Month: August 2023

  • ब्रांड असंतुलन साधने के लिए बदली गई ये चुनावी फील्डिंग

    ब्रांड असंतुलन साधने के लिए बदली गई ये चुनावी फील्डिंग


    भारतीय जनता पार्टी ने मध्यप्रदेश में 39सीटों पर प्रत्याशी घोषित करके जिस आक्रामक रणनीति का परिचय दिया था उसी तर्ज पर उसने तीन नए मंत्री बनाकर कथित तौर पर डगमगाती नैया के छेद भी बंद कर दिए हैं। कहा जा रहा था कि विंध्य का ब्राह्मण मतदाता इस बार भाजपा से नाराज है और वह कमलनाथ कांग्रेस के साथ जाने के लिए तैयार है। राजनीतिक क्षेत्र के जानकार होने का दावा करने वाले कुछ लाल बुझक्कड़ी पंडितों की इस कहानी में कोई सिर पैर ही नहीं था। इसकी वजह थी कि राजेन्द्र शुक्ल मंत्री न बनाए जाने से कतई नाराज नहीं थे। उनके करीबियों को जिस तरह से बड़े ठेके देकर महत्वपूर्ण कार्यों की जवाबदारी दी गई थी ये उनके मंत्री रहते संभव नहीं था.पिछले विधानसभा चुनावों में विंध्य का इलाका एकजुट होकर भाजपा के साथ आया था। शिवराज जी के लंबे कार्यकाल के कारण राजनीतिक मेधा से लबरेज वहां के मतदाताओं में थोड़ी बेचैनी जरूर देखी जा रही थी उन्हें लगता था कि हमारे इलाके को उपेक्षित किया जा रहा है लेकिन जिस तरह के ठोस कार्यों में विंध्य के प्रमुख लोगों को सत्ता का सहोदर बनाया गया उसे जानकर विंध्य के मतदाता में कहीं कोई संशय नहीं बचा है। नारायण त्रिपाठी अलग विंध्य प्रदेश के राजनीतिक नारे को हवा देकर खुद का औचित्य सिद्ध कर रहे थे। ऐसे में कांग्रेस के हवा दिएजाने के बावजूद अलगाव की मांग परवान नहीं चढ़ पाई । इधर विधानसभा अध्यक्ष गिरीश गौतम ने विंध्य की कमान को मजबूती से थाम रखा है। ऐसे में विंध्य कहीं खिसकने वाला नहीं है।


    बालाघाट और महाकौशल से संवाद करने वाले एक शिल्पी की जरूरत लंबे समय से महसूस की जा रही थी। जबलपुर से अजय विश्नोई जिस तरह रह रहकर अपने राजनीतिक वनवास की कराह सुनाते रहे हैं उसे देखकर सात बार के विधायक और लोकप्रिय मंत्री रहे गौरीशंकर बिसेन को मंत्री बनाकर भेजा गया है। महाकौशल को भड़काने और भरमाने के प्रयासों के लिए बिसेन अकेले ही काफी हैं। भाजपा ने हितग्राही मूलक जिन योजनाओं की बौछार पूरे प्रदेश में की है उसका असर महाकौशल में भी पर्याप्त है।


    उमा भारती अपनी राजनीतिक महत्वाकांक्षा के चलते जिस तरह लोधी वोटों को लामबंद करने में जुटी हैं उसे केन्द्रीय मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल का अंदरूनी सपोर्ट मिलता रहा है। ऐसे में राहुल लोधी को राज्यमंत्री बनाकर भाजपा ने लोधी समाज की एक बड़ी आकांक्षा पूरी कर दी है।उमा भारती को सत्ता में भागीदारी का संदेश देने में भी ये प्रयास सफल रहा है।


    दरअसल ये तीनों नियुक्तियां न तो मंत्रियों का जलवा बढ़ाने के लिए हैं और न ही उन नेताओं को इस नए पदभार से कोई लाभ मिलने वाला है। उन्हें तो उस ब्रांड असंतुलन को ठीक करने के लिए मैदान में उतारा गया है जो शिवराज सिंह चौहान के चेहरे के अति प्रचार से बिगड़ रहा है। चुनावी प्रचार के केन्द्र में शिवराज सिंह चौहान की छवि को भरपूर उभारा गया है। लगभग 20 सालों की सत्ता ने शिवराज जी को सामने आने का पूरा मौका दिया है। आगामी विधानसभा चुनाव के लिए भाजपा की केन्द्रीय कमान ने राज्य भाजपा को भरपूर संसाधन मुहैया कराए हैं। ऐसे में तीन महत्वपूर्ण पदाधिकारियों को मैदान में उतारकर भाजपा हाईकमान ने लड़खड़ाते शिवराज ब्रांड को सहारा देने का जतन किया है। जिस तरह से कहा जा रहा है कि योजनाओं के हितग्राही मिलकर पार्टी को गुजरात जैसी बंपर जीत दिला सकते हैं तो ऐसी स्थिति में शिवराज की आड़ में सत्ता का उपभोग करते रहे लोग इस जीत को शिवराज की जीत बताने में जुट जाएंगे। तब पार्टी को ये चुनावी फील्डिंग काम आएगी।

    बेशक तीनों मंत्री शिवराज के सहयोगी रहे हैं लेकिन राजनीतिक पतंग की डोर यदि थामकर न रखी जाए तो फिर ये मैदान में कोहराम मचाने लगती है। शिवराज जी के कार्यकाल को पार्टी में अलौकिक नहीं माना जाता है। वे मजबूरी का नाम महात्मा गांधी बनकर कार्य करते रहे हैं। ऐसे में तीन मंत्रियों का ब्रेक उनका भ्रम तोड़ने के लिए सहयोगी साबित होगा। शिवराज सिंह जिस लाबी की कठपुतली बनकर सरकार चलाते रहे हैं उसे शिकस्त देने की कोशिश करती कांग्रेस अपने दांत तुड़वा चुकी है। जाहिर है कि भाजपा ये गलती दुहराने वाली तो नहीं है।

  • कांग्रेस की रगों में बसा है चारित्रिक पतनःसबनानी

    कांग्रेस की रगों में बसा है चारित्रिक पतनःसबनानी

    भोपाल,25 अगस्त(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)। मध्य प्रदेश में कांग्रेस और उनके नेताओं की चरित्रहीनता पर भारतीय जनता पार्टी ने तीखा कटाक्ष किया है।भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश महामंत्री एवं प्रदेश कार्यालय प्रभारी श्री भगवानदास सबनानी ने आज राजधानी में पत्रकार वार्ता में कहा कि डबरा से कांग्रेस विधायक सुरेश राजे और तेंदूखेड़ा विधायक संजय शर्मा का नाम दो अलग-अलग चारित्रिक पतन की घटनाओं में सामने आया है। सुरेश राजे अशोभनीय वीडियो को लेकर चर्चाओं में हैं तो संजय शर्मा सना खान हत्याकांड के आरोपी को संरक्षण दे रहे हैं। यह मामले सामने आने के बाद भी कांग्रेस ने विधायकों पर कोई कार्रवाई नहीं की है और न ही किसी तरह की माफी मांगी है। यह घटनाएं हमें बताती हैं कि कांग्रेस का दुराचारियों और व्यभिचारियों को संरक्षण प्राप्त है। यह दुर्भाग्य की बात है इसमें कांर्ग्रेस ने जिस तरीके से चुप्पी ओढ़ रखी है, उससे लग रहा है कि यह सब कांग्रेस के इशारे पर हो रहा है। यही कांग्रेस का असली चेहरा और चरित्र रहा है।

    प्रदेश महामंत्री भगवानदास सबनानी ने कहा कि विधायक संजय शर्मा का नाम सना खान हत्याकांड में सामने आया है। विधायक और हत्यारे अमित साहू के बीच हुई बातचीत से साफ है कि वे उसे अपराध करने और फिर बचने का मार्गदर्शन दे रहे हैं। कांग्रेस ऐसे कांग्रेस नेताओं पर कार्रवाई करने की बजाय संरक्षण देने का काम कर रही है। वहीं विधायक सुरेश राजे का अशोभनीय वीडियो यह बताता है कि कांग्रेस नेताओं का असली चरित्र और चेहरा यही रहा है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस का एक पुराना इतिहास रहा है। उस इतिहास पर नजर डालें तो महिला अपमान में इन्होंने कोई कसर नहीं छोड़ी है।

    उन्होंने कहा कि गंधवानी से कांग्रेस विधायक और कमलनाथ सरकार में मंत्री रहे उमंग सिंघार के खिलाफ एक महिला ने दुष्कर्म का मामला दर्ज करवाया था। उन्होंने महिला को शादी का झूठा आश्वासन देकर दुष्कर्म किया था। मानवता को शर्मसार करने वाली इस तरह की घटनाएं कांग्रेस नेता व जनप्रतिनिधियों द्वारा की जा रही है। मंडला जिले में एक सरपंच के साथ दुष्कर्म का मामला सामने आया था। इसमें आरोपी और पीड़िता कांग्रेस कमेटी की पदाधिकारी थीं। कांग्रेस विधायक डॉ. अशोक मर्सकोले ने पीड़िता को न्याय दिलवाने की बजाय इसे व्यक्तिगत मामला बताते हुए पल्ला झाड़ लिया। यह कांग्रेस की असलियत है और अपनी जिम्मेदारियों से भागती है एवं जनता न्याय के लिए तरसती है।

    प्रदेश महामंत्री श्री सबनानी ने कहा कि रेवांचल एक्सर्प्रेस में यात्रा कर रही महिला के साथ सतना से कांग्रेस विधायक सुनील सर्राफ और कोतमा विधायक सिद्वार्थ कुशवाहा ने शराब के नशे में बदसलूखी की। साथ ही महिला को धमकी भी दी कि वह कहीं शिकायत न करें। अकेली महिला के साथ बदसलूकी करना कांग्रेसियों की आपराधिक और व्यभिचार से भरी मानसिकता को दर्शाता है। इनके लिए महिला सम्मान की कोई असहमियत नहीं है। कांग्रेस नेताओं ने महिलाओं के अपमान में कोई कसर नहीं छोड़ी है। उन्होंने अपने कर्मों से जनता का विश्वास तोड़ा है। आज प्रदेश की महिलाएं कांग्रेस और कांग्रेस नेताओं का चरित्र जानती हैं। कांग्रेस का असली चेहरा सबके सामने है।

    वरिष्ठ नेता भगवानदास सबनानी ने कहा कि जावरा में पूर्व कांग्रेस नेता डॉ. समीर सिंह राठौर पर महिला से दुष्कर्म का आरोप लगा, लेकिन कांग्रेस ने इस मामले को दबाने का काम किया। कांग्रेस का हाथ हमेशा अत्याचारियों के साथ ही होता है। उज्जैन जिले के कांग्रेस विधायक मुरली मोरवाल के बेटे करण मोरवाल एक महिला नेता के यौन शोषण के आरोपी हैं। उन्होंने महिला को शादी का झांसा देकर महिला के साथ दुष्कर्म किया। लेकिन उन पर कार्रवाई करने की बजाय उन्हें बचाया गया। कांग्रेस का हाथ हमेशा दुष्कर्मियों के साथ रहा है। भोपाल की नरेला विधानसभा के कांग्रेस अध्यक्ष तारिक अली और उनके भाइयों सारिक एवं राजा अली ने नशीला पदार्थ खिलाकर एक महिला की अस्मत लूटने का घिनौना काम किया। कांग्रेस नेता ही क्यों महिलाओं के रक्षक की जगह उनके भक्षक बनते हैं। कांग्रेस का चरित्र ही महिला विरोधी है। प्रियंका गांधी लड़की हूं, लड़ सकती हूं का नारा देती हैं, लेकिन महिलाओं को अपनी अस्मत कांग्रेस नेताओं से ही बचानी पड़ती है और अब तो बेटे भी इनकी आपराधिक और व्यभिचारिक मानसिकता के शिकार हो रहे हैं।

  • अंत्योदय का फार्मूला बना देश की राजनीति का प्रमुख आधार

    अंत्योदय का फार्मूला बना देश की राजनीति का प्रमुख आधार


    भोपाल,22 अगस्त(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)। वैश्विक राजनीति में बढ़ते दखल को सफल बनाने के लिए मोदी सरकार ने पंडित दीन दयाल उपाध्याय के जिस अंत्योदय वाले फार्मूले पर अमल करके प्रति व्यक्ति आय बढ़ाना शुरु कर दिया है उससे देश की राजनीति में नया भूचाल आ गया है। देश को अब तक जिन बड़े राजनीतिक कदमों ने प्रभावित किया है उसमें हर प्रति व्यक्ति आय बढ़ाने का फार्मूला कारगर साबित हो रहा है। मध्यप्रदेश सरकार ने किसानों, महिलाओं और विभिन तबकों को अर्थव्यवस्था में सीधे तौर पर जोडने की जो विधि अपनाई है उससे तमाम राजनीतिक दलों के दावे धराशायी हो गए हैं।
    मध्यप्रदेश में किसान सम्मान निधि और लाड़ली बहना योजना ने शिवराज सरकार के प्रति बढ़ती सत्ता विरोधी लहर को ठंडा करना शुरु कर दिया है। मोदी सरकार भले ही तीसरी बड़ी अर्थव्यवस्था बनने का दावा कर रही है लेकिन वास्तव में देश प्रति व्यक्ति आय के पैमाने पर 142 वें नंबर पर है। अर्थशास्त्रियों की इस राय पर गौर करते हुए भाजपा ने अपने शासित राज्यों में लोगों को राहत के कई पैकेज दिए हैं।
    लाल किले से दिए गए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के भाषण में ये तमाम दावे किए गए थे। इस पर जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी (जेएनयू) के जाने-माने अर्थशास्त्री, रिटायर्ड प्रोफेसर अरुण कुमार ने कहा कि प्रधानमंत्री जिन आंकड़ों के आधार पर ये बात कह रहे हैं वे संगठित क्षेत्र के सर्वे पर तैयार किए गए हैं।अरुण कुमार ने कहा, “10वें नंबर से 5वें नंबर पर और 5वें से तीसरे नंबर पर पहुंचने के लिए जिन आंकड़ों को आधार बनाया जा रहा है, वे आंकड़े सही नहीं है. क्योंकि नोटबंदी के बाद असंगठित क्षेत्र के आंकड़े सही नहीं हैं. सरकार भारतीय अर्थव्यवस्था इस की वृद्धि दर को 8%, 7% और 6% बताती रही है, लेकिन 2016 के बाद से दरअसल यह 2 से 3 प्रतिशत या 0% से ज्यादा नहीं रही है, खासकर तब जब नोटबंदी के कारण सब बंद पड़ा था.”


    उन्होंने कहा, “सरकार केवल आंकड़ों का खेल कर रही है. हम 10वें नंबर से 5वें नंबर पर नहीं पहुंचे हैं. अभी तो हम 10वें नंबर के आस-पास ही हैं, जहां हम पहले थे.”कुमार ने कहा कि, “सरकार के आधिकारिक आंकड़े के मुताबिक कोविड महामारी के पहले हमारी ग्रोथ रेट, 2017-18 की चौथी तिमाही (क्वार्टर 4) में 8 प्रतिशत थी जो गिरकर 3 प्रतिशत हो गई. लेकिन इसमें असंगठित क्षेत्र शामिल नहीं है, इसलिए यह वृद्धि 0% या उससे कम हो सकती है. इसलिए हम 5वें नंबर पर नहीं, बल्कि 8वें, 9वे नंबर होंगे.”

    उन्होंने कहा, “आखिर जब नोटबंदी से अर्थव्यवस्था गिर गई थी, तब कहा गया था कि हम 8 प्रतिशत के साथ वृद्धि कर रहे हैं. तो हम आकलन कर सकते हैं कि यह कितना सच और कितना झूठ है. और फिर जीएसटी ने असंगठित क्षेत्र को ध्वस्त किया. एफएमसीजी सेक्टर कि रिपोर्ट, टेक्सटाइल सेक्टर, लेदर गुड्स सेक्टर, लगेज इंडस्ट्री की रिपोर्ट्स इसे साबित करती हैं.”वहीं पीएम मोदी ने कहा, “अंतर्राष्ट्रीय एजेंसियां भी कह रही हैं कि भारत में अत्यधिक गरीबी खात्मे के कगार पर है, जो दिखाता है कि 9 सालों में सरकार के फैसले और नीतियां देश को सही दिशा में ले जा रही हैं.”

    कुमार इस पर कहते हैं, “दरअसल विश्व बैंक, ईडीबी और आईएमएफ खुद से आंकड़े इकट्ठा नहीं करता. वह सरकार के आंकड़े के आधार पर ही अपनी रिपोर्ट बनाता है. इसलिए जो सरकार के आंकड़ों में गड़बड़ी है, वही उसके आंकड़ों में भी गड़बड़ी होती है. वह एक इंडिपेंडेंट डेटा कलेक्टिंग (स्वतंत्र आंकड़े जुटाने वाली) एजेंसी नहीं है.” हालांकि, अरुण कुमार ने कहा, “55% संगठित क्षेत्र के आंकड़े को आधार बनाए तो वृद्धि की बात सही हो सकती है, लेकिन अंसगिठत क्षेत्र जो कि 45% है, जिसमें 14 प्रतिशत कृषि और बाकी 30 प्रतिशत अन्य असंगठित क्षेत्र है. 30 प्रतिशत असंगठित क्षेत्र में गिरावट है. असंगठित क्षेत्र के आंकड़े न मौजूद होने से 7-8 फीसदी की वृद्धि की बता गलत है, 30 फीसदी में गिरवाट के आधार पर आकलन करें तो हमारी ग्रोथ रेट, 0% 2%, 3% ही चल रही है, 7-8% नहीं.”

    कुमार ने कहा कि, “11 अक्टूबर 2022 को जय प्रकाश नारायण (जेपी) के जन्मदिन पर हमने एक रिपोर्ट निकाली, जिसके मुताबिक हमारे देश में 32 करोड़ लोगों के पास तो कोई ढंग काम है, लेकिन 28 करोड़ लोगों के पास ढंग का काम नहीं है, या बिलकुल काम नहीं है. इनमें 19 करोड़ ने काम ढूंढ़ना बंद कर दिया था. अगर 140 करोड़ की जनसंख्या में 32 करोड़ के पास ही ढंग का काम है. तो हर एक व्यक्ति 4 व्यक्ति को सहारा दे रहा है.”

    उन्होंने कहा, “नवंबर 2022 में ई-श्रम पोर्टल का डेटा आया है, प्रधानमंत्री ने भी इसका जिक्र किया है. नवंबर 2022 तक, 28 करोड़ असंगठित क्षेत्र के लोगों ने इस पोर्टल पर रजिस्टर कराया. उसमें से 94 प्रतिशत ने बताया कि हमारी आमदनी 10 हजार रुपये से कम है, जो कि गरीबी रेखा के आस-पास ही हैं.”

    अरुण कुमार ने कहा कि, “विश्व बैंक का गरीबी रेखा का जो पैमाना है वह 2.15 डॉलर है. यानि 5 लोगों के परिवार को 25 हजार महीने की आमदनी चाहिए. हालांकि, यदि मोटे तौर पर समझें तो हर व्यक्ति को कम से कम 13 हजार रुपये चाहिए. लेकिन 94 प्रतिशत लोग तो कह रहे हैं हमारी आमदनी 10 हजार रुपये से कम है. विश्व बैंक की रेखा से भारत की गरीबी नापें तो ये इस पोर्टल में दर्ज कराने वाले 94% लोग गरीब हैं. इसलिए हम 5वीं अर्थव्यवस्था हैं और तीसरी अर्थव्यवस्था हो जाएंगे, इसका कोई मतलब नहीं है. असली बात हमारे आंकड़ों में आ नहीं रही है.”वहीं पीएम ने इस कार्यक्रम में नीति आयोग की रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि, “भारत गरीबी को खत्म कर सकता है. पिछले 5 सालों में 13.5 करोड़ लोग गरीबी से बाहर निकले हैं.”

    इस पर कुमार कहते हैं, “इसे मल्टीडाइमेंशनल पॉवर्टी कहते हैं. जिसमें शिक्षा, स्वास्थ्य और लिविंग स्टैंडर्ड होता है. लेकिन इसमें भी गड़बड़ी है. सरकार कह रही है कि ये 2019-21 के आंकड़े हैं. 2019-20 की बात तो ठीक थी, लेकिन 2020-21 में तो भयंकर कोविड महामारी फैली थी. इस दौरान कितने लोगों ने पलायन किया. बच्चे स्कूल नहीं जा रहे थे, कितने लोग मर गए, जिनके आंकड़े भी ठीक से नहीं पता हैं. ऐसे में यह कहना कि 13.5 करोड़ लोग मल्टीडाइमेंशनल पॉवर्टी से निकल आए हैं, यह भी गलत है.”

    उन्होंने कहा कि, “रूरल एम्प्लॉयमेंट गारंटी स्कीम आरबीआई के आंकड़ों के मुताबिक कोविड महामारी के समय सिर्फ 47 दिन का काम मिल रहा था. जो कि साल में 9 दिन होता है, साल में 9 दिन के काम से पूरे साल का काम कैसे चल सकता है? इसलिए 135 मिलियन यानि 13.5 करोड़ लोग गरीबी से निकल आए हैं ये भी आंकड़ा सही नहीं है.”
    ‘अर्थशास्त्री कुमार ने कहा कि, “प्रति व्यक्ति आय में तो हम अभी भी दुनिया में 142वें स्थान पर हैं. जो कि ज्यादा महत्वपूर्ण है. अगर हम थोड़ी देर के लिए मान भी लें कि हमारी अर्थव्यवस्था ब्रिटेन की अर्थव्यवस्था से बड़ी हो गई है. लेकिन हमारे यहां तो 140 करोड़ लोग हैं, उनके यहां साढ़े 7 करोड़ लोग हैं. वो हमसे 15 गुना छोटे हैं. वास्तव में हमें प्रति व्यक्ति आय के आधार पर अपने देश की गरीबी को देखना चाहिए.”
    सरकार के दावों के समर्थन में बैंक ऑफ बड़ौदा के चीफ इकोनॉमिस्ट मदन सबनवीस कहते है कि , “जिस तरह भारत की सरकार इन्फ्रास्ट्रक्चर पर ध्यान दे रही है, इन्वेस्टमेंट हो रहा है और प्राइवेट इन्वेस्टमेंट पर इन्सेंटिव दिया जा रहा है, इससे तीसरी अर्थव्यवस्था बनना काफी संभव है.”सबनवीस ने कहा जहां तक असंगठित क्षेत्र के डेटा की बात है तो उसके लिए भी प्रॉक्सी डेटा का इस्तेमाल किया जाता है. इसके लिए आईआईपी ग्रोथ नंबर का इस्तेमाल होता है. ये काफी सालों से चल रहा है इसलिए मुझे नहीं लगता कि इसको लेकर बहुत बड़ी गड़बड़ी होगी.(प्रोफेसर अरुण कुमार के इंटरव्यू पर आधारित)

  • Equitas Small Finance Bank: इक्वाटास स्मॉल बैंक क्रेडिट कार्ड और पर्सनल लोन भी लाया

    Equitas Small Finance Bank: इक्वाटास स्मॉल बैंक क्रेडिट कार्ड और पर्सनल लोन भी लाया


    नई दिल्ली 21 जुलाई (प्रेस इंफार्मेशन सेंटर) : इक्वाटास स्मॉल फाइनेंस बैंक अब क्रेडिट कार्ड और पर्सनल लोन वेंचर की शुरूआत करेगा. बैंक अपने बिजनेस का विस्तार कर रहा है और इस दिशा में वह एक मोबाइल एप्लीकेशन भी ला रहा है ताकि बिजनेस ऑपरेशन में तेजी लाई जा सके और लोगों तक सेवाओं की पहुंच बढ़ाई जा सके. वहीं, विदेशी मुद्रा कार्ड और रेमिटेंस जैसी सेवाएं पर भी काम कर रहा है. बता दें कि इक्वाटास बैंक स्मॉल बैकों की कैटेगरी एफडी निवेशकों को सर्वाधिक ब्याज दर की पेशकश करता है.

    एक शीर्ष अधिकारी ने बताया कि निजी क्षेत्र के इक्विटास स्मॉल फाइनेंस बैंक लिमिटेड की क्रेडिट कार्ड और पर्सनल लोन सेक्टर में एंट्री करने की योजना है, क्योंकि उसे कंज्यूमर फाइनेंस पोर्टफोलियो बनाने की उम्मीद है. इक्विटास स्मॉल फाइनेंस बैंक व्यापारियों की सेवा करने और उनके व्यवसाय संचालन को बेहतर बनाने में मदद करने के लिए एक मोबाइल एप्लिकेशन विकसित करने में भी निवेश कर रहा है.

    इक्विटास स्मॉल फाइनेंस बैंक ने अप्रैल-जून 2023 तिमाही के लिए अपने नेट प्रॉफिट में 97.1 प्रतिशत की बढ़ोतरी के साथ 191.20 करोड़ रुपये की वृद्धि हासिल की है. पिछले वर्ष की इसी तिमाही के दौरान बैंक ने 97 करोड़ रुपये का नेट प्रॉफिट दर्ज किया था.

    इक्विटास स्मॉल फाइनेंस बैंक की वार्षिक रिपोर्ट में कई परियोजनाओं का खुलासा किया गया है. बैंक के पार्टटाइम चेयरमैन अरुण रामनाथन ने कहा कि आने वाले वर्षों में हम क्रेडिट कार्ड और पर्सनल लोन में प्रवेश करके अपने उपभोक्ता वित्त पोर्टफोलियो का निर्माण करने की योजना बना रहे हैं, जो विविध लोन पोर्टफोलियो के माध्यम से स्थिरता बढ़ाने में मदद करेगा. उन्होंने कहा कि बैंक विदेशी मुद्रा कार्ड, विदेशी मुद्रा गैर-निवासी (एफसीएनआर) जमा और रेमिटेंस जैसी अन्य प्रपोजल्स पर काम करेगा.

    इक्विटास स्मॉल फाइनेंस बैंक लिमिटेड के साथ इक्विटास होल्डिंग्स लिमिटेड का रिवर्स विलय पूरा कर लिया है, जो वित्तीय संस्थान को यूनिवर्सल बैंक लाइसेंस के लिए आवेदन करने की अनुमति देगा. चेयरमैन अरुण रामनाथन ने कहा कि लगभग समान परिसंपत्ति आधार वाली दो सूचीबद्ध कंपनियों की विसंगति को समाप्त करने के अलावा, विलय ने इक्विटास स्मॉल फाइनेंस बैंक के लिए दिशानिर्देश जारी होने के बाद यूनिवर्सल बैंक लाइसेंस के लिए आवेदन करने का रास्ता साफ कर दिया है.

    प्रबंध निदेशक और सीईओ पीएन वासुदेवन ने कहा कि बैंक एक नए जमाने का वित्तीय संस्थान है जो ग्राहकों को बैंक के प्रोडक्ट और समाधानों तक पहुंच को सशक्त बनाने के लिए विभिन्न डिजिटलीकरण पहल करना जारी रखता है. उन्होंने कहा कि स्मार्टफोन की बढ़ती पहुंच और तेज डेटा कनेक्टिविटी के साथ हम अपने छोटे और छोटे व्यापारियों के लिए एक समर्पित ऐप में निवेश कर रहे हैं, ताकि उन्हें अपने व्यापार संचालन को बेहतर बनाने और विभिन्न भुगतान और बैंकिंग समाधानों के साथ अपने ऑपरेटिंग सिस्टम को इंटीग्रेट करने में मदद मिल सके.

    प्रबंध निदेशक और सीईओ ने आगे कहा कि इक्वाटास बैंक श्रृंगेरी सारदा मठ के सहयोग से इक्विटास हेल्थकेयर फाउंडेशन के तहत एक कैंसर ट्रीटमेंट अस्पताल स्थापित कर रहा है. उन्होंने कहा कि हमने श्रृंगेरी सारदा मठ के साथ संयुक्त रूप से इक्विटास हेल्थकेयर फाउंडेशन के तहत उच्च गुणवत्ता वाली कैंसर देखभाल तक पहुंच प्रदान करने के लिए एक अस्पताल का निर्माण शुरू किया है. हमें उम्मीद है कि अस्पताल इस साल की दूसरी छमाही में ऑपरेशनल हो जाएगा. (इकानामिक टाईम्स से साभार)

  • भाजपा ने एमपी को बीमारू के कलंक से मुक्त कराया बोले अमित शाह

    भाजपा ने एमपी को बीमारू के कलंक से मुक्त कराया बोले अमित शाह


    केंद्रीय गृह मंत्री ने लांच किया प्रदेश सरकार का 2003-2023 गरीब कल्याण रिपोर्ट कार्ड

    भोपाल,20 अगस्त(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)। मध्यप्रदेश के गठन के बाद से 2003 तक ज्यादातर समय कांग्रेस की ही सरकारें सत्ता में रही हैं। इन सरकारों ने प्रदेश को बीमारू राज्य बना दिया था। मध्यप्रदेश देश के उन राज्यों में शामिल था, जो देश के विकास में बाधक थे। 2003 में प्रदेश में उमा भारती जी के नेतृत्व में भाजपा की सरकार बनी। बाद में बाबूलाल गौर और शिवराजसिंह चौहान ने उस सरकार का नेतृत्व किया। भाजपा की सरकार ने प्रदेश को 20 सालों में बीमारू से बेमिसाल राज्य बनाया, बंटाढार से बुलंदियों पर पहुंचाया, पिछड़े से अग्रणी बनाया, समृद्ध और खुशहाल राज्य बनाया। मि. बंटाढार और कमलनाथ इस बात का जवाब दें कि 53 सालों में उनकी सरकारों ने प्रदेश के लिए क्या किया? क्यों प्रदेश की जनता के साथ अन्याय किया? क्यों मध्यप्रदेश का काफिला लुटा? यह बात केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने रविवार को प्रदेश सरकार के 20 सालों का गरीब कल्याण रिपोर्ट कॉर्ड जारी करते हुए कही। इस अवसर पर मुख्यमंत्री श्री शिवराजसिंह चौहान एवं भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष विष्णुदत्त शर्मा ने भी संबोधित किया। इस दौरान मंच पर प्रदेश शासन के गृह मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा मौजूद थे।

    केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि 2003 से पहले मध्यप्रदेश बीमारू राज्य हुआ करता था। 2003 में आई भाजपा की सरकार ने प्रदेश को बीमारू राज्य के कलंक से मुक्ति दिलाई। 2003 से 2023 तक के 20 साल प्रदेश में गरीबी से मुक्ति का स्वर्णकाल का समय रहा है। इन सालों में आत्मनिर्भर मध्यप्रदेश की नींव डाली गई। 2014 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी की सरकार बनी और प्रधानमंत्री मोदी जी ने मध्यप्रदेश की दिल खोलकर मदद की। डबल इंजन वाली सरकार ने प्रदेश में विकास के नए प्रतिमान गढ़े। न सिर्फ सड़क, बिजली और पानी की समस्या दूर हुई, बल्कि शिक्षा, स्वास्थ्य, सुशासन और विकास के सभी मापदंडों पर प्रदेश को आगे बढ़ाया और राजधानी भोपाल से गांव की चौपाल तक विकास और खुशहाली बयार चलाई। इसका प्रति उत्तर देते हुए प्रदेश की जनता ने भी दिल खोलकर वोट दिये। 2019 में 29 में से 28 सीटें भाजपा को दीं और 2024 में जो एक सीट की कमी रह गई है, वो भी जनता पूरी कर देगी। श्री शाह ने कहा कि मैं प्रदेश की जनता को विश्वास दिलाता हूं कि देश के अमृतकाल में मध्यप्रदेश देश का अग्रणी राज्य बनेगा। उन्होंने कहा कि आने वाला चुनाव प्रदेश को विकसित और सर्वोच्च राज्य बनाने तथा गरीबी से संपूर्ण मुक्ति दिलाने वाला चुनाव है और मुझे पूरा विश्वास है कि प्रदेश की 9 करोड़ जनता का आशीर्वाद हमें मिलेगा।

    श्री शाह ने कहा कि 2014 में सत्ता में आने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी की सरकार ने 60 करोड़ गरीबों का जीवन स्तर ऊपर उठाया। 14 करोड़ लोग गरीबी की सीमा रेखा से बाहर हुए। लगभग 10 सालों में देश की आबादी 10 प्रतिशत लोगों को गरीबी रेखा से बाहर करके मोदी जी गरीब कल्याण के पुरोधा बन गए और उनकी योजनाओं का लाभ मध्यप्रदेश को भी मिला। बंटाढार सरकार ने राज्य के बजट को 23000 करोड़ पर छोड़ दिया था, जिसे शिवराज जी की सरकार ने 3.14 लाख करोड़ तक पहुंचाया है। बंटाढार के समय शिक्षा का बजट 2456 करोड़ था, जिसे 38000 करोड़ तक पहुंचाया। स्वास्थ्य का बजट 580 करोड़ था, जिसे 16 हजार करोड़ तथा सर्व शिक्षा अभियान का बजट जो 844 करोड़ था, उसे 66 हजार करोड़ तक पहुंचाया। मि. बंटाढार और कमलनाथ को यह बताना चाहिए कि प्रदेश की आबादी का बड़ा हिस्सा एससी, एसटी और ओबीसी का है, इनके बजट को क्यों 1056 करोड़ पर छोड़ दिया था? भाजपा सरकार ने इसे 64390 करोड़ तक पहुंचाया। प्रति व्यक्ति आय 11700 से बढ़कर 1.40 लाख रुपये हो गई। बंटाढार सरकार के समय प्रदेश की सड़कें बदनाम थीं, भाजपा की सरकार ने 5.10 लाख कि.मी. अच्छी क्वालिटी की सड़कें बनाईं और राष्ट्रीय राजमार्ग जो सिर्फ 4800 किलोमीटर थे, उन्हें 13000 किलोमीटर तक पहुंचाया। श्री शाह ने कहा कि कमलनाथ जैसे जिन नेताओं ने कभी हाथों में हल नहीं पकड़ा, वो हमारी सरकार पर सवाल उठाते हैं। जबकि उनकी सरकार के समय समर्थन मूल्य पर गेहूं की खरीदी सिर्फ 4.38 लाख थी, जिसे हमारी सरकार ने 77.96 लाख मीट्रिक टन तक पहुंचाया। धान की खरीदी सिर्फ 95 हजार मीट्रिक टन होती थी, जिसे 46.30 लाख टन तक पहुंचाया। प्रदेश में हुए इस रिकॉर्ड तोड़ विकास के लिए मैं शिवराज जी को साधुवाद देता हूं।

    श्री शाह ने कहा कि पहले की सरकारें टुकड़े-टुकड़े विकास पर विश्वास करती थीं। 20 हजार घर, 30 हजार शौचालय जैसे लक्ष्य हुआ करते थे। लेकिन प्रधानमंत्री मोदी जी ने देश में पहली बार संपूर्ण सेचुरेशन का कांसेप्ट दिया। हर घर में शौचालय, हर जरूरतमंद माता-बहन को गैस कनेक्शन, हर घर में नल से जल जैसी योजनाएं संपूर्ण सेचुरेशन की ही उदाहरण हैं। संपूर्ण सेचुरेशन को हासिल करने के लिए ही मोदी सरकार ने प्रदेश के 80 लाख घरों में शौचालय बनाए हैं, तो 1.2 करोड़ प्रधानमंत्री अन्न योजना के कॉर्ड बनाए हैं। 10.87 लाख गैस सिलेंडर बांटे गए हैं। 42 लाख प्रधानमंत्री आवास बनाए गए हैं। 4000 कि.मी. नए राजमार्ग बनाए जा रहे हैं। रीवा, ग्वालियर और जबलपुर एयरपोर्ट का विकास हो रहा है, 35 रेल्वे स्टेशन विश्वस्तरीय बनाए जा रहे हैं। प्रदेश की विकास दर 16 प्रतिशत हो गई है और सिंचाई क्षमता 47 लाख हेक्टेयर पर पहुंच गई है। प्रदेश की 46 लाख बेटियां लाडली लक्ष्मी बन चुकी हैं। प्रदेश में 24 मेडिकल कॉलेज खोले जा रहे हैं और मेडिकल, इंजीनियरिंग तथा पॉलीटेक्निक की पढ़ाई हिंदी में शुरू कराई जा रही है। भोपाल और इंदौर शहरों में मेट्रो रेल का काम तेजी से चल रहा है। ओंकारेश्वर में 2400 करोड़ की लागत से आदि शंकराचार्य अद्वैत स्मारक बनाया जा रहा है, तो उज्जैन में महाकाल महालोक बनकर तैयार हो चुका है। श्री शाह ने कहा कि मध्यप्रदेश सरकार ने आदिवासियों को उनके अधिकार देने के लिए पेसा एक्ट लागू किया है तथा जनजातीय इतिहास को संजोने के लिए संग्रहालय बनाए जा रहे हैं। जनजातीय क्रांतिवीरों और जननायकों की स्मृतियों को संजोने के लिए रेलवे स्टेशनों के नाम उनके नाम पर रखे जा रहे हैं।

    श्री शाह ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी ने जवाबदेही की एक नई परंपरा शुरू की है, जिसके अंतर्गत हर सरकार अपने कार्यकाल में किए गए कामों का लेखा-जोखा प्रस्तुत करती है। हमने अपना रिपोर्ट कॉर्ड प्रस्तुत किया है और गलत आरोप लगाकर जनता को गुमराह करने वाली कांग्रेस को इस रिपोर्ट कॉर्ड का जवाब देना चाहिए। कांग्रेस ने प्रदेश की जनता के साथ जो अन्याय किया है, उसका जवाब देना चाहिए और अगर उसमें हिम्मत है, तो अपने 53 सालों के शासन का रिपोर्ट कॉर्ड प्रस्तुत करे। श्री शाह ने कहा कि मध्यप्रदेश में 15 महीनों के लिए कमलनाथ की सरकार बनी थी, जिन्हें करप्शन नाथ कहा जाता है। बंटाढार और कमलनाथ की उस सरकार ने भाजपा सरकार द्वारा शुरू की गई गरीब कल्याण की सारी योजनाएं बंद कर दीं थी और गरीब कल्याण अभियान को अपाहिज बना दिया था। उस सरकार ने सहरिया, भारिया और बैगा बहनों को मिलने वाला पोषण अनुदान बंद कर दिया था। श्री शाह ने कहा कि इस्तीफा देते समय कोई मुख्यमंत्री काम नहीं करता, लेकिन करप्शननाथ ने अपने इस्तीफे से 15 मिनट पहले मोबाइल घोटाले से संबंधित दस्तावेजों पर साइन किए। करप्शन नाथ ने 350 करोड़ का मोजर बियर घोटाला किया और 2400 करोड़ के अगस्ता वेस्टलैंड घोटाले से उनका संबंध है। करप्शन नाथ ने 600 करोड़ का इफ्को घोटाला, कर्जमाफी में 25000 करोड़ का हेरफेर किया। उस सरकार ने 800 ट्रांसफर करके नया तबादला उद्योग शुरू कर दिया था। श्री शाह ने कहा कि कमलनाथ को अपनी सरकार के डेढ़ सालों में हुए घोटालों का जवाब देना चाहिए।
    जनता तय करे, वह घोटालों के साथ है या विकास के साथ
    श्री शाह ने कहा कि मोदी जी ने देश के प्रधानमंत्री बनते ही भारत को विकसित राष्ट्र बनाने का बीड़ा उठाया। देश को दुनिया की तीसरी अर्थव्यवस्था, 5 ट्रिलियन इकॉनॉमी और आत्मनिर्भर बनाने का संकल्प लिया। आज भारत क्लाइमेट चेंज और आतंकवाद पर जीरो टालरेंस के मामले में दुनिया का नेतृत्व कर रहा है। जी-20 समिट सारी दुनिया में भारत की संस्कृति, विकास और उसके भविष्य के प्रसार का माध्यम बन रही है। पहली बार जी-20 समिट देश के सभी राज्यों के 59 स्थानों पर हो रही है। 14 देशों ने प्रधानमंत्री मोदी जी को अपना सर्वोच्च सम्मान दिया है। भारत आज डिजिटल लेनदेन, एलईडी वल्ब के वितरण, स्वच्छता, टीकाकरण तथा दाल, दलहन, दूध,जूट और रेल इंजन के उत्पादन में दुनिया में पहले स्थान पर है। मोबाइल, सीमेंट, स्टील, कॉटन, चाय के उत्पादन में दूसरे स्थान पर तथा स्टार्टअप और वाहन उद्योग में तीसरे स्थान पर है। दूसरी तरफ कांग्रेस अपने शासन में सिर्फ घोटाले करती रही। बोफोर्स घोटाला, टूजी घोटाला, सत्यम घोटाला, कॉमनवेल्थ घोटाला, कोयला घोटाला, चॉपर घोटाला, टेट्रा ट्रक घोटाला, वोट के बदले नोट घोटाला, आदर्श हाउसिंग घोटाला, डीएलएफ घोटाला, नेशनल हेराल्ड घोटाला, खाद्य सुरक्षा बिल घोटाला, शेयर बाजार घोटाला, आईपीएल घोटाला, एलआईसी हाउसिंग घोटाला, मधु कोड़ा कांड, राफेल खरीदी घोटाला, सबमरीन घोटाला, मंदिर कलेक्शन घोटाला और वॉक्स वैगन इक्विटी घोटाले जैसे 24 से अधिक घोटालों में लिप्त रही है। श्री शाह ने कहा कि अब यह मध्यप्रदेश की जनता को तय करना है कि वह विकास के साथ है या घोटालों के साथ। अगर वो विकास के साथ है, तो उसे 2023 के विधानसभा चुनाव और 2024 के लोकसभा चुनाव में भाजपा को अपना समर्थन देना है।

    केंद्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह का स्वागत करते हुए मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान ने कहा कि 2003 से पहले मध्यप्रदेश बीमारू राज्यों में शामिल था और यहां डकैतों, नक्सलियों का आतंक था। हमारी सरकार ने प्रदेश को बीमारू राज्य के ठप्पे से मुक्ति दिलाई। वर्ष 2002-03 में प्रदेश की अर्थव्यवस्था का आकार 71000 करोड़ रुपये हुआ करता था, वह अब 13.5 लाख करोड़ के पार हो गया है। देश की जीडीपी में पहले प्रदेश का योगदान सिर्फ 3.6 प्रतिशत था, जो अब 4.8 प्रतिशत हो गया है। हमने प्रदेश में सड़कों का जाल बिछाया है और सिंचाई के क्षेत्र में तो चमत्कार हो गया है। श्री चौहान ने कहा कि 2014 में श्री नरेंद्र मोदी जी के प्रधानमंत्री बनने के बाद प्रदेश की प्रगति को नई दिशा और गति मिली है। डबल इंजन वाली सरकार ने विकास के नए प्रतिमान गढ़ दिए हैं। पहले जहां एक पंचायत को गिनती के ही आवास मिला करते थे, वहीं अब हर पंचायत औसत 122-23 प्रधानमंत्री आवास मिल रहे हैं। महिला सशक्तीकरण के क्षेत्र में प्रदेश में अभूतपूर्व काम हुआ है। प्रदेश की विकास दर 16 प्रतिशत से ऊपर है, लेकिन हम इससे संतुष्ट नहीं हैं। श्री चौहान ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने देश को 2047 तक देश को दुनिया को सबसे समृद्ध, गौरवशाली, वैभवशाली और शक्तिशाली राष्ट्र बनाने तथा देश को पांच ट्रिलियन इकॉनॉमी बनाने का संकल्प लिया है। इसे पूरा करने में मध्यप्रदेश कोई कसर नहीं छोड़ेगा और हमने भी इसमें भागीदारी करते हुए प्रदेश को 550 बिलियन की इकॉनॉमी बनाने का लक्ष्य तय किया है।

    कार्यक्रम को संबोधित करते हुए भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष व सांसद विष्णुदत्त शर्मा ने कहा कि प्रदेश के लिए यह गर्व की बात है कि भाजपा सरकार के 20 सालों के गरीब कल्याण के रिपोर्ट कॉर्ड का लोकार्पण केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह के हाथों किया जा रहा है, मैं प्रदेश की जनता की ओर से तथा पार्टी कार्यकर्ताओं की ओर से उनका स्वागत करता हूं, आभार जताता हूं। उन्होंने कहा कि भाजपा की डबल इंजन वाली सरकार देश और प्रदेश को लगातार विकास के रास्ते पर आगे बढ़ा रही है और यह हमारा सौभाग्य है कि हमारे पास ऐसी सशक्त सरकार है, जो अपने निर्णयों को लागू करने में सक्षम है।

  • ठगी पकड़ी जाए तो बंदूक दिखाकर धमकाता है बूटकॉम का गुप्ता

    ठगी पकड़ी जाए तो बंदूक दिखाकर धमकाता है बूटकॉम का गुप्ता


    भोपाल,18 अगस्त(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)। कंप्यूटर ग्राहक से ठगी की पोल जब खुल जाए और व्यापारी अपनी गलती मानने की बजाए बंदूक दिखाने लगे तो ये कारोबार कानून की निगाह में अड़ीबाजी माना जाता है। सामान्य ग्राहक इसे नहीं जानते और वे आमतौर पर पुलिस में शिकायत नहीं करते लेकिन बूटकाम सिस्टम्स का ठग व्यापारी प्रकाश चंद गुप्ता इसे अपना कारोबारी हुनर मानने लगा है। उसने खुद पर फर्जी हमला करवाकर बंदूक का लाईसेंस बनवा लिया । अब वह नित नए पैंतरे आजमाकर मालदार कंप्यूटर ग्राहकों को गन दिखाकर धमकाता है। । शूटिंग अकादमी से जुड़कर इसने कई पुलिस अफसरों को भी अपने सूदखोरी के जाल में फांस लिया है। वे समय समय पर इसके चौकीदार बन जाते हैं।


    सूत्रों के अनुसार यूपी के लालगंज का रहने वाला प्रकाश चंद गुप्ता वल्द चंद्राभान गुप्ता एमपीनगर पुलिस थाने से महज चार सौ मीटर दूर ठगी का ये अड्डा चला रहा है ।कोई ग्राहक यदि उसकी ठगी को समझ जाता है और अपना पैसा वापस मांगने की जिद पर अड़ जाता है तो वह अपने कर्मचारियों को तेज आवाज में बोलकर वहीं रखी बंदूके उठाकर बाजू में रख लेता है। पुलिस कहती है कि वह साक्ष्य के अभाव में लाचार है। कोई इस बदमाश के खिलाफ तथ्यों पर शिकायत करे तो वह उसे सजा करवा सकती है । पुलिस जिन साक्ष्यों को प्रकरणों में इस्तेमाल करती है उन्हें गुप्ता के अदालती एजेंट धराशायी कर देते हैं। इसके लिए गुप्ता का गिरोह फर्जी दस्तावेज और साक्ष्य तैयार करता है। इस गिरोह में नामी वकील, नोटरी, डॉक्टर,जज ,बैंक मैनेजर, पुलिस वाले और हैंडराईटिंग एक्सपर्ट भी शामिल हैं। ये ऐसे फर्जी साक्ष्य गढ़ते हैं जिन्हें देखकर खासे जज भी चकरा जाते हैं ,फिर वह प्रकरण भ्रष्ट जजों की अदालतों में ट्रांसफर करवा लेता है और रिश्वत देकर बरी हो जाता है।


    बताते हैं कि तीन सौ पंद्रह बोर की बंदूक का लाईसेंस बनवाने के लिए उसने खुद पर हमले की फर्जी वारदात गढ़ी थी। हमलावरों को पुलिस ने बाकायदा कोर्ट में भी पेश किया और अदालत ने उन्हें दोषी ठहराकर सजा भी सुना दी। इस प्रकरण की आड़ में दलालों ने उसे आनन फानन में लाईसेंस मुहैया करवा दिया। ये कहानी उसके ठगी के पैटर्न का खुलासा करता है। जिस प्रकरण क्रमांक 108 2019 में पंचम अपर सत्र न्यायाधीश विनय कुमार भारद्वाज ने 31 जनवरी 2023 को सजा सुनाई उसके सजायाफ्ता सफदर,इमरान, शाहिद और हनीफ आज हर्जाना मांग रहे हैं।उन्हें अपराध का प्रकरण दर्ज होने तक चुप रहने की सुपारी दी गई थी।उन्हें तब नहीं पता था कि वास्तव में सजा पड़ जाएगी।


    घटना 25 अक्टूबर 2018 की बताई गई है। प्रकाश गुप्ता ने शिकायत की थी कि हमलावरों ने उससे साढे छह लाख रुपए भरा ब्रीफकेस छीन लिया था जिसे पुलिस ने बाद में जब्त कर लिया । इस मामले में अदालत ने चारों अभियुक्तों को तीन तीन साल की जेल और दो दो हजार रुपए के जुर्माने से दंडित किया है। चारों लड़के नए थे और अदालत ने पूर्व रिकार्ड देखते हुए उन्हें छोटी सजा सुनाई।अभियुक्तों ने खुद को निर्दोष बताते हुए फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती दी है।


    गुप्ता ने तब एसपी से निवेदन किया था कि उसे जान का खतरा है, आत्मरक्षा के लिए हथियार का लाईसेंस दिया जाए। प्रशासनिक मशीनरी को इतनी आड़ काफी थी। उसे लाईसेंस भी मिल गया और उसने हथियार भी खरीद लिए। यही नहीं पुलिस विभाग के आला अफसरों से दोस्ती गांठकर वह फायरिंग अकादमी का सदस्य भी बन गया और वहां उसने अपना साहूकारी का जाल फैलाकर कई आला पुलिस अफसरों को भी मोटे ब्याज का लालच दिखाकर अपने जाल में फांस लिया। इनमें से कई अफसरों के विरुद्ध उसने झूठे साक्ष्य बना लिये हैं और वे भी अपनी रकम वापस मांगने के लिए सामने आने तैयार नहीं हैं।


    ब्लैकमेलिंग की वारदातों को अंजाम देने के लिए उसने कई प्रतिष्ठित समाचार पत्रों,वेवसाईटों और चैनलों की सदस्यता ले रखी है जिनसे वह भारत ही नहीं चीन, दुबई, थाईलैंड, ब्रिटेन और अमेरिका के सप्लायर जब शिकायत करते हैं तो वहां के अफसरों को धमकाने के लिए वह मध्यप्रदेश और उत्तरप्रदेश पुलिस के अधिकारियों का सहारा लेता है। इसके लिए वह उन अधिकारियों को ब्याज के नाम पर रिश्वत पहुंचा देता है।

  • संसाधन हड़पने वाले खलनायक को कौन कुचलेगा

    संसाधन हड़पने वाले खलनायक को कौन कुचलेगा


    प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने स्वाधीनता दिवस पर लाल किले की प्राचीर से देश को जगाने का जो प्रयास किया है आज पूरा देश उस पर सकारात्मक प्रतिक्रिया दे रहा है। प्रधानमंत्री ने आज कोई कलात्मक भाषण की झांकी न देकर जिन तथ्यों और योजनाओं से देश को अवगत कराया है वह भविष्य के हिंदुस्तान की एक रूपरेखा प्रस्तुत करते हैं। प्रधानमंत्री ने भ्रष्टाचार, परिवारवाद और तुष्टिकरण जैसी तीन बुराईयों को समाप्त करने का संकल्प खुलेआम दुहराया और कहा कि मेरा वादा है कि मैं जीवन भर इनसे लड़ता रहूंगा। प्रधानमंत्री ने कहा कि अगले साल भी मैं लाल किले पर आऊंगा और देश के सामर्थ्य और सफलता का गौरवगान करूंगा। उन्हें देश के प्रमुख विपक्षी दल की विचारधारा पर प्रहार करते हुए कहा कि आजादी के अमृत महोत्सव तक वे केवल बातें करते रहे जबकि हमने सरकार में आकर देश के संकल्पों को साकार कर दिखाया है। दरअसल कांग्रेस जिसे देश की विचारधारा कहती रही है वह एक परिवार के चंद सहयोगी परिवारों को पुष्ट करने का षड़यंत्र रहा है। देश के करोड़ों हाथों को काम देना कोई उपकार की बात नहीं बल्कि मानव बल का सदुपयोग करके उत्पादकता बढ़ाना है। जबकि सर्वाधिक सत्ता संभालने वाली कांग्रेस इसे देश पर उपकार गिनाते नहीं थकती।राजाओं, मुगलों, अंग्रेजों, जमींदारों, साहूकारों, जमाखोरों, मिलावटखोरों से लड़ने का काम देश की आम जनता आगे बढ़कर संभालती रही है लेकिन कांग्रेसी इसे अपना किया अहसान बताने में ही लगे रहते हैं। किसी भी कांग्रेसी से पूछिए वह यही दुहराता है हमने देश को आजादी दिलाई। जबकि हकीकत ये है कि करोड़ों हिंदुस्तानियों ने बलिदान देकर अंग्रेजों को देश से भागने पर विवश किया था। गांधी नेहरू की कांग्रेस ने तो अंग्रेजों को निकल भागने के लिए सुरक्षित पैसेज उपलब्ध कराया और उसका इनाम बटोरा। हिंदुओं और मुसलमानों के बीच वैमनस्य के बीज बोकर पाकिस्तान बंटवारा स्वीकार करना इसी गहरे षड़यंत्र का हिस्सा था। आजादी के बाद से लेकर जब तक कांग्रेस सत्ता में रही वह केवल फूट डालो राज करो की नीति पर ही अमल करती रही। आज भी देश में कांग्रेस को वोट देने वाला बड़ा तबका इसी तरह वैमनस्य की खेती करके अपना उल्लू सीधा करता है।केवल डेढ़ दो प्रतिशत लोगों को मंहगी सरकारी नौकरियां देकर शेष हिंदुस्तान के विरुद्ध षड़यंत्र की कलई तब खुल रही है जब भारतीय जनता पार्टी ने अंत्योदय के विचार पर अमल करके हर नागरिक को संसाधनों का बंटवारा करने की नीति पर अमल शुरु किया है। दरअसल हमेशा से यही समस्या रही है कि समाज के संसाधनों पर कुछ लोग कब्जा जमा लेते थे। कभी राजा,कभी मुगल, कभी अंग्रेज, कभी जमींदार,साहूकार और आज उन पर कब्जा बेतहाशा बढ़ते सरकारी तंत्र ने जमा लिया है। शोषण का ये कहर इतना अधिक बढ़ गया है कि लोग त्राहिमाम कर उठे हैं। जनता विद्रोह पर उतारू है। वह ये नहीं समझ पा रही है कि उसका असली खलनायक कौन है। कांग्रेस को अपना तारणहार मानने वाला तबका भाजपा को खलनायक बताने में जुटा है । भाजपा पर ये आरोप इसलिए चिपक रहा है क्योंकि लगभग दो दशक तक शासन करने के बाद भी भाजपा जनता के कंधे पर रखा ये जुआ नहीं उतार सकी है। सरकारी नौकरियों का वेतन लगातार बढ़ता जा रहा है और अमीरी गरीबी की खाई भी बढ़ती जा रही है।भाजपा ने अपने समर्थकों को सरकारी नौकरियों में भेज दिया तो शोषण का ये आंकड़ा और बढ़ गया। दिन भर में दो सौ रुपए की मजदूरी पाने वाला श्रमिक दाल,चावल,सब्जी उसी भाव पर खरीद रहा है जिस भाव पर ढाई तीन लाख रुपए मासिक वेतन पाने वाला अफसर खरीद रहा है। उपभोक्ता मूल्य सूचकांक पच्चीस लाख रुपए का पैकेज पाने वाले अमीर तबके से तय हो रहा है जबकि गरीब वर्ग बेवजह उसमें पिसा जा रहा है। मोदी जी जब मेरे प्यारे परिवारजन का संबोधन देते हैं को उन्हें और उनकी भाजपा को सोचना होगा कि वह अपने परिवारजनों के लिए मुखिया कैसे साबित हों। कहा गया है मुखिया मुख सो चाहिए, खान पान को एक, पाले पोसे सकल अंग तुलसी सहित विवेक । यदि मोदी जी और उनकी भाजपा कांग्रेस की छाया से बाहर नहीं निकल पाएगी और देश के संसाधनों का न्यायोचित बंटवारा नहीं कर पाएगी तो वह लाख बार कांग्रेस के परिवार वाद को गाली देती रहे जनता की समस्याओं का समाधान नहीं हो पाएगा। चंद परिवारों को जरूरत से ज्यादा संसाधन बांटने से उपभोक्ता सामग्री बनाने बेचने वाला कार्पोरेट सेक्टर तो मजबूत होता जा रहा है लेकिन वह सरकार और आम जनता दोनों का धन उलीचता जा रहा है। जनता इससे परेशान है और इससे अमीरी गरीबी के बीच खाई बढ़ती जा रही है। भाजपा ने हितग्राही मूलक योजनाओं से संसाधनों का बंटवारा आम जनता तक पहुंचाने की पहल तो की है लेकिन इसमें भी इतनी सारी शर्तें थोप दी गईं हैं कि वह संसाधन हर व्यक्ति को लाभ नहीं पहुंचा पा रहे हैं। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के सामने खुली चुनौती है कि वे हर नागरिक तक देश के संसाधन पहुंचाना सुनिश्चित करें। मध्यप्रदेश में शिवराज सिंह चौहान की भाजपा भी चीन्ह चीन्ह के रेवड़ी बांटने की शैली पर कार्य कर रही है। जाहिर है कि इससे जन आक्रोश बढ़ेगा और आने वाले विधानसभा चुनावों और लोकसभा चुनावों में भाजपा को इसकी मंहगी कीमत चुकानी पड़ेगी। संसाधन तो सीमित हैं। कर्ज लेकर बांटने की सीमा भी निश्चित है। जाहिर है कि सरकार को निष्पक्ष होकर शल्यक्रिया करनी होगी। संसाधन रिसकर आम जनता तक पहुंचाने वाला कांग्रेसी मॉडल उसे न केवल छोड़ना होगा बल्कि अंत्योदय की विचारधारा पर अमल की नाटकबाजी छोड़कर सख्ती से अमल शुरु करना होगा। अनुत्पादक सरकारी तंत्र को पालते रहने से वह भले ही चुनावी हेराफेरी करने में थोड़ी हद तक सफल हो जाए लेकिन जन आक्रोश का सैलाब उसे न घर का रहने देगा न घाट का ।

  • हजार वर्षों का स्वर्णकाल लिख रहा हिंदुस्तान:प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी

    हजार वर्षों का स्वर्णकाल लिख रहा हिंदुस्तान:प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी

    मेरे प्रिय 140 करोड़ परिवारजन,

    दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र और अब बहुत लोगों का अभिप्राय है ये जनसंख्या की दृष्टि से भी हम विश्व में नंबर एक पर हैं। इतना बड़ा विशाल देश, 140 करोड़ देश, ये मेरे भाई-बहन, मेरे परिवारजन आज आजादी का पर्व मना रहे हैं। मैं देश के कोटि-कोटि जनों को, देश और दुनिया में भारत को प्यार करने वाले, भारत का सम्मान करने वाले, भारत का गौरव करने वाले कोटि-कोटि जनों को आजादी के इस महान पवित्र पर्व की अनेक-अनेक शुभकामनाएं देता हूं।

    मेरे प्यारे परिवारजन,

    पूज्य बापू के नेतृत्व में असहयोग का आंदोलन, सत्याग्रह की मूवमेंट और भगत सिंह, सुखदेव, राजगुरू जैसे अनगिनत वीरों का बलिदान, उस पीढ़ी में शायद ही कोई व्यक्ति होगा जिसने देश की आजादी में अपना योगदान न दिया हो। मैं आज देश की आजादी की जंग में जिन-जिन ने योगदान दिया है, बलिदान दिए हैं, त्याग किया है, तपस्या की है, उन सबको आदरपूर्वक नमन करता हूं, उनका अभिनंदन करता हूं। आज 15 अगस्त महान क्रांतिकारी और अध्यात्म जीवन के रूचि तुल्य प्रणेता श्री अरविंदों की 150वीं जयंती पूर्ण हो रही है। ये वर्ष स्वामी दयानंद सरस्वती के 150वीं जयंती का वर्ष है। ये वर्ष रानी दुर्गावती के 500वीं जन्मशती का बहुत ही पवित्र अवसर है जो पूरा देश बड़े धूमधाम से मनाने वाला है। ये वर्ष मीराबाई भक्ति योग की सिरमौर मीराबाई के 525 वर्ष का भी ये पावन पर्व है। इस बार जब हम 26 जनवरी मनाएंगे वो हमारे गणतंत्र दिवस की 75वीं वर्षगांठ होगी। अनेक प्रकार से अनेक अवसर, अनेक संभावनाएं राष्ट्र निर्माण में जुटे रहने के लिए पल-पल नई प्रेरणा, पल-पल नई चेतना, पल-पल सपने, पल-पल संकल्प, शायद इससे बड़ा कोई अवसर नहीं हो सकता।
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    मेरे प्यारे परिवारजन,

    इस बार प्राकृतिक आपदा ने देश के अनेक हिस्सों में अकल्पनीय संकट पैदा किए। जिन परिवारों ने इस संकट में सहन किया है मैं उन सभी परिवाजनों के प्रति अपनी संवेदना प्रकट करता हूं और राज्य-केंद्र सरकार मिल करके उन सभी संकटों से जल्दी‍ से मुक्त हो करके फिर तेज गति से आगे बढ़ेंगे ये विश्वास दिलाता हूं।

    मेरे प्यारे परिवारजनों,

    पिछले कुछ सप्ताह नार्थ-ईस्ट में विशेषकर मणिपुर में और हिन्दुस्तान के भी अन्य कुछ भागो में, लेकिन विशेषकर मणिपुर में जो हिंसा का दौर चला, कई लोगों को अपना जीवन खोना पड़ा, मां-बेटियों के सम्मान के साथ खिलवाड़ हुआ, लेकिन कुछ दिनों से लगातार शांति की खबरें आ रही हैं, देश मणिपुर के लोगों के साथ है। देश मणिपुर के लोगों ने पिछले कुछ दिनों से जो शांति बनाई रखी है, उस शांति के पर्व को आगे बढ़ाए और शांति से ही समाधान का रास्ता निकलेगा। और राज्य और केंद्र सरकार मिलकर के उन समस्याओं के समाधान के लिए भरपूर प्रयास कर रही है, करती रहेगी।

    मेरे प्यारे परिवारजनों,

    जब हम इतिहास की तरफ नजर करते हैं तो इतिहास में कुछ पल ऐसे आते हैं जो अपनी अमिट छाप छोडकर के जाते है। और उसका प्रभाव सदियों तक रहता है और कभी-कभी शुरूआत में वो बहुत छोटा लगता है, छोटी सी घटना लगती है, लेकिन वो अनेक समस्याओं की जड़ बन जाती है। हमें याद है 1000-1200 साल पहले इस देश पर आक्रमण हुआ। एक छोटे से राज्य के छोटे से राजा का पराजय हुआ। लेकिन तब पता तक नहीं था कि एक घटना भारत को हजार साल की गुलामी में फंसा देगी। और हम गुलामी में जकड़ते गए, जकड़ते गए, जकड़ते गए, जो आया लूटता गया, जो जिसका मन चाहा, हम पर आकर सवार हो गया। कैसा विपरीत काल रहा होगा, वो हजार साल का।
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    मेरे प्यारे परिवारजनों,

    घटना छोटी क्यों न हो, लेकिन हजार साल तक प्रभाव छोड़ती रही है। लेकिन मैं आज इस बात का जिक्र इसलिए करना चाहता हूं कि भारत के वीरों ने इस कालखण्ड में कोई भू-भाग ऐसा नहीं था, कोई समय ऐसा नहीं था, जब उन्होंने देश की आजादी की लौ को जलता ना रखा हो, बलिदान की परंपरा न बनाई हो। मां भारती बेड़ियों से मुक्त होने के लिए उठ खड़ी हुई थी, जंजीरों को झकझोर रही थी और देश की नारी शक्ति, देश की युवा शक्ति, देश के किसान, देश के गांव के लोग, मजदूर, कोई हिन्दुस्तानी ऐसा नहीं था, जो आजादी के सपने को लेकर के जीता न हो। आजादी को पाने के लिए मर-मिटने के लिए तैयार होने वालों की एक बड़ी फौज तैयार हो गई थी। जेलों में जवानी खपाने वाले अनेक महापुरूष हमारी देश की आजादी को, गुलामी के बेड़ियों को तोड़ने के लिए लगे हुए थे।

    मेरे प्यारे प्रिय परिवारजनों,

    जनचेतना का वो व्यापक रूप, त्याग और तपस्या का वो व्यापक रूप जन-जन के अंदर एक नए विश्वास जगाने वाला वो पल, आखिकार 1947 में देश आजाद हुआ, हजार साल की गुलामी में संजोये हुए सपने देशवासियों ने पूरे करते हुए देखे।

    साथियों,

    मैं हजार साल पहले की बात इसलिए कह रहा हूं, मैं देख रहा हूं फिर एक बार देश के सामने एक मौका आया है, हम ऐसे कालखण्ड में जी रहे हैं, ऐसे कालखण्ड में हमने प्रवेश किया है और यह हमारा सौभाग्य है कि भारत के ऐसे अमृतकाल में, यह अमृतकाल का पहला वर्ष है या तो हम जवानी में जी रहे हैं या हम मां भारती की गोद में जन्म ले चुके हैं। और ये कालखण्ड मेरे शब्द लिखकर के रखिए, मेरे प्यारे परिवारजनों, इस कालखण्ड में जो हम करेंगे, जो कदम उठाऐंगे, जितना त्याग करेंगे, तपस्या करेंगे। सर्वजन हिताय, सर्वजन सुखाय, एक के बाद एक फैसले लेंगे, आने वाले एक हजार साल का देश का स्‍वर्णिम इतिहास उससे अंकुरित होने वाला है। इस कालखंड में होने वाली घटनाएं आगामी एक हजार साल के लिए इसका प्रभाव पैदा करने वाली हैं।
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    गुलामी की मानसिकता से बाहर निकला हुआ देश पंचप्राण को समर्पित हो, एक नए आत्‍मविश्‍वास के साथ आज आगे बढ़ रहा है। नए संकल्‍पों को सिद्ध करने के लिए वो जी-जान से जुड़ रहा है। मेरी भारत माता जो कभी ऊर्जा का सामर्थ्‍य था, लेकिन राख के ढेर में दबी पड़ी थी। वो भारत माँ 140 करोड़ देशवासियों के पुरुषार्थ से, उनकी चेतना से, उनकी ऊर्जा से, फिर एक बार जागृत हो चुकी है। मां भारती जागृत हो चुकी है और मैं साफ देख रहा हूँ दोस्‍तों, यही कालखंड है, पिछले 9-10 साल हमने अनुभव किया है। विश्‍व भर में भारत की चेतना के प्रति, भारत के सामर्थ्‍य के प्रति एक नया आकर्षण, नया विश्‍वास, नई आशा पैदा हुई है और ये प्रकाश पुंज जो भारत से उठा है वो विश्‍व को उसमें अपने लिए ज्‍योति नजर आ रही है। विश्‍व को एक नया विश्‍वास पैदा हो रहा है। हमारा सौभाग्‍य है कुछ ऐसी चीजें हमारे पास हैं जो हमारे पूर्वजों ने हमें विरासत में दी है और वर्तमान कालखंड ने गढ़ी है। आज हमारे पास डेमोग्राफी है, आज हमारे पास डेमोक्रेसी है, आज हमारे पास डाइवर्सिटी है। डेमोग्राफी, डेमोक्रेसी और डाइवर्सिटी की ये त्रिवेणी भारत के हर सपने को साकार करने का सामर्थ्‍य रखती है। आज पूरे विश्‍व में वहां देशों की उम्र ढल रही है, ढलाव पर है तो भारत यौवन की तरफ ऊर्जावान हो करके बढ़ रहा है। कितने बड़े गौरव का कालखंड है कि आज 30 साल की कम आयु की जनसंख्‍या दुनिया में सर्वाधिक कहीं है तो ये मेरे भारत मां की गोद में है। ये मेरे देश में है और 30 साल से कम उम्र के नौजवान हों, मेरे देश के पास हो, कोटि-कोटि भुजाएं हों, कोटि-कोटि मस्‍तिष्‍क हों, कोटि-कोटि सपने, कोटि-कोटि संकल्‍प हों तो भाईयों और बहनों, मेरे प्रिय परिवारजनों, हम इच्‍छित परिणाम प्राप्‍त करके रह सकते हैं।

    मेरे प्‍यारे परिवारजनों,

    देश का भाग्‍य ऐसी घटनाएं बदल देती है। ये सामर्थ्‍य देश के भाग्‍य को बदल देता है। भारत 1 हजार साल की गुलामी और आने वाले 1 हजार साल के भव्‍य भारत के बीच में पड़ाव पर हम खड़े हैं। एक ऐसी संधि पर खड़े हैं और इसलिए अब हमें न रुकना है, न दुविधा में जीना है।
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    मेरे प्‍यारे परिवारजनों,

    हमें खोई हुई उस विरासत का गर्व करते हुए, खोई हुई समृद्धि को प्राप्‍त करते हुए हमें फिर एक बार और ये बात मान कर चलें, हम जो भी करेंगे, हम जो भी कदम उठाएंगे, हम जो भी फैसला लेंगे वो अगले 1 हजार साल तक अपनी दिशा निर्धारित करने वाला है। भारत के भाग्‍य को लिखने वाला है, मैं आज मेरे देश के नौजवानों को, मेरे देश की बेटे-बेटियों को ये जरूर कहना चाहूँगा, जो सौभाग्‍य आज मेरे युवाओं को मिला है, ऐसा सौभाग्‍य, शायद ही किसी को नसीब होता है, जो आपको नसीब हुआ है।

    और इसलिए हमें ये गंवाना नहीं है। युवा शक्ति में मेरा भरोसा है, युवा शक्ति में सामर्थ्‍य है और हमारी नीतियां और हमारी रीतियां भी उस युवा सामर्थ्‍य को और बल देने के लिए है।

    आज मेरे युवाओं ने दुनिया के पहले तीन स्टार्टअप इकोनॉमी सिस्‍टम में भारत को स्‍थान दिला दिया है। विश्‍व के युवाओं को अचम्‍भा हो रहा है। भारत के इस सामर्थ्‍य को लेकर के, भारत की इस ताकत को देखकर के। आज दुनिया टेक्‍नोलॉजी ड्रिवेन है और आने वाला युग टेक्‍नोलॉजी से प्रभावित रहने वाला है और तब टेक्‍नोलॉजी में भारत की जो टेलेंट है, उसकी एक नई भूमिका रहने वाली है।

    साथियों,

    मैं पिछले दिनों जी-20 समिट में बाली गया था और बाली में दुनिया के समृद्ध से समृद्ध देश, दुनिया के विकसित देश भी, उनके मुखिया, मुझे भारत की डिजिटल इंडिया की सफलता के लिए, उसकी बारिकियों को जानने के लिए इच्‍छुक थे। हर कोई इसका सवाल पूछता था और जब मैं उनको कहता था कि भारत ने जो कमाल किया है ना वो दिल्‍ली, मुंबई, चेन्नई तक सीमित नहीं है, भारत जो कमाल कर रहा है, मेरे टियर-2, टियर-3 सिटी के युवा भी आज मेरे देश का भाग्‍य गढ़ रहे हैं। छोटे-छोटे स्‍थान के मेरे नौजवान, और मैं आज बड़े विश्‍वास से कहता हूं कि देश का ये जो सामर्थ्‍य नया नजर आ रहा है, और इसलिए मैं कहता हूं हमारे छोटे शहर आकार और आबादी में छोटे हो सकते हैं। ये हमारे छोटे-छोटे शहर, हमारे कस्‍बे आकार और आबादी में छोटे हो सकते हैं, लेकिन आशा और आकांक्षा, प्रयास और प्रभाव वो किसी से कम नहीं है, वो सामर्थ्‍य उनके अंदर है। नए एप, नए सोल्‍यूशन, टेक्‍नोलॉजी डिवाइस। अब खेलों की दुनिया देखिए, कौन बच्‍चे हैं, झुग्‍गी झोंपड़ी से निकले हुए बच्चे आज खेलों की दुनिया में पराक्रम दिखा रहे हैं। छोटे-छोटे गांव, छोटे-छोटे कस्‍बे के नौजवान, हमारे बेटे-बेटियां आज कमाल दिखा रहे हैं। अब देखिए, मेरे देश के सौ स्‍कूल ऐसे हैं, जहां के बच्‍चे सेटेलाइट बना करके सेटेलाइट छोड़ने की तैयारियां कर रहे हैं। आज हजारों टिंकरिंग लैब नये वैज्ञानिकों का गर्भाधान कर रही है। आज हजारों टिंकरिंग लैब लाखों बच्‍चों को साइंस और टेक्‍नोलॉजी के राह पर आगे बढ़ने के लिए प्रेरणा दे रही है।

    मैं मेरे देश के नौजवानों को कहना चाहता हूं कि अवसरों की कमी नहीं है, आप जितने अवसर चाहेंगे, ये देश आसमान से भी ज्‍यादा अवसर आपको देने का सामर्थ्‍य रखता है।

    मैं आज लालकिले की प्राचीर से मेरे देश की माताओं, बहनों, मेरे देश की बेटियों का ह्दय से अभिनंदन करता चाहता हूं। देश आज जहां पहुंचा है, उसमें विशेष शक्ति जुड़ रही है, मेरी माताओं, बहनों के सामर्थ्‍य की। आज देश प्रगति की राह पर चल पड़ा है तो मैं मेरे किसान भाई-बहनों का भी अभिनंदन करना चाहता हूं ये आप ही का पुरुषार्थ है, ये आप ही का परिश्रम है कि देश आज कृषि क्षेत्र में आगे बढ़ रहा है। मैं मेरे देश के मजदूरों का, मेरे श्रमिकों का, मेरे प्रिय परिवारजन ऐसे कोटि-कोटि समूहों को आज मैं नमन करता हूं। उनका अभिनंदन कर रहा हूं। देश आज जो आधुनिकता की ओर बढ़ रहा है, विश्‍व की तुलना करने वाले सामर्थ्‍य के साथ नजर आ रहा है, उसके पीछे मेरे देश के मजदूरों का, मेरे देश के श्रमिकों का बहुत बड़ा योगदान है, आज समय कहता है कि लालकिले की प्राचीर से मैं उनका अभिनंदन करूं। उनका अभिवादन करूं और यह मेरे परिवारजन, 140 करोड़ देशवासी मेरे इन श्रमिकों, रेहड़ी-पटरी वालों का, फूल-सब्‍जी बेचने वालों का हम सम्‍मान करते हैं। मेरे देश को आगे बढ़ाने में, मेरे देश को प्रगति की नई ऊंचाई पर ले जाने में प्रोफेशनल्स की बहुत बड़ी भूमिका बढ़ती रही है। चाहे साइंटिस्‍ट हो, चाहे इंजीनियर्स हो, डॉक्‍टर्स हो, नर्सेस हो, शिक्षक हो, आचार्य हो, युनिवर्सिटीस हो, गुरूकुल हो हर कोई मां भारती का भविष्‍य उज्ज्वल बनाने के लिए अपनी पूरी ताकत से लगा हुआ है।

    मेरे प्‍यारे परिवारजनों,

    राष्‍ट्रीय चेतना वो एक ऐसा शब्‍द है जो हमें चिंताओं से मुक्‍त कर रहा है। और आज वो राष्‍ट्रीय चेतना यह सिद्ध कर रही है कि भारत का सबसे बड़ा सामर्थ्‍य बना है भरोसा, भारत का सबसे बड़ा सामर्थ्‍य बना है विश्‍वास, जन-जन में हमारा विश्‍वास, जन-जन का सरकार पर विश्‍वास, जन-जन का देश के उज्ज्वल भविष्‍य पर विश्‍वास और विश्‍व का भी भारत के प्रति विश्‍वास। यह विश्‍वास हमारी नीतियों का है, हमारी रीति का है। भारत के उज्ज्वल भविष्‍य को जिस निर्धारित मजबूत कदमों से हम आगे बढ़ा रहे हैं उसका है।
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    भाईयों और बहनों,

    मेरे प्‍यारे परिवारजनों, यह बात निश्चित है कि भारत का सामर्थ्‍य और भारत की संभावनाएं विश्‍वास की नई बुलंदियों को पार करने वाली है और यह विश्‍वास की नई बुलंदियां नये सामर्थ्‍य को ले करके चलनी चाहिए। आज देश में जी-20 समिट की मेहमान नवाजी का भारत को अवसर मिला है। और पिछले एक साल से हिन्‍दुस्‍तान के हर कोने में जिस प्रकार से जी-20 के अनेक ऐसे आयोजन हुए हैं, अनेक कार्यक्रम हुए हैं, उसने देश के सामान्‍य मानवी के सामर्थ्‍य को विश्‍व को परिचित करा दिया है। भारत की विविधता का परिचय कराया है। भारत की डायवर्सिटी को दुनिया अचम्भे से देख रही है और उसके कारण भारत के करीब आकर्षण बढ़ा है। भारत को जानने की, समझने की इच्छा जगी है। उसी प्रकार से आप देखिए, एक्‍सपोर्ट, आज भारत का एक्‍सपोर्ट तेजी से बढ़ रहा है और मैं कहना चाहता हूं दुनिया के एक्सपर्टस इन सारे मानदंडों के आधार पर कह रहे हैं कि अब भारत रूकने वाला नहीं है। दुनिया की कोई भी रेटिंग एजेंसी होगी वो भारत का गौरव कर रही है। कोरोना काल के बाद दुनिया एक नये सिरे से सोचने लगी है। और मैं विश्‍वास से देख रहा हूं कि जिस प्रकार से द्वितीय महायुद्ध के बाद, द्वितीय विश्‍वयुद्ध के बाद दुनिया में एक नया वर्ल्ड ऑर्डर ने आकार लिया था। मैं साफ-साफ देख रहा हूं कि कोरोना के बाद एक नया विश्‍व ऑर्डर, एक नया ग्‍लोबल ऑर्डर, एक नया जियो पॉलिटिकल इक्‍वेशन यह बहुत तेजी से आगे बढ़ रहा है। जियो पॉलिटिकल इक्‍वेशन की सारी व्‍याख्‍याएं बदल रही हैं, परिभाषाएं बदल रही हैं। और मेरे प्‍यारे परिवाजनों, आप गौरव करेंगे बदलते हुए विश्‍व को शेप देने में आज मेरे 140 करोड़ देशवासियों आपका सामर्थ्‍य नजर आ रहा है। आप निर्णायक मोड़ पर खड़े हैं।

    और कोरोना काल में भारत ने जिस प्रकार से देश को आगे बढ़ाया हे, दुनिया ने हमारे सामर्थ्‍य को देखा है। जब दुनिया की supply chain तहस-नहस हो गई थी, बड़ी-बड़ी अर्थव्‍यवस्‍था पर दबाव था, उस समय भी हमने कहा था हमें विश्‍व का विकास देखना है, तो वो मानव केंद्रित होना चाहिए, मानवीय संवेदनाओं से भरा हुआ होना चाहिए, और तब जा करके समस्‍याओं का सही समाधान निकालेंगे और कोविड ने हमें सिखाया है या हमें मजबूर किया है, लेकिन मानवीय संवेदनाओं को छोड़ करके हम विश्‍व का कल्‍याण नहीं कर सकते।

    आज भारत ग्‍लोबल साउथ की आवाज बन रहा है। भारत की समृद्धि, विरासत आज दुनिया के लिए एक अवसर बन रही है। ग्‍लोबल इकोनॉमी, ग्‍लोबल supply chain में भारत की हिस्‍सेदारी, मैं पक्के विश्‍वास से कहता हूं, आज जो भारत में परिस्थिति पैदा हुई है, आज जो भारत ने कमाया है, वो दुनिया में स्थिरता की गारंटी ले करके आया है दोस्तों। अब न हमारे मन में, न 140 करोड़ मेरे परिवारजनों के मन में और न ही दुनिया के मन में कोई ifs हैं कोई buts हैं, विश्‍वास बन चुका है।

    मेरे प्‍यारे देशवासियों,

    अब गेंद हमारे पाले में है, हमें अवसर जाने नहीं देना चाहिए, हमें मौका छोड़ना नहीं चाहिए। भारत में मैं मेरे देशवासियों का इसलिए भी अभिनंदन करता हूं कि मेरे देशवासियों में एक नीर-क्षीर विवेक का सामर्थ्‍य है, समस्‍याओं की जड़ों को समझने का सामर्थ्‍य है और इसलिए 2014 में मेरे देशवासियों ने 30 साल के अनुभव के बाद तय किया कि देश को आगे ले जाना है तो स्थिर सरकार चाहिए, मजबूत सरकार चाहिए, पूर्ण बहुमत वाली सरकार चाहिए, और देशवासियों ने एक मजबूत और स्थिर सरकार बनाई है। और तीन दशकों तक जो अनिश्चिता का काल था, जो अस्थिरता का कालखंड था, जो राजनीतिक मजबूरियों से देश जकड़ा हुआ था, उससे मुक्ति मिली।

    मेरे प्‍यारे परिवारजनों,

    देश के पास आज ऐसी सरकार है, वो सर्वजन हिताय सर्वजन सुखाय देश के संतुलित विकास के लिए समय का पल-पल और जनता की पाई-पाई जनता की भलाई के लिए लगा रही है और मेरी सरकार, मेरे देशवासियों का मान एक बात से जुड़ा हुआ है, हमारे हर निर्णय, हमारी हर दिशा, उसका एक ही मानदंड है Nation First राष्‍ट्र प्रथम और राष्‍ट्र प्रथम यही दूरगामी परिणाम, सकारात्‍मक परिणाम पैदा करने वाला है। देश में बड़े स्‍तर पर काम हो रहा है। लेकिन मैं कहना चाहूंगा 2014 में आपने एक मजबूत सरकार बनाई और मैं कहता हूं 2014 में और 2019 में आपने एक सरकार form की तो मोदी में reform करने की हिम्‍मत आई। आपने ऐसी सरकार form की कि मोदी को reform करने की हिम्‍मत आई। और जब मोदी ने एक के बाद एक reform किए तो मेरे ब्‍यूरोक्रेसी के लोग, मेरे लाखों हाथ-पैर, जो हिन्‍दुस्‍तान के कोने-कोने में सरकार के हिस्‍से के रूप में काम कर रहे हैं, उन्‍होंने ब्‍यूरोक्रेसी ने transform करने के लिए perform करने की जिम्‍मेदारी बखूबी निभाई और उन्‍होंने perform करके दिखाया और जनता-जनार्दन जुड़ गई तो वो transform होता भी नजर आ रहा है। और इसलिए reform, perform, transform ये कालखंड अब भारत के भविष्‍य को गढ़ रहा है। और हमारी सोच देश की उस ताकतों को बढ़ावा देने पर है, जो आने वाले एक हजार साल की नींव को मजबूत करने वाले हैं। दुनिया को युवा शक्ति की जरूरत है, युवा स्किल की जरूरत है। हमने अलग स्किल मिनिस्‍ट्री बनाई, वो भारत की आवश्‍यकताओं को तो पूरा करेगी, वो दुनिया की आवश्‍यकताओं को भी पूर्ण करने का भी सामर्थ्‍य रखेगी। हमने जल शक्ति मंत्रालय बनाया। मंत्रालय की बनाने की रचना को भी अगर वो analysis करेगा ना तो इस सरकार के मन-मस्तिष्क को बड़े अच्छे ढंग से आप समझ पाएंगे। हमने जल शक्ति मंत्रालय बनाया ये जल शक्ति मंत्रालय हमारा, हमारे देश के एक-एक देशवासियों को पीने का शुद्ध पानी पहुंचे, पर्यावरण की रक्षा के लिए पानी के प्रति संवदेनशील व्यवस्थाएं विकसित हो उस पर हम बल दे रहे हैं। हमारे देश में कोरोना के बाद दुनिया देख रही है holistic health care ये समय की मांग है। हमने अलग आयुष मंत्रालय बनाया और योग और आयुष आज दुनिया में अपना परचम लहरा रहे हैं।

    दुनिया को हमारे commitment के कारण विश्व का हमारे प्रति ध्यान गया है। अगर हम ही हमारे इस सामर्थ्य को नकार देंगे तो फिर दुनिया कैसे स्वीकर करेगी। लेकिन जब मंत्रालय बना तो दुनिया को भी उसका मूल्य समझ में आया। मत्स्य पालन हमारा इतना बड़ा समुद्री तट, हमारे कोटि-कोटि मछुआरे भाई-बहन उनका कल्याण भी हमारे दिलों में है और इसलिए हमने अलग से मत्स्य पालन को लेकर के, पशुपालन को लेकर के, डेयरी को लेकर के अलग मंत्रालय की रचना की ताकि समाज के जिस वर्ग के लोग पीछे रह गए उनको हम साथ दे। देश में सरकारी अर्थव्यवस्था के हिस्से होते हैं लेकिन समाज की अर्थव्यवस्था का एक बड़ा हिस्सा है cooperative movement उसको बल देने के लिए, उसमें आधुनिकता लाने के लिए और देश के कोने-कोने में लोकतंत्र की एक सबसे बड़ी इकाई को मजबूत करने के लिए हमने अलग cooperative मंत्रालय बनाया और वो हमारी सहकारी संस्थाएं उसका जाल बिछा रहा है ताकि गरीब से गरीब की वहां सुनवाई हो, उसकी आवश्यकताओं की पूर्ति हो और वो भी राष्ट्र के विकास के योगदान में एक छोटी इकाई का हिस्सा बनकर के उसमें वो योगदान दे सके। हमने सहकार से समृद्धि का रास्ता अपनाया है।

    मेरे प्यारे परिवारजनों,

    जब हम 2014 में आए थे, तो हम वैश्विक अर्थव्यवस्था में 10वें नंबर पर थे और आज 140 करोड़ देशवासियों का पुरुषार्थ रंग लाया है कि हम विश्व की अर्थव्यवस्था में 5वें नंबर पर पहुंच चुके हैं। और ये ऐसे ही नहीं हुआ है जब भ्रष्टाचार का राक्षस देश को दबोचे हुए थे, लाखों-करोड़ के घोटाले अर्थव्यवस्था को डावाडोल कर रहे थे, governance, fragile फाइव में देश की पहचान होने लगी थी। Leakages को हमने बंद किया, मजबूत अर्थव्यवस्था बनाई, हमने गरीब कल्याण के लिए ज्यादा से ज्यादा धन खर्च करने का प्रयास किया। और आज मैं देशवासियों को बताना चाहता हूं कि जब देश आर्थिक रूप से समृद्ध होता है तो सिर्फ तिजोरी नहीं भरती है, देश का सामर्थ्य बढ़ता है, देशवासियों का सामर्थ्य बढ़ता है और तिजोरी का पाई-पाई अगर ईमानदारी से जनता-जनार्दन के लिए खर्च करने का संकल्प लेने वाली सरकार हो तो परिणाम कैसा आता है। मैं 10 साल का हिसाब तिरंगे की साक्षी में लाल किले की प्राचीर से मेरे देशवासियों को दे रहा हूं। आंकड़े देखकर के आपको लगेगा इतना बड़ा बदलाव, इतना बड़ा सामर्थ्य। 10 साल पहले राज्यों को 30 लाख करोड़ रूपये भारत सरकार की तरफ से जाते थे। पिछले 9 साल में ये आंकड़ा 100 लाख करोड़ पर पहुंचा है।

    पहले स्थानीय निकाय के विकास के लिए भारत सरकार के खजाने से 70 हजार करोड़ रूपया जाता था, आज वो 3 लाख करोड़ से भी ज्यादा जा रहा है। पहले गरीबों के घर बनाने के लिए 90 हजार करोड़ रूपया खर्च होता था, आज वो 4 गुना होकर के 4 लाख करोड़ से भी ज्यादा खर्च गरीबों के घर बनाने के लिए हो रहा है। पहले गरीबों को यूरिया सस्ता मिले। जो यूरिया के बैग दुनिया के कुछ बाजारों में 3 हजार में बिकते हैं, वो यूरिया का बैग मेरे किसानों को 300 में मिले और इसलिए देश की सरकार 10 लाख करोड़ रुपया मेरे किसानों को यूरिया में सब्‍सिडी दे रही है। मुद्रा योजना 20 लाख करोड़ रुपए उससे भी ज्‍यादा मेरे देश के नौजवानों को स्‍वरोजगार के लिए, अपने व्‍यवसाय के लिए, अपने कारोबार के लिए दिए हैं। 8 करोड़ लोगों ने नया कारोबार शुरू किया है और 8 करोड़ लोगों ने कारोबार शुरू किया है, ऐसा नहीं, हर कारोबारी ने एक या दो, लोगों को रोजगार दिया है। 8-10 करोड़ नए लोगों को रोजगार देने का सामर्थ्‍य ये मुद्रा योजना से लाभ लेने वाले 8 करोड़ नागरिकों ने किया है। MSMEs को करीब साढ़े तीन लाख करोड़ रुपए की मदद से कोरोना के संकट में भी उनको डूबने नहीं दिया, मरने नहीं दिया, उनको एक ताकत दी है। वन रैंक वन पेंशन, मेरे देश के सेना के जवानों का एक सम्‍मान का विषय था, 70 हजार करोड़ रुपया भारत की तिजोरी से आज पहुंचा है। मेरे निवृत्त सेना के नायकों के जेब में उनका परिवार में पहुंचा है। सभी कैटेगरी में मैंने तो कुछ ही गिनाएं हैं, मैं ज्‍यादा समय लेना नहीं चाहता हूँ। हर कैटेगरी में पहले की तुलना में अनेक गुना धन देश के विकास के लिए कोने-कोने में रोजगार पैदा करने के‍ लिए, पाई-पाई का उपयोग भारत का भाग्‍य बदलने के लिए हो और इसलिए हमने काम किया है।

    और मेरे प्‍यारे प्रियजनों,

    इतना ही नहीं, हमने इन सारे प्रयासों का परिणाम है कि आज 5 साल के मेरे एक कार्यकाल में, 5 साल में साढ़े 13 करोड़ मेरे गरीब भाई-बहन गरीबी की जंजीरों को तोड़ करके न्‍यू मिडिल क्‍लास के रूप में बाहर आए हैं। जीवन में इससे बड़ा कोई संतोष नहीं हो सकता।

    मेरे प्‍यारे प्रिय परिवारजनों,

    और जब साढ़े 13 करोड़ लोग गरीबी की इस मुसीबतों से बाहर निकलते हैं तो कैसी-कैसी योजनाओं ने उन्‍हें मदद दी है, उनको आवास योजना का लाभ मिलना, पीएम स्‍वनिधि से 50 हजार करोड़ रुपए रेहड़ी-पटरी वालों तक पहुंचाया है। आने वाले दिनो में, आने वाली विश्‍वकर्मा जयन्‍ती पर एक कार्यक्रम हम आगे लागू करेंगे, इस विश्‍वकर्मा जयन्‍ती पर हम करीब 13-15 हजार करोड़ रुपया से जो परम्‍परागत कौशल्‍य से रहने वाले लोग, जो औजार से और अपने हाथ से काम करने वाला वर्ग है, ज्‍यादातर ओबीसी समुदाय से है। हमारे सुथार हों, हमारे सुनार हों, हमारे राजमिस्‍त्री हों, हमारे कपड़े धोने वाले काम करने वाले लोग हों, हमारे बाल काटने वाले भाई-बहन परिवार हों, ऐसे लोगों को एक नई ताकत देने के लिए हम आने वाले महीने में विश्‍वकर्मा जयन्‍ती पर विश्‍वकर्मा योजना लॉन्‍च करेंगे और करीब 13-15 हजार करोड़ रुपये से उसका प्रारंभ करेंगे। हमने पीएम किसान सम्‍मान निधि में ढाई लाख करोड़ रुपया सीधा मेरे देश के किसानों के खाते में जमा किया है। हमने जल जीवन मिशन हर घर में शुद्ध पानी पहुंचे, दो लाख करोड़ रुपया खर्च किया है। हमने आयुष्‍मान भारत योजना ताकि गरीब को बीमारी के कारण अस्‍पताल जाने से जो मुसीबत होती थी, उससे मुक्‍ति दिलाना। उसको दवाई मिले, उसका उपचार हो, ऑपरेशन हो अच्‍छे से अच्‍छे हॉस्पिटल में हो, आयुष्‍मान भारत योजना के तहत 70 हजार करोड़ रुपये हमने लगाए हैं। पशुधन देश ने कोरोना वैक्‍सीन की बात तो देश को याद है, 40 हजार करोड़ रुपये लगाए, वो तो याद है लेकिन आपको जानकर के खुशी होगी हमने पशुधन को बचाने के लिए करीब–करीब 15 हजार करोड़ रुपया पशुधन के टीकाकरण के लिए लगाया है।

    मेरे प्‍यारे देशवासियों, मेरे प्यारे परिवारजनों,

    जन औषधि केंद्रों ने, देश के Senior Citizens को, देश के मध्यम वर्गीय परिवार को एक नई ताकत दी है। जिस संयुक्‍त परिवार में अगर किसी को एक डायबिटिज जैसा हो जाए 2-3 हजार का बिल स्‍वाभाविक हो जाता है। हमने जन-औषधि केंद्र से जो दवाई बाजार में सौ रुपये में मिलती है वो 10 रुपया, 15 रुपया, 20 में दी। और आज देश के 1000 जन-औषधि केंद्रों से इन बीमारी में जिनको दवाई की जरूरत थी, ऐसे लोगों के करीब 20 करोड़ रुपया उनके जेब में बचा है। और ये ज्‍यादातर मध्‍यम वर्गीय परिवार के लोग हैं। लेकिन आज उसकी सफलता को देखते हुए मैं देशवासियों को कहना चाहता हूं जैसे हम एक विश्‍वकर्मा योजना लेकर के समाज के उस वर्ग को छूने वाले हैं। अब देश में 10 हजार जन-औषधि केंद्र से हम 25 हजार जन-औषधि केंद्र का लक्ष्‍य लेकर के आने वाले दिनों में काम करने वाले हैं।

    मेरे प्‍यारे परिवारजनों,

    जब देश में गरीबी कम होती है तब देश के मध्‍यम वर्गीय वर्ग की ताकत बहुत बढ़ती है। और मैं आपको विश्‍वास दिलाता हूं आने वाले पांच साल में मोदी की गारंटी है, देश पहले तीन वैश्विक इकोनॉमी में अपनी जगह ले लेगा, ये पक्‍का जगह ले लेगा। आज जो साढ़े 13 करोड़ गरीबी से बाहर आए हुए लोग हैं वो एक प्रकार से मध्‍यम वर्गीय ताकत बन जाते हैं। जब गरीब की खरीद शक्ति बढ़ती है तो मध्‍यम वर्ग की व्‍यापार शक्ति बढ़ती है। जब गांव की खरीद शक्ति बढ़ती है, तो कस्‍बे और शहर की आर्थिक व्‍यवस्‍था और तेज गति से दौड़ती है। और यही इंटर कनेक्‍टेड हमारा अर्थ चक्र होता है। हम उसको बल देकर के आगे चलना चाहते हैं।

    मेरे प्‍यारे परिवारजनों,

    शहर के अंदर जो कमजोर लोग रहते हैं, बिना बात की जो मुसीबत रहती है। मध्‍यम वर्गीय परिवार अपने खुद के घर का सपना देख रहे हैं। हम उसके लिए भी आने वाले कुछ सालों के लिए एक योजना लेकर के आ रहे हैं और जिसमें ऐसे मेरे परिवारजन जो शहरों में रहते हैं, लेकिन किराए के मकान पर रहते हैं, झुग्‍गी-झोपड़ी में रहते हैं, चाल में रहते हैं, unauthorised कॉलोनी में रहते हैं। ऐसे मेरे परिवारजन अगर अपना मकान बनाना चाहते हैं तो बैंक से जो लोन मिलेगा उसके ब्‍याज के अंदर राहत देकर के लाखों रुपयों की मदद करने का हमने निर्णय किया है। मेरे मध्‍यम वर्गीय परिवार को दो लाख से 7 लाख इनकम टैक्‍स की सीमा बढ़ जाती है तो सबसे बड़ा लाभ सैलरी क्‍लास को होता है, मेरे मध्‍यम वर्गीय को होता है। इंटरनेट का डाटा बहुत महंगा था 2014 के पहले। अब दुनिया का सबसे सस्ता इंटरनेट का डेटा पर खर्चा हो रहा है, हर परिवार के पैसे बच रहे हैं।

    मेरे प्यारे परिवारजनों

    विश्‍व कोरोना के बाद अभी तक उभर नहीं पाया है, युद्ध ने फिर एक नई मुसीबत पैदा की है। आज दुनिया महंगाई के संकट से जूझ रही है। पूरी दुनिया की अर्थव्‍यवस्‍था को महंगाई ने दबोच कर रखा है। हम भी दुनिया से जिन सामान की जरूरत होती है लाते हैं तो हमें सामान तो इम्‍पोर्ट करते हैं, हमारा दुर्भाग्‍य है कि हमें महंगाई भी इम्‍पोर्ट करनी पड़ती है। तो इस पूरी दुनिया को महंगाई ने जकड़ कर रखा है।

    लेकिन मेरे प्यारे प्रिय परिवारजनों

    भारत ने महंगाई को नियंत्रित रखने के लिए भरसक प्रयास किए हैं। पिछले कालखंड की तुलना में हमें कुछ सफलता भी मिली है लेकिन इतने से संतोष नहीं मान नहीं सकते। दुनिया से हमारी चीजें अच्‍छी हैं, इतनी बात से हम सोच नहीं सकते, मुझे तो मेरे देशवासियों को महंगाई का बोझ कम से कम हो इस दिशा में और भी कदम उठाने हैं। और हम उस कदम को उठा कर रहेंगे। मेरा प्रयास निरंतर जारी रहेगा।

    मेरे प्‍यारे परिवारजनों,

    आज देश अनेक क्षमताओं को लेकर आगे बढ़ रहा है। देश आधुनिकता की तरफ आगे बढ़ने के लिए काम कर रहा है। आज देश Renewable energy में काम कर रहा है, आज देश green hydrogen पर काम हो रहा है, देश की space में क्षमता बढ़ रही है। तो देश deep sea mission में भी सफलता के साथ आगे चल रहा है। देश में रेल आधुनिक हो रही है, तो वंदे भारत, बुलेट ट्रेन भी आज देश के अंदर काम कर रही है। गांव-गांव पक्की सड़कें बन रही है तो इलेक्ट्रिक बसें, मेट्रो की रचना भी आज देश में हो रहे हैं। आज गांव-गांव तक इंटरनेट पहुंच रहा है तो quantum computer के लिए भी देश काम करता है। Nano Urea और Nano DAP उस पर काम हो रहा है तो दूसरी तरफ जैविक खेती पर भी हम बल दे रहे हैं। आज किसान उत्पादक संघ FPO का निर्माण हो रहा है तो हम सेमीकंडक्टर का भी निर्माण करना चाह रहे हैं। हम दिव्‍यांगजनों के लिए एक सुगम भारत के निर्माण के लिए काम करते हैं तो हम पैरालिंपिक में भी हिन्‍दुस्‍तान का तिरंगा झंडा गाड़ने के लिए मेरे दिव्‍यांगजनों को सामर्थ्‍यवान बना रहे हैं। हम खिलाडि़यों को स्पेशल ट्रेनिंग दे रहे हैं।

    आज भारत पुरानी सोच, पुराने ढर्रे को छोड़ करके लक्ष्‍यों को तय करके, लक्ष्‍यों को प्राप्‍त करने की नजर से चल रहा है। और जब मैं कहता हूं कि जिसका शिलान्यास हमारी सरकार करती है उसके उद्घाटन भी हमारे कालखंड में करते हैं। इन दिनों जो मैं शिलान्‍यास कर रहा हूं न आप लिख करके रखिए उसके उद्घाटन भी आप सब ने मेरे नसीब में ही छोड़े हुए हैं। हमारी कार्य संस्कृति, बड़ा सोचना, दूर का सोचना, सर्वजन हिताय सर्वजन सुखाय सोचना यह हमारी कार्यशैली रही है। और सोच से भी ज्‍यादा, संकल्‍प से भी ज्‍यादा हासिल कैसे करना इस ऊर्जा के साथ हम काम करते हैं। हमने आजादी के अमृत महोत्‍सव में 75 हजार अमृत सरोवर बनाने का संकल्‍प किया था। उस समय हमने हर जिले में 75 अमृत सरोवर बनाने का संकल्‍प किया था। करीब 50-55 हजार अमृत सरोवर की कल्‍पना की थी। लेकिन आज करीब-करीब 75 हजार अमृत सरोवर के निर्माण का काम हो रहा है। यह अपने आप में बहुत बड़ा काम हो रहा है। जनशक्ति और जलशक्ति की यह ताकत भारत के पर्यावरण की रक्षा में भी काम आने वाली है। 18 हजार गांवों तक बिजली पहुंचाना, जन धन बैंक खाते खोलना, बेटियों के लिए शौचालय बनाना सारे टारगेट समय के पहले पूरी शक्ति से पूरे करेगा। और जब भारत ठान लेता है तो उसे पूरा करके रहता है, यह हमारा ट्रैक रिकॉर्ड कहता है।

    200 करोड़ वैक्सीनेशन का काम। दुनिया जब हमें पूछती है न, 200 करोड़ सुनती है उनकी आंखे फट जाती है, इतना बड़ा काम। यह मेरे देश के आंगनवाड़ी वर्कर, हमारी आशा वर्कर, हमारी हेल्‍थ वर्कर उन्‍होंने करके दिखाया। यह मेरे देश का सामर्थ्‍य है। 5-G को रोल आउट किया, दुनिया में सबसे तेज गति से 5-G रोल आउट करने वाला मेरा देश है। 700 से अधिक जिलों तक हम पहुंच चुके हैं। और अब 6-G की भी तैयारी कर रहे हैं। हमने टास्‍क फोर्स बना दिया है। Renewable energy हम टारगेट से पहले चले हैं। हमने renewable energy 2030 का जो टारगेट तय किया था, 2021-2022 में उसका पूरा कर दिया। हमने इथेनॉल में 20 percent ब्‍लेंडिंग की बात कही थी वो भी हमने समय से पांच साल पहले पूरा कर दिया है। हमने 500 बिलियन डॉलर के एक्‍सपोर्ट की बात कही थी वो भी समय से पहले पांच सौ बिलियन डॉलर से ज्‍यादा कर दिया। हमने तय किया, जो हमारे देश में 25 साल से चर्चा हो रही थी कि देश में नई संसद बने। पार्लियामेंट का कोई सत्र ऐसा नहीं था, नई संसद के लिए, यह मोदी है समय के पहले नई संसद बना करके रख दिया मेरे प्‍यारे भाइयों और बहनों। यह काम करने वाली सरकार है, निर्धारित लक्ष्‍यों को पार करने वाली सरकार है, यह नया भारत है, यह आत्‍मविश्‍वास से भरा हुआ भारत है, यह संकल्‍पों को चरितार्थ करने के लिए जी-जान से जुटा हुआ भारत है। और इसलिए यह भारत न रुकता है, यह भारत न थकता है, यह भारत न हांफता है और न ही ये भारत हारता है। और इसलिए मेरे प्‍यारे परिवारजनों, आर्थिक शक्ति भरी है, तो हमारी सामरिक शक्ति को नई ताकत मिली है, हमारी सीमाएं पहले से अधिक सुरक्षित हुई है और मेरे सीमा पर बैठे हुए जवान, मेरे जवान जो देश की सीमाओं की रक्षा कर रहे हैं और मेरे देश की आंतरिक सुरक्षा संभालने वाले यूनिफॉर्म फोर्सेस, मैं आजादी के इस पावन पर्व पर उनको भी अनेक-अनेक बधाई देते हुए मेरी बात को आगे बढ़ाता हूं। सेना का अधिकरण हो, हमारी सेना युवा बने, हमारी सेना battle के लिए ready, युद्ध योग्‍य बने, इसलिए निरंतर रिफॉर्म का काम आज हमारी सेना में हो रहा है।

    मेरे प्‍यारे परिवारजनों,

    आए दिन हम लोग सुना करते थे, यहां बम धमाका हुआ, वहां बम धमाका हुआ। हर जगह पर लिखा हुआ रहता था कि इस बैग को मत छूना, एनाउसमेंट होते रहते थे। आज देश सुरक्षा की अनुभूति कर रहा है और जब सुरक्षा होती है, शांति होती है तो प्रगति के नए अरमान हम पूरे कर सकते हैं। उसके लिए सीरियल बम धमाके का जमाना बीती हुई बात हो गई है। निर्दोषों की जो मौत होती थी, वो बीते हुए कल की बात हो गई है। आज देश में आतंकी हमलों में भारी कमी आई है। नक्‍सल प्रभावित क्षेत्रों में भी बहुत बड़ा बदलाव आया है, बहुत बड़ा परिवर्तन का एक वातावरण बना है।

    मेरे प्‍यारे परिवारजनों,

    प्रगति की हर चीज में, लेकिन जब 2047, हम एक विकसित भारत का सपना ले करके चल रहे हैं तब, और वो सपना नहीं, 140 करोड़ देशवासियों का संकल्‍प है। और उस संकल्‍प को सिद्ध करने के लिए परिश्रम की पराकाष्‍ठा भी है और उसकी सबसे बड़ी ताकत होती है, वो राष्‍ट्रीय चरित्र होता है। दुनिया में जिन-जिन देशों ने प्रगति की है, दुनिया में जो-जो देश संकटों को पार करके निकले हैं, उनमें हर चीज के साथ-साथ एक महत्‍वपूर्ण कैटेलेटिक एजेंट रहा है, वो राष्‍ट्रीय चरित्र रहा है। और हमें राष्‍ट्रीय चरित्र के लिए और बल देते हुए हमें आगे बढ़ना होगा। हमारा देश, हमारा राष्‍ट्रीय चरित्र ओजस्‍वी हो, तेजस्‍वी हो, पुरुषार्थी हो, पराक्रमी हो, प्रखर हो; ये हम सबका सामूहिक दायित्‍व है। और आने वाले 25 साल हम एक ही मंत्र को लेकर चलें, ये हमारे राष्‍ट्रीय चरित्र का सिरमौर होना चाहिए। एकता का संदेश, भारत की एकता को जीना, भारत की एकता को आंच आए, न ऐसी मेरी भाषा होगी, न ऐसा मेरा कोई कदम होगा। हर पल देश को जोड़ने का प्रयास मेरी तरफ से भी होता रहेगा। भारत की एकता हमें सामर्थ्‍य देती है। उत्‍तर हो, दक्षिण हो, पूर्व हो, पश्चिम हो, गांव हो, शहर हो, पुरुष हो, नारी हो; हम सबने एकता के भाव के साथ और विविधता भरे देश में एकता का सामर्थ्‍य होता है और दूसरी महत्‍व की बात मैं देख रहा हूं, अगर 2047 में हमें हमारे देश को विकसि‍त भारत के रूप में देखना है तो हमें श्रेष्‍ठ भारत के मंत्र को जीना होगा, हमें चरित्रार्थ करना होगा।

    अब हमारे प्रोडक्‍शन में, मैंने 2014 में कहा था जीरो डिफेक्‍ट, जीरो इफेक्‍ट। दुनिया के किसी भी टेबल पर मेक इन इंडिया चीज हो तो दुनिया को विश्‍वास होना चाहिए, इससे बेहतर दुनिया में कुछ नहीं हो सकता है। ये अल्‍टीमेट होगा, हमारी हर चीज, हमारी सर्विसेज होंगी तो श्रेष्‍ठ होंगी, हमारे शब्‍दों की ताकत होगी तो श्रेष्‍ठ होंगी, हमारी संस्‍थाएं होंगी तो श्रेष्‍ठ होंगी, हमारी निर्णय प्रक्रियाएं होंगी तो श्रेष्‍ठ होंगी। ये श्रेष्‍ठता का भाव ले करके हमें चलना होगा। तीसरी बात है देश में आगे बढ़ने के लिए एक अतिरिक्‍त शक्ति का सामर्थ्‍य भारत को आगे ले जाने वाला है और वो है women-led development। आज भारत गर्व से कह सकता है कि दुनिया में नागरिक उड्डयन में अगर किसी एक देश में सबसे ज्‍यादा women-pilot हैं तो मेरे देश में हैं। आज चन्‍द्रयान की गति हो, moon-mission की बात हो, मेरी women-scientist उसका नेतृत्‍व कर रही हैं। आज women self-help group हो, मेरी 2 करोड़ लखपति दीदी का लक्ष्य लेकर के आज women self-help group पर हम काम कर रहे हैं। हम, हमारी नारी शक्ति के सामर्थ्य को बढ़ावा देते हुए women-led development और जब जी-20 में मैंने women led development के विषयों को आगे बढ़ाया है तो पूरा जी-20 समूह इसके महत्व का स्वीकार कर रहा है और उसके महत्व को स्वीकर कर करके वो उसको बहुत बल दे रहे हैं। उसी प्रकार से भारत विविधताओं से भरा देश है। असंतुलित विकास के हम शिकार रहे हैं, मेरा-पराया के कारण हमारे देश के कुछ हिस्से उसके शिकार रहे हैं। अब हमें regional aspirations को संतुलित विकास को बल देना है और regional aspirations को लेकर के उस भावना को हमें सम्मान देते हुए जैसे हमारी भारत मां का कोई, हमारे शरीर का कोई अंग अगर अविकसित रहे तो हमारा शरीर विकसित नहीं माना जाएगा। हमारा शरीर का कोई अंग दुर्बल रहे तो हमारा स्वस्थ नहीं माना जाएगा। वैसे ही मेरी भारत माता उसका कोई एक भू-भाग भी, समाज का कोई तबका भी अगर दुर्बल रहे तो मेरी भारत माता समर्थ है, स्वस्थ है ऐसा सोचकर के हम नहीं बैठ सकते। और इसलिए regional aspirations को हमें address करने की आवश्यकता है और इसलिए हम समाज का सर्वांगीण विकास हो, सर्वपक्षीय विकास हो भू-भाग के हर क्षेत्र को उसकी अपनी ताकत को खिलने का अवसर मिले, उस दिशा में आगे बढ़ना चाहते हैं।

    मेरे प्यारे परिवारजनों,

    भारत एक mother of democracy है, भारत model of diversity भी है। भाषाएं अनेक हैं, बोलियां अनेक हैं, परिधान अनेक हैं, विविधताएं बहुत है। हमने उन सारो के आधार पर आगे बढ़ना है।

    मेरे प्यारे परिवारजनों,

    देश के, जब मैं एकता की बात करता हूं तब अगर घटना मणिपुर में होती है तो पीढ़ा महाराष्ट्र में होती है, अगर बाढ़ असम में आती है तो बेचैन केरल हो जाता है। हिन्दुस्तान के किसी भी हिस्से में कुछ भी हो, हम एक अंगदान के भाव की अनुभूति करते हैं। मेरे देश की बेटियों पर जुल्म न हो, ये हमारा सामाजिक भी दायित्व है, ये हमारा पारिवारिक दायित्व भी है और ये देश के नाते हम सबका दायित्व है। आज जब अफगानिस्तान से गुरूग्रंथ साहब के स्वरूप को लाते है तो पूरा देश गौरव की अनुभूति करता है। जब आज दुनिया के किसी देश में कोविड के काल में मेरा कोई सिख भाई लंगर लगाता है, भूखों को खिलाता है और दुनिया में वाहा-वाही होती है तो हिंदुस्तान का सीना चौड़ा हो जाता है।

    मेरे प्यारे परिवारजनों,

    हमारे लिए जब नारी सम्मान की बात करते है। मुझे अभी, एक देश में दौरा कर रहा था तो वहां एक बहुत की सीनियर मिनिस्टर उसने मुझे एक सवाल पूछा, उसने कहां आपके यहां बेटियां science और engineering के विषयों की पढ़ाई करती है क्या? मैंने उनको कहा आज मेरे देश में लड़कों से ज्यादा बेटियां आज STEM यानी science, technology, engineering और maths, अधिकतम भाग मेरी बेटियां ले रही हैं तो उनके लिए अचरज था। ये सामर्थ्य आज हमारे देश का दिख रहा है।

    मेरे प्यारे परिवारजनों,

    आज 10 करोड़ महिलाएं women self help में जुड़ी हुई हैं और women self help group के साथ आप गांव में जाएंगे तो आपको बैंक वाली दीदी मिलेगी, आपको आंगनबाड़ी वाली दीदी मिलेगी, आपको दवाई देने वाली दीदी मिलेगी और अब मेरा सपना है, 2 करोड़ लखपति दीदी बनाने का, गांव में 2 करोड़ लखपति दीदी। और इसके लिए एक नया विकल्प भेजा, science और technology। हमारे गांव की महिलाओं का सामर्थ्य देखता हूं और इसलिए मैं नई योजना सोच रहे हूँ कि हमारे अग्रीकल्‍चर सेक्टर में टेक्‍नोलॉजी आए, एग्रीटेक को बल मिले, इसलिए Women Self Help Group की बहनों को हम ट्रेनिंग देंगे। ड्रोन चलाने की, ड्रोन रिपेयर करने की हम ट्रेनिंग देंगे और हजारों ऐसे Women Self Help Group को भारत सरकार ड्रोन देगी, ट्रेनिंग देगी और हमारे एग्रीकल्‍चर के काम में ड्रोन की सेवाएं उपलब्‍ध हों, इसके लिए हम शुरूआत करेंगे, प्रारंभ हम 15 हजार Women Self Help Group के द्वारा ये ड्रोन की उड़ान का हम आरंभ कर रहे हैं।

    मेरे प्‍यारे परिवारजनों,

    आज देश आधुनिकता की तरफ बढ़ रहा है। Highway हो, Railway हो, Airway हो, I-Ways हो, Information Ways, Water Ways हो, कोई क्षेत्र ऐसा नहीं है, जिस क्षेत्र को आगे बढ़ाने की दिशा में आज देश काम न करता हो। पिछले 9 वर्ष में तटीय क्षेत्रों में, हमने आदिवासी क्षेत्र में, हमारे पहाड़ी क्षेत्र में विकास को बहुत बल दिया है। हमने पर्वत माला, भारत माला ऐसी योजनाओं के द्वारा समाज के उस वर्ग को हमने बल दिया है। हमने गैस की पाइपलाइन से हमारे पूर्वी भारत को जोड़ने का काम किया है। हमने अस्‍पतालों की संख्‍या बढ़ाई है। हमने डॉक्‍टर्स की सीटें बढ़ाई हैं ताकि हमारे बच्‍चे डॉक्‍टर बनने का सपना पूरा कर सकें। हमने मातृभाषा पर पढ़ाने में बदल दिया है और मातृभाषा में वो पढ़ाई कर सके उस दिशा में और मैं भारत के सुप्रीम कोर्ट का भी धन्‍यवाद करता हूँ कि भारत के सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि अब जो judgement देंगे, उसका जो operative part होगा, वो जो अदालत में आया है, उसकी भाषा में उसको उपलब्‍ध होगा। मातृभाषा का महात्म्य आज बढ़ रहा है।

    मेरे प्‍यारे परिवारजनों,

    आज तक हमारे देश के जो Border Village हैं, हमने वहां Vibrant Border Village का एक कार्यक्रम शुरू किया है और Vibrant Border Village अब तक इसके लिए कहा जाता था देश के आखिरी गांव, हमने उस पूरी सोच को बदला है। वो देश का आखिरी गांव नहीं है, सीमा पर जो नजर आ रहा है, वो मेरे देश का पहला गांव है। अगर सूरज उगता है पूर्व में, तो उस तरफ के गांव में पहली सूरज की किरण आती है। अगर सूरज ढलता है, तो इस तरफ के गांव में आखिरी किरण का उसका लाभ मिलता है। ये मेरे पहले गांव है और मुझे खुशी है कि आज मेरे इस कार्यक्रम के विशेष मेहमान, ये जो पहले गांव हैं, सीमावर्ती गांव हैं, उसके 600 प्रधान आज इस लाल किले की प्राचीर के इस महत्‍वपूर्ण कार्यक्रम का हिस्‍सा बनने के लिए आए हैं। पहली बार वो इतनी दूर तक आए हैं। नए संकल्‍प और सामर्थ्‍य के साथ जुड़ने के लिए आए हैं।

    मेरे प्‍यारे परिवारजनों,

    हमने संतुलित विकास के लिए Aspirational District, Aspirational Block की कल्‍पना की और आज उसके सुखद परिणाम मिल रहे हैं। आज राज्‍य के जो Normal Parameters हैं, जो Aspirational Districts कभी बहुत पीछे थे, वो आज राज्‍य में भी अच्‍छा करने लग गए हैं और मुझे विश्‍वास है कि आने वाले दिनों में ये हमारे आकांक्षित जिले, हमारे आकांक्षित ब्‍लॉक अवश्‍य आगे बढ़ेंगे। जैसा मैंने कहा था भारत के चरित्र की चर्चा कर रहा था, तो मैंने पहले कहा था भारत की एकता, दूसरा कहा था भारत श्रेष्‍ठता की तरफ बल दे, तीसरा कहा था Women Development की मैंने बात कही थी। और मैं आज एक बात और कहना चाहता हूँ कि हम जैसे Regional aspiration मैंने चौथी बात कही थी, पांचवी महत्‍व की बात है और भारत ने अब उस दिशा में जाना है और वो है हमारा राष्‍ट्रीय चरित्र, विश्‍व मंगल के लिए सोचने वाला होना चाहिए। हमें देश को इतना मजबूत बनाना है, जो विश्‍व मंगल के लिए भी अपनी भूमिका अदा करें। और आज कोरोना के बाद मैं देख रहा हूँ, जिस प्रकार से संकट की घड़ी में देश ने दुनिया की मदद की उसका परिणाम है कि आज दुनिया में हमारा देश एक विश्‍व मित्र के रूप में है। विश्‍व के अटूट साथी के रूप में है। आज मेरे देश की पहचान बनी है। हम जब विश्‍व मंगल की बात करते हैं, तब भारत का मूलभूत विचार है उस विचार को हम आगे बढ़ाने वाले लोग हैं और मुझे खुशी है कि आज अमेरिकी संसद के भी कई चुने हुए गणमान्‍य प्रतिनिधि भी आज हमारे 15 अगस्‍त के इस अवसर में हमारे बीच में मौजूद हैं। भारत की सोच कैसी है, हम विश्‍व मंगल की बात को कैसे आगे बढ़ाते हैं। अब देखिए, जब हम जब सोचते हैं तो क्‍या कहते हैं, हमने दुनिया के सामने ये दर्शन रखा है, और दुनिया उस दर्शन को लेकर के हमारे साथ जुड़ रही है। हमने कहा One Sun, One World, One Grid. Renewable energy के क्षेत्र में एक बहुत बड़ा हमारा statement है, आज दुनिया उसको स्‍वीकार कर रही है। कोविड के बाद हमने दुनिया को कहा हमारी ये approach होनी चाहिए One Earth, One Health समस्‍याओं का समधान तभी होगा, जब मानव को, पशु को, पौधे को बीमारी के समय में समान रूप से address किया जाएगा, तब जाकर के हम ये करेंगे। हमने जी-20 समिट के लिए दुनिया के सामने कहा है One World, One Family, One Future इस सोच को लेकर के चल रहें हैं। हमने क्‍लाईमेट को लेकर के दुनिया जो संकट से जूझ रही है, हमने रास्‍ता दिखाया है, लाइव मिशन लॉन्‍च किया है Lifestyle For Environment। हमने दुनिया के सामने मिलकर International Solar Alliance बनाया और आज दुनिया के कई देश International Solar Alliance का हिस्‍सा बन रहे हैं। हमने bio diversity का महत्‍व देखते हुए Big Cat Alliance की व्‍यवस्‍था को हमने आगे बढ़ाया है। हमने प्राकृतिक आपदा के कारण ग्लोबल वार्मिग के कारण Infrastructure का जो नुकसान होता है, उसके लिए दूरगामी व्‍यवस्‍थाओं की जरूरत है। और इसलिए Coalition for Disaster Resilient Infrastructure, CDRI एक समाधान के रूप में दुनिया को दिया है। विश्‍व आज समुद्रों को संघर्ष का केंद्र बना रहा है, तब हमने दुनिया को सागर का प्‍लेटफार्म दिया है। जो वैश्विक सामुद्रिक शांति की गारंटी बन सकता है। हमने पारंपरिक चिकित्‍सा पद्धति को बल देते हुए WHO का एक ग्‍लोबल लेवल का सेंटर हिंदुस्‍तान में बनाने की दिशा में काम किया है। हमने योग और आयुष के द्वारा विश्‍व कल्‍याण और विश्‍व की स्वस्थता की दिशा में काम किया है। आज भारत विश्‍व मंगल की मजबूत नींव डाल रहा है। इस मजबूत नींव को आगे बढ़ाना, हम सबका काम है। हम सबकी जिम्मेदारी है।

    मेरे प्‍यारे परिवारजनों

    सपने अनेक हैं, संकल्‍प साफ है, नीतियाँ स्‍पष्‍ट हैं। नियत के सामने कोई सवालिया निशान नहीं है। लेकिन कुछ सच्‍चाईयों को हमें स्‍वीकार करना पड़ेगा और उसके समाधान के लिए मेरे प्रिय परिवारजनों, मैं आज लाल किले से आपकी मदद मांगने आया हूं, मैं लाल किले से आपका आर्शीवाद मांगने आया हूं। क्‍योंकि पिछले सालों मैंने देश को जो समझा है, देश की आवश्‍यकताओं को जो मैंने परखा है। और अनुभव के आधार पर मैं कह रहा हूं कि आज गंभीरतापूर्वक उन चीजों को हमें लेना होगा। आजादी के अमृतकाल में, 2047 में जब देश आजादी के 100 साल मनाएंगा, उस समय दुनिया में भारत का तिरंगा-झंडा विकसित भारत का तिरंगा-झंडा होना चाहिए, रत्‍ती भर भी हमें रुकना नहीं है, पीछे हटना नहीं है और इसके लिए शुचिता, पारदर्शिता और निष्‍पक्षता ये पहली मजबूती की जरूरत है। हमें उस मजबूती को जितना ज्‍यादा खाद पानी दे सकते हैं, संस्‍थाओं के माध्‍यम से दे सकते हैं, नागरिक के नाते दे सकते हैं, परिवार के नाते दे सकते हैं यह हमारा सामूहिक दायित्‍व होना चाहिए। और इसलिए पिछले 75 साल का इतिहास देखिए, भारत के सामर्थ्‍य में कोई कमी नहीं थी और यह जो देश कभी सोने की चिड़िया कहा जाता था वो देश क्यों न फिर से उस सामर्थ्‍य को ले करके खड़ा हो सकता है। मेरा अटूट विश्‍वास है साथियों, मेरे प्रिय परिवारजनों, मेरा अखंड, अटूट, एकनिष्ठ विश्‍वास है कि 2047 में जब देश आजादी के 100 साल मनाएगा मेरा देश विकसित भारत बनकर रहेगा। और यह मैं मेरे देश के सामर्थ्‍य के आधार पर कह रहा हूं। मेरे उपलब्‍ध संसाधनों के आधार पर कह रहा हूं और सबसे ज्‍यादा 30 से कम आयु वाली मेरी युवा शक्ति के भरोसे कह रहा हूं। मेरी माताओं-बहनों के सामर्थ्‍य के भरोसे कह रहा हूं, लेकिन उसके सामने अगर कोई रुकावट है, कुछ भी कृतियां पिछले 75 साल में ऐसे घर कर गई है, हमारी समाज व्‍यवस्‍था का ऐसा हिस्‍सा बन गई है कि कभी-कभी तो हम आंख भी बंद कर देते हैं। अब आंख बंद करने का समय नहीं है। अगर सपनों को सिद्ध करना है, संकल्‍प को पार करना है तो हमें यह आंख-मिचौली बंद करके आंख में आंख मिला करके तीन बुराईयों से लड़ना बहुत समय की मांग है। हमारे देश की सारी समस्‍याओं की जड़ में भ्रष्‍टाचार ने दीमक की तरह देश की सारी व्‍यवस्‍थाओं को, देश के सारे सामर्थ्‍य को पूरी तरह नोंच लिया है। भ्रष्‍टाचार से मुक्ति, भ्रष्‍टाचार के खिलाफ जंग हर ईकाई में हर क्षेत्र में और मैं देशवासियों, मेरे प्रिय परिवारजनों, यह मोदी के जीवन का कमिटमेंट है, यह मेरे व्‍यक्तित्‍व का एक कमिटमेंट है कि मैं भ्रष्‍टाचार के खिलाफ लड़ाई लड़ता रहूंगा। दूसरा हमारे देश को नोंच लिया है परिवारवाद ने। इस परिवारवाद ने देश को जिस प्रकार से जकड़ करके रखा है उसने देश के लोगों का हक छीना है, और तीसरी बुराई तुष्टिकरण की है। यह तुष्टिकरण में भी देश के मूल चिंतन को, देश के सर्वसमावेशक हमारे राष्ट्रीय चरित्र को दाग लगा दिए हैं। तहस-नहस कर दिया इन लोगों ने। और इसलिए मेरे प्‍यारे देशवासियों, इसलिए मेरे प्‍यारे परिवारजनों हमें इन तीन बुराइयों के खिलाफ पूरे सामर्थ्य के साथ लड़ना है। भ्रष्‍टाचार, परिवारवाद, तुष्टिकरण यह चुनौतियां, ये ऐसी चीजें पनपी है जो हमारे देश के लोगों का, जो आकांक्षाएं है, उसका दमन करती है। हमारे देश के कुछ लोगों के पास जो छोटा-मोटा सामर्थ्‍य है उसका शोषण करती है। यह ऐसी चीजें हैं, जो हमारे लोगों की आशाओं-आकांक्षाओं को सवाल या निशान में गढ़ देती है। हमारे गरीब हो, हमारे दलित हों, हमारे पिछड़े हो, हमारे पसमांदा हो, हमारे आदिवासी भाई-बहन हो, हमारी माताएं-बहनें हो, हमने, सबने उनके हकों के लिए इन तीन बुराइयों से मुक्ति पानी है। हमें भ्रष्‍टाचार के खिलाफ एक नफरत का माहौल बनाना है। जैसे गंदगी हमें नफरत पैदा करती है न, मन में, गंदगी पसंद नहीं है, यह सार्वजनिक जीवन की इससे बड़ी कोई गंदगी नहीं हो सकती। और इसलिए हमारे स्‍वच्‍छता अभियान को एक नया मोड़ ये भी देना है कि हमें भ्रष्‍टाचार से मुक्ति पानी है। सरकार टेक्‍नोलॉजी से भ्रष्‍टाचार की मुक्ति के लिए बहुत प्रयास कर रही है। आपको जानकर हैरानी होगी, इस देश में पिछले 9 साल में एक काम मैंने ऐसा किया; आंकड़ा सुनोगे तो लगेगा कि मोदी ऐसा करता है जैसे दस करोड़ लोग करीब-करीब जो गलत फायदा उठाते थे, वो मैंने रोक दिया। तो आप में से कोई कहेगा आपने लोगों से अन्‍याय कर दिया; जी नहीं, ये दस करोड़ लोग कौन लोग थे, ये दस करोड़ लोग वो लोग थे, जिनका जन्‍म ही नहीं हुआ था और उनके नाम पर उनके widow हो जाते थे, वो वृद्ध हो जाते थे, वो दिव्‍यांग हो जाते थे, फायदे लिए जाते थे। दस करोड़ ऐसी बेनामी चीजें जो चलती थीं, उसको रोकने का पवित्र काम, भ्रष्‍टाचारियों की संपत्ति जो हमने जब्‍त की है ना, वो पहले की तुलना में 20 गुना ज्‍यादा की है।

    मेरे प्‍यारे परिवारजनों,

    ये आपकी कमाई का पैसा लोग ले करके भागे थे। 20 गुना ज्‍यादा संपत्ति को जब्‍त करने का, और इसलिए लोगों की मेरे प्रति नाराजगी होना बहुत स्‍वाभाविक है। लेकिन मुझे भ्रष्‍टाचार के खिलाफ की लड़ाई को आगे बढ़ाना है। हमारी सरकारी व्‍यवस्‍था ने, पहले कैमरा के सामने तो कुछ हो जाता था, लेकिन बाद में चीजें अटक जाती थीं। हमने पहले की तुलना में कई गुना ज्‍यादा अदालत में चार्जशीट की है और अब जमानतें भी नहीं मिलती हैं, वैसी पक्‍की व्‍यवस्‍था को ले करके हम आगे बढ़ रहे हैं, क्‍योंकि हम ईमानदारी से भ्रष्‍टाचार के खिलाफ लड़ रहे हैं। आज परिवारवाद और तुष्टिकरण इसने देश का बहुत बड़ा दुर्भाग्‍य किया है। अब लोकतंत्र में ये कैसे हो सकता है कि पॉलिटिकल पार्टी, और मैं विशेष बल दे रहा हूं पॉलिटिकल पार्टी, आज मेरे देश के लोकतंत्र में एक ऐसी विकृति आई है जो कभी भारत के लोकतंत्र को मजबूती नहीं दे सकती और वो क्‍या है बीमारी, परिवारवादी पार्टियां। और उनका तो मंत्र क्‍या है, पार्टी ऑफ द फैमिली, बाय द फैमिली एंड फॉर द फैमिली। इनका तो जीवन मंत्र यही है कि उनकी पॉलिटिकल पार्टी, उनका राजनीतिक दल परिवार का, परिवार के द्वारा और परिवार के लिए। परिवारवाद और भाई-भतीजावाद प्रतिभाओं के दुश्‍मन होते हैं, योग्‍यताओं को नकारते हैं, सामर्थ्‍य को स्‍वीकार नहीं करते हैं। और इसलिए परिवारवाद की इस देश के लोकतंत्र की मजबूती के लिए उसकी मुक्ति जरूरी है। सर्वजन हिताय सर्वजन सुखाय, हर किसी को हक मिले, इसलिए और सामाजिक न्‍याय के लिए भी ये बहुत जरूरी है, उसी प्रकार से तुष्टिकरण, तुष्टिकरण ने सामाजिक न्‍याय का सबसे बड़ा नुकसान किया है। अगर सामाजिक न्‍याय को तबाह किसी ने किया है तो ये तुष्टिकरण की सोच, तुष्टिकरण की राजनीति, तुष्टिकरण का सरकारी योजनाओं का तरीका, इसने सामाजिक न्‍याय को मौत के घाट उतार दिया है। और इसलिए हमें तुष्टिकरण, भ्रष्‍टाचार, ये विकास के सबसे बड़े दुश्‍मन हैं। अगर देश विकास चाहता है, देश 2047, विकसित भारत का सपना साकार करना चाहता है तो हमारे लिए आवश्‍यक है कि हम किसी भी हालत में देश में भ्रष्‍टाचार को सहन नहीं करेंगे, इस मूड को ले करके चलना चाहिए।

    मेरे प्‍यारे परिवारजनों,

    हम सबका एक बहुत बड़ा महत्‍वपूर्ण दायित्‍व है, आपने जिस प्रकार से जिंदगी जी है, हमारी आने वाली पीढ़ी को ऐसी जिंदगी जीने के लिए मजबूर करना, ये हमारा गुनाह है, ये हमारा दायित्‍व है कि हमारी आने वाली पीढ़ी को हम ऐसा समृद्ध देश दें, ऐसा संतुलित देश दें, ऐसा सामाजिक न्याय की धरोहर वाला देश दें, ताकि छोटी-छोटी चीजों को पाने के लिए उन्हें कभी भी संघर्ष न करना पड़े। हम सभी का कर्तव्य, हर नागरिक कर्तव्य है और ये अमृतकाल कर्तव्यकाल है। हम कर्तव्य से पीछे नहीं हो सकते हैं, हमें वो भारत बनाना है, जो पूज्य बापू के सपनों का था, हमें वो भारत बनाना है जो हमारे स्वतंत्रता सेनानियों का सपना था, हमें वो भारत बनाना है जो हमारे वीर-शहीदों का था, हमारी वीरांगनाओं का था, जिन्होंने मात्रभूमि के लिए अपना जीवन दे दिया था।

    मेरे प्यारे परिवारजनों,

    मैं जब 2014 में आपके पास आया था तब 2014 में मैं परिवर्तन का वादा लेकर के आया था। 2014 में मैंने आपको वादा किया था मैं परिवर्तन लाऊंगा। और 140 करोड़ मेरे परिवारजन आपने मुझ पर भरोसा किया और मैंने विश्वास पूरा करने की कोशिश की। Reform, Perform, Transform वो 5 साल जो वादा था वो विश्वास में बदल गया क्योंकि मैंने परिवर्तन का वादा किया था। Reform, Perform, Transform के द्वारा मैंने इस वादे को विश्वास में बदल दिया है। कठोर परिश्रम किया है, देश के लिए किया है, शान से किया है, सिर्फ और सिर्फ nation first राष्ट्र सर्वोपरि इस भाव से किया है। 2019 में performance के आधार पर आप सबने मुझे फिर से आशीर्वाद दिया। परिवर्तन का वादा मुझे यहां ले आया, performance मुझे दोबारा ले आया और आने वाले 5 साल अभूतपूर्व विकास के हैं। 2047 के सपने को साकार करने का सबसे बड़ा स्वर्णीम पल आने वाले 5 साल हैं। और अगली बार 15 अगस्त को इसी लाल किले से मैं आपको देश की उपलब्धियां, आपके समार्थ्य, आपके संकल्प उसमें हुई प्रगति, उसकी जो सफलता है, उसके गौरवगान उससे भी अधिक आत्मविश्वास के साथ, आपके सामने में प्रस्तुत करूंगा।

    मेरे प्यारे प्रियजनों,

    मेरे परिवारजनों, मैं आप में से आता हूं, मैं आपके बीच से निकला हूं, मैं आपके लिए जीता हूं। अगर मुझे सपना भी आता है, तो आपके लिए आता है। अगर मैं पसीना भी बहाता हूं तो आपके लिए बहाता हूं, क्योंकि इसलिए नहीं कि आपने मुझे दायित्व दिया है, मैं इसलिए कर रहा हूं कि आप मेरे परिवाजन हैं और आपके परिवार के सदस्य के नाते मैं आपके किसी दु:ख को देख नहीं सकता हूँ, मैं आपके सपनों को चूर-चूर होते नहीं देख सकता हूं। मैं आपके संकल्प को सिद्धी तक ले जाने के लिए आपका एक साथी बनकर के, आपका एक सेवक बनकर के, आपके साथ जुड़े रहने का, आपके साथ जीने का, आपके लिए जूझने का मैं संकल्प लेकर के चला हुआ इंसान हूं और मुझे विश्वास है हमारे पूर्वजों ने आजादी के लिए जो जंग लड़ा था, जो सपने देखे थे, वो सपने हमारे साथ हैं। आजादी के जंग में जिन्होंने बलिदान दिया था, उनके आशीर्वाद हमारे साथ हैं और 140 करोड़ देशवासियों के लिए एक ऐसा अवसर आया है, ये अवसर हमारे लिए एक बहुत बड़ा संबल लेकर के आया है।

    और इसलिए मेरे प्यारे प्रियजनों,

    आज जब मैं अमृतकाल में आपके साथ बात कर रहा हूं, ये अमृतकाल का पहला वर्ष है, ये अमृतकाल के पहले वर्ष पर जब मैं आपके बात कर रहा हूं तो मैं आपको पूरे विश्वास से कहना चाहता हूं-

    चलता चलाता कालचक्र,

    अमृतकाल का भालचक्र,

    सबके सपने, अपने सपने,

    पनपे सपने सारे, धीर चले, वीर चले, चले युवा हमारे,

    नीति सही रीती नई, गति सही राह नई,

    चुनो चुनौती सीना तान, जग में बढ़ाओ देश का नाम।

    मेरे प्‍यारे परिवारजनों,

    हिन्‍दुस्‍तान के कोने-कोने में बैठे हुए मेरे परिवारजनों, दुनिया के कोने-कोने में जा करके बसे हुए मेरे परिवारजन, आप सबको आजादी के पावन पर्व की फिर एक बार मैं बहुत-बहुत शुभकामनाएं देता हूँ। और ये अमृतकाल हम सबके लिए कर्तव्य काल है। ये अमृतकाल हम सबको मां भारती के लिए कुछ कर गुजरने का काल है। आज़ादी की जब जंग चल रही थी, 1947 के पहले जो पीढ़ी ने जन्‍म लिया था, उन्‍हें देश के लिए मरने का मौका मिला था। वो देश के लिए मरने के लिए मौका नहीं छोड़ते थे लेकिन हमारे नसीब में देश के लिए मरने का मौका नहीं है। लेकिन हमारे लिए देश के लिए जीने का ये इससे बड़ा कोई अवसर नहीं हो सकता। हमें पल-पल देश के लिए जीना है, इसी संकल्‍प के साथ इस अमृत काल में 140 करोड़ देशवासियों के सपने संकल्‍प भी बनाने हैं। 140 करोड़ देशवासियों के संकल्‍प को सिद्धि में भी परिवर्तित करना है और 2047 का जब तिरंगा झंडा फहरेगा, तब विश्‍व एक विकसित भारत का गुणगान करता होगा। इसी विश्‍वास के साथ, इसी संकल्‍प के साथ मैं आप सबको अनेक-अनेक शुभकामनाएं देता हूँ। बहुत-बहुत बधाई देता हूँ।

    जय हिन्‍द, जय हिन्‍द, जय हिन्‍द!

    भारत माता की जय, भारत माता की जय, भारत माता की जय!

    वंदे मातरम, वंदे मातरम, वंदे मातरम!

    बहुत-बहुत धन्‍यवाद!

  • सेडमैप को सफल बनाया तो मिली अग्निपरीक्षा की चुनौती

    सेडमैप को सफल बनाया तो मिली अग्निपरीक्षा की चुनौती


    भोपाल,14 अगस्त(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)।प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, हिंदुस्तान को पांच ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने का जो महा अभियान चला रहे हैं उसे सफल बनाने के लिए मध्यप्रदेश की अनुराधा सिंघई जैसी उद्यमी अपने हुनर का इस्तेमाल करके योग्य मानव बल उपलब्ध करा रहीं हैं। नौकरियां बेचने के गोरखधंधे में शरीक न होने की वजह से सैडमेप की इस एक्जीक्यूटिव डायरेक्टर को अग्निपरीक्षा देने के लिए मजबूर किया जा रहा है। इसके पीछे कई ऐसे दिग्गज भी अपने गुंताड़े फिट कर रहे हैं जो खुद को महान देशभक्त बताते नहीं थकते।

    तैतीस साल की अपनी यात्रा में सैडमेप को महज एक एचआर मैनेजर की तरह ही इस्तेमाल किया जाता रहा है। इस संस्थान की बेहतरी के लिए किसी ने इसलिए प्रयास नहीं किए क्योंकि उनके लिए तो ये केवल नौकरियां बेचने की आड़ थी। संयुक्त राष्ट्र की भ्रष्टाचार विरोधी मुहिम में चार बार देश का नेतृत्व कर चुकीं अनुराधा सिंघई ने दो साल पहले जब मध्य प्रदेश सरकार के एमएसएमई विभाग के तहत इस स्वायत्त शासी निकाय CEDMAP (Centre for Entrepreneurship Development Madhya Pradesh) (उद्यमिता विकास केंद्र मध्य प्रदेश) की कार्यकारी निदेशक का पदभार संभाला तो ये संस्थान लगभग बंद होने की कगार पर पहुंच गया था। आज भी इसे वेतन और प्रशासनिक खर्चों के लिए भी सरकार से कोई धन सहायता नहीं मिलती है। संस्थान में कर्मचारियों का दस महीनों से वेतन नहीं बंटा था।एक महीने का वेतन पाने के लिए, नई ईडी को कार्यभार संभालते ही पिछले 10 महीनों का राजस्व अर्जित करना था । वह अगस्त 2021 से सभी स्टाफ को वेतन दिलवाने लगीं,लेकिन उन्होंने तय किया कि 10 महीने का पूरा वेतन देने से दक्षता हासिल किए बगैर वे अपना वेतन नहीं लेंगी। कार्यभार संभालने के चार महीने बाद उन्होंने पहला वेतन लिया।नतीजतन आज संस्थान अपना बोझ उठाने लगा है।

    जब उन्होंने संस्थान की काया पलटने का प्रमाण दे दिया तब उनकी नियुक्ति पर सवालिया निशान लगाए जा रहे हैं । प्रदेश की पंद्रह दिग्गज प्रमुख हस्तियों ने जो चयन किया उसे गलत ठहराने से पहले षड़यंत्रकारियों ने सैडमेप के इतिहास को पढ़ने का प्रयास भी नहीं किया। सैडमेप का गठन प्रदेश को प्रशिक्षित और उत्कृष्ट मानव बल मुहैया कराने के लिए किया गया था। संस्थान के संस्थापकों ने लंबी छानबीन के बाद ऐसे फार्मूले तैयार किए जिनके माध्यम से उद्यमी युवाओं की पहचान आसानी से की जा सकती थी। इसके बावजूद सत्ता के कई खिलाडियों के हस्तक्षेप से नौकरियां बेचने वालों का एक गिरोह भी इस प्रक्रिया के इर्दगिर्द इकट्ठा हो गया था। आज वही गिरोह खुद का सूरज अस्त होते देख रहा है।

    वार करने का जब कोई अवसर नहीं दिखा तो कुछ अधूरे दस्तावेजों को आधार बनाकर एक्जीक्यूटिव डायरेक्टर के विरुद्ध अदालती हस्तक्षेप की मुहिम छेड़ दी गई। हालांकि मुहिम चलाने वाले स्वयं जानते हैं कि वे एक हारी लड़ाई लड़ रहे हैं क्योंकि देश अब एक अलग दौर में प्रवेश कर गया है।आज जबकि कॉरपोरेट सेक्टर में नए प्रबंधकों के लिए 25लाख का वेतन पैकेज आम बात हो गई है तब कंगाल सोच वाले षड्यंत्र कारी संस्थान की नई कार पर ही सवाल उठा रहे हैं।

    पहली बार जब मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की सरकार के लघु एवं सूक्ष्म उद्योग विभाग के मंत्री ओमप्रकाश सखलेचा ने अपने पिता स्वर्गीय वीरेंद्र कुमार सखलेचा की परंपरा को आगे बढ़ाकर अधीनस्थों को तथ्यात्मक कार्य करने की सुविधा उपलब्ध कराई तो एक बार फिर प्रशासनिक दक्षता को घेरा जाने लगा है।वहीं घर की गृहिणी की तरह साज संभाल करने वाली अनुराधा सिंघई ने अपने सुदीर्घ आर्थिक प्रबंधन ज्ञान का उपयोग करके संस्थान को नई राह पर अग्रसर कर दिया है।


    कौन हैं अनुराधा सिंघई

    पहले वह इंडो यूरोपियन चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री की संस्थापक अध्यक्ष रहीं हैं, जो एक अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त विकास क्षेत्र संगठन है, जिसे संयुक्त राष्ट्र आर्थिक और सामाजिक संगठन की विशेष सलाहकार स्थिति प्राप्त है। वह 21 साल के अनुभव के साथ इंस्टीट्यूट ऑफ कंपनी सेक्रेटरीज ऑफ इंडिया की फेलो हैं।

    कानूनी, वित्त, कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व, क्लस्टर विकास, व्यवसाय मॉडलिंग, उद्यमिता, प्रशिक्षण, आजीविका, अनुसंधान और अध्ययन, कॉर्पोरेट समाधान, अंतर्राष्ट्रीय व्यापार और सहित विकास और कॉर्पोरेट क्षेत्र में 21 वर्षों से अधिक के विशाल और बहुमुखी अनुभव के साथ एक अनुभवी उच्च प्रबंधन पेशेवर हैं ।प्रमुख आंदोलन- “पर्पल मार्च” के माध्यम से विकास क्षेत्र में सुधार, लैंगिक समानता और महिला सशक्तिकरण में एक अनुभवी शख्सियत हैं । किसी भी क्षेत्र में संकल्पना से लेकर कार्यान्वयन तक अत्यधिक उद्यमशील, परिणामोन्मुखी, समाधान चाहने वाला संगठन उनकी सेवाओं को अव्वल मानता है । वे कॉर्पोरेट मामलों के मंत्रालय, भारत सरकार के लिए कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (सीएसआर) की विशेषज्ञ और पर्यटन सलाहकार भी हैं।

    उन्हें भारत के प्रतिनिधि के रूप में तीन बार रॉटरडैम, नीदरलैंड में सीबीआई (आयात संवर्धन केंद्र-नीदरलैंड मंत्रालय का एक निकाय) ने चुना और आमंत्रित किया । उन्होंने भारत से यूरोपीय देशों और संबद्ध विषयों पर निर्यात बाजार विकास पर 2001, 2007 में प्रशिक्षण प्राप्त किया।

    उन्होंने चार बार अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत का प्रतिनिधित्व किया, जिसमें 2014 में मलेशिया के कुआलालंपुर में भ्रष्टाचार के खिलाफ संयुक्त राष्ट्र कन्वेंशन और इसके समीक्षा तंत्र पर नशीली दवाओं और अपराध पर संयुक्त राष्ट्र कार्यालय (यूएनओडीसी) में प्रतिनिधित्व भी शामिल है।

    भारतीय ज्ञान प्रणाली और प्राचीन भारतीय विरासत में उनकी गहरी रुचि के कारण, उनके पास भारतीय प्राचीन ज्ञान प्रणाली- “वेद, वेदांग और दर्शन”, “उपनिषद”, “पुराण” और “गीता” और “भारतीय कला और साहित्य” में प्रशिक्षण और प्रमाण पत्र भी है। वास्तुकला”।

    उनके कुछ प्रतिष्ठित पुरस्कार और सम्मान हैं- 2012 में एमपी और सीजी राज्य के लिए दैनिक भास्कर द्वारा “बिजनेस वुमेन ऑफ द ईयर” पुरस्कार, 2019 में “अनहद नाद” सामाजिक कार्यकर्ता पुरस्कार, द इंटरनेशनल एसोसिएशन ऑफ लायंस द्वारा “सेवा सम्मान”। 2020 में क्लब, आदि।
    वह विभिन्न मंचों पर अतिथि संकाय और नियमित वक्ता हैं, जैसे – राज्य कृषि शिक्षा और प्रशिक्षण संस्थान (एसआईएईटी), केंद्रीय पुलिस प्रशिक्षण अकादमी, भारतीय वन प्रबंधन संस्थान (आईआईएफएम), भोपाल, पर्यावरण और वन मंत्रालय, भारत सरकार, बैंक ऑफ भारत, स्टाफ ट्रेनिंग कॉलेज, भारतीय कंपनी सचिव संस्थान (आईसीएसआई), अन्य प्रबंधन कॉलेज, आदि।

    उन्होंने स्विट्जरलैंड, नीदरलैंड, जर्मनी, फ्रांस, बेल्जियम, डेनमार्क, सिंगापुर, मलेशिया, दुबई, थाईलैंड और श्रीलंका का अध्ययन दौरा किया है।

    वह बिजनेस मॉडलिंग में विशेषज्ञ हैं और उन्होंने लगभग 1200 उद्यमियों का मार्गदर्शन किया है जिन्होंने विभिन्न क्षेत्रों में सफलतापूर्वक अपने उद्यम स्थापित किए हैं।

    Profile of Ms Anuradha Singhai

    Anuradha Singhai is Executive Director of CEDMAP (Centre for Entrepreneurship Development Madhya Pradesh), an autonomous body under Department of MSME, Government of Madhya Pradesh. 

    Previously she was founder president of Indo European Chamber of Commerce and Industry, an internationally recognized development sector organization having Special Consultative Status of United Nations Economic and Social Organisation.

    She is fellow of the Institute of Company Secretaries of India with 21 years of post qualification experience.

    A seasoned upper management professional with vast and versatile experience of over 21 years in development and corporate sector including legal, finance, Corporate Social Responsibility, Cluster development, business modelling, entrepreneurship, training, livelihood,  research & studies, corporate solutions, international trade and government advisory.

    A veteran in development sector reforms, Gender equality and women empowerment through flagship movement-“Purple March”.  A highly enterprising, result-oriented, solution seeker, right from conceptualization to implementation, in any sector.

    Ms Singhai is also an expert on Corporate Social Responsibility  (CSR) for Ministry of Corporate Affairs, GOI and tourism consultant. 

    She was selected and invited by CBI (Centre for Promotion of Imports- a body of Ministry of Netherlands) at Rotterdam, Netherlands for three times as India representative & received training on Export market development from India to European countries & allied topics in 2001, 2007 and 2009.

    She represented India on international forum for four times, including representation at United Nations Office on Drug and Crime (UNODC) on United Nations Convention against Corruption and its review mechanism at Kualalumpur, Malaysia in 2014.

    Out of her profound interest in Indian Knowledge System and ancient Indian heritage, she also posses training and certificate in Indian ancient knowledge system- “Ved, vedang & Darshan”, “Upanishads”, “Puraan” and “Gita” and “Indian art and architecture”.

    Some of her prestigious awards and honors are-“Business Women of the year”  award by Dainik Bhaskar for the state of MP and CG in 2012, “Anhad Naad” social worker award in 2019, “Sewa Samman” by The International Association of Lions Club in 2020, etc.

    She is guest faculty and regular speaker at various forums like -State Institute of Agriculture Education and Training (SIAET), Central Academy for Police training, Indian Institute of Forest Management (IIFM), Bhopal, Ministry of Environment & Forest, GOI, Bank of India, Staff Training College, Institute of Company Secretaries of India (ICSI), Other Management colleges, etc.

    She has undertaken study visits at Switzerland, Netherlands, Germany, France, Belgium, Denmark, Singapore, Malaysia, Dubai, Thailand and Srilanka.

    She is an expert in business modelling and mentored around 1200 entrepreneurs who have successfully established their ventures in various sectors.

  • सतरंगी सावन मेले में उमड़ पड़ा महिलाओं का कला संसार

    सतरंगी सावन मेले में उमड़ पड़ा महिलाओं का कला संसार

    भोपाल, 12 अगस्त(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)। संस्कार सुधा फाऊंडेशन के प्रयासों से आयोजित सतरंगी सावन मेले में युवतियों और महिलाओं का जमघट लग गया है, ये आयोजन कल रविवार को पूरे शवाब पर होगा। श्यामला हिल्स पालीटेक्निक चौराहे पर स्थित मानस भवन में लगाए गए इस अनोखे मेले में आज नवयुवतियों ने बढ़ चढ़कर सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दीं। इस अवसर पर गणमान्य नागरिकों और समाजसेवियों का सम्मान भी किया गया।


    लगभग सात वर्षों से आयोजित हो रहे संस्कार सुधा फाऊंडेशन के इस आयोजन में महिलाओं की भागीदारी साल दर साल बढ़ती जा रही है। हर साल की तरह इस बार भी व्यवसायी बहनों के लिए आयोजित ये दो दिवसीय कार्यक्रम उत्साह और उमंगों का जमघट बन गया है। इस मेले में सभी प्रकार की लाईफ स्टाल की वस्तुएं, कपड़े,श्रंगार की वस्तुएं, फूड स्टाल आदि लगे हैं।


    संस्कार सुधा फाऊंडेशन की अध्यक्ष श्रीमती सोनू अग्रवाल ने बताया कि ये मेला उद्यमियों और कलाकारों का चहेता मंच बन चुका है। संस्था के इस गुलदस्ते में युवतियों और कला प्रेमियों के लिए सतरंगे अवसर उपलब्ध हैं। पिछले सालों में जिस तरह महिलाओं और युवतियों की भागीदारी बढ़ती जा रही है उसे देखते हुए हमें अब और बड़े आयोजन की जवाबदारी संभालनी होगी। फिलहाल हमने कला प्रेमियों और उद्यमियों के लिए एक झरोखा देने का प्रयास किया है जिसके माध्यम से वे अपने हुनर का सर्वोत्तम प्रतिफल पा सकते हैं।


    आज के आयोजन में संस्था की ओर से लावारिस लाशों का अंतिम संस्कार करवाने वाले समाजसेवी और जनसंवेदना संस्था के संस्थापक राधेश्याम अग्रवाल का नागरिक अभिनंदन किया गया।

  • मुख्यमंत्री किसान कल्याण योजना में किसानों को मिलेंगे छह हजार रूपये

    मुख्यमंत्री किसान कल्याण योजना में किसानों को मिलेंगे छह हजार रूपये


    भोपाल,11 अगस्त(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की अध्यक्षता में मंत्रि-परिषद की बैठक ‘समत्व भवन’ मुख्यमंत्री निवास में हुई। मंत्रि-परिषद ने मुख्यमंत्री किसान कल्याण योजना अंतर्गत वित्तीय वर्ष 2023-2024 से पात्र किसानों को 6 हजार रूपये का भुगतान करने की स्वीकृति दी है।

    पूर्व में 1 अप्रैल से 31 अगस्त एवं 1 सितम्बर से 31 मार्च की अवधि में 2 समान किश्तों में कुल 4 हजार रूपये का भुगतान किया जाता था। अब वित्तीय वर्ष 2023-2024 से 1 अप्रैल से 31 जुलाई, 1 अगस्त से 30 नवम्बर एवं 1 दिसम्बर से 31 मार्च की अवधि में कुल 3 समान किश्तों में कुल 6 हजार रूपये का भुगतान पात्र किसानों को करने की स्वीकृति दी गई है।

    ग्राम पंचायत सचिवों को 7वें वेतनमान का लाभ

    मंत्रि-परिषद ने ग्राम पंचायत सचिवों को सातवें वेतनमान का लाभ देने का निर्णय लिया है। इस पर आने वाले अतिरिक्त व्ययभार राशि 178 करोड़ 88 लाख रूपये को गौण खनिज मद में अतिरिक्त रूप से उपलब्ध कराये जाने का निर्णय लिया है।

    प्रदेश में 53 सीएम राइज विद्यालयों और 19 कन्या शिक्षा परिसर के निर्माण की स्वीकृति

    मंत्रि-परिषद ने प्रदेश में 53 सीएम राइज विद्यालयों और 19 कन्या शिक्षा परिसर के निर्माण के लिये कुल 2491.91 करोड़ रूपये की स्वीकृति दी है। स्कूल शिक्षा विभाग के अंतर्गत 37 सर्वसुविधा सम्पन्न विद्यालयों के निर्माण के लिये कुल अनुमानित लागत 1362 करोड़ 91 लाख रूपये की स्वीकृति दी है। जनजातीय कार्य विभाग के अंतर्गत 16 सीएम राइज विद्यालय के लिये 540 करोड़ रूपये और 19 कन्या शिक्षा परिसर के लिये 589 करोड़ रूपये की स्वीकृति दी गई है।

    भिण्ड में सैनिक स्कूल के निर्माण की स्वीकृति

    मंत्रि-परिषद ने भिण्ड के मालनपुर में सैनिक स्कूल के निर्माण की स्वीकृति दी। सैनिक स्कूल का निर्माण रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन से प्राप्त 100 करोड़ रूपये से किया जाएगा। सैनिक स्कूल के लिये फर्नीचर और संचालन के लिये मध्यप्रदेश शासन द्वारा बजट का प्रावधान किया जाएगा।

    नवीन जिला मऊगंज के गठन की स्वीकृति

    मंत्रि-परिषद द्वारा प्रदेश में नवीन जिला मऊगंज के गठन की स्वीकृति दी गई। रीवा जिले की 3 तहसीलें मऊगंज, हनुमना और नईगढ़ी को समाविष्ट कर नवीन जिला मऊगंज का गठन किया गया है। नवीन जिला मऊगंज के गठन के बाद शेष रीवा जिले में 9 तहसीलें हुजूर, हुजूर नगर, जया, त्योंथर, रायपुर करचुलियां, गुढ, सिरमौर, सेमरिया और मनगवां शेष रहेंगी। नवीन जिला मऊगंज के कुशल संचालन के लिये कलेक्टर का 1, अपर कलेक्टर का 1, संयुक्त कलेक्टर / डिप्टी कलेक्टर के 5. सहायक लेखाधिकारी वित्त विभाग (प्रतिनियुक्ति/ संविदा से) के 1. अधीक्षक का 01. सहायक अधीक्षक के 2. ऑडिटर का 1, निज सहायक का 1, स्टेनोग्राफर का 1. सहायक ग्रेड-2 के 13, सहायक ग्रेड-3 के 25, स्टेनोटायपिस्ट के 3, कम्प्यूटर आपरेटर के 3, वाहन चालक के 6, जमादार का 1 और भृत्य के 31 पदों का सृजन किया गया है।

    शाजापुर में नवीन अनुविभाग गुलाना के सृजन की स्वीकृति

    मंत्रि-परिषद ने शाजापुर में नवीन अनुविभाग गुलाना के सृजन की स्वीकृति दी। नवीन अनुविभाग में तहसील गुलाना के राजस्व निरीक्षक मण्डल गुलाना 1 के समस्त 20 हल्कें, राजस्व निरीक्षक मण्डल मंगलाज 2 के समस्त 12 हल्कें, राजस्व निरीक्षक मण्डल सलसलाई 3 के समस्त 12 हल्के इस प्रकार कुल 44 हल्कें समाविष्ट होंगे तथा इसके गठन पश्चात शेष शाजापुर अनुविभाग में तहसील शाजापुर के 80 हल्कें और मोहन बडोदिया के 48 हल्कें इस प्रकार कुल 128 हल्के समाविष्ट होंगे।

    नवीन अनुविभाग गुलाना के कुशल संचालन के लिए अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) का 1, स्टेनो टायपिस्ट का 1, सहायक ग्रेड-2 के 2, सहायक ग्रेड-3 के 3, वाहन चालक का 1 और भृत्य के 4 पद इस प्रकार कुल 12 पद स्वीकृत करने की मंजूरी दी गई।

    बालाघाट में नवीन अनुविभाग परसवाड़ा की सृजन की स्वीकृति

    मंत्रि-परिषद ने बालाघाट में नवीन अनुविभाग परसवाड़ा की सृजन की स्वीकृति दी। नवीन अनुविभाग परसवाड़ा में तहसील परसवाड़ा के पटवारी हल्का नम्बर 1 से 57 तक कुल 57 पटवारी हल्के समाविष्ट होंगे। परसवाड़ा अनुविभाग के गठन के बाद शेष अनुविभाग बैहर में तहसील बैहर के पटवारी हल्का क्रमांक 1 से 50 तक और तहसील बिरसा के पटवारी हल्का क्रमांक 1 से 69 तक कुल 119 पटवारी हल्के समाविष्ट होंगे।

    अनुविभाग परसवाड़ा के कुशल संचालन के लिये अनुविभाग अधिकारी का 1, स्टेनो टायपिस्ट का 1. सहायक ग्रेड-2 के 2. सहायक ग्रेड-3 के 3, वाहन चालक का 1 और भृत्य के 4 इस प्रकार कुल 12 पद स्वीकृत किये गये है।

    छतरपुर में नवीन तहसील सटई का गठन

    मंत्रि-परिषद ने छतरपुर में नवीन तहसील सटई के गठन की स्वीकृति दी। नवीन तहसील में तहसील बिजावर के राजस्व निरीक्षक मण्डल सटई के पटवारी हल्का क्र. 26 से 39 तक, राजस्व निरीक्षक मण्डल देवरा के पटवारी हल्का क्र. 40, 41, 58 एवं 59 तथा तहसील राजनगर के राजस्व निरीक्षक मण्डल बसारी के पटवारी हल्का क्र. 46 से 54 एवं 56 से 59, इस प्रकार कुल 31 हल्के समाविष्ट होंगे। सटई तहसील के गठन के बाद बिजावर तहसील में 44 पटवारी हल्के तथा राजनगर तहसील में 75 पटवारी हल्के शेष रहेंगे।

    नवीन तहसील सटई के कुशल संचालन के लिये तहसीलदार का 1, नायब तहसीलदार का 1, सहायक ग्रेड-2 के 2, सहायक ग्रेड-3 के 4 सहायक ग्रेड-3 (प्रवाचक) के 2, जमादार / दफतरी/बस्तावरदार का 1, वाहन चालक का 1 और भृत्य के 5 इस प्रकार कुल 17 पद स्वीकृत किये गये है।

    ग्राम पंचायत बटियागढ़ को नगर परिषद के रूप में गठित करने की स्वीकृति

    मंत्रि-परिषद ने जिला दमोह की ग्राम पंचायत बटियागढ़ को नगर परिषद के रूप में गठित किए जाने और प्रस्ताव माननीय राज्यपाल को प्रेषित किए जाने की स्वीकृति दी।

    शक्ति सदन योजना नवीन मापदण्ड अनुसार संचालन करने की स्वीकृति

    मंत्रि-परिषद ने भारत सरकार की मिशन शक्ति के “सामर्थ्य” अंतर्गत शक्ति सदन योजना को प्रदेश के जिलों में भारत सरकार के नवीन मापदण्ड अनुसार संचालित करने की स्वीकृति दी है। शक्ति सदन योजना के संचालन के लिये भारत सरकार द्वारा जारी दिशा-निर्देशों के अनुसार 15वें वित्त आयोग की अवधि 2025-26 तक संचालन करने की स्वीकृति प्रदान की गई है।

    लोक परिसम्पत्ति का निवर्तन

    मंत्रि-परिषद ने अलीराजपुर में परिवहन विभाग की वार्ड क्र 5 स्थित अलीराजपुर बस डिपो भूमि परिसम्पत्ति पार्सल क्रमांक 1 कुल क्षेत्रफल 3980.32 वर्गमीटर के निवर्तन के लिये H-1 निविदाकार की उच्चतम निविदा राशि 2 करोड़ 25 लाख 72 हजार रुपये जो कि रिजर्व मूल्य राशि 2.07 करोड़ रूपये का 1.09 गुना है, की संस्तुति करते हुए उसे विक्रय करने एवं H-1 निविदाकार द्वारा निविदा राशि का 100% जमा करने के बाद अनुबंध / रजिस्ट्री की कार्यवाही जिला कलेक्टर द्वारा किये जाने का निर्णय लिया।

    अन्य निर्णय

    मंत्रि-परिषद ने शासकीय शालाओं की कक्षा 1 से 8 तक के छात्र-छात्राओं के गणवेश स्व-सहायता समूह के माध्यम से प्रदाय करने के स्कूल शिक्षा विभाग के निर्णय का अनुमोदन किया गया।

  • साईबर अपराधों से समाज को बचाएं राज्यपाल की अपील

    साईबर अपराधों से समाज को बचाएं राज्यपाल की अपील

    भोपाल 10 अगस्त(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)। राज्यपाल मंगूभाई पटेल ने कहा है कि सायबर अपराधियों के सॉफ्ट टारगेट को हार्ड टारगेट बनाने में प्रतिभागी अपनी पूरी शक्ति और सामर्थ्य लगाए। प्राप्त ज्ञान का समाज में प्रसार ही उसकी सार्थकता है। उन्होंने कहा कि प्राप्त ज्ञान और साधन से निज उन्नति के साथ ही समाज के वंचित, पिछड़े वर्ग को लाभान्वित कर, उनके उत्थान में सहयोग करना ही भारतीय संस्कृति है। उन्होंने कहा है कि हर घर तिरंगे के संकल्प से हर नागरिक स्वयं को जोड़े। दूसरों को जोड़ कर, राष्ट्र के प्रति अपनी समर्पण शक्ति को जागृत करे। इस अमृत काल को राष्ट्र के प्रति कर्तव्य काल के रूप में मनाएं।

    श्री पटेल आज आई.ई.एस. कॉलेज ऑफ टेक्नोलॉजी में आयोजित साइबर सिक्योरिटी हैकथॉन कवच-2023 के विजेताओं के पुरस्कार समारोह को संबोधित कर रहे थे। हैकथॉन का आयोजन केन्द्रीय शिक्षा एवं गृह मंत्रालय की पहल पर किया गया था। राज्यपाल ने प्रतियोगिता के विजेताओं के साथ आई.ई.एस. विद्यालय और विश्वविद्यालय के प्रतिभाशाली विद्यार्थियों को पुरस्कृत किया।

    राज्यपाल श्री मंगुभाई पटेल ने कहा कि हार से सीखने वाले ही भविष्य के विजेता होते है। प्रतियोगिता में सहभागिता की सार्थकता परिणामों में नहीं, प्राप्त ज्ञान, अनुभव और कौशल के प्रसार में है। उन्होंने कहा कि नवीन तकनीक के लाभ और हानि दोनों पक्ष होते है। शिक्षित युवाओं की जिम्मेदारी है कि वह अपनी प्रतिभा और ज्ञान से आधुनिक तकनीक के लाभ को समाज के वंचित वर्गों तक पहुँचाएं। तकनीक के दुरुपयोग की हानियों से रक्षा करें। उन्होंने कहा कि यह चिंता की बात है कि समाज के शिक्षित और सक्षम वर्ग के कुछ लोग अपने सामर्थ्य का दुरुपयोग गरीब और वंचित वर्ग को सताने में करते है। अशिक्षित, गरीब और पिछड़े वंचित वर्ग के सदस्य ऐसे अपराधियों के द्वारा आर्थिक और मानसिक पीड़ा का शिकार बन जाते हैं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने युवा शक्ति की ऊर्जा और उत्साह को प्रोत्साहित करते हुए, नये अवसर उपलब्ध कराए है। अवसरों का लाभ लेकर युवा पूरे जोश और होश के साथ राष्ट्र निर्माण में सहभागी बने। उन्होंने साइबर सुरक्षा और अपराध की चुनौतियों से निपटने के प्रयासों और नवाचार के लिए युवाओं की सहभागिता के साथ आयोजन की पहल की सराहना भी की।

    मध्यप्रदेश निजी विश्वविद्यालय विनियामक आयोग के अध्यक्ष, श्री भरत शरण सिंह ने कहा कि देश का अमृत काल हमारे आजादी के संघर्ष के वीरों शहीदों से प्रेरणा लेने का काल है। आजादी के लिए उनके बिना प्रतिफल की कामना के संघर्ष और अपने कर्तव्यों के प्रति समर्पण के अनुसरण का है। उन्होंने कहा कि राष्ट्र निर्माण के लिए युवाओं को अपनी विरासत पर गर्व के साथ राष्ट्र निर्माण के लिए संकल्पित होना चाहिए। नागरिक कर्तव्यों के दायित्व बोध के साथ आगे बढ़ना चाहिए।

    आई.ई.एस. विश्वविद्यालय के कुलाधिपति इंजीनियर बी.एस.यादव ने स्वागत उद्बोधन में समूह की गतिविधियों, उपलब्धियों का उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि समूह के पूर्व छात्र-छात्राएं देश विदेश में अच्छे स्तर कार्य करने के साथ संस्थान में अध्ययनरत विद्यार्थियों का आर्थिक और शैक्षणिक सहयोग एवं मार्गदर्शन भी कर रहे है। उन्होंने हैकथॉन-2023 के आयोजन और प्रतिभागियों की ऊर्जा एवं कार्य के प्रति समर्पण की सराहना की। विश्वविद्यालय के मुख्य कार्यपालक अधिकारी श्री देवांश सिंह ने आभार प्रदर्शन किया।

    राज्यपाल श्री मंगुभाई पटेल ने कार्यक्रम का दीप प्रज्जवलन कर शुभारम्भ किया। उनका पुष्पगुच्छ, शॉल, श्रीफल भेंट कर स्वागत किया गया तथा उनका आभार ज्ञापित करते हुए स्मृति चिन्ह भेंट किया गया।

  • तिजारत बने स्कूलों में शासन की सक्रियता से मचा हड़कंप

    तिजारत बने स्कूलों में शासन की सक्रियता से मचा हड़कंप


    अगस्त का महीना हिंदुस्तान की लोकतांत्रिक व्यवस्था की उपलब्धियों के मंथन का समय होता है। विकास की हर इबारत बोध के बिना अधूरी है। ज्ञान प्रसारित करने वाले विद्यालयों को लोकतांत्रिक गिरावट ने तिजारत का अड्डा बना दिया है। सरकारी स्कूल और इसके शिक्षक छुटभैये नेताओं तक के सामने नाक रगड़ने को मजबूर हैं। मध्यप्रदेश की स्कूली शिक्षा प्रशासनिक मुखिया ने निजी हनक का इस्तेमाल करके शैक्षणिक तंत्र को सुधारने का उपाय निकाला है। स्कूल शिक्षा प्रमुख सचिव रश्मि अरुण शमी एक ऐसी अफसर हैं जो शिक्षा तंत्र को व्यवस्थित करने की कमान खुद संभालती हैं।


    भोपाल,06 अगस्त(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर) सरकार का प्रयास है कि वह शासकीय स्कूलों के माध्यम से गांव गांव तक ज्ञान का प्रकाश निशुल्क पहुंचाए । शासन के सिवाय कोई दूसरा इतना बड़ा तंत्र नहीं जो दूर दराज के गांवों तक बच्चों को प्रमाणिक शिक्षा मुहैया कराता हो। लगभग तीन दशक पहले स्कूलों में राजनैतिक आधार पर शिक्षक नियुक्त करने की परंपरा शुरु की गई थी। दिग्विजय सिंह की असफल कांग्रेसी सरकार ने पंचायती राज का शिगूफा छेड़कर सत्ता का समानांतर ढांचा खड़ा करने का प्रयास किया था। तब गुंडे मवालियों तक को पंचायतों की शिक्षा समिति में चयनित कर लिया गया था। तभी से गांव गांव तक सरकारी अमले से चंदा वसूली का खेल शुरु हो गया। लोमड़ी की दाढ़ में इंसानी रक्त की खुशबू लग जाए तो वह आदमखोर हो जाती है।


    सीधी विकासखंड की प्राथमिक शाला बुसिया टोला करवाही की शिक्षिका श्रीमती बबिता गुप्ता ने जब प्रमुख सचिव महोदया से अपनी जान की सुरक्षा करने की गुहार लगाई तो उन्होंने इसे गंभीरता से लिया। शिक्षिका की पूरी बात गौर से सुनने के बाद उन्होंने अपने अमले को मामले की जांच के निर्देश दिए हैं। प्रशासनिक जांच के अलावा उन्होंने पुलिस महकमे को भी जांच में सहयोग करने के लिए ताकीद किया है। पुलिस महकमे के तमाम आला अफसर प्रमुख सचिव महोदया को उनके पद के अलावा व्यवहार के कारण बहुत इज्जत देते हैं। उनके पतिदेव संजीव शमी मध्यप्रदेश कैडर के निर्भीक और प्रतिभाशाली आईपीएस हैं। प्रदेश के दस्यु प्रभावित इलाकों में उनका खौफ इतना ज्यादा रहा है कि डकैत गिरोह और उनकी आड़ में काम करने वाले बदमाश अपनी आपराधिक गतिविधियों से ही तौबा कर लेते हैं। उन्हें अपने कार्य का जुनून है और सूचना मिलते ही वे जूते पहिनकर घटनास्थल पर पहुंच जाते हैं। उनकी इसी पहचान की वजह से आपराधिक चरित्र के लोग खौफ खाते हैं और नहीं चाहते कि वे सीधे टकराव वाली किसी पोस्ट पर मौजूद रहें। हालांकि उनकी इसी खूबी की वजह से पुलिस महकमे में उनकी बहुत इज्जत की जाती है।उनकी इस छवि का लाभ जाने अनजाने में शिक्षा जगत को भी मिल रहा है।


    शिक्षा विभाग में प्रमुख सचिव रश्मि अरुण शमी बहुत विनम्र अधिकारी हैं लेकिन शिक्षा माफिया के लोग उनकी सक्रिय भूमिका देखकर अपनी चालबाजियां भूल जाते हैं। जब श्रीमती बबिता गुप्ता ने बताया कि वे अपने स्कूल के बच्चों को अपने वेतन में से ड्रेस खरीदकर देती हैं पढाई का सामान देती हैं इस वजह से कलेक्टर महोदय उन्हें सम्मानित भी कर चुके हैं। उन्होंने पहल करके स्कूल की दीवारों पर रंगरोगन करवाया है और बच्चों की पढ़ाई को रुचिकर बना रहीं हैं। इसके विपरीत स्कूल के षड्यंत्रकारी ने उनके फर्जी हस्ताक्षर बनाकर शाला विकास समिति के फंड में से रुपए निकाल लिए हैं और झूठी शिकायत उनके ही विरुद्ध कर रहे हैं। श्रीमती गुप्ता ने इस मामले की शिकायत सीधी पुलिस को भी की है।


    उन्होंने बताया कि उनके स्कूल के हेडमास्टर ने उन्हें और उनके बच्चों को जान से मारने की धमकी दी है। इससे वे बहुत भयभीत हैं और उन्होंने अपने स्वास्थ्य के कारणों की वजह से फिलहाल महीने भर की छुट्टी ले ली है। प्रमुख सचिव महोदया ने शिक्षिका की बात गौर से सुनी और उन्हें हरसंभव मदद दिलाने का आश्वासन देकर विदा कर दिया। इसके साथ ही उन्होंने स्कूल शिक्षा विभाग को सख्त निर्देश देकर मामले की जांच करवाने और दोषियों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं। वहीं सीधी पुलिस तक भी इस मामले की सूचना पहुंच गई है। इससे पुलिस अमला सक्रिय हो गया है। पुलिस ने कथित तौर पर धमकी देने वाले शिक्षक अंजनी गुप्ता को भी सख्त हिदायत दी है कि यदि उनके विरुद्ध शिकायत जांच में सही साबित होती है तो उनके विरुद्ध प्रकरण दर्ज कर लिया जाएगा।

    स्कूल के एक अन्य शिक्षक धीरज सिंह ने बताया कि शिक्षिका के दयालु स्वभाव की वजह से गांव के लोगों और स्थानीय प्रशासन के बीच उनकी छवि अच्छी है। जबकि उन्होंने जो शिकायतें की हैं वे कागज पर खरी साबित नहीं हो रहीं हैं। ऐसे में प्रशासन ने उन्हें लिखित पत्र देकर अपनी बात प्रमाणित करने का निर्देश दिया है। वे अपना स्पष्टीकरण दे देंगी तो बहुत सी शिकायतों को निदान हो जाएगा।


    अब तक शिक्षा विभाग में इस तरह के मामलों में फाईलों पर धीमी गति से कार्रवाई चलती रही है लेकिन प्रमुख सचिव महोदया की सक्रियता से शिक्षा विभाग की जांच गतिविधियों में पंख लग गए हैं।संकुल चौफाल जिला सीधी म.प्र. के प्रिंसिपल दोमनीक खाखा ने इस मामले में हस्तक्षेप करके प्रधानाध्यापक अंजनी कुमार गुप्ता का पक्ष लेने की कोशिश की है,जिनकी जांच चल रही है।सुदूर ग्रामीण इलाके में शासन की उपस्थिति से सीधी जिले में हड़कंप मचा है। इस समय जब प्रदेश में प्रशासनिक कसावट का दौर चल रहा है तब प्रमुख सचिव की सक्रियता और न्यायप्रियता चर्चा का विषय बन गई है।

  • फैशन जगत में बजेगा भारत के हाथकरघा वस्त्रों का डंका

    फैशन जगत में बजेगा भारत के हाथकरघा वस्त्रों का डंका


    गांव में बैठकर फ्रांस के फैशन प्रेमियों के वस्त्र बनाना भी अब संभव,होटल रैडिसन में फैशन डिजाईनरों का जमघट


    भोपाल,06 अगस्त(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)।दुनिया के किसी भी मुल्क में रहने वाले फैशन प्रेमी अब अपने नाप जोख के कपड़े भारत के हाथकरघा डिजाईनरों से बनवा सकेंगे। दुनिया भर के फैशन डिजाईनरों का मंच, विश्व डिजाईनिंग फोरम भारत के इन हाथकरघा वस्त्रों को विकसित देशों के लोगों को सरलता से उपलब्ध कराएगा । भारत सरकार के मेक इन इंडिया और वोकल फार लोकल अभियान की सफलता के बाद मंच हाथकरघा वस्त्रों की मार्केटिंग दुनिया के प्रचलित ब्रांडों के साथ करेगा । हाथकरघा कला में निपुण वस्त्र डिजाईनरों के लिए विश्व का बाजार मुहैया कराने वाले इन रचनाधर्मी लोगों ने सोमवार 7 अगस्त को भोपाल के रेडीसन होटल में फैशन शो आयोजित किया है। इसमें वर्ल्ड डिजाइनर फोरम के संस्थापक अंकुश अनामी और उड़ीसा के डिजाइनर सव्यसाची,हरप्रीत, निशा, कपिला जैसे लगभग सौ से अधिक वस्त्र डिजाईनर शामिल होंगे। गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा और सूक्ष्म एवं लघु उद्योग मंत्री ओम प्रकाश सखलेचा के हाथों से सम्मानित डिजाईनरों को पुरस्कार प्रदान किए जाएंगे। लगभग आठ साल पहले प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने राष्ट्रीय हाथकरघा दिवस मनाए जाने की घोषणा की थी तबसे देश के वस्त्रों की पूछ परख विश्व बाजार में भी बढ़ी है।


    होटल रैडिसन में सोमवार की शाम साढ़े छह बजे से शुरु होने वाला ये फैशन शो लगभग दस बजे तक चलेगा। आज पत्रकारों से चर्चा में उड़ीसा से आए फोरम के संचालकों सव्यसाची और अंकुश अनामी ने बताया कि इस अवसर पर लगाई प्रदर्शनी में हाथकरघा से बने विभिन्न वस्त्र शिल्प रखे गए हैं। पूर्ण रूप से प्राकृतिक रेशों से बने ये वस्त्र सामान्य दिनचर्या में भी पहने जा सकेंगे। इसके साथ ही माहेश्वरी, चंदेरी की साड़ियों बाघ प्रिंट के वस्त्रों, जैसे कपड़ों से बनाए वस्त्र शिल्प भी लोगों को लुभाएंगे। हाथकरघा कारीगरों की विविध धर्मी सोच को ये आयोजन तब सामने ला रहा है जब दुनिया भर में फैक्टरी में बने रेडिमेड कपड़ों की धूम मची हुई है। लोग इन ब्रांडों को अपने स्टेटस का प्रतीक मानते हैं जबकि हाथकरघे से बने खूबसूरत, सुंदर और स्वास्थ्य के लिए लाभ प्रद वस्त्रों के बारे में उन्हें कम जानकारी है।


    श्री सव्यसाची ने बताया कि कोणार्क के सूर्यमंदिर या भगवान जगन्नाथ के खूबसूरत वास्तुशिल्प बनाने वाली हमारी संस्कृति वस्त्र निर्माण में भी अनूठी है। हमारी टेक्सटाईल इंडस्ट्री विकसित हो चुकी है और हम ऐसे कीमती धागों से वस्त्र बनाते हैं जो दुनिया के फैशन मापदंडों के बीच अपनी अलग पहचान रखते हैं। उन्होंने कहा कि हाथकरघा वस्त्रों, परंपरा और कारीगरों को संबल प्रदान करने के लिए सरकार और कार्पोरेट जगत को आगे आना चाहिए। वे अपने स्टाफ या विद्यार्थियों के कपड़े भी हाथकरघा कारीगरों से डिजाईन करवा सकते हैं। हमारे वस्त्रों में कपास, गांजे के रेशों, जूट या केले जैसे प्राकृतिक रेशों से बने वस्त्र भी शामिल रहते हैं। जिस तरह हमारे भोजन में आर्गेनिक फूड की डिमांड बढ़ रही है उसी तरह हमारे कपड़े भी आर्गेनिक होते जा रहे हैं।


    वर्ल्ड डिजाइनिंग फोरम के फाउंडर और सीईओ अंकुश अनामी ने कहा कि विश्व के प्रसिद्ध ब्रांडों या हाथकरघा वस्त्रों की नकल तो नहीं रोकी जा सकती लेकिन असली कपड़ों को जिस अनुसंधान और तकनीक से बनाया जाता है उसकी नकल संभव नहीं है। उन कपडों को किसी की सिफारिश की भी जरूरत नहीं होती। ये कपड़े पहली ही नजर में मन को भा जाते हैं। हम ज्यादा संख्या वाले उपभोक्ताओं के लिए भी कपड़े बनाते हैं और व्यक्तित्व संवारने वाले बेशकीमती वस्त्र भी डिजाईन करते हैं। हमारा प्रयास है कि राज्य और देश की सरकारें हमें भरपूर अवसर दें ताकि हम लोगों को मनमोहक कपड़ों का संसार उपलब्ध कराते रहें।

  • वंचितों का उपचार सेवा भावना से करें बोले महामहिम

    वंचितों का उपचार सेवा भावना से करें बोले महामहिम


    भोपाल, 5 अगस्त(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)। राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने चिकित्सकों से आग्रह किया है कि वे सेवा भावना के साथ गरीब और वंचित वर्गों का उपचार करें। माह में कम से कम एक बार ग्रामीण, दूरस्थ अंचलों और वंचित बस्तियों में नि:शुल्क चिकित्सा सेवाएँ प्रदान करें। मनोचिकित्सक का उपचार व्यक्ति को उसके रिश्तों, कैरियर और जीवन के विभिन्न आयामों में सुधार कर उसे खुशहाल जिन्दगी देता है। उन्होंने अपेक्षा की कि संगोष्ठी मनोरोग के पीड़ित गरीब और वंचित वर्गों की सेवा भावना के साथ मदद और उपचार पथ के प्रदर्शन में सफल होगी। श्री पटेल आज नेशनल यंग सायक्याट्रिस्ट द्वारा “हैश टैग मेंटल हेल्थ” पर आयोजित दो दिवसीय कॉन्फ्रेंस को संबोधित कर रहे थे।

    राज्यपाल श्री पटेल ने कहा कि राष्ट्र और समाज की गतिविधियों का सुचारू संचालन नागरिकों की शारीरिक, मानसिक क्षमताओं के साथ सामाजिकता की सम्पूर्ण स्थिति में स्वस्थ होने पर निर्भर करता है। आज समाज के सभी क्षेत्रों और वर्गों में आत्महत्या की घटनाएँ निरंतर सुनाई दे रही है। यह तेजी से उभर रहे मानसिक स्वास्थ्य संकट का संकेत है। भारत सरकार द्वारा मानसिक रोगियों की गरिमा के साथ जीवन जीने के अधिकारों को सुनिश्चित करने, राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य नीति, मानसिक स्वास्थ्य देख भाल अधिनियम 2017 और राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत उपचार, पुनर्वास और मानसिक स्वास्थ्य संवर्धन के कार्य किए जा रहे हैं। सरकार के प्रयासों को प्रभावी बनाने के लिए मानसिक स्वास्थ्य के सम्बन्ध में जन-जागरूकता और प्राथमिक देख-भाल में सामुदायिक सहभागिता के साथ प्रयास किए जाने चाहिए। राज्यपाल ने संगठन के सभी सदस्यों से कहा कि प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, स्कूल, आंगनवाड़ी, पंचायत पदाधिकारियों, पुलिस एवं अन्य ग्राम स्तरीय कर्मचारियों, शिक्षित व्यक्तियों के संवेदीकरण के प्रयासों में आगे आएं। संगोष्ठी में आयुष एवं अन्य चिकित्सा पद्धतियों के चिकित्सकों की सहभागिता से रोग चिन्हांकन, प्राथमिक देखभाल प्रयासों की संभावनाओं की तलाश करें। उन्होंने समाज में मनोरोगों की रोकथाम और उपचार प्रयासों के लिए मनोचिकित्सकों के वैचारिक विमर्श को सराहनीय और समय की आवश्यकता बताया है।

    विशिष्ट अतिथि पद्मश्री डॉ. बी.एन. गंगाधर ने कहा कि मनोचिकित्सा के क्षेत्र में पूर्व की तुलना में आशावादी और बेहतर भविष्य का परिदृश्य बन रहा है। मनोचिकित्सा के विशेषज्ञों और विद्यार्थियों की संख्या में करीब 200 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। समाज में प्रचलित भ्रांतियों में कमी हुई है। मनोरोगों की उपचार पद्धति में योग जैसी पारंपरिक पद्धतियों के सम्मेलन से उपचार प्रबंधन बेहतर हुआ है। उन्होंने कहा कि संगोष्ठी मनोरोगी के उपचार की व्यक्ति परक उपचार प्रणाली के विकास के पथ के प्रदर्शन का मंच बनें।

    इंडियन सायक्याट्रिक सोसाइटी के अध्यक्ष डॉ. विनय कुमार ने कहा कि डिजिटल क्रांति ने जीवन के सभी क्षेत्रों में आमूलचूल परिवर्तन किए हैं। कृत्रिम बुद्धिमत्ता, डिजिटल टेक्नोलॉजी विकास के सहचर हो सकते है, मार्गदर्शक कभी नहीं बन सकते। जरूरी यह है कि तकनीक का पूर्ण चेतना के साथ उपयोग किया जाए। उन्होंने कहा कि सोसाइटी द्वारा संस्था गठन के 75वें वर्ष में युवा शक्तियों को उद्बोधित करने के लिए पहल की गई है। संगोष्ठी युवा चिकित्सकों को शिक्षित और दीक्षित करेगी।

    आयोजन समिति के अध्यक्ष डॉ. आर.एन साहू ने बताया कि संगोष्ठी में मनोचिकित्सा के क्षेत्र में आधुनिक तकनीक की संभावनाओं, सीमाओं और चुनौतियों पर चिंतन किया जाएगा। आत्महत्या, नशाखोरी जैसी समस्याओं के समाधान के प्रयासों पर शिक्षकों, अनुभवी चिकित्सकों और युवा चिकित्सकों का संवाद मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं की मजबूती में नए उत्साह और ऊर्जा का संचार करेगा।

    आयोजन समिति सचिव डॉ. समीक्षा साहू ने धन्यवाद ज्ञापन में बताया कि संगोष्ठी से अनुभवी चिकित्सकों और युवा चिकित्सकों को संवाद का मंच प्रदान करने का प्रयास किया गया है। उन्होंने संगठन के प्रतिनिधि के रूप में माह में एक बार गरीब और वंचित वर्ग को नि:शुल्क चिकित्सकीय सेवाएँ प्रदान करने का आश्वासन दिया। प्रारंभ में अतिथियों का पुष्प-गुच्छ से स्वागत कर स्मृति-चिन्ह भेंट किये गये।

  • पंच परमेश्वर यशोधरा जी की राय पर गौर कीजिए

    पंच परमेश्वर यशोधरा जी की राय पर गौर कीजिए


    तकनीकी शिक्षा और कौशल विकास मंत्री यशोधरा राजे सिंधिया ने जाने अनजाने में लोकतंत्र की एक बड़ी कमजोरी की ओर लोगों का ध्यान आकर्षित किया है। उन्होंने सिंधिया खेमें के सहयोगी मंत्री डॉ.प्रभुराम चौधरी की आईटीआई खोलने की मांग ठुकराते हुए बड़ी मार्के की बात कही है। वे चाहती तो अपने ही भतीजे के प्रिय सहयोगी की बात मान लेती और वाहवाही बटोर लेतीं, लेकिन उन्होंने जनहित को देखते हुए पंच परमेश्वर बनकर अपनी बात कह डाली। उनकी स्नेहिल फटकार ने पूरे लोकतंत्र और इसके मालिकों को चेतावनी दी है। डॉ.प्रभुराम चौधरी ने ये सोचकर प्रस्ताव रखा था कि राजे तो कृपा बरसाती हैं और वे चुनाव की बेला में एक सफलता की कहानी उन्हें भेंट कर देंगी। वे अपने क्षेत्र में कह सकेंगे कि उन्होंने जनहित में कितने सारे कार्य किए हैं। उनका प्रस्ताव शालीन था उचित था लेकिन विभागीय मंत्री यशोधरा जी ने सच का साथ दिया। वे जानती हैं कि डॉ.प्रभुराम चौधरी तो बदमिजाज डॉ.गौरीशंकर शेजवार की हर चुनौती को सामना कर चुके हैं। उनके बेटे मुदित शेजवार भी जनता की कसौटी पर फिसड्डी साबित हो चुके हैं। इसलिए आईटीआई का शिगूफा गढने की उन्हें कोई जरूरत नहीं हैं। स्वास्थ्य मंत्री रहते हुए वे भरपूर जनसेवा कर रहे हैं। आईटीआई के संस्थान आज केवल डिग्री बांटने के लिए उपयोगी रह गए हैं। जिन्हें तकनीकी शिक्षा लेकर मिस्त्री, कारपेंटर, मैकेनिक, आदि बनना होता है वे तो निजी तौर पर प्रशिक्षण प्राप्त कर लेते हैं और अपना सेवा कार्य चालू कर देते हैं। सैकड़ों यू ट्यूब चैनल बच्चों को तकनीकी ज्ञान घर बैठे प्रदान करने लगे हैं। ऐसे में आईटीआई से ज्यादा जरूरत उत्पादन के अवसरों की है। रोजगार प्रशिक्षण केन्द्रों में लगभग सारे गुर सिखाए जा रहे हैं। आसपास के जिलों में आईटीआई संस्थान पहले से चालू हैं और उनमें से कई तो उन्नत उपकरणों से भी लैस हैं। करीबी जिले भोपाल में ही तकनीकी शिक्षा के ढेरों संस्थान हैं। जिन्हें वाकई काम धंधा सीखना है वे दिखावे की डिग्री बटोरने में अपना समय थोड़ी बर्बाद करेंगे। भुनभुनाते गौरीशंकर शेजवार जब पार्टी संगठन के प्रति नाराजगी दिखाते हुए गुर्रा रहे हैं तब प्रभुराम चौधरी को ये दूर के ढोल वाली कवायद करने की कोई जरूरत नहीं है। ऐसा करते हुए यशोधरा जी ने शिवराज सरकार की चिंतन प्रक्रिया को भी झिंझोड़ दिया है। बरसों से भाजपा सरकार वही घिसी पिटी पुरानी कांग्रेस की नीति को ढो रही है जिसमें वह शैक्षणिक संस्थानों की घोषणा करती रही है,जबकि आज जरूरत शैक्षणिक ढांचे में मूलभूत सुधार करने की है। यशोधरा जी ने ठीक ही कहा कि यदि आईटीआई खोल देते हैं तो फिर वही ट्रांसफर पोस्टिंग का खेल शुरु हो जाएगा। राजधानी में निवास करने वालों के लिए वह आईटीआई समय काटने का अड्डा बन जाएगा। जहां वे जाना पसंद नहीं करेंगे पर उनका वेतन जरूर खजाने से निकलता रहेगा। दरअसल वक्त कार्पोरेट सेक्टर को अपने पैरों पर खड़ा करने का अवसर देने का है। सरकार की आर्थिक हालत खस्ता है टैक्स और अन्य साधनों से उसकी आय बढ़ी है इसके बावजूद वह सरकारी अमले का वेतन भत्ता अपनी आय से नहीं निकाल पा रही है। वेतन के लिए भी उसे इसकी टोपी उसके सिर वाली कवायद करनी पड़ती है। कर्ज जनता के सिर लदता जा रहा है। आज जब एक शिक्षक पूरे देश के बच्चों को बेहतर शिक्षा टीवी कंप्यूटर मोबाईल के माध्यम से दे सकता है तब दिखावे के संस्थान खड़े करने का कोई औचित्य नहीं है। जरूरी है कि आय के उपक्रम खड़े किए जाएं। केन्द्र सरकार का सूक्ष्म एवं लघु उद्योग मंत्रालय उद्यमियों को आत्मनिर्भर बनाने का अभियान चला रहा है। ऐसे में कांग्रेसी औद्योगिकीकरण की असफल विचारधारा को ढोना फिजूल है। आप डिग्री देंगे और युवा नौकरी पाएंगे इससे बेहतर है कि वे काम सीखें और देश के लिए पूंजी का निर्माण करें। यशोधरा जी का यह संदेश पूरे राजनेताओं को समझना होगा। खासतौर से शिवराज सरकार की पैरवी करने वाले महान चिंतकों को भी इस विषय पर गौर करना चाहिए।

  • राष्ट्रपति ज्योति मुर्मू का अभिनंदन

    राष्ट्रपति ज्योति मुर्मू का अभिनंदन

    भोपाल, 3 अगस्त(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)।राष्ट्रपति श्रीमती द्रोपदी मुर्मु को नई दिल्ली वापसी पर राजा भोज विमान तल पर राज्यपाल मंगुभाई पटेल और मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने भावभीनी विदाई दी। श्रीमती मुर्मु एक दिवसीय प्रवास पर भोपाल आई थीं।
    राष्ट्रपति श्रीमती मुर्मु को विमानतल पर राज्यपाल श्री पटेल और मुख्यमंत्री श्री चौहान ने भगवान श्री कृष्ण और राधा की अष्टधातु की प्रतिमा स्मृति-चिन्ह के रूप में भेंट की। महापौर श्रीमती मालती राय, मुख्य सचिव श्री इकबाल सिंह बैंस, पुलिस महानिदेशक श्री सुधीर सक्सेना, पुलिस कमिश्नर श्री हरिनारायण चारी मिश्रा भी उपस्थित थे। राष्ट्रपति श्रीमती मुर्मु ने भारतीय सेना के विमान से लगभग साढ़े 4 बजे दिल्ली के लिए प्रस्थान किया।

  • इस खाई को कितना भर पाएगा अंत्योदय का विचार

    इस खाई को कितना भर पाएगा अंत्योदय का विचार


    देश में राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन को दीनदयाल अंत्योदय योजना के नाम से जाना जाता है। लगभग एक दशक से ज्यादा पुरानी इस योजना का इतिहास इससे भी ज्यादा पुराना है।आजादी के बाद से सरकारें लगातार गरीबी दूर करने के कार्यक्रम चलाती रहीं हैं। इनके लिए वैश्विक कर्जदाताओं से साफ्ट लोन भी लिए जाते रहे हैं। यदि ये सभी अभियान सफल हो गए होते तो भारत काफी साल पहले विकसित देशों की सूची में शामिल होकर चहुंमुखी विकास की होड़ में शामिल हो चुका होता। अपने लंबे अनुभवों से कांग्रेस की निवृत्तमान सरकारों ने पाया कि नौकरशाही इस अभियान की राह में सबसे बड़ा रोड़ा है। गरीबी दूर करने के लिए सरकारों ने जो संसाधन भेजे वे भ्रष्ट नौकरशाही की भेंट चढ़ गए। इस समस्या से निपटने के लिए कांग्रेस ने पंचायती राज जैसा मूर्खतापूर्ण उपाय ढूंढ़ा था। जो अपनी स्थापना से लेकर कभी सफल नहीं हो सका है। दिग्विजय सिंह की सरकार ने तो पंचायती राज को इतना पावरफुल बना दिया कि गांव गांव में सरपंच,सचिवों और उनकी मंडलियों ने लूट का कोहराम मचा दिया। सत्ता से समानांतर तंत्र खड़ा कर दिए जाने से नौकरशाही खफा हो गई। जनता को तब तक ये नहीं मालूम था कि नौकरशाही और पंचायती राज में असली अपराधी कौन है। जन आक्रोश पंचायती राज के खिलाफ था तो लोग उमा भारती की जन क्रांति में शामिल हो लिए और भाजपा की मजबूत सरकार सत्ता में पहुंच गई। बाद की भाजपा सरकारों ने नौकरशाही से पंगा नहीं लिया और कहानी जस की तस चलती रही। कांग्रेस की कमलनाथ सरकार ने इंसपेक्टरराज लौटाकर नौकरशाही को सब्जबाग दिखाए थे। वह तो भाजपा के रणनीतिकारों और ज्योतिरादित्य सिंधिया की आपसी समझबूझ थी जो करप्टनाथ के षड़यंत्र का भांडा बीच राह में ही फूट गया। इस बार फिर एक बार जनता को समाधान देने में असफल नौकरशाही निशाने पर है। कमलनाथ ने जिस नौकरशाही को सत्ता में आते ही धोबी का कुतका बना दिया था वे आज उसी नौकरशाही के सामने दाना डाल रहे हैं। क्योंकि उन्हें कांग्रेस के संगठन से ज्यादा भरोसा नौकरशाही के भ्रष्टाचार की शैली पर है। हालांकि सोशल मीडिया का चहुंमुखी विकास और संचार के बेहतर साधनों के बीच इस बार कमलनाथ की नाव वहीं डगमगाने लगी है जहां से उसने अपनी यात्रा शुरु की थी। भाजपा के रणनीतिकारों ने एकात्म मानवता वाद के प्रणेता पंडित दीन दयाल उपाध्याय के अंत्योदय वाले फार्मूले को मैदान में उतार दिया है। उन्होंने भ्रष्ट नौकरशाही से तो पंगा नहीं लिया लेकिन जनता को हितग्राही मूलक योजनाओं से भरपूर लाभ पहुंचाया। उसकी लाड़ली बहना योजना ने तो रिकार्ड सफलता अर्जित की है। इस योजना के दूसरे चरण को अधिकारी ये कहकर असफल बनाने में जुटे हैं कि सरकार ने योजना का लाभ लेने के लिए घर में टै्क्टर होना अनिवार्य शर्त बना दिया है। इस तरह नौकरशाही इस योजना की राह में अड़ंगे लगा रही है। ये कहा जा रहा है कि लाड़ली बहनों को देने लायक धन आखिर सरकार लाएगी कहां से। फिर जब उसने भविष्य में तीन हजार रुपए मासिक देने का वायदा किया है तो ये धन आखिर आएगा कहां से। भाजपा ने तो नौकरशाही कोसत्ता की बागडोर थमा रखी थी लेकिन भ्रष्ट अफसरों ने अपनी बदमाशी का ठीकरा भाजपा पर ही फोड़ना शुरु कर दिया। भाजपा के नेतागण खुलकर अपनी बात नहीं कह पाए और आज वे लाड़ली बहना योजना की सफलता का भरोसा भी नहीं दिला पा रहे हैं। कांग्रेस की नकल करते और अफसरशाही पर निर्भर भाजपाईयों की स्वतंत्र चेतना विलीन सी हो गई है। वे जनता को नहीं समझा पा रहे हैं कि उनके कार्यकाल में विकास के क्या क्या प्रतिमान गढ़े गए हैं। उसने लाड़ली बहना योजना, किसान सम्मान निधि,प्रधानमंत्री आवास, युवाओं को लैपटाप जैसी योजनाओं से नौकरशाही और सत्ता के विरुद्ध विद्रोह की आंधी को लगभग रोक दिया है। हालांकि ये अभी केवल अर्धविराम है।सत्ताधीशों को ये जान लेना चाहिए कि कांग्रेस के बनाए जिस ढांचे पर भाजपा अब तक चलती रही है वह ढांचा ही आक्रोश की असली वजह है। पंडित दीनदयाल उपाध्याय ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ में कार्य करते हुए जाना कि कांग्रेस अंग्रेजों की फूट डालो राज करो की नीति पर चल रही है। ये चंद लोगों को साथ लेकर बहुसंख्यक जनता को कुचलने वाली अंग्रेजों की ही रणनीति अपनाए हुए है। तब उन्होंने वसुधैव कुटुंबकम की भावना में रचे बसे एकात्म मानवतावाद का सिद्धांत दिया। जिसमें समाज के हर व्यक्ति को परिवार का सदस्य मानकर उसे मजबूत बनाने का लक्ष्य रखा गया था। अंत्योदय इसी से उपजा विचार था जिसमें समाज के दबे कुचले पिछड़े,दलित वर्ग को साथ लेकर चलने का लक्ष्य था। शिवराज सिंह सरकार ने अपने पूरे कार्यकाल में नौकरशाही को छूट दी लेकिन अब जब चुनाव की बेला नजदीक आ गई है तब वह अंत्योदय के सहारे जनता के आक्रोश को नई दिशा में धकेलने का प्रयास कर रहे हैं। नौकरशाही ने अपनी लापरवाही, अनिच्छा, अपना घर भरने के लालच और शोषणवादी मानसिकता से जनधन की खूब लूट मचाई है। जनता शोषण से उसी तरह त्रस्त है जैसे कभी मुगलों, अंग्रेजों, जमींदारों, राजदरबारों, सूदखोरों से त्रस्त रही है,और वह लगभग विद्रोह पर उतारू है।कानून और व्यवस्था दूर के ढोल बने हुए हैं। ऐसे में लाड़ली बहना योजना जैसे कदम उसकी नाराजगी पर ठंडा पानी छिड़कने का काम कर रहे हैं।उन योजनाओं का असर भी हुआ है लेकिन कितना अभी ये कहना जल्दबाजी होगी।

  • हाईकोर्ट ने जमानत दी तो रंगदारी दिखाने लगा पास्को आरोपी

    हाईकोर्ट ने जमानत दी तो रंगदारी दिखाने लगा पास्को आरोपी


    भोपाल,2 अगस्त(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)। फर्जी साक्ष्यों से अदालत को गुमराह करके जमानत लेने वाला पास्को आरोपी प्रकाश चंद वल्द चंद्रभान गुप्ता अब अपने गुर्गों से आतंक फैलाकर पीड़िता के परिजनों को डराने का प्रयास कर रहा है। उसके गुर्गे कंप्यूटर व्यवसायियों को धमका रहे हैं कि आरोपी की पकड़ बहुत ऊंची है और जो कोई उसके काले धंधे के बारे में जान जाता है उसे जान से हाथ धोना पड़ता है। वहीं हाईकोर्ट में उसने जो फर्जी दस्तावेज पेश किए थे और अपने वकीलों से झूठी दलीलें दिलवाई थीं उनकी शिकायत पुलिस के पास पहुंच गई है और पुलिस उनकी सत्यता की जांच कर रही है।


    नाबालिग पीड़िता ने बूटकाम सिस्टम्स नाम से कंप्यूटर की दूकान चलाने वाले प्रकाश चंद गुप्ता के खिलाफ अश्लील अनाचार की शिकायत की है जिसे पुलिस ने पास्को एक्ट के अंतर्गत दर्ज किया है। जिला अदालत ने तो मामले की गंभीरता को देखते हुए गुप्ता का जमानत आवेदन खारिज कर दिया था और उसे गिरफ्तार करने के निर्देश दिए थे। इस फैसले के विरुद्ध गुप्ता हाईकोर्ट पहुंचा और उसने वकीलों की फौज के साथ फर्जी दस्तावेजों का पुलिंदा पेश करके ये जताने की कोशिश की थी कि ये प्रकरण कारोबारी लेनदेन की वजह से दर्ज कराया गया है। जबकि पीडि़ता का कहना है कि हमारे पारिवारिक संबंध होने की वजह से मैं गुप्ता के घर थी तब उसने ये वारदात की थी।


    पुलिस ने अदालत में आरोपी के विरुद्ध जो साक्ष्य प्रस्तुत किए थे उनमें उसे ठग, और चरित्रहीन बताया गया था। व्यापार की आड़ में वह सूदखोरी का कारोबार चलाता है जिसमें लोगों को जमा राशि पर ऊंची ब्याज दर का भुगतान देने का लोभ दिखाता है।पुलिस ने उन प्रकरणों की सूची भी प्रस्तुत की थी जो विभिन्न व्यापारियों की ओर से इसके विरुद्ध भोपाल, इंदौर, दिल्ली, कलकत्ता समेत देश के कई शहरों में विचाराधीन हैं। लगभग एक महीने की फरारी के बाद अपने धंधे पर वापस लौटे गुप्ता ने व्यापारियों पर दबाव बनाने के लिए और आतंक फैलाने के लिए ये दुष्प्रचार अभियान चलाया है।


    गुप्ता का एक गुर्गा राहुल जैन कंप्यूटर व्यवसायी है और वह थद्दाराम काम्प्लेक्स एमपी नगर में कंप्यूटर से जुड़ी छोटी सामग्री और इसकी दूकान से बेकार बताकर बदले गए लैपटाप बेचता है। उसने इस मामले से जुड़े लोगों को धमकाते हुए कहा कि प्रकाश गुप्ता की पहुंच बहुत लंबी है। वह अदालतों को खरीदना और उनसे खेलना जानता है। पुलिस की क्या औकात जो उसका कुछ बिगाड़ सके। वह बड़े बड़े लोगों के करोड़ों रुपए ब्याज पर चलाता है। उसका हवाला कारोबार कई शहरों में फैला है। यूपी के लालगंज में उसके परिवार की सल्तनत चलती है।वह इतना खूंखार है कि जो उसके काले धंधे को जान लेता है उसे जान से हाथ धोना पड़ता है।जिन लोगों ने प्रकाश के विरुद्ध धोखाधड़ी की शिकायत की है वे केवल चक्कर खाते रहेंगे क्योंकि वह कई जजों को उलझे प्रकरणों में करोड़ों रुपए रिश्वत दिलाता है।


    राहुल ने दो पत्रकारों को देखकर जिस तरह की डींगें हांकी उससे प्रकाश गुप्ता के काले धंधे की एक नई तस्वीर सामने आई है। प्रकाश के इस गुर्गे ने कहा कि वह कई जजों, पुलिस वालों और अपराधियों को पालकर रखता है। हाईकोर्ट ने उसे उस मामले में भी जमानत दे दी जिसे भारत सरकार ने बाकायदा कानून बनाकर संगीन माना है। गौर तलब है कि जब इस मामले की जानकारी पुलिस को लगी तो उसने हाईकोर्ट में पेश किए इसके दस्तावेजों की छानबीन शुरु कर दी है।