने ऐसी नियुक्तियों को लेकर एक साफ व्यवस्था बना रखी है कि जो आईएएस या आईपीएस अधिकारी लगातार दस सालों तक फील्ड में काम नहीं कर पाएं वे विभाग प्रमुख पद के लिए अयोग्य समझे जाते हैं। इस मापदंड पर मकवाना फिसड्डी साबित हो रहे हैं क्योंकि उन्हें अब तक किसी भी सरकार ने या अफसरों ने दस सालों तक फील्ड में सेवा करने का अवसर नहीं दिया है।

  • एक्सिस बैंक में बीमा की आड़ में ठगी का खेल

    एक्सिस बैंक में बीमा की आड़ में ठगी का खेल


    पचास लाख रुपए की एफडी करने के बजाए राशि को बीमा में लाक कर दिया


    भोपाल,19 फरवरी(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर) भारत के मुद्रा बाजार में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाने के लिए एक्सिस बैंक ने इन दिनों आम निवेशकों को लूटने का अभियान चला रखा है। अपना संचालन खर्च घटाने के लिए बैंक ने ऐसे नए युवाओं को फील्ड में उतार दिया है जो निवेशकों के भरोसे से खिलवाड़ करके उन्हें ठगने का काम कर रहे हैं। हाल ही में बैंक की बिलासपुर शाखा में ऐॅसी ही ठगी की शिकार प्रोफेसर ने पुलिस का दरवाजा खटखटाया है। उसके साथ पचास लाख रुपए की धोखाघड़ी की गई है।


    सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार रसायन शास्त्र की एक प्राध्यापिका ने अपनी बेटी का भविष्य सुरक्षित करने के लिए एक्सिस बैंक बिलासपुर में राजकिशोर नगर शाखा में पचास लाख रुपए जमा किए थे। बैंक के अधिकारियों का कहना था कि शाखा के आला अधिकारी इस राशि को कहीं निवेश कराने के लिए दबाव बना रहे हैं। इस पर प्राध्यापिका ने एफडी कराने के लिए सहमति दे दी। इस पर बैंक मैनेजर चेतन श्रीवास ने अपने कर्मचारी रोहिणी वल्लभ साहू को भेजकर प्रोफेसर से कहलवाया कि वे बैंक का एप डाऊनलोड करवा लें तो ओटीपी के माध्यम से एफडी की प्रक्रिया पूरी की जा सकेगी। बैंक कर्मचारी ने प्रोफेसर का मोबाईल लिया और कहा कि वह इस पर बैंक का एप डाऊनलोड कर रहा है। इस बीच उसने मैक्स लाईफ की पालिसी की सहमति के लिए ओटीपी बुला लिया और ओके करके मोबाईल वापस प्रोफेसर को लौटा दिया। प्रोफेसर को लगा कि उनकी रकम बैंक के कर्मचारी ने एफडी में लगा दी है।उन्हों इस बीमे के बारे में कोई जानकारी नहीं दी गई।


    कुछ हफ्तों बाद जब प्रोफेसर के घर के पते पर पालिसी डिलीवर हुई तो उन्हें पता चला कि उनकी रकम बैंक ने बीमा कंपनी में निवेश कर दी है। उन्होंने पता किया तो बैंक के कर्मचारी ने बताया कि मैक्स लाईफ इंश्योरेंस एक तरह से एक्सिस बैंक की ही सहयोगी फर्म है। उनका पैसा भले ही बीमे में रखा है लेकिन उन्हें ब्याज भी मिलेगा और जब चाहेंगी रकम मात्र पाच हजार रुपए का शुल्क चुकाकर वापस मिल जाएगी। इसके बाजवूद प्रोफेसर बैंक गई और कहा कि उन्होंने रकम एक्सिस बैंक की एफडी में निवेश की है मैक्स लाईफ में नहीं। इस पर बैंक मैनेजर ने कहा कि दोनों ही सहयोगी कंपनियां हैं इसलिए उनकी रकम पर एफडी की ही तरह ब्याज मिलता रहेगा।


    प्रोफेसर ने बैंक मैनेजर से कहा कि मुझे अपनी रकम बीमा में निवेश नहीं करनी, मैं तो अपनी आय पर पूरा कर देती हूं मुझे किसी प्रकार की छूट नहीं चाहिए। मैं तो ये रकम अपनी बेटी की शादी के लिए बचाकर रखना चाहती हूं। बैंक के अधिकारियों ने उन्हें कहा कि उन्हें अपना टारगेट पूरा करना पड़ता है। इसलिए हम खाते को बीमा राशि दिखाकर वापस ले लेते हैं। अब जबकि प्रोफेसर को अपनी बेटी की शादी की तैयारी के लिए रकम की जरूरत पड़ी तो उन्होंने बैंक से संपर्क किया। उन्हें बताया गया कि उनकी रकम लाक हो गई है और समय अवधि पूरा होने पर ही वापस मिलेगी। इस पर प्रोफेसर हतप्रभ रह गईं और उनकी मनःस्थिति गड़बड़ा गई। उन्हें लगा कि अब बेटी की पढ़ाई, रोजगार और शादी के लिए उन्हें कर्ज लेना पड़ेगा।


    प्रोफेसर ने अपने साथ हुई इस धोखाघड़ी की शिकायत बैंक मैनेजर के अलावा पुलिस महानिरीक्षक बिलासपुर को भी की है। उन्होने पुलिस से निवेदन किया है कि मुझे अंधेरे में रखकर बैंक के कर्मचारियों ने धोखाघड़ी की है। लोगों ने बताया कि इस तरह की धोखाघड़ी बैंक के लोग अपने सैकड़ों ग्राहकों से कर चुके हैं । पुलिस ने शिकायत मिलने के बाद जांच शुरु कर दी है। बैंक के अधिकारी अब कह रहे हैं कि वे बीमा कंपनी से बात कर रहे हैं ताकि प्रोफेसर की रकम वापस दिला सकें। बीमा कंपनी का कहना है कि उन्होंने बीमा राशि को बाजार में निवेश कर दिया है। इस संबंध में वह बैंक को उसका कमीशन भी दे चुके हैं,इसलिए पूरी राशि वापस करने के लिए हेड आफिस से अनुमति लेनी होगी।


    मैक्स लाईफ बीमा कंपनी के भोपाल रीजन के मैनेजर ललित कुदेसिया का कहना है कि ये मामला एक्सिस बैंक की शाखा में घटित हुआ है। हमारी कंपनी ने इसमें कोई कार्रवाई नहीं की है। बैंक ने कहा तो हमने बीमा कर दिया। इस संबंध में किसी भी कार्रवाई के लिए आपको बैंक से ही संपर्क करना चाहिए। इधर एक्सिस बैंक भोपाल के मैनेजर विपिन तिवारी का कहना है कि बैंक की बिलासपुर शाखा ने ये बीमा किया है। उसे एफडी करना थी या बीमा इस संबंध में केवल वहीं के मैनेजर कुछ बता सकते हैं। आपने हमें सूचना दी है तो हम अपने मुंबई मुख्यालय को सूचना भेज देंगे। जब उनसे पूछा गया कि एक्सिस बैंक में इस तरह की धोखाघड़ी क्यों की जा रही है तो उन्होंने साफ इंकार करते हुए कहा कि हमारी ब्रांच में इस तरह की धोखाघड़ी नहीं होती। जब उनसे इस ब्रांच में इसी तरह के एक प्रकरण के बारे में पूछा गया तो वे बगलें झांकने लगे।दरअसल एक्सिस बैंक प्रबंधन ने ही अपने कर्मचारियों और अधिकारियों को बीमा बेचने का टारगेट दे रखा है जिसे पूरा करने के लिए वे ग्राहकों को गुमराह करके उनकी पूंजी बीमा योजना में जमा करवा देते हैं।

    सूत्र बताते हैं कि एक्सिस बैंक अपनी जमा राशियों को टैक्स से बचाने के लिए और आय न दिखाने के लिए मैक्स लाईफ के अलावा अन्य बीमा कंपनियों में भी निवेश दिखाता है। इससे उसे टैक्स में छूट भी मिल जाती है और कम ब्याज पर रकम भी मिल जाती है।सेबी ने हालांकि इस तरह की धोखाघड़ी रोकने के लिए सख्त दिशा निर्देश जारी किए हैं। इस तरह की धोखाघड़ी को संज्ञान में लेते हुए रिजर्व बैंक ने भी गाईडलाईन जारी की हैं। जानकारी के अभाव में आम उपभोक्ता इस तरह की घोखाघड़ी के शिकार हो रहे हैं। यह प्रकरण सेबी और बैंकिंग लोकपाल की निगाह में भी लाया जा रहा है। देखना है कि धोखाघड़ी के इस साफ प्रकरण में पुलिस क्या कार्रवाई करती है और पीड़िता को न्याय कैसे दिलाएगी।

  • रमनवीर अरोरा की हवेली पर छापे में गुर्गा गिरफ्तार

    रमनवीर अरोरा की हवेली पर छापे में गुर्गा गिरफ्तार


    भोपाल, 19 फरवरी ( प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)। मध्यप्रदेश पुलिस ने फर्जी कंपनियां बनाकर राज्य के खजाने से ठगी करने वाले गिरोह के सदस्यों की धरपकड़ शुरु कर दी है। ऐसे ही एक गिरोह के सरगना की कारगुजारियां जब पुलिस के सामने उजागर हो गईं तो पुलिस ने कुख्यात ठग और रमनवीर इंपोरियम के कथित संचालक रमनवीर अरोरा की हवेली पर छापा मारा जहां उसका गुर्गा पुलिस के हत्थे चढ़ गया।जिसने अपने मालिक के कहने पर अपराध करना स्वीकार कर लिया है। मुख्य आरोपी अभी भी फरार बताया जा रहा है।


    सैडमेप भोपाल की एक्जीक्यूटिव डायरेक्टर महिला अधिकारी ने पुलिस थाना क्राईम ब्रांच में शिकायत की थी कि किसी व्यक्ति ने उनके और राज्य शासन के वरिष्ठ अधिकारी के बीच फर्जी बातचीत का कथित स्क्रीन शाट वायरल किया था जिसमें आपत्तिजनक भाषा का प्रयोग करके उन्हें बदनाम करने की कोशिश की गई थी. पुलिस ने इस शिकायत पर कार्रवाई करते हुए ऐसी चैट बरामद की और पाया कि वरिष्ठ आईएएस अधिकारी, सेक्रेट्री एवं कमिश्नर ,एमएसएमई सेक्रेटरी , स्पोर्ट्र्स सेक्रेटरी आदि के बीच असत्य, मनगढ़ंत, और काल्पनिक आपत्तिजनक चैट बनाकर उसका स्क्रीन शाट सोशल मीडिया पर वायरल किया था। इस चैट का मकसद इन अधिकारियों को बदनाम करना था। ये सब साजिशें केवल इसलिए की जा रहीं थीं क्योंकि सैडमेप से सिक्यूरिटी के नाम पर लूट कर रहे फर्जी ठेकों को निरस्त कर दिया गया था। फर्जी तरीकों से नौकरियां करने वाले कई निठल्ले अधिकारियों को भी निकाल बाहर किया गया था।


    पुलिस ने पाया कि मुख्य अभियुक्त ब्लैक लिस्टेड रतन इंपोरियम का रमनवीर अरोरा इस षड़यंत्र का मुख्य साजिश कर्ता है। वह एक समाचार पत्र प्रकाशित करता है और पुलिस पर रौब जमाकर बच निकलता रहा है। इसने टाईम्स आफ इंडिया समूहब का एक पुरस्कार भी खरीदा था जिसे दिखाकर वह खुद को बड़ा समाजसेवी बताता रहता है। पुलिस आयुक्त नगरीय पुलिस भोपाल ने अतिरिक्त पुलिस आयुक्त अपराध मुख्यालय, और पुलिस उपायुक्त अपराध को अज्ञात आरोपी को खोजकर गिरफ्तार करने और वैधानिक कार्रवाई करने के आदेश दिये थे।


    निर्देश प्राप्त होने पर पुलिस उपायुक्त अपराध द्वारा अतिरिक्त पुलिस उपायुक्त अपराध के नेतृत्व एवं सहायक पुलिस आयुक्त अपराध के मार्ग दर्शन में थाना क्राइम ब्रांच की टीम गठित कर तत्काल सक्रिय किया गया जिनके द्वारा आधुनिक वैज्ञानिक तकनीकि साधनो/संसाधनों के आधार पर पता लगाया कि इंदौर के रहने वाले जावेद मोहम्मद पिता शफी मोहम्मद खान ने अपने सेठ रमनवीर सिंह अरोरा के कहने पर उक्त फर्जी कूटरचित स्क्रीन शॉट, एप के माध्यम से बनाकर सोशल मीडिया पर वायरल किया था जिसे क्राइम ब्रांच भोपाल की टीम द्वारा कडी मशक्कत के बाद गिरफ्तार करने में सफलता प्राप्त की है,मामले में अनुसंधान एवं फरार मुख्य आरोपी रमनवीर सिंह अरोरा की सरगर्मी से तलाश की जा रही है।राजधानी से एक दोपहर में प्रकाशित समाचारपत्र का मालिक इस गिरोह का संरक्षक बताया जा रहा है।


    पुलिस ने बताया कि उसने जावेद मोहम्मद पिता सफी मोहम्मद खान उम्र 35 साल निवासी म.न 17 राजा मार्ग,धार हाल पता, म.न 249 सिल्वर नगर,मोहम्मद इसरार का मकान, गली नं 2 थाना खजराना इंदौर कक्षा -5 वीं अप.क्र.28/24 धारा 469,500 भादवि इजाफा धारा 201,204,471,120 बी भादवि के अंतर्गत गिरफ्तार किया है। वह अनपढ़ महिलाओं को कुछ पैसे देकर उनके नाम पर सिम खरीद लेता था और उसी के माध्यम से दुष्प्रचार करता था।

  • सरकारी खजाने से 162 करोड़ चुराने वाले धराए

    सरकारी खजाने से 162 करोड़ चुराने वाले धराए

    भोपाल,16 जनवरी(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)। वित्त विभाग के आईएफएमआईएस (IFMIS) साफ्टवेयर की मदद से शासन ने फर्जी भुगतानों पर कार्रवाई करते हुए करीबन 162 करोड़ रुपयों का घोटाला उजागर किया है। अब तक इन मामलों पर आडिटर्स ही निगाह रखते थे। ये घोटाला आडिटर्स की ओके रिपोर्ट के बाद निगाह में आया है। साफ्टवेयर के माध्यम से मध्य प्रदेश शासन के लगभग 5600 आहरण एवं संवितरण अधिकारियों के कार्यालय के समस्त देयकों के भुगतान किये जाते हैं। इसमें मध्य प्रदेश के 10 लाख से अधिक कर्मचारियों के वेतन एवं विभिन्न स्वत्वों के भुगतान, कार्यालयीन व्यय, अनुदान, स्कालरशिप आदि के भुगतान सम्मिलित हैं।

    आयुक्त कोष एवं लेखा ज्ञानेश्वर पाटिल की सक्रियता से ये मामला उजागर हुआ है। विगत माहों में कुछ कार्यालयों में फ्राड भुगतान के गंभीर प्रकरण आयुक्त, कोष एवं लेखा कार्यालय के संज्ञान में आये थे। अधिकांश स्थानों से यह जानकारी प्राप्त हुई थी कि DDO के द्वारा Login Password अपने अधीनस्थ बाबू को Share किये जा चुके हैं एवं DDO कार्यालय में Bill Creator एवं Approver का कार्य बाबू के द्वारा किया जाता है। इसी वजह से अधीनस्थ कर्मचारी द्वारा स्वयं के या परिवार के खाते में राशि जमा कर गबन किये गये, जिसकी सूचना सिवनी एवं अन्य जिले से प्राप्त हुई।

    विगत वर्षों में करोड़ों ट्रांजैक्‍शन्‍स में मानवीय हस्तक्षेप से इस तरह के गबन को पकड़ने में कठिनाई थी। अतः यह निर्णय लिया गया कि IFMIS में इस समस्त जानकारी की उपलब्धता को देखते हुए Data Analysis कर यह जानकारी प्राप्त की जावे कि राशि कौन-से खाते में जमा की जा रही है। इसी Data Analysis हेतु एक State Financial Intelligence Cell (SFIC) का गठन किया गया। SFIC द्वारा IFMIS के गत 5 वित्त वर्षों के 85 लाख देयकों से हुए लगभग 15 करोड़ ट्रांजैक्शन का विश्लेषण करने का कार्य प्रारंभ किया गया। अनियमितताओं की संभावनाओं वाले क्षेत्रों को चिह्नित किया गया एवं डाटा के विश्लेषण हेतु अनेक क्वेरीज बनाई गईं।

    Data Analysis के माध्यम से पहला गबन कार्यालय कलेक्टर, इंदौर में पकड़ा गया। इसी Data Analysis को और Strengthen करते हुए आज दिनांक तक लगभग 162 करोड़ रुपये के गबन पकड़े गये हैं, 170 संदिग्धों पर FIR की गयी है एवं 15 करोड़ रुपये की वसूली की गई है। अनेक प्रकरणों में उत्‍तरदायी अधिकारियों एवं कर्मचारियों पर विभागीय जांच संस्थित की गई हैं।

    निर्धारित प्रक्रिया अनुसार SFIC द्वारा संदिग्‍ध भुगतानों को चिह्नांकित किया जाता है, एवं इनकी विस्तृत जाँच के लिये संबंधित संभागीय संयुक्त संचालक, कोष एवं लेखा को जाँच करने के लिये आदेशित किया जाता है। अनियमितताओं, अधिक भुगतान तथा गबन की पुष्टि होने पर जिला कलेक्टर के संज्ञान में लाते हुए तुरंत वैधानिक कार्यवाही सुनिश्चित की जाती है। इस प्रक्रिया में प्राप्‍त प्रत्येक जाँच निष्कर्ष के आधार पर IFMIS सिस्टम में त्वरित गति से सुधार किये जा रहे हैं।

    आज दिनांक तक SFIC द्वारा निम्नलिखित अधिक भुगतान एवं गबन का पर्दाफाश किया गया है :-

    क्र. संभाग का नाम कोषालय का नाम कार्यालय का नाम हानि/गबन की राशि वसूली की गई राशि क्‍या FIR की गई है? FIR में आरोपियों की संख्‍या
    1 उज्‍जैन उज्‍जैन केंद्रीय जेल, भैरूगढ़, जिला उज्‍जैन 135048325 0 YES 10
    पुन: जांच —-”—– 66199128 0
    2 उज्‍जैन देवास शासकीय महाविद्यालय बागली 37239107 0 YES 8
    3 उज्‍जैन देवास शासकीय महाविद्यालय हाटपिपल्‍या 785607 0 YES 2
    4 उज्‍जैन आगर मालवा DD Veterinary Services Agar Malwa 5477460 58514 Yes 9
    5 उज्‍जैन आगर मालवा उप संचालक पशु चिकित्‍सा गो अभ्‍यारण (सुसनेर) Agar Malwa 196942 0 Yes 6
    6 उज्‍जैन शाजापुर DD Veterinary Services शाजापुर 416244 0 YES 3
    7 उज्‍जैन शाजापुर BEO शाजापुर 936692 971918 No 0
    8 उज्‍जैन शाजापुर BEO Kalapipal 1011726 1336459 NO 0
    9 इन्‍दौर इन्‍दौर कलेक्‍टर इन्‍दौर 92431697 17036025 Yes 54
    10 इन्‍दौर खरगोन BEO, कसरावद 20400000 13800000 YES 1
    11 इन्‍दौर खरगोन EE, नर्मदा घाटी विकास प्राधिकरण डिवीजन क्र 21 सनावद, खरगौन 28310524 5200000 No 0
    12 इन्‍दौर खण्‍डवा DFO Khandwa (G) 1232577 1232577 YES 1
    13 इन्‍दौर धार SAF, धार 4285167 0 YES 1
    14 इन्‍दौर धार BEO Nisarpur 11823031 11823031 YES 7
    15 इन्‍दौर अलीराजपुर BEO कट्ठीवाड़ा 204712747 6886843 Yes 6
    16 इन्‍दौर इन्‍दौर DSP, Police Training School, Indore 10431268 0 No 0
    17 सागर सागर EE, WR Div 2 केसली 6010405 4614881 No 0
    18 सागर सागर SE PWD Sagar 2940379 700000 No 0
    19 रीवा अनूपपुर ASCO, पुष्‍पराजगढ़ 13786154 1000000 Yes 7
    20 रीवा सीधी BEO SIDHI 375396 0 NO 0
    21 रीवा सीधी PRINCIPAL G.H.S.S 2734323 0 NO 0
    22 रीवा सीधी EXECUTIV ENGINEER P.H.E DIVN 1576779 0 NO 0
    23 भोपाल भोपाल BEO, फंदा 1447307 581630 NO 0
    24 भोपाल नर्मदापुरम तहसीलदार, डोलारिया 22333863 1500000 YES 2
    25 भोपाल नर्मदापुरम SP नर्मदापुरम 2112194 2112194 YES 1
    26 भोपाल वल्लभ भवन Conservator of Forest, Social Forestry, Bhopal 1632000 0 YES 1
    27 भोपाल रायसेन CMHO, रायसेन 19232727 12400583 Yes 12
    28 जबलपुर छिंदवाड़ा BEO, छिंदवाड़ा 6371516 4132214 YES 8
    29 जबलपुर छिंदवाड़ा BEO, मोहखेड 1997739 987037 No 0
    30 जबलपुर छिंदवाड़ा BEO Tamia 4355307 0 Yes 5
    31 जबलपुर बालाघाट BEO Balaghat 8644323 8644323 Yes 15
    32 ग्‍वालियर भिण्‍ड BEO भिण्‍ड 20626794 13337080 Yes 6
    33 ग्‍वालियर भिण्‍ड ASCO, Bhind 5833475 1025967 No 1
    34 ग्‍वालियर भिण्‍ड BEO Mehgaon 7351476 12160 Yes 1
    35 ग्‍वालियर भिण्‍ड BEO Lahar 882800 917467 No 0
    36 ग्‍वालियर दतिया BEO Bhander 23589509 0 No 0
    37 ग्‍वालियर शिवपुरी तहसीलदार, पोहरी 6266660 1222620 Yes 1
    38 ग्‍वालियर शिवपुरी SP Shivpuri 934500 443275 YES 1
    39 ग्‍वालियर ग्‍वालियर EE, PHE, Section-1 Gwalior 812776308 26380753 Yes 1
    40 ग्‍वालियर गुना BEO Chachoda 14342224 8204249 No 0
    41 ग्‍वालियर गुना BEO GUNA
    BEO BAMORI
    Joint Enquiry 14796896 7734410 No 0
    42 ग्‍वालियर गुना 0 0 No 0
    43 ग्‍वालियर मुरैना BEO PHARGHAR 522416 522416 No 0
    Total 1624411712 154818626 170
    नोट – हानि/गबन की राशि प्रारंभिक अनुमान हैं, जिनमें वृद्धि या कमी हो सकती है।

    कोष एवं लेखा द्वारा मार्च 2023 में केंद्रीय जेल, भेरूगढ़ जिला उज्जैन में कर्मचारियों की विभागीय भविष्य निधि के भुगतानों में कार्यालय के विभिन्न कर्मचारियों के विभागीय भविष्य निधि खाते में से राशि निकालकर श्री रिपुदमन सिंह रघुवंशी, प्रहरी, श्री शैलेन्द्र सिंह सिकरवार, प्रहरी एवं श्री सोनू मालवीय के खातों में भुगतान को चिह्नित किया गया। प्रकरण का परीक्षण होने पर इस कार्यालय में इसके अलावा गृह भाड़ा भत्ता, वर्दी धुलाई भत्ता में श्री रिपुदमन सिंह रघुवंशी के वेतन में विभिन्न माहों में लाखों रुपये के भुगतान दर्शित हुए। समस्त अनियमितताओं को शामिल करते हुए इस जेल कार्यालय में लगभग 20 करोड़ का गबन प्रकाश में आया है। उक्त तीनों आरोपियों के विरुद्ध FIR दर्ज की गई है।
    
    इस प्रकरण में कर्मचारियों के बैंक खाता क्रमांक परिवर्तन के लिये आहरण अधिकारियों को दिये गये अधिकारों का व्यापक दुरुपयोग दर्शित हुआ, जिसके द्वारा कर्मचारियों के खाता क्रमांकों में बार-बार परिवर्तन कर उनके विभागीय भविष्य निधि खातों से राशि का आहरण किया गया। साथ ही विभागीय भविष्य निधि खातों के बैलेंस में परिवर्तन किया जाकर अधिक राशि का आहरण किया जाना दर्शित हुआ। आयुक्त कोष एवं लेखा द्वारा IFMIS में तुरंत प्रक्रिया में परिवर्तन किया गया एवं कर्मचारियों के बैंक खाते में परिवर्तन एवं विभागीय भविष्य निधि के बैलेंस में परिवर्तन अब कोषालय अधिकारी के अनुमोदन उपरांत ही संभव है। गृह भाड़ा भत्ता एवं वर्दी धुलाई भत्तों के साथ वेतन के अन्य भत्तों में अधिकतम संभव राशि की सीमा लगाई गई है।
    
    मार्च 2023 में ही आयुक्त कोष एवं लेखा के जिला कोषालय इंदौर के निरीक्षण के दौरान कलेक्ट्रेट कार्यालय इंदौर में लगभग 9 करोड़ रुपये का गबन प्रकाश में आया। मुख्यतः असफल भुगतानों एवं कार्यालयीन व्यय के देयकों को श्री मिलाप सिंह चौहान, सहायक वर्ग 3 के द्वारा स्वयं के एवं पत्नी के खाते में एवं अन्य मित्रों के खाते में राशि का अवैध ट्रांसफर किया जाना पाया गया। प्रकरण में 54 व्यक्तियों पर FIR की जा चुकी है। यह दर्शित हुआ कि असफल भुगतान में दूसरे कार्यालयों के चालान से भी भुगतान किया गया है। आयुक्त कोष एवं लेखा ने इस संबंध में पूर्व से ही प्रक्रिया में परिवर्तन किया गया था एवं ई-कुबेर से असफल भुगतान में मैन्युअल प्रक्रिया के स्थान पर आनलाइन प्रक्रिया बनाई गई है, जिसमें संबंधित कार्यालय को आटोमेटिकली असफल भुगतान व्यक्ति या संस्था के नाम सहित दर्शित होते हैं।
    
    अप्रैल 2023 में देवास जिले के शासकीय महाविद्यालय, बागली एवं शासकीय महाविद्यालय हाटपिपल्या में 3.8 करोड़ का गबन प्रकाश में आया। श्री विजय शंकर त्रिपाठी, सहायक वर्ग 3 एवं श्री रोहित दुबे, सहायक वर्ग 3 के द्वारा कर्मचारियों के एरियर एवं छात्रों की स्कालरशिप की राशि को अपने खातों में ट्रांसफर किया गया। स्वीकृति के रूप में खाली कागज की इमेज साफ्टवेयर में संलग्न होने पर भी देयक उपकोषालय बागली से अनुमोदित होने से उपकोषालय के कर्मचारी श्री हरी सिंह चौहान को भी निलंबित किया गया है। इस प्रकरण में FIR दर्ज की गई है एवं अन्य संदिग्धों के नाम जोड़े जाने के लिये प्रकरण पुलिस विवेचना में है।
    
    इन सभी प्रकरणों में अधिकारियों के द्वारा पासवर्ड शेयर करना एवं भुगतानों की मानीटरिंग में लापरवाही प्रकाश में आयी है। इसे रोकने के लिये ई-साइन को देयक को एप्रूव करने के लिये अनिवार्य किया गया है। आधार आधारित भुगतान प्रणाली की शुरुआत की गई है, ताकि वास्तविक भुगतानप्राप्तकर्ता की पहचान सुनिश्चित की जा सके।
    
    इन समस्त प्रकरणों के विश्लेषण पर यह भी दर्शित हुआ कि आहरण एवं संवितरण अधिकारियों को कोषालय में न आना पड़े, इसके लिये उनके कार्यालय के कर्मचारियों के बैंक खाता क्रमांक का सुधार करना, मोबाइल क्रमांक सुधारना, ई-मेल परिवर्तित करना, विभागीय भविष्य निधि के बैलेंस को अपडेट करना आदि की सुविधायें प्रदान की गई। आहरण एवं संवितरण अधिकारी द्वारा पासवर्ड एवं डिजिटल हस्ताक्षरों के डिटेल्स अपने अधीनस्थ कर्मचारी को विश्वास कर शेयर करने से दुरुपयोग के प्रकरण सामने आये हैं। DDO द्वारा सतर्कता दिखाते तो गबन की स्थिति निर्मित नहीं होती। अब बैंक खाता विवरण सुधार एवं विभागीय भविष्य निधि के बैलेंस के सुधार तो कोषालय अधिकारी से किया जाना सुनिश्चित किया ही गया है, साथ ही मोबाइल क्रमांक के अपडेशन की मिशन मोड में कार्यवाही जारी है, जिसके पूर्ण होने के उपरांत मोबाइल नंबर सुधारने का उत्तरदायित्व भी कोषालय अधिकारी को प्रदान किये जावेंगे।
    
    वेतन निर्धारण में सेवा-पुस्तिका को स्कैन कर IFMIS में अपलोड करने एवं उसके आधार पर वेतन निर्धारण किया जावेगा। इससे सेवा-पुस्तिका के कोष एवं लेखा कार्यालयों में नहीं भेजने या बाद में एंट्री को अनुचित रूप से सुधारने की वृत्ति को नियंत्रित किया गया है।
  • चीनी साईबर ठगों के गिरोह का भांडा फूटा

    चीनी साईबर ठगों के गिरोह का भांडा फूटा


    साईबर अपराधियों को बैंक खाते किराए पर देने वाले भी जेल जाएंगे

    भोपाल,10 जनवरी(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)। भोपाल पुलिस ने चीन में बैठे ठगों के एक माड्यूल का नेटवर्क पकड़ने में सफलता पाई है। इस नेटवर्क से जुड़े अपराधी यहां से ठगी करके जुटाई रकम को क्रिप्टो करंसी में बदलकर चीन में बैठे अपराधियों तक पहुंचा देते हैं। पुलिस ने एक फरियादी से 90 लाख रुपए की ठगी करने वाले आरोपियों को गिरफ्तार करने में भी सफलता पाई है।अपराधियों के इस नेटवर्क में सीमा पार बैठे षड़यंत्रकारियों पर भी नजर ऱखी जा रही है।


    भोपाल पुलिस के अतिरिक्त पुलिस उपायुक्त जोन-1 नगरीय पुलिस श्रुतकीर्ति सोमवंशी ने कंट्रोल रूम में आयोजित पत्रकार वार्ता में बताया कि चायनीज माड्यूल के इस नेटवर्क की कई आईडी हमने पहचान लीं हैं। फरियादी ने रकम जिन खातों में जमा कराई थी उनकी भी पहचान हो गई है। अंतिम कडी़ के रूप में चीनी भाषा और चीनी आईपी एड्रेस से जुड़े अपराधियों को भी हमने पहचान लिया है। अंतर्राष्ट्रीय अपराधी गिरोह के नेटवर्क पर निगरानी रखने वाला तंत्र भी सक्रिय हो गया है। पहली बार हमने किराए पर खाता देने वाले आम नागरिकों को भी अपराध की कड़ी में हिस्सेदार बनाया है। साईबर पुलिस की अपील है कि लोग अनजान लोगों को थोड़े से पैसों के लालच में अपने बैंक खातों का इस्तेमाल करने की इजाजत न दें।


    अतिरिक्त पुलिस उपायुक्त ने आईसीआई सीआई बैंक में नकली सोना गिरवी रखने वाले गिरोह का भी पर्दाफाश किया है।इसमें बैंक के कई अधिकारियों और सोना परखने वाले जौहरियों को भी गिरफ्तार किया गया है।

  • अपराध के आंकड़ों में पुलिस को मिली शाबासी

    अपराध के आंकड़ों में पुलिस को मिली शाबासी

    भोपाल, 04 दिसम्बर(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)। राष्ट्रीय अपराध अभिलेख ब्यूरो, नई दिल्ली ने देशभर के 2022 के अपराध के आंकड़े जारी किए हैं। जिनके अनुसार मध्य प्रदेश में पिछले वर्षों की तुलना में प्रदेश में हत्या, हत्या के प्रयास, लूट, गृहभेदन जैसे गंभीर अपराधों में उल्लेखनीय कमी आई है। वहीं कुल अपराध में 1.80 प्रतिशत की कमी आई है ।


    वर्ष 2021 की तुलना में वर्ष 2022 में कुल भादवि अपराधों में 1.80 प्रतिशत की कमी
    राष्ट्रीय अपराध अभिलेख द्वारा वर्ष 2022 के प्रकाशित आंकड़ों के अनुसार मप्र में वर्ष 2021 की तुलना में आईपीसी के अपराध घटे हैं। जहां वर्ष 2021 में प्रदेश में कुल 304066 अपराध घटित हुए थे, वहीं वर्ष 2022 में अपराध घटकर मात्र 298578 अपराध दर्ज किए गए। यानि वर्ष 2021 की तुलना में वर्ष 2022 में अपराधों में 1.80 प्रतिशत की कमी आई है। वर्ष 2021 की तुलना में वर्ष 2022 में जहां के मामलों में हत्या में 2.75 प्रतिशत की, हत्या के प्रयास में 3.19 प्रतिशत, डकैती में 20.24, लूट के मामलों में 5.41, गृह भेदन के मामलों में 2.46 और भारतीय दंड विधान के तहत आने वाले अन्य अपराधों में 1.42 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई हैं।


    महिलाओं के प्रति अपराध वृद्धि दर घटकर एक तिहाई
    मध्य प्रदेश में महिलाओं के प्रति होने वाले अपराधों की वृद्धि दर वर्ष 2020-21 में जहां 19.63 प्रतिशत थी, जो वर्ष 2021-22 में घटकर लगभग एक तिहाई यानी मात्र 6.82 प्रतिशत ही रह गई। वर्ष 2022 के प्रथम छ: माह में जहां 4160 दुष्कर्म के मामले सामने आए थे, वहीं 2023 में जनवरी से जून तक 17.07 प्रतिशत कमी के साथ 3450 मामले दर्ज किए गए हैं। इसी प्रकार पॉक्सो एक्ट (POCSO Act) के अंतर्गत घटित अपराधों में 1.22 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई है। मध्य प्रदेश पुलिस द्वारा महिलाओं को समय पर सहायता उपलब्ध करवाने और उन्हें सुरक्षा प्रदान करने के उद्देश्य से जहां सभी थानों में ऊर्जा महिला हेल्प डेस्क बनाई गई है, वहीं आशा, मुस्कान और अभिमन्यु जैसे विशेष अभियान भी संचालित किए जा रहे हैं।


    अनुसूचित जाति के प्रति अपराध वृद्धि दर घटकर एक चाैथाई रही
    अनुसूचित जाति के प्रति प्रदेश में हुए अपराधों की वृद्धि दर में उल्लेखनीय कमी दर्ज की गई। जहां 2019-20 में अनुसूचित जाति के प्रति अपराध वृद्धि दर 30 प्रतिशत थी, वहीं वर्ष 2021-22 में यह घटकर एक चौथाई यानी मात्र 7.19 प्रतिशत रह गई । इसी प्रकार वर्ष 2022 के प्रथम छ: माह से तुलना की जाए तो वर्ष 2023 में प्रथम छ: माह में प्रदेश में अनुसूचित जाति (एससी) के विरुद्ध होने वाले अपराधों में 5.29 प्रतिशत की कमी आई है। वर्ष 2022 के प्रथम प्रथम छ: माह में अनुसूचित जाति के विरुद्ध 2213 अपराध घटित हुए जबकि 2023 के प्रथम प्रथम छ: माह में 2096 अपराध घटित हुए हैं। मध्य प्रदेश में वर्ष 2022 में हॉट स्पॉट की संख्या 906 थी, जो वर्ष 2023 में 566 रह गई है। यानी इनमें 37 प्रतिशत की कमी आई है। इसी प्रकार हॉट स्पॉट क्षेत्रों में कुल घटित औसत मासिक अपराध वर्ष 2021 में 96 थे, जो वर्ष 2023 में घटकर 65 रह गए हैं, यानि इनमें 31 प्रतिशत की कमी आई है।


    अनुसूचित जनजाति के प्रति अपराध वृद्धि दर 24 प्रतिशत से घटकर 13 प्रतिशत हुई
    अनुसूचित जाति के विरुद्ध हुए अपराधों की वृद्धि दर के पिछले तीन वर्षों के आंकड़ों पर गौर करें तो निरंतर अपराधों में कमी दर्ज की गई। जहां वर्ष 2019-20 में अनुसूचित जाति के प्रति हुए अपराधों की वृद्धि दर 24 प्रतिशत थी, जो वर्ष 2021-22 में घटकर मात्र 13.40 प्रतिशत रह गई। इसी प्रकार वर्ष 2022 के प्रथम छ: माह से तुलना की जाए तो 2023 में अनुसूचित जनजाति (एसटी) के प्रति होने वाले अपराधों में 14.99 प्रतिशत की कमी आई है। वर्ष 2022 में अनुसूचित जनजाति के विरुद्ध घटित अपराधों की संख्या जहां 1094 थी, जबकि इस वर्ष प्रथम छ: माह में इन अपराधों की संख्या 930 दर्ज की गई है।
    मध्य प्रदेश में अनुसूचित जनजाति के विरुद्ध घटित अपराध कुल 2979 रहे हैं। यहां यह उल्लेखनीय है कि मध्य प्रदेश में अनुसूचित जनजाति की कुल जनसंख्या (153 लाख)देश में सबसे अधिक है । मध्य प्रदेश में अनुसूचित जनजाति के विरुद्ध अपराध की दर देश में तीसरे नंबर पर है। यही दर केरल राज्य में 35.5 है तथा राजस्थान में 27.3 है जो कि मध्य प्रदेश में 19.4 है।


    प्रतिबंधात्मक कार्रवाईयों में वृद्धि
    वर्ष 2021 की तुलना में वर्ष 2022 में प्रतिबंधात्मक कार्यवाहियों में वृद्धि हुई है। जहां वर्ष 2021 में 907990 प्रतिबंधात्मक कार्रवाईयां की गई थी वहीं 2022 में पुलिस ने सक्रियता दिखाते हुए 937284 प्रतिबंधात्मक कार्रवाईयां की।

  • टावर पर चढ़कर राजनीतिक ड्रामेबाजी करने वाला गिरफ्तार

    टावर पर चढ़कर राजनीतिक ड्रामेबाजी करने वाला गिरफ्तार


    भोपाल, 20 सितंबर(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)। राजधानी के महाराणा प्रताप नगर चौराहे पर संचार टावर पर चढ़कर राजनीतिक मांग करना एक युवक को भारी पड़ गया है, पुलिस उसे समझाबुझाकर नीचे लाई और उसे गिरफ्तार करके मानसिक जांच के लिए ले गई है। घटनास्थल पर पहुंचे एसपी मुजाल्दे ने कहा कि इस युवक की मानसिकजांच कराने के बाद उसके करीबी संबंधों की जांच की जाएगी और इस तरह की घटना दुबारा न हो इसके लिए भी आवश्यक इंतजाम किए जाएंगे।


    आज शाम करीबन पांच बजे चौराहे के व्यस्त ट्रेफिक के बीच तब अफरा तफरी फैल गई जब लोगों ने एक युवक को ठीक चौराहे पर लगे टावर पर चढ़ते हुए देखा। लोग टावर के नीचे एकत्रित होकर उसे देख रहे थे तभी उसने अपने कंधे पर टंगे बैग से छपे हुए पर्चे निकाले और नीचे फेंककर लोगों का ध्यान आकर्षित किया। नागरिकों ने इसकी सूचना पुलिस को दे दी। इसके बाद एमपीनगर पुलिस के कुछ जवान और टीआई घटना स्थल पर पहुंच गए। पुलिस ने अपनी गाड़ी में लगे स्पीकर से उसे नीचे उतरने को कहा। इस दौरान पुलिस का अमला और फायर ब्रिगेड भी घटना स्थर पर पहुंच गईं।


    पुलिस ने किसी अनहोनी से बचने के लिए जाल भी बुलवा लिया और नीचे बिछा दिया। इसके बावजूद वह उतरने को राजी नहीं हुआ। टावर पर ही खड़े होकर उसने एक पाईप में लगा तिरंगा झंडा फहराना शुरु कर दिया। पुलिस ने जब उससे अनुरोध किया कि शाम के वक्त झंडा नहीं फहराया जाता तो उसने झंडा खोलकर अपने बैग में रख लिया और डंडा नीचे फेंक दिया। पुलिस ने प्रेस मीडिया की मौजूदगी को स्पष्ट करने के लिए आसपास की भीड़ को हटा दिया। उससे अनुरोध किया गया कि वह नीचे आकर मीडिया के सामने अपनी बात कहे। काफी मान मनौव्वल के बाद वह राजी हुआ और नीचे उतरकर उसने मीडिया के सामने अपनी बात कही।


    परचे में छपी बातों को दुहराते हुए उसने कहा कि सरकारी तंत्र की हीलाहवाली से वह क्षुब्ध है और इसीलिए उसने जनता और सरकार का ध्यान आकर्षित करने के लिए ये कदम उठाया था। उसने अपना नाम अर्जुन आर्य उर्फ जज्जाल साहब बताया। उसने कहा कि मेरी उम्र 29 साल है और मैं जनता की सेवा करने के लिए ही ये मांगे रख रहा हूं। पुलिस की मार से बचने के लिए उसने पहली मांग पुलिस के लिए ही कर डाली। उसने लिखा कि वह भारतीय पुलिस की ड्यटी 8 घंटे की करवाना चाहता है।उसने कहा कि पुलिस वालों का वेतन भी दस हजार रुपए बढ़ाया जाना चाहिए। पुलिस वालों को 52 साल की उम्र में रिटायरमेंट दिया जाए ताकि चुस्त दुरुस्त युवकों को पुलिस में जगह मिल सके। नगर निगम में काम करने वाले मजदूरों को नियमित किया जाए।


    अर्जुन आर्य ने टावर से उतरकर मीडिया से कहा कि वह सरकार से बेरोजगार युवकों को बेरोजगारी भत्ता दिए जाने की मांग करता है। शिक्षा नीति बदलकर निम्न वर्ग के गरीबों के बच्चों को उच्च शिक्षा प्रदान की जाए। उद्योगों में काम करने वाले मजदूरों को प्रतिदिन एक हजार रुपए के हिसाब से तीस हजार रुपए मासिक वेतन दिया जाए। राशन में मिलावट खोरी करने वाले अपराधियों के विरुद्ध सख्त कानून बनाया जाए। बाल शोषण और बलात्कारियों के विरुद्ध फास्टेग कोर्ट में मुकदमा चलाया जाए।
    युवाओं को संबल देने के लिए निजी कालेजों और स्कूलों में हर विद्यार्थी को मुफ्त कापी किताबें दी जाएं और वार्षिक फीस मात्र दस हजार रुपए निर्धारित की जाए। तंबाखू वाले गुटखों और पान मसालों का विज्ञापन करने वाले फिल्मी अभिनेताओं पर कड़ी कार्रवाई की जाए। सेना के आफिसरों का वेतन दस हजार रुपए बढ़ाया जाए।


    एसपी श्री मुजाल्दे ने घटनास्थल पर पत्रकारों के सवालों के जवाब में बताया कि पुलिस ने तमाशा करके जनजीवन में व्यवधान डालने वाले इसयुवक के विरुद्ध मुकदमा दर्ज कर लिया है और इसकेसंबंधों की छानबीन शुरु कर दी है। फिलहाल उसे चिकित्सकीय निगरानी में रखा गया है।

  • ठगी पकड़ी जाए तो बंदूक दिखाकर धमकाता है बूटकॉम का गुप्ता

    ठगी पकड़ी जाए तो बंदूक दिखाकर धमकाता है बूटकॉम का गुप्ता


    भोपाल,18 अगस्त(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)। कंप्यूटर ग्राहक से ठगी की पोल जब खुल जाए और व्यापारी अपनी गलती मानने की बजाए बंदूक दिखाने लगे तो ये कारोबार कानून की निगाह में अड़ीबाजी माना जाता है। सामान्य ग्राहक इसे नहीं जानते और वे आमतौर पर पुलिस में शिकायत नहीं करते लेकिन बूटकाम सिस्टम्स का ठग व्यापारी प्रकाश चंद गुप्ता इसे अपना कारोबारी हुनर मानने लगा है। उसने खुद पर फर्जी हमला करवाकर बंदूक का लाईसेंस बनवा लिया । अब वह नित नए पैंतरे आजमाकर मालदार कंप्यूटर ग्राहकों को गन दिखाकर धमकाता है। । शूटिंग अकादमी से जुड़कर इसने कई पुलिस अफसरों को भी अपने सूदखोरी के जाल में फांस लिया है। वे समय समय पर इसके चौकीदार बन जाते हैं।


    सूत्रों के अनुसार यूपी के लालगंज का रहने वाला प्रकाश चंद गुप्ता वल्द चंद्राभान गुप्ता एमपीनगर पुलिस थाने से महज चार सौ मीटर दूर ठगी का ये अड्डा चला रहा है ।कोई ग्राहक यदि उसकी ठगी को समझ जाता है और अपना पैसा वापस मांगने की जिद पर अड़ जाता है तो वह अपने कर्मचारियों को तेज आवाज में बोलकर वहीं रखी बंदूके उठाकर बाजू में रख लेता है। पुलिस कहती है कि वह साक्ष्य के अभाव में लाचार है। कोई इस बदमाश के खिलाफ तथ्यों पर शिकायत करे तो वह उसे सजा करवा सकती है । पुलिस जिन साक्ष्यों को प्रकरणों में इस्तेमाल करती है उन्हें गुप्ता के अदालती एजेंट धराशायी कर देते हैं। इसके लिए गुप्ता का गिरोह फर्जी दस्तावेज और साक्ष्य तैयार करता है। इस गिरोह में नामी वकील, नोटरी, डॉक्टर,जज ,बैंक मैनेजर, पुलिस वाले और हैंडराईटिंग एक्सपर्ट भी शामिल हैं। ये ऐसे फर्जी साक्ष्य गढ़ते हैं जिन्हें देखकर खासे जज भी चकरा जाते हैं ,फिर वह प्रकरण भ्रष्ट जजों की अदालतों में ट्रांसफर करवा लेता है और रिश्वत देकर बरी हो जाता है।


    बताते हैं कि तीन सौ पंद्रह बोर की बंदूक का लाईसेंस बनवाने के लिए उसने खुद पर हमले की फर्जी वारदात गढ़ी थी। हमलावरों को पुलिस ने बाकायदा कोर्ट में भी पेश किया और अदालत ने उन्हें दोषी ठहराकर सजा भी सुना दी। इस प्रकरण की आड़ में दलालों ने उसे आनन फानन में लाईसेंस मुहैया करवा दिया। ये कहानी उसके ठगी के पैटर्न का खुलासा करता है। जिस प्रकरण क्रमांक 108 2019 में पंचम अपर सत्र न्यायाधीश विनय कुमार भारद्वाज ने 31 जनवरी 2023 को सजा सुनाई उसके सजायाफ्ता सफदर,इमरान, शाहिद और हनीफ आज हर्जाना मांग रहे हैं।उन्हें अपराध का प्रकरण दर्ज होने तक चुप रहने की सुपारी दी गई थी।उन्हें तब नहीं पता था कि वास्तव में सजा पड़ जाएगी।


    घटना 25 अक्टूबर 2018 की बताई गई है। प्रकाश गुप्ता ने शिकायत की थी कि हमलावरों ने उससे साढे छह लाख रुपए भरा ब्रीफकेस छीन लिया था जिसे पुलिस ने बाद में जब्त कर लिया । इस मामले में अदालत ने चारों अभियुक्तों को तीन तीन साल की जेल और दो दो हजार रुपए के जुर्माने से दंडित किया है। चारों लड़के नए थे और अदालत ने पूर्व रिकार्ड देखते हुए उन्हें छोटी सजा सुनाई।अभियुक्तों ने खुद को निर्दोष बताते हुए फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती दी है।


    गुप्ता ने तब एसपी से निवेदन किया था कि उसे जान का खतरा है, आत्मरक्षा के लिए हथियार का लाईसेंस दिया जाए। प्रशासनिक मशीनरी को इतनी आड़ काफी थी। उसे लाईसेंस भी मिल गया और उसने हथियार भी खरीद लिए। यही नहीं पुलिस विभाग के आला अफसरों से दोस्ती गांठकर वह फायरिंग अकादमी का सदस्य भी बन गया और वहां उसने अपना साहूकारी का जाल फैलाकर कई आला पुलिस अफसरों को भी मोटे ब्याज का लालच दिखाकर अपने जाल में फांस लिया। इनमें से कई अफसरों के विरुद्ध उसने झूठे साक्ष्य बना लिये हैं और वे भी अपनी रकम वापस मांगने के लिए सामने आने तैयार नहीं हैं।


    ब्लैकमेलिंग की वारदातों को अंजाम देने के लिए उसने कई प्रतिष्ठित समाचार पत्रों,वेवसाईटों और चैनलों की सदस्यता ले रखी है जिनसे वह भारत ही नहीं चीन, दुबई, थाईलैंड, ब्रिटेन और अमेरिका के सप्लायर जब शिकायत करते हैं तो वहां के अफसरों को धमकाने के लिए वह मध्यप्रदेश और उत्तरप्रदेश पुलिस के अधिकारियों का सहारा लेता है। इसके लिए वह उन अधिकारियों को ब्याज के नाम पर रिश्वत पहुंचा देता है।

  • साईबर अपराधों से समाज को बचाएं राज्यपाल की अपील

    साईबर अपराधों से समाज को बचाएं राज्यपाल की अपील

    भोपाल 10 अगस्त(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)। राज्यपाल मंगूभाई पटेल ने कहा है कि सायबर अपराधियों के सॉफ्ट टारगेट को हार्ड टारगेट बनाने में प्रतिभागी अपनी पूरी शक्ति और सामर्थ्य लगाए। प्राप्त ज्ञान का समाज में प्रसार ही उसकी सार्थकता है। उन्होंने कहा कि प्राप्त ज्ञान और साधन से निज उन्नति के साथ ही समाज के वंचित, पिछड़े वर्ग को लाभान्वित कर, उनके उत्थान में सहयोग करना ही भारतीय संस्कृति है। उन्होंने कहा है कि हर घर तिरंगे के संकल्प से हर नागरिक स्वयं को जोड़े। दूसरों को जोड़ कर, राष्ट्र के प्रति अपनी समर्पण शक्ति को जागृत करे। इस अमृत काल को राष्ट्र के प्रति कर्तव्य काल के रूप में मनाएं।

    श्री पटेल आज आई.ई.एस. कॉलेज ऑफ टेक्नोलॉजी में आयोजित साइबर सिक्योरिटी हैकथॉन कवच-2023 के विजेताओं के पुरस्कार समारोह को संबोधित कर रहे थे। हैकथॉन का आयोजन केन्द्रीय शिक्षा एवं गृह मंत्रालय की पहल पर किया गया था। राज्यपाल ने प्रतियोगिता के विजेताओं के साथ आई.ई.एस. विद्यालय और विश्वविद्यालय के प्रतिभाशाली विद्यार्थियों को पुरस्कृत किया।

    राज्यपाल श्री मंगुभाई पटेल ने कहा कि हार से सीखने वाले ही भविष्य के विजेता होते है। प्रतियोगिता में सहभागिता की सार्थकता परिणामों में नहीं, प्राप्त ज्ञान, अनुभव और कौशल के प्रसार में है। उन्होंने कहा कि नवीन तकनीक के लाभ और हानि दोनों पक्ष होते है। शिक्षित युवाओं की जिम्मेदारी है कि वह अपनी प्रतिभा और ज्ञान से आधुनिक तकनीक के लाभ को समाज के वंचित वर्गों तक पहुँचाएं। तकनीक के दुरुपयोग की हानियों से रक्षा करें। उन्होंने कहा कि यह चिंता की बात है कि समाज के शिक्षित और सक्षम वर्ग के कुछ लोग अपने सामर्थ्य का दुरुपयोग गरीब और वंचित वर्ग को सताने में करते है। अशिक्षित, गरीब और पिछड़े वंचित वर्ग के सदस्य ऐसे अपराधियों के द्वारा आर्थिक और मानसिक पीड़ा का शिकार बन जाते हैं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने युवा शक्ति की ऊर्जा और उत्साह को प्रोत्साहित करते हुए, नये अवसर उपलब्ध कराए है। अवसरों का लाभ लेकर युवा पूरे जोश और होश के साथ राष्ट्र निर्माण में सहभागी बने। उन्होंने साइबर सुरक्षा और अपराध की चुनौतियों से निपटने के प्रयासों और नवाचार के लिए युवाओं की सहभागिता के साथ आयोजन की पहल की सराहना भी की।

    मध्यप्रदेश निजी विश्वविद्यालय विनियामक आयोग के अध्यक्ष, श्री भरत शरण सिंह ने कहा कि देश का अमृत काल हमारे आजादी के संघर्ष के वीरों शहीदों से प्रेरणा लेने का काल है। आजादी के लिए उनके बिना प्रतिफल की कामना के संघर्ष और अपने कर्तव्यों के प्रति समर्पण के अनुसरण का है। उन्होंने कहा कि राष्ट्र निर्माण के लिए युवाओं को अपनी विरासत पर गर्व के साथ राष्ट्र निर्माण के लिए संकल्पित होना चाहिए। नागरिक कर्तव्यों के दायित्व बोध के साथ आगे बढ़ना चाहिए।

    आई.ई.एस. विश्वविद्यालय के कुलाधिपति इंजीनियर बी.एस.यादव ने स्वागत उद्बोधन में समूह की गतिविधियों, उपलब्धियों का उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि समूह के पूर्व छात्र-छात्राएं देश विदेश में अच्छे स्तर कार्य करने के साथ संस्थान में अध्ययनरत विद्यार्थियों का आर्थिक और शैक्षणिक सहयोग एवं मार्गदर्शन भी कर रहे है। उन्होंने हैकथॉन-2023 के आयोजन और प्रतिभागियों की ऊर्जा एवं कार्य के प्रति समर्पण की सराहना की। विश्वविद्यालय के मुख्य कार्यपालक अधिकारी श्री देवांश सिंह ने आभार प्रदर्शन किया।

    राज्यपाल श्री मंगुभाई पटेल ने कार्यक्रम का दीप प्रज्जवलन कर शुभारम्भ किया। उनका पुष्पगुच्छ, शॉल, श्रीफल भेंट कर स्वागत किया गया तथा उनका आभार ज्ञापित करते हुए स्मृति चिन्ह भेंट किया गया।

  • हाईकोर्ट ने जमानत दी तो रंगदारी दिखाने लगा पास्को आरोपी

    हाईकोर्ट ने जमानत दी तो रंगदारी दिखाने लगा पास्को आरोपी


    भोपाल,2 अगस्त(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)। फर्जी साक्ष्यों से अदालत को गुमराह करके जमानत लेने वाला पास्को आरोपी प्रकाश चंद वल्द चंद्रभान गुप्ता अब अपने गुर्गों से आतंक फैलाकर पीड़िता के परिजनों को डराने का प्रयास कर रहा है। उसके गुर्गे कंप्यूटर व्यवसायियों को धमका रहे हैं कि आरोपी की पकड़ बहुत ऊंची है और जो कोई उसके काले धंधे के बारे में जान जाता है उसे जान से हाथ धोना पड़ता है। वहीं हाईकोर्ट में उसने जो फर्जी दस्तावेज पेश किए थे और अपने वकीलों से झूठी दलीलें दिलवाई थीं उनकी शिकायत पुलिस के पास पहुंच गई है और पुलिस उनकी सत्यता की जांच कर रही है।


    नाबालिग पीड़िता ने बूटकाम सिस्टम्स नाम से कंप्यूटर की दूकान चलाने वाले प्रकाश चंद गुप्ता के खिलाफ अश्लील अनाचार की शिकायत की है जिसे पुलिस ने पास्को एक्ट के अंतर्गत दर्ज किया है। जिला अदालत ने तो मामले की गंभीरता को देखते हुए गुप्ता का जमानत आवेदन खारिज कर दिया था और उसे गिरफ्तार करने के निर्देश दिए थे। इस फैसले के विरुद्ध गुप्ता हाईकोर्ट पहुंचा और उसने वकीलों की फौज के साथ फर्जी दस्तावेजों का पुलिंदा पेश करके ये जताने की कोशिश की थी कि ये प्रकरण कारोबारी लेनदेन की वजह से दर्ज कराया गया है। जबकि पीडि़ता का कहना है कि हमारे पारिवारिक संबंध होने की वजह से मैं गुप्ता के घर थी तब उसने ये वारदात की थी।


    पुलिस ने अदालत में आरोपी के विरुद्ध जो साक्ष्य प्रस्तुत किए थे उनमें उसे ठग, और चरित्रहीन बताया गया था। व्यापार की आड़ में वह सूदखोरी का कारोबार चलाता है जिसमें लोगों को जमा राशि पर ऊंची ब्याज दर का भुगतान देने का लोभ दिखाता है।पुलिस ने उन प्रकरणों की सूची भी प्रस्तुत की थी जो विभिन्न व्यापारियों की ओर से इसके विरुद्ध भोपाल, इंदौर, दिल्ली, कलकत्ता समेत देश के कई शहरों में विचाराधीन हैं। लगभग एक महीने की फरारी के बाद अपने धंधे पर वापस लौटे गुप्ता ने व्यापारियों पर दबाव बनाने के लिए और आतंक फैलाने के लिए ये दुष्प्रचार अभियान चलाया है।


    गुप्ता का एक गुर्गा राहुल जैन कंप्यूटर व्यवसायी है और वह थद्दाराम काम्प्लेक्स एमपी नगर में कंप्यूटर से जुड़ी छोटी सामग्री और इसकी दूकान से बेकार बताकर बदले गए लैपटाप बेचता है। उसने इस मामले से जुड़े लोगों को धमकाते हुए कहा कि प्रकाश गुप्ता की पहुंच बहुत लंबी है। वह अदालतों को खरीदना और उनसे खेलना जानता है। पुलिस की क्या औकात जो उसका कुछ बिगाड़ सके। वह बड़े बड़े लोगों के करोड़ों रुपए ब्याज पर चलाता है। उसका हवाला कारोबार कई शहरों में फैला है। यूपी के लालगंज में उसके परिवार की सल्तनत चलती है।वह इतना खूंखार है कि जो उसके काले धंधे को जान लेता है उसे जान से हाथ धोना पड़ता है।जिन लोगों ने प्रकाश के विरुद्ध धोखाधड़ी की शिकायत की है वे केवल चक्कर खाते रहेंगे क्योंकि वह कई जजों को उलझे प्रकरणों में करोड़ों रुपए रिश्वत दिलाता है।


    राहुल ने दो पत्रकारों को देखकर जिस तरह की डींगें हांकी उससे प्रकाश गुप्ता के काले धंधे की एक नई तस्वीर सामने आई है। प्रकाश के इस गुर्गे ने कहा कि वह कई जजों, पुलिस वालों और अपराधियों को पालकर रखता है। हाईकोर्ट ने उसे उस मामले में भी जमानत दे दी जिसे भारत सरकार ने बाकायदा कानून बनाकर संगीन माना है। गौर तलब है कि जब इस मामले की जानकारी पुलिस को लगी तो उसने हाईकोर्ट में पेश किए इसके दस्तावेजों की छानबीन शुरु कर दी है।

  • हाईकोर्ट को गुमराह करके पास्को आरोपी प्रकाश गुप्ता ने फिर खरीदी जमानत

    हाईकोर्ट को गुमराह करके पास्को आरोपी प्रकाश गुप्ता ने फिर खरीदी जमानत


    भोपाल 28 जुलाई(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)। अदालतों को गुमराह करके ठगी के आरोपों से बच निकलने में माहिर बूटकाम सिस्टम्स के प्रकाश चंद गुप्ता को फिलहाल गिरफ्तारी से बच निकलने में सफलता मिल गई है।इसके बावजूद पास्को एक्ट में दर्ज ताजा मामले से उसके ठगी और व्यभिचार के अपराध पूरी तरह उजागर हो गए हैं। हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति विशाल धगट ने उसका जो जमानत आवेदन मंजूर किया उसमें उसे पुलिस के सामने सरेंडर करने ,पासपोर्ट जमा करने, विदेश भागने से रोकने, पचास हजार रुपए का निजी मुचलका भरने और पुलिस जांच अधिकारी के सामने जांच के लिए हर समय उपलब्ध रहने की शर्त लगाई है। आरोपी की जमानत के लिए उसने वकील मनीष दत्त से जो झूठे तथ्य पेश करवाए उसके आधार पर अदालत को अपने फैसले पर पुनर्विचार करने का निर्देश देने का रास्ता खुल गया है।


    सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार कंप्यूटर के कारोबार की आड़ में साहूकारी करके लोगों का धन हड़प जाने के जो मामले अदालतों में लंबित हैं उनमें वह साक्ष्यों को नष्ट करके अब तक बचता रहा है। पुलिस के रिकार्ड में ऐसे सैकड़ों मामले दर्ज हैं जिनमें उसने लोगों को झांसा देकर जमा राशि का चैक वापस ले लिया और फिर पैसा जमा करने वालों के खिलाफ ही कर्ज न लौटाने की शिकायत दर्ज करवा दी। पुलिस के देहाती अपराध रजिस्टर में प्रकाश चंद गुप्ता कुख्यात ठग के रूप में दर्ज है पर कुछ अदालतों को खरीदकर या उन्हें झांसा देकर वह अब तक बचता रहा है। इस बार एक बच्ची ने उसके खिलाफ यौन दुराचार की शिकायत दर्ज कराई है जिसमें गिरफ्तारी से बचने के लिए उसके वकीलों की फौज ने दलील दी कि बच्ची ने आठ सालों बाद शिकायत की है इसलिए उसे जमानत पर रिहा कर दिया जाना चाहिए। जबकि वह बच्ची अभी भी नाबालिग है।


    हमारे न्यायालयीन संवाददाता ने बताया कि अदालत ने आरोपी के वकीलों की ओर से पेश किए गए झूठे तथ्यों को भी स्वीकार कर लिया और उसे सशर्त जमानत दे दी है जबकि पास्को एक्ट में जोड़े गए उपबंधों में इस तरह की जमानत देने का प्रावधान बाधित किया गया है। आपराधिक संशोधन विधेयक 2018 ने धारा 438 में खंड 4 जोड़कर और कानून में अपवाद बनाए गए हैं । उक्त धारा के अनुसार, 16 वर्ष से कम उम्र की महिला के साथ बलात्कार, 12 वर्ष से कम उम्र की महिला के साथ सामूहिक बलात्कार और 16 वर्ष से कम उम्र की महिला के साथ सामूहिक बलात्कार के अपराध के आरोपी व्यक्ति को अग्रिम जमानत नहीं दी जा सकती है। 12 वर्ष से कम उम्र की महिला के विरुद्ध अपराध, भारतीय दंड संहिता, 1860 की क्रमशः धारा 376(3), 376 एबी, 376 डीए और 376 डीबी के तहत दंडनीय है।


    आरोपी प्रकाश चंद गुप्ता के विरुद्ध जब स्थानीय अदालत ने गिरफ्तारी के आदेश दिए तो आनन फानन में उसने झूठे दस्तावेज बनाकर पीड़िता के पिता के विरुद्ध ही पैसा हड़प जाने की कहानी गढ़ ली। पुलिस ने तो उसकी ये दलील नहीं सुनी लेकिन हाईकोर्ट में मनीष दत्त की ओर से प्रस्तुत झूठ तब उजागर हो गया जब उन्होंने कहा कि आरोपी ने पीडि़ता की मां को भारी रकम उधार दी है और उसे न लौटाने के लिए पीडि़ता ने उस पर आरोप लगाए हैं। जबकि हकीकत ये है कि पीडि़ता के परिवार से करीबी बढ़ाने के लिए आरोपी गुप्ता ने उनके पिता से लाखों रुपए ब्याज पर उधार लिए थे जिन्हें वो कथित तौर पर गड़प गया है।


    बताते हैं कि मनीष दत्त ने आरोपी के बचाव में एक और झूठी दलील दी कि आरोपी के पिता ने एक और व्यक्ति के विरुद्ध पहले व्यभिचार की शिकायत की थी जबकि ऐसा कोई मामला कभी कहीं दर्ज नहीं हुआ है।जबकि आरोपी ने जिन सैकड़ों लोगों की जमा राशि गड़प की है उसके मुकदमे भोपाल की जिला अदालत और दिल्ली, इंदौर, कलकत्ता की अदालतों में चल रहे हैं। आरोपी संभ्रांत व्यक्ति नहीं है और आईपीसी की धारा 438 के तहत जमानत पाने के लाभ का हकदार नहीं है क्योंकि उसके विरुद्ध वर्तमान में 4 करोड़ 27 लाख रुपए की धोखाधड़ी का एक मामला तो विक्रमादित्य सिंह पुत्र श्री राजेन्द्र सिंह की ओर से चलाया जा रहा है। इस मामले में वह जेल जा चुका है और जमानत पर रिहा है। उसके खिलाफ धारा 354 के अंतर्गत एक और महिला के ऊपर अश्लील तरीके से हमला करने का प्रकरण दर्ज हुआ था जिसमें उसने समझौता कर लिया था ।अदालत की भाषा में समझौता होना अपराध होने से बरी होना नहीं होता है।

    एक अन्य केस इसकी दुकान में कार्य करने वाली एक लड़की के साथ अवैध संबंध होने पर लड़की के गर्भवती हो जाने पर बलात्कार और अन्य धाराओं में दर्ज कराए गए थे। इस प्रकरण में भी प्रकाश गुप्ता ने अवैध रूप से समझौता करके लड़की के परिजनों को झांसा दिया कि मैं शादी कर लूंगा । कानून की निगाह में बलात्कार का आरोप भी समझौता होने के बावजूद बरी होना नहीं माना जाता। हिंदू विवाह अधिनिमय में दो विवाह की अनुमति भी नहीं है।


    पुलिस के सूत्र बताते हैं कि प्रकाश गुप्ता जिन व्यक्तियों से जमा राशि लेकर उनसे ठगी करता रहा है उनकी मूल रकम लौटाने से इंकार करने के लिए वह उनके नकली हस्ताक्षर बना लेता है और अदालत में जाली दस्तावेज पेश करता रहा है। अदालतें उसकी ओर से प्रस्तुत तथ्यों को क्यों स्वीकार कर लेती हैं ये भी जांच का विषय है। फर्जी दस्तावेज बनाकर वह ये सिद्ध करने की कोशिश करता है कि उसे विरोधी पक्षकार से पैसे लेने हैं। देने नहीं हैं। ये इसके अपराध करने का तरीका है।

  • लेडी किलर ठग प्रकाश चंद गुप्ता का आडियो वायरल

    लेडी किलर ठग प्रकाश चंद गुप्ता का आडियो वायरल


    भोपाल,26 जुलाई,(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)। पास्को एक्ट में लगभग एक महीने की फरारी के बाद हाईकोर्ट से सशर्त जमानत मिलने के साथ ही बूटकाम सिस्टम्स (Bootcom Systems) का प्रकाश चंद गुप्ता (Prakash Chand Gupta) अब एक और आडियो वायरल होने से चर्चाओं में आ गया है। ये आडियो उसके आकर्षक ब्याज के झांसे में लाखों रुपए गंवा चुकी एक महिला के करीबी ने रिकार्ड किया था। हाईकोर्ट ने पासपोर्ट जब्त करने के साथ उसे पुलिस थाने में हाजिरी की शर्त पर जमानत दी है।
    सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार फरारी के दौरान न केवल उसका कंप्यूटर कारोबार चलता रहा बल्कि उसका साहूकारी का धंधा भी बदस्तूर जारी था। इस कारोबार के सहारे ही वह लोगों का करोड़ों रुपया ब्याज पर लेकर कुछ बड़े व्यापारियों तक पहुंचाता है जो बैंकों के अरबों रुपये ब्याज पर लिए हुए हैं। इसी रकम उन कारोबारियों ने कर्ज पर चला रखा है। बैंक की किस्तें भरने के लिए वे बाजार का पैसा लेकर गड़प जाते हैं। इसी कड़ी में प्रकाश चंद गुप्ता भी कई जगह फ्रंट फेस तो कई जगह बैक कड़ी के रूप में काम करता है। हवाला के कारोबार से ये रकम शहर के विभिन्न इलाकों तक पहुंचाई जाती है।
    पिछले दिनों न्यायालय परिसर में नौकरी करने वाली ऐसी ही महिला ने अपनी रकम का ब्याज और मूलधन वापस मांगा तो गुप्ता ने उन्हें गालियां देकर दूकान से बाहर निकाल दिया। उसने महिला को विश्वास में लेकर पहले ही मूल चैक वापस ले लिया था और उसे फाड़ दिया था जबकि चैक की फोटो कापी महिला के पास है। उसने अपने दस्तावेजों के आधार पर पुलिस और अदालत में ठगी की शिकायत की है जो वाद अभी लंबित है।
    महिला और प्रकाश गुप्ता के बीच लेनदेन को लेकर जो झड़प हुई उसकी आडियो क्लिप हमारे पास मौजूद है। वार्तालाप में कुछ अश्लील गालियां भी मौजूद हैं जिन्हें मामले की गंभीरता को समझने के लिए सुनना जरूरी है। इसी के चलते हम अनकट आडियो आपके लिए प्रस्तुत कर रहे हैं। कृपया प्रकाश गुप्ता की असलियत को समझने के लिए इसे सुनें और गालियों को नजरंदाज करें। ये आडियो हमें फरियादी अभिलाषा राहते की ओर से उपलब्ध कराया गया है, प्रेस इंफार्मेशन सेंटर इस आडियो की सत्यता की कोई गारंटी नहीं लेता है।

  • नाबालिग के यौन अपचारी प्रकाश गुप्ता की अग्रिम जमानत अर्जी खारिज

    नाबालिग के यौन अपचारी प्रकाश गुप्ता की अग्रिम जमानत अर्जी खारिज


    भोपाल 18 जुलाई( प्रेस इनफार्मेशन सेंटर) जिला एवं सत्र सत्र न्यायालय मैं विगत 28 जून को दाखिल नाबालिग बालिका के योन उत्पीड़न आरोपी बूटकॉम सिस्टम के मालिक प्रकाश चंद्र गुप्ता कीअग्रिम जमानत की याचिका माननीय न्यायालय ने ये कहते हुए खारिज कर दी है कि आरोपी का क्रिमिनल रिकॉर्ड है,वह आदतन अपराधी है और महिलाओं से संबंधित अपराध करने का इसका पुराना रिकॉर्ड है । उपरोक्त तथ्यों को ध्यान में रखते हुए आरोपी को अग्रिम जमानत नहीं दी जा सकती।

    आरोपी के अधिवक्ता मेहता ने न्यायालय के समक्ष 30 मिनट तक अग्रिम जमानत देने के लिए तर्क दिए।उन्होंने कई न्याय दृष्टांत भी न्यायालय के समक्ष रखे लेकिन न्यायालय ने अधिवक्ता के सभी तर्कों को खारिज करते हुए आरोपी प्रकाश चंद्र गुप्ता की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी। माननीय न्यायालय ने प्रकाश गुप्ता के परिवार को कहा कि वे जल्द से जल्द आरोपी को पुलिस के सामने पेश करें। माननीय न्यायालय ने आरोपी के अधिवक्ता श्री मेहता के लगभग 150पन्नों के दलीलों से भरे आवेदन को निरस्त करते हुए अग्रिम जमानत का लाभ देने से इंकार कर दिया।
    ज्ञात हो कि दिनांक 21 जून को अयोध्या नगर थाने में आरोपी प्रकाश चंद गुप्ता के खिलाफ एफ आई आर दर्ज होने के बाद से ही वह फरार है। सूत्रों के अनुसार पुलिस का अमला पूरी कोशिश कर रहा है कि आरोपी को जल्द से जल्द गिरफ्तार कर न्यायालय के समक्ष पेश किया जाए।आरोपी ने अपने दोनों फोन बंद कर दिए गए हैं और किसी अन्य फोन नंबरों का इस्तेमाल कर रहा है।

    सूत्रों की माने तो प्रकाश गुप्ता की ओर से अब माननीय हाईकोर्ट के समक्ष अग्रिम जमानत का आवेदन लगाया गया है। विधि विशेषज्ञों का ऐसा कहना है कि जिस प्रकार से प्रकाश गुप्ता का आपराधिक रिकॉर्ड न्यायालय के संज्ञान में आया है उसे देखते हुए माननीय उच्च न्यायालय की ओर भी आरोपी को अग्रिम जमानत का लाभ मिलने की उम्मीद नहीं है