Category: मध्यप्रदेश

  • खेती के हालात समझें तो बदल पाएंगे किसान का भाग्य

    खेती के हालात समझें तो बदल पाएंगे किसान का भाग्य


    Dr. Neeta Singh
    President
    Centre for Resources Development Studies
    Mob: 94250 09125
    Email: crdsbpl@gmail.com
    neetasingh20012@gmail.com

    आपने कभी सोचा है कि मध्य प्रदेश (एमपी) कृषि व्यवसाय की दुनिया में अपने लिए कैसे जगह बना रहा है, यदि हां तो आप एक उपहार के लिए तैयार हैं। राज्य के विशाल मैदान, विविध जलवायु और एक ऐसी सरकार जो पूरी तरह से डिजिटल और टिकाऊ खेती पर जोर दे रही है, ऐसी चर्चा पैदा कर रही है जिसे नजरअंदाज करना मुश्किल है। आइए कहानी, चुनौतियों, उज्ज्वल बिंदुओं और मध्य प्रदेश में कृषि उद्यमों का भविष्य क्या है, के बारे में एक दोस्ताना सैर करें।
    भारतीय कृषि में एमपी क्यों मायने रखता है?
    मध्य प्रदेश को अक्सर “मध्य भारत की रोटी की टोकरी” कहा जाता है, और अच्छे कारण के लिए। 15 मिलियन हेक्टेयर से अधिक भूमि पर खेती के साथ, राज्य भारत के कुल खाद्यान्न उत्पादन में लगभग 15% का योगदान देता है। हाल के वर्षों में, ध्यान केवल अधिक उत्पादन से हटकर बेहतर उच्च मूल्य वाली फसलें पैदा करने पर केंद्रित हो गया है, बागवानी और पशुपालन इस कार्य में अग्रणी हैं। राज्य का लक्ष्य कृषि से अपने सकल राज्य घरेलू उत्पाद (जीएसडीपी) को दोगुना करना है, एक ऐसा लक्ष्य जो नीति और निजी क्षेत्र दोनों को उत्साहित कर रहा है।
    भौगोलिक लाभ – मध्य प्रदेश में 15 मिलियन हेक्टेयर कृषि योग्य भूमि है, जो इसे कृषि योग्य क्षेत्र के मामले में दूसरा सबसे बड़ा राज्य बनाती है।
    फसल विविधता – यह गेहूं, चावल, दालें, सोयाबीन, मक्का और बागवानी फसलों (आम, अमरूद, टमाटर, आदि) की एक विस्तृत श्रृंखला का उत्पादन करती है।
    राष्ट्रीय उत्पादन में योगदान – भारत के कुल खाद्यान्न उत्पादन का लगभग 15% और देश के बागवानी उत्पादन का 10% मध्य प्रदेश से आता है।
    नीति फोकस – राज्य ने सार्वजनिक क्षेत्र के निवेश और निजी क्षेत्र के हित को आगे बढ़ाते हुए 2027 तक अपने कृषि जीएसडीपी को दोगुना करने का लक्ष्य रखा है।

    प्रमुख विकास चालक
    1.उच्च मूल्य वाली फसलें और बागवानी
    किसान पारंपरिक गेहूं और चावल की जगह सोयाबीन, दालें, मक्का और कई तरह के फल और सब्जियां उगा रहे हैं। उदाहरण के लिए, इंदौर डिवीजन में दालों और मक्के की खेती में ज़बरदस्त बढ़ोतरी देखी गई है, अनुकूल मौसम और बेहतर बाज़ार कीमतों के कारण एक ही सीज़न में मक्के की खेती का रकबा 50% से ज़्यादा बढ़ गया है। यह विविधीकरण न केवल किसानों की आय बढ़ाता है बल्कि मानसून पर निर्भर फसलों पर निर्भरता भी कम करता है।
    रकबे में बदलाव – पिछले पांच सालों में, इंदौर डिवीजन में मक्के की खेती का रकबा 50% से ज़्यादा बढ़ा है, जबकि सोयाबीन का रकबा स्थिर हो गया है क्योंकि किसान बेहतर कीमतों की तलाश में हैं।
    बागवानी में तेज़ी – मालवा क्षेत्र में आम के बाग और छत्तीसगढ़ सीमावर्ती इलाकों में टमाटर की खेती लगभग 12% CAGR की दर से बढ़ी है, जिसे राज्य के “मध्य प्रदेश बागवानी मिशन” से समर्थन मिला है।
    वैल्यू एडिशन – उत्पादन क्षेत्रों के पास छोटे पैमाने की प्रोसेसिंग यूनिट (जैसे, टमाटर प्यूरी, आम का गूदा) उभर रही हैं, जिससे फसल कटाई के बाद होने वाले नुकसान (वर्तमान में फलों के लिए लगभग 15%) में कमी आ रही है।

    1. पशुधन और मत्स्य पालन
      पशुधन क्षेत्र 13% (वास्तविक रूप से) और मत्स्य पालन 15% की प्रभावशाली दर से बढ़ रहा है। बलराम तालाब योजना और अन्य जल निकाय परियोजनाओं के साथ, MP ने लाखों हेक्टेयर सिंचित भूमि जोड़ी है, जिससे पहले के सूखे इलाके फलते-फूलते मछली फार्म और डेयरी हब में बदल गए हैं।
      पशुधन विकास – यह क्षेत्र डेयरी सहकारी समितियों और “बलराम तालाब योजना” द्वारा संचालित होकर सालाना लगभग 13% (वास्तविक रूप से) की दर से विस्तार कर रहा है, जिसने मछली पालन के लिए 2 मिलियन हेक्टेयर से ज़्यादा जल निकाय बनाए हैं।
      मत्स्य पालन की क्षमता – वार्षिक मछली उत्पादन 1 मिलियन टन से ज़्यादा हो गया है, जिसमें कार्प और पंगासियस पर ध्यान केंद्रित किया गया है। राज्य का लक्ष्य 2028 तक 2 मिलियन टन तक पहुंचना है।
      महिलाओं की भागीदारी – 30% से ज़्यादा पशुधन से संबंधित उद्यम महिलाओं के स्वामित्व या प्रबंधन में हैं, खासकर “मध्य प्रदेश महिला डेयरी विकास कार्यक्रम” में।
    2. डिजिटलीकरण और बाज़ार सुधार
      राज्य का ई-अनुज्ञा प्लेटफॉर्म और आने वाला एग्री स्टैक मंडी संचालन को सुव्यवस्थित कर रहे हैं, किसानों को वास्तविक समय में कीमतों की जानकारी दे रहे हैं और बिचौलियों को कम कर रहे हैं। ये उपकरण “डिजिटल मंडी” विज़न की दिशा में एक बड़ा कदम हैं जो उत्पादकों को राज्य के अंदर और बाहर दोनों जगह सीधे खरीदारों से जोड़ सकता है।
      ई-अनुज्ञा प्लेटफॉर्म – एक एकीकृत डिजिटल बाज़ार जो > 150 वस्तुओं के लिए वास्तविक समय में कीमतों की जानकारी प्रदान करता है, जिससे ≈ 3 मिलियन किसानों को लाभ होता है।
      एग्री स्टैक और GIS मैपिंग – भूमि उपयोग योजना, मिट्टी स्वास्थ्य निगरानी और लक्षित सब्सिडी वितरण में मदद करता है।
      कोल्ड चेन विस्तार – राज्य ने पिछले तीन वर्षों में ≈ 1,200 मीट्रिक टन रेफ्रिजरेटेड भंडारण क्षमता जोड़ी है, जिससे खराब होने वाली वस्तुओं के खराब होने में कमी आई है।
    3. सरकारी योजनाओं की भरमार
      मुख्य मंडी किसान कल्याण योजना (इनपुट के लिए वित्तीय सहायता) से लेकर भावांतर भुगतान योजना (कीमत में कमी का भुगतान) तक, MP ऐसी कई योजनाएँ शुरू कर रहा है जो खेती के जोखिम को कम करती हैं और आधुनिक तरीकों को प्रोत्साहित करती हैं। मृदा स्वास्थ्य कार्ड, सूक्ष्म सिंचाई सब्सिडी, और कृषि ऋण समाधान के तहत ब्याज मुक्त ऋण भी इस पैकेज का हिस्सा हैं।
      मुख्य मंडी किसान कल्याण योजना – बीज, उर्वरक और मशीनरी के लिए सीधी वित्तीय सहायता।
      भावांतर भुगतान योजना – चुनिंदा फसलों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य की गारंटी देती है, जिससे किसानों को बाज़ार की अस्थिरता से बचाया जा सके।
      मृदा स्वास्थ्य कार्ड और सूक्ष्म सिंचाई सब्सिडी – संतुलित उर्वरक उपयोग और जल बचत प्रौद्योगिकियों को प्रोत्साहित करती है; पात्र खेतों में इसका उपयोग बढ़कर ≈ 45% हो गया है।
      कृषि ऋण समाधान – छोटे पैमाने के कृषि उद्यमों के लिए ₹5 लाख तक का ब्याज मुक्त ऋण।
      सफलता की कहानियाँ जो प्रेरित करती हैं
    4. भोपाल में मशरूम का जादू – बायोकेमिस्ट्री ग्रेजुएट डॉ. बसु ने एक खाली कमरे में सिर्फ 50 मशरूम बैग से शुरुआत की। आज, उनका इंडोर फार्म हर महीने लगभग ₹5 लाख कमाता है, और वह दर्जनों महिलाओं को इस मॉडल को दोहराने की ट्रेनिंग दे रही हैं, जिससे एक साधारण फंगस का प्रयोग ₹60 लाख से ज़्यादा के एंटरप्राइज में बदल गया है।
    5. इंदौर में दालों और मक्के में उछाल – सांवेर के लखन पटेल जैसे किसानों ने अच्छे मार्केट संकेतों और अच्छी पैदावार के कारण अपनी कई एकड़ ज़मीन पर मक्का उगाना शुरू कर दिया है। नतीजा? मक्के की खेती के रकबे में 50% की बढ़ोतरी और क्षेत्रीय खाद्य सुरक्षा में एक खास सुधार।
    6. महिलाओं के नेतृत्व वाली वैल्यू चेन – मध्य प्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के ज़रिए, महिलाओं के सेल्फ हेल्प ग्रुप को सामुदायिक संस्थानों से जोड़ा जा रहा है, जिससे उन्हें पारंपरिक खेती से मार्केट-ओरिएंटेड कृषि उद्यमों की ओर बढ़ने में मदद मिल रही है। ये पहल ग्रामीण महिलाओं के लिए एजेंसी, गतिशीलता और आय बढ़ा रही हैं।
      बची हुई चुनौतियाँ
      इतनी तेज़ी के बावजूद, MP का कृषि क्षेत्र चुनौतियों से मुक्त नहीं है:
    7. सोयाबीन की कीमतों में उतार-चढ़ाव – सोयाबीन एक प्रमुख फसल बनी हुई है, लेकिन वैश्विक कीमतों में उतार-चढ़ाव इसे कई छोटे किसानों के लिए जोखिम भरा सौदा बना देता है। सोयाबीन की कीमतों में सालाना ± 20% का उतार-चढ़ाव होता है, जिससे छोटे किसानों के कैश फ्लो पर असर पड़ता है।
    8. मार्केटिंग उदारीकरण – जबकि ई-मंडियां आशाजनक हैं, फिर भी कई किसान टूटी हुई सप्लाई चेन और कोल्ड स्टोरेज तक सीमित पहुंच से जूझ रहे हैं। ई-मंडियों के बावजूद, कई किसान अभी भी सीमित परिवहन और भंडारण के कारण स्थानीय व्यापारियों पर निर्भर हैं।
    9. विस्तार सेवाएँ – कृषि विज्ञान केंद्रों (KVKs) की मांग उनके स्टाफ से कहीं ज़्यादा है, जिससे नवीनतम तकनीक को खेतों तक पहुंचाने में बाधा आती है। विस्तार सेवाओं में कमी – KVKs (कृषि विज्ञान केंद्र) केवल लगभग 30% किसान आबादी को सेवा देते हैं, जिससे कई लोग नवीनतम कृषि सलाह से वंचित रह जाते हैं।
    10. क्रेडिट की कमी – हालांकि योजनाएं मौजूद हैं, लेकिन औपचारिक क्रेडिट की पहुंच कुल कृषि क्रेडिट ज़रूरतों के लगभग 45% तक ही है।
      भविष्य कैसा दिखता है
      अगर मौजूदा ट्रेंड जारी रहा, तो MP भारत में टिकाऊ, ज़्यादा ग्रोथ वाली खेती के लिए एक मॉडल बन सकता है। राज्य का कन्वर्जेंस पर ज़ोर—KVKs, ATMA, और राज्य के एक्सटेंशन वर्कर्स को एक साथ लाना—हर साल हर ज़िले में कम से कम 5,000 किसानों तक एडवांस्ड टेक्नोलॉजी पहुँचाने का लक्ष्य रखता है। इसमें एग्रो फॉरेस्ट्री, प्रिसिशन फार्मिंग, और AI आधारित उपज के पूर्वानुमान को भी जोड़ दें, तो आपके पास मज़बूत, मुनाफ़े वाली खेती का नुस्खा तैयार है।
      टेक्नोलॉजी का कन्वर्जेंस – राज्य ने KVKs, ATMA (एग्रीकल्चरल टेक्नोलॉजी मैनेजमेंट एजेंसी), और AI आधारित उपज के पूर्वानुमान को इंटीग्रेट करके हर साल हर ज़िले में 5,000 किसानों तक प्रिसिशन एग्रीकल्चर टूल्स पहुँचाने की योजना बनाई है।
      एग्रो फॉरेस्ट्री पर ज़ोर – मिट्टी की सेहत सुधारने और कार्बन क्रेडिट जेनरेट करने के लिए पेड़ वाली फसलों के तहत अतिरिक्त 2 मिलियन हेक्टेयर ज़मीन को टारगेट करना।
      प्राइवेट सेक्टर के साथ पार्टनरशिप – ड्रोन आधारित स्प्रेइंग, मिट्टी की नमी के सेंसर, और मार्केट लिंकेज प्लेटफॉर्म के लिए एग्रीटेक स्टार्टअप के साथ नए सहयोग।
      सस्टेनेबिलिटी पर फोकस – खेती को क्लाइमेट रेज़िलिएंट बनाने के लिए पानी बचाने वाली फसलों (जैसे, बाजरा) और रिन्यूएबल एनर्जी से चलने वाली खेती पर ज़ोर।
      नए एग्री एंटरप्रेन्योर्स के लिए संदेश साफ़ है: ज़मीन उपजाऊ है, नीतियां सहायक हैं, और बाज़ार भूखा है। चाहे वह मशरूम का वेंचर हो, हाई वैल्यू वाला बागवानी प्रोजेक्ट हो, या टेक इनेबल्ड सप्लाई चेन हो, MP एक ऐसा खेल का मैदान देता है जहाँ आइडिया जल्दी से असर में बदल सकते हैं।
      निष्कर्ष:
      मध्य प्रदेश सिर्फ़ फसलें नहीं उगा रहा है—यह एग्री एंटरप्राइज़ का एक बिल्कुल नया इकोसिस्टम तैयार कर रहा है। डिजिटल टूल्स, सरकारी मदद, और इनोवेटिव किसानों की लहर के साथ, राज्य अपने खेतों को सचमुच दौलत पैदा करने वाले इंजन में बदलने की राह पर है। MP का एग्री एंटरप्राइज़ लैंडस्केप तेज़ी से बदल रहा है, जो हाई वैल्यू फसलों, पशुधन की ग्रोथ, डिजिटल मार्केटप्लेस, और सहायक नीतियों से प्रेरित है। हालांकि चुनौतियाँ बनी हुई हैं, टेक्नोलॉजी का कन्वर्जेंस और मज़बूत सरकारी समर्थन राज्य को टिकाऊ, मुनाफ़े वाली खेती के लिए एक राष्ट्रीय मॉडल बनने की स्थिति में लाता है। अगर आप इसमें उतरने की सोच रहे हैं, तो यही सही समय है!
      स्रोत:
    11. किस्मत के खेत: मध्य प्रदेश में उद्यम के रूप में कृषि… minutespedia.in
    12. अनुकूल मौसम के कारण इंदौर संभाग के किसान दालों और मक्के की खेती की ओर रुख कर रहे हैं… टाइम्स ऑफ इंडिया
    13. मध्य प्रदेश के कृषि मुनाफे में परिवर्तनकारी रुझान: 2020 से 2023 तक का एक व्यापक विश्लेषण… mpkonnect.com
    14. NRLM के सामुदायिक संस्थानों के माध्यम से SHG महिलाओं के नेतृत्व में वैल्यू चेन बनाना… imagogg.org
    15. भोपाल की महिला ने 50 मशरूम बैग को 60 लाख रुपये के वेंचर में बदला और स्थानीय महिलाओं को कमाने के लिए प्रशिक्षित किया… thebetterindia.com
    16. सतत कृषि विकास के मध्य प्रदेश मॉडल का पालन करें… arunanchaltimes.in
  • गुजरातियों का घंटा बजाने निकले कैलाश की छाती पर क्यों मच रहा तांडव

    गुजरातियों का घंटा बजाने निकले कैलाश की छाती पर क्यों मच रहा तांडव

    -आलोक सिंघई-

          “मालव धरती धीर गंभीर, डग डग रोटी पग पग नीर” (Malav dharti dheer gambhir, dag dag roti pag pag neer) यह कहावत मालवा क्षेत्र की उपजाऊ, समृद्ध और जल-संपन्न भूमि का वर्णन करती है, जिसका अर्थ है कि यह धरती बहुत उपजाऊ है जहाँ हर कदम पर रोटी (अनाज) और हर पग पर पानी (जल) उपलब्ध है ।पहली बार दुनिया को पता चला कि सफाई के तमगे जीतते इंदौर का पानी अब पूरी तरह जहरीला हो चुका है। इतना कि उसने लगभग दो दर्जन लोगों की बलि ले ली। वैसे तो शहर के भागीरथपुरा में दो सौ से अधिक लोग गंभीर स्तर पर बीमार पड़े लेकिन हजारों लोगों का मन आज भी घिन से भरा हुआ है जिन्हें स्थानीय निकाय और जन प्रतिनिधियों की लापरवाही की वजह से मलमूत्र भरा पानी पीने को मजबूर होना पड़ा। इस घटना के बावजूद खुद को शहर का भाग्यविधाता समझने का दंभ भरने वालों का दिल नहीं पसीजा। इन मौतों के बाद हाल ही में उनके परिवार की एक शादी का समारोह जितने बड़े पैमाने पर मनाया गया उससे पता चलता है कि वहां के जन प्रतिनिधि अब एक अलग ही नशे में मदमस्त घूम रहे हैं।

         कांग्रेस के राजकुमार राहुल गांधी सत्रह जनवरी को इंदौर आ रहे हैं। उनकी कांग्रेस इस घटना पर इसी दिन पूरे प्रदेश में भी विरोध प्रदर्शन करेगी। कांग्रेस का आरोप है कि भाजपा की राजनीति और स्थानीय नेताओं की अकुशलता की वजह से लोगों को अपने परिजनों का बिछोह सहना पड़ रहा है। दरअसल इंदौर की इस घटना से न केवल मालवा बल्कि पूरे प्रदेश और देश के लोगों का मन विक्षोभ से भरा हुआ है। यही वजह है कि कांग्रेस जैसे समयातीत हो चले राजनीतिक दल के नेता भी अंगड़ाई लेने लगे हैं। कुछ दिनों पहले मध्यप्रदेश का बंटाढ़ार करने में निपुण दिग्विजय सिंह ने भी एक अखबार में आलेख के माध्यम से भाजपा की कार्यशैली को कटघरे में खड़ा करने की कोशिश की थी। इस टसुए बहाते लेख के माध्यम से दिग्विजय ने गुजरातियों पर निशाना साधा था।उनका कहना था कि राज्य की पंचायतों तक में गुजरातियों को जो ठेके दिए गए उनसे राज्य की स्थिति बिगड़ी है। कई गुजराती ठेकेदार तो बगैर काम किए भुगतान लेकर रफूचक्कर हो गए। उन्होंने भाजपा के जिन नेताओं से जुड़े ठेकेदारों को पेटी कांट्रेक्ट दिए उन्होंने भी काम नहीं किया। इस वजह से राज्य और इंदौर की ये दुर्दशा हुई है।

    कवि दुष्यंत कुमार की साए में धूप की कुछ लाईनें आज ज्यादा प्रासंगिक हो रहीं हैं। कि

    कैसे मंज़र सामने आने लगे हैं,गाते-गाते लोग चिल्लाने लगे हैं।

    अब तो इस तालाब का पानी बदल दो,ये कँवल के फूल कुम्हलाने लगे हैं

         शहरी नियोजन की विफलता को दर्शाने के लिए दिग्विजय ने जो लेख लिखा वह वास्तव में एक गहरी और अंदरूनी राजनीति का प्रकटीकरण बताया जा रहा है। पिछले लगभग ढाई दशकों से दिग्विजय सिंह मंदड़िए की तरह दांव खेल रहे हैं। शतरंज के पांसे फेंकते चुन्नू मुन्नू ने जिस तरह भाजपा की सत्ता में अपने महल खड़े किए उससे मध्यप्रदेश की राजनीति को आसानी से समझा जा सकता है। महापौर रहते हुए कैलाश विजयवर्गीय पर जिस पेंशन घोटाले का आरोप लगा था उसे अदालत ने सत्रह सालों बाद इसलिए खारिज कर दिया क्योंकि सरकार ने इस मामले में अभियोजन की स्वीकृति ही नहीं दी।

          इस मामले में कांग्रेस के नेता के के मिश्रा का आरोप है कि कैलाश विजयवर्गीय ने महापौर बनने के बाद परिषद की पहली बैठक में ही संकल्प पारित करवा लिया कि पेंशनधारियों को नंदानगर सहकारी साख संस्था के माध्यम से भुगतान किया जाएगा। इसके बाद अपात्र लोगों को जमकर पेंशन का भुगतान किया गया। जांच में घोटाले की रकम 33 करोड़ से ज्यादा आंकी गई थी। मिश्रा ने कोर्ट में एक परिवाद दायर कर तत्कालीन महापौर कैलाश विजयवर्गीय, महापौर परिषद यानि एमआईसी के तत्कालीन सदस्य रमेश मेंदोला, पूर्व महापौर उमाशशि शर्मा, तत्कालीन सभापति और अब सांसद शंकर लालवानी, तत्कालीन निगमायुक्त संजय शुक्ला समेत 14 लोगों के खिलाफ धोखाधड़ी, अमानत में खयानत, कूट रचना का आरोप लगाते हुए इन पर आपराधिक प्रकरण चलाने की मांग की थी।

           इसके बाद इंदौर जिस तरह राजनेताओं के धन उलीचने का अड्डा बना उसने तो पूरे इंदौर को ही लुटेरा बना दिया। इंदौर के चमकते विकास की अंतर्कथा ये साबित करती है कि जैसा राजा हो प्रजा वैसी ही हो जाती है। इसे समझने के लिए वहां के अस्पतालों की कहानिया हीं काफी हैं। छह आठ महीने पहले मेडीकल कालेज के सामने स्थित एक अस्पताल में जब मरीज के परिजनों ने देखा कि उन्हें थमाए गए बिल में एक ही खर्च कई बार दुहराया गया है तो उन्होंने अस्पताल के मालिक से बात की। इसके साथ ही उन्होंने स्थानीय मंत्रीजी से भी निवेदन किया कि अस्पताल बेवजह वसूली जा रही इस राशि का बिल संशोधित कर ले। मंत्रीजी के कार्यालय से अस्पताल प्रबंधक को फोन भी किया गया। इस पर प्रबंधक ने मरीज के परिजनों को दो टूक इंकार करते हुए कहा कि चुनाव से पहले मंत्रीजी उनसे पचपन लाख रुपए का चंदा ले चुके हैं। ऐसे में यदि वे मरीजों से भरपाई नहीं करेंगे तो फिर उन्हें अस्पताल बंद करना पड़ेगा।

             यही स्थिति वहां के तमाम कारोबारियों की  हो गई है। इंदौर में पदस्थ रहे पुलिस के एक बड़े अधिकारी का कहना है कि अब ये शहर एक दूसरे पर टोपी धरने में महारथ हासिल कर चुका है। एक नागरिक का बेशकीमती प्लाट नेता नगरी के एक गुंडे ने हथिया लिया। जब वह बिल्डर मंत्रीजी के सामने पहुंचा तो उन्होंने अपने दरबार में गुंडे की पेशी करवाई। गुंडा पूरी तैयारी से दस्तावेज लेकर पहुंचा और उसने कहा कि प्लाट तो उसी का है, भैया बेवजह उस पर दावा जता रहे हैं। हूबहू कागज देखकर बिल्डर चकरा गया। नेताजी ने उसे समझाया कि आपस में समझ लो। बड़ी अनुनय विनय के बाद बिल्डर ने अपना ही प्लाट दो करोड़ रुपये की अड़ीबाजी चुकाकर वापस पाया।

           ये घटनाएं तो आज आम हैं। घर घर में ये विष फैल चुका है। बहनें भाई की संपत्ति पर अड़ी बाजी कर रहीं हैं। कोई ससुराल का जेवर हड़पकर भाग रही है कोई रिश्तेदारों को अच्छे इलाज का प्रलोभन दिखाकर उनकी संपत्तियां लुटवा रहा है। लड़के लड़कियां चमक दमक के फेर में टोपी पहिनते पहिनाते दिख रहे हैं। लगभग ढाई दशकों में भोला भाला इंदौर बिल्कुल बदल गया है। एक नया ही शैतान वहां के जेहन में बैठ गया है। जो इंदौर कभी उत्पादक था वह आज शातिर कारोबारी माफिया बन चुका है।

            भागीरथ पुरा की घटना भी इसी जहरीली राजनीति और काले धन की हवस की भेंट चढ़ा है। अपना दामन छुड़ा रहे भाजपा के नेताओं ने अपने जिस बंटाढार सरगना से गुजराती लाबी पर सवालिया निशान लगवाया है वह केवल आधा सच है। ये बात सही है कि गुजरात से आए कुछ ठेकेदारों ने शिवराज सिंह चौहान की पिलपिली सरकार को ठगी का पप्पू बना रखा था। शहरी नवीनीकरण के नाम पर आई योजनाओं में खुलेआम खा खा खैया का खेल खेला गया। लेकिन इससे भागीरथपुरा का अभिशाप नहीं ढांका जा सकता है।सबसे ज्यादा राजस्व उपार्जन करने वाला इंदौर नगर निगम अपनी जल मल व्यवस्था को चलाने के लिए खुद सक्षम है। उस पर किसी केन्द्रीय योजनाओं की लूट का कोई असर क्यों पड़ना चाहिए था। दरअसल योजनाओं की इस लूट में सहयोगी बने भाजपा के नेताओं को जरा भी फिक्र नहीं थी कि उनके शहर की पाईप लाईनें सड़ चुकी हैं। उन्हें बदला भी जाना चाहिए। तेज आबादी का बोझ झेलते शहर में नई पाईप लाईनें भी विकसित की जानी थी। वे तो बस उन कागजी योजनाओं में अपना हिस्सा लेकर खिसक लिए । नृशंस लापरवाही पर सवालों के जवाब में घंटा बताते नेताओं को देखकर भविष्य की राजनीति की दिशा आसानी से समझी जा सकती है।

             जबसे कैलाश जी को पश्चिम बंगाल का प्रभार दिया गया और भारी संसाधन झोंकने के बाद ममता दीदी का प्रसाद खाने वाले वामपंथियों ने वहां भाजपा की दाल नहीं गलने दी तबसे भाजपा में कई स्तरीय चिंतन चलता रहा है। इस बार एक लाबी कह रही थी कि पिछले अनुभवों का लाभ लेने के लिए कैलाश जी को दुबारा उस मोर्चे पर भेजा जाए। इस जमावट को करीब से देख रहे उनके विरोधियों ने कलकत्ता के उन उद्योगपतियों से चंदा वसूली के प्रमाण हाईकमान के समक्ष रख दिए कि जिन्हें केन्द्र ने युद्ध में सहयोग के लिए तैनात किया था। जाहिर है कि भाजपा हाईकमान अपनी इस गलती को दुबारा कैसे दुहरा सकता था। इस बीच भागीरथ पुरा हो गया और अपनी गलती को छुपाने के लिए गुजरातियों पर ठीकरा फोड़ने की नादानी भी सामने आ गई। इस एपीसोड के बाद भाजपा के कई अन्य नेताओं को आशा की किरणें दिखने लगी हैं और वे अपने कुर्ते पजामे पर कलफ लगवाने में जुट गए हैं। रही सही कसर पूरी करने के लिए कांग्रेसियों ने भी खम ठोक दिया है।

  • साइबर ठगी रोकेगी जीरो एफआईआर:अमित शाह

    साइबर ठगी रोकेगी जीरो एफआईआर:अमित शाह

    01 लाख से अधिक राशि की साइबर वित्तीय धोखाधड़ी पर लागू होगी ई-जीरो एफआईआर (e-Zero FIR)

    भोपाल 25दिसंबर(प्रेस इंफॉर्मेशन सेंटर)। ई-जीरो एफआईआर व्यवस्था प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के ‘साइबर सुरक्षित भारत’ के दृष्टिकोण और अक्टूबर 2024 में उनके ‘मन की बात’ संबोधन के अनुरूप है। 

         केंद्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह के नेतृत्व में देश में साइबर अपराध से निपटने हेतु ऐतिहासिक और तकनीक-आधारित कदम उठाए जा रहे हैं। इसी क्रम में पूर्व प्रधानमंत्री श्रद्धेय श्री अटल बिहारी वाजपेयी जी के जन्म दिवस को ‘सुशासन दिवस’ के रूप में मनाए जाने की परंपरा के अनुरूप, मध्यप्रदेश पुलिस द्वारा प्रशासनिक सुशासन को सुदृढ़ करने हेतु एक नवीन अभिनव पहल के रूप में  ई-जीरो एफआईआर (e-Zero FIR) व्‍यवस्‍था का शुभारंभ किया गया। जिसका उद्घाटन ग्वालियर में आयोजित अभ्युदय मध्यप्रदेश ग्रोथ समिट के दौरान माननीय केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह द्वारा किया गया। इस अवसर पर ई-जीरो एफआईआर की पहली प्रति माननीय मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को सौंपी गई। इसके साथ ही मध्यप्रदेश, दिल्ली के बाद देश का दूसरा राज्य बन गया है, जहाँ ई-जीरो एफआईआर प्रणाली को लागू किया गया है। यह पहल पुलिस को अपराधियों से एक कदम आगे रखने की दिशा में मील का पत्थर साबित होगी।

             इस अवसर पर केंद्रीय मंत्री श्री ज्योतिरादित्य सिंधिया (संचार एवं सूचना प्रौद्योगिकी, पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास), उप मुख्यमंत्री श्री जगदीश देवड़ा, अध्यक्ष मध्यप्रदेश विधानसभा श्री नरेन्द्र सिंह तोमर, मंत्री जल संसाधन एवं प्रभारी मंत्री ग्वालियर श्री तुलसीराम सिलावट तथा मंत्री सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम विभाग श्री चेतन्य काश्यप की विशिष्ट उपस्थिति रही।

           मध्यप्रदेश में बढ़ते साइबर अपराधों की चुनौतियों को देखते हुए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने तकनीक का दुरुपयोग कर जनता की गाढ़ी कमाई लूटने वाले अपराधियों पर प्रभावी अंकुश लगाने के निर्देश दिए थे। मुख्यमंत्री जी का मानना है कि जैसे हमने स्वच्छता को अपनी संस्कृति बनाया है, वैसे ही हमें साइबर स्वच्छता को भी अपनी संस्कृति बनाना होगा।

    प्रदेश में ई-जीरो एफआईआर व्यवस्था का संचालन पुलिस महानिदेशक श्री कैलाश मकवाणा के निर्देशन तथा अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक श्री ए. साईं मनोहर के मार्गदर्शन में किया जा रहा है। जिसका उद्देश्य पुलिस को अपराधियों से अधिक तेज, तकनीक-सक्षम और नागरिक-केंद्रित बनाना है।

    साइबर वित्तीय धोखाधड़ी पुलिस के समक्ष एक बड़ी चुनौती बनकर उभरी है। अक्सर पीड़ित की जीवनभर की कमाई कुछ ही पलों में अपराधियों के हाथों चली जाती है, जिससे वह स्वयं को असहाय महसूस करता है। इसी पीड़ा को समझते हुए, गृह मंत्रालय द्वारा ई-जीरो एफआईआर की अवधारणा को लागू किया गया है, ताकि तकनीक को अपराधियों के विरुद्ध प्रभावी हथियार बनाया जा सके।

     2024 से लागू हुए नए आपराधिक कानून—भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS)—नागरिक-केंद्रित हैं और इनका मूल उद्देश्य ‘दंड नहीं, बल्कि न्याय’ प्रदान करना है।

    BNSS की धारा 173 के अंतर्गत जीरो एफआईआर को कानूनी मान्यता दी गई है, जिससे नागरिक देश में कहीं से भी इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से शिकायत दर्ज करा सकते हैं, चाहे अपराध किसी भी क्षेत्राधिकार में घटित हुआ हो।

    -जीरो एफआईआर एक क्रांतिकारी व्यवस्था है जो साइबर वित्तीय धोखाधड़ी (विशेष रूप से 1 लाख से अधिक की हानि) के मामलों में एफआईआर दर्ज करने की प्रक्रिया को तेज करती है। इसका मुख्‍य उद्देश्‍य क्षेत्राधिकार (Jurisdiction) की बाधाओं को समाप्त कर जांच की प्रक्रिया को तुरंत प्रारंभ करना है। यह प्रणाली तीन प्रमुख डिजिटल मंचों को एकीकृत करती है, जिसमें नेशनल साइबरक्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल (NCRP), I4C – भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र एवं CCTNS – अपराध एवं आपराधिक ट्रैकिंग नेटवर्क एवं सिस्टम सम्मिलित है। 

    ई-जीरो एफआईआई पंजीकरण की प्रक्रिया पांच चरणों में संपन्‍न होती है। इसके अंतर्गत प्रथम चरण में शिकायत दर्ज कराना होती है, जिसमें पीड़ित 1930 हेल्पलाइन या NCRP पोर्टल पर शिकायत दर्ज करता है। 1 लाख रूपए से अधिक की धोखाधड़ी होने पर डेटा सीधे भोपाल स्थित केन्‍द्रीय साइबर पुलिस हब को भेजा जाता है। दूसरे चरण में ऑटोमेटिक जनरेशन के अंतर्गत CCTNS सर्वर के माध्यम से शिकायत स्वतः ई-जीरो एफआईआर में बदल जाती है। तीसरे चरण में स्‍वीकृति (Acknowledgement) के अंतर्गत पीड़ित को तुरंत ई-जीरो एफआईआर नंबर उपलब्ध कराया जाता है। चौथे चरण में समीक्षा एवं हस्‍तांतरण के अंतर्गत राज्य स्तरीय साइबर पुलिस स्टेशन द्वारा समीक्षा कर प्रकरण संबंधित क्षेत्रीय पुलिस थाने भेजा जाता है। पांचवे एवं अंतिम चरण में नियमित एफआईआर दर्ज की जाती है, जिसमें  शिकायतकर्ता को 3 दिवस के भीतर अपने नजदीकी साइबर पुलिस स्टेशन में ई-जीरो एफआईआर को नियमित एफआईआर में परिवर्तित कराने की प्रक्रिया पूर्ण करनी होती है।

    साइबर अपराध में ‘गोल्डन ऑवर’ का महत्व

    साइबर अपराध में धोखाधड़ी के बाद के पहले 2 घंटे को “गोल्डन ऑवर” माना जाता है। जिसमें यदि पीड़ित तुरंत 1930 पर संपर्क करता है, तो I4C बैंकों के सहयोग से अपराधी के खाते में पहुंचने से पहले ही राशि को फ्रीज (रोक) किया जा सकता है। ई-जीरो एफआईआर के माध्यम से आईपी लॉग, ट्रांजैक्शन आईडी जैसे महत्वपूर्ण डिजिटल साक्ष्य कानूनी रूप से तत्काल सुरक्षित किए जाते हैं।

    देश में कहीं से भी शिकायत दर्ज करने की सुविधा से क्षेत्राधिकार से मुक्ति मिलती है। डिजिटल रिकॉर्ड के माध्यम से केस की स्थिति ऑनलाइन देखने की सुविधा प्राप्‍त होती है। एफआईआर जल्दी दर्ज होने से बैंकिंग चैनल सक्रिय हो जाते हैं, जिससे पैसा वापस मिलने की संभावना बढ़ जाती है। पीड़ित सीधे पोर्टल पर स्क्रीनशॉट और रसीदें अपलोड कर सकते हैं। 

    मध्यप्रदेश पुलिस द्वारा इस प्रणाली के लागू होने से यह स्‍पष्‍ट है कि तकनीक के माध्यम से न्याय को न केवल तेज, बल्कि आम नागरिकों के लिए अधिक सुलभ बनाया गया है।

  • साईबर तहसील से समय सीमा में होने लगे नामांतरणःकरण सिंह वर्मा

    साईबर तहसील से समय सीमा में होने लगे नामांतरणःकरण सिंह वर्मा

    भोपाल 24 दिसंबर(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)। राजस्व मंत्री श्री करण सिंह वर्मा ने कहा है कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में पिछले दो वर्षों में राजस्व प्रशासन को अधिक पारदर्शी, त्वरित और जनोन्मुखी बनाने की दिशा में ऐतिहासिक कार्य किए गए हैं।राजस्व विभाग द्वारा चलाए गए अभियानों और तकनीकी नवाचारों से नागरिकों को बड़ी राहत मिली है तथा लंबे समय से लंबित मामलों का तेजी से निराकरण संभव हुआ है।राजस्व मंत्री श्री वर्मा बुधवार को कुशाभाऊ ठाकरे अंतर्राष्ट्रीय कन्वेंशन सेंटर में विभाग की दो वर्ष की उपलब्धियों एवं नवाचारों पर पत्रकारों से चर्चा कर रहे थे। इस दौरान प्रमुख सचिव राजस्व श्री विवेक पोरवाल, आयुक्त राजस्व श्रीमती अनुभा श्रीवास्तव सहित अन्य विभागीय अधिकारी उपस्थित थे।


    मंत्री श्री वर्मा ने कहा कि राजस्व विभाग ने प्रकरणों के त्वरित समाधान के लिए वर्ष 2024-25 में ‘’राजस्व महाअभियान” के तीन चरण संचालित किए,जिनमें एक करोड़ से अधिक राजस्व प्रकरणों का निराकरण किया गया।उन्होंने कहा कि प्रकरणों के शीघ्र निराकरण के लिए राजस्व न्यायालयों में न्यायिक एवं गैर-न्यायिक कार्यों के लिए पृथक-पृथक अधिकारियों की नियुक्ति की गई है। मध्यप्रदेश देश का पहला राज्य है 24 जिलों में जिसने राजस्व न्यायालयों के लिए समर्पित अधिकारियों की नियुक्ति कर त्वरित एवं नियमित न्यायिक कार्यवाही सुनिश्चित की है।


    मंत्री श्री वर्मा ने “सायबर तहसील” को विभाग की बड़ी उपलब्धि बताते हुए कहा कि 29 फरवरी 2024 से नामांतरण की प्रक्रिया पूरी तरह पेपरलेस और फेसलेस कर दी गई है। अब 20 दिनों के भीतर नामांतरण पूरा कर आदेश व्हाट्सएप एवं ई-मेल के माध्यम से उपलब्ध कराया जा रहा है। सायबर तहसील के माध्यम से अब तक 6 लाख 26 हजार से अधिक नामांतरण प्रकरणों का निराकरण किया गया है, जिसके लिए इसे प्रधानमंत्री उत्कृष्टता प्रमाण पत्र भी प्राप्त हुआ है। आंशिक खसरा प्रक्रिया को भी ऑनलाइन किया गया है, जिससे प्रतिवर्ष लगभग 8 लाख नागरिक लाभान्वित होंगे तथा विवादित प्रकरणों का आपसी सहमति से त्वरित समाधान संभव होगा।


    मंत्री श्री वर्मा ने कहा कि स्वामित्व योजना के तहत गांवों की आबादी में निवासरत नागरिकों को भू-अधिकार पत्र प्रदान किए गए हैं। अब तक 39 लाख 60 हजार से अधिक लोगों को स्वामित्व अधिकार पत्र वितरित किए जा चुके हैं। इस तरह प्रदेश में योजना का 94 प्रतिशत कार्य पूर्ण हो चुका है।


    मंत्री श्री वर्मा ने कहा कि मध्यप्रदेश देश का पहला राज्य है जहाँ ड्रोन एवं जियो फेंस तकनीक का उपयोग कर त्रुटिरहित फसल गिरदावरी कराई जा रही है। इससे किसानों को वास्तविक नुकसान का लाभ समय पर मिल सकेगा। वर्ष 2025-26 में अब तक बाढ़ एवं अतिवृष्टि से प्रभावित नागरिकों को 2 हजार 68 करोड़ 99 लाख रुपये की सहायता राशि वितरित की जा चुकी है।


    भू-अर्जन प्रक्रिया को पारदर्शी और समयबद्ध बनाने के लिए आरसीएमएस पोर्टल पर एलएएमएस मॉड्यूल विकसित किया गया है।आरसीएमएस के माध्यम से पिछले दो वर्षों में 41.68 लाख प्रकरणों में से 94% से अधिक प्रकरणों का समय सीमा में निराकरण किया गया। राजस्व संग्रहण में भी प्रदेश ने उल्लेखनीय प्रगति की है। वर्ष 2024-25 में 700 करोड़ रुपये के लक्ष्य के विरुद्ध 1048 करोड़ रुपये का संग्रहण किया गया है, जबकि वर्ष 2025-26 में 1000 करोड़ रुपये का संग्रहण संभावित है।


    मंत्री श्री वर्मा ने कहा कि प्रदेश में राजस्व प्रशासन को मजबूत करने के लिए 1974 करोड़ रुपये की लागत से 324 कार्यालय भवन पूर्ण किए जा चुके हैं तथा 114 भवन प्रगतिरत हैं। इसके अतिरिक्त 261 आवासीय भवनों को भी स्वीकृति दी गई है। विभाग को सुदृढ़ करने के लिए 5281 पटवारियों एवं 136 नायब तहसीलदारों की भर्ती की गई है।
    मंत्री श्री वर्मा ने कहा कि भू अभिलेख पोर्टल का नवीन संस्करण 2.0 पूरे प्रदेश में लागू किया गया है, जिससे नागरिक अपनी भूमि का अभिलेख, डिजिटल नक्शा एवं प्रमाणित प्रतिलिपि मोबाइल एप के माध्यम से प्राप्त कर सकते हैं।साथ ही भूमि अभिलेखों के डिजिटाइजेशन का बड़ा अभियान प्रारंभ किया गया है जिसके अंतर्गत 15 करोड़ पुराने अभिलेखों को डिजिटल स्वरूप में परिवर्तित किया जाएगा। अब तक 1.59 करोड़ स्कैनिंग पूर्ण की जा चुकी है
    मंत्री श्री वर्मा ने आगामी तीन वर्षों की कार्ययोजना की जानकारी देते हुए कहा कि विभाग द्वारा विश्वास आधारित डायवर्जन प्रक्रिया लागू करने की योजना है। प्रदेश के नक्शाविहीन ग्रामों का नक्शा तैयार किया जायेगा एवं भू-अर्जन प्रकरणों में संपूर्ण प्रक्रिया को ऑनलाइन किया जायेगा।

  • चुनाव नहीं हुए पर सहकारी आंदोलन सफल,विश्वास सारंग का दावा

    चुनाव नहीं हुए पर सहकारी आंदोलन सफल,विश्वास सारंग का दावा

    भोपाल,24 दिसंबर(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)। सहकारी पैक्स समितियों तक के चुनाव न कराए जाने से सहकारिता आंदोलन में आम किसानों की सहभागिता समाप्त हो गई है। इसके बावजूद राज्य के सहकारिता मंत्री विश्वास सारंग का दावा है कि सहकारी आंदोलन सफल हो रहा है।राजधानी के अपेक्स बैंक सभागार में पहले तो उन्होंने खेलों में पदक जीतने वाले युवाओं की सफलता को अपनी कुशलता बताया बाद में सहकारिता के क्षेत्र में केन्द्रीय सहयोग का हवाला देकर अपनी पीठ थपथपाई।


    सरकार के दो साल पूरे होने पर शाबासी लेने पहुंचे मंत्री से जब पूछा गया कि धारा 11 के मापदंडों के अनुसार बैंक पूंजी विहीन हो गए हैं इस पर सरकार क्या कर रही है तो उन्होंने कहा कि हमने बैंकों को पूंजी मुहैया कराई है । उन्होंने कहा कि संस्थाओं के चुनाव कानूनी तौर पर करा लिये जाते हैं इससे हमें कामकाज चलाने लायक वैधानिक अधिकार मिल जाते हैं। सहकारी समितियों ने किसानों को कर्ज भी मुहैया कराया है और वसूली की बिगड़ी चाल भी सुधारी है। उन्होंने कहा कि भविष्य में हम किसानों को घर घर खाद पहुंचाने की व्यवस्था कर रहे हैं जो देश में अनूठी मिसाल के रूप में गिनी जाएगी।


    कंपनी के तौर पर चलाई जा रही सहकारी योजनाओं के आरोप से असहमति जताते हुए उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की डबल इंजन सरकार की परिकल्पना जहाँ केंद्र और राज्य एक साझा लक्ष्य, साझा गति और साझा परिणाम के साथ काम करते हैं, आज मध्यप्रदेश में ज़मीन पर साकार रूप ले रही है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के सक्षम नेतृत्व में मध्यप्रदेश ने बीते दो वर्षों में सहकारिता, खेल एवं युवा कल्याण के क्षेत्र में ऐतिहासिक उपलब्धियाँ हासिल की हैं।


    मंत्री श्री सारंग ने कहा कि प्रदेश के खिलाड़ी आज राष्ट्रीय ही नहीं बल्कि अंतर्राष्ट्रीय मंचों पर पदक अर्जित कर देश और प्रदेश का नाम रोशन कर रहे हैं। वर्ष 2024 में पेरिस (फ्रांस) में आयोजित ओलम्पिक व पैरा ओलम्पिक 2024 में प्रदेश के खिलाड़ियों ने प्रतिभागिता कर पदक अर्जित किये। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय स्तर पर भी मध्यप्रदेश ने खेलों में निरंतर उत्कृष्ट प्रदर्शन किया है। खेलो इंडिया यूथ गेम्स, तमिलनाडु में भी प्रदेश के खिलाड़ियों ने 29 पदक जीतकर अपनी प्रतिभा का परिचय दिया। इसी प्रकार 38वें नेशनल गेम्स, उत्तराखण्ड में मध्यप्रदेश के खिलाड़ियों ने 67 पदक अर्जित कर राज्यों में तीसरा स्थान प्राप्त किया।


    वर्ष 2024-25 की उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए मंत्री श्री सारंग ने बताया कि प्रदेश के खिलाड़ियों ने अंतर्राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में कुल 57 पदक तथा राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में 391 पदक अर्जित किए। हॉकी एशिया कप 2025, 16वीं एशियन शूटिंग चैंपियनशिप कजाकिस्तान, खेलो इंडिया वाटर स्पोर्ट्स फेस्टिवल श्रीनगर एवं एशियन केनो स्लालम चैंपियनशिप चीन में मध्यप्रदेश के खिलाड़ियों ने शानदार प्रदर्शन कर प्रदेश को शीर्ष राज्यों की श्रेणी में स्थापित किया है।


    मंत्री श्री सारंग ने कहा कि किसानों को बेहतर सेवाएं प्रदान करने हेतु ऑनलाइन केसीसी आवेदन, एकीकृत साख सीमा तथा नकद-वस्तु ऋण की बाध्यता समाप्त करने जैसे सुधार प्रस्तावित हैं। सभी PACS में ई-PACS के माध्यम से ऑनलाइन सेवाएं और SMS सूचना अनिवार्य की जाएगी। उन्होने बताया कि कमजोर जिला सहकारी बैंकों को आर्थिक सहायता देकर 0% ब्याज पर फसल ऋण उपलब्ध कराया जाएगा। डिफॉल्टर किसानों को मुख्यधारा में लाने हेतु एकमुश्त समझौता योजना तथा आर्थिक अनियमितताओं से प्रभावित किसानों को जांच अवधि में राहत देने की व्यवस्था हेतु न्याय योजना प्रस्तावित है।


    मंत्री श्री सारंग ने बताया कि राष्ट्रीय सहकारिता नीति 2025 के अनुरूप राज्य की सहकारिता नीति में आवश्यक संशोधन किए जाएंगे। जनवरी 2026 में IBPS के माध्यम से 2000 से अधिक पदों पर भर्ती एवं सतत प्रशिक्षण की योजना है। उन्होंने कहा कि CPPP मॉडल के विस्तार से सहकारिता में निजी निवेश और नवाचार को बढ़ावा दिया जाएगा। अंतर्राष्ट्रीय सहकारिता वर्ष 2025 अंतर्गत उत्कृष्ट संस्थाओं को पुरस्कृत किया जाएगा तथा जिला सहकारी बैंकों में NEFT/RTGS, QR कोड एवं इंटरनेट बैंकिंग जैसी आधुनिक तकनीकी सुविधाएं लागू की जाएंगी।

  • कर्ज लेकर खरीदा अनाज न बेचा न घोटाला रोक पाया खाद्य विभाग

    कर्ज लेकर खरीदा अनाज न बेचा न घोटाला रोक पाया खाद्य विभाग


    मंत्री गोविंद राजपूत ने माना सरकार पर उधार है खाली गोदामों का किराया


    भोपाल, 24 दिसंबर(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)। खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री गोविंद सिंह राजपूत आज जब सरकार की दो सालों की उपलब्धियां सुनाने पहुंचे तो पत्रकारों ने उन्हें विभागीय अव्यवस्थाओं को लेकर घेर लिया। पत्रकारों ने पूछा कि जिन ट्रकों से खाद्य विभाग के सील लगे अनाज से भरे बोरे पकड़े गए उनके खिलाफ अब तक आपराधिक प्रकरण क्यों नही दर्ज करवाए गए हैं। इस पर मंत्रीजी निरुत्तर हो गए।


    पत्रकारों ने पूछा कि सरकार कर्ज लेकर खरीदा गया अनाज नहीं बेच पा रही है, अपनी नाकामी छुपाने के लिए वह केन्द्र पर खरीदी करने का दबाव बना रही है। ऐसे में सरकार के दो साल कैसे सफल कहे जा सकते हैं। इस पर मंत्री ने कहा कि हम आगामी सिंहस्थ को देखते हुए अनाज का भंडारण कर रहे हैं। सिंहस्थ के दौरान हमें करोड़ों लोगों को भोजन कराना पड़ेगा। अनाज खरीदी के लिए हमें बैंकों से कर्ज लेना पड़ता है। सरकार पर ब्याज चुकाने का बोझ बढ़ता जा रहा है ऐसे में हमें केन्द्र से अनुरोध करना पड़ता है। उन्होंने माना कि किसानों ने बड़ी तादाद में भंडारगृह बना लिए हैं ऐसे में सरकार पर किराए की उधारी बढ़ती जा रही है। हम चाहते हैं कि ये गोदाम खाली हों ताकि सरकार को बेवजह किराया न भुगतना पड़े।


    उन्होंने पहले से रटी रटाई कहानी सुनाते हुए कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में मध्यप्रदेश शासन के खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग ने विगत दो वर्षों में सार्वजनिक वितरण प्रणाली, उपभोक्ता संरक्षण, किसान हित तथा गैस आपूर्ति के क्षेत्र में कई महत्वपूर्ण उपलब्धियाँ अर्जित की हैं। विभाग की ओर से योजनाओं के क्रियान्वयन में पारदर्शिता एवं तकनीक आधारित निगरानी व्यवस्था को प्राथमिकता दी गई है।


    खाद्य मंत्री श्री राजपूत ने बताया कि प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना के अंतर्गत प्रदेश के 5 करोड़ 25 लाख से अधिक हितग्राहियों को लगभग 22 हजार 800 करोड़ रुपये मूल्य का नि:शुल्क खाद्यान्न वितरित किया गया। राशन वितरण प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के उद्देश्य से मुख्यमंत्री अन्न सेवा जागरूकता कार्यक्रम लागू किया गया, जिसके तहत हितग्राहियों को एसएमएस के माध्यम से राशन आगमन एवं वितरण की जानकारी दी जा रही है। इसके अतिरिक्त 26 जनवरी एवं 2 अक्टूबर को ग्राम सभाओं में पात्र हितग्राहियों की सूची का वाचन किया जा रहा है।


    खाद्य मंत्री श्री राजपूत ने बताया कि विभाग द्वारा ई-केवाईसी प्रक्रिया में उल्लेखनीय प्रगति की गई है। प्रदेश में दो वर्ष में लगभग 1 करोड़ 70 लाख से अधिक हितग्राहियों का ई-केवाईसी सत्यापन पूर्ण किया जा चुका है। अब तक 4 करोड़ 97 लाख हितग्राहियों के ई-केवाईसी कराये जा चुके हैं। इस तरह से अब तक लगभग 93 प्रतिशत ई-केवाईसी पूर्ण हो चुके हैं। बायोमेट्रिक के साथ-साथ फेस ऑथेंटिकेशन के माध्यम से भी ई-केवाईसी की सुविधा उपलब्ध कराई गई है। 5 वर्ष से कम आयु के बच्चों, 80 वर्ष से अधिक आयु के वृद्धों एवं दिव्यांगजनों सहित लगभग 15 लाख हितग्राहियों को ई-केवाईसी से छूट प्रदान की गई है। साथ ही 14 लाख नए पात्र हितग्राहियों को जोड़कर पात्रता पर्ची जारी की गई है।


    खाद्य मंत्री श्री राजपूत ने बताया कि वन नेशन–वन राशन कार्ड योजना के अंतर्गत प्रतिमाह औसतन 39 हजार परिवार अन्य राज्यों में तथा लगभग 6 हजार परिवार अन्य राज्यों से मध्यप्रदेश में नि:शुल्क राशन प्राप्त कर रहे हैं। इसके अलावा लगभग 16 लाख परिवार प्रतिमाह अंतर-जिला पोर्टेबिलिटी का लाभ ले रहे हैं। वहीं जनजाति एवं पहुंचविहीन 89 गांवों में “आपका राशन आपके द्वार” योजना के माध्यम से घर-घर राशन पहुंचाया जा रहा है। मुख्यमंत्री अन्नदूत योजना के अंतर्गत वाहनों में जीपीएस प्रणाली स्थापित कर राज्य स्तरीय कंट्रोल कमांड सेंटर से निगरानी की जा रही है। एलपीजी आपूर्ति के क्षेत्र में उज्ज्वला एवं गैर-उज्ज्वला योजनाओं के अंतर्गत प्रदेश की बहनों की 6 करोड़ 17 लाख गैस रिफिल कराई गईं, जिसमें 911 करोड़ रुपये का अनुदान प्रदान किया गया। शहरी क्षेत्रों में घर-घर पाइप के माध्यम से गैस पहुंचाने के लिए शहरी गैस वितरण नेटवर्क का विस्तार किया जा रहा है।


    खाद्य मंत्री श्री राजपूत ने बताया कि वेयरहाउसिंग व्यवस्था को सुदृढ़ करने के लिए वेयरहाउसिंग कॉर्पोरेशन द्वारा नमी मापक, फ्यूमिगेशन एवं निरीक्षण से संबंधित तीन मोबाइल ऐप विकसित किए गए हैं, जिससे अनाज भंडारण की रियल टाइम मॉनिटरिंग सुनिश्चित की जा रही है। किसान हित में विभाग द्वारा समर्थन मूल्य पर गेहूं एवं धान की खरीदी की गई। लगभग 28 लाख किसानों से फसल खरीदी कर 51 हजार करोड़ रुपये का भुगतान किया गया। गेहूं की खरीदी में 175 रुपये प्रति क्विंटल बोनस देकर 2600 रुपये प्रति क्विंटल की दर से भुगतान किया गया।


    खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री गोविंद सिंह राजपूत ने कहा है कि नाप-तौल विभाग द्वारा विगत दो वर्षों में सत्यापन एवं निरीक्षण के माध्यम से 49 करोड़ 14 लाख रुपये का राजस्व अर्जित किया गया है। निरीक्षण के दौरान अनियमितता पाए जाने पर 11 हजार 700 प्रकरण पंजीबद्ध कर लगभग 4 करोड़ 50 लाख रुपये की दंड राशि वसूल की गई। उपभोक्ता विवादों के त्वरित निराकरण के लिए उपभोक्ता आयोगों का कंप्यूटरीकरण किया गया, जिसके परिणामस्वरूप दो वर्षों में 3 लाख 7 हजार से अधिक प्रकरणों का निराकरण किया गया। विभाग द्वारा आगामी अवधि में राशन दुकानों को मुख्यमंत्री पोषण मार्ट के रूप में विकसित करने, सॉफ्टवेयर सिस्टम के एकीकरण, उन्नत तकनीक से राशन वितरण तथा सिंहस्थ 2028 के लिए मेला क्षेत्र में राशन एवं गैस आपूर्ति की विस्तृत व्यवस्था किए जाने की कार्य योजना भी तैयार की गई है।

  • राज्य की खेती अब सोलर ऊर्जा से होगी बोले मंत्री राकेश शुक्ल

    राज्य की खेती अब सोलर ऊर्जा से होगी बोले मंत्री राकेश शुक्ल


    नवीन और नवकरणीय ऊर्जा विभाग की उपब्धियों पर मंत्री राकेश शुक्ला ने प्रकाश डाला


    भोपाल23 दिसंबर(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)। मध्यप्रदेश आज ऊर्जा सरप्लस राज्य बनकर सामने आया है। हमने ताप ऊर्जा, जल ऊर्जा, पन बिजली परियोजनाओं के साथ साथ सोलर बिजली बनाने में भी रिकार्ड सफलता पाई है। हमारा प्रयास है कि जल्दी ही राज्य की खेती की जरूरतें हम सोलर ऊर्जा से पूरी कर सकें। इसके लिए हमने इस साल पचास हजार किसानों को सब्सिडी आधारित सोलर पंप देने का फैसला किया है। लगभग चौदह हजार किसानों ने अपनी राशि भी जमा कर दी है ।जिन्हें सब्सिडी आधारित सोलर पंप और पूरा सैटअप दिया जा रहा है।


    विभागीय मंत्री राकेश शुक्ला के साथ ,प्रदेश के अतिरिक्त मुख्य सचिव ऊर्जा श्री मनु श्रीवास्तव(आईएएस) और मध्य प्रदेश ऊर्जा विकास निगम लिमिटेड (MPUVNL) के प्रबंध संचालक (MD) अमनवीर सिंह बैंस (Amanbir Singh Bains) भी इस अवसर पर उपस्थित थे।


    श्री बैंस ने बताया कि नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय के अंतर्गत नवरत्न सीपीएसयू, सोलर एनर्जी कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (एसईसीआई) ने सीपीएसयू योजना के अंतर्गत धार में 200 मेगावाट की सौर परियोजना तथा राज्य में 1000 मेगावाट क्षमता की बैटरी स्टोरेज परियोजना स्थापित करने के लिए मध्य प्रदेश सरकार के साथ समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए हैं। ये प्रोजेक्ट राज्य की गैर पारंपरिक ऊर्जा जरूरतें पूरी करने में मील का पत्थर साबित होगा।


    उल्लेखनीय है कि समझौता ज्ञापन पर शिवकुमार वी वेपाकोम्मा, निदेशक (विद्युत प्रणाली) एसईसीआई और मनु श्रीवास्तव, आईएएस, अतिरिक्त मुख्य सचिव (एनआरई) ने मध्य प्रदेश के नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री राकेश शुक्ला और आर पी गुप्ता, आईएएस (सेवानिवृत्त) अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक, एसईसीआई की उपस्थिति में हस्ताक्षर किए थे।


    200 मेगावाट की सौर परियोजना 500 मेगावाट के उस समझौते का हिस्सा है जिसे 2023 में एमपी पावर मैनेजमेंट कंपनी लिमिटेड (एमपीपीएमसीएल) के साथ 25 साल की अवधि के लिए निष्पादित किया गया था जिसके तहत एसईसीआई राज्य को बिजली की आपूर्ति करेगी। एसईसीआई ने मध्य प्रदेश राज्य में नवीकरणीय ऊर्जा के विस्तार और विकास के लिए 2500 करोड़ रुपये का चरणबद्ध पूंजीगत व्यय प्रस्तावित किया है।

  • ट्रांसपोर्टरों से वसूला चंदा बांटते तो आलोचना न होतीःराव उदय प्रताप सिंह

    ट्रांसपोर्टरों से वसूला चंदा बांटते तो आलोचना न होतीःराव उदय प्रताप सिंह


    राव उदयप्रताप सिंह ने गिनाई परिवहन विभाग की दो साल की उपलब्धियां


    भोपाल 22 दिसंबर(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)। परिवहन मंत्री राव उदय प्रताप सिंह ने भरी पत्रकार वार्ता में स्वीकार किया कि यदि परिवहन माफिया की अवैध वसूली की राशि हम बांटते रहते तो हमारे विभाग की आलोचना नहीं हो रही होती। हमने परिवहन नाके बंद करके जो जांच चौकियां स्थापित की हैं उनसे टैक्स चोरी का गैरकानूनी माल ढोने वालों में हड़कंप मचा हुआ है। अच्छा कारोबार करने वाले ट्रांसपोर्टरों को परेशान करने वाले अधिकारियों कर्मचारियों के खिलाफ भी कड़ी कार्रवाई की गई है। परिवहन सुधार के कई अन्य कार्यक्रम भी लगातार जारी रहेंगे।


    कुशाभाऊ ठाकरे सभागृह में आयोजित इस पत्रकार वार्ता में प्रदेश की परिवहन व्यवस्था को लेकर कई तीखे सवाल किए गए । इन सवालों से बचने के लिए मंत्रीजी ने शिक्षा विभाग के कार्यकलापों पर अधिक समय दिया और ट्रांसपोर्ट विभाग की बखिया उधेड़े जाने से बचने का पूरा जतन किया। परिवहन विभाग को लेकर मंत्री ने कहा कि जनवरी से आम जनता को सार्वजनिक परिवहन सेवा का लाभ मिलेगा। वाहन और सारथी पोर्टल पर कई सेवाएं उपलब्ध कराई गई हैं। ई-ड्राइविंग लाइसेंस की सुविधा शुरू की गई है और एमपी ऑनलाइन सेंटरों को सुविधा केंद्र के रूप में मान्यता दी गई है। इलेक्ट्रिक वाहनों पर टैक्स पूरी तरह माफ किया गया है और पुराने वाहनों को स्क्रैप कराने पर टैक्स में छूट दी जा रही है। ग्वालियर, इंदौर, भोपाल, जबलपुर, सतना, सिंगरौली, उज्जैन और देवास में ऑटोमेटिक टेस्टिंग स्टेशन स्थापित किए गए हैं।


    मंत्री ने बताया कि 1 जुलाई 2024 से चेकपोस्ट बंद हैं और चलित व्यवस्था के तहत काम हो रहा है। डेढ़ साल में करीब 6 फीसदी कर्मचारियों पर कार्रवाई की गई है। आरटीओ दलालों को लेकर उन्होंने कहा कि सभी सेवाएं ऑनलाइन हैं, जनता को दलालों के चक्कर में नहीं पड़ना चाहिए।

  • नीतिश के हिजाब उठाने पर हंगामा क्यों

    नीतिश के हिजाब उठाने पर हंगामा क्यों


    बिहार के मुख्यमंत्री नीतिश कुमार ने जब यूनानी चिकित्सा की डॉक्टर नुसरत परवीन का हिजाब उठाकर उसकी आंखों की चमक देखने का प्रयास किया तो कट्टर पंथियोंऔर नीतिश विरोधियों ने अपनी ओछी राजनीति शुरु कर दी। इस घटनाक्रम को नीतिश विरोधियों ने महिला और इस्लाम का अपमान बताना शुरु कर दिया । इस शोरगुल से घबराई नुसरत अब सरकारी नौकरी ज्वाईन करने को तैयार हो गई है। नीतिश ने कभी नरक बन चुके बिहार को तेजी से विकसित और आत्मनिर्भर हो रहे प्रांत में बदलने का भगीरथ किया है। दंगे,लूट और अराजकता के दौर में जा चुके बिहार की गाड़ी को पटरी पर लाना कभी लगभग असंभव माना जाता रहा है। ऐसे में बिहार की तरुणाई की आंखों में विकास को लेकर जो संकल्प और दृढ़ विश्वास पनपा है वह अद्भुत है। युवाओं के मुस्कुराते चेहरे आज बिहार के नव सूर्योदय की झलक दिखाते हैं। कोई शिल्पकार अनगढ़ पत्थर को तराशकर उसमें मूर्ति का सौंदर्य उभारता है तो वह बार बार हर कोण से उसकी मुस्कान को उभारने का प्रयास करता है । नीतिश कुमार भी कुछ इसी तरह बिहार के नागरिकों के चेहरों पर मुस्कान लाने का प्रयास कर रहे हैं। उम्र के 74 वें पड़ाव पर वे आश्वस्त होना चाहते हैं कि बिहार के युवाओं की आंखों में आगे बढ़ने के कैसे स्वप्न पल रहे है।उनकी राजनीतिक पारी का लंबा इतिहास रहा है। उस यात्रा में नुसरत जैसी न जाने कितनी नारियां उनके साथ कदम मिलाकर चलती रहीं हैं। इतने लंबे इतिहास में कभी नीतिश कुमार को अय्याश या चरित्र हीन व्यक्ति नहीं माना गया है। वे एक संवेदनशील राजनेता हैं जो अपने राज्य की बेहतरी के लिए दुर्दांत माफिया से भी टकराता रहा है। बिहार के आपराधिक गिरोह जिस तरह संसाधनों को लूटते रहे हैं और वहां की तरुणाई मजबूर होकर अन्य राज्यों व दूर देशों में काम करने को मजबूर की जाती रही हो वहां एक युवती वो भी मुस्लिम समाज के बीच से निकलकर डाक्टर बनने जा रही हो ये सुखद आश्चर्य से कम नहीं है। उसकी आंखों की चमक देखने का प्रयास करने वाले नीतिश कुमार अकेले व्यक्ति नहीं हैं । जिन चयनकर्ताओं ने उसे एक बड़ी सामाजिक जिम्मेदारी के लिए चुना वे भी उसकी योग्यता और सामाजिक समर्पण के कायल थे तभी तो उन्होंने उसे नौकरी के लिए चुना। ये नियुक्ति नीतिश कुमार के निर्देश पर नहीं हुई थी। जाहिर है कि उस क्षण को जिसे नीतिश कुमार भाव विभोर होकर देखने का प्रयास कर रहे थे उसे पूरी दुनिया में रह रहे बिहारी भी प्रसन्न भाव से देख रहे हैं। केवल कुछ कट्टरपंथी और विरोधी इस पर बखेड़ा खड़ा करने की कोशिश कर रहे हैं। जिन्होंने इतिहास पढ़ा है उन्होंने अंग्रेजों, मुगलों, जमींदारों, छुटभैये राजाओं की वे कहानियां खूब पढ़ी हैं जिनमें वे राज्य की नवयुवतियों को अपनी सेज पर ले जाने का कुकर्म करते देखे गए थे। इन्हीं बैचैनियों से निकलकर लोकतांत्रिक व्यवस्था ने जन्म लिया। आज कोई भी शासक या राजा ऐसी जुर्रत भी नहीं कर सकता है। नुसरत की उम्र तो उनके नाती पोतियों के बराबर है।वे सार्वजनिक स्थल पर उसके साथ अश्लील व्यवहार करने की सोच भी कैसे सकते हैं। वे जिस प्रशंसा भरे भाव से नुसरत को देख रहे थे वह दृश्य न केवल बिहार की आगे बढ़ती एक लड़की की कहानी सुनाता है बल्कि भारत के मुसलमानों की आगे बढ़ती नई पीढ़ी का दृष्टांत भी देता है। मुस्लिम वोटरों के जो ठेकेदार बरसों से भाजपा और उसके सहयोगी गैर कांग्रेसी राजनीतिक दलों को मुस्लिम विरोधी बताते रहे हैं वे इस घटनाक्रम से जरूर बैचेन घूम रहे हैं। उन्हें भय है कि यदि भारत के मुसलमानों की नई पीढ़ी के बीच से हिंदुत्व वादी राजनीति को मुस्लिम विरोधी बताने वाला नेरेटिव टूट गया तो वे कभी सत्ता का ख्वाब भी नहीं देख पाएंगे। जिस तरह हिंदू मुस्लिम और जातिगत व भाषाई राजनीति करके उन्होंने भारतीय समाज में फूट के बीज बोए थे वह षड़यंत्र धराशायी हो जाएगा। इसीलिए वे तरह तरह के दुष्प्रचार करके समाज को भ्रमित करने का प्रयास कर रहे हैं। ये अच्छा है कि नुसरत ने उनके बहकावे में न आकर अपने पैरों पर खड़े होकर चिकित्सा के माध्यम से समाजसेवा का निर्णय लिया है वह प्रशंसनीय है और स्वागत करने योग्य है। नुसरत के समान देश के सभी युवाओं को संकरे पैमानों से बाहर आकर विकास यात्रा का सहयात्री बनना है,तभी हम एक नए भारत का स्वप्न साकार कर पाएंगे।

  • विश्व स्तरीय सुविधाओं का लक्ष्य पूरा करेंगे शहरी निकायःकैलाश विजय वर्गीय

    विश्व स्तरीय सुविधाओं का लक्ष्य पूरा करेंगे शहरी निकायःकैलाश विजय वर्गीय

    भोपाल, 18 दिसंबर(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)। नगरीय विकास एवं आवास मंत्री श्री कैलाश विजयवर्गीय ने कहा है कि एक अनुमान के मुताबिक वर्ष 2047 में मध्यप्रदेश की कुल आबादी का लगभग 50 प्रतिशत आबादी शहरी क्षेत्रों में निवास करेगी। इस बात को ध्यान रखते हुए शहरी क्षेत्रों में अधोसंरचना कार्यों की योजना तैयार की जा रही है। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश ने स्वच्छता के क्षेत्र में देश में विशिष्ठ स्थान बनाया है। हमारे विभाग की कोशिश होगी कि प्रदेश के शहरी क्षेत्रों का एयर क्वालिटी इंडेक्स अच्छा हो। इस वजह से शहरी क्षेत्रों में बगीचों के विकास के साथ-साथ नगरवन को भी प्रोत्साहित किया जा रहा है। मंत्री श्री विजयवर्गीय भोपाल में राज्य सरकार के विकास और सेवा के दो वर्ष पूरा होने पर आयोजित पत्रकार वार्ता को संबोधित कर रहे थे।
    मंत्री श्री विजयवर्गीय ने बताया कि प्रदेश के जो शहर नर्मदा नदी के किनारे में आते है, वहां शहरों का दूषित पानी नदीं में न मिलें। इस पर विभाग लगातार काम कर रहा है। मेट्रोपॉलिटन सिटी की चर्चा करते हुए मंत्री श्री विजयवर्गीय ने बताया कि विभाग ने इंदौर-उज्जैन और भोपाल मेट्रोपॉलिटन सिटी के विकास का कार्य शुरू कर दिया है। भोपाल मेट्रोपॉलिटन सिटी में भोपाल, सीहोर, रायसेन, विदिशा, राजगढ़ और नर्मदापुरम जिलों की प्रमुख तहसीलों को शामिल किया है। इंदौर-उज्जैन मेट्रोपॉलिटन सिटी में इंदौर, उज्जैन, देवास, शाजापुर, रतलाम और धार जिलों की प्रमुख तहसीलों को शामिल किया गया है। प्रदेश की 2 मेट्रोपॉलिटन सिटी इस तरह विकसित की जाएंगी। जहां शहरी आबादी को सभी आवश्यक बुनियादी सुविधाएं मिल सकें। मेट्रोपॉलिटन सिटी में निवेश और रोजगार पर भी ध्यान दिया जाएगा।
    मंत्री श्री विजयवर्गीय ने बताया कि विभाग की कोशिश है कि शहरी क्षेत्रों में रहने वाले नागरिकों की अधिक से अधिक सेवाओं का डिजिटलीकरण ऑनलाइन हों। इसको ध्यान में रखते हुए हमने ई-नगरपालिका विकसित की है। प्रदेश के शहरों को ग्रीन सिटी के रूप में विकसित किया जा रहा है। नगरीय सेवाओं में सोलर एनर्जी का अधिक से अधिक उपयोग किया जाएं। इसको सुनिश्चित किया जा रहा है। राज्य सरकार का प्रयास है कि नगरीय निकाय आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर हो। इसके लिये शहरी क्षेत्रों की सम्पत्तियों का जीआई मेपिंग किया जा रहा है।
    प्रधानमंत्री आवास योजना शहरी में एक लाख 60 हजार से अधिक आवासों का निर्माण पूरा। प्रधानमंत्री आवास योजना के क्रियान्वयन में मध्यप्रदेश को बेस्ट परफॉर्मिंग अवार्ड की श्रेणी में दूसरा स्थान।
    उल्लेखनीय बिंदु-
    अमृत 2.0 में 300 परियोजनाओं का कार्य पूर्ण।
    जल गंगा संवर्द्धन अभियान में 3 हजार 323 जल संरचनाओं का, 74 जल संग्रहण संरचनाओं का लोकार्पण।
    स्वच्छ सर्वेक्षण 2024 में 8 शहरों का राष्ट्रीय पुरस्कार। साथ ही इंदौर ने देश के नम्बर वन शहर का सम्मान लगातार 8 साल बनायें रखा।
    कार्बन क्रेडिट से राशि अर्जित करने वाले इंदौर देश का प्रथम शहर
    दीनदयाल रसोई योजना में संचालित 56 केन्द्रों को बढ़कर इन्हें 191 केन्द्र किया गया।
    पीएम स्वनिधि योजना अंतर्गत 9 लाख से अधिक रहणी पटरी वालों को 14 लाख से अधिक ऋण प्रकरण मबजूत। मध्यप्रदेश को नवाचार और सर्वोत्तम अभ्यास की श्रेणी में पहला स्थान,
    आजीविकास मिशन में 3 लाख युवाओं को कौशल प्रशिक्षण दिलाया गया। 1 लाख 70 हजार युवाओं को स्व-रोजगार से जोड़ा गया।
    प्रदेश में 65 हजार स्व सहायता समूह का गठन। 6 लाख से अधिक परिवारों को स्व-सहायता समूह में जोड़ा गया।
    इंदौर में मेट्रो परिचालन शुरू भोपाल में दिसम्बर 2025 में ही शुरू होगा मेट्रो।
    हाउसिंग बोर्ड द्वारा एमपी ऑनलाईन के माध्यम से 532 करोड़ की सम्पत्तियों का विक्रय।
    गीता भवन स्थापना योजना 5 महीनों के लिये स्वीकृत।
    प्रदेश में इंटीग्रटेड टाउनशिप पॉलिसी-2025 मंजूर। प्रदेश में इलेक्ट्रिक व्हीकल पॉलिसी को भी मंजूरी।

  • मुख्यसचिव ने कहा परीक्षा को देखते तय करें गणना की तारीख

    मुख्यसचिव ने कहा परीक्षा को देखते तय करें गणना की तारीख


    भोपाल 10 दिसंबर(प्रेस इंफॉर्मेशन सेंटर)मुख्य सचिव अनुराग जैन ने सभी विभाग अध्यक्षों को निर्देश दिये है कि आगामी जनगणना 2027 के दृष्टिगत प्रशासनिक इकाइयों में जो भी परिवर्तन किये जाने हैं वे 31 दिसम्बर 2025 तक अनिवार्यतः कर लिये जांए। मुख्य सचिव श्री जैन की अध्यक्षता में बुधवार को मंत्रालय में भारत की जनगणना 2027 के दृष्टिगत राज्य स्तरीय जनगणना समन्वय समिति की बैठक संपन्न हुई।

    उल्लेखनीय है कि जनगणना के प्रथम चरण में मकान सूचीकरण एवं मकानों की गणना का कार्य 01 अप्रैल से 30 सितम्बर 2026 के दौरान 30 दिवस की अवधि में किया जायेगा। मुख्य सचिव ने सम्बंधित विभागों को यह भी सुनिश्चित करने के लिए कहा है कि स्कूली बच्चों की पढ़ाई, मानसून इत्यादि को ध्यान में रखते हुए उक्त 30 दिवस की अवधि निर्धारित की जायें।


    बैठक में बताया गया कि जनगणना के द्वितीय चरण में जनसंख्या की गणना का कार्य पूरे देश में एक साथ फ़रवरी 2027 में किया जायेगा। मुख्य सचिव श्री जैन ने स्कूल शिक्षा विभाग को निर्देश दिया गया कि वे जनगणना के द्वितीय चरण को ध्यान में रखकर वर्ष 2026-27 का शैक्षणिक कैलेंडर तैयार करें। उन्होंने परीक्षाओं की समय-सारणी इस तरह तैयार करने के निर्देश दिये है जिससे विद्यार्थीयों को कोई असुविधा नहीं हो। साथ ही सम्बंधित विभागों को यह भी निर्देश दिये गये कि वे आपस में समन्वय करते हुए जनगणना 2027 के लिए मानव संसाधन की उपलब्धता के लिए योजना तैयार करें जिससे जनगणना का कार्य सुचारू रूप से संपन्न हो सके।


    मुख्य सचिव श्री जैन ने आगामी जनगणना डिजिटल होने के मद्देनजर सर्वसम्बन्धितों को उचित समय पर युक्तियुक्त प्रशिक्षण दिए जाने की व्यवस्था करने के निर्देश दिये। श्री जैन ने जनगणना के दौरान स्व-गणना (Self-Enumeration) किये जाने के प्रावधान की सराहना की। उन्होंने सभी सम्बंधित विभागों को यह भी निर्देश दिये कि वे जनगणना 2027 के कार्य के समन्वय के लिए अपने अपने विभागों में एक नोडल अधिकारी नामित करें। जनसंपर्क विभाग को जन सामान्य में जनगणना के प्रति जागरूकता लाने एवं भ्रांतियों को दूर करने के लिए व्यापक प्रचार-प्रसार करने के निर्देश भी दिये गये ।


    मुख्य सचिव श्री जैन ने स्पष्ट रूप से कहा कि आम जन को यह बताया जाना आवश्यक होगा कि जनगणना 2027 पहली बार देश में डिजिटल होगी, जिसमें मोबाईल एप के माध्यम से आंकड़ों का संकलन एवं वेब पोर्टल के माध्यम से मैनेंजमेंट एवं मॉनिटरिंग की जाएगी। उन्होंने कहा कि इस बात का प्रचार होना चाहिए कि जनगणना अधिनियम की धारा 15 के तहत जनगणना में संकलित व्यक्तिगत जानकारियां गोपनीय होती है साथ ही इन्हें कहीं पर भी साक्ष्य के लिए उपयोग नहीं किया जा सकता।


    राज्य-स्तरीय जनगणना समन्वय समिति (SLCCC) की इस पहली बैठक में अपर मुख्य सचिव, गृह, अपर मुख्य सचिव, सामान्य प्रशासन, अपर मुख्य सचिव, पंचायत एवं ग्रामीण विकास, आयुक्त नगरीय विकास एवं आवास, सचिव, गृह एवं राज्य नोडल अधिकारी (जनगणना), निदेशक, जनगणना कार्य निदेशालय मध्यप्रदेश,राज्य सूचना विज्ञान अधिकारी, एन.आई.सी. और अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।
    अपर मुख्य सचिव, गृह श्री शिव शेखर शुक्ल ने बताया कि मध्यप्रदेश में गृह विभाग जनगणना के लिए नोडल विभाग है जो भारत सरकार, जनगणना निदेशालय एवं राज्य सरकार के विभिन्न विभागों के मध्य समन्वय स्थापित करते हुए जनगणना सम्पादन में अपनी भूमिका का निर्वहन करेगा । प्रारंभ में निदेशक, जनगणना कार्य निदेशालय द्वारा पावरपॉइंट प्रेजेंटेशन के माध्यम से जनगणना 2027 की रूपरेखा, प्रारम्भिक तैयारियां, डिजिटल रोडमैप और संगठनात्मकढांचा इत्यादि के बारे में विस्तृत रूप से अवगत कराया। उन्होंने यह बताया कि इस बार की जनगणना में स्व-गणना (Self-Enumeration)का प्रावधान भी किया जायेगा जिससे कि आम नागरिक अपनी जानकारी स्वयं दर्ज कर सकेंगे।


    निदेशक, जनगणना द्वारा बताया गया कि राष्ट्रीय महत्त्व के इस वृहद कार्य में लगभग 1 लाख 75 हजार प्रगणकों एवं पर्यवेक्षकों के अतिरिक्त अन्य प्रशासनिक अमले की भी आवश्यकता होगी। निदेशक जनगणना द्वारा अवगत कराया गया कि जनगणना के प्रथम चरण के पूर्व परीक्षण का कार्य प्रदेश में जिला रतलाम की रतलाम तहसील, जिला सिवनी की कुरई तहसील के कुछ चयनित ग्रामों में तथा ग्वालियर जिले के नगर निगम ग्वालियर के चयनित वार्डों में नवम्बर 2025 में कराया गया। पूर्व परीक्षण कार्य को राज्य शासन एवं सम्बंधित जिला प्रशासन के सहयोग से सफलतापूर्वक पूर्ण कर लिया गया है।

  • मध्यप्रदेश की विरासत को मिला जीआई टैग

    मध्यप्रदेश की विरासत को मिला जीआई टैग

    भोपाल 3 दिसंबर(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)।भारत का दिल कहे जाने वाले मध्यप्रदेश की 5 बहुत ही प्राचीन शिल्प कला को जीआई टैग के द्वारा भारत की बौद्धिक संपदा अधिकार में शुमार होने का गौरव प्राप्त हुआ है। एमएसएमई मंत्री चैतन्य कुमार काश्यप ने मध्यप्रदेश की विरासत को मिली इस ऐतिहासिक पहचान के लिए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का आभार व्यक्त करते हुए विभागीय अधिकारियों को बधाई दी है। इस उपलब्धि को जीआई मैन ऑफ इंडिया के नाम से प्रख्यात पद्मश्री डॉ. रजनी कांत ने अत्यंत गर्व का पल बताया है।

    जीआई रजिस्ट्री चेन्नई के वेबसाइट पर इन उत्पादों के सामने रजिस्टर्ड का स्टेटस आते ही संबंधित शिल्पियों में खुशी की लहर दौड़ गई और मध्यप्रदेश के लिए यह पहल करने वाले सूक्ष्म,लघु,मध्यम उद्यम विभाग सहित अन्य विभागों में भी नई चेतना आ गईं है।

    लगभग एक वर्ष पूर्व ही इन सभी के लिए जीआई का आवेदन खजुराहो स्टोन क्रॉफ्ट, बैतूल भरेवा मेटल क्रॉफ्ट, ग्वालियर पत्थर शिल्प और ग्वालियर पेपर मैशे के लिए नाबार्ड, मध्यप्रदेश ने और छतरपुर फर्नीचर के लिए सिडबी मध्यप्रदेश ने वित्तीय सहयोग प्रदान किया था। एमएसएमई विभाग मध्यप्रदेश के प्रयास से स्थानीय शिल्पियों की संबंधित संस्थाओं द्वारा यह सभी जीआई एप्लिकेशन पद्मश्री डॉ. रजनीकांत के तकनीकी सहयोग से भेजे गए थे।

    नवम्बर माह में ही पन्ना डायमंड को जीआई टैग प्राप्त हुआ है और लगभग 25 उत्पादों की जीआई मिलने की प्रक्रिया अपने अंतिम चरण में है।

  • फार्मासिस्टों के डिजिटल पंजीयन से विदेशों में भी मिलने लगीं नौकरियां

    फार्मासिस्टों के डिजिटल पंजीयन से विदेशों में भी मिलने लगीं नौकरियां


    भोपाल,30 नवंबर(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर) मध्यप्रदेश फार्मेसी काऊंसिल ने जबसे पंजीयन का सारा रिकार्ड आनलाईन करना शुरु कर दिया है तबसे देश के विभिन्न संस्थानों के साथ साथ विदेशी दवा कारोबार में भी राज्य के फार्मासिस्टों को रोजगार आसानी से मिलने लगा है।किसी भी फार्मासिस्ट के पंजीयन रिकार्ड को पूरी दुनिया में आनलाईन देखा जा सकता है और उसके दावे की सत्यता परखी जा सकती है। इस डिजिटलाईजेशन के अभियान से नकली पंजीयन प्रमाण पत्रों पर नौकरी और कारोबार कर रहे लोगों में हड़कंप मच गया है और वे इस अभियान को रोकने के लिए तरह तरह के जतन करते देखे जा रहे हैं।


    हाल ही में एक कथित फार्मासिस्ट ने जिस तरह काऊंसिल के दफ्तर में हंगामा मचाया और पुलिस ने उसकी शिकायत पर एफआईआर दर्ज की उससे इस समस्या को आसानी से समझा जा सकता है। वह छात्र अपने हंगामे को सही ठहराने के लिए बाकायदा गवाह भी साथ लेकर आया था हालांकि परिषद की ओर से दर्ज कराई गई प्राथमिकी में सारी स्थिति स्पष्ट की गई है और छात्र की आपराधिक हरकत को उजागर किया गया है।


    जबकि तथ्यों को देखा जाए तो पिछले पाँच महीनों में परिषद् ने 4416 नए फार्मासिस्टों के पंजीकरण सफलतापूर्वक किए हैं । लगभग 8,000 आवेदन-पत्रों के साथ प्रस्तुत दस्तावेजों की जांच आदि की प्रोसेसिंग की गई है। इस अवधि में कई महत्त्वपूर्ण सुविधाएँ जोड़ी गई हैं, जिनमें डिजिलॉकर एकीकरण, डोमिसाइल सत्यापन के साथ समग्र आईडी एकीकरण शामिल हैं। इससे पंजीयन की प्रक्रिया गलतियों से मुक्त हो गई है। अब पंजीयन के लिए किसी छात्र या फार्मासिस्ट को काउंसिल के दफ्तर आने की जरूरत ही नहीं रही है।


    इन बदलावों से काउंसिल अब एक से डेढ़ महीने में नए रजिस्ट्रेशन जारी कर पा रही है। जब तक ये प्रक्रिया चलती रहती है तब तक पोर्टल पर आवेदन की स्थिति आसानी से देखी जा सकती है। अब तक 99% बी.फार्मा पंजीकरण और सभी संभव/सत्यापन योग्य शासकीय विश्वविद्यालयों के डी.फार्मा पंजीकरण पूरे कर लिए गए हैं।
    जिन आवेदनों को प्रोसेसिंग के बाद पंजीकृत किया गया है उनमें लगभग 2000 आवेदन पुरानी प्रक्रिया के हैं जिनमें 2022/2024 के आवेदन मुख्यतः निजी विश्वविद्यालयों से संबंधित हैं । इनमें से अधिकतर आवेदनों का महाविद्यालयों से सत्यापन प्राप्त नहीं हुआ है। महाविद्यालयों से संपर्क करके ये पंजीयन भी जारी किए जा रहे हैं।


    प्राप्त आधिकारिक जानकारी के अनुसार परिषद ने 2023 में कुल 2889 पंजीयन जारी किए थे। 2024 में 2297 पंजीयन किए गए। जनवरी से मई 2025 तक 970,जून से नवंबर 2025 में जब पूरा ढांचा तैयार हो गया और पूर्णकालिक रजिस्ट्रार की तैनाती हो गई तो 4416 फार्मासिस्टों के पंजीयन प्रमाण पत्र जारी किए गए हैं। पिछले 5 महीनों में, परिषद ने एक वर्ष में होने वाले कार्य से लगभग दो–तीन गुना अधिक पंजीकरण जारी किए हैं।इस अवधि में कुल 8,000+ आवेदन प्रोसेस किए गए। जिसकी जानकारी आवेदक के लॉगिन पर भेजी जा चुकी है।
    डिजिटल सुधार और तेज सेवा

    • DigiLocker, Domicile, Samagra ID एकीकरण
    • आवेदन ट्रैकिंग व कारण-आधारित स्टेटस पोर्टल पर उपलब्ध है
    • अब नए पंजीकरण 1–1.5 माह में जारी किए जा रहे हैं
    • आवेदकों को काउंसिल आने की आवश्यकता समाप्त की गई
      वर्तमान पेंडेंसी — कारण व स्थिति
    • 99% बी.फार्मा और सभी सत्यापन योग्य सरकारी विश्वविद्यालयों के डी.फार्मा पंजीकरण पूर्ण किए गए हैं।
    • वर्तमान में लगभग 2000 आवेदन पुरानी प्रक्रिया के हैं जिनमें 2022/2024 के आवेदन मुख्यतः निजी विश्वविद्यालयों से संबंधित हैं और जिनके लिए महाविद्यालयों से सत्यापन प्राप्त नहीं हुआ है। इनको भी सत्यापन प्राप्ति अनुसार क्लियर किया जा रहा है।

    • परिषद ने विगत 1 वर्ष में दलालों के माध्यम से पंजीयन कराने की परंपरा समाप्त करने में सफलता पाई है। ऑफलाइन हस्तक्षेप पर जीरो टॉलरेंस पालिसी लागू की है। इससे नाराज दलालों में भारी असंतोष है और वे काऊंसिल के बारे में आधारहीन बातें फैलाकर छात्रों को भड़काने का प्रयास कर रहे हैं। जब फर्जी पंजीयन नहीं हो पा रहे हैं तो दलालों ने कई सामाजिक संगठनों के पदाधिकारियों को भी गुमराह करके अफवाहें फैलाना जारी कर दिया है। जबकि थोड़े ही दिनों में राज्य में एक पारदर्शी और सरल डिजिटल पंजीयन स्तर हासिल किया जा रहा है।

    • मध्यप्रदेश राज्य फार्मेसी परिषद के पदाधिकारियों का कहना है कि वह सभी आवेदकों के लिए तेज, पारदर्शी, डिजिटल,सटीक और ब्रोकर रहित सेवा उपलब्ध कराने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।
  • जनसंपर्क माफिया में कोहराम

    जनसंपर्क माफिया में कोहराम


    लगातार शिकायतों और पत्रकारों के विरोध दर्ज कराए जाने के बाद मध्यप्रदेश शासन ने जनसंपर्क संचालनालय में नर्मदापुरम संभाग के उपायुक्त(राजस्व) गणेश कुमार जायसवाल को अपरसंचालक के पद पर भेजा है। राज्य प्रशासनिक सेवा के 2012 बैच के इस युवा अधिकारी की पदस्थापना से जनसंपर्क विभाग के खासतौर पर अधिकारी वर्ग में बैचेनी की लहर दौड़ गई है। पहली बार वे शासन के निर्णय के खिलाफ एकजुट होकर कलमबंद हड़ताल पर उतर आए हैं। जनसंपर्क कमिश्नर दीपक सक्सेना से चर्चा के दौरान विभाग के अधिकारियों का तर्क था कि वे बरसों से इस विभाग में सरकार की छवि सुधारने का काम करते हैं इसके बावजूद सरकार ने एक राजस्व विभाग के एक जूनियर अधिकारी को भेजकर हमारा अपमान किया है। हमें प्रमोशन भी वक्त पर नहीं मिलते हैं और रात दिन हम सरकार की छवि सुधारने में जुटे रहते हैं। इसके बावजूद सरकार ने बाहिरी व्यक्ति को भेजकर हम पर अविश्वास जताया है जो अपमानजनक है। इस संबंध में सामान्य प्रशासन विभाग के अपर मुख्य सचिव संजय कुमार शुक्ल से अभी बात नहीं हो पाई है लेकिन जो जानकारियां छनकर बाहर आ रहीं हैं उनके मुताबिक सरकार ने आधिकारिक फीड बैक के आधार पर ही राजस्व विभाग के अधिकारी की नियुक्ति की है। यही नहीं विभाग के अपर मुख्य सचिव पद पर भारतीय प्रशासनिक सेवा के 1993 बैच के वरिष्ठ आईएएस अनुपम राजन को शासन की ओर से जवाबदारी सौंपी गई है। मुख्य सचिव अनुराग जैन के इस फैसले पर तो कोई सवाल नहीं उठाया जा रहा है लेकिन सामान्य प्रशासन विभाग के फैसले पर अधिकारियों का विरोध सबको चौंका रहा है। अधिकारियों के इस विरोध प्रदर्शन में विभाग के कर्मचारियों ने भी कलमबंद हड़ताल को समर्थन दिया है लेकिन वे अंदरूनी तौर पर खामोश हैं। विज्ञापन माफिया ने इस कलमबंद हड़ताल में जनसंपर्क संवर्ग के अधिकारियों को समेट लिया है। उनके माध्यम से वे सरकार पर दबाव बनाने का प्रयास कर रहे हैं। इस विरोध प्रदर्शन में कुछ पत्रकार संगठन भी कूद पड़े हैं। दरअसल में कुछ सालों से जनसंपर्क विभाग ने ऐसे गठरियों पत्रकार संगठन खड़े कर दिये हैं जिन्हें साथ लेकर विभाग के अधिकारी अपने फैसले लेते रहे हैं। खबरों के फैसले तो वे स्वयं ले लेते हैं लेकिन विज्ञापन के फैसलों में पत्रकार संगठनों को भी अपने साथ खड़ा कर लिया जाता है। इस गठजोड़ में शामिल माफिया शख्सियतें विभाग के माध्यम से लगभग आठ सौ करोड़ रुपयों से अधिक की राशि गड़प जाती हैं। पहली बार शासन ने विज्ञापन के नाम पर बजट की लूटपाट के इस धंधे पर लगाम कसने का प्रयास किया है। जाहिर है राजस्व विभाग का प्रशासनिक अधिकारी आयव्यय के सभी रिकार्ड पर भी निगरानी करेगा इससे जनसंपर्क विभाग के कुछ भ्रष्ट अधिकारियों को अपने काले कारनामों की कलई खुल जाने का भय लग रहा है। पत्रकारों की आड में दलाली करने वाले जिन कथित पत्रकारों ने इस घोटाले में लाभ उठाना अपना जन्मसिद्ध अधिकार बना रखा है वे भी इस फैसले से बौखलाए हुए हैं। केन्द्रीय स्तर पर प्रेस सेवा पोर्टल के माध्यम से भारत सरकार ने मीडिया को व्यवस्थित करने का अभियान चला रखा है। इससे पत्रकारों को काफी कठिनाई हो रही है। जबकि राज्य स्तर पर जनसंपर्क विभाग के अधिकारियों की प्रशासनिक अकुशलता की वजह से पत्रकारों के लिए आबंटित की जाने वाली राशि गैर पत्रकारों के पास पहुंच रही है। सत्तारूढ़ दल की सिफारिशों पर भी इस राशि का बड़ा हिस्सा साईफन कर लिया जाता है। ऐसे में पत्रकार वंचित रह जाते हैं और कलंक की कालिख उनके माथे पड़ जाती है। शासन की जवाबदारी है कि वह वास्तविक पत्रकारों को संवाद की भूमिका निभाने के लिए आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराए । वह अपना दायित्व निभाने के लिए जब फैसले ले रही है तो माफिया ताकतें इस फैसले को रोकने में जुट गईं हैं। ऊटपटांग के तर्क देकर वे इसे अपमान का कारण बता रहे हैं ।मध्यप्रदेश सरकार के वित्तीय संसाधनों पर ही जनसंपर्क विभाग के अधिकारियों कर्मचारियों को वेतन मिलता है और उन्हीं संसाधनों से राज्य प्रशासनिक सेवा के अन्य संवर्ग के अधिकारियों को वेतन मिलता है। इन सभी की जिम्मेदारी है कि वे प्रदेश की बेहतरी के लिए कार्य करें।ऐसे में राजस्व विभाग के वित्तीय प्रबंधन में कुशल अधिकारी की पदस्थापना स्वागत योग्य फैसला है। शासन को यदि अपने प्रशासनिक सुधारों पर जन समर्थन चाहिए तो उसे पत्रकारों की आड़ में पनप चुके विज्ञापन माफिया को उखाड़ फेंकना होगा तभी शासन और सरकार जनता की ओर से दिए गए अपने दायित्वों का निर्वहन सही तरीके से कर पाएंगे । फिलहाल शासन को अपने फैसले पर अडिग रहना होगा और माफिया की गीदड़ भभकियों को नजरंदाज करना होगा। वैसे भी सरकार की छवि बनाने बिगाड़ने का कार्य सोशल मीडिया संभाल चुका है। दलालों को बाहर किया जाएगा तो इसका सर्वत्र स्वागत किया जाएगा।

  • विदेशी पूंजी से कैसे बनेगा आत्मनिर्भर भारत

    विदेशी पूंजी से कैसे बनेगा आत्मनिर्भर भारत


    -आलोक सिंघई-


    अमेरिकी प्रतिबंधों से तिलमिलाई सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी ने आत्मनिर्भर भारत का नारा छेड़ दिया है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी स्वयं अनुरोध कर रहे हैं कि लोग भारत में बना माल ही खरीदें ताकि स्थानीय बाजार को बल मिले। अब तक की कांग्रेस की सरकारें हों या फिर मोदी जी के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार सभी धड़ल्ले से विदेशी माल और पूंजी के सहारे विकास का ढोल पीटते रहे हैं। नरेन्द्र मोदी की पृष्ठभूमि गुजरात रही है इसलिए वे एमके गांधी के स्वराज आंदोलन को करीब से जानते रहे हैं। वह आंदोलन अंग्रेजी हुकूमत को हिला देने वाला बताया गया था। कम से कम भारतीय इतिहासकारों ने तो आजादी के बाद से ही गांधी नेहरू और कांग्रेस के आंदोलनों को आजादी दिलाने वाला आंदोलन बताया है। ये विचार उन्होंने देश के मन मस्तिष्क में इतने गहरे तक जमा दिया है कि लोग इससे अलग कुछ सोचना ही नहीं चाहते। यदि उनके इस मानस से अलग कुछ भी कहा जाए तो वे भड़क उठते हैं। जबकि हकीकत इससे बिल्कुल अलग है। ब्रिटिश साम्राज्य ने सीधे तौर पर लगभग 56 देशों को शासित किया और इनमें से कई देशों को स्वतंत्रता प्राप्त हुई, जिससे आज दुनिया के लगभग 60 संप्रभु देश ब्रिटिश शासन से स्वतंत्र हुए देशों के दायरे में आते हैं। इन 56 देशों में से एक देश भारत भी था । शेष पचपन देशों में न गांधी थे न नेहरू न उनकी कांग्रेस इसके बाद भी उन्हें आजादी मिली।
    दरअसल द्वितीय विश्वयुद्ध के बाद जनजागरण का जो माहौल बना उसमें किसी दूसरे देश पर शासन करना कठिन हो गया था। अमेरिका में स्वतंत्रता के जिन मूल्यों की पैरवी की जा रही थी उसने अंग्रेजों के कारनामों को खूब बदनाम किया। रूस में जारशाही का पतन सन 1917 में हुआ था, जब रूस की फरवरी क्रांति ने जार निकोलस द्वितीय के शासन को समाप्त कर दिया और एक अंतरिम सरकार की स्थापना हुई। ऐसे माहौल में अंग्रेजों को महसूस हो गया था कि वे अब ज्यादा लंबे समय तक अपने उपनिवेशों को गुलाम बनाकर नहीं रख सकते। भारत में अंग्रेजी शासक 1885 में स्थापित भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के माध्यम से विभिन्न रियासतों के बीच अपना शासन चला रहे थे। जब उन्हें लगा कि उन्हें शासन छोड़ना पड़ेगा तो उन्होंने अपने संरक्षण वाले औद्योगिक घरानों के सहयोग से एमके गांधी के चलाए आंदोलनों को अपना मूक समर्थन देना शुरु कर दिया।
    बंगाल में नील किसानों का आंदोलन 1859 से चल रहा था। गांधी जी को 1917-18 में चंपारन सत्याग्रह में भाग लेने का अवसर मिला। इस आंदोलन ने गांधी को विदेशी कपड़ो के धंधे की बारीकियां समझने का अवसर मिला। नतीजतन गांधीजी ने विदेशी वस्त्रों के बहिष्कार का आंदोलन शुरु किया। उन्होंने 1921 में वस्त्रों की होली जलाकर कपड़े के धंधे की ओर देश का ध्यान आकर्षित किया। इस समय तक अंग्रेज बचाव की मुद्रा में आ चुके थे। वे गांधी के आंदोलनों को अंदर से समर्थन देकर भारत में अपने नियंत्रण वाली सत्ता के उदय की भूमिका जमा रहे थे। पहले स्वाधीनता संग्राम 1857 के बाद से 90 सालों तक अंग्रेजों पर छुटपुट हमले जारी रहे। त्रिपुरी अधिवेशन में 1939 में सुभाष चंद्र बोस ने गांधीजी समर्थित पट्टाभि सीतारमैय्या को हराकर कांग्रेस पार्टी के अध्यक्ष का चुनाव जीत लिया था । इसके बावजूद उन्हें अंग्रेजों के समर्थन वाले गांधीजी के असहयोग की वजह से अध्यक्ष पद से त्यागपत्र देना पड़ा। इससे क्षुब्ध सुभाष चंद्र बोस ने 1941 में सिंगापुर से अंग्रेजों के विरुद्ध आजादी के संग्राम की घोषणा कर दी । उन्होंने1943 में आजाद हिंद सरकार का गठन करके ग्यारह देशों से मान्यता भी हासिल कर ली थी।
    इन हालात में चलाए गए गांधी जी के स्वदेशी आंदोलन को अंग्रेज केवल इसलिए समर्थन दे रहे थे क्योंकि वे भारत में अपनी पिट्ठू सरकार का गठन करना चाहते थे। यही वजह थी कि भले ही 1947 में अंग्रेजों ने नेहरू के साथ ट्रांसफर आफ पावर एग्रीमेंट कर लिया लेकिन भारतीय बाजार पर उन्होंने अपना नियंत्रण नहीं छोड़ा। 1947 में अंग्रेजों का भारतीय कपड़ा उद्योग में बहुत गहरा और विनाशकारी हस्तक्षेप था, जिसके कारण पारंपरिक हथकरघा उद्योग लगभग नष्ट हो गया और भारतीय कारीगरों को भारी नुकसान हुआ। अंग्रेजों ने कच्चे माल के रूप में सस्ते कपास का निर्यात किया और ब्रिटेन में उत्पादित सस्ते, मशीन-निर्मित कपड़े भारत में ऊंची कीमतों पर बेचे, जिससे भारतीय बाजार पट गए और पारंपरिक भारतीय वस्त्र उद्योग दम तोड़ गया। आजादी के बाद स्वदेशी का नारा खादी आंदोलन तक ही सीमित रह गया। खादी और ग्रामोद्योग बोर्ड के नारे तले कांग्रेस ने देश को कपड़ा निर्माण में आत्मनिर्भर नहीं होने दिया।
    कांग्रेस के विभाजन के बाद जब 1971 में श्रीमती इंदिरागांधी सत्ता में लौटी तो उन्होंने रिलायंस के धीरूभाई अंबानी को देश के बाजार में पोलिएस्टर कपड़ा उतारने का काम दे दिया। इसके बाद भारतीय कपास की खेती का भट्टा बैठ गया और वह कपास की गठाने निर्यात करने का कार्य बदस्तूर जारी रहा । इन दिनों नरेन्द्र मोदी धार में कपड़ा उद्योग की आधारशिला रख रहे हैं तब इतिहास की इन बातों पर गौर करना जरूरी हो गया है। इसके पहले तक की तमाम राजनीतिक दलों की सरकारों ने भारत में विदेशी पूंजी की घुसपैठ रोकने को कोई कोशिश नहीं की बल्कि वे अधिकाधिक कर्ज लेकर शासन करने की नीति पर ही चलते रहे। लगभग दो दशकों तक मध्यप्रदेश में भाजपा की शिवराज सिंह चौहान सरकार भी पुरानी सत्ता लाबी की ही पिट्टू सरकार बनकर काम करती रही। कर्ज लेकर खैरात बांटने का जो अभियान उन्होंने चलाया उससे उन्हें भरपूर लोकप्रियता हासिल हुई। कर्ज से बिजली सड़क और पानी के प्रोजेक्ट पूरे करने के लिए उन्होंने धड़ाधड़ कर्ज लिया और जाते हुए वे प्रदेश पर तीन लाख अस्सी हजार करोड़ रुपयों का भारी भरकम कर्ज छोड़कर गए। इस कर्ज पर प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष तौर पर हर साल राज्य को लगभग चालीस हजार करोड़ रुपयों का ब्याज अदा करना पड़ता है। भला इतनी मोटी कमाई को सूदखोर देश और कंपनियां कैसे बंद होने दे सकती हैं।
    आज की डाक्टर मोहन यादव सरकार के लिए खैरात बांटने की अब तक चली आ रही नीतियों के विपरीत काम करने पर कुर्सी जाने का भय है और वे भले ही हिचक के साथ ही सही पर वही नीति दुहराते चले जा रहे हैं। ऐसे में जब भारतीय जनता पार्टी स्वदेशी का नारा बुलंद कर रही है तब उसके आंदोलन की खोखली आवाज कितने दूर तक जाएगी इसका अनुमान अभी नहीं लगाया जा सकता। सरकारी नौकरियां बेचने का जो अभियान कांग्रेस ने शुरु किया था उसे शिवराज सिंह चौहान की सरकार ने खूब हवा दी। कांग्रेस की तरह लूटो और भागो की नीति पर अमल करते हुए शिवराज सिंह काजल की इस कोठरी से अपनी स्याह तस्वीर लेकर सुरक्षित बाहर निकल चुके हैं।
    नरेन्द्र मोदी का स्वदेशी माल खरीदने का अनुरोध अमेरिकी प्रतिबंधों की मार की वजह से सामने आ सका है। आज इसे मेक इन इंडिया का विस्तार भले ही कहा जा रहा है पर मध्यप्रदेश में दो दशकों तक भारतीय जनता पार्टी की सरकारों ने स्वदेशी के मुद्दों पर क्या किया है इसका आकलन सहजता से किया जा सकता है।नानाजी देशमुख ने अपने सहयोगियों के साथ चित्रकूट में स्वदेशी के जो अनुसंधान किए और पूरी थीसिस तैयार की उसे भाजपा की उमा भारती सरकार ने पूरी शिद्दत से लागू करना शुरु किया था। इससे सूदखोर देशो में बेचैनी फैल गई और उन्होंने अरबों रुपयों का कर्ज बांटकर अपने पिट्ठू अखबारों के माध्यम से आंदोलन चलाकर उमा भारती की सरकार गिराई और अंततः उन्हें सत्ता से बाहर ही भेज दिया। आज वह आंदोलन चलाने वाले जिस समाचार पत्र पर लगभग पैंतीस हजार करोड़ रुपयों का कर्ज है वह इस मौजूदा स्वदेशी आंदोलन को भरपूर हवा देने में जुटा हुआ है।
    स्वदेशी का नारा देते घूम रहे भाजपा के चिंतकों, संगठन कर्मियों और राजनेताओं को अपने गिरेबान में झांककर पहले अपने पूर्वजों की गलत नीतियों में सुधार करना होगा। अब कार्पोरेट सेक्टर खड़े करके देशज पूंजी से उद्योगों की स्थापना करना सरल हो गया है। ऐसे में स्वदेशी आंदोलन करने से पहले भाजपा के नेताओं को स्वदेशी पूंजी, स्वदेशी प्रबंधन और स्वदेशी बाजार की मजबूती के लिए कार्य करना होगा। यदि वे ये नहीं कर पाए तो इस स्वदेशी आंदोलन का हश्र भी गांधीजी के स्वदेशी आंदोलन की तरह ही होगा। विदेशी पूंजी से आत्मनिर्भर भारत नहीं बनाया जा सकता।

  • विक्रमादित्य वैदिक घड़ी से पढ़ी जाएगी भारत की यशोगाथा : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

    विक्रमादित्य वैदिक घड़ी से पढ़ी जाएगी भारत की यशोगाथा : मुख्यमंत्री डॉ. यादव


    भोपाल,01 सितंबर(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)।मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि भारतवर्ष ने अपने ज्ञान से सम्पूर्ण ब्रह्मांड को अलौकिक किया है। कालगणना की पद्धति 300 साल पहले तक हमारे देश से दुनिया तक जाती थी। भारतीय संस्कृति का प्रत्येक पहलु प्रकृति और विज्ञान का ऐसा विलक्षण उदाहरण है, जो विश्व कल्याण का पोषक है। इन्हीं धरोहरों के आधार पर निर्मित विक्रमादित्य वैदिक घड़ी भारतीय परम्परा का गौरवपूर्ण प्रतीक है। इस घड़ी के माध्यम से भारत के गौरवपूर्ण समय को पुनर्स्थापित किया जा रहा है। विरासत-विकास-प्रकृति और तकनीक के संतुलन का प्रकटीकरण विक्रमादित्य वैदिक घड़ी से होगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव सोमवार को मुख्यमंत्री निवास में विक्रमादित्य वैदिक घड़ी के अनावरण और उसके ऐप लोकार्पण कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे।
    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। इससे पहले मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मुख्यमंत्री निवास के नवनिर्मित द्वार पर विक्रमादित्य वैदिक घड़ी का मंत्रोच्चार के बीच अनावरण किया। इस अवसर पर शौर्य स्मारक से आरंभ हुई ‘भारत का समय-पृथ्वी का समय’ रैली मुख्यमंत्री निवास पहुंची। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने रैली में शामिल युवाओं का स्वागत किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कार्यक्रम में विक्रमादित्य वैदिक घड़ी के ऐप का लोकार्पण, राजा भोज पर निर्मित यू-ट्यूब सीरीज के फोल्डर का विमोचन और खगोल विज्ञान पर केन्द्रित फिल्म की सीडी का विमोचन भी किया गया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने वैदिक घड़ी के उपयोग को प्रोत्साहित करने का आहवान किया और उपस्थित युवाओं से मोबाइल में विक्रमादित्य वैदिक घड़ी ऐप भी डाउनलोड करवाया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव को इस अवसर पर वैदिक घड़ी भेंट की गई।

    विक्रमादित्य वैदिक घड़ीः भारतीय कालगणना विज्ञान की यशोगाथा का दस्तावेज


    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि यह हमारा सौभाग्य है कि सनातन संस्कृति के व्रत, त्यौहार अंग्रेजी कैलेंडर के आधार पर नहीं आते, उनकी गणना में ऋतुओं का प्रभाव शामिल है। सावन-भादो-कार्तिक माह का प्रभाव हम सब अपने जीवन में अनुभव कर रहे हैं। पूर्णिमा और अमावस्या का समुद्र पर प्रभाव ज्वार-भाटा से आंका जा सकता है, इससे हमारी तिथियों की सत्यता भी प्रमाणित होती है। मानसिक रोगियों पर अमावस्या और पूर्णिमा का प्रभाव चिकित्सा शास्त्र भी स्वीकार करता है। मानव शरीर संरचना में 70 प्रतिशत जल का अंश है, जो अमावस्या और पूर्णिमा पर प्रभावित होता है। इसी का परिणाम है कि मानसिक चिकित्सालयों को अमावस्या और पूर्णिमा पर विशेष सतर्कता बरतने के स्थाई निर्देश हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि भारतीय शास्त्रों में समय की गणना सूक्ष्मतम स्तर तक की गई है। सनातन संस्कृति में सूर्योदय से सूर्योदय तक की गणना का विधान है। इस प्राचीन गणना में 30 मुहूर्त हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि सनातन संस्कृति में विभिन्न सिद्धांतों पर विचार-विमर्श के लिए कोई बंधन या दंड नहीं है, जबकि कालगणना पर वैचारिक मतभेद के कारण मृत्युदंड देने का उद्धरण पश्चिम के इतिहास में मिलता है।
    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि खगोलीय अध्ययन के लिए सूर्य से बनने वाली छाया के आधार पर सूर्य की गति की गणना की गई। उन्होंने बताया कि भारत का केन्द्र उज्जैन है और उज्जैन का केन्द्र वर्तमान में डोंगला में स्थित है। डोंगला का प्रसंग भगवान श्रीकृष्ण और सुदामा से जुड़ता है। संभवत: डोंगला के इस महत्व से ही भगवान श्रीकृष्ण का आगमन हुआ था। पंचांग भारतीय कालगणना की शुद्धता और सटीकता का जीवंत उदाहरण हैं। पंचांग के विद्वान चंद्रग्रहण, सूर्यग्रहण, तिथि, नक्षत्र, वार, व्रत, त्यौहार और मुहूर्तों की जानकारी वर्तमान में भी त्वरित रूप से उपलब्ध कराते हैं।
    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मुख्यमंत्री निवास के द्वार पर विक्रमादित्य वैदिक घड़ी स्थापित की गई है। मुख्यमंत्री निवास केवल मुख्यमंत्री का नहीं, अपितु सभी प्रदेशवासियों की धरोहर है। प्रदेशवासियों द्वारा दिया गया अधिकार और लोगों का भरोसा ही हमारी सरकार का आधार है। भारतीय संस्कृति के अतीत के गौरवशाली पृष्ठों का प्रकटीकरण हमारा दायित्व है। इसी का परिणाम है कि हमारी कालगणना का केन्द्र उज्जैन है, परंतु कालगणना की पद्धति की जानकारी प्रदेश की राजधानी में हो, इसके लिए प्रयास करते हुए विक्रमादित्य वैदिक घड़ी की स्थापना भोपाल में की गई। भारतीय कालगणना की पद्धति की जानकारी का वैश्विक रूप से भी प्रचार-प्रसार किया जाएगा।
    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि वैदिक घड़ी के ऐप के माध्यम से हम अपने मोबाइल में वैदिक घड़ी का संचालन कर सकते हैं। उन्होंने उच्च शिक्षा और संस्कृति विभाग के इस आयोजन में योगदान की सराहना की। उन्होंने कहा कि हम आजादी के अमृतकाल में चल रहे हैं। पूरी दुनिया का समय बदल रहा है, पश्चिम के बाद अब पूर्व का समय आया है।
    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी अपने दृष्टिकोण को लेकर आगे बढ़ रहे हैं। भारत का मान-सम्मान बढ़ाने के लिए वे प्रतिबद्ध हैं। उन्हीं के प्रयासों से वर्ष 2014 में दुनिया के अंदर यूनेस्को के माध्यम से योग को पुनर्स्थापित किया गया। भारत का ज्ञान, कौशल और विशेषता केवल भारत के लिए नहीं है, यह समूची मानवता के लिए है। भारत का मान-सम्मान बढ़ाने के लिए इस भाव से प्रधानमंत्री श्री मोदी के नेतृत्व में हम निरंतर सक्रिय और अग्रसर हैं।
    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि सुशासन के आधार पर ही विक्रमादित्य काल वर्तमान समय तक याद किया जाता है। सुशासन के इन्हीं उच्चतम मापदंडों के आधार पर प्रधानमंत्री श्री मोदी के नेतृत्व में वर्तमान में व्यवस्थाओं का संचालन हो रहा है। उनके प्रत्येक निर्णय से देश गौरवान्वित होता है। प्रधानमंत्री श्री मोदी हर परिस्थिति में हमारे वैज्ञानिकों, सैनिकों, किसानों सहित देश के लिए समर्पित प्रत्येक व्यक्ति के साथ हैं।
    खेल एवं युवा कल्याण तथा सहकारिता मंत्री श्री विश्वास कैलाश सारंग ने कहा कि उस राष्ट्र का भविष्य ही सुरक्षित रहता है, जो अपने अतीत और संस्कृति को प्रतिबद्धता के साथ आत्मसात करता है। प्रधानमंत्री श्री मोदी के नेतृत्व में देश में सनातन की ध्वजा चहुंओर लहरा रही है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने पिछले लगभग दो वर्षों में विकास और जनकल्याण के साथ सनातन संस्कृति को सहेजने की जो पहल की है, वह सराहनीय और वंदनीय है। कार्यक्रम को पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक कल्याण राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्रीमती कृष्णा गौर, सांसद श्री आलोक शर्मा, वैदिक घड़ी के अन्वेषणकर्ता श्री आरोह श्रीवास्तव, रबीन्द्रनाथ टैगोर विश्वविद्यालय के कुलाधिपति श्री संतोष चौबे और महर्षि सांदीपनि विश्वविद्यालय के कुलगुरू पंडित शिवशंकर मिश्र ने भी संबोधित किया।
    कार्यक्रम में प्रदेश अध्यक्ष श्री हेमंत खंडेलवाल, विधायक श्री रामेश्वर शर्मा, विधायक श्री विष्णु खत्री, भोपाल महापौर श्रीमती मालती राय, अध्यक्ष नगर निगम श्री किशन सूर्यवंशी, मुख्यमंत्री के संस्कृति सलाहकार श्रीराम तिवारी, अपर मुख्य सचिव उच्च शिक्षा श्री अनुपम राजन सहित विभिन्न विश्वविद्यालयों के कुलगुरू और बड़ी संख्या में युवा उपस्थित थे।
    वैदिक घड़ी और ऐप की विशेषताएं
    विक्रमादित्य वैदिक घड़ी भारतीय काल गणना पर आधारित विश्व की पहली घड़ी है, जो भारतीय परंपरा, वैदिक गणना और वैज्ञानिक दृष्टि का अद्भुत संगम है। यह भारत की सांस्कृतिक धुरी बनकर वैश्विक भाषाओं, पंरपराओं, आस्था और धार्मिक कार्यों को जोड़ने वाली महत्वपूर्ण कड़ी बनेगी। साथ ही विक्रमादित्य वैदिक घड़ी के तैयार किये गये मोबाइल ऐप में 3179 विक्रम पूर्व, महाभारतकाल से लेकर 7 हजार से अधिक वर्षों के पंचांग, तिथि, नक्षत्र, योग, करण, वार, मास, व्रत एवं त्यौहारों की दुर्लभ जानकारियां समाहित की गई हैं। धार्मिक कार्यों, व्रत और साधना के लिए 30 अलग-अलग शुभ मुहूर्तों की जानकारी एवं अलार्म की सुविधा भी है। प्रचलित समय में वैदिक समय (30 घंटे), वर्तमान मुहूर्त स्थान, GMT और IST समय, तापमान, हवा की गति, आर्द्रता एवं मौसम संबंधी सूचनाएं भी लोगों को उपलब्ध करायी गई है। यह ऐप 189 से अधिक वैश्विक भाषाओं में उपलब्ध है। इसमें दैनिक सूर्योदय और सूर्यास्त की गणना तथा इसी आधार पर हर दिन के 30 मुहूर्तों का सटीक विवरण शामिल है।

  • स्थानीय उद्योगों के अनुरूप पाठ्यक्रम बनाएं- इंदर सिंह परमार

    स्थानीय उद्योगों के अनुरूप पाठ्यक्रम बनाएं- इंदर सिंह परमार


    भोपाल, 13 अगस्त(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)। उच्च शिक्षा, तकनीकी शिक्षा एवं आयुष मंत्री श्री इन्दर सिंह परमार की अध्यक्षता में मंगलवार को मंत्रालय स्थित सभाकक्ष में रीवा इंजीनियरिंग महाविद्यालय के शासी निकाय (संचालक मंडल) एवं साधारण सभा की 23वीं बैठक हुई। प्रस्तावित कार्यसूची के अनुरूप विभिन्न बिंदुओं पर व्यापक चर्चा हुई। शासी निकाय (संचालक मंडल) एवं साधारण सभा की 22वीं बैठक के कार्य विवरण की पुष्टि के लिए पालन प्रतिवेदन प्रस्तुत किया गया।

    तकनीकी शिक्षा मंत्री श्री परमार ने कहा कि स्थानीय उद्योग जगत की आवश्यकता एवं मांग के अनुरूप पाठ्यक्रमों के अध्यापन की कार्ययोजना बनाकर क्रियान्वयन करें। श्री परमार ने राजीव गांधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के समन्वय के साथ, राज्य स्तर पर “अकैडमिक रिव्यू बोर्ड” बनाने के निर्देश तकनीकी शिक्षा विभाग को दिए, इससे वास्तविक आवश्यकता अनुरूप पाठ्यक्रम संचालन से समस्त इंजीनियरिंग महाविद्यालयों को सुविधा मिल सकेगी। श्री परमार ने कहा कि निर्माण एवं मरम्मत कार्यों में गुणवत्ता पर विशेष ध्यान दें। श्री परमार ने कहा कि संस्थान के विद्यार्थियों से ही निर्माण आदि कार्यों को संपादित करवाने की कार्ययोजना बनाएं, इससे विद्यार्थियों को महाविद्यालयों में ही प्रायोगिक ज्ञान मिल सकेगा।

    तकनीकी शिक्षा मंत्री श्री परमार ने विद्यार्थियों के लिए अकादमिक गुणवत्ता के उत्थान के लिए व्यापक कार्ययोजना के साथ क्रियान्वयन के निर्देश दिए। श्री परमार ने कहा कि संस्थान के हितों से जुड़े आवश्यक कार्यों को प्राथमिकता दें और अकादमिक गुणवत्ता में उत्तरोत्तर वृद्धि के सतत् प्रयास करें। श्री परमार ने कहा कि संस्थान अपनी विशेषता और उत्कृष्टता पर व्यापक कार्य करे ताकि विशिष्ट संदर्भ में संस्थान का नाम आलोकित हो। श्री परमार ने संस्थान की पहचान को पुनः स्थापित कर, आदर्श संस्थान के रूप में स्थापित करने के लिए सार्थक क्रियान्वयन करने की बात भी कही।

    बैठक में रीवा इंजीनियरिंग महाविद्यालय में पीएचडी केंद्र की स्थापना एवं शुल्क निर्धारण, सीएम संकल्प योजना के तहत कोडिंग लैब में प्रशिक्षण के संबंध में व्यय की स्वीकृति, संस्थान में नवीन यूजी तथा पीजी पाठ्यक्रम प्रारंभ करने के लिए सैद्धांतिक स्वीकृति, प्रतिवर्ष 10 मार्च को संस्था के स्थापना दिवस REC Day मनाने एवं टेक फेस्ट के आयोजन के लिए स्वीकृति, संस्थान के नवीन लोगों एवं ध्येय वाक्य के प्रस्ताव का अनुमोदन, संस्थान के कॉलोनी परिसर की सुरक्षा के लिए बाउंड्री वाल के निर्माण के लिए 1 करोड़ 33 लाख 23 हजार रुपए की स्वीकृति, पेयजल व्यवस्था के लिए ओवरहेड टैंक के निर्माण के लिए 32 लाख 39 हजार रुपए की स्वीकृति, भवन निर्माण एवं अन्य मरम्मत कार्य के लिए कुल 67 लाख 39 हजार रुपए की स्वीकृति, विभिन्न विभागों के उपकरणों के क्रय हेतु 50 लाख 51 हजार रुपए की स्वीकृति,

    नगर पालिका निगम रीवा द्वारा अधिरोपित सेवा प्रभार के भुगतान राशि की स्वीकृति, संस्थान के बालक एवं कन्या छात्रावास परीक्षा विभाग, रजिस्ट्रार एवं लेखा कार्यालय, इलेक्ट्रॉनिक विभाग एवं इलेक्ट्रिकल विभाग में फर्नीचर और अलमारी के क्रय के लिए 18 लाख 37 हजार रुपए की स्वीकृति, पुनर्घनत्वीकरण योजना के अंतर्गत 0.66 हेक्टेयर भूमि के बदले 22 करोड रुपए के संस्थान में निर्माण कार्य के लिए स्वीकृति के साथ संशोधित प्रस्ताव प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए। संस्थान परिसर में संजीवनी क्लीनिक निर्माण की अनुमति प्रदान की गई। संस्थान के बिजनेस प्लान को स्वीकृति के साथ विस्तृत गाइडलाइन बनाने के निर्देश भी दिए गए। संस्था के दो प्राध्यापकों को पीएचडी /उच्च शिक्षा के लिए अनुमति तथा भृत्य के पद पर अनुकंपा नियुक्ति के एक पद की स्वीकृति भी प्रदान की गई।

    प्रमुख सचिव तकनीकी शिक्षा कौशल विकास एवं रोजगार श्री मनीष सिंह , कुलगुरु राजीव गांधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय भोपाल प्रो. राजीव त्रिपाठी, आयुक्त तकनीकी शिक्षा श्री अवधेश शर्मा, अध्यक्ष रीवा इंजीनियरिंग कॉलेज ग्लोबल एल्युमिनियम एसोसिएशन श्री आर.एस. शर्मा, रीवा के उद्योगपति श्री विष्णु अग्रवाल एवं संस्थान के प्राचार्य और सदस्य सचिव डॉ. आर.पी. तिवारी सहित शासी निकाय (संचालक मंडल) एवं साधारण सभा के अन्य सदस्यगण एवं विभागीय अधिकारी उपस्थित थे।

  • गोविंद राजपूत पर हमला करके खुद घिरे भूपेन्द्र सिंह

    गोविंद राजपूत पर हमला करके खुद घिरे भूपेन्द्र सिंह


    पूर्व परिवहन मंत्री रहे विधायक भूपेन्द्र सिंह दांगी अब खुद सफाई देते घूम रहे हैं कि उन्होंने सदन में मालथौन के जिस गोविंद सिंह राजपूत पर आदिवासियों की जमीनें हड़पने का आरोप लगाया है वे खाद्य मंत्री गोविंद सिंह राजपूत नहीं हैं। आदिवासियों की जमीनें हड़पने का कार्य तो मालथौन में कथित आतंक का प्रतीक बने गोविंद सिंह राजपूत पिता श्री बलवंत सिंह राजपूत ने किया है। विधानसभा में उन्होंने अपना पूरा भाषण कुछ इस तरह दिया कि लोगों को महसूस हुआ कि वे खाद्य मंत्री के बारे में बात कह रहे हैं। सदन से बाहर हालांकि उन्होंने अपनी सफाई दी लेकिन तब तक सदन की लॉबी में बैठे पत्रकार बाहर जा चुके थे। यही वजह थी कि कई समाचार माध्यमों ने भूपेन्द्र सिंह के आरोपों को खाद्य मंत्री गोविंद सिंह राजपूत पर लगाया गया आक्षेप ही मानकर समाचार रिपोर्ट फाईल कर दी ।


    ये कूटनीति कुछ महाभारत के उस प्रसंग की ही तरह थी जिसमें भगवान कृष्ण ने युधिष्ठिर के माध्यम से संदेश प्रसारित करवाया था जिसमें युधिष्ठिर कहते सुने गए कि अश्वथामा हतो हतः…..इसके बाद की लाईन युद्ध के नगाड़ों के स्वर में नहीं सुनी जा सकी जिसमें उन्होंने विशालकाय हाथी अश्वथामा के बारे में कहा था ….नरो व कुंजरो वा । इस तरह की राजनीतिक चाल चलकर भूपेन्द्र सिंह ने अपने चिर प्रतिद्वंदी गोविंद राजपूत को बदनाम करने का दांव खेला था। उनका यह दांव एक तरह से उलटा पड़ा।


    कहा जाता है मुद्दई लाख बुरा चाहे क्या होता है वही होता है जो मंजूर ए खुदा होता है। कहीं तीर और कहीं निशाना की तर्ज पर उठाए इस मुद्दे पर भूपेन्द्र सिंह ने जो सफाई दी उससे गोविंद राजपूत पर लगे तमाम आरोप खंडित होते मालूम पड़ रहे हैं जिन्हें विपक्ष में बैठे कांग्रेसी भी लंबे समय से लगाते रहे हैं। पिछले चुनावों में जब कांग्रेस की कमलनाथ सरकार सत्ता में आई थी तब ज्योतिरादित्य सिंधिया समर्थक गोविंद सिंह राजपूत और इमरती देवी ने विद्रोह को स्वर देने में प्रमुख भूमिका निभाई थी। इमरती देवी चुनाव हार जाने की वजह से परिदृश्य से बाहर हो गईं लेकिन गोविंद राजपूत तभी से विपक्ष के निशाने पर बने हुए हैं।


    भूपेन्द्र सिंह अपने छात्र जीवन से गोविंद राजपूत के प्रतिद्वंदी रहे हैं। तबके गोविंद और आज के खाद्य मंत्री में बड़ा अंतर आ चुका है। अपने भाई हीरा सिंह राजपूत और क्षत्रियों के खानदानी हुनर के बलबूते गोविंद राजपूत हमेशा सत्ता के नजदीक बने रहे हैं। उनके समर्थक भी लोकतांत्रिक सत्ता का संचालन करने के हुनर में माहिर हो चुके हैं। यही वजह है कि वे लगातार सत्ता में बने हुए हैं और भूपेन्द्र सिंह जैसे उनके प्रतिद्वंदी अब अपनी राजनीतिक पारी समेटते नजर आने लगे हैं।


    दरअसल भूपेन्द्र सिंह दांगी ने भी अपनी लंबी राजनीतिक पारी में सत्ता का भरपूर आचमन किया है। कभी एक छोटी से कथित पारिवारिक मालगुजारी से शुरु उनकी राजनीतिक यात्रा आज अरबों के साम्राज्य तक पहुंच गई है। जब वे परिवहन मंत्री थे तब भी उन्होंने कांग्रेस के समय काल से चली आ रही परंपराओं को जारी रखा था। मध्यप्रदेश की स्थापना से लेकर पिछली सरकार तक परिवहन को सत्ता दुहने का साधन माना जाता रहा है। विदेशी कर्ज चुकाने की चुनौतियों ने आज बेशक इस काली कमाई पर अंकुश लगाने की मजबूरी को जन्म दिया है। इसके बावजूद परिवहन विभाग का अमला आज भी समानांतर जांच चौकियां बनाकर अपने आकाओं को खुश करने मेंजुटा हुआ है।


    परिवहन आरक्षक सौरभ शर्मा के ठिकानों से बरामद नकदी, सोना और अन्य बेनामी संपत्तियों को लेकर कांग्रेस के नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार भी गोविंद राजपूत को घेरने का प्रयास करते हैं । इसका नतीजा ये होता है कि समूची भाजपा गोविंद राजपूत के पक्ष में आकर खड़ी हो जाती है और परिवहन घोटाले की फाईल ठंडे बस्ते में पहुंच जाती है। ऐसा ही कुछ इस बार हुआ जब भूपेन्द्र दांगी के भाषण के बाद पूरा सरकारी तंत्र स्पष्टीकरण देने में जुट गया कि मालथौन वाले गोविंद सिंह राजपूत हमारे खाद्य मंत्री नहीं हैं।


    जाहिर सी बात है कि खाद्य मंत्री को लेकर विपक्ष और पार्टी के ही कुछ पुराने भाजपाई जिस तरह से लामबंद होते जा रहे हैं गोविंद राजपूत की ताकत उतनी ही ज्यादा बढ़ती जा रही है। भूपेन्द्र सिंह ने आदिवासियों की जमीनें छिनने का बवंडर खड़ा करके खुद को बड़ा जनसेवक बताने की जो चेष्ठा की उसने उन्हें ही सरकार के निशाने पर ला खड़ा किया है। जबसे वे मंत्री पद से हटाए गए हैं तभी से बार बार वे अपनी मौजूदगी दर्ज कराने का जतन करते रहे हैं। जिस तरह से उन्होंने विधानसभा के अपने भाषण पर सफाई दी उससे उनकी बचाव की मुद्रा भी यही कुछ बयान कर रही है।


    दरअसल भाजपा ने सत्ता की आड़ में अपना घर भरने वाले नेताओं को घर बिठाने का जो अभियान चला ऱखा है उसकी वजह से कई नेताओं को अपना भविष्य खतरे में नजर आने लगा है। वे जब तक सत्ता के शेर पर सवार हैं तब तक तो उनकी कहानी चलती रहेगी लेकिन जैसे ही वे सत्ता से दूर होंगे उनकी काली कमाई का साम्राज्य धूल धूसरित कर दिया जाएगा। भोपाल का मछली साम्राज्य इसकी जीती जागती मिसाल है।


    भूपेन्द्र सिंह अपने विधानसभा क्षेत्र में खडे़ गोविंद राजपूत मालथौन जैसे उस दिग्गज प्रतिद्वंदी को समेटने का प्रयास कर रहे हैं। जिसने अपनी भतीजी रक्षा राजपूत को कांग्रेस से टिकिट दिलवाकर भूपेन्द्र सिंह के सामने कड़ी राजनैतिक चुनौती खड़ी कर दी थी। भूपेन्द्र सिंह भले ही मालथौन के गोविंद सिंह राजपूत को भाजपा में लाए हों लेकिन तभी से वे उसे समाप्त करने की मुहिम भी चलाए हुए हैं। उसके बेटे का कथित अनाज घोटाला उजागर करने के बाद तो उनके लिए खुरई और मालथौन में अपने विरुद्ध बड़ी राजनीतिक ताकत खड़ी होती नजर आ रही है। अपने प्रतिद्वंदियों को वे समाप्त करने का जितना प्रयास कर रहे हैं उतना खुद ही दलदल में फंसते देखे जा रहे हैं।

  • सबके विकास के दौर में बार बार कुचली जाएगी धर्मांधता

    सबके विकास के दौर में बार बार कुचली जाएगी धर्मांधता


    प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का हिंदुस्तान सबके विकास का लक्ष्य लेकर आगे बढ़ता जा रहा है। इसके लिए सबको समान अवसर उपलब्ध कराए जा रहे हैं। विकास योजनाओं का लाभ भी सबको समान रूप से दिया जा रहा है। इसके बावजूद चंद कट्टरपंथी ताकतें अपना धर्म सबसे अव्वल वाली विचारधारा की ध्वज वाहक बनी हुई हैं। ये ताकतें न केवल मुस्लिम बल्कि सभी धर्मों में मौजूद हैं। दरअसल धर्म की आस्थावान सोच को लोग वैज्ञानिक आधार पर नहीं बल्कि पाखंडों के आधार पर विकसित करने का प्रयास करते हैं इसलिए उन्हें झूठे मुद्दों पर भीड़ जुटानी पड़ती है। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने जिस एकात्मकता को अपनी कार्यशैली बनाया है उसके बीच किसी भी कट्टरता को स्थान मिलना संभव नहीं है। फूट डालो राज करो वाली अंग्रेज परस्त कांग्रेस की राजनीति इसके सामने विदा होती चली जा रही है। पहलगाम आतंकी हमले के बाद जिस तरह आपरेशन सिंदूर के अंतर्गत पाकिस्तान की कुटाई की गई उसे देखकर इन कट्टरपंथी ताकतों को समझ लेना चाहिए कि उनकी वैमनस्य भरी राजनीति का अंत अब निकट आ गया है।


    सदियों से युद्ध वास्तव में किसी भी समाज की गंदगी साफ करने का प्रमुख अस्त्र साबित होता रहा है।इससे जहां लोगों में सामाजिक उद्देश्यों के प्रति जागरूकता बढ़ती है वहीं एकात्मकता का भाव भी विकसित होता है।कट्टरपंथी इस्लाम वादियों ने कथित भाईचारे के नाम पर एकात्मकता विकसित करने का फार्मूला अपना रखा है। ये भाईचारा मुस्लिम मुस्लिम भाई भाई तो कहता है लेकिन गैर मुस्लिम को काफिर कहकर लूटने और काटने की सलाह भी देता है। औपनिवेशिक दौर में भले ही ये चलता रहा हो। इसे सामाजिक स्वीकार्यता मिलती रही हो लेकिन पूंजीवाद के इस दौर में इस विकास विरोधी विचार के लिए कोई जगह नहीं है। जो लोग पूंजीवाद को कोसते फिरते हैं उन्हें भी अंततः पूंजीवाद की ठकुर सुहाती ही करनी पड़ती है।

    दरअसल पूंजीवाद और शोषणवाद दो अलग अलग विचार हैं। पूंजीवाद कहीं नहीं कहता कि श्रमिकों का शोषण किया जाए। ये तो वही अक्षम लोग हैं जो पूंजी पाकर शोषण पर उतारू हो जाते हैं।कई बार ऐसे लोगों का इलाज कानून से नहीं अपराध से ही करना पड़ता है। अमेरिका का पूंजीवादी समाज अपराध की वाशिंग मशीन में ही डालकर झकास साफ निखार पाता है। इसलिए दक्षिण एशिया में धर्म की ध्वजा थामने वालों को भी जान लेना होगा धर्म की आड़ में शोषणवादी ताकतों को संरक्षण देने की उनकी प्रवृत्ति अंततः कुचल ही दी जाएगी। चाहे पाकिस्तान हो या फिर हिंदुस्तान कहीं भी आतंक के अड्डों को स्वीकार नहीं किया जा सकता। जो लोग सोचते हैं कि इस्लामिक आतंकवाद से निपटने के लिए हमें हिंदू आतंकवाद को खड़ा करना होगा वे निहायत ही नादानी की बात करते हैं। आतंकवाद हमेशा ही विकास विरोधी होता है फिर वह किसी भी धर्म की आड़ लेकर क्यों न खड़ा किया जा रहा हो। पाकिस्तान के जो शासक ये बोलते हैं कि हम भी आतंकवाद का शिकार रहे हैं ये बोलकर वे दरअसल खुद की अक्षमता का ही उद्घोष कर रहे हैं। देश में नरेन्द्र मोदी हों या फिर उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ इन्होंने कहीं भी धर्म के नाम पर गुंडागर्दी को बढ़ावा नहीं दिया है। यही तो वह सकारात्मक विचार है जो देश को पांच ट्रिलियन डालर की अर्थव्यवस्था के लक्ष्य से आगे लेकर बढ़ता जा रहा है। पाकिस्तान के शासक क्या सोचते हैं ये उनकी समस्या है लेकिन उनकी समस्या यदि भारत को परेशान करेगी तो भारत की मजबूरी होगी कि वह सीमापार जाकर उन फोडों का इलाज करे। इसे यदि पाकिस्तान खुद पर हमला बताता है तो इस पर यकीन करना उसकी आवाम और वहां के शासकों की मूर्खता भरी सोच ही कही जाएगी।चीन जैसे देशों को भी समझना होगा कि वह भारत के प्रति वैमनस्यता रखकर यदि पाकिस्तान के आतंकवाद के साथ खड़ा होता है तो वह खुद के लिए एक नई कब्र खोद रहा है।

    तीन दिन के युद्ध में आपरेशन सिंदूर ने ये बता दिया है कि भारत, पाकिस्तान, बंग्लादेश और बंगाल के मुसलमानों को भी साफ समझ लें कि वे कट्टरपंथी ताकतों के भ्रमजाल में न उलझें। मोदी सरकार की नीति उनके विरुद्ध नहीं है। उन्हें उनकी धार्मिक सोच के साथ जीने की पूरी आजादी है। वे अपना जीवन संवारें इससे किसी को आपत्ति नहीं है। इसके विपरीत यदि वे चाहते हैं कि हम आतंकवाद के सहारे धर्मांतरण करेंगे और गजवा ए हिंद के मूर्खता पूर्ण सोच को लागू करने की कवायद में लगे रहेंगे तो फिर उनकी ये जिद अवश्य ही कुचली जाएगी। भारत के हिंदु हों या यहां के मुसलमान उन्हें कट्टरता की पट्टी पढ़ाकर उनका जीवन नहीं संवारा जा सकता। हां विकास की राह प्रशस्त करके जरूर उनका जीवन सुखमय बनाया जा सकता है। फिर वे चाहे तो हिंदु बनकर रहें या मुस्लिम बनकर किसी को क्या फर्क पड़ता है।

  • नाकामी पर पर्दा ढांकने रजिस्ट्रार ने छोटे मंत्री को ढाल बनाया

    नाकामी पर पर्दा ढांकने रजिस्ट्रार ने छोटे मंत्री को ढाल बनाया


    भोपाल, 11 अप्रैल,(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)। मध्यप्रदेश फार्मेसी काऊंसिल की प्रभारी रजिस्ट्रार माया अवस्थी ने काऊंसिल में चल रही अनियमिताओं पर पर्दा ढांकने के लिए लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा राज्य मंत्री को इस बार एक टूल की तरह इस्तेमाल किया है। लंबे समय से पंजीयन के लिए भटक रहे फार्मासिस्टों की शिकायतों पर अखबारी खबरों से परेशान प्रभारी रजिस्ट्रार ने इस बार राज्यमंत्री को अपनी ढाल बनाया। छोटे मंत्री के पास काऊंसिल का प्रभार भी नहीं है इसके बावजूद उन्होंने दौरा करके स्वास्थ्य मंत्री राजेन्द्र शुक्ल के अधिकार क्षेत्र का उल्लंघन कर डाला है।


    पिछले लंबे समय से प्रदेश के फार्मासिस्टों और केमिस्टों के बीच पंजीयन को लेकर मारामारी चल रही है।प्रदेश के फार्मेसी कालेजों से हर साल लगभग तीस हजार विद्यार्थी डिग्री लेकर निकलते हैं। फार्मासिस्ट के रूप में पंजीकृत होने के बाद वे देश और दुनिया के विभिन्न फार्मा संस्थानों में नौकरी पा सकते हैं। इस लिहाज से ये पंजीयन उनके जीवन के लिए सुनहरा मोड़ साबित होता है। फार्मासिस्टों की इसी चाहत का फायदा उठाकर काऊंसिल में लंबे समय से हेराफेरी चलती रही है। प्रभारी रजिस्ट्रार माया अवस्थी का कहना है कि फार्मेसी की डिग्री लेकर आवारा किस्म के लोग खुद को फार्मासिस्ट के रूप में पंजीकृत करवा लेते हैं और अपने पंजीयन प्रमाण पत्र के नाम पर मेडीकल दूकान खोलकर किराए पर दे देते हैं। इसीलिए हमारा प्रयास रहता है कि कम से कम फार्मेसिस्टों का पंजीयन हो ताकि अराजकता न फैले।


    यही तर्क देकर उन्होंने आज छोटे मंत्री नरेन्द्र शिवाजी पटेल का दौरा काऊंसिल में कराया। यहां मंत्रीजी के निर्देश पर फार्मेसी काऊंसिल के अध्यक्ष संजय जैन को बुला लिया गया। रजिस्ट्रार ने मंत्रीजी से कहा कि अध्यक्ष महोदय उन पर वाजिब पंजीयन जारी करने का दबाव बनाते हैं। इस पर अध्यक्ष ने मंत्रीजी को बताया कि हजारों विद्यार्थी परेशान घूमते रहते हैं इसीलिए वे रजिस्ट्रार को काऊंसिल में बैठने और प्रमाण पत्र जारी करने के निर्देश देते रहते हैं। फूड एवं ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन की रजिस्ट्रार और काऊंसिल की प्रभारी रजिस्ट्रार माया अवस्थी ने शिकायती लहजे में मंत्री जी से कहा कि अध्यक्ष महोदय यहां पदस्थ रजिस्ट्रार कुमारी दिव्या पटेल को भी जांच उपरांत पंजीयन जारी करने का निर्देश देते रहे हैं। कुमारी पटेल इन दिनों मातृत्व अवकाश पर गई हुईं हैं इसलिए मुझे काऊंसिल का प्रभार दिया गया है। मेरे पर इतना समय नहीं है कि मैं यहां बैठकर पंजीयन जारी करूं।


    गौरतलब है कि मध्यप्रदेश फार्मेसी काऊंसिल राज्य सरकार के निर्देश पर पंजीकृत संस्था है। इस संस्था में फार्मा क्षेत्र के चुने हुए जन प्रतिनिधियों को चुनाव के बाद पदस्थ किया जाता है। इसी संस्था के फंड से रजिस्ट्रार और स्टाफ का वेतन दिया जाता है। चुनी हुई काऊंसिल संस्था के फंड प्रबंधन और जनता की सुविधाओं के लिए प्रयास करती है। फंड का प्रबंधन रजिस्ट्रार के हाथ में होता है । राज्य प्रशासनिक सेवा से भेजे गए रजिस्ट्रार की नाकामियों का खमियाजा सरकार और काऊंसिल दोनों को भुगतना पड़ता है।


    फार्मा क्षेत्र को मजबूती देने के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के मेक इन इंडिया अभियान के अंतर्गत युवाओं को अवसर दिए जा रहे हैं. इन लक्ष्यों की पूर्ति के लिए ही काऊंसिल की चुनी हुई परिषद रजिस्ट्रार पर युवाओं के हित में जांच उपरांत पजीयन जारी करने के निर्देश देती रहती है। पिछले कुछ सालों से गड़बड़ियों को लेकर शिकायतें सामने आती रहीं हैं लेकिन सरकारी अमला अपना भ्रष्टाचार और नाकामी छुपाने के लिए तरह तरह के बहाने बनाता रहा है।


    विधानसभा चुनावों के पहले इंदौर की विजय नगर पुलिस ने जिस फर्जी मार्कशीट बनाने वाले गिरोह को गिरफ्तार किया था उसमें फार्मेसी काऊंसिल के तीन बाबू संजय तिलकवार, विजय शर्मा और आरएन पांडे भी धरे गए थे। उन्हें तो तभी निलंबित कर दिया गया था पर उन्होंने जिन फर्जी मार्कशीटों पर फार्मासिस्टों का पंजीयन कराया था उन्हें तत्कालीन रजिस्ट्रार शैलेन्द्र हिनोतिया ने मंजूरी दी थी। शैलेन्द्र हिनोतिया को बगैर जांच किए पंजीयन जारी करने का दोषी पाया गया था लेकिन उन्होंने अपनी ऊंची पहुंच का उपयोग करके खुद को गिरफ्तारी से बचा लिया। चुनावों की बेला में सरकारी असफलता की पोल न खुले इसके लिए काऊंसिल के पदाधिकारियों ने पूर्व की परिषद की गलतियों को नजरंदाज करने का अनुरोध करके मीडिया और विपक्षी दलों के लोगों को शांत किया था।


    माया अवस्थी को भी भय है कि वे बाबुओं की नोटशीट पर दस्तखत करके पंजीयन जारी करेंगी तो भविष्य मे उन पर भी घोटाले में शामिल होने के आरोप लग सकते हैं। दिव्या पटेल ने भी अपने कार्यकाल में गिने चुने पंजीयन जारी किए । ये प्रमाण पत्र भी भारी ऊहापोह के बीच बाबुओं की सिफारिश पर जारी किए गए थे। यहां भेजे जाने वाले रजिस्ट्रार असली नकली अभ्यर्थियों की छानबीन नहीं करना चाहते वे तो बाबुओं की नोटशीट को ही आधार बनाते हैं । इसकी वजह से काऊंसिल में लंबे समय से भ्रष्टाचार का बोलबाला रहा है। वर्तमान परिषद फार्मा सेक्टर के प्रतिभाशाली लोगों के बीच से आई है इसलिए रजिस्ट्रार के स्तर पर होने वाली गड़बड़ियों पर लगाम कसी गई है।


    काऊंसिल की परिषद के सदस्यों का कहना है कि राज्य के फार्मा सेक्टर को बल देने के लिए बड़ा वर्क फोर्स चाहिए। राज्य और केन्द्र सरकार की भी यही मंशा है। पंजीयन जारी करने की प्रक्रिया बड़ी पारदर्शी होती है। कालेजों से डिग्री पाने वाले विद्यार्थी यदि सभी प्रमाण पत्र प्रस्तुत करते हैं तो उन्हें पंजीयन जारी कर दिया जाना चाहिए। शासन को कई बार इसकी सूचना दी जा चुकी है कि फार्मा सेक्टर से जुड़ा पूर्णकालिक रजिस्ट्रार यहां पदस्थ किया जाए ताकि वह आवश्यक जांच उपरांत फार्मासिस्टों को पंजीकृत कर सके। अब सारी प्रक्रिया आनलाईन हो गई है इसलिए इसमें गड़बड़ी की संभावना नहीं है। इसके बावजूद प्रभारी रजिस्ट्रार न तो खुद दस्तावेंजों की जांच करवाने में इच्छुक हैं और न ही वे पंजीयन जारी करने मे रुचि लेती हैं। इससे सरकार को मिलने वाली फीस भी नहीं मिल पाती और युवाओं को चक्कर काटना पड़ते हैं जिससे वे दलालों के चंगुल में फंस जाते हैं। काऊंसिल इन्हीं गड़बड़ियों का निराकरण करने का प्रयास कर रही है।


    माया अवस्थी ने अपनी जवाबदारियों से पल्ला झाड़ने के लिए ही इस बार छोटे मंत्री को सामने ला खड़ा किया है। उनके पास फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन का प्रभार भी है। यहां फूड ड्रग के नमूनों की जांचें भी लंबित पड़ी हैं। ड्रग निर्माण की अनुमतियां जारी करने में भी भारी हेराफेरी की शिकायतें आ रहीं हैं। शायद यही वजह है कि छोटे मंत्रीजी को रजिस्ट्रार का पक्ष लेना न्याय जान पड़ रहा है। आज के दौरे में मंत्रीजी के साथ प्रभारी रजिस्ट्रार श्रीमती माया अवस्थी, मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी भोपाल डॉ. प्रभाकर तिवारी भी उपस्थित थे।