एनजीटी ने दिया नागरिकों को राहत देने का निर्देश
भोपाल,06 दिसंबर(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)। भारतीय जनता पार्टी सरकार की आड़ में कतिपय असामाजिक तत्वों ने प्रशासन को कुछ इस तरह पंगु बना दिया है कि वह नागरिकों के प्रति अपने दायित्वों को ही भूल चला है। चुनावी प्रक्रियाओं के चलते अब तक खामोश रही प्रशासनिक मशीनरी ने प्रकाश नगर में कल दौरा किया और अवैध निर्माण के चलते चोक हुई सीवेज लाईनों को खोलने के निर्देश दिए हैं। एनजीटी के आदेश के अनुपालन में प्रशासन ने अवैध निर्माण गिराने की तैयारी भी की है। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि कि वे किसी राजनैतिक हस्तक्षेप को अब बर्दाश्त नहीं करेंगे और प्रशासन यदि अपना दायित्व नहीं निभाता है तो वे इस संबंध में वैकल्पिक तरीकों का भी इस्तेमाल करने से नहीं चूकेंगे।
मामला गोविंदपुरा विधानसभा क्षेत्र स्थित प्रकाश नगर का है।यहां अनैतिक आचरण के चलते राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से बर्खास्त किए गए एक असामाजिक तत्व ने सीवेट ट्रीटमेंट के प्लाट पर अवैध निर्माण खड़ा कर लिया है।नागरिकों के विरोध के बावजूद वह बेशर्मी से ढांचे का निर्माण करता जा रहा है। इस वजह से सीवेज ट्रीटमेंट के लिए छोड़े गए प्लाट की नालियां चोक हो गईं और कालोनी में पानी भर गया है।
नागरिकों ने इस समस्या के खिलाफ पुलिस व प्रशासन को भी शिकायत की लेकिन चुनावी प्रक्रियाओं में उलझी भाजपा सरकार और अधिकारियों ने नागरिकों की परेशानी पर गौर नहीं किया। उस चरित्रहीन असामाजिक तत्व जो खुद को नेता और पत्रकार बताता है ने अवैध निर्माण जारी रखा। अब ये हालत हो गई है कि परिसर की नालियां चोक हो गईं हैं और नागरिकों को खासी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। भाजपा सरकार की आड़ में पनप रही गंदगी का ये अनूठा उदाहरण है।
नागरिकों ने इस संबंध में जब एनजीटी की भोपाल बैंच को शिकायत की तो उसने प्रकरण क्रमांक ओए 139।2023 कृष्णारानी विरुद् मध्यप्रदेश शासन एवं अन्य के विरुद्ध 12 अक्टूबर 2023 को पारित आदेश के अनुपालन के निर्देश दिए हैं। एनजीटी के सदस्य सचिव आईएएस चंद्रमोहन ठाकुर ने नगर निगम कमिश्नर और भोपाल कलेक्टर को नागरिकों को राहत दिलाने के निर्देश दिए हैं। इस संबंध में एक कमेटी की भी स्थापना की गई है।इस आदेश के अनुपालन की रिपोर्ट 18 दिसंबर के पहले एनजीटी के समक्ष पेश की जानी है।
गौरतलब है कि अतिक्रमण के कारण प्रकाश नगर रहवासियों को जलभराव और मुसीबतों का सामना करना पड़ रहा है। वार्ड 70,गोविंदपुरा की प्रकाश नगर, बिजली कॉलोनी, #Bhopal जहां पर अधिकतर रिटायर्ड MPEB के अधिकारी, बुजुर्ग महिलाएं रहते हैं वहां पर एक #भाजपा नेता के द्वारा नाले पर अतिक्रमण कर लिया गया और निर्माण प्रारंभ कर दिया । उसने संलग्न भूमि जो सेप्टिक टैंक के लिए निर्धारित थी उस पर भी निर्माण शुरु कर दिया है ।जिसके कारण सारे सीवरेज चेंबर ओवरफ्लो हो गये टॉयलेट गंदगी फैल गई और कई पेड़ धराशाई हो गए ।पिछले 3 माह से की जा रही विभिन्न विभागों एवं नेताओं को की गई शिकायतों का कोई निराकरण नहीं हुआ । विधायक, क्षेत्रीय पार्षद यहां तक कि संभाग आयुक्त ,कलेक्टर और #प्रदूषण निवारण मंडल में भी इसकी शिकायत की गई कि ओपन में जल-मल-मूत्र बह रहा है और सेप्टिक टैंक का निर्माण नहीं हो रहा। कथित भाजपा नेता के निजी स्वार्थ के कारण प्रकाश नगर के बुजुर्ग, महिलाओं, पुरुषों को अत्यंत दुख तकलीफों का सामना करना पड़ रहा है।
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आरएसएस से निष्कासित भाजपा नेता ने किया अतिक्रमण, एनजीटी ने मांगी राहत रिपोर्ट
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छोटे अखबारों को साल में छह विज्ञापन मिलेंगे
70 वर्ष से अधिक आयु के पत्रकारों को स्थायी अधिमान्यता कार्ड मिलेगा
महिला पत्रकारों को महिला कल्याण कार्यों के अध्ययन के लिए मिलेगी फैलोशिप
मुख्यमंत्री श्री चौहान ने आधुनिक और देश में अनूठे भोपाल स्टेट मीडिया सेंटर के निर्माण के लिए किया भूमिपूजन
भोपाल 3अक्टूबर(अशोक मनवानी) मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा है कि पत्रकार समाज और सरकार के मध्य सेतु की भूमिका निभाते हैं। पत्रकार समाज के अंतिम पंक्ति के व्यक्ति की आवाज होते हैं। पत्रकारिता एक धर्म है, जिसके निर्वहन के लिए पत्रकार युद्ध, बाढ़, भूकम्प जैसी विपरीत स्थितियों में भी जीवन दांव पर लगाकर कार्य करते हैं। जब विपत्तियों में लोग सुरक्षित स्थान खोजते हैं, तब पत्रकार समाधान खोजते हैं। स्टेट मीडिया सेंटर भविष्य के ऐसे वृट वृक्ष के बीज रोपे जा रहे हैं, जिनसे अनुभवों की शाखाओं पर अनंत आशाएं साकार होंगी।
मुख्यमंत्री श्री चौहान आज मालवीय नगर भोपाल में स्टेट मीडिया सेंटर के लिए भूमि पूजन समारोह को संबोधित कर रहे थे। इस अवसर पर जनसंपर्क मंत्री राजेंद्र शुक्ला, आयुक्त जनसंपर्क मनीष सिंह उपस्थित थे।
मुख्यमंत्री श्री चौहान ने लघु समाचार पत्रों को एक माह के अंतराल से विज्ञापन जारी करने और 70 वर्ष से अधिक आयु के पत्रकारों को स्थायी अधिमान्यता कार्ड प्रदान करने की घोषणा की। हर साल पांच महिला पत्रकारों को महिला विकास कार्यों पर अध्ययन के लिए फैलोशिप प्रदान की जाएगी। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि पत्रकार समाज को प्राप्त वो आश्वासन है, जिनके होने से सुनवाई सुनिश्चित है। राष्ट्र निर्माण में पत्रकारों के स्याही का अमूल्य योगदान है।
मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि पत्रकार और पत्रकारिता लोकतंत्र के प्राण हैं। मध्यप्रदेश की भूमि से पंडित माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता के पुरोधा बने। इसी धरती पर श्री हरिशंकर परसाई जैसे व्यंग्यकार हुए जिन्होंने समाज को आईना दिखाने का कार्य किया। स्व. श्री वेदप्रताप वैदिक ने हिंदी की प्रतिष्ठा के लिए कार्य किया। स्व. श्री प्रभाष जोशी ने नई भाषा दी। एक दौर था जब स्वतंत्रता आंदोलन में पत्रकारों ने भागीदारी की और परतंत्रता की बेड़ियां तोड़ने का कार्य किया। आपातकाल के खिलाफ भी पत्रकार लड़े। कोविड के कठिन दौर में पत्रकारों ने अपना दायित्व निभाया। पत्रकार समाजसेवी भी होते हैं, उनका सरोकारों से ऐसा रिश्ता होता है, जैसे शरीर और आत्मा का रिश्ता।
मीडिया सेंटर बनेगा पत्रकारिता के छात्रों का गुरूकुल
मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि आज इलेक्ट्रानिक और सोशल मीडिया के दौर में कहीं-कहीं विश्वसनीयता का संकट देखने को मिलता है। संवाद, संचार और सम्पर्क पत्रकारिता के प्राण होते हैं। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने आशा व्यक्त की कि स्टेट मीडिया सेंटर इन पत्रकारों के संवाद, खबरों के संचार और हमारे सम्पर्क का केन्द्र बनेगा। यह केन्द्र पत्रकारिता के छात्रों का गुरूकुल बनेगा। यह केन्द्र वरिष्ठों के अनुभवों और युवाओं की ऊर्जा का उपयोग करेगा। साथ ही पुराने घर की स्मृतियां भी संजोएगा।
पुराने भवन की यादों के साथ नए आंगन में प्रवेश
मुख्यमंत्री श्री चौहान ने पत्रकार भवन की नींव रखने वाले पुरोधा पत्रकारों का स्मरण भी किया और इस पत्रकार भवन में एक युग में पत्रकारों से भेंट और पत्रकार वार्ता आयोजित करने के अपने अनुभव भी साझा किए। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि गत 7 सितम्बर को उन्होंने मुख्यमंत्री निवास में पत्रकार समागम में इस मीडिया सेंटर के संबंध में घोषणा की थी जिसे आज मूर्त रूप देते हुए भूमिपूजन का कार्य सम्पन्न हुआ है। अब पत्रकार बंधु इस मीडिया सेंटर के रूप में पुराने पत्रकार के भवन की यादों के साथ नए आंगन में प्रवेश करेंगे। पत्रकार भवन के पुनर्निर्माण का सपना पूरा होगा। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने प्रदेशभर से पधारे पत्रकारों को स्टेट मीडिया सेंटर के शिलान्यास अवसर पर बधाई और शुभकामनाएं दीं।
जिलों में पत्रकारों को भूखंड प्रदान करने की चल रही है कार्रवाई- जनसंपर्क मंत्री श्री शुक्ल
जनसंपर्क मंत्री श्री राजेंद्र शुक्ल ने स्वागत उद्बोधन में कहा कि आज स्टेट मीडिया सेंटर के शिलान्यास में प्रदेश भर से पत्रकार आए हैं। पत्रकार लोकतंत्र को वरदान बनाने का कार्य करते हैं। उन्हें मूलभूत सुविधाएं प्राप्त होना चाहिए। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने प्रदेश को बीमारू प्रदेश होने की पहचान को समाप्त कर तेजी से विकास कर रहे प्रदेश की पहचान दी है। अब हम नहीं जमाना कहता है कि मध्यप्रदेश विकसित प्रदेश में शामिल हो रहा है। उन्होंने समय-समय पर सभी वर्गों के हित में कदम उठाए हैं। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने पत्रकारों के लिए भी स्वास्थ्य बीमा योजना लागू की जिससे अनेक परिवारों को राहत मिली। गत 7 सितंबर को मुख्यमंत्री निवास में पत्रकार समागम में स्टेट मीडिया सेंटर प्रारंभ करने के साथ पत्रकारों कोजिला स्तर पर भूखंड प्रदान करने की घोषणा की थी। जिलों में पत्रकारों को भूखंड प्रदान करने के लिए आवश्यक कार्यवाही भी प्रारंभ हो गई है। जनसंपर्क विभाग के अधिकारियों को भी लंबे समय से उच्च पद के प्रभार के लिए पात्र अधिकारियों और नये सहायक संचालकों को लंबित वार्षिक वेतन वृद्धि का लाभ दिया जायेगा।
वरिष्ठ पत्रकारों को सम्मान निधि
मुख्यमंत्री श्री चौहान ने आज स्टेट मीडिया सेंटर के शिलान्यास समारोह में प्रदेश के 10 वरिष्ठ पत्रकारों को बढ़ी हुई सम्मान निधि प्रतीक स्वरूप प्रदान की। उल्लेखनीय है कि प्रतिमाह 10,000 के स्थान पर अब 20,000 की राशि का भुगतान सम्मान निधि के अंतर्गत जनसंपर्क विभाग द्वारा किया जा रहा है। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने आज स्टेट मीडिया सेंटर के शिलान्यास समारोह में प्रदेश के जिन वरिष्ठ पत्रकारों को सम्मान निधि प्रदान की उनमें श्री विजय दत्त श्रीधर भोपाल, श्री ओम प्रकाश फरक्या इंदौर, श्री परमानंद तिवारी जबलपुर, श्री देव श्रीमाली ग्वालियर, श्री अंजनी कुमार शास्त्री रीवा, श्री राजेंद्र पुरोहित उज्जैन, श्री सिद्ध गोपाल तिवारी सागर, श्री कमलेश सिंह परिहार चंबल, श्री पंकज पटेरिया नर्मदापुरम और श्री रामावतार गुप्ता शहडोल शामिल हैं।
मुख्यमंत्री श्री चौहान ने पत्रकार भवन परिसर में अनुष्ठान और विधि-विधान पूर्वक स्टेट मीडिया सेंटर के निर्माण के लिए भूमिपूजन किया। उन्होंने शिला पट्टिका का अनावरण भी किया। मंचीय कार्यक्रम का शुभारंभ कन्या पूजन से हुआ। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने मंच पर आते ही प्रदेश के सभी जिलों से आये समस्त पत्रकार बंधुओं का स्वागत किया। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने पौधा भेंट कर वरिष्ठ पत्रकारों को सम्मानित भी किया। कार्यक्रम में स्टेट मीडिया सेंटर की विशेषताओं और पत्रकार कल्याण पर केन्द्रित लघु फिल्म का प्रदर्शन भी किया गया।
प्रत्येक जिले के पत्रकारों से मिले मुख्यमंत्री श्री चौहान
स्टेट मीडिया सेंटर के भूमिपूजन के औपचारिक कार्यक्रम के पश्चात मुख्यमंत्री श्री चौहान ने प्रदेश के जिलों से पधारे प्रिंट मीडिया, इलेक्ट्रानिक मीडिया, सोशल मीडिया से जुड़े पत्रकारों, टी.वी. कैमरा पर्सन और प्रेस छायाकारों से भेंट कर संवाद किया। मुख्यमंत्री श्री चौहान पत्रकारों के साथ भोजन में शामिल हुए।
मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान की अहम घोषणाएं
- मध्य प्रदेश में महिला विकास एवं कल्याण के कार्यों पर अध्ययन करने के लिए माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्वविद्यालय एवं संस्थान द्वारा जनसम्पर्क विभाग के सहयोग से प्रतिवर्ष 5 महिला पत्रकारों को फैलोशिप दी जाएगी।
- प्रदेश में अब 1 महीने के अंतराल से हर छोटे समाचार-पत्र को विज्ञापन देने की व्यवस्था की जाएगी।
- प्रदेश के 70 साल से अधिक की आयु वाले वरिष्ठ पत्रकारों को स्थायी अधिमान्यता कार्ड दिया जायेगा।
- जनसंपर्क विभाग के अधिकारियों को वरिष्ठ पद के प्रभार के आदेश जारी किए जा रहे हैं।
- सहायक संचालक पद पर कार्य कर रहे अधिकारियों की जो वेतन वृद्धि देय है उसके भी आदेश जारी किये जा रहे हैं।
कैसा होगा स्टेट मीडिया सेंटर
भोपाल में स्टेट मीडिया सेंटर का निर्माण 28 करोड़ रुपए की लागत से होगा। यह सर्व सुविधा युक्त मीडिया सेंटर होगा। इस सेंटर में निर्माण एजेंसी मध्यप्रदेश भवन विकास निगम है। अगले दो वर्ष में निर्माण पूर्ण करने का लक्ष्य है। कुल 66 हजार 981 वर्गफीट में तीन मंजिल के भवन में लोअर ग्राउण्ड फ्लोर पर वाहन पार्किंग, ड्रायवर्स रूम, मेंटेनेंस रूम, बैंक, शॉप्स और डिस्पेंसरी निर्माण होगा। ग्राउण्ड फ्लोरपर एक्जीबिशन हॉल, आर्ट गैलरी, मिनी ऑडिटोरियम, प्रेस कॉन्फ्रेंस कक्ष, प्रशासनिक कक्ष, रिसेप्शन कक्ष, कॉरीडोर, बैंक्वेट हॉल, बैंडमिंटन कोर्ट, रेस्टारेंट, टेरिस गार्डन होंगे। प्रथम मंजिल पर लायब्रेरी, प्रेस कॉन्फ्रेंस हॉल, मल्टी मीडिया रूम, लाउन्ज, जिम्नेशियम और इन्डोर गेम हॉल होगा। दूसरे मंजिल पर ओपन टेरिस, वर्किंग स्पेस, केबिन मिनी मीटिंग रूम, क्यूबिकल वर्क स्टेशन होंगे। तीसरी मंजिल पर पत्रकारों के लिए वर्क स्पेस, न्यूज और मीडिया के ऑफिस स्पेस रहेगा।
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सिंधिया जी की पहल से आर्थिक विकास की राह प्रशस्त हुईःडॉ.प्रभुराम चौधरी
भोपाल, 27 जुलाई(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)। प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री डॉ.प्रभुराम चौधरी ने कहा है कि सिंधिया घराना हमेशा जनता की बेहतरी के उपाय करता रहा है यही वजह है कि जनता हमेशा से सिंधिया परिवार के प्रति आशा की निगाह से देखती है। प्रदेश में जब कुछ स्वार्थी तत्वों ने आर्थिक सुधारों की चाल बिगाड़ी तो श्रीमंत ज्योतिरादित्य सिंधिया ने आगे आकर जनता का मार्ग प्रशस्त किया। हम विकास के जिन सिद्धांतों पर अमल कर रहे हैं उससे राज्य को आर्थिक महाशक्ति बनाने में मदद मिलेगी।
स्वास्थ्य मंत्री ने अपने व्यस्त कामकाज के बीच वक्त निकालकर पत्रकार साथियों से कहा कि मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की सरकार तो तिहरे इंजन की सरकार है। मोदी सरकार की नीतियों के साथ शिवराज जी की जन जन से जुडाव की नीतियां और ज्योतिरादित्य सिंधिया के आर्थिक विकास के फार्मूले सभी एक साथ प्रदेश की स्वर्णिम इबारत लिख रहे हैं।
उन्होंने कहा कि जन स्वास्थ्य को बेहतर बनाने के लिए हमने जहां अस्पतालों की व्यवस्थाएं सुधारी हैं वहीं हम दवा सप्लाई का पूरा नेटवर्क खड़ा कर रहे हैं। हमने फार्मा सेक्टर में आ रहे बदलावों के साथ चलने के लिए पूरा खाका तैयार किया है। इससे हम न केवल जनता को सस्ती दवाईयां मुहैया करा पाएंगे बल्कि हम दवा निर्माण का हब भी बनने जा रहे हैं। मोदी जी की सरकार ने मेक इन इंडिया का जो नारा दिया था हम दवा निर्माण के ऐसे फार्मूले लागू कर रहे हैं कि जल्दी ही मध्य प्रदेश दवा निर्माण के लिए दुनिया भर की बड़ी कंपनियों का चहेता राज्य बन जाएगा।
डॉ.प्रभुराम चौधरी ने कहा कि प्रदेश में डाक्टरों की कमी को दूर करने के साथ हम आधुनिक तकनीकों का भी इस्तेमाल कर रहे हैं जिससे लोगों को उनके घरों के आसपास ही स्वास्थ्य सुविधाएं मिलने लगी हैं। जो इलाके छूट गए हैं उन्हें जल्दी ही कवर कर लिया जाएगा। -

आर्थिक सुधारों के साथ चलें तो घर घर बरसेगी खुशहालीःजगदीश देवड़ा
भोपाल,27 जुलाई(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)। मध्यप्रदेश के वित्तमंत्री जगदीश देवड़ा ने प्रदेश के नागरिकों से कहा है कि भारत सरकार जो वित्तीय सुधार लागू कर रही है वे आजादी के बाद से अपेक्षित थे। जनता इन सुधारों के साथ कदमताल करेगी तो जल्दी ही घर घर में खुशहाली फैल जाएगी। कटनी दौरे से लौटने के बाद आज पत्रकारों से मुलाकात में उन्होंने प्रदेश के मजबूत होते वित्तीय ढांचे को लेकर कई संकेत दिए। उन्होंने कहा कि प्रदेश में जिस तरह आधारभूत ढांचे को विकसित किया गया है उसका लाभ प्रदेश की जनता भरपूर उठा रही है। लोगों की अपेक्षाएं बढ़ीं हैं और सरकार उन्हें पूरा करने का हर संभव प्रयास कर रही है।
पत्रकारों के सवालों के जवाब में हरफन मौला वित्तमंत्री श्री देवड़ा ने कहा कि आर्थिक चुनौतियों के बीच जिन परिवारों की समरसता बिगड़ रही है उन्हें हमारी सांस्कृतिक विरासत से प्रेरणा लेनी चाहिए। हमारे देश में बचत की परंपरा बहुत मजबूत रही है अब हमें अपने आर्थिक संसाधनों को बढ़ाने के तरीके सीखना होंगे। भारत सरकार की वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने टैक्स में छूट की जो सीमा बढ़ाई है उससे काली अर्थव्यवस्था समाप्त होगी। भारत का विदेशी व्यापार संतुलन सुधरेगा और लोगों की आय बढ़ेगी।सबसे बड़ी बात है कि लोगों के जीवन में सुकून बढ़ेगा अब तक जिन छोटे और मध्यम आयवर्ग के लोगों को अपनी आय छिपानी पड़ती थी वे अब बेखौफ होकर अपना जीवनयापन कर पाएंगे।
वित्तमंत्री ने कहा कि केन्द्र सरकार ने जिस तरह माईक्रोफाईनेंस और सूक्षम व लघु उद्योगों को अवसर दिए हैं, किसानों के लिए एफपीओ गठित किए हैं, सहकारिता के क्षेत्र को मजबूत बनाया है उससे जल्दी मुद्रा निर्माण बढ़ेगा और देश की क्षमताओं का उचित प्रतिफल हम जन जन तक पहुंचा पाएंगे। उन्होंने कहा कि लोग वित्तीय प्रबंधन की बारीकियां समझ रहे हैं और सरकार पर उनकी निर्भरता घट रही है। हमारा प्रयास है कि लोग लाचार न रहें और वे अपने हुनर का इस्तेमाल करके खूब समृद्धि हासिल करें।
एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश सरकार कुशल वित्तीय प्रबंधन के माध्यम से जनता को लाभ पहुंचाने वाले वित्तीय संस्थानों की पहचान कर रही है और उन्हें भरपूर संरक्षण भी दे रही है। हम ढर्रे की सोच से बाहर निकलना चाहते हैं। प्रदेश की पुरानी परंपराओं के साथ हमने कई ऐसे नवाचार भी किए हैं जो आज जनता की समृद्धि के प्रकाश स्तंभ बनते जा रहे हैं। -

सरकारी कालेजों को दुबारा बजट देकर किसने किया भ्रष्टाचार
भोपाल, 21 जुलाई,(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर) उच्च शिक्षा विभाग के महाविद्यालय जोकि शिक्षा की सबसे ऊंची इकाई मानी जाती है,उनकी गरिमा ताक पर रखकर नियम विरुद्ध प्रक्रियाओं से उन्हें भ्रष्टाचार का केंद्र बनाया जा रहा है | उच्च शिक्षा विभाग ने अपने पत्र क्रमांक 291/272/आउशि/योजना/2023 दिनांक 6.6.23से महाविद्यालयों की एक सूची प्रकाशित की थी जिसमें यह निर्देश दिए गए थे की जो महाविद्यालय विश्व बैंक पोषित योजना ऑब्लिक रूसा योजना अंतर्गत आ रहे हैं उन कॉलेजों को प्रस्ताव नहीं भेजना है इन महाविद्यालयों को सम्मिलित नहीं किया जाएगा इसका प्रमाण पत्र भी कॉलेजों से मंगवाया गया था उसके बावजूद उन्हीं कॉलेजों को दुबारा बजट आवंटन कर दिया गया I जिन कॉलेजों पिपरई, मंदसौर पी जी कॉलेज , मंदसौर गर्ल्स ,नलखेडा , दालोदा को पिछले साल बजट आवंटित हुआ था उन्हें इस बार फिर बजट आबंटित कर दिया गया। उच्च अधिकारियों ने ही इस प्रक्रिया को डबल अपनाने के आदेश जारी किए हैं।
यह प्रक्रिया प्रदेश के उच्च शिक्षा विभाग के अधिकांश महाविद्यालयों में एक जैसी की जा रही है और एक ही व्यक्ति विशेष फर्म एवं अधिकारियों को लाभ दिलाने की दृष्टि से यह कार्य किया जा रहा है| उच्च शिक्षा विभाग द्वारा वर्तमान में नामली ,जीरन,रावती ,अजयगढ़,मंदसौर , पवई,पिपरई , जैतवारा ,नलखेडा ,दलोदा एवं अन्य महाविद्यालयों को बजट आवंटित किया गया है निविदा की शर्त निम्नानुसार है :-1.सभी महाविद्यालय की निविदा में निविदाकारो से समस्त उत्पादों कि टेस्ट रिपोर्ट थर्ड पार्टी अन्य लैब से चाही गयी है, जबकि निर्माता द्वारा प्रदाय किये जा रहे उत्पादों को निर्माता कंपनी द्वारा अपनी टेस्टिंग लैब में टेस्ट करवाकर ही सप्लाई कर दिया गया। निविदा में न्यूनतम दर आने वाली फर्म को सामान देने के पूर्व थर्ड पार्टी इंस्पेक्शन/विभाग की तकनीकी समिति से कराना होता है I
2.सभी महाविद्यालय कि निविदा में निविदाकार का पास्ट एक्सपीरियंस 50% मांगा गया है जिसमे बिड वैल्यू नहीं दर्शायी गई है। जिससे निविदाकार का पास्ट एक्सपीरियंस 50% उपकरणों कि संख्या के आधार पर आकलन होना है I जबकि आश्चर्य की बात यह है कि निविदा कि अतिरिक्त निविदा बिंदु क़ 6 की शर्तो में निविदाकार द्वारा पिछले 3 वर्षों में ₹ 1 करोड़ का एकल ऑर्डर एवं ₹ 47- 47 लाख रुपए के पृथक – पृथक दो आर्डर उपलब्ध कराने होंगे नहीं तो निविदा पत्रक के अभाव में अमान्य कर दी जावेगीI
- जेम पोर्टल पर उपलब्ध निविदा क्रमांक GEM/2023/B/3669315 DT. 11.7.23, GEM/2023/B/3669485, DT. 11.7.23, GEM/2023/B/3668564 DT.10.7.23 , GEM/2023/B/3667558 DT.11.7.23 , GEM/2023/B/3667559 Dt.11.7.2023 को प्रकाशित हुई | जिसमें GEM/2023/B/3669315 DT. 11.7.23 निविदा में विभाग का नाम डिपार्टमेंट ऑफ हायर एजुकेशन प्रदर्शित हो रहा है एवं निविदा में ऑर्गेनाइजेशन का नाम गवर्नमेंट कॉलेज ऑफ़ मध्य प्रदेश प्रदर्शित है, निविदा के प्रपत्र में कहीं भी महाविद्यालय का नाम प्रदर्शित नहीं हो रहा है और उच्च शिक्षा विभाग में कोई भी ऐसा महाविद्यालय नहीं है जिसका नाम गवर्नमेंट कॉलेज ऑफ़ मध्य प्रदेश हैI निविदा में धरोहर राशि की मांग की गई है जिसमें बेनेफिशरी के नाम के लिए गवर्नमेंट कॉलेज ऑफ़ मध्य प्रदेश के नाम पर धरोहर राशि जमा करनी है , निविदा में महाविद्यालय का ऐसा कोई भी खाता नंबर नहीं है जिसमें यह राशि जमा की जा सके निविदाकारों के साथ मिलकर महाविद्यालय के अधिकारी/कर्मचारी एवं संस्था विशेष लोगो द्वारा राशी कि बंदरबांट करने का प्रयास किया जा रहा है |
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भाजपा ने प्रदेश में जो विकास किया वो कांग्रेस के पोस्टरों से नहीं छिपेगा : विष्णुदत्त शर्मा
भोपाल,24 जून(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)।जनता ने जब कांग्रेस के कुशासन को खारिज करके 2003 में भाजपा को सत्ता सौंपी तबसे लेकर अब तक उसने प्रदेश को सम्मान, समृद्धि और विकास की हर कसौटी पर अव्वल बनाया है। पहले मध्यप्रदेश दुरावस्था का शिकार और बीमारू राज्य था। भ्रष्टाचार का बोलबाला था । सड़क, बिजली, पानी के लिए जनता तरस रही थी। मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान के नेतृत्व वाली भाजपा की सरकार ने प्रदेश को उस स्थिति से निकाल कर विकसित प्रदेश बनाया। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ के अपने ही लोगों ने जिस तरह से उनके भ्रष्टाचार का कच्चा चिट्ठा खोला है, उससे बौखलाई कांग्रेस मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान पर अनर्गल आरोप लगा रही है। लेकिन कांग्रेस अपने इन कुत्सित प्रयासों से न तो अपने भ्रष्टाचार को छिपा सकती है और न ही भाजपा सरकार के प्रयासों से किए गए विकास को झुठला सकती है। कांग्रेस ने अपनी हरकत से प्रदेश में हुए विकास के अपमान का जो प्रयास किया है, उसका जवाब प्रदेश की जनता देगी। यह बात भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष व सांसद विष्णुदत्त शर्मा ने शनिवार को प्रदेश कार्यालय में पत्रकार वार्ता को संबोधित करते हुए कही।
प्रदेश अध्यक्ष श्री शर्मा ने कहा कि हाल ही में शहर में कुछ ऐसे पोस्टर लगे थे, जिनमें प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ को करप्शननाथ बताया गया था और पोस्टर को स्कैन करने पर उनके भ्रष्टाचार का कच्चा-चिट्ठा सामने आ जाता था। कांग्रेस इस पोस्टर से बौखला गई है, लेकिन उसे इस घटना के बारे में गंभीरता से विचार करना चाहिए। यह सोचना चाहिए कि इस घटना के बारे में पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजयसिंह या नेता प्रतिपक्ष डॉ. गोविंद सिंह की कोई प्रतिक्रिया क्यों नहीं आई? कांग्रेस को यह विचार करना चाहिए कि कहीं यह पार्टी में चल रहे अंतर्द्वंद और नेताओं के बेटों के बीच चल रही लड़ाई का परिणाम तो नहीं है?
प्रदेश अध्यक्ष विष्णुदत्त शर्मा ने कहा कि मि. बंटाढार के जमाने में प्रदेश की दुरावस्था किसी से छिपी नहीं है। बाद में 15 महीनों के लिए बनी कांग्रेस की सरकार ने गरीबों के हक छीने। जनहित की सारी योजनाएं बंद कर दीं। इंदौर में आईफा अवार्ड के लिए करोड़ों का प्रावधान किया, लेकिन मैचिंग ग्रांट न होने का बहाना बनाकर लाखों प्रधानमंत्री आवास लौटा दिए और गरीबों के सिर से छत छीन ली। श्री शर्मा ने कहा कि कांग्रेस सरकार के भ्रष्टाचार की स्वीकारोक्ति तो स्वयं कांग्रेस के एक प्रधानमंत्री ने यह कहते हुए दी थी कि हम दिल्ली से 1 रुपया भेजते हैं, तो संबंधित व्यक्ति तक 15 पैसा ही पहुंचता है। उन्होंने कहा कि अगर पोस्टर में कमलनाथ जी को करप्शननाथ लिखा गया था, तो इसमें गलत क्या है? प्रदेश की जनता यह जानना चाहती है कि प्रवीण कक्कड़ और आरके मिगलानी के यहां से छापे में जो 281 करोड़ रुपये नकद मिले थे, वो कहां से आए? श्री शर्मा ने कहा कि कांग्रेस की सरकार के समय में वरिष्ठ नेता डॉ. गोविंद सिंह और कुछ कैबिनेट मंत्रियों ने ही यह आरोप लगाए थे कि सरकार भ्रष्टाचार में आकंठ डूबी है और उसका पैसा ऊपर तक जाता है। श्री शर्मा ने कहा कि कमलनाथ को यह बताना चाहिए कि उनकी सरकार ने 7 बांध और नहर परियोजनाओं के काम से पहले 877 करोड़ रुपये का भुगतान क्यों किया? ई-टेंडर मामले की आरोपी कंपनी को 244 करोड़ और जनसंपर्क को 131 करोड़ क्यों दिए थे?
श्री शर्मा ने कहा कि आज प्रदेश में सड़कों का जाल बिछा है और बिजली सरप्लस है। मि. बंटाढार के समय प्रदेश में सिर्फ 7 लाख हेक्टेयर में सिंचाई होती थी, आज 45 लाख हेक्टेयर में सिंचाई हो रही है। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी की सरकार ने केन-बेतवा लिंक परियोजना के लिए 44605 करोड़ रुपये का प्रावधान किया है, जिससे सूखा बुंदेलखंड अब हरा-भरा और समृद्ध होगा। मि. बंटाढार के समय प्रदेश का बजट जहां 23161 करोड़ था, उसे श्री शिवराजसिंह चौहान की सरकार ने 3.14 लाख करोड़ से ऊपर पहुंचा दिया है। प्रदेश की आर्थिक वृद्धि दर जो उस समय 4.4 प्रतिशत थी, आज 16.43 प्रतिशत है। प्रदेश का सकल घरेलू उत्पाद 71594 करोड़ रुपये से बढ़कर 1322821 करोड़ रुपये हो गया है। प्रतिव्यक्ति आय 11718 रुपये से 1,40,583 करोड़ रुपये हो गई है। श्री शर्मा ने कहा कि भाजपा की केंद्र और राज्य सरकार हर गरीब का जीवन बदलने का अभियान चला रही हैं और इसी अभियान के अंतर्गत प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी 1 करोड़ से अधिक आयुष्मान कॉर्ड वितरित करेंगे, ताकि गरीबों को मुफ्त उपचार मिल सके। उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने जिस तरह झूठ, छल कपट का सहारा लिया था, उससे प्रदेश के किसान डिफाल्टर हो गए थे। इन किसानों के 2100 करोड़ रुपये प्रदेश की शिवराज सरकार ने चुकाये हैं। श्री शर्मा ने कहा कि भाजपा की सरकारें गुड गवर्नेंस, सेवा के भाव, गरीब कल्याण और विकास के मंत्र पर काम कर रही हैं और इन नीतियों से प्रदेश की जिस गरीब जनता के चेहरे पर मुस्कान खिली है, वही जनता कांग्रेस को उसकी हरकत का जवाब देगी।
प्रदेश अध्यक्ष श्री शर्मा ने कहा कि आज का दिन मध्यप्रदेश और पूरे देश के लिए बड़ा महत्वपूर्ण दिन है। भारतीय इतिहास में आज ही के दिन रानी दुर्गावती का बलिदान हुआ था। श्री शर्मा ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी कहते हैं कि देश का चहुंमुखी विकास करेंगे, लेकिन विकास के साथ ही अपनी विरासत को भी संजोकर रखेंगे। श्री शर्मा ने रानी दुर्गावती को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि भारतीय जनता पार्टी की यही सोच उसके निर्णयों में भी परिलक्षित होती है। मध्यप्रदेश में हमारी सरकार ने ऐसे जनजातीय क्रांतिवीरों, योद्धाओं और महानायकों की स्मृतियों को संजोने के लिए कदम उठाए हैं, जिनका देश की आजादी व भारतीय इतिहास में बड़ा योगदान रहा है। इसी को देखते हुए जनजातीय गौरव दिवस मनाने की शुरूआत की गई।
प्रदेश अध्यक्ष श्री शर्मा ने कहा कि प्रदेश भाजपा के लिए 27 जून बहुत ही महत्वपूर्ण है। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी अपनी अमेरिका की ऐतिहासिक यात्रा पूरी करके भारत आएंगे और उसके बाद उनका पहला दौरा भोपाल का होगा। यहां पार्टी कार्यकर्ता रोड शो के माध्यम से उनका स्वागत करेंगे, जिसकी तैयारियां चल रही हैं। प्रधानमंत्री भोपाल में मेरा बूथ सबसे मजबूत के संकल्प को लेकर देश के 3 हजार बूथ कार्यकर्ताओं से संवाद करेंगे। इस दौरान प्रधानमंत्री देश के 10 लाख बूथों से डिजिटली जुड़े रहेंगे। यहां से प्रधानमंत्री जी शहडोल जाएंगे, जहां रानी दुर्गावती गौरव यात्रा का समापन करेंगे और आयुष्मान हितग्राहियों को कार्ड का वितरण करेंगे। इससे पहले 26 जून को राष्टीय अध्यक्ष जेपी नड्डा भोपाल आएंगे। श्री शर्मा ने कहा कि प्रधानमंत्री जी और राष्ट्रीय अध्यक्ष के स्वागत के लिए प्रदेश का एक-एक कार्यकर्ता उत्साहित और आतुर है। मध्यप्रदेश की धरती पर उनका भव्य एवं ऐतिहासिक स्वागत किया जाएगा। -

बाजार बैठकी से ठेकेदार बाहर, रोज नहीं होगी वसूली
भोपाल,15 जून( प्रेस इंफार्मेशन सेंटर) नगरीय विकास एवं आवास मंत्री भूपेन्द्र सिंह ने सभी नगरपालिक निगम आयुक्तों और मुख्य नगरपालिका अधिकारियों को निर्देशित किया है कि ठेकेदारों के माध्यम से बाजार बैठकी-तहबाजारी शुल्क की वसूली नहीं की जाए। साथ ही इसकी प्रतिदिन वसूली भी नहीं होना चाहिए। उल्लेखनीय है कि मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान द्वारा 29 मई 2023 को हाथठेला, फेरी एवं रेहड़ी वालों की महापंचायत में हितग्राहियों के अनुरोध पर बाजार बैठकी-तहबाजारी शुल्क की प्रतिदिन की वसूली और वसूली में ठेकेदारी प्रथा को बंद करने की घोषणा की गई थी।

मंत्री श्री सिंह ने कहा है कि जिन नगरीय निकायों में बाजार बैठकी-तहबाजारी शुल्क की प्रतिदिन वसूली के लिये ठेके किये गये हैं, उन्हें प्राप्त होने वाली आय का आकलन करके शेष अवधि के लिये ठेके निरस्त करने की कार्यवाही परिषद की बैठक में की जाए। साथ ही बैठक में प्रतिदिन वसूली के स्थान पर अर्द्धवार्षिक-वार्षिक दरों का निर्धारण किया जाए। की गई कार्यवाही की जानकारी समय-सीमा में आयुक्त नगरीय प्रशासन एवं विकास को भेजने के निर्देश भी दिए गए हैं।
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जनजातीय ग्रामसभाओं की ताकत है पेसा एक्टःशिवराज
भोपाल 2 जून(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)। मुख्यमंंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा है कि बड़ा देव भगवान में हमारी गहरी आस्था और श्रद्धा है। सीधी जिले के कुसमी गौरव दिवस पर बड़ा देव भगवान के नव-निर्मित मंदिर में बड़ा देव भगवान की मूर्ति की प्राण-प्रतिष्ठा कार्यक्रम में शामिल होते हुए हृदय प्रफुल्लित है। मुख्यमंत्री ने भगवान बड़ा देव से प्रदेशवासियों के सुख-समृद्धि और निरंतर प्रगति-पथ पर अग्रसर होने की कामना की। मुख्यमंत्री श्री चौहान सीधी जिले के कुसमी गौरव दिवस पर बड़ा देव मूर्ति कुसमी की प्राण-प्रतिष्ठा के अवसर पर जनजातीय सम्मेलन को छतरपुर में वीडियो कांफ्रेंसिंग से संबोधित कर रहे थे।
मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि प्रदेश में पेसा एक्ट से जनजातीय विकासखंडों की ग्राम सभाओं को अधिकार सम्पन्न बनाया गया है। प्रदेश की 268 ग्राम सभाएँ स्वयं तेंदूपत्ता तुड़ाई का कार्य कर रही हैं। ग्राम सभाओं को गाँव में शराब की दुकान खोलने का फैसला करने का अधिकार दिया गया है। गाँव में छोटे-छोटे विवादों के निराकरण के लिए शांति और विवाद निवारण समितियाँ बनी हैं। गाँव से यदि किसी श्रमिक को काम के लिए बाहर ले जाया जाता है तो उसकी सूचना ग्राम सभा को देनी होती है।
मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि प्रदेश सरकार सभी वर्गों के विकास के लिए निरंतर कार्य कर रही है। महिलाओं के आर्थिक स्वावलंबन के लिए मुख्यमंत्री लाड़ली बहना योजना में 10 जून से प्रत्येक पात्र बहन के खाते में एक हजार रूपये डाले जाएंगे। इससे बहनों को अपनी छोटी-छोटी जरूरतों के लिए किसी के आगे हाथ नहीं फैलाना पड़ेगा। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी द्वारा गरीबों के कल्याण के लिए अनेक योजनाओं का संचालन किया जा रहा है। सभी को निःशुल्क खाद्यान्न, प्रधानमंत्री आवास योजना से पक्का आवास, बीमारी पर आयुष्मान कार्ड से निःशुल्क इलाज की सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है। प्रदेश में मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना से बेटियों का धूमधाम से विवाह संपन्न किया जा रहा है। किसानों को केंद्र तथा राज्य सरकार द्वारा प्रतिवर्ष 10 हजार रुपये की सम्मान निधि दी जा रही है। मुख्यमंत्री ने कहा कि वे भगवान बड़ा देव की प्रेरणा से निरंतर प्रदेशवासियों की प्रगति के लिए कार्य करते रहेंगे।
जनजातीय कार्य एवं अनुसूचित जाति कल्याण तथा सीधी जिले की प्रभारी मंत्री सुश्री मीना सिंह ने कहा कि मुख्यमंत्री श्री चौहान के कुसमी प्रवास के दौरान जनजातीय समुदाय के लोगों द्वारा भगवान बड़ा देव के मंदिर निर्माण तथा मूर्ति की प्राण-प्रतिष्ठा की माँग की गई थी। मुख्यमंत्री द्वारा पूरी श्रद्धा से माँग को पूरा करते हुए मंदिर का निर्माण कराया गया है।
कार्यक्रम में मुख्यमंत्री लाड़ली बहना योजना के हितग्राहियों को स्वीकृत-पत्र वितरित किए गए। साथ ही कुसमी क्षेत्र के विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले नागरिकों को सम्मानित किया गया।
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स्ट्रीट वेंडर्स से अब रोज वसूली नहीं होगी
भोपाल, 29 मई( प्रेस इंफार्मेशन सेंटर) मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि मध्यप्रदेश में कहीं भी किसी भी नगर में स्ट्रीट वेंडर्स से रोज शुल्क वसूली नहीं होगी, यह तत्काल बंद की जाएगी। स्ट्रीट वेंडर्स के रजिस्ट्रेशन के लिए नाममात्र का शुल्क लिया जाएगा। आपकी जिंदगी को आसान बनाने के लिए कोई कमी नहीं छोड़ी जाएगी। हाथठेला लगाने के लिए व्यवस्थित और उपयुक्त स्थान तैयार किए जाएंगे। गरीबों की जिंदगी में खुशियाँ लाने का प्रयास हमेशा जारी रहेगा। हाथ ठेला रोजी-रोटी का साधन है। आज मैं तत्काल प्रभाव से निर्देश दे रहा हूँ कि कोई भी हाथ ठेला जब्त नहीं होगा। इसके लिए नगरीय प्रशासन विभाग द्वारा नियम बना दिए जाएँ। जिनके पास हाथ ठेला नहीं है उनको सब्सिडी पर हाथ ठेला देने की योजना बनाई जाएगी। इसके लिए सरकार 5 हजार रूपए सब्सिडी देगी। गरीबों की तकलीफों को दूर करना शिवराज का धर्म है। मुख्यमंत्री श्री चौहान, मुख्यमंत्री निवास पर नगरीय क्षेत्र के हाथ ठेला चालक, फेरी एवं रेहड़ी वालों की महापंचायत को संबोधित कर रहे थे।
मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा है कि स्ट्रीट वेंडर्स मेहनतकश भाई-बहन हैं। अपना खून-पसीना एक कर रोजी-रोटी कमाते हैं। आप श्रम साधक हैं, आपके बिना दुनिया नहीं चल सकती है। आप घर-घर पहुँच कर लोगों को सामान की बिक्री करते हैं। जरूरत की हर छोटी-बड़ी चीज आसानी से लोगों तक पहुँचाते हैं।
मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि गाँव से शहर में आने वाले गरीबों के रहने की व्यवस्था की जाएगी। माफिया से छुड़ाई गई 23 हजार एकड़ जमीन पर गरीबों को पट्टा दिया जाएगा। जनता की तकलीफों को दूर करना सरकार का धर्म है। मुख्यमंत्री लाड़ली बहना योजना में 1000 रूपए हर महीना बहनों के खाते में डाले जायेंगे। संबल योजना का लाभ मिलता रहेगा। इस योजना में महिलाओं के पोषण, बच्चों की पढ़ाई, इलाज, शादी, दुर्घटना में मृत्यु पर सहायता की व्यवस्था की गई है। सभी पात्रों को योजना में शामिल कर लाभान्वित किया जाएगा। उन्होंने कहा कि बिना किसी भेदभाव के योजनाओं का लाभ मिलेगा। बारहवीं पास बच्चों को अलग-अलग संस्थाओं में काम सीखने के लिए भेजने की व्यवस्था की जाएगी। उनको काम सीखने के दौरान प्रतिमाह 8 हजार रूपए भी दिए जायेंगे। मैं आपके परिवार का सदस्य की तरह हूँ । इसलिए आपको योजनाओं का लाभ देने के लिए पंचायत बुलाई गई है। सामाजिक क्रांति लाकर स्ट्रीट विक्रेताओं की हालत को बदल दिया जाएगा। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि कमजोर नहीं ताकतवर बनें। इसके लिये जरूरी है कि संगठित होकर काम करें। अपना एक संगठन बनायें। हाथठेला में कचरा पेटी रखें और सोलर बेट्री लगायें। शराब नहीं पियें।
मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कन्या-पूजन और दीप प्रज्ज्वलित कर महापंचायत का शुभारंभ किया। उन्होंने पुष्प-वर्षा कर स्ट्रीट वेंडर्स का स्वागत किया। स्ट्रीट वेंडर्स की ओर से मुख्यमंत्री श्री चौहान को तुलसी का पौधा भेंट किया गया। लाड़ली बहना योजना की पात्र बहनों ने धन्यवाद-पत्र भेंट किया। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने पीएम स्व-निधि योजना में प्रतीकस्वरूप हितग्राहियों को लाभान्वित किया। प्रदेश में योजना से कुल 51 हजार हितग्राही लाभान्वित किए गए हैं।
नगरीय विकास एवं आवास मंत्री भूपेन्द्र सिंह ने कहा कि हाथठेला-चालक और पथ-विक्रेताओं के लिये शहरों में हॉकर्स जोन बनाये जाना चाहिये। उन्हें शासन की सभी जन-कल्याणकारी योजनाओं का लाभ मिले। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कोरोना काल में लगातार पथ-विक्रेताओं की चिंता की। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने पीएम स्व-निधि योजना लागू कर कोरोना काल में पथ-विक्रेताओं को बहुत बड़ी राहत दी। इस योजना में मध्यप्रदेश देश में नम्बर-1 है। योजना में 9 लाख 50 हजार रजिस्ट्रेशन हुए हैं। इनमें से 7 लाख एक हजार पथ-विक्रेताओं को योजना का लाभ दिया जा रहा है। आज पूरे प्रदेश में 51 हजार पथ-विक्रेताओं को ऋण स्वीकृति-पत्र वितरित किये जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री के निर्देशानुसार स्टॉम्प शुल्क 2500 के स्थान पर मात्र 50 रूपये लिया जा रहा है।
नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग के आयुक्त भरत यादव ने योजना के उद्देश्यों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि हितग्राहियों को 10 हजार, 20 हजार और 50 हजार रूपये का ब्याजमुक्त ऋण दिया जाता है। पथ-विक्रेताओं से उनकी समस्याओं की भी जानकारी ली जा रही है। नगरपालिक निगम भोपाल की महापौर श्रीमती मालती राय ने आभार माना। विधायक रामेश्वर शर्मा और श्रीमती कृष्णा गौर, प्रमुख सचिव नगरीय विकास एवं आवास नीरज मण्डलोई और बड़ी संख्या में पथ-विक्रेता और रेहड़ी वाले उपस्थित थे।
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सिविल सेवकों का जीवन सिर्फ अपने लिए नहीं, अपनों के लिए होता है : मुख्यमंत्री श्री चौहान
भोपाल,21 अप्रैल(अशोक मनवानी )। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने सिविल सेवकों से कहा कि आपका जीवन सिर्फ अपने लिए नहीं अपनों के लिए होता है। जन-कल्याण सबसे बड़ी प्राथमिकता होती है। आम जनता से जुड़े छोटे-छोटे कार्य, वास्तव में बड़े-बड़े कार्य होते हैं। सिविल सेवक इन कार्यों को समय पर पूरा करवा लें, यही सुशासन है। मुख्यमंत्री श्री चौहान आज आर.सी.वी.पी. नरोन्हा प्रशासन एवं प्रबंधकीय अकादमी, भोपाल के सभा कक्ष में सिविल सर्विस-डे के शुभारंभ कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि हमारा मूल काम समाज सेवा है। हम जो भी कार्य करते हैं, आम नागरिकों के लिए ही होता है। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने टीम मध्यप्रदेश को सिविल सेवा दिवस की बधाई और शुभकामनाएँ दी। सिविल सेवा दिवस पर हुए इस विशेष कार्यक्रम के मुख्य अतिथि शिक्षाविद, लेखक इन्फोसिस के पूर्व सदस्य और वर्तमान में मणिपाल ग्लोबल एजुकेशनल के अध्यक्ष श्री मोहनदास पाई थे।
मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि सिविल सर्विस-डे का अर्थ यही है कि हम लोक सेवक हैं और देश की सेवा हमारा मुख्य उद्देश्य है। लोकतंत्र में जनता का, जनता के लिए और जनता द्वारा शासन होता है। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि सिविल सेवा दिवस 2023 की थीम “विकसित भारत, नागरिकों को सशक्त करना और अंतिम व्यक्ति तक पहुँचना है।” उन्होंने टीम मध्यप्रदेश को बधाई देते हुए कहा कि उन्हें गर्व है कि सबने मिल कर मध्यप्रदेश को समृद्ध और विकसित बनाने में बहुत महत्वपूर्ण योगदान दिया है। टीम मध्यप्रदेश ने जुट कर कार्य किया है। मध्यप्रदेश में तेजी से सकारात्मक परिवर्तन आया है। सिंचाई की क्षमता को हमने आश्चर्यजनक रूप से साढ़े 7 लाख हेक्टयर से बढ़ा कर 45 लाख हेक्टेयर तक पहुँचा दिया है। इसे क्रास कर अब 65 लाख हेक्टेयर पर काम करेंगे। आज 4 लाख किलोमीटर सड़कें प्रदेश में बन चुकी हैं। किसी समय यह सिर्फ 71 हजार किलोमीटर हुआ करती थी और टूटी-फूटी हालत में होती थी। अब प्रदेश में शानदार सड़कें हैं। प्रदेश में ऊर्जा सहित विभिन्न क्षेत्रों में अद्भुत कार्य हुआ है। प्रदेश में अच्छे संसाधन हैं, इसलिए हम कार्य कर पा रहे हैं। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि प्रदेश में निर्माण विभाग भी सक्रिय रहे। मध्यप्रदेश की गिनती आज विकसित प्रांतों में है, मध्यप्रदेश बीमारू नहीं है। इसका श्रेय टीम मध्यप्रदेश के असाधारण परिश्रम को है। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि आम जन के बिना हमारा कार्य नहीं होता, हम हितग्राही तक पहुँच जाते हैं। प्रदेश में विकास यात्राएँ जन- कल्याण यात्राएँ बन गई।
मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि प्रदेश में अधो-संरचना की बात करें तो यह देखने को मिलता है कि काफी सकारात्मक परिवर्तन आया है। कृषि उत्पादन में कई गुना वृद्धि हुई है। अनाज के भंडार भरे हैं। प्रति व्यक्ति आय बड़ी है। देश की जीएसडीपी में मध्यप्रदेश का योगदान बढ़ा है। वर्ष 2005-06 में प्रदेश में का बजट आकार 25 हजार करोड़ होता था, वो बढ़ कर वर्ष 2012-13 में एक लाख करोड़, वर्ष 2020-21 में दो लाख करोड़ और इस बार 3 लाख करोड़ को पार कर गया है, यह आसान बात नहीं है। असाधारण उपलब्धि है। मध्यप्रदेश ने तुलनात्मक रूप से लम्बी छलांग लगाई है, जिसका श्रेय टीम मध्यप्रदेश को जाता है।
सुशासन से जनता और प्रशासन की दूरी हुई है समाप्त
मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि प्रदेश में जनता और प्रशासन के बीच की दूरी समाप्त की गई है, जो सुशासन के प्रयासों से संभव हुआ है। मुख्यमंत्री जन-सेवा अभियान से केन्द्र और राज्य सरकार की योजनाओं से 83 लाख से अधिक हितग्राहियों को जोड़ने में सफलता मिली। हमारे कार्यक्रम जनता के कार्यक्रम बन गए। जनता की निर्णयों में भी भागीदारी हो गई है। आगामी 10 से 25 मई तक समस्याओं के निराकरण के लिए पुन: अभियान संचालित किया जाएगा। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि सिविल सेवकों को यह चुनौती स्वीकार करना है कि नागरिकों को अपने कामों के लिए भटकना न पड़े। गाँव और शहरों के वार्डों में शिविरों के माध्यम से समस्याएँ हल की जाएँ। सीएम हेल्प लाइन सहित सुशासन की दिशा में अनेक उपायों को लागू किया गया। जन सुनवाई, वन-डे गर्वेनेंस और समाधान ऑनलाइन ऐसे ही उपाय हैं। इनको तकनीकी से जोड़ कर कार्यों के निपटारे के साथ सामने आने वाली विसंगतियों को भी दूर करने पर ध्यान देना है। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने गीता के श्लोकों के माध्यम से सिविल सेवक की भूमिका कैसी हो, इसका विस्तारपूर्वक उल्लेख भी किया।
मध्यप्रदेश में सुशासन और अधिकारियों की श्रेष्ठ भूमिका
मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि मध्यप्रदेश में सुशासन के क्षेत्र में निरंतर कार्य हुआ है। बुरहानपुर में हर घर जल पहुँचाने और गति शक्ति प्रोजेक्ट के क्रियान्वयन के कार्य हुए हैं। प्रदेश में अनेक नवाचार भी प्रशासनिक स्तर पर हुए हैं। अधिकांश सिविल सेवक श्रेष्ठ भूमिका का निर्वहन करते हुए सरकार की जन-कल्याणकारी नीतियों को जमीन पर उतारने का कार्य कुशलता से कर रहे हैं। प्रदेश के सिविल सेवक तेजी से क्रियान्वयन का गुण भी रखते हैं, मुख्यमंत्री लाड़ली बहना योजना बनने के बाद दो माह में आवश्यक वातावरण निर्माण और एक करोड़ से अधिक पंजीयन इसका उदाहरण है।
मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि सिविल सेवक एक लीडर भी हैं और उनका दायित्व सभी को सम दृष्टि से देख कर सबका उत्साह भी बढ़ाना है। व्यक्ति में अहंकार न हो। उत्साह में कमी न हो। धैर्य के साथ समस्याओं के समाधान का रास्ता निकाला जाए। मनोवृत्ति यह होना चाहिए कि किसी निराशा से घिरे व्यक्ति को भी उत्साहित कर दें। व्यक्ति जैसा सोचता है वैसा बन भी जाता है। सिविल सेवक सिर्फ अपने लिए कार्य नहीं करता बल्कि उसके कार्य से जनता और पूरा देश प्रभावित होता है। अप्रासंगिक कार्य को भी प्रासंगिक बनाने की कला होना चाहिए। एक व्यक्ति चाहे तो देश के प्रति विश्व की धारणा बदल सकता है। यह बात समस्त देशवासियों ने अनुभव की है। इसी तरह एक सिविल सेवक सही दिशा में कार्य कर विभाग को बदल सकता है। सिविल सेवक अधिकतम योगदान देने का प्रयास करें। इसलिए सिविल सेवाएँ सिर्फ व्यक्ति के लिए न होकर, राष्ट्र के लिए उपयोगी मानी गई हैं।
आनंद और प्रसन्नता के साथ करें कार्य
मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि स्वामी विवेकानंद ने मनुष्य को अनंत शक्तियों का भंडार बताया है। किसी कार्य में पूरी तरह प्रयत्न करना आवश्यक है। यदि एक बार सफल नहीं हुए तो पुन: प्रयास करना ही चाहिए। समय का भी सद्पयोग करना चाहिए। एक-एक क्षण कीमती है। जब तक व्यक्ति का जीवन है, दूसरों की जिन्दगी को बेहतर बनाने के लिए हर पल का उपयोग किया जाए। प्राय: धन-दौलत से सुख प्राप्त नहीं होता। ईमानदारी पूर्वक कार्य करने से अच्छे परिणाम निकलते हैं। कोरोना काल में अधिकारियों ने जिस जज्बे से कार्य किया वो गर्व करने लायक है। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने सिविल सेवकों से आहवान किया कि आनंद और प्रसन्नता से कार्य करें। परिवार में सभी सदस्यों का ध्यान रखते हुए मनोयोग पूर्वक अपने शासकीय दायित्वों को निभाना आसान होता है। ऐसा ही जीवन प्रासंगिक होता है। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि आत्म-निर्भर मध्यप्रदेश के लक्ष्य के लिए हम तेजी से कार्य करते हुए आगे बढ़ रहे हैं। इस कार्य को पूरी निष्ठा से पूर्ण करना है।
योजनाएँ जनता के सुझावों पर बनी
मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि मध्यप्रदेश की जनता भी विकास कार्यों में भागीदारी कर रही है। मध्यप्रदेश जन-अभियान परिषद हो या अन्य संगठन, सभी मिल कर योजनाओं के क्रियान्वयन में भागीदार हैं। मध्यप्रदेश में अनेक योजनाएँ आम जनता के सुझावों पर बनी हैं। प्रदेश में एक आदर्श कार्य-संस्कृति निर्मित हुई है। जिलों में जनता और कलेक्टर के बीच की दूरी खत्म हुई है।
अपेक्षाओं पर खरे उतरे हैं सिविल सेवक
मुख्य सचिव श्री इकबाल सिंह बैंस ने कहा कि सिविल सर्विसेज की लंबी परंपरा देश में रही है। विशेष परिस्थितियों और चुनौतीपूर्ण स्थितियों का हमारी प्रशासनिक व्यवस्था डट कर मुकाबला करती है। श्री बैंस ने कहा कि अपने लंबे कार्यकाल में उन्हें ऐसा अवसर याद नहीं आता जब हमें कोई विशेष दायित्व दिया गया हो और अपेक्षा पर खरे नहीं उतरे हों। मुख्य सचिव ने कहा कि ऐसी दक्ष टीम के साथ काम करने का सौभाग्य मिला है, इस बात का संतोष है और गर्व भी है। उन्होंने कहा कि चाहे कोरोना काल की बात हो या सिंहस्थ के आयोजन की बात हो या फिर माफिया के खिलाफ कार्रवाई का समय हो, अधो-संरचना का विकास हो या जनता की समस्याओं के निराकरण की व्यवस्था हो, मध्यप्रदेश में सभी प्रशासनिक आयामों पर अनेक उपलब्धियों का इतिहास रचा गया है। मुख्य सचिव ने कहा कि हम जो भी कार्य करते हैं उसका विश्लेषण भी किया जाता है। अनेक कमियाँ भी सामने आती हैं और बहुत सा अच्छा कार्य कमियों के आगे दब जाता है। अपने श्रेष्ठ कार्यों को प्रचारित करने और उनकी व्याख्या करने के प्रति भी हमें सजग रहना चाहिए।
प्रारंभ में मुख्यमंत्री श्री चौहान और अतिथियों ने दीप जला कर सिविल सर्विस-डे का शुभारंभ किया। मुख्यमंत्री श्री चौहान का श्री अनिरुद्ध मुखर्जी ने स्वागत किया। मुख्य सचिव और अन्य अतिथियों का भी स्वागत पुष्प-गुच्छ से किया गया। पुलिस महानिदेशक श्री सुधीर कुमार सक्सेना, अपर मुख्य सचिव सामान्य प्रशासन श्री विनोद कुमार सहित बड़ी संख्या में भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारी, भारतीय पुलिस सेवा और वन सेवा के अधिकारी उपस्थित थे। कलेक्टर्स, कमिश्नर्स और मुख्य कार्यपालन अधिकारी भी वर्चुअली जुड़े।
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विकास के उपाय स्थायी समाधान देंगे बोले उद्यम मंंत्री सखलेचा
भोपाल, 9 फरवरी(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)। सुक्ष्म, लघु, मध्यम उद्यम, विज्ञान एवं विज्ञान प्रौद्योगिकी मंत्री ओम प्रकाश सखलेचा के नेतृत्व में गुरूवार को जावद क्षेत्र में ग्राम लुहारिया चुण्डावत से विकास यात्रा का शुभारम्भ हुआ। इस अवसर पर मंत्री श्री सखलेचा ने मनरेगा के तहत 7.70 लाख की लागत से स्वीकृत नाला निर्माण कार्य का भूमिपूजन कर शिलान्यास किया। इस मौके पर अन्य जनप्रतिनिधि, अधिकारी, कर्मचारी और एवं ग्रामीण उपस्थित थे।
मंत्री श्री सखलेचा ने कहा कि प्रदेश सरकार द्वारा प्रत्येक वर्ग के सर्वागीण विकास के लिए विशेष ध्यान दिया जा रहा है। महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने के लिए प्रतिमाह एक हजार रूपये की राशि भुगतान करने का निर्णय लिया गया है। इसके लिए सरकार द्वारा शीघ्र ही “लाडली बहना योजना” प्रारम्भ की जा रही है। उन्होने जावद क्षैत्र में हुए, विभिन्न विकास एवं निर्माण कार्यो की विस्तार से जानकारी देते हुए कहा कि मुख्यमंत्री जन सेवा अभियान में हितग्राहियों को चिन्हित कर योजनाओं का लाभ दिया जा रहा है। मंत्री श्री सखलेचा ने विभिन्न हितग्राहीमूलक योजनाओं के लाभार्थियों और लाड़ली लक्ष्मियों को हितलाभ भी वितरित किए।
जावद क्षैत्र में गुरूवार को विकास यात्रा लुहारिया चुण्डावत से प्रारम्भ होकर खजुरिया, आलोरी गरवाडा, देहपुर, नीम का खेड़ा होते हुए, नगर रतनगढ़ पहुँची। मंत्री श्री सखलेचा ने लगभग 3 लाख रूपये की लागत के सीमेन्ट कांक्रीट सड़क निर्माण कार्यो का शिलान्यास एवं आरसीसी दीवार निर्माण कार्य का लोकार्पण किया। उन्होंने प्रधानमंत्री आवास के हितग्राहियों को प्रथम किश्त की राशि का वितरण तथा लाड़ली लक्ष्मी योजना के आश्वासन पत्र भी वितरित किये।
रतनगढ़ में विकास यात्रा ने सभी वार्डो को भ्रमण किया। ग्राम कसमारिया, विरमपुर, पालछां, चावड़िया, डोराई, होते हुए सांडा, जाट पहुँची। विकास यात्रा के दौरान गाँव में ग्रामीणों काफी उत्साह देखने को मिला। गाँव-गाँव में विकास यात्रा के साथ पहुँचे मंत्री श्री सखलेचा का ग्रामीण ने उत्साहपूर्वक आत्मीय स्वागत किया।
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अक्षय पात्र फाऊंडेशन खाने लगी बच्चों का भोजन
भोपाल,30 जनवरी,(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)। स्कूली बच्चों के लिए चलाई जा रही मध्यान्ह भोजन योजना(मिड डे मील) पूरे प्रदेश में अव्यवस्था की शिकार हो गई है। राजधानी भोपाल और इसके आसपास के इलाकों में भोजन सप्लाई का काम जिस अक्षयपात्र फाऊंडेशन को दिया गया है वह बच्चों को उनकी संख्या से बहुत कम भोजन सप्लाई कर रही है जिसकी वजह से बच्चों को भूखा ही घर लौटना पड़ रहा है। विगत 25 जनवरी से शुरु हुई ये व्यवस्था अधिकारियों की मानीटरिंग में भी अव्यस्थित है लेकिन इसके बावजूद किन्हीं ऊंची पहुंच वाले लोगों के निजी हितों के मद्देनजर वे कोई कार्रवाई नहीं कर पा रहे हैं।
राजधानी के शहरी और आसपास के ग्रामीण इलाकों से लेकर रायसेन तक मध्यान्ह भोजन योजना सप्लाई करने का ठेका अक्षयपात्र फाऊंडेशन को दे दिया गया है। ये तर्क दिया गया था कि बच्चों को अच्छी गुणवत्ता का भोजन अत्याधुनिक प्लांट में बनवाकर सप्लाई किया जाएगा। महिला स्व सहायता समूह के माध्यम से की जाने वाली इस कथित सप्लाई ने पूरी व्यवस्था इस तरह बिगाड़ दी है कि बच्चों को भोजन मिलना भी दूभर हो गया है।
खाली कंटेनर सप्लाई घोटाले की कहानी बयां कर रहे हैं।
बताया जा रहा है कि इस फाऊंडेशन को कई बड़ी कंपनियों ने अपनी सीएसआर राशि का हिस्सा दिया है। मंडीदीप स्थित एचईजी कंपनी ने भी अपनी सीएसआर राशि इस फाऊंडेशन को मिड डे मील सप्लाई करने के लिए दी है। बताते हैं कि संस्था ने कंपनियों से बड़ी राशि डकार ली है इसके बाद भी बच्चों को घटिया भोजन वह भी सिर्फ खाना पूरी के अंदाज में सप्लाई किया जा रहा है।
बताते हैं कि ज्वाईंट डायरेक्टर नकीजा कुरैशी ने मध्यान्ह भोजन योजना सप्लाई का काम कई स्थानीय संस्थाओं को दिया था और उनसे कथित तौर पर वादा भी किया गया था कि भोजन उनके माध्यम से ही सप्लाई कराया जाएगा। अब उन्होंने इस अक्षयपात्र फाऊंडेशन को सप्लाई का ठेका दिलवा दिया है जिससे स्थानीय संस्थाओं के संचालक खासे नाराज बताए जा रहे हैं।
स्थानीय संस्थाओं से जुड़े सूत्रों ने बताया कि विश्वकर्मा नगर, अयोध्यानगर, प्राथमिक शाला पिपलिया पेंदे खां,
नरेला हनुमंत, दामखेड़ा, दौलतपुर,टीआरटी, जीवन ज्योति गैस राहत कालोनी, बंजारी ,बागमुगलिया नई बस्ती,प्राथमिक शाला अरेरा कालोनी, अमरावद खुर्द ,पिपलिया केशव बीडीए कालोनी में भी खाना जरूरत से बहुत कम आ रहा है। जिसकी वजह से बच्चों के बीच छीना झपटी की स्थितियां देखी जा रहीं हैं। बतातें हैं कि किसी मदरसे में भी खाना सप्लाई नहीं किया जा रहा है। बैरागढ़ चीचली, रतनपुर स़ड़क,बिलखिरिया खुर्द बरखेड़ी खुर्द में भी पूरी सब्जी केवल नाममात्र के लिए ही सप्लाई की जा रही है। -

इ कुबेेर प्रणाली ने हितग्राही को रिजर्व बैंक से जोड़ा
भोपाल, 16 जनवरी(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)।वित्त विभाग के आई.एफ.एम.आई.एस. सॉफ्टवेयर में ई-कुबेर प्रणाली विकसित की गई है। इस प्रणाली से कोषालय अधिकारियों द्वारा लाभांवितों के बैंक खातों में सीधे आर.बी.आई के माध्यम से राशि हस्तांतरित की जा सकेगी। महापौर श्रीमती मालती राय ने वल्लभ भवन कोषालय में सोमवार को प्रणाली का शुभारंभ किया। इस दौरान महापौर ने प्रणाली से लाभांवितों को भुगतान भी किया। आयुक्त कोष एवं लेखा श्री ज्ञानेश्वर पाटिल, संचालक कोष एवं लेखा डॉ. राजीव सक्सेना, संभागीय संयुक्त संचालक कोष एवं लेखा श्री आर.आर. अहिरवार उपस्थित रहे।
वरिष्ठ कोषालय अधिकारी श्री प्रदीप ओमकार ने बताया कि पूर्व में कोषालय अधिकारी ई-फाईल भारतीय स्टेट बैंक की वेबसाईट पर अपलोड करते थे। इसके बाद भारतीय स्टेट बैंक द्वारा लाभांवितों को भुगतान किया जाता था, जिससे कई बार एक-दो दिन का समय भी लग जाता था। अब ई-कुबेर प्रणाली से तत्काल भुगतान हो सकेगा और समय भी कम लगेगा।
आयुक्त कोष एवं लेखा श्री पाटिल द्वारा आई.एफ.एम.आई.एस. सॉफ्टवेयर को अत्याधुनिक बनाने के लिये अनेक सुधार किए गए हैं। गत दिसंबर माह में आधार आधारित भुगतान प्रणाली से भुगतान प्रारंभ करने वाला मध्यप्रदेश पहला राज्य बना। इसके बाद अब ई-कुबेर की नई सुविधा विकसित कर संबंधितों को सीधे आर.बी.आई से भुगतान की प्रक्रिया शुरू की गई है।
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सम्मान से शुरु हुआ सहकारिता के उप अंकेक्षकों का नया साल
भोपाल,7 जनवरी(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)। सहकारिता विभाग के प्रदेश भर से आए अंकेक्षकों ने आज राजधानी में नव वर्ष मिलन समारोह 2023 मनाया । श्यामला हिल्स स्थित होटल विंड एंड वेव्वज में आयोजित इस कार्यक्रम में विभाग के वरिष्ठ अफसरों ने भी शिरकत की और प्रदेश में सहकारिता आंदोलन को नई ऊंचाईयां देने के लिए अंकेक्षकों को प्रोत्साहित किया। अफसरों ने कहा कि जनता की वित्तीय संस्थाओं को साफसुथरा बनाकर प्रदेश को विकास की नई ऊंचाईयों तक पहुंचाया जा सकता है। इसके लिए अंकेक्षक बिना डरे जिस मुस्तैदी से कार्य कर रहे हैं वह सराहनीय है । उनका काम सरल बनाने के लिए सरकार की मंशा के अनुरूप सभी उपाय किए जाएंगे।
मुख्य अतिथि के तौर पर कार्यक्रम में शामिल सहकारिता विभाग के संयुक्त आयुक्त अभय खरे ने कहा कि आमतौर पर सरकारी बैठकों में अनौपचारिक वार्तालाप नहीं हो पाता है। गंभीर दायित्वों का निर्वहन करने वाले आडिटरों को चुनौतियों का सामना अकेले करना पड़ता है। इस तरह के सामाजिक कार्यक्रम अफसरों और कर्मचारियों में उमंग का संचार करते हैं जिसका लाभ प्रदेश के आम आदमी को मिलता है। आडिटरों को जो स्मृति चिन्ह दिए गए वे दैनंदिनी कामकाज के बीच उन्हें प्रकाश स्तंभ की तरह प्रोत्साहित करते रहेंगे।
कार्यक्रम के मुख्य आयोजक उप अंकेक्षक मुकंद राव भैंसारे ने कहा कि प्रदेश भर की सहकारी संस्थाओं की लेखा पुस्तिकाओं की शुद्धता और सत्यता का परीक्षण करने का काम दुरूह होता है। अशुद्धियों और कपट का परीक्षण करना और उनकी रोकथाम के उपाय करने से आडिटरों को नाराजगी का सामना भी करना पड़ता है। ऐसे में उन्हें शासन की ओर से प्रोत्साहन और संबल मिलता रहे तो सहकारिता आंदोलन को सफल बनाया जा सकता है। भारत सरकार की ओर से सहकारिता के क्षेत्र में जो तकनीकी सुधार किए गए हैं उनसे वित्तीय गड़बड़ियों को रोकना सरल होता जा रहा है।
नववर्ष मिलन समारोह में अंकेक्षकों ने गीत संगीत की रंगारंग प्रस्तुतियां दीं। कविता पाठ और चुटकुलों से उपस्थित अधिकारियों और कर्मचारियों के बीच संवाद की नई कड़ी का सूत्रपात किया गया। महिला उप अंकेक्षकों ने अपनी प्रस्तुतियों से सभी अधिकारियों को संवाद के नए धरातल पर ला दिया। कई अधिकारियों ने कहा कि वे रिटारमेंट की आयु तक पहुंच गए लेकिन कभी विभाग की ओर से उनकी पीठ नहीं थपथपाई गई। पहली बार स्मृति चिन्ह पाकर उन्हें अपनी जीविका सार्थक महसूस हो रही है।
कार्यक्रम में संयुक्त आयुक्त सहकारिता बीएस शुक्ला,प्रबंध संचालक अपेक्स एवं संयुक्त आयुक्त पीएस तिवारी,सहकारिता विभाग के सचिव मनोज सिन्हा, संयुक्त आयुक्त अनिल वर्मा, उपायुक्त सहकारिता एवं सचिव मार्कफेड यतीश त्रिपाठी, उपायुक्त शिवेन्द्र पांडेय, उपायुक्त आरएस विश्वकर्मा, उपायुक्त श्रीमती अनिता उइके, श्रीमती श्वेता रावत, सहायक आयुक्त संजय सिंह, मप्र कार्यपालिक तृतीय वर्ग सहकारिता विभाग कर्मचारी संघ के प्रांताध्यक्ष संजय सिंह, शोधकर्ता अविनाश सिंह समेत पूरे प्रदेश के आए उप अंकेक्षकों ने आयोजन में हिस्सा लिया। उप अंकेक्षक वर्ग की ओर से वरिष्ठ अधिकारियों और कर्मचारियों को स्मृति चिन्ह भेंट किए गए। श्री भैंसारे ने आयोजन को सफल बनाने वाली टीम के सदस्यों श्री रामचंद अहिरवार, श्री विनोद जैन, एवं अन्य अंकेक्षकों व उप अंकेक्षकों के योगदान का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि इस तरह के आयोजन बार बार होंगे और राज्य के विकास में अपना योगदान देने वाले उप अंकेक्षकों को पुरस्कृत भी किया जाएगा। -

चौपाल से चलती है शिवराज सिंह सरकार बोले गोविंद सिंह राजपूत
अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा जारी, आज आएगा मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान का जवाब
भोपाल,21 दिसंबर(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)। मध्य प्रदेश विधानसभा के शीतकालीन सत्र में तीसरे दिन बुधवार को सदन की कार्यवाही गहमागहमी भरी रही . कई सालों बाद सदन में लगभग साढ़े तेरह घंटों तक चर्चा जारी रही। सुबह ग्यारह बजे समवेत हुआ सदन समयकाल बढ़ाने के साथ रात्रि 12.37 बजे तक चलता रहा। कार्यवाही के दौरान कई बार पक्ष और विपक्ष के नेताओं में तीखी बहस देखने को मिली. कांग्रेस की ओर से नेता प्रतिपक्ष डॉ.गोविंद सिंह ने ये प्रस्ताव प्रस्तुत किया जिस पर हुई चर्चा ने सत्ता पक्ष को अपने कामकाज पर सफाई देने का अवसर मिल गया। कई बार तो विपक्ष स्वयं अपने आरोपों में घिरता नजर आया।
कांग्रेस के अविश्वास प्रस्ताव पर प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान कल गुरुवार को जवाब प्रस्तुत करेंगे. इधर विधानसभा सत्र के महत्वपूर्ण तीसरे दिन सदन की कार्यवाही के दौरान प्रदेश कांग्रेस कमेटी के प्रमुख कमलनाथ नदारद रहे. पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ बुधवार को विदिशा जिले के सिरोंज जिले के दौरे पर थे . जबकि मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान पूरी कार्यवाही के दौरान मौजूद रहे.
सदन में अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा में कांग्रेस विधायक जीतू पटवारी ने कहा कि सरकारी पैसे से भाजपा ने अपने दफ्तर में 40 करोड़ रुपए का खाना खिला दिया. जीतू पटवारी के इस बयान पर नगरीय प्रशासन राज्यमंत्री ओपीएस भदौरिया भडक़ उठे. मंत्री भदौरिया अपनी सीट से उठकर विपक्ष की और बढऩे लगे जिस पर विपक्षी नेताओं ने हंगामा शुरु कर दिया. मामले को बढ़ता देख स्पीकर ने जैसे तैसे मामले को शांत कराया. इसके बाद जीतू पटवारी ने पुन: बोलना शुरू किया.
हंगामे के बीच कांग्रेस के वरिष्ठ नेता सज्जन सिंह वर्मा ने ओपीएस भदौरिया को बिल्ली कहकर संबोधित किया. सज्जन सिंह वर्मा ने कहा कि ओपीएस अपने क्षेत्र में भीगी बिल्ली बने फिरते हैं और यहां पहलवानी बता रहे हैं। पूर्व मंत्री सज्जन सिंह वर्मा के तेवर इसलिए तेज हो रहे थे. क्योंकि पूर्व मंत्री जीतू पटवारी के वक्तव्य के दौरान मंत्री ओपीएस भदौरिया अपनी सीट से उठ खड़े हुए ,जिन्हें मंत्री रामखेलावन सिंह बार बार हाथ पकडक़र बिठाते नजर आए.परिवहन मंत्री गोविंद सिंह राजपूत ने कहा कि कमलनाथ सरकार में हम अपने क्षेेत्र के गरीब नागरिकों के नाम गरीबी रेखा में जुड़वाने के लिए प्रयास करते रहे लेकिन डेढ़ साल तक पोर्टल ही नहीं खोला गया। जबकि शिवराज सिंह चौहान की सरकार आते ही पच्चीस लाख लोगों के नाम गरीबी रेखा में जोड़ दिए गए। कांग्रेस सरकार अप्राकृतिक मृत्यु होने पर पचास हजार रुपए हर्जाना देती थी जबकि शिवराज सरकार ने चार लाख रुपए मुआवजा देना शुरु कर दिया। ये सरकार भोपाल के मंत्रालय से नहीं बल्कि प्रदेश के चौपालों से चलने वाली सरकार है।
सुश्री हिना लिखीराम कांवरे ने सरकार की कार्यप्रणाली को घेरे में लेते हुए कहा कि गृहमंत्री बड़े बड़े दावे करते हैं कि उनके शासनकाल में डकैतों,नक्सलियों पर कार्रवाई हुई है लेकिन हकीकत ये है कि बालाघाट और इसके आसपास नक्सलवादियों ने इतने घर बना लिए हैं कि सरकार किस किस घर में घुसकर उन्हें मार पाएगी। आतंकी हरकतों की वजह से कान्हा नेशनल पार्क में पर्यटक आखिर क्यों आएंगे। बालाघाट को नक्सली अपना रेस्ट जोन मानते हैं। नक्सलियों ने इलाके के नागरिकों का हक छीना है वहां कोई उद्योगपति अपना कारोबार शुरु नहीं करना चाहते।
शीतकालीन विधानसभा सत्र के तीसरे दिन की कार्रवाई में पक्ष और विपक्ष के नेताओं में व्यंग्य तंज का भी दौर चला. नेता प्रतिपक्ष गोविंद सिंह ने कहा कि हमने अविश्वास प्रस्ताव में जो मुद्दे उठाए, उनपर जवाब देना चाहिए. इस पर मंत्री गोपाल भार्गव वने कहा कि आपने आज क्या भाषण दिया वो आपको खुद याद नहीं होगा. इस पर संसदीय मंत्री नरोत्तम मिश्रा ने तंज कसते हुए कहा कि नेता प्रतिपक्ष गोविंद सिंह तो ढोर डॉक्टर हैं. -

विदेशी धन कमाने का माध्यम बनी एमपी की वन संपदा
वनमंत्री विजय शाह ने बताया 20 से 26 दिसंबर तक भोपाल के लाल परेड ग्राऊंड में लगेगा 9 वां अंतर्राष्ट्रीय हर्बल मेला
भोपाल,18 दिसंबर(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)। वनों से प्राप्त जड़ी बूटियां वनवासियों की समृद्धि का साधन बन रही हैं और विदेशी मुद्रा कमाने का साधन भी बन गईं हैं। मध्यप्रदेश सरकार के वन विभाग की रणनीति की कामयाबी की ये कहानी वर्ष 2011 से आयोजित हो रहे अंतर्राष्ट्रीय हर्बल मेलों की वजह से लिखी जा सकी है। लगातार नौवें वर्ष आयोजित किए जा रहे इस वन मेले की सफलता से उत्साहित राज्य के वन विभाग ने इस बार 20 से 26 दिसंबर तक लगातार सात दिनों तक इस मेले की मेजबानी करने की तैयारी की है। वनमंत्री कुंवर विजय शाह ने आज भोपाल में आयोजित पत्रकार वार्ता में बताया कि वनवासियों की समृद्धि के लिए इस बार भी वनसंपदा के विक्रेताओं और खरीददारों को आपस में जोड़कर राज्य सरकार वनौषधियों की मंडी को सफल बनाएगी।
कुंवर विजय शाह ने पत्रकारों के सवालों के जवाब में बताया कि लगातार आयोजित होने वाले वनमेलों से वन संपदा अब वैश्विक बाजारों में पहचान बनाने लगी हैं। महुए के च्वनप्राश की लोकप्रियता इतनी तेजी से बढ़ रही है कि वन समितियों ने अब महुआ इकट्ठा कराकर उसकी मिठाई, अचार और च्वनप्राश जैसे उत्पादों की मार्केटिंग शुरु कर दी है। लघुवनोपज संघ को लंदन से अठारह क्विंटल महुआ उपलब्ध कराने का आर्डर मिला है। इस तरह कई अन्य वनौषधियां भी विदेशी मुद्रा कमाने का साधन बन रहीं हैं।
वनमंत्री कुंवर विजय शाह ने बताया कि सरकार के प्रयासों से वनवासियों को रोजगार के नए साधन मिले हैं.इस अवसर पर लघुवनोपज संघ के एमडी पुष्कर सिंह भी उपस्थित थे.
श्री शाह ने बताया कि इस सात दिवसीय आयोजन के लिए भारत के बारह राज्यों के साथ भूटान, नेपाल और इंडोनेशिया की सरकारों ने भी अपनी भागीदारी सुनिश्चित की है। मेले में चौबीस दिसंबर को बायर सेलर मीट का आयोजन किया जाएगा जिससे स्थानीय वनसंपदा के विक्रेताओं के लिए वैश्विक बाजार के खरीदार भी उपलब्ध हो सकेंगे। कई सरकारी और गैर सरकारी प्रतिष्ठान भी मेले में अपने उत्पादों के स्टाल लगा रहे हैं। पिछले साल इस मेले में लगभग सवा लाख लोग पहुंचे थे इस बार सात दिनों के मेले में इससे भी ज्यादा तादाद में दर्शक और खरीददार पहुंचेंगे।
उन्होंने बताया कि मध्यप्रदेश की वनौषधियों में लोगों की रुचि को देखते हुए वन विभाग ने कई सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया है.मेले में प्रसिद्ध गायक विनोद राठौर, हास्य कलाकार सुनील पाल, कबीर कैफे, आदिवासी लोक नृत्य जैसे कई कार्यक्रमों का आयोजन होगा।
इस मेले की थीम हर बार की तरह लघुवनोपज से आत्मनिर्भरता रहेगी। पिछले साल बड़ी कंपनियों ने ग्रामीण वनोपज समितियों से 14 करोड़ रुपए के अनुबंध किए थे। इस बार हमें लगभग बीस करोड़ रुपए से अधिक के अनुबंध होने का अनुमान है। हमारा प्रयास है कि विक्रेताओं को सीधे खरीददार उपलब्ध हों और वे दलालों के चंगुल में न फंसें। ये सारे प्रयास मप्र लघुवनोपज संघ और वन विभाग के सहयोग से सफल हो पाए हैं। -

किसान अब ऊर्जादाता भी बनेगाःगडकरी
भोपाल,7 नवंबर(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)। केन्द्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री श्री नितिन गडकरी ने कहा है कि मध्यप्रदेश में कृषि क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य हुआ है। मुख्यमंत्री श्री चौहान के नेतृत्व में मध्यप्रदेश को निरंतर कृषि कर्मण पुरस्कार से सम्मानित किया जा रहा है। अब मध्यप्रदेश कृषि उत्पादों का निर्यात भी करने लगा है। किसान अन्नदाता के साथ अब ऊर्जादाता भी बनेगा।
केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री श्री गडकरी ने मंडला में मंडला और डिंडोरी जिले के लिए 1261 करोड़ रूपये लागत की 5 सड़क परियोजना का शिलान्यास किया। केन्द्रीय मंत्री श्री गडकरी ने कहा कि मंडला में प्रकृति का निवास है, यह रानी दुर्गावती की भूमि है तथा यहाँ कान्हा जैसा विश्व प्रसिद्ध राष्ट्रीय उद्यान है। जनजातीय कार्यों के विकास के लिए सड़कें अत्यंत जरूरी हैं। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री श्री चौहान, केंद्रीय राज्य मंत्री श्री फग्गन सिंह कुलस्ते सहित स्थानीय जन-प्रतिनिधियों द्वारा दिए गए सड़क विकास के प्रस्तावों पर विस्तृत अध्ययन कर योजनाओं को स्वीकृति दी जाएगी।
केन्द्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री श्री गडकरी ने देशभर में ऊर्जा के क्षेत्र में परिवहन मंत्रालय द्वारा प्रारंभ की गई नई परियोजनाओं की विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने मध्यप्रदेश में परिवहन के क्षेत्र में इलेक्ट्रिक बसों के संचालन की आवश्यकता बताई। उन्होंने कहा कि मंडला, डिंडौरी एवं अन्य जनजातीय क्षेत्रों में बाँस के उत्पादन को बढ़ावा दिया जा सकता है। बाँस से भविष्य में इथेनॉल का निर्माण होगा, जिससे परिवहन एवं अन्य क्षेत्रों के लिए ऊर्जा पैदा की जा सकेगी। केन्द्रीय मंत्री श्री गडकरी ने कान्हा-बालाघाट क्षेत्र में सड़क विकास के लिए नए प्रोजेक्ट को ‘गति शक्ति योजना’ में शामिल करने की बात कही।
मंडला-जबलपुर हाई-वे का गुणवत्तापूर्ण निर्माण कराने के निर्देश
केन्द्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री श्री गडकरी ने मंडला-जबलपुर हाई-वे के बारे में चर्चा की। उन्होंने हाई-वे निर्माण में गुणवत्ता से असंतुष्टि जाहिर की और मंडला एवं आसपास के क्षेत्र की जनता को सड़क से हुई परेशानी के लिए मंच से माफी मांगी। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को निर्देशित किया कि राष्ट्रीय राजमार्ग के पुराने कार्य को रिपेयर करें तथा सड़क के खराब हिस्से के निर्माण के लिए जल्द नया टेंडर जारी करें। केन्द्रीय मंत्री श्री गडकरी ने आगामी वर्षों में अलग-अलग परियोजनाओं से सड़क एवं पुलों के विकास के बारे में चर्चा की।
नर्मदा एक्सप्रेस-वे पर अध्ययन जारी
केन्द्रीय मंत्री श्री गडकरी ने कहा कि केन्द्र सरकार द्वारा देश के सभी धार्मिक स्थानों तक पहुँचने के लिए लगातार बारह-मासी सड़कों का निर्माण जारी है। उन्होंने अमरकंटक से लेकर धार-झाबुआ तक नर्मदा एक्सप्रेस-वे के निर्माण के संबंध में कहा कि इस मार्ग के निर्माण के लिए मंत्रालय द्वारा अध्ययन जारी है। इस मार्ग के विकास से नर्मदा प्रदक्षिणा करने वाले श्रद्धालुओं को निश्चित रूप से लाभ होगा। केन्द्रीय मंत्री श्री गडकरी ने मध्यप्रदेश में मेडिकल की पढ़ाई हिंदी भाषा में भी प्रारंभ करने पर मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान को सभी विद्यार्थियों की ओर से शुभकामनाएँ दी। उन्होंने कहा कि गरीब एवं वंचित वर्गों तक विकास को पहुँचाना हमारा संकल्प है।
मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि राज्य सरकार चारों तरफ सड़कों के जाल बिछाने के लिए लगातार प्रयास कर रही है। उन्होंने मंडला और डिंडोरी जिले के लिए केंद्र सरकार द्वारा दी गई नई 5 सड़क परियोजना की स्वीकृति के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एवं केंद्रीय मंत्री श्री गडकरी को धन्यवाद दिया। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने बताया कि वर्ष 2003 के बाद प्रदेश सरकार द्वारा अब तक 3 लाख किलोमीटर से अधिक लंबाई की सड़कें बनाई जा चुकी हैं। उन्होंने कहा कि नर्मदा उद्गम से लेकर धार-झाबुआ तक ’नर्मदा एक्सप्रेस-वे’ बनाने का प्रस्ताव है। ‘नर्मदा एक्सप्रेस-वे’ के दोनों ओर औद्योगिक क्षेत्र के विकास का प्रयास किया जाएगा, जहाँ स्थानीय उत्पादों पर आधारित उद्योग लगाए जाएंगे।
मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि सरकार विकास के कार्यों में कमी नहीं होने देगी। उन्होंने मंडला-डिंडौरी क्षेत्र में घर-घर पानी पहुँचाने के लिए केंद्र एवं राज्य सरकार के कार्यों की जानकारी दी। उन्होंने सीएम जनसेवा अभियान में मंडला जिले में प्राप्त तथा स्वीकृत आवेदनों की जानकारी देते हुए बताया कि जिले में कुल एक लाख 84 हजार 753 आवेदन में से एक लाख 56 हजार 944 को स्वीकृत किया जा चुका है। उन्होंने केन्द्रीय मंत्री श्री गडकरी से कान्हा क्षेत्र को मुख्य सड़क मार्गों से जोड़ने तथा नर्मदा सौन्दर्यीकरण और विकास के लिए नए प्रस्तावों को स्वीकृति प्रदान करने का आग्रह किया। मुख्यमंत्री ने मंडला जिले में नए सीएम राईज स्कूलों के संचालन, विशेष कोचिंग के माध्यम से नीट परीक्षा में जनजाति बहुल जिलों के विद्यार्थियों की सफलता तथा मध्यप्रदेश में मेडिकल की पढ़ाई हिंदी माध्यम में शुरू किए जाने की जानकारी दी।
15 नवंबर से लागू होगा ’पेसा एक्ट’
मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि 15 नवंबर को प्रदेश में जनजातीय गौरव दिवस मनाया जाएगा। इसमें प्रदेश में पंचायत से लेकर जिला स्तर तक समारोहपूर्वक अनेक कार्यक्रम होंगे। मुख्यमंत्री ने कहा कि 15 नवंबर से ही संपूर्ण प्रदेश में सामाजिक समरसता के साथ ’पेसा एक्ट’ भी लागू किया जाएगा। उन्होंने मेडिकल कॉलेज के भूमि-पूजन के लिए जल्द मंडला आने की बात भी कही।
सड़क परियोजनाओं के शिलान्यास महाकौशल क्षेत्र के लिए अत्यंत गौरव का पल
केंद्रीय इस्पात एवं ग्रामीण विकास राज्य मंत्री श्री फग्गन सिंह कुलस्ते ने कहा कि पाँच सड़क परियोजना का शिलान्यास महाकौशल क्षेत्र के लिए अत्यंत गौरव का पल है। उन्होंने सड़क परियोजनाओं की स्वीकृति के लिए प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी एवं सड़क परिवहन मंत्री श्री गडकरी का मंडला एवं डिंडोरी की जनता तथा स्थानीय जन-प्रतिनिधियों की ओर से अभिनंदन किया। श्री कुलस्ते ने जबलपुर-नैनपुर बाईपास, कान्हा क्षेत्र को प्रमुख मार्गों से जोड़ने, नैनपुर-सिवनी हाई-वे, मंडला-लखनादौन के लिए नई परियोजनाओं की स्वीकृति का आग्रह किया।
केन्द्रीय मंत्री श्री गडकरी विजनरी, दृष्टिवान तथा नवाचार के धनी
प्रदेश के लोक निर्माण कुटीर एवं ग्रामोद्योग मंत्री श्री गोपाल भार्गव ने केंद्रीय मंत्री श्री गडकरी को नई सड़क परियोजनाओं की स्वीकृति के लिए धन्यवाद दिया। उन्होंने वर्ष 2014 के बाद से मध्यप्रदेश में सड़क एवं अन्य बड़ी परियोजनाओं के विकास कार्यों की जानकारी दी। मंत्री श्री भार्गव ने सड़क, पुलिया एवं फ्लाईओवर निर्माण के क्षेत्र में बेहतरीन कार्य करने वाले केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री श्री गडकरी को विजनरी, दृष्टिवान एवं नवाचार का धनी बताया।
कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलन से हुआ। केन्द्रीय मंत्री श्री गडकरी तथा मुख्यमंत्री श्री चौहान का स्थानीय जन-प्रतिनिधियों ने कलगी-साफा पहना कर स्वागत किया। कार्यक्रम में 5 सड़क परियोजना पर आधारित लघु फिल्म का प्रदर्शन किया गया। अतिथियों ने सड़क परियोजनाओं पर आधारित प्रदर्शनी का अवलोकन भी किया।
कार्यक्रम में राज्यसभा सांसद सुश्री संपतिया उईके, विधायकगण सर्वश्री देवसिंह सैयाम, डॉ. अशोक मर्सकोले और श्री नारायण पट्टा, जिला पंचायत अध्यक्ष श्री संजय कुशराम, नगरपालिका अध्यक्ष श्री विनोद कछवाहा और जिला पंचायत उपाध्यक्ष श्री कमलेश टेकाम उपस्थित रहे।
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विकास का झूठ और कर्ज का पहाड़
सरयूसुत मिश्र
सरकारों द्वारा लिए जाने वाले कर्ज और विकास पर पक्ष विपक्ष के बीच बहस और बयानबाजी अक्सर होती रहती है| जहां सत्ता पक्ष का तर्क होता है कि ऋण लेकर प्रदेश का विकास किया गया है, वहीं विपक्ष आरोप लगाता है कि सरकार द्वारा कर्ज लेकर घी पीने का काम किया जा रहा है|
जैसे ही सत्ता और विपक्ष का स्थान बदलता है वैसे ही वक्तव्य भी बदल जाते हैं| इसकी वास्तविकता क्या है यह हमेशा राजनीतिक बयानों के बीच छिपा रहता है|
वित्तीय आंकड़े और बजटीय भाषा कुछ इस तरह की होती है जो आम समझ के बाहर होती है| विशेषज्ञों के लिए राज्यों का कर्ज कोई महत्वपूर्ण विषय नहीं होता इसलिए उनकी आंखों से भी यह ओझल ही रहता है|
कर्ज और विकास की सच्चाई सरकारें बताना नहीं चाहती|
मध्यप्रदेश विधानसभा में 21 दिसंबर 2021 को एक प्रश्न में यह पूछा गया था कि सरकार द्वारा लिए गए ऋण से कौन-कौन से विकास कार्य कराए गए हैं?
सरकार ने उत्तर में यह बताया कि कर्ज किसी योजना के लिए नहीं लिया जाता| इसलिए इससे कराए गए कार्यों की जानकारी नहीं दी जा सकती|
विकास के लिए कर्ज लिया जाना आवश्यक होता है| लेकिन आम लोगों को जानने का हक है कि जो कर्ज लिया गया है उससे कौन-कौन से विकास कार्य कराए गये| यह सही है कि किसी योजना के लिए सरकार द्वारा कर्ज नहीं लिया जाता, सरकार तो अपने बजट के अंतर्गत विकास कार्यों के लिए धनराशि की कमी को पूरा करने के लिए लोन लेती है| वित्त विभाग के लिए यह कठिन नहीं है कि वह साफ-साफ बताए कि जो भी ऋण राज्य द्वारा लिया गया है उसके अंतर्गत मुख्य रूप से कौन-कौन से विकास के कार्य कराए गए हैं| यह समझ के बाहर है कि यह जानकारी सरकारें छुपाती क्यों है|
मध्य प्रदेश सरकार पर 31 मार्च की स्थिति में 2 लाख 53 हजार करोड़ का कर्ज है| इसके बाद नवंबर 21 तक 14000 करोड का कर्ज और लिया गया है, यानि नवम्बर 2021 की स्थिति में कर्ज 267000 करोड हो चुका है| पिछले साल लिए गए ऋण की प्रवृत्तियों के अनुसार, यदि लोन लिया जाता है तो चालू वित्तीय वर्ष में यह आंकड़ा तीन लाख करोड़ के ऊपर पहुंचने की संभावना है|
वर्ष 2003 में मध्यप्रदेश में कांग्रेस की सरकार के बाद उमा भारती के नेतृत्व में सरकार बनी थी तब सरकार द्वारा राज्य की आर्थिक स्थिति पर एक श्वेत पत्र जारी किया गया था| इसके अनुसार मध्य प्रदेश गठन के बाद 2003 तक 33 हजार करोड़ का कर्ज था जो 20 सालों में बढ़कर 3 लाख करोड़ पंहुच रहा है| यानी 2003 के बाद सरकार द्वारा लिए गए लोन में से 33000 करोड रुपए घटा देने पर 18 सालों में 2 लाख 34 हज़ार करोड़ का कर्ज मध्य प्रदेश सरकार द्वारा लिया गया है|
इनको अगर माह अनुसार बांटा जाए तो हर महीने 1083 करोड़ का कर्ज सरकार ने लिया है|
विकास के लिए कर्ज जरूरी है इसलिए यह देखना भी जरूरी है कि जो भी कर्ज लिया गया है उसका क्या सदुपयोग विकास (पूंजीगत व्यय) में किया गया है?
वैसे तो सरकार की आय और व्यय में भी पूंजीगत व्यय के लिए राशि दी जाना चाहिए| लेकिन अगर उसको छोड़ भी दें और केवल कर्ज को ही विकास के लिए माना जाए तब भी आंकड़े ऐसा बताते हैं कि कर्ज की पूरी राशि शायद पूंजीगत व्यय में खर्च नहीं की जाती है|
पूंजीगत व्यय के अंतर्गत पुल पुलिया सड़क आदि स्थाई परिसंपत्तियों का निर्माण किया जाता है| जब तक स्थाई परिसंपत्तियों का निर्माण सही मात्रा में नहीं होगा तब तक विकास की सही परिकल्पना पूरी नहीं हो सकती है| नियंत्रक महालेखा परीक्षक द्वारा 31 मार्च 2020 को समाप्त हुए वर्ष के लिए दिए गए लेखा परीक्षा प्रतिवेदन में यह बताया गया है कि राज्य में पूंजीगत परिव्यय 15-16 से 20-21 तक इस प्रकार है|
2015-16 16 835 करोड़2016-17 27 288 करोड़2017-18 30 913 करोड़2018-19 29 424 करोड़2019-20 29 241 करोड़2021-22 33 490 करोड़(बजट)लेखा प्रतिवेदन में यह बताया गया है कि पिछले 5 वर्षों के दौरान राज्य का पूंजीगत व्यय दो हजार अट्ठारह उन्नीस को छोड़कर 2015-16 से 2019-20 तक परिसंपत्तियों के सृजन पर आवंटित बजट का उपयोग नहीं किया जा सका|
जितने भी छोटे-छोटे निर्माण कार्य होते हैं, उन पर योजना की लागत और निर्माण एजेंसी का नाम राज्य सरकार पारदर्शिता के लिए प्रदर्शित करती है|
जब यह सामान्य भाषा में बताया जा सकता है तो सरकार स्तर पर वित्त विभाग सामान्य भाषा में यह क्यों नहीं बता सकता कि कुल बजट और कुल लिए गए कर्ज में से विकास के कौन-कौन से काम कराए गए और सामाजिक सेवाओं या अन्य प्रतिबद्ध खर्चों पर कितना व्यय किया गया|
वैसे आजकल विकास का पैमाना भी बदल गया है| पहले विकास के हर काम सरकारों को स्वयं करने पड़ते थे| चाहे सड़क हो,बिजली संयंत्र हों या कोई भी विकास की योजना हो, सरकार ही पैसा खर्च करती थी और सरकार ही उनका निर्माण करती थी| अब तो विकास की प्रक्रिया बदल गई है| अब BOT जैसे प्रोसेस आ गए हैं| जिसमें सरकारी संपत्ति निर्माण के लिए प्राइवेट लोगों को दे दी जाती है और प्राइवेट लोग अपना पैसा खर्च कर निर्माण करते हैं| उस संपत्ति का उपयोग करने वालों से वह सेवा शुल्क प्राप्त करते हैं| इनके विकास पर अब सरकारें पैसा नहीं खर्च करती हैं| सड़कों को ही अगर देखा जाए तो आज अधिकांश सड़कें चाहे वह राजमार्ग हो या राष्ट्रीय राजमार्ग, उनका निर्माण BOT के अंतर्गत निजी लोगों द्वारा किया गया है, उन पर टोल वसूला जा रहा है| वैसे तो जो सड़क सरकार की संपत्ति थी, जिस पर चलने पर किसी को कोई टैक्स नहीं देना पड़ता था, वह अब लोगों को टैक्स देने के बाद ही आवागमन के लिए मिलती है| अगर यात्री टोल की सड़कों पर 1000 किलोमीटर यात्रा करेगा तो कम से कम इतनी ही राशि उसे टोल टैक्स के रूप में देनी पड़ेगी| सड़कों के अलावा अन्य क्षेत्रों में भी अब इस तरह की नीतियां सरकारों द्वारा लागू कर दी गई हैं|
आज सभी राज्यों में लोकतांत्रिक सरकारों द्वारा चुनाव जीतने के लिए निजी लाभ को ज्यादा प्रोत्साहित किया जाता है| ऐसी योजनाएं घोषित की जाती हैं, और लागू की जाती है जिससे लोगों को उनके खातों में पैसा या कोई न कोई लाभ मिल सके| जिससे कि उस सरकार के प्रति लोग उपकृत महसूस करें और चुनाव के समय राजनीतिक दलों को उसका लाभ मिले|
सरकारों की निजी लाभ देने की जो प्रवृत्ति आजकल दिखाई पड़ रही है वह चिंतित करती है|
सरकारें अनाप-शनाप ऐसे काम पर खर्च करती हैं जो पूरी तरह से अनुत्पादक हैं| उत्पादक खर्चों पर ध्यान नहीं दिया जाता|
एक पहेली में एक मजदूर अपनी मजदूरी और खर्च बताते हुए कहता है कि उसे ₹4 की मजदूरी मिलती है उसमें से ₹1 वह अपने परिवार के भरण पोषण पर खर्च करता है, ₹1 कर्ज देता है(अर्थात अपने बच्चों के भविष्य निर्माण पर खर्च करता है), ₹1 कर्ज लौटाता है, अर्थात बूढ़े माता-पिता पर खर्च करता है, क्योंकि उन्होंने उसका पालन पोषण किया है, ₹1 फेंक देता है अर्थात सेवा में समाज के लिए दान में खर्च करता है| यह सामान्य पहेली किसी भी व्यक्ति और सरकार को अपनी आय और व्यय को संतुलित रखने का बहुत मार्मिक संदेश देती है| कोई भी सरकार अगर भविष्य निर्माण पर अपनी आय का एक चौथाई नहीं खर्च करेगी तो व्यवस्था गड़बड़ा जाएगी| इसी प्रकार सामाजिक सेवाओं के लिए मुफ्त में लोगों को लाभान्वित करने के लिए 25% से ज्यादा नहीं खर्च किया जाना चाहिए| सिस्टम पर खर्च भी लगातार बढ़ता जा रहा है| यह भी सरकार पर भारी पड़ रहा है| जबकि सरकारी कर्मचारियों की संख्या लगातार घटती जा रही है| आज के 15 साल पहले जहां लगभग 7 लाख कर्मचारी थे आज उनकी संख्या चार लाख के आसपास ही है|
सरकार विज्ञापन निकालकर नए बजट के लिए आम लोगों से सुझाव मांगती है| क्या इसी विज्ञापन में यह नहीं दिया जा सकता कि पिछले साल हमने आम लोगों के लिए कितनी कितनी राशि किस बात पर किस विकास कार्य पर खर्च की| अगर यह दिया जाता तब लोग बजट के लिए सुझाव देने पर अधिक उत्साहित होते| आज तो यह औपचारिकता जैसी हो गई है| सरकार से जुड़े कुछ लोग सुझाव देकर इस औपचारिकता को पूरी कर देते हैं|
सूचना के अधिकार कानून में जहां लोगों को सुरक्षा और कुछ महत्वपूर्ण विषयों को छोड़कर सभी चीजें जानने का हक है, तो फिर इस बात से क्यों वंचित किया जा रहा है, कि सरकार ने कर्ज लेकर उसके अंतर्गत कौन-कौन से विकास के काम किए हैं|
भले ही इसके लिए विभाग को थोड़ी मेहनत कर विवरण तैयार कर देना पड़े लेकिन दिया जाना चाहिए| इससे सरकार की विश्वसनीयता बढ़ेगी और विकास की प्रमाणिकता भी स्थापित होगी|
केवल बांटने से अहम की संतुष्टि हो सकती है, लेकिन राज्य का विकास नहीं हो सकता है| जनता के टैक्स का पैसा खर्च करते समय उसकी उपयोगिता और प्रमाणिकता सबसे महत्वपूर्ण होती है| सरकारें इस पर ध्यान नहीं देंगी तो पक्ष विपक्ष के बीच में तर्क वितर्क होता रहेगा और राज्य के टैक्सपेयर चिंता व्यक्त करते रहेंगे|न्यूज पुराण से साभार
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एमपी में बन रहा गौशालाओं का नेटवर्क
भोपाल,(सुनीता दुबे).वर्तमान में मध्यप्रदेश देश का सर्वाधिक गौवंश और गौशालाओं वाला प्रदेश है। यहाँ गौवंश के विकास, गौ-पालन, गौ-संरक्षण, गौ-संवर्धन और गौ आधारित उत्पादों के संवर्धन के लिये सार्थक प्रयास किये जा रहे हैं। मुख्यमंत्री गौ-सेवा योजना और अशासकीय स्वयंसेवी संस्थाओं द्वारा संचालित 1768 गौ-शालाओं में ढाई लाख से ज्यादा गौ-वंश की देखभाल की जा रही है। शासन द्वारा प्रति गौवंश प्रति दिवस के मान से 20 रुपये का अनुदान दिया जाता है। मुख्यमंत्री गौ-सेवा योजना में अब तक पूर्ण 1141 गौ-शालाओं में 76 हजार 941 गौ-वंश का पालन किया जा रहा है। स्वयंसेवी संस्थाओं की पंजीकृत 627 गौ-शालाओं में भी करीब एक लाख 74 हजार गौ-वंश की देखभाल की जा रही है।
विकसित होंगे गौवंश वन्य विहार
गौ-वंश को जंगल से आहार और वन को गोबर से खाद मिलने की व्यवस्था प्राकृतिक है। गौपालन एवं पशुधन संवर्धन बोर्ड द्वारा जंगलों के पास गौ-वंश वन्य विहार विकसित किये जा रहे हैं। रीवा जिले के बसावन मामा क्षेत्र में 51 एकड़ क्षेत्र में गौ-वंश वन्य विहार विकसित किया गया है, जिसमें 4 हजार गौ-वंश हैं। जबलपुर जिले के गंगईवीर में 10 हजार और दमोह जिले में 4 हजार गौ-वंश की क्षमता वाला वन्य विहार विकसित किया जा रहा है। आगर-मालवा के सुसनेर में 400 एकड़ में कामधेनु अभयारण्य विकसित किया गया है, जिसमें वर्तमान में 3400 बेसहारा, वृद्ध और बीमार गायों की देखभाल की जा रही है। इसी माह सागर विश्वविद्यालय में कामधेनु पीठ की स्थापना भी की गई है।
मध्यप्रदेश में गौ हत्या संज्ञेय अपराध
मध्यप्रदेश में गौ हत्या संज्ञेय अपराध है। यहाँ आरोप सिद्ध होने पर सजा का प्रावधान है। मध्यप्रदेश में चार प्रजाति का देशी गौ-वंश पाया जाता है, जिनका दूध गिर गाय की तरह ही स्वर्णयुक्त एवं उच्च गुणवत्ता वाला है। देशी गाय के दूध में मानव स्वास्थ्य के लिये आवश्यक सभी पोषक तत्व पाये जाते हैं।
प्रतिदिन 9.13 लाख किलो लीटर दूध का संकलन
प्रदेश में लगभग सवा 7 हजार दुग्ध सहकारी समितियाँ कार्यरत हैं, जिनके माध्यम से पिछले वित्त वर्ष में प्रतिदिन औसतन 9 लाख 13 हजार किलो लीटर दुग्ध संकलन और औसत 6 लाख 38 हजार लीटर पैकेट दुग्ध विक्रय हुआ है। लॉकडाउन के दौरान दुग्ध संघों द्वारा 2 करोड़ 54 लाख लीटर दूध अतिरिक्त रूप से खरीदा गया। उल्लेखनीय यह भी है कि कोरोना लॉकडाउन के कारण जहाँ कई व्यवसाइयों को आर्थिक तंगी से गुजरना पड़ा, वहीं दुग्ध उत्पादक किसानों को 94 करोड़ रुपये राशि का अतिरिक्त भुगतान किया गया।
आइसक्रीम, पनीर आदि संयंत्रों का निर्माण
पिछले एक साल में इंदौर में 4 करोड़ रुपये की लागत से आइसक्रीम संयंत्र और खण्डवा में 25 हजार लीटर क्षमता के संयंत्र निर्माण का कार्य पूरा हुआ। जबलपुर में पौने 10 करोड़ रुपये की लागत से 10 मीट्रिक टन प्रतिदिन क्षमता के स्वचलित पनीर निर्माण संयंत्र की स्थापना का काम भी पूरा हो चुका है। सागर में भी एक लाख लीटर क्षमता के संयंत्र की स्थापना की गई।
सौर ऊर्जा को बढ़ावा
दुग्ध संयंत्रों को ऊर्जा में आत्म-निर्भर बनाने के लिये सौर ऊर्जा संयंत्र स्थापना की कार्यवाही को प्रोत्साहित किया जा रहा है। प्रदेश के 5 संयंत्रों में 4 करोड़ 13 लाख रुपये की लागत से सौर ऊर्जा आधारित गर्म पानी के संयंत्रों की स्थापना की जा रही है।
अतिरिक्त दूध का उपयोग मिल्क पावडर बनाने में
दुग्ध संघों द्वारा वितरण से बचे हुए दूध का मिल्क पावडर बनाकर महिला-बाल विकास विभाग की “टेक होम राशन” योजना के लिये प्रदाय किया जाता है। आँगनवाड़ियों के लिये सुगंधित मीठा दुग्ध चूर्ण भी पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के माध्यम से प्रदाय किया जा रहा है।
देश की दूसरी सीमन प्रयोगशाला भोपाल में
केन्द्रीय वीर्य संस्थान द्वारा साढ़े 47 करोड़ रुपये की लागत से देश की दूसरी सेक्स सार्टेड सीमन प्रयोगशाला भोपाल में स्थापित की गई है। प्रयोगशाला में अब तक 21 हजार 580 सीमन का उत्पादन किया जा चुका है। सागर जिले के रतौना में राष्ट्रीय गोकुल मिशन में गोकुल ग्राम और कृत्रिम गर्भाधान प्रशिक्षण संस्थान की स्थापना की गई है। बुंदेलखण्ड क्षेत्र विकास योजना में दतिया जिले के नौनेर में आत्म-निर्भर मध्यप्रदेश के तहत प्रदेश का दूसरा वीर्य उत्पादन संस्थान स्थापित किया गया है। पिछले साल राष्ट्रीय कृषि विकास योजना में 1500 और गोकुल मिशन में 850 मैत्री को प्रशिक्षण दिया गया।
स्वास्थ्य सुरक्षा के लिये टीकाकरण
प्रदेश के सभी गौ-भैंस वंशीय पशुओं को नेशनल एनीमल डिजीज कंट्रोल प्रोग्राम में एफएमडी और ब्रूसेल्ला का टीका लगाया गया। समस्त पशुओं को यूआईडी टेग लगाकर इनाफ पोर्टल पर दर्ज किया जा रहा है। राष्ट्रीय पशु रोग नियंत्रण कार्यक्रम में ढाई करोड़ से अधिक पशुओं का एफएमडी रोग के विरुद्ध टीकाकरण किया गया है। उद्देश्य वर्ष 2025 तक मुँहपका, खुरपका (एफएमडी) और ब्रूसेल्ला रोग पर नियंत्रण पाना और वर्ष 2030 तक इनका उन्मूलन करना है। दुधारु पशुओं के निरोगी होने से दूध, पशुधन और उत्पादों में वृद्धि होगी। परिणाम स्वरूप किसानों और पशुपालकों की आय में वृद्धि सुनिश्चित होगी। टीकाकरण का प्रथम चरण 31 जनवरी, 2021 को पूरा हो चुका है।
राष्ट्रव्यापी कृत्रिम गर्भाधान कार्यक्रम
कार्यक्रम के प्रथम चरण में 7 लाख 65 हजार गौ-भैंस वंशीय पशुओं का कृत्रिम गर्भाधान, 5 लाख 91 हजार गर्भधारण परीक्षण और एक लाख 62 हजार वत्सोत्पादन किया गया। द्वितीय चरण में 19 लाख 15 हजार गौ-भैंस वंशीय पशुओं का कृत्रिम गर्भाधान, 9 लाख 29 हजार का गर्भधारण परीक्षण और 38 हजार 365 वत्सोत्पादन हुआ। तीसरा चरण एक अगस्त, 2021 से प्रारंभ होकर 31 मई, 2022 तक चलेगा। इसमें अब तक डेढ़ लाख कृत्रिम गर्भाधान और 3 हजार से अधिक गर्भ परीक्षण किये जा चुके हैं। इनकी प्रविष्टि भी इनाफ पोर्टल पर की जा रही है।
बकरी दूध विक्रय आरंभ
जनजातीय गौरव दिवस 15 नवम्बर से प्रदेश में ग्राहकों को बकरी का दूध भी मिलना आरंभ हो गया है। बकरी दूध विक्रय की शुरूआत जनजातीय बहुल जिलों सिवनी, बालाघाट और धार, झाबुआ और बड़वानी जिलों में उत्पादित 50 से 70 रूपये प्रतिकिलो की दर से खरीदे गये दूध से की गई है। उच्च गुणवत्ता वाला पौष्टिक बकरी का दूध फिलहाल जबलपुर और इंदौर संघ के पार्लर पर उपलब्ध है।
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भू अधिकार पुस्तिका अब आनलाईन उपलब्ध
भोपाल,1 दिसंबर (प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान द्वारा भू-अधिकार पुस्तिका प्राप्त करने का सुगम और आसान तरीका बनाने के निर्देशों के अनुपालन में मध्यप्रदेश शासन के राजस्व विभाग ने भू-अधिकार पुस्तिका उपलब्ध कराने के संबंध में संशोधित नियम जारी किए हैं। अब भू-अधिकार पुस्तिका आवेदक को ऑनलाइन प्राप्त होगी। भू-स्वामी अपनी भू-अधिकार पुस्तिका प्राप्त करने के लिए आईटी सेंटर, एम.पी. ऑनलाइन, लोक सेवा केन्द्र, कियोस्क सेंटर और शासन द्वारा प्राधिकृत सेवा प्रदाता के माध्यम से ऑनलाइन आवेदन कर सकेंगे।
ऑनलाइन मिलने वाली भू-अधिकार पुस्तिका सामान्यत: दो पृष्ठों की होगी। इसके लिए शासन द्वारा 45 रुपये शुल्क निर्धारित किया गया है। प्रकरण विशेष में पुस्तिका यदि अधिक पृष्ठों की है, तो प्रत्येक पृष्ठ के लिए 15 रुपये अतिरिक्त देय होंगे। प्रदेश में भू-अधिकार पुस्तिका अब ऑनलाइन प्रदाय की जायेगी। पूर्व में प्राप्त की गई भू-अधिकार पुस्तिका यथावत उपयोग में ली जा सकेगी। राजस्व विभाग द्वारा भू-अधिकार पुस्तिका प्रदाय करने के लिए समय-सीमा लोक सेवा प्रबंधन विभाग द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार निर्धारित की गई है। भूलेख पोर्टल से भू-अधिकार पुस्तिका की डिजिटल हस्ताक्षरित प्रति डाउनलोड कर आवेदक को निर्धारित समय-सीमा में प्रदाय की जायेगी।
ऑनलाइन भू-अधिकार पुस्तिका प्राप्त करने के लिए कृषक/आवेदक को अपना आधार कार्ड, फोटो, मोबाइल नम्बर, समग्र आईडी, पटवारी हल्का और सेक्टर क्रमांक आदि अभिलेख उपलब्ध कराना होंगे। इन अभिलेखों के आधार पर ऑनलाइन सेवा प्रदाता संस्था आवेदक का आवेदन प्रस्तुत कर देगी। आवेदक द्वारा भू-अधिकार पुस्तिका का आवेदन किए जाने के लिए यदि आधार नम्बर उपलब्ध नहीं है, तो आवेदक का फोटो लेकर क्षेत्र के पटवारी से सत्यापित करवाया जायेगा। पटवारी का दायित्व है कि वह आवेदक का फोटो तीन कार्य दिवस में सत्यापित अथवा अमान्य करें। पटवारी द्वारा ऐसा नहीं किए जाने की दशा में फोटो को सही मानकर भू-अधिकार पुस्तिका जारी की जायेगी।
भू-अधिकार पुस्तिका का आवेदन अमान्य किए जाने अथवा समय-सीमा में निराकरण नहीं होने पर आवेदक को अपील करने का अधिकार होगा। आवेदक प्रथम अपील 30 दिवस और द्वितीय अपील 60 दिवस में प्रस्तुत कर सकेगा। दोनों ही अपील निराकरण करने की समय-सीमा 15 दिवस निर्धारित की गई है।