Month: July 2023

  • कांग्रेस के डिफाल्टर प्रेम की धूल उड़ाता भाजपा का अंत्योदय

    कांग्रेस के डिफाल्टर प्रेम की धूल उड़ाता भाजपा का अंत्योदय


    -आलोक सिंघई-


    किसान का कर्जा माफ, मुफ्त बिजली, सरकारी नौकरियों का खोखला उद्घोष, जाति और धर्म आधारित वर्ग भेद जैसे मसालों के भरोसे कमलनाथ कांग्रेस मध्यप्रदेश में काठ की हांडी चढ़ाने का प्रयास कर रही है। कांग्रेस का वचन पत्र कमलनाथ की थोथी शोशेबाजी से मुक्त नहीं हो पाया है। इसके विपरीत भारतीय जनता पार्टी अपने अंत्योदय के फार्मूले से जन जन तक पैठ बढ़ाती जा रही है। शिवराज सिंह चौहान की भाजपा सरकार पर घोषणाओं का आरोप उस वक्त फीका पड़ गया है जब चुनावी बेला में सरकार ने दनादन हितग्राही मूलक योजनाओं का सैलाब ला दिया है। लाड़ली बहना योजना से भाजपा ने घर घर में पैठ बना ली है। इस योजना का दूसरा चरण 20 अगस्त तक चलेगा। इस बीच पंद्रह अगस्त का राष्ट्रीय त्यौहार भी है। इसमें मुख्यमंत्री शिवराज सिंह अपने बीस साल के कार्यकाल में आए बदलाव की झांकी भी पेश करेंगे। भाजपा सरकार के पिटारे में सफलताओं के इतने मुद्दे हैं कि अच्छा भला कांग्रेसी भी खामोश रह जाता है।आम जनता को अब ये समझ में आ गया है कि जाति धर्म और वर्गभेद की राजनीति से इतर भारतीय जनता पार्टी का अंत्योदय समाज के हर तबके के लिए सुखद संदेश ला रहा है। कांग्रेस ने भाजपा पर जो अडानी अंबानी जैसे व्यापारियों की पार्टी होने का आरोप लगाया था वह हकीकत में मुंह के बल गिरा है। जन जन तक ये संदेश पहुंचाने में भाजपा कामयाब रही है कि वह वास्तव में देश के उद्यमियों के साथ खड़ी है और एकनया भारत समृद्ध भारत बनाने में सफलताएं हासिल कर रही है।


    जनता का ये भरोसा एक दिन में नहीं जमा बल्कि मध्यप्रदेश में लगातार बीस सालों तक भाजपा ने ये शहनाई बजाई है। बीच में कांग्रेस की कमलनाथ सरकार ने जिस तरह वैमनस्य और संकीर्ण नजरिये से इंस्पेक्टरराज की कलह मचाई उससे लोगों को दोनों पार्टियों की मानसिकता का अंतर समझ में आ गया है। कांग्रेस आज भी डिफाल्टरों के साथ खड़ी है। कमलनाथ कह रहे हैं कि वे सत्ता में आने पर कर्जा माफ करेंगे। कांग्रेस उन फोकटियों का कर्जा माफ करने और उन्हें अपने साथ लाने का प्रयास कर रही है जो विकास करने वाले नहीं बल्कि मुफ्तखोर हैं। भाजपा कर्मठ किसानों को नकद राशि देकर आगे बढ़ने में मदद कर रही है। सरकारी नौकरियों के नाम पर एक दो फीसदी लोगों तक लाखों रुपए का वेतन बांटकर कांग्रेस ने जिस उपभोक्तावाद की नींव रखी थी भाजपा ने उसे तो नहीं छेड़ा है लेकिन इसके साथ वह जन जन तक सरकारी योजनाओं का संदेश लेकर पहुंच रही है। ऐसा कोई वर्ग नहीं कोई नागरिक नहीं जो सरकार की योजनाओं का सीधा लाभ नहीं उठा रहा हो। ऐसे में आने वाले चुनाव की तस्वीर इकतरफा नजर आने लगी है।


    कांग्रेस के दंभी नेता आज भी अपनी विचारधारा छोड़ने तैयार नहीं हैं। जो विचारधारा अप्रासंगिक हो चली। समय की आंधी ने जिसके परखचे उड़ा दिए उसे ही गले लगाए बैठी कांग्रेस को आने वाला पंद्रह अगस्त एक तगड़ा पंच साबित होने वाला है। जब प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी लाल किले से देश को संदेश देंगे और बताएंगे कि उनकी सरकारों ने क्या बदलाव किए हैं जो जनता महसूस कर रही है तो देश की जनता को अपना मानस बनाने में सरलता होगी।


    विकास की ये कहानी तब लिखी जा रही है जब सरकारी बैंक ऊंची दूकान फीका पकवान बनकर असहयोग कर रहे हैं। सरकारी बैंकों का स्थापना व्यय उपभोक्ता कंपनियों के लिए तो मुनाफे का सौदा बना हुआ है जबकि आम जनता बैंकों के राष्ट्रीयकरण से लेकर अब तक वंचित बनी रही है। आज जब हर नागरिक को बैंक की चौखट तक पहुंचाने का प्रयास चल रहा है तब सरकारी बैंक हांफ रहे हैं। इसके विपरीत निजी क्षेत्र के स्माल फाईनेंस बैंक तक धड़ल्ले से आगे बढ़ते जा रहे हैं। आईडीएफसी फर्स्ट बैंक हो या इक्विटास स्माल फाईनेंस बैंक, एयू स्माल फाईनेंस बैंक, बंधन बैंक सभी तेजी से लोन बांट रहे हैं और मुनाफा बटोर रहे हैं। इसके विपरीत सरकारी बैंक ग्राहकों के धन की अघोषित चोरियां कर रहे हैं। कोई टीडीएस के नाम पर रकम उड़ा रहा है तो कोई बैंक लाकर के किराए के नाम पर ऊटपटांग बिलिंग कर रहा है। इसके बावजूद निगरानी तंत्र खामोश है।


    मध्यप्रदेश की सुशासन और विकास रिपोर्ट-2022 के अनुसार राज्य में आए बदलाव से मध्यप्रदेश बीमारू से विकसित प्रदेशों की पंक्ति में उदाहरण बन कर खड़ा हुआ है। इस उपलब्धि में प्रदेश में जन-भागीदारी से विकास के मॉडल ने अहम भूमिका निभाई है। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के नेतृत्व में केन्द्र और राज्य की डबल इंजन सरकार ने मध्यप्रदेश को अन्य राज्यों के लिये अनुकरणीय बना दिया है। इस अरसे में सड़क, बिजली, पानी, कृषि, पर्यटन, जल-संवर्धन, सिंचाई, निवेश, स्व-रोजगार और अधो-संरचना विकास के साथ उन सभी पहलुओं पर सुविचारित एवं सर्वांगीण विकास की नवीन गाथा लिखी गई जो जन-कल्याण के साथ विकास के लिये जरूरी हैं।


    बेहतर वित्तीय प्रबंधन और चौतरफा विकास से आज प्रदेश की विकास दर 19.7 प्रतिशत है, जो देश में सर्वाधिक है। देश की अर्थ-व्यवस्था में मध्यप्रदेश 4.6 प्रतिशत का योगदान दे रहा है। सकल घरेलू उत्पाद में बीते दशक में 200 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। मध्यप्रदेश की आर्थिक वृद्धि दर निरंतर बढ़ रही है। वर्ष 2001-02 में 4.43 प्रतिशत की दर आज बढ़ कर 16.43 प्रतिशत हो गई है प्रदेश का सकल घरेलू उत्पाद 71 हजार 594 करोड़ रूपये से बढ़ कर 13 लाख 22 हजार 821 रूपये हो गया है। वर्ष 2001-02 में प्रति व्यक्ति आय 11 हजार 718 रूपये थी, जो वर्ष 2022-23 में बढ़ कर एक लाख 40 हजार 583 रूपये हो गई है। राज्य की जीएसडीपी की वृद्धि दर विगत एक दशक में राष्ट्रीय जीडीपी वृद्धि दर से अधिक रही है।


    विकास प्रक्रिया में राज्य का अधो-संरचना विकास निरंतर हो रहा है। अधो-संरचना बजट जो वर्ष 2002-03 में 3873 करोड़ रूपए था, वह वर्ष 2023-24 में बढ़ कर 56 हजार 256 करोड़ रुपए हो गया है। एक समय था जब बिजली आती कम थी और जाती ज्यादा थी। आज प्रदेश बिजली क्षेत्र में आत्म-निर्भर है और 24 घंटे बिजली की उपलब्धता है। वर्ष 2003 में ऊर्जा क्षमता 5173 मेगावाट थी, जो बढ़ कर 28 हजार मेगावाट हो गई है।


    अच्छी सड़कें विकास की धुरी होती है। एक समय था, तब यह पता ही नहीं चलता था कि सड़क में गड्डे हैं या गड्डे में सड़क है। अब गाँव-गाँव, शहर-शहर अच्छी गुणवत्तायुक्त सड़कों का जाल बिछाया गया हैं। शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में वर्ष 2001-02 में 44 हजार किलोमीटर सड़कें थी, अब 4 लाख 10 हजार किलोमीटर सड़कें बन गई हैं। राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजना में लगभग 1500 किलोमीटर लंबाई के 40 हजार करोड़ की लागत के 35 कार्य स्वीकृत हैं। अटल, नर्मदा और विंध्य प्रगति पथ के साथ मालवा, बुंदेलखंड और मध्य विकास पथ निर्मित किए जा रहे हैं।


    प्रदेश में सभी रेलवे क्रॉसिंग समाप्त करने के लिए 105 रेलवे ओवर ब्रिज के साथ 334 पुलों का निर्माण हो रहा है। साथ ही 86 हजार करोड़ से अधिक की रेल परियोजनाओं के कार्य चल रहे हैं। वर्ष 2009 से 2014 के बीच जहाँ प्रदेश को औसतन 632 करोड़ रूपए का रेलवे बजट मिलता था, वहीं वर्ष 2022-23 में 13 हजार 607 करोड़ का रेलवे बजट प्रावधान मिला है, जो इक्कीस गुना अधिक है। अमृत भारत रेलवे स्टेशन योजना में प्रदेश के 80 रेलवे स्टेशन विश्व स्तरीय बनाए जाएंगे। अत्याधुनिक रानी कमलापति स्टेशन देश में एक मॉडल बना है। एक वंदे भारत ट्रेन प्रारंभ हो चुकी है.


    प्रदेश में कृषि को लाभ का धंधा बनाना के लिए सिंचाई क्षमताओं का निरंतर विकास किया जा रहा है। वर्ष 2003 में सिंचाई क्षमता केवल 7 लाख 68 हजार हेक्टेयर थी, जो वर्ष 2022 में बढ़ कर 45 लाख हेक्टेयर से अधिक हो गई है। वर्ष 2025 तक सिंचाई क्षमता को बढ़ा कर 65 लाख हेक्टेयर किये जाने पर भी तेजी से काम किया जा रहा है। हर घर जल से नल योजना पर तेज गति से कार्य हो रहा है, अभी तक लगभग 50% घरों तक नल से जल पहुँच चुका है। कृषि विकास दर जो वर्ष 2002-03 में 03 प्रतिशत थी, वह वर्ष 2020-21 में बढ़ कर 18.89 प्रतिशत हो गई है। खेती और एलाइड सेक्टर का बजट भी 600 करोड़ से बढ़ कर 53 हजार 964 करोड़ हो गया। खाद्य उत्पादन भी इस अवधि में 159 लाख मीट्रिक टन से बढ़ कर 619 लाख मीट्रिक टन हो गया है।


    उद्यानिकी फसलों का रकबा 4 लाख 67 हजार हेक्टेयर से बढ़ कर 25 लाख हेक्टेयर हो गया है। फसल उत्पादन 224 लाख मीट्रिक टन से बढ़ कर 725 लाख मीट्रिक टन से अधिक हो गया है। फसल उत्पादकता 1195 किलोग्राम से बढ़ कर 2421 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर हो गई है। किसान-कल्याण के ध्येय से प्रदेश में गत 3 वर्षों में फसलों की नुकसानी पर 4000 करोड़ से अधिक की राहत राशि वितरित की गई है। प्रदेश के 11 लाख से अधिक डिफाल्टर किसानों का 2123 करोड़ का ब्याज माफ करने के लिए मुख्यमंत्री कृषक ब्याज माफी योजना प्रारंभ की गई है। पिछले 3 वर्षों में किसानों को विभिन्न शासकीय योजनाओं में 2 लाख 69 हजार 686 करोड़ रुपये से अधिक के हितलाभ वितरण किए गए हैं। फसल क्षति प्रतिपूर्ति दरों में भी कई गुना वृद्धि की गई है।


    कांग्रेस जहां एक तरफ मुफ्तखोर प्रभावशाली वर्ग को सहेजने का जतन कर रही है वहीं भाजपा ने हर घर तक अपनी योजनाओं का लाभ पहुंचाया है। ऐसे में अब भाजपा को केवल नई भाजपा ही मात दे सकती है। कांग्रेस के हौसलों की हवा दिन ब दिन निकलती नजर आ रही है।

  • फाईनेंशियल प्लानिंग से अमर वैभव की यात्रा

    फाईनेंशियल प्लानिंग से अमर वैभव की यात्रा


    पांच ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने की जद्दोजहद में भारत ने कई पुरानी ढपोरशंखी परंपराओं को तिलांजलि दे दी है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने जिस तरह आर्थिक हालात को बदलने में सफलता पाई है उससे भारत के वैभव की अमरगाथा आज पूरी दुनिया गौर से सुन रही है। मौजूदा हालात में हमें वित्तीय प्रबंधन के नए तौर तरीके सीखने होंगे। इसे जिम्मेदारी कहना भी कोई अतिशयोक्ति नहीं होगी. इसे जरूर निभाएं।


    पैसा पैसे को खींचता है… हम सभी ने ये कहावत जरूर सुनी है. इसका शाब्दिक अर्थ निकाला जाए तो हम कहेंगे, आज आत्मीय रिश्तों की उतनी महत्ता नहीं है जितनी कि रुपये-पैसों की है. अब ज़रा इसे हम अपनी रोजमर्रा की जिंदगी में ढालकर इस पर अमल करें तो… हम वाकई रुपये-पैसों के महत्व को समझते हुए बचत को तवज़्जो देंगे, और जिस तरह से दुनियाभर में अनिश्चितताओं का बाजार गर्म है, बचत करना समझदारी भरा कदम है और यह कदम उठाना हम सभी के लिए बेहद जरूरी हो गया है. बल्कि हमें अब एक कदम और आगे बढ़ने की जरूरत है, वो कदम है — हमें अपने बच्चों को रुपये-पैसों का गणित सिखाने और बचत के महत्व को समझाते हुए उन्हें इसके तरीके बताने होंगे. यही सही समय है कि हम इसे अपनी नैतिक जिम्मेदारी बना लें.


    India Brand Equity Foundation (IBEF) की एक रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में दुनिया का शीर्ष वित्तीय साक्षर देश (financial literate country) होने की क्षमता है क्योंकि 25-44 आयु वर्ग के 27.6 प्रतिशत लोग वित्तीय शिक्षा के माध्यम से वित्तीय समावेशन (financial inclusion) कार्यक्रम में भाग लेना जारी रखते हैं. रिपोर्ट में आगे बताया गया है कि यदि 10-19 आयु वर्ग के युवाओं को भी उचित वित्तीय शिक्षा प्रदान की जाती है, तो अगले दो दशकों में यह दर 20% से अधिक बढ़ सकती है. यह समूह भारत की आबादी का लगभग 21.8% है.


    आपको अपनी नैतिक जिम्मेदारी निभाने में अर्थात् अपने बच्चों को रुपये-पैसों का हिसाब-किताब सिखाने और बचत के महत्व को समझाने में… पैसों की समझ जरूरी है। अपने अनुभवों के आधार पर हम कह सकते हैं कि वित्तीय संकट का समय हमें पैसों को मैनेज करने और इसका सही उपयोग करना सिखाता है. बच्चों को अपनी मेहनत की कमाई का विवेकपूर्ण तरीके से उपयोग करने और पैसे के मामलों से अवगत होने में मदद करने के लिए आर्थिक रूप से साक्षर बनाना आवश्यक है. पैसा हमारे दिन-प्रतिदिन के जीवन के लिए बेहद जरूरी है, हम न केवल पढ़ाई के लिए इसका उपयोग करते हैं बल्कि हम जो खाते हैं, कपड़े पहनते हैं, तकनीक का उपयोग करते हैं और बहुत कुछ करते हैं. ऐसे में अगर आप अपने बच्चों के सामने पैसों का जिक्र नहीं करते हैं, तो वे इसका महत्व नहीं समझ पाएंगे या उन्हें इसे समझने में देर हो जाएगी. उन्हें बताएं कि पैसा कमाना और खर्चों का हिसाब-किताब करना कितना कठिन है. उन्हें यह महसूस करने में मदद करें कि बचत या निवेश के माध्यम से फंड का सबसे उचित उपयोग मौजूदा फंड का ज्यादा से ज्यादा सदुपयोग करना है.


    पैसा कमाया जाता है अपने बच्चों को यह समझने में मदद करना आवश्यक है कि पैसा कमाना इतना आसान नहीं है, बल्कि इसके लिए कड़ी मेहनत की आवश्यकता होती है. आप उन्हें यह सिखाएं कि आप एक परिवार के मुखिया होने के नाते पैसा कैसे कमाते हैं और उन्हें सैलरी का अर्थ समझाएं. इस तरह, आप पैसों के महत्व को समझने में उनकी मदद कर सकते हैं. इससे उन्हें पैसों की अहमियत का एहसास होगा. खर्चों का हिसाब-किताब समझाएं हम हर रोज अपनी दैनिक जरूरतों के लिए अपनी जेब ढीली करते हैं, और पूरे खर्चों का हिसाब-किताब रखते हैं. यह हमारी रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा है. इसलिए, वित्तीय साक्षरता हर जगह सिखाई जा सकती है – उदाहरण के लिए, खरीदारी करते समय, आप अपने बच्चों को उनकी चाहत और ज़रूरत के बीच का अंतर सिखा सकते हैं. आप इस अवसर का लाभ उठाकर उन्हें यह समझने में मदद कर सकते हैं कि क्रेडिट या डेबिट कार्ड क्या हैं और/या नकद कैसे काम करता है और कुछ खरीदते समय कैसे इसका उपयोग किया जाता है. आप खरीदारी के बिलों को समझने में भी उनकी मदद कर सकते हैं जिनमें प्राप्त वस्तु के अनुसार लागत और अन्य महत्वपूर्ण विवरण शामिल हैं.


    पैसों की बचत का महत्व समझाएं जैसा कि हमने पहले कहा है — अपने बच्चों को पैसों की बचत के महत्व को समझाना; अपनी नैतिक जिम्मेदारी बना लें. खर्चों को समझने में आप अपने बच्चों की मदद करें और आय और बचत इसमें एक बड़ी भूमिका निभाते हैं. उन्हें सिखाएं कि पहले बचत करना और उसके अनुसार खर्चों को समायोजित करना आवश्यक है. उन्हें अपनी पॉकेट मनी का कुछ हिस्सा अपने गुल्लक में बचत के रूप में रखने की आदत डालने में मदद करें और एक लक्ष्य निर्धारित करें. यह न केवल उन्हें बचत के मूल्य का एहसास कराने में मदद करेगा बल्कि धन-प्रबंधन की बात आने पर उन्हें स्वतंत्रता की भावना महसूस करने में भी मदद करेगा।.

  • हाईकोर्ट को गुमराह करके पास्को आरोपी प्रकाश गुप्ता ने फिर खरीदी जमानत

    हाईकोर्ट को गुमराह करके पास्को आरोपी प्रकाश गुप्ता ने फिर खरीदी जमानत


    भोपाल 28 जुलाई(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)। अदालतों को गुमराह करके ठगी के आरोपों से बच निकलने में माहिर बूटकाम सिस्टम्स के प्रकाश चंद गुप्ता को फिलहाल गिरफ्तारी से बच निकलने में सफलता मिल गई है।इसके बावजूद पास्को एक्ट में दर्ज ताजा मामले से उसके ठगी और व्यभिचार के अपराध पूरी तरह उजागर हो गए हैं। हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति विशाल धगट ने उसका जो जमानत आवेदन मंजूर किया उसमें उसे पुलिस के सामने सरेंडर करने ,पासपोर्ट जमा करने, विदेश भागने से रोकने, पचास हजार रुपए का निजी मुचलका भरने और पुलिस जांच अधिकारी के सामने जांच के लिए हर समय उपलब्ध रहने की शर्त लगाई है। आरोपी की जमानत के लिए उसने वकील मनीष दत्त से जो झूठे तथ्य पेश करवाए उसके आधार पर अदालत को अपने फैसले पर पुनर्विचार करने का निर्देश देने का रास्ता खुल गया है।


    सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार कंप्यूटर के कारोबार की आड़ में साहूकारी करके लोगों का धन हड़प जाने के जो मामले अदालतों में लंबित हैं उनमें वह साक्ष्यों को नष्ट करके अब तक बचता रहा है। पुलिस के रिकार्ड में ऐसे सैकड़ों मामले दर्ज हैं जिनमें उसने लोगों को झांसा देकर जमा राशि का चैक वापस ले लिया और फिर पैसा जमा करने वालों के खिलाफ ही कर्ज न लौटाने की शिकायत दर्ज करवा दी। पुलिस के देहाती अपराध रजिस्टर में प्रकाश चंद गुप्ता कुख्यात ठग के रूप में दर्ज है पर कुछ अदालतों को खरीदकर या उन्हें झांसा देकर वह अब तक बचता रहा है। इस बार एक बच्ची ने उसके खिलाफ यौन दुराचार की शिकायत दर्ज कराई है जिसमें गिरफ्तारी से बचने के लिए उसके वकीलों की फौज ने दलील दी कि बच्ची ने आठ सालों बाद शिकायत की है इसलिए उसे जमानत पर रिहा कर दिया जाना चाहिए। जबकि वह बच्ची अभी भी नाबालिग है।


    हमारे न्यायालयीन संवाददाता ने बताया कि अदालत ने आरोपी के वकीलों की ओर से पेश किए गए झूठे तथ्यों को भी स्वीकार कर लिया और उसे सशर्त जमानत दे दी है जबकि पास्को एक्ट में जोड़े गए उपबंधों में इस तरह की जमानत देने का प्रावधान बाधित किया गया है। आपराधिक संशोधन विधेयक 2018 ने धारा 438 में खंड 4 जोड़कर और कानून में अपवाद बनाए गए हैं । उक्त धारा के अनुसार, 16 वर्ष से कम उम्र की महिला के साथ बलात्कार, 12 वर्ष से कम उम्र की महिला के साथ सामूहिक बलात्कार और 16 वर्ष से कम उम्र की महिला के साथ सामूहिक बलात्कार के अपराध के आरोपी व्यक्ति को अग्रिम जमानत नहीं दी जा सकती है। 12 वर्ष से कम उम्र की महिला के विरुद्ध अपराध, भारतीय दंड संहिता, 1860 की क्रमशः धारा 376(3), 376 एबी, 376 डीए और 376 डीबी के तहत दंडनीय है।


    आरोपी प्रकाश चंद गुप्ता के विरुद्ध जब स्थानीय अदालत ने गिरफ्तारी के आदेश दिए तो आनन फानन में उसने झूठे दस्तावेज बनाकर पीड़िता के पिता के विरुद्ध ही पैसा हड़प जाने की कहानी गढ़ ली। पुलिस ने तो उसकी ये दलील नहीं सुनी लेकिन हाईकोर्ट में मनीष दत्त की ओर से प्रस्तुत झूठ तब उजागर हो गया जब उन्होंने कहा कि आरोपी ने पीडि़ता की मां को भारी रकम उधार दी है और उसे न लौटाने के लिए पीडि़ता ने उस पर आरोप लगाए हैं। जबकि हकीकत ये है कि पीडि़ता के परिवार से करीबी बढ़ाने के लिए आरोपी गुप्ता ने उनके पिता से लाखों रुपए ब्याज पर उधार लिए थे जिन्हें वो कथित तौर पर गड़प गया है।


    बताते हैं कि मनीष दत्त ने आरोपी के बचाव में एक और झूठी दलील दी कि आरोपी के पिता ने एक और व्यक्ति के विरुद्ध पहले व्यभिचार की शिकायत की थी जबकि ऐसा कोई मामला कभी कहीं दर्ज नहीं हुआ है।जबकि आरोपी ने जिन सैकड़ों लोगों की जमा राशि गड़प की है उसके मुकदमे भोपाल की जिला अदालत और दिल्ली, इंदौर, कलकत्ता की अदालतों में चल रहे हैं। आरोपी संभ्रांत व्यक्ति नहीं है और आईपीसी की धारा 438 के तहत जमानत पाने के लाभ का हकदार नहीं है क्योंकि उसके विरुद्ध वर्तमान में 4 करोड़ 27 लाख रुपए की धोखाधड़ी का एक मामला तो विक्रमादित्य सिंह पुत्र श्री राजेन्द्र सिंह की ओर से चलाया जा रहा है। इस मामले में वह जेल जा चुका है और जमानत पर रिहा है। उसके खिलाफ धारा 354 के अंतर्गत एक और महिला के ऊपर अश्लील तरीके से हमला करने का प्रकरण दर्ज हुआ था जिसमें उसने समझौता कर लिया था ।अदालत की भाषा में समझौता होना अपराध होने से बरी होना नहीं होता है।

    एक अन्य केस इसकी दुकान में कार्य करने वाली एक लड़की के साथ अवैध संबंध होने पर लड़की के गर्भवती हो जाने पर बलात्कार और अन्य धाराओं में दर्ज कराए गए थे। इस प्रकरण में भी प्रकाश गुप्ता ने अवैध रूप से समझौता करके लड़की के परिजनों को झांसा दिया कि मैं शादी कर लूंगा । कानून की निगाह में बलात्कार का आरोप भी समझौता होने के बावजूद बरी होना नहीं माना जाता। हिंदू विवाह अधिनिमय में दो विवाह की अनुमति भी नहीं है।


    पुलिस के सूत्र बताते हैं कि प्रकाश गुप्ता जिन व्यक्तियों से जमा राशि लेकर उनसे ठगी करता रहा है उनकी मूल रकम लौटाने से इंकार करने के लिए वह उनके नकली हस्ताक्षर बना लेता है और अदालत में जाली दस्तावेज पेश करता रहा है। अदालतें उसकी ओर से प्रस्तुत तथ्यों को क्यों स्वीकार कर लेती हैं ये भी जांच का विषय है। फर्जी दस्तावेज बनाकर वह ये सिद्ध करने की कोशिश करता है कि उसे विरोधी पक्षकार से पैसे लेने हैं। देने नहीं हैं। ये इसके अपराध करने का तरीका है।

  • सिंधिया जी की पहल से आर्थिक विकास की राह प्रशस्त हुईःडॉ.प्रभुराम चौधरी

    सिंधिया जी की पहल से आर्थिक विकास की राह प्रशस्त हुईःडॉ.प्रभुराम चौधरी


    भोपाल, 27 जुलाई(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)। प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री डॉ.प्रभुराम चौधरी ने कहा है कि सिंधिया घराना हमेशा जनता की बेहतरी के उपाय करता रहा है यही वजह है कि जनता हमेशा से सिंधिया परिवार के प्रति आशा की निगाह से देखती है। प्रदेश में जब कुछ स्वार्थी तत्वों ने आर्थिक सुधारों की चाल बिगाड़ी तो श्रीमंत ज्योतिरादित्य सिंधिया ने आगे आकर जनता का मार्ग प्रशस्त किया। हम विकास के जिन सिद्धांतों पर अमल कर रहे हैं उससे राज्य को आर्थिक महाशक्ति बनाने में मदद मिलेगी।
    स्वास्थ्य मंत्री ने अपने व्यस्त कामकाज के बीच वक्त निकालकर पत्रकार साथियों से कहा कि मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की सरकार तो तिहरे इंजन की सरकार है। मोदी सरकार की नीतियों के साथ शिवराज जी की जन जन से जुडाव की नीतियां और ज्योतिरादित्य सिंधिया के आर्थिक विकास के फार्मूले सभी एक साथ प्रदेश की स्वर्णिम इबारत लिख रहे हैं।
    उन्होंने कहा कि जन स्वास्थ्य को बेहतर बनाने के लिए हमने जहां अस्पतालों की व्यवस्थाएं सुधारी हैं वहीं हम दवा सप्लाई का पूरा नेटवर्क खड़ा कर रहे हैं। हमने फार्मा सेक्टर में आ रहे बदलावों के साथ चलने के लिए पूरा खाका तैयार किया है। इससे हम न केवल जनता को सस्ती दवाईयां मुहैया करा पाएंगे बल्कि हम दवा निर्माण का हब भी बनने जा रहे हैं। मोदी जी की सरकार ने मेक इन इंडिया का जो नारा दिया था हम दवा निर्माण के ऐसे फार्मूले लागू कर रहे हैं कि जल्दी ही मध्य प्रदेश दवा निर्माण के लिए दुनिया भर की बड़ी कंपनियों का चहेता राज्य बन जाएगा।
    डॉ.प्रभुराम चौधरी ने कहा कि प्रदेश में डाक्टरों की कमी को दूर करने के साथ हम आधुनिक तकनीकों का भी इस्तेमाल कर रहे हैं जिससे लोगों को उनके घरों के आसपास ही स्वास्थ्य सुविधाएं मिलने लगी हैं। जो इलाके छूट गए हैं उन्हें जल्दी ही कवर कर लिया जाएगा।

  • आर्थिक सुधारों के साथ चलें तो घर घर बरसेगी खुशहालीःजगदीश देवड़ा

    आर्थिक सुधारों के साथ चलें तो घर घर बरसेगी खुशहालीःजगदीश देवड़ा


    भोपाल,27 जुलाई(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)। मध्यप्रदेश के वित्तमंत्री जगदीश देवड़ा ने प्रदेश के नागरिकों से कहा है कि भारत सरकार जो वित्तीय सुधार लागू कर रही है वे आजादी के बाद से अपेक्षित थे। जनता इन सुधारों के साथ कदमताल करेगी तो जल्दी ही घर घर में खुशहाली फैल जाएगी। कटनी दौरे से लौटने के बाद आज पत्रकारों से मुलाकात में उन्होंने प्रदेश के मजबूत होते वित्तीय ढांचे को लेकर कई संकेत दिए। उन्होंने कहा कि प्रदेश में जिस तरह आधारभूत ढांचे को विकसित किया गया है उसका लाभ प्रदेश की जनता भरपूर उठा रही है। लोगों की अपेक्षाएं बढ़ीं हैं और सरकार उन्हें पूरा करने का हर संभव प्रयास कर रही है।
    पत्रकारों के सवालों के जवाब में हरफन मौला वित्तमंत्री श्री देवड़ा ने कहा कि आर्थिक चुनौतियों के बीच जिन परिवारों की समरसता बिगड़ रही है उन्हें हमारी सांस्कृतिक विरासत से प्रेरणा लेनी चाहिए। हमारे देश में बचत की परंपरा बहुत मजबूत रही है अब हमें अपने आर्थिक संसाधनों को बढ़ाने के तरीके सीखना होंगे। भारत सरकार की वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने टैक्स में छूट की जो सीमा बढ़ाई है उससे काली अर्थव्यवस्था समाप्त होगी। भारत का विदेशी व्यापार संतुलन सुधरेगा और लोगों की आय बढ़ेगी।सबसे बड़ी बात है कि लोगों के जीवन में सुकून बढ़ेगा अब तक जिन छोटे और मध्यम आयवर्ग के लोगों को अपनी आय छिपानी पड़ती थी वे अब बेखौफ होकर अपना जीवनयापन कर पाएंगे।
    वित्तमंत्री ने कहा कि केन्द्र सरकार ने जिस तरह माईक्रोफाईनेंस और सूक्षम व लघु उद्योगों को अवसर दिए हैं, किसानों के लिए एफपीओ गठित किए हैं, सहकारिता के क्षेत्र को मजबूत बनाया है उससे जल्दी मुद्रा निर्माण बढ़ेगा और देश की क्षमताओं का उचित प्रतिफल हम जन जन तक पहुंचा पाएंगे। उन्होंने कहा कि लोग वित्तीय प्रबंधन की बारीकियां समझ रहे हैं और सरकार पर उनकी निर्भरता घट रही है। हमारा प्रयास है कि लोग लाचार न रहें और वे अपने हुनर का इस्तेमाल करके खूब समृद्धि हासिल करें।
    एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश सरकार कुशल वित्तीय प्रबंधन के माध्यम से जनता को लाभ पहुंचाने वाले वित्तीय संस्थानों की पहचान कर रही है और उन्हें भरपूर संरक्षण भी दे रही है। हम ढर्रे की सोच से बाहर निकलना चाहते हैं। प्रदेश की पुरानी परंपराओं के साथ हमने कई ऐसे नवाचार भी किए हैं जो आज जनता की समृद्धि के प्रकाश स्तंभ बनते जा रहे हैं।

  • लेडी किलर ठग प्रकाश चंद गुप्ता का आडियो वायरल

    लेडी किलर ठग प्रकाश चंद गुप्ता का आडियो वायरल


    भोपाल,26 जुलाई,(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)। पास्को एक्ट में लगभग एक महीने की फरारी के बाद हाईकोर्ट से सशर्त जमानत मिलने के साथ ही बूटकाम सिस्टम्स (Bootcom Systems) का प्रकाश चंद गुप्ता (Prakash Chand Gupta) अब एक और आडियो वायरल होने से चर्चाओं में आ गया है। ये आडियो उसके आकर्षक ब्याज के झांसे में लाखों रुपए गंवा चुकी एक महिला के करीबी ने रिकार्ड किया था। हाईकोर्ट ने पासपोर्ट जब्त करने के साथ उसे पुलिस थाने में हाजिरी की शर्त पर जमानत दी है।
    सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार फरारी के दौरान न केवल उसका कंप्यूटर कारोबार चलता रहा बल्कि उसका साहूकारी का धंधा भी बदस्तूर जारी था। इस कारोबार के सहारे ही वह लोगों का करोड़ों रुपया ब्याज पर लेकर कुछ बड़े व्यापारियों तक पहुंचाता है जो बैंकों के अरबों रुपये ब्याज पर लिए हुए हैं। इसी रकम उन कारोबारियों ने कर्ज पर चला रखा है। बैंक की किस्तें भरने के लिए वे बाजार का पैसा लेकर गड़प जाते हैं। इसी कड़ी में प्रकाश चंद गुप्ता भी कई जगह फ्रंट फेस तो कई जगह बैक कड़ी के रूप में काम करता है। हवाला के कारोबार से ये रकम शहर के विभिन्न इलाकों तक पहुंचाई जाती है।
    पिछले दिनों न्यायालय परिसर में नौकरी करने वाली ऐसी ही महिला ने अपनी रकम का ब्याज और मूलधन वापस मांगा तो गुप्ता ने उन्हें गालियां देकर दूकान से बाहर निकाल दिया। उसने महिला को विश्वास में लेकर पहले ही मूल चैक वापस ले लिया था और उसे फाड़ दिया था जबकि चैक की फोटो कापी महिला के पास है। उसने अपने दस्तावेजों के आधार पर पुलिस और अदालत में ठगी की शिकायत की है जो वाद अभी लंबित है।
    महिला और प्रकाश गुप्ता के बीच लेनदेन को लेकर जो झड़प हुई उसकी आडियो क्लिप हमारे पास मौजूद है। वार्तालाप में कुछ अश्लील गालियां भी मौजूद हैं जिन्हें मामले की गंभीरता को समझने के लिए सुनना जरूरी है। इसी के चलते हम अनकट आडियो आपके लिए प्रस्तुत कर रहे हैं। कृपया प्रकाश गुप्ता की असलियत को समझने के लिए इसे सुनें और गालियों को नजरंदाज करें। ये आडियो हमें फरियादी अभिलाषा राहते की ओर से उपलब्ध कराया गया है, प्रेस इंफार्मेशन सेंटर इस आडियो की सत्यता की कोई गारंटी नहीं लेता है।

  • संजय जैन अब फार्मेसी काऊंसिल आफ इंडिया के सदस्य भी निर्वाचित

    संजय जैन अब फार्मेसी काऊंसिल आफ इंडिया के सदस्य भी निर्वाचित

    भोपाल 21 जुलाई (प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)।भारत सरकार के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय की विधिक इकाई फार्मेसी काऊंसिल आफ इंडिया के सदस्य के रूप में मध्यप्रदेश फार्मेसी काऊंसिल के अध्यक्ष संजय जैन को विधिवत पांच सालों के लिए निर्वाचित किया गया है। इसके साथ ही मध्यप्रदेश अब देश के फार्मा सेक्टर में नई छलांग लगाने के लिए तैयार हो गया है। मोदी सरकार ने मेक इन इंडिया अभियान के अंतर्गत देश के फार्मा सेक्टर को विश्व की जरूरतों के लिए तैयार करने का रोड मैप बनाया है। मध्यप्रदेश की ओर से स्वास्थ्य मंत्री प्रभुराम चौधरी ने श्री संजय जैन को अपना प्रतिनिधि बनाकर भेजा है।
    फार्मेसी काऊंसिल आफ इंडिया के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ.मोंटू पटेल ने पिछले दिनों अपने रायपुर प्रवास के दौरान श्री जैन से मध्यप्रदेश के फार्मा सेक्टर की संभावनाओं की जानकारी ली थी। उनके साथ आए केन्द्रीय फार्मेसी शिक्षा समिति के अध्यक्ष डॉ. दीपेन्द्र सिंह ने स्टेट फार्मेसी काऊंसिल की स्थितियों की समीक्षा की थी। इसके बाद दिल्ली में हुए फैसले के आधार पर पीसीआई के रजिस्ट्रार और सचिव अनिल मित्तल ने इस निर्वाचन की सूचना भेजी है।
    भारत सरकार की ये संस्था देश में फार्मेसी के शिक्षण प्रशिक्षण और कालेजों को मान्यता देने में प्रमुख भूमिका निभाती है।देश के दवा उद्योग को दिशा देने में भारत सरकार का स्वास्थ्य मंत्रालय इस संस्था के माध्यम से ही संवाद करता है। वर्तमान नरेन्द्र मोदी सरकार ने जबसे मेक इन इंडिया का विचार लागू किया है तबसे भारत का दवा उद्योग कई मूलभूत बदलावों के साथ नई ऊंचाईयां छू रहा है।
    श्री संजय जैन को मध्यप्रदेश की ओर से पहली बार स्टेट फार्मेसी काऊंसिल का प्रतिनिधित्व करने का अवसर मिला है। मध्यप्रदेश सरकार ने दवा के कारोबार में राज्य की भागीदारी बढ़ाने के लिए जो प्रयास किए हैं राज्य को उसका पूरा लाभ मिले इसके लिए श्री जैन कई बड़े दवा उद्योगों से निरंतर संपर्क कर रहे हैं। स्वास्थ्य मंत्री डॉ.प्रभुराम चौधरी ने दवा उद्योग को सुव्यवस्थित करके आम जनता को जो आधुनिक दवाईयां सस्ती कीमतों पर उपलब्ध कराने की मुहिम चलाई है उसमें संजय जैन की उपस्थिति प्रभावी साबित होगी।

  • सरकारी कालेजों को दुबारा बजट देकर किसने किया भ्रष्टाचार

    सरकारी कालेजों को दुबारा बजट देकर किसने किया भ्रष्टाचार

    भोपाल, 21 जुलाई,(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर) उच्च शिक्षा विभाग के महाविद्यालय जोकि शिक्षा की सबसे ऊंची इकाई मानी जाती है,उनकी गरिमा ताक पर रखकर नियम विरुद्ध प्रक्रियाओं से उन्हें भ्रष्टाचार का केंद्र बनाया जा रहा है | उच्च शिक्षा विभाग ने अपने पत्र क्रमांक 291/272/आउशि/योजना/2023 दिनांक 6.6.23से महाविद्यालयों की एक सूची प्रकाशित की थी जिसमें यह निर्देश दिए गए थे की जो महाविद्यालय विश्व बैंक पोषित योजना ऑब्लिक रूसा योजना अंतर्गत आ रहे हैं उन कॉलेजों को प्रस्ताव नहीं भेजना है इन महाविद्यालयों को सम्मिलित नहीं किया जाएगा इसका प्रमाण पत्र भी कॉलेजों से मंगवाया गया था उसके बावजूद उन्हीं कॉलेजों को दुबारा बजट आवंटन कर दिया गया I जिन कॉलेजों पिपरई, मंदसौर पी जी कॉलेज , मंदसौर गर्ल्स ,नलखेडा , दालोदा को पिछले साल बजट आवंटित हुआ था उन्हें इस बार फिर बजट आबंटित कर दिया गया। उच्च अधिकारियों ने ही इस प्रक्रिया को डबल अपनाने के आदेश जारी किए हैं।
    यह प्रक्रिया प्रदेश के उच्च शिक्षा विभाग के अधिकांश महाविद्यालयों में एक जैसी की जा रही है और एक ही व्यक्ति विशेष फर्म एवं अधिकारियों को लाभ दिलाने की दृष्टि से यह कार्य किया जा रहा है| उच्च शिक्षा विभाग द्वारा वर्तमान में नामली ,जीरन,रावती ,अजयगढ़,मंदसौर , पवई,पिपरई , जैतवारा ,नलखेडा ,दलोदा एवं अन्य महाविद्यालयों को बजट आवंटित किया गया है निविदा की शर्त निम्नानुसार है :-

    1.सभी महाविद्यालय की निविदा में निविदाकारो से समस्त उत्पादों कि टेस्ट रिपोर्ट थर्ड पार्टी अन्य लैब से चाही गयी है, जबकि निर्माता द्वारा प्रदाय किये जा रहे उत्पादों को निर्माता कंपनी द्वारा अपनी टेस्टिंग लैब में टेस्ट करवाकर ही सप्लाई कर दिया गया। निविदा में न्यूनतम दर आने वाली फर्म को सामान देने के पूर्व थर्ड पार्टी इंस्पेक्शन/विभाग की तकनीकी समिति से कराना होता है I

    2.सभी महाविद्यालय कि निविदा में निविदाकार का पास्ट एक्सपीरियंस 50% मांगा गया है जिसमे बिड वैल्यू नहीं दर्शायी गई है। जिससे निविदाकार का पास्ट एक्सपीरियंस 50% उपकरणों कि संख्या के आधार पर आकलन होना है I जबकि आश्चर्य की बात यह है कि निविदा कि अतिरिक्त निविदा बिंदु क़ 6 की शर्तो में निविदाकार द्वारा पिछले 3 वर्षों में ₹ 1 करोड़ का एकल ऑर्डर एवं ₹ 47- 47 लाख रुपए के पृथक – पृथक दो आर्डर उपलब्ध कराने होंगे नहीं तो निविदा पत्रक के अभाव में अमान्य कर दी जावेगीI

    1. जेम पोर्टल पर उपलब्ध निविदा क्रमांक GEM/2023/B/3669315 DT. 11.7.23, GEM/2023/B/3669485, DT. 11.7.23, GEM/2023/B/3668564 DT.10.7.23 , GEM/2023/B/3667558 DT.11.7.23 , GEM/2023/B/3667559 Dt.11.7.2023 को प्रकाशित हुई | जिसमें GEM/2023/B/3669315 DT. 11.7.23 निविदा में विभाग का नाम डिपार्टमेंट ऑफ हायर एजुकेशन प्रदर्शित हो रहा है एवं निविदा में ऑर्गेनाइजेशन का नाम गवर्नमेंट कॉलेज ऑफ़ मध्य प्रदेश प्रदर्शित है, निविदा के प्रपत्र में कहीं भी महाविद्यालय का नाम प्रदर्शित नहीं हो रहा है और उच्च शिक्षा विभाग में कोई भी ऐसा महाविद्यालय नहीं है जिसका नाम गवर्नमेंट कॉलेज ऑफ़ मध्य प्रदेश हैI निविदा में धरोहर राशि की मांग की गई है जिसमें बेनेफिशरी के नाम के लिए गवर्नमेंट कॉलेज ऑफ़ मध्य प्रदेश के नाम पर धरोहर राशि जमा करनी है , निविदा में महाविद्यालय का ऐसा कोई भी खाता नंबर नहीं है जिसमें यह राशि जमा की जा सके निविदाकारों के साथ मिलकर महाविद्यालय के अधिकारी/कर्मचारी एवं संस्था विशेष लोगो द्वारा राशी कि बंदरबांट करने का प्रयास किया जा रहा है |
  • नाबालिग के यौन अपचारी प्रकाश गुप्ता की अग्रिम जमानत अर्जी खारिज

    नाबालिग के यौन अपचारी प्रकाश गुप्ता की अग्रिम जमानत अर्जी खारिज


    भोपाल 18 जुलाई( प्रेस इनफार्मेशन सेंटर) जिला एवं सत्र सत्र न्यायालय मैं विगत 28 जून को दाखिल नाबालिग बालिका के योन उत्पीड़न आरोपी बूटकॉम सिस्टम के मालिक प्रकाश चंद्र गुप्ता कीअग्रिम जमानत की याचिका माननीय न्यायालय ने ये कहते हुए खारिज कर दी है कि आरोपी का क्रिमिनल रिकॉर्ड है,वह आदतन अपराधी है और महिलाओं से संबंधित अपराध करने का इसका पुराना रिकॉर्ड है । उपरोक्त तथ्यों को ध्यान में रखते हुए आरोपी को अग्रिम जमानत नहीं दी जा सकती।

    आरोपी के अधिवक्ता मेहता ने न्यायालय के समक्ष 30 मिनट तक अग्रिम जमानत देने के लिए तर्क दिए।उन्होंने कई न्याय दृष्टांत भी न्यायालय के समक्ष रखे लेकिन न्यायालय ने अधिवक्ता के सभी तर्कों को खारिज करते हुए आरोपी प्रकाश चंद्र गुप्ता की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी। माननीय न्यायालय ने प्रकाश गुप्ता के परिवार को कहा कि वे जल्द से जल्द आरोपी को पुलिस के सामने पेश करें। माननीय न्यायालय ने आरोपी के अधिवक्ता श्री मेहता के लगभग 150पन्नों के दलीलों से भरे आवेदन को निरस्त करते हुए अग्रिम जमानत का लाभ देने से इंकार कर दिया।
    ज्ञात हो कि दिनांक 21 जून को अयोध्या नगर थाने में आरोपी प्रकाश चंद गुप्ता के खिलाफ एफ आई आर दर्ज होने के बाद से ही वह फरार है। सूत्रों के अनुसार पुलिस का अमला पूरी कोशिश कर रहा है कि आरोपी को जल्द से जल्द गिरफ्तार कर न्यायालय के समक्ष पेश किया जाए।आरोपी ने अपने दोनों फोन बंद कर दिए गए हैं और किसी अन्य फोन नंबरों का इस्तेमाल कर रहा है।

    सूत्रों की माने तो प्रकाश गुप्ता की ओर से अब माननीय हाईकोर्ट के समक्ष अग्रिम जमानत का आवेदन लगाया गया है। विधि विशेषज्ञों का ऐसा कहना है कि जिस प्रकार से प्रकाश गुप्ता का आपराधिक रिकॉर्ड न्यायालय के संज्ञान में आया है उसे देखते हुए माननीय उच्च न्यायालय की ओर भी आरोपी को अग्रिम जमानत का लाभ मिलने की उम्मीद नहीं है

  • कार्पोरेट बैंकिंग में प्रवेश की दहलीज पर सद्गुरु नागरिक सहकारी बैंक

    कार्पोरेट बैंकिंग में प्रवेश की दहलीज पर सद्गुरु नागरिक सहकारी बैंक

        सद्गुरु नागरिक सहकारी बैंक के चुनाव में 16 जुलाई को नालंदा स्कूल में लिखेगा नया अध्याय

    भोपाल,13 जुलाई,(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)।राजधानी के व्यापारियों की आर्थिक प्रगति में बड़ी भागीदारी निभाने वाला सद्गुरु नागरिक सहकारी बैंक अब आधुनिकता के नए दौर में प्रवेश करने जा रहा है। बैंक ने आगामी 16 जुलाई रविवार को अपने नए संचालक मंडल के चुनाव आयोजित किए हैं। देश की तेज करवट ले रही अर्थव्यवस्था  के साथ कदमताल करने के लिए सद्गुरु वैभव पैनल ने आज पत्रकार वार्ता में अपनी योजनाओं का खाका प्रस्तुत किया।बैंक के संस्थापक स्वर्गीय श्री राजाभाऊ कुलकर्णी के सुपुत्र मिलिंद कुलकर्णी के मैदान में आ जाने से ये चुनाव नई उमंगों से लबरेज बन गया है।

             स्वर्गीय राजाभाऊ कुलकर्णी के प्रयासों से निर्मित इसबैंक को इसके अंशधारी सदस्यों, अमानतदारों, उधार कर्ताओं कर्मचारियों ने अपने अथक परिश्रम से लगातार सफल बनाया और ऊंचाईयों पर पहुंचाया। जब केवल सरकारी बैंकों का जलजला था और बाद में बड़े निजी बैंकों की धमक बढ़ी तब भी सद्गुरु नागरिक सहकारी बैंक अपना कारोबार बढ़ाता रहा है। जब सरकारी मदद से खोले गए सहकारी बैंक धूल धूसरित हो रहे थे तब भी सद्गुरु नागरिक सहकारी बैंक अपना लाभांश अपने हितग्राहियों में बांट रहा था। इस बार स्वर्गीय कुलकर्णी के बेटे ने अपने पिता के अधूरे स्वप्नों को साकार करके बैंक को नई ऊंचाईयों पर ले जाने का संकल्प व्यक्त किया है।

           आज पत्रकार वार्ता में सद्गुरु वैभव पैनल के सुरेश कानिटकर और मिलिंद कुलकर्णी ने कहा कि आधुनिक बैंकिंग के इस दौर में व्यापारियों और अंशधारकों की जरूरतों को पूरा करने के लिए हमारी पैनल ने एक व्यापक रोड मैप तैयार किया है। पैनल के अनुभवी सदस्यों ने मोबाईल बैंकिंग और आनलाईन बैंकिंग के माध्यम से अपने ग्राहकों के वित्तीय उन्नयन की तैयारी की है। उन्होंने बताया कि नालंदा स्कूल में होने वाले मतदान बैंक के वे अंशधारी सदस्य ही मतदान कर पाएंगे जिन्होंने अपने जीवनकाल में कम से कम एक बार बैंक लोन लिया है। निर्वाचन अधिकारी ने मतदान के लिए शासन की ओर से मान्यता प्राप्त पहचान पत्र लाना अनिवार्य कर दिया है।

           उन्होंने बताया कि पिछले कुछ सालों में बैंक के सदस्य संस्था से अपना जुड़ाव नहीं बना पाए हैं। अंशधारी सदस्यों की जरूरतों पर ध्यान नहीं दिए जाने के कारण आम ग्राहक खुद को उपेक्षित महसूस कर रहा है। संचालक मंडल की नीतियों की वजह से कई योग्य अधिकारी कर्मचारी अपनी नौकरियां छोड़ चुके हैं। इसी वजह से इस बार चुनाव में एक बदलाव की बयार महसूस की जा रही है। बैंक एक सहकारी संस्था है और भारतीय रिजर्व बैंक की निगरानी में सहकारिता कानून के तहत कार्य करती है। पिछले वर्षों में इसे चंद लोगों के इर्द गिर्द चलाने की कोशिशें की गईं। इस चुनाव में हमारी पैनल विजयी हुई तो हम बैंक को कार्पोरेट गवर्नेंस की ओर ले जाएंगे।

         सद्गुरु वैभव पैनल ने समाज के जागरूक डाक्टरों, सीए,वकील, व्यवसायी, पत्रकार आदि सभी वर्गों के लोग शामिल किए गए हैं। उन्होंने समाज के सभी वर्गों के मतदाता सदस्यों से निवेदन किया है कि वे मतदान अवश्य करें और सद्गगुरु पैनल के सभी सदस्यों को भारी बहुमत से विजयी बनाकर बैंकिंग के क्षेत्र में एक नया अध्याय लिखने की शुरुआत करें।

  • जनसंवेदना ने सेवा कार्य करके दिखाया:विधानसभा अध्यक्ष गिरीश गौतम

    जनसंवेदना ने सेवा कार्य करके दिखाया:विधानसभा अध्यक्ष गिरीश गौतम

    भोपाल,11जुलाई(प्रेस इंफॉर्मेशन सेंटर)जनसंवेदना सामाजिक संस्था के 19 वें स्थापना दिवस पर प्रकाशित मानव सेवा ही माधव सेवा स्मारिका का विमोचन आज विधानसभा परिसर में  विधानसभा अध्यक्ष गिरीश गौतम ने किया। इस अवसर पर संस्था के संस्थापक राधेश्याम अग्रवाल ,उदयवीर सिंह एवं कई अन्य गणमान्य लोग भी उपस्थित थे ।

     विधानसभा अध्यक्ष श्री गौतम ने कहा कि मानव सेवा ही माधव सेवा के मूल मंत्र से जनसंवेदना अपना सेवा कार्य कर रही है जिससे जरूरतमंदों को सहायता मिल रही है । निराश्रित बेसहारा लावारिस की  मृत्यु हो  जाने पर उसका अंतिम संस्कार का सेवा कार्य गहरे समर्पण और धीरज से ही संभव है।संस्था ने अपनी उपयोगिता साबित की है