Category: अपराध

  • सवालों का फतवा जारी करने से पहले जान तो लें

    सवालों का फतवा जारी करने से पहले जान तो लें

    • प्रशांत पोळ

    द कश्मीर फाईल्स की जबरदस्त सफलता के कारण तमाम वामपंथी और इस्लामिस्ट्स बौखला गए हैं. आज तक खड़ा किया सारा विमर्श उन्हे बिखरता हुआ नजर आ रहा हैं. इसलिए राष्ट्रवाद के इस नए तूफान को भ्रमित करने, वे सोशल मीडिया के तमाम मंचों पर यह प्रश्न उठा रहे हैं, “तब आप क्या कर रहे थे..? दिल्ली में सरकार आपकी थी. राज्यपाल जगमोहन आपके थे. फिर भी यह नरसंहार क्यूँ हुआ.? क्या किया आपने तब ?”

    ‘उल्टा चोर कोतवाल को डांटे’ इस मुहावरे का इससे अच्छा प्रयोग नहीं हो सकता.

    1984 में आठवी लोकसभा के चुनाव में काँग्रेस को राक्षसी बहुमत मिला था. कुल 514 में से 404 सीट्स. भाजपा के मात्र 2 सांसद चुन कर आए थे. किन्तु परिस्थिति तेजी से बदली. 1989 के चुनाव मे, उन्ही राजीव गांधी के नेतृत्व में काँग्रेस बहुमत का आंकड़ा भी नहीं छूं सकी. उन्हे मिली 197 सीटें. नवगठित ‘जनता दल’ के 143 सदस्य चुनकर आए. रामजन्मभूमि आंदोलन के कारण पहली बार, भाजपा का आंकड़ा 2 से बढ़कर 85 तक पहुंचा था. मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी को 33 सीटें मिली थी. अतः जनता दल की सरकार बनी, जिसे भाजपा और कम्युनिस्ट पार्टी ने बाहर से समर्थन दिया. विश्वनाथ प्रताप सिंह प्रधानमंत्री बने.

    इधर कश्मीर की परिस्थिति क्या थी.? नेहरू के चहेते, शेख अब्दुल्ला के बेटे फारुख अब्दुल्ला मुख्यमंत्री थे. कश्मीर से ही चुने गए मुफ़्ती मोहम्मद सईद देश के गृहमंत्री थे. 1987 के विधानसभा चुनाव में 76 में से फारुख अब्दुल्ला की नेशनल कॉन्फ्रेंस को 40 और काँग्रेस को 26 सीटें मिली थी. जम्मू क्षेत्र से भाजपा के मात्र 2 विधायक चुन कर आए थे. इस चुनाव के बाद, सन 1988 से ही, कश्मीर घाटी में पाकिस्तानीयों की घुसपैठ बढ़ गई थी. हिंदुओं को घाटी से भगाने का आंदोलन प्रारंभ हो गया था. यासीन मलिक (जिसे फिल्म में ‘बिट्टा’ के रूप में दिखाया हैं), यह आतंकवादी गुट, ‘जम्मू – कश्मीर लिबरेशन फ्रंट’ (JKLF) का नेता था. अनेक आतंकवादी गुटों के साथ, वह खुले आम केंद्र शासन को चुनौती देता था. चुन – चुन कर घाटी के हिन्दू नेताओं को मारता था. 1986 के काश्मीर दंगों में इसकी बड़ी भूमिका थी. 14 सितंबर 1989 को ‘टीका लाल टपलू’ की दिन दहाड़े, खुले आम हत्या कर के दहशत फैलाने का काम प्रारंभ हो गया था. टीका लाल टपलू यह राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के निष्ठावान और समर्पित स्वयंसेवक थे. कश्मीरी पंडित उन्हे अतीव आदर से देखते थे.

    1989 में कश्मीर में हो रही इन हत्याओं के दौर में दिल्ली में वी. पी. सिंह की सरकार थी, जिसमे मुफ़्ती मोहम्मद सईद गृहमंत्री थे और इश्कबाजी में डुबे हुए फारुख अब्दुल्ला मुख्यमंत्री..! इसी बीच 8 दिसंबर 1989 को, गृहमंत्री मुफ़्ती साहब की लड़की, रूबिया सईद का आतंकवादी अपहरण कर लेते हैं. उसके बदले कश्मीर के जेल में बंद पांच खूंखार आतंकवादियों को रिहा करने की मांग रखी जाती हैं. अपहरण की ज़िम्मेदारी जेकेएलएफ और उसका नेता यासीन मलिक लेते हैं. पांच दिन यह नाटक चलता हैं. पांच दिनों के बाद रूबिया सईद को सुरक्षित लौटाया जाता हैं और वहां पांच खूंखार आतंकवादी रिहा किए जाते हैं..!

    इस पूरे प्रकरण में, ना तो जेकेएलएफ़ का कोई नेता गिरफ्तार होता हैं, ना ही यासीन मलिक को गिरफ्तार किया जाता हैं. गिरफ्तारी छोड़िए, पुंछताछ के लिए भी नहीं बुलाया जाता… 1989 के दिसंबर और 1990 के जनवरी महीने में पूरा कश्मीर आतंकवादियों के हवाले कर दिया गया हैं. जैसा कश्मीर फाईल्स में दिखाया गया हैं, बिलकुल वैसा ही कश्मीर का माहौल हैं. रोज रात को मशाल जुलूस निकाल रहे हैं जिसमे हिंदुओं को, उनकी औरतों को कश्मीर में छोड़कर, भाग जाने के लिए कहा जा रहा हैं. 4 जनवरी 1990 को श्रीनगर से प्रकाशित होने वाले दैनिक ‘आफताब’ ने एक बड़ा सा विज्ञापन प्रकाशित किया, जिसमे हिजबूल मुजाहिदीन ने सारे हिन्दू – सीख समुदाय को घाटी छोड़ के जाने के लिए कहा गया था. पूरे घाटी में पाकिस्तानी करेंसी का प्रयोग हो रहा था.

    कश्मीर में हो रहे हिंदुओं के हत्याकांड पर जब भाजपा ने आवाज उठाना चालू किया, चिल्लाना शुरू किया, तब फारुख अब्दुल्ला को हटाकर राष्ट्रपति शासन लगाया गया. यह दिन था, 19 जनवरी 1990. आतंकवादियों को यह पहले से पता चल गया था, की 19 जनवरी को राज्यपाल का शासन लगेगा. इसलिए 18 जनवरी की रात और 19 जनवरी को पूरे दिन भर कश्मीर घाटी में हिंदुओं के खून की होली खेली गई. इसी दिन राज्यपाल के रूप में जिस व्यक्ति को दिल्ली ने भेजा, वह थे – जगमोहन !

    इस समय तक जगमोहन का और भाजपा का, दूर – दूर तक कोई संबंध नहीं था. जगमोहन काँग्रेस के आदमी थे. विशेषतः गांधी परिवार के खास. आपातकाल (1975 – 1977) में संजय गांधी की आज्ञा से तुर्कमान गेट और अन्य स्थानों के अतिक्रमण तोड़ने वाले प्रशासक. संजय गांधी के कारण ही वे ‘नाम’ समिट के समय गोवा के और एशियाड के समय दिल्ली के उप-राज्यपाल बने. इन आयोजनों की सफलता के कारण वे इंदिरा गांधी और बाद में राजीव गांधी के चहेते बने. वे कुशल प्रशासक थे.

    जगमोहन ने कश्मीर के हिंदुओं की जो स्थिति देखी, उससे वो अंदर तक हिल गए. उन दिनों पर उन्होने पुस्तक लिखी हैं – My Frozen Turbulence in Kashmir’. कश्मीर के राज्यपाल के नाते उनका कार्यकाल मात्र पांच महीनों का ही रहा. जब वे वहां मुस्लिम आतंकवादियों पर कहर बरसाने लगे, तो उन्हे गृहमंत्री मुफ़्ती मोहम्मद सईद ने राज्यपाल पद से हटा दिया. इस के बाद जगमोहन ने भाजपा में शामिल होने का निर्णय लिया.

    कश्मीर की इन तत्कालीन घटनाओं पर सबसे ज्यादा आवाज उठाई तो राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने. उस समय नए बनने जा रहे ‘पुनुन कश्मीर’ (हमारा कश्मीर) के शीर्ष नेताओं को, जिसमे ‘अग्निशेखर जी’ प्रमुख थे, संघ ने देश भर, विभिन्न स्थानों पर लोगों से, पत्रकारों से मिलवाया. कश्मीर की स्थिति को लोगों तक लेकर जाने के पूरे प्रयास किए. दुर्भाग्य से उन दिनों संघ को उतना नहीं सुना जाता था, जितना आज सुना जाता हैं !

    इसलिए कोई अगर यह कहे की ‘उस समय आप क्या कर रहे थे?’ तो उनसे पूछिए –

    • शेख अब्दुल्ला, फारुख अबुल्ला और ओमर अब्दुल्ला की खासमखास काँग्रेस पार्टी क्या कर रही थी ?
    • जितने वामपंथी यह सवाल उठा रहे हैं, उनसे पूछना हैं, वे क्या कर रहे थे? वी. पी. सिंह सरकार को उनका भी तो समर्थन था.
    • देश के तमाम बुध्दीजीवी मुस्लिम नेताओं ने इस घटना पर क्या कहा? किसी एक मुसलमान नेता ने भी इस घटना का विरोध किया?
    • फारुख अब्दुल्ला परिवार की खास समर्थक काँग्रेस सरकार दस साल तक दिल्ली में राज करती रही. उस ने एक बार, एक बार भी इस समस्या का हल ढूँढने की कोशिश की?
    • और सिनेमा जगत…. दुनिया भर के प्रश्नों पर सिनेमा बनाने वाले हमारे बॉलीवुड के निर्माता, कश्मीर के इस सच को इतने वर्षों तक क्यूँ नहीं पर्दे पर लाये?
  • दुष्कर्म के आरोपी राजेश विश्वकर्मा की अवैध प्रॉपर्टी जमींदोज

    दुष्कर्म के आरोपी राजेश विश्वकर्मा की अवैध प्रॉपर्टी जमींदोज

    भोपाल,17 जनवरी(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)। इंदौर जिले के थाना क्षिप्रा पर 15 जनवरी 2022 को एक महिला ने शिकायत की थी कि उसका पति राजेश विश्वकर्मा अपने अन्य साथियों अंकेश, विवेक, विपिन, और आनंद को लेकर उसके साथ सामूहिक दुष्कर्म और अप्राकृतिक कृत्य करता है। पीड़िता की रिपोर्ट पर थाना क्षिप्रा ने इन पांच आरोपियों के विरुद्ध अपराध क्रमांक 24/2022 पंजीबद्ध करके जांच शुरु की। पुलिस ने पाया कि महिला की शिकायत सही है और आरोपी गण अपने सामाजिक रसूख की आड़ में अन्य लोगों से भी अभद्रता करते हैं। उनकी हरकतें अशोभनीय और आततायी श्रेणी की हैं। पुलिस टीम ने सक्रियता से कार्रवाई करते हुए घटना के सभी आरोपियों की पहचान की और उन्हें गिरफ्तार भी कर लिया।
    महिला की दुर्दशा और प्रकरण की गंभीरता को देखते हुए पुलिस तथा जिला प्रशासन ने संयुक्त कार्रवाई की और आरोपी राजेश विश्वकर्मा की अवैध संपत्तियों की जानकारी निकाली। पुलिस और प्रशासन ने पाया कि उसने अवैध तरीकों से संपत्तियां बनाई हैं और इसी वजह से उसके हौसले बुलंद हो गए हैं। प्रशासन ने आरोपी राजेश विश्वकर्मा के अवैध फार्म हाऊस और मकान को आनन फानन में जमींदोज कर दिया।अन्य आरोपियों की संपत्तियों और उनसे प्रताड़ित महिलाओं की जानकारी भी प्राप्त की जा रही है।

  • घुसपैठियों को बसाने वालों को बख्शने पर  सतना डीएम को लोकायुक्त ने तलब किया

    घुसपैठियों को बसाने वालों को बख्शने पर सतना डीएम को लोकायुक्त ने तलब किया

    भोपाल,13 जनवरी(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)। सतना जिले की नयागांव ग्राम पंचायत में बंग्लादेशी घुसपैठियों को इंदिरा आवास देकर बसाने वाले अफसर पर कार्रवाई न किए जाने से लोकायुक्त जस्टिस एन के गुप्त खासे नाराज हैं। पिछले ढाई सालों से आरोपी सीईओ पर कार्रवाई न किए जाने पर लोकायुक्त ने सतना कलेक्टर और एसपी को अपने सम्मुख हाजिर होने के निर्देश दिए हैं।

    सतना कलेक्टर अनुराग वर्मा और एसपी धर्मवीर सिंह यादव को लोकायुक्त कार्यालय में 11 फरवरी को जांच प्रकरण 5032016 के संबंध में हाजिर होने के निर्देश दिए गए हैं। शिकायत प्राप्त होने पर ये प्रारंभिक जांच राजीव गांधी जल ग्रहण क्षेत्र प्रबंधन मिशन भोपाल के अतिरिक्त संचालक से कराई गई थी। जांच प्रतिवेदन में सतना जिलेके मझगंवा विकासखंड की वीरसिंह पुर तहसील के अंतर्गत नयागांव ग्रामपंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी संदीप शर्मा को दोषी पाया गया है। आरोप है कि श्री शर्मा ने इंदिरा आवास योजना के अंतर्गत हितग्राही अब्दुल कय्यूम, इरफान खान, मेहरून खान, सलीम खान,श्रीमती पुरवहिया खान,और रुबाब खान को वर्ष 2013-14 में आवास स्वीकृत किए थे और पहली किस्त के रूप में 35000 रुपए की राशि भी दे दी थी।

    शिकायत मिलने पर पाया गया कि ये सभी हितग्राही बंग्लादेशी हैं और अवैध रूपसे घुसपैठिए बनकर यहां रह रहे हैं। अतिरिक्त संचालक के जांच प्रतिवेदन के आधार पर लोकायुक्त कार्यालय ने लगभग ढाईसाल पहले सतना कलेक्टर से पूछा था कि इस संबंध में वे वस्तुस्थिति से अवगत कराएं। इसके बावजूद सतना कलेक्टर ने न तो कोई कार्रवाई की न ही संगठन को वस्तुस्थिति से अवगत कराया। इससे नाराज लोकायुक्त ने कलेक्टर और एसपी दोनों को 11 फरवरी को हाजिर होने के निर्देश दिए हैं।

    सूत्रों का कहना है कि सतना में कांग्रेस के विधायक सिद्धार्थ कुशवाहा  और चित्रकूट के कांग्रेसी विधायक नीलांशु चतुर्वेदी के संरक्षण की वजह से ये कार्रवाई नहीं हो पा रही है। वे अपने क्षेत्र में इसी तरह के घुसपैठियों को बसाकर वोट बैंक बढ़ा रहे हैं। घुसपैठियों के कारण विंध्य क्षेत्र के हालात पश्चिम बंगाल की तरह विस्फोटक बनते जा रहे हैं।

    जन न्याय दल के प्रदेश प्रवक्ता आलोक सिंघई ने आरोप लगाया है कि  मैहर के विधायक नारायण त्रिपाठी और अन्य कांग्रेसी नेता लंबे समय से विंध्य प्रांत की मांग उठाकर सरकार पर दबाव बना रहे हैं। इस वोट बैंक की राजनीति की आड़ लेकर वे सरकारी नौकरियां बेचने का कारोबार करते हैं और सरकारी बजट छीनने का षड़यंत्र भी रचते हैं। अवैध घुसपैठियों की वजह से देश की सुरक्षा पर खतरा तो बढ़ ही रहा है साथमें आम नागरिकों के टैक्स से प्राप्त संसाधनों का भी दुरुपयोग हो रहा है।

  • आर्टिफिशल  इंटेलिजेंस आधारित स्मार्ट आई से हो सकेगी छात्रों की निगरानी

    आर्टिफिशल इंटेलिजेंस आधारित स्मार्ट आई से हो सकेगी छात्रों की निगरानी

    आर्टिफिशल इंटेलिजेंस आधारित स्मार्ट आई से हो सकेगी छात्रों की निगरानी

    चंडीगढ़: पिछले कई वर्षों से आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पर काफी चर्चा हो रही है। दुनिया में भी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के इस्तेमाल पर जोर दिया जा रहा है। यह तकनीक फोन या कंप्यूटर में उपलब्ध शतरंज जैसे गेम, गूगल और एलेक्सा वॉयस असिस्टेंट समेत रोबोट जैसी डिवाइस के रूप में मौजूद है। हालांकि, इस तकनीक पर अब भी काम चल रहा है। आज हम आपको बता रहे हैं आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से कैसे स्कूल में छात्रों की निगरानी की जा सकती है गवर्मेंट मॉडल सीनियर सेकेंडरी स्कूल, सेक्टर 33 चंडीगढ़ के एक छात्र संजीत सोनी ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की मदद से एक स्मार्ट आई प्रोजेक्ट बनाया है। यह प्रोजेक्ट छात्रों की उपस्थिति को चिह्नित करने और कक्षाओं और लेक्चर्स में उनकी हाज़िरी की जांच करने के लिए फ़ेस रिकगनिशन मॉडल यानी चेहरे पहचानने वाली तकनीक के रूप में काम करता है। डिजिटल इंडिया ने माइक्रो-ब्लॉगिंग प्लेटफॉर्म एप्प कू पर संजीत सोनी का एक वीडियो शेयर कर बताया कि कैसे काम करेगा यह स्मार्ट आई प्रोजेक्ट। क्या है आर्टिफिशियल इटेलिजेंस
    आर्टिफिशियल इटेलिजेंस, दुनिया की श्रेष्ठ तकनीकों में से एक है। यह दो शब्दों आर्टिफिशियल और इंटेलिजेंस से मिलकर बना है। इसका अर्थ है “मानव निर्मित सोचने की ताक़त। इस तकनीक की सहायता से ऐसा सिस्टम तैयार किया जा सकता है, जो मानव बुद्धिमत्ता यानी इंटेलिजेंस के बराबर होगा। इस तकनीक के माध्यम से एल्गोरिदम सीखने, पहचानने, समस्या-समाधान, भाषा, लॉजिकल रीजनिंग, डिजिटल डेटा प्रोसेसिंग, बायोइंफार्मेटिक्‍स तथा मशीन बायोलॉजी को आसानी से समझा जा सकता है। इसके अलावा यह तकनीक खुद सोचने, समझने और कार्य करने में सक्षम है।

  • इत्र कारोबारी पीयुष जैन से ढाई सौ करोड़ नकद, हजार करोड़ की जायदाद बरामद

    इत्र कारोबारी पीयुष जैन से ढाई सौ करोड़ नकद, हजार करोड़ की जायदाद बरामद

    पीयूष जैन के बाद अब कन्नौज में GST विजिलेंस टीम की जांच, इत्र कारोबारी रानू मिश्रा के यहां बड़ी कार्रवाई
    कानपुर,27 दिसंबर(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)।इत्र कारोबारी पीयुष जैन के ठिकानों से आज सोमवार को भी नोटों की गड्डियों के मिलने का सिलसिला जारी है। कानपुर के बाद आज कन्नौज स्थित उसके एक घर पर आरबीआई और सीबीआई कर्मी भी नोट गिनने पहुंचे हैं। अब तक कुल 257 करोड़ रुपयों की बरामदगी हो चुकी है और पीयुष जैन को गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश किया गया है। अबतक पीयुष जैन के ठिकानों से 257 करोड़ कैश, 125 किलो सोना और अरबों की संपत्ति के दस्तावेज मिले हैं। छापे में करीब 1000 करोड़ रुपये से अधिक की संपत्ति का खुलासा हो चुका है।

    गिरफ्तारी के बाद कानपुर कोर्ट में पीयुष जैन पेश

    इधर पीयूष जैन को कानपुर में गिरफ्तार कर लिया गया। थाने में अंदर उसके ठिकानों से मिले नोटों का अंबार लगा था जबकि पुलिस स्टेशन की फर्श पर धनकुबेर इत्र कारोबारी बेहाल लेटा हुआ था। ताजा समाचार में बताया गया कि पीयुष जैन का पुलिस ने मेडिकल चेकअप कराया है। इसके बाद उसे आज ही कानपुर कोर्ट में पेश किया जाएगा।

    RBI और एसबीआई की टीम भी लगाई गई

    इत्र माफिया के घर पिछले 4 दिनों से जारी छापेमारी सोमवार को भी जारी रही। कन्नौज में उसके घर पर नोटों की गिनती के लिए आरबीआई के साथ स्टेट बैंक के अफसरों की भी टीम लगायी गई है। नोट गिनने की तीन बड़ी और दो छोटी मशीनों को बढ़ाते हुए कुल 7 मशीनों का प्रयोग किया जा रहा है।

    अफसरों ने जब उससे पूछा कि ये पैसा किसका है तो उसने कहा कि मेरा है। मैंने अपने घर का पुश्तैनी 400 किलो सोना बेचकर इसे इकट्ठा किया है। ये रकम मैं अपने कारोबार में लगाना चाहता था।
    कन्नौज में इत्र कारोबारी पीयूष जैन के बेटे को लेकर शुक्रवार को जीएसटी इंटेलिजेंस महानिदेशालय गुजरात (DGGI) की टीम छिपट्टी मोहल्ला पहुंची थी, वहीं टीम ने शहर के दूसरे बडे़ कंपाउंड और इत्र कारोबारी रानू मिश्रा के घर छापा मारा और उनके स्टॉफ से पूछताछ की जा रही है, वहीं टीम ने कुछ दस्तावेज भी जब्त किए है।

    सूत्रों का कहना है कि जांच में पता चला है कि मुखौटा कंपनियां बनाकर लोन लिया गया है और कर की चोरी की गई है। जैन मूल रूप से कन्नौज के रहने वाले हैं। इनका इत्र का बड़ा कारोबार है। इनकी संपत्तियां, शोरूम एवं कार्यालय मुंबई में भी है। जांच में पता चला है कि इनका कारोबार सऊदी अरब सहित मध्य पूर्व के देशों में फैला है। पीयूष जैन की फैक्टरी से ही निर्मित ‘समाजवादी इत्र’ की लॉन्चिंग नवंबर में समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने की जैन को अखिलेश यादव का करीबी बताया जाता है।
    अधिकारियों के मुताबिक जैन की करीब 40 कंपनियां हैं जिनमें से दो कंपनियां मध्य पूर्व के देशों में हैं। जैन का कारोबार तो कई क्षेत्रों में हैं लेकिन इनका मूल व्यवसाय इत्र का है। इनका एक शो रूम मुंबई में है जहां से वह अपने इत्र का निर्यात देश और दुनिया में करते हैं। आयकर विभाग की टीम ने पीयूष जैन की फैक्ट्री, कार्यालय, कोल्ड स्टोर और पेट्रोल पंप पर छापेमारी की और इस दौरान करोड़ों की कर चोरी सामने आई।कल उनके घर से डेढ़ सौ करोड़ रुपए नकद बरामद होने के बाद टीम के सदस्यों ने घर के गुप्त तहखानों को तोड़कर रकम जब्त करने का अभियान चलाया है।

  • पुलिसिंग का मॉडल बनेगी पुलिस कमिश्नर प्रणालीःनरोत्तम मिश्रा

    पुलिसिंग का मॉडल बनेगी पुलिस कमिश्नर प्रणालीःनरोत्तम मिश्रा

    भोपाल,20 दिसंबर(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)।गृह मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा ने कहा कि भोपाल में लागू की गई पुलिस कमिश्नर प्रणाली को प्रभावी रूप से अमल में लाया जाए। आम नागरिकों को इसका एहसास भी होना चाहिए। पुलिस जनता के साथ मित्रतापूर्ण व्यवहार करे और अपराधियों के दिल में खौफ पैदा हो। कानून व्यवस्था को बनाए रखने के लिए पुलिस आधुनिक तकनीक को अपनाए। इसके प्रभावी क्रियान्वयन के लिये अत्याधुनिक तकनीक का अधिकतम इस्तेमाल करने के निर्देश भी दिये। उन्होंने पुलिस कमिश्नर प्रणाली के लाभों से जनता को अवगत कराने को कहा है।

    गृह मंत्री डॉ. मिश्रा पुलिस कमिश्नर प्रणाली लागू होने के बाद सोमवार को इसके प्रभावी क्रियान्वयन के लिये पुलिस कंट्रोल रूप भोपाल में दिये जा रहे प्रशिक्षण का जायजा ले रहे थे। प्रशिक्षण में भोपाल के पुलिस आयुक्त श्री मकरंद देउस्कर भी मौजूद थे।

    डॉ. मिश्रा ने पुलिस के आला अधिकारियों को निर्देश दिये कि प्रशिक्षण व्यवहारिक हो, जिससे पुलिस कमिश्नर प्रणाली का प्रभावी क्रियान्वयन हो। उन्होंने कहा कि इस नये सिस्टम के लागू होने के बाद अपराध नियंत्रण के सकारात्मक परिणाम अपेक्षित है।

    गृह मंत्री डॉ. मिश्रा ने सभी प्रतिभागी अधिकारियों से बेहतर परिणाम की अपेक्षा की। उन्होंने कहा कि पुलिस को सौंपे गये नये दायित्वों में कोई लापरवाही न बरतें। उन्होंने सिस्टम के क्रियान्वयन को देश में सबसे अच्छा बनाने के लिये सभी से अपना शत-प्रतिशत सर्वश्रेष्ठ योगदान देने का आव्हान किया।

  • मकरंद देऊस्कर बने भोपाल के पहले पुलिस कमिश्नर,हरिनारायण चारी मिश्रा ने संभाली इंदौर की कमान

    मकरंद देऊस्कर बने भोपाल के पहले पुलिस कमिश्नर,हरिनारायण चारी मिश्रा ने संभाली इंदौर की कमान

    भोपाल,10 दिसंबर(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)। भोपाल और इंदौर में लागू की गई पुलिस आयुक्त प्रणाली के तहत भारतीय पुलिस सेवा, राज्य पुलिस सेवा के अधिकारियों के पद-स्थापना आदेश जारी कर दिये गये हैं। पुलिस आयुक्त प्रणाली के अंतर्गत भोपाल में मकरन्द देऊस्कर (भापुसे) को और इंदौर में हरिनारायण चारी मिश्रा (भापुसे) को पुलिस आयुक्त पदस्थ किया गया है।

  • भोपाल और इंदौर मेट्रोपोलिटियन क्षेत्र घोषित, पुलिस आयुक्त प्रणाली लागू

    भोपाल और इंदौर मेट्रोपोलिटियन क्षेत्र घोषित, पुलिस आयुक्त प्रणाली लागू


    पुलिस आयुक्त प्रणाली के लिये अधिसूचना जारी

    भोपाल, 09 दिसंबर(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)। राज्य सरकार ने ऐतिहासिक निर्णय लेते हुए प्रदेश के महानगर भोपाल और इंदौर में पुलिस आयुक्त प्रणाली को लागू कर दिया है। इस संबंध में आज अधिसूचना जारी कर दी गई है। गृह मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा ने पुलिस मुख्यालय में आयोजित पत्रकारवार्ता में बताया कि कानून-व्यवस्था के प्रभावी क्रियान्वयन और दोनों शहरों की जनसंख्या 10 लाख से अधिक होने पर राज्य सरकार ने संवैधानिक प्रावधानों के मुताबिक नगरीय क्षेत्रों एवं सीमाओं को मेट्रो पोलिटियन क्षेत्र घोषित किया है। मंत्री डॉ. मिश्रा ने सरकार द्वारा लिये गये बहु-प्रतीक्षित ऐतिहासिक निर्णय के लिये मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान का आभार माना। पुलिस मुख्यालय भोपाल में पुलिस आयुक्त प्रणाली को लागू किये जाने संबंधी जानकारी की उद्घोषणा के समय पुलिस महानिदेशक श्री विवेक जौहरी और अपर मुख्य सचिव गृह डॉ. राजेश राजौरा भी मौजूद थे।

    गृह मंत्री डॉ. मिश्रा ने बताया कि पुलिस आयुक्त प्रणाली में इंदौर नगरीय पुलिस जिले में 36 थानों और भोपाल नगरीय पुलिस जिले में 38 थानों की सीमाओं को समाविष्ट किया गया है। दोनों शहरों में पुलिस महानिरीक्षक स्तर के अधिकारी पुलिस आयुक्त रहेंगे। उन्होंने बताया कि दोनों महानगरों में पुलिस आयुक्त प्रणाली के लिये अधिकारियों के पद और जोन का भी निर्धारण किया गया है।

    मंत्री डॉ. मिश्रा ने बताया कि पुलिस आयुक्त प्रणाली के लागू हो जाने से इंदौर और भोपाल के पुलिस आयुक्त की शक्तियों एवं प्राधिकारों को मध्यप्रदेश के पुलिस महानिदेशक तथा महानिरीक्षक के सामान्य नियंत्रण एवं पर्यवेक्षण के अधीन निहित किया गया है। पुलिस आयुक्त को कार्यपालक मजिस्ट्रेट की शक्तियाँ होंगी। मंत्री डॉ. मिश्रा ने बताया है कि भारतीय दण्ड प्रक्रिया संहिता-1973 (1974 का 2) की धारा-21 द्वारा प्रदत्त शक्तियों में इंदौर और भोपाल नगरीय पुलिस जिले में पदस्थ पुलिस उपायुक्तों एवं पुलिस सहायक आयुक्तों को अपने-अपने अधिकारिता क्षेत्र में विशेष कार्यपालक मजिस्ट्रेट नियुक्त कर शक्तियाँ प्रदान की गई हैं।

    मंत्री डॉ. मिश्रा ने बताया कि पुलिस एक्ट-1861 के अनुसार मेट्रोपोलिटिन क्षेत्र में पुलिस आयुक्त के अधीन पुलिस का प्रशासन रहेगा। पुलिस आयुक्त पुलिस महानिदेशक के सामान्य नियंत्रण एवं परिवेक्षण में रहेंगे। उन्होंने बताया कि बंदी अधिनियम-1900 अनुसार जेल में बंद कैदियों को पैरोल और आपातकाल में पैरोल बोर्ड की अनुशंसा पर सशर्त छोड़ा जा सकेगा। विष अधिनियम-1919 के तहत गैर कानूनी ज़हर या तेज़ाब रखने अथवा बेचने वालों की तलाशी से बरामद ज़हर या तेज़ाब जप्त किया जा सकेगा। अनैतिक व्यापार अधिनियम-1956 में निहित प्रावधान अनुसार वैश्यावृत्ति के विरुद्ध कार्यवाही की जा सकेगी और इस पेशे में धकेली गई महिलाओं को मुक्त कराया जाकर उन्हें संरक्षण-गृह में भेजा जा सकेगा।

    मंत्री डॉ. मिश्रा ने बताया कि पुलिस आयुक्त प्रणाली लागू हो जाने से विधि विरुद्ध क्रिया-कलाप निवारण अधिनियम-1967 अनुसार केन्द्र सरकार द्वारा मेट्रोपोलिटिन क्षेत्र में प्रतिबंधित संगठनों को गैर कानूनी गतिविधियों को रोकने के लिये प्रतिबंधित किया जा सकेगा। मोटर यान अधिनियम-1988 (1988 का 59) का प्रयोग करते हुए वाहनों की पार्किंग अथवा उनके रुकने के स्थान स्थानीय अधिकारियों से समन्वय कर निर्धारित किये जा सकेंगे। वाहनों की गति सीमा निर्धारित की जा सकेगी। लोक सुरक्षा के हित में या उनकी सहूलियत के लिये या किसी सड़क या पुल की स्थिति को देखते हुए, वाहनों की अधिकतम गति निर्धारित करने के लिये उपयुक्त ट्रैफिक साइन लगाये जा सकेंगे।

    मंत्री डॉ. मिश्रा ने बताया कि लोक सुरक्षा के हित में या उनकी सहूलियत के लिये या किसी सड़क या पुल की स्थिति को देखते हुए, श्रेणी विशेष के वाहनों के उपयोग को सामान्यत: अथवा निर्धारित क्षेत्र या निर्धारित सड़क पर प्रतिबंधित किये जा सकेंगे या सशर्त अनुमति दी जा सकेगी। मध्यप्रदेश सुरक्षा अधिनियम-1990 के अंतर्गत गुण्डे-बदमाशों और ऐसे अपराधी तत्वों के गैंग और आदतन अपराधियों को जिलाबदर किया जा सकेगा। उन्होंने बताया कि शासकीय गुप्त बात अधिनियम-1923 अंतर्गत सरकारी गोपनीय दस्तावेज रखने और इस अधिनियम के विरुद्ध की गई गतिविधियों पर कार्यवाही की जा सकेगी।

  • भारत के पहले सीडीएस जनरल विपिन रावत का हेलीकाप्टर दुर्घटना में निधन, एक  पायलट जख्मी

    भारत के पहले सीडीएस जनरल विपिन रावत का हेलीकाप्टर दुर्घटना में निधन, एक पायलट जख्मी

    सीडीएस बिपिन रावत समेत 14 लोगों के साथ भारतीय वायुसेना का हेलिकॉप्टर तमिलनाडु में दुर्घटनाग्रस्त

    नई दिल्ली 8 दिसंबर (प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)। भारतीय वायु सेना का एक हेलीकॉप्टर बुधवार को तमिलनाडु के कुन्नूर के पास दुर्घटनाग्रस्त हो गया। हादसे में चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (CDS) जनरल बिपिन रावत के साथ उनकी पत्नी मधुलिका रावत, उनके कर्मचारी और अन्य अधिकारी भी मौजूद थे। IAF Mi-17V5 हेलीकॉप्टर में चालक दल सहित 14 लोग सवार थे, जिनमें से चार के शव बरामद कर लिए गए हैं और तीन घायलों को अस्पताल पहुँचाया गया है। हादसे की जानकारी मिलते ही देश की दिग्गज शख़्सियतों ने Koo App पर पोस्ट करते हुए सभी की सलामती की दुआएँ माँगी।

    अधिकारियों के मुताबिक़ हेलिकॉप्टर में सवार लोगों में देश के पहले सीडीएस बिपिन रावत के रक्षा सहायक ब्रिगेडियर एलएस लिड्डर और उनके स्टाफ़ ऑफिसर लेफ्टिनेंट कर्नल हरजिंदर सिंह भी शामिल थे। भारतीय वायुसेना ने कहा कि दुर्घटना के कारणों का पता लगाने के लिए जांच के आदेश दे दिए गए हैं। हेलिकॉप्टर सुलूर हवाई अड्डे से वेलिंगटन के डिफेंस सर्विसेज स्टाफ कॉलेज की ओर जा रहा था। घटनास्थल पर राहत एवं बचाव कार्य चल रहा है और घायलों को नज़दीकी सरकारी अस्पताल और सेना अस्पताल में ले जाया गया है।

    रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह स्थिति पर नजर रखे हुए हैं और रक्षा मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों की बैठक हो चुकी है। राजनाथ सिंह ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को हादसे की जानकारी दी। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय मामले की जानकारी देने के लिए संसद पहुंचे।

    घटना की जानकारी मिलने के बाद केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने Koo App पर एक पोस्ट में कहा, “CODS श्री बिपिन रावत जी के साथ हेलीकॉप्टर के दुखद दुर्घटना के बारे में सुनकर स्तब्ध हूँ। मैं सभी की सुरक्षा, भलाई के लिए प्रार्थना करता हूं।”

    वहीं, उत्तराखंड के पूर्व सीएम और वरिष्ठ कांग्रेस नेता हरीश रावत ने Koo पोस्ट में लिखा, “चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल बिपिन रावत जी, उनकी धर्मपत्नी सहित 14 लोगों के कुन्नूर तमिलनाडु में एम.आई.17 के दुर्घटनाग्रस्त होने से घायल होने का समाचार प्राप्त हुआ, जिनको उपचार हेतु अस्पताल में भर्ती किया गया है। मैं भगवान से CDS बिपिन रावत जी एवं उनकी धर्मपत्नी जी व अन्य लोगों की शीघ्र स्वास्थ्य लाभ की कामना करता हूँ। #CDSBipinRawat”

    Koo App
    चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल बिपिन रावत जी, उनकी धर्मपत्नी सहित 14 लोगों के कुन्नूर तमिलनाडु में एम.आई.17 के दुर्घटनाग्रस्त होने से घायल होने का समाचार प्राप्त हुआ, जिनको उपचार हेतु अस्पताल में भर्ती किया गया है। मैं भगवान से CDS बिपिन रावत जी एवं उनकी धर्मपत्नी जी व अन्य लोगों की शीघ्र स्वास्थ्य लाभ की कामना करता हूँ। #CDSBipinRawat Harish Rawat (@harishrawatcmuk) 8 Dec 2021

    छिंदवाड़ा, मध्य प्रदेश से लोकसभा सांसद नकुल नाथ ने Koo करते हुए लिखा, “तमिलनाडु के कुन्नूर में सेना का हेलिकॉप्टर क्रैश होने की दुर्भाग्यपूर्ण घटना का समाचार प्राप्त हुआ, जिसमें चीफ़ आफ डिफेंस विपिन रावत जी के भी होने का समाचार है, विपिन रावत जी एवं साथियों को अस्पताल ले जानी की सूचना है। ईश्वर से उनके व समस्त घायलों की सकुशलता की प्रार्थना करता हूँ ।”

    बॉलीवुड अभिनेत्री और टीवी प्रस्तोता अर्चना पूरन सिंह ने अपनी Koo पोस्ट में कहा, “CDS बिपिन रावत को ले जा रहा हेलिकॉप्टर क्रैश। सुनकर बहुत दुःख हुआ । पैसेंजर्स की सेफ्टी के लिए प्रार्थना. 🙏🏽🙏🏽🙏🏽 बताया जा रहा है कि खराब मौसम की वजह से ये हादसा हुआ है.”

    क्रिकेटर प्रज्ञान ओझा ने अपनी कू पोस्ट में लिखा, “आपकी सुरक्षा के लिए प्रार्थना सीडीएस जनरल बिपिन रावत जी। सब कुछ ठीक होने की उम्मीद करता हूं!”

    ग़ौरतलब है कि जनरल बिपिन रावत ने सेना प्रमुख के रूप में सेवा करने के बाद 31 दिसंबर, 2019 को पूरे तीन साल के कार्यकाल के लिए भारत के पहले सीडीएस के रूप में कार्यभार संभाला था। रावत 3 फरवरी, 2015 को नागालैंड के दीमापुर में एक चीता दुर्घटना में बाल-बाल बचे थे और तब वह लेफ्टिनेंट जनरल थे।

  • राज्यपाल पहुंचे पुलिस के पचमढ़ी शिविर

    राज्यपाल पहुंचे पुलिस के पचमढ़ी शिविर

    भोपाल, 10 अक्टूबर(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)।मध्यप्रदेश के राज्यपाल महामहिम मंगुभाई पटेल ने शनिवार 09
    अक्टूबर को पुलिस प्रशिक्षण शाला पचमदी का भ्रमण किया। भ्रमण के दौरान महामहिम ने
    प्रशिक्षण शाला में प्रशिक्षणरत नव आरक्षकों के हथियार प्रशिक्षण की गतिविधियों का अवलोकन
    किया। साथ ही नव आरक्षकों की आवास व्यवस्था,भोजन व्यवस्था, विभिन्न प्रकार के प्रशिक्षणों
    के लिए परिसर में उपलब्ध सुविधाओं का जायजा लिया।

    पुलिस प्रशिक्षण शाला परिसर स्थित ब्रिटिशकालीन भवनों तथा प्रशिक्षण शाला परिसर के विस्तार के संबंध में भी जानकारी ली। इस अवसर पर होशंगाबाद जोन की पुलिस महानिरीक्षक श्रीमती दीपिका सूरी एवं पुलिस प्रशिक्षण
    शाला की पुलिस अधीक्षक श्रीमती निमिषा पाण्डेय ने महामहिम राज्यपाल महोदय को नव
    आरक्षकों के वर्ष भर चलने वाले प्रशिक्षण कार्यक्रम के बारे में विस्तृत जानकारी दी।

    श्रीमती निमिषा पाण्डेय ने बताया कि पुलिस प्रशिक्षण शाला पचमदी वर्ष 1960 में जबलपुर से
    स्थानांतरित कर पचमढ़ी लाई गई जिसमें वर्तमान में 72वें बैच के 126 नव आरक्षक प्रशिक्षणरत
    हैं। प्रशिक्षण कार्य में संलग्न स्टॉफ एवं उनके आवास और कल्याण संबंधी जानकारी भी दी गई।
    इस अवसर पर राज्यपाल महोदय द्वारा परिसर में स्थित शहीद स्मारक पर पुष्पांजलि अर्पित
    कर शहीदों को श्रद्धांजली दी। साथ ही परिसर में वृक्षारोपण भी किया। राज्यपाल महोदय ने नव
    आरक्षकों को सफलतापूर्वक प्रशिक्षण करने हेतु अग्रिम बधाई दी।

  • राज्यपाल मंगूभाई पटेल बोले साईबर सुरक्षा की मजबूती अनिवार्य

    राज्यपाल मंगूभाई पटेल बोले साईबर सुरक्षा की मजबूती अनिवार्य

    सायबर क्राइम इंवेस्टिगेशन एवं इंटेलिजेंस समिट-2021 का समापन

    भोपाल01 अक्टूबर,(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)। तेजी से बदलती हुई दुनिया में भूमि, समुद्र, वायु और अंतरिक्ष के साथ ही सायबर डोमेन का भी व्‍यापक एवं महत्‍वपूर्ण स्‍थान हो गया है। इसके असीमित उपयोग की संभावना है। नवीन तकनीक के सदुपयोग से जहाँ आमजन लाभांवित हो रहे हैं वहीं असामाजिक तत्‍व इसके दुरूपयोग से विभिन्‍न अपराधों को भी अंजाम दे रहे हैं। इस तरह की समि‍ट सायबर सुरक्षा और अपराध नियंत्रण का प्रासंगिक और सराहनीय प्रयास है। उक्‍त उद्गार आज मध्‍यप्रदेश पुलिस अकादमी, भौंरी के सभागार में दस दिवसीय सायबर क्राइम एवं इंटेलिजेंस समिट-2021 के समापन अवसर पर मुख्‍य अतिथि‍ के रूप में मध्‍यप्रदेश के राज्‍यपाल मंगूभाई पटेल ने व्‍यक्‍त किए। उन्‍होंने कहा कि अर्थव्‍यवस्‍था डिजीटल, कैशलेस की ओर अग्रसर है अत: सायबर सुरक्षा की मजबूती अनिवार्य है। इंटरनेट का कल्‍याणकारी कार्यों में सदुपयोग हो। सभी राज्‍यों की सहभागिता तथा अंतर्राष्‍ट्रीय विशेषज्ञों का मार्गदर्शन निश्चित ही सायबर सुरक्षा और सायबर अपराध नियंत्रण में सहायक होगा। राज्‍यपाल श्री पटेल ने विद्यालयीन/महाविद्यालयीन पाठ्यक्रम में भी सायबर सुरक्षा जागरूकता को शामिल करने की आवश्‍यकता बताई।

          पुलिस महानिदेशक विवेक जौहरी ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि कोविड काल में सायबर अपराधों में अत्‍यधिक बढ़ोत्‍तरी देखी गई। शहरों के साथ-साथ ग्रामीण क्षेत्रों में भी इस तरह के अपराध घटित हुए हैं। इस समिट में सायबर अपराध के निराकरण/विवेचना/नियंत्रण हेतु अधिकतम प्रयास किए गए हैं। विशेषज्ञों और सहभागियों ने अपना ज्ञान और तकनीक साझा की। डीजीपी ने कहा कि ” समिट के प्रतिभागी इस दौरान प्राप्‍त ज्ञान को अपने सहकर्मी/अधीनस्‍थों से भी साझा कर प्रशिक्षित करेंगे ताकि इन अपराधों पर त्‍वरित कार्यवाही संभव हो।

          विशेष पुलिस महानिदेशक (प्रशिक्षण) श्रीमती अरूणा मोहन राव ने बताया कि समिट में तीन हजार से अधिक अधिकारियों ने सहभागिता की है। 56 से अधिक राष्‍ट्रीय/अंतर्राष्‍ट्रीय विषय विशेषज्ञों से मार्गदर्शन प्राप्‍त हुआ है। सभी राज्‍यों में समन्‍वय और तकनीकी जानकारी का आदान-प्रदान त्‍वरित और प्रभावी कार्यवाही में सहयोगी होगा। उन्‍होंने कहा कि समिट आशानुकूल रही। समापन कार्यक्रम में यूनीसेफ की श्रीमती मारग्रेट ने भी सायबर क्राइम एंड द इम‍रजिंग टेक्‍नोलॉजी पर वर्चुअल संबोधन दिया।

    समिट के समापन अवसर पर अतिरिक्‍त पुलिस महानिदेशक  प्रशिक्षण श्रीमती अनुराधा शंकर, पुलिस अकादमी के निदेशक राजेश चावला, अतिरिक्‍त पुलिस महानिदेशक सायबर सेल योगेश देशमुख, सेवानिवृत्‍त पुलिस महानिदेशक मध्‍यप्रदेश ऋषि कुमार शुक्‍ला व क्‍लीयर ट्रेल संस्‍था के वाईस प्रेसीडेंट मनोहर कटोच सहित समिट के आयोजन से जुड़ीं संस्थाओं के प्रतिनिधि एवं अधिकारी  मौजूद थे। आभार प्रदर्शन उप निदेशक पुलिस अकादमी डॉ विनीत कपूर ने किया।

    समिट में मध्यप्रदेश सहित अन्‍य राज्‍यों के तीन हजार से अधिक पुलिस अधिकारियों ने सायबर क्राइम से निपटने एवं आधुनिक तरीकों से खुफिया जानकारी जुटाने की बारीकियाँ सीखीं।  इस समिट का आयो‍जन मध्‍यप्रदेश पुलिस द्वारा सॉफ्ट क्लिक फाउंडेशन, यूनीसेफ व क्‍लीयर ट्रेल कम्‍यूनिकेशन एनालिटिक्‍स के सहयोग से किया गया। समिट में देश एवं दुनिया के विख्‍यात सायबर क्राइम व इंटेलीजेंस विशेषज्ञों द्वारा सायबर क्राइम रोकथाम के गुर सिखाए गए। इस समिट में ऑनलाइन गेमिंग और गेम्बलिंग, किप्टोकरेंसी और क्रिप्‍टो-ट्रेड अपराधों जैसे महत्वपूर्ण विषयों के साथ वित्तीय धोखाधडी, एन्क्रिप्टेड व्हीओआईपी संचार पर अपराध को हल करने, ड्रोन तकनीक इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT), आर्टिफीशियल इंटेलिजेंस (AI), मशीन लर्निंग (ML) और अन्य विषयों पर मंथन हुआ। यह समिट महिलाओं एवं बच्चों के खिलाफ होने वाले सायबर अपराध रोकने एवं पुलिस अधिकारियों की कार्य क्षमता बढ़ाने के उद्देश्य से भी आयोजित की गई थी।

  • जन संतोष हमारा दायित्वःविवेक जौहरी

    जन संतोष हमारा दायित्वःविवेक जौहरी

    महिला अपराध अनुसंधान कौशल उन्‍नयन विकास प्रशिक्षण कार्यक्रम सम्‍पन्‍न

    भोपाल, 23 सिंतबर (प्रेस इंफार्मेशन सेंटर). पुलिस मुख्‍यालय में दो दिवसीय महिला अपराध अनुसंधान कौशल विकास प्रशिक्षण कार्यक्रम का समापन पुलिस महानिदेशक विवेक जौहरी के मुख्‍य आतिथ्‍य तथा जिला एवं सत्र न्‍यायाधीश सुश्री गिरीबाला सिंह के विशेष आतिथ्‍य में संपन्‍न हुआ।

          डीजीपी श्री जौहरी ने प्रशिक्षुओं को संबोधित करते हुए कहा कि महिला अपराध की विवेचना तथा की जाने वाली कार्यवाहियों में संवेदनशीलता अत्‍यावश्‍यक है। पीडि़त के साथ सहानुभूति पूर्ण सद्व्‍यवहार करें। कानून की जानकारी अद्यतन (अपडेट) रखें। सर्वोच्‍च न्‍यायालय, उच्‍च न्‍यायालय के नवीन निर्णयों का अध्‍ययन करें। पीडि़ता को शासन द्वारा उपलब्‍ध कराई जा रही सहायता और सुविधाओं से सुविज्ञ रहें। प्रशिक्षण लगातार चलने वाली प्रक्रिया है। जनअपेक्षाओं पर खरा उतरना हमारा दायित्‍व है, आदर्श पुलिसिंग करने का प्रयास करें।

          जिला एवं सत्र न्‍यायाधीश सुश्री गिरीबाला सिंह ने कहा कि न्‍याय होने के साथ-साथ होता हुआ दिखना भी चाहिए। विवेचना में निष्‍पक्षता एवं तथ्‍यात्‍मक दृष्टिकोण होना चाहिए। पीडि़त पक्ष की शिकायत दर्ज करते समय पूर्वागृहों से पूर्णत: मुक्‍त रहें। पीडि़त की आस्‍था और विश्‍वास का केन्‍द्र आप ही होते हैं अत: अपने उत्‍तरदायित्‍व से पूरा न्‍याय करें। अनुसंधान में तथ्‍यों की स्‍पष्‍टता पर पूरा ध्‍यान दें। अपने काम का खुद ऑडिट करें तभी सकारात्‍मक परिवर्तन ला सकेंगें।

          अतिरिक्‍त पुलिस महानिदेशक (महिला अपराध) श्रीमती प्रज्ञा ऋचा श्रीवास्‍तव ने बताया कि विगत दो वर्षों से पहला ऑफलाईन प्रशिक्षण कार्यक्रम रहा। जिसमें अच्‍छी सहभागिता रही है। प्रशिक्षण कार्यक्रम का फीडबेक उप पुलिस अधीक्षक आशुतोष पटेल तथा निरीक्षक सुश्री ज्‍योति सिंह ने दिया। प्रशिक्षुओं में उत्‍कृष्‍ट प्रदर्शन करने वाले प्रतिभागियों में निरीक्षक सुश्री प्रियंका पाठक, उप पुलिस अधीक्षक संदीप मालवीय, सुश्री यशस्‍वी शिंदे, सुश्री कीर्ति बघेल तथा अनिल कुमार को अतिथियों द्वारा प्रशस्ति पत्र प्रदान किए गए।

  • क्रिप्टो करंसी के अपराधों पर पुलिस की नजर

    क्रिप्टो करंसी के अपराधों पर पुलिस की नजर

    साइबर क्राइम इन्वेस्टिगेशन एंड इंटेलिजेंस समिट 2021

    भोपाल, 23 सितंबर (प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)। तीसरे दिन के उद्घाटन सत्र में उपस्थित पैनल मेंबर्स ने बताया कि कैसे क्रिप्टोकरेंसी और क्रिप्टो-लेन-देन ने साइबर अपराध परिदृश्य और डार्कवेब पर उनके उपयोग को प्रभावित किया है। इस सत्र का संचालन सहायक पुलिस महानिरीक्षक सायबर सेल रियाज इकबाल ने किया। इस सत्र में पुलिस महानिरीक्षक महाराष्‍ट्र पुलिस बृजेश सिंह, अतिरिक्‍त पुलिस महानिदेशक विशेष शाखा योगेश चौधरी और सायबर एक्सपर्ट जितेंद्र सिंह पैनलिस्ट के रूप में उपस्थित रहे। चर्चा में विभिन्न प्रकार के लेन-देन के हस्ताक्षर, आमतौर पर इस्तेमाल होने वाले टर्म्स और शब्दावली, इंटरनेट पर क्रिप्टोकरेंसी के उपयोग – डार्क वेब में ख़रीद फरोख्‍त से लेकर शुल्क और सेवाएं शामिल थे।

    दूसरा सत्र क्रिप्टोकरेंसी से सम्बंधित साइबर अपराध की जांच के इर्द-गिर्द रहा जिसमें इंटरनेट ऑडियंस ने कई सवाल पूछे। सत्र की अध्यक्षता अतिरिक्‍त पुलिस महानिदेशक विशेष शाखा योगेश चौधरी ने की। श्री चौधरी ने क्रिप्टोकरेंसी से सम्बंधित एक केस पर चर्चा की जिसमें एक निवेशक के साथ लगभग एक करोड़ रुपये (136,000 अमरीकी डॉलर) की धोखाधड़ी की गई। इस धोखाधड़ी में पाकिस्तान, चीन और अन्य देशों में स्थित अपराधियों के बीच अंतर्राष्ट्रीय सांठ-गांठ पाई गई।

    अगले दो सत्र में भारतीय दृष्टिकोण से क्रिप्टोकरेंसी के भविष्य पर विस्तृत चर्चा हुई। इन सत्रों को सीईओ वज़ीरएक्स निश्चल शेट्टी और कॉइनडीसीएक्स के संस्थापक और सीईओ सुमित गुप्ता ने संबोधित किया । सत्रों में ब्लॉकचेन प्रौद्योगिकी की प्रकृति और अन्य पहलुओं के बीच एक विकेन्द्रीकृत वित्तीय प्रणाली की खूबियों पर चर्चा की गई।

    अंतिम सत्र को अंतर्राष्ट्रीय प्रशिक्षक संचार डेटा विशेषज्ञ, राष्ट्रीय साइबर अपराध कानून प्रवर्तन यूके पुलिस मार्क बेंटले ने संबोधित किया। यह सत्र क्रिप्टोकोरेंसी की जांच और डार्कवेब पर क्रिप्टोकरेंसी के उपयोग से सम्बंधित रहा |

  • पवन विद्रोही के हत्यारे और शूटर सभी सबूतों के अभाव में बरी

    पवन विद्रोही के हत्यारे और शूटर सभी सबूतों के अभाव में बरी

    पवन विद्रोही हत्याकांड मामले में अदालत ने सुनाया फैसला

    भोपाल,23 अगस्त(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)। राजधानी में वर्ष 2007 के दौरान हुए पत्रकार पवन विद्रोही हत्याकांड के मामले में अदालत ने ग्वालियर के तीन शूटरों सहित आरोपी बनाए गए बिजनेस पार्टनर राजेंद्र जैन आम्रपाली, मुकेश जैन राजेश जैन और सुनील भदोरिया को सबूतों के अभाव मैं दोषमुक्त कर दिया है। जिला अदालत में अपर सत्र न्यायाधीश यतेश सिसोदिया ने सोमवार को यह फैसला सुनाया।अपने फैसले में अदालत ने कहा कि मामले में गवाहों के बयानों में विरोधाभास है साथ ही जब्ती की कार्रवाई भी प्रमाणित नहीं है। ऐसे में सभी को दोषमुक्त किया जाता है।


    पत्रकार और बिल्डर पवन जैन विद्रोही की 3 जुलाई 2007 को गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। विद्रोही कार में विदिशा से नेहरू नगर स्थित घर लौट रहे थे। ग्वालियर के शूटर जितेंद्र, मेवालाल और आरिफ ने कार को जेके रोड के पास रोककर विद्रोही की गोली मारकर हत्या कर दी थी। जिस कार में विद्रोही लौट रहे थे उसमें ही आरोपी बनाए गए विद्रोही के साले मुकेश जैन और राजेंद्र जैन आम्रपाली बैठे थे। कार चालक सरदार सिंह की भी गोलीबारी में मौत हो गई थी। मामले में शुरू में राजधानी पुलिस ने विवेचना की थी। बाद में हाईकोर्ट के आदेश पर जांच सीबीआई को सौंपी गई थी।

    सीबीआई ने पोस्टमार्टम रिपोर्ट के आधार पर पवन के पार्टनर और साले को ही चिन्हित किया था। जांच अधिकारी का कहना था कि चूंकि गोलियां सीट के पीछे से मारी गईं हैं इसलिए शूटरों और गवाहों का बयान झूठा है। ड्राईवर और पवन दोनों के मृत शरीरों में गोलियां पीछे से घुसकर आगे की ओर निकलीं थीं। जबकि पकडे गए कथित शूटरों का कहना था कि उन्होंने आगे से गोलियां चलाईं थीं। सीबीआई के बाद के अफसरों ने इस मामले में रुचि नहीं ली और अदालत में आरोपियों को भ्रम की स्थिति निर्मित करने में सफलता मिल गई।

    राजेंद्र जैन आम्रपाली के वकील विजय चौधरी ने बताया कि पुलिस की कहानी के अनुसार बिजनेस पार्टनर राजेंद्र जैन आम्रपाली, मुकेश जैन राजेश जैन और सुनील भदोरिया ने कारोबारी रंजिश के चलते साजिश रच कर भाड़े के हत्यारों से विद्रोही की हत्या कराई थी। हालांकि कोर्ट में पुलिस चारों पर लगे आरोप साबित नहीं कर सकी। अदालत में गवाहों ने अभियोजन की कहानी का समर्थन नहीं किया।

    ऐसे हुआ था हत्याकांड का खुलासा

    जांच के दौरान पिपलानी पुलिस को विद्रोही का मोबाइल मिला था। जांच में पाया गया कि हत्या के पहले विद्रोही की लगातार फोन पर बिजनेस पार्टनरों से बातचीत हो रही थी। जिस नंबर पर ज्यादा बार बातचीत हुई उसकी लोकेशन घटनास्थल के आसपास की थी। जांच में नंबर विदिशा के रहने वाले सुनील भदोरिया का निकला। सुनील भदोरिया ने पुलिस को दिए मेमोरेंडम में बताया कि उसने राजेंद्र जैन आम्रपाली, मुकेश जैन और राजेश जैन के कहने पर गवालियर के शूटरों से हत्या करवाई है। भदोरिया ने बताया था कि हत्या का सौदा 15 लाख में तय हुआ था।

  • फर्जी सेठ बनकर समृद्धि की राह में  रोड़ा बना था लूजर भास्कर

    फर्जी सेठ बनकर समृद्धि की राह में रोड़ा बना था लूजर भास्कर

    भोपाल,4 जुलाई (प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)।आयकर विभाग और प्रवर्तन निदेशालय समेत देश की तमाम एजेंसियां इन दिनों शैल कंपनियों के सहारे काला धन सफेद करके उद्योगपति बन बैठे जेबकतरों की खाना तलाशी ले रहीं हैं। केरल के गोरखधंधेबाजों के बाद देश के अन्य प्रांतों में भी इन ठगों की धरपकड़ जारी है। मुद्रा को खोखला करने वाले इन फर्जी उद्योगपतियों से जूझने में राज्यों की सरकारें सबसे बड़ा अड़ंगा साबित हो रहीं हैं। पुलिस राज्य का विषय है और पुलिस की आंखें मूंदने के लिए काले धन के इन धोबियों ने राजनेताओं से गहरी सांठगांठ कर ली है। गुजरात के अहमदाबाद में पंजीकृत कराई गई डीबी कार्प लिमिटेड और इसके सहयोगी संस्थानों पर डाले गए छापे में पता चला कि बैंकों से लगभग 28 हजार करोड़ रुपए का कर्ज लेकर भास्कर समूह ने शैल कंपनियों के सहारे लगभग छह हजार करोड़ रुपयों का सालाना टर्नओवर हासिल कर लिया था। देश के वित्तीय ढांचे की आंखों में धूल झोंकने के लिए इस समूह ने बाजार से मंहगी दर पर निवेश जुटाया और पुलिस के रिश्वतखोरों की सहायता से इन छोटे निवेशकों की पूंजी हड़पकर उसे अपनी आय बता दिया.जबकि हकीकत में ये समूह देश के संसाधनों का लूजर बनकर सामने आया है.

    डीबी कार्प लिमिटेड में आ रहे विदेशी निवेश की जांच करने पर पता चला है कि कांग्रेस नेता दिग्गी के सहयोग से शुरु किए गए इस गोरखधंधे में भाजपा के कई बड़े दिग्गज भी शामिल हैं। सत्ताधीशों का ये गिरोह राज्य के खजाने से फर्जी योजनाओं के नाम पर मोटी रकमें निकालकर इस समूह को मुहैया कराता रहा है। आयकर अधिनियम की धारा 132 में जो तलाशी ली गई उससे इस काले कारोबार की पोल खुल गई है। समूह के मुंबई, दिल्ली, भोपाल, इंदौर,जयपुर, कोरबा,, नोयडा, अहमदाबाद, समेत लगभग 40 परिसरों की तलाशी ली गई है। लगभग सात दिनों तक डेरा डाले रहे अन्य प्रदेशों से भेजे गए अधिकारियों ने इस गोरखधंधे के पूरे दस्तावेज जब्त कर लिए हैं। अपने समाचार पत्र समूह और राज्य के गृहमंत्री के सहारे दबाव बनाने के प्रयास भी नाकाम होने के बाद अब समूह के कर्ताधर्ता संघ के दरबार में दंड बैठक लगाने की जुगत भी बिठा रहे हैं।

    सरे चौराहे कथित प्रगति की पोल खुलने से शेयर मार्केट में औंधे मुंह गिरने लगा कंपनी का शेयर

    यह समूह मीडिया, बिजली, कपड़ा और रियल एस्टेट के अलावा कई अन्य धंधों से भी अपनी आय होना दिखाता रहा है। जबकि इसका मुख्य धंधा मनी लांड्रिंग(धनशोधन) का रहा है। समूह ने अपना सालाना कारोबार 6000 करोड़ रुपए दिखाया है।समूह से जुड़े उद्योगपति नमक, अगरबत्ती, साबुन, प्रिंटिंग आदि तमाम धंधों से अपनी आय दिखाते रहे हैं।प्रेस को बुद्धू समझने वाले इस गिरोह के सदस्य लोटा बाल्टियां बांटते रहते है विदेशों में अय्याशी करने वाले इन कारोबारियों की जान इन दिनों सांसत में फंसी हुई है क्योंकि देश के मुद्रा तंत्र से काले धन की धरपकड़ का शिकंजा भारत सरकार की पहल पर ही कसा गया है।

    सूत्रों के अनुसार समूह की फ्लैगशिप कंपनी डीबी कॉर्प लिमिटेड है, जो दैनिक भास्कर समाचार प्रकाशित करती है। कोयला आधारित बिजली उत्पादन व्यवसाय मेसर्स डीबी पावर लिमिटेड के नाम से किया जाता है। सरकारी सूत्र कहते हैं कि फर्जी खर्च और शेल संस्थाओं की आड़ में समूह ने सरसरी नजर में लगभग सात सौ करोड़ की टैक्स चोरी की है। समूह ने अपने कर्मचारियों के साथ शेयर धारकों और निदेशकों के रूप में कई कागजी कंपनियां बनाई हैं। इस तरह से निकाले गए धन को मॉरीशस स्थित संस्थाओं के माध्यम से शेयर प्रीमियम और विदेशी निवेश के रूप में विभिन्न व्यक्तिगत और व्यावसायिक खातों में वापस भेज दिया गया। परिवार के सदस्यों के नाम पनामा पेपर लीक मामले में भी सामने आए। विभागीय डेटा बेस बैंकिंग पूछताछ और अन्य तरीकों से पूछताछ का विश्लेषण करने के बाद तलाशी का सहारा लिया गया।

    जांच से जुड़े सूत्र बताते हैं कि डीबी कार्प लिमिटेड के रूप में समूह को कमाई का एक नया साधन मिल गया था। शासन की अनुमति प्राप्त किए बगैर समूह ने मध्यप्रदेश हाऊसिंग बोर्ड से वह जमीन खरीद ली थी। खरीद का अनुबंध करने वाली कंपनी से मिलता जुलता नाम वाली नई कंपनी बनाकर मॉल खरीदा गया। बाद में आकार ली कंपनी देश भर में मॉल बनाने का दावा करके लोन पर लोन लेती चली गई।लगभग ढाई सौ करोड़ रुपयों से बने डीबी कार्प लिमि. पर आज हजारों करोड़ रुपयों का कर्ज है। ये राशि समूह की संपत्तियों से कई गुना अधिक है।इस राशि से समूह ने आय तो की लेकिन उस पर न तो टैक्स दिया न जुर्माना भरा।मुनाफे को शैल कंपनियों में घुमाकर और अधिक लोन लिया जाता रहा।

    बड़े समाचार प्रतिष्ठान देश के वित्तीय प्रबंधकों को धमकाने की आड़ बन गए थे.

    कंपनी ने मॉल बनाने के नाम पर भारी लोन उठाया है।बताते हैं कि इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट बैंक से सितंबर 2011 में 1,080,000,000रुपए, स्टैंडर्ड चार्टर्ड बैंक से अगस्त 2010 में 500,000,000 रुपए,आईडीबीआई बैंक से 1,890,000,000 रुपए,राबो इंडिया फाईनेंस लिमि.से 1,400,000,000रुपए,एबीएन एंब्रो बैंक एनवी से जून 2009 में 250,000,000 रुपए,यूको बैंक से चल संपत्तियों पर 120,000,000 रुपए,स्टेट बैंक आफ इंदौर से फरवरी 2010 में 517,000,000 रुपए, यस बैंक लिमिटेड से 700,000,000 रुपए, स्टेट बैंक आफ इंदौर से 20,000,000 रुपए,स्टैंडर्ड चार्टर्ड बैंक से 250,000,000 रुपए, आईडीबीआई बैंक से 700,000,000रुपए, 31इंफोटेक ट्रस्टीशिप सर्विसेज लिमिटेड से 1,000,000,000 रुपए,एगको फाईनेंस जीएमबीएच से 1,778,500,000 रुपए, आईएल एंड एफएस ट्रस्ट कंपनी लिमिटेड से अक्टूबर 2007 में 250,000,000 रुपए,इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट बैंक आफ इंडिया लिमिटेड से फरवरी 2008 में 200,000,000 रुपए लोन के नाम पर जुटाए गए। ये तो प्राप्त जानकारी का बहुत छोटा हिस्सा है।

    जासूस बादशाह समाचार पत्र के ब्यूरो प्रमुख अनिल तिवारी बताते हैं कि समूह की वित्तीय अनियमितताओं पर देश की जांच एजेंसियां लंबे समय से निगाह रख रहीं थीं।कई दस्तावेजों को एकजुट करने का काम चल रहा है।अभी तक जो जानकारियां सामने आईं है उससे वित्तीय अनियमितताओं की केवल सरसरी जानकारी मिली है।इससे जुड़ी अन्य जानकारियां सामने आने पर पता चलेगा कि किस तरह उद्योग खड़े करने के नाम पर देश में ही धनशोधन की फेक्टरी चलाई जा रही थी।

    लूटो और भागो की तर्ज पर काम करता रहा समूह जिद करो दुनिया बदलो का टैग वाक्य सुनाता रहा लेकिन उसने न तो दुनिया बदली न ही देश को समृद्ध बनाया। बैंकों का पैसा हड़पकर समूह के कर्ता धर्ता अपने रिश्तेदारों के घरों में ये जायदाद छुपाते रहे।प्रदेश के नेता और अफसर तो समूह के दरवाजे पूंछ हिलाते रहे लेकिन पहली बार देश की जांच एजेंसियों ने तिजोरी में बंद लक्ष्मी को आजाद कराने की पहल की है। निश्चित तौर पर ये पहल कई करोड़ गरीबों के औद्योगिक संस्थान रोशन करेगी और हजारों करोड़ घरों में रोजगार के दीप जलाएगी।

  • हाईकोर्ट को धता बताकर कर्ज वसूली की गुंडई पर उतरा राजस्व अमला

    हाईकोर्ट को धता बताकर कर्ज वसूली की गुंडई पर उतरा राजस्व अमला

    भोपाल 3 अगस्त(प्रेस सूचना केन्द्र)। मध्यप्रदेश हाईकोर्ट नागरिकों की चाहे जो चिंता करे पर कार्यपालिका के मैदानी अफसरों को सिर्फ अपनी कमाई की चिंता सताती है। न्यायपालिका के मुखिया प्रदेश के चीफ जस्टिस मोहम्मद रफीक और जस्टिस विजय कुमार शुक्ला ने कोरोना काल में कंगाल हुए नागरिकों को राहत देने के लिए बैंकों को कुर्की करने पर रोक लगाई है लेकिन तहसीली का अमला दुष्ट साहूकार की तरह गुंडई पर उतर आया है। एमपी नगर वृत्त के तहसीली दफ्तर में तो बैंकों के वसूली एजेंटों ने बाकायदा अपना अड्डा बना लिया है। ये एजेंट पुलिस की वर्दी पहनकर कर्जदारों के घर जाते हैं और उन्हें वारंट थमाकर कुर्की का भय दिखा रहे हैं। हाईकोर्ट को झांसा देने के लिए एजेंटों ने कर्जदारों को नए लोन मंजूर करा दिए हैं। इस टॉपअप राशि से वे पुराना कर्ज जमा कर देते हैं और नए कर्ज की वसूली के लिए कुर्की आदेश जारी करवा देते हैं।

    मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की जबलपुर बेंच ने रिट याचिका क्रमांक- 8820-2021 का निपटारा करते हुए 15.07.2021 को कोरोना जैसी आपदा से प्रभावित कर्जदारों को राहत देने का प्रयास किया है । अपने फैसले में मुख्य न्यायाधीश की पीठ ने अंतरिम आदेश की समय सीमा 25 अगस्त 2021 तक बढ़ा दी है। हाईकोर्ट ने कहा है कि वित्तीय संस्थान कोरोना की आपदा को देखते हुए मजबूर डिफाल्टरों को नए लोन दें और वसूली की समय सीमा कम से कम एक महीने तक बढ़ाएं।

    बैंकों ने अपनी गड़बड़ाई कर्ज वसूली को लाईन पर लाने के लिए नए ऋण तो मंजूर किए हैं लेकिन मुनाफा बढ़ाने के लिए राजस्व अमले को साथ लेकर कुर्की का हथकंडा इस्तेमाल करना शुरु कर दिया है। बैंकों की वसूली एजेंसियों ने साहूकारों के गुंडों की तरह डिफाल्टरों का जीना हराम कर दिया है। जिला प्रशासन का साथ होऩे के कारण पुलिस का अमला भी एजेंटों को संरक्षण देता है। डिफाल्टरों से मारपीट और दुर्वयवहार की शिकायत लिखने के बजाए पुलिस वाले नागरिकों को डरा धमकाकर भगा देते हैं।

    गांधीनगर के 42 सेक्टर के निवासी शहनवाज खान ने गाड़ी के लिए आईडीएफसी फर्स्ट बैंक लिमिटेड से डेढ़ लाख रुपयों का लोन लिया था। पेशे से मैकेनिक शहनवाज का कामकाज लॉकडाउन की वजह से ठप हो गया। इसकी वजह से वह लोन की किस्तें वक्त पर जमा नहीं कर पाया। बैक के अधिकारियों ने पुराने रिकार्ड के आधार पर नया लोन मंजूर कर दिया। अब बैंक के वसूली एजेंट कथित पुलिस वालों को लेकर उसके घर जा रहे हैं और घर की कुर्की करने की धमकी दे रहे हैं।

    इसी तरह इतवारा निवासी मोहम्मद नावेद के नाम पर मंगलवारा पुलिस से 5000 रुपए का वारंट भिजवाया गया है। उसे घर की कुर्की किए जाने की धमकी दी जा रही है। जबकि उसका लोन तो कंज्यूमर सामान के लिए था। जिसकी वसूली के लिए वारंट जैसी प्रक्रिया का उपयोग ही नहीं किया जा सकता।

    कर्जों की वसूली के लिए बैंकों से आरआरसी जारी होने के बाद कलेक्ट्रेट दफ्तर को भेजी जाती है। यहां से संबंधिक एसडीएम के माध्यम से तहसील के ऋण वसूली अमले को मांग सूची जारी करने की अनुमति प्रदान की जाती है। भोपाल में इस प्रक्रिया का पालन नहीं हो रहा है। तहसील दफ्तर में अड्डा जमाए बैठे वसूली एजेंट खुद की सील ठप्पे लगाकर फर्जी हस्ताक्षरों से मांग सूची जारी कर देते हैं। फर्जी पुलिस वालों को भेजकर डिफाल्टरों को धमकाया जाता है। आईडीएफसी बैंक से जुड़ी कुछ वसूली एजेंसियों ने तो कर्ज वसूली के लिए गुंडों को नौकरी पर रख लिया है। इनमें सहयोग ,विसर्प, श्री जैसी एजेंसियों के मुश्ताक खान,लोकेश शर्मा और उनके सहयोगियों ने छीना झपटी के साथ माफियागिरी भी शुरु कर दी है। बताते हैं कि रूपाली यादव नाम की एक डिफाल्टर की कार इन्हीं एजेंटों ने धमकाकर कुर्क कर ली और उसे बाजार में बेच दिया। इसी तरह से आईडीएफसी बैंक के यार्ड में खड़ी तीन अन्य कारें भी कोरोना काल के बाद कुर्क की गईं हैं। सहयोग नाम की एजेंसी के अमित ठाकुर के ससुर पुलिस में थे और इसका लाभ लेकर वह लोन वसूली के लिए पुलिस का झांसा दिखाता रहता है। आईडीएफसी बैंक के मैनेजर सुजीत सिंह और रोहित शर्मा कथित तौर पर इन एजेंटों को संरक्षण भी देते हैं और जरूरत होने पर उनके लिए वित्तीय मदद भी मुहैया कराते हैं। कंज्यूमर प्रोडक्ट के लोन की वसूली के लिए तो आरआरसी जारी करने का प्रावधान ही नहीं है लेकिन ये एजेंट कथित तौर पर फर्जी कुर्की वारंट बनाकर लोगों को धमका रहे हैं।

    तहसील दफ्तर की ऋण वसूली शाखा पर बैंकों के वसूली एजेटों ने कब्जा जमा लिया है.

    सूत्र बताते हैं कि गुरु एसोसिएट नाम की वसूली एजेंसी के फरीद और गुरु भाई अपने पार्टनरों के साथ मिलकर लंबित किस्तों वाले वाहनों को तहसील से बाहर ही बेच देते हैं। तहसील के नोटिसों के आधार पर डिफाल्टरों को धमकाया जाता है। कई ग्राहकों ने तो राजधानी के पुलिस थानों में इस गुंडागिरी के विरुद्ध प्रकरण भी दर्ज कराए हैं। अशोका गार्डन समेत कई पुलिस थानों में ये प्रकरण जांच के बाद दर्ज किए गए हैं ।तहसीलदार को अनाप शनाप जानकारियां देकर सहयोग एजेंसी के सुजीत सिंह ने तो कथित तौर पर आठ दस ग्राहकों के बैंक खाते भी सीज करवा दिए हैं ।

    वसूली एजेंट खुद को राजस्व अधिकारी भी बता देते हैं.

    हाईकोर्ट के आदेश के बाद भी एजेंटों के माध्यम से की जा रही इस अवैध वसूली और गुंडागर्दी के बारे में पूछे जाने पर तहसीलदार मनीष शर्मा ने कहा कि हाईकोर्ट के आदेश की वजह से कुर्की की प्रक्रिया रोक दी गई है। डिफाल्टरों को मांग पत्र जरूर भेजे जा रहे हैं क्योंकि हम किसी को कर्ज जमा करने से रोक नहीं सकते। श्री शर्मा ने कहा कि बैंकों की वसूली पर हमें प्रोत्साहन राशि मिलती है जो कि बाकायदा शासन की ओर से वेतन के अलावा जारी होती है। कलेक्टर के ब्रिक्स फंड में भी कर्ज वसूली का एक हिस्सा जमा होता है। इस वजह से हम लोग कर्ज वसूली को प्राथमिकता देते हैं। हाईकोर्ट जब अनुमति देगा तो कुर्की की कार्रवाई वसूली नियमों के अनुसार ही की जाएगी।

  • जनता के अरबों रुपए दबाकर उद्योगपति बन बैठा भास्कर समूह

    जनता के अरबों रुपए दबाकर उद्योगपति बन बैठा भास्कर समूह

    भोपाल,28 जुलाई(अनिल तिवारी)। वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने 27 जुलाई मंगलवार को संसद में कहा कि रिजर्व बैंक को सरकारी क्षेत्र के बैंकों ने बताया है कि जानबूझकर कर्ज लौटाने में चूक करने वाले 2,494 लोगों से वसूली का काम जारी है। पिछले तीन वित्तीय वर्षों के दौरान एनपीए और बट्टे खाते में डाले गए ऋणों में से 3,12,987 करोड़ रुपयों की वसूली की गई है। इनमें से ज्यादातर लोग भास्कर समूह की तरह दबाव की रणनीति अपनाकर बैंकों से करोड़ों रुपए का लोन हड़प रहे थे। अपनी दबंगई के सहारे आडिट रिपोर्ट को मनमाफिक तैयार कराकर रोज नए लोन मंजूर करा रहे थे लेकिन उन्हें चुकाने की जगह सरकार को बदनाम करने की गुंडई करते रहे हैं।

    पिछले दिनों भास्कर समूह पर आयकर विभाग ने जो छापे डाले उसके बाद माफिया की तरह बर्ताव कर रहे समूह के प्रमोटरों ने अपने कांग्रेसी गुर्गों के माध्यम से सरकार और संसद पर ये कहकर दबाव बनाना शुरु कर दिया था कि ये पत्रकारिता पर हमला है। भास्कर समूह के तनखैया पत्रकारों ने भी शोर मचाना शुरु कर दिया कि आपातकाल की तरह प्रेस की आजादी को कुचलने का प्रयास किया जा रहा है।जबकि सरसरे अनुमान के मुताबिक भास्कर समूह ने 28 हजार करोड़ रुपए से अधिक का कर्ज ले रखा है।

    भास्कर समूह की लिस्टेड कंपनियां तो भास्कर इंडस्ट्रीज लिमिटेड और शारदा साल्वेंट लिमिटेड के नाम से दर्ज हैं लेकिन इसकी आड़ में सैकड़ा भर अनलिस्टेड कंपनियां भी काम कर रहीं थीं। इनमें आरके इंनवेस्टमेंट प्राईवेट लिमिटेड, बीईएल ट्रेडर्स प्राईवेट लिमिटेड, बीएफपी एंटरप्राईजेस प्राईवेट लिमिटेड,बेरी डेवलपर्स एंड इंफ्रास्ट्रक्चर प्राईवेट लिमिटेड, बीएफपी ट्रेडर्स प्राईवेट लिमिटेड, भास्कर एयरलाईंस इंडिया प्राईवेट लिमिटेड, भास्कर ब्राडकास्टिंग कार्पोरेशन लिमिटेड, भास्कर डेनिम लिमिटेड, भास्कर एक्सिम लिमिटेड, भास्कर एक्सोआईल लिमिटेड, भास्कर इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड, भास्कर फूड्स प्राईवेट लिमिटेड,भास्कर ग्लोबल प्राईवेट लिमिटेड, भास्कर हाऊसिंग डेवलपमेंट कंपनी प्राईवेट लिमिटेड, भास्कर मल्टीमीडिया प्राईवेट लिमिटेड, भास्कर मल्टीनेट लिमिटेड,भास्कर पब्लिकेशन एंड एलाईड इंडस्ट्रीज प्राईवेट लिमिटेड,भास्कर बायोफ्यूल प्राईवेट लिमिटेड, भास्कर व्यंकटेश प्रोडक्ट प्राईवेट लिमिटेड, भोपाल फाईनेंशियल सर्विस प्राईवेट लिमिटेड,ब्रिक ज्वाईंट प्राईवेट लिमिटेड,ब्राईट ड्रग इंडस्ट्रीज लिमिटेड, चंबल ट्रेडिंग प्राईवेट लिमिटेड,डीबी बिल्डकॉन प्राईवेट लिमिटेड, डीबी इनर्जी प्राईवेट लिमिटेड, डीबी इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड, डीबी माल्स प्राईवेट लिमिटेड, डीबी माईनिंग कार्पोरेशन लिमिटेड,डीबी पावर लिमिटेड, डीबी पब्लिकेशंस प्राईवेट लिमिटेड, डिलाईट इंनवेस्टमेंट प्राईवेट लिमिटेड, डीलक्स ट्रेवल सर्विस प्राईवेट लिमिटेड, डिजाईन साल्यूशंस लिमिटेड, देव एंटरप्राईजेस प्राईवेट लिमिटेड, देव फिस्कल सर्विसेस प्राईवेट लिमिटेड, देव मीडिया प्राईवेट लिमिटेड, डेलीजेंट मीडिया कार्पोरेशन लिमिटेड, डायमेंशन मीडिया प्राईवेट लिमिटेड,डायरेक्ट ओह मीडिया प्राईवेट लिमिटेड, दिव्या देव डेवलपर्स प्राईवेट लिमिटेड,दिव्या ट्रेडिंग प्राईवेट लिमिटेड, एक्सोईल्स एंटरप्राईजेस प्राईवेट लिमिटेड, ग्वालियर बिल्डकान प्राईवेट लिमिटेड, इंडिया इंटरएक्टिव टेक्नालाजीस प्राईवेट लिमिटेड, खानदाधर मिनरल्स लिमिटेड,मंजुल पब्लिशिंग हाऊस प्राईवेट लिमिटेड, मेरी डेवलपर्स प्राईवेट लिमिटेड, जैसी कंपनियां शामिल हैं।

    कमलनाथ हों या शिवराज,पानी भरते रहे प्रदेश के सभी कर्णधार

    जिन प्रोप्राईटर फर्म्स से भास्कर समूह अपनी आय होना दिखाता रहा है उनमें मेसर्स भास्कर ग्लोबल, भास्कर फोटो टाईप सेटर भोपाल, भास्कर प्रिंटिंग प्रेस अहमदाबाद, सूरत,वडोदरा, भास्कर प्रिंटिंग प्रेस भोपाल, मेसर्स द्वारका प्रसाद अग्रवाल एंड ब्रदर्स, द्वारका प्रसाद अग्रवाल चैरीटेबल ट्रस्ट, गिरीश अग्रवाल हिंदू अविभाजित फैमिली, मेसर्स मतोलिया मोटल्स, ओमप्रकाश गर्ग हिंदू अविभाजित फैमिली, पवन अग्रवाल हिंदू अविभाजित फैमिली, रमेश चंद्र अग्रवाल हिंदू अविभाजित फैमिली, आरसी अग्रवाल चैरिटेबल ट्रस्टर, आरसी फोटो टाईप सेटर रायपुर, मेसर्स आरसी प्रिंटर्स, शारदा देवी चैरीटेबल ट्रस्ट, शिवपुरी ट्रेडिंग कार्पोरेशन, सुधीर अग्रवाल हिंदू अविभाजित फैमिली, शामिल हैं।

    जिन कंपनियों से ये समूह अपना कारोबार दिखाता रहा है उनमें न्यू इरा पब्लिकेशंस प्राईवेट लिमिटेड, पीकाक ट्रेडिंग एंड इंनवेस्टमेंट प्राईवेट लिमिटेड, रीजेंसी एग्रो प्रोडक्टस् प्राईवेट लिमिटेड, रीजेंसी होटल्स एंड इंनवेस्टमेंट्स इंडिया प्राईवेट लिमिटेड,एसए ट्रेडिंग एंड इन्वेस्टमेंट्स प्राईवेट लिमिटेड,सौराष्ट्र समाचार प्राईवेट लिमिटेड, एसबी होटल्स प्राईवेट लिमिटेड, शारदा रियल इस्टेट प्राईवेट लिमिटेड, शाश्वत होम्स प्राईवेट लिमिटेड, शौर्या डायमंड लिमिटेड, साल्वेंट ट्रेडर्स प्राईवेट लिमिटेड, स्टाईटेक्स ग्लोबल लिमिटेड, सनशाईन साल्वेंट प्राईवेट लिमिटेड, सर्ज डेवलपर्स प्राईवेट लिमिटेड, सूर्या आई इंस्टीट्यूट एंड रिसर्च सेंटर प्राईवेट लिमिटेड, राईटर्स एंड पब्लिशर्स लिमिटेड, वेंचर ड्राईव प्राईवेट लिमिटेड, विज्युअल मीडिया एंटरटेनमेंट प्राईवेट लिमिटेड, जैसी कई अन्य कंपनियां शामिल हैं।

    पत्रकारिता की आड़ में परिवारवाद

    आयकर अधिनियम की धारा 132 के तहत दिए गए नोटिस के जवाब में जो जानकारी समूह के प्रवर्तकों ने दी है उसमें परिवारों और रिश्तेदारों के नाम मोटा मालिकाना हिस्सा दिखाया गया है। कंपनी के प्रमोटरों की हिस्सेदारी भी बांटकर उन्हें संपत्ति का मालिक बनाया गया है।सर्व श्री गिरीश अग्रवाल 5.24 प्रतिशत संपत्ति के मालिक हैं। जबकि श्रीमती ज्योति अग्रवाल 5.26 प्रतिशत,कस्तूरी देवी अग्रवाल 3.08 प्रतिशत, नमिता अग्रवाल 4.23 प्रतिशत, निकिता अग्रवाल 1.42 प्रतिशत, पवन अग्रवाल 5.70 प्रतिशत,रमेश चंद्र अग्रवाल 19.66 प्रतिशत,स्वर्गीय रमेशचंद्र अग्रवाल हिंदू अविभाजित परिवार की हैसियत से 2.78 प्रतिशत, सुधीर अग्रवाल 8.73 प्रतिशत, भास्कर फूड्स प्राईवेट लिमिटेड 2.78 प्रतिशत,राईटर्स एंड पब्लिशर्स लिमिटेड 1.93 प्रतिशत हिस्सेदारी के साथ समूह के प्रमोटर्स हैं।

    अनुप्रिया आचार्यः डीबी कार्प लिमिटेड की डायरेक्टर, पिता की दौलत पर ऐश्वर्य का साम्राज्य

    जिन विदेशी हिस्सेदारों ने एनआरआई के तौर पर भागीदारी की है उनमें सर्वश्री बृजेश जे पटेल 2.34 प्रतिशत, जयवंत एन पटेल 5.99 प्रतिशत,कांतिभाई नाथाभाई पटेल 4.83 प्रतिशत, माया जे पटेल 5.80 प्रतिशत, पायल जी पटेल 2.34 प्रतिशत, सविबेन कांतिभाई पटेल 2.22 प्रतिशत, के भागीदार हैं। समूह में शामिल अन्य प्रमोटरों में चंबल ट्रेडिंग प्राईवेट लिमिटेड की 7.20प्रतिशत, भास्कर इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड की 7.89 प्रतिशत हिस्सेदारी है। अन्य लोगों की 0.58 प्रतिशत हिस्सेदारी भी दर्शायी गई है।कुल पांच लाख करोड़ से अधिक की संपत्तियां भास्कर समूह के पास इकट्ठी हैं। भास्कर के इस साम्राज्य में पलीता लगाने वालों में भी इसके प्रमोटर्स ही शामिल हैं क्योंकि समूह ने न तो सरकार को टैक्स देना उचित समझा न बैंकों को उसकी संपत्तियां लौटाईं और न ही प्रमोटरों को मुनाफे का हिस्सा दिया। इसी वजह से कागजों पर बनी कंपनियों की कागजी नाव डूबने की कगार पर जा पहुंची।

    चाचा महेश प्रसाद अग्रवालःरमेश ने हड़प लिया दैनिक भास्कर

    जनधन को दबाने वालों में स्वर्गीय रमेश चंद्र अग्रवाल का पूरा परिवार और खानदान बढ़ चढ़कर भागीदार रहा है। दस्तावेजों पर जनधन का मालिकाना हक प्राप्त करने वालों में रमेश चंद्र अग्रवाल की मां कस्तूरी देवी अग्रवाल, बहन मीना गर्ग, बहन नीलम गोयल, बेटे सुधीर अग्रवाल, गिरीश अग्रवाल, पवन अग्रवाल,शामिल हैं।अन्य मालिकों में रमेश चंद्र अग्रवाल की बेटी भावना अग्रवाल, दामाद स्वर्गीय डाक्टर ओपी गर्ग, दामाद श्री गोविंद प्रसाद गर्ग, जिठसास विनीता खेतावत, सुधीर अग्रवाल की पत्नी ज्योति अग्रवाल, सुधीर का बेटा अर्जुन अग्रवाल, बेटी शुभ अग्रवाल, ससुर डीडी बेरी, सास सुषमा बेरी, साले सुमीत बेरी, जिठसास अन्नू राखीजा, जिठसास नीतू सिंह, जिठसास रीनू दुआ शामिल हैं।

    दैनिक भास्कर समूह ने अपने राजनीतिक संबंधों और पत्रकारिता से अर्जित रसूख के दम पर बैंकों में भारी माफियागिरी मचाई थी।बैंकों ने भी इस कागजी विकास के दावों को सच माना और धड़ाधड़ मोटी रकमें समूह को थमा दीं। वर्ष 2013 से 2017 के दौरान भारतीय स्टेट बैंक ने 4,400,000,000 रुपए समूह को थमा दिए। सितंबर 2018 में आरबीएल बैंक लिमिटेड ने 1,000,000,000 रुपए समूह को दिए। अचल संपत्तियों और ब्याज को गिरवी रखकर आरबीएल बैंक ने 2,430,000,000 रुपए और दे दिए। एक्सिस ट्रस्टी सर्विस लिमिटेड ने 6,000,000,000 रुपए,एक्सिस ट्रस्टी सर्विसेज लिमिटेड ने 5,970,000,000 रुपए, एक्सिस ट्रस्टी सर्विस लिमिटेड ने 5,970,000,000 रुपए फिर जारी किए।हाऊसिंग एंड अर्बन डेवलपमेंट कार्पोरेशन लिमिटेड ने इन्हीं संपत्तियों को गिरवी रखकर अप्रैल 2011 में 250,000,000 रुपए, स्टेट बैंक आफ इंदौर ने मार्च 2011 में 250,000,000 रुपए, एलआईसी हाऊसिंग फायनेंस लिमिटेड ने 400,000,000 रुपए,आरबीएल बैंकलिमिटेड ने 1,995,000,000 रुपए,आरबीएल बैंक लिमिटेड ने ही संपत्तियों पर 313,000,000 रुपए सितंबर 2018 में जारी किए। कार्पोरेट गारंटी पर आरबीएल बैंक ने जुलाई 2019 में 218,750,100 रुपए, यूनियन बैंक आफ इंडिया ने दस्तावेजों के आधार पर 5,970,000,000 रुपए भास्कर समूह को थमा दिए। आईडीबीआई बैंक ने 750,000,000 रुपए, सेन्ट्रल बैंक आफ इंडिया ने 500,000,000 रुपए, पंजाब एंड सिंध बैंक ने 250,000,000 रुपए, स्टेट बैंक आफ पटियाला ने 432,900,000 रुपए, स्टेट बैंक आफ इंडिया ने 3,150,000,000 रुपए, एक्सिस ट्रस्टी सर्विसेज लिमिटेड ने 6,000,000,000 रुपए भास्कर समूह को थमा दिए जिन्हें न तो समूह लौटा रहा है न ही उससे आय हासिल करके उसे बढ़ा पा रहा है।

    बैंकों से हड़पी गईं इन राशियों की ये पूरी सूची नहीं हैं।प्राप्त राशियों में से ये चंद आंकड़े हैं जो राशियां खुद को कागज पर उद्योगपति बताकर भास्कर समूह ने हड़पी हैं। जिद करो दुनिया बदलो जैसा झांसेवाला स्लोगन देकर भास्कर समूह दिन ब दिन नाममात्र का ब्याज देकर ये राशि प्राप्त करता रहा है। समूह के लालच और ठगी का आलम ये है कि वह बैंकों को ब्याजराशि भी नहीं दे पा रहा है। शिवराज सिंह चौहान जैसी कमजोर सरकार अखबार को विज्ञापन के रूप में भारी धनराशि मुहैया कराती रही जिससे वह बैंकों की किस्त भरकर अधिकारियों को टहलाता रहा। बताते हैं कि एक्सिस बैंक की एक अधिकारी ने ब्याज की रकम जमा न करने पर रमेश चंद्र अग्रवाल को ऐसी डॉट पिलाई थी कि वे स्वयं मध्यप्रदेश सरकार के खजाने से रकम लेकर अहमदाबाद गए थे लेकिन हार्ट अटैक आ जाने की वजह से उनकी मौत हो गई।

    भास्कर समूह ने बैंकों से इतना अधिक कर्ज ले रखा है कि वह इसी मूल रकम भी बैंकों को नहीं लौटा सकता है। उसकी संपत्तियां भी इतनी नहीं हैं कि उन्हें बेचकर जनधन की वसूली की जा सके। समूह पर आयकर ही इतना बाकी है कि यदि वह जुर्माना सहित वसूला जाए तो पूरा समूह बिक जाए और फिर भी कर नहीं भरा जा सकता है। देश में फर्जी उद्योगपतियों का सरगना भास्कर समूह पत्रकारिता के दम पर अपनी झूठी शान बघार रहा है। जब आयकर की जांच शुरु हुई तो इसे पत्रकारिता पर हमला बताने वालों की भीड़ खड़ी हो गई। इन चंद आंकड़ों से समूह की औकात साफतौर पर आंकी जा सकती है। जो मुफ्तखोर इस समूह के साथ खड़े हो रहे हैं उनकी भी जांच कराई जानी जरूरी है ताकि जनधन को गड़पने वाले बदमाशों को आर्थिक विकास की धुरी से बाहर किया जा सके।

  • डीजीपी जौहरी बोले तो बेखौफ अपराधियों पर बरसी एमपी पुलिस

    डीजीपी जौहरी बोले तो बेखौफ अपराधियों पर बरसी एमपी पुलिस

    दो माह में 733 चिन्हित गुण्‍डों पर कार्यवाही, चार हजार से अधिक ईनामी बदमाशों की गिरफ्तारी

    भोपाल। पुलिस महानिदेशक विवेक जौहरी के नेतृत्‍व में विगत दो माह जून-जुलाई में प्रदेश की पुलिस ने गुण्‍डों-माफियाओं और आपराधिक तत्‍वों के विरूद्ध कठोर कार्यवाही की है। डीजीपी ने अपने मैदानी अफसरों को निर्देश दिए थे कि शासन की मंशा के अनुरूप प्रदेश में आपराधिक तत्‍वों का समूल सफाया करें और प्रदेश को अपराध मुक्‍त बनाने के लिये कार्य करें। समाज विरोधी गैर कानूनी गतिविधियों को अंजाम देने वाला व्‍यक्ति चाहे कितना भी रसूखदार हो, उसके विरूद्ध कानूनी कार्यवाही करें। संगठित अपराध करने वाले आपराधिक लोगों का सिंडीकेट तहस-नहस कर दें।

    कोविड- 19 अनलॉक की प्रक्रिया प्रारम्भ होने के बाद म.प्र. पुलिस द्वारा आधारभूत पुलिसिंग पर कार्य करना प्रारम्भ किया गया है। अपराध एवं अपराधियों पर नियंत्रण करने के उद्देश्य से पुलिस महानिदेशक जौहरी ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग करके ये विशेष अभियान चलाने के निर्देश दिए थे। अभियान के दौरान प्रत्येक जिले में शीर्ष आपराधिक तत्वों को सूचीबद्ध कर उनके विरूद्ध उचित वैधानिक कार्यवाही करने के निर्देशों के फलस्वरूप 733 आपराधिक तत्वों को चिन्हित कर उनके विरुद्ध 133 एनएसए, 350 जिला बदर एवं 140 धारा 110 द.प्र.सं. के प्रकरण पंजीबद्ध कर न्यायालय में प्रस्तुत किये गये।

    माह जून-2020 में चलाए गए विशेष अभियान में 1980 नई हिस्ट्रीशीट फाईल एवं 88 नई गैंग हिस्ट्रीशीटर फाईल तैयार की गई। माह जून-2020 में चलाए गए विशेष अभियान में 137 पैरोल पर छूटे अपराधियों की पैरोल निरस्त कराने की कार्यवाही की गई। माह जून-2020 में चलाए गए विशेष अभियान में संपत्ति संबंधी अपराधों के 2564 स्थाई वारंटी एवं 375 गिरफ्तारी वारंट तामील कराये गये। इसी प्रकार माह जुलाई में 3914 स्थाई वारण्ट एवं 477 गिरफ्तारी वारण्ट तामील कराने गये।

    विगत माहों में कुल 4386 ईनामी बदमाशों को गिरफ्तार करने में सफलता प्राप्त हुई। पोर्टल के माध्यम से वाहन चैकिंग एवं थानों में रखे वाहनों की सर्चिंग के दौरान माह जुलाई में 3,45,182 वाहनों को सर्च किया गया। जिसमें 228 अपराधियों से 251 चोरी के वाहन जप्त करने में सफलता प्राप्त की।

    गुम बालक/बालिकाओं की दस्तयाबी के लिए माह जुलाई में 1,628 बालक/बालिकाओं को दस्तयाब करने में सफलता प्राप्त की है। चिटफण्ड कंपनियों के विरूद्ध शिविर लगाकर शिकायतें प्राप्त कर निराकरण कराने के निर्देश दिये गये थे 275 प्रकरण कायम किये जाकर शिकायतों का निराकरण कराया जा रहा है। जिला रतलाम, कटनी, इंदौर एवं नीमच में निवेशकों के रूपये वापस कराने की अच्छी कार्यवाही की गई है। करोड़ों रुपये आवेदकों को दिलाए गए। बदमाशों द्वारा अवैध तरीके से अर्जित की गई सम्पत्ति एवं शासकीय जमीनों पर अतिक्रमण करने के मामलों में इन सम्‍पत्तियों को नष्ट करना एवं शासकीय जमीनों को अतिक्रमण मुक्त कराया गया। इसी तरह जिला इंदौर, भोपाल में भू-माफियाओं के विरुद्ध भी प्रभावी कार्यवाही की गई है।

  • डीएनए जांच में सहयोग देगी पुलिस -डीजीपी राजेन्द्र कुमार

    डीएनए जांच में सहयोग देगी पुलिस -डीजीपी राजेन्द्र कुमार

    भोपाल में नव निर्मित उच्‍च तकनीक प्रयोगशाला में डीएनए जाँच शुरू

    भोपाल, 07 मार्च(प्रेस सूचना केन्द्र)। दृढ़ इच्‍छा शक्ति एवं संकल्‍पबद्ध होकर डीएनए के सभी लंबित सैम्‍पल की जाँच का काम अगले छ: माह के भीतर पूरा करें। इसके लिए तकनीकी स्‍टाफ एवं अन्‍य सुविधाएं मुहैया कराने में पुलिस मुख्‍यालय का पूरा सहयोग मिलेगा। यह बात पु‍लिस महानिदेशक राजेन्द्र कुमार ने एफएसएल वैज्ञानिकों एवं तकनीकी स्‍टाफ को संबोधित करते हुए कही। श्री राजेन्‍द्र कुमार ने यहाँ भदभदा रोड़ स्थित क्षेत्रीय न्‍याया‍लयिक विज्ञान प्रयोगशाला परिसर में नव निर्मित हाईटेक लेबोरेटरी कॉम्‍प्‍लेक्‍स (उच्‍च तकनीक प्रयोगशाला) में डीएनए परीक्षण कार्य का शनिवार को शुभारंभ किया। ज्ञात हो लगभग छ: करोड़ रूपये की लागत से निर्मित इस हाईटेक लेबोरेटरी कॉम्‍प्‍लेक्‍स भवन का लोकार्पण गत 26 फरवरी को मुख्‍यमंत्री द्वारा किया गया था।

          इस लेबोरेटरी के शुरू होने से डीएनए जाँच के क्षेत्र में मध्‍यप्रदेश में नया अध्‍याय जुड़ा है। अब प्रदेश में डीएनए जाँच के लिए अत्‍याधुनिक तकनीक से सुसज्जित दो प्रयोगशालाएँ हो गईं हैं। अभी तक केवल सागर की एफएसएल में ही डीएनए जाँच की सुविधा उपलब्‍ध थी। इस हाईटेक लैब में एनजीएस उपकरण भी लगाया गया है, जो भारत की किसी लैब में पहली बार लगा है। भोपाल में आधुनिकतम उपकरणों के साथ शुरू हुई इस प्रयोगशाला में डीएनए जाँच के साथ-साथ Cow Buffalo meat testing ( गाय एवं भैंस के मांस का परीक्षण) का काम भी होगा। यह लैब शुरू होने से पॉक्‍सो एक्‍ट एवं यौन अपराधों के निराकरण में तेजी आएगी।

          पुलिस महानिदेशक श्री राजेन्‍द्र कुमार ने मध्‍यप्रदेश एफएसएल के निदेशक से कहा कि प्रदेश में जब तक नई अन्‍य लैब शुरू नहीं होतीं तब तक डीएनए सैम्‍पल जाँच की पैडेंसी दूर करने के लिए सागर एवं भोपाल की लैब को 24 घंटे चालू रखने का प्रयास करें। तकनीकी स्‍टाफ की कमी दूर करने के लिए स्‍टाफ का युक्तियुक्‍तकरण किया जाए। उन्‍होंने हिदायत दी कि डीएनए जाँच करने में सक्षम स्‍टाफ को मैदानी स्‍तर से इन प्रयोगशाला में पदस्‍थ करें। साथ ही भरोसा दिलाया अन्‍य जरूरी सुविधाएं मुहैया कराने के लिए पुलिस मुख्‍यालय से हर संभव मदद मिलेगी। पुलिस महानिदेशक के आहृवान पर कार्यक्रम में मौजूद स्‍टाफ ने डीएनए पैडेंसी छ: माह के भीतर निपटाने का संकल्‍प लिया।

    श्री राजेन्‍द्र कुमार ने कहा कि डीएनए जाँच रिपोर्ट एक ऐसा साक्ष्‍य है, जिससे अपराधी को शत-प्रतिशत सजा दिलाई जा सकती है। उन्‍होंने कहा कि लैगिंक अपराधों एवं हत्‍या के प्रकरणों में न्‍यायालय द्वारा डीएनए सैम्‍पल जाँच रिपोर्ट की माँग खासतौर पर की जाती है। इसलिए डीएनए जाँच की गति हमें तेज करनी ही होगी। पुलिस महानिदेशक ने डीएनए जाँच के लिए प्रदेश की लेबोरेटरी में उच्‍च मानक स्‍थापित करने पर भी विशेष बल दिया। साथ ही कहा कि ऐसे पाठ्यक्रम बनाएं, जिनके डिप्‍लोमा व प्रमाण पत्र के आधार पर तकनीकी स्‍टाफ की पूर्ति की जा सके और न्‍यायालय में भी हमारा पक्ष मजबूत हो सके।

    आरंभ में पुलिस महानिदेशक ने दीप प्रज्‍ज्‍वलन कर डीएनए परीक्षण कार्यक्रम का शुभारंभ किया। इस अवसर पर जी अखेतो सेमा अतिरिक्‍त पुलिस महानिदेशक तकनीकी सेवाएं मंचासीन थे। स्‍वागत उद्बोधन मध्‍यप्रदेश एफएसएल के निदेशक हर्ष शर्मा ने दिया। डीएनए लैब के प्रभारी डॉ अनिल कुमार सिंह ने बताया कि मध्‍यप्रदेश डीएनए जाँच में देश भर में अग्रणी है। डीएनए जाँच के आधार पर पिछले लगभग तीन वर्ष में मध्‍यप्रदेश में न्‍यायालय ने 34 मौत की सजाएं सुनाईं है, जो देश भर में सर्वाधिक हैं।

    कार्यक्रम में अतिरिक्‍त पुलिस महानिदेशक रेल श्रीमती अरूणा मोहन राव, अतिरिक्‍त पुलिस महानिदेशक महिला अपराध अन्‍वेष मंगलम, अतिरिक्‍त पुलिस महानिदेशक कल्‍याण विजय कटारिया, अतिरिक्‍त पुलिस महानिदेशक जेएनपीए डी.सी.सागर, अतिरिक्‍त पुलिस महानिदेशक प्रबंध डी.श्रीनिवास राव व अतिरिक्‍त पुलिस महानिदेशक योजना अनंत कुमार सिंह सहित अन्‍य वरिष्‍ठ पुलिस अधिकारी एवं एफएसएल के वैज्ञानिक व अधिकारी मौजूद थे।

  • बंद कमरे की चर्चा पर नहीं लग सकेगा एट्रोसिटी एक्ट

    बंद कमरे की चर्चा पर नहीं लग सकेगा एट्रोसिटी एक्ट

    इलाहाबाद,3 मार्च(प्रेस सूचना केन्द्र)। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा है कि अनुसूचित जाति और जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनयम, 1989 के तहत कथित अपराध “सार्वजनिक रूप” (पब्लिक व्यू) से होना चाहिए। न्यायमूर्ति राम कृष्ण गौतम ने स्पष्ट किया कि अगर किसी व्यक्ति को एससी/एसटी समुदाय का होने के कारण अपमानित किया जाता है और यह घटना बंद दरवाज़े के भीतर होती है तो इस पर एससी/एसटी अधिनियम लागू नहीं होता।

    यह आदेश जाँच विभाग के जांच अधिकारी केपी ठाकुर के आवेदन पर दिया गया है।उन्होंने अपने आवेदन में विनोद कुमार तनय के ख़िलाफ़ शिकायत की है। ठाकुर ने तनय को अपने कमरे में बुलाकर साक्ष्य की रिकॉर्डिंग को कहा था। तनय के साथ उसका एक सहकर्मी एमपी तिवारी भी था। ठाकुर ने इस पर आपत्ति की और उन्होंने तिवारी से इस प्रक्रिया में व्यवधान नहीं पहुँचाएँ और कमरे से बाहर चले जाएं। इसके बाद, तनय ने आवेदनकर्ता के ख़िलाफ़ आईपीसी की धारा 323, 504, 506 और एससी/एसटी अधिनियम की धारा 3(1) (X) के तहत मामला दायर किया।

    जब निचली अदालत ने ठाकुर को अदालत में पेश होने को कहा तो उसने इस मामले को हाईकोर्ट में चुनौती दी। हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा था कि ठाकुर पर जिस अपराध का आरोप लगाया अगया है वह “सार्वजनिक” नहीं है। अदालत ने कहा कि “यह जाँच अधिकारी का चैम्बर था जहाँ प्रेज़ेंटिंग ऑफ़िसर और जाँच अधिकारी मौजूद थे और यह नहीं कहा जा सकता कि वह एक आम स्थल था,” ।

    एससी/एसटी अधिनियम की धारा 3(1) (X) स्पष्ट कहती है कि “अगर कोई व्यक्ति जो अनुसूचित जाति या जनजाति का सदस्य नहीं है – (x) अगर सार्वजनिक रूप से अनुसूचित जाति या जनजाति के किसी सदस्य को जानबूझकर धमकता है या अपमानित करता है।” इस बारे में गोरिगे पेंटैय्याह बनाम आंध्र प्रदेश राज्य एवं अन्य, (2008) 12 SCC 531 का भी हवाला दिया जा सकता है जिसमें सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि ‘पब्लिक व्यू’ ऐसी जगह है तहाँ तक आम लोगों की पहुँच है। जब यह किसी घर के अंदर है, तो यह पब्लिक व्यू नहीं हो सकता और इस आधारभूत बात के अभाव में, अधिनियम की धारा 3(1)(X) के तहत यह मामला नहीं बनता।

    अदालत ने इस बात पर भी ग़ौर किया कि शिकायतकर्ता ने पूरी प्रक्रिया के दौरान यह कभी नहीं बताया कि अनुसूचित जाति के होने के कारण उसे उस व्यक्ति ने अपमानित किया जो ख़ुद उस समुदाय का नहीं है। इसलिए यह बात भी इससे ग़ायब है। इस तरह ठाकुर के आवेदन को सुनवाई के लिए स्वीकार कर लिया गया और उसके ख़िलाफ़ एससी/एसटी अधिनियम की धारा 3(1) (X) के तहत जारी सम्मन को निरस्त कर दिया। पर अदालत ने अन्य आरोपों में हस्तक्षेप नहीं किया और कहा कि उन मामलों में सुनवाई जारी रहेगी। अदालत ने जाते जाते शिकायतकर्ता की इस बात के लिए भी खिंचाई की कि उसने पूछताछ के दौरान जाँच में रोड़ा अटकाने के लिए अपने एक सहयोगी के साथ वहाँ पहुँच गया था।