Category: अर्थ संसार

  • फार्मा सेक्टर की समस्याओं का निराकरण शीघ्रःसंजय जैन

    फार्मा सेक्टर की समस्याओं का निराकरण शीघ्रःसंजय जैन


    भोपाल,15 अगस्त(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर).मध्यप्रदेश फार्मेसी काऊंसिल के अध्यक्ष संजय जैन ने कहा है कि राज्य सरकार फार्मा उद्योग की मौजूदा जरूरतों और समस्याओं पर गंभीरता से ध्यान रख रही है और जल्दी ही इस क्षेत्र से जुड़े लोगों को विश्व स्तरीय सुविधाएं मिलने लगेंगी। स्वाधीनता दिवस आयोजन में राष्ट्रध्वज फहराने पहुंचे श्री संजय जैन ने कहा कि मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डाक्टर मोहन यादव भारत सरकार के आर्थिक सुधारों को तेजी से लागू कर रहे हैं जिससे जनता को राहत मिलेगी।


    मध्यप्रदेश फार्मेसी काऊंसिल और भोपाल केमिस्ट एसोसिएशन के परिसरों में झंडा वंदन के दौरान देशभक्ति के भाव से सराबोर उद्यमियों ने जोरदार नारे लगाकर राष्ट्र की आराधना की। श्री संजय जैन ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जिस तरह राजनीति को परिवार की बपौती बनाने वालों को चुनौती देने के लिए आम नागरिकों से राजनीति में आने का आव्हान कर रहे हैं उसी तरह मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डाक्टर मोहन यादव सत्ता माफिया पर चोट करके प्रदेश की तरुणाई को मुख्य धारा में लाने का अभियान चला रहे है। देश नई करवट ले रहा है इसलिए मध्यप्रदेश में के दवा निर्माताओं और व्यापारियों के बीच संवाद स्थापित किया जा रहा है।उपमुख्यमंत्री स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण श्री राजेन्द्र शुक्ल के माध्यम से प्रदेश में राष्ट्रीय स्तर की शिक्षा का केंद्र प्रारंभ करने के लिए एक प्रस्ताव भारत सरकार को भेजा गया है। श्री शुक्ल ने फार्मेसी की पढ़ाई और प्रशिक्षण के लिए फार्मेसी काऊंसिल के माद्यम से देश और प्रदेश स्तर पर फार्मा सेक्टर को बल देने के लिए कई योजनाएं बनवाई हैंं। इसका लाभ नई पीढ़ी के फार्मासिस्टों को मिलेगा।


    उन्होंने कहा कि भारत के दवा उद्योग को वैश्विक चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है लेकिन मध्यप्रदेश के दवा निर्माता और व्यापारी आम जनता को कम कीमत में अच्छी गुणवत्ता वाली दवाएं मुहैया कराने का प्रयास कर रहे हैं। प्रधानमंत्री जन औषधि योजना के प्लेटफार्म पर भी मध्यप्रदेश में निर्मित दवाओं ने अपनी भागीदारी शुरु कर दी है। इस देशव्यापी नेटवर्क से हम राज्य और देश के लिए पूंजी निर्माण का अनुष्ठान कर रहे हैं. इसमें आम फार्मासिस्ट और दवा निर्माताओं की सक्रिय भागीदारी है।


    श्री जैन ने कहा कि कुछ इलाकों में फार्मासिस्टों को पंजीयन संबंधी समस्याओं का सामना करना पड़ा है ।काऊंसिल ने अपनी कार्यप्रणाली में सुधार शुरु किए हैं। जल्दी ही आम फार्मासिस्टों को कई सुविधाएं घर बैठे पारदर्शी तरीके से मिलने लगेंगी।
    फार्मेसी काऊंसिल के झंडा वंदन कार्यक्रम में श्री संजय जैन के साथ काऊंसिल के उपाध्यक्ष श्री राजू चतुर्वेदी और फार्मेसी काऊंसिल की रजिस्ट्रार सुश्री माया अवस्थी ने भाग लिया। काऊंसिल के सभी कर्मचारी और अधिकारी भी इस अवसर पर उपस्थित थे।


    भोपाल केमिस्ट एसोसिएशन की ओर से आयोजित स्वाधीनता दिवस कार्यक्रम में वरिष्ठ व्यापारियों को सम्मानित किया गया। मप्र फार्मेसी काऊंसिल के अध्यक्ष संजय जैन ने लगभग पचहत्तर वर्ष से अधिक उम्र के केमिस्टों को प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया। कार्यक्रम में एसोसिएशन के अध्यक्ष जितेन्द्र धाकड़, सचिव विवेक खंडेलवाल, अनिल कुमार जैन,राहुल नगाइच, सुहाग सिंह तोमर, अनिरुद्ध पारे, विक्रम शेरवानी, मनोज शर्मा, सुनील कुमार गुप्ता एवं दवा बाजार और राजधानी के दवा व्यापारी भी उपस्थित थे।

  • सब्सिडी देकर मोदी ने देश को सोलर बिजली का दीवाना बनाया

    सब्सिडी देकर मोदी ने देश को सोलर बिजली का दीवाना बनाया


    भोपाल,28 जुलाई(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की पहल पर सोलर बिजली प्लांट लगाने के लिए जो सब्सिडी देने की योजना चलाई गई है उसके प्रति लोगों की दीवानगी बढ़ती जा रही है। लोगों ने अपने घरों पर सोलर बिजली प्लांट लगाना शुरु कर दिए हैं और उस बिजली से वे घरों को रोशन करने के साथ साथ मुफ्त परिवहन का भी आनंद उठा रहे हैं। केंद्र सरकार ने इस परियोजना पर 75,000 करोड़ रुपये से अधिक की सब्सिडी देने का लक्ष्य निर्धारित किया है। एनडीए सरकार इस अभियान में हर महीने 300 यूनिट तक मुफ्त बिजली प्रदान करने के साथ-साथ 1 करोड़ घरों को रोशन करके भारत की ऊर्जा जरूरतों का नया इतिहास लिखने जा रही है।
    पब्लिक रिलेशंस सोसायटी आफ इंडिया,भोपाल ने इस विषय पर आज एक सेमिनार का आयोजन किया। इसमें मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी लिमिटेड के उप मुख्य महाप्रबंधक (एनएसई) सौरभ श्रीवास्तव ने एक समारोह में बताया कि वे किस तरह इस योजना में सब्सिडी का लाभ लेकर अपनी ऊर्जा जरूरतें पूरी कर सकते हैं और बिजली कंपनी को अतिरिक्त बिजली बेचकर अपनी आय भी बढ़ा सकते हैं। उन्होंने बताया कि बिजली कंपनी के पोर्टल और वेवसाईट पर इस योजना की लिंक दी गई है। इस पर आवेदन करके घर बैठे वे अपने घरों पर सोलर बिजली प्लांट लगवा सकते हैं। सरकार एक किलोवाट बिजली प्लांट पर तीस हजार रुपए ,दो किलोवाट के बिजली प्लांट पर साठ हजार रुपए और तीन किलोवाट बिजली प्लांट पर 78 हजार रुपए सब्सिडी दे रही है। इससे ज्यादा क्षमता वाले बिजली प्लांटों पर सब्सिडी 78 हजार रुपए ही रहेगी।
    उन्होंने बताया कि इन घरेलू बिजली प्लांटों से प्राप्त बिजली से घर की लाईट ,एसी ,गीजर और हीटर भी चलाए जा सकते हैं। इस बिजली से इलेक्ट्रिक वाहनों की बैटरी भी चार्ज की जा सकती है। इससे बिजली के साथ परिवहन के ईंधन की भी बचत की जा सकती है। उन्होंने बताया कि भारत सरकार ईंधन के आयात पर हर साल लाखों करोड़ रुपए खर्च करती है। घरेलू बिजली से जहां पर्यावरण की रक्षा की जा सकेगी वहीं देश को ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर भी बनाया जा सकेगा। उन्होंने बताया कि काफी अनुसंधान के बाद ऐसे फोटो वोल्टिक सेल भी अब बाजार में आने लगे हैं जिनसे बादलों की मौजूदगी के बीच भी बिजली बनाई जा सकती है।
    वरिष्ठ पत्रकार गिरिजा शंकर ने कहा कि पर्यावरण की रक्षा के साथ देश की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने की दिशा में ये महत्वाकांक्षी योजना है। लोगों को आगे बढ़कर इस योजना का लाभ उठाना चाहिए। इस योजना के अधिक प्रचार प्रसार की भी जरूरत है जिससे लोग अपनी ऊर्जा जरूरतों को लेकर आत्मनिर्भर हो सकेंगे।
    इस परियोजना से जुड़े मोंटाज इंफ्रा पावर प्राईवेट लिमिटेड के निदेशक ओम प्रकाश मेहरा ने बताया कि अब देश में ही निर्मित उच्च क्वालिटी के सोलर पैनल अधिक बिजली का उत्पादन कर रहे हैं। सोलर पैनलों के छाया वाले पृष्ठ पर भी अब ऐसे फोटो वोल्टिक सेल लगाए जाते हैं जो आसपास की धूप से भी बिजली का उत्पादन करते हैं। इससे सोलर प्लांटों की क्षमता में इजाफा हुआ है। भारत में लगभग तीन सौ दिनों तक धूप उपलब्ध होती है। इससे बिजली का उत्पादन सरलता से हो जाता है।
    कार्यक्रम के आयोजक और पीआरएसआई के अध्यक्ष मनोज द्विवेदी ने कहा कि भारत सरकार की इस योजना पर मध्यक्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी ने गंभीरता से अमल शुरु किया है। इससे प्रदेश की बिजली की मांग को नियंत्रित करने में सफलता मिली है। आगे आने वाले समय में हम सोलर बिजली का ऐसा नेटवर्क तैयार करने में सफल होंगे जिससे भारत ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बन जाएगा। पीआरएसआई के सचिव पंकज मिश्रा ने सभी अतिथियों और आगंतुकों के प्रति आभार व्यक्त किया। संस्था के कोषाध्यक्ष के.के.शुक्ला ने अतिथियों के सत्कार और गोष्ठी की व्यवस्था का दायित्व संभाला।

  • सरकारी छूट से मुनाफे का उद्यम चलाना सिखाएगा सैडमैप

    सरकारी छूट से मुनाफे का उद्यम चलाना सिखाएगा सैडमैप

    55 जिलों में 37 सेक्टर में निशुल्क अत्याधुनिक पाठ्यक्रम

    भोपाल11 मई(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)। बेरोजगारी दूर करने और युवाओं को अपने पैरों पर खड़ा करने के लिए उद्यमिता विकास केंद्र मध्य प्रदेश (सेडमैप) सभी पचपन जिलों में लगभग सैंतीस प्रकार के उद्यम शुरु करने के लिए प्रशिक्षण देने जा रहा है। जिला व्यापार एवं उद्योग केन्द्र (डीआईसी) अंतर्गत संचालित शासकीय स्वरोजगार योजनाओं की सब्सिडी का लाभ युवाओं को तभी मिल पाता है जब वे किसी भी विधा में विधिवत प्रशिक्षण प्राप्त कर चुके हों। सैडमेप ने एक व्यापक कार्यक्रम तैयार किया है जिसमें छोटा व्यवसाय शुरु करने जा रहे उद्यमियों के लिए, व्यावसायिक उद्यमों की स्थापना को सुविधाजनक बनाने और मौजूदा व्यावसायिक इकाइयों के विकास को बढ़ावा देने के गुर सिखाए जाएंगे। पाठ्यक्रम में अध्ययन सामग्री, वीडियो आधारित ट्यूटोरियल, केस-आधारित उदाहरण भी शामिल होते हैं। केंद्र की ओर से डीएलईसी फोरलेन फार्मूला आधारित ‘सर्टिफिकेट इन बिजनेस स्किल, डिसेंट्रलाइजेशन, लोकल, एंटरप्रेन्योरशिप तथा कोऑपरेशन’ के साथ ‘फैकल्टी डेवलपमेंट प्रोग्राम सर्टिफिकेट’ का संयुक्त संचालन भी किया जा रहा है। 

    इस संदर्भ में जानकारी देते हुए सेडमैप की कार्यकारी संचालक श्रीमती अनुराधा सिंघई ने बताया कि इसके लिए संयुक्त रूप से एक कोर्स ‘ज्ञान हैंडबुक’ डिजाइन किया गया है जिसमें 37 विभिन्न सेक्टर से सम्बंधित उद्यमिता के आयाम को सम्मिलित किया गया है । साथ में वरिष्ठ विषय विशेषज्ञों एवं अधिकारियों के माध्यम से भी इसमें युवाओं को मार्गदर्शन उपलब्ध कराया जाएगा। सबसे बड़ी बात तो ये है कि इच्छुक युवा इस प्रशिक्षण को ऑनलाइन माध्यम से घर बैठे भी पा सकते हैं और प्रमाण-पत्र भी निःशुल्क डाउनलोड कर सकते हैं। प्रत्येक विषय पर जानकारी के साथ प्रत्येक वीडियो  यूटूयूब पर उपलब्ध रहेगा। 

    श्रीमती अनुराधा सिंघई ने बताया कि पाठ्यक्रम में उद्यमिता के उभरते हुए अनेक सेक्टर को सम्मिलित किया गया है. जिसमें प्रमुख रूप से वनौषधि- आयुष एपीआई, 64-कलाओं, सोलह सिंगार, हर्बल, 108 जड़ी-बूटी, मोटा अनाज, 108 भारतीय मसाला, जनजातीय उद्यमिता, हथकरघा-बुटीक, गोबर उत्पाद, पूजन सामग्री, फूड प्रोसेसिंग, भारतीय शिल्प, अलाइड डेयरी, मिलेट बेकरी, महुआ, जैव उर्वरक, घरेलू / दैनिक उपयोग की वस्तुओं, बायोप्लास्टिक, स्पोर्ट्स, योग-नेचुरोपैथी पर्यटन उद्यमिता तथा अन्य सम्बंधित उपसेक्टर शामिल है। जल और ऊर्जा स्वराज के साथ एग्रोएंटरप्रेन्योर तैयार करना, विकसित मध्य प्रदेश, फूड प्रोस‍ेसिंग हब, एग्रोप्रेनर ग्रामीण अर्थव्यवस्‍था के नए इंजन, न्‍यूट्री हब, श्रीअन्‍न सुपरफूड को वर्ल्डवाइड एक्सपोर्ट,  छोटे किसानों के लिए मिलेट्स (श्रीअन्‍न) आधारित उद्यमिता, सौर उर्जा ट्यूबवेलों, कृषि‍ मशीनरी और उपकरण आधारित उद्यमिता, पीएम कि‍सान समृद्धि का वि‍स्‍तार, ड्रोन-कृषि-सैटेलाइट उद्यमिता के क्षमता निर्माण होने से उपज के प्रभावी मार्केटिंग के लिए नए आयामों को स्थापित करना शामिल है।

    श्रीमती अनुराधा सिंघई ने बताया कि इसमें संयुक्त रूप से स्वावलंबी भारत अभियान, मिनिस्ट्री ऑफ़ इलेक्ट्रॉनिक्स एंड इंफॉरमेशन टेक्नोलॉजी भारत सरकार प्रोजेक्ट राष्ट्रीय जनजातीय विश्वविद्यालय अमरकंटक, मध्य प्रदेश जन अभियान परिषद म.प्र. सरकार, आईसीएआर-अटारी जबलपुर, एकल ग्रामोत्थान फाउंडेशन, स्वर्णिम भारतवर्ष फाउंडेशन के संयुक्त तत्वाधान में भारत के सवा सौ करोड़ ‘ज्ञान’ जी फॉर गरीब, वाई फॉर युवा, ए फॉर अन्नदाता (किसान), एन फॉर नारीशक्ति (महिला) पर ध्यान कर डीएलईसी फार्मूला डिसेंट्रलाइजेशन (विकेंद्रीकरण), लोकल (स्वदेशी), एंटरप्रेन्योरशिप (उद्यमिता), कोऑपरेशन (सहकारिता) आधारित अत्याधुनिक पाठ्यक्रम का नि:शुल्क संचालन किया जा रहा है।  

    श्रीमती अनुराधा सिंघई ने यह भी बताया कि अहिल्याबाई होल्कर जन्म त्रिशताब्दी वर्ष को देखते हुए क्षमता सम्‍वर्धन के इस कार्यक्रम में कुटुंब प्रबोधन और नागरिक शिष्टाचार के साथ स्वदेशी उत्पादन बढ़ाने के लिए स्थानीय संसाधन का पर्यावरण हितैषी के रूप में उपयोग एवं सामजिक समरसता को ध्यान में रखकर सहकारिता आधारित आउट ऑफ बॉक्स थिंकिंग वाले उद्यमिता के माध्यम से क्लास बी और क्लास सी कैटेगरी के स्वदेशी उत्पादों से बड़े पैमाने पर इंपोर्ट कम तथा एक्सपोर्ट को बढ़ावा देने सम्मिलित किया गया है। पंच परिवर्तन के सूत्र सामाजिक समरसता, कुटुंब प्रबोधन, पर्यावरण संरक्षण, स्व का जागरण तथा नागरिक शिष्टाचार का पालन करते हुए उद्यमिता पारिस्थितिकी तंत्र उद्यमिता का निर्माण प्रायोगिक रूप में कराने का प्रशिक्षण भी इस पाठ्यक्रम में शामिल है। 

  • फार्मा उद्योग में क्रांतिकारी साबित होगी नई शिक्षा नीतिःसंजय जैन

    फार्मा उद्योग में क्रांतिकारी साबित होगी नई शिक्षा नीतिःसंजय जैन


    भोपाल,06 मार्च(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)। पांच लाख करोड़ रुपयों की अर्थव्यवस्था का लक्ष्य पूरा करने में भारत का फार्मा उद्योग बड़ी भूमिका निभाने जा रहा है। नई शिक्षा नीति के माध्यम से फार्मेसी की पढ़ाई में उद्योंगों की सीधी भागीदारी बढ़ाकर हम भारत और दुनिया के लिए बेहतर फार्मासिस्ट तैयार कर रहे हैं। मध्यप्रदेश फार्मेसी काऊंसिल के अध्यक्ष और फार्मेसी काऊंसिल आफ इंडिया के सदस्य संजय जैन ने भोपाल के सैम कालेज आफ फार्मेसी की ओर से होटल रैडिसन में आयोजित सेमिनार में ये कहा। राष्ट्रीय फार्मेसी शिक्षण दिवस के अवसर पर आयोजित फार्मा अन्वेषण नामक इस विचार मंथन शिविर में उद्योगों से जुड़े अनेक वक्ताओं ने भी फार्मा सेक्टर को मजबूत बनाने के मंत्र सुझाए।
    सैम ग्लोबल विश्वविद्यालय की चांसलर प्रीति सलूजा, सैमं विश्विद्यालय के कुलगुरु डॉ.आर.के.रघुवंशी,मुख्य अतिथि के रूप में पधारे फार्मेसी काऊंसिल आफ इंडिया की शिक्षा नियंत्रण समिति के चेयरमेन डॉ.दीपेन्द्र सिंह, सर हरिसिंह गौर केन्द्रीय विश्वविद्यालय सागर के फार्मेसी विभाग के प्रोफेसर एस.के.जैन ने भी अपने विचार व्यक्त किए। सैम फार्मेसी कालेज के प्राचार्य डॉ.शैलेश जैन ने विषय का प्रवर्तन करते हुए नई शिक्षा नीति के लागू होने के बाद फार्मेसी के अध्ययन और अध्यापन में आ रहीं चुनौतियों की ओर सभी वक्ताओं का ध्यान आकर्षित किया। कार्यक्रम की शुरुआत भारत में फार्मेसी की शिक्षा के जनक प्रोफेसर स्वर्गीय एम.एल. सराफ के चित्र पर दीप जलाकर सभी अतिथियों ने पुष्प अर्पित किए । सरस्वती पूजन के बाद उद्घाटन सत्र का शुभारंभ हुआ।
    मध्यप्रदेश सरकार के प्रतिनिधि के रूप में मध्यप्रदेश फार्मेसी काऊंसिल के अध्यक्ष संजय जैन ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ.मोहन यादव ने उच्च शिक्षा मंत्री रहते हुए नई शिक्षा नीति को लागू करवाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया था। अब वे उज्जैन के नजदीक विकसित किए जा रहे सर्जिकल उपकरणों के विशेष औद्योगिक क्षेत्र के माध्यम से फार्मा सेक्टर को मजबूती प्रदान कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि फार्मेसी काऊंसिल आफ इंडिया के अध्यक्ष मोंटू पटेल ने भारत सरकार से फार्मा उद्योग में आ रहीं अड़चनें दूर करवाने में बड़ी भूमिका निभाई है। आजादी के बाद उद्योग की जरूरतों के मद्देनजर कोई सहयोगी कानून नहीं थे। फार्मेसी एक्ट 1948 का बना हुआ था। अब संसद ने नए फार्मेसी अधिनियम को मंजूरी प्रदान कर दी है।
    उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने प्रधानमंत्री जन औषधि के माध्यम से आम जनता को सस्ती और गुणवत्ता पूर्ण औषधियां उपलब्ध कराने की पहल की है। मध्यप्रदेश के एक युवा आकाश जी ने सभी जिलों में दवाईयों की सप्लाई की प्रणाली को आधुनिक स्वरूप प्रदान किया है। पीथमपुरा में बन रहीं दवाईयां विदेशों को सप्लाई की जा रहीं हैं और देश की आय बढ़ाने में अपना महत्वपूर्ण योगदान दे रहीं हैं। उन्होंने सैम विश्वविद्यालय और फार्मेसी कालेज के शिक्षकों और विद्यार्थियों को एक महत्व पूर्ण अनुष्ठान में सक्रिय भागीदारी निभाने के लिए बधाई और शुभकामनाएं भी दीं।
    फार्मेसी काऊंसिल आफ इंडिया की शिक्षा समिति के अध्यक्ष दीपेन्द्र सिंह ने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस ने फार्मेसी शिक्षण की सामग्री को इतना सहज बना दिया है कि जो जानकारियां ढूंढ़ने में हमें कई दिन लग जाते थे अब वे जानकारियां चुटकियों में हासिल की जा सकती है। यही वजह है कि दवाईयां बनाने में कम समय लग रहा है। उन्होंने कहा कि भारत का औषधि क्षेत्र पहले बहुत विकसित रहा है। हमारे विद्यार्थी शिक्षा पाने के लिए गुरुकुलों में जाते थे, जहां विद्यार्थी की अभिरुचि और क्षमता के अनुसार उसे काम दिया जाता था। नई शिक्षा नीति 2020 के लागू होने के बाद एक बार फिर शिक्षा का वही दौर लौटेगा। अब व्यावहारिक शिक्षा के लिए विद्यार्थी को शिक्षक से ज्ञान अर्जित करने में आसानी होगी। यह शैक्षणिक पद्धति विद्यार्थी को अपने विषय चयन करने और बदलने की आजादी देती है। इतने विशाल कैनवास पर अध्यापन होने से शिक्षण का कार्य बहुत चुनौतीपूर्ण भी हो गया है।
    उन्होंने कहा कि हमें ऐसे लोगों के लिए दवाईयां बनानी होती हैं जो तनाव और बीमारियों से जूझ रहे हैं। जाहिर है इसके लिए हमें आम लोगों के मनोविज्ञान को भी समझना पड़ता है। हम शरीर के लिए उपयोगी रसायनों के साथ साथ संगीत और खुशबू से जुड़ी चिकित्सा विधियों के लिए भी दवाईयां बनाते हैं। पहले देश में फार्मेसी के चार कालेज हुआ करते थे अब लगभग सात हजार कालेज हैं। ऐसे में विद्यार्थी तो बहुत हैं लेकिन गुणवत्ता पूर्ण फार्मासिस्ट तैयार करना आज के फार्मा सेक्टर के लिए चुनौती बन गया है। श्री सिंह ने कहा कि फार्मेसी काऊंसिल आफ इंडिया ने लगभग तीस बड़ी फार्मा कंपनियों से अनुबंध किया है ताकि वे उद्योगों के लिए जरूरी शैक्षणिक सामग्री और योग्य प्रशिक्षक उपलब्ध करवाकर अच्छे फार्मासिस्ट बनाने में अपना योगदान दे सकें।
    डॉ.सर हरिसिंह गौर विवि के फार्मेसी विभाग के प्रोफेसर एस.के.जैन ने कहा कि हम फार्मा सेक्टर के अनुसंधान कर्ताओं और सफल फार्मासिस्टों के माध्यम से बेहतर फार्मासिस्ट तैयार कर रहे हैं। नई शिक्षा नीति ने जिस व्यापकता के साथ पाठ्यक्रमों को लचीला बनाया है उससे विद्यार्थियों को उनकी रुचि के अनुरूप काम चुनने की आजादी मिलने लगी है। सैम यूनिवर्सिटी जैसे कई विश्वविद्यालय फार्मेसी के शिक्षण को गुणवत्ता प्रदान कर रहे हैं उससे आने वाले समय में हमारा देश फार्मा सेक्टर का पुरोधा बन जाएगा।
    सैम विश्वविद्यालय की चांसलर इंजी.प्रीति सलूजा ने कहा कि पीसीआई ने सैम फार्मेसी कालेज को देश के फार्मेसी शिक्षण के लिए पाठ्यक्रम अनुसंधान का अवसर दिया है इसके लिए हम उनके प्रति आभारी हैं। श्री सिंह के साथ पीसीआई के सदस्य संजय जैन की पारखी निगाहों ने सैम कालेज को इस महत्वपूर्ण जिम्मेदारी निभाने के लिए अनुकूल पाया तभी हम देश के शैक्षणिक विकास में अपना योगदान दे पा रहे हैं। गौर विश्वविद्यालय सागर के प्रोफेसर एस.के.जैन के अनुभवी मार्गदर्शन से हम फार्मेसी शिक्षण के लिए महत्वपूर्ण साफ्टवेयर बनाने जा रहे हैं। भारत सरकार ने जिस खुलेपन की नीति पर अमल शुरु किया है उससे हमारे गांवों के प्रतिभाशाली बच्चे भी आगे आकर विश्व का नेतृत्व करने के लिए तैयार हो रहे हैं। जल्दी ही हमारे देश में पूरी दुनिया की जरूरतें पूरी करने वाली जेनरिक दवाईयां बनने लगेंगी। इससे हम मानवता के प्रमुख प्रहरी के रूप में सामने होंगे। हमारे फार्मासिस्ट नैतिक भी हैं और तकनीक से सुसज्जित उद्यमी के रूप में भी सामने आ रहे हैं।
    कार्यक्रम के पहले सत्र में सैम विवि की चांसलर इंजी. प्रीति सलूजा ने फार्मेसी काऊंसिल आफ इंडिया केशिक्षा समिति के अध्यक्ष दीपेन्द्र सिंह को स्मृति चिन्ह और शाल श्रीफल भेंटकर सम्मानित किया। मध्यप्रदेश फार्मेसी काऊंसिल के अध्यक्ष संजय जैन को कुलगुरु आर.के.रघुवंशी ने शाल श्रीफल और स्मृति चिन्ह भेंटकर सम्मानित किया। प्रोफेसर एस.के.जैन को सैम कालेज के प्राचार्य शैलेश जैन ने स्मृति चिन्ह, शाल और श्रीफल भेंटकर उनका अभिनंदन किया। दूसरे सत्र में सभी विशेषज्ञों और आमंत्रितों ने फार्मेसी के शिक्षण में आ रहीं चुनौतियों को दूर करने में अपने समाधान प्रस्तुत किए। इनमें पाठ्यक्रम की व्यापकता और व्यावहारिकता दोनों पर विमर्श किया गया।

  • समाजसेवा में अडंगा आए तो शीर्षासन कराते हैं बाबा रामदेव


    योगशिविर में आए पतंजलि आयुर्वेद के स्वामी परमार्थदेव गरजे


    भोपाल,09 जनवरी(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)। स्वामी बाबा रामदेव ने ऋषि मुनियों की देन भारतीय योग पद्धति को पुर्नजीवित करके समाजसेवा का सफल मॉडल खड़ा किया है। बहुराष्ट्रीय कंपनियों की आड़ में जिन लुटेरों ने इस अनुष्ठान में व्यवधान डालने की कोशिश की उन्हें पूज्य स्वामी जी ने शीर्षासन करा दिया। आज वे अपनी दुर्दशा पर आंसू बहा रहे हैं। पतंजलि फूड्स के माध्यम से हमने आम जनता को अपना भागीदार बनाया है। हम देश से प्राप्त संसाधनों को देश के विकास पर खर्च कर रहे हैं। ये हमारी देश भक्ति है और इसमें देश के उद्यमी अपनी हिस्सेदारी दर्ज करा रहे हैं। हमारा उद्देश देश को स्वस्थ और समृद्ध बनाना है। अपना लक्ष्य हम पाकर ही रहेंगे। राजधानी में आए पतंजलि योगपीठ ट्रस्ट हरिद्वार के डॉक्टर स्वामी परमार्थ देव ने पत्रकार वार्ता में सवालों का जवाब देते हुए ये बात कही। वे यहां सुभाष एक्सीलेंस स्कूल में आयोजित योग शिविर में शामिल होने राजधानी पहुंचे हैं।


    पतंजलि योगपीठ ट्रस्ट के प्रकल्पों पर लगाए जा रहे आरोपों का तीखा प्रतिकार करते हुए स्वामी परमार्थदेव ने कहा कि हमारा लक्ष्य समाजसेवा है और हम इसमें आधुनिक व्यापार प्रबंधन की तकनीकों का प्रयोग कर रहे हैं। यही वजह है कि आज हम आम परिवारों को स्वस्थ बनाने में कामयाब हुए हैं। देश को आर्थिक महाशक्ति बनाने के अभियान में हम सबसे सबल मॉडल के रूप में उभरे हैं। हमारी प्रगति से उन लोगों को हैरानी हो रही है जो अपने उत्पादों के माध्यम से आम जनता को ठग रहे थे। हम अपने प्रतिद्वंदियों के षड़यंत्रों को अच्छी तरह समझते हैं इसलिए हमारे उत्पाद गुणवत्ता के पैमाने पर चोखे हैं। कभी हमारे ऊपर छह छह सौ मुकदमे लादे गए लेकिन हम सभी में बेदाग होकर आगे आए हैं। हमारी सफलता के पीछे आम जनता की शक्ति है, यही वजह है कि हम अपने लक्ष्यकी ओर लगातार बढ़ते जा रहे हैं।


    पतंजलि फूड्स पर सेबी की आपत्तियों के बारे में उन्होंने कहा कि आर्थिक मॉडल में कई छोटी त्रुटियां रह जाती हैं जिन्हें हम सेबी, या अन्य आर्थिक गतिविधियों की नियंत्रक संस्थाओं के मार्गदर्शन में सुधारते जा रहे हैं। हमने अपने कारोबार में कई संस्थाओं और नागरिकों को हिस्सेदार बनाया है। उनकी खामियों के आरोप भी हमारे ऊपर लगा दिए जाते हैं जबकि हमने जो आर्थिक मॉडल अपनाया है उसमें देशसेवा और स्वाधीनता की खनक है।


    भारत स्वाभिमान न्यास और पतंजलि योग समिति के प्रांतीय कार्यालय प्रबंधक टी.एस.बावल ने बताया कि राजधानी में आयोजित विशाल योग शिविर में भारत स्वाभिमान,पतंजलि योग समिति, महिला पतंजलि योग समिति, युवा भारत, पतंजलि किसान सेवा समिति, हमरो स्वाभिमान संगठन, के कार्यकर्ता साधक, स्कूली बच्चे, आध्यात्मिक संगठन, सामाजिक संगठन व गणमान्य नागरिक ठंड और कोहरे के बावजूद बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।


    इस अवसर पर योग आयोग के अध्यक्ष वेद प्रकाश शर्मा, संगठन के प्रदेश संरक्षक अरुण मेहरोत्रा, भारत स्वाभिमान संगठन के प्रदेश प्रभारी करण सिंह पंवार, पतंजलि योग समिति की प्रदेश प्रभारी डॉक्टर पुष्पांजलि शर्मा, भारत स्वाभिमान के प्रदेश प्रभारी, राजेन्द्र आर्य, पतंजलि किसान सेवा समिति के प्रभारी मुन्नीलाल यादव, युवा भारत के प्रभारी अनिल सेन, सोशल मीडिया के प्रभारी सत्यानारायण गौर, प्रदेश कोषाध्यक्ष टी.एस. बावल, पतंजलि योग समिति सह प्रदेश प्रभारी हरिशरण समारी, पतंजलि किसान सेवा समिति सह प्रदेश प्रभारी कमलेश गौर, युवा भारत सह प्रदेश प्रभारी लखनलाल साहू, महिला पतंजलि योग समिति प्रदेश कोषाध्यक्ष पार्वती शर्मा, संगठन के सभी जिला प्रभारीगण मुरलीधर साहू, डॉक्टर मनोज शर्मा, अमरीश गोस्वामी, मोहनलाल श्रीवास्तव, रेखा बत्रा, हीरालाल कुशवाहा, रामकृपाल पटेल, लोकेश नागर, सुरेन्द्र सिंह आर्य, धर्मेन्द्र जाट, एमएल गौर, प्रदीप वैष्णव, महेन्द्र रघुवंशी, शर्द वर्मा, अशोक पटेल, प्रदीप वर्मा, गणेश प्रसाद गौर, रामकृपाल पटेल,अखिलेश योगी, शशिकांत यादव, सोबरन सिंह चौहान, वीरेन्द्र धवन, हरीश भाई , एम के श्रीवास्तव, जगदीश सिंह, डॉक्टर एस आर मालवीय, विनोद वाजपेयी, उपस्थित थे।


    सुभाष उत्कृष्ट विद्यालय के प्राचार्य सुधाकर पाराशर, अर्पणा नागोलिया, संजय झा, गुलाब रघुवंशी, प्रेम सिंह चौहान, भीम सिंह यादव, के साथ बडी संख्या में गणान्य नागरिकों ने भी शिविर का लाभ उठाया। योग शिविर में स्वामी परमार्थदेव ने सूक्ष्म व्यायाम, भस्त्रिका, कपालभाति, अनुलोम विलोम, भ्रामरी, उद्घिगत, प्राणायाम के साथ सूर्य नमस्कार, मरकटासन, वज्रासन, गौमुखासन, ताड़ासन, त्रियक ताड़ासन, आदि कराते हुए उनके बारे में विस्तृत जानकारी प्रदान की।


    योग शिविर के बाद ई-4। 7 अरेरा कालोनी में आोयजित बैठक में स्वामी परमार्थदेव ने कहा कि नर सेवा ही नारायण सेवा है। एक डाक्टर भी चीरा लगाता है और अपराधी भी चाकू चलाता है। डाक्टर के कार्य को हम समाजसेवा कहते हैं और स्वयं जाकर उससे चीरा लगवाते हैं। सभी जानते हैं कि डाक्टर का कार्य जीवनदान देना है। हम सभी कार्यकर्ताओं को मानवसेवा ,स्वास्थ्य सेवा और योग सेवा के अपने कार्य में जुटे रहना है। हम विचार पर आधारित गुरु सत्ता को ध्यान में रखते हुए वो आचरण करें जिससे समाज का लाभ हो। हमारे कार्यों से आम लोगों में संतुष्टि का भाव जागना चाहिए तभी हम अपने अनुष्ठान को सफल कर पाएंगे।

  • हांगकांग में बैंकिंग का सिक्का जमाने वाले चंद्रशेखर शर्मा बने भोपाल सर्किल के मुख्य महाप्रबंधक

    हांगकांग में बैंकिंग का सिक्का जमाने वाले चंद्रशेखर शर्मा बने भोपाल सर्किल के मुख्य महाप्रबंधक

    भोपाल 1.जनवरी(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)।श्री चंद्रशेखर शर्मा के रूप में आज भारतीय स्टेट बैंक में एक नया अध्याय सामने आया है। चंद्रशेखर शर्मा ने आधिकारिक तौर पर आज भारतीय स्टेट बैंक के मुख्य महाप्रबंधक के रूप में कार्यभार संभाल लिया है। देश के सबसे बड़े बैंक के भोपाल सर्किल में मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ दोनों राज्य शामिल हैं।


    बैंकिंग क्षेत्र के लोग जानते हैं कि उन्होंने 1994 में एक परिवीक्षाधीन अधिकारी के रूप में अपनी पारी शुरु की थी। अपने शानदार दीर्घ कार्यकाल में उन्होंने लगातार 29 सालों तक बैंकिंग के विभिन्न कार्यों को सफलता पूर्वक अंजाम दिया। हर सेवा का अनुभव हासिल करते हुए उन्होंने अपनी विशेषज्ञता को न केवल निखारा बल्कि बैंक को ऊंचाईयों तक पहुंचाने में अपनी प्रतिभा का बहुमूल्य योगदान दिया है। आज भारतीय स्टेट बैंक की शाखाएं जिस तकनीकी पेशेवर कुशलता के साथ दूर दराज के इलाकों तक भी उपलब्ध हैं उसमें श्री शर्मा ने भी अपनी रचनात्मकता का योगदान दिया है।


    बैंकिंग का अनुपालन निरीक्षण हो या वाणिज्यिक ऋणों का रणनीतिक प्रबंधन, हर क्षेत्र में उन्होंने एक सख्त कार्यशैली का विकास किया और सेवाओं को कारगर बनाने में अपनी भूमिका निभाई है। अंतर्राष्ट्रीय एसबीआई की विदेशी शाखा में उनके कार्यकाल के दौरान कई ऐसे बैंकिंग मामले आए जिनसे भारत की अर्थव्यवस्था को संवारने में मदद मिली।

    इस नई जिम्मेदारी से पहले श्री शर्मा भुवनेश्वर मंडल के महाप्रबंधक रहे हैं। उनका ये कार्यकाल देश में नई आशाओं का संचार करता देखा गया। कॉव्लून शाखा में मुख्य परिचालन अधिकारी के रूप में उन्होंने हांगकांग में भारतीय अर्थव्यवस्था को मजबूती प्रदान की।


    राजधानी के प्रधान कार्यालय में अधिकारियों और कर्मचारियों को संबोधित करते हुए उन्होंने नए साल की हार्दिक शुभकामनाएं दीं और सभी से कहा कि वे अपनी सेहत का ख्याल रखते हुए सामाजिक समर्पण की मिसाल पेश करें। उन्होंने कहा कि संस्था और काम के प्रति अटूट प्रतिबद्धता से हम जो गौरव हासिल करते हैं वह न केवल हमें बल्कि हमारे परिजनों और ग्राहकों के बीच प्रेरणा बनता है। उन्होंने कहा कि तनावमुक्त कार्य वातावरण बनाने के लिए हमें खुद पहल करनी होगी तभी हम खुशहाल ग्राहक सेवा का माहौल बना पाएंगे और एक सामंजस्यपूर्ण कार्यसंस्कृति को अंजाम दे पाएंगे।


    इस अवसर पर बैंक के तमाम अधिकारी और कर्मचारी भी उपस्थित थे। श्री कुंदन ज्योति, श्री अजितव पाराशर, श्री नीरज प्रसाद, श्री दीपक कुमार झा डीजीएम एवं सीरडीओ ने भी अपने विचार साझा किए। सभी अधिकारियों और कर्मचारियों ने अपने उद्बोधन में कहा कि किसी भी सकारात्मक नेतृत्व से पूरे संस्थान में नई ऊर्जा का संचार हो जाता है।

    प्रफुल्लित अधिकारियों और कर्मचारियों के प्रति धन्यवाद ज्ञापित करते हुए श्री चंद्रशेखर शर्मा ने कहा कि हम सभी मिलकर भारतीय स्टेट बैंक की सेवाओं को और भी ज्यादा जनोन्मुखी बनाने में सफल होंगे। हमारा लक्ष्य समाज की समृद्धि है जिसे हमें ग्राहकों के चेहरे पर मुस्कान लाकर संपन्न करना है।

  • फार्मासिस्टों के असामयिक निधन पर परिजनों को दो लाख रुपए की राहत मिलेगीःसंजय जैन

    फार्मासिस्टों के असामयिक निधन पर परिजनों को दो लाख रुपए की राहत मिलेगीःसंजय जैन

    भोपाल,17 अक्टूबर(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)। मध्यप्रदेश फार्मेसी काऊंसिल के अध्यक्ष संजय जैन ने आज भोपाल केमिस्ट एसोसिएशन की ओर से आयोजित सम्मान समारोह में कहा कि व्यापारियों के असामयिक निधन पर उनके परिजनों को दो लाख रुपए की राहत राशि प्रदान की जाएगी। एसोसिएशन के पदाधिकारियों और सदस्यों ने अध्यक्ष संजय जैन और उपाध्यक्ष राजू चतुर्वेदी को फूल मालाएं पहिनाकर,शाल श्रीफल से सम्मानित किया। एसोफरमससट-क-असमयकसिएशन की ओर से उन्हें स्मृति चिन्ह भेंट कर दवा व्यापारियों की समस्याओं का समाधान करने का अनुरोध किया गया। जवाब में श्री संजय जैन ने पूरे प्रदेश के दवा व्यापारियों से व्यापार को व्यवस्थित और जनउपयोगी बनाने का आव्हान किया।

    फार्मेसी काऊंसिल आफ इंडिया के सदस्य औक्षर मध्यप्रदेश फार्मेसी काऊंसिल के अध्यक्ष संजय जैन ने कहा कि ये संयोग है कि मध्यप्रदेश के फार्मा सेक्टर को पहली बार अनुभवी फार्मासिस्ट और केमिस्ट मिले हैं। हमारा प्रयास रहेगा कि दवा उद्योग से जुड़े किसी भी व्यक्ति को अनावश्यक झंझटों में न उलझना पड़े ताकि दवा कारोबार को सुगम बनाकर आम जनता को राहत दी जा सके। उन्होंने कहा कि नई परिषद ने व्यापारियों के असामयिक निधन पर दो लाख रुपए की राहत राशि दिए जाने का प्रावधान किया है। ये राशि काऊंसिल के सुरक्षा फंड से उपलब्ध कराई जाएगी। उन्होंने कहा कि दवा उद्योग को व्यवस्थित तरीके से संचालित करने के लिए फार्मेसी एक्ट में स्पष्ट प्रावधान किए गए हैं कि काऊंसिल के पदाधिकारी फार्मा सेक्टर से ही लिए जाएं। इस कारोबार से जुड़े लोग यदि व्यापार की तकनीक को समझ लेंगे तो उन्हें अनावश्यक घाटा नहीं झेलना पड़ेगा और जनता को भी विश्वसनीय दवाईयां कम कीमतों पर उपलब्ध हो सकेंगी। इस प्रशिक्षण कार्यक्रम का वित्तीय बोझ काऊंसिल स्वयं उठाएगी और प्रदेश के फार्मा सेक्टर को आधुनिक तकनीकों के प्रयोग से प्रशिक्षित किया जाएगा। हमारा प्रयास है कि व्यापारियों के काम हों और दवा निर्माताओं, विक्रेताओं डाक्टरों सभीलोक निर्माण मंत्री गोपाल भार्गव ने कहा है कि प्रदेश में सेतु बंधन योजना में 896 करोड़ रूपये की लागत से 15 फ्लाई ओवर तथा रेलवे ओवर ब्रिज बनाए जाएंगे। इसकी प्रक्रिया प्रारंभ की जा चुकी है। के बीच निरंतर संवाद कायम रहे। विश्व के विकसित देशों में डाक्टर मरीज को देखकर दवाईयां लिखता है लेकिन उसकी डोज तय करने का काम फार्मासिस्ट ही करते हैंं। इससे मरीजों को दवाईयों के दुष्प्रभाव से बचाया जाता है।

    उन्होंने कहा कि भोपाल के दवा कारोबारी प्रदेश भर में दवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण योगदान दे सकते हैं। श्री जितेन्द्र धाकड़ हरफनमौला प्रतिनिधि हैं और उनकी टीम ऊर्जावान है। इनका युवा नेतृत्व प्रदेश के दवा कारोबार को नए दौर में ले जाएगा। जिस तरह से नए पदाधिकारियों ने सुविधाजनक ड्रेसकोड लागू करने का फैसला लिया है उससे दवा उद्योग को पारदर्शी बनाने में मदद मिलेगी। इससे दवा कारोबार पर आम जनता का भरोसा भी बढ़ेगा।इस कारोबार से जुड़े छोटे कर्मचारियों में दायित्व बोध बढ़ेगा जिसका लाभ अंतिम पंक्ति में खड़े नागरिक को मिलेगा। श्री जैन ने कहा कि जीएसटी और अन्य कारोबारी व्यवस्थाओं ने दवा उद्योग की सफल इंडेक्सिंग की है। व्यापारियों की जो समस्याएं होंगी हम सभी मिलजुलकर उनका समाधान करेंगे। हमारा प्रयास रहेगा कि सभी व्यवस्थाओं पर अमल करके वर्ष 2024तक प्रदेश के पूरे दवा कारोबार की रंगत बदल दी जाए। राजधानी में ही शाहपुरा थाने के पास काऊंसिल का नया भवन निर्मित होने जा रहा है। यहां एक म्यूजियम बनाया जाएगा जिसमें दवा उद्योग के क्रमबद्ध विकास को मॉडलों(प्रदर्शों) के माध्यम से समझाया जाएगा। ये संस्थान नए फार्मासिस्टों को संस्कारित करने में मील का पत्थर साबित होगा।

    एसोसिएशन के अध्यक्ष जितेंद्र धाकड़ एवं सचिव विवेक खंडेलवाल ने अतिथियों का अभिनंदनकिया। श्री धाकड़ ने इस अवसर पर कहा कि मध्यप्रदेश फार्मेसी काऊंसिल में पिछले दस लगाए जाएंगे जिससे उन्हें अपनी समस्याओं के लिए हर बार राजधानी नहीं भागना पड़ेगा।सालों का दौर अफरातफरी भरा रहा है। व्यापारियों और फार्मासिस्टों को अपने वैधानिक पंजीयन के लिए भी ऊटपटांग रुकावटों का सामना करना पड़ता था। जबसे श्री जैन ने काऊंसिल का पदभार संभाला है तबसे नवागत फार्मासिस्टों और व्यापारियों को फिजूल की अडंगेबाजी से राहत मिल गई है।श्री जैन ने पंजीयन व्यवस्था को सुव्यवस्थित करने के लिए सरल नियम बनाए हैं। नई परिषद फार्मेसी क्षेत्र की जानकार है और इसी वजह से कारोबारी रुकावटें दूर होने लगीं हैं।काऊंसिल में लगभग बारह सालों बाद विधिवत चुनाव हुआ है।
    उन्होंने कहा कि दवा व्यापारियों को एक्सपायरी डेट की दवाईयां नष्ट करने में बड़ी अड़चनों का सामना करना पड़ता है। अब नई व्यवस्था के तहत हम सभी मिलकर एक मंच पर घोषित तरीके से एक्सपायरी डेट की दवाईयों को नष्ट करेंगे। इससे आम जनता को विश्वसनीय दवाईयां मिलने की गारंटी दी जा सकेगी।इससे दवा बाजार में फैलने वाला भ्रम भी दूर हो जाएगा। काऊंसिल के माध्यम से भविष्य में हर महीने फार्मासिस्टों के लिए संभाग स्तर पर केम्प लगाने का जो फैसला लिया गया है उससे व्यापारियों का समय बचेगा और उनका तनाव भी कम होगा। इस अवसर पर केमिस्ट एसोसिएशन और विभिन्न दवा संगठनों के पदाधिकारी और सदस्य मौजूद थे।

  • दिव्यांग बच्चों को संबल देने सामने आया इक्विटास बैंक

    दिव्यांग बच्चों को संबल देने सामने आया इक्विटास बैंक


    भोपाल,29 सितंबर(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)। इक्विटास स्माल फायनेंस बैंक ने अपने कारोबारी विस्तार के साथ दिव्यांग बच्चों को संबल देने का अभियान मध्यप्रदेश में भी जारी रखा है। बैंक बनने के सात वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में बैंक ने आज पटेल नगर स्थित दिव्यांग बच्चों के ज्योति स्पेशल स्कूल में बच्चों के बीच पढ़ाई सामग्री वितरित करके उनके चेहरों पर मुस्कान लाने का प्रयास किया है। बैंक अपनी माईक्रो फायनेंस बैंकिंग गतिविधियो से आम नागरिकों के बीच लगातार समर्थन बढ़ाता जा रहा है इसके साथ ही बैंक ने समाजसेवा के माध्यम से लोगों के साथ खडे होने का दायित्व निभाना जारी रखा है। चेन्नई से प्रारंभ इस बैंक का सामाजिक दायित्वों के प्रति समर्पण देखकर ही रिजर्व बैंक ने कडी प्रतिस्पर्धा के बीच इक्विटास बैंक को बैंकिंग का लाईसेंस प्रदान किया था तबसे लेकर बैंक लगातार अपनी बैंकिंग गतिविधियों के साथ लोक दायित्व निर्वहन का वादा भी पूरा करता आ रहा है।


    इक्विटास स्माल फायनेंस बैंक के इंदौर रेंज के सीएसआर अधिकारी राजेश भूमरकर ने बताया कि इक्विटास डेवलपमेंट इनीशिएटिव ट्रस्ट अपने सामाजिक दायित्वों को लगातार निभाता आ रहा है। समय से साथ बैंक के कामकाज में निखार आता जा रहा है जिससे हमारी सामाजिक गतिविधियां भी बढ़ती जा रहीं हैं। इसी श्रंखला में आज हमने मंदबुद्धि और दिव्यांग बच्चों के ज्योति स्पेशल स्कूल में अपना सहयोग दिया है। पांच से पंद्रह साल के करीबन अड़तालीस बच्चों को जब हमने पढ़ाई सामग्री वितरित की तो उनके खिले चेहरे और उनमें झलकता संतोष और जीवटता देखते ही बनती थी। ऐसे बच्चों को सहारा देना और उन्हें सामान्य जीवन के लिए प्रशिक्षित करना बहुत दुरूह कार्य है ऐसे किसी भीसामाजिक अभियान को मदद देने का हमारा प्रयास हमेशा जारी रहेगा। वर्ष 2016 से जब हमें बैंकिंग का लाईसेंस मिला तभी से हम एमपी में कार्य कर रहे हैं । भोपाल के लोगों ने हमारे कार्य के प्रति समर्पण को देखते हुए लगभग एक सौ चालीस करोड़ रुपए की जमाराशि देकर सामाजिक गतिविधियां निभाने की जवाबदारी सौंपी है। जैसे जैसे हमारी क्षमता बढती जाएगी हम प्रदेश के विकास की प्रमुख कड़ी के रूप में सदैव उपस्थित रहेंगे।


    बैंक के रीजनल मैनेजर अमित देशपांडे ने बच्चों को दुलार करते हुए बताया कि बैंक ने कुछ ऐसी सरल प्रणाली विकसित की है जिससे हम ऐसे सामाजिक ट्रस्टों, एसोसिएशन, फेडरेशन और समितियों की आय बढ़ाने में सहयोगी साबित हो रहे हैं। हमारा लक्ष्य सार्थक बैंकिंग करना है। अपने इस दायित्व के निर्वहन में हम लगातार आगे बढ़ते जा रहे हैं।


    बैंक के शाखा प्रबंधक लोकेश जैन ने बताया कि हमारी बैंकिंग गतिविधियां माईक्रो फायनेंस का सिद्धांत अपनाने की वजह से ज्यादा कारगर साबित हो रहीं हैं। हमने दस दस महिलाओं के स्वसहायता समूहों को बाजार की तुलना में कम ब्याज दर पर फायनेंस किया है। इन समूहों में सभी हितग्राही आपस में एक दूसरे की गारंटी देते हैं। ऐसे में हमारा डूबत ऋण एक फीसदी से भी कम होता है। यही वजह है कि हमारा मुनाफा ठोस और गारंटी वाला होता है। लगभग बीस सालों से हम लोगों को फायनेंस देकर उनका जीवन स्तर ऊंचा उठाने के लिए कार्य कर रहे हैं इस कारण से हमारा ग्राहकी आधार बहुत बड़ा है। लोगों को हम पर विश्वास है और जब हम उन्हें पैरों पर खड़ा करने में मदद करते हैं तो फिर वे हमसे अधिक ऋण लेकर अपना जीवन स्तर ऊंचा उठाने में निपुण हो जाते हैं। हमारी इसी सफलता को देखते हुए आज श्रंगेरी सारदा मठ हमारा संरक्षक बनकर सामने आया है। हमारे प्रेरणा पुंज पीएन वासुदेवन बैंक के धन प्रबंधन की जो कार्यपद्धति विकसित की है उससे हम गारंटी के साथ आगे बढ़ रहे हैं। शेयर बाजार का समर्थन हमारी विकास यात्रा का सबसे बड़ा गवाह साबित हो रहा है।


    श्री राजेश भूमरकर ने बताया कि हम अपने उपभोक्ताओं को सफल बनाने के लिए हेल्थ हेल्पलाईन चलाते हैं जिनके अंतर्गत उन्हें बेहतर और सस्ती चिकित्सा की सलाह दी जाती है। मेडिकल कैप लगाकर हम लोगों को मुफ्त चिकित्सकीय जांच की सुविधा मुहैया कराते हैं। अपनी सीएसआर गतिविधियों में हम युवाओं और उद्यमियों का भी मार्गदर्शन करते हैं जिससे हमारी बैंकिंग गतिविधियां अपना उद्देश्य सार्थक बनाती हैं। आज के आयोजन में बैंक की ओर से व्यवसाय विकास अधिकारी रोहित राजपूत और प्रियंका पराते भी उपस्थित थे। ज्योति स्पेशल स्कूल की प्राचार्य सिस्टर बिंसी आगस्टाईन( एंसिलिन सिस्टर) ने सभी समाजसेवियों के प्रति आभार प्रकट किया।

  • सफलता की आठवीं सीढ़ी जा पहुंचा इक्विटास बैंक

    सफलता की आठवीं सीढ़ी जा पहुंचा इक्विटास बैंक


    राज्यों की सरकारों ने इक्विटास बैंक को भागीदार बनाकर अपनी आय बढ़ाई

    भोपाल, 5 सितंबर(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)।तमिलनाडू के चेन्नई से वर्ष 2016 में शुरु हुआ इक्विटास स्माल फाईनेंस बैंक आज सात साल पूरे करके आठवें वर्ष में प्रवेश कर गया है, बैंक ने राजधानी में इस अवसर पर एक उत्सव का आयोजन किया। अपनी इस यात्रा में बैंक ने लोगों का भरोसा जीता और 3641 करोड़ रुपए की पूंजी जुटाई है।अप्रैल-जून की तिमाही में बैंक ने अपने नेट प्राफिट में 97.1 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज कराई । इन सफलताओं को देखते हुए शेयर बाजार ने भी बैंक को अपनी सलामी दी है। राजधानी में आज इक्विटास बैंक की वर्षगांठ के अवसर पर लाभ उठाने वाले निवेशकों और हितग्राहियों ने बैंक का जन्मदिन उत्साह पूर्वक मनाया।

    भोपाल चैंबर्स आफ कामर्स ने केक काटकर इक्विटास बैंक को सफलता की शुभकामनाएं दीं.


    भोपाल चैंबर्स आफ कामर्स के अध्यक्ष तेजकुल पाल सिंह पाली, फार्मेसी काऊंसिल के अध्यक्ष संजय जैन, रेलवे बोर्ड सदस्य कमलेश सेन, भोपाल कैट के अध्यक्ष रामबाबू शर्मा, मनोहर लाल टोंग्या, श्री कोल इंडस्ट्री के मनोज जैन, विदिशा के व्यवसायी विजय कदरे, नगरीय प्रशासन विभाग के वरिष्ठ अभियंता रवि चतुर्वेदी, सीनियर चार्डर्ड अकाऊंटेंट बी.आर.सोनी, एड्व्होकेट सीमा शाही,मूंदड़ा एंडरप्राईजेस के चंद्रमोहन नेमा, प्रापर्टी डीलर अशोक सिंह, जय स्टेशनरी वाले जेपी मड़वैया,संजीव शर्मा समृद्धि इंटरप्राईजेस,समेत कई गणमान्य नागरिकों ने दीप प्रज्ववलन करके और केक काटकर बैंक को शुभकामनाएं दीं। बैंक की ओर से रीजनल मैनेजर अमित देशपांडे,भोपाल संभाग बैंक समूह के प्रबंधक मनीष मरदद्वाज,शाखा प्रबंधक लोकेश जैन ने सभी आगंतुकों का स्वागत और अभिनंदन किया। बैंक की ओर से जन कल्याण कार्यो के अंतर्गत जरूरतमंद लोगों और बच्चों को आवश्यक सामग्री का वितरण भी किया गया।

    मध्यप्रदेश फार्मेसी काऊंसिल के अध्यक्ष संजय जैन ने इक्विटास बैंक की सफल यात्रा पर केक काटकर बधाई दी.


    वासुदेवन पठानी नरसिम्हन के मार्गदर्शन में आधुनिक बैंकिंग का प्रतीक बनते जा रहे इस बैंक ने अपने नाम को सार्थक कर दिखाया है। करोड़ों लोगों की बैंकिंग जरूरतों को पूरा करते हुए बैंक ने शेयर बाजार में भी धाक जमा ली है। महज सात सालों के कार्यकाल में बैंक ने पूरे देश में 882 शाखाएं स्थापित की हैं जहां से फाईनेंस के साथ साथ तमाम बैंकिंग सुविधाओं को संचालित किया जा रहा है। महाराष्ट्र ,छत्तीसगढ़ जैसे पड़ोसी राज्यों के अलावा कई अन्य राज्यों की सरकारों के कामकाज में सफल भागीदार रहते हुए बैंक ने प्रदेश सरकारों की आय बढ़ाने में उल्लेखनीय योगदान दिया है।


    बैंक की सफलता की वजह इसका सफल धन प्रबंधन है। बैंक ने अपनी आनलाईन सेवाओं के माध्यम से अनावश्यक खर्चों को घटाने में सफलता पाई है। जनधन का उचित निवेश और बेहतर मुनाफा अर्जित करके बैंक ने अपने ग्राहकों को उनकी पूंजी का अधिकाधिक लाभ उपलब्ध कराया है। आज इक्विटास स्माल फाईनेंस बैंक अपने निवेशकों को फिक्स जमा राशियों पर नौ फीसदी से अधिक ब्याज उपलब्ध करा रहा है। इसके साथ ही बैंक ने ऐसे ऋणदाताओं का नेटवर्क खड़ा किया है जो सफल कारोबारों से बैंक को खासा लाभ दिलवा रहे हैं।


    बैंक की जीवंत सेवाओं को देखते हुए श्रंगेरी सारदा मठ ने इक्विटास हेल्थकेयर फाऊंडेशन के तहत कैंसर रोगियों की देखभाल और उपचार का विशाल अभियान चलाया है। इसमें रोगियों को मुफ्त उपचार उपलब्ध कराया जाता है। बैंक अपने मुनाफे का 5 फीसदी हिस्सा इसी तरह के जनकल्याणकारी कार्यों पर खर्च करता है।

  • अंत्योदय का फार्मूला बना देश की राजनीति का प्रमुख आधार

    अंत्योदय का फार्मूला बना देश की राजनीति का प्रमुख आधार


    भोपाल,22 अगस्त(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)। वैश्विक राजनीति में बढ़ते दखल को सफल बनाने के लिए मोदी सरकार ने पंडित दीन दयाल उपाध्याय के जिस अंत्योदय वाले फार्मूले पर अमल करके प्रति व्यक्ति आय बढ़ाना शुरु कर दिया है उससे देश की राजनीति में नया भूचाल आ गया है। देश को अब तक जिन बड़े राजनीतिक कदमों ने प्रभावित किया है उसमें हर प्रति व्यक्ति आय बढ़ाने का फार्मूला कारगर साबित हो रहा है। मध्यप्रदेश सरकार ने किसानों, महिलाओं और विभिन तबकों को अर्थव्यवस्था में सीधे तौर पर जोडने की जो विधि अपनाई है उससे तमाम राजनीतिक दलों के दावे धराशायी हो गए हैं।
    मध्यप्रदेश में किसान सम्मान निधि और लाड़ली बहना योजना ने शिवराज सरकार के प्रति बढ़ती सत्ता विरोधी लहर को ठंडा करना शुरु कर दिया है। मोदी सरकार भले ही तीसरी बड़ी अर्थव्यवस्था बनने का दावा कर रही है लेकिन वास्तव में देश प्रति व्यक्ति आय के पैमाने पर 142 वें नंबर पर है। अर्थशास्त्रियों की इस राय पर गौर करते हुए भाजपा ने अपने शासित राज्यों में लोगों को राहत के कई पैकेज दिए हैं।
    लाल किले से दिए गए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के भाषण में ये तमाम दावे किए गए थे। इस पर जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी (जेएनयू) के जाने-माने अर्थशास्त्री, रिटायर्ड प्रोफेसर अरुण कुमार ने कहा कि प्रधानमंत्री जिन आंकड़ों के आधार पर ये बात कह रहे हैं वे संगठित क्षेत्र के सर्वे पर तैयार किए गए हैं।अरुण कुमार ने कहा, “10वें नंबर से 5वें नंबर पर और 5वें से तीसरे नंबर पर पहुंचने के लिए जिन आंकड़ों को आधार बनाया जा रहा है, वे आंकड़े सही नहीं है. क्योंकि नोटबंदी के बाद असंगठित क्षेत्र के आंकड़े सही नहीं हैं. सरकार भारतीय अर्थव्यवस्था इस की वृद्धि दर को 8%, 7% और 6% बताती रही है, लेकिन 2016 के बाद से दरअसल यह 2 से 3 प्रतिशत या 0% से ज्यादा नहीं रही है, खासकर तब जब नोटबंदी के कारण सब बंद पड़ा था.”


    उन्होंने कहा, “सरकार केवल आंकड़ों का खेल कर रही है. हम 10वें नंबर से 5वें नंबर पर नहीं पहुंचे हैं. अभी तो हम 10वें नंबर के आस-पास ही हैं, जहां हम पहले थे.”कुमार ने कहा कि, “सरकार के आधिकारिक आंकड़े के मुताबिक कोविड महामारी के पहले हमारी ग्रोथ रेट, 2017-18 की चौथी तिमाही (क्वार्टर 4) में 8 प्रतिशत थी जो गिरकर 3 प्रतिशत हो गई. लेकिन इसमें असंगठित क्षेत्र शामिल नहीं है, इसलिए यह वृद्धि 0% या उससे कम हो सकती है. इसलिए हम 5वें नंबर पर नहीं, बल्कि 8वें, 9वे नंबर होंगे.”

    उन्होंने कहा, “आखिर जब नोटबंदी से अर्थव्यवस्था गिर गई थी, तब कहा गया था कि हम 8 प्रतिशत के साथ वृद्धि कर रहे हैं. तो हम आकलन कर सकते हैं कि यह कितना सच और कितना झूठ है. और फिर जीएसटी ने असंगठित क्षेत्र को ध्वस्त किया. एफएमसीजी सेक्टर कि रिपोर्ट, टेक्सटाइल सेक्टर, लेदर गुड्स सेक्टर, लगेज इंडस्ट्री की रिपोर्ट्स इसे साबित करती हैं.”वहीं पीएम मोदी ने कहा, “अंतर्राष्ट्रीय एजेंसियां भी कह रही हैं कि भारत में अत्यधिक गरीबी खात्मे के कगार पर है, जो दिखाता है कि 9 सालों में सरकार के फैसले और नीतियां देश को सही दिशा में ले जा रही हैं.”

    कुमार इस पर कहते हैं, “दरअसल विश्व बैंक, ईडीबी और आईएमएफ खुद से आंकड़े इकट्ठा नहीं करता. वह सरकार के आंकड़े के आधार पर ही अपनी रिपोर्ट बनाता है. इसलिए जो सरकार के आंकड़ों में गड़बड़ी है, वही उसके आंकड़ों में भी गड़बड़ी होती है. वह एक इंडिपेंडेंट डेटा कलेक्टिंग (स्वतंत्र आंकड़े जुटाने वाली) एजेंसी नहीं है.” हालांकि, अरुण कुमार ने कहा, “55% संगठित क्षेत्र के आंकड़े को आधार बनाए तो वृद्धि की बात सही हो सकती है, लेकिन अंसगिठत क्षेत्र जो कि 45% है, जिसमें 14 प्रतिशत कृषि और बाकी 30 प्रतिशत अन्य असंगठित क्षेत्र है. 30 प्रतिशत असंगठित क्षेत्र में गिरावट है. असंगठित क्षेत्र के आंकड़े न मौजूद होने से 7-8 फीसदी की वृद्धि की बता गलत है, 30 फीसदी में गिरवाट के आधार पर आकलन करें तो हमारी ग्रोथ रेट, 0% 2%, 3% ही चल रही है, 7-8% नहीं.”

    कुमार ने कहा कि, “11 अक्टूबर 2022 को जय प्रकाश नारायण (जेपी) के जन्मदिन पर हमने एक रिपोर्ट निकाली, जिसके मुताबिक हमारे देश में 32 करोड़ लोगों के पास तो कोई ढंग काम है, लेकिन 28 करोड़ लोगों के पास ढंग का काम नहीं है, या बिलकुल काम नहीं है. इनमें 19 करोड़ ने काम ढूंढ़ना बंद कर दिया था. अगर 140 करोड़ की जनसंख्या में 32 करोड़ के पास ही ढंग का काम है. तो हर एक व्यक्ति 4 व्यक्ति को सहारा दे रहा है.”

    उन्होंने कहा, “नवंबर 2022 में ई-श्रम पोर्टल का डेटा आया है, प्रधानमंत्री ने भी इसका जिक्र किया है. नवंबर 2022 तक, 28 करोड़ असंगठित क्षेत्र के लोगों ने इस पोर्टल पर रजिस्टर कराया. उसमें से 94 प्रतिशत ने बताया कि हमारी आमदनी 10 हजार रुपये से कम है, जो कि गरीबी रेखा के आस-पास ही हैं.”

    अरुण कुमार ने कहा कि, “विश्व बैंक का गरीबी रेखा का जो पैमाना है वह 2.15 डॉलर है. यानि 5 लोगों के परिवार को 25 हजार महीने की आमदनी चाहिए. हालांकि, यदि मोटे तौर पर समझें तो हर व्यक्ति को कम से कम 13 हजार रुपये चाहिए. लेकिन 94 प्रतिशत लोग तो कह रहे हैं हमारी आमदनी 10 हजार रुपये से कम है. विश्व बैंक की रेखा से भारत की गरीबी नापें तो ये इस पोर्टल में दर्ज कराने वाले 94% लोग गरीब हैं. इसलिए हम 5वीं अर्थव्यवस्था हैं और तीसरी अर्थव्यवस्था हो जाएंगे, इसका कोई मतलब नहीं है. असली बात हमारे आंकड़ों में आ नहीं रही है.”वहीं पीएम ने इस कार्यक्रम में नीति आयोग की रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि, “भारत गरीबी को खत्म कर सकता है. पिछले 5 सालों में 13.5 करोड़ लोग गरीबी से बाहर निकले हैं.”

    इस पर कुमार कहते हैं, “इसे मल्टीडाइमेंशनल पॉवर्टी कहते हैं. जिसमें शिक्षा, स्वास्थ्य और लिविंग स्टैंडर्ड होता है. लेकिन इसमें भी गड़बड़ी है. सरकार कह रही है कि ये 2019-21 के आंकड़े हैं. 2019-20 की बात तो ठीक थी, लेकिन 2020-21 में तो भयंकर कोविड महामारी फैली थी. इस दौरान कितने लोगों ने पलायन किया. बच्चे स्कूल नहीं जा रहे थे, कितने लोग मर गए, जिनके आंकड़े भी ठीक से नहीं पता हैं. ऐसे में यह कहना कि 13.5 करोड़ लोग मल्टीडाइमेंशनल पॉवर्टी से निकल आए हैं, यह भी गलत है.”

    उन्होंने कहा कि, “रूरल एम्प्लॉयमेंट गारंटी स्कीम आरबीआई के आंकड़ों के मुताबिक कोविड महामारी के समय सिर्फ 47 दिन का काम मिल रहा था. जो कि साल में 9 दिन होता है, साल में 9 दिन के काम से पूरे साल का काम कैसे चल सकता है? इसलिए 135 मिलियन यानि 13.5 करोड़ लोग गरीबी से निकल आए हैं ये भी आंकड़ा सही नहीं है.”
    ‘अर्थशास्त्री कुमार ने कहा कि, “प्रति व्यक्ति आय में तो हम अभी भी दुनिया में 142वें स्थान पर हैं. जो कि ज्यादा महत्वपूर्ण है. अगर हम थोड़ी देर के लिए मान भी लें कि हमारी अर्थव्यवस्था ब्रिटेन की अर्थव्यवस्था से बड़ी हो गई है. लेकिन हमारे यहां तो 140 करोड़ लोग हैं, उनके यहां साढ़े 7 करोड़ लोग हैं. वो हमसे 15 गुना छोटे हैं. वास्तव में हमें प्रति व्यक्ति आय के आधार पर अपने देश की गरीबी को देखना चाहिए.”
    सरकार के दावों के समर्थन में बैंक ऑफ बड़ौदा के चीफ इकोनॉमिस्ट मदन सबनवीस कहते है कि , “जिस तरह भारत की सरकार इन्फ्रास्ट्रक्चर पर ध्यान दे रही है, इन्वेस्टमेंट हो रहा है और प्राइवेट इन्वेस्टमेंट पर इन्सेंटिव दिया जा रहा है, इससे तीसरी अर्थव्यवस्था बनना काफी संभव है.”सबनवीस ने कहा जहां तक असंगठित क्षेत्र के डेटा की बात है तो उसके लिए भी प्रॉक्सी डेटा का इस्तेमाल किया जाता है. इसके लिए आईआईपी ग्रोथ नंबर का इस्तेमाल होता है. ये काफी सालों से चल रहा है इसलिए मुझे नहीं लगता कि इसको लेकर बहुत बड़ी गड़बड़ी होगी.(प्रोफेसर अरुण कुमार के इंटरव्यू पर आधारित)

  • Equitas Small Finance Bank: इक्वाटास स्मॉल बैंक क्रेडिट कार्ड और पर्सनल लोन भी लाया

    Equitas Small Finance Bank: इक्वाटास स्मॉल बैंक क्रेडिट कार्ड और पर्सनल लोन भी लाया


    नई दिल्ली 21 जुलाई (प्रेस इंफार्मेशन सेंटर) : इक्वाटास स्मॉल फाइनेंस बैंक अब क्रेडिट कार्ड और पर्सनल लोन वेंचर की शुरूआत करेगा. बैंक अपने बिजनेस का विस्तार कर रहा है और इस दिशा में वह एक मोबाइल एप्लीकेशन भी ला रहा है ताकि बिजनेस ऑपरेशन में तेजी लाई जा सके और लोगों तक सेवाओं की पहुंच बढ़ाई जा सके. वहीं, विदेशी मुद्रा कार्ड और रेमिटेंस जैसी सेवाएं पर भी काम कर रहा है. बता दें कि इक्वाटास बैंक स्मॉल बैकों की कैटेगरी एफडी निवेशकों को सर्वाधिक ब्याज दर की पेशकश करता है.

    एक शीर्ष अधिकारी ने बताया कि निजी क्षेत्र के इक्विटास स्मॉल फाइनेंस बैंक लिमिटेड की क्रेडिट कार्ड और पर्सनल लोन सेक्टर में एंट्री करने की योजना है, क्योंकि उसे कंज्यूमर फाइनेंस पोर्टफोलियो बनाने की उम्मीद है. इक्विटास स्मॉल फाइनेंस बैंक व्यापारियों की सेवा करने और उनके व्यवसाय संचालन को बेहतर बनाने में मदद करने के लिए एक मोबाइल एप्लिकेशन विकसित करने में भी निवेश कर रहा है.

    इक्विटास स्मॉल फाइनेंस बैंक ने अप्रैल-जून 2023 तिमाही के लिए अपने नेट प्रॉफिट में 97.1 प्रतिशत की बढ़ोतरी के साथ 191.20 करोड़ रुपये की वृद्धि हासिल की है. पिछले वर्ष की इसी तिमाही के दौरान बैंक ने 97 करोड़ रुपये का नेट प्रॉफिट दर्ज किया था.

    इक्विटास स्मॉल फाइनेंस बैंक की वार्षिक रिपोर्ट में कई परियोजनाओं का खुलासा किया गया है. बैंक के पार्टटाइम चेयरमैन अरुण रामनाथन ने कहा कि आने वाले वर्षों में हम क्रेडिट कार्ड और पर्सनल लोन में प्रवेश करके अपने उपभोक्ता वित्त पोर्टफोलियो का निर्माण करने की योजना बना रहे हैं, जो विविध लोन पोर्टफोलियो के माध्यम से स्थिरता बढ़ाने में मदद करेगा. उन्होंने कहा कि बैंक विदेशी मुद्रा कार्ड, विदेशी मुद्रा गैर-निवासी (एफसीएनआर) जमा और रेमिटेंस जैसी अन्य प्रपोजल्स पर काम करेगा.

    इक्विटास स्मॉल फाइनेंस बैंक लिमिटेड के साथ इक्विटास होल्डिंग्स लिमिटेड का रिवर्स विलय पूरा कर लिया है, जो वित्तीय संस्थान को यूनिवर्सल बैंक लाइसेंस के लिए आवेदन करने की अनुमति देगा. चेयरमैन अरुण रामनाथन ने कहा कि लगभग समान परिसंपत्ति आधार वाली दो सूचीबद्ध कंपनियों की विसंगति को समाप्त करने के अलावा, विलय ने इक्विटास स्मॉल फाइनेंस बैंक के लिए दिशानिर्देश जारी होने के बाद यूनिवर्सल बैंक लाइसेंस के लिए आवेदन करने का रास्ता साफ कर दिया है.

    प्रबंध निदेशक और सीईओ पीएन वासुदेवन ने कहा कि बैंक एक नए जमाने का वित्तीय संस्थान है जो ग्राहकों को बैंक के प्रोडक्ट और समाधानों तक पहुंच को सशक्त बनाने के लिए विभिन्न डिजिटलीकरण पहल करना जारी रखता है. उन्होंने कहा कि स्मार्टफोन की बढ़ती पहुंच और तेज डेटा कनेक्टिविटी के साथ हम अपने छोटे और छोटे व्यापारियों के लिए एक समर्पित ऐप में निवेश कर रहे हैं, ताकि उन्हें अपने व्यापार संचालन को बेहतर बनाने और विभिन्न भुगतान और बैंकिंग समाधानों के साथ अपने ऑपरेटिंग सिस्टम को इंटीग्रेट करने में मदद मिल सके.

    प्रबंध निदेशक और सीईओ ने आगे कहा कि इक्वाटास बैंक श्रृंगेरी सारदा मठ के सहयोग से इक्विटास हेल्थकेयर फाउंडेशन के तहत एक कैंसर ट्रीटमेंट अस्पताल स्थापित कर रहा है. उन्होंने कहा कि हमने श्रृंगेरी सारदा मठ के साथ संयुक्त रूप से इक्विटास हेल्थकेयर फाउंडेशन के तहत उच्च गुणवत्ता वाली कैंसर देखभाल तक पहुंच प्रदान करने के लिए एक अस्पताल का निर्माण शुरू किया है. हमें उम्मीद है कि अस्पताल इस साल की दूसरी छमाही में ऑपरेशनल हो जाएगा. (इकानामिक टाईम्स से साभार)

  • फाईनेंशियल प्लानिंग से अमर वैभव की यात्रा

    फाईनेंशियल प्लानिंग से अमर वैभव की यात्रा


    पांच ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने की जद्दोजहद में भारत ने कई पुरानी ढपोरशंखी परंपराओं को तिलांजलि दे दी है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने जिस तरह आर्थिक हालात को बदलने में सफलता पाई है उससे भारत के वैभव की अमरगाथा आज पूरी दुनिया गौर से सुन रही है। मौजूदा हालात में हमें वित्तीय प्रबंधन के नए तौर तरीके सीखने होंगे। इसे जिम्मेदारी कहना भी कोई अतिशयोक्ति नहीं होगी. इसे जरूर निभाएं।


    पैसा पैसे को खींचता है… हम सभी ने ये कहावत जरूर सुनी है. इसका शाब्दिक अर्थ निकाला जाए तो हम कहेंगे, आज आत्मीय रिश्तों की उतनी महत्ता नहीं है जितनी कि रुपये-पैसों की है. अब ज़रा इसे हम अपनी रोजमर्रा की जिंदगी में ढालकर इस पर अमल करें तो… हम वाकई रुपये-पैसों के महत्व को समझते हुए बचत को तवज़्जो देंगे, और जिस तरह से दुनियाभर में अनिश्चितताओं का बाजार गर्म है, बचत करना समझदारी भरा कदम है और यह कदम उठाना हम सभी के लिए बेहद जरूरी हो गया है. बल्कि हमें अब एक कदम और आगे बढ़ने की जरूरत है, वो कदम है — हमें अपने बच्चों को रुपये-पैसों का गणित सिखाने और बचत के महत्व को समझाते हुए उन्हें इसके तरीके बताने होंगे. यही सही समय है कि हम इसे अपनी नैतिक जिम्मेदारी बना लें.


    India Brand Equity Foundation (IBEF) की एक रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में दुनिया का शीर्ष वित्तीय साक्षर देश (financial literate country) होने की क्षमता है क्योंकि 25-44 आयु वर्ग के 27.6 प्रतिशत लोग वित्तीय शिक्षा के माध्यम से वित्तीय समावेशन (financial inclusion) कार्यक्रम में भाग लेना जारी रखते हैं. रिपोर्ट में आगे बताया गया है कि यदि 10-19 आयु वर्ग के युवाओं को भी उचित वित्तीय शिक्षा प्रदान की जाती है, तो अगले दो दशकों में यह दर 20% से अधिक बढ़ सकती है. यह समूह भारत की आबादी का लगभग 21.8% है.


    आपको अपनी नैतिक जिम्मेदारी निभाने में अर्थात् अपने बच्चों को रुपये-पैसों का हिसाब-किताब सिखाने और बचत के महत्व को समझाने में… पैसों की समझ जरूरी है। अपने अनुभवों के आधार पर हम कह सकते हैं कि वित्तीय संकट का समय हमें पैसों को मैनेज करने और इसका सही उपयोग करना सिखाता है. बच्चों को अपनी मेहनत की कमाई का विवेकपूर्ण तरीके से उपयोग करने और पैसे के मामलों से अवगत होने में मदद करने के लिए आर्थिक रूप से साक्षर बनाना आवश्यक है. पैसा हमारे दिन-प्रतिदिन के जीवन के लिए बेहद जरूरी है, हम न केवल पढ़ाई के लिए इसका उपयोग करते हैं बल्कि हम जो खाते हैं, कपड़े पहनते हैं, तकनीक का उपयोग करते हैं और बहुत कुछ करते हैं. ऐसे में अगर आप अपने बच्चों के सामने पैसों का जिक्र नहीं करते हैं, तो वे इसका महत्व नहीं समझ पाएंगे या उन्हें इसे समझने में देर हो जाएगी. उन्हें बताएं कि पैसा कमाना और खर्चों का हिसाब-किताब करना कितना कठिन है. उन्हें यह महसूस करने में मदद करें कि बचत या निवेश के माध्यम से फंड का सबसे उचित उपयोग मौजूदा फंड का ज्यादा से ज्यादा सदुपयोग करना है.


    पैसा कमाया जाता है अपने बच्चों को यह समझने में मदद करना आवश्यक है कि पैसा कमाना इतना आसान नहीं है, बल्कि इसके लिए कड़ी मेहनत की आवश्यकता होती है. आप उन्हें यह सिखाएं कि आप एक परिवार के मुखिया होने के नाते पैसा कैसे कमाते हैं और उन्हें सैलरी का अर्थ समझाएं. इस तरह, आप पैसों के महत्व को समझने में उनकी मदद कर सकते हैं. इससे उन्हें पैसों की अहमियत का एहसास होगा. खर्चों का हिसाब-किताब समझाएं हम हर रोज अपनी दैनिक जरूरतों के लिए अपनी जेब ढीली करते हैं, और पूरे खर्चों का हिसाब-किताब रखते हैं. यह हमारी रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा है. इसलिए, वित्तीय साक्षरता हर जगह सिखाई जा सकती है – उदाहरण के लिए, खरीदारी करते समय, आप अपने बच्चों को उनकी चाहत और ज़रूरत के बीच का अंतर सिखा सकते हैं. आप इस अवसर का लाभ उठाकर उन्हें यह समझने में मदद कर सकते हैं कि क्रेडिट या डेबिट कार्ड क्या हैं और/या नकद कैसे काम करता है और कुछ खरीदते समय कैसे इसका उपयोग किया जाता है. आप खरीदारी के बिलों को समझने में भी उनकी मदद कर सकते हैं जिनमें प्राप्त वस्तु के अनुसार लागत और अन्य महत्वपूर्ण विवरण शामिल हैं.


    पैसों की बचत का महत्व समझाएं जैसा कि हमने पहले कहा है — अपने बच्चों को पैसों की बचत के महत्व को समझाना; अपनी नैतिक जिम्मेदारी बना लें. खर्चों को समझने में आप अपने बच्चों की मदद करें और आय और बचत इसमें एक बड़ी भूमिका निभाते हैं. उन्हें सिखाएं कि पहले बचत करना और उसके अनुसार खर्चों को समायोजित करना आवश्यक है. उन्हें अपनी पॉकेट मनी का कुछ हिस्सा अपने गुल्लक में बचत के रूप में रखने की आदत डालने में मदद करें और एक लक्ष्य निर्धारित करें. यह न केवल उन्हें बचत के मूल्य का एहसास कराने में मदद करेगा बल्कि धन-प्रबंधन की बात आने पर उन्हें स्वतंत्रता की भावना महसूस करने में भी मदद करेगा।.

  • संजय जैन अब फार्मेसी काऊंसिल आफ इंडिया के सदस्य भी निर्वाचित

    संजय जैन अब फार्मेसी काऊंसिल आफ इंडिया के सदस्य भी निर्वाचित

    भोपाल 21 जुलाई (प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)।भारत सरकार के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय की विधिक इकाई फार्मेसी काऊंसिल आफ इंडिया के सदस्य के रूप में मध्यप्रदेश फार्मेसी काऊंसिल के अध्यक्ष संजय जैन को विधिवत पांच सालों के लिए निर्वाचित किया गया है। इसके साथ ही मध्यप्रदेश अब देश के फार्मा सेक्टर में नई छलांग लगाने के लिए तैयार हो गया है। मोदी सरकार ने मेक इन इंडिया अभियान के अंतर्गत देश के फार्मा सेक्टर को विश्व की जरूरतों के लिए तैयार करने का रोड मैप बनाया है। मध्यप्रदेश की ओर से स्वास्थ्य मंत्री प्रभुराम चौधरी ने श्री संजय जैन को अपना प्रतिनिधि बनाकर भेजा है।
    फार्मेसी काऊंसिल आफ इंडिया के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ.मोंटू पटेल ने पिछले दिनों अपने रायपुर प्रवास के दौरान श्री जैन से मध्यप्रदेश के फार्मा सेक्टर की संभावनाओं की जानकारी ली थी। उनके साथ आए केन्द्रीय फार्मेसी शिक्षा समिति के अध्यक्ष डॉ. दीपेन्द्र सिंह ने स्टेट फार्मेसी काऊंसिल की स्थितियों की समीक्षा की थी। इसके बाद दिल्ली में हुए फैसले के आधार पर पीसीआई के रजिस्ट्रार और सचिव अनिल मित्तल ने इस निर्वाचन की सूचना भेजी है।
    भारत सरकार की ये संस्था देश में फार्मेसी के शिक्षण प्रशिक्षण और कालेजों को मान्यता देने में प्रमुख भूमिका निभाती है।देश के दवा उद्योग को दिशा देने में भारत सरकार का स्वास्थ्य मंत्रालय इस संस्था के माध्यम से ही संवाद करता है। वर्तमान नरेन्द्र मोदी सरकार ने जबसे मेक इन इंडिया का विचार लागू किया है तबसे भारत का दवा उद्योग कई मूलभूत बदलावों के साथ नई ऊंचाईयां छू रहा है।
    श्री संजय जैन को मध्यप्रदेश की ओर से पहली बार स्टेट फार्मेसी काऊंसिल का प्रतिनिधित्व करने का अवसर मिला है। मध्यप्रदेश सरकार ने दवा के कारोबार में राज्य की भागीदारी बढ़ाने के लिए जो प्रयास किए हैं राज्य को उसका पूरा लाभ मिले इसके लिए श्री जैन कई बड़े दवा उद्योगों से निरंतर संपर्क कर रहे हैं। स्वास्थ्य मंत्री डॉ.प्रभुराम चौधरी ने दवा उद्योग को सुव्यवस्थित करके आम जनता को जो आधुनिक दवाईयां सस्ती कीमतों पर उपलब्ध कराने की मुहिम चलाई है उसमें संजय जैन की उपस्थिति प्रभावी साबित होगी।

  • कार्पोरेट बैंकिंग में प्रवेश की दहलीज पर सद्गुरु नागरिक सहकारी बैंक

    कार्पोरेट बैंकिंग में प्रवेश की दहलीज पर सद्गुरु नागरिक सहकारी बैंक

        सद्गुरु नागरिक सहकारी बैंक के चुनाव में 16 जुलाई को नालंदा स्कूल में लिखेगा नया अध्याय

    भोपाल,13 जुलाई,(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)।राजधानी के व्यापारियों की आर्थिक प्रगति में बड़ी भागीदारी निभाने वाला सद्गुरु नागरिक सहकारी बैंक अब आधुनिकता के नए दौर में प्रवेश करने जा रहा है। बैंक ने आगामी 16 जुलाई रविवार को अपने नए संचालक मंडल के चुनाव आयोजित किए हैं। देश की तेज करवट ले रही अर्थव्यवस्था  के साथ कदमताल करने के लिए सद्गुरु वैभव पैनल ने आज पत्रकार वार्ता में अपनी योजनाओं का खाका प्रस्तुत किया।बैंक के संस्थापक स्वर्गीय श्री राजाभाऊ कुलकर्णी के सुपुत्र मिलिंद कुलकर्णी के मैदान में आ जाने से ये चुनाव नई उमंगों से लबरेज बन गया है।

             स्वर्गीय राजाभाऊ कुलकर्णी के प्रयासों से निर्मित इसबैंक को इसके अंशधारी सदस्यों, अमानतदारों, उधार कर्ताओं कर्मचारियों ने अपने अथक परिश्रम से लगातार सफल बनाया और ऊंचाईयों पर पहुंचाया। जब केवल सरकारी बैंकों का जलजला था और बाद में बड़े निजी बैंकों की धमक बढ़ी तब भी सद्गुरु नागरिक सहकारी बैंक अपना कारोबार बढ़ाता रहा है। जब सरकारी मदद से खोले गए सहकारी बैंक धूल धूसरित हो रहे थे तब भी सद्गुरु नागरिक सहकारी बैंक अपना लाभांश अपने हितग्राहियों में बांट रहा था। इस बार स्वर्गीय कुलकर्णी के बेटे ने अपने पिता के अधूरे स्वप्नों को साकार करके बैंक को नई ऊंचाईयों पर ले जाने का संकल्प व्यक्त किया है।

           आज पत्रकार वार्ता में सद्गुरु वैभव पैनल के सुरेश कानिटकर और मिलिंद कुलकर्णी ने कहा कि आधुनिक बैंकिंग के इस दौर में व्यापारियों और अंशधारकों की जरूरतों को पूरा करने के लिए हमारी पैनल ने एक व्यापक रोड मैप तैयार किया है। पैनल के अनुभवी सदस्यों ने मोबाईल बैंकिंग और आनलाईन बैंकिंग के माध्यम से अपने ग्राहकों के वित्तीय उन्नयन की तैयारी की है। उन्होंने बताया कि नालंदा स्कूल में होने वाले मतदान बैंक के वे अंशधारी सदस्य ही मतदान कर पाएंगे जिन्होंने अपने जीवनकाल में कम से कम एक बार बैंक लोन लिया है। निर्वाचन अधिकारी ने मतदान के लिए शासन की ओर से मान्यता प्राप्त पहचान पत्र लाना अनिवार्य कर दिया है।

           उन्होंने बताया कि पिछले कुछ सालों में बैंक के सदस्य संस्था से अपना जुड़ाव नहीं बना पाए हैं। अंशधारी सदस्यों की जरूरतों पर ध्यान नहीं दिए जाने के कारण आम ग्राहक खुद को उपेक्षित महसूस कर रहा है। संचालक मंडल की नीतियों की वजह से कई योग्य अधिकारी कर्मचारी अपनी नौकरियां छोड़ चुके हैं। इसी वजह से इस बार चुनाव में एक बदलाव की बयार महसूस की जा रही है। बैंक एक सहकारी संस्था है और भारतीय रिजर्व बैंक की निगरानी में सहकारिता कानून के तहत कार्य करती है। पिछले वर्षों में इसे चंद लोगों के इर्द गिर्द चलाने की कोशिशें की गईं। इस चुनाव में हमारी पैनल विजयी हुई तो हम बैंक को कार्पोरेट गवर्नेंस की ओर ले जाएंगे।

         सद्गुरु वैभव पैनल ने समाज के जागरूक डाक्टरों, सीए,वकील, व्यवसायी, पत्रकार आदि सभी वर्गों के लोग शामिल किए गए हैं। उन्होंने समाज के सभी वर्गों के मतदाता सदस्यों से निवेदन किया है कि वे मतदान अवश्य करें और सद्गगुरु पैनल के सभी सदस्यों को भारी बहुमत से विजयी बनाकर बैंकिंग के क्षेत्र में एक नया अध्याय लिखने की शुरुआत करें।

  • रोजगार के सशक्त माध्यम हैं सूक्ष्म और लघु उद्योग

    रोजगार के सशक्त माध्यम हैं सूक्ष्म और लघु उद्योग

    मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने बढ़ते मध्यप्रदेश का रोडमैप प्रस्तुत किया,ओमप्रकाश सखलेचा ने ली बैठक

    भोपाल, 19 जून( प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा है कि आत्म-निर्भर भारत के लिए आत्म-निर्भर मध्यप्रदेश के निर्माण का जो रोडमेप हमने बनाया है, उसके रोम-रोम में सशक्त औद्योगिक परिदृश्य के निर्माण और रोजगार सृजन की भावना रची-बसी है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में 21वीं सदी के आत्म-निर्भर भारत बनाने का जो यज्ञ चल रहा है, उसमें बड़े उद्योगों की भूमिका जितनी अहम है, उतना ही महत्व सूक्ष्म, लघु और मध्यम श्रेणी के उद्यमियों का भी है। युवाओं को रोजगार उपलब्ध कराने में इन उद्यमियों की भूमिका बहुत अधिक महत्वपूर्ण है, यह स्थानीय स्तर पर निवेश और रोजगार के अवसर सृजित करने के सशक्त माध्यम हैं। स्थानीय परिवेश-स्थानीय संसाधनों पर कार्य करने वाली इन इकाइयों की सहायता और विकास के लिए राज्य सरकार हरसंभव सहयोग प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध है। इसी उद्देश्य से आज हो रही समिट का ध्येय वाक्य “आर्थिक विकास के शुभ संयोग-मध्यप्रदेश के सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्योग” रखा गया है।
    मुख्यमंत्री श्री चौहान ने होटल आमेर ग्रीन भोपाल में राज्य स्तरीय एमएसएमई समिट का शुभारंभ किया। भोपाल महापौर श्रीमती मालती राय विशेष रूप से उपस्थित थी। समिट में अनेक उद्योग परिसंघ के पदाधिकारी, बड़े औद्योगिक घराने, नव उद्यमी, केन्द्र और राज्य सरकार के वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए।
    मुख्यमंत्री श्री चौहान ने दीप प्रज्ज्वलित कर समिट का शुभारंभ किया। मध्यप्रदेश में एमएसएमई की भूमिका पर लघु फिल्म का प्रदर्शन किया गया। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने सफल उद्यमियों को एमएसएमई अवार्ड प्रदान किए और राज्य सरकार एवं देश की प्रतिष्ठित कंपनी और संस्थानों के बीच एम.ओ.यू का आदान-प्रदान भी हुआ। प्रदेश के सभी जिले कार्यक्रम से वर्चुअली जुड़े।
    मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम मध्यप्रदेश की समृद्धि और विकास के भागीदार हैं। हम मिल-जुल कर कैसे आगे बढ़ सकते हैं, इस पर विचार-विमर्श के लिए यह समिट की गई है। सफलता के लिए उत्साह सबसे आवश्यक है। आप सकारात्मक सोच के साथ ईज ऑफ डूईंग बिजनेस का लाभ उठाते हुए आगे बढ़ें। सरकारी नीतियों में जहाँ सुधार की आवश्यकता हो, उन बिन्दुओं को सरकार के साथ साझा करें। जो भी बेहतर होगा उसे क्रियान्वित किया जाएगा। हम मिल कर काम करेंगे और मध्यप्रदेश को आगे बढ़ाएंगे। प्रधानमंत्री श्री मोदी के नेृतत्व में भारत को विश्व में अग्रणी बनाने के लिए हम सब प्रतिबद्ध हैं।
    मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि स्व-रोजगार और छोटे उद्योगों को सहायता के लिए प्रदेश में 12 योजनाएँ संचालित हैं। मुख्यमंत्री सीखो कमाओ योजना भी लागू की जा रही है, जिसमें 700 कार्य चिन्हित किए गए हैं। उद्यमी इस योजना से जुड़ें, युवाओं को जोड़ें, उन्हें दक्ष बनाएँ और योजना का लाभ उठाएँ। यह योजना उद्यमियों, रोजगार के इच्छुक युवाओं के लिए उपयोगी और मध्यप्रदेश को सक्षम एवं आत्म-निर्भर बनाने के लिए प्रभावी है।
    मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि हर स्तर के उद्योगों की आवश्यकता के अनुरूप नीतियाँ और योजनाएँ बनाकर उनका क्रियान्वयन किया जा रहा है। प्रदेश में उपलब्ध प्रचुर खनिज संसाधन, पर्याप्त लैण्डबैंक, सुविकसित सड़क अधो-संरचना, बढ़ती कृषि उत्पादकता और निवेश अनुकूल नीतियों से औद्योगिक विकास की अपार संभावनाएँ मौजूद हैं। एमएसएमई सेक्टर के विकास के लिए पृथक से विभाग गठित किया गया है। स्टार्टअप को प्रोत्साहित करने और उन्हें बेहतर ईको सिस्टम उपलब्ध कराने के लिए कई प्रावधान किए गए हैं। बेहतर सड़क नेटवर्क के साथ एक्सप्रेस-वे विकसित किए जा रहे हैं। साथ ही निवेश गलियारों का भी निर्माण होगा। बेहतर औद्योगिक अधो-संरचना सुविधा के लिए उद्योगों के क्लस्टर विकसित किए जा रहे हैं। “एक जिला-एक उत्पाद” से रोजगार के नए अवसर सृजित हो रहे हैं। दक्ष मानव संसाधन की उपलब्धता के लिए ग्लोबल स्किल पार्क के साथ संभाग और जिला स्तर पर आई.आई.टी को भी सशक्त किया जा रहा है।
    मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि प्रदेश निरंतर विकास की ओर अग्रसर है। हम अब बीमारू राज्य नहीं हैं। मध्यप्रदेश की जीएसडीपी का आकार 15 लाख करोड़ पार कर चुका है। राज्य की प्रतिव्यक्ति आय एक लाख 40 हजार रूपए हो गई है। इस वर्ष का बजट 3 लाख 14 हजार करोड़ रूपए का है। प्रदेश ने वित्तीय प्रबंधन की अनूठी मिसाल प्रस्तुत की है। राज्य सरकार लाड़ली बहनों को प्रतिमाह एक हजार रूपए देने और केपिटल एक्सपेंडिचर बढ़ाने का कार्य एक साथ कर रही है।
    सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्री श्री ओमप्रकाश सखलेचा ने कहा कि हमारा विभाग अर्थ-व्यवस्था में महत्वपूर्ण योगदान देने वाला विभाग है। सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों को सबसे अधिक आवश्यकता तकनीकी अपग्रेडेशन की है। मुख्यमंत्री श्री चौहान के सहयोग, मार्गदर्शन और उदारता से प्रदेश में उद्यमशीलता का वातावरण बना है। राज्य सरकार औद्योगिक क्लस्टर्स के साथ डिस्प्ले सेंटर और ऑनलाइन कनेक्टिविटी को प्रोत्साहित कर रही है। प्रदेश में उत्पादित सामग्री की बेहतर मार्केटिंग के लिए भी बेहतर प्रयास हो रहे हैं।
    मुख्यमंत्री श्री चौहान ने वर्ष 2018-19, 2019-20 और 2020-21 के लिए एमएसएमई अवार्ड प्रदान किए। प्रभावी कार्य संस्कृति और बेस्ट प्रेक्टिसेस अपनाने के लिए वर्ष 2018-19 का प्रथम पुरस्कार आईटीएल इंडस्ट्रीज लिमिटेड इंदौर को, द्वितीय पुरस्कार शास्त्री सर्जिकल इण्डस्ट्रीज रायसेन और तृतीय पुरस्कार शक्ति एम्पोरियम झाबुआ को प्रदान किया गया। महिला उद्यमियों में मंत्रा कम्पोजिट इंदौर की श्रीमती ममता महाजन को पुरस्कृत किया गया। वर्ष 2019-20 के लिए नंदिनी मेडिकल लेबोरेट्रीज इंदौर को प्रथम, न्यू लाईफ लेबोरेट्रीज मण्डीदीप रायसेन को द्वितीय और सेफफ्लेक्स इंटरनेशनल धार को तृतीय पुरस्कार प्रदान किया गया। वर्ष 2020-21 के लिए मॉर्डन लेबोरेट्रीज इंदौर को प्रथम, डीइसीजी इंटरनेशनल मण्डीदीप रायसेन को द्वितीय और हेल्थीको क्वालिटी प्रोडक्ट्स धार को तृतीय पुरस्कार प्राप्त हुआ। वर्ष 2020-21 में महिला उद्यमियों की श्रेणी में सांई मशीन टूल्स इंदौर की श्रीमती शिखा विशाल जायसवाल और श्रीमती निहारिका अजय जायसवाल तथा अर्थव पैकेजिंग इंदौर की श्रीमती ममता शर्मा को पुरस्कृत किया गया। मुख्यमंत्री श्री चौहान की उपस्थिति में एनएसई इंडिया, वॉलमार्ट, आरएक्सआईएल, इनवॉइस मार्ट तथा आइसेक्ट के साथ एम.ओ.यू. का आदान-प्रदान हुआ।
    सचिव एमएसएमई पी. नरहरि ने अतिथियों का स्वागत किया तथा समिट और विभागीय कार्यक्रमों एवं योजनाओं की जानकारी दी। समिट में 6 सत्र हैं, जिनसे उद्यमियों, विषय-विशेषज्ञों और युवाओं को उद्यमिता के लिए मार्गदर्शन प्राप्त होगा। सत्रों को ऐसा डिजाइन किया गया है, जिससे अलग-अलग क्षेत्रों में नई संभावनाओं पर विशेष फोकस रहे। समिट में एमएसएमई के लिए टेक्नालॉजी ट्रांसफर, न्यू एज फाइनेंस, अंतर्राष्ट्रीय प्रतिस्पर्धा, महिला उद्यमिता को प्रोत्साहन और डिजिटल रूपांतरण विषयों पर विशेष सत्र हुए।
    समिट में संयुक्त राष्ट्र औद्योगिक विकास संगठन के भारत प्रतिनिधि श्री रेने वान बर्कल, फिक्की फ्लो की राष्ट्रीय अध्यक्ष सुश्री सुधा शिवकुमार, कोप्पल टॉय क्लस्टर के सीईओ श्री किशोर राव, राष्ट्रीय अनुसंधान विकास निगम के अध्यक्ष और प्रबंध निदेशक कमोडोर अमित रस्तोगी (सेवानिवृत्त), भारतीय लोक प्रशासन संस्थान के महानिदेशक श्री सुरेंद्र नाथ त्रिपाठी और लघु उद्योग भारती के अध्यक्ष श्री महेश गुप्ता उपस्थित थे। इन्वेस्ट इंडिया, एसोचेम इंडिया, सीआईआई, फिक्की, पीएचडी चेम्बर्स ऑफ कॉमर्स एण्ड इंडस्ट्री और डिक्की के प्रतिनिधि समिट में शामिल हुए।

  • जन धन खातों में न्यूनतम बैलेंस जरूरी नहीं

    जन धन खातों में न्यूनतम बैलेंस जरूरी नहीं

    भोपाल,14 जून(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर) के कुछ जिलों में कहीं-कहीं मुख्यमंत्री लाड़ली बहना योजना की लाड़ली बहनों के बैंक खातों में अंतरित की गई राशि क्रेडिट नहीं होने की जानकारी मिली है। न्यूनतम बेलेंस नही होने से सेवा शुल्क में रूप में बैंकों द्वारा राशि काटे जाने की आशंका व्यक्त की गई है, जबकि रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के निर्देशानुसार प्रधानमंत्री जन धन योजना में खुले बैंक अकाउंट सहित बेसिक सेविंग बैंक डिपॉजिट में न्यूनतम बेलेंस रखने की बाध्यता नहीं है। बैंक, इन अकाउंट पर सेवा शुल्क नहीं ले सकते हैं।

    संयुक्त संचालक महिला बाल विकास डॉ. विशाल नाडकर्णी ने बताया है कि स्टेट लेवल बैंकर्स कमेटी (एसएलबीसी) ने निर्देश जारी कर निष्क्रिय खातों वाली लाड़ली बहनाओं के खाते, जन धन खातों में परिवर्तित करने की कार्यवाही के निर्देश भी दिये हैं, जिससे कि बहनों के खाते में अंतरित की गई राशि जमा हो सके।

    डॉ. नाडकर्णी ने कहा है कि महिला बाल विकास संचालनालय द्वारा प्रयास किया जा रहा है कि महिलाओं के बैंक खातों से न्यूनतम बेलेंस न होने के कारण बैंकों द्वारा राशि काटी गई है, ऐसे सभी प्रकरणों के लिये जिला कार्यक्रम अधिकारी द्वारा प्रयास किया जा रहा है कि इन महिलाओं के बेसिक सेविंग डिपाजिट अकाउंट में या तो परिवर्तन किया जाएगा या फिर नवीन अकाउंट खुलवा कर डीबीटी सक्रिय किया जाएगा, जिससे उनके अकाउंट से राशि न कटे। इसके अतिरिक्त इस अवधि के दौरान जितने भी डीबीटी हुए हैं, उन सभी के भुगतान की प्रक्रिया महिला बाल विकास संचालनालय द्वारा जारी शेड्यूल के अनुसार की जाएगी। मुख्यमंत्री लाड़ली बहना योजना के स्वीकृति-पत्र मिलने के बाद भी लाड़ली बहनों के खाते में राशि नहीं आने के प्रकरण बहुत कम संख्या में हैं। राशि प्राप्त नहीं होने के कारणों की जानकारी पोर्टल पर उपलब्ध हो गई है। ऐसे प्रकरणों का निदान जिला स्तर से ही किया जा रहा है और डीबीटी सक्रिय होते ही शेड्यूल अनुसार भुगतान किया जाएगा।

  • भारतीय रेल ने नौ साल में लिखी विकास की नई कहानी

    भारतीय रेल ने नौ साल में लिखी विकास की नई कहानी

    नई दिल्ली, 11 जून(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर). बीते 9 साल में, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व में, भारतीय रेलवे में अभूतपूर्व बदलाव देखा गया है. आर्थिक विकास को बढ़ावा देने और कनेक्टिविटी में सुधार के लिए मजबूत रेलवे नेटवर्क के महत्व को स्वीकार करते हुए, केंद्र की मोदी सरकार ने रेलवे के आधुनिकीकरण और विस्तार के लिए कई महत्वाकांक्षी योजनाएं शुरू की हैं.
    मोदी सरकार ने पैसेंजर्स की सुरक्षा सुनिश्चित करने और ऑपरेशनल कैपेसिटी को बढ़ाने के लिए रेलवे के बुनियादी ढांचे के एडवांसमेंट पर फोकस किया है. सिग्नलिंग और टेलीकम्यूनिकेशन सिस्टम को बढ़ाने के लिए पैसे का पर्याप्त आवंटन किया गया है और पुराने उपकरणों को अत्याधुनिक तकनीक से बदल दिया गया है. इससे दुर्घटनाओं में काफी कमी आई है और रेलवे के समग्र सुरक्षा रिकॉर्ड में सुधार हुआ है.
    डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर की योजना मोदी सरकार के लिए मील का पत्थर साबित हो रही है. ये हाई-स्पीड कॉरिडोर, जैसे कि पश्चिमी डीएफसी और पूर्वी डीएफसी, गुड्स को सही तरीके से ट्रांसपोर्ट करने और मौजूदा रेलवे लाइनों पर भीड़ को कम करने के लिए डिज़ाइन किए गए हैं. ये कॉरिडोर पूरे देश में गुड्स ढुलाई की निर्बाध आवाजाही को सुगम बनाकर अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देंगे.
    केंद्र की मोदी सरकार भारत में हाई-स्पीड रेल (Bullet Train) लेकर आई है. मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन परियोजना, जापान के सहयोग से, इंटरसिटी यात्रा में रिवोल्यूशन लाने के लिए तैयार है, जिससे दोनों शहरों के बीच यात्रा का समय काफी कम हो जाएगा. यह परियोजना न केवल तकनीकी प्रगति के प्रति भारत की प्रतिबद्धता को प्रदर्शित करती है, बल्कि अंतर्राष्ट्रीय साझेदारों के साथ संबंधों को भी मजबूत करती है.
    मोदी सरकार ने देश भर में रेलवे के बुनियादी ढांचे के विस्तार और आधुनिकीकरण को प्राथमिकता दी है. कई नई रेलवे लाइनें, दोहरीकरण और विद्युतीकरण परियोजनाएं शुरू की गई हैं, जो पहले से असंबद्ध क्षेत्रों को जोड़ती हैं और मौजूदा मार्गों पर भीड़भाड़ को कम करती हैं. इसके अलावा, सरकार ने भारतमाला परियोजना और सागरमाला परियोजनाएं शुरू की हैं, जो रेलवे को रोडवेज और पोर्ट कनेक्टिविटी के साथ इंटीग्रेट करती हैं, मल्टीमॉडल परिवहन को बढ़ावा देती हैं और आर्थिक विकास को बढ़ावा देती हैं.
    डिजिटल युग को गले लगाते हुए, मोदी सरकार ने पैसेंजर्स के अनुभव को बढ़ाने और संचालन को सिस्टमेटिक करने के लिए कई पहलें शुरू की हैं. भारतीय रेलवे खानपान और पर्यटन निगम (IRCTC) की वेबसाइट और मोबाइल ऐप की शुरुआत ने टिकट बुकिंग को आसान बना दिया है, जिससे फिजिकल टिकट काउंटरों पर निर्भरता कम हो गई है. इसके अतिरिक्त, रेलवे स्टेशनों पर वाई-फाई सेवाओं ने उन्हें डिजिटल हब में बदल दिया है.
    भारत की गौरव गाथा में वंदे भारत ट्रेन ने बड़ा योगदान दिया है. इस अत्याधुनिक सेमी हाई-स्पीड ट्रेन ने देश में रेल यात्रा में क्रांति ला दी है, कनेक्टिविटी को बढ़ाया है और आर्थिक विकास को बढ़ावा दिया है. अपनी अत्याधुनिक तकनीक और बेहतर सुविधा के साथ, इसने घरेलू और अंतरराष्ट्रीय दोनों पर्यटकों को आकर्षित किया है, पर्यटन क्षेत्र को बढ़ावा दिया है और रोजगार के अवसर पैदा किए हैं. साथ ही तेजस ट्रेनों को भी लाया गया है. ये ट्रेनें प्राइवेट हाथों में हैं. डबल डेकर ट्रनों के भी इंट्रोड्यूस किया गया है.
    पैसेंजर सुविधाओं पर सरकार का मुख्य फोकस रहा है. देश भर के स्टेशनों को बेहतर प्रतीक्षालयों, बेहतर स्वच्छता सुविधाओं और एस्केलेटर और लिफ्ट जैसी सुविधाओं का आधुनिकीकरण किया गया है.
    कार्बन फुटप्रिंट को कम करने और ऊर्जा दक्षता बढ़ाने के लिए, मोदी सरकार ने रेलवे इलेक्ट्रिफिकेशन पर बहुत जोर दिया है. ब्रॉड-गेज रेलवे लाइन के 100% इलेक्ट्रिफिकेशन के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए सख्ती से पालन किया गया है, जिससे ईंधन की लागत में काफी बचत और ग्रीन रेलवे सिस्टम का रास्ता खुला है. इस संक्रमण ने न केवल प्रदूषण को कम किया है, बल्कि ट्रेन संचालन की गति और दक्षता को भी बढ़ाया है.
    मोदी सरकार ने रोजगार के अवसर पैदा करने में रेलवे की क्षमता को पहचाना है. रेलवे कर्मियों के स्किल डेवलपमेंट के जरिए सक्षम कार्यबल बनाने के प्रयास किए गए हैं. भारतीय रेलवे विश्वविद्यालय और व्यावसायिक प्रशिक्षण कार्यक्रम जैसी पहलें लोगों को रेलवे उद्योग में करियर बनाने के लिए आवश्यक कौशल से लैस करने के लिए शुरू की गई हैं. इससे न केवल नौकरी चाहने वालों को लाभ हुआ है बल्कि रेलवे की समग्र मानव संसाधन क्षमताओं को भी मजबूती मिली है.

  • नेशनल इनोवेशन सिस्टम से जुड़ें फार्मासिस्ट

    नेशनल इनोवेशन सिस्टम से जुड़ें फार्मासिस्ट


    अगर हम अपनी कंपनियों, सार्वजनिक शोध और नियमन में जरूरी बदलाव करें तो इनोवेशन पर आधारित एक ऐसा औष​धि उद्योग तैयार कर सकते हैं जो दुनिया को पीछे छोड़ देगा।

    भोपाल, 10 जून (प्रेस इंफार्मेशन सेंटर). प्रभावी नैशनल इनोवेशन सिस्टम कायम करने के लिए हमें बीते 70 वर्षों की सबसे सफल आर्थिक घटनाओं से सबक लेना होगा। जापान, द​क्षिण कोरिया, ताइवान, सिंगापुर और चीन इसके उदाहरण हैं। इन सभी देशों ने इनोवेशन की क्षमता विकसित करने की एक प्रक्रिया का पालन किया। एक प्रतिस्पर्धी उद्योग तैयार किया गया फिर गहरी तकनीकी क्षमता, उसके पश्चात आंतरिक शोध एवं विकास तथा अंत में सरकारी स्तर पर शोध और विकास किया गया।

    हम फार्मा सेक्टर में दुनिया को पछाड़ने वाला इनोवेशन कर सकते हैं। यह एक ऐसा उद्योग है जिसमें हम शोध एवं विकास में वै​श्विक स्तर का निवेश कर सकते हैं। हमने यह नतीजा कैसे निकाला? दरअसल यह जानकारी उन टिप्प​णियों का नतीजा है जो फार्मा सेक्टर में इनोवेशन को लेकर बंद दरवाजों के पीछे हुई एक बैठक में निकलीं। इस बैठक में फार्मा उद्योग के कुछ सर्वा​धिक जानकार लोग, विद्वान, सरकार के लोग आदि शामिल थे। इसका आयोजन सेंटर फॉर टेक्नॉलजी इनोवेशन ऐंड इकनॉमिक रिसर्च तथा अनंत सेंटर ने किया था।

    कंपनियों के सामने चुनौती यह है कि भारतीय फार्मा उद्योग एक सफल क्षेत्र है। 50 वर्ष पहले जहां हम विदेशी कंपनियों और ब्रांड पर निर्भर रहते थे, वहीं अब हमने एक बड़ा और जीवंत फार्मा सेक्टर तैयार किया है जहां उद्यमिता श​क्ति से भरपूर भारतीय कारोबारी बहुराष्ट्रीय कंपनियों का मुकाबला कर रहे हैं। आकार के मामले में हम 10 फीसदी हिस्सेदारी के साथ दुनिया में तीसरे स्थान पर हैं लेकिन 42 अरब डॉलर की बिक्री के साथ हम मूल्य में 14वें स्थान पर हैं और हमारी हिस्सेदारी केवल 1.5 फीसदी है।

    फार्मा उद्योग की आकांक्षा 2030 तक अपना आकार तीन गुना करने की है। इसमें इनोवेशन का योगदान होगा। परंतु इसके लिए पूरी व्यवस्था बनानी होगी। इसकी शुरुआत शोध एवं विकास में निवेश से होनी चाहिए। अमेरिका, जापान, जर्मनी, ​स्विट्जरलैंड और ब्रिटेन में बड़ी-बड़ी फार्मास्युटिकल कंपनियां हैं। इन सभी ने शोध एवं विकास में अरबों डॉलर का निवेश किया है। ​​

    स्विट्जरलैंड की रॉश और नोवार्टिस, अमेरिका की जेऐंडजे, फाइजर, ब्रिस्टल-मायर्स, मर्क और इलाई लिली, ब्रिटेन की ऐस्ट्राजेनेका और जीएसके, जर्मनी की बेयर, बोरिंगर और मर्क डी, जापान की ताकेदा, दाइची, एस्टेल्लास, ओत्सुका और एईसाई। हमें उनकी बराबरी के लिए क्या करना चाहिए? ये कंपनियां हमारी टॉप पांच फार्मा कंपनियों के कुल टर्नओवर से अ​धिक रा​शि तो अपने शोध एवं विकास पर व्यय करती हैं। हमारी कंपनियों को कम से कम 10 वर्षों तक शोध एवं निवेश व्यय बढ़ाना होगा।

    आंतरिक शोध एवं विकास में निवेश को प्रोत्साहन दिया जाना चाहिए। हम कंपनियों से वह करने के लिए कहने में भी हिचकिचाते हैं जो उन्हें अपनी बेहतरी के लिए खुद कहना चाहिए यानी शोध एवं विकास पर व्यय बढ़ाना। शोध एवं विकास पर व्यय करने वाली टॉप कंपनियों से यह कहा जाना चाहिए कि वे इस सेक्टर में निवेश बढ़ाएं। अगले 10 वर्षों तक शोध एवं विकास व्यय में इजाफे के मामले में आय कर पर कर छूट दी जानी चाहिए।

    हमें ऐसी नियामकीय व्यवस्था बनानी चाहिए जो कंपनियों में इनोवेशन को बढ़ावा दे। हमारी एक राउंडटेबल बैठक में वक्ताओं ने नियामकीय ढांचे में सुधार की बात कही थी। नियमन का काम ऐसे अ​धिकारियों के हवाले है जिनको औष​धि निर्माण में लगने वाले नए घटक के बारे में कोई जानकारी नहीं है।

    ऐसी ही वजहों से भारतीय औष​धि निर्माताओं को पहले चरण के परीक्षण भारत के बजाय ऑस्ट्रेलिया में करने पड़ रहे हैं। ऑस्ट्रेलिया में इसकी लागत 10 गुना तक अ​धिक होती है लेकिन वहां प्रक्रिया व्यव​स्थित, पारद​र्शी और सुनि​श्चित है। अगर हम नियामकीय व्यवस्था में सुधार करें तो हमें औष​धि निर्माण में प्रतिस्पर्धी बढ़त मिल सकती है।

    हम अपने सकल घरेलू उत्पाद का करीब 0.4 फीसदी सार्वजनिक फंडिंग वाले शोध एवं विकास में खर्च करता है जो वै​श्विक औसत का 0.5 फीसदी है। परंतु इस निवेश पर हमें बहुत कम प्रतिफल मिलता है। समस्या यह नहीं है कि हम कितना व्यय करते हैं ब​ल्कि दिक्कत यह है कि हम कहां खर्च करते हैं। राष्ट्रीय शोध एवं विकास व्यय का आधा से अ​धिक हिस्सा सरकार अपनी स्वचालित प्रयोगशालाओं में व्यय करती है। सबसे अ​धिक व्यय रक्षा पर उसके बाद परमाणु ऊर्जा, CSIR और कृ​षि पर व्यय होता है। स्वास्थ्य शोध छठे स्थान पर है और शोध एवं विकास पर होने वाले सरकारी व्यय का छह फीसदी उस पर खर्च किया जाता है।

    अमेरिका में स्वास्थ्य क्षेत्र का शोध रक्षा के ठीक बाद आता है और सकार शोध विकास व्यय का 27 फीसदी हिस्सा उस पर खर्च करती है। ब्रिटेन में यह 20 फीसदी है। मजबूत आंतरिक व्यय से ही इस क्षेत्र में बात बन सकती है। सरकारी शोध एवं विकास व्यय का बड़ा हिस्सा स्वास्थ्य पर खर्च करने से इसलिए भी लाभ होगा क्योंकि फार्मा उद्योग में गहन शोध एवं विकास होता है।

    इसके अलावा भी अवसर हैं। फार्मा उद्योग का कोई भी व्य​क्ति आपको बता देगा कि वे आसानी से कई फार्मेसी पाठ्यक्रमों के ​युवा स्नातकों को नौकरी दे सकते हैं। लेकिन उन्हें आसानी से बढि़या शोध प्रतिभाएं नहीं मिलतीं। विशेष प्रतिभाएं अक्सर अमेरिका और ब्रिटेन की प्रयोगशालाओं में चली जाती हैं। यह बात उन्हें बेहतर फंडिंग वाले विश्वविद्यालयों से जोड़ती है जो इस दिशा में ढेर सारा शोध करते हैं।

    तमाम ऐतिहासिक कारणों से हमारे अ​धिकांश सार्वजनिक शोध स्वायत्त सरकारी प्रयोगशालाओं में होता है। जबकि तमाम अन्य देश सरकारी विश्वविद्यालयो में शोध करते हैं। अगर हम उच्च ​शिक्षा में सार्वजनिक शोध पर बल दें तो हम बेहतर प्रतिभाएं तैयार कर पाएंगे।

    इनोवेशन को लेकर राष्ट्रीय स्तर पर आकांक्षा होनी आवश्यक है। चीन के अनुभव से भी हम सीख सकते हैं। 15 वर्ष पहले भारतीय फार्मा उद्योग इनोवेशन में चीन से आगे था लेकिन आज हम 10 वर्ष पीछे हैं। 2012 के आसपास चीन में नियामकीय बदलाव करके चिकित्सकीय परीक्षणों को आसान बना दिया गया, वि​भिन्न स्थानीय सरकारों के बीच की प्रतिद्वंद्विता ने कंपनियों को अपने शहर में शोध विकास बढ़ाने को प्रेरित किया।

    वहां प्रतिभा खोज कार्यक्रम में हजारों प्रतिभाशाली युवाओं का चयन किया गया और चीन के बाजार और निर्यातोन्मुखी उद्योग ने पूरा परिदृश्य बदल दिया। इसके इर्दगिर्द फलता-फूलता वेंचर कैपिटल उद्योग तैयार हुआ। गत वर्ष इस उद्योग ने चीन में इस क्षेत्र के स्टार्टअप में 15 अरब डॉलर का निवेश किया। भारत में इसकी तुलना में बहुत कम प्रगति हुई। आगे की राह एक व्यापक राष्ट्रीय उद्देश्य से निकलेगी जिसके तहत भारत के फार्मा उद्योग को इनोवेशन में अग्रणी बनाने का प्रयास होना चाहिए।

    नियामकीय ढांचे में बदलाव लाकर चिकित्सकीय परीक्षणों का मार्ग सहज किया जा सकता है और स्वास्थ्य से जुड़े शोध के क्षेत्र में सरकारी निवेश बढ़ाने से भी हालात में सुधार होगा। आज से 10 वर्ष बाद हमारे फार्मा उद्योग का बदला हुआ इनोवेशन भारतीय उद्योग को दिशा दिखा सकता है।

    (नौशाद फोर्ब्स, फोर्ब्स मार्शल के को-चेयरमैन और सतीश रेड्डी, रेड्डीज लैबोरेटरीज के चेयरमैन हैं) बिजिनेस स्टैंडर्ड हिंदी से साभार

  • बीना रिफायनरी से ज्यादा धंधा कर रही रिलायंस

    बीना रिफायनरी से ज्यादा धंधा कर रही रिलायंस

    भोपाल,26 मई(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)। भारत की सरकारी तेल रिफायनरियां नियमों से बंधे होने की वजह से बाजार की रपटीली राहों पर फिसड्डी साबित हो रहीं हैं।इसकी तुलना में निजी रिफायनरीज ज्यादा अच्छा धंधा कर रहीं हैं। मसलन भारत पेट्रोलियम या इंडियन ऑइल, कच्चे तेल से बने उत्पाद – माने पेट्रोल-डीज़ल निर्यात नहीं कर सकते. वहीं, निजी रिफाइनरीज़ पर ऐसा कोई प्रतिबंध नहीं है. उन्हें बस 65 हज़ार पेट्रोल पंप्स में से 10 हज़ार में तेल की सप्लाई देने की बाध्यता है. उसके बाद वो चाहे जहां तेल बेच सकती हैं. रूस-यूक्रेन जंग से पहले, रिलायंस और नायरा जैसी निजी रिफाइनरियों को इंटरनैशनल मार्केट से कच्चा तेल ख़रीदना पड़ता था, जो कि रूसी तेल की तुलना में काफी महंगा था. अब ये दोनों रिफाइनरियां रियायती दरों पर रूस से तेल आयात करती हैं. और विदेश में माल बेचकर भयानक मुनाफ़ा कमाती हैं.

    नायरा गुजरात में स्थित है, लेकिन अप्रत्यक्ष रूप से कंपनी का स्वामित्व, प्रमुख रूसी तेल कंपनी रॉसनेफ्ट के पास है. रॉसनेफ्ट ने 2017 में रुइया समूह से एस्सार रिफाइनरी को क़रीब 105 करोड़ रुपए में ख़रीद लिया था. विशेषज्ञ इस बात को भी रेखांकित करते हैं कि रिलायंस का पहले से ही रूसी कंपनियों से अच्छा संपर्क है.

    बीना रिफायनरीज के एक प्रमुख सूत्र ने बताया कि भारत सरकार रूस पर लगे अंतर्राष्ट्रीय प्रतिबंधों की वजह से न तो उसका तेल खरीद की अनुमति दे सकती है न ही वह खुद रशिया से कोई कारोबार कर सकती है। जबकि निजी कंपनियों के सामने ऐसी कोई बाध्यता नहीं है। भारत की निजी कंपनियों ने जिस तरह विदेशी परिवहन के क्षेत्र में अपने कदम बढ़ाए हैं उससे भारतीय कंपनियों का विदेशी कारोबार तेजी से बढ़ा है। यही वजह है कि चाहे रिलायंस हो या नायरा दोनों के कारोबार में भारत सरकार कोई दखल नहीं दे सकती है। यही नहीं उसे इन कंंपनियों के कारोबार को सफल बनाने के लिए सुरक्षा के प्रबंध भी करने हैं। यही वजह है कि मुक्त बाजार की अर्थव्यवस्था का ये मसला आज वैश्विक प्रतिबंधों पर भारी पड़ रहा है।