मध्य प्रदेश में, भाजपा ने निर्णय लिया है कि अब राज्य के मंत्रियों को हफ्ते में पांच दिन दोपहर 1 से 3 बजे तक पार्टी (प्रदेश) कार्यालय में बैठना होगा, ताकि कार्यकर्ता और आम लोग सीधे उनसे अपनी समस्याएँ या सुझाव रख सकें। इस व्यवस्था के तहत सोमवार से शुक्रवार हर दिन दो-दो मंत्री लगाए जाएँगे। शनिवार–रविवार इस सूची में नहीं होंगे। इस पहल की शुरुआत राज्य के उपमुख्यमंत्री और अन्य राज्य मंत्रियों से की गई है।
राजस्थान के भाजपा कार्यालय में “वर्कर हियरिंग” (कार्यकर्ता सुनवाई) का ये मॉडल लागू किया गया है, जहाँ मंत्री प्रति हफ्ते तय दिन कार्यालय में बैठेंगे।इस व्यवस्था से जमीनी स्तर पर कार्य करने वाला कार्यकर्ता सीधे सरकार के शीर्ष व्यक्ति से सीधे संवाद कर पाएगा।ये कामकाजी व्यवस्था कार्यकर्ताओं व आम लोगों को सीधे अपने प्रतिनिधियों (मंत्रियों) तक पहुँचने का अवसर देती है। इससे संगठन और सरकार में “नीचे से ऊपर” (bottom-up) संवाद की संभावना बढ़ती है।
सरकारी ढांचे के कार्य करने का जो माडल आजादी के बाद से बना हुआ था उसमें भाजपा की सरकारों ने मुख्यमंत्री से सीधे मुलाकात का माडल विकसित किया था। इसके पहले की कांग्रेसी सरकारों के मंत्री अपने बंगलों पर जनता से मुलाकात करते रहे हैं। वहां मंत्री के स्टाफ का एक काकस स्थापित हो जाता था और तबादलों, पोस्टिंग के अलावा कई अन्य जन शिकायतों का निवारण किया जाता था।इस व्यवस्था में अक्सर शिकायतकर्ता (worker / आम नागरिक) को लम्बा इंतजार करना पड़ता था, या मंत्री तक पहुँचने में दिक्कत होती थी। अब तय समय होने से, मुद्दों को सुनने व समाधान का असली मौका मिलेगा।इससे प्रशासन में जवाबदेही (accountability) और प्रतिसाद (responsiveness) की छवि मजबूत हो सकती है। पार्टी कार्यकर्ता महसूस कर सकते हैं कि “उनकी आवाज सुनी जाती है” — इससे संगठन में भरोसा और जुड़ाव (motivation) बनेगा। विशेष रूप से, ऐसे कार्यकर्ताओं जिन्हें पहले अनदेखा महसूस होता था, वे अब सक्रिय और जागरूक महसूस करेंगे।
सीधे जनता से संवाद होने से क्षेत्र की विशिष्ट समस्याएं, लोक-विकास की मांगें, समझौतों की जरूरत आदि सामने आएँगी।इससे सरकार को नीतिगत फैसलों में grassroots का इनपुट मिलेगा, जो विकास व प्रशासन में सुधार ला सकता है। भक्त या समर्थक नहीं बस, आम नागरिक या कार्यकर्ता भी अपनी बात रख सकते हैं — इससे राजनीतिक जीवन थोड़ा “लोक-केंद्रित” बनेगा।
केवल दो घंटे प्रतिदिन और सिर्फ दो मंत्री से बहुत सारे कार्यकर्ता या आम लोग अपनी बातें पूरी तरह नहीं रख पाएँगे। केवल सुनना पर्याप्त नहीं है; समस्या हल करना अलग है। संसाधन, अधिकार, बजट, प्रशासनिक बाधाएं आदि हो सकते हैं।यदि केवल पार्टी कार्यकर्ताओं को प्राथमिकता दी गई आम नागरिकों या निवासियों को नहीं तो लोकतंत्र से समाधान के मूल लक्ष्य को हासिल नहीं किया जा सकेगा। वे ही लोग आगे आएंगे जिनके पास पहुंच होगी; इससे “नज़रअंदाज़” वर्ग फिर पीछे रह सकते हैं।
जब मंत्री नियमित रूप से संगठन कार्यालय में बैठेंगे, तो सरकार तथा पार्टी की भूमिका और दायित्व में कई भ्रम भी फैल सकते हैं। कार्यकर्ता-मुद्दों पर सरकारी फैसले लेंगे या सिर्फ उनके प्रश्नों का जवाब देकर अपना ज्ञान पेलेंगे। यह कदम संभवतः 2027 के लिए तैयारियों की दिशा में है पार्टी संगठन को मजबूत करना, grassroots कार्यकर्ताओं को जोड़ना, सुनने की संस्कृति बनाना। यह जनता (या कार्यकर्ता) के दृष्टिकोण से भाजपा की “खुली” और “जवाबदेह” छवि पेश करता है, जिससे विपक्षी आलोचना कम हो सकती है।
क्षेत्रीय और स्थानीय स्तर पर पार्टी की पकड़ मजबूत होगी जिससे मतदाताओं से जुड़ाव आसान होगा। लेकिन अगर यह सिर्फ एक दिखावा (symbolic gesture) बना रह गया , जहाँ सुनने का समय है, लेकिन समाधान नहीं — तो आलोचना और असंतोष भी बढ़ सकता है।ये कहा जा सकता है कि यह व्यवस्था सही दिशा में एक सकारात्मक पहल है, बशर्ते इसे सिर्फ “प्रोटोकॉल” न समझा जाए, बल्कि “सशक्त लोकतांत्रिक संवाद” के रूप में सक्रिय रूप से लागू किया जाए। अगर मंत्रियों ने वास्तव में जनता व कार्यकर्ताओं की सुनवाई की, उनकी समस्याओं पर संवेदनशीलता दिखायी, और त्वरित समाधान व असर दिखाया तो इससे पार्टी-सरकार दोनों को ही लाभ होगा। लेकिन सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि यह व्यवस्था कितनी नियमित, पारदर्शी, निष्पक्ष और जवाबदेह साबित होती है।
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मुख्यमंत्री मोहन यादव की दहाड़ पर सदन में छाया सन्नाटा
भोपाल,01 जुलाई(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)। मध्यप्रदेश विधानसभा के मानसून सत्र में आज मुख्यमंत्री डाक्टर मोहन यादव ने पहली बार जिस सख्त लहजे में जवाब दिया उससे पूरे सदन में अचानक सन्नाटा फैल गया। कमोबेश दो दशक बाद पहली बार सदन के नेता की दहाड़ ने नेतृत्व की मौजूदगी का अहसास कराया है।
मामला कथित नर्सिंग भर्ती घोटाले का था जिसमें विपक्ष ये कहते हुए आक्रामक था कि सरकार इस मुद्दे पर चर्चा नहीं कराना चाहती क्योंकि इससे उसकी नाकामियां उजागर होने वाली हैं। विपक्ष में बैठे कांग्रेस के कई सदस्य सफेद एप्रिन पहिनकर सदन में आए थे। चिकित्सा शिक्षा विभाग पर दिए गए स्थगन प्रस्ताव पर चर्चा कराए जाने के लिए उन्होंने सदन में दबाव बनाना शुरु किया था। नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने विधानसभा अध्यक्ष नरेन्द्र सिंह तोमर से कहा कि हमारे तीस चालीस सदस्यों ने स्थगन प्रस्ताव देकर इस लोक महत्व के विषय पर चर्चा कराने की मांग की है। ये मामला युवाओं से जुड़ा है और परीक्षाओं व संचार घोटालों की वजह से वे परेशान हैं। इस विषय पर सदन में चर्चा की जानी चाहिए।
इस पर संसदीय कार्य मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने कहा कि मध्यप्रदेश विधानसभा एवं कार्य संचालन संबंधी पुस्तिका के पेज क्रमांक साठ पर साफ लिखा है कि जो मुद्दे किसी न्यायाधिकरण आयोग आदि के सामने विचाराधीन हैं उन विषयों पर चर्चा नहीं की जाती है। इन मामलों में जांच एजेंसी जांच कर रही है। प्रकरण न्यायालय में भी चल रहा है जजों की कमेटी इस मामले पर विचार कर रही है ऐसे में नियमों और परंपराओं के अनुसार इस विषय पर चर्चा नहीं हो सकती।
इस पर उमंग सिंघार ने कहा कि हम तो नर्सिंग परीक्षा के संबंध में बात करना चाह रहे हैं। सीबीआई तो कालेजों की जांच कर रही है। ये मामला न्यायालय में नहीं है। कैलाश विजयवर्गीय ने कहा कि स्थगन प्रस्ताव में जो मुद्दा उठाया गया है वो न्यायालय में विचाराधीन है। उमंग सिंघार ने कहा कि हम तो नर्सिंग काऊंसिल पर सरकार के बनाए गए नियमों राजपत्र में प्रकाशन आदि के विषय में बात करना चाह रहे हैं। सरकार इस पर बात क्यों नहीं करना चाहती वह बच क्यों रही है।
अध्यक्ष नरेन्द्र सिंह तोमर ने कहा कि बजट का सत्र हो या न्यायालय में विचाराधीन प्रकरण उन पर सदन में चर्चा नहीं कराई जाती है क्योंकि चर्चा के दौरान कई तरह के आक्षेप भी लगा दिये जाते हैं जिनका जवाब न्यायालय के कार्य में हस्तक्षेप करना हो जाता है। इन्हीं सब चर्चाओं में पक्ष और विपक्ष के कई सदस्य तैश में आकर तर्क दे रहे थे ,शोरगुल के बीच अध्यक्ष ने सदन की कार्यवाही दोपहर एक बजे तक स्थगित कर दी।
एक बार फिर जब सदन समवेत हुआ तो उमंग सिंघार ने एक बार फिर इस विषय पर चर्चा कराए जाने की मांग कर दी। इस पर कैलाश विजय वर्गीय ने कहा कि डाक्टर मोहन यादव की सरकार चर्चा से भाग नहीं रही है। ये कोई तात्कालिक घटना नहीं है तीन चार या पांच सत्र बीत चुके हैं पुराना मामला है इसलिए इस पर बजट चर्चा के दौरान आसानी से बात हो जाएगी।
इस पर कांग्रेस के भंवर सिंह शेखावत ने गुस्से में भरकर कहा कि मामला कांग्रेस और भाजपा का नहीं है,प्रदेश के बच्चों के भविष्य का है। विधानसभा अध्यक्ष नरेन्द्र सिंह तोमर ने उन्हें ये कहकर समझाने का प्रयास किया कि सरकार ने कह दिया है कि वह चर्चा कराने को तैयार है। इस पर श्री शेखावत गुस्से से बोले कि फिर चर्चा कराईए न। मुख्यमंत्री मोहन यादव ने बात को संभालते हुए कहा कि हम किसी विषय पर पीछे नहीं हट रहे हैं। जन हितैषी विषय पर चर्चा कराने को तैयार है। विधानसभा का कामकाज रोककर स्थगन लाने और ध्यानाकर्षण में अंतर होता है इसे अगली बार ले आईए फिर चर्चा करा लेंगे।
इस पर भंवर सिंह शेखावत ने तंज कसते हुए कहा कि आप चर्चा से नहीं घबराते आप बहादुर हैं आपको इसका प्रमाण पत्र दिया जाएगा। जवाब में कैलाश विजयवर्गीय ने कहा कि हमें आपके प्रमाण पत्र की जरूरत नहीं है। उच्च शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार ने कहा कि ये सर्टिफिकेट आप अपने पास रख लें हम पारदर्शी तरीके से सरकार चलाते हैं । सभी मुद्दों पर कार्रवाई हो रही है और हम चर्चा के लिए तैयार हैं। इस पर भी श्री शेखावत शांत नहीं हुए उन्होंने कहा कि आप चर्चा क्यों नहीं कराना चाहते जिन्होंने भ्रष्टाचार किया है उन्हें आप बचाना चाह रहे हैं।
इस मुद्दे पर लगभग शांत बैठे मुख्यमंत्री डाक्टर मोहन यादव ने कहा कि हमने शुरु से स्वर रखा है कि हम हर विषय पर चर्चा कराने को तैयार हैं। किसी मसले पर हमारी सरकार डरने वाली नहीं है और न ही हम पीछे हटने वाले हैं। आपके स्वर किसी भी स्तर तक जा सकते हैं लेकिन हम संयम के साथ स्पष्टता से अपनी बात रखना चाहते हैं। यदि कोई उत्तेजना से बात करेगा तो ये सुनने की आदत हमारी भी नहीं है।माननीय सदस्य गण सुन लें अपनी बात को संयमित तरीके से रखें। तीखे स्वरों में कही गई उनकी बात पर पूरे सदन में खामोशी छा गई। नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने बात को संभालते हुए कहा कि हम विवाद के बजाए चर्चा कराना चाहते हैं। इस पर विधानसभा अध्यक्ष नरेन्द्र सिंह तोमर ने सदन को आश्वस्त करते हुए कहा कि ये चर्चा ग्राह्यता पर नहीं हो रही है। दोनों पक्षों ने इस विषय पर फैसला लेने का अवसर मुझे दिया है इसलिए कल मैं किसी उचित नियम के तहत इस पर चर्चा कराऊंगा। -

राज्य में उद्यमशीलता का दौर :भगवानदास सबनानी
भोपाल.6 जनवरी(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)। भारतीय जनता पार्टी के नवनिर्वाचित विधायक एवं प्रदेश महामंत्री भगवानदास सबनानी ने कहा है कि राज्य में अब उद्यमशीलता का दौर शुरु हो गया है हम पूंजी निर्माण से समाजसेवा के नए दौर में प्रवेश कर रहे हैं। राज्य की नई सरकार कार्यकर्ताओं के बल पर सत्तासीन हुई है, यही कार्यकर्ता जनता की आकांक्षाओं को साकार करने में जुट गए हैं।हमारे नेताओं ने जिस संकल्पपत्र को सामने रखकर जनता से आशीर्वाद मांगा था हम उसकी हर भावना को साकार करने जा रहे हैं। माननीय मुख्यमंत्री डॉक्टर मोहन यादव ने सत्ता संभालते ही कार्यपालिका को साफ संदेश दे दिया है कि ये कार्यकर्ताओं,मजदूरों और किसानों की सरकार है और हम उनकी हर आकांक्षा को पूरा करेंगे।
श्री सबनानी ने विशेष मुलाकात में बताया कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने समाज की चार जातियां गरीब, किसान, महिला और युवाओं को बताया है। हमें अच्छी तरह मालूम है कि ये चारों वर्ग के आम नागरिक किस तरह प्रदेश और देश की उत्पादकता बढ़ाने में सहयोगी साबित होते हैं। हम भारत के परम वैभव को ऊंचाईयों पर पहुंचाने के लिए कार्य कर रहे हैं। यही वजह है कि नई सरकार सत्ता के सभी कारकों के लिए दो टूक संदेश देने का कार्य कर रही है।
उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री डॉक्टर मोहन यादव ने सत्ता संभालते ही हुकमचंद मिल के मजदूरों की बरसों पुराने लंबित वेतन भत्तों का निराकरण करके अपनी सामाजिक प्रतिबद्धता जाहिर कर दी है। ग्वालियर की विनोद मिल के मजदूरों के भी लंबित प्रकरण सुलझाए जा रहे हैं। भाजपा संगठन ने अपनी जमीनी सेवाओं से जनता की जरूरतों को अच्छी तरह समझा है। राजनीति हमारे लिए सेवा का माध्यम है। हम सेवा की राजनीति करते हैं। हमारे पैतृक संगठन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से हमने सेवा, त्याग और तपस्या के जो संस्कार पाए हैं हम उन्हें साकार करने में जी जान से जुटे हैं।श्री सबनानी ने बताया कि लगभग तीन चार महीनों से चुनावी प्रक्रिया चल रही थी। नई सरकार के गठन के बाद हमारी जवाबदारी है कि हम अपनी ही पूर्ववर्ती सरकार की योजनाओं को आगे ले जाएं और यदि उनमें कुछ संशोधन भी करना पड़े तो करें। इसके लिए हमने राज्य के खजाने का आकलन शुरु कर दिया है। हमारी पार्टी के कई आर्थिक विशेषज्ञ स्थितियों का आकलन कर रहे हैं। हम मौजूदा संसाधनों के बीच जनता की जरूरतें पूरी कर रहे हैं और जल्दी ही रोजगार के नए अवसर शुरु हो जाएंगे।
उन्होंने कहा कि माननीय मुख्यमंत्री जी ने शासन को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि सरकार रोजगार के अवसर बढ़ाना चाहती है। नई शिक्षा नीति में भी हमने युवाओं में हुनर विकसित करने की नीति पर अमल शुरु किया है। इस प्रक्रिया में हम औद्योगिक ढांचा भी विकसित कर रहे हैं और उसके लिए हुनरमंद युवाओं की टीम भी उपलब्ध करवा रहे हैं। हम सरकारीकरण के भरोसे नहीं बैठेंगे और समाज को जल्दी ही उत्पादकता का लाभ देंगे। ये बदलाव की बयार जल्दी ही अपना असर दिखाएगी और जनता की आकांक्षाओं पर खरी साबित होगी। -

कांग्रेस की विदाई में त्रिदेव ने निभाई बड़ी भू्मिका
कांग्रेस की विचारधारा और नीतियों को विदाई देकर तीन राज्यों में भाजपा की सरकार बनाकर देश के मतदाताओं ने स्पष्ट संदेश दिया है। भारतीय जनता पार्टी तो इस संदेश को बहुत हद तक समझ रही है लेकिन कांग्रेस के दिग्गज इसे लगातार नकारते दिख रहे हैं। कमलनाथ कांग्रेस के अधिकतर बुद्दिजीवी इसे ईवीएम की गड़बड़ी बताकर अपनी हार पर पर्दा डालने का असफल प्रयास कर रहे हैं। इस ऐतिहासिक हार से सबक लेना तो दूर वे जनता पर ही ओछी तोहमत लगा रहे हैं। कांग्रेसी और उनके पिछलग्गू भाजपाई इन चुनावी नतीजों को कमतर बताने के लिए इसे लाड़ली बहना की देन बता रहे हैं। नतीजों का इस तरह का सरलीकरण करके वे सत्ता की फिसलन भरी सीढ़ियों पर खुद को जमाए रखने का प्रयास ही कर रहे हैं।
भोपाल दक्षिण पश्चिम के नवनिर्वाचित विधायक और भाजपा के प्रदेश महामंत्री भगवान दास सबनानी बताते हैं कि जबसे चुनावी महासमर का मंथन शुरु हुआ था तभी से भारतीय जनता पार्टी संगठन ने अपनी भूमिका स्पष्ट रूप से तैयार कर ली थी। प्रदेश अध्यक्ष विष्णुदत्त शर्मा ने अमितशाह के दिए मंत्र के अनुसार बूथ अध्यक्ष,महामंत्री और बूथ लेवल एजेंट यानि बीएलए को मैदानी जवाबदारी सौंपी थी।इन्ही त्रिदेवों ने मतदाताओं को ई वी एम तक पहुंचा दिया।पन्ना प्रभारी, पन्ना समिति, और शक्ति केन्द्र टोली इसके साथ खड़ी थी। यही वजह है कि जिन चुनावी क्षेत्रों में षड़यंत्रों की इबारत लिखी गई वहां भी भाजपा का संगठन मजबूती से प्रत्याशी के समर्थन में खड़ा था।
यही वजह है कि भारतीय जनता पार्टी तमाम सर्वेक्षणों से आगे देखकर अपनी जीत पर आश्वस्त था। आज कांग्रेस को ये नतीजे भले ही अचंभित कर रहे हों लेकिन इसके पीछे भारतीय जनता पार्टी के संगठन की प्रतिबद्धता वह समझ ही नहीं पा रही है। इसकी वजह केवल यही कि कांग्रेस का संगठन तो नदारद था। कमलनाथ बयानबाजी को ही अपनी जीत का आधार मान रहे थे। कांग्रेस के प्रवक्ताओं को भी लगता था कि कमलनाथ कोई चमत्कार कर रहे हैं। लेकिन जब नतीजे सामने आए तो वे बौखला गए। जबसे इन पांच राज्यों की चुनावी बहसें शुरु हुईं थीं तबसे कम से कम मध्यप्रदेश में कहा जा रहा था कि जनता बदलाव चाहती है। राजस्थान में कहा जाता है कि वहां का मतदाता हर बार सत्ता बदल देता है।
मध्यप्रदेश में कहा जा रहा था कि जनता शिवराज सिंह चौहान के चेहरे से ऊब गई है इसलिए वह बदलाव चाहती है। जबकि हकीकत ये है कि जनता को ये नहीं मालूम था कि उसका खलनायक कौन है। मध्यप्रदेश में जनता की बैचेनी की वजह यहां की नौकरशाही रही है। कांग्रेस और फिर उसकी पूंछ पकड़कर चलने वाली शिवराज सिंह चौहान की भारतीय जनता पार्टी ने जिस दरियादिली से सरकारी नौकरियां बांटीं उससे प्रदेश की आय और व्यय में असंतुलन पैदा हो गया है। मध्यप्रदेश में दस लाख से अधिक परिवार ऐसे हैं जिनमें एक न एक सदस्य सरकारी नौकरी कर रहा है। सरकारी नौकरियों में भी वेतनमान इतने अधिक हो गये हैं कि उसकी तुलना में प्रदेश के उत्पादक कार्यों में लगे लगभग आठ करोड़ लोग नेपथ्य में चले गए थे। इन्हीं को भाजपा संगठन ने अपनी हितग्राही मूलक योजनाओं से अपना तारण हार बना लिया। कमलनाथ कांग्रेस ने अपनी हार होते देखकर चुनावी चर्चाओं के बीच वादा कर दिया था कि वह सत्ता में आकर पुरानी पेंशन लागू कर देगी। इसके बावजूद कांग्रेस की डेढ़ साल का अनुभव कर्मचारी भूले नहीं थे। उन्हें मालूम था कि सत्ता में आकर कांग्रेसी तबादले और पोस्टिंग के धंधे में मशगूल हो जाएंगे। यही वजह थी कि पुरानी पेंशन का फार्मूला भी फिसड्डी हो गया। सरकारी कर्मचारियों ने जो मिल रहा है वही स्वीकार करने का मन बना लिया। नतीजा सामने है सरकारी कर्मचारियों ने कोई बड़ा फेरबदल नहीं किया। हालांकि डाक मतपत्रों के नतीजों को देखकर लग रहा था कि कोई बड़ा फेरबदल होगा।
दरअसल में भारतीय जनता पार्टी ने जो हितग्राही मूलक योजनाएं चलाईं उनका लाभ लेने वाला इतना बड़ा वर्ग देश में तैयार हो गया है कि उसकी तुलना में जनधन की मलाई खाने वालों की भीड़ नगण्य रह गई है। भाजपा ने सत्ता का लाभ आम नागरिकों तक पहुंचाने के कई आयाम विकसित कर दिए हैं। चाहे लाड़ली बहना योजना हो, लाड़ली लक्ष्मी योजना हो, किसान सम्मान निधि हो, जलजीवन मिशन हो या फिर शौचालय निर्माण सभी ने देश के आम जनजीवन को प्रभावित किया है। यही वजह है कि कांग्रेस की फूट डालो राज करो की पूरी विचारधारा ही नेपथ्य में चली गई है।
कांग्रेस की नीतियां समाज के एक वर्ग को खलनायक बनाने और दूसरे वर्ग से उस पर पत्थर फिंकवाने की रही है। जिसे इस बार जनता ने साफ तौर पर नकार दिया है।पहली बार देश से कांग्रेस के सफाए की शुरुआत हुई है। इन चुनावी नतीजों ने कांग्रेस की पूंछ पकड़कर चल रही शिवराज भाजपा से आगे निकलकर एक राजमार्ग दिखा दिया है। आज की भारतीय जनता पार्टी के सामने कांग्रेस की नीतियों को बरकरार रखने की अनिवार्यता नहीं रही है। भाजपा अब अपनी सकारात्मक सोच को बेधड़क लागू कर सकती है।
पिछले दो दशकों में भाजपाईयों को नहीं मालूम था कि वे क्यों सत्ता में भेजे गए हैं। शिवराज सिंह चौहान ने भी केवल नौकरशाही के भरोसे रहकर सत्ता चलाई जिससे जनता को ये नहीं महसूस हुआ कि प्रदेश की राजनीति किस नई राह पर चल पड़ी है। इस बार जिस तरह नौकरशाही को जमीन दिखाई गई है वह अनोखी कवायद है। पहली बार सरकार नौकरशाही के चंगुल से बाहर निकली है। जाहिर है कि अब आने वाली मध्यप्रदेश की सरकार ब्लैकमेलिंग के जाल से बाहर निकल आई है। अब उसे न सरकारी तंत्र की ब्लैकमेलिंग के सामने मजबूर होकर खड़ा होना है न ही प्रेस के माध्यम से चलाई गई माफिया की मुहिम के सामने लाचार होना है। वह प्रदेश को विकास के राजपथ पर बेधड़क लेकर चल सकती है।
मुख्यमंत्री के चयन में हो रही देरी को देखकर लोगों को लगता है कि भाजपा किसी असमंजस में है।केन्द्र की भाजपा ने अमित शाह ने बच्चों के साथ शतरंज खेलते हुए दिखाकर बता दिया है कि वह शह और मात के खेल में नया अध्याय लिखने जा रही है। आगामी आम चुनावों में देश नतीजों पर अपना फैसला सुनाने वाला है और भाजपा लगातार अपनी सफलताओं के नतीजे जनता के सामने प्रस्तुत कर रही है। तीनों राज्यों में भाजपा ने न केवल अपनी सफलताओं की कहानी लिखी है बल्कि वह नतीजों का अहसास अपनी नीतियों से करवाने में भी सफल रही है। आज ठेठ गांव के निवासी हों या उद्योंगों से जुड़े मजदूर सभी को पता है कि किस तरह से भाजपा की सरकारें उनका जीवन बदलती जा रहीं हैं। ऐसे में कांग्रेस तो क्या किसी अन्य दल को भी अपना अस्तित्व बचाने का भरोसा नहीं रहा है। कांग्रेस के दिग्गजों को पता है कि कि वे पुरानी राजनीति की अपनी इबारत खो चुके हैं। भाजपा अब एक नई भाजपा बन रही है। भाजपा का ये नया संस्करण भाजपा को विस्थापित करके सत्ता में आने जा रहा है।ऐसे में कांग्रेस हो या सपा,या फिर आप पार्टी किसी की कोई गुंजाईश नहीं बची है। जाहिर है कि आम चुनावों की इबारत साफ है। भाजपा अब देश का चुनाव भी भारी बहुमत से जीतने जा रही है। तीन राज्यों की जीत ने बता दिया है कि जनता की राय में अब और भी तेज इजाफा होने जा रहा है।
भाजपा अब इन तीन राज्यों में सरकार का जो माडल पेश करने जा रही है वह परम्परावादी राजनीति के ऐसे अध्याय के रूप में सामने आ रहा है जो न किसी ने देखा न पढ़ा न सुना है। भारत अब न केवल विश्व गुरु बनने जा रहा है बल्कि वह पूरी दुनिया का अनूठा सेवक भी बनने जा रहा है। दुनिया की तमाम शक्तियों के बीच जो नया सूर्योदय होने जा रहा है उसके पक्ष में अब मध्यप्रदेश की जनता ने भी अपना फैसला सुना दिया है। भाजपा को इसी फैसले का इंतजार था और राष्ट्रवादियों ने भारतमाता के इसी श्रंगार का स्वप्न देखा था जो अब पूरा होने जा रहा है।संशय को बादल लगातार छंटते जा रहे हैं। राष्ट्रवादियों की कई पीढ़ियां इसी का इंतजार कर रहीं थीं। -

बेअसर रही पिछड़ा वर्ग का वोट बैंक छीनने की राजनीति
अंग्रेजों की फूट डालो और राज करो की नीति का अनुसरण करने वाली कांग्रेस पार्टी इन दिनों मध्यप्रदेश में इसी पुरातन फार्मूले का प्रयोग कर रही है। पिछले विधानसभा चुनाव में कमलनाथ कांग्रेस ने आदिवासियों को बरगलाकर सत्ता पाने में जो सफलता पाई थी उससे उत्साहित होकर उन्होंने इस बार पिछड़ों को निशाना बनाया है। पिछड़ा वर्ग के इस बड़े वोट बैंक की खेती करने की शुरुआत वैसे तो कांग्रेस की अर्जुनसिंह सरकार ने की थी लेकिन उसे परिणाम मूलक बनाने का काम भारतीय जनता पार्टी ने किया । पिछड़ा वर्ग से ही लगातार तीन मुख्यमंत्री देकर भाजपा ने इस बड़े वोट बैंक को संवारने में सफलता पाई है। इस मजबूत वोट बैंक में सेंध लगाने की हसरत पाले कमलनाथ कांग्रेस ने कानूनी दांव पेंच से अपनी पार्टी को जिस तरह पिछड़ों का हितैषी बताने का अभियान चलाया उसने राज्य की राजनीति में भारी भूचाल मचा दिया। कई दिनों तक लगता रहा कि पिछड़ों की ये पैरवी कांग्रेस को बड़ा जनाधार दिलवाएगी। कमलनाथ के इस दांव के सूत्रधार राज्यसभा सांसद विवेक तनखा बने। उन्होंने कमलनाथ के मीडिया प्रभारी सैय्यद जाफर और अन्य की याचिकाओं को लेकर अदालती लड़ाई लड़ी। विशेष विमान से इन योद्धाओं को सुप्रीम कोर्ट भेजा गया और बड़ी धनराशि खर्च करके अदालत में पिछड़ों को आरक्षण की रोटेशन प्रणाली का पालन करवाने की पैरवी की गई। ये दांव उल्टा पड़ा और अदालत ने इसे फेब्रिकेटेड मानते हुए खारिज कर दिया। रिपट पड़े की हर गंगे करने वाले कमलनाथ ने सरकार पर दबाव बनाना शुरु कर दिया कि वह पिछड़ों को आरक्षण दिलाने के लिए अदालत जाए। विधानसभा में जो स्थगन प्रस्ताव लाया गया उसमें कांग्रेस ने सरकार पर आरोप लगाने की कोशिश की थी कि वह पिछड़ों को आरक्षण का लाभ न देकर पंचायतों के जो चुनाव करवा रही है उससे प्रदेश के एक बड़े वर्ग के हितों की अनदेखी होगी। कमलनाथ और उनकी चिल्लर पार्टी ने सदन में जिस तरह इस मुद्दे को उठाया उससे तो कांग्रेस छोड़कर भाजपा में गए विधायकों मंत्रियों को भी एकबारगी लगा कि सरकार पर किया जा रहा ये वार बहुत घातक साबित होगा। पर ऐसा कुछ हुआ नहीं। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान, उनके सहयोगी गृहमंत्री डाक्टर नरोत्तम मिश्रा और नगरीय विकास एवं आवास मंत्री ठाकुर भूपेन्द्र सिंह ने जिस तरह इस राजनीतिक वार का डटकर सामना किया उससे विपक्ष की धार भौंथरी हो गई। भूपेन्द्र सिंह जो कि स्वयं पिछड़ा वर्ग से आते हैं उन्होंने कहा कि यदि हमारी सरकार पर लगाए जा रहे आरोपों में थोड़ी भी सच्चाई हुई और मैंने जिन कानूनी प्रक्रियाओं का हवाला दिया है उनमें यदि कोई झूठी साबित हुईं तो मैं राजनीति छोड़ दूंगा। पिछड़ा वर्ग के हित के लिए मैं जान देने को भी तैयार हूं। कमलनाथ ने सदन में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान पर दबाव बनाया कि वे पिछड़ा वर्ग को लेकर जो दावे कर रहे हैं उसके लिए उनकी सरकार को अदालत जाकर आरक्षण सुनिश्चित करना चाहिए। मुख्यमंत्री ने विपक्ष के आरोपों पर तीखे हमले किए। उन्होंने कहा कि भाजपा ने पिछड़े वर्ग से लगातार तीन मुख्यमंत्री देकर इस वर्ग को जितनी नौकरियां दी हैं या अन्य लाभ दिलाए हैं उन्हें वे सदन के पटल पर रखने को तैयार हैं। हमने पिछड़े वर्ग को सत्ता का लाभ दिलाने का पाखंड नहीं किया बल्कि उसे लाभ दिलाया है। हमने सभी समाजों और वर्गों के विकास की जो राजनीति की है उससे समाज में सामंजस्य बढ़ा है और सभी वर्गों को लाभ मिला है। जिस 27 प्रतिशत आरक्षण न दिलाए जाने के आरोप हम पर लगाए जा रहे हैं, हमने पिछड़े वर्ग के लोगों को उससे भी कई गुना ज्यादा लाभ दिया है। हमें इसके लिए किसी अग्निपरीक्षा देने की जरूरत नहीं है। उन्होंने सदन के नेता के रूप में कहा कि हमने जाति धर्म की संकीर्णताओं से ऊपर उठकर जनहित को सर्वोपरि रखा है। जिस तरह कमलनाथ कांग्रेस की टीम वैमनस्य फैलाने की राजनीति कर रही है हम उसका जवाब देने में सक्षम हैं। सरकार के रुख ने कांग्रेस से भाजपा में आए नेताओं के सामने घिरे असमंजस को भी दूर कर दिया है और जनता में फैलाए जा रहे भ्रम को भी हटा दिया है। कांग्रेस के इस वार ने सरकार को समय से पहले सावधान कर दिया है कि वह कांग्रेस की इस वैमनस्य फैलाने वाली राजनीति के लिए भी भविष्य में तैयार रहे। -

नए केन्द्रीय मंत्रियों को जनता देगी अपना आशीर्वाद बोले सबनानी
भाजपा के प्रदेश महामंत्री भगवानदास सबनानी ने केन्द्रीय मंत्रियों पर जनता के आशीर्वाद की पुष्पयात्रा कराने का बीड़ा उठाया है. भोपाल। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी द्वारा हाल ही में किए गए मंत्रिमंडल पुनर्गठन में ‘सबका साथ, सबका विकास और सबका विश्वास’ की झलक दिखाई देती है। इस पुनर्गठन के अंतर्गत प्रदेश के वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री थावरचंद गहलोत को कर्नाटक का राज्यपाल बनाया गया है, तो दो नए मंत्रियों के रूप में डॉ. वीरेंद्र खटीक एवं ज्योतिरादित्य सिंधिया को शामिल किया गया है। विपक्ष ने अपनी हठधर्मिता के चलते इन मंत्रियों का सदन में परिचय नहीं होने दिया था। इसलिए अब ये मंत्रीगण आशीर्वाद यात्राओं के माध्यम से जनता का आशीर्वाद लेंगे। यह बात भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश महामंत्री एवं आशीर्वाद यात्राओं के प्रदेश प्रभारी भगवानदास सबनानी ने गुरुवार को पत्रकार वार्ता को संबोधित करते हुए कही। पत्रकार वार्ता में प्रदेश उपाध्यक्ष श्रीमती सीमा सिंह जादौन उपस्थित थी।16 से 24 अगस्त तक चलेंगी यात्राएं
श्री सबनानी ने बताया कि केंद्रीय मंत्री डॉ. वीरेंद्र खटीक, श्री ज्योतिरादित्य सिंधिया और उत्तरप्रदेश से सांसद तथा केंद्रीय मंत्री श्री एस.पी.एस. बघेल प्रदेश में आशीर्वाद यात्राओं के माध्यम से जनता का आशीर्वाद लेंगे। ये यात्राएं 16 अगस्त से शुरू होंगी और 24 अगस्त तक चलेंगी। यात्राओं के दौरान केंद्रीय मंत्री गण धार्मिक स्थलों, संत-महात्माओं, शहीदों, लोकतंत्र सेनानियों आदि से आशीर्वाद लेंगे। इसके अलावा मंत्रीगण विभिन्न समाजों के कार्यक्रमों में भाग लेंगे तथा प्रबुद्जनों, कलाकारों, खिलाड़ियों से भेंट करेंगे। इसके अलावा केंद्रीय मंत्री विभिन्न महापुरुषों के स्मारकों पर जाकर श्रद्धासुमन भी अर्पित करेंगे।रेल और सड़क मार्ग से होगी मंत्री श्री खटीक की यात्रा
केंद्रीय मंत्री डॉ. वीरेंद्र खटीक की आशीर्वाद यात्रा रेल और सड़क मार्ग से होगी। उनकी यात्रा 19 अगस्त को ग्वालियर से शुरू होगी। 20 अगस्त को डॉ. वीरेंद्र खटीक भोपाल में आयोजित विभिन्न कार्यक्रमों में भाग लेंगे। उनके इन कार्यक्रमों में पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष व सांसद श्री विष्णुदत्त शर्मा भी शामिल होंगे। आशीर्वाद यात्रा 21 अगस्त को विदिशा एवं सागर जिलों में पहुंचेगी। 23 अगस्त को जबलपुर और 24 अगस्त को दमोह तथा टीकमगढ़ जिलों में पहुंचेगी। उनकी यात्रा के लिए प्रदेश महामंत्री श्री रणवीरसिंह रावत को प्रभारी एवं कार्यसमिति सदस्य श्री महेंद्र यादव को सह प्रभारी बनाया गया है। श्री खटीक की यह यात्रा 7 जिलों एवं 7 लोकसभा क्षेत्रों से गुजरेगी और पांच दिनों में 589 किलोमीटर की दूरी तय करेगी। इस दौरान श्री खटीक 105 कार्यक्रमों में भाग लेंगे।देवास से शुरू होगी केंद्रीय मंत्री श्री सिंधिया की यात्रा
श्री सबनानी ने बताया कि केंद्रीय मंत्री श्री ज्योतिरादित्य अपनी आशीर्वाद यात्रा की शुरुआत देवास से 17 अगस्त को करेंगे। इसी दिन यात्रा शाजापुर पहुंच जाएगी। 18 अगस्त को यात्रा खरगोन जिले में पहुंचेगी जहां रावेरखेड़ी में बाजीराव पेशवा के समाधि स्थल पर आयोजित कार्यक्रम में केंद्रीय मंत्री श्री सिंधिया मुख्यमंत्री श्री शिवराजसिंह चौहान के साथ भाग लेंगे। 19 अगस्त को श्री सिंधिया की आशीर्वाद यात्रा इंदौर पहुंचेगी। उनकी आशीर्वाद यात्रा के लिए प्रदेश उपाध्यक्ष श्री आलोक शर्मा को प्रभारी एवं कार्यसमिति सदस्य श्री संतोष पारीक को सहप्रभारी नियुक्त किया गया है। श्री सिंधिया की यह यात्रा 4 जिलों एवं 4 लोकसभा क्षेत्रों से गुजरेगी तथा 584 किलोमीटर की होगी। चार दिनों की यात्रा के दौरान श्री सिंधिया 78 कार्यक्रमों में भाग लेंगे।पीताम्बरा पीठ, दतिया से शुरू होगी केंद्रीय मंत्री श्री बघेल की यात्रा
श्री सबनानी ने बताया कि केंद्रीय मंत्री श्री एस.पी.एस. बघेल की आशीर्वाद यात्रा दतिया स्थित पीताम्बरा पीठ से 16 अगस्त को शुरू होगी। विधि राज्यमंत्री श्री बघेल 16 अगस्त को दतिया, डबरा, ग्वालियर की यात्रा करेंगे। इसके उपरांत 17 अगस्त को ग्वालियर और मुरैना में आशीर्वाद लेंगे। उनकी यात्रा के लिए प्रदेश उपाध्यक्ष श्री चौधरी मुकेश चतुर्वेदी को प्रभारी एवं प्रदेश मंत्री श्री मदन कुशवाह को सह प्रभारी नियुक्त किया गया है। श्री बघेल की यह यात्रा तीन जिलों एवं तीन लोकसभा क्षेत्रों से होकर गुजरेगी तथा 167 किलोमीटर की होगी। इस दौरान श्री बघेल 14 कार्यक्रमों में भाग लेंगे। -

कांग्रेस ने दो दिन भी नहीं चलने दिया विधानसभा का राज दरबार
भोपाल 10 अगस्त(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)। पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमतें, ओबीसी आरक्षण और बढ़ती महंगाई के विरोध में हंगामे के चलते विधानसभा का मानसून सत्र अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दिया गया है। इस हंगामे के बीच सरकार ने सदन में महत्वपूर्ण विधेयकों की मंजूरी जरूर करवा ली।
सदन की कार्यवाही सुबह से ही हंगामेदार रही। हंगामे की स्थिति और ज्यादा तब बढ़ गई जब महंगाई से जुड़ा सवाल वित्त मंत्री से पूछा गया। इसके बाद वित्त मंत्री के जवाब से विपक्ष खेमे ने नाराजगी प्रकट की। जवाब से असंतुष्ट नजर आए नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि मंत्री का जवाब सही नहीं, आज पूरा देश महंगाई से जूझ रहा है, इस पर चर्चा होनी चाहिए। इस पर विपक्षी सदस्य लॉबी में नारेबाजी करने लगे और विधानसभा अध्यक्ष गिरीश गौतम को सदन की कार्यवाही 12 बजे तक के लिए स्थगित करनी पड़ी। इसके बाद फिर से कार्यवाही शुरू की गई, लेकिन विपक्ष का हंगामा नहीं थमा तो विधानसभा के मानसून सत्र को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दिया गया।
सदन की हंगामेदार कार्यवाही के दौरान सरकार ने कई महत्वपूर्ण विधेयक पास करा लिए। इसी शोरगुल के बीच अनुपूरक बजट को हंगामे के दौरान मंजूरी दे दी गई। इसके बाद नगरीय निकाय संशोधन बिल भी पास हुए और आबकारी एक्ट संशोधन समेत अन्य महत्वूर्ण विधेयकों को भी मंजूरी दे दी गई।
बाढ़ से प्रभावित शयोपुर के विधायक बाबू जँडेल ने विधानसभा में अपने कपड़े फाड़ लिये। वे अपने इलाक़े में बाढ़ प्रभावितों को कथित तौर पर सरकारी मदद न मिल पाने के कारण खुद को दुखी बता रहे थे। उनका कहना था कि उनके इलाके के लोगों को कपड़े तक नहीं मिल पा रहे हैं। लोगों के घर पानी में डूब गए हैं। सरकार बाढ़ पीड़ितों को मदद नहीं कर रही है।
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मध्यभारत में सिंधिया ने फहराया भगवा परचम
ज्योतिरादित्य बोले कांग्रेस भ्रष्टाचार में डूबी इसलिए छोड़ा
भोपाल,22 अगस्त( प्रेस सूचना केन्द्र)। मध्यप्रदेश के ग्वालियर विधानसभा क्षेत्र के पांच हजार से अधिक कांग्रेस कार्यकर्ता शनिवार को मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान और वरिष्ठ नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया समेत अन्य वरिष्ठ नेताओं की मौजूदगी में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) में शामिल हो गए।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कांग्रेस पर जमकर हमला बोला। उन्होंने कहा कि राज्य में 15 माह के शासन के दौरान कमलनाथ कांग्रेस ने जनता के हित में कदम नहीं उठाए। भ्रष्टाचार किया गया। उस समय मुख्यमंत्री भी दो हुआ करते थे। एक आगे और दूसरे पर्दे के पीछे। उन्होंने कमलनाथ और दिग्विजय सिंह का नाम लेते हुए कहा कि पूर्ववर्ती सरकार में जनता की सेवा की बजाए निहित स्वार्थों को प्राथमिकता दी गई।
सिंधिया ने कहा कि उन्होंने और उनके परिवार ने सदैव जनता के हितों की बात की है। जनता की प्रतिष्ठा पर आंच आने पर भी परिवार ने सदैव आगे आकर विरोध किया है। उन्होंने कहा कि ऐसा ही उनकी दादी राजमाता विजयाराजे सिंधिया ने तत्कालीन मुख्यमंत्री डी पी मिश्रा के समय किया था। उनके पिता माधवराव सिंधिया ने विकास कांग्रेस के नाम से नया दल बनाया था। वे भी जनता के हितों पर आंच आने पर झंडा और डंडा उठाकर सड़क पर उतरने तैयार रहते हैं।
सिंधिया ने मुख्यमंत्री चौहान के प्रति धन्यवाद ज्ञापित करते हुए कहा कि उन्होंने कुर्सी संभालते ही सभी से कार्यों के बारे में पूछकर कार्य किए। इसके अलावा ग्वालियर चंबल अंचल की चंबल प्रोग्रेस वे परियोजना पर भी तेजी से कार्य किया जा रहा है। साढ़े सात हजार करोड़ रुपयों की इस योजना से इस संपूर्ण अंचल का विकास होगा।
आगामी समय में राज्य में 27 विधानसभा सीटों पर उपचुनाव होने हैं। इसमें से अधिकांश सीट ग्वालियर चंबल अंचल की है। ग्वालियर विधानसभा सीट पर भी उपचुनाव होना है। इस सीट से वर्ष 2018 के विधानसभा चुनाव में प्रद्युमन सिंह तोमर कांग्रेस के टिकट पर चुनाव जीते थे। इसी वर्ष मार्च के राजनीतिक घटनाक्रमों के चलते उन्होंने विधायक पद से त्यागपत्र दे दिया और भाजपा में शामिल हो गए। माना जा रहा है कि अब वे ग्वालियर विधानसभा उपचुनाव में भाजपा के टिकट पर उम्मीदवार होंगे।
विधानसभा उपचुनाव के लिए कार्यक्रम जारी नहीं हुआ है, लेकिन भाजपा की तैयारियां तेजी से चल रही हैं। भाजपा के वरिष्ठ नेता शनिवार, रविवार और सोमवार को यहां विभिन्न आयोजनों में सक्रिय रहेंगे, इस दौरान ग्वालियर चंबल अंचल के विभिन्न विधानसभा क्षेत्रों के हजारों कार्यकर्ता भाजपा में शामिल होंगे।
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संगठन गढ़ने वाला तपस्वी नरेन्द्र सिंह तोमर

The Union Minister for Rural Development, Panchayati Raj, Drinking Water & Sanitation and Urban Development, Shri Narendra Singh Tomar addressing at the launch of the Swachh Sarvekshan (Gramin)- 2017, in New Delhi on August 08, 2017.
जयराम शुक्लपिछले महीने ही मोदी 2.0 के एक साल पूरे हुए। इस एक साल का लेखाजोखा और सरकार की उपलब्धियों का प्रस्तुतिकरण नरेन्द्र तोमर ने जिस प्रभावी तरीके से किया उससे विपक्षी दल के नेता प्रभावित हुए बिना नहीं रहे। राज्यसभा के एक सदस्य(भाजपा के नहीं) का तो यहां तक कहना है कि श्री तोमर अपने जवाब से जिस तरह विपक्ष को संतुष्ट करते हैं और मीडिया को फेस करते हैं..इस वजह से वे सरकार की और भी बड़ी जिम्मेदारी के हकदार बनते हैं। सांसदजी का संकेत वित्तमंत्री जैसे गुरुतर दायित्व की ओर था क्योंकि इस पद के लिए धैर्य और जवाबदेही की बड़ी जरूरत होती है जो कि श्री तोमर में है।
यद्यपि श्री तोमर केंद्र सरकार में ग्रामीण विकास,पंचायतीराज, पेयजल और स्वच्छता मंत्री पद का जो दायित्व मिला है व कथित बड़े मंत्रालयों से ज्यादा महत्वपूर्ण व चुनौती भरा है। क्योंकि इन्हीं क्षेत्रों की पृष्ठभूमि पर आत्मनिर्भर भारत की आधारशिला रखी जानी है। कोरोना से अर्थव्यवस्था को उबारने में देश को प्राणवायु तो भारतमाता ग्राम्यवासिनी से ही मिलनी है। श्री तोमर नरेन्द्र मोदी व अमित शाह दोनों शीर्ष नेताओं के विश्वसनीय हैं इसीलिए जब भी सरकार या संगठन को कोई सबक देना होता है तो पहला नाम श्री तोमर का ही आता है। वे संगठन में जहां मंडल अध्यक्ष, प्रदेश भाजयुमो, प्रदेश भाजपाध्यक्ष होते हुए राष्ट्रीय महामंत्री तक पहुंचे, वहीं नगर निगम पार्षद से लेकर विधायक, सांसद, राज्यसभा सदस्य निर्वाचित हुए।
पिछले कार्यकाल में वे इस्पात व खनन मंत्री थे..लेकिन पाँच साल पूरा होते-होते एक के बाद एक विभागों के अतिरिक्त दायित्व जुड़ते गए। जबकि सांगठनिक तौर पर वे गुजरात के विधानसभा चुनाव में वहां के प्रभारी रहे। संगठन और सरकार दोनों ही मामलों जहां कहीं कुछ पेंचीदगी दिखती है..वहां नरेन्द्र सिंह तोमर की अपरिहार्यता स्वमेव आ खड़ी होती है।
श्री तोमर की एक और खासियत दूसरे से अलग करती है वो हैं विवादों में डूबे बगैर विवादों को सुलझाना। मध्यप्रदेश में जो ये भाजपा सरकार है उसकी केंद्रीय भूमिका में कोई और नहीं श्री तोमर ही थे। ज्योतिरादित्य सिंधिया के लिए भाजपा में यही लाल कालीन बिछाने वालों में थे..जबकि ये स्वयं उसी चंबल-ग्वालियर क्षेत्र के क्षत्रप हैं जहां दशकों से महल का दबदबा चला आ रहा है। कोई दूसरा नेता होता तो उसका असुरक्षा बोध शायद ही जूनियर सिंधिया के लिए रास्ता बनाता।
जोड़तोड़ की सरकार में शिवराज सिंह चौहान का फिर से मुख्यमंत्री बन जाना सभी को चौंकाया। वजह श्री चौहान पर तोहमद थी कि जनता ने उनके नेतृत्व को नकार दिया इसलिए भाजपा हारी। सिद्धांततः यह सही भी है। सभी यह उम्मीद लगाए बैठे थे कि प्रदेश के अगले मुख्यमंत्री श्री तोमर ही होंगे..लेकिन तोमर ने परोसी हुई थाल अपने मित्र की ओर खिसका दी और कुर्ता झाड़कर फिर अपने दायित्व में बिंध गए। राजनीति में तोमर-चौहान की युति की दुहाई आज भी दी जाती है। इसी युति ने..मध्यप्रदेश में दो-दो बार भाजपा की ताजपोशी कराई। इसबार जोड़ी टूटी थी, तोमर प्रदेश संगठन के अध्यक्ष नहीं थे। यह कहने में कोई हर्ज नहीं कि केंद्र की राजनीति करते हुए भी नरेन्द्र सिंह तोमर मध्यप्रदेश की भाजपा के शुभंकर हैं।भारतीय जनता पार्टी की नई पीढ़ी के जिन वरिष्ठ नेताओं ने अपने सहज, सरल और सफल व्यक्तित्व व कृतित्व से गहरी छाप छोड़ी है उनमें से नरेन्द्र सिंह तोमर का नाम सबसे आगे है। सहजता के आवरण में ढंका हुआ उनका कुशाग्र राजनय उनके व्यक्तित्व का चुम्बकीय आकर्षण है। यहीं वजह है कि 1998 से विधानसभा और फिर संसदीय पारी को आगे बढ़ाते हुए श्री तोमर प्रदेश ही नहीं देश में भाजपा की सरकार और संगठन से लेकर केन्द्रीय राजनीति तक अपरिहार्य हैं।
यह सब कुछ उन्हें विरासत में नहीं मिला अपितु उन्होंने अपनी लकीर खुद खींची, अपनी लीक स्वयं तैयार की। राजनीति के इस दौर में जहां धैर्य लुप्तप्राय तत्व है वहीं यह तोमरजी की सबसे बड़ी पूूँजी है। यही एक अद्भुत साम्य है जिसकी वजह से वे सरकार व संंगठन दोनोंं को प्रिय हैं। श्री तोमर की जड़ें राजनीति की जमीन पर गहराई तक हैं। वृस्तित जनाधार और लोकप्रियता की छांव उन्हें सहज, सरल, सौम्य और कुशाग्र बनाती है, यहीं उनके धैर्य और शक्ति-सामर्थ्य का आधार भी है।
श्री तोमर पूर्णत: सांस्कारिक राजनेता है जिन्होंने अपने दायित्व को कभी बड़ा या छोटा करके नहीं नापा। विद्यार्थी परिषद की छात्र राजनीति से उनके सार्वजनिक जीवन का शुभारंभ हुआ। श्री तोमर माटी से जुड़े नेता हैं, उन्होंने मुरैना जिले के ओरेठी गांव की जमीनी हकीकत देखी और यहीं से तप कर निकले। राजनीति में शून्य से शिखर तक पहुंचने वाले गिनती के ही सहयात्री ऐसे हैं जो गांव-मोहल्ले की राजनीति से चलकर दिल्ली के राजपथ तक पहुंचे।श्री तोमर ने ग्वालियर नगर निगम की पार्षदी से चुनाव यात्रा शुरू की। वे तरूणाई में ही देश की मुख्य राजनीतिक धारा से जुड़ गए थे। आपातकाल के बाद 1977 में जब केन्द्र व प्रदेश में जनता पार्टी की सरकार थी तब वे पार्टी के मण्डल अध्यक्ष बने। अपनी प्रभावी कार्यशैली और वक्तृत्व कला के जरिए वे मोर्चे के प्रदेश भर के युवाओं के चहेते बन गए परिणामत: 1996 में वे भारतीय जनता युवा मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष बने।
यहां मैंने श्री तोमर के आरंभ काल का जिक्र इसलिए किया ताकि पार्टी की नई पीढ़ी यह जाने और समझे कि यदि लगन, निष्ठा और समर्पण है तो उसके उत्कर्ष को कोई बाधा नहीं रोक सकती, श्री तोमर, उनका व्यक्तित्व व उनकी राजनीतिक यात्रा इसका एक आदर्श व जीवंत प्रमाण है।
उनके व्यक्तित्व की सबसे बड़ी खासियत यह है कि वे सब कुछ करने, परिणाम देने व समर्थ होने के बावजूद भी स्वयं श्रेय लेने पर विश्वास नहीं करते। वे अपनी उपलब्धियों को साझा करते हैं। ‘शौमैनशिप’ उनमें दूर-दूर तक नहीं है।
मोदी सरकार के पहले कार्यकाल में इस्पात व खान मंत्री के रूप में उनकी कार्यशैली,नवाचार व मूल्यवर्धित परिणाम देने की कला ने केंद्रीय नेतृत्व को प्रभावित किया। देश में खनन क्षेत्र को नया जीवन देने का बीड़ा इन्होंने उठाया व पहले ही दिन से उस दिशा में कार्यवाही शुरू कर दी। केन्द्र सरकार के खान मंत्रालय ने तोमरजी के नेतृत्व में खनन क्षेत्र में भारी ठहराव, अवैध खनन, पारदर्शिता की कमी और विनियमित ढ़ांचे की अपर्याप्तता की चुनौती से निपटने के लिए एमएमडीआर अधिनियम 1956 में व्यापक संशोधन किए। इससे अब केवल नीलामी प्रक्रिया के माध्यम से ही खनिज रियायतों का आवंटन हो सकेगा, विवेकाधिकार समाप्त हो गया, पारदर्शिता बढ़ गई, खनिज मूल्य में सरकार का हिस्सा बढ़ गया और निजी निवेश तथा आधुनिक प्रौद्योगिकी को आकृष्ट करने में सफलता मिली।श्री तोमर के नेतृत्व व प्रशासनिक क्षमता का लोहा तो विपक्ष की राजनीति करने वाले भी मानते है। मेरी अपनी दृष्टि से श्री तोमर नई पीढ़ी के कार्यकर्ताओं के लिए इसलिए भी अनुगम्य और प्रेरणादायी हैं कि इकाई स्तर से शिखर की राजनीति तक का सफर किस धैर्य व संयम के साथ किया जाता है। वे एक पार्षद से विधायक, सांसद, मंत्री से केन्द्रीय मंत्री तक पहुंचे वहीं मंडल के अध्यक्ष के दायित्व से प्रदेश के अध्यक्ष, राष्ट्रीय महामंत्री बने। यह भारतीय जनता पार्टी में ही संभव है जहां कार्यकर्ता की क्षमता और निष्ठा का ईमानदारी से मूल्यांकन होता है। श्री तोमर इसकी जीती जागती मिसाल हैं।
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सुरखी में चुनौतियों से ऊपर पहुंची गोविंद राजपूत की उड़ान
रजनीश जैन,वरिष्ठ पत्रकार ,सागर
सिंधिया के सिपहसालार गोविंद राजपूत को परास्त करने का मंसूबा पालना आसान है लेकिन उन्हें हराना अब आसान नहीं है। सागर जिले के सुरखी विधानसभा क्षेत्र में उनको हराने और हरवाने की कला सिर्फ पूर्व गृहमंत्री भूपेंद्रसिंह के पास है लेकिन वे ही अब गोविंदसिंह राजपूत के सारथी होंगे। तकरीबन तय है कि चुनाव का संचालन कद्दावर नेता भूपेंद्रसिंह के हाथों में होगा। सुरखी में भाजपा का परचम भूपेंद्र सिंह ने ही लहराया था,यह मूलरूप से उनका ही विधानसभा क्षेत्र रहा है। सुरखी में दोनों के खेमे एक होने का अर्थ 1+1=2 नहीं बल्कि =11 होगा। गोविंद राजपूत को 2013 के विधानसभा चुनाव में पराजित करने वाली पूर्व कांग्रेस विधायक संतोष साहू की बेटी पारुल साहू भी भूपेंद्र सिंह की ही खोज थीं। पिछले चुनाव में पारुल साहू टिकट काट कर भाजपा ने जैसे गोविंद राजपूत को वाकओवर ही दे दिया था। तब से पारुल साहू अपनी ही पार्टी में उपेक्षित महसूस कर रही हैं लेकिन लगता नहीं कि वे पार्टी छोड़ कर कांग्रेस की कमजोर कश्ती में सवार होंगी। ऐसे में असली प्रत्याशी ढूंढ़ना ही कांग्रेस के लिए चुनौती भरा काम है।
यह हैरत की बात है कि कांग्रेस में रहते हुए गोविंद राजपूत के खिलाफ प्रत्याशी की खोज और तैयारी करना होती थी क्योंकि इस कठिन चुनौती के लिए कोई आसानी से तैयार नहीं होता था। लेकिन आज जब गोविंद भाजपा ज्वाइन करके,मंत्री बनके अपनी चतुरंगिणी सेना के साथ मैदान में खड़े हैं तब उनके खिलाफ चुनाव लड़ने कांग्रेस से लगभग बीस प्रत्याशी टिकट मांग रहे हैं। और मैं इन सबके नाक्म देने की जहमत उठाए बिना साफ तौर पर इन सबको यह कह कर खारिज कर रहा हूं कि इनमें से एक भी गोविंद का टक्कर देने का माद्दा नहीं रखता। फिर कांग्रेस में टिकटार्थियों की इतनी लंबी क्यू क्यों है!? इसका उत्तर सीधा और सपाट है कि कांग्रेस के ज्यादातर अभ्यर्थी अपने ही हाईकमान और क्षत्रपों की आंतरिक वेदना और प्रतिशोध की भावनाओं का नगदीकरण करना चाह रहे हैं।
जैसी कि खबरें आ रही हैं कि कमलनाथ और दिग्विजय सिंह सरकार गिराने के लिए सिंधिया को तगड़ा सबक सिखाना चाह रहे हैं। इसके लिए जो लक्ष्य रखे गए हैं उसमें से एक लक्ष्य गोविंद राजपूत को ‘एनीहाऊ’ पराजित करना भी है। कांग्रेस कार्यकर्ताओं में अफवाह यहां तक है कि सुरखी के लिए दस करोड़ का बजट रखा गया है। बस यही दस करोड़ वह अनकापल्ली गुड़ है जिसके लिए मक्खियां बड़ी तादाद में भिनभिना रही हैं।…और इस मानसिकता वाली ये मक्खियां अच्छी तरह जानती हैं कि यह गुड़ चट कर जाने वाली मक्खी को शत्रुपक्ष से भी शहद चाटने का तगड़ा प्रस्ताव मिल सकता है। तो कांग्रेस के सामने पहली चुनौती यह सावधानी बरतने की है कि उन्हें असल प्रत्याशी खोजना है और जयचंद या मीरजाफरों से बचना है। जाहिर है जयचंद बड़े-बड़े कागजी समीकरण बना कर हाईकमान को रिझा रहे हैं पर ये सब उनके सब्जबाग हैं।
असलियत यह है कि कांग्रेस के सामने संभावनाशील प्रत्याशी चयन के सीमित विकल्प हैं। पहला यह कि कांग्रेस का कोई कद्दावर नेता सुरखी से मैदान में उतरे। इनमें अजयसिंह राहुल भैया शीर्ष पर हैं। उसकी वजह यह है कि स्थानीय भाजपा नेता राजेंद्रसिंह मोकलपुर से सिर्फ उन्हीं की पटरी बैठती है। राजेंद्रसिंह से गोविंद राजपूत की ऐसी व्यक्तिगत अदावत है कि यदि उन्हें हराने की ठोस परिस्थिति बनती दिखी तब वे इसके लिए भाजपा छोड़ने जैसा कदम भी उठा सकते हैं।
कांग्रेस के पास दूसरा विकल्प यह है कि भाजपा से राजेंद्र सिंह मोकलपुर या पारुलसाहू को तोड़ कर टिकट दिया जाए। पारुल साहू का टूटना मुश्किल काम है पर असंभव भी नहीं है। मोकलपुर टूट सकते हैं पर इसके लिए ठोस परिस्थितियां बनानी होंगी। वे अगर तैयार हो गए तो यह उनकी गोविंद राजपूत से प्रत्यक्ष अप्रत्यक्ष चौथी और भीषण जंग होगी। इस जंग के लिए वे लगातार अनुभवी होते जा रहे हैं और क्षेत्र की जनता भी उनको एक मौका देने पर विचार कर सकती है। कांग्रेसी और भाजपाई दोनों कार्यकर्ता उनके साथ आज भी फ्रेंडली हैं।
इसके अलावा एक तीसरा और इकलौता विकल्प कांग्रेस के पास यह है कि वह अपने पुराने और कद्दावर कांग्रेसी नेता रहे विट्ठलभाई पटेल की नातिन धारणा पटेल को चुनाव लड़ने के लिए तैयार करे। यहां ध्यान रहे कि सुरखी क्षेत्र विट्ठलभाई का ही चुनाव क्षेत्र रहा है जहां उनको दीवान भगतसिंह भापेल ने अपनी राजनैतिक जमीन देकर जिताया और मंत्री के ओहदे तक पहुंचाया। पटेल परिवार कांग्रेस का निष्ठावान और पुराना परिवार रहा है। सुरखी क्षेत्र की जनता, वहां के कांग्रेस कार्यकर्ताओं में अब भी इस परिवार के प्रति विश्वास और सम्मान है। दरअसल कांग्रेस की तरफ से सुरखी क्षेत्र में गोविंद राजपूत की आरंभिक सफलताओं में विट्ठलभाई का भी योगदान रहा है। क्षेत्र के जातिगत समीकरण भी पटेल परिवार के पक्ष में हैं। वहां का परंपरागत कांग्रेसी वोटर और कांग्रेसी कार्यकर्ता इसके लिए आश्वस्त हो सकता है कि यह प्रत्याशी बिकेगा और झुकेगा नहीं और भविष्य में भी संघर्ष के लिए साथ रहेगा।
धारणा पटेल वैसा ही फ्रेश, ऊर्जा से भरा,अंग्रेजीदां चेहरा है जैसी कि पारुल साहू थीं। गोविंद राजपूत खेमा ऐसे ही गुमनाम और नये चेहरे से भयभीत होता है क्योंकि तब उनकी सारी रणनीतियां असमंजस का शिकार हो जाती हैं। महिला मतदाताओं का सपोर्ट एकपक्षीय हो जाता है। धारणा पटेल वैसे तो कुछ वर्षों से एनजीओ के सहारे अपनी पुश्तैनी विरासत को रचनात्मक गति देने में सक्रिय हैं पर वे राजनीति के लिए एकदम नई हैं। उनका पूरा कैंपेन दिल्ली और भोपाल के वरिष्ठ नेताओं को हाथ में लेना होगा। आर्थिक मोर्चे पर भी अब इस परिवार से बहुत बेहतर की उम्मीद नहीं की जा सकती। लेकिन कुछ वर्षों पहले दादा विट्ठलभाई पटेल और हाल में पिता संजयभाई पटेल की मृत्यु की सहानुभूति लहर क्षेत्र की जनता और जिले के कांग्रेस कार्यकर्ताओं को उद्वेलित कर सकती है। इस तरह पार्टी को एक बेहतर संभावनाओं वाला प्रत्याशी हासिल होगा। लगभग महीने भर से कांग्रेस नेतृत्व के नुमाइंदे स्व विट्ठलभाई पटेल के परिवार के संपर्क में हैं और उनकी सहमति से ही उनके नाम पर क्षेत्र की जनता की नब्ज टटोली जा रही है।
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जनता से माफी मांगे दिग्विजय सिंह
भोपाल(प्रेस सूचना केन्द्र)। पिछले दो दिनों से मुख्यमंत्री कमलनाथ और दिग्विजयसिंह ने भाजपा पर विधायकों को बंधक बनाने, लालच देने और सरकार गिराने के जो आरोप लगाए हैं, वे बेहद निंदनीय और घटिया हैं। ये कांग्रेस की उस मानसिकता को प्रकट करते हैं, जिसे लोकतंत्र में स्वीकार नहीं किया जा सकता। ऐसा करके मुख्यमंत्री कमलनाथ और दिग्विजयसिंह ने न सिर्फ भारतीय जनता पार्टी के कार्यकर्ताओं बल्कि उन विधायकों का भी अपमान किया है, जो लाखों लोगों द्वारा चुने गए हैं। दुर्भाग्य से इन विधायकों में कांग्रेस के विधायक भी शामिल हैं। कांग्रेस का झूठ अब पूरी तरह उजागर हो गया है। राज्यसभा चुनाव की आपाधापी में यह शर्मनाक हरकत करने के लिए कांग्रेस के नेताओं को जनता, विधायकों और भाजपा कार्यकर्ताओं से माफी मांगनी चाहिए। यह बात भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष व सांसद श्री विष्णुदत्त शर्मा ने विधायकों द्वारा भाजपा पर लगाए जा रहे आरोपों को गलत बताए जाने पर मीडिया के सामने प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कही।
श्री शर्मा ने कहा कि पिछले एक-सवा साल में कांग्रेस की कमलनाथ सरकार हर मोर्चे पर असफल रही है। इस सरकार ने जनहित का कोई काम नहीं किया है। सरकार और कांग्रेस के नेता अलग-अलग तरीकों से लूट-खसोट में लगे हुए हैं। सत्ता में आने के पहले जनता से जो वादे किए थे, उनमें से किसी वादे को पूरा नहीं किया। कांग्रेस सरकार ने इन सभी मुद्दों से जनता का ध्यान हटाने, उसे भ्रमित करने के लिये यह राजनीतिक प्रपंच रचा था, ताकि जनता बाकी सब बातें भूल जाए। लेकिन इस तरह की निंदनीय हथकंडेबाजी को भारतीय जनता पार्टी सहन नहीं करेगी और कमलनाथ सरकार को इसका करारा जवाब देगी।
प्रदेश अध्यक्ष श्री शर्मा ने कहा कि गोएवल्स ने कहा था कि एक झूठ को स्थापित के लिये 100 झूठ बोलना पड़ता है। कांग्रेस के नेता गोएवल्स की संतानों के गिरोह के रूप में उभरे हैं और उनके इस सिद्धांत को चरितार्थ कर रहे हैं। श्री शर्मा ने कहा कि कांग्रेस की हमेशा यही कोशिश रहती है कि कैसे झूठ बोला जाए। कमलनाथ सरकार झूठ बोलकर ही सत्ता में आई और अब सत्ता में बने रहने के लिये सौ झूठ का सहारा ले रही है। वहीं, पर्दे के पीछे से सरकार चलाने वाले मिस्टर बंटाढार दिग्विजय सिंह लगातार झूठ बोलते रहते हैं।
श्री शर्मा ने कहा कि जिन विधायकों को प्रलोभन देने के आरोप लगाए जा रहे थे, उन सभी को मुख्यमंत्री आवास पर बुलाकर दबाव डाला गया। इसके बावजूद उन विधायकों का कहना है कि हमें भाजपा की ओर से कोई ऑफर नहीं मिला और न ही कोई हमें लेकर गया था। यह इस बात का प्रमाण है कि दिग्विजय सिंह और कमलनाथ सहित तमाम नेताओं ने भारतीय जनता पार्टी को बदनाम करने के लिए झूठ फैलाया था। श्री शर्मा ने कहा कि सच्चाई क्या है, इसे कांग्रेस के नेता भी जानते हैं। कमलनाथ के मंत्री उमंग सिंगार ने कहा है कि यह सब कांग्रेसी खेमे में चल रही राज्यसभा जाने की लड़ाई है। सांसद विवेक तन्खा मानते हैं कि कांग्रेस के भीतर भारी असंतोष है, उसी के परिणामस्वरूप यह स्थितियां बन रही हैं, इसलिए मुख्यमंत्री को कांग्रेस अध्यक्ष का पद छोड़ देना चाहिए। मंत्री प्रदीप जायसवाल कहते हैं कि सरकार जाए या रहे, मुझे कोई फर्क नहीं पड़ता। दिग्विजय सिंह के अनुज विधायक लक्ष्मण सिंह ईश्वर से दुआ कर रहे हैं कि मुख्यमंत्री को सद्बुद्धि आ जाए। वरिष्ठ नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया कहते हैं कि मुझे किसी हॉर्स ट्रेडिंग की जानकारी नहीं है। विधायक रामबाई का कहना था कि मुझे कोई कैसे उठा सकता है? कुल मिलाकर यह पूरा प्रपंच कांग्रेस की अंदरूनी लड़ाई का ठीकरा भाजपा पर फोड़ने के लिये रचा गया था।
श्री शर्मा ने कहा कि जब से कमलनाथ सरकार बनी है, इसमें लगातार अंर्तद्वंद और अंर्तकलह चल रहा है। प्रदेश की जनता कांग्रेस सरकार को समझ चुकी है। यह सरकार माफियाओं की सरकार है। इन्होंने एक माफिया पर हाथ डाला और बाकी 99 माफियाओं से वसूली की है। भाजपा की सरकार ने कभी ऐसा नहीं किया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस एक डूबता जहाज है और सभी इससे भाग रहे हैं। उन्होंने कहा कि दिग्विजय सिंह की वास्तविकता पूरा देश अच्छी तरह से जानता है। वे कितना झूठ बोलते हैं, किस तरह के देशद्रोही बयान देते, जनता को सब पता है। उन्होंने कहा कि दिग्विजयसिंह उन लोगों के साथ खड़े होते हैं, जो देश तोड़ने और आजादी के नारे लगाते हैं। -

वोट की तिजारत के दौर में कितना सुना जाएगा विष्णु का संघनाद
भारतीय लोकतंत्र अब सिर्फ पूंजीवाद की ओर पींगें बढ़ा रहा है. इसका असर इतना व्यापक हो चला है कि चुनावी वादों के शोर में मूल्यों की राजनीति अप्रासंगिक हो चली है। वोट का अब राजनीतिक मूल्यों से नाता टूटता जा रहा है और वह मुफ्त सौगातों के ऊपर लिपटा रंग बिरंगा रैपर बन गया है। हालिया दिल्ली विधानसभा के चुनावों में ये असर इतना स्पष्ट नजर आया कि उसने भारत की राजनीति की तस्वीर साफ कर दी है। इसके पहले पांच राज्यों के चुनाव में भी कमोबेश यही तस्वीर उभरी थी लेकिन तब इसका शोर इतना तीखा नहीं था। इसके बावजूद भारतीय जनता पार्टी ने कई राज्य हाथ से गंवाने के बाद मध्यप्रदेश में अपने सांसद विष्णुदत्त शर्मा को प्रदेश की कमान थमा दी है। वे संघ की तपोनिष्ट सेवा भावना से प्रेरित होकर राजनीति में आए हैं। यही वजह है कि उनकी सफलता को लेकर तरह तरह के संशय और आशंकाएं व्यक्त की जाने लगीं हैं। राजनीति के दीवानों का कहना है कि एक ओर जब देश में अरविंद केजरीवाल की गिफ्ट वाली राजनीति का बोलबाला है तब विष्णुदत्त शर्मा का देशराग कहां टिक सकता है।
मध्यप्रदेश का राजनीतिक परिदृष्य दिल्ली से अलहदा नहीं है। यहां की राजनीति भी गिव एंड टेक के नए नए प्रतिमानों के बीच झूलती रही है। पहले जो राजनीति गरीबों के इर्दगिर्द घूमती रही थी वह आज निम्न मध्यम वर्ग को भी अपने आगोश में ले चुकी है। पिछले पंद्रह सालों में भारतीय जनता पार्टी ने किसानों के साथ साथ प्रदेश के बड़े हिस्से तक सत्ता का लाभ पहुंचाया था। विभिन्न हितग्राही मूलक योजनाओं ने शिवराज सिंह चौहान की लोकप्रियता में चार चांद लगा दिए। सरकारी नौकरियां खरीदकर वेतन भत्तों के हकदार बने एक छोटे तबके को तो शिवराज सिंह चौहान की सरकार ने नए वेतनमानों का लाभ दिया ही इसके साथ आम नागरिकों के बड़े तबके तक भी सत्ता का लाभांश पहुंचाने का प्रयोग किया। सैकड़ों योजनाओं के माध्यम से प्रदेश के बड़े हिस्से तक सरकारी आय और कर्ज से जुटाए गए संसाधनों का लाभ पहुंचाया। शिवराज की सबसे बड़ी उपलब्धि यही रही कि उन्होंने प्रदेश के एक बड़े तबके को सत्ता में सीधे भागीदार बनाया। किसानों के खातों में लाभांश और मुआवजे की राशि पहुंचाने का इतना सफल प्रयोग इसके पहले देश की राजनीति में भी नहीं किया गया था। यही कारण था कि शिवराज को अजेय कहा जाने लगा था।
भाजपा की राजनीति में सेंध लगाना कांग्रेस के लिए कठिन नहीं रहा। संगठन और सिद्धांतों के बगैर कांग्रेस ने प्रदेश में पल रहे असंतोष की कड़ियां जोड़ लीं और भाजपा को सत्ता गंवानी पड़ी। कमलनाथ के नेतृत्व में कुशल व्यूहरचना करके कांग्रेस के रणनीतिकारों ने भाजपा को चौखाने चित्त कर दिया। जयस के नेतृत्व में आदिवासियों के आंदोलन से उभारा गया असंतोष भाजपा के पतन की सबसे बड़ी वजह बना। किसान कर्ज माफी और बेरोजगारों को भत्ता देने जैसे लुभावने वादों ने मतदाताओं को बरगलाने में कोई कसर नहीं छोड़ी। इसके विपरीत भारतीय जनता पार्टी ने भी कांग्रेस को सत्ता में आने का मार्ग सुगम कर दिया। शिवराज सिंह चौहान के गलत टिकिट वितरण ने कांग्रेस को सुरक्षित गुप्त मार्ग उपलब्ध कराया और कांग्रेस ने फोटो फिनिश मात देकर सत्ता अपनी झोली में डाल ली।
शिवराज सिंह चौहान ने भाजपा के संगठन को जिस तरह अपने एकाधिकार से पंगु बनाया उससे भाजपा ने अपनी संघर्ष क्षमता गंवा दी। भाजपा के तमाम पदाधिकारी सत्ता की मलाई छानने में जुट गए और संगठन को उन्होंने हितग्राही मूलक योजनाओं के दरवाजे पटक दिया। यही वजह थी कि भाजपा का कैडर हितग्राही मूलक योजनाओं के सहारे सिसकता रहा और सत्ता के खिलाड़ी बड़े कारोबार से अपनी पीढ़ियां सुरक्षित करने में जुट गए। इस कवायद का सबसे बड़ा पहलू ये भी था कि उनके साथ कांग्रेस के वे तमाम सत्ता के दलाल भी सहयोगी के रूप में शामिल थे जिन्होंने मध्यप्रदेश की स्थापना के बाद से सत्ता की लूट में महारथ हासिल की थी। यही वजह थी कि कांग्रेस के लूटतंत्र की जड़ें पंद्रह सालों में और भी गहरी हो गई। आज कमलनाथ जिस माफिया राज को गरियाते फिरते हैं वह वास्तव में कांग्रेस की कथित गरीब परस्ती से ही उपजा था। पूर्व प्रधानमंत्री डाक्टर मनमोहन सिंह जिस इंसपेक्टर राज को लानत भेजते हुए कहते थे कि वह अब कभी नहीं लौटेगा उसे कमलनाथ ने आते ही एक बार फिरसे जिंदा कर दिया।
शुद्ध के लिए युद्ध हो, तबादलों का बेशर्म कारोबार हो या फिर माफिया के विरुद्ध संग्राम का उद्घोष हो सभी के पीछे सत्ता की आड़ में लूट ही प्रमुख धुरी रहा है। कमलनाथ और उनकी ब्रिगेड ने सत्ता की आड़ में करोड़ों रुपयों का जो खेल किया है उसका सीधा असर प्रदेश की जनता पर पड़ रहा है। मंहगाई और अराजकता ने अपराध का आंकड़ा बढ़ा दिया है। सरेआम लूट, हत्याएं और मारपीट की घटनाएं बढ़ गईं हैं। जिस डकैती समस्या को कभी समाप्त घोषित कर दिया गया था वह अब अपहरण उद्योग के रूप में एक बार फिर सिर उठाने लगी है। जीएसटी को असफल बनाने के लिए राज्य प्रायोजित जो टैक्स चोरी की मुहिम चलाई जा रही है उसने केन्द्रीय करों में मिलने वाले हिस्से को अप्रत्याशित रूप से घटा दिया है। कमलनाथ जिस बेशर्मी से खजाना खाली है का राग अलाप रहे हैं उससे भी साफ हो गया है कि मौजूदा सरकार के पास प्रदेश को सफल बनाने का कोई रोड मैप नहीं है।
अब इन हालात में भाजपा ने विष्णुदत्त शर्मा को प्रदेश की कमान थमाकर फैला रायता समेटने की जो कवायद शुरु की है उसका कितना असर जमीन पर होगा उसका आकलन करना निश्चित ही बहुत जटिल हो गया है। विष्णुदत्त शर्मा संघ की जोड़ने वाली राजनीति की गोद में पले बढ़े हैं। वे सभी वर्गों और तबकों के बीच संबंधों की फेविकाल बिछाते रहे हैं। बेशक वे इस कार्य में निपुण हैं। बरसों से वे समाज को जगाने वाले प्रचारकों की भूमिका में रहे हैं। इसके बावजूद आज दौर बदल गया है। अब समाज को जगाने के बजाए उसे मुफ्तखोरी के नशे में डुबाने का दौर शुरु हो गया है। साम्यवाद जहां सख्ती से नियंत्रण करता रहा है वहीं पूंजीवाद सुर संगीत में डूबे प्रलोभनों की लोरियां सुना रहा है। ऩिश्चित रूप से ऐसे दौर में भाजपा का प्रदेश अध्यक्ष बनकर विष्णुदत्त शर्मा को नई चुनौतियों का सामना करना पड़ेगा। ये चुनौतियां उनकी अब तक की राजनीतिक विरासत से बिल्कुल अलग हैं। यही वजह है कि भाजपा और संघ के स्वयंसेवकों के सामने तरह तरह के सवाल उठ रहे हैं जिनका शमन सिर्फ उन्हें ही करना है। देखना है वे राजनीति के इस व्यूह को कैसे भेद पाते हैं।
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भाजपा ने संगठन गढ़ने बीडी शर्मा को बनाया प्रदेश अध्यक्ष
भोपाल,15 फरवरी(प्रेस सूचना केन्द्र)। भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश महामंत्री एवं सांसद विष्णुदत्त (व्हीडी) शर्मा को राष्ट्रीय नेतृत्व ने प्रदेश अध्यक्ष नियुक्त किया है। श्री विष्णुदत्त शर्मा ने अपने सामाजिक जीवन की शुरुआत अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद से की थी। इसके बाद वे कई वर्षों तक परिषद में पूर्णकालिक कार्यकर्ता के रूप में कार्य करते रहे। वर्तमान में वे भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश महामंत्री, मध्यप्रदेश ओलपिंक एसोसिएशन के प्रदेश उपाध्यक्ष के साथ ही खजुराहो लोकसभा सीट से सांसद हैं।
श्री विष्णुदत्त शर्मा का लंबा कार्यकाल विद्यार्थी परिषद में कड़े परिश्रम और संघर्षों के साथ कार्य करते हुए व्यतीत हुआ है। उन्होंने अपने सामाजिक जीवन की शुरुआत वर्ष 1986 में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद से की। वे वर्ष 1994 तक विद्यार्थी परिषद में विभिन्न पदों पर रहे। वर्ष 1995 से परिषद में पूर्णकालिक के रूप में कार्य करते हुए विभिन्न दायित्वों का निर्वहन किया। यह सफर वर्ष 2013 तक सतत जारी रहा। वर्ष 2013 में उन्होंने भारतीय जनता पार्टी में प्रवेश किया तथा विभिन्न दायित्वों का निर्वहन किया।
श्री विष्णुदत्त शर्मा का जन्म 01 अक्टूबर 1970 को मुरैना जिले के ग्राम सुरजनपुर में हुआ। उनके पिता श्री अमर सिंह शर्मा हैं। श्री विष्णुदत्त शर्मा ने एमएससी (एग्रीकल्चर एग्रोनामी) से की। उनकी प्रारंभिक शिक्षा गृहग्राम सुरजनपुर के सरकारी स्कूल में हुई। इसके बाद कक्षा नवमी से 12वीं तक की पढ़ाई मुरैना से की। शासकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय मुरैना से बीएससी प्रथम वर्ष की पढ़ाई की। आगे की पढ़ाई के लिए ग्वालियर के कृषि महाविद्यालय में एडमिशन लिया। इसके बाद एमएससी की पढ़ाई के लिए सीहोर के कृषि महाविद्यालय में प्रवेश लिया। बचपन से ही उनकी सामाजिक कार्यो में रूचि थी। यही कारण रहा कि छात्र जीवन से ही उन्होंने सार्वजनिक राजनीति की शुरूआत कर दी। वे वर्ष 2001 से 2005 तक राष्ट्रीय मंत्री, वर्ष 2007 से 2009 तक परिषद के राष्ट्रीय महामंत्री एवं तत्पश्चात वर्ष 2013 तक क्षेत्रीय संगठन मंत्री मध्यक्षेत्र (मप्र-छग) रहे। वर्ष 2001 से वर्ष 2005 तक प्रदेश संगठन मंत्री महाकौशल का दायित्व भी संभाला। इससे पहले वर्ष 1993 में मध्यभारत के प्रदेश मंत्री रहे। उज्जैन के विभाग संगठन मंत्री एवं ग्वालियर के विभाग प्रमुख का दायित्व भी उन्होंने बखूबी निभाया।
श्री विष्णुदत्त शर्मा ने वर्ष 2013 में भारतीय जनता पार्टी में प्रवेश किया तो यहां भी उन्हें कई दायित्व मिले। पार्टी ने उन्हें वर्ष 2014 के लोकसभा चुनाव में झारखंड के संथाल क्षेत्र की 6 लोकसभा सीटों के चुनाव प्रभारी की जिम्मेदारी सौंपी। यहां के विधानसभा चुनाव में भी उन्हें संथाल क्षेत्र का प्रभारी बनाया गया। इसके अलावा दिल्ली, बिहार, असम, मध्यप्रदेश सहित कई अन्य प्रदेशों में विधानसभा चुनाव में कार्य संचालन एवं प्रबंधन की जिम्मेदारी भी सौंपी गईं। वे मार्च 2014 से दिसंबर 2016 तक नेहरू युवा केंद्र संगठन के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष रहे। 14 अगस्त 2016 से भाजपा के प्रदेश महामंत्री का दायित्व निभा रहे हैं।
श्री विष्णुदत्त शर्मा ने राजनीति के अलावा अन्य क्षेत्रों में भी कई उपलब्धियां हासिल की हैं। इनमें बेस्ट जोन इंटर यूनिवर्सिटी बॉलीवाल प्रतियोगिता में जवाहरलाल नेहरू कृषि विशवविद्यालय का प्रतिनिधित्व, कबड्डी और बॉलीवाल प्रतियोगिताओं में महाविद्यालयीन टीम के कप्तान, विभिन्न प्रतियोगिताओं में कृषि महाविद्यालय ग्वालियर का प्रतिनिधित्व, एथलेटिक्स प्रतियोगिता में महाविद्यालय स्तर पर चैंपियन भी रहे। इसके अलावा एनसीसी का सी सर्टिफिकेट प्राप्त किया एवं अखिल भारतीय ट्रेकिंग शिविर गंगोत्री-गौमुख में सहभागिता एवं एनसीसी का बी सर्टिफिकेट प्राप्त किया।
श्री विष्णुदत्त शर्मा ने देश में बढ़ते भष्टाचार के खिलाफ भी अभियान चलाया। इसके लिए उन्होंने वर्ष 2012 में यूथ अगेंस्ट करप्शन के तहत कार्य किया। उन्होंने मंच के राष्ट्रीय सह संयोजक के रूप में देश के विभिन्न हिस्सों में जाकर भष्टाचार के खिलाफ जनजागरण अभियान चलाया, साथ ही कई स्थानों पर आंदोलन एवं प्रदर्शन का नेतृत्व किया। तत्कालीन केंद्रीय मंत्री प्रफुल्ल पटेल द्वारा दिल्ली एयरपोर्ट के भूमि घोटाले के विरूद्ध वर्ष 2012 में बालाघाट से गोदिंया (महाराष्ट्र) तक पदयात्रा की। देश भर में व्याप्त भ्रष्टाचार एवं तत्कालीन केंद्र सरकार के खिलाफ मार्च 2012 में दिल्ली में संसद का घेराव किया। अभाविप के राष्ट्रीय महामंत्री रहते हुए देश भर में प्रवास किया एवं शिक्षा के व्याप्त व्यापारीकरण एवं अव्यवस्थाओं के खिलाफ जन आंदोलन खड़ा करते हुए सड़क से लेकर सर्वोच्च न्यायालय तक संघर्ष किया। मध्यप्रदेश में निजी मेडिकल कॉलेजों में गरीब बच्चों के प्रवेश में आने वाली कठिनाइयों के लिए कड़ा संघर्ष किया। इसके अलावा नर्मदा नदी को प्रदूषण मुक्त बनाने के लिए मां नर्मदा अध्ययन दल का गठन कर नर्मदा अध्ययन यात्रा की। श्री विष्णुदत्त शर्मा ने विद्यार्थी कल्याण न्यास संस्था की स्थापना भी की। यह संस्था गरीब एवं पिछड़े वर्गों के सामाजिक उत्थान के लिए कार्य करती है।
श्री विष्णुदत्त शर्मा को अपने बेहतर कार्यों के लिए कई अवार्ड भी प्राप्त हुए हैं। वर्ष 2018 में उन्हें दिल्ली के प्रतिष्ठित कलाम फाउंडेशन द्वारा कलाम इनोवेशन एंड गवर्नेंस अवार्ड मिला। एमआईटी पुणे द्वारा यूथ लीडर अवार्ड प्रदान किया गया। इसके साथ ही शासकीय एवं सामाजिक संस्थाओं द्वारा युवाओं के नेतृत्व प्रदान करने, सामाजिक कार्यों के लिए प्रेरित करने, सेवा कार्यों को मान्यता प्रदान करते हुए कई अन्य अवार्ड, स्मृति चिन्ह एवं अभिनंदन पत्र भी मिले।
श्री विष्णुदत्त शर्मा ने कई विदेश यात्राएं भी कीं। इनमें भारत सरकार के युवा कार्य एवं खेल मंत्रालय द्वारा इंडो-चीन यूथ एक्सचेंज प्रोग्राम 2015 में भारतीय डेलीगेशन का नेतृत्व प्रमुख रहा। अंतरराष्ट्रीय एग्रीकल्चर सेमिनार के लिए बैंकाक गए। राजनीतिक, सामाजिक अध्ययन के लिए सिंगापुर की यात्रा की। साथ ही नेपाल भी गए।
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कब्जाधारी कांग्रेसियों की सूची सार्वजनिक करेगी भाजपा बोले लुणावत
भोपाल,21 जनवरी(प्रेस सूचना केन्द्र)। भारतीय जनता पार्टी ने अपने पंद्रह सालों के शासनकाल में सार्वजनिक संपत्तियों पर कब्जा जमाने वाले अतिक्रमण कारियों के खिलाफ कार्रवाई की लेकिन कभी दलगत राजनीति के आधार पर भेदभाव नहीं किया। मौजूदा कांग्रेस सरकार चुन चुनकर भारतीय जनता पार्टी के कार्यकर्तांओं को अतिक्रमण के नाम पर प्रताड़ित कर रही है। ऐसे झूठे मामलों में प्रताड़ित किए जा रहे आम लोगों का नेतृत्व करते हुए कल भारतीय जनता पार्टी के कार्यकर्ता पूरे प्रदेश में कलेक्टर कार्यालयों का घेराव करेंगे। सरकार से मांग की जाएगी कि वह आम नागरिकों को भाजपा का कार्यकर्ता बताकर प्रताड़ित करना बंद करे। भाजपा ने हर जिले में कांग्रेस के पदाधिकारियों के अतिक्रमणों की सूची बनाई है जिसे सार्वजनिक किया जाएगा और सरकार से उन अतिक्रमण कारियों के विरुद्ध बेदखली की कार्रवाई करने की मांग की जाएगी। भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश उपाध्यक्ष बृजेश लुणावत ने आज पार्टी के प्रदेश कार्यालय में आयोजित पत्रकार वार्ता में ये बात कही है।
श्री लुणावत ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी जिस तरह के भेदभाव और अवैध वसूली के आरोप प्रदेश सरकार पर लगाती रही है, उसे स्वयं मुख्यमंत्री कमलनाथ भी मानते हैं और मुख्य सचिव की नोटशीट भाजपा के आरोपों पर मोहर लगाती है। मुख्यमंत्री ने माना है कि इस मुहिम के दौरान माफिया के नाम पर आम जनता को परेशान किया जा रहा है। उन्होंने लिखा है कि बिल्डिंग परमीशन जैसी छोटी-छोटी बातों के लिए हजारों नोटिस दिये जा रहे हैं, पुलिस और प्रशासन के लोग इसमें शामिल हैं, जबकि मैंने स्पष्ट आदेश दिया था कि कार्रवाई माफिया पर हो, जनता पर नहीं।
श्री लुणावत ने कहा कि कमलनाथ सरकार प्रदेश में अराजकता का वातावरण बना रही है। प्रदेश में अवैध शराब माफिया, उत्खनन माफिया और ट्रांसपोर्ट माफिया सक्रिय हैं, लेकिन उनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं हो रही है। कांग्रेस नेताओं और अधिकारियों की मिलीभगत से सरकारी जमीनों को हथियाया जा रहा है, अवैध कब्जे किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि प्रदेश में सबसे ज्यादा अतिक्रमण कांग्रेसियों के ही हैं, लेकिन गरीब जनता और भाजपा कार्यकर्ताओं को चुन-चुनकर निशाना बनाया जा रहा है।
श्री लुणावत ने कहा कि हमारी मांग है कि प्रदेश सरकार द्वारा माफियाओं की जो सूची तैयार कराई गई है, सरकार उसे जनता के बीच प्रस्तुत करे। यदि सरकार ऐसा नहीं करती है, तो भारतीय जनता पार्टी अपने स्तर पर तैयार की जा रही अतिक्रमण, अवैध कब्जों की सूचियां मुख्यमंत्री को सौंपेगी। उन्होंने कहा कि भारतीय जनता पार्टी को यह जानकारी है कि किस मंदिर की जमीन पर किस कांग्रेस नेता का कब्जा है और सरकारी तालाबों की जमीन किसने हथिया रखी है। उन्होंने कहा कि हमारी मांग है कि सरकार इन लोगों पर कार्रवाई करे और गरीब जनता तथा कार्यकर्ताओं को परेशान करना बंद करे।
प्रदेश में 24 जनवरी को होने वाले विरोध प्रदर्शन के दौरान पार्टी के वरिष्ठ नेता अलग-अलग जिलों में आंदोलन का नेतृत्व करेंगे। प्रदेश अध्यक्ष राकेश सिंह इंदौर में नगर-ग्रामीण द्वारा आयोजित विरोध प्रदर्शन का नेतृत्व करेंगे। पूर्व मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चैहान एवं सांसद साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर भोपाल में आंदोलन का नेतृत्व करेंगी। पूर्व प्रदेश अध्यक्ष व सांसद नंदकुमार सिंह चैहान खण्डवा में तथा नरोत्तम मिश्रा जबलपुर में उपस्थित रहेंगे। शिवपुरी में श्रीमती यशोधरा राजे सिंधिया, छतरपुर में भूपेन्द्र सिंह, उमरिया में रामलाल रौतेल, सतना में राजेन्द्र शुक्ला, दमोह में जयंत मलैया, टीकमगढ़ में लालसिंह आर्य, कटनी में गणेश सिंह, ग्वालियर नगर-ग्रामीण में विवेक शेजवलकर, होशंगाबाद में डॉ. सीताशरण शर्मा, हरदा में हेमंत खंडेलवाल, खरगोन में जितू जिराती, झाबुआ में सुदर्शन गुप्ता, धार में सुश्री ऊषा ठाकुर, मुरैना में जयसिंह कुशवाह, भिण्ड में रूस्तम सिंह, दतिया में श्रीमती संध्या राय, श्योपुर में अभय चैधरी, गुना में वेदप्रकाश शर्मा, अशोकनगर में नरेन्द्र बिरथरे, सागर में गौरीशंकर बिसेन, निवाड़ी में उमेश शुक्ला, पन्ना में बृजेन्द्रप्रताप सिंह, रीवा में जनार्दन मिश्र, सीधी में श्रीमती रीति पाठक, सिंगरौली में शशांक श्रीवास्तव, शहडोल में गिरीश द्विवेदी, अनूपपुर में ओमप्रकाश धुर्वे, डिण्डौरी में संपत्तिया उईके, मंडला में नरेश दिवाकर, बालाघाट में ढालसिंह बिसेन, सिवनी में कन्हाईराम रघुवंशी, नरसिंहपुर में राव उदयप्रताप सिंह, छिन्दवाड़ा में कमल पटेल, भोपाल नगर-ग्रामीण में साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर, रायसेन में डॉ. गौरीशंकर शेजवार, विदिशा में ध्रुवनारायण सिंह, सीहोर में रमाकांत भार्गव, बुरहानपुर में सुभाष कोठारी, बड़वानी में गजेन्द्र पटेल, अलीराजपुर में श्रीमती रंजना बघेल, उज्जैन नगर-ग्रामीण में रमेश मेंदोला, शाजापुर में महेन्द्र सोलंकी, आगर में विजेन्द्र सिंह सिसोदिया, देवास में कृष्णमुरारी मोघे, रतलाम में जी.एस. डामोर, मंदसौर में सुधीर गुप्ता एवं जगदीश देवड़ा नीमच में कार्यकर्ताओं के साथ कलेक्ट्रेट का घेराव करेंगे। -

कांग्रेस की शह पर दलित को जलाया बोले लाल सिंह आर्य

भोपाल,21 जनवरी(प्रेस सूचना केन्द्र)। सागर में दलित को जिंदा जलाने वाले युवकों को कांग्रेस के नेताओं का खुला संरक्षण है इसलिए पुलिस इस वारदात के असली आरोपियों को बचा रही है। जिन तीस पैंतीस लोगों ने पीड़ित धन प्रसाद पुत्र निजाम अहिरवार का घर घेरा था उन्हें पुलिस ने आरोपी नहीं बनाया है। भारतीय जनता पार्टी के पूर्व मंत्री लाल सिंह आर्य ने आज पत्रकार वार्ता में आरोप लगाया कि सरकार दलितों को निशाना बना रही है और अपना खोया वोट बैंक लौटाने के लिए दलितों के बीच अपने समर्थन वाला नेतृत्व खड़ा करने का प्रयास कर रही है।
उन्होंने बताया कि सागर के मोतीनगर थानाक्षेत्र के धर्मश्री वार्ड की आवासीय कालोनी के रहवासी धनप्रसाद अहिरवार को आरोपियों ने मिट्टी का तेल डालकर आग लगा दी और दरवाजे की कुंडी भी बंद कर दी ताकि वो किसी भी प्रकार से बच न पाए। उसे साठ फीसदी जल जाने के बावजूद सरकार से कोई मदद नहीं मिली है। सरकार यदि उसे न्याय दिलाने के लिए गंभीर होती तो उसे सफदरजंग दिल्ली की बर्न यूनिट में भर्ती करवाती और बेहतर इलाज कराती। उसे बुंदेलखंड मेडीकल कालेज की सिफारिश के बाद हमीदिया अस्पताल के सामान्य वार्ड में रखा गया है। इससे सरकार के दलित विरोधी चेहरे की असलियत उजागर हो गई है।

श्री आर्य ने बताया कि भाजपा प्रदेश अध्यक्ष राकेश सिंह ने इस मामले को गंभीरता से लिया और पीड़ित को न्याय दिलाने के लिए एक टीम भी गठित की है। इस टीम में श्री आर्य के साथ सागर के विधायक शैलेन्द्र जैन, नरयावली विधायक प्रदीप लारिया और सूरज कैरों व अन्य लोग घटना स्थल पर गए थे। उन्हें बताया गया कि दो दिन पहले बच्चों का विवाद पुलिस थाने भी पहुंचा था लेकिन पुलिस ने मामले को गंभीरता से नहीं लिया। इसके बाद कालोनी के ही छुट्टू, अज्जू पठान, कल्लू और इरफान ने कैरोसिन डालकर धनप्रसाद को जिंदा जला दिया। आज वह जीवन और मौत के बीच झूल रहा है।
भाजपा की ओर से श्री आर्य ने बताया कि कांग्रेस की सरकार बनने के बाद प्रदेश में दलितों पर अत्याचार बढ़ रहे हैं। कांग्रेस के नेता अपना खोया वोट बैंक वापस पाने के लिए दलित समाज के ऐसे लोगों को निशाना बना रही है जिन्होंने दलितों को वोट बैंक समझे जाने वाली राजनीति का विरोध किया है। इसके लिए वे मुस्लिमों को ढाल बनाकर दलितों के बीच फूट डालने का काम कर रहे हैं।
उधर सागर विधायक शैलेन्द्र जैन का कहना है कि पुलिस ने समय पर कार्रवाई की होती तो अपराधियों में खौफ होता और वे इस तरह की वारदात करने की हिम्मत नहीं जुटा पाते। प्रदेश की कानून व्यवस्था खराब होने की वजह से ये स्थितियां निर्मित हुई हैं।
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कैलाश पर प्रहार को मजबूर कांग्रेस
कमलनाथ सरकार को सबसे बड़ा खतरा महसूस हो रहे कैलाश विजयवर्गीय को जल्दी ही धारा 144 का उल्लंघन करने के आरोप में गिरफ्तार किया जा सकता है। उनके साथ इंदौर कमिश्नर के आवास के बाहर धरना देने वाले इंदौर से बीजेपी सांसद शंकर लालवानी, बीजेपी विधायक रमेश मेंदोला, महेंद्र हार्डिया और जिला अध्यक्ष गोपीकृष्ण नेमा के खिलाफ भी धारा 144 उल्लंघन करने की FIR दर्ज की गई है। इस दौरान कैलाश विजयवर्गीय ने बयान दिया था कि हम कमिश्नर से मिलने आए हैं इसके बाद भी अधिकारियों ने प्रोटोकाल का पालन नहीं किया और हमें सूचना नहीं दी कि कमिश्नर शहर में नहीं हैं। उन्होंने कहा कि हम इसे बर्दाश्त नहीं करेंगे। साथ में उन्होंने पुछल्ला लगा दिया कि आज शहर में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के नेतागण मौजूद हैं नहीं तो मैं शहर में आग लगा देता। कैलाश के इस बयान से सत्तारूढ़ कांग्रेस बौखला गई। कैबिनेट की बैठक में विकास योजनाओं को छोड़कर चर्चा का सबसे बड़ा मुद्दा कैलाश विजयवर्गीय का ये बयान ही बन गया। सज्जन सिंह वर्मा, जीतू पटवारी और स्वास्थ्य मंत्री तुलसी सिलावट ने प्रेसवार्ता में ही कैलाश के बयान को निशाना बना दिया। सज्जन सिंह वर्मा बोले कि कैलाश विजयवर्गीय जैसी भाषा बोल रहे हैं वह इंदौर के लोग पसंद नहीं करते। इंदौर विकास प्रेमियों का शहर है और वहां इस तरह की भाषा नहीं चल सकती। दरअसल कैलाश विजयवर्गीय को कमलनाथ सरकार सबसे बड़ा खतरा महसूस करती है। पश्चिम बंगाल के प्रभारी होने के कारण कैलाश विजयवर्गीय राष्ट्रीय स्तर पर कांग्रेस के लिए बड़ी चुनौती बने हुए हैं। ममता बैनर्जी के गुंडों से लड़ते हुए कैलाश ने पश्चिम बंगाल में अपनी सशक्त उपस्थिति दर्ज कराई है। वहां कांग्रेस का मुकाबला ममता बैनर्जी की तृणमूल कांग्रेस से तो है ही साथ में भाजपा से भी है। जिस तरह महाराष्ट्र में कांग्रेस ने शरद पंवार की राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी से तालमेल बिठाकर सत्ता पाई है उसी तरह वह बंगाल में भी ममता बैनर्जी के सामने झुकने तैयार है। इसलिए कांग्रेस का हाईकमान नहीं चाहता कि वह बंगाल में भी कैलाश की भाजपा को सफलता के झंडे गाड़ने की छूट दे दे। यही वजह है कि मध्यप्रदेश में वह कैलाश को घेरकर भाजपा के सफल हथियार को भौंथरा करना चाहती है। धारा 144 के उल्लंघन जैसे छोटे से मुद्दे को उठाकर वह कैलाश को घुटना टेक कराना चाहती है। कांग्रेस की इस रणनीति का दूसरा असर यह भी हो रहा है कि कैलाश मध्यप्रदेश भाजपा का चेहरा भी बनते जा रहे हैं। हाईकमान से करीबी होने के नाते भाजपा संगठन का भी एक बड़ा धड़ा कैलाश से जुड़ता जा रहा है। ऐसे में कांग्रेस की कमलनाथ सरकार जाने अनजाने में कैलाश पर प्रहार करके भाजपा को उसका सर्वमान्य नेता दिए दे रही है। कांग्रेस का दिग्विजय सिंह गुट भी कैलाश से करीबी महसूस करता है। ऐसे में कमलनाथ सरकार अपने ही पैरों पर कुल्हाड़ी मारने जैसा कार्य कर रही है। जब प्रदेश में कमलनाथ सरकार के प्रति बैचेनी बढ़ रही है तब उसे विकासात्मक कार्यों पर जोर देना चाहिए। इसके विपरीत वह तोड़फोड़ की राजनीति में ही उलझी बैठी है। कमलनाथ सरकार की यह रणनीति आने वाले समय में प्रदेश की राजनीतिक स्थितियों में बड़ा बदलाव लाने वाली साबित हो सकती है।








