सागर, 27 सितंबर(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि भविष्य का बुन्देलखंड, विकसित बुन्देलखंड होगा। प्रदेश में उद्योगों के विकास का कार्य निरंतर जारी रहेगा। छोटे से छोटे उद्यमी की सहायता के लिए भी राज्य सरकार पूर्ण सहयोग प्रदान करेगी। केन-बेतवा परियोजना के क्रियान्वयन से बुन्देलखंड के ढाई लाख हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई क्षमता की वृद्धि होगी, जिससे बुन्देलखंड क्षेत्र का स्वरूप बदल जायेगा। सागर में एयरपोर्ट का निर्माण होगा। इससे एविएशन क्षेत्र में संभावनाएं बढ़ेगी। प्रदेश के कई स्थानों पर विमानन की गतिविधियों के लिए केन्द्र सरकार का पूर्ण सहयोग मिल रहा है, इससे रोजगार भी बढेगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव सागर में रीजनल इंडस्ट्री कॉन्क्लेव के शुभारंभ सत्र को संबोधित कर रहे थे।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने आरआईसी सागर के शुभारंभ अवसर पर मध्यप्रदेश में औद्योगिक निवेश के अवसरों पर केन्द्रित लघु फिल्म “एडवांटेज एमपी” का प्रदर्शन किया गया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने एमपीआईडीसी के सागर स्थित क्षेत्रीय कार्यालय का वर्चुअल भूमि-पूजन किया। उन्होंने सागर संभाग के 6 जिलों सागर, पन्ना, टीकमगढ़, निवाड़ी, छतरपुर और दमोह में इन्वेस्टमेंट फेसिलिटेशन सेंटर और संभागीय मुख्यालय में एमपीआईडीसी के रीजनल ऑफिस का शुभारंभ किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने इसके साथ ही कोयंबटूर (तमिलनाडू) में एमपीआईडीसी के कार्यालय का भी वर्चुअल शुभारंभ किया। इस अवसर पर औद्योगिक क्षेत्र से सिंधगवां की जलापूर्ति के लिए नगर निगम सागर और एमपीआईडीसी के मध्य ट्रीटेड वाटर प्रदाय के लिए एमओयू का संपादन भी हुआ। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने 96 औद्योगिक इकाइयों के आशय-पत्र जारी किए। इन इकाइयों को 240 एकड़ भूमि आवंटित की जाना है। इससे 1 हजार 560 करोड़ का पूंजी निवेश एवं 5 हजार 900 से अधिक व्यक्तियों को रोजगार प्रदाय किया जाना प्रस्तावित है।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बुंदेलखंड इनोवेशन चैलेंज (हैकाथॉन) के विजेताओं बेम्बू वर्ल्ड के श्री सुजीत तिवारी, सेवा हब के श्री आशीष शर्मा, निम्बस गेमिंग के श्री विपुल सिंह परमार को क्रमशः प्रथम, द्वितीय और तृतीय पुरस्कार प्रदान किए। जय अनाग गायत्री प्राइवेट लिमिटेड की सुश्री निलय शर्मा को सर्वश्रेृष्ठ महिला उद्यमी के रूप में पुरस्कृत किया गया। इस अवसर पर बुक ऑडियो के लिए सोशल मीडिया क्रिऐटर श्री राजीव यादव भी पुरस्कृत किए गए।
क्षेत्रीय इंडस्ट्री कॉन्क्लेव के शुभारंभ सत्र में मंगोलिया के राजदूत श्री गनबोल्ड डंबजाव, टीड्व्ल्यू के सीईओ श्री इंगो सोईलर, थाईलैंड के महावाणिज्यदूत श्री डोनाविट पूलसावत, मंत्री श्री गोविंद सिंह राजपूत, मंत्री श्री चैतन्य काश्यप, मंत्री श्री धर्मेन्द्र भाव सिंह लोधी, मंत्री श्री लखन पटेल, राज्यमंत्री श्री दिलीप अहिरवार, खजुराहो सांसद श्री वी.डी. शर्मा, पूर्व मंत्री श्री गोपाल भार्गव और श्री भूपेन्द्र सिंह सहित कई वरिष्ठ जनप्रतिनिधि, राष्ट्रीय व अंतर्राष्ट्रीय उद्योग समूहों के प्रतिनिधि उपस्थित थे।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने जनसंपर्क विभाग द्वारा हिन्दी में प्रकाशित “मध्यप्रदेश संदेश” के अंग्रेजी संस्करण का लोकार्पण किया। इस अंक में राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु की मध्यप्रदेश यात्रा, प्रदेश की पहली जनमन कॉलोनी शिवपुरी और अन्य उपलब्धियों का समावेश है। इस अवसर पर सचिव तथा आयुक्त जनसंपर्क डॉ. सुदाम खाड़े विशेष रूप से उपस्थित रहे।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि बड़े पैमाने पर निवेश से स्थानीय व्यापार को प्रोत्साहन मिलता है। इस कॉन्क्लेव से पूरा संभाग लाभान्वित होगा। संभाग के सभी जिलों में उद्योग तथा व्यापारिक गतिविधियां प्रारंभ होंगी। बीना में कई इकाइयां आएंगी। साथ ही 120 करोड़ की लागत से पेट्रोलियम क्षेत्र में भी निवेश हो रहा है। प्रदेश में सागर में चलने वाले डेटा सेंटर की स्थापना महत्वपूर्ण कदम है। यह 1700 करोड़ का निवेश है और इससे लगभग एक हजार लोगों को रोजगार मिलेगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि नये 6 लेन और 4 लेन मार्गों का लाभ भी बुन्देलखंड क्षेत्र को प्राप्त होगा। उन्होंने कहा कि नवकरणीय ऊर्जा क्षेत्र में भी निवेश आ रहा है। कृषि और पशुपालन क्षेत्र में सरकार सहयोग प्रदान कर गतिविधियों को प्रोत्साहित कर रही है। खनिज क्षेत्र में भी बुन्देलखंड सहित संपूर्ण प्रदेश में प्रोत्साहन दिया जा रहा है।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि बुन्देलखंड ने कला, संस्कृति, वीरता से इतिहास में अपना स्थान बनाया है। इस क्षेत्र में चांदी का कार्य करने वालों, बीड़ी तथा अगरबत्ती उद्योग से जुड़े लोगों को पूर्ण सहयोग प्रदान किया जायेगा। सागर में चांदी से जुड़ी गतिविधियों को प्रोत्साहित करने क्लस्टर विकसित किया जायेगा। उन्होंने कहा कि संभागीय कॉन्क्लेव से स्थानीय स्तर पर नई इकाइयों की स्थापना के लिए अनुकूल वातावरण बन रहा है। क्षेत्रीय इंडस्ट्री कॉन्क्लेव से स्थानीय गतिविधियों के साथ प्रदेश स्तर पर महत्व रखने वाले उद्योगों की स्थापना को भी गति देने में मदद मिल रही है।
खाद्य नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री श्री राजपूत ने कहा कि क्षेत्रीय इंडस्ट्री कॉन्क्लेव से युवा उद्यमियों को प्रोत्साहन मिल रहा है और उनका सपना साकार हो रहा है। सागर के पुराने अगरबत्ती और बीड़ी उद्योग को पुनर्जीवित करने की पहल भी हुई है। कैंसर चिकित्सा के क्षेत्र में नागरिकों को सुविधा देने के प्रयोग किये जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. यादव सागर अंचल में सभी तरह के उद्योगों की स्थापना के लिए प्रयासरत हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव के प्रयासों से बुन्देलखंड अंचल को नई पहचान मिलेगी।
एमएसएमई मंत्री श्री कश्यप ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. यादव की पहल और दूरदर्शिता से ही क्षेत्रीय इंडस्ट्री कॉन्क्लेव के आयोजन संभव हो पा रहे हैं। इससे प्रदेश में स्थानीय स्तर पर उद्यमिता के लिए उत्साह का वातावरण बन रहा है। यह देश में अपनी तरह का अनूठा नवाचार है। इससे कृषि पर निर्भर उद्योगों के साथ व्यापार, व्यवसाय की गतिविधियों को भी प्रोत्साहन मिला है।
सांसद एवं प्रदेश अध्यक्ष श्री वी.डी. शर्मा ने कहा कि बुन्देलखंड अंचल में खनिज, पर्यटन और अन्य क्षेत्रों में उद्योगों के विकास की अपार संभावनाएं हैं। मध्यप्रदेश ने स्वच्छता के क्षेत्र में देश में अपनी विशिष्ट छाप छोड़ी है। खजुराहों को फिल्म सिटी के रूप में विकसित करने की दिशा में विशेष प्रयास किये जा रहे है
पेसिफिक मेटा-स्टील के श्री जे. पी. अग्रवाल ने कहा कि वे निवाड़ी में 3200 करोड़ की लागत से इंटीग्रेटेड स्टील प्लांट लगा रहे हैं। इससे 10 हजार लोगों को रोजगार मिलेगा और प्रतिवर्ष लगभग 1 हजार करोड़ का राजस्व भी शासन को प्राप्त होगा। उन्होंनें मध्यप्रदेश में मेडीकल क्षेत्र में भी गतिविधियां आरंभ करने की योजना सांझा की।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव के प्रयासों की निवेशकों ने सराहना की। कॉन्क्लेव में आए बंसल समूह के श्री सुनील बंसल ने कहा कि चिकित्सा उद्योग क्षेत्र में बंसल समूह कार्य कर रहा है। सागर में किडनी प्रत्यारोपण की सुविधा समूह द्वारा प्रारंभ की गई है। श्री बंसल ने प्रदेश में 4 सुपर स्पेशियेलिटी हॉस्पीटल, एक पांच सितारा होटल और ऊर्जा क्षेत्र में 1350 करोड़ रुपये के निवेश का प्रस्ताव दिया।
सागर ग्रुप के उद्योगपति श्री सुधीर अग्रवाल ने कहा कि भोपाल के पास तामोट में उनकी इकाइयां कार्य कर रही हैं। टेक्सटाईल क्षेत्र में नए निवेश के प्रयास सागर ग्रुप कर रहा है। शिक्षा, स्वास्थ्य, रोटी, कपड़ा, मकान सभी क्षेत्रों में ग्रुप कार्य कर रहा हैं। उनके समूह की डाईंग एण्ड प्रोसेसिंग क्षेत्र में लगभग 1400 करोड़ रूपये के निवेश की योजना है, इससे रोजगार के अवसर निर्मित होंगे। उन्होंने कहा कि उनका समूह कॉम्पटीशन नहीं, को-आपरेशन के सिद्धांत पर कार्य करता है।
मध्य भारत एग्रो के श्री पंकज ओसवाल ने कहा कि उनके समूह का सर्वाधिक निवेश मध्यप्रदेश में है। निवेश की उद्योग मित्र नीति तथा शासन का सहयोगी रवैया अतुलनीय है। उनका समूह सागर में सिंगल सुपर फॉस्फेट का उत्पादन कर रहा है। श्री ओसवाल ने बताया कि उनके समूह की सागर के बंडा के पास 500 करोड़ रूपये निवेश की योजना है।
प्रमुख सचिव, औद्योगिक नीति एवं निवेश प्रोत्साहन श्री राघवेन्द्र कुमार सिंह ने कहा कि प्रदेश में 3 संभागीय कॉन्क्लेव के बाद आज सागर रीजनल इंडस्ट्री कॉन्क्लेव हो रही है। बैंगलुरू, कोयम्बटूर, मुम्बई और कोलकाता में इंटरैक्टिव सेशन भी इस वर्ष संपन्न हुए हैं। मध्यप्रदेश औद्योगिक दृष्टि से देश का दूसरा सबसे बड़ा राज्य है, यहाँ भारत का सबसे बड़ा सौर ऊर्जा संयंत्र स्थापित किया गया हैं। अनेक क्षेत्रों में उद्योगों के विकास की प्रदेश में व्यापक संभावनाएं हैं। अधोसंरचना की दृष्टि से महत्वपूर्ण कार्य होने से निवेशकों के लिए प्रदेश अनुकूल है। राज्य सरकार की उद्योग नीतियों से उद्योगपति मध्यप्रदेश में उद्योग लगाने के लिए इच्छुक रहते हैं।
अपर मुख्य सचिव श्री संजय दुबे ने सूचना प्रोद्योगिकी क्षेत्र में उद्योगों के विकास के लिए तैयार की गई राज्य की नीतियों की जानकारी प्रदान की। उन्होंने बताया कि डेटा सेंटर स्थापना की दृष्टि से मध्यप्रदेश सर्वाधिक अनुकूल प्रदेश है। श्री दुबे ने आईटी क्षेत्र में संचालित गतिविधियों की जानकारी दी।
प्रमुख सचिव खनिज श्री संजय कुमार शुक्ला ने प्रदेश में उपलब्ध खनिज संपदा और संचालित उद्योगों की विस्तार से जानकारी दी। श्री शुक्ला ने मध्यप्रदेश में खनिज आधारित उद्योगों की संभावनाओं पर विस्तृत प्रेजेंटेशन दिया। उन्होंने कहा कि उद्योगों को सभी विभागों से जुड़ी अनुमतियां आसानी से प्राप्त होती हैं। उन्होंने बताया कि 17-18 अक्टूबर को भोपाल में खनन व खनिज गतिविधियों पर केंद्रित राष्ट्रीय स्तर का आयोजन प्रस्तावित है। उन्होंने बताया कि सागर की ढाना हवाईपट्टी को एयरपोर्ट के रूप में विकसित करने संबंधी प्रस्ताव प्राप्त हुआ है।
एम.डी. पर्यटन श्री इलैया राजा टी. ने बताया कि पर्यटन क्षेत्र में निवेश से बड़ी संख्या में प्रदेश के युवाओं को रोजगार मिल रहा है। सचिव सूक्ष्म, लघु, मध्यम उद्यम श्री नवनीत मोहन कोठारी ने कुटीर उद्योगों के विकास के लिए किए जा रहे प्रयासों की जानकारी दी। प्रबंध संचालक हस्तशिल्प विकास निगम श्री मोहित बुन्दस ने मध्यप्रदेश में कुटीर उद्योग क्षेत्र में विद्यमान अवसरों के बारे में जानकारी दी। कॉन्क्लेव में बड़ी संख्या में जन-प्रतिनिधि, अधिकारी और नागरिक उपस्थित थे।
Category: अर्थ संसार
-

विकसित बुंदेलखंड के लिए होंगे तमाम उपायःडॉ.मोहन यादव
-

बेहिचक तय कीजिए बीड़ी कारोबार का कार्पोरेटीकरण
-आलोक सिंघई-
पिछले 36 सालों से बीड़ी उद्योग के कथित सहकारीकरण और सुधारों ने राज्य के लाखों मजदूरों को लाचार बना दिया है ।जिन मजदूरों को साल भर बीड़ी बनाने का रोजगार मिलता था वह लगभग समाप्त हो गया है। राज्य को अपने श्रमबल से होने वाली आय समाप्त हो चुकी है। तंबाखू की खपत सिगरेट और गुटखे से जारी है अंग्रेजों की बनाई आईटीसी कंपनी अपनी सिगरेट बेचकर मुनाफा कमा रही है । तेंदूपत्ता मजदूरों को बोनस बांटने का शिगूफा छेड़कर पूर्व मुख्यमंत्री अर्जुन सिंह और उसके बाद उनके अनुचरों ने सरकारों में शामिल होकर बीड़ी मजदूरों के साथ जो छल किया उसके पटाक्षेप का समय अब नजदीक आ गया है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने सत्ता में आते ही जीरो बैलैंस वाले बैंक खाते खुलवाकर गरीब श्रमिकों को पहली बार बैंकों की चौखट तक पहुंचाया था। अब श्रमिकों के पंजीयन के बाद पीएफ खाते खोलकर मजदूरों का भविष्य सुरक्षित बनाने का प्रयास जारी है। राष्ट्रीय प्रतिदर्श सर्वेक्षण कार्यालय (एनएसएसओ) के आवधिक श्रम बल सर्वेक्षण (पीएलएफएस) के मुताबिक देश में रोजगार की संख्या बढ़ी है,ऐसे में मध्यप्रदेश की डाक्टर मोहन यादव सरकार ने सागर में इन्वेस्टर्स समिट का आयोजन करके बीड़ी उद्योग को प्रबंधित करने का जो मन बनाया है वह तारीफ के काबिल लगता है।
तमाम प्रयासों के बावजूद लोगों में धूम्रपान की लत बरकार है । भारत के साथ पाकिस्तान, श्रीलंका,नेपाल, म्यांमार, जैसे कई पडौसी देश भी लोगों की धूम्रपान की जरूरतों को पूरी करने के लिए अपना बाजार खोले बैठे हैं । ऐसे में बीड़ी हमेशा से सिगरेट की राह में अडंगा बनी हुई है । मध्यप्रदेश इस मायने में सौभाग्यशाली है कि इसके जंगलों में तेंदूपत्ता बहुतायत से पाया जाता है। कथित सहकारीकरण के पहले राज्य के जंगलों से लगभग अस्सी लाख मानक बोरा तेंदूपत्ता तोड़ा जाता था। जब से लघुवनोपज संघ ने ये काम संभाला तबसे तेंदूपत्ते के संग्रहण में लगातार गिरवट आती रही है । आज संघ का संग्रहण लक्ष्य ही 16 लाख मानक बोरा बचा है । जंगलों का रखरखाव घटने से तेंदूपत्ते की गुणवत्ता भी धराशायी गई है। ये सारा षड़यंत्र कथित तौर पर आईटीसी कंपनी की छोटी सिगरेट को लाभ पहुंचाने की मंशा से रचा गया था।
स्वर्गीय अर्जुन सिंह जब खुद को भावी प्रधानमंत्री के रूप में प्रोजेक्ट कर रहे थे तब उन्होंने बहुराष्ट्रीय कंपनियों की लुटियन गेंग को खुश करने के लिए छोटी सिगरेट का मार्ग प्रशस्त किया था।कांग्रेस के ही उनके करीबी बताते हैं कि कंपनी ने उन्हें अपना पार्टनर बना लिया था।ऐसे में राज्य को अपना कारोबार गंवाने की मंहगी कीमत चुकानी पड़ी। उनके बाद आए तमाम मुख्यमंत्रियों ने इस बर्रों के छत्ते में हाथ नहीं डाला। दिग्विजय सिंह जैसे पुतला पूजने वाले शासक हों या फिर शिवराज सिंह जैसी लंबी पारी खेलने वाले मुख्यमंत्री सभी साहब की लाबी का हाथ पकड़कर चलते रहे। अर्जुन सिंह से उपकृत स्वर्गीय सुंदरलाल पटवा हों या उनकी भजन मंडली के बाबूलाल गौर, कैलाश नारायण सारंग सभी ने सिगरेट की राह में अड़ंगा न लगाने की परिपाटी जारी रखी।बाद में तो विश्वास सारंग पर लघु वनोपज संघ में खुद को श्रमिक के तौर पर पंजीकृत करवाने का आरोप भी लगा। शिवराज सिंह चौहान और उनके मंत्रिमंडलीय सहयोगियों की तो क्या बिसात थी कि वे कोई स्वतंत्र फैसला ले सकते। उनके मंत्रिमंडल में शामिल रहे पंडित गोपाल भार्गव ने दिग्विजय सिंह सरकार के सामने खूब उछलकूद मचाई और बीड़ी कारोबार को व्यवस्थित करने की नौटंकी भी की। दिग्विजय सिंह ने उन्हें बीड़ी कारोबार के अध्ययन के लिए कई राज्यों की सैर भी कराई इसके बाद वे भी सिगरेट लाबी की गोदी में जाकर बैठ गए। सत्ता में आने के बाद उन्होंने अपना मुंह बंद रखा। अब जबकि रोजगार के साधन बढ़ाने की मुहिम देश भर में चलाई जा रही है तब वे आगे आकर बीड़ी उद्योग की पुरानी सूरत लौटाने की आवाज उठाने लगे हैं।
जब अर्जुनसिंह जी इस कारोबार को लपेटना चाह रहे थे तब उनके वामपंथी सहयोगियों और मजदूर नेताओं ने खूब शोरगुल मचाया कि बीड़ी मजदूरों का शोषण किया जा रहा है। उन्हें ज्यादा मजदूरी मिलनी चाहिए। इस शोरगुल में उन्होंने बीड़ी मजदूरों की न्यूनतम मजदूरी भी बढ़ा दी और तेंदूपत्ते के राष्ट्रीयकरण की आड़ में लघु वनोपज संघ के माध्यम से तेंदूपत्ते का कारोबार भी छीन लिया। कहा गया कि इस तेंदूपत्ते को बेचकर राज्य की आय बढ़ाई जाएगी और पत्ता संग्राहकों को बोनस भी बांटा जाएगा। तबसे लेकर हर साल बोनस बांटने की नौटंकी की जाती रही है। जब पत्ता एक्सपोर्ट होने लगा तो जिस बीड़ी मजदूर को साल भर रोजगार मिलता था वो छिन गया। मजदूरी बढ़ने से बीड़ी कारोबार की कमर टूट गई और यह धंधा पश्चिम बंगाल पहुंच गया।
बीड़ी सेठ तो मध्यप्रदेश कांग्रेस कमेटी के कोषाध्यक्ष भी हुआ करते थे लेकिन अर्जुन सिंह के सामने उनकी एक न चली। बीड़ी श्रमिकों के नेताओं ने शोषण और अत्याचारों की ऐसी कहानियां गढ़ीं और सुनाईं कि बीड़ी कारोबारियों को खलनायक बना दिया गया। जिन परिवारों ने अपनी पीढ़ियों की साधना के बल पर गांव गांव में अपनी शाखाएं खोलीं और सट्टेदार स्थापित करके बीड़ी बनवाने व उसे एक्सपोर्ट करने का कारोबार विकसित किया वह शनैःशनैः धराशायी हो गया। बेशक बीड़ी कारोबारियों के कई सट्टेदार शोषण करके बीड़ी छांट देते थे और इस छंटी हुई बीड़ी की मजदूरी काट लेते थे। इस बीड़ी को बाद में नकली लेवल लगाकर बाजार में पिछले दरवाजे से बेच दिया जाता था। शोषण के कई तरीके विकसित किए गए थे लेकिन उन्हें पूरी शह सरकारी तंत्र की थी। रिश्वत लेकर सरकारी अमला मजदूरों के शोषण की राह प्रशस्त करता रहा और मुनाफा कूटता रहा। निश्चित तौर पर शोषण रोकना सरकार की जवाबदारी थी। तब आनलाईन खातों की व्यवस्था भी नहीं थी। मजदूरी नकद दी जाती थी। ऐसे में मजदूरों खासतौर पर महिलाओं का शोषण भी आम था। इन्हें रोकने की सख्ती करने के बजाए फैक्टरी की सिगरेट बाजार में उतारकर पूरा कारोबार धराशायी कर दिया गया।
आज जब सभी धंधों के कार्पोरेटीकरण से निजीकरण की सीमाओं और सरकारीकरण की धूर्तताओं से अलग हटकर कारोबार को व्यवस्थित करने की सुविधा आ गई है। मजदूरी को व्यवस्थित करने की आनलाईन सुविधा आ गई है तब बीड़ी कारोबार पर नए संदर्भों में विचार किया जाना अनिवार्य हो गया है। सरकार जब एक क्लिक से किसान सम्मान निधि, लाड़ली बहना योजना जैसी बहुउद्देश्यीय योजनाएं सफलता पूर्वक चला रहीं हैं तब श्रमिकों को उनके खातों के साथ देश के पूंजी निर्माण में पार्टनर बनाना सरल हो गया है। बीड़ी कारोबार हो या असंगठित क्षेत्र का खेतीहर मजदूर सभी को आनलाईन प्लेटफार्म पर जोड़ना जरूरी है। मध्यप्रदेश से जो बीड़ी कारोबार पश्चिम बंगाल, या आंध्रप्रदेश शिफ्ट हो चुका है उसे एक बार फिर राज्य में स्थापित करना चुनौतीपूर्ण कार्य हो गया है।कथित सहकारीकरण का मॉडल फेल घोषित होने के बाद तो अब तय हो गया है कि बीडी़ का धंधे को कुचलकर राजनेताओं ने मजदूरों की रीढ़ तोड़ने का षडयंत्र किया था। बीड़ी कारोबारी परिवार से आए सागर के विधायक शैलैन्द्र जैन कहते हैं कि लंबी उपेक्षा के बाद तमाम बीड़ी कारोबारियों ने दूसरे धंधे शुरु कर दिए हैं और बीड़ी का कारोबार बंद कर दिया है ऐसे में इस कारोबार की पुरानी सूरत कैसै लौटाई जा सकती है। मुख्यमंत्री मोहन यादव ने सत्ता संभालते ही मिल श्रमिकों के कल्याण के लिए जो ठोस फैसले लिए थे उन्हें देखते हुए उम्मीद की जानी चाहिए कि खासतौर पर बुंदेलखंड के बीड़ी श्रमिकों के हित में भी वे बगैर किसी दबाव के फैसले ले सकेंगे। सागर में आयोजित इन्वेस्टर समिट में कम से कम यह एक ठोस फैसला लिए जाने की तो उम्मीद की ही जा सकती है।
-

दुनिया के दवा उद्योग में छलांग लगाने को तैयार है प्रदेश
भोपाल, 25 सितंबर (प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)। मध्यप्रदेश के फार्मा सेक्टर के युवाओं ने गुणवत्ता युक्त दवाओं के निर्माण में नए कीर्तिमान स्थापित करके प्रदेश का नाम रोशन किया है। राज्य में बनाई जा रहीं कई जीवन रक्षक दवाएं वैश्विक बाजारों में साख अर्जित कर रहीं हैं। प्रदेश सरकार ने फार्मा सेक्टर को मजबूती देने के लिए जो उपाय किए हैं उनके नतीजे मिलने शुरु हो गए हैं। जल्दी ही प्रदेश के फार्मेसिस्ट अपनी रचनाधर्मिता से राज्य को औषधि निर्माण,विदेशी मुद्रा अर्जित करने और रोजगार मुहैया कराने में बड़ी भूमिका निभाने जा रहे हैं। विश्व फार्मासिस्ट दिवस के अवसर पर एक विशेष मुलाकात में काऊंसिल के अध्यक्ष संजय जैन ने इस क्षेत्र की कई बारीकियों की जानकारी दी।
काउंसिल के अध्यक्ष संजय कुमार जैन ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि आज के समय में फार्मासिस्ट का औषधि निर्माण हॉस्पिटल मेडिकल स्टोर शोध कार्य एवं कई विधाओं में महत्वपूर्ण योगदान है। काउंसिल अपने मापदंडों के अनुरूप फार्मेसी के क्षेत्र में कार्य कर रही है और भविष्य में भी कई योजनाएं बनाई जा रही हैं।इन्हें जल्दी लागू किया जाएगा।
काउंसिल की सचिब एवं रजिस्ट्रार सुश्री दिव्या पटेल ने कहा कि काउंसिल के माध्यम से फार्मेसी के छात्रों को कम समय में फार्मेसी के रजिस्ट्रेशन प्रदान करने का प्रयास किए जा रहे हैं। काउंसिल के अध्यक्ष एवं सचिव ने विश्व फार्मेसी दिवस पर सभी को अपनी शुभकामनाएं प्रकट की।
कार्यक्रम का संचालन एवं आभार काउंसिल के ही गोपाल यादव ने किया । उन्होंने बताया कि आए हुए आवेदनों पर सक्रियता से फैसले लिए जा रहे हैं। -

सस्ती जेनरिक दवाएं अब हर जिले में उपलब्ध
भोपाल, 17 सितंबर(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)।देश के यशस्वी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्म दिवस पर मध्य प्रदेश में प्रधानमंत्री जन औषधि परियोजना के तहत 50 जिलों के जिला अस्पतालों में रेड क्रॉस सोसाइटी के माध्यम से मेडिकल स्टोर का शुभारंभ मध्य प्रदेश के राज्यपाल माननीय मंगू भाई पटेल एवं प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव के कर कमलो से संपन्न हुआ
कार्यक्रम मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में आयोजित किया गया।इस अवसर पर मध्य प्रदेश के उपमुख्यमंत्री माननीय राजेंद्र शुक्ल ,नगरीय प्रशासन मंत्री कैलाश विजय वर्गीय,श्रीमती कृष्णा गौर, विश्वास सारंग,विजय शाह, प्रदेश भाजपा अध्यक्ष सांसद बी डी शर्मा भी अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। कार्यक्रम में मध्य प्रदेश शासन के मंत्री गण , सांसद , विधायक गण मध्य प्रदेश शासन के कई वरिष्ठ अधिकारी भी सम्मिलित हुए।मध्यप्रदेश फार्मेसी काऊंसिल के अध्यक्ष संजय जैन ने इस अवसर पर भोपाल में जनऔषधि केन्द्र पहुंचकर व्यवस्थाओं का जायजा लिया।

संजय जैनःमध्यप्रदेश राज्य फार्मेसी काऊंसिल, जनोपयोगी दवाओं के लिए फार्मासिस्टों का मार्गदर्शन कर रही है।
मध्य प्रदेश शासन की ओर से स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण प्रमुख सचिव संदीप यादव भी कार्यक्रम में उपस्थित थे। प्रधानमंत्री जन औषधि परियोजना के प्रदेश संयोजक संजय जैन ने बताया कि देश में मध्य प्रदेश एक ऐसा राज्य बन गया है जहां हर जिला अस्पताल में प्रधानमंत्री जन औषधि परियोजना का मेडिकल स्टोर उपलब्ध है। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश स्टेट फार्मेसी काऊंसिल ने सभी जन औषधि केन्द्रों पर प्रशिक्षित फार्मासिस्ट की सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए काऊंसिल की पंजीयन प्रणाली में विशेष सुविधा का प्रावधान किया है। आम जनता को सस्ती दवाएं आसानी से उपलब्ध हो सकें इसके लिए काऊंसिल की तरफ से मार्गदर्शन उपलब्ध कराया जा रहा है।नए फार्मासिस्टों को उन आवश्यक दवाओं की सूची उपलब्ध कराई जा रही है जिनके माध्यम से जन औषधि केन्द्रों के माध्यम से जनता को सस्ती दवाएं दिलाकर राहत दिलाई जा सकेगी। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने देश को दवाओं की कालाबाजारी और मंहगी दवाओं के मकड़जाल से मुक्त कराने के लिए प्रधानमंत्री जन औषधि केन्द्र परियोजना शुरु की थी जिसके संकट में फंसे आम नागरिकों की आंखों में धूल झोंकने वाले दवा माफिया को नियंत्रण में करना सरल हो गया है।
अनुसूचित जाति कल्याण मंत्री श्री नागरसिंह चौहान ने आज अलीराजपुर से स्वच्छता ही सेवा अभियान की शुरुआत की। इस अवसर पर उन्होंने अलीराजपुर में जन औषधि केन्द्र का शुभारंभ भी किया।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मंत्री श्री चौहान ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के जन्मदिवस के अवसर पर राज्यपाल मंगुभाई पटेल एवं मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव द्वारा जिले को जन औषधि केन्द्र का वर्चुअल शुभारंभ कर जिले को सौगात दी है। उन्होंने कहा कि औषधि केन्द्र के माध्यम से आम नागरिकों को 2000 हजार से अधिक उच्च गुणवत्ता वाली दवाइयां प्राप्त होगी और 300 से अधिक सर्जिकल उपकरण भी उपलब्ध होंगे जो गंभीर बीमारियों के उपचार में उपयोगी होंगे, जिनकी कीमत बाजार मूल्य से 50 से 90 प्रतिशत तक सस्ती होगी।
मंत्री श्री चौहान ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री मोदी की अनुपम सोच के कारण आज हर जरूरतमंद को कम कीमतों में दवा उपलब्ध होगी। निश्चित ही आदिवासी अंचलों के साथ- साथ शहरी क्षेत्रों के लोगों को भी जन औषधि केंद्र का लाभ मिलेगा ।
इस अवसर पर सांसद श्रीमती अनीता नागर सिंह चौहान, कलेक्टर डॉ. अभय अरविंद बेडेकर, मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री प्रखर सिंह, मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. देवेन्द्र सुनहरे सहित जनप्रतिनिधिगण उपस्थित रहे। -

हर जिला चिकित्सालय में खुलेगा भारतीय जनऔषधि केन्द्र
भोपाल,16 सितंबर(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)। राज्यपाल मंगुभाई पटेल और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव 17 सितम्बर से शुरू हो रहे स्वच्छता ही सेवा पखवाड़ा 2024 के पहले दिन सभी जिला चिकित्सालयों में प्रधानमंत्री भारतीय जन औषधि केंद्रों के संचालन का शुभारंभ करेंगे। यह कदम प्रदेश के नागरिकों को सस्ती और गुणवत्तापूर्ण जेनेरिक दवाइयां उपलब्ध कराने का महत्वपूर्ण प्रयास है। चिकित्सालयों में जन औषधि केंद्र का शुभारम्भ, स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच को बेहतर बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है।
राजधानी भोपाल के कुशाभाऊ ठाकरे अंतर्राष्ट्रीय कन्वेन्शन सेंटर में सुबह 10 बजे आयोजित होने वाले समारोह में उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल, नगरीय विकास एवं आवास कैलाश विजयवर्गीय, पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री प्रहलाद पटेल, लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा राज्य मंत्री नरेन्द्र शिवाजी पटेल, नगरीय विकास एवं आवास राज्य मंत्री श्रीमती प्रतिमा बागरी, पंचायत एवं ग्रामीण विकास राज्य मंत्री श्रीमती राधा सिंह विशेष रूप से उपस्थित रहेंगे।
प्रधानमंत्री भारतीय जन औषधि केंद्र परियोजना का शुभारंभ वर्ष 2008 में सस्ती और गुणवत्तापूर्ण जेनेरिक दवाइयां उपलब्ध कराने के उद्देश्य से किया गया था। वर्ष 2015 के बाद से इस योजना में और गति आयी। इसका उद्देश्य पूरे देश में सस्ती दवाइयों की पहुंच को व्यापक बनाना था। वर्तमान में इस परियोजना में देश में प्रधानमंत्री भारतीय जन औषधि केंद्र खोले जा रहे हैं, जिससे ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में लोग सस्ती जेनेरिक दवाओं का लाभ उठा सकें।
वर्तमान में मध्य प्रदेश में 500 से अधिक जन औषधि केंद्र कार्यरत हैं, जो प्रदेश के विभिन्न जिलों में संचालित हैं। ये केंद्र शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों में स्थापित किए गए हैं, जिससे सभी नागरिकों को सस्ती दवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित हो सके। इन केंद्रों के माध्यम से प्रतिदिन हजारों लोग सस्ती और गुणवत्तापूर्ण दवाइयां खरीद रहे हैं। उनके मासिक चिकित्सा खर्चों में बड़ी बचत हो रही है। अब सभी ज़िला चिकित्सालयों में भी प्रधानमंत्री भारतीय जन औषधि केंद्र खोले जा रहे हैं।
सभी को सस्ती दरों पर गुणवत्तापूर्ण जेनेरिक दवाइयां उपलब्ध कराना मुख्य उद्देश्य है। मरीजों को ब्रांडेड दवाओं की तुलना में 50% से 90% तक कम दाम पर दवाइयां उपलब्ध होंगी।
ग्रामीण और शहरी परिवारों को सस्ती दवाइयां मिलेंगी। मासिक चिकित्सा खर्चों में बड़ी बचत होगी। आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए विशेष रूप से फायदेमंद होगी।
सस्ती और सुलभ दवाओं के माध्यम से लोग अपने उपचार को निरंतर जारी रख सकेंगे, जिससे स्वास्थ्य परिणामों में सुधार होगा। विशेष रूप से मधुमेह, उच्च रक्तचाप और हृदय रोग जैसी पुरानी बीमारियों के प्रबंधन में यह केंद्र महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
प्रधानमंत्री जन औषधि केंद्र के माध्यम से जेनेरिक दवाओं की गुणवत्ता और प्रभावशीलता को लेकर जागरूकता बढ़ेगी, जिससे लोग ब्रांडेड दवाओं पर निर्भरता कम करेंगे और सस्ती जेनेरिक दवाओं को अपनाएंगे।
स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर भी उत्पन्न होंगे। प्रत्येक केंद्र के चालन के लिए फार्मासिस्ट और अन्य कर्मचारी आवश्यक होंगे, जिससे राज्य में नए रोजगार के अवसर पैदा होंगे।
प्रधानमंत्री जन औषधि केंद्र राज्य में सस्ती और सुलभ स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता किए जाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। यह केंद्र प्रदेश के नागरिकों को सस्ती और गुणवत्तापूर्ण दवाइयां उपलब्ध कराकर उनकी चिकित्सा आवश्यकताओं को पूरा करने में अहम भूमिका निभाएगा।
स्वच्छता ही सेवा पखवाड़ा 2024 के पहले दिन इसी स्थान पर प्रात: 10:30 बजे प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) में देश के 4 लाख आवासों का गृह प्रवेश कार्यक्रम होगा। इनमें मध्यप्रदेश के 51 हजार आवासों में गृह प्रवेश होगा। प्रधानमंत्री आवास योजना शहरी 2-0 का शुभारंभ तथा पीएम स्वनिधि अंतर्गत पीआरएआईएसई अवार्ड वितरित किये जायेंगे। इस कार्यक्रम में नगरीय विकास एवं आवास श्री कैलाश विजयवर्गीय मुख्य अतिथि होंगे। नगरीय विकास एवं आवास राज्य मंत्री श्रीमती प्रतिमा बागरी अध्यक्षता करेंगी। भोपाल नगर पालिग निगम की महापौर श्रीमती मालती राय, नगर पालिग निगम भोपाल के परिषद अध्यक्ष श्री किशन सूर्यवंशी विशेष रूप से उपस्थित रहेंगे।
-

इक्विटास बैंक के मुनाफे में हिस्सेदारी से ग्राहकों में संतोष
भोपाल,05 सितंबर(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर).इक्विटास बैंक ने आधुनिक बैंकिंग में जो सुधार लागू किए हैं वे देश के संपदा निर्माताओं को बहुत पसंद आ रहे हैं। बैंक की वर्षगांठ पर पहुंचे नागरिकों उद्यमियों और श्रेष्ठी वर्ग ने इक्विटास बैंक को जन जन का बैंक बनने की शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि बैंक के ऊर्जावान कर्मचारियों ने निवेशकों की जरूरतों पर खरा उतरने के लिए जो रुचि दिखाई है उससे आने वाले समय में ये बैंक प्रदेश भर में ग्राहकों की पहली पसंद बन जाएगा।
इक्विटास स्माल फायनेंस बैंक की स्थापना के आठ साल पूरे होने पर राजधानी की एमपीनगर शाखा में प्रबंधन ने जीवंत आयोजन किया था जो लगभग दिन भर चला। बैंक के क्षेत्रीय प्रबंधक अमित देशपांडे ने सभी ग्राहकों,उद्यमियों और निवेशकों को बैंक की प्रगति के विभिन्न आयामों की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि हम अपनी आनलाईन सेवाओं के माधयम से देश की संपदा बढ़ाने में उल्लेखनीय योगदान दे रहे हैं। देश के अठारह राज्यों और केन्द्र शासित प्रदेशों में हमारी 964 शाखाएं हैं जिनमें 57 लाख 22 हजार कर्मचारी कार्य कर रहे हैं।
भोपाल शाखा के प्रबंधक लोकेश जैन ने बताया कि हम अपनी ग्राहक हितैषी बैंकिंग के माध्यम से आम नागरिकों का दिल जीत रहे हैं। ग्राहकों की छोटी छोटी सुविधाओं को हम तत्काल समाधान देकर उनका उचित मार्गदर्शन भी करते हैं। ग्राहकों के बताए अनुसार हम अपनी सेवाओं में लगातार सुधार और विस्तार भी कर रहे हैं। हमारा प्रबंधन हर निवेश की सुरक्षा पर विशेष ध्यान रखता है जिसकी वजह से हम देश के बैंकिंग मानकों पर लगातार खरे उतर रहे हैं।
बैंक के ऊर्जावान कार्यकर्ताओं की वजह से ग्राहक सेवा सफल हो रही है.
राजधानी के गणमान्य नागरिकों और श्रेष्ठि वर्ग ने बैंक पहुंचकर वर्षगांठ के आयोजन में हिस्सा लिया। दीप प्रज्जवलन के बाद केक काटा गया और सभी ने इक्विटास बैंक की सफलताओं की कहानियां सुनाईं। श्री मनोहर लाल टोंग्या ने कहा कि बैंक के कर्मचारियों के अच्छे व्यवहार और बैंक की सरल योजनाओं की वजह से हमें ज्यादा मुनाफा हो रहा है। बैंक में अनावश्यक नियमों का बोझ नहीं है। वरिष्ठ जनों को तो घर पहुंच सेवाएं उपलब्ध कराई जाती हैं। ज्यादातर काम बैंक के एप से निपट जाते हैं इसलिए हमें बार बार शाखा जाने की जरूरत नहीं पड़ती है।
कार्यक्रम में पहुंचे श्री महावीर मेडीकल कालेज के प्रशासक आईएएस राजेश जैन ने कहा कि बैंक के नीति निर्धारकों ने उद्यमियों की सुविधा के लिए जो आधुनिक बैंकिंग दी है उससे संपदा निर्माण में मदद मिल रही है। श्री देवेन्द्र जैन ने कहा कि बैंक अपने ग्राहकों को मुनाफे का हिस्सेदार बना रहा है और इसके साथ साथ समाज कल्याण की भी योजनाओं में अपनी भागीदारी सुनिश्चित कर रहा है। आयोजन में पहुंचे श्री कमलेश सेन, श्रीमती प्रीति टोंग्या, श्री डी.आर.सोनी श्री सुरेश चंद्र प्रमोद सिन्हा, श्री देवेन्द्र जैन, श्री महेश सिंघल, सुरेश जैन आईएएस, श्री त्रिलोक जाजू, श्री प्रवीण कुमार सक्सेना, सीए मयंक अग्रवाल के अलावा बड़ी तादाद में गणमान्य नागरिकों ने बैंक पहुंचकर अपना स्नेह प्रदर्शित किया।
क्षेत्रीय प्रबंधक अमित देशपांडे ने अपने स्टाफ के साथ ग्राहकों के प्रति आभार प्रकट किया और उन्हें कहा कि आपके बताए सुझावों पर अमल करके बैंक ग्राहकों को अपने मुनाफे में भागीदार बनाता रहेगा। इस अवसर पर सागर मल्टिसिटी हास्पिटल के सौजन्य से हेल्थ चैकअप शिविर भी आयोजित किया गया। जिसमें नागरिकों के रक्तचाप और डायबिटीज की मुफ्त जांच की गई। -

निवेशकों को भा गया मध्यप्रदेश बोले मुख्यमंत्री
भोपाल,28 अगस्त(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर) मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि ग्वालियर में हो रही इन्वेस्टर समिट में, अब तक हुई सभी इन्वेस्टर समिट से बेहतर परिणाम आने की उम्मीद है। क्षेत्रीय स्तर पर औद्योगिक गतिविधियों को प्रोत्साहित करने के लिए प्रदेश के विभिन्न भागों में की जा रही इन्वेस्टर समिट के परिणाम प्रोत्साहित करने वाले हैं। उद्योग समूहों और निवेशकों ने मध्यप्रदेश सरकार पर भरोसा जताया हैं, राज्य सरकार उनकी अपेक्षाओं पर खरी उतरने के लिए प्रतिबद्ध है। प्रसन्नता का विषय है कि प्रदेश में औद्योगिक गतिविधियों को प्रोत्साहन के लिए लागू की गई नीतियों और व्यवस्थाओं के प्रति उद्योगपति और निवेशक विश्वास व्यक्त कर रहे हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने एम्स भोपाल के परिसर में मीडिया प्रतिनिधियों से चर्चा में यह बात कही।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि इन्वेस्टर समिट प्रदेश में रोजगार के अवसर बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी। हमारा प्रयास है कि प्रदेश के उद्योगपति भी अपनी गतिविधियों को विस्तार दें और प्रदेश के युवा अपने उद्यम आरंभ करें। राज्य सरकार उन्हें हर संभव सहयोग देने के लिए तत्पर है। राज्य सरकार ने उद्योग और उद्यमशीलता में युवाओं को प्रोत्साहित करने के लिए आरंभ किये गये विशेष अभियान अंतर्गत गतिविधियां जारी है। समिट जीडीपी बढ़ाने में भी महत्वपूर्ण योगदान देगी। समिट में शिक्षा, एमएसएमई, भारी उद्योग और कृषि अभियांत्रिकी सहित सभी सेक्टर को शामिल किया गया है।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश में निवेश और औद्योगिक गतिविधियों के लिए उद्योगपतियों को आमंत्रित करने के उद्देश्य से वे अगले माह सितंबर में कोलकाता में रोड-शो करेंगे। उन्होंने बताया कि आगामी 27-28 सितंबर को सागर और अक्टूबर में रीवा में भी इन्वेस्टर समिट होगी। प्रदेश में विदेशी निवेश आकर्षित करने के लिए नवंबर माह में उनकी विदेश यात्रा भी प्रस्तावित है।
-

फार्मा सेक्टर की समस्याओं का निराकरण शीघ्रःसंजय जैन
भोपाल,15 अगस्त(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर).मध्यप्रदेश फार्मेसी काऊंसिल के अध्यक्ष संजय जैन ने कहा है कि राज्य सरकार फार्मा उद्योग की मौजूदा जरूरतों और समस्याओं पर गंभीरता से ध्यान रख रही है और जल्दी ही इस क्षेत्र से जुड़े लोगों को विश्व स्तरीय सुविधाएं मिलने लगेंगी। स्वाधीनता दिवस आयोजन में राष्ट्रध्वज फहराने पहुंचे श्री संजय जैन ने कहा कि मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डाक्टर मोहन यादव भारत सरकार के आर्थिक सुधारों को तेजी से लागू कर रहे हैं जिससे जनता को राहत मिलेगी।
मध्यप्रदेश फार्मेसी काऊंसिल और भोपाल केमिस्ट एसोसिएशन के परिसरों में झंडा वंदन के दौरान देशभक्ति के भाव से सराबोर उद्यमियों ने जोरदार नारे लगाकर राष्ट्र की आराधना की। श्री संजय जैन ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जिस तरह राजनीति को परिवार की बपौती बनाने वालों को चुनौती देने के लिए आम नागरिकों से राजनीति में आने का आव्हान कर रहे हैं उसी तरह मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डाक्टर मोहन यादव सत्ता माफिया पर चोट करके प्रदेश की तरुणाई को मुख्य धारा में लाने का अभियान चला रहे है। देश नई करवट ले रहा है इसलिए मध्यप्रदेश में के दवा निर्माताओं और व्यापारियों के बीच संवाद स्थापित किया जा रहा है।उपमुख्यमंत्री स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण श्री राजेन्द्र शुक्ल के माध्यम से प्रदेश में राष्ट्रीय स्तर की शिक्षा का केंद्र प्रारंभ करने के लिए एक प्रस्ताव भारत सरकार को भेजा गया है। श्री शुक्ल ने फार्मेसी की पढ़ाई और प्रशिक्षण के लिए फार्मेसी काऊंसिल के माद्यम से देश और प्रदेश स्तर पर फार्मा सेक्टर को बल देने के लिए कई योजनाएं बनवाई हैंं। इसका लाभ नई पीढ़ी के फार्मासिस्टों को मिलेगा।
उन्होंने कहा कि भारत के दवा उद्योग को वैश्विक चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है लेकिन मध्यप्रदेश के दवा निर्माता और व्यापारी आम जनता को कम कीमत में अच्छी गुणवत्ता वाली दवाएं मुहैया कराने का प्रयास कर रहे हैं। प्रधानमंत्री जन औषधि योजना के प्लेटफार्म पर भी मध्यप्रदेश में निर्मित दवाओं ने अपनी भागीदारी शुरु कर दी है। इस देशव्यापी नेटवर्क से हम राज्य और देश के लिए पूंजी निर्माण का अनुष्ठान कर रहे हैं. इसमें आम फार्मासिस्ट और दवा निर्माताओं की सक्रिय भागीदारी है।
श्री जैन ने कहा कि कुछ इलाकों में फार्मासिस्टों को पंजीयन संबंधी समस्याओं का सामना करना पड़ा है ।काऊंसिल ने अपनी कार्यप्रणाली में सुधार शुरु किए हैं। जल्दी ही आम फार्मासिस्टों को कई सुविधाएं घर बैठे पारदर्शी तरीके से मिलने लगेंगी।
फार्मेसी काऊंसिल के झंडा वंदन कार्यक्रम में श्री संजय जैन के साथ काऊंसिल के उपाध्यक्ष श्री राजू चतुर्वेदी और फार्मेसी काऊंसिल की रजिस्ट्रार सुश्री माया अवस्थी ने भाग लिया। काऊंसिल के सभी कर्मचारी और अधिकारी भी इस अवसर पर उपस्थित थे।
भोपाल केमिस्ट एसोसिएशन की ओर से आयोजित स्वाधीनता दिवस कार्यक्रम में वरिष्ठ व्यापारियों को सम्मानित किया गया। मप्र फार्मेसी काऊंसिल के अध्यक्ष संजय जैन ने लगभग पचहत्तर वर्ष से अधिक उम्र के केमिस्टों को प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया। कार्यक्रम में एसोसिएशन के अध्यक्ष जितेन्द्र धाकड़, सचिव विवेक खंडेलवाल, अनिल कुमार जैन,राहुल नगाइच, सुहाग सिंह तोमर, अनिरुद्ध पारे, विक्रम शेरवानी, मनोज शर्मा, सुनील कुमार गुप्ता एवं दवा बाजार और राजधानी के दवा व्यापारी भी उपस्थित थे। -

सब्सिडी देकर मोदी ने देश को सोलर बिजली का दीवाना बनाया
भोपाल,28 जुलाई(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की पहल पर सोलर बिजली प्लांट लगाने के लिए जो सब्सिडी देने की योजना चलाई गई है उसके प्रति लोगों की दीवानगी बढ़ती जा रही है। लोगों ने अपने घरों पर सोलर बिजली प्लांट लगाना शुरु कर दिए हैं और उस बिजली से वे घरों को रोशन करने के साथ साथ मुफ्त परिवहन का भी आनंद उठा रहे हैं। केंद्र सरकार ने इस परियोजना पर 75,000 करोड़ रुपये से अधिक की सब्सिडी देने का लक्ष्य निर्धारित किया है। एनडीए सरकार इस अभियान में हर महीने 300 यूनिट तक मुफ्त बिजली प्रदान करने के साथ-साथ 1 करोड़ घरों को रोशन करके भारत की ऊर्जा जरूरतों का नया इतिहास लिखने जा रही है।
पब्लिक रिलेशंस सोसायटी आफ इंडिया,भोपाल ने इस विषय पर आज एक सेमिनार का आयोजन किया। इसमें मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी लिमिटेड के उप मुख्य महाप्रबंधक (एनएसई) सौरभ श्रीवास्तव ने एक समारोह में बताया कि वे किस तरह इस योजना में सब्सिडी का लाभ लेकर अपनी ऊर्जा जरूरतें पूरी कर सकते हैं और बिजली कंपनी को अतिरिक्त बिजली बेचकर अपनी आय भी बढ़ा सकते हैं। उन्होंने बताया कि बिजली कंपनी के पोर्टल और वेवसाईट पर इस योजना की लिंक दी गई है। इस पर आवेदन करके घर बैठे वे अपने घरों पर सोलर बिजली प्लांट लगवा सकते हैं। सरकार एक किलोवाट बिजली प्लांट पर तीस हजार रुपए ,दो किलोवाट के बिजली प्लांट पर साठ हजार रुपए और तीन किलोवाट बिजली प्लांट पर 78 हजार रुपए सब्सिडी दे रही है। इससे ज्यादा क्षमता वाले बिजली प्लांटों पर सब्सिडी 78 हजार रुपए ही रहेगी।
उन्होंने बताया कि इन घरेलू बिजली प्लांटों से प्राप्त बिजली से घर की लाईट ,एसी ,गीजर और हीटर भी चलाए जा सकते हैं। इस बिजली से इलेक्ट्रिक वाहनों की बैटरी भी चार्ज की जा सकती है। इससे बिजली के साथ परिवहन के ईंधन की भी बचत की जा सकती है। उन्होंने बताया कि भारत सरकार ईंधन के आयात पर हर साल लाखों करोड़ रुपए खर्च करती है। घरेलू बिजली से जहां पर्यावरण की रक्षा की जा सकेगी वहीं देश को ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर भी बनाया जा सकेगा। उन्होंने बताया कि काफी अनुसंधान के बाद ऐसे फोटो वोल्टिक सेल भी अब बाजार में आने लगे हैं जिनसे बादलों की मौजूदगी के बीच भी बिजली बनाई जा सकती है।
वरिष्ठ पत्रकार गिरिजा शंकर ने कहा कि पर्यावरण की रक्षा के साथ देश की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने की दिशा में ये महत्वाकांक्षी योजना है। लोगों को आगे बढ़कर इस योजना का लाभ उठाना चाहिए। इस योजना के अधिक प्रचार प्रसार की भी जरूरत है जिससे लोग अपनी ऊर्जा जरूरतों को लेकर आत्मनिर्भर हो सकेंगे।
इस परियोजना से जुड़े मोंटाज इंफ्रा पावर प्राईवेट लिमिटेड के निदेशक ओम प्रकाश मेहरा ने बताया कि अब देश में ही निर्मित उच्च क्वालिटी के सोलर पैनल अधिक बिजली का उत्पादन कर रहे हैं। सोलर पैनलों के छाया वाले पृष्ठ पर भी अब ऐसे फोटो वोल्टिक सेल लगाए जाते हैं जो आसपास की धूप से भी बिजली का उत्पादन करते हैं। इससे सोलर प्लांटों की क्षमता में इजाफा हुआ है। भारत में लगभग तीन सौ दिनों तक धूप उपलब्ध होती है। इससे बिजली का उत्पादन सरलता से हो जाता है।
कार्यक्रम के आयोजक और पीआरएसआई के अध्यक्ष मनोज द्विवेदी ने कहा कि भारत सरकार की इस योजना पर मध्यक्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी ने गंभीरता से अमल शुरु किया है। इससे प्रदेश की बिजली की मांग को नियंत्रित करने में सफलता मिली है। आगे आने वाले समय में हम सोलर बिजली का ऐसा नेटवर्क तैयार करने में सफल होंगे जिससे भारत ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बन जाएगा। पीआरएसआई के सचिव पंकज मिश्रा ने सभी अतिथियों और आगंतुकों के प्रति आभार व्यक्त किया। संस्था के कोषाध्यक्ष के.के.शुक्ला ने अतिथियों के सत्कार और गोष्ठी की व्यवस्था का दायित्व संभाला। -

विकास की मुख्यधारा में बढ़ चला मध्यप्रदेश
डॉ. मयंक चतुर्वेदीमध्य प्रदेश में नई सरकार के गठन और उसके बाद प्रदेश को मुखिया के रूप में मिले डॉ. मोहन यादव को मुख्यमंत्री के पद पर रहते अभी पूरे छह माह भी नहीं बीते हैं कि एक के बाद एक उनके निर्णयों ने हर क्षेत्र में राज्य की गति को ऊंचाईयों तक पहुंचा दिया है।
यह स्वभाविक है कि किसी भी राज्य के विकास में सबसे अहम भूमिका, शासन, प्रशासन और जनता के बीच के समन्वय की होती है । लोक कल्याणकारी राज्य की अवधारणा तब तक सफल नहीं होती, जब तक कि ये तीनों ही आपस में समन्वय के साथ कार्य करते हुए नहीं दिखते हैं । जब ये तीनों के बीच समन्वय होता है तो देश एवं प्रदेश की आर्थिक उन्नति होती है और आर्थिक गति आने से राज्य के हर नागरिक के जीवन में भौतिक सुख एवं उससे मिलनेवाले आध्यात्मिक सुख की वृद्धि होती है।
मध्य प्रदेश में आज जो नई भाजपा की मोहन सरकार में दृश्य उभरा है, वह राज्य के नागरिक की जेब से जुड़ा हुआ है, बाजार से आप कोई वस्तु एक उपभोक्ता के रूप में तभी खरीदते हैं, जब आपकी पॉकेट इसकी अनुमति देती है। यदि आपका कोई आर्थिक संग्रह नहीं या आपकी आय पर्याप्त नहीं है तब आप चाहकर भी कोई वस्तु स्वयं के लिए और अपने परिवार जन, कुटुम्ब, बन्धु-बान्धवों के लिए नहीं खरीद पाते हैं, किंतु इस संदर्भ में मध्य प्रदेश में जो खुशी की बात वर्तमान में है, वह यह है कि राज्य में निवास कर रहे लोग खुलकर बाजार से खरीदारी कर रहे हैं और प्रदेश की सकल घरेलू आय (जीडीपी) बढ़ाने में अपना भरपूर योगदान दे रहे हैं ।
स्वभाविक है यदि राज्य में सरकार की सोच एवं कार्य लोककल्याणकारी नहीं होते तथा रोजगार के पर्याप्त अवसर मुहैया कराने के साथ लगातार नवाचार करने में यदि भाजपा की मोहन सरकार कहीं कमजोर होती तो आज यह दृष्य उभरकर कभी सामने नहीं आता। यही कारण है कि देश में आज मध्य प्रदेश अपनी बड़ी आबादी के बाद भी उच्च पूंजीगत व्यय में या कहना होगा कि लग्जरी वस्तुओं की अधिक खपत के कारण राज्य माल और सेवा कर (एसजीएसटी) संग्रह में, कहीं अधिक वृद्धि करने में भारत के सभी राज्यों में सबसे आगे रहने में कामयाब हुआ है ।
भारत में विनिर्माण के लिए पीएलआई, राज्य प्रोत्साहन, विदेशी व्यापार नीति के तहत लाभ जीएसटी, केंद्रीय उत्पाद शुल्क, सेवा कर और वैट कानूनों सहित अधिकांश करों पर ग्राहकों को पिछले 20 वर्षों से अधिक समय से सलाह दे रहे केपीएमजी संस्थान के राष्ट्रीय प्रमुख अभिषेक जैन की इस संबंध में कही बातों पर हमें गौर करना चाहिए, वे कहते है कि किसी राज्य के जीएसटी की वृद्धि और गिरावट का सटीक कारण बताना कठिन है, कर संग्रह दरों को प्रभावित करने के लिए कई कारक जिम्मेदार हो सकते हैं। चूंकि जीएसटी एक उपभोग-आधारित कर है, इसलिए एसजीएसटी दरें उपभोग पैटर्न में बदलाव से प्रभावित हो सकती हैं। उच्च आर्थिक क्रय शक्ति वाले राज्य और जनसंख्या आमतौर पर एसजीएसटी संग्रह को प्रभावित करने वाले कारक हैं। कई अन्य कारक भी एसजीएसटी में योगदान दे सकते हैं, जैसे सरकारी नीतियों या विनियमों में बदलाव जो राज्य में निवेश को गति देता है। अन्य प्रकार के सरकारों के सफल आर्थिक प्रयास अधिकांशत: जीएसटी की वृद्धि के कारण बनते हैं।
इस दिशा में कहना होगा कि यह मोहन सरकार की आर्थिक क्षेत्र में सकारात्मक और सही निर्णयों का ही प्रतिफल है जोकि मध्य प्रदेश ने वित्त वर्ष 24 में साल-दर-साल सबसे अधिक एसजीएसटी संग्रह में सफलता हासिल की है। पिछले वित्तीय वर्ष में दर्ज की गई 15.93 प्रतिशत की वृद्धि जहां मप्र ने अपने खाते में दर्ज की थी, वहीं, अभी उसने 19.53 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज कर न सिर्फ अपने ही रिकार्ड को तोड़ा है, बल्कि उत्तर प्रदेश जैसे विशाल जनसंख्यावाले राज्य जहां माल की खपत भी स्वभाविक तौर पर अधिक हैै, उसे भी पीछे छोड़ दिया है।
आंकड़ों को देखें तो मध्य प्रदेश के बाद दूसरे नंबर पर वित्त वर्ष 2024 में उत्तर प्रदेश में 18.88 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के राज में यूपी ने भी बीते एक वर्ष में एकदम से लगभग चार पायदान की छलांग लगाई है। 18.58 प्रतिशत की वृद्धि के साथ तेलंगाना अगले क्रम में है। सूची में चौथे स्थान पर महाराष्ट्र है, जिसका वास्तविक रूप से एक लाख करोड़ रुपये का सबसे अधिक एसजीएसटी संग्रह रहा है और वित्त वर्ष 24 में 17.9 प्रतिशत की वृद्धि दर दिखी है। दूसरी ओर गुजरात, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, केरल, हरियाणा और कर्नाटक जैसे कई अन्य राज्यों में 15 प्रतिशत से कम वृद्धि दर्ज होते दिख रही है।
इसके साथ मध्य प्रदेश ने वित्त वर्ष 24 में अपने पूंजीगत व्यय में 97 प्रतिशत की वृद्धि की है, जो आंशिक रूप से एसजीएसटी संग्रह में उछाल आगे ले जाने में सहायक रहा है। राज्य में बड़ी आबादी को रोजगार पाने एवं उन्हें मिलनेवाले वेतन में बढ़ोत्तरी को भी इससे जोड़कर देखा जा सकता है, प्रत्येक व्यक्ति और परिवार की क्रय क्षमता इसके कारण से बढ़ जाती है । इससे किसी भी राज्य की अर्थव्यवस्था को बहुत मदद मिलती है। मध्य प्रदेश के शहरों के साथ ग्रामीण क्षेत्र ने भी इस बार कर संग्रह में एक बड़ी भूमिका निभाई है। जोकि यह समझता है कि राज्य में न सिर्फ शहरों में बल्कि ग्रामीण क्षेत्र में प्रति व्यक्ति आय में लगातार अच्छी वृद्धि हो रही है। इसके साथ ही पिछले दिनों मध्य प्रदेश ने वाहन खरीदी में भी अपना एक नया रिकार्ड बनाया, यह भी आज प्रत्येक परिवार की आर्थिक समृद्धि को दर्शा रहा है।
वस्तुत: इस मामले में आज ”बिजनेसलाइन” द्वारा देश के शीर्ष 15 राज्यों का तुलनात्मक अध्ययन एवं उसकी रिपोर्ट मध्य प्रदेश के संदर्भ में एक उत्साह जगा रही है। यदि इसी तरह से मध्य प्रदेश आगे बढ़ता रहा तो जैसा अभी कुछ दिन पहले मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने एक सभा के दौरान कहा था कि भाजपा की सरकार मप्र को देश का सबसे विकसित राज्य बनाएगी और इसके लिए हम संकल्पित हैं, तो कहना होगा कि उनका यह संकल्प साकार होने की दिशा में जरूर सफलता से आगे बढ़ता हुआ दिख रहा है।
(लेखक, फिल्म सेंसर बोर्ड एडवाइजरी कमेटी के सदस्य एवं पत्रकार हैं) -

सरकारी छूट से मुनाफे का उद्यम चलाना सिखाएगा सैडमैप
55 जिलों में 37 सेक्टर में निशुल्क अत्याधुनिक पाठ्यक्रम
भोपाल11 मई(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)। बेरोजगारी दूर करने और युवाओं को अपने पैरों पर खड़ा करने के लिए उद्यमिता विकास केंद्र मध्य प्रदेश (सेडमैप) सभी पचपन जिलों में लगभग सैंतीस प्रकार के उद्यम शुरु करने के लिए प्रशिक्षण देने जा रहा है। जिला व्यापार एवं उद्योग केन्द्र (डीआईसी) अंतर्गत संचालित शासकीय स्वरोजगार योजनाओं की सब्सिडी का लाभ युवाओं को तभी मिल पाता है जब वे किसी भी विधा में विधिवत प्रशिक्षण प्राप्त कर चुके हों। सैडमेप ने एक व्यापक कार्यक्रम तैयार किया है जिसमें छोटा व्यवसाय शुरु करने जा रहे उद्यमियों के लिए, व्यावसायिक उद्यमों की स्थापना को सुविधाजनक बनाने और मौजूदा व्यावसायिक इकाइयों के विकास को बढ़ावा देने के गुर सिखाए जाएंगे। पाठ्यक्रम में अध्ययन सामग्री, वीडियो आधारित ट्यूटोरियल, केस-आधारित उदाहरण भी शामिल होते हैं। केंद्र की ओर से डीएलईसी फोरलेन फार्मूला आधारित ‘सर्टिफिकेट इन बिजनेस स्किल, डिसेंट्रलाइजेशन, लोकल, एंटरप्रेन्योरशिप तथा कोऑपरेशन’ के साथ ‘फैकल्टी डेवलपमेंट प्रोग्राम सर्टिफिकेट’ का संयुक्त संचालन भी किया जा रहा है।
इस संदर्भ में जानकारी देते हुए सेडमैप की कार्यकारी संचालक श्रीमती अनुराधा सिंघई ने बताया कि इसके लिए संयुक्त रूप से एक कोर्स ‘ज्ञान हैंडबुक’ डिजाइन किया गया है जिसमें 37 विभिन्न सेक्टर से सम्बंधित उद्यमिता के आयाम को सम्मिलित किया गया है । साथ में वरिष्ठ विषय विशेषज्ञों एवं अधिकारियों के माध्यम से भी इसमें युवाओं को मार्गदर्शन उपलब्ध कराया जाएगा। सबसे बड़ी बात तो ये है कि इच्छुक युवा इस प्रशिक्षण को ऑनलाइन माध्यम से घर बैठे भी पा सकते हैं और प्रमाण-पत्र भी निःशुल्क डाउनलोड कर सकते हैं। प्रत्येक विषय पर जानकारी के साथ प्रत्येक वीडियो यूटूयूब पर उपलब्ध रहेगा।
श्रीमती अनुराधा सिंघई ने बताया कि पाठ्यक्रम में उद्यमिता के उभरते हुए अनेक सेक्टर को सम्मिलित किया गया है. जिसमें प्रमुख रूप से वनौषधि- आयुष एपीआई, 64-कलाओं, सोलह सिंगार, हर्बल, 108 जड़ी-बूटी, मोटा अनाज, 108 भारतीय मसाला, जनजातीय उद्यमिता, हथकरघा-बुटीक, गोबर उत्पाद, पूजन सामग्री, फूड प्रोसेसिंग, भारतीय शिल्प, अलाइड डेयरी, मिलेट बेकरी, महुआ, जैव उर्वरक, घरेलू / दैनिक उपयोग की वस्तुओं, बायोप्लास्टिक, स्पोर्ट्स, योग-नेचुरोपैथी पर्यटन उद्यमिता तथा अन्य सम्बंधित उपसेक्टर शामिल है। जल और ऊर्जा स्वराज के साथ एग्रोएंटरप्रेन्योर तैयार करना, विकसित मध्य प्रदेश, फूड प्रोसेसिंग हब, एग्रोप्रेनर ग्रामीण अर्थव्यवस्था के नए इंजन, न्यूट्री हब, श्रीअन्न सुपरफूड को वर्ल्डवाइड एक्सपोर्ट, छोटे किसानों के लिए मिलेट्स (श्रीअन्न) आधारित उद्यमिता, सौर उर्जा ट्यूबवेलों, कृषि मशीनरी और उपकरण आधारित उद्यमिता, पीएम किसान समृद्धि का विस्तार, ड्रोन-कृषि-सैटेलाइट उद्यमिता के क्षमता निर्माण होने से उपज के प्रभावी मार्केटिंग के लिए नए आयामों को स्थापित करना शामिल है।
श्रीमती अनुराधा सिंघई ने बताया कि इसमें संयुक्त रूप से स्वावलंबी भारत अभियान, मिनिस्ट्री ऑफ़ इलेक्ट्रॉनिक्स एंड इंफॉरमेशन टेक्नोलॉजी भारत सरकार प्रोजेक्ट राष्ट्रीय जनजातीय विश्वविद्यालय अमरकंटक, मध्य प्रदेश जन अभियान परिषद म.प्र. सरकार, आईसीएआर-अटारी जबलपुर, एकल ग्रामोत्थान फाउंडेशन, स्वर्णिम भारतवर्ष फाउंडेशन के संयुक्त तत्वाधान में भारत के सवा सौ करोड़ ‘ज्ञान’ जी फॉर गरीब, वाई फॉर युवा, ए फॉर अन्नदाता (किसान), एन फॉर नारीशक्ति (महिला) पर ध्यान कर डीएलईसी फार्मूला डिसेंट्रलाइजेशन (विकेंद्रीकरण), लोकल (स्वदेशी), एंटरप्रेन्योरशिप (उद्यमिता), कोऑपरेशन (सहकारिता) आधारित अत्याधुनिक पाठ्यक्रम का नि:शुल्क संचालन किया जा रहा है।
श्रीमती अनुराधा सिंघई ने यह भी बताया कि अहिल्याबाई होल्कर जन्म त्रिशताब्दी वर्ष को देखते हुए क्षमता सम्वर्धन के इस कार्यक्रम में कुटुंब प्रबोधन और नागरिक शिष्टाचार के साथ स्वदेशी उत्पादन बढ़ाने के लिए स्थानीय संसाधन का पर्यावरण हितैषी के रूप में उपयोग एवं सामजिक समरसता को ध्यान में रखकर सहकारिता आधारित आउट ऑफ बॉक्स थिंकिंग वाले उद्यमिता के माध्यम से क्लास बी और क्लास सी कैटेगरी के स्वदेशी उत्पादों से बड़े पैमाने पर इंपोर्ट कम तथा एक्सपोर्ट को बढ़ावा देने सम्मिलित किया गया है। पंच परिवर्तन के सूत्र सामाजिक समरसता, कुटुंब प्रबोधन, पर्यावरण संरक्षण, स्व का जागरण तथा नागरिक शिष्टाचार का पालन करते हुए उद्यमिता पारिस्थितिकी तंत्र उद्यमिता का निर्माण प्रायोगिक रूप में कराने का प्रशिक्षण भी इस पाठ्यक्रम में शामिल है।
-

फार्मा उद्योग में क्रांतिकारी साबित होगी नई शिक्षा नीतिःसंजय जैन
भोपाल,06 मार्च(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)। पांच लाख करोड़ रुपयों की अर्थव्यवस्था का लक्ष्य पूरा करने में भारत का फार्मा उद्योग बड़ी भूमिका निभाने जा रहा है। नई शिक्षा नीति के माध्यम से फार्मेसी की पढ़ाई में उद्योंगों की सीधी भागीदारी बढ़ाकर हम भारत और दुनिया के लिए बेहतर फार्मासिस्ट तैयार कर रहे हैं। मध्यप्रदेश फार्मेसी काऊंसिल के अध्यक्ष और फार्मेसी काऊंसिल आफ इंडिया के सदस्य संजय जैन ने भोपाल के सैम कालेज आफ फार्मेसी की ओर से होटल रैडिसन में आयोजित सेमिनार में ये कहा। राष्ट्रीय फार्मेसी शिक्षण दिवस के अवसर पर आयोजित फार्मा अन्वेषण नामक इस विचार मंथन शिविर में उद्योगों से जुड़े अनेक वक्ताओं ने भी फार्मा सेक्टर को मजबूत बनाने के मंत्र सुझाए।
सैम ग्लोबल विश्वविद्यालय की चांसलर प्रीति सलूजा, सैमं विश्विद्यालय के कुलगुरु डॉ.आर.के.रघुवंशी,मुख्य अतिथि के रूप में पधारे फार्मेसी काऊंसिल आफ इंडिया की शिक्षा नियंत्रण समिति के चेयरमेन डॉ.दीपेन्द्र सिंह, सर हरिसिंह गौर केन्द्रीय विश्वविद्यालय सागर के फार्मेसी विभाग के प्रोफेसर एस.के.जैन ने भी अपने विचार व्यक्त किए। सैम फार्मेसी कालेज के प्राचार्य डॉ.शैलेश जैन ने विषय का प्रवर्तन करते हुए नई शिक्षा नीति के लागू होने के बाद फार्मेसी के अध्ययन और अध्यापन में आ रहीं चुनौतियों की ओर सभी वक्ताओं का ध्यान आकर्षित किया। कार्यक्रम की शुरुआत भारत में फार्मेसी की शिक्षा के जनक प्रोफेसर स्वर्गीय एम.एल. सराफ के चित्र पर दीप जलाकर सभी अतिथियों ने पुष्प अर्पित किए । सरस्वती पूजन के बाद उद्घाटन सत्र का शुभारंभ हुआ।
मध्यप्रदेश सरकार के प्रतिनिधि के रूप में मध्यप्रदेश फार्मेसी काऊंसिल के अध्यक्ष संजय जैन ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ.मोहन यादव ने उच्च शिक्षा मंत्री रहते हुए नई शिक्षा नीति को लागू करवाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया था। अब वे उज्जैन के नजदीक विकसित किए जा रहे सर्जिकल उपकरणों के विशेष औद्योगिक क्षेत्र के माध्यम से फार्मा सेक्टर को मजबूती प्रदान कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि फार्मेसी काऊंसिल आफ इंडिया के अध्यक्ष मोंटू पटेल ने भारत सरकार से फार्मा उद्योग में आ रहीं अड़चनें दूर करवाने में बड़ी भूमिका निभाई है। आजादी के बाद उद्योग की जरूरतों के मद्देनजर कोई सहयोगी कानून नहीं थे। फार्मेसी एक्ट 1948 का बना हुआ था। अब संसद ने नए फार्मेसी अधिनियम को मंजूरी प्रदान कर दी है।
उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने प्रधानमंत्री जन औषधि के माध्यम से आम जनता को सस्ती और गुणवत्ता पूर्ण औषधियां उपलब्ध कराने की पहल की है। मध्यप्रदेश के एक युवा आकाश जी ने सभी जिलों में दवाईयों की सप्लाई की प्रणाली को आधुनिक स्वरूप प्रदान किया है। पीथमपुरा में बन रहीं दवाईयां विदेशों को सप्लाई की जा रहीं हैं और देश की आय बढ़ाने में अपना महत्वपूर्ण योगदान दे रहीं हैं। उन्होंने सैम विश्वविद्यालय और फार्मेसी कालेज के शिक्षकों और विद्यार्थियों को एक महत्व पूर्ण अनुष्ठान में सक्रिय भागीदारी निभाने के लिए बधाई और शुभकामनाएं भी दीं।
फार्मेसी काऊंसिल आफ इंडिया की शिक्षा समिति के अध्यक्ष दीपेन्द्र सिंह ने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस ने फार्मेसी शिक्षण की सामग्री को इतना सहज बना दिया है कि जो जानकारियां ढूंढ़ने में हमें कई दिन लग जाते थे अब वे जानकारियां चुटकियों में हासिल की जा सकती है। यही वजह है कि दवाईयां बनाने में कम समय लग रहा है। उन्होंने कहा कि भारत का औषधि क्षेत्र पहले बहुत विकसित रहा है। हमारे विद्यार्थी शिक्षा पाने के लिए गुरुकुलों में जाते थे, जहां विद्यार्थी की अभिरुचि और क्षमता के अनुसार उसे काम दिया जाता था। नई शिक्षा नीति 2020 के लागू होने के बाद एक बार फिर शिक्षा का वही दौर लौटेगा। अब व्यावहारिक शिक्षा के लिए विद्यार्थी को शिक्षक से ज्ञान अर्जित करने में आसानी होगी। यह शैक्षणिक पद्धति विद्यार्थी को अपने विषय चयन करने और बदलने की आजादी देती है। इतने विशाल कैनवास पर अध्यापन होने से शिक्षण का कार्य बहुत चुनौतीपूर्ण भी हो गया है।
उन्होंने कहा कि हमें ऐसे लोगों के लिए दवाईयां बनानी होती हैं जो तनाव और बीमारियों से जूझ रहे हैं। जाहिर है इसके लिए हमें आम लोगों के मनोविज्ञान को भी समझना पड़ता है। हम शरीर के लिए उपयोगी रसायनों के साथ साथ संगीत और खुशबू से जुड़ी चिकित्सा विधियों के लिए भी दवाईयां बनाते हैं। पहले देश में फार्मेसी के चार कालेज हुआ करते थे अब लगभग सात हजार कालेज हैं। ऐसे में विद्यार्थी तो बहुत हैं लेकिन गुणवत्ता पूर्ण फार्मासिस्ट तैयार करना आज के फार्मा सेक्टर के लिए चुनौती बन गया है। श्री सिंह ने कहा कि फार्मेसी काऊंसिल आफ इंडिया ने लगभग तीस बड़ी फार्मा कंपनियों से अनुबंध किया है ताकि वे उद्योगों के लिए जरूरी शैक्षणिक सामग्री और योग्य प्रशिक्षक उपलब्ध करवाकर अच्छे फार्मासिस्ट बनाने में अपना योगदान दे सकें।
डॉ.सर हरिसिंह गौर विवि के फार्मेसी विभाग के प्रोफेसर एस.के.जैन ने कहा कि हम फार्मा सेक्टर के अनुसंधान कर्ताओं और सफल फार्मासिस्टों के माध्यम से बेहतर फार्मासिस्ट तैयार कर रहे हैं। नई शिक्षा नीति ने जिस व्यापकता के साथ पाठ्यक्रमों को लचीला बनाया है उससे विद्यार्थियों को उनकी रुचि के अनुरूप काम चुनने की आजादी मिलने लगी है। सैम यूनिवर्सिटी जैसे कई विश्वविद्यालय फार्मेसी के शिक्षण को गुणवत्ता प्रदान कर रहे हैं उससे आने वाले समय में हमारा देश फार्मा सेक्टर का पुरोधा बन जाएगा।
सैम विश्वविद्यालय की चांसलर इंजी.प्रीति सलूजा ने कहा कि पीसीआई ने सैम फार्मेसी कालेज को देश के फार्मेसी शिक्षण के लिए पाठ्यक्रम अनुसंधान का अवसर दिया है इसके लिए हम उनके प्रति आभारी हैं। श्री सिंह के साथ पीसीआई के सदस्य संजय जैन की पारखी निगाहों ने सैम कालेज को इस महत्वपूर्ण जिम्मेदारी निभाने के लिए अनुकूल पाया तभी हम देश के शैक्षणिक विकास में अपना योगदान दे पा रहे हैं। गौर विश्वविद्यालय सागर के प्रोफेसर एस.के.जैन के अनुभवी मार्गदर्शन से हम फार्मेसी शिक्षण के लिए महत्वपूर्ण साफ्टवेयर बनाने जा रहे हैं। भारत सरकार ने जिस खुलेपन की नीति पर अमल शुरु किया है उससे हमारे गांवों के प्रतिभाशाली बच्चे भी आगे आकर विश्व का नेतृत्व करने के लिए तैयार हो रहे हैं। जल्दी ही हमारे देश में पूरी दुनिया की जरूरतें पूरी करने वाली जेनरिक दवाईयां बनने लगेंगी। इससे हम मानवता के प्रमुख प्रहरी के रूप में सामने होंगे। हमारे फार्मासिस्ट नैतिक भी हैं और तकनीक से सुसज्जित उद्यमी के रूप में भी सामने आ रहे हैं।
कार्यक्रम के पहले सत्र में सैम विवि की चांसलर इंजी. प्रीति सलूजा ने फार्मेसी काऊंसिल आफ इंडिया केशिक्षा समिति के अध्यक्ष दीपेन्द्र सिंह को स्मृति चिन्ह और शाल श्रीफल भेंटकर सम्मानित किया। मध्यप्रदेश फार्मेसी काऊंसिल के अध्यक्ष संजय जैन को कुलगुरु आर.के.रघुवंशी ने शाल श्रीफल और स्मृति चिन्ह भेंटकर सम्मानित किया। प्रोफेसर एस.के.जैन को सैम कालेज के प्राचार्य शैलेश जैन ने स्मृति चिन्ह, शाल और श्रीफल भेंटकर उनका अभिनंदन किया। दूसरे सत्र में सभी विशेषज्ञों और आमंत्रितों ने फार्मेसी के शिक्षण में आ रहीं चुनौतियों को दूर करने में अपने समाधान प्रस्तुत किए। इनमें पाठ्यक्रम की व्यापकता और व्यावहारिकता दोनों पर विमर्श किया गया। -

खनिज आय बढ़ाकर प्रदेश को बनाएँगे आत्मनिर्भरःमुख्यमंत्री डॉ.मोहन यादव
भोपाल,23 जनवरी(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्रीय खनन मंत्रालय द्वारा खनन क्षेत्र में किए गए सुधारों ओर नवाचारों से मध्यप्रदेश सहित सभी राज्यों को लाभ मिलेगा। हमारी समृद्ध भू-गर्भ संपदा में अनेक संभावनाएं छिपी हैं, इन सुधारों के क्रियान्वयन और नवाचारों को अपनाने से प्रदेश आर्थिक रूप से सुदृढ़ होगा। खनन प्रक्रिया में लाई गई पारदर्शी और जवाबदेह व्यवस्था से खनन क्षेत्र को लेकर समाज में विश्वसनीयता बढ़ेगी। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव राज्यों के खनिज मंत्रियों के दूसरे सम्मेलन को मुख्य अतिथि के रूप में संबोधित कर रहे थे। कुशाभाऊ ठाकरे सभागार में आयोजित सम्मेलन की अध्यक्षता केन्द्रीय कोयला, खान और संसदीय कार्य मंत्री श्री प्रह्लाद जोशी ने की। मिनरल ब्लॉक्स की नीलामी में सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन के लिए मध्यप्रदेश को देश में प्रथम स्थान प्राप्त हुआ, जिसका भारत सरकार द्वारा जारी प्रमाण मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को प्रदान किया गया। उल्लेखनीय है कि 29 खनिल ब्लॉकों की नीलामी कर मध्यप्रदेश ने देश में प्रथम रहा है। मध्यप्रदेश की क्रिटिकल मिनरल रिपोर्ट भी मुख्यमंत्री डॉ. यादव को प्रदान की गई।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव तथा केन्द्रीय मंत्री श्री जोशी ने केंद्रीय खान मंत्रालय द्वारा लगाई गई प्रदर्शनी का अवलोकन भी किया। प्रदर्शनी में जियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया, जिला खनिज प्रतिष्ठान सहित देश की प्रमुख खनन कंपनियों, निजी एजेंसियों और स्टार्ट-अप्स द्वारा अपनी उपलब्धियों को प्रदर्शित किया गया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव तथा केन्द्रीय मंत्री श्री जोशी ने मंत्रोच्चार के बीच दीप प्रज्जवलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। इस अवसर पर कॉफी टेबल बुक बिल्डिंग ट्रस्ट-ट्रासंफोर्मिंग लाईव्ज़ का विमोचन भी किया गया। इसके साथ ही एवरेज सेल प्राईज सिस्टम प्लेटफार्म तथा स्टार रेटिंग ऑफ माइन्स का डिजिटल लोकार्पण किया गया। एक्सप्लोरेशन लायसेंस रूल्स का भी विमोचन हुआ। खनन क्षेत्र में हुए प्रक्रियागत सुधारों और नवाचारों पर लघु फिल्म का भी प्रदर्शन हुआ।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मध्यप्रदेश गान का उल्लेख करते हुए कहा कि हमारा प्रदेश वन संपदा, खनिज संपदा और प्राकृतिक संसाधनों में समृद्ध होने के साथ-साथ संस्कार, संस्कृति और धार्मिक रूप से भी उन्नत और सम्पन्न है। मध्यप्रदेश को राज्यों के खनिज मंत्रियों के सम्मेलन का अवसर देने के लिए राज्य सरकार केन्द्रीय मंत्री श्री जोशी की आभारी है। प्रधानमंत्री श्री मोदी के नेतृत्व और केन्द्रीय मंत्री श्री जोशी के मार्गदर्शन में खनन क्षेत्र की चुनौतियों और कठिनाइयों का सामना करते हुए खनन क्षेत्र में किए जा रहे सुधारों और नवाचारों से राज्यों के आर्थिक सुदृढ़ीकरण में मदद मिलेगी, उड़ीसा द्वारा राजस्व वृद्धि के लिए अपनाया गया मॉडल अन्य राज्यों के लिए भी अनुकरणीय है।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री मोदी के नेतृत्व में देश के भू-भाग सहित समुद्री क्षेत्र की खनिज संपदा को खोजने और उसके उपयोग के लिए की गई पहल सराहनीय है। खनन से संबंधित प्रक्रियाओं सहित सम्पूर्ण शासन व्यवस्था में क्रियान्वित किए गए नवाचार और पारदर्शी एवं शुचितापूर्ण व्यवस्था से प्रधानमंत्री श्री मोदी का स्वरूप, सम्राट विक्रमादित्य का आभास कराता है। देश के विभिन्न भौगोलिक भागों में विद्यमान खनिज संपदा की सटीक जानकारी की बढ़ती उपलब्धता से देश की उन्नति के द्वार खुल रहे हैं, माइनिंग ब्लॉक्स की नीलामी जैसी गतिविधियों से खनिज संपदा का देश की उन्नति के लिए अधिक से अधिक उपयोग संभव हुआ है। माइनिंग फंड से लोगों की जिन्दगी बदलने के लिए किए जा रहे कार्य सराहनीय है।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि विभिन्न प्रदेशों के खनिज मंत्रियों का यह सम्मेलन खनन क्षेत्र में प्रगति के लिए निश्चित ही मील का पत्थर साबित होगा, खनन क्षेत्र में आ रही अंतर्विभागीय कठिनाइयों के समाधान का भी मार्ग इससे प्रशस्त होगा। साथ ही खनन क्षेत्र में पर्यावरण तथा वन विभाग से संबंधित समस्याओं के समाधान के लिए विशेष पहल की जाएगी।
केन्द्रीय कोयला, खान और संसदीय कार्य मंत्री श्री प्रह्लाद जोशी ने मध्यप्रदेश द्वारा खनन गतिविधियों से प्रभावित लोगों के विकास और उनकी आजीविका सुनिश्चित करने के लिए डीएमएफटी (जिला खनिज फाउंडेशन ट्रस्ट) के अंतर्गत किए गए कार्यों की सराहना की। मध्यप्रदेश के मिनरल ब्लॉक्स की नीलामी में प्रथम आने पर मुख्यमंत्री डॉ. यादव को बधाई देते हुए केन्द्रीय मंत्री श्री जोशी ने कहा कि देश की अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ करने में खनिज संसाधनों की महत्वपूर्ण भूमिका है, खनिज ब्लॉक्स की नीलामी और नवाचारों से राजस्व बढ़ा है, अन्य राज्यों को भी खनिज ब्लॉक्स की नीलामी की दिशा में पहल करना चाहिए। सस्टेनेबल माइनिंग से प्रदेश अपनी अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण सुधार ला सकते हैं। केन्द्र सरकार, सभी राज्यों को खनन क्षेत्र में हरसंभव सहयोग प्रदान करने के लिए तत्पर है।
केन्द्रीय मंत्री श्री जोशी ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री मोदी के नेतृत्व में अब देश क्रिटिकल मिनरल्स, रेयरैस्ट मिनरल्स के खनन की ओर आगे बढ़ रहा है। डाटा रिपोजिटरी अवलेबलिटी में वृद्धि हुई है, लायसेंस, लीज क्लीयरेंस को भी सरल और त्वरित किया जा रहा है। उन्होंने मध्यप्रदेश द्वारा खनिज मंत्रियों के सम्मेलन की मेजबानी करने के लिए मुख्यमंत्री डॉ. यादव तथा राज्य सरकार का आभार माना।
राज्यों के खनिज मंत्रियों के सम्मेलन में उड़ीसा के इस्पात एवं खान मंत्री श्री प्रफुल कुमार मलिक, कर्नाटक के खान मंत्री श्री एस.एस. मलिकानुर्जन, उत्तरप्रदेश के एमएसएमई मंत्री श्री राकेश सचान, नागालैंड के विधायक तथा खनिज सलाहकार श्री डब्ल्यू.सी. कोनयक, केन्द्रीय खनन मंत्रालय के सचिव श्री वी.एल. कांताराव, अतिरक्त सचिव श्री संजय लोहिया तथा अन्य अधिकारी उपस्थित थे। सम्मेलन में आंध्रप्रदेश, असम, बिहार, छत्तीसगढ़, गुजरात, जम्मू-कश्मीर, झारखंड, केरल, महाराष्ट्र, उड़ीसा, राजस्थान, तमिलनाडु, तेलंगाना और उत्तरप्रदेश को क्रिटिकल मिनरल रिपोर्ट्स भी सौंपी गई। -
समाजसेवा में अडंगा आए तो शीर्षासन कराते हैं बाबा रामदेव
योगशिविर में आए पतंजलि आयुर्वेद के स्वामी परमार्थदेव गरजे
भोपाल,09 जनवरी(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)। स्वामी बाबा रामदेव ने ऋषि मुनियों की देन भारतीय योग पद्धति को पुर्नजीवित करके समाजसेवा का सफल मॉडल खड़ा किया है। बहुराष्ट्रीय कंपनियों की आड़ में जिन लुटेरों ने इस अनुष्ठान में व्यवधान डालने की कोशिश की उन्हें पूज्य स्वामी जी ने शीर्षासन करा दिया। आज वे अपनी दुर्दशा पर आंसू बहा रहे हैं। पतंजलि फूड्स के माध्यम से हमने आम जनता को अपना भागीदार बनाया है। हम देश से प्राप्त संसाधनों को देश के विकास पर खर्च कर रहे हैं। ये हमारी देश भक्ति है और इसमें देश के उद्यमी अपनी हिस्सेदारी दर्ज करा रहे हैं। हमारा उद्देश देश को स्वस्थ और समृद्ध बनाना है। अपना लक्ष्य हम पाकर ही रहेंगे। राजधानी में आए पतंजलि योगपीठ ट्रस्ट हरिद्वार के डॉक्टर स्वामी परमार्थ देव ने पत्रकार वार्ता में सवालों का जवाब देते हुए ये बात कही। वे यहां सुभाष एक्सीलेंस स्कूल में आयोजित योग शिविर में शामिल होने राजधानी पहुंचे हैं।
पतंजलि योगपीठ ट्रस्ट के प्रकल्पों पर लगाए जा रहे आरोपों का तीखा प्रतिकार करते हुए स्वामी परमार्थदेव ने कहा कि हमारा लक्ष्य समाजसेवा है और हम इसमें आधुनिक व्यापार प्रबंधन की तकनीकों का प्रयोग कर रहे हैं। यही वजह है कि आज हम आम परिवारों को स्वस्थ बनाने में कामयाब हुए हैं। देश को आर्थिक महाशक्ति बनाने के अभियान में हम सबसे सबल मॉडल के रूप में उभरे हैं। हमारी प्रगति से उन लोगों को हैरानी हो रही है जो अपने उत्पादों के माध्यम से आम जनता को ठग रहे थे। हम अपने प्रतिद्वंदियों के षड़यंत्रों को अच्छी तरह समझते हैं इसलिए हमारे उत्पाद गुणवत्ता के पैमाने पर चोखे हैं। कभी हमारे ऊपर छह छह सौ मुकदमे लादे गए लेकिन हम सभी में बेदाग होकर आगे आए हैं। हमारी सफलता के पीछे आम जनता की शक्ति है, यही वजह है कि हम अपने लक्ष्यकी ओर लगातार बढ़ते जा रहे हैं।
पतंजलि फूड्स पर सेबी की आपत्तियों के बारे में उन्होंने कहा कि आर्थिक मॉडल में कई छोटी त्रुटियां रह जाती हैं जिन्हें हम सेबी, या अन्य आर्थिक गतिविधियों की नियंत्रक संस्थाओं के मार्गदर्शन में सुधारते जा रहे हैं। हमने अपने कारोबार में कई संस्थाओं और नागरिकों को हिस्सेदार बनाया है। उनकी खामियों के आरोप भी हमारे ऊपर लगा दिए जाते हैं जबकि हमने जो आर्थिक मॉडल अपनाया है उसमें देशसेवा और स्वाधीनता की खनक है।
भारत स्वाभिमान न्यास और पतंजलि योग समिति के प्रांतीय कार्यालय प्रबंधक टी.एस.बावल ने बताया कि राजधानी में आयोजित विशाल योग शिविर में भारत स्वाभिमान,पतंजलि योग समिति, महिला पतंजलि योग समिति, युवा भारत, पतंजलि किसान सेवा समिति, हमरो स्वाभिमान संगठन, के कार्यकर्ता साधक, स्कूली बच्चे, आध्यात्मिक संगठन, सामाजिक संगठन व गणमान्य नागरिक ठंड और कोहरे के बावजूद बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।
इस अवसर पर योग आयोग के अध्यक्ष वेद प्रकाश शर्मा, संगठन के प्रदेश संरक्षक अरुण मेहरोत्रा, भारत स्वाभिमान संगठन के प्रदेश प्रभारी करण सिंह पंवार, पतंजलि योग समिति की प्रदेश प्रभारी डॉक्टर पुष्पांजलि शर्मा, भारत स्वाभिमान के प्रदेश प्रभारी, राजेन्द्र आर्य, पतंजलि किसान सेवा समिति के प्रभारी मुन्नीलाल यादव, युवा भारत के प्रभारी अनिल सेन, सोशल मीडिया के प्रभारी सत्यानारायण गौर, प्रदेश कोषाध्यक्ष टी.एस. बावल, पतंजलि योग समिति सह प्रदेश प्रभारी हरिशरण समारी, पतंजलि किसान सेवा समिति सह प्रदेश प्रभारी कमलेश गौर, युवा भारत सह प्रदेश प्रभारी लखनलाल साहू, महिला पतंजलि योग समिति प्रदेश कोषाध्यक्ष पार्वती शर्मा, संगठन के सभी जिला प्रभारीगण मुरलीधर साहू, डॉक्टर मनोज शर्मा, अमरीश गोस्वामी, मोहनलाल श्रीवास्तव, रेखा बत्रा, हीरालाल कुशवाहा, रामकृपाल पटेल, लोकेश नागर, सुरेन्द्र सिंह आर्य, धर्मेन्द्र जाट, एमएल गौर, प्रदीप वैष्णव, महेन्द्र रघुवंशी, शर्द वर्मा, अशोक पटेल, प्रदीप वर्मा, गणेश प्रसाद गौर, रामकृपाल पटेल,अखिलेश योगी, शशिकांत यादव, सोबरन सिंह चौहान, वीरेन्द्र धवन, हरीश भाई , एम के श्रीवास्तव, जगदीश सिंह, डॉक्टर एस आर मालवीय, विनोद वाजपेयी, उपस्थित थे।
सुभाष उत्कृष्ट विद्यालय के प्राचार्य सुधाकर पाराशर, अर्पणा नागोलिया, संजय झा, गुलाब रघुवंशी, प्रेम सिंह चौहान, भीम सिंह यादव, के साथ बडी संख्या में गणान्य नागरिकों ने भी शिविर का लाभ उठाया। योग शिविर में स्वामी परमार्थदेव ने सूक्ष्म व्यायाम, भस्त्रिका, कपालभाति, अनुलोम विलोम, भ्रामरी, उद्घिगत, प्राणायाम के साथ सूर्य नमस्कार, मरकटासन, वज्रासन, गौमुखासन, ताड़ासन, त्रियक ताड़ासन, आदि कराते हुए उनके बारे में विस्तृत जानकारी प्रदान की।
योग शिविर के बाद ई-4। 7 अरेरा कालोनी में आोयजित बैठक में स्वामी परमार्थदेव ने कहा कि नर सेवा ही नारायण सेवा है। एक डाक्टर भी चीरा लगाता है और अपराधी भी चाकू चलाता है। डाक्टर के कार्य को हम समाजसेवा कहते हैं और स्वयं जाकर उससे चीरा लगवाते हैं। सभी जानते हैं कि डाक्टर का कार्य जीवनदान देना है। हम सभी कार्यकर्ताओं को मानवसेवा ,स्वास्थ्य सेवा और योग सेवा के अपने कार्य में जुटे रहना है। हम विचार पर आधारित गुरु सत्ता को ध्यान में रखते हुए वो आचरण करें जिससे समाज का लाभ हो। हमारे कार्यों से आम लोगों में संतुष्टि का भाव जागना चाहिए तभी हम अपने अनुष्ठान को सफल कर पाएंगे। -

हांगकांग में बैंकिंग का सिक्का जमाने वाले चंद्रशेखर शर्मा बने भोपाल सर्किल के मुख्य महाप्रबंधक
भोपाल 1.जनवरी(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)।श्री चंद्रशेखर शर्मा के रूप में आज भारतीय स्टेट बैंक में एक नया अध्याय सामने आया है। चंद्रशेखर शर्मा ने आधिकारिक तौर पर आज भारतीय स्टेट बैंक के मुख्य महाप्रबंधक के रूप में कार्यभार संभाल लिया है। देश के सबसे बड़े बैंक के भोपाल सर्किल में मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ दोनों राज्य शामिल हैं।
बैंकिंग क्षेत्र के लोग जानते हैं कि उन्होंने 1994 में एक परिवीक्षाधीन अधिकारी के रूप में अपनी पारी शुरु की थी। अपने शानदार दीर्घ कार्यकाल में उन्होंने लगातार 29 सालों तक बैंकिंग के विभिन्न कार्यों को सफलता पूर्वक अंजाम दिया। हर सेवा का अनुभव हासिल करते हुए उन्होंने अपनी विशेषज्ञता को न केवल निखारा बल्कि बैंक को ऊंचाईयों तक पहुंचाने में अपनी प्रतिभा का बहुमूल्य योगदान दिया है। आज भारतीय स्टेट बैंक की शाखाएं जिस तकनीकी पेशेवर कुशलता के साथ दूर दराज के इलाकों तक भी उपलब्ध हैं उसमें श्री शर्मा ने भी अपनी रचनात्मकता का योगदान दिया है।
बैंकिंग का अनुपालन निरीक्षण हो या वाणिज्यिक ऋणों का रणनीतिक प्रबंधन, हर क्षेत्र में उन्होंने एक सख्त कार्यशैली का विकास किया और सेवाओं को कारगर बनाने में अपनी भूमिका निभाई है। अंतर्राष्ट्रीय एसबीआई की विदेशी शाखा में उनके कार्यकाल के दौरान कई ऐसे बैंकिंग मामले आए जिनसे भारत की अर्थव्यवस्था को संवारने में मदद मिली।इस नई जिम्मेदारी से पहले श्री शर्मा भुवनेश्वर मंडल के महाप्रबंधक रहे हैं। उनका ये कार्यकाल देश में नई आशाओं का संचार करता देखा गया। कॉव्लून शाखा में मुख्य परिचालन अधिकारी के रूप में उन्होंने हांगकांग में भारतीय अर्थव्यवस्था को मजबूती प्रदान की।
राजधानी के प्रधान कार्यालय में अधिकारियों और कर्मचारियों को संबोधित करते हुए उन्होंने नए साल की हार्दिक शुभकामनाएं दीं और सभी से कहा कि वे अपनी सेहत का ख्याल रखते हुए सामाजिक समर्पण की मिसाल पेश करें। उन्होंने कहा कि संस्था और काम के प्रति अटूट प्रतिबद्धता से हम जो गौरव हासिल करते हैं वह न केवल हमें बल्कि हमारे परिजनों और ग्राहकों के बीच प्रेरणा बनता है। उन्होंने कहा कि तनावमुक्त कार्य वातावरण बनाने के लिए हमें खुद पहल करनी होगी तभी हम खुशहाल ग्राहक सेवा का माहौल बना पाएंगे और एक सामंजस्यपूर्ण कार्यसंस्कृति को अंजाम दे पाएंगे।
इस अवसर पर बैंक के तमाम अधिकारी और कर्मचारी भी उपस्थित थे। श्री कुंदन ज्योति, श्री अजितव पाराशर, श्री नीरज प्रसाद, श्री दीपक कुमार झा डीजीएम एवं सीरडीओ ने भी अपने विचार साझा किए। सभी अधिकारियों और कर्मचारियों ने अपने उद्बोधन में कहा कि किसी भी सकारात्मक नेतृत्व से पूरे संस्थान में नई ऊर्जा का संचार हो जाता है।प्रफुल्लित अधिकारियों और कर्मचारियों के प्रति धन्यवाद ज्ञापित करते हुए श्री चंद्रशेखर शर्मा ने कहा कि हम सभी मिलकर भारतीय स्टेट बैंक की सेवाओं को और भी ज्यादा जनोन्मुखी बनाने में सफल होंगे। हमारा लक्ष्य समाज की समृद्धि है जिसे हमें ग्राहकों के चेहरे पर मुस्कान लाकर संपन्न करना है।
-

Post Office Savings Account: न्यूनतम बैलेंस सिर्फ 500 रुपए,अमाऊंट कम रहेगा तो कटेंगे सिर्फ पचास रुपए
भोपाल 22 दिसंबर(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)। जबसे मोदी सरकार ने बैंक खाते खुलवाने की मुहिम चलाई है तबसे लोग बैंक में सेविंग्स अकाउंट खुलवाना पसंद करते हैं। छोटे वित्तीय लेनदेन करने वालों के लिए बैंक खाते कई बार मंहगा सौदा साबित होते हैं। पोस्ट ऑफिस में सेविंग अकाउंट खुलवाने के अपने अलग फायदे हैं. आईए जानते हैं कि पोस्ट ऑफिस सेविंग्स अकाउंट किस तरह उपयोगी साबित हो रहा है। ट्रांजैक्शन के अलावा कई तरह की स्कीम्स के फायदे भी सेविंग्स अकाउंट के जरिए ही मिलते हैं. सेविंग्स अकाउंट किसी भी बैंक या पोस्ट ऑफिस में खुलवा सकते हैं. आमतौर पर लोग बैंक में सेविंग्स अकाउंट खुलवाना पसंद करते हैं, लेकिन पोस्ट ऑफिस में सेविंग अकाउंट खुलवाने के अपने अलग फायदे हैं. पहला फायदा तो ये है कि इसमें आपको बहुत ज्यादा मिनिमम बैलेंस मेंटेन नहीं करना पड़ता. सिर्फ 500 रुपए का बैलेंस बनाए रखना भी काफी है. आइए आपको बताते हैं पोस्ट ऑफिस के सेविंग अकाउंट पर मिलने वाले तमाम फायदों के बारे में.
खाता खुलवाना बहुत सरल
कोई भी वयस्क व्यक्ति पोस्ट ऑफिस में खाता खुलवा सकता है. इसके अलावा दो लोग मिलकर भी अपना अकाउंट खुलवा सकते हैं. माइनर के लिए अकाउंट खुलवाना हो तो उसके माता-पिता या कानूनी अभिभावक उसकी ओर से अकाउंट खुलवा सकते हैं. वहीं 10 वर्ष से अधिक उम्र का नाबालिग अपने नाम से खाता खुलवा सकता है. नाबालिग को वयस्क होने के बाद अपने नाम में अकाउंट को ट्रांसफर करवाने के लिए संबंधित डाकघर में नया खाता खोलने का फॉर्म और अपने नाम के केवाईसी दस्तावेज जमा करने होते हैं.
कई सुविधाएं उपलब्ध
बैंक की तरह ही आपको पोस्ट ऑफिस सेविंग्स अकाउंट पर भी कई तरह की सुविधाएं मिलती हैं. अकाउंट खुलवाने पर आपको चेकबुक, एटीएम कार्ड, ईबैंकिंग/मोबाइल बैंकिंग, आधार लिंकिंग आदि की सुविधा मिलती है. इसके अलावा आप इस अकाउंट पर सरकार की ओर से चलाई जा रही अटल पेंशन योजना, प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना और प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना ,किसान सम्मान निधि, लाड़ली बहना योजना, का भी लाभ ले सकते हैं. इसमें आपको 4.0% प्रति वर्ष के हिसाब से ब्याज मिलता है.
कुछ सेवाओं पर लगेगा शुल्क
पोस्ट ऑफिस सेविंग्स अकाउंट में मिनिमम 500 रुपए होने जरूरी हैं. अमाउंट कम है और वित्तवर्ष खत्म होते-होते ये इस लिमिट से नीचे ही रहता है तो 50 रुपए मेंटेनेंस फीस काट लिया जाएगा.
डुप्लीकेट पासबुक जारी करवाने के लिए आपको 50 रुपए देने होते हैं.
अकाउंट स्टेटमेंट या डिपॉजिट रसीद जारी कराने के लिए 20-20 रुपए देने होते हैं.
सर्टिफिकेट खोने, खराब होने की दिशा में पासबुक जारी करवाने पर हर रजिस्ट्रेशन पर 10 रुपए देने होते हैं.
अकाउंट ट्रांसफर कराने पर और अकाउंट प्लेज कराने पर 100-100 रुपए लगते हैं.
नॉमिनी का नाम बदलवाने या कैंसल कराने के 50 रुपए लगते हैं.
चेक के दुरुपयोग पर आपको 100 रुपए चार्ज देना होता है.
एक साल में आप चेक बुक के 10 लीफ बिना किसी चार्ज के इस्तेमाल कर सकते हैं, और उसके बाद हर लीफ पर 2 रुपए का चार्ज लगता है. -

फार्मासिस्टों के असामयिक निधन पर परिजनों को दो लाख रुपए की राहत मिलेगीःसंजय जैन
भोपाल,17 अक्टूबर(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)। मध्यप्रदेश फार्मेसी काऊंसिल के अध्यक्ष संजय जैन ने आज भोपाल केमिस्ट एसोसिएशन की ओर से आयोजित सम्मान समारोह में कहा कि व्यापारियों के असामयिक निधन पर उनके परिजनों को दो लाख रुपए की राहत राशि प्रदान की जाएगी। एसोसिएशन के पदाधिकारियों और सदस्यों ने अध्यक्ष संजय जैन और उपाध्यक्ष राजू चतुर्वेदी को फूल मालाएं पहिनाकर,शाल श्रीफल से सम्मानित किया। एसोफरमससट-क-असमयकसिएशन की ओर से उन्हें स्मृति चिन्ह भेंट कर दवा व्यापारियों की समस्याओं का समाधान करने का अनुरोध किया गया। जवाब में श्री संजय जैन ने पूरे प्रदेश के दवा व्यापारियों से व्यापार को व्यवस्थित और जनउपयोगी बनाने का आव्हान किया।
फार्मेसी काऊंसिल आफ इंडिया के सदस्य औक्षर मध्यप्रदेश फार्मेसी काऊंसिल के अध्यक्ष संजय जैन ने कहा कि ये संयोग है कि मध्यप्रदेश के फार्मा सेक्टर को पहली बार अनुभवी फार्मासिस्ट और केमिस्ट मिले हैं। हमारा प्रयास रहेगा कि दवा उद्योग से जुड़े किसी भी व्यक्ति को अनावश्यक झंझटों में न उलझना पड़े ताकि दवा कारोबार को सुगम बनाकर आम जनता को राहत दी जा सके। उन्होंने कहा कि नई परिषद ने व्यापारियों के असामयिक निधन पर दो लाख रुपए की राहत राशि दिए जाने का प्रावधान किया है। ये राशि काऊंसिल के सुरक्षा फंड से उपलब्ध कराई जाएगी। उन्होंने कहा कि दवा उद्योग को व्यवस्थित तरीके से संचालित करने के लिए फार्मेसी एक्ट में स्पष्ट प्रावधान किए गए हैं कि काऊंसिल के पदाधिकारी फार्मा सेक्टर से ही लिए जाएं। इस कारोबार से जुड़े लोग यदि व्यापार की तकनीक को समझ लेंगे तो उन्हें अनावश्यक घाटा नहीं झेलना पड़ेगा और जनता को भी विश्वसनीय दवाईयां कम कीमतों पर उपलब्ध हो सकेंगी। इस प्रशिक्षण कार्यक्रम का वित्तीय बोझ काऊंसिल स्वयं उठाएगी और प्रदेश के फार्मा सेक्टर को आधुनिक तकनीकों के प्रयोग से प्रशिक्षित किया जाएगा। हमारा प्रयास है कि व्यापारियों के काम हों और दवा निर्माताओं, विक्रेताओं डाक्टरों सभीलोक निर्माण मंत्री गोपाल भार्गव ने कहा है कि प्रदेश में सेतु बंधन योजना में 896 करोड़ रूपये की लागत से 15 फ्लाई ओवर तथा रेलवे ओवर ब्रिज बनाए जाएंगे। इसकी प्रक्रिया प्रारंभ की जा चुकी है। के बीच निरंतर संवाद कायम रहे। विश्व के विकसित देशों में डाक्टर मरीज को देखकर दवाईयां लिखता है लेकिन उसकी डोज तय करने का काम फार्मासिस्ट ही करते हैंं। इससे मरीजों को दवाईयों के दुष्प्रभाव से बचाया जाता है।

फार्मेसी काऊंसिल के अध्यक्ष संजय जैन और उपाध्यक्ष राजू चतुर्वेदी को भोपाल केमिस्ट एसोसिएशन के अध्यक्ष जितेन्द्र धाकड़ ने
स्मृति चिन्ह भेंटकर सम्मानित किया.1उन्होंने कहा कि भोपाल के दवा कारोबारी प्रदेश भर में दवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण योगदान दे सकते हैं। श्री जितेन्द्र धाकड़ हरफनमौला प्रतिनिधि हैं और उनकी टीम ऊर्जावान है। इनका युवा नेतृत्व प्रदेश के दवा कारोबार को नए दौर में ले जाएगा। जिस तरह से नए पदाधिकारियों ने सुविधाजनक ड्रेसकोड लागू करने का फैसला लिया है उससे दवा उद्योग को पारदर्शी बनाने में मदद मिलेगी। इससे दवा कारोबार पर आम जनता का भरोसा भी बढ़ेगा।इस कारोबार से जुड़े छोटे कर्मचारियों में दायित्व बोध बढ़ेगा जिसका लाभ अंतिम पंक्ति में खड़े नागरिक को मिलेगा। श्री जैन ने कहा कि जीएसटी और अन्य कारोबारी व्यवस्थाओं ने दवा उद्योग की सफल इंडेक्सिंग की है। व्यापारियों की जो समस्याएं होंगी हम सभी मिलजुलकर उनका समाधान करेंगे। हमारा प्रयास रहेगा कि सभी व्यवस्थाओं पर अमल करके वर्ष 2024तक प्रदेश के पूरे दवा कारोबार की रंगत बदल दी जाए। राजधानी में ही शाहपुरा थाने के पास काऊंसिल का नया भवन निर्मित होने जा रहा है। यहां एक म्यूजियम बनाया जाएगा जिसमें दवा उद्योग के क्रमबद्ध विकास को मॉडलों(प्रदर्शों) के माध्यम से समझाया जाएगा। ये संस्थान नए फार्मासिस्टों को संस्कारित करने में मील का पत्थर साबित होगा।
एसोसिएशन के अध्यक्ष जितेंद्र धाकड़ एवं सचिव विवेक खंडेलवाल ने अतिथियों का अभिनंदनकिया। श्री धाकड़ ने इस अवसर पर कहा कि मध्यप्रदेश फार्मेसी काऊंसिल में पिछले दस लगाए जाएंगे जिससे उन्हें अपनी समस्याओं के लिए हर बार राजधानी नहीं भागना पड़ेगा।सालों का दौर अफरातफरी भरा रहा है। व्यापारियों और फार्मासिस्टों को अपने वैधानिक पंजीयन के लिए भी ऊटपटांग रुकावटों का सामना करना पड़ता था। जबसे श्री जैन ने काऊंसिल का पदभार संभाला है तबसे नवागत फार्मासिस्टों और व्यापारियों को फिजूल की अडंगेबाजी से राहत मिल गई है।श्री जैन ने पंजीयन व्यवस्था को सुव्यवस्थित करने के लिए सरल नियम बनाए हैं। नई परिषद फार्मेसी क्षेत्र की जानकार है और इसी वजह से कारोबारी रुकावटें दूर होने लगीं हैं।काऊंसिल में लगभग बारह सालों बाद विधिवत चुनाव हुआ है।
उन्होंने कहा कि दवा व्यापारियों को एक्सपायरी डेट की दवाईयां नष्ट करने में बड़ी अड़चनों का सामना करना पड़ता है। अब नई व्यवस्था के तहत हम सभी मिलकर एक मंच पर घोषित तरीके से एक्सपायरी डेट की दवाईयों को नष्ट करेंगे। इससे आम जनता को विश्वसनीय दवाईयां मिलने की गारंटी दी जा सकेगी।इससे दवा बाजार में फैलने वाला भ्रम भी दूर हो जाएगा। काऊंसिल के माध्यम से भविष्य में हर महीने फार्मासिस्टों के लिए संभाग स्तर पर केम्प लगाने का जो फैसला लिया गया है उससे व्यापारियों का समय बचेगा और उनका तनाव भी कम होगा। इस अवसर पर केमिस्ट एसोसिएशन और विभिन्न दवा संगठनों के पदाधिकारी और सदस्य मौजूद थे। -

दिव्यांग बच्चों को संबल देने सामने आया इक्विटास बैंक
भोपाल,29 सितंबर(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)। इक्विटास स्माल फायनेंस बैंक ने अपने कारोबारी विस्तार के साथ दिव्यांग बच्चों को संबल देने का अभियान मध्यप्रदेश में भी जारी रखा है। बैंक बनने के सात वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में बैंक ने आज पटेल नगर स्थित दिव्यांग बच्चों के ज्योति स्पेशल स्कूल में बच्चों के बीच पढ़ाई सामग्री वितरित करके उनके चेहरों पर मुस्कान लाने का प्रयास किया है। बैंक अपनी माईक्रो फायनेंस बैंकिंग गतिविधियो से आम नागरिकों के बीच लगातार समर्थन बढ़ाता जा रहा है इसके साथ ही बैंक ने समाजसेवा के माध्यम से लोगों के साथ खडे होने का दायित्व निभाना जारी रखा है। चेन्नई से प्रारंभ इस बैंक का सामाजिक दायित्वों के प्रति समर्पण देखकर ही रिजर्व बैंक ने कडी प्रतिस्पर्धा के बीच इक्विटास बैंक को बैंकिंग का लाईसेंस प्रदान किया था तबसे लेकर बैंक लगातार अपनी बैंकिंग गतिविधियों के साथ लोक दायित्व निर्वहन का वादा भी पूरा करता आ रहा है।
इक्विटास स्माल फायनेंस बैंक के इंदौर रेंज के सीएसआर अधिकारी राजेश भूमरकर ने बताया कि इक्विटास डेवलपमेंट इनीशिएटिव ट्रस्ट अपने सामाजिक दायित्वों को लगातार निभाता आ रहा है। समय से साथ बैंक के कामकाज में निखार आता जा रहा है जिससे हमारी सामाजिक गतिविधियां भी बढ़ती जा रहीं हैं। इसी श्रंखला में आज हमने मंदबुद्धि और दिव्यांग बच्चों के ज्योति स्पेशल स्कूल में अपना सहयोग दिया है। पांच से पंद्रह साल के करीबन अड़तालीस बच्चों को जब हमने पढ़ाई सामग्री वितरित की तो उनके खिले चेहरे और उनमें झलकता संतोष और जीवटता देखते ही बनती थी। ऐसे बच्चों को सहारा देना और उन्हें सामान्य जीवन के लिए प्रशिक्षित करना बहुत दुरूह कार्य है ऐसे किसी भीसामाजिक अभियान को मदद देने का हमारा प्रयास हमेशा जारी रहेगा। वर्ष 2016 से जब हमें बैंकिंग का लाईसेंस मिला तभी से हम एमपी में कार्य कर रहे हैं । भोपाल के लोगों ने हमारे कार्य के प्रति समर्पण को देखते हुए लगभग एक सौ चालीस करोड़ रुपए की जमाराशि देकर सामाजिक गतिविधियां निभाने की जवाबदारी सौंपी है। जैसे जैसे हमारी क्षमता बढती जाएगी हम प्रदेश के विकास की प्रमुख कड़ी के रूप में सदैव उपस्थित रहेंगे।
बैंक के रीजनल मैनेजर अमित देशपांडे ने बच्चों को दुलार करते हुए बताया कि बैंक ने कुछ ऐसी सरल प्रणाली विकसित की है जिससे हम ऐसे सामाजिक ट्रस्टों, एसोसिएशन, फेडरेशन और समितियों की आय बढ़ाने में सहयोगी साबित हो रहे हैं। हमारा लक्ष्य सार्थक बैंकिंग करना है। अपने इस दायित्व के निर्वहन में हम लगातार आगे बढ़ते जा रहे हैं।
बैंक के शाखा प्रबंधक लोकेश जैन ने बताया कि हमारी बैंकिंग गतिविधियां माईक्रो फायनेंस का सिद्धांत अपनाने की वजह से ज्यादा कारगर साबित हो रहीं हैं। हमने दस दस महिलाओं के स्वसहायता समूहों को बाजार की तुलना में कम ब्याज दर पर फायनेंस किया है। इन समूहों में सभी हितग्राही आपस में एक दूसरे की गारंटी देते हैं। ऐसे में हमारा डूबत ऋण एक फीसदी से भी कम होता है। यही वजह है कि हमारा मुनाफा ठोस और गारंटी वाला होता है। लगभग बीस सालों से हम लोगों को फायनेंस देकर उनका जीवन स्तर ऊंचा उठाने के लिए कार्य कर रहे हैं इस कारण से हमारा ग्राहकी आधार बहुत बड़ा है। लोगों को हम पर विश्वास है और जब हम उन्हें पैरों पर खड़ा करने में मदद करते हैं तो फिर वे हमसे अधिक ऋण लेकर अपना जीवन स्तर ऊंचा उठाने में निपुण हो जाते हैं। हमारी इसी सफलता को देखते हुए आज श्रंगेरी सारदा मठ हमारा संरक्षक बनकर सामने आया है। हमारे प्रेरणा पुंज पीएन वासुदेवन बैंक के धन प्रबंधन की जो कार्यपद्धति विकसित की है उससे हम गारंटी के साथ आगे बढ़ रहे हैं। शेयर बाजार का समर्थन हमारी विकास यात्रा का सबसे बड़ा गवाह साबित हो रहा है।
श्री राजेश भूमरकर ने बताया कि हम अपने उपभोक्ताओं को सफल बनाने के लिए हेल्थ हेल्पलाईन चलाते हैं जिनके अंतर्गत उन्हें बेहतर और सस्ती चिकित्सा की सलाह दी जाती है। मेडिकल कैप लगाकर हम लोगों को मुफ्त चिकित्सकीय जांच की सुविधा मुहैया कराते हैं। अपनी सीएसआर गतिविधियों में हम युवाओं और उद्यमियों का भी मार्गदर्शन करते हैं जिससे हमारी बैंकिंग गतिविधियां अपना उद्देश्य सार्थक बनाती हैं। आज के आयोजन में बैंक की ओर से व्यवसाय विकास अधिकारी रोहित राजपूत और प्रियंका पराते भी उपस्थित थे। ज्योति स्पेशल स्कूल की प्राचार्य सिस्टर बिंसी आगस्टाईन( एंसिलिन सिस्टर) ने सभी समाजसेवियों के प्रति आभार प्रकट किया। -

सफलता की आठवीं सीढ़ी जा पहुंचा इक्विटास बैंक
राज्यों की सरकारों ने इक्विटास बैंक को भागीदार बनाकर अपनी आय बढ़ाईभोपाल, 5 सितंबर(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)।तमिलनाडू के चेन्नई से वर्ष 2016 में शुरु हुआ इक्विटास स्माल फाईनेंस बैंक आज सात साल पूरे करके आठवें वर्ष में प्रवेश कर गया है, बैंक ने राजधानी में इस अवसर पर एक उत्सव का आयोजन किया। अपनी इस यात्रा में बैंक ने लोगों का भरोसा जीता और 3641 करोड़ रुपए की पूंजी जुटाई है।अप्रैल-जून की तिमाही में बैंक ने अपने नेट प्राफिट में 97.1 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज कराई । इन सफलताओं को देखते हुए शेयर बाजार ने भी बैंक को अपनी सलामी दी है। राजधानी में आज इक्विटास बैंक की वर्षगांठ के अवसर पर लाभ उठाने वाले निवेशकों और हितग्राहियों ने बैंक का जन्मदिन उत्साह पूर्वक मनाया।

भोपाल चैंबर्स आफ कामर्स ने केक काटकर इक्विटास बैंक को सफलता की शुभकामनाएं दीं.
भोपाल चैंबर्स आफ कामर्स के अध्यक्ष तेजकुल पाल सिंह पाली, फार्मेसी काऊंसिल के अध्यक्ष संजय जैन, रेलवे बोर्ड सदस्य कमलेश सेन, भोपाल कैट के अध्यक्ष रामबाबू शर्मा, मनोहर लाल टोंग्या, श्री कोल इंडस्ट्री के मनोज जैन, विदिशा के व्यवसायी विजय कदरे, नगरीय प्रशासन विभाग के वरिष्ठ अभियंता रवि चतुर्वेदी, सीनियर चार्डर्ड अकाऊंटेंट बी.आर.सोनी, एड्व्होकेट सीमा शाही,मूंदड़ा एंडरप्राईजेस के चंद्रमोहन नेमा, प्रापर्टी डीलर अशोक सिंह, जय स्टेशनरी वाले जेपी मड़वैया,संजीव शर्मा समृद्धि इंटरप्राईजेस,समेत कई गणमान्य नागरिकों ने दीप प्रज्ववलन करके और केक काटकर बैंक को शुभकामनाएं दीं। बैंक की ओर से रीजनल मैनेजर अमित देशपांडे,भोपाल संभाग बैंक समूह के प्रबंधक मनीष मरदद्वाज,शाखा प्रबंधक लोकेश जैन ने सभी आगंतुकों का स्वागत और अभिनंदन किया। बैंक की ओर से जन कल्याण कार्यो के अंतर्गत जरूरतमंद लोगों और बच्चों को आवश्यक सामग्री का वितरण भी किया गया।
मध्यप्रदेश फार्मेसी काऊंसिल के अध्यक्ष संजय जैन ने इक्विटास बैंक की सफल यात्रा पर केक काटकर बधाई दी.
वासुदेवन पठानी नरसिम्हन के मार्गदर्शन में आधुनिक बैंकिंग का प्रतीक बनते जा रहे इस बैंक ने अपने नाम को सार्थक कर दिखाया है। करोड़ों लोगों की बैंकिंग जरूरतों को पूरा करते हुए बैंक ने शेयर बाजार में भी धाक जमा ली है। महज सात सालों के कार्यकाल में बैंक ने पूरे देश में 882 शाखाएं स्थापित की हैं जहां से फाईनेंस के साथ साथ तमाम बैंकिंग सुविधाओं को संचालित किया जा रहा है। महाराष्ट्र ,छत्तीसगढ़ जैसे पड़ोसी राज्यों के अलावा कई अन्य राज्यों की सरकारों के कामकाज में सफल भागीदार रहते हुए बैंक ने प्रदेश सरकारों की आय बढ़ाने में उल्लेखनीय योगदान दिया है।
बैंक की सफलता की वजह इसका सफल धन प्रबंधन है। बैंक ने अपनी आनलाईन सेवाओं के माध्यम से अनावश्यक खर्चों को घटाने में सफलता पाई है। जनधन का उचित निवेश और बेहतर मुनाफा अर्जित करके बैंक ने अपने ग्राहकों को उनकी पूंजी का अधिकाधिक लाभ उपलब्ध कराया है। आज इक्विटास स्माल फाईनेंस बैंक अपने निवेशकों को फिक्स जमा राशियों पर नौ फीसदी से अधिक ब्याज उपलब्ध करा रहा है। इसके साथ ही बैंक ने ऐसे ऋणदाताओं का नेटवर्क खड़ा किया है जो सफल कारोबारों से बैंक को खासा लाभ दिलवा रहे हैं।
बैंक की जीवंत सेवाओं को देखते हुए श्रंगेरी सारदा मठ ने इक्विटास हेल्थकेयर फाऊंडेशन के तहत कैंसर रोगियों की देखभाल और उपचार का विशाल अभियान चलाया है। इसमें रोगियों को मुफ्त उपचार उपलब्ध कराया जाता है। बैंक अपने मुनाफे का 5 फीसदी हिस्सा इसी तरह के जनकल्याणकारी कार्यों पर खर्च करता है। -

अंत्योदय का फार्मूला बना देश की राजनीति का प्रमुख आधार
भोपाल,22 अगस्त(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)। वैश्विक राजनीति में बढ़ते दखल को सफल बनाने के लिए मोदी सरकार ने पंडित दीन दयाल उपाध्याय के जिस अंत्योदय वाले फार्मूले पर अमल करके प्रति व्यक्ति आय बढ़ाना शुरु कर दिया है उससे देश की राजनीति में नया भूचाल आ गया है। देश को अब तक जिन बड़े राजनीतिक कदमों ने प्रभावित किया है उसमें हर प्रति व्यक्ति आय बढ़ाने का फार्मूला कारगर साबित हो रहा है। मध्यप्रदेश सरकार ने किसानों, महिलाओं और विभिन तबकों को अर्थव्यवस्था में सीधे तौर पर जोडने की जो विधि अपनाई है उससे तमाम राजनीतिक दलों के दावे धराशायी हो गए हैं।
मध्यप्रदेश में किसान सम्मान निधि और लाड़ली बहना योजना ने शिवराज सरकार के प्रति बढ़ती सत्ता विरोधी लहर को ठंडा करना शुरु कर दिया है। मोदी सरकार भले ही तीसरी बड़ी अर्थव्यवस्था बनने का दावा कर रही है लेकिन वास्तव में देश प्रति व्यक्ति आय के पैमाने पर 142 वें नंबर पर है। अर्थशास्त्रियों की इस राय पर गौर करते हुए भाजपा ने अपने शासित राज्यों में लोगों को राहत के कई पैकेज दिए हैं।
लाल किले से दिए गए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के भाषण में ये तमाम दावे किए गए थे। इस पर जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी (जेएनयू) के जाने-माने अर्थशास्त्री, रिटायर्ड प्रोफेसर अरुण कुमार ने कहा कि प्रधानमंत्री जिन आंकड़ों के आधार पर ये बात कह रहे हैं वे संगठित क्षेत्र के सर्वे पर तैयार किए गए हैं।अरुण कुमार ने कहा, “10वें नंबर से 5वें नंबर पर और 5वें से तीसरे नंबर पर पहुंचने के लिए जिन आंकड़ों को आधार बनाया जा रहा है, वे आंकड़े सही नहीं है. क्योंकि नोटबंदी के बाद असंगठित क्षेत्र के आंकड़े सही नहीं हैं. सरकार भारतीय अर्थव्यवस्था इस की वृद्धि दर को 8%, 7% और 6% बताती रही है, लेकिन 2016 के बाद से दरअसल यह 2 से 3 प्रतिशत या 0% से ज्यादा नहीं रही है, खासकर तब जब नोटबंदी के कारण सब बंद पड़ा था.”
उन्होंने कहा, “सरकार केवल आंकड़ों का खेल कर रही है. हम 10वें नंबर से 5वें नंबर पर नहीं पहुंचे हैं. अभी तो हम 10वें नंबर के आस-पास ही हैं, जहां हम पहले थे.”कुमार ने कहा कि, “सरकार के आधिकारिक आंकड़े के मुताबिक कोविड महामारी के पहले हमारी ग्रोथ रेट, 2017-18 की चौथी तिमाही (क्वार्टर 4) में 8 प्रतिशत थी जो गिरकर 3 प्रतिशत हो गई. लेकिन इसमें असंगठित क्षेत्र शामिल नहीं है, इसलिए यह वृद्धि 0% या उससे कम हो सकती है. इसलिए हम 5वें नंबर पर नहीं, बल्कि 8वें, 9वे नंबर होंगे.”उन्होंने कहा, “आखिर जब नोटबंदी से अर्थव्यवस्था गिर गई थी, तब कहा गया था कि हम 8 प्रतिशत के साथ वृद्धि कर रहे हैं. तो हम आकलन कर सकते हैं कि यह कितना सच और कितना झूठ है. और फिर जीएसटी ने असंगठित क्षेत्र को ध्वस्त किया. एफएमसीजी सेक्टर कि रिपोर्ट, टेक्सटाइल सेक्टर, लेदर गुड्स सेक्टर, लगेज इंडस्ट्री की रिपोर्ट्स इसे साबित करती हैं.”वहीं पीएम मोदी ने कहा, “अंतर्राष्ट्रीय एजेंसियां भी कह रही हैं कि भारत में अत्यधिक गरीबी खात्मे के कगार पर है, जो दिखाता है कि 9 सालों में सरकार के फैसले और नीतियां देश को सही दिशा में ले जा रही हैं.”
कुमार इस पर कहते हैं, “दरअसल विश्व बैंक, ईडीबी और आईएमएफ खुद से आंकड़े इकट्ठा नहीं करता. वह सरकार के आंकड़े के आधार पर ही अपनी रिपोर्ट बनाता है. इसलिए जो सरकार के आंकड़ों में गड़बड़ी है, वही उसके आंकड़ों में भी गड़बड़ी होती है. वह एक इंडिपेंडेंट डेटा कलेक्टिंग (स्वतंत्र आंकड़े जुटाने वाली) एजेंसी नहीं है.” हालांकि, अरुण कुमार ने कहा, “55% संगठित क्षेत्र के आंकड़े को आधार बनाए तो वृद्धि की बात सही हो सकती है, लेकिन अंसगिठत क्षेत्र जो कि 45% है, जिसमें 14 प्रतिशत कृषि और बाकी 30 प्रतिशत अन्य असंगठित क्षेत्र है. 30 प्रतिशत असंगठित क्षेत्र में गिरावट है. असंगठित क्षेत्र के आंकड़े न मौजूद होने से 7-8 फीसदी की वृद्धि की बता गलत है, 30 फीसदी में गिरवाट के आधार पर आकलन करें तो हमारी ग्रोथ रेट, 0% 2%, 3% ही चल रही है, 7-8% नहीं.”
कुमार ने कहा कि, “11 अक्टूबर 2022 को जय प्रकाश नारायण (जेपी) के जन्मदिन पर हमने एक रिपोर्ट निकाली, जिसके मुताबिक हमारे देश में 32 करोड़ लोगों के पास तो कोई ढंग काम है, लेकिन 28 करोड़ लोगों के पास ढंग का काम नहीं है, या बिलकुल काम नहीं है. इनमें 19 करोड़ ने काम ढूंढ़ना बंद कर दिया था. अगर 140 करोड़ की जनसंख्या में 32 करोड़ के पास ही ढंग का काम है. तो हर एक व्यक्ति 4 व्यक्ति को सहारा दे रहा है.”
उन्होंने कहा, “नवंबर 2022 में ई-श्रम पोर्टल का डेटा आया है, प्रधानमंत्री ने भी इसका जिक्र किया है. नवंबर 2022 तक, 28 करोड़ असंगठित क्षेत्र के लोगों ने इस पोर्टल पर रजिस्टर कराया. उसमें से 94 प्रतिशत ने बताया कि हमारी आमदनी 10 हजार रुपये से कम है, जो कि गरीबी रेखा के आस-पास ही हैं.”
अरुण कुमार ने कहा कि, “विश्व बैंक का गरीबी रेखा का जो पैमाना है वह 2.15 डॉलर है. यानि 5 लोगों के परिवार को 25 हजार महीने की आमदनी चाहिए. हालांकि, यदि मोटे तौर पर समझें तो हर व्यक्ति को कम से कम 13 हजार रुपये चाहिए. लेकिन 94 प्रतिशत लोग तो कह रहे हैं हमारी आमदनी 10 हजार रुपये से कम है. विश्व बैंक की रेखा से भारत की गरीबी नापें तो ये इस पोर्टल में दर्ज कराने वाले 94% लोग गरीब हैं. इसलिए हम 5वीं अर्थव्यवस्था हैं और तीसरी अर्थव्यवस्था हो जाएंगे, इसका कोई मतलब नहीं है. असली बात हमारे आंकड़ों में आ नहीं रही है.”वहीं पीएम ने इस कार्यक्रम में नीति आयोग की रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि, “भारत गरीबी को खत्म कर सकता है. पिछले 5 सालों में 13.5 करोड़ लोग गरीबी से बाहर निकले हैं.”
इस पर कुमार कहते हैं, “इसे मल्टीडाइमेंशनल पॉवर्टी कहते हैं. जिसमें शिक्षा, स्वास्थ्य और लिविंग स्टैंडर्ड होता है. लेकिन इसमें भी गड़बड़ी है. सरकार कह रही है कि ये 2019-21 के आंकड़े हैं. 2019-20 की बात तो ठीक थी, लेकिन 2020-21 में तो भयंकर कोविड महामारी फैली थी. इस दौरान कितने लोगों ने पलायन किया. बच्चे स्कूल नहीं जा रहे थे, कितने लोग मर गए, जिनके आंकड़े भी ठीक से नहीं पता हैं. ऐसे में यह कहना कि 13.5 करोड़ लोग मल्टीडाइमेंशनल पॉवर्टी से निकल आए हैं, यह भी गलत है.”
उन्होंने कहा कि, “रूरल एम्प्लॉयमेंट गारंटी स्कीम आरबीआई के आंकड़ों के मुताबिक कोविड महामारी के समय सिर्फ 47 दिन का काम मिल रहा था. जो कि साल में 9 दिन होता है, साल में 9 दिन के काम से पूरे साल का काम कैसे चल सकता है? इसलिए 135 मिलियन यानि 13.5 करोड़ लोग गरीबी से निकल आए हैं ये भी आंकड़ा सही नहीं है.”
‘अर्थशास्त्री कुमार ने कहा कि, “प्रति व्यक्ति आय में तो हम अभी भी दुनिया में 142वें स्थान पर हैं. जो कि ज्यादा महत्वपूर्ण है. अगर हम थोड़ी देर के लिए मान भी लें कि हमारी अर्थव्यवस्था ब्रिटेन की अर्थव्यवस्था से बड़ी हो गई है. लेकिन हमारे यहां तो 140 करोड़ लोग हैं, उनके यहां साढ़े 7 करोड़ लोग हैं. वो हमसे 15 गुना छोटे हैं. वास्तव में हमें प्रति व्यक्ति आय के आधार पर अपने देश की गरीबी को देखना चाहिए.”
सरकार के दावों के समर्थन में बैंक ऑफ बड़ौदा के चीफ इकोनॉमिस्ट मदन सबनवीस कहते है कि , “जिस तरह भारत की सरकार इन्फ्रास्ट्रक्चर पर ध्यान दे रही है, इन्वेस्टमेंट हो रहा है और प्राइवेट इन्वेस्टमेंट पर इन्सेंटिव दिया जा रहा है, इससे तीसरी अर्थव्यवस्था बनना काफी संभव है.”सबनवीस ने कहा जहां तक असंगठित क्षेत्र के डेटा की बात है तो उसके लिए भी प्रॉक्सी डेटा का इस्तेमाल किया जाता है. इसके लिए आईआईपी ग्रोथ नंबर का इस्तेमाल होता है. ये काफी सालों से चल रहा है इसलिए मुझे नहीं लगता कि इसको लेकर बहुत बड़ी गड़बड़ी होगी.(प्रोफेसर अरुण कुमार के इंटरव्यू पर आधारित)