Category: अर्थ संसार

  • समृद्धि की वैश्विक दौड़ में भारत का बजट बना ग्रोथ का इंजन

    समृद्धि की वैश्विक दौड़ में भारत का बजट बना ग्रोथ का इंजन

     “स्पीड, स्केल और संकल्प का केंद्रीय बजट”  – सीए अखिलेश जैन

    प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी ना तो छोटा सोचते हैं, ना छोटा करते हैं। स्पीड और स्केल अपने आप में भिन्न होती है। कार्यों के परिणाम भी भिन्न होते हैं। प्रधानमंत्री जी के लक्ष्य भी भिन्न होते हैं। प्रधानमंत्री जी कार्य शुरू करके उसको 100% तक पूरा करने का प्रयास करते हैं। यह बात बिल्कुल सही है प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी ने 2014 में जब से देश की सत्ता संभाली है, देश के स्थापित लक्ष्यों को पीछे छोड़ते हुए जिस स्पीड और स्केल से कार्य किया है, रात दिन एक करके बिना विश्राम लिए, वह किसी भी विश्लेषक को आश्चर्यचकित करने के लिए पर्याप्त है। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी की अगुवाई वाली सरकार ने हमेशा निर्णायक रूप से, अस्पष्टता की जगह काम को, बातों की जगह सुधार को और लोक-लुभावन नीतियों की जगह लोगों को प्राथमिकता दी है।

    सन् 2014 में प्रति व्यक्ति की आय 86647 रुपए सालाना थी,  2023 में बढ़कर 172000 रुपए सालाना हो गई, 2026 में लगभग 2.5 लाख से 2.72 लाख रुपए सालाना के बीच तक पहुंचने का अनुमान है, इस बीच में कोरोना जैसी वैश्विक महामारी का भी देश ने सामना किया। कोरोना के बावजूद 2022-23 में प्रति व्यक्ति आय 172000 रुपए सालाना, मतलब लगभग 9 वर्षों में प्रति व्यक्ति आय को दोगुना करने में, प्रधानमंत्री जी वैश्विक अनिश्चिताओं, वैश्विक उथल-पुथल, वैश्विक महामारी के बाद भी 172000 रुपए सालाना आय के लक्ष्य प्राप्त करने में सफल रहे। यही प्रति व्यक्ति आय 2024 – 2025 में 235000 रुपए सालाना तक पहुंच गई। यही प्रधानमंत्री जी की अर्थनीति, स्पीड और स्केल है, यही मोदी जी का 13 वर्षों का बजट है।

    2014-15 में प्रति व्यक्ति जीडीपी 98405 रुपए सालाना के लगभग थी, 2024 – 2025 में प्रति व्यक्ति जीडीपी 234859 रुपए सालाना तक पहुंच गई। यही मोदी जी का 13 वर्षों का बजट है।

    भारत का कुल निर्यात 2013-14 के दौरान 465 अरब अमेरिकी डॉलर के बराबर था जो 2024 – 2025 में भारत का कुल निर्यात 825.3 अरब अमेरिकी डॉलर पहुंच गया। अर्थात् 11 वर्षों में भारत का निर्यात 177.5 % की दर से सकारात्मक वृद्धि दर को प्राप्त किया। यही मोदी जी का 13 वर्षों का बजट है।

    मंदी के दौरान भी भारत ने पर्याप्त प्रत्यक्ष विदेशी निवेशकों को आकर्षित किया है। मोदी सरकार के लगातार सुधारों एवं प्रयासों के परिणाम स्वरूप एफडीआई 2013-14 में लगभग 36 अरब अमेरिकी डॉलर था। 2024-25 में 80 अरब अमेरिकी डॉलर से अधिक हो गया, 222.23 % की दर से सकारात्मक वृद्धि दर को प्राप्त किया। जो निवेशकों के निरंतर विश्वास और सेवा, डिजिटल, विनिर्माण एवं बुनियादी अवसंरचनात्मक क्षेत्रों में निवेश की तेज गति को दर्शाता है। यही प्रधानमंत्री मोदी जी की अर्थनीति और 13 वर्षों बजट है।

    2014 में हाई- स्पीड कॉरिडोर की लंबाई 550 किलोमीटर थी, वित्त वर्ष 2025- 2026 में दिसंबर तक 5,364 किलोमीटर हो गई है। लगभग दस गुना बढ़ गई है। यही प्रधानमंत्री मोदी जी की स्पीड और स्केल है।

    हवाई अड्डों की संख्या 2014 में 74 थी, 2025 में 164 हो गई है। भारत घरेलू विमानन के क्षेत्र में विश्व का तीसरा सबसे बड़ा बाजार बन गया है। यही प्रधानमंत्री मोदी जी की अर्थनीति है।

    नवकरणीय ऊर्जा तथा संस्थापित सौर ऊर्जा क्षमता के मामले में भारत मार्च 2014 में 76.38 गीगावॉट पर था, नवंबर 2025 तक 253.96 गीगावाट हो गई, वैश्विक स्तर पर तीसरे स्थान पर है और स्थापित पवन ऊर्जा क्षमता में चौथे स्थान पर है। कुल नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता पिछले दशक में तीन गुना से अधिक बढ़ गई है। यही प्रधानमंत्री मोदी जी की अर्थनीति है।

    2014 में उच्च गति क्षमता वाली पटरियों की लंबाई 31,445 किमी थी, 2025 तक लगभग दोगुनी से भी ज्यादा होकर होकर 84,244 किमी हो गई है, जिससे राष्ट्रीय रेल नेटवर्क के लगभग 80% हिस्से पर 110 किमी प्रति घंटे से अधिक की गति से परिचालन संभव हो पा रहा है।

    उद्योग को समर्थन देना उद्योग को बढ़ाने में सहायक सिद्ध होता है। इसलिए उच्च स्तरीय उच्च गति की रेल कॉरिडोर का विकास औद्योगिक क्षेत्र के लिए विशेष सहायक होगा।
    प्रधानमंत्री मोदी जी ने सभी महत्वपूर्ण औद्योगिक क्षेत्र को हाई स्पीड रोड से जोड़ने का प्रयास किया है। यही प्रधानमंत्री मोदी जी की स्पीड और स्केल है।

    रक्षा बजट 2013-14 में 2.53 लाख करोड़ रुपये था, वर्ष 2026-27 में 7.85 लाख करोड़ रुपये हो गया है, अर्थात इसमें लगभग 5.32 लाख करोड़ रुपये की बढ़ोत्तरी हुई है, जो लगभग तीन गुना वृद्धि को दर्शाता है। इस बढ़े हुए प्रावधान के माध्यम से, सरकार ने आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य की दिशा में रणनीतिक बदलाव के साथ सशस्त्र बलों और उनकी क्षमताओं को दुनिया के उच्चतम मानकों में बदलने के अपने संकल्प की पुष्टि की है। वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं में रुकावट और विदेशी विक्रेताओं की तुलना में घरेलू आवश्यकताओं को प्राथमिकता देने ने आयात प्रतिस्थापन की आवश्यकता पर फिर से जोर दिया है और न केवल निर्वाह के लिए बल्कि भविष्य के आधुनिकीकरण के लिए स्वदेशीकरण की ओर बढ़ रहा है। यही मोदी जी का बजट है।

    13 सालों के बजट की चर्चा इसलिए भी आवश्यक है कि आज देश जिस स्थिति में खड़ा है उस स्थिति को प्राप्त करने में कोई एक बजट महत्वपूर्ण नहीं है, आज की स्थिति जो भारत ने प्राप्त की है इस स्थिति को प्राप्त करने के लिए मोदी जी को विरासत में मिला भारत और विरासत को मोदी जी के द्वारा सजाया संवारा गया है। इन दोनों चीजों का परिणाम आज का वर्तमान भारत है और भविष्य का भारत आज के भारत से आगे के भारत के लिए की गई तैयारी का परिणाम होगा।

    मोदी जी भारत को तेज गति से आगे बढ़ाने के लिए प्रयासरत हैं। तेज गति को प्राप्त करने के लिए आवश्यक सुधारों पर बल दिया गया है। सरकार के प्राथमिकताओं में परिवर्तन किया गया है। सरकार ने युवा शक्ति को भविष्य का भारत बनाने के लिए तैयार करने डेवलप करने और नेतृत्व करने के लिए रचनात्मक प्रयास किए हैं। राजकोषीय अनुशासन, सतत् विकास, मुद्रास्फीति की दर को कम करने का शानदार प्रयास किया है। मोदी सरकार ने आत्मनिर्भरता को लक्ष्य मान करके घरेलू उत्पादन क्षमता को बढ़ाने का प्रयास किया है। ऊर्जा सुरक्षा को सुरक्षा प्रदान करने का प्रयास किया है। मेक इन इंडिया जैसे कार्यक्रमों को चला करके आयात पर निर्भरता कम करने का प्रयास किया है। सरकार की पूरी अर्थनीति का अगर विश्लेषण करेंगे तो उसके केंद्र बिंदुओं में सरकार का लक्ष्य आत्मनिर्भरता, रोजगारसृजन, कृषि उत्पादन क्षमता का विकास, नागरिकों की क्रय शक्ति का बढ़ना, नागरिकों के जीवन स्थान में सुधार लाना अपनाया गया है। सरकार ने 7% उच्च वृद्धि दर को सुनिश्चित करके गरीबी घटाने और नागरिकों के जीवन को बेहतर बनाने के प्रयासों में उल्लेखनीय सफलता प्राप्त की है।

    जो देश कृषि उत्पादों को आयात करता था, अनाज की कमी से जुझता था, आज वही देश ढाई लाख करोड़ रुपए से अधिक के कृषि उत्पादों को निर्यात करता है, कितना फर्क है,

    सरकार की अर्थ नीति कर्तव्य नीति ज्यादा दिखाई देती है। जिसके चलते सरकार ने 25 करोड़ लोगों को गरीबी से बाहर निकलने में सफलता प्राप्त की है।

    इसलिए मोदी सरकार के बजट में, मोदी सरकार की अर्थनीति में, स्पीड और स्केल में, हर क्षेत्र की तरफ, नभ, जल और आकाश सभी तरफ नए कीर्तिमान स्थापित होते दिखते हैं। क्योंकि हमारे पूर्व की क्षमताओं से हम एक नए स्तर पर आ गए हैं। मोदी सरकार का लक्ष्य तो इससे कहीं ऊपर है। देश को वापस अपना खोया हुआ गौरव हासिल करना है। देश को विश्व की अर्थव्यवस्था में अपनी हिस्सेदारी सुनिश्चित करना है। इसीलिए भारत विश्व का ग्लोबल ग्रोथ इंजन है। कोई भी इस विकास की दौड़ में पीछे ना छूटे, कोई भी विकास की भागीदारी में रह ना जाए, समग्र विकास के साथ-साथ समग्र दृष्टिकोण केवल भाजपा सरकार, प्रधानमंत्री मोदी जी ही कर सकते हैं।

    (लेखक- अखिलेश जैन सीए व भाजपा मप्र के प्रदेश कोषाध्यक्ष हैं)

  • बीना में पचास हजार करोड़ रुपयों की एथिलीन क्रेकर परियोजना का काम शुरु

    बीना में पचास हजार करोड़ रुपयों की एथिलीन क्रेकर परियोजना का काम शुरु


    भोपाल,12 फरवरी (प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)।प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 14 सितंबर 2023 को बीना में लगभग 50 हजार करोड़ रुपये की लागत वाली जिस एथिलीन क्रैकर परियोजना की आधारशिला रखी थी उसके लिए नए केन्द्रीय बजट में आवश्यक प्रावधान कर दिया गया है। इंजीनियर्स इंडिया लिमिटेड की कंसल्टेंसी में प्रोजेक्ट का काम यहां जोरों शोरों से चालू है। राज्य सरकार इस परियोजना को सफल बनाने के लिए आवश्यक सुविधाएं जुटाने का प्रयास भी कर रही है।


    बीना रिफायनरी के सहयोगी प्रतिष्ठान के रूप में ये प्रोजेक्ट देश को दुनिया के पेट्रोकेमिकल क्षेत्र में प्रमुख स्थान दिलाएगा। केन्द्रीय बजट में बीना पेट्रोलियम क्रेकर्स परियोजना को लगभग पचास हजार करोड़ रुपए जुटाने की मंजूरी मिल गई है। भारत पेट्रोलियम कार्पोरेशन लिमिटेड BPCL की सागर जिले स्थित बीना रिफाइनरी (Bina Refinery) के विस्तार और वहां ₹49,000 करोड़ से अधिक की लागत से एक विश्वस्तरीय पेट्रोकेमिकल्स कॉम्प्लेक्स स्थापित करने का काम चल रहा है । यह परियोजना ‘मेक इन इंडिया’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ के तहत भारत को तैयार पेट्रोकेमिकल प्रोडेक्ट का आयात कम करने और निर्यात बढ़ाने में प्रमुख भूमिका निभाएगी।


    प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने जब इस परियोजना की आधारशिला रखी थी तब किसी को ये अनुमान नहीं था कि इतनी जल्दी ये परियोजना आकार ले लेगी। प्रदेश के कुछ सांसदों और विधायकों ने इस परियोजना को अन्यत्र स्थानांतरित किए जाने की लाबिंग भी की थी। शासन के कुछ अधिकारियों ने इसके लिए तमाम तर्क दिए थे,लेकिन प्रधानमंत्री कार्यालय ने कहा कि इस परियोजना का कच्चा माल नेप्था बीना रिफायनरी से ही प्राप्त होता है। यहां स्थित टाऊनशिप भी काफी सुविधाजनक है। जमीन उपलब्ध है। सरकार का अमला मुआवजे आदि की प्रक्रियाएं भी पूरी कर चुका है। ऐसे में परियोजना को जल्दी पूरा करने के अलावा कोई सोच विचार नहीं किया जा सकता।


    बीना पेट्रोकेमिकल परियोजना की मुख्य बातें:
    परियोजना लागत: लगभग ₹49,000 करोड़ (लगभग ₹52,000 करोड़ तक अनुमानित) के निवेश से 1.2 MTPA एथिलीन क्रैकर यूनिट स्थापित की जा रही है।
    क्षमता विस्तार: परियोजना में रिफाइनरी की क्षमता 7.8 MTPA से बढ़ाकर 11 MTPA करने का प्रावधान शामिल है।
    उत्पादन: यह परियोजना Linear Low-density Polyethylene (LLDPE), High-density Polyethylene (HDPE), Polypropylene (PP) और अन्य पेट्रोकेमिकल उत्पादों का उत्पादन करेगी।
    रोजगार: निर्माण चरण में 15,000 से अधिक और चालू होने के बाद 1 लाख से अधिक प्रत्यक्ष/अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर पैदा होंगे।


    इस परियोजना का उद्देश्य बुंदेलखंड क्षेत्र को औद्योगिक केंद्र बनाना और आयात पर निर्भरता कम करना है। परियोजना के लिए भारत सरकार (SBI के नेतृत्व में) और मध्य प्रदेश सरकार (औद्योगिक प्रोत्साहन के माध्यम से) वित्तीय सहायता व बुनियादी ढांचा प्रदान कर रही हैं। यह परियोजना 2028 तक चालू होने की उम्मीद है।

  • कार्पेोरेट शोषण से नाराज व्यापारियों ने पाली को फिर बनाया अपना नेता

    कार्पेोरेट शोषण से नाराज व्यापारियों ने पाली को फिर बनाया अपना नेता


    भोपाल,29 जनवरी(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)। बैंकों से हजारों करोड़ रुपयों का कर्ज लेकर स्थानीय कारोबार की चैन तोड़ने वाली कार्पोरेट कंपनियों के विरुद्ध भोपाल के व्यापारी अब लामबंद हो गए हैं। भोपाल चेंबर आफ कामर्स के एक फरवरी को होने वाले चुनावों में व्यापारियों के बीच नेता के रूप में तेजकुल पाल सिंह पाली को लेकर उत्साह का माहौल बन गया है। ये व्यापारी तेजकुल पाली के विरुद्ध चुनाव लड़ रहे गोविंद गोयल को कार्पोरेट, राजनेताओं और हवाला कारोबारियों का एजेंट बता रहे हैं।


    राजधानी के प्रमुख होटल व्यवसायी तेजकुल पाल सिंह पाली यूं तो खुद को स्थानीय व्यापार में जान फूंकने वाला प्रतिनिधि बताते हैं। उनके बयानों में भी वे किसी अन्य पर आक्षेप लगाए बिना अपने पिछले कार्यकाल का हवाला देकर जिताने की अपील करते हैं। पत्रकारों से चर्चा में उन्होंने बताया कि उनका पिछला कार्यकाल पूरा होने के नौ महीने बाद जब व्यापारी उन्हें दुबारा अध्यक्ष के रूप में निर्विरोध चुनने की मांग कर रहे थे तब उन्होंने इस्तीफा दिया था ताकि निष्पक्ष चुनाव कराए जा सकें। कुछ कार्पोरेट कंपनियों से जुड़े पदाधिकारियों ने इस्तीफा मंजूर करते हुए अखबारों में मनगढ़ंत बयान छपवाए कि मैं दुबारा अध्यक्ष नहीं बनना चाहता। इस बार व्यापारियों की मांग पर दुबारा मैं मैदान में खड़ा हूं। मैं न तो राजनेता हूं न किसी राजनेता की कठपुतली हूं, केवल व्यापारियों का प्रतिनिधि हूं।
    श्री पाली ने कहा कि कई बाहिरी ताकतें कार्पोरेट कंपनियों की आड़ में स्थानीय बाजार को चौपट करना चाहती हैं। ये लोग हमारे ही देश के बैंकों से कर्ज लेकर विदेश का सस्ता व नकली माल बाजार में पाट देते हैं और स्थानीय बाजार व्यवस्था को तोड़ देते हैं। बाद में ये कंपनियां डिफाल्टर होकर भाग जाती हैं। इससे हमारे देश की पूंजी व्यवस्था क्षतिग्रस्त हो रही है।

    उन्होंने कहा कि राजधानी होने के कारण भोपाल इन कंपनियों के निशाने पर होता है। इसके विपरीत हमारे स्थानीय व्यापारी अपना समय और ऊर्जा लगाकर लोगों को उनकी जरूरत का माल मुहैया कराते हैं। सरकारें इन षड़यंत्रों को नहीं समझ पा रहीं हैं। हमारा प्रयास है कि हम व्यापारियों से फीडबैक लेकर राजधानी और प्रदेश को ऐसी बाजार व्यवस्था दें ताकि हमारे प्रदेश की संपत्ति बढ़े और राज्य को सफल प्रदेश के रूप में आगे बढ़ाया जा सके। फिलहाल तो हम राजधानी के व्यापारियों के बीच रायशुमारी कर रहे हैं। आगामी एक फरवरी को होने वाले भोपाल चेंबर आफ कामर्स के चुनावों में जागरूक व्यापारियों को जिताने के लिए उनके नेतृत्व में प्रगतिशील पैनल के सदस्य लगातार संवाद स्थापित कर रहे हैं।


    उनके साथ उपाध्यक्ष पद का चुनाव लड़ रहे कमल पंजवानी ने कहा कि हमारी पैनल के माध्यम से चुनाव लड़ रहे प्रत्याशी चेंबर के पिछले कार्यकाल में भी सक्रिय रहे हैं। स्थापना के बाद से चेंबर के सदस्यों ने पहली बार व्यापारियों के हित में आवाज बुलंद की थी। यही वजह है कि हमारे पूर्व अध्यक्ष तेजकुल पाल सिंह पाली को व्यापारियों ने सिर आंखों पर बिठाया। हाल ही में 26 जनवरी को जब हमने राष्ट्रभक्ति से सराबोर देशगीतों का आयोजन किया तो दूर दराज के व्यापारी भी उमड़ पड़े और सभी ने उल्लास पूर्वक प्रदेश को मजबूत बाजार देने के इस अभियान का समर्थन किया।


    प्रतिद्वंदी उन्नति पैनल से महामंत्री पद का चुनाव लड़ रहे विनोद जैन एमपीटी ने कहा कि गोविंद गोयल की पैनल सदैव व्यापारियों के हित में लड़ाई लड़ती रही है। हमने ट्रांसपोर्ट व्यापारियों को 123 करोड़ के जुर्माने जैसे असंवैधानिक दबाब से बाहर निकालने में बड़ी भूमिका निभाई थी। सराफा व्यापारियों की समस्याओं का भी समाधान कराया था। उन्नति पैनल के सभी पदाधिकारी व्यापारियों की समस्याओं के समाधान के लिए हमेशा उपलब्ध रहते हैं। यही वजह है कि एक फरवरी को होने जा रहे चुनावों में उन्नति पैनल अपनी विजय पताका फहराने जा रही है।

    गौरतलब है कि कई चीनी ,अमेरिकी, जर्मनी, और ब्रितानियों की बहुराष्ट्रीय कंपनियां भारतीय बाजार को धराशायी करने के लिए कथित तौर पर भारतीय बैंकों से हजारों करोड़ रुपए का कर्ज लेकर अपना माल बाजार में उतार रहीं हैं। इससे स्थानीय व्यापारियों का कारोबार ठप होता जा रहा है। सरकार की ओर से इन व्यापारियों को कोई संरक्षण नहीं मिल रहा है। जिस तरह जीएसटी और अन्य प्रावधान लागू किए गए हैं उससे भी व्यापारियों का सुख चैन छिन गया है। यही वजह है कि व्यापारी नाराज हैं और सरकार से सुधारों की उम्मीद कर रहे हैं।

  • मोहन ने लगाया छन्ना तो उखड़ पड़े खैराती नगर सेठ

    मोहन ने लगाया छन्ना तो उखड़ पड़े खैराती नगर सेठ

    भले ही भारत की अर्थव्यवस्था वृद्धि दर के लिहाज़ से मजबूत मानी जा रही है, लेकिन देश पर बढ़ते कर्ज को कई विदेशी ताकतें भाजपा सरकारों की असफलता ठहराने का प्रयास कर रहीं हैं। केंद्र और राज्यों दोनों का कर्ज लगातार बढ़ रहा है और इसका प्रत्यक्ष असर राज्यीय अर्थव्यवस्थाओं पर भी दिख रहा है। मध्यप्रदेश भी इससे अछूता नहीं है। यहाँ सरकार लगातार बड़े बजट और जनकल्याण योजनाओं के साथ आर्थिक गतिविधियों को तेज़ करने का प्रयास कर रही है, लेकिन इन पहलों का वित्तीय भार राज्य की ऋण-प्रणाली को चुनौती देता बताया जा रहा है।ये सारा शोर कमोबेश वही लोग मचा रहे हैं जो अब तक शिवराज सिंह चौहान की सरकार के दौरान मलाई छानते रहे हैं।


    भारत में पिछले कुछ वर्षों में सरकारी एवं घरेलू—दोनों स्तरों पर कर्ज तेज़ी से बढ़ा है। कोविड के बाद पुनरुद्धार पैकेज, बुनियादी ढाँचे में निवेश, सामाजिक सुरक्षा योजनाएँ और वैश्विक आर्थिक अस्थिरता ने सरकारी उधारी पर निर्भरता बढ़ाई है। राष्ट्रीय स्तर पर बढ़ते ऋण का सीधा असर राज्यों की उधारी सीमा, बाजार ब्याज दरों और उधार की लागत पर पड़ता है। केंद्र की उधारी बढ़ने से बाजार में बांडों की मांग प्रभावित होती है और राज्यों को ऊँचे ब्याज पर ऋण लेना पड़ता है। यही स्थिति आज मध्यप्रदेश समेत कई राज्यों के सामने है।


    विधानसभा के हालिया सत्र में अनुपूरक बजट प्रस्तावों पर चर्चा करते हुए प्रमुख विपक्षी दल कांग्रेस के वरिष्ठ नेता डाक्टर राजेन्द्र सिंह ने कहा कि सरकार पर कर्ज का बोझ लगभग चार लाख अस्सी हजार करोड़ से ज्यादा हो गया है। ये राज्य के कुल बजट से भी ज्यादा है। राज्य पर ब्याज का बोझ भी बढ़ता जा रहा है और सरकार की विकास योजनाएं प्रभावित हो रहीं हैं। मध्यप्रदेश का वार्षिक बजट जहाँ लगातार बढ़ा है, वहीं राज्य का कर्ज उससे भी तेज़ी से ऊपर गया है। 2025 तक उपलब्ध सरकारी आँकड़ों के अनुसार, राज्य पर बकाया ऋण लगभग 4.4–4.6 लाख करोड़ रुपयों तक पहुँच चुका है—जो राज्य के वार्षिक बजट (लगभग 4.21 लाख करोड़) से भी अधिक है।
    इसके अलावा, वर्ष 2025 के भीतर सरकार ने कई बार तात्कालिक उधारी (short-term borrowing) ली—जो यह संकेत देती है कि योजनाओं और भुगतान दायित्वों को पूरा रखने के लिए सरकार को बाजार से बार-बार धन जुटाना पड़ रहा है। राज्य की ऋण-से-GSDP अनुपात (Debt-to-GSDP Ratio) भी बढ़कर 31% के आसपास पहुँच गया है, जो आदर्श वित्तीय सीमा से अधिक माना जाता है।


    ऐसा कहा जा रहा है कि लाड़ली बहना योजना की वजह से सरकार झमेले में पड़ रही है। हालांकि ये योजना डाक्टर मोहन यादव को विरासत में मिली थी।वर्तमान सरकार ने महिलाओं को आर्थिक आधार देने के लिए ‘लाडली बहना’ योजना को सर्वोच्च प्राथमिकता दी है। उन्हें दी जाने वाली रकम भी बढ़ाई है। योजना की मासिक किश्तें और लगातार बढ़ती पात्रता संख्या के कारण राज्य को हर माह बड़ी राशि खर्च करनी पड़ती है। यह योजना सामाजिक रूप से अत्यंत प्रभावी है, लेकिन इसके लिए आवश्यक बजट का एक बड़ा हिस्सा उधार पर निर्भर है।


    सरकारी कर्मचारियों के वेतन-संशोधन, महंगाई भत्ते और पेंशन दायित्व बढ़े हैं, जिससे सरकार का नियमित राजस्व व्यय लगातार ऊपर जा रहा है। मेडिकल कॉलेज, नदी-लिंक, पर्यटन अवसंरचना और औद्योगिक इकाइयों पर बड़े निवेश की पहल की गई है। ये प्रोजेक्ट दीर्घकाल में लाभ देंगे, लेकिन शुरुआती वर्षों में इन पर भारी पूंजी खर्च की आवश्यकता होती है—जो उधारी के सहारे पूरी की जा रही है। सरकार ने मई से अक्टूबर 2025 के बीच कई बार 3,000–5,000 करोड़ रुपये के कर्ज लिए। यह नकदी-अभाव और बढ़ते भुगतान दायित्वों की ओर संकेत बताया जा रहा है। जबकि वित्तीय विशेषज्ञों का कहना है कि ये रकम देश की अर्थव्यवस्था का आकार बढ़ाने में प्रयुक्त हो रही है इसलिए इस पर ज्यादा चिंतित होने की जरूरत नहीं है।


    डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में राज्य सरकार की प्राथमिकता जनकल्याण, महिलाओं का सशक्तिकरण, बड़े बुनियादी प्रोजेक्ट पर कार्य, औद्योगिक विकास, शिक्षा और स्वास्थ्य पर नए निवेश के रूप में जारी है। इन सभी पहलों को जनता का समर्थन भी प्राप्त है। परंतु यह भी सच है कि इतनी व्यापक योजनाओं के लिए राज्य को सशक्त राजस्व आय की आवश्यकता है,जो अभी सीमित है। यही कारण है कि सरकार को बार-बार उधार लेकर नीतियों को गति देनी पड़ रही है। राजनीतिक दृष्टि से ये योजनाएँ मजबूत आधार बनाती हैं, लेकिन आर्थिक दृष्टि से ऋण-पोषित कल्याण मॉडल लंबे समय में चुनौती बन सकता है।


    वित्तीय तरलता घटने से कई कार्यक्रम गड़बड़ा जाते हैं। जब कर्ज बढ़ता है, तो बजट का बड़ा हिस्सा ब्याज भुगतान में जाता है। इससे शिक्षा, स्वास्थ्य और बुनियादी ढाँचे में निवेश कम पड़ने का खतरा होता है। उच्च ऋण/GSDP अनुपात से राज्य की क्रेडिट रेटिंग प्रभावित होती है, और आने वाले वर्षों में उधार लेना महंगा हो सकता है। कर्ज जितना बढ़ता जाएगा, नीति-निर्माताओं के पास नई योजनाओं के लिए वित्तीय गुंजाइश उतनी ही कम होती जाएगी।
    मुख्यमंत्री डाक्टर मोहन यादव ने आय बढ़ाने वाले विभागों पर तेजी से कार्य करने का फैसला लिया है। उसका प्रयास है कि राजस्व आय बढ़े,उद्योग और पर्यटन पर निवेश बढ़ाने की नई नीतियां लाई जाएं। जीएसटी की प्रक्रिया मजबूत हो और कर संग्रहण की स्थितियों में सुधार हो। राज्य के संसाधनों और संपत्तियों का इस तरह से पुर्ननियोजन किया जाए कि उनसे आय बढ़ाई जा सके और बर्बादी रोकी जा सके। कल्याण योजनाओं के लिए लाभार्थियों की नियमित समीक्षा कर खर्च की दक्षता बेहतर की जा सकती है। सरकारी खरीद और प्रशासनिक खर्च में कटौती कर कर्ज निर्भरता को कम किया जा सकता है। ऐसे प्रोजेक्ट जिनसे सीधे राजस्व आय बढ़ती है — कृषि वैल्यू चेन, पर्यटन, स्वास्थ्य सेवाएँ, स्टार्टअप इकॉनमी — इन्हें प्राथमिकता मिलनी चाहिए।


    मध्यप्रदेश आज दो राहे पर खड़ा है उसे अपनी जन हितकारी योजनाएं जारी रखनी हैं लेकिन उसे अपने कर्ज के निवेश से आय के नए संसाधन भी विकसित करने हैं। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की नीतियाँ सकारात्मक सामाजिक बदलाव ला रही हैं, किंतु इन नीतियों की वित्तीय स्थिरता तभी सुनिश्चित हो पाएगी जब राज्य कर्ज-निर्भरता से निकलकर मजबूत राजस्व-आधारित अर्थव्यवस्था की ओर बढ़ेगा। राज्य के लिए चुनौती यह नहीं कि योजनाएँ जारी रहें या नहीं—बल्कि यह है कि उन्हें वित्तीय दृष्टि से टिकाऊ कैसे बनाया जाए। यही वह बिंदु है जो आने वाले वर्षों में मध्यप्रदेश की आर्थिक सेहत और विकास गति दोनों तय करेगा।

  • बैलेंसशीट के मुनाफे में जन भागीदारी से ही सफल होगा मध्यप्रदेश

    बैलेंसशीट के मुनाफे में जन भागीदारी से ही सफल होगा मध्यप्रदेश

    -आलोक सिंघई-

    मध्यप्रदेश को अक्सर “भारत का हृदय” कहा जाता है — और आर्थिक संकेतक बताते हैं कि यह राज्य अब सचमुच भारत के विकास-मानचित्र पर एक अहम स्थान लेता जा रहा है। वर्ष 2024–25 में राज्य का सकल राज्य घरेलू उत्पाद (GSDP) लगभग 15.03 लाख करोड़ रुपए तक पहुँच गया है, जो 11.05 प्रतिशत की प्रभावशाली वृद्धि दर्शाता है। यह दर राष्ट्रीय औसत से बेहतर है और राज्य की आर्थिक गतिशीलता का संकेत देती है। राज्य की प्रति व्यक्ति आय भी बढ़कर लगभग 1.52 लाख रुपए तक पहुँची है। हालांकि यह वृद्धि उत्साहजनक है, फिर भी यह महाराष्ट्र, गुजरात और कर्नाटक जैसे अग्रणी राज्यों से कम है।
    मध्यप्रदेश की अर्थव्यवस्था अब केवल खेती पर निर्भर नहीं है। सोयाबीन, गेहूँ और तिलहन के उत्पादन प्रेोसेसिंग में अग्रणी होने के साथ, राज्य ने अब औद्योगिक निवेश और निर्यात में भी उल्लेखनीय प्रगति की है। वर्ष 2024–25 में राज्य की निर्यात रैंकिंग 15वें से सुधरकर ग्यारहवें स्थान पर पहुँच गई है। इंदौर, भोपाल, पीथमपुर और मंडीदीप जैसे औद्योगिक क्षेत्र अब तकनीक, इंजीनियरिंग और फार्मा उत्पादों के नए केंद्र बन रहे हैं। राज्य ने पिछले वर्ष ढाई हजार करोड़ रुपयों से अधिक के तकनीकी निवेशों को आकर्षित किया है। यही वजह है कि राज्य अब धीरे-धीरे एक “डिजिटल पावरहाउस” के रूप में उभर रहा है।
    विकास के इन सकारात्मक संकेतों के बावजूद, सामाजिक क्षेत्र अभी भी मध्यप्रदेश की कमजोर कड़ी है। राज्य की साक्षरता दर लगभग सत्तर फीसदी है, जो राष्ट्रीय औसत से कम है। स्कूलों में इंटरनेट कनेक्टिविटी सिर्फ पैंतीस प्रतिशत तक सीमित है, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों से प्रतिभाओं की प्राप्ति कठिन बनी हुई है। जो ग्रामीण अपने बच्चों को बेहतर शिक्षा देना चाहते हैं उन्हें इसकी मंहगी कीमत चुकाकर बच्चों को बड़े शहरों में भेजना पड़ता है।
    स्वास्थ्य के पैमाने पर भी राज्य कठिन संकटों से जूझ रहा है। भारी धनराशि खर्च करने के बावजूद कार्यकुशल आबादी का सवास्थ्य चिंताजनक बना हुआ है। शिशु मृत्यु दर लगभग 43 प्रति 1000 जन्म है, और ग्रामीण इलाकों में डॉक्टरों की उपलब्धता सीमित है। मानव विकास सूचकांक (HDI)0.611 के आसपास है, जो भारत के कई अन्य राज्यों से नीचे है।
    यदि कोई क्षेत्र है जिसमें मध्यप्रदेश ने राष्ट्रीय स्तर पर नाम कमाया है, तो वह है स्वच्छता और आधारभूत ढाँचे का विकास। इंदौर लगातार सातवीं बार भारत का सबसे स्वच्छ शहर घोषित हुआ है। बिजली, सड़क, और ग्रामीण कनेक्टिविटी के क्षेत्र में पिछले दशक में उल्लेखनीय सुधार हुए हैं। राज्य ने वर्ष 2024–25 में 1.01 लाख मिलियन यूनिट बिजली ट्रांसमिट कर नया रिकॉर्ड बनाया।
    राज्य सरकार ने लाड़ली बहना योजना,मुख्यमंत्री उद्यम क्रांति योजना और कृषि निवेश प्रोत्साहन कार्यक्रमों के ज़रिए सामाजिक व आर्थिक समावेशन को बढ़ावा देने का प्रयास किया है इसके बावजूद बेरोज़गारी, महिला सुरक्षा और भ्रष्टाचार जैसी समस्याएँ अब भी जनता के बीच चिंता का कारण हैं।
    अन्य राज्यों से तुलना

    संकेतकमध्यप्रदेशगुजरातमहाराष्ट्रकर्नाटकउत्तरप्रदेश
    GSDP वृद्धि दर (2024–25)11.05%9.3%8.1%9.8%9.1%
    प्रति व्यक्ति आय (₹)1.52 लाख2.74 लाख2.85 लाख2.65 लाख1.45 लाख
    साक्षरता दर (%)7079827668
    HDI0.6110.6820.6960.6850.613

    *स्रोत: NITI Aayog, आर्थिक सर्वेक्षण 2024–25, Free Press Journal, Times of India, ET Government Reports
    मध्यप्रदेश आज एक तेजी से बढ़ता, परंतु चुनौतियों से जूझता राज्य है। जहाँ आर्थिक प्रगति ने एक ठोस आधार तैयार किया है, वहीं शिक्षा, स्वास्थ्य और मानव विकास को मजबूत किए बिना “सफल राज्य” की उपाधि अधूरी रहेगी। संक्षेप में कहा जाए तो — मध्यप्रदेश अब भारत का “उभरता हुआ विकासशील राज्य” है, पर वास्तविक सफलता की मंज़िल तक पहुँचने के लिए सामाजिक विकास पर केंद्रित नई रफ्तार की जरूरत है।

    1. शिक्षा और डिजिटल पहुँच में तेज़ निवेश के माध्यम से हर स्कूल तक इंटरनेट व स्मार्ट क्लास की पहुंच आज की अनिवार्य पहल बन गई है।
    2. ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाओं का सशक्तीकरण करने के लिए हमें अपने प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में डॉक्टर और उपकरणों की उपलब्धता सुनिश्चित करनी होगी।
    3. कृषि से उद्योग तक वैल्यू-चेन विकसित करना होगी ताकि किसानों की आय स्थायी रूप से बढ़ाई जा सके और उन्हें सरकारी मदद की बाट न जोहनी पड़े।
    4. महिला सुरक्षा व कौशल विकास कार्यक्रमों को वास्तविक परिणामों तक पहुँचाना होगा। लाड़ली बहना योजना का लाभ हर महिला तक न तो पहुंच पा रहा है और न ही ये संभव होगा। महिलाएं आर्थिक विकास की चेन का हिस्सा बनें तभी इन लक्ष्यों को हासिल किया जा सकता है।
    5. नवाचार और स्टार्टअप निवेश के लिए विशेष औद्योगिक ज़ोन बनाना होंगे जो नव उद्यमियों को सहारा देकर उत्पादन बढ़ाने में सहयोगी साबित हो। कल्याणकारी राज्य की कहानियां बहुत सुनी सुनाई जा चुकी हैं। अब तो चुनौतीपूर्ण नतीजे लाने की प्रतिस्पर्धा ही एमपी को सिरमौर बना सकती है।
  • धार अब फैशन की दुनिया में लगाएगा नई छलांग

    धार अब फैशन की दुनिया में लगाएगा नई छलांग

    प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी 17 को भैंसोला में लिखेंगे नई इबारत


    भोपाल,13 सितंबर(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी आगामी सत्रह सितंबर को धार के दौरे पर आ रहे हैं। वे फैशन की दुनिया में धार के बढ़ते सोपानों की आधार शिला रखेंगे। भारत सरकार ने वस्त्र उद्योग को सशक्त और आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से पीएम मित्रा पार्क योजना (PM MITRA Parks Scheme) की शुरुआत की है। यह योजना प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के “आत्मनिर्भर भारत” और “मेक इन इंडिया” विज़न को साकार करने का एक बड़ा कदम है।

    पीएम मित्रा पार्क योजना की घोषणा केंद्रीय बजट 2021-22 में की गई थी। इस योजना के अंतर्गत देशभर में 7 मेगा इंटीग्रेटेड टेक्सटाइल रीजन एंड अपैरल (MITRA) पार्क स्थापित किए जाएंगे। इन पार्कों का उद्देश्य वस्त्र क्षेत्र को एक ही स्थान पर पूरी वैल्यू चेन—कपास से लेकर तैयार कपड़े और निर्यात तक—उपलब्ध कराना है।मध्यप्रदेश का निमाड़ और मालवा अंचल कपास की खेती करके देश के लिए सूती कपड़े बनाने का प्रमुख आधार मुहैया कराता रहा है।

    इस वस्त्र हबका उद्देश्य भारत को वैश्विक स्तर पर वस्त्र निर्माण का हब बनाना है। रोटी कपड़ा और मकान उपलब्ध कराने की श्रंखला में राज्य का धार अंचल अब कपड़ा प्रोसेसिंग से रोजगार के नए अवसर पादा करेगा। निर्माण की पूरी प्रक्रिया एक ही जगह होने से यहां उत्पादित वस्त्रों की लागत घटेगी। उद्योग को बढ़ावा देने की तमाम प्रक्रिया नए अनुसंधानों को बढ़ावा भी देगी। विकसित मशीनें पूरी दुनिया के लिए उत्तम गुणवत्ता का कपड़ा बनाकर देंगी। खेतों में कपड़े के रेशे उत्पादन के बाद फैक्ट्री में प्रोसेसिंग ,फैशन डिजाईनिंग और वैश्विक बाजार में कपड़ा भेजने के फाईव एफ(Farm to Fibre to Factory to Fashion to Foreign) विजन को भी यहां साकार किया जा सकेगा।

    गौरतलब है कि देश के अलग अलग राज्यों में कुल सात मित्रा पार्क स्थापित किए जा रहे हैं। ये सभी पार्क केन्द्र और राज्य सरकारों की साझेदारी में बनाए जाएंगे। केन्द्र सरकार इन पार्कों पर लगभग चार हजार चार सौ पैंतालीस करोड़ का निवेश करेगी।
    इस विशेष क्षेत्र में कामन प्रोसेसिंग हाऊस होंगे जो वस्त्र निर्माण की लागत घटाने में मददगार होंगे। औद्योगिक जरूरतों के लिए पर्याप्त क्षेत्र उपलब्ध होगा। ट्रांसपोर्ट एवं लॉजिस्टिक्स सुविधाएं भी होंगी। नई तकनीकों और ट्रेंडिंग तकनीकी नवाचारों के लिए पर्याप्त अवसर भी उपलब्ध हो सकेंगे। इस विशेष औद्योगिक प्रक्षेत्र में लगभग 1 लाख प्रत्यक्ष और 2 लाख अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर उपलब्ध होंगे जो सामाजिक रोजगार जरूरतों के लिए काफी बड़ा स्रोत साबित होगा।

    इस औद्योगिक क्षेत्र की वजह से वस्त्र उद्योग की उत्पादन क्षमता और गुणवत्ता बढ़ेगी। छोटे एवं मध्यम उद्योगों (SMEs) को सपोर्ट मिलेगा। निर्यात क्षमता बढ़ेगी और विदेशी मुद्रा का अर्जन भी होगा। कपड़ा क्षेत्र में ग्लोबल सप्लाई चेन में भारत की भागीदारी मजबूत होगी। किसानों को कपास और रेशम जैसी कच्ची सामग्री का बेहतर मूल्य मिलेगा।

    सरकार ने योजना के अंतर्गत विभिन्न राज्यों को मित्रा पार्क स्थापित करने की स्वीकृति दी है। इनमें तमिलनाडु, कर्नाटक, मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र, गुजरात, आंध्रप्रदेश और उत्तरप्रदेश शामिल हैं। इन राज्यों में ज़मीन और उद्योगों की संभावनाओं के आधार पर पार्क का निर्माण कार्य आगे बढ़ाया जा रहा है।

    पीएम मित्रा पार्क योजना वस्त्र उद्योग में क्रांतिकारी बदलाव लाने वाली है। इससे न केवल रोजगार के अवसर बढ़ेंगे, बल्कि भारत को वैश्विक स्तर पर एक टेक्सटाइल पॉवरहाउस के रूप में पहचान मिलेगी। यह योजना “आत्मनिर्भर भारत” और “मेक इन इंडिया” को मजबूती देने के साथ-साथ ग्रामीण अर्थव्यवस्था और किसानों को भी लाभ पहुँचाएगी।

  • इक्विटास स्मॉल फाइनेंस बैंक ने मनाई अपनी 9वीं वर्षगांठ

    इक्विटास स्मॉल फाइनेंस बैंक ने मनाई अपनी 9वीं वर्षगांठ


    Equitas Small Finance Bank Celebrates Its 9th Anniversary
    इक्विटास बैंक – 9 साल विश्वास और प्रगति के।
    Equitas Bank – 9 Years of Trust and Progress.

    भोपाल, 06 सितंबर (प्रेस इंफार्मेशन सेंटर) इक्विटास स्मॉल फाइनेंस बैंक ने आज अपनी स्थापना के 9 गौरवशाली वर्ष पूरे कर लिए। इस अवसर पर देशभर की सभी शाखाओं में विविध कार्यक्रम आयोजित किए गए, जिनमें ग्राहकों, कर्मचारियों और स्थानीय समुदायों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।भोपाल की एमपीनगर शाखा में भी इस अवसर पर ग्राहक मिलन कार्यक्रम आयोजित किया गया।

    Bhopal, 06 September(Press Information Centre).Equitas Small Finance Bank proudly marked the completion of its 9 successful years today. To celebrate the occasion, a series of events were held across all its branches nationwide, with enthusiastic participation from customers, employees, and local communities.

    ग्राहकों के प्रति आभार | Gratitude Towards Customers
    बैंक ने इस अवसर पर अपने ग्राहकों को विशेष धन्यवाद देते हुए कहा कि उनकी निरंतर विश्वास और सहयोग से ही इक्विटास आज इस मुकाम तक पहुँचा है। बैंक ने यह दोहराया कि ग्राहकों को बेहतर सेवा और आधुनिक वित्तीय समाधान प्रदान करना उसकी सर्वोच्च प्राथमिकता है।

    On this special day, the bank expressed heartfelt gratitude to its customers, stating that their continued trust and support have been the foundation of Equitas’ growth. The bank reaffirmed its commitment to delivering excellent service and innovative financial solutions.

    कार्यक्रमों की झलक | Highlights of the Celebrations
    ग्राहक सम्मान समारोह

    वित्तीय जागरूकता अभियान

    सामुदायिक सेवा गतिविधियाँ

    Customer Appreciation Events

    Financial Literacy Drives

    Community Service Initiatives

    डिजिटल पहल: Equitas 2.0 ऐप लॉन्च | Digital Leap: Launch of Equitas 2.0 App
    अपने डिजिटल दृष्टिकोण को आगे बढ़ाते हुए, बैंक ने अपने नए और उन्नत मोबाइल बैंकिंग ऐप – Equitas 2.0 के लॉन्च की विधिवत घोषणा की। यह ऐप बेहतर ग्राहक अनुभव, आसान ट्रांजैक्शन और नई सुविधाओं से लैस है।

    Reinforcing its focus on digital transformation, the bank announced the launch of its advanced mobile banking app – Equitas 2.0. The app is designed to offer a smoother user experience, seamless transactions, and enhanced features.

    भविष्य की दिशा | Vision Ahead
    इक्विटास स्मॉल फाइनेंस बैंक ने अपने मिशन “हर ग्राहक तक बैंकिंग” को दोहराया और वादा किया कि आने वाले वर्षों में वह और अधिक नवाचारों और सेवाओं के साथ हर वर्ग तक सुलभ बैंकिंग पहुँचाएगा।

    Equitas SFB reiterated its mission of “Banking for Every Customer” and pledged to bring more innovation and inclusive services in the coming years to reach every segment of society.

  • ड्राईवरों का स्वास्थ्य सुधारिए बोलीं ट्रांसपोर्ट कमिश्नर रजनी सिंह

    ड्राईवरों का स्वास्थ्य सुधारिए बोलीं ट्रांसपोर्ट कमिश्नर रजनी सिंह

    भोपाल,12 जुलाई(ट्रांसपोर्ट रिपोर्टर)।सड़क दुर्घटनाओं में कमी लाने के लिए सरकार ने अब मूलभूत सुधार शुरु किए हैं।श्रम विभाग की ओर से भारी वाहनों जैसे बस, ट्रक, टैक्सी आदि का संचालन करने वाले ड्रायवरों तथा अन्य स्टाफ जैसे कंडक्टर और क्लीनर के कार्य के घंटे के संबंध में प्रावधानों को प्रभावी रूप से लागू किए जाने की पहल की जा रही है।इसी सिलसिले में मोटर ट्रांसपोर्ट नियोजकों की कार्यशाला शुक्रवार 18 जुलाई को श्रमायुक्त कार्यालय, इंदौर में सम्पन्न हुई।

    कार्यशाला में श्रमायुक्त श्रीमती रजनी सिंह ने मोटर परिवहन कर्मकार अधिनियम, 1961 के अंतर्गत ट्रांसपोर्ट कार्यों में संलग्न ड्राइवरों और अन्य स्टाफ के कार्य के घंटों, विश्राम अवधि और अन्य सुविधाओं के बारे में विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया कि अधिनियम के अंतर्गत ट्रांसपोर्ट वर्कर्स के लिए प्रतिदिन 8 घंटे और साप्ताहिक 48 घंटे कार्य की अवधि निर्धारित है। इन प्रावधानों का गंभीरता से पालन किया जाना आवश्यक है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि ड्रायवरों और स्टाफ के लगातार लंबी अवधि तक कार्य करने और विश्राम का समय न मिलने से थकान और तनाव की स्थितियाँ उत्पन्न होती हैं, जिससे सड़क दुर्घटनाओं की संभावना बढ़ जाती है।

    श्रमायुक्त ने वाहनचालकों के समय-समय पर नियमित स्वास्थ्य परीक्षण, विशेषकर नेत्र परीक्षण, सुनिश्चित करने का सुझाव भी दिया। उन्होंने जोर देकर कहा कि विभिन्न तकनीकों और उपकरणों की सहायता से, साथ ही जागरूकता और प्रचार-प्रसार के माध्यम से सड़क दुर्घटनाओं की संभावनाओं को कम किया जा सकता है। इसके लिए ड्रायवरों के कार्य समय और विश्राम अवधि की निगरानी करने तथा अन्य सुरक्षा मानकों को सुनिश्चित करने हेतु मोटर वाहनों में सीसीटीवी कैमरे, जीपीएस प्रणाली जैसे तकनीकी उपकरणों के उपयोग को बढ़ावा दिया जाना चाहिए।

    कार्यशाला में अटल इंदौर सिटी ट्रांसपोर्ट सर्विसेस लिमिटेड (AICTSL) के अधिकारी श्री अभिनव चौहान ने भी भाग लिया। उन्होंने बताया कि उनके संस्थान में संभावित वाहन दुर्घटनाओं को रोकने के लिए ड्रायवर और पैसेंजर मैनेजमेंट सिस्टम का भविष्य में उपयोग किया जाएगा। इस संबंध में कार्यशाला में एक प्रस्तुति भी दी गई, जिससे सड़क दुर्घटनाओं की रोकथाम में मदद मिलेगी। कार्यशाला में ट्रांसपोर्टर एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने अधिनियम के परिपालन के लिए सकारात्मक सुझाव प्रस्तुत किए और मोटर यातायात श्रमिक अधिनियम के प्रावधानों के अनुपालन में सहयोग देने का आश्वासन भी दिया। कार्यशाला में श्रम विभाग से श्री प्रभात दुबे, श्री आशीष पालीवाल, जिला परिवहन अधिकारी श्री प्रदीप शर्मा, अटल इंदौर ट्रांसपोर्ट सर्विसेस लिमिटेड (AICTSL) के अधिकारी श्री अभिनव चौहान, प्राइम रूट बस ऑनर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष श्री गोविंद शर्मा, इंदौर ट्रक ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन के श्री सी. एल. मुकाती एवं अन्य ट्रांसपोर्टर्स उपस्थित थे।

  • नई दवाएं मानवता का उपहारःसंजय जैन

    नई दवाएं मानवता का उपहारःसंजय जैन

    भोपाल,27 जून(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)।

    मध्यप्रदेश फार्मेसी काऊंसिल के अध्यक्ष और फार्मेसी काऊंसिल आफ इंडिया के सदस्य संजय जैन ने कहा है कि आर्टीफीशियल इंटेलिजेंस से बन रहीं आधुनिक दवाएं मानवता के लिए उपहार बनकर सामने आई हैं। ये दवाएं जल्दी बन जाती हैं और व्यक्ति विशेष के लिए खास तौर पर बनाई जा सकती हैं। एल एन सी टी संस्थान भोपाल के फार्मेसी विभाग में आयोजित अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी में उन्होंने ये विचार व्यक्त किए। संगोष्ठी के मुख्य अतिथि विज्ञान एवं साइंस टेक्नोलॉजी विभाग मध्य प्रदेश के संचालक डॉक्टर अनिल कोठारी थे।


    कार्यक्रम में विशेष अतिथि के रूप में स्टेट फार्मेसी काउंसिल मध्य प्रदेश के अध्यक्ष .एवं फार्मेसी काउंसिल आफ इंडिया के सदस्य संजय कुमार जैन ने भाग लिया । संस्थान के डायरेक्टर श्री अशोक राय एवं फार्मेसी विभाग की विभाग अध्यक्ष श्रीमती पारुल मेहता ने अतिथियों का पुष्प एवं मालाओं से स्वागत किया । श्री कोठारी ने अपने अपने उद्बोधन में कहा कि फार्मेसी के बगैर विज्ञान अधूरी है विज्ञान की विभिन्न विभिन्न शाखों द्वारा फार्मेसी के क्षेत्र में विभिन्न शोध कार्य किया जा रहे हैं।


    मध्य प्रदेश स्टेट फार्मेसी काउंसिल के अध्यक्ष श्री संजय जैन ने संगोष्ठी में फार्मेसी के क्षेत्र में हो रहे विकास कार्य पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि आज देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में देश में जितनी उन्नति फार्मेसी के क्षेत्र में हुई है। उतनी आजादी के बाद कभी नहीं हुई थी। इसी का कारण है कि दुनिया के अधिकतम देश औषधि के क्षेत्र में भारत पर निर्भर हैं।


    मध्य प्रदेश में भी फार्मेसी औद्योगिक क्षेत्र एवं शिक्षा के क्षेत्र में प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव एवं उपमुख्यमंत्री श्री राजेंद्र शुक्ल के मार्गदर्शन में निरंतर आगे बढ़ रहे हैं। इसी का कारण है कि मध्य प्रदेश आज फार्मेसी के क्षेत्र में विकासशील प्रदेशों में जाना जाता है।
    इस संगोष्ठी में देश प्रदेश एवं विदेश के कई फार्मासिस्ट विभिन्न माध्यमों के द्वारा भाग ले रहे हैं।

  • मोदीजी ने भारत की शान बढ़ाई बोले भोपाल के प्रोफेशनल्स

    मोदीजी ने भारत की शान बढ़ाई बोले भोपाल के प्रोफेशनल्स

    भोपाल 20 जून(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर). मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव एवं भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष व सांसद विष्णुदत्त शर्मा ने शुक्रवार को कुशाभाऊ ठाकरे कन्वेटशन सेन्टर में ‘‘एक पेड़ मां के नाम‘‘ अभियान के तहत पौधा रोपकर प्रोफेशनल मीट को संबोधित किया। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी ने अपने कार्यों से दुनिया को बता दिया कि भारत अपने मूल स्वभाव से समझौता नहीं करता। प्रधानमंत्री जी भय मुक्त भारत बनाने के लिए कार्य कर रहे हैं। प्रधानमंत्री जी ने भारत को हर कार्य के लिए दुनिया की तरफ देखने की आदत को बदला है। अब भारत रक्षा उपकरणों सहित हर क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनने की ओर तेजी से अग्रसर है। ऑपरेशन सिंदूर में दुश्मन को घर में घुसकर मारकर दुनिया में भारत का डंका बजाया है। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष व सांसद श्री विष्णुदत्त शर्मा ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी ने 11 सालों में सेवा, सुशासन, गरीब कल्याण के कार्यों से देश के भ्रष्टाचार के परसेप्शन को बदला है। प्रधानमंत्री जी ने 11 साल के कार्यकाल में प्रोफेशनल्स का असली इंपावरमेंट हुआ है। मोदी जी गांधी जी के स्वच्छता और स्वदेशी के विचारों को अपने अभियानों से आगे बढ़ा रहे हैं। प्रोफेशनल मीट को पार्टी की प्रदेश महामंत्री व सांसद सुश्री कविता पाटीदार एवं जिला अध्यक्ष रविन्द्र यति ने भी सम्बोधित किया।


    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने प्रोफेशनल मीट को संबोधित करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व में देश बहुत तेजी से हर क्षेत्र में आगे बढ़ रहा है। पहले देश हर कार्य के लिए विदेशों की तरफ ताकता था, लेकिन प्रधानमंत्री जी ने स्वदेशी को बढ़ावा देकर ‘मेड इन इंडिया’ के तहत रक्षा उपकरणों सहित हर क्षेत्र में भारत को आत्मनिर्भर बनाने के लिए कार्य कर रहे हैं। इतना ही नहीं भय मुक्त भारत बनाने के लिए भी कार्य कर रहे हैं। विश्व में दो ही देश ऐसे हैं, जो अपनी तरफ आने वाले हर खतरे को भांपकर उसे समय से पहले ही नष्ट करने का कार्य करते हैं। भारत भी इसी तरह कार्य कर रहा है। ऑपरेशन सिंदूर सहित कई मौकों पर प्रधानमंत्री जी ने अपने कार्यों से स्पष्ट कर दिया कि भारत का स्वर्णिम काल चल रहा है और भारत विकसित राष्ट्र बनने की ओर तेजी से बढ़ रहा है। प्रधानमंत्री जी के नेतृत्व में ऐतिहासिक फैसले लिए जो पहले कभी नहीं हुए। प्रधानमंत्री जी के नेतृत्व में भारत वर्ष 2047 तक विश्व की सबसे बड़ी शक्ति के रूप में स्थापित होगा। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री जी के कार्यों का स्पंदन देखने को मिल रहा है। देश जब आजाद जुआ तो देश की अर्थव्यवस्था विश्व में 15वें नंबर पर थी, लेकिन आजादी के बाद अर्थव्यवस्था पर इतना ध्यान नहीं दिया गया। 2014 में प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी ने जब देश की बागडोर संभाली को देश की अर्थव्यवस्था विश्व में 11वें नंबर थी। आज भारत विश्व की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था वाल देश बन गया। श्रद्धेय अटल बिहारी वाजपेयी जी ने देश के नेता प्रतिपक्ष के पद की गरिमा क्या होती है, यह अपने कार्यों और व्यक्तित्व से दिखाकर देश को गौरवांन्वित किया था। जब प्रधानमंत्री पद संभाला तो उन्होंने कई प्रकार की कठिनाइयों के बावजूद परमाणु परीक्षण कर दुनिया को भारत की ताकत दिखायी।


    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि 2014 से पहले भारतीय राजनीति में भ्रष्टाचार और परिवारवाद चरम पर था। प्रधानमंत्री जी ने राजनीति से भ्रष्टाचार और परिवारवाद को समाप्त कर रहे हैं। पहले दुनिया के लोग भारत को कमजोर और गरीब देश के रूप में देखते थे। आज विश्व भर के देशों का भारत के प्रति नजरिया बदला है। प्रधानमंत्री जी ने देश की सेनाओं को खुली छूट दी, सेनाओं को सशक्त किया। देश को आत्मनिर्भर बनाने के साथ वर्ष 2047 तक देश को विकसित और विश्वगुरू बनाने की दिशा में तेजी से आगे ले जा रहे हैं। पहले देश में टुकड़े-टुकड़े गैंग बहुत सक्रिय था। अलगाववाद, नक्सलवाद और आतंकवाद की गतिविधियां होती रहती थी, लेकिन प्रधानमंत्री जी के कार्यों और नीतियों से नक्सलवाद और आतंकवाद को लगभग समाप्त कर दिया है। यह नए भारत की ताकत है कि प्रधानमंत्री जी 21 जून को योग दिवस के रूप में मनाने का निर्णय लेते हैं तो दुनिया के 177 देश श्री मोदी जी पीछे खड़े होकर योग करते है। कांग्रेस कहती थी कि राम काल्पनिक हैं, उनके अस्तित्व को नकारती थी। अयोध्या में भव्य श्रीराम मंदिर के लिए 500 वर्षों तक संघर्ष चला। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व में केंद्र में सरकार बनी, इसके बाद अयोध्या में भगवान श्री राम जी का भव्य मंदिर तैयार हो गया है। श्री मोदी जी ने देश की जनता में आशा जगाई और उसी का परिणाम है कि भारत हर क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ रहा है और आमजन में 2047 तक विकसित भारत बनने की उम्मीद जगी है।


    भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष व सांसद श्री विष्णुदत्त शर्मा ने कहा कि सेवा, सुशासन, गरीब कल्याण के कार्यों को पूरा करने में आप सभी प्रोफेशनल्स की महत्वपूर्ण भूमिका है। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व में 11 वर्षों में प्रोफेशनल्स का असली इंपावरमेंट किया गया है। प्रधानमंत्री जी ने देश के सभी वर्गों के कल्याण के साथ देश को सशक्त बनाने का कार्य किया है। चुनौतियों का समाधान निकालकर देश को आत्मनिर्भर बनाने के लिए कार्य कर रहे हैं। ऑपरेशन सिंदूर में भारत ने विदेशी हथियारों के साथ भारत में निर्मित स्वदेशी हथियारों के प्रदर्शन ने वैश्विक स्तर पर भारत के पराक्रम को सराहा है। आप सभी प्रोफेशनल्स देश की प्रगति के बड़े भागीदार हैं। प्रधानमंत्री जी ने गति शक्ति के माध्यम से इंफ्रास्ट्रक्चर में क्रांति लाने के साथ कई परिवर्तनकारी कार्य किए हैं। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी विकसित भारत बनाने के लिए कार्य कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि एक समय था जब बुंदेलखंड सूखे से प्रभावित था। वर्षों तक मध्यप्रदेश और देश में शासन करने वाली पार्टी ने बुंदेलखंड के सूखे को समाप्त करने के लिए कोई कार्य नहीं किया। लेकिन विजनरी लीडर श्री नरेन्द्र मोदी जी ने देश के प्रधानमंत्री का पद संभाला तो उन्होंने पूरे देश के लोगों को नल से जल उपलब्ध कराने के लिए जल जीवन मिशन लागू किया। प्रधानमंत्री जी बुंदेलखंड के सूखे को समाप्त करने के लिए 44 हजार 605 करोड़ रूपए की केन-बेतवा लिंक परियोजना की सौगात देकर समूचे बुंदेलखंड को हरा-भरा और खुशहाल बनाने के लिए कार्य कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री जी गरीब कल्याण योजनाओं का इतना इंपेक्ट हुआ कि पहले मध्यप्रदेश के दतिया सहित देश के अलग-अलग राज्यों में बेटी बचाने के लिए अभियान चलाया जा रहा था। 2014 के प्रधानमंत्री जी ने बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ योजना लागू की और आज मध्यप्रदेश में एक हजार लड़कों में 1020 बेटियां पैदा हो रही हैं। महिलाओं को सशक्त बनाने के लिए अनेकों योजनाओं के साथ नारी शक्ति वंदन कानून बनाकर देश की संसद और राज्यों की विधानसभाओं में 33 प्रतिशत आरक्षण महिलाओं को देने का निर्णय किया है। आयुष्मान भारत योजना बनाकर हर गरीब और बुजुर्ग को पांच लाख रूपए के इलाज की गारंटी देने का कार्य किया है।


    भाजपा प्रदेश अध्यक्ष व सांसद श्री विष्णुदत्त शर्मा ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी भ्रष्टाचार मुक्त भारत बनने के लिए कार्य कर रहे हैं। दुनिया भर में एक परसेप्शन बन गया था कि भारत में भ्रष्टाचार होता है। प्रधानमंत्री जी ने देश को लेकर बने इस परसेप्शन को पूरी तरह से बदलने का कार्य किया है। आजादी के बाद वर्षों तक देश में शासन करने वाली पार्टी के नेता और देश के तत्कालीन प्रधानमंत्री स्व. राजीव गांधी ने ऑन रिकॉर्ड कहा था कि मैं दिल्ली से एक रूपए क्षेत्र में भेजता हूं तो जनता तक 15 पैसे पहुंचते हैं। आखिर देश में वर्षों तक शासन करने वाली पार्टी के नेता और देश के तत्कालीन प्रधानमंत्री ऐसी बातें कहते हैं तो भ्रष्टाचार समाप्त करने की जिम्मेदारी किसकी थी। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी ने 2014 में प्रधानमंत्री का पद संभालने के बाद जनधन खाते खुलवाए और डायरेक्ट बेनीफिट योजना के तहत भ्रष्टाचार को पूरी तरह से समाप्त करने का कार्य किया है। डिजिटल इंडिया को देश भर में लागू करके देश में होने वाले भुगतान का 49 प्रतिशत डिजिटली कराने का रिकार्ड भी प्रधानमंत्री जी के नेतृत्व में बना है। भारत के अलावा दुनिया के किसी भी देश में कुल भुगतान का 49 प्रतिशत पेमेंट डिजिटली नहीं हो रहा है। हाल ही में विश्व स्तर की संस्था ने एक रिपोर्ट जारी की है, जिसमें कहा गया है कि देश में गरीबी की दर 27 प्रतिशत से घटकर 5.3 प्रतिशत हो गई है। देश में 27 करोड़ लोग गरीबी की रेखा के बाहर आ गए हैं। महात्मा गांधी जी के नाम पर राजनीति करने वालों ने उनके विचारों को आगे बढ़ाने के लिए कोई कार्य नहीं किया। 2014 के पहले देश में गंदगी का अंबार लगा रहता था। प्रधानमंत्री जी ने महात्मा गांधी के स्वच्छता और स्वदेशी विचारों को अभियान बनाकर आज देश को स्वच्छता में आगे ले जाने के साथ हर क्षेत्र में स्वदेशी को अपनाने का कार्य किया है।


    इस दौरान मंच पर पार्टी की प्रदेश महामंत्री एवं राज्यसभा सांसद सुश्री कविता पाटीदार, प्रदेश उपाध्यक्ष कांतदेव सिंह, पार्टी के प्रदेश महामंत्री व विधायक भगवानदास सबनानी, जिला प्रभारी महेन्द्र सिंह यादव, महापौर श्रीमती मालती राय, पूर्व विधायक ध्रुवनारायण सिंह, प्रदेश मंत्री राहुल कोठारी, वरिष्ठ नेता शैलेन्द्र शर्मा, नगर निगम अध्यक्ष किशन सूर्यवंशी उपस्थित रहे।

  • उद्यमियों का सफल मंच बना राष्ट्रीय स्वदेशी मेला-किशन सूर्यवंशी

    उद्यमियों का सफल मंच बना राष्ट्रीय स्वदेशी मेला-किशन सूर्यवंशी


    भोपाल, 13 अप्रैल(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)। राजधानी के बिट्टन मैदान पर 7 से 13 अप्रैल तक आयोजित राष्ट्रीय स्वदेशी मेला का आज विधिवत समापन हो गया।मेले के भव्य आयोजन के स्वरूप को देखते हुए नगर पालिक निगम के सभापति किशन सूर्यवंशी ने कहा कि ये आयोजन प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के मेक इन इंडिया कार्यक्रम की सफलता का बुलंद उद्घोष है।ये उद्यमियों को संबल देने वाला बड़ा मंच बनकर सामने आया है।

    राजेश पोरवालः स्वदेशी के विचार को देशव्यापी बनाने में उल्लेखनीय योगदान.


    अखिल भारतीय स्वदेशी संघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष राजेश पोरवाल ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के स्वप्न को साकार करने के लिए मुख्यमंत्री डाक्टर मोहन यादव ने जिस तरह मेले के आयोजन को सफल बनाने के लिए आशीर्वाद दिया उससे नागरिकों की जन भागीदारी बढ़ी है। उन्होंने मेले के समापन अवसर पर विशेष अतिथि के रूप में आमंत्रित नगर निगम सभापति किशन सूर्यवंशी का हार्दिक अभिनंदन किया। श्री सूर्यवंशी ने मेले का भ्रमण किया और देश भर से आए शिल्प कलाकारों की सफलता की कहानियां भी सुनीं। उन्होंने बताया कि जिस तरह युवा उद्यमियों ने अपनी कला अभिरुचि को व्यावसायिक तौर पर प्रस्तुत किया है उसे देखकर कहा जा सकता है कि भारत की अर्थव्यवस्था में जन भागीदारी बढ़ती जा रही है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री डाक्टर मोहन यादव ने राज्य की उद्यमिता को बढ़ावा देने के लिए जो उपाय किए हैं उनमें इस तरह के मेलों के आयोजन से युवाओं को ज्यादा अवसर मिल रहे हैं।


    भारत सरकार के सूक्ष्म एवं लघु उद्योग मंत्रालय के प्रतिनिधि चेतन कुमार गुप्ता ने बताया कि भारत सरकार के उद्देश्यों को पूरा करने के लिए मंत्रालय ने उद्यमियों के लिए कई फ्लैगशिप योजनाएं चलाई हैं। उद्यमियों को आर्थिक सहयोग प्रदान करके राष्ट्र के विकास सूचकांक को बढ़ाने में मदद मिली है। इस मेले में भी विभाग ने सक्रिय सहयोग करके युवाओं का मार्गदर्शन किया है।राज्य सरकार ने जिस तरह आगे बढ़कर उद्यमियों को अवसर उपलब्ध कराया उससे मध्यप्रदेश को राष्ट्रीय स्तर पर विशेष पहचान मिली है.


    अखिल भारतीय स्वदेशी संघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष राजेश पोरवाल ने बताया कि महावीर जयंती तक मेले की सूचना राजधानी के दूरदराज के इलाकों तक पहुंच चुकी थी। इससे दस अप्रैल से मेला स्थल पर खासा जमघट लगने लगा था। छुट्टी के दिनों में तो मेले में पहुंचे नागरिकों ने भरपूर खरीददारी की। मेला स्थल पर वाहन पार्किंग, पेयजल, बैठक व्यवस्था, प्रकाश संयोजन और व्यंजनों की सुविधा और बच्चों के लिए खेल जैसी तमाम सुविधाएं उपलब्ध कराईं गईँ थीं जिसका लोगों ने भरपूर आनंद लिया। मेले के संचालक प्रणम्य अग्रवाल ने सभी सहयोगियों और नागरिकों के प्रति आभार व्यक्त किया है।

  • एमपी में उद्यमियों को नहीं झेलना पड़ेगा सत्ता की दलाली का बोझ

    एमपी में उद्यमियों को नहीं झेलना पड़ेगा सत्ता की दलाली का बोझ


    प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भारत की सत्ता संभालते ही गुजरातियों के व्यापारिक सोच से पूरे देश को रोशन करने का अभियान चलाया हुआ है। भारत ही नहीं बल्कि वे पूरे देश में अपने इसी सोच की वजह से वे आज आकर्षण का केन्द्र बन गए हैं। भोपाल में जब ग्लोबल इंवेस्टर्स समिट का आयोजन तय किया गया तभी से पूरी दुनिया के भारत मित्रों की निगाह देश के दिल की ओर लगी हुईं थीं। फ्रांस,जर्मनी, अमेरिका समेत विश्व के तमाम देशों में जाकर प्रधानमंत्री ने निवेशकों को भारत आने का न्यौता दिया है। यही वजह है कि एमपी आज निवेशकों के लिए एक प्रमुख डेस्टिनेशन बनकर सामने आया है। उद्योग अनुकूल माहौल बनाने के लिए भाजपा ने लगभग दो दशक पहले आधारभूत ढांचे को विकसित करने पर जोर दिया था। बिजली, सड़क और पानी की मूलभूत जरूरतें पूरी करने के साथ प्रधानमंत्री आवास योजना, जल नल योजना जैसी तमाम योजनाओं ने एमपी के इंफ्रास्टक्चर को मजबूती प्रदान की है। आज प्रदेश की तस्वीर पूरी तरह बदली हुई नजर आती है। कल्याणकारी हितग्राही मूलक योजनाओं से यहां के आम नागरिक की खरीद क्षमता भी बढ़ी है जिससे राज्य आज एक सफल बाजार के रूप में उभरकर सामने आया है। इस सबसे अलग जो बात आज श्री मोदी ने इंवेस्टर्स समिट में आए निवेशकों को समझाने का प्रयास किया वो यह कि देश का दिल आज निवेशकों को मुनाफे की गारंटी वाला राज्य बन गया है।


    इसके लिए हमें दो दशक पहले मध्यप्रदेश पर गौर करना होगा। तब राज्य में न तो सड़कें थीं, न बिजली पानी की मूलभूत व्यवस्थाएं थीं। कांग्रेस की सरकारों ने राज्य में लूटपाट का माहौल बना रखा था। वोट बटोरने के लिए तुष्टिकरण और जनता को बरगलाने के लिए उद्योगपतियों, व्यापारियों, सेठों को खलनायक बताने की राजनीति की जाती थी। शोषण की कहानियां सुनाकर कांग्रेस के नेता लोगों को बरगलाते थे। व्यापारियों और उद्योगपतियों को चोर व शोषक बताया जाता था। उनकी पैरवी करने वाली भाजपा को व्यापारियों की पार्टी बताकर लांछित किया जाता था। चंबल में डकैतों का आतंक इतना गहरा था कि लोग शाम के वक्त घरों से बाहर नहीं निकलते थे। उन्हीं डकैतों की कहानियां दिखाकर मुंबई की फिल्म नगरी कांग्रेस की जीवनरेखा बनी हुई थी। मीडिया की अपराध कथाएं भी उद्यमियों को कलंकित करती होती थीं। यही वजह है कि न तो यहां उद्योग विकसित हो पाए और न ही पूंजी का निर्माण हो पाया । आर्थिक रूप से बुरी तरह टूट चुका मध्यप्रदेश एक दुःस्वप्न बनकर रह गया था।


    बदले माहौल में आज इन्हीं पिछड़ेपन की नीतियों को मार भगाया गया है। लगभग दो दशकों की भाजपा की सरकारों ने पहले डकैतों, माफियाओं, ठगों और षड़यंत्र कारियों के विरुद्ध अभियान चलाया। अब वह सत्ता के दलालों को मार भगाने में जुटी हुई है। शिवराज सिंह की भाजपा सरकार ने आधारभूत ढांचे को तो विकसित किया लेकिन वह राज्य को सत्ता के दलालों से मुक्ति नहीं दिला पाई थी। डकैतों और माफियाओं ने जंगल छोड़ दिए लेकिन वे बस्तियों में आकर सेठ बन गए। राज्य की आय तो नहीं बढ़ी लेकिन कर्ज बढ़कर साढ़े तीन लाख करोड़ हो गया। चोरों मवालियों और ठगों ने अपनी आय बढ़ाई लेकिन वे न तो उद्योग स्थापित कर रहे थे और न ही उन्होंने अपनी काली कमाई का टैक्स चुकाया ।


    इस बार प्रदेश की जनता ने जैसे ही भाजपा को एक बार फिर सत्ता सौंपी तो सबसे पहले सत्ता के दलालों के आगे नतमस्तक नेताओं को सत्ता से बाहर किया और नई पीढ़ी को बागडोर सौंपी। डाक्टर मोहन यादव जैसे जमीनी नेता के हाथों कमान सौंपकर केन्द्र सरकार ने सत्ता के दलालों को घर बैठने का संदेश दिया। लाठी लेझम चलाने वाले पहलवान मोहन यादव हों या फिर वित्तमंत्री जगदीश देवड़ा जैसे समर्पित राजनेताओं तो आगे लाकर उन्होंने जड़ हो चुकी राजनीति को एक खुला आसमान सौप दिया है। इसके साथ ही काला धन बटोरकर जिन राजनेताओं ने अपने चहेते व्यापारियों के माध्यम से निवेश किया और महाराजा बन बैठे उनसे काला धन भी निकलवाया जाने लगा है।इस सब कार्य के लिए मोहन यादव ने अफसरशाही को खुला अवसर दिया है।


    मुख्य सचिव के रूप में अनुराग जैन को भेजकर राज्य में निवेश अनुकूल वातावरण बनाया गया है।जिन अफसरों के हाथों में आज राज्य की कमान है,योजनाओं को लागू करने की जवाबदारी है वे अपेक्षाकृत रूप से साफ सुथरे हैं। ये भी कहा जा सकता है कि अफसरशाही पर शिकंजा कसकर उसे औद्योगिक विकास के अनुकूल बनाया गया है। यही वजह है कि इस बार की इंवेस्टर समिट पिछले तमाम सम्मेलनों से अलग तस्वीर लेकर सामने आई है। निवेशकों की परख के लिए राज्य की पूरी जानकारी डिजिटल कर दी गई है। उनके आवेदनों की प्रक्रिया भी इतनी सरल कर दी गई है कि वे निवेश का प्रस्ताव देकर आसानी से अपना कारोबार शुरु कर सकते हैं।दुनिया के बहुराष्ट्रीय बैंकों में कार्य कर चुके भोपाल के ही युवा उद्यमी अंकेश मेहरा ने बताया कि उन्होंने अलान्ना ब्रांड नेम से राजधानी में एक स्टार्टअप शुरु किया है। उनका प्रोडक्ट होंठों की सुंदरता के लिए दुनिया का आधुनिकतम आविष्कार है। अपने माल को सस्ता और आम जनता की पहुंच का बनाने के लिए उन्हें कुछ पैकिंग मटेरियल आज भी चीन से बुलाना पड़ता है। जल्दी ही वे ये सामान भी भारत में बनाने लगेंगे। राज्य की औद्योगिक नीतियां उद्यमियों के लिए दोस्ताना हैं ।ये माहौल बना रहेगा तो राज्य जल्दी ही एक सफल स्टेट के रूप में अपना नाम रौशन करेगा।


    इसके पहले तक राज्य में एक कुप्रथा छाई हुई थी कि टेंडर किसी भी उद्यमी के नाम खुले उसे एक विशेष प्रजाति का साईलेंट पार्टनर रखना पड़ता था। कांग्रेस के आपराधिक चरित्र वाले मुख्यमंत्रियों की चलाई इस प्रथा का पालन भाजपा की सरकारें भी दो दशक तक करती रहीं।इसका सबसे बड़ा नुक्सान ये होता था कि निवेशक यदि गुणवत्ता का कार्य करे और कम मुनाफा ले तब भी उसे सत्ता के दलालों को मुनाफे का कट देना पड़ता था। सत्ता का पेट भरते भरते उसे यहां कारोबार करना घाटे का सौदा बन जाता था और वो यहां की परंपराओं से घबराकर निवेश से पीछे हट जाता था। पहली बार डाक्टर मोहन यादव की सरकार ने निवेशकों को सत्ता के दलालों के भय से मुक्ति दिलाकर स्वच्छंद वातावरण मुहैया कराया है। यही वजह है कि राज्य में निवेशकों ने धड़ाधड़ निवेश शुरु कर दिया है।


    लोक निर्माण विभाग के प्रमुख सचिव आईएएस नीरज मंडलोई ने बताया कि इंवेस्टर्स समिट की सफलता का आलम ये है कि आज पहले दिन ही उनके विभाग को लगभग ढाई सौ करोड़ रुपयों के निवेश के प्रस्ताव मिल चुके हैं। कल तक ये आंकडा़ नया रिकार्ड स्थापित करेगा। इसी तरह एमपी इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट कार्पोरेशन लिमिटेड के अध्यक्ष राघवेन्द्र कुमार सिंह ने बताया कि उद्यमियों में जो उत्साह देखने मिल रहा है वह अद्वितीय है। हमें अब तक के अनुभवों और निरंतर संवाद का लाभ भी मिला है। ये बात सही है कि राज्य में कई मूलभूत बदलाव हुए हैं लेकिन अब तक भाजपा के कई स्थानीय नेता भी इस बदलाव को स्वीकार नहीं कर पा रहे हैं। उन्हें कांग्रेस से आए ज्योतिरादित्य सिंधिया गुट के नेताओं के नाम पर भड़काया जा रहा है। अब तक जो हुआ सो हुआ पर जीआईएस के आयोजन की सफलता की जो तस्वीर उभरी है वह मध्यप्रदेश और देश में मेक इन इंडिया का एक सफल माडल दुनिया के सामने लाने में सफल हुई है।

  • भयमुक्त मध्यप्रदेश में अब निवेशकों को मुनाफे की गारंटी बोले प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी

    भयमुक्त मध्यप्रदेश में अब निवेशकों को मुनाफे की गारंटी बोले प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी

    भोपाल,24 फरवरी(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)।प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने विकसित मध्यप्रदेश से विकसित भारत के उद्देश्य से ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट के भव्य आयोजन के लिए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को बधाई दी। प्रधामनंत्री श्री मोदी ने कहा कि भारत के इतिहास में ऐसा अवसर पहली बार आया है, जब पूरी दुनिया भारत के लिए आशान्वित है। भारत ने विभिन्न क्षेत्रों में अपनी क्षमता को सिद्ध किया है, जिसके परिणाम स्वरूप सम्पूर्ण विश्व भारत पर विश्वास प्रकट कर रहा है। प्रधामनंत्री श्री मोदी ने कहा कि यही विश्वास हम मध्यप्रदेश में अनुभव कर रहे हैं। मध्यप्रदेश जनसंख्या की दृष्टि से देश का पांचवां बड़ा राज्य है, कृषि और खनन में अग्रणी है, इसके साथ ही राज्य को माँ नर्मदा का आशीर्वाद प्राप्त हुआ है। देश में हो रहे अधोसंरचना विकास का लाभ मध्यप्रदेश को मिला है, दिल्ली, मुम्बई नेशनल हाईवे का बड़ा भाग मध्यप्रदेश से निकलता है, प्रदेश में पाँच लाख किलोमीटर का रोड नेटवर्क है और लॉजिस्टिक्स की यहाँ अपार संभावनाएं विद्यमान हैं। मध्यप्रदेश में हर वो क्षमता है, जो इसे देश के शीर्ष पाँच राज्यों में ला सकता है। प्रधानमंत्री श्री मोदी ने मुख्यमंत्री डॉ. यादव को वर्ष 2025 को उद्योग वर्ष के रूप में मनाने के लिए बधाई दी।


    प्रधानमंत्री श्री मोदी ने रिमोर्ट का बटन दबाकर प्रदेश में औद्योगिक निवेश प्रोत्साहन के लिए लागू 18 नवीन नीतियों का शुभारंभ किया। इसके अंतर्गत मध्यप्रदेश उद्योग नीति 2025, एमएसएमई नीति, एक्सपोर्ट प्रमोशन नीति, लॉजिस्टिक्स नीति, स्टार्टअप नीति, मध्यप्रदेश एनीमेशन, वीआर, गैमिंग कामिक्स और विस्तारित रियलिटि नीति, जीसीसी नीति, सेमी कंडक्टर नीति, ड्रोन संवर्धन और उपयोग नीति, फिल्म पर्यटन नीति, पर्यटन नीति, पम्पड हाइड्रो स्टोरेज नीति, सिटी गैस डिस्टिब्यूशन नीति, विमानन नीति, नवकरणीय ऊर्जा नीति, स्वास्थ निवेश प्रोत्साहन नीति और एकीकृत टाउनशिप नीति शामिल हैं।


    प्रधानमंत्री श्री मोदी ने समिट में पधारे उद्योगपतियों को मध्यप्रदेश में निवेश के लिए प्रोत्साहित करते हुए कहा कि यहां 300 से अधिक इंडस्ट्री जोन हैं और निवेश की अपार संभावनाएं हैं। प्रदेश में 31 हजार मेगावॉट सरप्लस एनर्जी है, जिसमें 30 फीसदी रिन्यूएबल एनर्जी है। कुछ दिन पहले ही ओंकारेश्वर में फ्लोटिंग सौर ऊर्जा परियोजना का शुभारंभ हुआ है। एनर्जी सेक्टर में आए बूम का मध्यप्रदेश को लाभ मिला है। हाल ही में 45 हजार करोड़ रूपए लागत की केन-बेतवा लिंक परियोजना की आधारशिला रखी गई, जिससे 10 लाख हेक्टेयर भूमि में सिंचाई क्षमता बढ़ेगी, परिणामस्वरूप प्रदेश में कपड़ा उद्योग और फूड प्रोसेसिंग सेक्टर बढ़ेगा। प्रधानमंत्री श्री मोदी ने मध्यप्रदेश को देश का कॉटन कैपिटल बताते हुए कहा कि कपड़ा उद्योग और कॉटन सप्लाई में मध्यप्रदेश, देश का सबसे बड़ा उत्पादक है। यहां का मलबरी सिल्क और चंदेरी साड़ियां भी बहुत पसंद की जाती हैं। देश में बन रहे सात बड़े टेक्सटाइल पार्क में से एक मध्यप्रदेश में है। देश के टूरिज्म सेक्टर में मध्यप्रदेश अजब भी है और गजब भी है। नर्मदा के किनारे पर्यटन का पर्याप्त विकास हुआ है। प्रदेश में मेडिकल टूरिज्म की भी अपार संभावनाएं हैं।


    प्रधानमंत्री श्री मोदी ने कहा कि दो दशक पहले लोग मध्यप्रदेश में निवेश करने से डरते थे। जिस प्रदेश में बसें ठीक से नहीं चल पाती थीं, वह राज्य अब इलेक्ट्रिक व्हीकल के मामले में तेज गति से आगे बढ़ रहा है। जनवरी 2025 तक प्रदेश में दो लाख इलेक्ट्रिक वाहन रजिस्टर्ड हुए हैं, जो दर्शाता है कि नए क्षेत्रों में भी मध्यप्रदेश निवेश आकर्षित कर रहा है। लीथियम बैटरी और न्यूक्लीयर एनर्जी में भी निवेश को प्रोत्साहित किया जा रहा है। मध्यप्रदेश में शत-प्रतिशत रेल नेटवर्क का विद्युतीकरण किया जा चुका है। रानी कमलापति स्टेशन के चित्र सभी का मन मोह रहे हैं। इसी तर्ज पर प्रदेश के 80 रेलवे स्टेशनों को विकसित किया जा रहा है। विमानन सेवा के लिए ग्वालियर और जबलपुर के एयरपोर्ट को विस्तार दिया गया है। प्रधानमंत्री श्री मोदी ने कहा कि केन्द्र और राज्य सरकार प्रदेश की विकास दर को नई ऊँचाइयां देने के लिए निरंतर हरसंभव प्रयास कर रही है। मध्यप्रदेश में निवेश का यही समय है और सही समय है।


    प्रधानमंत्री श्री मोदी ने कहा कि विश्व के सामान्यजन, विशेषज्ञ और संस्थाएं भारत की ओर आशा से देख रही हैं। विश्व बैंक ने कहा है कि भारत आने वाले वर्षों में ऐसे ही गतिशील अर्थव्यवस्था बना रहेगा। इसी प्रकार संयुक्त राष्ट्र संघ की एक संस्था ने भारत को सौर ऊर्जा का श्रेष्ठ केन्द्र कहा है। एक अन्य रिपोर्ट में कहा गया है कि वैश्विक सप्लाई चैन के रूप में उभर रहा है। विश्व में यह मान्यता है कि भारत जो कहता है – वह करके दिखाता है। वैश्विक स्तर पर विद्यमान यह विचार निवेशकों का उत्साह बढ़ाने के पर्याप्त आधार हैं।


    प्रधानमंत्री श्री मोदी ने कहा कि टेक्सटाइल, टूरिज्म और टेक्नोलॉजी आगामी वर्षों में देश के विकास को गति देंगे। मध्यप्रदेश सहित देश में मेडिकल टूरिज्म की अपार संभावनाए हैं। हेल्थ एंड वेलनेस क्षेत्र को प्रोत्साहित किया जा रहा है। सरकार एमएसएमई सेक्टर को गति देने के लिए एमएसएमई केन्द्रित सप्लाई चैन को विकसित करने की दिशा में कार्य कर रही है और इस सेक्टर में कार्यरत उद्यमियों को प्रोत्साहन प्रदान किए जा रहे हैं। “ईज-ऑफ-डूइंग बिजनेस” को प्रोत्साहित करने के लिए कई अप्रासंगिक कानूनों को समाप्त किया गया है। केन्द्रीय बजट में टैक्स स्लैब को रिस्ट्रक्चर किया गया है, रिजर्व बैंक ने भी ब्याज दरें घटाई हैं।


    प्रधानमंत्री श्री मोदी ने समिट में पधारे डेलीगेट्स से कहा कि वे मध्यप्रदेश आएं है तो उज्जैन के महाकाल महालोक के दर्शन कर भगवान महाकाल का आशीर्वाद अवश्य प्राप्त करें, यह उन्हें आलोकिक अनुभूति प्रदान करेगा।
    प्रधानमंत्री श्री मोदी ने जीआईएस के शुभारंभ कार्यक्रम में 15-20 मिनिट विलंब पहुंचने का कारण बताते हुए कहा कि उन्हें ज्ञात हुआ कि आज 10वीं और 12वीं के विद्यार्थियों की परीक्षा है। वीआईपी मूवमेंट होने से विद्यार्थियों को कोई परेशानी न हो, इस उद्देश्य से उन्होंने अपने शिड्यूल को पंद्रह मिनिट लेट कर दिया।


    प्रधानमंत्री श्री मोदी का भोपाल में पहली बार हो रही ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट में पधारने पर राज्यपाल श्री मंगुभाई पटेल की उपस्थिति में, मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने अंग वस्त्रम भेंट अभिवादन किया। आयोजन की शोभा बढ़ाने के लिए मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने स्मृति चिन्ह के रूप में भोपाल की प्रसिद्ध जरी-जरदोजी कला से निर्मित महाकाल मंदिर का चित्र भेंट कर उनका आभार व्यक्त किया। राष्ट्रीय मानव संग्रहालय में आयोजित दो दिवसीय समिट में देश-दुनिया के दिग्गज राजनेता, उद्योगपति और राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय संगठनों के प्रतिनिधि सहभागिता कर रहे हैं।
    कार्यक्रम में प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व और मार्गदर्शन में विश्व की प्रमुख अर्थव्यवस्था के रूप में उभरते भारत पर केंद्रित लघु फिल्म “इंडिया ग्रोथ स्टोरी” का भी प्रदर्शन किया गया। प्रदेश की औद्योगिक संभावनाओं पर केंद्रित लघु फिल्म “मध्य प्रदेश-अनंत संभावनाएं” का प्रदर्शन किया गया।


    प्रधानमंत्री श्री मोदी ने कार्यक्रम स्थल पर मध्यप्रदेश की अनोखी शिल्प कला और सांस्कृतिक विरासत को प्रदर्शित करते एमपी एक्सपीरियन्स जोन और एमपी प्वेलियन का अवलोकन किया। एक्सपीरियन्स ज़ोन के अंतर्गत इमर्सिव डिजिटल वॉकव्यू के रूप में प्रदेश की विरासत, प्रगति और आकांक्षाओं का प्रदर्शन किया गया है। इसके साथ ही सांस्कृति क्षेत्र के अंतर्गत इंटरैक्टिव प्रदर्शनियां, डिजिटल स्टोरीटेलिंग और वर्चुअल रीयलिटी द्वारा राज्य के इतिहास, लोककथाएं, वास्तुशिल्प और जनजातीय परम्पराएं प्रदर्शित हैं। गांव के रूप में विकसित जोन में पारंपरिक मिट्टी के बर्तनों, टैराकोटा कलाकृतियों के साथ ही “एक जिला-एक उत्पाद” के अंतर्गत जिलों के उत्पादों का प्रदर्शन भी किया गया। प्रधानमंत्री श्री मोदी ने प्रदेश के प्रसिद्ध जनजातीय चित्रकारों द्वारा बनाई गई गौंड, भीली, और पिथौरा कलाकृतियों का अवलोकन किया। प्रधानमंत्री श्री मोदी ने इस अवसर पर लगाई गई औद्योगिक प्रदर्शनियों क्रमश: आटो शो, टेक्सटाइल एवं फैशन एक्सपो का भी अवलोकन किया।


    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व और मार्गदर्शन में राज्य सरकार द्वारा प्रदेश के सतत विकास और औद्योगिक निवेश की दिशा में नए कदम बढ़ाऐ जा रहे है। ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट की थीम ‘अनंत संभावनाएँ है, जो प्रदेश में उद्योग और निवेश की असीमित संभावनाओं को दर्शाती है। ‘अनंत संभावनाएँ’ केवल एक विचार नहीं, बल्कि मध्यप्रदेश के प्रत्येक क्षेत्र में अवसरों की व्यापकता को दर्शाने वाला दृष्टिकोण है। प्रधानमंत्री श्री मोदी ने “सबका साथ, सबका विकास, सबका प्रयास, सबका विश्वास” का मंत्र दिया, जिसमें यह संदेश समाहित है कि जब संभावनाओं के अनंत आकाश में हम साथ मिलकर आशा की ज्योत जलाते हैं, तो एक नहीं, बल्कि सभी के आंगन रोशन होते हैं और यही हमारी सनातन संस्कृति है। प्रधानमंत्री श्री मोदी के नेतृत्व में भारत को 2047 तक विकसित भारत बनाने का संकल्प समस्त भारतवासियों ने लिया है, हमारा लक्ष्य देश को 35 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाना है। विकसित भारत के इस लक्ष्य को पूरा करने के लिए विकसित मध्यप्रदेश समस्त प्रदेशवासियों के साथ महत्वपूर्ण योगदान प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध है। इसी अनुक्रम में राज्य सरकार अगले 05 वर्षों में राज्य की अर्थव्यवस्था को दोगुना करने का लक्ष्य लेकर आगे बढ़ रही है।


    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि एक वर्ष पहले निवेश तथा औद्योगिक विकास की यात्रा मार्च 2024 में बाबा महाकाल के आशीर्वाद के साथ उज्जैन से शुरू हुई। इस यात्रा में रीजनल इंडस्ट्री कॉन्क्लेव के साथ ही देश के प्रमुख शहरों में इंटरैक्टिव सेशंस आयोजित किए गए। अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर यूके, जर्मनी एवं जापान में मध्यप्रदेश की विकास गाथा को प्रस्तुत किया गया और उद्योगपतियों से संवाद कर उनकी आवश्यकताओं एवं संभावित चुनौतियों को समझा तथा निवेश को प्रोत्साहित करने के लिए एक व्यापक रोडमैप तैयार किया गया। सरल, निवेश अनुकूल एवं प्रासंगिक नीतियों का प्रभावी क्रियान्वयन, सरलीकृत व्यापार एवं बाधारहित व्यवसाय, सिंगल विंडो सिस्टम को बेहतर बनाना और शासन में पारदर्शिता लाना हमारी उच्च प्राथमिकता है। प्रदेश में निवेश के प्रयासों के लिए लगातार कार्य करने के उद्देश्य से सरकार ने वर्ष 2025 को “उद्योग एवं रोजगार वर्ष” के रूप में मनाने का निर्णय लिया है।


    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि उद्योग एवं रोज़गार को बढ़ावा देने के लिए पहली बार ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट के अंतर्गत 6 विभाग शहरी विकास विभाग, पर्यटन विभाग, खनिज विभाग, नवीकरणीय ऊर्जा विभाग, सूचना प्रौद्योगिकी विभाग एवं एमएसएमई विभाग के अलग से समिट हो रहे हैं। किसी भी प्रदेश के औद्योगिक विकास के लिए 4 मूलभूत संसाधनों की आवश्यकता होती है, भूमि, जल, बिजली और कुशल कार्यबल। प्रदेश में सरप्लस बिजली है, भरपूर पानी है, विशाल लैंड बैंक है और कुशल मानव संसाधन है। यहां की कानून-व्यवस्था भी निवेश अनुकूल है। इसके साथ ही सरकार की प्रतिबद्धता प्रदेश में उद्योगों के विकास की है, जिससे उद्योग जगत के कार्य सरल, प्रभावी एवं त्वरित गति से चलें, नवीन निवेश के क्षेत्र का विकास हो और औद्योगिक विकास के लिए अनुकूल इकोसिस्टम तैयार हो।


    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि सकल राज्य घरेलु उत्पाद (GSDP) में मध्यप्रदेश बड़े राज्यों की श्रेणी में सर्वाधिक वार्षिक विकास दर वाला राज्य है। पिछले 12 वर्षों में मध्यप्रदेश का सकल घरेलु उत्पाद लगभग 4 गुना हुआ है। मेगा फुटवेयर क्लस्टर (मुरैना), नवकरणीय ऊर्जा उपकरण निर्माण (मोहासा-बावई) और पीएम मित्रा (MITRA) पार्क (धार) सहित कई बड़े प्रोजेक्ट प्रगति पर हैं। विक्रम उद्योगपुरी (उज्जैन) में मेडिकल डिवाइसेस पार्क और 6 नए औद्योगिक क्षेत्रों का विकास हो रहा है। प्रदेश में 300 से अधिक औद्योगिक क्षेत्र हैं। आगामी वर्ष में 13 नए औद्योगिक पार्क पूर्ण होंगे, जबकि 20 और औद्योगिक पार्कों की आधारशिला रखी जाएगी। राज्य में प्लग एंड प्ले सेंटर, सेमीकंडक्टर पार्क एवं नवीन आईटी पार्क स्थापित किए जा रहे हैं, इससे प्रदेश में निवेश आकर्षित होगा और रोजगार के नए द्वार खुलेंगे। बड़े से बड़ा और छोटे से छोटा निवेशक भी हमारे लिए अतिथि है। सभी के लिए प्रदेश में अनंत संभावनाएं हैं। इन अनंत संभावनाओं को विकास में फलीभूत करने के लिए राज्य सरकार प्रतिबद्ध है।


    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री मोदी के नेतृत्व में मध्यप्रदेश सहित पूरा देश आर्थिक प्रगति के नई युग में प्रवेश कर रहा है। राज्य सरकार ने गरीब, युवा, अन्नदाता एवं महिलाओं को केंद्र में रखते हुए 4 मिशन आरंभ किए हैं। प्रधानमंत्री श्री मोदी ने मध्यप्रदेश को विकास की राह पर अग्रसर करने के लिए केन-बेतवा लिंक राष्ट्रीय परियोजना और पार्वती-कालीसिंध-चंबल लिंक परियोजना की सौगात दी, जिससे मध्यप्रदेश में 41 लाख की आबादी को पेयजल सुविधा एवं लगभग 09 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में वार्षिक सिंचाई सुविधा उपलब्ध होगी। मध्यप्रदेश बिजली के क्षेत्र में सरप्लस स्टेट है। प्रधानमंत्री श्री मोदी के नेतृत्व में प्रदेश को विकसित और औद्योगिक मध्यप्रदेश’ बनाने की यात्रा शुरू हो चुकी है, प्रदेश एक बेहतर भविष्य को आकार दे रहा है। मध्यप्रदेश, देश की आर्थिक प्रगति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने में अग्रणी साबित होगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने उद्योग जगत की प्रमुख हस्तियों को प्रदेश में आमंत्रित करते हुए कहा कि मध्यप्रदेश में सशक्त पारिवारिक भावना विद्यमान है। यहां की यह विशेषता है कि जो मध्यप्रदेश एक बार आता है, वह यहीं का होकर रह जाता है।


    प्रधानमंत्री श्री मोदी की उपस्थिति में विभिन्न उद्योगपतियों और औद्योगिक समूहों के प्रतिनिधियों ने मध्यप्रदेश में औद्योगिक इकाइयों के संचालन और गतिविधियों के विस्तार के संबंध में अपने अनुभव साझा किए। इसके अंतर्गत अडाणी ग्रुप के चेयरमेन श्री गौतम अडाणी ने कहा कि ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट में आना उनके लिए सौभाग्य का विषय है। अडाणी ग्रुप मध्यप्रदेश में 50 हजार करोड़ रूपए का निवेश कर चुका है। भविष्य में उनके समूह की एक लाख 10 हजार करोड़ रूपए की योजना है। यह निवेश सीमेंट, खनन और ऊर्जा क्षेत्र में होगा, इससे वर्ष 2030 तक एक लाख 20 हजार रोजगार के अवसर सृजित होंगे। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार के साथ मल्टी स्मार्ट सिटी और एयरपोर्ट सिटी के निर्माण के लिए भी उनका समूह चर्चा कर रहा है।


    प्रदेश में निवेश के संबंध में अवाडा ग्रुप के चेयरमेन श्री विनीत मित्तल ने कहा कि उनके समूह की प्रदेश में 50 हजार करोड़ रूपए के निवेश से सोलर-विंड पॉवर प्रोजेक्ट स्थापना की योजना है। आईटीसी ग्रुप के श्री संजीव पुरी ने मध्यप्रदेश को कृषि क्षेत्र का पॉवर हाऊस बताया। गोदरेज समूह के श्री नादिर गोदरेज ने कहा कि प्रदेश में जारी विकास प्रक्रिया से यहां निवेश करना बुद्धिमानी है। सागर ग्रुप के श्री सुधीर अग्रवाल और शक्ति पम्पस के श्री दिनेश पाटीदार ने भी प्रदेश में औद्योगिक गतिविधियों के संचालन संबंधी अपने अनुभव साझा किए। ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट में विदेशी निवेशक, वैश्विक औद्योगिक संगठन, राष्ट्रीय स्तर पर कार्यरत औद्योगिक घरानें, उद्योग संघों के प्रतिनिधि, उद्यमी तथा व्यवसायी बड़ी संख्या में सम्मिलित हुए।

  • ग्लोबल इंवेस्टर्स समिट से दुनिया के नक्शे पर आया एमपी

    ग्लोबल इंवेस्टर्स समिट से दुनिया के नक्शे पर आया एमपी

    भोपाल, 22 फरवरी(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने 24-25 फरवरी को आयोजित हो रही ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट-2025 से पहले भोपाल के अलग-अलग स्थानों पर की जा रही तैयारियों का निरीक्षण किया। उन्होंने जीआईएस की तैयारियों में लगे अधिकारियों को आवश्यक निर्देश भी दिए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट-2025 की तैयारियां अपने अंतिम चरण में हैं। रविवार को प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी मध्यप्रदेश आयेंगे। उनका आगमन समस्त प्रदेशवासियों के लिए एक गौरवशाली क्षण है। हम प्रधानमंत्री श्री मोदी का हार्दिक स्वागत एवं अभिनंदन करते हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि सालों के बाद ऐसा अवसर आया है कि प्रधानमंत्री भोपाल में ही रात्रि विश्राम करेंगे। इस ऐतिहासिक आयोजन के लिए हर स्तर पर व्यापक व्यवस्थाएं की जा रही हैं। प्रधानमंत्री श्री मोदी भोपाल में निर्वाचित जनप्रिनिधियों एवं शीर्ष पदाधिकारियों की बैठक लेंगे।

    जीआईएस-2025 की तैयारियों के निरीक्षण के बाद मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मीडिया से चर्चा में कहा कि ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट मध्यप्रदेश को नई ऊंचाइयों पर ले जाएगी। इसमें देश-विदेश के शीर्ष उद्योगपति एवं निवेशक शामिल होंगे, जिनका आत्मीय आतिथ्य-सत्कार किया जाएगा। हम न केवल उन्हें निवेश के सभी अवसर प्रदान करेंगे, बल्कि उनका विश्वास भी जीतने का प्रयास करेंगे।

    भोपाल जीआईएस में बनेगा रिकॉर्ड

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने उम्मीद जताई है कि भोपाल जीआईएस-2025 एक नया कीर्तिमान स्थापित करेंगी। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश में इस प्रकार के बड़े आयोजनों के लिए आगे भी प्रयास कि जाएंगे। मध्यप्रदेश देश में नंबर-1 बने इस दिशा में एक अभिनव प्रयास भोपाल में हो रहा है। सरकार ने संभाग स्तर पर सफलतापूर्वक रीजनल इंडस्ट्री कॉन्क्लेव आयोजित कर प्रदेशभर में औद्योगिकीकरण एवं निवेश लाने की शुरुआत की है। अब हमारी सरकार रीजनल इंडस्ट्री कॉन्क्लेव को जिला स्तर तक लेकर जायेगी, जिससे हर जिले, हर ब्लॉक के औद्योगिक विकास को भी और अधिक गति मिलेगी।

  • अफसरों ने थामी ग्लोबल इंवेस्टर समिट की कमान

    अफसरों ने थामी ग्लोबल इंवेस्टर समिट की कमान


    भोपाल, 20 फरवरी(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर) । राजधानी में होने जा रही ग्लोबल इंवेस्टर समिट के माध्यम से प्रदेश में औद्योगिक विकास की रफ्तार तेज करने के लिए आज राज्य मंत्रालय में आला अफसरों ने एक समीक्षा बैठक आयोजित की। इस बैठक में आयोजन की तैयारियों और औद्योगिक विकास की आधारशिला बनाने की रणनीति पर कार्य किया गया। मुख्य सचिव श्री अनुराग जैन ने भोपाल में आयोजित होने जा रही ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट (जीआईएस) तैयारियों की विस्तृत समीक्षा की। भारत सरकार के मेक इन इंडिया अभियान को सार्थक बनाने के लिए अफसरों ने कई जमीनी उपायों पर अमल शुरु कर दिया है।

    उन्होंने कलेक्टर भोपाल एवं पुलिस-कमिश्नर को निर्देशित किया कि जीआईएस के दौरान होने वाली परीक्षाओं में कोई अवरोध नहीं हो। इसका विशेष ध्यान रखा जाये, कोई भी विद्यार्थी परीक्षा केंद्र तक जाने से वंचित न रह जाये।
    मुख्य सचिव श्री जैन ने यातायात व्यवस्था, पार्किंग, ई-बस, ई-कार्ड, बैठक व्यवस्था, होटल, स्वास्थ्य, मेहमानों के भोजन, आकस्मिक प्लान, प्रधानमंत्री की आगमन-प्रस्थान व्यवस्था के संबंध में जानकारी प्राप्त कर निर्देशित किया कि सभी अधिकारी अपने दायित्वों को समझकर निर्वहन करें। टीम वर्क के साथ कार्य करें जिससे प्रदेश के आर्थिक विकास में वृद्धि हो सके।
    बैठक में स्वास्थ्य, नवकरणीय ऊर्जा, नगरीय प्रशासन, कौशल विकास, उद्यानिकी, खनिज साधन, पर्यटन एवं एमएसएमई विभागों ने प्रेजेंटेशन देकर अपनी तैयारियों की जानकारी दी।
    बैठक्‍में अपर मुख्य सचिव डॉ. राजेश राजौरा, श्री अशोक बर्णवाल, श्री मनु श्रीवास्तव, श्री अनुपम राजन, प्रमुख सचिव श्री संजय शुक्ल, श्री उमाकांत उमराव, श्री राघवेन्द्र सिंह सचिव, श्री सुदाम पी. खाड़े, श्री एम. रघुराज कलेक्टर भोपाल एवं पुलिस कमिश्नर उपस्थित थे।

  • राजधानी में अंतर्राष्ट्रीय वनमेले का शुभारंभ

    राजधानी में अंतर्राष्ट्रीय वनमेले का शुभारंभ

    भोपाल,16 दिसंबर(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)। 10वां अंतर्राष्ट्रीय वन मेला 17 से 23 दिसंबर तक लाल परेड मैदान में आयोजित होने जा रहा है। मेले का उद्घाटन शाम पांच बजे राज्यपाल मंगूभाई पटेल करेंगे। कार्यक्रम की अध्यक्षता मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव करेंगे, विशिष्ट अतिथि के रूप में वन एवं पर्यावरण, राज्य मंत्री दिलीप अहिरवार भी उपस्थित रहेंगे। मंत्री दिलीप अहिरवार ने आज एक भीड़ भरी पत्रकार वार्ता में बताया कि मेले की थीम ‘लघु वनोपज से महिला सशक्तिकरण’ रखी गई है। लघु वनोपजों के प्रबंधन में महिलाओं की महत्वपूर्ण भूमिका है, प्रदेश में लघु वनोपज संग्रहण कार्य में लगभग 50 प्रतिशत महिलाओं की भागीदारी है।
    मंत्री दिलीप अहिरवार ने बताया कि मेले में 300 स्टाल्स लगाए जाएंगे। प्रदेश के जिला यूनियन, वन धन केंद्र, जड़ी-बूटी संग्राहक, उत्पादक, कृषक, आयुर्वेदिक औषधि निर्माता, परंपरागत भोजन सामग्री के निर्माता एवं विक्रेतागण अपने उत्पादों का प्रदर्शन एवं विक्रय करेंगे। उन्होंने कहा कि मेले में लघु वनोपज एवं औषधीय पौधों के क्षेत्र की गतिविधियों, उत्पादों एवं अवसरों को प्रदर्शित करने एवं इससे जुड़े संग्राहकों, उत्पादकों, व्यापारियों, उद्यमियों, वैज्ञानिकों, प्रशासकों एवं नीति निर्धारकों के बीच संवाद स्थापित करने के लिए एक व्यापक मंच उपलब्ध कराया जाएगा।
    मेले में विभिन्न शासकीय विभागों की प्रदर्शनी लगाई जाएगी। साथ ही 19 एवं 20 दिसंबर को मेला स्थल पर ‘लघु वनोपज से महिला सशक्तिकरण’ पर दो दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया जाएगा। जिसमें श्रीलंका, नेपाल एवं ऑस्ट्रेलिया के प्रतिनिधिगण भाग लेंगे। 21 दिसंबर को क्रेता-विक्रेता सम्मेलन आयोजित होगा,जिसमें उच्च गुणवत्ता युक्त लघु वनोपजों (औषधीय पौधों ) कच्ची जड़ी-बूटियों एवं एमएफपी-पार्क की बनाईं हुईं आयुर्वेदिक औषधियों के क्रय-विक्रय के लिए अनुबंध किए जाएंगे।
    मंत्री दिलीप अहिरवार ने बताया कि मेले में ओपीडी संचालन किया जाएगा। जिसमें आयुर्वेदिक पद्धति के चिकित्सकों, उपचार करने वाले विशेषज्ञों द्वारा निशुल्क चिकित्सा परामर्श दिया जाएगा। जिसमें 25 हजार लोगों के उपचार कराने की संभावना है।
    वन राज्य मंत्री ने बताया कि मेले में सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जाएगा। जिसमें आर्केस्टा, नुक्कड़ नाटक एवं लोक नृत्य, स्कूली छात्र-छात्राओं के लिए चित्रकला, फैंसी ड्रेस, गाय कार्यक्रम आयोजित होंगे, साथ ही 18 दिसंबर को लोक गायिका मालिनी अवस्थी एवं 19 को हास्य कलाकार एहसान कुरैशी, 20 को सूफी बैंड, 21 फिडली क्राफ्ट और 22 को ‘एक शाम वन विभाग के नाम’ कार्यक्रम का आयोजन होगा।
    अंतर्राष्ट्रीय वन मेला, 2024, प्रदेश की वन संपदा और महिला सशक्तिकरण को समर्पित एक ऐसा मंच है, जो पर्यावरण, संस्कृति और अर्थव्यवस्था के सामंजस्य को प्रदर्शित करता है।

  • फिर लौटेगी राज्य के बीड़ी उद्योग की रौनक

    फिर लौटेगी राज्य के बीड़ी उद्योग की रौनक


    भोपाल,16 दिसंबर(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)। मध्यप्रदेश बीड़ी उद्योग संघ के प्रतिनिधि मंडल ने आज मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से भेंट कर बीड़ी उद्योग में रोजगार के अवसरों को बढ़ाने के लिए कारोबार में आ रही कई तकनीकी अड़चनों को दूर करने का अनुरोध किया। संघ के प्रतिनिधियों ने मुख्यमंत्री को बताया कि बीड़ी श्रमिकों को श्रम कानूनों का लाभ दिलाने के लिए बीड़ी निर्माताओं को राज्य की ओर से आवश्यक संरक्षण प्रदान किया जाए। इससे श्रमिकों को साल भर रोजगार देने वाले इस कारोबार से प्रदेश को आत्मनिर्भर बनाया जा सकेगा।
    विधानसभा के मुख्यमंत्री कक्ष में उन्होंने डाक्टर मोहन यादव को बताया कि बरसों से इस उद्योग को अनदेखा किए जाने की वजह से पूरा कारोबार अराजकता का शिकार हो गया है। बीड़ी उद्योग संघ के सचिव श्री अर्जुन खन्ना के नेतृत्व में मिले प्रतिनिधि मंडल ने बताया कि बीड़ी निर्माण एक श्रम आधारित कुटीर ग्रामोद्योग है, जिसमें न्यूनतम पूंजी और बुनियादी ढांचे की आवश्यकता होती है। संघ ने बताया कि प्रदेश के जंगलों से प्राप्त होने वाले अच्छी गुणवत्ता के तेंदूपत्ते से बीड़ी उत्पादन बढ़ाया जा सकता है। प्रति मानक बोरी तेंदूपत्ते पर सब्सिडी बढ़ाकर श्रमिकों का भी भला किया जा सकता है। प्रति मानक बोरी तेंदूपत्ते पर सब्सिडी बढ़ाने से मध्यप्रदेश बीड़ी निर्यात की अपनी खोई विरासत दुबारा हासिल कर सकता है।
    संघ के प्रतिनिधियों ने बताया कि उत्पादन बढ़ाने का प्रोत्साहन देकर राज्य को संगठित और स्थायी बीड़ी उत्पादन के केन्द्र के रूप में मजबूती से खड़ा किया जा सकता है। तेंदूपत्ता की स्थानीय खपत बढ़ने से प्रदेश में ही पूंजी का उत्पादन बढ़ाया जा सकेगा। बीड़ी का स्थानीय निर्माण होने से बेरोजगारी की समस्या का समाधान भी किया जा सकेगा। मुख्यमँत्री डाक्टर मोहन यादव ने प्रतिनिधि मंडल को आश्वासन दिया कि राज्य सरकार बीड़ी उद्योग संघ के सुझावों पर अमल करने के लिए आवश्यक सुधार लागू करेगी।
    गौरतलब है कि राज्य में तेंदूपत्ते का राष्ट्रीयकरण के साथ ही छोटी सिगरेट को बढ़ावा मिलने की वजह से राज्य का बीड़ी उद्योग अन्य राज्यों में पहुंच गया था। इससे स्थानीय रोजगार घटा था और सिगरेट कंपनियों का मुनाफा बढ़ गया था। कांग्रेस की पूर्ववर्ती अर्जुनसिंह की सरकार ने श्रमिकों को अधिक मजदूरी का प्रलोभन देकर खूब वाहवाही बटोरी थी। राज्य का बीड़ी उद्योग समाप्त हो जाने की वजह से स्थानीय श्रमिकों का रोजगार छिन गया था। अन्य राज्यों में ट्रांसफर हुए बीड़ी उद्योग की वजह से उन राज्यों में तो श्रमिकों को लाभ होने लगा लेकिन यहां के मजदूर लाचार हो गये थे। धीरे धीरे तेंदूपत्ते की चोरी बढ़ी और स्थानीय स्तर पर स्थापित ब्रांडों की और बगैर लेवल वाली नकली बीड़ी का निर्माण बढ़ गया था। इससे राज्य को टैक्स के रूप में होने वाली आय भी प्रभावित हुई थी और अपंजीकृत मजदूरों को श्रम कानूनों का लाभ मिलना भी बंद हो गया था।

  • शराब के कारोबार को माफिया मुक्त बनाएगी नई नीति

    शराब के कारोबार को माफिया मुक्त बनाएगी नई नीति

    भोपाल,23 अक्टूबर(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)। उप मुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा ने कहा है कि मध्यप्रदेश में शराब की अवैध बिक्री सख्ती से रोक लगाई जाए और व्यापार में शामिल आपराधिक तत्वों पर कड़ी कारवाई की जाए। श्री देवड़ा ने सोमवार को भोपाल स्थित पर्यावरण अध्ययन संस्थान (इप्को) में आयोजित नवीन आबकारी नीति/आबकारी व्यवस्था वर्ष 2025-26 के निर्धारण के संबंध में मदिरा की फुटकर बिक्री की दुकानों के लायसेंसियों की कार्यशाला में ये बात कही। उप मुख्यमंत्री श्री देवड़ा ने पहली बार आसवक एवं देशी/विदेशी मदिरा विनिर्माताओं एवं बार-लायसेंसियों के साथ भी बैठक की। श्री देवड़ा ने वाणिज्यक कर विभाग की उपलब्धियों को लेकर भी चर्चा की।

    उप मुख्यमंत्री श्री देवड़ा ने सभी विभागीय अधिकारियों को निर्देश दिये कि उनका कर्तव्य है कि अधिकारी अपने मुख्यालय पर रहकर कार्यों के प्रति सजग रहें। उन्होने कहा कि किसी भी परिस्थिति में मदिरा का अवैध परिवहन ना हो तथा संगठित अपराधियों के विरूद्व कड़ी से कड़ी कार्रवाई की जाए। प्रदेश में शराब के अवैध कारोबार पर पैनी नजर रखी जाएगी और जहां भी अवैध कारोबार या कालाबाजारी की सूचना मिलती है तो सख्त कार्रवाई की जाएगी।

    उप मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश सरकार को राजस्व देने में वाणिज्यकर विभाग का महत्वपूर्ण योगदान है। वित्तीय वर्ष 2024-25 में आबकारी विभाग का राजस्व लक्ष्य 16 हजार करोड़ रूपये है। मुझे पूर्ण विश्वास है कि आप सभी के समन्वित प्रयास से यह लक्ष्य भी हम प्राप्त कर लेगें। इसके साथ साथ हमें शराब के धंधे की आड़ में जनता का शोषण करने वाले आपराधिक तत्वों पर भी नियंत्रण करना होगा।

    उप मुख्यमंत्री श्री देवड़ा ने कहा कि वाणिज्यिक कर विभाग द्वारा निरंन्तर नए-नए नवाचार किये जा रहें हैं। विभिन्न राज्यों की आबकारी नीति का अध्ययन किया जा रहा है। उनकी अच्छाईयों को प्रदेश की आबकारी नीति में संम्मिलित किया जाएगा। उन्होंने कहा कि नीति तभी ठीक होगी जब अनुभवी लोगो से बात की जायेगी। कार्यशाला में प्रदेश के मदिरा व्यावसायियों एंव ठेकेदारों द्वारा उप मुख्यमंत्री को अपनी समस्या से भी अवगत कराया गया। उप मुख्यमंत्री श्री देवडा ने कहा कि अगर समस्या है तो उसका समाधान भी सरकार करेगी। कठिनाईयों को दूर किया जायेगा। सरकार बहुत सजग है। उन्होनें विभागीय अधिकारियों का निर्देश दिये कि प्रदेश के शराब व्यावसायियों की समस्या को हल करने का प्रयास करे। श्री देवड़ा ने कहा कि प्रदेश के राजस्व प्राप्ति में आबकारी विभाग का अहम भागीदारी रहती है।

    कार्यशाला में उप मुख्यमंत्री श्री देवड़ा ने कहा कि आबकारी विभाग के द्वारा ई-आबकारी पोर्टल के माध्यम से लायसेंसियों को अनेक सुविधाऐं प्रदान की गई हैं, जिससे अधिक पारदर्शिता के साथ कार्य संम्पादित किये जा रहें हैं तथा राजस्व में निरंन्तर वृद्धि हो रही है। लायसेंसी भी नियमानुसार अपनी दुकान एवं बार का संचालन करें, विभाग द्वारा किसी प्रकार की गड़बड़ी होने पर लायसेंसियों के विरूद्ध भी कार्यवाही की जावेगी।

    शराब कारोबारियों में नागरिकों के प्रति जिम्मेदारी का भाव जगाने के लिए मंथन बैठक

    उप मुख्यमंत्री श्री देवड़ा ने कहा कि विभागीय अधिकारियों से अपेक्षा है कि आप सभी जनप्रतिनिधियों/मंत्रियों/विधायकों के माध्यम से प्राप्त शिकायतों का त्वरित निराकरण करें एवं निराकरण के बाद संबंधित को अवगत भी कराया जाए। आबकारी अधिनियम का प्रभावी क्रियान्वयन कर आबकारी अपराधों पर रोक लगाना हम सभी का दायित्व है। सभी के समन्वित प्रयास से वर्ष 2025-26 के लिए संतुलित आबकारी नीति बनाना ही विभाग का लक्ष्य है। आशा करता हूं कि हम इसमें पूरी तरह सफल होगें।

    कार्यक्रम में प्रमुख सचिव वाणिज्यिक कर श्री अमित राठौर ने कहा कि प्रदेश के राजस्व में मदिरा व्यावसायियों का बड़ा योगदान रहता है। उन्होने अपेक्षा की कि जनता के स्वास्थ्य एवं सुरक्षा का ध्यान रखा जाना चाहिए। आबकारी आयुक्त श्री अभिजीत अग्रवाल ने आभार व्यक्त किया। इस अवसर पर विभागीय अधिकारी एवं मदिरा व्यावसायियों/लाइसेंसियों के प्रतिनिधि भी उपस्थित रहे।

  • स्टेट बैंक की कछुआ ब्रांच में पेंशनधारकों का सम्मेलन

    स्टेट बैंक की कछुआ ब्रांच में पेंशनधारकों का सम्मेलन


    भोपाल, 20 अक्टूबर(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)।राजधानी के भारतीय स्टेट बैंक मुख्यालय स्थित कछुआ ब्रांच में सेवा निवृत्त वरिष्ठ जनों की पेशन समस्याओं के निवारण के लिए एक शिविर का आयोजन किया गया। इसमें वरिष्ठ जनों को पेंशन प्रक्रिया में बचत करने और अनावश्यक राशि कटौती होने बचाने के लिए आवश्यक मार्गदर्शन दिया गया।
    ब्रांच मैनेजर श्री ध्रुपद दवे ने शिविर में उपस्थित वरिष्ठ जनों को उन बैंकिंग प्रावधानों की जानकारियां दीं जिनसे किसी भी पेंशन धारक को बगैर परेशान हुए पेंशन प्राप्त करना सरल हो जाता है। उन्होंने बताया कि वरिष्ठ जन देश की किसी भी स्टेट बैंक शाखा में जाकर अपने जीवित होने का प्रमाण आसानी से दे सकते हैं। उन्होंने बताया कि वरिष्ठ जनों को पेंशन संबंधी आदेशों के लिए पेंशन संचालनालय या सेवा निवृत्ति मंजूर करने वाली किसी भी संस्था से संपर्क करना पड़ता है। जब भारतीय स्टेट बैंक के पास पेंशन जारी करने का आदेश आ जाता है तो फिर बैंक बहुत ही सरल प्रक्रिया से पेंशन जारी कर देता है। ये पेंशन देश भर के किसी भी खाते से आसानी से निकाली जा सकती है।
    श्री ध्रुपद दवे ने बताया कि भारतीय स्टेट बैंक अपने पेशन धारकों की जीवन प्रक्रिया को विश्वसनीय तरीके से सहजता प्रदान करता है। इसके लिए बैंक समय समय पर वरिष्ठ नागरिकों के लिए नई पेंशन योजनाएं भी लाता है।भारतीय स्टेट बैंक के पास देश के वरिष्ठ नागरिकों का विशाल नेटवर्क मौजूद है इसलिए बैंक अपने इन विशिष्ठ नागरिकों के लिए कई सुविधाएं भी प्रदान करता है। देश के लिए अपने जीवन का योगदान देने वाले वरिष्ठ नागरिकों को निर्विघ्न सेवाएं मिलती रहें इसके लिए बैंक ने धैर्यवान कर्मचारियों की टीम तैनात कर रखी है। इससे हम हर पेंशन धारक की समस्याओं का पूरा समाधान कर पाते हैं।


    बैंक की ही बीमा योजना के जुड़े विस्तार अधिकारी श्री सचिन शुक्ला ने बताया कि बैंक ने वरिष्ठ नागरिकों के लिए मासिक पेंशन योजना आरंभ की है।उन्होंने बताया कि स्मार्ट प्लेटिना प्लस योजना में कुल ग्यारह लाख रुपए की किस्तें जमा करने वाले नागरिकों को स्कीम पूरी होने पर पच्चीस लाख इंक्यानबे हजार सात सौ पचास रुपए वापस मिलते हैं। पंद्रह सालों तक 99450 रुपए की किस्तें पेंशन के रूप में प्राप्त होती हैं। एक अन्य स्मार्ट एन्युईटी प्लस योजना में वरिष्ठ जनों के बच्चों के लिए पांच साल वाली स्मार्ट फार्च्यून बिल्डर योजना भी चलाई जा रही है। इसकी विस्तृत जानकारी के लिए मोबाईल नंबर750970016 पर संपर्क किया जा सकता है।

  • शराब की खपत बढ़ी तो आय भी बढ़ाइए

    शराब की खपत बढ़ी तो आय भी बढ़ाइए

    भोपाल01 अक्टूबर(अजय खेमरिया).
    प्रदेश की मौजूदा आबकारी नीति में बड़े बदलाब की आवश्यकता है क्योंकि जिस व्यापक पैमाने पर शराब का अवैध कारोबार मैदानी स्तर पर हो रहा है उसे आबकारी विभाग रोक पाने में नाकाम साबित हो रहा है। सीमित मानव संसाधन और केंद्रीयकृत नियंत्रण तंत्र के अभाव में सरकार को इस अवैध कारोबार से राजस्व की क्षति भी हजारों करोड़ में हो रही है।
    तथ्य यह है कि प्रदेश में जितनी आधिकारिक शराब दुकानें है उससे दोगुने अनुपात में शराब का अवैध विक्रय संगठित तौर पर किया जा रहा है।प्रदेश में एक भी गांव ऐसा नही है जहां सरकारी दुकानों से अवैध परिवहन कर शराब नही बेची जा रही हो। यही नही इसी अनुपात में अवैध रूप से शराब निर्माण भी गांव-गांव में किया जा रहा है। इसके दुष्परिणाम सरकारी राजस्व में चपत के साथ आम नागरिकों की अमानक शराब से असमय मौत के रूप में भी सामने आ रहे हैं। मुरैना जिले में पिछले सालों जिस तरह से अवैध शराब भट्टियों से निर्मित शराब पीने से जो मौते हुई थी उससे सरकार ने कोई सबक नही सीखा।
    सरकार नहीं कर सकती शराब दुकानें बंद?
    मध्यप्रदेश सरकार बिहार या गुजरात की तरह शराब बंदी नहीं कर सकती है, क्योंकि राज्य के राजस्व का एक बड़ा हिस्सा उसे आबकारी से ही प्राप्त होता है। प्रदेश में अभी तीन हजार 600 शराब दुकानों से सरकार को 13 हजार 916 करोड़ का राजस्व चालू वित्तीय बर्ष में मिला है। 2003 में यह आंकड़ा लगभग 750 करोड़ रुपए था। जाहिर है कि औधोगिक एवं खनिज संसाधनों रूप में बीमारू मप्र के लिए सरकारी राजस्व का बड़ा स्रोत शराब भी है।
    वर्तमान तीन हजार छह सौ दुकानों की संख्या आंकड़े के रूप में तो बहुत नजर आती है, लेकिन जो जमीनी हकीकत है वह इन आंकड़ों से जुदा है क्योंकि बिना सरकारी दुकानों के भी हजारों जगह शराब का अवैध विक्रय हो रहा है और इसी अनुपात में अवैध भट्टियों का संचालन भी जारी है। यह दोनों तथ्य सरकार से छिपे हुए नहीं है।
    सरकार के राजस्व का इतना महत्वपूर्ण स्रोत होने के बाबजूद आबकारी महकमा मानव संसाधन की गंभीरतम कमी से जूझ रहा है। अधिकतर जिलों में आबकारी उपनिरीक्षक, हवलदार, आरक्षक के आधे से ज्यादा पद खाली है। एक एक उपनिरीक्षक के पास दो से तीन सर्किल का प्रभार है। नतीजतन अवैध भट्टियों पर कारवाई के लिए महकमें के पास कोई संसाधन ही नहीं हैं । इस अवैध कारोबार को स्थानीय दबंगो के अलावा राजनीतिक स्तर पर भी खुला संरक्षण मिला हुआ है। जब भी आबकारी महकमा अवैध बिक्री या निर्माण पर कारवाई करता है उसे स्थानीय माफिया और नेता कारवाई नहीं करने देते हैं। नेताओं के संरक्षण के कारण ही उन अवैध कारोबारियों को न तो पुलिस का भय है और न ही आबकारी विभाग का।

    अवैध शराब के लिए बाजार की उपलब्धता होना है, वर्तमान में मध्य प्रदेश में संपूर्ण प्रदेश को दो ,तीन या चार-चार दुकानों के समूहों में बांटा गया है, प्रत्येक समूह किसी न किसी ठेकेदार को टेंडर के माध्यम से आवंटित किया जाता है जिसके एवज में सरकार को राजस्व की प्राप्ति होती है। दुकानें शासकीय होती हैं और ड्यूटी पेड शराब सरकारी वेयर हाउस से उनको प्रदान की जाती हैं जिनको वो एमएसपी और एमआरपी के बीच अपने सुविधा जनक रेट पर विक्रय करने हेतु स्वतंत्र होते हैं। अब सवाल ये उठता है कि अवैध शराब यदि दुकानों से नहीं बिकती तो फिर कहां बिकती है? प्रत्येक मदिरा समूह में ठेकेदार को आवंटित दुकानों की संख्या कम होने और उन दुकानों से संबद्ध क्षेत्र बहुत बड़ा होने से प्रति व्यक्ति दुकान तक मदिरा खरीदने जाने के लिए सक्षम नहीं होता इसलिए ठेकेदार प्रत्येक गांव में अपना एक कमीशन किसी सामान्य पान या परचून दुकानदार को दे देते हैं जिस से प्रत्येक गांव में ड्यूटी पेड शराब प्रत्येक व्यक्ति को आसानी से स्थानीय स्तर पर उपलब्ध हो जाती है।
    अवैध शराब विक्रय को रोकने के लिये प्रत्येक गांव में अघोषित रूप से खुली हुई कलारियों को सरकार नियमों के अंतर्गत लाकर उनके नियमित लाइसेंस प्रदान करने की कार्यवाही करें, जिससे सरकार के राजस्व में वृद्धि होगी और जनहानि की संभावना भी खत्म हो जाएगी। इसके अलावा शराब की कीमतों में कमी की जानी चाहिए क्योंकि जो शराब का आदि है, वह तो शराब पियेगा, फिर चाहे जहरीली ही क्यों न हो। ऐसे में यदि कीमत कम होगी, तो यह मौतों का सिलसिला भी कम होगा। आबकारी विभाग द्वारा की जाने वाली कार्यवाहियों का पूर्ण अधिकार विभाग को ही दिया जाना चाहिए, ताकि विभागीय अधिकारियों का अवैध करोबार पर अंकुश लगाए जाने के प्रति रूझान बढ सके। अन्यथा पुलिस द्वारा की जाने वाली कार्यवाहियों के कारण आबकारी अपने कर्तव्यों के प्रति उदासीन हो जाती है, फलस्वरूप दिखावे की कार्यवाहियां कर अपने काम की इतिश्री कर ली जाती है। आबकारी अधिनियम में कठोर दण्ड का प्रावधान करना और पालन करना चाहिए। दुकानों की संख्या में वृद्धि की जाकर ड्यूटी पेड मदिरा की उपलब्धता में वृद्धि की जानी चाहिए।