Month: May 2023

  • जनता के विश्वास पर खरी उतरी मोदी सरकार

    जनता के विश्वास पर खरी उतरी मोदी सरकार

    केन्द्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव ने पत्रकारों को सभी तथ्यों से अवगत कराया

    भोपाल 29 मई(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)। 2014 से पहले देश में जो सरकार थी, उसमें सत्ता के ऐसे केंद्र बन गए थे, जो संविधानेत्तर थे और उनकी देश के संविधान के प्रति कोई जवाबदेही नहीं थी। देश पॉलिसी पैरालिसिस का शिकार था। अर्थव्यवस्था ढेर हो रही थी और भ्रष्टाचार की स्थिति यह थी कि सरकार के मंत्री ही जेल चले जाते थे। 2014 के चुनाव में जनता ने जनादेश दिया और प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में नई सरकार बनी। देश की जनता ने पूर्ण बहुमत से सरकार बनाकर जो विश्वास जताया था, बीते 9 वर्षों में प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी की सरकार ने अपने कामकाज से उस भरोसे को सही साबित कर दिया है। यह बात केंद्रीय पर्यावरण, वन, जलवायु परिवर्तन, श्रम और रोजगार मंत्री भूपेंद्र यादव ने सोमवार को कुशाभाऊ ठाकरे कन्वेंशन सेंटर सभागार में प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में केन्द्र सरकार के 9 वर्ष पूर्ण होने पर आयोजित मीडिया संवाद कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कही। मीडिया संवाद कार्यक्रम में मुख्यमंत्री श्री शिवराजसिंह चौहान एवं पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष व सांसद श्री विष्णुदत्त शर्मा ने भी विचार व्यक्त किए। मंच का संचालन प्रदेश मीडिया प्रभारी श्री आशीष अग्रवाल ने किया।

    केन्द्रीय मंत्री श्री यादव ने कहा कि बीते 9 वर्षों में प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी की सरकार अगर देश में बड़े बदलाव ला सकी है, तो उसका आधार है टारगेटेड डिलीवरी और लॉस्ट माइल डिलीवरी। यही मोदी सरकार की सबसे बड़ी उपलब्धियां भी हैं। मोदी सरकार ने हर काम की समय सीमा तय की और हर योजना का 100 प्रतिशत लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंच सके, यह सुनिश्चित किया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री मोदी ने 2014 में शपथ लेते ही कहा था कि मेरी सरकार, गरीबों की सरकार है। बीते 9 वर्षों में उनकी सरकार ने जो काम किए हैं, उनसे हर गरीब को सुरक्षा और गरिमा मिली है। मोदी सरकार ने आधुनिक टेक्नोलॉजी, अपने विजन और कार्यक्षमता के आधार पर हर गरीब तक योजनाओं का लाभ पहुंचाया। पहले जहां हम टी.बी.और पोलियो जैसी बीमारियों की वेक्सीन नहीं बना पाए, हमने कोरोना संकट में रिकॉर्ड समय में कोरोना की वेक्सीन बनाई और अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाई। 3.5 करोड़ से अधिक लोगों को प्रधानमंत्री आवास दिये गए। स्व. लोहिया जी ने जिन दो विषयों को भारतीय महिलाओं की सबसे बड़ी समस्या बताया था, उन्हें मोदी सरकार ने हल किया है। देश में 11.72 करोड़ इज्जत घरों का निर्माण किया गया है। 12 करोड़ घरों में नल से स्वच्छ जल पहुंच रहा है और उज्जवला योजना में 9.6 करोड़ से अधिक गैस कनेक्शन देकर महिलाओं के जीवन को आसान बनाया है। कोविड संकट में मोदी सरकार ने 80 करोड़ गरीबों को मुफ्त राशन देना शुरू किया। आयुष्मान योजना में प्रत्येक गरीब व्यक्ति को 5 लाख रुपये तक का मुफ्त इलाज मिल रहा है।

    केंद्रीय मंत्री श्री भूपेंद्र यादव ने कहा कि मोदी सरकार के लिए सामाजिक न्याय का आशय किसी का तुष्टिकरण नहीं है, बल्कि वह पिछड़ों के सशक्तीकरण पर विश्वास करती है। वोट बैंक की राजनीति को नकारते हुए मोदी सरकार ने उच्च शिक्षा में सामान्य वर्ग के कमजोर आय वर्ग के छात्र-छात्राओं को 10 प्रतिशत आरक्षण दिया। कांग्रेस की सरकारों ने काका कालेकर कमीशन और फिर मंडल कमीशन की सिफारिशों को ठंडे बस्ते में डाले रखा। मोदी सरकार ने सत्ता में आने के बाद पिछड़ा वर्ग आयोग को संवैधानिक दर्जा दिया। सरकार ने दिव्यांगों की कैटेगरी को 7 से बढ़ाकर 21 किया, ताकि हर तरह के दिव्यांगों तक सरकार की योजनाओं का लाभ पहुंच सके। मोदी सरकार ने सीमांत किसानों की कठिनाइयों को ध्यान में रखते हुए उनकी तात्कालिक आवश्यकता की पूर्ति के लिए उन्हें प्रतिवर्ष 6 हजार रुपये की किसान सम्मान निधि देना शुरू किया।

    श्री यादव ने कहा कि देश की आजादी के बाद से लेकर 2014 के पहले तक अधोसंरचना के विकास के जितने काम नहीं हुए थे, उससे कहीं ज्यादा विकास कार्य मोदी सरकार के 9 वर्षों में हुए हैं। 2014 के पहले देश में 74 एयरपोर्ट थे, जबकि 2014 के बाद के 9 वर्षों में इतने ही नए एयरपोर्ट बनाए गए हैं। मोदी सरकार के पहले तक देश में 91287 किलोमीटर सड़कें थीं, जबकि मोदी सरकार के 9 वर्षों में 53868 किलोमीटर नई सड़कें बनाई गई हैं। इस सरकार के समय पहली बार वाटर वे के विकास के बारे में सोचा गया और 111 वाटर वे बनाए गए। 20 वंदे भारत ट्रेनें देश के यात्रियों को वर्ल्ड क्लास सुविधाएं उपलब्ध करा रही हैं, वहीं 15 शहरों में मेट्रो ट्रेनों का परिवहन शुरू किया गया है, जो कि पहले 5 शहरों में ही चलती थीं। 2014 तक देश में 7 एम्स हुआ करते थे, मोदी सरकार ने 15 नए एम्स स्थापित किए। पहले देश में 641 मेडिकल कॉलेज थे, जबकि बीते 9 सालों में 700 नए कॉलेज खोले गए हैं। 7 नए आईआईएम और 390 नए विश्वविद्यालय खोले गए हैं। सरयू नहर, बोगीबील ब्रिज और केरल के कोलम बायपास जैसी जो परियोजनाएं बरसों से अटकी हुई थीं, उन्हें पूरा किया गया है। देश के सुदूर अंचलों और सीमावर्ती क्षेत्रों तक हर मौसम में आने-जाने की सुविधा मिली है तथा इसमें लगने वाला समय भी कम हुआ है।

    श्री यादव ने कहा कि मोदी सरकार के 9 सालों में देश में अर्थव्यवस्था को टेक्नोलॉजी से जोड़ा गया और आज देश में एक डिजिटल क्रांति आई हुई है। देश का निर्यात रिकॉर्ड स्तर पर है और भारत सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था वाला देश बन गया है। भारत ग्लोबल इनोवेशन इंडेक्स में 45 वें स्थान पर है और देश में 100 से अधिक यूनिकॉर्न हैं। देश में नई शिक्षा नीति लागू की गई है, जो भविष्य की आवश्यकताओं को पूरा करेगी। देश में नए स्पोर्ट्स कल्चर की शुरुआत हुई है। मोदी सरकार ने अयोध्या में राम मंदिर की 500 साल पुरानी समस्या को न्यायिक प्रक्रिया के माध्यम से सुलझाया है, तो वहीं बुद्धा सर्किट, महाकाल महालोक, सोमनाथ, करतारपुर साहिब कॉरिडोर, केदारनाथ धाम आदि के विकास से देश के धार्मिक, सांस्कृतिक वैभव को नई ऊंचाइयां दी हैं। एक देश में दो निशान-दो विधान की बिडंबना से मुक्ति के लिए मोदी सरकार ने कश्मीर से धारा 370 को समाप्त किया। रक्षा उत्पादन में देश आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ रहा है। देश की जैव विविधता को समृद्ध करने के लिए प्रोजेक्ट चीता की शुरुआत की गई है। भारत जी-20 के अध्यक्ष के रूप में उन देशों का नेतृत्व कर रहा है, जिन देशों में वैश्विक अर्थव्यवस्था की 75 प्रतिशत हिस्सेदारी है। श्री यादव ने कहा कि बीते 9 सालों में मोदी सरकार ने अविस्मरणीय काम किए हैं और सरकार की घरेलू नीतियों की वजह से सारी दुनिया में देश की साख तथा भारत और प्रधानमंत्री मोदी जी का मान-सम्मान बढ़ा है।

    मुख्यमंत्री श्री शिवराजसिंह चौहान ने कार्यक्रम में संबोधित करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी सदैव देश के विकास, गरीब कल्याण, प्रकृति और पर्यावरण को लेकर सोचते हैं। 9 साल में प्रधानमंत्री जी ने देश को बदल दिया है, आज हर भारतवासी आत्म विश्वास और गौरव से भरा हुआ है। पूरी दुनिया में भारत की जय-जय हो रही है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के मार्गदर्शन में मध्यप्रदेश में 5 करोड़ 18 लाख से अधिक हितग्राहियों को निःशुल्क खाद्यान्न वितरित किया गया है। 4 करोड 1 लाख से अधिक नागरिकों को जन धन खाते खोले गए है। गांव में हर घर में नल से पानी लाने का अभियान शुरू किया है, जिसके अंतर्गत 57 लाख घरों में नल कनेक्शन एवं 38 लाख से अधिक पीएम आवास ग्रामीण क्षेत्र में और 7 लाख आवास शहरी क्षेत्रों में दिये जा चुके हैं। अटल पेंशन योजना से 30 लाख 21 हजार लोग लाभान्वित हुए है। वहीं मुख्यमंत्री जीवन ज्योति योजना के अंतर्गत 81 लाख 75 हजार लोगों को बीमा की सुविधा मिली है। मुद्रा योजना के अंतर्गत 95 लाख 47 हजार हितग्राहियों को 34 हजार करोड से अधिक के ऋण दिए गए हैं। श्री चौहान ने इंफ्रास्ट्रक्चर के मामले में प्रदेश में हुए विकास की जानकारी देते हुए कहा कि 2009 से 2014 के बीच रेलवे के बजट का आवंटन 632 करोड रूपए था, जो 2021-22 में बढकर 7700 करोड और 2023-24 में बढकर 13607 करोड रूपए हो गया है। वहीं, 2005-06 से लेकर 2013-14 तक 9 वर्षों में सड़कों के निर्माण के लिए प्रदेश को केवल 662 करोड रूपए स्वीकृत किए गए थे। वहीं,  इसके बाद 2022-23 तक 9 वर्षों में 52613 करोड रूपए सड़क निर्माण के लिए स्वीकृत किए गए हैं। 4906 कि.मी. राष्ट्रीय राजमार्ग सड़कों का निर्माण किया जा चुका है। मुख्यंमत्री ने कहा कि मध्यप्रदेश सिंचाई के मामले में 45 लाख हेक्टेयर तक पहुंचा है तो इसके पीछे प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी का भरपूर सहयोग है। 44500 करोड से अधिक की केन बेतवा लिंक परियोजना स्वीकृत प्रधानमंत्री जी ने बुन्देलखण्ड के तस्वीर और वहां की जनता की तकदीर बदलने का काम किया है। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में एक वैभवशाली, गौरवशाली और संपन्न भारत का निर्माण हो रहा है, आज भारत विश्वगुरु बनने की ओर तेजी से अग्रसर है। सुरक्षित भारत और आत्मविश्वास से भरा भारत आज दुनिया को दिशा दिखा रहा है।

    भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष व सांसद श्री विष्णुदत्त शर्मा ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व में केन्द्र सरकार के 9 वर्ष सेवा, सुशासन और गरीब कल्याण को समर्पित हैं। श्री मोदी जी के नेतृत्व में भारतीय जनता पार्टी के कार्यकर्ता आज भारत के कोने कोने में गुड गर्वेनेंस को जमीन पर उतारने का काम कर रहे है। श्री शर्मा ने कहा कि कांग्रेस के जमाने में कहा जाता था कि केन्द्र सरकार से 1 रुपए भेजा जाता था तो 85 पैसे भ्रष्टाचार में चला जाता था, 15 पैसे ही जनता तक पहुँचते थे। लेकिन प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी ने भ्रष्टाचार की परंपरा का अंत कर देश को पारदर्शी व्यवस्था दी है। आज केन्द्र सरकार एक रूपया अगर गरीब के लिए पहुंचाती है तो पूरा 1 रूपया गरीब के खाते में पहुंचता है। उन्होंने कहा कि देश के विकास के संकल्प के साथ प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के कुशल नेतृत्व में देश आगे बढ रहा है। हर गरीब के जीवन को बदलने का कार्य विगत 9 वर्षों में हुआ है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में पूरी दुनिया में भारत का मान सम्मान बढ़ा है और भारत के नेतृत्व के प्रति एक विश्वास जागृत हुआ है। यह सब मोदीजी के कारण संभव हुआ है। उन्होंने कहा कि मोदी जी के विकास कार्यो और निर्णयों को 140 करोड जनता अनुभव करती है और आज मोदी जी हर नागरिक के दिल में अलग स्थान बनाए हुए हैं।

  • स्ट्रीट वेंडर्स से अब रोज वसूली नहीं होगी

    स्ट्रीट वेंडर्स से अब रोज वसूली नहीं होगी

    भोपाल, 29 मई( प्रेस इंफार्मेशन सेंटर) मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि मध्यप्रदेश में कहीं भी किसी भी नगर में स्ट्रीट वेंडर्स से रोज शुल्क वसूली नहीं होगी, यह तत्काल बंद की जाएगी। स्ट्रीट वेंडर्स के रजिस्ट्रेशन के लिए नाममात्र का शुल्क लिया जाएगा। आपकी जिंदगी को आसान बनाने के लिए कोई कमी नहीं छोड़ी जाएगी। हाथठेला लगाने के लिए व्यवस्थित और उपयुक्त स्थान तैयार किए जाएंगे। गरीबों की जिंदगी में खुशियाँ लाने का प्रयास हमेशा जारी रहेगा। हाथ ठेला रोजी-रोटी का साधन है। आज मैं तत्काल प्रभाव से निर्देश दे रहा हूँ कि कोई भी हाथ ठेला जब्त नहीं होगा। इसके लिए नगरीय प्रशासन विभाग द्वारा नियम बना दिए जाएँ। जिनके पास हाथ ठेला नहीं है उनको सब्सिडी पर हाथ ठेला देने की योजना बनाई जाएगी। इसके लिए सरकार 5 हजार रूपए सब्सिडी देगी। गरीबों की तकलीफों को दूर करना शिवराज का धर्म है। मुख्यमंत्री श्री चौहान, मुख्यमंत्री निवास पर नगरीय क्षेत्र के हाथ ठेला चालक, फेरी एवं रेहड़ी वालों की महापंचायत को संबोधित कर रहे थे।

    मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा है कि स्ट्रीट वेंडर्स मेहनतकश भाई-बहन हैं। अपना खून-पसीना एक कर रोजी-रोटी कमाते हैं। आप श्रम साधक हैं, आपके बिना दुनिया नहीं चल सकती है। आप घर-घर पहुँच कर लोगों को सामान की बिक्री करते हैं। जरूरत की हर छोटी-बड़ी चीज आसानी से लोगों तक पहुँचाते हैं।

    मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि गाँव से शहर में आने वाले गरीबों के रहने की व्यवस्था की जाएगी। माफिया से छुड़ाई गई 23 हजार एकड़ जमीन पर गरीबों को पट्टा दिया जाएगा। जनता की तकलीफों को दूर करना सरकार का धर्म है। मुख्यमंत्री लाड़ली बहना योजना में 1000 रूपए हर महीना बहनों के खाते में डाले जायेंगे। संबल योजना का लाभ मिलता रहेगा। इस योजना में महिलाओं के पोषण, बच्चों की पढ़ाई, इलाज, शादी, दुर्घटना में मृत्यु पर सहायता की व्यवस्था की गई है। सभी पात्रों को योजना में शामिल कर लाभान्वित किया जाएगा। उन्होंने कहा कि बिना किसी भेदभाव के योजनाओं का लाभ मिलेगा। बारहवीं पास बच्चों को अलग-अलग संस्थाओं में काम सीखने के लिए भेजने की व्यवस्था की जाएगी। उनको काम सीखने के दौरान प्रतिमाह 8 हजार रूपए भी दिए जायेंगे। मैं आपके परिवार का सदस्य की तरह हूँ । इसलिए आपको योजनाओं का लाभ देने के लिए पंचायत बुलाई गई है। सामाजिक क्रांति लाकर स्ट्रीट विक्रेताओं की हालत को बदल दिया जाएगा। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि कमजोर नहीं ताकतवर बनें। इसके लिये जरूरी है कि संगठित होकर काम करें। अपना एक संगठन बनायें। हाथठेला में कचरा पेटी रखें और सोलर बेट्री लगायें। शराब नहीं पियें।

    मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कन्या-पूजन और दीप प्रज्ज्वलित कर महापंचायत का शुभारंभ किया। उन्होंने पुष्प-वर्षा कर स्ट्रीट वेंडर्स का स्वागत किया। स्ट्रीट वेंडर्स की ओर से मुख्यमंत्री श्री चौहान को तुलसी का पौधा भेंट किया गया। लाड़ली बहना योजना की पात्र बहनों ने धन्यवाद-पत्र भेंट किया। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने पीएम स्व-निधि योजना में प्रतीकस्वरूप हितग्राहियों को लाभान्वित किया। प्रदेश में योजना से कुल 51 हजार हितग्राही लाभान्वित किए गए हैं।

    नगरीय विकास एवं आवास मंत्री भूपेन्द्र सिंह ने कहा कि हाथठेला-चालक और पथ-विक्रेताओं के लिये शहरों में हॉकर्स जोन बनाये जाना चाहिये। उन्हें शासन की सभी जन-कल्याणकारी योजनाओं का लाभ मिले। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कोरोना काल में लगातार पथ-विक्रेताओं की चिंता की। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने पीएम स्व-निधि योजना लागू कर कोरोना काल में पथ-विक्रेताओं को बहुत बड़ी राहत दी। इस योजना में मध्यप्रदेश देश में नम्बर-1 है। योजना में 9 लाख 50 हजार रजिस्ट्रेशन हुए हैं। इनमें से 7 लाख एक हजार पथ-विक्रेताओं को योजना का लाभ दिया जा रहा है। आज पूरे प्रदेश में 51 हजार पथ-विक्रेताओं को ऋण स्वीकृति-पत्र वितरित किये जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री के निर्देशानुसार स्टॉम्प शुल्क 2500 के स्थान पर मात्र 50 रूपये लिया जा रहा है।

    नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग के आयुक्त भरत यादव ने योजना के उद्देश्यों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि हितग्राहियों को 10 हजार, 20 हजार और 50 हजार रूपये का ब्याजमुक्त ऋण दिया जाता है। पथ-विक्रेताओं से उनकी समस्याओं की भी जानकारी ली जा रही है। नगरपालिक निगम भोपाल की महापौर श्रीमती मालती राय ने आभार माना। विधायक रामेश्वर शर्मा और श्रीमती कृष्णा गौर, प्रमुख सचिव नगरीय विकास एवं आवास नीरज मण्डलोई और बड़ी संख्या में पथ-विक्रेता और रेहड़ी वाले उपस्थित थे।

  • दमोह में बिजली सुधारों के लिए 95 करोड़ मंजूर

    दमोह में बिजली सुधारों के लिए 95 करोड़ मंजूर

    भोपाल,28 मई( प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)। ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर ने कहा है कि दमोह जिले की विद्युत अधो-संरचना को सुदृढ़ करने एवं विद्युत हानियों को कम करने के उद्देश्य से 95 करोड़ रूपये स्वीकृत किये गए हैं। इसमें से केन्द्र सरकार द्वारा रिवेम्पड डिस्ट्रीब्यूशन सेक्टर स्कीम के प्रथम चरण में 49 करोड़ रूपये और राज्य सरकार द्वारा 46 करोड़ रूपये स्वीकृत किये गए हैं।

    स्वीकृत कार्यों में 220/132 के.व्ही. अति उच्च दाब पॉवर ट्रांसफार्मर की क्षमता वृद्धि, 220/132 के.व्ही. अतिरिक्त अति उच्च दाब पॉवर ट्रांसफार्मर स्थापना, 2 नवीन 33/11 के.व्ही. उप केंद्र निर्माण, वोल्टेज व्यवस्था में सुधार के लिए 28 स्थान पर कैपेसिटर बैंक स्थापना, 48 उच्च दाब फीडरों का विभक्तिकरण कार्य, 975 वितरण ट्रांसफार्मर स्थापना, 3308 किलोमीटर निम्न दाब लाइनों का केबलिंग कार्य, 396 उच्च दाब फीडरों का विभक्तिकरण और कंडक्टर क्षमता वृद्धि के कार्य शामिल हैं। इससे दमोह जिले की लगभग 13 लाख की जनसंख्या लाभान्वित होगी। साथ ही आगामी 10 वर्षों की विद्युत माँग की सफलतापूर्वक पूर्ति हो सकेगी।

  • मोदी के नौ सालों में भारत का अभ्युदय

    मोदी के नौ सालों में भारत का अभ्युदय

    भोपाल 28 मई( प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में केन्द्र सरकार के 9 वर्ष सेवा, सुशासन और गरीब कल्याण को समर्पित है। इन 9 वर्षों में गरीबों के जीवन स्तर में सुधार आया है तो वहीं सांस्कृतिक वैभव का अभ्युदय हुआ है। 9 वर्षों में देश ने हर मोर्चे पर सफलताएं अर्जित की है। भारतीय जनता पार्टी ने 30 मई से 30 जून के बीच विशेष जनसंपर्क अभियान के माध्यम से मोदी सरकार की योजनाओं और उपलब्धियों को जन जन तक पहुंचाने का कार्यक्रम तय किया है। इस अभियान के दौरान प्रदेश में हर बूथ तक केन्द्र और राज्य सरकार की उपलब्धियां पहुंचे, इसकी जिम्मेदारी प्रत्येक कार्यकर्ता की है। हर मोर्चा विस्तृत कार्ययोजना के आधार पर विशेष जनसंपर्क अभियान को सफल बनाने में जुटें। यह बात भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय सह संगठन महामंत्री श्री शिवप्रकाश जी, प्रदेश प्रभारी श्री मुरलीधर राव, पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष व सांसद श्री विष्णुदत्त शर्मा एवं प्रदेश संगठन महामंत्री श्री हितानंद जी ने शनिवार को प्रदेश कार्यालय में किसान मोर्चा, युवा मोर्चा, अनुसूचित जाति मोर्चा एवं अनुसूचित जनजाति मोर्चा की संयुक्त बैठक को संबोधित करते हुए कही।
    पार्टी के राष्ट्रीय सह संगठन महामंत्री शिवप्रकाश ने बैठक को संबोधित करते हुए कहा कि मोदी सरकार की योजनाएं हर वर्ग के लिए है। समाज का ऐसा कोई वर्ग अछूता नहीं है जो गरीब कल्याण की योजनाओें से लाभान्वित न हुआ हो। उन्होंने कहा कि पिछले 9 वर्षों में ढांचागत विकास में अमूलचूल परिवर्तन आया है। 2014 से पहले देश में नक्सलवाद, माओवाद और आतंकवाद की घटना आम बात थी। 2014 के बाद देश की आतंरिक सुरक्षा मजबूत हुई है और देश की सीमाएं भी सुरक्षित हुई है। सर्जिकल स्ट्राइक और एयर स्ट्राइक इसके उदाहरण है। देश के सीमावर्ती गांवों तक आज सड़कें बन चुकी है। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार में देश आर्थिक उन्नति की ओर अग्रसर हुआ है। आज भारत दुनिया की पांचवी अर्थव्यवस्था बन चुका है। आने वाले वर्षों में भारत तीसरे स्थान पर पहुंचेगा। श्री शिवप्रकाश जी ने कहा कि मोदी सरकार के 9 वर्ष देश में क्रांतिकारी और अभूतपूर्व निर्णयों के लिए जाने जाते है। मोदी सरकार ने वीआईपी कल्चर पर प्रहार किया है। उन्होंने कहा कि महाकाल लोक, काशी विश्वनाथ कॉरीडोर और राम मंदिर के निर्माण जैसे अनेक निर्णय यह दर्शाते है कि मोदी सरकार में सांस्कृतिक मूल्य स्थापित हुए है और विश्व में भारत का मान सम्मान बढा है। उन्होंने कहा कि सम्राट हर्षवर्धन और उसके बाद चन्द्रगुप्त विक्रमादित्य और अहिल्याबाई के शासनकाल में धर्म प्रधान शासन था। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी को भी लोग इसी के लिए जानेंगे।
    प्रदेश प्रभारी श्री मुरलीधर राव ने बैठक को संबोधित करते हुए कहा कि कांग्रेस के डीएनए में हिन्दू विरोधी भावनाएं है। जो देश की सर्वमान्य परंपराएं है उन्हें भी कांग्रेस नहीं मानती है। सेंगोल देश के राजधर्म का प्रतीक है। उसका अपमान कर कांग्रेस ने जनता की भावनाओं को ठेस पहुंचायी है। उन्होंने कहा कि राम को न मानने वाली कांग्रेस ने राम मंदिर निर्माण में भी रूकावटें डालने की कोशिश की लेकिन वह सफल नहीं हो पायी। कांग्रेस ने हमेशा हिन्दूओं को अपमानित करने का काम किया है। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार के 9 वर्ष पूरे होने पर कार्यकर्ता सरकार की उपलब्धियों और योजनाओं को लेकर जनता के बीच जायेंगे तो साथ ही कांग्रेस की भारत की अस्मिता विरोधी मानसिकता को भी जनता के समक्ष रखें और उन्हें बताएं कि कांग्रेस हमेशा देश की अवमानना करती आयी है। उन्होंने कहा कि विशेष जनसंपर्क अभियान में पार्टी द्वारा तय कार्यक्रमों के साथ ही हर मोर्चा विधानसभा स्तर पर प्रभावी सम्मेलन आयोजित करें।
    पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष व सांसद श्री विष्णुदत्त शर्मा ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी 9 वर्ष का कार्यकाल अभूतपूर्व है। मोदी सरकार के 9 वर्ष पूर्ण होने पर भारतीय जनता पार्टी सरकार के कामों को विशेष जनसंपर्क अभियान के माध्यम से हर बूथ और हर घर तक पहुंचाने का काम करेगी। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश में मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान ने विकास के नए आयाम स्थापित किए है। 30 मई से 30 जून के बीच चलने वाले अभियान में अलग अलग कार्यक्रम होंगे। 20 से 30 जून के बीच बूथ स्तर तक घर घर संपर्क अभियान चलेगा। उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार की योजनाएं सर्वहारा वर्ग की योजनाएं है। इनके माध्यम से कार्यकर्ता हर समाज वर्ग को पार्टी से जोडने का काम करें। श्री शर्मा ने कहा कि प्रदेश सरकार ने पेसा एक्ट लागू कर अनुसूचित जनजाति वर्ग को अधिकार संपन्न बनाया और गौरव दिवस मनाकर उन्हें गौरवान्वित किया है। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी ने आदिवासी बहन को राष्ट्रपति बनाकर आदिवासी समाज का सम्मान किया है। यह सब बातें हमें नीचे तक ले जाने की आवश्यकता है। श्री शर्मा ने कहा कि मध्यप्रदेश में 30 लाख नवमतदाता है इन्हें अभियान के दौरान युवा मोर्चा पार्टी की विचारधारा से जोडे और नवमतदाताओं को यह बताएं कि कांग्रेस उन्हें गुमराह करने की कोशिश कर रही है।
    श्री शर्मा ने कहा कि देश और प्रदेश में कांग्रेस मुद्दाविहीन है। कांग्रेस भ्रम का वातावरण फैला रही है। कांग्रेस के इस भ्रम का जवाब भारतीय जनता पार्टी सरकार द्वारा किया गया विकास, गुड गर्वेंनेंस और गरीब कल्याण की योजनाएं है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस चुनाव के पहले हर राज्य में बडे बडे वादे करती है, लेकिन चुनाव के बाद जनता के साथ वादाखिलाफी करती है। कांग्रेस ने राजस्थान, कर्नाटक में जनता से बडे बडे वादे किए लेकिन सत्ता हासिल करते ही उन वादों को पूरा करने में पीछे हट गयी। आज वहां की जनता खुद को ठगा महसूस कर रही है। मध्यप्रदेश में भी कांग्रेस ऐसे ही चुनावी वादे कर जनता को भ्रमित कर रही है, भारतीय जनता पार्टी के कार्यकर्ता मैदान में उतरकर सरकार के विकास कार्यों से उन्हें करारा जवाब दें।
    बैठक के दौरान अनुसूचित जाति मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष लाल सिंह आर्य, किसान मोर्चा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बंशीलाल गुर्जर, किसान मोर्चा प्रदेश प्रभारी डॉ. अनिल बोंडे, अशोक नेते, प्रदेश सरकार के मंत्री जगदीश देवडा, डॉ. प्रभुराम चौधरी, प्रदेश महामंत्री सुश्री कविता पाटीदार, युवा मोर्चा के राष्ट्रीय महामंत्री व प्रदेश प्रभारी रोहित चहल, युवा आयोग अध्यक्ष डॉ. निशांत खरे, बैतूल सांसद दुर्गादास उइके, पार्टी की प्रदेश उपाध्यक्ष व सांसद श्रीमती संध्या राय, अजा मोर्चा प्रदेश अध्यक्ष डॉ. कैलाश जाटव, अजजा मोर्चा प्रदेश अध्यक्ष कल सिंह भांबर, युवा मोर्चा प्रदेश अध्यक्ष वैभव पंवार, किसान मोर्चा प्रदेश अध्यक्ष दर्शन सिंह चौधरी मंचासीन थे। बैठक का संचालन अजजा मोर्चा के राष्ट्रीय महामंत्री व सांसद गजेन्द्रसिंह पटेल ने किया।

  • बीना रिफायनरी से ज्यादा धंधा कर रही रिलायंस

    बीना रिफायनरी से ज्यादा धंधा कर रही रिलायंस

    भोपाल,26 मई(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)। भारत की सरकारी तेल रिफायनरियां नियमों से बंधे होने की वजह से बाजार की रपटीली राहों पर फिसड्डी साबित हो रहीं हैं।इसकी तुलना में निजी रिफायनरीज ज्यादा अच्छा धंधा कर रहीं हैं। मसलन भारत पेट्रोलियम या इंडियन ऑइल, कच्चे तेल से बने उत्पाद – माने पेट्रोल-डीज़ल निर्यात नहीं कर सकते. वहीं, निजी रिफाइनरीज़ पर ऐसा कोई प्रतिबंध नहीं है. उन्हें बस 65 हज़ार पेट्रोल पंप्स में से 10 हज़ार में तेल की सप्लाई देने की बाध्यता है. उसके बाद वो चाहे जहां तेल बेच सकती हैं. रूस-यूक्रेन जंग से पहले, रिलायंस और नायरा जैसी निजी रिफाइनरियों को इंटरनैशनल मार्केट से कच्चा तेल ख़रीदना पड़ता था, जो कि रूसी तेल की तुलना में काफी महंगा था. अब ये दोनों रिफाइनरियां रियायती दरों पर रूस से तेल आयात करती हैं. और विदेश में माल बेचकर भयानक मुनाफ़ा कमाती हैं.

    नायरा गुजरात में स्थित है, लेकिन अप्रत्यक्ष रूप से कंपनी का स्वामित्व, प्रमुख रूसी तेल कंपनी रॉसनेफ्ट के पास है. रॉसनेफ्ट ने 2017 में रुइया समूह से एस्सार रिफाइनरी को क़रीब 105 करोड़ रुपए में ख़रीद लिया था. विशेषज्ञ इस बात को भी रेखांकित करते हैं कि रिलायंस का पहले से ही रूसी कंपनियों से अच्छा संपर्क है.

    बीना रिफायनरीज के एक प्रमुख सूत्र ने बताया कि भारत सरकार रूस पर लगे अंतर्राष्ट्रीय प्रतिबंधों की वजह से न तो उसका तेल खरीद की अनुमति दे सकती है न ही वह खुद रशिया से कोई कारोबार कर सकती है। जबकि निजी कंपनियों के सामने ऐसी कोई बाध्यता नहीं है। भारत की निजी कंपनियों ने जिस तरह विदेशी परिवहन के क्षेत्र में अपने कदम बढ़ाए हैं उससे भारतीय कंपनियों का विदेशी कारोबार तेजी से बढ़ा है। यही वजह है कि चाहे रिलायंस हो या नायरा दोनों के कारोबार में भारत सरकार कोई दखल नहीं दे सकती है। यही नहीं उसे इन कंंपनियों के कारोबार को सफल बनाने के लिए सुरक्षा के प्रबंध भी करने हैं। यही वजह है कि मुक्त बाजार की अर्थव्यवस्था का ये मसला आज वैश्विक प्रतिबंधों पर भारी पड़ रहा है।

  • मोदी का नेतृत्व पसंद करते हैं विश्व के नेतागण

    मोदी का नेतृत्व पसंद करते हैं विश्व के नेतागण

    भोपाल, 25 मई(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा है कि हमारे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को विश्व के अनेक देशों में सम्मान मिला है। इससे भारतवासी गर्वित, आनंदित और सम्मानित महसूस कर रहे हैं। प्रधानमंत्री मोदी अभिनन्दन के पात्र हैं। मुख्यमंत्री चौहान ने कहा कि हाल ही में प्रधानमंत्री जी को पापुआ न्यू गिनी और फिजी ने अपने सर्वोच्च सम्मान से सम्मानित किया है। इन देशों के राष्ट्र प्रमुख कहते हैं कि भारत हमारी आवाज बन कर उभर रहा है। हमारे प्रधानमंत्री जब पापुआ न्यू गिनी पहुँचे तो वहाँ के प्रधानमंत्री ने मोदी जी के चरण स्पर्श किए। यह अभूतपूर्व और ऐतिहासिक है। यह प्रधानमंत्री श्री मोदी की सेवाओं का ही परिणाम है। उन्होंने दुनिया की भी चिंता की है। श्री मोदी को केवल इन दो देशों ने ही अपना सर्वोच्च सम्मान नहीं दिया बल्कि सबसे पहले अफगानिस्तान ने अपना सर्वोच्च सम्मान उन्हें दिया था। इसके अलावा फिलीस्तीन, यूएई और रूस ने भी मोदी जी को अपने देश के सर्वोच्च सम्मान से सम्मानित किया है।

    मुख्यमंत्री श्री चौहान ने डिंडोरी में कहा कि अनेक राष्ट्र, भारत से मार्गदर्शन की अपेक्षा करते हैं। प्रधानमंत्री श्री मोदी कल 6 दिवसीय विदेश यात्रा से लौटे, उन्होंने लगभग 20 राष्ट्राध्यक्षों से भेंट की और 40 से अधिक बैठकों में शामिल हुए। वे निरंतर घंटों कार्य करते हैं।

    सम्मानों की रही है लंबी श्रंखला

    मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि प्रधानमंत्री जी का सम्मान अद्भुत है और गर्व का विषय है। उनको पूर्व में अनेक देशों ने सम्मान दिए हैं। जहाँ अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडेन ने कहा कि मोदी जी आप बहुत लोकप्रिय हैं, मुझे आपके आटोग्राफ चाहिए, वहीं आस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री श्री एंथनी एल्बनीज ने मोदी जी के लिए कहा “मोदी इज द बॉस”। यहीं नहीं इसके पूर्व मालद्वीप और बहरीन द्वारा भी प्रधानमंत्री जी को सम्मानित किया गया है। अमेरिका ने अपना सर्वोच्च सैन्य सम्मान श्री मोदी को दिया। सऊदी अरब ने भी उनको सर्वोच्च सम्मान से सम्मानित किया। साथ ही दक्षिण कोरिया ने भी सम्मानित किया। पर्यावरण के क्षेत्र में काम करने के लिए संयुक्त राष्ट्र संघ ने “चेंपियन्स ऑफ द अर्थ अवार्ड से मोदी जी को नवाजा। प्रधानमंत्री श्री मोदी को फिलिप कोर्टल प्रेसिडेंशियल अवार्ड से भी सम्मानित किया गया। स्वच्छ भारत अभियान के लिए बिल एंड मेलिंडा गेट्स फाउंडेशन अवार्ड से सम्मानित किया गया। वर्ष 2019 में ग्लोबल गोल्ड कीपर अवार्ड से नवाजा गया। विश्व ऊर्जा और पर्यावरण के क्षेत्र बेहतर काम करने के लिए मोदी जी को इसी साल केम्ब्रिज रिसर्च एसोसिएट्स का ग्लोबल एनर्जी एंड एनवायरमेंट लीडरशिप अवार्ड दिया गया। यह सभी सम्मान अकेले प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी का सम्मान नही है बल्कि सभी 140 करोड़ भारतवासियों का सम्मान है।

  • उपहारों की खैरात रोकने का भी कानून बने

    उपहारों की खैरात रोकने का भी कानून बने

    -अजय व्यास-

    राजनीतिक दलों द्वारा प्रदान किए जाने वाले मुफ्त उपहारों को रोकने या विनियमित करने के लिए कानूनों का अधिनियमन एक संभावना है, लेकिन यह कानूनी ढांचे, राजनीतिक अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और एक लोकतांत्रिक समाज में सरकार की भूमिका के बारे में महत्वपूर्ण विचार करता है।

    कानूनी ढांचा और संवैधानिकता: राजनीतिक दलों द्वारा मुफ्त उपहारों को प्रतिबंधित या प्रतिबंधित करने के उद्देश्य से किसी भी कानून को देश के संवैधानिक प्रावधानों का पालन करने की आवश्यकता होगी। यह सुनिश्चित करना आवश्यक है कि इस तरह के कानून मौलिक अधिकारों का उल्लंघन नहीं करते हैं, जिसमें संविधान द्वारा गारंटीकृत भाषण, संघ और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता शामिल है।

    परिभाषा और दायरा: कानून को स्पष्ट रूप से परिभाषित करने की आवश्यकता होगी कि फ्रीबी क्या है और इसकी प्रयोज्यता की सीमाएं निर्धारित करें। इससे अस्पष्टता से बचने और इसके कार्यान्वयन में निरंतरता सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी।

    प्रवर्तन और दंड: कानून को लागू करने के लिए प्रभावी तंत्र स्थापित करना और गैर-अनुपालन के लिए दंड लगाना महत्वपूर्ण होगा। इसके लिए उचित कार्यान्वयन सुनिश्चित करने के लिए पर्याप्त संसाधन, निगरानी प्रणाली और निष्पक्ष निरीक्षण की आवश्यकता होगी।

    जनता की भावना और राजनीतिक इच्छाशक्ति: इस तरह के कानून की व्यवहार्यता और स्वीकृति प्रचलित सार्वजनिक भावना और इस मुद्दे को हल करने की राजनीतिक इच्छाशक्ति पर निर्भर करेगी। यदि परिवर्तन के लिए अपर्याप्त सार्वजनिक मांग है तो राजनीतिक दल विरोध कर सकते हैं या कानून को दरकिनार करने के तरीके खोज सकते हैं।

    लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं पर प्रभाव: राजनीतिक दलों की मुफ्त उपहार देने की क्षमता को सीमित करना राजनीतिक अभियानों में राज्य के हस्तक्षेप की सीमाओं के बारे में सवाल उठाता है। संसाधनों के दुरुपयोग को रोकने और निष्पक्ष और प्रतिस्पर्धी चुनावी प्रक्रिया सुनिश्चित करने के बीच संतुलन बनाना महत्वपूर्ण है।

    केवल कानून पर निर्भर रहने के बजाय, राजनीतिक दलों द्वारा मुफ्त उपहारों के मुद्दे को संबोधित करने के लिए एक व्यापक दृष्टिकोण की आवश्यकता है। इसमें मुफ्त उपहारों के परिणामों के बारे में मतदाताओं के बीच जागरूकता बढ़ाना, जिम्मेदार शासन को प्रोत्साहित करना और अभियान के वित्तपोषण में पारदर्शिता को बढ़ावा देना शामिल है। इसमें जवाबदेही और नागरिक भागीदारी की संस्कृति को बढ़ावा देना भी शामिल है, जहां मतदाता अल्पकालिक लाभों के बजाय पार्टी की व्यापक दृष्टि और नीतियों के आधार पर सूचित विकल्प चुनते हैं।

    आखिरकार, मुफ्त उपहारों को विनियमित करने और लोकतांत्रिक सिद्धांतों को बनाए रखने के बीच सही संतुलन बनाना एक जटिल चुनौती है। यह सुनिश्चित करने के लिए कानूनी, संवैधानिक और सामाजिक कारकों पर सावधानीपूर्वक विचार करने की आवश्यकता है कि कोई भी उपाय प्रभावी, निष्पक्ष और लोकतंत्र के सिद्धांतों के अनुरूप हो।

    इस आलेख को श्री अजय व्यास , पूर्व कार्यपालक निदेशक, देना बेंक ने लिखा है।अजय का बेंकिग में महत्वपूर्ण पदों पर 35 साल का अनुभव है एवं वह राष्ट्रीय, सामाजिक समस्याओं पर सटीक, बेबाक बातचीत कर विचार रखते हैं।

  • केरल के मंदिरों में संघ की शाखा पर रोक

    केरल के मंदिरों में संघ की शाखा पर रोक

    नई दिल्ली ,23 मई(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)। त्रावणकोर देवस्वोम बोर्ड(टीडीबी) ने सर्कुलर जारी कर केरल में अपने अधीन आने वाले मंदिरों में आरएसएस के अलावा सभी राजनीतिक दलों के कार्यक्रमों पर रोक लगा दी है। टीडीबी ने सख्ती से उसके निर्देशों का पालन करने की बात कही है।
    दक्षिणी राज्य केरल में टीडीबी करीब 1200 मंदिरों का प्रबंधन देखता है। टीबीडी के सर्कुलर में कहा गया है कि उसके निर्देशों का सख्ती से सभी मंदिरों में पालन किया जाए और जो अधिकारी इसका पालन नहीं करेंगे, उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
    यह पहली बार नहीं है जब टीबीडी ने आरएसएस के खिलाफ ऐसे फैसले लिए हैं। इससे पहले 2016 में भी टीबीडी ने मंदिर परिसरों में आरएसएस द्वारा हथियारों के प्रशिक्षण पर प्रतिबंध लगा दिया था। साथ ही त्रावणकोर देवस्वोम बोर्ड ने इससे पहले 30 मार्च, 2021 को एक आदेश जारी किया था कि मंदिर परिसर का उपयोग मंदिर के अनुष्ठानों और त्योहारों के अलावा किसी अन्य उद्देश्य के लिए नहीं किया जाना चाहिए।

    त्रावणकोर देवास्वोम बोर्ड के अध्यक्ष के अनंतगोपन ने कहा, ‘आरएसएस की शाखाएं कई मंदिरों में चल रही थीं और वहां ड्रिल जारी था। यही वजह है कि ऐसा सर्कुलर जारी किया गया। मंदिर श्रद्धालुओं के लिए होते हैं, श्रद्धालुओं को कोई असुविधा नहीं होनी चाहिए। यही बोर्ड का स्टैंड है।’

    देवस्वोम बोर्ड के अधिकारियों ने कहा कि सिर्फ आरएसएस ही नहीं, किसी भी संगठन या राजनीतिक दलों को अन्य उद्देश्यों के लिए मंदिर परिसर का उपयोग करने की अनुमति नहीं दी जाएगी। बोर्ड के उपायुक्तों, सहायक आयुक्तों, प्रशासनिक अधिकारियों और उप-समूह अधिकारियों को इस तरह की गतिविधियों पर प्रतिबंध लगाने के लिए कदम उठाने और मुख्यालय को रिपोर्ट करने के लिए कहा गया है।

  • महारानी पद्मावती का जौहर सदा याद रहेगाःशिवराज

    महारानी पद्मावती का जौहर सदा याद रहेगाःशिवराज

    भोपाल,22 मई,(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने भोपाल की मनुआभान टेकरी पर महारानी पद्मावती की प्रतिमा का अनावरण किया। केंद्रीय कृषि एवं किसान-कल्याण मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर और महाराणा प्रताप के वंशज महाराज कुमार डॉ. लक्ष्यराज सिंह मेवाड़ साथ थे। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि भारतीय शौर्य एवं पराक्रम की प्रतीक महारानी पद्मावती की प्रतिमा स्थापना से एक संकल्प पूरा हुआ है। महारानी पद्मावती ने अपने स्वाभिमान और देश के गौरव की रक्षा के लिए स्वयं को अग्नि में समर्पित कर दिया। उनकी मूर्ति स्थापित करने के साथ ही इस स्थल को विकसित किया जा रहा है, जिससे युवा पीढ़ी महारानी के संघर्ष से प्रेरणा ले सकें और अपनी धर्म, संस्कृति और जीवन मूल्यों को न भूलें। महारानी पद्मावती की मूर्ति का प्रारूप श्री एल.एन. भावसार द्वारा तैयार किया गया और मूर्तिकार श्री प्रभात राय हैं।

    सहकारिता मंत्री श्री अरविंद सिंह भदौरिया, संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री सुश्री उषा ठाकुर, औद्योगिक नीति एवं निवेश प्रोत्साहन मंत्री श्री राजवर्धन सिंह दत्तीगांव, चिकित्सा शिक्षा मंत्री श्री विश्वास सारंग, पूर्व मंत्री श्री रामपाल सिंह, भोपाल महापौर श्रीमती मालती राय, विधायक श्री रामेश्वर शर्मा, पूर्व महापौर श्री आलोक शर्मा सहित जन-प्रतिनिधि और नागरिक उपस्थित थे।

  • सिख कत्लेआम के आरोपी कमलनाथ जेल जाएंगेःसारंग

    सिख कत्लेआम के आरोपी कमलनाथ जेल जाएंगेःसारंग

    भोपाल,21मई(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)। श्रीमती इंदिरा गांधी की हत्या के बाद 1984 के सिखों के कत्लेआम के आरोपी कमलनाथ को जल्दी ही सजा पड़ जाएगी। सीबीआई कोर्ट में दूसरे अभियुक्त जगदीश टाईटलर के खिलाफ आरोप पत्र प्रस्तुत हो चुका है। प्रदेश सरकार के चिकित्सा शिक्षा मंत्री विश्वास सांरग ने प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ को लेकर कांग्रेस नेतृत्व से सवाल किया है कि क्या, कांग्रेस सिख दंगों के आरोपी के नेतृत्व में मध्यप्रदेश विधानसभा के चुनाव लड़ेगी? यह बात भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश कार्यालय में रविवार को पत्रकार-वार्ता के दौरान कही।


    श्री सारंग ने पूरे घटनाक्रम का उल्लेख करते हुए कहा कि इस देश के इतिहास में 1984 का सिख कत्लेआम काले धब्बों में से एक है। तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के हत्या के बाद कांग्रेस के नेताओं ने सिख भाई बहनों का कत्लेआम किया था। हजारों भाई बहन उस कत्लेआम में प्रभावित हुए थे। सबसे दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति यह थी कि उस कत्लेआम में जिन्होंने भीड़ का नेतृत्व किया था वह कांग्रेस के नेता थे। विशेष रूप से दिल्ली में जो बड़े स्तर पर कत्लेआम किया गया था उसमें तीन कांग्रेस के नेताओं का हिस्सा लेना अलग अलग विषय पर सबूत के साथ जनता के सामने प्रस्तुत हुआ था। एक सज्जन कुमार दूसरे नं पर जगदीश टाईटलर और तीसरे कमलनाथ थे चौथे नेता इस दुनिया में नहीं हैं। यह तीन लोगों का नाम बहुत ही प्रमुखता से उस समय की घटनाओं में लिया गया था।

    नानावटी आयोग एवं जांच एजेंसी के कारण सज्जन जेल में, टाईटलर की बारी
    श्री सारंग ने कहा कि सन् 2000 के बाद इस पूरे विषय पर नानावटी आयोग ने जांच की और इसके बाद सीबीआई में यह मामला गया। परंतु वहीं दुर्भाग्य यह हुआ कि 2004 में कांग्रेस की सरकार आई और उसने इस मामले में लीपा-पोती कर दी और किसी दोषी पर कोई कार्यवाही नहीं हुई। 2014 के बाद इस पूरे मामले में जांच एजेंसियों ने काम किया और उसका परिणाम निकला कि सज्जन कुमार जेल में हैं और उन्हें उम्रकैद की सजा सुनाई गई है। कल भी सीबीआई कोर्ट ने इस पूरे मामले में जिस दूसरे कांग्रेस के बड़े नेता का नाम आता है जगदीश टाईटलर का, उनके खिलाफ भी जार्चशीट प्रस्तुत की है और वो भी जल्द ही जेल में होंगे। तीसरा नाम कमलनाथ है, निश्चित ही आने वाले समय में जो इस पूरे मामले में दोषी हैं, उनपर भी कार्यवाही होगी ऐसी उम्मीद है। जांच एजेंसी अपना काम कर रही हैं।

    गवाहों की किताब में कमलनाथ का जिक्र
    उन्होंने कहा की जो बातें में तथ्य के रूप में बोल रहा हॅू। यह केवल हमने नहीं बोला अलग-अलग स्तर पर इस पूरे मामले में जो चश्मदीद गवाह हैं, उन्होंने भी विभिन्न स्तरों पर अलग-अलग किताबों में इन दंगों को लेकर वास्तविकता का जिक्र किया है। श्री सारंग ने तत्कालीन क्राइम रिपोर्टर संजय सूरी की बात का जिक्र किया है कि उस दौरान वह गुरूद्वारा रकाबगंज में स्वयं उपस्थित थे। उस समय वहां 4-5 हजार की भीड़ का नेतृत्व कमलनाथ कर रहे थे और उन्होंने उस गुरूद्वारे में पानी की सेवा करने वालो को कमलनाथ के इशारे पर जिंदा जलाया गया था। इस बात का जिक्र एच.एस. फुल्का ने भी अपनी किताब में किया था।

    सिख समाज के विरोध के कारण कमलनाथ को पंजाब प्रभारी पद से हटाया
    कमलनाथ को लेकर सिख समाज में यह बात है कि उन्होंने इस समय सिख दंगों का नेतृत्व किया था। कमलनाथ को जब 2016 में पंजाब का प्रभारी बनाया गया था, तो इसी बात का विद्रोह पंजाब में हुआ था और कांग्रेस नेतृत्व को उन्हें तत्काल प्रभाव से प्रभारी के पद से हटाना पड़ा। उस समय यह बात स्थापित हुई थी कि यदि एक नेता सिख कत्लेआम का दोषी है तो फिर वह राजनीतिक क्षेत्र में काम कैसे कर सकता है। इसी तरह विगत दिनों इंदौर में एक बड़े कीर्तन करने वाले सिख संत मनप्रीत कनपुरिया जब इंदौर पहुंचे थे, तो उन्हांने भी इस चींज का विरोध किया था कि जो व्यक्ति सिख दंगों का दोषी है, वह सिख गुरूद्वारे में या सिख कीर्तन में, गुरू के प्रकाश पर्व में कैसे आ सकता है। यह सब बातें आज जनता के बीच में हैं, दो अभियुक्त जिनकों कांग्रेस सरकार ने 1984 से लेकर अभी तक बचाने का काम किया। चाहे वह सज्जन कुमार हों या जगदीश टाईटलर हों जांच एजेंसियों की तत्परता के कारण उनको सजा मिलना निश्चित हो चुका है। सज्जन कुमार जेल में हैं और और जगदीश टाईटलर को भी जल्दी जेल में जाना होगा, तीसरे अभियुक्त जो कि हर तरह से उनका नाम स्थापित हो चुका है कि वह सिख दंगों में शामिल थे, मैं कांग्रेस के नेतृत्व से यह पूछना चाहता हॅू कि जो सिख कत्लेआम का अभियुक्त है, जिन्होंने सिख कत्लेआम किया। क्या, उनके नेतृत्व में कांग्रेस मध्यप्रदेश विधानसभा का चुनाव लड़ेगी। कांग्रेस को इस बात का जवाब देना होगा कि जो व्यक्ति सिख कत्लेआम में स्वयं सामने खड़े होकर सिखों के कत्लेआम का दोशी है, जिसके दामन पर सिख दंगों के दाग हैं, क्या वह कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष होने के लायक हैं।

    सिख समाज की उम्मीद तीसरे दोषी कमलनाथ को भी मिले सजा
    श्री सारंग ने कहा कि सिख परिवार इस बात की अपेक्षा करते हैं कि तीसरे अभियुक्त कमलनाथ ने सिख दंगों के समय भीड़ का उकसाने का काम किया था, उन्हें भी सजा मिले। जब हम सार्वजनिक क्षेत्र या राजनीतिक क्षेत्र में काम करते हैं तो किसी भी राजनीतिक दल का यह दायित्व है कि उसके किसी नेता पर इस प्रकार के कत्लेआम के दाग हैं, तो तुरंत प्रभाव से उनपर कार्यवाही होनी चाहिए। अगर कांग्रेस नेतृत्व कमलनाथ को पद से नहीं हटाता है, तो इससे यह स्पष्ट होता है कि उस समय के सिख कत्लेआम में कांग्रेस नेतृत्व का पूरा आशीर्वाद था और उसको करने के पीछे कांग्रेस नेतृत्व की मंशा थी। संपूर्ण देश का सिख समाज और पीड़ित परिवार वह इस बात का इंतजार कर रहे हैं कि जल्द से जल्द कमलनाथ को भी इसकी सजा मिलेगी।

  • किसानों को अमीर बनाएंगे एफपीओः नरेन्द्र सिंह तोमर

    किसानों को अमीर बनाएंगे एफपीओः नरेन्द्र सिंह तोमर

    बालाघाट, 20 मई(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)। देश में कृषि के अधो-संरचनात्मक विकास पर निरंतर काम किया जा रहा है। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में किसानों को मुनाफे की खेती कर आत्म-निर्भर बनाने के लिये केन्द्र सरकार विभिन्न योजनाएँ संचालित कर रही है। केन्द्रीय कृषि एवं किसान-कल्याण मंत्री श्री नरेन्द्र सिंह तोमर ने यह बात विश्व मधुमक्खी दिवस पर बालाघाट में हुई राष्ट्रीय कार्यशाला में कही। प्रदेश के किसान-कल्याण एवं कृषि विकास मंत्री श्री कमल पटेल ने कहा कि किसानों के आर्थिक सशक्तिकरण के लिये सरकार तत्पर होकर कार्य कर रही है। विश्व मधुमक्खी दिवस पर मधु एक्स-पो का शुभारंभ किया गया। कार्यक्रम में आयुष एवं जल-संसाधन राज्य मंत्री श्री रामकिशोर ‘नानो’ कावरे, मध्यप्रदेश पिछड़ा वर्ग कल्याण आयोग के अध्यक्ष श्री गौरीशंकर बिसेन, छत्तीसगढ़ के पूर्व मंत्री एवं विधायक श्री बृजमोहन अग्रवाल सहित जन-प्रतिनिधि और अधिकारी उपस्थित थे।

    केन्द्रीय कृषि मंत्री श्री तोमर ने राष्ट्रीय कार्यशाला में कहा कि किसानों को आत्म-निर्भर बनाने के लिये केन्द्र और राज्य सरकार मिल कर निरंतर कार्य कर रही है। किसानों को आत्म-निर्भर बनाने के लिये उनके उत्पाद की ग्रेडिंग, प्रोसेसिंग और पैकेजिंग द्वारा अधिक से अधिक लाभान्वित करने को 10 हजार एफपीओ बनाये जा रहे हैं। एफपीओ पर केन्द्र सरकार 6 हजार 865 करोड़ रूपये व्यय कर रही है। केन्द्रीय मंत्री ने बालाघाट को विश्व मधुमक्खी दिवस पर राष्ट्रीय कार्यशाला के आयोजन के लिये बधाई दी।

    कृषि मंत्री श्री पटेल ने कहा कि प्रदेश सरकार किसानों के सशक्तिकरण के लिये निरंतर कार्य कर रही है। सरकार द्वारा ग्रीष्मकालीन मूंग, उड़द एवं सरसों की समर्थन मूल्य पर खरीदी के लिये पंजीयन कराया जा रहा है। इससे किसानों को सीधे लाभ मिलेगा। प्रदेश में सिंचाई क्षमता को बढ़ा कर 45 लाख हेक्टेयर से बढ़ा कर 65 लाख हेक्टेयर करने का लक्ष्य निर्धारित कर कार्य किया जा रहा है। किसानों के फसल बीमे की प्रीमियम राशि सरकार द्वारा भरी जा रही है।

    कृषि महाविद्यालय में भवन लोकार्पित

    केन्द्रीय मंत्री श्री तोमर, कृषि मंत्री श्री पटेल एवं अन्य अतिथियों ने बालाघाट के राजा भोज कृषि महाविद्यालय में 80 करोड़ रूपये की लागत से बने भवन, छात्रावास एवं ऑडिटोरियम हॉल का लोकार्पण किया।

    बैलजोड़ी दौड़ का हुआ आयोजन

    राजा भोज कृषि महाविद्यालय में बैलजोड़ी दौड़ प्रतियोगिता का आयोजन हुआ। इसमें देश की 170 से अधिक बैलजोड़ियों ने भाग लिया। प्रतियोगिता के प्रथम पुरस्कार विजेता को 47 हॉर्स पॉवर, द्वितीय पुरस्कार विजेता को 42 हॉर्स पॉवर और तृतीय पुरस्कार विजेता को 32 हॉर्स पॉवर का ट्रेक्टर प्रदान किया गया। इसके अतिरिक्त 22 विजेता को मोटर-साइकिल प्रदान की गई।

  • समृद्धि में सहायक हैं संग्रहालय बोले मनोज श्रीवास्तव

    समृद्धि में सहायक हैं संग्रहालय बोले मनोज श्रीवास्तव

    भोपाल,20 मई,(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर) मानव मन अपने गौरव के बिंदुओं का स्मरण करके खुद को मजबूत बनाता है। यही वजह है कि हमारी प्रेरणा के भावों से जुड़े संग्रहालय अर्थव्यवस्था को बूस्ट देने वाले इंजन बन जाते हैं। उज्जैन में महाकाल लोक,काशी में बाबा विश्वनाथ परिसर, गुजरात में सरदार वल्लभ भाई पटेल की विशाल प्रतिमा( स्टेच्यू आफ यूनिटी) आज सरकार के लिए रिकार्डतोड़ कमाई का साधन बन रहे हैं। भारत के संविधान ने संसद में पारित विषयों पर बने संग्रहालयों को आयकर में छूट दी है।इस नामुराद शर्त को हटाना होगा तभी देश की विरासत को संजोया जा सकता है। राजधानी में कवि दुष्यंत कुमार स्मारक पांडुलिपि संग्रहालय में आयोजित कमलेश्वर व्याख्यान माला के अंतर्गत- संग्रहालय, समाज और मीडिया- विषय पर आयोजित व्याख्यान में पूर्व संस्कृति सचिव मनोज श्रीवास्तव ने ये विचार व्यक्त किए । संस्कृति विभाग के सहयोग से आयोजित इस आयोजन की अध्यक्षता  प्रसिद्ध संस्कृति कर्मी वसंत निर्गुणे ने की। विशिष्ट अतिथि के रूप में पुरातत्व वेत्ता डॉ.मनोज कुमार  कुर्मी ने भी अपने विचार व्यक्त किए। संग्रहालय के अध्यक्ष श्री वामनकर ने विषय का प्रवर्तन किया और संचालन श्री घनश्याम मैथिल अमृत ने किया। संग्रहालय की सचिव सुश्री करुणा राजुरकर ने सभी आगंतुकों और सहयोगियों के प्रति अपना आभार प्रदर्शित किया।

    मुख्य अतिथि के रूप में अपने संबोधन में श्री मनोज श्रीवास्तव ने कहा कि भोपाल ऐसा महानगर है  जहां 21 से ज्यादा संग्रहालय मौजूद हैं। ये दर्शाता है कि भोपाल की सांस्कृतिक विरासत कितनी समृद्ध है। आमतौर पर हमारे सामाजिक परिवेश में अपनी सांस्कृतिक विरासत को संजोने का भाव देखने नहीं मिलता है। इसके बावजूद किसी एक साहित्यकार की स्मृतियां संजोने के लिए एक व्यक्ति ने दीवानगी की हद तक काम किया हो ऐसा देखने नहीं मिलता है। स्वर्गीय राजुरकर राज मेरे सहपाठी रहे हैं और उन्होंने कवि दुष्यंत कुमार के संग्रहालय को समाज में विशिष्ट पहचान दिलाई है। ये  काम हमारे विश्वविद्यालय ,कालेज या कई अन्य संस्थान भी कर सकते हैं। वे यदि किसी एक व्यक्तिव के कृतित्व को संग्रहालय के रूप में संरक्षित करना शुरु कर दें तो हम अपनी विरासत से जुडा समाज बना सकते हैं।

    विश्व के कई विश्वविदयालय और संस्थानों की ओर से चलाए जा रहे संग्रहालय पूरी दुनिया के ऊर्जावान लोगों की प्रेरणा के स्रोत बने हुए हैं। मिसिसिपी विश्वविद्यालय ने नोबेल और पुलित्जर पुरस्कार विजेता लेखक विलियम फॉकनर, का संग्रहालय बनाया है। राष्ट्रकवि रवीन्द्र नाथ टैगोर की स्मृति में बना म्यूजियम पूरे भारत तो क्या विश्व के लोगों के आकर्षण का केन्द्र है। ग्लास्गो विश्वविद्यालय का मार्गन संग्रहालय अपनी विविधताओं के साथ दुनिया में अनूठा है।

    उन्होंने कहा कि हमारे देश में साहित्यिक संग्रहालय न तो किसी धनपति ने बनाए न किसी संस्थान ने और सरकार ने तो कभी इस ओर गंभीरता से विचार भी नहीं किया। जो काम संस्थानों या सरकार को करना था वो अकेले राजुरकर ने कर दिखाया। जिसके पास संसाधन नहीं थे केवल समर्पण था। संग्रहालयों को लेकर हमारे स्कूल कालेजों में कोई पाठ्यक्रम भी नहीं पढ़ाया जाता है। प्रदेश में गिने चुने स्कूल कालेज हैं जो अपने विद्यार्थियों के लिए संग्रहालयों के आऊटरीच कार्यक्रम करवाते हैं। कई देशों में ये पाठ्यक्रम का हिस्सा हैं। जहां बच्चों को अपनी विरासत का संग्रह करना सिखाया जाता है। संग्रहालय में अनुसंधान होते हैं। डाक्यूमेंटेशन सिखाया जाता है। हमारे यहां तो संग्रहालय के शैक्षणिक नजरिए को भी नजरंदाज किया गया है।ऐसे में दुष्यंत संग्रहालय एक जीवंत प्रयोगशाला बन गया है।

    उन्होंने कहा कि श्री राजुरकर की बेटी विशाखा ने मुझसे पूछा कि भारत में कितने संग्रहालय सफलता पूर्वक चलाए जा रहे हैं। मैंने उसे बताया कि एक फैजावाद में सरोजिनी नायडू का है। इसी तरह कोट्टायम में रमन पिल्लई के कार्यों को संग्रहित किया गया है। हमारे यहां साहित्यकारों की स्थिति न तो जीवनकाल में अच्छी है न मरने के बाद उनके काम को सराहा जाता है। गीतकार साहिल लुधियानवी ने तो सार्वजनिक तौर पर कई बार इस पर दुख व्यक्त किया था।

    ऐसा समाज जहां कोई संग्रहालय नहीं बनाता वहां दुष्यंत संग्रहालय अपने आप में अनूठा है। क्या होशंगाबाद में भवानी प्रसाद मिश्र या बाबई में माखनलाल चतुर्वेदी,उज्जैन में श्रोत्रिय जी का संग्रहालय नहीं बनाया जाना चाहिए। नरेश मेहता से गजानंद माधव मुक्तिबोध जैसे साहित्यकार हमारे यहां हुए हैं उनके भी संग्रहालय नहीं है। राजुरकर राज का काम उल्लेखनीय तो है पर अभी वैसा नहीं है जैसा होना चाहिेए। ये साहित्यकारों का मंच तो बन गया है लेकिन अभी संग्रहालय नहीं बन पाया है। यहां दुष्यंत जी के जीवन वृत्त से संबंधित सारी चीजें होनी चाहिए। उनकी व्यक्तिगत उपयोग की वस्तुएं भी रखी जानी चाहिए। दुष्यंत जी की पुस्तकों और पांडुलिपियों का सेट बल्कि उन पर लिखी पुस्तकें और शोध भी रखे जाने चाहिए। उनकी रचना प्रक्रिया की कुछ व्यावहारिकताएं और वास्तविकताएं थीं उनका सूचनात्मक प्रस्तुतिकरण होना चाहिए। यह दूसरा भाग राजुरकर जी की बेटी विशाखा को पूरा करना है।

    उन्होंने कहा कि हमारे यहां संग्रहालय की संस्कृति नहीं है। आईसलेंड में तो नाव का संग्रहालय बना हुआ है। जिस नाव से दक्षिण अमेरिका से चलकर लोग आईसलेंड पहुंचे थे। उस नाव को संरक्षित किया गया है। वहां लोग जाते हैं और वहां की संस्कृति को आत्मसात करते हैं।

    कई शहरों में सिटी म्युजियम की परंपरा है । हर नगर का एक इतिहास है। रमेश शर्मा जी किताब लिख रहे हैं जो भारत के वैदिक इतिहास को बताएगी। उन सब चीजों को लेकर हमारी क्या तैयारी है। किस काल में जनजीवन कैसा था। किचिन कैसे थे घर कैसे थे। ये भी दर्शाया जाता है। विश्व के विकसित समाज अपनी उपलब्धियों का ही म्यूजियम नहीं बनाते वे अपनी लज्जा का भी म्यूजियम बनाते हैं। लिवरपूल में दास प्रथा का म्यूजियम बना है। जिसमें दासों के व्यापार को दर्शाया गया है। शेख्सपीयर का म्यूजियम सरकार की ओर से नहीं चलाया जाता। उसे मिला दान आयकर में छूट दिलाता है। यदि आप दान देंगे तो कर में छूट मिलेगी। मास्को में पुश्किन का म्यूजियम है उसे भी एक संस्थान चलाता है ।पुश्किन सरकार के समर्थक साहित्यकार माने जाते हैं लेकिन उनका संग्रहालय सरकार नहीं चलाती।  ये संग्रहालय कई पार्टनर, और सदस्य मिलकर चलाते हैं। मध्यप्रदेश में कालिदास संग्रहालय है। भोपाल के कुछ संग्रहालयों में स्टेट म्यूजियम, आदिवासी संग्रहालय, ओरछा में राम राजा म्यूजियम इस तरह के अच्छे प्रयास हैं। हमने वाणिज्यकर विभाग में रहते हुए डाक टिकिट का म्यूजियम बनाया था। हमें अपनी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को सहेजकर रखना आना चाहिए।

    हमारे देश में भारतीय पुरातत्व संग्रहालय विभाग ने लगभग 3800 स्थानों को संरक्षित किया है। जबकि ब्रिटेन छोटा सा देश है वहां बीस  हजार राष्ट्रीय संग्रहालय हैं। फ्रांस में चवालीस हजार संग्रहालय हैं। हमारे संविधान में संग्रहालय बनाने के लिए जो प्रावधान किए गए हैं उनमें इसे बनाना राज्य का कर्तव्य बताया गया है। लेकिन केवल उन्हीं संग्रहालयों को अनुमति दी जाती है जो संसद की निगाह में राष्ट्रीय महत्व के होते हैं हमारे देश के संविधान को ऐतिहासिक कहा जाता है पर उसमें राष्ट्रीय महत्व की शर्त रख दी गई है। जबकि दुनिया भर के सारे देशों में इनकी अनुमति देना राज्य का कर्तव्य होता है।इसमें संसद की घोषणा की क्या आवश्यकता है। कभी किसी ने ये कानून लिखा होगा पर हमने उस संस्कृति की बाधा को दूर नहीं किया।जब इस विषय पर चिंतन होगा तभी हमारे समाज में और मीडिया में कोई चेतना आएगी। मीडिया ही बहुत सारी चीजों को चलाता है। यदि मीडिया में डिबेट शुरु नहीं होगी तो हमारी संवेदना इन बातों को प्रस्तुत नहीं कर पाएगी।  

  • आसव और अरिष्ट से संवारें स्वास्थ्य

    आसव और अरिष्ट से संवारें स्वास्थ्य

    अर्जुनारिष्ट : शरीर में वायु अधिक होने से हृदय की धड़कन बढ़ना, पसीना अधिक आना, मुँह सूखना, नींद कम आना, दिल घबराना, फेफड़े के रोग तथा हृदय रोगों में लाभकारी।

    अभ्रयारिष्ट : सभी प्रकार के बवासीर की प्रसिद्ध दवा है। कब्जियत, मंदाग्नि आदि उदर रोगों को नष्ट कर अग्नि को बढ़ता है। पीलिया, तिल्ली, उदर रोग, झांई, अर्बुद, ग्रहणी तथा ज्वरनाशक है।

    अमृतारिष्ट : सब तरह के बुखार में लाभकारी। विषम ज्वर, जीर्ण ज्वर व पित्त ज्वर में विशेष लाभ करता है। बालकों के यकृत बढ़ने पर लाभकारी।

    अरविन्दासव : बालकों को सूखा रोग, अतिसार, दूध न पचना आदि रोगों को दूर कर उन्हें हृष्ट-पुष्ट, बलवान बनाता है। पाचन क्रिया ठीक होकर रक्त, मांस व बल वृद्धि होती है। बुद्धि वर्द्धक व रक्त शुद्धि कारक है।

    अशोकारिष्ट : स्त्रियों के सब प्रकार के रोग, प्रदर, (लाल, पीला, सफेद पानी), मासिक धर्म के विकार, सिर पेडू व कमर वगैरह के दर्द, पित्त दाह (हाथ व पाँव के तलवों की जलन), प्रमेह, अरुचि, उदरशूल आदि इसके सेवन से नष्ट होते हैं। शरीर की शक्ति व मुख की कांति बढ़ती है।

    अश्वगंधारिष्ट : दिमागी ताकत बढ़ाने और शरीर को पुष्ट करने में विशेष लाभकारी है। मूर्छा (बेहोशी), अकारण भय, दिल की घबराहट, चित्त भ्रम, अनिद्रा, याददाश्त की कमी, मंदाग्नि, बवासीर, कब्जियत, काम में चित्त न लगना, स्नायु दुर्बलता व कमजोरी दूर करता है, बुद्धि, बल-वीर्य बढ़ाता है।

    उशीरासव : समस्त पित्त विकारों में लाभदायक। रक्तपित्त, प्रमेह, बवासीर आदि में विशेष लाभकारी। पांडू रोग, कोढ़, सूजन आदि में लाभप्रद।

    कनकासव : नए- पुराने दमा (श्वास), खाँसी, कुकर खाँसी, क्षय रोग आदि में अत्यंत लाभकारी। पुराना बुखार, रक्तपित्त और उरुक्षत रोगों में लाभदायक।

    पुटजारिष्ट : खून के दस्त, संग्रहणी, खूनी बवासीर, आमांश, रक्तातिसार व जीर्ण ज्वर आदि रोगों में अत्यंत लाभदायक ।
    कुमारी असाव : सब प्रकार के उदर रोग, तिल्ली व जिगर बढ़ना, गुल्म (वायु गोला), भोजन के बाद पेट का दर्द आदि उदर रोग नष्ट होते हैं। भोजन ठीक से पचता है तथा अरुचि दूर होती है। श्वास, खाँसी, बवासीर, पीलिया, धातुक्षय, हृदय रोग, कब्जियत व वात व्याधि को नष्ट करता है। यकृत रोग में विशेष लाभकारी।

    कुमारी आसव (लौह युक्त) : ऊपर लिखे गुणों के अतिरिक्त पथरी, अपस्मार, प्रमेह व शूल रोग नष्ट करता है तथा खून बढ़ाता है। मूत्र कृच्छ, अपस्मार, कृमि रोग, शुक्रदोष आदि में लाभकारी है।

    खदिरादिष्ट : सब प्रकार के चर्म रोग (फोड़े-फुंसी, खुजली आदि) गण्डमाला एवं खून की तमाम खराबियों आदि में विशेष लाभकारी है।

    चन्दनासव : शुक्रमेह (सुजाक), प्रमेह, पेशाब की जलन, धातु का जाना, पथरी आदि मूत्र विकारों में अत्यंत लाभदायक। पित्त शामक, पुष्टिकारक व हृदय को ताकत देता है। बल- वीर्य वर्द्धक।

    जीरकाद्यरिष्ट : हाथ-पैरों की जलन, भूख कम लगना व उदर विकारों पर अतिसार, संग्रहणी व सूतिका रोगों पर लाभकारी।

    दशमूलारिष्ट : बल, वीर्य व तेज बढ़ाता है तथा बाजीकारक है। स्त्रियों के प्रसूत रोग, अरुचि, शूल सूतिका, संग्रहणी, मंदाग्नि, प्रदर रोग, श्वास, खांसी वात व्याधि, कमजोरी आदि रोगों की प्रसिद्ध दवा है। शरीर पुष्ट करता है। प्रसूता स्त्रियों तथा प्रसूति के बाद इसका सेवन अवश्य करना चाहिए।

    दयाल द्राक्षासव : ताकत और ताजगी से भरा सुमधुर टॉनिक है। यह भूख बढ़ाता है। दस्त साफ लाता है, खून में तेजी लाता है, काम की थकावट दूर करता है तथा नींद लाता है। दिल व दिमाग में ताजगी पैदा करता है। बल, वीर्य, रक्त मांस बढ़ाता है। कफ, खाँसी, सर्दी-जुकाम, क्षय की खाँसी, कमजोरी में लाभदायक। सब ऋतुओं में बाल, वृद्ध, स्त्री, पुरुष सभी सेवन कर सकते हैं।

    द्राक्षारिष्ट : उरक्षत छाती में दर्द होना, कुकर खाँसी, गले के रोग, श्वास, काँस, क्षय, फेफड़ों की कमजोर व कब्जियत में लाभकारी तथा बलवर्द्धक है।
    देवदार्व्यारिष्ट : प्रमेह, वातरोग, ग्रहणी, अर्श, मूत्र, कृच्छ, दद्रु व कुष्ठ नाशक।

    पत्रांगासव : सब तरह के प्रदर रोग, गर्भाशय की शिथिलता, सोमरस, ज्वर, पांडू, सूजन मंदाग्नि, अरुचि आदि रोगों को दूर करता है। वेदनायुक्त रक्त प्रदर व श्वेत प्रदर पर लाभकारी।

    पिपल्यासव : मंदाग्नि, क्षय, कफ, खांसी, गुल्म, उदर रोग, ग्रहणी तथा अर्श नाशक। शोथ, यकृत व प्लीहा वृद्धि, ज्वर व अतिसार में लाभप्रद।

    पुनर्नवारिष्ट : शोथ (सूजन) रोग, उदर रोग, प्लीहा वृद्धि, यकृत, जिगर बढ़ना, अम्लपित्त गुल्म आदि रोगों को नष्ट करता है तथा अधिक पेशाब लाता है। शोथ, यकृत तथा गुर्दों को विशेष लाभकारी है।

    बबूलारिष्ट : रक्त विकार, अतिसार, खांसी, दमा, तपेदिक, बहुमूत्र, प्रमेह, प्रदर, उरक्षत, सोम रोग आदि में लाभकारी। छाती का दर्द, पेशाब में जलन व पीड़ा होना, धातु क्षय व सूखी खांसी में लाभकारी है।

    वासारिष्ट : पुरानी खाँसी, श्वास, रक्तपित्त, बुखार में खाँसी के साथ कफ और खून का निकलना, सूखी खाँसी, गले के रोग आदि रोगों में अत्यंत लाभकारी है।

    भृंगराजासव : धातु क्षय, कमजोरी, स्मरण शक्ति की कमी, नेत्र रोग, बालों का सफेद होना, प्रमेह, खाँसी आदि रोग नष्ट करता है। बलकारक व कामोद्दीपक है तथा बन्ध्यापन नष्ट करता है व खून साफ करता है।
    मुस्तकारिष्ट : अग्निमांद्य, संग्रहणी, अजीर्ण, अतिसार, आदि अनेक रोगों को नष्ट करता है तथा भूख बढ़ाता है।

    महामंजिष्ठाद्यरिष्ट : सब प्रकार के कुष्ठ रोग, खून की खराबियाँ, उपदंश (गर्मी), फोड़े-फुंसी चकत्ते आदि रोगों पर लाभकारी तथा चर्म रोग नष्ट करता है।

    रोहितकारिष्ट : तिल्ली, जिगर (लीवर), गुल्म (वायु गोला), अग्निमांद्य, पांडू, संग्रहणी आदि रोगों को दूर करता है। जिगर व तिल्ली के बढ़ जाने पर इसके उपयोग से विशेष लाभ होता है।

    लोध्रासव : कफ तथा पित्त जनक प्रमेह, पेशाब की जलन, मूत्राशय में दर्द, पेशाब के रास्ते में सूजन, प्रदर आदि स्त्रियों के रोगों पर विशेष लाभकारी है। गर्भाशय की शुद्धि करता है। पांडू, बवासीर, ग्रहणी, खांसी, चक्कर आना आदि नष्ट करता है।

    लोहासव : खून बढ़ाने की सुप्रसिद्ध औषधि। खून की कमी, पीलिया, गुल्म रोग, बवासीर, भगंदर संग्रहणी, बढ़े हुए जिगर और तिल्ली में विशेष लाभदायक है। दमा, खाँसी, क्षय, जीर्ण ज्वर, हृदय रोग आदि में लाभप्रद तथा बलवर्धक।

    विडंगारिष्ट व विडंगासव : सब प्रकार के पेट के कृमि (कीड़ों) को नष्ट करता है तथा भगंदर, गण्डमाला, गुल्म, अश्मीर, विद्रधि, कफ, खांसी, श्वास आदि रोगों में भी लाभदायक है।

    सारस्वतारिष्ट : बुद्धिवर्द्धक, आयु, वीर्य एवं कांतिवर्धक है। स्मरण शक्ति बढ़ाता है तथा मज्जान्तु हृदय व दिमाग को ताकत पहुँचाता है। मानसिक एवं शारीरिक दुर्बलता, आवाज भारी होना, नींद न आना, स्वर भंग, रुक-रुककर बोलना, (तोतलापन), हकलाना, कानों में तरह-तरह की आवाजों का होना, कम सुनाई देना आदि में अच्छा लाभ होता है। दिमागी काम करने वालों के लिए उत्तम ब्रेन टॉनिक है। उन्माद ऋतु दोष, वीर्य रोग, मूर्च्छा व अपस्मार को नष्ट करता है और बच्चों के तोतलेपन व मंदबुद्धि में लाभकारी।

    सरिवाद्यासव : खून साफ करने की प्रसिद्ध दवा है। यह खून और पित्त की खराबी को मिटाता है। फोड़ा-फुंसी, खाज-खुजली, चकत्ते, वातरक्त आदि रक्त विकार, सुजाक, भगंदर, हाथ-पैर, आँख, छाती की जलन, गठिया, आमवात, वात व्याधि सभी प्रकार के रक्त दोष उपद्रव, कब्जियत, रक्त संचार की अनियमितता आदि की उत्तम औषधि है।

    नोट : अधिकांश आसव-आरिष्ट 10 से 25 मिलीलीटर तक बराबर पानी मिलाकर भोजन करने के बाद दोनों समय पिए जाते हैं।

  • कलु रैकवार के हत्यारों के घर तोड़ने की मांग में प्रदर्शन

    कलु रैकवार के हत्यारों के घर तोड़ने की मांग में प्रदर्शन

    दमोह,17 मई(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)। दमोह के मछली ठेकेदार कलू रैकवार की हत्या के सभी आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया है। पुलिस अधीक्षक राकेश कुमार सिंह ने पत्रकार वार्ता में कहा कि पुलिस को सीधी चुनौती देने वाले इस कांड का राज फाश कर दिया गया है। कलू के बेटे समान बाडी गार्ड विक्की वाल्मिकी, शिवा रैकवार, अजय उर्फ अज्जू अहिरवार, ऐफाज खान समेत आठ आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। चर्चा के बहाने कमरे में ले जाकर कलु पर कतन्ने और गोलियों से वार किए जाने के षड़यंत्र में प्रयुक्त वाहन, मोबाईल फोन और कट्टे भी बरामद कर लिए गए हैं। कलु रैकवार कई धार्मिक और सामाजिक गतिविधियां भी चलाते थे और उनसे जुड़े कई समर्थकों ने प्रदर्शन करके हत्यारों के घर तोड़े जाने की मांग की है।
    पुलिस के अनुसार विगत छह मई को मछली ठेकेदार, कलु रैकवार पिता श्री कन्हैया रैकवार,उम्र लगभग 45 साल,निवासी फुटेरा वार्ड नंबर 5 को पुरानी अदावट के चलते सौरभ वंशवर्ती, दीपक वंशवर्ती, और उनके साथियों ने गोलियां मारी थीं । हत्या सुनिश्चित करने के लिए तेज धारदार कतन्ने से चेहरे, गर्दन और सीने पर कई वार किए गए थे। इससे घटना स्थल पर ही उसकी मौत हो गई थी। जिला अस्पताल में डाक्टरों ने उसे मृत घोषित किया था। पुलिस ने भारी सुरक्षा के बीच शव का पोस्ट मार्टम कराया था। पुलिस ने अपराध क्रमांक 393 । 2023 में धारा 302,34 एवं ता.हिं. 25 । 27 आर्म्स एक्ट के तहत अपराध पंजीबद्ध करके विवेचना शुरु की थी।


    पुलिस अधीक्षक राकेश कुमार सिंह ने बताया कि सूचना के आधार पर आरोपियों तक पहुंचने के लिए पुलिस ने एसआईटी का गठन किया था। आरोपियों की गिरफ्तारी पर दस दस हजार रुपए का इनाम भी घोषित किया गया था। एसडीओपी हटा वीरेन्द्र सिंह ठाकुर के नेतृत्व में कोतवारी इंस्पेक्टर विजय राजपूत की टीमों ने हरियाणा, दिल्ली, इंदौर, भोपाल, जबलपुर, कटनी में पुलिस टीम भेजकर आरोपियों और उनके रिश्तेदारों की तलाश की थी।
    पुलिस की साईबर टीम को दो आरोपियों के भोपाल में होने की सूचना मिली थी जिसके आधार पर भोपाल पुलिस से सहयोग लिया गया और दीपक वंशवर्ती व सौरभ वंशवर्ती को भोपाल से धर दबोचा गया। दो आरोपियों शिवा और आशीष रैकवार को पुलिस पहले ही जबलपुर से गिरफ्तार कर चुकी थी।


    पुलिस ने अब तक सौरभ पिता महेश वंशवर्ती, उम्र 25 साल ,दीपक पिता महेश वंशवर्ती उम्र 30 साल, राहुल पिता संतोष यादव उम्र 26 साल, मत्था उर्फ मथुरा पिता बाबूलाल वंशकार उम्र 20 साल, अजय उर्फ अज्जू पिता ईश्वर प्रसाद अहिरवार उम्र 30 साल, निक्की उर्फ नितिन पिता नत्थू बाल्मिकी उम्र 33 साल, शिवा पिता श्री राजेन्द्र रैकवार उम्र 31 साल, अहफाज पिता इलयास खाना उम्र 20 साल, एवं अन्य सहयोगियों को भी हिरासत में लिया है।

  • छत्रपति संभाजी पर नृशंसता ने जगाई मुगलों से नफरत

    छत्रपति संभाजी पर नृशंसता ने जगाई मुगलों से नफरत

    -संजय गोविंद खोचे-

    सम्भाजी राजे, शिवाजी महाराज के ज्येष्ठ पुत्र थे, संभाजी का जन्म 14 मई 1657 में हुआ था। माता का देहांत उनकी अल्प आयु में ही हो गया और फिर उनका पालन पोषण दादी जीजाबाई ने किया। 16 जनवरी सन 1681 ई. को सम्भाजी महाराज का विधिवत राज्याभिषेक हुआ और वो हिंदवी स्वराज्य के दूसरे छत्रपति बने। शम्भाजी बहुत बड़े विद्वान् और धर्मशास्त्रो के ज्ञाता थे, उन्होंने 14 वर्ष की उम्र में ही संस्कृत में कई ग्रन्थ लिख दिये थे।

    विदेशी पुर्तगालियों को हमेशा उनकी औकात में रखने वाले सम्भाजी को धर्म परिवर्तन कर मुस्लिम बन गए हिन्दुओं का शुद्धिकरण कर उन्हें फिर से स्वधर्म में शामिल करने वाले, एक ऐसे राजा जिन्होंने एक स्वतंत्र विभाग की ही स्थापना इस उद्देश्य हेतु की थी।

    छत्रपति सम्भाजी महाराज ने अपने जीवन में 140 युद्ध लड़े जिनमे एक में भी उनकी हार नही हुई, लेकिन आखिर में धोखे से उन्हें पकड़ कर मुग़लो द्वारा कैद कर लिया गया। औरँगजेब ने उन्हें इस्लाम स्वीकार करने के लिये अनेको भयंकर अमानवीय यातनाए दी। उनकी जुबान काट ली गई और आँखे निकाल ली, लेकिन उन्होंने सनातन हिन्दू धर्म छोड़कर इस्लाम स्वीकार नही किया। क्रोधित औरंगजेब ने अपने सामने ही इंसानों की खाल उतारने में प्रवीण जल्लादों को बुलाया और सम्भाजी की नख से शिख तक खाल उतरवा दी। उस दृश्य को देखने वाले प्रत्यक्षदर्शी मुगल सरदारों के हवाले से इतिहासकारों ने लिखा है कि खाल उतर जाने के बाद औरंगजेब ने उन्हें आसान मौत देने का प्रस्ताव यह कहते हुए दिया कि वह इस हालत में इस्लाम कबूल कर लें तो उन्हें आसान मौत दे दी जाएगी, लेकिन सम्भाजी ने फिर एक बार उसे ठुकरा दिया।

    इसके बाद उनके खाल उतरे शरीर को रोजाना सुबह नीबूरस में नमक और मिर्च मिलाकर नहलाया जाता था। सम्भाजी की पीड़ा को शब्द देने वाले एक इतिहासकार के अनुसार पहले दो दिन सम्भाजी तथा कलश स्नान के वक्त खूब चीखते थे, लेकिन तीसरे दिन से उन्होंने पीड़ा पर काबू पा लिया। औरंगजेब को जब यह जानकारी मिली तो वह आगबबूला हो गया और उसने एक हाथ कटवा दिया, फिर भी सम्भाजी ने उफ नहीं की तो उनका पैर काट दिया गया, आखिरकार करीब पन्द्रह दिन तक नीबूरस में मिले नमक मिर्च के स्नान के बाद सम्भाजी ने 11 मार्च 1689 को कैद में ही दम तोड़ दिया।

    मराठा इतिहासकारों के अलावा यूरोपियन इतिहासकार डेनिस किनकैड़ ने भी अपने लेखन में इस प्रकरण की पुष्टि की है। इतनी भयंकर यातनाओं के बावजूद अपने धर्म पर टिके रहने और इस्लाम के बदले मृत्यु का वरण करने के कारण उन्हें धर्मवीर भी कहा गया है। औरंगजेब को लगता था कि छत्रपति संभाजी के समाप्त होने के पश्चात् हिन्दू साम्राज्य भी समाप्त हो जायेगा या जब सम्भाजी मुसलमान हो जायेगा तो सारा का सारा हिन्दू मुसलमान हो जायेगा, लेकिन वह नहीं जनता था कि वह वीर पिता का धर्म वीर पुत्र विधर्मी होना स्वीकार न कर मौत को गले लगाएगा। वह नहीं जानता था कि सम्भाजी किस मिट्टी के बना हुए हैं।

    सम्भाजी मुगलों के लिए रक्त बीज साबित हुये, सम्भाजी की मौत ने मराठों को जागृत कर दिया और सारे मराठा एक साथ आकर लड़ने लगे। यहीं से शुरू हुआ एक नया संघर्ष जिसमें इस जघन्य हत्याकांड का प्रतिशोध लेने के लिए हर मराठा सेनानी बन गया और अंत में मुग़ल साम्राज्य कि नींव हिल ही गयी और हिन्दुओं के एक शक्तिशाली साम्राज्य का उदय हुआ।

    औरंगजेब दक्षिण क्षेत्र में मराठा हिंदवी स्वराज्य को खत्म करने आया था, लेकिन शिवाजी महाराज और शम्भाजी महाराज की रणनीति और बलिदान के कारण उसका ये सपना मिट्टी में मिल गया और उसको दक्षिण के क्षेत्र में ही दफन होना पड़ा।
    आज का इतिहास सच में सिर्फ महाराष्ट्र में रहने वाले मराठो के बीच में ही सिमित रह गया, ऐसा मुझे इअलिये कहना पड़ा की मराठो को छोड़ कर बाकी लोगो ये भी नहीं मालूम की धर्मवीर छत्रपति संभाजी राजे कौन थे।
    (धर्मवीर छत्रपति संभाजी राजे भोसले) या शम्भाजी (1657-1689) मराठा सम्राट और छत्रपति शिवाजी के उत्तराधिकारी। उस समय मराठाओं के सबसे प्रबल शत्रु मुगल बादशाह औरंगजेब बीजापुर और गोलकुण्डा का शासन हिन्दुस्तान से समाप्त करने में उनकी प्रमुख भूमिका रही।

    सम्भाजी अपनी शौर्यता के लिये काफी प्रसिद्ध थे। सम्भाजी ने अपने कम समय के शासन काल मे 140 युद्ध किये और इसमे एक प्रमुख बात ये थी कि उनकी सेना एक भी युद्ध मे पराभूत नहीं हुई। इस तरह का पराक्रम करने वाले वह शायद एकमात्र योद्धा होंगे। उनके पराक्रम की वजह से परेशान हो कर दिल्ली के बादशाह औरंगजेब ने कसम खायी थी के जब तक छत्रपती संभाजी पकडे नहीं जायेंगे, वो अपना किमोंश सर पर नहीं चढ़ाएगा।

    इनको मुसलमान बनाने के लिए औरंगजेब ने कई कोशिशें की। किन्तु धर्मवीर छत्रपति संभाजी महाराज और कवि कलश ने धर्म परिवर्तन से इनकार कर दिया। औरंगजेब ने दोनों की जुबान कटवा दी, आँखें निकाल दी किन्तु शेर छत्रपति शिवाजी महाराज के इस सुपुत्र ने अंत तक धर्म का साथ नहीं छोड़ा। उस समय 11 मार्च 1689 को हिन्दू नववर्ष का दिन था जब औरंगजेब ने दोनों के शरीर के टुकडे कर के हत्या कर दी। किन्तु ऐसा कहते है की हत्या पूर्व औरंगजेब ने छत्रपति संभाजी महाराज से कहा के मेरे 4 पुत्रों में से एक भी तुम्हारे जैसा होता तो सारा हिन्दुस्थान कब का मुग़ल सल्तनत में समाया होता। जब छत्रपति संभाजी महाराज के टुकडे तुलापुर की नदी में फेंकें गए तो उस किनारे रहने वाले लोगों ने वो इकठ्ठा कर के सिला के जोड़ दिए (इन लोगों को आज ” शिवले ” इस नाम से जाना जाता है) जिस के उपरांत उनका विधिपूर्वक अंत्यसंस्कार किया। औरंगजेब ने सोचा था की मराठी साम्राज्य छत्रपति संभाजी महाराज के मृत्यु पश्चात ख़त्म हो जाएगा। छत्रपति संभाजी महाराज के हत्या की वजह से सारे मराठा एक साथ आकर लड़ने लगे। अत: औरंगजेब को दक्खन में ही प्राणत्याग करना पड़ा। उसका दक्खन जीतने का सपना इसी भूमि में दफन हो देश धरम पर मिटने वाला।

    शेर शिवा का छावा था ।।
    महापराक्रमी परम प्रतापी। एक ही शंभू राजा था ।।
    तेज:पुंज तेजस्वी आँखें। निकलगयीं पर झुकी नहीं ।।
    दृष्टि गयी पर राष्ट्रोन्नति का। दिव्य स्वप्न तो मिटा नहीं ।।
    दोनो पैर कटे शंभू के। ध्येय मार्ग से हटा नहीं ।।
    हाथ कटे तो क्या हुआ?। सत्कर्म कभी छुटा नहीं ।।
    जिव्हा कटी, खून
    शिवाजी का बेटा था वह। गलत राह पर चला नहीं ।।
    वर्ष तीन सौ बीत गये अब। शंभू के बलिदान को ।।
    कौन जीता, कौन हारा। पूछ लो संसार को ।।
    कोटि कोटि कंठो में तेरा। आज जयजयकार है ।।
    अमर शंभू तू अमर हो गया। तेरी जयजयकार है ।।
    मातृभूमि के चरण कमलपर। जीवन पुष्प चढाया था ।।
    है दुजा दुनिया में कोई। जैसा शंभू राजा था।।

    #संजय_गोविंद_खोचे

  • पुलिस के कानूनों का भ्रम दूर करेगा नया ग्रंथ

    पुलिस के कानूनों का भ्रम दूर करेगा नया ग्रंथ

    एडीजी अनुराधा शंकर तथा पुलिस मुख्यालय से से‍वानिवृत्‍त लायब्रेरियन डॉ फरीद बज्मी ने पुलिस रेगुलेशन एक्ट की अपडेट पुस्तक का किया विमोचन

    भोपाल,09 मई (प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)। अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक प्रशिक्षण श्रीमती अनुराधा शंकर तथा पुलिस मुख्यालय से सेवानिवृत्‍त लायब्रेरियन डॉ फरीद बज्मी ने आज 09 मई 2023 मंगलवार को पुलिस रेगुलेशन एक्‍ट की अपडेट पुस्‍तक का विमोचन किया।

     उल्लेखनीय है कि पुलिस रेगुलेशन एक्ट में समय समय पर संशोधन किए जाते रहे है। उन संशोधनों को शामिल करते हुए पुलिस रेगुलेशन को अद्यतन किए जाने की आवश्यकता लंबे समय से महसूस की जा रही थी। इस कार्य हेतु स्वतः पहल पुलिस मुख्यालय के लायब्रेरियन के रूप में पदस्थ रहे उप पुलिस अधीक्षक डॉ. फरीद बज्मी ने की। उन्होंने अथक प्रयासों के साथ इन सभी संशोधनों को समेकित करते हुए पुस्तक के रूप में तैयार किया जो कि पुलिस विभाग के प्रत्येक कर्मचारी के लिए यह नवीनतम संशोधनों सहित एक प्रमाणिक एवं उपयोगी दस्तावेज सिद्ध होगा। इस कार्य को पूरा करने में बज्मी जी को 4 वर्ष लगे। उन्होंने गंभीर रूप से अस्वस्थ होने के बावजूद पूर्व में प्रकाशित एक्ट की सभी त्रुटियां दूर करने के साथ –साथ पुलिस एक्ट में बने नए कानूनों को भी इस पुस्तक में संकलित किया। बज्मी के गंभीर रूप से अस्वस्थ्य होने के कारण अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक श्रीमती अनुराधा शंकर ने पालीवाल अस्‍पताल जाकर उनका कुशलक्षेम जाना। इसके साथ ही इस पुलिस रेगुलेशन एक्ट की नवीनतम किताब का विमोचन भी फरीद बज्मी के हाथों कराया। अपनी इस अथक प्रयासों को सफल होता देख डॉ फरीद बज्मी काफी प्रसन्न हुए और उन्होंने एडीजी को बहुत धन्यवाद दिया।

    इस अवसर पर डिप्टी डायरेक्टर मध्यप्रदेश पुलिस अकादमी भौंरी श्री मलय जैन, एडिशनल डीसीपी श्री महावीर मुजाल्दे, एआईजी इरमीन शाह सहित फरीद बज्मी के परिवार के सदस्य भी उपस्थित थे।

  • देश की आत्मा के साथ खड़े होंः अमिताभ अग्निहोत्री

    देश की आत्मा के साथ खड़े होंः अमिताभ अग्निहोत्री

    देवर्षि नारद जंयती पर विश्‍व संवाद केंद्र द्वारा आयोजित किया गया पत्रकार पुरस्कार एवं सम्मान समारोह


    भोपाल। हर देश और संस्कृति का अपना ‘स्व’ होता है।‌ ब्रिटेन लोकतांत्रिक देश है लेकिन जब वहां राजा का राजतिलक होता है तो ईसाई पद्धति से होता है। यह वहां का ‘स्व’ है। इसका कोई विरोध नहीं होता है। इसीलिए आवश्यक है कि हम अपने ‘स्व’ की तलाश करें और उसके साथ खड़े हों। यह बात टेलीविजन समाचार माध्यम के देश के जाने-माने पत्रकार अमिताभ अग्निहोत्री ने रविवार को रवीन्‍द्र भवन में आयोजित देवर्षि नारद जयंती एवं पत्रकार सम्मान समारोह में बतौर मुख्‍य अतिथि कही।

    श्री अग्निहोत्री ने कहा कि अमेरिका का राष्ट्रपति बाइबिल पर हाथ रखकर शपथ लेता है और कोई आपत्ति नहीं होती। इसका कारण यह है कि एक धर्मनिरपेक्ष राष्ट्र होने पर भी उन्होंने अपने ‘स्व’ को नहीं बदला। हमें भी हमारे देश के ‘स्व’ को समझकर उसकी पुनर्स्थापना करना होगी। विश्‍व संवाद केंद्र मध्यप्रदेश की ओर से आयोजित इस समारोह के मुख्‍य वक्‍ता राष्‍ट्रीय स्‍वयंसेवक संघ के सह क्षेत्र कार्यवाह हेमंत मुक्तिबोध थे। अध्‍यक्षता विश्‍व संवाद केंद्र न्‍यास के अध्‍यक्ष डॉ अजय नारंग ने की। मुख्य अतिथि श्री अमिताभ अग्निहोत्री ने कहा कि इस्लाम के उदय से 2600 साल पहले बुद्ध का परिनिर्वाण हो गया था।हिंदू धर्म तो इससे भी हजारों साल पुराना है। इसलिए यहां यह झगड़ा तो होना ही नहीं चाहिए कि पहले कौन यहां था। उन्होंने इस बात पर भी प्रश्न उठाए कि ऐसा इतिहास क्यों रचा गया जिसमें विदेश से आए लोगों को महान बताया गया जबकि वे अपने साथ सांस्कृतिक मूल्य लेकर नहीं आए थे। अयोध्या, मथुरा, काशी कभी भारत में आर्थिक महत्व के केंद्र नहीं रहे, यह सामरिक केंद्र भी नहीं रहे इसके पश्चात भी इन पर हमले क्यों किये गए? इस पर विचार करना आवश्यक है। खिलजी से लेकर औरंगजेब तक भारत के माथे पर सिर रखकर खड़े होना चाहते थे। कोई मेरे आत्म तत्व को दबाए तो इसे स्वीकार नहीं किया जाना चाहिए।

    उन्होंने कहा कि अब देश अपेक्षाकृत अधिक जागृत है। सूचनाएं सब तक पहुंच रही हैं। अब कोई समाचार को दबा नहीं सकता। ऐसे में हमारी जिम्मेदारी बनती है कि हम दुनिया को बता सकें कि हम सांस्कृतिक पुनर्जागरण क्यों करना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि इस देश में 1000 साल की परतंत्रता के दौर में भी धर्म जीवित रहा क्योंकि यह सत्ता पर आश्रित नहीं रहा। धार्मिक पुनर्जागरण सत्ता के आधार पर नहीं होता, यह लोक की चेतना का विषय है। जब भी लोक चेतना सत्ताश्रित हो जाती है तब राष्ट्र का भला नहीं हो सकता। किसी सत्ता का घोषणा पत्र रामचरितमानस या गीता नहीं बना।

    उन्होंने उपस्थित पत्रकारों से आह्वान किया कि शब्दों को मंत्र बनाना पड़ेगा। हमें इसे अपने तप से सिद्ध करना पड़ेगा। देह अमर नहीं होती अपितु यश और कीर्ति अमर होती है। इतिहास को निरपेक्ष होकर लिखा जाए और यदि निरपेक्ष होकर लिखेंगे तो इसके खतरे भी उठाने पड़ेंगे।

    उन्होंने कहा कि भारत की सांझी चेतना जागृत होगी तो भारत का पुनर्जागरण होगा। सांस्कृतिक पुनर्जागरण का काम अपनी व्यक्तिगत स्वार्थों से ऊपर उठे बिना नहीं हो सकता। हम अपना नुकसान उठाकर भी धर्म के साथ खड़े हो सकते हैं। यदि हां तो आप मातृभूमि के ऋण से मुक्त हो सकते हैं। उन्होंने आह्वान किया कि यदि हम नेपथ्य में रहकर बलिदान करने को तैयार हैं तो सांस्कृतिक पुनर्जागरण हो सकता है। प्रत्येक व्यक्ति को केवल एक बात ध्यान में रखनी चाहिए कि हम राष्ट्र के साथ हैं।
    कार्यक्रम के मुख्‍य वक्‍ता राष्‍ट्रीय स्‍वयंसेवक संघ के क्षेत्र सह कार्यवाह हेमंत मुक्तिबोध ने कहा कि यूरोप और अरब की संस्कृति अन्य देशों एवं उनकी संस्कृतियों को प्रभावित करना चाहती हैं। दुनिया भर की दूसरी संस्कृतियों के लोग जब बाहर के देशों में गए तो सबसे पहले उन्होंने वहां की संस्कृति को नष्ट किया। उन्होंने वहां की इतिहास, कला, संस्कृति और शिल्प को नष्ट किया। इसके उलट भारत जब बाहर गया तो उनको समाप्त करने नहीं गया अपितु उनको समृद्ध ही किया। भारतीय संस्कृति की विशेषताओं को देखते हुए यदि हम उसके अनुसार जीवन जीना शुरू कर देंगे तो सांस्कृतिक पुनर्जागरण हो सकेगा।

    उन्होंने इस बात पर भी चिंता जताई कि मीडिया में संपादक से अधिक प्रबंध संपादक की भूमिका हो गई है। पत्रकारों की भी अपनी विवशताएं हैं। एजेंडा पत्रकारिता से सनसनी तो मिल जाती है लेकिन कराहता हुआ सत्य नहीं मिलता। सांस्कृतिक पुनर्जागरण के लिए मीडिया को निजी स्वार्थ से हटकर स्थान देना चाहिए। सकारात्मक और समाजहित में कार्य करने वाले लोगों के समाचार सामने आएं, इस दिशा में कार्य करना चाहिए।

    अध्‍यक्षता कर रहे डॉ. अजय नारंग ने कहा कि देवर्षि नारद को हम सब लोक संचालक के रूप में जानते हैं। यह समझना आवश्यक है कि देवर्षि नारद के समय में उनके कार्य का लाभ किसको होता, निश्चित ही वह जन सामान्य को होता। संवाद केंद्र प्रतिवर्ष देवर्षि नारद जयंती पर यह आयोजन करता है। विश्व संवाद केंद्र का कार्य पत्रकारों के माध्यम से लोक कल्याण के लिए है। उन्होंने कहा कि हमने पिछले एक माह के समाचार पत्रों का विश्लेषण किया। इसमें पता चला कि ‘द केरल स्टोरी’, समलैंगिक विवाह, पहलवानों का धरना, मध्यप्रदेश में मदरसों जैसे मुद्दों पर पत्रकारों ने मात्र समाचार से आगे जाकर उसके सच का विश्लेषण मीडिया द्वारा किया गया। समाचार पत्र सांस्कृतिक पुनर्जागरण में सकारात्मक भूमिका निभाते हैं। जब मध्यप्रदेश में नगरों को उनके पूर्व नाम मिले तो समाचार पत्रों ने लोगों को इसका स्मरण कराया। सांस्कृतिक पुनर्जागरण के लिए मीडिया अपना योगदान दे रहे हैं, यह किसी से छिपा नहीं है। विश्वास है कि हमारा मीडिया सांस्कृतिक पुनर्जागरण में अपनी भूमिका को अग्रणी रखेगा। कार्यक्रम का प्रारंभ संगीत प्रस्‍तुति के साथ हुआ। निनाद अधिकारी के संतूर वादन ने श्रोताओं का मन मोह लिया।

    विश्‍व संवाद केंद्र द्वारा दिए जा रहे पुरस्‍कारों एवं सम्‍मान की जानकारी, चयन प्रक्रि‍या एवं चयन समिति के संबंध में जानकारी पत्रकार मनोज जोशी ने दी। मंच पर अतिथियों का स्‍वागत किया गया। कार्यक्रम के अंत में आभार विश्‍व संवाद केंद्र के सचिव दिनेश जैन ने व्‍यक्‍त किया। मंच संचालन डॉ वंदना गांधी ने किया। राष्‍ट्रगान के साथ समारोह का समापन किया गया।

    इन पत्रकारों को दिए गए देवर्षि नारद पत्रकारिता सम्‍मान एवं पुरस्‍कार :
    कार्यक्रम में वरिष्‍ठ पत्रकार एवं संपादक रमेश शर्मा को देवर्षि नारद सार्थक (पत्रकारिता) जीवन सम्‍मान–2023 से सम्‍मानित किया गया। वहीं प्रदेश के पांच पत्रकारों को देवर्षि नारद पत्रकारिता पुरस्कार प्रदान किए गए। पुरस्‍कृत पत्रकारों में नवदुनिया सीहोर के आकाश माथुर, स्वदेश ग्वालियर के डॉ. अजय खेमरिया, पत्रिका भोपाल के श्री श्‍याम सिंह तोमर, स्वदेश भोपाल के दीपेश कौरव, दैनिक भास्कर भोपाल के राहुल शर्मा सम्मिलित रहे। मंच पर सम्मानित होने के बाद अपने वक्तव्य में श्री रमेश शर्मा ने कहा कि पत्रकार यदि नारद को अपना आदर्श मानते हैं तो राष्ट्र, संस्कृति के संबंध में कोई समझौता नहीं होना चाहिए। पत्रकारिता को इस बात को उठाना चाहिए कि हमारी पहचान क्या है। अपने ऊपर बलिदानियों का ऋण है। पत्रकार अपने–अपने क्षेत्र के अनाम अमर बलिदानी के योगदान को सबके सामने लाएं।


  • मंदिर में दान आया तो खर्च करने जुट गए समाजसेवी

    मंदिर में दान आया तो खर्च करने जुट गए समाजसेवी

              जिसके कारण आज आपका अस्तित्व है उसके प्रति कृतज्ञता का भाव रखना जैन धर्म की मूल पहचान है।उदार हृदय होकर ईश्वर की आराधना करने वाले जैनियों की इसी साख की वजह से उन्हें समाज का खजांची माना जाता  है। सामाजिक संस्कार के इस भाव की पूजा मंदिर में श्री जी के अभिषेक से पुष्पित पल्लवित होती है। राजधानी के जैन धर्मावलंबी भी इस भाव से अछूते नहीं हैं और इसी वजह से राजधानी के जैनियों को प्रदेश की जैन समाज का शीर्ष  (अपेक्स ) प्रतिनिधि माना जाता रहा है। इसके बावजूद यहां कई बार जैनियों के बीच अप्रिय घटनाएं भी सामने आती रहती हैं जिसका कारण अज्ञानता, संकीर्णता और अहंकार का भाव होता है। कस्तूरबा नगर के धर्मावलंबियों के बीच कुप्रबंधन से जुड़ी कुछ इसी तरह की बैचेनी इन दिनों देखी जा रही है। कस्तूरबानगर, रचनानगर ,गौतम नगर, भारती निकेतन,  शांतिनिकेतन जैसी कालोनियों में रहने वाले जैन धर्मावलंबियों के पुण्य की आराधना के बीच पनपा कटुता का भाव इन दिनों सु स्वादु भोजन के बीच आए कंकड़ की तरह खटक रहा है।

            ये कहानी न केवल कस्तूरबानगर बल्कि देश भर की जैन संस्थाओं में देखी सुनी जा रही है। इसकी वजह समासेवा के नाम पर जुटने वाले अहंकारियों का कुप्रबंधन,मनमानी और अराजकता है।  राजधानी के कस्तूरबानगर और रचनानगर के लोगों ने वर्ष 2002-03 में एक सार्वजनिक वाचनालय और भगवान सुपार्श्वनाथ के संदेशों का प्रसार करने के लिए मंदिर का निर्माण किया था। मंदिर के संधारण और निर्माण का कार्य श्री महावीर कुंदकुंद दिगंबर जैन वाचनालय एवं पुस्तकालय समिति जिसका रजिस्ट्रेशन 10249/2002 है इसके अधीनस्थ श्री 1008 सुपार्श्वनाथ दिगंबर जैन मंदिर समिति कस्तूरबा नगर(उपसमिति) करती रही । मंदिर की स्थापना करने वाले समाजसेवियों की बनाई इस उप समिति का कार्यकाल 30 अप्रैल 2023 को समाप्त हो गया। उसके चुनाव की नई तिथि अभी तक घोषित नहीं हुई है। इसकी घोषणा मंदिरजी की स्थापना करने वाली श्री महावीर कुंद कुंद दिगंबर जैन वाचनालय एवं पुस्तकालय समिति को करना है। इस उपसमिति के अध्यक्ष का पद काल दो वर्ष रखा गया है। जाहिर है कि दो साल बाद उप समिति का अध्यक्ष बदला जाता है। वाचनालय के लिए बनी मूल समिति ने लगभग इक्कीस सालों के अथक प्रयासों और जन सहयोग से सुंदर सार्वजनिक स्थल का निर्माण किया है। यही नहीं दानराशि का एक बड़ा फंड सामाजिक गतिविधियों के लिए भी एकत्रित किया है। फंड के दुरुपयोग की भी कोई शिकायत कभी सामने नहीं आई। ये काम मंदिर समिति से जुड़े तमाम जैन धर्मावलंबी बडी पारदर्शिता और लगन से करते रहे हैं। सभी का एकमेव लक्ष्य है कि वे रोज सुबह भगवान के दर्शन कर सकें और सामाजिक मानदंडों की उत्कृष्टता का संकल्प ले सकें।

           ये सब गतिविधियां शुरुआती अवरोध के बाद से निर्बाध चल रहीं हैं और समाज के कई लोग इस अभियान से जुड़ते चले जा रहे हैं। इसमें न केवल जैन समाज बल्कि कई अन्य स्थानीय नागरिकों ने भी बढ़ चढ़कर अपनी हिस्सेदारी निभाई है। अदालतों के विभिन्न फैसलों की वजह से सरकार ने मंदिर स्थलों के निर्माण और नियमन को लंबे समय से रोक रखा है। यही वजह है कि कस्तूरबानगर जैन मंदिर को जमीन आबंटन की प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकी, मंदिर से जुड़े लोगों के सब्र का बांध अब टूटने लगा है। मंदिर की जिस उपसमिति का कार्यकाल हाल ही में 30 अप्रैल को समाप्त हुआ है, उसके अध्यक्ष रहे सुनील जैन(जैनाविन) ने मंदिर के नवनिर्माण पर पच्चीस लाख रुपए खर्च कर दिए। इस मनमानी पर श्री महावीर कुंदकुंद दिगंबर जैन वाचनालय एवं पुस्तकालय समिति के कई सदस्यों ने आपत्ति उठाई । उनका कहना था कि वाचनालय या मंदिर की जमीन आबंटन की प्रक्रिया पूरी नहीं हुई है इसलिए इस तरह की फिजूलखर्ची की अनुमति नहीं दी जा सकती। समिति के सदस्यों ने लोगों से प्राप्त धनराशि को पाई पाई करके जोड़ा है इसे बर्बाद नहीं किया जा सकता ।जिस तरह राम जन्मभूमि मंदिर का जमीन विवाद सुलझने के बाद ही मंदिर निर्माण शुरु किया गया उसी तरह यहां सरकार की मंजूरी का इंतजार किया जाना चाहिेए। इस पर व्यवस्था संभाल रहे कुछ लोगों और अध्यक्ष सुनील जैन ने आरोप लगाने शुरु कर दिये कि मूल समिति की जिद से मंदिर का नवनिर्माण नहीं हो पा रहा है। उन्होंने स्थानीय लोगों और समिति के सदस्यों को बरगलाया कि मंदिर के निर्माण में स्वर्गीय पंडित कस्तूरचंद जी का परिवार आड़े आ रहा है, इसलिए मंदिर का प्रबंधन उनके हाथ से छीन लिया जाए।ये भी कहा गया कि मूल समिति की स्थापना मुमुक्षु पंथ के लोगों ने की थी इसलिए मुनिभक्तों को उसे स्वीकार नहीं करना चाहिए। जबकि स्थापना से लेकर अभी तक इस तरह का कोई विवाद नहीं था।

    मध्यप्रदेश फार्मेसी काऊंसिल के अध्यक्ष और समिति के वर्तमान अध्यक्ष संजय जैन का कहना था कि श्री महावीर कुंदकुंद दिगंबर जैन वाचनालय एवं पुस्तकालय समिति ने इस सार्वजनिक स्थल के निर्माण के लिए सरकार के विभिन्न मंचों पर सहमति बना ली है जिस दिन सरकार मंदिरों के बारे में कोई फैसला करेगी यहां का भी गतिरोध टूट जाएगा और वाचनालय के साथ मंदिर भी भव्य बन जाएगा। बताया जाता है कि कार्यकाल समाप्त होने की तिथि सामने देख सुनील जैन ने एक पुरानी बंद पड़ी मिलते जुलते नाम वाली समिति की खाना पूर्ति करवाई और उसे असली समिति बताने लगे। इस समिति का नाम  श्री 1008 सुपार्शनाथ दिगंबर जैन समिति है जिसका रजिस्ट्रेशन क्रमांक 1402/1992है।इस समिति का कार्यालय चेतक ब्रिज की रचनानगर साईड है। ये समिति बी-83 के पते पर किसी अन्य व्यक्ति ने पंजीकृत करवाई थी और इस समिति का कस्तूरबा नगर जैन मंदिर से कोई भी लेना देना नहीं है।इसके रजिस्ट्रेशन के वक्त मंदिर का कोई अस्तित्व नहीं था।

           मंदिर निर्माण की ललक रखने वाले भोले भाले श्रद्धालुओं की आंखों में धूल झोंककर जो समिति आनन फानन में तैयार की गई उसकी नकल की पोल पहली बैठक में ही खुल गई। आरटीआई से प्राप्त जानकारी में साफ दिख रहा है कि किस तरह एक ही व्यक्ति ने फर्जी दस्तखत करके समिति को अद्यतन किया है । इसकी आपराधिक जांच भी चल रही है। संजय जैन ने बैंक मैनेजर को जब सारी जानकारी दी तो उन्होंने खाता सीज कर दिया। समस्या ये थी कि ये बैंक खाता अस्थायी उपसमिति के नाम से खोला गया था और उसकी केवाईसी में श्री महावीर कुंदकुंद दिगंबर जैन वाचनालय एवं पुस्तकालय समिति का पैन नंबर दर्ज किया गया था। समिति के सभी सदस्य समिति और उपसमिति दोनों के भी सदस्य थे इसलिए पहले किसी को कोई आपत्ति नहीं थी। बताते हैं कि रोक लगवाए जाने के बाद सुनील जैनाविन ने बैंक मैनेजर को धमकाया और कहा कि वे खाते का संव्यवहार जारी ऱखें क्योंकि खाते में रखा लगभग सवा करोड़ रुपया सदस्यों के प्रयासों से  ही एकत्रित हुआ है। मूल समिति के दस्तावेजों में हेरफेर करके एक फर्जी समिति खड़ी करके फंड पर कब्जा जमाने की ये कोशिश धोखाघड़ी के दायरे में आती है इसलिए संजय जैन ने इसकी शिकायत एसडीएम एमपीनगर श्री सतीश गुप्ता को भी की।  पुलिस कमिश्नर प्रणाली चालू होने के बाद राजस्व संबंधी धोखाघड़ी पर भी राजधानी पुलिस गभीरता से निगरानी कर रही है। जाहिर है गोविंदपुरा पुलिस की जांच में चोर दरवाजे से फंड पर कब्जा और फिजूलखर्ची करने की असली कहानी लोगों के सामने आ जाएगी।

           कस्तूरबानगर जैन मंदिर से जुड़े आम नागरिकों का कहना है कि सुनील जैन अपना रौब जमाने के लिए खुद को महापौर का खासमखास बताते हैं। जबकि वे नगर निगम के एक ब्लैकलिस्टेड ठेकेदार हैं जिन्हें घटिया बिजली का माल सप्लाई के कारण प्रतिबंधित किया गया था। बताते हैं कि वे मंदिर समिति के फंड से निर्माण का काम महापौर से जुड़े ठेकेदारों को दिलवाते रहे हैं। उनकी इस शैली का लाभ मंत्री और स्थानीय विधायक विश्वास सारंग के कई करीबी भी उठाते रहे हैं। पीड़ितों का कहना है कि सुनील खुद को एक बड़े समाचार पत्र समूह के मालिकों का फंड मैनेजर बताकर प्रभाव जमाते हैं। मंदिर समिति से जुड़े लोग ये सब जानते हैं लेकिन वे खुलकर विरोध नहीं कर पा रहे हैं। मंदिर के फंड पर कब्जा जमाने के लिए सुनील ने समानांतर बनाई गई समिति का चुनाव करवाने की तैयारी कर डाली जबकि मूल मंदिर समिति से इसकी कोई अनुमति नहीं ली गई। श्री महावीर कुंदकुंद दिगंबर जैन वाचनालय एवं पुस्तकालय समिति ने बाकायदा नोटिस चिपकाकर इस पर आपत्ति जताई और पुलिस से अनुरोध किया कि इस गैरकानूनी घुसपैठ को रोका जाए क्योंकि इससे शांति भंग होने की संभावना है। पुलिस ने आनन फानन में कार्रवाई की है। संजय जैन ने राजधानी में जैन समाज की प्रतिनिधि संस्था श्री चौक जैन मंदिर कमेटी ट्रस्ट से भी हस्तक्षेप करने का अनुरोध किया है। इस पर चौक कमेटी के अध्यक्ष मनोज जैन बांगा ने कहा कि दोनों पक्ष आपस में मिलजुलकर विवाद को सुलझा लें यदि समाज के लोग अनुरोध करेंगे तो चौक ट्रस्ट भी इसमें हस्तक्षेप करेगा। मामला अब पुलिस और अदालत की चौखट तक पहुंच गया है। जाहिर है इस विवाद ने न केवल जैन समाज बल्कि सभी धार्मिक संस्थाओं में पनप रही लूटपाट और अराजकता की ओर सरकार का ध्यान आकर्षित कराया है।

            धार्मिक संस्थाओं में विधि का पालन न किए जाने से दान दाताओं की भी अनदेखी हो रही है। परमार्थिक दान को आयकर अधिनियम में कई प्रकार की छूट प्रदान की गई है। इसके बावजूद मंदिर के फंड में दान करने वाले नागरिकों को छूट का लाभ नहीं मिल पा रहा है। टैक्स की चोरी और अनियमित लेखों को देखकर चार्टर्ड एकाऊंटेंट श्री नागेन्द्र पवैया ने आपत्ति दर्ज कराई थी और अंकेक्षण का कार्य करने इंकार कर दिया था। उनका कहना था कि मंदिर की प्रभारी समिति के सदस्य नकद आठ लाख रुपए तक अपने पास रखते हैं जो नियमानुसार नहीं है। मंदिर समिति को हाथखर्च के लिए पच्चीस हजार रुपए तक रखने की छूट होती है क्योंकि दान राशि की सीमा बीस हजार रुपए तक निर्धारित है। जैसे ही दान प्राप्त हो उसे समिति के बैंक खाते में जमा कराया जाना चाहिए। मंदिर के खर्चों के बिल और वाऊचर भी आडिट में सामने रखे जाने चाहिए। इस तरह की वित्तीय अनियमिताओं की ओर जब समिति का ध्यान आकर्षित किया गया तो सुनील जैनाविन और उनके कुछ सहयोगी कहने लगे कि हमने कोई घोटाला थोड़ी कर लिया है। जब उनसे कहा गया कि दान का पैसा खाते में जमा क्यों नहीं किया गया था तो उनका कहना था कि वे भूल गए थे। एक सदस्य ने तो अहसान जताते हुए ये भी कहा कि उन्होंने अपनी व्यक्तिगत एफडी तुड़वाकर समिति के खाते में धनराशि जमा कराई है जबकि ऐसा करने की नौबत क्यों आई इस पर समिति के सदस्य खामोश हैं। जाहिर है कि ये खामोशी जैन समाज के भीतर खदबदाते आक्रोश की आहट भी दे रही है। ऩई पीढ़ी के धर्मानुरागी जिस तरह दान देने में उदार हैं उसी तरह वे किसी अनियमितता के भाव को तिरस्कार की नजर से देखते हैं। समय आ गया है कि जब समाज के जिम्मेदार लोगों को गड़बड़ियां सुधारने के लिए आगे आना होगा।उत्तर प्रदेश में तो योगी जी की सरकार जन धन के अतिक्रमणकारियों का मुफीद इलाज कर रही है लेकिन मध्यप्रदेश की नौकरशाही में अभी सुशासन का जज्बा भरने की सख्त जरूरत है।