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  • कोरोना की बूस्टर डोज जरूर लगवाएं बोले स्वास्थ्य मंत्री डॉ.प्रभुराम चौधरी

    कोरोना की बूस्टर डोज जरूर लगवाएं बोले स्वास्थ्य मंत्री डॉ.प्रभुराम चौधरी

    भोपाल, 21 जुलाई( प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)। लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री डॉ. प्रभुराम चौधरी ने कहा कि सभी पात्र व्यक्ति कोविड टीके की प्रिकॉशन (बूस्टर) डोज अवश्य लगवायें। कोविड वैक्सीन अमृत महोत्सव में कोविड-19 प्रिकॉशन डोज 18 वर्ष से अधिक आयु के सभी पात्र व्यक्तियों को नि:शुल्क लगाया जा रहा है। स्वास्थ्य मंत्री डॉ. चौधरी आज होटल अशोक लेक व्यू के ओपन थियेटर में ड्राइव इन वैक्सीनेशन का शुभारंभ कर रहे थे।

    स्वास्थ्य मंत्री डॉ. चौधरी ने कहा कि एम.पी. टूरिज्म, यूनीसेफ और एनएचएम द्वारा ड्राइव इन वैक्सीनेशन का नवाचार किया गया है। इसके लिये अशोक लेक व्यू होटल के ओपन थियेटर परिसर में टीकाकरण केन्द्र बनाया गया है। यहाँ पर कोई भी पात्र व्यक्ति वाहन ड्राइव करते हुए टीकाकरण केन्द्र में पहुँच कर वाहन में बैठे-बैठे कोविड-19 प्रिकॉशन डोज लगवा सकता है। यह सुविधा दिव्यांग और वृद्धजन के लिये आसानी से टीका लगवाने में मददगार है। स्वास्थ्य मंत्री डॉ. चौधरी ने कहा कि इस नवाचार से पहले टीकाकरण अभियान में 50 हजार से अधिक व्यक्तियों को कोविड-19 के टीके लगाये गये।

    स्वास्थ्य मंत्री डॉ. चौधरी ने कहा कि कोविड टीका बहुत महत्वपूर्ण है। टीकाकरण के बाद आई तीसरी लहर में कोविड टीका ने सुरक्षा प्रदान की और जिन्हें कोरोना हुआ, उनमें से बहुत कम को अस्पताल जाना पड़ा। स्वास्थ्य मंत्री डॉ. चौधरी ने सभी नागरिकों से अपील की है कि कोरोना की प्रिकॉशन डोज अवश्य लगवायें। डायरेक्टर एनएचएम (टीकाकरण) डॉ. संतोष शुक्ला, जनरल मैनेजर एम.पी. टूरिज्म श्री के.आर. साद, श्री एस.पी. सिंह, संचार विशेषज्ञ यूनिसेफ मध्यप्रदेश श्री अनिल गुलाटी और डॉ. वंदना भाटिया उपस्थित थीं।

  • कोरोना वायरस के नए वेरिएंट ‘ओमीक्रोन’ ने बढ़ाई चिंता

    कोरोना वायरस के नए वेरिएंट ‘ओमीक्रोन’ ने बढ़ाई चिंता

    नई दिल्ली। दुनियाभर में कोरोना वायरस के नए वेरिएंट को लेकर चिंता जताई जा रही है। इसे अब तक का सबसे ज्यादा म्यूटेशन वाला वेरिएंट बताया जा रहा है। इसके सामने आने के बाद सवाल उठने लगे हैं कि ये नया वेरिएंट कितना संक्रामक है, वैक्सीन के बावजूद भी ये कितनी तेजी से फैल सकता है और इसे लेकर क्या करना चाहिए?

    विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने कोरोना वायरस के एक नए वेरिएंट को लेकर चिंता जाहिर की है। उसने इसे वेरिएंट ऑफ कंसर्न (वीओसी) बताते हुए इसका नाम ओमीक्रोन (Omicron) रखा है। डब्ल्यूएचओ ने चेतावनी देते हुए कहा कि यह काफी तेजी से और बड़ी संख्या में म्यूटेट होने वाला वेरिएंट है। उसने बताया है कि इस वेरिएंट के कई म्यूटेशन चिंता पैदा करने वाले हैं। इसलिए शुरुआती साक्ष्यों के आधार पर डब्ल्यूएचओ ने कहा है कि इस म्यूटेशन के चलते संक्रमण का खतरा बढ़ गया है। बता दें कि डब्ल्यूएचओ को इस वेरिएंट के पहले मामले की जानकारी 24 नवंबर को दक्षिण अफ्रीका से मिली थी। इसके अलावा बोत्सवाना, बेल्जियम, हांगकांग और इसराइल में भी इस वेरिएंट की पहचान हुई है। इस वेरिएंट के सामने आने के बाद दुनिया के कई देशों ने दक्षिणी अफ्रीका से आने-जाने पर प्रतिबंध लगाने का फैसला किया है।

    अमेरिकी अधिकारियों ने भी दक्षिण अफ्रीका, बोत्सवाना, जिम्बॉब्वे, नामीबिया, लेसोथो, इस्वातिनी, मोज़ाम्बिक और मलावी से आने वाली उड़ानों को रोकने का फ़ैसला किया है. यह प्रतिबंध सोमवार से लागू हो जाएगा. यूरोपीय संघ के देशों और स्विट्ज़रलैंड ने भी कई दक्षिणी अफ़्रीकी देशों से आने-जाने वाले विमानों पर अस्थायी रोक लगा दी है.

    भारत सरकार भी अलर्ट
    भारत के केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने नए वेरिएंट की गंभीरता को देखते हुए राज्यों को निर्देश दिया है कि वे दक्षिण अफ्रीका, हॉन्ग कॉन्ग और बोत्स्वाना से आने या जाने वाले यात्रियों की सख्ती से जांच करें और उनका परीक्षण करें। स्वास्थ्य सचिव राजेश भूषण ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को पत्र लिख कर कहा है कि भारत के नेशनल सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल (एनसीडीसी) ने सरकार को सूचित किया है कि ‘बोत्स्वाना, दक्षिण अफ्रीका और हॉन्ग कॉन्ग में नए कोविड-19 वेरिएंट बी.1.1529 के कई मामले दर्ज किए गए हैं। स्वास्थ्य मंत्रालय ने ये भी कहा है कि जारी दिशानिर्देशों के अनुसार इन अंतरराष्ट्रीय यात्रियों के संपर्कों में आए सभी लोगों को बारीकी से ट्रैक और टेस्ट किया जाना चाहिए। प्रधानमंत्री मोदी ने भी कहा कि अधिक सतर्क रहने और मास्क तथा सोशल डिस्टेंसिंग जैसी उचित सावधानी बरतने की जरूरत है।

  • सीएम योगी बोले कोरोना रोधी टीका लगवाएं

    सीएम योगी बोले कोरोना रोधी टीका लगवाएं

    लखनऊ। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा है कि दुनिया के कई देशों में कोरोना संक्रमण फिर तेजी से बढ़ रहा है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में देश और प्रदेश ने कोरोना पर सफल नियंत्रण पा लिया है, फिर भी दुनिया मे संक्रमण के नए दौर को लेकर हमें सतर्कता पर जरूर ध्यान रखना होगा. दो गज की दूरी, मास्क है जरूरी के मंत्र का अनुसरण करने के साथ ही जिन लोगों ने अब तक वैक्सीन नहीं लगवाई है उन्हें वैक्सीन लगवाने को प्रेरित करें. वैक्सीन के बहाने सीएम योगी आदित्यनाथ ने विपक्ष को भी आड़े हाथ लिया. उन्होंने माइक्रो-ब्लॉगिंग ऐप Koo पर पोस्ट कर कहा कि दोहरे चरित्र और गिरगिट की तरह रंग बदलने वाले विपक्ष के बहकावे में मत आइएगा. ये लोग चुपचाप वैक्सीन ले लेते हैं और कहते हैं कि हमने वैक्सीन नहीं ली. जनता से अपील है कि सभी पात्र लोग वैक्सीन अवश्य लें, किसी के बहकावे में न आएं.

    लॉकडाउन में उत्तर प्रदेश ऐसा पहला राज्य था जिसने गरीबों, श्रमिकों को भरण-पोषण भत्ता दिया। 54 लाख श्रमिकों को इसका लाभ मिला. सरकार ने मुफ्त में खाद्यान्न वितरण भी प्रारम्भ किया जो अनवरत जारी है. उन्होंने कहा कि पीएम मोदी ने सभी के लिए मुफ्त कोरोना जांच, इलाज और वैक्सीन की व्यवस्था की. इस दौरान मुख्यमंत्री ने उपस्थित जनसमूह से कोविड वैक्सीन लगवाने के बारे में पूछा. सबके हाथ उठाने पर उन्होंने कहा कि आपके आसपास जो लोग भी बचे हों, उन्हें वैक्सीन लगवाने के लिए प्रेरित करें. सीएम ने बताया कि देश में 125 करोड़ लोगों को वैक्सीन लगाई जा चुकी है. उत्तर प्रदेश में भी 16 करोड़ लोगों को एक या दो डोज़ लग चुकी है. विपक्ष पर निशाना साधते हुए सीएम योगी आदित्यनाथ ने कहा कि दुर्भाग्य से अगर पूर्व की सरकारों में कोरोना का संकट आया होता तो बाप-बेटे भाग गए होते, बुआ-बबुआ लापता हो गए होते, भाई-बहन का कहीं पता नहीं चलता और जनता तड़प रही होती. लेकिन भाजपा की केंद्र व प्रदेश सरकार जनता के साथ थी.

  • आयुर्वेद में पहले से उपलब्ध है वायरस मुक्ति का उपायःआचार्य हुकुमचंद शनकुशल

    आयुर्वेद में पहले से उपलब्ध है वायरस मुक्ति का उपायःआचार्य हुकुमचंद शनकुशल

    भोपाल,8 अप्रैल(प्रेस इन्फार्मेशन सेंटर)। आयुर्वेद की शास्त्रोक्त पद्धति से बनाई गईं औषधियां कोरोना को परास्त करने में पूरी तरह सक्षम हैं।इसके पहले भी वायरसों के हमलों से आयुर्वेद रक्षा करता रहा है। आधुनिक चिकित्सा के वैज्ञानिक अनुसंधानों के बीच आयुर्वेद की जो परंपरा भुला दी गई है उस पर अमल करके भारत को दुनिया का मार्गदर्शन करना चाहिए। राजधानी में भारतीय योग अनुसंधान केन्द्र आनंदनगर के संस्थापक आचार्य हुकुमचंद शनकुशल ने कोरोना के उपचार की जो दवाएं विकसित की हैं वे उनके माध्यम से लोगों को मुफ्त उपचार सेवाएं भी दे रहे हैं।

    श्री शनकुशल ने बताया कि उन्होंने आयनिक पानी और अग्नि तत्व के माध्यम से कोरोना के उपचार की पूरी विधि विकसित की है। इस उपचार विधि में स्वर्णिम जल, विष्णुजल,नस्य, और धूनी मसाला व शर्बत बनाया है जो कोरोना संक्रमण को रोकने में कारगर है। उन्होंने अपने दावे की प्रमाणिकता को साबित करने के लिए आयुर्वेद में दिए गए उपायों का भी विवरण प्रस्तुत किया है। आयनिक जल का प्रयोगशाला में भी परीक्षण कराया गया है जिससे इसके सुरक्षित होने का विश्वास बढ़ेगा। इन दवाओं से उन्होंने आम मरीजों की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में सफलता भी पाई है।

    योग और आयुर्वेद को पिछले पचास सालों से भी अधिक समय से वैज्ञानिक आधार पर परिभाषित करते रहे आचार्य हुकुमचंद शनकुशल ने बताया कि ये जग जाहिर तथ्य है कि पीने का पानी यदि शुद्ध हो तो कई बीमारियों से बचा जा सकता है। पानी हमारी कोशिकाओं का प्रमुख तत्व भी होता है। हमारा शरीर कई किस्म के न्यूरोन्स की गतिविधियों से ही सक्रिय रहता है। यही वजह है कि स्वर्णिम जल शरीर पर तुरंत असर करता है। इसे बनाने के लिए ज्वालामुखी के चार सौ फीट की गहराई से निकाले गए पानी का शोधन किया जाता है।इस पानी में सोना, मैग्नीशियम और एल्यूमीनियम जैसे तत्वों के लवण मौजूद हैं। गहन चुंबकीय क्षेत्र से गुजारे गए इस पानी को सोने और तांबे के बीच से गुजारा जाता है। यही वजह है कि ये आयनिक पानी हमारे शरीर पर तेज असर डालता है। सरकार यदि पहल करे तो आम जनता को ये जल बहुत सस्ती कीमत पर उपलब्ध कराया जा सकता है।

    आचार्य हुकुमचंद शनकुशलः विश्व को स्वस्थ और सफल बनाने का सतत अनुष्ठान

    गौमूत्र से निर्मित विष्णुजल कोरोना जैसे वायरसों को निष्क्रिय करने में प्रभावी भूमिका निभाता है। शास्त्रोक्त विधि से इसे बनाने का विवरण कई ग्रंथों में पहले से मौजूद है। इसे बनाने के लिए आठ लीटर बछिया के मूत्र में आधा किलो सौंफ, आधा किलो धनिया मिलाकर 24 घंटे के लिए रख दिया जाता है। इसके बाद इसा अर्क उतार लिया जाता है। पांच लीटर इस अर्क में 250 ग्राम गंधक शोधित आंवला सार, 250 ग्राम चूना, 5 ग्राम लौंग, 5 ग्राम इलायची मिलाई जाती है। इसे नारंगी होने तक उबाला जाता है और फिर 24 घंटे बाद निथारकर छानकर रख लिया जाता है। इससे त्वचा को शुद्ध किया जाता है और शरीर पर भी छिड़ककर वायरस को निष्क्रिय कर दिया जाता है।

    कोरोना जिस तरह से मस्तिष्क की चेतना प्रभावित करता है और फेंफड़ों में रुकावट लाता है उसे बेअसर करने के लिए वैदिक नस्य बनाई जाती है। इसमें अपामार्ग, अरीठा, आक(मदार), गोलोचन, और केसर डालकर पीसा जाता है। इसे बनाने के लिए 25ग्राम चावल का आटा, 2 ग्राम शुद्ध केसर, 10 ग्राम अपामार्ग का आटा, 70 मिलीग्राम सफेद अर्क का दूध मिलाकर 24 घंटे बाद घोंटा जाता है। 5 ग्राम अरीठे का झाग 2 मिलीलीटर मिलाकर तब तक घोंटा जाता है जब तक कि ये सूख न जाए। इसमें 1 ग्राम शुद्ध गोलोचन मिलाकर घोंट दिया जाता है। इस नस्य को दिन में 11 बजे से 4 बजे के बीच सूंघा जाता है। अंगूठा और उसके पास वाली उंगली से चुटकी भर नस्य लेकर जोर से सूंघा जाता है। सूर्य की ओर नासा छिद्र करके सांस ली जाती है तो छींकें आने लगती हैं। कफ निकलने के बाद छींकें बंद हो जाती है। इसके बाद उंगली में थोड़ा गाय का घी मिलाकर नाक का सूखापन दूर कर दिया जाता है। इसके उपयोग से नाक से पानी बहना, सर्दी जुकाम और बुखार से रक्षा होती है और मस्तिष्कीय चेतना बढ़ती है।

    कोरोना में फेंफड़ों में फाईब्राईड विकसित हो जाते हैं और उनका स्पंज समाप्त होने लगता है।इससे फेंफड़ों में सांस रोक सकने की क्षमता समाप्त हो जाती है। इसका इलाज हवन प्रक्रिया से किया जाता है। हवन की जो समिधा बनाई जाती है उसमें अर्क(मदार) की लकड़़ी का उपयोग होता है। धूम लेने के लिए काले धतूरे के पत्ते, सत्यानाशी के बीज, बिल्ली की विष्टा, मोर पंख, गाय का सींग, सांप की केंचुली, नीम के पत्ते, वासा की छाल, अर्क के फूल, तुलसी पत्र, बहेड़ा पाऊडर, घी, शहद और गुग्गल मिलाकर धूनी दी जाती है। इससे फेंफड़े खराब नहीं हो पाते। अथर्व वेद की भूत विद्या में इस फार्मूले का विवरण दिया गया है। सन्निपात, भूत बाधा और नाड़ी चिकित्सा में ये विधि बहुत सफल साबित होती रही है। कोरोना वायरस को बेअसर करने में भी यही विधि रामबाण साबित होगी।

    गले की नली में खराश करने वाला कोरोना वायरस लिवर और किडनी को भी क्षतिग्रस्त करता है। इसके निदान के लिए आंवला, बहेड़ा, पारिजात और गुड़हल के फूल का शरबत रोगी को पिलाया जाता है। इससे वायरस का असर भी समाप्त होता है और पीड़ित की चेतना भी लौटने लगती है।

    श्री शनकुशल ने बताया कि पूरी चिकित्सा विधि अग्नि और आयनिक जल के प्रयोग पर केन्द्रित है। इसका असर अब तक वायरसों के आक्रमण से रक्षा के लिए होता रहा है। यजुर्वेद में भी इन विधियों का उल्लेख है। बड़े पैमाने पर ये कार्य सरकारी संरक्षण के बगैर संभव नहीं है। यदि कोरोना संक्रमितों को इस विधि से उपचार दिया जाए तो न केवल मरीजों को ठीक किया जा सकता है बल्कि देश के संसाधनों की बड़ी क्षति भी बचाई जा सकती है।

  • दिल्ली से मजदूरों को किसने खदेड़ा

    दिल्ली से मजदूरों को किसने खदेड़ा

    प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने जब देश में 21 दिनों के लॉक डाऊन की घोषणा की तो लोगों को लगा कि ये कैसे संभव होगा। प्रधानमंत्री ने हाथ जोड़कर अपील की और कहा कि लॉक डाऊन का मतलब पूरा बंद है। रेल और बसों का परिवहन भी रोक दिया गया। हवाई मार्ग पर भी रोक लगा दी गई। इसके बावजूद कुछ राज्यों में मजदूरों के घर लौटने की कवायद जारी है। प्रधानमंत्री ने राज्य सरकारों से जरूरत मंदों को खाना उपलब्ध कराने और खाद्य सामग्री की आपूर्ति जारी रखने के निर्देश दिए थे। इसके बावजूद केरल और दिल्ली से भारी संख्या में मजदूरों का पलायन हुआ है। दिल्ली में तो प्रशासनिक अधिकारियों ,मस्जिदों और आप पार्टी के कार्यकर्ताओं की ओर से ऐलान किया गया कि आपको डीटीसी की बसों से यूपी सीमा से लगे आनंद विहार बस अड्डे तक छोड़ा जा रहा है। योगी सरकार ने वहां बसें उपलब्ध कराईं हैं जिनसे आपको आपके घरों तक छोड़ा जाएगा। इस ऐलान के बाद हजारों लोगों की भीड़ बसों में भरकर यूपी बार्डर तक पहुंच गई।हजारों मजदूर तो पैदल ही घरों की ओर रवाना हो गए। जब उन्हें यूपी सरकार की बसें नहीं मिलीं तो वे पैदल ही बच्चों महिलाओं समेत अपने गांवों की ओर चल दिए।जब शोर मचा तो प्रशासन ने उनके लिए भोजन की व्यवस्था कराई और संक्रमण फैलने के खतरों के बीच इन मजदूरों को उनके घरों तक छोड़ा गया । इस पलायन ने पूरे देश में कोरोना संक्रमण फैलने की आशंका जगा दी है। राज्य सरकारों की गैर जिम्मेदारी का ये नमूना ठेठ दिल्ली में ही देखने मिला है।

    चीनी वायरस कोरोना के कहर से इन दिनों पूरी दुनिया हलाकान है। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने इसे महामारी घोषित किया है।भारत में लगभग एक हजार पचास मरीजों में कोरोना वायरस की पहचान की गई है। देश के विभिन्न अस्पतालों में उनका इलाज किया जा रहा है। इस वायरस के प्रति रोग प्रतिरोधक टीके के विकास के प्रयास चल रहे हैं लेकिन टीके का विकास इतनी जटिल प्रक्रिया है कि उसे तत्काल न तो बनाया जा सकता है और न ही पूरी दुनिया में उसे उपलब्ध कराया जा सकता है। भारत की विशाल आबादी के बीच इसे फैलने से बचाने के लिए आईसीएमआर और देश के विशेषज्ञों ने त्वरित उपाय के रूप में रोग के प्रसार की कड़ी तोड़ने की सलाह दी थी। ये तभी संभव था कि जब 130करोड़ लोगों को उनके घरों में ही रोक दिया जाए। चीन के वुहान राज्य में फैले कोरोना संक्रमण के बाद चीनी सरकार ने लगभग तीन अरब लोगों को अपने घरों में कैद करने का विशाल अभियान चलाया था। चीनी पुलिस और सेना ने लोगों को घरों तक सीमित करने के लिए सख्त कवायद की तब जाकर संक्रमण का फैलाव रोका जा सका। विश्व के अन्य देशों से सबक लेकर ही भारत में संपूर्ण लॉक डाऊन का फैसला लिया गया। इससे विश्व के कई देशों की तरह भारत की अर्थव्यवस्था को भी भारी क्षति पहुंचने का अंदेशा है, इसके बावजूद कोई अन्य विकल्प नहीं था।

    अमेरिका, इटली, जर्मनी,आस्ट्रेलिया ने चीन की स्थितियों से सबक नहीं लिया। नतीजतन इन देशों में कोरोना संक्रमण से मरने वालों की तादाद चीन के आंकड़ों को भी पार कर गई। भारत में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने डाक्टरी सलाह को पूरे देश में लागू किया और संक्रमण दो चरण पार होने के बाद भी तीसरे चरण में नहीं पहुंच पाया है। तीसरे चरण का मतलब है कि महामारी घर घर तक फैल जाए। यदि ऐसा हो जाता तो भारत की स्वास्थ्य सुविधाएं अचानक अस्पताल पहुंचने वाली मरीजों की भीड़ से नहीं निपट सकती थीं। वैसे भी स्वास्थ्य सुविधाओं के लिहाज से भारत दुनिया में 120 देशों के पीछे खड़ा है। भारत में सरकारी ढांचे की विफलताओं के बाद बड़े पैमाने पर स्वास्थ्य को उद्योग का दर्जा देकर निजी निवेश से स्वास्थ्य सुविधाओं में सुधार के प्रयास किए गए हैं लेकिन इससे भारत के लोगों पर दोहरा बोझ पड़ रहा है। उन्हें इलाज निजी अस्पतालों में करवाना पड़ता है जबकि सरकारी तंत्र को पालने के लिए अपनी जेब से मोटी रकम खर्च करनी पड़ती है। मूर्खतापूर्ण ढंग से किए गए घटिया सरकारीकरण जिस तरह भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ा उसे देखकर कोरोना संकट ज्यादा भयावह नजर आने लगा है। अमीर देशों की स्वास्थ्य सुविधाएं जब कोरोना का कहर आते ही चरमरा गईं तो भारत में तो इसकी भयावहता का अंदाजा लगाना भी मुश्किल है। मजदूरों के कल्याण का नारा देने वाली केरल की कम्युनिस्ट सरकार हो या कांग्रेस और कम्युनिस्ट की संकर सोच से उपजी दिल्ली की आप पार्टी सरकार सभी ने मजदूरों को उकसाकर वोट कबाड़ने की जो रणनीति अपनाई उससे कोरोना संकट का खतरा बढ़ गया है। इन सरकारों को लगा कि यदि कोरोना संकट बढ़ा तो हमारे अस्पताल आबादी के बोझ को सहन नहीं कर पाएंगे इसलिए भविष्य की बदनामी से बचने के लिए उन्होंने मजदूरों को खदेड़ना शुरु कर दिया। जब औद्योगिक विकास के लिए उन्हें मजदूर मिल रहे थे तो वे खुश थे क्योंकि इससे उन्हें राज्य में टैक्स अधिक मिलता था। लेकिन जब महामारी के आसन्न संकट का बोझ आता दिखा तो उन्होंने मजदूरों से सबसे पहले पिंड छुड़ाया। इस तरह की अमानवीयता दिल्ली की वो आप पार्टी सरकार कर रही है जिसने मोहल्ला क्लीनिक के नाम पर पूरे देश में स्वास्थ्य सुविधाओं का ढिंडोरा पीटा था। अब जबकि केन्द्र सरकार ने नाराजगी व्यक्त करते हुए वरिष्ठ अधिकारियों पर गैर जिम्मेदारी से काम करने की वजह से उन्हें हटाना शुरु कर दिया है तब दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल टीवी पर आकर लोगों से अपने ही घरों में रुके रहने की अपील कर रहे हैं। भारत की राजनीति का ये अंधियारा पक्ष है जिसकी वजह से भारत आज भी छोटी सोच वाले विकासशील देश से आगे नहीं बढ़ पा रहा है। महामारी जैसे संकट से निपटने के लिए राज्यों की सरकारें यदि देश की नीति के साथ कदमताल नहीं कर पा रहीं हैं तो फिर इन सरकारों को बर्खास्त करके वहां राष्ट्रपति शासन लगा दिया जाना चाहिए ताकि देश को महामारी के प्रकोप से होने वाली क्षति से बचाया जा सके।

  • कोरोना वायरस का असर महामारी घोषित

    कोरोना वायरस का असर महामारी घोषित

    दिल्ली,13 मार्च(प्रेस सूचना केन्द्र)। चीन में तबाही मचाने वाला कोरोना वायरस अब पूरे विश्व में अपनी मौजूदगी दर्ज करा रहा है। चीन से बाहर 122 देशों में कोरोना वायरस के मामलों की पुष्टि हुई है. इन देशों में थाईलैंड, ईरान, इटली, जापान, सिंगापुर, दक्षिण कोरिया, ऑस्ट्रेलिया, मलेशिया, अमेरिका, फ्रांस, जर्मनी और संयुक्त अरब अमीरात शामिल हैं. आइए जानते हैं कि इस वायरस के लक्षण और बचाव के तरीके क्या हैं.

    कोरोना वायरस का संबंध वायरस के ऐसे परिवार से है, जिसके संक्रमण से जुकाम से लेकर सांस लेने में तकलीफ जैसी समस्या क्या है कोरोना वायरस? कोरोना वायरस का संबंध वायरस के ऐसे परिवार से है, जिसके संक्रमण से जुकाम से लेकर सांस लेने में तकलीफ जैसी समस्या हो सकती है. इस वायरस को पहले कभी नहीं देखा गया है. इस वायरस का संक्रमण दिसंबर में चीन के वुहान में शुरू हुआ था. डब्लूएचओ के मुताबिक, बुखार, खांसी, सांस लेने में तकलीफ इसके लक्षण हैं. अब तक इस वायरस को फैलने से रोकने वाला कोई टीका नहीं बना है. क्या हैं इस बीमारी के लक्षण? इसके लक्षण फ्लू से मिलते-जुलते हैं. संक्रमण के फलस्वरूप बुखार, जुकाम, सांस लेने में तकलीफ, नाक बहना और गले में खराश जैसी समस्या उत्पन्न होती हैं. यह वायरस एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में फैलता है. इसलिए इसे लेकर बहुत सावधानी बरती जा रही है. कुछ मामलों में कोरोना वायरस घातक भी हो सकता है. खास तौर पर अधिक उम्र के लोग और जिन्हें पहले से अस्थमा, डायबिटीज़ और हार्ट की बीमारी है. क्या हैं इससे बचाव के उपाय? स्‍वास्‍थ्‍य मंत्रालय ने कोरोना वायरस से बचने के लिए दिशानिर्देश जारी किए हैं. इनके मुताबिक, हाथों को साबुन से धोना चाहिए. अल्‍कोहल आधारित हैंड रब का इस्‍तेमाल भी किया जा सकता है. खांसते और छीकते समय नाक और मुंह रूमाल या टिश्‍यू पेपर से ढककर रखें. जिन व्‍यक्तियों में कोल्‍ड और फ्लू के लक्षण हों उनसे दूरी बनाकर रखें. अंडे और मांस के सेवन से बचें. जंगली जानवरों के संपर्क में आने से बचें. विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के सात स्टेप्स विश्व स्वास्थ्य संगठन ने सात आसान स्टेप्स बताए हैं, जिनकी मदद से कोरोना वायरस को फैलने से रोका जा सकता है और खुद भी इसके इंफेक्शन से बचा जा सकता है.

    भारत सरकार ने भी कोरोना वायरस के लक्षण मिलने पर तत्काल स्वास्थ्य केंद्र पर सूचना देने को कहा है. स्वास्थ्य मंत्रालय की तरफ से 24 घंटे चलने वाला कंट्रोल रूम तैयार किया गया है. फोन नंबर 011-23978046 के माध्यम से कंट्रोल रूम में संपर्क किया जा सकता है. इसके अलावा [email protected] पर मेलकर के भी कोरोना वायरस के लक्षणों या किसी भी तरह की आशंकाओं के बारे में जानकारी ली जा सकती है.

    चीन और इटली में सबसे ज्यादा असरचीन और इटली में सबसे ज्यादा असर

    चीन में इस वायरस का बहुत ज्यादा असर पड़ा है. सबसे ज्यादा असर चीन की अर्थव्यवस्था पर पड़ा है. पहले ही चीन की अर्थव्यवस्था सुस्ती के दौर में है. लगभग 18 साल पहले सार्स वायरस से भी ऐसा ही खतरा बना था. 2002-03 में सार्स की वजह से पूरी दुनिया में 700 से ज्यादा लोगों की मौत हुई थी. इटली में भी अब तक 800 से ज्यादा मौतें हो चुकी हैं.

    क्या आप जानते हैं कि कोरोना वायरस यानी कि क्या आप जानते हैं कि कोरोना वायरस यानी कि Coronavirus disease (COVID-19) बहुत सूक्ष्म लेकिन प्रभावी वायरस है. कोरोना वायरस मानव के बाल की तुलना में 900 गुना छोटा है. आकार में इस छोटे वायरस ने पूरी दुनिया को डरा दिया है. इसका खौफ आज दुनियाभर में दिख रहा है.

  • कोरोना वायरस संक्रमण से मुक्ति दिलाएगा आयुर्वेद

    कोरोना वायरस संक्रमण से मुक्ति दिलाएगा आयुर्वेद

    भोपाल,28 फरवरी(प्रेस सूचना केन्द्र)। कोरोना वायरस(Corona Virus) ने चीन में जिस तरह का कोहराम मचा रखा है उससे पूरी दुनिया दहशत में आ गई है। विश्व के कई देशों में कोरोना वायरस से निपटने की तैयारियां चल रहीं हैं। वे देश खासे दहशत में हैं जहां मांसाहार को बड़े पैमाने पर अपनाया जाता है। यही वजह है कि कई देशों में शाकाहार अपनाने की मुहिम चल पड़ी है। इस बीच भारत में कोरोना वायरस का इलाज आयुर्वेदिक तरीकों से करने के दावे किए जाने लगे हैं। कमोबेश यही दावे एड्स जैसी बीमारी को नियंत्रित करने के भी किए जाते रहे हैं।

    दरअसल में आयुर्वेदिक चिकित्सा पद्धति जीवन दर्शन की वो शैली है जो इंसान को रोगों की गिरफ्त में ही नहीं आने देती। यदि भूल वश स्वस्थ इंसान का शरीर बीमार भी हो जाए तो आयुर्वेद में वात पित्त और कफ को संतुलित करके स्वस्थ बनाने की विधि मौजूद है। नाड़ी विज्ञान से शरीर की दशा को समझा जाता है फिर आयुर्वेदिक दवाओं से नाड़ी को संतुलित किया जाता है। इसी विधि से जटिल से जटिल रोगों का उपचार हो जाता है। यह उपचार पूरे प्राकृतिक तरीकों से किया जाता है।

    कोरोना वायरस के प्रकोप को लेकर मध्यप्रदेश के वरिष्ठ आयुर्वेदाचार्य कहते हैं कि आयुर्वेदिक दवाओं के संतुलित इस्तेमाल से कोरोना वायरस से मुक्ति पाई जा सकती है। जो फार्मूला सुझाया गया है उसके मुताबिक हरिद्राखंड, संशमणि बटी, और त्रिकटु चूर्ण के युक्तियुक्त प्रयोग से कोरोना वायरस आसानी से परास्त हो सकता है। तुलसी और गिलोय का काढ़ा जिसमें सात काली मिर्च डालकर उबाला गया हो वह कोरोना वायरस के संक्रमण को समाप्त कर सकता है। भारत में फेंफड़ों के रोगों और सर्दी जुकाम में इन दवाओं का इस्तेमाल सदियों से किया जाता रहा है। ये दवाएं सभी प्रमुख आयुर्वेदिक दवा फार्मेसियां बनाती हैं।

    हरसिंगार के पांच पत्तों की चाय बनाकर पीने से भी गंभीर संक्रमण को रोकने में मदद मिलती है।