Month: January 2020

  • खजाने के लुटेरों पर लगे अंकुश

    खजाने के लुटेरों पर लगे अंकुश

    बजट सत्र का शुभारंभ करते हुए महामहिम राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने एक बार फिर भारत को 5 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने का संकल्प दुहराया है। कल पेश होने जा रहे आम बजट से पहले आज वित्तमंत्री श्रीमती निर्मला सीतारमन ने आर्थिक सर्वेक्षण पेश किया। इसमें दर्शाया गया है कि भारत का विदेशी मुद्रा भंडार आज 450 बिलियन डॉलर का ऐतिहासिक स्तर छू रहा है। देश में आर्थिक विकास की रफ्तार धीमी बताते हुए शेयर बाजार ने ना नुकुर शुरु कर दी है। बजट को लेकर कार्पोरेट सेक्टर सरकार पर दबाव डालने का भरपूर प्रयास कर रहा है।इसके बावजूद नरेन्द्र मोदी की सरकार भारत की इकानामी को बढ़ाने के दावे पर अटल है। प्रमुख विपक्षी दल कांग्रेस लगातार देश में ये संदेश देने का प्रयास कर रहा है कि मानों देश डूब गया हो और उसकी अर्थव्यवस्था को मोदी सरकार ने मटियामेट कर दिया है। हकीकत इससे ठीक उलट है। जबसे देश में नोटबंदी हुई है तबसे कांग्रेस ये जताने की कोशिश करती रही है कि मोदी सरकार ने बगैर सोचे समझे एक गलत फैसला लिया था जिसकी वजह से देश के उद्योग धंधे और कारोबार तबाह हो गए थे। नोटबंदी से कई सच उजागर हुए हैं। आयकर विभाग ने देश के उन कारोबारियों को नोटिस दिए हैं जिन्होंने नोटबंदी के दौरान बड़ी रकम के पुराने नोट जमा किए थे। उनसे पूछा जा रहा है कि वे बैंकों में जमा कराए गए नोटों के स्रोत उजागर करें। रिजर्व बैंक भी ये जानने को बेताब है कि आखिर जितनी तादाद में उसने नोट छापे उससे भी ज्यादा संख्या में नोट बैंकों में जमा कैसे करा दिए गए। डुप्लीकेट नोटों की खेप कहां कहां से आई। वे कौन लोग थे जिन्होंने जाली नोटों की खेप जमा कर रखी थी। सरकार के इस कदम से बाजार में खलबली मच गई है। काला धन बैंको में जमा करने का अपराध कर चुके लोगों के लिए अब सामने अंधी गली नजर आ रही है। वे अपनी गलती अब सुधार नहीं सकते हैं। यही वजह है कि वे करवट लेते बाजार के कारण पिट रही कंपनियों की आड़ लेकर अर्थव्यवस्था की तबाही का रोना रो रहे हैं। रोने वाले राज्यों में वे सबसे आगे हैं जिन राज्यों में कांग्रेस सत्तासीन है। छत्तीसगढ़ की भूपेश बघेल सरकार ने तो वे तमाम योजनाएं बंद कर डाली हैं जिन्हें पिछली रमन सरकार चलाती रही थी। भाजपा पर विज्ञापनों की खैरात बांटने वाली कमलनाथ सरकार भी कटौतियों पर उतारू है। कमलनाथ ने तो भुगतानों पर रोक लगाने के बजाए बजट की ही कैपिंग कर दी है। निर्धारित बजट की मात्र साठ फीसदी राशि ही विभागों को दी जा रही है। राशि की कमी की वजह से भुगतान लंबित हैं और लोग इसी प्रत्याशा में धीरज बांधे हुए हैं कि जल्दी ही उन्हें भुगतान प्राप्त होगा। पूर्व वित्तमंत्री जयंत मलैया के उस बयान को कमलनाथ ने अपना सूत्र वाक्य बना रखा है कि प्रदेश का खजाना खाली है। जबकि हकीकत ये है कि दिग्विजय सिंह सरकार की नालायकियों के बाद से प्रदेश का वित्तीय प्रबंधन बहुत कारगर हो चुका है। उमा भारती के वित्तमंत्री रहे राघवजी भाई ने जिस तरह प्रदेश की आय बढ़ाने का प्रयास किया वह उल्लेखनीय रहा है। बाद के वर्षो में शिवराज सिंह चौहान की मैं हूं न वाली रट ने अनाप शनाप खर्चे चालू कर दिए थे। ठाकुर लाबी की शह पर सिंधिया महाराज को गाली देते शिवराज सिंह चौहान दिग्विजय सिंह की शतरंज के जाल में बुरी तरह उलझ गए थे। उन्होंने दिग्गी की उन सभी नीतियों का चुग्गा शान से चुगा जिनकी वजह से दिग्गी ने प्रदेश का बंटाढार किया था।मोदी सरकार की आर्थिक नीतियों में पलीता लगाने में जुटे शिवराज को इसीलिए केन्द्र ने सलाह देना बंद कर दिया और गलत टिकिट वितरण ने भाजपा की लुटिया डुबो दी। अब कमलनाथ तो इससे भी आगे बढ़कर अपने पैरों पर कुल्हाड़ी मार रहे हैं। उनकी निगाह में प्रदेश के सारे लोग अपराधी हैं। सारे लोग लुटेरे हैं। इतनी वैमनस्यता से भरी सरकार इसके पहले कभी नहीं देखी गई। जिन रेत के ठेकों में वे प्रदेश को बारहसौ करोड़ रुपए आय का लालीपाप थमा रहे हैं वह सिर्फ दिवा स्वप्न साबित होने जा रहा है। सीहोर, होशंगाबाद और भिंड में रेत खनन के लिए हैदराबाद की जिस पावर मेक प्रोजेक्ट्स लिमिटेड को ठेका दिया गया है वह बैंकों का कर्ज गड़पने के आरोपों से घिरी है।एमपी, महाराष्ट्र और छत्तीसगढ़ में इस कंपनी के मालिकों ने हजारों लोगों को चूना लगाकर बैंकों के करोड़ों रुपए गड़प किए हैं। इसी तरह अन्य कई कंपनियां रेत के ठेकों की आ़ड़ में अपने घोटाले छुपा रहीं हैं। बेशक कमलनाथ सरकार कहे कि उनका वास्ता तो केवल रेत के ठेकों से आय बढ़ाने तक ही सीमित है लेकिन कंपनियों के आड़ में जिन्होंने देश का धन लूटा है उन्हें संरक्षण देना देश से गद्दारी करना है। कानून व्यवस्था भले ही राज्य का विषय हो लेकिन वित्तीय अनुशासन केन्द्र का सबसे प्रमुख अस्त्र है। भारत सरकार को उन कंपनियों के विरुद्ध भी कार्रवाई करनी चाहिए जिन्हें राजनैतिक वैमनस्य के जरिए कांग्रेस की राज्य सरकारें संरक्षण दे रहीं हैं। इन पर अंकुश लगाए बगैर पांच ट्रिलियन डालर की इकानामी का लक्ष्य नहीं पाया जा सकेगा।

  • कमलनाथ की राजनीति को नसीहत की दरकार

    कमलनाथ की राजनीति को नसीहत की दरकार

    गुलाम भारत में अंग्रेजों के ऊटपटांग कानूनों के विरोध में तरह तरह से विरोध किया जाता रहा है। उसकी वजह ये थी कि अंग्रेजी सल्तनत ने भारत को लूटने के लिए वे कानून बनाए थे। बाद में जब एओ ह्यूम की कांग्रेस को गांधीजी ने अंग्रेजों से संवाद का माध्यम बनाया तब कानूनों का विरोध अदालतों में भी किया जाने लगा। आजाद हिंदुस्तान में गांधी कांग्रेस की नकलची इंदिरा कांग्रेस संसद में पारित कानूनों को लेकर जनता को भड़काने में लगी है। इंदिरा कांग्रेस के नेता अपनी इस शैली से खुद को महात्मा गांधी की कांग्रेस बताना चाह रहे हैं। वो ये तब कर रहे हैं जब पूरा देश एक नई दिशा में चल पड़ा है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का मेक इन इंडिया उत्पादन बढ़ाकर पूंजी का उत्पादन करना चाहता है जबकि कांग्रेस का मानस आज तक थानेदारी के माहौल से आगे नहीं बढ़ पाया है। पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की कार्यशैली की लाखों आलोचनाएं की जा सकती है। बेशक वे एक सफल शासक नहीं साबित हो पाए। इसके बावजूद वे एक ऐसे मुख्यमंत्री जरूर साबित हुए जिसने प्रदेश को आगे बढ़ने का अवसर दिया। जिसने प्रदेश के लोगों के कामकाज में बेवजह अड़ंगे नहीं लगाए। इसके विपरीत मध्यप्रदेश की कमलनाथ सरकार आपातकाल की मनःस्थिति से बाहर नहीं आ पा रही है। सरकार का शुद्ध के लिए युद्ध अभियान हो या बजट की कैपिंग करने की कार्यशैली ये दोनों ही चौकीदारी के मानस से बाहर नहीं आ पा रहे हैं। पूर्व प्रधानमंत्री डाक्टर मनमोहन सिंह चिल्ला चिल्लाकर बोलते रहे कि देश में अब इंस्पेक्टर राज की वापिसी नहीं होगी। इसके बावजूद उनकी ही पार्टी की सरकार ने मध्यप्रदेश को थानेदारी के जाल में उलझा दिया है। ये थानेदारी भी छुप छुपकर की जा रही है। जिस नागरिकता कानून को संसद ने बहुमत से पारित किया उसके खिलाफ राज्य सरकार कुछ ऐसा माहौल बना रही है जैसे संसद में बैठे लोग अंग्रेज हों और उनकी नियत देश का शोषण करने की है। जबकि हकीकत ठीक विपरीत है। खुद को उद्योगपति कहलाने वाले कमलनाथ बेहद कमजोर व्यवस्थापक साबित हो रहे हैं। पिछली सरकार की देखासीखी करके उनके वित्तमंत्री तरुण भानोट ने भले ही दो लाख 14 हजार करोड़ का बजट बना दिया हो लेकिन कमोबेश सभी विभागों को बजट की राशि देने में कटौती कर दी है। हर विभाग को कम से कम चालीस फीसदी बजट कम दिया जा रहा है। बजट की इस कटौती से हाहाकार मचा है। इससे निपटने के लिए उन्होंने मुस्लिमों को नागरिकता कानून के विरोध में भड़काना जारी रखा है। उनके एक विधायक आरिफ मसूद इस अभियान के सूत्रधार हैं। उन्होंने पुराने भोपाल के इलाकों में इतनी दहशत फैलाई कि लोगों ने अपनी दूकानें बंद रखने में ही भलाई समझी। विधायक आरिफ अकील के क्षेत्र में व्यापारियों ने बेखौफ होकर अपना कारोबार जारी रखा लेकिन आरिफ मसूद के इलाके में भारत बंद को सफल दिखाने के लिए दूकानें बंद कराई गईं। सरकार की शह इतनी दबी छुपी है कि पूरे प्रदेश में पुलिस तंत्र का एक हिस्सा बंद का समर्थन करते नजर आया। पुलिस के कुछ आला अधिकारियों का तो कहना था कि लोग यदि कानून का विरोध कर रहे हैं तो फिर उन्हें क्यों रोका जाए। ये पहली बार हो रहा है कि कोई सरकार अपने ही देश के कानून के विरोध को शह दे रही हो। निश्चित रूप से ये समझदारी भरा कदम नहीं है। इससे केन्द्र राज्य के बीच बेवजह कटुता का माहौल बन रहा है। मध्यप्रदेश की जनता के एक हिस्से ने कांग्रेस को सत्ता में काम करने का अवसर दिया है। उसका भी सोच प्रदेश का विकास करना है। जबकि राज्य सरकार इस सत्ता का उपयोग केन्द्र से टकराव के लिए कर रही है। उसकी इस खुन्नस से राज्य के हित प्रभावित हो रहे हैं। प्रदेश के लोगों की जीवचर्या में सहयोग देने की बात आती है तो कमलनाथ और उनके मंत्री कहने लगते हैं कि खजाना खाली है। जबकि राज्य को हर महीने उतनी ही आय हो रही है जितनी पिछली सरकार के कार्यकाल में हो रही थी। राज्य सरकार जीएसटी कलेक्शन बढ़ाने का माहौल भी नहीं बना पा रही है। मुख्यमंत्री अपने सचिवालय में मैराथन बैठकें करते रहते हैं। वे अधिकारियों पर अधिक राजस्व जुटाने के लिए दबाव बनाते हैं जबकि इसके बावजूद खजाने की आय नहीं बढ़ रही है। इसकी सबसे बड़ी वजह ये है कि तबादले और पोस्टिंग के धंधों की वजह से राज्य की आय का एक बड़ा हिस्सा काला धन बना रहा है। उसे रोकने के लिए सरकारी तंत्र छापेमारी कर रहा है। इस पूरी कवायद ने प्रदेश में तनाव के हालात बना दिए हैं। राज्य सरकार की इस अज्ञानता भरी कवायद की वजह से राज्य का माहौल तनावपूर्ण है। सीएए का विरोध करके राज्य सरकार ने खुद को फिजूल की उलझन में फंसा लिया है। प्रदेश के जिम्मेदार लोगों को चाहिए कि वे सरकार को नसीहत दें और प्रदेश की विकास यात्रा प्रशस्त करें।

  • टीन शेड जैन मंदिर में गणतंत्र दिवस पर झंडावंदन

    टीन शेड जैन मंदिर में गणतंत्र दिवस पर झंडावंदन

    भोपाल,26 जनवरी(प्रेस सूचना केन्द्र)।भोपाल समाज समिति, भोपाल के तत्त्वावधान में टीन शेड जैन मंदिर के प्रांगण में झण्डा वंदन कर 71 वें गणतंत्र दिवस का कार्यक्रम पूरे हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। देश भक्ति से परिपूर्ण कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में सुश्री “मितुल प्रदीप” उपस्थित रहीं।

    सुश्री मितुल, जन जन के रक्त में देशभक्ति का संचार करने वाले कालजयी गीत “ए मेरे वतन के लोगो” जैसे अनेक देशभक्ति गीतों के रचियता कवि प्रदीप की पुत्री हैं। कार्यक्रम की अध्यक्षता देश के अंतराष्ट्रीय स्तर के वरिष्ठ कवि एवं गीतकार श्री कुंवर बैचेन ने की। कुंवर बैचेन जी की रचनाएं देश के 7 राज्यों के कॉलेज एवं स्कूल के पाठ्यक्रमों में सम्मिलित है। उनकी अब तक 35 पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी है साथ ही एक महाकाव्य भी प्रकाशित हो चुका है। लगभग 60 दशकों से भी अधिक समय से काव्य मंचो का प्राधिनित्व कर रहे कवि कुंवर बैचेन के काव्यों पर लगभग 24 पीएचडी अवार्ड हो चुकी हैं एवं 8 पीएचडी शोध चलायमान हैं।

    मुख्य अतिथि ने अपने उद्गार व्यक्त करते हुए अपने संबोधन में कवि प्रदीप की दो संदेशों के विषय में कहा । पहला संदेश “हम लाये हैं तूफान से कश्ती निकाल के, इस देश को रखना मेरे बच्चों संभाल के” को दृष्टिगत रखते हुए बच्चों को संबोधित करते हुए दिया कि ये देश को संभालने वाले अब ये बच्चे है जो भावी भारत के कर्णधार हैं। दूसरे संदेश में “इंसान का इंसान से हो भाईचारा, यही संदेश हमारा’ को दृष्टिगत रखते आज के परिदृश्य में कवि प्रदीप द्वारा लिखी गयी पंक्तियों को आचरण में अंगीकार करने की अपील उन्होंने की। श्री कुंवर बैचेन ने अपने अध्यक्षीय संबोधन में सकारात्मकता पर जोर देते हुए कहा कि इस समय हमें एकता के सूत्र में बधने की आवश्यकता है तभी राष्ट्र तरक्की कर पायेगा। अपने गीत “भले ही हम में तुम में कुछ, ये रूप रंग का भेद हो..है खुशबुओं में फर्क क्या गुलाब हम गुलाब तुम” के माध्यम से आज के परिदृश्य में समाधान बताने की चेष्टा की साथ ही अपने गीत ” है हमारा नमन है वतन के लिए” के माध्यम से देशभक्ति के जज़्बातों को ज़ाहिर किया।

    कार्यक्रम में भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारी श्री शोभित जैन आई.ए. एस, टीन शेड जैन मंदिर के अध्यक्ष अमर जैन, संस्था के अध्यक्ष राकेश सिंघई, श्री सेठी जी एवं अन्य गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।कार्यक्रम का सफल संचालन श्री शशांक जैन, आई.टी कंसलटेंट द्वारा किया गया एवं आभार प्रदर्शन अमर जी जैन द्वारा किया गया।

  • रबर की गुड़िया का खेल नहीं कलेक्टरी

    रबर की गुड़िया का खेल नहीं कलेक्टरी

    रबर की गुड़िया और खिलौनों से खेलने वाले बच्चे पूरी जिंदगी उस साए से मुक्त नहीं हो पाते हैं। चाहे वे कितनी ही बड़ी जवाबदारी क्यों न संभाल लें लेकिन उन्हें लगता है कि वे गुड़िया से ही खेल रहे हैं और वह कोई जवाब नहीं देगी। उसके जवाब भी उन्हें ही देना होंगे। ऐसा ही कुछ राजगढ़ की कलेक्टर निधि निवेदिता और डिप्टी कलेक्टर प्रिया वर्मा के साथ घट रहा है।जिला दंडाधिकारी का पद पाने के बाद भी उन्हें लगता है कि वे बच्चों का खेल खेल रहीं हैं। गलती करने पर उन्हें लाड़ से डपटने वालों को छोड़कर किसी का सामना नहीं करना पड़ेगा। वे भूल रहीं हैं कि वे जनता की अनुबंधित नौकर हैं। उन्हें जनता ने अपनी व्यवस्थाओं की जवाबदारी निभाने के लिए नौकरी पर रखा हुआ है। अफसरी का ज्यादा अनुभव न होने की वजह से उन्हे लगता है कि उनकी जवाबदारी जनता के प्रति नहीं बल्कि शासकों के प्रति है। अंग्रेजों की प्रेरणा से बनी अफसरशाही शुरु से ही शासकों के प्रति झुकाव रखती रही है।इस समस्या के निदान के लिए ही स्वर्गीय राजीव गांधी ने पंचायती राज की अवधारणा को पूरे देश में लागू किया था। जिस दिग्विजय सिंह ने पंचायती राज व्यवस्था को प्रदेश में सख्ती से लागू किया वही आज बिगड़े दिमाग वाली अफसरों का बचाव कर रहे हैं। उन्हें तो अपनी सरकार केवल इसलिए गंवानी पड़ी थी क्योंकि पंचायती राज व्यवस्था अराजकता की भेंट चढ़ गई थी और अफसरशाही ने उनकी सरकार का वध कर दिया था। इसी अफसरशाही की असफलताएं गिनाकर कांग्रेस की मौजूदा सरकार सत्ता में आई है। इसके बावजूद सत्ता में आने के बाद वह अफसरों की गुलामी करने लगी है। राजगढ़ के कुछ जागरूक नागरिक जब नागरिकता संशोधन कानून का समर्थन कर रहे थे तब उन्हें जरा भी भान नहीं था कि जिस सरकारी अमले पर कानून लागू करवाने की जिम्मेदारी है वे ही उनके ऊपर हमला कर देंगे।उस समय वे शांतिपूर्ण तरीके से विरोध जता रहे थे। उनके हाथों में तिरंगा झंड़ा था। कमलनाथ सरकार ने चूंकि राजनीतिक एजेंडे के तहत विरोध प्रदर्शन को अनुमति न देने का अघोषित आदेश दिया है इसलिए खुद को सरकार का सिपाहसालार बताने के लिए कुछ अफसरों में होड़ सी लग गई है। जाहिर है कि राजगढ़ की कलेक्टर और डिप्टी कलेक्टर को भी राज्य सरकार की चिलम भरने में जुटना ही था। जिस बेखौफ अंदाज में कलेक्टर ने नारे लगाते कार्यकर्ता को झांपड़ रसीद किया और जिस गुंडई भरे लहजे में डिप्टी कलेक्टर ने तिरंगा धारियों को घसीटा उससे तो ऐसा ही लग रहा था मानों अंग्रेजों के टुकड़खोर आजादी के परवानों पर जुल्म ढा रहे हों। इस बदतमीजी का जवाब खून खराबे से भरा भी हो सकता था। भीड़ चूंकि हिंसक नहीं थी और न ही हिंसा का उसका कोई इरादा था इसलिए किसी शैतान प्रदर्शनकारी ने डिप्टी कलेक्टर की चोटी खींचकर उसे याद दिलाया कि वह सीमा लांघ रही है। पुलिस के बीचबचाव से भले ही दोनों अफसर बच गईं हों लेकिन जनता के बीच इसकी प्रतिक्रिया अच्छी नहीं है। इस घटना से नाराज भाजपा के कार्यकर्ता जब प्रदर्शन कर रहे थे तो पूर्व मंत्री बद्री यादव ने भावनाओं के अतिरेक में कुछ ज्यादा ही काल्पनिक कहानी सुना डाली। उन्होंने कहा कि यहां की कलेक्टर कांग्रेसियों को तो गोदी में बिठाकर दूध पिलाती है लेकिन भाजपा के कार्यकर्ताओं को थप्पड़ मारती है। हंसी ठिठोली के अंदाज में कही गई इस बात ने तूल पकड़ लिया और डिप्टी कलेक्टर की शिकायत पर बद्रीयादव की गिरफ्तारी और जमानत की प्रक्रिया भी की गई। दूध दुहना और लोगों को पिलाना बद्रीयादव का खानदानी काम रहा है। इसी वजह से उन्होंने कलेक्टर के कांग्रेस प्रेम को दर्शाने के लिए इस जुमले का इस्तेमाल कर डाला। जब प्रतिक्रियाएं आईं तो उन्हें अपनी गलती का अहसास हुआ और उन्होंने यह कहते हुए माफी भी मांग ली कि उनकी बात का गलत अर्थ न निकाला जाए। हालांकि जब बात बिगड़ती है तो उसकी कई तस्वीरें सामने आती हैं।एक एएसआई और पटवारी ने कलेक्टर के दुर्व्यवहार को लेकर ही शिकायत कर डाली। जिसमें कलेक्टर ने उन्हें भी थप्पड़ मारा था। अब कलेक्टर साहिबा की मानसिक दशा का दूसरा ही पक्ष सामने आने लगा है। जाहिर है कि भारतीय प्रशासनिक सेवा के आला अधिकारियों और उन्हें मध्यप्रदेश कैडर में भेजने वाले केन्द्रीय कार्मिक मंत्रालय को ऐसी मानसिकता वाली अफसर की कार्यशैली पर गंभीरता से विचार करना चाहिए जो जनता के प्रति असहिष्णु हो। फौरी प्रतिक्रिया के तौर पर निधि निवेदिता और प्रिया वर्मा को निलंबित किया जाना चाहिए। राज्य सरकार से फिलहाल ये उम्मीद इसलिए नहीं की जाती क्योंकि भाजपा की ओर से इस घटना को लेकर अफसरों का विरोध किया जा रहा है। सबसे बड़ी बात तो ये है कि अफसरों को नसीहत देने वाले मुख्यमंत्री कमलनाथ महिला अफसरों के मामले में थोड़े ज्यादा सहिष्णु हैं। शायद यही वजह है कि उनकी कांग्रेस भाजपा के प्रदर्शन को महिलाओं का अपमान बताने में जुटी है। वीडियो क्लीपिंग्स में जो हकीकत सामने आई है उसमें साफ दिख रहा है कि किसी भी प्रदर्शन कारी ने महिला अफसरों से बदतमीजी नहीं की थी। इसके बावजूद महिला अफसरों ने सीमाएं लांघकर कार्यकर्ताओं पर हमला किया। प्रिया वर्मा तो अपनी अफसर से जुगलबंदी करने की रौ में इतना बह गईं कि उन्होंने भीड़ में घुसकर तिरंगा लिए व्यक्तियों को चुन चुनकर घसीटना शुरु कर दिया। गैर जिम्मेदार अफसरों पर कार्रवाई करने की जवाबदारी निश्चित रूप से राज्य सरकार की है। उसे इन अफसरों को तत्काल हटाकर निलंबित करना चाहिए। उनके व्यवहार की जांच कराई जानी चाहिए और केन्द्र को सूचित किया जाना चाहिए।ये भी सुनिश्चित किया जाए कि जो अफसर भीड़ को नियंत्रित करने के बजाए उसे भड़काने की मानसिकता रखते हों उन्हें भविष्य में कभी मैदानी पोस्टिंग न दी जाए। कमलनाथ सरकार से फिलहाल ऐसे किसी सख्त कदम की उम्मीद नहीं की जा सकती। जो सरकार नागरिकता संशोधन कानून जैसे संसद से पारित व्यवस्था को लेकर अनर्गल बयानबाजी कर रही हो उससे जिम्मेदाराना व्यवहार की अपेक्षा भी क्यों की जाए। केन्द्र सरकार ने आईएएस अफसरों की व्यवस्था सुधारने की दिशा में कई प्रयास किए हैं। निश्चित रूप से ऐसे बिगड़े अफसरों के भविष्य का फैसला उसे करना चाहिए। सबसे बड़ी जवाबदारी तो भाजपा जैसे राजनीतिक दलों और आम नागरिकों की है।जनता के प्रति सड़ांध भरी मानसिकता लेकर नौकरी में आ गए इन अफसरों की शैली को अदालत में चुनौती दी जानी चाहिए। उनकी योग्यता की छानबीन कराई जाए और उन्हें पदमुक्त किया जाए ताकि सरकार और जनता के बीच संवादहीनता की स्थितियां न बनें। जिन अफसरों को जनता और सरकार के बीच संवाद की कड़ी बनना चाहिए यदि वे रोड़ा बन रहे हों तो बेहतर है इस रोड़े को जल्दी से जल्दी रास्ते से हटाया जाए। क्योंकि कलेक्टरी कोई रबर के गुड्डे गुड़ियों का खेल नहीं है। कमलनाथ सरकार इस पर गौर करे तो अच्छा ही होगा।

  • कब्जाधारी कांग्रेसियों की सूची सार्वजनिक करेगी भाजपा बोले लुणावत

    कब्जाधारी कांग्रेसियों की सूची सार्वजनिक करेगी भाजपा बोले लुणावत

    भोपाल,21 जनवरी(प्रेस सूचना केन्द्र)। भारतीय जनता पार्टी ने अपने पंद्रह सालों के शासनकाल में सार्वजनिक संपत्तियों पर कब्जा जमाने वाले अतिक्रमण कारियों के खिलाफ कार्रवाई की लेकिन कभी दलगत राजनीति के आधार पर भेदभाव नहीं किया। मौजूदा कांग्रेस सरकार चुन चुनकर भारतीय जनता पार्टी के कार्यकर्तांओं को अतिक्रमण के नाम पर प्रताड़ित कर रही है। ऐसे झूठे मामलों में प्रताड़ित किए जा रहे आम लोगों का नेतृत्व करते हुए कल भारतीय जनता पार्टी के कार्यकर्ता पूरे प्रदेश में कलेक्टर कार्यालयों का घेराव करेंगे। सरकार से मांग की जाएगी कि वह आम नागरिकों को भाजपा का कार्यकर्ता बताकर प्रताड़ित करना बंद करे। भाजपा ने हर जिले में कांग्रेस के पदाधिकारियों के अतिक्रमणों की सूची बनाई है जिसे सार्वजनिक किया जाएगा और सरकार से उन अतिक्रमण कारियों के विरुद्ध बेदखली की कार्रवाई करने की मांग की जाएगी। भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश उपाध्यक्ष बृजेश लुणावत ने आज पार्टी के प्रदेश कार्यालय में आयोजित पत्रकार वार्ता में ये बात कही है।


    श्री लुणावत ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी जिस तरह के भेदभाव और अवैध वसूली के आरोप प्रदेश सरकार पर लगाती रही है, उसे स्वयं मुख्यमंत्री कमलनाथ भी मानते हैं और मुख्य सचिव की नोटशीट भाजपा के आरोपों पर मोहर लगाती है। मुख्यमंत्री ने माना है कि इस मुहिम के दौरान माफिया के नाम पर आम जनता को परेशान किया जा रहा है। उन्होंने लिखा है कि बिल्डिंग परमीशन जैसी छोटी-छोटी बातों के लिए हजारों नोटिस दिये जा रहे हैं, पुलिस और प्रशासन के लोग इसमें शामिल हैं, जबकि मैंने स्पष्ट आदेश दिया था कि कार्रवाई माफिया पर हो, जनता पर नहीं।

    श्री लुणावत ने कहा कि कमलनाथ सरकार प्रदेश में अराजकता का वातावरण बना रही है। प्रदेश में अवैध शराब माफिया, उत्खनन माफिया और ट्रांसपोर्ट माफिया सक्रिय हैं, लेकिन उनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं हो रही है। कांग्रेस नेताओं और अधिकारियों की मिलीभगत से सरकारी जमीनों को हथियाया जा रहा है, अवैध कब्जे किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि प्रदेश में सबसे ज्यादा अतिक्रमण कांग्रेसियों के ही हैं, लेकिन गरीब जनता और भाजपा कार्यकर्ताओं को चुन-चुनकर निशाना बनाया जा रहा है।

    श्री लुणावत ने कहा कि हमारी मांग है कि प्रदेश सरकार द्वारा माफियाओं की जो सूची तैयार कराई गई है, सरकार उसे जनता के बीच प्रस्तुत करे। यदि सरकार ऐसा नहीं करती है, तो भारतीय जनता पार्टी अपने स्तर पर तैयार की जा रही अतिक्रमण, अवैध कब्जों की सूचियां मुख्यमंत्री को सौंपेगी। उन्होंने कहा कि भारतीय जनता पार्टी को यह जानकारी है कि किस मंदिर की जमीन पर किस कांग्रेस नेता का कब्जा है और सरकारी तालाबों की जमीन किसने हथिया रखी है। उन्होंने कहा कि हमारी मांग है कि सरकार इन लोगों पर कार्रवाई करे और गरीब जनता तथा कार्यकर्ताओं को परेशान करना बंद करे।

    प्रदेश में 24 जनवरी को होने वाले विरोध प्रदर्शन के दौरान पार्टी के वरिष्ठ नेता अलग-अलग जिलों में आंदोलन का नेतृत्व करेंगे। प्रदेश अध्यक्ष राकेश सिंह इंदौर में नगर-ग्रामीण द्वारा आयोजित विरोध प्रदर्शन का नेतृत्व करेंगे। पूर्व मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चैहान एवं सांसद साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर भोपाल में आंदोलन का नेतृत्व करेंगी। पूर्व प्रदेश अध्यक्ष व सांसद नंदकुमार सिंह चैहान खण्डवा में तथा नरोत्तम मिश्रा जबलपुर में उपस्थित रहेंगे। शिवपुरी में श्रीमती यशोधरा राजे सिंधिया, छतरपुर में भूपेन्द्र सिंह, उमरिया में रामलाल रौतेल, सतना में राजेन्द्र शुक्ला, दमोह में जयंत मलैया, टीकमगढ़ में लालसिंह आर्य, कटनी में गणेश सिंह, ग्वालियर नगर-ग्रामीण में विवेक शेजवलकर, होशंगाबाद में डॉ. सीताशरण शर्मा, हरदा में हेमंत खंडेलवाल, खरगोन में जितू जिराती, झाबुआ में सुदर्शन गुप्ता, धार में सुश्री ऊषा ठाकुर, मुरैना में जयसिंह कुशवाह, भिण्ड में रूस्तम सिंह, दतिया में श्रीमती संध्या राय, श्योपुर में अभय चैधरी, गुना में वेदप्रकाश शर्मा, अशोकनगर में नरेन्द्र बिरथरे, सागर में गौरीशंकर बिसेन, निवाड़ी में उमेश शुक्ला, पन्ना में बृजेन्द्रप्रताप सिंह, रीवा में जनार्दन मिश्र, सीधी में श्रीमती रीति पाठक, सिंगरौली में शशांक श्रीवास्तव, शहडोल में गिरीश द्विवेदी, अनूपपुर में ओमप्रकाश धुर्वे, डिण्डौरी में संपत्तिया उईके, मंडला में नरेश दिवाकर, बालाघाट में ढालसिंह बिसेन, सिवनी में कन्हाईराम रघुवंशी, नरसिंहपुर में राव उदयप्रताप सिंह, छिन्दवाड़ा में कमल पटेल, भोपाल नगर-ग्रामीण में साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर, रायसेन में डॉ. गौरीशंकर शेजवार, विदिशा में ध्रुवनारायण सिंह, सीहोर में रमाकांत भार्गव, बुरहानपुर में सुभाष कोठारी, बड़वानी में गजेन्द्र पटेल, अलीराजपुर में श्रीमती रंजना बघेल, उज्जैन नगर-ग्रामीण में रमेश मेंदोला, शाजापुर में महेन्द्र सोलंकी, आगर में विजेन्द्र सिंह सिसोदिया, देवास में कृष्णमुरारी मोघे, रतलाम में जी.एस. डामोर, मंदसौर में सुधीर गुप्ता एवं जगदीश देवड़ा नीमच में कार्यकर्ताओं के साथ कलेक्ट्रेट का घेराव करेंगे।

  • स्थापित उद्योगों के सहारे एमपी के सीईओ दिखना चाहते हैं कमलनाथ

    स्थापित उद्योगों के सहारे एमपी के सीईओ दिखना चाहते हैं कमलनाथ

    अरुण पटेल

    बतौर मुख्यमंत्री अपने कार्यकाल के अंतिम कुछ सालों में तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान अक्सर बढ़चढ़ कर यह दावा करते रहे कि वे मुख्यमंत्री नहीं बल्कि प्रदेश के सीईओ हैं, लेकिन सच्चे अर्थों में प्रदेश के वास्तविक सीईओ के रुप में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष और मुख्यमंत्री कमलनाथ अपनी एक ऐसी छवि गढ़ रहे हैं जिसमें राजनेता के साथ ही एक कुशल प्रशासक के भी गुण मौजूद दिखाई पड़ने लगे हैं। कमलनाथ के पास विकास की वैश्‍विक दूरदृष्टि होने के साथ ही विकास का मॉडल स्थानीय जमीनी आवश्यकताओं के अनुसार क्या हो, इन दोनों का समन्वय उनके व्यक्तित्व में है। प्रशासनिक व्यवस्था को चुस्त-दुरुस्त करने और ‘वक्त है बदलाव का’ अपना चुनावी वायदा पूरा करने की दिशा में कमलनाथ सरकार आगे बढ़ रही है। दशकों बाद मंत्रालय में मुख्यमंत्री के रुप में एक ऐसा चेहरा विराजमान है जिसकी प्रशासन पर मजबूत पकड़ बन रही है और वे आला अधिकारियों को बताते हैं कि उन्हें क्या करना है और कैसे होगा। कमलनाथ का कहना है कि मेरी सरकार ‘आउटसोर्स’ की नहीं है। अब जब अधिकारी मेरे पास आते हैं और कैसे क्या करना है पूछते हैं तो मैं उन्हें बताता हूं कि कैसे काम करना है और क्या काम करना है एवं सरकार कैसे चलती है।


    मेरी सरकार आउटसोर्स की सरकार नहीं है यह कहते हुए कमलनाथ पूर्ववर्ती शिवराज सिंह चौहान के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार पर तंज कसते हैं। समझा जाता है कि पूर्ववर्ती शिवराज सरकार के कार्य संचालन के मामले में उनकी यह पक्की धारणा रही है कि उस समय पांच-छह अधिकारियों को सरकार आउटसोर्स कर दी थी और वे जो चाहते थे वही होता था। जहां तक कमलनाथ का सवाल है चाहें वे मुख्यमंत्री हों, मंत्री रहे हों या सांसद उनकी कार्यशैली स्वाभाविक रुप से सीईओ की ही रही है, जबकि शिवराज पहली बार सीधे मुख्यमंत्री बने थे और उन्होंने अपने ढंग से सरकार चलाई थी। पहले और दूसरे कार्यकाल में शिवराज ने भी सामाजिक सरोकारों से जुड़ी खासकर लाडली लक्ष्मी और मुख्यमंत्री तीर्थ दर्शन तथा मुख्यमंत्री कन्यादान योजना जैसी कुछ ऐसी योजनायें चलाई थीं, जिनके चलते उनका अपना एक आभामंडल बना था और बहनों के भाई एवं भांजे-भांजियों के मामा तथा वृद्धजनों के लिए श्रवण कुमार बन गए थे। लेकिन यह भी सही है कि उनके कार्यकाल के आखिरी दो-तीन सालों में जैसा कमलनाथ कह रहे हैं वैसी ही स्थिति बन गयी थी।


    राजनीतिक हल्कों में यह बात मानी जाती थी कि कमलनाथ एक साथ वैश्‍विक सोच एवं जमीनी आवश्यकताओं के साथ पिछड़े से पिछड़े इलाके को कैसे विकसित किया जाए यह भलीभांति जानते हैं। आला प्रशासनिक अधिकारी और मध्यप्रदेश आईएएस एसोसिएशन के अध्यक्ष आई.सी.पी. केशरी कहते हैं कि हमारे सी.एम. डायनमिक ग्लोबल हैं और हम सब राज्य की उम्मीदों पर खरे उतरेंगे। आईएएस आफीसर्स एसोसिएशन की सर्विस मीट 2020 के उद्घाटन अवसर पर केशरी ने कहा कि नये आने वाले अफसरों को शायद अपने मुख्यमंत्री के बारे में ज्यादा कुछ पता नहीं है, इसकी वजह यह है कि उन्होंने उनके साथ काम नहीं किया है। उन्होंने एक उदाहरण देकर कहा कि जिनेवा में डब्ल्यूटीओ के सम्मेलन में एक बार किसानों के हितों को लेकर 90 देशों के मंत्रियों ने कमलनाथ के नेतृत्व में वाकआउट कर दिया था। एक बार विकासशील देशों के लिए पश्‍चिमी देशों की एक बैठक में अमेरिका के राष्ट्रपति जार्ज बुश भी आये थे, उस समय तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने परिचय कराते हुए कहा कि ये वाणिज्यिक मंत्री कमलनाथ हैं, इसके पूर्व ही बुश बोल उठे कि मैं इन्हें जानता हूं, इन्होंने हमारे मंत्रियों को परेशान किया हुआ है। इस पर कमलनाथ ने कहा कि ऐसा नहीं है हमारे अच्छे सम्बन्ध हैं, उनकी इस हाजिर जवाबी के कारण सभी उनकी ओर देखने लगे थे।


    कांग्रेस अक्सर शिवराज सरकार पर भू-माफिया, खनन माफिया को फलने-फूलने का आरोप लगाती रही थी। चुनाव के समय भी कांग्रेस ने इसे एक बड़ा मुद्दा बनाया था। उसका आरोप था कि पिछले भाजपा सरकार के कार्यकाल के दौरान रेत माफिया, भू-माफिया, बिल्डर माफिया और अनेक प्रकार के माफिया इस कदर तेजी से उभरे थे कि एक प्रकार से प्रदेश माफियाओं के मकड़जाल में फंस गया था। कांग्रेस का कहना है कि इन सभी माफियाओं पर अपने-पराये या राजनीतिक प्रतिबद्धताओं से परे समान रुप से कड़ी कार्रवाई कमलनाथ कर रहे हैं और इसमें किसी प्रकार के हस्तक्षेप को प्रश्रय नहीं मिल पा रहा है। अपने चुनावी वायदों को तेजी से पूरा करने के साथ ही कमलनाथ की प्राथमिकता प्रदेश में नये उद्योग लगाने की रही है और इस मामले में एक यथार्थवादी दृष्टिकोण से वे आगे बढ़ रहे हैं। प्रदेश कांग्रेस मीडिया विभाग के उपाध्यक्ष अभय दुबे का दावा है कि प्रदेश में औद्योगिक निवेश का एक विश्‍वसनीय माहौल बना है और लगभग 30 हजार करोड़ रुपये के निवेश के प्रोजेक्ट की बुनियाद बीते एक साल के कार्यकाल में रखी गई है। लगभग 70 हजार करोड़ रुपये के प्रोजेक्ट के लिए, उन्हें भूमि आवंटन सम्बन्धी प्रक्रिया भी पूरी कर ली गयी है। उनका कहना है कि मध्यप्रदेश में औद्योगिक निवेश के परिवेश को देखा जाए तो पिछले पन्द्रह साल की तुलना में कमलनाथ सरकार का एक साल का कार्यकाल भाजपाई शासन का पर्दाफाश कर रहा है और भाजपा के पन्द्रह साल की अवधि प्रदेश के औद्योगिक निवेश के लिए अभिशाप साबित हुई है। दुबे का आरोप है कि शिवराज सरकार के समय 2007 से 2016 तक आयोजित अनेकों ग्लोबल इन्वेस्टर समिट में बड़े पैमाने पर औद्योगिक निवेश में 17 लाख करोड़ के गननचुम्बी निवेश के दावे किए गए थे, किन्तु नतीजा सिफर रहा और केवल 50 हजार करोड़ का ही निवेश आ पाया। दुबे का दावा है कि कमलनाथ सरकार औद्योगिक निवेश का स्वर्णिम भविष्य का मार्ग प्रशस्त कर रही है और उसने 30 हजार करोड़ रूपये की बुनियाद भी रख दी है जबकि समूचा देश केन्द्र की भाजपा सरकार की अदूरदृष्टि के चलते भयंकर आर्थिक मंदी की चपेट में आ गया है, जबकि मध्यप्रदेश में निवेशकों की कतार लग गयी है। मध्यप्रदेश का पीथमपुर हिन्दुस्तान का सबसे बड़ा फार्मा हब बन गया है। यहां सिपला फार्मा ने 600 करोड़ रुपये के निवेश की बुनियाद यहां रखी है। जो बड़े निवेशक आये हैं उनमें अजंता फार्मा ने 500 करोड़ रुपये का निवेश किया है। न्यू जर्सी की कम्पनी पार फार्मा ने 400 करोड़ का निवेश किया है मेक्लाईड नेे भी 400 करोड़ का निवेश किया है। इसके साथ ही उन्होंने आंकड़ों के हवाले से औद्योगीकरण की दिशा में बढ़ते प्रदेश का खाका भी प्रस्तुत किया।

    एक तरफ मुख्यमंत्री कमलनाथ जहां प्रदेश का औद्योगिक परिवेश बदलने के लिए भिड़े हुए हैं तो वहीं वे उन पर किए जा रहे किसी भी तंज का जवाब उसी लहजे में देने से नहीं चूक रहे। भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष व केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने जबलपुर में सीएए के समर्थन में एक रैली को सम्बोधित करते हुए कमलनाथ पर निशाना साधा और कहा कि वे सोनिया मैडम के दरबार में अपनी सीआर सुधारने में लगे हैं और जोरशोर से बोल रहे हैं कि प्रदेश में सीएए लागू नहीं होगा। उनकी उम्र चिल्लाने की नहीं रही है, स्वास्थ्य बिगड़ जायेगा। इस पर कमलनाथ ने भी पलटवार करते हुए कहा कि मेरी उम्र नहीं काम देख रही है प्रदेश की जनता, 365 दिनों में 365 वायदे पूरे किए हैं हमारी सरकार ने, आप प्रदेश की जनता और जनादेश दोनों का अपमान कर रहे हैं। हमने एक साल में प्रदेश में बदलाव लाकर दिखा दिया है और वायदे पूरे कर जनता का भरोसा कायम रखा है, हम काम में विश्‍वास रखते हैं झूठे वायदों में नहीं। इसी उम्र में जनता ने मुझ पर भरोसा कर भाजपा के कई युवा उम्मीदवारों की उम्मीद पर पानी फेरा है। आप कांग्रेस को नहीं जनता को समझाइए जो इस सच को जानती है कि केन्द्र सरकार अपनी असफलताओं को छुपाने के लिए सीएए और एनआरसी जैसे कानून थोपने का काम कर रही है। कमलनाथ ने शाह को सलाह दी कि अधिक बेहतर होता आप सीएए के समर्थन में रैली व जनसभा के लिए उन राज्यों में जाते जहां हिंसा हुई है। प्रदेश की शान्त धरती पर कानून के नाम पर गुमराह करने व फिजा खराब करने के लिए आपके यहां आने की आवश्यकता नहीं है। 

    यह लेख सुबह सवेरे से आभार सहित लिया गया है। इसका मकसद मुख्यमंत्री कमलनाथ की आकांक्षाओं को अपने पाठकों तक पहुंचाना मात्र है। लेखक को उपलब्ध कराए गए तथ्यों ,वक्तव्यों, राय आदि से प्रेस इंफार्मेशन सेंटर की सहमति होना आवश्यक नहीं है।

  • कांग्रेस की शह पर दलित को जलाया बोले लाल सिंह आर्य

    कांग्रेस की शह पर दलित को जलाया बोले लाल सिंह आर्य

    भोपाल,21 जनवरी(प्रेस सूचना केन्द्र)। सागर में दलित को जिंदा जलाने वाले युवकों को कांग्रेस के नेताओं का खुला संरक्षण है इसलिए पुलिस इस वारदात के असली आरोपियों को बचा रही है। जिन तीस पैंतीस लोगों ने पीड़ित धन प्रसाद पुत्र निजाम अहिरवार का घर घेरा था उन्हें पुलिस ने आरोपी नहीं बनाया है। भारतीय जनता पार्टी के पूर्व मंत्री लाल सिंह आर्य ने आज पत्रकार वार्ता में आरोप लगाया कि सरकार दलितों को निशाना बना रही है और अपना खोया वोट बैंक लौटाने के लिए दलितों के बीच अपने समर्थन वाला नेतृत्व खड़ा करने का प्रयास कर रही है।

    उन्होंने बताया कि सागर के मोतीनगर थानाक्षेत्र के धर्मश्री वार्ड की आवासीय कालोनी के रहवासी धनप्रसाद अहिरवार को आरोपियों ने मिट्टी का तेल डालकर आग लगा दी और दरवाजे की कुंडी भी बंद कर दी ताकि वो किसी भी प्रकार से बच न पाए। उसे साठ फीसदी जल जाने के बावजूद सरकार से कोई मदद नहीं मिली है। सरकार यदि उसे न्याय दिलाने के लिए गंभीर होती तो उसे सफदरजंग दिल्ली की बर्न यूनिट में भर्ती करवाती और बेहतर इलाज कराती। उसे बुंदेलखंड मेडीकल कालेज की सिफारिश के बाद हमीदिया अस्पताल के सामान्य वार्ड में रखा गया है। इससे सरकार के दलित विरोधी चेहरे की असलियत उजागर हो गई है।

    श्री आर्य ने बताया कि भाजपा प्रदेश अध्यक्ष राकेश सिंह ने इस मामले को गंभीरता से लिया और पीड़ित को न्याय दिलाने के लिए एक टीम भी गठित की है। इस टीम में श्री आर्य के साथ सागर के विधायक शैलेन्द्र जैन, नरयावली विधायक प्रदीप लारिया और सूरज कैरों व अन्य लोग घटना स्थल पर गए थे। उन्हें बताया गया कि दो दिन पहले बच्चों का विवाद पुलिस थाने भी पहुंचा था लेकिन पुलिस ने मामले को गंभीरता से नहीं लिया। इसके बाद कालोनी के ही छुट्टू, अज्जू पठान, कल्लू और इरफान ने कैरोसिन डालकर धनप्रसाद को जिंदा जला दिया। आज वह जीवन और मौत के बीच झूल रहा है।

    भाजपा की ओर से श्री आर्य ने बताया कि कांग्रेस की सरकार बनने के बाद प्रदेश में दलितों पर अत्याचार बढ़ रहे हैं। कांग्रेस के नेता अपना खोया वोट बैंक वापस पाने के लिए दलित समाज के ऐसे लोगों को निशाना बना रही है जिन्होंने दलितों को वोट बैंक समझे जाने वाली राजनीति का विरोध किया है। इसके लिए वे मुस्लिमों को ढाल बनाकर दलितों के बीच फूट डालने का काम कर रहे हैं।

    उधर सागर विधायक शैलेन्द्र जैन का कहना है कि पुलिस ने समय पर कार्रवाई की होती तो अपराधियों में खौफ होता और वे इस तरह की वारदात करने की हिम्मत नहीं जुटा पाते। प्रदेश की कानून व्यवस्था खराब होने की वजह से ये स्थितियां निर्मित हुई हैं।

  • प्रदेश को आर्थिक शक्ति बनाएं अफसरों से बोले कमलनाथ

    प्रदेश को आर्थिक शक्ति बनाएं अफसरों से बोले कमलनाथ

    तीन दिवसीय आईएएस सर्विस मीट 2020

    भोपाल 17 जनवरी(प्रेस सूचना केन्द्र)। मुख्यमंत्री कमल नाथ ने कहा है कि देश में मध्यप्रदेश ही ऐसा प्रदेश है, जो विविधताओं से सम्पन्न है और पूरे विश्व में भारत ही ऐसा देश है, जो विविधताओं से पूर्ण है। इस विविधता को सकारात्मक ऊर्जा में बदलना होगा। उन्होंने कहा कि विविधता में भारत की बराबरी करने वाला देश सिर्फ सोवियत संघ था। आज वह अस्तित्व में नहीं है क्योंकि उसमें भारत जैसी सोच-समझ और सहिष्णुता की संस्कृति नहीं थी। यही भारत की पहचान है। मुख्यमंत्री आरसीवीपी नरोन्हा प्रशासन अकादमी में आईएएस सर्विस मीट 2020 के शुभारंभ सत्र को संबोधित कर रहे थे।

    मुख्यमंत्री कमल नाथ ने कहा कि जो आईएएस अधिकारी अपनी सेवा यात्रा के मध्य में हैं और जो सेवा पूरी करने वाले हैं, वे चिंतन करें कि मध्यप्रदेश को वे कहाँ छोड़कर जाना चाहते हैं। जो अधिकारी अपनी सेवा यात्रा की शुरूआत कर रहे हैं, वे सोचें कि मध्यप्रदेश को कहाँ देखना चाहते हैं। श्री कमल नाथ ने प्रशासनिक अधिकारियों को न्याय देने वाला बताते हुए कहा कि संविधान में उल्लेखित स्वतंत्रता और समानता जैसे मूल्यों की सीमाएँ हो सकती हैं लेकिन न्याय की कोई सीमा नहीं है। यह हर समय और परिस्थिति में दिया जा सकता है। दृष्टिकोण में परिवर्तन लाने की आवश्यकता है। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रशासनिक अधिकारियों के पास जो क्षमता और कौशल है, वह सामान्यत: राजनैतिक नेतृत्व के पास नहीं रहता। राजनैतिक नेतृत्व बदलते ही प्रशासनिक तंत्र का भी नया जन्म होता है लेकिन ज्ञान, कला, कौशल नहीं बदलते।

    मुख्यमंत्री ने नए परिवर्तनकारी विचारों (न्यू आइडिया आफ चेंज) के लिए तीन पुरस्कार देने की बात कही। उन्होंने कहा कि इसके लिए पूर्व मुख्य सचिवों की एक ज्यूरी बनाई जाएगी, जो सर्वोत्कृष्ट आईडिया चुनेगी।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि हर राज्य की अपना प्रोफाईल होती है। सबको मिलकर मध्यप्रदेश का प्रोफाईल बनाना होगा। वर्तमान प्रोफाईल को बदलना होगा। मध्यप्रदेश की नई पहचान बनानी होगी। इसके लिए जरूरी है कि प्रदेश में ज्यादा से ज्यादा आर्थिक गतिविधियाँ उत्पन्न हों। उन्होंने कहा कि प्रौद्योगिकी हर पल बदल रही है। पूरा भारत बदल रहा है। ज्ञान और सूचना के भंडार तक आज जो पहुँच बढ़ी है, वह पहले नहीं थी। उन्होंने कहा कि विश्व में सबसे ज्यादा महत्वाकांक्षी जनसंख्या भारत में है। ये जनसंख्या युवाओं की है। बदलते समय में महत्वाकांक्षाएँ भी बदल रही हैं। अब यह देखना है कि इन्हें कैसे अपनाएं।

    श्री कमल नाथ ने कहा कि मध्यप्रदेश कृषि आधारित अर्थ-व्यवस्था का प्रदेश है। वर्तमान समय में अधिक उत्पादन की चुनौती है। खाद्यान्न की कमी अब चुनौती नहीं रही। उन्होंने कहा कि परिवर्तन तब दिखेगा, जब धोती-पायजामा पहनने वाला किसान आधुनिक खेती करते हुए जींस और शर्ट वाला किसान बन जाये।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि सबसे बड़ी चुनौती हमारी नई पीढ़ी की है। उन्होंने कहा कि हर साल बड़ी संख्या में कौशल सम्पन्न युवा तैयार होते हैं। उन्हें रोजगार की जरूरत है। उन्होंने कहा कि रोजगार आर्थिक गतिविधियों का एक घटक है। इसलिए आर्थिक गतिविधियाँ बढ़ाना चुनौतीपूर्ण काम है। उन्होंने कहा कि हर सरकार की अपनी कार्य-शैली होती है। अपनी अच्छाईयाँ और कमजोरियाँ होती हैं। प्रशासनिक अधिकारियों की नई पीढ़ी को यह देखना होगा कि मध्यप्रदेश को किस दिशा में जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश एक आर्थिक शक्ति बनने की संभावना रखता है। मध्यप्रदेश के पास लॉजिस्टिक लाभ है। यहाँ का बाजार और व्यापार पूरे देश से जुड़ सकता है। सिर्फ नजरिए में परिवर्तन लाने की देर है। इसके लिए नया सीखने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि क्या सीखते हैं, इससे ज्यादा जरूरी है कि कैसे सीखते हैं।

    मुख्य सचिव एस.आर. मोहंती ने आईएएस मीट के आयोजन की पृष्ठभूमि की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि यह नई ऊर्जा और अनुभव को एक साथ लाने का अवसर है ताकि यह कार्य-शैली में भी बना रहे और इसका भरपूर लाभ समाज को मिले।

    अपर मुख्य सचिव सर्वश्री एम.गोपाल रेड्डी, मनोज श्रीवास्तव एवं प्रमुख सचिव मलय श्रीवास्तव ने अतिथियों को स्मृति-चिन्ह भेंट किये। प्रारंभ में मध्यप्रदेश आईएएस एसोसिएशन के अध्यक्ष आई.सी.पी. केशरी ने अपने स्वागत भाषण में मुख्यमंत्री को आधुनिक, उदार, डॉयनामिक और विश्व-दृष्टि से सम्पन्न नेता बताते हुए कहा कि वे 159 देशों का भ्रमण कर चुके हैं । वे किसानों के हित में 19 मंत्रियों के साथ विश्व व्यापार संगठन की बैठक का विरोध करने वाले नेता हैं। उनके नेतृत्व में देश में ऑटोमोबाइल सेक्टर में क्रांतिकारी परिवर्तन आया।

    इस अवसर पर वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी एवं प्रख्यात लेखक पवन वर्मा और प्रशासन अकादमी की महानिदेशक सुश्री वीरा राणा उपस्थित थी। 

  • कांग्रेस की माफिया राजनीति का रुदन

    कांग्रेस की माफिया राजनीति का रुदन

    शिवसेना सुप्रीमो बाला साहब ठाकरे के उत्तराधिकारी बनने का ख्वाब देश के कई लोग देखते रहते हैं। संजय राऊत भी उनमें से एक हैं। भारत की राजनीति में बाला साहब ठाकरे को कांग्रेस की परिवारवादी सोच से उपजी निराशा के अंधकार में चमकते सूर्य की तरह देखा गया। गैर कांग्रेसवाद का प्रयोग भारतीय राजनीति के कई महारथियों ने किया लेकिन बालासाहब ठाकरे ने उसे अंजाम तक पहुंचाया। आज भाजपा की गुटबाजी और एकाधिकार वादी राजनीति ने हालात बदल दिए हैं। आज शिवसेना उसी कांग्रेस के साथ आ खड़ी हुई है जिसके जेहन में माफिया शब्द गहरे तक घर जमाए बैठा है। राजाओं, सामंतवादियों के बाद अंग्रेजों और फिर आजाद भारत में जमाखोरों, मिलावटियों को ब्लैकमेल करके राजनीति की इबारत लिखती रही कांग्रेस के नेता आज भी वही पुराना धंधा चमकाने का प्रयास कर रहे हैं। कांग्रेस के साथ सत्तासीन होने के बाद शिवसेना भी इस धंधे से रोजी कमाने की जुगत भिड़ा रही है। भारत का जल व्यापार पहले निजी हाथों में था। आजादी से पहले सिंधिया घराने ने जल व्यापार में अपनी सशक्त उपस्थिति दर्ज कराई थी। विदेशों तक फैला जल कारोबार सिंधिया घराने की आय का बड़ा स्रोत था। जिसकी मदद से सिंधिया घराने ने अपेक्षाकृत रूप से अच्छी राजनीति की परिपाटी विकसित की। इस राजनीति को भारत की आजादी से ग्रहण लग गया। जब श्रीमती इंदिरा गांधी सत्ता में आईं तो उन्होंने सिंधिया घऱाने की आय के इस बड़े स्रोत पर कब्जा जमाने की रणनीति पर काम किया। मुंबई के अंडरवर्ल्ड डॉन करीम लाला तब समुद्री कारोबार पर माफिया गतिविधियों की वजह से गहरा नियंत्रण रखते थे। हाजी मस्तान ने भी तस्करी के कारोबार से काफी दौलत बनाई थी। इंदिरा गांधी अच्छी तरह जानती थीं कि उन्हें यदि समुद्री कारोबार पर नियंत्रण करना है तो उन्हें इस धंधे की नस कहे जाने वाले माफिया डॉनों की मदद लेनी होगी। इंदिरा गांधी की इस मंशा को महाराष्ट्र की राज्य सरकारों और पुलिस कमिश्नरों ने पूरा किया।ये बात सही है कि मुंबई का पुलिस कमिश्नर कौन होगा ये अंडरवर्ल्ड ही तय करता था। जहाजरानी मंत्रालय के अधीन बाद में बने केन्द्रीय अंतर्देशीय जल परिवहन निगम को स्थापित करके समुद्री कारोबार के बड़े खिलाड़ियों को दस जनपथ ने धंधे से बाहर कर दिया। निजी कंपनियों के जहाज धड़ाधड़ डूबने लगे, उन पर अग्निकांड होने लगे। उन्हें लूटा जाने लगा और सुरक्षा कारणों की वजह से उन्हें सरकारीकरण की जरूरत महसूस हुई जिसे आगे जाकर अंजाम दिया गया। सोने से भरे जहाज पर विस्फोट और धंधे की बर्बादी की कहानियां देश में आज तक सुनी और सुनाई जाती हैं। तब ये कहा गया कि सरकार की सुरक्षा में समुद्री कारोबार बेहतर ढंग से काम करेगा। ये हुआ भी। भारत का समुद्री कारोबार बढ़ा भी उस पर माफिया का शिकंजा आटे में नमक की तरह बना भी रहा। जब दाऊद इब्राहिम ने करीम लाला के वर्चस्व को तोड़ा तब उसे सरकार की आड़ में धंधे पर काबिज हो चुके राजनेताओं से भी जूझना पड़ा। राजनीति और माफिया के इस गठजोड़ प्रेम और दुश्मनी की कई कहानियां हैं।बाद में राजनेताओं ने निगम की आड़ में निजी मुनाफा काटने का धंधा विकसित कर लिया। आज श्रीमती इंदिरा गांधी के करीम लाला से कथित मुलाकात की कहानी ने देश में भूचाल ला दिया है उसकी वजह कुछ और है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी गुजरात में बंदरगाहों की आय बढ़ाकर राज्य की अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने का सफल प्रयोग कर चुके हैं। भारत की सत्ता संभालने के बाद उन्होंने यही प्रयोग मुंबई में दुहरा दिया। इसकी वजह से जल परिवहन निगम की आड़ में मुनाफा उलीच रहे कारोबारियों को दस्त होने लगे। जो जहाजरानी निगम घाटे की घाटी पर लुढ़क रहा था वो मुनाफा देने लगा। इस धंधे के पुराने खिलाड़ी बाहर होने लगे और नए खिलाड़ियों का उदय होने लगा। धंधे पर इसी पकड़ को बचाने के लिए शिवसेना का झगड़ा भाजपा से हुआ और सत्ता की नई इबारत लिख दी गई। आज कांग्रेस, एनसीपी और शिवसेना सभी से जुड़े व्यापारी सत्ता का पाला बदल रहे हैं। उन्हें अपने साथ रोके रखने की कवायद बड़ी कठिन साबित हो रही है। कानून और व्यवस्था राज्य का विषय होता है। इसलिए उन कारोबारियों को चमकाने के लिए संजय राऊत ने करीम लाला और इंदिराजी की मुलाकात की कहानी सुनाई है। वे बताना चाहते हैं कि आज शिवसेना माफिया के सहारे वही खेल दुहरा सकती है जिसे इंदिराजी ने कभी जहाजों की रानी को डुबाने के लिए इस्तेमाल किया था।काग्रेस के कुछ राजनेता इसे इंदिराजी की तौहीन बता रहे हैं लेकिन सच तो ये है कि माफिया के सहारे सत्ता चलाने का खेल कांग्रेस हमेशा से खेलती रही है। मध्यप्रदेश में भी उसका एक सामंत यही खेल खेल रहा है। बड़े और सफल कारोबारियों को माफिया बताकर वह अपना सिक्का चलाना चाह रहा है। मुंबई में शिवसेना गठबंधन हो या मध्यप्रदेश में कांग्रेस सभी को ये जान लेना चाहिए कि वक्त बदल चुका है। रशिया का साम्यवाद इसी माफिया के सहारे सत्ता चलाने की वजह से सत्ता से बाहर धकेला गया था। देश में भी कारोबार को बढ़ाने वाली सत्ता को पसंद किया जाता है। धंधों की जड़ों में मठा डालकर उन पर कब्जा जमाने की हवस की उम्र बहुत छोटी होती है। ये तो गनीमत है कि भाजपा के बौड़म राजनेता मोदी सरकार की चाल से कदमताल नहीं कर पा रहे हैं। वे आज भी कांग्रेस की पिछलग्गू राजनीति से मुक्त नहीं हो पाए हैं।जरूरत किसी एक सशक्त नेता की है जो कारोबारियों को एकसूत्र में बांधकर मजबूती और संरक्षण दे सके। जिस दिन ये हो गया तो माफिया के सहारे सत्ता चलाने वाली राजनीति की विदाई सुनिश्चित हो जाएगी।

  • ATIGS Dubai 2020 is going to be great opportunity for Indian industries-Anuradha Singhai

    ATIGS Dubai 2020 is going to be great opportunity for Indian industries-Anuradha Singhai

    DUBAI, UAE [ 16th JANUARY 2020 ] – Leading Africa business development company, ATIGS Group is proud to announce a partnership with Indo-European Chamber of Commerce and Industry to host the 2020 Africa Trade and Investment Global Summit (ATIGS) on October 28 & 29, 2020 in Dubai, United Arab Emirates.

    ATIGS is a unique business platform to foster relationships and engage efficiently with key influencers and investors from every corner of the world. During a period of two days, Vice presidents, Ministers, Governors, Business Executives, top CEOs, international investors and companies seeking to expand in African markets are gathered in one single place to discuss concrete investment projects and establish strategic partnerships through thematic workshops, presentations, and networking sessions.

    Last year, ATIGS Group hosted the premier ATIGS in the United States, on June 24-26 in Washington DC at the Ronald Reagan Building and World Trade Center. With more than 2,300 delegates from 92 countries, ATIGS USA 2018 was a great success for both the hosting country, sponsors and the participants. High-potential industries and companies were presented to a select audience which led to direct engagement, deal-making, co-investments and the establishment of business partnerships.

    The next edition, ATIGS Dubai 2020 will be a more exclusive high-level gathering for government officials, high-profile African business leaders, project developers, and international investors from Africa, UAE, Asia, Europe, and America. www.atigs2020.com

    “ATIGS Dubai 2020 is going to be great opportunity for Indian industries who are looking at expanding in African geography” said, Anuradha Singhai, President of Indo-European Chamber of Commerce and Industry

    Under this partnership, Indo-European Chamber of Commerce and Industry will support ATIGS Group in the promoting, and India delegates recruitment of ATIGS Dubai 2020, and now entitled to participate in the business and affairs of ATIGS Dubai 2020.

    “Hosting ATIGS is a huge contribution to the development of Africa, and we are excited to partner with IECCI to advance the mission and agenda of ATIGS Dubai 2020.” said, Bako Ambianda, Chairman and CEO of ATIGS Group, Inc.

    ATIGS Dubai 2020 is presented by ATIGS Group, Inc, and organized by Global Attain Advancement, LLC, known as GAA Exhibitions & Conferences, and supported by partners & sponsors.

  • मकर संक्रांति अब साठ सालों तक 15 जनवरी को ही मनेगी

    मकर संक्रांति अब साठ सालों तक 15 जनवरी को ही मनेगी

    भोपाल,14 जनवरी(प्रेस सूचना केन्द्र)।आम चर्चा में कहा जाता है कि मकर संक्रांति ही ऐसा पर्व है जो हर साल चौदह जनवरी को आता है। लेकिन अब ये पर्व 15 जनवरी को पड़ रहा है। इसे देखते हुए लोग असमंजस में हैं कि संक्रांति अब 15 जनवरी को क्यों हो रही है?

    खगोल शास्त्र की गणनाओं को देखें तो 2008 से 2080 तक मकर संक्राति 15 जनवरी को ही होगी। विगत 72 वर्षों से (1935 से) प्रति वर्ष मकर संक्रांति 14 जनवरी को ही पड़ती रही है।इसीलिए लोगों के बीच तारीख को लेकर भ्रम की स्थिति बनना स्वाभाविक है।जबकि 2081 से आगे 72 वर्षों तक अर्थात 2153 तक यह 16 जनवरी को रहेगी।

    ज्ञातव्य रहे, कि सूर्य के धनु राशि से मकर राशि में प्रवेश (संक्रमण) का दिन मकर संक्रांति के रूप में जाना जाता है। इस दिवस से, मिथुन राशि तक में सूर्य के बने रहने पर सूर्य उत्तरायण का तथा कर्क से धनु राशि तक में सूर्य के बने रहने पर इसे दक्षिणायन का माना जाता है।

    सूर्य का धनु से मकर राशि में संक्रमण प्रति वर्ष लगभग 20 मिनिट विलम्ब से होता है। स्थूल गणना के आधार पर तीन वर्षों में यह अंतर एक घंटे का तथा 72 वर्षो में पूरे 24 घंटे का हो जाता है।

    यही कारण है, कि अंग्रेजी तारीखों के मान से, मकर-संक्रांति का पर्व, 72 वषों के अंतराल के बाद एक तारीख आगे बढ़ता रहता है।

  • मीसाबंदी की विधवा को पेंशन दें बोला छग हाईकोर्ट

    मीसाबंदी की विधवा को पेंशन दें बोला छग हाईकोर्ट

    बिलासपुर.13 जनवरी,(प्रेस सूचना केन्द्र)। छत्तीसगढ़ (Chhattisagrh) की बिलासपुर हाईकोर्ट (Bilaspur High court) ने एक याचिका पर सुनवाई के बाद मीसाबंदी (Misabandi) की विधवा को आधी पेंशन (Pension) देने का आदेश दिया है. कांग्रेस सरकार के फैसले को सुधारने का आदेश देने वाला ये अदालत का पहला फैसला है।पेंशन के नियमों के मुताबिक बिलासपुर के इस मीसाबंदी की विधवा को पति की मृत्यु के बाद आधी पेंशन दी जाती थी। जिसे राज्य शासन ने कांग्रेस के सत्ता में आने के बाद जनवरी 2019 से बंद कर दिया। कोर्ट के इस फैसले के बाद साफ हो गया है कि सरकार का फैसला गलत था और अब मीसाबंदियों की विधवाओं की पेंशन जारी रहेगी।

    कांग्रेस सरकार ने सत्ता में आने के बाद तमाम मीसाबंदियों की पैंशन सत्यापन के नाम पर रोक दी थी। पिछली भाजपा सरकार ने बाकायदा शासकीय अधिसूचना के माध्यम से ये पेंशन जारी की थी। नई सरकार के फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती दी गई जिसके आधार पर हाईकोर्ट ने बिलासपुर के 28 और दुर्ग के 32 मीसाबंदियों को पेंशन देने का आदेश दिया था। इसके बावजूद मीसाबंदियों की विधवाओं की पेंशन जारी नहीं की गई थी। पेंशन बंद किए जाने के खिलाफ बिलासपुर के मीसाबंदी की विधवा ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। हाईकोर्ट के जस्टिस पी सेम कोशी की सिंगल बेंच ने मीसाबंदी की विधवा के पक्ष में फैसला सुनाते हुए उनके रोकी गई पेंशन की राशि और सारे एरियर्स को तत्काल जारी करने का आदेश दिया है। मीसाबंदी की विधवा की ओर से दायर यह राज्य का पहला मामला है। ऐसा माना जा रहा है कि अब बाकी विधवा पेंशन पाने वालों के लिए भी रास्ता साफ हो गया है.

    मध्यप्रदेश में भी अभी तक मीसाबंदियों की मौजूदगी और सच्चाई का सत्यापन होने के बावजूद कई पेंशन धारकों को भुगतान नहीं किया जा रहा है। पिछले 9 महीनों से पेंशन नहीं मिलने से परेशान मीसाबंदियों ने हाईकोर्ट की शरण भी ली है।छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने तमाम याचिकाओं पर एक स्वर में सरकार के आदेश को रद्द कर दिया है। अभी 4 दिनों पहले बिलासपुर के ही 28 मीसाबंदियों को हाईकोर्ट ने सुनवाई के बाद बड़ी राहत देते हुए उनकी तमाम पेंशन और भत्तों की राशि तत्काल जारी करने का आदेश दिया था. दो दिन पूर्व दुर्ग के 38 मीसाबंदियों को भी हाईकोर्ट से बड़ी राहत मिली थी और अब विधवा पेंशन के प्रकरण में भी हाईकोर्ट ने वही फैसला दिया है।

  • आरक्षित वर्गों का बैकलाग 20 जून तक भरें-भुवनेश पटेल

    आरक्षित वर्गों का बैकलाग 20 जून तक भरें-भुवनेश पटेल

    भोपाल,11 जनवरी(प्रेस सूचना केन्द्र)। मप्र पिछड़ा वर्ग, अनुसूचित जाति, जनजाति एवं अल्पसंख्यक कर्मचारी संघ- अपाक्स के प्रांताध्यक्ष भुवनेश कुमार पटेल का कहना है कि पिछले पंद्रह सालों से आरक्षित वर्गों का बैकलाग भरने की प्रक्रिया बहुत धीमी चल रही है,पात्रताधारी लोग निर्धारित आयुसीमा पार करते जा रहे हैं इसलिए सरकार को वंचित वर्ग को लाभ दिलाने के लिए बैकलाग के खाली पदों की सौ फीसदी भरपाई 20 जून तक पूरी कर लेनी चाहिए। आज राजधानी में आयोजित अपाक्स की बैठक में उन्होंने सरकार से अनुरोध किया है कि इस अवधि में ये कार्य बखूबी निटपाया जा सकता है और इसकी तिथि को आगे बढ़ाने की नौबत भी नहीं आएगी।

    अपाक्स के पदाधिकारियों के बीच विमर्श के बाद उन्होंने कहा कि शासन की भर्ती प्रक्रिया की चयन समितियों में अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग सभी के प्रतिनिधियों को अलग अलग नामित किया जाए। अपाक्स परिवार ने इन सदस्यों को चिन्हित भी कर लिया है जिससे सरकार को फैसला लेने में आसानी होगी।

    श्री पटेल ने कहा कि शासन ने भर्ती प्रक्रिया में 70 फीसदी स्थान प्रदेश के मूल निवासियों के लिए आरक्षित किए हैं इसलिए निजी क्षेत्र में भी इस प्रक्रिया का पालन सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने कहा कि आरक्षित संवर्ग के अधिकारियों कर्मचारियों से जुड़े शिकायत के प्रकरणों में सहानुभूति पूर्वक विचार किया जाए और उन्हें शासन की मंशानुसार संरक्षण प्रदान किया जाए।

    राज्य प्रशासनिक सेवा से आईएएस सेवा में पदोन्नति के लिए जो 33.3 प्रतिशत पद आरक्षित हैं उनमें से पंद्रह प्रतिशत पद गैर राज्य प्रशासनिक सेवा में आरक्षित हैं। इन पदों की पूर्ति भी भाजपा शासन ने पिछले पंद्रह सालों के दौरान नहीं की है। इन पदों पर भी पदोन्नति की प्रक्रिया अभी शेष है जिसे तत्काल पूरा किया जाना चाहिए। बैठक में लंबित डीए की पांच प्रतिशत राशि का भुगतान शीघ्र किए जाने की मांग भी की गई।

    बैठक में विभिन्न कर्मचारी संगठनों के प्रतिनिधि गण सर्व श्री वीरेन्द्र खोंगल, जितेन्द्र सिंह, ओ.पी. कटियार, रामविश्वास कुशवाह, राजकुमार चंदेल, सीएस यादव, प्रकाश मालवीय,अनिल वाजपेयी समेत प्रदेश के सभी पदाधिकारियों और प्रतिनिधियों ने भाग लिया।

  • श्रमिकों की आवाज कौन बने

    श्रमिकों की आवाज कौन बने

    भारत सरकार की नीतियों को श्रमिक विरोधी बताते हुए देशव्यापी हड़ताल का आव्हान किया गया। हड़ताल लगभग असफल रही। इससे देश की गतिविधियों पर कोई बड़ा असर नहीं पड़ा। जबकि इस हड़ताल में संगठित क्षेत्र के 25 लाख श्रमिकों की भागीदारी का दावा किया गया था। इस लिहाज से ये हड़ताल श्रमिक आंदोलनों की विदाई का दस्तावेज बन गया है। इसकी वजह ये है कि ये श्रमिक जिन क्षेत्रों से आते हैं वे क्षेत्र अब भारत की मुख्यधारा नहीं रहे हैं। बीएसएनल हो या सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक इनके समानांतर पूरा ढांचा कार्पोरेट सेक्टर में खड़ा हो चुका है। रेलवे जिस निजीकरण का विरोध कर रहा है वह कार्पोरेट सेक्टर के सहारे पूरी तरह यंत्रवत काम करने लगा है। ऐसे में हड़तालियों की बात कौन सुनेगा। हड़तालियों ने अपना समर्थन जुटाने के लिए असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों को लुभाने के लिए न्यूनतम वेतन 21 हजार रुपए करने का नारा दिया। ये नारा वे दे रहे हैं जिनके वेतन पचास हजार रुपए से अधिक हैं और वे अपना वेतन बढ़ाने की मांग को लेकर हड़ताल कर रहे हैं। संगठित क्षेत्र के पांच सात प्रतिशत कर्मचारी या श्रमिक यदि ये मांग करें कि नब्बे फीसदी नागरिकों का पेट काटकर आप हमारे वेतन भत्ते बढ़ा दें तो इसे कैसे न्यायोचित माना जा सकता है। फिर ये आवाज भी जनता की गरीबी दूर करने के नाम पर लगाई जाए तो इसे कैसे उचित ठहराया जाए। इसके बावजूद देश के श्रमिक संगठन अपनी हड़ताल को मजदूर की आवाज बता रहे हैं। इसे केन्द्र सरकार की हठधर्मिता के विरुद्ध संग्राम बताया जा रहा है। देश के कुछ मूर्ख बुद्धिजीवी श्रमिक संगठनों की इस मांग को जायज बता रहे हैं। देश का पूरा ढांचा बदल चुका है। इसके बावजूद कांग्रेस और उनके वामपंथी सहोदर अपना पुराना घिसा पिटा रिकार्ड बजाने में जुटे हुए हैं। डाक्टर मनमोहन सिंह जैसे उनके मार्गदर्शक कर्जमाफी जैसे आम जनता को ठगने वाले चुनावी वायदे पर चुप्पी साधे बैठे हैं। दरअसल देश बदल चुका है और उसे नए हालात को समझने वाले जन नेताओं की दरकार है। नई पीढ़ी के बीच से उभरने वाले नेता इस जरूरत को महसूस करें और अपनी नई भूमिका निभाएं तो देश का ज्यादा भला हो सकता है।

  • माफिया से गलबहियां और मुक्ति की लबरयाई

    माफिया से गलबहियां और मुक्ति की लबरयाई

    भारत पर 514 अरब डॉलर का कर्ज है और इस कर्ज का अधिकतर हिस्सा या तो अनुत्पादक है या फिर उसके मुनाफे पर चंद लोग ऐश कर रहे हैं। इस कर्ज का अधिकांश हिस्सा विदेशी बैंकों में छिपाकर रखा गया है।विदेशी धन वापस लाने का वायदा करके सत्ता में आई भाजपा की मोदी सरकार के लिए यह विदेशी कर्ज एक अबूझ पहेली बन गया है। पहले कार्यकाल में तो प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने टैक्स हैवन देशों से नई संधियां करके विदेशी बैंकों में रखे धन के मालिकों को ढूंढ़ने का भरपूर जतन किया। इसके बावजूद सरकार को अधिक सफलता नहीं मिली। ये जरूर पता चल गया कि बैंकों की 85 फीसदी कर्ज की रकम जिन उद्योपतियों ने गड़प ली है वे भारत में ही सक्रिय हैं और फर्जी कंपनियों से धन का उपयोग कर रहे हैं। सरकार ने फर्जी कंपनियों को भी ढूंढ़ निकाला और उनका धन बरामद कर लिया। इसके बावजूद जिस धन को शोधन के बाद बाकायदा सीए की मंजूरी के बाद कंपनियों में निवेश किया गया है उनसे धन की वसूली की प्रक्रिया देश भर में अपनाई जा रही है। कमलनाथ सरकार भी उस व्यवस्था का हिस्सा हैं जो देश में काले धन की खोजबीन में जुटे हैं। उनसे ये उम्मीद की जाती रही है कि वे अपना काम जिम्मेदारी से करेंगे और काला धन उजागर करने में सहयोगी की भूमिका निभाएंगे।

    इसके विपरीत कमलनाथ की भूमिका प्रोपेगंडा से अधिक साबित नहीं हो रही है। वे शुद्द के लिए युद्ध और भू माफिया के विरुद्ध जिस तरह से अभियान चला रहे हैं उसे लेकर वे ये जताने का प्रयास कर रहे हैं कि वे काले धन की वसूली के प्रयास कर रहे हैं। वास्तव में उनकी भूमिका देश से काला धन उजागर करने की मुहिम को पंचर करना अधिक नजर आ रहा है। उन्होंने जिस तरह रेत के ठेकों में देश की पूंजी हड़पने वाले फर्जी उद्योगपतियों की भीड़ जुटाई है उसे देखकर उनकी भूमिका की असलियत आसानी से समझी जा सकती है। जिस रेत कारोबार से प्रदेश को 250 करोड़ रुपए की आय होती थी और बाद में इसे शिवराज सरकार ने मुक्त कर दिया उससे कमलनाथ 1200 करोड़ रुपए की आय होने की कहानियां सुना रहे हैं। उनकी सरकार का कहना है कि रेत माफिया पर अंकुश लगाकर ये आय की जा रही है। इस कारोबार के पुराने खिलाड़ी धंधे से बाहर कर दिए गए हैं और जिला स्तर पर नए ठेकेदारों को खदानें आबंटित की गई हैं। रेत खदानों के ठेके लेने वालों में वे लोग शामिल हैं जिन पर देश का अरबों रुपया जीम जाने का आरोप है।

    सरकार ने जिन रेड्डी बंधुओं को रेत कारोबार का सहयोगी बनाया है और राज्य के लिए आय देने वाला बताया जा रहा है उन रेड्डी बंधुओं की असलियत कुछ और है। मध्यप्रदेश,छत्तीसगढ़ और महाराष्ट्र की पुलिस उन्हें सरगर्मी से तलाश रही है। उन पर हजारों लोगों को झांसा देकर उनके साथ बैंक धोखाघड़ी करने का आरोप है।इसके बावजूद कमलनाथ सरकार उन्हें राज्य को आय कराने वाला निवेशक बता डाला है। जो लोग बैंकों का हजारों करोड़ रुपया पौंजी स्कीमों से हड़प चुके हैं वे प्रदेश को कितनी और कैसी आय कराएंगे ये तो आने वाले समय में पता चलेगा लेकिन तब तक कमलनाथ सरकार ने उन्हें पुलिस से रक्षा कवच जरूर उपलब्ध करा दिया है।

    इसके विपरीत भारत सरकार का ध्यान बंटाने के लिए राज्य सरकार माफिया को ध्वस्त करने की मुहिम चला रही है। इस मुहिम में सैकड़ों निर्दोष व्यापारियों और बिल्डरों की बलि चढ़ाई जा रही है। राज्य सरकार की इस मुहिम में अफसर, जज और पुलिस सभी शामिल हैं। जिस तरह की रिपोर्ट के आधार पर आम नागरिकों को भयंकर माफिया, मिलावटखोर, जमाखोर बताया जा रहा है वे आने वाले समय में आपातकाल से भी ज्यादा भयावह प्रताड़ना की असलियत सामने लाने लाएंगे। लेकिन इससे प्रदेश की विकास यात्रा बुरी तरह तहस नहस हो रही है। जो लोग छुटपुट कारोबार करके हजारों लोगों को रोजगार देने का काम कर रहे थे वे भी खुद को असहाय महसूस कर रहे हैं। सरकार की मुहिम से बचने के लिए व्यापारियों ने न केवल भारी भरकम टैक्स चुकाना जारी रखा है बल्कि वे राजनीतिक चंदे की मुंहमांगी रकम भी देने को मजबूर किए जा रहे हैं। जिन लोगों को माफिया बताकर प्रशासन ने उनके ठिकाने तहस नहस कर डाले हैं उनमें से अधिकतर केवल दस्तावेजों की कमी की वजह से निशाना बने हैं। जिन अफसरों और दलालों ने उन्हें झांसा देकर कारोबार बढ़ाने में मदद की अब वही लोग उन्हें माफिया साबित करने में जुटे हुए हैं।

    सरकार की इस मुहिम से आम जनता परेशान है और काला धन बनाने वाला माफिया अपनी बुलंदियां छू रहा है। वह न केवल काला धन बचाने में सफल हो रहा है बल्कि निर्दोष लोगों को डरा धमकाकर उनसे अवैध वसूलियां भी कर रहा है। ये हालत कमोबेश वैसी ही है जैसे कभी इंदिरा गांधी के आपातकाल के दौरान सामने आई थी। बेशक कमलनाथ कह रहे हैं कि निर्दोष लोगों को घबराने की जरूरत नहीं है लेकिन जब प्रशासन और तंत्र उन्हें आरोपी बना देता है तब वे अपनी बेगुनाही साबित ही नहीं कर पाते और सरकार के दमनचक्र का शिकार हो जाते हैं।

    ऐसे ही एक पनीर कारोबारी के विरुद्ध हाईकोर्ट ने बाईस पेज का फैसला दिया और उसे दोषी बताते हुए मामले की सुनवाई अधिक जजों की खंडपीठ से कराने का निर्देश दिया। जिस मामले को कोई बच्चा भी षड़यंत्र पूर्वक रचा गया बता सकता है उसे हाईकोर्ट मानने तैयार नहीं है। हाईकोर्ट के ही एक विद्वान न्यायाधीश कह रहे हैं कि वह व्यक्ति निर्दोष है और उसे बरी किया जाना चाहिए लेकिन दूसरे जज केवल अपना तमगा बढवाने और कमलनाथ की गुड बुक में आने के लिए अपनी विद्वत्ता का प्रदर्शन किए जा रहे हैं।

    वास्तव में समय आ गया है जब देश की सर्वोच्च संस्थाएं इन मामलों पर गौर करें और राज्य सरकार की पक्षपातपूर्ण नीतियों पर लगाम लगाएं। ये तो साफ हो चुका है कि मध्यप्रदेश एक बार फिर आपातकाल दो के दौर से गुजर रहा है लेकिन ये आपातकाल भारत की मानवता के लिए कलंक न बन जाए इसके लिए आगे बढ़कर इस पर रोक लगाना समय की मांग बन गई है।

  • गेहूं के भंडार भरे,केन्द्र उठाने तैयार नहीं बोले प्रद्युम्न सिंह

    गेहूं के भंडार भरे,केन्द्र उठाने तैयार नहीं बोले प्रद्युम्न सिंह

    भोपाल,08 जनवरी(प्रेस सूचना केन्द्र)। मध्यप्रदेश के खाद्य मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर का कहना है कि राज्य ने किसानों का गेहूं खरीदकर किसानों को राहत दी है लेकिन केन्द्र अब वह गेहूं नहीं उठा रहा है। इसके चलते राज्य को केन्द्र से भुगतान भी नहीं हो पा रहा है। केन्द्र सरकार ऐसा करके किसानों के हितों पर चोट पहुंचा रही है।

    साल भर की विभागीय उपलब्धियों पर चर्चा करते हुए श्री तोमर ने कहा कि कमलनाथ सरकार ने किसानों से किया गया कर्ज माफी का वायदा पूरा किया है। किसानों को बोनस देकर भी राज्य सरकार ने किसानों के प्रति अपनी प्रतिबद्धता पूरी की है। इसके बावजूद केन्द्र के असहयोग के चलते वह किसानों को अधिक लाभ नहीं दे पा रही है।

    केन्द्र से ठीक रेपो न होने की वजह से किसानों को होने वाली असुविधा के लिए क्या राज्य सरकार अपनी अयोग्यता को स्वीकार करती है पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि राज्य की ओर से लगातार केन्द्र सरकार से वार्ता की जाती रही है। लगभग तीन चरणों की बातचीत हो चुकी है लेकिन अभी तक केन्द्र ने न तो गेहूं उठाया है और न ही इसके एवज में राशि का भुगतान किया है।उन्होंने कहा कि केन्द्र की ओर से किसानों को दिए जाने वाले बोनस का भी भुगतान नहीं किया जा रहा है।

    खाद्य मंत्री से जब पूछा गया कांग्रेस पार्टी ने किसानों से किए गए वायदे केन्द्र से पूछकर तो नहीं किए थे इसके बावजूद अपनी असफलताओं का ठीकरा वे केन्द्र सरकार पर क्यों फोड़ रहे हैं ये पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि सरकार अपना काम बखूबी कर रही है।

    मंहगाई नियंत्रित कर पाने में राज्य सरकार की असफलताओं के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि सरकार माफिया के विरुद्ध कार्रवाई कर रही है। जो लोग जनता को ठगने का काम कर रहे थे और पिछले पंद्रह सालों में वे फलते फूलते रहे अब सरकार उन पर अंकुश लगाने का काम कर रही है।

  • कैलाश पर प्रहार को मजबूर कांग्रेस

    कैलाश पर प्रहार को मजबूर कांग्रेस

    कमलनाथ सरकार को सबसे बड़ा खतरा महसूस हो रहे कैलाश विजयवर्गीय को जल्दी ही धारा 144 का उल्लंघन करने के आरोप में गिरफ्तार किया जा सकता है। उनके साथ इंदौर कमिश्नर के आवास के बाहर धरना देने वाले इंदौर से बीजेपी सांसद शंकर लालवानी, बीजेपी विधायक रमेश मेंदोला, महेंद्र हार्डिया और जिला अध्यक्ष गोपीकृष्ण नेमा के खिलाफ भी धारा 144 उल्लंघन करने की FIR दर्ज की गई है। इस दौरान कैलाश विजयवर्गीय ने बयान दिया था कि हम कमिश्नर से मिलने आए हैं इसके बाद भी अधिकारियों ने प्रोटोकाल का पालन नहीं किया और हमें सूचना नहीं दी कि कमिश्नर शहर में नहीं हैं। उन्होंने कहा कि हम इसे बर्दाश्त नहीं करेंगे। साथ में उन्होंने पुछल्ला लगा दिया कि आज शहर में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के नेतागण मौजूद हैं नहीं तो मैं शहर में आग लगा देता। कैलाश के इस बयान से सत्तारूढ़ कांग्रेस बौखला गई। कैबिनेट की बैठक में विकास योजनाओं को छोड़कर चर्चा का सबसे बड़ा मुद्दा कैलाश विजयवर्गीय का ये बयान ही बन गया। सज्जन सिंह वर्मा, जीतू पटवारी और स्वास्थ्य मंत्री तुलसी सिलावट ने प्रेसवार्ता में ही कैलाश के बयान को निशाना बना दिया। सज्जन सिंह वर्मा बोले कि कैलाश विजयवर्गीय जैसी भाषा बोल रहे हैं वह इंदौर के लोग पसंद नहीं करते। इंदौर विकास प्रेमियों का शहर है और वहां इस तरह की भाषा नहीं चल सकती। दरअसल कैलाश विजयवर्गीय को कमलनाथ सरकार सबसे बड़ा खतरा महसूस करती है। पश्चिम बंगाल के प्रभारी होने के कारण कैलाश विजयवर्गीय राष्ट्रीय स्तर पर कांग्रेस के लिए बड़ी चुनौती बने हुए हैं। ममता बैनर्जी के गुंडों से लड़ते हुए कैलाश ने पश्चिम बंगाल में अपनी सशक्त उपस्थिति दर्ज कराई है। वहां कांग्रेस का मुकाबला ममता बैनर्जी की तृणमूल कांग्रेस से तो है ही साथ में भाजपा से भी है। जिस तरह महाराष्ट्र में कांग्रेस ने शरद पंवार की राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी से तालमेल बिठाकर सत्ता पाई है उसी तरह वह बंगाल में भी ममता बैनर्जी के सामने झुकने तैयार है। इसलिए कांग्रेस का हाईकमान नहीं चाहता कि वह बंगाल में भी कैलाश की भाजपा को सफलता के झंडे गाड़ने की छूट दे दे। यही वजह है कि मध्यप्रदेश में वह कैलाश को घेरकर भाजपा के सफल हथियार को भौंथरा करना चाहती है। धारा 144 के उल्लंघन जैसे छोटे से मुद्दे को उठाकर वह कैलाश को घुटना टेक कराना चाहती है। कांग्रेस की इस रणनीति का दूसरा असर यह भी हो रहा है कि कैलाश मध्यप्रदेश भाजपा का चेहरा भी बनते जा रहे हैं। हाईकमान से करीबी होने के नाते भाजपा संगठन का भी एक बड़ा धड़ा कैलाश से जुड़ता जा रहा है। ऐसे में कांग्रेस की कमलनाथ सरकार जाने अनजाने में कैलाश पर प्रहार करके भाजपा को उसका सर्वमान्य नेता दिए दे रही है। कांग्रेस का दिग्विजय सिंह गुट भी कैलाश से करीबी महसूस करता है। ऐसे में कमलनाथ सरकार अपने ही पैरों पर कुल्हाड़ी मारने जैसा कार्य कर रही है। जब प्रदेश में कमलनाथ सरकार के प्रति बैचेनी बढ़ रही है तब उसे विकासात्मक कार्यों पर जोर देना चाहिए। इसके विपरीत वह तोड़फोड़ की राजनीति में ही उलझी बैठी है। कमलनाथ सरकार की यह रणनीति आने वाले समय में प्रदेश की राजनीतिक स्थितियों में बड़ा बदलाव लाने वाली साबित हो सकती है।

  • बाजीराव पेशवा ने आज जीता था नर्मदा से चंबल का राज्य

    बाजीराव पेशवा ने आज जीता था नर्मदा से चंबल का राज्य

    भारत के शेर ( द लॉयन आफ इंडिया) कहे जाने वाले बालाजी बाजीराव पेशवा की शूरवीरता के किस्से आज भी पूरी दुनिया में गूंजते रहते हैं। इसके बावजूद कम ही लोगों को मालूम होगा कि 7 जनवरी 1737 को सीहोर जिले के दोराहा में बाजीराव और निजाम के बीच संधि हुई थी। इसके साथ ही पेशवा को नर्मदा से चंबल तक का इलाका मिल गया था। दिल्ली से निजाम की अगुआई में मुगलों की विशाल सेना आई थी और दक्कन से बाजीराव की अगुआई में मराठा सेना निकली थी। दोनों सेनाएं भोपाल में मिलीं। 24 दिसंबर 1737 के दिन मराठा सेना ने मुगलों को जबरदस्त तरीके से हराया। निजाम ने अपनी जान बचाने के के लिए बाजीराव से संधि कर ली। इस बार 7 जनवरी 1738 को ये संधि दोराहा में हुई। मालवा, मराठों को सौंप दिया गया और मुगलों ने 50 लाख रुपए बतौर हर्जाना बाजीराव को सौंपे थे।

    दरअसल बाजीराव की सक्रियता इतनी अधिक थी कि उसकी फौज का मुकाबला करने से पहले ही विरोधियों को हार मान लेने में ही अपनी खैरियत नजर आती थी। बाजीराव ने दिल्ली पर जो आक्रमण किया और थोड़े ही समय में जो उत्पात मचाया उससे भयभीत होकर सभी मुगल सरदार दिल्ली में आ जुटे थे। मराठों को कैसे पूरी तरह नष्ट किया जाए इसी मुद्दे पर सभी रायशुमारी करते रहे। गरमागरम बहस के बीच सभी एक दूसरे को दोषी ठहराते रहे। तरह तरह के उपाय सुझाए गए अंत में तय हुआ कि ये काम निजाम को सौंपा जाए। जिस निजाम से सभी द्वेष रखते थे और उसे उखाड़ फेंकना चाहते थे उसी निजाम को आगे करके सभी ने दिल्ली में अपना दांव खेल दिया।

    जय सिंह को अपने पद से हटा दिया गया। निजाम के पुत्र गाजीउद्दीन को आगरा का सूबेदार नियुक्त किया गया। निजाम ने इस उत्तरदायित्व को सहर्ष स्वीकार किया। वह भी मराठों को अपना सबसे बड़ा दुश्मन मानता था और उन्हें नष्ट भी करना चाहता था। उसे एक तरह से दिल्ली के वजीर का ही पद थमाया जा रहा था। उसने सभी को आश्वासन दिया था कि वजीरी मिल जाने के साथ जब दिल्ली का खजाना भी उसकी पहुंच में होगा और विशाल सेना होगी तो वह बाजीराव को तो समाप्त कर ही देगा साथ में मराठों को भी धूल चटा देगा।

    निजाम ने अक्टूबर 1737को दिल्ली से प्रस्थान किया। उसके साथ तीस हजार की सेना थी जिसके पास बादशाही तोपखाना था। रास्ते में अनेक मुगल सरदार सेना के साथ उससे आ मिले। वह मालवा की ओर बढ़ने लगा। बाजीराव के गुप्तचर सभी ओर अपना काम बखूबी कर रहे थे। उन्हें दिल्ली की योजना का और निजाम की नियुक्ति का पूरा विवरण पता चल गया। उन्होंने भी अपनी व्यूह रचना बनाई और सैन्य तैयारियां कर लीं। महीना भर भी पूरा नहीं हो पाया था कि अक्टूबर के अंतिम सप्ताह में बाजीराव ने पुणे से रवानगी डाल दी। निजाम इस दौरान इटावा, कालपी, होता हुआ बुंदेलखंड पहुंच चुका था। वह धामौनी और सिरोंज होते हुए भोपाल पहुंच गया। उसने तय किया कि भोपाल में ही वह अपनी मुख्य छावनी रखेगा। यहां उसने सुरक्षित स्थान चुना जिसमें एक तरफ तालाब था और दूसरी ओर किला था।तीसरी तरफ छोटी सी नदी थी। बीच में विशाल मैदान था। यहां निजाम ने अपनी छावनी लगा ली। यहां बैठकर वह आसपास के इलाकों में छोटी बड़ी टुकड़ियां भेजना चाहता था। उसका प्रयास था कि वह मराठों को मालवा से बाहर निकाले ताकि उन्हें टुकड़ों में बांटकर हराया जा सके। उसकी ये रणनीति औंधे मुंह गिर पड़ी और मराठों ने ही उसे अपने व्यूह में फंसा लिया।

    निजाम ने अपने पुत्र नासिर जंग को नर्मदा के किनारे तैनात किया। किसी भी स्थान से बाजीराव नर्मदा न लांघ सके उसे ये जवाबदारी सौंपी गई थी। बाजीराव तो नए नए प्रयोगों का आदी था। उसने कब कहां से और कैसे नर्मदा नदी पार कर ली इसका अहसास नासिरजंग को नहीं हो पाया। वह हाथ मलते रह गया। आश्चर्य तो इस बात का था कि बाजीराव के पास हर बार की तरह इस बार छोटी सेना नहीं थी। इस समय पूरे अस्सी हजार सैनिक उसके साथ थे। बाजीराव होशंगाबाद होते हुए भोपाल पहुंचा। उसने निजाम की पूरी छावनी का नक्शा प्राप्त कर लिया था। अपनी व्यूह रचना में उसने तय किया कि निजाम की सेना को खाद्यान्न न मिल पाए।

    पूरी तरह आश्वस्त निजाम ने एक दो बार मराठों पर आक्रमण के लिए अपनी कुछ सेना भेजी। मराठे पूरी तरह सतर्क थे। उन्होंने आए दिन निजामी सेना को परास्त करना शुरु कर दिया। मराठों ने निजाम को चारों ओर से घेर लिया। सैनिकों को भोजन मिलना भी दुश्वार हो गया। सफदरजंग और कोटा नरेश ने निजाम को खाद्यान्न पहुंचाने का बहुत प्रयास किया लेकिन वे असफल रहे। जब वे अपनी सेना लेकर सहायता करने पहुंचे तो मल्हारराव होल्कर ने उन्हें बुरी तरह कुचल दिया। नासिरजंग ने भी अपनी विशाल सेना लेकर निजाम की सहायता का प्रयास किया लेकिन चिमाजी आप्पा न उसे हर जगह से मारकर भगा दिया। निजाम की सेना में धान्य मंहगा मिलने लगा। खाने के लाले पड़ने लगे। उसे लगा कि सेना विद्रोह न कर दे इसलिए उसने सेना को सिरोंज की ओर ले जाने की योजना बनाई। मराठों ने यह मार्ग भी घेर लिया और आक्रमण करके सेना को आगे बढ़ने से रोक दिया हालत ये हो गई कि सेना हर दिन युद्ध में ही उलझी रहती आगे की ओर नहीं बढ़ पाती। निजाम के पास पूरा तोपखाना था लेकिन मराठों की टुकड़ियां उसकी जद में ही नहीं आतीं थीं। तोपें नाकाम साबित हुईं और सेना उन्हें ढोने में ही लगी रही। यही वजह थी कि निजाम के सामने अंततः शरण में आने के सिवाय कोई उपाय बाकी नहीं बचा।

    दुराहा सराय के नजदीक निजाम ने बड़ा भारी शामियाना लगाया। यहां उसने बाजीराव और उसके सरदारों का सम्मान किया। दोनों पक्षों के बीच बातचीत हुई। तहनामा लिखा गया।नतीजतन बाजीराव को निजाम ने संपूर्ण मालवा बहाल कर दिया। उसके साथ साथ नर्मदा से लेकर चंबल के बीच का सारा इलाका बाजीराव के अधीन कर दिया गया। युद्ध के खर्चे की भरपाई करने के लिए निजाम ने आश्वासन दिया कि वह दिल्ली से पचास लाख रुपए दिला देगा।

    इस युद्ध में विभिन्न मराठा सरदारों ने अपना पराक्रम दिखाया। चिमाजी आप्पा ने नासिरजंग को खदेड़ा था। ठीक उसी प्रकार रघुजी ने शुजायत खान को धूल चटाई थी। यशवंतराव पंवार ने कोटा नरेश को दंड दिया और उससे दस लाख रुपए वसूले। शिंदे होल्कर,आवजी कवड़े, इन्होंने भी असाधारण शौर्य का परिचय दिया। बाजीराव ने उन्हें और अन्य सेनाधिकारियों का गौरव गान करके हरेक को पच्चीस हजार रुपए इनाम के तौर पर दिए। दिल्ली का बादशाह और अन्य सरदार निजाम को बहुत पराक्रमी मानते थे। वह स्वयं भी खुद को बहुत सफल सेना पति मानता था लेकिन भोपाल में उसे जिस तरह हार का मुंह देखना पड़ा उससे वह अंदर तक हिल गया और उसने मराठों से टकराने की अपनी शैली छोड़ दी।

    बालाजी बाजीराव पेशवा की ख्याति में चार चांद लग गए। देश विदेशों में उसके शौर्य धर्म की कहानियां सुनाई जाने लगीं। भारत भर के लोग बाजीराव को वीरों का मुकुटमणि मानने लगे। बाजीराव के परिवार में भी जो षड़यंत्र चलते रहते थे उनमें भी कमी आने लगी। षड़यंत्रकारियों को अब महसूस होने लगा कि बाजीराव के गुप्तचर कभी भी उनकी चालबाजियां धराशायी कर सकते हैं। इस तरह कई नजरियों से निजाम पर मराठों की ये विजय प्रशासनिक सफलताओं की वजह बन गई। इसी ने आगे चलकर मराठा साम्राज्य की वो इबारत लिखी जो लंबे समय तक क्षेत्र में शांति और विकास का अविरल झऱना साबित हुई।

    प्र.ग.सहस्त्रबुद्धे की पुस्तक बाजीराव महान से साभार

  • बीमा योजना से कर्मचारियों की चिकित्सा प्रतिपूर्ति बंद

    बीमा योजना से कर्मचारियों की चिकित्सा प्रतिपूर्ति बंद


    मंत्रि-परिषद के निर्णय 

    भोपाल,4 जनवरी(प्रेस सूचना केन्द्र)। कमल नाथ की अध्यक्षता में आज मंत्रालय में हुई मंत्रि-परिषद की बैठक में मुख्यमंत्री कर्मचारी स्वास्थ्य बीमा योजना को लागू करने का निर्णय लिया गया। योजना से लगभग 12 लाख 55 हजार कर्मचारी/अधिकारी लाभांवित होंगे।बीमा योजना लागू होने से कर्मचारियों को दी जाने वाली चिकित्सा प्रतिपूर्ति की व्यवस्था बंद कर दी जाएगी।

    इस योजना का लाभ प्रदेश के सभी नियमित शासकीय कर्मचारी, सभी संविदा कर्मचारी, शिक्षक संवर्ग, सेवानिवृत्त कर्मचारी, नगर सैनिक, आकस्मिक निधि से वेतन पाने वाले पूर्ण कालिक कर्मचारियों और राज्य की स्वशासी संस्थाओं में कार्यरत कर्मचारियों को मिलेगा। इसके अलावा निगम/मण्डलों में कार्यरत कर्मचारियों एवं अखिल भारतीय सेवा के अधिकारियों के लिए योजना वैकल्पिक होगी।

    मुख्यमंत्री कर्मचारी स्वास्थ्य बीमा योजना में बाहय रोगी ओपीडी के रूप में प्रतिवर्ष 10 हजार रूपये तक का नि:शुल्क उपचार अथवा नि:शुल्क दवाओं का वितरण किया जाएगा। सामान्य उपचारों के लिए प्रत्येक परिवार को प्रतिवर्ष 5 लाख रूपये और गंभीर उपचारों के लिए 10 लाख रूपये तक की नि:शुल्क चिकित्सा सुविधा प्राप्त होगी। दस लाख से अधिक के उपचार के लिए राज्य स्तरीय मेडिकल बोर्ड द्वारा विशेष अनुमति दी जा सकेगी।

    मंत्रि-परिषद ने महिला-बाल विकास विभाग द्वारा शत-प्रतिशत सहायित भारत सरकार की योजना वन स्टाप सेन्टर को प्रदेश के 51 जिलों में संचालित एवं निरंतर रखने की मंजूरी दी। इसके लिये 560 नये पद सृजित करने की भी मंजूरी दी गयी।

    मंत्रियों का स्वेच्छानुदान अब एक करोड़

    मंत्रि-परिषद ने मंत्रियों की वार्षिक स्वेच्छानुदान की राशि 50 लाख से बढ़ाकर एक करोड़ रूपये करने की मंजूरी दी। इसी प्रकार, राज्य मंत्रियों की वार्षिक स्वेच्छानुदान राशि को 35 लाख से बढ़ाकर 60 लाख किया गया है।

  • कर्ज लादकर माफी का वादा निभा रही कमलनाथ सरकार

    कर्ज लादकर माफी का वादा निभा रही कमलनाथ सरकार

    भोपाल,3 जनवरी(प्रेस सूचना केन्द्र)। कमल नाथ की अगुआई में बनी राज्य सरकार पर प्रदेश की जनता से किए गए वादों को पूरा करने की जिम्मेदारी पहले दिन से ही रही है। किसानों, आदिवासियों, कर्मचारियों, युवाओं सहित सभी लोग प्रदेश में इस बदलाव को आशा और अपेक्षा की नजर से देख रहे थे। सरकार ने आते ही मिली वित्तीय रिक्तता, आर्थिक मंदी जैसी विषम परिस्थिति और वित्तीय मामलों में केन्द्र सरकार के रवैये से जन अपेक्षाओं पर पूरा उतरना नई सरकार के लिए चुनौतीपूर्ण रहा। नई सरकार के सामने राज्य के सामाजिक, आर्थिक और भौतिक ढांचे को अधिक मजबूत बनाने का मुख्य लक्ष्य था। यह सब सशक्त आर्थिक आधार और बेहतर वित्तीय प्रबंधन के बिना संभव नहीं था। राज्य सरकार ने इस परिस्थिति से निपटने के लिये बेहतर वित्तीय प्रबंधन को सर्वोच्च प्राथमिकता दी। इससे शासकीय विभागों को अनिवार्य व्ययों के लिए निरंतर राशि उपलब्ध कराना संभव हुआ।

    प्रदेश की उन्नति और सबके हितों की रक्षा सुनिश्चित करने के क्रम में सर्वोच्च प्राथमिकता हमारी अर्थ-व्यवस्था के प्रमुख आधार किसान को दी गई। जय किसान फसल ऋण माफी योजना से संबंधित विभागों से समन्वय कर पात्र किसानों के दो लाख रूपये तक के कालातीत ऋण तथा 50 हजार रूपये तक के चालू ऋण माफ किए गए। योजना में बैंकों द्वारा एक मुश्त समझौता योजना में 1950 करोड़ रूपये का ऋण माफ किया गया। कुल मिलाकर 20 लाख से अधिक किसानों के 7 हजार करोड़ रूपये से अधिक के ऋण माफ किए गए।

    प्रदेश की तेज प्रगति के लिये सुचारू और सुगम परिवहन व्यवस्था अत्यंत आवश्यक है। राज्य सरकार ने परिवहन की आवश्यक अधोसंरचना सुनिश्चित करने के उददे्श्य से सड़कों के निर्माण के लिए एशियन डेव्हलपमेंट बैंक से 3 हजार 400 करोड़ रूपये (490 मिलियन यूएस डालर) प्राप्त करने का निर्णय लिया। इसी प्रकार, इन्दौर मेट्रो रेल परियोजना के लिए न्यू डेव्हलपमेंट बैंक से 1600 करोड़ रूपये (225 मिलियन यूएस डालर) प्राप्त करने का निर्णय लिया।

    राज्य सरकार की योजनाओं और कार्यक्रमों के क्रियान्वयन में हमकदम और आपदा प्रबंधन के आधार, शासकीय सेवकों की बेहतरी के प्रयास तुरंत शुरू किये गये। शासकीय सेवकों को सातवें वेतनमान के ऐरियर्स की द्वितीय किस्त का भुगतान किया गया। साथ ही सार्वजनिक निगम/मण्डलों के कर्मचारियों को सातवें वेतनमान के एरियर्स के लिए कार्यवाही की गई। शिक्षक संवर्ग को कोषालयीन व्यवस्था से जोड़ा गया। शासकीय सेवकों की पेंशन स्वीकृति और भुगतान प्रक्रिया को सरल किया। वेतन विसंगतियों और सेवा शर्तों पर विचार के लिए कर्मचारी आयोग गठित किया गया।

    राज्य सरकार द्वारा प्रदेश के आदिवासी समुदाय के सर्वागींण विकास के लिए भी अभिनव प्रयास किये जा रहे हैं। वित्त विभाग द्वारा प्रदेश के 89 आदिवासी बहुल विकासखण्डों में विशेष अभियान चलाते हुए 7 हजार 331 व्यक्तियों के जन-धन खाते में ओवर ड्रॉफ्ट की सीमा स्वीकृत कर 35 हजार 709 नये खाते खोले गये।

    राज्य सरकार की सकारात्मक सोच के साथ समाज के सभी वर्गों को साथ लेकर चलने की कोशिश कुशल आर्थिक प्रबंधन के आधार पर ही सफल हो रही है। वित्त विभाग द्वारा जनवरी से नवम्बर 2019 तक पूंजीगत मद में 30 हजार 709 करोड़ रूपये व्यय किये गये। यह इसी अवधि के पिछले वर्ष के व्यय से 1304 करोड़ रूपये अधिक है। पूंजीगत व्यय से संबंधित प्रमुख विभागों को अप्रैल 2018 से नवम्बर 2018 की अवधि की तुलना में अप्रैल 2019 से नवम्बर 2019 की अवधि में अधिक राशि उपलब्ध करायी गई। गृह विभाग को 247 करोड़ 57 लाख की तुलना में 363 करोड़ 58 लाख, वन विभाग को 253 करोड़ 38 लाख की तुलना में 342 करोड़ 12 लाख, शहरी विकास एवं पर्यावरण विभाग को 483 करोड़ 23 लाख की तुलना में 775 करोड़ 91 लाख, लोक निर्माण विभाग को 5454 करोड़ 78 लाख की तुलना में 5562 करोड़ 04 लाख, नर्मदा घाटी/जल संसाधन विभाग को 5709 करोड़ 51 लाख की तुलना में 6280 करोड़ 60 लाख, लोक स्वाथ्य यांत्रिकी विभाग को 1179 करोड़ 49 लाख की तुलना में 1635 करोड़ एक लाख तथा ग्रामीण विकास विभाग को 1743 करोड़ 63 लाख की तुलना में 2343 करोड़ 10 लाख रूपये की धनराशि उपलब्ध करायी गई। प्रदेश में बैंकों द्वारा ऋण में वृद्धि की दर भी राष्ट्रीय स्तर से अधिक रही है।

    सबके हितों की रक्षा और प्रदेश की उन्नति सुनिश्चित करने के अपने संकल्प की पूर्ति के लिये आवश्यक वित्तीय आधार उपलब्ध कराने के लिए राज्य सरकार लगातार सक्रिय है।