Category: सरकार

  • केन्द्र का आर्थिक पैकेज संजीवनी साबित होगाःदेवड़ा

    केन्द्र का आर्थिक पैकेज संजीवनी साबित होगाःदेवड़ा

    भोपाल 29 जून (प्रेस इंफार्मेंशन सेंटर)

    वित्त मंत्री जगदीश देवड़ा ने कहा है कि केन्द्र सरकार द्वारा की अर्थ-व्यवस्था को गति देने के लिए 6.29 लाख करोड़ का प्रोत्साहन पैकेज देने से कोविड-19 प्रभावित भारत की अर्थ-व्यवस्था में नया मोड़ आयेगा। उन्होने प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी को इस पहल के लिये धन्यवाद देते हुए कहा कि उनके नेतृत्व में केन्द्रीय वित्त मंत्री श्रीमती निर्मला सीतारमण एवं वित्त राज्य मंत्री श्री अनुराग ठाकुर द्वारा घोषित किया गया आर्थिक पैकेज अर्थ-व्यवस्था के लिये संजीवनी साबित होगा और बूस्टर डोज का काम करेगा। श्री देवड़ा ने मध्यप्रदेश की अर्थ-व्यवस्था को पुनर्जीवित करने के लिये मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान का भी आभार व्यक्त करते हुए कहा कि केन्द्र सरकार के नये पैकेज से मध्यप्रदेश को भरपूर लाभ होगा।

    मंत्री श्री देवडा ने कहा कि यह राहत पैकेज स्वास्थ्य, एमएसएमई, पर्यटन, निर्यात एवं आत्म-निर्भर भारत रोजगार योजना सहित विभिन्न क्षेत्रों के लिये संजीवनी की तरह है। इन क्षेत्रों को फिर से जीवन मिलेगा। उन्होंने कहा कि यह प्रोत्साहन पैकेज समय की मांग के अनुसार है। उन्होंने कोरोना प्रभावित उघमियों को कम ब्याज दर पर 1.1 लाख करोड़ आर्थिक पैकेज देने की घोषणा का स्वागत करते हुए कहा कि प्रभावित क्षेत्रों को कोरोना महामारी से उपजे आर्थिक संकट से उबरने में मदद मिलेगी।

    छोटे उद्यमियों को बढ़ावा मिलेगा

    मंत्री श्री देवड़ा ने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा किए गए इन उपायों से निजी निवेश, निर्यात, कृषि उत्पादकता में वृद्धि को मदद मिलेगी तथा छोटे शहरों में भी स्वास्थ्य संबंधी ढाँचागत सुविधाएँ मजबूत होगी। अर्थ-व्यवस्था के पुर्नद्धार को गति मिलेगी और आर्थिक गतिविधियों में भी तेजी आएगी। यह राहत पैकेज अर्थ-व्यवस्था के लिए जीवन रक्षक साबित होगा। इन उपायों से उत्पादन भी बढ़ेगा और रोजगार के अवसर भी पैदा होंगे। साथ ही छोटे उद्यमियों, व्यवसायियों और पर्यटन को बढावा मिलेगा। चिकित्सा क्षेत्र में निवेश बढ़ने से इस क्षेत्र में मजबूती मिलेगी। स्वास्थ्य सुविधाओं को लेकर किए गए प्रावधानों से पिछड़े क्षेत्रों में भी स्वास्थ्य सुविधाएँ बढ़ सकेंगी।

    मंत्री श्री देवड़ा ने कहा कि देश में 18 वर्ष से अधिक आयु के प्रत्येक नागरिक को फ्री वैक्सीन देने का क्रांतिकारी कदम उठा चुकी केंद्र सरकार ने अब इन आर्थिक उपायों से वित्तीय क्षेत्र को भी जरूरी वैक्सीन प्रदान कर दी है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री गरीब कल्याण योजना का लाभ नागरिकों को मिला है। अब इस योजना को नवंबर तक बढ़ाए जाने से गरीब लोगों को फायदा पहुँचेगा।

  • विंध्य की सत्ता को मजबूती देंगे नए विधानसभा अध्यक्ष गिरीश गौतम

    विंध्य की सत्ता को मजबूती देंगे नए विधानसभा अध्यक्ष गिरीश गौतम

    भोपाल,21 फरवरी( प्रेस सूचना केन्द्र)। मध्यप्रदेश विधानसभा का बजट सत्र सोमवार 22 फरवरी से प्रारंभ होने जा रहा है। नए अध्यक्ष के चुनाव के बाद एक बार फिर विंध्यक्षेत्र में रीवा जिले के देवतालाब से चौथी बार विधायक निर्वाचित हुए भाजपा के वरिष्ठ नेता गिरीश गौतम इस सत्र की अध्यक्षता करेंगे। आज हुई बैठक के बाद श्री गौतम ने विधानसभा अध्यक्ष पद के लिए नामांकन दाखिल किया। प्रमुख विपक्षी दल कांग्रेस ने उनके विरोध में कोई प्रत्याशी नहीं उतारने का निर्णय लिया है।

    मध्यप्रदेश की पंद्रहवीं विधानसभा का ये बजट सत्र कल 22 फरवरी से प्रारंभ होकर 26 मार्च 2021 तक चलेगा।इस विधानसभा का ये अष्टम सत्र होगा। इस 33 दिवसीय सत्र में कुल 23 बैठकें होंगी।इस दौरान आगामी वित्तीय वर्ष 2021-22 का बजट प्रस्तुत होगा। अध्यक्ष के निर्वाचन के बाद राज्यपाल का अभिभाषण होगा।

    भाजपा के वरिष्ठ विधायक गिरीश गौतम को विधानसभा अध्यक्ष के रूप में अवसर देकर भाजपा ने विंध्यक्षेत्र को एक बार फिर सत्ता में मजबूत भागीदारी दी है। मध्यप्रदेश के पिछले विधानसभा चुनाव में विंध्य क्षेत्र ने भाजपा को सर्वाधिक सीटें दीं थीं। इसके बावजूद मंत्रिमंडल में विंध्य क्षेत्र को अधिक प्रतिनिधित्व नहीं मिल पाया था। चंबल, मालवा, निमाड़,बुंदेलखंड और निमाड़ में तो कांग्रेस ने 2018 में अच्छा प्रदर्शन किया था लेकिन विंध्य के साथ न देने से ही कांग्रेस की सरकार कमजोर रही और अंततः उसे सत्ता से बाहर होना पड़ा। इसके बावजूद शिवराज सिंह सरकार में विंध्य क्षेत्र के केवल तीन विधायकों को ही जगह मिल सकी थी। मैहर के विधायक तो विंध्य क्षेत्र को प्रतिनिधित्व दिए जाने को लेकर खुला विरोध दर्ज करा चुके हैं।

    विंध्य क्षेत्र के ही श्रीनिवास तिवारी कांग्रेस सरकार में 1993 से 2003 तक स्पीकर रह चुके हैं। उन्हें मझगंवा से चुनाव हराकर 2003 में श्री गिरीश गौतम विधानसभा पहुंचे थे। परिसीमन के बाद वे देवतालाब से 2008 में भाजपा विधायक निर्वाचित हुए थे।

  • सहकारिता के दोषियों को बख्शा नहीं जाएगाः भदौरिया

    सहकारिता के दोषियों को बख्शा नहीं जाएगाः भदौरिया

    भोपाल,31जनवरी(प्रेस सूचना केन्द्र)। सहकारिता मंत्री अरविंद सिंह भदौरिया ने कहा है कि प्राथमिक सहकारी समितियों के लिए आबंटित धन की हेराफेरी करने वाले किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा। सतना और शिवपुरी जिले के अलावा अन्य जिलों मे जिन ऐसे मामलों में प्राथमिकी दर्ज की गई है उनमें दोषियों को अवश्य दंड मिलेगा। उन्होंने किसी भी सहकारी बैंक के बंद होने की खबरों को निराधार बताया। आज भोपाल में आयोजित पत्रकार वार्ता में उन्होंने पैक्स संस्थाओं में 3629 कनिष्ठ संविदा विक्रेताओं की नियुक्ति के आदेश जारी करने की जानकारी भी दी।

    सहकारिता और लोकसेवा प्रबंधन विभागों की विभिन्न गतिविधियों पर जानकारी देने के लिए अपेक्स बैंक में आयोजित पत्रकार वार्ता में आयुक्त सहकारिता और पंजीयक सहकारी संस्थाएं नरेश पाल, प्रभारी प्रबंध संचालक प्रदीप नीखरा और संचालक मंडल के सदस्य भी उपस्थित थे। श्री अरविंद भदौरिया ने बताया कि वर्ष 2018 में जिन कनिष्ठ संविदा विक्रेताओं को परीक्षा के माध्यम से चुना गया था उन्हें अब 10 फरवरी तक नियुक्ति दे दी जाएगी। युवाओं को रोजगार देने की दिशा में कदम बढ़ाते हुए शिवराज सरकार पुलिस विभाग में भी 5200 युवाओं को नौकरी देने जा रही है। उन्होंने बताया कि पैक्स संस्थाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए उन्हें आवश्यकता के अनुसार व्यवसाय करने की छूट भी प्रदान की गई है। प्रदेश की लगभग 17472 दूकानों में लगभग साढ़े तेरह हजार विक्रेता हैं।

    श्री भदौरिया ने बताया कि आत्मनिर्भर मध्यप्रदेश अभियान के तहत पैक्स संस्थाओं को दो करोड़ रुपयों तक का ऋण भी मुहैया कराया जा रहा है। सहकारिता आंदोलन को मजबूती देने के लिए तेलांगाना में जिस तरह की प्रक्रिया अपनाई गई है उसी तर्ज पर मध्यप्रदेश की सहकारी संस्थाओं को भी सफल बनाया जा रहा है। ये पूरा नेटवर्क कंप्यूटरीकृत होगा। इस आधुनिक नेटवर्क को बाजार की जरूरतों के आधार पर विकसित किया जा रहा है। आधुनिक दौर में कृषि तकनीकों में क्या फेरबदल जरूरी है उसे लेकर सहकारिता विभाग कई बदलाव कर रहा है।

    लोकसेवा प्रबंधन विभाग के मंत्री श्री भदौरिया ने बताया कि विभाग ने अपनी तकनीकी दक्षताओं से लगभग सात करोड़ लोगों की जरूरतों को पूरा करने की प्रक्रिया सरल बनाई है। युवाओं को जाति और निवास प्रमाणपत्र जैसी सुविधाएं सिर्फ मोबाईल पर आधार कार्ड टाईप करके चंद घंटों में मिलने लगी है। खसरों और खातों की प्रति भी अब आनलाईन उपलब्ध है।

    श्री भदौरिया ने एक सवाल के जवाब में बताया कि किसान कर्जमाफी का शोर मचाकर पूर्ववर्ती कमलनाथ सरकार ने केवल धोखाघड़ी की थी। किसान कर्जमाफी का बजटीय प्रावधान ही नहीं किया था। उस सरकार का कदम सहकारी बैंकों को बर्बाद करने का था। अब हमारी सरकार उन किसानों को भी मदद कर रही है जो कांग्रेस सरकार के झूठे वादों के फेर में डिफाल्टर हो गए थे। पैक्स संस्थाएं खत्म न हों इसके लिए सरकार ने आठ सौ करोड़ रुपए मुहैया कराए हैं।

    उन्होंने बताया कि सहकारी संस्थाओं को आबंटित राशि का दुरुपयोग करने वालों के खिलाफ अब कार्रवाई सुनिश्चित की जा रही है। ग्वालियर, छिंदवाड़ा ,सतना होशंगाबाद और कई जिलों में ऐसे अपराधियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई गई है। कुछ मामलों में कुर्की भी कराई जा चुकी है। गड़बड़ी रोकने के लिए अब पारदर्शी सिस्टम बनाया गया है।एक भी दोषी आदमी को बख्शा नहीं जाएगा।

  • किसान को खुशहाल बनाएंगे नए कानूनःकमल पटेल

    किसान को खुशहाल बनाएंगे नए कानूनःकमल पटेल

    अन्नदाताओं के जीवन में आसानी, समृद्धि, किसानी में आधुनिकता और प्रगति का मूल मंत्र लिए मोदी सरकार निरंतर कार्य कर रही है।इसका लाभ देश के करोड़ों किसानों को लगातार मिल रहा है।नए कृषि कानूनों के आने से यह सुनिश्चित हो गया है कि किसान अपनी फसलों को चाहे मंडी में बेचें या फिर मंडी के बाहर, ये उनकी मर्जी होगी। अब जहां किसान को लाभ मिलेगा वह बिना किसी अवरोध और रोक-टोक के वहां अपनी उपज बेच सकेगा।किसान पुत्र कृषिगत उद्योग धंधे अपने गांवों में ही लगा सकेंगे। किसान अब इन नवीन विधेयकों की बदौलत उद्योगपति भी बनेंगे।

    मोदी सरकार ने प्राथमिकता से स्वामीनाथन कमेटी की सिफारिशों के अनुरूप प्रगतिशील कदम उठाए है।देश के हर गांव का किसान अपनी फसलों की सुरक्षा को लेकर आश्वस्त रहे इसलिए भंडारण की आधुनिक व्यवस्थाएं बनाने, कोल्ड स्टोरेज बनाने और फूड प्रोसेसिंग के नए उपक्रम लगाने के लिए सरकार ने तेजी से कदम बढ़ाते हुए नए द्वार खोल दिए हैं।यदि बात न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) की करें, तो मोदी सरकार किसानों को बेहतर लागत मूल्य देकर किसानों के जीवन में क्रांतिकारी परिवर्तन लाने में सफल हुई है। वर्ष 2014 के पूर्व और वर्ष 2014 के बाद एमएसपी का तुलनात्मक अध्ययन करें, तो हम पायेंगे कि विभिन्न फसलों पर न्यूनतम समर्थन मूल्य वर्ष 2014 के बाद निरंतर बढ़ा है। यूपीए सरकार में गेहूँ का एमएसपी 1400 रुपये प्रति क्विंटल था, जबकि आज 1975 रुपये प्रति क्विंटल है। मूंग दाल पर एमएसपी 4500 रुपये था, जबकि वर्तमान सरकार में 7200 रुपये है। मसूर दाल की एमएसपी 2950 रुपये से बढ़कर आज 5100 रुपये है। ज्वार 1520 रुपये से बढ़कर 2640 रुपये है। धान की एमएसपी 1310 रुपये से बढ़कर 1870 रुपये है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी ने हाल ही में मध्यप्रदेश के किसानों से बात करते हुए इन उपलब्धियों का जिक्र भी किया और पूरी विनम्रता से अन्नदाताओं के हितों के लिए सभी सकारात्मक कदम उठाने का भरोसा भी दिलाया।

    किसान हितों के लिए दूरगामी और प्रभावकारी योजनाएँ केन्द्र सरकार लागू कर रही है। नवीन कृषि विधेयक किसानों के आर्थिक सशक्तिकरण के मार्ग को सरल और सुगम बनाएंगे। यह विधेयक किसानों के आर्थिक उत्थान का मुख्य साधन बनेंगे। मध्यप्रदेश के लोकप्रिय मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान स्वयं किसान है और वे किसानों के हितों के लिए प्रतिबद्धता से कार्य करने के लिए जाने जाते हैं। वे लगातार प्रदेश के किसानों से संवाद कर रहे है। ये कानून उनके हित में हैं। मैंने हरदा जिले में किसान चौपाल अभियान प्रारंभ किया है। नवीन कृषि कानूनों के समर्थन में किसान चौपालों में नये कृषि कानूनों पर मैं स्वयं बात कर रहा हूँ। हम सभी को मिलकर नये कृषि कानूनों को लेकर किसानों से बातचीत करना चाहिए। इससे इन कानूनों को लेकर किसानों में फैले भ्रम को दूर किया जा सकेगा। सही मायनों में इन विधेयकों से किसानों की तकदीर और प्रदेश एवं देश की तस्वीर बदलेगी। इन विधेयकों में वे तमाम प्रावधान किए गए हैं, जिनसे किसानों में खुशहाली आये और वे समृद्द हों। राष्ट्र में सुख और समृद्धि बढ़े। अंततः हम सबका लक्ष्य अपने राष्ट्र की खुशहाली है और सरकार लोककल्याणकारी नीतियों से देश के करोड़ों लोगों के सपनों को साकार कर रही है।

    वर्ष 2014 के बाद केंद्र की मोदी सरकार की लोककल्याणकारी नीतियों से देश के किसानों के जीवन में बेहद सुधार हुआ है। प्रधानमंत्री किसान सम्मान योजना से किसानों के बैंक खातों में रुपये छ: हजार की राशि सीधे ट्रांसफर होती है। इतना ही नहीं प्रदेश सरकार भी मुख्यमंत्री किसान सम्मान योजना अंतर्गत चार हजार रुपये की अतिरिक्त राशि किसानों के खातों में ट्रांसफर कर रही है। यह क्रांतिकारी बदलाव है जिससे करोड़ों भोले-भाले किसानों को सीधे उनके बैंक खातों में पूरे पैसे मिलना सुनिश्चित किया है। देश के हर किसान को पानी मिले और हर खेत तक पानी पहुंचे इस दिशा में मोदी सरकार लगातार काम कर रही है और हजारों करोड़ रुपए खर्च करके इन सिंचाई परियोजनाओं को मिशन मोड में पूरा करने में जुटी है। इसके साथ ही मधुमक्खी पालन,पशुपालन पालन और मछली पालन को भी लगातार बढ़ावा दिया जा रहा है।

    इस साल पंचायती राज स्थापना दिवस 24 अप्रैल को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशभर के सरपंचों से बात करते हुए किसानों के जीवन में बदलाव के लिए प्रधानमंत्री स्वामित्व योजना की रूप में एक स्वर्णिम योजना की शुरुआत की थी। जिससे भारत  के किसान,ग्रामीण समाज का विकास और प्रगति से सीधे जुडने का मार्ग प्रशस्त हुआ है। प्रधानमंत्री स्वामित्व योजना के तहत गांवों में ड्रोन से गाँव,खेत और भूमि की मैपिंग की जा रही है। इससे गांवों में संपत्ति को लेकर विवाद खत्म हो जाएंगे। इससे भूमि की सत्यापन प्रक्रिया में तेजी और भूमि भ्रष्टाचार को रोकने में सहायता मिलेगी। पहले गांव की जमीन पर लोन मिलना मुश्किल होता था,इसी कारण जोत की जमीन बेचकर किसान परिवार शहर की ओर पलायन कर जाते थे। अब गांवों में भी लोग बैंकों से लोन ले सकेंगे और इन सब सुविधाओं के कारण ग्रामों के विकास कार्यों को प्रगति मिलेगी। जमीन की मैपिंग के बाद गांव के लोगों को उस संपत्ति का मालिकाना प्रमाण-पत्र दिया जाएगा। ग्रामीणों के पास स्वामित्व होगा तो उस संपत्ति के आधार पर ग्रामीण बैंक से लोन ले सकेंगे। नये विधेयकों के आने से किसान आगे बढ़कर उद्यमी बनेंगे। हम सब मिलकर आत्मनिर्भर मध्यप्रदेश और आत्मनिर्भर भारत के सपने को साकार करेंगे।

  • आंगनबाड़ियों में गाय का दूध देने का फैसला सराहनीयः संदीप डाकोलिया

    आंगनबाड़ियों में गाय का दूध देने का फैसला सराहनीयः संदीप डाकोलिया


    भोपाल,28 नवंबर( प्रेस सूचना केन्द्र) अखिल भारतीय जैन पत्रकार महासंघ के प्रदेश अध्यक्ष संदीप डाकोलिया व प्रदेश महासचिव शिरीष सकलेचा का कहना है कि राज्य की शिवराज सिंह चौहान सरकार ने आंगनबाड़ियों में अंडे की जगह दूध देने के फैसले के अमल पर जो सक्रियता दिखाई है वह सराहनीय है। सरकार के इस निर्णय से पूरा अहिंसक समाज प्रसन्नता जाहिर कर रहा है।


    उन्होंने प्रेस से चर्चा में कहा कि कांग्रेस सरकार की पूर्व महिला एवं बाल विकास मंत्री इमरती देवी ने आंगनवाड़ी में बच्चों को अंडे देने का निर्णय लिया गया था। इस फैसले का अखिल भारतीय जैन पत्रकार महासंघ ने भी पुरजोर विरोध किया था।कमलनाथ सरकार के पतन के बाद अब प्रदेश की गौ प्रेमी सरकार ने इस निर्णय को पलटते हुए बच्चों को कुपोषण से मुक्त करने के लिए गाय के दूध देने का जो निर्णय लिया है वह सभी के हित में है।

    उन्होंने कहा कि गाय का दूध सभी तरह से पौष्टिक होता है। इसे सभी धर्म के लोग स्वीकार करते हैं। आंगनवाड़ी में अब सभी बच्चे एक साथ दूध ग्रहण कर सकेंगे ।किसी को कोई परहेज नहीं होगा।इस सराहनीय निर्णय के लिए अखिल भारतीय जैन पत्रकार महासंघ के पदाधिकारियों ने प्रदेश सरकार का साधुवाद ज्ञापित किया है।

    इस सरहानीय निर्णय के लिए अखिल भारतीय जैन पत्रकार महासंघ के पदाधिकारियों संस्थापक अध्यक्ष संजय लोढा, संरक्षक हिम्मत मेहता, ऋतुराज बुड़ावनवाला, सलाहकार राजेश नाहर, जवाहर डोसी उपाध्यक्ष देवेन्द्र सांड, पंकज पटवा, सचिव संदीप जैन, मयंक बाफना, संगठन सचिव विमल कटारिया, संयुक्त सचिव मेहुल बम, अरुण बुरड़, प्रचार सचिव प्रदीप जैन सिंगोली, गौरव दुग्गड़ आदि ने प्रदेश सरकार का साधुवाद ज्ञापित किया है.

  • इंस्पेक्टर राज से उद्योगों को राहत

    इंस्पेक्टर राज से उद्योगों को राहत

    भोपाल,5मई(प्रेस सूचना केन्द्र) उद्योगों और श्रमिकों के हित में 4 केन्द्रीय और 3 राज्य अधिनियमों में संशोधन की अधिसूचना जारी कर दी गई है। इसके साथ ही लोक सेवा प्रदाय गारंटी अधिनियम में 18 सेवाओं को एक दिन में देने का प्रावधान किया जा रहा है। मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने अधिकारियों के साथ बैठक में विभिन्न अधिनियमों में प्रस्तावित संशोधनों में बिन्दुवार चर्चा कर कोरोना के बाद उत्पन्न स्थिति में आगामी एक हजार दिनों में उद्योगों को विभिन्न रियायतें देने की जरूरत बताई थी। श्री चौहान ने आज के प्रतिस्पर्धी दौर में निवेश बढ़ाने और श्रमिकों को रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने के उद्देश्य से श्रम कानूनों में आवश्यक संशोधन के प्रस्ताव तैयार करने के निर्देश दिए थे।

    कारखाना अधिनियम 1948 के अंतर्गत कारखाना अधिनियम 1958 की धारा 6,7,8 धारा 21 से 41 (एच), 59,67,68,79,88 एवं धारा 112 को छोड़कर सभी धाराओं से नवीन उद्योगों को छूट रहेगी। इससे अब उद्योगों को विभागीय निरीक्षणों से मुक्ति मिलेगी। उद्योग अपनी मर्जी से थर्ड पार्टी इंस्पेक्शन करा सकेंगे। रजिस्टर के संधारण में छूट मिलेगी। फेक्ट्री इंस्पेक्टर द्वारा जाँच एवं निरीक्षण से मुक्ति मिलेगी। उद्योग अपनी सुविधा में शिफ्टों में परिवर्तन कर सकेंगे।

    मध्यप्रदेश औद्योगिक संबंध अधिनियम 1960 में संशोधन के साथ इस अधिनियम के प्रावधान उद्योगों पर लागू नहीं होंगे। इससे किसी एक यूनियन से समझौते की बाध्यता समाप्त हो जायेगी। औद्योगिक विवाद अधिनियम 1947 में संशोधन के बाद नवीन स्थापनाओं को एक हजार दिवस तक औद्योगिक विवाद अधिनियम में अनेक प्रावधानों से छूट मिल जायेगी। संस्थान अपनी सुविधानुसार श्रमिकों को सेवा में रख सकेगा। उद्योगों द्वारा की गयी कार्यवाही के संबंध में श्रम विभाग एवं श्रम न्यायालय का हस्तक्षेप बंद हो जायेगा।

    मध्यप्रदेश औद्योगिक नियोजन (स्थायी आदेश) अधिनियम 1961 में संशोधन के बाद 100 श्रमिक तक नियोजित करने वाले कारखानों को अधिनियम के प्रावधानों से छूट मिल जायेगी। इससे श्रमिक निष्ठापूर्वक उत्पादन में सहयोग करेंगे। मध्यप्रदेश श्रम कल्याण निधि अधिनियम 1982 के अंतर्गत जारी किये जाने वाले अध्यादेश के बाद सभी नवीन स्थापित कारखानों को आगामी एक हजार दिवस के लिये मध्यप्रदेश श्रम कल्याण मण्डल को प्रतिवर्ष प्रति श्रमिक 80 रूपये के अभिदाय के प्रदाय से छूट मिल जायेगी। इसके साथ ही वार्षिक रिटर्न से भी छूट मिलेगी।

    लोक सेवा प्रदाय गारंटी अधिनियम 2010 के अंतर्गत जारी अधिसूचना के अनुसार श्रम विभाग की 18 सेवाओं को पहले तीस दिन में देने का प्रावधान था। अब इन सेवाओं को एक दिन में देने का प्रावधान किया गया है। कारखाना अधिनियम 1948, दुकान एवं स्थापना अधिनियम 1958, ठेका श्रम अधिनियम 1970, अंतर्राज्यीय प्रवासी कर्मकार अधिनियम 1979, मोटर परिवहन कर्मकार अधिनियम 1961, मध्यप्रदेश भवन एवं अन्य संनिर्माण कर्मकार अधिनियम 1996 और बीड़ी एवं सिगार कामगार (नियोजन की शर्ते) अधिनियम 1966 में पंजीयन के लिये ऑनलाइन आवेदन करने पर एक दिन में ही ऑनलाइन पंजीयन मिल जाएगा। इससे पंजीयन के लिये बेवजह कार्यालयों के चक्कर काटने से मुक्ति मिलेगी।

    दुकान एवं स्थापना अधिनियम 1958 में संशोधन के बाद कोई भी दुकान एवं स्थापना सुबह 6 से रात 12 बजे तक खुली रह सकेगी। इससे दुकानदारों के साथ ही ग्राहकों को भी राहत मिलेगी। पचास से कम श्रमिकों को नियोजित करने वाले स्थापनाओं में श्रम आयुक्त की अनुमति के बाद ही निरीक्षण किया जा सकेगा। निरीक्षण में पारदर्शिता होगी। कारखानों को दो रिटर्न के स्थान पर एक ही रिटर्न भरना पड़ेगा।

    ठेका श्रमिक अधिनियम 1970 में संशोधन के बाद ठेकेदारों को 20 के स्थान पर 50 श्रमिक नियोजित करने पर ही पंजीयन की बाध्यता होगी। 50 से कम श्रमिक नियोजित करने वाले ठेकेदार बिना पंजीयन के कार्य कर सकेंगे। इस अधिनियम में संशोधन के लिये प्रस्ताव केन्द्र सरकार को भेजा गया है।

    कारखाना अधिनियम के अंतर्गत कारखाने की परिभाषा में विद्युत शक्ति के साथ 10 के स्थान पर 20 श्रमिक और बगैर विद्युत के 20 के स्थान पर 40 श्रमिक किया गया है। इस संशोधन का प्रस्ताव भी केन्द्र शासन को भेजा गया है। इससे छोटे उद्योगों को कारखाना अधिनियम के पंजीयन से मुक्ति मिलेगी। इसके पूर्व 13 केन्द्रीय एवं 4 राज्य कानूनों में आवश्यक श्रम संशोधन किये जा चुके हैं।

  • परिवारवाद पर संघवाद की विजय का शंखनाद

    परिवारवाद पर संघवाद की विजय का शंखनाद

    शिवराज सिंह चौहान के चौथी बार मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के साथ ही ये भी साबित हो गया है कि मध्यप्रदेश में संघवाद ने परिवारवाद को परास्त कर दिया है। भारतीय जनता पार्टी की अब तक की विकासयात्रा में ये सबसे महत्वपूर्ण चरण था जिसमें कभी कांग्रेस के सुपरस्टार राजनेता रहे ज्योतिरादित्य सिंधिया ने सारी बाधाएं तोड़कर सत्ता की कमान उसे थमाई है। ज्योतिरादित्य सिंधिया के साथ कांग्रेस के जिन 22 पूर्व मंत्रियों और विधायकों ने आगे बढ़कर कुंठित कमलनाथ सरकार के षड़यंत्रों को धराशायी किया वह परिवारवाद पर सबसे प्रभावी प्रहार साबित हुआ। कमलनाथ के नेतृत्व वाली कमलनाथ सरकार ने लगभग पंद्रह महीने के शासनकाल में वैमनस्यपूर्ण तरीके से प्रदेश के विभिन्न वर्गों को प्रताड़ित किया वह अब आपातकाल की तरह एक कलंकित इतिहास बन गया है। कांग्रेस के नेतागण भाजपा के बहाने जनता को गालियां देते रहे उससे मध्यप्रदेश का माहौल कलहपूर्ण बन गया था। आपराधिक वारदातों के बढ़ते आंकड़े और आर्थिक दुर्दशा से मुक्ति का ये स्वप्न इतनी जल्दी साकार हो सकेगा इसका अनुमान शायद भाजपा के शीर्ष नेताओं को भी नहीं था।

    शपथ लेने से पहले विधायक दल ने जब शिवराज सिंह चौहान को अपना नेतृत्व सौंपा तब शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि मैं कभी अपनी मां समान पार्टी को कलंकित नहीं होने दूंगा। साथ में उन्होंने दुहराया कि अब हम मिलजुलकर विकास का नया इतिहास लिखेंगे। उनके हर भाषण में ज्योतिरादित्य सिंधिया और कांग्रेस के विधायकों के प्रति आभार का भाव था। शायद शिवराज सिंह चौहान की यही विनम्रता उन्हें अपने राजनीतिक प्रतिद्वंदियों के बीच अजात शत्रु बनाती है। यही वजह है कि पिछले विधानसभा चुनावों में माफ करो महाराज का नारा देने वाली शिवराज की भाजपा आज ज्योतिरादित्य सिंधिया से टकराव की वजह नहीं बन रही है।

    कांग्रेस के नेताओं को अब भी भरोसा नहीं हो पा रहा है कि उन्होंने अपनी ही कुल्हाड़ी से कैसे अपने ही पैरों को लहू लुहान कर डाला है। दरअसल पिछले पंद्रह सालों के दौरान राजनीति जो करवट ले चुकी है उसका अनुमान बुजुर्ग हो चुके कमलनाथ नहीं लगा पाए थे। उनका राजनीतिक दंभ ये समझने को तैयार ही नहीं था कि किसी विभागीय मंत्रालय की कार्यप्रणाली और प्रदेश के मुखिया की कार्यप्रणाली में भारी अंतर होता है। प्रदेश के मुखिया से लोगों की अपेक्षाएं होती हैं जिन्हें गैरकानूनी तबादले पोस्टिंग की कमीशनखोरी के अलावा भी अन्य साधनों से पूरा किया जा सकता है। कांग्रेस आज भी राबिनहुड की शैली की कबीलाई संस्कृति से बाहर नहीं आ सकी है। नेताओं के इर्द गिर्द बना कांग्रेस का संगठन केवल चंद हजार कार्यकर्ताओं की जरूरतें पूरी करने तक ही सिमटा रहा। जबकि प्रदेश के साढ़े सात करोड़ लोग अपनी अपेक्षाओं के लिए सरकार के प्रति उम्मीदें लगाए बैठे रह गए।

    कमलनाथ ने सरकारी तंत्र को अपनी आय का स्रोत मान लिया था।उनका सारा ध्यान सरकारी तंत्र को निचोड़ने में ही लगा रहा। शिवराज सिंह चौहान की विनम्रता को मूर्खता बताने वाले कमलनाथ ने सरकारी तंत्र को जूते की नोंक पर ऱखकर सरकार चलाने का जो प्रयोग किया वह चंद दिनों में ही धराशायी हो गया। अफसरशाही ने कमलनाथ के निर्देशों पर सौ फीसदी अमल शुरु कर दिया और जनहितैषी योजनाओं की समीक्षा सख्ती से कर डाली। नतीजा ये हुआ कि जो योजनाएं जनता के लिए सहारा बनी हुईं थीं वे दूर की कौड़ी साबित होने लगीं। परिवारवाद के एजेंट के रूप में कमलनाथ को गांधी परिवार ने मध्यप्रदेश भेजा था। वे सोनिया गांधी के विश्वसनीय थे इसलिए उन्होंने जागीरदार की तरह पार्टी हाईकमान के लिए चंदा वसूली शुरु कर दी। उनका सारा ध्यान प्रदेश के उस सरकारी तंत्र पर था जिसे राज्य के खजाने से हर महीने तीन हजार दो सौ करोड़ रुपए वेतन के रूप में दिए जाते हैं। अफसरों को टारगेट दिए गए कि उन्होंने टैक्स वसूली का टारगेट पूरा नहीं किया तो उन्हें वेतन नहीं दिया जाएगा। कई विभागों में वेतन बांटने का विलंब शुरु हो गया दो तीन महीनों का वेतन लंबित रहना सामान्य बात हो गई थी। यही वजह है कि कमलनाथ सरकार बड़ी तेजी से अलोकप्रिय हो गई।

    शिवराज सरकार ने पंद्रह सालों के प्रयोग के बीच ढेरों ऐसी योजनाएं चालू कीं थीं जिनसे आम जनता को सत्ता में भागीदार बनाया गया था। बेशक वे योजनाएं उत्पादक नहीं थीं लेकिन बाजार व्यवस्था को संतुलित बनाने में उनका योगदान अतुलनीय था। शिवराज की निवृत्तमान सरकार की सबसे बड़ी असफलता ये थी कि इतना लंबा अंतराल सत्ता पर काबिज रहने के बावजूद वह उत्पादकता नहीं बढ़ा पाई थी।इस वजह से हर महीने खजाने पर बोझ बढ़ता जा रहा था। पूर्व वित्तमंत्री राघवजी भाई ने आय को बढ़ाने का जो चमत्कार कर दिखाया था उससे ढेरों योजनाएं शुरु हो पाईं थीं। राघवजी भाई इससे अधिक योजनाएं चालू करने के पक्षधर नहीं थे क्योंकि इससे राज्य का वित्तीय प्रबंधन बिगड़ सकता था। उनकी विदाई के बाद शिवराज ने खजाने की चाभी जयंत मलैया को सौंप दी। मलैया उदार साबित हुए लेकिन इससे खजाना लुट गया। उनकी खजाना खाली है वाली प्रतिक्रिया को कमलनाथ ने सूत्र वाक्य बना लिया और अपने पूरे कार्यकाल में जन प्रतिनिधियों की मांग को शांत करने के लिए खजाना खाली है का राग अलापते रहे। जबकि उनके स्वयं के जिले छिंदवाड़ा में योजनाओं की बाढ़ लग गई। लगभग एक सौ तेरह हजार करोड़ रुपए की योजनाएं अकेले छिंदवाड़ा जिले में शुरु कर दीं गईं। इससे विधायकों में असंतोष फैल गया।

    ज्योतिरादित्य से कोटे से सत्ता में आए विधायकों की बैचेनी की वजह भी यही थी कि अफसर शाही उनकी बात ही नहीं सुन रही थी। कमलनाथ ने अफसरों की तैनाती की जवाबदारी दिग्विजय सिंह को ही सौंप दी थी। यही कहा जाने लगा था कि पर्दे के पीछे सरकार दिग्विजय सिंह चला रहे हैं। ये सच भी था, मंत्रालय से लेकर जिलों तक की कमान दिग्विजय़ सिंह के इशारे पर ही दी गई थी। उनके बेटे जयवर्धन सिंह को जिस तरह नगरीय प्रशासन विभाग देकर कमाई के अवसर दिए गए उससे विधायकों में असंतोष बढ़ गया। चुनाव के दौरान बेरोजगार युवाओं को चार हजार रुपए का बेरोजगारी भत्ता देने का झूठा वादा दिग्विजय सिंह की चतुराई भरी चाल थी जबकि सत्ता में आने के बाद वह योजना चालू ही नहीं की जा सकी।इतनी शर्ते लगाईं गईं कि योजना का लाभ युवाओं को दिया ही नहीं जा सकता था। जबकि निजी कमाई के लिए शहरों के मास्टर प्लान धड़ाधड़ लाए गए और शहरों में अराजकता का माहौल बना देने की तैयारी शुरु हो गई। यदि ये तख्तापलट न की जाती तो शहरों के रहवासी इलाकों में आम नागरिकों का रहना भी दूभर हो जाता।

    कमलनाथ सरकार ने जिस तरह राज्य को चंद परिवारों तक समेटने की मुहिम चलाई उसका लाभ उनके चंद उद्योगपति मित्रों को तो मिलना शुरु हो गया लेकिन आम जनता के पाले में सिर्फ प्रताड़ना आई। जनता को लूटकर परिवार को संवारने की ये शैली लोकतांत्रिक लगे इसके लिए कर्जमाफी और सस्ती बिजली का शिगूफा इस्तेमाल किया गया। इन योजनाओं का शोर तो बहुत हुआ लेकिन आम जनता फायदे का इंतजार करती रही। जिन आदिवासियों को बरगलाकर कमलनाथ ने उनकी बहुलता वाली सीटें जीतीं थीं जल्दी ही उनकी भी समझ में आ गया कि वे ठगे गए हैं। ब्राह्रमणों को बरगलाकर जिस सवर्ण समाज पार्टी ने शिवराज के बयान कोई माई का लाल आरक्षण समाप्त नहीं कर सकता को बदनामी का हथकंडा बनाया था उन्हें भी जल्दी अहसास हो गया कि उन्होंने कितनी बड़ी गलती की है।

    दरअसल आजादी की चाहत में देश ने कांग्रेस के जिस परिवारवाद को स्वीकार किया था उसे हटाने के लिए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ को लंबी लड़ाई लड़नी पड़ी है। कांग्रेस जिस धर्मनिरपेक्षता की आड़ में टुकड़े टुकड़े गेंग बनकर समाज को विभाजित करती रही वहीं संघ समाज को जोड़ने की मुहिम चलाता रहा। संघ के करोड़ों कार्यकर्ताओं ने एक राष्ट्र के विचार के लिए अपने जीवन के स्वर्णिम बसंत न्यौछावर कर दिए हैं। इसके बाद भी उन्हें लांछन और बदनामियां ही झेलनी पड़ीं। बरसों के प्रयासों के बाद जब ज्योतिरादित्य जैसे युवा सितारे ने भाजपा में शामिल होकर संघ के सामाजिक सौहार्द्र के विचार पर अपनी मुहर लगाई है तब जाकर भारतीय जनता पार्टी को वैचारिक विजयश्री का आश्वासन मिल सका है। जो लोग ज्योतिरादित्य को गद्दार या अवसरवादी बताकर लांछित कर रहे हैं उन्हें जल्दी ही समझ में आ जाएगा कि लोगों को जोड़ने का ये विचार कैसे सबल राष्ट्र का प्रणेता साबित होता है। कोई लीडर कैसे समाज को हितकारी लक्ष्यों की ओर प्रवृत्त कर देता है।फिलहाल तो शिवराज सरकार को अपने पुराने ढर्रे से बाहर निकलकर अपनी पार्टी की मौलिक शैली का उद्घोष करना होगा। यही शैली संघवाद की विजयपताका साबित होगी।

  • महामहिम ने निकाली कमलनाथ की झूठी हेकड़ी

    महामहिम ने निकाली कमलनाथ की झूठी हेकड़ी

    भोपाल,15मार्च(प्रेस सूचना केन्द्र)। प्रदेश में बगावत के बाद अल्पमत में आई कमलनाथ सरकार की सारी हेकड़ी राज्यपाल महामहिम ने मुख्यमंत्री को भेजे अपने पत्र में ही निकाल दी है।उन्होंने कहा है कि विधायकों से प्राप्त जानकारी के अनुसार आपकी सरकार अल्पमत में आ चुकी है इसलिए राज्यपाल के अभिभाषण के तुरंत बाद आप सदन में विश्वासमत हासिल करें। यह कार्यवाही हर हाल में 16 मार्च को शुरु होगी और स्थगित,विलंबित या निलंबित नहीं की जा सकेगी।

    महामहिम लालजी टंडन ने मुख्यमंत्री कमलनाथ को 14 मार्च को लिखे पत्र में कहा है कि आपकी सरकार के 22 विधायकों ने अपने पद त्याग की सूचना विभिन्न माध्यमों से दी है। छह मंत्रियों के इस्तीफे विधानसभा ने भी मंजूर कर दिए हैं। ये स्थिति अत्यंत गंभीर है इसलिए प्रजातांत्रिक मूल्यों की रक्षा के लिए आप सदन में विश्वास मत हासिल करें।

    कांग्रेस के पूर्व सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया के भारतीय जनता पार्टी में शामिल हो जाने के बाद कांग्रेस के ही 22 सांसदों ने अपनी सदस्यता से इस्तीफा दे दिया था। वे विधायक बैंगलूरु के एक रिसार्ट में रह रहे हैं और वीडियो के माध्यम से उन्होंने पद त्याग की सूचना सार्वजनिक की है। कांग्रेस के कई अन्य मंत्रियों ने भी सुरक्षा की मांग करके सरकार के कामकाज के प्रति नाराजगी व्यक्त की है। इस्तीफा दे चुके जनसंपर्क मंत्री ने आज प्रेसवार्ता के माध्यम से आरोप लगाया कि कांग्रेस के 16 विधायकों को भाजपा ने बंदूक की नोंक पर बंधक बना रखा है। उन विधायकों पर सम्मोहित करने वाला जादू टोना किया गया है।

    इसी के साथ उन्होंने कैबिनेट बैठक में करोना वायरस के कहर की भी चर्चा का उल्लेख किया। कांग्रेस से जुड़े लोगों का कहना है कि होटल में ठहरे दो विधायकों में करोना वायरस से प्रभावित होने के लक्षण मिले हैं इसलिए वे सदन की कार्यवाही थोड़े दिनों के लिए स्थगित करने की मांग करेंगे। कैबिनेट बैठक के बाद सरकार के कई पूर्व मंत्रियों ने दावा किया कि कमलनाथ सरकार सदन में विश्वासमत हासिल कर लेगी। इन बड़बोले नेताओं ने खोखले दावे करते हुए कहा कि सरकार न केवल पांच साल का कार्यकाल पूरा करेगी बल्कि एक और बार सत्ता में आएगी।

    विकास की डींगें हांकते मुख्यमंत्री कमलनाथ और उनके मंत्रियों की सारी हेकड़ी राज्यपाल लालजी टंडन के इस पत्र से आज निकल गई है। पूर्व वित्तमंत्री तरुण भानोट तो इसके बाद कहते सुने गए कि हमने किसानों के दो लाख तक के कृषि ऋण माफ करने का वादा किया था किसी भी प्रकार के ऋण माफ करने का वादा हमने कभी किया ही नहीं। इसी तरह अन्य वादों की असफलताओं को लेकर पूर्व मंत्रियों ने दबे स्वरों में स्वीकार किया कि सरकार की कई नीतियां अपेक्षाकृत रूप से सफल नहीं हो पाईं हैं। सरकार की नीतियों की असफलता की वजह से ही कांग्रेस के भीतर असंतोष फूटा और उनकी सरकार आज विदाई की दहलीज पर पहुंच गई है। हम मुख्यमंत्री कमलनाथ को उद्योगपति के रूप में प्रचारित किए जाने वाले वादों से प्रभावित हो गए थे जबकि सत्ता में आने के बाद वे सरकारी तंत्र और व्यापारियों की लूट के हथकंडे अपनाते देखे गए।

  • रबर की गुड़िया का खेल नहीं कलेक्टरी

    रबर की गुड़िया का खेल नहीं कलेक्टरी

    रबर की गुड़िया और खिलौनों से खेलने वाले बच्चे पूरी जिंदगी उस साए से मुक्त नहीं हो पाते हैं। चाहे वे कितनी ही बड़ी जवाबदारी क्यों न संभाल लें लेकिन उन्हें लगता है कि वे गुड़िया से ही खेल रहे हैं और वह कोई जवाब नहीं देगी। उसके जवाब भी उन्हें ही देना होंगे। ऐसा ही कुछ राजगढ़ की कलेक्टर निधि निवेदिता और डिप्टी कलेक्टर प्रिया वर्मा के साथ घट रहा है।जिला दंडाधिकारी का पद पाने के बाद भी उन्हें लगता है कि वे बच्चों का खेल खेल रहीं हैं। गलती करने पर उन्हें लाड़ से डपटने वालों को छोड़कर किसी का सामना नहीं करना पड़ेगा। वे भूल रहीं हैं कि वे जनता की अनुबंधित नौकर हैं। उन्हें जनता ने अपनी व्यवस्थाओं की जवाबदारी निभाने के लिए नौकरी पर रखा हुआ है। अफसरी का ज्यादा अनुभव न होने की वजह से उन्हे लगता है कि उनकी जवाबदारी जनता के प्रति नहीं बल्कि शासकों के प्रति है। अंग्रेजों की प्रेरणा से बनी अफसरशाही शुरु से ही शासकों के प्रति झुकाव रखती रही है।इस समस्या के निदान के लिए ही स्वर्गीय राजीव गांधी ने पंचायती राज की अवधारणा को पूरे देश में लागू किया था। जिस दिग्विजय सिंह ने पंचायती राज व्यवस्था को प्रदेश में सख्ती से लागू किया वही आज बिगड़े दिमाग वाली अफसरों का बचाव कर रहे हैं। उन्हें तो अपनी सरकार केवल इसलिए गंवानी पड़ी थी क्योंकि पंचायती राज व्यवस्था अराजकता की भेंट चढ़ गई थी और अफसरशाही ने उनकी सरकार का वध कर दिया था। इसी अफसरशाही की असफलताएं गिनाकर कांग्रेस की मौजूदा सरकार सत्ता में आई है। इसके बावजूद सत्ता में आने के बाद वह अफसरों की गुलामी करने लगी है। राजगढ़ के कुछ जागरूक नागरिक जब नागरिकता संशोधन कानून का समर्थन कर रहे थे तब उन्हें जरा भी भान नहीं था कि जिस सरकारी अमले पर कानून लागू करवाने की जिम्मेदारी है वे ही उनके ऊपर हमला कर देंगे।उस समय वे शांतिपूर्ण तरीके से विरोध जता रहे थे। उनके हाथों में तिरंगा झंड़ा था। कमलनाथ सरकार ने चूंकि राजनीतिक एजेंडे के तहत विरोध प्रदर्शन को अनुमति न देने का अघोषित आदेश दिया है इसलिए खुद को सरकार का सिपाहसालार बताने के लिए कुछ अफसरों में होड़ सी लग गई है। जाहिर है कि राजगढ़ की कलेक्टर और डिप्टी कलेक्टर को भी राज्य सरकार की चिलम भरने में जुटना ही था। जिस बेखौफ अंदाज में कलेक्टर ने नारे लगाते कार्यकर्ता को झांपड़ रसीद किया और जिस गुंडई भरे लहजे में डिप्टी कलेक्टर ने तिरंगा धारियों को घसीटा उससे तो ऐसा ही लग रहा था मानों अंग्रेजों के टुकड़खोर आजादी के परवानों पर जुल्म ढा रहे हों। इस बदतमीजी का जवाब खून खराबे से भरा भी हो सकता था। भीड़ चूंकि हिंसक नहीं थी और न ही हिंसा का उसका कोई इरादा था इसलिए किसी शैतान प्रदर्शनकारी ने डिप्टी कलेक्टर की चोटी खींचकर उसे याद दिलाया कि वह सीमा लांघ रही है। पुलिस के बीचबचाव से भले ही दोनों अफसर बच गईं हों लेकिन जनता के बीच इसकी प्रतिक्रिया अच्छी नहीं है। इस घटना से नाराज भाजपा के कार्यकर्ता जब प्रदर्शन कर रहे थे तो पूर्व मंत्री बद्री यादव ने भावनाओं के अतिरेक में कुछ ज्यादा ही काल्पनिक कहानी सुना डाली। उन्होंने कहा कि यहां की कलेक्टर कांग्रेसियों को तो गोदी में बिठाकर दूध पिलाती है लेकिन भाजपा के कार्यकर्ताओं को थप्पड़ मारती है। हंसी ठिठोली के अंदाज में कही गई इस बात ने तूल पकड़ लिया और डिप्टी कलेक्टर की शिकायत पर बद्रीयादव की गिरफ्तारी और जमानत की प्रक्रिया भी की गई। दूध दुहना और लोगों को पिलाना बद्रीयादव का खानदानी काम रहा है। इसी वजह से उन्होंने कलेक्टर के कांग्रेस प्रेम को दर्शाने के लिए इस जुमले का इस्तेमाल कर डाला। जब प्रतिक्रियाएं आईं तो उन्हें अपनी गलती का अहसास हुआ और उन्होंने यह कहते हुए माफी भी मांग ली कि उनकी बात का गलत अर्थ न निकाला जाए। हालांकि जब बात बिगड़ती है तो उसकी कई तस्वीरें सामने आती हैं।एक एएसआई और पटवारी ने कलेक्टर के दुर्व्यवहार को लेकर ही शिकायत कर डाली। जिसमें कलेक्टर ने उन्हें भी थप्पड़ मारा था। अब कलेक्टर साहिबा की मानसिक दशा का दूसरा ही पक्ष सामने आने लगा है। जाहिर है कि भारतीय प्रशासनिक सेवा के आला अधिकारियों और उन्हें मध्यप्रदेश कैडर में भेजने वाले केन्द्रीय कार्मिक मंत्रालय को ऐसी मानसिकता वाली अफसर की कार्यशैली पर गंभीरता से विचार करना चाहिए जो जनता के प्रति असहिष्णु हो। फौरी प्रतिक्रिया के तौर पर निधि निवेदिता और प्रिया वर्मा को निलंबित किया जाना चाहिए। राज्य सरकार से फिलहाल ये उम्मीद इसलिए नहीं की जाती क्योंकि भाजपा की ओर से इस घटना को लेकर अफसरों का विरोध किया जा रहा है। सबसे बड़ी बात तो ये है कि अफसरों को नसीहत देने वाले मुख्यमंत्री कमलनाथ महिला अफसरों के मामले में थोड़े ज्यादा सहिष्णु हैं। शायद यही वजह है कि उनकी कांग्रेस भाजपा के प्रदर्शन को महिलाओं का अपमान बताने में जुटी है। वीडियो क्लीपिंग्स में जो हकीकत सामने आई है उसमें साफ दिख रहा है कि किसी भी प्रदर्शन कारी ने महिला अफसरों से बदतमीजी नहीं की थी। इसके बावजूद महिला अफसरों ने सीमाएं लांघकर कार्यकर्ताओं पर हमला किया। प्रिया वर्मा तो अपनी अफसर से जुगलबंदी करने की रौ में इतना बह गईं कि उन्होंने भीड़ में घुसकर तिरंगा लिए व्यक्तियों को चुन चुनकर घसीटना शुरु कर दिया। गैर जिम्मेदार अफसरों पर कार्रवाई करने की जवाबदारी निश्चित रूप से राज्य सरकार की है। उसे इन अफसरों को तत्काल हटाकर निलंबित करना चाहिए। उनके व्यवहार की जांच कराई जानी चाहिए और केन्द्र को सूचित किया जाना चाहिए।ये भी सुनिश्चित किया जाए कि जो अफसर भीड़ को नियंत्रित करने के बजाए उसे भड़काने की मानसिकता रखते हों उन्हें भविष्य में कभी मैदानी पोस्टिंग न दी जाए। कमलनाथ सरकार से फिलहाल ऐसे किसी सख्त कदम की उम्मीद नहीं की जा सकती। जो सरकार नागरिकता संशोधन कानून जैसे संसद से पारित व्यवस्था को लेकर अनर्गल बयानबाजी कर रही हो उससे जिम्मेदाराना व्यवहार की अपेक्षा भी क्यों की जाए। केन्द्र सरकार ने आईएएस अफसरों की व्यवस्था सुधारने की दिशा में कई प्रयास किए हैं। निश्चित रूप से ऐसे बिगड़े अफसरों के भविष्य का फैसला उसे करना चाहिए। सबसे बड़ी जवाबदारी तो भाजपा जैसे राजनीतिक दलों और आम नागरिकों की है।जनता के प्रति सड़ांध भरी मानसिकता लेकर नौकरी में आ गए इन अफसरों की शैली को अदालत में चुनौती दी जानी चाहिए। उनकी योग्यता की छानबीन कराई जाए और उन्हें पदमुक्त किया जाए ताकि सरकार और जनता के बीच संवादहीनता की स्थितियां न बनें। जिन अफसरों को जनता और सरकार के बीच संवाद की कड़ी बनना चाहिए यदि वे रोड़ा बन रहे हों तो बेहतर है इस रोड़े को जल्दी से जल्दी रास्ते से हटाया जाए। क्योंकि कलेक्टरी कोई रबर के गुड्डे गुड़ियों का खेल नहीं है। कमलनाथ सरकार इस पर गौर करे तो अच्छा ही होगा।

  • स्थापित उद्योगों के सहारे एमपी के सीईओ दिखना चाहते हैं कमलनाथ

    स्थापित उद्योगों के सहारे एमपी के सीईओ दिखना चाहते हैं कमलनाथ

    अरुण पटेल

    बतौर मुख्यमंत्री अपने कार्यकाल के अंतिम कुछ सालों में तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान अक्सर बढ़चढ़ कर यह दावा करते रहे कि वे मुख्यमंत्री नहीं बल्कि प्रदेश के सीईओ हैं, लेकिन सच्चे अर्थों में प्रदेश के वास्तविक सीईओ के रुप में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष और मुख्यमंत्री कमलनाथ अपनी एक ऐसी छवि गढ़ रहे हैं जिसमें राजनेता के साथ ही एक कुशल प्रशासक के भी गुण मौजूद दिखाई पड़ने लगे हैं। कमलनाथ के पास विकास की वैश्‍विक दूरदृष्टि होने के साथ ही विकास का मॉडल स्थानीय जमीनी आवश्यकताओं के अनुसार क्या हो, इन दोनों का समन्वय उनके व्यक्तित्व में है। प्रशासनिक व्यवस्था को चुस्त-दुरुस्त करने और ‘वक्त है बदलाव का’ अपना चुनावी वायदा पूरा करने की दिशा में कमलनाथ सरकार आगे बढ़ रही है। दशकों बाद मंत्रालय में मुख्यमंत्री के रुप में एक ऐसा चेहरा विराजमान है जिसकी प्रशासन पर मजबूत पकड़ बन रही है और वे आला अधिकारियों को बताते हैं कि उन्हें क्या करना है और कैसे होगा। कमलनाथ का कहना है कि मेरी सरकार ‘आउटसोर्स’ की नहीं है। अब जब अधिकारी मेरे पास आते हैं और कैसे क्या करना है पूछते हैं तो मैं उन्हें बताता हूं कि कैसे काम करना है और क्या काम करना है एवं सरकार कैसे चलती है।


    मेरी सरकार आउटसोर्स की सरकार नहीं है यह कहते हुए कमलनाथ पूर्ववर्ती शिवराज सिंह चौहान के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार पर तंज कसते हैं। समझा जाता है कि पूर्ववर्ती शिवराज सरकार के कार्य संचालन के मामले में उनकी यह पक्की धारणा रही है कि उस समय पांच-छह अधिकारियों को सरकार आउटसोर्स कर दी थी और वे जो चाहते थे वही होता था। जहां तक कमलनाथ का सवाल है चाहें वे मुख्यमंत्री हों, मंत्री रहे हों या सांसद उनकी कार्यशैली स्वाभाविक रुप से सीईओ की ही रही है, जबकि शिवराज पहली बार सीधे मुख्यमंत्री बने थे और उन्होंने अपने ढंग से सरकार चलाई थी। पहले और दूसरे कार्यकाल में शिवराज ने भी सामाजिक सरोकारों से जुड़ी खासकर लाडली लक्ष्मी और मुख्यमंत्री तीर्थ दर्शन तथा मुख्यमंत्री कन्यादान योजना जैसी कुछ ऐसी योजनायें चलाई थीं, जिनके चलते उनका अपना एक आभामंडल बना था और बहनों के भाई एवं भांजे-भांजियों के मामा तथा वृद्धजनों के लिए श्रवण कुमार बन गए थे। लेकिन यह भी सही है कि उनके कार्यकाल के आखिरी दो-तीन सालों में जैसा कमलनाथ कह रहे हैं वैसी ही स्थिति बन गयी थी।


    राजनीतिक हल्कों में यह बात मानी जाती थी कि कमलनाथ एक साथ वैश्‍विक सोच एवं जमीनी आवश्यकताओं के साथ पिछड़े से पिछड़े इलाके को कैसे विकसित किया जाए यह भलीभांति जानते हैं। आला प्रशासनिक अधिकारी और मध्यप्रदेश आईएएस एसोसिएशन के अध्यक्ष आई.सी.पी. केशरी कहते हैं कि हमारे सी.एम. डायनमिक ग्लोबल हैं और हम सब राज्य की उम्मीदों पर खरे उतरेंगे। आईएएस आफीसर्स एसोसिएशन की सर्विस मीट 2020 के उद्घाटन अवसर पर केशरी ने कहा कि नये आने वाले अफसरों को शायद अपने मुख्यमंत्री के बारे में ज्यादा कुछ पता नहीं है, इसकी वजह यह है कि उन्होंने उनके साथ काम नहीं किया है। उन्होंने एक उदाहरण देकर कहा कि जिनेवा में डब्ल्यूटीओ के सम्मेलन में एक बार किसानों के हितों को लेकर 90 देशों के मंत्रियों ने कमलनाथ के नेतृत्व में वाकआउट कर दिया था। एक बार विकासशील देशों के लिए पश्‍चिमी देशों की एक बैठक में अमेरिका के राष्ट्रपति जार्ज बुश भी आये थे, उस समय तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने परिचय कराते हुए कहा कि ये वाणिज्यिक मंत्री कमलनाथ हैं, इसके पूर्व ही बुश बोल उठे कि मैं इन्हें जानता हूं, इन्होंने हमारे मंत्रियों को परेशान किया हुआ है। इस पर कमलनाथ ने कहा कि ऐसा नहीं है हमारे अच्छे सम्बन्ध हैं, उनकी इस हाजिर जवाबी के कारण सभी उनकी ओर देखने लगे थे।


    कांग्रेस अक्सर शिवराज सरकार पर भू-माफिया, खनन माफिया को फलने-फूलने का आरोप लगाती रही थी। चुनाव के समय भी कांग्रेस ने इसे एक बड़ा मुद्दा बनाया था। उसका आरोप था कि पिछले भाजपा सरकार के कार्यकाल के दौरान रेत माफिया, भू-माफिया, बिल्डर माफिया और अनेक प्रकार के माफिया इस कदर तेजी से उभरे थे कि एक प्रकार से प्रदेश माफियाओं के मकड़जाल में फंस गया था। कांग्रेस का कहना है कि इन सभी माफियाओं पर अपने-पराये या राजनीतिक प्रतिबद्धताओं से परे समान रुप से कड़ी कार्रवाई कमलनाथ कर रहे हैं और इसमें किसी प्रकार के हस्तक्षेप को प्रश्रय नहीं मिल पा रहा है। अपने चुनावी वायदों को तेजी से पूरा करने के साथ ही कमलनाथ की प्राथमिकता प्रदेश में नये उद्योग लगाने की रही है और इस मामले में एक यथार्थवादी दृष्टिकोण से वे आगे बढ़ रहे हैं। प्रदेश कांग्रेस मीडिया विभाग के उपाध्यक्ष अभय दुबे का दावा है कि प्रदेश में औद्योगिक निवेश का एक विश्‍वसनीय माहौल बना है और लगभग 30 हजार करोड़ रुपये के निवेश के प्रोजेक्ट की बुनियाद बीते एक साल के कार्यकाल में रखी गई है। लगभग 70 हजार करोड़ रुपये के प्रोजेक्ट के लिए, उन्हें भूमि आवंटन सम्बन्धी प्रक्रिया भी पूरी कर ली गयी है। उनका कहना है कि मध्यप्रदेश में औद्योगिक निवेश के परिवेश को देखा जाए तो पिछले पन्द्रह साल की तुलना में कमलनाथ सरकार का एक साल का कार्यकाल भाजपाई शासन का पर्दाफाश कर रहा है और भाजपा के पन्द्रह साल की अवधि प्रदेश के औद्योगिक निवेश के लिए अभिशाप साबित हुई है। दुबे का आरोप है कि शिवराज सरकार के समय 2007 से 2016 तक आयोजित अनेकों ग्लोबल इन्वेस्टर समिट में बड़े पैमाने पर औद्योगिक निवेश में 17 लाख करोड़ के गननचुम्बी निवेश के दावे किए गए थे, किन्तु नतीजा सिफर रहा और केवल 50 हजार करोड़ का ही निवेश आ पाया। दुबे का दावा है कि कमलनाथ सरकार औद्योगिक निवेश का स्वर्णिम भविष्य का मार्ग प्रशस्त कर रही है और उसने 30 हजार करोड़ रूपये की बुनियाद भी रख दी है जबकि समूचा देश केन्द्र की भाजपा सरकार की अदूरदृष्टि के चलते भयंकर आर्थिक मंदी की चपेट में आ गया है, जबकि मध्यप्रदेश में निवेशकों की कतार लग गयी है। मध्यप्रदेश का पीथमपुर हिन्दुस्तान का सबसे बड़ा फार्मा हब बन गया है। यहां सिपला फार्मा ने 600 करोड़ रुपये के निवेश की बुनियाद यहां रखी है। जो बड़े निवेशक आये हैं उनमें अजंता फार्मा ने 500 करोड़ रुपये का निवेश किया है। न्यू जर्सी की कम्पनी पार फार्मा ने 400 करोड़ का निवेश किया है मेक्लाईड नेे भी 400 करोड़ का निवेश किया है। इसके साथ ही उन्होंने आंकड़ों के हवाले से औद्योगीकरण की दिशा में बढ़ते प्रदेश का खाका भी प्रस्तुत किया।

    एक तरफ मुख्यमंत्री कमलनाथ जहां प्रदेश का औद्योगिक परिवेश बदलने के लिए भिड़े हुए हैं तो वहीं वे उन पर किए जा रहे किसी भी तंज का जवाब उसी लहजे में देने से नहीं चूक रहे। भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष व केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने जबलपुर में सीएए के समर्थन में एक रैली को सम्बोधित करते हुए कमलनाथ पर निशाना साधा और कहा कि वे सोनिया मैडम के दरबार में अपनी सीआर सुधारने में लगे हैं और जोरशोर से बोल रहे हैं कि प्रदेश में सीएए लागू नहीं होगा। उनकी उम्र चिल्लाने की नहीं रही है, स्वास्थ्य बिगड़ जायेगा। इस पर कमलनाथ ने भी पलटवार करते हुए कहा कि मेरी उम्र नहीं काम देख रही है प्रदेश की जनता, 365 दिनों में 365 वायदे पूरे किए हैं हमारी सरकार ने, आप प्रदेश की जनता और जनादेश दोनों का अपमान कर रहे हैं। हमने एक साल में प्रदेश में बदलाव लाकर दिखा दिया है और वायदे पूरे कर जनता का भरोसा कायम रखा है, हम काम में विश्‍वास रखते हैं झूठे वायदों में नहीं। इसी उम्र में जनता ने मुझ पर भरोसा कर भाजपा के कई युवा उम्मीदवारों की उम्मीद पर पानी फेरा है। आप कांग्रेस को नहीं जनता को समझाइए जो इस सच को जानती है कि केन्द्र सरकार अपनी असफलताओं को छुपाने के लिए सीएए और एनआरसी जैसे कानून थोपने का काम कर रही है। कमलनाथ ने शाह को सलाह दी कि अधिक बेहतर होता आप सीएए के समर्थन में रैली व जनसभा के लिए उन राज्यों में जाते जहां हिंसा हुई है। प्रदेश की शान्त धरती पर कानून के नाम पर गुमराह करने व फिजा खराब करने के लिए आपके यहां आने की आवश्यकता नहीं है। 

    यह लेख सुबह सवेरे से आभार सहित लिया गया है। इसका मकसद मुख्यमंत्री कमलनाथ की आकांक्षाओं को अपने पाठकों तक पहुंचाना मात्र है। लेखक को उपलब्ध कराए गए तथ्यों ,वक्तव्यों, राय आदि से प्रेस इंफार्मेशन सेंटर की सहमति होना आवश्यक नहीं है।

  • गेहूं के भंडार भरे,केन्द्र उठाने तैयार नहीं बोले प्रद्युम्न सिंह

    गेहूं के भंडार भरे,केन्द्र उठाने तैयार नहीं बोले प्रद्युम्न सिंह

    भोपाल,08 जनवरी(प्रेस सूचना केन्द्र)। मध्यप्रदेश के खाद्य मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर का कहना है कि राज्य ने किसानों का गेहूं खरीदकर किसानों को राहत दी है लेकिन केन्द्र अब वह गेहूं नहीं उठा रहा है। इसके चलते राज्य को केन्द्र से भुगतान भी नहीं हो पा रहा है। केन्द्र सरकार ऐसा करके किसानों के हितों पर चोट पहुंचा रही है।

    साल भर की विभागीय उपलब्धियों पर चर्चा करते हुए श्री तोमर ने कहा कि कमलनाथ सरकार ने किसानों से किया गया कर्ज माफी का वायदा पूरा किया है। किसानों को बोनस देकर भी राज्य सरकार ने किसानों के प्रति अपनी प्रतिबद्धता पूरी की है। इसके बावजूद केन्द्र के असहयोग के चलते वह किसानों को अधिक लाभ नहीं दे पा रही है।

    केन्द्र से ठीक रेपो न होने की वजह से किसानों को होने वाली असुविधा के लिए क्या राज्य सरकार अपनी अयोग्यता को स्वीकार करती है पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि राज्य की ओर से लगातार केन्द्र सरकार से वार्ता की जाती रही है। लगभग तीन चरणों की बातचीत हो चुकी है लेकिन अभी तक केन्द्र ने न तो गेहूं उठाया है और न ही इसके एवज में राशि का भुगतान किया है।उन्होंने कहा कि केन्द्र की ओर से किसानों को दिए जाने वाले बोनस का भी भुगतान नहीं किया जा रहा है।

    खाद्य मंत्री से जब पूछा गया कांग्रेस पार्टी ने किसानों से किए गए वायदे केन्द्र से पूछकर तो नहीं किए थे इसके बावजूद अपनी असफलताओं का ठीकरा वे केन्द्र सरकार पर क्यों फोड़ रहे हैं ये पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि सरकार अपना काम बखूबी कर रही है।

    मंहगाई नियंत्रित कर पाने में राज्य सरकार की असफलताओं के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि सरकार माफिया के विरुद्ध कार्रवाई कर रही है। जो लोग जनता को ठगने का काम कर रहे थे और पिछले पंद्रह सालों में वे फलते फूलते रहे अब सरकार उन पर अंकुश लगाने का काम कर रही है।

  • बीमा योजना से कर्मचारियों की चिकित्सा प्रतिपूर्ति बंद

    बीमा योजना से कर्मचारियों की चिकित्सा प्रतिपूर्ति बंद


    मंत्रि-परिषद के निर्णय 

    भोपाल,4 जनवरी(प्रेस सूचना केन्द्र)। कमल नाथ की अध्यक्षता में आज मंत्रालय में हुई मंत्रि-परिषद की बैठक में मुख्यमंत्री कर्मचारी स्वास्थ्य बीमा योजना को लागू करने का निर्णय लिया गया। योजना से लगभग 12 लाख 55 हजार कर्मचारी/अधिकारी लाभांवित होंगे।बीमा योजना लागू होने से कर्मचारियों को दी जाने वाली चिकित्सा प्रतिपूर्ति की व्यवस्था बंद कर दी जाएगी।

    इस योजना का लाभ प्रदेश के सभी नियमित शासकीय कर्मचारी, सभी संविदा कर्मचारी, शिक्षक संवर्ग, सेवानिवृत्त कर्मचारी, नगर सैनिक, आकस्मिक निधि से वेतन पाने वाले पूर्ण कालिक कर्मचारियों और राज्य की स्वशासी संस्थाओं में कार्यरत कर्मचारियों को मिलेगा। इसके अलावा निगम/मण्डलों में कार्यरत कर्मचारियों एवं अखिल भारतीय सेवा के अधिकारियों के लिए योजना वैकल्पिक होगी।

    मुख्यमंत्री कर्मचारी स्वास्थ्य बीमा योजना में बाहय रोगी ओपीडी के रूप में प्रतिवर्ष 10 हजार रूपये तक का नि:शुल्क उपचार अथवा नि:शुल्क दवाओं का वितरण किया जाएगा। सामान्य उपचारों के लिए प्रत्येक परिवार को प्रतिवर्ष 5 लाख रूपये और गंभीर उपचारों के लिए 10 लाख रूपये तक की नि:शुल्क चिकित्सा सुविधा प्राप्त होगी। दस लाख से अधिक के उपचार के लिए राज्य स्तरीय मेडिकल बोर्ड द्वारा विशेष अनुमति दी जा सकेगी।

    मंत्रि-परिषद ने महिला-बाल विकास विभाग द्वारा शत-प्रतिशत सहायित भारत सरकार की योजना वन स्टाप सेन्टर को प्रदेश के 51 जिलों में संचालित एवं निरंतर रखने की मंजूरी दी। इसके लिये 560 नये पद सृजित करने की भी मंजूरी दी गयी।

    मंत्रियों का स्वेच्छानुदान अब एक करोड़

    मंत्रि-परिषद ने मंत्रियों की वार्षिक स्वेच्छानुदान की राशि 50 लाख से बढ़ाकर एक करोड़ रूपये करने की मंजूरी दी। इसी प्रकार, राज्य मंत्रियों की वार्षिक स्वेच्छानुदान राशि को 35 लाख से बढ़ाकर 60 लाख किया गया है।

  • कर्ज लादकर माफी का वादा निभा रही कमलनाथ सरकार

    कर्ज लादकर माफी का वादा निभा रही कमलनाथ सरकार

    भोपाल,3 जनवरी(प्रेस सूचना केन्द्र)। कमल नाथ की अगुआई में बनी राज्य सरकार पर प्रदेश की जनता से किए गए वादों को पूरा करने की जिम्मेदारी पहले दिन से ही रही है। किसानों, आदिवासियों, कर्मचारियों, युवाओं सहित सभी लोग प्रदेश में इस बदलाव को आशा और अपेक्षा की नजर से देख रहे थे। सरकार ने आते ही मिली वित्तीय रिक्तता, आर्थिक मंदी जैसी विषम परिस्थिति और वित्तीय मामलों में केन्द्र सरकार के रवैये से जन अपेक्षाओं पर पूरा उतरना नई सरकार के लिए चुनौतीपूर्ण रहा। नई सरकार के सामने राज्य के सामाजिक, आर्थिक और भौतिक ढांचे को अधिक मजबूत बनाने का मुख्य लक्ष्य था। यह सब सशक्त आर्थिक आधार और बेहतर वित्तीय प्रबंधन के बिना संभव नहीं था। राज्य सरकार ने इस परिस्थिति से निपटने के लिये बेहतर वित्तीय प्रबंधन को सर्वोच्च प्राथमिकता दी। इससे शासकीय विभागों को अनिवार्य व्ययों के लिए निरंतर राशि उपलब्ध कराना संभव हुआ।

    प्रदेश की उन्नति और सबके हितों की रक्षा सुनिश्चित करने के क्रम में सर्वोच्च प्राथमिकता हमारी अर्थ-व्यवस्था के प्रमुख आधार किसान को दी गई। जय किसान फसल ऋण माफी योजना से संबंधित विभागों से समन्वय कर पात्र किसानों के दो लाख रूपये तक के कालातीत ऋण तथा 50 हजार रूपये तक के चालू ऋण माफ किए गए। योजना में बैंकों द्वारा एक मुश्त समझौता योजना में 1950 करोड़ रूपये का ऋण माफ किया गया। कुल मिलाकर 20 लाख से अधिक किसानों के 7 हजार करोड़ रूपये से अधिक के ऋण माफ किए गए।

    प्रदेश की तेज प्रगति के लिये सुचारू और सुगम परिवहन व्यवस्था अत्यंत आवश्यक है। राज्य सरकार ने परिवहन की आवश्यक अधोसंरचना सुनिश्चित करने के उददे्श्य से सड़कों के निर्माण के लिए एशियन डेव्हलपमेंट बैंक से 3 हजार 400 करोड़ रूपये (490 मिलियन यूएस डालर) प्राप्त करने का निर्णय लिया। इसी प्रकार, इन्दौर मेट्रो रेल परियोजना के लिए न्यू डेव्हलपमेंट बैंक से 1600 करोड़ रूपये (225 मिलियन यूएस डालर) प्राप्त करने का निर्णय लिया।

    राज्य सरकार की योजनाओं और कार्यक्रमों के क्रियान्वयन में हमकदम और आपदा प्रबंधन के आधार, शासकीय सेवकों की बेहतरी के प्रयास तुरंत शुरू किये गये। शासकीय सेवकों को सातवें वेतनमान के ऐरियर्स की द्वितीय किस्त का भुगतान किया गया। साथ ही सार्वजनिक निगम/मण्डलों के कर्मचारियों को सातवें वेतनमान के एरियर्स के लिए कार्यवाही की गई। शिक्षक संवर्ग को कोषालयीन व्यवस्था से जोड़ा गया। शासकीय सेवकों की पेंशन स्वीकृति और भुगतान प्रक्रिया को सरल किया। वेतन विसंगतियों और सेवा शर्तों पर विचार के लिए कर्मचारी आयोग गठित किया गया।

    राज्य सरकार द्वारा प्रदेश के आदिवासी समुदाय के सर्वागींण विकास के लिए भी अभिनव प्रयास किये जा रहे हैं। वित्त विभाग द्वारा प्रदेश के 89 आदिवासी बहुल विकासखण्डों में विशेष अभियान चलाते हुए 7 हजार 331 व्यक्तियों के जन-धन खाते में ओवर ड्रॉफ्ट की सीमा स्वीकृत कर 35 हजार 709 नये खाते खोले गये।

    राज्य सरकार की सकारात्मक सोच के साथ समाज के सभी वर्गों को साथ लेकर चलने की कोशिश कुशल आर्थिक प्रबंधन के आधार पर ही सफल हो रही है। वित्त विभाग द्वारा जनवरी से नवम्बर 2019 तक पूंजीगत मद में 30 हजार 709 करोड़ रूपये व्यय किये गये। यह इसी अवधि के पिछले वर्ष के व्यय से 1304 करोड़ रूपये अधिक है। पूंजीगत व्यय से संबंधित प्रमुख विभागों को अप्रैल 2018 से नवम्बर 2018 की अवधि की तुलना में अप्रैल 2019 से नवम्बर 2019 की अवधि में अधिक राशि उपलब्ध करायी गई। गृह विभाग को 247 करोड़ 57 लाख की तुलना में 363 करोड़ 58 लाख, वन विभाग को 253 करोड़ 38 लाख की तुलना में 342 करोड़ 12 लाख, शहरी विकास एवं पर्यावरण विभाग को 483 करोड़ 23 लाख की तुलना में 775 करोड़ 91 लाख, लोक निर्माण विभाग को 5454 करोड़ 78 लाख की तुलना में 5562 करोड़ 04 लाख, नर्मदा घाटी/जल संसाधन विभाग को 5709 करोड़ 51 लाख की तुलना में 6280 करोड़ 60 लाख, लोक स्वाथ्य यांत्रिकी विभाग को 1179 करोड़ 49 लाख की तुलना में 1635 करोड़ एक लाख तथा ग्रामीण विकास विभाग को 1743 करोड़ 63 लाख की तुलना में 2343 करोड़ 10 लाख रूपये की धनराशि उपलब्ध करायी गई। प्रदेश में बैंकों द्वारा ऋण में वृद्धि की दर भी राष्ट्रीय स्तर से अधिक रही है।

    सबके हितों की रक्षा और प्रदेश की उन्नति सुनिश्चित करने के अपने संकल्प की पूर्ति के लिये आवश्यक वित्तीय आधार उपलब्ध कराने के लिए राज्य सरकार लगातार सक्रिय है।

  • खनिज विभाग ने राजस्व वसूली का नया रिकार्ड बनाया

    खनिज विभाग ने राजस्व वसूली का नया रिकार्ड बनाया

    खनिज मंत्री प्रदीप जायसवाल बोले ठेकेदारों को सुरक्षा मुहैया कराएंगे

    भोपाल,27 दिसंबर(प्रेस सूचना केन्द्र)।खनिज मंत्री प्रदीप जायसवाल का कहना है कि कमलनाथ सरकार ने खनिज विभाग से टैक्स चोरी के सभी रास्ते बंद कर दिए हैं जिससे प्रदेश ने राजस्व वसूली की नई ऊंचाईंयां छू लीं हैं। राजस्व आय का ये आंकड़ा और बढ़ेगा। उन्होंने राजस्व देने वाले ठेकेदारों को आश्वासन दिया कि सरकार उन्हें खनिज माफिया से पर्याप्त सुरक्षा मुहैया कराएगी।

    कमलनाथ सरकार की साल भर की उपलब्धियों का लेखा जोखा प्रस्तुत करते हुए श्री जायसवाल ने बताया कि वित्त विभाग ने वर्ष 2018-19 के लिए 4528 करोड़ रुपयों का लक्ष्य दिया था जिसे पार करते हुए विभाग ने 4623.04 करोड़ रुपए जुटाए हैं। इसी तरह मौजूदा वित्तीय वर्ष 2019-20 में अप्रैल 2019 से नवंबर 2019 तक 2226.85 करोड़ रुपए का राजस्व इकट्ठा किया जा चुका है। पिछले साल की इसी अवधि की तुलना में ये राशि 34.35 करोड़ रुपए अधिक है।

    श्री जायसवाल ने बताया कि प्रदेश में खनिजों की खोज का काम निरंतर जारी है और इसके लिए राष्ट्रीय खनिज अन्वेषण न्यास ने भी पर्याप्त संसाधन उपलब्ध कराए हैं। पिछले साल राज्य को 54.81 करोड़ रुपए प्राप्त हुए थे इस साल नवंबर महीने तक 34.12 करोड़ रुपए मिल चुके हैं।

    उन्होंने कहा कि खनिज और रायल्टी चोरी को सरकार सख्ती से रोकना चाहती है। इस वित्तीय वर्ष में ही अब तक खनिजों के अवैध उत्खनन के 1330 प्रकरण,अवैध परिवहन के 8294 प्रकरण, अवैध भंडारण के 531प्रकरणों से 527.511 लाख रुपए और अवैध परिवहन से 2412.20 लाख रुपए की आय हुई है। खनिजों के अवैध भंडारण से भी सरकार ने 136.55 लाख रुपए का अर्थदंड वसूला है।

    खनिज मंत्री ने बताया कि छतरपुर की बक्सवाहा तहसील के बंदर डायमंड ब्लाक को सरकार ने लगभग अस्सी हजार करोड़ रुपयों में नीलाम कर दिया है। एस्सेल माईनिंग एंड इंडस्ट्रीज ने लगभग साढ़े तीस प्रतिशत अधिक बोली लगाकर इस खदान का आधिपत्य हासिल किया है। कंपनी को अभी पर्यावरण आदि की मंजूरियों के लिए दो साल का वक्त दिया गया है। सरकार ने कंपनी को पचास सालों के लिए लीज पर दिया है।

    रेत खदानों से हर साल लगभग बारह सौ करोड़ रुपए की आय को उल्लेखनीय कार्य बताते हुए श्री जायसवाल ने कहा कि पिछली सरकार रेत से मात्र 240 करोड़ तक आय करती थी बाकी खनिज चोरी हो जाता था। इस सरकार ने 36 जिलों की रेत खदानें नीलाम की हैं ठेकेदारों को अब खनिज बेचना अनिवार्य कर दिया गया है। इससे राज्य को भरपूर आय होगी.

    पत्रकार वार्ता में खनिज मंत्री के साथ प्रमुख सचिव नीरज मंडलोई, सचिव नरेन्द्र सिंह परमार, विनीत आस्टिन संचालक, भौमिकी तथा खनिक कर्म समेत विभाग के कई अन्य अधिकारी भी उपस्थित थे।

  • नागरिकता कानून विरोधियों के साथ खड़ी होगी कमलनाथ सरकार

    नागरिकता कानून विरोधियों के साथ खड़ी होगी कमलनाथ सरकार

    भोपाल,21 दिसंबर(प्रेस सूचना केन्द्र)। नागरिकता अधिनियम 1955 में हुए संशोधन के बाद लागू नए नागरिकता कानून का विरोध करने के लिए अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी ने पूरे देश में कानून का विरोध करने का फैसला लिया है। मध्यप्रदेश में भी कमलनाथ सरकार 25 तारीख को इस विरोध प्रदर्शन को अपना समर्थन देगी। संवैधानिक तौर पर चुनी हुई राज्य सरकार ने केन्द्रीय कानून का विरोध करने के लिए जो रणनीति अपनाई है उससे नए नागरिकता कानून को लेकर उठ रहीं भ्रांतियों को दूर करने में भी मदद मिलेगी।

    कांग्रेस के सूत्रों का कहना है कि वह कानून को लेकर जनमत संग्रह (Referendum) भी करेंगे. दिल्ली में केंद्र सरकार के नए कानून के खिलाफ (Protest against CAA) पार्टी के हल्लाबोल के बाद ऑल इंडिया कांग्रेस कमेटी ने कांग्रेस-शासित सभी राज्यों में प्रभावी तरीके से प्रदर्शन करने का निर्देश दिया है।

    CAA को लेकर कांग्रेस ने दिल्ली में केंद्र सरकार के खिलाफ हल्ला बोला था. अब दिल्ली के बाद कांग्रेस शासित राज्यों में नागरिकता संशोधन कानून के विरोध में प्रदर्शन की तैयारी है. एआईसीसी ने सभी राज्यों में इस कानून के विरोध में प्रदर्शन करने के लिए निर्देश दिए हैं. ऐसे में कांग्रेस शासित मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान जैसे हिंदी भाषी राज्यों में कांग्रेस सरकार का पूरा फोकस इस प्रदर्शन को प्रभावी बनाने में है. दिल्ली के बाद भोपाल में भी कमलनाथ सरकार इस कानून के विरोध के बहाने शक्ति प्रदर्शन करेगी.

    प्रमुख विपक्षी दल भारतीय जनता पार्टी ने सरकार के इस फैसले से असहमति जताई है। पार्टी का कहना है कि नागरिकता कानून देश के किसी भी नागरिक के खिलाफ नहीं है, इसके बावजूद विरोध को स्वर देकर कांग्रेस सरकार अपने संवैधानिक दायित्वों से मुंह मोड़ रही है।

    प्रदेश में जब अधिकतर लोग नए नागरिकता कानून से सहमति जताते हुए खुलकर बात रख रहे हैं तब कमलनाथ सरकार कानून के विरोध में खड़े होकर क्षुद्र राजनीतिक प्रतिद्वंदिता का उद्घोष करने जा रही है।

    नए नागरिकता कानून को समझना जरूरी

    कई लोग इस वजह से विरोध कर रहे हैं कि उन्हें लगता है इस कानून से उनकी नागरिकता खतरे में पड़ जाएगी. कुछ को लगता है कि असम में जिस तरह एनआरसी यानी राष्ट्रीय नागरिकता रजिस्टर (एनआरसी) के चलते लाखों लोगों की नागरिकता खतरे में पड़ गई है, वैसा ही उनके साथ भी होगा, लेकिन सचाई बिल्कुल अलग है. नागरिकता संशोधन कानून और एनआरसी अलग-अलग चीजें हैं.

    नागरिकता कानून 2019 भारत के तीन पड़ोसी देशों से धार्मिक उत्पीड़न ही वजह से भारत आने वाले अल्पसंख्यकों को सिटिजनशिप देने के लिए है. पाकिस्तान, अफगानिस्तान और बांग्लादेश जैसे भारत के पड़ोसी देशों में सिख, जैन, हिंदू, बौद्ध, इसाई और पारसी अल्पसंख्यक हैं. ये तीनों देश मुस्लिम राष्ट्र हैं, इस वजह से उनमें धार्मिक अल्पसंख्यक को उत्पीड़न का शिकार होना पड़ता है.नागरिकता संशोधन अधिनियम में प्रावधान है कि अगर इन तीन देशों के छह धर्म के लोग भारत में 31 दिसंबर 2014 तक आ चुके हैं तो उन्हें घुसपैठिया नहीं माना जाएगा. उन्हें इस कानून के तहत भारत की नागरिकता दी जाएगी.

    अगर इसे सीधे शब्दों में समझें तो एनआरसी जहां देश से अवैध घुसपैठियों को बाहर निकालने की कवायद है, वहीं नागरिकता कानून 2019 देश में आ चुके छह धर्म के लोगों को बसाने की कोशिश है.जिन लोगों के नाम एनआरसी में शामिल नहीं हैं, वह अवैध नागरिक कहलाए जाएंगे. एनआरसी के हिसाब से 25 मार्च 1971 से पहले असम में रह रहे लोगों को भारतीय नागरिक माना गया है.

    एनआरसी और सीएए में ये हैं मुख्य अंतर नागरिकता संशोधन कानून 2019 जहां धर्म पर आधारित है, वहीं राष्ट्रीय नागरिकता रजिस्टर (एनआरसी) का धर्म से कोई लेना-देना नहीं है. सीएए के तहत मुस्लिम बहुल आबादी वाले देश पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान में धार्मिक उत्पीड़न के कारण भागकर भारत आए हिंदू, सिख, ईसाई, जैन, बौद्ध और पारसी धर्म के लोगों को भारत की नागरिकता प्रदान करने का प्रावधान है. सीएए में मुस्लिमों को शामिल नहीं किया गया है. एनआरसी में अवैध अप्रवासियों की पहचान करने की बात कही गई है, चाहे वे किसी भी जाति, वर्ग या धर्म के हों. ऐसे लोगों की पहचान कर उन्हें देश से बाहर भेजने का प्रावधान है. एनआरसी फिलहाल सिर्फ असम में लागू है जबकि सीएए देशभर में लागू होगा. सीएए भारतीय मुसलमानों को किसी तरह का नुकसान नहीं पहुंचा सकता. सीएए को लेकर एक गलत धारणा बन गई है कि इस वजह से भारतीय मुसलमान अपने अधिकारों से वंचित हो जाएंगे. सच यह है कि अगर कोई ऐसा करना चाहे तो भी इस कानून के तहत यह संभव नहीं है. पूर्वोत्तर राज्यों में सीएए का विरोध इसलिए हो रहा है कि क्योंकि लोगों को आशंका है इससे उनके इलाके में अप्रवासियों की तादाद बढ़ जाएगी जिससे उनकी संस्कृति और भाषाई विशिष्टता को खतरा हो सकता है. केरल, पश्चिम बंगाल और दिल्ली में सीएए का विरोध इस कानून में मुसलमानों को शामिल नहीं किए जाने पर हो रहा है, उनका तर्क है कि यह संविधान के विरुद्ध है.

  • खनिज आय में पैंतीस करोड़ की बढ़त

    खनिज आय में पैंतीस करोड़ की बढ़त

    भोपाल,18 दिसंबर(प्रेस सूचना केन्द्र)। प्रदेश में इस वर्ष अप्रैल से नवम्बर तक मात्र 8 महीने में पिछले वर्ष की तुलना में 34 करोड़ 35 लाख रुपये से अधिक खनिज राजस्व संग्रहित किया गया। पिछले साल इस अवधि में 2192 करोड़ 50 लाख रुपये खनिज राजस्व संग्रहित की गयी थी। इस वर्ष 2226 करोड़ 85 लाख रुपये खनिज राजस्व अर्जित की गई। इसी के साथ, जिला खनिज प्रतिष्ठान नियम-2016 के अंतर्गत इस अवधि में 495 करोड़ रुपये से अधिक खनिज राजस्व संग्रहित किया गया। इस दौरान राष्ट्रीय खनिज अन्वेषण न्यास के अंतर्गत 34 करोड़ 12 लाख रुपये के राजस्व की प्राप्ति हुई।

    प्रदेश में पिछले 8 माह में अवैध खनिज उत्खनन के 1330, अवैध खनिज परिवहन के 8294 और अवैध खनिज भण्डारण के 531 प्रकरण अर्थात कुल 10,155 प्रकरण पंजीबद्ध कर कार्यवाही की गई। अवैध उत्खनन के प्रकरणों में 5 करोड़ 27 लाख, अवैध परिवहन के प्रकरणों में 24 करोड़ 12 लाख और अवैध भण्डारण के प्रकरणों में एक करोड़ 36 लाख रुपये अर्थात कुल 3076.26 लाख रुपये अर्थदण्ड वसूली की गई।

  • प्रदेश को समृद्ध बनाएगा रोडमैपःडॉ.मनमोहन सिंह

    प्रदेश को समृद्ध बनाएगा रोडमैपःडॉ.मनमोहन सिंह

    भोपाल, 17 दिसंबर(प्रेस सूचना केन्द्र)।भारत के पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह ने आज यहाँ मध्यप्रदेश सरकार द्वारा तैयार ‘विजन टू डिलीवरी रोड मैप 2020-25’ दस्तावेज का विमोचन करते हुए इसे मध्यप्रदेश की जनता की आकांक्षाओं और प्राथमिकताओं का दस्तावेज बताया।  उन्होंने  प्रदेश की त्वरित आर्थिक समृद्धि और विकास के लक्ष्यों को पूरा करने में विचारों की स्पष्टता और प्रतिबद्धता के लिए मुख्यमंत्री कमल नाथ की प्रशंसा की। डॉ. सिंह ने लोगों के आर्थिक विकास और समृद्धि लाने के लिए एक साल के कम समय में उठाए गए कदमों के लिए बधाई दी। मुख्य रूप से उद्योग के साथ मिलकर रोजगार के नये अवसरों का निर्माण करने की सराहना की।

    डॉ. मनमोहन सिंह ने रोडमैप को सूक्ष्म और वृहद  स्तर  पर अर्थ-व्यवस्था  को  आगे बढ़ाकर रोजगार उत्पन्न करने के प्रयासों पर फोकस करने की सराहना की। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य और शिक्षा के क्षेत्र और सतत विकास के लक्ष्यों को हासिल करने के लिए न सिर्फ  सुस्पष्ट दृष्टि-पत्र  बनाया गया है बल्कि इसको  लागू करने के लिए एक रोडमैप भी तैयार किया गया है। इसमें सभी विभागों का सहयोग  है।

    डॉ. सिंह ने कहा कि यह दृष्टि-पत्र आम नागरिकों, किसानों के कल्याण,  सतत विकास और सूक्ष्म स्तर पर अर्थ-व्यवस्था को मजबूत बनाने,  असंगठित क्षेत्र को गति देने,  अधोसंरचना का विकास करने जैसे विषयों पर केंद्रित है। उन्होंने एक साल में सरकार द्वारा उठाए गए कदमों की चर्चा करते हुए किसानों की जय किसान फसल ऋण माफी  योजना और असंगठित क्षेत्र के लिये नया सवेरा योजना, आयुष्मान भारत जैसी योजना का उल्लेख करते हुए  कहा कि इन  प्रयासों  में मुख्यमंत्री श्री कमल नाथ के विचारों और  विकास का संकल्प स्पष्ट दिखता है।

    डॉ. मनमोहन सिंह ने कहा कि दृष्टि-पत्र में 11 क्षेत्रों पर ध्यान केन्द्रित किया गया है। आर्थिक समृद्धि के लिए कृषि प्र-संस्करण उद्योग, अधोसंरचना विकास और सेवा क्षेत्र पर ध्यान देने से भविष्य में ज्यादा से ज्यादा संख्या में रोजगार निर्माण करने में मदद मिलेगी।

    पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. सिंह ने कहा कि स्कूल शिक्षा, उच्च शिक्षा, कौशल विकास और तकनीकी शिक्षा पर ध्यान केन्द्रित करने से गुणवत्तापूर्ण  मानव संसाधन तैयार करने की सरकार की सोच साफ़ दिखती है। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य के क्षेत्र में मेडिकल कॉलेजों की संख्या और सीटें बढ़ाने तथा स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार करने से भविष्य में प्रदेश में स्वास्थ्य पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा। उन्होंने कहा कि मैग्नीफिसेंट मध्यप्रदेश जैसे आयोजन से उद्योग क्षेत्र में घरेलू और विदेशी पूंजी निवेश बढ़ाने में मदद मिलेगी। डू-इट योरसेल्फ गवर्नेंस व्यवस्था को दूसरे चरण में ले जाने से प्रशासन में भी पारदर्शिता बढ़ेगी। पंचायत राज संस्थाओं और स्थानीय संस्थाओं के संसाधनों और क्षमता को मजबूत बनाने पर ध्यान देने से प्रशासन तंत्र मजबूत होगा और  दृष्टि पत्र को समय पर पूरा करने में मदद मिलेगी। डॉ. मनमोहन सिंह ने विजन टू डिलीवरी 2020-25 को सुगठित,  फोकस्ड और यथार्थवादी बताते हुए कहा कि यह लोगों की आकांक्षाओं का दस्तावेज है।

    मुख्यमंत्री श्री कमल नाथ ने पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह का स्वागत एवं आभार व्यक्त करते हुए कहा कि मुझे 10 साल तक डॉ. मनमोहन सिंह के नेतृत्व में केन्द्रीय मंत्री-मंडल में काम करने का सौभाग्य मिला। मुख्यमंत्री ने कहा कि हमने दढ़ इच्छाशक्ति के साथ 365 दिन में वचन पत्र के 365 बिन्दुओं को पूरा किया।

    मुख्य सचिव एस.आर. मोहंती ने सरकार का एक साल पूरा होने पर उठाए गए कल्याणकारी कदमों और निर्णयों का उल्लेख करते हुए लोगों के विकास के लिए तैयार किए गए विजन टू डिलीवरी 2020-25 की विशेषताओं की चर्चा की। अपर मुख्य सचिव योजना मोहम्मद सुलेमान ने आभार व्यक्त किया।

  • माफिया से संग्राम का डरावना अध्याय

    माफिया से संग्राम का डरावना अध्याय

    मध्यप्रदेश में कांग्रेस सरकार किन हालात में आई सभी जानते हैं। प्रदेश के लोग शिवराज सिंह चौहान की प्रशासनिक असफलताओं से खफा थे और उन्होंने विकास के नाम पर लूट करने वाले फोकटियों को अपने पड़ौस में देखा था। नतीजतन वे खफा हुए और शिवराज सिंह चौहान की खरीदी हुई अतिलोकप्रियता धराशायी हो गई। अब कांग्रेस के गुटीय संतुलन को साधकर सत्ता में आए कमलनाथ ने शिवराज सिंह चौहान के नेतृत्व में जड़ विहीन कर दी गई भारतीय जनता पार्टी को फुटबाल बना दिया है। खुद भाजपा के नेता आश्चर्य से देख रहे हैं कि आखिर कमलनाथ की शक्ति का आधार क्या है। ऐसा क्या हो गया कि कमलनाथ कथित कैडर आधारित पार्टी को आए दिन ठोक रहे हैं और कोई बोलने वाला तक नहीं है। दरअसल शिवराज सिंह चौहान ने अपने नजदीक जैसै भ्रष्ट और नपुंसक लोगों की भीड़ जमा कर ली थी उनकी शक्ति का आधार केवल सरकार थी। सरकारी तंत्र का लाभ लेकर वे भ्रष्ट मंत्री अफसर विकास के नाम पर लिए गए कर्ज को जीमने में जुटे रहे। धनागमन के इस आंकड़े को बाहर बैठा कोई सामान्य शख्स भी अच्छी तरह समझ सकता है। शुरुआती दौर में उमा भारती ने जब राघवजी भाई को वित्तीय प्रबंधन की कमान थमाई तो उन्होंने प्रदेश की आय बढ़ाने में व्यावसायिक प्रबंधन का सहारा लिया। वे स्वयं टैक्स सलाहकार थे सो उन्होंने टैक्स प्रदाताओं से धन जुटाकर प्रदेश की बैलेंस शीट मजबूत की। जिससे भाजपा सरकार केन्द्र से अधिक धन प्राप्त कर सकी। मैचिंग ग्रांट भरपूर होने की वजह से तरह तरह की योजनाएं बनाईं गईं और प्रदेश के लिए वित्तीय प्रबंधन मजबूत किया गया। शिवराज सिंह चौहान इस वित्तीय प्रबंधन की वजह से भरपूर धन लुटाते रहे। हितग्राहियों के जो सम्मेलन भाजपा कर रही थी वह वास्तव में फुगावा था। दरअसल सत्ता के अंतिम मुहाने पर पंचायतों में बैठे दिग्विजय सिंह के समर्थक उस धन को आहरित कर रहे थे। वे गांव के लोगों को ठेलकर हितग्राही सम्मेलनों में भेज रहे थे और भाजपा उन्हें प्रदेश के विकास की धुरी मान रही थी। राजीव गांधी के पंचायती राज को माफिया राज में बदलने वाले इस षड़यंत्र की आहट जब पंचायत सचिव रहे आईएएस आरएस जुलानिया को लगी तो उन्होंने पंचायतों को जाने वाला फंड रोक दिया। इसके बावजूद इस दौरान जन धन का भारी अपव्यय हो चुका था। ठेकेदारों और अफसरों के जिस गठजोड़ ने राजनेताओं का संरक्षण पाकर विकास की कहानियां सुनाईं वे भी इस प्रक्रिया में भरपूर मजबूत हो चले थे। अब सत्ता की मलाई चाटने वाला ये माफिया इस बार कांग्रेस के साथ है, और कमलनाथ सरकार माफिया के विरुद्ध संग्राम का उद्घोष कर रही है। सरकार की निगाह में माफिया वो है जो टैक्स नहीं देता और कानूनी इबारतों को अनदेखा करके अनगढ़ तरीके से धन बनाने का काम कर रहा है। दरअसल प्रदेश और देश में धन बनाने वाला बड़ा वर्ग वो है जो बगैर किसी सरकारी मदद के अपना कारोबार करके धनार्जन करता है। निश्चित रूप से सरकारी तंत्र उसे अवैध कारोबारी कहता है। इसीलिए सरकार ने शुद्द के लिए युद्ध नाम का जो अभियान चलाया उसमें निरीह व्यापारियों की मौत हो गई। उन पर रासुका लाद दी गई और जेलों में ठूंस दिया गया। उनके उद्योग से जुड़े हजारों कर्माचारी बेरोजगार हो गए। इसके बावजूद कमलनाथ सरकार और उससे पोषित मीडिया इसे बेईमानों के विरुद्ध संग्राम बताता रहा। आज जब कमलनाथ माफिया के विरुद्ध शंखनाद करने के लिए सरकारी तंत्र को छूट दे रहे हैं तो वो कहर कांग्रेस के विरोधियों पर टूटने वाला है। जो अवैध कारोबार करने वाले कांग्रेस की गोदी में बैठे हैं या बैठ चुके हैं उन पर इस युद्ध का कोई असर पड़ने वाला नहीं है। इसके साफ संकेत कमलनाथ सरकार की कार्यप्रणाली को देखकर मिल जाता है। तबादले पोस्टिंग के कारोबार में जिस तरह खुलेआम नौकरियों की बोलियां लगाईँ गईं उससे साफ पता चलता है कि सरकार अपने विरोधियों को अपराधी बताने में कोई गुरेज नहीं कर रही है। जिस तरह कांग्रेस ने चुनाव के दौरान कर्ज माफी या सस्ती बिजली के वादे किए उसके लिए धन की जरूरत थी। ये धन इसी तरह बेरहमी से टैक्स वसूली से उगाया जा सकता है। साथ में बंदर हीरा खदान को नीलाम करके सरकार ने अपने धन की उगाही का एक अजस्र स्रोत भी तलाश लिया है। चुनावों को देखकर शिवराज सिंह चौहान ने रेत को टैक्स मुक्त करके अपने समर्थकों को खुश करने का खेल खेला था उसे भी कमलनाथ माफिया के विरुद्ध युद्ध बता रहे हैं। निश्चित रूप से सरकार और प्रदेश को चलाने के लिए धन की जरूरत होती है। यह धन टैक्स से ही जुटाया जाता है। जो सरकार अपनी आय का अस्सी फीसदी हिस्सा स्थापना खर्च में ही लुटा देती हो वह प्रदेश के लिए धन बनाने वाले कारोबारियों को माफिया कहे तो ये वास्तव में क्रूरता होगी। इसके बावजूद सरकार धड़ल्ले से फोकटियों को ये अधिकार दे रही है कि वे प्रदेश के लिए पैसा उत्पादन करने वाले या सेवाएं उपलब्ध कराने वालों को माफिया कहे क्योंकि वे सरकार से सहमत नहीं हैं। ये आपातकाल से भी ज्यादा नृशंस और निंदनीय कार्य कहा जाएगा। इतिहास में आपातकाल को इंदिराजी का सबसे घिनौना अत्याचार बताया जाता है लेकिन कमलनाथ का ये माफिया संग्राम सदियों तक डरावने अध्याय के रूप में जाना जाएगा।

  • माफिया से युद्ध को कमलनाथ ने दी खुली छूट

    माफिया से युद्ध को कमलनाथ ने दी खुली छूट

    मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में उच्च-स्तरीय बैठक कल

    भोपाल 11 दिसंबर(प्रेस सूचना केन्द्र)। कमल नाथ सरकार ने अपने मात्र एक साल के कार्यकाल में वर्षों से माफिया राज के आतंक का दंश झेल रही आम जनता को इससे मुक्त कराने की मुहिम को तेज करने के लिए 12 दिसंबर को उच्च स्तरीय बैठक बुलाई गई है। जनसम्पर्क मंत्री पी.सी. शर्मा ने कहा है कि मुख्यमंत्री के स्पष्ट निर्देश हैं कि अब प्रदेश में ‘लोगों के लिए लोगों की सरकार’ चलेगी न कि माफिया राज।

    जनसम्पर्क मंत्री श्री शर्मा ने कहा कि मात्र एक साल में माफिया राज की कमर तोड़ने का जो साहस मुख्यमंत्री ने दिखाया है, उससे जनता को राहत मिली है। उन्होंने कहा कि माफिया, शासन-प्रशासन को ताक पर रखकर पूरे प्रदेश में दशकों से  समानांतर सरकार चला रहे थे, जिसका खामियाजा प्रदेश की जनता भुगत रही थी और विकास अवरूद्ध हो रहा था।

    श्री शर्मा ने कहा कि माफिया के खिलाफ जनमानस के साथ कमर कसकर खड़ी कमल नाथ सरकार ने मिलावटखोरों के खिलाफ ‘शुद्ध के लिए युद्ध’ की शुरुआत की। आम जनता को जहर परोस रहे मिलावटखोर माफियाओं की धर-पकड़ से पूरे प्रदेश में बड़े पैमाने पर कार्यवाही हुई। अभियान के दौरान मिलावटखोरों के खिलाफ 94 एफआईआर दर्ज की गई और 31 कारोबारियों के खिलाफ रासुका के तहत कार्रवाई हुई।

    मंत्री श्री शर्मा ने कहा कि राज्य सरकार की नई रेत नीति बन जाने से अभी तक प्रदेश की रेत संपदा लूटने और प्रदेश की जनता के हितों से कुठाराघात करने वाले माफिया के हौसले पस्त हो गए हैं। शासन-प्रशासन पर हमले कर और राजनीतिक संरक्षण प्राप्त कर बेखौफ रेत माफिया को एक ही फैसले से मुख्यमंत्री श्री कमल नाथ ने ध्वस्त कर दिया है। यही नहीं, नई रेत नीति से प्रदेश को जो राजस्व करीब 200 करोड़ मिलता था, वह इस वर्ष बढ़कर 1234 करोड़ तक पहुँच गया है। पिछले 15 साल से 15 हजार करोड़ रुपए किसकी जेब में जा रहे थे, इसका खुलासा भी मुख्यमंत्री ने नई रेत नीति बनाकर किया है। अब ये पैसा निजी हाथों में जाने के बजाए प्रदेश के विकास और जनता के हितों के लिए उपयोग होगा। 

    जनसम्पर्क मंत्री ने कहा कि किसानों को मिलावटी खाद बेचने वाले माफियाओं से मुक्त कराने के लिए भी मुहिम पूरे प्रदेश में चल रही है। पिछले एक माह में 1313 उर्वरक विक्रेताओं और गोदामों का निरीक्षण कर लिए गए नमूनों में 110 प्रकरणों में मिलावट पाए जाने पर कार्रवाई की गई है।

    श्री पी.सी. शर्मा ने कहा कि इतना ही नहीं, कमल नाथ सरकार ने विभिन्न शहरों में अपने रसूख और माध्यमों का दुरुपयोग करके अनैतिक गतिविधियाँ चलाने, सरकारी और निजी जमीनों पर कब्जे कर अपना साम्राज्य बनाने वाले तथा इंदौर और ग्वालियर में भी माफिया के खिलाफ सारे दबावों के बावजूद सख्ती दिखाई है और कठोर कार्यवाही भी सुनिश्चित की है। इस दृढ़तापूर्ण कार्रवाई के पीछे एक ही लक्ष्य था कि अब माफिया को प्रदेश की जनता और यहाँ की सरकारी संपदा को लूटने की इजाजत नहीं होगी। 

    मंत्री श्री शर्मा ने कहा कि जो नेता प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से माफिया के समर्थन में बयान देकर उनका संरक्षण कर रहे हैं, उनकी गतिविधियों से यह स्पष्ट है कि 15 साल में ये माफिया किनके संरक्षण में पनपे हैं। श्री शर्मा ने कहा कि प्रदेश में माफिया राज को जड़ से उखाड़ फेकने के लिए मुख्यमंत्री श्री कमल नाथ की अध्यक्षता में 12 दिसंबर को उच्च स्तरीय बैठक होने जा रही है। इस बैठक में गृह मंत्री, मुख्य सचिव, पुलिस महानिदेशक, अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (गुप्त वार्ता) एवं एसआईटी, आईजी एवं कमिश्नर जबलपुर, इंदौर, ग्वालियर, भोपाल, कलेक्टर इंदौर एवं कमिश्नर इंदौर नगर निगम उपस्थित रहेंगे। 

  • एक करोड़ उपभोक्ताओं को मिली सस्ती बिजली बोले प्रियव्रत सिंह

    एक करोड़ उपभोक्ताओं को मिली सस्ती बिजली बोले प्रियव्रत सिंह

    भोपाल,9 दिसंबर(प्रेस सूचना केन्द्र)। ऊर्जा मंत्री प्रियव्रत सिंह ने दावा किया है मध्यप्रदेश सरकार ने अपने चुनावी वादे को पूरा करते हुए एक करोड़ बिजली उपभोक्ताओं को इंदिरा ज्योति योजना में सस्ती बिजली उपलब्ध कराई है। केवल सत्रह लाख उपभोक्ता इस सुविधा के दायरे में नहीं आए हैं। हितग्राही उपभोक्ताओं को अब तीस दिनों की बिजली खपत डेढ़ सौ यूनिट से कम होने पर सौ यूनिट का बिल मात्र सौ रुपए लिया जा रहा है।

    प्रेस वार्ता में श्री सिंह ने बताया कि उपभोक्ताओं को लाभ देने के लिए राज्य सरकार 3400 करोड़ रुपए की सब्सिडी दे रही है। इससे 90 फीसदी उपभोक्ता लाभान्वित हो रहे हैं। उन्होंने बताया कि जब नई सरकार सत्ता में आई तब बिजली कंपनियों पर 37963 करोड़ रुपए का कर्ज था और लगभग 44975 करोड़ का संचयी घाटा था।

    उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के उस बयान को गैर लोकतांत्रिक बताया जिसमें उन्होंने उपभोक्ताओं से अधिक बिजली बिल का भुगतान न करने का आव्हान किया है। उन्होंने कहा कि इस तरह के भड़काऊ बयानों से अराजकता फैल जाएगी जिसे नियंत्रण करने के लिए राज्य को अपने बहुमूल्य संसाधन खर्च करने होंगे।

    जुलाई महीने से लेकर अब तक ऊर्जा विभाग में कितने तबादले किए गए और इन तबादलों से विभाग को क्या लाभ हुआ पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि ये तबादले पांच साल की समयसीमा पूरी होने पर किए गए हैं। उन्होंने कहा कि तबादलों की निश्चित संख्या तो बता पाना फिलहाल संभव नहीं है लेकिन ये तबादले जरूरत के अनुसार ही किए गए हैं।

    नवंबर के महीने तक मीटर बदलने की समय सीमा बढ़ाए जाने की बात स्वीकार करते हुए श्री सिंह ने कहा कि ये समय सीमा मार्च 2020 तक तय की गई है।