Category: दुनिया एक बाजार

  • संजय जैन अब फार्मेसी काऊंसिल आफ इंडिया के सदस्य भी निर्वाचित

    संजय जैन अब फार्मेसी काऊंसिल आफ इंडिया के सदस्य भी निर्वाचित

    भोपाल 21 जुलाई (प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)।भारत सरकार के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय की विधिक इकाई फार्मेसी काऊंसिल आफ इंडिया के सदस्य के रूप में मध्यप्रदेश फार्मेसी काऊंसिल के अध्यक्ष संजय जैन को विधिवत पांच सालों के लिए निर्वाचित किया गया है। इसके साथ ही मध्यप्रदेश अब देश के फार्मा सेक्टर में नई छलांग लगाने के लिए तैयार हो गया है। मोदी सरकार ने मेक इन इंडिया अभियान के अंतर्गत देश के फार्मा सेक्टर को विश्व की जरूरतों के लिए तैयार करने का रोड मैप बनाया है। मध्यप्रदेश की ओर से स्वास्थ्य मंत्री प्रभुराम चौधरी ने श्री संजय जैन को अपना प्रतिनिधि बनाकर भेजा है।
    फार्मेसी काऊंसिल आफ इंडिया के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ.मोंटू पटेल ने पिछले दिनों अपने रायपुर प्रवास के दौरान श्री जैन से मध्यप्रदेश के फार्मा सेक्टर की संभावनाओं की जानकारी ली थी। उनके साथ आए केन्द्रीय फार्मेसी शिक्षा समिति के अध्यक्ष डॉ. दीपेन्द्र सिंह ने स्टेट फार्मेसी काऊंसिल की स्थितियों की समीक्षा की थी। इसके बाद दिल्ली में हुए फैसले के आधार पर पीसीआई के रजिस्ट्रार और सचिव अनिल मित्तल ने इस निर्वाचन की सूचना भेजी है।
    भारत सरकार की ये संस्था देश में फार्मेसी के शिक्षण प्रशिक्षण और कालेजों को मान्यता देने में प्रमुख भूमिका निभाती है।देश के दवा उद्योग को दिशा देने में भारत सरकार का स्वास्थ्य मंत्रालय इस संस्था के माध्यम से ही संवाद करता है। वर्तमान नरेन्द्र मोदी सरकार ने जबसे मेक इन इंडिया का विचार लागू किया है तबसे भारत का दवा उद्योग कई मूलभूत बदलावों के साथ नई ऊंचाईयां छू रहा है।
    श्री संजय जैन को मध्यप्रदेश की ओर से पहली बार स्टेट फार्मेसी काऊंसिल का प्रतिनिधित्व करने का अवसर मिला है। मध्यप्रदेश सरकार ने दवा के कारोबार में राज्य की भागीदारी बढ़ाने के लिए जो प्रयास किए हैं राज्य को उसका पूरा लाभ मिले इसके लिए श्री जैन कई बड़े दवा उद्योगों से निरंतर संपर्क कर रहे हैं। स्वास्थ्य मंत्री डॉ.प्रभुराम चौधरी ने दवा उद्योग को सुव्यवस्थित करके आम जनता को जो आधुनिक दवाईयां सस्ती कीमतों पर उपलब्ध कराने की मुहिम चलाई है उसमें संजय जैन की उपस्थिति प्रभावी साबित होगी।

  • प्रहलाद पटेल बोले दमोह के टमाटर को फूड प्रोसेसिंग नीति का लाभ मिलेगा

    प्रहलाद पटेल बोले दमोह के टमाटर को फूड प्रोसेसिंग नीति का लाभ मिलेगा

    भोपाल,18 दिसंबर(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)। देश में अगस्त 2019 से जल जीवन मिशन का कार्य प्रारंभ हुआ, लेकिन मध्य प्रदेश में इसका काम मई 2020 से प्रारंभ हुआ। मध्य प्रदेश में जल जीवन मिशन के पूर्व 14.5 प्रतिशत घरों में नल से जल प्रदाय था, जो अब बढ़कर 36.5 प्रतिशत हो चुका है।

    यह बात केंद्रीय खाद्य प्रसंस्करण उद्योग एवं जल शक्ति राज्य मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल ने शनिवार को भोपाल में पत्रकार वार्ता में कही। उन्होंने कहा कि जल जीवन मिशन के तहत प्रदेश में 2024 तक कुल 1 करोड़ 22 लाख क्रियाशील घरेलू नल कनेक्शन उपलब्ध कराए जाने हैं। 17 दिसंबर 2021 तक प्रदेश में 44.64 लाख (36.5 प्रतिशत) परिवारों को घरेलू नल कनेक्शन उपलब्ध करा दिए गए हैं। पटेल ने कहा कि मध्य प्रदेश अकेला राज्य है, जिसमें समस्त जिला स्तरीय पेयजल परीक्षण प्रयोगशालाएं NABL प्रमाणित हैं। उन्होंने कहा कि जल जीवन मिशन के तेजी से क्रियान्वयन के लिए प्रदेश के बजट को वर्ष 2021-22 में तीन गुना (5824 करोड़ रुपये) किया गया, जिससे राज्यांश व्यय करने में मप्र (1260 करोड़ रुपये) प्रथम स्थान पर है।

    https://youtu.be/p-tKV9do7pY
    आज केन्द्रीय मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल ने दमोह की चना दाल और टमाटर की फूड प्रोसेसिंग को बढ़ावा देने की बात कही, (वीडियो आईएनएच टीवी के सौजन्य से उपलब्ध)उन्होंने प्रेस इंफार्मेशन सेंटर को आश्वासन दिया कि दमोह जिले के रंजरा में बनाई जा रही गौशाला शीघ्र ही प्रारंभ हो जाएगी ।इसके लिए उन्होंने प्रशासन को स्पष्ट निर्देश भी दिए।

    पत्रकार वार्ता में मध्यप्रदेश की पूर्व मंत्री श्रीमती अर्चना चिटनिस, डॉ.हितेश वाजपेयी, भोपाल भाजपा के पूर्व जिलाध्यक्ष विकास वीरानी,प्रवक्ता सुश्री नेहा बग्गा समेत कई अन्य पदाधिकारी भी उपस्थित थे।

  • BitMEX ने पेश किया अब तक का सबसे फायदेमंद क्रिप्टो उत्पाद ‘EARN’

    BitMEX ने पेश किया अब तक का सबसे फायदेमंद क्रिप्टो उत्पाद ‘EARN’

    BitMEX ने पेश किया अब तक का सबसे फायदेमंद क्रिप्टो उत्पाद ‘EARN’

    BitMEX EARN शुरुआत के ग्राहकों के लिए Tether पर
    १००% तक का एपीआर ऑफर करता है

    माहे, सेशेल्स – 10दिसंबर,(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर) वैश्विक क्रिप्टोक्यूरेंसी ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म BitMEX ने आज BitMEX EARN के लॉन्च की घोषणा की। यह ब्याज देने वाला उत्पाद सभी सार्वजनिक कमाई उत्पादों के मुकाबले उच्चतम वार्षिक प्रतिशत दर (एपीआर) प्रदान करता है।
    BitMEX EARN उत्पाद, एक निर्धारित अवधि के लिए फण्ड की सदस्यता लेने वाले उपयोगकर्ताओं को १४ – १००% एपीआर के ब्याज भुगतान से पुरस्कृत करता है। इसके अलावा, BitMEX EARN बाजार में अपने प्रकार का एकमात्र उत्पाद है जो १००% बीमा फंड समर्थित है। सभी भुगतानों की गारंटी उद्योग के सबसे बड़े फंडों में से एक BitMEX बीमा कोष द्वारा दी जाती है।
    BitMEX EARN पर उपलब्ध पहली क्रिप्टोक्यूरेंसी Tether (USDT ERC-२०) है। BitMEX के ग्राहक, जो ७ दिसंबर २०२१ से पहले सदस्य्ता लेते हैं वे प्रति उपयोगकर्ता USDT १,००० तक के जमा राशि पर Tether पर १००% एपीआर तक और USDT १००,००० तक के जमा राशि पर १४% एपीआर तक कमाने के अर्ली बर्ड ऑफर का फायदा उठा सकते हैं। BitMEX EARN पर अधिक विवरण यहां पाया जा सकता है।

    अलेक्जेंडर हॉप्टनर, मुख्य कार्यकारी अधिकारी – BitMEX ने कहा, “BitMEX EARN से कोई भी आसानी से दो अंकों का रिटर्न उत्पन्न प्राप्त कर सकता है – जो TradFi उत्पादों से मिलने वाली दरों से काफी अधिक है। हमारे EARN उत्पादों का एपीआर अन्य क्रिप्टो प्लेटफॉर्म पर पेश किए जाने वाले उत्पादों, जिनकी समान उत्पादों पर हेडलाइन दरें आमतौर पर अप्राप्य शर्त आवश्यकताओं से जुड़ी होती हैं. उनसे कहीं अधिक है। हमने अपनी सदस्यता प्रक्रिया को भी सुव्यवस्थित किया है, जिससे यह एक ऐसा उत्पाद बन गया है जो, न केवल पेशेवरों के लिए, लेकिन सभी प्रकार के व्यापारियों के लिए आकर्षक बन गया है।”

    BitMEX EARN, कंपनी के महत्वाकांक्षी व्यापार परिवर्तन का हिस्सा है, जिसे इसकी ‘बियॉन्ड डेरिवेटिव्स’ रणनीति के रूप में जाना जाता है। BitMEX साल २०२० में एक कठोर उपयोगकर्ता सत्यापन और अनुपालन कार्यक्रम शुरू करने के बाद पांच नए वैश्विक व्यापार खंड (स्पॉट, ब्रोकरेज, कस्टडी, सूचना उत्पाद और अकादमी) जोड़ रहा है। जनवरी २०२१ में, बिटमेक्स ने अपने उपयोगकर्ता सत्यापन कार्यक्रम को पूरा करने की घोषणा की, जिससे बिटमेक्स सबसे बड़े क्रिप्टो डेरिवेटिव एक्सचेंजों में से एक है जिसके पास पूरी तरह से सत्यापित सक्रिय उपयोगकर्ता आधार है। BitMEX EARN नवंबर २०२१ में कंपनी द्वारा मार्जिन और स्थायी स्वैप पर निपटान के लिए USDT की शुरुआत का अनुसरण करता है।

    BitMEX EARN दिसंबर ०१, २०२१ को लॉन्च किया गया, जिसमें दिसंबर ०७, २०२१ तक (या पूरी तरह से सब्सक्राइब होने तक) पहले दो उत्पादों के लिए सब्सक्रिप्शन खुला है। सदस्यता लेने या अधिक जानने के लिए, BitMEX EARN वेबपेज पर जाएं।

    BitMEX के बारे में:
    BitMEX एक ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म है जो निवेशकों को वैश्विक डिजिटल करेंसी के वित्तीय बाजारों तक पहुंच प्रदान करता है। एचडीआर ग्लोबल ट्रेडिंग लिमिटेड BitMEX के मालिक है। BitMEX के बारे में, हमारी दृष्टि के बारे में, बढ़ती टीम के बारे में और आगे की राह के बारे में अधिक जानने के लिए, कृपया हमें Twitter, Telegram, और BitMEX Blog पर फॉलो करें।

  • वाइब्रेंट गुजरात वैश्विक सम्मेलन के लिए सीएम भूपेंद्र पटेल दुबई में करेंगे प्रचार

    वाइब्रेंट गुजरात वैश्विक सम्मेलन के लिए सीएम भूपेंद्र पटेल दुबई में करेंगे प्रचार

    अहमदाबाद,8 दिसंबर(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)। गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेन्द्र पटेल (CM Bhupendra Patel) वैश्विक निवेशक शिखर सम्मेलन (Vibrant Gujarat Global Summit 2022) से पहले प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) आकर्षित करने के लिए बुधवार को दुबई (Dubai expo) में प्रचार-प्रसार करेंगे. सम्मेलन गांधीनगर में जनवरी में होगा. मुख्यमंत्री कार्यालय ने एक विज्ञप्ति में कहा, ‘पटेल संयुक्त अरब अमीरात के उद्योग जगत प्रमुखों के साथ अलग-अलग बैठक करेंगे. वह दुबई में चल रहे ‘दुबई एक्सपो’ में भारत के मंडप का भी दौरा करेंगे.’

    ‘वायब्रेंट’ गुजरात वैश्विक शिखर सम्मेलन 10 से 12 जनवरी को होगा. विज्ञप्ति के अनुसार ‘वायब्रेंट’ गुजरात शिखर सम्मेलन की तैयारी के सिलसिले में मुख्यमंत्री भूपेन्द्र पटेल आठ दिसंबर को दुबई में प्रचार-प्रसार करेंगे. इस दौरान गुजरात के उद्योग राज्यमंत्री जगदीश पांचाल और अन्य वरिष्ठ सरकारी अधिकारी मुख्यमंत्री के साथ होंगे.
    वायब्रेंट गुजरात वैश्विक शिखर सम्मेलन का पीएम मोदी करेंगे उद्घाटन
    वाईब्रेंट गुजरात के नोडल अधिकारी एम थेन्नासरन का कहना है कि मुख्यमंत्री के पास एक लाख करोड के एमओयू सम्मेलन से पहले हो चुके होंगे. अब तक इस वैश्विक सम्मेलन के पहले 50 हजार करोड के निवेश प्रस्ताव मिल चुके हैं. जिनसे राज्य में 50 हजार को नौकरी मिल सकेगी. गांधीनगर में 10 से 12 जनवरी 2022 को यह निवेशक सम्मेलन आयोजित होगा. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुजरात के मुख्यमंत्री रहते 2005 में इसकी शुरुआत की थी. यह हर दो साल में होता है. वैसे वाइब्रेंट समिट 2021 में ही होनी थी लेकिन कोरोना महामारी के चलते इसका आयोजन नहीं किया जा सका था.

    बता दें कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी 10 जनवरी को सम्मेलन का उद्घाटन करेंगे. इसी के ही साथ बीते 18 सालों में इस समिट के दौरान कई एमओयू हुए हैं. जिसमें से 64.35 प्रतिशत प्रोजेक्ट को क्रियान्वित भी किया जा चुका है. सिर्फ 6.26 प्रतिशत प्रोजेक्ट ही क्रियान्वयन के चरण में हैं.

    18 राज्य चले गुजरात की राह पर
    वाइब्रेंट गुजरात ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट को अब देश के अधिकांश राज्यों ने अपना लिया है. गुजरात में इस तरह के सम्मेलन शुरू करने के बाद देश के करीब 18 राज्यों ने अब तक यह अपने-अपने यहां निवेश के लिए इस तरह के सम्मलेन का आयोजन आरंभ किया है. इन राज्यों में मध्य प्रदेश, कर्नाटक, बंगाल, तमिलनाडु, राजस्थान, तेलंगाना, ओडिशा, छत्तीसगढ़, उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड, हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर, उत्तराखंड और आंध्र प्रदेश, सहित कई राज्य शामिल हैं.

  • भाषाओं को बढ़ावा देने के लिए केंद्रीय भारतीय भाषा संस्थान (CIIL) और Koo App ने मिलाया हाथ

    भाषाओं को बढ़ावा देने के लिए केंद्रीय भारतीय भाषा संस्थान (CIIL) और Koo App ने मिलाया हाथ

    भाषाओं को बढ़ावा देने के लिए केंद्रीय भारतीय भाषा संस्थान (CIIL) और Koo App ने मिलाया हाथ
    • आपत्तिजनक माने जाने वाले शब्दों और वायांशों का एक संग्रह तैयार करेगा सीआईआईएल
    • भारतीय भाषाओं के संदर्भ, तर्क और व्याकरण को परिभाषित करेंगे
    • प्लेटफॉर्म पर सुरक्षा बढ़ाने और दुरुपयोग को रोकने के लिए Koo तकनीकी सहायता प्रदान करेगा और कंटेंट मॉडरेशन नीतियों को मजबूत करेगा

    राष्ट्रीय, 06 दिसंबर, 2021: सोशल मीडिया के दुरुपयोग को रोकने और भाषा के उचित इस्तेमाल को बढ़ावा देने के लिए मैसूर स्थित सेंट्रल इंस्टीट्यूट ऑफ इंडियन लैंग्वेजेज (CIIL) ने भारत के बहुभाषी माइक्रो-ब्लॉगिंग प्लेटफॉर्म Koo App की होल्डिंग कंपनी बॉम्बिनेट टेक्नोलॉजीज प्राइवेट लिमिटेड के साथ एक समझौते (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए हैं। भारत सरकार द्वारा भारतीय भाषाओं के विकास के सामंजस्य के लिए स्थापित की गई CIIL अब Koo App के साथ संयुक्त रूप से काम करेगी, ताकि इसकी कंटेंट मॉडरेशन नीतियों को मजबूत करने के साथ ही यूज़र्स को ऑनलाइन सुरक्षित करने में मदद मिल सके। यह समझौता यूजर्स को ऑनलाइन दुर्व्यवहार, बदमाशी और धमकियों से बचाने की दिशा में काम करेगा और एक पारदर्शी और अनुकूल कसो सिस्टम का निर्माण करेगा।

    इस समझौते के जरिये CIIL शब्दों, वाक्यांशों, संक्षिप्त रूपों और संक्षिप्त शब्दों सहित अभिव्यक्तियों का एक कोष तैयार करेगा, जिन्हें भारत के संविधान में आठवीं अनुसूची की 22 भाषाओं में आक्रामक या संवेदनशील माना जाता है। जबकि Koo App कोष बनाने के लिए प्रासंगिक डेटा साझा करेगा और इंटरफेस बनाने के लिए तकनीकी सहायता प्रदान करेगा जो सार्वजनिक पहुंच के लिए कोष की मेजबानी करेगा। यह सोशल मीडिया पर भारतीय भाषाओं के जिम्मेदार इस्तेमाल को विकसित करने के लिए एक दीर्घकालिक समझौता है और यह यूजर्स को सभी भाषाओं में एक सुरक्षित और व्यापक नेटवर्किंग अनुभव प्रदान करके दो साल के लिए वैध होगा।

    CIIL और Koo App के इस संयुक्त अग्रणी कार्य का उद्देश्य भारतीय भाषाओं में शब्दों और अभिव्यक्तियों के ऐसे शब्दकोश विकसित करना है, जिन्हें आक्रामक, अपमानजनक या आपत्तिजनक माना जाता है और इन भाषाओं में कुशल कंटेंट मॉडरेशन को सक्षम किया जा सके। भारतीय संदर्भ में इस तरह की पहल को पहले कभी लागू नहीं किया गया था।

    इस समझौते का स्वागत करते हुए CIIL के निदेशक प्रो. शैलेंद्र मोहन ने कहा कि भारतीय भाषाओं के यूजर्स को Koo मंच पर संवाद करने में सक्षम बनाना, वास्तव में समानता और बोलने की स्वतंत्रता के अधिकार की अभिव्यक्ति है, जो हमारे बहुत सम्मानित संवैधानिक मूल्य हैं। CIIL और Koo के बीच समझौता ज्ञापन यह सुनिश्चित करने की दिशा में एक प्रयास है कि सोशल मीडिया का इस्तेमाल, विशेष रूप से Koo App, बोलने/लिखने की स्वच्छता के साथ आता है और यह अनुचित भाषा और दुरुपयोग से मुक्त है। सोशल मीडिया पोस्ट के लिए सुखद और सुरक्षित वातावरण बनाने की दिशा में Koo की इस पहल को प्रोत्साहित करते हुए प्रो. मोहन ने कहा कि Koo App के प्रयास सराहनीय हैं। इसलिए, CIIL कोष के माध्यम से भाषा परामर्श प्रदान करेगा और जिम्मेदार एवं स्वच्छ सोशल मीडिया चर्चा को हासिल करने के लक्ष्य को साकार करने में Koo टीम के हाथों को मजबूत करेगा।

    इस सहयोग पर प्रकाश डालते हुए Koo App के सह-संस्थापक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी अप्रमेय राधाकृष्ण ने कहा, “एक बेहतरीन सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के रूप में Koo भारतीयों को कई भाषाओं में जुड़ने और चर्चा में सक्षम बनाता है। हम ऑनलाइन इको सिस्टम को बढ़ाकर अपने यूजर्स को सशक्त बनाना चाहते है, ताकि दुरुपयोग को प्रभावी तरीके से रोका जा सके। हम चाहते हैं कि हमारे यूजर्स भाषाई संस्कृतियों के लोगों के साथ सार्थक रूप से बातचीत करने के लिए मंच का लाभ उठाएं। हम इंटरनेट यूजर्स के लिए परस्पर दुनिया को अधिक सुरक्षित, भरोसेमंद और विश्वसनीय बनाने के लिए और इस कोष के निर्माण के लिए प्रतिष्ठित सेंट्रल इंस्टीट्यूट ऑफ इंडियन लैंग्वेजेज के साथ साझेदारी करते हुए प्रसन्न हैं।”

  • भारतीय यूजर्स के लिए Koo App पर आया Snapdeal

    भारतीय यूजर्स के लिए Koo App पर आया Snapdeal

    नई दिल्ली,1 दिसंबर, महत्वपूर्ण ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म सैपडील (Snapdeal) ने भारत में अपने लाखों यूज़र्स से उनकी मूल भाषाओं में जुड़ने के लिए मेड-इन-इंडिया सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म Koo App पर लॉगिन किया है। देश में ई-कॉमर्स बाजार को ऑनलाइन खरीदारों की बढ़ती संख्या की वजह से नया स्वरूप मिला है। ये ख़रीदार छोटे भारतीय शहरों और कस्बों से जुड़े हैं, जिन्हें भारत भी कहा जाता है। इन ग्राहकों की विशेष जरूरतों ने इस क्षेत्र के विकास को तेजी से बढ़ावा दिया है और इसके साथ ही स्थानीय भाषा में सामग्री और जानकारी की मांग भी बढ़ी है। सैपडील (Snapdeal), विशेष रूप से दूसरे और तीसरे दर्जे के शहरों समेत भारत भर के यूज़र्स के साथ जुड़ने के लिए Koo App की बेहतरीन बहुभाषी सुविधाओं का लाभ उठाएगा और उनकी मातृभाषा में सेल, डील्स और अन्य घोषणाओं के ज़रूरी अपडेट्स देकर उनसे जुड़ेगा। देसी भाषाओं में अभिव्यक्ति के लिए एक सोशल मीडिया मंच के रूप में Koo App वर्तमान में हिंदी, कन्नड़, तेलुगु, तमिल, बंगाली, असमिया, मराठी, गुजराती और अंग्रेजी समेत नौ भाषाओं में अपनी शानदार सुविधाएं प्रदान करता है। प्लेटफॉर्म पर फिलहाल यूजर्स की संख्या डेढ़ करोड़ से ज्यादा है और अगले एक वर्ष में इस माइक्रो-ब्लॉगिंग प्लेटफ़ॉर्म के डाउनलोड्स का आंकड़ा 10 करोड़ तक पहुंचने का अनुमान है।

    Koo App पर अपना अकाउंट बनाकर स्रैपडील, तमाम आयु-लिंग-स्थान के इंटरनेट यूजर्स तक पहुंचने में सक्षम होगा ये इंटरनेट यूजर्स डिजिटल फर्स्ट अर्थव्यवस्था में अपनी मूल भाषा में ब्रांड्स के साथ जुड़ने की इच्छा रखते हैं। सेपडील के ब्रांड मार्केटिंग निदेशक, सौम्यदीप चटर्जी ने कहा, “मोबाइल इंटरनेट एक्सेस ने दूरदराज की जगहों में रहने वाले लोगों तक पहुंचना और स्थानीय भाषाओं में उनके साथ बातचीत करना मुमकिन कर दिया है। इसलिए तमाम भाषाओं में कंटेंट बनाने में वक्त देना और कोशिश करना ज़रूरी हो जाता है। Koo App जैसा प्लेटफॉर्म हमें बड़े पैमाने पर स्थानीय समुदायों के साथ जुड़ाव बनाए रखने में मदद करेगा।”

    स्रेपडील (Snapdeal) का प्लेटफॉर्म पर स्वागत करते हुए Koo App के सह-संस्थापक मयंक बिदावतका ने कहा, “भारत के सबसे बड़े और सबसे लोकप्रिय ई-कॉमर्स दिग्गजों में से एक सैपडील को हम अपने प्लेटफॉर्म पर पाकर काफी खुश हैं। Koo App भारतीयों को अपनी मातृभाषा में अभिव्यक्ति का मौका देता है। हमारे ऑटो ट्रांसलेशन जैसे स्मार्ट फीचर्स, भाषा की जंजीरों को तोड़ते हुए, यूजर्स को एक-दूसरे से जुड़ने के लिए प्रोत्साहित करते हैं। हमें विश्वास है कि हमारे फीचर्स का फायदा उठाकर, सेपडील एक विशाल यूजर बेस के साथ
    सफलतापूर्वक जुड़ने में सफल होगा और कई भाषाओं में अपनी पेशकशों पर अधिक चर्चा को बढ़ावा दे सकेगा।”

    कू (Koo) के बारे में:

    Koo की स्थापना मार्च 2020 में भारतीय भाषाओं के एक बहुभाषी, माइक्रो-ब्लॉगिंग प्लेटफॉर्म के रूप में की गई थी और अब इसके डेढ़ करोड़ से ज्यादा यूजर्स हो गए हैं। इनमें काफी प्रतिष्ठित लोग भी शामिल हैं। भारत के विभिन्न हिस्सों के लोग, तमाम भारतीय भाषाओं में मौजूद इस मंच के जरिये मातृभाषा में अपनी अभिव्यक्ति कर सकते हैं। एक ऐसे देश में जहां भारत के सिर्फ 10% लोग अंग्रेजी बोलते हैं. एक ऐसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म की बेहद जरूरत है जो भारतीय यूजर्स को भाषा का व्यापक अनुभव दे सके और उन्हें जोड़ने में मदद कर सके। Koo भारतीय भाषाओं को पसंद करने वाले लोगों की आवाज़ के लिए एक मंच प्रदान करता है।

  • बिजली क्रांति बढ़ाएगी मुद्रा भंडार

    बिजली क्रांति बढ़ाएगी मुद्रा भंडार

    
    
    
    
    


    रमेश कुमार दुबे
    बिजली से चलने वाले वाहन अर्थव्‍यवस्‍था के साथ-साथ पर्यावरण के लिए भी मुफीद साबित होंगे। इसी प्रकार इलेक्‍ट्रिक वाहन पेरिस जलवायु समझौते की शर्तों के अनुपालन में भी मददगार बनेंगे। इतना ही नहीं इलेक्‍ट्रिक वाहनों के साथ आने वाली स्‍वचालन तकनीक से सड़क दुर्घटनाओं में भी कमी आएगी। स्‍पष्‍ट है, मोदी सरकार ने जो कदम उठाया है वह देश में एक नई बिजली क्रांति का आगाज करेगा।

    दुनिया भर में बिजली खपत में भारी असमानता पाई जाती है। इतना ही नहीं जहां विकसित देशों में जीवन के हर पहलू में बिजली की भरपूर भागीदारी रही है, वहीं भारत जैसे विकासशील देशों में बिजली की भूमिका रोशनी और औद्योगिक गतिविधियों तक सिमटी रही।

    दशकों की उपेक्षा के बाद भारत में भी बिजली की भागीदारी बढ़ाने के प्रयास शुरू हो चुके हैं। देश के हर गांव तक बिजली पहुंचाने के बाद प्रधानमत्री नरेंद्र मोदी ने सातों दिन-चौबीसों घंटे बिजली मुहैया कराने का महत्‍वाकांक्षी लक्ष्‍य तय किया है। इसके साथ-साथ सरकार देश के समूचे परिवहन तंत्र को पेट्रोल-डीजल के बजाए बिजली आधारित करने की महत्‍वाकांक्षी योजना पर काम कर रही है। रेल लाइनों का विद्युतीकरण और 2030 तक कुल वाहनों के 25 फीसदी को इलेक्‍ट्रिक वाहन करने का लक्ष्‍य है।


    इलेक्‍ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने के लिए मोदी सरकार ने 2015 में फास्‍टर एडॉप्‍शन एंड मैनुफैक्‍चरिंग ऑफ इलेक्‍ट्रिक ह्विकल (फेम)-1 शुरू किया था। इसे मिली कामयाबी को देखते हुए 28 फरवरी को कैबिनेट ने फेम के दूसरे चरण को मंजूरी दे दी। इसके तहत देश में इलेक्‍ट्रिक वाहनों को प्रोत्‍साहन देने के लिए 10,000 करोड़ रूपये का आवंटन किया गया है।

    यह राशि इलेक्‍ट्रिक वाहनों और इलेक्‍ट्रिक इंफ्रास्‍ट्रक्‍चर पर खर्च की जाएगी जिससे 2030 तक 100 फीसदी वाहनों को इलेक्‍ट्रिक बनाने का काम किया जा सके। फेम-2 के अंतर्गत इलेक्‍ट्रिक वाहनों की खरीद को सस्‍ता बनाने और चार्जिंग स्‍टेशनों की पर्याप्‍त व्‍यवस्‍था पर काम किया जाएगा।

    फेम-2 योजना के तहत इलेक्‍ट्रिक वाहन 20,000 से 2.5 लाख रूपये तक सस्‍ते हो जाएंगे। वाहनों को सस्‍ता बनाने के लिए वाणिज्‍यिक वाहनों को प्राथमिकता दी जा रही है। सरकार का लक्ष्‍य है कि तय समय के भीतर देश में 10 लाख इलेक्‍ट्रिक दोपहिया, पांच लाख इलेक्‍ट्रिक तिपहिया, 55000 इलेक्‍ट्रिक कार और 70000 इलेक्‍ट्रिक बस खरीदी जाएं। यह प्रोत्‍साहन सिर्फ उन्‍हें दिया जाएगा जो लिथियम आयन बैटरी से युक्‍त वाहन खरीदेंगे।

    योजना के तहत महानगरों, टू टियर शहरों और पहाड़ी इलाकों में 2700 चार्जिंग स्‍टेशन लगाए जाएंगे। इन शहरों में हर तीन किमी पर एक चार्जिंग स्‍टेशन और राजमार्गों पर हर 25 किमी पर चार्जिंग स्‍टेशन लगाने का लक्ष्‍य रखा गया है। इसके साथ-साथ रिहाइशी इलाकों में भी चार्जिंग स्‍टेशन लगाए जाएंगे।

    इस दिशा में आंध्र प्रदेश सरकार ने एक बड़ी पहल करते हुए 2024 तक पेट्रोल-डीजल कारों के पंजीकरण रोकने और अगले पांच वर्षों में सड़कों पर 10 लाख इलेक्‍ट्रिक वाहन लाने की घोषणा की है। इसके साथ-साथ 2024 तक सभी सरकारी वाहनों को इलेक्‍ट्रिक वाहनों में बदल दिया जाएगा। कमोबेश इसी तरह की पहल कर्नाटक सरकार ने भी की है।

    अधिक से अधिक लोग पेट्रोल-डीजल के बजाए बिजली से चलने वाले वाहन अपनाएं इसके लिए सरकार खुद पहल कर रही है। हाल ही में सरकार ने टाटा मोटर्स से 10,000 इलेक्‍ट्रिक वाहन खरीदने का समझौता किया है। बिजली मंत्रालय के मुताबिक इस दिशा में सबसे बड़ी बाधा कीमत है लेकिन एलईडी बल्‍ब का उदाहरण सरकार के लिए प्रेरणा का काम कर रहा है। गौरतलब है कि शुरू में एलईडी बल्‍ब बहुत महंगे पड़ते थे लेकिन जब देश में इनका बड़े पैमाने पर उत्‍पादन होने लगा तब इनकी कीमतों में तेजी से कमी आई। इसी तरह बैटरी रिक्‍शा व सोलर पंप को मिल रही लोकप्रियता भी सरकार का उत्‍साह बढ़ा रही है।

    फिर लीथियन ऑयन आधारित बैटरी की कीमतों में गिरावट से इलेक्‍ट्रिक वाहनों की लागत कम हो रही है। दूसरी ओर कठोर उत्‍सर्जन मानकों के कारण पेट्रोल-डीजल वाहनों की कीमत लगातार बढ़ रही है। मौजूदा अनुसंधान को देखें तो अगले पांच वर्षों में डीजल-पेटोल व बिजली से चलने वाले वाहनों की लागत लगभग एक समान हो जाएगी।

    स्‍पष्‍ट है, यदि भारत ढांचागत बदलाव नहीं करता तो उसे बड़े पैमाने पर इलेक्‍ट्रिक वाहन व संबंधित कल-पुर्जा आयात करना पड़ेगा। जर्मनी, चीन, अमेरिका जैसे देश पेट्रोल-डीजल की जगह इलेक्‍ट्रिक वाहन पर फोकस कर चुके हैं। इन देशों में वाहन निर्माताओं को 30-40 फीसदी सब्‍सिडी मिल रही है। भारत में इतनी सब्‍सिडी संभव नहीं है। इसलिए उसे समय पर कदम उठाना पड़ेगा।

    भारत अपनी जरूरत का 80 फीसदी पेट्रोलियम पदार्थ आयात करता है। ऐसे में परिवहन क्षेत्र में हो रही बिजली क्रांति से न केवल आयात पर निर्भरता घटेगी बल्‍कि पर्यावरण प्रदूषण में भी कमी आएगी। नीति आयोग की रिपोर्ट के मुताबिक इलेक्‍ट्रिक वाहनों के इस्‍तेमाल से 2030 तक सड़क परिवहन में खपत होने वाली ऊर्जा में 64 फीसदी और कार्बन उत्‍सर्जन में 37 फीसदी की कमी आएगी।

    स्‍पष्‍ट है, बिजली से चलने वाले वाहन अर्थव्‍यवस्‍था के साथ-साथ पर्यावरण के लिए भी मुफीद साबित होंगे। इसी प्रकार इलेक्‍ट्रिक वाहन पेरिस जलवायु समझौते की शर्तों के अनुपालन में भी मददगार बनेंगे। इतना ही नहीं इलेक्‍ट्रिक वाहनों के साथ आने वाली स्‍वचालन तकनीक से सड़क दुर्घटनाओं में भी कमी आएगी। स्‍पष्‍ट है, मोदी सरकार ने जो कदम उठाया है वह देश में एक नई बिजली क्रांति का आगाज करेगा।

  • अधिक फसल बेचने के चक्कर में सीलिंग एक्ट में फंसे किसान

    अधिक फसल बेचने के चक्कर में सीलिंग एक्ट में फंसे किसान

    भोपाल। समर्थन मूल्य पर मुक्त हस्त से फसलों की खरीद करने के मध्यप्रदेश सरकार के फैसले को प्रदेश के बड़े किसानों ने मुनाफा कमाने का साधन बना लिया है। वे अपनी अधिक जोत को फसलों की खरीद के लिए पंजीकृत करा लेते हैं। इससे उनकी फसलों का अधिकतर भाग सरकारी खरीद के दायरे में आ जाता है। इस साल जबकि कोरोना संकट के चलते सरकार की माली हालत खस्ता है तब भी ऐसे किसानों ने अपनी उपज सरकार को बेचने में सफलता पाई है। जबकि छोटे जोत वाले किसानों का खाद्यान्न बहुत कम खरीदा गया है। इस खामी के सामने आने के बाद अब सरकार के कान खड़े हुए हैं और उसने सीलिंग एक्ट के तहत जमीनों के रकबे की जांच भी शुरु कर दी है।

    जमीन के रकबे के आधार पर फसल बिक्री के लिए किसानों ने जो पंजीयन कराया है उन आंकड़ों की जांच कराने पर कई बड़े किसानों को अपनी जमीनें बचाना कठिन हो जाएगा। कई जिलों में किसानों के पास जमीन का रकबा इतना ज्यादा है, जो सीलिंग एक्ट के दायरे में आ सकता है।

    मप्र कृषि जोत अधिकतम सीमा अधिनियम 1960 (सीलिंग एक्ट)की धारा 7 के तहत प्रदेश के किसानों को खेती के लिए जमीन की अधिकतम जोत रखने का अधिकार है। यह पात्रता परिवार में सदस्यों की संख्या के आधार पर है। पिछले कुछ सालों में किसानों की जमीन की सिंचाई का रकबा बढ़ा है। केसीसी में अधिकतम कर्ज लेने के लिए भी किसानों ने राजस्व अभिलेखों में असिंचित जमीन को सिंचित करवाया है। साथ ही समर्थन मूल्य पर रबी एवं गर्मियों की फसलों की बिक्री के लिए जमीन को दो फसलीय सिंचित दर्ज कराया है। ऐसे में किसानों की सिंचित जमीन का रकबा बढ़ा है। इसका रिकॉर्ड किसान हर साल समर्थन मूल्य पर फसल बेचने के लिए पंजीयन कराते समय देते हैं। इसी रिकॉर्ड के आधार पर जांच हुई तो कई किसान इसके लपेटे में आ सकते हैं। खास बात यह है कि प्रदेश के किसी भी किसान के पास प्रदेश के किसी भी हिस्से में जमीन ज्यादा होती है तो वह सीलिंग एक्ट में आ सकती है।

    तहसील स्तर के मामले की सुनवाई एसडीएम करते हैं। दो अलग-अलग तहसील के मामलों की सुनवाई कलेक्टर कोर्ट में होती है। दो जिलों के मामले की सुनवाई संभागायुक्त करते हैं। जबकि दो अलग-अलग संभाग में जमीन से जुड़े मामले की सुनवाई आयुक्त, भू-अभिलेख एवं बंदोबस्त करते हैं।

    एक व्यक्ति एक फसलीय सिंचित जमीन 15 एकड़ तक रख सकता है। पांच सदस्यतीय परिवार 27 एकड़ तक रख सकता है। जबकि पांच से ज्यादा सदस्य होने पर हर सदस्य को 4.5 एकड़ रखने का अधिकार है, लेकिन अधिकतम 54 एकड़ तक रखी जा सकती है।

    एक व्यक्ति दो फसलीय 10 एकड़ तक जमीन अपने पास रख सकता है। पांच सदस्यीय परिवार पति-पत्नी एवं तीन नाबालिग के लिए अधिकतम 18 एकड़ जमीन रखने का अधिकार है। संयुक्त परिवार जिसमें पति-पत्नी एवं तीन नाबालिगों के लिए यह सीमा अधिकतम 18 एकड़ है, लेकिन इससे ज्यादा सदस्य होने पर पांच से ज्यादा सदस्य होने पर हर सदस्य को 3 एकड़ जमीन रखने का अधिकार है, यह अधिकतम 36 एकड़ तक रखी जा सकती है।

    इसी तरह असिंचित जमीन एक व्यक्ति 30 एकड़ तक रख सकता है। पांच सदस्यीय परिवार (दो नाबालिग समेत)54 एकड़ जमीन रख सकता है, पांच से ज्यादा सदस्य होने पर प्रति सदस्य 9 एकड़ असिंचित जमीन रख सकता है। लेकिन यह अधिकतम 108 एकड़ तक रखी जा सकती है। इससे ज्यादा जमीन होने पर सीलिंग एक्ट के तहत सरकार ले सकती है।

    सीलिंग एक्ट के प्रकरणों की सुनवाई अलग-अलग स्तर पर होती है। इन सभी मामलों में आपत्ति होने पर इन मामलों का निराकरण शासन स्तर पर किया जाता है।
    ज्ञानेश्वर बी पाटिल, आयुक्त, भू-अभिलेख एवं बंदोबस्त एवं सचिव राजस्व

  • ATIGS Dubai 2020 is going to be great opportunity for Indian industries-Anuradha Singhai

    ATIGS Dubai 2020 is going to be great opportunity for Indian industries-Anuradha Singhai

    DUBAI, UAE [ 16th JANUARY 2020 ] – Leading Africa business development company, ATIGS Group is proud to announce a partnership with Indo-European Chamber of Commerce and Industry to host the 2020 Africa Trade and Investment Global Summit (ATIGS) on October 28 & 29, 2020 in Dubai, United Arab Emirates.

    ATIGS is a unique business platform to foster relationships and engage efficiently with key influencers and investors from every corner of the world. During a period of two days, Vice presidents, Ministers, Governors, Business Executives, top CEOs, international investors and companies seeking to expand in African markets are gathered in one single place to discuss concrete investment projects and establish strategic partnerships through thematic workshops, presentations, and networking sessions.

    Last year, ATIGS Group hosted the premier ATIGS in the United States, on June 24-26 in Washington DC at the Ronald Reagan Building and World Trade Center. With more than 2,300 delegates from 92 countries, ATIGS USA 2018 was a great success for both the hosting country, sponsors and the participants. High-potential industries and companies were presented to a select audience which led to direct engagement, deal-making, co-investments and the establishment of business partnerships.

    The next edition, ATIGS Dubai 2020 will be a more exclusive high-level gathering for government officials, high-profile African business leaders, project developers, and international investors from Africa, UAE, Asia, Europe, and America. www.atigs2020.com

    “ATIGS Dubai 2020 is going to be great opportunity for Indian industries who are looking at expanding in African geography” said, Anuradha Singhai, President of Indo-European Chamber of Commerce and Industry

    Under this partnership, Indo-European Chamber of Commerce and Industry will support ATIGS Group in the promoting, and India delegates recruitment of ATIGS Dubai 2020, and now entitled to participate in the business and affairs of ATIGS Dubai 2020.

    “Hosting ATIGS is a huge contribution to the development of Africa, and we are excited to partner with IECCI to advance the mission and agenda of ATIGS Dubai 2020.” said, Bako Ambianda, Chairman and CEO of ATIGS Group, Inc.

    ATIGS Dubai 2020 is presented by ATIGS Group, Inc, and organized by Global Attain Advancement, LLC, known as GAA Exhibitions & Conferences, and supported by partners & sponsors.

  • श्रमिकों की आवाज कौन बने

    श्रमिकों की आवाज कौन बने

    भारत सरकार की नीतियों को श्रमिक विरोधी बताते हुए देशव्यापी हड़ताल का आव्हान किया गया। हड़ताल लगभग असफल रही। इससे देश की गतिविधियों पर कोई बड़ा असर नहीं पड़ा। जबकि इस हड़ताल में संगठित क्षेत्र के 25 लाख श्रमिकों की भागीदारी का दावा किया गया था। इस लिहाज से ये हड़ताल श्रमिक आंदोलनों की विदाई का दस्तावेज बन गया है। इसकी वजह ये है कि ये श्रमिक जिन क्षेत्रों से आते हैं वे क्षेत्र अब भारत की मुख्यधारा नहीं रहे हैं। बीएसएनल हो या सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक इनके समानांतर पूरा ढांचा कार्पोरेट सेक्टर में खड़ा हो चुका है। रेलवे जिस निजीकरण का विरोध कर रहा है वह कार्पोरेट सेक्टर के सहारे पूरी तरह यंत्रवत काम करने लगा है। ऐसे में हड़तालियों की बात कौन सुनेगा। हड़तालियों ने अपना समर्थन जुटाने के लिए असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों को लुभाने के लिए न्यूनतम वेतन 21 हजार रुपए करने का नारा दिया। ये नारा वे दे रहे हैं जिनके वेतन पचास हजार रुपए से अधिक हैं और वे अपना वेतन बढ़ाने की मांग को लेकर हड़ताल कर रहे हैं। संगठित क्षेत्र के पांच सात प्रतिशत कर्मचारी या श्रमिक यदि ये मांग करें कि नब्बे फीसदी नागरिकों का पेट काटकर आप हमारे वेतन भत्ते बढ़ा दें तो इसे कैसे न्यायोचित माना जा सकता है। फिर ये आवाज भी जनता की गरीबी दूर करने के नाम पर लगाई जाए तो इसे कैसे उचित ठहराया जाए। इसके बावजूद देश के श्रमिक संगठन अपनी हड़ताल को मजदूर की आवाज बता रहे हैं। इसे केन्द्र सरकार की हठधर्मिता के विरुद्ध संग्राम बताया जा रहा है। देश के कुछ मूर्ख बुद्धिजीवी श्रमिक संगठनों की इस मांग को जायज बता रहे हैं। देश का पूरा ढांचा बदल चुका है। इसके बावजूद कांग्रेस और उनके वामपंथी सहोदर अपना पुराना घिसा पिटा रिकार्ड बजाने में जुटे हुए हैं। डाक्टर मनमोहन सिंह जैसे उनके मार्गदर्शक कर्जमाफी जैसे आम जनता को ठगने वाले चुनावी वायदे पर चुप्पी साधे बैठे हैं। दरअसल देश बदल चुका है और उसे नए हालात को समझने वाले जन नेताओं की दरकार है। नई पीढ़ी के बीच से उभरने वाले नेता इस जरूरत को महसूस करें और अपनी नई भूमिका निभाएं तो देश का ज्यादा भला हो सकता है।

  • सस्ती बिजली के पाखंड की आड़ में रिकार्डतोड़ वसूली

    सस्ती बिजली के पाखंड की आड़ में रिकार्डतोड़ वसूली

    भोपाल,4 दिसंबर(प्रेस सूचना केन्द्र)। प्रदेश के पावर सेक्टर के इतिहास में नवंबर 2019 का माह मील के पत्थर के रूप में दर्ज हो गया है। नवंबर में राजस्व संग्रह  2017 करोड़  रुपये का हुआ है, जो नवंबर 2018 की तुलना में 413 करोड़ अधिक है। इस प्रकार लगभग 26 प्रतिशत अधिक राजस्व मिला है जो अब तक का प्रदेश का एक माह का सर्वाधिक राजस्व संग्रह है। इसके लिये ऊर्जा मंत्री श्री प्रियव्रत सिंह ने बिजली उपभोक्ताओं और तीनों विद्युत वितरण कंपनी के स्टॉफ को बधाई दी है।

    गौरतलब है कि  वर्ष 2018 में जुलाई से नवंबर की तुलना इस वर्ष 2019  से की जाए तो इन महीनों में 1687 करोड़ का अधिक राजस्व संग्रह हुआ है। इसी प्रकार प्रति यूनिट नगद  राजस्व वसूली गत वर्ष 2 रुपये 34 पैसे की तुलना में इस वर्ष नवंबर में  4 रुपये 14 पैसे हो गई है। यह गत वर्ष के इसी माह से 77 प्रतिशत अधिक है। 

    प्रदेश की तीनों वितरण कंपनियों ने राजस्व संग्रह में अब तक का उत्कृष्ट योगदान दिया है। पूर्व क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी द्वारा नवंबर 2019 में 596 करोड़, मध्य क्षेत्र कंपनी द्वारा 587 करोड़ एवं पश्चिम क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी द्वारा 834 करोड़ रुपए का राजस्व संग्रह किया गया। पिछले वर्ष इसी अवधि में पूर्व क्षेत्र कंपनी द्वारा 452 करोड़, मध्य क्षेत्र कंपनी द्वारा 488 करोड  एवं पश्चिम क्षेत्र कंपनी द्वारा 664 करोड़ रुपए का राजस्व संग्रह किया गया था। इस नवंबर माह में पूर्व क्षेत्र कंपनी द्वारा  31.71 प्रतिशत, मध्य क्षेत्र कंपनी द्वारा 20.38 प्रतिशत व पश्चिम क्षेत्र कंपनी द्वारा 25.63 प्रतिशत अधिक राजस्व संग्रह किया गया। यह कंपनी गठन के बाद किसी एक माह में सर्वाधिक है। 

     ऊर्जा मंत्री  ने कहा है कि सरकार प्रदेश के शहरों और ग्रामों में 24 घंटे तथा किसानों को घोषित अवधि में 10 घंटे निर्बाध विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए कृत-संकल्पित है। 

  • बंदर हीरा खदान को मंजूरी बिना बेचने की तैयारी

    बंदर हीरा खदान को मंजूरी बिना बेचने की तैयारी

    बंदर हीरा खदान लेने के लिये 5 कम्पनियों ने प्रस्तुत किया दावा
    तकनीकी बिड का मूल्यांकन 27 नवम्बर को पूर्ण किया जायेगा : मंत्री जायसवाल

    भोपाल,14 नवंबर(प्रेस सूचना केन्द्र)। खनिज साधन मंत्री प्रदीप जायसवाल ने बताया है कि छतरपुर जिले की वर्षों से अनुपयोगी बंदर हीरा खदान लेने के लिये 5 बड़ी कम्पनियों ने 13 नवम्बर को खुली प्रथम चरण की तकनीकी निविदाओं में बिड जमा कर अपना दावा प्रस्तुत किया है। ये कम्पनियाँ हैं भारत सरकार का उपक्रम नेशनल मिनरल डेव्हलपमेंट कॉर्पोरेशन लिमिटेड (एनएमडीसी), एस्सेल माइनिंग (बिरला ग्रुप), रूंगटा माइन्स लिमिटेड, चेंदीपदा कालरी (अडानी ग्रुप) तथा वेदांता कम्पनी।

    मंत्री श्री जायसवाल ने बताया कि 55 हजार करोड़ रुपये की यह खदान रियो टिंटो कम्पनी ने छोड़ी थी। देश की इस सबसे बड़ी खदान के नीलामी प्रकरण में भारत सरकार के नियमानुसार लगभग 56 करोड़ रुपये की सुरक्षा निधि जमा कराई जानी थी। इसके लिये आवेदक कम्पनी की नेटवर्थ कम से कम 1100 करोड़ रुपये होना आवश्यक था।

    खनिज साधन मंत्री ने बताया कि 13 नवम्बर की निविदा कार्यवाही के बाद अब तकनीकी बिड के मूल्यांकन का कार्य 27 नवम्बर, 2019 को पूर्ण किया जायेगा। इसके बाद 28 नवम्बर को प्रारंभिक बोली खोली जाएगी और उसके अगले दिन ऑनलाइन नीलामी सम्पादित की जाएगी।

    उल्लेखनीय है कि छतरपुर जिले में लगभग 3.50 करोड़ कैरेट के हीरे के भण्डार का अनुमानित मूल्य 55 हजार करोड़ रुपये है। इस पर राज्य शासन को प्राप्त होने वाली रॉयल्टी की दरों के आधार पर नीलामी सम्पन्न की जाएगी।

    बक्सवाहा में हीरे की मौजूदगी का पता लगने के बाद आस्ट्रेलिया की रियो टिन्टो कंपनी ने बंदर प्रोजेक्ट को लीज पर लेकर यहां भारी मात्रा में हीरा पाए जाने का सर्वे किया था। इसके बाद उसने करोड़ों रूपए के हीरे सर्वेक्षण के नाम पर निकाले थे।

    जब कंपनी से सरकार का अनुबंध खत्म हो गया और आगे के कार्य की अनुमति नहीं मिली तो कंपनी अपना सामान समेटकर चली गई। अब इसी प्रोजेक्ट को फिर से नीलाम किया जा रहा है।

    अब देश की जानी-मानी कंपनियों ने हीरा खनन में अपनी रूचि दिखाई है। कंपनी के प्रतिनिधियों ने बंदर प्रोजेक्ट की भौगोलिक स्थिति समझने हेतु जंगल का दौरा किया और प्रोजेक्ट के बारे में जांच-पड़ताल की। जानकारी के मुताबिक बंदर डायमंड माइंस प्रोजेक्ट की नीलामी में अनेक कंपनियों ने रुचि दिखाई है।

    आदित्य बिरला ग्रुप, अडानी ग्रुप, वेदांता ग्रुप, रूंगटा ग्रुप, एसेल ग्रुप, क्यूरा ग्रुप जैसी कंपनियों ने बकस्वाहा पहुँच कर बंदर प्रोजेक्ट की जानकारी ली साथ ही भौगोलिक स्थिति जानकर परिस्थितियों से रूबरू होकर प्रोजेक्ट के संबंध में चर्चाएं की गई जिसमें मुख्य रुप से भूमि सम्बन्धी और जंगल से सम्बंधित चर्चाएं हुई ।

    कलेक्टर मोहित बुंदस ने बताया कि डायमंड प्रोजेक्ट के लिए निरीक्षण करने टीमें आई हैं। इस प्रोजेक्ट में रूचि रखने वाली कंपनियों की टीमों ने निरीक्षण करने के बाद विभिन्न बिन्दुओं पर चर्चा की।

    यहां का प्रोजेक्ट शुरू होने से लोगों को रोजगार मिलेगा और बक्स्वाहा का नाम पूरे विश्व में हीरा खदान के रूप में जाना जाएगा।

    इस प्रोजेक्ट का रकबा 356 हेक्टेयर है जिसमें से करीब 13 हेक्टेयर जंगल ऐसा है जो पन्ना टाईगर रिजर्व से लगा हुआ है साथ ही इमली घाट जहां ये खदान लगाई जानी है वहां जाकर भी कंपनियों ने मुआयना किया और वहां की स्थिति जानी।

    बकस्वाहा ब्लॉक के हीरा खदान देखने पहुँची कंपनियों के साथ नरेंद्र सिंह परमार सचिव मध्यप्रदेश शासन, मोहित बुंदस कलेक्टर छतरपुर, अनुपम सहाय डीएफओ, तिलक सिंह एसपी, मनोज मालवीय एसडीएम बिजावर के साथ जिले का अमला मौजूद रहा।

    प्रदेश शासन के सचिव नरेन्द्र सिंह परमार ने बताया कि बंदर हीरा खनन प्रोजेक्ट बक्स्वाहा की नीलामी प्रक्रिया की शुरूआत 5 अगस्त से शुरू की गई। प्रोजेक्ट की बोली 60 हजार करोड़ से शुरू होगी।

    परमार ने बताया कि विभिन्न कंपनियों के प्रतिनिधियों से प्रोजेक्ट के बारे में चर्चा हुई है। पन्ना में रखे बक्स्वाहा के डायमंड को देखने के बाद प्रतिनिधियों ने भौगोलिक स्थिति जानने की इच्छा जताई थी। उन्हें यहां लाया गया है ताकि वे वस्तु स्थिति से भी अवगत हो सकें।

    यहां आने वालों में 6 कंपनियों के प्रतिनिधि शामिल हैं। उधर डीएफओ अनुपम सहाय का कहना है कि पूरा प्रोजेक्ट वन क्षेत्र का है इसलिए एनओसी जारी होगी लेकिन यह भी देखना होगा कि इस जंगल को कहां स्थानांतरित किया जाए ताकि अच्छे किस्म का जंगल तैयार हो सके।

  • व्यापारियों को ई कामर्स पर आना ही पड़ेगाःकमलनाथ

    व्यापारियों को ई कामर्स पर आना ही पड़ेगाःकमलनाथ

    भोपाल,4 सितंबर(प्रेस सूचना केन्द्र)। कनफेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स कैट के पदाधिकारियों ने कैट के राष्ट्रीय महामंत्री प्रवीण खंडेलवाल जी के नेतृत्व में बल्लभ भवन में माननीय मुख्यमंत्री श्री कमलनाथ से मुलाकात की।व्यापारियों की समस्याओं के जवाब में उन्हें मुख्यमंत्री ने सुझाया कि यदि व्यापार को सुरक्षित रखना है और बढ़ाना है तो मौजूदा व्यवस्था के साथ साथ कारोबारियों को ई कामर्स का इस्तेमाल भी बढ़ाना होगा। यह प्लेटफार्म व्यापार की चुनौतियों से निपटने में मददगार साबित होगा।


    कैट के प्रवक्ता विवेक साहू ने हुए बताया कि भेंट के दौरान माननीय मुख्यमंत्री ने कहा कि विश्वभर में बढ़ते ऑनलाइन कारोबार को देखते हुए अब यह आवश्यक हो गया है कि आने वाले समय में व्यापारियों को ई-कॉमर्स पर लाना होगा। हम अपने व्यवसाय को ऑफलाइन के साथ-साथ आनॅलाइन पर भी रखे ।
    उन्होंने आगे कहा है कि हम मध्यप्रदेश में इसे अभियान के रूप में चलायेंगे।

    कैट के महामंत्री प्रवीण खंडेलवाल ने मुख्यमंत्री को बताया कि कैट एक पोर्टल तैयार करने जा रहा है जो व्यापारियों को ऑनलाइन व्यापार करने के लिए प्रेरित करेगा जिसमें विश्वविद्यालयों के छात्र-छात्राएं भी इसमें प्रतिभागी रहेंगे।हम उन्हें रोजगार के अवसर प्रदान करेंगे और छोटे कारोबारियों को बिना किसी आर्थिक भार के ई-कॉमर्स का उपयोग सिखाने में भी मददगार साबित होंगे।


    चर्चा में मुख्यमंत्री ने कहा कि मंडियों में किसानों को नगद भुगतान आवश्यक है क्योंकि बैंकों में कैश उपलब्ध ना होने की स्थिति में किसान को परेशानी होती है। अतः इसके लिए हम केन्द्र सरकार से बात करेंगे और व्यापरियों को परेशानी ना हो एवं किसान को भी उसकी फसल का पैसा मिले इसके लिए हम एक योजना बनाकर कार्य करेंगे।


    इस अवसर पर उन्होंने कॉन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) के ‘‘बैज‘‘ का लोकार्पण किया। कॉन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) के मध्यप्रदेश अध्यक्ष भूपेन्द्र जैन ने मुख्यमंत्री को पहला बैज लगाकर सम्मानित किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश के युवाओं को स्वावलंबी बनाने के लिए महिला उद्यमियों को विकास के लिए हर जिले में मुद्रा लोन शिविर लगाये जायेंगे और विश्वविद्यालय स्तर पर स्टार्टअप समिट होगी।


    मुख्यमंत्री ने कैट के प्रस्ताव को थाना स्तर पर व्यापारिक समितियां बनाने के लिए पुलिस महानिदेशक को आवश्यक दिशा-निर्देश देने का आश्वासन दिया।
    मुख्यमंत्री ने मध्यप्रदेश में व्यापारियों और कारोबारियों को आमंत्रित करते हुए कहा कि जो अधिक से अधिक रोजगार देगा उसके लिए राज्य शासन हरसंभव मदद करेगी। इस अवसर पर कैट के राष्ट्रीय महामंत्री प्रवीण खंडेलवाल ने कैट, सीएससी, मास्टर कार्ड एवं ग्लोबल लिंकर ई-कॉमर्स बिजनिस की परिकल्पना से मुख्यमंत्री को अवगत कराया। मुख्यमंत्री ने कहा कि जिला स्तर पर कलेक्टर की अध्यक्षता में जो व्यापारिक समितियां बन रही हैं उनमें एवं अन्य जिला स्तरीय कमेटियों में कैट को उचित प्रतिनिधित्व मिलेगा। कॉन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) मध्यप्रदेश राज्य शासन के साथ मिलकर प्रदेश के आर्थिक विकास के लिए कार्य करे।


    राष्ट्रीय वरिष्ठ उपाध्यक्ष कैलाश अग्रवाल, राधेश्याम महेश्वरी, ग्लोबल लिंकर के समीर वकील, कैट के सोशल मीडिया प्रभारी सुमित अग्रवाल, राष्ट्रीय उपाध्यक्ष राधेश्याम माहेश्वरी, सेन्ट्रल जोन कोर्डिनेटर रमेश गुप्ता, प्रदेश अध्यक्ष भूपेंद्र जैन, महामंत्री मुकेश अग्रवाल, प्रवक्ता विवेक साहू, संयुक्त सचिव मनोज चौरसिया, अजय चौरिया, अविचल जैन, नरेन्द्र मांडिल आदि उपस्थित थे।


    इससे पूर्व प्रतिनिधिमंडल ने राजीव गांधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. सुनील कुमार से भेंट की और व्यापारियों को ई-कॉमर्स में परिवर्तन करने के लिए विश्वविद्यालय के छात्र-छात्राओं का सहयोग मांगा। इसे कुलपति ने स्वीकर किया और 9 सितम्बर से उनकी ट्रेनिंग प्रारंभ होगी।


    इसी श्रंखला में आज एमपी नगर स्थित गौरव होटल में विदेशी व्यापारियों के साथ बैठक का आयोजन किया गया ।बैठक के मुख्य अतिथि प्रवीण खंडेलवाल ने व्यापारियों को संबोधित करते हुए कहा कि आज का समय डिजिटल युग का हैं और उसके बिना व्यापार करना नामुमकिन है जो व्यापारी आज के दौर में डिजिटल तकनीक नहीं अपना आएगा वह धीरे-धीरे अपना व्यापार को खोता जाएगा।

  • सार्वजनिक क्षेत्र के छह और बैंकों का विलय,अब केवल 12 बचेंगे

    सार्वजनिक क्षेत्र के छह और बैंकों का विलय,अब केवल 12 बचेंगे

    नईदिल्ली,30 अगस्त(प्रेस सूचना केन्द्र) नरेन्द्र मोदी सरकार ने आज बैंकों की बड़ी विलय योजना की घोषणा की, जिससे सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों की संख्या एक ही झटके में 18 से घटकर 12 रह जाएगी। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि पंजाब नैशनल बैंक (पीएनबी) ओरियन्टल बैंक ऑफ कॉमर्स और यूनाइटेड बैंक ऑफ इंडिया का अधिग्रहण करेगा। इसी तरह वहीं केनरा बैंक में सिंडिकेट बैंक का, यूनियन बैंक ऑफ इंडिया में आन्ध्रा बैंक और कॉर्पोरेशन बैंक तथा इंडियन बैंक में इलाहाबाद बैंक का विलय होगा। सीतारमण ने कहा कि इन 10 बैंकों की जगह केवल 4 बैंक रह जाएंगे और सरकार चालू वित्त वर्ष के दौरान 70,000 करोड़ रुपये के पुर्नपूंजीकरण में से करीब 55,250 करोड़ रुपये की पूंजी इन्हीं बैंकों में डालेगी।

    बैंकों के विलय की घोषणा करते हुए वित्त मंत्री और वित्त सचिव राजीव कुमार ने बार-बार दोहराया कि इस निर्णय से किसी कर्मचारी की नौकरी नहीं जाएगी। कुमार ने कहा कि प्रस्तावित विलय की समयसीमा इन दस बैंकों के बोर्डों से परामर्श करने के बाद तय की जाएगी। उन्होंने कहा, ‘इस निर्णय से नौकरियों पर किसी तरह की आंच नहीं आएगी। जिन बैंकों में इनका विलय होगा, वे विलय होने वाले बैंकों के कर्मचारियों को बनाए रखेंगे।’  

    वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा, ‘बैंक एकीकरण के दो चरण पहले ही किए जा चुके हैं और अपनी बैंकिंग व्यवस्था को मजबूत बनाने तथा 5 लाख करोड़ डॉलर की अर्थव्यवस्था का लक्ष्य हासिल करने के लिए हम एक बार फिर विलय करना चाहते हैं। हम नई पीढ़ी के और बड़े बैंक बनाने की कोशिश कर रहे हैं, जिनकी अधिक कर्ज देने की क्षमता हो।’ उन्होंने कहा, ‘इंडियन ओवरसीज बैंक, यूको बैंक, बैंक ऑफ महाराष्ट्र और पंजाब एण्ड सिंध बैंक पहले की तरह काम करते रहेंगे क्योंकि ये मजबूत क्षेत्रीय बैंक हैं।’  वित्त मंत्री ने बैंकों के लिए नए परिचालन सुधारों की भी घोषणा की।

    सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के निदेशक मंडल अब महाप्रबंधक से ऊपर के दर्जे के अधिकारियों का प्रदर्शन आधारित मूल्यांकन करेंगे। बैंक अपने मुख्य जोखिम अधिकारी को बाजार के अनुकूल पारितोषिक पर नियुक्त कर सकेंगे। बोर्ड को वरिष्ठ प्रबंधन के कार्यकाल की योजना तय करने की आजादी होगी। इसके अलावा गैर-आधिकारिक निदेशकों की फीस में इजाफा किया जाएगा, बोर्ड समितियों को तार्किक बनाया जाएगा और प्रबंधन समिति की कर्ज मंजूर करने की सीमा बढ़ाकर 100 फीसदी तक की जाएगी ताकि उच्च मूल्य के ऋण प्रस्तावों पर ज्यादा ध्यान दिया जा सके। इसके साथ ही बड़े सरकारी बैंकों में कार्यकारी निदेशकों की संख्या मौजूदा तीन से बढ़ाकर चार की जाएगी। 

    पीएनबी में ओरियन्टल बैंक और यूनाइटेड बैंक का विलय होने के बाद वह 17.95 लाख करोड़ रुपये के कारोबार, 11,437 शाखाओं और 10.44 लाख करोड़ रुपये की जमा के साथ देश का दूसरा सबसे बड़ा बैंक बन जाएगा। एकीकृत इकाई की गैर-निष्पादित आस्तियां 6.61 फीसदी रहने का अनुमान है, जो ओरियन्टल बैंक ऑफ कॉमर्स के एनपीए से अधिक लेकिन पीएनबी और यूनाइटेड बैंक से कम है।केनरा बैंक और सिंडिकेट बैंक का विलय होने के बाद कारोबार के लिहाज से वह देश का चौथा सबसे बड़ा बैंक होगा, जबकि शाखाओं के हिसाब से तीसरा सबसे बड़ा बैंक बन जाएगा।  एकीकृत इकाई के पास कुल जमा राशि 8.59 लाख करोड़ रुपये होगी और शुद्घ एनपीए अनुपात 5.62 फीसदी होगा।

    यूनियन बैंक, आन्ध्रा बैंक और कॉर्पोरेशन बैंक के एकीकरण से देश का पांचवां सबसे बड़ा सरकारी बैंक बनेगा। इसकी एकीकृत जमा 8.20 लाख करोड़ रुपये और शुद्घ एनपीए अनुपात 6.30 फीसदी होगा, जो यूनियन बैंक के एनपीए से कम लेकिन आन्ध्रा बैंक और कॉर्पोरेशन बैंक के एनपीए से अधिक है। इंडियन बैंक और इलाहाबाद बैंक के एकीकरण से देश का सातवां सबसे बड़ा सरकारी बैंक बनेगा, जिसकी कुल जमा राशि 4.56 लाख करोड़ रुपये होगी और एनपीए अनुपात 4.39 फीसदी होगा।क्रिसिल रेटिंग्स के वरिष्ठ निदेशक कृष्णन सीतारमण ने कहा, ‘इतने बड़े स्तर पर एकीकरण से कुछ समय के लिए कामकाज की शैली के अंतर, मानव संसाधन को संभालने, बैंक शाखाओं को तर्कसंगत बनाने एवं तकनीकी एकीकरण करने जैसी चुनौतियों से जूझना पड़ सकता है। अगर इसे सही तरीके से क्रियान्वित किया गया तो मध्यम अवधि में इसका लाभ होगा और सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक ज्यादा प्रभावी तरीके से प्रतिस्पद्र्घा कर सकेंगे।’भारी-भरकम विलय की घोषणा वित्त सचिव, वित्त मंत्री और सार्वजनिक क्षेत्र के 10 बैंकों के मुख्य कार्याधिकारियों की बैठक के बाद की गई। 

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  • रिजर्व बैंक की सालाना आय 146.5% बढ़ी

    रिजर्व बैंक की सालाना आय 146.5% बढ़ी

    नई दिल्ली,31 अगस्त (प्रेस सूचना केन्द्र) RBI (भारतीय रिजर्व बैंक) ने बुधवार को अपनी सालाना रिपोर्ट पेश की। इसके अनुसार, केंद्रीय बैंक की बैलेंस शीट में 13.42 फीसद का इजाफा हुआ है और यह 41.03 लाख करोड़ रुपये रहा। वहीं, ब्‍याज से होने वाली आय 2018-19 में 146.59 फीसद बढ़कर 1.93 लाख करोड़ रुपये रही। अपने वार्षिक रिपोर्ट में RBI ने कहा है कि ब्‍याज से होने वाली उसकी आय 44.62 फीसद बढ़कर 1.06 लाख करोड़ रुपये रही और अन्‍य स्रोतों से होने वाली आय 30 जून 2019 के अनुसार, 86,199 करोड़ रुपये रही जो एक साल पहले की अवधि में 4,410 करोड़ रुपये थी। 

    RBI ने कहा कि 30 जून 2019 के अनुसार, सरकारी प्रतिभूतियों में उसका निवेश 57.19 फीसद बढ़कर 6.29 लाख रुपये से 9.89 करोड़ रुपये रहा। इसमें लिक्विडिटी मैनेजमेंट ऑपरेशंस के दौरान 3.31 लाख करोड़ रुपये की सरकारी प्रतिभूतियों की खरीद शामिल है। रिजर्व बैंक का विदेशी विनिमय लाभ बढ़कर 28,998 करोड़ रुपये रहा। पिछले वर्ष इसमें 4,067 करोड़ रुपये का घाटा हुआ था। 

    2018-19 में सरकार को ट्रांसफर की जाने वाली सरप्‍लस राशि रिजर्व बैंक के बोर्ड द्वारा इस हफ्ते अपनाए गए इकोनॉमिक कैपिटल फ्रेमवर्क अपनाए जाने के बाद समायोजन के आधार पर 1.76 लाख करोड़ रुपये रहा। यह नया फ्रेमवर्क 27 अगस्‍त को बिमल जालान कमेटी द्वारा दिए गए सुझावों का एक हिस्‍सा है। सरकार को दी जाने वाली राशि में फरवरी में दिया गया 28,000 करोड़ रुपया भी शामिल है। 

    30 जून 2019 के अनुसार, RBI के पास 618.16 मेट्रिक टन सोना था जो 30 जून 2018 को 566.23 मेट्रिक टन था। इस साल के दौरान 51.93 मेट्रिक टन सोना और बढ़ा है। 

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  • चार हजार खाद्य नमूने उठाए केवल छह नकली निकले

    चार हजार खाद्य नमूने उठाए केवल छह नकली निकले

    भोपाल,27 अगस्त(प्रेस सूचना केन्द्र)। कमलनाथ सरकार ने जनता की सहानुभूति हासिल करने के लिए जो शुद्ध के लिए युद्ध चलाया उसका नतीजा टांय टांय फिस्स साबित होने लगा है। खोदा पहाड़ और निकली चुहिया जैसी कहावत इस अभियान को देखते हुए सटीक साबित हो रही है। प्रदेश भर में जिन 3840 व्यापारियों के प्रतिष्ठानों से खाद्य नमूने जब्त किए उनमें से मात्र छह नमूने प्रतिबंधित निकले हैं। जबकि सरकार ने प्रदेश में बिक रहे 70 फीसदी खाद्य पदार्थों के नकली होने का शोर मचाया था।

    अधिकृत सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार पिछले महीने 19 जुलाई से कथित तौर पर मिलावट के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के जो नतीजे सामने आए हैं उनमें मात्र छह नमूनों में प्रतिबंधित पदार्थ पाए गए हैं। आज 28 अगस्त तक जिन 723 नमूनों की जांच रिपोर्ट सामने आई है उनमें से 374नमूने मानक स्तर के पाए गए हैं। नमूनों में से 277 जांच में अवमानक निकले हैं। ब्रांड की कसौटी पर 27 को मिथ्या ब्रांड पाया गया है। यानि कि उन्हें बेचने के लिए ब्रांड नाम की अनुमति नहीं ली गई थी। 23 सैंपलों में मिलावट पाई गई है, यानि उनमें पाम आईल या अन्य खाद्यान्नों के अंश पाए गए हैं। सोलह नमूनों को असुरक्षित पाया गया है उनमें यूरिया या डिटर्जेंट पाऊडर जैसे पदार्थों के अंश पाए गए हैं।

    केवल छह नमूनों में प्रतिबंधित पदार्थों की मौजूदगी पता चली है।ये नमूने उन्हीं व्यापारियों से बरामद हुए हैं जिनके बारे में लंबे समय से नकली खाद्यान् बनाने की शिकायतें मिलती रहीं थीं। इन्हीं की आड़ में सरकार ने धड़ाधड़ छापेमारी करके पूरे प्रदेश में भय का वातावरण निर्मित कर दिया। बीते राखी के त्यौहार के दौरान या तो उपभोक्ताओं ने इन खाद्यान्नों का इस्तेमाल नहीं किया या फिर उन्होंने ब्रांडेड कंपनियों के खाद्य पदार्थ खरीदकर त्यौहार मनाया।

    गौरतलब है कि राज्य सरकार के पास इतने बड़े अभियान को चलाने लायक अमला नहीं है। फूड लेबोरेटरी में रेंडम सैंपल लेने और जांच करने की व्यवस्था है लेकिन एक साथ हजारों नमूनों की तत्काल जांच की सुविधा नहीं है। इसके बावजूद सरकार ने न केवल अभियान चलाकर व्यापारियों पर हल्ला बोला बल्कि कई जिलों के कलेक्टरों ने व्यापारियों के विरुद्ध रासुका के अंतर्गत कार्यवाही करके भय का माहौल बना दिया है।

    राखी के अवसर पर व्यापारियों ने ज्ञापन देकर अनुरोध किया था कि खादय नमूनों को दूकानों से लिया जाए। परिवहन के दौरान जो नमूने लिए जाते हैं उनसे विक्रेताओं की धरपकड़ नहीं हो पाती है। इससे न ही खाद्यान्न निर्माताओं की पहचान संभव हो पाती है। व्यापारियों का कहना है कि खाद्य अमले ने इसके बाद रणनीति बदली थी लेकिन इस पूरे अभियान से कच्चा धंधा करने वाले व्यापारियों को खासी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। जबकि ये अभियान ईमानदार व्यापारियों को परेशान किए बगैर भी चलाया जा सकता था।

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  • खेती में राज्यों की धींगामुश्ती रोकेगी समवर्ती सूची

    खेती में राज्यों की धींगामुश्ती रोकेगी समवर्ती सूची

    सुरिंदर सूद

    किसानों की समस्याओं पर गठित एम एस स्वामीनाथन की अध्यक्षता वाले राष्ट्रीय आयोग (नैशनल कमीशन ऑन फार्मर्स) ने कृषि क्षेत्र को राज्य सूची से स्थानांतरित कर समवर्ती सूची में रखने की सिफारिश की थी। अफसोस की बात है कि इस महत्त्वपूर्ण सिफारिश पर उतना ध्यान नहीं दिया गया है, जितनी जरूरत थी। कृषि विषय अगर समवर्ती सूची में लाया जाता है तो इससे कृषि एवं किसानों से जुड़े मसलों पर केंद्र सरकार अपेक्षाकृत अधिक निर्णायक कदम उठा पाएगी, साथ ही राज्य सरकारों के अधिकारों पर भी कोई खास असर नहीं होगा। फिलहाल केंद्र को उन कृषि विकास एवं किसानों के लिए कल्याणकारी योजनाओं के क्रियान्वयन के लिए भी राज्य सरकारों पर निर्भर रहना पड़ता है, जिनका वित्त पोषण यह स्वयं कर रहा है।

    वास्तव में कृषि क्षेत्र को राज्य सरकार की मर्जी पर छोडऩा भारत सरकार अधिनियम, 1935 की ‘देन’ कही जा सकती है। उस समय इसके पीछे तर्क यह दिया गया था कि चूंकि, कृषि क्षेत्र विशेष पेशा है और मुख्य तौर पर स्थानीय कृषि-पारिस्थितिकी वातावरण और मूल स्थानों पर उपलब्ध प्राकृतिक संसाधनों पर निर्भर है, इसलिए प्रांतीय सरकारें इस क्षेत्र की बेहतर देखभाल कर सकती हैं। उन दिनों कृषि कार्य केवल खाद्य जरूरतें पूरी करने के लिए किए होते थे और खाद्यान्न की खरीद-बिक्री सीमित स्तर पर होती थी। किसानों से जुड़ीं समस्याएं भी स्थानीय स्तर तक ही सीमित थीं।

    आधुनिक समय में परिस्थितियां काफी बदल गई हैं। आधुनिक समय में कृषि क्षेत्रीय सीमाओं में बंधा नहीं रह गया है और अब राज्यों के बीच व्यापारिक सौदे इसका हिस्सा बन गए हैं। इतना ही नहीं, कृषि अब अर्थव्यवस्था के दूसरे क्षेत्रों खासकर व्यापार, उद्योग और सेवा से भी जुड़ गया है। अब कोई एक राज्य कृषि के संबंध में कोई निर्णय लेता है तो इसका प्रभाव दूसरे राज्यों की कृषि-अर्थव्यवस्था पर भी देखा जाता है। लिहाजा कृषि क्षेत्रों पर राज्यों के बेरोकटोक नियंत्रण से समस्याएं खड़ी हो रही हैं और इनका प्रतिकूल असर पड़ रहा है।

    स्वामीनाथन समिति की पांचवीं और अंतिम रिपोर्ट अक्टूबर 2006 में जारी हुई थी, जिसमें कृषि को समवर्ती सूची में स्थानांतरित करने का प्रस्ताव दिया गया था। रिपोर्ट में इस ओर ध्यान दिलाया गया था कि फसलों का समर्थन मूल्य, संस्थागत साख और कृषि-जिंस कारोबार-घरेलू एवं अंतरराष्ट्रीय- आदि से जुड़े निर्णय केंद्र सरकार द्वारा लिए जाते हैं। कुछ महत्त्वपूर्ण कानून, जिनका कृषि क्षेत्र पर व्यापक असर पड़ा है, संसद ने बनाए हैं, जो केंद्र की देख-रेख में काम करते हैं। पौधे की नस्लों की सुरक्षा एवं किसानों के अधिकार कानून, जैविक विविधता कानून और राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा कानून कुछ ऐसे ही उदाहरण हैं। इनके अलावा ग्रामीण ढांचा, सिंचाई एवं अन्य कृषि विकास कार्यक्रमों के लिए ज्यादातर राशि केंद्र ही मुहैया कराता है। आयोग ने कहा, ‘कृषि समवर्ती सूची में आने से किसानों की सेवा और कृषि की संरक्षा केंद्र एवं राज्य दोनों का उत्तरदायित्व बन जाएंगे।’

    कृषि को समवर्ती सूची में लाने की सिफारिश के पीछे कुछ और कारण भी हैं। कुछ राज्य सरकारों के असहयोग करने से किसानों की समस्याएं दूर करने एवं उनकी आय बढ़ाने के लिए शुरू की गईं केंद्र की कुछ योजनाएं अपेक्षित परिणाम नहीं दे पा रही हैं। उदाहरण के लिए फसल बीमा योजना, प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि (पीएम किसान) और प्रधानमंत्री अन्नदाता आय संरक्षण अभियान (पीएम आशा) कुछ ऐसी ही योजनाएं हैं, जिनका पूर्ण लाभ नहीं मिल पा रहा है। इतना ही नहीं, कृषि विपणन, जमीन पट्टा, अनुबंध आधारित कृषि आदि से जुड़े कुछ महत्त्वपूर्ण सुधार भी कुछ खास बदलाव नहीं ला पा रहे हैं। एक बार फिर कुछ राज्यों का असहयोग इसके लिए जिम्मेदार रहा है।

    किसानों की आय दोगुनी करने की संभावनाएं तलाशने के लिए गठित दलवाई समिति ने भी कृषि विपणन को समवर्ती सूची में रखने पर जोर दिया है। समिति के अनुसार इससे कृषि मंडियों में व्यापक सुधार, इनकी परिचालन क्षमता में इजाफा और ग्रामीण विपणन तंत्र के विस्तार में केंद्र सरकार को आसानी होगी। दलवाई समिति की रिपोर्ट ने कृषि को समवर्ती सूची में स्थानांतरित करने की दलील और मजबूत कर दी है। इससे पहले भी किसी विषय को एक सूची से दूसरी सूची में डालने के लिए संविधान में संशोधन हो चुके हैं। उदाहरण के लिए 1976 में 42वें संशोधन में वन एवं वन्यजीव सुरक्षा सहित पांच विषय राज्य से निकालकर समवर्ती सूची में डाल दिए गए। विषय की महत्ता और इससे मिलने वाले संभावित लाभों को देखते हुए सभी राजनीतिक दलों को कृषि को राज्य सूची से स्थानांतरित कर समवर्ती सूची में रखने के लिए एक और संविधान संशोधन को समर्थन देना चाहिए। कृषि और किसान दोनों इससे लाभान्वित होंगे।

  • खनन की मंजूरी दे केन्द्रःकमलनाथ

    खनन की मंजूरी दे केन्द्रःकमलनाथ

    प्राइज डेफिसिट योजना के 575.90 करोड़ मांगे
    मुख्यमंत्री कमल नाथ की प्रधानमंत्री से मुलाकात,    

    भोपाल,4 फरवरी(प्रेस सूचना केन्द्र) मुख्यमंत्री कमल नाथ ने नई दिल्ली में आज प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी से मुलाकात की और कृषि एवं खनन से जुड़े मुददों पर विस्तार से चर्चा की।  श्री नाथ ने राज्य की आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिये माइनिंग लीज पाने की पात्रता रखने वाले 27 प्रकरण में जल्द से जल्द निर्णय लेने का अनुरोध किया। श्री कमल नाथ ने प्रधानमंत्री को विस्तार से बताया कि मध्यप्रदेश के करीब 170 आवेदन हैं जो खदान एवं खनिज (विकास एवं नियमन) अधिनियम की धारा 10-ए और 2-बी के अंतर्गत माइनिंग लीज अनुदान पाने की पात्रता रखते हैं। इन प्रस्तावों पर जल्द निर्णय होने से राज्य की आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा।

     मुख्यमंत्री ने बताया कि जनवरी 2015 में खदान और खनिज (विकास एवं नियमन) अधिनियम मध्यप्रदेश जैसे राज्य जिला खनिज कोष के नये प्रावधानों का लाभ उठा रहे हैं। साथ ही वे अधोसंरचना के विकास और खनन गतिविधियों से प्रभावित क्षेत्रों के लोगों के लिये अन्य संकेतकों को सुधारने में भी योगदान दे रहे हैं।

    प्राइज डेफिसिट योजना के 575.90 करोड़ रूपये जारी करने का आग्रह

      मुख्यमंत्री श्री कमल नाथ ने प्रधानमंत्री का ध्यान तिलहन के लिये प्राइज डेफिसिट भुगतान योजना के क्रियान्वयन लागत की शेष राशि 575.90 करोड़ रूपये शीघ्र जारी करने का आग्रह किया है। उन्होंने प्रधानमंत्री समर्थन मूल्य तय करने के पूर्व के निर्णय को आगे बढाते हुए अभियान के क्रियान्वयन के संबंध में ध्यान आकृष्ट करते हुए कहा कि अभियान के माध्यम से किसानों को उनकी उपज का न्यूनतम समर्थन मूल्य सुनिश्चित करने के लिये राज्य सरकार प्रतिबद्ध है।

    श्री नाथ ने श्री मोदी को बताया कि मध्यप्रदेश सरकार ने 1951.80 करोड़ रूपये किसानों को भुगतान किये थे जो न्यूनतम समर्थन मूल्य और आदर्श विक्रय मूल्य का अंतर था। उन्होंने कहा कि यदि यह फसल नाफेड द्वारा न्यूनतम समर्थन मूल्य पर उपार्जित होती तो प्रशासनिक लागत और हानि करीब 2800 करोड़ आती।

    मुख्यमंत्री ने लागत में 50 प्रतिशत की भागीदारी भारत सरकार द्वारा करने के निर्णय को देखते हुए शेष 575.90 करोड़ रूपये शीघ्र जारी करवाने का आग्रह किया ।

    सोयाबीन के लिये म.प्र. का  लक्ष्य 26.92 लाख मीट्रिक टन करने का आग्रह

    मुख्यमंत्री ने सोयाबीन के लिये प्राइज डेफिसिट योजना में राज्य के उत्पादन का 40 प्रतिशत यानी 26.92 लाख मीट्रिक टन लक्ष्य तय करने का आग्रह किया है।

    श्री नाथ ने कहा कि प्राइज डेफिसिट योजना की गाइडलाइन में राज्य को दिये लक्ष्य को उत्पादन का 25 प्रतिशत से बढ़ाकर 40 प्रतिशत करने के तरीके का उल्लेख नहीं किया गया है जबकि यही मूल्य समर्थन योजना की गाइडलाइन में अंकित है। उन्होंने प्राइज डेफिसिट योजना में परिवर्तन करने का आग्रह करते हुए कहा कि इससे उत्पादन के 25 प्रतिशत के लक्ष्य को 40 प्रतिशत तक बढ़ाया जा सकेगा।

  • किसानों तक पहुंच गया देश का कृषि बाजार

    किसानों तक पहुंच गया देश का कृषि बाजार

    राष्ट्रीय कृषि बाजार योजना से जुड़ीं मध्यप्रदेश की 58 कृषि उपज मण्डियाँ

    भोपाल,4 जून(पीआईसीएमपीडॉटकॉम)।देश के अन्नदाता का सोना बिचौलियों के हाथों पड़ने के कारण अब तक खेती किसानी का जीवन एक अबूझ पहेली बना हुआ है। शिवराज सिंह चौहान की सरकार ने इस दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए अब सभी कृषि उपज मंडियों को राष्ट्रीय कृषि बाजार से जोड़ दिया है। कृषि बाजार (ई-नाम) एक पैन-इण्डिया इलेक्ट्रॉनिक ट्रेडिंग पोर्टल है। यह कृषि उपजों के लिये एकीकृत राष्ट्रीय बाजार का निर्माण करने का सशक्त माध्यम है। कृषि उपज मण्डी से संबंधित सभी सूचनाओं और सेवाओं के लिये यह ई-नाम पोर्टल सिंगल विण्डो सेवा प्रदान कर रहा है। इस पोर्टल में उपज के आगमन और कीमतों तथा उपज को खरीदने और बेचने के व्यापारिक प्रस्तावों के प्रावधान को शामिल किया गया है। प्रदेश में ई-नाम पोर्टल के माध्यम से अभी तक 58 कृषि उपज मण्डियों को राष्ट्रीय कृषि बाजार से जोड़ा जा चुका है।

    http://www.enam.gov.in/NAM/home/index.html

    इस अभिनव पहल से प्रदेश की 58 कृषि उपज मण्डियाँ राष्ट्रीय कृषि बाजार से जुड़ गईं हैं। 13 कपास मण्डियों को भी राष्ट्रीय कृषि बाजार से जोड़ा जा रहा है।ई-नाम पोर्टल पर 49 लाख क्विंटल कृषि जिन्सों का व्यापार भी हो चुका है।

    प्रदेश में ई-नाम पोर्टल की शुरूआत भोपाल की पण्डित लक्ष्मीनारायण शर्मा कृषि उपज मण्डी करोंद से की गई। योजना के पहले चरण में प्रदेश की 19 चयनित कृषि उपज मण्डियों को इस पोर्टल से जोड़ा गया। ई-नाम पोर्टल से जुड़ी कृषि उपज मण्डियों में 6 जिन्सों पर ऑनलाईन ट्रेडिंग की जा रही है। योजना के दूसरे चरण में 30 और तीसरे चरण में 8 कृषि उपज मण्डियों को राष्ट्रीय कृषि बाजार योजना में शामिल किया गया है। अब तक प्रदेश की 58 कृषि उपज मण्डियों को राष्ट्रीय कृषि बाजार योजना से जोड़ा जा चुका है।

    इसके साथ ही, 13 कपास मण्डियों को राष्ट्रीय कृषि बाजार योजना से जोड़ने का कार्य तेजी से पूर्ण किया जा रहा है। प्रदेश में राष्ट्रीय कृषि बाजार योजना में अब तक करीब 12 लाख किसानों से 19 हजार लायसेंस धारी व्यापारियों ने ई-प्लेटफार्म के माध्यम से करीब 49 लाख क्विंटल कृषि जिन्सों का व्यापार किया है। प्रदेश में ई-नाम पोर्टल की सभी 58 मण्डियों में कृषि उपज के गुणवत्ता परीक्षण के लिये वृहद एसेइंग एण्ड ग्रेडिंग लैब स्थापित करने की कार्यवाही की जा रही है। ई-नाम पोर्टल में देश के 18 राज्यों में मध्यप्रदेश की स्थिति गेट एन्ट्री और एसेइंग में प्रथम तथा बिड क्रिएशन और सेल ऐग्रीमेंट में तृतीय रही है। ज्ञातव्य है‍कि देश में अप्रैल 2016 से प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने ऑनलाइन राष्ट्रीय कृषि बाजार योजना की शुरूआत की थी। इसका मकसद किसानों को उनकी उपज का राष्ट्रीय स्तर पर सही दाम दिलवाना है।

  • नरेन्द्र मोदी के साथ महाशक्ति की राह पर भारत

    नरेन्द्र मोदी के साथ महाशक्ति की राह पर भारत


    - भरतचन्द्र नायक
    वीरता और पराक्रम में सदैव से भारत अजेय रहा है। उसकी समृद्धि ने सभी को ललचाया और बाह्य आक्रमण का दंश झेला, लेकिन समय की रफ्तार के साथ कदम से कदम मिलाने में जो चूक हुई उसका खामियाजा भी भुगतना पड़ा। जब आक्रमण का प्रचलन हो चुका था और दुश्मन ने तोप बंदूक से लेस होकर आक्रमण किया हम अपना शौर्य भाला तलवार लेकर दिखा रहे थे। आजादी के बाद विकास की ओर ध्यान गया। कदम संभले पं. नेहरू ने बांध जलाशयों, कारखानों को तीर्थधाम बनाया। इंदिरा जी ने परमाणु शक्ति संपन्नता की ओर ध्यान दिया। राजीव गांधी ने देश में कंप्यूटरीकरण का मार्ग प्रशस्त करने का श्रेय दिया गया। अटलजी ने प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना से गांवों तक विकास की रोशनी पहुंचाई। मोदी जी ने देश को बुलेट पर सवार कर दिया। लोकतंत्र में सत्ता पक्ष की नीतियों कार्यक्रमों का विरोध अनिवार्य है और ऐसा हुआ, लेकिन 2014 में जब सोलहवीं लोकसभा के चुनाव की रणपेटी बजी और गुजरात के सफल मुख्यमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने भारतीय जनता पार्टी के चुनाव प्रचार की कमान संभाली उनकी प्रखर आलोचना उनके लिए स्वीकार्यता विस्तार में सहायक सिद्ध हुई। मोदी ने पूर्ववर्ती सरकार के भ्रष्टाचार से मुक्ति, महंगाई पर लगाम, सुरक्षा परिदृश्य में सुखद बदलाव का भरोसे और अच्छे दिन आने का सपने को देश की जनता ने मोदी जी के नेतृत्व में उनकी कटु आलोचना के बावजूद भारतीय जनता पार्टी के नाम प्रचंड बहुमत के साथ जनादेश दे दिया। मजे की बात यह रही कि जब नरेंद्र मेादी को जनता एक दूर दृष्ठा, कल्पनाशील और कुशल प्रशासक के रूप में देख रही थी। राजनैतिक दल उन्हें मौत का सौदागर बता रहा था। जनता महसूस कर चुकी थी कि विरोध राजनैतिक है। वास्तविकता यह थी कि गुजरात ने मोदी के नेतृत्व में नई करवट ली थी। गुजरात विकास के हर मापदंड पर कसे जाने के बाद देश में अब्बल, प्रगतिशील अमन चैन के मामले अब्बल राज्य था, जो राजनैतिक दल मोदी पर असहिष्णुता का इल्जाम लगा रहे थे उनके द्वारा शासित राज्यों से गुजरात के अल्पसंख्यक तरक्की की ऊंची सीढ़ियां चढ़ चुके थे। जनता देख चुकी थी कि नरेंद्र मोदी समस्या नहीं समाधान पुरूष है।

    प्रधानमंत्री के रूप में नरेंद्र मोदी अपने कार्यकाल के तीन वर्ष पूर्ण कर चुके हैं और उन्होंने मंत्रालयवार अपना रिपोर्ट कार्ड जनता को सौंप दिया है। कुछ स्थानेां को अपवाद स्वरूप छोड़कर जहाॅ विधानसभा चुनाव अथवा लोकसभा उपचुनाव हुए जनता ने तमाम मुसीबतें सहते हुए मोदी के नेतृत्व में भारतीय जनता पार्टी और भाजपानीत एनडीए कोसमर्थन देकर विजय रथ आगे बढ़ाया है। नरेंद्र मोदी सरकार ने कड़े, कष्टप्रद फैसले लेने में कभी गुरेज नहीं किया जिनका पुरजोर विरोध भी हुआ लेकिन देश की अपढ़ कही जाने वाली जनता ने मुसीबते झेलते हुए माना कि मोदी की दिशा और दशा सही है। नीयत में खोट नहीं है। विपक्ष के सामने सबसे बड़ी हैरानी परेशानी की बात यह रही कि वह बीते तीन वर्षों में एनडीए सरकार पर गड़बड़, घोटाला, भ्रष्टाचार का एक भी इल्जाम नहीं लगा पाई। जब 8 नवम्बर 2016 को एकाएक नोटबंदी का ऐलान हुआ गैरभाजपा दल हक्के-बक्के रह गये। उनका सीधा सपाट आरोप था कि बिना जनता को भरोसे में लिए इतना बड़ा फैसला क्यों ले लिया कि करेंसी कम पड़ गई। बैंकों से खाताधारियों को अपनी रकम निकालने पर पाबंदी लग गई। बैंकों के सामने बंद करेंसी बदलने के लिये गरीबों, अमीरों की लाइने लग गई। नोटंबंदी को कालेधन और उसके सृजन पर प्रहार बताया गया रोजी-रोटी छोड़ कर मजदूर भी बैंक के दरवाजे पर वहीं खड़ा था जहां धन्ना सेठ वारी का इन्तजार कर रहे थे। विपक्ष को मुंहमांगा मुद्दा मिल गया। लेकिन आम आदमी ने माना कि इससे कालेधन की समानान्तर चलने वाली व्यवस्था ध्वस्त हो गई जनता ने विरोध के स्वरों को अनसुना ही नहीं किया उत्तरप्रदेश जेसे राज्य में भारतीय जनता पार्टी को नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में विजय से नवाजा और नोटबंदी के प्रबल विरोधियों को हाशिये पर धकेल दिया। नीति नीयत ने मोदी का हर बार साथ दिया। आलोचना मोदी को संजीवनी साबित हुई। नोटबंदी के पश्चात् उपलब्धि की जो गुलाबी तसवीर रिजर्व बैंक ने सार्वजनिक की है वह साबित करती है कि आजदी के पश्चात् देश के आर्थिक क्षेत्र में नोटबंदी सबसे बड़ा कं्रातिकारी सुधार है जिसने धनपतियों की तसवीर बैंक के राडार पर ला दी है। अब न तो बेनामी सौंदे हो पा रहे हैं और न कालाधन खपाने की गली शेष बची है। बैंकों में नकदी का अंबार लगा है। कर्ज वितरण आसान हुआ है। टेक्स का वेस बड़ा है और सरकार के खजाने में आने वाले टेक्स में बहुगुवित वृद्धि हुई है।

    सुरक्षा परिदृश्य में आये बदलाव से दुनिया चकित है। पड़ौसी देश पाकिस्तान और चीन भ्रमित है। सर्जिकल स्ट्राईक ने दुनिया को बता दिया है कि भारत अब साफ्ट इस्टेट नहीं रहा है। इसकी डोकलाम प्रकरण में भारत की दृढ़ता ने मोहर लगा दी है। चीन को डोकलाम मामले में उल्टे पैर लौटना पड़ा है। इसने भारत की प्रतिष्ठा में चारचांद लगा दिये हैं। चीन के पुसैल पाकिस्तान को भारत की सीमा में आतंकवाद फैलाने के लिए उकसाने वाले चीन को ही ब्रिक्स की बैठक में पाकिस्तान की भत्र्सना करने को नरेंद्र मोदी ने विवश कर दिया। यह पहला मौका था जब मोदी ने चीन की धरती पर चीन केा मात दे दी। विश्व शक्तियां दांत तले अंगुली दबाने को विवश हुई। लेकिन इसे कांग्रेस की नादानी ही कहेंगे कि जब चीन भारत के बीच तनाव चरम पर था राहुल गांध्ीा चीन के दूतावास पहुंच गये और खुद संदेह के घेरे में आ गये। देश विदेश खासकर अमेरिका ने भारत में जीएसटी की जी भरकर प्रशंसा की। लेकिन राहुल गांधी ने अमेरिका की धरती पर जीएसटी का विरोध करके न केवल घरेलु मामलों पर विवाद खड़ा कर दिया अपितु अपनी कूटनीतिक निरक्षरता जनता के सामने उजागर कर दी।

    हाल के दिनों में जापान के प्रधानमंत्री आबे ने भारत पहुंचकर नरेंद्र मोदी सरकार की नीतियों का खुलेमन से समर्थन किया अपितु भारत को सामरिक, आर्थिक समर्थन देकर पड़ौसी देश चीन का बुलेट और पाकिस्तान को बुलट का अर्थ समझा दिया। आज पाकिस्तान यदि आतंकवादी देश के रूप में अलग-थलग खड़ा है और चीन की विस्तारवादी दुष्प्रवृत्ति के कारण विश्व के अधिकांश देश चीन के विरोधी और भारत के समर्थन में खड़े हैं यह इक्कीसवीं शताब्दी की बड़ी सफलता है जिसका श्रेय नरेंद्र मोदी को जाता है। उन्होंने भारत के इतिहास को नया मोड़ देकर वैश्विक पटल पर भारत का मान और प्रतिष्ठा बढ़ाई है।

    नरेंद्र मोदी के प्रयास से अहमदाबाद से मुंबई बुलेट ट्रेन की आधार शिला रखे जाने के पश्चात् जापान के प्रधानमंत्री ने ऐलान किया है कि वे 2022 में बुलेट ट्रेन से भारत के नयनाभिराम स्थलों का दौरा करेंगे। पांच वर्षों में पूर्ण होने वाली बुलेट ट्रेन परियोजना पर 84 लाख करोड़ रू. का खर्च आयेगा जो कर्ज के रूप में जापान भारत को 0.1 प्रतिशत ब्याज पर देगा। नरेंद्र मोदी का यह कहना कि बुलेट ट्रेन परियोजना भारत को मुफ्त में पड़ेगी अतिरंजना नहीं एक हकीकत है। क्योकि इस कर्ज राशि की वसूली 15 वर्ष बाद लंबी अवधि की किश्तों में होगी। तब तक यह परियोजना भारत के लिए दुधारू गाय साबित हो चुकी होगी। देश के औद्योगिक शहरों में आवागमन सरल, सुलभ पर यातायात का दबाव केन्द्रित होने से सड़क और देश यातायात पर से दबाव घटेगा। इससे पर्यावरण संरक्षण का नया अध्याय आरंभ होगा।

    नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में हर क्षेत्र में काम की गति में तीव्रता आई है। सबसे बड़ी बात यह है कि भारत की दुनिया की महाशक्ति की राह पर अजेय बनकर बढ़ रहा है भारतीय फौज ने पाकिस्तान के विरूद्ध सर्जिकल स्ट्राईल लालसेना के साथ साहसिक झड़पे मोल ली हैं। ऐसा पहली बार हुआ कि भारत ने सीना तानकर इसकी जानकारी सार्वजनिक करने में गुरेज नहीं किया। अब तक यह साहस विश्व का महानशक्तिशाली देश अमेरिका ही करता रहा है। इतिहास में दर्ज है कि पूर्ववर्ती सरकार के दौर में नाथूला पर हुई झड़पों में चीन के 300 सैनिक ढेर हुए थे लेकिन सरकार यह बताने का साहस नहीं कर सकी थी। क्योंकि उसे अंदेशा था कि ऐसा करने से चीन भड़क जायेगा। लेकिन इस बार सेना को जितनी आजादी दी गई। उतने ही खुलेपन के साथ भारतीय फौज के शौर्य का सरकार ने बखान किया और उसे पूरा श्रेय भी दिया। अब तक भारत की विदेश नीति संकोच के अवकुंठन रही है। लेकिन मोदी ने इसमें साहस के साथ पारदर्शिता का रंग भरा है और देश का भाल उन्नत किया है यहीं महाशक्ति के सिर का सेहरा है।