Category: मध्यप्रदेश

  • टीन शेड जैन मंदिर में गणतंत्र दिवस पर झंडावंदन

    टीन शेड जैन मंदिर में गणतंत्र दिवस पर झंडावंदन

    भोपाल,26 जनवरी(प्रेस सूचना केन्द्र)।भोपाल समाज समिति, भोपाल के तत्त्वावधान में टीन शेड जैन मंदिर के प्रांगण में झण्डा वंदन कर 71 वें गणतंत्र दिवस का कार्यक्रम पूरे हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। देश भक्ति से परिपूर्ण कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में सुश्री “मितुल प्रदीप” उपस्थित रहीं।

    सुश्री मितुल, जन जन के रक्त में देशभक्ति का संचार करने वाले कालजयी गीत “ए मेरे वतन के लोगो” जैसे अनेक देशभक्ति गीतों के रचियता कवि प्रदीप की पुत्री हैं। कार्यक्रम की अध्यक्षता देश के अंतराष्ट्रीय स्तर के वरिष्ठ कवि एवं गीतकार श्री कुंवर बैचेन ने की। कुंवर बैचेन जी की रचनाएं देश के 7 राज्यों के कॉलेज एवं स्कूल के पाठ्यक्रमों में सम्मिलित है। उनकी अब तक 35 पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी है साथ ही एक महाकाव्य भी प्रकाशित हो चुका है। लगभग 60 दशकों से भी अधिक समय से काव्य मंचो का प्राधिनित्व कर रहे कवि कुंवर बैचेन के काव्यों पर लगभग 24 पीएचडी अवार्ड हो चुकी हैं एवं 8 पीएचडी शोध चलायमान हैं।

    मुख्य अतिथि ने अपने उद्गार व्यक्त करते हुए अपने संबोधन में कवि प्रदीप की दो संदेशों के विषय में कहा । पहला संदेश “हम लाये हैं तूफान से कश्ती निकाल के, इस देश को रखना मेरे बच्चों संभाल के” को दृष्टिगत रखते हुए बच्चों को संबोधित करते हुए दिया कि ये देश को संभालने वाले अब ये बच्चे है जो भावी भारत के कर्णधार हैं। दूसरे संदेश में “इंसान का इंसान से हो भाईचारा, यही संदेश हमारा’ को दृष्टिगत रखते आज के परिदृश्य में कवि प्रदीप द्वारा लिखी गयी पंक्तियों को आचरण में अंगीकार करने की अपील उन्होंने की। श्री कुंवर बैचेन ने अपने अध्यक्षीय संबोधन में सकारात्मकता पर जोर देते हुए कहा कि इस समय हमें एकता के सूत्र में बधने की आवश्यकता है तभी राष्ट्र तरक्की कर पायेगा। अपने गीत “भले ही हम में तुम में कुछ, ये रूप रंग का भेद हो..है खुशबुओं में फर्क क्या गुलाब हम गुलाब तुम” के माध्यम से आज के परिदृश्य में समाधान बताने की चेष्टा की साथ ही अपने गीत ” है हमारा नमन है वतन के लिए” के माध्यम से देशभक्ति के जज़्बातों को ज़ाहिर किया।

    कार्यक्रम में भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारी श्री शोभित जैन आई.ए. एस, टीन शेड जैन मंदिर के अध्यक्ष अमर जैन, संस्था के अध्यक्ष राकेश सिंघई, श्री सेठी जी एवं अन्य गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।कार्यक्रम का सफल संचालन श्री शशांक जैन, आई.टी कंसलटेंट द्वारा किया गया एवं आभार प्रदर्शन अमर जी जैन द्वारा किया गया।

  • रबर की गुड़िया का खेल नहीं कलेक्टरी

    रबर की गुड़िया का खेल नहीं कलेक्टरी

    रबर की गुड़िया और खिलौनों से खेलने वाले बच्चे पूरी जिंदगी उस साए से मुक्त नहीं हो पाते हैं। चाहे वे कितनी ही बड़ी जवाबदारी क्यों न संभाल लें लेकिन उन्हें लगता है कि वे गुड़िया से ही खेल रहे हैं और वह कोई जवाब नहीं देगी। उसके जवाब भी उन्हें ही देना होंगे। ऐसा ही कुछ राजगढ़ की कलेक्टर निधि निवेदिता और डिप्टी कलेक्टर प्रिया वर्मा के साथ घट रहा है।जिला दंडाधिकारी का पद पाने के बाद भी उन्हें लगता है कि वे बच्चों का खेल खेल रहीं हैं। गलती करने पर उन्हें लाड़ से डपटने वालों को छोड़कर किसी का सामना नहीं करना पड़ेगा। वे भूल रहीं हैं कि वे जनता की अनुबंधित नौकर हैं। उन्हें जनता ने अपनी व्यवस्थाओं की जवाबदारी निभाने के लिए नौकरी पर रखा हुआ है। अफसरी का ज्यादा अनुभव न होने की वजह से उन्हे लगता है कि उनकी जवाबदारी जनता के प्रति नहीं बल्कि शासकों के प्रति है। अंग्रेजों की प्रेरणा से बनी अफसरशाही शुरु से ही शासकों के प्रति झुकाव रखती रही है।इस समस्या के निदान के लिए ही स्वर्गीय राजीव गांधी ने पंचायती राज की अवधारणा को पूरे देश में लागू किया था। जिस दिग्विजय सिंह ने पंचायती राज व्यवस्था को प्रदेश में सख्ती से लागू किया वही आज बिगड़े दिमाग वाली अफसरों का बचाव कर रहे हैं। उन्हें तो अपनी सरकार केवल इसलिए गंवानी पड़ी थी क्योंकि पंचायती राज व्यवस्था अराजकता की भेंट चढ़ गई थी और अफसरशाही ने उनकी सरकार का वध कर दिया था। इसी अफसरशाही की असफलताएं गिनाकर कांग्रेस की मौजूदा सरकार सत्ता में आई है। इसके बावजूद सत्ता में आने के बाद वह अफसरों की गुलामी करने लगी है। राजगढ़ के कुछ जागरूक नागरिक जब नागरिकता संशोधन कानून का समर्थन कर रहे थे तब उन्हें जरा भी भान नहीं था कि जिस सरकारी अमले पर कानून लागू करवाने की जिम्मेदारी है वे ही उनके ऊपर हमला कर देंगे।उस समय वे शांतिपूर्ण तरीके से विरोध जता रहे थे। उनके हाथों में तिरंगा झंड़ा था। कमलनाथ सरकार ने चूंकि राजनीतिक एजेंडे के तहत विरोध प्रदर्शन को अनुमति न देने का अघोषित आदेश दिया है इसलिए खुद को सरकार का सिपाहसालार बताने के लिए कुछ अफसरों में होड़ सी लग गई है। जाहिर है कि राजगढ़ की कलेक्टर और डिप्टी कलेक्टर को भी राज्य सरकार की चिलम भरने में जुटना ही था। जिस बेखौफ अंदाज में कलेक्टर ने नारे लगाते कार्यकर्ता को झांपड़ रसीद किया और जिस गुंडई भरे लहजे में डिप्टी कलेक्टर ने तिरंगा धारियों को घसीटा उससे तो ऐसा ही लग रहा था मानों अंग्रेजों के टुकड़खोर आजादी के परवानों पर जुल्म ढा रहे हों। इस बदतमीजी का जवाब खून खराबे से भरा भी हो सकता था। भीड़ चूंकि हिंसक नहीं थी और न ही हिंसा का उसका कोई इरादा था इसलिए किसी शैतान प्रदर्शनकारी ने डिप्टी कलेक्टर की चोटी खींचकर उसे याद दिलाया कि वह सीमा लांघ रही है। पुलिस के बीचबचाव से भले ही दोनों अफसर बच गईं हों लेकिन जनता के बीच इसकी प्रतिक्रिया अच्छी नहीं है। इस घटना से नाराज भाजपा के कार्यकर्ता जब प्रदर्शन कर रहे थे तो पूर्व मंत्री बद्री यादव ने भावनाओं के अतिरेक में कुछ ज्यादा ही काल्पनिक कहानी सुना डाली। उन्होंने कहा कि यहां की कलेक्टर कांग्रेसियों को तो गोदी में बिठाकर दूध पिलाती है लेकिन भाजपा के कार्यकर्ताओं को थप्पड़ मारती है। हंसी ठिठोली के अंदाज में कही गई इस बात ने तूल पकड़ लिया और डिप्टी कलेक्टर की शिकायत पर बद्रीयादव की गिरफ्तारी और जमानत की प्रक्रिया भी की गई। दूध दुहना और लोगों को पिलाना बद्रीयादव का खानदानी काम रहा है। इसी वजह से उन्होंने कलेक्टर के कांग्रेस प्रेम को दर्शाने के लिए इस जुमले का इस्तेमाल कर डाला। जब प्रतिक्रियाएं आईं तो उन्हें अपनी गलती का अहसास हुआ और उन्होंने यह कहते हुए माफी भी मांग ली कि उनकी बात का गलत अर्थ न निकाला जाए। हालांकि जब बात बिगड़ती है तो उसकी कई तस्वीरें सामने आती हैं।एक एएसआई और पटवारी ने कलेक्टर के दुर्व्यवहार को लेकर ही शिकायत कर डाली। जिसमें कलेक्टर ने उन्हें भी थप्पड़ मारा था। अब कलेक्टर साहिबा की मानसिक दशा का दूसरा ही पक्ष सामने आने लगा है। जाहिर है कि भारतीय प्रशासनिक सेवा के आला अधिकारियों और उन्हें मध्यप्रदेश कैडर में भेजने वाले केन्द्रीय कार्मिक मंत्रालय को ऐसी मानसिकता वाली अफसर की कार्यशैली पर गंभीरता से विचार करना चाहिए जो जनता के प्रति असहिष्णु हो। फौरी प्रतिक्रिया के तौर पर निधि निवेदिता और प्रिया वर्मा को निलंबित किया जाना चाहिए। राज्य सरकार से फिलहाल ये उम्मीद इसलिए नहीं की जाती क्योंकि भाजपा की ओर से इस घटना को लेकर अफसरों का विरोध किया जा रहा है। सबसे बड़ी बात तो ये है कि अफसरों को नसीहत देने वाले मुख्यमंत्री कमलनाथ महिला अफसरों के मामले में थोड़े ज्यादा सहिष्णु हैं। शायद यही वजह है कि उनकी कांग्रेस भाजपा के प्रदर्शन को महिलाओं का अपमान बताने में जुटी है। वीडियो क्लीपिंग्स में जो हकीकत सामने आई है उसमें साफ दिख रहा है कि किसी भी प्रदर्शन कारी ने महिला अफसरों से बदतमीजी नहीं की थी। इसके बावजूद महिला अफसरों ने सीमाएं लांघकर कार्यकर्ताओं पर हमला किया। प्रिया वर्मा तो अपनी अफसर से जुगलबंदी करने की रौ में इतना बह गईं कि उन्होंने भीड़ में घुसकर तिरंगा लिए व्यक्तियों को चुन चुनकर घसीटना शुरु कर दिया। गैर जिम्मेदार अफसरों पर कार्रवाई करने की जवाबदारी निश्चित रूप से राज्य सरकार की है। उसे इन अफसरों को तत्काल हटाकर निलंबित करना चाहिए। उनके व्यवहार की जांच कराई जानी चाहिए और केन्द्र को सूचित किया जाना चाहिए।ये भी सुनिश्चित किया जाए कि जो अफसर भीड़ को नियंत्रित करने के बजाए उसे भड़काने की मानसिकता रखते हों उन्हें भविष्य में कभी मैदानी पोस्टिंग न दी जाए। कमलनाथ सरकार से फिलहाल ऐसे किसी सख्त कदम की उम्मीद नहीं की जा सकती। जो सरकार नागरिकता संशोधन कानून जैसे संसद से पारित व्यवस्था को लेकर अनर्गल बयानबाजी कर रही हो उससे जिम्मेदाराना व्यवहार की अपेक्षा भी क्यों की जाए। केन्द्र सरकार ने आईएएस अफसरों की व्यवस्था सुधारने की दिशा में कई प्रयास किए हैं। निश्चित रूप से ऐसे बिगड़े अफसरों के भविष्य का फैसला उसे करना चाहिए। सबसे बड़ी जवाबदारी तो भाजपा जैसे राजनीतिक दलों और आम नागरिकों की है।जनता के प्रति सड़ांध भरी मानसिकता लेकर नौकरी में आ गए इन अफसरों की शैली को अदालत में चुनौती दी जानी चाहिए। उनकी योग्यता की छानबीन कराई जाए और उन्हें पदमुक्त किया जाए ताकि सरकार और जनता के बीच संवादहीनता की स्थितियां न बनें। जिन अफसरों को जनता और सरकार के बीच संवाद की कड़ी बनना चाहिए यदि वे रोड़ा बन रहे हों तो बेहतर है इस रोड़े को जल्दी से जल्दी रास्ते से हटाया जाए। क्योंकि कलेक्टरी कोई रबर के गुड्डे गुड़ियों का खेल नहीं है। कमलनाथ सरकार इस पर गौर करे तो अच्छा ही होगा।

  • स्थापित उद्योगों के सहारे एमपी के सीईओ दिखना चाहते हैं कमलनाथ

    स्थापित उद्योगों के सहारे एमपी के सीईओ दिखना चाहते हैं कमलनाथ

    अरुण पटेल

    बतौर मुख्यमंत्री अपने कार्यकाल के अंतिम कुछ सालों में तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान अक्सर बढ़चढ़ कर यह दावा करते रहे कि वे मुख्यमंत्री नहीं बल्कि प्रदेश के सीईओ हैं, लेकिन सच्चे अर्थों में प्रदेश के वास्तविक सीईओ के रुप में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष और मुख्यमंत्री कमलनाथ अपनी एक ऐसी छवि गढ़ रहे हैं जिसमें राजनेता के साथ ही एक कुशल प्रशासक के भी गुण मौजूद दिखाई पड़ने लगे हैं। कमलनाथ के पास विकास की वैश्‍विक दूरदृष्टि होने के साथ ही विकास का मॉडल स्थानीय जमीनी आवश्यकताओं के अनुसार क्या हो, इन दोनों का समन्वय उनके व्यक्तित्व में है। प्रशासनिक व्यवस्था को चुस्त-दुरुस्त करने और ‘वक्त है बदलाव का’ अपना चुनावी वायदा पूरा करने की दिशा में कमलनाथ सरकार आगे बढ़ रही है। दशकों बाद मंत्रालय में मुख्यमंत्री के रुप में एक ऐसा चेहरा विराजमान है जिसकी प्रशासन पर मजबूत पकड़ बन रही है और वे आला अधिकारियों को बताते हैं कि उन्हें क्या करना है और कैसे होगा। कमलनाथ का कहना है कि मेरी सरकार ‘आउटसोर्स’ की नहीं है। अब जब अधिकारी मेरे पास आते हैं और कैसे क्या करना है पूछते हैं तो मैं उन्हें बताता हूं कि कैसे काम करना है और क्या काम करना है एवं सरकार कैसे चलती है।


    मेरी सरकार आउटसोर्स की सरकार नहीं है यह कहते हुए कमलनाथ पूर्ववर्ती शिवराज सिंह चौहान के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार पर तंज कसते हैं। समझा जाता है कि पूर्ववर्ती शिवराज सरकार के कार्य संचालन के मामले में उनकी यह पक्की धारणा रही है कि उस समय पांच-छह अधिकारियों को सरकार आउटसोर्स कर दी थी और वे जो चाहते थे वही होता था। जहां तक कमलनाथ का सवाल है चाहें वे मुख्यमंत्री हों, मंत्री रहे हों या सांसद उनकी कार्यशैली स्वाभाविक रुप से सीईओ की ही रही है, जबकि शिवराज पहली बार सीधे मुख्यमंत्री बने थे और उन्होंने अपने ढंग से सरकार चलाई थी। पहले और दूसरे कार्यकाल में शिवराज ने भी सामाजिक सरोकारों से जुड़ी खासकर लाडली लक्ष्मी और मुख्यमंत्री तीर्थ दर्शन तथा मुख्यमंत्री कन्यादान योजना जैसी कुछ ऐसी योजनायें चलाई थीं, जिनके चलते उनका अपना एक आभामंडल बना था और बहनों के भाई एवं भांजे-भांजियों के मामा तथा वृद्धजनों के लिए श्रवण कुमार बन गए थे। लेकिन यह भी सही है कि उनके कार्यकाल के आखिरी दो-तीन सालों में जैसा कमलनाथ कह रहे हैं वैसी ही स्थिति बन गयी थी।


    राजनीतिक हल्कों में यह बात मानी जाती थी कि कमलनाथ एक साथ वैश्‍विक सोच एवं जमीनी आवश्यकताओं के साथ पिछड़े से पिछड़े इलाके को कैसे विकसित किया जाए यह भलीभांति जानते हैं। आला प्रशासनिक अधिकारी और मध्यप्रदेश आईएएस एसोसिएशन के अध्यक्ष आई.सी.पी. केशरी कहते हैं कि हमारे सी.एम. डायनमिक ग्लोबल हैं और हम सब राज्य की उम्मीदों पर खरे उतरेंगे। आईएएस आफीसर्स एसोसिएशन की सर्विस मीट 2020 के उद्घाटन अवसर पर केशरी ने कहा कि नये आने वाले अफसरों को शायद अपने मुख्यमंत्री के बारे में ज्यादा कुछ पता नहीं है, इसकी वजह यह है कि उन्होंने उनके साथ काम नहीं किया है। उन्होंने एक उदाहरण देकर कहा कि जिनेवा में डब्ल्यूटीओ के सम्मेलन में एक बार किसानों के हितों को लेकर 90 देशों के मंत्रियों ने कमलनाथ के नेतृत्व में वाकआउट कर दिया था। एक बार विकासशील देशों के लिए पश्‍चिमी देशों की एक बैठक में अमेरिका के राष्ट्रपति जार्ज बुश भी आये थे, उस समय तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने परिचय कराते हुए कहा कि ये वाणिज्यिक मंत्री कमलनाथ हैं, इसके पूर्व ही बुश बोल उठे कि मैं इन्हें जानता हूं, इन्होंने हमारे मंत्रियों को परेशान किया हुआ है। इस पर कमलनाथ ने कहा कि ऐसा नहीं है हमारे अच्छे सम्बन्ध हैं, उनकी इस हाजिर जवाबी के कारण सभी उनकी ओर देखने लगे थे।


    कांग्रेस अक्सर शिवराज सरकार पर भू-माफिया, खनन माफिया को फलने-फूलने का आरोप लगाती रही थी। चुनाव के समय भी कांग्रेस ने इसे एक बड़ा मुद्दा बनाया था। उसका आरोप था कि पिछले भाजपा सरकार के कार्यकाल के दौरान रेत माफिया, भू-माफिया, बिल्डर माफिया और अनेक प्रकार के माफिया इस कदर तेजी से उभरे थे कि एक प्रकार से प्रदेश माफियाओं के मकड़जाल में फंस गया था। कांग्रेस का कहना है कि इन सभी माफियाओं पर अपने-पराये या राजनीतिक प्रतिबद्धताओं से परे समान रुप से कड़ी कार्रवाई कमलनाथ कर रहे हैं और इसमें किसी प्रकार के हस्तक्षेप को प्रश्रय नहीं मिल पा रहा है। अपने चुनावी वायदों को तेजी से पूरा करने के साथ ही कमलनाथ की प्राथमिकता प्रदेश में नये उद्योग लगाने की रही है और इस मामले में एक यथार्थवादी दृष्टिकोण से वे आगे बढ़ रहे हैं। प्रदेश कांग्रेस मीडिया विभाग के उपाध्यक्ष अभय दुबे का दावा है कि प्रदेश में औद्योगिक निवेश का एक विश्‍वसनीय माहौल बना है और लगभग 30 हजार करोड़ रुपये के निवेश के प्रोजेक्ट की बुनियाद बीते एक साल के कार्यकाल में रखी गई है। लगभग 70 हजार करोड़ रुपये के प्रोजेक्ट के लिए, उन्हें भूमि आवंटन सम्बन्धी प्रक्रिया भी पूरी कर ली गयी है। उनका कहना है कि मध्यप्रदेश में औद्योगिक निवेश के परिवेश को देखा जाए तो पिछले पन्द्रह साल की तुलना में कमलनाथ सरकार का एक साल का कार्यकाल भाजपाई शासन का पर्दाफाश कर रहा है और भाजपा के पन्द्रह साल की अवधि प्रदेश के औद्योगिक निवेश के लिए अभिशाप साबित हुई है। दुबे का आरोप है कि शिवराज सरकार के समय 2007 से 2016 तक आयोजित अनेकों ग्लोबल इन्वेस्टर समिट में बड़े पैमाने पर औद्योगिक निवेश में 17 लाख करोड़ के गननचुम्बी निवेश के दावे किए गए थे, किन्तु नतीजा सिफर रहा और केवल 50 हजार करोड़ का ही निवेश आ पाया। दुबे का दावा है कि कमलनाथ सरकार औद्योगिक निवेश का स्वर्णिम भविष्य का मार्ग प्रशस्त कर रही है और उसने 30 हजार करोड़ रूपये की बुनियाद भी रख दी है जबकि समूचा देश केन्द्र की भाजपा सरकार की अदूरदृष्टि के चलते भयंकर आर्थिक मंदी की चपेट में आ गया है, जबकि मध्यप्रदेश में निवेशकों की कतार लग गयी है। मध्यप्रदेश का पीथमपुर हिन्दुस्तान का सबसे बड़ा फार्मा हब बन गया है। यहां सिपला फार्मा ने 600 करोड़ रुपये के निवेश की बुनियाद यहां रखी है। जो बड़े निवेशक आये हैं उनमें अजंता फार्मा ने 500 करोड़ रुपये का निवेश किया है। न्यू जर्सी की कम्पनी पार फार्मा ने 400 करोड़ का निवेश किया है मेक्लाईड नेे भी 400 करोड़ का निवेश किया है। इसके साथ ही उन्होंने आंकड़ों के हवाले से औद्योगीकरण की दिशा में बढ़ते प्रदेश का खाका भी प्रस्तुत किया।

    एक तरफ मुख्यमंत्री कमलनाथ जहां प्रदेश का औद्योगिक परिवेश बदलने के लिए भिड़े हुए हैं तो वहीं वे उन पर किए जा रहे किसी भी तंज का जवाब उसी लहजे में देने से नहीं चूक रहे। भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष व केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने जबलपुर में सीएए के समर्थन में एक रैली को सम्बोधित करते हुए कमलनाथ पर निशाना साधा और कहा कि वे सोनिया मैडम के दरबार में अपनी सीआर सुधारने में लगे हैं और जोरशोर से बोल रहे हैं कि प्रदेश में सीएए लागू नहीं होगा। उनकी उम्र चिल्लाने की नहीं रही है, स्वास्थ्य बिगड़ जायेगा। इस पर कमलनाथ ने भी पलटवार करते हुए कहा कि मेरी उम्र नहीं काम देख रही है प्रदेश की जनता, 365 दिनों में 365 वायदे पूरे किए हैं हमारी सरकार ने, आप प्रदेश की जनता और जनादेश दोनों का अपमान कर रहे हैं। हमने एक साल में प्रदेश में बदलाव लाकर दिखा दिया है और वायदे पूरे कर जनता का भरोसा कायम रखा है, हम काम में विश्‍वास रखते हैं झूठे वायदों में नहीं। इसी उम्र में जनता ने मुझ पर भरोसा कर भाजपा के कई युवा उम्मीदवारों की उम्मीद पर पानी फेरा है। आप कांग्रेस को नहीं जनता को समझाइए जो इस सच को जानती है कि केन्द्र सरकार अपनी असफलताओं को छुपाने के लिए सीएए और एनआरसी जैसे कानून थोपने का काम कर रही है। कमलनाथ ने शाह को सलाह दी कि अधिक बेहतर होता आप सीएए के समर्थन में रैली व जनसभा के लिए उन राज्यों में जाते जहां हिंसा हुई है। प्रदेश की शान्त धरती पर कानून के नाम पर गुमराह करने व फिजा खराब करने के लिए आपके यहां आने की आवश्यकता नहीं है। 

    यह लेख सुबह सवेरे से आभार सहित लिया गया है। इसका मकसद मुख्यमंत्री कमलनाथ की आकांक्षाओं को अपने पाठकों तक पहुंचाना मात्र है। लेखक को उपलब्ध कराए गए तथ्यों ,वक्तव्यों, राय आदि से प्रेस इंफार्मेशन सेंटर की सहमति होना आवश्यक नहीं है।

  • प्रदेश को आर्थिक शक्ति बनाएं अफसरों से बोले कमलनाथ

    प्रदेश को आर्थिक शक्ति बनाएं अफसरों से बोले कमलनाथ

    तीन दिवसीय आईएएस सर्विस मीट 2020

    भोपाल 17 जनवरी(प्रेस सूचना केन्द्र)। मुख्यमंत्री कमल नाथ ने कहा है कि देश में मध्यप्रदेश ही ऐसा प्रदेश है, जो विविधताओं से सम्पन्न है और पूरे विश्व में भारत ही ऐसा देश है, जो विविधताओं से पूर्ण है। इस विविधता को सकारात्मक ऊर्जा में बदलना होगा। उन्होंने कहा कि विविधता में भारत की बराबरी करने वाला देश सिर्फ सोवियत संघ था। आज वह अस्तित्व में नहीं है क्योंकि उसमें भारत जैसी सोच-समझ और सहिष्णुता की संस्कृति नहीं थी। यही भारत की पहचान है। मुख्यमंत्री आरसीवीपी नरोन्हा प्रशासन अकादमी में आईएएस सर्विस मीट 2020 के शुभारंभ सत्र को संबोधित कर रहे थे।

    मुख्यमंत्री कमल नाथ ने कहा कि जो आईएएस अधिकारी अपनी सेवा यात्रा के मध्य में हैं और जो सेवा पूरी करने वाले हैं, वे चिंतन करें कि मध्यप्रदेश को वे कहाँ छोड़कर जाना चाहते हैं। जो अधिकारी अपनी सेवा यात्रा की शुरूआत कर रहे हैं, वे सोचें कि मध्यप्रदेश को कहाँ देखना चाहते हैं। श्री कमल नाथ ने प्रशासनिक अधिकारियों को न्याय देने वाला बताते हुए कहा कि संविधान में उल्लेखित स्वतंत्रता और समानता जैसे मूल्यों की सीमाएँ हो सकती हैं लेकिन न्याय की कोई सीमा नहीं है। यह हर समय और परिस्थिति में दिया जा सकता है। दृष्टिकोण में परिवर्तन लाने की आवश्यकता है। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रशासनिक अधिकारियों के पास जो क्षमता और कौशल है, वह सामान्यत: राजनैतिक नेतृत्व के पास नहीं रहता। राजनैतिक नेतृत्व बदलते ही प्रशासनिक तंत्र का भी नया जन्म होता है लेकिन ज्ञान, कला, कौशल नहीं बदलते।

    मुख्यमंत्री ने नए परिवर्तनकारी विचारों (न्यू आइडिया आफ चेंज) के लिए तीन पुरस्कार देने की बात कही। उन्होंने कहा कि इसके लिए पूर्व मुख्य सचिवों की एक ज्यूरी बनाई जाएगी, जो सर्वोत्कृष्ट आईडिया चुनेगी।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि हर राज्य की अपना प्रोफाईल होती है। सबको मिलकर मध्यप्रदेश का प्रोफाईल बनाना होगा। वर्तमान प्रोफाईल को बदलना होगा। मध्यप्रदेश की नई पहचान बनानी होगी। इसके लिए जरूरी है कि प्रदेश में ज्यादा से ज्यादा आर्थिक गतिविधियाँ उत्पन्न हों। उन्होंने कहा कि प्रौद्योगिकी हर पल बदल रही है। पूरा भारत बदल रहा है। ज्ञान और सूचना के भंडार तक आज जो पहुँच बढ़ी है, वह पहले नहीं थी। उन्होंने कहा कि विश्व में सबसे ज्यादा महत्वाकांक्षी जनसंख्या भारत में है। ये जनसंख्या युवाओं की है। बदलते समय में महत्वाकांक्षाएँ भी बदल रही हैं। अब यह देखना है कि इन्हें कैसे अपनाएं।

    श्री कमल नाथ ने कहा कि मध्यप्रदेश कृषि आधारित अर्थ-व्यवस्था का प्रदेश है। वर्तमान समय में अधिक उत्पादन की चुनौती है। खाद्यान्न की कमी अब चुनौती नहीं रही। उन्होंने कहा कि परिवर्तन तब दिखेगा, जब धोती-पायजामा पहनने वाला किसान आधुनिक खेती करते हुए जींस और शर्ट वाला किसान बन जाये।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि सबसे बड़ी चुनौती हमारी नई पीढ़ी की है। उन्होंने कहा कि हर साल बड़ी संख्या में कौशल सम्पन्न युवा तैयार होते हैं। उन्हें रोजगार की जरूरत है। उन्होंने कहा कि रोजगार आर्थिक गतिविधियों का एक घटक है। इसलिए आर्थिक गतिविधियाँ बढ़ाना चुनौतीपूर्ण काम है। उन्होंने कहा कि हर सरकार की अपनी कार्य-शैली होती है। अपनी अच्छाईयाँ और कमजोरियाँ होती हैं। प्रशासनिक अधिकारियों की नई पीढ़ी को यह देखना होगा कि मध्यप्रदेश को किस दिशा में जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश एक आर्थिक शक्ति बनने की संभावना रखता है। मध्यप्रदेश के पास लॉजिस्टिक लाभ है। यहाँ का बाजार और व्यापार पूरे देश से जुड़ सकता है। सिर्फ नजरिए में परिवर्तन लाने की देर है। इसके लिए नया सीखने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि क्या सीखते हैं, इससे ज्यादा जरूरी है कि कैसे सीखते हैं।

    मुख्य सचिव एस.आर. मोहंती ने आईएएस मीट के आयोजन की पृष्ठभूमि की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि यह नई ऊर्जा और अनुभव को एक साथ लाने का अवसर है ताकि यह कार्य-शैली में भी बना रहे और इसका भरपूर लाभ समाज को मिले।

    अपर मुख्य सचिव सर्वश्री एम.गोपाल रेड्डी, मनोज श्रीवास्तव एवं प्रमुख सचिव मलय श्रीवास्तव ने अतिथियों को स्मृति-चिन्ह भेंट किये। प्रारंभ में मध्यप्रदेश आईएएस एसोसिएशन के अध्यक्ष आई.सी.पी. केशरी ने अपने स्वागत भाषण में मुख्यमंत्री को आधुनिक, उदार, डॉयनामिक और विश्व-दृष्टि से सम्पन्न नेता बताते हुए कहा कि वे 159 देशों का भ्रमण कर चुके हैं । वे किसानों के हित में 19 मंत्रियों के साथ विश्व व्यापार संगठन की बैठक का विरोध करने वाले नेता हैं। उनके नेतृत्व में देश में ऑटोमोबाइल सेक्टर में क्रांतिकारी परिवर्तन आया।

    इस अवसर पर वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी एवं प्रख्यात लेखक पवन वर्मा और प्रशासन अकादमी की महानिदेशक सुश्री वीरा राणा उपस्थित थी। 

  • कांग्रेस की माफिया राजनीति का रुदन

    कांग्रेस की माफिया राजनीति का रुदन

    शिवसेना सुप्रीमो बाला साहब ठाकरे के उत्तराधिकारी बनने का ख्वाब देश के कई लोग देखते रहते हैं। संजय राऊत भी उनमें से एक हैं। भारत की राजनीति में बाला साहब ठाकरे को कांग्रेस की परिवारवादी सोच से उपजी निराशा के अंधकार में चमकते सूर्य की तरह देखा गया। गैर कांग्रेसवाद का प्रयोग भारतीय राजनीति के कई महारथियों ने किया लेकिन बालासाहब ठाकरे ने उसे अंजाम तक पहुंचाया। आज भाजपा की गुटबाजी और एकाधिकार वादी राजनीति ने हालात बदल दिए हैं। आज शिवसेना उसी कांग्रेस के साथ आ खड़ी हुई है जिसके जेहन में माफिया शब्द गहरे तक घर जमाए बैठा है। राजाओं, सामंतवादियों के बाद अंग्रेजों और फिर आजाद भारत में जमाखोरों, मिलावटियों को ब्लैकमेल करके राजनीति की इबारत लिखती रही कांग्रेस के नेता आज भी वही पुराना धंधा चमकाने का प्रयास कर रहे हैं। कांग्रेस के साथ सत्तासीन होने के बाद शिवसेना भी इस धंधे से रोजी कमाने की जुगत भिड़ा रही है। भारत का जल व्यापार पहले निजी हाथों में था। आजादी से पहले सिंधिया घराने ने जल व्यापार में अपनी सशक्त उपस्थिति दर्ज कराई थी। विदेशों तक फैला जल कारोबार सिंधिया घराने की आय का बड़ा स्रोत था। जिसकी मदद से सिंधिया घराने ने अपेक्षाकृत रूप से अच्छी राजनीति की परिपाटी विकसित की। इस राजनीति को भारत की आजादी से ग्रहण लग गया। जब श्रीमती इंदिरा गांधी सत्ता में आईं तो उन्होंने सिंधिया घऱाने की आय के इस बड़े स्रोत पर कब्जा जमाने की रणनीति पर काम किया। मुंबई के अंडरवर्ल्ड डॉन करीम लाला तब समुद्री कारोबार पर माफिया गतिविधियों की वजह से गहरा नियंत्रण रखते थे। हाजी मस्तान ने भी तस्करी के कारोबार से काफी दौलत बनाई थी। इंदिरा गांधी अच्छी तरह जानती थीं कि उन्हें यदि समुद्री कारोबार पर नियंत्रण करना है तो उन्हें इस धंधे की नस कहे जाने वाले माफिया डॉनों की मदद लेनी होगी। इंदिरा गांधी की इस मंशा को महाराष्ट्र की राज्य सरकारों और पुलिस कमिश्नरों ने पूरा किया।ये बात सही है कि मुंबई का पुलिस कमिश्नर कौन होगा ये अंडरवर्ल्ड ही तय करता था। जहाजरानी मंत्रालय के अधीन बाद में बने केन्द्रीय अंतर्देशीय जल परिवहन निगम को स्थापित करके समुद्री कारोबार के बड़े खिलाड़ियों को दस जनपथ ने धंधे से बाहर कर दिया। निजी कंपनियों के जहाज धड़ाधड़ डूबने लगे, उन पर अग्निकांड होने लगे। उन्हें लूटा जाने लगा और सुरक्षा कारणों की वजह से उन्हें सरकारीकरण की जरूरत महसूस हुई जिसे आगे जाकर अंजाम दिया गया। सोने से भरे जहाज पर विस्फोट और धंधे की बर्बादी की कहानियां देश में आज तक सुनी और सुनाई जाती हैं। तब ये कहा गया कि सरकार की सुरक्षा में समुद्री कारोबार बेहतर ढंग से काम करेगा। ये हुआ भी। भारत का समुद्री कारोबार बढ़ा भी उस पर माफिया का शिकंजा आटे में नमक की तरह बना भी रहा। जब दाऊद इब्राहिम ने करीम लाला के वर्चस्व को तोड़ा तब उसे सरकार की आड़ में धंधे पर काबिज हो चुके राजनेताओं से भी जूझना पड़ा। राजनीति और माफिया के इस गठजोड़ प्रेम और दुश्मनी की कई कहानियां हैं।बाद में राजनेताओं ने निगम की आड़ में निजी मुनाफा काटने का धंधा विकसित कर लिया। आज श्रीमती इंदिरा गांधी के करीम लाला से कथित मुलाकात की कहानी ने देश में भूचाल ला दिया है उसकी वजह कुछ और है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी गुजरात में बंदरगाहों की आय बढ़ाकर राज्य की अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने का सफल प्रयोग कर चुके हैं। भारत की सत्ता संभालने के बाद उन्होंने यही प्रयोग मुंबई में दुहरा दिया। इसकी वजह से जल परिवहन निगम की आड़ में मुनाफा उलीच रहे कारोबारियों को दस्त होने लगे। जो जहाजरानी निगम घाटे की घाटी पर लुढ़क रहा था वो मुनाफा देने लगा। इस धंधे के पुराने खिलाड़ी बाहर होने लगे और नए खिलाड़ियों का उदय होने लगा। धंधे पर इसी पकड़ को बचाने के लिए शिवसेना का झगड़ा भाजपा से हुआ और सत्ता की नई इबारत लिख दी गई। आज कांग्रेस, एनसीपी और शिवसेना सभी से जुड़े व्यापारी सत्ता का पाला बदल रहे हैं। उन्हें अपने साथ रोके रखने की कवायद बड़ी कठिन साबित हो रही है। कानून और व्यवस्था राज्य का विषय होता है। इसलिए उन कारोबारियों को चमकाने के लिए संजय राऊत ने करीम लाला और इंदिराजी की मुलाकात की कहानी सुनाई है। वे बताना चाहते हैं कि आज शिवसेना माफिया के सहारे वही खेल दुहरा सकती है जिसे इंदिराजी ने कभी जहाजों की रानी को डुबाने के लिए इस्तेमाल किया था।काग्रेस के कुछ राजनेता इसे इंदिराजी की तौहीन बता रहे हैं लेकिन सच तो ये है कि माफिया के सहारे सत्ता चलाने का खेल कांग्रेस हमेशा से खेलती रही है। मध्यप्रदेश में भी उसका एक सामंत यही खेल खेल रहा है। बड़े और सफल कारोबारियों को माफिया बताकर वह अपना सिक्का चलाना चाह रहा है। मुंबई में शिवसेना गठबंधन हो या मध्यप्रदेश में कांग्रेस सभी को ये जान लेना चाहिए कि वक्त बदल चुका है। रशिया का साम्यवाद इसी माफिया के सहारे सत्ता चलाने की वजह से सत्ता से बाहर धकेला गया था। देश में भी कारोबार को बढ़ाने वाली सत्ता को पसंद किया जाता है। धंधों की जड़ों में मठा डालकर उन पर कब्जा जमाने की हवस की उम्र बहुत छोटी होती है। ये तो गनीमत है कि भाजपा के बौड़म राजनेता मोदी सरकार की चाल से कदमताल नहीं कर पा रहे हैं। वे आज भी कांग्रेस की पिछलग्गू राजनीति से मुक्त नहीं हो पाए हैं।जरूरत किसी एक सशक्त नेता की है जो कारोबारियों को एकसूत्र में बांधकर मजबूती और संरक्षण दे सके। जिस दिन ये हो गया तो माफिया के सहारे सत्ता चलाने वाली राजनीति की विदाई सुनिश्चित हो जाएगी।

  • मकर संक्रांति अब साठ सालों तक 15 जनवरी को ही मनेगी

    मकर संक्रांति अब साठ सालों तक 15 जनवरी को ही मनेगी

    भोपाल,14 जनवरी(प्रेस सूचना केन्द्र)।आम चर्चा में कहा जाता है कि मकर संक्रांति ही ऐसा पर्व है जो हर साल चौदह जनवरी को आता है। लेकिन अब ये पर्व 15 जनवरी को पड़ रहा है। इसे देखते हुए लोग असमंजस में हैं कि संक्रांति अब 15 जनवरी को क्यों हो रही है?

    खगोल शास्त्र की गणनाओं को देखें तो 2008 से 2080 तक मकर संक्राति 15 जनवरी को ही होगी। विगत 72 वर्षों से (1935 से) प्रति वर्ष मकर संक्रांति 14 जनवरी को ही पड़ती रही है।इसीलिए लोगों के बीच तारीख को लेकर भ्रम की स्थिति बनना स्वाभाविक है।जबकि 2081 से आगे 72 वर्षों तक अर्थात 2153 तक यह 16 जनवरी को रहेगी।

    ज्ञातव्य रहे, कि सूर्य के धनु राशि से मकर राशि में प्रवेश (संक्रमण) का दिन मकर संक्रांति के रूप में जाना जाता है। इस दिवस से, मिथुन राशि तक में सूर्य के बने रहने पर सूर्य उत्तरायण का तथा कर्क से धनु राशि तक में सूर्य के बने रहने पर इसे दक्षिणायन का माना जाता है।

    सूर्य का धनु से मकर राशि में संक्रमण प्रति वर्ष लगभग 20 मिनिट विलम्ब से होता है। स्थूल गणना के आधार पर तीन वर्षों में यह अंतर एक घंटे का तथा 72 वर्षो में पूरे 24 घंटे का हो जाता है।

    यही कारण है, कि अंग्रेजी तारीखों के मान से, मकर-संक्रांति का पर्व, 72 वषों के अंतराल के बाद एक तारीख आगे बढ़ता रहता है।

  • आरक्षित वर्गों का बैकलाग 20 जून तक भरें-भुवनेश पटेल

    आरक्षित वर्गों का बैकलाग 20 जून तक भरें-भुवनेश पटेल

    भोपाल,11 जनवरी(प्रेस सूचना केन्द्र)। मप्र पिछड़ा वर्ग, अनुसूचित जाति, जनजाति एवं अल्पसंख्यक कर्मचारी संघ- अपाक्स के प्रांताध्यक्ष भुवनेश कुमार पटेल का कहना है कि पिछले पंद्रह सालों से आरक्षित वर्गों का बैकलाग भरने की प्रक्रिया बहुत धीमी चल रही है,पात्रताधारी लोग निर्धारित आयुसीमा पार करते जा रहे हैं इसलिए सरकार को वंचित वर्ग को लाभ दिलाने के लिए बैकलाग के खाली पदों की सौ फीसदी भरपाई 20 जून तक पूरी कर लेनी चाहिए। आज राजधानी में आयोजित अपाक्स की बैठक में उन्होंने सरकार से अनुरोध किया है कि इस अवधि में ये कार्य बखूबी निटपाया जा सकता है और इसकी तिथि को आगे बढ़ाने की नौबत भी नहीं आएगी।

    अपाक्स के पदाधिकारियों के बीच विमर्श के बाद उन्होंने कहा कि शासन की भर्ती प्रक्रिया की चयन समितियों में अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग सभी के प्रतिनिधियों को अलग अलग नामित किया जाए। अपाक्स परिवार ने इन सदस्यों को चिन्हित भी कर लिया है जिससे सरकार को फैसला लेने में आसानी होगी।

    श्री पटेल ने कहा कि शासन ने भर्ती प्रक्रिया में 70 फीसदी स्थान प्रदेश के मूल निवासियों के लिए आरक्षित किए हैं इसलिए निजी क्षेत्र में भी इस प्रक्रिया का पालन सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने कहा कि आरक्षित संवर्ग के अधिकारियों कर्मचारियों से जुड़े शिकायत के प्रकरणों में सहानुभूति पूर्वक विचार किया जाए और उन्हें शासन की मंशानुसार संरक्षण प्रदान किया जाए।

    राज्य प्रशासनिक सेवा से आईएएस सेवा में पदोन्नति के लिए जो 33.3 प्रतिशत पद आरक्षित हैं उनमें से पंद्रह प्रतिशत पद गैर राज्य प्रशासनिक सेवा में आरक्षित हैं। इन पदों की पूर्ति भी भाजपा शासन ने पिछले पंद्रह सालों के दौरान नहीं की है। इन पदों पर भी पदोन्नति की प्रक्रिया अभी शेष है जिसे तत्काल पूरा किया जाना चाहिए। बैठक में लंबित डीए की पांच प्रतिशत राशि का भुगतान शीघ्र किए जाने की मांग भी की गई।

    बैठक में विभिन्न कर्मचारी संगठनों के प्रतिनिधि गण सर्व श्री वीरेन्द्र खोंगल, जितेन्द्र सिंह, ओ.पी. कटियार, रामविश्वास कुशवाह, राजकुमार चंदेल, सीएस यादव, प्रकाश मालवीय,अनिल वाजपेयी समेत प्रदेश के सभी पदाधिकारियों और प्रतिनिधियों ने भाग लिया।

  • गेहूं के भंडार भरे,केन्द्र उठाने तैयार नहीं बोले प्रद्युम्न सिंह

    गेहूं के भंडार भरे,केन्द्र उठाने तैयार नहीं बोले प्रद्युम्न सिंह

    भोपाल,08 जनवरी(प्रेस सूचना केन्द्र)। मध्यप्रदेश के खाद्य मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर का कहना है कि राज्य ने किसानों का गेहूं खरीदकर किसानों को राहत दी है लेकिन केन्द्र अब वह गेहूं नहीं उठा रहा है। इसके चलते राज्य को केन्द्र से भुगतान भी नहीं हो पा रहा है। केन्द्र सरकार ऐसा करके किसानों के हितों पर चोट पहुंचा रही है।

    साल भर की विभागीय उपलब्धियों पर चर्चा करते हुए श्री तोमर ने कहा कि कमलनाथ सरकार ने किसानों से किया गया कर्ज माफी का वायदा पूरा किया है। किसानों को बोनस देकर भी राज्य सरकार ने किसानों के प्रति अपनी प्रतिबद्धता पूरी की है। इसके बावजूद केन्द्र के असहयोग के चलते वह किसानों को अधिक लाभ नहीं दे पा रही है।

    केन्द्र से ठीक रेपो न होने की वजह से किसानों को होने वाली असुविधा के लिए क्या राज्य सरकार अपनी अयोग्यता को स्वीकार करती है पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि राज्य की ओर से लगातार केन्द्र सरकार से वार्ता की जाती रही है। लगभग तीन चरणों की बातचीत हो चुकी है लेकिन अभी तक केन्द्र ने न तो गेहूं उठाया है और न ही इसके एवज में राशि का भुगतान किया है।उन्होंने कहा कि केन्द्र की ओर से किसानों को दिए जाने वाले बोनस का भी भुगतान नहीं किया जा रहा है।

    खाद्य मंत्री से जब पूछा गया कांग्रेस पार्टी ने किसानों से किए गए वायदे केन्द्र से पूछकर तो नहीं किए थे इसके बावजूद अपनी असफलताओं का ठीकरा वे केन्द्र सरकार पर क्यों फोड़ रहे हैं ये पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि सरकार अपना काम बखूबी कर रही है।

    मंहगाई नियंत्रित कर पाने में राज्य सरकार की असफलताओं के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि सरकार माफिया के विरुद्ध कार्रवाई कर रही है। जो लोग जनता को ठगने का काम कर रहे थे और पिछले पंद्रह सालों में वे फलते फूलते रहे अब सरकार उन पर अंकुश लगाने का काम कर रही है।

  • बीमा योजना से कर्मचारियों की चिकित्सा प्रतिपूर्ति बंद

    बीमा योजना से कर्मचारियों की चिकित्सा प्रतिपूर्ति बंद


    मंत्रि-परिषद के निर्णय 

    भोपाल,4 जनवरी(प्रेस सूचना केन्द्र)। कमल नाथ की अध्यक्षता में आज मंत्रालय में हुई मंत्रि-परिषद की बैठक में मुख्यमंत्री कर्मचारी स्वास्थ्य बीमा योजना को लागू करने का निर्णय लिया गया। योजना से लगभग 12 लाख 55 हजार कर्मचारी/अधिकारी लाभांवित होंगे।बीमा योजना लागू होने से कर्मचारियों को दी जाने वाली चिकित्सा प्रतिपूर्ति की व्यवस्था बंद कर दी जाएगी।

    इस योजना का लाभ प्रदेश के सभी नियमित शासकीय कर्मचारी, सभी संविदा कर्मचारी, शिक्षक संवर्ग, सेवानिवृत्त कर्मचारी, नगर सैनिक, आकस्मिक निधि से वेतन पाने वाले पूर्ण कालिक कर्मचारियों और राज्य की स्वशासी संस्थाओं में कार्यरत कर्मचारियों को मिलेगा। इसके अलावा निगम/मण्डलों में कार्यरत कर्मचारियों एवं अखिल भारतीय सेवा के अधिकारियों के लिए योजना वैकल्पिक होगी।

    मुख्यमंत्री कर्मचारी स्वास्थ्य बीमा योजना में बाहय रोगी ओपीडी के रूप में प्रतिवर्ष 10 हजार रूपये तक का नि:शुल्क उपचार अथवा नि:शुल्क दवाओं का वितरण किया जाएगा। सामान्य उपचारों के लिए प्रत्येक परिवार को प्रतिवर्ष 5 लाख रूपये और गंभीर उपचारों के लिए 10 लाख रूपये तक की नि:शुल्क चिकित्सा सुविधा प्राप्त होगी। दस लाख से अधिक के उपचार के लिए राज्य स्तरीय मेडिकल बोर्ड द्वारा विशेष अनुमति दी जा सकेगी।

    मंत्रि-परिषद ने महिला-बाल विकास विभाग द्वारा शत-प्रतिशत सहायित भारत सरकार की योजना वन स्टाप सेन्टर को प्रदेश के 51 जिलों में संचालित एवं निरंतर रखने की मंजूरी दी। इसके लिये 560 नये पद सृजित करने की भी मंजूरी दी गयी।

    मंत्रियों का स्वेच्छानुदान अब एक करोड़

    मंत्रि-परिषद ने मंत्रियों की वार्षिक स्वेच्छानुदान की राशि 50 लाख से बढ़ाकर एक करोड़ रूपये करने की मंजूरी दी। इसी प्रकार, राज्य मंत्रियों की वार्षिक स्वेच्छानुदान राशि को 35 लाख से बढ़ाकर 60 लाख किया गया है।

  • कर्ज लादकर माफी का वादा निभा रही कमलनाथ सरकार

    कर्ज लादकर माफी का वादा निभा रही कमलनाथ सरकार

    भोपाल,3 जनवरी(प्रेस सूचना केन्द्र)। कमल नाथ की अगुआई में बनी राज्य सरकार पर प्रदेश की जनता से किए गए वादों को पूरा करने की जिम्मेदारी पहले दिन से ही रही है। किसानों, आदिवासियों, कर्मचारियों, युवाओं सहित सभी लोग प्रदेश में इस बदलाव को आशा और अपेक्षा की नजर से देख रहे थे। सरकार ने आते ही मिली वित्तीय रिक्तता, आर्थिक मंदी जैसी विषम परिस्थिति और वित्तीय मामलों में केन्द्र सरकार के रवैये से जन अपेक्षाओं पर पूरा उतरना नई सरकार के लिए चुनौतीपूर्ण रहा। नई सरकार के सामने राज्य के सामाजिक, आर्थिक और भौतिक ढांचे को अधिक मजबूत बनाने का मुख्य लक्ष्य था। यह सब सशक्त आर्थिक आधार और बेहतर वित्तीय प्रबंधन के बिना संभव नहीं था। राज्य सरकार ने इस परिस्थिति से निपटने के लिये बेहतर वित्तीय प्रबंधन को सर्वोच्च प्राथमिकता दी। इससे शासकीय विभागों को अनिवार्य व्ययों के लिए निरंतर राशि उपलब्ध कराना संभव हुआ।

    प्रदेश की उन्नति और सबके हितों की रक्षा सुनिश्चित करने के क्रम में सर्वोच्च प्राथमिकता हमारी अर्थ-व्यवस्था के प्रमुख आधार किसान को दी गई। जय किसान फसल ऋण माफी योजना से संबंधित विभागों से समन्वय कर पात्र किसानों के दो लाख रूपये तक के कालातीत ऋण तथा 50 हजार रूपये तक के चालू ऋण माफ किए गए। योजना में बैंकों द्वारा एक मुश्त समझौता योजना में 1950 करोड़ रूपये का ऋण माफ किया गया। कुल मिलाकर 20 लाख से अधिक किसानों के 7 हजार करोड़ रूपये से अधिक के ऋण माफ किए गए।

    प्रदेश की तेज प्रगति के लिये सुचारू और सुगम परिवहन व्यवस्था अत्यंत आवश्यक है। राज्य सरकार ने परिवहन की आवश्यक अधोसंरचना सुनिश्चित करने के उददे्श्य से सड़कों के निर्माण के लिए एशियन डेव्हलपमेंट बैंक से 3 हजार 400 करोड़ रूपये (490 मिलियन यूएस डालर) प्राप्त करने का निर्णय लिया। इसी प्रकार, इन्दौर मेट्रो रेल परियोजना के लिए न्यू डेव्हलपमेंट बैंक से 1600 करोड़ रूपये (225 मिलियन यूएस डालर) प्राप्त करने का निर्णय लिया।

    राज्य सरकार की योजनाओं और कार्यक्रमों के क्रियान्वयन में हमकदम और आपदा प्रबंधन के आधार, शासकीय सेवकों की बेहतरी के प्रयास तुरंत शुरू किये गये। शासकीय सेवकों को सातवें वेतनमान के ऐरियर्स की द्वितीय किस्त का भुगतान किया गया। साथ ही सार्वजनिक निगम/मण्डलों के कर्मचारियों को सातवें वेतनमान के एरियर्स के लिए कार्यवाही की गई। शिक्षक संवर्ग को कोषालयीन व्यवस्था से जोड़ा गया। शासकीय सेवकों की पेंशन स्वीकृति और भुगतान प्रक्रिया को सरल किया। वेतन विसंगतियों और सेवा शर्तों पर विचार के लिए कर्मचारी आयोग गठित किया गया।

    राज्य सरकार द्वारा प्रदेश के आदिवासी समुदाय के सर्वागींण विकास के लिए भी अभिनव प्रयास किये जा रहे हैं। वित्त विभाग द्वारा प्रदेश के 89 आदिवासी बहुल विकासखण्डों में विशेष अभियान चलाते हुए 7 हजार 331 व्यक्तियों के जन-धन खाते में ओवर ड्रॉफ्ट की सीमा स्वीकृत कर 35 हजार 709 नये खाते खोले गये।

    राज्य सरकार की सकारात्मक सोच के साथ समाज के सभी वर्गों को साथ लेकर चलने की कोशिश कुशल आर्थिक प्रबंधन के आधार पर ही सफल हो रही है। वित्त विभाग द्वारा जनवरी से नवम्बर 2019 तक पूंजीगत मद में 30 हजार 709 करोड़ रूपये व्यय किये गये। यह इसी अवधि के पिछले वर्ष के व्यय से 1304 करोड़ रूपये अधिक है। पूंजीगत व्यय से संबंधित प्रमुख विभागों को अप्रैल 2018 से नवम्बर 2018 की अवधि की तुलना में अप्रैल 2019 से नवम्बर 2019 की अवधि में अधिक राशि उपलब्ध करायी गई। गृह विभाग को 247 करोड़ 57 लाख की तुलना में 363 करोड़ 58 लाख, वन विभाग को 253 करोड़ 38 लाख की तुलना में 342 करोड़ 12 लाख, शहरी विकास एवं पर्यावरण विभाग को 483 करोड़ 23 लाख की तुलना में 775 करोड़ 91 लाख, लोक निर्माण विभाग को 5454 करोड़ 78 लाख की तुलना में 5562 करोड़ 04 लाख, नर्मदा घाटी/जल संसाधन विभाग को 5709 करोड़ 51 लाख की तुलना में 6280 करोड़ 60 लाख, लोक स्वाथ्य यांत्रिकी विभाग को 1179 करोड़ 49 लाख की तुलना में 1635 करोड़ एक लाख तथा ग्रामीण विकास विभाग को 1743 करोड़ 63 लाख की तुलना में 2343 करोड़ 10 लाख रूपये की धनराशि उपलब्ध करायी गई। प्रदेश में बैंकों द्वारा ऋण में वृद्धि की दर भी राष्ट्रीय स्तर से अधिक रही है।

    सबके हितों की रक्षा और प्रदेश की उन्नति सुनिश्चित करने के अपने संकल्प की पूर्ति के लिये आवश्यक वित्तीय आधार उपलब्ध कराने के लिए राज्य सरकार लगातार सक्रिय है।

  • खनिज विभाग ने राजस्व वसूली का नया रिकार्ड बनाया

    खनिज विभाग ने राजस्व वसूली का नया रिकार्ड बनाया

    खनिज मंत्री प्रदीप जायसवाल बोले ठेकेदारों को सुरक्षा मुहैया कराएंगे

    भोपाल,27 दिसंबर(प्रेस सूचना केन्द्र)।खनिज मंत्री प्रदीप जायसवाल का कहना है कि कमलनाथ सरकार ने खनिज विभाग से टैक्स चोरी के सभी रास्ते बंद कर दिए हैं जिससे प्रदेश ने राजस्व वसूली की नई ऊंचाईंयां छू लीं हैं। राजस्व आय का ये आंकड़ा और बढ़ेगा। उन्होंने राजस्व देने वाले ठेकेदारों को आश्वासन दिया कि सरकार उन्हें खनिज माफिया से पर्याप्त सुरक्षा मुहैया कराएगी।

    कमलनाथ सरकार की साल भर की उपलब्धियों का लेखा जोखा प्रस्तुत करते हुए श्री जायसवाल ने बताया कि वित्त विभाग ने वर्ष 2018-19 के लिए 4528 करोड़ रुपयों का लक्ष्य दिया था जिसे पार करते हुए विभाग ने 4623.04 करोड़ रुपए जुटाए हैं। इसी तरह मौजूदा वित्तीय वर्ष 2019-20 में अप्रैल 2019 से नवंबर 2019 तक 2226.85 करोड़ रुपए का राजस्व इकट्ठा किया जा चुका है। पिछले साल की इसी अवधि की तुलना में ये राशि 34.35 करोड़ रुपए अधिक है।

    श्री जायसवाल ने बताया कि प्रदेश में खनिजों की खोज का काम निरंतर जारी है और इसके लिए राष्ट्रीय खनिज अन्वेषण न्यास ने भी पर्याप्त संसाधन उपलब्ध कराए हैं। पिछले साल राज्य को 54.81 करोड़ रुपए प्राप्त हुए थे इस साल नवंबर महीने तक 34.12 करोड़ रुपए मिल चुके हैं।

    उन्होंने कहा कि खनिज और रायल्टी चोरी को सरकार सख्ती से रोकना चाहती है। इस वित्तीय वर्ष में ही अब तक खनिजों के अवैध उत्खनन के 1330 प्रकरण,अवैध परिवहन के 8294 प्रकरण, अवैध भंडारण के 531प्रकरणों से 527.511 लाख रुपए और अवैध परिवहन से 2412.20 लाख रुपए की आय हुई है। खनिजों के अवैध भंडारण से भी सरकार ने 136.55 लाख रुपए का अर्थदंड वसूला है।

    खनिज मंत्री ने बताया कि छतरपुर की बक्सवाहा तहसील के बंदर डायमंड ब्लाक को सरकार ने लगभग अस्सी हजार करोड़ रुपयों में नीलाम कर दिया है। एस्सेल माईनिंग एंड इंडस्ट्रीज ने लगभग साढ़े तीस प्रतिशत अधिक बोली लगाकर इस खदान का आधिपत्य हासिल किया है। कंपनी को अभी पर्यावरण आदि की मंजूरियों के लिए दो साल का वक्त दिया गया है। सरकार ने कंपनी को पचास सालों के लिए लीज पर दिया है।

    रेत खदानों से हर साल लगभग बारह सौ करोड़ रुपए की आय को उल्लेखनीय कार्य बताते हुए श्री जायसवाल ने कहा कि पिछली सरकार रेत से मात्र 240 करोड़ तक आय करती थी बाकी खनिज चोरी हो जाता था। इस सरकार ने 36 जिलों की रेत खदानें नीलाम की हैं ठेकेदारों को अब खनिज बेचना अनिवार्य कर दिया गया है। इससे राज्य को भरपूर आय होगी.

    पत्रकार वार्ता में खनिज मंत्री के साथ प्रमुख सचिव नीरज मंडलोई, सचिव नरेन्द्र सिंह परमार, विनीत आस्टिन संचालक, भौमिकी तथा खनिक कर्म समेत विभाग के कई अन्य अधिकारी भी उपस्थित थे।

  • नागरिकता कानून विरोधियों के साथ खड़ी होगी कमलनाथ सरकार

    नागरिकता कानून विरोधियों के साथ खड़ी होगी कमलनाथ सरकार

    भोपाल,21 दिसंबर(प्रेस सूचना केन्द्र)। नागरिकता अधिनियम 1955 में हुए संशोधन के बाद लागू नए नागरिकता कानून का विरोध करने के लिए अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी ने पूरे देश में कानून का विरोध करने का फैसला लिया है। मध्यप्रदेश में भी कमलनाथ सरकार 25 तारीख को इस विरोध प्रदर्शन को अपना समर्थन देगी। संवैधानिक तौर पर चुनी हुई राज्य सरकार ने केन्द्रीय कानून का विरोध करने के लिए जो रणनीति अपनाई है उससे नए नागरिकता कानून को लेकर उठ रहीं भ्रांतियों को दूर करने में भी मदद मिलेगी।

    कांग्रेस के सूत्रों का कहना है कि वह कानून को लेकर जनमत संग्रह (Referendum) भी करेंगे. दिल्ली में केंद्र सरकार के नए कानून के खिलाफ (Protest against CAA) पार्टी के हल्लाबोल के बाद ऑल इंडिया कांग्रेस कमेटी ने कांग्रेस-शासित सभी राज्यों में प्रभावी तरीके से प्रदर्शन करने का निर्देश दिया है।

    CAA को लेकर कांग्रेस ने दिल्ली में केंद्र सरकार के खिलाफ हल्ला बोला था. अब दिल्ली के बाद कांग्रेस शासित राज्यों में नागरिकता संशोधन कानून के विरोध में प्रदर्शन की तैयारी है. एआईसीसी ने सभी राज्यों में इस कानून के विरोध में प्रदर्शन करने के लिए निर्देश दिए हैं. ऐसे में कांग्रेस शासित मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान जैसे हिंदी भाषी राज्यों में कांग्रेस सरकार का पूरा फोकस इस प्रदर्शन को प्रभावी बनाने में है. दिल्ली के बाद भोपाल में भी कमलनाथ सरकार इस कानून के विरोध के बहाने शक्ति प्रदर्शन करेगी.

    प्रमुख विपक्षी दल भारतीय जनता पार्टी ने सरकार के इस फैसले से असहमति जताई है। पार्टी का कहना है कि नागरिकता कानून देश के किसी भी नागरिक के खिलाफ नहीं है, इसके बावजूद विरोध को स्वर देकर कांग्रेस सरकार अपने संवैधानिक दायित्वों से मुंह मोड़ रही है।

    प्रदेश में जब अधिकतर लोग नए नागरिकता कानून से सहमति जताते हुए खुलकर बात रख रहे हैं तब कमलनाथ सरकार कानून के विरोध में खड़े होकर क्षुद्र राजनीतिक प्रतिद्वंदिता का उद्घोष करने जा रही है।

    नए नागरिकता कानून को समझना जरूरी

    कई लोग इस वजह से विरोध कर रहे हैं कि उन्हें लगता है इस कानून से उनकी नागरिकता खतरे में पड़ जाएगी. कुछ को लगता है कि असम में जिस तरह एनआरसी यानी राष्ट्रीय नागरिकता रजिस्टर (एनआरसी) के चलते लाखों लोगों की नागरिकता खतरे में पड़ गई है, वैसा ही उनके साथ भी होगा, लेकिन सचाई बिल्कुल अलग है. नागरिकता संशोधन कानून और एनआरसी अलग-अलग चीजें हैं.

    नागरिकता कानून 2019 भारत के तीन पड़ोसी देशों से धार्मिक उत्पीड़न ही वजह से भारत आने वाले अल्पसंख्यकों को सिटिजनशिप देने के लिए है. पाकिस्तान, अफगानिस्तान और बांग्लादेश जैसे भारत के पड़ोसी देशों में सिख, जैन, हिंदू, बौद्ध, इसाई और पारसी अल्पसंख्यक हैं. ये तीनों देश मुस्लिम राष्ट्र हैं, इस वजह से उनमें धार्मिक अल्पसंख्यक को उत्पीड़न का शिकार होना पड़ता है.नागरिकता संशोधन अधिनियम में प्रावधान है कि अगर इन तीन देशों के छह धर्म के लोग भारत में 31 दिसंबर 2014 तक आ चुके हैं तो उन्हें घुसपैठिया नहीं माना जाएगा. उन्हें इस कानून के तहत भारत की नागरिकता दी जाएगी.

    अगर इसे सीधे शब्दों में समझें तो एनआरसी जहां देश से अवैध घुसपैठियों को बाहर निकालने की कवायद है, वहीं नागरिकता कानून 2019 देश में आ चुके छह धर्म के लोगों को बसाने की कोशिश है.जिन लोगों के नाम एनआरसी में शामिल नहीं हैं, वह अवैध नागरिक कहलाए जाएंगे. एनआरसी के हिसाब से 25 मार्च 1971 से पहले असम में रह रहे लोगों को भारतीय नागरिक माना गया है.

    एनआरसी और सीएए में ये हैं मुख्य अंतर नागरिकता संशोधन कानून 2019 जहां धर्म पर आधारित है, वहीं राष्ट्रीय नागरिकता रजिस्टर (एनआरसी) का धर्म से कोई लेना-देना नहीं है. सीएए के तहत मुस्लिम बहुल आबादी वाले देश पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान में धार्मिक उत्पीड़न के कारण भागकर भारत आए हिंदू, सिख, ईसाई, जैन, बौद्ध और पारसी धर्म के लोगों को भारत की नागरिकता प्रदान करने का प्रावधान है. सीएए में मुस्लिमों को शामिल नहीं किया गया है. एनआरसी में अवैध अप्रवासियों की पहचान करने की बात कही गई है, चाहे वे किसी भी जाति, वर्ग या धर्म के हों. ऐसे लोगों की पहचान कर उन्हें देश से बाहर भेजने का प्रावधान है. एनआरसी फिलहाल सिर्फ असम में लागू है जबकि सीएए देशभर में लागू होगा. सीएए भारतीय मुसलमानों को किसी तरह का नुकसान नहीं पहुंचा सकता. सीएए को लेकर एक गलत धारणा बन गई है कि इस वजह से भारतीय मुसलमान अपने अधिकारों से वंचित हो जाएंगे. सच यह है कि अगर कोई ऐसा करना चाहे तो भी इस कानून के तहत यह संभव नहीं है. पूर्वोत्तर राज्यों में सीएए का विरोध इसलिए हो रहा है कि क्योंकि लोगों को आशंका है इससे उनके इलाके में अप्रवासियों की तादाद बढ़ जाएगी जिससे उनकी संस्कृति और भाषाई विशिष्टता को खतरा हो सकता है. केरल, पश्चिम बंगाल और दिल्ली में सीएए का विरोध इस कानून में मुसलमानों को शामिल नहीं किए जाने पर हो रहा है, उनका तर्क है कि यह संविधान के विरुद्ध है.

  • खनिज आय में पैंतीस करोड़ की बढ़त

    खनिज आय में पैंतीस करोड़ की बढ़त

    भोपाल,18 दिसंबर(प्रेस सूचना केन्द्र)। प्रदेश में इस वर्ष अप्रैल से नवम्बर तक मात्र 8 महीने में पिछले वर्ष की तुलना में 34 करोड़ 35 लाख रुपये से अधिक खनिज राजस्व संग्रहित किया गया। पिछले साल इस अवधि में 2192 करोड़ 50 लाख रुपये खनिज राजस्व संग्रहित की गयी थी। इस वर्ष 2226 करोड़ 85 लाख रुपये खनिज राजस्व अर्जित की गई। इसी के साथ, जिला खनिज प्रतिष्ठान नियम-2016 के अंतर्गत इस अवधि में 495 करोड़ रुपये से अधिक खनिज राजस्व संग्रहित किया गया। इस दौरान राष्ट्रीय खनिज अन्वेषण न्यास के अंतर्गत 34 करोड़ 12 लाख रुपये के राजस्व की प्राप्ति हुई।

    प्रदेश में पिछले 8 माह में अवैध खनिज उत्खनन के 1330, अवैध खनिज परिवहन के 8294 और अवैध खनिज भण्डारण के 531 प्रकरण अर्थात कुल 10,155 प्रकरण पंजीबद्ध कर कार्यवाही की गई। अवैध उत्खनन के प्रकरणों में 5 करोड़ 27 लाख, अवैध परिवहन के प्रकरणों में 24 करोड़ 12 लाख और अवैध भण्डारण के प्रकरणों में एक करोड़ 36 लाख रुपये अर्थात कुल 3076.26 लाख रुपये अर्थदण्ड वसूली की गई।

  • डिफाल्टर नीतियों वाला मुख्यमंत्री

    डिफाल्टर नीतियों वाला मुख्यमंत्री

    सत्ता संभालने के एक साल पूरा होने पर मुख्यमंत्री कमलनाथ ने अपनी डींगें हांकने के लिए विज्ञापनों का रेला पेल दिया है। जिस शिवराज सिंह सरकार को विज्ञापनों की सरकार बताकर कमलनाथ ने मीडिया पर लांछन लगाया आज उसी मीडिया की चौखट पर उनकी सरकार औंधे मुंह गिरी पड़ी है। करोड़ों के विज्ञापन कार्पोरेट मीडिया की झोली में डालकर वे प्रदेश की जनता के टूटते भरोसे को टिकाए रखना चाहते हैं। कर्ज माफी और इंदिरा ज्योति योजना जैसी वाहवाही लूटने वाले उनके ध्वजवाहक अभियान ही जनता को उनके वादे और हकीकत की पहचान कराने के लिए काफी हैं। तरह तरह की नई शर्तें कर्जमाफी को छलावा बता रहीं हैं तो बिजली कंपनियां अपना घाटा पाटने के लिए जिस तरह बिजली बिलों की रीडिंग लंबित करके उपभोक्ताओं से भारी भरकम बिल वसूल रही है उससे सरकार की कथनी और करनी की पोल खुल जाती है। बात बात में भाजपा सरकार पर खजाना खाली छोड़कर जाने का आरोप मढ़ने वाले मुख्यमंत्री कमलनाथ और उनके मंत्रिमंडलीय सहयोगी ये समझाने में असफल रहे हैं कि राज्य की मासिक आय क्यों घटती जा रही है। यदि उनका वित्तीय प्रबंधन बहुत अच्छा है तो साल भर में उन्हें उन्नीस हजार करोड़ का कर्ज क्यों लेना पड़ा है। छिंदवाड़ा माडल का शिगूफा छोड़कर कमलनाथ ने खुद को उद्योगपति बताने की कारीगरी तो कर ली लेकिन वे अब तक एक डिफाल्टर मुख्यमंत्री ही साबित हुए हैं। प्रदेश के बरसों पुराने बेशकीमती बांस जंगलों को मिट्टी मोल बेचने के लिए उन्होंने आईटीसी को कारखाना लगाने की छूट तो दे दी लेकिन इससे प्रदेश की कितनी संपदा कौड़ियों के मोल बेची जाएगी ये बताने को वे तैयार नहीं हैं। छतरपुर के बक्सवाहा की हीरा खदान सरकार ने अस्सी हजार करोड़ में बिड़ला को बेचकर ये बताने का प्रयास किया है कि वे प्रदेश के लिए आर्थिक संसाधन जुटाने में बहुत गंभीर हैं। जबकि हकीकत ये है कि भारत सरकार अभी अपने बहुमूल्य खनिजों को बेचने की नौबत नहीं आने देना चाहती। खनिज मंत्री प्रदीप जायसवाल कहते हैं कि केन्द्र से मंजूरियां लेने की जवाबदारी ठेका लेने वाली कंपनी की है। उसे हमने दो साल का वक्त दिया है। हालांकि केन्द्र के रुख को देखते हुए ये अनुमतियां मिल पाएंगी फिलहाल तो संभव नहीं दिखता। कमलनाथ सरकार ने तबादलों और पोस्टिंग का जो खुला खेल किया उसकी वजह से नौकरशाही पूरी तरह मनमर्जी की मालिक हो गई है। जिस अफसर ने करोड़ों रुपये देकर पोस्टिंग हड़पी है वह राजस्व उगाही आखिर कहां से करे। उसकी सहूलियत के लिए ही सरकार ने पहले शुद्ध के लिए युद्ध और फिर माफिया पर हमले जैसे लोकप्रियता बटोरने वाले अभियान चला दिए। शुद्ध के लिए युद्ध के नाम पर सरकार ने सात हजार से भी अधिक व्यापारियों के नमूने लिए। अस्सी से अधिक व्यापारियों को रासुका में जेल भेज दिया जबकि उनमें से अधिकतर की खाद्य सामग्री शुद्ध पाई गई है। इसके बाद जेल भेजे गए व्यापारियों को भी सरकार की कृपा के आधार पर ही छोड़ा जा रहा है। जो लोग सरकार की कृपा नहीं खरीद सके हैं वे बेगुनाह होते हुए भी जेलों में बंद हैं। उनके कारोबार बंद हैं और उनसे जुड़े हजारों कर्मचारी बेरोजगार हो गए हैं। ये बात सही है कि कांग्रेस ने लगभग हवा हवाई वादे करके सत्ता की चाभी छीनी है। किसानों को गुमराह किया गया आदिवासियों को बहकाया गया, आम नागरिकों को शिवराज सरकार की कमजोरियां दिखाकर बरगलाया गया और सत्ता तो हासिल कर ली लेकिन अब इसे बनाए रखना सरकार के लिए टेढ़ी खीर साबित हो रहा है। ये बात सही है कि शिवराज सिंह सरकार प्रशासनिक तौर पर इतनी असफल सरकार थी कि वह अपने अच्छे कार्यों की पैरवी करने लायक लोगों को भी तैयार नहीं कर सकी। भीड़ भंगार के बीच कर्ज लेकर योजनाओं की टाफिया बांटते शिवराज सिंह चौहान को पता ही नहीं था कि उन्होंने कैसे भाजपा के कर्मठ कार्यकर्ताओं को संगठन से बेदखल कर दिया है। उनकी सरकार लगभग जड़ विहीन थी यही वजह है कि आज जब कमलनाथ सरकार ने माफिया के नाम पर उनके चमचों को जूते की नोंक पर रखना शुरु कर दिया है तब भाजपा के पास सरकार का मुकाबला करने के लिए रक्षा पंक्ति तक नहीं है। पाखंडी अभियानों से शिवराज की भाजपा ये भ्रम फैलाने का प्रयास कर रही है कि वो कमलनाथ सरकार से मुकाबला कर रही है लेकिन उनके साथ रहे भ्रष्ट मंत्रियों और चापलूसों की भीड़ को कमलनाथ बहादुरी के साथ काबू में कर रहे हैं। अधिकतर तो सरकार के माफिया वाले अभियान से ही डरकर अपने घरों तक सिमट गए हैं।दरअसल कमलनाथ जिन कारोबारियों को माफिया का नाम देकर वसूलियां कर रहे हैं वे सरकारी तंत्र के ही संरक्षण में तो फले फूले हैं। असली माफिया तो टैक्स वसूली करने वाले भ्रष्ट अफसरों का तंत्र है। कमलनाथ जी उसी तंत्र से चुनावी चंदा वसूलकर माफिया के विरुद्ध संग्राम का ऐलान कर रहे हैं जो सिर्फ छलावा ही साबित हो रहा है। शिवराज सिंह चौहान सरकार भी योजनाओं के नाम पर कर्ज लेकर जनता को बांट रही थी और कमोबेश यही काम कमलनाथ कर रहे हैं। कमलनाथ सरकार के वित्तमंत्री तरुण भनोट ने तो अपने बजट में भारी भरकम वसूली के टारगेट तय किए थे लेकिन जब मध्यप्रदेश अपने हिस्से का जीएसटी ही नहीं वसूल कर पा रहा हो तो वह किस मुंह से केन्द्र से अपना हिस्सा मांग सकता है। बेशक केन्द्र ने देर सबेर सभी राज्यों को जीएसटी की भरपाई राशि दे दी है लेकिन जब तक कमलनाथ सरकार बेईमान सरकारी तंत्र के भरोसे वसूली के रिकार्ड बनाने का मुगालता पाले बैठी रहेगी तब तक उसे असफलता ही हाथ लगेगी। हंसना और गाल फुलाना एक साथ नहीं हो सकता। आप अफसरों से यदि पार्टी फंड वसूल रहे हों तब आपको ये मुगालता नहीं पालना चाहिए कि वे ये राज्य का खजाना भी अपनी जेब से भरेंगे। कांग्रेस सरकार ने पार्टी फंड वसूलने की जवाबदारी जब अफसरों को ही थमा दी है तो फिर राज्य के संसाधन जुटाने के लिए निश्चित रूप से वे जनता पर अत्याचार करेंगे। यही कार्य श्रीमती इंदिरा गांधी के लगाए आपातकाल के दौरान हुआ था। तब जमाखोरों, मिलावटियों और कथित शोषकों के विरुद्ध मुहिम चलाई गई थी। नतीजा ये हुआ कि आपातकाल की आड़ में सरकारी भ्रष्ट तंत्र ने अत्याचारों की बाढ़ ला दी। नतीजतन श्रीमती गांधी चुनाव हारीं और देश को आपातकाल जैसे सिरफिरे फैसले से निजात मिल सकी थी। आपातकाल का कलंक आज भी कांग्रेस के सिर पर लगा है इसके बावजूद कमलनाथ आपातकाल 2 लेकर मैदान में कूद पड़े हैं। अब तक जो कहानियां उजागर हो रहीं हैं उनसे सरकार के झूठ की पोल रोज खुल रही है। निश्चित रूप से ये कहानियां मीडिया की सुर्खियां नहीं बन पा रही हैं लेकिन आखिर कब तक सरकार मीडिया का मुंह बंद कर सकती है।रोते बच्चे के मुंह को हाथ से दबा दिया जाए तो उसके रोने की आवाज जरूर बंद हो जाती है लेकिन उसका रोना जारी रहता है और जैसे ही हाथ हटाया जाता है उसके रोने की आवाज बुक्का फाड़कर बाहर आ जाती है। सरकार विज्ञापनों के मायाजाल के सहारे आखिर कब तक जनता की घुटन को दबाकर रख सकती है। राजनैतिक वसूलियों से केन्द्र की नीतियों के विरुद्ध झूठे आंदोलन खड़े करने से जनता का पेट भरने वाला नहीं है। जनता के बीच आक्रोश पनप रहा है। अभी यूरिया की कालाबाजारी ने जिस तरह किसानों को आक्रोशित कर दिया है उसी तरह सरकार की जनविरोधी नीतियों की असलियत भी जल्दी ही सामने आ जाएगी। अभी भी वक्त है कांग्रेस के सलाहकार अपनी सरकार का मार्गदर्शन करें तो गलती सुधारी जा सकती है।

  • प्रदेश को समृद्ध बनाएगा रोडमैपःडॉ.मनमोहन सिंह

    प्रदेश को समृद्ध बनाएगा रोडमैपःडॉ.मनमोहन सिंह

    भोपाल, 17 दिसंबर(प्रेस सूचना केन्द्र)।भारत के पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह ने आज यहाँ मध्यप्रदेश सरकार द्वारा तैयार ‘विजन टू डिलीवरी रोड मैप 2020-25’ दस्तावेज का विमोचन करते हुए इसे मध्यप्रदेश की जनता की आकांक्षाओं और प्राथमिकताओं का दस्तावेज बताया।  उन्होंने  प्रदेश की त्वरित आर्थिक समृद्धि और विकास के लक्ष्यों को पूरा करने में विचारों की स्पष्टता और प्रतिबद्धता के लिए मुख्यमंत्री कमल नाथ की प्रशंसा की। डॉ. सिंह ने लोगों के आर्थिक विकास और समृद्धि लाने के लिए एक साल के कम समय में उठाए गए कदमों के लिए बधाई दी। मुख्य रूप से उद्योग के साथ मिलकर रोजगार के नये अवसरों का निर्माण करने की सराहना की।

    डॉ. मनमोहन सिंह ने रोडमैप को सूक्ष्म और वृहद  स्तर  पर अर्थ-व्यवस्था  को  आगे बढ़ाकर रोजगार उत्पन्न करने के प्रयासों पर फोकस करने की सराहना की। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य और शिक्षा के क्षेत्र और सतत विकास के लक्ष्यों को हासिल करने के लिए न सिर्फ  सुस्पष्ट दृष्टि-पत्र  बनाया गया है बल्कि इसको  लागू करने के लिए एक रोडमैप भी तैयार किया गया है। इसमें सभी विभागों का सहयोग  है।

    डॉ. सिंह ने कहा कि यह दृष्टि-पत्र आम नागरिकों, किसानों के कल्याण,  सतत विकास और सूक्ष्म स्तर पर अर्थ-व्यवस्था को मजबूत बनाने,  असंगठित क्षेत्र को गति देने,  अधोसंरचना का विकास करने जैसे विषयों पर केंद्रित है। उन्होंने एक साल में सरकार द्वारा उठाए गए कदमों की चर्चा करते हुए किसानों की जय किसान फसल ऋण माफी  योजना और असंगठित क्षेत्र के लिये नया सवेरा योजना, आयुष्मान भारत जैसी योजना का उल्लेख करते हुए  कहा कि इन  प्रयासों  में मुख्यमंत्री श्री कमल नाथ के विचारों और  विकास का संकल्प स्पष्ट दिखता है।

    डॉ. मनमोहन सिंह ने कहा कि दृष्टि-पत्र में 11 क्षेत्रों पर ध्यान केन्द्रित किया गया है। आर्थिक समृद्धि के लिए कृषि प्र-संस्करण उद्योग, अधोसंरचना विकास और सेवा क्षेत्र पर ध्यान देने से भविष्य में ज्यादा से ज्यादा संख्या में रोजगार निर्माण करने में मदद मिलेगी।

    पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. सिंह ने कहा कि स्कूल शिक्षा, उच्च शिक्षा, कौशल विकास और तकनीकी शिक्षा पर ध्यान केन्द्रित करने से गुणवत्तापूर्ण  मानव संसाधन तैयार करने की सरकार की सोच साफ़ दिखती है। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य के क्षेत्र में मेडिकल कॉलेजों की संख्या और सीटें बढ़ाने तथा स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार करने से भविष्य में प्रदेश में स्वास्थ्य पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा। उन्होंने कहा कि मैग्नीफिसेंट मध्यप्रदेश जैसे आयोजन से उद्योग क्षेत्र में घरेलू और विदेशी पूंजी निवेश बढ़ाने में मदद मिलेगी। डू-इट योरसेल्फ गवर्नेंस व्यवस्था को दूसरे चरण में ले जाने से प्रशासन में भी पारदर्शिता बढ़ेगी। पंचायत राज संस्थाओं और स्थानीय संस्थाओं के संसाधनों और क्षमता को मजबूत बनाने पर ध्यान देने से प्रशासन तंत्र मजबूत होगा और  दृष्टि पत्र को समय पर पूरा करने में मदद मिलेगी। डॉ. मनमोहन सिंह ने विजन टू डिलीवरी 2020-25 को सुगठित,  फोकस्ड और यथार्थवादी बताते हुए कहा कि यह लोगों की आकांक्षाओं का दस्तावेज है।

    मुख्यमंत्री श्री कमल नाथ ने पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह का स्वागत एवं आभार व्यक्त करते हुए कहा कि मुझे 10 साल तक डॉ. मनमोहन सिंह के नेतृत्व में केन्द्रीय मंत्री-मंडल में काम करने का सौभाग्य मिला। मुख्यमंत्री ने कहा कि हमने दढ़ इच्छाशक्ति के साथ 365 दिन में वचन पत्र के 365 बिन्दुओं को पूरा किया।

    मुख्य सचिव एस.आर. मोहंती ने सरकार का एक साल पूरा होने पर उठाए गए कल्याणकारी कदमों और निर्णयों का उल्लेख करते हुए लोगों के विकास के लिए तैयार किए गए विजन टू डिलीवरी 2020-25 की विशेषताओं की चर्चा की। अपर मुख्य सचिव योजना मोहम्मद सुलेमान ने आभार व्यक्त किया।

  • संदीप डाकोलिया बने प्रदेश अध्यक्ष

    संदीप डाकोलिया बने प्रदेश अध्यक्ष

    भोपाल,13 दिसंबर(प्रेस सूचना केन्द्र)। अखिल भारतीय जैन पत्रकार महासंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष प्रवीण कुमार खारीवाल की सहमति से राष्ट्रीय महासचिव संजय लोढ़ा ने संदीप डाकोलिया को प्रदेश अध्यक्ष नियुक्त किया है। डाकोलिया विगत वर्षों से मप्र में जैन समाज के पत्रकारों के माध्यम से समाज की एकता को लेकर रचनात्मक आंदोलन चला रहे हैं। समाज को जोड़ने की दिशा में उनकी सक्रियता को देखकर अब उन्हें ही प्रदेश अध्यक्ष पद की जवाबदारी सौंपी गई है।

    श्री डाकोलिया ने सभी पंथों और समाज के सभी वर्गों के साधुओं और गणमान्य नागरिकों से मिलकर सकल जैन समाज को शक्ति के रूप में उभारने का अभियान चलाया और उसमें बड़ी सफलताएं भी अर्जित कीं हैं। डाकोलिया की इस नियुक्ति से आने वाले दिनों में एकता के इस अभियान को और अधिक सफलता मिलेगी। श्री संदीप डाकोलिया की इस नियुक्ति से राजधानी के सभी जैन पत्रकार साथियों के बीच संतोष महसूस किया गया है। बरसों से जैन समाज के पत्रकार अलग अलग जिलों में अपनी विश्वसनीय खबरों से समाज का मार्गदर्शन करते रहे हैं।

    उन्होंने अपनी नियुक्ति को संगठन के लिए उपयोगी बताया है। उनका कहना है कि जिस तरह से अभियान में बड़ी संख्या में जैन पत्रकार जुड़े हैं उनसे निरंतर संवाद स्थापित करने के लिए ये नई भूमिका मददगार साबित होगी।

    संगठन के जिलाध्यक्ष आलोक सिंघई ने बताया कि श्री डाकोलिया की नियुक्ति से राजधानी के पत्रकारों ने संतोष व्यक्त किया है। सर्वश्री सनत जैन, रवीन्द्र जैन, राकेश सिंघई, विनोद भारिल्ल,प्रशांत जैन, संजय जैन, प्रवीण जैन, राजेन्द्र जैन, अंकित जैन, विकास जैन सभी ने उम्मीद की है कि संदीप डाकोलिया की नियुक्ति से जैन पत्रकारों का संगठन और भी मजबूती के साथ उभरेगा।

  • माफिया से संग्राम का डरावना अध्याय

    माफिया से संग्राम का डरावना अध्याय

    मध्यप्रदेश में कांग्रेस सरकार किन हालात में आई सभी जानते हैं। प्रदेश के लोग शिवराज सिंह चौहान की प्रशासनिक असफलताओं से खफा थे और उन्होंने विकास के नाम पर लूट करने वाले फोकटियों को अपने पड़ौस में देखा था। नतीजतन वे खफा हुए और शिवराज सिंह चौहान की खरीदी हुई अतिलोकप्रियता धराशायी हो गई। अब कांग्रेस के गुटीय संतुलन को साधकर सत्ता में आए कमलनाथ ने शिवराज सिंह चौहान के नेतृत्व में जड़ विहीन कर दी गई भारतीय जनता पार्टी को फुटबाल बना दिया है। खुद भाजपा के नेता आश्चर्य से देख रहे हैं कि आखिर कमलनाथ की शक्ति का आधार क्या है। ऐसा क्या हो गया कि कमलनाथ कथित कैडर आधारित पार्टी को आए दिन ठोक रहे हैं और कोई बोलने वाला तक नहीं है। दरअसल शिवराज सिंह चौहान ने अपने नजदीक जैसै भ्रष्ट और नपुंसक लोगों की भीड़ जमा कर ली थी उनकी शक्ति का आधार केवल सरकार थी। सरकारी तंत्र का लाभ लेकर वे भ्रष्ट मंत्री अफसर विकास के नाम पर लिए गए कर्ज को जीमने में जुटे रहे। धनागमन के इस आंकड़े को बाहर बैठा कोई सामान्य शख्स भी अच्छी तरह समझ सकता है। शुरुआती दौर में उमा भारती ने जब राघवजी भाई को वित्तीय प्रबंधन की कमान थमाई तो उन्होंने प्रदेश की आय बढ़ाने में व्यावसायिक प्रबंधन का सहारा लिया। वे स्वयं टैक्स सलाहकार थे सो उन्होंने टैक्स प्रदाताओं से धन जुटाकर प्रदेश की बैलेंस शीट मजबूत की। जिससे भाजपा सरकार केन्द्र से अधिक धन प्राप्त कर सकी। मैचिंग ग्रांट भरपूर होने की वजह से तरह तरह की योजनाएं बनाईं गईं और प्रदेश के लिए वित्तीय प्रबंधन मजबूत किया गया। शिवराज सिंह चौहान इस वित्तीय प्रबंधन की वजह से भरपूर धन लुटाते रहे। हितग्राहियों के जो सम्मेलन भाजपा कर रही थी वह वास्तव में फुगावा था। दरअसल सत्ता के अंतिम मुहाने पर पंचायतों में बैठे दिग्विजय सिंह के समर्थक उस धन को आहरित कर रहे थे। वे गांव के लोगों को ठेलकर हितग्राही सम्मेलनों में भेज रहे थे और भाजपा उन्हें प्रदेश के विकास की धुरी मान रही थी। राजीव गांधी के पंचायती राज को माफिया राज में बदलने वाले इस षड़यंत्र की आहट जब पंचायत सचिव रहे आईएएस आरएस जुलानिया को लगी तो उन्होंने पंचायतों को जाने वाला फंड रोक दिया। इसके बावजूद इस दौरान जन धन का भारी अपव्यय हो चुका था। ठेकेदारों और अफसरों के जिस गठजोड़ ने राजनेताओं का संरक्षण पाकर विकास की कहानियां सुनाईं वे भी इस प्रक्रिया में भरपूर मजबूत हो चले थे। अब सत्ता की मलाई चाटने वाला ये माफिया इस बार कांग्रेस के साथ है, और कमलनाथ सरकार माफिया के विरुद्ध संग्राम का उद्घोष कर रही है। सरकार की निगाह में माफिया वो है जो टैक्स नहीं देता और कानूनी इबारतों को अनदेखा करके अनगढ़ तरीके से धन बनाने का काम कर रहा है। दरअसल प्रदेश और देश में धन बनाने वाला बड़ा वर्ग वो है जो बगैर किसी सरकारी मदद के अपना कारोबार करके धनार्जन करता है। निश्चित रूप से सरकारी तंत्र उसे अवैध कारोबारी कहता है। इसीलिए सरकार ने शुद्द के लिए युद्ध नाम का जो अभियान चलाया उसमें निरीह व्यापारियों की मौत हो गई। उन पर रासुका लाद दी गई और जेलों में ठूंस दिया गया। उनके उद्योग से जुड़े हजारों कर्माचारी बेरोजगार हो गए। इसके बावजूद कमलनाथ सरकार और उससे पोषित मीडिया इसे बेईमानों के विरुद्ध संग्राम बताता रहा। आज जब कमलनाथ माफिया के विरुद्ध शंखनाद करने के लिए सरकारी तंत्र को छूट दे रहे हैं तो वो कहर कांग्रेस के विरोधियों पर टूटने वाला है। जो अवैध कारोबार करने वाले कांग्रेस की गोदी में बैठे हैं या बैठ चुके हैं उन पर इस युद्ध का कोई असर पड़ने वाला नहीं है। इसके साफ संकेत कमलनाथ सरकार की कार्यप्रणाली को देखकर मिल जाता है। तबादले पोस्टिंग के कारोबार में जिस तरह खुलेआम नौकरियों की बोलियां लगाईँ गईं उससे साफ पता चलता है कि सरकार अपने विरोधियों को अपराधी बताने में कोई गुरेज नहीं कर रही है। जिस तरह कांग्रेस ने चुनाव के दौरान कर्ज माफी या सस्ती बिजली के वादे किए उसके लिए धन की जरूरत थी। ये धन इसी तरह बेरहमी से टैक्स वसूली से उगाया जा सकता है। साथ में बंदर हीरा खदान को नीलाम करके सरकार ने अपने धन की उगाही का एक अजस्र स्रोत भी तलाश लिया है। चुनावों को देखकर शिवराज सिंह चौहान ने रेत को टैक्स मुक्त करके अपने समर्थकों को खुश करने का खेल खेला था उसे भी कमलनाथ माफिया के विरुद्ध युद्ध बता रहे हैं। निश्चित रूप से सरकार और प्रदेश को चलाने के लिए धन की जरूरत होती है। यह धन टैक्स से ही जुटाया जाता है। जो सरकार अपनी आय का अस्सी फीसदी हिस्सा स्थापना खर्च में ही लुटा देती हो वह प्रदेश के लिए धन बनाने वाले कारोबारियों को माफिया कहे तो ये वास्तव में क्रूरता होगी। इसके बावजूद सरकार धड़ल्ले से फोकटियों को ये अधिकार दे रही है कि वे प्रदेश के लिए पैसा उत्पादन करने वाले या सेवाएं उपलब्ध कराने वालों को माफिया कहे क्योंकि वे सरकार से सहमत नहीं हैं। ये आपातकाल से भी ज्यादा नृशंस और निंदनीय कार्य कहा जाएगा। इतिहास में आपातकाल को इंदिराजी का सबसे घिनौना अत्याचार बताया जाता है लेकिन कमलनाथ का ये माफिया संग्राम सदियों तक डरावने अध्याय के रूप में जाना जाएगा।

  • माफिया से युद्ध को कमलनाथ ने दी खुली छूट

    माफिया से युद्ध को कमलनाथ ने दी खुली छूट

    मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में उच्च-स्तरीय बैठक कल

    भोपाल 11 दिसंबर(प्रेस सूचना केन्द्र)। कमल नाथ सरकार ने अपने मात्र एक साल के कार्यकाल में वर्षों से माफिया राज के आतंक का दंश झेल रही आम जनता को इससे मुक्त कराने की मुहिम को तेज करने के लिए 12 दिसंबर को उच्च स्तरीय बैठक बुलाई गई है। जनसम्पर्क मंत्री पी.सी. शर्मा ने कहा है कि मुख्यमंत्री के स्पष्ट निर्देश हैं कि अब प्रदेश में ‘लोगों के लिए लोगों की सरकार’ चलेगी न कि माफिया राज।

    जनसम्पर्क मंत्री श्री शर्मा ने कहा कि मात्र एक साल में माफिया राज की कमर तोड़ने का जो साहस मुख्यमंत्री ने दिखाया है, उससे जनता को राहत मिली है। उन्होंने कहा कि माफिया, शासन-प्रशासन को ताक पर रखकर पूरे प्रदेश में दशकों से  समानांतर सरकार चला रहे थे, जिसका खामियाजा प्रदेश की जनता भुगत रही थी और विकास अवरूद्ध हो रहा था।

    श्री शर्मा ने कहा कि माफिया के खिलाफ जनमानस के साथ कमर कसकर खड़ी कमल नाथ सरकार ने मिलावटखोरों के खिलाफ ‘शुद्ध के लिए युद्ध’ की शुरुआत की। आम जनता को जहर परोस रहे मिलावटखोर माफियाओं की धर-पकड़ से पूरे प्रदेश में बड़े पैमाने पर कार्यवाही हुई। अभियान के दौरान मिलावटखोरों के खिलाफ 94 एफआईआर दर्ज की गई और 31 कारोबारियों के खिलाफ रासुका के तहत कार्रवाई हुई।

    मंत्री श्री शर्मा ने कहा कि राज्य सरकार की नई रेत नीति बन जाने से अभी तक प्रदेश की रेत संपदा लूटने और प्रदेश की जनता के हितों से कुठाराघात करने वाले माफिया के हौसले पस्त हो गए हैं। शासन-प्रशासन पर हमले कर और राजनीतिक संरक्षण प्राप्त कर बेखौफ रेत माफिया को एक ही फैसले से मुख्यमंत्री श्री कमल नाथ ने ध्वस्त कर दिया है। यही नहीं, नई रेत नीति से प्रदेश को जो राजस्व करीब 200 करोड़ मिलता था, वह इस वर्ष बढ़कर 1234 करोड़ तक पहुँच गया है। पिछले 15 साल से 15 हजार करोड़ रुपए किसकी जेब में जा रहे थे, इसका खुलासा भी मुख्यमंत्री ने नई रेत नीति बनाकर किया है। अब ये पैसा निजी हाथों में जाने के बजाए प्रदेश के विकास और जनता के हितों के लिए उपयोग होगा। 

    जनसम्पर्क मंत्री ने कहा कि किसानों को मिलावटी खाद बेचने वाले माफियाओं से मुक्त कराने के लिए भी मुहिम पूरे प्रदेश में चल रही है। पिछले एक माह में 1313 उर्वरक विक्रेताओं और गोदामों का निरीक्षण कर लिए गए नमूनों में 110 प्रकरणों में मिलावट पाए जाने पर कार्रवाई की गई है।

    श्री पी.सी. शर्मा ने कहा कि इतना ही नहीं, कमल नाथ सरकार ने विभिन्न शहरों में अपने रसूख और माध्यमों का दुरुपयोग करके अनैतिक गतिविधियाँ चलाने, सरकारी और निजी जमीनों पर कब्जे कर अपना साम्राज्य बनाने वाले तथा इंदौर और ग्वालियर में भी माफिया के खिलाफ सारे दबावों के बावजूद सख्ती दिखाई है और कठोर कार्यवाही भी सुनिश्चित की है। इस दृढ़तापूर्ण कार्रवाई के पीछे एक ही लक्ष्य था कि अब माफिया को प्रदेश की जनता और यहाँ की सरकारी संपदा को लूटने की इजाजत नहीं होगी। 

    मंत्री श्री शर्मा ने कहा कि जो नेता प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से माफिया के समर्थन में बयान देकर उनका संरक्षण कर रहे हैं, उनकी गतिविधियों से यह स्पष्ट है कि 15 साल में ये माफिया किनके संरक्षण में पनपे हैं। श्री शर्मा ने कहा कि प्रदेश में माफिया राज को जड़ से उखाड़ फेकने के लिए मुख्यमंत्री श्री कमल नाथ की अध्यक्षता में 12 दिसंबर को उच्च स्तरीय बैठक होने जा रही है। इस बैठक में गृह मंत्री, मुख्य सचिव, पुलिस महानिदेशक, अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (गुप्त वार्ता) एवं एसआईटी, आईजी एवं कमिश्नर जबलपुर, इंदौर, ग्वालियर, भोपाल, कलेक्टर इंदौर एवं कमिश्नर इंदौर नगर निगम उपस्थित रहेंगे। 

  • एक करोड़ उपभोक्ताओं को मिली सस्ती बिजली बोले प्रियव्रत सिंह

    एक करोड़ उपभोक्ताओं को मिली सस्ती बिजली बोले प्रियव्रत सिंह

    भोपाल,9 दिसंबर(प्रेस सूचना केन्द्र)। ऊर्जा मंत्री प्रियव्रत सिंह ने दावा किया है मध्यप्रदेश सरकार ने अपने चुनावी वादे को पूरा करते हुए एक करोड़ बिजली उपभोक्ताओं को इंदिरा ज्योति योजना में सस्ती बिजली उपलब्ध कराई है। केवल सत्रह लाख उपभोक्ता इस सुविधा के दायरे में नहीं आए हैं। हितग्राही उपभोक्ताओं को अब तीस दिनों की बिजली खपत डेढ़ सौ यूनिट से कम होने पर सौ यूनिट का बिल मात्र सौ रुपए लिया जा रहा है।

    प्रेस वार्ता में श्री सिंह ने बताया कि उपभोक्ताओं को लाभ देने के लिए राज्य सरकार 3400 करोड़ रुपए की सब्सिडी दे रही है। इससे 90 फीसदी उपभोक्ता लाभान्वित हो रहे हैं। उन्होंने बताया कि जब नई सरकार सत्ता में आई तब बिजली कंपनियों पर 37963 करोड़ रुपए का कर्ज था और लगभग 44975 करोड़ का संचयी घाटा था।

    उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के उस बयान को गैर लोकतांत्रिक बताया जिसमें उन्होंने उपभोक्ताओं से अधिक बिजली बिल का भुगतान न करने का आव्हान किया है। उन्होंने कहा कि इस तरह के भड़काऊ बयानों से अराजकता फैल जाएगी जिसे नियंत्रण करने के लिए राज्य को अपने बहुमूल्य संसाधन खर्च करने होंगे।

    जुलाई महीने से लेकर अब तक ऊर्जा विभाग में कितने तबादले किए गए और इन तबादलों से विभाग को क्या लाभ हुआ पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि ये तबादले पांच साल की समयसीमा पूरी होने पर किए गए हैं। उन्होंने कहा कि तबादलों की निश्चित संख्या तो बता पाना फिलहाल संभव नहीं है लेकिन ये तबादले जरूरत के अनुसार ही किए गए हैं।

    नवंबर के महीने तक मीटर बदलने की समय सीमा बढ़ाए जाने की बात स्वीकार करते हुए श्री सिंह ने कहा कि ये समय सीमा मार्च 2020 तक तय की गई है।

  • प्रज्ञा से झुलसने वालों को रद्दी में फेंको

    प्रज्ञा से झुलसने वालों को रद्दी में फेंको

    भोपाल की सांसद प्रज्ञा सिंह को भारत सरकार के रक्षा मंत्रालय की समिति का सदस्य बना दिए जाने से विघ्न संतोषी ताकतों के पिछवाड़े मिर्ची लग गई है। उनका कहना है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने जब साध्वी प्रज्ञा सिंह के प्रति सार्वजनिक तौर पर नाराजगी व्यक्त की थी तो उन्हें रक्षा समिति जैसे महत्वपूर्ण कार्य की जवाबदारी कैसे दी जा सकती है। भोपाल की सांसद से चिढ़ने वालों की फेरहिस्त बड़ी लंबी है। जबसे साध्वी प्रज्ञा को भाजपा ने सांसद के रूप में प्रोजेक्ट किया था तबसे उन्हें विवादों में घसीटने के प्रयास लगातार होते रहे हैं। अब जबकि वे 21 सदस्यों वाली रक्षा समिति की सदस्य बनाई गईं हैं तब यही विघ्न संतोषी अपना पिछवाड़ा संभालते हुए उछलने लगे हैं। साध्वी प्रज्ञा सिंह को 2008 में हुए मालेगांव बम धमाके का आरोपी बनाकर कांग्रेस के कुछ षड़यंत्रकारियों ने हिंदू आतंकवाद की नई परिभाषा गढ़ी थी। इसे खूब प्रचारित किया गया। कर्नल श्रीकांत पुरोहित को भी इस बम धमाके में आरोपित किया गया था जिन्हें बाद में निर्दोष पाया गया और अब वे सेना में दुबारा अपना काम संभाल चुके हैं। दरअसल तत्कालीन गृहमंत्री शिवराज पाटिल और उसके बाद कांग्रेस के ही सुशील कुमार शिंदे ने इस बम धमाके को हिंदू बनाम मुस्लिम झड़प का रूप देने का प्रयास किया था। कांग्रेस के ही दिग्विजय सिंह ने इसे हिंदू आतंकवाद का नाम देते हुए साम्प्रदायिक ध्रुवीकरण का अभियान चला दिया। देश में लंबे समय तक ये बम धमाका जातिगत वैमनस्य की वजह बना रहा। अब जबकि एनआईए की गढ़ी गई कहानी झूठी साबित हो रही है तब देश का एक बड़ा तबका इस पर संशय महसूस कर रहा है। इस मामले की सुनवाई कर रहे जज ने भी सवाल पूछा कि यदि एनआईए की कहानी झूठी है तो बम धमाका किसने किया था। दरअसल एनआईए के तत्कालीन अफसरों के माध्यम से कांग्रेस सरकार ने जिस तरह बम धमाके को साम्प्रदायिक रंग देने का प्रयास किया उससे आज भी लोग असमंजस महसूस कर रहे हैं। मालेगांव के बम धमाके में 7 लोगों की मौत हुई थी और सौ से अधिक लोग जख्मी हो गए थे। इस धमाके के वास्तविक आरोपियों को तो जांच के दायरे से बाहर कर दिया गया और आतंक के खिलाफ काम करने वालों को आरोपी बना दिया गया। जाहिर है कि अब जबकि साध्वी प्रज्ञा को देश की रक्षा समिति का सदस्य बना दिया गया है तब उनके खिलाफ षड़यंत्र रचने वाला बड़ा समूह आहत महसूस करेगा ही। अब समय आ गया है कि जब भारत की सेना और नागरिकों पर हिंदू आतंकवाद जैसा लांछन लगाने में असफल होने के बाद जो लोग बैचेन हो रहे हैं उनकी आपत्तियों को रद्दी की टोकरी में फेंक दिया जाना चाहिए। भारत में आतंकवाद फैलाने वालों पर कड़ी कार्रवाई होने से जो लोग परेशान महसूस करते हैं उनकी चिंता की जाएगी तो फिर भारत में भी एक नया पाकिस्तान बन जाएगा। आज पाकिस्तान ऐसे ही आतंकवादियों से परेशान है। भारत में इस आतंक की कमर तोड़ने के लिए सेना और सरकार को जो भी उपाय बन पड़ें बेखौफ होकर करने चाहिए। इसमें किसी आतंकवादी के मानवाधिकारों की चिंता करने वालों की भी खबर ली जाना जरूरी है।जो लोग आतंकवाद की पैरवी करते फिरते हैं उनके लिए साध्वी प्रज्ञा भारती के रक्षा समिति में चयनित होने पर चिंतित होना लाजिमी है। देश की सुरक्षा के प्रति चिंतन करने का काम वही लोग कर सकते हैं जो देश के लिए मरने मिटने के लिए तैयार हों। अपना सर्वस्व न्यौछावर करने के लिए तैयार हों। साध्वी प्रज्ञा सिंह मालेगांव बम धमाके के प्रताड़ना तंत्र से चोखी साबित होकर वापस आईं हैं। भोपाल की जनता ने षड़यंत्रकारी दिग्विजय सिंह को भारी मतों से हराकर उन्हें संसद भेजा है। महात्मा गांधी की हत्या निश्चित तौर पर निंदनीय और गलत थी। देश महात्मा गांधी की क्षति पूर्ति कभी नहीं कर सकता। इसके बावजूद नाथूराम गोड़से की देशभक्ति पर सवाल खड़े करना उन लोगों की सीमित दृष्टि का ही नतीजा है जो खरगोश की तरह आंखें बंद करके दुश्मन के चले जाने का भ्रम पालते फिरते हैं। साध्वी प्रज्ञा के बयानों पर लाख सवाल उठाए जाएं पर उनकी देशभक्ति शंका से परे है। रक्षा मंत्रालय या भारत सरकार के जिन भी लोगों ने साध्वी को ये महत्वपूर्ण जवाबदारी दी है उन्होंने देश को संदेश देने का प्रयास किया है कि वे रक्षा के मुद्दे पर किन्हीं भी सीमाओं तक जा सकते हैं। निश्चित रूप से भारत में आतंक फैलाने की मंशा रखने वालों के लिए ये कड़ा संदेश है।इसकी जितनी प्रशंसा की जाए कम है।