तकनीकी शिक्षा और कौशल विकास मंत्री यशोधरा राजे सिंधिया ने जाने अनजाने में लोकतंत्र की एक बड़ी कमजोरी की ओर लोगों का ध्यान आकर्षित किया है। उन्होंने सिंधिया खेमें के सहयोगी मंत्री डॉ.प्रभुराम चौधरी की आईटीआई खोलने की मांग ठुकराते हुए बड़ी मार्के की बात कही है। वे चाहती तो अपने ही भतीजे के प्रिय सहयोगी की बात मान लेती और वाहवाही बटोर लेतीं, लेकिन उन्होंने जनहित को देखते हुए पंच परमेश्वर बनकर अपनी बात कह डाली। उनकी स्नेहिल फटकार ने पूरे लोकतंत्र और इसके मालिकों को चेतावनी दी है। डॉ.प्रभुराम चौधरी ने ये सोचकर प्रस्ताव रखा था कि राजे तो कृपा बरसाती हैं और वे चुनाव की बेला में एक सफलता की कहानी उन्हें भेंट कर देंगी। वे अपने क्षेत्र में कह सकेंगे कि उन्होंने जनहित में कितने सारे कार्य किए हैं। उनका प्रस्ताव शालीन था उचित था लेकिन विभागीय मंत्री यशोधरा जी ने सच का साथ दिया। वे जानती हैं कि डॉ.प्रभुराम चौधरी तो बदमिजाज डॉ.गौरीशंकर शेजवार की हर चुनौती को सामना कर चुके हैं। उनके बेटे मुदित शेजवार भी जनता की कसौटी पर फिसड्डी साबित हो चुके हैं। इसलिए आईटीआई का शिगूफा गढने की उन्हें कोई जरूरत नहीं हैं। स्वास्थ्य मंत्री रहते हुए वे भरपूर जनसेवा कर रहे हैं। आईटीआई के संस्थान आज केवल डिग्री बांटने के लिए उपयोगी रह गए हैं। जिन्हें तकनीकी शिक्षा लेकर मिस्त्री, कारपेंटर, मैकेनिक, आदि बनना होता है वे तो निजी तौर पर प्रशिक्षण प्राप्त कर लेते हैं और अपना सेवा कार्य चालू कर देते हैं। सैकड़ों यू ट्यूब चैनल बच्चों को तकनीकी ज्ञान घर बैठे प्रदान करने लगे हैं। ऐसे में आईटीआई से ज्यादा जरूरत उत्पादन के अवसरों की है। रोजगार प्रशिक्षण केन्द्रों में लगभग सारे गुर सिखाए जा रहे हैं। आसपास के जिलों में आईटीआई संस्थान पहले से चालू हैं और उनमें से कई तो उन्नत उपकरणों से भी लैस हैं। करीबी जिले भोपाल में ही तकनीकी शिक्षा के ढेरों संस्थान हैं। जिन्हें वाकई काम धंधा सीखना है वे दिखावे की डिग्री बटोरने में अपना समय थोड़ी बर्बाद करेंगे। भुनभुनाते गौरीशंकर शेजवार जब पार्टी संगठन के प्रति नाराजगी दिखाते हुए गुर्रा रहे हैं तब प्रभुराम चौधरी को ये दूर के ढोल वाली कवायद करने की कोई जरूरत नहीं है। ऐसा करते हुए यशोधरा जी ने शिवराज सरकार की चिंतन प्रक्रिया को भी झिंझोड़ दिया है। बरसों से भाजपा सरकार वही घिसी पिटी पुरानी कांग्रेस की नीति को ढो रही है जिसमें वह शैक्षणिक संस्थानों की घोषणा करती रही है,जबकि आज जरूरत शैक्षणिक ढांचे में मूलभूत सुधार करने की है। यशोधरा जी ने ठीक ही कहा कि यदि आईटीआई खोल देते हैं तो फिर वही ट्रांसफर पोस्टिंग का खेल शुरु हो जाएगा। राजधानी में निवास करने वालों के लिए वह आईटीआई समय काटने का अड्डा बन जाएगा। जहां वे जाना पसंद नहीं करेंगे पर उनका वेतन जरूर खजाने से निकलता रहेगा। दरअसल वक्त कार्पोरेट सेक्टर को अपने पैरों पर खड़ा करने का अवसर देने का है। सरकार की आर्थिक हालत खस्ता है टैक्स और अन्य साधनों से उसकी आय बढ़ी है इसके बावजूद वह सरकारी अमले का वेतन भत्ता अपनी आय से नहीं निकाल पा रही है। वेतन के लिए भी उसे इसकी टोपी उसके सिर वाली कवायद करनी पड़ती है। कर्ज जनता के सिर लदता जा रहा है। आज जब एक शिक्षक पूरे देश के बच्चों को बेहतर शिक्षा टीवी कंप्यूटर मोबाईल के माध्यम से दे सकता है तब दिखावे के संस्थान खड़े करने का कोई औचित्य नहीं है। जरूरी है कि आय के उपक्रम खड़े किए जाएं। केन्द्र सरकार का सूक्ष्म एवं लघु उद्योग मंत्रालय उद्यमियों को आत्मनिर्भर बनाने का अभियान चला रहा है। ऐसे में कांग्रेसी औद्योगिकीकरण की असफल विचारधारा को ढोना फिजूल है। आप डिग्री देंगे और युवा नौकरी पाएंगे इससे बेहतर है कि वे काम सीखें और देश के लिए पूंजी का निर्माण करें। यशोधरा जी का यह संदेश पूरे राजनेताओं को समझना होगा। खासतौर से शिवराज सरकार की पैरवी करने वाले महान चिंतकों को भी इस विषय पर गौर करना चाहिए।
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पंच परमेश्वर यशोधरा जी की राय पर गौर कीजिए
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राष्ट्रपति ज्योति मुर्मू का अभिनंदन
भोपाल, 3 अगस्त(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)।राष्ट्रपति श्रीमती द्रोपदी मुर्मु को नई दिल्ली वापसी पर राजा भोज विमान तल पर राज्यपाल मंगुभाई पटेल और मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने भावभीनी विदाई दी। श्रीमती मुर्मु एक दिवसीय प्रवास पर भोपाल आई थीं।
राष्ट्रपति श्रीमती मुर्मु को विमानतल पर राज्यपाल श्री पटेल और मुख्यमंत्री श्री चौहान ने भगवान श्री कृष्ण और राधा की अष्टधातु की प्रतिमा स्मृति-चिन्ह के रूप में भेंट की। महापौर श्रीमती मालती राय, मुख्य सचिव श्री इकबाल सिंह बैंस, पुलिस महानिदेशक श्री सुधीर सक्सेना, पुलिस कमिश्नर श्री हरिनारायण चारी मिश्रा भी उपस्थित थे। राष्ट्रपति श्रीमती मुर्मु ने भारतीय सेना के विमान से लगभग साढ़े 4 बजे दिल्ली के लिए प्रस्थान किया। -

इस खाई को कितना भर पाएगा अंत्योदय का विचार
देश में राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन को दीनदयाल अंत्योदय योजना के नाम से जाना जाता है। लगभग एक दशक से ज्यादा पुरानी इस योजना का इतिहास इससे भी ज्यादा पुराना है।आजादी के बाद से सरकारें लगातार गरीबी दूर करने के कार्यक्रम चलाती रहीं हैं। इनके लिए वैश्विक कर्जदाताओं से साफ्ट लोन भी लिए जाते रहे हैं। यदि ये सभी अभियान सफल हो गए होते तो भारत काफी साल पहले विकसित देशों की सूची में शामिल होकर चहुंमुखी विकास की होड़ में शामिल हो चुका होता। अपने लंबे अनुभवों से कांग्रेस की निवृत्तमान सरकारों ने पाया कि नौकरशाही इस अभियान की राह में सबसे बड़ा रोड़ा है। गरीबी दूर करने के लिए सरकारों ने जो संसाधन भेजे वे भ्रष्ट नौकरशाही की भेंट चढ़ गए। इस समस्या से निपटने के लिए कांग्रेस ने पंचायती राज जैसा मूर्खतापूर्ण उपाय ढूंढ़ा था। जो अपनी स्थापना से लेकर कभी सफल नहीं हो सका है। दिग्विजय सिंह की सरकार ने तो पंचायती राज को इतना पावरफुल बना दिया कि गांव गांव में सरपंच,सचिवों और उनकी मंडलियों ने लूट का कोहराम मचा दिया। सत्ता से समानांतर तंत्र खड़ा कर दिए जाने से नौकरशाही खफा हो गई। जनता को तब तक ये नहीं मालूम था कि नौकरशाही और पंचायती राज में असली अपराधी कौन है। जन आक्रोश पंचायती राज के खिलाफ था तो लोग उमा भारती की जन क्रांति में शामिल हो लिए और भाजपा की मजबूत सरकार सत्ता में पहुंच गई। बाद की भाजपा सरकारों ने नौकरशाही से पंगा नहीं लिया और कहानी जस की तस चलती रही। कांग्रेस की कमलनाथ सरकार ने इंसपेक्टरराज लौटाकर नौकरशाही को सब्जबाग दिखाए थे। वह तो भाजपा के रणनीतिकारों और ज्योतिरादित्य सिंधिया की आपसी समझबूझ थी जो करप्टनाथ के षड़यंत्र का भांडा बीच राह में ही फूट गया। इस बार फिर एक बार जनता को समाधान देने में असफल नौकरशाही निशाने पर है। कमलनाथ ने जिस नौकरशाही को सत्ता में आते ही धोबी का कुतका बना दिया था वे आज उसी नौकरशाही के सामने दाना डाल रहे हैं। क्योंकि उन्हें कांग्रेस के संगठन से ज्यादा भरोसा नौकरशाही के भ्रष्टाचार की शैली पर है। हालांकि सोशल मीडिया का चहुंमुखी विकास और संचार के बेहतर साधनों के बीच इस बार कमलनाथ की नाव वहीं डगमगाने लगी है जहां से उसने अपनी यात्रा शुरु की थी। भाजपा के रणनीतिकारों ने एकात्म मानवता वाद के प्रणेता पंडित दीन दयाल उपाध्याय के अंत्योदय वाले फार्मूले को मैदान में उतार दिया है। उन्होंने भ्रष्ट नौकरशाही से तो पंगा नहीं लिया लेकिन जनता को हितग्राही मूलक योजनाओं से भरपूर लाभ पहुंचाया। उसकी लाड़ली बहना योजना ने तो रिकार्ड सफलता अर्जित की है। इस योजना के दूसरे चरण को अधिकारी ये कहकर असफल बनाने में जुटे हैं कि सरकार ने योजना का लाभ लेने के लिए घर में टै्क्टर होना अनिवार्य शर्त बना दिया है। इस तरह नौकरशाही इस योजना की राह में अड़ंगे लगा रही है। ये कहा जा रहा है कि लाड़ली बहनों को देने लायक धन आखिर सरकार लाएगी कहां से। फिर जब उसने भविष्य में तीन हजार रुपए मासिक देने का वायदा किया है तो ये धन आखिर आएगा कहां से। भाजपा ने तो नौकरशाही कोसत्ता की बागडोर थमा रखी थी लेकिन भ्रष्ट अफसरों ने अपनी बदमाशी का ठीकरा भाजपा पर ही फोड़ना शुरु कर दिया। भाजपा के नेतागण खुलकर अपनी बात नहीं कह पाए और आज वे लाड़ली बहना योजना की सफलता का भरोसा भी नहीं दिला पा रहे हैं। कांग्रेस की नकल करते और अफसरशाही पर निर्भर भाजपाईयों की स्वतंत्र चेतना विलीन सी हो गई है। वे जनता को नहीं समझा पा रहे हैं कि उनके कार्यकाल में विकास के क्या क्या प्रतिमान गढ़े गए हैं। उसने लाड़ली बहना योजना, किसान सम्मान निधि,प्रधानमंत्री आवास, युवाओं को लैपटाप जैसी योजनाओं से नौकरशाही और सत्ता के विरुद्ध विद्रोह की आंधी को लगभग रोक दिया है। हालांकि ये अभी केवल अर्धविराम है।सत्ताधीशों को ये जान लेना चाहिए कि कांग्रेस के बनाए जिस ढांचे पर भाजपा अब तक चलती रही है वह ढांचा ही आक्रोश की असली वजह है। पंडित दीनदयाल उपाध्याय ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ में कार्य करते हुए जाना कि कांग्रेस अंग्रेजों की फूट डालो राज करो की नीति पर चल रही है। ये चंद लोगों को साथ लेकर बहुसंख्यक जनता को कुचलने वाली अंग्रेजों की ही रणनीति अपनाए हुए है। तब उन्होंने वसुधैव कुटुंबकम की भावना में रचे बसे एकात्म मानवतावाद का सिद्धांत दिया। जिसमें समाज के हर व्यक्ति को परिवार का सदस्य मानकर उसे मजबूत बनाने का लक्ष्य रखा गया था। अंत्योदय इसी से उपजा विचार था जिसमें समाज के दबे कुचले पिछड़े,दलित वर्ग को साथ लेकर चलने का लक्ष्य था। शिवराज सिंह सरकार ने अपने पूरे कार्यकाल में नौकरशाही को छूट दी लेकिन अब जब चुनाव की बेला नजदीक आ गई है तब वह अंत्योदय के सहारे जनता के आक्रोश को नई दिशा में धकेलने का प्रयास कर रहे हैं। नौकरशाही ने अपनी लापरवाही, अनिच्छा, अपना घर भरने के लालच और शोषणवादी मानसिकता से जनधन की खूब लूट मचाई है। जनता शोषण से उसी तरह त्रस्त है जैसे कभी मुगलों, अंग्रेजों, जमींदारों, राजदरबारों, सूदखोरों से त्रस्त रही है,और वह लगभग विद्रोह पर उतारू है।कानून और व्यवस्था दूर के ढोल बने हुए हैं। ऐसे में लाड़ली बहना योजना जैसे कदम उसकी नाराजगी पर ठंडा पानी छिड़कने का काम कर रहे हैं।उन योजनाओं का असर भी हुआ है लेकिन कितना अभी ये कहना जल्दबाजी होगी। -

कांग्रेस के डिफाल्टर प्रेम की धूल उड़ाता भाजपा का अंत्योदय
-आलोक सिंघई-
किसान का कर्जा माफ, मुफ्त बिजली, सरकारी नौकरियों का खोखला उद्घोष, जाति और धर्म आधारित वर्ग भेद जैसे मसालों के भरोसे कमलनाथ कांग्रेस मध्यप्रदेश में काठ की हांडी चढ़ाने का प्रयास कर रही है। कांग्रेस का वचन पत्र कमलनाथ की थोथी शोशेबाजी से मुक्त नहीं हो पाया है। इसके विपरीत भारतीय जनता पार्टी अपने अंत्योदय के फार्मूले से जन जन तक पैठ बढ़ाती जा रही है। शिवराज सिंह चौहान की भाजपा सरकार पर घोषणाओं का आरोप उस वक्त फीका पड़ गया है जब चुनावी बेला में सरकार ने दनादन हितग्राही मूलक योजनाओं का सैलाब ला दिया है। लाड़ली बहना योजना से भाजपा ने घर घर में पैठ बना ली है। इस योजना का दूसरा चरण 20 अगस्त तक चलेगा। इस बीच पंद्रह अगस्त का राष्ट्रीय त्यौहार भी है। इसमें मुख्यमंत्री शिवराज सिंह अपने बीस साल के कार्यकाल में आए बदलाव की झांकी भी पेश करेंगे। भाजपा सरकार के पिटारे में सफलताओं के इतने मुद्दे हैं कि अच्छा भला कांग्रेसी भी खामोश रह जाता है।आम जनता को अब ये समझ में आ गया है कि जाति धर्म और वर्गभेद की राजनीति से इतर भारतीय जनता पार्टी का अंत्योदय समाज के हर तबके के लिए सुखद संदेश ला रहा है। कांग्रेस ने भाजपा पर जो अडानी अंबानी जैसे व्यापारियों की पार्टी होने का आरोप लगाया था वह हकीकत में मुंह के बल गिरा है। जन जन तक ये संदेश पहुंचाने में भाजपा कामयाब रही है कि वह वास्तव में देश के उद्यमियों के साथ खड़ी है और एकनया भारत समृद्ध भारत बनाने में सफलताएं हासिल कर रही है।
जनता का ये भरोसा एक दिन में नहीं जमा बल्कि मध्यप्रदेश में लगातार बीस सालों तक भाजपा ने ये शहनाई बजाई है। बीच में कांग्रेस की कमलनाथ सरकार ने जिस तरह वैमनस्य और संकीर्ण नजरिये से इंस्पेक्टरराज की कलह मचाई उससे लोगों को दोनों पार्टियों की मानसिकता का अंतर समझ में आ गया है। कांग्रेस आज भी डिफाल्टरों के साथ खड़ी है। कमलनाथ कह रहे हैं कि वे सत्ता में आने पर कर्जा माफ करेंगे। कांग्रेस उन फोकटियों का कर्जा माफ करने और उन्हें अपने साथ लाने का प्रयास कर रही है जो विकास करने वाले नहीं बल्कि मुफ्तखोर हैं। भाजपा कर्मठ किसानों को नकद राशि देकर आगे बढ़ने में मदद कर रही है। सरकारी नौकरियों के नाम पर एक दो फीसदी लोगों तक लाखों रुपए का वेतन बांटकर कांग्रेस ने जिस उपभोक्तावाद की नींव रखी थी भाजपा ने उसे तो नहीं छेड़ा है लेकिन इसके साथ वह जन जन तक सरकारी योजनाओं का संदेश लेकर पहुंच रही है। ऐसा कोई वर्ग नहीं कोई नागरिक नहीं जो सरकार की योजनाओं का सीधा लाभ नहीं उठा रहा हो। ऐसे में आने वाले चुनाव की तस्वीर इकतरफा नजर आने लगी है।
कांग्रेस के दंभी नेता आज भी अपनी विचारधारा छोड़ने तैयार नहीं हैं। जो विचारधारा अप्रासंगिक हो चली। समय की आंधी ने जिसके परखचे उड़ा दिए उसे ही गले लगाए बैठी कांग्रेस को आने वाला पंद्रह अगस्त एक तगड़ा पंच साबित होने वाला है। जब प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी लाल किले से देश को संदेश देंगे और बताएंगे कि उनकी सरकारों ने क्या बदलाव किए हैं जो जनता महसूस कर रही है तो देश की जनता को अपना मानस बनाने में सरलता होगी।
विकास की ये कहानी तब लिखी जा रही है जब सरकारी बैंक ऊंची दूकान फीका पकवान बनकर असहयोग कर रहे हैं। सरकारी बैंकों का स्थापना व्यय उपभोक्ता कंपनियों के लिए तो मुनाफे का सौदा बना हुआ है जबकि आम जनता बैंकों के राष्ट्रीयकरण से लेकर अब तक वंचित बनी रही है। आज जब हर नागरिक को बैंक की चौखट तक पहुंचाने का प्रयास चल रहा है तब सरकारी बैंक हांफ रहे हैं। इसके विपरीत निजी क्षेत्र के स्माल फाईनेंस बैंक तक धड़ल्ले से आगे बढ़ते जा रहे हैं। आईडीएफसी फर्स्ट बैंक हो या इक्विटास स्माल फाईनेंस बैंक, एयू स्माल फाईनेंस बैंक, बंधन बैंक सभी तेजी से लोन बांट रहे हैं और मुनाफा बटोर रहे हैं। इसके विपरीत सरकारी बैंक ग्राहकों के धन की अघोषित चोरियां कर रहे हैं। कोई टीडीएस के नाम पर रकम उड़ा रहा है तो कोई बैंक लाकर के किराए के नाम पर ऊटपटांग बिलिंग कर रहा है। इसके बावजूद निगरानी तंत्र खामोश है।
मध्यप्रदेश की सुशासन और विकास रिपोर्ट-2022 के अनुसार राज्य में आए बदलाव से मध्यप्रदेश बीमारू से विकसित प्रदेशों की पंक्ति में उदाहरण बन कर खड़ा हुआ है। इस उपलब्धि में प्रदेश में जन-भागीदारी से विकास के मॉडल ने अहम भूमिका निभाई है। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के नेतृत्व में केन्द्र और राज्य की डबल इंजन सरकार ने मध्यप्रदेश को अन्य राज्यों के लिये अनुकरणीय बना दिया है। इस अरसे में सड़क, बिजली, पानी, कृषि, पर्यटन, जल-संवर्धन, सिंचाई, निवेश, स्व-रोजगार और अधो-संरचना विकास के साथ उन सभी पहलुओं पर सुविचारित एवं सर्वांगीण विकास की नवीन गाथा लिखी गई जो जन-कल्याण के साथ विकास के लिये जरूरी हैं।
बेहतर वित्तीय प्रबंधन और चौतरफा विकास से आज प्रदेश की विकास दर 19.7 प्रतिशत है, जो देश में सर्वाधिक है। देश की अर्थ-व्यवस्था में मध्यप्रदेश 4.6 प्रतिशत का योगदान दे रहा है। सकल घरेलू उत्पाद में बीते दशक में 200 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। मध्यप्रदेश की आर्थिक वृद्धि दर निरंतर बढ़ रही है। वर्ष 2001-02 में 4.43 प्रतिशत की दर आज बढ़ कर 16.43 प्रतिशत हो गई है प्रदेश का सकल घरेलू उत्पाद 71 हजार 594 करोड़ रूपये से बढ़ कर 13 लाख 22 हजार 821 रूपये हो गया है। वर्ष 2001-02 में प्रति व्यक्ति आय 11 हजार 718 रूपये थी, जो वर्ष 2022-23 में बढ़ कर एक लाख 40 हजार 583 रूपये हो गई है। राज्य की जीएसडीपी की वृद्धि दर विगत एक दशक में राष्ट्रीय जीडीपी वृद्धि दर से अधिक रही है।
विकास प्रक्रिया में राज्य का अधो-संरचना विकास निरंतर हो रहा है। अधो-संरचना बजट जो वर्ष 2002-03 में 3873 करोड़ रूपए था, वह वर्ष 2023-24 में बढ़ कर 56 हजार 256 करोड़ रुपए हो गया है। एक समय था जब बिजली आती कम थी और जाती ज्यादा थी। आज प्रदेश बिजली क्षेत्र में आत्म-निर्भर है और 24 घंटे बिजली की उपलब्धता है। वर्ष 2003 में ऊर्जा क्षमता 5173 मेगावाट थी, जो बढ़ कर 28 हजार मेगावाट हो गई है।
अच्छी सड़कें विकास की धुरी होती है। एक समय था, तब यह पता ही नहीं चलता था कि सड़क में गड्डे हैं या गड्डे में सड़क है। अब गाँव-गाँव, शहर-शहर अच्छी गुणवत्तायुक्त सड़कों का जाल बिछाया गया हैं। शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में वर्ष 2001-02 में 44 हजार किलोमीटर सड़कें थी, अब 4 लाख 10 हजार किलोमीटर सड़कें बन गई हैं। राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजना में लगभग 1500 किलोमीटर लंबाई के 40 हजार करोड़ की लागत के 35 कार्य स्वीकृत हैं। अटल, नर्मदा और विंध्य प्रगति पथ के साथ मालवा, बुंदेलखंड और मध्य विकास पथ निर्मित किए जा रहे हैं।
प्रदेश में सभी रेलवे क्रॉसिंग समाप्त करने के लिए 105 रेलवे ओवर ब्रिज के साथ 334 पुलों का निर्माण हो रहा है। साथ ही 86 हजार करोड़ से अधिक की रेल परियोजनाओं के कार्य चल रहे हैं। वर्ष 2009 से 2014 के बीच जहाँ प्रदेश को औसतन 632 करोड़ रूपए का रेलवे बजट मिलता था, वहीं वर्ष 2022-23 में 13 हजार 607 करोड़ का रेलवे बजट प्रावधान मिला है, जो इक्कीस गुना अधिक है। अमृत भारत रेलवे स्टेशन योजना में प्रदेश के 80 रेलवे स्टेशन विश्व स्तरीय बनाए जाएंगे। अत्याधुनिक रानी कमलापति स्टेशन देश में एक मॉडल बना है। एक वंदे भारत ट्रेन प्रारंभ हो चुकी है.
प्रदेश में कृषि को लाभ का धंधा बनाना के लिए सिंचाई क्षमताओं का निरंतर विकास किया जा रहा है। वर्ष 2003 में सिंचाई क्षमता केवल 7 लाख 68 हजार हेक्टेयर थी, जो वर्ष 2022 में बढ़ कर 45 लाख हेक्टेयर से अधिक हो गई है। वर्ष 2025 तक सिंचाई क्षमता को बढ़ा कर 65 लाख हेक्टेयर किये जाने पर भी तेजी से काम किया जा रहा है। हर घर जल से नल योजना पर तेज गति से कार्य हो रहा है, अभी तक लगभग 50% घरों तक नल से जल पहुँच चुका है। कृषि विकास दर जो वर्ष 2002-03 में 03 प्रतिशत थी, वह वर्ष 2020-21 में बढ़ कर 18.89 प्रतिशत हो गई है। खेती और एलाइड सेक्टर का बजट भी 600 करोड़ से बढ़ कर 53 हजार 964 करोड़ हो गया। खाद्य उत्पादन भी इस अवधि में 159 लाख मीट्रिक टन से बढ़ कर 619 लाख मीट्रिक टन हो गया है।
उद्यानिकी फसलों का रकबा 4 लाख 67 हजार हेक्टेयर से बढ़ कर 25 लाख हेक्टेयर हो गया है। फसल उत्पादन 224 लाख मीट्रिक टन से बढ़ कर 725 लाख मीट्रिक टन से अधिक हो गया है। फसल उत्पादकता 1195 किलोग्राम से बढ़ कर 2421 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर हो गई है। किसान-कल्याण के ध्येय से प्रदेश में गत 3 वर्षों में फसलों की नुकसानी पर 4000 करोड़ से अधिक की राहत राशि वितरित की गई है। प्रदेश के 11 लाख से अधिक डिफाल्टर किसानों का 2123 करोड़ का ब्याज माफ करने के लिए मुख्यमंत्री कृषक ब्याज माफी योजना प्रारंभ की गई है। पिछले 3 वर्षों में किसानों को विभिन्न शासकीय योजनाओं में 2 लाख 69 हजार 686 करोड़ रुपये से अधिक के हितलाभ वितरण किए गए हैं। फसल क्षति प्रतिपूर्ति दरों में भी कई गुना वृद्धि की गई है।
कांग्रेस जहां एक तरफ मुफ्तखोर प्रभावशाली वर्ग को सहेजने का जतन कर रही है वहीं भाजपा ने हर घर तक अपनी योजनाओं का लाभ पहुंचाया है। ऐसे में अब भाजपा को केवल नई भाजपा ही मात दे सकती है। कांग्रेस के हौसलों की हवा दिन ब दिन निकलती नजर आ रही है। -

सिंधिया जी की पहल से आर्थिक विकास की राह प्रशस्त हुईःडॉ.प्रभुराम चौधरी
भोपाल, 27 जुलाई(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)। प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री डॉ.प्रभुराम चौधरी ने कहा है कि सिंधिया घराना हमेशा जनता की बेहतरी के उपाय करता रहा है यही वजह है कि जनता हमेशा से सिंधिया परिवार के प्रति आशा की निगाह से देखती है। प्रदेश में जब कुछ स्वार्थी तत्वों ने आर्थिक सुधारों की चाल बिगाड़ी तो श्रीमंत ज्योतिरादित्य सिंधिया ने आगे आकर जनता का मार्ग प्रशस्त किया। हम विकास के जिन सिद्धांतों पर अमल कर रहे हैं उससे राज्य को आर्थिक महाशक्ति बनाने में मदद मिलेगी।
स्वास्थ्य मंत्री ने अपने व्यस्त कामकाज के बीच वक्त निकालकर पत्रकार साथियों से कहा कि मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की सरकार तो तिहरे इंजन की सरकार है। मोदी सरकार की नीतियों के साथ शिवराज जी की जन जन से जुडाव की नीतियां और ज्योतिरादित्य सिंधिया के आर्थिक विकास के फार्मूले सभी एक साथ प्रदेश की स्वर्णिम इबारत लिख रहे हैं।
उन्होंने कहा कि जन स्वास्थ्य को बेहतर बनाने के लिए हमने जहां अस्पतालों की व्यवस्थाएं सुधारी हैं वहीं हम दवा सप्लाई का पूरा नेटवर्क खड़ा कर रहे हैं। हमने फार्मा सेक्टर में आ रहे बदलावों के साथ चलने के लिए पूरा खाका तैयार किया है। इससे हम न केवल जनता को सस्ती दवाईयां मुहैया करा पाएंगे बल्कि हम दवा निर्माण का हब भी बनने जा रहे हैं। मोदी जी की सरकार ने मेक इन इंडिया का जो नारा दिया था हम दवा निर्माण के ऐसे फार्मूले लागू कर रहे हैं कि जल्दी ही मध्य प्रदेश दवा निर्माण के लिए दुनिया भर की बड़ी कंपनियों का चहेता राज्य बन जाएगा।
डॉ.प्रभुराम चौधरी ने कहा कि प्रदेश में डाक्टरों की कमी को दूर करने के साथ हम आधुनिक तकनीकों का भी इस्तेमाल कर रहे हैं जिससे लोगों को उनके घरों के आसपास ही स्वास्थ्य सुविधाएं मिलने लगी हैं। जो इलाके छूट गए हैं उन्हें जल्दी ही कवर कर लिया जाएगा। -

आर्थिक सुधारों के साथ चलें तो घर घर बरसेगी खुशहालीःजगदीश देवड़ा
भोपाल,27 जुलाई(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)। मध्यप्रदेश के वित्तमंत्री जगदीश देवड़ा ने प्रदेश के नागरिकों से कहा है कि भारत सरकार जो वित्तीय सुधार लागू कर रही है वे आजादी के बाद से अपेक्षित थे। जनता इन सुधारों के साथ कदमताल करेगी तो जल्दी ही घर घर में खुशहाली फैल जाएगी। कटनी दौरे से लौटने के बाद आज पत्रकारों से मुलाकात में उन्होंने प्रदेश के मजबूत होते वित्तीय ढांचे को लेकर कई संकेत दिए। उन्होंने कहा कि प्रदेश में जिस तरह आधारभूत ढांचे को विकसित किया गया है उसका लाभ प्रदेश की जनता भरपूर उठा रही है। लोगों की अपेक्षाएं बढ़ीं हैं और सरकार उन्हें पूरा करने का हर संभव प्रयास कर रही है।
पत्रकारों के सवालों के जवाब में हरफन मौला वित्तमंत्री श्री देवड़ा ने कहा कि आर्थिक चुनौतियों के बीच जिन परिवारों की समरसता बिगड़ रही है उन्हें हमारी सांस्कृतिक विरासत से प्रेरणा लेनी चाहिए। हमारे देश में बचत की परंपरा बहुत मजबूत रही है अब हमें अपने आर्थिक संसाधनों को बढ़ाने के तरीके सीखना होंगे। भारत सरकार की वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने टैक्स में छूट की जो सीमा बढ़ाई है उससे काली अर्थव्यवस्था समाप्त होगी। भारत का विदेशी व्यापार संतुलन सुधरेगा और लोगों की आय बढ़ेगी।सबसे बड़ी बात है कि लोगों के जीवन में सुकून बढ़ेगा अब तक जिन छोटे और मध्यम आयवर्ग के लोगों को अपनी आय छिपानी पड़ती थी वे अब बेखौफ होकर अपना जीवनयापन कर पाएंगे।
वित्तमंत्री ने कहा कि केन्द्र सरकार ने जिस तरह माईक्रोफाईनेंस और सूक्षम व लघु उद्योगों को अवसर दिए हैं, किसानों के लिए एफपीओ गठित किए हैं, सहकारिता के क्षेत्र को मजबूत बनाया है उससे जल्दी मुद्रा निर्माण बढ़ेगा और देश की क्षमताओं का उचित प्रतिफल हम जन जन तक पहुंचा पाएंगे। उन्होंने कहा कि लोग वित्तीय प्रबंधन की बारीकियां समझ रहे हैं और सरकार पर उनकी निर्भरता घट रही है। हमारा प्रयास है कि लोग लाचार न रहें और वे अपने हुनर का इस्तेमाल करके खूब समृद्धि हासिल करें।
एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश सरकार कुशल वित्तीय प्रबंधन के माध्यम से जनता को लाभ पहुंचाने वाले वित्तीय संस्थानों की पहचान कर रही है और उन्हें भरपूर संरक्षण भी दे रही है। हम ढर्रे की सोच से बाहर निकलना चाहते हैं। प्रदेश की पुरानी परंपराओं के साथ हमने कई ऐसे नवाचार भी किए हैं जो आज जनता की समृद्धि के प्रकाश स्तंभ बनते जा रहे हैं। -

सरकारी कालेजों को दुबारा बजट देकर किसने किया भ्रष्टाचार
भोपाल, 21 जुलाई,(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर) उच्च शिक्षा विभाग के महाविद्यालय जोकि शिक्षा की सबसे ऊंची इकाई मानी जाती है,उनकी गरिमा ताक पर रखकर नियम विरुद्ध प्रक्रियाओं से उन्हें भ्रष्टाचार का केंद्र बनाया जा रहा है | उच्च शिक्षा विभाग ने अपने पत्र क्रमांक 291/272/आउशि/योजना/2023 दिनांक 6.6.23से महाविद्यालयों की एक सूची प्रकाशित की थी जिसमें यह निर्देश दिए गए थे की जो महाविद्यालय विश्व बैंक पोषित योजना ऑब्लिक रूसा योजना अंतर्गत आ रहे हैं उन कॉलेजों को प्रस्ताव नहीं भेजना है इन महाविद्यालयों को सम्मिलित नहीं किया जाएगा इसका प्रमाण पत्र भी कॉलेजों से मंगवाया गया था उसके बावजूद उन्हीं कॉलेजों को दुबारा बजट आवंटन कर दिया गया I जिन कॉलेजों पिपरई, मंदसौर पी जी कॉलेज , मंदसौर गर्ल्स ,नलखेडा , दालोदा को पिछले साल बजट आवंटित हुआ था उन्हें इस बार फिर बजट आबंटित कर दिया गया। उच्च अधिकारियों ने ही इस प्रक्रिया को डबल अपनाने के आदेश जारी किए हैं।
यह प्रक्रिया प्रदेश के उच्च शिक्षा विभाग के अधिकांश महाविद्यालयों में एक जैसी की जा रही है और एक ही व्यक्ति विशेष फर्म एवं अधिकारियों को लाभ दिलाने की दृष्टि से यह कार्य किया जा रहा है| उच्च शिक्षा विभाग द्वारा वर्तमान में नामली ,जीरन,रावती ,अजयगढ़,मंदसौर , पवई,पिपरई , जैतवारा ,नलखेडा ,दलोदा एवं अन्य महाविद्यालयों को बजट आवंटित किया गया है निविदा की शर्त निम्नानुसार है :-1.सभी महाविद्यालय की निविदा में निविदाकारो से समस्त उत्पादों कि टेस्ट रिपोर्ट थर्ड पार्टी अन्य लैब से चाही गयी है, जबकि निर्माता द्वारा प्रदाय किये जा रहे उत्पादों को निर्माता कंपनी द्वारा अपनी टेस्टिंग लैब में टेस्ट करवाकर ही सप्लाई कर दिया गया। निविदा में न्यूनतम दर आने वाली फर्म को सामान देने के पूर्व थर्ड पार्टी इंस्पेक्शन/विभाग की तकनीकी समिति से कराना होता है I
2.सभी महाविद्यालय कि निविदा में निविदाकार का पास्ट एक्सपीरियंस 50% मांगा गया है जिसमे बिड वैल्यू नहीं दर्शायी गई है। जिससे निविदाकार का पास्ट एक्सपीरियंस 50% उपकरणों कि संख्या के आधार पर आकलन होना है I जबकि आश्चर्य की बात यह है कि निविदा कि अतिरिक्त निविदा बिंदु क़ 6 की शर्तो में निविदाकार द्वारा पिछले 3 वर्षों में ₹ 1 करोड़ का एकल ऑर्डर एवं ₹ 47- 47 लाख रुपए के पृथक – पृथक दो आर्डर उपलब्ध कराने होंगे नहीं तो निविदा पत्रक के अभाव में अमान्य कर दी जावेगीI
- जेम पोर्टल पर उपलब्ध निविदा क्रमांक GEM/2023/B/3669315 DT. 11.7.23, GEM/2023/B/3669485, DT. 11.7.23, GEM/2023/B/3668564 DT.10.7.23 , GEM/2023/B/3667558 DT.11.7.23 , GEM/2023/B/3667559 Dt.11.7.2023 को प्रकाशित हुई | जिसमें GEM/2023/B/3669315 DT. 11.7.23 निविदा में विभाग का नाम डिपार्टमेंट ऑफ हायर एजुकेशन प्रदर्शित हो रहा है एवं निविदा में ऑर्गेनाइजेशन का नाम गवर्नमेंट कॉलेज ऑफ़ मध्य प्रदेश प्रदर्शित है, निविदा के प्रपत्र में कहीं भी महाविद्यालय का नाम प्रदर्शित नहीं हो रहा है और उच्च शिक्षा विभाग में कोई भी ऐसा महाविद्यालय नहीं है जिसका नाम गवर्नमेंट कॉलेज ऑफ़ मध्य प्रदेश हैI निविदा में धरोहर राशि की मांग की गई है जिसमें बेनेफिशरी के नाम के लिए गवर्नमेंट कॉलेज ऑफ़ मध्य प्रदेश के नाम पर धरोहर राशि जमा करनी है , निविदा में महाविद्यालय का ऐसा कोई भी खाता नंबर नहीं है जिसमें यह राशि जमा की जा सके निविदाकारों के साथ मिलकर महाविद्यालय के अधिकारी/कर्मचारी एवं संस्था विशेष लोगो द्वारा राशी कि बंदरबांट करने का प्रयास किया जा रहा है |
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जनसंवेदना ने सेवा कार्य करके दिखाया:विधानसभा अध्यक्ष गिरीश गौतम
भोपाल,11जुलाई(प्रेस इंफॉर्मेशन सेंटर)जनसंवेदना सामाजिक संस्था के 19 वें स्थापना दिवस पर प्रकाशित मानव सेवा ही माधव सेवा स्मारिका का विमोचन आज विधानसभा परिसर में विधानसभा अध्यक्ष गिरीश गौतम ने किया। इस अवसर पर संस्था के संस्थापक राधेश्याम अग्रवाल ,उदयवीर सिंह एवं कई अन्य गणमान्य लोग भी उपस्थित थे ।
विधानसभा अध्यक्ष श्री गौतम ने कहा कि मानव सेवा ही माधव सेवा के मूल मंत्र से जनसंवेदना अपना सेवा कार्य कर रही है जिससे जरूरतमंदों को सहायता मिल रही है । निराश्रित बेसहारा लावारिस की मृत्यु हो जाने पर उसका अंतिम संस्कार का सेवा कार्य गहरे समर्पण और धीरज से ही संभव है।संस्था ने अपनी उपयोगिता साबित की है
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सहकारी आंदोलन को सार्थक करते मुकुंद राव भैंसारे
भोपाल,27जून( प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)। सहकारिता का क्षेत्र भारत के विकास में एक महत्वपूर्ण भूमिका रखता है। विकास की दौड़ में आज सहकारिता अप्रासंगिक होता नजर आ रहा है, इसके बावजूद मध्य प्रदेश का एक छोटा सा अधिकारी आज सहकारिता को सामाजिक बदलाव की कडी बनाए हुए है। राजधानी भोपाल में जिस तरह से सहकारिता को बदलाव की भूमिका में देखा जा रहा है उसके लिए विभाग के एक डिप्टी ऑडिटर मुकुंद राव भैंसारे पर प्रशासन की भी निगाह है।प्रशासन ने उनके कार्य को पुरस्कृत किया है और सहकारिता के मॉडल के रूप में प्रस्तुत भी
मुकुंदराव भैंसारे को मध्य प्रदेश का सहकारिता विभाग फायर ब्रिगेड की तरह इस्तेमाल करता है । जिस गृह समिति में गड़बड़ियों की शिकायत मिलती है उन्हें वहां प्रशासक के रूप में तैनात कर दिया जाता है । उन्होंने राजधानी के भारत नगर कि जिस तरह से कायापलट की उससे नगर निगम सहकारिता विभाग और प्रशासन का हर तबका अचंभित है ।श्री भैंसारे ने भारत नगर को ना केवल एक साफ-सुथरे मोहल्ले में तब्दील कर दिया है बल्कि उसे आत्मनिर्भर आर्थिक आजादी भी प्रदान की है।इसी के परिणामस्वरूप भारत नगर को स्वच्छता पुरुस्कारों से सम्मानित किया जा चुका है।परिश्रम के इस पुरस्कार ने तीन बार समूचे सहकारिता विभाग की शान बढ़ाई है।
स्वच्छता के मापदंडों पर खरा उतरने वाले भारत नगर को मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने द्वितीय पुरस्कार से सम्मानित किया था। भोपाल नगर पालिक निगम क्षेत्र में अव्वल आने वाली ये एकमात्र रहवासी समिति है जिसका संचालन राज्य का सहकारिता विभाग कर रहा है। विभाग की ओर से नियुक्त तत्कालीन प्रशासक मुकुंद राव भैंसारे के आव्हान पर रहवासियों ने विभिन्न चरणों में सफल सामाजिक आयोजन किए थे।
रोहित नगर के रहवासी लंबे समय से अपने प्लाट पर मकान बनाने के लिए निवर्तमान पूर्व अध्यक्ष घनश्याम सिंह राजपूत के घर के चक्कर काट रहे थे । उन्हें उनकी जमीन ही नहीं मिल रही थी ।समिति के 550 सदस्यों में से 330सदस्य अपना आशियाना आज भी तलाश रहे हैं।श्री भैसारे ने कार्यभार संभालने के बाद खाली पड़ी लगभग ढाई एकड़ जमीन पर प्लाट दर्शाने की कार्यवाही शुरू कर दी।उन्होंने चुनाव कराने की भी प्रक्रिया जारी रखी है। एक स्कूल संचालक जो इस जमीन पर कब्जा जमाना चाहता था उसने अपने राजनीतिक संबंधों का इस्तेमाल करके श्री भैंसारे को हटाने का षड्यंत्र रचा लेकिन उनके कुशल प्रशासन को देखकर आला अफसरों ने रोहित नगर की विकास यात्रा बदस्तूर जारी रखी। इस गृह निर्माण समिति के नागरिकों की दूसरी पीढ़ी अपने हक की लड़ाई लड़ रही है। सहकारिता विभाग के अफसर अपने सामाजिक उद्देश्यों को पूरा करने के लिए आज संकल्पित होकर खड़े हैं।मैदान में उनके बुलंद इरादों को साकार करने की जवाबदारी श्री भैंसारे कुशलता पूर्वक निभा रहे हैं,ये राहत की बात है।
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भाजपा ने प्रदेश में जो विकास किया वो कांग्रेस के पोस्टरों से नहीं छिपेगा : विष्णुदत्त शर्मा
भोपाल,24 जून(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)।जनता ने जब कांग्रेस के कुशासन को खारिज करके 2003 में भाजपा को सत्ता सौंपी तबसे लेकर अब तक उसने प्रदेश को सम्मान, समृद्धि और विकास की हर कसौटी पर अव्वल बनाया है। पहले मध्यप्रदेश दुरावस्था का शिकार और बीमारू राज्य था। भ्रष्टाचार का बोलबाला था । सड़क, बिजली, पानी के लिए जनता तरस रही थी। मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान के नेतृत्व वाली भाजपा की सरकार ने प्रदेश को उस स्थिति से निकाल कर विकसित प्रदेश बनाया। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ के अपने ही लोगों ने जिस तरह से उनके भ्रष्टाचार का कच्चा चिट्ठा खोला है, उससे बौखलाई कांग्रेस मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान पर अनर्गल आरोप लगा रही है। लेकिन कांग्रेस अपने इन कुत्सित प्रयासों से न तो अपने भ्रष्टाचार को छिपा सकती है और न ही भाजपा सरकार के प्रयासों से किए गए विकास को झुठला सकती है। कांग्रेस ने अपनी हरकत से प्रदेश में हुए विकास के अपमान का जो प्रयास किया है, उसका जवाब प्रदेश की जनता देगी। यह बात भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष व सांसद विष्णुदत्त शर्मा ने शनिवार को प्रदेश कार्यालय में पत्रकार वार्ता को संबोधित करते हुए कही।
प्रदेश अध्यक्ष श्री शर्मा ने कहा कि हाल ही में शहर में कुछ ऐसे पोस्टर लगे थे, जिनमें प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ को करप्शननाथ बताया गया था और पोस्टर को स्कैन करने पर उनके भ्रष्टाचार का कच्चा-चिट्ठा सामने आ जाता था। कांग्रेस इस पोस्टर से बौखला गई है, लेकिन उसे इस घटना के बारे में गंभीरता से विचार करना चाहिए। यह सोचना चाहिए कि इस घटना के बारे में पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजयसिंह या नेता प्रतिपक्ष डॉ. गोविंद सिंह की कोई प्रतिक्रिया क्यों नहीं आई? कांग्रेस को यह विचार करना चाहिए कि कहीं यह पार्टी में चल रहे अंतर्द्वंद और नेताओं के बेटों के बीच चल रही लड़ाई का परिणाम तो नहीं है?
प्रदेश अध्यक्ष विष्णुदत्त शर्मा ने कहा कि मि. बंटाढार के जमाने में प्रदेश की दुरावस्था किसी से छिपी नहीं है। बाद में 15 महीनों के लिए बनी कांग्रेस की सरकार ने गरीबों के हक छीने। जनहित की सारी योजनाएं बंद कर दीं। इंदौर में आईफा अवार्ड के लिए करोड़ों का प्रावधान किया, लेकिन मैचिंग ग्रांट न होने का बहाना बनाकर लाखों प्रधानमंत्री आवास लौटा दिए और गरीबों के सिर से छत छीन ली। श्री शर्मा ने कहा कि कांग्रेस सरकार के भ्रष्टाचार की स्वीकारोक्ति तो स्वयं कांग्रेस के एक प्रधानमंत्री ने यह कहते हुए दी थी कि हम दिल्ली से 1 रुपया भेजते हैं, तो संबंधित व्यक्ति तक 15 पैसा ही पहुंचता है। उन्होंने कहा कि अगर पोस्टर में कमलनाथ जी को करप्शननाथ लिखा गया था, तो इसमें गलत क्या है? प्रदेश की जनता यह जानना चाहती है कि प्रवीण कक्कड़ और आरके मिगलानी के यहां से छापे में जो 281 करोड़ रुपये नकद मिले थे, वो कहां से आए? श्री शर्मा ने कहा कि कांग्रेस की सरकार के समय में वरिष्ठ नेता डॉ. गोविंद सिंह और कुछ कैबिनेट मंत्रियों ने ही यह आरोप लगाए थे कि सरकार भ्रष्टाचार में आकंठ डूबी है और उसका पैसा ऊपर तक जाता है। श्री शर्मा ने कहा कि कमलनाथ को यह बताना चाहिए कि उनकी सरकार ने 7 बांध और नहर परियोजनाओं के काम से पहले 877 करोड़ रुपये का भुगतान क्यों किया? ई-टेंडर मामले की आरोपी कंपनी को 244 करोड़ और जनसंपर्क को 131 करोड़ क्यों दिए थे?
श्री शर्मा ने कहा कि आज प्रदेश में सड़कों का जाल बिछा है और बिजली सरप्लस है। मि. बंटाढार के समय प्रदेश में सिर्फ 7 लाख हेक्टेयर में सिंचाई होती थी, आज 45 लाख हेक्टेयर में सिंचाई हो रही है। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी की सरकार ने केन-बेतवा लिंक परियोजना के लिए 44605 करोड़ रुपये का प्रावधान किया है, जिससे सूखा बुंदेलखंड अब हरा-भरा और समृद्ध होगा। मि. बंटाढार के समय प्रदेश का बजट जहां 23161 करोड़ था, उसे श्री शिवराजसिंह चौहान की सरकार ने 3.14 लाख करोड़ से ऊपर पहुंचा दिया है। प्रदेश की आर्थिक वृद्धि दर जो उस समय 4.4 प्रतिशत थी, आज 16.43 प्रतिशत है। प्रदेश का सकल घरेलू उत्पाद 71594 करोड़ रुपये से बढ़कर 1322821 करोड़ रुपये हो गया है। प्रतिव्यक्ति आय 11718 रुपये से 1,40,583 करोड़ रुपये हो गई है। श्री शर्मा ने कहा कि भाजपा की केंद्र और राज्य सरकार हर गरीब का जीवन बदलने का अभियान चला रही हैं और इसी अभियान के अंतर्गत प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी 1 करोड़ से अधिक आयुष्मान कॉर्ड वितरित करेंगे, ताकि गरीबों को मुफ्त उपचार मिल सके। उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने जिस तरह झूठ, छल कपट का सहारा लिया था, उससे प्रदेश के किसान डिफाल्टर हो गए थे। इन किसानों के 2100 करोड़ रुपये प्रदेश की शिवराज सरकार ने चुकाये हैं। श्री शर्मा ने कहा कि भाजपा की सरकारें गुड गवर्नेंस, सेवा के भाव, गरीब कल्याण और विकास के मंत्र पर काम कर रही हैं और इन नीतियों से प्रदेश की जिस गरीब जनता के चेहरे पर मुस्कान खिली है, वही जनता कांग्रेस को उसकी हरकत का जवाब देगी।
प्रदेश अध्यक्ष श्री शर्मा ने कहा कि आज का दिन मध्यप्रदेश और पूरे देश के लिए बड़ा महत्वपूर्ण दिन है। भारतीय इतिहास में आज ही के दिन रानी दुर्गावती का बलिदान हुआ था। श्री शर्मा ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी कहते हैं कि देश का चहुंमुखी विकास करेंगे, लेकिन विकास के साथ ही अपनी विरासत को भी संजोकर रखेंगे। श्री शर्मा ने रानी दुर्गावती को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि भारतीय जनता पार्टी की यही सोच उसके निर्णयों में भी परिलक्षित होती है। मध्यप्रदेश में हमारी सरकार ने ऐसे जनजातीय क्रांतिवीरों, योद्धाओं और महानायकों की स्मृतियों को संजोने के लिए कदम उठाए हैं, जिनका देश की आजादी व भारतीय इतिहास में बड़ा योगदान रहा है। इसी को देखते हुए जनजातीय गौरव दिवस मनाने की शुरूआत की गई।
प्रदेश अध्यक्ष श्री शर्मा ने कहा कि प्रदेश भाजपा के लिए 27 जून बहुत ही महत्वपूर्ण है। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी अपनी अमेरिका की ऐतिहासिक यात्रा पूरी करके भारत आएंगे और उसके बाद उनका पहला दौरा भोपाल का होगा। यहां पार्टी कार्यकर्ता रोड शो के माध्यम से उनका स्वागत करेंगे, जिसकी तैयारियां चल रही हैं। प्रधानमंत्री भोपाल में मेरा बूथ सबसे मजबूत के संकल्प को लेकर देश के 3 हजार बूथ कार्यकर्ताओं से संवाद करेंगे। इस दौरान प्रधानमंत्री देश के 10 लाख बूथों से डिजिटली जुड़े रहेंगे। यहां से प्रधानमंत्री जी शहडोल जाएंगे, जहां रानी दुर्गावती गौरव यात्रा का समापन करेंगे और आयुष्मान हितग्राहियों को कार्ड का वितरण करेंगे। इससे पहले 26 जून को राष्टीय अध्यक्ष जेपी नड्डा भोपाल आएंगे। श्री शर्मा ने कहा कि प्रधानमंत्री जी और राष्ट्रीय अध्यक्ष के स्वागत के लिए प्रदेश का एक-एक कार्यकर्ता उत्साहित और आतुर है। मध्यप्रदेश की धरती पर उनका भव्य एवं ऐतिहासिक स्वागत किया जाएगा। -

बाजार बैठकी से ठेकेदार बाहर, रोज नहीं होगी वसूली
भोपाल,15 जून( प्रेस इंफार्मेशन सेंटर) नगरीय विकास एवं आवास मंत्री भूपेन्द्र सिंह ने सभी नगरपालिक निगम आयुक्तों और मुख्य नगरपालिका अधिकारियों को निर्देशित किया है कि ठेकेदारों के माध्यम से बाजार बैठकी-तहबाजारी शुल्क की वसूली नहीं की जाए। साथ ही इसकी प्रतिदिन वसूली भी नहीं होना चाहिए। उल्लेखनीय है कि मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान द्वारा 29 मई 2023 को हाथठेला, फेरी एवं रेहड़ी वालों की महापंचायत में हितग्राहियों के अनुरोध पर बाजार बैठकी-तहबाजारी शुल्क की प्रतिदिन की वसूली और वसूली में ठेकेदारी प्रथा को बंद करने की घोषणा की गई थी।

मंत्री श्री सिंह ने कहा है कि जिन नगरीय निकायों में बाजार बैठकी-तहबाजारी शुल्क की प्रतिदिन वसूली के लिये ठेके किये गये हैं, उन्हें प्राप्त होने वाली आय का आकलन करके शेष अवधि के लिये ठेके निरस्त करने की कार्यवाही परिषद की बैठक में की जाए। साथ ही बैठक में प्रतिदिन वसूली के स्थान पर अर्द्धवार्षिक-वार्षिक दरों का निर्धारण किया जाए। की गई कार्यवाही की जानकारी समय-सीमा में आयुक्त नगरीय प्रशासन एवं विकास को भेजने के निर्देश भी दिए गए हैं।
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सतपुड़ा भवन में भीषण आग,एयरकंडीशनर फटे
भोपाल, 12 जून( प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)। मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल के सतपुड़ा भवन में सोमवार को आग लग गई। तीसरी मंजिल से शुरू हुई यह आग देखते ही देखते छठी मंजिल तक पहुंच गई। देर रात तक आग नहीं बुझाई जा सकी थी। इस आग से बड़ी संख्या में महत्वपूर्ण दस्तावेज और फर्नीचर जल गया है। 30 से ज्यादा एयर कंडीशनरों में ब्लास्ट होने की बात कही जा रही है। कांग्रेस ने आग लगने की टाइमिंग पर सवाल किए हैं। आरोप लगाया है कि शिवराज सरकार की चला-चली की बेला है। इस वजह से आग लगाकर घोटालों की फाइलें जलाई गई हैं। वहीं सीएम शिवराज ने पीएम नरेंद्र मोदी, गृहमंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह को जानकारी दी है। वायुसेना की मदद मांगी है।
जानकारी के मुताबिक आग सोमवार को करीब चार बजे लगी। आग की शुरुआत अनुसूचित जनजाति क्षेत्रीय विकास योजना के दफ्तर से हुई। फिर चौथी मंजिल पर स्थित स्वास्थ्य संचालनालय को भी इसने अपनी चपेट में ले लिया। पहले तो कर्मचारियों और सुरक्षाकर्मियों ने आग बुझाने की कोशिश की, लेकिन वे उस पर काबू नहीं पा सके । एसी में ब्लास्ट हुए, जिससे आग तेजी से फैली। आग की वजह से पूरी इमारत में हड़कम्प मच गया। सीआईएसएफ और एसडीईआरएफ की टीमें भी मौके पर पहुंचीं। आग के कारणों का पता नहीं चल सका है। अधिकारियों का कहना है कि जांच समिति की निगरानी में आग से हुई क्षति का अनुमान लगाया जाएगा। सतपुड़ा भवन में कई विभागों के संचालनालय हैं, जिनमें आईएएस अफसर भी बैठते हैं।
मुख्यमंत्री चौहान ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से फोन पर चर्चा कर उन्हें सतपुड़ा में दुर्भाग्यपूर्ण आगजनी की घटना की जानकारी दी। मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री मोदी को आग बुझाने के प्रदेश सरकार के प्रयासों और केंद्र सरकार के विभिन्न विभागों (आर्मी, एयरफोर्स, भेल, सीआईएएसएफ, एयरपोर्ट एवं अन्य) से मिली मदद से भी अवगत कराया। प्रधानमंत्री ने मुख्यमंत्री को केंद्र से हरसंभव मदद का आश्वासन दिया।
मुख्यमंत्री चौहान ने गृहमंत्री अमित शाह से फोन पर चर्चा कर सतपुड़ा भवन में आग की घटना की जानकारी दी एवं आवश्यक मदद मांगी। सतपुड़ा के जिन मंजिलों में आग लगी है, वहां मूलतः तीन विभाग हैं, आदिम जाति कल्याण विभाग, परिवहन विभाग और स्वास्थ्य विभाग । तीसरी, चौथी, पांचवीं व छठवीं मंजिल में इनमें से किसी भी विभाग का टेंडर, प्रैक्योरमेंट संबंधित कोई भी कार्य नहीं होता है। मूलतः यहां स्थापना संबंधित विभागीय कार्य होते हैं। मुख्यमंत्री चौहान ने गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा को भी सतपुड़ा भेजा और सुरक्षा उपायों की निगरानी करने को कहा है।
इधर मुख्यमंत्री शिवराज सिंह ने रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह से भी बात की। उन्होंने आग बुझाने के लिए एयरफोर्स की मदद मांगी। रक्षा मंत्री ने एयरफोर्स को निर्देशित किया। रक्षा मंत्री के निर्देश पर एएन 32 विमान और एमआई 15 हेलीकॉप्टर भोपाल पहुंचने के निर्देश दिए थे लेकिन आग पर काबू कर लिया गया है। आग दुबारा न भड़क सके और विमानों व हेलीकाप्टरों की आवाजाही सुनिश्चित हो सके इसके लिए एयरपोर्ट को रात भर खुला रखा गया है।
मुख्यमंत्री चौहान ने आग के प्रारंभिक कारणों को जानने के लिए कमेटी घोषित की है। कमेटी में एसीएस होम राजेश राजौरा, पीएस अर्बन नीरज मंडलोई, पीएस पीडब्ल्यूडी सुखबीर सिंह और एडीजी फायर रहेंगे। कमेटी जांच के प्रारंभिक कारणों का पता कर रिपोर्ट मुख्यमंत्री चौहान को सौंपेगी।
सूत्रों का दावा है कि स्वास्थ्य विभाग के कई मामलों की शिकायत ईओडब्ल्यू और लोकायुक्त को हुई थी। इनसे जुड़ी जांच की फाइलों को भी आग से नुकसान पहुंचा है। इसी तरह आदिम जाति विभाग और स्वास्थ्य विभाग के कई अन्य महत्वपूर्ण दस्तावेज भी जले हैं। स्वास्थ्य विभाग में कुछ महीनों पहले रिनोवेशन का काम हुआ था। पुरानी अलमारियों और फर्नीचर को निकाला गया था, जिसे आग ने पूरी तरह नष्ट कर दिया।
आदिम जाति विभाग के दफ्तर को सबसे अधिक नुकसान पहुंचा है। आग तीसरी मंजिल पर ही लगी थी। आग की लपटों की वजह से फर्नीचर पूरी तरह से जल गया। पांचवें और छठी मंजिल पर रखा सामान भी जला है। प्लास्टर टूटकर गिर गया है। पूरी इमारत में मधुमक्खियों के पुराने छत्ते हैं। इस वजह से छत्तों से मधुमक्खियों के उड़ने की दहशत भी थी।
सतपुड़ा भवन में इससे पहले भी आग लग चुकी है। 25 जून 2012 में भी चौथी मंजिल पर आग लगी थी। तब यहां तकनीकी शिक्षा विभाग का दफ्तर था। यह आग शॉर्ट सर्किट से लगी थी।
पूर्व केंद्रीय मंत्री और कांग्रेस नेता अरुण यादव ने सतपुड़ा भवन में लगी आग पर सवाल उठाया है। उन्होंने ट्वीट किया कि प्रियंका गांधी जी ने जबलपुर में “विजय शंखनाद रैली” में घोटालों को लेकर हमला बोला तो सतपुड़ा भवन में भीषण आग लग गई। इसमें महत्वपूर्ण फाइलें जलकर राख हो गई है। कहीं आग के बहाने घोटालों के दस्तावेज जलाने की साज़िश तो नहीं। यह आग मप्र में बदलाव के संकेत दे रही है। पूर्व मंत्री और विधायक जीतू पटवारी ने कहा कि पचास प्रतिशत कमीशन वाली सरकार ने अपने दस्तावेज जला दिए। सितंबर 2018 में भी सतपुड़ा भवन में भी आग लगी थी। सर्वे कांग्रेस के पक्ष में है। आम लोगों में राय है कि कांग्रेस की सरकार आ रही है। साफ है कि भ्रष्टाचार छिपाने के लिए आग लगी है। मेरा मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान से सीधा सवाल है – यह आग लगी है या लगाई गई है? आम तौर पर माना जाता है कि चुनाव से पहले सबूत मिटाने के लिए सरकार ऐसी ‘हरकत’ करती है! हार रही है भाजपा। अब यह भी बताए कि पुराने ‘अग्निकांड’ में दोषी कौन थे? किसे/कितनी सजा मिली? -

जनजातीय ग्रामसभाओं की ताकत है पेसा एक्टःशिवराज
भोपाल 2 जून(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)। मुख्यमंंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा है कि बड़ा देव भगवान में हमारी गहरी आस्था और श्रद्धा है। सीधी जिले के कुसमी गौरव दिवस पर बड़ा देव भगवान के नव-निर्मित मंदिर में बड़ा देव भगवान की मूर्ति की प्राण-प्रतिष्ठा कार्यक्रम में शामिल होते हुए हृदय प्रफुल्लित है। मुख्यमंत्री ने भगवान बड़ा देव से प्रदेशवासियों के सुख-समृद्धि और निरंतर प्रगति-पथ पर अग्रसर होने की कामना की। मुख्यमंत्री श्री चौहान सीधी जिले के कुसमी गौरव दिवस पर बड़ा देव मूर्ति कुसमी की प्राण-प्रतिष्ठा के अवसर पर जनजातीय सम्मेलन को छतरपुर में वीडियो कांफ्रेंसिंग से संबोधित कर रहे थे।
मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि प्रदेश में पेसा एक्ट से जनजातीय विकासखंडों की ग्राम सभाओं को अधिकार सम्पन्न बनाया गया है। प्रदेश की 268 ग्राम सभाएँ स्वयं तेंदूपत्ता तुड़ाई का कार्य कर रही हैं। ग्राम सभाओं को गाँव में शराब की दुकान खोलने का फैसला करने का अधिकार दिया गया है। गाँव में छोटे-छोटे विवादों के निराकरण के लिए शांति और विवाद निवारण समितियाँ बनी हैं। गाँव से यदि किसी श्रमिक को काम के लिए बाहर ले जाया जाता है तो उसकी सूचना ग्राम सभा को देनी होती है।
मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि प्रदेश सरकार सभी वर्गों के विकास के लिए निरंतर कार्य कर रही है। महिलाओं के आर्थिक स्वावलंबन के लिए मुख्यमंत्री लाड़ली बहना योजना में 10 जून से प्रत्येक पात्र बहन के खाते में एक हजार रूपये डाले जाएंगे। इससे बहनों को अपनी छोटी-छोटी जरूरतों के लिए किसी के आगे हाथ नहीं फैलाना पड़ेगा। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी द्वारा गरीबों के कल्याण के लिए अनेक योजनाओं का संचालन किया जा रहा है। सभी को निःशुल्क खाद्यान्न, प्रधानमंत्री आवास योजना से पक्का आवास, बीमारी पर आयुष्मान कार्ड से निःशुल्क इलाज की सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है। प्रदेश में मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना से बेटियों का धूमधाम से विवाह संपन्न किया जा रहा है। किसानों को केंद्र तथा राज्य सरकार द्वारा प्रतिवर्ष 10 हजार रुपये की सम्मान निधि दी जा रही है। मुख्यमंत्री ने कहा कि वे भगवान बड़ा देव की प्रेरणा से निरंतर प्रदेशवासियों की प्रगति के लिए कार्य करते रहेंगे।
जनजातीय कार्य एवं अनुसूचित जाति कल्याण तथा सीधी जिले की प्रभारी मंत्री सुश्री मीना सिंह ने कहा कि मुख्यमंत्री श्री चौहान के कुसमी प्रवास के दौरान जनजातीय समुदाय के लोगों द्वारा भगवान बड़ा देव के मंदिर निर्माण तथा मूर्ति की प्राण-प्रतिष्ठा की माँग की गई थी। मुख्यमंत्री द्वारा पूरी श्रद्धा से माँग को पूरा करते हुए मंदिर का निर्माण कराया गया है।
कार्यक्रम में मुख्यमंत्री लाड़ली बहना योजना के हितग्राहियों को स्वीकृत-पत्र वितरित किए गए। साथ ही कुसमी क्षेत्र के विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले नागरिकों को सम्मानित किया गया।
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भोपाल विलीनीकरण दिवस पर छुट्टी रहेगी-शिवराज सिंह
भोपाल,1 जून(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा है कि अगले वर्ष से गौरव दिवस पर एक जून को भोपाल में अवकाश रहेगा। आने वाली पीढ़ी भोपाल के इतिहास से रू-ब-रू हो सके, इस उद्देश्य से भोपाल के इतिहास पर केंद्रित शोध संस्थान की स्थापना की जाएगी। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने भोपाल गौरव दिवस पर भोपाल गेट पहुँच कर सफाई मित्रों का सम्मान किया। उन्होंने भोपाल विलीनीकरण दिवस की शुभकामनाएँ देते हुए कहा कि असंख्य लोगों के बलिदान और वीर सपूतों के संघर्ष के परिणामस्वरूप देश की स्वतंत्रता के 2 साल बाद एक जून 1949 को भोपाल, भारत का अभिन्न अंग बना।
मुख्यमंत्री श्री चौहान ने रंग-गुलाल, पुष्प-वर्षा और आतिशबाजी के बीच राष्ट्रीय ध्वज फहराया। उन्होंने जन-गण-मन गान के बाद भारत माता को पुष्पांजलि अर्पित की और मशाल जला कर विलीनीकरण के शहीदों का स्मरण किया। शहीदों के चित्र पर पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि भी दी। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने भोपाल विलीनीकरण आंदोलन पर केंद्रित चित्र प्रदर्शनी का अवलोकन भी किया।
मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि नई पीढ़ी को यह नहीं मालूम कि 15 अगस्त 1947 को भारत के स्वतंत्र होने के साथ भोपाल स्वतंत्र नहीं हुआ था। नवाब ने भोपाल के भारत में विलय से इंकार कर दिया था। इस स्थिति में भोपाल में विलीनीकरण आंदोलन आरंभ हुआ। उन्होंने श्रद्धेय उद्धव दास मेहता, बालकृष्ण गुप्ता और डॉ. शंकर दयाल शर्मा के संघर्ष का स्मरण करते हुए बोरास के शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित की। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने लगभग 100 सफाई मित्रों का शॉल पहना कर सम्मान किया। जानकारी दी गई कि भोपाल के सभी वार्डों में स्वच्छता कर्मियों का सम्मान किया जा रहा है।
चिकित्सा शिक्षा मंत्री श्री विश्वास कैलाश सारंग ने कहा कि मुख्यमंत्री श्री चौहान द्वारा एक जून को भोपाल का गौरव दिवस मनाने की पहल से आने वाली पीढ़ी भोपाल के इतिहास से अवगत होगी। महापौर श्रीमती मालती राय ने भोपालवासियों को गौरव दिवस की शुभकामनाएँ दी। पूर्व महापौर श्री आलोक शर्मा उपस्थित थे।
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स्ट्रीट वेंडर्स से अब रोज वसूली नहीं होगी
भोपाल, 29 मई( प्रेस इंफार्मेशन सेंटर) मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि मध्यप्रदेश में कहीं भी किसी भी नगर में स्ट्रीट वेंडर्स से रोज शुल्क वसूली नहीं होगी, यह तत्काल बंद की जाएगी। स्ट्रीट वेंडर्स के रजिस्ट्रेशन के लिए नाममात्र का शुल्क लिया जाएगा। आपकी जिंदगी को आसान बनाने के लिए कोई कमी नहीं छोड़ी जाएगी। हाथठेला लगाने के लिए व्यवस्थित और उपयुक्त स्थान तैयार किए जाएंगे। गरीबों की जिंदगी में खुशियाँ लाने का प्रयास हमेशा जारी रहेगा। हाथ ठेला रोजी-रोटी का साधन है। आज मैं तत्काल प्रभाव से निर्देश दे रहा हूँ कि कोई भी हाथ ठेला जब्त नहीं होगा। इसके लिए नगरीय प्रशासन विभाग द्वारा नियम बना दिए जाएँ। जिनके पास हाथ ठेला नहीं है उनको सब्सिडी पर हाथ ठेला देने की योजना बनाई जाएगी। इसके लिए सरकार 5 हजार रूपए सब्सिडी देगी। गरीबों की तकलीफों को दूर करना शिवराज का धर्म है। मुख्यमंत्री श्री चौहान, मुख्यमंत्री निवास पर नगरीय क्षेत्र के हाथ ठेला चालक, फेरी एवं रेहड़ी वालों की महापंचायत को संबोधित कर रहे थे।
मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा है कि स्ट्रीट वेंडर्स मेहनतकश भाई-बहन हैं। अपना खून-पसीना एक कर रोजी-रोटी कमाते हैं। आप श्रम साधक हैं, आपके बिना दुनिया नहीं चल सकती है। आप घर-घर पहुँच कर लोगों को सामान की बिक्री करते हैं। जरूरत की हर छोटी-बड़ी चीज आसानी से लोगों तक पहुँचाते हैं।
मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि गाँव से शहर में आने वाले गरीबों के रहने की व्यवस्था की जाएगी। माफिया से छुड़ाई गई 23 हजार एकड़ जमीन पर गरीबों को पट्टा दिया जाएगा। जनता की तकलीफों को दूर करना सरकार का धर्म है। मुख्यमंत्री लाड़ली बहना योजना में 1000 रूपए हर महीना बहनों के खाते में डाले जायेंगे। संबल योजना का लाभ मिलता रहेगा। इस योजना में महिलाओं के पोषण, बच्चों की पढ़ाई, इलाज, शादी, दुर्घटना में मृत्यु पर सहायता की व्यवस्था की गई है। सभी पात्रों को योजना में शामिल कर लाभान्वित किया जाएगा। उन्होंने कहा कि बिना किसी भेदभाव के योजनाओं का लाभ मिलेगा। बारहवीं पास बच्चों को अलग-अलग संस्थाओं में काम सीखने के लिए भेजने की व्यवस्था की जाएगी। उनको काम सीखने के दौरान प्रतिमाह 8 हजार रूपए भी दिए जायेंगे। मैं आपके परिवार का सदस्य की तरह हूँ । इसलिए आपको योजनाओं का लाभ देने के लिए पंचायत बुलाई गई है। सामाजिक क्रांति लाकर स्ट्रीट विक्रेताओं की हालत को बदल दिया जाएगा। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि कमजोर नहीं ताकतवर बनें। इसके लिये जरूरी है कि संगठित होकर काम करें। अपना एक संगठन बनायें। हाथठेला में कचरा पेटी रखें और सोलर बेट्री लगायें। शराब नहीं पियें।
मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कन्या-पूजन और दीप प्रज्ज्वलित कर महापंचायत का शुभारंभ किया। उन्होंने पुष्प-वर्षा कर स्ट्रीट वेंडर्स का स्वागत किया। स्ट्रीट वेंडर्स की ओर से मुख्यमंत्री श्री चौहान को तुलसी का पौधा भेंट किया गया। लाड़ली बहना योजना की पात्र बहनों ने धन्यवाद-पत्र भेंट किया। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने पीएम स्व-निधि योजना में प्रतीकस्वरूप हितग्राहियों को लाभान्वित किया। प्रदेश में योजना से कुल 51 हजार हितग्राही लाभान्वित किए गए हैं।
नगरीय विकास एवं आवास मंत्री भूपेन्द्र सिंह ने कहा कि हाथठेला-चालक और पथ-विक्रेताओं के लिये शहरों में हॉकर्स जोन बनाये जाना चाहिये। उन्हें शासन की सभी जन-कल्याणकारी योजनाओं का लाभ मिले। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कोरोना काल में लगातार पथ-विक्रेताओं की चिंता की। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने पीएम स्व-निधि योजना लागू कर कोरोना काल में पथ-विक्रेताओं को बहुत बड़ी राहत दी। इस योजना में मध्यप्रदेश देश में नम्बर-1 है। योजना में 9 लाख 50 हजार रजिस्ट्रेशन हुए हैं। इनमें से 7 लाख एक हजार पथ-विक्रेताओं को योजना का लाभ दिया जा रहा है। आज पूरे प्रदेश में 51 हजार पथ-विक्रेताओं को ऋण स्वीकृति-पत्र वितरित किये जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री के निर्देशानुसार स्टॉम्प शुल्क 2500 के स्थान पर मात्र 50 रूपये लिया जा रहा है।
नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग के आयुक्त भरत यादव ने योजना के उद्देश्यों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि हितग्राहियों को 10 हजार, 20 हजार और 50 हजार रूपये का ब्याजमुक्त ऋण दिया जाता है। पथ-विक्रेताओं से उनकी समस्याओं की भी जानकारी ली जा रही है। नगरपालिक निगम भोपाल की महापौर श्रीमती मालती राय ने आभार माना। विधायक रामेश्वर शर्मा और श्रीमती कृष्णा गौर, प्रमुख सचिव नगरीय विकास एवं आवास नीरज मण्डलोई और बड़ी संख्या में पथ-विक्रेता और रेहड़ी वाले उपस्थित थे।
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दमोह में बिजली सुधारों के लिए 95 करोड़ मंजूर
भोपाल,28 मई( प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)। ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर ने कहा है कि दमोह जिले की विद्युत अधो-संरचना को सुदृढ़ करने एवं विद्युत हानियों को कम करने के उद्देश्य से 95 करोड़ रूपये स्वीकृत किये गए हैं। इसमें से केन्द्र सरकार द्वारा रिवेम्पड डिस्ट्रीब्यूशन सेक्टर स्कीम के प्रथम चरण में 49 करोड़ रूपये और राज्य सरकार द्वारा 46 करोड़ रूपये स्वीकृत किये गए हैं।
स्वीकृत कार्यों में 220/132 के.व्ही. अति उच्च दाब पॉवर ट्रांसफार्मर की क्षमता वृद्धि, 220/132 के.व्ही. अतिरिक्त अति उच्च दाब पॉवर ट्रांसफार्मर स्थापना, 2 नवीन 33/11 के.व्ही. उप केंद्र निर्माण, वोल्टेज व्यवस्था में सुधार के लिए 28 स्थान पर कैपेसिटर बैंक स्थापना, 48 उच्च दाब फीडरों का विभक्तिकरण कार्य, 975 वितरण ट्रांसफार्मर स्थापना, 3308 किलोमीटर निम्न दाब लाइनों का केबलिंग कार्य, 396 उच्च दाब फीडरों का विभक्तिकरण और कंडक्टर क्षमता वृद्धि के कार्य शामिल हैं। इससे दमोह जिले की लगभग 13 लाख की जनसंख्या लाभान्वित होगी। साथ ही आगामी 10 वर्षों की विद्युत माँग की सफलतापूर्वक पूर्ति हो सकेगी।
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उपहारों की खैरात रोकने का भी कानून बने

-अजय व्यास-
राजनीतिक दलों द्वारा प्रदान किए जाने वाले मुफ्त उपहारों को रोकने या विनियमित करने के लिए कानूनों का अधिनियमन एक संभावना है, लेकिन यह कानूनी ढांचे, राजनीतिक अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और एक लोकतांत्रिक समाज में सरकार की भूमिका के बारे में महत्वपूर्ण विचार करता है।
कानूनी ढांचा और संवैधानिकता: राजनीतिक दलों द्वारा मुफ्त उपहारों को प्रतिबंधित या प्रतिबंधित करने के उद्देश्य से किसी भी कानून को देश के संवैधानिक प्रावधानों का पालन करने की आवश्यकता होगी। यह सुनिश्चित करना आवश्यक है कि इस तरह के कानून मौलिक अधिकारों का उल्लंघन नहीं करते हैं, जिसमें संविधान द्वारा गारंटीकृत भाषण, संघ और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता शामिल है।
परिभाषा और दायरा: कानून को स्पष्ट रूप से परिभाषित करने की आवश्यकता होगी कि फ्रीबी क्या है और इसकी प्रयोज्यता की सीमाएं निर्धारित करें। इससे अस्पष्टता से बचने और इसके कार्यान्वयन में निरंतरता सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी।
प्रवर्तन और दंड: कानून को लागू करने के लिए प्रभावी तंत्र स्थापित करना और गैर-अनुपालन के लिए दंड लगाना महत्वपूर्ण होगा। इसके लिए उचित कार्यान्वयन सुनिश्चित करने के लिए पर्याप्त संसाधन, निगरानी प्रणाली और निष्पक्ष निरीक्षण की आवश्यकता होगी।
जनता की भावना और राजनीतिक इच्छाशक्ति: इस तरह के कानून की व्यवहार्यता और स्वीकृति प्रचलित सार्वजनिक भावना और इस मुद्दे को हल करने की राजनीतिक इच्छाशक्ति पर निर्भर करेगी। यदि परिवर्तन के लिए अपर्याप्त सार्वजनिक मांग है तो राजनीतिक दल विरोध कर सकते हैं या कानून को दरकिनार करने के तरीके खोज सकते हैं।
लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं पर प्रभाव: राजनीतिक दलों की मुफ्त उपहार देने की क्षमता को सीमित करना राजनीतिक अभियानों में राज्य के हस्तक्षेप की सीमाओं के बारे में सवाल उठाता है। संसाधनों के दुरुपयोग को रोकने और निष्पक्ष और प्रतिस्पर्धी चुनावी प्रक्रिया सुनिश्चित करने के बीच संतुलन बनाना महत्वपूर्ण है।
केवल कानून पर निर्भर रहने के बजाय, राजनीतिक दलों द्वारा मुफ्त उपहारों के मुद्दे को संबोधित करने के लिए एक व्यापक दृष्टिकोण की आवश्यकता है। इसमें मुफ्त उपहारों के परिणामों के बारे में मतदाताओं के बीच जागरूकता बढ़ाना, जिम्मेदार शासन को प्रोत्साहित करना और अभियान के वित्तपोषण में पारदर्शिता को बढ़ावा देना शामिल है। इसमें जवाबदेही और नागरिक भागीदारी की संस्कृति को बढ़ावा देना भी शामिल है, जहां मतदाता अल्पकालिक लाभों के बजाय पार्टी की व्यापक दृष्टि और नीतियों के आधार पर सूचित विकल्प चुनते हैं।
आखिरकार, मुफ्त उपहारों को विनियमित करने और लोकतांत्रिक सिद्धांतों को बनाए रखने के बीच सही संतुलन बनाना एक जटिल चुनौती है। यह सुनिश्चित करने के लिए कानूनी, संवैधानिक और सामाजिक कारकों पर सावधानीपूर्वक विचार करने की आवश्यकता है कि कोई भी उपाय प्रभावी, निष्पक्ष और लोकतंत्र के सिद्धांतों के अनुरूप हो।
इस आलेख को श्री अजय व्यास , पूर्व कार्यपालक निदेशक, देना बेंक ने लिखा है।अजय का बेंकिग में महत्वपूर्ण पदों पर 35 साल का अनुभव है एवं वह राष्ट्रीय, सामाजिक समस्याओं पर सटीक, बेबाक बातचीत कर विचार रखते हैं।

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देश की आत्मा के साथ खड़े होंः अमिताभ अग्निहोत्री
देवर्षि नारद जंयती पर विश्व संवाद केंद्र द्वारा आयोजित किया गया पत्रकार पुरस्कार एवं सम्मान समारोह
भोपाल। हर देश और संस्कृति का अपना ‘स्व’ होता है। ब्रिटेन लोकतांत्रिक देश है लेकिन जब वहां राजा का राजतिलक होता है तो ईसाई पद्धति से होता है। यह वहां का ‘स्व’ है। इसका कोई विरोध नहीं होता है। इसीलिए आवश्यक है कि हम अपने ‘स्व’ की तलाश करें और उसके साथ खड़े हों। यह बात टेलीविजन समाचार माध्यम के देश के जाने-माने पत्रकार अमिताभ अग्निहोत्री ने रविवार को रवीन्द्र भवन में आयोजित देवर्षि नारद जयंती एवं पत्रकार सम्मान समारोह में बतौर मुख्य अतिथि कही।श्री अग्निहोत्री ने कहा कि अमेरिका का राष्ट्रपति बाइबिल पर हाथ रखकर शपथ लेता है और कोई आपत्ति नहीं होती। इसका कारण यह है कि एक धर्मनिरपेक्ष राष्ट्र होने पर भी उन्होंने अपने ‘स्व’ को नहीं बदला। हमें भी हमारे देश के ‘स्व’ को समझकर उसकी पुनर्स्थापना करना होगी। विश्व संवाद केंद्र मध्यप्रदेश की ओर से आयोजित इस समारोह के मुख्य वक्ता राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सह क्षेत्र कार्यवाह हेमंत मुक्तिबोध थे। अध्यक्षता विश्व संवाद केंद्र न्यास के अध्यक्ष डॉ अजय नारंग ने की। मुख्य अतिथि श्री अमिताभ अग्निहोत्री ने कहा कि इस्लाम के उदय से 2600 साल पहले बुद्ध का परिनिर्वाण हो गया था।हिंदू धर्म तो इससे भी हजारों साल पुराना है। इसलिए यहां यह झगड़ा तो होना ही नहीं चाहिए कि पहले कौन यहां था। उन्होंने इस बात पर भी प्रश्न उठाए कि ऐसा इतिहास क्यों रचा गया जिसमें विदेश से आए लोगों को महान बताया गया जबकि वे अपने साथ सांस्कृतिक मूल्य लेकर नहीं आए थे। अयोध्या, मथुरा, काशी कभी भारत में आर्थिक महत्व के केंद्र नहीं रहे, यह सामरिक केंद्र भी नहीं रहे इसके पश्चात भी इन पर हमले क्यों किये गए? इस पर विचार करना आवश्यक है। खिलजी से लेकर औरंगजेब तक भारत के माथे पर सिर रखकर खड़े होना चाहते थे। कोई मेरे आत्म तत्व को दबाए तो इसे स्वीकार नहीं किया जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि अब देश अपेक्षाकृत अधिक जागृत है। सूचनाएं सब तक पहुंच रही हैं। अब कोई समाचार को दबा नहीं सकता। ऐसे में हमारी जिम्मेदारी बनती है कि हम दुनिया को बता सकें कि हम सांस्कृतिक पुनर्जागरण क्यों करना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि इस देश में 1000 साल की परतंत्रता के दौर में भी धर्म जीवित रहा क्योंकि यह सत्ता पर आश्रित नहीं रहा। धार्मिक पुनर्जागरण सत्ता के आधार पर नहीं होता, यह लोक की चेतना का विषय है। जब भी लोक चेतना सत्ताश्रित हो जाती है तब राष्ट्र का भला नहीं हो सकता। किसी सत्ता का घोषणा पत्र रामचरितमानस या गीता नहीं बना।
उन्होंने उपस्थित पत्रकारों से आह्वान किया कि शब्दों को मंत्र बनाना पड़ेगा। हमें इसे अपने तप से सिद्ध करना पड़ेगा। देह अमर नहीं होती अपितु यश और कीर्ति अमर होती है। इतिहास को निरपेक्ष होकर लिखा जाए और यदि निरपेक्ष होकर लिखेंगे तो इसके खतरे भी उठाने पड़ेंगे।
उन्होंने कहा कि भारत की सांझी चेतना जागृत होगी तो भारत का पुनर्जागरण होगा। सांस्कृतिक पुनर्जागरण का काम अपनी व्यक्तिगत स्वार्थों से ऊपर उठे बिना नहीं हो सकता। हम अपना नुकसान उठाकर भी धर्म के साथ खड़े हो सकते हैं। यदि हां तो आप मातृभूमि के ऋण से मुक्त हो सकते हैं। उन्होंने आह्वान किया कि यदि हम नेपथ्य में रहकर बलिदान करने को तैयार हैं तो सांस्कृतिक पुनर्जागरण हो सकता है। प्रत्येक व्यक्ति को केवल एक बात ध्यान में रखनी चाहिए कि हम राष्ट्र के साथ हैं।
कार्यक्रम के मुख्य वक्ता राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के क्षेत्र सह कार्यवाह हेमंत मुक्तिबोध ने कहा कि यूरोप और अरब की संस्कृति अन्य देशों एवं उनकी संस्कृतियों को प्रभावित करना चाहती हैं। दुनिया भर की दूसरी संस्कृतियों के लोग जब बाहर के देशों में गए तो सबसे पहले उन्होंने वहां की संस्कृति को नष्ट किया। उन्होंने वहां की इतिहास, कला, संस्कृति और शिल्प को नष्ट किया। इसके उलट भारत जब बाहर गया तो उनको समाप्त करने नहीं गया अपितु उनको समृद्ध ही किया। भारतीय संस्कृति की विशेषताओं को देखते हुए यदि हम उसके अनुसार जीवन जीना शुरू कर देंगे तो सांस्कृतिक पुनर्जागरण हो सकेगा।उन्होंने इस बात पर भी चिंता जताई कि मीडिया में संपादक से अधिक प्रबंध संपादक की भूमिका हो गई है। पत्रकारों की भी अपनी विवशताएं हैं। एजेंडा पत्रकारिता से सनसनी तो मिल जाती है लेकिन कराहता हुआ सत्य नहीं मिलता। सांस्कृतिक पुनर्जागरण के लिए मीडिया को निजी स्वार्थ से हटकर स्थान देना चाहिए। सकारात्मक और समाजहित में कार्य करने वाले लोगों के समाचार सामने आएं, इस दिशा में कार्य करना चाहिए।
अध्यक्षता कर रहे डॉ. अजय नारंग ने कहा कि देवर्षि नारद को हम सब लोक संचालक के रूप में जानते हैं। यह समझना आवश्यक है कि देवर्षि नारद के समय में उनके कार्य का लाभ किसको होता, निश्चित ही वह जन सामान्य को होता। संवाद केंद्र प्रतिवर्ष देवर्षि नारद जयंती पर यह आयोजन करता है। विश्व संवाद केंद्र का कार्य पत्रकारों के माध्यम से लोक कल्याण के लिए है। उन्होंने कहा कि हमने पिछले एक माह के समाचार पत्रों का विश्लेषण किया। इसमें पता चला कि ‘द केरल स्टोरी’, समलैंगिक विवाह, पहलवानों का धरना, मध्यप्रदेश में मदरसों जैसे मुद्दों पर पत्रकारों ने मात्र समाचार से आगे जाकर उसके सच का विश्लेषण मीडिया द्वारा किया गया। समाचार पत्र सांस्कृतिक पुनर्जागरण में सकारात्मक भूमिका निभाते हैं। जब मध्यप्रदेश में नगरों को उनके पूर्व नाम मिले तो समाचार पत्रों ने लोगों को इसका स्मरण कराया। सांस्कृतिक पुनर्जागरण के लिए मीडिया अपना योगदान दे रहे हैं, यह किसी से छिपा नहीं है। विश्वास है कि हमारा मीडिया सांस्कृतिक पुनर्जागरण में अपनी भूमिका को अग्रणी रखेगा। कार्यक्रम का प्रारंभ संगीत प्रस्तुति के साथ हुआ। निनाद अधिकारी के संतूर वादन ने श्रोताओं का मन मोह लिया।
विश्व संवाद केंद्र द्वारा दिए जा रहे पुरस्कारों एवं सम्मान की जानकारी, चयन प्रक्रिया एवं चयन समिति के संबंध में जानकारी पत्रकार मनोज जोशी ने दी। मंच पर अतिथियों का स्वागत किया गया। कार्यक्रम के अंत में आभार विश्व संवाद केंद्र के सचिव दिनेश जैन ने व्यक्त किया। मंच संचालन डॉ वंदना गांधी ने किया। राष्ट्रगान के साथ समारोह का समापन किया गया।
इन पत्रकारों को दिए गए देवर्षि नारद पत्रकारिता सम्मान एवं पुरस्कार :
कार्यक्रम में वरिष्ठ पत्रकार एवं संपादक रमेश शर्मा को देवर्षि नारद सार्थक (पत्रकारिता) जीवन सम्मान–2023 से सम्मानित किया गया। वहीं प्रदेश के पांच पत्रकारों को देवर्षि नारद पत्रकारिता पुरस्कार प्रदान किए गए। पुरस्कृत पत्रकारों में नवदुनिया सीहोर के आकाश माथुर, स्वदेश ग्वालियर के डॉ. अजय खेमरिया, पत्रिका भोपाल के श्री श्याम सिंह तोमर, स्वदेश भोपाल के दीपेश कौरव, दैनिक भास्कर भोपाल के राहुल शर्मा सम्मिलित रहे। मंच पर सम्मानित होने के बाद अपने वक्तव्य में श्री रमेश शर्मा ने कहा कि पत्रकार यदि नारद को अपना आदर्श मानते हैं तो राष्ट्र, संस्कृति के संबंध में कोई समझौता नहीं होना चाहिए। पत्रकारिता को इस बात को उठाना चाहिए कि हमारी पहचान क्या है। अपने ऊपर बलिदानियों का ऋण है। पत्रकार अपने–अपने क्षेत्र के अनाम अमर बलिदानी के योगदान को सबके सामने लाएं। -

सिविल सेवकों का जीवन सिर्फ अपने लिए नहीं, अपनों के लिए होता है : मुख्यमंत्री श्री चौहान
भोपाल,21 अप्रैल(अशोक मनवानी )। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने सिविल सेवकों से कहा कि आपका जीवन सिर्फ अपने लिए नहीं अपनों के लिए होता है। जन-कल्याण सबसे बड़ी प्राथमिकता होती है। आम जनता से जुड़े छोटे-छोटे कार्य, वास्तव में बड़े-बड़े कार्य होते हैं। सिविल सेवक इन कार्यों को समय पर पूरा करवा लें, यही सुशासन है। मुख्यमंत्री श्री चौहान आज आर.सी.वी.पी. नरोन्हा प्रशासन एवं प्रबंधकीय अकादमी, भोपाल के सभा कक्ष में सिविल सर्विस-डे के शुभारंभ कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि हमारा मूल काम समाज सेवा है। हम जो भी कार्य करते हैं, आम नागरिकों के लिए ही होता है। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने टीम मध्यप्रदेश को सिविल सेवा दिवस की बधाई और शुभकामनाएँ दी। सिविल सेवा दिवस पर हुए इस विशेष कार्यक्रम के मुख्य अतिथि शिक्षाविद, लेखक इन्फोसिस के पूर्व सदस्य और वर्तमान में मणिपाल ग्लोबल एजुकेशनल के अध्यक्ष श्री मोहनदास पाई थे।
मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि सिविल सर्विस-डे का अर्थ यही है कि हम लोक सेवक हैं और देश की सेवा हमारा मुख्य उद्देश्य है। लोकतंत्र में जनता का, जनता के लिए और जनता द्वारा शासन होता है। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि सिविल सेवा दिवस 2023 की थीम “विकसित भारत, नागरिकों को सशक्त करना और अंतिम व्यक्ति तक पहुँचना है।” उन्होंने टीम मध्यप्रदेश को बधाई देते हुए कहा कि उन्हें गर्व है कि सबने मिल कर मध्यप्रदेश को समृद्ध और विकसित बनाने में बहुत महत्वपूर्ण योगदान दिया है। टीम मध्यप्रदेश ने जुट कर कार्य किया है। मध्यप्रदेश में तेजी से सकारात्मक परिवर्तन आया है। सिंचाई की क्षमता को हमने आश्चर्यजनक रूप से साढ़े 7 लाख हेक्टयर से बढ़ा कर 45 लाख हेक्टेयर तक पहुँचा दिया है। इसे क्रास कर अब 65 लाख हेक्टेयर पर काम करेंगे। आज 4 लाख किलोमीटर सड़कें प्रदेश में बन चुकी हैं। किसी समय यह सिर्फ 71 हजार किलोमीटर हुआ करती थी और टूटी-फूटी हालत में होती थी। अब प्रदेश में शानदार सड़कें हैं। प्रदेश में ऊर्जा सहित विभिन्न क्षेत्रों में अद्भुत कार्य हुआ है। प्रदेश में अच्छे संसाधन हैं, इसलिए हम कार्य कर पा रहे हैं। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि प्रदेश में निर्माण विभाग भी सक्रिय रहे। मध्यप्रदेश की गिनती आज विकसित प्रांतों में है, मध्यप्रदेश बीमारू नहीं है। इसका श्रेय टीम मध्यप्रदेश के असाधारण परिश्रम को है। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि आम जन के बिना हमारा कार्य नहीं होता, हम हितग्राही तक पहुँच जाते हैं। प्रदेश में विकास यात्राएँ जन- कल्याण यात्राएँ बन गई।
मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि प्रदेश में अधो-संरचना की बात करें तो यह देखने को मिलता है कि काफी सकारात्मक परिवर्तन आया है। कृषि उत्पादन में कई गुना वृद्धि हुई है। अनाज के भंडार भरे हैं। प्रति व्यक्ति आय बड़ी है। देश की जीएसडीपी में मध्यप्रदेश का योगदान बढ़ा है। वर्ष 2005-06 में प्रदेश में का बजट आकार 25 हजार करोड़ होता था, वो बढ़ कर वर्ष 2012-13 में एक लाख करोड़, वर्ष 2020-21 में दो लाख करोड़ और इस बार 3 लाख करोड़ को पार कर गया है, यह आसान बात नहीं है। असाधारण उपलब्धि है। मध्यप्रदेश ने तुलनात्मक रूप से लम्बी छलांग लगाई है, जिसका श्रेय टीम मध्यप्रदेश को जाता है।
सुशासन से जनता और प्रशासन की दूरी हुई है समाप्त
मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि प्रदेश में जनता और प्रशासन के बीच की दूरी समाप्त की गई है, जो सुशासन के प्रयासों से संभव हुआ है। मुख्यमंत्री जन-सेवा अभियान से केन्द्र और राज्य सरकार की योजनाओं से 83 लाख से अधिक हितग्राहियों को जोड़ने में सफलता मिली। हमारे कार्यक्रम जनता के कार्यक्रम बन गए। जनता की निर्णयों में भी भागीदारी हो गई है। आगामी 10 से 25 मई तक समस्याओं के निराकरण के लिए पुन: अभियान संचालित किया जाएगा। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि सिविल सेवकों को यह चुनौती स्वीकार करना है कि नागरिकों को अपने कामों के लिए भटकना न पड़े। गाँव और शहरों के वार्डों में शिविरों के माध्यम से समस्याएँ हल की जाएँ। सीएम हेल्प लाइन सहित सुशासन की दिशा में अनेक उपायों को लागू किया गया। जन सुनवाई, वन-डे गर्वेनेंस और समाधान ऑनलाइन ऐसे ही उपाय हैं। इनको तकनीकी से जोड़ कर कार्यों के निपटारे के साथ सामने आने वाली विसंगतियों को भी दूर करने पर ध्यान देना है। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने गीता के श्लोकों के माध्यम से सिविल सेवक की भूमिका कैसी हो, इसका विस्तारपूर्वक उल्लेख भी किया।
मध्यप्रदेश में सुशासन और अधिकारियों की श्रेष्ठ भूमिका
मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि मध्यप्रदेश में सुशासन के क्षेत्र में निरंतर कार्य हुआ है। बुरहानपुर में हर घर जल पहुँचाने और गति शक्ति प्रोजेक्ट के क्रियान्वयन के कार्य हुए हैं। प्रदेश में अनेक नवाचार भी प्रशासनिक स्तर पर हुए हैं। अधिकांश सिविल सेवक श्रेष्ठ भूमिका का निर्वहन करते हुए सरकार की जन-कल्याणकारी नीतियों को जमीन पर उतारने का कार्य कुशलता से कर रहे हैं। प्रदेश के सिविल सेवक तेजी से क्रियान्वयन का गुण भी रखते हैं, मुख्यमंत्री लाड़ली बहना योजना बनने के बाद दो माह में आवश्यक वातावरण निर्माण और एक करोड़ से अधिक पंजीयन इसका उदाहरण है।
मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि सिविल सेवक एक लीडर भी हैं और उनका दायित्व सभी को सम दृष्टि से देख कर सबका उत्साह भी बढ़ाना है। व्यक्ति में अहंकार न हो। उत्साह में कमी न हो। धैर्य के साथ समस्याओं के समाधान का रास्ता निकाला जाए। मनोवृत्ति यह होना चाहिए कि किसी निराशा से घिरे व्यक्ति को भी उत्साहित कर दें। व्यक्ति जैसा सोचता है वैसा बन भी जाता है। सिविल सेवक सिर्फ अपने लिए कार्य नहीं करता बल्कि उसके कार्य से जनता और पूरा देश प्रभावित होता है। अप्रासंगिक कार्य को भी प्रासंगिक बनाने की कला होना चाहिए। एक व्यक्ति चाहे तो देश के प्रति विश्व की धारणा बदल सकता है। यह बात समस्त देशवासियों ने अनुभव की है। इसी तरह एक सिविल सेवक सही दिशा में कार्य कर विभाग को बदल सकता है। सिविल सेवक अधिकतम योगदान देने का प्रयास करें। इसलिए सिविल सेवाएँ सिर्फ व्यक्ति के लिए न होकर, राष्ट्र के लिए उपयोगी मानी गई हैं।
आनंद और प्रसन्नता के साथ करें कार्य
मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि स्वामी विवेकानंद ने मनुष्य को अनंत शक्तियों का भंडार बताया है। किसी कार्य में पूरी तरह प्रयत्न करना आवश्यक है। यदि एक बार सफल नहीं हुए तो पुन: प्रयास करना ही चाहिए। समय का भी सद्पयोग करना चाहिए। एक-एक क्षण कीमती है। जब तक व्यक्ति का जीवन है, दूसरों की जिन्दगी को बेहतर बनाने के लिए हर पल का उपयोग किया जाए। प्राय: धन-दौलत से सुख प्राप्त नहीं होता। ईमानदारी पूर्वक कार्य करने से अच्छे परिणाम निकलते हैं। कोरोना काल में अधिकारियों ने जिस जज्बे से कार्य किया वो गर्व करने लायक है। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने सिविल सेवकों से आहवान किया कि आनंद और प्रसन्नता से कार्य करें। परिवार में सभी सदस्यों का ध्यान रखते हुए मनोयोग पूर्वक अपने शासकीय दायित्वों को निभाना आसान होता है। ऐसा ही जीवन प्रासंगिक होता है। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि आत्म-निर्भर मध्यप्रदेश के लक्ष्य के लिए हम तेजी से कार्य करते हुए आगे बढ़ रहे हैं। इस कार्य को पूरी निष्ठा से पूर्ण करना है।
योजनाएँ जनता के सुझावों पर बनी
मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि मध्यप्रदेश की जनता भी विकास कार्यों में भागीदारी कर रही है। मध्यप्रदेश जन-अभियान परिषद हो या अन्य संगठन, सभी मिल कर योजनाओं के क्रियान्वयन में भागीदार हैं। मध्यप्रदेश में अनेक योजनाएँ आम जनता के सुझावों पर बनी हैं। प्रदेश में एक आदर्श कार्य-संस्कृति निर्मित हुई है। जिलों में जनता और कलेक्टर के बीच की दूरी खत्म हुई है।
अपेक्षाओं पर खरे उतरे हैं सिविल सेवक
मुख्य सचिव श्री इकबाल सिंह बैंस ने कहा कि सिविल सर्विसेज की लंबी परंपरा देश में रही है। विशेष परिस्थितियों और चुनौतीपूर्ण स्थितियों का हमारी प्रशासनिक व्यवस्था डट कर मुकाबला करती है। श्री बैंस ने कहा कि अपने लंबे कार्यकाल में उन्हें ऐसा अवसर याद नहीं आता जब हमें कोई विशेष दायित्व दिया गया हो और अपेक्षा पर खरे नहीं उतरे हों। मुख्य सचिव ने कहा कि ऐसी दक्ष टीम के साथ काम करने का सौभाग्य मिला है, इस बात का संतोष है और गर्व भी है। उन्होंने कहा कि चाहे कोरोना काल की बात हो या सिंहस्थ के आयोजन की बात हो या फिर माफिया के खिलाफ कार्रवाई का समय हो, अधो-संरचना का विकास हो या जनता की समस्याओं के निराकरण की व्यवस्था हो, मध्यप्रदेश में सभी प्रशासनिक आयामों पर अनेक उपलब्धियों का इतिहास रचा गया है। मुख्य सचिव ने कहा कि हम जो भी कार्य करते हैं उसका विश्लेषण भी किया जाता है। अनेक कमियाँ भी सामने आती हैं और बहुत सा अच्छा कार्य कमियों के आगे दब जाता है। अपने श्रेष्ठ कार्यों को प्रचारित करने और उनकी व्याख्या करने के प्रति भी हमें सजग रहना चाहिए।
प्रारंभ में मुख्यमंत्री श्री चौहान और अतिथियों ने दीप जला कर सिविल सर्विस-डे का शुभारंभ किया। मुख्यमंत्री श्री चौहान का श्री अनिरुद्ध मुखर्जी ने स्वागत किया। मुख्य सचिव और अन्य अतिथियों का भी स्वागत पुष्प-गुच्छ से किया गया। पुलिस महानिदेशक श्री सुधीर कुमार सक्सेना, अपर मुख्य सचिव सामान्य प्रशासन श्री विनोद कुमार सहित बड़ी संख्या में भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारी, भारतीय पुलिस सेवा और वन सेवा के अधिकारी उपस्थित थे। कलेक्टर्स, कमिश्नर्स और मुख्य कार्यपालन अधिकारी भी वर्चुअली जुड़े।
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कुबेरेश्वर धाम से अब साल भर बंटेंगे रुद्राक्ष
सीहोर में पंडित प्रदीप मिश्रा की कथा सुनने पहुंचा करोड़ों श्रद्धालुओं का रेला सनातन धर्म का जयकारा लगा रहा है। बीस लाख लोगों ने पहले ही दिन लगभग पांच लाख अभिमंत्रित रुद्राक्ष प्राप्त कर लिए थे। प्रशासन और खुद आयोजकों को भी भरोसा नहीं था कि उनका आयोजन इतना सुपर हिट होगा। भोपाल इंदौर मार्ग पर लगे कई किलोमीटर लंबे जाम को देखते हुए आयोजकों ने फिलहाल रुद्राक्ष वितरण रोक दिया है। जनता की आस्था को देखते हुए अब ये रुद्राक्ष साल भर बांटे जाएंगे। इस विशाल आयोजन की सफलता पर तरह तरह की अटकलें लगाई जा रहीं हैं। कई सयाने इसे पाखंड और सरकार का वोट बटोरने का अनुष्ठान बताने में जुट गए हैं। उनका आरोप है कि पाखंडी बाबाओं की तरह पंडित प्रदीप मिश्रा भी जनता को बरगला रहे हैं। वे कहते हैं कि रुद्राक्ष का पानी पीने से कैंसर जैसे रोग भी ठीक हो जाते हैं। इस तरह के कई आरोप कथावाचक पर चिपकाने का प्रयास किया जा रहा है। कहा जा रहा है कि वे सरकार के लिए वोटों की खेती कर रहे हैं इसलिए भाजपा सरकार उनके आयोजन को बढ़ावा दे रही है। सरकार से वेतन और सुविधाएं प्राप्त करने वाले कथित सुधारवादी इसके लिए आयोजक और शासन को कटघरे में खड़ा करने का बचकाना प्रयास कर रहे हैं। इसके विपरीत लोगों की आस्थाएं परवान चढ़ती जा रही हैं। दूसरे दिन भी श्रद्धालुओं का सीहोर पहुंचना जारी रहा है। प्रशासन ने भोपाल इंदौर हाईवे खुलवा दिया है लेकिन कोसने वाले कई तरह की अफवाहें फैला रहे हैं। आयोजन में पहुंचे बीस लाख लोगों में से दो महिलाओं और एक बच्चे ने अपने स्वास्थ्य कारणों से दम तोड़ दिया तो कुछ लोगों ने ये कहना चालू कर दिया कि अव्यवस्था की वजह से इन लोगों का निधन हुआ है। जबकि हकीकत ये है कि आयोजकों ने लाखों लोगों के भोजन की व्यवस्थाएं की हैं। भीड़ की वजह से पानी के टैंकर नहीं पहुंच पा रहे हैं तो आसपास के नलकूपों से पाईप डलवाकर पानी पहुंचाया जा रहा है।इस तरह के कई उपाय किए जा रहे हैं कि दूरदराज से और अन्य प्रांतों से आने वाले लोगों को भी कोई परेशानी न हो। ये लोग मध्यप्रदेश के वोटर नहीं हैं।कथा सुनने के लिए पहुंचने वाले सभी श्रद्धालु भाजपाई कार्यकर्ता नहीं हैं। कुछ तो कट्टर कांग्रेसी भी हैं। इसके बावजूद ये सभी सनातन धर्म की उस धारा में स्नान करने पहुंच रहे हैं जो सबके सुखी और स्वस्थ होने की कामना करती है। कुबेर को यक्षों का राजा माना जाता है। वे स्थायी धन के देवता भी हैं। लक्ष्मी जहां चंचला होती है वहीं कुबेर स्थायी संपदा के प्रतीक हैं। पंडित प्रदीप मिश्रा अपनी कथाओं में जिस नजरिए से सनातन धर्म को समझाने का प्रयास करते हैं उनसे लोग धर्म को आज के संदर्भ में समझ पा रहे हैं। यही वजह है कि लोग अपने अपने इंतजाम करके अपने वाहनों से सीहोर पहुंच रहे हैं पर ये सभी सुविधाएं सभी के पास नहीं हैं । ऐसे में लोग ट्रेनों और बसों से भी कुबेरेश्वर धाम पहुंच रहे हैं। इस सफल आयोजन से किनके पेट में दर्द हो रहा है और क्यों ये जानकर असली षड़यंत्रकारियों की पहचान करना सरल हो जाता है।

पंडित प्रदीप मिश्राःसनातन को सरल बनाकर किया पाखंडियों को बेनकाब दरअसल पंडित प्रदीप मिश्रा सनातन को सरल भाषा में समझा रहे हैं वे कह रहे हैं कि ईश्वर के प्रति आस्था प्रकट करने के लिए आपको ढपोरशंखियों के जंजाल में उलझने की जरूरत नहीं हैं। आप अपने घर में भी भोले का अभिषेक कर सकते हैं।इससे खासतौर पर वे पंडित और नकली ब्राह्मण खासे नाराज हैं जो अपने जजमानों की जेब से चढ़ावा निकलवाने के लिए ऊटपटांग उपाय सुझाते रहते हैं। ऐसे लोग वास्तव में सनातन को भौतिकवादी पाखंडों में घसीट रहे हैं। ऐसे में पंडित प्रदीप मिश्रा का मार्गदर्शन उन्हें सनातन की महिमा समझने का अवसर दे रहा है। गुरु और शिष्यों के बीच का ये प्रेम अद्भुत है। वे गुरु कथाओं में अपने आसपास के उदाहरणों से लोगों को पाखंड के दलदल से बाहर निकाल रहे हैं। संघ और भाजपा ने जबसे सनातन और हिंदुत्व की चमचमाती आभा को पाखंड के पर्दे से बाहर लाने का अभियान चलाया है तबसे सुधारवादी कथावाचक और साधु संतों को सनातन के प्रति खोया सम्मान जगाने में सरलता होने लगी है। परेशानी तो उन पाखंडियों को हो रही है जिन्होंने भोली भाली जनता को जातियों में बांटकर वैमनस्य की खेती की है। धर्म की दीवारें खींचकर उन्हें एक दूसरे के विरुद्ध बरगलाया है। समाज को बड़ी संख्या में मनोवैज्ञानिकों की जरूरत है जो लोगों का मार्गदर्शन कर सकें। ऐसे में पंडित प्रदीप मिश्रा जैसे कथावाचक दीपक बनकर लोगों का मार्ग निष्कंटक बना रहे हैं। कुबेरेश्वर धाम में बंटने वाले रुद्राक्षों के प्रति लोगों का अनुराग देखकर आयोजकों ने अब साल भर रुद्राक्ष बांटने की व्यवस्था कर दी है। जाहिर है इससे रुद्राक्ष पाने के लिए भगदड़ की कोई जरूरत नहीं रह गई है। हर श्रद्धालु को रुद्राक्ष मिलेगा और कथाओं से निकला ज्ञान पुंज उनके जीवन में स्थायी सुख समृद्धि और स्वास्थ्य का श्रीगणेश करेगा।