Category: अर्थ संसार

  • वाइब्रेंट गुजरात वैश्विक सम्मेलन के लिए सीएम भूपेंद्र पटेल दुबई में करेंगे प्रचार

    वाइब्रेंट गुजरात वैश्विक सम्मेलन के लिए सीएम भूपेंद्र पटेल दुबई में करेंगे प्रचार

    अहमदाबाद,8 दिसंबर(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)। गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेन्द्र पटेल (CM Bhupendra Patel) वैश्विक निवेशक शिखर सम्मेलन (Vibrant Gujarat Global Summit 2022) से पहले प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) आकर्षित करने के लिए बुधवार को दुबई (Dubai expo) में प्रचार-प्रसार करेंगे. सम्मेलन गांधीनगर में जनवरी में होगा. मुख्यमंत्री कार्यालय ने एक विज्ञप्ति में कहा, ‘पटेल संयुक्त अरब अमीरात के उद्योग जगत प्रमुखों के साथ अलग-अलग बैठक करेंगे. वह दुबई में चल रहे ‘दुबई एक्सपो’ में भारत के मंडप का भी दौरा करेंगे.’

    ‘वायब्रेंट’ गुजरात वैश्विक शिखर सम्मेलन 10 से 12 जनवरी को होगा. विज्ञप्ति के अनुसार ‘वायब्रेंट’ गुजरात शिखर सम्मेलन की तैयारी के सिलसिले में मुख्यमंत्री भूपेन्द्र पटेल आठ दिसंबर को दुबई में प्रचार-प्रसार करेंगे. इस दौरान गुजरात के उद्योग राज्यमंत्री जगदीश पांचाल और अन्य वरिष्ठ सरकारी अधिकारी मुख्यमंत्री के साथ होंगे.
    वायब्रेंट गुजरात वैश्विक शिखर सम्मेलन का पीएम मोदी करेंगे उद्घाटन
    वाईब्रेंट गुजरात के नोडल अधिकारी एम थेन्नासरन का कहना है कि मुख्यमंत्री के पास एक लाख करोड के एमओयू सम्मेलन से पहले हो चुके होंगे. अब तक इस वैश्विक सम्मेलन के पहले 50 हजार करोड के निवेश प्रस्ताव मिल चुके हैं. जिनसे राज्य में 50 हजार को नौकरी मिल सकेगी. गांधीनगर में 10 से 12 जनवरी 2022 को यह निवेशक सम्मेलन आयोजित होगा. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुजरात के मुख्यमंत्री रहते 2005 में इसकी शुरुआत की थी. यह हर दो साल में होता है. वैसे वाइब्रेंट समिट 2021 में ही होनी थी लेकिन कोरोना महामारी के चलते इसका आयोजन नहीं किया जा सका था.

    बता दें कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी 10 जनवरी को सम्मेलन का उद्घाटन करेंगे. इसी के ही साथ बीते 18 सालों में इस समिट के दौरान कई एमओयू हुए हैं. जिसमें से 64.35 प्रतिशत प्रोजेक्ट को क्रियान्वित भी किया जा चुका है. सिर्फ 6.26 प्रतिशत प्रोजेक्ट ही क्रियान्वयन के चरण में हैं.

    18 राज्य चले गुजरात की राह पर
    वाइब्रेंट गुजरात ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट को अब देश के अधिकांश राज्यों ने अपना लिया है. गुजरात में इस तरह के सम्मेलन शुरू करने के बाद देश के करीब 18 राज्यों ने अब तक यह अपने-अपने यहां निवेश के लिए इस तरह के सम्मलेन का आयोजन आरंभ किया है. इन राज्यों में मध्य प्रदेश, कर्नाटक, बंगाल, तमिलनाडु, राजस्थान, तेलंगाना, ओडिशा, छत्तीसगढ़, उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड, हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर, उत्तराखंड और आंध्र प्रदेश, सहित कई राज्य शामिल हैं.

  • विदेशी फंडिंग से धर्मांतरण कराने वाले NGO और PFI जैसे संगठनों की जांच होगी बोले गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा

    विदेशी फंडिंग से धर्मांतरण कराने वाले NGO और PFI जैसे संगठनों की जांच होगी बोले गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा

    विदेशी फंडिंग का गलत उपयोग कर धर्मांतरण कराने वाले NGO और PFI जैसे संगठनों की भूमिका की पूरी जांच की जा रही है, जांच में दोषी पाए जाने वालों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी- ग्रह मंत्री नरोत्तम मिश्रा

    (मध्य प्रदेश में 8 छात्रों के धर्मांतरण का आरोप लगा विदिशा के मिशनरी स्कूल में तोड़फोड़, दक्षिणपंथी हिंदू संगठन पर आरोप लगाया था और केस दर्ज हुआ हैं*

    भोपाल,7 दिसंबर(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)।विश्व हिंदू परिषद, बजरंग दल, हिंदू जागरण मंच व अन्य संगठनों ने स्कूल प्रबंधन पर आठ छात्रों का ईसाई धर्म में परिवर्तन करने का आरोप लगाया है. इन संगठनों ने स्कूल और चर्च पर विदेशों से पैसे लेने, छात्रों को तिलक नहीं लगाने और कलावा नहीं बांधने के लिए मजबूर करने का भी आरोप लगाया है

    मध्य प्रदेश: मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के विदिशा जिले के एक मिशनरी स्कूल (Vidisha missionary school vandalized) में दक्षिणपंथी हिंदू संगठनों (Right wing Hindu organization) के कार्यकर्ताओं के तोड़फोड़ करने के मामले में ग्रह मंत्री नरोत्तम मिश्रा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में बयां दिया है कि विदेशी फंडिंग का गलत उपयोग कर धर्मांतरण कराने वाले NGO और PFI जैसे संगठनों की भूमिका की पूरी जांच की जा रही है और जांच में दोषी पाए जाने वालों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी |

    क्या है पूरा मामला
    दक्षिणपंथी संगठनों का आरोप है कि स्कूल में 8 छात्रों का धर्मांतरण कराया गया था जबकि स्कूल प्रशासन ने इस तरह के आरोपों से इनकार कदिया है. इलाके के पुलिस अधिकारी (SDOP) भारत भूषण शर्मा के मुताबिक फिलहाल अज्ञात लोगों के खिलाफ दंगा फैलाने और तोड़फोड़ करने के मामले से जुड़ी धाराओं में केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है.

    भारत भूषण शर्मा ने बताया कि विदिशा जिला मुख्यालय से करीब 48 किलोमीटर दूर गंजबासौदा में सेंट जोसेफ स्कूल के परिसर में ये तोड़फोड़ की गई है.आरोपियों की पहचान की जा रही है और उनके खिलाफ कानून के अनुसार उचित कार्रवाई की जाएगी. उन्होंने बताया कि इस घटना में स्कूल की संपत्ति को काफी नुकसान हुआ है. मौके पर मौजूद लोगों के मुताबिक हंगामा करने वाले लोगों ने स्कूल पर पथराव भी किया था.

    उधर विश्व हिन्दू परिषद के पदाधिकारी नीकेश अग्रवाल ने बताया कि उन्होंने शांतिपूर्ण तरीके से विरोध प्रदर्शन किया और प्रशासन को ज्ञापन भी सौंपा है. अग्रवाल ने कहा, ”हमारा कथित हंगामे से कोई लेना-देना नहीं है क्योंकि स्थानीय प्रशासन को सूचित करने के बाद हमारा विरोध प्रदर्शन शांतिपूर्ण था. इस धर्मांतरण के खिलाफ पिछले एक सप्ताह से कई संगठन विरोध कर रहे हैं और इसकी जांच की मांग कर रहे हैं. दूसरे राज्यों से लाए गए गरीब छात्रों का कथित तौर पर धर्मांतरण किया जा रहा है.’

    प्रशासन को सौंपे गए ज्ञापन में विश्व हिंदू परिषद, बजरंग दल, हिंदू जागरण मंच व अन्य संगठनों ने स्कूल प्रबंधन पर आठ छात्रों का ईसाई धर्म में परिवर्तन करने का आरोप लगाया है. इस ज्ञापन में इन संगठनों ने स्कूल और उसके चर्च पर विदेशों से पैसे लेने, छात्रों को तिलक नहीं लगाने और कलावा (कलाई में हिंदुओं द्वारा पहना जाने वाला पवित्र धागा) नहीं बांधने के लिए मजबूर करने का भी आरोप लगाया है. इसके अलावा, यह भी आरोप लगाया गया कि छात्रों को ईसाई धर्म की प्रार्थना करने के लिए मजबूर किया जा रहा है.

    स्कूल ने आरोपों से किया इनकार
    रविवार को जिलाधिकारी को लिखे पत्र में सेंट जोसेफ चर्च और स्कूल प्रशासन ने धर्मांतरण के सभी आरोपों से इंकार किया है. चर्च ने कहा है कि 30 अक्टूबर को आठ ईसाई बच्चों का ईसाई धर्म रीति से संस्कार किया गया था ये हिंदू धर्म में ‘जनेऊ संस्कार’ की तरह ही होता है. चर्च ने इस मामले की जांच करने का भी आग्रह किया ताकि सच्चाई का पता चल सके. पत्र में चर्च ने स्थानीय यूट्यूब चैनलों पर धर्मांतरण की झूठी खबरें फैलाने और सांप्रदायिक तनाव फैलाने का भी आरोप लगाया है और प्रशासन से उनके खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई करने की मांग की है.

    स्कूल के प्रिंसिपल ने एसडीओपी को लिखे पत्र में सुरक्षा की मांग करते हुए कहा है कि फिलहाल स्कूल में परीक्षाएं कराई जा रही हैं. पत्र में यह भी कहा गया है कि मीडिया में प्रसारित किए जा रहे कथित धर्मांतरण की तस्वीरें स्कूल परिसर की नहीं हैं. इस बीच, स्कूल प्रबंधन के प्रवक्ता ने बताया कि मीडिया के माध्यम से विरोध प्रदर्शन की जानकारी मिलने के बाद स्थानीय प्रशासन को समय पर कार्रवाई के लिए संभावित गड़बड़ी के बारे में पहले से सूचित कर दिया गया था. उन्होंने कहा कि लेकिन लोग इकट्ठा होने लगे और पथराव से स्कूल को कम से कम 10 लाख रुपये का नुकसान हुआ है. जब यह घटना हुई, उस वक्त स्कूल में छात्र अपनी परीक्षाएं देने के लिए मौजूद थे

  • भाषाओं को बढ़ावा देने के लिए केंद्रीय भारतीय भाषा संस्थान (CIIL) और Koo App ने मिलाया हाथ

    भाषाओं को बढ़ावा देने के लिए केंद्रीय भारतीय भाषा संस्थान (CIIL) और Koo App ने मिलाया हाथ

    भाषाओं को बढ़ावा देने के लिए केंद्रीय भारतीय भाषा संस्थान (CIIL) और Koo App ने मिलाया हाथ
    • आपत्तिजनक माने जाने वाले शब्दों और वायांशों का एक संग्रह तैयार करेगा सीआईआईएल
    • भारतीय भाषाओं के संदर्भ, तर्क और व्याकरण को परिभाषित करेंगे
    • प्लेटफॉर्म पर सुरक्षा बढ़ाने और दुरुपयोग को रोकने के लिए Koo तकनीकी सहायता प्रदान करेगा और कंटेंट मॉडरेशन नीतियों को मजबूत करेगा

    राष्ट्रीय, 06 दिसंबर, 2021: सोशल मीडिया के दुरुपयोग को रोकने और भाषा के उचित इस्तेमाल को बढ़ावा देने के लिए मैसूर स्थित सेंट्रल इंस्टीट्यूट ऑफ इंडियन लैंग्वेजेज (CIIL) ने भारत के बहुभाषी माइक्रो-ब्लॉगिंग प्लेटफॉर्म Koo App की होल्डिंग कंपनी बॉम्बिनेट टेक्नोलॉजीज प्राइवेट लिमिटेड के साथ एक समझौते (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए हैं। भारत सरकार द्वारा भारतीय भाषाओं के विकास के सामंजस्य के लिए स्थापित की गई CIIL अब Koo App के साथ संयुक्त रूप से काम करेगी, ताकि इसकी कंटेंट मॉडरेशन नीतियों को मजबूत करने के साथ ही यूज़र्स को ऑनलाइन सुरक्षित करने में मदद मिल सके। यह समझौता यूजर्स को ऑनलाइन दुर्व्यवहार, बदमाशी और धमकियों से बचाने की दिशा में काम करेगा और एक पारदर्शी और अनुकूल कसो सिस्टम का निर्माण करेगा।

    इस समझौते के जरिये CIIL शब्दों, वाक्यांशों, संक्षिप्त रूपों और संक्षिप्त शब्दों सहित अभिव्यक्तियों का एक कोष तैयार करेगा, जिन्हें भारत के संविधान में आठवीं अनुसूची की 22 भाषाओं में आक्रामक या संवेदनशील माना जाता है। जबकि Koo App कोष बनाने के लिए प्रासंगिक डेटा साझा करेगा और इंटरफेस बनाने के लिए तकनीकी सहायता प्रदान करेगा जो सार्वजनिक पहुंच के लिए कोष की मेजबानी करेगा। यह सोशल मीडिया पर भारतीय भाषाओं के जिम्मेदार इस्तेमाल को विकसित करने के लिए एक दीर्घकालिक समझौता है और यह यूजर्स को सभी भाषाओं में एक सुरक्षित और व्यापक नेटवर्किंग अनुभव प्रदान करके दो साल के लिए वैध होगा।

    CIIL और Koo App के इस संयुक्त अग्रणी कार्य का उद्देश्य भारतीय भाषाओं में शब्दों और अभिव्यक्तियों के ऐसे शब्दकोश विकसित करना है, जिन्हें आक्रामक, अपमानजनक या आपत्तिजनक माना जाता है और इन भाषाओं में कुशल कंटेंट मॉडरेशन को सक्षम किया जा सके। भारतीय संदर्भ में इस तरह की पहल को पहले कभी लागू नहीं किया गया था।

    इस समझौते का स्वागत करते हुए CIIL के निदेशक प्रो. शैलेंद्र मोहन ने कहा कि भारतीय भाषाओं के यूजर्स को Koo मंच पर संवाद करने में सक्षम बनाना, वास्तव में समानता और बोलने की स्वतंत्रता के अधिकार की अभिव्यक्ति है, जो हमारे बहुत सम्मानित संवैधानिक मूल्य हैं। CIIL और Koo के बीच समझौता ज्ञापन यह सुनिश्चित करने की दिशा में एक प्रयास है कि सोशल मीडिया का इस्तेमाल, विशेष रूप से Koo App, बोलने/लिखने की स्वच्छता के साथ आता है और यह अनुचित भाषा और दुरुपयोग से मुक्त है। सोशल मीडिया पोस्ट के लिए सुखद और सुरक्षित वातावरण बनाने की दिशा में Koo की इस पहल को प्रोत्साहित करते हुए प्रो. मोहन ने कहा कि Koo App के प्रयास सराहनीय हैं। इसलिए, CIIL कोष के माध्यम से भाषा परामर्श प्रदान करेगा और जिम्मेदार एवं स्वच्छ सोशल मीडिया चर्चा को हासिल करने के लक्ष्य को साकार करने में Koo टीम के हाथों को मजबूत करेगा।

    इस सहयोग पर प्रकाश डालते हुए Koo App के सह-संस्थापक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी अप्रमेय राधाकृष्ण ने कहा, “एक बेहतरीन सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के रूप में Koo भारतीयों को कई भाषाओं में जुड़ने और चर्चा में सक्षम बनाता है। हम ऑनलाइन इको सिस्टम को बढ़ाकर अपने यूजर्स को सशक्त बनाना चाहते है, ताकि दुरुपयोग को प्रभावी तरीके से रोका जा सके। हम चाहते हैं कि हमारे यूजर्स भाषाई संस्कृतियों के लोगों के साथ सार्थक रूप से बातचीत करने के लिए मंच का लाभ उठाएं। हम इंटरनेट यूजर्स के लिए परस्पर दुनिया को अधिक सुरक्षित, भरोसेमंद और विश्वसनीय बनाने के लिए और इस कोष के निर्माण के लिए प्रतिष्ठित सेंट्रल इंस्टीट्यूट ऑफ इंडियन लैंग्वेजेज के साथ साझेदारी करते हुए प्रसन्न हैं।”

  • भारतीय यूजर्स के लिए Koo App पर आया Snapdeal

    भारतीय यूजर्स के लिए Koo App पर आया Snapdeal

    नई दिल्ली,1 दिसंबर, महत्वपूर्ण ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म सैपडील (Snapdeal) ने भारत में अपने लाखों यूज़र्स से उनकी मूल भाषाओं में जुड़ने के लिए मेड-इन-इंडिया सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म Koo App पर लॉगिन किया है। देश में ई-कॉमर्स बाजार को ऑनलाइन खरीदारों की बढ़ती संख्या की वजह से नया स्वरूप मिला है। ये ख़रीदार छोटे भारतीय शहरों और कस्बों से जुड़े हैं, जिन्हें भारत भी कहा जाता है। इन ग्राहकों की विशेष जरूरतों ने इस क्षेत्र के विकास को तेजी से बढ़ावा दिया है और इसके साथ ही स्थानीय भाषा में सामग्री और जानकारी की मांग भी बढ़ी है। सैपडील (Snapdeal), विशेष रूप से दूसरे और तीसरे दर्जे के शहरों समेत भारत भर के यूज़र्स के साथ जुड़ने के लिए Koo App की बेहतरीन बहुभाषी सुविधाओं का लाभ उठाएगा और उनकी मातृभाषा में सेल, डील्स और अन्य घोषणाओं के ज़रूरी अपडेट्स देकर उनसे जुड़ेगा। देसी भाषाओं में अभिव्यक्ति के लिए एक सोशल मीडिया मंच के रूप में Koo App वर्तमान में हिंदी, कन्नड़, तेलुगु, तमिल, बंगाली, असमिया, मराठी, गुजराती और अंग्रेजी समेत नौ भाषाओं में अपनी शानदार सुविधाएं प्रदान करता है। प्लेटफॉर्म पर फिलहाल यूजर्स की संख्या डेढ़ करोड़ से ज्यादा है और अगले एक वर्ष में इस माइक्रो-ब्लॉगिंग प्लेटफ़ॉर्म के डाउनलोड्स का आंकड़ा 10 करोड़ तक पहुंचने का अनुमान है।

    Koo App पर अपना अकाउंट बनाकर स्रैपडील, तमाम आयु-लिंग-स्थान के इंटरनेट यूजर्स तक पहुंचने में सक्षम होगा ये इंटरनेट यूजर्स डिजिटल फर्स्ट अर्थव्यवस्था में अपनी मूल भाषा में ब्रांड्स के साथ जुड़ने की इच्छा रखते हैं। सेपडील के ब्रांड मार्केटिंग निदेशक, सौम्यदीप चटर्जी ने कहा, “मोबाइल इंटरनेट एक्सेस ने दूरदराज की जगहों में रहने वाले लोगों तक पहुंचना और स्थानीय भाषाओं में उनके साथ बातचीत करना मुमकिन कर दिया है। इसलिए तमाम भाषाओं में कंटेंट बनाने में वक्त देना और कोशिश करना ज़रूरी हो जाता है। Koo App जैसा प्लेटफॉर्म हमें बड़े पैमाने पर स्थानीय समुदायों के साथ जुड़ाव बनाए रखने में मदद करेगा।”

    स्रेपडील (Snapdeal) का प्लेटफॉर्म पर स्वागत करते हुए Koo App के सह-संस्थापक मयंक बिदावतका ने कहा, “भारत के सबसे बड़े और सबसे लोकप्रिय ई-कॉमर्स दिग्गजों में से एक सैपडील को हम अपने प्लेटफॉर्म पर पाकर काफी खुश हैं। Koo App भारतीयों को अपनी मातृभाषा में अभिव्यक्ति का मौका देता है। हमारे ऑटो ट्रांसलेशन जैसे स्मार्ट फीचर्स, भाषा की जंजीरों को तोड़ते हुए, यूजर्स को एक-दूसरे से जुड़ने के लिए प्रोत्साहित करते हैं। हमें विश्वास है कि हमारे फीचर्स का फायदा उठाकर, सेपडील एक विशाल यूजर बेस के साथ
    सफलतापूर्वक जुड़ने में सफल होगा और कई भाषाओं में अपनी पेशकशों पर अधिक चर्चा को बढ़ावा दे सकेगा।”

    कू (Koo) के बारे में:

    Koo की स्थापना मार्च 2020 में भारतीय भाषाओं के एक बहुभाषी, माइक्रो-ब्लॉगिंग प्लेटफॉर्म के रूप में की गई थी और अब इसके डेढ़ करोड़ से ज्यादा यूजर्स हो गए हैं। इनमें काफी प्रतिष्ठित लोग भी शामिल हैं। भारत के विभिन्न हिस्सों के लोग, तमाम भारतीय भाषाओं में मौजूद इस मंच के जरिये मातृभाषा में अपनी अभिव्यक्ति कर सकते हैं। एक ऐसे देश में जहां भारत के सिर्फ 10% लोग अंग्रेजी बोलते हैं. एक ऐसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म की बेहद जरूरत है जो भारतीय यूजर्स को भाषा का व्यापक अनुभव दे सके और उन्हें जोड़ने में मदद कर सके। Koo भारतीय भाषाओं को पसंद करने वाले लोगों की आवाज़ के लिए एक मंच प्रदान करता है।

  • बिजली क्रांति बढ़ाएगी मुद्रा भंडार

    बिजली क्रांति बढ़ाएगी मुद्रा भंडार

    
    
    
    
    


    रमेश कुमार दुबे
    बिजली से चलने वाले वाहन अर्थव्‍यवस्‍था के साथ-साथ पर्यावरण के लिए भी मुफीद साबित होंगे। इसी प्रकार इलेक्‍ट्रिक वाहन पेरिस जलवायु समझौते की शर्तों के अनुपालन में भी मददगार बनेंगे। इतना ही नहीं इलेक्‍ट्रिक वाहनों के साथ आने वाली स्‍वचालन तकनीक से सड़क दुर्घटनाओं में भी कमी आएगी। स्‍पष्‍ट है, मोदी सरकार ने जो कदम उठाया है वह देश में एक नई बिजली क्रांति का आगाज करेगा।

    दुनिया भर में बिजली खपत में भारी असमानता पाई जाती है। इतना ही नहीं जहां विकसित देशों में जीवन के हर पहलू में बिजली की भरपूर भागीदारी रही है, वहीं भारत जैसे विकासशील देशों में बिजली की भूमिका रोशनी और औद्योगिक गतिविधियों तक सिमटी रही।

    दशकों की उपेक्षा के बाद भारत में भी बिजली की भागीदारी बढ़ाने के प्रयास शुरू हो चुके हैं। देश के हर गांव तक बिजली पहुंचाने के बाद प्रधानमत्री नरेंद्र मोदी ने सातों दिन-चौबीसों घंटे बिजली मुहैया कराने का महत्‍वाकांक्षी लक्ष्‍य तय किया है। इसके साथ-साथ सरकार देश के समूचे परिवहन तंत्र को पेट्रोल-डीजल के बजाए बिजली आधारित करने की महत्‍वाकांक्षी योजना पर काम कर रही है। रेल लाइनों का विद्युतीकरण और 2030 तक कुल वाहनों के 25 फीसदी को इलेक्‍ट्रिक वाहन करने का लक्ष्‍य है।


    इलेक्‍ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने के लिए मोदी सरकार ने 2015 में फास्‍टर एडॉप्‍शन एंड मैनुफैक्‍चरिंग ऑफ इलेक्‍ट्रिक ह्विकल (फेम)-1 शुरू किया था। इसे मिली कामयाबी को देखते हुए 28 फरवरी को कैबिनेट ने फेम के दूसरे चरण को मंजूरी दे दी। इसके तहत देश में इलेक्‍ट्रिक वाहनों को प्रोत्‍साहन देने के लिए 10,000 करोड़ रूपये का आवंटन किया गया है।

    यह राशि इलेक्‍ट्रिक वाहनों और इलेक्‍ट्रिक इंफ्रास्‍ट्रक्‍चर पर खर्च की जाएगी जिससे 2030 तक 100 फीसदी वाहनों को इलेक्‍ट्रिक बनाने का काम किया जा सके। फेम-2 के अंतर्गत इलेक्‍ट्रिक वाहनों की खरीद को सस्‍ता बनाने और चार्जिंग स्‍टेशनों की पर्याप्‍त व्‍यवस्‍था पर काम किया जाएगा।

    फेम-2 योजना के तहत इलेक्‍ट्रिक वाहन 20,000 से 2.5 लाख रूपये तक सस्‍ते हो जाएंगे। वाहनों को सस्‍ता बनाने के लिए वाणिज्‍यिक वाहनों को प्राथमिकता दी जा रही है। सरकार का लक्ष्‍य है कि तय समय के भीतर देश में 10 लाख इलेक्‍ट्रिक दोपहिया, पांच लाख इलेक्‍ट्रिक तिपहिया, 55000 इलेक्‍ट्रिक कार और 70000 इलेक्‍ट्रिक बस खरीदी जाएं। यह प्रोत्‍साहन सिर्फ उन्‍हें दिया जाएगा जो लिथियम आयन बैटरी से युक्‍त वाहन खरीदेंगे।

    योजना के तहत महानगरों, टू टियर शहरों और पहाड़ी इलाकों में 2700 चार्जिंग स्‍टेशन लगाए जाएंगे। इन शहरों में हर तीन किमी पर एक चार्जिंग स्‍टेशन और राजमार्गों पर हर 25 किमी पर चार्जिंग स्‍टेशन लगाने का लक्ष्‍य रखा गया है। इसके साथ-साथ रिहाइशी इलाकों में भी चार्जिंग स्‍टेशन लगाए जाएंगे।

    इस दिशा में आंध्र प्रदेश सरकार ने एक बड़ी पहल करते हुए 2024 तक पेट्रोल-डीजल कारों के पंजीकरण रोकने और अगले पांच वर्षों में सड़कों पर 10 लाख इलेक्‍ट्रिक वाहन लाने की घोषणा की है। इसके साथ-साथ 2024 तक सभी सरकारी वाहनों को इलेक्‍ट्रिक वाहनों में बदल दिया जाएगा। कमोबेश इसी तरह की पहल कर्नाटक सरकार ने भी की है।

    अधिक से अधिक लोग पेट्रोल-डीजल के बजाए बिजली से चलने वाले वाहन अपनाएं इसके लिए सरकार खुद पहल कर रही है। हाल ही में सरकार ने टाटा मोटर्स से 10,000 इलेक्‍ट्रिक वाहन खरीदने का समझौता किया है। बिजली मंत्रालय के मुताबिक इस दिशा में सबसे बड़ी बाधा कीमत है लेकिन एलईडी बल्‍ब का उदाहरण सरकार के लिए प्रेरणा का काम कर रहा है। गौरतलब है कि शुरू में एलईडी बल्‍ब बहुत महंगे पड़ते थे लेकिन जब देश में इनका बड़े पैमाने पर उत्‍पादन होने लगा तब इनकी कीमतों में तेजी से कमी आई। इसी तरह बैटरी रिक्‍शा व सोलर पंप को मिल रही लोकप्रियता भी सरकार का उत्‍साह बढ़ा रही है।

    फिर लीथियन ऑयन आधारित बैटरी की कीमतों में गिरावट से इलेक्‍ट्रिक वाहनों की लागत कम हो रही है। दूसरी ओर कठोर उत्‍सर्जन मानकों के कारण पेट्रोल-डीजल वाहनों की कीमत लगातार बढ़ रही है। मौजूदा अनुसंधान को देखें तो अगले पांच वर्षों में डीजल-पेटोल व बिजली से चलने वाले वाहनों की लागत लगभग एक समान हो जाएगी।

    स्‍पष्‍ट है, यदि भारत ढांचागत बदलाव नहीं करता तो उसे बड़े पैमाने पर इलेक्‍ट्रिक वाहन व संबंधित कल-पुर्जा आयात करना पड़ेगा। जर्मनी, चीन, अमेरिका जैसे देश पेट्रोल-डीजल की जगह इलेक्‍ट्रिक वाहन पर फोकस कर चुके हैं। इन देशों में वाहन निर्माताओं को 30-40 फीसदी सब्‍सिडी मिल रही है। भारत में इतनी सब्‍सिडी संभव नहीं है। इसलिए उसे समय पर कदम उठाना पड़ेगा।

    भारत अपनी जरूरत का 80 फीसदी पेट्रोलियम पदार्थ आयात करता है। ऐसे में परिवहन क्षेत्र में हो रही बिजली क्रांति से न केवल आयात पर निर्भरता घटेगी बल्‍कि पर्यावरण प्रदूषण में भी कमी आएगी। नीति आयोग की रिपोर्ट के मुताबिक इलेक्‍ट्रिक वाहनों के इस्‍तेमाल से 2030 तक सड़क परिवहन में खपत होने वाली ऊर्जा में 64 फीसदी और कार्बन उत्‍सर्जन में 37 फीसदी की कमी आएगी।

    स्‍पष्‍ट है, बिजली से चलने वाले वाहन अर्थव्‍यवस्‍था के साथ-साथ पर्यावरण के लिए भी मुफीद साबित होंगे। इसी प्रकार इलेक्‍ट्रिक वाहन पेरिस जलवायु समझौते की शर्तों के अनुपालन में भी मददगार बनेंगे। इतना ही नहीं इलेक्‍ट्रिक वाहनों के साथ आने वाली स्‍वचालन तकनीक से सड़क दुर्घटनाओं में भी कमी आएगी। स्‍पष्‍ट है, मोदी सरकार ने जो कदम उठाया है वह देश में एक नई बिजली क्रांति का आगाज करेगा।

  • संपत्ति से आय बढ़ाएगा किराएदारी कानून

    संपत्ति से आय बढ़ाएगा किराएदारी कानून

    मॉडल टेनेंसी एक्ट चर्चा में क्यों?
    हाल ही में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने किराये की संपत्तियों पर कानून बनाने या कानूनों में संशोधन करने के लिये राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को भेजे जाने वाले मॉडल टेनेंसी एक्ट (Model Tenancy Act) को मंज़ूरी दे दी।

    यह मसौदा अधिनियम वर्ष 2019 में आवास और शहरी मामलों के मंत्रालय (Ministry of Housing and Urban Affairs) द्वारा प्रकाशित किया गया था।
    प्रमुख बिंदु
    प्रमुख प्रावधान:

    लिखित समझौता अनिवार्य है:
    इसके लिये संपत्ति के मालिक और किरायेदार के बीच लिखित समझौता होना अनिवार्य है।
    स्वतंत्र प्राधिकरण और रेंट कोर्ट की स्थापना:
    यह अधिनियम किरायेदारी समझौतों के पंजीकरण के लिये हर राज्य और केंद्रशासित प्रदेश में एक स्वतंत्र प्राधिकरण स्थापित करता है और यहाँ तक कि किरायेदारी संबंधी विवादों को सुलझाने हेतु एक अलग अदालत भी स्थापित करता है।
    सिक्यूरिटी डिपॉज़िट के लिये अधिकतम सीमा:
    इस अधिनियम में किरायेदार की एडवांस सिक्यूरिटी डिपॉजिट (Advance Security Deposit) को आवासीय उद्देश्यों के लिये अधिकतम दो महीने के किराये और गैर-आवासीय उद्देश्यों हेतु अधिकतम छह महीने तक सीमित किया गया है।
    मकान मालिक और किरायेदार दोनों के अधिकारों तथा दायित्वों का वर्णन करता है:
    मकान मालिक संरचनात्मक मरम्मत (किरायेदार की वजह से हुई क्षति को नहीं) जैसे- दीवारों की सफेदी, दरवाज़ों और खिड़कियों की पेंटिंग आदि जैसी गतिविधियों के लिये ज़िम्मेदार होगा।
    किरायेदार नाली की सफाई, स्विच और सॉकेट की मरम्मत, खिड़कियों में काँच के पैनल को बदलने, दरवाज़ों और बगीचों तथा खुले स्थानों के रखरखाव आदि के लिये ज़िम्मेदार होगा।
    मकान मालिक द्वारा 24 घंटे पूर्व सूचना:
    एक मकान मालिक को मरम्मत या प्रतिस्थापन करने के लिये किराये के परिसर में प्रवेश करने से पहले 24 घंटे पूर्व सूचना देनी होगी।
    परिसर खाली करने के लिये तंत्र:
    यदि किसी मकान मालिक ने रेंट एग्रीमेंट में बताई गई सभी शर्तों को पूरा किया है जैसे- नोटिस देना आदि और किरायेदार किराये की अवधि या समाप्ति पर परिसर को खाली करने में विफल रहता है, तो मकान मालिक मासिक किराये को दोगुना करने का हकदार है।
    कवरेज:

    यह अधिनियम आवासीय, व्यावसायिक या शैक्षिक उपयोग के लिये किराये पर दिये गए परिसर पर लागू होगा, लेकिन औद्योगिक उपयोग हेतु किराये पर दिये गए परिसर पर लागू नहीं होगा।
    इसमें होटल, लॉजिंग हाउस, सराय आदि शामिल नहीं होंगे।
    इसे भविष्यलक्षी प्रभाव से लागू किया जाएगा जिससे मौजूदा किराये की दर प्रभावित नहीं होगी।
    आवश्यकता:

    वर्ष 2011 की जनगणना के अनुसार, देश में लगभग 1.1 करोड़ घर खाली पड़े थे और इन घरों को किराये पर उपलब्ध कराकर वर्ष 2022 तक ‘सभी के लिये आवास’ के विज़न को पूरा किया जाएगा।
    महत्त्व:

    इस अधिनियम के अंतर्गत स्थापित प्राधिकरण विवादों और अन्य संबंधित मामलों को सुलझाने हेतु एक त्वरित तंत्र प्रदान करेगा।
    यह अधिनियम पूरे देश में किराये के आवास के संबंध में कानूनी ढाँचे को कायापलट करने में मदद करेगा।
    यह सभी आय समूहों के लिये पर्याप्त किराये के आवास उपलब्ध कराने में सहायता करेगा जिससे बेघरों की समस्या का समाधान होगा।
    यह किराये के आवास से संबंधित औपचारिक बाज़ार को संस्थागत करने में मदद करेगा।
    इससे आवास की भारी कमी को दूर करने के लिये एक व्यवसाय मॉडल के रूप में किराये के आवास में निजी भागीदारी को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
    चुनौतियाँ:

    यह अधिनियम राज्यों के लिये बाध्यकारी नहीं है क्योंकि भूमि और शहरी विकास राज्य के विषय हैं।
    राज्य सरकारें रियल एस्टेट (विनियमन और विकास) अधिनियम की तरह ही इस अधिनियम को भी कमज़ोर करके इसके दिशा-निर्देशों का पालन नहीं करने का विकल्प चुन सकती हैं।
    स्रोत: पी.आई.बी.

  • अधिक फसल बेचने के चक्कर में सीलिंग एक्ट में फंसे किसान

    अधिक फसल बेचने के चक्कर में सीलिंग एक्ट में फंसे किसान

    भोपाल। समर्थन मूल्य पर मुक्त हस्त से फसलों की खरीद करने के मध्यप्रदेश सरकार के फैसले को प्रदेश के बड़े किसानों ने मुनाफा कमाने का साधन बना लिया है। वे अपनी अधिक जोत को फसलों की खरीद के लिए पंजीकृत करा लेते हैं। इससे उनकी फसलों का अधिकतर भाग सरकारी खरीद के दायरे में आ जाता है। इस साल जबकि कोरोना संकट के चलते सरकार की माली हालत खस्ता है तब भी ऐसे किसानों ने अपनी उपज सरकार को बेचने में सफलता पाई है। जबकि छोटे जोत वाले किसानों का खाद्यान्न बहुत कम खरीदा गया है। इस खामी के सामने आने के बाद अब सरकार के कान खड़े हुए हैं और उसने सीलिंग एक्ट के तहत जमीनों के रकबे की जांच भी शुरु कर दी है।

    जमीन के रकबे के आधार पर फसल बिक्री के लिए किसानों ने जो पंजीयन कराया है उन आंकड़ों की जांच कराने पर कई बड़े किसानों को अपनी जमीनें बचाना कठिन हो जाएगा। कई जिलों में किसानों के पास जमीन का रकबा इतना ज्यादा है, जो सीलिंग एक्ट के दायरे में आ सकता है।

    मप्र कृषि जोत अधिकतम सीमा अधिनियम 1960 (सीलिंग एक्ट)की धारा 7 के तहत प्रदेश के किसानों को खेती के लिए जमीन की अधिकतम जोत रखने का अधिकार है। यह पात्रता परिवार में सदस्यों की संख्या के आधार पर है। पिछले कुछ सालों में किसानों की जमीन की सिंचाई का रकबा बढ़ा है। केसीसी में अधिकतम कर्ज लेने के लिए भी किसानों ने राजस्व अभिलेखों में असिंचित जमीन को सिंचित करवाया है। साथ ही समर्थन मूल्य पर रबी एवं गर्मियों की फसलों की बिक्री के लिए जमीन को दो फसलीय सिंचित दर्ज कराया है। ऐसे में किसानों की सिंचित जमीन का रकबा बढ़ा है। इसका रिकॉर्ड किसान हर साल समर्थन मूल्य पर फसल बेचने के लिए पंजीयन कराते समय देते हैं। इसी रिकॉर्ड के आधार पर जांच हुई तो कई किसान इसके लपेटे में आ सकते हैं। खास बात यह है कि प्रदेश के किसी भी किसान के पास प्रदेश के किसी भी हिस्से में जमीन ज्यादा होती है तो वह सीलिंग एक्ट में आ सकती है।

    तहसील स्तर के मामले की सुनवाई एसडीएम करते हैं। दो अलग-अलग तहसील के मामलों की सुनवाई कलेक्टर कोर्ट में होती है। दो जिलों के मामले की सुनवाई संभागायुक्त करते हैं। जबकि दो अलग-अलग संभाग में जमीन से जुड़े मामले की सुनवाई आयुक्त, भू-अभिलेख एवं बंदोबस्त करते हैं।

    एक व्यक्ति एक फसलीय सिंचित जमीन 15 एकड़ तक रख सकता है। पांच सदस्यतीय परिवार 27 एकड़ तक रख सकता है। जबकि पांच से ज्यादा सदस्य होने पर हर सदस्य को 4.5 एकड़ रखने का अधिकार है, लेकिन अधिकतम 54 एकड़ तक रखी जा सकती है।

    एक व्यक्ति दो फसलीय 10 एकड़ तक जमीन अपने पास रख सकता है। पांच सदस्यीय परिवार पति-पत्नी एवं तीन नाबालिग के लिए अधिकतम 18 एकड़ जमीन रखने का अधिकार है। संयुक्त परिवार जिसमें पति-पत्नी एवं तीन नाबालिगों के लिए यह सीमा अधिकतम 18 एकड़ है, लेकिन इससे ज्यादा सदस्य होने पर पांच से ज्यादा सदस्य होने पर हर सदस्य को 3 एकड़ जमीन रखने का अधिकार है, यह अधिकतम 36 एकड़ तक रखी जा सकती है।

    इसी तरह असिंचित जमीन एक व्यक्ति 30 एकड़ तक रख सकता है। पांच सदस्यीय परिवार (दो नाबालिग समेत)54 एकड़ जमीन रख सकता है, पांच से ज्यादा सदस्य होने पर प्रति सदस्य 9 एकड़ असिंचित जमीन रख सकता है। लेकिन यह अधिकतम 108 एकड़ तक रखी जा सकती है। इससे ज्यादा जमीन होने पर सीलिंग एक्ट के तहत सरकार ले सकती है।

    सीलिंग एक्ट के प्रकरणों की सुनवाई अलग-अलग स्तर पर होती है। इन सभी मामलों में आपत्ति होने पर इन मामलों का निराकरण शासन स्तर पर किया जाता है।
    ज्ञानेश्वर बी पाटिल, आयुक्त, भू-अभिलेख एवं बंदोबस्त एवं सचिव राजस्व

  • यस बैंक पचास हजार से ज्यादा रकम केवल उधारी पर देगा

    यस बैंक पचास हजार से ज्यादा रकम केवल उधारी पर देगा

    निर्मला सीतारमण- किसी की रकम नहीं डूबेगी

    नई दिल्ली,6 मार्च(प्रेस सूचना केन्द्र)रिजर्व बैंक आफ इंडिया ने यस बैंक से रुपए की निकासी पर पचास हजार रुपए की सीमा तय कर दी है।इससे ज्यादा रकम केवल उधारी पर दी जाएगी। इससे बाजार में अफरातफरी की स्थिति बन गई है। वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने इस व्यवस्था को लेकर खाताधारकों को भरोसा दिलाया है कि उनका पैसा डूबने नहीं दिया जाएगा। बैंक के खाताधारकों का पैसा पूरी तरह सुरक्षित है। किसी भी खाताधारक को चिंतित होने की जरूरत नहीं है। रिजर्व बैंक के अधिकारी समस्या का समाधान निकालने में जुटे हुए हैं। ये भी सुनिश्चित किया जाएगा कि इस हालात के लिए दोषी कौन है।

    उन्होंने कहा कि पिछले कुछ महीनों से हम इन हालात पर लगातार नजर बनाए हुए हैं. RBI ने कई कदम उठाए हैं, एटीएम से कैश निकालने की लिमिट तय किए जाने पर निर्मला सीतारमण ने कहा कि मैं आपको बता दूं कि स्वास्थ्य, विवाह और अन्य आपातकालीन मुद्दों के लिए अतिरिक्त राशि की आवश्यकता को पूरा करने के लिए कदम उठाए गए हैं।

    इस बीच आरबीआई गवर्नर शक्तिकांत दास ने कहा कि हमने 30 दिनों के लिए यह लिमिट लगाई है. जल्द ही आरबीआई यस बैंक को संकट से निकालने के लिए तेजी से कार्रवाई करेगा। आरबीआई गवर्नर ने कहा, ‘आपको बैंक को समय देना होगा, प्रबंधन द्वारा उठाए जाने वाले जरूरी कदम को उठाने की कोशिश करनी होगी और उन्होंने कोशिश की. जब हमने पाया कि यह कोशिश काम नहीं कर रहा तो आरबीआई ने हस्तक्षेप किया.’

    भारतीय रिजर्व बैंक ने बृहस्पतिवार को नकदी संकट से जूझ रहे निजी क्षेत्र के यस बैंक के निदेशक मंडल को भंग करते हुए उस पर प्रशासक नियुक्त कर दिया है. इसके साथ ही बैंक के जमाकर्ताओं पर निकासी की सीमा सहित इस बैंक के कारोबार पर कई तरह की पाबंदियां लगा दी गई हैं. केंद्रीय बैंक ने अगले आदेश तक बैंक के ग्राहकों के लिए निकासी की सीमा 50,000 रुपये तय की है. फिलहाल यह रोक 5 मार्च से 3 अप्रैल तक लगी रहेगी. बैंक का नियंत्रण भारतीय स्टेट बैंक के नेतृत्व में वित्तीय संस्थानों के एक समूह के हाथ में देने की तैयारी की गई है. आरबीआई ने देर शाम जारी बयान में कहा कि यस बैंक के निदेशक मंडल को तत्काल प्रभाव से भंग कर दिया गया है और भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) के पूर्व मुख्य वित्त अधिकारी (सीएफओ) प्रशांत कुमार को यस बैंक का प्रशासक नियुक्त किया गया है.

    इससे करीब छह माह पहले रिजर्व बैंक ने बड़ा घोटाला सामने आने के बाद शहर के सहकारी बैंक पीएमसी बैंक के मामले में भी इसी तरह का कदम उठाया गया था. करीब 15 साल पहले शुरू हुआ यस बैंक काफी समय से डूबे कर्ज की समस्या से जूझ रहा है. इससे पहले दिन में सरकार ने एसबीआई और अन्य वित्तीय संस्थानों को यस बैंक को उबारने की अनुमति दी थी.

    इसका अंदाजा इसस भी लगाया जा सकता है कि पिछले 15 महीनों में निवेशकों को 90 फीसदी तक का घाटा लग चुका है. सितंबर 2018 में इसका मार्केट कैपिटलाइजेशन 90 हजार करोड़ रुपये था, जो घटकर 9000 करोड़ रुपये बच गया है.

    यस बैंक से निकासी पर लिमिट के ऐलान के बाद सार्वजनिक क्षेत्र के कुछ बैंकों के शेयरों में जोरदार उछाल दर्ज हुआ. केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 10 सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के विलय की मंजूरी दे दी है. यह विलय एक अप्रैल से प्रभावी होगा. इससे सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के शेयर 16 प्रतिशत तक की छलांग लगा गए. वहीं, दूसरी ओर सरकार द्वारा भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) की अगुवाई वाले बैंकों के समूह को यस बैंक के अधिग्रहण की मंजूरी की खबरों के बीच निजी क्षेत्र के बैंक का शेयर 27 प्रतिशत तक चढ़ गया.

  • नई आबकारी नीति से शराब निर्माताओं में हड़कंप

    नई आबकारी नीति से शराब निर्माताओं में हड़कंप

    भोपाल,29 फरवरी(प्रेस सूचना केन्द्र)।प्रदेश में वर्ष 2020-21 की आबकारी नीति में देशी/विदेशी मदिरा की फुटकर दुकानों के बड़े समूह बनाये जाने से मध्यप्रदेश ही नहीं बल्कि सीमावर्ती प्रांतों के मदिरा लायसेंसधारियों में जिज्ञासा देखी गई है जबकि मदिरा के निर्माताओं में हड़कंप मच गया है। डिस्टिलरियों के मालिकों का कहना है कि सरकार ने किसी बड़े निवेशक को एकमुश्त शराब सप्लाई के ठेके देने की तैयारी की है। इससे बड़े व्यापारी अधिक मुनाफा कमाने के लिए शराब की खरीद कम दामों पर करेंगे जबकि बाजार में मंहगी कीमत में बेचेंगे।

    आबकारी विभाग के सूत्रों के अनुसार बड़े मदिरा समूहों के निर्माण से मदिरा के अवैध व्यापार पर प्रभावी नियंत्रण रखा जा सकेगा। इससे अस्वस्थ व्यवसायी प्रतिस्पर्धा समाप्त होगी और मदिरा उपभोक्ताओं को उच्च गुणवत्ता की वैध मदिरा उचित मूल्य पर उपलब्ध हो सकेगी। वर्ष 2020-21 के लिये घोषित आबकारी नीति से राज्य के राजस्व संवर्धन में नया प्रतिमान स्थापित होने की संभावना है। आबकारी आयुक्त श्री राजेश बहुगुणा ने इस सिलसिले में प्रदेश के और सीमावर्ती प्रांतों के मदिरा अनुज्ञप्तिधारियों से दूरभाष पर चर्चा की है।

    सरकारी सूत्रों का दावा है कि वित्तीय वर्ष 2020-21 की आबकारी नीति में बड़े, मध्यम और छोटे मदिरा अनुज्ञप्तिधारियों की व्यावसायिक क्षमताओं का पूरा ध्यान रखा गया है। साथ ही नवीनीकरण/ई-टेण्डर/ई-बिडिंग जैसी पारदर्शी व्यवस्थाओं को अपनाया गया है। प्रदेश के जिन 16 जिलों की समस्त मदिरा दुकानें दो अथवा एक समूह में नीलाम होनी है, वहाँ एकाधिकारी व्यवसाय की चाह में उत्तरप्रदेश, छत्तीसगढ़, राजस्थान, हरियाणा तथा दिल्ली जैसे प्रदेशों के ठेकेदारों में अत्यधिक रूचि नजर आ रही है। ये ठेकेदार विभिन्न माध्यमों से ठेकों के बारे में जानकारी हासिल कर रहे हैं। जिन जिलों में नवीनीकरण, लॉटरी या एक समूहों में मदिरा दुकानों की नीलामी होना है, उनसे संबंधित ठेकेदारों को विभाग द्वारा समन्वय कर जानकारी मुहैया कराई जा रही है।

    आबकारी व्यवस्था वर्ष 2020-21 के लिये मध्यप्रदेश के 36 जिलों में मौजूदा वर्ष के देशी/विदेशी मदिरा के फुटकर व्यवसायियों को उनके पक्ष में स्वीकृत अनुज्ञप्तियों को वर्ष 2020-21 की अवधि के लिये नवीनीकृत करने का अवसर दिया गया है। नवीनीकरण की कार्यवाही के लिये 29 फरवरी को गुना और अशोकनगर की सम्पूर्ण देशी/विदेशी फुटकर मदिरा दुकानों के लिये नवीनीकृत आवेदन प्राप्त हो चुके हैं। प्रदेश के शेष जिलों में भी नवीनीकरण प्रक्रिया को लेकर मदिरा अनुज्ञप्तिधारियों ने सकारात्मक रूझान दिखाया है। उल्लेखनीय है कि प्रदेश के शेष जिलों में पहले दिन ही 55 से भी अधिक मदिरा समूहों के लिये नवीनीकरण आवेदन क्रय किये जा चुके हैं। नवीनीकरण संबंधी प्रक्रिया 5 मार्च, 2020 तक जारी रहेगी।

  • फॉर्मास्युटिकल हब बनेगा एमपी बोले कमलनाथ

    फॉर्मास्युटिकल हब बनेगा एमपी बोले कमलनाथ

    इंदौर,28 फरवरी(प्रेस सूचना केन्द्र)।मुख्यमंत्री कमल नाथ ने कहा है कि मध्यप्रदेश को फॉर्मास्युटिकल हब बनाया जाएगा। श्री कमल नाथ ने इससे जुड़ी औद्योगिक इकाइयों से आग्रह किया कि वे मध्यप्रदेश आएं और निवेश करें। मुख्यमंत्री इंदौर में पीथमपुर औद्योगिक संगठन के प्रतिनिधियों को संबोधित कर रहे थे।

    मुख्यमंत्री कमल नाथ ने कहा कि मध्यप्रदेश में फॉर्मास्युटिकल के क्षेत्र में व्यापक संभावनाएँ है। इससे जहाँ एक ओर इससे जुड़ी कंपनियों को जरूरत के संसाधन उपलब्ध होंगे, वहीं दूसरी ओर प्रदेश के लोगों को रोजगार मिलेगा। श्री कमल नाथ ने बताया कि सन फार्मा कंपनी ने रिसर्च का काम शुरू कर दिया है। प्रदेश में उपलब्ध जड़ी-बूटियों की मदद से कैंसर के ईलाज की दवा का 70 प्रतिशत अनुसंधान कार्य पूरा कर लिया गया है।

    मुख्यमंत्री ने सभी औद्योगिक इकाइयों से कहा कि वे अपने संस्थान में सोलर प्लांट लगवाएं। उन्होंने बताया कि इस क्षेत्र में कई नई तकनीक भी आई हैं, जिसमें सोलर से उत्पादित बिजली को स्टोर करने की तकनीक भी शामिल है। उन्होंने कहा कि राज्य शासन इसके लिए अनुदान भी दे रही है। मुख्यमंत्री ने पीथमपुर औद्योगिक संगठन के प्रतिनिधियों से चर्चा कर उनकी अपेक्षाओं और जरूरतों के बारे में जानकारी प्राप्त की।

    इस मौके पर गृह मंत्री बाला बच्चन, लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री तुलसीराम सिलावट एवं पीथमपुर औद्योगिक संगठन के गौतम कोठारी तथा अन्य प्रतिनिधि उपस्थित थे।

    इंदौर में कनफेडरेशन ऑफ इंडियन इंडस्ट्री (सीआईआई) के 125वें वार्षिक अधिवेशन में ‘बिजनेस एण्ड बियोन्ड’ विषय पर श्री कमलनाथ ने कहा कि समाज के गरीब और पिछड़े वर्गों को सशक्त बनाकर ही सामाजिक संतुलन स्थापित किया जा सकता है।

    मुख्यमंत्री कमल नाथ ने कहा कि आज संपन्नता के अस्तित्व के लिए प्रयास करने की बजाए हमें समाज के गरीब, पिछड़े लोगों को हर स्तर पर आगे लाने की आवश्यकता है। इससे देश और समाज स्वत: शक्तिशाली बन जाएगा। उन्होंने कहा कि शासन-प्रशासन में सुधार लाने के साथ-साथ व्यवहार में भी सुधार लाने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि देश-दुनिया में निरंतर परिवर्तन हो रहा है। जरूरतों के साथ लोगों की अपेक्षाएँ भी बढ़ रही हैं। सीआईआई बदलती हुई दुनिया के साथ इंडस्ट्री प्रेरक होने की भूमिका निभाए। इस दिशा में काम करना चाहिए। श्री कमल नाथ ने कहा कि मध्यप्रदेश के औद्योगिक विकास के लिए यह जरूरी है। उद्योग-व्यवसाय से जुड़े और स्टार्टअप उद्यमी अपनी कार्य-प्रणाली को आदर्श बनाएं, जिससे मध्यप्रदेश की देश और दुनिया में एक आदर्श औद्योगिक क्षेत्र की छवि स्थापित हो सके।

  • ATIGS Dubai 2020 is going to be great opportunity for Indian industries-Anuradha Singhai

    ATIGS Dubai 2020 is going to be great opportunity for Indian industries-Anuradha Singhai

    DUBAI, UAE [ 16th JANUARY 2020 ] – Leading Africa business development company, ATIGS Group is proud to announce a partnership with Indo-European Chamber of Commerce and Industry to host the 2020 Africa Trade and Investment Global Summit (ATIGS) on October 28 & 29, 2020 in Dubai, United Arab Emirates.

    ATIGS is a unique business platform to foster relationships and engage efficiently with key influencers and investors from every corner of the world. During a period of two days, Vice presidents, Ministers, Governors, Business Executives, top CEOs, international investors and companies seeking to expand in African markets are gathered in one single place to discuss concrete investment projects and establish strategic partnerships through thematic workshops, presentations, and networking sessions.

    Last year, ATIGS Group hosted the premier ATIGS in the United States, on June 24-26 in Washington DC at the Ronald Reagan Building and World Trade Center. With more than 2,300 delegates from 92 countries, ATIGS USA 2018 was a great success for both the hosting country, sponsors and the participants. High-potential industries and companies were presented to a select audience which led to direct engagement, deal-making, co-investments and the establishment of business partnerships.

    The next edition, ATIGS Dubai 2020 will be a more exclusive high-level gathering for government officials, high-profile African business leaders, project developers, and international investors from Africa, UAE, Asia, Europe, and America. www.atigs2020.com

    “ATIGS Dubai 2020 is going to be great opportunity for Indian industries who are looking at expanding in African geography” said, Anuradha Singhai, President of Indo-European Chamber of Commerce and Industry

    Under this partnership, Indo-European Chamber of Commerce and Industry will support ATIGS Group in the promoting, and India delegates recruitment of ATIGS Dubai 2020, and now entitled to participate in the business and affairs of ATIGS Dubai 2020.

    “Hosting ATIGS is a huge contribution to the development of Africa, and we are excited to partner with IECCI to advance the mission and agenda of ATIGS Dubai 2020.” said, Bako Ambianda, Chairman and CEO of ATIGS Group, Inc.

    ATIGS Dubai 2020 is presented by ATIGS Group, Inc, and organized by Global Attain Advancement, LLC, known as GAA Exhibitions & Conferences, and supported by partners & sponsors.

  • श्रमिकों की आवाज कौन बने

    श्रमिकों की आवाज कौन बने

    भारत सरकार की नीतियों को श्रमिक विरोधी बताते हुए देशव्यापी हड़ताल का आव्हान किया गया। हड़ताल लगभग असफल रही। इससे देश की गतिविधियों पर कोई बड़ा असर नहीं पड़ा। जबकि इस हड़ताल में संगठित क्षेत्र के 25 लाख श्रमिकों की भागीदारी का दावा किया गया था। इस लिहाज से ये हड़ताल श्रमिक आंदोलनों की विदाई का दस्तावेज बन गया है। इसकी वजह ये है कि ये श्रमिक जिन क्षेत्रों से आते हैं वे क्षेत्र अब भारत की मुख्यधारा नहीं रहे हैं। बीएसएनल हो या सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक इनके समानांतर पूरा ढांचा कार्पोरेट सेक्टर में खड़ा हो चुका है। रेलवे जिस निजीकरण का विरोध कर रहा है वह कार्पोरेट सेक्टर के सहारे पूरी तरह यंत्रवत काम करने लगा है। ऐसे में हड़तालियों की बात कौन सुनेगा। हड़तालियों ने अपना समर्थन जुटाने के लिए असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों को लुभाने के लिए न्यूनतम वेतन 21 हजार रुपए करने का नारा दिया। ये नारा वे दे रहे हैं जिनके वेतन पचास हजार रुपए से अधिक हैं और वे अपना वेतन बढ़ाने की मांग को लेकर हड़ताल कर रहे हैं। संगठित क्षेत्र के पांच सात प्रतिशत कर्मचारी या श्रमिक यदि ये मांग करें कि नब्बे फीसदी नागरिकों का पेट काटकर आप हमारे वेतन भत्ते बढ़ा दें तो इसे कैसे न्यायोचित माना जा सकता है। फिर ये आवाज भी जनता की गरीबी दूर करने के नाम पर लगाई जाए तो इसे कैसे उचित ठहराया जाए। इसके बावजूद देश के श्रमिक संगठन अपनी हड़ताल को मजदूर की आवाज बता रहे हैं। इसे केन्द्र सरकार की हठधर्मिता के विरुद्ध संग्राम बताया जा रहा है। देश के कुछ मूर्ख बुद्धिजीवी श्रमिक संगठनों की इस मांग को जायज बता रहे हैं। देश का पूरा ढांचा बदल चुका है। इसके बावजूद कांग्रेस और उनके वामपंथी सहोदर अपना पुराना घिसा पिटा रिकार्ड बजाने में जुटे हुए हैं। डाक्टर मनमोहन सिंह जैसे उनके मार्गदर्शक कर्जमाफी जैसे आम जनता को ठगने वाले चुनावी वायदे पर चुप्पी साधे बैठे हैं। दरअसल देश बदल चुका है और उसे नए हालात को समझने वाले जन नेताओं की दरकार है। नई पीढ़ी के बीच से उभरने वाले नेता इस जरूरत को महसूस करें और अपनी नई भूमिका निभाएं तो देश का ज्यादा भला हो सकता है।

  • सस्ती बिजली के पाखंड की आड़ में रिकार्डतोड़ वसूली

    सस्ती बिजली के पाखंड की आड़ में रिकार्डतोड़ वसूली

    भोपाल,4 दिसंबर(प्रेस सूचना केन्द्र)। प्रदेश के पावर सेक्टर के इतिहास में नवंबर 2019 का माह मील के पत्थर के रूप में दर्ज हो गया है। नवंबर में राजस्व संग्रह  2017 करोड़  रुपये का हुआ है, जो नवंबर 2018 की तुलना में 413 करोड़ अधिक है। इस प्रकार लगभग 26 प्रतिशत अधिक राजस्व मिला है जो अब तक का प्रदेश का एक माह का सर्वाधिक राजस्व संग्रह है। इसके लिये ऊर्जा मंत्री श्री प्रियव्रत सिंह ने बिजली उपभोक्ताओं और तीनों विद्युत वितरण कंपनी के स्टॉफ को बधाई दी है।

    गौरतलब है कि  वर्ष 2018 में जुलाई से नवंबर की तुलना इस वर्ष 2019  से की जाए तो इन महीनों में 1687 करोड़ का अधिक राजस्व संग्रह हुआ है। इसी प्रकार प्रति यूनिट नगद  राजस्व वसूली गत वर्ष 2 रुपये 34 पैसे की तुलना में इस वर्ष नवंबर में  4 रुपये 14 पैसे हो गई है। यह गत वर्ष के इसी माह से 77 प्रतिशत अधिक है। 

    प्रदेश की तीनों वितरण कंपनियों ने राजस्व संग्रह में अब तक का उत्कृष्ट योगदान दिया है। पूर्व क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी द्वारा नवंबर 2019 में 596 करोड़, मध्य क्षेत्र कंपनी द्वारा 587 करोड़ एवं पश्चिम क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी द्वारा 834 करोड़ रुपए का राजस्व संग्रह किया गया। पिछले वर्ष इसी अवधि में पूर्व क्षेत्र कंपनी द्वारा 452 करोड़, मध्य क्षेत्र कंपनी द्वारा 488 करोड  एवं पश्चिम क्षेत्र कंपनी द्वारा 664 करोड़ रुपए का राजस्व संग्रह किया गया था। इस नवंबर माह में पूर्व क्षेत्र कंपनी द्वारा  31.71 प्रतिशत, मध्य क्षेत्र कंपनी द्वारा 20.38 प्रतिशत व पश्चिम क्षेत्र कंपनी द्वारा 25.63 प्रतिशत अधिक राजस्व संग्रह किया गया। यह कंपनी गठन के बाद किसी एक माह में सर्वाधिक है। 

     ऊर्जा मंत्री  ने कहा है कि सरकार प्रदेश के शहरों और ग्रामों में 24 घंटे तथा किसानों को घोषित अवधि में 10 घंटे निर्बाध विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए कृत-संकल्पित है। 

  • बंदर हीरा खदान को मंजूरी बिना बेचने की तैयारी

    बंदर हीरा खदान को मंजूरी बिना बेचने की तैयारी

    बंदर हीरा खदान लेने के लिये 5 कम्पनियों ने प्रस्तुत किया दावा
    तकनीकी बिड का मूल्यांकन 27 नवम्बर को पूर्ण किया जायेगा : मंत्री जायसवाल

    भोपाल,14 नवंबर(प्रेस सूचना केन्द्र)। खनिज साधन मंत्री प्रदीप जायसवाल ने बताया है कि छतरपुर जिले की वर्षों से अनुपयोगी बंदर हीरा खदान लेने के लिये 5 बड़ी कम्पनियों ने 13 नवम्बर को खुली प्रथम चरण की तकनीकी निविदाओं में बिड जमा कर अपना दावा प्रस्तुत किया है। ये कम्पनियाँ हैं भारत सरकार का उपक्रम नेशनल मिनरल डेव्हलपमेंट कॉर्पोरेशन लिमिटेड (एनएमडीसी), एस्सेल माइनिंग (बिरला ग्रुप), रूंगटा माइन्स लिमिटेड, चेंदीपदा कालरी (अडानी ग्रुप) तथा वेदांता कम्पनी।

    मंत्री श्री जायसवाल ने बताया कि 55 हजार करोड़ रुपये की यह खदान रियो टिंटो कम्पनी ने छोड़ी थी। देश की इस सबसे बड़ी खदान के नीलामी प्रकरण में भारत सरकार के नियमानुसार लगभग 56 करोड़ रुपये की सुरक्षा निधि जमा कराई जानी थी। इसके लिये आवेदक कम्पनी की नेटवर्थ कम से कम 1100 करोड़ रुपये होना आवश्यक था।

    खनिज साधन मंत्री ने बताया कि 13 नवम्बर की निविदा कार्यवाही के बाद अब तकनीकी बिड के मूल्यांकन का कार्य 27 नवम्बर, 2019 को पूर्ण किया जायेगा। इसके बाद 28 नवम्बर को प्रारंभिक बोली खोली जाएगी और उसके अगले दिन ऑनलाइन नीलामी सम्पादित की जाएगी।

    उल्लेखनीय है कि छतरपुर जिले में लगभग 3.50 करोड़ कैरेट के हीरे के भण्डार का अनुमानित मूल्य 55 हजार करोड़ रुपये है। इस पर राज्य शासन को प्राप्त होने वाली रॉयल्टी की दरों के आधार पर नीलामी सम्पन्न की जाएगी।

    बक्सवाहा में हीरे की मौजूदगी का पता लगने के बाद आस्ट्रेलिया की रियो टिन्टो कंपनी ने बंदर प्रोजेक्ट को लीज पर लेकर यहां भारी मात्रा में हीरा पाए जाने का सर्वे किया था। इसके बाद उसने करोड़ों रूपए के हीरे सर्वेक्षण के नाम पर निकाले थे।

    जब कंपनी से सरकार का अनुबंध खत्म हो गया और आगे के कार्य की अनुमति नहीं मिली तो कंपनी अपना सामान समेटकर चली गई। अब इसी प्रोजेक्ट को फिर से नीलाम किया जा रहा है।

    अब देश की जानी-मानी कंपनियों ने हीरा खनन में अपनी रूचि दिखाई है। कंपनी के प्रतिनिधियों ने बंदर प्रोजेक्ट की भौगोलिक स्थिति समझने हेतु जंगल का दौरा किया और प्रोजेक्ट के बारे में जांच-पड़ताल की। जानकारी के मुताबिक बंदर डायमंड माइंस प्रोजेक्ट की नीलामी में अनेक कंपनियों ने रुचि दिखाई है।

    आदित्य बिरला ग्रुप, अडानी ग्रुप, वेदांता ग्रुप, रूंगटा ग्रुप, एसेल ग्रुप, क्यूरा ग्रुप जैसी कंपनियों ने बकस्वाहा पहुँच कर बंदर प्रोजेक्ट की जानकारी ली साथ ही भौगोलिक स्थिति जानकर परिस्थितियों से रूबरू होकर प्रोजेक्ट के संबंध में चर्चाएं की गई जिसमें मुख्य रुप से भूमि सम्बन्धी और जंगल से सम्बंधित चर्चाएं हुई ।

    कलेक्टर मोहित बुंदस ने बताया कि डायमंड प्रोजेक्ट के लिए निरीक्षण करने टीमें आई हैं। इस प्रोजेक्ट में रूचि रखने वाली कंपनियों की टीमों ने निरीक्षण करने के बाद विभिन्न बिन्दुओं पर चर्चा की।

    यहां का प्रोजेक्ट शुरू होने से लोगों को रोजगार मिलेगा और बक्स्वाहा का नाम पूरे विश्व में हीरा खदान के रूप में जाना जाएगा।

    इस प्रोजेक्ट का रकबा 356 हेक्टेयर है जिसमें से करीब 13 हेक्टेयर जंगल ऐसा है जो पन्ना टाईगर रिजर्व से लगा हुआ है साथ ही इमली घाट जहां ये खदान लगाई जानी है वहां जाकर भी कंपनियों ने मुआयना किया और वहां की स्थिति जानी।

    बकस्वाहा ब्लॉक के हीरा खदान देखने पहुँची कंपनियों के साथ नरेंद्र सिंह परमार सचिव मध्यप्रदेश शासन, मोहित बुंदस कलेक्टर छतरपुर, अनुपम सहाय डीएफओ, तिलक सिंह एसपी, मनोज मालवीय एसडीएम बिजावर के साथ जिले का अमला मौजूद रहा।

    प्रदेश शासन के सचिव नरेन्द्र सिंह परमार ने बताया कि बंदर हीरा खनन प्रोजेक्ट बक्स्वाहा की नीलामी प्रक्रिया की शुरूआत 5 अगस्त से शुरू की गई। प्रोजेक्ट की बोली 60 हजार करोड़ से शुरू होगी।

    परमार ने बताया कि विभिन्न कंपनियों के प्रतिनिधियों से प्रोजेक्ट के बारे में चर्चा हुई है। पन्ना में रखे बक्स्वाहा के डायमंड को देखने के बाद प्रतिनिधियों ने भौगोलिक स्थिति जानने की इच्छा जताई थी। उन्हें यहां लाया गया है ताकि वे वस्तु स्थिति से भी अवगत हो सकें।

    यहां आने वालों में 6 कंपनियों के प्रतिनिधि शामिल हैं। उधर डीएफओ अनुपम सहाय का कहना है कि पूरा प्रोजेक्ट वन क्षेत्र का है इसलिए एनओसी जारी होगी लेकिन यह भी देखना होगा कि इस जंगल को कहां स्थानांतरित किया जाए ताकि अच्छे किस्म का जंगल तैयार हो सके।

  • मंदी नहीं,विकास जारी बोलीं वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण

    मंदी नहीं,विकास जारी बोलीं वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण

    नयी दिल्ली,14 सितंबर(प्रेस सूचना केन्द्र)।हाऊसिंग प्रोजेक्ट को गति देेने के लिए भारत सरकार दस हजार करोड़ रुपए उपलब्ध कराएगी। वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने शनिवार को बताया कि सरकार ने अर्थव्यवस्था को गति देने के लिए कई उपाय किए हैं।जो लोग मंदी की बात कह रहे हैं उनके अनुमान ताजा आंकड़ों के सामने काल्पनिक साबित हुए हैं। उन्होंने बताया कि सहायता ऐसी परियोजनाओं को ही मिलेगी, जो दिवाला संहिता के तहत एनसीएलटी में जाने या गैर-निष्पादित संपत्ति (एनपीए) घोषित होने से बची हुई हैं.

    वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने यहां अर्थव्यवस्था को नरमी से उबारने के लिए एक और पैकेज की घोषणा करते हुए कहा कि निर्माणाधीन परियोजनाओं के वित्त-पोषण के लिए सरकार करीब 10 हजार करोड़ रुपये की सहायता देगी. उन्होंने कहा कि इस काम में बाहरी निवेशकों से भी करीब इतनी ही राशि उपलब्ध होने का अनुमान है. उन्होंने कहा कि इससे किफायती तथा मध्य आय वर्ग के लिए बनायी जा रही आवासीय परियोजनाओं को पूरा करने में मदद मिलेगी. उन्होंने कहा कि इस कोष का प्रबंधन पेशेवर लोग करेंगे.


    वित्तमंत्री ने कहा कि भवन निर्माण के लिए कर्ज पर ब्याज दर को कम किया जायेगा तथा इन पर ब्याज की दर को 10 साल की सरकारी प्रतिभूतियों के यील्ड (निवेश-प्रतिफल) से जोड़ा जायेगा. उन्होंने कहा कि सरकारी नौकरी वाले लोग आवास की मांग में अहम योगदान देते हैं. इस व्यवस्था के तहत सरकारी नौकरी वाले अधिक लोगों को नया घर खरीदने का प्रोत्साहन मिलेगा. उन्होंने कहा कि डेवलपरों को विदेश से पूंजी जुटाने में मदद करने के लिए विदेश से लिये जाने वाले वाणिज्यिक ऋण से संबंधित गाइडलाइन आसान बनाई जाएगी।

    मुद्रास्फीति नियंत्रित और औद्योगिक उत्पादन में सुधार के स्पष्ट संकेत
    के साथ ही, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने शनिवार को कहा कि मुद्रास्फीति नियंत्रण में है और औद्योगिक उत्पादन में सुधार के स्पष्ट संकेत दिख रहे हैं. उन्होंने अर्थव्यवस्था के लिए राहत की तीसरी किस्त की घोषणा करते हुए एक संवाददाता सम्मेलन में कहा कि मुद्रास्फीति चार फीसदी के लक्ष्य से अच्छी-खासी नीचे है. सरकार ने रिजर्व बैंक को खुदरा मुद्रास्फीति चार फीसदी से नीचे रखने का लक्ष्य दिया है. हालांकि खुदरा मुद्रास्फीति अगस्त में कुछ तेज होकर 3.21 फीसदी पर पहुंच गयी, लेकिन यह अब निर्धारित दायरे में है.

    सीतारमण ने कहा कि 2018-19 की चौथी तिमाही में औद्योगिक उत्पादन से संबंधित सारी चिंताओं के बाद भी जुलाई, 2019 तक हमें सुधार के स्पष्ट संकेत दिखाई देते हैं. उन्होंने कहा कि आंशिक ऋण गारंटी योजना समेत गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (एनबीएफसी) में ऋण का प्रवाह सुधारने के कदमों की घोषणा के परिणाम दिखाई देने लगे हैं. उन्होंने कहा कि कई एनबीएफसी को फायदा हुआ है. उन्होंने कहा कि गोवा में जीएसटी परिषद की बैठक से एक दिन पहले वह अर्थव्यवस्था में ऋण प्रवाह की समीक्षा करने के लिए 19 सितंबर को सार्वजनिक बैंकों के प्रमुखों से मुलाकात करेंगी.

    वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने निर्यातकों के लिए ऋण प्राथमिकता वाले क्षेत्रों के लिए ऋण आवंटन के संशोधित नियमों (पीएसएल) की घोषणा की. इससे निर्यातकों को 36,000 करोड़ रुपये से लेकर 68,000 करोड़ रुपये तक का अतिरिक्त वित्त पोषण मिलेगा. सीतारमण ने कहा कि निर्यातकों को ऋण के लिए पीएसएल नियमों की समीक्षा की जायेगी. दिशानिर्देशों पर भारतीय रिजर्व बैंक के साथ विचार-विमर्श चल रहा है.

    सीतारमण ने यहां संवाददाताओं से कहा, ‘‘इससे प्राथमिकता वाले क्षेत्रों के तहत निर्यात ऋण के लिए 36,000 करोड़ रुपये 68,000 करोड़ रुपये की अतिरिक्त पूंजी उपलब्ध होगी. उन्होंने कहा कि वाणिज्य विभाग के तहत एक अंतर-मंत्रालयी समूह निर्यात क्षेत्र को वित्त पोषण की सक्रिय निगरानी करेगा. इसके अलावा, निर्यात ऋण गारंटी निगम (ईसीजीसी) निर्यात ऋण बीमा योजना का दायरा बढ़ायेगा.

    सीतारमण ने कहा कि इस पहल की सालाना लागत 1,700 करोड़ रुपये आयेगी. साथ ही, यह ब्याज दर समेत निर्यात ऋण की पूरी लागत को विशेषकर लघु एवं मझोले कारोबारों के लिए कम करने में मदद करेगी. उन्होंने यह भी घोषणा की कि मुक्त व्यापार समझौता उपयोग मिशन की भी स्थापना की जायेगी.

    इसका मकसद निर्यातकों को उन देशों से शुल्क छूट दिलाने में मदद करना है, जिनके साथ भारत ने संधि की है. इसके अलावा, देश में चार स्थानों पर हस्तशिल्प, योग, पर्यटन, कपड़ा और चमड़ा क्षेत्रों के लिए वार्षिक शॉपिंग फेस्टिवल आयोजित किये जायेंगे.

  • व्यापारियों को ई कामर्स पर आना ही पड़ेगाःकमलनाथ

    व्यापारियों को ई कामर्स पर आना ही पड़ेगाःकमलनाथ

    भोपाल,4 सितंबर(प्रेस सूचना केन्द्र)। कनफेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स कैट के पदाधिकारियों ने कैट के राष्ट्रीय महामंत्री प्रवीण खंडेलवाल जी के नेतृत्व में बल्लभ भवन में माननीय मुख्यमंत्री श्री कमलनाथ से मुलाकात की।व्यापारियों की समस्याओं के जवाब में उन्हें मुख्यमंत्री ने सुझाया कि यदि व्यापार को सुरक्षित रखना है और बढ़ाना है तो मौजूदा व्यवस्था के साथ साथ कारोबारियों को ई कामर्स का इस्तेमाल भी बढ़ाना होगा। यह प्लेटफार्म व्यापार की चुनौतियों से निपटने में मददगार साबित होगा।


    कैट के प्रवक्ता विवेक साहू ने हुए बताया कि भेंट के दौरान माननीय मुख्यमंत्री ने कहा कि विश्वभर में बढ़ते ऑनलाइन कारोबार को देखते हुए अब यह आवश्यक हो गया है कि आने वाले समय में व्यापारियों को ई-कॉमर्स पर लाना होगा। हम अपने व्यवसाय को ऑफलाइन के साथ-साथ आनॅलाइन पर भी रखे ।
    उन्होंने आगे कहा है कि हम मध्यप्रदेश में इसे अभियान के रूप में चलायेंगे।

    कैट के महामंत्री प्रवीण खंडेलवाल ने मुख्यमंत्री को बताया कि कैट एक पोर्टल तैयार करने जा रहा है जो व्यापारियों को ऑनलाइन व्यापार करने के लिए प्रेरित करेगा जिसमें विश्वविद्यालयों के छात्र-छात्राएं भी इसमें प्रतिभागी रहेंगे।हम उन्हें रोजगार के अवसर प्रदान करेंगे और छोटे कारोबारियों को बिना किसी आर्थिक भार के ई-कॉमर्स का उपयोग सिखाने में भी मददगार साबित होंगे।


    चर्चा में मुख्यमंत्री ने कहा कि मंडियों में किसानों को नगद भुगतान आवश्यक है क्योंकि बैंकों में कैश उपलब्ध ना होने की स्थिति में किसान को परेशानी होती है। अतः इसके लिए हम केन्द्र सरकार से बात करेंगे और व्यापरियों को परेशानी ना हो एवं किसान को भी उसकी फसल का पैसा मिले इसके लिए हम एक योजना बनाकर कार्य करेंगे।


    इस अवसर पर उन्होंने कॉन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) के ‘‘बैज‘‘ का लोकार्पण किया। कॉन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) के मध्यप्रदेश अध्यक्ष भूपेन्द्र जैन ने मुख्यमंत्री को पहला बैज लगाकर सम्मानित किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश के युवाओं को स्वावलंबी बनाने के लिए महिला उद्यमियों को विकास के लिए हर जिले में मुद्रा लोन शिविर लगाये जायेंगे और विश्वविद्यालय स्तर पर स्टार्टअप समिट होगी।


    मुख्यमंत्री ने कैट के प्रस्ताव को थाना स्तर पर व्यापारिक समितियां बनाने के लिए पुलिस महानिदेशक को आवश्यक दिशा-निर्देश देने का आश्वासन दिया।
    मुख्यमंत्री ने मध्यप्रदेश में व्यापारियों और कारोबारियों को आमंत्रित करते हुए कहा कि जो अधिक से अधिक रोजगार देगा उसके लिए राज्य शासन हरसंभव मदद करेगी। इस अवसर पर कैट के राष्ट्रीय महामंत्री प्रवीण खंडेलवाल ने कैट, सीएससी, मास्टर कार्ड एवं ग्लोबल लिंकर ई-कॉमर्स बिजनिस की परिकल्पना से मुख्यमंत्री को अवगत कराया। मुख्यमंत्री ने कहा कि जिला स्तर पर कलेक्टर की अध्यक्षता में जो व्यापारिक समितियां बन रही हैं उनमें एवं अन्य जिला स्तरीय कमेटियों में कैट को उचित प्रतिनिधित्व मिलेगा। कॉन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) मध्यप्रदेश राज्य शासन के साथ मिलकर प्रदेश के आर्थिक विकास के लिए कार्य करे।


    राष्ट्रीय वरिष्ठ उपाध्यक्ष कैलाश अग्रवाल, राधेश्याम महेश्वरी, ग्लोबल लिंकर के समीर वकील, कैट के सोशल मीडिया प्रभारी सुमित अग्रवाल, राष्ट्रीय उपाध्यक्ष राधेश्याम माहेश्वरी, सेन्ट्रल जोन कोर्डिनेटर रमेश गुप्ता, प्रदेश अध्यक्ष भूपेंद्र जैन, महामंत्री मुकेश अग्रवाल, प्रवक्ता विवेक साहू, संयुक्त सचिव मनोज चौरसिया, अजय चौरिया, अविचल जैन, नरेन्द्र मांडिल आदि उपस्थित थे।


    इससे पूर्व प्रतिनिधिमंडल ने राजीव गांधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. सुनील कुमार से भेंट की और व्यापारियों को ई-कॉमर्स में परिवर्तन करने के लिए विश्वविद्यालय के छात्र-छात्राओं का सहयोग मांगा। इसे कुलपति ने स्वीकर किया और 9 सितम्बर से उनकी ट्रेनिंग प्रारंभ होगी।


    इसी श्रंखला में आज एमपी नगर स्थित गौरव होटल में विदेशी व्यापारियों के साथ बैठक का आयोजन किया गया ।बैठक के मुख्य अतिथि प्रवीण खंडेलवाल ने व्यापारियों को संबोधित करते हुए कहा कि आज का समय डिजिटल युग का हैं और उसके बिना व्यापार करना नामुमकिन है जो व्यापारी आज के दौर में डिजिटल तकनीक नहीं अपना आएगा वह धीरे-धीरे अपना व्यापार को खोता जाएगा।

  • सार्वजनिक क्षेत्र के छह और बैंकों का विलय,अब केवल 12 बचेंगे

    सार्वजनिक क्षेत्र के छह और बैंकों का विलय,अब केवल 12 बचेंगे

    नईदिल्ली,30 अगस्त(प्रेस सूचना केन्द्र) नरेन्द्र मोदी सरकार ने आज बैंकों की बड़ी विलय योजना की घोषणा की, जिससे सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों की संख्या एक ही झटके में 18 से घटकर 12 रह जाएगी। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि पंजाब नैशनल बैंक (पीएनबी) ओरियन्टल बैंक ऑफ कॉमर्स और यूनाइटेड बैंक ऑफ इंडिया का अधिग्रहण करेगा। इसी तरह वहीं केनरा बैंक में सिंडिकेट बैंक का, यूनियन बैंक ऑफ इंडिया में आन्ध्रा बैंक और कॉर्पोरेशन बैंक तथा इंडियन बैंक में इलाहाबाद बैंक का विलय होगा। सीतारमण ने कहा कि इन 10 बैंकों की जगह केवल 4 बैंक रह जाएंगे और सरकार चालू वित्त वर्ष के दौरान 70,000 करोड़ रुपये के पुर्नपूंजीकरण में से करीब 55,250 करोड़ रुपये की पूंजी इन्हीं बैंकों में डालेगी।

    बैंकों के विलय की घोषणा करते हुए वित्त मंत्री और वित्त सचिव राजीव कुमार ने बार-बार दोहराया कि इस निर्णय से किसी कर्मचारी की नौकरी नहीं जाएगी। कुमार ने कहा कि प्रस्तावित विलय की समयसीमा इन दस बैंकों के बोर्डों से परामर्श करने के बाद तय की जाएगी। उन्होंने कहा, ‘इस निर्णय से नौकरियों पर किसी तरह की आंच नहीं आएगी। जिन बैंकों में इनका विलय होगा, वे विलय होने वाले बैंकों के कर्मचारियों को बनाए रखेंगे।’  

    वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा, ‘बैंक एकीकरण के दो चरण पहले ही किए जा चुके हैं और अपनी बैंकिंग व्यवस्था को मजबूत बनाने तथा 5 लाख करोड़ डॉलर की अर्थव्यवस्था का लक्ष्य हासिल करने के लिए हम एक बार फिर विलय करना चाहते हैं। हम नई पीढ़ी के और बड़े बैंक बनाने की कोशिश कर रहे हैं, जिनकी अधिक कर्ज देने की क्षमता हो।’ उन्होंने कहा, ‘इंडियन ओवरसीज बैंक, यूको बैंक, बैंक ऑफ महाराष्ट्र और पंजाब एण्ड सिंध बैंक पहले की तरह काम करते रहेंगे क्योंकि ये मजबूत क्षेत्रीय बैंक हैं।’  वित्त मंत्री ने बैंकों के लिए नए परिचालन सुधारों की भी घोषणा की।

    सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के निदेशक मंडल अब महाप्रबंधक से ऊपर के दर्जे के अधिकारियों का प्रदर्शन आधारित मूल्यांकन करेंगे। बैंक अपने मुख्य जोखिम अधिकारी को बाजार के अनुकूल पारितोषिक पर नियुक्त कर सकेंगे। बोर्ड को वरिष्ठ प्रबंधन के कार्यकाल की योजना तय करने की आजादी होगी। इसके अलावा गैर-आधिकारिक निदेशकों की फीस में इजाफा किया जाएगा, बोर्ड समितियों को तार्किक बनाया जाएगा और प्रबंधन समिति की कर्ज मंजूर करने की सीमा बढ़ाकर 100 फीसदी तक की जाएगी ताकि उच्च मूल्य के ऋण प्रस्तावों पर ज्यादा ध्यान दिया जा सके। इसके साथ ही बड़े सरकारी बैंकों में कार्यकारी निदेशकों की संख्या मौजूदा तीन से बढ़ाकर चार की जाएगी। 

    पीएनबी में ओरियन्टल बैंक और यूनाइटेड बैंक का विलय होने के बाद वह 17.95 लाख करोड़ रुपये के कारोबार, 11,437 शाखाओं और 10.44 लाख करोड़ रुपये की जमा के साथ देश का दूसरा सबसे बड़ा बैंक बन जाएगा। एकीकृत इकाई की गैर-निष्पादित आस्तियां 6.61 फीसदी रहने का अनुमान है, जो ओरियन्टल बैंक ऑफ कॉमर्स के एनपीए से अधिक लेकिन पीएनबी और यूनाइटेड बैंक से कम है।केनरा बैंक और सिंडिकेट बैंक का विलय होने के बाद कारोबार के लिहाज से वह देश का चौथा सबसे बड़ा बैंक होगा, जबकि शाखाओं के हिसाब से तीसरा सबसे बड़ा बैंक बन जाएगा।  एकीकृत इकाई के पास कुल जमा राशि 8.59 लाख करोड़ रुपये होगी और शुद्घ एनपीए अनुपात 5.62 फीसदी होगा।

    यूनियन बैंक, आन्ध्रा बैंक और कॉर्पोरेशन बैंक के एकीकरण से देश का पांचवां सबसे बड़ा सरकारी बैंक बनेगा। इसकी एकीकृत जमा 8.20 लाख करोड़ रुपये और शुद्घ एनपीए अनुपात 6.30 फीसदी होगा, जो यूनियन बैंक के एनपीए से कम लेकिन आन्ध्रा बैंक और कॉर्पोरेशन बैंक के एनपीए से अधिक है। इंडियन बैंक और इलाहाबाद बैंक के एकीकरण से देश का सातवां सबसे बड़ा सरकारी बैंक बनेगा, जिसकी कुल जमा राशि 4.56 लाख करोड़ रुपये होगी और एनपीए अनुपात 4.39 फीसदी होगा।क्रिसिल रेटिंग्स के वरिष्ठ निदेशक कृष्णन सीतारमण ने कहा, ‘इतने बड़े स्तर पर एकीकरण से कुछ समय के लिए कामकाज की शैली के अंतर, मानव संसाधन को संभालने, बैंक शाखाओं को तर्कसंगत बनाने एवं तकनीकी एकीकरण करने जैसी चुनौतियों से जूझना पड़ सकता है। अगर इसे सही तरीके से क्रियान्वित किया गया तो मध्यम अवधि में इसका लाभ होगा और सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक ज्यादा प्रभावी तरीके से प्रतिस्पद्र्घा कर सकेंगे।’भारी-भरकम विलय की घोषणा वित्त सचिव, वित्त मंत्री और सार्वजनिक क्षेत्र के 10 बैंकों के मुख्य कार्याधिकारियों की बैठक के बाद की गई। 

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  • रिजर्व बैंक की सालाना आय 146.5% बढ़ी

    रिजर्व बैंक की सालाना आय 146.5% बढ़ी

    नई दिल्ली,31 अगस्त (प्रेस सूचना केन्द्र) RBI (भारतीय रिजर्व बैंक) ने बुधवार को अपनी सालाना रिपोर्ट पेश की। इसके अनुसार, केंद्रीय बैंक की बैलेंस शीट में 13.42 फीसद का इजाफा हुआ है और यह 41.03 लाख करोड़ रुपये रहा। वहीं, ब्‍याज से होने वाली आय 2018-19 में 146.59 फीसद बढ़कर 1.93 लाख करोड़ रुपये रही। अपने वार्षिक रिपोर्ट में RBI ने कहा है कि ब्‍याज से होने वाली उसकी आय 44.62 फीसद बढ़कर 1.06 लाख करोड़ रुपये रही और अन्‍य स्रोतों से होने वाली आय 30 जून 2019 के अनुसार, 86,199 करोड़ रुपये रही जो एक साल पहले की अवधि में 4,410 करोड़ रुपये थी। 

    RBI ने कहा कि 30 जून 2019 के अनुसार, सरकारी प्रतिभूतियों में उसका निवेश 57.19 फीसद बढ़कर 6.29 लाख रुपये से 9.89 करोड़ रुपये रहा। इसमें लिक्विडिटी मैनेजमेंट ऑपरेशंस के दौरान 3.31 लाख करोड़ रुपये की सरकारी प्रतिभूतियों की खरीद शामिल है। रिजर्व बैंक का विदेशी विनिमय लाभ बढ़कर 28,998 करोड़ रुपये रहा। पिछले वर्ष इसमें 4,067 करोड़ रुपये का घाटा हुआ था। 

    2018-19 में सरकार को ट्रांसफर की जाने वाली सरप्‍लस राशि रिजर्व बैंक के बोर्ड द्वारा इस हफ्ते अपनाए गए इकोनॉमिक कैपिटल फ्रेमवर्क अपनाए जाने के बाद समायोजन के आधार पर 1.76 लाख करोड़ रुपये रहा। यह नया फ्रेमवर्क 27 अगस्‍त को बिमल जालान कमेटी द्वारा दिए गए सुझावों का एक हिस्‍सा है। सरकार को दी जाने वाली राशि में फरवरी में दिया गया 28,000 करोड़ रुपया भी शामिल है। 

    30 जून 2019 के अनुसार, RBI के पास 618.16 मेट्रिक टन सोना था जो 30 जून 2018 को 566.23 मेट्रिक टन था। इस साल के दौरान 51.93 मेट्रिक टन सोना और बढ़ा है। 

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  • चार हजार खाद्य नमूने उठाए केवल छह नकली निकले

    चार हजार खाद्य नमूने उठाए केवल छह नकली निकले

    भोपाल,27 अगस्त(प्रेस सूचना केन्द्र)। कमलनाथ सरकार ने जनता की सहानुभूति हासिल करने के लिए जो शुद्ध के लिए युद्ध चलाया उसका नतीजा टांय टांय फिस्स साबित होने लगा है। खोदा पहाड़ और निकली चुहिया जैसी कहावत इस अभियान को देखते हुए सटीक साबित हो रही है। प्रदेश भर में जिन 3840 व्यापारियों के प्रतिष्ठानों से खाद्य नमूने जब्त किए उनमें से मात्र छह नमूने प्रतिबंधित निकले हैं। जबकि सरकार ने प्रदेश में बिक रहे 70 फीसदी खाद्य पदार्थों के नकली होने का शोर मचाया था।

    अधिकृत सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार पिछले महीने 19 जुलाई से कथित तौर पर मिलावट के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के जो नतीजे सामने आए हैं उनमें मात्र छह नमूनों में प्रतिबंधित पदार्थ पाए गए हैं। आज 28 अगस्त तक जिन 723 नमूनों की जांच रिपोर्ट सामने आई है उनमें से 374नमूने मानक स्तर के पाए गए हैं। नमूनों में से 277 जांच में अवमानक निकले हैं। ब्रांड की कसौटी पर 27 को मिथ्या ब्रांड पाया गया है। यानि कि उन्हें बेचने के लिए ब्रांड नाम की अनुमति नहीं ली गई थी। 23 सैंपलों में मिलावट पाई गई है, यानि उनमें पाम आईल या अन्य खाद्यान्नों के अंश पाए गए हैं। सोलह नमूनों को असुरक्षित पाया गया है उनमें यूरिया या डिटर्जेंट पाऊडर जैसे पदार्थों के अंश पाए गए हैं।

    केवल छह नमूनों में प्रतिबंधित पदार्थों की मौजूदगी पता चली है।ये नमूने उन्हीं व्यापारियों से बरामद हुए हैं जिनके बारे में लंबे समय से नकली खाद्यान् बनाने की शिकायतें मिलती रहीं थीं। इन्हीं की आड़ में सरकार ने धड़ाधड़ छापेमारी करके पूरे प्रदेश में भय का वातावरण निर्मित कर दिया। बीते राखी के त्यौहार के दौरान या तो उपभोक्ताओं ने इन खाद्यान्नों का इस्तेमाल नहीं किया या फिर उन्होंने ब्रांडेड कंपनियों के खाद्य पदार्थ खरीदकर त्यौहार मनाया।

    गौरतलब है कि राज्य सरकार के पास इतने बड़े अभियान को चलाने लायक अमला नहीं है। फूड लेबोरेटरी में रेंडम सैंपल लेने और जांच करने की व्यवस्था है लेकिन एक साथ हजारों नमूनों की तत्काल जांच की सुविधा नहीं है। इसके बावजूद सरकार ने न केवल अभियान चलाकर व्यापारियों पर हल्ला बोला बल्कि कई जिलों के कलेक्टरों ने व्यापारियों के विरुद्ध रासुका के अंतर्गत कार्यवाही करके भय का माहौल बना दिया है।

    राखी के अवसर पर व्यापारियों ने ज्ञापन देकर अनुरोध किया था कि खादय नमूनों को दूकानों से लिया जाए। परिवहन के दौरान जो नमूने लिए जाते हैं उनसे विक्रेताओं की धरपकड़ नहीं हो पाती है। इससे न ही खाद्यान्न निर्माताओं की पहचान संभव हो पाती है। व्यापारियों का कहना है कि खाद्य अमले ने इसके बाद रणनीति बदली थी लेकिन इस पूरे अभियान से कच्चा धंधा करने वाले व्यापारियों को खासी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। जबकि ये अभियान ईमानदार व्यापारियों को परेशान किए बगैर भी चलाया जा सकता था।

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  • बिजली मंहगी कर खरीदे जाएंगे नए मीटर

    बिजली मंहगी कर खरीदे जाएंगे नए मीटर

    भोपाल।मध्यप्रदेश में बिजली बिल हाफ करने का वादा करके सत्ता में लौटी कांग्रेस सरकार ने अगले महीने से उपभोक्ताओं को मंहगी बिजली बेचने की तैयारी कर ली है। खजाना खाली होने का हवाला देकर सरकार ने अठारह हजार करोड़ रुपए के घाटे को पाटने और बिजली मीटरों की खरीद के लिए पैसा जुटाने के लिए बिजली के दाम बढ़ाने का फैसला लिया है। लगातार बढ़ती वितरण क्षति को पाटने की जवाबदारी भी अब आम उपभोक्ता को उठाना पड़ेगी।

    बिजली मंत्री प्रियव्रत सिंह की सिफारिशों को मुख्यमंत्री कमलनाथ ने अनुमति देकर बिजली कंपनियों को अतिरिक्त धन जुटाने की ये जवाबदारी सौंपी है। सरकार ने इसी साल नवंबर महीने तक पूरे बिजली कनेक्शनों पर नए मीटर लगाने की समय सीमा तय की है। इसके लिए बिजली कंपनियों को अतिरक्त धन राशि की जरूरत थी। जिसे बढ़ी दरों से ही जुटाया जाएगा। उपभोक्ताओं को सस्ती बिजली दिलाने के लिए सरकार सब्सिडी दे सकती थी लेकिन सरकार ने उपभोक्ताओं से ही ये धन जुटाने की तैयारी की है।

    मध्य प्रदेश विद्युत नियामक आयोग ने बिजली कंपनियों की सिफारिशों को मानते हुए बिजली की दरों में सात फीसदी दाम बढ़ाने की अनुमति दे दी है।इसके बाद सरकार की अनुमति से बिजली मंडल ने घरेलू, गैर घरेलू और व्यावसायिक उपभोक्ताओं की बिजली दरों में इजाफा किया है। नई दरें 17 अगस्त से लागू होंगी। राज्य की बिजली कंपनियों ने बिजली दरों में 12 प्रतिशत की बढ़ोत्तरी की मांग की थी,मगर आयोग ने बिजली दरों में सात प्रतिशत तक की बढ़ोत्तरी की अनुमति दी है। इससे राज्य के लोगों को अब सितंबर माह से बिजली के ज्यादा दाम चुकाने होंगे।

    नई बिजली दरों का फैसला गुरुवार की रात को आयोग ने किया। नई दरों के अनुसार, घरेलू कनेक्शन की बिजली दरें 5.1 प्रतिशत, गैर घरेलू कनेक्शन की दर में 4.9 प्रतिशत और व्यावसायिक कनेक्शन की दरों में सात प्रतिशत तक का इजाफा किया गया है।

    आयोग ने बिजली उपभोक्ताओं के लिए पांच स्लैब तय किए हैं, जिसके मुताबिक घरेलू उपभोक्ता को मासिक 30 यूनिट तक का उपयोग करने पर 3.25 रुपये प्रति यूनिट, 50 यूनिट तक बिजली के उपयोग पर 4.05 रुपये प्रति यूनिट, 51 से 150 यूनिट के उपयोग पर दर 4.95 रुपये प्रति यूनिट, 151 यूनिट से 300 यूनिट के उपयोग पर 6.30 रुपये प्रति यूनिट और 300 यूनिट से ज्यादा बिजली का उपयेाग करने पर 6.50 रुपये प्रति यूनिट की राशि का भुगतान करना होगा।

    आयोग बिजली दरों के निर्धारण के लिए बनाए गए पांच स्लैब पर नजर दौड़ाई जाए तो पता चलता है कि पुरानी दरों के मुकाबले 20 से 30 पैसे प्रति यूनिट तक इजाफा हुआ है। पहले चार स्लैब थे, अब पांच स्लैब बनाए गए हैं।

    एक तरफ जहां बिजली दरों में बढ़ोत्तरी की गई है, वहीं वैवाहिक उद्यानों, सामाजिक व वैवाहिक कार्यक्रमों के आयोजन, धार्मिक समारोह के लिए अस्थाई बिजली कनेक्शनों की दरों में कोई बदलाव नहीं किया गया है।

    इसी तरह ई-वाहन और ई-रिक्शा के चार्जिंग केंद्र की बिजली दरें भी पूर्ववत रखी गई हैं। इसके साथ ही कृषि उपभोक्ताओं को सब्सिडी के अतिरिक्त प्रति हार्सपावर प्रति वर्ष 700 रुपये का भुगतान करना होगा, जबकि 10 हार्सपॉवर से ज्यादा के कृषि उपभेाक्ताओं को सब्सिडी के अतिरिक्त प्रति वर्ष 1400 रुपये का भुगतान करना होगा।