Month: September 2017

  • आर्थिक सुधारों पर संकट का कोहराम

    आर्थिक सुधारों पर संकट का कोहराम

    एमके वेणु
    2019 के चुनावों से 18 महीने पहले, भारत की राजनीतिक अर्थव्यवस्था पूरी तरह से लड़खड़ाई हुई दिखाई दे रही है, लेकिन नरेंद्र मोदी द्वारा लगातार 2022 तक पूरे किए जाने वाले नामुमकिन वादों की झड़ी लगाने का सिलसिला जारी है.

    चारों तरफ से आ रही आर्थिक संकट की ख़बरों ने अचानक भाजपा की जान को सांसत में डाल दिया है. नोटबंदी के फैसले के बाद कुछ वैसी ही बदइंतजामी जीएसटी को लागू करने के मामले में भी दिखाई दे रही है. इसने छोटे कारोबारियों की कमर तोड़ दी है, जिसका नतीजा नोटबंदी के बाद के महीनों में उत्पादन और बेरोजगारी में आई गिरावट की स्थिति के और भयावह होने के तौर पर सामने आया है.

    कारोबारी कंपनियां जीएसटी के लागू होने से पहले अपना स्टॉक खाली करने में लगी हुई थीं. उन्हें उम्मीद थी कि वे नई कर-प्रणाली में नया स्टॉक जमा करेंगी. लेकिन, विशेषज्ञों का कहना है कि जीएसटी को खराब तरीके से लागू किए जाने के कारण नया स्टॉक जमा करने रफ्तार काफी सुस्त है और कंपनियां फिलहाल जीएसटी व्यवस्था के स्थिर होने का इंतजार कर रही हैं. इसके बाद ही वे रफ्तार पकड़ेंगी.

    इस बात का ध्यान रखा जाना चाहिए कि यह सब त्योहारों के मौसम के ठीक पहले हो रहा है. 2017 की दूसरी छमाही में इसका असर आर्थिक विकास पर पड़ना तय है. जैसा कि कई लोगों ने आशंका जताई थी, जीएसटी को लागू करने के बाद मुद्रास्फीति में भी थोड़ी बढ़ोतरी दर्ज की गई है. पिछले कई दशकों में घरेलू पेट्रोल और डीजल की सर्वाधिक कीमत ने भी स्थिति को और बिगाड़ने का काम किया है.

    इसे विडंबना ही कहा जा सकता है कि तेल पर लगाए गए रिकॉर्ड टैक्स स्थिर राजस्व का एकमात्र स्रोत हैं, क्योंकि इसे जीएसटी के दायरे से बाहर रखा गया है. फिलहाल जीएसटी नहीं, तेल पर लगा कर ही केंद्र सरकार की जान बचाए हुए है.

    वित्त मंत्री अरुण जेटली की मुश्किलों को और बढ़ाते हुए जीएसटी नेटवर्क के उम्मीदों से कमतर प्रदर्शन (ऐसा कहना शायद स्थिति की गंभीरता को कम करके बताना है) ने 2017-18 में राजस्व में कमी का गंभीर खतरा पैदा कर दिया है. इससे केंद्र के राजकोषीय हिसाब-किताब के गड़बड़ाने की आशंका पैदा हो गई है. वित्त मंत्रालय को पहला झटका तब लगा जब जुलाई के महीने के लिए जीएसटी के तहत जमा हुए 95,000 करोड़ रुपये में से कुल 65,000 करोड़ रुपये के रिफंड का दावा उसके सिर पर आ गया.

    अगर इन सारे रिफंड दावों को स्वीकार कर लिया जाता है, तो केंद्र के पास महज 30,000 करोड़ रुपये ही बचेंगे, जबकि बजट में प्रति माह वास्तविक कर संग्रह 90,000 करोड़ से ज्यादा होने का अनुमान लगाया गया है. पुराने स्टॉक पर रिफंड के प्रावधान के कारण पहले महीने में रिफंड के ज्यादा दावों के आने का अंदाजा पहले से ही था. अनुमान है कि आनेवाले महीनों में जीएसटी से ज्यादा राजस्व प्राप्त होगा. लेकिन, जीएसटीएन के सॉफ्टवेयर में आ रही दिक्कतों को देखते हुए इस वित्तीय वर्ष में इस पूरी कवायद का भविष्य अधर में लटका हुआ नजर आता है.

    जीएसटीएन में आ रही विभिन्न परेशानियों को दूर करने के लिए राज्यों के मंत्रियों की नवनिर्मित समिति की अगुआई कर रहे बिहार के उप-मुख्यमंत्री सुशील मोदी ने पिछले सप्ताह एक दिलचस्प बयान दिया: ‘हम नाव को खेते हुए नाव का निर्माण कर रहे हैं.’ साफ तौर पर यह बयान केंद्र को कठघरे में खड़ा करता है, जिसने बगैर पर्याप्त तैयारी के जीएसटी को लागू कर दिया.

    इस नई समिति के सदस्य कर्नाटक के कृषि मंत्री कृष्ण बायरे गौड़ा ने बताया कि जीएसटीएन के सॉफ्टवेयर के साथ कई दिक्कतें हैं, जिन्हें ठीक करने में कम से कम छह महीने का वक्त लग जाएगा.

    उन्होंने कहा, ‘फिलहाल बहुत बुनियादी परेशानियां सामने आ रही हैं. मसलन, व्यापारी यह शिकायत कर रहे हैं कि उन्होंने रजिस्ट्रेशन करा लिया है और जीएसटी रिर्टन भी अपलोड कर दिया है, लेकिन इसे सिस्टम द्वारा नहीं दिखाया जा रहा है. सिस्टम की कछुआ चाल ने टैक्स भरनेवालों को दिन में तारे दिखा दिए हैं. जीएसटी सिस्टम इनवॉयस और विभिन्न चरणों, मसलन, जीएसटीआर-2 और जीएसटीआर-3, पर भरे गए रिटर्नों को अपलोड करने में भी परेशानी पैदा कर रहा है. इससे भी खराब बात ये है कि राज्य सरकारें जीएसटी अदायगी की निगरानी करने के लिए कंपनियों से संबंधित आंकड़ों को निकालने में असमर्थ साबित हो रही हैं.’

    गौड़ा का कहना है कि समिति के सदस्यों से सॉफ्टवेयर प्रोवाइडर से बात की है और ‘उनका कहना है कि उन्हें जुलाई में जीएसटी के लागू होने से पहले आखिरी मौके पर प्रक्रियागत नियमावली (प्रोटोकॉल) सौंपी गई. ट्रायल रन करने के लिए पर्याप्त समय नहीं था.’ इसलिए अब हम यह समझ सकते हैं कि आखिर सुशील मोदी के यह कहने का क्या अर्थ है कि नाव का निर्माण, बहती हुई नाव पर बैठे-बैठे किया जा रहा है!

    संघ परिवार के शीर्ष विचारकों ने देर से इस बात को स्वीकार किया है कि अर्थव्यवस्था की अस्थिर नाव पहले से ही नोटबंदी के कारण आए तूफान से पछाड़ खाते हुए हुए समुद्र में बह रही है. संघ परिवार के एक महत्वपूर्ण आर्थिक विचारक एस. गुरुमूर्ति ने कहा है कि एक साथ नोटबंदी, जीएसटी, बैंकों की गैर-निष्पादन परिसंपत्तियां (एनपीए), सेटलमेंट प्रोसेस और काले धन पर कई स्तरों पर किए जा रहे सुधारों ने व्यापार को बड़ा झटका दिया है.

    गुरुमूर्ति की यह आत्मस्वीकृति काफी दिलचस्प है, क्योंकि वे नोटबंदी, जीएसटी और निजी उद्यमियों तथा छोटे कारोबारियों पर कर-अधिकारियों की मनमानी कार्रवाई के सबसे बड़े समर्थकों में से एक थे. टैक्स डिपार्टमेंट बड़े कारोबारियों पर हाथ नहीं डाल रहा है. इसका कारण शायद ये है कि उनके साथ इनके संबंध मुद्दतों से अच्छे रहे हैं. आपको अगर इस बात का अर्थ समझना है, तो आपको बस नौकरी छोड़कर भारत की शीर्ष 500 कंपनियों से जुड़नेवाले वरिष्ठ टैक्स अधिकारियों की संख्या देखनी पड़ेगी.

    यानी संघ परिवार के विचारक अब ये खुलकर मान रहे हैं कि मोदी और जेटली ने दरअसल नवजात शिशु को सीधे पानी में तैरने के लिए फेंक दिया है. जीएसटी का वर्तमान चरण इसकी सबसे बड़ी मिसाल है. जुलाई महीने के लिए जीएसटी रिटर्न दाखिल करने और वाजिब रिफंड का दावा करनेवाले कारोबारियों को इस तरह परेशान किया जा रहा है, मानो वे कोई अपराधी हों.

    पहले निर्यातकों को हमेशा एक्साइज ड्यूटी से मुक्त रखा जाता था, क्योंकि वे वैश्विक बाजार में प्रतिस्पर्धा करते थे. जीएसटी के तहत, चूंकि सभी कारोबारियों को प्रक्रिया के तहत अप्रत्यक्ष कर भरना पड़ रहा है, इसलिए निर्यातकों से 18 प्रतिशत जीएसटी भरने के लिए कहा गया था, जिसे उनके माल को विदेश भेजने से पहले वापस लौटाने की बात कही गई थी.

    लेकिन अब निर्यातकों की यह शिकायत है कि उनका टैक्स रिफंड समय पर नहीं आ रहा है. निर्यातक इसके लिए इंतजार नहीं कर सकते, क्योंकि वे मौसम के हिसाब से काम करते हैं. मसलन, क्रिसमस के लिए बाहर माल भेजना. 18 प्रतिशत जीएसटी चुका देने के बाद उनकी कामकाजी पूंजी फंस जाती है. यह एक बड़ी रकम है. उन्हें छोटी अवधि में कामचलाऊ पूंजी की जरूरत को पूरा करने के लिए कर्ज लेने के लिए अतिरिक्त पैसा चुकाना पड़ रहा है. इससे उनका मुनाफा और सिकुड़ रहा है.

    भारत करीब 300 अरब अमेरिकी डॉलर का सालाना निर्यात करता है जिससे जीडीपी का एक बड़ा हिस्सा आता है. कल्पना कीजिए कि जीएसटी अधिकारी निर्यात मूल्य का 18 प्रतिशत अपने पास रख लेते हैं और उसे समय पर वापस नहीं लौटाते हैं. यह निर्यातकों के लिए किसी खराब सपने से कम नहीं कहा जा सकता है. निर्यातकों को त्वरित रिफंड के इस समीकरण को समझ पाने में वित्त मंत्रालय नाकाम रहा. जाहिर है इसका खामियाजा किसी न किसी को तो उठाना ही पड़ेगा.

    जीएसटी के पहाड़ जैसे कुप्रबंधन के मद्देनजर, अगर 2017 की दूसरी छमाही में जीडीपी विकास दर अप्रैल-जून में दर्ज किए गए 5.7 प्रतिशत से भी नीचे लुढक जाती है, तो मुझे कोई हैरत नहीं होगी. निश्चित तौर पर भाजपा अध्यक्ष अमित शाह के इस साहस भरे बयान के बावजूद कि लोगों को ‘आधिकारिक आंकड़ों को नजरअंदाज करना चाहिए’ सरकार के अंदर अर्थव्यवस्था पर मंडरा रहे काले बादलों को लेकर बदहवासी की स्थिति है.

    भारत के अनौपचारिक क्षेत्र, खासकर कृषि और छोटे उद्योगों को हुए नुकसान का काफी विस्तार से दस्तावेजीकरण किया गया है. पिछले कुछ महीनों से सोशल मीडिया पर इस मसले पर लगातार आंकड़ों के सहारे बात की जा रही है. छोटी कंपनियों (जिनका कुल कारोबार 25 करोड़ से कम है) को लेकर किए गए रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के एक सर्वेक्षण के मुताबिक जनवरी-मार्च, 2017 में उनकी बिक्री में 58 फीसदी की गिरावट देखी गई. जुलाई के बाद जीएसटी ने उनकी बदहाली को और बढ़ाया ही होगा.

    अंतरराष्ट्रीय वित्तीय सेवा समूह, क्रेडिट सुइस की मुंबई स्थित रिसर्च इकाई ने हाल ही में कहा है कि भारतीय अर्थव्यवस्था बेहद खराब दौर से गुजर रही है और नोटबंदी और जीएसटी जैसे बड़े नीतिगत उपायों ने अर्थव्यवस्था में बड़ी रुकावटें पैदा की हैं.

    क्रेडिट सुइस का कहना है कि इससे भी ज्यादा चिंताजनक बात ये है कि इन रुकावटों के साथ-साथ कुल सरकारी खर्च में भी भारी कमी आई है. यह याद रखना होगा कि निजी निवेश की गैरहाजिरी में संभवतः सार्वजनिक निवेश ही वह इकलौता इंजन बचा था, जो विकास की गाड़ी को थोड़ा-बहुत आगे खींच रहा था.

    2019 के चुनावों से 18 महीने पहले, भारत की राजनीतिक अर्थव्यवस्था पूरी तरह से लड़खड़ाई हुई दिखाई दे रही है. मोदी द्वारा लगातार 2022 तक पूरे किए जाने वाले नामुमकिन वादों की झड़ी लगाने का सिलसिला जारी है. इन नए वादों के पीछे छिपा संदेश यह है कि 2019 में उनकी सत्ता में वापसी पहले से ही तय है.

    इतिहास हमें बताता है कि राजनीति अक्सर चकमा देती है. किसी निजाम के आत्मविश्वास और लोकप्रियता के अपने चरम पर पहुंचने के ठीक बाद पैरों के नीचे की ज़मीन खिसकना शुरू कर देती है. मतदाता 2018 के बाद इस बारे में गंभीरता के साथ आकलन करना शुरू करेगा कि ‘नए भारत’ का वादा सच्चा है या फिर यह एक और बुलबुला है, जिसकी नियति ‘स्वच्छ भारत’ के कूड़ेदान में पड़ा पाया जाना है.(द वायर से साभार)

  • छोटे करदाताओं के लिए केवल पांच फीसदी टैक्स

    छोटे करदाताओं के लिए केवल पांच फीसदी टैक्स

    नई दिल्ली(पीआईसीएमपीडॉटकॉम)। केन्द्रीय वित्‍त एवं कॉरपोरेट मामलों के मंत्री श्री अरुण जेटली ने कहा कि वित्‍त मंत्रालय के आयकर विभाग ने कर प्रशासन में दक्षता, पारदर्शिता एवं निष्‍पक्षता सुनिश्चित करने के लिए पिछले दो-तीन वर्षों में अनेक कदम उठाए हैं। वित्‍त मंत्री ने इन पहलों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि 50 लाख रुपये तक की आमदनी वाले करदाताओं के लिए सिर्फ एक पेज वाला आईटीआर-1 (सहज) फॉर्म पेश किया गया। वित्‍त मंत्री ने कहा कि 2.5 लाख रुपये से लेकर 5 लाख रुपये तक की आमदनी वाले करदाताओं के लिए टैक्‍स दर 10 फीसदी से घटाकर 5 फीसदी कर दी गई जो दुनिया की न्‍यूनतम कर दरों में से एक है। वित्‍त मंत्री श्री जेटली ने यह भी कहा कि 5 लाख रुपये तक की आमदनी वाले ऐसे गैर-बिजनेस करदाताओं के लिए ‘कोई जांच नहीं’ अवधारणा शुरू की गई जिन्‍होंने पहली बार टैक्‍स रिटर्न भरा था। इसके पीछे मुख्‍य उद्देश्‍य यह था कि ज्‍यादा से ज्‍यादा लोग कर दायरे में आएं, अपने-अपने आईटी रिटर्न भरें और निर्धारित टैक्‍स भरें। वित्‍त मंत्री आज यहां ‘आईटी विभाग की पहलों’ विषय पर वित्‍त मंत्रालय से संबंद्ध सलाहकार समिति की दूसरी बैठक को संबोधित कर रहे थे।

    आयकर विभाग की अन्‍य पहलों पर प्रकाश डालते हुए वित्‍त मंत्री श्री अरुण जेटली ने कहा कि 50 करोड़ रुपये तक के कारोबार वाली कंपनियों के लिए कॉरपोरेट टैक्‍स की दर घटाकर 25 प्रतिशत के स्‍तर पर ला दी गई जिससे लगभग 96 फीसदी कंपनियों को कवर कर लिया गया। 01 मार्च, 2016 को अथवा उसके बाद गठित नई विनिर्माण कंपनियों को बगैर किसी छूट के 25 फीसदी की दर से टैक्‍स लगाए जाने का विकल्‍प दिया गया। वित्‍त मंत्री ने कहा कि प्रक्रियागत सुधारों के तहत न्‍यूनतम वैकल्पिक कर (मैट) से संबंधित क्रेडिट को 10 वर्षों के बजाय 15 वर्षों तक आगे ले जाने (कैरी फॉरवर्ड) की अनुमति दी गई।

    ई-गवर्नेंस के क्षेत्र में विभाग की पहलों पर रोशनी डालते हुए वित्‍त मंत्री ने कहा कि इस साल 97 फीसदी आयकर रिटर्न इलेक्‍ट्रॉनिक ढंग से दाखिल किए गए जिनमें से 92‍ फीसदी रिटर्न की प्रोसेसिंग 60 दिनों के भीतर कर दी गई और 90 फीसदी रिफंड 60 दिनों के भीतर जारी कर दिए गए। वित्‍त मंत्री ने यह भी कहा कि आयकर विभाग ने शिकायत निवारण प्रणाली ‘ई-निवारण’ शुरू की है जिसके तहत ऑनलाइन एवं कागज पर लिखकर दी गई सभी शिकायतों को एकीकृत कर दिया गया है और इनका निवारण होने तक इन पर करीबी नजर रखी जाती है। प्रत्‍येक शिकायत को स्‍वीकार किया जाता है और उसके समाधान के बारे में सूचना ईमेल और एसएमएस के जरिये दी जाती है। वित्‍त मंत्री ने कहा कि 4.65 लाख ई-निवारण शिकायतों में से 84 फीसदी शिकायतों का निपटारा अब तक किया जा चुका है।

    वित्‍त मंत्री श्री जेटली ने कहा कि ‘ई-सहयोग’ के जरिये सूचनाओं में अंतर वाले सभी मामलों को गैर-दखल तरीके से निपटाया जाता है जिससे कि पूर्ण जांच को टाला जा सके। वित्‍त मंत्री ने कहा कि आयकर विभाग द्वारा हर तिमाही लगभग 1.9 करोड़ वेतनभोगी करदाताओं को यह सूचना दी जाती है कि उनके नियोक्‍ताओं द्वारा कितना टीडीएस (स्रोत पर कर कटौती) जमा कराया गया है। वित्‍त मंत्री ने कहा कि विभाग की इन सभी ई-गवर्नेंस पहलों से कर निर्धारण अधिकारियों और करदाताओं के बीच प्रत्‍यक्ष संपर्क न्‍यूनतम हो गया है जिससे करदाताओं का उत्‍पीड़न कम करने, भ्रष्‍टाचार पर अंकुश लगाने और समय की बचत करने में मदद मिली है।

    केंद्रीय वित्‍त मंत्री ने कारोबार में सुगमता और वित्‍तीय बाजारों को बढ़ावा देने के लिए आयकर विभाग द्वारा उठाए गए कदमों पर भी प्रकाश डाला। इस संबंध में उन्‍होंने 50 लाख रुपये तक की आमदनी वाले प्रोफेशनलों के लिए प्रकल्पित कराधान योजना शुरू किए जाने का उल्‍लेख विशेष रूप से किया। इसी तरह कारोबारी आमदनी हेतु प्रकल्पित कराधान योजना के लिए सीमा को 1 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 2 करोड़ रुपये कर दिया गया है। वहीं, अंतरराष्‍ट्रीय वित्‍तीय सेवा केंद्र (आईएफएससी) में अवस्थित कंपनियों को लाभांश वितरण कर से मुक्‍त कर दिया गया है और उन्‍हें केवल 9 फीसदी की दर से मैट अदा करना होगा।

    जहां तक काले धन के खिलाफ छेड़े गए अभियान का सवाल है, आयकर विभाग ने वर्तमान सरकार के सत्‍ता में आने के बाद अनेक तरह के कदम उठाए हैं। इस संबंध में वित्‍त मंत्री ने काला धन अधिनियम 2015, बेनामी अधिनियम 1988 में किए गए व्‍यापक संशोधनों और ऑपरेशन क्लीन मनी इत्‍यादि का उल्‍लेख किया। वित्‍त मंत्री ने कहा कि 9 नवंबर, 2016 से लेकर 10 जनवरी, 2017 तक के विमुद्रीकरण संबंधी आंकड़ों के गहन अध्‍ययन के बाद लगभग 1100 तलाशियां ली गईं और इसके परिणामस्‍वरूप 513 करोड़ रुपये की नकदी सहित 610 करोड़ रुपये की राशि जब्‍त की गई। उन्‍होंने कहा कि 5400 करोड़ रुपये की अघोषित आय के बारे में पता लगा और समुचित कार्रवाई के लिए लगभग 400 मामले ईडी और सीबीआई को सौंपे गए हैं।

    ‘लेस कैश’ अर्थव्‍यवस्‍था और डिजिटल लेन-देन को बढ़ावा देने के लिए वित्‍त मंत्री ने कहा कि आयकर विभाग ने अनेक कदम उठाए जिनमें 2 लाख रुपये अथवा उससे ज्‍यादा की नकदी की प्राप्ति पर जुर्माना लगाना, धर्मार्थ ट्रस्टों को नकद दान की सीमा को 10,000 रुपये से घटाकर 2,000 रुपये करना और राजनीतिक दलों को 2000 रुपये या इससे अधिक का नकद दान नहीं किया जाना, इत्‍यादि शामिल हैं।

    विमुद्रीकरण के असर और आयकर विभाग के विभिन्‍न सक्रिय कदमों पर प्रकाश डालते हुए वित्‍त मंत्री ने कहा कि प्रत्‍यक्ष करों के मामले में राजस्‍व संग्रह वित्‍त वर्ष 2016-17 के दौरान 14.5 प्रतिशत की वृद्धि के साथ 8,49, 818 करोड़ रुपये के स्‍तर पर पहुंच गया। वित्‍त मंत्री ने यह भी कहा कि चालू वित्‍त वर्ष में 18 सितंबर, 2017 तक प्रत्‍यक्ष करों का शुद्ध संग्रह 15.7 प्रतिशत बढ़कर 3.7 लाख करोड़ रुपये के स्‍तर पर पहुंच गया।

    उन्‍होंने कहा कि करदाताओं की कुल संख्‍या वित्‍त वर्ष 2012-13 के 4.72 करोड़ से काफी बढ़कर वित्‍त वर्ष 2016-17 में 6.26 करोड़ हो गई।

    इससे पहले सीबीडीटी के अध्‍यक्ष श्री सुशील चंद्रा ने समिति के समक्ष आयकर विभाग की पहलों पर एक प्रस्‍तुति दी।

    उपर्युक्‍त बैठक में वित्‍त राज्‍य मंत्री श्री एस.पी.शुक्‍ला, वित्‍त सचिव श्री अशोक लवासा, राजस्‍व सचिव डॉ. हसमुख अधिया, निवेश एवं सार्वजनिक परिसंपत्ति प्रबंधन विभाग में सचिव श्री नीरज कुमार गुप्‍ता, आर्थिक मामलों के विभाग में सचिव श्री एस.सी.गर्ग, मुख्‍य आर्थिक सलाहकार डॉ. अरविंद सुब्रमण्‍यन, सीबीडीटी के अध्‍यक्ष श्री सुशील चंद्रा और वित्‍त मंत्रालय के अन्‍य वरिष्‍ठ अधिकारीगण भी उपस्थित थे।

  • पिता ने सौंपी विरासत तो खैरात नहीं बांट सकतेःगौतम सिंघानिया

    पिता ने सौंपी विरासत तो खैरात नहीं बांट सकतेःगौतम सिंघानिया

    मुंबई(पीआईसीएमपीडॉटकॉम)। देश के स्थापित सूट ब्रांड रेमंड के मालिक गौतम सिंघानिया का जो पक्ष देश के सामने आया है उससे उनके पिता विजयपत सिंघानिया की सनक उजागर हो गई है। वे कंपनी के मालिकाना हक वाले जेके हाऊस को प्रमोटर के हाथों कौड़ियों के मोल बेचना चाह रहे हैं। इस प्रस्ताव के खिलाफ गौतम कानूनी लड़ाई लड़ रहे हैं। मुंबई हाईकोर्ट ने उन्हें ये मामला अदालत से बाहर सुलझाने की सलाह दी है।

    गौतम ने पिता के उस दावे को खारिज किया है जिसमें उन्होंने कहा था कि बेटे के प्यार में आकर उन्होंने गलती से अपने 37.17 प्रतिशत शेयर बेटे को गिफ्ट कर दिए थे। इन शेयरों की कीमत बाजार में लगभग 1000 करोड़ रुपए है।गौतम सिंघानिया ने मीडिया को बताया कि ये शेयर फरवरी 2015 में ट्रांसफर हुए थे। पैंतीस सालों के लंबे प्रयासों के दौरान ये हिस्सा उन्होंने कंपनी के लिए काम करके कमाया था। गौतम अपने पिता के कारोबार में साथ देने वाले अकेले बेटे थे। इसलिए पिता ने उन्हें ये भागीदारी सौंपी। बातचीत में 52 साल के गौतम सिंघानिया ने कहा कि 35 सालों तक लगातार 16 घंटे काम करके उन्होंने कंपनी को संवारा है इसलिए परिवार में पहले ही ये बात तय थी कि पिता की विरासत बेटा संभालेगा। उन्होंने अपना स्टेक बेटे को देकर अपना कर्तव्य निभाया। इसके लिए कोई जोर जबरदस्ती तो थी नहीं। अगर पिता अपना स्टेक किसी और को देते तो कंपनी के 35000 कर्मचारियों का भविष्य बिगड़ सकता था। पिता ने शेयर सौंपे तो इसके बाद मैं या पिता कोई भी मनमाने ढंग से खैरात नहीं बांट सकते, इसके लिए कंपनी के शेयरहोल्डर्स के हितों की रक्षा करना हमारी प्राथमिकता है।

    रेमंड के सीएमडी ने कहा कि 2015 में पिता के हाथों कंपनी का स्टेक मिलने के बाद उन्हें कारोबार में प्रोफेशनलों को शामिल करने, सलाहकार बोर्ड बनाने जैसे कई फैसले लेने में सरलता होने लगी। ढाई साल पहले पिता से शेयर होल्डिंग कंट्रोल लेते ही मेरे लिए खेल बदल गया। ग्रोथ को बढ़ावा देने के लिए मैंने कई फैसले लिए।इसके बाद से कंपनी का शेयर 50 फीसदी तक चढ़ चुका है। इस दौरान बीएसई सेंसेक्स केवल 12 फीसदी बढ़ा है जबकि रेमंड के शेयरों का सुधार इससे कई गुना ज्यादा हुआ।

    पिता की बदहाली पर उन्होंने कहा कि नारियल का पेड़ तूफान में झुक जाता है पर दूसरे दरख्त नहीं झुकते इसलिए टूट जाते हैं। उन्होंने कहा कि रेमंड ने अपने अगले बीस सालों की रणनीति बनाई है। लोग इस ब्रांड को अपने नए अवतार में देख रहे हैं। कंपनी में कार्पोरेट गवर्निंग को बढ़ावा मिला है। राजनीतिक फैसलों के चलते कंपनी के बहुत से कामकाज नहीं हो पाते हैं, पर अब माहौल बदल गया है। उन्होंने कहा कि वे अपने शेयर होल्डर्स को अधिकतम फायदा देने के लिए प्रतिबद्ध हैं।

  • मुझे मेरी बन्डी मिल गईः संत हिरदाराम जी

    मुझे मेरी बन्डी मिल गईः संत हिरदाराम जी

    – सुरेश आवतरामानी –

    परमहंस संत हिरदाराम साहिब जी का 112 वां अवतरण दिवस 21 सितम्बर 2017 को है । इस शुभ अवसर पर अनायास संत जी से जुड़ी एक घटना का स्मरण हो आया है । वर्ष 1999 में आन्ध्र प्रदेश और ओड़ीसा के तटवर्तीय इलाकों में भयानक तूफान और मूसलाधार बारिश हुई थी फलस्वरूप समुद्र ने अपना तट छोड़ दिया था और उसका पानी रिहायशी इलाको में घुस आया था । इस प्रलयंकारी तबाही से बड़ी संख्यां में तटवर्ती इलाको के लोग काल क गाल में समा गये थे । हजारों की संख्या में पशु और पक्षी मर गये थे । चैतरफा विनाशकारी दृश्य फैला हुआ था । केन्द्र और राज्य सरकार अपने स्तर पर तो लोगों की मदद के लिये काम कर रही थीं, लेकिन वे प्रयत्न किंचित अपर्याप्त दिख रहे थे । बहुत सी स्वयंसेवी संस्थाएं भी इस प्राकृतिक आपदा की स्थिति से लोगों को उबारने के लिये प्रयत्नशील थीं ।

    उन दिनों मध्यप्रदेश में डाॅ. भाई महावीर राज्यपाल थे । एक दिन प्रातः महामहिम राज्यपाल ने राजभवन में मुझे बुलाकर परमहंस संत हिरदाराम साहिब जी के दर्शन करने की इच्छा प्रकट की तथा कहा कि कुटिया फोन करके संत जी से भेेंट का समय निर्धारित करवाएं । उन दिनों मैं महामहिम राज्यपाल के प्रेस अधिकारी के पद पर सेवारत था । राज्यपाल की आज्ञा के अनुसार मैंने सिद्ध भाऊ जी को फोन पर राज्यपाल की इच्छा से उन्हें अवगत कराया । सिद्ध भाऊ ने संत जी से आज्ञा लेकर अगले ही दिन प्रातः 9 बजे महामहिम राज्यपाल को कुटिया लेकर आने की बात कही । डाॅ. भाई महावीर और उनकी धर्मपत्नि श्रीमति कृष्णा कुमारी तथा उनके परिजन निर्धारित समय पर कुटिया पहुंचे । प्रोटोकाॅल की दृष्टि से कुटिया में राज्यपाल और उनके परिवार के लिये कुर्सियां लगायी गयी थी । सामने तानो के (स्टूल नुमा) एक छब्बे पर परम्परा अनुसार संत जी का आसन लगाया गया था। लेकिन महामहिम राज्यपाल ने उस समय दाहिनी टांग में साइटिका का असह्य दर्द होने के बावजूद भी संत जी के सामने जमीन पर बैठना पसंद किया । राज्यपाल से आग्रह के बाद भी उन्होनें कुर्सी पर बैठने के लिये विनम्रता पूर्वक इन्कार कर दिया । संत जी उस समय एक फटी हुई बंडी पहने हुए थे तथा नीचे एक अंगोछा बांधे हुए थे । महामहिम राज्यपाल के लिये यह एक आश्चर्यजनक प्रसंग था कि इतने बड़े सिद्ध पुरूष के तन पर कपड़े तक फटे हुए हैं । डाॅ. भाई महावीर ने संत जी से आग्रह किया कि वे उन्हें एक नई बंडी सिलवाकर देना चाहते हैं । राज्यपाल से यह सुनने पर संत जी थोड़ा मुस्कराए और कहा कि वे उनकी बंडी स्वीकार करेंगें पर उसके पहले उनकी एक शर्त है । संत हिरदाराम जी ने राज्यपाल से कहा कि ओड़ीसा और आन्ध्रप्रदेश के तटवर्ती इलाकों में प्रलयंकारी बाढ़ से हजारों की संख्या में लोग काल कवलित हो गये हैं । जो दुधमुहें बच्चे बच गये हैं, उनको पीने के लिये दूध तक भी उपलब्ध नहीं है । यूनीसेफ ने मिल्क पाउडर अहमदाबाद हवाई अड्डे पर पहुंचा दिया है लेकिन सामान का परिवहन करने वाला विमान तत्काल उपलब्ध न होने के कारण वह दूध भी भुवनेश्वर नहीं पहुंच पा रहा है । इसी प्रकार विवेकानन्द केन्द्र की दिल्ली शाखा के स्वयं सेवकों ने बड़ी संख्या में तम्बू और अन्य राहत सामग्री दिल्ली स्टेशन तक पहुंचा दी है। लेकिन दिल्ली स्टेशन पर खाली मालगाड़ी का प्रबंध न होने के कारण उस सामग्री का परिवहन भी नहीं हो पा रहा है । संत जी ने डाॅ. भाई महावीर को कहा कि यथासमय यह सामग्री यदि जरूरतमंदों को उपलब्ध नहीं होगी तो उन्हें किसी प्रकार की राहत नहीं मिल सकेगी । संत जी ने राज्यपाल से यह अपेक्षा की कि वे शासन और प्रशासन के शीर्ष स्तर पर अपने अच्छे संबंधों का उपयोग करते हुए अहमदाबाद विमान तल पर माल ढुलाई विमान और दिल्ली रेल्वे स्टेशन पर एक खाली माल गाड़ी का प्रबंध करवायें ।

    संत जी के दर्शन के बाद राज्यपाल, राजभवन वापस लौट आये और उन्होंने अविलम्ब तत्कालीन रेल मंत्री और नागरिक उड्डयन मंत्री से फोन पर बात की । दोपहर में अनकरीब 3 बजे सिद्ध भाऊ जी का गर्वनर साहब को एक फोन मिला, जिसमें सिद्ध भाऊ जी ने डाॅ. भाई महावीर को संत जी का संदेश दिया । भाऊ जी ने राज्यपाल को बताया कि संत जी ने कहा है कि उन्हें राज्यपाल की बन्डी मिल गयी है । वस्तुतः राज्यपाल द्वारा केन्द्रीय मंत्रियों से टेलीफोन पर बात करने के तुरंत बाद अहमदाबाद में एक कारगो विमान तथा दिल्ली स्टेशन पर एक खाली गाड़ी उपलब्ध करा दी गई थी और उनमें राहत सामग्री और मिल्क पाउडर आदि का लदान भी शुरू हो गया था । डाॅ. भाई महावीर को संत जी का यह विस्मयकारी संदेश मिलने पर वे अवाक रह गये । कुछ देर बाद उन्होंने कहा कि करने वाले तो स्वयं संत जी ही थे, इस प्रसंग में व्यर्थ में ही उनका नाम हो रहा है । डाॅ. भाई महावीर ने कहा कि आज के युग मे भी हमारे समाज में ऐसे महापुरूष विद्यमान हैं जिनके बल पर यह संसार चल रहा है ।

    संत की सीख

    यह बात वर्ष 2002 की है। उन दिनों डाॅ. भाई महावीर मध्यप्रदेश के राज्यपाल थे। वे महीने में कम से कम एक बार परमहंस संत हिरदाराम साहिब जी के दर्शन के लिए बैरागढ़ स्थित कुटिया में आया करते थे। डाॅ. भाई महावीर का राज्यपाल पद का कार्यकाल लगभग समाप्त होने वाला था। यह बात उन्होंने परमहंस संत हिरदाराम साहिब जी को बताई। इस पर संत जी ने तत्कालीन राज्यपाल को कहा कि इससे क्या फर्क पड़ता है कि आप गवर्नर रहें या न रहें, सेवा और सिमरन तो कहीं भी किया जा सकता है। इस बात पर डाॅ. भाई महावीर ने संत हिरदाराम जी को बताया कि वे राज्यपाल बनने के पहले दिल्ली के डी.ए.वी. स्कूल के प्राचार्य थे और उन्होंने अपना लगभग पूरा जीवन अध्यापन कार्य में बिताया है। इस पर संत हिरदाराम साहिब जी ने उन्हें कहा कि विद्यादान बहुत बड़ा काम है। राज्यपाल पद से निवृत्त के बाद भी आप पुनः विद्यादान के क्षेत्र में सेवा कर सकते हैं।

    इस पर डाॅ. भाई महावीर ने परमहंस संत हिरदाराम साहिब जी को बताया कि उनके स्वर्गीय पिता भाई परमानन्द स्वतंत्रता संग्राम सेनानी थे। अंग्रेजों ने उन्हें क्रान्तिकारी गतिविधियों में लिप्त होने के कारण फांसी की सजा सुनाई थी लेकिन महात्मा गांधी और एनी बीसेन्ट के प्रयासों से बाद में अंग्रेजों ने उनकी सजा फांसी से बदलकर काले पानी में बदल दी थी। अंडमान निकोबार स्थित सेल्युलर जेल में आज भी भाई परमानन्द के कारावास काल के स्मृति अवषेष रखे हुए हैं। डाॅ. भाई महावीर ने संत हिरदाराम साहिब को बताया कि वे गुरू तेग बहादुर के समकालीन भाई मतिदास और भाई जतिदास के तेरहवें वंशज हैं। औरंगजेब द्वारा हिन्दुओं के सामुहिक धर्मान्तरण के लिए चलाई गई मुहिम में औरंगजेब ने दिल्ली के शीशगंज गुरूद्वारे के पास भाई मतिदास और भाई जतिदास को आरे से चिर वाकर मरवा डाला था।

    संत हिरदाराम साहिब जी डाॅ. भाई महावीर के इतने बड़े बलिदानी कुनबे के वंशज होने के संबंध में जानकारी मिलने पर वे एकदम मौन हो गए। परमहंस संत हिरदाराम साहिब जी को गुरू वाणी में अगाध श्रद्धा थी। दसों गुरूओं की श्रंखला में गुरू तेग बहादुर के समकालीन सहयोगी होने की बात सुनकर संत हिरदाराम साहिब जी अभीभूत हो गए और काफी देर तक आँखें मूंद कर गुरूओं का स्मरण करने लगे। डाॅ. भाई महावीर ने संत हिरदाराम साहिब जी को यह भी बताया कि वे दिल्ली में कड़कड़डूमा क्षेत्र में अपने स्वर्गीय पिता देवता तुल्य भाई परमानन्द की स्मृति में एक विद्यालय खोलना चाहते हैं। सरकार ने उन्हें इस प्रयोजन के लिए लगभग पौने दो एकड़ जमीन भी दे दी है। इस जमीन पर विद्यालय भवन निर्माण के लिए तत्कालीन प्रधानमंत्री श्री अटलबिहारी वाजपेयी ने षिलान्यास भी कर दिया है लेकिन धनाभाव के कारण वे उस विद्यालय भवन का निर्माण नहीं करवा पा रहे हैं। डाॅ. भाई महावीर के मुंह से यह बात सुनते ही संत हिरदाराम साहिब जी ने कहा कि किसी शुभ काम में धन की कमी आड़े नहीं आनी चाहिए। तब डाॅ. भाई महावीर ने उन्हें कहा कि वैसे तो विद्यालय का पूरा प्रोजेक्ट लगभग चार करोड़ रूपए का है, लेकिन उसके प्रथम चरण में कक्षा एक से बारहवीं तक की कक्षाओं का निर्माण करवाने पर लगभग एक करोड़ रूपए खर्च होगा। संत हिरदाराम साहिब जी ने यह सुनते ही श्रद्धेय सिद्ध भाऊ जी की तरफ देखते हुए उन्हें कहा कि वे विदेषों में अप्रवासी भारतीयों को डाॅ. भाई महावीर की पारिवारिक पृष्ठभूमि तथा समाज और देश के लिए उनके योगदान का उल्लेख करते हुए जानकारी भेजें तथा विद्यालय भवन निर्माण करवाने के लिए अपेक्षित धन का प्रबंध करने के प्रयास करें। संत जी द्वारा इतना भर कह देने के बाद उनके सेवाभावी शिष्य सक्रिय हो गए और बहुत थोड़े दिनों में विद्यालय भवन के प्रथम चरण के लिए अपेक्षित धनराशि का संग्रहण हो गया और बहुत ही जल्दी दिल्ली के कड़कड़डूमा क्षेत्र में यह विद्यालय भवन बनकर तैयार भी हो गया। इस बीच डाॅ. भाई महावीर मध्यप्रदेष के राज्यपाल पद से भी निवृत्त हो गए थे।

    कुछ महीनों बाद डाॅ. भाई महावीर पुनः परमहंस संत हिरदाराम साहिब जी के दर्शन के लिए कुटिया पधारे। संत जी ने डाॅ. भाई महावीर से कहा कि वे विद्यार्थियों की प्रातःकालीन प्रार्थना सभा में स्वयं उपस्थित रहा करें तथा उन्हें प्रतिदिन शाला आने के पहले अपने माता-पिता के चरणस्पर्श करके विद्यालय आने की सीख देवें। डाॅ. भाई महावीर ने बाद में ऐसा ही किया। वे प्रतिदिन अपने दिल्ली स्थित निवास न्यू राजेन्द्र नगर से कड़कड़डूमा स्थित स्कूल जाने लगे और प्रार्थना सभा में बालकों को अपने माता-पिता के चरणस्पर्ष करने के बाद स्कूल आने की सीख देने लगे। इस विद्यालय के बालकों ने जब ऐसा करने शुरु किया तो दिल्ली के उस मध्यम वर्गीय परिवारों के इलाके के अभिभावकोें ने अपने बच्चों के इस व्यवहार को महानगरीय संस्कृति और जीवन शैली से विपरीत कुछ बदला हुआ पाया। मध्यम वर्गीय परिवार के ये अभिभावक समझने लगे कि इस विद्यालय में आधुनिक शिक्षा के साथ ही उदात्त भारतीय जीवन मूल्यों की षिक्षा भी दी जा रही है। विद्यार्थियों के इस बदले हुए सकारात्मक आचरण से उनके माता-पिता बहुत प्रभावित होने लगे और बहुत ही जल्दी यह विद्यालय आस-पड़ोस के अन्य क्षेत्रों में काफी लोकप्रिय हो गया। उसका नतीजा यह निकला कि इस विद्यालय ने एक वर्ष के अन्दर ही अपनी पूर्ण क्षमता दो हजार विद्यार्थियों के प्रवेश की पूरी कर ली ।

    परमहंस संत हिरदाराम जी द्वारा अपने जीवनकाल में बैरागढ, भोपाल में शुरु किए गए मिठी गोविन्दराम स्कूल के बालकों को भी प्रतिदिन अपने माता-पिता के चरणस्पर्श करने के बाद विद्यालय आने की सीख दी जाती है। कुछ दिनों के बाद संत हिरदाराम साहिब जी ने डाॅ. भाई महावीर से जानकारी चाही कि क्या उन्हें विद्यालय संचालन के लिए और अधिक धन की आवश्यकता है? इस पर उन्होंने संत जी के सम्मुख हाथ जोड़ लिए और कहा कि आपके द्वारा दी गई सीख पर अमल करने का यह परिणाम निकला है कि अब हमारे स्कूल में प्रवेश के बहुत सारे इच्छुक विद्यार्थियों को वापस लौटाने की नौबत आने लगी है। उन्होंने बताया कि यह स्कूल अपनी क्षमता से भी अधिक भर गया है और अब स्कूल प्रबंधन को धन की कोई कमी नहीं है। स्कूल की भावी योजनाएं वे स्कूल द्वारा ही अर्जित राशि से कार्यान्वित कर सकते हैं। डाॅ. भाई महावीर ने कहा कि संतों की सीख सदा सुखकारी और कल्याणकारी होती है। (आलेख-सुरेश आवतरामानी)

    पक्षियों को दाना-पानी

    दान करने से धन बढ़ता है परंतु दान भी पात्र व्यक्ति के पास जाए तो उसका लाभ है, अपात्र व्यक्ति को दिया हुआ दान भी निरर्थक है। वनों की कटाई तथा सरोवरों के सूख जाने के कारण पक्षियों की अनेक प्रजातियां विलुप्त होने की कगार पर हैं। पशु-पक्षी भूख, प्यास और उष्मा के दुष्प्रभाव से मर रहे हैं। प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से हो रही जीव हत्या के लिए मनुष्य ही जिम्मेदार है। पक्षी अपना पूरा जीवन जी सकें इसके लिए मनुष्य को ही पहल करनी होगी। प्रत्येक परिवार में यदि बच्चे प्रतिदिन घर की छत पर एक सकोरा पानी तथा थोड़ा अन्न रखें तो उनके अंतर्मन से निकलने वाले आषीर्वाद उन बच्चों के जीवन को ही बदलने का सामथ्र्य रखते हैं। जैसे मूल्यहीन वस्तु अनुपयोगी मानी जाती है वैसे मूल्यहीन जीवन का भी कोई उद्देश्य नहीं होता। जो बच्चे बचपन से पक्षियों को दाना-पानी देते हैं उनके बाल हृदय में करूणा के भाव उत्पन्न होते हैं। आज कल प्रायः यह दिखता है कि संवेदनशीलता की कमी के कारण लोग सड़क पर पड़े घायल व्यक्ति की मदद के बजाय मुंह मोड़ कर चले जाते हैं। जिस हृदय में दर्द नहीं है वह किसी आत्मीय जन की पीड़ा हरने में भी कितना काम आएगा।
    जीवन जीने का अधिकार मनुष्यों के साथ ही पषु-पक्षियों को भी है। मनुष्य तो अपने इस अधिकार की रक्षा पशु-पक्षियों का जीवन लेकर भी करता है। परन्तु ये मूक जीव अपने जीवन की रक्षा भी नहीं कर पाते। ऐसे में हमारे परिवारों के सुसंस्कृत बच्चे यदि पक्षियों के संरक्षण का बीड़ा उठा लें तो वे न केवल एक प्रजाति को विलुप्त होने से बचा लेंगे बल्कि अपना लोक-परलोक भी सवार लेंगे। हमारी पुरातन परम्पराओं में यह सिखाया गया है कि ‘‘पर हित सरस धरम नहीं भाई‘‘ अथवा ‘‘सर्वे भवन्तु सुखिनः‘‘। इन उदात्त जीवन मूल्यों और संस्कारों से ही न केवल मानव मात्र बल्कि इस ब्रह्माण्ड के जैविक संसार का भी हित निहित है। दान को गुप्त रखने की बात कही गई है। गुप्त दान का प्रभाव मनुष्य के जीवन को सुखमय करने का सामर्थ्य रखता है। पक्षी मूक होते हैं, उनकी क्षुद्धा को तृप्त करने के लिए किया गया दान भी गुप्त ही रहता है। पक्षियों को किया गया दान भी मनुष्य के जीवन में सकारात्मक बदलाव ला सकता है।

  • फसलों का रिकार्ड रखो तो ज्यादा मिलेगा बीमा दावा

    पाँच वर्ष की औसत उत्पादकता और वास्तविक फसल उत्पादकता के अंतर पर बनता है बीमा दावा

    भोपाल 20 सितंबर(सुरेश गुप्ता)।

    प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के अंतर्गत देश में सर्वाधिक 42 हजार किसानों को मध्यप्रदेश में बीमित किया गया है। इस योजना के अंतर्गत खरीफ 2016 के बीमित दावों का भुगतान किया गया है। खरीफ 2016 में सीहोर जिले के 43 हजार 850 कृषकों को 55 करोड़ 50 लाख की दावा राशि स्वीकृत हुई है। देखा जाय तो जिले के एक किसान के मान से 12 हजार 657 रुपये बीमा दावे का औसत आता है। लेकिन पटवारी हल्का अनुसार क्षतिस्तर भिन्न-भिन्न होने से कहीं अधिक और कहीं कम बीमा राशि का भुगतान हुआ।

    प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना पिछले 5 वर्षों की औसत उत्पादकता (जो फसल कटाई प्रयोग से निकाली जाती है) में वास्तविक फसल उत्पादकता के अंतर पर बीमा दावा बनाया जाता है।

    उदाहरण के लिये सीहोर जिले की रेहटी तहसील के पटवारी हल्का 44 में वास्तविक उपज तथा थ्रेश होल्ड उपज में फसल कटाई प्रयोगों में कमी मात्र 2 किलोग्राम प्रति हैक्टेयर रही। इस वजह से बीमा दावा राशि अत्यन्त कम रही। दूसरी ओर जिन पटवारी हल्के में फसल कटाई प्रयोगों में थ्रेश होल्ड तथा वास्तविक फसल कटाई में अधिक अंतर रहा, वहाँ ज्यादा फसल बीमा राशि बनी।

    उदाहरण के लिये इसी तहसील के पटवारी हल्का 42 में थ्रेश होल्ड उपज से वास्तविक उपज में अंतर फसल कटाई प्रयोगों में 319 किलोग्राम प्रति हैक्टेयर रहा। इस कारण से इस पटवारी हल्के के ग्रामों में किसानों को फसल बीमा राशि अधिक मिली।

    सीहोर जिले में कृषकों को सोयाबीन फसल में अधिक नुकसान होने से अधिक राशि प्राप्त हुई है जैसे – कृषक श्री दशरथ सिंह पटवारी हल्का नं. 41 ग्राम अवंतिपुरा को बीमा दावा राशि 1,81,345 रुपये प्राप्त हुए हैं। इसी प्रकार कृषक श्री मनोहर सिंह पटवारी हल्का नं. 42 ग्राम महोड़िया को राशि 1,21,949 रुपये, कृषक श्री अशोक कुमार गुप्ता पटवारी हल्का नं. 42 ग्राम महोडिया को 1,40,752 रुपये, कृषक सिद्धनाथ सिंह पटवारी हल्का नं. 47 ग्राम संग्रामपुर को 97 हजार 480 रुपये, कृषक श्री भरतसिंह गेहलोत पटवारी हल्का नं. 52 ग्राम संग्रामपुर को 94 हजार 697 रुपये, कृषक श्री शेरसिंह पटवारी हल्का नं. 35 ग्राम तकीपुर को 85 हजार 732 रुपये, कृषक श्री पर्वतसिंह पटवारी हल्का नं. 64 ग्राम धबोटी को 76 हजार 636 रुपये, कृषक श्री नरसिंह पटवारी हल्का नं. 68 ग्राम बड़नगर को 84 हजार 882 रुपये और कृषक श्री हरिचरण पटवारी हल्का नं. 07 ग्राम सेमरादांगी को 66 हजार 539 रुपये प्राप्त हुए हैं।

    इस प्रकार यह स्पष्ट है कि प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के प्रावधानों के अनुसार पिछले 5 सालों में फसल कटाई प्रयोगों के मान से वास्तविक उपज के अंतर के अनुसार बीमा राशि का भुगतान होता है। कटाई अंतर कम होने पर बीमा राशि कम प्राप्त होती है और वास्तविक उपज का अंतर ज्यादा होता है तो दावा राशि ज्यादा प्राप्त होती है। यह भी कि प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना क्षेत्र आधारित है। किसानवार योजना नहीं है।

    किसान इस माह के अन्त तक फसल का बीमा करवायें

    भोपाल, 23 सितम्बर(पीआईसीएमपीडॉटकॉम)।

    प्राकृतिक आपदा से किसानों को होने वाले नुकसान की भरपाई के लिये केन्द्र सरकार ने प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना प्रारम्भ की है। इसमें किसानों को कम प्रीमियम देना पड़ता है। बीमा कंपनियों को रबी फसलों के प्रीमियम रेट का सिर्फ डेढ़ फीसदी एवं खरीफ फसल का 02 प्रतिशत किसान देंगे। बागवानी फसलों के मामले में किसानों को 05 प्रतिशत प्रीमियम देना होगा। बाकी प्रीमियम केन्द्र और राज्य की सरकारें देंगी। यह योजना 2016 से लागू की गई है। जिले के कृषकों से जिला प्रशासन द्वारा अपील की गई है कि अऋणी कृषक 30 सितम्बर तक निकट के बैंक से सम्पर्क कर अथवा जिला सहकारी केन्द्रीय बैंक से सम्पर्क कर अपनी रबी फसल का बीमा करवा सकते हैं।

    ऋणी किसान हेतु स्वीकृत ऋण राशि एवं अऋणी किसान के प्रस्ताव बैंक में जमा कराने की तिथि 15 सितम्बर 2017 से 15 जनवरी 2018 निर्धारित है। बैंकों से बीमा कंपनी को घोषणा-पत्र भेजने की अन्तिम तिथि 28 फरवरी 2018 है। किसानों के खातों से काटे गये प्रीमियम को बीमा कंपनी को जमा करने की अन्तिम तिथि ऋणी कृषकों के लिये 15 फरवरी 2018 एवं अऋणी कृषकों के लिये 22 जनवरी 2018 है। बीमा योजना के तहत पैदावार के आंकड़े निर्धारित करने की अन्तिम तिथि 30 जून 2018 निर्धारित की गई है।

    प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के अन्तर्गत सभी प्रकार की फसलों रबी, खरीफ, वाणिज्यिक और बागवानी को शामिल किया गया है। उपज नुकसान के आधार पर इस योजना में बिजली गिरने, तूफान, ओला पड़ने, चक्रवात, अंधड़, बवंडर, बाढ़, जलभराव, जमीन धंसने, सूखा, खराब मौसम, कीट एवं फसल को होने वाली बीमारियां आदि जोखिम से फसल को होने वाले नुकसान को शामिल कर एक ऐसा बीमा कवर दिया जाता है, जिसमें इनसे होने वाले सारे नुकसान से सुरक्षा प्रदान की जाती है।

  • बौद्धिक संपदा अधिकार की अनुमति से विकिरण रहित संचार क्रांति संभवःसंजर

    बौद्धिक संपदा अधिकार की अनुमति से विकिरण रहित संचार क्रांति संभवःसंजर

    भोपाल(पीआईसीएमपीडॉटकॉम)। सांसद आलोक संजर का कहना है कि बौद्धिक संपदा अधिकार प्राप्त होने के बाद होने वाले अनुसंधानों से क्वाण्टम गणित की गणनाएं ज्यादा सुग्राही तरीके से की जा सकती हैं। आज की संचार क्रांति में इसका एक उपयोग नई पीढ़ी का जीवन सरल बना देगा।इस नई तकनीक से विकसित उपकरणों से विकिरण भी नहीं फैलेगा और हमारे संचार उपकरण ज्यादा सटीकता से कार्य कर सकेंगे। इस अकेली तकनीक का पेटेंट हमारे पास होने से देश को भारी विदेशी मुद्रा भी प्राप्त होगी। भारत सरकार इस विषय पर गंभीर चिंतन कर रही है। निकट भविष्य में सरकार के ये प्रयास भारत को विश्व गुरु बनाने में सहयोगी साबित होंगे।

    आज क्वाण्टम गणित के क्षेत्र में बौद्धिक संपदा अधिकार की लड़ाई लड़ने के लिए भोपाल में एक कार्यशाला का आयोजन किया गया। जिसमें वक्ताओं ने विश्व व्यापार संगठन के नियमों का लाभ उठाने के लिए गणित कापीराईट सोसाईटी को पंजीकृत करने की आवश्यकता बताई। समिति अधिनियम की धारा 33 और नियम 12 के अंतर्गत इस तरह की समिति को पंजीकृत करवाने की पहल भारत सरकार को करनी है।

    सांसद आलोक संजर ने कहा कि मैं इस मुद्दे को दो बार संसद में भी उठा चुका हूं। भारत सरकार गणितीय समिति के पंजीयन की दिशा में गंभीरता से विचार कर रही है। भविष्य की गणनाओं पर भारत के अधिकार को सुनिश्चित करने के लिए उन्होंने विश्व प्रसिद्ध गणितज्ञ श्याम सिंह ठाकुर को शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि श्री ठाकुर भारत की धरोहर हैं। कुछ साल पहले उन्होंने वाईटूके समस्या को हल करके दुनिया में अपनी बौद्धिक दक्षता का डंका बजाया था। उन्होने भगवान विश्वकर्मा जयंती पर श्री ठाकुर को उनके अनुसंधान कार्यों के लिए सफलता की शुभकामनाएं भी दीं। श्री संजर ने कहा कि जिस तरह प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी देश को नई दिशा में ले जाने लिए अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन कर रहे हैं उसी तरह श्री ठाकुर भी अपने मकसद में अवश्य सफल होंगे।
    अक्षर प्रभात ट्रस्ट के प्रतिनिधि राम निवास गोलस ने बौद्धिक संपदा अधिकार के लिए गणितीय सोसाईटी की अनिवार्यता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि भारत सरकार ने 1995 में बौद्धिक संपदा अधिकार अनुबंध पर हस्ताक्षर किए थे। इसे 2005 में लागू भी कर दिया गया। इसके बाद12 मई 2016 को सरकार ने बौद्धिक संपदा अधिकार नीति घोषित भी कर दी। इसके अगले चरण के रूप में अनुबंध कापीराईट आदेश 1999 के अनुच्छेद 9.2और 10 को लागू किया जाना था। ये अभी तक लागू नहीं किया गया है। इससे आईपीआर नीति पर अमल नहीं हो पा रहा है और भारत को विश्व के सर्वोत्तम विश्वविद्यालय का दर्जा नहीं मिल पा रहा है।

    भारत की सरकारों की अनदेखी के चलते दुनिया के कई देश इसे मनमाने ढंग से लागू कर रहे हैं। नासा और यूरोप की स्पेस एजेंसियों ने इसे थ्योरी आफ एवरीथिंग नाम से लागू किया है। नेशनल जियोग्राफी के अक्टूबर 1999 के अंक में पेज क्रमांक 25 से 30 तक मेपिंग द यूनिवर्स शीर्षक से एक लेख प्रकाशित किया गया है जिसमें बताया गया है कि जापान के टोकियो विश्वविद्यालय ने अर्थमेट्री ज्योमेट्री के नाम से इसे 16 से 20 फरवरी 2004 को शिक्षा में लागू भी कर दिया है। जबकि इसे लागू करने से पहले दुनिया के तमाम देशों को भारत की गणितीय सोसाईटी से अनुमति लेना आवश्यक है।

    उन्होंने कहा कि भारत के कंप्यूटर इंजीनियरों को प्रोफेशनल घोषित करने के लिए भारत सरकार को क्वाण्टम गणित रेगुलेटरी अथार्टी बनाना होगी। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति ने भारत के उच्च शिक्षा संस्थानों में टी-4 आदेश लागू किया है। इसके बाद प्रोफेसर बनने के लिए आईपीआर का पेटेंट अनिवार्य हो गया है। तकनीकी रूप से दक्ष प्रोफेसर उपलब्ध न होने के कारण संस्थानों में प्रोफेसरों की नियुक्तियां नहीं हो पा रही है और वे पद खाली पड़े हैं।

    श्री गोलस ने कहा कि विश्व का एकमात्र बौद्धिक संपदा अधिकार प्राप्त करने वाले डॉ.श्याम सिंह ठाकुर पिछले 15 सालों से भारत सरकार से पत्र व्यवहार कर रहे हैं। सरकार में बैठे तकनीकी विशेषज्ञ इसकी गंभीरता को नहीं समझ पा रहे हैं। चीन ने क्वाण्टम गणित के सहारे विश्व का सर्वोत्तम कंप्यूटर बना लिया है। सरकार पहल करे तो कापीराईट क्रमांक एल। 18402 । 99 दिनांक 24.06.1999 के अनुच्छेद 9.2 और 10 को लागू करके भारत भी तकनीकी के आकाश में ऊंची छलांग लगा सकता है।

    श्री गोलस ने कहा कि पेटेंट न होने के कारण भारत बेरोजगारी के दौर से गुजर रहा है। जबकि भारत का नाम इंडिया करने वालों ने विश्व की निगाह में भारत की साख खंडित कर दी है। उन्होंने कहा कि इंडिया का अर्थ बिकने वाला गुलाम होता है। जबकि बौद्धिक संपदा अधिकार को लागू करके भारत में औद्योगिक निवेश की राह सरल हो जाएगी।

    इस अवसर पर दिव्य विश्वेश्वर पंचांग के संपादक पं. बृजेन्द्र कुमार तिवारी ने कहा कि भारत में तकनीकी एकरूपता न होने के कारण अनेकानेक प्रकार के पंचांग प्रकाशित हो रहे हैं। जिनकी गणनाओं में काफी अंतर है। क्वाण्टम तकनीक पर आधारित समिति के गठन के बाद पंचांग बनाने वालों की गणनाएं ज्यादा सटीक और एकरूप हो जाएंगी। जटिल ज्योतिषीय गणनाओं का सटीक आकलन होने के कारण भारत की तकनीक और व्यापार सभी सफल बनाए जा सकेंगे। उन्होंने विशेषज्ञों से सरकार को इस दिशा में कार्य करने की सलाह देने का आव्हान किया।

    बौद्धिक संपदा अधिकार के क्षेत्र में अनुसंधान कर रहीं श्रीमती ऋचा गोलस ने भी इस अवसर पर अपने विचार प्रस्तुत किए। आयोजनकर्ता श्री रामगोपाल बंसल, और प्रदेश के कई जाने माने बुद्धिजीवियों ने इस अवसर पर अपनी जिज्ञासाओं का शमन किया। अक्षर प्रभात ट्रस्ट की ओर से श्री रामनिवास गोलस ने सभी अतिथियों का आभार माना।

  • नरेन्द्र मोदी के साथ महाशक्ति की राह पर भारत

    नरेन्द्र मोदी के साथ महाशक्ति की राह पर भारत


    - भरतचन्द्र नायक
    वीरता और पराक्रम में सदैव से भारत अजेय रहा है। उसकी समृद्धि ने सभी को ललचाया और बाह्य आक्रमण का दंश झेला, लेकिन समय की रफ्तार के साथ कदम से कदम मिलाने में जो चूक हुई उसका खामियाजा भी भुगतना पड़ा। जब आक्रमण का प्रचलन हो चुका था और दुश्मन ने तोप बंदूक से लेस होकर आक्रमण किया हम अपना शौर्य भाला तलवार लेकर दिखा रहे थे। आजादी के बाद विकास की ओर ध्यान गया। कदम संभले पं. नेहरू ने बांध जलाशयों, कारखानों को तीर्थधाम बनाया। इंदिरा जी ने परमाणु शक्ति संपन्नता की ओर ध्यान दिया। राजीव गांधी ने देश में कंप्यूटरीकरण का मार्ग प्रशस्त करने का श्रेय दिया गया। अटलजी ने प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना से गांवों तक विकास की रोशनी पहुंचाई। मोदी जी ने देश को बुलेट पर सवार कर दिया। लोकतंत्र में सत्ता पक्ष की नीतियों कार्यक्रमों का विरोध अनिवार्य है और ऐसा हुआ, लेकिन 2014 में जब सोलहवीं लोकसभा के चुनाव की रणपेटी बजी और गुजरात के सफल मुख्यमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने भारतीय जनता पार्टी के चुनाव प्रचार की कमान संभाली उनकी प्रखर आलोचना उनके लिए स्वीकार्यता विस्तार में सहायक सिद्ध हुई। मोदी ने पूर्ववर्ती सरकार के भ्रष्टाचार से मुक्ति, महंगाई पर लगाम, सुरक्षा परिदृश्य में सुखद बदलाव का भरोसे और अच्छे दिन आने का सपने को देश की जनता ने मोदी जी के नेतृत्व में उनकी कटु आलोचना के बावजूद भारतीय जनता पार्टी के नाम प्रचंड बहुमत के साथ जनादेश दे दिया। मजे की बात यह रही कि जब नरेंद्र मेादी को जनता एक दूर दृष्ठा, कल्पनाशील और कुशल प्रशासक के रूप में देख रही थी। राजनैतिक दल उन्हें मौत का सौदागर बता रहा था। जनता महसूस कर चुकी थी कि विरोध राजनैतिक है। वास्तविकता यह थी कि गुजरात ने मोदी के नेतृत्व में नई करवट ली थी। गुजरात विकास के हर मापदंड पर कसे जाने के बाद देश में अब्बल, प्रगतिशील अमन चैन के मामले अब्बल राज्य था, जो राजनैतिक दल मोदी पर असहिष्णुता का इल्जाम लगा रहे थे उनके द्वारा शासित राज्यों से गुजरात के अल्पसंख्यक तरक्की की ऊंची सीढ़ियां चढ़ चुके थे। जनता देख चुकी थी कि नरेंद्र मोदी समस्या नहीं समाधान पुरूष है।

    प्रधानमंत्री के रूप में नरेंद्र मोदी अपने कार्यकाल के तीन वर्ष पूर्ण कर चुके हैं और उन्होंने मंत्रालयवार अपना रिपोर्ट कार्ड जनता को सौंप दिया है। कुछ स्थानेां को अपवाद स्वरूप छोड़कर जहाॅ विधानसभा चुनाव अथवा लोकसभा उपचुनाव हुए जनता ने तमाम मुसीबतें सहते हुए मोदी के नेतृत्व में भारतीय जनता पार्टी और भाजपानीत एनडीए कोसमर्थन देकर विजय रथ आगे बढ़ाया है। नरेंद्र मोदी सरकार ने कड़े, कष्टप्रद फैसले लेने में कभी गुरेज नहीं किया जिनका पुरजोर विरोध भी हुआ लेकिन देश की अपढ़ कही जाने वाली जनता ने मुसीबते झेलते हुए माना कि मोदी की दिशा और दशा सही है। नीयत में खोट नहीं है। विपक्ष के सामने सबसे बड़ी हैरानी परेशानी की बात यह रही कि वह बीते तीन वर्षों में एनडीए सरकार पर गड़बड़, घोटाला, भ्रष्टाचार का एक भी इल्जाम नहीं लगा पाई। जब 8 नवम्बर 2016 को एकाएक नोटबंदी का ऐलान हुआ गैरभाजपा दल हक्के-बक्के रह गये। उनका सीधा सपाट आरोप था कि बिना जनता को भरोसे में लिए इतना बड़ा फैसला क्यों ले लिया कि करेंसी कम पड़ गई। बैंकों से खाताधारियों को अपनी रकम निकालने पर पाबंदी लग गई। बैंकों के सामने बंद करेंसी बदलने के लिये गरीबों, अमीरों की लाइने लग गई। नोटंबंदी को कालेधन और उसके सृजन पर प्रहार बताया गया रोजी-रोटी छोड़ कर मजदूर भी बैंक के दरवाजे पर वहीं खड़ा था जहां धन्ना सेठ वारी का इन्तजार कर रहे थे। विपक्ष को मुंहमांगा मुद्दा मिल गया। लेकिन आम आदमी ने माना कि इससे कालेधन की समानान्तर चलने वाली व्यवस्था ध्वस्त हो गई जनता ने विरोध के स्वरों को अनसुना ही नहीं किया उत्तरप्रदेश जेसे राज्य में भारतीय जनता पार्टी को नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में विजय से नवाजा और नोटबंदी के प्रबल विरोधियों को हाशिये पर धकेल दिया। नीति नीयत ने मोदी का हर बार साथ दिया। आलोचना मोदी को संजीवनी साबित हुई। नोटबंदी के पश्चात् उपलब्धि की जो गुलाबी तसवीर रिजर्व बैंक ने सार्वजनिक की है वह साबित करती है कि आजदी के पश्चात् देश के आर्थिक क्षेत्र में नोटबंदी सबसे बड़ा कं्रातिकारी सुधार है जिसने धनपतियों की तसवीर बैंक के राडार पर ला दी है। अब न तो बेनामी सौंदे हो पा रहे हैं और न कालाधन खपाने की गली शेष बची है। बैंकों में नकदी का अंबार लगा है। कर्ज वितरण आसान हुआ है। टेक्स का वेस बड़ा है और सरकार के खजाने में आने वाले टेक्स में बहुगुवित वृद्धि हुई है।

    सुरक्षा परिदृश्य में आये बदलाव से दुनिया चकित है। पड़ौसी देश पाकिस्तान और चीन भ्रमित है। सर्जिकल स्ट्राईक ने दुनिया को बता दिया है कि भारत अब साफ्ट इस्टेट नहीं रहा है। इसकी डोकलाम प्रकरण में भारत की दृढ़ता ने मोहर लगा दी है। चीन को डोकलाम मामले में उल्टे पैर लौटना पड़ा है। इसने भारत की प्रतिष्ठा में चारचांद लगा दिये हैं। चीन के पुसैल पाकिस्तान को भारत की सीमा में आतंकवाद फैलाने के लिए उकसाने वाले चीन को ही ब्रिक्स की बैठक में पाकिस्तान की भत्र्सना करने को नरेंद्र मोदी ने विवश कर दिया। यह पहला मौका था जब मोदी ने चीन की धरती पर चीन केा मात दे दी। विश्व शक्तियां दांत तले अंगुली दबाने को विवश हुई। लेकिन इसे कांग्रेस की नादानी ही कहेंगे कि जब चीन भारत के बीच तनाव चरम पर था राहुल गांध्ीा चीन के दूतावास पहुंच गये और खुद संदेह के घेरे में आ गये। देश विदेश खासकर अमेरिका ने भारत में जीएसटी की जी भरकर प्रशंसा की। लेकिन राहुल गांधी ने अमेरिका की धरती पर जीएसटी का विरोध करके न केवल घरेलु मामलों पर विवाद खड़ा कर दिया अपितु अपनी कूटनीतिक निरक्षरता जनता के सामने उजागर कर दी।

    हाल के दिनों में जापान के प्रधानमंत्री आबे ने भारत पहुंचकर नरेंद्र मोदी सरकार की नीतियों का खुलेमन से समर्थन किया अपितु भारत को सामरिक, आर्थिक समर्थन देकर पड़ौसी देश चीन का बुलेट और पाकिस्तान को बुलट का अर्थ समझा दिया। आज पाकिस्तान यदि आतंकवादी देश के रूप में अलग-थलग खड़ा है और चीन की विस्तारवादी दुष्प्रवृत्ति के कारण विश्व के अधिकांश देश चीन के विरोधी और भारत के समर्थन में खड़े हैं यह इक्कीसवीं शताब्दी की बड़ी सफलता है जिसका श्रेय नरेंद्र मोदी को जाता है। उन्होंने भारत के इतिहास को नया मोड़ देकर वैश्विक पटल पर भारत का मान और प्रतिष्ठा बढ़ाई है।

    नरेंद्र मोदी के प्रयास से अहमदाबाद से मुंबई बुलेट ट्रेन की आधार शिला रखे जाने के पश्चात् जापान के प्रधानमंत्री ने ऐलान किया है कि वे 2022 में बुलेट ट्रेन से भारत के नयनाभिराम स्थलों का दौरा करेंगे। पांच वर्षों में पूर्ण होने वाली बुलेट ट्रेन परियोजना पर 84 लाख करोड़ रू. का खर्च आयेगा जो कर्ज के रूप में जापान भारत को 0.1 प्रतिशत ब्याज पर देगा। नरेंद्र मोदी का यह कहना कि बुलेट ट्रेन परियोजना भारत को मुफ्त में पड़ेगी अतिरंजना नहीं एक हकीकत है। क्योकि इस कर्ज राशि की वसूली 15 वर्ष बाद लंबी अवधि की किश्तों में होगी। तब तक यह परियोजना भारत के लिए दुधारू गाय साबित हो चुकी होगी। देश के औद्योगिक शहरों में आवागमन सरल, सुलभ पर यातायात का दबाव केन्द्रित होने से सड़क और देश यातायात पर से दबाव घटेगा। इससे पर्यावरण संरक्षण का नया अध्याय आरंभ होगा।

    नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में हर क्षेत्र में काम की गति में तीव्रता आई है। सबसे बड़ी बात यह है कि भारत की दुनिया की महाशक्ति की राह पर अजेय बनकर बढ़ रहा है भारतीय फौज ने पाकिस्तान के विरूद्ध सर्जिकल स्ट्राईल लालसेना के साथ साहसिक झड़पे मोल ली हैं। ऐसा पहली बार हुआ कि भारत ने सीना तानकर इसकी जानकारी सार्वजनिक करने में गुरेज नहीं किया। अब तक यह साहस विश्व का महानशक्तिशाली देश अमेरिका ही करता रहा है। इतिहास में दर्ज है कि पूर्ववर्ती सरकार के दौर में नाथूला पर हुई झड़पों में चीन के 300 सैनिक ढेर हुए थे लेकिन सरकार यह बताने का साहस नहीं कर सकी थी। क्योंकि उसे अंदेशा था कि ऐसा करने से चीन भड़क जायेगा। लेकिन इस बार सेना को जितनी आजादी दी गई। उतने ही खुलेपन के साथ भारतीय फौज के शौर्य का सरकार ने बखान किया और उसे पूरा श्रेय भी दिया। अब तक भारत की विदेश नीति संकोच के अवकुंठन रही है। लेकिन मोदी ने इसमें साहस के साथ पारदर्शिता का रंग भरा है और देश का भाल उन्नत किया है यहीं महाशक्ति के सिर का सेहरा है।

  • गौरी लंकेश की हत्या की आड़ में गंदी राजनीति

    गौरी लंकेश की हत्या की आड़ में गंदी राजनीति


    -आलोक सिंघई-
    बैंगलुरु की पत्रकार गौरी लंकेश की हत्यारे अभी पुलिस गिरफ्त में नहीं आए हैं। आरएसएस के क्षेत्रीय प्रचारक वी नागराज इस नृशंस हत्या पर अपना विरोध जता रहे हैं। इसके बावजूद कांग्रेस और वामपंथियों के समर्थक इसे विचारधारा की हत्या बताने में जुट गए हैं। विरोध का बाजार गर्म देखकर भाजपा के विरोध की पत्रकारिता करने वाले मीडिया कर्मी भी मैदान में कूद पड़े हैं। उन्हें गौरी लंकेश की हत्या से इतनी बैचेनी नहीं है जितना उन्हें देश में भाजपा के प्रति बढ़ते जन समर्थन ने परेशान कर दिया है। इसलिए वे इसे भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह के उस अभियान से जोड़कर दिखा रहे हैं जिसमें उन्होंने कार्यकर्ताओं के सामने 350 से अधिक सीट जीतने का लक्ष्य रखा है। गौरी लंकेश के माध्यम से वे कह रहे हैं कि भाजपा अपने विरोधी विचारधारा को कुचलने के लिए अब पत्रकारों की हत्याएं तक कराने लगी है।

    इसमें कोई शक नहीं कि भाजपा अपनी राजनीति को आगे बढ़ाने के लिए आक्रामक रणनीति अपना रही है। वह खुद के विस्तार के साथ साथ कांग्रेस मुक्त भारत की बात भी खुलेआम कहती है। इसके बावजूद गांधी की हत्या के बाद से लगातार कलंक का भार ढोती रही भाजपा हर कदम फूंक फूंककर रख रही है। भले ही गांधी वध करने वाले नाथूराम गोड़से ने वैचारिक प्रतिबद्धता को साकार करने के लिए अतिवादी कदम उठाया हो लेकिन तबसे लेकर आज तक कभी आरएसएस या भाजपा ने गांधी के वध का समर्थन नहीं किया है। गांधी का वध कभी आरएएस के एजेंडे में भी नहीं रहा।आजादी के बाद से देश में कांग्रेस की सरकारें रहीं हैं इसके बावजूद कभी ये साबित नहीं हो पाया कि गांधी का वध आरएएस की रणनीति का हिस्सा था। ये सब जानते बूझते सत्ता पर बैठी कांग्रेस की चरण वंदना करने के लिए ढेरों कथित बुद्धिजीवी भाजपा और आरएसएस को दक्षिणपंथी और गांधी के हत्यारे बताते रहे हैं।

    प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी स्वयं गांधी के गुजरात से आते हैं। वे बरसों से कांग्रेस के इस दुष्प्रचार के वार झेलते रहे हैं। इसके बावजूद गुजरात की जनता ने उन्हें अपने कंधों पर बिठाकर देश के शीर्ष तक पहुंचाया है। खुद गुजरात दंगों पर आरोप लगाने वाले आज तक मोदी को हत्यारा बताने में नहीं चूकते। जबकि अदालतों में कई बार साबित हो चुका है कि गुजरात दंगों के लिए मोदी दोषी नहीं हैं। तीस्ता सीतलवाड़ जैसी कथित समाजसेविका जिसे वामपंथ की आड़ में कांग्रेस पोषित करती रही है उसे भी भाजपा ने आज तक नहीं मारा। जबकि उसके खिलाफ अमेरिकी फोर्ड फाऊंडेशन से चंदा लेने और लोगों से धन जुटाने के आरोप लगे हैं। कांग्रेस की सरकारें लंबे समय से उसके एनजीओ को फंडिंग करती रहीं हैं। उनका एकमात्र लक्ष्य भाजपा के प्रति दुष्प्रचार अभियान चलाना है। कहने को तो तीस्ता सीतलवाड़ भी पत्रकार हैं लेकिन उनकी सुपारीखोर पत्रकारिता को देश की मुख्यधारा की पत्रकारिता ने कभी खबर से आगे नहीं स्वीकार किया है।

    ऐसा ही कुछ कर्नाटक की स्वर्गीय गौरी लंकेश कर रहीं थीं। उनके पिता पी. के लंकेश ने लंकेश पत्रिका नाम से टेब्लायड अखबार शुरु किया था जिसे अब गौरी प्रकाशित करती थीं। इस अखबार की आय पचास लोगों के संगठन पर आधारित थी। इन पचास लोगों में जाहिर है ज्यादातर भाजपा विरोधी ही थे। इस तरह गौरी लंकेश की पत्रकारिता सामाजिक संवाद पर आधारित नहीं बल्कि संघ और भाजपा के विरोध पर आधारित थी। जाहिर है जब आप किसी एक विचारधारा के मुखपत्र बन जाते हैं तो अपने विचार को ज्यादा सफेद बताने के लिए आप सच को तोड़ मरोड़कर प्रस्तुत करने लगते हैं। यही वजह थी कि 2008 में लिखे गए उनके एक आलेख को भाजपा के सांसद प्रहलाद जोशी ने अदालत में चुनौती दी। अपने आलेख को गौरी अदालत में सच साबित नहीं कर पाईं और उन्हें छह महीने की जेल और जुर्माने की सजा सुनाई गई। हालांकि वे जमानत पर रिहा भी हो गईं पर इस मामले की लंबी कानूनी लड़ाई लड़ते हुए वे संघ भाजपा के खिलाफ कुछ ज्यादा ही तीखा लिखने लगीं थीं।

    उनके संपादकीय का हिंदी में अनुवाद करके देश भर में विचारधारा की हत्या का शोर मचाने वाले पत्रकारों ने निहायत ही गैर जिम्मेदारी भरा रवैया अपनाया है। ये बात सही है कि गौरी लंकेश यदि किसी खास विचारधारा की पैरवीकोर थीं तो ये उनका निजी मामला था। जो उनके विचारों से सहमत नहीं थे वे उस विचारधारा को दरकिनार कर ही तो रहे थे। ये भी संभव है कि उनके तीखे लेखों की धार से आहत होकर किसी सिरफिरे ने हत्याकांड जैसा कदम उठाने की रणनीति अख्तियार कर ली हो। लेकिन अभी सिर्फ अनुमानों के आधार पर फतवे जारी करने लगना किसी भी तरह से उचित नहीं माना जा सकता।कौआ कान ले गया की आवाज सुनकर धरने प्रदर्शन करने चल पड़े पत्रकारों की समझ भी इस घटना से कटघरे में आ रही है।भोपाल में तो इस गौरी की हत्या का विरोध करने वाले ज्यादातर पत्रकार सरकार की निगाह में आने के लिए मैदान में उतरे।

    कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने पुलिस आयुक्त टी सुनील कुमार को साफ निर्देश दिये हैं कि इस मामले की जांच करके दोषियों को दंडित कराया जाए। खुद गौरी के भाई इंद्रजीत ने मामले की जांच सीबीआई से कराए जाने की मांग की है।कर्नाटक की पुलिस देश के चुस्त संगठन के लिए जानी जाती है। देर अबेर हत्यारे जरूर पकड़े जाएंगे और उन्हें दंडित भी किया जाएगा। तब इस हत्या पर से पर्दा उठेगा।

    केरल में तो आरएसएस के कार्यकर्ताओं की हत्याएं बाकायदा चेतावनी देकर की जाती रहीं हैं। इसके बावजूद वहां की वामपंथी सरकारें इस पाप को लगातार छुपा रहीं हैं। खुद भाजपा शासित राज्यों में विरोधियों की हत्याएं जैसे प्रसंग अब तक सामने नहीं आए हैं। विरोधियों को निपटाने के लिए छापे डालना और मुकदमों में फंसाना जैसी रणनीति तो देश की राजनीतिक पार्टियां कांग्रेस से सीख चुकी हैं पर विरोधियों की हत्याएं कराना जैसे ओछे हथकंडे कोई राजनीतिक दल नहीं अपनाता है। भाजपा को जब दक्षिण के राज्यों में अपने पैर पसारने हैं तब वह दिल जीतने के अभियान में पत्रकार की हत्या कराने जैसा कलंकित कदम कैसे उठा सकती है। जाहिर है इस विषय कपोल कल्पनाओं के आधार पर किसी निष्कर्ष पर पहुंच जाना जल्दबाजी होगी।कम से कम इसे पत्रकारिता तो नहीं ही कहा जाएगा।

  • अब चीन भी आतंकवाद पर भारत के साथ

    अब चीन भी आतंकवाद पर भारत के साथ

    नई दिल्ली । चीन के शियामेन शहर में ब्रिक्स सम्मेलन के समापन की औपचारिक घोषणा के साथ अगले साल दक्षिण अफ्रीका के जोहानिसबर्ग में अगले ब्रिक्स सम्मेलन की घोषणा की गई।

    ब्रिक्स सम्मेलन पर देश और दुनिया की नजर इस बात पर टिकी थी कि भारत और चीन के बीच बातचीत का एजेंडा क्या होगा। सोमवार को जब ब्रिक्स का घोषणापत्र जारी हुआ तो उसमें अहम बात ये रही कि पहली बार चीन ने माना कि लश्कर और जैश दुनिया के लिए खतरनाक हैं। ब्रिक्स के घोषणापत्र में लश्कर और जैश संगठनों का जिक्र होना भारत के लिए अहम कामयाबी मानी गई। गोवा में 2016 के ब्रिक्स के घोषणापत्र के समय भारत की तमाम कोशिशों के बाद भी लश्कर और जैश के नाम पर चीन अड़ गया था। आज जब पीएम मोदी और चीनी राष्ट्रपति शी जिनफिंग के बीच मुलाकात हुई तो कयास लगाए जा रहे थे कि शायद डोकलाम के मुद्दे पर दोनों देशों के बीच बातचीत हो। लेकिन चीन ने बातचीत से पहले ही साफ कर दिया कि डोकलाम पर बातचीत नहीं होगी।

    पीएम मोदी और चीनी राष्ट्रपति शी चिनफिंग की बातचीत के बाद विदेश सचिव एस जयशंकर ने सधे अंदाज में कहा कि मतभदों को कभी विवाद नहीं बनने देंगे। भारत के इस बयान से साफ हो गया कि पंचशील सिद्धांतों के तहत ही चीन और भारत को आगे बढ़ने की जरुरत है।

  • शाकाहार बनाए बॉडी और बचाए मर्दानगी

    शाकाहार बनाए बॉडी और बचाए मर्दानगी


    -हैल्थ रिपोर्टर-
    ज्यादातर शाकाहारी लोगों के दिमाग में इस तरह के विचार पनपते रहते हैं कि शाकाहार के चलते वह बॉडी नहीं बना पा रहे हैं। सबसे ज्यादा सवाल और शंकाएं रहती हैं प्रोटीन को लेकर। इस लेख में आपको अपनी जिज्ञासाओं के सभी समाधान मिल सकेंगे। ये कहना बंद कर दें कि शाकाहारी व्यक्ति कभी अच्छी बाडी नहीं बना सकता।शाकाहार में भी प्रोटीन, कार्बोहाईड्रेट और फैट के अच्छे स्रोत पाए जाते हैं। यदि हम उनका सही तरीके से इस्तेमाल करें तो शाकाहार को पचाना और उससे शरीर के मसल्स को मजबूती देना बड़ा सरल हो जाएगा। सबसे बड़ी बात तो ये कि शाकाहार पर आधारित शरीर बीमारियों से मुक्त रखता है और सही मायनों में मर्दानगी का पोषक होता है।

    हमारे देश में शाकाहारियों के भोजन में प्रोटीन कम शामिल होता है। क्योंकि एक तो ये मंहगा है फिर हमारे ज्यादातर खाद्य पदार्थों में कार्बोहाईड्रेट और फैट पाए जाते हैं। इसलिए शाकाहारियों को सबसे पहले पचने लायक प्रोटीन शामिल करने पर जोर देना होता है।

    शाकाहारी प्रोटीन – सोया टोफू, सोयाबीन के दाने, काला चना, काबुली चना, दूध, छाछ, योग हर्ट, पनीर, चीज़, मूंगफली, ओट्स, दालें, बादाम, दूध पाउडर, आइसक्रीम, प्रोटीन पाउडर, पास्ता, सोया मिल्क, प्रोटीन चॉकलेट।
    इनके अलावा हमारे खाने में रोटी, चावल, मक्‍का, दलिया, केले, आलू, शकरकंद भी होता है तो हमारी कार्ब्स और फैट की जरूरत पूरी हो जाती है। खाने पीने की इन चीजों के उपयोग के तरीके और संयोग पर भी खासा ध्यान रखना होता है। यदि हम इन खाद्य पदार्थों में संयोग का गणित नहीं समझेंगे तो ये खाद्य हमारे शरीर में कई असंतुलन पैदा कर सकते हैं।

    सबसे पहले हमें अपनी प्रोटीन की जरूरत का आकलन करना सीखना होगा। आपका वजन यदि 60 किलो है तो आपको 120 से लेकर 180 ग्राम प्रोटीन की जरूरत होगी। अपने वजन के प्रतिकिलो पर दो से तीन ग्राम प्रोटीन की जरूरत होती है। अब ये हिसाब लगाएं कि इतने प्रोटीन का इंतजाम कहां से होगा। हमें तय करना होगा कि हम कितना प्रोटीन कहां से प्राप्त करें। इसके लिए सबसे आसान स्रोत डबल टोंड दूध या छाछ होता है। हर दिन आप चार लीटर दूध और सूखे मेवे खाकर भी बाडी बना सकते हैं।

    बॉडी बनाने वाले लड़कों की डाईट कैसी हो

    उन्हें जिम जाने से पहले अपने प्रोटीन को बचाने का उपाय सीखना होगा।उनके शरीर को अपनी गतिविधियां चलाने के लिए सबसे पहले ईंधन की जरूरत होती है। ये ईंधन ऊर्जा यदि शरीर को फैट और कार्बोहाइड्रेट से नहीं मिले तो वह प्रोटीन को ईंधन की तरह इस्तेमाल करने लगेगी। इसलिए उसे ऐसा करने से रोकना होगा। प्रोटीन को बचाएं ताकि उसका ज्यादा से ज्यादा इस्तेमाल मसल्स बनाने में हो। इसके लिए जरूरी है बॉडी को भरपूर कैलोरी देना। इसके लिए दिन में कम से कम छह बार खाना खाएं। फल और ड्राई फ्रूट, ग्लूकोज या जूस और शहद को जरूर शामिल करें। रात के वक्त एक लीटर दूध जरूर पिएं ताकि बॉडी को मरम्मत के काम में आसानी हो। अगर दूध नहीं पी पाते तो फिर सोयाबीन या टोफू या पनीर या प्रोटीन पाउडर का इस्तेमाल करें।

    शरीर में फैट इकट्ठा न हो सके इसलिए प्रोटीन के शाकाहारी स्रोतों में फैट घटाने वाले साधन भी अपनाना पड़ते हैं।क्योंकि प्रोटीन के जो शाकाहारी स्रोत हैं उनमें फैट भी अच्छा खासा होता है। जो लोग वजन बढ़ाना चाहते हैं उनके लिए तो कुछ चिंता वाली बात नहीं मगर जो लोग ठोस बाडी के दीवाने हैं उन्हें सोचना पड़ेगा। इसके लिए आपको ग्रीन टी, कॉफी, हरी मिर्च, दालचीनी, लहसुन जैसे लीन बॉडी में मदद करने वाले फूड्स को भी साथ में रखना होगा। यही नहीं पेट की कसरत के लिए वक्त निकालना होगा और ठंडे पानी की बजाए ज्यादातर गर्म पानी पीना होगा। दूध भी गर्म पिएं, खासकर रात को। कलौंजी अथवा मंगरैल भी पेट कम करने में मदद करती है।कलौंजी का तेल भी लेकर शरीर में आवश्यक तत्वों की जरूरत पूरी की जा सकती है।

    मछली के विकल्प के रूप में शाकाहार में भी कई चीजें उपलब्ध हैं। अलसी, अलसी का तेल और अखरोट में बहुत उम्दा किस्म का फैट होता है। मछली को प्रोटीन के अलावा ओमेगा थ्री फैटी एसिड के लिए जाना जाता है। मछली न खाने वालों के लिए अपने खाले में अलसी उर्फ फ्लैक्‍सीड और अखरोट को शामिल करना चाहिए। अलसी को शेक में डाल सकते हैं और अखरोट को कैसे भी खाएं। दो से तीन बड़े चम्मच अलसी और मुट्ठी भर अखरोट की गिरी।

    मांसाहारी प्रोटीन के साथ केवल एक अच्छी बात ये है कि इसमें सभी आठ अमीनो एसिड मिलते हैं। शाकाहारी प्रोटीन में एक आध कम रह जाता है। लेकिन उसका भी उपाय है। दलिया में दाल और थोड़ी सब्जी मिला देंगे तो सारे अमीनो एसिड आ जाएंगे। सब्जियों और अनाज को आपस में मिलाएं। आपको पता है कि दाल व सोयाबीन में खूब प्रोटीन होता है मगर एक कटोरा दाल पीने की बजाए उसमें थोड़ा ओट्स और कोई सब्‍जी मिला लें। सोयाबीन के दानों के साथ साथ अंकुरित मूंग की दाल भी खाएं। कुल मिलाकर बात ये है कि दो अलग अलग परिवारों को साथ मिला लें।

    अगर कोई कसम नहीं खाई है तो फूड सप्लीमेंट लेने से कभी न चूकें। एक सीमा के बाद बिना सप्लीमेंट बॉडी बिल्डिंग काफी टफ हो जाती है खासकर उनके लिए जिन्हें साइज और शेप दोनों चाहिए। ऐसे में प्रोटीन पाउडर मदद करता है। शाकाहारियों पर क्रेटीन और ग्लूटामिन भी काम करता है। आजकल अच्छी कंपनियों के प्रोटीन पाउडर में क्रेटीन, ग्‍लूटामिन और बीसीएए मिला आता है। प्रोटीन पाउडर चुनते वक्‍त चेक कर लें अगर ये तीनों चीजें हैं तो अच्‍छा रहेगा।कई आयुर्वेदिक जड़ी बूटियां भी प्रोटीन की इस कमी की भरपाई कर देती हैं।

    आलू, केला, योग हर्ट, ब्रोकली,पालक और गोभी के परिवार की अन्य सब्‍जियां भी शरीर की प्रक्रिया सुचारू रूप से चलाने में मदद करती हैं। आलू और केले कसरत करने में मदद देंगे और प्रोटीन को खर्च होने से बचाएंगे। ये दोनों सब्जियां फाइबर के अलावा प्रोटीन, कैल्शियम, विटामिन बी और सी से भरी होती हैं। शतावरी का भी इस्तेमाल किया करें।

    आमतौर पर ये सभी चीजें भोजन को समृद्ध बनाने के लिए काफी हैं। लेकिन इसके साथ ये भी जरूरी है कि इन चीजों को हम बदल बदलकर लें। यदि हम इन्हें एक साथ लेंगे तो फायदे के बजाए नुक्सान भी हो सकता है। इसलिए सूझबूझ से इन्हें आपस में बदलते रहना भी जरूरी है। फिर आपको दिन में कम से कम छह बार खाना है। एक ही बार में भरपेट भोजन करने से वह पूरी तरह पच नहीं पाता और शरीर में एसीडिटी बढ़ाने लगता है।

    इस भोजन के साथ अपनी मानसिकता भी सकारात्मकता रखना सबसे जरूरी है। यदि आप खुद पर दया करेंगे तो इस भोजन का पूरा फायदा नहीं उठा पाएंगे। बहुत से शाकाहारी युवक न तो मेहनत अच्छी करते हैं न डाइट अच्‍छी लेते हैं और फिर आलसीपने का ठीकरा शाकाहार पर फोड़ देते हैं। डींगे हांकते हुए कहते फिरते हैं कि अगर हम मांसाहारी होते तो फलां को भी पटखनी मार देते।इस तरह की गप्पें मारना बंद कर दें क्योंकि कई दुबले पतले पहलवान अखाड़े में भारी पड़ जाते हैं जबकि कई मांसाहारी भी सुर्री बम साबित होते हैं। यदि किसी शाकाहारी की बॉडी नहीं बन पा रही है तो इसके लिए शाकाहार दोषी नहीं है। उसके भोजन के तरीके और एंजाईमों, प्रोटीनों, के संयोग से भी लाभ लिया जा सकता है। क्योंकि शाकाहार मानव शरीर के लिए ही बना है और वही उसे स्वस्थ रखता है।यदि संतुलित तरीके से भोजन लिया जाए और भरपूर पसीना बहाया जाए तो शरीर का वी शेप और सिक्स पैक एब्स भी आसानी से पाए जा सकते हैं।

    सप्‍लीमेंट बनाने वाली कंपनियों के उत्पादों को सोयाबीन पाऊडर से कड़ी टक्कर मिलती है। यदि लोग सोयाबीन लेकर प्रोटीन प्राप्त कर लेंगे तो उनका माल कौन खरीदेगा। जाहिर है कि ये कंपनियां सोयाबीन की बदनामी करती फिरती हैं। उनका कहना है कि सोयाबीन में टेस्टेस्टेरोन नहीं होता है। यदि ये न हो तो आप दूसरी चीजों से इसकी कमी पूरी कर सकते हैं। पर इसका मतलब ये तो नहीं कि सोयाबीन खराब हो गया।

    जो लोग सप्लीमेंट लिए बगैर लीन बॉडी चाहते हैं तो उन्हें इसके कई विकल्प भी मिल सकते हैं। वैसे तो प्रोटीन पाउडर लेने में कोई बुराई नहीं है। प्रोटीन के लिए आप चाहें नानवेज खाएं, या सप्लीमेंट और फैट लें तो ही आपका शरीर इस्पात बन सकता है। यदि आप इतनी शर्तें लगाएंगे तो फिर किसी कोच से अपने लायक डाईट फिक्स करवा लें।

    कसरत से एक घंटा पहले तीन केले और एक गिलास दूध शहद मिलाकर या एक बड़ा उबला आलू, दही और धनिया के पत्‍तों के साथ लेना जरूरी है । कसरत से पंद्रह मिनट पहले एक गिलास पानी में तीन चम्‍मच ग्‍लूकोज या एक गिलास बिना छना मौसमी का जूस या एक कप ठंडे पानी में एक चम्‍मच कॉफी ली जा सकती है।

    जबकि कसरत के बाद पहलवानों वाला शेक लिया जा सकता है। अपने नाश्ते में एक बड़ा कटोरा भर सोयाबीन (60 से 100 ग्राम) के भीगे हुए दाने टमाटर प्‍याज और लहसुन डालकर खायें। साथ में एक कप जूस या ग्‍लूकोज,या 50 से 80 ग्राम के आसपास मूंग की दाल पका लें और साथ में जरा सा सलाद भी लें।

    दोपहर का खाना – डेढ़ सौ ग्राम पनीर, आधा गिलास जूस या ग्‍लूकोज, एक प्‍लेट चावल, जरा सा सलाद या चटनी ली जा सकती है।

    शाम को – एक बड़ा कटोरा दलिया या ओट़स, जिसमें थोड़ी सब्‍जी या दाल भी पड़ी हो। ओट्स या दलिया पकाने के बाद उसमें दो चम्‍मच सरसों का तेल या ऑलिव ऑयल डाल लें। एक गिलास छाछ या मट्ठा लिया जा सकता है। मट्ठे के साथ 80 से 100 ग्राम मूंगफली के साथ में मक्‍का भी लें।

    रात का खाना – आपकी मर्जी। बस खाने के बाद कम से कम दो से तीन सौ ग्राम आइसक्रीम ली जा सकती है। इसके विकल्प के रूप में रबड़ी भी ली जा सकती है।जबकि सोने से आधा घंटा पहले 1 से आधा लीटर गर्म दूध।ये डाइट चार्ट उन लोगों के लिए है जिन्‍हें वजन बढ़ाना है और थोड़े बहुत फैट से परहेज नहीं है।इसमें प्रोटीन पाउडर को शामिल नहीं किया है। अगर लेते हैं तो एक्‍सरसाइज के बाद और रात को दूध के साथ ले सकते हैं। मिल्‍क पाउडर भी ले सकते हैं।

    ड्राई फ्रूट्स और फ्रूट्स चलते फिरते कभी भी लें। ग्रीन टी जब मन किया तब पी लें, मगर पिएं जरूर।
    डाइट चार्ट में बदलाव करते रहें। कभी सोयाबीन बढ़ा दें, कभी दूध तो कभी पनीर। प्रोटीन के चार पांच स्रोत हैं उनको हमेशा ध्‍यान में रखें।साथ में भूख बढ़ाने वाली जड़ी बूटियां या टॉनिक भी लेना जरूरी है। क्योंकि यदि भोजन ठीक से न पचे तो सारी मेहनत बेकार हो जाएगी। इसके साथ आपको ये भी ध्यान रखना होगा कि कम से कम दो बार पेट साफ हो।

    डाइट चार्ट देखने में टेंशन देने वाला लग सकता है मगर जब प्रयास करेंगे तो सब आसानी से हो जाएगा। अपने हिसाब से कुछ चीजें आगे पीछे करने की आजादी सबके पास होती है। शाकाहारी लोग 4 लीटर दूध के स्‍पेशल प्लान के बूते बहुत अच्छी गेनिंग कर सकते हैं।

    100 ग्राम में कितना प्रोटीन
    दूध – 3-4 ग्राम, पनीर – 18, सोयाबीन – 36, काला चना – 15, बादाम – 21, पास्‍ता – 12, पीनट बटर – 25, दूध पाउडर – 26, टोफू – 12-40, ओट्स – 16, मूंगफली – 26, दालें – 20-25, छाछ/ मट्ठा – 3, काबुली चना – 19 ग्राम

  • कर देने लगे 17 लाख नए व्यापारी

    कर देने लगे 17 लाख नए व्यापारी

    New Delhi: Prime Minister Narendra Modi addresses the inaugural function of the Rajasva Gyan Sangam – Annual Conference of Tax Administrators, in New Delhi on Friday. PTI Photo/PIB(PTI9_1_2017_000118B)

    नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी ने कर प्रशासकों से कहा है कि वे 2022 तक देश की कराधान प्रणाली में सुधार के लिए स्‍पष्‍ट लक्ष्‍य निर्धारित करें। उन्‍होंने कहा कि सरकार ऐसा माहौल बनाने का प्रयास कर रही है, जिससे भ्रष्‍ट लोगों के हौसले पस्‍त हों और ईमानदार करदाताओं का व्‍यवस्‍था पर भरोसा बढ़े। आज नई दिल्‍ली में राजस्‍व ज्ञान संगम का उद्घाटन करते हुए श्री नरेन्‍द्र मोदी ने काले धन और बेनामी संपत्तियों के खिलाफ बनाए गये कड़े कानूनों पर अमल और विमुद्रीकरण जैसे कई कदमों का जिक्र किया। उन्‍होंने कहा कि कर प्रशासन के कार्य में मानव हस्‍तक्षेप कम से कम करने और ई-एसेसमेंट को अपनाया जाना चाहिए ताकि निहित स्‍वार्थ वाले लोगों को कानूनी प्रक्रिया में बाधा डालने का मौका न मिले।
    प्रधानमंत्री ने कहा कि जी एस टी से देश के आर्थिक एकीकरण और व्‍यवस्‍था में पारदर्शिता को बढ़ावा मिला है। दो महीने के भीतर 17 लाख से अधिक नये व्‍यापारियों को अप्रत्‍यक्ष कर प्रणाली के दायरे में लाया गया है।

  • अठारह लाख बैंक खाते संदिग्धःजेटली

    अठारह लाख बैंक खाते संदिग्धःजेटली


    नई दिल्ली।वित्‍तमंत्री अरूण जेटली ने कहा है कि नोटबंदी के नतीजे आशा के अनुरूप हैं और मध्‍यम तथा लंबी अवधि में इससे अर्थव्‍यवस्‍था को लाभ होगा। आज नई दिल्‍ली में ‘द इकॉनमिस्ट पत्रिका द्वारा आयोजित इंडिया समिट के उदघाटन सत्र को संबोधित करते हुए श्री जेटली ने कहा कि बैंकों में जो नोट जमा किए गए थो उसका मतलब यह नहीं है कि वो सब वैध धन था। वित्‍तमंत्री ने कहा कि नोटबंदी के समय अनुमान लगाया गया था कि अधिक से अधिक लोग कर प्रणाली के तहत आयेंगे और इससे प्रत्‍यक्ष कर वसूली में मदद मिलेगी। श्री जेटली ने कहा कि नोटबंदी का राजनीतिक स्‍तर पर भी व्‍यापक स्‍वागत किया गया है और इससे अर्थव्‍यवस्‍था में पारदर्शिता लाने में मदद मिलेगी।

    वस्‍तु और सेवाकर के बारे में श्री जेटली ने कहा कि इसके लाभों के बारे में अभी से कोई अनुमान लगाना जल्‍दबाजी होगी, लेकिन इससे मिलने वाले फायदे निश्‍चय ही उल्‍लेखनीय होंगे। श्री जेटली ने कहा कि जीएसटी की एक ही दर लगाना न्‍यायसंगत नहीं होगा लेकिन सरकार को आशा है कि जीएसटी की दो मानक दरें भविष्‍य में एक हो सकती हैं। वित्‍त्‍मंत्री ने कहा कि अगर जीएसटी को सही ढंग से अपनाया गया तो जीएसटी परिषद अलग अलग कर दरों के आपस में विलय का निर्णय ले सकती है।

    औद्योगिक उत्‍पादन सूचकांक के बारे में श्री जेटली ने कहा कि पिछले कुछ महीनों में वह उत्‍साहवर्धक नहीं रहा है। उन्‍होंने आशा व्‍यक्‍त की कि भ्रष्‍टाचार उन्‍मूलन अधिनियम को जल्‍दी ही संसद की स्‍वीकृति मिल जाएगी। श्री जेटली ने कहा कि सरकार ने रक्षा क्षेत्र में निजी कम्‍पनियों को आने की इजाजत दे दी है। इससे रक्षा उत्‍पादन बढ़ाने में मदद मिलेगी।

    आरबीआई ने बुधवार को कहा था कि साल 2016 के नवंबर में की गई 500 रुपये और 1000 रुपये की नोटबंदी के बाद प्रचलन से बाहर हुए 15.44 लाख करोड़ नोट में से 15.28 लाख करोड़ नोट लौटकर प्रणाली में वापस आ चुके हैं.मंत्री ने हालांकि कहा कि नोटबंदी का उद्देश्य कुल मिलाकर पूरा हो गया है.

    उन्होंने कहा, ‘इससे असंगठित क्षेत्र को संगठित बनाने में मदद मिली. नोटबंदी ने कर आधार बढ़ाने में मदद की, जिससे प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष कर संग्रहण बढ़ा है.’ उन्होंने कहा, ‘नोटबंदी ने बेनामी पैसे पर रोक लगाई है और प्रणाली को झकझोरा है.’ जेटली ने कहा, ‘दो तिहाई जीएसटी र्टिन दाखिल होने के साथ ही हमने लक्ष्य से अधिक हासिल कर लिया है. जीएसटी लागू होने के पहले महीने में इससे हुआ कर संग्रहण सरकार की उम्मीदों से अधिक है.’उन्होंने कहा कि नोटबंदी के दीर्घकालिक असर से सरकारी खर्च को बढ़ावा मिलेगा, क्योंकि राजस्व अधिक इकट्ठा होगा.

    देश में एक करोड़ रूपये से अधिक की 14 हजार से ज्‍यादा संपत्तियां आयकर विभाग के जांच के दायरे में हैं जिनके स्‍वामियों ने अपने आयकर विवरण में इसकी जानकारी नहीं दी है। ऐसे संदिग्‍ध मामलों की जांच की जा रही है। वित्‍त मंत्रालय ने कहा है कि ऑपरेशन क्‍लीन मनी के पहले चरण में बैंकों में नोटबंदी की अवधि में नकद रूपये जमा करने वाले लोगों के बैंक खाता और उनके कर विवरण दाखिलों के आंकड़ों का विश्‍लेषण किया गया जिसमें 18 लाख संदिग्‍ध मामलों की पहचान की गई। ऑपरेशन क्‍लीन मनी अभियान जनवरी 2017 में शुरू हुआ था।

    वित्त मंत्री अरुण जेटली ने बैंकों का कर्ज लेकर उसे नहीं लौटा पाने वाली निजी कंपनियों के मालिकों से कहा है कि वह अपना बकाया चुकायें या फिर कारोबार छोड़कर उसका नियंत्रण किसी दूसरे के हवाले कर दें.

    भारतीय रिजर्व बैंक ने दिवाला एवं ऋण शोधन अक्षमता कानून के तहत हाल ही में ऐसी 12 बड़ी कर्जदार कंपनियों के खिलाफ दिवाला कारवाई शुरू करने का बैंकों को निर्देश दिया है. इन कंपनियों में दो लाख करोड़ रुपये का कर्ज फंसा हुआ है. यह राशि बैंकों के कुल फंसे कर्ज का एक चौथाई के करीब है.

    बैंकों से कर्ज लेकर उसे नहीं लौटा पा रहे कुछ और कर्जदारों के खिलाफ भी कारवाई को अधिसूचित किया जा रहा है. जेटली ने कहा कि सरकार बैंकों को और पूंजी उपलब्ध कराने के लिये तैयार है लेकिन फंसे कर्ज का समाधान सरकार के लिये बड़ी प्राथमिकता है.

    वित्त मंत्री ने इकोनोमिस्ट सम्मेलन को संबोधित करते हुये कहा, ‘‘दिवाला एवं रिण शोधन अक्षमता कानून के जरिये, मैं समझता हूं कि देश में पहली बार फंसे कर्ज के मामले में सक्रिय कारवाई की जा रही है.’’ उन्होंने कहा कि फंसे कर्ज का समाधान करने में समय लगेगा. ‘‘आप इस मामले में एक झटके में सर्जिकल कारवाई नहीं कर सकते हैं.’’

    वित्त मंत्री ने कहा कि सरकार ने बैंकों को पहले ही 70,000 करोड़ रुपये तक पूंजी उपलब्ध करा दी है और उन्हें और पूंजी देने के लिये भी तैयार है. कुछ बैंक बाजार से भी पूंजी जुटा सकते हैं. ‘‘हम बैंकिंग क्षेत्र में एकीकरण की कारवाई आगे बढ़ाने के लिये भी सक्रियता से काम कर रहे हैं. हमें ज्यादा बैंक नहीं चाहिये, हमें कम लेकिन मजबूत बैंक चाहिये.’’

    केन्द्रीय मंत्रिमंडल ने पिछले सप्ताह ही देश के सार्वजनिक क्षेत्र के 21 बैंकों के बीच विलय प्रक्रिया को तेज करने का फैसला किया ताकि इन बैंकों की कार्यक्षमता और उनमें संचालन को बेहतर बनाया जा सके.