Category: मध्यप्रदेश

  • हृदय प्रदेश की संस्कृति दुनिया के आकर्षण का केन्द्र बनीःपर्यटन मंत्री सिंह लोधी

    हृदय प्रदेश की संस्कृति दुनिया के आकर्षण का केन्द्र बनीःपर्यटन मंत्री सिंह लोधी


    भोपाल23 दिसंबर(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)। दुनिया के नक्शे पर मध्यप्रदेश आज भारत की नई सांस्कृतिक पहचान के साथ उभर रहा है। यहां के आतिथ्य संस्कार से आकर्षित होकर प्रदेश में पर्यटकों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। राज्य सरकार इसे देखते हुए प्रदेश के तमाम धार्मिक, सांस्कृतिक और पर्यटन स्थलों पर ठहरने की आवासीय सुविधाएं बढ़ाने का प्रयास कर रही है। हमारा प्रयास है कि दुनिया भर के पर्यटक मध्यप्रदेश आएं और यहां की विकास यात्रा के सहभागी बनें।


    राजधानी के कुशाभाऊ ठाकरे इंटरनेशनल कंवेशन सेंटर में आयोजित पत्रकार वार्ता में संस्कृति मंत्री ने कहा कि भारत के विभिन्न राज्यों की संस्कृति देश के हृदय प्रदेश के कला संसार में साफ तौर पर देखी जा सकती है। हमारे प्रदेश के कलाकारों ने अपनी रचनात्मकता से दुनिया भर में प्रेम का संदेश दिया है। यही वजह है कि इस साल दुनिया भर से लगभग 14 लाख पर्यटक मध्यप्रदेश आए हैं। हमने अपने धार्मिक शहरों और पर्यटन स्थलों को आपस में जोड़ दिया है। इससे यहां आने वाले पर्यटक एक साथ सभी लक्ष्य पूरे कर लेते हैं।


    उन्होंने पिछले दो सालों में पर्यटन, संस्कृति, धार्मिक न्यास और धर्मस्व विभागों की सफलताओं का लेखा जोखा प्रेस के माध्यम से जनता के समक्ष प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा कि पत्रकारों के माध्यम से हमें जनता के जो सुझाव मिल रहे हैं हम उनके अनुसार अपने कार्यक्रमों में फेरबदल कर रहे हैं। हमारा प्रयास है कि वैश्विक संवाद के इस महा अभियान में आम जनता की सीधी भागीदारी हो। उज्जैन में होने वाले सिंहस्थ महाकुंभ की तैयारियों को लेकर भी उन्होंने कई जानकारियां दीं। उन्होंने बताया कि हम चारों दिशाओं में फोरलेन सड़कों के साथ ठहरने के सुविधायुक्त आवास भी बढ़ा रहे हैं। इससे दुनिया भर से आने वाले श्रद्धालुओं को एक आत्मिक संतुष्टि मिल पाएगी।

  • मंत्रिपरिषद ने कहा किसानों को मिलेंगे ज्यादा पावर के पंप

    मंत्रिपरिषद ने कहा किसानों को मिलेंगे ज्यादा पावर के पंप


    भोपाल,22 दिसंबर(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में मंत्रि-परिषद की बैठक मंगलवार को मंत्रालय में सम्पन्न हुई। मंत्रि-परिषद द्वारा प्रधानमंत्री कृषक मित्र सूर्य योजना में सिंचाई के लिये सोलर पम्प स्थापना की योजना में संशोधन की स्वीकृति प्रदान की गयी है। संशोधन अनुसार कृषकों को स्वीकृत सोलर पम्प स्थापना क्षमता से एक क्षमता अधिक तक का विकल्प प्रदाय किया जायेगा। अब 3 एच.पी. के अस्थाई विद्युत कनेक्शनधारियों को 5 एच.पी. और 5 एच.पी. के अस्थाई विद्युत कनेक्शनधारियों को 7.5 एच.पी. का सोलर पंप प्रदाय करने का विकल्प दिया जाएगा।


    योजना के प्रथम चरण में अस्थायी विद्युत कनेक्शन संयोजन वाले किसानों अथवा अविद्युतीकृत किसानों को सोलर पम्प का लाभ दिया जाएगा। योजना अनुसार 7.5 एचपी क्षमता तक का सोलर पम्प पम्प लगाने के लिए अस्थाई विद्युत कनेक्शन धारी कृषक का अंश 10% रहेगा। शासन द्वारा 90% की सब्सिडी दी जाएगी।


    उल्लेखनीय है कि भारत सरकार की कुसुम-ब योजना को प्रदेश में “प्रधानमंत्री कृषक मित्र सूर्य योजना” नाम से 24 जनवरी 2025 से लागू किया गया है। इसका क्रियान्वयन राज्य में मध्यप्रदेश ऊर्जा विकास निगम द्वारा किया जा रहा है। इस निर्णय से सोलर पंप की स्थापना से विद्युत पंपों को विद्युत प्रदाय के लिए राज्य सरकार पर अनुदान के भार को सीमित किया जा सकेगा एवं विद्युत वितरण कम्पनियों की वितरण हानियों को कम किया जा सकेगा।

  • गाय अब निबंध नहीं जीवन का अंग बनेगीःराव उदय प्रताप सिंह

    गाय अब निबंध नहीं जीवन का अंग बनेगीःराव उदय प्रताप सिंह

    भोपाल 22 दिसंबर(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)। मध्य प्रदेश में स्कूल शिक्षा विभाग प्रायोगिक रूप से राजगढ़ और नरसिंहपुर में आदिशंकराचार्य गुरुकुलम शुरू करने जा रहा है। इन गुरुकुलों में वेद, योग, संस्कृत के साथ गाय को लेकर भी पाठ्यक्रम शामिल रहेंगे।उन्होंने कहा कि अब तक बच्चों को स्कूलों में गाय पर निबंध लिखना सिखाया जाता था पर अब हम उसे दैनंदिनी जीवन का हिस्सा बनाने जा रहे हैं।


    स्कूल शिक्षा मंत्री राव उदय प्रताप सिंह ने स्कूल शिक्षा विभाग और परिवहन विभाग का दो साल का रिपोर्ट कार्ड पेश करते हुए बताया कि हम गाय के बारे में बच्चों को पढ़ाएंगे ताकि नई पीढ़ी गाय के महत्व को आसानी से समझ पाए। उन्होंने कहा कि वैज्ञानिक तौर पर ये बात साबित हो चुकी है कि गाय से हमें सकारात्मक ऊर्जा मिलती है। गाय से निरोग रहने के लिए वातावरण मिलता है. गाय को लेकर दूसरे देशों में भी रिसर्च किए जा रहे हैं।


    राव उदय प्रताप सिंह ने बताया “मध्य प्रदेश में 30 हजार से ज्यादा शिक्षकों के खाली पद भरे जाएंगे. इसके अलावा पहली बार ये भी हुआ है कि पात्र शिक्षकों को प्रमोट किया गया है. पहली बार ही 20 हजार से अधिक अतिशेष शिक्षकों का तबादला ऐसे विद्यालयों में किया गया है जहां टीचर्स की कमी है. अब स्कूलों में हाईटेक अटेंडेंस हो रही है, जिसमें करीब 80 प्रतिशत नियमित और 96 फीसदी अतिथि शिक्षकों की जियो टैग एप से हाजिरी दर्ज की जा रही है।


    मंत्री राव उदय प्रताप सिंह ने कहा “राइट टू एजुकेशन के तहत सबसे महत्वपूर्ण काम है कि बच्चों को समय से सिलेबस मिले और सरकार उन्हें किताबें उपलब्ध कराए. किताबें अगर समय पर नहीं मिलती तो बच्चों की पढ़ाई प्रभावित होती है. पिछले वर्ष हमने 100 फीसदी जिन बच्चों को मुफ्त में मिलना चाहिए, हम स्कूल में भेजने में कामयाब रहे. इस साल हम एक कदम और आगे जा रहे हैं. हम विकास खंड स्तर पर बुक फेयर लगाएंगे. बच्चे शासन स्तर पर न्यूनतम दरों पर पुस्तकें खरीद सकते हैं.”


    स्कूल शिक्षा मंत्री राव उदय प्रताप सिंह ने बताया “मध्य प्रदेश में 8 वीं कक्षा तक 86 प्रतिशत बच्चे स्कूलिंग नियमित रख पा रहे हैं. 10वीं तक के बच्चों के प्रतिशत में थोड़ी गिरावट के साथ ये आंकड़ा 54 फीसदी है. वहीं 12वीं तक पहुंच पाने वाले छात्रों की संख्या घटकर 32 प्रतिशत ही रह जाती है. बीते 3 वर्षों में सभी कक्षाओं में ड्रॉपआउट दर में कमी आई है. वर्ष 2024-25 में प्रथामिक स्तर पर ड्रॉपआउट दर 6.8 प्रतिशत से घटकर शून्य हो गई है.”


    स्कूल शिक्षा मंत्री राव उदय प्रताप सिंह ने बताया “पहली कक्षा में पिछले साल के मुकाबले में 19 फीसदी की बढ़ोत्तरी हुई है. इसी तरह से नौवीं से 12वीं में इनरोलमेंट करीब 4 फीसदी बढ़ा है. समग्र आईडी के जरिए 90 फीसदी बच्चों की ट्रैकिंग पूर्ण कर ली गई है. जिसमें 6-14 वर्ष के विद्यालय से बाहर के बच्चों को विद्यालय में प्रवेश दिया जा रहा है.”


    एक सवाल के जवाब में मंत्री राव उदय प्रताप सिंह ने बताया “मौजूदा स्थिति में प्रदेश के 3367 विद्यालयों में व्यावसायिक शिक्षा दी जा रही है. जिनमें 17 ट्रेड और 42 जॉब रोल का प्रशिक्षण दिया जा रहा है. बीते दो वर्षों से 690 विद्यालयों में कृषि ट्रेड भी शुरू किया गया है.”
    मंत्री ने कहा कि शिक्षा विभाग में कई चुनौतियां हैं, लेकिन बच्चों को बेहतर शिक्षा देने के लिए लगातार काम किया जा रहा है। हर साल अप्रैल में प्रवेश उत्सव मनाया जा रहा है, जिससे स्कूलों में नामांकन बढ़ा है। इस साल 100 फीसदी किताबें समय पर स्कूलों तक पहुंचाई गईं।


    उन्होंने बताया कि कक्षा 1 में नामांकन पिछले साल की तुलना में 19.6 फीसदी बढ़ा है, जबकि सरकारी स्कूलों में यह बढ़ोतरी 32.4 फीसदी रही। कक्षा 9 से 12 तक के नामांकन में भी 4 फीसदी की वृद्धि हुई है। पिछले तीन सालों में सभी कक्षाओं में ड्रॉपआउट कम हुआ है और साल 2024–25 में ड्रॉपआउट दर घटकर शून्य हो गई।


    मंत्री ने बताया कि अब हर विकासखंड में बुक फेयर लगाया जाएगा। इसमें सरकारी और निजी स्कूलों के बच्चे कम कीमत पर किताबें खरीद सकेंगे। प्रदेश में 30,281 शिक्षकों की भर्ती प्रक्रिया चल रही है। 275 संदीपनी और 799 पीएमश्री स्कूलों को राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत मॉडल स्कूल के रूप में विकसित किया जा रहा है। डिजिटल शिक्षा पर भी विशेष फोकस किया जा रहा है। 3,367 स्कूलों में व्यवसायिक शिक्षा शुरू की जा चुकी है। आने वाले तीन सालों में स्कूलों में सीटें बढ़ाने, स्कूल का समय कम करने और आईसीटी लैब स्थापित करने की योजना है।


    राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत मालवी, बुंदेलखंडी और निमाड़ी जैसी स्थानीय भाषाओं में किताबें बच्चों को उपलब्ध कराई जाएंगी। इसके अलावा राजगढ़ और नरसिंहपुर में आदि शंकराचार्य गुरुकुल बनाया जाएगा, जहां वेद और योग की शिक्षा दी जाएगी। भोपाल में शिक्षा विभाग की एक बहुमंजिला इमारत भी बनाई जाएगी।


    मंत्री ने बताया कि कक्षा 1 से 8 तक 86 फीसदी, कक्षा 1 से 10 तक 54 फीसदी और कक्षा 1 से 12 तक 32 फीसदी बच्चे नियमित रूप से पढ़ाई कर रहे हैं। ड्रॉपआउट रोकने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं।
    इस मौके पर स्कूल शिक्षा विभाग के सचिव डॉ. संजय गोयल, परिवहन विभाग के सचिव श्री मनीष सिंह, परिवहन आयुक्त श्री विवेक शर्मा, संचालक राज्य शिक्षा केन्द्र श्री हरजिंदर सिंह एवं विभागीय अधिकारी भी मौजूद थे।

  • ट्रांसपोर्टरों से वसूला चंदा बांटते तो आलोचना न होतीःराव उदय प्रताप सिंह

    ट्रांसपोर्टरों से वसूला चंदा बांटते तो आलोचना न होतीःराव उदय प्रताप सिंह


    राव उदयप्रताप सिंह ने गिनाई परिवहन विभाग की दो साल की उपलब्धियां


    भोपाल 22 दिसंबर(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)। परिवहन मंत्री राव उदय प्रताप सिंह ने भरी पत्रकार वार्ता में स्वीकार किया कि यदि परिवहन माफिया की अवैध वसूली की राशि हम बांटते रहते तो हमारे विभाग की आलोचना नहीं हो रही होती। हमने परिवहन नाके बंद करके जो जांच चौकियां स्थापित की हैं उनसे टैक्स चोरी का गैरकानूनी माल ढोने वालों में हड़कंप मचा हुआ है। अच्छा कारोबार करने वाले ट्रांसपोर्टरों को परेशान करने वाले अधिकारियों कर्मचारियों के खिलाफ भी कड़ी कार्रवाई की गई है। परिवहन सुधार के कई अन्य कार्यक्रम भी लगातार जारी रहेंगे।


    कुशाभाऊ ठाकरे सभागृह में आयोजित इस पत्रकार वार्ता में प्रदेश की परिवहन व्यवस्था को लेकर कई तीखे सवाल किए गए । इन सवालों से बचने के लिए मंत्रीजी ने शिक्षा विभाग के कार्यकलापों पर अधिक समय दिया और ट्रांसपोर्ट विभाग की बखिया उधेड़े जाने से बचने का पूरा जतन किया। परिवहन विभाग को लेकर मंत्री ने कहा कि जनवरी से आम जनता को सार्वजनिक परिवहन सेवा का लाभ मिलेगा। वाहन और सारथी पोर्टल पर कई सेवाएं उपलब्ध कराई गई हैं। ई-ड्राइविंग लाइसेंस की सुविधा शुरू की गई है और एमपी ऑनलाइन सेंटरों को सुविधा केंद्र के रूप में मान्यता दी गई है। इलेक्ट्रिक वाहनों पर टैक्स पूरी तरह माफ किया गया है और पुराने वाहनों को स्क्रैप कराने पर टैक्स में छूट दी जा रही है। ग्वालियर, इंदौर, भोपाल, जबलपुर, सतना, सिंगरौली, उज्जैन और देवास में ऑटोमेटिक टेस्टिंग स्टेशन स्थापित किए गए हैं।


    मंत्री ने बताया कि 1 जुलाई 2024 से चेकपोस्ट बंद हैं और चलित व्यवस्था के तहत काम हो रहा है। डेढ़ साल में करीब 6 फीसदी कर्मचारियों पर कार्रवाई की गई है। आरटीओ दलालों को लेकर उन्होंने कहा कि सभी सेवाएं ऑनलाइन हैं, जनता को दलालों के चक्कर में नहीं पड़ना चाहिए।

  • उपभोक्ताओं से मनमाना शुल्क वसूलने पर ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर की कान खिंचाई

    उपभोक्ताओं से मनमाना शुल्क वसूलने पर ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर की कान खिंचाई


    भोपाल, 21 दिसंबर(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)। ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर आज सरकार के दो साल पूरे होने पर उपलब्धियां गिनाने पहुंचे तो पत्रकारों ने बिजली बिलों में वसूले जाने वाले अनाप शनाप अधिभारों को लेकर उनकी खिंचाई कर दी। पत्रकारों ने उनसे पूछा कि बिजली सुधारों के नाम पर जब ऊर्जा विभाग ने हजारों करोड़ रुपयों का कर्ज लिया है तो फिर उपभोक्ताओं से ये अतिरिक्त शुल्क की वसूली क्यों की जा रही है। बिजली मंत्री ने अपनी सफाई देते हुए कहा कि बिजली की मांग बढ़ती जा रही है पर बिजली कंपनियां बिना कटौती बिजली सप्लाई करके देश में मिसाल कायम कर रहीं हैं। स्मार्टमीटर, सब्सिडी और कर्मचारियों की भर्ती करके व्यवस्था में सुधार किया गया है।


    मध्य प्रदेश सरकार में ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर ने कहा कि अभी 12 दिसंबर को 19,113 मेगावाट की बिजली मांग भी हमने बिना किसी कटौती के पूरी की है। इसके लिए सरकार ने ऊर्जा क्षेत्र में लगातार सुधार किए हैं और बिजली प्रबंधन मजबूत किया है।खेती के लिए अनियमित बिजली सप्लाई के मुद्दे पर श्री तोमर कोई स्पष्टीकरण नहीं दे पाए।


    उन्होंने बताया कि हम 25,081 मेगावाट बिजली खरीदने का अनुबंध करके बिजली की सप्लाई लगातार बनाए हुए हैं। यही वजह है कि मध्यप्रदेश सरप्लस बिजली वाला राज्य बन गया है। उन्होंने कहा कि वर्ष 2011 के बाद बिजली कंपनियों में नियमित भर्तियां नहीं हो रहीं हैं इससे हमें अपनी सेवाओं को किराए पर लेना पड़ता है। उन्होंने बताया कि अक्षमता की शिकायतें मिलने के बाद मंत्री परिषद ने बिजली कंपनियों में 50 हजार से अधिक नियमित पदों पर भर्ती को मंजूरी दी है।


    प्रद्युम्न सिंह तोमर ने स्मार्ट मीटर को उपभोक्ताओं के लिए उपयोगी बताया। उन्होंने कहा कि इनके माध्यम से समय पर और सही बिल उपलब्ध कराए जा रहे हैं। वितरण केन्द्रों के प्रभारी अधिकारी प्रतिदिन पांच उपभोक्ताओं से फोन पर सीधे संवाद कर रहे हैं। स्मार्ट मीटर के जरिए सुबह 9 बजे से शाम 5 बजे तक मिलने वाली सस्ती बिजली का लाभ उपभोक्ताओं को दिया जा रहा है। इस अवधि में की गई खपत पर 20 प्रतिशत तक की छूट दी जा रही है।


    ऊर्जा मंत्री ने दावा किया कि सरकार अलग अलग श्रेणियों के उपभोक्ताओं को बड़ी मात्रा में बिजली सब्सिडी दे रही है। हर माह करीब एक करोड़ घरेलू उपभोक्ताओं से पहले 100 यूनिट बिजली के लिए केवल 100 रुपये लिए जा रहे हैं। किसानों को देय राशि का मात्र 7 प्रतिशत भुगतान दो किस्तों में करना होता है. अनुसूचित जाति और जनजाति वर्ग के एक हेक्टेयर तक भूमि वाले और पांच एचपी पंपधारक किसानों को मुफ्त बिजली दी जा रही है। उनसे जब पूछा गया कि पांच हार्स पावर के पंप धारकों से आठ हार्स पावर का बिल क्यों वसूला जा रहा है तो उन्होंने कहा कि ऐसे मामले सामने आने पर हम कार्रवाई करेंगे।


    उन्होंने बताया कि घरेलू और कृषि उपभोक्ताओं को हर साल करीब 26 हजार करोड़ रुपये की सब्सिडी दी जा रही है। उद्योगों को भी रियायती दरों पर बिजली उपलब्ध कराई जा रही है। इससे सरकार को हर साल लगभग 2,000 करोड़ रुपये अतिरिक्त खर्च करना पड़ते हैं। उन्होंने कहा कि उद्योग और कई सरकारी प्रतिष्ठान तक समय पर बिजली का भुगतान नहीं करते इसलिए हमारी उधारी बढ़कर ग्यारह हजार करोड़ रुपए से अधिक हो गई है। इसकी भरपाई ऊर्जा विभाग को ही करनी पड़ती है।


    इस मौके पर विभाग के सचिव विशेष गढ़पाले, वित्तीय सलाहकार रंजीत सिंह चौहान,और अन्य प्रमुख अधिकारी भी उपस्थित थे।

  • नीतिश के हिजाब उठाने पर हंगामा क्यों

    नीतिश के हिजाब उठाने पर हंगामा क्यों


    बिहार के मुख्यमंत्री नीतिश कुमार ने जब यूनानी चिकित्सा की डॉक्टर नुसरत परवीन का हिजाब उठाकर उसकी आंखों की चमक देखने का प्रयास किया तो कट्टर पंथियोंऔर नीतिश विरोधियों ने अपनी ओछी राजनीति शुरु कर दी। इस घटनाक्रम को नीतिश विरोधियों ने महिला और इस्लाम का अपमान बताना शुरु कर दिया । इस शोरगुल से घबराई नुसरत अब सरकारी नौकरी ज्वाईन करने को तैयार हो गई है। नीतिश ने कभी नरक बन चुके बिहार को तेजी से विकसित और आत्मनिर्भर हो रहे प्रांत में बदलने का भगीरथ किया है। दंगे,लूट और अराजकता के दौर में जा चुके बिहार की गाड़ी को पटरी पर लाना कभी लगभग असंभव माना जाता रहा है। ऐसे में बिहार की तरुणाई की आंखों में विकास को लेकर जो संकल्प और दृढ़ विश्वास पनपा है वह अद्भुत है। युवाओं के मुस्कुराते चेहरे आज बिहार के नव सूर्योदय की झलक दिखाते हैं। कोई शिल्पकार अनगढ़ पत्थर को तराशकर उसमें मूर्ति का सौंदर्य उभारता है तो वह बार बार हर कोण से उसकी मुस्कान को उभारने का प्रयास करता है । नीतिश कुमार भी कुछ इसी तरह बिहार के नागरिकों के चेहरों पर मुस्कान लाने का प्रयास कर रहे हैं। उम्र के 74 वें पड़ाव पर वे आश्वस्त होना चाहते हैं कि बिहार के युवाओं की आंखों में आगे बढ़ने के कैसे स्वप्न पल रहे है।उनकी राजनीतिक पारी का लंबा इतिहास रहा है। उस यात्रा में नुसरत जैसी न जाने कितनी नारियां उनके साथ कदम मिलाकर चलती रहीं हैं। इतने लंबे इतिहास में कभी नीतिश कुमार को अय्याश या चरित्र हीन व्यक्ति नहीं माना गया है। वे एक संवेदनशील राजनेता हैं जो अपने राज्य की बेहतरी के लिए दुर्दांत माफिया से भी टकराता रहा है। बिहार के आपराधिक गिरोह जिस तरह संसाधनों को लूटते रहे हैं और वहां की तरुणाई मजबूर होकर अन्य राज्यों व दूर देशों में काम करने को मजबूर की जाती रही हो वहां एक युवती वो भी मुस्लिम समाज के बीच से निकलकर डाक्टर बनने जा रही हो ये सुखद आश्चर्य से कम नहीं है। उसकी आंखों की चमक देखने का प्रयास करने वाले नीतिश कुमार अकेले व्यक्ति नहीं हैं । जिन चयनकर्ताओं ने उसे एक बड़ी सामाजिक जिम्मेदारी के लिए चुना वे भी उसकी योग्यता और सामाजिक समर्पण के कायल थे तभी तो उन्होंने उसे नौकरी के लिए चुना। ये नियुक्ति नीतिश कुमार के निर्देश पर नहीं हुई थी। जाहिर है कि उस क्षण को जिसे नीतिश कुमार भाव विभोर होकर देखने का प्रयास कर रहे थे उसे पूरी दुनिया में रह रहे बिहारी भी प्रसन्न भाव से देख रहे हैं। केवल कुछ कट्टरपंथी और विरोधी इस पर बखेड़ा खड़ा करने की कोशिश कर रहे हैं। जिन्होंने इतिहास पढ़ा है उन्होंने अंग्रेजों, मुगलों, जमींदारों, छुटभैये राजाओं की वे कहानियां खूब पढ़ी हैं जिनमें वे राज्य की नवयुवतियों को अपनी सेज पर ले जाने का कुकर्म करते देखे गए थे। इन्हीं बैचैनियों से निकलकर लोकतांत्रिक व्यवस्था ने जन्म लिया। आज कोई भी शासक या राजा ऐसी जुर्रत भी नहीं कर सकता है। नुसरत की उम्र तो उनके नाती पोतियों के बराबर है।वे सार्वजनिक स्थल पर उसके साथ अश्लील व्यवहार करने की सोच भी कैसे सकते हैं। वे जिस प्रशंसा भरे भाव से नुसरत को देख रहे थे वह दृश्य न केवल बिहार की आगे बढ़ती एक लड़की की कहानी सुनाता है बल्कि भारत के मुसलमानों की आगे बढ़ती नई पीढ़ी का दृष्टांत भी देता है। मुस्लिम वोटरों के जो ठेकेदार बरसों से भाजपा और उसके सहयोगी गैर कांग्रेसी राजनीतिक दलों को मुस्लिम विरोधी बताते रहे हैं वे इस घटनाक्रम से जरूर बैचेन घूम रहे हैं। उन्हें भय है कि यदि भारत के मुसलमानों की नई पीढ़ी के बीच से हिंदुत्व वादी राजनीति को मुस्लिम विरोधी बताने वाला नेरेटिव टूट गया तो वे कभी सत्ता का ख्वाब भी नहीं देख पाएंगे। जिस तरह हिंदू मुस्लिम और जातिगत व भाषाई राजनीति करके उन्होंने भारतीय समाज में फूट के बीज बोए थे वह षड़यंत्र धराशायी हो जाएगा। इसीलिए वे तरह तरह के दुष्प्रचार करके समाज को भ्रमित करने का प्रयास कर रहे हैं। ये अच्छा है कि नुसरत ने उनके बहकावे में न आकर अपने पैरों पर खड़े होकर चिकित्सा के माध्यम से समाजसेवा का निर्णय लिया है वह प्रशंसनीय है और स्वागत करने योग्य है। नुसरत के समान देश के सभी युवाओं को संकरे पैमानों से बाहर आकर विकास यात्रा का सहयात्री बनना है,तभी हम एक नए भारत का स्वप्न साकार कर पाएंगे।

  • अब गांवों में जी राम जी से आएगी खुशहालीःप्रह्लाद पटेल

    अब गांवों में जी राम जी से आएगी खुशहालीःप्रह्लाद पटेल


    भोपाल, 19 दिसंबर(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)। पंचायत एवं ग्रामीण विकास तथा श्रम मंत्री श्री प्रह्लाद सिंह पटेल ने आज पत्रकारों को बताया कि भारत सरकार के ग्रामीण विकास मंत्रालय की पहल पर ‘विकसित भारत-रोज़गार और आजीविका मिशन (ग्रामीण) विधेयक, 2025’ या VB-G RAM G (Viksit Bharat – Guarantee For Rozgar and Ajeevika Mission (Gramin)) के नाम से जो योजना शुरु की गई है वह बेरोजगारी दूर करने में मील का पत्थर साबित होगी।

    इसी तरह प्रधानमंत्री जनमन योजना अब दूर दराज की बस्तियों को भी मुख्य धारा से जोड़ने का कारगर उपाय बनने जा रही है। राजधानी के मिंटो हाल में आयोजित पत्रकार वार्ता में उन्होंने विभाग की दो वर्ष की उपलब्धियों से मीडिया को अवगत कराया। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में प्रदेश सरकार ने ग्रामीण क्षेत्र के विकास के लिए सकारात्मक दृष्टिकोण के साथ उल्लेखनीय उपलब्धियाँ अर्जित की है। मध्य प्रदेश में श्रमिकों के हित में भी अनेक उल्लेखनीय कार्य हुए हैं।भारत सरकार ने श्रमिकों को रोजगार दिलाने के लिए जो जी राम जी योजना लागू की है वह अब गांवों में खुशहाली लाने का प्रवेश द्वार साबित होगी।


    प्रसन्नता का विषय है कि भारत की संसद ने विकसित भारत-रोज़गार और आजीविका मिशन (ग्रामीण) विधेयक, 2025 (विकसित भारत- जी राम जी विधेयक, 2025) को पारित किया है। यह विधेयक मनरेगा में व्यापक वैधानिक बदलाव का प्रतिनिधित्व करता है, जो ग्रामीण रोज़गार को विकसित भारत 2047 के दीर्घकालिक विजन के साथ संयोजित करेगा तथा जवाबदेही, बुनियादी ढांचे के परिणामों और आय सुरक्षा को सुदृढ़ करेगा।गांव के विकास के बिना प्रदेश और राष्ट्र के विकास की कल्पना नहीं की जा सकती। हमारा सौभाग्य है कि देश के यशस्वी प्रधानमंत्री माननीय श्री नरेंद्र मोदी जी की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में ग्राम विकास है। उनकी भावनाओं को दृष्टिगत रखते हुए प्रदेश सरकार के मुखिया डॉक्टर मोहन यादव जी के नेतृत्व में हमारी सरकार ग्रामीण क्षेत्र के विकास हेतु सकारात्मक दृष्टिकोण के साथ कार्य कर रही है। यह मेरा सौभाग्य है कि मुझे पंचायत एवं ग्रामीण विकास तथा श्रम विभाग का उत्तरदायित्व मिला है। हमारी सरकार ने विगत दो वर्षों में जो कार्य किए हैं उनकी जानकारी इस प्रकार है :-
    विशेष उल्लेखनीय बिंदु
    तीनों स्तर की पंचायतों के कार्यालय भवनों हेतु स्वीकृतियां प्रदान कीं तथा उनकी डिजाइन में परिवर्तन भी किया ताकि भविष्य में उनके ऊपरी मंजिलों का भी निर्माण किया जा सके।
    2472 अटल ग्राम सेवा सदनों (ग्राम पंचायत भवनों) के निर्माण हेतु 922.20 करोड़ की राशि स्वीकृत की।
    106 अटल सुशासन भवनों (जनपद पंचायत भवनों) के निर्माण हेतु 557.08 करोड़ की राशि स्वीकृत की।
    05 अटल जिला सुशासन भवनों (जिला पंचायत भवनों) के निर्माण हेतु 49.98 करोड़ की राशि स्वीकृत की।
    जीवनदायिनी माँ नर्मदा के परिक्रमा पथ को सुगम बनाना हमारी सरकार की प्राथमिकता में है। इस हेतु आश्रय स्थलों के निर्माण हेतु 231 स्थल चिन्हित किए गए हैं। इन स्थलों पर प्रथम चरण में पौधारोपण कार्य हेतु फेंसिंग के लिए 4.13 करोड़ रुपए की राशि स्वीकृत की गई है। 19 स्थलों पर आश्रय स्थलों एवं यात्री प्रतिक्षालय के निर्माण हेतु 10.5 करोड रुपए की राशि स्वीकृत की गई है। इन आश्रय स्थलों का निर्माण पर्यटन विकास विभाग के माध्यम से प्रारंभ भी हो चुका है।
    नदियों एवं जलवायु का संरक्षण हम सभी की सामूहिक चिंता का विषय है। मैंने प्रदेश की 106 नदियों के उद्गम स्थलों तक की यात्रा की है। हमारी सरकार इन उद्गम स्थलों को संरक्षित एवं संवर्धित करने का प्रयास कर रही है। हमने 89 नदियों के उद्गम स्थलों पर पौधरोपण कार्य हेतु फेंसिंग के लिए 2.92 करोड रुपए की राशि स्वीकृत की है।
    प्रदेश के पुराऐतिहासिक स्थलों का संरक्षण भी हमारी सरकार की प्राथमिकता में है। हमने तामिया एवं भीमबेटिका क्षेत्र के विकास हेतु मध्य प्रदेश पर्यटन विकास निगम को 2 करोड रुपए की राशि स्वीकृत की है।
    प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों में श्मशान घाटों को सुव्यवस्थित करने का निर्णय हमारी सरकार ने लिया है। इसके लिए दिसंबर, 2026 तक की समय सीमा भी तय की है। इस अवधि में सभी श्मशान घाटों को अतिक्रमण मुक्त करवाकर फेंसिंग उपरांत उनमें पौधरोपण करना तथा उन्हें मुख्य सड़क से एप्रोच रोड बनाकर जोड़ने का कार्य इस अवधि में किया जाएगा।
    प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना में प्रदेश ने उल्लेखनीय कार्य किया है इसके प्रथम चरण में 72975 किलोमीटर लंबाई की 18948 सड़कों का निर्माण किया गया द्वितीय चरण में 4891 किलोमीटर की 373 सड़कों का निर्माण हुआ तथा तीसरे चरण में 11886 किलोमीटर की 984 सड़कों का निर्माण किया गया। विगत दो वर्षों में इन तीनों चरणों में 913 किलोमीटर लंबाई की सड़क तथा 305 फूलों का निर्माण किया गया है।
    आरसीपीएलडब्ल्यूईए अंतर्गत 18 अप्रैल 107 किलोमीटर लंबाई की सड़कों का निर्माण हुआ है।
    प्रधानमंत्री जनमन योजना अंतर्गत 1033 संपर्क विहीन बस्तियों हेतु 2218 किलोमीटर सड़क स्वीकृत की गई हैं।
    प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के चौथे चरण हेतु 10602 बस हटे चिन्ह अंकित की गई है जिनके लिए 1849 किलोमीटर की स्वीकृति प्रक्रियाधीन है।
    रोजगार गांरटी योजना :-
    कार्यों के स्थल चयन हेतु वैज्ञानिक आधार पर करने हेतु SIPRI सॉफ्टवेयर विकसित
    जल गंगा संवर्धन अभियान 2025 में SIPRI सॉफ्टवेयर से समस्त कार्यों (जैसे खेत तालाब, कूप रिचार्ज, अमृत सरोवर इत्यादि) के उपयुक्त स्थल का चयन
    वर्ष 2025-26 में कुल स्वीकृत लेबर बजट (मानव दिवस) : 1500 लाख, कुल सृजित : 1404 लाख (94%)
    वर्ष 2024-25 में कुल स्वीकृत लेबर बजट (मानव दिवस) : 2000 लाख, कुल सृजित : 1897 लाख (95%)
    राष्ट्रीय स्तर पर वर्ष 2025-26 में अनुसूचित जनजाति परिवारों को रोजगार देने में मध्यप्रदेश प्रथम स्थान पर
    कैच द रेन अभियान (जल संचय, जन भागीदारी- अप्रैल 2024 से मई 2025) – देश में मध्यप्रदेश को चतुर्थ स्थान एवं खंडवा जिले को प्रथम पुरुस्कार प्राप्त
    एक बगिया माँ के नाम परियोजना अंतर्गत रु 750 करोड़ की लागत से 31,142 कार्य लिए गए।
    माँ नर्मदा परिक्रमा पथ पर चिन्हित आश्रय स्थल के में 138 परिसरों में पौधरोपण कार्य।
    जल गंगा संवर्धन अभियान 2025 अंतर्गत, रु 3000 करोड़ के कार्य लिए गए
    खेत तालाब – 86,360 लागत रु 2048 करोड़
    कूप रिचार्ज – 1,05,203 लागत रु 263 करोड़
    अमृत सरोवर – 536, लागत रु 138 करोड़
    पूर्व वर्षों के प्रगतिरत 24,358 कार्यों की पूर्णता
    जल गंगा संवर्धन अभियान 2024 अंतर्गत रु. 1368 करोड़ के 60,428 कार्य कराये गए।
    राज्‍य ग्रामीण आजीविका मिशन
    लखपति दीदी- Digital Ajeevika register के अनुसार SHG के ऐसे सदस्य जिनके परिवार की मासिक आय ₹10,000 या उससे अधिक है, की श्रेणी में 11,27,037 परिवार पिछले 2 वर्षों में बने।
    135 FPO का टर्नओवर ₹1,608 करोड़। (306 करोड़ रूपये की बढ़ोत्‍तरी)
    प्रधानमंत्री आवास योजना ग्रामीण
    कुल 11.72 लाख लक्ष्‍य में से 11.46 लाख आवास स्‍वीकृत देश में प्रथम स्‍थान
    PM-JANMAN
    लक्ष्‍य- 1.85 लाख
    स्‍वीकृत- 1.84 लाख
    पूर्ण- 1.29 लाख देश में प्रथम स्‍थान
    स्‍वच्‍छ भारत मिशन
    खुले में शौच मुक्ति के स्थायित्व हेतु 2,87,279 पारिवारिक व्यक्तिगत शौचालय (IHHL) एवं 1,417 सामुदायिक स्वच्छता परिसर का निर्माण।
    16,056 ग्रामों (अब तक कुल 99.35%) ग्राम ठोस अपशिष्ट प्रबंधित (SWM) घोषित।
    4,318 ग्रामों (अब तक कुल 99.46%) ग्राम तरल अपशिष्ट प्रबंधित (LWM) घोषित।
    गोबरधन योजना अंतर्गत 73 बायो गैस सयंत्रों का निर्माण ।
    नवाचार
    सभी ग्राम पंचायतो में CSC ई-गवर्नेंस सर्विस इंडिया लिमिटेड के माध्यम से गैर वित्तीय आधार पर अटल ई-सेवा केन्द्रों का संचालन। 30 नवम्बर तक 1084 पंचायतों में अटल ई-सेवा केंद्र प्रारंभ हो चुके है।
    मुख्यमंत्री वृन्दावन ग्राम योजना 2025 प्रकाशित हो चुकी है। ग्रामों के चयन की गतिविधियां अंतिम चरण में है।
    श्मशान घाटों का सुव्यवस्थित विकास 5वां राज्य वित्त आयोग की अनुदान राशि से किया जाना एवं इस हेतु इस वित्तीय वर्ष की द्वितीय किश्त जारी।
    23,011 ग्राम पंचायतों की वार्षिक कार्ययोजना तैयार करने हेतु प्लानर सॉफ्टवेयर विकसित किया गया है।
    विकेंद्रीकृत कौशल प्रशिक्षण – आदिवासी बाहुल्य /नक्सल प्रभावित जिलों में विशेषकर जनजाति समूहों की परंपरागत कला और ज्ञान को संरक्षित, प्रोत्साहित, और व्यवसायिक बनाने के उद्देश्य से कार्यक्रम प्रारंभ।
    नवाचार -स्वच्छता साथी Wash on Wheels सेवा
    ODF के निरंतरता के लिए मोबाइल ऐप द्वारा ऑनलाइन बुकिंग सेवा जिसके अंतर्गत घरेलू एवं संस्थागत शौचालयों की आधुनिक मशीनों एवं उपकरणों के माध्यम से साफ़-सफ़ाई
    प्रशिक्षित स्वच्छता साथियों के द्वारा दो-पहिया वाहन के माध्यम से त्वरित साफ़-सफ़ाई
    सम्मानजनक रोजगार के अवसर उपलब्ध कराये जाने हेतु पूर्णत: व्यावसायिक मॉडल
    वर्तमान में प्रगति-
    37,499 ग्राम मैप
    1,577 क्लस्टर निर्माण पूर्ण
    1,484 स्वच्छता साथी का पोर्टल पर पंजीकरण पूर्ण
    आगामी 03 वर्षों की कार्य योजना
    नर्मदा परिक्रमा पथ पर चयनित स्‍थलों पर 20 से 25 कि.मी की पारस्‍परिक दूरी पर नर्मदा परिक्रमा करने वाले श्रध्‍दालुओं के लिये सर्वसुविधायुक्‍त आश्रय स्‍थल/यात्री प्रतीक्षालय का निर्माण।
    सभी पंचायत भवनों में अटल ई-सेवा केन्द्रों का संचालन सुनिश्चित किया जायेगा।
    पंचायत सचिवो एवं अन्य विभागीय रिक्त पदों पर भर्ती सुनिश्चित की जाएगी।
    प्रदेश के समस्त ग्रामीण क्षेत्र के श्मशान घाटों का सुव्यवस्थित विकास एवं निर्बाध पहुंच मार्ग सुनिश्चित किया जाना
    अर्ध शहरी एवं बड़ी ग्राम पंचायतो के व्यवस्थित्त विकास हेतु मध्य प्रदेश ग्राम पंचायत (कॉलोनी विकास) नियमों का युक्तियुक्तकरण करते हुए व्यवस्थित विकास कराया जायेगा|
    ग्रामीण क्षेत्रो में कॉलोनियो के रजिस्ट्रेशन एवं विकास इत्यादि की अनुमति केंद्रीकृत ऑनलाइन व्यवस्था तथा EWS हितग्राहियों संबंधी समस्त जानकारियों का पंचायत दर्पण पोर्टल पर प्रदर्शन|
    पंचायत दर्पण पोर्टल के माध्यम से पंचायतो का वित्तीय प्रबंधन सुनिश्चित करना|
    पंचायत दर्पण पोर्टल को वस्तु एवं सेवा कर (GST) के पोर्टल से इन्टीग्रेट कर अनिवार्य TDS कटोत्रा सुनिश्चित करना|
    पंचायतो की सशक्त करने के दृष्टिकोण से तकनीकी एवं प्रशासनिक स्वीकृतियां ऑनलाइन जारी किया जाना |
    मानव संसाधन के बेहतर एवं प्रभावी प्रबंधन हेतु HRMS पोर्टल का प्रभावी उपयोग।
    दोहरी संपर्कता हेतु प्रस्तावित मुख्यमंत्री सुगम संपर्कता परियोजना
    अधिकांश ग्रामीण क्षेत्रों को राष्‍ट्रीय राजमार्ग, राज्य राजमार्ग, प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना,मुख्‍य जिला सड़क, अन्‍य जिला सड़क इत्‍यादि से जोड़ा जा चुका है।
    कई स्‍थानों पर 02 ग्रामों/पंचायतों/मजरे-टोलों को एक-दूसरे से जोड़ने हेतु व संदीपनी विद्यालय तक संपर्कता की मांग, जनप्रतिनिधियों व ग्रामीणजनों से प्राप्‍त होती है।
    दो गांव/पंचायत/मजरे-टोले को दोहरी संपर्कता उपलब्‍ध कराए जाने हेतु प्रदेश में मनरेगा अंतर्गत “मुख्‍यमंत्री सुगम सम्‍पर्कता परियोजना” लागू की जा रही है
    प्रदेश में लगभग रु. 1000 करोड़ के कार्य लिए जा सकेंगे (3 करोड़ प्रति जनपद पंचायत)
    कार्य स्थल चयन तथा DPR तैयार करने हेतु RIMS पोर्टल विकसित।
    3300 ग्राम पंचायतों में ग्राम रोजगार सहायक के रिक्त पदों पर नियुक्ति की कार्यवाही
    एक बगिया माँ के नाम अंतर्गत लिए गए 30,000 से अधिक कार्यों को पूर्ण करना तथा कार्बन क्रेडिट से जोड़ना ।
    किचिनशेड के निर्धारित राशि रू. 2.24 – 3.25 लाख में कुल 3000 किचिनशेड में मनरेगा कंवरजेंस से 10 लाख तक के उन्‍नत किचनशेड का निर्माण किया जाना प्रस्‍तावित है। माननीय मुख्‍यमंत्री जी से नामकरण हेतु अनुरोध है।
    पीएम पोषण पोर्टल, निरीक्षण, ऑडिट, AMS, MIS से संबंधित समस्‍त पोर्टल का एक डेशबोर्ड तैयार करना।
    शतप्रतिशत लक्षित शालाओं में नवीन बर्तनों की उपलब्‍धता सुनिश्चित करना।
    शाजापुर की तर्ज में आगामी वर्ष में प्रदेश के समस्‍त सांदीपनी शालाओं में SHG के माध्‍यम से मेकेनाईज्‍ड किचिन शेड का प्रशिक्षण दिया जा कर किचिन शेड का संचालन किया जाएगा।

  • विश्व स्तरीय सुविधाओं का लक्ष्य पूरा करेंगे शहरी निकायःकैलाश विजय वर्गीय

    विश्व स्तरीय सुविधाओं का लक्ष्य पूरा करेंगे शहरी निकायःकैलाश विजय वर्गीय

    भोपाल, 18 दिसंबर(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)। नगरीय विकास एवं आवास मंत्री श्री कैलाश विजयवर्गीय ने कहा है कि एक अनुमान के मुताबिक वर्ष 2047 में मध्यप्रदेश की कुल आबादी का लगभग 50 प्रतिशत आबादी शहरी क्षेत्रों में निवास करेगी। इस बात को ध्यान रखते हुए शहरी क्षेत्रों में अधोसंरचना कार्यों की योजना तैयार की जा रही है। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश ने स्वच्छता के क्षेत्र में देश में विशिष्ठ स्थान बनाया है। हमारे विभाग की कोशिश होगी कि प्रदेश के शहरी क्षेत्रों का एयर क्वालिटी इंडेक्स अच्छा हो। इस वजह से शहरी क्षेत्रों में बगीचों के विकास के साथ-साथ नगरवन को भी प्रोत्साहित किया जा रहा है। मंत्री श्री विजयवर्गीय भोपाल में राज्य सरकार के विकास और सेवा के दो वर्ष पूरा होने पर आयोजित पत्रकार वार्ता को संबोधित कर रहे थे।
    मंत्री श्री विजयवर्गीय ने बताया कि प्रदेश के जो शहर नर्मदा नदी के किनारे में आते है, वहां शहरों का दूषित पानी नदीं में न मिलें। इस पर विभाग लगातार काम कर रहा है। मेट्रोपॉलिटन सिटी की चर्चा करते हुए मंत्री श्री विजयवर्गीय ने बताया कि विभाग ने इंदौर-उज्जैन और भोपाल मेट्रोपॉलिटन सिटी के विकास का कार्य शुरू कर दिया है। भोपाल मेट्रोपॉलिटन सिटी में भोपाल, सीहोर, रायसेन, विदिशा, राजगढ़ और नर्मदापुरम जिलों की प्रमुख तहसीलों को शामिल किया है। इंदौर-उज्जैन मेट्रोपॉलिटन सिटी में इंदौर, उज्जैन, देवास, शाजापुर, रतलाम और धार जिलों की प्रमुख तहसीलों को शामिल किया गया है। प्रदेश की 2 मेट्रोपॉलिटन सिटी इस तरह विकसित की जाएंगी। जहां शहरी आबादी को सभी आवश्यक बुनियादी सुविधाएं मिल सकें। मेट्रोपॉलिटन सिटी में निवेश और रोजगार पर भी ध्यान दिया जाएगा।
    मंत्री श्री विजयवर्गीय ने बताया कि विभाग की कोशिश है कि शहरी क्षेत्रों में रहने वाले नागरिकों की अधिक से अधिक सेवाओं का डिजिटलीकरण ऑनलाइन हों। इसको ध्यान में रखते हुए हमने ई-नगरपालिका विकसित की है। प्रदेश के शहरों को ग्रीन सिटी के रूप में विकसित किया जा रहा है। नगरीय सेवाओं में सोलर एनर्जी का अधिक से अधिक उपयोग किया जाएं। इसको सुनिश्चित किया जा रहा है। राज्य सरकार का प्रयास है कि नगरीय निकाय आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर हो। इसके लिये शहरी क्षेत्रों की सम्पत्तियों का जीआई मेपिंग किया जा रहा है।
    प्रधानमंत्री आवास योजना शहरी में एक लाख 60 हजार से अधिक आवासों का निर्माण पूरा। प्रधानमंत्री आवास योजना के क्रियान्वयन में मध्यप्रदेश को बेस्ट परफॉर्मिंग अवार्ड की श्रेणी में दूसरा स्थान।
    उल्लेखनीय बिंदु-
    अमृत 2.0 में 300 परियोजनाओं का कार्य पूर्ण।
    जल गंगा संवर्द्धन अभियान में 3 हजार 323 जल संरचनाओं का, 74 जल संग्रहण संरचनाओं का लोकार्पण।
    स्वच्छ सर्वेक्षण 2024 में 8 शहरों का राष्ट्रीय पुरस्कार। साथ ही इंदौर ने देश के नम्बर वन शहर का सम्मान लगातार 8 साल बनायें रखा।
    कार्बन क्रेडिट से राशि अर्जित करने वाले इंदौर देश का प्रथम शहर
    दीनदयाल रसोई योजना में संचालित 56 केन्द्रों को बढ़कर इन्हें 191 केन्द्र किया गया।
    पीएम स्वनिधि योजना अंतर्गत 9 लाख से अधिक रहणी पटरी वालों को 14 लाख से अधिक ऋण प्रकरण मबजूत। मध्यप्रदेश को नवाचार और सर्वोत्तम अभ्यास की श्रेणी में पहला स्थान,
    आजीविकास मिशन में 3 लाख युवाओं को कौशल प्रशिक्षण दिलाया गया। 1 लाख 70 हजार युवाओं को स्व-रोजगार से जोड़ा गया।
    प्रदेश में 65 हजार स्व सहायता समूह का गठन। 6 लाख से अधिक परिवारों को स्व-सहायता समूह में जोड़ा गया।
    इंदौर में मेट्रो परिचालन शुरू भोपाल में दिसम्बर 2025 में ही शुरू होगा मेट्रो।
    हाउसिंग बोर्ड द्वारा एमपी ऑनलाईन के माध्यम से 532 करोड़ की सम्पत्तियों का विक्रय।
    गीता भवन स्थापना योजना 5 महीनों के लिये स्वीकृत।
    प्रदेश में इंटीग्रटेड टाउनशिप पॉलिसी-2025 मंजूर। प्रदेश में इलेक्ट्रिक व्हीकल पॉलिसी को भी मंजूरी।

  • मुख्यसचिव ने कहा परीक्षा को देखते तय करें गणना की तारीख

    मुख्यसचिव ने कहा परीक्षा को देखते तय करें गणना की तारीख


    भोपाल 10 दिसंबर(प्रेस इंफॉर्मेशन सेंटर)मुख्य सचिव अनुराग जैन ने सभी विभाग अध्यक्षों को निर्देश दिये है कि आगामी जनगणना 2027 के दृष्टिगत प्रशासनिक इकाइयों में जो भी परिवर्तन किये जाने हैं वे 31 दिसम्बर 2025 तक अनिवार्यतः कर लिये जांए। मुख्य सचिव श्री जैन की अध्यक्षता में बुधवार को मंत्रालय में भारत की जनगणना 2027 के दृष्टिगत राज्य स्तरीय जनगणना समन्वय समिति की बैठक संपन्न हुई।

    उल्लेखनीय है कि जनगणना के प्रथम चरण में मकान सूचीकरण एवं मकानों की गणना का कार्य 01 अप्रैल से 30 सितम्बर 2026 के दौरान 30 दिवस की अवधि में किया जायेगा। मुख्य सचिव ने सम्बंधित विभागों को यह भी सुनिश्चित करने के लिए कहा है कि स्कूली बच्चों की पढ़ाई, मानसून इत्यादि को ध्यान में रखते हुए उक्त 30 दिवस की अवधि निर्धारित की जायें।


    बैठक में बताया गया कि जनगणना के द्वितीय चरण में जनसंख्या की गणना का कार्य पूरे देश में एक साथ फ़रवरी 2027 में किया जायेगा। मुख्य सचिव श्री जैन ने स्कूल शिक्षा विभाग को निर्देश दिया गया कि वे जनगणना के द्वितीय चरण को ध्यान में रखकर वर्ष 2026-27 का शैक्षणिक कैलेंडर तैयार करें। उन्होंने परीक्षाओं की समय-सारणी इस तरह तैयार करने के निर्देश दिये है जिससे विद्यार्थीयों को कोई असुविधा नहीं हो। साथ ही सम्बंधित विभागों को यह भी निर्देश दिये गये कि वे आपस में समन्वय करते हुए जनगणना 2027 के लिए मानव संसाधन की उपलब्धता के लिए योजना तैयार करें जिससे जनगणना का कार्य सुचारू रूप से संपन्न हो सके।


    मुख्य सचिव श्री जैन ने आगामी जनगणना डिजिटल होने के मद्देनजर सर्वसम्बन्धितों को उचित समय पर युक्तियुक्त प्रशिक्षण दिए जाने की व्यवस्था करने के निर्देश दिये। श्री जैन ने जनगणना के दौरान स्व-गणना (Self-Enumeration) किये जाने के प्रावधान की सराहना की। उन्होंने सभी सम्बंधित विभागों को यह भी निर्देश दिये कि वे जनगणना 2027 के कार्य के समन्वय के लिए अपने अपने विभागों में एक नोडल अधिकारी नामित करें। जनसंपर्क विभाग को जन सामान्य में जनगणना के प्रति जागरूकता लाने एवं भ्रांतियों को दूर करने के लिए व्यापक प्रचार-प्रसार करने के निर्देश भी दिये गये ।


    मुख्य सचिव श्री जैन ने स्पष्ट रूप से कहा कि आम जन को यह बताया जाना आवश्यक होगा कि जनगणना 2027 पहली बार देश में डिजिटल होगी, जिसमें मोबाईल एप के माध्यम से आंकड़ों का संकलन एवं वेब पोर्टल के माध्यम से मैनेंजमेंट एवं मॉनिटरिंग की जाएगी। उन्होंने कहा कि इस बात का प्रचार होना चाहिए कि जनगणना अधिनियम की धारा 15 के तहत जनगणना में संकलित व्यक्तिगत जानकारियां गोपनीय होती है साथ ही इन्हें कहीं पर भी साक्ष्य के लिए उपयोग नहीं किया जा सकता।


    राज्य-स्तरीय जनगणना समन्वय समिति (SLCCC) की इस पहली बैठक में अपर मुख्य सचिव, गृह, अपर मुख्य सचिव, सामान्य प्रशासन, अपर मुख्य सचिव, पंचायत एवं ग्रामीण विकास, आयुक्त नगरीय विकास एवं आवास, सचिव, गृह एवं राज्य नोडल अधिकारी (जनगणना), निदेशक, जनगणना कार्य निदेशालय मध्यप्रदेश,राज्य सूचना विज्ञान अधिकारी, एन.आई.सी. और अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।
    अपर मुख्य सचिव, गृह श्री शिव शेखर शुक्ल ने बताया कि मध्यप्रदेश में गृह विभाग जनगणना के लिए नोडल विभाग है जो भारत सरकार, जनगणना निदेशालय एवं राज्य सरकार के विभिन्न विभागों के मध्य समन्वय स्थापित करते हुए जनगणना सम्पादन में अपनी भूमिका का निर्वहन करेगा । प्रारंभ में निदेशक, जनगणना कार्य निदेशालय द्वारा पावरपॉइंट प्रेजेंटेशन के माध्यम से जनगणना 2027 की रूपरेखा, प्रारम्भिक तैयारियां, डिजिटल रोडमैप और संगठनात्मकढांचा इत्यादि के बारे में विस्तृत रूप से अवगत कराया। उन्होंने यह बताया कि इस बार की जनगणना में स्व-गणना (Self-Enumeration)का प्रावधान भी किया जायेगा जिससे कि आम नागरिक अपनी जानकारी स्वयं दर्ज कर सकेंगे।


    निदेशक, जनगणना द्वारा बताया गया कि राष्ट्रीय महत्त्व के इस वृहद कार्य में लगभग 1 लाख 75 हजार प्रगणकों एवं पर्यवेक्षकों के अतिरिक्त अन्य प्रशासनिक अमले की भी आवश्यकता होगी। निदेशक जनगणना द्वारा अवगत कराया गया कि जनगणना के प्रथम चरण के पूर्व परीक्षण का कार्य प्रदेश में जिला रतलाम की रतलाम तहसील, जिला सिवनी की कुरई तहसील के कुछ चयनित ग्रामों में तथा ग्वालियर जिले के नगर निगम ग्वालियर के चयनित वार्डों में नवम्बर 2025 में कराया गया। पूर्व परीक्षण कार्य को राज्य शासन एवं सम्बंधित जिला प्रशासन के सहयोग से सफलतापूर्वक पूर्ण कर लिया गया है।

  • मध्यप्रदेश की विरासत को मिला जीआई टैग

    मध्यप्रदेश की विरासत को मिला जीआई टैग

    भोपाल 3 दिसंबर(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)।भारत का दिल कहे जाने वाले मध्यप्रदेश की 5 बहुत ही प्राचीन शिल्प कला को जीआई टैग के द्वारा भारत की बौद्धिक संपदा अधिकार में शुमार होने का गौरव प्राप्त हुआ है। एमएसएमई मंत्री चैतन्य कुमार काश्यप ने मध्यप्रदेश की विरासत को मिली इस ऐतिहासिक पहचान के लिए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का आभार व्यक्त करते हुए विभागीय अधिकारियों को बधाई दी है। इस उपलब्धि को जीआई मैन ऑफ इंडिया के नाम से प्रख्यात पद्मश्री डॉ. रजनी कांत ने अत्यंत गर्व का पल बताया है।

    जीआई रजिस्ट्री चेन्नई के वेबसाइट पर इन उत्पादों के सामने रजिस्टर्ड का स्टेटस आते ही संबंधित शिल्पियों में खुशी की लहर दौड़ गई और मध्यप्रदेश के लिए यह पहल करने वाले सूक्ष्म,लघु,मध्यम उद्यम विभाग सहित अन्य विभागों में भी नई चेतना आ गईं है।

    लगभग एक वर्ष पूर्व ही इन सभी के लिए जीआई का आवेदन खजुराहो स्टोन क्रॉफ्ट, बैतूल भरेवा मेटल क्रॉफ्ट, ग्वालियर पत्थर शिल्प और ग्वालियर पेपर मैशे के लिए नाबार्ड, मध्यप्रदेश ने और छतरपुर फर्नीचर के लिए सिडबी मध्यप्रदेश ने वित्तीय सहयोग प्रदान किया था। एमएसएमई विभाग मध्यप्रदेश के प्रयास से स्थानीय शिल्पियों की संबंधित संस्थाओं द्वारा यह सभी जीआई एप्लिकेशन पद्मश्री डॉ. रजनीकांत के तकनीकी सहयोग से भेजे गए थे।

    नवम्बर माह में ही पन्ना डायमंड को जीआई टैग प्राप्त हुआ है और लगभग 25 उत्पादों की जीआई मिलने की प्रक्रिया अपने अंतिम चरण में है।

  • फार्मासिस्टों के डिजिटल पंजीयन से विदेशों में भी मिलने लगीं नौकरियां

    फार्मासिस्टों के डिजिटल पंजीयन से विदेशों में भी मिलने लगीं नौकरियां


    भोपाल,30 नवंबर(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर) मध्यप्रदेश फार्मेसी काऊंसिल ने जबसे पंजीयन का सारा रिकार्ड आनलाईन करना शुरु कर दिया है तबसे देश के विभिन्न संस्थानों के साथ साथ विदेशी दवा कारोबार में भी राज्य के फार्मासिस्टों को रोजगार आसानी से मिलने लगा है।किसी भी फार्मासिस्ट के पंजीयन रिकार्ड को पूरी दुनिया में आनलाईन देखा जा सकता है और उसके दावे की सत्यता परखी जा सकती है। इस डिजिटलाईजेशन के अभियान से नकली पंजीयन प्रमाण पत्रों पर नौकरी और कारोबार कर रहे लोगों में हड़कंप मच गया है और वे इस अभियान को रोकने के लिए तरह तरह के जतन करते देखे जा रहे हैं।


    हाल ही में एक कथित फार्मासिस्ट ने जिस तरह काऊंसिल के दफ्तर में हंगामा मचाया और पुलिस ने उसकी शिकायत पर एफआईआर दर्ज की उससे इस समस्या को आसानी से समझा जा सकता है। वह छात्र अपने हंगामे को सही ठहराने के लिए बाकायदा गवाह भी साथ लेकर आया था हालांकि परिषद की ओर से दर्ज कराई गई प्राथमिकी में सारी स्थिति स्पष्ट की गई है और छात्र की आपराधिक हरकत को उजागर किया गया है।


    जबकि तथ्यों को देखा जाए तो पिछले पाँच महीनों में परिषद् ने 4416 नए फार्मासिस्टों के पंजीकरण सफलतापूर्वक किए हैं । लगभग 8,000 आवेदन-पत्रों के साथ प्रस्तुत दस्तावेजों की जांच आदि की प्रोसेसिंग की गई है। इस अवधि में कई महत्त्वपूर्ण सुविधाएँ जोड़ी गई हैं, जिनमें डिजिलॉकर एकीकरण, डोमिसाइल सत्यापन के साथ समग्र आईडी एकीकरण शामिल हैं। इससे पंजीयन की प्रक्रिया गलतियों से मुक्त हो गई है। अब पंजीयन के लिए किसी छात्र या फार्मासिस्ट को काउंसिल के दफ्तर आने की जरूरत ही नहीं रही है।


    इन बदलावों से काउंसिल अब एक से डेढ़ महीने में नए रजिस्ट्रेशन जारी कर पा रही है। जब तक ये प्रक्रिया चलती रहती है तब तक पोर्टल पर आवेदन की स्थिति आसानी से देखी जा सकती है। अब तक 99% बी.फार्मा पंजीकरण और सभी संभव/सत्यापन योग्य शासकीय विश्वविद्यालयों के डी.फार्मा पंजीकरण पूरे कर लिए गए हैं।
    जिन आवेदनों को प्रोसेसिंग के बाद पंजीकृत किया गया है उनमें लगभग 2000 आवेदन पुरानी प्रक्रिया के हैं जिनमें 2022/2024 के आवेदन मुख्यतः निजी विश्वविद्यालयों से संबंधित हैं । इनमें से अधिकतर आवेदनों का महाविद्यालयों से सत्यापन प्राप्त नहीं हुआ है। महाविद्यालयों से संपर्क करके ये पंजीयन भी जारी किए जा रहे हैं।


    प्राप्त आधिकारिक जानकारी के अनुसार परिषद ने 2023 में कुल 2889 पंजीयन जारी किए थे। 2024 में 2297 पंजीयन किए गए। जनवरी से मई 2025 तक 970,जून से नवंबर 2025 में जब पूरा ढांचा तैयार हो गया और पूर्णकालिक रजिस्ट्रार की तैनाती हो गई तो 4416 फार्मासिस्टों के पंजीयन प्रमाण पत्र जारी किए गए हैं। पिछले 5 महीनों में, परिषद ने एक वर्ष में होने वाले कार्य से लगभग दो–तीन गुना अधिक पंजीकरण जारी किए हैं।इस अवधि में कुल 8,000+ आवेदन प्रोसेस किए गए। जिसकी जानकारी आवेदक के लॉगिन पर भेजी जा चुकी है।
    डिजिटल सुधार और तेज सेवा

    • DigiLocker, Domicile, Samagra ID एकीकरण
    • आवेदन ट्रैकिंग व कारण-आधारित स्टेटस पोर्टल पर उपलब्ध है
    • अब नए पंजीकरण 1–1.5 माह में जारी किए जा रहे हैं
    • आवेदकों को काउंसिल आने की आवश्यकता समाप्त की गई
      वर्तमान पेंडेंसी — कारण व स्थिति
    • 99% बी.फार्मा और सभी सत्यापन योग्य सरकारी विश्वविद्यालयों के डी.फार्मा पंजीकरण पूर्ण किए गए हैं।
    • वर्तमान में लगभग 2000 आवेदन पुरानी प्रक्रिया के हैं जिनमें 2022/2024 के आवेदन मुख्यतः निजी विश्वविद्यालयों से संबंधित हैं और जिनके लिए महाविद्यालयों से सत्यापन प्राप्त नहीं हुआ है। इनको भी सत्यापन प्राप्ति अनुसार क्लियर किया जा रहा है।

    • परिषद ने विगत 1 वर्ष में दलालों के माध्यम से पंजीयन कराने की परंपरा समाप्त करने में सफलता पाई है। ऑफलाइन हस्तक्षेप पर जीरो टॉलरेंस पालिसी लागू की है। इससे नाराज दलालों में भारी असंतोष है और वे काऊंसिल के बारे में आधारहीन बातें फैलाकर छात्रों को भड़काने का प्रयास कर रहे हैं। जब फर्जी पंजीयन नहीं हो पा रहे हैं तो दलालों ने कई सामाजिक संगठनों के पदाधिकारियों को भी गुमराह करके अफवाहें फैलाना जारी कर दिया है। जबकि थोड़े ही दिनों में राज्य में एक पारदर्शी और सरल डिजिटल पंजीयन स्तर हासिल किया जा रहा है।

    • मध्यप्रदेश राज्य फार्मेसी परिषद के पदाधिकारियों का कहना है कि वह सभी आवेदकों के लिए तेज, पारदर्शी, डिजिटल,सटीक और ब्रोकर रहित सेवा उपलब्ध कराने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।
  • जनसंपर्क माफिया में कोहराम

    जनसंपर्क माफिया में कोहराम


    लगातार शिकायतों और पत्रकारों के विरोध दर्ज कराए जाने के बाद मध्यप्रदेश शासन ने जनसंपर्क संचालनालय में नर्मदापुरम संभाग के उपायुक्त(राजस्व) गणेश कुमार जायसवाल को अपरसंचालक के पद पर भेजा है। राज्य प्रशासनिक सेवा के 2012 बैच के इस युवा अधिकारी की पदस्थापना से जनसंपर्क विभाग के खासतौर पर अधिकारी वर्ग में बैचेनी की लहर दौड़ गई है। पहली बार वे शासन के निर्णय के खिलाफ एकजुट होकर कलमबंद हड़ताल पर उतर आए हैं। जनसंपर्क कमिश्नर दीपक सक्सेना से चर्चा के दौरान विभाग के अधिकारियों का तर्क था कि वे बरसों से इस विभाग में सरकार की छवि सुधारने का काम करते हैं इसके बावजूद सरकार ने एक राजस्व विभाग के एक जूनियर अधिकारी को भेजकर हमारा अपमान किया है। हमें प्रमोशन भी वक्त पर नहीं मिलते हैं और रात दिन हम सरकार की छवि सुधारने में जुटे रहते हैं। इसके बावजूद सरकार ने बाहिरी व्यक्ति को भेजकर हम पर अविश्वास जताया है जो अपमानजनक है। इस संबंध में सामान्य प्रशासन विभाग के अपर मुख्य सचिव संजय कुमार शुक्ल से अभी बात नहीं हो पाई है लेकिन जो जानकारियां छनकर बाहर आ रहीं हैं उनके मुताबिक सरकार ने आधिकारिक फीड बैक के आधार पर ही राजस्व विभाग के अधिकारी की नियुक्ति की है। यही नहीं विभाग के अपर मुख्य सचिव पद पर भारतीय प्रशासनिक सेवा के 1993 बैच के वरिष्ठ आईएएस अनुपम राजन को शासन की ओर से जवाबदारी सौंपी गई है। मुख्य सचिव अनुराग जैन के इस फैसले पर तो कोई सवाल नहीं उठाया जा रहा है लेकिन सामान्य प्रशासन विभाग के फैसले पर अधिकारियों का विरोध सबको चौंका रहा है। अधिकारियों के इस विरोध प्रदर्शन में विभाग के कर्मचारियों ने भी कलमबंद हड़ताल को समर्थन दिया है लेकिन वे अंदरूनी तौर पर खामोश हैं। विज्ञापन माफिया ने इस कलमबंद हड़ताल में जनसंपर्क संवर्ग के अधिकारियों को समेट लिया है। उनके माध्यम से वे सरकार पर दबाव बनाने का प्रयास कर रहे हैं। इस विरोध प्रदर्शन में कुछ पत्रकार संगठन भी कूद पड़े हैं। दरअसल में कुछ सालों से जनसंपर्क विभाग ने ऐसे गठरियों पत्रकार संगठन खड़े कर दिये हैं जिन्हें साथ लेकर विभाग के अधिकारी अपने फैसले लेते रहे हैं। खबरों के फैसले तो वे स्वयं ले लेते हैं लेकिन विज्ञापन के फैसलों में पत्रकार संगठनों को भी अपने साथ खड़ा कर लिया जाता है। इस गठजोड़ में शामिल माफिया शख्सियतें विभाग के माध्यम से लगभग आठ सौ करोड़ रुपयों से अधिक की राशि गड़प जाती हैं। पहली बार शासन ने विज्ञापन के नाम पर बजट की लूटपाट के इस धंधे पर लगाम कसने का प्रयास किया है। जाहिर है राजस्व विभाग का प्रशासनिक अधिकारी आयव्यय के सभी रिकार्ड पर भी निगरानी करेगा इससे जनसंपर्क विभाग के कुछ भ्रष्ट अधिकारियों को अपने काले कारनामों की कलई खुल जाने का भय लग रहा है। पत्रकारों की आड में दलाली करने वाले जिन कथित पत्रकारों ने इस घोटाले में लाभ उठाना अपना जन्मसिद्ध अधिकार बना रखा है वे भी इस फैसले से बौखलाए हुए हैं। केन्द्रीय स्तर पर प्रेस सेवा पोर्टल के माध्यम से भारत सरकार ने मीडिया को व्यवस्थित करने का अभियान चला रखा है। इससे पत्रकारों को काफी कठिनाई हो रही है। जबकि राज्य स्तर पर जनसंपर्क विभाग के अधिकारियों की प्रशासनिक अकुशलता की वजह से पत्रकारों के लिए आबंटित की जाने वाली राशि गैर पत्रकारों के पास पहुंच रही है। सत्तारूढ़ दल की सिफारिशों पर भी इस राशि का बड़ा हिस्सा साईफन कर लिया जाता है। ऐसे में पत्रकार वंचित रह जाते हैं और कलंक की कालिख उनके माथे पड़ जाती है। शासन की जवाबदारी है कि वह वास्तविक पत्रकारों को संवाद की भूमिका निभाने के लिए आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराए । वह अपना दायित्व निभाने के लिए जब फैसले ले रही है तो माफिया ताकतें इस फैसले को रोकने में जुट गईं हैं। ऊटपटांग के तर्क देकर वे इसे अपमान का कारण बता रहे हैं ।मध्यप्रदेश सरकार के वित्तीय संसाधनों पर ही जनसंपर्क विभाग के अधिकारियों कर्मचारियों को वेतन मिलता है और उन्हीं संसाधनों से राज्य प्रशासनिक सेवा के अन्य संवर्ग के अधिकारियों को वेतन मिलता है। इन सभी की जिम्मेदारी है कि वे प्रदेश की बेहतरी के लिए कार्य करें।ऐसे में राजस्व विभाग के वित्तीय प्रबंधन में कुशल अधिकारी की पदस्थापना स्वागत योग्य फैसला है। शासन को यदि अपने प्रशासनिक सुधारों पर जन समर्थन चाहिए तो उसे पत्रकारों की आड़ में पनप चुके विज्ञापन माफिया को उखाड़ फेंकना होगा तभी शासन और सरकार जनता की ओर से दिए गए अपने दायित्वों का निर्वहन सही तरीके से कर पाएंगे । फिलहाल शासन को अपने फैसले पर अडिग रहना होगा और माफिया की गीदड़ भभकियों को नजरंदाज करना होगा। वैसे भी सरकार की छवि बनाने बिगाड़ने का कार्य सोशल मीडिया संभाल चुका है। दलालों को बाहर किया जाएगा तो इसका सर्वत्र स्वागत किया जाएगा।

  • पत्रकारों का स्वागत रहेगाःजनसंपर्क आयुक्त दीपक सक्सेना

    पत्रकारों का स्वागत रहेगाःजनसंपर्क आयुक्त दीपक सक्सेना

    भोपाल 22 सितंबर(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)। सेंट्रल इंडिया प्रेस क्लब पब्लिक ट्रस्ट के आमंत्रण पर राजधानी के अरेरा क्लब में पधारे नए जनसंपर्क आयुक्त दीपक सक्सेना का कहना है कि वे मीडिया को मार्गदर्शक के रूप में सहयोगी मानते हैं। पिछले 32 सालों की नौकरी में उनका कभी पत्रकारों से टकराव नहीं हुआ। वे कहते हैं कि महत्वपूर्ण सुझाव देकर विभिन्न सामाजिक समस्याओं की गुत्थी सुलझाने वाले पत्रकारों का उनके कार्यकाल में हमेशा स्वागत रहेगा। इस ऐतिहासिक अवसर पर निवृत्तमान जनसंपर्क कमिश्नर सुदाम खाड़े को भी भावभीनी विदाई दी गई।
    डॉ. सुदाम खाड़े, जिनकी सहजता, सादगी और संवादप्रियता ने पत्रकारिता जगत के हृदय पर गहरी छाप छोड़ी है, ने अपने विदाई संबोधन में कहा- “पत्रकारिता और जनसंपर्क की डोर हमेशा अटूट रहनी चाहिए। यहाँ हर शब्द की जवाबदेही है। एक बार प्रकाशित हो जाने के बाद सुधार की कोई गुंजाइश नहीं रहती। यही इस विभाग की सबसे बड़ी चुनौती और सबसे बड़ी शक्ति भी है। मध्यप्रदेश का जनसंपर्क विभाग, केंद्र से प्रत्यक्ष जुड़ाव न होने के बावजूद, आज देशभर में नवाचार में अग्रणी स्थान पर है।”
    भावुक स्वर में उन्होंने आगे कहा – “मुझे आदत थी कि मैं प्रतिदिन सौ से अधिक लोगों से भेंट करता था। अब यह संभव नहीं होगा और निश्चय ही यह मुझे बहुत खलेगा।”वहीं, नवागत जनसंपर्क आयुक्त दीपक सक्सेना ने विश्वास का संदेश देते हुए कहा- “अपने 32 वर्ष के लंबे करियर में कभी किसी पत्रकार से टकराव की स्थिति नहीं बनी। आगे भी ऐसी स्थिति नहीं आएगी। मेरी आदत है कि हर कॉल उठाऊं और यदि छूट भी जाए तो अवश्य कॉल बैक करूं। मेरा प्रयास रहेगा कि सरकार और मीडिया के बीच विश्वास की डोर और अधिक सुदृढ़ हो। जब हम सब एक दिशा में कार्य कर रहे हैं, तो कटुता की कोई संभावना नहीं है।”
    वरिष्ठ पत्रकार और पद्मश्री सम्मानित विजय दत्त श्रीधर ने इस अवसर पर सुझाव दिया कि फोटोजर्नलिस्टों के हितों की रक्षा के लिए ठोस कदम उठाए जाएं। साथ ही उन्होंने वरिष्ठ पत्रकारों की स्मृतियों और अनुभवों को संजोने की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि यही अनुभव भविष्य की पत्रकारिता के लिए दिशा-प्रदर्शक सिद्ध होंगे।

    नए जनसंपर्क आयुक्त दीपक सक्सेना का कहना है कि समाज की गुत्थियां सुलझाने वाले पत्रकार राज्य की धरोहर हैं। सरकार के साथ वे भी समाज कल्याण का लक्ष्य लेकर चलते हैं इसलिए कोई टकराव की स्थिति नहीं बननी चाहिए।


    सेंट्रल इंडिया प्रेस क्लब के संस्थापक अध्यक्ष विजय दास ने कहा कि इस पत्रकार संघ ने अपने गठन से ही आंदोलन और नारेबाज़ी से दूरी बनाए रखते हुए संवाद, विमर्श और रचनात्मक गतिविधियों को अपनी पहचान बनाया है। मीडिया संवाद श्रृंखलाएँ, कार्यशालाएँ, पुस्तक विमोचन, स्वास्थ्य शिविर और सामाजिक सरोकार- इन सबने इसे वरिष्ठ और युवा पीढ़ी के बीच एक सेतु के रूप में स्थापित किया है।
    कार्यक्रम में डॉ. सुदामा खाड़े को शाल-श्रीफल, पौधा और स्मृति-चिह्न भेंट कर भावभीनी विदाई दी गई। वहीं श्री दीपक सक्सेना का उसी आत्मीयता और विश्वास के साथ स्वागत किया गया।इस अवसर पर क्लब के सचिव सचिन चौधरी ने अपनी पुस्तक “बागेश्वर धाम सरकार” अतिथियों को भेंट की।
    कार्यक्रम में क्लब के राष्ट्रीय संस्थापक अध्यक्ष विजय कुमार दास , प्रदेश अध्यक्ष गोविन्द गुर्जर , राष्ट्रीय समन्वयक राजेश भाटिया , महासचिव अक्षत शर्मा संस्थापक समन्वयक सरमन नगेले , पूर्व महासचिव मृग्रेन्द्र सिंह ,भोपाल जिलाध्यक्ष कन्हैया लोधी , ट्रस्टी के डी शर्मा , वीरेंद्र सिन्हा एवं क्लब के समस्त पदाधिकारी, पत्रकारगण,जनसम्पर्क अधिकारी उपस्थित थे।
    कार्यक्रम में संदेश स्पष्ट था कि पत्रकारिता और जनसंपर्क की साझेदारी केवल औपचारिकता नहीं, बल्कि संवाद, विश्वास और सहयोग की जीवंत परंपरा है। यही भरोसा आने वाले कल की पत्रकारिता को नई दिशा और नई ऊर्जा प्रदान करेगा।

  • विदेशी पूंजी से कैसे बनेगा आत्मनिर्भर भारत

    विदेशी पूंजी से कैसे बनेगा आत्मनिर्भर भारत


    -आलोक सिंघई-


    अमेरिकी प्रतिबंधों से तिलमिलाई सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी ने आत्मनिर्भर भारत का नारा छेड़ दिया है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी स्वयं अनुरोध कर रहे हैं कि लोग भारत में बना माल ही खरीदें ताकि स्थानीय बाजार को बल मिले। अब तक की कांग्रेस की सरकारें हों या फिर मोदी जी के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार सभी धड़ल्ले से विदेशी माल और पूंजी के सहारे विकास का ढोल पीटते रहे हैं। नरेन्द्र मोदी की पृष्ठभूमि गुजरात रही है इसलिए वे एमके गांधी के स्वराज आंदोलन को करीब से जानते रहे हैं। वह आंदोलन अंग्रेजी हुकूमत को हिला देने वाला बताया गया था। कम से कम भारतीय इतिहासकारों ने तो आजादी के बाद से ही गांधी नेहरू और कांग्रेस के आंदोलनों को आजादी दिलाने वाला आंदोलन बताया है। ये विचार उन्होंने देश के मन मस्तिष्क में इतने गहरे तक जमा दिया है कि लोग इससे अलग कुछ सोचना ही नहीं चाहते। यदि उनके इस मानस से अलग कुछ भी कहा जाए तो वे भड़क उठते हैं। जबकि हकीकत इससे बिल्कुल अलग है। ब्रिटिश साम्राज्य ने सीधे तौर पर लगभग 56 देशों को शासित किया और इनमें से कई देशों को स्वतंत्रता प्राप्त हुई, जिससे आज दुनिया के लगभग 60 संप्रभु देश ब्रिटिश शासन से स्वतंत्र हुए देशों के दायरे में आते हैं। इन 56 देशों में से एक देश भारत भी था । शेष पचपन देशों में न गांधी थे न नेहरू न उनकी कांग्रेस इसके बाद भी उन्हें आजादी मिली।
    दरअसल द्वितीय विश्वयुद्ध के बाद जनजागरण का जो माहौल बना उसमें किसी दूसरे देश पर शासन करना कठिन हो गया था। अमेरिका में स्वतंत्रता के जिन मूल्यों की पैरवी की जा रही थी उसने अंग्रेजों के कारनामों को खूब बदनाम किया। रूस में जारशाही का पतन सन 1917 में हुआ था, जब रूस की फरवरी क्रांति ने जार निकोलस द्वितीय के शासन को समाप्त कर दिया और एक अंतरिम सरकार की स्थापना हुई। ऐसे माहौल में अंग्रेजों को महसूस हो गया था कि वे अब ज्यादा लंबे समय तक अपने उपनिवेशों को गुलाम बनाकर नहीं रख सकते। भारत में अंग्रेजी शासक 1885 में स्थापित भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के माध्यम से विभिन्न रियासतों के बीच अपना शासन चला रहे थे। जब उन्हें लगा कि उन्हें शासन छोड़ना पड़ेगा तो उन्होंने अपने संरक्षण वाले औद्योगिक घरानों के सहयोग से एमके गांधी के चलाए आंदोलनों को अपना मूक समर्थन देना शुरु कर दिया।
    बंगाल में नील किसानों का आंदोलन 1859 से चल रहा था। गांधी जी को 1917-18 में चंपारन सत्याग्रह में भाग लेने का अवसर मिला। इस आंदोलन ने गांधी को विदेशी कपड़ो के धंधे की बारीकियां समझने का अवसर मिला। नतीजतन गांधीजी ने विदेशी वस्त्रों के बहिष्कार का आंदोलन शुरु किया। उन्होंने 1921 में वस्त्रों की होली जलाकर कपड़े के धंधे की ओर देश का ध्यान आकर्षित किया। इस समय तक अंग्रेज बचाव की मुद्रा में आ चुके थे। वे गांधी के आंदोलनों को अंदर से समर्थन देकर भारत में अपने नियंत्रण वाली सत्ता के उदय की भूमिका जमा रहे थे। पहले स्वाधीनता संग्राम 1857 के बाद से 90 सालों तक अंग्रेजों पर छुटपुट हमले जारी रहे। त्रिपुरी अधिवेशन में 1939 में सुभाष चंद्र बोस ने गांधीजी समर्थित पट्टाभि सीतारमैय्या को हराकर कांग्रेस पार्टी के अध्यक्ष का चुनाव जीत लिया था । इसके बावजूद उन्हें अंग्रेजों के समर्थन वाले गांधीजी के असहयोग की वजह से अध्यक्ष पद से त्यागपत्र देना पड़ा। इससे क्षुब्ध सुभाष चंद्र बोस ने 1941 में सिंगापुर से अंग्रेजों के विरुद्ध आजादी के संग्राम की घोषणा कर दी । उन्होंने1943 में आजाद हिंद सरकार का गठन करके ग्यारह देशों से मान्यता भी हासिल कर ली थी।
    इन हालात में चलाए गए गांधी जी के स्वदेशी आंदोलन को अंग्रेज केवल इसलिए समर्थन दे रहे थे क्योंकि वे भारत में अपनी पिट्ठू सरकार का गठन करना चाहते थे। यही वजह थी कि भले ही 1947 में अंग्रेजों ने नेहरू के साथ ट्रांसफर आफ पावर एग्रीमेंट कर लिया लेकिन भारतीय बाजार पर उन्होंने अपना नियंत्रण नहीं छोड़ा। 1947 में अंग्रेजों का भारतीय कपड़ा उद्योग में बहुत गहरा और विनाशकारी हस्तक्षेप था, जिसके कारण पारंपरिक हथकरघा उद्योग लगभग नष्ट हो गया और भारतीय कारीगरों को भारी नुकसान हुआ। अंग्रेजों ने कच्चे माल के रूप में सस्ते कपास का निर्यात किया और ब्रिटेन में उत्पादित सस्ते, मशीन-निर्मित कपड़े भारत में ऊंची कीमतों पर बेचे, जिससे भारतीय बाजार पट गए और पारंपरिक भारतीय वस्त्र उद्योग दम तोड़ गया। आजादी के बाद स्वदेशी का नारा खादी आंदोलन तक ही सीमित रह गया। खादी और ग्रामोद्योग बोर्ड के नारे तले कांग्रेस ने देश को कपड़ा निर्माण में आत्मनिर्भर नहीं होने दिया।
    कांग्रेस के विभाजन के बाद जब 1971 में श्रीमती इंदिरागांधी सत्ता में लौटी तो उन्होंने रिलायंस के धीरूभाई अंबानी को देश के बाजार में पोलिएस्टर कपड़ा उतारने का काम दे दिया। इसके बाद भारतीय कपास की खेती का भट्टा बैठ गया और वह कपास की गठाने निर्यात करने का कार्य बदस्तूर जारी रहा । इन दिनों नरेन्द्र मोदी धार में कपड़ा उद्योग की आधारशिला रख रहे हैं तब इतिहास की इन बातों पर गौर करना जरूरी हो गया है। इसके पहले तक की तमाम राजनीतिक दलों की सरकारों ने भारत में विदेशी पूंजी की घुसपैठ रोकने को कोई कोशिश नहीं की बल्कि वे अधिकाधिक कर्ज लेकर शासन करने की नीति पर ही चलते रहे। लगभग दो दशकों तक मध्यप्रदेश में भाजपा की शिवराज सिंह चौहान सरकार भी पुरानी सत्ता लाबी की ही पिट्टू सरकार बनकर काम करती रही। कर्ज लेकर खैरात बांटने का जो अभियान उन्होंने चलाया उससे उन्हें भरपूर लोकप्रियता हासिल हुई। कर्ज से बिजली सड़क और पानी के प्रोजेक्ट पूरे करने के लिए उन्होंने धड़ाधड़ कर्ज लिया और जाते हुए वे प्रदेश पर तीन लाख अस्सी हजार करोड़ रुपयों का भारी भरकम कर्ज छोड़कर गए। इस कर्ज पर प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष तौर पर हर साल राज्य को लगभग चालीस हजार करोड़ रुपयों का ब्याज अदा करना पड़ता है। भला इतनी मोटी कमाई को सूदखोर देश और कंपनियां कैसे बंद होने दे सकती हैं।
    आज की डाक्टर मोहन यादव सरकार के लिए खैरात बांटने की अब तक चली आ रही नीतियों के विपरीत काम करने पर कुर्सी जाने का भय है और वे भले ही हिचक के साथ ही सही पर वही नीति दुहराते चले जा रहे हैं। ऐसे में जब भारतीय जनता पार्टी स्वदेशी का नारा बुलंद कर रही है तब उसके आंदोलन की खोखली आवाज कितने दूर तक जाएगी इसका अनुमान अभी नहीं लगाया जा सकता। सरकारी नौकरियां बेचने का जो अभियान कांग्रेस ने शुरु किया था उसे शिवराज सिंह चौहान की सरकार ने खूब हवा दी। कांग्रेस की तरह लूटो और भागो की नीति पर अमल करते हुए शिवराज सिंह काजल की इस कोठरी से अपनी स्याह तस्वीर लेकर सुरक्षित बाहर निकल चुके हैं।
    नरेन्द्र मोदी का स्वदेशी माल खरीदने का अनुरोध अमेरिकी प्रतिबंधों की मार की वजह से सामने आ सका है। आज इसे मेक इन इंडिया का विस्तार भले ही कहा जा रहा है पर मध्यप्रदेश में दो दशकों तक भारतीय जनता पार्टी की सरकारों ने स्वदेशी के मुद्दों पर क्या किया है इसका आकलन सहजता से किया जा सकता है।नानाजी देशमुख ने अपने सहयोगियों के साथ चित्रकूट में स्वदेशी के जो अनुसंधान किए और पूरी थीसिस तैयार की उसे भाजपा की उमा भारती सरकार ने पूरी शिद्दत से लागू करना शुरु किया था। इससे सूदखोर देशो में बेचैनी फैल गई और उन्होंने अरबों रुपयों का कर्ज बांटकर अपने पिट्ठू अखबारों के माध्यम से आंदोलन चलाकर उमा भारती की सरकार गिराई और अंततः उन्हें सत्ता से बाहर ही भेज दिया। आज वह आंदोलन चलाने वाले जिस समाचार पत्र पर लगभग पैंतीस हजार करोड़ रुपयों का कर्ज है वह इस मौजूदा स्वदेशी आंदोलन को भरपूर हवा देने में जुटा हुआ है।
    स्वदेशी का नारा देते घूम रहे भाजपा के चिंतकों, संगठन कर्मियों और राजनेताओं को अपने गिरेबान में झांककर पहले अपने पूर्वजों की गलत नीतियों में सुधार करना होगा। अब कार्पोरेट सेक्टर खड़े करके देशज पूंजी से उद्योगों की स्थापना करना सरल हो गया है। ऐसे में स्वदेशी आंदोलन करने से पहले भाजपा के नेताओं को स्वदेशी पूंजी, स्वदेशी प्रबंधन और स्वदेशी बाजार की मजबूती के लिए कार्य करना होगा। यदि वे ये नहीं कर पाए तो इस स्वदेशी आंदोलन का हश्र भी गांधीजी के स्वदेशी आंदोलन की तरह ही होगा। विदेशी पूंजी से आत्मनिर्भर भारत नहीं बनाया जा सकता।

  • विक्रमादित्य वैदिक घड़ी से पढ़ी जाएगी भारत की यशोगाथा : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

    विक्रमादित्य वैदिक घड़ी से पढ़ी जाएगी भारत की यशोगाथा : मुख्यमंत्री डॉ. यादव


    भोपाल,01 सितंबर(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)।मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि भारतवर्ष ने अपने ज्ञान से सम्पूर्ण ब्रह्मांड को अलौकिक किया है। कालगणना की पद्धति 300 साल पहले तक हमारे देश से दुनिया तक जाती थी। भारतीय संस्कृति का प्रत्येक पहलु प्रकृति और विज्ञान का ऐसा विलक्षण उदाहरण है, जो विश्व कल्याण का पोषक है। इन्हीं धरोहरों के आधार पर निर्मित विक्रमादित्य वैदिक घड़ी भारतीय परम्परा का गौरवपूर्ण प्रतीक है। इस घड़ी के माध्यम से भारत के गौरवपूर्ण समय को पुनर्स्थापित किया जा रहा है। विरासत-विकास-प्रकृति और तकनीक के संतुलन का प्रकटीकरण विक्रमादित्य वैदिक घड़ी से होगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव सोमवार को मुख्यमंत्री निवास में विक्रमादित्य वैदिक घड़ी के अनावरण और उसके ऐप लोकार्पण कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे।
    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। इससे पहले मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मुख्यमंत्री निवास के नवनिर्मित द्वार पर विक्रमादित्य वैदिक घड़ी का मंत्रोच्चार के बीच अनावरण किया। इस अवसर पर शौर्य स्मारक से आरंभ हुई ‘भारत का समय-पृथ्वी का समय’ रैली मुख्यमंत्री निवास पहुंची। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने रैली में शामिल युवाओं का स्वागत किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कार्यक्रम में विक्रमादित्य वैदिक घड़ी के ऐप का लोकार्पण, राजा भोज पर निर्मित यू-ट्यूब सीरीज के फोल्डर का विमोचन और खगोल विज्ञान पर केन्द्रित फिल्म की सीडी का विमोचन भी किया गया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने वैदिक घड़ी के उपयोग को प्रोत्साहित करने का आहवान किया और उपस्थित युवाओं से मोबाइल में विक्रमादित्य वैदिक घड़ी ऐप भी डाउनलोड करवाया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव को इस अवसर पर वैदिक घड़ी भेंट की गई।

    विक्रमादित्य वैदिक घड़ीः भारतीय कालगणना विज्ञान की यशोगाथा का दस्तावेज


    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि यह हमारा सौभाग्य है कि सनातन संस्कृति के व्रत, त्यौहार अंग्रेजी कैलेंडर के आधार पर नहीं आते, उनकी गणना में ऋतुओं का प्रभाव शामिल है। सावन-भादो-कार्तिक माह का प्रभाव हम सब अपने जीवन में अनुभव कर रहे हैं। पूर्णिमा और अमावस्या का समुद्र पर प्रभाव ज्वार-भाटा से आंका जा सकता है, इससे हमारी तिथियों की सत्यता भी प्रमाणित होती है। मानसिक रोगियों पर अमावस्या और पूर्णिमा का प्रभाव चिकित्सा शास्त्र भी स्वीकार करता है। मानव शरीर संरचना में 70 प्रतिशत जल का अंश है, जो अमावस्या और पूर्णिमा पर प्रभावित होता है। इसी का परिणाम है कि मानसिक चिकित्सालयों को अमावस्या और पूर्णिमा पर विशेष सतर्कता बरतने के स्थाई निर्देश हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि भारतीय शास्त्रों में समय की गणना सूक्ष्मतम स्तर तक की गई है। सनातन संस्कृति में सूर्योदय से सूर्योदय तक की गणना का विधान है। इस प्राचीन गणना में 30 मुहूर्त हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि सनातन संस्कृति में विभिन्न सिद्धांतों पर विचार-विमर्श के लिए कोई बंधन या दंड नहीं है, जबकि कालगणना पर वैचारिक मतभेद के कारण मृत्युदंड देने का उद्धरण पश्चिम के इतिहास में मिलता है।
    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि खगोलीय अध्ययन के लिए सूर्य से बनने वाली छाया के आधार पर सूर्य की गति की गणना की गई। उन्होंने बताया कि भारत का केन्द्र उज्जैन है और उज्जैन का केन्द्र वर्तमान में डोंगला में स्थित है। डोंगला का प्रसंग भगवान श्रीकृष्ण और सुदामा से जुड़ता है। संभवत: डोंगला के इस महत्व से ही भगवान श्रीकृष्ण का आगमन हुआ था। पंचांग भारतीय कालगणना की शुद्धता और सटीकता का जीवंत उदाहरण हैं। पंचांग के विद्वान चंद्रग्रहण, सूर्यग्रहण, तिथि, नक्षत्र, वार, व्रत, त्यौहार और मुहूर्तों की जानकारी वर्तमान में भी त्वरित रूप से उपलब्ध कराते हैं।
    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मुख्यमंत्री निवास के द्वार पर विक्रमादित्य वैदिक घड़ी स्थापित की गई है। मुख्यमंत्री निवास केवल मुख्यमंत्री का नहीं, अपितु सभी प्रदेशवासियों की धरोहर है। प्रदेशवासियों द्वारा दिया गया अधिकार और लोगों का भरोसा ही हमारी सरकार का आधार है। भारतीय संस्कृति के अतीत के गौरवशाली पृष्ठों का प्रकटीकरण हमारा दायित्व है। इसी का परिणाम है कि हमारी कालगणना का केन्द्र उज्जैन है, परंतु कालगणना की पद्धति की जानकारी प्रदेश की राजधानी में हो, इसके लिए प्रयास करते हुए विक्रमादित्य वैदिक घड़ी की स्थापना भोपाल में की गई। भारतीय कालगणना की पद्धति की जानकारी का वैश्विक रूप से भी प्रचार-प्रसार किया जाएगा।
    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि वैदिक घड़ी के ऐप के माध्यम से हम अपने मोबाइल में वैदिक घड़ी का संचालन कर सकते हैं। उन्होंने उच्च शिक्षा और संस्कृति विभाग के इस आयोजन में योगदान की सराहना की। उन्होंने कहा कि हम आजादी के अमृतकाल में चल रहे हैं। पूरी दुनिया का समय बदल रहा है, पश्चिम के बाद अब पूर्व का समय आया है।
    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी अपने दृष्टिकोण को लेकर आगे बढ़ रहे हैं। भारत का मान-सम्मान बढ़ाने के लिए वे प्रतिबद्ध हैं। उन्हीं के प्रयासों से वर्ष 2014 में दुनिया के अंदर यूनेस्को के माध्यम से योग को पुनर्स्थापित किया गया। भारत का ज्ञान, कौशल और विशेषता केवल भारत के लिए नहीं है, यह समूची मानवता के लिए है। भारत का मान-सम्मान बढ़ाने के लिए इस भाव से प्रधानमंत्री श्री मोदी के नेतृत्व में हम निरंतर सक्रिय और अग्रसर हैं।
    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि सुशासन के आधार पर ही विक्रमादित्य काल वर्तमान समय तक याद किया जाता है। सुशासन के इन्हीं उच्चतम मापदंडों के आधार पर प्रधानमंत्री श्री मोदी के नेतृत्व में वर्तमान में व्यवस्थाओं का संचालन हो रहा है। उनके प्रत्येक निर्णय से देश गौरवान्वित होता है। प्रधानमंत्री श्री मोदी हर परिस्थिति में हमारे वैज्ञानिकों, सैनिकों, किसानों सहित देश के लिए समर्पित प्रत्येक व्यक्ति के साथ हैं।
    खेल एवं युवा कल्याण तथा सहकारिता मंत्री श्री विश्वास कैलाश सारंग ने कहा कि उस राष्ट्र का भविष्य ही सुरक्षित रहता है, जो अपने अतीत और संस्कृति को प्रतिबद्धता के साथ आत्मसात करता है। प्रधानमंत्री श्री मोदी के नेतृत्व में देश में सनातन की ध्वजा चहुंओर लहरा रही है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने पिछले लगभग दो वर्षों में विकास और जनकल्याण के साथ सनातन संस्कृति को सहेजने की जो पहल की है, वह सराहनीय और वंदनीय है। कार्यक्रम को पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक कल्याण राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्रीमती कृष्णा गौर, सांसद श्री आलोक शर्मा, वैदिक घड़ी के अन्वेषणकर्ता श्री आरोह श्रीवास्तव, रबीन्द्रनाथ टैगोर विश्वविद्यालय के कुलाधिपति श्री संतोष चौबे और महर्षि सांदीपनि विश्वविद्यालय के कुलगुरू पंडित शिवशंकर मिश्र ने भी संबोधित किया।
    कार्यक्रम में प्रदेश अध्यक्ष श्री हेमंत खंडेलवाल, विधायक श्री रामेश्वर शर्मा, विधायक श्री विष्णु खत्री, भोपाल महापौर श्रीमती मालती राय, अध्यक्ष नगर निगम श्री किशन सूर्यवंशी, मुख्यमंत्री के संस्कृति सलाहकार श्रीराम तिवारी, अपर मुख्य सचिव उच्च शिक्षा श्री अनुपम राजन सहित विभिन्न विश्वविद्यालयों के कुलगुरू और बड़ी संख्या में युवा उपस्थित थे।
    वैदिक घड़ी और ऐप की विशेषताएं
    विक्रमादित्य वैदिक घड़ी भारतीय काल गणना पर आधारित विश्व की पहली घड़ी है, जो भारतीय परंपरा, वैदिक गणना और वैज्ञानिक दृष्टि का अद्भुत संगम है। यह भारत की सांस्कृतिक धुरी बनकर वैश्विक भाषाओं, पंरपराओं, आस्था और धार्मिक कार्यों को जोड़ने वाली महत्वपूर्ण कड़ी बनेगी। साथ ही विक्रमादित्य वैदिक घड़ी के तैयार किये गये मोबाइल ऐप में 3179 विक्रम पूर्व, महाभारतकाल से लेकर 7 हजार से अधिक वर्षों के पंचांग, तिथि, नक्षत्र, योग, करण, वार, मास, व्रत एवं त्यौहारों की दुर्लभ जानकारियां समाहित की गई हैं। धार्मिक कार्यों, व्रत और साधना के लिए 30 अलग-अलग शुभ मुहूर्तों की जानकारी एवं अलार्म की सुविधा भी है। प्रचलित समय में वैदिक समय (30 घंटे), वर्तमान मुहूर्त स्थान, GMT और IST समय, तापमान, हवा की गति, आर्द्रता एवं मौसम संबंधी सूचनाएं भी लोगों को उपलब्ध करायी गई है। यह ऐप 189 से अधिक वैश्विक भाषाओं में उपलब्ध है। इसमें दैनिक सूर्योदय और सूर्यास्त की गणना तथा इसी आधार पर हर दिन के 30 मुहूर्तों का सटीक विवरण शामिल है।

  • स्थानीय उद्योगों के अनुरूप पाठ्यक्रम बनाएं- इंदर सिंह परमार

    स्थानीय उद्योगों के अनुरूप पाठ्यक्रम बनाएं- इंदर सिंह परमार


    भोपाल, 13 अगस्त(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)। उच्च शिक्षा, तकनीकी शिक्षा एवं आयुष मंत्री श्री इन्दर सिंह परमार की अध्यक्षता में मंगलवार को मंत्रालय स्थित सभाकक्ष में रीवा इंजीनियरिंग महाविद्यालय के शासी निकाय (संचालक मंडल) एवं साधारण सभा की 23वीं बैठक हुई। प्रस्तावित कार्यसूची के अनुरूप विभिन्न बिंदुओं पर व्यापक चर्चा हुई। शासी निकाय (संचालक मंडल) एवं साधारण सभा की 22वीं बैठक के कार्य विवरण की पुष्टि के लिए पालन प्रतिवेदन प्रस्तुत किया गया।

    तकनीकी शिक्षा मंत्री श्री परमार ने कहा कि स्थानीय उद्योग जगत की आवश्यकता एवं मांग के अनुरूप पाठ्यक्रमों के अध्यापन की कार्ययोजना बनाकर क्रियान्वयन करें। श्री परमार ने राजीव गांधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के समन्वय के साथ, राज्य स्तर पर “अकैडमिक रिव्यू बोर्ड” बनाने के निर्देश तकनीकी शिक्षा विभाग को दिए, इससे वास्तविक आवश्यकता अनुरूप पाठ्यक्रम संचालन से समस्त इंजीनियरिंग महाविद्यालयों को सुविधा मिल सकेगी। श्री परमार ने कहा कि निर्माण एवं मरम्मत कार्यों में गुणवत्ता पर विशेष ध्यान दें। श्री परमार ने कहा कि संस्थान के विद्यार्थियों से ही निर्माण आदि कार्यों को संपादित करवाने की कार्ययोजना बनाएं, इससे विद्यार्थियों को महाविद्यालयों में ही प्रायोगिक ज्ञान मिल सकेगा।

    तकनीकी शिक्षा मंत्री श्री परमार ने विद्यार्थियों के लिए अकादमिक गुणवत्ता के उत्थान के लिए व्यापक कार्ययोजना के साथ क्रियान्वयन के निर्देश दिए। श्री परमार ने कहा कि संस्थान के हितों से जुड़े आवश्यक कार्यों को प्राथमिकता दें और अकादमिक गुणवत्ता में उत्तरोत्तर वृद्धि के सतत् प्रयास करें। श्री परमार ने कहा कि संस्थान अपनी विशेषता और उत्कृष्टता पर व्यापक कार्य करे ताकि विशिष्ट संदर्भ में संस्थान का नाम आलोकित हो। श्री परमार ने संस्थान की पहचान को पुनः स्थापित कर, आदर्श संस्थान के रूप में स्थापित करने के लिए सार्थक क्रियान्वयन करने की बात भी कही।

    बैठक में रीवा इंजीनियरिंग महाविद्यालय में पीएचडी केंद्र की स्थापना एवं शुल्क निर्धारण, सीएम संकल्प योजना के तहत कोडिंग लैब में प्रशिक्षण के संबंध में व्यय की स्वीकृति, संस्थान में नवीन यूजी तथा पीजी पाठ्यक्रम प्रारंभ करने के लिए सैद्धांतिक स्वीकृति, प्रतिवर्ष 10 मार्च को संस्था के स्थापना दिवस REC Day मनाने एवं टेक फेस्ट के आयोजन के लिए स्वीकृति, संस्थान के नवीन लोगों एवं ध्येय वाक्य के प्रस्ताव का अनुमोदन, संस्थान के कॉलोनी परिसर की सुरक्षा के लिए बाउंड्री वाल के निर्माण के लिए 1 करोड़ 33 लाख 23 हजार रुपए की स्वीकृति, पेयजल व्यवस्था के लिए ओवरहेड टैंक के निर्माण के लिए 32 लाख 39 हजार रुपए की स्वीकृति, भवन निर्माण एवं अन्य मरम्मत कार्य के लिए कुल 67 लाख 39 हजार रुपए की स्वीकृति, विभिन्न विभागों के उपकरणों के क्रय हेतु 50 लाख 51 हजार रुपए की स्वीकृति,

    नगर पालिका निगम रीवा द्वारा अधिरोपित सेवा प्रभार के भुगतान राशि की स्वीकृति, संस्थान के बालक एवं कन्या छात्रावास परीक्षा विभाग, रजिस्ट्रार एवं लेखा कार्यालय, इलेक्ट्रॉनिक विभाग एवं इलेक्ट्रिकल विभाग में फर्नीचर और अलमारी के क्रय के लिए 18 लाख 37 हजार रुपए की स्वीकृति, पुनर्घनत्वीकरण योजना के अंतर्गत 0.66 हेक्टेयर भूमि के बदले 22 करोड रुपए के संस्थान में निर्माण कार्य के लिए स्वीकृति के साथ संशोधित प्रस्ताव प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए। संस्थान परिसर में संजीवनी क्लीनिक निर्माण की अनुमति प्रदान की गई। संस्थान के बिजनेस प्लान को स्वीकृति के साथ विस्तृत गाइडलाइन बनाने के निर्देश भी दिए गए। संस्था के दो प्राध्यापकों को पीएचडी /उच्च शिक्षा के लिए अनुमति तथा भृत्य के पद पर अनुकंपा नियुक्ति के एक पद की स्वीकृति भी प्रदान की गई।

    प्रमुख सचिव तकनीकी शिक्षा कौशल विकास एवं रोजगार श्री मनीष सिंह , कुलगुरु राजीव गांधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय भोपाल प्रो. राजीव त्रिपाठी, आयुक्त तकनीकी शिक्षा श्री अवधेश शर्मा, अध्यक्ष रीवा इंजीनियरिंग कॉलेज ग्लोबल एल्युमिनियम एसोसिएशन श्री आर.एस. शर्मा, रीवा के उद्योगपति श्री विष्णु अग्रवाल एवं संस्थान के प्राचार्य और सदस्य सचिव डॉ. आर.पी. तिवारी सहित शासी निकाय (संचालक मंडल) एवं साधारण सभा के अन्य सदस्यगण एवं विभागीय अधिकारी उपस्थित थे।

  • गोविंद राजपूत पर हमला करके खुद घिरे भूपेन्द्र सिंह

    गोविंद राजपूत पर हमला करके खुद घिरे भूपेन्द्र सिंह


    पूर्व परिवहन मंत्री रहे विधायक भूपेन्द्र सिंह दांगी अब खुद सफाई देते घूम रहे हैं कि उन्होंने सदन में मालथौन के जिस गोविंद सिंह राजपूत पर आदिवासियों की जमीनें हड़पने का आरोप लगाया है वे खाद्य मंत्री गोविंद सिंह राजपूत नहीं हैं। आदिवासियों की जमीनें हड़पने का कार्य तो मालथौन में कथित आतंक का प्रतीक बने गोविंद सिंह राजपूत पिता श्री बलवंत सिंह राजपूत ने किया है। विधानसभा में उन्होंने अपना पूरा भाषण कुछ इस तरह दिया कि लोगों को महसूस हुआ कि वे खाद्य मंत्री के बारे में बात कह रहे हैं। सदन से बाहर हालांकि उन्होंने अपनी सफाई दी लेकिन तब तक सदन की लॉबी में बैठे पत्रकार बाहर जा चुके थे। यही वजह थी कि कई समाचार माध्यमों ने भूपेन्द्र सिंह के आरोपों को खाद्य मंत्री गोविंद सिंह राजपूत पर लगाया गया आक्षेप ही मानकर समाचार रिपोर्ट फाईल कर दी ।


    ये कूटनीति कुछ महाभारत के उस प्रसंग की ही तरह थी जिसमें भगवान कृष्ण ने युधिष्ठिर के माध्यम से संदेश प्रसारित करवाया था जिसमें युधिष्ठिर कहते सुने गए कि अश्वथामा हतो हतः…..इसके बाद की लाईन युद्ध के नगाड़ों के स्वर में नहीं सुनी जा सकी जिसमें उन्होंने विशालकाय हाथी अश्वथामा के बारे में कहा था ….नरो व कुंजरो वा । इस तरह की राजनीतिक चाल चलकर भूपेन्द्र सिंह ने अपने चिर प्रतिद्वंदी गोविंद राजपूत को बदनाम करने का दांव खेला था। उनका यह दांव एक तरह से उलटा पड़ा।


    कहा जाता है मुद्दई लाख बुरा चाहे क्या होता है वही होता है जो मंजूर ए खुदा होता है। कहीं तीर और कहीं निशाना की तर्ज पर उठाए इस मुद्दे पर भूपेन्द्र सिंह ने जो सफाई दी उससे गोविंद राजपूत पर लगे तमाम आरोप खंडित होते मालूम पड़ रहे हैं जिन्हें विपक्ष में बैठे कांग्रेसी भी लंबे समय से लगाते रहे हैं। पिछले चुनावों में जब कांग्रेस की कमलनाथ सरकार सत्ता में आई थी तब ज्योतिरादित्य सिंधिया समर्थक गोविंद सिंह राजपूत और इमरती देवी ने विद्रोह को स्वर देने में प्रमुख भूमिका निभाई थी। इमरती देवी चुनाव हार जाने की वजह से परिदृश्य से बाहर हो गईं लेकिन गोविंद राजपूत तभी से विपक्ष के निशाने पर बने हुए हैं।


    भूपेन्द्र सिंह अपने छात्र जीवन से गोविंद राजपूत के प्रतिद्वंदी रहे हैं। तबके गोविंद और आज के खाद्य मंत्री में बड़ा अंतर आ चुका है। अपने भाई हीरा सिंह राजपूत और क्षत्रियों के खानदानी हुनर के बलबूते गोविंद राजपूत हमेशा सत्ता के नजदीक बने रहे हैं। उनके समर्थक भी लोकतांत्रिक सत्ता का संचालन करने के हुनर में माहिर हो चुके हैं। यही वजह है कि वे लगातार सत्ता में बने हुए हैं और भूपेन्द्र सिंह जैसे उनके प्रतिद्वंदी अब अपनी राजनीतिक पारी समेटते नजर आने लगे हैं।


    दरअसल भूपेन्द्र सिंह दांगी ने भी अपनी लंबी राजनीतिक पारी में सत्ता का भरपूर आचमन किया है। कभी एक छोटी से कथित पारिवारिक मालगुजारी से शुरु उनकी राजनीतिक यात्रा आज अरबों के साम्राज्य तक पहुंच गई है। जब वे परिवहन मंत्री थे तब भी उन्होंने कांग्रेस के समय काल से चली आ रही परंपराओं को जारी रखा था। मध्यप्रदेश की स्थापना से लेकर पिछली सरकार तक परिवहन को सत्ता दुहने का साधन माना जाता रहा है। विदेशी कर्ज चुकाने की चुनौतियों ने आज बेशक इस काली कमाई पर अंकुश लगाने की मजबूरी को जन्म दिया है। इसके बावजूद परिवहन विभाग का अमला आज भी समानांतर जांच चौकियां बनाकर अपने आकाओं को खुश करने मेंजुटा हुआ है।


    परिवहन आरक्षक सौरभ शर्मा के ठिकानों से बरामद नकदी, सोना और अन्य बेनामी संपत्तियों को लेकर कांग्रेस के नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार भी गोविंद राजपूत को घेरने का प्रयास करते हैं । इसका नतीजा ये होता है कि समूची भाजपा गोविंद राजपूत के पक्ष में आकर खड़ी हो जाती है और परिवहन घोटाले की फाईल ठंडे बस्ते में पहुंच जाती है। ऐसा ही कुछ इस बार हुआ जब भूपेन्द्र दांगी के भाषण के बाद पूरा सरकारी तंत्र स्पष्टीकरण देने में जुट गया कि मालथौन वाले गोविंद सिंह राजपूत हमारे खाद्य मंत्री नहीं हैं।


    जाहिर सी बात है कि खाद्य मंत्री को लेकर विपक्ष और पार्टी के ही कुछ पुराने भाजपाई जिस तरह से लामबंद होते जा रहे हैं गोविंद राजपूत की ताकत उतनी ही ज्यादा बढ़ती जा रही है। भूपेन्द्र सिंह ने आदिवासियों की जमीनें छिनने का बवंडर खड़ा करके खुद को बड़ा जनसेवक बताने की जो चेष्ठा की उसने उन्हें ही सरकार के निशाने पर ला खड़ा किया है। जबसे वे मंत्री पद से हटाए गए हैं तभी से बार बार वे अपनी मौजूदगी दर्ज कराने का जतन करते रहे हैं। जिस तरह से उन्होंने विधानसभा के अपने भाषण पर सफाई दी उससे उनकी बचाव की मुद्रा भी यही कुछ बयान कर रही है।


    दरअसल भाजपा ने सत्ता की आड़ में अपना घर भरने वाले नेताओं को घर बिठाने का जो अभियान चला ऱखा है उसकी वजह से कई नेताओं को अपना भविष्य खतरे में नजर आने लगा है। वे जब तक सत्ता के शेर पर सवार हैं तब तक तो उनकी कहानी चलती रहेगी लेकिन जैसे ही वे सत्ता से दूर होंगे उनकी काली कमाई का साम्राज्य धूल धूसरित कर दिया जाएगा। भोपाल का मछली साम्राज्य इसकी जीती जागती मिसाल है।


    भूपेन्द्र सिंह अपने विधानसभा क्षेत्र में खडे़ गोविंद राजपूत मालथौन जैसे उस दिग्गज प्रतिद्वंदी को समेटने का प्रयास कर रहे हैं। जिसने अपनी भतीजी रक्षा राजपूत को कांग्रेस से टिकिट दिलवाकर भूपेन्द्र सिंह के सामने कड़ी राजनैतिक चुनौती खड़ी कर दी थी। भूपेन्द्र सिंह भले ही मालथौन के गोविंद सिंह राजपूत को भाजपा में लाए हों लेकिन तभी से वे उसे समाप्त करने की मुहिम भी चलाए हुए हैं। उसके बेटे का कथित अनाज घोटाला उजागर करने के बाद तो उनके लिए खुरई और मालथौन में अपने विरुद्ध बड़ी राजनीतिक ताकत खड़ी होती नजर आ रही है। अपने प्रतिद्वंदियों को वे समाप्त करने का जितना प्रयास कर रहे हैं उतना खुद ही दलदल में फंसते देखे जा रहे हैं।

  • विधानसभा ने लगभग ढाई हजार करोड़ रुपए और मंजूर किए

    विधानसभा ने लगभग ढाई हजार करोड़ रुपए और मंजूर किए

    भोपाल, 30 जुलाई(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)। मध्यप्रदेश विधानसभा में आज तीसरे दिन 2335.36 करोड़ रुपए का अनुपूरक बजट पारित किया गया । अनुपूरक बजट पर चर्चा के दौरान डिप्टी सीएम और वित्त मंत्री जगदीश देवड़ा ने कहा कि सभी क्षेत्र में विकास के लिए पर्याप्त प्रावधान मूल बजट में भी किए गए हैं और जहां राशि की जरूरत पड़ी है वहां अनुपूरक बजट में व्यवस्था की जा रही है।


    नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने कहा- ये कर्ज लेकर घी पीने वाली सरकार है। सरकार लगातार कर्ज ले रही है। सत्र का समय भी कम किया जा रहा है। जिससे जनता की बात नहीं हो पाती है। सिंघार ने कहा- मुख्यमंत्री के पास विदेश यात्रा के लिए बजट और समय दोनों है, लेकिन जनता के लिए न बजट है और न समय है।


    कांग्रेस विधायक ओमकार सिंह मरकाम ने आरोप लगाया कि ट्रांसफर के नाम पर वसूली की जा रही है। उन्होंने ये भी कहा कि सत्ताधारी दल के विधायकों को 15-15 करोड़ रुपए की राशि दी जा रही, जबकि विपक्षी विधायकों को विकास के लिए राशि नहीं दे रहे हैं।
    इससे पहले कांग्रेस विधायक लखन घनघोरिया ने कहा कि पहले सड़कें बनती थीं तो कम से कम एक बारिश में कोई दिक्कत नहीं होती थी। अब 40 दिन में सड़कें उखड़ रही हैं। जबलपुर की सड़कों का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि 56 करोड़ की सड़क इसी बारिश में बह गई। अधिकारी दिखावे की कार्रवाई करते हैं।


    सदन की कार्यवाही शुरू होने से पहले कांग्रेस के विधायकों ने पेसा कानून को सही तरीके से लागू न किए जाने के विरोध में प्रदर्शन किया। सरकार पर आदिवासियों को वन क्षेत्र से बेदखल किए जाने का आरोप लगाया। कांग्रेस विधायकों ने कपड़ों पर पेड़ों के पत्ते लपेटकर प्रदर्शन किया।
    इस पर पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री प्रहलाद पटेल ने कहा- मुझे लगता है कि जिन्होंने जीवन में कुछ नहीं किया उन्हें मूल्यांकन का भी अधिकार नहीं है। पेसा के मामले में जिस ढंग से काम हुआ है वह बेहतरीन है।


    उमंग सिंघार ने स्मार्ट मीटर पर सवाल उठाते हुए कहा कि उसकी स्पीड जेट की तरह है 200 का बिल देने वालों को 2000 देना पड़ रहा है।
    सिंघार ने विधायकों और पूर्व विधायकों के वेतन का मामला भी उठाया और कहा कि जो वेतन मिलता है, उसमें गुजारा होना मुश्किल होता है। विधायक निधि भी बढ़ाई जानी चाहिए।


    एमएसएमई पॉलिसी पर सवाल उठाते हुए सिंघार ने कहा कि बड़े उद्योगों को 1 रुपए में जमीन दी जाती है, लेकिन छोटे उद्योगों को 5 लाख, 10 लाख, 20 लाख रुपए में जमीन दी जाती है। ऐसे में छोटे उद्योग कहां लगेंगे। सभी योजनाओं में करप्शन भरा पड़ा है। योजनाओं में सोशल ऑडिट बहुत जरूरी है।


    आयुष्मान कार्ड की व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए सिंघार ने कहा कि 131830 कार्ड धारक ने प्रदेश के बाहर इलाज कराया। यानी प्रदेश में डॉक्टर नहीं है, इसलिए बाहर जाना पड़ रहा है।


    राजस्व मंत्री करण सिंह वर्मा ने अति वृष्टि के कारण खराब हुई फसलों को लेकर कहा कि सभी कलेक्टरों को ये निर्देश दिए गए हैं कि जहां जितना भी नुकसान हुआ है, उसका सर्वे कर तत्काल जानकारी भेजें। जिनका जो नुकसान हुआ है उन किसानों को आरबीसी 6/4 के अंतर्गत मुआवजा दिया जाएगा।


    विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर की अनुमति के बाद आज 4 विधेयक सदन में पेश किए गए। उच्च शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार ने मध्य प्रदेश विश्वविद्यालय संशोधन विधेयक 2025 पेश किया। उप मुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा ने तीन विधेयक पेश किए। पहला भारतीय स्टांप मध्य प्रदेश संशोधन विधेयक 2025, दूसरा रजिस्ट्रीकरण मध्य प्रदेश संशोधन विधेयक 2025 और तीसरा भारतीय स्टांप मध्य प्रदेश द्वितीय संशोधन विधेयक 2025 किया।


    इसी मामले में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने कहा कि सरकार ने यहां के लोगों को भू अधिकार पत्र दे दिया, लेकिन रजिस्ट्री नहीं कर रही है। स्वामित्व दे दिया है लेकिन बाकी सुविधा नहीं दे रहे। इस मामले में कोई टाइम लिमिट तय की जानी चाहिए। इस पर पंचायत मंत्री प्रहलाद पटेल ने कहा कि कलेक्टर से इस मामले में जानकारी लेकर निराकरण का काम करेंगे।


    कांग्रेस के प्रदर्शन पर सागर के बीजेपी विधायक शैलेंद्र जैन ने कहा- हमारी सरकार आदिवासी हितों के लिए काम करने वाली है। आदिवासियों के लिए हमने कई योजनाएं बनाई हैं, जबकि कांग्रेस पाखंड करती है।

  • भोपाल की महिलाओं ने सकारात्मक सोच से देश को दिया संदेश बोले नरेन्द्र मोदी

    भोपाल की महिलाओं ने सकारात्मक सोच से देश को दिया संदेश बोले नरेन्द्र मोदी

    महापौर श्रीमती मालती राय ने भोपाल का गौरव बढ़ाने वाली महिलाओं को किया सम्मानित

    भोपाल 27 जुलाई (प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने आज मन की बात कार्यक्रम में भोपाल को स्वच्छता में निरंतर आगे बढ़ने और भोपाल की स्वच्छता में सकारात्मक सोच रखने वाली संस्था द्वारा किए जा रहे कार्यों की सराहना की और भोपाल में स्वच्छता के प्रति समर्पित महिलाओं का मान बढ़ाया है। सकारात्मक सोच संस्था की सदस्यों ने भोपाल को गौरवान्वित किया है। यह विचार महापौर श्रीमती मालती राय ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा मन की बात कार्यक्रम में सकारात्मक सोच संस्था का उल्लेख करने पर संस्था की सदस्यों के सम्मान कार्यक्रम में व्यक्त किये। इस मौके पर महापौर श्रीमती मालती राय ने भोपाल और भोपाल की स्वच्छता से संलग्न संस्था की सराहना करने पर प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के प्रति आभार भी व्यक्त किया।
    सम्मान कार्यक्रम में महापौर परिषद के सदस्य श्री आर के सिंह बघेल श्री रविंद्र यति श्रीमती सुषमा बवीसा ,जोन अध्यक्ष श्री राजेश चौकसे,पार्षद श्री जीतेन्द्र सिंह राजपूत सहित बड़ी संख्या में सकारात्मक सोच की सदस्य और गणमान्य नागरिक मौजूद थे।
    प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को प्रसारित मन की बात कार्यक्रम में भोपाल को स्वच्छता में निरंतर आगे बढ़ाने और भोपाल की स्वच्छता में सकारात्मक सोच संस्था द्वारा किए जा रहे कार्यों का उल्लेख करते हुए कहा कि भोपाल में एक टीम का नाम है सकारात्मक सोच इसमें 200 महिलाएं हैं यह सिर्फ सफाई ही नहीं करती बल्कि सोच भी बदलने का कार्य करती है। एक साथ मिल कर शहर के 17 पार्कों की सफाई करना, कपड़े के थैले बांटना जैसे इनके हर कदम एक संदेश है। ऐसे प्रयासों की वजह से ही भोपाल भी अब स्वच्छ सर्वेक्षण में काफी आगे आ गया है।
    प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी द्वारा अपने लोकप्रिय कार्यक्रम मन की बात में भोपाल की स्वच्छता और स्वच्छता से संलग्न सकारात्मक सोच संस्था व उसके कार्यों का उल्लेख भोपालवासियों के लिए गौरव की बात है। महापौर श्रीमती मालती राय स्वामी विवेकानन्द पार्क अशोका गार्डन में मन की बात कार्यक्रम सुनने के बाद जोन 15 वार्ड 68 सोनागिरी के मिलखा सिंह पार्क स्थित सकारात्मक सोच संस्था के कार्यालय पहुंची और सदस्यों को सम्मानित किया। उन्हें बधाई और शुभकामनाएं देते हुए उन्होंने कहा कि संस्था गरिमामयी सदस्यों की टीम के प्रयास आज सार्थक साबित हुए हैं।

  • सीएस बोले विधानसभा तक पहुंचाएं सरकार के कामकाज

    सीएस बोले विधानसभा तक पहुंचाएं सरकार के कामकाज

    भोपाल, 17 जुलाई(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)।मुख्य सचिव अनुराग जैन ने कहा है कि सरकार के तमाम कामकाज की रिपोर्ट विधानसभा तक पहुंचाएं ताकि आगामी विधानसभा सत्र में उन कार्यों पर सदन में सफल चर्चा हो सके।उनकी अध्यक्षता में विधानसभा के आगामी सत्र की तैयारी और लंबित कार्यों की समीक्षा में उन्होंने प्रश्नों की जानकारियां जल्दी बनाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि बैठक में शून्यकाल, अपूर्ण उत्तर, आश्वासन, लोकलेखा समिति की सिफारिशें, विधानसभा में विभागों के प्रशासनिक प्रतिवेदन प्रस्तुत करने पर चर्चा की गयी। मुख्य सचिव श्री जैन ने निर्देश दिए कि सभी विभाग प्रमुख अपने काम समय-सीमा में करें। कार्य की साप्ताहिक समीक्षा भी की जाये।

    मुख्य सचिव श्री जैन ने बैठक में 5 वीं राष्ट्रीय मुख्य सचिव कांफ्रेंस की तैयारियों के भी निर्देश दिये। उन्होंने अतिरिक्त कोर्ट केस, राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण, मानवाधिकार आयोग, अनुसूचित जाति/ जनजाति आयोग के प्रकरणों में राज्य शासन की ओर से समय-सीमा में जवाब प्रस्तुत करने के भी निर्देश दिये।

    बैठक में अपर मुख्य सचिव डॉ. राजेश राजौरा, श्री जे.एन. कंसोटिया, श्री अशोक वर्णवाल, श्री संजय शुक्ल, श्री मनु श्रीवास्तव, श्रीमती रश्मि अरूण शमी, प्रमुख सचिव श्री विवेक पोरवाल, श्री संदीप यादव सहित विभागों के सचिव, अपर सचिव एवं उप सचिव उपस्थित थे।