Category: सरकार

  • समर्थ हैं तो जरूरतमंदों की मदद करें बोलीं राज्यपाल

    समर्थ हैं तो जरूरतमंदों की मदद करें बोलीं राज्यपाल

    भोपाल 7 दिसंबर(प्रेस सूचना केन्द्र)।राज्यपाल श्रीमती आनंदीबेन पटेल ने कोलार रोड स्थित दिल्ली पब्लिक स्कूल के तृतीय वार्षिक उत्सव में प्रायमरी, माध्यमिक और उच्च माध्यमिक कक्षाओं में प्रथम आने वाले बच्चों, खेलकूद में सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाले बच्चों और संगीत के क्षेत्र में विशिष्ट प्रदर्शन करने वाले बच्चों को स्मृति-चिन्ह और प्रशस्ति पत्र प्रदान किये। उन्होंने स्कूल प्रबंधन को राजभवन परिवार के बच्चों को साँची घुमाने के लिये बसे उपलब्ध करवाने, बाल साहित्य प्रदान करने और पढ़े भोपाल में सक्रिय योगदान के लिये धन्यवाद दिया।

    राज्यपाल ने कहा कि हर समर्थवान को जरूरतमंद की मदद करना चाहिये। इसी भावना के साथ बड़े स्कूल छोटे स्कूलों की मदद करें और गरीब बच्चों को आगे लाने का प्रयास करें। उन्होंने कहा कि अगर लोग अपने जन्म-दिन पर स्कूलों में जाकर बच्चों को फल-मिठाई आदि वितरित करेंगे, तो बच्चे तो खुश होंगे ही, उन्हें भी आत्म संतुष्टि मिलेगी।

    कार्यक्रम के प्रारंभ में स्कूल प्रबंधन ने राज्यपाल का स्वागत करते हुए उनके ही फोटो पर ऑटोग्राफ लिये और फूलों का पौधा भेंट किया। स्कूल की छात्रा सुश्री कमलप्रीत कौर ने राज्यपाल को चारकोल से बनाई गई उन्हीं की पेंटिंग भेंट की। कार्यक्रम के दूसरे चरण में स्कूलों के बच्चों द्वारा सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किये गये।

    राज्यपाल ने स्कूली बच्चों को बाँटी किताबें और खेलकूद, पेंटिंग की सामग्री

    बच्चों को जब किसी विशिष्ट व्यक्ति के स्नेह और दुलार के साथ-साथ उपहार मिलता है, तो उनमें नई ऊर्जा का संचार होता है और उनके चेहरे की खुशी देखते ही बनती है। ऐसा ही अवसर शा.मा. शाला कुम्हारपुरा के स्कूल के बच्चों के लिये था, जब उन्हें राजभवन में राज्यपाल श्रीमती आनंदीबेन पटेल ने आमंत्रित कर खेलकूद का सामान, चित्रकला सामग्री और बाल साहित्य की किताबें बाँटीं।

    राज्यपाल ने बच्चों से कहा कि हमें अपना हर काम स्वयं करने की कोशिश करना चाहिये क्योंकि इससे आत्मबल बढ़ता है और हम सक्षम बनते हैं। उल्लेखनीय है कि श्रीमती पटेल ने पहले राजभवन में संचालित वर्तमान में कुम्हारपुरा स्कूल को गोद लेकर वहाँ के बच्चों की बेहतरी के लिये काम शुरू किये है। उनके प्रयासों से बैंक ऑफ बड़ोदा के सहयोग से प्राप्त खेल सामग्री, बीएसएनएल के सहयोग से प्राप्त पेंटिंग सामग्री एवं डी.पी.एस. स्कूल के सहयोग से प्राप्त बाल साहित्य बच्चों को भेंट किया गया।

    श्रीमती पटेल ने बच्चों को इण्‍डोर गेम्स कैरम, शतरंज, लूडो, रस्सी, बेडमिंटन और चित्रकला में कलर बुक, पेंटिंग स्टेंड और कलर्स दिये, वही किताबों में प्रेमचंद साहित्य के अलावा अनेक ज्ञानवर्धक किताबें दीं, जिसे पाकर बच्चे प्रसन्न और उत्साहित थे। कुम्हारपुरा स्कूल की 8वीं कक्षा की छात्रा सोनिया ने कार्यक्रम का संचालन किया। उसने कहा कि पहले हम लोगों के पास खेल, चित्रकला, संगीत और कम्प्यूटर जैसा कोई सामान नहीं था। राज्यपाल द्वारा दी गई सामग्री से हम सभी बच्चे खूब खेलेंगे, चित्रकारी करेंगे, संगीत सीखेंगे और स्मार्ट कक्षाओं में पढ़ाई भी करेंगे। इस अवसर पर बच्चों ने सांस्कृतिक कार्यक्रमों की प्रस्तुति भी दी। इस मौके पर राज्यपाल के सचिव, उप सचिव और स्कूल प्रबंधन भी उपस्थित था।

  • बच्चों की सुरक्षा में सचेत रहेंः राघवेन्द्र शर्मा

    मध्यप्रदेश बाल अधिकार संरक्षण आयोग में हुई विस्तृत चर्चा

    भोपाल,28 सितंबर(करुणा राजुरकर)। स्कूली बच्चों की सुरक्षा के विषय पर म.प्र. राज्य बाल आयोग ने राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग के सहयोग से समन्वय भवन में आज एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया। कार्यशाला में विषय प्रवर्तन करते हुए म.प्र. बाल आयोग के अध्यक्ष श्री राघवेन्द्र शर्मा ने कहा कि आयोग का प्रमुख कार्य आर.टी.ई. तथा किशोर न्याय अधिनियम और लैंगिक अपराधों पर कारवाई करना है। उन्होंने नियमों के पालन में व्यवहारिक कठिनाईयों का उल्लेख करते हुए कहा कि मौलिक अधिकारों का हनन आपराधिक श्रेणी में आता है। श्रम कानून के हिसाब से 18 वर्ष से कम उम्र के बच्चे से काम करवाना अपराध है। नये चाइल्ड लेबर एक्ट में 14 वर्ष की उम्र के बाद बच्चे को कौशल विकास का प्रशिक्षण दिया जा सकता है। अत: इन सारे विराधाभासों को दूर करते हुए तथा म.प्र के सभी विभागों में बच्चों को लेकर जो भी नियमावली है, उन्हें एकजाई कर नये नियम बनाये जाने और उनकी मॉनिटरिंग बाल आयोग द्वारा किये जाने की आवश्यकता है।

    ए.आई.जी. सायबर क्राइम श्री सुधीर गोयनका ने प्रदेश के विद्यालयों से आये प्राचार्यों और प्रबंधकों को वाट्सएप, इंटरनेट के माध्यम से बच्चों द्वारा जाने-अनजाने में किये जा रहे अपराधों के बारे में जानकारी देते हुए उन्हें सचेत रहने के लिये कहा। उन्होंने बताया कि 13 वर्ष की उम्र से बच्चा अपना फेसबुक प्रोफाइल और 18 वर्ष के बाद ई-मेल आई डी बना सकता है। उन्होंने डिजीटल फुटप्रिंट को मैनेज करने के लिये विवेकपूर्ण इस्तेमाल करने की सलाह भी दी। एक महत्वपूर्ण बात उन्होंने प्रशिक्षार्णियों को यह भी बताई कि हमें अपने हर खाते का पासवर्ड ऐसे ही अलग रखना चाहिये, जैसे हर कमरे का एक ताला और चाबी रखते हैं।

    राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग के तकनीकी विशेषज्ञ श्री रजनीकांत ने तैयार की जा रही नियमावली के महत्वपूर्ण बिंदुओं पर प्रकाश डाला और सुझाव भी आमंत्रित किए। उन्होंने बच्चों की सुरक्षा एवं अन्य समस्याओं के समाधान के लिये शिकायत पेटी लगाने के साथ-साथ स्कूल की संरचना, प्रबंधन सेनीटेशन जैसी सुविधाओं पर विशेष ध्यान देने की जरूरत बताई। उनका मानना था कि बच्चों को 5वीं कक्षा के पश्चात् ही कम्प्यूटर शिक्षा दी जानी चाहिये। उन्होंने बस्ते का बोझ घटाने के लिये किये जा रहे नवाचारों की भी चर्चा की।

    कार्यशाला के समापन पर प्रशिक्षणार्थियों ने बच्चों की शिक्षा-सुरक्षा और अन्य मुद्दों पर महत्वपूर्ण सुझाव दिये। इस अवसर पर बाल आयोग के सदस्य श्री आशीष कपूर, रवीन्द्र मोरे, सचिव श्रीमती शुभा वर्मा, जिला शिक्षा अधिकारी श्री धमेन्द्र शर्मा, राज्य शिक्षा केन्द्र के श्री रमाकांत तिवारी विशेष रूप से उपस्थित थे।

  • किसानों को राहत देने सरकार ने बदला कानून

    किसानों को राहत देने सरकार ने बदला कानून


    मंत्रि-परिषद के निर्णय

    भोपाल 16 जुलाई(पीआईसी)।
    मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान की अध्यक्षता में आज हुई मंत्रि-परिषद की बैठक में सहायक उप निरीक्षक (कम्प्यूटर)/प्रधान आरक्षक (कम्प्यूटर) और आरक्षक संवर्ग की सीधी भर्ती में महिला उम्मीदवारों के लिये ऊँचाई मापदंड 155 सेन्टीमीटर रखने का निर्णय लिया गया।

    मंत्रि-परिषद ने विदेश अध्ययन छात्रवृत्ति योजना में पिछड़े वर्ग के 10 विद्यार्थियों के स्थान पर 50 विद्यार्थियों को प्रतिवर्ष लाभांवित करने का निर्णय लिया। इस योजना में उनकी छात्रवृत्ति का भुगतान शासन द्वारा किया जायेगा।

    किसान-कल्याण एवं कृषि विकास

    मंत्रि-परिषद ने भारत सरकार द्वारा नेशनल मिशन ऑन एग्रीकल्चर एक्सटेंशन एण्ड टेक्नॉलाजी अंतर्गत सब-मिशन ऑन एग्रीकल्चर मेकेनाईजेशन (एस.एम.ए.एम) के वर्ष 2017-18 से 2019-20 तक निरंतर संचालन के लिये कुल 379 करोड़ 89 लाख रूपये का अनुमोदन देने का निर्णय लिया। इसमें केन्द्रांश 227 करोड़ 93 लाख और राज्यांश 151 करोड़ 96 लाख रूपये है।

    मंत्रि-परिषद ने प्रदेश में कृषि यंत्रीकरण की गतिविधियों को समग्र रूप से विस्तारित करने के उद्देश्य से क्रियान्वित की जा रही कृषि शक्ति योजना के वर्ष 2017-18 से 2019-20 तक निरंतर संचालन के लिये 32 करोड़ 35 लाख रूपये स्वीकृत किये।

    राजस्व

    मंत्रि-परिषद ने राजस्व पुस्तक परिपत्र में केला फसल की हानि के लिये आर्थिक अनुदान सहायता राशि के मापदंडों में संशोधन करने का निर्णय लिया। निर्णय अनुसार 25 से 33 प्रतिशत फसल क्षति होने पर 15 हजार रूपये प्रति हेक्टेयर अनुदान सहायता, 33 से 50 प्रतिशत पर 27 हजार और 50 प्रतिशत से अधिक फसल क्षति होने पर 1 लाख रूपये प्रति हेक्टेयर अनुदान सहायता राशि देने का निर्णय लिया गया।

    मंत्रि-परिषद ने जिला राजपूत समाज ट्रस्ट, मंदसौर को स्कूल, छात्रावास, सामुदायिक भवन और सांस्कृतिक भवन निर्माण के लिये कस्बा मंदसौर में भूमि आवंटन करने का निर्णय लिया।

    जल संसाधन

    मंत्रि-परिषद ने खण्डवा जिले की भाम मध्यम सिंचाई परियोजना के लिये भू-अर्जन अधिनियम और पुनर्वास नीति के अनुसार भू-अर्जन एवं पुनर्व्यवस्थापन के लिये परियोजना प्रतिवेदन अनुसार अनुमानित व्यय के अतिरिक्त डूब क्षेत्र के कृषकों को विशेष पैकेज का लाभ देने का निर्णय लिया। परियोजना की प्रशासकीय स्वीकृति में भू-अर्जन एवं पुनर्वास कार्य के लिये 71 करोड़ 93 लाख का प्रावधान है। डूब क्षेत्र के ऐसे कृषक, जिन्हें भू-अर्जन अधिनियम के तहत सोलेशियम सहित मुआवजा राशि 10 लाख रूपये प्रति हेक्टेयर से कम प्राप्त हो रही है, को विशेष पैकेज के तहत न्यूनतम 10 लाख रूपये प्रति हेक्टेयर की दर से एकमुश्त राशि देने की स्थिति में भू-अर्जन एवं पुनर्वास पर 62 करोड़ 72 लाख रूपये की राशि व्यय की जाऐगी।

    इसी प्रकार खण्डवा जिले की आवंलिया मध्यम सिंचाई परियोजना के लिए भू-अर्जन एवं पुनर्व्यवस्थापन के लिए डूब क्षेत्र के कृषकों को 47 करोड़ 78 लाख की राशि का व्यय विशेष पुनर्वास पैकेज अन्तर्गत किया जायेगा।

    मंत्रि-परिषद ने श्योपुर जिले की चंबल सूक्ष्म सिंचाई परियोजना के कुल सैंच्य क्षेत्र 12 हजार हेक्टेयर के लिये 167 करोड़ 58 लाख रूपये की प्रशासकीय स्वीकृति दी है।

    चिकित्सा शिक्षा

    मंत्रि-परिषद ने चिकित्सा महाविद्यालय, ग्वालियर में कैंसर उपचार की उच्च क्षमता वाली रेडियोथेरेपी मशीन स्थापित करने और उपचार की गुणवत्ता बढ़ाने के लिये टर्सरी कैंसर केयर सेंटर की स्थापना के लिये 42 करोड़ रूपये के पूँजीगत निवेश तथा 12 नवीन पदों के सृजन का स्वीकृति दी।

    इसी क्रम में चिकित्सा शिक्षा विभाग के अंतर्गत ग्वालियर स्थित मानसिक आरोग्यशाला में राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य प्रोग्राम के अंतर्गत मेन पॉवर डेव्हलपमेन्ट स्कीम की निरंतरता और स्वीकृत 31 करोड़ 60 लाख की परियोजना के क्रियान्वयन के लिये 16 संविदा पदों के सृजन का भी अनुमोदन दिया।

    चिकित्सा महाविद्यालय, जबलपुर में न्यूरो सर्जरी विभाग को राष्ट्रीय सर्वश्रेष्ठ बैंचमार्क स्तर की सुविधा प्रदान करने के उद्देश्य से उसके उन्नयन के लिये 75 नवीन पदों के सृजन तथा निर्माण कार्य के लिये 15 करोड़ 83 लाख 11 हजार रूपये की पुनरीक्षित स्वीकृति प्रदान की गई।

    भंडार क्रय नियम में संशोधन

    मंत्रि-परिषद ने सामान्य उपयोग की सामग्री और सेवाएँ लेने के लिए भारत सरकार द्वारा विकसित जैम पोर्टल (गव्हर्नमेंट ई-मार्केट प्लेस) का उपयोग करने के लिए म.प्र भण्डार क्रय तथा सेवा उपार्जन नियम 2015 में संशोधन कर म.प्र भण्डार क्रय तथा सेवा उपार्जन नियम 2017 का अनुमोदन किया।

    लोक निर्माण

    मंत्रि-परिषद ने म.प्र राजमार्ग निधि में प्राप्त होने वाले राजस्व की राशि का वित्तीय वर्ष 2018-19 से आगामी 10 वर्ष के लिये म.प्र रोड डेव्हलपमेंट कार्पोरेशन के पक्ष में प्रतिभूतिकरण करने का निर्णय लिया। इसका उपयोग कार्पोरेशन द्वारा निर्माणाधीन और नवीन राज्य राजमार्गों तथा मुख्य जिला मार्गों के लिए किया जाएगा।

    कर्मचारी कल्याण

    मंत्रि-परिषद ने कार्यभारित सेवा में कार्यरत कर्मचारियों तथा दैनिक वेतन भोगी श्रमिकों, स्थाई कर्मियों को मृत्यु-सह-सेवानिवृत्ति उपादान का भुगतान, उपादान भुगतान अधिनियम 1972 के प्रावधानों के तहत करने का निर्णय लिया। यह व्यवस्था 7 अक्टूबर 2016 से प्रभावी होगी। मंत्रि-परिषद ने निर्णय लिया कि इस तिथि के पूर्व मृत अथवा सेवानिवृत्त कर्मचारियों के प्रकरणों में, जिनमें नियंत्रण प्राधिकारी अथवा न्यायालय द्वारा निर्णय दिया गया है अथवा भविष्य में दिया जाता है, गुण दोष के आधार पर परिपालन के संबंध में निर्णय लेने के लिये संबंधित विभाग के विभागाध्यक्ष को प्राधिकृत किया जाये।

    विधि विधायी

    मंत्रि-परिषद ने म.प्र उच्च न्यायालय के निजी सचिवों का ग्रेड वेतन दिनांक 1 जनवरी 2016 से 4200 रूपये से उन्नयित कर 4800 रूपये किये जाने को अनुमोदन प्रदान किया।

    सहकारिता

    मंत्रि-परिषद ने जिला सहकारी केन्द्रीय बैंकों से संबद्ध प्राथमिक कृषि साख सहकारी समितियों (पैक्स) के डिफाल्टर सदस्यों के बकाया कालातीत ऋणों के निपटारे के लिये 6 अप्रैल 2018 से लागू मुख्यमंत्री ऋण समाधान योजना में भाग लेने की अंतिम तिथि 31 जुलाई 2018 तक बढा़ने के निर्णय को अनुमोदन प्रदान किया।

    अनुसूचित जाति कल्याण

    मंत्रि-परिषद ने अनुसूचित जाति कल्याण विभाग की बस्ती विकास योजना को वर्ष 2017-18 से 2019-20 तक निरंतर संचालित करने का निर्णय लिया।

  • खेती को उद्योग बनाने की दिशा में कई फैसले

    खेती को उद्योग बनाने की दिशा में कई फैसले

    खेती में निवेश की राह में रोड़े बने कानूनों की समीक्षा के बाद राजस्व मंत्री उमाशंकर गुप्ता ने प्रस्ताव कैबिनेट में प्रस्तुत किया।

    भोपाल(पीआईसी)। मध्यप्रदेश सरकार ने खेती को उद्योग की तरह लाभकारी बनाने की दिशा में कई नियमों में फेरबदल किए हैं। हालांकि अभी खेती को उद्योग का दर्जा नहीं दिया जा रहा है पर इन बदलावों से खेती पर निवेश बढ़ाने में मदद मिलेगी। केबिनेट ने फैसला लिया है कि लगातार तीन साल किराए की जमीन पर लगातार खेती करने से मिलने वाला भू-स्वामी का अधिकार अब नहीं मिलेगा। इसके लिए भू-राजस्व संहिता के मौरूषी के अधिकार को विलोपित किया जाएगा। इस प्रावधान के चलते लोग अपनी जमीन किराए पर नहीं देते थे और ये खाली पड़ी रहती थी। इससे कृषि विकास दर के साथ उत्पादन भी प्रभावित होता था।

    सरकार विधानसभा के मानसून सत्र में भू-राजस्व संहिता 1959 में व्यापक बदलाव का विधेयक लाएगी। शहरी क्षेत्रों में भूखंड को फ्री-होल्ड कराने के बाद भी भू-स्वामी का अधिकार नहीं मिल पाता था, वो समस्या भी अब दूर हो जाएगी। शहरी क्षेत्रों में भूमि प्रबंधन की व्यवस्था बनाई जाएगी। आबादी की जगह नक्शे में अब भू-स्वामी को दर्शाया जाएगा। इसके बाकायदा पत्र भी दिए जाएंगे। बैठक में इसके अलावा पेटलावद मोहर्रम जुलूस विवाद संबंधी न्यायिक जांच आयोग की रिपोर्ट को मंजूरी दी गई। यह रिपोर्ट विधानसभा के पटल पर रखी जाएगी। इसमें आरएसएस कार्यकर्ताओं को क्लीचचिट दी गई है।

    कैबिनेट बैठक के बाद जनसंपर्क मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा और राजस्व मंत्री उमाशंकर गुप्ता ने बताया कि भू-राजस्व संहिता की 122 धाराओं में बदलाव किए गए हैं। संहिता को किसान के साथ जन उपयोगी बनाया गया है। राजस्व मंडल से राजस्व न्यायालयों के नियम बनाने की शक्ति वापस ले ली गई है। नामांतरण आदेश पारित होने के बाद जब तक इसकी नि:शुल्क प्रति संबंधित व्यक्ति को नहीं मिल जाएगी, तब तक प्रक्रिया को पूरा नहीं माना जाएगा। सीमांकन के लिए निजी एजेंसियों को लाइसेंस दिए जाएंगे।

    सीमांकन में विवाद होने पर तहसीलदार सुनवाई करके आदेश देंगे। इसकी अपील अनुविभागीय अधिकारी के पास होगी और उसका फैसला अंतिम होगा। मामूली बातों पर अपील खारिज करने के प्रावधान को समाप्त कर दिया गया है। डायवर्सन के लिए अब व्यक्ति को भटकना नहीं पड़ेगा। मास्टर प्लान में जो लैंडयूज दिया गया है, वैसा ही भूमि का उपयोग करने पर तय शुल्क चुकाकर जो रसीद मिलेगी उसे ही प्रमाण मान लिया जाएगा।

    बंदोबस्त की समस्याओं का निराकरण अब कलेक्टर स्वयं कर सकेंगे। अब तक ये 30 साल में एक बार होता था, यह व्यवस्था खत्म करके कलेक्टरों को अधिकार दिया गया है वे जहां जरूरी समझें तो बंदोबस्त करा सकते हैं। ग्रामीण क्षेत्रों के पटवारी हलके की तरह शहरी क्षेत्रों में सेक्टर और ब्लॉक की व्यवस्था होगी। सार्वजनिक उपयोग के लिए जमीन आरक्षित करने का अधिकार कलेक्टर को होगा।

  • उत्तर पुस्तिका पाना परीक्षार्थी का अधिकार

    उत्तर पुस्तिका पाना परीक्षार्थी का अधिकार

    विक्रम विश्वविद्यालय के कुलपति व कुलसचिव को सूचना आयोग की फटकार
    अपीलार्थी को उत्तर पुस्तिका की प्रति 7 दिन में देने का आदेश

    भोपाल,4 अप्रैल(पीआईसीएमपीडॉटकॉम)। म.प्र. राज्य सूचना आयोग ने परीक्षार्थी को उसकी उत्तर पुस्तिका की प्रमाणित प्रति प्रदाय करने से इंकार करने के विधि विरूध्द कृत्य के लिए विक्रम विश्विद्यालय उज्जैन के कुलपति व कुलसचिव को जमकर फटकार लगाते हुए आदेश दिया है कि वे 7 दिन में अपीलार्थी को उसकी उत्तर पुस्तिका की प्रमाणित प्रति निःशुल्क प्रदाय कर 28 अप्रेल तक आयोग के समक्ष सप्रमाण पालन प्रतिवेदन प्रस्तुत करना सुनिष्चित करें । अन्यथा स्थिति में उनके विरूध्द सूचना का अधिकार अधिनियम की धारा 20 (1) व 20 (2) के अंतर्गत दंडात्मक प्रावधान आकर्षित होंगे ।

    अपीलार्थी कु0 तितिक्षा शुक्ला की अपील मंजूर करते हुए राज्य सूचना आयुक्त आत्मदीप ने अपने आदेश में कहा है कि सूचना का अधिकार अधिनियम के प्रावधानानुसार मूल्यांकित उत्तर पुस्तिका परीक्षक की राय का दस्तावेज है जो धारा 2 के तहत ‘सूचना’ की परिभाषा के अंतर्गत आता है। नागरिकों को लोक प्राधिकारी के नियंत्रण या अधिकार में रखी ऐसी सभी सूचनाओं को पाने का अधिकार है। केन्द्रीय सूचना आयोग व विभिन्न राज्य सूचना आयोगों द्वारा पारित निर्णयों में भी अपनी उत्तरपुस्तिका की प्रमाणित प्रति प्राप्त करने के परीक्षार्थी के वैधानिक अधिकार की पुष्टि की जा चुकी हैं । सर्वोच्च न्यायालय द्वारा भी केन्द्रीय माध्यमिक शिक्षा मण्डल बनाम आदित्य बंदोपाध्याय मामले में सुस्पष्ट आदेश पारित किया जा चुका है कि परीक्षार्थी को अपनी मूल्यांकित उत्तरपुस्तिका की प्रमाणित प्रति प्राप्त करने का वैधानिक अधिकार है । उत्तरपुस्तिकाओं में दी गई सूचनाओं के प्रकटन से प्रतिलिप्याधिकार का भी उल्लंघन नहीं होता है । अतः परीक्षा लेने वाले निकायों को सूचना का अधिकार अधिनियम की धारा 9 की छूट प्राप्त नहीं होगी ।

    सूचना आयुक्त ने विश्वविधालय की इस दलील को विधि विरूध्द करार दिया कि वि0वि0 समन्वय समिति द्वारा मंजूर स्थायी समिति की अनुशंसा अनुसार वि0 वि0 व महाविधालय के विधार्थियों की उत्तर पुस्तिकाओं की प्रति नहीं दी जा सकती है क्योंकि इसके कारण वैधानिक कठिनाईयां बढ़ने की आशंका है। अतः सूचना के अधिकार के तहत उत्तर पुस्तिका की प्रति नहीं दी जा सकती है, केवल उसका अवलोकन कराया जा सकता है।

    आरटीआई एक्ट सर्वोपरि: इस संबंध में अपीलीय अधिकारी/कुलपति व लोक सूचना अधिकारी/कुलसचिव के निर्णय खारिज करते हुए आयुक्त आत्मदीप ने फैसले में कहा – अधिनियम की धारा 22 के अनुसार सूचना का अधिकार अधिनियम के प्रावधानों का सर्वोपरि (ओवर राईडिंग) प्रभाव रहेगा । इसका आषय यह है कि यदि अन्य किसी कानून/नियम/प्रावधान में सूचना का अधिकार अधिनियम के प्रावधानों से विसंगति रखने वाला कोई प्रावधान है तो ऐसा असंगत प्रावधान मान्य नहीं होगा और उसके स्थान पर सूचना का अधिकार अधिनियम के प्रावधान मान्य होंगे । सर्वोच्च न्यायालय द्वारा भी स्पष्ट किया गया है कि सूचना का अधिकार अधिनियम की धारा 22 के अनुसार, अधिनियम के प्रावधान सर्वोपरि होने से, परीक्षा लेने वाले निकाय इस बात से आबद्ध हैं कि वे अपने नियमों/विनियमों में विपरीत प्रावधान होने के बावजूद, परीक्षार्थी को उत्तरपुस्तिका का निरीक्षण करने दें और चाहे जाने पर उसकी प्रति प्रदान करें ।

    अपील संबंधी जानकारी देना जरूरी: अपीलार्थी के सूचना के आवेदन का नियत अवधि में निराकरण न करने, अपीलार्थी को प्रथम व द्वितीय अपील संबंधी जरूरी सूचना न देने तथा प्रथम अपील की सुनवाई में अपीलार्थी के प्रतिनिधि को न सुनने पर भी नाराजगी जताते हुए आयोग ने कुलपति व कुलसचिव कोे आइंदा ऐसी वैधानिक त्रुटि न करने की चेतावनी दी है ।

    यह है मामला: कु0 तितिक्षा शुक्ला ने वि0 वि0 से मेनेजमेंट एकाउंटिंग विषय के प्रश्नपत्र की स्वयं की उत्तर पुस्तिका की प्रति चाही थी जिसे देने से कुलसचिव ने यह कह कर इंकार कर दिया कि सूचना का अधिकार अधिनियम के तहत उत्तर पुस्तिका की प्रति देने का प्रावधान नहीं है । कुलपति ने भी इसी आधार पर प्रथम अपील खारिज कर दी । आयोग ने कुलपति व कुलसचिव के आदेशों को निरस्त कर अपीलार्थी को उत्तर पुस्तिका की प्रति देने का आदेश पारित कर दिया ।

  • हाईकोर्ट ने रोका नीलम शमी राव का तुगलकी फरमान

    हाईकोर्ट ने रोका नीलम शमी राव का तुगलकी फरमान

    केबिनेट मंत्री माया सिंह के बाजू में बैठी आईएएस,सुश्री नीलम शमी राव अपने फैसलों के कारण इन दिनों विवादों में हैं।

    भोपाल ( पीआईसीएमपीडॉटकॉम )। खाद्य विभाग के इंस्पेक्टरों को नापतौल विभाग में अतिरिक्त प्रभार देने वाली प्रमुख सचिव नीलम शमी राव के तुगलकी आदेश को गलत मानते हुए हाईकोर्ट ने फिलहाल स्थगित कर दिया है। गैरकानूनी आदेश पर अदालती रोक से बौखलाई श्रीमती राव ने अब खाद्य विभाग के कमिश्नर और कलेक्टरों पर अपने आदेश का पालन करने का दबाव बनाना शुरु कर दिया है। इस आदेश पर विभागीय मंत्री ने तो कोई गुरेज नहीं किया पर इसके विरोध में नापतौल विभाग के अफसरों ने जरूर मोर्चा खोल दिया है। इस मामले से शिवराज सिंह चौहान सरकार के कथित सुशासन की असलियत भी उजागर हो गई है।

    राज्यों के नापतौल विभाग भारत सरकार के विधिक माप विज्ञान,खाद्य एवं उपभोक्ता मामले के निदेशक से प्रत्यायोजित अधिकारों के माध्यम से काम करते हैं। भारत सरकार की अधिसूचना क्रमांक 576(अ) दिनांक 18.07.2012 से राज्यों को अंतर्राज्यीय व्यापार एवं वाणिज्य के संबंध में ये शक्तियां प्रदान की गईं हैं। ये अधिकार किसी अन्य को हस्तांतरित नहीं किये जा सकते हैं। इसके बावजूद 1992 बैच की आईएएस और इलेक्ट्रानिक्स में बीई करके प्रशासक बनी राज्य की प्रमुख सचिव इन कानूनों को धता बताने की सनक पाल बैठी हैं। वे इस संबंध में भारत सरकार से अधिकार विकेन्द्रीकृत करने का अनुरोध प्रक्रियागत रूप से कर सकतीं थीं लेकिन बिना कानूनी फेरबदल केवल धौंस डपट के सहारे वे फूड इंस्पेक्टरों को नापतौल इंस्पेक्टर बनाने में जुटी हुई हैं।

    उनके हाई प्रोफाईल व्यवहार की वजह कथित तौर पर उनकी आईएएस और आईपीएस सदस्यों वाली पारिवारिक पृष्ठभूमि बताई जा रही है। इस संबंध में जब उनसे पूछा गया कि पांच फूड इंस्पेक्टरों को नापतौल विभाग का अतिरिक्त प्रभार दिए जाने से विभाग की कार्यप्रणाली में क्या सुधार हुए तो उनका कहना था कि इतनी जल्दी आकलन करना संभव नहीं है। वे ऐसा क्यों चाहती हैं पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि शासन का फैसला है सबको मानना ही पड़ेगा। हालांकि इस संबंध में हाईकोर्ट के स्थगन पर वे अपने आदेश को सर्वोपरि ही बताती रहीं।

    गौरतलब है कि हाईकोर्ट की जबलपुर खंडपीठ की न्यायाधीश सुश्री वंदना कसरेकर ने याचिका क्रमांक ड्बल्यू पी 5545 दिनांक 15.03.2018 का निपटारा करते हुए फिलहाल इस गैरकानूनी आदेश पर स्थगन दे दिया है। इस स्थगन से बौखलाई प्रमुख सचिव महोदया ने मैराथन बैठकों के माध्यम से मंत्रालय और नापतौल विभाग के अफसरों को घंटों फटकारना शुरु कर दिया है। नियमों और कानूनों को रौंदने वाले इस मामले पर फिलहाल मध्यप्रदेश की सरकार और शासन के आला अफसर सभी चुप्पी साधे हुए हैं।

    मध्यप्रदेश विधिक माप विज्ञान अधिकारी एवं कर्मचारी संघ के महासचिव उमाशंकर तिवारी ने शासन को भेजे अपने प्रतिवेदन में कहा है कि खाद्य विभाग के पांच सहायक खाद्य आपूर्ति अधिकारियों को आदेश क्रमांक एफ 13-1। 2018। 29-2दिनांक 19.02.2018 के माध्यम से नापतौल विभाग में अतिरिक्त प्रभार देना गैरकानूनी और अव्यावहारिक है इसलिए इस आदेश को वापस लिया जाए। उनका कहना है कि विधिक माप विज्ञान अधिनियम 2009 की धारा 14(1) में राज्य सरकार को अधिसूचना के माध्यम से विधिक माप विज्ञान नियंत्रक , अपर नियंत्रक, उप नियंत्रक, सहायक नियंत्रक निरीक्षक आदि को नियुक्त करने का तो अधिकार है पर अतिरिक्त प्रभार देने की अनुमति नहीं है।

    विधिक माप विज्ञान नियम 2011 के नियम 28(3) से विधिक माप विज्ञान अधिकारी के पद पर नियुक्त व्यक्ति को पदस्थापना से पहले भारतीय विधिक माप विज्ञान संस्थान रांची से आधारभूत प्रशिक्षण पाठ्यक्रम पूरा करना अनिवार्य होता है। हालांकि इस संबंध में पहले भी भारत सरकार के उपभोक्ता मामले का मंत्रालय पत्र के माध्यम से कह चुका है कि खाद्य निरीक्षकों को विधिक माप विज्ञान निरीक्षक के पद पर नियुक्त करने की कोई गुंजाईश नहीं है।

    सबसे हास्यास्पद बात तो ये है कि खाद्य विभाग में कनिष्ठ आपूर्ति अधिकारी के चार सौ पद स्वीकृत हैं जिनमें से 188 पद खाली पड़े हैं। सहायक आपूर्ति अधिकारियों के 146 पद स्वीकृत हैं जिनमें से 31 पद खाली हैं। इसके बावजूद शासन ने फूड इंस्पेक्टरों को नापतौल विभाग का अतिरिक्त प्रभार देने की जिद ठान ली है। नापतौल विभाग में भी 34 पद खाली पड़े हैं जिन्हें भरने में शासन की कोई रुचि नहीं है लेकिन वह उन जिलों में फूड इंस्पेक्टरों को अतिरिक्त प्रभार दे रही है जहां पहले से नापतौल निरीक्षक पदस्थ हैं। जबकि उन स्थानों पर भी खाद्य विभाग अपना काम पूरा नहीं कर पा रहा है।

    नापतौल विभाग को चवन्नी छाप डिपार्टमेंट बोलने वाली प्रमुख सचिव नीलम शमी राव ने अपने आदेश से होशंगाबाद, बैतूल, मुरैना, गुना और उज्जैन में नापतौल निरीक्षकों का अतिरिक्त प्रभार छीनकर फूड इंस्पेक्टरों को देने का फरमान सुनाया था जिसे हाईकोर्ट ने रोक दिया है। उन्होंने संबंधित कलेक्टरों पर दबाव बनाकर फूड इंस्पेक्टरों को काम करने की छूट दिलाने का दबाव बनाया था। इसके जवाब में उमाशंकर तिवारी का कहना है कि जब इन फूड इंस्पेक्टरों का वेतन खाद्य विभाग से मिली उनकी पदस्थापना स्थल से निकलना है और वे नापतौल विभाग के अधीन हैं ही नहीं तो विभाग उनसे कैसे काम ले सकता है। उनका कहना है कि नापतौल विभाग न तो फूड इंस्पेक्टरों के कामकाज का आकलन करेगा और न ही वे प्रवर्तन संबंधी प्रकरणो में अभियोजन कार्रवाई कर सकते हैं। ऐसे में उन्हें प्रभार दिए जाने का क्या औचित्य है। ये प्रकरण छोटी अदालतों से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक विचाराधीन रहते हैं जिसमें शासन भी एक पक्ष रहता है। शासन को यदि नापतौल विभाग का कामकाज सुधारने की इतनी ही चिंता है तो वह यहां खाली पड़े पदों को भरने की पहल क्यों नहीं करता है।

    नापतौल विभाग राज्य शासन से प्राप्त लगभग बीस करोड़ के बजट के एवज में लगभग पंद्रह करोड़ रुपए की आय भी देता है। मौजूदा वित्तीय वर्ष में वह फरवरी महीने तक लगभग साढ़े चौदह करोड़ की कमाई कर चुका था। पूरे प्रदेश में नापतौल विभाग के पास स्वयं के बनाए भवन हैं।वह राज्य सरकार के निर्देशों पर अपना कामकाज बखूबी कर रहा है। ऐसे में यदि अधिकारियों की कमी पूरी की जाती तो सरकार की आय भी बढ़ती और उपभोक्ताओं को ठगी धोखाघड़ी से भी बचाया जा सकता था।

    राज्य सरकार एक ओर तो प्रांत को –इज आफ डूइंग बिजिनेस — वाला राज्य बताकर उद्योगपतियों को कारोबार फैलाने का निमंत्रण दे रही है वहीं उसके आला अफसर कलेक्टरों के माध्यम से इंस्पेक्टर राज को फिर जीवित करके सरकार की मंशा को मटियामेट करने में जुटे हैं। नापतौल विभाग उपकरणों के पुनःसत्यापन, राजीनामा, पंजीयन, जैसे सामाजिक सुरक्षा के कामकाज की जवाबदारी संभालता है लेकिन गैरकानूनी और गैर जिम्मेदार व्यवस्था को बढ़ावा देकर सुशासन में पलीता लगाने वाले आला अफसरों को किसकी शह है ये तो विस्तृत खोजबीन के बाद ही पता लगाया जा सकता है।

  • छात्रवृत्ति जिसे दें उसका आधार नंबर लिखेंःआर्य

    छात्रवृत्ति जिसे दें उसका आधार नंबर लिखेंःआर्य

    भोपाल,23 अगस्त(पीआईसीएमपीडॉटकॉम)।
    अनुसूचित जाति कल्याण राज्य मंत्री लाल सिंह आर्य ने निर्देश दिये हैं कि विभाग की सभी छात्रवृत्ति योजना को आधार नम्बर से लिंक किया जाये। उन्होंने निर्देश दिये कि विभाग में सामग्री खरीदी जेम के माध्यम से ही हो। श्री आर्य आज अनुसूचित जाति कल्याण विभाग की गतिविधियों की समीक्षा कर रहे थे। इस मौके पर प्रमुख सचिव आशीष उपाध्याय और आयुक्त श्रीमती दीपाली रस्तोगी उपस्थित थी।

    विभिन्न योजनाओं का कम्प्यूटर डॉटाबेस तैयार किया जाये

    श्री आर्य ने कहा कि अनुसूचित जाति-जनजाति वर्ग के बच्चों के लिये संचालित विभिन्न योजना का डॉटाबेस तैयार किया जाये। योजनाओं का कम्प्यूटर के माध्यम से ऐनालेसिस हो। उन्होंने निर्देश दिये कि मुख्यमंत्री बच्चों से सीधा संवाद स्थापित कर सके, ऐसी व्यवस्था बनाये। इसके लिये सूचना प्रौद्योगिकी विभाग से सहयोग लिया जाये।

    श्री आर्य ने विभिन्न योजनाओं में जिला स्तर पर की गई कार्यवाही की मॉनीटरिंग को कहा। उन्होंने कहा कि इस संबंध में कलेक्टर, संभागीय अधिकारी और जिला संयोजक को पत्र जारी किया जाये। श्री आर्य ने निर्देश दिये कि पिछले वर्ष अस्पृश्यता निवारणार्थ किन पंचायतों का सम्मान किया गया और इस वर्ष कौन-सी पंचायतों का चयन किया गया है, इसकी जानकारी मंगवाई जाये। उन्होंने अस्पृश्यता निवारण शिविर की जानकारी भी एकत्रित करने को कहा।

    सोशल मीडिया के जरिये उपलब्धि का हो प्रचार-प्रसार

    श्री लाल सिंह आर्य ने विभाग की उपलब्धियों को सोशल मीडिया के जरिये प्रचारित करने के निर्देश दिये। उन्होंने अनुसूचित जाति और आदिम जाति कल्याण विभागों की योजनाओं की उपलब्धियों और लाभार्थियों की संख्या आदि का प्रचार-प्रसार करने को कहा। उन्होंने विशेष अवसरों का एक वार्षिक रूट चार्ट तैयार करने के निर्देश भी दिये।

    क्रीड़ा महाकुंभ या ओलपिंक जैसे कार्यक्रम की शुरूआत

    राज्य मंत्री श्री आर्य ने लोकप्रिय खिलाड़ी से समारोह में खेलकूद गतिविधियों के उत्कृष्ट खिलाड़ियों का सम्मान करवाने को कहा। उन्होंने खेल प्रतिभाओं को निखारने के लिये राज्य स्तर पर बड़े शहरों में क्रीड़ा महाकुंभ या ओलपिंक जैसे कार्यक्रम की शुरूआत करने को कहा।

    दो से 5 अक्टूबर स्वच्छता और वृक्षारोपण के होंगे कार्यक्रम

    श्री आर्य ने दो अक्टूबर महात्मा गाँधी जयंती से 5 अक्टूबर महर्षि वाल्मीकी के प्रकटोत्सव तक छात्रावास और आश्रम शालाओं में स्वच्छता अभियान और वृक्षारोपण का अभियान चलाने के निर्देश दिये। उन्होंने अभियान में स्थानीय जन-प्रतिनिधियों को भी जोड़ने को कहा।

    बाल संसद शुरू करने के निर्देश

    श्री आर्य ने नेतृत्व विकास शिविर में भारत या मध्यप्रदेश दर्शन कार्यक्रम को जोड़ने के निर्देश दिये। साथ ही उन्होंने राष्ट्रीय भावना से ओत-प्रोत, ‘राष्ट्र निर्माण में युवाओं की भूमिका’ विषय पर बच्चों की बाल-संसद शुरू करने को भी कहा। उन्होंने राष्ट्रीय स्तर के विषय पर वाद-विवाद प्रतियोगिता करने और डाक्यूमेन्ट्री फिल्म दिखाने के निर्देश दिये।

    अधिकारियों की तरह कर्मचारियों का भी हो प्रशिक्षण

    राज्य मंत्री श्री लाल सिंह आर्य ने इस साल का अधिकारियों का प्रशिक्षण प्रशासन अकादमी के माध्यम से करवाने को कहा। उन्होंने ग्वालियर, जबलपुर, इंदौर और भोपाल में जिला स्तरीय कर्मचारियों का प्रशिक्षण करने को भी कहा। उन्होंने स्व-सहायता समूह को ऋण देने के पूर्व प्रशिक्षण देने की योजना भी तैयार करने के निर्देश दिये। श्री आर्य ने अनुसूचित जाति कल्याण विभाग में अमले की कमी की पूर्ति करने के लिये आदिम जाति कल्याण विभाग से अमला लेने का प्रस्ताव देने को कहा।

    निर्माणाधीन भवनों के कार्यों की होगी समीक्षा

    श्री आर्य ने अनुसूचित जाति-जनजाति की विद्यार्थियों को आवास सहायता योजना को लोकसेवा गारंटी से जोड़ने और विभागीय छात्रावास का मूल्यांकन करवाने को कहा। श्री लाल सिंह आर्य ने पीआईयू के जरिये बनाये जा रहे भवन निर्माण की प्रगति और समय-सीमा की जानकारी के साथ समीक्षा बैठक करने को कहा।

    बताया गया कि अंतर्जातीय विवाह प्रोत्साहन योजना में वर्ष 2016-17 में 110 जोड़ों को लाभान्वित किया गया। वर्ष 2015-16 में 152 स्व-सहायता समूह को लाभान्वित किया गया। पीआईयू के जरिये 120 छात्रावास भवन बनाये जा रहे हैं। ऑनलाइन पद्धति के जरिये लगभग 22 लाख विद्यार्थियों को प्री और पोस्ट मेट्रिक छात्रवृत्ति दी जा रही है।

  • शिवलिंग के बहाने लड़कियों की सोच पर कुठाराघात

    शिवलिंग के बहाने लड़कियों की सोच पर कुठाराघात

    भारतीय जनता पार्टी राष्ट्रवादी सोच को लेकर सत्ता में पहुंची है। इसके बावजूद पार्टी के कई पुरातनपंथी आज भी राजनीति में धर्म की मिलावट करने से बाज नहीं आ रहे हैं। उन्हें लगता है कि यदि उन्होंने जनता को धर्म की अफीम नहीं चटाई तो शायद वह दुबारा कांग्रेस की ओर मुड़ जाए और भाजपा को फिर निर्वासन झेलना पड़े। शायद यही कारण है कि सत्ता के गलियारों में यदा कदा धार्मिकता का बुखार महामारी बनकर उभरता रहता है। इसका लाभ लेने के लिए तैयार अवसरवादी कोई मौका नहीं छोड़ना चाहते और वे धर्म में आस्थाएं दर्शाकर खुद को सरकार का हनुमान बताने में जुट जाते हैं। कुछ इसी तरह की पहल भोपाल में लड़कियों के एक सरकारी स्कूल की प्रिंसिपल ने कर डाली। मध्यप्रदेश के स्कूल शिक्षा विभाग की धींगामुश्ती के बीच भोपाल के इस सरकारी स्कूल में पोस्टिंग करवा लेने में सफल प्राचार्या निशा कामरानी को अपनी उपयोगिता सिद्ध करने की जल्दी पड़ी थी। सत्ताधारी दल के कतिपय बड़े नेताओं की कृपा से इस स्कूल में पदस्थ हुईं प्राचार्या ने अपनी स्वामिभक्ति दिखाने के चक्कर में सरकार की सोच की पोल खोल दी। उसने बालसभा कार्यक्रम के अंतर्गत मिट्टी के शिवलिंग बनाने की पूजा आयोजित कर डाली। बाकायदा पंडितजी बुलाए गए। हवन हुआ। लाऊडस्पीकर पर विधिविधान से हुई पूजा छह घंटे चली। इस दौरान छात्राएं और शिक्षिकाएं पूजा में शामिल हुईं। हालांकि स्कूल की मुस्लिम शिक्षिका और छात्राओं ने पूजा में शामिल होने से साफ इंकार कर दिया। इस पर उन्हें एक अलग कमरे में बिठा दिया गया।

    पूजा संचालन का माईक प्राचार्या महोदया ने संभाल रखा था। उन्होंने लड़कियों से कहा कि यदि वे विधि विधान से शिवलिंग बनाएंगी तो परीक्षा में पास हो जाएंगी और उन्हें जल्दी नौकरी मिल जाएगी।लड़कियों से कहा गया कि वे आम की पत्तियों को अंगूठी मानकर अपनी उंगली में धारण कर लें। छात्राओं से सूत के कलावे का स्पर्श करवाकर कहा गया कि भगवान ने उनकी भेंट स्वीकार कर ली है। अब पूजा में शामिल सभी छात्राएं आसानी से पास हो जाएंगी।उन्हें सुंदर जीवन भी मिल जाएगा।इस पूजन कार्यक्रम के लिए लड़कियों से चंदा जुटाया गया था। एक शिक्षिका के रिटायरमेंट का आयोजन भी पूजा के बाद किया गया। जिसमें भोज का चंदा भी छात्राओं ने जुटाया था। इसके लिए शिक्षा विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों और भाजपा के स्थानीय नेताओं को भी आमंत्रित किया गया था। प्राचार्या महोदया ने बाकायदा अपने मोबाईल फोन से मैसेज भेजकर ये आमंत्रण वितरित किए थे। हालांकि कई अधिकारियों ने बहाने बनाकर आयोजन से बच निकलने की जुगत भी भिड़ा ली।
    इस संबंध में जब प्राचार्या महोदया से पूछा गया कि हिंदू तुष्टिकरण करने वाले इस गैर संवैधानिक कार्य के लिए उन्होंने किससे अनुमति ली थी तो उन्होंने कहा कि मैंने तो सभी अधिकारियों और नेताओं को सूचित किया था। सभी ने सहमति जताई थी,लिखित अनुमति आने में समय लगता इसलिए मैंने शिक्षिकाओं के सहयोग से ये आयोजन कर लिया।हालांकि इस दौरान उन्होंने संवाददाता का मोबाईल कैमरा छीन लिया और कहा कि यदि उनकी ये बातें जनता के बीच आ जाएंगी तो दंगा हो जाएगा। स्वयं प्राचार्या निशा कामरानी ने कहा कि इस आयोजन से चमत्कार हुआ है और स्कूल में प्रेम का वातावरण निर्मित हो गया है। अब हम भविष्य में ईद मिलन समारोह भी आयोजित करेंगे। उनसे पूछा गया कि आप साम्प्रदायिक ध्रुवीकरण फैलाकर आखिर छात्राओं को क्या शिक्षा देना चाहती हैं तो उन्होंने कहा कि हम तो प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी के बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ अभियान को बल देने के लिए उन्हें आध्यात्मिकता से जोड़ने का प्रयास कर रहे थे। इस दौरान लड़कियों ने जो शिवलिंग बनाए उनसे उनकी रचना धर्मिता सामने आई है।

    प्राचार्या निशा कामरानी से जब पूछा गया कि आप इस पूजा को जिस तरह परीक्षा पास करने और नौकरी पा लेने का फार्मूला बता रहीं थीं वो कैसे संभव है। इस पर उन्होंने जवाब दिया कि पूजा विधान की प्रक्रिया से लड़कियों को आत्महत्या की बढ़ती घटनाओं से दूर रखने का प्रयास किया गया है। आजकल लड़कियां असफलताओं के कारण आत्महत्याएं कर रहीं हैं इसलिए उन्हें पूजा के माध्यम से खुद को भगवान के सुपुर्द करने की शिक्षा दी गई है। यदि वे अपने कर्म का श्रेय भगवान के सुपुर्द करना सीख जाएंगी तो उन्हें बेवजह असफलता का तनाव नहीं झेलना पड़ेगा।

    भारतीय दर्शन में विद्या को मुक्तिदाता बताया गया है। संस्कृत में इसे …. या विद्या सा मुक्तये …..कहा गया है। बच्चों की तर्कशक्ति और सवाल पूछने की शक्ति को बढ़ाने के लिए ……..विज्ञान आओ करके सीखें ………के वाक्य तमाम स्कूलों में लगाए जाते हैं। प्रख्यात शिक्षाविद इवान इलिच ने तो शायद इसीलिए……. डी स्कूलिंग सोसायटी….. पुस्तक लिखकर ये जताने का प्रयास किया कि स्कूल विद्यार्थियों की मौलिकता को कुचल देते हैं इसलिए स्कूलों को भंग कर देना चाहिए। इसके बावजूद भोपाल के कमला नेहरू स्कूल में छात्राओं को …..जान लेने …..के बजाए …..मान लेने…. की शिक्षा दी जा रही है। ये बात तो इसलिए उजागर हो गई क्योंकि राजधानी में शिक्षा के कारोबार को जानने बूझने वाले लोग आसानी से उपलब्ध हैं। जाहिर है कि भक्तों की नाकारा फौज तैयार करने में जुटे प्रदेश के हजारों स्कूलों में क्या चल रहा है ये इस घटना से आसानी से समझा जा सकता है।

    जब प्राचार्या से कहा गया कि आपने स्कूल में पूजा और शिवलिंग निर्माण का आयोजन करके गैर संवैधानिक अपराध कर डाला है। संविधान में धर्म निरपेक्षता का प्रावधान इस उद्देश्य से डाला गया है कि उन्हें व्यक्तिगत रूप से धार्मिक मान्यताओं को मानने की तो आजादी है लेकिन सार्वजनिक तौर पर उन्हें सर्व धर्म समभाव रखना होगा। इसी कानूनी बाध्यता के कारण देश की सरकार सबका साथ सबका विकास का नारा लेकर चल रही है। इस पर प्राचार्या महोदया ने कहा कि कुछ लोग उनके खिलाफ षड़यंत्र कर रहे हैं। इसमें कुछ पत्रकार भी शामिल हैं । इनके बारे में वे सब जानती हैं और समय आने पर उनके नाम उजागर करेंगी।जब उनसे पूछा गया कि नाबालिग बच्चियों को वे संघर्ष के लिए तैयार करने के बजाए समर्पण की सीख क्यों दे रहीं हैं। तो उन्होंने कहा कि उन पर भगवान की विशेष कृपा है इसलिए वे विरोधियों के जाल से हमेशा बच जाती हैं।

    प्राचार्या निशा कामरानी शासकीय नौकरी में आने के बाद से लगातार विवादों में घिरी रहीं हैं। सिक्किम के नवोदय विद्यालय जाने और वापस आने की कहानी भी उनकी जुगाड़ गाथा को समृद्ध बनाती है। माननीय उच्च न्यायालय के न्यायाधीश जस्टिस राजेन्द्र मेनन ने अपने फैसले में उन्हें अयोग्य पाया था। इसके बावजूद उन्होंने एक बार फिर राजधानी के प्रमुख स्कूल के प्राचार्य को धकियाकर ये कुर्सी कबाड़ ली। स्कूल शिक्षा विभाग के लगभग बीस अधिकारियों कर्मचारियों के विरुद्ध वे शिकायतें कर चुकीं हैं। एक शिकायत को तो पुलिस ने प्राथमिक जांच के बाद न केवल नस्तीबद्ध किया बल्कि निशा कामरानी को फटकार भी लगाई कि वे शिकायतें करने से पहले अपने गिरेबान में झांककर जरूर देखें।

    बालीवुड की चर्चित फिल्म है ….चांदनी चौक टू चायना… इस फिल्म का हीरो सिद्धू (अक्षय कुमार) आलू को अपना भगवान मानकर उसकी पूजा करता है। जब कुछ चीनी गुंडे उसे पीटते हैं तो वह अपने उस आलू भगवान से विनती करता है कि वो उसे गुंडों से बचाए। तब भगवान तो प्रकट नहीं होते बल्कि एक चीनी नागरिक जो निर्वासन भोग रहा था वो आकर उसे बचाता है। इसके बाद वह हीरो को युद्धकला में इतना पारंगत बना देता है कि हीरो सिद्धू उस चीनी माफिया का नाश कर देता है।

    आज जब एक बार फिर चीनी सेनाएं सीमा पर खड़ीं हमें युद्ध के लिए ललकार रहीं हैं तब मध्यप्रदेश की शिवराज सिंह चौहान सरकार के स्कूल अपने विद्यार्थियों को ईश्वरवादी बनाकर चुनौतियों से भागना सिखा रहे हैं। हथियार डाल देने वाली ये सोच भला चीनी सेनाओं का मुकाबला कैसे कर पाएगी। सरकार की इस सोच के बारे में जब शिक्षा मंत्री विजय शाह की प्रतिक्रिया जानना चाही तो उन्होंने चुप्पी साध ली। स्कूल शिक्षा विभाग के आयुक्त नीरज दुबे से जब इस संबंध में पूछा गया तो उन्होंने ये कहकर पल्ला झाड़ लिया कि उन्हें इस घटना की जानकारी ही नहीं है। जिला शिक्षा अधिकारी ये कहकर बच निकले कि उन्हें क्यों झगड़े में फंसा रहे हो। दरअसल में शिवराज सिंह सरकार का पूरा शिक्षा तंत्र नई पीढ़ी को लाचार और असहाय बनाने पर तुला हुआ है। प्रदेश की नई पीढ़ी शिक्षा माफिया के हाथों लूटी जा रही है। डिग्रियां कबाड़ने में जुटे युवा बेरोजगारी झेलने के लिए अभिशप्त हैं। जबकि हर असफलता का ठीकरा कांग्रेस की पूर्ववर्ती भ्रष्ट सरकारों पर थोपने में सिद्धहस्त हो चुके भारतीय जनता पार्टी के नेतागण अपनी जवाबदारी स्वीकारने को तैयार ही नहीं हैं। प्रदेश को लगातार कर्ज के दलदल में धकेलने में जुटी ये सरकार सवाल खड़े करने वाले युवाओं से घबराती है ।शायद इसीलिए षड़यंत्र पूर्वक निशा कामरानी जैसी प्राचार्या को राजधानी के प्रमुख स्कूल में तैनात करके ये माडल वह प्रदेश के अन्य स्कूलों के लिए भी प्रस्तुत करने का प्रयास कर रही है। इस स्कूल से निकली छात्राएं जिन 1400 घरों में जाकर संघर्ष की जगह समर्पण का भाव जगाएंगी वहां एक लाचार समाज ही तो जन्म लेगा। सरकारी योजनाओं के लिए कर्ज का साम्राज्य चलाने वाले विदेशी सूदखोरों का भी शायद यही उद्देश्य है जिसे शिवराज सिंह सरकार बखूबी पूरा कर रही है।

  • शिवलिंग के बाद अब छात्राओं की फैशन परेड

    शिवलिंग के बाद अब छात्राओं की फैशन परेड

    प्राचार्या ने पत्रकार का कैमरा छुड़ाया,बोलीं मंत्रियों से करीबी नाता
    भोपाल(पीआईसीएमपीडॉटकॉम)।राजधानी के सरकारी स्कूल में छात्राओं से मिट्टी के शिवलिंग बनवाने वाली प्राचार्या निशा कामरानी का कहना है कि उन्होंने इस आयोजन की जानकारी वरिष्ठ अधिकारियों को वाट्सएप पर भेज दी थी। इसके लिए उनकी अनुमति की क्या जरूरत। इसी श्रंखला में अब एक क्रीम कंपनी के सहयोग से मिस इंडिया को स्कूल में बुलाया जा रहा है। छात्राएं उनके साथ फैशन परेड करेंगी और इससे लड़कियों को बाजार की जरूरतें समझाई जाएंगी। छात्राओं ने शिवलिंग के अलावा जो भी शिल्प बनाए हैं उनसे उनके सौंदर्यबोध की झलक मिलती है।उनके इस बयान का मोबाईल वीडियो बनाने वाले पत्रकार का फोन प्राचार्या के निर्देश पर जब्त कर लिया गया। धमकाते हुए कहा कि मेरे कई मंत्रियों से निकट के संबंध हैं और इसीलिए मैंने ज्यादातर अखबारों में खबर नहीं छपने दी है।

    सरकारी नौकरी में शामिल होने के बाद लगातार विवादों में रहीं भोपाल के शासकीय कमला नेहरू कन्या उच्चतर माध्यमिक विद्यालय टीटीनगर की प्राचार्या निशा कामरानी ने महीने भर के भीतर सरकार के लिए नया बखेड़ा खड़ा कर दिया है। माननीय उच्च न्यायालय के न्यायाधीश जस्टिस राजेन्द्र मेनन ने Nisha kamRani Vs. State of Madhya Pradesh & Others के निपटारे के दौरान Writ Petition No : 11004/2012 को यह कहते हुए खारिज किया था कि निशा कामरानी का अपने स्कूल के शिक्षकों पर कोई नियंत्रण नहीं था। उनका तबादला जांच कमेटी की रिपोर्ट के बाद किया गया इसलिए उनका आरोप बेबुनियाद है कि पक्षपात के चलते उनके लगातार तबादले किए जाते हैं। इसके बावजूद अपने राजनीतिक संबंधों के प्रभाव से उन्होंने राजधानी के इस प्रमुख स्कूल में प्राचार्या का पद हथिया लिया। जबकि इससे पहले राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के पदाधिकारियों की शिकायत पर उन्हें तूमड़ा के स्कूल में ट्रांसफर किया गया था।

    शिक्षा विभाग के सूत्रों का कहना है कि प्राचार्या महोदया को जींस और टॉप पहिनकर आने के कारण पूर्व शिक्षा मंत्री श्रीमती अर्चना चिटनिस ने हटाया था। शिक्षा राज्यमंत्री दीपक जोशी के नाम की दुहाई देने वाली श्रीमती कामरानी कई बार मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के बारे में भी तरह तरह की डींगें हांकती हैं जिसकी आडियो रिकार्डिंग सोशल मीडिया पर भी उपलब्ध है। सिक्किम नवोदय विद्यालय से लेकर शिवलिंग बनवाने तक ढेरों किस्से हैं जिन्हें शिक्षा जगत से जुड़े लोग चटखारे लेकर सुनाते हैं। छात्राओं से पैर पड़वाना और गुरु दक्षिणा लेना उनका प्रिय शगल है।अपने संकुल से जुड़े स्कूलों के चंदा जुटाकर वे इस तरह के आयोजन करती हैं। इसी तरह की एक शिकायत की विभागीय जांच लोक शिक्षण संचालनालय में लंबित है जिसे नस्तीबद्ध करवाने के लिए उन्होंने कई राजनेताओं से कमिश्नर को फोन भी करवाए हैं।

    सूत्रों का कहना है कि स्कूल में बगैर अनुमति शिवलिंग बनाने का आयोजन करने के मसले पर आज एसडीएम दिशा नागवंशी ने प्राचार्या महोदया से पूछताछ की है। इस जांच में पता चला है कि किसी शिक्षिका के रिटायरमेंट आयोजन के लिए 200 -200 रुपए भंडारे के नाम पर चंदे के रूप में जुटाए गए थे । कई छात्राओं ने भी चंदा दिया, जबकि स्कूल की छात्राओं को अपने टिफिन का भोजन खाकर ही संतोष करना पड़ा।

    उनसे जब पूछा गया कि हिंदू तुष्टिकरण के इस आयोजन का ये गैर कानूनी कार्य उन्होंने क्यों किया तो उन्होंने कहा कि मैंने कुछ गलत नहीं किया है। कुछ लोग मेरे खिलाफ षड़यंत्र कर रहे हैं इसलिए वे पत्रकारों को रिश्वत देकर मेरे खिलाफ समाचार प्रकाशित करवा रहे हैं। वे लोग कौन हैं और ऐसा कैसे कर सकते हैं तो इसके बारे में उन्होंने कहा कि मेरे पास सबूत हैं जिन्हें मैं जल्दी ही उजागर करूंगी। हालांकि उन्होंने इस विवाद के उजागर होने के बाद स्कूल की मुस्लिम लड़कियों से पत्र लिखवाए हैं जिनमें लिखवाया गया है कि शिवलिंग बनवाने के फैसले से उन्हें कोई आपत्ति नहीं है। उन्होंने तो इस आयोजन का प्रसाद भी खाया था। प्राचार्या महोदया ने कहा कि जल्दी ही वे ईद मिलन का आयोजन भी करने जा रहीं हैं जिससे लोगों को धार्मिक सौहार्द्र का संदेश दिया जाएगा।

    सामान्य घरों से आने वाली नाबालिग छात्राओं को बहकाकर निशा कामरानी जिस तरह उन्हें अपने समर्थन में लामबंद कर रहीं हैं इस पर शिक्षा विभाग के आला अधिकारी कुछ बोलने तैयार नहीं हैं। उनका कहना है कि प्राचार्या महोदया अपने राजनीतिक संबंधों के चलते किसी पर भी कीचड़ उछाल सकती हैं। शिक्षा विभाग के ही कई अधिकारी कर्मचारी आज भी उनकी शिकायतों का खमियाजा भुगत रहे हैं। इसलिए अब सरकार ही कोई उचित फैसला ले सकती है।

  • मुस्लिम छात्राओं ने शिवलिंग बनाने से किया इंकार

    मुस्लिम छात्राओं ने शिवलिंग बनाने से किया इंकार

    प्राचार्या बोलीं शिवलिंग बनाओ पास हो जाओगी,अच्छी नौकरी मिलेगी

    भोपाल(पीआईसीएमपीडॉटकॉम)। मध्यप्रदेश की शिवराज सिंह चौहान सरकार युवाओं को रोजगार देने के पैमाने पर फिसड्डी साबित हुई है। जनता के धन पर उद्योगपतियों को निमंत्रण देते फिरे मुख्यमंत्री खुद इस बात से हैरान हैं कि आखिर उद्योगपति मध्यप्रदेश क्यों नहीं आना चाहते। रोजगार के मापदंडों पर सरकार को लगातार मिल रही असफलता से परेशान लोगों ने अब सरकार के बजाए ईश्वर के भरोसे ही रहना शुरु कर दिया है। राजधानी के सरकारी स्कूल में तो प्रिंसिपल महोदया ने अन्य शिक्षिकाओं के साथ मिलकर छात्राओं से मिट्टी के शिवलिंग बनवाए । सावन के महीने में किए गए इस आयोजन में प्राचार्या महोदया ने छात्राओं के कहा कि उन्हें अच्छे नंबरों में पास होना है और अच्छी नौकरी पानी है तो पूरी भक्ति के साथ शिवलिंग बनाएं।हालांकि कुछ मुस्लिम छात्राओं ने जब शिवलिंग बनाने से इंकार कर दिया तो उन्हें स्कूल से छुट्टी दे दी गई।

    भगवान भरोसे चल रही भाजपा की शिवराज सिंह चौहान सरकार को आयोजन वाली सरकार कहा जाता है। ये सरकार साल भर तरह तरह के आयोजन करती रहती है। इन आयोजनों में जनता का धन फूंक दिया जाता है पर समस्याओं के स्थायी समाधान नहीं तलाशे जाते हैं। यही वजह है कि मध्यप्रदेश में बेरोजगारी चरम पर है। हालत ये है कि बेरोजगारी के चलते स्कूली बच्चों का भी शिक्षा से मोह भंग होने लगा है।

    राजधानी के ह्दय स्थल तात्याटोपे नगर में स्थित शासकीय कमला नेहरू कन्या उच्चतर माध्यमिक विद्यालय में आज मिट्टी के शिवलिंग बनाने का आयोजन किया गया। प्राचार्या निशा कामरानी ने बाल सभा आयोजन के अंतर्गत शिवलिंग निर्माण का ये आयोजन रखा था। उन्होंने पिछले माह ही इस स्कूल में प्राचार्या के रूप में कार्यभार संभाला है। इसके पहले वे लोक शिक्षण संचालनालय में वर्चुअल क्लास का कामकाज देखतीं थीं। अपने राजनीतिक संबंधों के चलते उन्होंने यहां पदस्थ पूर्व प्राचार्य आर.एन.शर्मा को तूमड़ा पहुंचवा दिया और राजधानी के इस प्रमुख स्कूल की कुर्सी संभाल ली। बताते हैं आते ही उन्होंने शिक्षिकाओं को समझा दिया कि अब इस स्कूल में वही होगा जो सरकार चाहेगी। सूत्र बताते हैं कि स्कूल शिक्षा मंत्री विजय शाह की पहल पर उन्हें इस स्कूल की जवाबदारी थमाई गई है।

    मिट्टी के शिवलिंग निर्माण के इस आयोजन के बाद लड़कियों के नाम पर भंडारा भी खिलाया गया। इस आयोजन में शिक्षा विभाग के अधिकारियों और स्थानीय राजनेताओं को भी आमंत्रित किया गया था।जबकि लड़कियों को इसमें शामिल नहीं किया गया। मंच पर जब पंडितजी पूजा करवा रहे थे तब प्रचार्या महोदया माईक संभालें थीं। वे लड़कियों से कह रहीं थीं कि पूरे मनोयोग से शिवलिंग बनाओ। उनका अभिषेक करो। इस पूजा का फल मिलेगा। तुम सभी अच्छे नंबरों से पास हो जाओगी और अच्छी नौकरी मिलेगी।

    नाम न छापने की शर्त पर स्कूल की ही कुछ शिक्षिकाओं ने कहा कि सरकारी स्कूलों में इस तरह के आयोजन गलत हैं। धर्म विशेष के आयोजनों से अन्य समाजों की छात्राओं को तकलीफ भी हुई है पर इसके संबंध में आयोजन कर्ता ही कुछ बता सकते हैं। प्राचार्य महोदया की संदिग्ध गतिविधियों से शिक्षिकाओं और शिक्षा विभाग के जानकारों में असंतोष है पर सरकार के रवैये को देखते हुए वे फिलहाल खामोश हैं।

  • किसान आंदोलन पर उलटा पड़ा कांग्रेस का दांव

    किसान आंदोलन पर उलटा पड़ा कांग्रेस का दांव

    भोपाल(पीआईसीएमपीडॉटकॉम)। मध्यप्रदेश विधानसभा में आज नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह ने जब किसान आंदोलन पर स्थगन लाने का प्रस्ताव प्रस्तुत किया तब सभी समझ रहे थे कि अब भाजपा सरकार को खासी परेशानी होगी लेकिन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने चर्चा कराने का ये प्रस्ताव तत्काल स्वीकार कर लिया। इसके बाद भाजपा के नेताओं किसानों के लिए किए गए अपनी सरकार के जो कामकाज गिनाए उसके बाद तो सारी बाजी पलट गई। हर नेता ने कांग्रेस की सरकारों की खामियां गिनाईँ और किसान आंदोलन की सारी हकीकत सदन में उजागर कर दी। पंचायत मंत्री गोपाल भार्गव ने तो किसान आंदोलन पर कांग्रेस को आड़े हाथों लिया।

    उन्होंने कहा कि ये आंदोलन सिर्फ उसी हिस्से में था जहाँ पर अफीम का उत्पादन होता है, डोडा चूरा का उत्पादन होता है, हमारे बुन्देलखण्ड के 5 जिलों में कहीं नहीं है, भिण्ड जिले में नहीं है, ग्वालियर चंबल संभाग में कहीं नहीं है. यह स्पष्ट रूप से इस बात का प्रतीक है कि पूरा का पूरा मामला तस्करों के द्वारा प्रेरित था, जिसके लिए यहाँ पर स्थगन लाया गया, उनकी मदद के लिए स्थगन लाया गया, मेरा आरोप है.उन्होने कहा अलाभकारी मूल्य की बात हो रही है. किसान का भावनात्मक शोषण कर रहे हैं. अध्यक्ष महोदय, किसान बहुत भावुक होता है और भावुक होने के कारण ही उसे लोग प्रेरित करते हैं. मैं एक जगह अपने क्षेत्र में सुन रहा था, एक करोड़ रुपये की मुख्यमंत्री जी ने घोषणा की, कुछ लोग हमारे ही क्षेत्र में कहने लगे एक करोड़ मिल जाएँगे तुम लटक जाओ और वे दूसरी पार्टी के लोग थे, मैं उनके बारे में कुछ कहना नहीं चाहता. क्या उनको ऐसा कहना चाहिए? अध्यक्ष महोदय, मैं इस बात को कहना चाहता हूँ कि यदि हम वास्तव में किसानों के हितैषी हैं और हम वास्तव में किसान हैं, तो अपनी सब्जियों को, अपने खाद्यान्न को, अपने दुग्ध उत्पादन को, अपने दूध को, हम सड़कों पर नहीं बहा सकते, हम नालियों में नहीं फेंक सकते और सब्जियों को हम कुचल नहीं सकते. अध्यक्ष महोदय, सरकार ने किसानों के लिए क्या नहीं किया? साढ़े चार हजार करोड़ रुपये पिछले साल फसल बीमा का मिला, साढ़े चार हजार करोड़ रुपया, लगभग राहत राशि का मिला. नौ हजार करोड़ रुपये की राशि पिछले साल किसानों के लिए मिली. आपकी सरकार के समय 100-100, 50-50, रुपये के चेक मिलते थे और जहाँ तक फायरिंग की बात है, फायरिंग की बात के लिए आप याद कर लो मुलताई की 1998 की घटना, 29 किसान मारे गए थे और वाहवाही करने के लिए तो इन्होंने असत्य एनकाउण्टर तक किसानों का किया. अध्यक्ष महोदय, शिवपुरी जिले में रामबाबू गडरिया को मारने की एक घटना हुई. तमगे लगा लिए, प्रमोशन हो गया, आउट आफ टर्न और अध्यक्ष महोदय, जिनको मारा था, वह निकले 3 किसान, खेत में पानी बराने के लिए जा रहे थे, उनके लिए मार दिया गया और तत्कालीन मुख्यमंत्री जी ने, सच है कि नहीं? आप बताएँ. सच है कि नहीं वह 3 किसान मारे गए थे? और उसके बाद में टी.आई. को डी.एस.पी. और डी.एस.पी. को एस.पी. बना दिया, सार्वजनिक सम्मेलन कर के,बताइये यह सही है और आप किसानों के हित की बात करते हैं? इसलिए मैं कहना चाहता हूं कि बात करना है तो तर्क के साथ में करें. हमारी सरकार ने पिछले 13 वर्षों में अनेकों काम किये हैं, उन सब के लिए बात होनी चाहिए. अध्यक्ष महोदय, मैं बहुत विनम्रतापूर्वक हमारे प्रतिपक्ष के सदस्यों से कहना चाहता हूं. अपने मित्रों से कहना चाहता हूं कि आत्मा पर हाथ रखकर आप बोलें कि क्या किसान के हित में इस सरकार ने पिछले वर्षों में कोई काम नहीं किया? बहुत-सी बातें सुसाइड की सामने आईं. माननीय अध्यक्ष महोदय, प्रतिपक्ष के सदस्यों ने यह नहीं बताया कि उन किसानों के पास कितने सुसाइड नोट मिले? कोई वीडियों क्लिपिंग उनके पास मिली क्या? आज कल तो घर-घर में मोबाईल हो गये हैं, मोबाईल की कहीं कोई क्लिपिंग मिली चूंकि किसानों की संख्या ज्यादा है, तादाद ज्यादा है इस कारण से यह माना जाता है कि स्वाभाविक रूप से किसान यदि दर्ज है, रिकार्ड में उसके नाम से कुछ जमीन दर्ज है, घर के भी झगड़े होते हैं, पारिवारिक विवाद होते हैं, अन्य प्रकार की समस्यायें होती हैं, बीमारियाँ होती हैं इस कारण से यदि किसान आत्महत्या करते हैं तो उसके पीछे यह न माना जाना चाहिए वह कर्जदार ही हैं. कई किसान ऐसे हैं जिनके घर में पर्याप्त राशि मिली है लेकिन उन्होंने मृत्यु को प्राप्त किया है.

    हमारे बहुत वरिष्ठ सदस्य रामनिवास जी हैं, इसी सत्र में आपके प्रश्न का एक उत्तर आया है. इस उत्तर में स्पष्ट है कि फसल की विफलता के कारण जो मृतक किसानों की संख्या है वह जीरो है.कर्ज के कारण 6, गरीबी से 2, नशे की लत के कारण 37, बीमारी से परेशान होकर 68, संपत्ति के कारण 5, पारिवारिक कारणों से 51, अन्य कारणों से 20 इस प्रकार कुल 189 किसानों की अलग-अलग कारणों से पिछले छह माह में मृत्यु राज्य के अंदर हुई है. अध्यक्ष महोदय, हम यह नहीं सकते है कि यह किसान ने दिवालिया होकर, किसान ने कर्ज के कारण, किसान ने प्रताड़ित होकर आत्महत्या कर ली. अध्यक्ष महोदय, नीति आयोग की जो रिपोर्ट आई है उसमें यह बात आई है और जहाँ तक किसानों का जो सुसाइड रेट है वह हमारे राज्य में सबसे नीचे है. लेकिन इसका भी हमें बहुत अफसोस है, दुख है. हमारा कोई भी भाई मरता है, चाहे वह किसान हो, व्यापारी हो, परीक्षा में अनुत्तीर्ण छात्र हो या किसी भी वर्ग का आदमी हो, खेतिहर श्रमिक हो, कोई भी हो सभी के लिए तकलीफ होती है, दुख होता है. लेकिन कुछ घटनायें ऐसी रहती हैं जिनको हम और आप कोई भी नहीं रोक सकते हैं लेकिन हमें नीतियाँ ऐसी बनानी चाहिए, क्रियान्वयन इतना पारदर्शी रखना चाहिए कि जितना संभव हो सके राज्य में इस प्रकार की घटनाएं रुके.

    अध्यक्ष महोदय, यदि पार्टीगत बात करते हैं कि बीजेपी की सरकार होने के कारण यहाँ पर आत्महत्यायें हो रही हैं, तो मैं आपको पढ़कर बता रहा हूं, आत्महत्या का परसेंट पांडिच्चेरी में 43.2 है जबकि वहाँ आपकी कांग्रेस की सरकार है, सिक्किम में गैर भाजपा सरकार है वहाँ 37.5 परसेंट है, तेलंगाना में गैर भाजपा सरकार है वहाँ 27 परसेंट है, तामिलनाडु में अन्नाद्रुमक या द्रुमुक की सरकारें रही हैं, वहाँ 22 परसेंट है,केरल में कम्युनिस्ट पार्टी की सरकार है वहाँ 21 परसेंट है, त्रिपुरा में कम्युनिस्ट पार्टी की मार्क्सवादियों की सरकार है वहाँ 19 परसेंट है, कर्नाटक में कांग्रेस की सरकार है वहाँ 17 परसेंट है, पश्चिम बंगाल में तृणमूल की सरकार है वहाँ 15 परसेंट है , महाराष्ट्र में पूर्व में जब आपकी कांग्रेस की सरकार थी,उस समय का रेट है 14 परसेंट और मध्यप्रदेश में यह रेट 13 परसेंट है. हालांकि यह 13 परसेंट भी नहीं होना चाहिए. यह हम सब लोगों के लिए चिंता की बात है कि देश में किसी भी किसान की मृत्यु हो, किसी भी वर्ग के व्यक्ति की मृत्यु हो. हमें लोक कल्याणकारी सरकार के लिए प्रयास यह करना चाहिए कि किसी भी व्यक्ति की मृत्यु अभाव के कारण ना हो. लेकिन कुछ घटनायें ऐसी होती हैं जिनको हम रोक नहीं सकते हैं. माननीय गोविंद सिंह जी ने बहुत-सी बातें कहीं औऱ अनेकों सदस्यों ने प्रश्न लगाये हैं, जो स्थगन सूचनायें दी हैं. मैं इतना ही निवेदन करना चाहता हॅूं कि गोली चलाना कोई अच्‍छी बात नहीं है. जैसा गृहमंत्री जी ने अपने उत्‍तर में कहा है 109 कर्मचारी घायल हुए और कई बहुत गंभीर रूप से घायल हुए, परमानेंटली आंख डैमेज हो गई. अब उस कर्मचारी की आंख कभी सुधर नहीं सकती. क्‍या यह किसी विदेशी ने आकर किया था ? यह तो सब हमारे लोग थे और हमारे लोगों के लिए प्रेरित करने का काम, भड़काने का काम यदि किसी ने किया है तो वह ऐसे असामाजिक तत्‍वों ने किया, जो कतई सामाजिक नहीं थे, कतई अच्‍छे लोग नहीं थे. अन्‍य लोग थे और मैं कांग्रेसी मित्रों से भी कहना चाहता हॅूं कि राजनीति करने के लिए हमारे पास बहुत से विषय पडे़ हैं. बहुत-सी समस्‍याएं हैं. आज भी देश और प्रदेश बहुत-सी समस्‍याओं से जूझ रहा होगा. लेकिन मैं यह कहना चाहता हॅूं कि किसानों के शवों के ऊपर राजनीति नहीं करना चाहिए.

    माननीय अध्‍यक्ष महोदय, श्री पी.के.यादव की आंख क्षतिग्रस्‍त हो गई है. कांग्रेस के मित्र हैं मैं नाम नहीं लेना चाहता. इसमें काफी नाम लिखे हुए हैं. जिन्‍होंने सक्रिय रूप से भाग लिया. वीडियोग्राफी है. हम कहना चाहते हैं कि राजनीति होगी जब मकाम होगा, उस समय तय कर लेंगे कि राजनीति की दिशा क्‍या होगी. बिजली की बात, सिंचाई की बात, फर्टिलाइजर की बात, उत्‍तम सीड की बात है. आज आप अपनी आत्‍मा पर हाथ रखकर बताएं कि क्‍या पहले से बेहतरी नहीं आयी है ? वर्ष 2003 के पहले जब मैं विधायक था. मैं एमएलए रेस्‍ट हाउस के फैमिली ब्‍लॉक में रहता था. मैंने वे दिन देखे हैं जब रेस्‍ट हाउस में सुबह 6 बजे से सुबह 10 बजे तक बिजली बंद रहती थी, जबकि हम लोग विधायक थे. एक प्रकार से सरकार के अंग थे लेकिन मैंने सुबह-सुबह मोमबत्‍ती में, लालटेन में अखबार पढे़ हैं क्‍योंकि मुझे स्‍थगन और ध्‍यानाकर्षण सूचनाएं देना पड़ती थीं. क्‍या हमने वह दिन नहीं देखें हैं. हर किसानों के पास जनरेटरों का अंबार लग गया था. विद्युत उत्‍पादन कितना था, मोटर बाईंडिंग के लिए वायर नहीं मिलता था. वह काले दिन थे. हमारे सभी वरिष्‍ठ सदस्‍य बैठे हैं. क्‍या हम वह भूल जाएंगे. याद नहीं करेंगे. हम विद्युत उत्‍पादन के मामले में बहुत बेहतरी में आएं हैं. रबी की फसल की आधी जमीन असिंचित पड़ी रहती थी. आज वह पूरी सिंचित है. कृषि उत्‍पादन बढ़ा है और कई गुना बढ़ा है. गर्व से कहने की बात है कि हम आज कृषि उत्‍पादन के मामले में और जीडीपी के मामले में पंजाब और हरियाणा से भी आगे हैं. (मेजों की थपथपाहट) यह नीति आयोग की रिपोर्ट है. यह पूरा का पूरा प्रामाणिक है. कृषि उत्‍पादन के मामले में, सिंचाई के मामले में आगे हैं. सिंचाई कितनी बढ़ गई है. जब आप लोगों की सरकार थी कृषि ग्रामीण विकास बैंक से ऋण लिया जाता था, हर महीने 24 परसेंट इंट्रेस्‍ट लगता था, आप लोगों को याद होगा और जब कम्‍युलेट होता था तो वह 40 परसेंट तक हो जाता था. कभी कोई किसान अपनी जमीन वापस नहीं ले पाया और हम लोगों ने तय किया कि आज भी हजारों एकड़ जमीन एलडीपी में बंधक रखी हुई है. माननीय मुख्‍यमंत्री जी ने कहा और हम सभी लोगों ने भी तय किया कि एक इंच जमीन भी हम नीलाम नहीं होने देंगे, भले ही पैसा वापस आए अथवा नहीं आए. (मेजों की थपथपाहट) सेंट्रल को-ऑपरेटिव बैंक, अपेक्‍स बैंक की दरें सहकारिता के क्षेत्र में जो हमारे बैंक हैं उनकी दरें कभी 24 परसेंट, 22 परसेंट हुआ करती थी घटते-घटते 7, 5, 4, 3 और आते ही हमने शून्‍य कर दी. लोग आश्‍चर्य करते हैं कि बिना ब्‍याज का ऋण और उसके ऊपर मूल में भी छूट है. 10000 रूपए का ऋण लेंगे तो 9000 रूपए वापस करने पडे़गे तो उसमें 1000 रूपए की भी छूट क्‍या किसान के लिए यह सुविधाएं नहीं मिलीं ? व्‍यवस्‍थाएं नहीं मिलीं ? आज मैं यह कहना चाहता हॅूं कि हमें दिल पर हाथ रखकर इस बात को सोचना चाहिए कि हमने क्‍या बेहतर किया और हमें आज बैठकर चर्चा करना चाहिए कि हम क्‍या बेहतर से बेहतर और ज्‍यादा कर सकते हैं. हमने कृषि केबिनेट बनायी और कृषि केबिनेट में वे तमाम फैसले जो किसानों के हित में हो सकते हैं लगातार बैठकें करके हम लोगों ने लागू किया है. घटना के बारे में मुख्‍यमंत्री जी ने केबिनेट की फिर बैठक की और उसके बाद बाहर से विशेषज्ञ बुलाए. दिल्‍ली के पूसा से आईसीएआर के विशेषज्ञ बुलाए गए और विस्‍तृत रूप से यह चर्चा हुई कि हम बेहतर मार्केटिंग कैसे कर सकते हैं ? उत्‍पादन में तो हम आगे हो गए लेकिन हम मार्केटिंग बेहतर से बेहतर कैसे कर सकते हैं ? यह सबको जानकारी है कि नाफेड आज कमजोर आर्थिक स्‍थिति में चल रहा है. चने की, मसूर की, अरहर की, मूंग की जो खरीद होनी चाहिए वह आज नाफेड के माध्‍यम से पूरी तरह से नहीं हो रही है, तो सरकार ने एक हजार करोड़ रुपये यानि कि 10 अरब रुपये का अपना स्‍वयं का मूल्‍य स्‍थरीकरण के लिए फंड बनाया जो कि हिंदुस्‍तान के इतिहास में, मध्‍यप्रदेश के इतिहास में पहली बार हुआ है. एक हजार करोड़ रुपये का फंड स्‍थाई सर्विस के लिए सरकार ने इसलिए बनाया कि यदि घाटा होता हो तो हो जाए, लेकिन मध्‍यप्रदेश के किसी किसान को घाटा न हो, उसे अपनी जान न देनी पड़े.

    अध्‍यक्ष महोदय, रोज अखबारों में प्‍याज की खबर आ रही है, कह दिया गया है कि 8 रुपये प्रति किलोग्राम के भाव से प्‍याज खरीदेंगे और यदि खराब हो जाए तो भी किसान को नुकसान नहीं होने देंगे, एक बार सरकार के लिए नुकसान हो जाए, हम अपनी 10 योजनाओं में कटौती कर देंगे, लेकिन किसान के पेट पर लात नहीं मारने देंगे.

    अध्‍यक्ष महोदय, दर्जनों बातें ऐसी हैं, जिनके कारण मैं अपने विपक्ष के साथियों से कहना चाहता हूँ कि हमें खुले दिल से, राज्‍य के किसानों के हित में और अन्‍य सभी वर्गों के हित में काम करना चाहिए तो मुझे लगता है कि मध्‍यप्रदेश में जैसे हम बेहतर स्‍थिति में आए हैं और ज्‍यादा बेहतर कर सकते हैं अन्‍यथा वही पुराने दिन लौट आएंगे. मुझे स्‍मरण है कि आस्‍ट्रेलिया का वह लाल गेहूँ, लोग तो क्‍या जानवर भी नहीं खाते थे जो ये इम्‍पोर्ट करवाते थे, आस्‍ट्रेलिया के वे लाल गेहूँ खाने के बुरे दिन न आएं. अब तो मुझे खुशी है कि मध्‍यप्रदेश की शरबती और मध्‍यप्रदेश का बासमती आस्‍ट्रेलिया वाले खा रहे हैं तो यह हम लोगों के कारण हुआ है.

    अध्‍यक्ष महोदय, मैं माननीय सदस्‍यों से कहना चाहता हूँ कि ये जो हमारी प्रवृत्‍ति है, इस प्रवृत्‍ति में हमें परिवर्तन करना पड़ेगा. किसान के मुद्दे को लेकर हर गाँव में, हर कस्‍बे में, जिला मुख्‍यालय पर या जगह-जगह पर मजमे करके हम शायद यह बताने की कोशिश कर रहे हैं कि मध्‍यप्रदेश कृषि के मामले में पिछड़ा है, किसान दु:खी है, लेकिन इससे पूरे प्रदेश की बदनामी होती है, पूरे प्रदेश की अवमानना होती है. यदि मेरी अवमानना होगी, भारतीय जनता पार्टी के सदस्‍य की अवमानना होगी तो मैं सदस्‍य तो हूँ ही, लेकिन एक नागरिक भी हूँ. इस कारण से मैं कहना चाहता हूँ कि आपकी भी अवमानना होगी.

    मैं पूर्व में बोल चुका हूं, फसल बीमा का 4660 करोड़ रुपया, पिछले साल ही किसानों के लिए दिया गया है. मैं सदस्यों को बताना चाहता हूं कि आपको सुनकर आश्चर्य होगा. सीहोर जिले में कुल 26 करोड़ रुपया प्रीमियम का जमा हुआ था और बदले में 443 करोड़ रुपया सीहोर जिले के लिए बंटा है. विदिशा में 21 करोड़ रुपया प्रीमियम का जमा हुआ था, 310 करोड़ रुपया बंटा है. रायसेन में 18 करोड़ रुपया प्रीमियम में जमा हुआ था, 172 करोड़ रुपया बंटा है. सागर जिले में 16 करोड़ रुपया प्रीमियम का जमा हुआ था, 254 करोड़ रुपया बंटा है, बुन्देलखंड में बंटा है. मैं इसीलिए इन बातों को कह रहा हूं, जो माननीय श्री के.पी. सिंह साहब कह रहे थे. इसकी रेलिवेंसी है, इसकी सम्बद्धता है, इसका औचित्य है और इसीलिए भी है कि जहां आत्महत्या की बात आती है, जहां गोली चालन की बात आती है, जहां घटनाओं की बात आती है, वहां इन तथ्यों को भी देखना पड़ेगा कि हमने कृषि के क्षेत्र में क्या-क्या किया है. राहत राशि भी लगभग 4600 करोड़ रुपए हमने दी है. इसके बाद में आरबीसी 6 (4) में जितने संशोधन हुए, जितने सुधार हुए, और ज्यादा किया है कि यदि किसान की भैंस, बैल की मृत्यु हो जाय, वह बह जाय, दुर्घटना में, करंट में, सर्प के काटने से कुछ हो जाय, अभी तक तो आदमी के लिए नियम था, मुख्यमंत्री जी ने उसमें पशुओं तक में नियम कर दिया.

    अध्यक्ष महोदय, मैं यह कहना चाहता हूं कि सब एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं, यह क्या रेलिवेंट नहीं है? रेलिवेंसी है, इस कारण से मैं इन बातों को कहना चाहता हूं. आरबीसी 6 (4) में लगातार सुधार हुआ है. गेहूं का उपार्जन 70 लाख टन गेहूं खरीदा गया है, उन्हीं प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़कों से मंडियों में उपार्जन केन्दों पर आया, इसलिए इन बातों को कह रहा हूं. सॉइल हेल्थ कॉर्ड, घर जाकर सॉइल हेल्थ कॉर्ड बनाने का काम हो रहा है, हमारा इसके लिए ग्रामोदय अभियान चला. सबसे बड़ी बात जो मुख्यमंत्री जी ने कही है कि अब हम खसरा, खतौनी की नकल एक-एक किसान के घर पर जाकर देंगे ताकि किसी प्रकार के भ्रष्टाचार की कोई गुंजाईश प्रदेश में नहीं रहे. इससे बड़ी क्या उपलब्धि हो सकती है? (अध्यक्ष महोदय, अनेकों बातें हैं, इतना ही कहना चाहता हूं कि मध्यप्रदेश एक शांति का टापू है और जब से हमारे यहां डाकू उन्मूलन हुआ है, मध्यप्रदेश में इस प्रकार की कोई घटना घटित नहीं हुई है, जिससे इस प्रदेश के ऊपर कोई कलंक आए, इस प्रदेश के ऊपर कोई कालिख आए, इस प्रदेश के ऊपर कोई ऊंगली उठाए. यह प्रदेश हम सबका है, मेरा भी है, आपका भी है, सभी का है. हम सभी मध्यप्रदेशवासी शान के साथ में यह कह सकते हैं कि हम कृषि उत्पादन के मामले में देश में अव्वल हैं और जब अव्वल हैं तो स्वाभाविक रूप से यह स्वतः सिद्ध है कि किसान भी सुखी होगा ही, क्योंकि यह कृषि उत्पादन कहां से बढ़ता है, किसान की समृद्धता से और जब किसान समृद्ध है तो मैं यह मानकर चलता हूं कि कोई कारण ऐसा नहीं है कि जिसमें हमें पुलिस का प्रयोग करना पड़े, प्रशासन का प्रयोग करना पड़े, कोई अप्रिय स्थिति न आए और यदि लाई जाती है तो निश्चित रूप से हम सभी के लिए दुर्भाग्यपूर्ण है.

    अध्यक्ष महोदय, मैं माननीय सदस्यों से यही कहना चाहता हूं. बहुत लोग आ रहे हैं. मंदसौर के लिए आप तीर्थ मत बनाएं, यह अच्छी परंपरा नहीं है, इसलिए मैं कहना चाहता हूं कि इससे एक प्रदूषण का वातावरण भी बनता है. राहुल भैया भी वहां पर गये थे, आप भी गये थे. राहुल गांधी जी गये थे और नानी जी के यहां से जब से लौटे हैं तो नानी जी की कहानियां तो बड़ी शिक्षाप्रद होती थीं, पता नहीं नानी जी ने राहुल भैया को कैसी कहानी सुनाई होगी मुझे तो नहीं मालूम, लेकिन यहां पर नानी याद आ जाएगी, हम नहीं बताना चाहते, इसलिए आप सब इसको नहीं करें. अध्यक्ष महोदय, जो आपने समय दिया, उसके लिए बहुत-बहुत धन्यवाद.

  • चुनौती को अवसर में बदलते नरेन्द्र मोदी

    चुनौती को अवसर में बदलते नरेन्द्र मोदी

    (मोदी फेस्ट 26 मई से 15 जून)

    - भरतचन्द्र नायक

    देश की जनता याद करती है कि 2004 मार्च-अप्रैल के दरम्यान जब कहा जाता था कि मंहगाई कमर तोड़ रही है। यूपीए सरकार जनता की समस्याओं के प्रति संवेदनशील होने के बजाय एक ही जबाव देकर कत्र्तव्य की इतिश्री समझ लेती थी कि मंहगाई विश्वव्यापी समस्या है। आये दिन भ्रष्टाचार और घोटाले जनचर्चा का विषय होते थे। सरकार का ध्यान सीएजी द्वारा भ्रष्टाचार का अनावरण कर दिये जाने के कारण झूठे तर्क देकर जनता के प्रति गैर जिम्मेदाराना मतिभ्रम पैदा करना रह गया था। न्यायालयों ने इनका संज्ञान लिया। यूपीए सरकार के मंत्रिगंण आरोपों के कठघरे में खड़े हुए। उनकी तिहाड़ यात्रा ने सवा अरब जनता का विश्वास खंडित कर दिया। सरकार किंकत्र्तव्य विमूढ़ और जनता हताश थी। भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में 2014 लोकसभा चुनाव लड़े गये। सेकुलर ब्रिगेड ने बड़े इत्मीनान के साथ जनता को फुसलाया, प्रलोभित किया, बरगलाया तथा नरेन्द्र मोदी के चरित्र हनन में अपनी विशेषज्ञता प्रदर्शित करने में कसर नहीं छोड़ी। श्री नरेन्द्र मोदी ने निरर्थक आलोचना के प्रति गहन गंभीर सहिष्णुता का परिचय देते हुए जनता को गरीब हितैषी, भ्रष्टाचार मुक्त, विकासोन्मुखी सरकार देने का वायदा किया। लोकतंत्र में जनविश्वास सबसे बड़ी शक्ति है। नरेन्द्र मोदी ने हताशा से त्रस्त जनमानस में सकारात्मक ऊर्जा का संचार किया। जनता और भाजपा के बीच विश्वास का सेतु बना। 26 मई 2014 को जनादेश, प्रचंड बहुमत अर्जित कर नरेन्द्र मोदी ने नीतिगत अस्त-व्यस्तता के आलम में केन्द्र मंे प्रचंड बहुमत के बावजूद घटक दलों के साथ एनडीए सरकार का गठन किया। नरेन्द्र मोदी ने गुजरात के मुख्यमंत्री पद से देश के प्रधानमंत्री का पद संभाला। तीन वर्ष के सरकार के कार्यकाल में एनडीए सरकार ने न तो जनविश्वास को खंडित किया और न ही पार्टी को लज्जित होने का अवसर आने दिया। काजल की कोठरी में बेदाग बने रहने का कीर्तिमान बनाकर जनता को सुखद परिवर्तन का अहसास कराया। देश विदेश में साफ-सुथरी, शुचितापूर्ण विकासोन्मुखी सरकार का सबूत पेश किया। मजे की बात यह है कि लोकसभा चुनाव 2014 के पश्चात हुए राज्यों के विधानसभा चुनावों, उपचुनावों में दिल्ली, बिहार और पंजाब को अपवाद मानें तो हर चुनाव में बाजी मारकर उन्होनें सिद्ध कर दिया कि करिश्माई नेतृत्व ने जो लहर पैदा की है वह अनवरत तीन साल मंे भी जस की तस बरकरार है। जनता का नरेन्द्र मोदी और उनकी सरकार पर अटल विश्वास है। सोलह राज्यों में पार्टी और घटक दलों की भागीदारी से सरकार है। नरेन्द्र मोदी की गणना दुनिया के श्रेष्ठ शासकों में ही नहीं उन्होनें अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प को भी लोकप्रियता के मामले में पीछे धकेल दिया है। जीडीपी विकास में चीन को पीछे धकेला है।

    नरेन्द्र मोदी ने जिस तरह चुनौतियों को अवसर में बदला, उनके नक्शेकदम पर चलकर भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित भाई शाह ने पार्टी संगठन को कुशलतापूर्वक नेतृत्व देकर पार्टी को विश्व का सबसे बड़ा (12 करोड़ सदस्य संख्या वाला दल) राजनैतिक दल बना दिया है। अब तक चीन का वामपंथी दल इसका दावेदार था। सदस्यता में अंकों की कारीगरी नहीं मैदानी स्तर पर देश के हर राज्य में मतदान केन्द्र तक पार्टी का ऊर्जावान नेतृत्व खड़ा करके साबित कर दिया है कि राजनैतिक दल की सफलता नारों और वादों में नहीं मतदान केन्द्र पर खड़ी जुझारू विकासोन्मुखी कार्यकर्ताओं की टीम पर निर्भर है। जो आंचलिक समस्याओं के समाधान के लिए राह बन सके है। यह टीम तीन वर्षों की मोदी सरकार की यशोगाथा लेकर 26 मई से 15 जून 2017 तक मतदाताओं का आशीर्वाद लेने मैदान में उतरकर मतदाताओं से रूबरू हो रही है। मोदी फेस्ट के नाम से लोकप्रिय यह अभियान वन-वे ट्रैफिक नहीं, कार्यकर्ता मतदाता का सुख-दुःख में भागीदार बनकर जन समस्याओं औश्र उनके उचित समाधान में पूर्ण मनायोग से जुटे है। नरेन्द्र मोदी ने पिछले दिनों ‘मन की बात’ करके जनता से रागात्मक संबंध जोड़ा और इस दरम्यिान जन की बात सुनने के लिए ‘जन की बात’ अभियान को गति प्रदान कर लोकतंत्र की अनुभूति दी है। आजादी के बाद श्री नरेन्द्र मोदी ने जन-धन योजना आरंभ करके जीरो बैलेंस पर आम आदमी को बैंक खाता खोलने का अवसर दिया और इसे दुर्घटना बीमा का समावेशी बनाकर सामाजिक-आर्थिक कवच सुनिश्चित कर दिया। बीस करोड़ बैंक खाते खोलकर उनमें सब्सीडी दी जाने लगी है। जन-धन योजना और जीवन ज्योति बीमा योजना से सामाजिक सुरक्षा सुनिश्चित हुई है। 1971 के गरीबी हटाओ अभियान से ठगी गयी जनता को पहली बार लगा कि मोदी सरकार कुछ परफार्मेन्स देने वाली सरकार है। लोकतंत्र में जन विश्वास ही राजनैतिक दल की सबसे बड़ी शक्ति होती है और इससे लोकतंत्र की विश्वसनीयता बढ़ती है। नरेन्द्र मोदी ने जन विश्वास के न्यासी की भूमिका में विलक्षण प्रतिभा दिखाकर करोड़ो लोगों को मुरीद बना लिया है।

    नरेन्द्र मोदी ने सत्ता के पटल पर अवतरित होते ही ऐलान किया कि ‘‘न खाऊंगा और न खाने दूंगा’’। सेकुलर ब्रिगेड ने ठाठ-बाट, सूट-बूट की सरकार जैसे जुमले गढ़े, लेकिन उसे हताश तो तब हुई जब तीन वर्षों में एक भी मामला भ्रष्टाचार, घोटाले का उसके हाथ नहीं लगा। लेकिन सिर्फ यही हताशा का कारण नहीं बन रहा। आजादी के बाद पहली बार सरकार में पं. नेहरू के समय सेना की जीप खरीदी जैसे घोटाले हुए। इंदिरा जी के कार्यकाल में तो स्टेट बैंक से तक फर्जी काल पर रकमें निकाली गयी। पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने स्वीकार किया कि शासन-प्रशासन में गोलमाल है और जनता तक एक रू. भेजने में सिर्फ 15 पैसे पहुंचते है। मोदी सरकार ने सारी सब्सीडी हितग्राही के खाते में जमा कर दो लाख करोड़ रू. जो बिचैलियों की जेब में जाते थे, उन पर रोक लगा दी। जनता ने जहां इस पहल को जनोन्मुखी माना, वहीं बिचैलियो के रूप में इस रकम को हड़पने वालों की छाती पर सांप लौटने लगे और मोदी सरकार कीप्रगति देखने सराहने के बजाय दुष्प्रचार करनें में जुट गये। मोदी सरकार ने कालेधन और भ्रष्टाचार पर लगाम लगाने के लिए 8 नवंबर 2016 को नोटबंदी (विमुद्रीकरण) का ऐलान कर बड़े नोट (1000 और 500 के नोट) को प्रचलन से बाहर कर दिया। बैंको के सामने लाइने लगी और विपक्ष ने हाहाकर मचाया। लेकिन गरीब वर्ग ने अपने साथ अमीरों को कतार में खड़ा देखकर माना कि आर्थिक विषमता दूर करने और भ्रष्टाचार तथा कालेधन पर रोक लगाने में नोटबंदी कारगर कदम है। निम्म वर्ग और मध्यम वर्ग ने कठिनाई झेलते हुए नोटबंदी का स्वागत किया। नतीजा यह हुआ कि सरकारी खजाने में टैक्स संग्रह का रिकार्ड बन गया। नकदी की समस्या से जूझ रहे बैंक मालामाल हो गये और जन-जन को कर्ज मिलना आसान हो गया। 23 हजार करोड़ रू. कालाधन का खुलासा हो गया। नजरे बदलता है तो नजरिया बदल जाता है।

    नोटबंदी और जीएसटी कराधान जैसी साहसिक पहल ने देश विदेश में निवेशकों को प्रभावित कर दिया कि वास्तव में मोदी के नेतृत्व में गतिशील दूरदर्शी सरकार मिली है। किसान, गरीब, मजदूर, आम आदमी का कल्याण ही सरकार की असल प्रतिबद्धता है। नोटबंदी और जीएसटी से जहां देश का जीडीपी दहाई में पहुंचने जा रहा हे, वहीं महंगाई दर में 2 प्रतिशत की कमी आने से जनता अच्छे दिनों का अहसास करने जा रही है। मजदूरों को न्यूनतम मजदूरी, असंगठित क्षेत्र में न्यूनतम पेंशन योजना, किसानों के लिए प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना, सामाजिक आर्थिक कवच साबित हुई है। जनता का विश्वास अटल हुआ है कि श्री नरेन्द्र मोदी जो कहते है वह करके दिखाते है। भारतीय जनता पार्टी की कथनी और करनी में साम्य है। कृषि के मोर्चा पर मिली कामयाबी से इस क्षेत्र में विकास दर नकारात्मक से 4 प्रतिशत की बढ़ोत्तरी आने से देश में बंपर कृषि उत्पादन हुआ। खाद्यान्न के मूल्य घटने से असल लाभ आम आदमी को मिल रहा है। देश के 14 करोड़ किसानों के लिए उनकी जमीन का स्वाईल हेल्थ (मृदा स्वास्थ्य परीक्षण) कार्ड किया जा रहा है। इससे किसान जमीन की तासीर पहचान कर न्यूनतम परिमाण में उर्वरक का इस्तेमाल करेगा और कृषि की लागत घटेगी। 2014 तक किसान यूरिया खाद के लिए भटकते थे। वितरण केन्द्रों पर कालाबाजारी होती थी। एनडीए सरकार ने यूरिया को नीम कोटेड बनाकर उसकी हेराफेरी समाप्त कर दी और उत्पादन बढ़ा दिया है। अब रासायनिक खाद मुंह मांगा बाजार में उपलब्ध है उस पर मिलने वाली सब्सीडी उत्पादकों और वितरकों की जेब में जाने के बजाय किसान के खाते में जमा हो रही है।

    मोदी सरकार ने पाॅलिसी पेरालिसिस के आरोप से सरकार को मुक्त किया है। जनहित में हर दिन फैसला होता है और अगले दिन प्रगति की निगरानी खुद नरेन्द्र मोदी करते है, जिससे राजनैतिक क्षेत्र और प्रशासन में नई कार्य संस्कृति विकसित हुई है। राजनैतिक और प्रशासकीय क्षेत्र में कर्महीन, आलसी, लापरवाह लोगों का सितारा अस्त हो रहा है। जनता मानती है कि मोदी सरकार काम करने वाली सरकार है, तीव्र गति से लिए जाने वाले फैसलों की देश में बेहद चर्चा है। सरकार ने कालाबाजारी खत्म करने के लिए 64 विभागों की 533 योजना में नकद सब्सीडी वितरण से बिचैलियों को अलविदा करने, राशि का हितग्राही के खातों में हस्तातंरण आरंभ कर दिया तो देश के बैंकों का आठ लाख करोड़ रू. कर्जदारों की गैर अदायगी के कारण डूबन्त खाते में जा रहा था, सरकार ने इस समस्या से निपटने के लिए रिजर्व बैंकों को निर्णयात्मक पहल करने के लिए शक्ति संपन्न बनाने के लिए बैंकिंग रेगुलेशन में संशोधन कर दिया है। इस कदम से रकम डकारने वाले औद्योगिक, वाणिज्यक क्षेत्र ऊहापोह में है, सरकार को घेरने की जुगत में है। लेकिन सरकार लोकधन की वसूली के लिए कृत संकल्प है। सरकार ने बेनामी संपत्ति को जप्त किये जाने के लिए कानून में संशोधन करके संपत्ति राजसात किये जाने की व्यवस्था करके दोहरी अर्थव्यवस्था के सृजन पर रोक लगा दी है। बेनामी संपत्ति संशोधन कानून-2016 ने काली अर्थव्यवस्था की रीढ़ तोड़़ दी है। भ्रष्टाचार के फैलाव में नकदी और बड़े नोटों का प्रचलन खाद-पानी का काम करता है। मोदी सरकार ने कैशलेस इकाॅनोमी की दिशा में सर्तकतापूर्ण कदम बढ़ाया है। डिजिटल लेन-देन को लोकप्रिय बनाया गया है। आधार नंबर के जरिये लेनदेन में भीम एप्प, यूपीआई, यूएएसए जैसे माध्यमों को प्रोत्साहन देकर न्यूनतम कैश, मिनीमम कैश की पद्धति अपनाने पर बल दिया है।

    मोदी सरकार की नीतियों की दिशा और दशा से देश में सकारात्मक वातावरण बना है। सुदूर ग्रामों में चूल्हे के धुंआ से परेशान महिलाओं को जब उज्जवला योजना में केन्द्र सरकार ने निःशुल्क गैस कनेक्शन दिया, तब गांव-गांव तक यह संदेश पहुंचा कि यह जनहितैषी सरकार है। महिलाएं भी सरकार के राडार पर है, गैस चूल्हा का इस्तेमाल करने वाली बहनें मोदी सरकार के ‘सबका साथ-सबका विकास’ संदेश की संवाहक बन चुकी है। केन्द्र सरकार ने निजी क्षेत्र में स्वास्थ्य पर्यटन के रूप में विकसित अस्पतालों के खर्चीले बिलों को देखते हुए तय किया कि सरकारी अस्पतालों में सरकारी खर्च पर दवाईयां सुलभ हो। जहां बाजार से जीवन रक्षक दवाएं खरीदना अनिवार्य हो दवाईयां उपकरणों पर अनुचित मुनाफाखोरी न हो पाये। इसके लिए लाख रू. कीमत का स्टेंट सस्ता कर आम आदमी की पहुंच में लाया गया है। जेनेरिक दवाईयों के इस्तेमाल को तरजीह दी जा रही है। जेनेरिक दवाईयां ब्रांडेड दवाओं से कई गुना सस्ती होती है। इसके विक्रय केन्द्र शहरों में खोले जा रहे है। नरेन्द्र मोदी सरकार की ‘तीन साल बेमिसाल’ की उपलब्धियां जन-जन तक पहुंचाना लोकतंत्र में आवश्यक इसलिए भी है कि जनता सूचना के अधिकार से संपन्न है।

    मोदी फेस्ट के रूप में पार्टी संगठन और एनडीए सरकार ने इक्कीस दिन का जनसंपर्क महासंवाद अभियान आयोजित करके जन जिज्ञासा को शांत करने की अनूठी पहल की है। यह एक अवसर है जब पाॅलीटिक्ल क्लास और सिविल सोसायटी इस अभियान में प्रगति पर समावेशी बहस कर जनता जनता को विकास के प्रति जागरूक बना सकती है। विकास के इस स्वर्ण युग में कुछ कमियां भी हो सकती है। लेकिन एक बात तो तय है कि राष्ट्र के जीवन में तीन साल मूल्यवान साबित होने पर दो मत नहीं है। देश में अधोसरंचना विकास, आवासहीनों के सिर पर 2022 तक छत, मेक इन इंडिया, डिजिटल इंडिया, मुद्रा बैंक, स्किल्ड इंडिया, स्टार्ट अप इंडिया जैसे अभियानों ने युवकों में इल्म और हुनर की चाह पैदा की है। वे देश में बढ़ते रोजगार के अवसरों को छोड़ना नहीं चाहते। ब्रेन-ड्रेन की जगह ब्र्रेन गेन की जुगत लग गयी है। स्वच्छ भारत-स्वस्थ भारत, खुशहाल भारत का जो सपना स्वतंत्रता संग्राम सैनानियों ने देखा था, उस दिशा में अनुष्ठान शुरू हो चुका है। राष्ट्र के जीवन में तीन वर्ष की अवधि मूल्यांकन की दृष्टि से नगण्य है किंतु नीतियों बताती है कि दशा और दिशा सही है। गत तीन वर्षों में भारत में विकास का नया विहान हुआ है। योजना आयोग नीति आयोग में बदला है। टीम इंडिया का प्रादुर्भाव हो चुका है। नीति आयोग और जीएसटी परिषद में राज्यों का वर्चस्व बढ़ने से संविधान की संघवाद की भावना ने मूर्तरूप लिया है। राज्यों को केन्द्र से मिले वाले राज्यांश का 32 प्रतिशत से बढ़ाकर 42 प्रतिशत हो जाने से राज्यों की माली सेहत सुधरी है। अब तक मोदी सरकार राज्यों के बीच पक्षपात से बची है। यह भी एक लोकतांत्रिक उपलब्धि है।

  • दुनिया के देशों जैसा नियंत्रित होगा रियल इस्टेट

    दुनिया के देशों जैसा नियंत्रित होगा रियल इस्टेट

    मंत्रि-परिषद के निर्णय

    भोपाल 25 अप्रैल।

    मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान की अध्यक्षता में आज हुई मंत्रि-परिषद की बैठक में महाप्रबंधक परियोजना एनटीपीसी लिमिटेड खरगोन को 2×600 मेगावॉट विद्युत परियोजना के लिए रेलवे पथ निर्माण के लिए ग्राम खेड़ी तहसील पुनासा जिला खंडवा की कुल 0.532 हेक्टेयर शासकीय भूमि चालू वित्तीय वर्ष की कलेक्टर गाइड लाइन अनुसार निर्धारित कर नर्मदा घाटी विकास प्राधिकरण की शर्तों पर आवंटित करने की अनुमति दी।

    मंत्रि-परिषद ने मध्यप्रदेश रियल एस्टेट विनियामक प्राधिकरण के लिए पदों की संरचना एवं अधिकारी-कर्मचारी के पदों को प्रतिनियुक्ति/संविदा आधार पर भरे जाने, स्वीकृत पदों की संख्या एवं वेतनमान के प्रस्ताव का अनुमोदन किया।

    मंत्रि-परिषद ने कोर्ट मैनेजर एवं सपोर्टिंग स्टाफ के सृजित पदों में से उच्च न्यायालय की स्थापना पर सृजित भृत्य के पद के वेतनमान में ग्रेड पे 1400 के स्थान पर 1300 संशोधित करने का निर्णय लिया।

    मंत्रि-परिषद ने संविदा आधार पर 31 मार्च 2017 तक निरंतर किए गए कोर्ट मैनेजर एवं उनके स्टाफ के पदों में से कार्यरत कोर्ट मैनेजर एवं सपोर्टिंग स्टाफ के पदों को 30 सितंबर 2017 तक अथवा नियमित कोर्ट मैनेजर एवं सर्पोटिंग स्टाफ के पदों पर भर्ती होने तक, जो भी पहले हो, निरंतर किये जाने का अनुसमर्थन किया।

    मंत्रि-परिषद ने अशासकीय स्वयंसेवा अनुदान प्राप्त संस्था अखिल भारतीय दयानंद सेवाश्रम संघ, नई दिल्ली, शाखा थांदला जिला झाबुआ द्वारा संचालित प्रवृत्तियों के लिए अनुदान सहायता प्राप्त करने के लिए अनुदान नियम 1985 एवं मध्यप्रदेश में पंजीयन कराए जाने के प्रावधान से 2015-16 से 10 वर्ष की छूट प्रदान की।

    मंत्रि-परिषद ने पूर्वता क्रम (आर्डर ऑफ प्रेसीडेन्स) 2011 की सारणी के सरल क्रमांक-30 में प्रमुख सचिव गृह के बाद प्रमुख सचिव मध्यप्रदेश शासन एवं प्रमुख सचिव मध्यप्रदेश विधानसभा को एक साथ जोड़े जाने का निर्णय लिया।

    मंत्रि-परिषद ने एम पी रोड डेव्लपमेंट कार्पोरेशन लिमिटेड के संचालन मंडल की 33 वीं बैठक 15 मार्च 2017 में पारित संकल्प के अंतर्गत निकास नीति का अनुमोदन किया।

  • चार पीढ़ियों के त्याग की श्रद्धांजलि हैं मोदी

    चार पीढ़ियों के त्याग की श्रद्धांजलि हैं मोदी

    – भरतचन्द्र नायक…
    भारत में लोकतंत्र ने अंगड़ाई ली है। लोकतंत्र परिपक्वता की ओर बढ़ता नजर आया और परंपराएं ध्वस्त हुई क्योंकि जनता ने सियासी खोखलापन नापसंद कर दिया। पात्रता के अवसरवाद से मुक्ति के बाद सबका साथ-सबका सशक्तिकरण लोकबोध बनता देखा गया। अमित शाह और नरेन्द्र मोदी की इस बात को लेकर आलोचना हुई कि उत्तर प्रदेश में एक भी अल्पसंख्यक को प्रत्याशी नहीं बनाया। लेकिन मतदान करने में अल्पसंख्यक आगे रहे और कमल की नुमाइंदगी पसंद की। यहां तक कि मुस्लिम महिलाओं ने कमल के समर्थन में तमाम फतबों और दबावों को दरकिनार करके गतिशील भारत की दिशा निर्धारित कर दी। देश-विदेश के राजनैतिक विश्लेषक इस बात पर हैरान-परेशान है कि विमुद्रीकरण ने 86 प्रतिशत बड़ी मुद्रा को चलन से बाहर कर बैंकों के सामने लंबी लाईनों में जनता को खड़ा कर दिया। फिर भी जनता ने नोटबंदी के कारण क्लेशित होने के बाद भी प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के समर्थन में मतदान केन्द्रों पर भी कतारों को लंबा कर दिया। कारण स्पष्ट समझ में आया कि सात दशकों तक राजनीति के दिखाऊ मधुर तेवरों में हकीकत कम फसाना अधिक रहा है। नरेन्द्र मोदी ने देश की काली अर्थव्यवस्था में नस्तर लगाया और इसके पहले ताकीद कर दी कि नस्तर से तकलीफ होगी। लेकिन बनने वाले नासूर से आप और अगली पीढ़ी सुरक्षित हो जायेगी। नतीजा सामने आया उत्तर प्रदेश देश के सबसे बड़े सूबे में कमल खिला और ऐसा विशाल जनमत लगभग पौने चार दशक बाद जनता ने परोसा। सत्ता नस्तर लगाने वालों के हाथों में सौंपकर निश्चिन्त हो गयी। पग-पग पर विरोधाभास ने नरेन्द्र मोदी का प्रेतछाया के समान पीछा किया है और नहीं कहा जा सकता है कि यह सिलसिला कहां से कब तक चलेगा? लेकिन जैसा कि वरिष्ठ नेता वैंकेया नायडू ने कहा कि मोदी देश को दैवीय वरदान (गॉड गिफ्ट) है। विरोधाभास वास्तव में उनके लिए पारस स्पर्श देता आ रहा है। कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने मोदी को मौत के सौदागर के रूप में संबोधित क्या किया, गुजरात की जनता मोदी पर कुर्बान हो गयी और गुजरात में कांग्रेस का अवसान हो गया। सर्जिकल स्ट्राईक को राहुल बाबा ने सैनिकों के खून की दलाली कहकर जनता का मूड बिगाड़ दिया। पांच में से 4 राज्यों में जीत का सेहरा जनता ने मोदी के सिर बांध दिया।
    बाबरी मजिस्द विवाद के पक्षकार मोहम्मद अंसारी की गणना अल्पसंख्यकों के कट्टर पेरोकार के रूप में हुई है। लेकिन अंसारी मोदी पर ऐसे लटटू हो गये कि उन्होनें अल्पसंख्यकों का आव्हान किया और कहा कि आजादी के बाद पहला प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी हुआ जो न तो राग द्वेष रखता और न ही लोक लुभावन नारे परोसकर जनता को छलता है। उसके लिए समूची कौम एक परिवार और नजर एक है। अल्पसंख्यकों के साथ वेमुरोब्बत बात वहीं कर सकता है जो निष्कपट है। हाल का एक वाकया भी गंभीर विमर्श की अपेक्षा करता है। आतंकवाद के विस्तार में सिमी के सपोलों ने सिर उठाया। मध्यप्रदेश में 6 सपोले पुलिस के हत्थे चढ़ गये। उत्तर प्रदेश में हरकत कर पाते इसके पहले ही हुई मुठभेड़ में सैफुल्ला हला हो गया। सेकुलर ब्रिगेड चुप कैसे रहता? उसे वोटों की सियासत का मनचाहा मौका मिल गया। मुठभेड़ पर सवाल दाग दिये गये। लेकिन आतंकवादी सरगना सैफुल्ला के वालिद जनाब सरताज ने सैफुल्ला की लाश लेने और दफन करने से इंकार करते हुए कहा कि जो वतन का नहीं हुआ वह मेरा लड़का कैसे हो सकता है। सेकुलर ब्रिगेड की सियासत की सरताज ने न केवल पोल खोल दी, बल्कि नरेन्द्र मोदी द्वारा की गयी सर्जिकल स्ट्राईक के औचित्य में चार चांद लगा दिये। कांग्रेस के वे सभी नेता चुप हतप्रभ रह गये जो ऐसे मौकों को सियासत के लिए भुनाने की ताक में रहते है। उन्होनें मुंबई आतंकी घटना, बटाला हाउस एनकाउंटर पर सवाल खड़े ही नहीं किये, बल्कि मुठभेड़ में शहीद हुए रक्षाकर्मियों की शहादत का अपमान भी किया। लगातार अल्पसंख्यकों को भ्रमित करके अल्पसंख्यकों के विश्वास को सेकुलर ब्रिगेड ने डिगा दिया। अब तक सेकुलरवादियों की अल्पसंख्यकों के भावनात्मक शोषण करने की फितरतों ने सेकुलरवाद के छद्म से अल्पसंख्यक ने तौबा कर ली। इसी का दुष्परिणाम कांग्रेस, समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी को उत्तर प्रदेश के चुनाव में भोगना पड़ा। अल्पसंख्यकों के साथ दलितों, पिछड़ों, अति पिछड़ों ने भी नरेन्द्र मोदी की आर्थिक, सामाजिक नीतियों के समर्थन में एकमुश्त मतदान करने की ठान लिया। लोकसभा चुनाव 2014 में नरेन्द्र मोदी के समर्थन में भारतीय जनता पार्टी को जो समर्थन मिला था, ढ़ाई वर्ष बाद भी उसका बरकरार रहना भारतीय लोकतंत्र में विश्वसनीयता का एक अभूतपूर्व कीर्तिमान है। एंटी इन्कमबेंसी की प्रत्याशा में जो ताल ठोक रहे थे वे धराशायी हो गये। नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश में तीन चौथाई से अधिक बहुमत ने देश और दुनिया को चमत्कृत किया है। राजनैतिक विश्लेषकों का मानना है कि ऐसा तीन चौथाई बहुमत विधानसभा, लोकसभा चुनाव में पीढ़ी को एक बार ही मयस्सर होता है। 1952 के चुनावों में पं. जवाहरलाल नेहरू के नेतृत्व में यह जीत नसीब हुई। बाद में गरीबी हटाओं देश को बचाओं जैसे आकर्षक नारे देकर इंदिरा जी को भी जनता ने मौका दिया। उनके अवसान के बाद 1984 में इंदिरा जी की दुःखद मौत के बाद जनता ने सहानुभूति वोट के रूप में राजीव गांधी को भी इस स्तर पर पहुंचाया। लेकिन 37 वर्ष बाद नरेन्द्र मोदी ने जैसा कहा कि देश की जनता की खिदमत में उनका 56 इंच का सीना चट्टान की तरह आगे रहेगा। उन्होनें 16वीं लोकसभा के चुनाव और उत्तर प्रदेश की 16वीं विधानसभा के चुनाव में अप्रत्याशित जीत हासिल कर साबित कर दिया कि वे सेवादारों की सैना में यदि सेनापति है तो बेरेक में रहकर हुक्म चलाना नहीं जानते, सीना मोर्चा पर हमेशा आगे रहता है। ‘न खाऊंगा न खाने दूंगा’, न चैन से बैठूंगा और न दूसरों को बैठने दूंगा। छाती ठोककर प्रमाणित कर दिखाया है। नरेन्द्र मोदी का कद पं. नेहरू, इंदिरा गांधी से आगे नहीं तो, पीछे भी नहीं है। यह अतिश्योक्ति नहीं। सात समन्दर पार विश्व संचार माध्यम जो अब तक नरेन्द्र मोदी के खिलाफ विष वमन करने में अग्रणी थे, वे ही फरमा रहे है कि नरेन्द्र मोदी की भारत की जनता ऐसी मुरीद है कि 2019 में 17वीं लोकसभा चुनाव में कमल खिलाने को आतुर है। आहट सोलहवीं विधानसभा (उ.प्र.) चुनावों से कर्णगोचर हो चुकी है। समाजशास्त्रियों, राजनैतिक विश्लेषकों और वरिष्ठ सियासतदारों का मानना है कि नरेन्द्र मोदी ने समाज के बिखराव के जो कारक अभी तक राजनेताओं ने ईजाद किये थे, उन्हें झुठला दिया है। उनकी नीतियों से पात्रता क्रम मिट चुका है। उन्होनें सबका साथ-सबका सशक्तिकरण मूलमंत्र साबित किया है। चाहे जन-धन योजना हो, मुद्रा बैंक योजना हो, उज्जवला योजना और 79 प्रकार की जो भी जन हितकारी योजनाएं है, उनमें एक ही सांचा है। भारत का नागरिक, शोषित, पीडि़त, वंचित, गरीब, अबाल, वृद्ध नर-नारी, किसान, मजदूर, युवा, महिला सब एक समान न्याय और समानता के अधिकार के हकदार है। पूर्ववर्ती कांग्रेस की यूपीए सरकार के प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह ने योजना भवन दिल्ली में बैठकर यह कहकर कि देश की संपदा पर पहला अधिकार अल्पसंख्यकों का है, अलगाव के बीज बो दिये थे। लेकिन नरेन्द्र मोदी ने लाग-लपेट बिना कहा कि देश की संपदा पर पहला अधिकार सवा अरब जनता का है, लेकिन प्राथमिकता में गरीब सर्वोच्च है। इसी का नतीजा है कि भारतीय जनसंघ के संस्थापक पं. दीनदयाल उपाध्याय के जन्मशताब्दी समारोह के वर्ष को नरेन्द्र मोदी ने देश के वंचितों, गरीबों को समर्पित कर गरीब कल्याण वर्ष के अनुरूप कार्यक्रम का संचालन किया है। नरेन्द्र मोदी को गरीबों में मसीहा की निगाह से देखे जाने के पीछे एक वजह यह है कि मोदी ने कहा है कि गरीब को राहत, डोल की जरूरत नहीं है। उसे ऐसे अवसर और परिस्थिति चाहिए जिसमें गरीब अपना बोझ उठा सके। इसका नतीजा यह होगा कि देश के मध्यम वर्ग के सिर का बोझ कम होगा। देश के संचालन में किफायत होगी और कराधान उदार मॉडल में पहुंच जायेगा। वास्तव में नरेन्द्र मोदी ने सामाजिक न्याय और सेकुलरवाद को ऐसा परिभाषित कर दिखाया है कि समाजवाद, वामपंथ और अन्य सभी वाद भूलुंठित हो चुके है। उत्तर प्रदेश में नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में आशातीत विजय के एकाधिक कारण है जो अन्य दलों के लिए सबक बन सकते है। विजय के रूप में उत्तर प्रदेश की परिघटना में केन्द्र सरकार और भाजपा संगठन का मेलजोल का अपूर्व संगम रहा है। मोदी ने जहां राष्ट्रहित में संकुचित स्वार्थ को बलि चढ़ाने का साहस दिखाया और नोटबंदी करके अमीरांे और गरीबों को एक कतार में खड़ा करते हुए कहा कि आने वाले कल के लिए आज कुर्बान करना होगा। जनता ने तकलीफ भोगी लेकिन गरीब समझ गये कि देश के माफिया, भ्रष्टाचारी सब नोटबंदी के निशाने पर आ चुके है। विपक्ष ने जनता को बहकाने, विरोध करने के लिए उकसाया लेकिन जनता ने राष्ट्रीय हित में मोदी का साथ दिया। भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने संगठन में केन्द्रीय कार्यालय से मतदान केन्द्र तक ऐसा संगठनात्मक ताना-बाना बुन डाला और पार्टी की सदस्य संख्या 12 करोड़ पहुंचाकर भारतीय जनता पार्टी को दुनिया की सबसे बड़ी पार्टी में गणना करा दी। देश में ऐसी परिस्थति बनी कि जनता ने महसूस किया कि यदि हम अपना और आने वाली पीढ़ी का भविष्य चाहते है तो राष्ट्रवाद की परिभाषा गढ़ें। राष्ट्रवाद के नाम पर नाक-भौंह सिकोड़ने वालों से देश को अधिक जोखिम है, जितना बाहर से नहीं। देश में सामाजिक, आर्थिक सुधार का जो सिलसिला आरंभ हुआ है, उससे दुनिया में भारत की साख में चार चांद लग गये है। श्री नरेन्द्र मोदी अंतर्राष्ट्रीय फलक पर नेता के रूप में स्थापित हो चुके है। विश्व शक्तियां भारत की ओर टकटकी लगाये है। 2014 के लोकसभा चुनाव में कमल की विजय के 32 माह बाद यदि उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड में भारतीय जनता पार्टी का परचम शान से फहराया गया है तो मानना पड़ेगा कि नरेन्द्र मोदी युग का प्रादुर्भाव हो गया है। यह युग आरंभ तो हो गया है इसका सुदीर्घ भविष्य भी है। सुनहरा भविष्य भाजपा के लिए ही नहीं सवा अरब जनता के कल्याण के लिए समर्पित। नरेन्द्र मोदी ने सादा जीवन-उच्च विचार का जो सामाजिक, राजनैतिक, आर्थिक दर्शन गढ़ा हे, वास्तव में यह भारतीय जनसंघ और पार्टी के उन महामना नेताओं, जिनकी चार पीढ़ी खप गयी है, के प्रति सच्ची भावांजलि है।

  • दलितों को कांग्रेस ने वोट समझाः लालसिंह

    दलितों को कांग्रेस ने वोट समझाः लालसिंह

    लाल सिंह आर्यःदलितों को केवल वोट बैंक समझती रही कांग्रेस।
    लाल सिंह आर्यःदलितों को केवल वोट बैंक समझती रही कांग्रेस।

    भोपाल। कांग्रेस नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री श्री ज्योतिरादित्य सिंधिया को दलितों पर अत्याचार और उपेक्षा के मामले में या तो इतिहास का ज्ञान नहीं है, या फिर वे देश की जनता को अज्ञानी समझते हैं। सच तो यह है कि लगभग 6 दशक तक देश में एक छत्र राज्य करने वाली कांग्रेस ने दलितों को कभी सम्मान से खड़े नहीं होने दिया। उसे सिर्फ वोट समझा, इंसान नहीं। इतना ही नहीं दलितों के सम्मान की अत्यंत शालीनता के साथ आवाज उठाने वाले और उन्हें संविधान के तहत अधिकार दिलाने वाले राष्ट्र नायक डॉ. भीमराव अंबेडकर को निरंतर अपमानित और उपेक्षित करने में कांग्रेस के पहले प्रधानमंत्री पं. जवाहरलाल नेहरू से लेकर डॉ. मनमोहन सिंह तक किसी ने कोई कसर नहीं छोड़ी।
    श्री ज्योतिरादित्य सिंधिया के इस बयान पर कि ‘‘भारतीय जनता पार्टी दलित मुक्त भारत बनाने पर तुली है’’, भाजपा नेता एवं मंत्री श्री लालसिंह आर्य ने गंभीर आपत्ति व्यक्त करते हुए कहा है कि श्री सिंधिया के इन बेहुदे बयानों से इतिहास की सच्चाई को छिपाया नहीं जा सकता। श्री सिंधिया को यह पता होना चाहिए जबकि श्री अटलबिहारी वाजपेयी की सरकार ने उन्हें भारत के सर्वोच्च सम्मान भारत रत्न से अलंकृत किया। दलित समाज के प्रणेता और मार्गदर्शक डॉ. भीमराव अंबेडकर को नीचा दिखाने के लिए पं. जवाहरलाल नेहरू के समय से ही बिसात बिछा दी गई थी। वे अपनी जानकारी दुरूस्त कर लें कि जब डॉ. अंबेडकर मुंबई से 1952 में चुनाव लड़े, तब पं. नेहरू ने उन्हें चुनाव हराने के लिए एड़ी-चोटी का जोर लगाया। डॉ. अंबेडकर को जीवनभर इस बात की टीस रही। कांग्रेस के पास इस बात का भी कोई जवाब नहीं है कि डॉ. अंबेडकर दिल्ली के जिस किराए के मकान में रहे, उस मकान को उपेक्षित करके रखा गया और जब देश में श्री अटलबिहारी वाजपेयी की सरकार बनी, तब अटल जी ने उस मकान से अपना भावनात्मक संबंध स्थापित करते हुए 16 करोड़ में न सिर्फ उसे खरीदा, बल्कि हाल ही में वर्तमान भाजपा सरकार के मुखिया श्री नरेंद्र मोदी ने 100 करोड़ रू. से 26, अलीपुर रोड स्थित इस मकान को संविधान की शक्ल में एक भव्य स्मारक बनाने की घोषणा की है। मध्यप्रदेश में लगभग 43 साल कांग्रेस की सरकार रही है, लेकिन जहां भारत के लाल डॉ. अंबेडकर पैदा हुए उस महू कस्बे को उपेक्षित रखा गया और उनके जन्म स्थान को सम्मान देने का कोई जतन नहीं किया गया। हमें इस बात पर गर्व है कि भारतीय जनता पार्टी की श्री शिवराज सिंह के नेतृत्व वाली सरकार ने बाबा साहब की जन्मभूमि का शत्-शत् नमन करते हुए राष्ट्र को एक स्मारक समर्पित किया है। श्री ज्योतिरादित्य सिंधिया को शायद यह भी जानकारी नहीं है कि बाबा साहब की दीक्षा भूमि जो नागपुर में है, उसे भाजपा शिवसेना की सरकार ने राष्ट्रीय स्मारक की सूरत दी। भाजपा के वरिष्ठ नेता श्री नितिन गडकरी के इस प्रयास को देश सदैव याद रखेगा। श्री सिंधिया को इस बात का भी अध्ययन करना चाहिए कि संविधान के निर्माता का अंतिम संस्कार मुंबई में जिस स्थान पर किया गया था, उस इंदुमिल की जमीन पर श्री गोपीनाथ मुंडे के प्रयास से स्मृतियां संजोई गईं हैं और हाल ही में श्री नरेंद्र मोदी की सरकार ने इंदुमिल की जमीन बाबा साहब के अंतिम संस्कार स्थल पर स्मारक बनाने और समाज निर्माण के अन्य प्रकल्प चलाने के लिए आवंटित कर दी है। श्री ज्योतिरादित्य सिंधिया अपनी छुट्टियां बिताने विदेश तो खूब जाते हैं, शायद वह लंदन भी गये होंगे, लेकिन उन्हें यह जानने की फुरसत नहीं मिली कि लंदन में जिस स्थान पर बाबा साहब अंबेडकर ने अपनी उच्च शिक्षा प्राप्त की, उस स्थान को महाराष्ट्र की भाजपा शिवसेना सरकार ने राष्ट्रीय संपत्ति घोषित किया है। सरकार बाबा साहब के नाम पर एक बड़ा शोध केंद्र बनाने पर भी काम कर रही है।
    श्री लालसिंह आर्य ने कहा है कि श्री सिंधिया भाजपा पर आरोप लगाने से पहले अपने जमीर में झांक कर देखें कि अंबेडकर जी के जन्मदिन पर राष्ट्रीय अवकाश की घोषणा किसने की ? संसद के सेंट्रल हाल में दशकों की प्रतीक्षा के बाद बाबा साहब का तैल चित्र किसके प्रयासों से लग सका? श्री सिंधिया को इस बात का जवाब शायद कभी न सूझ सके कि जिस दिन डॉ. मनमोहन सिंह की घोटालेबाज कांग्रेस सरकार विदा हो रही थी उस दिन भी देश में 80 करोड़ गरीब बचे थे। यह किसी को बताने की आवश्यकता नहीं हैं कि देश में गरीबों की कुल आबादी में दलितों और वंचितों का हिस्सा कितना अधिक है। कांग्रेस को जवाब देना पड़ेगा कि 60 साल तक आप गरीबी हटाओ का नारा देते रहे और निरंतर गरीब और दलित राष्ट्र की मुख्य धारा से दूर होते रहे, इसके कारण क्या हैं? श्री सिंधिया की मजबूरी हम समझ सकते हैं कि वे आज अपनी ही पार्टी में कुछ ऐसे लोगांे के रहमोकरम पर अपना राजनैतिक अस्तित्व बनाये हुए हैं, जिनकी कार्य प्रणाली इस राष्ट्र के लिए समझ से परे है। अपने आकाओं को खुश करने के लिए जब श्री सिंधिया जेएनयू में राष्ट्र विरोधी नारे लगाने वालो को राष्ट्र द्रोही मानने से इंकार कर सकते हैं, वे कश्मीर मामले पर अत्यंत असहनीय बयान दे सकते हैं, तो उनसे यह उम्मीद कैसे की जा सकती है कि वह समाज के वंचित वर्ग की भावनाओं को आहत नहीं करेंगे। भारतीय जनता पार्टी को श्री सिंधिया जैसे नेताओं से किसी सर्टिफिकेट की आवश्यकता नहीं है। वे यदि दलितों और वंचितों का दर्द समझते तो आज देश की तस्वीर कुछ और होती। इन नेताओं की तखलीफ यह है कि देश में पहली बार एक गरीब का बेटा प्रधानमंत्री बना है और उसने समाज के सभी वर्गों के लिए समानता के आधार पर विकास के द्वार खोल दिये हैं। कांग्रेस को यह बात समझ में आ रही है कि जब देश खुशहाल हो जायगा, तो किसी भी वर्ग को वोट के लिए बरगलाया नही जा सकेगा। ऐसे में बेचारी कांग्रेस कभी सत्ता में लौटेगी कैसे? अनुसूचित जाति-जनजाति अब किसी का वोट बैंक बनने को तैयार नहीं हैं। दलित वर्ग को पता है कि कांग्रेस ने सदैव से उसके साथ उत्थान के नाम पर षड़यंत्र किए हैं, लेकिन कांग्रेस के षड़यंत्रों को समापन की ओर ले जाने के लिए आज के जागरूक दलित समाज ने कमर कस ली है।