Month: March 2024

  • पास्को एक्ट के आरोपी प्रकाश चंद्र गुप्ता के खिलाफ पुलिस पहुंची अदालत

    पास्को एक्ट के आरोपी प्रकाश चंद्र गुप्ता के खिलाफ पुलिस पहुंची अदालत


    भोपाल, 12 मार्च(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर) । पास्को एक्ट के आरोपी और कतिपय भ्रष्ट जजों के टुकड़खोर प्रकाश चंद्र गुप्ता के खिलाफ पास्को एक्ट में प्राप्त शिकायत और सबूतों को लेकर आज भोपाल पुलिस ने जिला अदालत में चालान प्रस्तुत कर दिया। पुलिस कार्रवाई को बरसों से धता बता रहे गुप्ता के विरुद्ध पुलिस के पास ढेरों कहानियां हैं लेकिन अब तक वह झूठे साक्ष्यों का इस्तेमाल करके अदालतों को झांसा देता रहा है। पुलिस ने पास्को एक्ट में लगभग नौ महीनों की जांच के बाद ये चालान प्रस्तुत किया है।
    अदालत के सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार बूटकॉम कंप्यूटर नाम से एमपीनगर में दूकान चलाने वाले गुप्ता के विरुद्ध उसके एक करीबी मित्र की बेटी ने शिकायत की है कि गुप्ता ने उसके साथ अनैतिक संबंध बनाने की नियत से छेड़खानी की थी। पुलिस ने कानूनी विशेषज्ञों की सलाह के बाद ही पास्को एक्ट में ये पकरण दर्ज किया है। कथित तौर पर बैंकों , व्यवसायियों और आम नागरिकों से धोखाघड़ी करने वाले इस कुख्यात आरोपी के विरुद्ध बरसो से पुलिस के पास शिकायतें तो प्राप्त होती रहीं हैं लेकिन साक्ष्यों के अभाव में वह अक्सर बच निकलता था।
    सूत्र बताते हैं कि प्रकाश गुप्ता को न्यायपालिका के कुछ भ्रष्ट जजों, बैंकों से अरबों रुपयों का लोन लेकर गड़प जाने वाले ठगों और पुलिस के कुछ भ्रष्ट अफसरों का संरक्षण रहा है। कुछ जजों के विरुद्ध ठगी करने वाले गुप्ता को एक समय में कुख्यात अपराधी रहे मुख्तयार मलिक ने भी धमकी दी थी लेकिन अदालतों और पुलिस अफसरों की शरण लेकर वह बच निकला। करोड़ों रुपयों की ठगी के बाद कई व्यापारियों ने अपराध जगत की शरण लेकर भी गुप्ता से अपनी रकम वापस पाने का प्रयास किया लेकिन हर बार वह चकमा देकर बच निकलता था।
    पुलिस को इस बार उसकी पास्को एक्ट की वारदात की सूचना मिली तो उसने पूरी छानबीन करके चालान प्रस्तुत किया है। गुप्ता ने अपने अदालती सहयोगियों के माध्यम से जमानत पाने का आवदेन प्रस्तुत किया है। हालांकि उसके विरुद्ध शिकायत करने वाली पुलिस और फरियादी ने अदालत से अनुरोध किया है कि अपराध की गंभीरता को देखते हुए उसका जमानत आवेदन खारिज करके उसे जेल भेजा जाए।
    उत्तर प्रदेश के लालगंज का रहने वाले गुप्ता का परिवार कथित तौर पर भाजपा से भी जुड़ा है और इलाके का कुख्यात माफिया है।नाबालिग लड़कियों से रेप के अपराधी प्यारे मियां को तो शिवराज सिंह चौहान की पुलिस ने जेल के सीखचों में पहुंचा दिया था लेकिन गुप्ता ने सरकार में अपनी जमावट करके कानूनी प्रक्रियाओं को कमजोर करवा लिया था। देखना है कि डॉ. मोहन यादव की पुलिस के सामने गुप्ता की चालबाजियां चल पाती हैं या नहीं। हालांकि गुप्ता कई बार अंडरवर्ल्ड की धमकियों को लेकर पुलिस संरक्षण हासिल करता रहा है।

  • सरकार ने तय किया तो विकास पथ पर बढ़ चला सैडमैप

    सरकार ने तय किया तो विकास पथ पर बढ़ चला सैडमैप


    कांग्रेस में भगदड़ मची है और सभी समझदार देशभक्त पुरानी लीक छोड़कर भाजपा में शामिल हो रहे हैं। इसकी वजह विकास की वो इबारत है जो मोदी सरकार ने बुलंद आवाज के रूप में उद्घोषित की है। मुक्त बाजार व्यवस्था का आगाज तो भारत में पूर्व प्रधानमंत्री पी व्ही नरसिंम्हाराव की सरकार ने किया था लेकिन उस पर अमल करने का भगीरथ नरेन्द्र मोदी की भाजपा ही कर पाई है। राहुल कांग्रेस आज भी मानने तैयार नहीं है कि उनके पूर्वज कितनी बड़ी गलती कर रहे थे। वे बार बार कांग्रेस की उसी विचारधारा के सहारे फूट के बीज बोकर गरीबी को संरक्षित करने का प्रयास कर रहे हैं जो उनकी दादी श्रीमती इंदिरा गांधी ने अपनी सत्ता मजबूत करने के लिए लागू की थी। जातिगत जनगणना हो या सरकारीकरण सभी का फटा ढोल पीटती राहुल कांग्रेस आज भी देश में भ्रमजाल फैलाने में जुटी है। अडानी अंबानी को गालियां देकर राहुल गांधी और उनकी चिलम भरने वाले कांग्रेसी बार बार विकास के पैरों में बेडियां पहनाने की कोशिश कर रहे हैं लेकिन जनता अब इस भ्रमजाल से बाहर निकल चुकी है। मध्यप्रदेश की भाजपा पर जबसे शिवराज सिंह चौहान की कांग्रेस की पूंछ पकड़कर चलने वाली सरकार का साया हटा है तबसे राज्य की भाजपा देश के मूलभूत विचार पथ पर मजबूती से कदम बढ़ाती नजर आ रही है। सरकार के निगम,मंडलों और संस्थाओं में सरकार की बदली कार्यप्रणाली की छाप स्पष्ट तौर पर दृष्टिगोचर होने लगी है। डॉक्टर मोहन यादव सरकार ने उन फिजूल योजनाओं को बंद कर दिया है जिनके माध्यम से सत्ता माफिया अपना उल्लू सीधा करता था। गरीब कल्याण की बात कहकर माफिया के गुर्गे ठेके, सप्लाई ,निर्माण आदि में खजाने की चोरी करते थे। हालांकि आज भी इन मुफ्तखोरों पर पूरी तरह अंकुश नहीं लग पाया है इसके बावजूद सरकार के प्रतिष्ठान इन नई राह पर धीरे धीरे बढ़ चले हैं। सरकार को प्रशिक्षित कार्यबल उपलब्ध कराने के लिए बनाया गया सैडमैप अपने काम को कुशलता पूर्वक अंजाम दे रहा है। सरकार के संरक्षण में यहां ऐसा प्रबंधन अपना कार्य कर रहा है जिससे संस्थान की आय में कई गुना इजाफा हो गया है। सिक्योरिटी एजेंसी, प्रशिक्षण संस्थाओं और नियोक्ताओं की आड़ में मलाई काटने वाले माफिया को खदेड़कर बाहर कर दिए जाने से मुफ्तखोरों का एक बड़ा वर्ग आहत हो गया है। भारत सरकार हो या राज्य सरकार दोनों आगे बढ़ते इस संस्थान को लगातार अपना संरक्षण और संबल प्रदान कर रहे हैं। वे जानते हैं कि विरोध या गड़बड़ियों के आरोप लगाने वाले कौन हैंऔर क्यों तिलमिला रहे हैं। जिन प्रशिक्षण कार्यक्रमों को बंद किया गया है उनके विकल्प के रूप में जो ढांचा खड़ा किया जा रहा है वह युवाओं के लिए ज्यादा उपयोगी और कारगर है। सरकार पर बोझ घटाने में भी ये सुधारात्मक उपाय सहयोगी साबित हो रहे हैं। दरअसल आजादी के बाद से संरक्षण वाद और बेचारगी को सहारा देने का जो भाव सरकारों के बीच पनप गया था उससे इतर कोई भी उपाय लोगों को आक्रामक नजर आता है। लोगों को लगता है कि यदि सरकार ने कृपा नहीं की तो देश भूखों मर जाएगा। जबकि जनता के विकास कार्यों को संरक्षण देने का सबसे उचित तरीका यह है कि उन पर से मुफ्तखोरों का बोझ हटा दिया जाए। यदि माफिया के संरक्षण में पनप रहे ये मुफ्तखोर खदेड़ दिए जाएंगे तो जाहिर है कि सरकार की कार्यक्षमता में जो इजाफा होगा उसका लाभ सीधे आम जन को मिलने लगेगा। सैडमैप अपने आर्थिक संसाधनों को लगातार विकसित कर रहा है और अपनी उपयोगिता स्थापित करता जा रहा है। कमोबेश ऐसे ही सुधार तमाम निगम मंडलों के लिए अपरिहार्य है। सरकार को कारगर और उपयोगी समूहों का नेतृत्व कर्ता बनाना है तो जाहिर है कि गरीबी और बेचारगी के नाम पर फल फूल रहे माफिया की विदाई करना सबसे उचित फैसला होगा। इसका विरोध करने वालों को भी अपनी सोच पर एक बार ठहरकर आत्ममंथन करना चाहिए ताकि वे अपनी गलतियों को सुधार सकें।

  • पोस्टिंग बेचने वाले संजय चौधरी को बरी करने से खुली पोल

    पोस्टिंग बेचने वाले संजय चौधरी को बरी करने से खुली पोल


    भोपाल 08 मार्च(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)। भैरवगढ़ केन्द्रीय जेल की पूर्व अधीक्षक ऊषा राज से कथित तौर पर तीन करोड़ रुपए लेकर पोस्टिंग देने वाले पूर्व जेल डीजी संजय चौधरी को क्लीनचिट दिए जाने के बाद आईपीएस कैलाश मकवाना अब बुरी तरह उलझ गए हैं। लोकायुक्त संगठन ने संजय चौधरी के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज कर जांच फिर शुरु कर दी है लेकिन सीआर के नंबर बढ़वाने के फेर में कैलाश मकवाना की कथित ईमानदारी सवालों के घेरे में आ गई है। लोकायुक्त की जांच रिपोर्ट सामने आ जाने के बाद मकवाना की कथित तौर पर सुधार दी गई गोपनीय चरित्रावली के आदेश जारी करने को अब कोई अफसर राजी नहीं है।


    आईपीएस कैलाश मकवाना को पूरा भरोसा था कि वरिष्ठता क्रम में आगे होने की वजह से वे एक बार मध्यप्रदेश के पुलिस मुखिया बन जाएंगे लेकिन लोकायुक्त संगठन से हटाए जाने के बाद अब पूरी न्यायपालिका उन्हें सींखचों में धकेलने में जुट गई है। दरअसल शिवराज सिंह सरकार के कतिपय भ्रष्ट अफसरों की सलाह पर मकवाना को विशेष पुलिस स्थापना लोकायुक्त में भेजा गया था। इन भ्रष्ट अधिकारियों के मामले बंद करने की सुपारी लेकर गए मकवाना ने कार्यभार संभालते ही संगठन के रिकार्ड रूम की सफाई शुरु करवा दी। कहा गया कि बरसों पुराना कचरा पड़ा होने से पुलिस की कार्रवाई में व्यवधान होता है। उन्होंने कई लंबित प्रकरणों में भी खात्मा लगाना शुरु कर दिया । उन्हें उम्मीद थी कि यदि कोई शोरगुल नहीं हुआ तो धीरे धीरे फालतू प्रकरण बताकर कई भ्रष्ट अफसरों को भी बरी करवा लिया जाएगा।

    इस श्रंखला में मकवाना ने प्रेमवती खैरवार, डीएसपी श्रीनाथ सिंह बघेल, राकेश कुमार जैन, डीएसपी रामखिलावन शुक्ला, मोहित तिवारी, नरेश सिंह चौहान को क्लीनचिट देकर उनके प्रकरण बंद कर दिए। इन प्रकरणों में न तो प्रक्रिया का पालन किया गया, न जांच की गई और न ही लोकायुक्त संगठन के विधि सलाहकारों की टीप ली गई। लोकायुक्त से स्वीकृति का इंतजार भी नहीं किया गया। इस बात से संगठन में पदस्थ विधि अधिकारी(न्यायाधीश) चौंक गए। उनकी अनुशंसा पर लोकायुक्त जस्टिस एनके गुप्ता ने जो जांच कमेटी बिठाई उसने पाया कि सभी प्रकरणों को गैरकानूनी ढंग से बंद किया गया है।


    तभी उज्जैन की केन्द्रीय जेल की अधीक्षक ऊषा राज का घोटाला सामने आ गया। उनके संरक्षण में काम करने वाले जेल के सहायक लेखाधिकारी ने लगभग सौ कर्मचारियों के भविष्य निधि खातों से लगभग तेरह करोड़ से ज्यादा रुपया निकाल लिया। इसमें से कुछ रकम उन्होंने अपने खातों में डाली और कुछ रकम ऊषा राज को भेंट की। पुलिस जांच में पता चला कि इसी रकम का एक हिस्सा कथित तौर पर पूर्व डीजी संजय चौधरी को भी पोस्टिंग के एवज में पहुंचाया गया था। इधर जेल डीजी संजय चौधरी के खिलाफ चल रही लोकायुक्त जांच मकवाना ने उनकी बताई कहानी को सच मानकर बंद कर दी ।संजय चौधरी का कहना था कि उनके पास मौजूद आय अधिक संपत्ति उन्होंने घोड़ों की जगह खच्चर बेचकर नहीं कमाई है। उनकी स्कूल मास्टरनी सास ने अपनी करोड़ों रुपयों की चल संपत्ति और सोना अपनी बेटी के बच्चों को गिफ्ट के रूप में दिया है । सागर के एक स्कूल से रिटायर सास के पास इतनी दौलत कभी रही ही नही ये बात सभी जानते थे। इन दिनों इंदौर जेल में बंद ऊषा राज भी सागर की ही मूल निवासी रही है। जब उन्हें उज्जैन की केन्द्रीय जेल भैरवगढ़ में पोस्टिंग दी गई तो विभाग के कई अफसरों ने हो हल्ला भी मचाया था।


    अब लोकायुक्त संगठन की जांच कमेटी की अनुशंसा पर जो छानबीन शुरु हुई है उसमें संजय चौधरी तो झमेले में पड़े ही हैं साथ में कैलाश मकवाना भी उलझ गए हैं। खुद को कथित तौर पर बेगुनाह बताने के लिए मकवाना कह रहे हैं कि उनके पूर्व तीन डीजी संजय राणा, अनिल कुमार, और राजीव टंडन भी संजय चौधरी के प्रकरण को बंद करने की सिफारिश कर चुके थे पर केवल उनकी खात्मा रिपोर्ट को ही गलत ठहराया जा रहा है। दरअसल जांच कमेटी की निगाह में जो तथ्य आए थे उनके आधार पर ही फैसला लेने वाले मकवाना को दोषी पाया गया है। देखना है कि पुलिस मुखिया पद का ये खिलाड़ी कहीं खुद अपराधी न करार दिया जाए।

  • विक्टिम कार्ड खेलकर भी सीआर नहीं सुधरवा पाए मकवाना

    विक्टिम कार्ड खेलकर भी सीआर नहीं सुधरवा पाए मकवाना


    भोपाल, 07 मार्च(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)। मध्यप्रदेश के लोकायुक्त जस्टिस एन.के.गुप्ता के खिलाफ अनर्गल आरोप लगाकर खुद को ईमानदार दिखाने का जतन करने वाले आईपीएस कैलाश मकवाना की सीआर फिर खटाई में पड़ गई है। उन्हें लोकायुक्त संगठन से विदा करने वाली जांच रिपोर्ट की वजह से विभाग और शासन दोनों ने गोपनीय चरित्रावली के सुधार पर चुप्पी साध ली है। ऐसे में मकवाना की बिगड़ी सीआर सुधरना तो दूर बल्कि उनकी समूची प्रशासनिक दक्षता पर सवालिया निशान लग गए हैं। मुख्यमंत्री डॉ.मोहन यादव ने भले ही भोले भंडारी बनकर मकवाना की सीआर अपग्रेड कर दी थी लेकिन बताते हैं कि जांच रिपोर्ट की असलियत सामने आने के बाद उन्होंने भी इससे किनारा कर लिया है और अब तक उसका आदेश जारी नहीं हो पाया है। मकवाना की बात को सही मानकर जिन लोगों ने उनकी सीआर सही होने की खबर छापना शुरु कर दी थी वे अब अपना समाचार असत्य हो जाने से परेशान हैं।
    मकवाना को जब शिवराज सिंह चौहान की सरकार ने लोकायुक्त संगठन भेजा था तब कतिपय भ्रष्ट अफसरों के हरकारों ने ढोल पीटा था कि अब लोकायुक्त संगठन में बेईमानों को बचाना संभव नहीं होगा। उन्होंने चंद प्रकरणों का हवाला देकर जताने की कोशिश की थी कि मकवाना ईमानदार अधिकारी हैं इसलिए अब तक उन्हें फील्ड से दूर रखा जाता रहा है। पहली बार उन्हें बड़ी जिम्मेदारी दी जा रही है। मकवाना ने भी संगठन में जाते ही ताबड़तोड़ ढंग से आधे दर्जन अफसरों के विरुद्ध दर्ज प्रकरण बंद कर दिए और उन्हें दोषमुक्त करार दे दिया। इसके लिए उन्होंने न तो लोकायुक्त एनके गुप्ता से कोई राय मशविरा किया और न ही उनकी विधिवत अनुमति प्राप्त की।जबकि इस प्रक्रिया में कई विधिवेत्ता और जांच अधिकारी शामिल होते हैं जिनकी रायशुमारी और कानूनी सलाह के बाद ही किसी को दोषमुक्त करार दिया जाता है।
    लोकायुक्त संगठन के सूत्र बताते हैं कि जब मकवाना ने संगठन के कानून वेत्ताओं को खलनायक बताते हुए खुद को राबिनहुड की तरह पेश करना शुरु कर दिया तो वहां पदस्थ कई जजों के कान खड़े हो गए। उन्होंने इसकी शिकायत लोकायुक्त जस्टिस एन.के.गुप्ता से की।इस पर संगठन की ओर से एक जांच समिति नियुक्त की गई जिसने पाया कि मकवाना ने अपने अधिकारों से इतर जाकर इन प्रकरणों में खात्मा लगाया है। भ्रष्टाचार के तथ्यों को तोड़ मरोड़कर उन्होंने आरोपियों को बरी कर दिया। जब जांच समिति ने अपनी रिपोर्ट तैयार की तो इसका अवलोकन कानून वेत्ताओं से करवाया गया। इसके बाद पुर्नावलोकन भी कराया गया। जब सभी ने पाया कि भ्रष्ट अधिकारियों को गैरकानूनी ढंग से बरी किया गया है तो ये जांच रिपोर्ट लोकायुक्त जस्टिस एन.के.गुप्ता के पास पहुंची। यहां से इसे मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के संज्ञान में लाया गया। तब जाकर मात्र छह महीनों के भीतर मकवाना को विशेष पुलिस स्थापना लोकायुक्त संगठन से बाहर कर दिया गया। जिन प्रकरणों में मकवाना ने खात्मा लगवाया था उनके विरुद्ध दुबारा प्राथमिकी दर्ज करके जांच शुरु की गई।
    आईपीएस कैलाश मकवाना इससे बहुत क्षुब्ध हुए और उन्होंने विक्टिम कार्ड खेलना शुरु कर दिया। सार्वजनिक ट्वीट और परिजनों के ट्वीट के साथ उन्होंने अपने कई समर्थकों के सहारे मीडिया में हल्ला मचाना शुरु कर दिया ताकि उनके खिलाफ जांच रिपोर्ट के तथ्यों को अत्याचार करार दिया जा सके। कुछ सूत्रों का कहना है कि मकवाना ने विशेष पुलिस स्थापना में अपनी पोस्टिंग केवल इसलिए कराई थी ताकि वह शिवराज सरकार में आका बने बैठे कतिपय वरिष्ठ अधिकारियों के खिलाफ दर्ज प्रकरणों में खात्मा लगाकर उन्हें बचा सकें और पुरस्कार के रूप में खुद को पुलिस महानिदेशक के रूप में पदस्थ करवा सकें। वरिष्ठता क्रम में वे आगे जरूर हैं लेकिन उनकी गोपनीय चरित्रावली की वजह से वे दौड़ से बाहर हो रहे थे।
    उनके विक्टिम कार्ड का असर इतना तो जरूर पड़ा कि बाद में आई कमलनाथ सरकार ने उन्हें अपने लिए उपयोगी समझा और उन्हें फिर एक बार मैदानी नियुक्ति दे दी गई। इस बार कमलनाथ सरकार को भी चार महीनों में समझ में आ गया कि मकवाना की तोड़ फोड़ और व्यक्तिगत लाभ उठाने की प्रवृत्ति उसके लिए खतरनाक साबित हो रही है। इसे देखते हुए उन्हें एक बार फिर विभागीय कामकाज संभालने के लिए पुलिस हाऊसिंग कार्पोरेशन भेज दिया गया।
    पुलिस हाऊसिंग कार्पोरेशन में संविदा नियुक्त वाली एक इंजीनियर हेमा मीणा के पास जब करोड़ों रुपयों की जायदाद बरामद हुई तब एक बार फिर मकवाना सवालों के घेरे में आ गए. आईपीएस उपेन्द्र जैन के साथ उन पर भ्रष्टाचार के छींटे उड़े क्योंकि उनके अधीनस्थ कर्मचारी इतने लंबे समय तक भ्रष्टाचार करती रही और विभाग के प्रमुखों को कानों कान खबर भी न हो ऐसा तो संभव नहीं हो सकता था।
    आईपीएस अधिकारी कैलाश मकवाना के औंधे मुंह गिर पड़ने से पुलिस विभाग के कई अफसरों ने राहत की सांस ली है। पुलिस महानिदेशक पद के लिए दौड़ में शामिल इस विकेट के गिर जाने से शैलेष सिंह, अरविंद कुमार, सुधीर कुमार शाही जैसे कई अफसरों को अब अपनी राह आसान दिखने लगी है। केन्द्र सरकार ने ऐसी नियुक्तियों को लेकर एक साफ व्यवस्था बना रखी है कि जो आईएएस या आईपीएस अधिकारी लगातार दस सालों तक फील्ड में काम नहीं कर पाएं वे विभाग प्रमुख पद के लिए अयोग्य समझे जाते हैं। इस मापदंड पर मकवाना फिसड्डी साबित हो रहे हैं क्योंकि उन्हें अब तक किसी भी सरकार ने या अफसरों ने दस सालों तक फील्ड में सेवा करने का अवसर नहीं दिया है।

  • फार्मा उद्योग में क्रांतिकारी साबित होगी नई शिक्षा नीतिःसंजय जैन

    फार्मा उद्योग में क्रांतिकारी साबित होगी नई शिक्षा नीतिःसंजय जैन


    भोपाल,06 मार्च(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)। पांच लाख करोड़ रुपयों की अर्थव्यवस्था का लक्ष्य पूरा करने में भारत का फार्मा उद्योग बड़ी भूमिका निभाने जा रहा है। नई शिक्षा नीति के माध्यम से फार्मेसी की पढ़ाई में उद्योंगों की सीधी भागीदारी बढ़ाकर हम भारत और दुनिया के लिए बेहतर फार्मासिस्ट तैयार कर रहे हैं। मध्यप्रदेश फार्मेसी काऊंसिल के अध्यक्ष और फार्मेसी काऊंसिल आफ इंडिया के सदस्य संजय जैन ने भोपाल के सैम कालेज आफ फार्मेसी की ओर से होटल रैडिसन में आयोजित सेमिनार में ये कहा। राष्ट्रीय फार्मेसी शिक्षण दिवस के अवसर पर आयोजित फार्मा अन्वेषण नामक इस विचार मंथन शिविर में उद्योगों से जुड़े अनेक वक्ताओं ने भी फार्मा सेक्टर को मजबूत बनाने के मंत्र सुझाए।
    सैम ग्लोबल विश्वविद्यालय की चांसलर प्रीति सलूजा, सैमं विश्विद्यालय के कुलगुरु डॉ.आर.के.रघुवंशी,मुख्य अतिथि के रूप में पधारे फार्मेसी काऊंसिल आफ इंडिया की शिक्षा नियंत्रण समिति के चेयरमेन डॉ.दीपेन्द्र सिंह, सर हरिसिंह गौर केन्द्रीय विश्वविद्यालय सागर के फार्मेसी विभाग के प्रोफेसर एस.के.जैन ने भी अपने विचार व्यक्त किए। सैम फार्मेसी कालेज के प्राचार्य डॉ.शैलेश जैन ने विषय का प्रवर्तन करते हुए नई शिक्षा नीति के लागू होने के बाद फार्मेसी के अध्ययन और अध्यापन में आ रहीं चुनौतियों की ओर सभी वक्ताओं का ध्यान आकर्षित किया। कार्यक्रम की शुरुआत भारत में फार्मेसी की शिक्षा के जनक प्रोफेसर स्वर्गीय एम.एल. सराफ के चित्र पर दीप जलाकर सभी अतिथियों ने पुष्प अर्पित किए । सरस्वती पूजन के बाद उद्घाटन सत्र का शुभारंभ हुआ।
    मध्यप्रदेश सरकार के प्रतिनिधि के रूप में मध्यप्रदेश फार्मेसी काऊंसिल के अध्यक्ष संजय जैन ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ.मोहन यादव ने उच्च शिक्षा मंत्री रहते हुए नई शिक्षा नीति को लागू करवाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया था। अब वे उज्जैन के नजदीक विकसित किए जा रहे सर्जिकल उपकरणों के विशेष औद्योगिक क्षेत्र के माध्यम से फार्मा सेक्टर को मजबूती प्रदान कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि फार्मेसी काऊंसिल आफ इंडिया के अध्यक्ष मोंटू पटेल ने भारत सरकार से फार्मा उद्योग में आ रहीं अड़चनें दूर करवाने में बड़ी भूमिका निभाई है। आजादी के बाद उद्योग की जरूरतों के मद्देनजर कोई सहयोगी कानून नहीं थे। फार्मेसी एक्ट 1948 का बना हुआ था। अब संसद ने नए फार्मेसी अधिनियम को मंजूरी प्रदान कर दी है।
    उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने प्रधानमंत्री जन औषधि के माध्यम से आम जनता को सस्ती और गुणवत्ता पूर्ण औषधियां उपलब्ध कराने की पहल की है। मध्यप्रदेश के एक युवा आकाश जी ने सभी जिलों में दवाईयों की सप्लाई की प्रणाली को आधुनिक स्वरूप प्रदान किया है। पीथमपुरा में बन रहीं दवाईयां विदेशों को सप्लाई की जा रहीं हैं और देश की आय बढ़ाने में अपना महत्वपूर्ण योगदान दे रहीं हैं। उन्होंने सैम विश्वविद्यालय और फार्मेसी कालेज के शिक्षकों और विद्यार्थियों को एक महत्व पूर्ण अनुष्ठान में सक्रिय भागीदारी निभाने के लिए बधाई और शुभकामनाएं भी दीं।
    फार्मेसी काऊंसिल आफ इंडिया की शिक्षा समिति के अध्यक्ष दीपेन्द्र सिंह ने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस ने फार्मेसी शिक्षण की सामग्री को इतना सहज बना दिया है कि जो जानकारियां ढूंढ़ने में हमें कई दिन लग जाते थे अब वे जानकारियां चुटकियों में हासिल की जा सकती है। यही वजह है कि दवाईयां बनाने में कम समय लग रहा है। उन्होंने कहा कि भारत का औषधि क्षेत्र पहले बहुत विकसित रहा है। हमारे विद्यार्थी शिक्षा पाने के लिए गुरुकुलों में जाते थे, जहां विद्यार्थी की अभिरुचि और क्षमता के अनुसार उसे काम दिया जाता था। नई शिक्षा नीति 2020 के लागू होने के बाद एक बार फिर शिक्षा का वही दौर लौटेगा। अब व्यावहारिक शिक्षा के लिए विद्यार्थी को शिक्षक से ज्ञान अर्जित करने में आसानी होगी। यह शैक्षणिक पद्धति विद्यार्थी को अपने विषय चयन करने और बदलने की आजादी देती है। इतने विशाल कैनवास पर अध्यापन होने से शिक्षण का कार्य बहुत चुनौतीपूर्ण भी हो गया है।
    उन्होंने कहा कि हमें ऐसे लोगों के लिए दवाईयां बनानी होती हैं जो तनाव और बीमारियों से जूझ रहे हैं। जाहिर है इसके लिए हमें आम लोगों के मनोविज्ञान को भी समझना पड़ता है। हम शरीर के लिए उपयोगी रसायनों के साथ साथ संगीत और खुशबू से जुड़ी चिकित्सा विधियों के लिए भी दवाईयां बनाते हैं। पहले देश में फार्मेसी के चार कालेज हुआ करते थे अब लगभग सात हजार कालेज हैं। ऐसे में विद्यार्थी तो बहुत हैं लेकिन गुणवत्ता पूर्ण फार्मासिस्ट तैयार करना आज के फार्मा सेक्टर के लिए चुनौती बन गया है। श्री सिंह ने कहा कि फार्मेसी काऊंसिल आफ इंडिया ने लगभग तीस बड़ी फार्मा कंपनियों से अनुबंध किया है ताकि वे उद्योगों के लिए जरूरी शैक्षणिक सामग्री और योग्य प्रशिक्षक उपलब्ध करवाकर अच्छे फार्मासिस्ट बनाने में अपना योगदान दे सकें।
    डॉ.सर हरिसिंह गौर विवि के फार्मेसी विभाग के प्रोफेसर एस.के.जैन ने कहा कि हम फार्मा सेक्टर के अनुसंधान कर्ताओं और सफल फार्मासिस्टों के माध्यम से बेहतर फार्मासिस्ट तैयार कर रहे हैं। नई शिक्षा नीति ने जिस व्यापकता के साथ पाठ्यक्रमों को लचीला बनाया है उससे विद्यार्थियों को उनकी रुचि के अनुरूप काम चुनने की आजादी मिलने लगी है। सैम यूनिवर्सिटी जैसे कई विश्वविद्यालय फार्मेसी के शिक्षण को गुणवत्ता प्रदान कर रहे हैं उससे आने वाले समय में हमारा देश फार्मा सेक्टर का पुरोधा बन जाएगा।
    सैम विश्वविद्यालय की चांसलर इंजी.प्रीति सलूजा ने कहा कि पीसीआई ने सैम फार्मेसी कालेज को देश के फार्मेसी शिक्षण के लिए पाठ्यक्रम अनुसंधान का अवसर दिया है इसके लिए हम उनके प्रति आभारी हैं। श्री सिंह के साथ पीसीआई के सदस्य संजय जैन की पारखी निगाहों ने सैम कालेज को इस महत्वपूर्ण जिम्मेदारी निभाने के लिए अनुकूल पाया तभी हम देश के शैक्षणिक विकास में अपना योगदान दे पा रहे हैं। गौर विश्वविद्यालय सागर के प्रोफेसर एस.के.जैन के अनुभवी मार्गदर्शन से हम फार्मेसी शिक्षण के लिए महत्वपूर्ण साफ्टवेयर बनाने जा रहे हैं। भारत सरकार ने जिस खुलेपन की नीति पर अमल शुरु किया है उससे हमारे गांवों के प्रतिभाशाली बच्चे भी आगे आकर विश्व का नेतृत्व करने के लिए तैयार हो रहे हैं। जल्दी ही हमारे देश में पूरी दुनिया की जरूरतें पूरी करने वाली जेनरिक दवाईयां बनने लगेंगी। इससे हम मानवता के प्रमुख प्रहरी के रूप में सामने होंगे। हमारे फार्मासिस्ट नैतिक भी हैं और तकनीक से सुसज्जित उद्यमी के रूप में भी सामने आ रहे हैं।
    कार्यक्रम के पहले सत्र में सैम विवि की चांसलर इंजी. प्रीति सलूजा ने फार्मेसी काऊंसिल आफ इंडिया केशिक्षा समिति के अध्यक्ष दीपेन्द्र सिंह को स्मृति चिन्ह और शाल श्रीफल भेंटकर सम्मानित किया। मध्यप्रदेश फार्मेसी काऊंसिल के अध्यक्ष संजय जैन को कुलगुरु आर.के.रघुवंशी ने शाल श्रीफल और स्मृति चिन्ह भेंटकर सम्मानित किया। प्रोफेसर एस.के.जैन को सैम कालेज के प्राचार्य शैलेश जैन ने स्मृति चिन्ह, शाल और श्रीफल भेंटकर उनका अभिनंदन किया। दूसरे सत्र में सभी विशेषज्ञों और आमंत्रितों ने फार्मेसी के शिक्षण में आ रहीं चुनौतियों को दूर करने में अपने समाधान प्रस्तुत किए। इनमें पाठ्यक्रम की व्यापकता और व्यावहारिकता दोनों पर विमर्श किया गया।

  • मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम बनने की यात्रा ही भारत का संस्कारः विधानसभा अध्यक्ष नरेन्द्र सिंह तोमर

    मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम बनने की यात्रा ही भारत का संस्कारः विधानसभा अध्यक्ष नरेन्द्र सिंह तोमर


    भोपाल,03 मार्च(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)। त्रेता युग में राजा दशरथ के संकल्प को प्रसाद मानकर प्रभु श्रीराम अयोध्या से वन की ओर प्रस्थान कर रहे थे तब वे राजकुमार राम थे।जनमानस तब भी उनके साथ था और राजा दशरथ समेत कोई भी नागरिक नहीं चाहता था कि वे वन गमन करें। चौदह वर्ष बाद जब वे लंकापति रावण को परास्त करके अयोध्या वापस लौटे तब तक लोग उन्हें मर्यादा पुरुषोत्तम श्री राम के रूप में जानने लगे थे।आम व्यक्ति से मर्यादा पुरुषोत्तम बनने की यही यात्रा भारत का संस्कार है।अयोध्या में रामलला का भव्य मंदिर स्थापित होने से भारत के संस्कार और विकास के यही मानदंड एक बार फिर स्थापित हुए हैं। सागर में स्वर्गीय भुवन भूषण देवलिया ने पत्रकारिता की नर्सरी में जो संस्कार रोपे थे वे आज बहुमूल्य उपवन बनकर सबके सामने हैं। इसे उसी रामराज्य का मॉडल कहा जा सकता है जिसे हम समाज के बीच साकार कर रहे हैं।
    व्याख्यान माला और सम्मान समारोह में पहुंचे विधानसभा अध्यक्ष नरेन्द्र सिंह तोमर के मार्गदर्शन में राजेन्द्र शर्मा ,विजयदत्त श्रीधर, श्रीमती कीर्ति देवलिया और अन्य अतिथियों ने दीप प्रज्वलन कर कार्यक्रम का विधिवत शुभारंभ किया।उन्होंने स्वर्गीय देवलिया जी के चित्र पर पुष्प अर्पित किए और ज्ञान की देवी मां सरस्वती की प्रतिमा पर माल्यार्पण किया। मुख्यमंत्री के जनसंपर्क अधिकारी अशोक मनवानी ने विधानसभा अध्यक्ष को पुष्पगुच्छ और शाल पहनाकर उनका सम्मान किया। मुख्य वक्ता राजेन्द्र शर्मा को समिति की ओर से आलोक सिंघई ने पुष्पगुच्छ और अंगवस्त्र पहनाकर उनका अभिवादन किया। पद्मश्री विजयदत्त श्रीधर को वरिष्ठ पत्रकार राजीव सोनी ने पुष्पगुच्छ भेंट करके और शाल ओढ़ाकर सम्मानित किया
    राजधानी के माधवराव सप्रे समाचार पत्र संग्रहालय एवम शोध संस्थान में आयोजित भुवन भूषण देवलिया स्मृति व्याख्यान के तेरहवें आयोजन में पहुंचे विधानसभा अध्यक्ष श्री नरेन्द्र सिंह तोमर ने राम,राजनीति और पत्रकारिता विषय पर अपने संबोधन में देश के वर्तमान राजनीतिक परिदृश्य को ऊर्जा से ओतप्रोत बताया। उन्होंने कहा कि पत्रकारिता के गुरु की याद में उनके शिष्य और परिजन ये आयोजन लगातार कर रहे हैं मुझे इसमें पहली बार शामिल होने का सौभाग्य मिला है। समिति ने शिवपुरी के वरिष्ठ पत्रकार प्रमोद भार्गव को सम्मानित करके अपने संकल्पों के प्रति प्रतिबद्धता दुहराई है। मैं जब भारतीय जनता युवा मोर्चा में था और राजनीति की शुरुआत कर रहा था तब मुझे ग्वालियर चंबल अंचल के शिवपुरी जाने का अवसर मिलता था। तबसे पत्रकार वार्ताओं में मुझे श्री प्रमोद भार्गव जी को समझने का अवसर मिला। उनके मार्गदर्शन से मुझे अपनी राजनीतिक जीवनयात्रा को मजबूती देने में काफी मदद मिली। मैं जानता हूं कि राष्ट्वादी विचारों के माध्यम से कैसे समाज का भला किया जा सकता है।
    श्री तोमर ने कहा कि श्री राम मंदिर आंदोलन और अयोध्या के भव्य राम मंदिर में राम लला की मूर्ति की स्थापना ने भगवान श्री राम के व्यक्तित्व की स्थापना में सहयोग दिया है। इसी राममय राजनीति में देश की सारी समस्याओं का समाधान मौजूद है। प्रभु श्रीराम ने अपने चौदह वर्ष के वनवास के कालखंड में वही किया जो एक आम इंसान को करना चाहिए। महादेव पूजन में मुख्य पुरोहित के रूप में शत्रु रावण को बुलाना हो या मृत्यु शैया पर पड़े रावण से ज्ञान प्राप्त करने के लिए भ्राता लक्ष्मण का मार्गदर्शन करना सभी वे संस्कार हैं जो लोकतंत्र की पहली शर्त हैं। प्रतिकूल परिस्थितियों में वनवासियों की सेना बनाकर असत्य पर सत्य की विजय का परचम फहराना हर शासक के लिए आज भी समीचीन संदेश है। राम राजनीति और पत्रकारिता विषय पर विमर्श की जिज्ञासा सभी को होनी चाहिए तभी लोग समझ पाएंगे कि राजकुमार राम से मर्यादा पुरुषोत्तम श्री राम तक की यात्रा ही हमारे जीवन का लक्ष्य है। समिति की सचिव डा. अपर्णा एलिया ने विधानसभा अध्यक्ष श्री नरेन्द्र सिंह तोमर को स्मृति चिन्ह ,शॉल और तुलसी का पौधा भेंट कर सम्मानित किया।
    विषय का प्रवर्तन करते हुए वरिष्ठ पत्रकार शिवकुमार विवेक ने कहा कि राम हमारी चेतना से जुड़े हुए हैं। राम वास्तव में राजनीति का विषय नहीं हैं। जब तक वे व्यक्तिगत आस्था का विषय थे तब तक उनसे किसी को शिकायत नहीं थी। अब जबकि जब वे सामूहिक चेतना के प्रतीक बन गए हैं तो उनका मंदिर राजनीतिक विमर्श का केन्द्र बिंदु बन गया है। अखबारों ने भी इसे भारत की प्राण प्रतिष्ठा कहकर जनमानस की भावनाओं को रेखांकित किया है। लोकतंत्र की इसी नब्ज को टटोलकर हमारी पत्रकारिता अपना उद्देश्य पूरा कर रही है। इस अवसर पर प्रकाशित की गई स्मारिका का विमोचन भी किया गया।
    भुवन भूषण देवलिया व्याख्यानमाला समिति की ओर से सम्मानित किए गए शिवपुरी के वरिष्ठ पत्रकार प्रमोद भार्गव ने कहा कि मैंने पत्रकारिता की अकादमिक शिक्षा कहीं नहीं ली लेकिन देश की राजनीतिक चेतना को समझकर मैंने अपना संवाद किया और हमेशा पूरे देश के मीडिया के साथ काम करने का अवसर मुझे मिलता रहा। उन्होंने कहा कि देश में लगभग तीन सौ रामायण हैं जिनमें अलग अलग आख्यान कहे गए हैं। फादर कामिल बुल्के ने इन रामायणों को पढ़कर रामकथा सार नामक ग्रंथ लिखा है। हमें देखना होगा कि भारतीयता कहां कहां है। भारत ऋषियों और मुनियों का देश रहा है। वे पूजा पाठ जैसे कर्मकांडों में नहीं लगे थे वे तो वैज्ञानिक आविष्कारों जुटे रहते थे। उन्हीं ऋषियों ने संदेश दिया था कि रावण उत्तर भारत की ओर बढ़ रहा है। यही कारण है कि उन्होंने राम को वन का राज सौंपने की राय दी थी। ऋषि मुनि तब वनवासियों को शिक्षित कर रहे थे। उनकी यज्ञशालाएं वास्तव में अग्नि शालाएं थीं। वहां हथियार बनाए जाते थे। श्री प्रमोद भार्गव ने कहा कि उन्होंने अपनी पत्रकारिता और पुस्तकों के माध्यम से देश की भावनाओं को सामने लाने के लिए काम किया है। उन्होंने कहा यही पत्रकारिता समाज में हितकारी संवाद स्थापित कर पाती है। व्याख्यान माला समिति की ओर से विधानसभा अध्यक्ष नरेन्द्र सिंह तोमर ने श्री प्रमोद भार्गव को पुरस्कार राशि 11 हजार रूपए, शाल श्रीफल देकर सम्मानित किया।
    कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे पद्मश्री विजयदत्त श्रीधर ने कहा कि ये आयोजन हर साल मार्च महीने के पहले रविवार को होता है। इस बार संयोग है कि आज स्वर्गीय देवलिया जी का जन्मदिन भी है। मैं उनकी स्मृति को प्रणाम करता हूं। उन्होंने कहा कि अयोध्या में 1949 में रामलला की मूर्ति की स्थापना हुई थी। तब फैजाबाद की जिला कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष ने अपने पत्र में लिखा कि यदि आज श्री राम लला की मूर्ति की स्थापना नहीं होगी तो हमने आजादी किसलिए हासिल की थी। अदालत के फैसले से अयोध्या में तो देश के जनमानस के मनोभावों की प्राण प्रतिष्ठा हो चुकी है। अभी काशी और मथुरा बाकी हैं। इरफान हबीब जैसे सुधारवादी मुस्लिमों का कहना है कि ये मसले आपसी बातचीत से सुलझा लिए जाने चाहिए। मीडिया इस पर राष्ट्रीय सहमति बनाने से चूक गया है। यदि अयोध्या की तरह इस पर देशव्यापी डिबेट हो जाए तो शांति का मार्ग प्रशस्त हो सकता है। आयोजन समिति की ओर से डा. बालकृष्ण दुबे ने श्री विजयदत्त श्रीधर को स्मृति चिन्ह भेंटकर सम्मानित किया।
    राम,राजनीति और पत्रकारिता विषय पर व्याख्यान के मुख्य वक्ता राजेन्द्र शर्मा ने कहा कि इस भावमय कार्यक्रम से हमें ये समझने में मदद मिलती है कि स्वर्गीय भुवन भूषण देवलिया जी श्री राम के व्यक्तित्व के समान ही प्रेरणा के स्रोत बने हुए हैं। एक से बढ़कर एक पत्रकारों को तैयार करने में श्री देवलिया जी का योगदान अप्रतिम रहा है। हमें इस तरह के विमर्श से देश की नई पीढ़ी को प्रेरणा देते रहना चाहिए। उन्होंने कहा कि आज भी देश में बाबरी मस्जिद ध्वंस पर छाती पीटने वालों की जमात मौजूद है जबकि बाबर केवल एक आक्रांता था। मुगल काल में हिदू धर्म के प्रतीक ध्वस्त किए गए थे लेकिन अंग्रेजों ने तो पूरे जन मानस को राम से विमुख करने का षड़यंत्र रचा। श्री शर्मा ने कहा कि राम मंदिर के माध्यम से देश की नई पीढ़ी आसानी से समझ पाएगी कि राम समन्वय के प्रतीक हैं। वे उस मां को भी पूरा सम्मान देते हैं जिसने उन्हें वनवास के लिए भेज दिया था। वे उस मारीच को भी अभय देते हैं जिसने उन्हें गुमराह किया था। उनके आदर्श जीवन को राजनीति का मंत्र मानने वाले राम को अपना प्रकाश स्तंभ मानते हैं लेकिन कुछ विरोधी अपना नाम सीताराम और जयराम रखने के बावजूद भगवान राम का विरोध करते देखे जाते हैं। पूरी दुनिया में रामव्रत के बगैर लोकतंत्र सफल नहीं हो सकता।
    श्री शर्मा ने कहा कि सीता माता के प्रति राम का अनुराग इतना गहरा था कि उन्होंने शक्तिशाली रावण तक का वध कर दिया लेकिन जब उनके राज्य के एक नागरिक ने सवाल उठाया तो उन्होंने अपने अनुराग का दमन करके सीता माता को त्यागने तक का फैसला कर लिया। लोकतंत्र के लिए व्यक्तिगत राग का त्याग करने का ऐसा उदाहरण कौन प्रस्तुत कर सकता है। विभीषण के प्रति अन्याय करने वाले रावण को दंडित करने के बाद वे लंका को हड़प सकते थे लेकिन उन्होंने विभीषण को वहां की सत्ता सौपकर जो त्याग का उदाहरण दिया वह लोकतांत्रिक सोच ही तो था लेकिन कुछ विरोधियों ने तो केवल राजनीतिक द्वेष की वजह से राम मंदिर के प्राण प्रतिष्ठा आयोजन में शामिल होने से इंकार कर दिया। उन्होंने कहा कि श्री राम के व्यक्तित्व से प्रेरित केवल वही पत्रकारिता स्वागत योग्य होती है जो दूसरों की पीड़ा को दूर करने के लिए आगे आती है।
    उन्होंने कहा कि रावण तो छल विद्या का जानकार था वह रूप भी बदल लेता था लेकिन उसने अपने सलाहकारों से कहा कि मैं जब राम का वेश धरता हूं तो सीता मुझे माता नजर आने लगती हैं। ऐसे में मैं कोई अन्यायी कदम नहीं उठा पाता। राम नाम की राजनीति भी यही संस्कार देती है जिससे समाज का कल्याण सफलता पूर्वक किया जा सकता है। श्री शर्मा ने कहा कि जटायु जब प्राण त्याग रहे थे तब श्रीराम ने उनसे निवेदन किया कि वे स्वर्ग में जाकर राजा दशरथ को सीता हरण की कहानी न सुनाएं। मैं स्वयं रावण का वध करके उसे अपनी व्यथा सुनाने कुल समेत भेज रहा हूं। वनवासी राम ने अपनी सेना के सभी अंगों को शक्ति संपन्न किया। अपने आत्मविश्वास और निपुणता के बल पर रावण का वध भी किया। त्याग,पराक्रम के साथ दयालुता जैसी भावनाओं का जैसा समावेश राम की नीति में है वही सच्ची राजनीति कही जा सकती है। स्वर्गीय भुवन भूषण देवलिया की पुत्री श्रीमती अरुणा दुबे ने श्री राजेन्द्र शर्मा को स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया।
    विशिष्ट अतिथि माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो.के.जी. सुरेश ने कहा कि पत्रकारिता पर गहरा दायित्व है कि वह उन मुद्दों को खबर बनाए जिसके आधार पर लोकतंत्र की भावना मजबूत होती है। उन्होंने कहा कि जम्मू कश्मीर में जब हुर्रियत चुनावों का बहिष्कार कर रही थी तब कुछ देश भक्त चैनलों ने भय के माहौल के बीच मतदान करने वाले नागरिकों को शाबासी दी थी । उसी सकारात्मक भाव का नतीजा है कि आज जम्मू कश्मीर विकास के पथ पर अग्रसर है। उन्होंने कहा कि कुछ ही साल पहले राष्ट्रवादी सोच के पत्रकारों को गोदी मीडिया कहकर लांछित किया जाता था आज जब पूरी दुनिया भारत के साथ खड़ी है तब उन चैनलों के सुर भी बदल गए हैं। मुख्य धारा के मीडिया को समझ में आ गया है कि यदि वे जन भावनाओं को महत्व नहीं देंगे तो उनका मीडिया समाज से कट जाएगा। अब वे चैनल भीजनता की सोच के अनुकूल सामग्री ही दिखाते हैं। आज देश में समान नागरिक संहिता पर सकारात्मक चर्चा चल रही है। जनता और मीडिया सभी के सोच में स्पष्ट बदलाव साफ दिखाई देने लगा है। स्वर्गीय भुवन भूषण देवलिया के सुपुत्र डा. आशीष देवलिया ने प्रोफेसर के.जी.सुरेश को स्मृति चिन्ह भेंटकर सम्मानित किया।
    कार्यक्रम का औपचारिक आभार प्रदर्शन वरिष्ठ पत्रकार राजेश सिरोठिया ने किया। उन्होंने कहा कि राजनीति धर्म के बगैर नहीं की जा सकती। सनातनी भाव से ही लोकतंत्र मजबूत हो सकता है। राम और कृष्ण के देश में हमें शास्त्रों से नैतिकता की शिक्षा दी जाती है लेकिन वक्त आने पर धर्म की रक्षा के लिए शस्त्र उठाने का प्रशिक्षण भी दिया जाता है। उन्होंने सभी अतिथियों के प्रति आभार प्रदर्शित किया। मंच का संचालन वरिष्ठ पत्रकार एवं लेखक श्री लोकेन्द्र सिंह ने किया।