Category: सरकार

  • जनता स्वस्थ रहे इसलिए ज्यादा डाक्टर बना रहेःराजेन्द्र शुक्ला

    जनता स्वस्थ रहे इसलिए ज्यादा डाक्टर बना रहेःराजेन्द्र शुक्ला

    भोपाल, 26 फरवरी(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)। राजेन्द्र शुक्ला ने आज विधानसभा में प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ बनाने के लिए सरकार की प्रतिबद्धता दोहराते हुए कहा कि आमजन को गुणवत्तापूर्ण और सुलभ उपचार उपलब्ध कराना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य ढांचे के विस्तार, विशेषज्ञ डॉक्टरों की नियुक्ति और आधुनिक उपकरणों की उपलब्धता के लिए व्यापक कार्ययोजना पर अमल किया जा रहा है।उन्होंने कहा कि प्रदेश में डाक्टरों की कमी दूर करने के लिए एमबीबीएस में 1000 औ पोस्ट ग्रेजुएट विशेषज्ञता के लिए आठ सौ सीटें बढ़ाई गईं हैं। भारत सरकार हर लोकसभा क्षेत्र में एक मेडीकल कालेज खोलना सुनिश्चित कर रही है। इससे आने वाले समय में लोगों को डाक्टरी सुविधाएं सुलभ हो जाएंगी।

    विधानसभा में अपने वक्तव्य के दौरान मंत्री ने बताया कि जिला अस्पतालों और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में सुविधाओं के उन्नयन का कार्य तेज गति से चल रहा है। कई अस्पतालों में आईसीयू और मातृ-शिशु वार्डों का विस्तार किया गया है। उन्होंने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में डॉक्टरों और नर्सिंग स्टाफ की कमी दूर करने के लिए विशेष भर्ती अभियान चलाया जा रहा है, जिससे दूरस्थ अंचलों के मरीजों को भी बेहतर उपचार मिल सके।

    मंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि गंभीर बीमारियों के उपचार के लिए राज्य सरकार द्वारा संचालित योजनाओं के दायरे को बढ़ाया गया है। आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के मरीजों को निशुल्क उपचार उपलब्ध कराने के लिए बजट में पर्याप्त प्रावधान किए गए हैं। उन्होंने कहा कि दवाओं और जांच सुविधाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करने हेतु अस्पतालों की नियमित मॉनिटरिंग की जा रही है।

    विपक्ष के सवालों का जवाब देते हुए श्री शुक्ला ने कहा कि स्वास्थ्य सेवाओं में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए डिजिटल मॉनिटरिंग सिस्टम लागू किया जा रहा है। टेलीमेडिसिन सेवाओं का विस्तार कर विशेषज्ञ चिकित्सकों को ग्रामीण क्षेत्रों से जोड़ा जा रहा है।

    अंत में उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि सरकार के समन्वित प्रयासों से प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था में उल्लेखनीय सुधार होगा और आम नागरिकों को बेहतर एवं त्वरित चिकित्सा सेवाएं प्राप्त होंगी।

  • लोक कल्याण के लिए सख्त कार्रवाई बोले पीडब्ल्यूडी मंत्री राकेश सिंह

    लोक कल्याण के लिए सख्त कार्रवाई बोले पीडब्ल्यूडी मंत्री राकेश सिंह

    भोपाल, 25 फरवरी (प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)। मध्य प्रदेश विधानसभा के बजट सत्र में लोक निर्माण विभाग की अनुदान मांगों पर चर्चा के दौरान प्रदेश के लोक निर्माण मंत्री राकेश सिंह ने विभागीय कार्यों, गुणवत्ता नियंत्रण और पारदर्शिता पर विस्तृत वक्तव्य दिया। उन्होंने स्पष्ट कहा कि सड़क और पुल निर्माण में किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी तथा जवाबदेही तय कर सख्त कार्रवाई की जाएगी। हमने लोक निर्माण से लोक कल्याण का जो लक्ष्य तय किया है उसे सार्थक करने के लिए आवश्यक कार्रवाई की जा रही है।

    मंत्री ने सदन को अवगत कराया कि पिछले 13 महीनों में विभाग द्वारा 875 से अधिक औचक निरीक्षण किए गए। इन निरीक्षणों के आधार पर चार इंजीनियरों को निलंबित किया गया और 25 ठेकेदारों को ब्लैकलिस्ट किया गया है। उन्होंने बताया कि गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए थर्ड-पार्टी ऑडिट प्रणाली को और सुदृढ़ किया जा रहा है तथा प्रत्येक बड़े कार्य के लिए चरणबद्ध तकनीकी परीक्षण अनिवार्य किए गए हैं। निर्माण कार्यों में मानक सामग्री के उपयोग और समयसीमा का पालन सुनिश्चित करने के लिए जिला स्तर पर मॉनिटरिंग तंत्र सक्रिय किया गया है।

    भोपाल में चर्चित तथाकथित “90 डिग्री पुल” के संदर्भ में मंत्री ने कहा कि पुल का वास्तविक कोण 119 डिग्री है और इसे स्वीकृत डिजाइन के अनुरूप बनाया गया है। तकनीकी पेचीगदियों के बीच इस पुल को इसी प्रकार बना पाना संभव हुआ है। उन्होंने बताया कि मामले की तकनीकी जांच कराई गई है और यदि कहीं प्रक्रिया में त्रुटि पाई जाती है तो संबंधित एजेंसी के विरुद्ध दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी। मंत्री ने यह भी जोड़ा कि भविष्य में डिजाइन स्वीकृति और साइट सुपरविजन के बीच बेहतर समन्वय के लिए विशेष दिशानिर्देश जारी किए जा रहे हैं।

    विपक्ष की ओर से सड़क निर्माण की गुणवत्ता, गड्ढों की समस्या और अधूरी परियोजनाओं को लेकर प्रश्न उठाए गए। कांग्रेस विधायक महेश परमार ने इंदौर-भोपाल क्षेत्र की परियोजनाओं का उल्लेख करते हुए जवाब मांगा। इस पर मंत्री ने स्पष्ट किया कि मेट्रो परियोजना लोक निर्माण विभाग के अधीन नहीं आती, जबकि विभागीय सड़कों और पुलों पर निर्धारित भारतीय सड़क कांग्रेस (IRC) मानकों के अनुसार कार्य कराया जा रहा है। उन्होंने बताया कि वर्ष 2026-27 के लिए विभाग ने रखरखाव मद में अतिरिक्त प्रावधान का प्रस्ताव रखा है, ताकि गड्ढा-मुक्त सड़कों का लक्ष्य समयबद्ध तरीके से हासिल किया जा सके।

    चर्चा के दौरान कांग्रेस विधायक हेमंत कटारे की टिप्पणी पर मंत्री ने कहा कि सदन में गंभीर विषयों पर रचनात्मक बहस होनी चाहिए। उन्होंने सभी दलों से आग्रह किया कि विकास कार्यों को राजनीति से ऊपर उठकर देखा जाए। मंत्री ने यह भी बताया कि लोक शिकायतों के त्वरित निवारण के लिए ‘लोकपथ’ एप को अपग्रेड किया गया है, जिससे नागरिक सीधे फोटो और लोकेशन टैग के साथ शिकायत दर्ज कर सकते हैं। इसके अतिरिक्त विभाग ‘पीएम गति शक्ति’ प्लेटफॉर्म पर परियोजनाओं का डेटा एकीकृत कर रहा है, ताकि विभिन्न विभागों के बीच समन्वय बढ़े और दोहराव से बचा जा सके।

    मंत्री राकेश सिंह ने यह जानकारी भी दी कि ग्रामीण संपर्क सड़कों के उन्नयन के लिए चरणबद्ध योजना तैयार की गई है, जिसके तहत दूरस्थ और आदिवासी अंचलों को जिला मुख्यालय से जोड़ने वाली सड़कों को प्राथमिकता दी जाएगी। उन्होंने बताया कि वर्ष 2025-26 में हजारों किलोमीटर सड़कों के नवीनीकरण और मजबूतीकरण का लक्ष्य निर्धारित किया गया है, जिससे परिवहन लागत घटेगी और कृषि-उद्योग गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा। साथ ही, सड़क सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए ब्लैक स्पॉट चिन्हित कर सुधारात्मक कार्य किए जा रहे हैं।

    सदन में सड़कों पर आवारा पशुओं से दुर्घटनाओं की बढ़ती घटनाओं का मुद्दा भी उठा। मंत्री ने कहा कि यह विषय बहु-विभागीय है और स्थानीय निकायों व पशुपालन विभाग के साथ समन्वय स्थापित कर समाधान की दिशा में काम किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि प्रमुख राजमार्गों पर चेतावनी संकेतक, रिफ्लेक्टर और प्रकाश व्यवस्था को सुदृढ़ करने के निर्देश दिए गए हैं।

    विधानसभा में दिए गए इस विस्तृत वक्तव्य के माध्यम से मंत्री राकेश सिंह ने जहां विभाग की उपलब्धियों को रेखांकित किया, वहीं कमियों को दूर करने के लिए ठोस कदम उठाने का भरोसा भी दिलाया। बजट सत्र में लोक निर्माण विभाग पर हुई यह चर्चा प्रदेश में अधोसंरचना विकास की दिशा और सरकार की प्राथमिकताओं को स्पष्ट करती है।

  • राज्य के विकास काआधार बनेगा केन्द्रीय बजटःडॉ.मोहन यादव

    राज्य के विकास काआधार बनेगा केन्द्रीय बजटःडॉ.मोहन यादव

    भोपाल, 03 फरवरी(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)।  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव एवं भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष व विधायक  हेमंत खण्डेलवाल ने केंद्रीय बजट 2026-27 को लेकर मंगलवार को कुशाभाऊ ठाकरे सभागार भोपाल में पत्रकार वार्ता को संबोधित किया। पत्रकार-वार्ता में पार्टी के प्रदेश प्रभारी डॉ. महेन्द्र सिंह एवं मध्यप्रदेश शासन के उप मुख्यमंत्री श्री जगदीश देवड़ा विशेष रूप से उपस्थित रहे। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने पत्रकार-वार्ता को संबोधित करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के मार्गदर्शन में और वित मंत्री श्रीमती निर्मला सीतारमण द्वारा प्रस्तुत केंद्रीय बजट प्रधानमंत्री जी के विकसित भारत के संकल्पों को सिद्ध करने वाला है। केंद्रीय बजट मध्यप्रदेश के आर्थिक-औद्योगिक और सामाजिक विकास का ऐतिहासिक अवसर सिद्ध होगा। पूंजीगत व्यय में वृद्धि, शहरों के विकास व लॉजिस्टिक्स इकोसिस्टम का विकास प्रदेश के लिए वरदान बनेगा। यह बजट सतत आर्थिक विकास के साथ जनअपेक्षाओं को पूरा करने वाला है। प्रधानमंत्री मोदी जी ने समय-समय पर अपने निर्णयों से देश को सशक्त बनाने के साथ दुनिया को भारत की ताकत का अहसास कराया है। इस बजट के माध्यम से उद्योगों को बढ़ावा मिलने के साथ अलग-अलग क्षेत्रों में रोजगार के अनेक अवसर पैदा होंगे। यह केंद्रीय बजट सभी वर्गों की आशा-आकांक्षाओं को पूरा करने के साथ उन्हें सशक्त बनाने में निर्णायक सिद्ध होगा। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष व विधायक श्री हेमंत खण्डेलवाल ने कहा कि केंद्रीय बजट 2026-27 में प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी की बताई चार जातियों गरीब, युवा, नारी शक्ति और अन्नदाता के साथ मध्यम वर्ग, उद्यमियों और हर वर्ग के कल्याण व शक्तिकरण के लिए प्रावधान किए गए हैं। केंद्रीय बजट सिर्फ बजट नहीं है, यह विकसित भारत और आत्मनिर्भर भारत का विजन डॉक्यूमेंट है। यह आने वाले वर्षों में भारत की दिशा तय करने वाला बजट सिद्ध होगा। यह सर्वस्पर्शी, सर्वव्यापी और सर्वसमावेशी बजट है। बजट में तीन कर्तव्यों-आर्थिक विकास, जन-आकांक्षाओं की पूर्ति और ‘सबका साथ, सबका विकास’ की परिकल्पना को साकार किया गया है। बजट में रिफॉर्म, परफॉर्म और ट्रांसफॉर्म स्पष्ट रूप से परिलक्षित हो रहा है। केन्द्रीय बजट में राजकोषीय घाटा को 4.5 प्रतिशत से घटाकर 4.3 प्रतिशत तक लाने का रोडमैप तैयार किया है। देश के कुल कर्ज को जीडीपी के 56 प्रतिशत से घटाकर 50 प्रतिशत तक लाने की भी योजना है। बजट में 7 हाई-स्पीड कॉरिडोर्स के निर्माण और 12.2 लाख करोड़ के कैपिटल एक्सपेंडिचर का प्रावधान किया गया है। सेमीकंडक्टर मिशन के लिए निवेश राशि को 22,500 करोड़ से बढ़ाकर 40,000 करोड़ करने का प्रस्ताव है।उन्होंने कहा कि इस बजट से मध्यप्रदेश को भी व्यापक लाभ होगा और यह बजट वर्ष 2047 के विकसित भारत की परिकल्पना को साकार करने में मील का पत्थर साबित होगा।

    मध्यप्रदेश को सुदृढ़ वित्तीय आधार प्राप्त होगा, निवेशकों का विश्वास और बढ़ेगा- डॉ. मोहन यादव

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि यह बजट युवा शक्ति प्रेरित बजट है। इस बजट का मूल उद्देश्य तेज एवं सतत आर्थिक वृद्धि, जन आकांक्षाओं की पूर्ति, क्षमता निर्माण तथा सभी परिवारों, क्षेत्रों और सेक्टरों को समान अवसर उपलब्ध कराना है। बजट में आत्मनिर्भरता को मार्गदर्शक सिद्धांत बनाकर उच्च विकास दर बनाए रखने के स्पष्ट प्रावधान किए गए हैं। यह बजट मध्यप्रदेश को सुदृढ़ वित्तीय आधार प्रदान करेगा। साथ ही निवेशकों का विश्वास और बढ़ेगा, जिससे मध्यप्रदेश के विकास की रफ्तार और तेज होगी और हमारा प्रदेश आत्मनिर्भर बनेगा। बजट में वैश्विक बाजारों से जुड़ाव, निर्यात विस्तार तथा दीर्घकालिक निवेश आकर्षण की रणनीति है, जिसका बहुत फायदा आने वाले सालों में मध्यप्रदेश को मिलेगा। उन्होंने कहा कि यह बजट केवल वित्तीय प्रावधानों का संकलन नहीं है, बल्कि ईज ऑफ डूइंग बिजनेस आधारित आर्थिक विकास का संरचित रोडमैप है। यह बजट मध्यप्रदेश को सतत विकासशील राज्य के रूप में स्थापित करने की दिशा में निर्णायक भूमिका अदा करेगा। बजट के प्रावधानों से मध्यप्रदेश में निवेश, उद्योग स्थापना, रोजगार सृजन, उत्पादन क्षमता, निर्यात उन्मुख विनिर्माण का बेहतर वातावरण तैयार होगा।

    मध्यप्रदेश स्वास्थ्य और ज्ञान आधारित अर्थव्यवस्था में तेजी से आगे बढ़ेगा

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि बायोफार्म शक्ति योजना से बायोटेक्नोलॉजी, बायो फार्मा, फार्मास्यूटिकल अनुसंधान और हेल्थ इंडस्ट्री आधारित स्टार्ट अप्स को बढ़ावा मिलेगा। मध्यप्रदेश ज्ञान आधारित अर्थव्यवस्था की दिशा में अग्रसर होगा, जिससे उच्च मूल्य रोजगार सृजित होंगे। सेमीकंडक्टर मिशन 2.0 से इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट मैन्युफैक्चरिंग और एआई आधारित तकनीकों के विकास से मध्यप्रदेश में हाई टेक उद्योग, डिजिटल निवेश और नवाचार आधारित उद्यमिता को बढ़ावा मिलेगा। बजट के प्रावधान मध्यप्रदेश के पारंपरिक औद्योगिक क्षेत्रों के लिए विशेष रूप से लाभकारी सिद्ध होगा। ग्रामीण और स्थानीय अर्थव्यवस्था रोजगार तथा औद्योगिक पुनर्जीवन को नई गति प्रदान करेंगे। 200 लेगेसी इंडस्ट्रियल क्लस्टर्स के पुनर्जीवन से मध्यप्रदेश के पारंपरिक औद्योगिक क्षेत्रों में अधोसंरचना सुधार, निवेश पुनर्स्थापन, उत्पादन विस्तार और स्थानीय रोजगार को नई ऊर्जा मिलेगी। उन्होंने कहा कि केंद्रीय बजट मध्यप्रदेश के एमएसएमई सेक्टर के लिए अत्यंत लाभकारी सिद्ध होगा। राज्य में उद्यमिता, स्वरोजगार तथा औद्योगिक विस्तार को मजबूती मिलेगी। मध्यप्रदेश के लघु एवं मध्यम उद्योग अधिक प्रतिस्पर्धी, आत्मनिर्भर और विस्तार उन्मुख बनेंगे। मध्यप्रदेश को आईटी, पर्यटन, स्वास्थ्य एवं शिक्षा सेवाओं के प्रमुख केंद्र के रूप में विकसित करने में यह बजट महती भूमिका निभाएगा।

    ग्रामीण क्षेत्र के साथ नारी शक्ति को आर्थिक सशक्तिकरण देगा बजट

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि बजट में वर्ष 2047 तक भारत को वैश्विक सेवा क्षेत्र में नेतृत्व दिलाने की दृष्टि से सेवा क्षेत्र को विकास का प्रमुख चालक बनाया गया है। यह बजट मध्यप्रदेश को आईटी, हेल्थ, एजुकेशन, टूरिज्म और प्रोफेशनल सर्विसेज के केंद्र के रूप में विकसित होने में सहायक सिद्ध होने के सथ भारत को सेवा क्षेत्र में वैश्विक नेतृत्व भी दिलाएगा। बजट में 10 हजार करोड़ की लागत से देश के प्रत्येक जिलों में महिला छात्रावास स्थापना का के साथ नारी शक्ति के लिए रोजगार के अवसर बढ़ाने 1.5 लाख सेवा प्रदाताओं और एक लाख स्वास्थ्य पेशेवरों को प्रशिक्षित करने का लक्ष्य रखा गया है। लखपति दीदी योजना पर आधारित सामुदायिक स्व-सहायता समूह उद्यम स्थापित करने का प्रावधान है, इससे महिलाओं को क्रेडिट लिंक्ड आजीविका से उद्यम स्वामित्व की ओर जाने में मदद मिलेगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि बजट के इन प्रावधनों से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को गति मिलेगी ही, साथ ही यह बजट नारी शक्ति को आर्थिक सशक्तिकरण देने वाला होगा। सिटी ईकोनॉमिक रीजन के अंतर्गत शहरी क्षेत्रों में नियोजित आर्थिक विकास, औद्योगिक व्यावसायिक क्लस्टरिंग और आधुनिक अधोसंरचना का निर्माण होगा। इसके साथ ही मध्यप्रदेश के प्रमुख शहर संगठित आर्थिक केंद्रों के रूप में विकसित होंगे, जिससे  निवेश अनुकूल शहरी अर्थव्यवस्था का निर्माण होगा।

    बजट मध्यप्रदेश के आर्थिक विकास के नए द्वार खोलता है

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि यह बजट मध्यप्रदेश के लिए आर्थिक विकास के नए द्वार खोलता है, जहां उद्योगों को सरल प्रक्रियाएं, निवेशकों को भरोसेमंद वातावरण, युवाओं को रोजगार के अवसर, महिलाओं को आर्थिक सशक्तिकरण, एमएसएमई को संस्थागत समर्थन और नागरिकों को बेहतर सेवाए प्राप्त होंगी। यह बजट मध्य प्रदेश के सर्वांगीण विकास, समावेशी प्रगति और दीर्घकालिक आर्थिक समृद्धि का एक मजबूत आधार बनेगा। साथ ही एक निवेश-आकर्षक, विकासोन्मुख और भविष्य-उन्मुख अर्थव्यवस्था के रूप में स्थापित करने की दिशा में निर्णायक भूमिका निभाएगा। यह बजट मध्यप्रदेश के लिए तेज विकास, संरचनात्मक परिवर्तन और सतत समृद्धि की एक सशक्त विकास यात्रा का प्रारंभ बिंदु सिद्ध होगा, जो राज्य के सामाजिक आर्थिक भविष्य को नई ऊंचाइयों तक ले जाने में अत्यंत सहायक एवं परिवर्तनकारी भूमिका निभाएगा।

    प्रदेश की प्रतिभाओं के बलबूते फार्मा सहित सभी क्षेत्रों में लगाएंगे छलांग

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि मध्य्रदेश अपनी प्रतिभाओं के बलबूते पर फार्मा सहित सभी क्षेत्रों में लंबी छलांग लगाएगा। सेमीकंडक्टर बड़ा सेक्टर है। मैं सेमीकंडक्टर को लेकर गुजरात के मुख्यमंत्री से कल ही बात करके आया हूं। सेमीकंडक्टर मिशन 2.0 भारतीय तकनीक है, जिसके आधार पर मध्यप्रदेश में अत्याधुनिक उद्योग, डिजिटल निवेश के साथ देश के साथ कदम से कदम मिलाकर चलेंगे। हमारे प्रदेश में जो उद्योग चल रहे हैं, वह अधिकांश परंपरागत आधारित हैं। आगे बढ़ने के लिए रिनोवेशन के साथ और अधिक प्रभावी कार्य किया जाएगा। मध्यप्रदेश में पहले कॉटन इंडस्ट्री चलती थी, लेकिन रिनोवेशन नहीं होने से वह डूब गई थी। प्रधानमंत्री मोदी जी ने धार में पीएम मित्र पार्क की सौगात दी है, जिसके आधार पर हमारी सरकार मध्यप्रदेश वस्त्र उद्योग को बढ़ावा दे रही है। उन्होंने कहा कि नए उद्योग लगाना अच्छी बात है, लेकिन जो चल रहे हैं उनका संवर्धन करना भी एक बड़ा कार्य है। हमारी सरकार इस क्षेत्र में भी कार्य कर रही है। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी टियर-2 और टियर-3 शहरों के लिए भी पर्याप्त धनराशि दी गई है। मध्यप्रदेश में प्रमुख शहर संगठित और आर्थिक रूप से समृद्ध होंगे और संरचना निवेश मॉडल मध्य प्रदेश के लिए अत्यंत लाभकारी होगा। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी की दूरदृष्टि आर्थिक विकास के नए राह दिखा रही है। मैं प्रधानमंत्री जी को बधाई देता हूं कि उन्होंने देश के आर्थिक विकास के लिए कई निर्णय लिए हैं। पाकिस्तान हमारे साथ आजाद हुआ। वहां की आर्थिक स्थिति दुनिया में किसी से छिपी नहीं है। हमारे प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी ने देश को सशक्त बनाने के साथ दुनिया को भारत की ताकत का अहसास कराया है।भारत को आत्मनिर्भर बनाने, देशवासियों के कल्याण और मध्यम वर्ग को राहत देने वाले इस क्रांतिकारी बजट के लिए यशस्वी प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी और केंद्रीय वित्त मंत्री श्रीमती निर्मला सीतारमण जी का मध्यप्रदेशवासियों की ओर से बहुत-बहुत आभार व्यक्त करता हूं।

    केंद्रीय बजट सशक्त भारत की नींव को और मजबूती प्रदान करेगा – श्री हेमंत खण्डेलवाल

    भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष श्री हेमंत खण्डेलवाल ने कहा कि केंद्रीय बजट 2026-27 प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के विकसित व आत्मनिर्भर भारत के विजन का सशक्त दस्तावेज़ है। गरीब, युवा, नारी शक्ति, अन्नदाता के साथ मध्यम वर्ग और उद्यमियों के कल्याण व सशक्तिकरण के प्रावधान बजट में किए गए हैं। यह सर्वस्पर्शी, सर्वसमावेशी बजट रिफॉर्म, परफॉर्म और ट्रांसफॉर्म की भावना को दर्शाता है, जो मध्यप्रदेश सहित देश को 2047 के विकसित भारत की ओर मजबूती से ले जाएगा। केंद्रीय बजट को राजनीति के दृष्टिकोण से नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माण की नजर से देखना आवश्यक है। देश के कुल कर्ज को जीडीपी के 56 प्रतिशत से घटाकर 50 प्रतिशत तक लाने की भी योजना है। बजट में 7 हाई-स्पीड कॉरिडोर्स के निर्माण और 12.2 लाख करोड़ के कैपिटल एक्सपेंडिचर का प्रावधान किया गया है। सेमीकंडक्टर मिशन के लिए निवेश राशि को 22,500 करोड़ से बढ़ाकर 40,000 करोड़ करने का प्रस्ताव है।उन्होंने कहा कि इस बजट से मध्यप्रदेश को भी व्यापक लाभ होगा और यह बजट वर्ष 2047 के विकसित भारत की परिकल्पना को साकार करने में मील का पत्थर साबित होगा। यह बजट भारत को आने वाले वर्षों में विश्व की अग्रणी अर्थव्यवस्था बनाने की दिशा में एक मजबूत कदम है। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में देश तेजी से सही दिशा में आगे बढ़ रहा है, और बजट 2026 उसी भरोसे और दूरदृष्टि का प्रमाण है। यह केंद्रीय बजट देश के आर्थिक विकास के साथ “रिफॉर्म एक्सप्रेस” की रफ्तार को भी दिखा रहा है। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व में प्रस्तुत केंद्रीय बजट तात्कालिक प्रभाव से अधिक अगले 10-20 वर्षों में भारत की दिशा तय करने वाला है। यह बजट सशक्त भारत की नींव को और मजबूती प्रदान करेगा।

    स्वास्थ्य के क्षेत्र में उल्लेखनीय सुधार के साथ ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती देगा बजट

    भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष श्री हेमंत खण्डेलवाल ने कहा कि केन्द्रीय बजट में फिस्कल डेफिसिट (राजकोषीय घाटा) को 4.5 प्रतिशत से घटाकर 4.3 प्रतिशत तक लाने का रोडमैप तैयार किया है। साथ ही देश के कुल कर्ज को जीडीपी के 56 प्रतिशत से घटाकर 50 प्रतिशत तक लाने की भी योजना है। रेयर अर्थ मिनरल्स के क्षेत्र में ओडिशा, आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु में बड़े निवेश की योजना बनाई गई है, जिससे इस क्षेत्र में चीन की निर्भरता कम होगी। सेमीकंडक्टर उद्योग को बढ़ावा देने के लिए लगभग 40 हजार करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। इसके अलावा केमिकल पार्क और नए इकोनॉमिक जोन स्थापित करने की भी घोषणा हुई है। स्वास्थ्य क्षेत्र में कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों की 17 दवाइयों पर कस्टम ड्यूटी शून्य कर दी गई है। एक लाख हेल्थ प्रोफेशनल्स की नियुक्ति, राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य संस्थान और हेल्थ टूरिज्म को बढ़ावा देने जैसे महत्वपूर्ण कदम उठाए गए हैं। जिला अस्पतालों का उन्नयन कर उनमें ट्रामा सेंटर स्थापित करने संबंधी प्रावधान स्वास्थ्य के क्षेत्र में उल्लेखनीय सुधार लाएंगे। महिलाओं के लिए हर जिले में हॉस्टल, डेढ़ लाख केयर वर्कर्स और पेंशनर्स को सुविधाएं देने का भी प्रावधान है। यह महिलाओं को आर्थिक सशक्तिकरण के लिए बड़ा कदम है। उन्होंने कहा कि ‘लखपति दीदी’ योजना, पशुपालन में पूंजी सब्सिडी, पशु चिकित्सकों की संख्या बढ़ाने तथा अमृत सरोवर योजना के माध्यम से रोजगार सृजन पर विशेष ध्यान दिया गया है। यह निर्णय ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करेंगे।

    युवाओं को रोजगार दिलाने में महती भूमिका निभाएगी कंटेंट क्रिएटर लैब

    भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष श्री हेमंत खण्डेलवाल ने कहा कि केंद्रीय बजट में 15 हजार माध्यमिक शालाओं में कंटेंट क्रिएटर लैब की स्थापना, आईआईएम के सहयोग से 10 हजार टूरिस्ट गाइड तैयार करने और ‘खेलो इंडिया’ के माध्यम से खेलों को प्रोत्साहन देने की घोषणाएं की गई हैं। क्रिएटर लैब युवाओं को रोजगार दिलाने में महती भूमिका निभाएगी। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी देश को हर क्षेत्र में आत्मनिर्भर बना रहे हैं। रक्षा बजट में 15 प्रतिशत की वृद्धि से देश की सुरक्षा और आत्मनिर्भरता को और बल मिलेगा। उन्होंने कहा कि बजट में महात्मा गांधी जी के ग्राम स्वराज की परिकल्पना का पालन करते हुए खादी, हथकरघा, हस्तशिल्प और एक जिला एक उत्पाद को बढ़ावा देने वाला है। रक्षा बजट में 15 फीसदी की बढ़ोतरी देश की सुरक्षा की प्रधानमंत्री जी की प्रतिबद्धता को रेखांकित करता है। पूर्वोत्तर राज्यों में बौद्ध स्थलों के संरक्षण, बुनियादी ढांचे के विकास और धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने का निर्णय प्रधानमंत्री जी की विरासत के विकास के मंत्र को साकार कर रहा है। कैंसर की 17 जीवनरक्षक दवाओं पर कस्टम ड्यूटी शून्य या न्यूनतम कर गरीबों को संबल देने का कार्य किया गया है। यह बजट महिला सशक्तिकरण को नई दिशा देने वाला है। बजट में किसानों की आय बढ़ाने और कृषि को आधुनिक बनाने पर स्पष्ट फोकस किया गया है। पशुपालन और मत्स्य पालन को मजबूती, पूंजी सब्सिडी से पशु चिकित्सकों की संख्या बढ़ेगी और जलाशयों, अमृत सरोवरों के निर्माण से ग्रामीण रोजगार को प्राथमिकता दी गई है।

    पत्रकार-वार्ता के दौरान पार्टी के प्रदेश महामंत्री श्री राहुल कोठारी, प्रदेश मीडिया प्रभारी श्री आशीष उषा अग्रवाल एवं जिला अध्यक्ष श्री रविन्द्र यति मंचासीन रहे।

  • साईबर तहसील से समय सीमा में होने लगे नामांतरणःकरण सिंह वर्मा

    साईबर तहसील से समय सीमा में होने लगे नामांतरणःकरण सिंह वर्मा

    भोपाल 24 दिसंबर(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)। राजस्व मंत्री श्री करण सिंह वर्मा ने कहा है कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में पिछले दो वर्षों में राजस्व प्रशासन को अधिक पारदर्शी, त्वरित और जनोन्मुखी बनाने की दिशा में ऐतिहासिक कार्य किए गए हैं।राजस्व विभाग द्वारा चलाए गए अभियानों और तकनीकी नवाचारों से नागरिकों को बड़ी राहत मिली है तथा लंबे समय से लंबित मामलों का तेजी से निराकरण संभव हुआ है।राजस्व मंत्री श्री वर्मा बुधवार को कुशाभाऊ ठाकरे अंतर्राष्ट्रीय कन्वेंशन सेंटर में विभाग की दो वर्ष की उपलब्धियों एवं नवाचारों पर पत्रकारों से चर्चा कर रहे थे। इस दौरान प्रमुख सचिव राजस्व श्री विवेक पोरवाल, आयुक्त राजस्व श्रीमती अनुभा श्रीवास्तव सहित अन्य विभागीय अधिकारी उपस्थित थे।


    मंत्री श्री वर्मा ने कहा कि राजस्व विभाग ने प्रकरणों के त्वरित समाधान के लिए वर्ष 2024-25 में ‘’राजस्व महाअभियान” के तीन चरण संचालित किए,जिनमें एक करोड़ से अधिक राजस्व प्रकरणों का निराकरण किया गया।उन्होंने कहा कि प्रकरणों के शीघ्र निराकरण के लिए राजस्व न्यायालयों में न्यायिक एवं गैर-न्यायिक कार्यों के लिए पृथक-पृथक अधिकारियों की नियुक्ति की गई है। मध्यप्रदेश देश का पहला राज्य है 24 जिलों में जिसने राजस्व न्यायालयों के लिए समर्पित अधिकारियों की नियुक्ति कर त्वरित एवं नियमित न्यायिक कार्यवाही सुनिश्चित की है।


    मंत्री श्री वर्मा ने “सायबर तहसील” को विभाग की बड़ी उपलब्धि बताते हुए कहा कि 29 फरवरी 2024 से नामांतरण की प्रक्रिया पूरी तरह पेपरलेस और फेसलेस कर दी गई है। अब 20 दिनों के भीतर नामांतरण पूरा कर आदेश व्हाट्सएप एवं ई-मेल के माध्यम से उपलब्ध कराया जा रहा है। सायबर तहसील के माध्यम से अब तक 6 लाख 26 हजार से अधिक नामांतरण प्रकरणों का निराकरण किया गया है, जिसके लिए इसे प्रधानमंत्री उत्कृष्टता प्रमाण पत्र भी प्राप्त हुआ है। आंशिक खसरा प्रक्रिया को भी ऑनलाइन किया गया है, जिससे प्रतिवर्ष लगभग 8 लाख नागरिक लाभान्वित होंगे तथा विवादित प्रकरणों का आपसी सहमति से त्वरित समाधान संभव होगा।


    मंत्री श्री वर्मा ने कहा कि स्वामित्व योजना के तहत गांवों की आबादी में निवासरत नागरिकों को भू-अधिकार पत्र प्रदान किए गए हैं। अब तक 39 लाख 60 हजार से अधिक लोगों को स्वामित्व अधिकार पत्र वितरित किए जा चुके हैं। इस तरह प्रदेश में योजना का 94 प्रतिशत कार्य पूर्ण हो चुका है।


    मंत्री श्री वर्मा ने कहा कि मध्यप्रदेश देश का पहला राज्य है जहाँ ड्रोन एवं जियो फेंस तकनीक का उपयोग कर त्रुटिरहित फसल गिरदावरी कराई जा रही है। इससे किसानों को वास्तविक नुकसान का लाभ समय पर मिल सकेगा। वर्ष 2025-26 में अब तक बाढ़ एवं अतिवृष्टि से प्रभावित नागरिकों को 2 हजार 68 करोड़ 99 लाख रुपये की सहायता राशि वितरित की जा चुकी है।


    भू-अर्जन प्रक्रिया को पारदर्शी और समयबद्ध बनाने के लिए आरसीएमएस पोर्टल पर एलएएमएस मॉड्यूल विकसित किया गया है।आरसीएमएस के माध्यम से पिछले दो वर्षों में 41.68 लाख प्रकरणों में से 94% से अधिक प्रकरणों का समय सीमा में निराकरण किया गया। राजस्व संग्रहण में भी प्रदेश ने उल्लेखनीय प्रगति की है। वर्ष 2024-25 में 700 करोड़ रुपये के लक्ष्य के विरुद्ध 1048 करोड़ रुपये का संग्रहण किया गया है, जबकि वर्ष 2025-26 में 1000 करोड़ रुपये का संग्रहण संभावित है।


    मंत्री श्री वर्मा ने कहा कि प्रदेश में राजस्व प्रशासन को मजबूत करने के लिए 1974 करोड़ रुपये की लागत से 324 कार्यालय भवन पूर्ण किए जा चुके हैं तथा 114 भवन प्रगतिरत हैं। इसके अतिरिक्त 261 आवासीय भवनों को भी स्वीकृति दी गई है। विभाग को सुदृढ़ करने के लिए 5281 पटवारियों एवं 136 नायब तहसीलदारों की भर्ती की गई है।
    मंत्री श्री वर्मा ने कहा कि भू अभिलेख पोर्टल का नवीन संस्करण 2.0 पूरे प्रदेश में लागू किया गया है, जिससे नागरिक अपनी भूमि का अभिलेख, डिजिटल नक्शा एवं प्रमाणित प्रतिलिपि मोबाइल एप के माध्यम से प्राप्त कर सकते हैं।साथ ही भूमि अभिलेखों के डिजिटाइजेशन का बड़ा अभियान प्रारंभ किया गया है जिसके अंतर्गत 15 करोड़ पुराने अभिलेखों को डिजिटल स्वरूप में परिवर्तित किया जाएगा। अब तक 1.59 करोड़ स्कैनिंग पूर्ण की जा चुकी है
    मंत्री श्री वर्मा ने आगामी तीन वर्षों की कार्ययोजना की जानकारी देते हुए कहा कि विभाग द्वारा विश्वास आधारित डायवर्जन प्रक्रिया लागू करने की योजना है। प्रदेश के नक्शाविहीन ग्रामों का नक्शा तैयार किया जायेगा एवं भू-अर्जन प्रकरणों में संपूर्ण प्रक्रिया को ऑनलाइन किया जायेगा।

  • चुनाव नहीं हुए पर सहकारी आंदोलन सफल,विश्वास सारंग का दावा

    चुनाव नहीं हुए पर सहकारी आंदोलन सफल,विश्वास सारंग का दावा

    भोपाल,24 दिसंबर(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)। सहकारी पैक्स समितियों तक के चुनाव न कराए जाने से सहकारिता आंदोलन में आम किसानों की सहभागिता समाप्त हो गई है। इसके बावजूद राज्य के सहकारिता मंत्री विश्वास सारंग का दावा है कि सहकारी आंदोलन सफल हो रहा है।राजधानी के अपेक्स बैंक सभागार में पहले तो उन्होंने खेलों में पदक जीतने वाले युवाओं की सफलता को अपनी कुशलता बताया बाद में सहकारिता के क्षेत्र में केन्द्रीय सहयोग का हवाला देकर अपनी पीठ थपथपाई।


    सरकार के दो साल पूरे होने पर शाबासी लेने पहुंचे मंत्री से जब पूछा गया कि धारा 11 के मापदंडों के अनुसार बैंक पूंजी विहीन हो गए हैं इस पर सरकार क्या कर रही है तो उन्होंने कहा कि हमने बैंकों को पूंजी मुहैया कराई है । उन्होंने कहा कि संस्थाओं के चुनाव कानूनी तौर पर करा लिये जाते हैं इससे हमें कामकाज चलाने लायक वैधानिक अधिकार मिल जाते हैं। सहकारी समितियों ने किसानों को कर्ज भी मुहैया कराया है और वसूली की बिगड़ी चाल भी सुधारी है। उन्होंने कहा कि भविष्य में हम किसानों को घर घर खाद पहुंचाने की व्यवस्था कर रहे हैं जो देश में अनूठी मिसाल के रूप में गिनी जाएगी।


    कंपनी के तौर पर चलाई जा रही सहकारी योजनाओं के आरोप से असहमति जताते हुए उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की डबल इंजन सरकार की परिकल्पना जहाँ केंद्र और राज्य एक साझा लक्ष्य, साझा गति और साझा परिणाम के साथ काम करते हैं, आज मध्यप्रदेश में ज़मीन पर साकार रूप ले रही है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के सक्षम नेतृत्व में मध्यप्रदेश ने बीते दो वर्षों में सहकारिता, खेल एवं युवा कल्याण के क्षेत्र में ऐतिहासिक उपलब्धियाँ हासिल की हैं।


    मंत्री श्री सारंग ने कहा कि प्रदेश के खिलाड़ी आज राष्ट्रीय ही नहीं बल्कि अंतर्राष्ट्रीय मंचों पर पदक अर्जित कर देश और प्रदेश का नाम रोशन कर रहे हैं। वर्ष 2024 में पेरिस (फ्रांस) में आयोजित ओलम्पिक व पैरा ओलम्पिक 2024 में प्रदेश के खिलाड़ियों ने प्रतिभागिता कर पदक अर्जित किये। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय स्तर पर भी मध्यप्रदेश ने खेलों में निरंतर उत्कृष्ट प्रदर्शन किया है। खेलो इंडिया यूथ गेम्स, तमिलनाडु में भी प्रदेश के खिलाड़ियों ने 29 पदक जीतकर अपनी प्रतिभा का परिचय दिया। इसी प्रकार 38वें नेशनल गेम्स, उत्तराखण्ड में मध्यप्रदेश के खिलाड़ियों ने 67 पदक अर्जित कर राज्यों में तीसरा स्थान प्राप्त किया।


    वर्ष 2024-25 की उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए मंत्री श्री सारंग ने बताया कि प्रदेश के खिलाड़ियों ने अंतर्राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में कुल 57 पदक तथा राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में 391 पदक अर्जित किए। हॉकी एशिया कप 2025, 16वीं एशियन शूटिंग चैंपियनशिप कजाकिस्तान, खेलो इंडिया वाटर स्पोर्ट्स फेस्टिवल श्रीनगर एवं एशियन केनो स्लालम चैंपियनशिप चीन में मध्यप्रदेश के खिलाड़ियों ने शानदार प्रदर्शन कर प्रदेश को शीर्ष राज्यों की श्रेणी में स्थापित किया है।


    मंत्री श्री सारंग ने कहा कि किसानों को बेहतर सेवाएं प्रदान करने हेतु ऑनलाइन केसीसी आवेदन, एकीकृत साख सीमा तथा नकद-वस्तु ऋण की बाध्यता समाप्त करने जैसे सुधार प्रस्तावित हैं। सभी PACS में ई-PACS के माध्यम से ऑनलाइन सेवाएं और SMS सूचना अनिवार्य की जाएगी। उन्होने बताया कि कमजोर जिला सहकारी बैंकों को आर्थिक सहायता देकर 0% ब्याज पर फसल ऋण उपलब्ध कराया जाएगा। डिफॉल्टर किसानों को मुख्यधारा में लाने हेतु एकमुश्त समझौता योजना तथा आर्थिक अनियमितताओं से प्रभावित किसानों को जांच अवधि में राहत देने की व्यवस्था हेतु न्याय योजना प्रस्तावित है।


    मंत्री श्री सारंग ने बताया कि राष्ट्रीय सहकारिता नीति 2025 के अनुरूप राज्य की सहकारिता नीति में आवश्यक संशोधन किए जाएंगे। जनवरी 2026 में IBPS के माध्यम से 2000 से अधिक पदों पर भर्ती एवं सतत प्रशिक्षण की योजना है। उन्होंने कहा कि CPPP मॉडल के विस्तार से सहकारिता में निजी निवेश और नवाचार को बढ़ावा दिया जाएगा। अंतर्राष्ट्रीय सहकारिता वर्ष 2025 अंतर्गत उत्कृष्ट संस्थाओं को पुरस्कृत किया जाएगा तथा जिला सहकारी बैंकों में NEFT/RTGS, QR कोड एवं इंटरनेट बैंकिंग जैसी आधुनिक तकनीकी सुविधाएं लागू की जाएंगी।

  • कर्ज लेकर खरीदा अनाज न बेचा न घोटाला रोक पाया खाद्य विभाग

    कर्ज लेकर खरीदा अनाज न बेचा न घोटाला रोक पाया खाद्य विभाग


    मंत्री गोविंद राजपूत ने माना सरकार पर उधार है खाली गोदामों का किराया


    भोपाल, 24 दिसंबर(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)। खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री गोविंद सिंह राजपूत आज जब सरकार की दो सालों की उपलब्धियां सुनाने पहुंचे तो पत्रकारों ने उन्हें विभागीय अव्यवस्थाओं को लेकर घेर लिया। पत्रकारों ने पूछा कि जिन ट्रकों से खाद्य विभाग के सील लगे अनाज से भरे बोरे पकड़े गए उनके खिलाफ अब तक आपराधिक प्रकरण क्यों नही दर्ज करवाए गए हैं। इस पर मंत्रीजी निरुत्तर हो गए।


    पत्रकारों ने पूछा कि सरकार कर्ज लेकर खरीदा गया अनाज नहीं बेच पा रही है, अपनी नाकामी छुपाने के लिए वह केन्द्र पर खरीदी करने का दबाव बना रही है। ऐसे में सरकार के दो साल कैसे सफल कहे जा सकते हैं। इस पर मंत्री ने कहा कि हम आगामी सिंहस्थ को देखते हुए अनाज का भंडारण कर रहे हैं। सिंहस्थ के दौरान हमें करोड़ों लोगों को भोजन कराना पड़ेगा। अनाज खरीदी के लिए हमें बैंकों से कर्ज लेना पड़ता है। सरकार पर ब्याज चुकाने का बोझ बढ़ता जा रहा है ऐसे में हमें केन्द्र से अनुरोध करना पड़ता है। उन्होंने माना कि किसानों ने बड़ी तादाद में भंडारगृह बना लिए हैं ऐसे में सरकार पर किराए की उधारी बढ़ती जा रही है। हम चाहते हैं कि ये गोदाम खाली हों ताकि सरकार को बेवजह किराया न भुगतना पड़े।


    उन्होंने पहले से रटी रटाई कहानी सुनाते हुए कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में मध्यप्रदेश शासन के खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग ने विगत दो वर्षों में सार्वजनिक वितरण प्रणाली, उपभोक्ता संरक्षण, किसान हित तथा गैस आपूर्ति के क्षेत्र में कई महत्वपूर्ण उपलब्धियाँ अर्जित की हैं। विभाग की ओर से योजनाओं के क्रियान्वयन में पारदर्शिता एवं तकनीक आधारित निगरानी व्यवस्था को प्राथमिकता दी गई है।


    खाद्य मंत्री श्री राजपूत ने बताया कि प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना के अंतर्गत प्रदेश के 5 करोड़ 25 लाख से अधिक हितग्राहियों को लगभग 22 हजार 800 करोड़ रुपये मूल्य का नि:शुल्क खाद्यान्न वितरित किया गया। राशन वितरण प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के उद्देश्य से मुख्यमंत्री अन्न सेवा जागरूकता कार्यक्रम लागू किया गया, जिसके तहत हितग्राहियों को एसएमएस के माध्यम से राशन आगमन एवं वितरण की जानकारी दी जा रही है। इसके अतिरिक्त 26 जनवरी एवं 2 अक्टूबर को ग्राम सभाओं में पात्र हितग्राहियों की सूची का वाचन किया जा रहा है।


    खाद्य मंत्री श्री राजपूत ने बताया कि विभाग द्वारा ई-केवाईसी प्रक्रिया में उल्लेखनीय प्रगति की गई है। प्रदेश में दो वर्ष में लगभग 1 करोड़ 70 लाख से अधिक हितग्राहियों का ई-केवाईसी सत्यापन पूर्ण किया जा चुका है। अब तक 4 करोड़ 97 लाख हितग्राहियों के ई-केवाईसी कराये जा चुके हैं। इस तरह से अब तक लगभग 93 प्रतिशत ई-केवाईसी पूर्ण हो चुके हैं। बायोमेट्रिक के साथ-साथ फेस ऑथेंटिकेशन के माध्यम से भी ई-केवाईसी की सुविधा उपलब्ध कराई गई है। 5 वर्ष से कम आयु के बच्चों, 80 वर्ष से अधिक आयु के वृद्धों एवं दिव्यांगजनों सहित लगभग 15 लाख हितग्राहियों को ई-केवाईसी से छूट प्रदान की गई है। साथ ही 14 लाख नए पात्र हितग्राहियों को जोड़कर पात्रता पर्ची जारी की गई है।


    खाद्य मंत्री श्री राजपूत ने बताया कि वन नेशन–वन राशन कार्ड योजना के अंतर्गत प्रतिमाह औसतन 39 हजार परिवार अन्य राज्यों में तथा लगभग 6 हजार परिवार अन्य राज्यों से मध्यप्रदेश में नि:शुल्क राशन प्राप्त कर रहे हैं। इसके अलावा लगभग 16 लाख परिवार प्रतिमाह अंतर-जिला पोर्टेबिलिटी का लाभ ले रहे हैं। वहीं जनजाति एवं पहुंचविहीन 89 गांवों में “आपका राशन आपके द्वार” योजना के माध्यम से घर-घर राशन पहुंचाया जा रहा है। मुख्यमंत्री अन्नदूत योजना के अंतर्गत वाहनों में जीपीएस प्रणाली स्थापित कर राज्य स्तरीय कंट्रोल कमांड सेंटर से निगरानी की जा रही है। एलपीजी आपूर्ति के क्षेत्र में उज्ज्वला एवं गैर-उज्ज्वला योजनाओं के अंतर्गत प्रदेश की बहनों की 6 करोड़ 17 लाख गैस रिफिल कराई गईं, जिसमें 911 करोड़ रुपये का अनुदान प्रदान किया गया। शहरी क्षेत्रों में घर-घर पाइप के माध्यम से गैस पहुंचाने के लिए शहरी गैस वितरण नेटवर्क का विस्तार किया जा रहा है।


    खाद्य मंत्री श्री राजपूत ने बताया कि वेयरहाउसिंग व्यवस्था को सुदृढ़ करने के लिए वेयरहाउसिंग कॉर्पोरेशन द्वारा नमी मापक, फ्यूमिगेशन एवं निरीक्षण से संबंधित तीन मोबाइल ऐप विकसित किए गए हैं, जिससे अनाज भंडारण की रियल टाइम मॉनिटरिंग सुनिश्चित की जा रही है। किसान हित में विभाग द्वारा समर्थन मूल्य पर गेहूं एवं धान की खरीदी की गई। लगभग 28 लाख किसानों से फसल खरीदी कर 51 हजार करोड़ रुपये का भुगतान किया गया। गेहूं की खरीदी में 175 रुपये प्रति क्विंटल बोनस देकर 2600 रुपये प्रति क्विंटल की दर से भुगतान किया गया।


    खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री गोविंद सिंह राजपूत ने कहा है कि नाप-तौल विभाग द्वारा विगत दो वर्षों में सत्यापन एवं निरीक्षण के माध्यम से 49 करोड़ 14 लाख रुपये का राजस्व अर्जित किया गया है। निरीक्षण के दौरान अनियमितता पाए जाने पर 11 हजार 700 प्रकरण पंजीबद्ध कर लगभग 4 करोड़ 50 लाख रुपये की दंड राशि वसूल की गई। उपभोक्ता विवादों के त्वरित निराकरण के लिए उपभोक्ता आयोगों का कंप्यूटरीकरण किया गया, जिसके परिणामस्वरूप दो वर्षों में 3 लाख 7 हजार से अधिक प्रकरणों का निराकरण किया गया। विभाग द्वारा आगामी अवधि में राशन दुकानों को मुख्यमंत्री पोषण मार्ट के रूप में विकसित करने, सॉफ्टवेयर सिस्टम के एकीकरण, उन्नत तकनीक से राशन वितरण तथा सिंहस्थ 2028 के लिए मेला क्षेत्र में राशन एवं गैस आपूर्ति की विस्तृत व्यवस्था किए जाने की कार्य योजना भी तैयार की गई है।

  • राज्य की खेती अब सोलर ऊर्जा से होगी बोले मंत्री राकेश शुक्ल

    राज्य की खेती अब सोलर ऊर्जा से होगी बोले मंत्री राकेश शुक्ल


    नवीन और नवकरणीय ऊर्जा विभाग की उपब्धियों पर मंत्री राकेश शुक्ला ने प्रकाश डाला


    भोपाल23 दिसंबर(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)। मध्यप्रदेश आज ऊर्जा सरप्लस राज्य बनकर सामने आया है। हमने ताप ऊर्जा, जल ऊर्जा, पन बिजली परियोजनाओं के साथ साथ सोलर बिजली बनाने में भी रिकार्ड सफलता पाई है। हमारा प्रयास है कि जल्दी ही राज्य की खेती की जरूरतें हम सोलर ऊर्जा से पूरी कर सकें। इसके लिए हमने इस साल पचास हजार किसानों को सब्सिडी आधारित सोलर पंप देने का फैसला किया है। लगभग चौदह हजार किसानों ने अपनी राशि भी जमा कर दी है ।जिन्हें सब्सिडी आधारित सोलर पंप और पूरा सैटअप दिया जा रहा है।


    विभागीय मंत्री राकेश शुक्ला के साथ ,प्रदेश के अतिरिक्त मुख्य सचिव ऊर्जा श्री मनु श्रीवास्तव(आईएएस) और मध्य प्रदेश ऊर्जा विकास निगम लिमिटेड (MPUVNL) के प्रबंध संचालक (MD) अमनवीर सिंह बैंस (Amanbir Singh Bains) भी इस अवसर पर उपस्थित थे।


    श्री बैंस ने बताया कि नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय के अंतर्गत नवरत्न सीपीएसयू, सोलर एनर्जी कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (एसईसीआई) ने सीपीएसयू योजना के अंतर्गत धार में 200 मेगावाट की सौर परियोजना तथा राज्य में 1000 मेगावाट क्षमता की बैटरी स्टोरेज परियोजना स्थापित करने के लिए मध्य प्रदेश सरकार के साथ समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए हैं। ये प्रोजेक्ट राज्य की गैर पारंपरिक ऊर्जा जरूरतें पूरी करने में मील का पत्थर साबित होगा।


    उल्लेखनीय है कि समझौता ज्ञापन पर शिवकुमार वी वेपाकोम्मा, निदेशक (विद्युत प्रणाली) एसईसीआई और मनु श्रीवास्तव, आईएएस, अतिरिक्त मुख्य सचिव (एनआरई) ने मध्य प्रदेश के नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री राकेश शुक्ला और आर पी गुप्ता, आईएएस (सेवानिवृत्त) अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक, एसईसीआई की उपस्थिति में हस्ताक्षर किए थे।


    200 मेगावाट की सौर परियोजना 500 मेगावाट के उस समझौते का हिस्सा है जिसे 2023 में एमपी पावर मैनेजमेंट कंपनी लिमिटेड (एमपीपीएमसीएल) के साथ 25 साल की अवधि के लिए निष्पादित किया गया था जिसके तहत एसईसीआई राज्य को बिजली की आपूर्ति करेगी। एसईसीआई ने मध्य प्रदेश राज्य में नवीकरणीय ऊर्जा के विस्तार और विकास के लिए 2500 करोड़ रुपये का चरणबद्ध पूंजीगत व्यय प्रस्तावित किया है।

  • ट्रांसपोर्टरों से वसूला चंदा बांटते तो आलोचना न होतीःराव उदय प्रताप सिंह

    ट्रांसपोर्टरों से वसूला चंदा बांटते तो आलोचना न होतीःराव उदय प्रताप सिंह


    राव उदयप्रताप सिंह ने गिनाई परिवहन विभाग की दो साल की उपलब्धियां


    भोपाल 22 दिसंबर(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)। परिवहन मंत्री राव उदय प्रताप सिंह ने भरी पत्रकार वार्ता में स्वीकार किया कि यदि परिवहन माफिया की अवैध वसूली की राशि हम बांटते रहते तो हमारे विभाग की आलोचना नहीं हो रही होती। हमने परिवहन नाके बंद करके जो जांच चौकियां स्थापित की हैं उनसे टैक्स चोरी का गैरकानूनी माल ढोने वालों में हड़कंप मचा हुआ है। अच्छा कारोबार करने वाले ट्रांसपोर्टरों को परेशान करने वाले अधिकारियों कर्मचारियों के खिलाफ भी कड़ी कार्रवाई की गई है। परिवहन सुधार के कई अन्य कार्यक्रम भी लगातार जारी रहेंगे।


    कुशाभाऊ ठाकरे सभागृह में आयोजित इस पत्रकार वार्ता में प्रदेश की परिवहन व्यवस्था को लेकर कई तीखे सवाल किए गए । इन सवालों से बचने के लिए मंत्रीजी ने शिक्षा विभाग के कार्यकलापों पर अधिक समय दिया और ट्रांसपोर्ट विभाग की बखिया उधेड़े जाने से बचने का पूरा जतन किया। परिवहन विभाग को लेकर मंत्री ने कहा कि जनवरी से आम जनता को सार्वजनिक परिवहन सेवा का लाभ मिलेगा। वाहन और सारथी पोर्टल पर कई सेवाएं उपलब्ध कराई गई हैं। ई-ड्राइविंग लाइसेंस की सुविधा शुरू की गई है और एमपी ऑनलाइन सेंटरों को सुविधा केंद्र के रूप में मान्यता दी गई है। इलेक्ट्रिक वाहनों पर टैक्स पूरी तरह माफ किया गया है और पुराने वाहनों को स्क्रैप कराने पर टैक्स में छूट दी जा रही है। ग्वालियर, इंदौर, भोपाल, जबलपुर, सतना, सिंगरौली, उज्जैन और देवास में ऑटोमेटिक टेस्टिंग स्टेशन स्थापित किए गए हैं।


    मंत्री ने बताया कि 1 जुलाई 2024 से चेकपोस्ट बंद हैं और चलित व्यवस्था के तहत काम हो रहा है। डेढ़ साल में करीब 6 फीसदी कर्मचारियों पर कार्रवाई की गई है। आरटीओ दलालों को लेकर उन्होंने कहा कि सभी सेवाएं ऑनलाइन हैं, जनता को दलालों के चक्कर में नहीं पड़ना चाहिए।

  • विश्व स्तरीय सुविधाओं का लक्ष्य पूरा करेंगे शहरी निकायःकैलाश विजय वर्गीय

    विश्व स्तरीय सुविधाओं का लक्ष्य पूरा करेंगे शहरी निकायःकैलाश विजय वर्गीय

    भोपाल, 18 दिसंबर(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)। नगरीय विकास एवं आवास मंत्री श्री कैलाश विजयवर्गीय ने कहा है कि एक अनुमान के मुताबिक वर्ष 2047 में मध्यप्रदेश की कुल आबादी का लगभग 50 प्रतिशत आबादी शहरी क्षेत्रों में निवास करेगी। इस बात को ध्यान रखते हुए शहरी क्षेत्रों में अधोसंरचना कार्यों की योजना तैयार की जा रही है। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश ने स्वच्छता के क्षेत्र में देश में विशिष्ठ स्थान बनाया है। हमारे विभाग की कोशिश होगी कि प्रदेश के शहरी क्षेत्रों का एयर क्वालिटी इंडेक्स अच्छा हो। इस वजह से शहरी क्षेत्रों में बगीचों के विकास के साथ-साथ नगरवन को भी प्रोत्साहित किया जा रहा है। मंत्री श्री विजयवर्गीय भोपाल में राज्य सरकार के विकास और सेवा के दो वर्ष पूरा होने पर आयोजित पत्रकार वार्ता को संबोधित कर रहे थे।
    मंत्री श्री विजयवर्गीय ने बताया कि प्रदेश के जो शहर नर्मदा नदी के किनारे में आते है, वहां शहरों का दूषित पानी नदीं में न मिलें। इस पर विभाग लगातार काम कर रहा है। मेट्रोपॉलिटन सिटी की चर्चा करते हुए मंत्री श्री विजयवर्गीय ने बताया कि विभाग ने इंदौर-उज्जैन और भोपाल मेट्रोपॉलिटन सिटी के विकास का कार्य शुरू कर दिया है। भोपाल मेट्रोपॉलिटन सिटी में भोपाल, सीहोर, रायसेन, विदिशा, राजगढ़ और नर्मदापुरम जिलों की प्रमुख तहसीलों को शामिल किया है। इंदौर-उज्जैन मेट्रोपॉलिटन सिटी में इंदौर, उज्जैन, देवास, शाजापुर, रतलाम और धार जिलों की प्रमुख तहसीलों को शामिल किया गया है। प्रदेश की 2 मेट्रोपॉलिटन सिटी इस तरह विकसित की जाएंगी। जहां शहरी आबादी को सभी आवश्यक बुनियादी सुविधाएं मिल सकें। मेट्रोपॉलिटन सिटी में निवेश और रोजगार पर भी ध्यान दिया जाएगा।
    मंत्री श्री विजयवर्गीय ने बताया कि विभाग की कोशिश है कि शहरी क्षेत्रों में रहने वाले नागरिकों की अधिक से अधिक सेवाओं का डिजिटलीकरण ऑनलाइन हों। इसको ध्यान में रखते हुए हमने ई-नगरपालिका विकसित की है। प्रदेश के शहरों को ग्रीन सिटी के रूप में विकसित किया जा रहा है। नगरीय सेवाओं में सोलर एनर्जी का अधिक से अधिक उपयोग किया जाएं। इसको सुनिश्चित किया जा रहा है। राज्य सरकार का प्रयास है कि नगरीय निकाय आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर हो। इसके लिये शहरी क्षेत्रों की सम्पत्तियों का जीआई मेपिंग किया जा रहा है।
    प्रधानमंत्री आवास योजना शहरी में एक लाख 60 हजार से अधिक आवासों का निर्माण पूरा। प्रधानमंत्री आवास योजना के क्रियान्वयन में मध्यप्रदेश को बेस्ट परफॉर्मिंग अवार्ड की श्रेणी में दूसरा स्थान।
    उल्लेखनीय बिंदु-
    अमृत 2.0 में 300 परियोजनाओं का कार्य पूर्ण।
    जल गंगा संवर्द्धन अभियान में 3 हजार 323 जल संरचनाओं का, 74 जल संग्रहण संरचनाओं का लोकार्पण।
    स्वच्छ सर्वेक्षण 2024 में 8 शहरों का राष्ट्रीय पुरस्कार। साथ ही इंदौर ने देश के नम्बर वन शहर का सम्मान लगातार 8 साल बनायें रखा।
    कार्बन क्रेडिट से राशि अर्जित करने वाले इंदौर देश का प्रथम शहर
    दीनदयाल रसोई योजना में संचालित 56 केन्द्रों को बढ़कर इन्हें 191 केन्द्र किया गया।
    पीएम स्वनिधि योजना अंतर्गत 9 लाख से अधिक रहणी पटरी वालों को 14 लाख से अधिक ऋण प्रकरण मबजूत। मध्यप्रदेश को नवाचार और सर्वोत्तम अभ्यास की श्रेणी में पहला स्थान,
    आजीविकास मिशन में 3 लाख युवाओं को कौशल प्रशिक्षण दिलाया गया। 1 लाख 70 हजार युवाओं को स्व-रोजगार से जोड़ा गया।
    प्रदेश में 65 हजार स्व सहायता समूह का गठन। 6 लाख से अधिक परिवारों को स्व-सहायता समूह में जोड़ा गया।
    इंदौर में मेट्रो परिचालन शुरू भोपाल में दिसम्बर 2025 में ही शुरू होगा मेट्रो।
    हाउसिंग बोर्ड द्वारा एमपी ऑनलाईन के माध्यम से 532 करोड़ की सम्पत्तियों का विक्रय।
    गीता भवन स्थापना योजना 5 महीनों के लिये स्वीकृत।
    प्रदेश में इंटीग्रटेड टाउनशिप पॉलिसी-2025 मंजूर। प्रदेश में इलेक्ट्रिक व्हीकल पॉलिसी को भी मंजूरी।

  • खनिज नीलामी से एमपी ने कमाए दस हजार करोड़ रुपए

    खनिज नीलामी से एमपी ने कमाए दस हजार करोड़ रुपए

    प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नवाचारों से प्रेरित होकर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के कुशल नेतृत्व में मध्यप्रदेश सरकार माइनिंग में नवाचार कर रही है। प्रदेश में सबसे पहले क्रिटिकल मिनरल के 2 ब्लॉक्स को नीलामी में रखा गया है। सबसे अधिक खनिज ब्लॉक्स की नीलामी कर मध्यप्रदेश देश में पहले स्थान पर आ गया है। प्रदेश की समृद्ध खनिज सम्पदा और नई खनन नीतियों से राज्य की आर्थिक स्थिति मजबूत हो रही है। खनिज संसाधनों के उपयोग से न केवल राजस्व में बढ़ोत्तरी होगी, बल्कि रोजगार के नये अवसर भी पैदा होंगे। प्रदेश में कोयला, चूना पत्थर, डोलोमाइट और बॉक्साइट जैसे खनिजों का विशाल भण्डार है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में प्रदेश खनन के क्षेत्र में अधिक राजस्व प्राप्त कर नई ऊँचाइयाँ छू रहा है।
    प्रदेश में वित्तीय वर्ष 2023-24 के मुकाबले खनिज राजस्व संग्रह में 23 प्रतिशत की वृद्धि हुई, प्रदेश में पहली बार खनिज राजस्व संग्रह 5 अंकों में पहुंच गया। जबकि वित्तीय वर्ष 2023-24 में इस अवधि में 4 हजार 958 करोड़ 98 लाख रुपये प्राप्त हुए थे। जबकि वर्ष 2024-25 में यह प्राप्ति 10 हजार करोड़ रुपये से अधिक प्राप्त किया गया है
    मध्यप्रदेश मुख्य खनिज ब्लॉकों की सर्वाधिक संख्या में नीलामी करने में देश में प्रथम स्थान पर है। भारत सरकार द्वारा वर्तमान में स्ट्रैटेजिक एवं क्रिटिकल मिनरल पर देश की आत्म-निर्भरता बढ़ाने का लक्ष्य रखा गया है, जिससे इन खनिजों की आयात पर निर्भरता कम हो सके। प्रदेश द्वारा इस खनिज समूह के अंतर्गत अभी तक ग्रेफाइट के 8 खनिज ब्लॉक, रॉक-फॉस्फेट खनिज के 6 ब्लॉक सफलतापूर्वक नीलाम किये गये हैं। मुख्य खनिज के 20 ब्लॉकों की नीलामी के लिये विभाग द्वारा 9 अगस्त, 2024 को निविदा आमंत्रण सूचना-पत्र (NIT) जारी की गयी है, जिसकी कार्यवाही प्रचलन में है। इसके अतिरिक्त महत्वपूर्ण खनिज गोल्ड के 4 ब्लॉक, मैग्नीज खनिज के 16 ब्लॉक एवं कॉपर का एक ब्लॉक अभी तक सफलतापूर्वक नीलाम किये गये हैं। भारत सरकार द्वारा जनवरी-2024 में एक्सप्लोरेशन नीति प्रभावशील की गयी। इस नीति के तहत मध्यप्रदेश राज्य द्वारा क्रिटिकल मिनरल के 2 ब्लॉक नीलामी में रखे गये हैं। मध्यप्रदेश केंद्र सरकार की इस नीति का क्रियान्वयन करने वाला पहला राज्य बन गया है। खनिज अन्वेषण के क्षेत्र में भी प्रदेश प्रथम स्थान पर है। प्रदेश में स्ट्रेटेजिक एवं क्रिटिकल मिनरल, मुख्यत: रॉक-फास्फेट, ग्रेफाइट, ग्लूकोनाइट, प्लेटिनम एवं दुर्लभ धातु (आरईई) के लिये कार्य किया जा रहा है। इसके अंतर्गत 11 क्षेत्रों पर अन्वेषण कार्य किया गया।
    प्रदेश में जिला खनिज विभाग के अंतर्गत विभिन्न विकास कार्य, जिसमें पेयजल, चिकित्सा, शिक्षा, महिला एवं बाल कल्याण, स्वच्छता, कौशल विकास और वृद्ध, विकलांग कल्याण के लिये 16 हजार 452 परियोजनाएँ स्वीकृत की गयी हैं, जिनकी लागत 4406 करोड़ रुपये है। इनमें से 7 हजार 583 परियोजना लागत 1810 करोड़ रुपये का कार्य पूर्ण हो गया है।
    प्रदेश में खनिज के अवैध परिवहन रोकने के लिये एआई आधारित 41 ई-चेकगेट स्थापित किए जा रहे हैं। ई-चेकगेट पर वेरीफोकल कैमरा, आरएफआईडी रीडर और ऑटोमेटिक नम्बर प्लेट रीडर की सहायता से खनिज परिवहन में संलग्न वाहन की जाँच की जा सकेगी। परियोजना में पायलेट प्रोजेक्ट के रूप में खनिज परिवहन के लिये महत्वपूर्ण 4 स्थानों पर ई-चेकगेट स्थापित कर कार्य प्रारंभ कर दिया गया है। अवैध परिवहन की निगरानी के लिये राज्य स्तर पर भोपाल में कमाण्ड एवं कंट्रोल सेंटर तथा जिला भोपाल एवं रायसेन में जिला कमाण्ड सेंटर स्थापित किया गया है। इस वर्ष तक सभी 41 ई-चेकगेट की स्थापना किये जाने का लक्ष्य है।
    अवैध खनन की रोकथाम के लिये उपग्रह और ड्रोन आधारित परियोजना प्रारंभ की गयी है। इस परियोजना के माध्यम से 7 हजार खदानों को जियो टैग देकर खदान क्षेत्र का सीमांकन किया गया है। यह परियोजना पूर्ण रूप से लागू होने पर अवैध खनन को चिन्हित कर प्रभावी कार्यवाही हो सकेगी। परियोजना के लागू होने पर स्वीकृत खदान के अंदर 3-डी इमेजिंग तथा वॉल्यूमेट्रिक एनालिसिस कर उत्खनित खनिज की मात्रा का सटीक आँकलन किया जा सकेगा। माइनिंग में नवाचारों से प्रदेश की आर्थिक प्रगति सुनिश्चित होगी, साथ ही इससे मध्यप्रदेश को राष्ट्रीय स्तर पर खनिज उत्पादक राज्य के रूप में नई पहचान मिलेगी।
    मध्यप्रदेश सरकार निजी क्षेत्र को प्रदेश के प्रचुर खनिज संसाधनों के बेहतर उपयोग के लिये प्रोत्साहित कर रही है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव के मार्गदर्शन में हाल ही में भोपाल में आयोजित माइनिंग कॉन्क्लेव में कई बड़ी कम्पनियों ने माइनिंग सेक्टर में निवेश की इच्छा जताई है। कॉन्क्लेव में 20 हजार करोड़ से अधिक के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं। राज्य सरकार ने खनिज क्षेत्र को बढ़ावा देने के लिये कई सुधार किये हैं। इनमें पारदर्शी नीलामी प्रक्रिया, पर्यावरण-अनुकूल खनन और स्थानीय समुदायों को मुनाफे में भागीदारी देने जैसे कदम शामिल हैं।
    प्रदेश के पन्ना जिले में देश का एकमात्र हीरे का भण्डार है। हीरा खदान से प्रतिवर्ष एक लाख कैरेट हीरे का उत्पादन होता है। मलाजखण्ड कॉपर खदान भारत की सबसे बड़ी ताम्बा खदान है। इस खदान से प्रतिदिन 5 से 10 हजार ताम्बा निकाला जाता है। भारत के कुल ताम्बा भण्डार का 70 प्रतिशत ताम्बा मध्यप्रदेश में है। राज्य में स्थित सासन कोयला खदान भी अपने विशाल खनन उपकरणों के लिये प्रसिद्ध है। मध्यप्रदेश देश का चौथा सबसे बड़ा कोयला उत्पादक राज्य है। प्रदेश में लाइम-स्टोन, डायमण्ड और पाइरोफ्लाइट जैसे खनिज संसाधन हैं।
    मध्यप्रदेश के जिलों में खनिज के भण्डार हैं, जिसमें सतना, रीवा और सीधी में लाइम-स्टोन, बॉक्साइट, ग्रेफाइट, गोल्ड और ग्रेनाइट, सिंगरौली में कोयला, गोल्ड और आयरन, शहडोल, अनूपपुर और उमरिया में कोयला, कोल बेड, मिथेन और बॉक्साइट, छतरपुर, सागर और पन्ना में डायमण्ड, रॉक फास्फेट, आयरन, ग्रेनाइट, लाइम, डायस्पोर और पाइरोफ्लाइट, जबलपुर और कटनी में बॉक्साइट, डोलोमाइट, आयरन, लाइम-स्टोन, मैग्नीज, गोल्ड और मार्बल, नीमच और धार में लाइम-स्टोन, बैतूल में कोयला, ग्रेफाइट, ग्रेनाइट, लीड और जिंक, छिंदवाड़ा में कोयला, मैग्नीज और डोलोमाइट, बालाघाट में कॉपर, मैग्नीज, डोलोमाइट, लाइम-स्टोन और बॉक्साइट, मण्डला और डिण्डोरी में डोलोमाइट और बॉक्साइट, ग्वालियर और शिवपुरी में आयरन, फ्लेग-स्टोन और क्वार्ट्ज, झाबुआ और अलीराजपुर में रॉक फस्फेट, डोलोमाइट, लाइम-स्टोन, मैग्नीज और ग्रेफाइट के भण्डार हैं।
    के.के. जोशी (लेखक जनसंपर्क विभाग में उप संचालक है।)

  • अटल सुशासन है इस मेगा कैबिनेट का संदेश

    अटल सुशासन है इस मेगा कैबिनेट का संदेश


    मध्यप्रदेश की जनता ने दिग्विजय सिंह की कांग्रेस सरकार को केवल इसीलिए विदा किया था क्योंकि उसे उम्मीद थी कि भाजपा सत्ता में आकर अटलजी के सुशासन वाला राष्ट्रवाद देगी। बरसों से देश के बच्चे बच्चे ने अटल बिहारी वाजपेयी को सुना था और आज प्रौढ़ हो चली उस पीढ़ी के लिए सुराज एक स्वप्नलोक नजर आता था। भाजपा की नेत्री उमा भारती ने सत्ता में आकर उस सुराज की इबारत भी लिखनी शुरु कर दी थी। इसके बाद जब सत्ता के सटोरियों ने ताश के पत्ते फेंटे तो सुराज का वो स्वप्नलोक कहां गायब हो गया आज तक पता नहीं चल सका। आज तो नई पीढ़ी राकेश शर्मा और सौरभ शर्मा जैसे सत्ता के पुर्जों के भ्रष्टाचार की कहानियां देख सुन रही है।मुख्यमंत्री डाक्टर मोहन यादव भी दौड़ दौड़कर प्रदेश भर में क्लास लगा रहे हैं। कार्यकर्ताओं और नेताओं को संदेश दे रहे हैं कि हमें सुराज की ओर चलना है। हमारे केन्द्रीय नेतृत्व ने प्रदेश में नई पीढ़ी को सत्ता में भेजकर यही कुछ बदलाव करने का संदेश दिया है। शायद इसी वजह से मोहन यादव ने प्रदेश के अनेक स्थानों पर औद्योगिक सम्मेलन किए। जगह जगह जाकर कैबिनेट की बैठक ली और लोगों को सत्ता में भागीदार होने का आमंत्रण भी दिया। इसके बावजूद पाप की पोटलियां सामने आ आकर पूरा माहौल कड़वा बना रहीं हैं। मुख्यमंत्री महोदय ने भोपाल के मिंटो हाल के कंन्वेंशन सेंटर में कैबिनेट बुलाई है। उन्हें लगता है कि शायद सरकार और शासन के बीच बढ़ती चली आ रहीं दूरियां पाटने में वे सफल होंगे । पिछली दो दशकों की ऐसी ही कवायदों के बाद भी राज्य में कुदेवों का कुशासन जारी है। अब तक सुशासन की आबोहबा जमीन पर अपनी खुशबू नहीं फैला पाई है। जिन सत्ताधीशों को हमने कुर्सी सौंपी है वे अब तक किसी आदर्शवाद की झलक प्रस्तुत नहीं कर पाए हैं। मोहन यादव बार बार राजा विक्रमादित्य के सुशासन की दुहाई देते रहते हैं। उन्हें उम्मीद है कि सत्ता में शीर्ष पदों पर शामिल लोग उनका संकेत समझ पाएंगे। उनका ये आकलन बिल्कुल थोथा है ।सुशासन तो उस कुशल घुड़सवार की कला है जो घोड़े की लगाम भी थामता है और एड़ लगाकर उसे रेस की लेन में चाबुक भी फटकारता है। सधे घोड़े अपने सवार का संकेत अच्छी तरह समझते हैं। उन्हें नहीं मालूम होता कि रेस में अव्वल आ जाने पर क्या होगा पर उन्हें इतना जरूर मालूम होता है कि यदि वे ठीक तरह दौड़े तो उनका सवार उसे थपकी भरी शाबासी जरूर देगा। जिस घुड़सवार को अपनी कला पर भरोसा नहीं होता वह सभी निर्णायकों के पास सिफारिश लेकर भटकता रहता है। जिस घुड़सवार को अपनी मेहनत अपनी दूरदर्शिता पर भरोसा होता है वह बगैर किसी की परवाह किए रेस में कूदता है और अपना परचम फहराता है। डाक्टर मोहन यादव की भोपाल में आयोजित मेगा कैबिनेट भी शायद कुछ इसी तरह का इशारा कर रही है।

  • रानी दुर्गावती के राजदरबार में दंडवत हुई मोहन सरकार

    रानी दुर्गावती के राजदरबार में दंडवत हुई मोहन सरकार

    सिग्रामपुर,दमोह5 अक्टूबर(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि विशेष सशस्त्र पुलिस बल (SAF) की 35वीं बटालियन, मण्डला का नामकरण वीरांगना रानी दुर्गावती के नाम पर किया जाएगा। वीरांगना रानी दुर्गावती की जयंती के अवसर पर सिंग्रामपुर में मंत्रि-परिषद की बैठक का हिस्सा बनना सभी सदस्यों का सौभाग्य हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि रानी दुर्गावती का जन्म दुर्गा अष्टमी के दिन ही हुआ था। जैसा उनका नाम था वैसा ही उन्होंने अपने जीवन काल में 23 हजार से अधिक गांवों के साम्राज्य पर कुशलता, पराक्रम और शौर्य से शासन किया। उन्होंने 51 लड़ाइयों में दुश्मनों का वीरता से सामना कर विजय प्राप्त करने के साथ जनता के लिए कल्याणकारी कार्य करते हुए अपने “दुर्गा” नाम को सार्थक किया। दुर्भाग्यवश 52वीं लड़ाई में आसफ खान से युद्ध लड़ते हुए वीरांगना रानी दुर्गावती वीरगति को प्राप्त हुई। रानी दुर्गावती का यह बलिदान प्रदेश में सदैव स्मरण किया जाएगा।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव दमोह जिले के सिंग्रामपुर में मंत्रि-परिषद की बैठक के पूर्व मंत्रीगण को संबोधित कर रहे थे। रानी दुर्गावती के अभूतपूर्व योगदान के सम्मान में मंत्रि-परिषद की बैठक वंदे-मातरम् गान के साथ शुरू हुई। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि वीरांगना रानी दुर्गावती के शासन सूत्र, जन-कल्याणकारी नीतियां और शासन अविस्मरणीय है। बैठक में मुख्यमंत्री डॉ. यादव को संस्कृति, पर्यटन और धार्मिक न्यास एवं धर्मस्व मंत्री श्री धर्मेंद्र सिंह लोधी ने केंद्रीय पर्यटन मंत्रालय द्वारा प्रदेश के प्राणपुर, साबरवानी और लाड़पुरा खास को देश के सर्वश्रेष्ठ पर्यटन ग्राम के लिये प्रदत्त सम्मान का प्रशस्ति-पत्र भेंट किया। अंतर्राष्ट्रीय पर्यटन दिवस के मौके पर प्राणपुर को पारंपरिक चन्देरी क्रॉफ्ट श्रेणी और साबरवानी व लाड़पुरा खास को रिस्पॉन्सिबल टूरिज्म श्रेणी में चुना गया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने वीरांगना रानी दुर्गावती के सिंगौरगढ़ दुर्ग के इतिहास, महत्व, वास्तुकला और अन्य विशेषताओं पर निर्मित ब्रोशर का विमोचन किया। मंत्रि-परिषद की बैठक के दौरान वीरांगना रानी दुर्गावती के जीवन, संघर्ष और कल्याणकारी कार्यों के महत्व को प्रदर्शित करता रानी दुर्गावती स्मारक एवं उद्यान परियोजना पर केन्द्रित वीडियो का भी प्रदर्शन किया गया। स्मारक एवं उद्यान, जबलपुर में मदन महल पहाड़ी के 24 एकड़ भूमि पर 100 करोड़ रूपये की लागत से तैयार किया जाएगा। स्मारक में संग्रहालय, ओपन एयर थिएटर, जल संरक्षण संरचनाएं, फूड जोन, रानी दुर्गावती की कांस्य प्रतिमा आदि निर्मित किए जायेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मध्यप्रदेश पर्यटन विभाग द्वारा किए गए ग्रामीण पर्यटन और पर्यटन के विकास और प्रचार-प्रसार के कार्यों पर प्रसन्नता व्यक्त की।


    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि लोकमाता देवी अहिल्याबाई महिला सशक्तिकरण की प्रतीक थी। लगभग 300 वर्ष पहले महिला सशक्तिकरण के लिए उनके द्वारा अपने शासनकाल में अनेक कार्य कराए गए। इस वर्ष विजयादशमी पर शस्त्र-पूजन कार्यक्रम लोकमाता देवी अहिल्या बाई के नाम पर किया जाएगा। देवी अहिल्याबाई के शासन स्थल महेश्वर में शस्त्र-पूजन कार्यक्रम में वे स्वयं हिस्सा लेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मंत्रि-परिषद के सभी सदस्यों से अपने विधानसभा क्षेत्र और जिले के शस्त्र-पूजन कार्यक्रमों में शामिल होने का आग्रह किया।


    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि सम्पूर्ण प्रदेश में 2 अक्टूबर से 11 अक्टूबर तक ‘शक्ति अभिनंदन अभियान” चलाया जा रहा है। अभियान में जिला, विकासखण्ड एवं ग्राम स्तर पर महिला सशक्तिकरण और जागरूकता पर विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे है। अब 5 अक्टूबर से संवाद कार्यक्रम, मानसिक स्वास्थ्य संवेदी कार्यक्रम, सोशल मीडिया कैंपेन और शक्ति संवाद जैसे कार्यक्रम संचालित किए जायेंगे। संवाद कार्यक्रम के अन्तर्गत बदलाव की कहानियाँ, रोजगार, व्यवसाय एवं उद्यमिता में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी के साथ महिला एवं बुजुर्गों का सम्मान किया जाएगा। बालिकाओं के प्रशिक्षण के लिए सशक्त वाहिनी पंजीयन, सेफ्टी वॉक का आयोजन किया जाएगा। मानसिक स्वास्थ्य संवेदी कार्यक्रम और विकास में महिला भागीदारी पर परिचर्चा का आयोजन किया जाएगा। बालिकाओं द्वारा मार्शल आर्ट का प्रदर्शन, सकारात्मक पुरूष भागीदारी पर चर्चा और महिला सुरक्षा वातावरण निर्माण के लिए जागरूक किया जाएगा। इसके साथ सायबर सिक्योरिटी/सोशल मीडिया सिक्योरिटी पर प्रशिक्षण, ‘मैं निडर हूँ : बालिकाओं का दृष्टिकोण” के लिए सोशल मीडिया कैम्पेन चलाया जाएगा। ”शक्ति संवाद” कार्यक्रम अंतर्गत प्रदेश के समस्त थानों पर महिला सुरक्षा के लिए संवाद किया जाएगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि केन्द्र और राज्य सरकार द्वारा महिला नेतृत्व पर आधारित विकास, महिला सशक्तिकरण, महिला सुरक्षा जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर केन्द्रित विभिन्न गतिविधियों, कार्यक्रमों का निरन्तर क्रियान्वयन किया जा रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मंत्रि-परिषद के सभी सदस्यों और विधायकों से अपने विधानसभा क्षेत्र और जिले के कार्यक्रमों में शामिल होने का आग्रह किया।
    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश में निवेश बढ़ाने के लिए विशेष प्रयास किए जा रहे है। आगामी 16 अक्टूबर को हैदराबाद में रोड-शो किया जाएगा। भोपाल में 17 और 18 अक्टूबर को माइनिंग कॉन्क्लेव और 23 अक्टूबर को रीवा रीजनल इण्डस्ट्री कॉन्क्लेव आयोजित की जाएगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मंत्रि-परिषद के सदस्यों को बताया कि सागर में हुए इण्डस्ट्री कॉन्क्लेव से लगभग 23 हजार 181 करोड़ रूपये के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए, जिसमें हजारों लोगों के लिये रोजगार सृजन संभावित है। इण्डस्ट्री कॉन्क्लेव में 10 राज्यों से आए 3500 से अधिक निवेशकों और प्रतिभागियों ने सहभागिता की। रीजनल इण्डस्ट्री कॉन्क्लेव सागर में 96 इकाइयों के आशय-पत्र जारी किये गये, जिनमें 240 एकड़ भूमि आवंटित की गई।


    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश की बेरोजगारी दर देश के औसत तथा अन्य राज्यों में सबसे कम है। भारत सरकार के सांख्यिकीय एवं कार्यक्रम क्रियान्वयन मंत्रालय के द्वारा वर्ष 2024 में Periodic Labour Force Survey के द्वारा बेरोजगारी से संबंधित आंकडे जारी किए गए हैं। सर्वे के अनुसार पूरे देश की बेरोजगारी दर 10.2% है। मध्यप्रदेश की बेरोजगारी दर पूरे देश में सबसे कम 2.6% है। राज्यों में सबसे अधिक बेरोजगारी दर केरल (29.9%) में है।
    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि सरकार का एक वर्ष पूरा होने जा रहा है। प्रत्येक विभाग के विजन और विगत एक वर्ष में किए गए मुख्य कार्यों की समीक्षा कर विज़न डॉक्यूमेंट तैयार करें। उन्होंने मंत्रि-परिषद के सभी सदस्यों को विज़न डॉक्यूमेंट के निर्माण के लिए विभागों का सुपरविजन करने के लिए निर्देशित किया।
    पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री श्री प्रहलाद पटेल ने कहा कि वीरांगना रानी दुर्गावती की पहली राजधानी सिंग्रामपुर में मंत्रि-परिषद की बैठक उन्हें सच्ची श्रद्धांजलि है। मंत्री श्री पटेल ने रानी दुर्गावती के जीवन संघर्ष और जन-कल्याणकारी कार्यों का उल्लेख कर नमन किया। उन्होंने बैठक में आए मंत्रि-परिषद के सभी सदस्यों का आभार व्यक्त किया। बाद में पत्रकार वार्ता में भी उन्होंने कैबिनेट बैठक में लिए गए फैसलों की जानकारी दी।
    पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री श्री प्रहलाद पटेल, वन एवं पर्यावरण मंत्री श्री रामनिवास रावत, संस्कृति और पर्यटन राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्री लोधी और पशुपालन और डेयरी राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्री लखन पटेल ने मंत्रि-परिषद के सदस्यों का शॉल और पुष्प-गुच्छ से स्वागत किया और रानी दुर्गावती की प्रतिमा स्मृति-चिन्ह के रूप में भेंट की।
    रानी दुर्गावती के सुशासन, कार्यकुशलता और महिलाओं के सशक्तिकरण से प्रेरित कैबिनेट बैठक हॉल का डिज़ाइन तैयार किया गया। रानी दुर्गावती के किले की भव्यता को प्रतिबिंबित करते हुए निर्माण की गई संरचना में किला-नुमा प्रवेश द्वार और रानी दुर्गावती के जीवन की प्रमुख घटनाओं को प्रदर्शित करती पेंटिंग भी लगाई गई थी।
    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मंत्रि-परिषद की ओर से नवागत मुख्य सचिव श्री अनुराग जैन का स्वागत कर शुभकामनाएं दीं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री कार्यालय तथा भारत सरकार के महत्वपूर्ण विभागों में कार्य करने के अनुभव का लाभ मध्यप्रदेश को मिलेगा। बैठक में सेवानिवृत मुख्य सचिव श्रीमती वीरा राणा के प्रति मंत्रि-परिषद ने आभार जताया।
    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि वीरांगना रानी दुर्गावती की 500वीं जयंती का दिन शौर्य और बलिदान के स्मरण, नारी सशक्तिकरण एवं सम्मान का दिन है। रानी दुर्गावती अदम्य साहस और वीरता की प्रतीक थीं। उनके जीवित रहते कभी भी मुगल, पठान, सुल्तान या अन्य कोई भी आक्रांता गोंडवाना की तरफ आँख उठाकर नहीं देख सका। रानी दुर्गावती ने अंतिम श्वांस तक अपने राज्य को आक्रांताओं से सुरक्षित रखा और उसकी सुरक्षा करते हुए हंसते-हंसते प्राणोत्सर्ग कर दिया। मुख्यमंत्री ने कहा कि उनके शौर्य और बलिदान को पुन: स्मरण करने के लिये सिंग्रामपुर में जनजातीय क्षेत्रों में विकास की नई इबारत लिखने के लिये केबिनेट करने का महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया। मुझे बेहद प्रसन्नता है कि वीरांगना रानी दुर्गावती की पहली राजधानी से आज लाड़ली बहना योजना, सामाजिक सुरक्षा पेंशन और प्रधानमंत्री उज्जवला गैस योजना में हितग्राहियों के खाते में सिंगल क्लिक से 1934 करोड़ 71 लाख रुपये की राशि अंतरित की गई है। साथ ही 70 वर्ष से अधिक उम्र के वृद्धजनों के लिए आयुष्मान कार्ड योजना का शुभारंभ और क्षेत्र के विकास के लिये 5 करोड़ 47 लाख रुपये के विकास कार्यों का लोकार्पण/भूमि-पूजन किया गया।
    मुख्यमंत्री डॉ. यादव शनिवार को दमोह जिले के ग्राम सिंग्रामपुर में महिला सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे। सम्मेलन में उप मुख्यमंत्री श्री जगदीश देवड़ा, श्री राजेन्द्र शुक्ल सहित मंत्रि-परिषद के सभी सदस्य मौजूद रहे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में नारी सम्मान सर्वोपरि है। सभी वर्ग की महिलाओं के लिये अनेक हितग्राही और स्व-रोजगार मूलक योजनाएँ प्रभावी रूप से संचालित की जा रही हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 2024-25 में लाड़ली बहना योजना में 18 हजार 984 करोड़ रुपये का प्रावधान रखा गया है। मुझे यह जानकर खुशी हुई कि सिर्फ दमोह जिले में ही ढाई लाख लाड़ली बहनों को योजना का लाभ मिल रहा है। प्रधानमंत्री श्री मोदी ने बहनों को लखपति बनाने की योजना लागू की है। प्रधानमंत्री ने ‘एक देश-एक चुनाव’ की घोषणा की है। अब लोकसभा और विधानसभा चुनाव में भी महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण मिलेगा। इस व्यवस्था से बहनों के महत्व का एहसास होगा। हमारी बहनें सत्ता के साथ सुव्यवस्था और विकास लायेंगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि नारी सशक्तिकरण के लिये आज से नवरात्रि तक विभिन्न गतिविधियाँ संचालित की जायेंगी, जिसमें मॉर्शल ऑर्ट, सायबर टेक्नोलॉजी का प्रशिक्षण भी शामिल है। इन गतिविधियों से नारी को आत्म-निर्भर और जागरूक बनाया जायेगा।
    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि बुंदेलखण्ड क्षेत्र के किसानों के लिये प्रधानमंत्री श्री मोदी ने केन-बेतवा परियोजना की बड़ी सौगात दी है। आने वाले समय में पूरे क्षेत्र के किसानों के खेतों में पानी पहुँचेगा और अच्छी फसल होगी। यह क्षेत्र कृषि उत्पादन में पंजाब और हरियाणा को भी पीछे छोड़ेगा। मुख्यमंत्री ने किसानों से आह्वान किया कि वे अपनी कृषि भूमि किसी भी स्थिति में न बेचें। केन-बेतवा नदी परियोजना से आने वाला समय किसानों के लिये स्वर्णिम होगा। उन्होंने कहा कि किसानों को जीरो प्रतिशत पर फसल ऋण उपलब्ध कराने का निर्णय आज कैबिनेट में लिया गया है। राज्य सरकार किसानों के कल्याण के लिये दृढ़ संकल्पित है।
    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि हमारे गौरवशाली इतिहास से भावी पीढ़ी को परिचित करवाने के लिये भगवान श्रीराम और श्रीकृष्ण के मध्यप्रदेश में जहाँ-जहाँ चरण पड़े हैं, उन स्थानों को तीर्थ-स्थल के रूप में विकसित किया जायेगा। हमारी सरकार ने सभी त्यौहारों को पूरे उत्साह के साथ मनाने का निर्णय लिया है। हाल ही में रक्षाबंधन और श्रीकृष्ण जन्माष्मी पूरे प्रदेश में धूमधाम और हर्षोल्लास के साथ मनाई गई। अब आने वाला दशहरा पर्व भी हम उत्साह एवं उमंग के साथ मनायेंगे। राज्य सरकार ने निर्णय लिया है कि दशहरा पर्व पर सभी जिलों में शस्त्र-पूजन किया जायेगा। इसमें मैं स्वयं और पूरे मंत्री-मण्डल के साथ सांसद और विधायक अपने-अपने क्षेत्र में शस्त्र-पूजन करेंगे।
    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि दमोह में पर्यटन के क्षेत्र में अपार संभावनाएं हैं। पर्यटकों को आकर्षित करने के लिए दमोह को पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित किया जायेगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने दमोह में रानी दमयंती संग्रहालय के उन्नयन, वीरांगना रानी दुर्गावती की प्राचीन राजधानी सिंग्रामपुर में स्वास्थ्य केंद्र, शिक्षा के क्षेत्र में विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध करवाने दूसरे चरण में सीएम राइज स्कूल बनाने, हाई-मास्क लाइट और स्ट्रीट लाइट व्यवस्था, रानी दुर्गावती की याद में मंगल भवन का निर्माण करने की घोषणा की। उन्होंने कहा कि क्षेत्र में सिंचाई एवं पेयजल व्यवस्था को सुचारू बनाए रखने और जल-संरक्षण के लिए स्टॉप डेम और चेक डैम बनाए जाएंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि सागर में आयोजित रीजनल इण्डस्ट्री कॉन्क्लेव में 23 हजार करोड़ के औद्योगिक निवेश पर सहमति हुई है। इससे बुंदेलखण्ड में औद्योगिक निवेश से विकास के साथ बड़ी संख्या में रोजगार के अवसर उपलब्ध होंगे। मुख्यमंत्री ने बताया कि आगामी 16 अक्टूबर को हैदराबाद में निवेश के लिये रोड-शो और 23 अक्टूबर को रीवा में रीजनल इंडस्ट्री कॉन्क्लेव होगी।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने ग्राम सिंग्रामपुर में आयोजित महिला सम्मेलन में शामिल हुई बहनों का स्वागत पुष्प-वर्षा के साथ किया। उन्होंने प्रतीक स्वरूप हितग्राही महिलाओं को हित-लाभ भी वितरित किये। मुख्यमंत्री डॉ. यादव को जिले के प्रभारी मंत्री श्री धर्मेन्द्र लोधी सहित जन-प्रतिनिधियों ने प्रतीक स्वरूप ‘हल’ और रानी दुर्गावती की प्रतिमा भेंट की। प्रभारी मंत्री श्री लोधी, पशुपालन मंत्री श्री लखन पटेल और सांसद श्री राहुल लोधी ने भी संबोधित किया। सम्मेलन का शुभारंभ दीप प्रज्जवलन और कन्या-पूजन के साथ किया गया। इस अवसर पर प्रदेश के मंत्रीगण, जन-प्रतिनिधि, नागरिक और बड़ी संख्या में लाड़ली बहनें उपस्थित रहीं।
    झलकियां—-
    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कार्यक्रम स्थल पर पौध-रोपण कर प्रकृति संरक्षण का संदेश दिया।
    मुख्यमंत्री डॉ. यादव का स्वागत रानी दुर्गावती की प्रतिमा, राधा-कृष्ण की मूर्ति एवं हल भेंट कर हुआ।
    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने दमोह ज़िले की ऐतिहासिक एवं गौरवशाली संस्कृति को समाहित किये हुए दमोह दर्शन पुस्तक का विमोचन, संकट के साथी मोबाइल एप्प लांच किया।
    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने समर्पित भाव से समाज सेवा का कार्य करने वाले मुलाम बाबा का सम्मान किया।
    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने दशहरे एवं दीपावली पर्व की अग्रिम शुभकामनाएँ जिलेवासियों को दी।
    कैबिनेट बैठक के बाद मंत्रि-परिषद के सभी सदस्य टेम्पो ट्रैवलर से सभा स्थल तक पहुँचे।
    सुप्रसिद्ध गायिका मैथिली ठाकुर ने अपनी सुमधुर आवाज़ में माँ दुर्गा के भजन प्रस्तुत किये।
    काँसा, पीतल हस्तशिल्प को जीवित रखने के लिए उत्कृष्ट कार्य करने वाले शिल्पकारों को शॉल श्रीफल से सम्मानित किया गया।
    ज़िले की 24 ग्राम पंचायतें टीबी मुक्त होने पर जनपद पंचायतों के अध्यक्षों का सम्मान राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की प्रतिमा भेंट कर किया गया।
    कार्यक्रम का आभार स्व सहायता समूह की महिला सदस्य तुलसा प्रजापति के द्वारा किया गया।

  • डॉ.मोहन यादव सरकार नहीं तो कौन चला रहा है मध्यप्रदेश

    डॉ.मोहन यादव सरकार नहीं तो कौन चला रहा है मध्यप्रदेश


    भोपाल,23 सितंबर(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)। पचास लाख युवाओं को नौकरी दिलाने का अभियान चला रहे सैडमैप की कार्यकारी निदेशक अनुराधा सिंघई(शर्मा) को इकतरफा आदेश से सस्पेंड करने वाला मामला गहराता जा रहा है। ईडी ने इस अन्याय की शिकायत मध्यप्रदेश हाईकोर्ट से की तो मध्यप्रदेश सरकार की ओर से महाधिवक्ता समेत आठ कानूनविद हाईकोर्ट में कैविएट का जवाब लेकर पहुंच गए। हाईकोर्ट ने लताड़ लगाई तो जजों को मैनेज करने के लिए सैडमैप से ही नौ लाख रुपए निकालकर मुकदमेबाजी पर खर्च कर दिए गए। मजेदार बात तो ये है कि इस अवैधानिक कार्रवाई के बारे में सूक्ष्म एवं लघु उद्योग मंत्री को भी विश्वास में नहीं लिया गया। मुख्यमंत्री डाक्टर मोहन यादव के सुशासन की जवाबदारी संभालने वालों को इस मामले में कुछ पता नहीं। सचिव नवनीत कोठारी कहते हैं मैं बता नहीं सकता। जब किसी को कुछ पता नहीं तो आखिर प्रदेश सरकार को चला कौन रहा है।


    जब सैडमैप घाटे की घाटी पर लुढ़क रहा था कर्मचारियों को दस दस महीने क तनख्वाह नहीं मिल रही थी सरकार इसे बंद करने का विचार कर रही थी तब एक कंपनी सेक्रेटरी अनुराधा सिंघई ने अपनी हिकमतअमली से संस्थान को अपने पैरों पर खड़ा कर दिया। आते ही उन्होंने जब संस्थान में जोंक की तरह लिपटे नौकरी माफिया को निकाल बाहर किया तो इन लोगों नेऊटपटांग कहानियां गढ़कर ईडी के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज करवा दी। अदालत और सरकार को गुमराह करके की गई इस शिकायत की पोल हाईकोर्ट में खुल गई और श्रीमती सिंघई को बेदाग बरी कर दिया गया। उसी नौकरी माफिया ने इस बार सरकार के चोर दरवाजे से घुसकर संस्थान के निकाले गए भ्रष्ट अफसरों को दुबारा नौकरी में लाने की मुहिम चला दी है। इकतरफा सस्पेंशन के आदेश के माध्यम से सूक्ष्म एवं लघु उद्योग विभाग के एक जूनियर अधिकारी को यहां बिठा दिया गया उसने न तो विधिवत चार्ज लिया और न ही श्रीमती सिंघई के सस्पेंशन की प्रक्रिया पूरी की गई।


    प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के मेक इन इंडिया अभियान को सफल बनाने के लिए धड़ाधड़ नौकरियां जनरेट कर रहीं श्रीमती अनुराधा सिंघई को ये कहकर सस्पेंड किया गया कि वे आला अधिकारियों की बात नहीं मानती हैं। जबकि यही माईबाप संस्थान को कभी ठीक से नहीं चला सके । पिछले तीस सालों में संस्थान ने कोई करिश्मा नहीं किया। यहां पदस्थ ईडी और अन्य अधिकारी भ्रष्टाचार में लिप्त रहे। लोकायुक्त और ईओडब्ल्यू जैसे संस्थानों को छापे मारकर जांच करनी पड़ी। जब प्रदेश की एक हुनरमंद कंपनी सेक्रेटरी ने राज्य की पूंजी बनाने का पारदर्शी अभियान शुरु किया तो नौकरी माफिया ने तरह तरह के षड़यंत्र रचकर युवाओं की राह अवरुद्ध करने की मुहिम छेड़ दी है।


    हाईकोर्ट के पीठासीन जजों ने याचिका के निपटारे के लिए सरकार से जो सवाल जवाब किए उससे महाधिवक्ता समेत तमाम कानूनविद हकला गए। उन्होंने कई तरह के तर्क जुटाकर अदालत में रखे हैं इसके बावजूद वे किसी न्यायाधीश का सामना नहीं कर पा रहे हैं। नतीजतन रोटेशन के आधार पर किसी ऐसे जज का इंतजार किया जा रहा है जिसके माध्यम से शासन की काली करतूतों पर पर्दा डाला जा सके।


    सवाल तो ये है कि आखिर क्या वजह है कि राज्य सरकार स्वयं युवाओं को रोजगार दिलाने के अभियान में टांग फंसा रही है। सरकार में बैठे वो कौन लोग है जो राज्य की उत्पादकता बढ़ाने के अभियान में रोड़े अटका रहे हैं। यदि सैडमैप की ईडी कोई गलती कर रहीं थीं या कोई भ्रष्टाचार कर रहीं थीं तो राज्य मंत्रालय में बैठे आईएएस अफसरों में से ही कई अधिकारी उपलब्ध हैं जिनसे जांच करवाकर ईडी की गलतियां उजागर की जा सकतीं थीं। जिस नौकरी माफिया ने लोकायुक्त में शिकायत की उसी की जांच करवाकर ईडी के विरुद्ध कार्रवाई की जा सकती थी। ये न करते हुए शासन के विधि एवं न्याय विभाग ने मुकदमेबाजी पर मोटी फीस खर्च करने का फैसला ले लिया। सूत्र बताते हैं कि अपनी आत्मनिर्भरता की राह खोज रहे सैडमैप के ही फंड से नौ लाख रुपए वकीलों की फीस निकाली गई है।


    इस षड़यंत्र की भी पोल खुल गई है। कथित तौर पर शासन में सक्रिय जिस मंच के माध्यम से ये अभियान चलाया जा रहा है वह नौकरी माफिया का अड्डा बन गया है। सवा तीन लाख करोड़ रुपयों का बजट खर्च करने वाली मोहन यादव की भाजपा को पार्टी फंड के लिए कोई चंदे की जरूरत तो नहीं जो वह दिन को रात करने के लिए वकीलों और जजों की नाव पर डोल रही है।


    गौरतलब है कि प्रदेश के युवाओं में नौकरी की आकांक्षा होते हुए भी सरकार उन्हें रोजगार मुहैया नहीं करा पा रही है। लगभग अस्सी हजार करोड़ रुपयों के बजट से दस लाख अनुत्पादक सरकारी अमले को पाला पोसा जा रहा है। इसके विपरीत जब सरकार का ही एक संस्थान सरकारी के साथ कार्पोरेट,कोआपरेटिव, सेक्टर और उद्यमिता को बढ़ावा देकर रोजगार संवर्धन का पथ प्रशस्त कर रहा हो तो आखिर वो कौन है जो सरकार के इस अभियान में पलीता लगा रहा है। डाक्टर मोहन यादव की सरकार के नुमाईंदों को इसकी पड़ताल करनी होगी ताकि युवाओं को न्याय मिल सके और मोदी सरकार के राष्ट्रीय अनुष्ठान की आहूतियां बेरोकटोक जारी रह सकें।

    भारतीय जनता पार्टी स्वयं को विश्व का सबसे बड़ा राजनीतिक संगठन होने का दावा करती है। कहा जाता है कि उसके नेतागण देश को सबसे तेज बढ़ती इकानामी बनाना चाहते हैं। ऐसे में जब कोई संस्थान उसके ही वोटरों को रोजगार दिलाने का बीड़ा उठाए हुए है तब उसे अस्थिर करने से आखिर किसे लाभ होने वाला है। ये षड़यंत्र भी तब चल रहा है जब सूक्ष्म एवं लघु उद्योग मंत्री चेतन काश्यप स्वयं उद्यमिता को बढ़ावा देने की मुहिम चलाए हुए हैं। वे खुद उद्योगपति हैं और सरकार से कोई वेतन भत्ते नहीं लेते हैं। भाजपा को सोचना होगा कि वह वित्तीय संरचनाओं में देश को आगे ले जाने वाले युवाओं को भर्ती करना चाहते हैं या फिर भेड़िया धसान युवाओं के सहारे शेखचिल्ली ख्वाब देखते रहना चाहेंगे।भारत माता की आराधना सुपुत्रों से होती है माफियागिरी से तो केवल पप्पू पैदा होते हैं।

  • एमपी की पहचान बाघ को बचाएं बोले डॉ.मोहन यादव

    एमपी की पहचान बाघ को बचाएं बोले डॉ.मोहन यादव

    भोपाल,28 जुलाई(प्रेस इनफॉर्मेशन सेंटर).मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि यह हमारा सौभाग्य है कि मध्यप्रदेश सर्वाधिक बाघ वाला प्रदेश है। प्रदेश में बाघों की आबादी बढ़कर 785 पहुँच गई है। यह प्रदेश के लिये गर्व की बात है। उन्होंने अंतर्राष्ट्रीय बाघ दिवस पर प्रदेशवासियों को बधाई और शुभकामनाएँ दी हैं।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा है कि वन्य प्राणियों की सुरक्षा का कार्य अत्यंत मेहनत और परिश्रम का है। समुदाय के सहयोग के बिना वन्य प्राणियों की सुरक्षा संभव नहीं है। वन विभाग और वन्य प्राणियों की सुरक्षा में लगे सभी लोग बधाई के पात्र हैं, जिनके कारण मध्यप्रदेश एक बार फिर टाइगर स्टेट बन गया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने अंतर्राष्ट्रीय बाघ दिवस पर जंगलों में बाघों के भविष्य को सुरक्षित करने और प्राकृतिक संतुलन बनाए रखने के लिए एकजुट होकर कार्य करने का संकल्प लेने का आहवान किया है।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि बाघों के संरक्षण के लिये संवेदनशील प्रयासों की आवश्यकता होती है जो वन विभाग के सहयोग से संभव हुई है। हमारे प्रदेश के राष्ट्रीय उद्यानों में बेहतर प्रबंधन से जहाँ एक ओर वन्य प्राणियों को संरक्षण मिलता है, वहीं बाघों के प्रबंधन में लगातार सुधार भी हुए हैं।

    वन्य प्राणियों के प्रति संवेदनशीलता

    वन्य प्राणियों के प्रति संवेदनशीलता का हाल ही में सीहोर जिले में एक उदाहरण सामने आया था। सीहोर जिले के बुदनी के मिडघाट रेलवे ट्रेक पर बाघिन के तीन शावक ट्रेन की चपेट में आ गये थे, जिसमें दो गंभीर रूप से घायल शावकों को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के निर्देश पर जिला प्रशासन और वन्य प्राणी चिकित्सकों की टीम द्वारा एक डिब्बे की विशेष ट्रेन से उपचार के लिये भोपाल लाया गया था।

  • अनुराधा सिंघई की नियुक्ति को हाईकोर्ट ने सही बताया

    अनुराधा सिंघई की नियुक्ति को हाईकोर्ट ने सही बताया

    पुलिस में दर्ज प्राथमिकी खारिज, शिकायत कर्ताओं को लगाई फटकार

    भोपाल। ईडी की नियुक्ति को चुनौती देने वाली याचिका क्रमांक 29833/2023 पर मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय ने अपना महत्वपूर्ण फैसला सुना दिया है। न्यायालय ने न केवल सेडमैप की कार्यकारी संचालक श्रीमती अनुराधा सिंघई की नियुक्ति को सही माना है, बल्कि उनके विरूद्ध लगाए गए सभी आरोपों को भी झूठा बताया है। कार्यकारी संचालक श्रीमती अनुराधा सिंधई की नियुक्ति उद्यमिता विकास केंद्र मध्यप्रदेश (सेडमैप) में 27 जुलाई 2021 को की गई थी। उनके कार्यभार संभालने से पहले ही नियुक्ति प्रक्रिया और उनकी योग्यता पर सवाल उठाए जाने लगे थे। अब कोर्ट का बहुप्रतीक्षित निर्णय आने के बाद यह साबित हो गया कि सभी आरोप झूठे और निराधार थे, जिससे विरोधियों को कोर्ट में पराजय का सामना करना पड़ा। न्यायालय के निर्णय के सम्मान में सेडमैप में खुशी मनाई गई। निर्णय आते ही ईडी श्रीमती अनुराधा सिंघई को सभी ओर से बधाइयां मिलना शुरू हो गईं।


    बता दें कि सेडमैप की कार्यकारी संचालक श्रीमती अनुराधा सिंघई की नियुक्ति के खिलाफ न केवल पुलिस थाना में झूठी और फर्जी शिकायत दर्ज कराई गई थी, बल्कि उन्हें परेशान करने के लिए न्यायालय में भी याचिका दायर की गई थी कि वह ईडी पद के लिए योग्य नहीं हैं और इस पद पर उनकी नियुक्ति में अनियमितताएं हुई हैं, लेकिन हाईकोर्ट का फैसला आने के बाद अब सब कुछ स्पष्ट हो गया है, साथ ही विरोधियों के झूठ का भी पर्दाफाश हो गया है।


    दरअसल, भ्रष्टाचार के विरूद्ध ‘‘जीरो टॉलरेंस’’ की नीति पर अडिग कार्यकारी संचालक श्रीमती अनुराधा सिंघई को पद से हटाने के लिए पिछले तीन वर्षाें से कतिपय तत्वों द्वारा हर तरह के हथकंडे अपनाए जा रहे थे। भ्रष्टाचार के मंसूबे पूरे न होते देख कुछ लोगों ने कार्यकारी संचालक की नियुक्ति को ही चुनौती दे डाली। बिना जांच पड़ताल किए एक के बाद एक प्रकरण दर्ज होने के बाद भी कार्यकारी संचालक श्रीमती अनुराधा सिंघई ने सबका डटकर मुकाबला किया, और जैसे-जैसे प्रकरण आगे बढ़ता गया, सभी को वास्तविकता का आभास होने लगा। ईडी के पक्ष में धीरे-धीरे लोग सामने आने लगे। कार्यकारी संचालक ने नियुक्ति सम्बंधी जो तथ्य प्रस्तुत किए, उनके सामने, विरोध में मुखर लोगों को हार मानने, के लिए विवश होना पड़ा।
    हालांकि इस मामले की बहस पिछले माह ही पूरी हो गई थी, परंतु कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रख लिया था। फैसला सुनने के बाद जहां सेडमैप के कर्मचारियों के चेहरे खिल उठे वहीं उद्यमिता भवन में खुशियां मनाई गईं। कार्यकारी संचालक ने कहा कि अदालत ने किसी भी धारा में उन्हें दोषी नहीं पाया। उन्हें न्याय प्रणाली पर पूरा भरोसा था। नियुक्ति सम्बंधी मामले में बीते तीन वर्षों से घिरीं कार्यकारी संचालक श्रीमती अनुराधा सिंधई ने गर्व से न्यायालय के फैसले का सम्मान किया। कर्मचारियों के बीच जीत की घोषणा करते ही उद्यमिता भवन में हर्ष की लहर दौड़ गई। उल्लेखनीय है कि इससे पूर्व संस्था के एक भ्रष्ट समूह ने षड़यंत्रपूर्वक ईडी को पद से हटाने के इरादे से पुलिस थाने में भी एफ.आई.आर. दर्ज कराई थी, जिसमें गहन जांच-पड़ताल के बाद यह पाया गया कि ईडी सही हैं और भोपाल जिला और सत्र न्यायालय ने गहन जांच और विचार-विमर्श के बाद, कार्यकारी संचालक के खिलाफ लगाए गए सभी आरोपों को झूठा करार दिया व एफ.आई.आर. खारिज कर दी गई।
    बताना चाहेंगे कि इससे पूर्व में हो चुकी विभागीय जांच में भी विभागीय अधिकारियों द्वारा श्रीमती अनुराधा सिंघई की नियुक्ति को सही ठहराया गया। अब हाईकोर्ट के निर्णय उपरांत उस पर मोहर लग गई है।
    हालांकि तीन साल तक कार्यकारी संचालक को कई आरोपों का सामना करना पड़ा, जिससे उनकी कार्यप्रणाली, उनकी उपलब्धियां और वित्तीय स्थिति के लिए उनकी प्रतिष्ठा पर आंच आने का खतरा मंडराने लगा था। कार्यकारी संचालक श्रीमती अनुराधा सिंघई ने फैसले के बाद सभी के प्रति आभार व्यक्त किया और राहत व्यक्त की।

    उन्होंने कहा कि न्यायालय का निर्णय एक कानूनी जीत से कहीं अधिक है। यह पारदर्शिता, नैतिक आचरण और भ्रष्टाचार के विरूद्ध छेड़ी गई मुहिम के प्रति अटूट आस्था का प्रतीक है। कानूनी विशेषज्ञों की एक प्रतिष्ठित टीम द्वारा हर प्रकार से मुकाबला किया गया और पूरी लगन से बहस की गई। एक अनुचित जांच का सामना करते हुए ईडी की प्रतिष्ठा पर गहरा असर पड़ा, परंतु चुनौतियों के बावजूद, उन्होंने अपनी बेगुनाही बरकरार रखी और कानूनी कार्यवाही में लगातार सहयोग किया।


    आरोपों के झूठा साबित होने पर अपनी प्रतिक्रिया में कार्यकारी संचालक श्रीमती अनुराधा सिंघई ने कहा कि आज उन्हें फिर से विश्वास हो गया कि ईश्वर के घर में देर है, अंधेर नहीं। उन्होंने कहा कि वे शुरू से स्वयं को निर्दाेष बता रहीं थीं। लेकिन किसी ने उनकी बात नहीं सुनी। आखिर सच की जीत हुई। न्यायालय का निर्णय आने के पश्चात कार्यकारी संचालक श्रीमती अनुराधा सिंघई ने अपने अधिवक्ताओं, परिवार, मित्रों, और प्रशंसकों के समर्थन के लिए, सभी की शुभकामनाओं के लिए उन्हें धन्यवाद दिया, जो इस कठिन समय के दौरान उनके समर्थन में अटूट रहे तथा जिनकी वजह से उन्हें साहस और संबल मिला और वे कठिनाइयों से जूझ सकीं, जिन्होंने पूरी प्रक्रिया में मार्गदर्शन प्रदान किया। उन सभी के प्रति उन्होंने धन्यवाद ज्ञापित किया।
    अनुराधा को ऐसे किया प्रताड़ित…!


    o संस्था में बाहरी एजेंसियों से मिला हुआ, कुछ कर्मचारियों का एक ऐसा अंदरूनी समूह (सिंडिकेट) था, जो वित्तीय अनियमितता में लिप्त था और संस्था के हितों से ऊपर अपने हितों को रखता था।
    o इस षडयंत्रकारी समूह ने ही कार्यकारी संचालक के कार्यभार संभालने से पूर्व ही दो प्रकरण दर्ज करा रखे थे, जिन्हें बाद में वापस ले लिया गया।
    o उसके बाद शुरू हुआ अनगिनत आर.टी.आई. (सूचना का अधिकार) लगाने और सी.एम. हेल्पलाइन में झूठी शिकायतों का सिलसिला
    o दुर्भावनापूर्ण इरादे और बुरी नियत से भद्दे, अशोभनीय पत्र लिखे गए
    o छवि धूमिल करने के इरादे से कई तरह की अफवाहें फैलाई गईं, कर्मचारियों को उनके विरूद्ध कार्य करने के लिए बरगलाया गया।
    o योग्यता और नियुक्ति को लेकर जनहित याचिका (पी.आई.एल.) क्रमांक 11889/2022 लगाई गई, जिसे माननीय उच्च न्यायालय ने दिनांक 23 मई 2022 को खारिज कर दिया और नियुक्ति को सही ठहराया।
    o कूटरचित, मिथ्या और भ्रामक दस्तावेज तैयार कर षडयंत्रपूर्वक आपराधिक प्रकरण दर्ज कराया गया, जो पुलिस जांच में झूठे पाए गए और न्यायालय ने भी पुष्टि करते हुए उन्हें खारिज कर दिया।
    o षडयंत्रकारी यहीं नहीं रूके, छवि धूमिल करने के लिए कतिपय तत्वों द्वारा गुमनाम, फर्जी और झूठी शिकायतें, अलग-अलग नामों से विभिन्न फोरम पर की जाती रहीं।
    o संस्था में कार्यरत कर्मचारियों के अतिरिक्त नवनियुक्त कर्मचारियों को ईडी के खिलाफ़ भड़काकर कार्य बाधित किया गया।
    o कोर्ट में अपील खारिज हो जाने से हताश लोगों ने मनगढ़ंता तरीके से मिथ्या, भ्रामक और काल्पनिक चैट बनाकर वायरल किया और चरित्र हनन का प्रयास किया। आपको बता दें कि क्राइम ब्रांच द्वारा जांच में साबित हो गया कि मनगढ़ंत और झूठी चैट बनाने के पीछे एक निष्कासित एजेंसी रतन एम्पोरियम का प्रबंधक रमनवीर अरोरा था। उसके विरूद्ध कोर्ट में चालान भी पेश हो गया है।
    o अपने मंसूबों में कामयाबी मिलते न देख और कोर्ट में अपील खारिज होने से हताश भ्रष्ट समूह की शह पर कई दफा ईडी की रैकी और पीछा करते हुए लोगों से भी जान का खतरा पाया गया, जिसकी शिकायत पुलिस कमिश्नर कार्यालय में की गई।
    o उक्त समूह द्वारा दहशत फैलाने का मकसद ईडी को मरवाने की कोशिश भी हो सकता है।
    o मीडिया को भी गुमराह करने की कोशिशें की गईं, झूठी, भ्रामक और मनगढ़ंता जानकारी देकर ईडी की छवि धूमिल करने और चरित्र हनन की साजिशें की गईं।


    § * योग्यता पर प्रश्नचिन्ह कैसे…?*
    o एक स्वशासी संस्था जो वर्ष 2021 में बंद की कगार पर थी और निरंतर कई वर्षों से घाटे में जा रही थी, उसे अपनी कार्यकुशलता से सफलतापूर्वक संचालित कर दिखाया। उन्होंने आर्थिक संकट की स्थिति में ईडी का कार्यभार संभालते हुए मात्र चार माह में 14 माह का (बीते 10 माह सहित) वेतन देकर संस्था को घाटे से उबार दिया।
    o ईडी के कार्यभार से पूर्व संस्था की हालत यह थी कि कर्मचारियों को 10 माह से वेतन नहीं मिल पा रहा था, जो कि उनके ज्वाइन करने के चार माह के भीतर ही 14 माह का वेतन प्रदान कर दिया गया और तब से अब तक कर्मचारियों को नियमित वेतन प्राप्त हो रहा है।
    o संस्था के क्षेत्रीय समन्वयकों की वित्तीय अनियमितता और दुराचार के कारण संविदा कर्मचारी और जिला समन्वयक काफी प्रताड़ित हो रहे थे, उनकी मुश्किलों को क्षेत्रीय समन्वयक का पद समाप्त करते हुए, दूर किया गया।
    o संस्था अपने अस्तित्व से लड़ रही थी और बेहद खराब छवि से गुजर रही थी, तब उन्होंने छवि निखारने के लिए सभी आवश्यक कदम उठाए और संस्था के प्रति विश्वास का वातावरण निर्मित करते हुए पहचान दिलाने का कार्य किया।
    o संस्था में गुणवत्ता पर ध्यान दिया गया। मैनपावर प्रभाग में चल रही विसंगतियों को दूर करते हुए सेडमैप को बतौर मॉनीटरिंग एजेंसी और फेसिलिटेटर के रूप में उभारा, जिसके परिणामस्वरूप मध्यप्रदेश भंडार क्रय नियम के अन्तर्गत प्रशिक्षण एवं आउटसोर्स सेवाओं के लिए संस्था को नामांकित किया गया।
    o संस्था के लक्ष्यों की प्रतिपूर्ति के लिए एक ब्लूपिं्रट तैयार किया गया, जिसके माध्यम से मध्यप्रदेश मंे कोई बेरोजगार न रहे, इस हेतु सभी को रोजगार-स्वरोजगार और आजीविका से जोड़ने का बीड़ा उठाया गया।
    o और भी कई ऐसे प्रेरक कार्य हैं जो शासन की मंशा के अनुरूप किये जा रहे हैं और उनके सुखद परिणाम भी आ रहे हैं।
    § क्या इसे कहेंगे अयोग्य होना?
    o जो कार्यभार संभालने के उपरांत महज 4-5 माह में ही संस्था को घाटे से उबार देता है।
    o जो गुणवत्ता पर ध्यान देते हुए संस्था को उत्तरोत्तर प्रगति की ओर अग्रसर करता है।
    o जो जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाते हुए भ्रष्टाचार के विरूद्ध कठोर कदम उठाता है।
    o जो संस्था के उद्देश्यों के अनुरूप रोजगार-स्वरोजगार और आजीविका संवर्धन के लिए नए-नए प्रयोग करता है।
    o जिन्हें कॉर्पाेरेट सामाजिक उत्तरदायित्व, क्लस्टर विकास, व्यवसाय मॉडलिंग, उद्यमिता, प्रशिक्षण, आजीविका, अनुसंधान और अध्ययन, कॉर्पाेरेट समाधान, अंतर्राष्ट्रीय व्यापार और सरकारी सलाह सहित विकास और कॉर्पाेरेट क्षेत्र में 21 वर्षों से अधिक का अनुभव है।
    o जो बहुमुखी प्रतिभा की धनी हैं और बिजनेस वुमेन ऑफ द ईयर सहित कई सामाजिक, सांस्कृतिक एवं शैक्षणिक संस्थाओं द्वारा पुरस्कृत हैं।
    o जो फैलो कंपनी सेक्रटरी की उपाधि से विभूषित हैं और वेद, वेदांग एवं उपनिषद में गहन अध्ययन के लिए सम्मानित हैं।
    o जो आजीविका संवर्द्धन के लिए किए जा रहे प्रयासों के लिए विदेशों में तीन बार भारत का प्रतिनिधित्व कर चुकी हैं।
    o जिन्होंने अपनी कार्यकुशलता और दूरदर्शिता से संस्था का कायापलट किया है।


    फैसले के बाद विधि विशेषज्ञों की राय
    न्यायालय के फैसले पर सेडमैप के विधिक सलाहकार एडिशनल एडवोकेट जनरल श्री भरत सिंह और वरिष्ठ हाईकोर्ट एडवोकेट श्री पंकज दुबे ने प्रसन्नता प्रकट की। कार्यकारी संचालक श्रीमती अनुराधा सिंघई के पक्ष में न्यायालय का निर्णय आने के उपरांत खुशी जताते हुए एडिशनल एडवोकेट जनरल श्री भरत सिंह ने कहा कि ईडी वाकई बहुत साहसी और जुझारू हैं, जिन्होंने अकेले इस विषम परिस्थिति का सामना किया और बुराई को जड़ से हटाया। यदि देश में ऐसे और लोग हों तो प्रदेश का कायापलट करने से कोई नहीं रोक सकता। उन्होंने शासन की राजस्व चोरी को रोका है। उन्हें सम्मानित किया जाना चाहिए।
    वरिष्ठ हाईकोर्ट एडवोकेट श्री पंकज दुबे का भी कहना है कि ईडी की नियुक्ति को कोर्ट ने पूरी तरह से सही ठहराया है। कोर्ट ने माना कि ईडी की नियुक्ति पूरी तरह से सही है और सक्षम प्राधिकारी द्वारा उनकी नियुक्ति को सही ठहराया गया है वह काफी योग्य हैं। इसलिए सभी आरोप झूठे और बेबुनियाद साबित हुए।


    शिकायतकर्ता मनोज शर्मा निष्कासित अकाउंटेंट है जो कि वित्तीय अनियमितता में भ्रष्ट समूह में शामिल था। इसके लिए उसके द्वारा दुर्भावनापूर्ण तरीके से फर्जी और झूठी शिकायत की गई। माननीय कोर्ट ने उसे बुरी तरह फटकार लगाई है।
    विभागीय जांच के विरूद्ध आर.डी. मांडवकर जब हाईकोर्ट में स्टे लेने गया तो माननीय हाईकोर्ट जज ने स्टे की पिटीशन को खारिज करते हुए आर.डी. मांडवकर को भी फटकार लगाई थी। ईडी ने विभागीय जांच शुरू की तो उसने बदला लेने के लिए ईडी के विरूद्ध झूठी एफ.आई.आर. दर्ज कराई।


    माननीय न्यायालय का निर्णय भ्रष्ट समूह में शामिल मनोज शर्मा, शरद कुमार मिश्रा, आर.डी. मांडवकर और रमनवीर अरोरा समेत समस्त अंदरूनी कर्मचारी और बाहरी उनके सहयोगी साजिश में जुटे अन्य लोगों के लिए एक बड़ा सबक है।

  • सरकार चाहती रोजगार मिले पर कलेक्टर वेतन देने राजी नहीं

    सरकार चाहती रोजगार मिले पर कलेक्टर वेतन देने राजी नहीं


    भोपाल 20 जुलाई(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)।सरकार के सूक्ष्म एवं लघु उद्योग विभाग ने जिन उद्यमियों को प्रशिक्षण देकर कुशल कामगार के रूप में जिलों में भेजा है उन्हें कई कलेक्टर वेतन ही नहीं देना चाहते हैं। गुना कलेक्टर ने ऐसे करीब दस कर्मचारियों से साल भर काम कराया और बाद में कर्मचारियों की चयन प्रक्रिया में शामिल सैडमैप को ये कहते हुए वापस लौटा दिया कि उन्हें काम करना नहीं आता है। कर्मचारियों ने अपना हक पाने के लिए शासन के दरवाजे खटखटाए हैं।


    मामला सैडमैप संस्था का है। इस अर्धशासकीय संस्था को सरकार ने नई पीढ़ी के उद्यमियों को प्रशिक्षित करने के लिए तैनात कर रखा है।संस्था विभिन्न रुचियों वाले उद्यमियों को प्रशिक्षण देकर तैयार करती है और कार्पोरेट व सरकारी संस्थानों को उपलब्ध कराती है। निजी क्षेत्रकी भी कई बड़ी कंपनियां कुशल कर्मचारियों के लिए सैडमैप को डिमांड भेजती हैं और उन्हें अपनी उद्यमिता बढ़ाने में मदद मिलती है। विभिन्न जिलों में पदस्थ संस्था के क्षेत्रीय अधिकारी युवाओं को उनकी रुचि के अनुरूप प्रशिक्षण उपलब्ध कराते हैं और शासन की निर्धारित दर पर सैडमेप को भी अपना खर्ची निकालने की जवाबदारी दी गई है। शासन सीधे तौर पर संस्था को अनुदान नहीं देता है।


    ताजा मामला गुना कलेक्टर सत्येन्द्र सिंह के उस इंकार से गरमाया है जिसमें उन्होंने चयन प्रक्रिया से चयनित कर्मचारियों का वेतन जारी करने से इंकार कर दिया। उनकी ओर से सैडमैप को पत्र जारी किया गया जिसमें कहा गया है कि वे कर्मचारी सक्षम नहीं हैं और उन्हें काम नहीं आता है। गुना कलेक्ट्रेट को ये अहसास तब हुआ जब उन कर्मचारियों ने कई महीनों का लंबित वेतन मांगते हुए कलेक्टर कार्यालय से संपर्क किया। कलेक्टर महोदय ने कर्मचारियों का वेतन तो जारी नहीं किया बल्कि उनके चयन का ठीकरा सैडमैप पर ही फोड़ दिया।


    गौरतलब है कि सैडमैप में इन पैनल्ड रूप से जुड़ी हुई एजाईल सिक्यूरिटी फोर्स प्राईवेट लिमिटेड फर्म की ओर से आयोजित चयन प्रक्रिया में जिला शिक्षा केन्द्र के परियोजना समन्वयक का भी एक प्रतिनिधि शामिल था। उनसे अपनी कसौटी पर जांचकर युवाओं का चयन किया था। लगभग साल भर तक परियोजना में काम करते रहने के बावजूद जब कर्मचारियों का वेतन नहीं दिया गया तब उन्होंने शोरगुल मचाना प्रारंभ कर दिया। उनकी जरूरतों को देखते हुए लगभग दो माह का वेतन सैडमैप ने अपने फंड से उपलब्ध कराया ताकि बजट जारी होने और वेतन मिलने तक कर्मचारियों का जीवनयापन हो सके।


    कलेक्टर गुना की ओर से जब कर्मचारियों को वेतन देने से इंकार कर दिया गया तब उन्होंने अपनी पीड़ा से शासन को अवगत कराया है। शोरगुल बढ़ता देख गुना कलेक्टर की ओर से जारी पत्र सार्वजनिक कर दिया गया जिसमें कर्मचारियों के चयन के लिए ठीकरा सैडमैप पर फोड़ा गया है।


    मामले में पेंच तो ये है कि यदि गुना जिला शिक्षा केन्द्र के समन्वयक के पास वेतन देने की हैसियत नहीं थी तो उन्होंने सैडमैप से कर्मचारी मांगे ही क्यों। कर्मचारियों का चयन भी उनके प्रतिनिधि ने स्वयं किया तब क्या कलेक्टर महोदय से अनुमति नहीं ली गई थी। गुना जिला प्रशासन यदि कर्मचारियों का वेतन देने में सक्षम नहीं था तो कलेक्टर महोदय ने उन्हें अन्य उद्यमों में रोजगार मुहैया कराने की जवाबदारी क्यों नहीं निभाई। लगभग साल भर कर्मचारियों से काम लिया गया और बाद में उनकी योग्यता पर सवालिया निशान लगाकर युवाओं के जीवन से खिलवाड़ क्यों किया गया।


    जनता के खजाने से लगभग अस्सी हजार करोड़ रुपयों का स्थापना व्यय वसूलने वाली नौकरशाही आखिर क्यों युवाओं को अपना दुश्मन मान रही है। इतना बड़ा बजट लेकर भी ये नौकरशाही उत्पादकता बढ़ाने के पैमाने पर लगातार फिसड्डी साबित होती जा रही है। तमाम कार्पोरेट संस्थान अपने कर्मचारियों की कुशलता बढ़ाने के लिए उन्हें नए नए प्रशिक्षण देते हैं ऐसे में सैडमैप से प्रशिक्षण पाकर सेवाएं उपलब्ध कराने वाले युवाओं के साथ ये खिलवाड़ क्यों किया जा रहा है इस पर शासन को विचार अवश्य करना होगा।

  • मुख्यमंत्री मोहन यादव की दहाड़ पर सदन में छाया सन्नाटा

    मुख्यमंत्री मोहन यादव की दहाड़ पर सदन में छाया सन्नाटा


    भोपाल,01 जुलाई(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)। मध्यप्रदेश विधानसभा के मानसून सत्र में आज मुख्यमंत्री डाक्टर मोहन यादव ने पहली बार जिस सख्त लहजे में जवाब दिया उससे पूरे सदन में अचानक सन्नाटा फैल गया। कमोबेश दो दशक बाद पहली बार सदन के नेता की दहाड़ ने नेतृत्व की मौजूदगी का अहसास कराया है।


    मामला कथित नर्सिंग भर्ती घोटाले का था जिसमें विपक्ष ये कहते हुए आक्रामक था कि सरकार इस मुद्दे पर चर्चा नहीं कराना चाहती क्योंकि इससे उसकी नाकामियां उजागर होने वाली हैं। विपक्ष में बैठे कांग्रेस के कई सदस्य सफेद एप्रिन पहिनकर सदन में आए थे। चिकित्सा शिक्षा विभाग पर दिए गए स्थगन प्रस्ताव पर चर्चा कराए जाने के लिए उन्होंने सदन में दबाव बनाना शुरु किया था। नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने विधानसभा अध्यक्ष नरेन्द्र सिंह तोमर से कहा कि हमारे तीस चालीस सदस्यों ने स्थगन प्रस्ताव देकर इस लोक महत्व के विषय पर चर्चा कराने की मांग की है। ये मामला युवाओं से जुड़ा है और परीक्षाओं व संचार घोटालों की वजह से वे परेशान हैं। इस विषय पर सदन में चर्चा की जानी चाहिए।


    इस पर संसदीय कार्य मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने कहा कि मध्यप्रदेश विधानसभा एवं कार्य संचालन संबंधी पुस्तिका के पेज क्रमांक साठ पर साफ लिखा है कि जो मुद्दे किसी न्यायाधिकरण आयोग आदि के सामने विचाराधीन हैं उन विषयों पर चर्चा नहीं की जाती है। इन मामलों में जांच एजेंसी जांच कर रही है। प्रकरण न्यायालय में भी चल रहा है जजों की कमेटी इस मामले पर विचार कर रही है ऐसे में नियमों और परंपराओं के अनुसार इस विषय पर चर्चा नहीं हो सकती।


    इस पर उमंग सिंघार ने कहा कि हम तो नर्सिंग परीक्षा के संबंध में बात करना चाह रहे हैं। सीबीआई तो कालेजों की जांच कर रही है। ये मामला न्यायालय में नहीं है। कैलाश विजयवर्गीय ने कहा कि स्थगन प्रस्ताव में जो मुद्दा उठाया गया है वो न्यायालय में विचाराधीन है। उमंग सिंघार ने कहा कि हम तो नर्सिंग काऊंसिल पर सरकार के बनाए गए नियमों राजपत्र में प्रकाशन आदि के विषय में बात करना चाह रहे हैं। सरकार इस पर बात क्यों नहीं करना चाहती वह बच क्यों रही है।


    अध्यक्ष नरेन्द्र सिंह तोमर ने कहा कि बजट का सत्र हो या न्यायालय में विचाराधीन प्रकरण उन पर सदन में चर्चा नहीं कराई जाती है क्योंकि चर्चा के दौरान कई तरह के आक्षेप भी लगा दिये जाते हैं जिनका जवाब न्यायालय के कार्य में हस्तक्षेप करना हो जाता है। इन्हीं सब चर्चाओं में पक्ष और विपक्ष के कई सदस्य तैश में आकर तर्क दे रहे थे ,शोरगुल के बीच अध्यक्ष ने सदन की कार्यवाही दोपहर एक बजे तक स्थगित कर दी।


    एक बार फिर जब सदन समवेत हुआ तो उमंग सिंघार ने एक बार फिर इस विषय पर चर्चा कराए जाने की मांग कर दी। इस पर कैलाश विजय वर्गीय ने कहा कि डाक्टर मोहन यादव की सरकार चर्चा से भाग नहीं रही है। ये कोई तात्कालिक घटना नहीं है तीन चार या पांच सत्र बीत चुके हैं पुराना मामला है इसलिए इस पर बजट चर्चा के दौरान आसानी से बात हो जाएगी।
    इस पर कांग्रेस के भंवर सिंह शेखावत ने गुस्से में भरकर कहा कि मामला कांग्रेस और भाजपा का नहीं है,प्रदेश के बच्चों के भविष्य का है। विधानसभा अध्यक्ष नरेन्द्र सिंह तोमर ने उन्हें ये कहकर समझाने का प्रयास किया कि सरकार ने कह दिया है कि वह चर्चा कराने को तैयार है। इस पर श्री शेखावत गुस्से से बोले कि फिर चर्चा कराईए न। मुख्यमंत्री मोहन यादव ने बात को संभालते हुए कहा कि हम किसी विषय पर पीछे नहीं हट रहे हैं। जन हितैषी विषय पर चर्चा कराने को तैयार है। विधानसभा का कामकाज रोककर स्थगन लाने और ध्यानाकर्षण में अंतर होता है इसे अगली बार ले आईए फिर चर्चा करा लेंगे।


    इस पर भंवर सिंह शेखावत ने तंज कसते हुए कहा कि आप चर्चा से नहीं घबराते आप बहादुर हैं आपको इसका प्रमाण पत्र दिया जाएगा। जवाब में कैलाश विजयवर्गीय ने कहा कि हमें आपके प्रमाण पत्र की जरूरत नहीं है। उच्च शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार ने कहा कि ये सर्टिफिकेट आप अपने पास रख लें हम पारदर्शी तरीके से सरकार चलाते हैं । सभी मुद्दों पर कार्रवाई हो रही है और हम चर्चा के लिए तैयार हैं। इस पर भी श्री शेखावत शांत नहीं हुए उन्होंने कहा कि आप चर्चा क्यों नहीं कराना चाहते जिन्होंने भ्रष्टाचार किया है उन्हें आप बचाना चाह रहे हैं।


    इस मुद्दे पर लगभग शांत बैठे मुख्यमंत्री डाक्टर मोहन यादव ने कहा कि हमने शुरु से स्वर रखा है कि हम हर विषय पर चर्चा कराने को तैयार हैं। किसी मसले पर हमारी सरकार डरने वाली नहीं है और न ही हम पीछे हटने वाले हैं। आपके स्वर किसी भी स्तर तक जा सकते हैं लेकिन हम संयम के साथ स्पष्टता से अपनी बात रखना चाहते हैं। यदि कोई उत्तेजना से बात करेगा तो ये सुनने की आदत हमारी भी नहीं है।माननीय सदस्य गण सुन लें अपनी बात को संयमित तरीके से रखें। तीखे स्वरों में कही गई उनकी बात पर पूरे सदन में खामोशी छा गई। नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने बात को संभालते हुए कहा कि हम विवाद के बजाए चर्चा कराना चाहते हैं। इस पर विधानसभा अध्यक्ष नरेन्द्र सिंह तोमर ने सदन को आश्वस्त करते हुए कहा कि ये चर्चा ग्राह्यता पर नहीं हो रही है। दोनों पक्षों ने इस विषय पर फैसला लेने का अवसर मुझे दिया है इसलिए कल मैं किसी उचित नियम के तहत इस पर चर्चा कराऊंगा।

  • हिट एंड रन पर सरकार सख्त,मुख्यमंत्री के निर्देश नागरिक सेवाएं बहाल करें

    हिट एंड रन पर सरकार सख्त,मुख्यमंत्री के निर्देश नागरिक सेवाएं बहाल करें


    भोपाल,2 जनवरी(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने आज मंत्रालय में कमिश्नर, कलेक्टर और एसपी के साथ वीसी के माध्यम से चर्चा कर ट्रक ड्राइवरों की हड़ताल के मद्देनजर किए जा रहे आवश्यक उपायों की जानकारी प्राप्त की और जरूरी निर्देश दिए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि नागरिकों को आवश्यक सामग्री के लिए परेशानी नही हो, इसके लिए सभी जरूरी उपाय किए जाएं।


    मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को हड़ताल खत्म कराने के निर्देश दिए हैं। दो याचिकाओं पर मंगलवार को हुई सुनवाई में हाईकोर्ट ने कहा, ‘हड़ताल को तुरंत खत्म करवाया जाए। सरकार परिवहन बहाल करवाए।’ इस पर सरकार की तरफ से महाधिवक्ता ने कहा, ‘आज शाम तक इस मामले में अहम निर्णय लिया जा रहा है।’ ये याचिकाएं नागरिक उपभोक्ता मंच और अखिलेश त्रिपाठी की ओर से दायर की गईं।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश में पेट्रोल-डीजल की सप्लाई प्रभावित न हो। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि पेट्रोल-डीजल को लेकर कोई अवरोध पैदा करेगा तो उसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। इसके लिए सभी आवश्यक उपाय सुनिश्चित किए जाएं, जनता को किसी भी प्रकार का कष्ट न हो। पेट्रोल पंप और एलपीजी गैस के डीलर्स जिनके अपने वाहन हैं, उनके माध्यम से सप्लाई सुनिश्चित की जाए।


    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने जबलपुर, ग्वालियर, कटनी, रीवा, उज्जैन, सागर समेत विभिन्न जिलों के कलेक्टर, एसपी से चर्चा करते हुए कहा कि किसी भी मार्ग पर अवरोध और बाधा न हो। रास्ते की सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करें। सभी डीलर्स, एसोसिएशन के साथ बैठक करें। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि हमारा मैदान में मूवमेंट दिखे। सोशल मीडिया, इलेक्ट्रॉनिक मीडिया आदि प्लेटफार्म का उपयोग करते हुए स्थिति सामान्य होने की जानकारी दी जाए।

    बैठक में अपर मुख्य सचिव गृह डॉ. राजेश राजौरा, डीजीपी श्री सुधीर कुमार सक्सेना, मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव श्री राघवेंद्र सिंह सहित वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे।

  • अमीरी की आधारशिला पर खुशहाल बनेगा मध्यप्रदेशःगौतम टेटवाल

    अमीरी की आधारशिला पर खुशहाल बनेगा मध्यप्रदेशःगौतम टेटवाल


    भोपाल, 2 जनवरी(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)। कौशल विकास एवं रोजगार राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) गौतम टेटवाल ने कहा है कि हमारे युवा हमारी संपदा हैं। हम इस युवा शक्ति ऊर्जा को बेहतर दृष्टिकोण से संवार रहे हैं। इससे स्थायी रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे और युवाओं का जीवन स्तर बेहतर होगा. पिछली सरकारें गरीबी को संरक्षित करती रहीं हैं मुख्यमंत्री डॉक्टर मोहन यादव के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार अमीरी की आधारशिला पर काम कर रही है। इसके नतीजे जल्दी ही सबको खुशहाल बनाएंगे।


    उन्होंने मंगलवार को वल्लभ भवन क्र. 3 में कक्ष क्र. 318 में पूजा अर्चना कर पदभार ग्रहण किया। श्री टेटवाल ने विभागीय योजनाओं की जानकारी भी ली। इस दौरन अपर मुख्य सचिव तकनीकी शिक्षा एवं कौशल विकास श्री मनु श्रीवास्तव एवं अन्य अधिकारी उपस्थित थे।

    श्री टेटवाल ने एक मुलाकात में कहा कि प्रदेश अब रोजगार निर्माण के एक नए दौर में प्रवेश करने जा रहा है।अब तक भाजपा सरकार ने युवाओं के कौशल के आधार पर उनका जीवन संवारने के लिए विभिन्न उद्यमों की मदद ली थी। इस प्रक्रिया में युवाओं को फौरी राहत भी मिली । अब स्थायी रोजगार स्थापित करने के लिए हम वो फार्मूला लागू कर रहे हैं जिसके माध्यम से आत्मनिर्भर प्रदेश के निर्माण की राह प्रशस्त होगी। प्रदेश के करोड़ों युवा आज अपने हुनर के मुताबिक काम न मिलने के कारण परेशान हैं।अब सरकार जिन उद्यमों को बढ़ावा दे रही है उससे युवाओं के जीवन में समृद्धि आएगी और प्रदेश भी समृद्ध होगा।

  • आरएसएस से निष्कासित भाजपा नेता ने किया अतिक्रमण, एनजीटी ने मांगी राहत रिपोर्ट

    आरएसएस से निष्कासित भाजपा नेता ने किया अतिक्रमण, एनजीटी ने मांगी राहत रिपोर्ट


    एनजीटी ने दिया नागरिकों को राहत देने का निर्देश
    भोपाल,06 दिसंबर(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)। भारतीय जनता पार्टी सरकार की आड़ में कतिपय असामाजिक तत्वों ने प्रशासन को कुछ इस तरह पंगु बना दिया है कि वह नागरिकों के प्रति अपने दायित्वों को ही भूल चला है। चुनावी प्रक्रियाओं के चलते अब तक खामोश रही प्रशासनिक मशीनरी ने प्रकाश नगर में कल दौरा किया और अवैध निर्माण के चलते चोक हुई सीवेज लाईनों को खोलने के निर्देश दिए हैं। एनजीटी के आदेश के अनुपालन में प्रशासन ने अवैध निर्माण गिराने की तैयारी भी की है। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि कि वे किसी राजनैतिक हस्तक्षेप को अब बर्दाश्त नहीं करेंगे और प्रशासन यदि अपना दायित्व नहीं निभाता है तो वे इस संबंध में वैकल्पिक तरीकों का भी इस्तेमाल करने से नहीं चूकेंगे।
    मामला गोविंदपुरा विधानसभा क्षेत्र स्थित प्रकाश नगर का है।यहां अनैतिक आचरण के चलते राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से बर्खास्त किए गए एक असामाजिक तत्व ने सीवेट ट्रीटमेंट के प्लाट पर अवैध निर्माण खड़ा कर लिया है।नागरिकों के विरोध के बावजूद वह बेशर्मी से ढांचे का निर्माण करता जा रहा है। इस वजह से सीवेज ट्रीटमेंट के लिए छोड़े गए प्लाट की नालियां चोक हो गईं और कालोनी में पानी भर गया है।
    नागरिकों ने इस समस्या के खिलाफ पुलिस व प्रशासन को भी शिकायत की लेकिन चुनावी प्रक्रियाओं में उलझी भाजपा सरकार और अधिकारियों ने नागरिकों की परेशानी पर गौर नहीं किया। उस चरित्रहीन असामाजिक तत्व जो खुद को नेता और पत्रकार बताता है ने अवैध निर्माण जारी रखा। अब ये हालत हो गई है कि परिसर की नालियां चोक हो गईं हैं और नागरिकों को खासी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। भाजपा सरकार की आड़ में पनप रही गंदगी का ये अनूठा उदाहरण है।
    नागरिकों ने इस संबंध में जब एनजीटी की भोपाल बैंच को शिकायत की तो उसने प्रकरण क्रमांक ओए 139।2023 कृष्णारानी विरुद् मध्यप्रदेश शासन एवं अन्य के विरुद्ध 12 अक्टूबर 2023 को पारित आदेश के अनुपालन के निर्देश दिए हैं। एनजीटी के सदस्य सचिव आईएएस चंद्रमोहन ठाकुर ने नगर निगम कमिश्नर और भोपाल कलेक्टर को नागरिकों को राहत दिलाने के निर्देश दिए हैं। इस संबंध में एक कमेटी की भी स्थापना की गई है।इस आदेश के अनुपालन की रिपोर्ट 18 दिसंबर के पहले एनजीटी के समक्ष पेश की जानी है।
    गौरतलब है कि अतिक्रमण के कारण प्रकाश नगर रहवासियों को जलभराव और मुसीबतों का सामना करना पड़ रहा है। वार्ड 70,गोविंदपुरा की प्रकाश नगर, बिजली कॉलोनी, #Bhopal जहां पर अधिकतर रिटायर्ड MPEB के अधिकारी, बुजुर्ग महिलाएं रहते हैं वहां पर एक #भाजपा नेता के द्वारा नाले पर अतिक्रमण कर लिया गया और निर्माण प्रारंभ कर दिया । उसने संलग्न भूमि जो सेप्टिक टैंक के लिए निर्धारित थी उस पर भी निर्माण शुरु कर दिया है ।जिसके कारण सारे सीवरेज चेंबर ओवरफ्लो हो गये टॉयलेट गंदगी फैल गई और कई पेड़ धराशाई हो गए ।पिछले 3 माह से की जा रही विभिन्न विभागों एवं नेताओं को की गई शिकायतों का कोई निराकरण नहीं हुआ । विधायक, क्षेत्रीय पार्षद यहां तक कि संभाग आयुक्त ,कलेक्टर और #प्रदूषण निवारण मंडल में भी इसकी शिकायत की गई कि ओपन में जल-मल-मूत्र बह रहा है और सेप्टिक टैंक का निर्माण नहीं हो रहा। कथित भाजपा नेता के निजी स्वार्थ के कारण प्रकाश नगर के बुजुर्ग, महिलाओं, पुरुषों को अत्यंत दुख तकलीफों का सामना करना पड़ रहा है।