Category: सरकार

  • छिंदवाड़ा का नया कमीशन एजेंट एपीडी आरके गुप्ता

    छिंदवाड़ा का नया कमीशन एजेंट एपीडी आरके गुप्ता


    भोपाल,19 नवंबर(प्रेस सूचना केन्द्र)। छिंदवाड़ा मॉडल की शान बघारकर मुख्यमंत्री बने कमलनाथ ने सत्ता संभालते ही छिंदवाड़ा में लगभग तीन हजार करोड़ के प्रोजेक्ट मंजूर कर दिए हैं। राज्य सरकार का खजाना खाली होने का शोर मचाकर वे प्रदेश को गुमराह कर रहे हैं और अपने चुनाव क्षेत्र में प्रदेश के संसाधन झोंकते चले जा रहे हैं। मुख्यमंत्री के इस अभियान की आड़ में अपना उल्लू सीधा करने वाले पीआईयू विभाग के एपीडी रमाकांत गुप्ता ने ठेकेदारों का नया गिरोह खड़ा करना शुरु कर दिया है। सबसे ज्यादा चंदा देकर वे सरकार के नीति नियंताओं के लोकप्रिय बने हुए हैं और कमाई के साथ साथ रिटायरमेंट के बाद अपनी पुर्ननियुक्ति की भूमिका भी बनाते जा रहे हैं।

    कमलनाथ के अंधा बांटे रेवड़ी बार बार खुद को दे वाले अंदाज का फायदा उठाने वाले पीआईयू विभाग के एपीडी रमाकांत गुप्ता के रवैये से खासा असंतोष पनप रहा है लेकिन वे पूरी बेशर्मी से अपना भविष्य सुरक्षित करने में जुटे हुए हैं। गुप्ता के रवैये से न केवल छिंदवाड़ा बल्कि पूरे जबलपुर संभाग के अन्य विकास कार्य ठप हो गए हैं। जिन प्रोजेक्टों की समय सीमा पूरी हो चुकी है और बावजूद वे अधूरे हैं उनकी समय सीमा बढ़ाना एपीडी के अधिकार क्षेत्र में ही रहता है। मूल ठेके से जुड़े सप्लीमेंट्री सेक्शन की मंजूरी, स्टीमेट में सुधार, और लैब अप्रूवल जैसे कार्य भी एपीडी ही संपन्न कराते हैं। जाहिर है कि इन सभी कार्यों के लिए रमाकांत गुप्ता के दफ्तर में ठेकेदारों को मोटी रिश्वत देनी पड़ रही है। उगाही के इस तंत्र से जुड़े उनके करीबियों का कहना है कि इसमें माननीय मुख्यमंत्री जी के दफ्तर का खर्च भी शामिल है।

    अपने पूरे सर्विसकाल में श्री गुप्ता ने ठेकों की परिपाटियों को अपनी परिभाषा की कसौटी पर कसा है। जब वे मुख्य अभियंता थे तब भी उन्होंने ठेकेदारों के कमीशन में से राजनेताओं का हिस्सा बढ़ाया था। यही वजह है कि उनके प्रमोशन धड़ाधड़ होते चले गए और अब वे अपने रिटायरमेंट के करीब आते आते सेवा वृद्धि की रणनीति पर तेजी से काम कर रहे हैं। उनके इस रवैये से ठेकेदारों पर अतिरिक्त बोझ पड़ रहा है और शर्तें पूरी न करने पर उन्हें अपने काम से भी हाथ धोना पड़ रहा है।

    गौरतलब है कि छिंदवाड़ा के अधिकतर निर्माण कार्य ईपीसी पद्धति से कराए जा रहे हैं। जिनमें ज्यादातर ठेकेदार दिल्ली के ही हैं और वे नक्शा बनाने से लेकर संधारण और निर्माण के सभी कार्यों का ठेका ले रहे हैं। इस पूरी प्रक्रिया में ठेकों की लागत अनावश्यक रूप से बढ़ाई जा रही है। कई ठेकेदारों का आतंक इतना ज्यादा है कि विभाग के अफसर भी उनकी बात काटने में हिचकते हैं। बताते हैं कि आरके गुप्ता का मार्गदर्शन पाकर वे ठेकेदार गुंडागर्दी पर उतारू हो रहे हैं।

    छिंदवाड़ा माडल के नाम पर लूट का आलम ये है कि भोपाल का हमीदिया अस्पताल जहां लगभग छह सौ करोड़ रुपए में बन रहा है वहीं छिंदवाड़ा के सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल की लागत 1600 करोड़ बताई गई थी। बाद में सरकार में बैठे अफसरों ने इसे घटाने का दबाव बनाया तो लागत 1100 करोड़ अनुमानित की गई। इस प्रक्रिया में आरके गुप्ता ने आंख मूंद ली और प्रदेश के खजाने से लगभग दोगुनी राशि व्यय किए जाने का राज मार्ग खोल दिया। पीआईयू के सर्वेसर्वा विजय वर्मा इस प्रक्रिया से पूरी तरह वाकिफ हैं लेकिन वे भी इसी तरह के हथकंडे अपनाते हुए अपना कार्यकाल तीन बार बढ़वा चुके हैं। ठेके की लागत घटाने के साथ साथ इस अस्पताल के लिए दुबारा टेंडर बुलाने पड़े थे, जिससे लागत भी बढ़ी और प्रोजेक्ट की समयसीमा भी बढ़ गई।

    श्री गुप्ता जब पीडब्लयूडी के मुख्य अभियंता थे तब उन्होंने सड़कों के 200 करोड़ रुपए के कार्य को भी कई महीनों तक लटकाया था। ये निर्माण न्यू डेवलपमेंट बैंक से प्राप्त कर्ज से किया जाना था। गुप्ता की शर्तें पूरी नहीं होने के कारण उन्होंने इस प्रोजेक्ट को महीनों तक तकनीकी मंजूरी नहीं दी। जब विभाग में नए अभियंता की नियुक्ति हुए तब जाकर सड़कों के लिए तकनीकी मंजूरी दी जा सकी।इस तरह प्रदेश के संसाधनों से खिलवाड़ करने वालों के लिए गुप्ता एक सफल सरमाएदार बन गए हैं।

  • टेंडर होने तक पंचायतों की रेत मंडी जारी रहेगी

    टेंडर होने तक पंचायतों की रेत मंडी जारी रहेगी

    भोपाल,11 अक्टूबर(प्रेस सूचना केन्द्र)।खनिज साधन विभाग ने प्रदेश में रेत नियम-2019 के क्रियान्वयन की प्रक्रिया 43 जिलों में समूहवार शुरू की है। रेत खदानों की शुरू की गई निविदा प्रक्रिया की अंतिम तिथि 8 नवम्बर, 2019 निर्धारित की गई है। निविदाओं के बाद सफल उच्चतम बोली के निविदाकार को अपने जिले में रेत खदानों के संचालन की जिम्मेदारी दी जायेगी।तब तक रेत की सप्लाई पंचायतों से ही जारी रहेगी।

    राज्य शासन ने नई नीति के अनुसार जिले में रेत खदानों के संचालन के लिये सभी वैधानिक अनुमतियाँ प्राप्त करने में लगने वाले समय को देखते हुए निजी भूमि पर उपलब्ध रेत खदानों और ग्राम पंचायतों को हस्तांतरित रेत खदानों को पूर्व की भाँति निरंतर संचालित रखे जाने का निर्णय लिया है। जिन निजी भूमि एवं ग्राम पंचायतों की रेत खदानों को मानसून अवधि में प्रतिबंध लगने के पूर्व 30 जून, 2019 के पूर्व पर्यावरणीय स्वीकृति प्राप्त हो गई थी, ऐसी सभी खदानों को तत्काल संचालित करने के प्रस्ताव भेजने के निर्देश प्रमुख सचिव, खनिज साधन विभाग श्री नीरज मण्डलोई ने जिला कलेक्टर्स को दिये हैं।

    खनिज साधन मंत्री श्री प्रदीप जायसवाल ने बताया कि प्रदेश में नई नीति के अनुसार रेत खदानों की निविदा के लिये बड़ी संख्या में इच्छुक निविदाकार तैयारी कर रहे हैं। नई नीति से प्रदेश को रेत से 464 करोड़ रुपये के आरक्षित मूल्य से अधिक राजस्व प्राप्त होने की संभावना है। उन्होंने बताया कि प्रदेश में जन-सामान्य को रेत प्राप्त करने में दिक्कत न हो, इसे ध्यान में रखते हुए पर्यावरणीय स्वीकृति प्राप्त निजी भूमि की रेत खदानों और ग्राम पंचायतों को हस्तांतरित रेत खदानों को चालू रखे जाने का निर्णय लिया गया है।

  • मंहगे बांस सस्ते में बेचने के लिए बरेजों को आड़ बनाया

    मंहगे बांस सस्ते में बेचने के लिए बरेजों को आड़ बनाया

    पान बरेजों के लिए निस्तार दर पर बांस मुहैया कराए जाएंगे

    मंत्रि-परिषद के निर्णय

    भोपाल,5 अक्टूबर(प्रेस सूचना केन्द्र)। मुख्यमंत्री कमल नाथ की अध्यक्षता में आज मंत्रालय में हुई मंत्रि-परिषद की बैठक में सामाजिक सुरक्षा पेंशन भुगतान के लिए जिलों को 550 करोड़ 2 लाख रूपये की राशि स्वीकृत करने का निर्णय लिया गया। यह राशि राज्य स्तरीय निराश्रित निधि खाते से मासिक आवश्यकतानुसार आहरित कर सामाजिक सुरक्षा पेंशन का भुगतान किया जायेगा। आईटीसी के अगरबत्ती उद्योग को सरकारी जंगलों का बांस सस्ते भावों पर मुहैया कराने के लिए कमलनाथ सरकार ने पान बरेजों के लिए निस्तार दर पर बांस मुहैया कराने का फैसला लिया है। सूत्र बताते हैं कि पान बरेजों के नाम पर खरीदा जाने वाला बांस सीधे अगरबत्ती उद्योग को मुहैया कराए जाने की तैयारी की जा रही है।

    मंत्रि-परिषद ने प्रदेश में होटल, रिसॉर्ट और हेरिटेज होटल की स्थापना के लिए ब्रॉण्ड्स को आकर्षित और प्रोत्साहित करने के लिए सतत् अनुदान उपलब्ध कराने की ब्रॉण्डेड होटल प्रोत्साहन नीति-2019 का अनुमोदन किया। ब्रॉण्ड्स को प्रदेश में स्थापित होने वाली परियोजनाओं की संभावनाओं को देखते हुए ब्रॉण्ड हॉटल्स, ब्रॉण्ड रिसॉर्टस और ब्रॉण्ड हेरिटेज हॉटल्स श्रेणी में वर्गीकृत किया गया है।

    मध्यप्रदेश देश का पहला राज्य है, जिसने ब्राण्ड हॉटल्स की स्थापना पर इस तरह की नीति बनाई है। अनुमान है कि इस नीति से प्रदेश में अगले 5 वर्षों में ब्राण्ड हॉटल्स में कम से कम एक हजार लग्जरी और विश्व-स्तरीय नवीन कक्ष स्थापित हो सकेंगे। न्यूनतम 100 करोड़ रुपये अथवा उससे अधिक के निवेश से नवीन ब्राण्ड होटल की स्थापना पर उनके द्वारा होटल कक्षों के किराये से प्राप्त वार्षिक टर्न ओवर पर नीति अंतर्गत 3 वर्ष तक 20 से 30 प्रतिशत तक अनुदान दिया जायेगा। अनुदान की अधिकतम सीमा 3 करोड़ रुपये होगी। इसी प्रकार, ब्रॉण्ड रिसॉर्ट एवं ब्रॉण्ड हेरिटेज होटल को 3 वर्षों तक प्रतिवर्ष 2 करोड़ रुपये तक संचालन अनुदान दिया जायेगा। ब्रॉण्ड होटल को दिये जाने वाला यह अनुदान उन्हें नीति के तहत प्राप्त होने वाले पूँजी अनुदान के अतिरिक्त होगा।

    प्रदेश सरकार के पर्यटन विकास के लक्ष्यों की पूर्ति के लिए मंत्रि-परिषद ने पर्यटन नीति-2016 को सक्षम, व्यवहारिक, व्यापक और पूंजी निवेश के अनुकूल बनाने के लिए प्रावधानित संशोधन को अनुमोदन प्रदान कर दिया। बैठक में मार्ग सुविधा केन्द्रों (वे-साईड एमेनिटीज) की स्थापना एवं संचालन की नीति 2016 में संशोधन का अनुमोदन किया गया। इसके अंतर्गत मध्यप्रदेश पर्यटन विकास निगम द्वारा पूरे प्रदेश में रोड नेटवर्क एवं यात्री सुविधाओं की आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए मार्ग सुविधा केन्द्रों की स्थापना को प्रोत्साहित किया जाएगा। साथ ही, संभावित स्थलों और तैयार ब्राउन-फील्ड मार्ग सुविधा केन्द्रों का प्रचार-प्रसार किया जाएगा, ताकि निवेश का वातावरण तैयार हो।

    मंत्रि-परिषद ने आवास एवं पर्यावास नीति 2007 की कंडिका क्रमांक 5.4 को विलोपित करने का निर्णय लिया। इसमें निवेश के क्षेत्रों में भूखण्डीय विकास के लिए भूमि अथवा भू-खण्ड का क्षेत्रफल दो हेक्टेयर रखे जाने का प्रावधान था। इस कारण न्यूनतम दो हेक्टेयर भूमि की आवश्यकता निर्मित होने से छोटी भूमि अनुपयोगी रह जाती थी। ऐसे क्षेत्रों में अवैध कॉलोनियाँ विकसित होने की संभावनाएँ बढ़ जाने से विकास की निरंतरता भी बाधित हो रही थी।

    रिसॉर्ट बार लायसेंस का सरलीकरण

    मंत्रि-परिषद ने राज्य के वन क्षेत्रों में पर्यटन को प्रोत्साहन देने के लिए रिसॉर्ट बार लायसेंस का सरलीकरण करने का निर्णय लिया। इसमें राष्ट्रीय उद्यानों के अतिरिक्त वन अभयारण्य के पास भी रिसॉर्ट बार लायसेंस की सुविधा दी जाएगी। रिसॉर्ट बार राष्ट्रीय उद्यान/अभयारण्यों की सीमा से 20 किलोमीटर की सीमा में स्थित होना चाहिए। रिसॉर्ट में दस कमरों के स्थान पर न्यूनतम पाँच कमरों का प्रावधान किया गया। रिसॉर्ट बार के लिए न्यूनतम क्षेत्र 2 हेक्टेयर को घटाकर एक एकड़ करने का निर्णय लिया गया। वन्य क्षेत्रों में स्थित रिसॉर्ट बार के लिए वार्षिक लायसेंस फीस पाँच कमरे के लिए 50 हजार, 6 से 10 कमरे के लिए एक लाख और 10 से अधिक कमरे वाले रिसॉर्ट के लिए डेढ़ लाख रूपये करने का निर्णय लिया गया है। सभी बार लायसेंसों की स्वीकृति और नवीनीकरण के प्रकरणों में अग्नि सुरक्षा संबंधी व्यवस्था के संबंध में निर्धारित प्रमाण-पत्र के स्थान पर जिला आबकारी अधिकारी तथा संबंधित रिसॉर्ट बार अनुज्ञप्तिधारी के संयुक्त हस्ताक्षर से रिपोर्ट ली जाएगी।

    मंत्रि-परिषद ने पान किसानों/पान बरेजा परिवारों को निस्तार दर पर बाँस उपलब्ध कराने का निर्णय लिया। वन विभाग द्वारा जारी आदेश को 10 मार्च 2019 से ही पान बरेजा परिवारों की निस्तार नीति में शामिल करते हुए कार्योत्तर अनुमोदन प्रदान किया गया। संशोधित निस्तार नीति वर्ष-2019 का भी अनुमोदन किया गया।

    मंत्रि-परिषद ने भारतीय पुलिस सेवा (संवर्ग) नियम के अनुसार 31 अक्टूबर,2019 तक की अवधि के लिए पुलिस महानिदेशक ग्रेड में एक पद निर्मित करने का निर्णय लिया। इसी के साथ, संविदा आधार पर निरंतर किए गए कोर्ट मैनेजर का कार्यकाल 31 मार्च 2020 तक अथवा नियमित कोर्ट मैनेजर के पदों पर भर्ती होने तक, जो भी पहले हो, इस शर्त के साथ अंतिम बार निरंतर करने का निर्णय लिया गया। मंत्रि-परिषद ने मुंबई स्थित मध्यालोक भवन का संचालन एवं संधारण मध्यप्रदेश राज्य पर्यटन विकास निगम को सौंपने का भी निर्णय लिया।

  • कमलनाथ सरकार को मैट्रो के कर्ज का सहारा

    कमलनाथ सरकार को मैट्रो के कर्ज का सहारा

    भोपाल,26 सितंबर(प्रेस सूचना केन्द्र)। घनघोर आर्थिक कुप्रबंधन से घिरी कमलनाथ सरकार ने कामकाज चलाने के लिए तीन शहरों में मैट्रो रेल परियोजना के नाम पर कर्ज बटोरने का अभियान चलाया है। इसके तहत आज भोपाल में सात हजार करोड़ रुपए के मैट्रो के पहले चरण का शिलान्यास किया गया। ये आकलन अभी आनन फानन में तैयार किया गया है वास्तविक लागत इससे कई गुना अधिक आने की संभावना व्यक्त की जा रही है।

    छिंदवाड़ा मॉडल की औद्योगिक कलाकारी वाली कमलनाथ की नौ महीने पुरानी बैसाखियों पर टिकी सरकार जिस तरह छीनाझपटी और भ्रष्टाचार के रिकार्ड बना रही है उसके चलते प्रदेश की तमाम आर्थिक व्यवस्थाएं गड़बड़ा गईं हैं। कमलनाथ जनता को बहलाने के लिए रोज रोज कहते फिरते हैं कि शिवराज सिंह चौहान सरकार खजाना खाली छोड़कर गई है। जबकि हकीकत ये है कि सरकार को जो बयालीस सौ करोड़ रुपए मासिक आय होती थी वो अब तेजी से गिरती जा रही है। सरकार के तमाम प्रस्ताव केन्द्र ने मैचिंग ग्रांट तक न चुका पाने के कारण वापस लौटा दिए हैं।

    कमलनाथ का जादू टूटने लगा है और वे जिस औद्योगिक जादूगरी का हवाला देकर सत्ता में आए थे उसकी हालत इतनी खस्ता है कि आज जब भोपाल में मैट्रो का उद्घाटन करते हुए उन्होंने इसे राजा भोज मैट्रो का नाम दिया तो कांग्रेस के ही एक विधायक आरिफ मसूद ने उनकी बात काट दी। उन्होंने कहा कि मैट्रो का नाम भोपाल मैट्रो ही रहने दिया जाए। मंच से कमलनाथ की बात काटे जाने से कांग्रेस के तमाम नेता और पदाधिकारी खुद को असहाय महसूस करते रहे।

    दरअसल सार्वजनिक परिवहन को बढ़ावा देने की भारत सरकार की नीति के चलते भोपाल में भी रेल शुरु करने की योजना बनाई गई थी। पूरे देश में राजीव गांधी की पहल पर जिस वैयक्तिक परिवहन को बढ़ावा दिया गया था वह बुरी तरह असफल साबित हुआ है। देश को आयातित ईंधन आधारित परिवहन के लिए मंहगी कीमत चुकानी पड़ी और हर आम आदमी को अपनी आय का बड़ा हिस्सा वाहन खरीदने पर खर्च करना पड़ा था। सड़कों पर वाहनों की भीड़ इतनी अधिक बढ़ गई कि सडकों को चौड़ा करने के लिए भी सरकारों को मोटा कर्ज लेना पड़ा इसके बावजूद सार्वजनिक परिवहन की हालत जस की तस रही।

    कमलनाथ ने कुर्सी संभालते वक्त कहा था कि भोपाल को मैट्रो की जरूरत नहीं है यहां मोनो रेल चलाई जानी चाहिए। इसके बावजूद अब वे ही इंदौर, जबलपुर और भोपाल में भी मेट्रो चलाने की वकालत कर रहे हैं। इसकी वजह मैट्रो पर लिया जाने वाला वह मोटा कर्ज है जिसका उपयोग वे प्रदेश का खर्च चलाने में करने की तैयारी कर रहे हैं। भोपाल में सात हजार करोड़ रुपए से जो 27.87 किलोमीटर की मैट्रो बिछाई जानी है उसका महज 1.79 किलोमीटर हिस्सा जमीन के नीचे होगा। बाकी पूरी मैट्रो पिलरों पर ही चलेगी। इसके दो कारीडोर बनेंगे जिसमें से एक करोंद सर्कल से एम्स तक 14.94 किलोमीटर और दूसरा भदभदा चौराहा से रत्नागिरि चौराहा तक 12.88 किलोमीटर का होगा। इसकी प्राथमिक लागत 6941 करोड़ 40 लाख होगी। प्रोजेक्ट में एलीवेटेड सेक्शन 26.08 किलोमीटर का होगा। इसमें कुल 28 स्टेशन बनेंगे। अंडर ग्राउण्ड सेक्शन 1.79 किलोमीटर का होगा, जिसमें 2 स्टेशन बनेंगे। पहला भाग दिसम्बर 2022 तक पूरा करने का लक्ष्य है।

    गौरतलब है कि दिल्ली प्रदेश में मैट्रो रेल 327 किलोमीटर चलती है।यह रेल नेटवर्क दिल्ली के एक करोड़ अस्सी लाख लोगों के लिए बनाया गया है जिसमें हर दिन सोलह लाख लोग सफर करते हैं। इसके बावजूद मैट्रो घाटे में चलती है। जबकि भोपाल की आबादी महज 23 लाख है और यहां 27 किलोमीटर में मैट्रो बिछाने की तैयारी की गई है। जिस तरह बीआरटीएस रोड़ असफल साबित हुई और शहर की परिवहन जरूरतें पूरी नहीं कर पाई उसी तरह मैट्रो भी फिलहाल औचित्यहीन है। इसके बावजूद कमलनाथ सरकार ने आनन फानन में मैट्रो केवल इसलिए प्रारंभ की ताकि वो इसके नाम पर कर्ज ले सके और राज्य की जरूरतें पूरी कर सके। कांग्रेस के लोग इसे कमलनाथ की औद्योगिक सूझबूझ बता रहे हैं जबकि दिन ब दिन प्रदेश के लोगों की बैचेनी बढ़ती जा रही है।

  • हीरा निकालने की नीति अलग हो बोले कमलनाथ

    हीरा निकालने की नीति अलग हो बोले कमलनाथ

    भोपाल,5 सितंबर(प्रेस सूचना केन्द्र)। मुख्यमंत्री कमल नाथ ने आज फिर हीरा खदान की नीलामी को लेकर केन्द्र सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि हीरा खुदाई के लिए अलग नीति बनाई जानी चाहिए। कोयला खुदाई के लिए बनाई गई नीति के आधार पर ही हीरा और मैंगनीज की खुदाई कैसे हो सकती है।

    कमलनाथ का कहना है कि खनिज उत्पादन भविष्य की अर्थ-व्यवस्था का आधार है। मध्यप्रदेश में कीमती खनिजों का भंडार है, जिसका उपयोग राज्य के विकास के लिए जितनी जल्दी करें, उतना जनता के हित में होगा। मुख्यमंत्री ने मंत्रालय में भारत सरकार की मिनी रत्न कंपनी मिनरल एक्सप्लोरेशन कार्पोरेशन लिमिटेड के वरिष्ठ अधिकारियों से चर्चा करते हुए कहा कि वे मध्यप्रदेश को अपनी प्राथमिकता का प्रदेश बनायें। कोयला और चूना पत्थर के अलावा प्रदेश में कई बहुमूल्य खनिज हैं, जो भविष्य की अर्थ-व्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। श्री कमल नाथ ने अधिकारियों को निर्देश दिये कि कीमती खनिजों के खनन की समयबद्ध योजना बनायें।

    मुख्यमंत्री कमल नाथ ने कहा कि भारतीय भू-वैज्ञानिक सर्वेक्षण के पास उपलब्ध खनन और भण्डारण की बहुमूल्य जानकारी का उपयोग कर खनन का काम तत्काल शुरू करने की तैयारी करें। एम.ई.सी.एल. के पास इसका उपयोग करने की क्षमता और विशेषज्ञता है। खनिजों के उत्खनन की समय-सीमा निर्धारित कर योजना बनायें। राज्य शासन पूरा सहयोग करेगा। मैगनीज, बाक्साइट, ग्रेफाईट, आयरन ओर एवं रेडियम, वेनेडियम जैसे मूल्यवान खनिजों के खनन पर ध्यान दें, जिनके भण्डारण की जानकारी उपलब्ध है। मुख्यमंत्री ने कहा कि बुंदेलखण्ड, महाकौशल और प्रदेश के पश्चिम भाग में इन खनिजों के कीमती भंडार उपलब्ध हैं। प्रत्येक खनिज की अलग नीति बनाकर काम शुरू किया जायेगा। उन्होंने कहा कि कोयला खनन की नीति डायमंड अथवा मैगनीज पर लागू नहीं हो सकती।

    बैठक में खनिज मंत्री प्रदीप जायसवाल, मुख्य सचिव एस.आर. मोहन्ती, प्रमुख सचिव मुख्यमंत्री अशोक वर्णवाल, प्रमुख सचिव उद्योग राजेश राजौरा, प्रमुख सचिव खनिज नीरज मंडलोई और एम.ई.सी.एल. के अध्यक्ष तथा मुख्य महाप्रबंधक डा. रंजीत रथ उपस्थित थे।

  • रेत की रायल्टी चोरी पर कांग्रेस में मचा कोहराम

    रेत की रायल्टी चोरी पर कांग्रेस में मचा कोहराम

    भोपाल,28 अगस्त(प्रेस सूचना केन्द्र)। भ्रष्टाचार और अराजकता के चलते राज्य की मासिक आय में गिरावट ने कांग्रेस सरकार में सिरफुटौव्वल के हालात निर्मित कर दिए हैं। रेत की रायल्टी चोरी के मसले पर सामान्य प्रशासन मंत्री डाक्टर गोविंद सिंह ने जैसे ही सवाल खड़े किए पार्टी के भीतर से उनके खिलाफ बयानबाजी शुरु हो गई है। हालात पर काबू पाने के लिए मुख्यमंत्री कमलनाथ मंत्रियों को संभलकर बोलने की नसीहत दी है।

    कांग्रेस की अंतर्कलह तब उजागर हुई जब लहार से कांग्रेस के विधायक और सामान्य प्रशासन मंत्री डाक्टर गोविंद सिंह ने रेत के अवैध उत्खनन के लिए जनता से माफी मांगी। उन्होंने कहा कि मैं अपने समर्थकों के साथ भाजपा शासनकाल में रेत के अवैध उत्खनन के खिलाफ लड़ाई लड़ता रहा हूं। सत्ता में आने के बाद कांग्रेस के नेतागण जिस तरह से रेत का अवैध उत्खनन करके मंहगी रेत बेच रहे हैं इसके कारण मैं जनता से माफी मांगता हूं।उन्होंने कहा कि रेत माफिया के हौसले इतने बुलंद हैं कि वे मेरे जैसे वरिष्ठ मंत्री तक की परवाह नहीं करते हैं।

    खनिज मंत्री प्रदीप जायसवाल ने कहा कि डाक्टर गोविंद सिंह वरिष्ठ राजनेता हैं। वे दतिया के प्रभारी मंत्री भी हैं वे अपने क्षेत्र में रेत का अवैध उत्खनन रोकने के लिए स्वतंत्र हैं। प्रशासन को उनके निर्देशों का पालन अवश्य करना पड़ेगा।

    जनसंपर्क और विधि विधायी कार्य मंत्री पीसी शर्मा ने कहा कि इस बार नदियों में इतनी अधिक रेत आई है कि पानी उतरते ही रेत का भंडार सामने आ जाएगा। रेत का ये भंडार जनता की आवश्यकता से बहुत अधिक है। आने वाले समय में रेत के खरीददार तक नहीं मिलेंगे। इस मुद्दे पर विवाद की कोई जरूरत नहीं है।

    पीडब्ल्यूडी मंत्री सज्जन सिंह वर्मा ने कहा कि डाक्टर गोविंद सिंह वरिष्ठ मंत्री हैं। ऐसा हो ही नहीं सकता कि अधिकारी उनकी बात नहीं सुनें। यदि मेरे विभाग में ये नौबत आ जाए कि अधिकारी मेरी बात नहीं सुनें तो मैं तो इस्तीफा दे दूंगा।

    कंप्यूटर बाबा ने कहा कि रेत के अवैध उत्खनन पर कमलनाथ सरकार ने सख्ती से रोक लगाई है। पिछले दिनों चंबल और सिंध नदी में जैसी बाढ़ आई है उसके चलते रेत का उत्खनन संभव नहीं है। सरकार रेत माफिया के विरुद्ध सख्त कार्रवाई करेगी और किसी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा।

    भाजपा प्रदेश अध्यक्ष राकेश सिंह ने कहा कि पैसों की बंदरबांट के चलते आज कांग्रेस की अंतर्कलह सामने आ गई है। सरकार ने चंदा लेकर ट्रांसफर पोस्टिंग की हैं। जो लोग भारी रिश्वत देकर मैदानी पोस्टिंग लेकर पहुंचे हैं उन्हें जनता के प्रति अपने उत्तरदायित्व की चिंता नहीं है। वे तो केवल अपनी लागत निकालने के लिए उगाही करने में जुटे हुए हैं।

    नेता प्रतिपक्ष गोपाल भार्गव ने मुख्यमंत्री कमलनाथ को पत्र लिखकर अवैध उत्खनन पर चिंता व्यक्त की है। वहीं कैलाश विजयवर्गीय ने कहा है कि डाक्टर गोविंद सिंह कह रहे हैं कि चंदा उगाही का खेल ऊपर से नीचे तक चल रहा है। उन्हें यह भी बताना चाहिए कि ऊपर का आशय श्यामला हिल्स से है या दस जनपथ से।

    राज्य की घटती आय को देखते हुए डाक्टर गोविंद सिंह की चिंता वाजिब है। निवृत्तमान शिवराज सिंह चौहान सरकार ने रेत उत्खनन की अनुमति देने का अधिकार पंचायतों को सौंप दिया था। इसके पहले 18 जिलों की 430 खदानों से रेत का उत्खनन खनिज विकास निगम की निगरानी में होता था शेष जिलों में ये काम खनिज विभाग करता था। तब तमाम शिकायतों के बावजूद प्रदेश को लगभग 700 करोड़ रुपयों की आय होती थी। पंचायतों को अधिकार दिए जाने के बाद रेत उत्खनन से होने वाली आय मात्र डेढ़ सौ करोड़ रुपए रह गई है।

    राज्य सरकार बारिश के सीजन में रेत उत्खनन पर रोक लगाती है। इस बार भी एक जुलाई से 30 सितंबर तक ये रोक प्रभावी है। इसके बावजूद रेत का उत्खनन और परिवहन जारी है। रेत माफिया पुराने परमिटों पर एकत्रित रेत को एक गोदाम से उठाकर दूसरे स्थान पर ले जाने का तर्क देकर रेत का अवैध कारोबार कर रहा है।

    डाक्टर गोविंद सिंह जिन भिंड, मुरैना, ग्वालियर और दतिया जिलों में रेत का अवैध उत्खनन होने की शिकायत कर रहे हैं उन जिलों में खनिज निगम के पास केवल चार खदानें हैं जबकि अन्य खदानें पंचायतों को समर्पित कर दी गईं हैं। पूरे प्रदेश में खनिज विकास निगम 48 खदानों से रेत का उत्खनन कर रहा है। बारिश की वजह से लगी रोक के चलते उन खदानों पर उत्खनन बंद है लेकिन आसपास की अन्य खदानें जिनकी नीलामी नहीं की जाती है उनसे रेत का अवैध उत्खनन हो रहा है। जब रेत उत्खनन के अधिकार खनिज विकास निगम के पास थे तब इन चार जिलों से बीस लाख घनमीटर रेत का उत्खनन किया जाता था। पंचायतों को अधिकार देने के बाद ये उत्खनन क्षमता मात्र आठ लाख घनमीटर बची है।

    रेत उत्खनन का अधिकार पंचायतों को दिए जाने के बाद दस्तावेजों पर रेत का उत्खनन भी घटा है और राज्य को होने वाली आय में भी भारी गिरावट आई है। इसके बावजूद आम नागरिकों को पहले से मंहगी रेत खरीदना पड़ रही है। वर्ष 2018-19 में पंचायतों ने अब तक लगभग सवा सौ करोड़ रुपए की रेत रायल्टी जुटाई है जबकि खनिज विकास निगम और खनिज निगम मिलकर इतने ही कार्यकाल में पांच सौ करोड़ रुपए रेत की रायल्टी के रूप में जुटाते थे। शासन ने रेत के दाम 125 रुपए प्रति घनमीटर तय किए हैं। फार्मूले के मुताबिक इसमें से 50 रुपए कलेक्टर फंड में और 50 रुपए पंचायतों को दिए जाते हैं। इसमें से 25 रुपए खनिज विकास निगम को दिया जाता है। इतनी सस्ती रेत खरीदने के बावजूद बाजार में रेत के दाम डेढ़ हजार रुपए से लेकर साढ़े तीन हजार रुपए घनमीटर तक पहुंच गए हैं। खनिज निगम नीलामी में रेत की रायल्टी कई बार 900 रुपए प्रति घनमीटर तक हासिल करता था। इसके बावजूद रेत के दाम खुले बाजार में नियंत्रित रहते थे।

    नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल,सिया और प्रदूषण नियंत्रण प्राधिकरण जैसी संस्थाओं के दबाव के चलते शिवराज सिंह चौहान की सरकार ने पत्थर को पीसकर रेत बनाने जैसा काम शुरु किया था लेकिन अब प्रदेश की रेत की जरूरतें केवल नदियों से बहकर आने वाली रेत से ही पूरी हो रहीं हैं।

    खनिज मंत्री प्रदीप जायसवाल ने नई खनिज नीति बनाने की घोषणा की थी। इसके मुताबिक रेत की नीलामी के लिए ग्लोबल टेंडर जारी किए जाने की तैयारी की गई है। अभी तक सरकार का जो ढर्रा है उसे देखते हुए कहा जा सकता कि एक अक्टूबर से जब रेत उत्खनन पर पाबंदी हटेगी तब तक टेंडर की प्रक्रिया पूरी नहीं हो पाएगी। लगभग सभी स्थानों पर पुलिस की अवैध वसूली की शिकायतें सामने आ रहीं हैं। रेत उत्खनन से रायल्टी जमा कराने की जवाबदारी खनिज विभाग और खनिज विकास निगम की है जबकि रेत रायल्टी की चोरी पर लगाम लगाने की जवाबदारी पुलिस को सौंपी गई है। पुलिस के अधिकारी कर्मचारी ही रेत की चोरी करवाते हैं और अवैध उत्खनन से खजाने को क्षति पहुंचाते हैं। रेत की रायल्टी जमा कराना उनकी जवाबदारी भी नहीं है इसलिए वे संबंधित पुलिस थानों में पोस्टिंग के लिए मनचाही कीमत देने तैयार रहते हैं।

    डाक्टर गोविंद सिंह की चिंता को देखते हुए यदि राज्य सरकार रेत उत्खनन से रायल्टी जुटाने का नया ढांचा तैयार करे तभी प्रदेश का खजाना भरा जा सकता है। रेत की जरूरत आम जनता को है और वह इसके लिए मंहगी कीमत चुका रही है। मकान बनाने के लिए उसे कई स्तर पर शासन को कर चुकाना पड़ता है। इसके बावजूद उसे रेत की जरूरत के लिए माफिया के सामने नाक रगड़नी पड़ती है। जरूरत है कि सरकार रेत रायल्टी जुटाने के लिए कारगर व्यवस्था बनाए और जनता को सस्ती रेत मुहैया कराए।

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  • अंधा करने वाले डॉक्टर दंडित होंगेःसिलावट

    अंधा करने वाले डॉक्टर दंडित होंगेःसिलावट

    आंखों की रोशनी खोने वाले दस मरीजों का इलाज शंकर नेत्रालय चेन्नई के डॉक्टर करेंगे

    भोपाल,17 अगस्त(प्रेस सूचना केन्द्र)। लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री तुलसीराम सिलावट ने इंदौर के एक निजी अस्पताल में 10 मरीजों के आँखों के ऑपरेशन के बाद उनकी आँखों की रोशनी प्रभावित होने की घटना को अमानवीय बताया है। उन्होंने कहा कि प्रभावित मरीजों के इलाज के लिये राज्य सरकार ने देश के ख्याति प्राप्त शंकर नेत्रालय के डॉ. राजू रमन को कॉल किया है। डॉ. रमन रविवार, 18 अगस्त को सुबह इंदौर पहुँच रहे हैं। मंत्री श्री सिलावट ने बताया कि प्रभावित मरीजों को इंदौर के चोइथराम नेत्रालय में शिफ्ट कर दिया गया है।

    मंत्री श्री सिलावट ने बताया कि प्रभावित मरीजों की आँखों का पूरा इलाज राज्य सरकार द्वारा नि:शुल्क कराया जायेगा। उन्होंने कहा कि घटना की जाँच के लिये उच्च-स्तरीय इन्क्वायरी कमेटी गठित की गई है। कमेटी ने जाँच का काम शुरू कर दिया है। कमेटी को यथाशीघ्र जाँच रिपोर्ट प्रस्तुत करने के लिये कहा गया है। श्री सिलावट ने बताया कि कमेटी की जाँच रिपोर्ट के आधार पर दोषी चिकित्सकों एवं अस्पताल के खिलाफ कड़ी कार्यवाही की जायेगी।

  • वैश्विक खेती को अपनाए भारत बोले कमलनाथ

    वैश्विक खेती को अपनाए भारत बोले कमलनाथ

    भोपाल,16 अगस्त(प्रेस सूचना केन्द्र)। मुख्यमंत्री कमल नाथ ने केन्द्र सरकार से आग्रह किया है कि वह जेनेटिकली मोडीफाइड बीज के संबंध में नीतिगत निर्णय ले, जिससे भारत ऐसी टेक्नालाजी अपनाने में पीछे नहीं रह जाये, जो पूरे विश्व को बदल रही है। इसके बिना भारत का बहुत बड़ा नुकसान हो जायेगा। उन्होंने अत्यावश्यक वस्तु अधिनियम में सुधार लाने की भी वकालत की, जिससे किसानों के हित में अप्रत्याशित परिस्थितियों से निपटने में मदद मिल सके।

      मुख्यमंत्री कमल नाथ ने  नीति आयोग की भारत के कृषि परिदृश्य के कायाकल्प के लिये गठित मुख्यमंत्रियों की उच्चाधिकार समिति की आज मुम्बई में हुई बैठक में अपने सुझाव दिये। उल्लेखनीय है कि मुख्यमंत्री श्री कमल नाथ उच्चाधिकार समिति के सदस्य हैं।
    
        मुख्यमंत्री ने कहा कि कृषि न सिर्फ आर्थिक बल्कि सामाजिक मुद्दा भी है। उन्होंने कहा कि किसानों की सोच में बदलाव आया है। धोती पहनने वाले किसान और आज के पेंट-जींस पहनने वाले किसान के नजरिये में फर्क है। मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत के किसान अमेरिका, यूरोपियन यूनियन की व्यवस्थाओं से मुकाबला नहीं कर सकते। उन्होंने कहा कि विश्व व्यापार संगठन से हुए समझौतों के चलते किसी भी प्रकार का कृषि आयात किसानों के हित में नहीं है। उन्होंने किसानों के हित में जैविक खाद्यान्न के संकुलों की पहचान कर इसकी मार्केटिंग करने की जरूरत बताई।  श्री नाथ ने सुझाव दिया कि खाद्य प्रसंस्करण की संभावनाओं वाले क्षेत्रों की पहचान कर उन्हें भरपूर सहयोग देने की आवश्यकता है।        
    
        श्री कमल नाथ ने कहा कि किसानों को कीमतों का आकलन कर के कृषि आदान का ब्रांड चुनने की आजादी होना चाहिए। उन्होंने कहा कि किसानों, किसान उत्पादन संगठनों, व्यापारिक सोसायटी और बाजार के बीच परस्पर सामंजस्य और तालमेल बैठाना होगा। उन्होंने कहा कि उपार्जन मॉडल को भी सुधारने की जरूरत है। श्री कमल नाथ ने खेती में यंत्रीकरण को बढ़ाने पर जोर देते हुए कहा कि कृषि क्षेत्र में जीआईएस/जीपीएस जैसी आधुनिक तकनीकी के उपयोग से भी लाभ होगा।
    
       मुख्यमंत्री कमल नाथ ने बैठक में मध्यप्रदेश के कृषि क्षेत्र में किए गए सुधारों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि किसानों के उत्पाद संगठनों को लाइसेंस और संचालन संबंधी जरूरतों को शिथिल किया गया है ताकि उन्हें बेहतर दाम मिलें। सिंगल लाइसेंस और मंडियों के बाहर भी खरीदी करने की अनुमति दी गई है। नीलामी के लिये इलेक्ट्रॉनिक प्लेटफार्म स्थापित करने का काम चल रहा है। 
  • कांग्रेस के वसूली अभियान ने मचाया बाजार में कोहराम

    कांग्रेस के वसूली अभियान ने मचाया बाजार में कोहराम

    भोपाल,(प्रेस सूचना केन्द्र)।औद्योगिक विकास की राह चलते मध्यप्रदेश में सत्ता बदलने के साथ साथ उद्योपतियों से संवाद का तरीका भी बदल गया है। भाजपा की शिवराज सिंह चौहान की सरकार जहां कर्ज आधारित अर्थव्यवस्था से उन्हें पैसा बनाने के अवसर उपलब्ध करा रही थी वहीं कमलनाथ की कांग्रेस सरकार ने उद्योपतियों की वसूली बैठक शुरु कर दी है। भाजपा को जो उद्योगपति स्वेच्छा से चंदा मुहैया करा रहे थे उन्हें कमलनाथ जी ने कार्पोरेट सोशल रिस्पांसिबिलिटी के छिंदवाड़ा माडल के नाम पर भारी भरकम जवाबदारियां थमा दीं हैं।हाल की मुंबई यात्रा में मुख्यमंत्री ने सामाजिक विकास के नाम पर उ्दयोपतियो को जो जवाबदारियां थमाई हैं उससे उद्योगपतियों के बीच कोहराम मच गया है।उद्योगपतियों ने व्यापारियों को दिए जाने वाले प्रोत्साहन फंड जब्त कर लिए हैं जिससे पूरे बाजार में भूचाल आ गया है।

    कांग्रेस का विकास माडल हमेशा से अमीरों को लूटकर गरीबों को बांटने के कबीलाई फार्मूले पर टिका रहा है। मुक्त बाजार व्यवस्था के पूंजीवादी माडल ने इस नीति को पूरी तरह धराशायी कर दिया था। कमलनाथ दुबारा उसी घिसे पिटे फार्मूले को लागू करने का प्रयास कर रहे हैं। पंद्रह साल के भाजपा शासनकाल में भले ही इस पुराने फार्मूले की विदाई न हो पाई हो लेकिन इंस्पेक्टर राज की चूलें जरूर हिल गईं थीं। यही वजह था कि राज्य का बजट भी बढ़ा और फलने फूलने के एवज में उद्योगपतियों ने भाजपा को भरपूर चंदा भी दिया। अब जबकि कमलनाथ की कांग्रेस को अपनी सरकार बचाने के लिए हर दिन मशक्कत करना पड़ रही है तब उनकी कांग्रेस खुलकर चंदा उगाही के मैदान में कूद पड़ी है।

    कांग्रेस की पोल तो केवल उद्योपतियों की उस सूची से ही खुल जाती है जिन्हें वो प्रदेश में औद्योगिक विकास के लिए आमंत्रित करने का दावा कर रही है। इनमें अंबानी, अडानी से लेकर महिंद्रा और हीरो जैसी कंपनियां प्रमुख हैं जिनका कारोबार मध्यप्रदेश में पहले से फैला हुआ है। राज्य मंत्रालय का भवन बनाने वाले शापोरजी पालोनजी समूह को ही इतनी बड़ी जवाबदारी थमाई गई है जिससे विधायकों को भी मालामाल कर दिया जाएगा। सूत्र बताते हैं कि कमलनाथ ने मुख्यमंत्री बनने के बाद उद्यमियों से साफ कह दिया है कि यदि उन्हें प्रदेश में अपना कारोबार करना है तो अपनी आय का पंद्रह फीसदी हिस्सा पार्टी के अघोषित फंड में देना होगा। इधर कांग्रेस और भाजपा के भाग निकलने को बेकरार विधायकों को आश्वासन दिया जा रहा है कि उनका भरपूर सम्मान किया जाएगा इसलिए वे सरकार गिराने के अभियान से दूर ही रहें।

    कमल नाथ ने मुंबई में रिलायंस ग्रुप के चेयरमेन मुकेश अंबानी, बिरला ग्रुप के कुमार मंगलम, टाटा ग्रुप के चंद्रशेखर, महिंद्रा एंड महिंद्रा ग्रुप के पवन गोयनका, टाटा पावर के प्रवीर सिन्हा, ग्रेसिम के दिलीप गौर, आर.पी.जी. ग्रुप के हर्ष गोयनका, एसीसी सीमेंट के दिलीप अखूरी, अहिल्या हेरीटेज होटल्स के यशवंत होलकर एवं नरसी मुंजी के अमरीश पटेल से वन-टू-वन चर्चा की इन सभी के कारोबार पहले से ही मध्यप्रदेश में संचालित हैं।

    कांफ्रेंस में बजाज फाइनेंस के एम.डी. संजीव बजाज, जुबिलेंट लाइफ एंड सांइसेस लिमिटेड के वाइस प्रेसीडेंट अमरदीप सिंह, महिंद्रा हॉलिडेज एण्‍ड रिसोर्ट इंडिया लिमि. के चेयरमेन अरुण नंदा, टाटा केपिटल लिमि. के हेड बिजनेस डेव्हलपमेंट कश्मीरा मेवावाला, थाइसनग्रुप-इण्डस्ट्रीज प्रा.लि. के सीईओ विवेक भाटिया, ट्यूबेक्स इंडिया लिमि. के चेयरमेन अजय सम्बरानी, एचडीएफसी बैंक के ग्रुप हेड राकेश सिंह, वेरेटिव एनर्जी लिमि. के एम.डी. सुनील खन्ना, कौंसुलेट जनरल ऑफ जापान के कौंसुलेट जनरल मिशियो हराडा, टाटा पॉवर लिमि. के एमडी प्रवीर सिन्हा, टाटा कंसलटेंसी लिमि. के वाइस प्रेसीटेंड तेज भाटिया, रिलायंस इण्डस्ट्रीज लिमि. के स्टॉफ चेयरमेन निलेश मोदी, रिलायंस इण्डस्ट्रीज लिमि. के बिजनेस यूनिट हेड संजय रॉय, हिन्दुजा के ग्रुप हेड कार्पोरेट आर. केनन, एसीसी सीमेंट के एमडी नीरज अखोरी, इण्डो-स्पेस के मैनेजिंग डायरेक्टर राहुल नायर, टाटा मोटर लिमि. नेशनल हेड सुशांत नायक, ग्रेसिम इण्डस्ट्रीज लि. के ज्वाइंट डायरेक्टर अजय सरदाना, केमोट्रोल्स इण्डस्ट्रीज प्रा.लि. चेयरमेन के. नंदकुमार, हिन्दुस्तान यूनिलीवर लिमि. एक्जीक्यूटिव डेयरेक्टर प्रदीप बेनर्जी, हिन्दुस्तान यूनिलीवर लिमि. लीड साउथ एशिया कनिका पाल, इनोक्स लिमि. डायरेक्टर सिद्धार्थ जैन, प्रॉक्टर एंड गेम्बल चीफ एक्जीक्यूटिव मधुसूधन गोपालन, अहिल्या एक्सप्रिंसेस डायरेक्टर यशवंत होलकर, सिप्ला लिमि. वाइस प्रेसीटेंड निखिल बेसवान, इंटरनेशनल बायोटेक पार्क लिमि. सीईओ प्रशांता के. बिसवाल, टीसीजी रियल एस्टेट चीफ फाइनेंशियल ऑफिसर प्रताप चटर्जी, एप्टेक लिमि. डायरेक्टर नीनंद करपे, केपिटल फू़ड प्रा.लि. सीईओ नवीन तिवारी, करगोम फूड्स लिमि. एमडी रोहित भाटिया, एरिस एग्रो लिमि. मैनेजिंग डायरेक्टर राहुल मीरचंदानी, टाटा कन्सलटिंग इंजीनियर्स लिमि. चेयरमेन अशोक सेठी, गोदावरी बायो रिफाइनर्स लिमि. सीईओ समीर सोमिया, एसीजी-एसोसियेटेड केप्सूल चेयरमेन अजीत सिंह से मुख्यमंत्री कार्यालय से सीधा संपर्क किया गया। इन सभी ने सरकार को सीएसआर की दो फीसदी राशि विकास कार्यों के लिए खर्च करने का आश्वासन तो दिया ही है साथ में चंदे की किस्त भी पहुंचानी शुरु कर दी है। सीएसआर की राशि तो शिवराज सिंह सरकार के कार्यकाल में भी खर्च होती थी लेकिन तब उद्योगपतियों पर कोई दबाव नहीं था।पहली बार सरकार ने उन्हें स्पष्ट टारगेट दिए गए हैं।जिससे उद्योपतियों के साथ साथ व्यापारियों में भी कोहराम मच गया है, क्योंकि उद्योगपतियों ने चंदे के टारगेट पूरे करने के लिए व्यापारियों के इंसेंटिव बंद कर दिए हैं।

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  • गरीबों को भी मिलेगा आरक्षण का लाभ

    गरीबों को भी मिलेगा आरक्षण का लाभ

    भोपाल/इन्दौर मेट्रो रेल के लिए त्रिपक्षीय करार को मंजूरी 
    मंत्रि-परिषद के निर्णय 

    भोपाल,26 जून(प्रेस सूचना केन्द्र)। मुख्यमंत्री कमल नाथ की अध्यक्षता में मंत्रालय में हुई मंत्रि-परिषद की बैठक में  आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (ई.डब्ल्यू.एस) को 10 प्रतिशत आरक्षण की मंजूरी दी गई। आरक्षण का लाभ उन लोगों को मिलेगा, जिनकी सभी स्त्रोतों से आय 8 लाख सालाना से ज्यादा नहीं हो, उनके स्वामित्व में 5 एकड़ से ज्यादा कृषि भूमि ना हो (इसमें उसर, बंजर, बीहड़ और पथरीली जमीन शामिल नहीं है), नगर निगम क्षेत्र में 1200 वर्ग फीट मकान/फ्लैट से ज्यादा आकार का आवास न हो, नगर पालिका क्षेत्र में 1500 वर्ग फीट मकान/फ्लैट और नगर पंचायत क्षेत्र में 1800 वर्ग फीट मकान/फ्लैट से ज्यादा आकार का आवास न हो, को आरक्षण का लाभ मिल सकेगा। ग्रामीण क्षेत्रों में कोई सीमा निर्धारित‍नहीं की गई है।

     बार लायसेंस व्यवस्था का सरलीकरण

    मंत्रि-परिषद द्वारा पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए होटल बार लायसेंस व्यवस्था में संशोधन किया गया है। इसके तहत एक से अधिक तल पर रेस्तरां बार संचालित करने की अनुमति के लिए प्रत्येक अतिरिक्त बार के लिए 10 प्रतिशत अधिक लायसेंस फीस ली जाएगी। नवीन होटल बार लायसेंस के लिए होटल में कम से कम 25 कमरे होने का प्रावधान किया गया है। बार लायसेंस के लिए मदिरा की निर्धारित धारण क्षमता में 25 प्रतिशत की वृद्धि की गई।

    मंत्रि-परिषद द्वारा रिसोर्ट बार (एफ.एल.3क) लायसेंस के लिए निर्धारित मापदण्डों में संशोधन एवं वन्य पर्यटन क्षेत्रों के अतिरिक्त अन्य पर्यटन क्षेत्रों में लायसेंस स्वीकृत किये जाने का निर्णय लिया गया। होटल बार (एफ.एल.3) रिसोर्ट बार (एफ.एल.3क), सिविलियन क्लब बार (एफ.एल.4) और व्यवसायी क्लब(एफ.एल.4ए) लायसेंसी को 15 प्रतिशत अतिरिक्त राशि जमा कराकर परिसर में अन्यत्र मदिरा की सुविधा उपलब्ध कराये जाने की अनुमति प्रदान की गई। इसके अतिरिक्त, विशिष्ट श्रेणी के होटलों के समान होटल बार एवं क्लब लायसेंस को विदेशी मदिरा भण्डागार से मदिरा प्रदाय की सुविधा की स्वीकृति दी गई। साथ ही समुचित राजस्व सुनिशिचत करने के लिए बार लायसेंसों के लिए वेट एवं जीएसटी के अन्तर्गत पंजीकृत होने की शर्त एवं उसकी देयता  अनिवार्य होगी। 

    भोपाल/इन्दौर मेट्रो रेल के लिए त्रिपक्षीय करार

    मंत्रि-परिषद द्वारा भोपाल एवं इन्दौर मेट्रो रेल के लिए केन्द्र शासन, राज्य शासन एवं मध्यप्रदेश मेट्रो रेल कम्पनी लिमिटेड के बीच त्रिपक्षीय करार (एमओयू) किये जाने की स्वीकृति प्रदान की गई। राज्य शासन की ओर से मुख्य सचिव तथा मध्यप्रदेश मेट्रो रेल कम्पनी के मैनेजिंग डायरेक्टर को करार किये जाने के लिए अधिकृत किया गया।

    मंत्रि-परिषद द्वारा वाणिज्यिक कर विभाग के अन्तर्गत सूचना एवं प्रौद्योगिकी योजना की निरंतरता वर्ष 2019-20 के लिए 41.65 करोड़ रूपये की स्वीकृति प्रदान की गई।

  • मंत्रालय से नहीं पंचायतों से चलती है सरकार बोले कमलनाथ

    मंत्रालय से नहीं पंचायतों से चलती है सरकार बोले कमलनाथ

    योजनाओं को प्रभावी बनाने क्रियान्वयन की प्रक्रिया की होगी समीक्षा 

    भोपाल,5 मार्च(प्रेस सूचना केन्द्र)।मुख्यमंत्री कमल नाथ ने कहा है कि सरकार मंत्रालय से नहीं, पंचायतों से चलती है। पंचायत व्यवस्था योजनाओं और कार्यक्रम के क्रियान्वयन की धुरी है। अच्छी योजनाओं का क्रियान्वयन भी अच्छा होना चाहिये, अन्यथा वे सफल नहीं होगी। उन्होंने कहा कि योजनाओं को ज्यादा से ज्यादा प्रभावी बनाने के लिये योजनाओं के क्रियान्वयन की प्रक्रिया की समीक्षा  की जायेगी।

    मुख्यमंत्री ने  जिला एवं जनपद-पंचायतों के मुख्य कार्यपालन अधिकारियों से कहा कि वे वर्तमान समय के संदर्भ में योजनाओं के क्रियान्वयन के तौर-तरीकों की समीक्षा कर अपने सुझाव दें। सरकार के सहभागी नहीं, सहयोगी बनें। श्री नाथ आज प्रशासन अकादमी में जिला एवं जनपद पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारियों की बैठक को संबोधित कर रहे थे।

    मुख्यमंत्री कमल नाथ ने कहा कि हमारे देश और प्रदेश की अर्थ-व्यवस्था गाँव से जुड़ी है। इसलिये फोकस ग्रामीण क्षेत्र पर है। पंचायत राज इसकी धुरी है । सरकार की योजनाओं का सफलतापूर्वक क्रियान्वयन करने की जिम्मेदारी जिला जनपद पंचायत के सीईओ और पंचायत सचिव की है। उन्होंने कहा कि कई योजनाएँ ऐसी हैं, जो पन्द्रह से बीस साल पहले बनीं। उनका क्रियान्वयन आज वैसा ही नहीं हो सकता है। उसमें परिवर्तन करने की आवश्यकता होगी। उन्होंने मनरेगा और प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना का उल्लेख करते हुए कहा कि वे इन योजनाओं के निर्माण से स्वत: जुड़े हैं। यूपीए सरकार में जब ये योजनाएँ बनी थीं, तब इसके क्रियान्वयन को लेकर कई सुधार करवाये थे। उन्होंने कहा कि समय बदला है, तो सरकार को यह भी बतायें कि क्रियान्वयन की प्रक्रिया में कौन से परिवर्तन करना है ताकि ज्यादा से ज्यादा ग्रामीण क्षेत्रों को लाभ मिले।

    लक्ष्य उत्कृष्ट क्रियान्वयन का बनाये

    मुख्यमंत्री कमल नाथ ने कहा कि सरकार की योजनाओं और कार्यक्रमों की क्रियान्वयन व्यवस्थाओं की समीक्षा और सर्वे कराया जायेगा। पुरानी योजनाओं में क्या परिवर्तन कर सकते हैं, उनके जरिए और अधिक लोगों को कैसे लाभ पहुँचा सकते हैं, ये तथ्य सर्वे का आधार होंगे। उन्होंने जिला और जनपद पंचायत के सीईओ को जनता और सरकार के बीच की कड़ी बताते हुए कहा कि क्रियान्वयन में बदलाव हो, इसकी जिम्मेदारी भी उनकी है।

    बेहतर उपयोग हो ग्रामीण क्षेत्रों के बजट का

    मुख्यमंत्री ने कहा कि आज हमारे देश का हो चाहे प्रदेश का, बजट का एक बड़ा हिस्सा ग्रामीण विकास पर खर्च होता है। ग्रामीण क्षेत्रों का प्रमुख व्यवसाय खेती-किसानी है। किसानों की क्रय शक्ति किस तरह बढ़ायें, इस पर भी हमें सोचना होगा। उन्होंने कहा कि कर्ज माफी स्थाई समाधान नहीं है, यह एक राहत है । इसके आगे यह सोचना होगा कि किसानों के अधिक उत्पादन का कैसे उपयोग करें, क्योंकि इससे ही उनकी आय को दोगुना कर सकते हैं, उनकी क्रय शक्ति को बढ़ा सकते हैं। किसानों की क्रय शक्ति से ही हमारी बहुत सी छोटी-छोटी आर्थिक गतिविधियाँ जुड़ी हैं, जो लोगों को रोजगार उपलब्ध करवाती हैं। इस चुनौती को हम कैसे सफलता में बदलें, इसमें आप सभी को महत्वपूर्ण दायित्व का निर्वहन करना है।

    जल-संरक्षण बड़ी चुनौती

    मुख्यमंत्री श्री कमल नाथ ने कहा कि आने वाले दस वर्षों में पानी की उपलब्धता हमारे लिये सबसे बड़ी चुनौती होगी।  इसके लिये हमें विशेष प्रयास करने की जरूरत है। वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम को हमें मजबूत बनाना होगा।

    सड़क से सिर्फ आवागमन ही नहीं, निवेश भी आता है

    मुख्यमंत्री ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में बनने वाली सड़कों से सिर्फ आवागमन की सुविधा नहीं होती। सड़क निर्माण से कई प्रकार का निवेश भी आता है, जो लोगों के रोजगार का माध्यम बनता है। हमें इन अवसरों का लाभ उठाना चाहिये।

    सरकार में सहयोगी बनें

    मुख्यमंत्री श्री कमल नाथ ने कहा कि आज मध्यप्रदेश की शासन व्यवस्था बदली है। हम नई सोच, नई दृष्टि के साथ एक विकासोन्मुखी-जनोन्मुखी प्रशासनिक व्यवस्था की स्थापना करने जा रहे हैं। हमारा लक्ष्य है कि इस प्रदेश में हर व्यक्ति को भोजन, पानी, आवास के साथ एक बेहतर जीवन जीने का वातावरण मिले।  इस नई  व्यवस्था में आपको साथ चलना है। मध्यप्रदेश के विकास का एक नया नक्शा बनाना हमारा संकल्प है। इसमें न केवल आप भागीदारी करें बल्कि सहयोगी भी बनें।

    पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री श्री कमलेश्वर पटेल ने कहा कि प्रदेश की 70 प्रतिशत आबादी के चहुँमुखी विकास की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी जिला एवं जनपद के मुख्य कार्यपालन अधिकारियों की है। विकास की एक सुनियोजित अवधारणा जमीन पर क्रियान्वित होना चाहिये। इस दिशा में प्रभावी तरीके से काम करने की आवश्यकता है।

    श्री पटेल ने कहा कि मुख्यमंत्री श्री कमल नाथ की स्पष्ट सोच है कि सरकार आम जनता के हित के लिये बनी है। इसलिये पंचायत से जुड़ी सभी संस्थाओं का दायित्व है कि वे ग्रामीण क्षेत्र की समस्याओं का अपने ही स्तर पर निदान करें ताकि हमारे ग्रामीण भाइयों को भटकना न पड़े। उन्होंने योजनाओं और विभिन्न आर्थिक गतिविधियों के बीच बेहतर तालमेल बनाने को कहा। श्री पटेल ने कहा कि सरकार त्रि-स्तरीय पंचायत राज को सुदृढ़ बनाने के लिये काम कर रही है। इसी कड़ी में मुख्यमंत्री की पहल पर पंचायत पदाधिकारियों की स्वेच्छानुदान राशि में वृद्धि के आदेश जारी भी हो चुके हैं। उन्होंने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में विभिन्न योजनाओं के अधूरे कार्यों को प्राथमिकता से पूरा किया जाये।

    अपर मुख्य सचिव श्रीमती गौरी सिंह ने विभागीय उपलब्धियों की जानकारी दी। जिला एवं जनपद के सीईओ ने अपने-अपने क्षेत्र में ग्रामीण योजनाओं के सफल क्रियान्वयन की जानकारी भी दी। इस मौके पर मुख्यमंत्री ने नदी पुनर्जीवन पर केन्द्रित पुस्तक का विमोचन भी किया।

  • राहुल ब्रिगेड ने छीनी भोपाल की शान

    राहुल ब्रिगेड ने छीनी भोपाल की शान

    लोकनिर्माण विभाग में कमाऊ परियोजनाओं पर वर्चस्व जमाने की मुहिम

    वक्त है बदलाव का नारा देकर कांग्रेस ने प्रदेश की सत्ता की चाभी मांगी थी। जनता ने इस वादे पर गौर किया कांग्रेस की झोली में चार फीसदी वोट अधिक डाल दिए। समीकरण कुछ ऐसे बने कि सत्तर हजार वोट कम पाकर भी कांग्रेस कुर्सी पर काबिज हो गई। जनता को अपेक्षा है कि कमलनाथ कांग्रेस जनहित में कुछ बदलाव करेगी। सरकार ने कुछ बड़े कदम उठाए भी हैं लेकिन सत्ता की आड़ में कई ठग भी सत्तासीन हो चले हैं। लोक निर्माण विभाग में बड़े बजट वाले प्रोजेक्ट हड़पने की मुहिम शुरु हो गई है। कई प्रोजेक्ट तो सजायाफ्ता अफसरों के हवाले कर दिए गए हैं। ठेठ राजधानी में सड़क निर्माण की एक परियोजना ऐसे अफसर के हवाले कर दी गई है जिसे भ्रष्टाचार में दोषी पाकर दंडित किया जा चुका है। एक अन्य प्रकरण में सजा मंजूर हो चुकी है। जबकि एक अन्य प्रकरण पर लोकायुक्त की जांच लंबित है और जल्दी ही एफआईआर दर्ज होने वाली है।

    राजधानी का विकास मंडीदीप से बैरागढ़ होते हुए सीहोर तक लंबी लंबी सड़कों के बीच हुआ है। पहली बार एक ऐसी सड़क बनाई जा रही है जो सीहोर से मंडीदीप को जोड़ने वाली होगी। भोपाल को काटने वाली ये पहली सड़क है। कलियासोत डैम से बर्रई के बीच बनने वाली इस 12 किलोमीटर सड़क की लागत 45 करोड़ रुपए अनुमानित की गई है। इस सड़क का सुझाव पूर्व मुख्य सचिव आर परशुराम ने दिया था। उनका कहना था कि मंडीदीप औद्योगिक क्षेत्र को इंदौर मार्ग से जोड़ने का प्रयास कुछ इस तरह किया जाए ताकि भोपाल से गुजरने वाले ट्रेफिक को वक्त भी कम लगे और यातायात की बाधाएं भी न आएं। लोक निर्माण विभाग के पूर्व ईएनसी अखिलेश अग्रवाल ने इसके लिए बाकायदा विभागीय अफसरों से सैटेलाईट सर्वे करवाया और तब ऐसा मार्ग खोजा गया जिसकी लागत बहुत कम हो। कलियासोत नहर के दायीं ओर बनने वाली इस सड़क की लागत इसलिए कम आ रही है क्योंकि इसमें मुआवजे की राशि का भुगतान अधिक नहीं किया जाना है। अतिक्रमण हटाने के प्रकरण भी कम हैं। इसके साथ साथ जिन तेरह चौराहों से होकर ये सड़क गुजरनी है उनसे शहर के बड़े हिस्से को सीधी कनेक्टिविटी मिलना संभव है। चूनाभट्टी से बनने वाला ये एक्सप्रेस हाईवे बहुत कम वक्त में सीधा बाईपास से जोड़ देगा। यही नहीं मंडीदीप से सीहोर जाने के मौजूदा मार्ग की तुलना में इस सड़क से लगभग बारह किलोमीटर की कमी भी आएगी।

    लोक निर्माण विभाग ने चार वर्षों के लंबे अध्ययन और नक्शे आदि बनाने के बाद अक्टूबर 2018 में ये प्रोजेक्ट शुरु किया है। इस प्रोजेक्ट को साकार करने वाले जेल 2 सबडिवीजन के अनुविभागीय अधिकारी अमलराज जैन को ये जवाबदारी दी गई थी। इंजीनियरों के भी इंजीनियर कहे जाने वाले मुख्य अभियंता अखिलेश अग्रवाल इस परियोजना पर अपनी पैनी नजर रखे हुए थे। इसलिए परियोजना का काम तेजी से पूरा किया जा रहा था। कमलनाथ सरकार के आते ही कई लोग ईएनसी पर कमाऊ प्रोजेक्ट देने का दबाव बनाने लगे। राहुल ब्रिगेड के प्रभारी रहे युवा केबिनेट मंत्री ने चूनाभट्टी से बर्रई के बीच बनने वाले एक्सप्रेस हाईवे का काम अपने रिश्तेदार विजय सिंह पटेल को देने का दबाव बनाया। अखिलेश अग्रवाल ने साफ इंकार कर दिया। नतीजन अगले दिन विभागीय मंत्री सज्जन सिंह वर्मा ने मामले में हस्तक्षेप किया और विभागाध्यक्ष से राहुल ब्रिगेड के संबंधित मंत्री का निर्देश मानने को कह दिया। आनन फानन में आदेश निकाला गया और विजय सिंह पटेल को ये परियोजना थमा दी गई। जब श्री विजय सिंह जतारा में सहायक यंत्री थे तब उन्होंने सड़क पर इतना कम डामरीकरण कराया था कि पहली बरसात में ही सड़क बह गई। जांचकर्ताओं ने इसके लिए श्री विजय सिंह को दोषी पाया और विभाग ने उनकी चार वेतनवृद्धि संचयी प्रभाव से रोकने की शास्ति अधिरोपित कर दी। विभागाध्यक्ष अखिलेश अग्रवाल ये जानते थे,लोकायुक्त के प्रकरण की भी उन्हें जानकारी थी लेकिन सरकार का निर्देश मानकर उन्होंने इस परियोजना को भ्रष्ट अफसर के हवाले कर दिया।हालांकि इसके बावजूद निर्माण भवन में सात वर्ष नौ माह की मैराथन जवाबदारी संभालने वाले अखिलेश अग्रवाल को भी विभाग से चलता कर दिया गया। वे निहायत ईमानदार अफसर माने जाते हैं पर सरकार में आ धमके कुछ गिरोहबाजों के लिए वे उपयोगी नहीं थे।

    मौजूदा मुख्य अभियंता श्री आर के मेहरा और विभागीय मंत्री सज्जन सिंह वर्मा के विशेष कर्तव्यस्थ अधिकारी संजय खांडे भी इस परियोजना की हकीकत से वाकिफ हैं। वे कहते भी हैं कि इस प्रोजेक्ट को साकार करना भोपाल के लिए विशेष तौर पर उपयोगी है। वे ये भी कहते हैं कि लोक निर्माण विभाग के नियमों और परंपराओं के अनुसार किसी भी प्रोजेक्ट को शुरु करने वाले अफसर को ही उसे पूरा करने की जवाबदारी दी जाती रही है।क्योंकि इससे परियोजना की बारीकियां आसानी से हल हो जाती हैं। कोई गंभीर शिकायत सामने आने पर ही परियोजना का प्रभारी बदला जाता है। इसके बावजूद सरकार का हुक्म बजाना अफसरों की मजबूरी है।

    मुख्यमंत्री कमलनाथ आमतौर पर सरकारी कामकाज में अधिक दखल देने के पक्ष में नहीं रहते हैं। उनके करीबी बताते हैं कि वे अफसरों पर राजनीतिक उद्देश्यों के लिए भी बेजा दबाव डालने के पक्षधर नहीं हैं। इसके बावजूद कांग्रेस में जिस तरह से कई नेताओं की लाबियां सक्रिय हैं उससे शासन प्रशासन पर तय शुदा राजनीतिक दबाव की तुलना में कई गुना तनाव थोपा जा रहा है। राजधानी की शान कही जाने वाली इस परियोजना में मौजूदा बदलाव आने के बाद शुरु हो चुका काम ठप पड़ गया है। निश्चित तौर पर यदि सरकार ने परियोजना की सुध नहीं ली तो इसका समय सीमा में पूरा होना भी असंभव है और लागत कितने गुना बढ़ेगी ये तो आने वाला समय ही बताएगा।

  • सरकार ने रोका जबलपुर के मत्स्य महाविद्यालय का अनुदान

    सरकार ने रोका जबलपुर के मत्स्य महाविद्यालय का अनुदान

    मांझी समाज से भेदभाव भारी पड़ेगा बोले आनंद निषाद

    भोपाल,2फरवरी(प्रेस सूचना केन्द्र)। विधानसभा चुनावों में रोजगार दिलाने का वादा करने के लिए इस्तेमाल किया गया छिंदवाड़ा मॉडल कांग्रेस के सत्ता में आते ही हवा हवाई साबित होने लगा है। मुख्यमंत्री कमलनाथ बात बात में युवाओं को रोजगार दिलाने के लिए प्रशिक्षण दिलाने की बात करते हैं लेकिन सरकार का मछली पालन विभाग ये जवाबदारी उठाने को ही तैयार नहीं है।सरकार ने जबलपुर के मत्स्य विज्ञान महाविद्यालय का अनुदान रोक दिया है जिससे वहां कई महीनों से वेतन नहीं बंट पा रहा है। सरकार की इस बेरुखी से मांझी समाज आक्रोश में है और उसके नेतागण दो दो हाथ करने की तैयारी कर रहे हैं।

    प्रदेश में मछली पालन के क्षेत्र में रोजगार बढ़ाने और पूंजी निर्माण के लिए निवृत्तमान भाजपा सरकार ने वर्ष 2012 में मत्स्य विज्ञान महाविद्यालय जबलपुर की स्थापना की थी। मांझी समाज की एक मांग उनके बच्चों को उनकी पारंपरिक कला में प्रशिक्षित करने की भी थी। इसे देखते हुए कुलाधिपति के आदेशानुसार यह कालेज मछुआ कल्याण तथा मत्स्य विकास विभाग ने शुरु किया था। पूरे मध्यप्रदेश में मछली पालन सिखाने वाला ये एकमात्र कालेज है।विभाग ने कालेज की स्थापना के साथ ही उसे पांच साल की ग्रांट उपलब्ध कराई थी। तबसे कालेज से निकले करीबन अस्सी विद्यार्थी आज देश भर में मछली पालन व्यवसाय में रोजगार पा रहे हैं और प्रदेश में मछली उत्पादन के नए कीर्तिमान स्थापित कर रहे हैं।

    कालेज शुरु होने के बाद से मंजूर पंचवर्षीय प्रोजेक्ट का समय विगत वर्ष अगस्त माह में पूरा हो गया था। अनुपूरक बजट पारित होने के साथ इसकी नई ग्रांट मंजूर होनी थी। एक सितंबर 2018 को मत्स्य पालन विभाग ने अनुपूरक बजट के लिए कालेज का प्रस्ताव प्रस्तुत ही नहीं किया। विभाग के संचालक ओपी सक्सेना ने तब आश्वासन दिया था कि विभाग का बजट आबंटित होते ही कालेज की ग्रांट नवीनीकृत कर दी जाएगी। उस वक्त चुनाव का माहौल था और आचार संहिता के दौरान कोई बड़ा फैसला नहीं लिया जा सका। अब जबकि नई सरकार अपना कामकाज सुचारू रूप से संभाल चुकी है और पिछले पांच छह महीनों से कालेज में वेतन तक नहीं बंट सका है तब विभाग और शासन दोनों ही कालेज को फंड देने में आनाकानी कर रहे हैं।

    प्रमुख सचिव मछुआ कल्याण एवं मत्स्य विभाग अश्विनी कुमार राय का कहना है कि सरकार ने पांच साल के लिए बजट मंजूर किया था। मंजूरी देते वक्त कहा गया था कि भविष्य में कालेज अपने कामकाज का विस्तार अपने वित्तीय संसाधनों से करेगा। कालेज को शैक्षणिक जगत में अपनी गुणवत्ता स्थापित करनी चाहिए और बजट की व्यवस्था खुद करनी चाहिए।उनका कहना है कि इंडियन इंस्टीट्यूट आफ एग्रीकल्चर रिसर्च और उच्च शिक्षा अनुदान आयोग से अनुदान लेकर कालेज को चलाया जाना चाहिए। हालांकि यूजीसी के मान्यता दिलाने और अनुदान दिलाने की जवाबदारी शासन की ही होती है। जबकि आईएआरआई की ओर से अनुसंधान कार्यों के लिए अनुदान दिया जाता है।

    हकीकत ये है कि सरकार की पहल पर शासन ने बाकायदा अधिसूचना जारी करके यह कालेज शुरु कराया था।जाहिर है कि कालेज की स्थापना का व्यय शासन को ही वहन करना था।शासन ने ये जवाबदारी अपनी ओर से मत्स्य पालन विभाग को दी थी। अपना रुतबा दिखाते हुए मत्स्य पालन विभाग ने कालेज को शुरु कराते समय ऐसे शिक्षकों की भर्ती कर ली थी जिनकी पढ़ाई मत्स्य विज्ञान में नहीं हुई थी। ऐसे में उच्च शिक्षा के राष्ट्रीय संस्थानों की कसौटी पर कालेज को कसा जाना संभव नहीं था। इसके बावजूद चूंकि शासन ने गारंटी ली थी इसलिए कालेज का शैक्षणिक कामकाज सुचारू तौर पर चलता रहा।

    मत्स्य पालन के क्षेत्र में रोजगार और पूंजी निर्माण की बढ़ती संभावनाओं को देखते हुए देश के सीमांत राज्यों ने अपने युवाओं को इस क्षेत्र में प्रशिक्षित किया है। छत्तीसगढ़ जैसे राज्य में दो कालेज हैं जहां इस कारोबार के कुशल युवाओं को तैयार किया जाता है। बिहार जैसे राज्य में भी मछली पालन के स्टार्टअप तैयार हो चुके हैं जबकि मध्यप्रदेश इस क्षेत्र में बहुत पिछड़ा है।

    मत्स्य विज्ञान महाविद्यालय जबलपुर के प्रभारी अधिष्ठाता डॉ.एस.के.महाजन का कहना है कि पिछले सालों में हमने राज्य के बच्चों को वैश्विक कसौटियों से मुकाबले के लिए तैयार किया है। आज हमारे कालेज से निकले छात्र देश के मछली उद्योग की शीर्ष जवाबदारियां संभाल रहे हैं। विशाखापट्टनम के मछली उद्योग में छात्रदल के प्रशिक्षण कार्यक्रम में शामिल होने गए डॉ.महाजन ने कहा कि मत्स्य पालन विभाग और उसका ये कालेज अपनी जवाबदारी ठीक तरह से निभा रहा है। यदि सरकार की ओर से इसे संरक्षण मिले तो प्रदेश के युवाओं को रोजगार के नए अवसर देने में हम कामयाब होंगे। कालेज की ओर से अनुदान और विकास संबंधी प्रस्ताव हमने विभाग को भेजा है, जिस पर शासन की मंजूरी का हमें इंतजार है।

    हालांकि मांझी समाज के साथ किए जा रहे सरकार के भेदभाव से मछुआरों के सर्वमान्य नेता आनंद निषाद बहुत नाराज हैं। उनका कहना है कि हमने जब प्रदेश में अपना राजनीतिक वजूद खंगालना शुरु किया तब घबराकर भाजपा की शिवराज सरकार ने इस कालेज की स्थापना की थी। बाद में कुछ राजनीतिक कारणों से मांझी समाज भेदभाव का शिकार हो गया। विधानसभा चुनाव में मांझी समाज ने राष्ट्रीय महान गणतंत्र पार्टी के बैनर तले अपने स्वाभिमान की लड़ाई लड़ी। जिसके कारण भाजपा की सरकार का पतन संभव हुआ। अब कमलनाथ की कांग्रेस सरकार मछुआरों के बच्चों से शिक्षा का हक छीन रही है, जिसे देखते हुए हम आने वाले समय में कांग्रेस के वजूद पर भी प्रहार कर सकते हैं। उनका कहना है कि प्रदेश के जन,जंगल,जमीन, जल, और जानवरों पर पहला हक प्रदेश के मूल निवासियों का है। सरकार यदि मांझी समाज के बच्चों की शिक्षा में रोड़े अटकाएगी तो हम उसकी ईंट से ईंट बजा देंगे। प्रदेश के हर जिले और हर विधानसभा सीट पर हमारी समाज का वोट बैंक निर्णायक है। हम इसे एकजुट कर रहे हैं और आगामी चुनावों में हमारी मौजूदगी सरकार बनाने और बिगाड़ने में निर्णायक साबित होगी।

  • राजनैतिक मुकदमे वापस लेगी कमलनाथ सरकार

    राजनैतिक मुकदमे वापस लेगी कमलनाथ सरकार

    मंत्रि-परिषद के निर्णय 

    भोपाल,17 जनवरी(प्रेस सूचना केन्द्र)।मुख्यमंत्री श्री कमल नाथ की अध्यक्षता में हुई मंत्रि-परिषद की बैठक में व्यापक लोकहित में आपराधिक प्रकरणों के प्रत्याहरण के लिए नयी प्रक्रिया अनुमोदित की गई है। अनुमोदित प्रक्रिया अनुसार प्रत्याहरण के लिए अब किसी भी आवेदक को राजधानी आने की आवश्यकता नहीं होगी। वह अपना आवेदन सीधे संबंधित जिले के जिलादण्डाधिकारी को प्रस्तुत कर सकेगा।इन आवेदनों की छानबीन के बाद ये मुकदमे सरकार वापस लेगी चाहे वे किसी भी राजनीतिक दलों के कार्यकर्ताओं से संबंधित क्यों न हों।

    मंत्रिपरिषद की बैठक के बाद जनसंपर्क मंत्री पीसी शर्मा और खेल उच्च शिक्षा मंत्री जीतू पटवारी ने कहा कि प्रकरणों के प्रत्याहरण के लिए जिला एवं राज्य स्तरीय समिति के गठन के साथ ही प्रकरण प्रत्याहरण की त्वरित कार्यवाही सुनिश्चित करने के लिए संचालक लोक अभियोजन को संयोजक एवं नोडल एजेंसी घोषित किया गया है। जिला स्तरीय समिति में जिलादण्डाधिकारी को अध्यक्ष, जिला पुलिस अधीक्षक को सदस्य और जिला लोक अभियोजन अधिकारी को सदस्य सचिव बनाया गया है।

    राज्य स्तरीय समिति में अपर मुख्य सचिव/प्रमुख सचिव गृह विभाग, प्रमुख सचिव विधि एवं विधायी कार्य, पुलिस महानिदेशक और महाधिवक्ता अथवा उनके द्वारा नामांकित प्रतिनिधि सदस्य होंगे। संचालक लोक अभियोजन को समिति का संयोजक बनाया गया है। राज्य स्तरीय समिति प्रक्रिया के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए समय-समय पर अनुशंसा कर सकेगी। मंत्रि-परिषद की बैठक में जय किसान फसल ऋण माफी योजना के क्रियान्वयन की समीक्षा भी की गई।

    जीतू पटवारी ने कहा कि सरकार ने 31 मार्च 2018 तक बकाया प्रकरणों और 12 दिसंबर 2018 तक चुकाए गए प्रकरणों में भी कर्जमाफी का लाभ मिलेगा। उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य है कि अधिक से अधिक किसानों तक इस योजना का लाभ मिले।उन्होंने कहा कि प्रदेश के 55 लाख किसान इस योजना से लाभान्वित होंगे।उन्होंने बताया कि 90फीसदी किसानों से संबंधित जानकारियां कंप्यूटर में दर्ज है केवल 7 फीसदी किसानों की जानकारियां एकत्रित की जानी हैं।

  • 55 लाख किसानों का 50 हजार करोड़ का फसल ऋण होगा माफ

    55 लाख किसानों का 50 हजार करोड़ का फसल ऋण होगा माफ

    भोपाल,15 जनवरी(प्रेस सूचना केन्द्र) मुख्यमंत्री कमल नाथ ने कहा है कि किसानों को मजबूत किये बिना मध्यप्रदेश की कृषि आधारित अर्थ-व्यवस्था मजबूत नहीं हो सकती। कृषि क्षेत्र अर्थ-व्यवस्था की नींव है। आज यहां ‘जय किसान फसल ऋण माफी योजना” का शुभारंभ करते हुए उन्होंने कहा कि इस योजना से प्रदेश के 55 लाख किसानों को ऋण माफी का लाभ मिलेगा। इन किसानों के 50 हजार करोड़ रूपये के फसल ऋण माफ हो जायेंगे। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह योजना मध्यप्रदेश के इतिहास में मील का पत्थर साबित होगी।

    श्री कमल नाथ ने स्थानीय पलाश होटल परिसर से योजना की शुरूआत की। इसके साथ ही पूरे प्रदेश में ऋण माफी की प्रक्रिया शुरू हो गई है। उन्होंने प्रतीक स्वरूप दस किसानों से ऋण मुक्ति आवेदन भरवाये और प्राप्त किये। आगामी पांच फरवरी तक पूरे प्रदेश में यह प्रक्रिया पूरी हो जायेगी।

    किसानों को मजबूती देगी योजना

    मुख्यमंत्री श्री कमल नाथ ने कहा कि ‘जय किसान फसल ऋण माफी योजना” किसानों को आर्थिक रूप से मजबूती देने वाली योजना है। यह योजना कर्ज से जूझ रहे किसानों के लिये उपहार नहीं बल्कि कृषि क्षेत्र में बड़ा निवेश है । उन्होंने कहा कि कृषि आधारित अर्थ-व्यवस्था में जब तक किसान मजबूत नहीं होगा, तब तक प्रदेश आगे नहीं बढ़ सकता। मुख्यमंत्री ने जय किसान फसल ऋण माफी योजना के क्रियान्वयन से जुड़े सभी  अधिकारियों को भी धन्यवाद दिया ।

    जल्द शुरू होगा निवेश आने का सिलसिला

    मुख्यमंत्री ने कहा कि विगत दो दशकों में किसानों के बच्चे भी पढ़ लिख कर आगे आये हैं। इंजीनियर बने हैं। उनके लिए रोजगार की व्यवस्था करना होगा। युवाओं के लिये रोजगार निर्माण पर ज्यादा ध्यान दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि निवेश आने से रोजगार का निर्माण होता है और विश्वास से ही निवेश आता है । निवेश आए बिना रोजगार के अवसर पैदा करना संभव नहीं है । उन्होंने कहा कि जल्दी ही प्रदेश में निवेश आने का सिलसिला शुरू होगा।

    किसानों की मेहनत को समर्पित योजना

    मुख्यमंत्री ने कहा कि कि बाजारों में रौनक तभी होगी, जब किसानों की क्रय शक्ति मजबूत होगी। उन्होंने कहा कि यह योजना किसानों की मेहनत को समर्पित है। उन्होंने कहा कि किसान कर्ज में जन्म लेता है, कर्ज में जीता है और कर्ज में उसका अंत होता है। यह स्थिति ठीक नहीं है। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार किसानों को मजबूत करेगी।

    बजट की चिंता न करें विरोधी दल

    श्री कमल नाथ ने भाजपा द्वारा सरकार की स्थिरता और योजना के लिये बजट उपलब्‍धता पर व्यक्त की जा रही शंकाओं का स्पष्ट जवाब देते हुए कहा कि भाजपा को बजट की चिंता करने की कोई जरूरत नहीं है।  उन्होंने कहा कि जो लोग वक्तव्य दे रहे हैं, वे खुद नहीं जानते कि बजट क्या होता है।

    प्रदेश की अपनी निवेश नीति होगी

    मुख्यमंत्री श्री कमल नाथ ने कहा कि मध्यप्रदेश को निवेश के क्षेत्र में प्रतियोगी राज्य बनाना है । उन्होंने कहा कि अन्य राज्यों की तरह मध्यप्रदेश को भौगोलिक लाभ नहीं मिला है। इसलिए प्रदेश की अपनी नीति बनाना होगा।

    जनसंपर्क मंत्री श्री पी. सी. शर्मा ने कहा कि सरकार का शुरूआती एक घंटे में ही किसानों की कर्ज माफी का फैसला ऐतिहासिक कदम है। उन्होंने कहा कि लाखों किसान मुख्यमंत्री के प्रति आभार व्यक्त कर रहे हैं। कार्यक्रम में विधायक श्री आरिफ मसूद और किसान संघों के प्रतिनिधि उपस्थित थे।

  • भाजपा के ट्रेप में फंसी कांग्रेस

    भाजपा के ट्रेप में फंसी कांग्रेस

    लंगड़ी सरकार की छवि से बाहर निकलने के लिए कांग्रेस ने विधानसभा में अपना अध्यक्ष बनाकर जीत का उद्घोष करने में सफलता पाई है। इसी उत्साह के माहौल में उसने अपना उपाध्यक्ष भी बनाकर अपनी पीठ थपथपाई है। कांग्रेस के आम कार्यकर्ता से लेकर मुख्यमंत्री कमलनाथ तक इसे अपनी जीत बता रहे हैं।ऊपरी तौर पर ये नजर भी आ रहा है। सरकार की जी हुजूरी में लगा मीडिया भी इसे सरकार की जीत बता रहा है। इसके बावजूद राजनीतिक पंडितों का कहना है कि ये फैसला वास्तव में कांग्रेस को भाजपा के राजनीतिक जाल में फंसाने वाला साबित होने जा रहा है। भाजपा का स्थानीय नेतृत्व अध्यक्ष और उपाध्यक्ष का चुनाव परंपरागत रूप से करने का ही पक्षधर था। बाद में भाजपा हाईकमान की ओर से कहा गया कि अपनी ओर से अध्यक्ष और उपाध्यक्ष के नाम घोषित किए जाएं। पार्टी की ओर से अध्यक्ष के रूप में आदिवासी नेता विजय शाह का नाम प्रस्तुत किया गया। उपाध्यक्ष के रूप में जगदीश देवड़ा का नाम प्रस्तुत किया गया। कांग्रेस ने व्हिप जारी किया और अपने सभी सदस्यों को विधानसभा में हाजिर रहने के निर्देश दिए गए। सचिवालय को दी गई सूचना न पढ़े जाने को मुद्दा बनाकर भाजपा ने सदन से वाकआऊट कर दिया। नतीजतन कांग्रेस ने एक पक्षीय वोटिंग कराई और एनपी प्रजापति को 120 मतों से विजयी घोषित कर दिया। भाजपा के नेताओं का कहना था कि यदि सदन में गुप्त मतदान कराया जाता तो कांग्रेस का प्रत्याशी चुनाव नहीं जीत सकता था। हालांकि ऐसी कोई परंपरा पहले कभी नहीं रही है कि गुप्त मतदान कराया जाता। भाजपा को भी वोटिंग नहीं करानी थी उसे तो बस केवल रायता फैलाना था। जीत के उल्लास में कांग्रेस ने भाजपा की रणनीति को समझने का कोई प्रयास नहीं किया। अगले दिन भाजपा ने उपाध्यक्ष के लिए भी अपना प्रत्याशी घोषित कर दिया। फिर वही कहानी दुहराई गई। चार सदस्यों ने सुश्री हिना कांवरे को उपाध्यक्ष बनाने के लिए नाम प्रस्तावित किया जबकि एक सदस्य ने भाजपा के जगदीश देवड़ा का नाम प्रस्तावित किया।ये प्रस्ताव विधिवत था और समर्थक भी मौजूद था। इसके बावजूद अध्यक्ष की आसंदी पर विराजमान एनपी प्रजापति ने पहले तो पूरे नाम नहीं पढ़े लेकिन जब नेता प्रतिपक्ष गोपाल भार्गव ने अनुरोध किया कि वे पूरे नाम पढ़ें अन्यथा उनके प्रत्याशी का नाम सदन के रिकार्ड में नहीं आएगा। इसके बाद अध्यक्ष ने जगदीश देवड़ा का नाम भी पढ़ दिया। इसके बाद विपक्ष के सदस्य नारेबाजी करते रहे और इसी बीच उपाध्यक्ष पद पर हिना कांवरे को विजयी घोषित कर दिया गया। कांग्रेस ने जो तैयारी की थी उसके बीच यही होना भी था। यदि विधिवत चुनाव होता तो भी कांग्रेस अपने प्रत्याशी को जिताने की पूरी कोशिश करती क्योंकि इससे उसे विश्वास मत की पुष्टि भी करनी थी। भाजपा को इस प्रक्रिया में चुनौती देनी भी नहीं थी उसे तो केवल सरकार और उसके प्रतिनिधियों के बीच अविश्वास जताना था। पिछले कार्यकालों में वह भी कमोबेश ऐसा ही करती रही थी। उसने हर बार मनमर्जी से सदन चलाया क्योंकि उसे स्पष्ट बहुमत प्राप्त था। इस बार उसे पता था कि संख्याबल उसके पास नहीं है।यदि वो तोड़फोड़ का प्रयास करती तो उसे इसकी बहुत मंहगी कीमत चुकानी पड़ती। जनता के बीच भी संदेश जाता कि भाजपा जनमत को मानने तैयार नहीं है।पिछले सालों में भाजपा ने बाकायदा कांग्रेस को उपाध्यक्ष पद देकर विपक्ष को अपने साथ चलने के लिए तैयार किया था। उसे मालूम है कि उपाध्यक्ष जैसे पद का कोई औचित्य नहीं है।यदि वो उपाध्यक्ष पद कृपा से भी स्वीकार कर लेती तो उसे सदन में अपनी जिम्मेदारी का निर्वहन करने की मजबूरी से बंध जाना पड़ता।अब वह सदन को चलाने की जवाबदारी से मुक्त है। वहीं कांग्रेस के नेतागण बार बार सफाई देकर कह रहे हैं कि भाजपा ने उसे चुनाव के लिए मजबूर किया हम तो परंपरा का पालन करना चाहते थे। जबकि हकीकत ये है कि कांग्रेस जाने अनजाने भाजपा के बिछाए जाल में फंस गई है। भाजपा तो झगड़ा करना ही चाहती थी। फिर ये किसने कह दिया कि चुनाव करवाने से कोई बुरा काम हो गया। चुनाव ने तो कांग्रेस के स्पष्टमत की पुष्टि ही की है। जो बात राज्यपाल महोदया के समक्ष कांग्रेस ने प्रमाणित की थी वही बात सदन में उसने दुहराई है। इसके बावजूद कांग्रेस ने अनजाने में बड़ी पराजय को गले लगा लिया है। यदि सदन विधिवत चलता तो कांग्रेस अपनी नीतियों पर विपक्ष की मुहर भी लगवा सकती थी। आलोचना के साथ ही सही पर वो अपनी नीतियों को लोकतांत्रिक जामा पहना सकती थी। अब ऐसा होना संभव नहीं दिखता। सदन का पहला सत्र ही कांग्रेस सुचारू रूप से नहीं चला पाई। ये जवाबदारी सरकार की होती है। विपक्ष का तो काम ही हो हल्ला मचाना है। ये जवाबदारी सरकार की थी कि वो विपक्ष को कैसे अपने साथ लेकर चले। यदि कांग्रेस बड़ा दिल करके भाजपा को उपाध्यक्ष देकर परंपरा का पालन करती तो भाजपा के सामने मजबूरी थी कि वो सदन को चलाने में सहयोग करे। भाजपा ये चाहती भी नहीं थी और कांग्रेस ने उसकी मांगी मुराद पूरी कर दी। अब यदि ये टकराव आने वाले समय में और बढ़ता है तो भाजपा उसी तरह असहयोग आंदोलन शुरु कर देगी जिस तरह से आजादी के संग्राम के दौरान महात्मा गांधी असहयोग आंदोलन का आव्हान करते थे।मध्यप्रदेश में सरकारी तंत्र का बोझ बहुत भारी हो चुका है। हर महीने सरकार को तीन हजार दो सौ करोड़ रुपए तो मात्र वेतन भत्तों के लिए जुटाने पड़ते हैं। कर्ज ली गई रकम का ब्याज अलग से भुगतना पड़ता है। विकास कार्यों के लिए भी भारी धनराशि की जरूरत पड़ती है। कर्जमाफी, बिजली बिल हाफ जैसी लोकप्रियता आधारित योजनाओं का दंड भी सरकारों को भुगतना पड़ता है। ऐसे में कमलनाथ सरकार के सामने चुनौती है कि वो सरकारी कामकाज को शांतिपूर्वक निपटाए। यदि सरकार रोज रोज नेतागिरी करके थोथी जीत के नशे की आदी हो जाएगी तो उसे सरकार चलाने लायक धनराशि जुटाना भी कठिन हो जाएगा। दरअसल कांग्रेस के नेतागण पिछली सरकारों के समान ही राजनीतिक व्यवस्था की आदत से बाहर नहीं आ पाए हैं। पहले केन्द्र की ओर से अनुदान मिल जाता था या कुछ योजनाओं को शत प्रतिशत तक मदद मिल जाती थी। जीएसटी लागू होने के बाद ये परिपाटी बदल गई है। अब राज्यों को टैक्स कलेक्शन करना होता है और उसे अनुपातिक धनराशि केन्द्र से वापस मिल जाती है। ऐसे स्थिति में यदि राज्य सरकार का टैक्स कलेक्शन घटेगा तो उसे वित्तीय संकट का सामना करना पड़ेगा। यदि जनता ने असहयोग कर दिया और टैक्स कलेक्शन में सरकार को टकराव का सामना करना पड़ा तो उसे उपहार में केवल बदनामी हाथ लगेगी।वित्तीय संकट बढ़ेगा को अलग। भाजपा के रणनीतिकार कांग्रेस को उसी दिशा में धकेल रहे हैं।कांग्रेस के नेतागण समझ लें कि यदि उन्होंने टकराव की नीति जारी रखी तो वो अपनी सरकार को सफल बनाकर जनता का दिल नहीं जीत पाएंगे। उम्मीद है कि भविष्य में कांग्रेस जीत के हैंगओवर से बाहर आएगी और टकराव की नीति छोड़कर प्रदेश के विकास की नींव रखेगी।

  • बीज से वृक्ष बन गया भोपाल उत्सव मेलाःराज्यपाल श्रीमती आनंदी बेन पटेल

    बीज से वृक्ष बन गया भोपाल उत्सव मेलाःराज्यपाल श्रीमती आनंदी बेन पटेल

    भोपाल,8 जनवरी(करुणा राजुरकर)।राज्यपाल श्रीमती आनंदीबेन पटेल ने भोपाल उत्सव मेला का शुभारंभ करते हुए कहा कि मध्यप्रदेश में मेरे पिछले एक साल के कार्यकाल में पहली बार मैं किसी मेले में आई हूं।यहां आकर मुझे बहुत अच्छा लग रहा है। उन्होंने कहा कि मेला शब्द मेल से बना है और जहाँ बहुत से स्त्री-पुरुष, बच्चे इकट्ठे होकर आनंदित हो, अपनी मन-पसंद चीजें देखें और खरीदें इससे अच्छा क्या हो सकता है। हमारे देश में पहले मेले धार्मिक स्थानों पर ही लगते थे। पर अब उसका स्वरूप बदला है। मेले धार्मिक उद्देश्यों के साथ-साथ आर्थिक-सामाजिक और सांस्कृतिक उद्देश्यों से लगने लगे हैं। इन सबके अलावा आजकल पुस्तक मेलों का आयोजन भी हो रहा है और इन पुस्तक मेलों से प्रबुद्ध वर्ग को बहुत फायदा हुआ है। दिल्ली में लगने वाला विश्व पुस्तक मेला ने विदेशी पाठकों के बीच अपना स्थान बनाया है। इस अवसर पर जनसम्पर्क मंत्री श्री पी.सी. शर्मा विशेष रूप से उपस्थित थे।

    मेला समिति के अध्यक्ष श्री मनमोहन अग्रवाल ने राज्यपाल का स्वागत करते हुए कहा कि भोपाल मेले को शुरू करने में भास्कर समूह के संस्थापक स्वर्गीय श्री रमेश चंद्र अग्रवाल का महत्वपूर्ण योगदान रहा है। मेला 27 वर्षों से निरतंर चल रहा है। वर्ष 1991 में सिर्फ 60 स्टाल शुरू होकर आज विशाल आकार लेता जा रहा है। अब यहाँ लगभग 600 स्टाल लगते हैं। यहाँ भोपाल ही नहीं अब तो आस पास के गाँवों और शहरों के लोग बड़ी संख्या में इस मेले में घूमने के लिए आते हैं।

    मेला समिति के महामंत्री श्री संतोष अग्रवाल ने आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह मेला भोपाल शहर की पहचान बन गया है। यहाँ मनोरंजन के साथ-साथ नि:शुल्क हेल्थ हेल्थ कैम्प भी लगाया गया है। यहाँ नारायण सेवा संस्थान, उदयपुर के सहयोग से नि:शक्तजनों के लिए कृत्रिम अंगों का वितरण होगा। एलोपैथी के डॉक्टरों द्वारा नाक, कान, गला, केंसर आदि की जाँच होगी। दंत परीक्षण, शुगर की जाँच के अलावा नेत्र परीक्षण कर नि:शुल्क चश्मों का वितरण किया जायेगा।

  • प्रशासनिक बदलाव की धुरी बनेंगे डॉ.गोविंद सिंह

    प्रशासनिक बदलाव की धुरी बनेंगे डॉ.गोविंद सिंह

    कांग्रेस में समाजवादी पृष्ठभूमि का परचम लेकर चलने वाले डाक्टर गोविंद सिंह को मुख्यमंत्री कमलनाथ ने सामान्य प्रशासन विभाग की जिम्मेदारी भी सौंप दी है।कमलनाथ के इस फैसले के कई अर्थ निकाले जा रहे हैं। कहा जा रहा है कि कांग्रेस की अल्पमत वाली सरकार कई दबावों और तनावों के बीच झूल रही है। सत्ता के चार बड़े केन्द्र कांग्रेस सरकार के फैसलों को फुटबाल बना रहे हैं। आगामी विधानसभा के सत्र में ये खींचतान सरकार के लिए भारी पड़ सकती है। डाक्टर गोविंद सिंह ने तो पहले शपथ लेने से ही इंकार कर दिया था बाद में जीएडी विभाग लेने पर अड़ गए जिससे लगता है कि सरकार कई धड़ों में बंट गई है।

    हालांकि जो लोग डाक्टर गोविंद सिंह को जानते हैं वे समझते हैं कि लगातार जनता की पैरवी करने वाले डाक्टर साहब ने कभी ओछे दांव नहीं खेले हैं। वे जनहित के मुद्दों पर कई बार अपनी ही सरकार को घेरते रहे हैं। दिग्विजय सिंह सरकार में वे जनता के मुद्दों पर अपनी ही सरकार को खरीखोटी सुनाते रहे हैं।ऐसे में सामान्य प्रशासन विभाग लेने की उनकी जिद के क्या मायने हो सकते हैं। सामान्य प्रशासन विभाग सरकार का प्रमुख विभाग है। इसमें राजभवन सचिवालय,मध्यप्रदेश लोक सेवा आयोग,लोक आयुक्त एवं उप लोक आयुक्त,राज्य निर्वाचन आयुक्त का कार्यालय,मुख्य तकनीकी परीक्षक (सतर्कता),राज्य आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो,मध्यप्रदेश मानव अधिकार आयोग, आर.सी.वी.पी.नरोन्हा प्रशासन अकादमी मध्यप्रदेश,मध्यप्रदेश भवन,राज्य सत्कार अधिकारी का कार्यालय,विभागीय जांच आयुक्त कार्यालय,मध्यप्रदेश राज्य सूचना आयोग,अधिनियमों के अधीन गठित मंडल तथा निगम,मध्‍यप्रदेश सिविल सेवा सर्विसेस खेल मण्डल, विभाग के अधीन आने वाली सेवा का नाम,भारतीय प्रशासनिक सेवा,राज्य प्रशासनिक सेवा,मध्यप्रदेश मंत्रालयीन सेवा,राजभवन, मध्यप्रदेश प्रशासनिक अधिकरण, लोक सेवा आयोग, लोक आयुक्त एवं उप लोक आयुक्त, मुख्य तकनीकी परीक्षक, राज्य आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो, प्रशासन अकादमी और राज्य निर्वाचन आयोग के कार्यालयों से संबंधित सेवा विषय,आरक्षण प्रकोष्ठ,मानव अधिकार प्रकोष्ठ,पेंशन प्रकोष्ठ,पंच-ज प्रकोष्ठ,स्‍थानान्‍तर प्रकोष्ठ,सूचना का अधिकार प्रकोष्ठ,सुशासन प्रकोष्‍ठ,मुख्‍य सचिव कार्यालय,सत्‍कार कार्यालय जैसी महत्वपूर्ण जवाबदारी होती है।

    डाक्टर गोविंद सिंह को शुरुआती विभाग आबंटन में सहकारिता और संसदीय कार्य विभाग दिए गए थे। वे पहले भी सहकारिता और गृह विभाग संभाल चुके हैं। सहकारिता आंदोलन कांग्रेस की राजनैतिक शैली का प्रमुख औजार रहा है। हालांकि ये भी सच है कि सहकारिता आंदोलन को धराशायी करने में कांग्रेस के कुछ नेताओं ने बड़ी भूमिका निभाई। सहकारिता की आड़ में पनपे माफिया ने इस आंदोलन को शोषण का माध्यम बना दिया जो आगे चलकर जन आक्रोश की वजह बना।आज जब देश पूंजीवाद की राह पर चल रहा है तब सहकारिता के क्षेत्र को आज के संदर्भों में नए सिरे से परिभाषित करने की जरूरत है। ये काम ही अपने आप में इतना विस्तृत है कि इसे संभालने वाला व्यक्ति कोई दूसरा कार्य नहीं कर सकता। ऐसे में डाक्टर साहब को जीएडी जैसा बड़ा विभाग संभालने की जिद क्यों करनी पड़ी।

    इस मुद्दे की तहकीकात करते हुए कई नई बातें सामने आ रहीं हैं। ये तथ्य गौर करने लायक है कि डाक्टर गोविंद सिंह पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह के करीबी माने जाते हैं। दिग्विजय सिंह सरकार की असफलता की एक बड़ी वजह उसका पंचायती राज लागू करने का फैसला भी माना जाता रहा है। पंचायती राज के नाम पर दिग्विजय सिंह की सरकार ने सरकारी तंत्र के समानांतर ऐसा ढांचा खड़ा कर दिया था जो निहायत गैर जिम्मेदार था और सरकारी खजाने पर बोझा साबित हुआ था। असामाजिक तत्वों और माफिया ताकतों ने तब कार्यपालिका का लगभग अपहरण कर लिया था। हालात इतने विपरीत हो गए थे कि नौकरशाही ने सरकार से असहयोग शुरु कर दिया और जिसकी परिणति दिग्गी सरकार के पतन के रूप में सामने आई थी। दिग्विजय सिंह सार्वजनिक मंचों पर सरकारी तंत्र को लताड़ते देखे जाते थे। आईएएस अफसर हों या आईपीएस अफसर सभी दिग्विजय सिंह के आक्रोश का शिकार बने। राज्य प्रशासनिक सेवा के अफसरों की तो कोई बिसात ही नहीं थी। दिग्विजयसिंह की कई बातें तथ्यों पर आधारित भी थीं लेकिन नेता की मंशा को भांपकर कांग्रेसियों ने नौकरशाही को जिस तरह लताड़ना शुरु कर दिया वो असंतोष की बड़ी वजह बना था।

    इस बार डाक्टर गोविंद सिंह ने जिस जिद के साथ सामान्य प्रशासन विभाग की कमान हथियाई है उसके पीछे दिग्विजय सिंह से उनका तालमेल ही प्रमुख वजह माना जा रहा है। प्रशासनिक हलकों में कहा जा रहा है कि डाक्टर गोविंद सिंह के माध्यम से खुद दिग्विजय सिंह अपनी आधी अधूरी मंशा को लागू करना चाहते हैं। पिछले कार्यकाल में वे नौकरशाही पर लगाम लगाने का जो काम पूरा नहीं कर सके थे वो कमलनाथ मंत्रिमंडल में डॉ.गोविंद सिंह के माध्यम से करना चाहते हैं। जाहिर है कि खुद कमलनाथ भी इसी सोच के पक्षधर साबित होंगे। शपथ ग्रहण के बाद कार्यभार संभालने मंत्रालय पहुंचे मुख्यमंत्री ने पहली पत्रकार वार्ता में नौकरशाही पर निशाना साधा था। उनका कहना था कि आज के दौर का नौजवान लालफीताशाही को झेलने तैयार नहीं है। अफसरों को अपना सोच बदलना होगा। कार्यपालिका की जो जवाबदारी है उन कार्यों के लिए यदि कोई नागरिक शिकायत लेकर उनके पास आया तो वे बर्दाश्त नहीं करेंगे।

    भाजपा सरकार के पतन की वजह भी नौकरशाही को ही माना जा रहा है। भाजपा के कार्यकर्ताओं की हमेशा से शिकायत रही है कि अफसर उनकी बात नहीं सुनते। प्रशासनिक सुधारों को लेकर भाजपा ने तमाम चिंतन,मनन और बैठकें की हैं। पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान अफसरों को शासन व्यवस्था का महत्वपूर्ण अंग मानते थे। इसके बावजूद नौकरशाही के बीच सरकारी खजाने को लूटने की खुली होड़ पनपी वो शिवराज सिंह सरकार की कलंकित प्रशासनिक शैली की वजह बन गई थी। शिवराज सिंह सरकार के अंतिम चार सालों में जनधन खाते और केन्द्र के प्रयासों से योजनाओं का लाभ सीधे हितग्राहियों के खाते में पहुंचाने की व्यवस्था भी हुई लेकिन तब तक प्रशासनिक व्यवस्था इतनी बेलगाम हो चुकी थी कि जन आक्रोश से भाजपा का जनाधार प्रभावित भी हुआ।

    कांग्रेस की अल्पमत वाली कमलनाथ सरकार के सामने असरकारी उपस्थिति दिखाने के लिए बहुत कम समय है। लोकसभा चुनाव सिर पर खड़ा है। कांग्रेस ने चुनाव में वक्त है बदलाव का नारा दिया था। जनता ने उसी बदलाव की आस में उसे सरकार में भेजा है। ऐसे में यदि कार्यपालिका ने असहयोग शुरु कर दिया तो सरकार को लेने के देने पड़ सकते हैं। जाहिर है कि सरकार कार्यपालिका से सीधा टकराव लेने की स्थिति में नहीं है। इसके विपरीत यदि सरकार जनता को जीत का अहसास कराना चाहती है तो उसे नौकरशाही के चंगुल में फंसे पड़े प्रदेश को मुक्त कराना होगा। ये काम सामान्य प्रशासन विभाग को कसे बगैर संभव नहीं होगा। इस विभाग के ज्यादातर फैसले सरकार और मंत्रिपरिषद की जद में होते हैं। जाहिर है कि डाक्टर गोविंद सिंह पर बड़ी जवाबदारी होगी कि वे किस तरह कांग्रेस के सुधारों को लागू करें और अफसरशाही के बीच विद्रोह का भाव भी न पनपने दें। दूध के जले दिग्विजय सिंह के अरमानों की छाछ को फूंक फूंक कर कैसे पिएं। कल्याणकारी राज्य की अवधारणा के बीच जो विशाल कार्यपालिका का बोझ कांग्रेस की सरकारें लादती रहीं हैं भाजपा ने भी उसमें थोडी़ बहुत वृद्धि ही की है।

    जाहिर है कि कांग्रेस की मौजूदा सरकार के सामने चुनौती है कि वो जनता को अनुत्पादक कार्यपालिका के बोझ से राहत कैसे दिलाए। सरकार ने सत्ता में आते ही पुलिस कर्मियों को एक दिन की छुट्टी का फैसला लागू कर दिया है। ऐसे में उसे आठ हजार पुलिस वालों को तत्काल नौकरी देने की मजबूरी का सामना करना पड़ेगा। पंद्रह सालों से सत्ता से बाहर रहे कांग्रेसी भी सरकार पर दबाव बना रहे हैं कि वो उनके चहेतों को सरकारी नौकरियां दे। जाहिर है कि चाहते हुए भी कांग्रेस की मौजूदा सरकार कार्यपालिका को सुधारने का कोई बड़ा अभियान नहीं चला पाएगी। ऐसे में डाक्टर गोविंद सिंह ने सामान्य प्रशासन विभाग लेकर कार्यपालिका के चक्रव्यूह में घुसने का फैसला तो कर लिया है लेकिन वे इसे कैसे भेदेंगे ये आने वाले समय में ही देखने मिलेगा।

  • तंत्र शास्त्र सामाजिक विकास में सहयोगीःआनंदी बेन

    तंत्र शास्त्र सामाजिक विकास में सहयोगीःआनंदी बेन

    सांची विश्वविद्यालय में तंत्र और श्रीविद्या पर धर्म-धम्म सम्मेलन सम्पन्न

    भोपाल,19 दिसंबर(प्रेस सूचना केन्द्र)। राज्यपाल श्रीमती आनंदीबेन पटेल ने आज रायसेन जिले सांची बौद्ध-भारतीय ज्ञान अध्ययन विश्वविद्यालय में जारी धर्म-धम्म सम्मेलन के समापन अवसर पर कहा कि तंत्र शास्त्र और श्रीविद्या, भक्ति और ज्ञान का अध्यात्मिक मार्ग है। इस विषय में जनमानस में अल्पज्ञान है, जिसे दूर करने की ज़रूरत है।

    विश्वविद्यालय के निवृतमान कुलपति आचार्य यज्ञेश्वर शास्त्री ने कहा कि तंत्रशास्त्र शोध की दृष्टि से पिछड़ रहा है। इस कॉन्फ्रेंस से शोध को बढ़ावा मिलेगा। भारतीय इतिहास अनुसंधान परिषद के चेयरमैन प्रो अरविंद पी जामखेड़कर ने कहा कि तंत्र पर केंद्रित इस सम्मेलन से उन्हें इतिहास को देखने की नई दृष्टि मिली है। विश्वविद्यालय के कुलसचिव श्री अदितिकुमार त्रिपाठी ने कहा कि तंत्र शास्त्र का उल्लेख भारतीय, बौद्ध और जैन साहित्य में प्रमुखता से मिलता है। इस मौके पर विश्वविद्यालय के कुलपति श्री मनोज श्रीवास्तव भी उपस्थित थे।

    समापन सत्र के पूर्व दो सामान्य सत्रों में अमेरिका से आए प्रो. देवाशीष बनर्जी ने तंत्र और वेदांत के अंतरसंबंधों पर प्रकाश डालते हुए दोनों की प्रकियाओं एवं उद्देश्यों पर प्रकाश डाला। ऑस्ट्रिया के प्रो जयेन्द्र सोनी ने शैव सिद्धांत और शिवज्ञानबोध में शक्तिनिपात का उल्लेख करते हुए कहा कि शक्ति के बिना शिव की कल्पना नहीं हो सकती। उन्होंने कहा कि ज्ञान ही शाश्वत सत्य है और गुरु शिव का प्रतिरूप है।

    समापन कार्यक्रम में विश्वविद्यालय द्वारा गोद लिए गए गांव बिलारा के विद्यार्थियों को राज्यपाल ने फल, किताबें और मेडिकल फर्स्ट एड किट्स भेंट की। तीन दिन के अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में अमेरिका, कनाडा, जर्मनी, ऑस्ट्रिया, फिनलैण्ड, बैल्जियम, कोरिया, श्रीलंका एवं नेपाल से 34 विदेशी विद्वान समेत 130 भारतीय विद्वान शामिल हुए। 6 सामान्य सत्र, 9 गोलमेज सम्मेलन और तीन अकादमिक सत्रों में 100 से अधिक शोधपत्र प्रस्तुत किए गए।

  • प्रो. आशा शुक्ला बनी कुलपति

    भोपाल,14 दिसंबर(प्रेस सूचना केन्द्र)। कुलाधिपति और राज्यपाल श्रीमती आनंदीबेन पटेल ने प्रो. आशा शुक्ला, विभागाध्यक्ष, महिला अध्ययन विभाग, बरकतउल्ला विश्वविद्यालय, भोपाल को डॉ. बी.आर. अंबेडकर सामाजिक विज्ञान विश्वविद्यालय, महू का कुलपति नियुक्त किया है। प्रो. आशा शुक्ला की नियुक्ति कुलपति के पद का कार्यभार ग्रहण करने की तिथि से पांच वर्ष की कालावधि अथवा 70 वर्ष की आयु, जो भी पूर्वतर हो के लिए की कई है।

    प्रो.शुक्ला लिंगभेद को दूर करने के लिए किए गए अपने विशेष प्रयासों के कारण जानी जाती हैं। उन्होंने विभिन्न सामाजिक विषयों पर कई पुस्तकें भी लिखी हैं और शोधपत्र प्रकाशित किए हैं।