Category: मध्यप्रदेश

  • आरक्षित वर्गों का बैकलाग 20 जून तक भरें-भुवनेश पटेल

    आरक्षित वर्गों का बैकलाग 20 जून तक भरें-भुवनेश पटेल

    भोपाल,11 जनवरी(प्रेस सूचना केन्द्र)। मप्र पिछड़ा वर्ग, अनुसूचित जाति, जनजाति एवं अल्पसंख्यक कर्मचारी संघ- अपाक्स के प्रांताध्यक्ष भुवनेश कुमार पटेल का कहना है कि पिछले पंद्रह सालों से आरक्षित वर्गों का बैकलाग भरने की प्रक्रिया बहुत धीमी चल रही है,पात्रताधारी लोग निर्धारित आयुसीमा पार करते जा रहे हैं इसलिए सरकार को वंचित वर्ग को लाभ दिलाने के लिए बैकलाग के खाली पदों की सौ फीसदी भरपाई 20 जून तक पूरी कर लेनी चाहिए। आज राजधानी में आयोजित अपाक्स की बैठक में उन्होंने सरकार से अनुरोध किया है कि इस अवधि में ये कार्य बखूबी निटपाया जा सकता है और इसकी तिथि को आगे बढ़ाने की नौबत भी नहीं आएगी।

    अपाक्स के पदाधिकारियों के बीच विमर्श के बाद उन्होंने कहा कि शासन की भर्ती प्रक्रिया की चयन समितियों में अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग सभी के प्रतिनिधियों को अलग अलग नामित किया जाए। अपाक्स परिवार ने इन सदस्यों को चिन्हित भी कर लिया है जिससे सरकार को फैसला लेने में आसानी होगी।

    श्री पटेल ने कहा कि शासन ने भर्ती प्रक्रिया में 70 फीसदी स्थान प्रदेश के मूल निवासियों के लिए आरक्षित किए हैं इसलिए निजी क्षेत्र में भी इस प्रक्रिया का पालन सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने कहा कि आरक्षित संवर्ग के अधिकारियों कर्मचारियों से जुड़े शिकायत के प्रकरणों में सहानुभूति पूर्वक विचार किया जाए और उन्हें शासन की मंशानुसार संरक्षण प्रदान किया जाए।

    राज्य प्रशासनिक सेवा से आईएएस सेवा में पदोन्नति के लिए जो 33.3 प्रतिशत पद आरक्षित हैं उनमें से पंद्रह प्रतिशत पद गैर राज्य प्रशासनिक सेवा में आरक्षित हैं। इन पदों की पूर्ति भी भाजपा शासन ने पिछले पंद्रह सालों के दौरान नहीं की है। इन पदों पर भी पदोन्नति की प्रक्रिया अभी शेष है जिसे तत्काल पूरा किया जाना चाहिए। बैठक में लंबित डीए की पांच प्रतिशत राशि का भुगतान शीघ्र किए जाने की मांग भी की गई।

    बैठक में विभिन्न कर्मचारी संगठनों के प्रतिनिधि गण सर्व श्री वीरेन्द्र खोंगल, जितेन्द्र सिंह, ओ.पी. कटियार, रामविश्वास कुशवाह, राजकुमार चंदेल, सीएस यादव, प्रकाश मालवीय,अनिल वाजपेयी समेत प्रदेश के सभी पदाधिकारियों और प्रतिनिधियों ने भाग लिया।

  • गेहूं के भंडार भरे,केन्द्र उठाने तैयार नहीं बोले प्रद्युम्न सिंह

    गेहूं के भंडार भरे,केन्द्र उठाने तैयार नहीं बोले प्रद्युम्न सिंह

    भोपाल,08 जनवरी(प्रेस सूचना केन्द्र)। मध्यप्रदेश के खाद्य मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर का कहना है कि राज्य ने किसानों का गेहूं खरीदकर किसानों को राहत दी है लेकिन केन्द्र अब वह गेहूं नहीं उठा रहा है। इसके चलते राज्य को केन्द्र से भुगतान भी नहीं हो पा रहा है। केन्द्र सरकार ऐसा करके किसानों के हितों पर चोट पहुंचा रही है।

    साल भर की विभागीय उपलब्धियों पर चर्चा करते हुए श्री तोमर ने कहा कि कमलनाथ सरकार ने किसानों से किया गया कर्ज माफी का वायदा पूरा किया है। किसानों को बोनस देकर भी राज्य सरकार ने किसानों के प्रति अपनी प्रतिबद्धता पूरी की है। इसके बावजूद केन्द्र के असहयोग के चलते वह किसानों को अधिक लाभ नहीं दे पा रही है।

    केन्द्र से ठीक रेपो न होने की वजह से किसानों को होने वाली असुविधा के लिए क्या राज्य सरकार अपनी अयोग्यता को स्वीकार करती है पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि राज्य की ओर से लगातार केन्द्र सरकार से वार्ता की जाती रही है। लगभग तीन चरणों की बातचीत हो चुकी है लेकिन अभी तक केन्द्र ने न तो गेहूं उठाया है और न ही इसके एवज में राशि का भुगतान किया है।उन्होंने कहा कि केन्द्र की ओर से किसानों को दिए जाने वाले बोनस का भी भुगतान नहीं किया जा रहा है।

    खाद्य मंत्री से जब पूछा गया कांग्रेस पार्टी ने किसानों से किए गए वायदे केन्द्र से पूछकर तो नहीं किए थे इसके बावजूद अपनी असफलताओं का ठीकरा वे केन्द्र सरकार पर क्यों फोड़ रहे हैं ये पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि सरकार अपना काम बखूबी कर रही है।

    मंहगाई नियंत्रित कर पाने में राज्य सरकार की असफलताओं के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि सरकार माफिया के विरुद्ध कार्रवाई कर रही है। जो लोग जनता को ठगने का काम कर रहे थे और पिछले पंद्रह सालों में वे फलते फूलते रहे अब सरकार उन पर अंकुश लगाने का काम कर रही है।

  • बीमा योजना से कर्मचारियों की चिकित्सा प्रतिपूर्ति बंद

    बीमा योजना से कर्मचारियों की चिकित्सा प्रतिपूर्ति बंद


    मंत्रि-परिषद के निर्णय 

    भोपाल,4 जनवरी(प्रेस सूचना केन्द्र)। कमल नाथ की अध्यक्षता में आज मंत्रालय में हुई मंत्रि-परिषद की बैठक में मुख्यमंत्री कर्मचारी स्वास्थ्य बीमा योजना को लागू करने का निर्णय लिया गया। योजना से लगभग 12 लाख 55 हजार कर्मचारी/अधिकारी लाभांवित होंगे।बीमा योजना लागू होने से कर्मचारियों को दी जाने वाली चिकित्सा प्रतिपूर्ति की व्यवस्था बंद कर दी जाएगी।

    इस योजना का लाभ प्रदेश के सभी नियमित शासकीय कर्मचारी, सभी संविदा कर्मचारी, शिक्षक संवर्ग, सेवानिवृत्त कर्मचारी, नगर सैनिक, आकस्मिक निधि से वेतन पाने वाले पूर्ण कालिक कर्मचारियों और राज्य की स्वशासी संस्थाओं में कार्यरत कर्मचारियों को मिलेगा। इसके अलावा निगम/मण्डलों में कार्यरत कर्मचारियों एवं अखिल भारतीय सेवा के अधिकारियों के लिए योजना वैकल्पिक होगी।

    मुख्यमंत्री कर्मचारी स्वास्थ्य बीमा योजना में बाहय रोगी ओपीडी के रूप में प्रतिवर्ष 10 हजार रूपये तक का नि:शुल्क उपचार अथवा नि:शुल्क दवाओं का वितरण किया जाएगा। सामान्य उपचारों के लिए प्रत्येक परिवार को प्रतिवर्ष 5 लाख रूपये और गंभीर उपचारों के लिए 10 लाख रूपये तक की नि:शुल्क चिकित्सा सुविधा प्राप्त होगी। दस लाख से अधिक के उपचार के लिए राज्य स्तरीय मेडिकल बोर्ड द्वारा विशेष अनुमति दी जा सकेगी।

    मंत्रि-परिषद ने महिला-बाल विकास विभाग द्वारा शत-प्रतिशत सहायित भारत सरकार की योजना वन स्टाप सेन्टर को प्रदेश के 51 जिलों में संचालित एवं निरंतर रखने की मंजूरी दी। इसके लिये 560 नये पद सृजित करने की भी मंजूरी दी गयी।

    मंत्रियों का स्वेच्छानुदान अब एक करोड़

    मंत्रि-परिषद ने मंत्रियों की वार्षिक स्वेच्छानुदान की राशि 50 लाख से बढ़ाकर एक करोड़ रूपये करने की मंजूरी दी। इसी प्रकार, राज्य मंत्रियों की वार्षिक स्वेच्छानुदान राशि को 35 लाख से बढ़ाकर 60 लाख किया गया है।

  • कर्ज लादकर माफी का वादा निभा रही कमलनाथ सरकार

    कर्ज लादकर माफी का वादा निभा रही कमलनाथ सरकार

    भोपाल,3 जनवरी(प्रेस सूचना केन्द्र)। कमल नाथ की अगुआई में बनी राज्य सरकार पर प्रदेश की जनता से किए गए वादों को पूरा करने की जिम्मेदारी पहले दिन से ही रही है। किसानों, आदिवासियों, कर्मचारियों, युवाओं सहित सभी लोग प्रदेश में इस बदलाव को आशा और अपेक्षा की नजर से देख रहे थे। सरकार ने आते ही मिली वित्तीय रिक्तता, आर्थिक मंदी जैसी विषम परिस्थिति और वित्तीय मामलों में केन्द्र सरकार के रवैये से जन अपेक्षाओं पर पूरा उतरना नई सरकार के लिए चुनौतीपूर्ण रहा। नई सरकार के सामने राज्य के सामाजिक, आर्थिक और भौतिक ढांचे को अधिक मजबूत बनाने का मुख्य लक्ष्य था। यह सब सशक्त आर्थिक आधार और बेहतर वित्तीय प्रबंधन के बिना संभव नहीं था। राज्य सरकार ने इस परिस्थिति से निपटने के लिये बेहतर वित्तीय प्रबंधन को सर्वोच्च प्राथमिकता दी। इससे शासकीय विभागों को अनिवार्य व्ययों के लिए निरंतर राशि उपलब्ध कराना संभव हुआ।

    प्रदेश की उन्नति और सबके हितों की रक्षा सुनिश्चित करने के क्रम में सर्वोच्च प्राथमिकता हमारी अर्थ-व्यवस्था के प्रमुख आधार किसान को दी गई। जय किसान फसल ऋण माफी योजना से संबंधित विभागों से समन्वय कर पात्र किसानों के दो लाख रूपये तक के कालातीत ऋण तथा 50 हजार रूपये तक के चालू ऋण माफ किए गए। योजना में बैंकों द्वारा एक मुश्त समझौता योजना में 1950 करोड़ रूपये का ऋण माफ किया गया। कुल मिलाकर 20 लाख से अधिक किसानों के 7 हजार करोड़ रूपये से अधिक के ऋण माफ किए गए।

    प्रदेश की तेज प्रगति के लिये सुचारू और सुगम परिवहन व्यवस्था अत्यंत आवश्यक है। राज्य सरकार ने परिवहन की आवश्यक अधोसंरचना सुनिश्चित करने के उददे्श्य से सड़कों के निर्माण के लिए एशियन डेव्हलपमेंट बैंक से 3 हजार 400 करोड़ रूपये (490 मिलियन यूएस डालर) प्राप्त करने का निर्णय लिया। इसी प्रकार, इन्दौर मेट्रो रेल परियोजना के लिए न्यू डेव्हलपमेंट बैंक से 1600 करोड़ रूपये (225 मिलियन यूएस डालर) प्राप्त करने का निर्णय लिया।

    राज्य सरकार की योजनाओं और कार्यक्रमों के क्रियान्वयन में हमकदम और आपदा प्रबंधन के आधार, शासकीय सेवकों की बेहतरी के प्रयास तुरंत शुरू किये गये। शासकीय सेवकों को सातवें वेतनमान के ऐरियर्स की द्वितीय किस्त का भुगतान किया गया। साथ ही सार्वजनिक निगम/मण्डलों के कर्मचारियों को सातवें वेतनमान के एरियर्स के लिए कार्यवाही की गई। शिक्षक संवर्ग को कोषालयीन व्यवस्था से जोड़ा गया। शासकीय सेवकों की पेंशन स्वीकृति और भुगतान प्रक्रिया को सरल किया। वेतन विसंगतियों और सेवा शर्तों पर विचार के लिए कर्मचारी आयोग गठित किया गया।

    राज्य सरकार द्वारा प्रदेश के आदिवासी समुदाय के सर्वागींण विकास के लिए भी अभिनव प्रयास किये जा रहे हैं। वित्त विभाग द्वारा प्रदेश के 89 आदिवासी बहुल विकासखण्डों में विशेष अभियान चलाते हुए 7 हजार 331 व्यक्तियों के जन-धन खाते में ओवर ड्रॉफ्ट की सीमा स्वीकृत कर 35 हजार 709 नये खाते खोले गये।

    राज्य सरकार की सकारात्मक सोच के साथ समाज के सभी वर्गों को साथ लेकर चलने की कोशिश कुशल आर्थिक प्रबंधन के आधार पर ही सफल हो रही है। वित्त विभाग द्वारा जनवरी से नवम्बर 2019 तक पूंजीगत मद में 30 हजार 709 करोड़ रूपये व्यय किये गये। यह इसी अवधि के पिछले वर्ष के व्यय से 1304 करोड़ रूपये अधिक है। पूंजीगत व्यय से संबंधित प्रमुख विभागों को अप्रैल 2018 से नवम्बर 2018 की अवधि की तुलना में अप्रैल 2019 से नवम्बर 2019 की अवधि में अधिक राशि उपलब्ध करायी गई। गृह विभाग को 247 करोड़ 57 लाख की तुलना में 363 करोड़ 58 लाख, वन विभाग को 253 करोड़ 38 लाख की तुलना में 342 करोड़ 12 लाख, शहरी विकास एवं पर्यावरण विभाग को 483 करोड़ 23 लाख की तुलना में 775 करोड़ 91 लाख, लोक निर्माण विभाग को 5454 करोड़ 78 लाख की तुलना में 5562 करोड़ 04 लाख, नर्मदा घाटी/जल संसाधन विभाग को 5709 करोड़ 51 लाख की तुलना में 6280 करोड़ 60 लाख, लोक स्वाथ्य यांत्रिकी विभाग को 1179 करोड़ 49 लाख की तुलना में 1635 करोड़ एक लाख तथा ग्रामीण विकास विभाग को 1743 करोड़ 63 लाख की तुलना में 2343 करोड़ 10 लाख रूपये की धनराशि उपलब्ध करायी गई। प्रदेश में बैंकों द्वारा ऋण में वृद्धि की दर भी राष्ट्रीय स्तर से अधिक रही है।

    सबके हितों की रक्षा और प्रदेश की उन्नति सुनिश्चित करने के अपने संकल्प की पूर्ति के लिये आवश्यक वित्तीय आधार उपलब्ध कराने के लिए राज्य सरकार लगातार सक्रिय है।

  • खनिज विभाग ने राजस्व वसूली का नया रिकार्ड बनाया

    खनिज विभाग ने राजस्व वसूली का नया रिकार्ड बनाया

    खनिज मंत्री प्रदीप जायसवाल बोले ठेकेदारों को सुरक्षा मुहैया कराएंगे

    भोपाल,27 दिसंबर(प्रेस सूचना केन्द्र)।खनिज मंत्री प्रदीप जायसवाल का कहना है कि कमलनाथ सरकार ने खनिज विभाग से टैक्स चोरी के सभी रास्ते बंद कर दिए हैं जिससे प्रदेश ने राजस्व वसूली की नई ऊंचाईंयां छू लीं हैं। राजस्व आय का ये आंकड़ा और बढ़ेगा। उन्होंने राजस्व देने वाले ठेकेदारों को आश्वासन दिया कि सरकार उन्हें खनिज माफिया से पर्याप्त सुरक्षा मुहैया कराएगी।

    कमलनाथ सरकार की साल भर की उपलब्धियों का लेखा जोखा प्रस्तुत करते हुए श्री जायसवाल ने बताया कि वित्त विभाग ने वर्ष 2018-19 के लिए 4528 करोड़ रुपयों का लक्ष्य दिया था जिसे पार करते हुए विभाग ने 4623.04 करोड़ रुपए जुटाए हैं। इसी तरह मौजूदा वित्तीय वर्ष 2019-20 में अप्रैल 2019 से नवंबर 2019 तक 2226.85 करोड़ रुपए का राजस्व इकट्ठा किया जा चुका है। पिछले साल की इसी अवधि की तुलना में ये राशि 34.35 करोड़ रुपए अधिक है।

    श्री जायसवाल ने बताया कि प्रदेश में खनिजों की खोज का काम निरंतर जारी है और इसके लिए राष्ट्रीय खनिज अन्वेषण न्यास ने भी पर्याप्त संसाधन उपलब्ध कराए हैं। पिछले साल राज्य को 54.81 करोड़ रुपए प्राप्त हुए थे इस साल नवंबर महीने तक 34.12 करोड़ रुपए मिल चुके हैं।

    उन्होंने कहा कि खनिज और रायल्टी चोरी को सरकार सख्ती से रोकना चाहती है। इस वित्तीय वर्ष में ही अब तक खनिजों के अवैध उत्खनन के 1330 प्रकरण,अवैध परिवहन के 8294 प्रकरण, अवैध भंडारण के 531प्रकरणों से 527.511 लाख रुपए और अवैध परिवहन से 2412.20 लाख रुपए की आय हुई है। खनिजों के अवैध भंडारण से भी सरकार ने 136.55 लाख रुपए का अर्थदंड वसूला है।

    खनिज मंत्री ने बताया कि छतरपुर की बक्सवाहा तहसील के बंदर डायमंड ब्लाक को सरकार ने लगभग अस्सी हजार करोड़ रुपयों में नीलाम कर दिया है। एस्सेल माईनिंग एंड इंडस्ट्रीज ने लगभग साढ़े तीस प्रतिशत अधिक बोली लगाकर इस खदान का आधिपत्य हासिल किया है। कंपनी को अभी पर्यावरण आदि की मंजूरियों के लिए दो साल का वक्त दिया गया है। सरकार ने कंपनी को पचास सालों के लिए लीज पर दिया है।

    रेत खदानों से हर साल लगभग बारह सौ करोड़ रुपए की आय को उल्लेखनीय कार्य बताते हुए श्री जायसवाल ने कहा कि पिछली सरकार रेत से मात्र 240 करोड़ तक आय करती थी बाकी खनिज चोरी हो जाता था। इस सरकार ने 36 जिलों की रेत खदानें नीलाम की हैं ठेकेदारों को अब खनिज बेचना अनिवार्य कर दिया गया है। इससे राज्य को भरपूर आय होगी.

    पत्रकार वार्ता में खनिज मंत्री के साथ प्रमुख सचिव नीरज मंडलोई, सचिव नरेन्द्र सिंह परमार, विनीत आस्टिन संचालक, भौमिकी तथा खनिक कर्म समेत विभाग के कई अन्य अधिकारी भी उपस्थित थे।

  • नागरिकता कानून विरोधियों के साथ खड़ी होगी कमलनाथ सरकार

    नागरिकता कानून विरोधियों के साथ खड़ी होगी कमलनाथ सरकार

    भोपाल,21 दिसंबर(प्रेस सूचना केन्द्र)। नागरिकता अधिनियम 1955 में हुए संशोधन के बाद लागू नए नागरिकता कानून का विरोध करने के लिए अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी ने पूरे देश में कानून का विरोध करने का फैसला लिया है। मध्यप्रदेश में भी कमलनाथ सरकार 25 तारीख को इस विरोध प्रदर्शन को अपना समर्थन देगी। संवैधानिक तौर पर चुनी हुई राज्य सरकार ने केन्द्रीय कानून का विरोध करने के लिए जो रणनीति अपनाई है उससे नए नागरिकता कानून को लेकर उठ रहीं भ्रांतियों को दूर करने में भी मदद मिलेगी।

    कांग्रेस के सूत्रों का कहना है कि वह कानून को लेकर जनमत संग्रह (Referendum) भी करेंगे. दिल्ली में केंद्र सरकार के नए कानून के खिलाफ (Protest against CAA) पार्टी के हल्लाबोल के बाद ऑल इंडिया कांग्रेस कमेटी ने कांग्रेस-शासित सभी राज्यों में प्रभावी तरीके से प्रदर्शन करने का निर्देश दिया है।

    CAA को लेकर कांग्रेस ने दिल्ली में केंद्र सरकार के खिलाफ हल्ला बोला था. अब दिल्ली के बाद कांग्रेस शासित राज्यों में नागरिकता संशोधन कानून के विरोध में प्रदर्शन की तैयारी है. एआईसीसी ने सभी राज्यों में इस कानून के विरोध में प्रदर्शन करने के लिए निर्देश दिए हैं. ऐसे में कांग्रेस शासित मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान जैसे हिंदी भाषी राज्यों में कांग्रेस सरकार का पूरा फोकस इस प्रदर्शन को प्रभावी बनाने में है. दिल्ली के बाद भोपाल में भी कमलनाथ सरकार इस कानून के विरोध के बहाने शक्ति प्रदर्शन करेगी.

    प्रमुख विपक्षी दल भारतीय जनता पार्टी ने सरकार के इस फैसले से असहमति जताई है। पार्टी का कहना है कि नागरिकता कानून देश के किसी भी नागरिक के खिलाफ नहीं है, इसके बावजूद विरोध को स्वर देकर कांग्रेस सरकार अपने संवैधानिक दायित्वों से मुंह मोड़ रही है।

    प्रदेश में जब अधिकतर लोग नए नागरिकता कानून से सहमति जताते हुए खुलकर बात रख रहे हैं तब कमलनाथ सरकार कानून के विरोध में खड़े होकर क्षुद्र राजनीतिक प्रतिद्वंदिता का उद्घोष करने जा रही है।

    नए नागरिकता कानून को समझना जरूरी

    कई लोग इस वजह से विरोध कर रहे हैं कि उन्हें लगता है इस कानून से उनकी नागरिकता खतरे में पड़ जाएगी. कुछ को लगता है कि असम में जिस तरह एनआरसी यानी राष्ट्रीय नागरिकता रजिस्टर (एनआरसी) के चलते लाखों लोगों की नागरिकता खतरे में पड़ गई है, वैसा ही उनके साथ भी होगा, लेकिन सचाई बिल्कुल अलग है. नागरिकता संशोधन कानून और एनआरसी अलग-अलग चीजें हैं.

    नागरिकता कानून 2019 भारत के तीन पड़ोसी देशों से धार्मिक उत्पीड़न ही वजह से भारत आने वाले अल्पसंख्यकों को सिटिजनशिप देने के लिए है. पाकिस्तान, अफगानिस्तान और बांग्लादेश जैसे भारत के पड़ोसी देशों में सिख, जैन, हिंदू, बौद्ध, इसाई और पारसी अल्पसंख्यक हैं. ये तीनों देश मुस्लिम राष्ट्र हैं, इस वजह से उनमें धार्मिक अल्पसंख्यक को उत्पीड़न का शिकार होना पड़ता है.नागरिकता संशोधन अधिनियम में प्रावधान है कि अगर इन तीन देशों के छह धर्म के लोग भारत में 31 दिसंबर 2014 तक आ चुके हैं तो उन्हें घुसपैठिया नहीं माना जाएगा. उन्हें इस कानून के तहत भारत की नागरिकता दी जाएगी.

    अगर इसे सीधे शब्दों में समझें तो एनआरसी जहां देश से अवैध घुसपैठियों को बाहर निकालने की कवायद है, वहीं नागरिकता कानून 2019 देश में आ चुके छह धर्म के लोगों को बसाने की कोशिश है.जिन लोगों के नाम एनआरसी में शामिल नहीं हैं, वह अवैध नागरिक कहलाए जाएंगे. एनआरसी के हिसाब से 25 मार्च 1971 से पहले असम में रह रहे लोगों को भारतीय नागरिक माना गया है.

    एनआरसी और सीएए में ये हैं मुख्य अंतर नागरिकता संशोधन कानून 2019 जहां धर्म पर आधारित है, वहीं राष्ट्रीय नागरिकता रजिस्टर (एनआरसी) का धर्म से कोई लेना-देना नहीं है. सीएए के तहत मुस्लिम बहुल आबादी वाले देश पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान में धार्मिक उत्पीड़न के कारण भागकर भारत आए हिंदू, सिख, ईसाई, जैन, बौद्ध और पारसी धर्म के लोगों को भारत की नागरिकता प्रदान करने का प्रावधान है. सीएए में मुस्लिमों को शामिल नहीं किया गया है. एनआरसी में अवैध अप्रवासियों की पहचान करने की बात कही गई है, चाहे वे किसी भी जाति, वर्ग या धर्म के हों. ऐसे लोगों की पहचान कर उन्हें देश से बाहर भेजने का प्रावधान है. एनआरसी फिलहाल सिर्फ असम में लागू है जबकि सीएए देशभर में लागू होगा. सीएए भारतीय मुसलमानों को किसी तरह का नुकसान नहीं पहुंचा सकता. सीएए को लेकर एक गलत धारणा बन गई है कि इस वजह से भारतीय मुसलमान अपने अधिकारों से वंचित हो जाएंगे. सच यह है कि अगर कोई ऐसा करना चाहे तो भी इस कानून के तहत यह संभव नहीं है. पूर्वोत्तर राज्यों में सीएए का विरोध इसलिए हो रहा है कि क्योंकि लोगों को आशंका है इससे उनके इलाके में अप्रवासियों की तादाद बढ़ जाएगी जिससे उनकी संस्कृति और भाषाई विशिष्टता को खतरा हो सकता है. केरल, पश्चिम बंगाल और दिल्ली में सीएए का विरोध इस कानून में मुसलमानों को शामिल नहीं किए जाने पर हो रहा है, उनका तर्क है कि यह संविधान के विरुद्ध है.

  • खनिज आय में पैंतीस करोड़ की बढ़त

    खनिज आय में पैंतीस करोड़ की बढ़त

    भोपाल,18 दिसंबर(प्रेस सूचना केन्द्र)। प्रदेश में इस वर्ष अप्रैल से नवम्बर तक मात्र 8 महीने में पिछले वर्ष की तुलना में 34 करोड़ 35 लाख रुपये से अधिक खनिज राजस्व संग्रहित किया गया। पिछले साल इस अवधि में 2192 करोड़ 50 लाख रुपये खनिज राजस्व संग्रहित की गयी थी। इस वर्ष 2226 करोड़ 85 लाख रुपये खनिज राजस्व अर्जित की गई। इसी के साथ, जिला खनिज प्रतिष्ठान नियम-2016 के अंतर्गत इस अवधि में 495 करोड़ रुपये से अधिक खनिज राजस्व संग्रहित किया गया। इस दौरान राष्ट्रीय खनिज अन्वेषण न्यास के अंतर्गत 34 करोड़ 12 लाख रुपये के राजस्व की प्राप्ति हुई।

    प्रदेश में पिछले 8 माह में अवैध खनिज उत्खनन के 1330, अवैध खनिज परिवहन के 8294 और अवैध खनिज भण्डारण के 531 प्रकरण अर्थात कुल 10,155 प्रकरण पंजीबद्ध कर कार्यवाही की गई। अवैध उत्खनन के प्रकरणों में 5 करोड़ 27 लाख, अवैध परिवहन के प्रकरणों में 24 करोड़ 12 लाख और अवैध भण्डारण के प्रकरणों में एक करोड़ 36 लाख रुपये अर्थात कुल 3076.26 लाख रुपये अर्थदण्ड वसूली की गई।

  • डिफाल्टर नीतियों वाला मुख्यमंत्री

    डिफाल्टर नीतियों वाला मुख्यमंत्री

    सत्ता संभालने के एक साल पूरा होने पर मुख्यमंत्री कमलनाथ ने अपनी डींगें हांकने के लिए विज्ञापनों का रेला पेल दिया है। जिस शिवराज सिंह सरकार को विज्ञापनों की सरकार बताकर कमलनाथ ने मीडिया पर लांछन लगाया आज उसी मीडिया की चौखट पर उनकी सरकार औंधे मुंह गिरी पड़ी है। करोड़ों के विज्ञापन कार्पोरेट मीडिया की झोली में डालकर वे प्रदेश की जनता के टूटते भरोसे को टिकाए रखना चाहते हैं। कर्ज माफी और इंदिरा ज्योति योजना जैसी वाहवाही लूटने वाले उनके ध्वजवाहक अभियान ही जनता को उनके वादे और हकीकत की पहचान कराने के लिए काफी हैं। तरह तरह की नई शर्तें कर्जमाफी को छलावा बता रहीं हैं तो बिजली कंपनियां अपना घाटा पाटने के लिए जिस तरह बिजली बिलों की रीडिंग लंबित करके उपभोक्ताओं से भारी भरकम बिल वसूल रही है उससे सरकार की कथनी और करनी की पोल खुल जाती है। बात बात में भाजपा सरकार पर खजाना खाली छोड़कर जाने का आरोप मढ़ने वाले मुख्यमंत्री कमलनाथ और उनके मंत्रिमंडलीय सहयोगी ये समझाने में असफल रहे हैं कि राज्य की मासिक आय क्यों घटती जा रही है। यदि उनका वित्तीय प्रबंधन बहुत अच्छा है तो साल भर में उन्हें उन्नीस हजार करोड़ का कर्ज क्यों लेना पड़ा है। छिंदवाड़ा माडल का शिगूफा छोड़कर कमलनाथ ने खुद को उद्योगपति बताने की कारीगरी तो कर ली लेकिन वे अब तक एक डिफाल्टर मुख्यमंत्री ही साबित हुए हैं। प्रदेश के बरसों पुराने बेशकीमती बांस जंगलों को मिट्टी मोल बेचने के लिए उन्होंने आईटीसी को कारखाना लगाने की छूट तो दे दी लेकिन इससे प्रदेश की कितनी संपदा कौड़ियों के मोल बेची जाएगी ये बताने को वे तैयार नहीं हैं। छतरपुर के बक्सवाहा की हीरा खदान सरकार ने अस्सी हजार करोड़ में बिड़ला को बेचकर ये बताने का प्रयास किया है कि वे प्रदेश के लिए आर्थिक संसाधन जुटाने में बहुत गंभीर हैं। जबकि हकीकत ये है कि भारत सरकार अभी अपने बहुमूल्य खनिजों को बेचने की नौबत नहीं आने देना चाहती। खनिज मंत्री प्रदीप जायसवाल कहते हैं कि केन्द्र से मंजूरियां लेने की जवाबदारी ठेका लेने वाली कंपनी की है। उसे हमने दो साल का वक्त दिया है। हालांकि केन्द्र के रुख को देखते हुए ये अनुमतियां मिल पाएंगी फिलहाल तो संभव नहीं दिखता। कमलनाथ सरकार ने तबादलों और पोस्टिंग का जो खुला खेल किया उसकी वजह से नौकरशाही पूरी तरह मनमर्जी की मालिक हो गई है। जिस अफसर ने करोड़ों रुपये देकर पोस्टिंग हड़पी है वह राजस्व उगाही आखिर कहां से करे। उसकी सहूलियत के लिए ही सरकार ने पहले शुद्ध के लिए युद्ध और फिर माफिया पर हमले जैसे लोकप्रियता बटोरने वाले अभियान चला दिए। शुद्ध के लिए युद्ध के नाम पर सरकार ने सात हजार से भी अधिक व्यापारियों के नमूने लिए। अस्सी से अधिक व्यापारियों को रासुका में जेल भेज दिया जबकि उनमें से अधिकतर की खाद्य सामग्री शुद्ध पाई गई है। इसके बाद जेल भेजे गए व्यापारियों को भी सरकार की कृपा के आधार पर ही छोड़ा जा रहा है। जो लोग सरकार की कृपा नहीं खरीद सके हैं वे बेगुनाह होते हुए भी जेलों में बंद हैं। उनके कारोबार बंद हैं और उनसे जुड़े हजारों कर्मचारी बेरोजगार हो गए हैं। ये बात सही है कि कांग्रेस ने लगभग हवा हवाई वादे करके सत्ता की चाभी छीनी है। किसानों को गुमराह किया गया आदिवासियों को बहकाया गया, आम नागरिकों को शिवराज सरकार की कमजोरियां दिखाकर बरगलाया गया और सत्ता तो हासिल कर ली लेकिन अब इसे बनाए रखना सरकार के लिए टेढ़ी खीर साबित हो रहा है। ये बात सही है कि शिवराज सिंह सरकार प्रशासनिक तौर पर इतनी असफल सरकार थी कि वह अपने अच्छे कार्यों की पैरवी करने लायक लोगों को भी तैयार नहीं कर सकी। भीड़ भंगार के बीच कर्ज लेकर योजनाओं की टाफिया बांटते शिवराज सिंह चौहान को पता ही नहीं था कि उन्होंने कैसे भाजपा के कर्मठ कार्यकर्ताओं को संगठन से बेदखल कर दिया है। उनकी सरकार लगभग जड़ विहीन थी यही वजह है कि आज जब कमलनाथ सरकार ने माफिया के नाम पर उनके चमचों को जूते की नोंक पर रखना शुरु कर दिया है तब भाजपा के पास सरकार का मुकाबला करने के लिए रक्षा पंक्ति तक नहीं है। पाखंडी अभियानों से शिवराज की भाजपा ये भ्रम फैलाने का प्रयास कर रही है कि वो कमलनाथ सरकार से मुकाबला कर रही है लेकिन उनके साथ रहे भ्रष्ट मंत्रियों और चापलूसों की भीड़ को कमलनाथ बहादुरी के साथ काबू में कर रहे हैं। अधिकतर तो सरकार के माफिया वाले अभियान से ही डरकर अपने घरों तक सिमट गए हैं।दरअसल कमलनाथ जिन कारोबारियों को माफिया का नाम देकर वसूलियां कर रहे हैं वे सरकारी तंत्र के ही संरक्षण में तो फले फूले हैं। असली माफिया तो टैक्स वसूली करने वाले भ्रष्ट अफसरों का तंत्र है। कमलनाथ जी उसी तंत्र से चुनावी चंदा वसूलकर माफिया के विरुद्ध संग्राम का ऐलान कर रहे हैं जो सिर्फ छलावा ही साबित हो रहा है। शिवराज सिंह चौहान सरकार भी योजनाओं के नाम पर कर्ज लेकर जनता को बांट रही थी और कमोबेश यही काम कमलनाथ कर रहे हैं। कमलनाथ सरकार के वित्तमंत्री तरुण भनोट ने तो अपने बजट में भारी भरकम वसूली के टारगेट तय किए थे लेकिन जब मध्यप्रदेश अपने हिस्से का जीएसटी ही नहीं वसूल कर पा रहा हो तो वह किस मुंह से केन्द्र से अपना हिस्सा मांग सकता है। बेशक केन्द्र ने देर सबेर सभी राज्यों को जीएसटी की भरपाई राशि दे दी है लेकिन जब तक कमलनाथ सरकार बेईमान सरकारी तंत्र के भरोसे वसूली के रिकार्ड बनाने का मुगालता पाले बैठी रहेगी तब तक उसे असफलता ही हाथ लगेगी। हंसना और गाल फुलाना एक साथ नहीं हो सकता। आप अफसरों से यदि पार्टी फंड वसूल रहे हों तब आपको ये मुगालता नहीं पालना चाहिए कि वे ये राज्य का खजाना भी अपनी जेब से भरेंगे। कांग्रेस सरकार ने पार्टी फंड वसूलने की जवाबदारी जब अफसरों को ही थमा दी है तो फिर राज्य के संसाधन जुटाने के लिए निश्चित रूप से वे जनता पर अत्याचार करेंगे। यही कार्य श्रीमती इंदिरा गांधी के लगाए आपातकाल के दौरान हुआ था। तब जमाखोरों, मिलावटियों और कथित शोषकों के विरुद्ध मुहिम चलाई गई थी। नतीजा ये हुआ कि आपातकाल की आड़ में सरकारी भ्रष्ट तंत्र ने अत्याचारों की बाढ़ ला दी। नतीजतन श्रीमती गांधी चुनाव हारीं और देश को आपातकाल जैसे सिरफिरे फैसले से निजात मिल सकी थी। आपातकाल का कलंक आज भी कांग्रेस के सिर पर लगा है इसके बावजूद कमलनाथ आपातकाल 2 लेकर मैदान में कूद पड़े हैं। अब तक जो कहानियां उजागर हो रहीं हैं उनसे सरकार के झूठ की पोल रोज खुल रही है। निश्चित रूप से ये कहानियां मीडिया की सुर्खियां नहीं बन पा रही हैं लेकिन आखिर कब तक सरकार मीडिया का मुंह बंद कर सकती है।रोते बच्चे के मुंह को हाथ से दबा दिया जाए तो उसके रोने की आवाज जरूर बंद हो जाती है लेकिन उसका रोना जारी रहता है और जैसे ही हाथ हटाया जाता है उसके रोने की आवाज बुक्का फाड़कर बाहर आ जाती है। सरकार विज्ञापनों के मायाजाल के सहारे आखिर कब तक जनता की घुटन को दबाकर रख सकती है। राजनैतिक वसूलियों से केन्द्र की नीतियों के विरुद्ध झूठे आंदोलन खड़े करने से जनता का पेट भरने वाला नहीं है। जनता के बीच आक्रोश पनप रहा है। अभी यूरिया की कालाबाजारी ने जिस तरह किसानों को आक्रोशित कर दिया है उसी तरह सरकार की जनविरोधी नीतियों की असलियत भी जल्दी ही सामने आ जाएगी। अभी भी वक्त है कांग्रेस के सलाहकार अपनी सरकार का मार्गदर्शन करें तो गलती सुधारी जा सकती है।

  • प्रदेश को समृद्ध बनाएगा रोडमैपःडॉ.मनमोहन सिंह

    प्रदेश को समृद्ध बनाएगा रोडमैपःडॉ.मनमोहन सिंह

    भोपाल, 17 दिसंबर(प्रेस सूचना केन्द्र)।भारत के पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह ने आज यहाँ मध्यप्रदेश सरकार द्वारा तैयार ‘विजन टू डिलीवरी रोड मैप 2020-25’ दस्तावेज का विमोचन करते हुए इसे मध्यप्रदेश की जनता की आकांक्षाओं और प्राथमिकताओं का दस्तावेज बताया।  उन्होंने  प्रदेश की त्वरित आर्थिक समृद्धि और विकास के लक्ष्यों को पूरा करने में विचारों की स्पष्टता और प्रतिबद्धता के लिए मुख्यमंत्री कमल नाथ की प्रशंसा की। डॉ. सिंह ने लोगों के आर्थिक विकास और समृद्धि लाने के लिए एक साल के कम समय में उठाए गए कदमों के लिए बधाई दी। मुख्य रूप से उद्योग के साथ मिलकर रोजगार के नये अवसरों का निर्माण करने की सराहना की।

    डॉ. मनमोहन सिंह ने रोडमैप को सूक्ष्म और वृहद  स्तर  पर अर्थ-व्यवस्था  को  आगे बढ़ाकर रोजगार उत्पन्न करने के प्रयासों पर फोकस करने की सराहना की। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य और शिक्षा के क्षेत्र और सतत विकास के लक्ष्यों को हासिल करने के लिए न सिर्फ  सुस्पष्ट दृष्टि-पत्र  बनाया गया है बल्कि इसको  लागू करने के लिए एक रोडमैप भी तैयार किया गया है। इसमें सभी विभागों का सहयोग  है।

    डॉ. सिंह ने कहा कि यह दृष्टि-पत्र आम नागरिकों, किसानों के कल्याण,  सतत विकास और सूक्ष्म स्तर पर अर्थ-व्यवस्था को मजबूत बनाने,  असंगठित क्षेत्र को गति देने,  अधोसंरचना का विकास करने जैसे विषयों पर केंद्रित है। उन्होंने एक साल में सरकार द्वारा उठाए गए कदमों की चर्चा करते हुए किसानों की जय किसान फसल ऋण माफी  योजना और असंगठित क्षेत्र के लिये नया सवेरा योजना, आयुष्मान भारत जैसी योजना का उल्लेख करते हुए  कहा कि इन  प्रयासों  में मुख्यमंत्री श्री कमल नाथ के विचारों और  विकास का संकल्प स्पष्ट दिखता है।

    डॉ. मनमोहन सिंह ने कहा कि दृष्टि-पत्र में 11 क्षेत्रों पर ध्यान केन्द्रित किया गया है। आर्थिक समृद्धि के लिए कृषि प्र-संस्करण उद्योग, अधोसंरचना विकास और सेवा क्षेत्र पर ध्यान देने से भविष्य में ज्यादा से ज्यादा संख्या में रोजगार निर्माण करने में मदद मिलेगी।

    पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. सिंह ने कहा कि स्कूल शिक्षा, उच्च शिक्षा, कौशल विकास और तकनीकी शिक्षा पर ध्यान केन्द्रित करने से गुणवत्तापूर्ण  मानव संसाधन तैयार करने की सरकार की सोच साफ़ दिखती है। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य के क्षेत्र में मेडिकल कॉलेजों की संख्या और सीटें बढ़ाने तथा स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार करने से भविष्य में प्रदेश में स्वास्थ्य पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा। उन्होंने कहा कि मैग्नीफिसेंट मध्यप्रदेश जैसे आयोजन से उद्योग क्षेत्र में घरेलू और विदेशी पूंजी निवेश बढ़ाने में मदद मिलेगी। डू-इट योरसेल्फ गवर्नेंस व्यवस्था को दूसरे चरण में ले जाने से प्रशासन में भी पारदर्शिता बढ़ेगी। पंचायत राज संस्थाओं और स्थानीय संस्थाओं के संसाधनों और क्षमता को मजबूत बनाने पर ध्यान देने से प्रशासन तंत्र मजबूत होगा और  दृष्टि पत्र को समय पर पूरा करने में मदद मिलेगी। डॉ. मनमोहन सिंह ने विजन टू डिलीवरी 2020-25 को सुगठित,  फोकस्ड और यथार्थवादी बताते हुए कहा कि यह लोगों की आकांक्षाओं का दस्तावेज है।

    मुख्यमंत्री श्री कमल नाथ ने पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह का स्वागत एवं आभार व्यक्त करते हुए कहा कि मुझे 10 साल तक डॉ. मनमोहन सिंह के नेतृत्व में केन्द्रीय मंत्री-मंडल में काम करने का सौभाग्य मिला। मुख्यमंत्री ने कहा कि हमने दढ़ इच्छाशक्ति के साथ 365 दिन में वचन पत्र के 365 बिन्दुओं को पूरा किया।

    मुख्य सचिव एस.आर. मोहंती ने सरकार का एक साल पूरा होने पर उठाए गए कल्याणकारी कदमों और निर्णयों का उल्लेख करते हुए लोगों के विकास के लिए तैयार किए गए विजन टू डिलीवरी 2020-25 की विशेषताओं की चर्चा की। अपर मुख्य सचिव योजना मोहम्मद सुलेमान ने आभार व्यक्त किया।

  • संदीप डाकोलिया बने प्रदेश अध्यक्ष

    संदीप डाकोलिया बने प्रदेश अध्यक्ष

    भोपाल,13 दिसंबर(प्रेस सूचना केन्द्र)। अखिल भारतीय जैन पत्रकार महासंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष प्रवीण कुमार खारीवाल की सहमति से राष्ट्रीय महासचिव संजय लोढ़ा ने संदीप डाकोलिया को प्रदेश अध्यक्ष नियुक्त किया है। डाकोलिया विगत वर्षों से मप्र में जैन समाज के पत्रकारों के माध्यम से समाज की एकता को लेकर रचनात्मक आंदोलन चला रहे हैं। समाज को जोड़ने की दिशा में उनकी सक्रियता को देखकर अब उन्हें ही प्रदेश अध्यक्ष पद की जवाबदारी सौंपी गई है।

    श्री डाकोलिया ने सभी पंथों और समाज के सभी वर्गों के साधुओं और गणमान्य नागरिकों से मिलकर सकल जैन समाज को शक्ति के रूप में उभारने का अभियान चलाया और उसमें बड़ी सफलताएं भी अर्जित कीं हैं। डाकोलिया की इस नियुक्ति से आने वाले दिनों में एकता के इस अभियान को और अधिक सफलता मिलेगी। श्री संदीप डाकोलिया की इस नियुक्ति से राजधानी के सभी जैन पत्रकार साथियों के बीच संतोष महसूस किया गया है। बरसों से जैन समाज के पत्रकार अलग अलग जिलों में अपनी विश्वसनीय खबरों से समाज का मार्गदर्शन करते रहे हैं।

    उन्होंने अपनी नियुक्ति को संगठन के लिए उपयोगी बताया है। उनका कहना है कि जिस तरह से अभियान में बड़ी संख्या में जैन पत्रकार जुड़े हैं उनसे निरंतर संवाद स्थापित करने के लिए ये नई भूमिका मददगार साबित होगी।

    संगठन के जिलाध्यक्ष आलोक सिंघई ने बताया कि श्री डाकोलिया की नियुक्ति से राजधानी के पत्रकारों ने संतोष व्यक्त किया है। सर्वश्री सनत जैन, रवीन्द्र जैन, राकेश सिंघई, विनोद भारिल्ल,प्रशांत जैन, संजय जैन, प्रवीण जैन, राजेन्द्र जैन, अंकित जैन, विकास जैन सभी ने उम्मीद की है कि संदीप डाकोलिया की नियुक्ति से जैन पत्रकारों का संगठन और भी मजबूती के साथ उभरेगा।

  • माफिया से संग्राम का डरावना अध्याय

    माफिया से संग्राम का डरावना अध्याय

    मध्यप्रदेश में कांग्रेस सरकार किन हालात में आई सभी जानते हैं। प्रदेश के लोग शिवराज सिंह चौहान की प्रशासनिक असफलताओं से खफा थे और उन्होंने विकास के नाम पर लूट करने वाले फोकटियों को अपने पड़ौस में देखा था। नतीजतन वे खफा हुए और शिवराज सिंह चौहान की खरीदी हुई अतिलोकप्रियता धराशायी हो गई। अब कांग्रेस के गुटीय संतुलन को साधकर सत्ता में आए कमलनाथ ने शिवराज सिंह चौहान के नेतृत्व में जड़ विहीन कर दी गई भारतीय जनता पार्टी को फुटबाल बना दिया है। खुद भाजपा के नेता आश्चर्य से देख रहे हैं कि आखिर कमलनाथ की शक्ति का आधार क्या है। ऐसा क्या हो गया कि कमलनाथ कथित कैडर आधारित पार्टी को आए दिन ठोक रहे हैं और कोई बोलने वाला तक नहीं है। दरअसल शिवराज सिंह चौहान ने अपने नजदीक जैसै भ्रष्ट और नपुंसक लोगों की भीड़ जमा कर ली थी उनकी शक्ति का आधार केवल सरकार थी। सरकारी तंत्र का लाभ लेकर वे भ्रष्ट मंत्री अफसर विकास के नाम पर लिए गए कर्ज को जीमने में जुटे रहे। धनागमन के इस आंकड़े को बाहर बैठा कोई सामान्य शख्स भी अच्छी तरह समझ सकता है। शुरुआती दौर में उमा भारती ने जब राघवजी भाई को वित्तीय प्रबंधन की कमान थमाई तो उन्होंने प्रदेश की आय बढ़ाने में व्यावसायिक प्रबंधन का सहारा लिया। वे स्वयं टैक्स सलाहकार थे सो उन्होंने टैक्स प्रदाताओं से धन जुटाकर प्रदेश की बैलेंस शीट मजबूत की। जिससे भाजपा सरकार केन्द्र से अधिक धन प्राप्त कर सकी। मैचिंग ग्रांट भरपूर होने की वजह से तरह तरह की योजनाएं बनाईं गईं और प्रदेश के लिए वित्तीय प्रबंधन मजबूत किया गया। शिवराज सिंह चौहान इस वित्तीय प्रबंधन की वजह से भरपूर धन लुटाते रहे। हितग्राहियों के जो सम्मेलन भाजपा कर रही थी वह वास्तव में फुगावा था। दरअसल सत्ता के अंतिम मुहाने पर पंचायतों में बैठे दिग्विजय सिंह के समर्थक उस धन को आहरित कर रहे थे। वे गांव के लोगों को ठेलकर हितग्राही सम्मेलनों में भेज रहे थे और भाजपा उन्हें प्रदेश के विकास की धुरी मान रही थी। राजीव गांधी के पंचायती राज को माफिया राज में बदलने वाले इस षड़यंत्र की आहट जब पंचायत सचिव रहे आईएएस आरएस जुलानिया को लगी तो उन्होंने पंचायतों को जाने वाला फंड रोक दिया। इसके बावजूद इस दौरान जन धन का भारी अपव्यय हो चुका था। ठेकेदारों और अफसरों के जिस गठजोड़ ने राजनेताओं का संरक्षण पाकर विकास की कहानियां सुनाईं वे भी इस प्रक्रिया में भरपूर मजबूत हो चले थे। अब सत्ता की मलाई चाटने वाला ये माफिया इस बार कांग्रेस के साथ है, और कमलनाथ सरकार माफिया के विरुद्ध संग्राम का उद्घोष कर रही है। सरकार की निगाह में माफिया वो है जो टैक्स नहीं देता और कानूनी इबारतों को अनदेखा करके अनगढ़ तरीके से धन बनाने का काम कर रहा है। दरअसल प्रदेश और देश में धन बनाने वाला बड़ा वर्ग वो है जो बगैर किसी सरकारी मदद के अपना कारोबार करके धनार्जन करता है। निश्चित रूप से सरकारी तंत्र उसे अवैध कारोबारी कहता है। इसीलिए सरकार ने शुद्द के लिए युद्ध नाम का जो अभियान चलाया उसमें निरीह व्यापारियों की मौत हो गई। उन पर रासुका लाद दी गई और जेलों में ठूंस दिया गया। उनके उद्योग से जुड़े हजारों कर्माचारी बेरोजगार हो गए। इसके बावजूद कमलनाथ सरकार और उससे पोषित मीडिया इसे बेईमानों के विरुद्ध संग्राम बताता रहा। आज जब कमलनाथ माफिया के विरुद्ध शंखनाद करने के लिए सरकारी तंत्र को छूट दे रहे हैं तो वो कहर कांग्रेस के विरोधियों पर टूटने वाला है। जो अवैध कारोबार करने वाले कांग्रेस की गोदी में बैठे हैं या बैठ चुके हैं उन पर इस युद्ध का कोई असर पड़ने वाला नहीं है। इसके साफ संकेत कमलनाथ सरकार की कार्यप्रणाली को देखकर मिल जाता है। तबादले पोस्टिंग के कारोबार में जिस तरह खुलेआम नौकरियों की बोलियां लगाईँ गईं उससे साफ पता चलता है कि सरकार अपने विरोधियों को अपराधी बताने में कोई गुरेज नहीं कर रही है। जिस तरह कांग्रेस ने चुनाव के दौरान कर्ज माफी या सस्ती बिजली के वादे किए उसके लिए धन की जरूरत थी। ये धन इसी तरह बेरहमी से टैक्स वसूली से उगाया जा सकता है। साथ में बंदर हीरा खदान को नीलाम करके सरकार ने अपने धन की उगाही का एक अजस्र स्रोत भी तलाश लिया है। चुनावों को देखकर शिवराज सिंह चौहान ने रेत को टैक्स मुक्त करके अपने समर्थकों को खुश करने का खेल खेला था उसे भी कमलनाथ माफिया के विरुद्ध युद्ध बता रहे हैं। निश्चित रूप से सरकार और प्रदेश को चलाने के लिए धन की जरूरत होती है। यह धन टैक्स से ही जुटाया जाता है। जो सरकार अपनी आय का अस्सी फीसदी हिस्सा स्थापना खर्च में ही लुटा देती हो वह प्रदेश के लिए धन बनाने वाले कारोबारियों को माफिया कहे तो ये वास्तव में क्रूरता होगी। इसके बावजूद सरकार धड़ल्ले से फोकटियों को ये अधिकार दे रही है कि वे प्रदेश के लिए पैसा उत्पादन करने वाले या सेवाएं उपलब्ध कराने वालों को माफिया कहे क्योंकि वे सरकार से सहमत नहीं हैं। ये आपातकाल से भी ज्यादा नृशंस और निंदनीय कार्य कहा जाएगा। इतिहास में आपातकाल को इंदिराजी का सबसे घिनौना अत्याचार बताया जाता है लेकिन कमलनाथ का ये माफिया संग्राम सदियों तक डरावने अध्याय के रूप में जाना जाएगा।

  • माफिया से युद्ध को कमलनाथ ने दी खुली छूट

    माफिया से युद्ध को कमलनाथ ने दी खुली छूट

    मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में उच्च-स्तरीय बैठक कल

    भोपाल 11 दिसंबर(प्रेस सूचना केन्द्र)। कमल नाथ सरकार ने अपने मात्र एक साल के कार्यकाल में वर्षों से माफिया राज के आतंक का दंश झेल रही आम जनता को इससे मुक्त कराने की मुहिम को तेज करने के लिए 12 दिसंबर को उच्च स्तरीय बैठक बुलाई गई है। जनसम्पर्क मंत्री पी.सी. शर्मा ने कहा है कि मुख्यमंत्री के स्पष्ट निर्देश हैं कि अब प्रदेश में ‘लोगों के लिए लोगों की सरकार’ चलेगी न कि माफिया राज।

    जनसम्पर्क मंत्री श्री शर्मा ने कहा कि मात्र एक साल में माफिया राज की कमर तोड़ने का जो साहस मुख्यमंत्री ने दिखाया है, उससे जनता को राहत मिली है। उन्होंने कहा कि माफिया, शासन-प्रशासन को ताक पर रखकर पूरे प्रदेश में दशकों से  समानांतर सरकार चला रहे थे, जिसका खामियाजा प्रदेश की जनता भुगत रही थी और विकास अवरूद्ध हो रहा था।

    श्री शर्मा ने कहा कि माफिया के खिलाफ जनमानस के साथ कमर कसकर खड़ी कमल नाथ सरकार ने मिलावटखोरों के खिलाफ ‘शुद्ध के लिए युद्ध’ की शुरुआत की। आम जनता को जहर परोस रहे मिलावटखोर माफियाओं की धर-पकड़ से पूरे प्रदेश में बड़े पैमाने पर कार्यवाही हुई। अभियान के दौरान मिलावटखोरों के खिलाफ 94 एफआईआर दर्ज की गई और 31 कारोबारियों के खिलाफ रासुका के तहत कार्रवाई हुई।

    मंत्री श्री शर्मा ने कहा कि राज्य सरकार की नई रेत नीति बन जाने से अभी तक प्रदेश की रेत संपदा लूटने और प्रदेश की जनता के हितों से कुठाराघात करने वाले माफिया के हौसले पस्त हो गए हैं। शासन-प्रशासन पर हमले कर और राजनीतिक संरक्षण प्राप्त कर बेखौफ रेत माफिया को एक ही फैसले से मुख्यमंत्री श्री कमल नाथ ने ध्वस्त कर दिया है। यही नहीं, नई रेत नीति से प्रदेश को जो राजस्व करीब 200 करोड़ मिलता था, वह इस वर्ष बढ़कर 1234 करोड़ तक पहुँच गया है। पिछले 15 साल से 15 हजार करोड़ रुपए किसकी जेब में जा रहे थे, इसका खुलासा भी मुख्यमंत्री ने नई रेत नीति बनाकर किया है। अब ये पैसा निजी हाथों में जाने के बजाए प्रदेश के विकास और जनता के हितों के लिए उपयोग होगा। 

    जनसम्पर्क मंत्री ने कहा कि किसानों को मिलावटी खाद बेचने वाले माफियाओं से मुक्त कराने के लिए भी मुहिम पूरे प्रदेश में चल रही है। पिछले एक माह में 1313 उर्वरक विक्रेताओं और गोदामों का निरीक्षण कर लिए गए नमूनों में 110 प्रकरणों में मिलावट पाए जाने पर कार्रवाई की गई है।

    श्री पी.सी. शर्मा ने कहा कि इतना ही नहीं, कमल नाथ सरकार ने विभिन्न शहरों में अपने रसूख और माध्यमों का दुरुपयोग करके अनैतिक गतिविधियाँ चलाने, सरकारी और निजी जमीनों पर कब्जे कर अपना साम्राज्य बनाने वाले तथा इंदौर और ग्वालियर में भी माफिया के खिलाफ सारे दबावों के बावजूद सख्ती दिखाई है और कठोर कार्यवाही भी सुनिश्चित की है। इस दृढ़तापूर्ण कार्रवाई के पीछे एक ही लक्ष्य था कि अब माफिया को प्रदेश की जनता और यहाँ की सरकारी संपदा को लूटने की इजाजत नहीं होगी। 

    मंत्री श्री शर्मा ने कहा कि जो नेता प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से माफिया के समर्थन में बयान देकर उनका संरक्षण कर रहे हैं, उनकी गतिविधियों से यह स्पष्ट है कि 15 साल में ये माफिया किनके संरक्षण में पनपे हैं। श्री शर्मा ने कहा कि प्रदेश में माफिया राज को जड़ से उखाड़ फेकने के लिए मुख्यमंत्री श्री कमल नाथ की अध्यक्षता में 12 दिसंबर को उच्च स्तरीय बैठक होने जा रही है। इस बैठक में गृह मंत्री, मुख्य सचिव, पुलिस महानिदेशक, अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (गुप्त वार्ता) एवं एसआईटी, आईजी एवं कमिश्नर जबलपुर, इंदौर, ग्वालियर, भोपाल, कलेक्टर इंदौर एवं कमिश्नर इंदौर नगर निगम उपस्थित रहेंगे। 

  • एक करोड़ उपभोक्ताओं को मिली सस्ती बिजली बोले प्रियव्रत सिंह

    एक करोड़ उपभोक्ताओं को मिली सस्ती बिजली बोले प्रियव्रत सिंह

    भोपाल,9 दिसंबर(प्रेस सूचना केन्द्र)। ऊर्जा मंत्री प्रियव्रत सिंह ने दावा किया है मध्यप्रदेश सरकार ने अपने चुनावी वादे को पूरा करते हुए एक करोड़ बिजली उपभोक्ताओं को इंदिरा ज्योति योजना में सस्ती बिजली उपलब्ध कराई है। केवल सत्रह लाख उपभोक्ता इस सुविधा के दायरे में नहीं आए हैं। हितग्राही उपभोक्ताओं को अब तीस दिनों की बिजली खपत डेढ़ सौ यूनिट से कम होने पर सौ यूनिट का बिल मात्र सौ रुपए लिया जा रहा है।

    प्रेस वार्ता में श्री सिंह ने बताया कि उपभोक्ताओं को लाभ देने के लिए राज्य सरकार 3400 करोड़ रुपए की सब्सिडी दे रही है। इससे 90 फीसदी उपभोक्ता लाभान्वित हो रहे हैं। उन्होंने बताया कि जब नई सरकार सत्ता में आई तब बिजली कंपनियों पर 37963 करोड़ रुपए का कर्ज था और लगभग 44975 करोड़ का संचयी घाटा था।

    उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के उस बयान को गैर लोकतांत्रिक बताया जिसमें उन्होंने उपभोक्ताओं से अधिक बिजली बिल का भुगतान न करने का आव्हान किया है। उन्होंने कहा कि इस तरह के भड़काऊ बयानों से अराजकता फैल जाएगी जिसे नियंत्रण करने के लिए राज्य को अपने बहुमूल्य संसाधन खर्च करने होंगे।

    जुलाई महीने से लेकर अब तक ऊर्जा विभाग में कितने तबादले किए गए और इन तबादलों से विभाग को क्या लाभ हुआ पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि ये तबादले पांच साल की समयसीमा पूरी होने पर किए गए हैं। उन्होंने कहा कि तबादलों की निश्चित संख्या तो बता पाना फिलहाल संभव नहीं है लेकिन ये तबादले जरूरत के अनुसार ही किए गए हैं।

    नवंबर के महीने तक मीटर बदलने की समय सीमा बढ़ाए जाने की बात स्वीकार करते हुए श्री सिंह ने कहा कि ये समय सीमा मार्च 2020 तक तय की गई है।

  • प्रज्ञा से झुलसने वालों को रद्दी में फेंको

    प्रज्ञा से झुलसने वालों को रद्दी में फेंको

    भोपाल की सांसद प्रज्ञा सिंह को भारत सरकार के रक्षा मंत्रालय की समिति का सदस्य बना दिए जाने से विघ्न संतोषी ताकतों के पिछवाड़े मिर्ची लग गई है। उनका कहना है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने जब साध्वी प्रज्ञा सिंह के प्रति सार्वजनिक तौर पर नाराजगी व्यक्त की थी तो उन्हें रक्षा समिति जैसे महत्वपूर्ण कार्य की जवाबदारी कैसे दी जा सकती है। भोपाल की सांसद से चिढ़ने वालों की फेरहिस्त बड़ी लंबी है। जबसे साध्वी प्रज्ञा को भाजपा ने सांसद के रूप में प्रोजेक्ट किया था तबसे उन्हें विवादों में घसीटने के प्रयास लगातार होते रहे हैं। अब जबकि वे 21 सदस्यों वाली रक्षा समिति की सदस्य बनाई गईं हैं तब यही विघ्न संतोषी अपना पिछवाड़ा संभालते हुए उछलने लगे हैं। साध्वी प्रज्ञा सिंह को 2008 में हुए मालेगांव बम धमाके का आरोपी बनाकर कांग्रेस के कुछ षड़यंत्रकारियों ने हिंदू आतंकवाद की नई परिभाषा गढ़ी थी। इसे खूब प्रचारित किया गया। कर्नल श्रीकांत पुरोहित को भी इस बम धमाके में आरोपित किया गया था जिन्हें बाद में निर्दोष पाया गया और अब वे सेना में दुबारा अपना काम संभाल चुके हैं। दरअसल तत्कालीन गृहमंत्री शिवराज पाटिल और उसके बाद कांग्रेस के ही सुशील कुमार शिंदे ने इस बम धमाके को हिंदू बनाम मुस्लिम झड़प का रूप देने का प्रयास किया था। कांग्रेस के ही दिग्विजय सिंह ने इसे हिंदू आतंकवाद का नाम देते हुए साम्प्रदायिक ध्रुवीकरण का अभियान चला दिया। देश में लंबे समय तक ये बम धमाका जातिगत वैमनस्य की वजह बना रहा। अब जबकि एनआईए की गढ़ी गई कहानी झूठी साबित हो रही है तब देश का एक बड़ा तबका इस पर संशय महसूस कर रहा है। इस मामले की सुनवाई कर रहे जज ने भी सवाल पूछा कि यदि एनआईए की कहानी झूठी है तो बम धमाका किसने किया था। दरअसल एनआईए के तत्कालीन अफसरों के माध्यम से कांग्रेस सरकार ने जिस तरह बम धमाके को साम्प्रदायिक रंग देने का प्रयास किया उससे आज भी लोग असमंजस महसूस कर रहे हैं। मालेगांव के बम धमाके में 7 लोगों की मौत हुई थी और सौ से अधिक लोग जख्मी हो गए थे। इस धमाके के वास्तविक आरोपियों को तो जांच के दायरे से बाहर कर दिया गया और आतंक के खिलाफ काम करने वालों को आरोपी बना दिया गया। जाहिर है कि अब जबकि साध्वी प्रज्ञा को देश की रक्षा समिति का सदस्य बना दिया गया है तब उनके खिलाफ षड़यंत्र रचने वाला बड़ा समूह आहत महसूस करेगा ही। अब समय आ गया है कि जब भारत की सेना और नागरिकों पर हिंदू आतंकवाद जैसा लांछन लगाने में असफल होने के बाद जो लोग बैचेन हो रहे हैं उनकी आपत्तियों को रद्दी की टोकरी में फेंक दिया जाना चाहिए। भारत में आतंकवाद फैलाने वालों पर कड़ी कार्रवाई होने से जो लोग परेशान महसूस करते हैं उनकी चिंता की जाएगी तो फिर भारत में भी एक नया पाकिस्तान बन जाएगा। आज पाकिस्तान ऐसे ही आतंकवादियों से परेशान है। भारत में इस आतंक की कमर तोड़ने के लिए सेना और सरकार को जो भी उपाय बन पड़ें बेखौफ होकर करने चाहिए। इसमें किसी आतंकवादी के मानवाधिकारों की चिंता करने वालों की भी खबर ली जाना जरूरी है।जो लोग आतंकवाद की पैरवी करते फिरते हैं उनके लिए साध्वी प्रज्ञा भारती के रक्षा समिति में चयनित होने पर चिंतित होना लाजिमी है। देश की सुरक्षा के प्रति चिंतन करने का काम वही लोग कर सकते हैं जो देश के लिए मरने मिटने के लिए तैयार हों। अपना सर्वस्व न्यौछावर करने के लिए तैयार हों। साध्वी प्रज्ञा सिंह मालेगांव बम धमाके के प्रताड़ना तंत्र से चोखी साबित होकर वापस आईं हैं। भोपाल की जनता ने षड़यंत्रकारी दिग्विजय सिंह को भारी मतों से हराकर उन्हें संसद भेजा है। महात्मा गांधी की हत्या निश्चित तौर पर निंदनीय और गलत थी। देश महात्मा गांधी की क्षति पूर्ति कभी नहीं कर सकता। इसके बावजूद नाथूराम गोड़से की देशभक्ति पर सवाल खड़े करना उन लोगों की सीमित दृष्टि का ही नतीजा है जो खरगोश की तरह आंखें बंद करके दुश्मन के चले जाने का भ्रम पालते फिरते हैं। साध्वी प्रज्ञा के बयानों पर लाख सवाल उठाए जाएं पर उनकी देशभक्ति शंका से परे है। रक्षा मंत्रालय या भारत सरकार के जिन भी लोगों ने साध्वी को ये महत्वपूर्ण जवाबदारी दी है उन्होंने देश को संदेश देने का प्रयास किया है कि वे रक्षा के मुद्दे पर किन्हीं भी सीमाओं तक जा सकते हैं। निश्चित रूप से भारत में आतंक फैलाने की मंशा रखने वालों के लिए ये कड़ा संदेश है।इसकी जितनी प्रशंसा की जाए कम है।

  • छिंदवाड़ा का नया कमीशन एजेंट एपीडी आरके गुप्ता

    छिंदवाड़ा का नया कमीशन एजेंट एपीडी आरके गुप्ता


    भोपाल,19 नवंबर(प्रेस सूचना केन्द्र)। छिंदवाड़ा मॉडल की शान बघारकर मुख्यमंत्री बने कमलनाथ ने सत्ता संभालते ही छिंदवाड़ा में लगभग तीन हजार करोड़ के प्रोजेक्ट मंजूर कर दिए हैं। राज्य सरकार का खजाना खाली होने का शोर मचाकर वे प्रदेश को गुमराह कर रहे हैं और अपने चुनाव क्षेत्र में प्रदेश के संसाधन झोंकते चले जा रहे हैं। मुख्यमंत्री के इस अभियान की आड़ में अपना उल्लू सीधा करने वाले पीआईयू विभाग के एपीडी रमाकांत गुप्ता ने ठेकेदारों का नया गिरोह खड़ा करना शुरु कर दिया है। सबसे ज्यादा चंदा देकर वे सरकार के नीति नियंताओं के लोकप्रिय बने हुए हैं और कमाई के साथ साथ रिटायरमेंट के बाद अपनी पुर्ननियुक्ति की भूमिका भी बनाते जा रहे हैं।

    कमलनाथ के अंधा बांटे रेवड़ी बार बार खुद को दे वाले अंदाज का फायदा उठाने वाले पीआईयू विभाग के एपीडी रमाकांत गुप्ता के रवैये से खासा असंतोष पनप रहा है लेकिन वे पूरी बेशर्मी से अपना भविष्य सुरक्षित करने में जुटे हुए हैं। गुप्ता के रवैये से न केवल छिंदवाड़ा बल्कि पूरे जबलपुर संभाग के अन्य विकास कार्य ठप हो गए हैं। जिन प्रोजेक्टों की समय सीमा पूरी हो चुकी है और बावजूद वे अधूरे हैं उनकी समय सीमा बढ़ाना एपीडी के अधिकार क्षेत्र में ही रहता है। मूल ठेके से जुड़े सप्लीमेंट्री सेक्शन की मंजूरी, स्टीमेट में सुधार, और लैब अप्रूवल जैसे कार्य भी एपीडी ही संपन्न कराते हैं। जाहिर है कि इन सभी कार्यों के लिए रमाकांत गुप्ता के दफ्तर में ठेकेदारों को मोटी रिश्वत देनी पड़ रही है। उगाही के इस तंत्र से जुड़े उनके करीबियों का कहना है कि इसमें माननीय मुख्यमंत्री जी के दफ्तर का खर्च भी शामिल है।

    अपने पूरे सर्विसकाल में श्री गुप्ता ने ठेकों की परिपाटियों को अपनी परिभाषा की कसौटी पर कसा है। जब वे मुख्य अभियंता थे तब भी उन्होंने ठेकेदारों के कमीशन में से राजनेताओं का हिस्सा बढ़ाया था। यही वजह है कि उनके प्रमोशन धड़ाधड़ होते चले गए और अब वे अपने रिटायरमेंट के करीब आते आते सेवा वृद्धि की रणनीति पर तेजी से काम कर रहे हैं। उनके इस रवैये से ठेकेदारों पर अतिरिक्त बोझ पड़ रहा है और शर्तें पूरी न करने पर उन्हें अपने काम से भी हाथ धोना पड़ रहा है।

    गौरतलब है कि छिंदवाड़ा के अधिकतर निर्माण कार्य ईपीसी पद्धति से कराए जा रहे हैं। जिनमें ज्यादातर ठेकेदार दिल्ली के ही हैं और वे नक्शा बनाने से लेकर संधारण और निर्माण के सभी कार्यों का ठेका ले रहे हैं। इस पूरी प्रक्रिया में ठेकों की लागत अनावश्यक रूप से बढ़ाई जा रही है। कई ठेकेदारों का आतंक इतना ज्यादा है कि विभाग के अफसर भी उनकी बात काटने में हिचकते हैं। बताते हैं कि आरके गुप्ता का मार्गदर्शन पाकर वे ठेकेदार गुंडागर्दी पर उतारू हो रहे हैं।

    छिंदवाड़ा माडल के नाम पर लूट का आलम ये है कि भोपाल का हमीदिया अस्पताल जहां लगभग छह सौ करोड़ रुपए में बन रहा है वहीं छिंदवाड़ा के सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल की लागत 1600 करोड़ बताई गई थी। बाद में सरकार में बैठे अफसरों ने इसे घटाने का दबाव बनाया तो लागत 1100 करोड़ अनुमानित की गई। इस प्रक्रिया में आरके गुप्ता ने आंख मूंद ली और प्रदेश के खजाने से लगभग दोगुनी राशि व्यय किए जाने का राज मार्ग खोल दिया। पीआईयू के सर्वेसर्वा विजय वर्मा इस प्रक्रिया से पूरी तरह वाकिफ हैं लेकिन वे भी इसी तरह के हथकंडे अपनाते हुए अपना कार्यकाल तीन बार बढ़वा चुके हैं। ठेके की लागत घटाने के साथ साथ इस अस्पताल के लिए दुबारा टेंडर बुलाने पड़े थे, जिससे लागत भी बढ़ी और प्रोजेक्ट की समयसीमा भी बढ़ गई।

    श्री गुप्ता जब पीडब्लयूडी के मुख्य अभियंता थे तब उन्होंने सड़कों के 200 करोड़ रुपए के कार्य को भी कई महीनों तक लटकाया था। ये निर्माण न्यू डेवलपमेंट बैंक से प्राप्त कर्ज से किया जाना था। गुप्ता की शर्तें पूरी नहीं होने के कारण उन्होंने इस प्रोजेक्ट को महीनों तक तकनीकी मंजूरी नहीं दी। जब विभाग में नए अभियंता की नियुक्ति हुए तब जाकर सड़कों के लिए तकनीकी मंजूरी दी जा सकी।इस तरह प्रदेश के संसाधनों से खिलवाड़ करने वालों के लिए गुप्ता एक सफल सरमाएदार बन गए हैं।

  • कमलनाथ की पाखंडी मुहिम पर केन्द्र की रोक

    कमलनाथ की पाखंडी मुहिम पर केन्द्र की रोक

    भोपाल,22अक्टूबर(प्रेस सूचना केन्द्र)। शुद्ध के लिए युद्ध नाम से चलाई गई कमलनाथ सरकार की पाखंडी मुहिम पर अंततः केन्द्र सरकार ने हस्तक्षेप करके विराम लगा दिया है। उज्जैन के एक घी व्यापारी पर लगाई गई रासुका का प्रकरण हटाकर केन्द्र के गृह विभाग ने राज्य सरकार की तमाम कार्रवाईयों को संदेह के दायरे में ला दिया है। रासुका हटाए जाने से बिलबिलाई कमलनाथ कांग्रेस ने इसके बाद अनर्गल प्रलाप शुरु कर दिया है।

    मध्यप्रदेश कांग्रेस की मीडिया विभाग की अध्यक्ष शोभा ओझा और उपाध्यक्ष अभय दुबे ने उज्जैन के घी व्यापारी कीर्ति वर्धन केलकर पर लगाई रासुका हटाने की कार्रवाई को शर्मनाक बताया है।अभय दुबे का कहना है कि कीर्ति वर्धन केलकर को 30 जुलाई 2019 को उज्जैन प्रशासन ने नकली घी बनाते हुए तथा केमिकल एवं रसायनों के साथ पकड़ा था। कार्रवाई करने वाले अमले का आरोप था कि व्यक्ति अपने परिसर में बेकरी शार्टनिंग के नाम पर मिलावटी घी का निर्माण कर रहा था। इस व्यक्ति से 45 किलो घी जब्त करके सैंपल को जांच के लिए भेजा गया था। जांच रिपोर्ट में सामग्री अवमानक (कम गुणवत्ता) स्तर की पाई गई। इसके बाद आरोपी के खिलाफ एफएसएस एक्ट 2006 की धारा 26(2)(ii) तथा नियम 2011 सहपठित धारा 51 के तहत अपराध पंजीबद्ध किया गया।

    खाद्य विभाग का आरोप था कि यह व्यक्ति आदतन अपराधी है। इसके पूर्व 2015 में भी इसका नमूना लिया गया था, तब भी सामग्री घटिया गुणवत्ता की पाई गई थी। वह प्रकरण न्यायालय में विचाराधीन है। दो प्रकरण बन जाने के कारण व्यापारी को आदतन अपराधी बताते हुए कलेक्टर ने राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम 1980 की धारा 3(2) के तहत कार्रवाई करने की अनुशंसा की गई थी। इस प्रकरण में केंद्रीय गृहमंत्रालय ने 10 अक्टूबर 2019 को राष्ट्रीय सुरक्षा कानून 1980 की धारा 14 (1) के तहत रासुका की कार्रवाई को निष्प्रभावी कर दिया है।

    शोभा ओझा और अभय दुबे ने केंद्रीय गृहविभाग की इस कार्रवाई को शर्मनाक बताते हुए आरोप लगाया है कि मप्र भाजपा के बड़े नेता सत्ता में रहते हुए भी मिलावट खोरों के साथ खड़े थे और आज विपक्ष में रहकर भी मिलावटखोरों का साथ निभा रहे हैं।

    अभय दुबे का कहना है कि कमलनाथ सरकार ने शुद्ध के लिए युद्ध अभियान में अब तक 89 व्यापारियों के विरुद्ध मिलावटखोरी के लिए एफआईआर दर्ज की है। 31 मिलावटखोरों पर रासुका के तहत कार्रवाई की गई है। पूरे प्रदेश में इस साल 19 जुलाई से 16 अक्टूबर तक दूध उत्पादनों एवं अन्य खाद्य पदार्थों, पान मसाला सहित कुछ 7425 नमूने जांच के लिए दिए गए हैं। इनमें से राज्य प्रयोगशालाओं और अन्य प्रयोगशालाओं से कुछ 2147 नमूनों की रिपोर्ट आई है। इनमें 666 अवमानक (कम गुणवत्ता के) पाए गए हैं। 163 मिथ्याछाप(दूसरे ब्रांड के) पाए गए हैं। 40 मिलावटी पाए गए हैं। 36 सुरक्षित पाए गए और 30 प्रतिबंधित पाए गए हैं।

    गौरतलब है कि राज्य सरकार के अभियान को समर्थन देने के लिए कई जिलों में खाद्य अधिकारियों ने फर्जी तरीके से रिपोर्ट बिगड़वाई और व्यापारियों के विरुद्ध रासुका की कार्रवाई की है। इसकी शिकायतें कई जिलों से आ रहीं हैं और प्रकरण अदालतों में लंबित पड़े हैं। कुछ प्रकरणों को हाईकोर्ट ने रद्द कर दिया है और कई अन्य विचाराधीन हैं। इस मुहिम की आड़ में सत्ता के दलालों ने व्यापारियों को धमका चमकाकर लाखों रुपए वसूले हैं। व्यापारियों के नमूने अवमानक बताने के लिए खाद्य विभाग के अफसर फर्जी रिपोर्ट तैयार कर रहे हैं और पुलिस कार्रवाई के नाम पर व्यापारियों से लाखों रुपए ऐंठे जा रहे हैं। स्थानीय निकायों ने भी खाद्य सुरक्षा के नाम पर अपनी टीमें बना लीं हैं जो व्यापारियों से महीना वसूल रहीं हैं। राज्य सरकार की इस पाखंडपूर्ण कार्रवाई के बावजूद बाजार में नकली खाद्य सामग्रियां धड़ल्ले से बिक रहीं हैं और निर्दोष व्यापारियों को परेशान किया जा रहा है। सरकार की इस कार्रवाई पर लगाम लगाकर केन्द्रीय गृह मंत्रालय ने साफ जाहिर कर दिया है कि राज्य सरकार की अन्यायपूर्ण गतिविधियों पर वह चुप्पी साधे नहीं रह सकती।

  • वृक्षारोपण अभियान की जांच करेगा ईओडब्ल्यू

    वृक्षारोपण अभियान की जांच करेगा ईओडब्ल्यू

    भोपाल 11 अक्टूबर(प्रेस सूचना केन्द्र)। वन मंत्री उमंग सिंघार का कहना है कि मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की लोकप्रियता बटोरने की ललक के चलते राज्य सरकार के खजाने को 450 करोड़ का नुकसान पहुंचा था। गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड में अपना नाम दर्ज कराने के चक्कर में शिवराज ने जुलाई 2017 में एक ही दिन में नर्मदा किनारे 7 करोड़ पौधे लगाने का फरमान सुनाया। अधिकारी मना करते रहे, लेकिन मुख्यमंत्री की सनक के सामने किसी की नहीं चली। 30 प्रतिशत पौधे भी नहीं लगे और बजट पूरा निकाल लिया गया। कमलनाथ सरकार ने अब इस पर सख्त कदम उठाते हुए तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान और तत्कालीन वनमंत्री डॉ. गौरीशंकर शेजवार सहित 6 अधिकारियों के खिलाफ आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो में एफआईआर दर्ज करने के निर्देश दिए हैं।

    प्रदेश के वनमंत्री उमंग सिंघार ने आज पत्रकार वार्ता में शिवराज सरकार पर लगने वाले आरोपों को लेकर आज ये खुलासा किया। उनका कहना है कि अधिकारियों के रोकने के बावजूद तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान गिनीज बुक में नाम दर्ज कराने एक दिन में 7 करोड़ 10 लाख 39 हजार 711 पौधे लगाने का कथित झूठा रिकॉर्ड बनाते रहे। मजेदार बात यह है कि इतने सारे पौधे 20 रुपए से 200 रुपए के दर पर खरीदना दिखाया गया। इनके लिए गड्ढे करना दिखाया गया और इनके रोपण खाद्य और पानी के नाम पर भी करोड़ों रुपए निकाले गए। सरकारी रिकॉर्ड में 1 लाख 21 हजार 275 स्थानों पर 7.10 करोड़ पौधों की घोषणा की गई जबकि गिनीज बुक वल्र्ड ऑफ रिकॉर्ड को बताया गया कि मात्र 5 हजार 540 स्थानों पर 2 करोड़ 22 लाख 28 हजार 954 पौधे ही लगाए गए। यानि 3 गुना भ्रष्टाचार तो पहले ही साफ दिखाई दे रहा है। वनमंत्री का दावा है कि मात्र 5 से 7 प्रतिशत पौधे ही लगे हैं।

    वनमंत्री ने पत्रकार वार्ता में कहा कि शिवराज कार्यकाल में हुए पौधा रोपण कार्यक्रम में वन विभाग के अधिकारी वनमंत्री को ही गलत जानकारियां दे रहे हैं। उन्होंने बताया कि बैतूल के शाहपुर परिक्षेत्र में वृक्षारोपण की जानकारी मांगने पर अधिकारियों ने बताया था कि 2 जुलाई 2017 को 15625 पौधे रोपे गए इनमें से 11 हजार 140 पौधे जीवित हैं। जबकि 27 जून 2019 को स्वयं वनमंत्री ने वरिष्ठ अधिकारियों के साथ मौका मुआयना किया तो मौके पर मात्र 2343 पौधे ही जीवित मिले। इस स्थान पर पौधों के लिए गड्ढे भी मात्र 9 हजार 985 ही खोदे गए थे। उन्होनें कहा कि गलत जानकारी देने वाले अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जा रही है।

    इस पूरे मामले में अतिरिक्त मुख्य सचिव स्तर के आईएएस अधिकारी एपी श्रीवास्तव की भूमिका को संदिग्ध बताया जा रहा है। जिस समय यह घोटाला हुआ तब वे प्रमुख सचिव वित्त थे। उन्होंने ही इस वृक्षारोपण अभियान के लिए वित्तीय अनुमतियां दीं थीं। वर्तमान में श्रीवास्तव वन विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव हैं। वनमंत्री ने उन्हें ही नोटशीट लिखकर इस घोटाले की शिकायत ईओडब्ल्यू को करने के निर्देश दिए हैं। मंत्रालय में चर्चा है कि जिस अधिकारी ने स्वयं घोटाले की राशि जारी की है वह इसकी शिकायत कैसे कराएगा?

    सूत्रों के मुताबिक केन्द्रीय वन मंत्रालय से प्राप्त पांच सौ करोड़ रुपए की धनराशि को राज्य के अन्य विकास कार्यों पर भी खर्च किया गया था जबकि वृक्षारोपण अभियान वन विभाग के सामान्य बजट और कई निजी संस्थाओं के जन सहयोग से पूरा किया गया था। राज्य में पहली बार नर्मदा नदी के दोनों किनारों पर इतना बड़ा वृक्षारोपण अभियान चलाया गया था। ईओडब्ल्यू की जांच में ये साफ हो जाएगा कि बजट की धनराशि का किसी भी तरह दुरुपयोग नहीं किया गया था। वन विभाग की ही एक अन्य रिपोर्ट के अनुसार इस अभियान में लगाए गए लगभग साठ फीसदी वृक्ष अभी भी जिंदा हैं और तीस फीसदी वृक्षारोपण हर अभियान में असफल होता ही है। ऐसे में केवल दस फीसदी वृक्षों के आंकड़ों के आधार पर रचा गया ये घोटाले का मायाजाल आगे चलकर कुछ अधिकारियों को निपटाने के साथ ही ठंडा पड़ जाएगा।

  • टेंडर होने तक पंचायतों की रेत मंडी जारी रहेगी

    टेंडर होने तक पंचायतों की रेत मंडी जारी रहेगी

    भोपाल,11 अक्टूबर(प्रेस सूचना केन्द्र)।खनिज साधन विभाग ने प्रदेश में रेत नियम-2019 के क्रियान्वयन की प्रक्रिया 43 जिलों में समूहवार शुरू की है। रेत खदानों की शुरू की गई निविदा प्रक्रिया की अंतिम तिथि 8 नवम्बर, 2019 निर्धारित की गई है। निविदाओं के बाद सफल उच्चतम बोली के निविदाकार को अपने जिले में रेत खदानों के संचालन की जिम्मेदारी दी जायेगी।तब तक रेत की सप्लाई पंचायतों से ही जारी रहेगी।

    राज्य शासन ने नई नीति के अनुसार जिले में रेत खदानों के संचालन के लिये सभी वैधानिक अनुमतियाँ प्राप्त करने में लगने वाले समय को देखते हुए निजी भूमि पर उपलब्ध रेत खदानों और ग्राम पंचायतों को हस्तांतरित रेत खदानों को पूर्व की भाँति निरंतर संचालित रखे जाने का निर्णय लिया है। जिन निजी भूमि एवं ग्राम पंचायतों की रेत खदानों को मानसून अवधि में प्रतिबंध लगने के पूर्व 30 जून, 2019 के पूर्व पर्यावरणीय स्वीकृति प्राप्त हो गई थी, ऐसी सभी खदानों को तत्काल संचालित करने के प्रस्ताव भेजने के निर्देश प्रमुख सचिव, खनिज साधन विभाग श्री नीरज मण्डलोई ने जिला कलेक्टर्स को दिये हैं।

    खनिज साधन मंत्री श्री प्रदीप जायसवाल ने बताया कि प्रदेश में नई नीति के अनुसार रेत खदानों की निविदा के लिये बड़ी संख्या में इच्छुक निविदाकार तैयारी कर रहे हैं। नई नीति से प्रदेश को रेत से 464 करोड़ रुपये के आरक्षित मूल्य से अधिक राजस्व प्राप्त होने की संभावना है। उन्होंने बताया कि प्रदेश में जन-सामान्य को रेत प्राप्त करने में दिक्कत न हो, इसे ध्यान में रखते हुए पर्यावरणीय स्वीकृति प्राप्त निजी भूमि की रेत खदानों और ग्राम पंचायतों को हस्तांतरित रेत खदानों को चालू रखे जाने का निर्णय लिया गया है।

  • पंचायती राज में सुधार जरूरी बोले महामहिम

    पंचायती राज में सुधार जरूरी बोले महामहिम

    बदलते वैश्विक दौर में हस्तशिल्प और हथकरघा क्षेत्र का विकास चुनौतीपूर्ण

    भोपाल,10 अक्टूबर(प्रेस सूचना केन्द्र)। राज्यपाल लालजी टंडन ने कहा है कि तेजी से बदलते वैश्विक दौर में हस्तशिल्प और हथकरघा क्षेत्र के विकास के लिये कार्य करना चुनौतीपूर्ण है। उन्होंने कहा कि भारत की प्राचीन हस्तशिल्प और हथकरघा पद्धति का विकास कर हम रोजगार के ज्यादा से ज्यादा अवसर निर्मित कर सकते हैं। बाजारवाद ने जिस तरह फिनिश माल की मांग बढ़ा दी है उस दौर में ग्रामीण उत्पादों की मार्केटिंग एक चुनौती है। राज्यपाल आज यहाँ हिन्दी भवन में डॉ. बी.आर. अम्बेडकर सामाजिक विज्ञान विश्वविद्यालय द्वारा आयोजित त्रि-स्तरीय पंचायती राज प्रशिक्षण कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे।

    राज्यपाल श्री टंडन ने कहा कि पंचायत राज व्यवस्था हमेशा से ग्रामीण विकास की धुरी रही है। हमारे देश के हस्तशिल्प और हथकरघा की दुनियाभर में विशिष्ट पहचान रही है, लेकिन पिछले कुछ वर्षों में मशीनीकरण के दौर ने इन कलाओं के विकास को प्रभावित किया है। प्राचीन दौर में इन कलाओं के माध्यम से अधिक से अधिक लोगों को उनके गाँव में ही रोजगार के अधिक से अधिक अवसर मिल जाते थे। राज्यपाल ने कहा कि देश की आदिवासी संस्कृति की समृद्धि के लिये निरंतर प्रयास करना भी जरूरी है।

    डॉ. बी.आर. अम्बेडकर सामाजिक विज्ञान विश्वविद्यालय, महू की कुलपति प्रो. आशा शुक्ला ने कहा कि विश्वविद्यालय डॉ. अम्बेडकर के सपनों और आदर्शों को केन्द्र में रखकर निरंतर कार्य कर रहा है। उन्होंने बताया कि ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अधिक से अधिक अवसर निर्मित करने के लिये पंचायत प्रतिनिधियों को प्रशिक्षण दिये जाने की व्यवस्था की गई है। विश्वविद्यालय द्वारा ग्रामीण क्षेत्रों में हस्तशिल्प और हथकरघा के विकास के लिये जागरूकता कार्यक्रम भी चलाये जा रहे हैं। प्रो. शुक्ला ने बताया कि इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में रायसेन, सीहोर और भोपाल जिले के कारीगरों और पंचायत प्रतिनिधियों को प्रशिक्षण दिये जाने की व्यवस्था है। उन्होंने बताया कि विश्वविद्यालय ने महू के पास 12 गाँव गोद लिये हैं, इन गाँवों में सामाजिक विकास के लिये जन-जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है।

    कार्यक्रम को साथिया वेलफेयर सोसायटी की निदेशक श्रीमती स्मृति शुक्ला और हस्तशिल्प विकास निगम के प्रतिनिधि श्री महेश गुलाटी ने भी संबोधित किया।

  • मंहगे बांस सस्ते में बेचने के लिए बरेजों को आड़ बनाया

    मंहगे बांस सस्ते में बेचने के लिए बरेजों को आड़ बनाया

    पान बरेजों के लिए निस्तार दर पर बांस मुहैया कराए जाएंगे

    मंत्रि-परिषद के निर्णय

    भोपाल,5 अक्टूबर(प्रेस सूचना केन्द्र)। मुख्यमंत्री कमल नाथ की अध्यक्षता में आज मंत्रालय में हुई मंत्रि-परिषद की बैठक में सामाजिक सुरक्षा पेंशन भुगतान के लिए जिलों को 550 करोड़ 2 लाख रूपये की राशि स्वीकृत करने का निर्णय लिया गया। यह राशि राज्य स्तरीय निराश्रित निधि खाते से मासिक आवश्यकतानुसार आहरित कर सामाजिक सुरक्षा पेंशन का भुगतान किया जायेगा। आईटीसी के अगरबत्ती उद्योग को सरकारी जंगलों का बांस सस्ते भावों पर मुहैया कराने के लिए कमलनाथ सरकार ने पान बरेजों के लिए निस्तार दर पर बांस मुहैया कराने का फैसला लिया है। सूत्र बताते हैं कि पान बरेजों के नाम पर खरीदा जाने वाला बांस सीधे अगरबत्ती उद्योग को मुहैया कराए जाने की तैयारी की जा रही है।

    मंत्रि-परिषद ने प्रदेश में होटल, रिसॉर्ट और हेरिटेज होटल की स्थापना के लिए ब्रॉण्ड्स को आकर्षित और प्रोत्साहित करने के लिए सतत् अनुदान उपलब्ध कराने की ब्रॉण्डेड होटल प्रोत्साहन नीति-2019 का अनुमोदन किया। ब्रॉण्ड्स को प्रदेश में स्थापित होने वाली परियोजनाओं की संभावनाओं को देखते हुए ब्रॉण्ड हॉटल्स, ब्रॉण्ड रिसॉर्टस और ब्रॉण्ड हेरिटेज हॉटल्स श्रेणी में वर्गीकृत किया गया है।

    मध्यप्रदेश देश का पहला राज्य है, जिसने ब्राण्ड हॉटल्स की स्थापना पर इस तरह की नीति बनाई है। अनुमान है कि इस नीति से प्रदेश में अगले 5 वर्षों में ब्राण्ड हॉटल्स में कम से कम एक हजार लग्जरी और विश्व-स्तरीय नवीन कक्ष स्थापित हो सकेंगे। न्यूनतम 100 करोड़ रुपये अथवा उससे अधिक के निवेश से नवीन ब्राण्ड होटल की स्थापना पर उनके द्वारा होटल कक्षों के किराये से प्राप्त वार्षिक टर्न ओवर पर नीति अंतर्गत 3 वर्ष तक 20 से 30 प्रतिशत तक अनुदान दिया जायेगा। अनुदान की अधिकतम सीमा 3 करोड़ रुपये होगी। इसी प्रकार, ब्रॉण्ड रिसॉर्ट एवं ब्रॉण्ड हेरिटेज होटल को 3 वर्षों तक प्रतिवर्ष 2 करोड़ रुपये तक संचालन अनुदान दिया जायेगा। ब्रॉण्ड होटल को दिये जाने वाला यह अनुदान उन्हें नीति के तहत प्राप्त होने वाले पूँजी अनुदान के अतिरिक्त होगा।

    प्रदेश सरकार के पर्यटन विकास के लक्ष्यों की पूर्ति के लिए मंत्रि-परिषद ने पर्यटन नीति-2016 को सक्षम, व्यवहारिक, व्यापक और पूंजी निवेश के अनुकूल बनाने के लिए प्रावधानित संशोधन को अनुमोदन प्रदान कर दिया। बैठक में मार्ग सुविधा केन्द्रों (वे-साईड एमेनिटीज) की स्थापना एवं संचालन की नीति 2016 में संशोधन का अनुमोदन किया गया। इसके अंतर्गत मध्यप्रदेश पर्यटन विकास निगम द्वारा पूरे प्रदेश में रोड नेटवर्क एवं यात्री सुविधाओं की आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए मार्ग सुविधा केन्द्रों की स्थापना को प्रोत्साहित किया जाएगा। साथ ही, संभावित स्थलों और तैयार ब्राउन-फील्ड मार्ग सुविधा केन्द्रों का प्रचार-प्रसार किया जाएगा, ताकि निवेश का वातावरण तैयार हो।

    मंत्रि-परिषद ने आवास एवं पर्यावास नीति 2007 की कंडिका क्रमांक 5.4 को विलोपित करने का निर्णय लिया। इसमें निवेश के क्षेत्रों में भूखण्डीय विकास के लिए भूमि अथवा भू-खण्ड का क्षेत्रफल दो हेक्टेयर रखे जाने का प्रावधान था। इस कारण न्यूनतम दो हेक्टेयर भूमि की आवश्यकता निर्मित होने से छोटी भूमि अनुपयोगी रह जाती थी। ऐसे क्षेत्रों में अवैध कॉलोनियाँ विकसित होने की संभावनाएँ बढ़ जाने से विकास की निरंतरता भी बाधित हो रही थी।

    रिसॉर्ट बार लायसेंस का सरलीकरण

    मंत्रि-परिषद ने राज्य के वन क्षेत्रों में पर्यटन को प्रोत्साहन देने के लिए रिसॉर्ट बार लायसेंस का सरलीकरण करने का निर्णय लिया। इसमें राष्ट्रीय उद्यानों के अतिरिक्त वन अभयारण्य के पास भी रिसॉर्ट बार लायसेंस की सुविधा दी जाएगी। रिसॉर्ट बार राष्ट्रीय उद्यान/अभयारण्यों की सीमा से 20 किलोमीटर की सीमा में स्थित होना चाहिए। रिसॉर्ट में दस कमरों के स्थान पर न्यूनतम पाँच कमरों का प्रावधान किया गया। रिसॉर्ट बार के लिए न्यूनतम क्षेत्र 2 हेक्टेयर को घटाकर एक एकड़ करने का निर्णय लिया गया। वन्य क्षेत्रों में स्थित रिसॉर्ट बार के लिए वार्षिक लायसेंस फीस पाँच कमरे के लिए 50 हजार, 6 से 10 कमरे के लिए एक लाख और 10 से अधिक कमरे वाले रिसॉर्ट के लिए डेढ़ लाख रूपये करने का निर्णय लिया गया है। सभी बार लायसेंसों की स्वीकृति और नवीनीकरण के प्रकरणों में अग्नि सुरक्षा संबंधी व्यवस्था के संबंध में निर्धारित प्रमाण-पत्र के स्थान पर जिला आबकारी अधिकारी तथा संबंधित रिसॉर्ट बार अनुज्ञप्तिधारी के संयुक्त हस्ताक्षर से रिपोर्ट ली जाएगी।

    मंत्रि-परिषद ने पान किसानों/पान बरेजा परिवारों को निस्तार दर पर बाँस उपलब्ध कराने का निर्णय लिया। वन विभाग द्वारा जारी आदेश को 10 मार्च 2019 से ही पान बरेजा परिवारों की निस्तार नीति में शामिल करते हुए कार्योत्तर अनुमोदन प्रदान किया गया। संशोधित निस्तार नीति वर्ष-2019 का भी अनुमोदन किया गया।

    मंत्रि-परिषद ने भारतीय पुलिस सेवा (संवर्ग) नियम के अनुसार 31 अक्टूबर,2019 तक की अवधि के लिए पुलिस महानिदेशक ग्रेड में एक पद निर्मित करने का निर्णय लिया। इसी के साथ, संविदा आधार पर निरंतर किए गए कोर्ट मैनेजर का कार्यकाल 31 मार्च 2020 तक अथवा नियमित कोर्ट मैनेजर के पदों पर भर्ती होने तक, जो भी पहले हो, इस शर्त के साथ अंतिम बार निरंतर करने का निर्णय लिया गया। मंत्रि-परिषद ने मुंबई स्थित मध्यालोक भवन का संचालन एवं संधारण मध्यप्रदेश राज्य पर्यटन विकास निगम को सौंपने का भी निर्णय लिया।