भोपाल, 02 अगस्त(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)। कार्पोरेट क्षेत्र के इक्विटास स्मॉल फाइनेंस बैंक लिमिटेड अधिक मुनाफा दिलाने की वजह से निवेशकों की पसंद बनता जा रहा है। ग्राहकों से चाय पर चर्चा के दौरान बैंक के अधिकारियों ने अनिवासी भारतीयों को डॉलर में कमाई करने के रास्ते सुझाए।
चाय पर चर्चा के लिए पधारे रियल इस्टेट व्यवसायी और समाजसेवी राजेन्द्र जैन (टीआई) ने अपने अनुभव सुनाते हुए कहा कि विदेशों के बैंकिंग लाऊंज में इक्विटास स्माल फायनेंस बैंक की सुविधाएं बहुत आसानी से उपलब्ध होती हैं। बैंक ने जिस तरह अपनी सामाजिक जिम्मेदारी निभाते हुए कैंसर के इलाज और पर्यावरण रक्षा की दिशा में अपने कदम बढ़ाए हैं वह एक सराहनीय कदम है। उन्होंने कहा कि बैंक के एफसीएनआर उपकरण से भारतीय उपभोक्ताओं को डालर कमाने का प्रवेश द्वार मिल गया है। उन्होंने कहा कि वे अब तक विश्व के चौंतीस देशों में भ्रमण कर चुके हैं, कई देशों में उन्होंने इक्विटास बैंक की सुविधाओं का लाभ उठाया है।
बैंक मैनेजर लोकेश जैनः समृद्धि के साथ पर्यावरण मित्र वस्तुओं के उपयोग का संदेश
बैंक के शाखा प्रबंधक लोकेश जैन ने बताया कि बैंक ने विदेशी मुद्रा कार्ड, विदेशी मुद्रा अनिवासी (एफसीएनआर) जमा और धन लाने ले जाने जैसी सुविधाओं को सरल बनाया है ।
बैंक के अधिकारी मिनहाज खान ने बताया कि बैंक के ने अनिवासी भारतीयों को टैक्स बचाने और विभिन्न विदेशी मुद्राओं के साथ ज्यादा मुनाफा कमाने का मार्ग प्रशस्त किया है। इक्विटास बैंक बार बार विदेश जाने वाले और विदेश से भारत आने वाले ग्राहकों के लिए बहुत कम शुल्क में सारी सुविधाएं एक साथ उपलब्ध करा देता है।
चाय पर चर्चा कार्यक्रम के दौरान आए ग्राहकों ने बैंक की गतिविधियों की जानकारी ली। बैंकिग से जुड़े अपने अनुभव सुनाए और अपने परिजनों को इक्विटास बैंक से जोड़ने में रुचि दिखाई। इक्विटास स्मॉल फाइनेंस बैंक अपने सेविंग एकाऊंट धारकों के लिए नए स्लैब के तहत 7% ब्याज देता है ।
इस महाकुंभ के शाही स्नान में बारह फरवरी से छह करोड़ से अधिक लोग एक साथ गंगा, यमुना और सरस्वती नदियों के संगम में स्नान करने जा रहे हैं। तीर्थयात्रियों के अखाड़ों से जुड़े लाखों सनातनी एक साथ महाकुंभ में होंगे। महाकुंभ पहली बार नहीं जा रहा है। ये परम्परा सनातनकाल से चली आ रही है। ऐसे भगवान के दरबार में दमोह जिले के कुंडपुर तीर्थ में बड़े बाबा के चंद ओछे भक्तों की जो थू थू हो रही है वह विचारणीय है। यहां जैन मुनि अंतरमना आचार्य आकर्षक सागर जी को मंदिर समिति के कुछ सदस्यों ने निराहार गमन करने के लिए मजबूर कर दिया। अंतरमना संघ के भक्तगण यहां नए साल के आगमन के अवसर पर भजन संध्या का आयोजन करना चाह रहे थे। मंदिर समिति का कहना था कि तीर्थ क्षेत्र की ओर से एक कार्यक्रम आयोजित किया गया है इसलिए दूसरे कार्यक्रम की अनुमति नहीं दी जा सकती। बांसुरी म्युजिकल ग्रुप के अक्षय पंड्या और डिशी जैन की भजन मंडली ये कार्यक्रम प्रस्तुत करने जा रही थी। समिति के कुछ कुटिल मंदिर समिति ने कहा कि लड़कियां नाचने के इस कार्यक्रम के बारे में विचार नहीं किया जा सकता है। कहा जा रहा है कि यह धार्मिक आयोजन आचार्य श्री आकर्षक सागर जी के नाम पर हो रहा था इसलिए मंदिर समिति ने इस पर रोक लगा दी। आकर्षक सागर जी तो अगले दिन सुबह क्षेत्र से निराहार गमन कर गए इस घटना पर कई सवाल कर दिए गए हैं। कुंडपुर में इस तरह की घटनाएं बार-बार क्यों घटती हैं। यहां आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज की कृपा से विशाल मंदिर बनकर तैयार हो गया है। सैकड़ों साज़िशों के मंदिर बने हुए हैं। ये विशाल तीर्थ पूरी दुनिया में जैन धर्म की कीर्ति पताका फहरा रहा है। पूर्ण होने के बाद आचार्यश्री मंदिर में विशाल पंच कल्याणक महोत्सव के लिए गए थे। आचार्यश्री ने भी तीर्थ क्षेत्र से यात्रा की थी। निर्यापक बनाये गये सुधा सागर जी महाराज ने भी तीर्थ क्षेत्र से कुछ ऐसी ही मनःस्थिति में गमन किया था। जबकि वे तो आचार्य श्री के ही नियुक्त किये गये निर्यापक संत थे। आचार्य सागर जी को गणाचार्य पुष्पदंत सागर जी ने चार शिष्यों के साथ आचार्य की पदवी प्रदान की है। ये समाधिनाथ पुलक सागर जी,प्रमुख सागर जी और प्रमुख सागर जी भी शामिल हैं। इस समारोह में जाने वाले प्रोफेसर के पदवी में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड एलेक्टोल ने प्रतिनिधि के रूप में अपने सलाहकार प्रोफेसर फिलिप एलेक्जेंड्रा को भी भेजा था। ये अमेरिकी सरकार की ओर से उनका सम्मान था। ऐसे विद्वान संत को कुंडलपुर समिति ने क्यों स्वीकार नहीं किया, इस पर पूरी दुनिया के जैन समाज के बीच गंभीर सांत्वना मनन चल रहा है। निश्चित रूप से आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज का वास्तुशिल्प अद्वितीय है। बड़े बाबा भगवान आदिनाथ की विशाल प्रतिमा बिना खंडित किस चमत्कारिक तरीके से नए मंदिर में हो गई ये अनोखी घटना। लाल पत्थर से बना कुंड, पुरी का जैन मंदिर, अयोध्या के भगवान श्रीराम के मंदिर की ऐसी ही अद्भुत संरचना है। इस तीर्थ क्षेत्र की वंदना करने के लिए दक्षिणी आचार्य श्री आकर्षक सागर जी की सेवा और साख लेकर यहां की प्रबंधन समिति तीर्थ क्षेत्र की यशोगाथा पूरी दुनिया में निकाली जा सकती थी, लेकिन समिति में पाई गई जगह पर कुछ ओछे लोगों ने इसे तीर्थ क्षेत्र की गरिमा का खंडन कर दिया। तीर्थ क्षेत्र समिति के अध्यक्ष चंद्रकुमार सराफ उस वक्त वहां मौजूद नहीं थे। इस घटना के बाद उन्होंने खेद भी व्यक्त किया। असल में उनके कुछ षडयंत्रकारी कार्यकर्ताओं ने ये कहा था कि निवृत्तमान अध्यक्ष संतोष सिंघई ने मंदिर की कमान दमोह के बाहर जैन धर्मावलंबियों के हाथों में दे दी है। दरअसल मंदिर निर्माण में पूरी दुनिया में अंतिम जैन धर्मावलंबियों ने बढ़-चढ़कर अपना योगदान दिया था। तब आचार्य श्री ने सकारात्मक लोगों को दिये महत्वपूर्ण उत्तर। कुछ लोगों को मंदिर निर्माण के कार्य से दूर रखा गया था। आज वही लोग मंदिर के आभूषण बन गए हैं और वे कुंडलपुर की चमक-दमक को फीका करने की वजह बन रहे हैं। आचार्यश्री ने इस मंदिर को पूरी दुनिया तक पहुंचाने के लिए जैन धर्म की वकालत का संदेश दिया था। आज भारत में जैन धर्म को अल्पसंख्यक माना जाता है। सनातन धर्म के विभिन्न मतावलंबियों में भी जैन धर्म के मतावलम्बियों को प्रेरणा लेनी होगी।
आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज की विरासत को हथियाने की होड़ इन दिनों जैन धर्मावलंबियों के जी का जंजाल बनी हुई है। ये लड़ाई इतनी कर्कश है कि इसमें कई षड़यंत्रकारी जीवित संतों को भी अपमानित करने में जुट गए हैं। राष्ट्रसंत आचार्य भगवान श्री विद्यासागर जी महामुनिराज ने साल 2019 में चातुर्मास की स्थापना दिवस पर मुनि श्री नियम सागर जी महाराज और मुनि श्री सुधा सागर जी मुनिराज को निर्यापक श्रमण की उपाधि दी थी. उन्होंने निर्यापक श्रमण व्यवस्था के बारे में भी जानकारी दी थी. उन्होंने बताया था कि जब संघ बड़ा होता है, तब निर्यापक श्रमण की व्यवस्था की जाती है. मुनियों को यह ज़िम्मेदारी दी जाती है कि वे देश भर में धर्म का संदेश लेकर भ्रमण करें.तभी से आचार्य सुधासागर जी देश भर में जैन समाज को एकजुट करने और तीर्थों के प्रबंधन को सुचारू बनाने का काम कर रहे हैं। इसके बावजूद आचार्यश्री के इर्द गिर्द जमे बैठे रहे षड़यंत्रकारियों ने उनकी विरासत को हड़पने के लिए तरह तरह के पाखंड शुरु कर दिए हैं। आचार्यश्री का जन्मदिन मनाना भी उसमें से एक है। ताजा विवाद की शुरुआत सागर से हुई है।यहां के मंगलगिरी जैन तीर्थ से जुड़े कुछ ट्रस्टियों ने खुद को जैन पंचायत का नेता लिखना शुरु कर दिया था। संकोच से भरे जैन धर्मावलंबियों ने चुप्पी साध रखी थी क्योंकि सामान्य कार्यक्रमों में ये लोग बड़ी बड़ी धनराशि दान की घोषणा करते रहते थे। जबकि हकीकत ये थी कि ये लोग जैन समाज की ही धनराशि विभिन्न मदों में निकालकर उसे अपने नाम की दानराशि बता देते थे। आचार्य सुधा सागर जी की जानकारी में जब ये तथ्य लाए गए तो उन्होंने दो टूक शब्दों में कह दिया कि हमें उस राशि का ब्याज नहीं चाहिए आप तो समाज की मूल राशि वापस कर दीजिए। इस घटनाक्रम के बाद कतिपय षड़यंत्रकारियों ने वाट्सएप ग्रुप पर अनर्गल बयानबाजी करना शुरु कर दिया। दबंग मुनि और सख्त प्रशासक सुधासागर जी को अपमानित करने के लिए उन्होंने सार्वजनिक मंच पर निवेदन किया कि आचार्यश्री विद्यासागर जी महाराज के जन्मदिवस शरद पूर्णिमा पर आयोजित होने जा रहे समारोह में आप भी शामिल होकर हमें आशीर्वाद प्रदान करें। इस पर सुधासागर जी ने फटकार लगाते हुए कहा कि आचार्यश्री किसी भौतिक शरीर के जन्मदिन मनाने के खिलाफ थे। हम तो उनके उपदेशों को आत्मसात किए हुए हैं और उन पर अमल भी करते हैं। उन्होंने जैन धर्म की प्रभावना का जो दायित्व हमें सौंपा है हम वो कर रहे हैं। अब यदि हम सार्वजनिक मंच से आयोजन में शामिल होने से इंकार करते हैं तो ये कहा जाएगा कि मैं आचार्यश्री का विरोधी हूं। इसके विपरीत यदि आयोजन में शामिल होते हैं तो कहा जाएगा कि ये अपने गुरु की आज्ञा का पालन नहीं कर रहे हैं। इस घटना पर पीठासीन आचार्य समयसागर जी ने तो कुछ नहीं कहा बल्कि संघ से जुड़े कुछ महंतों ने इशारा करके आचार्यश्री का जन्मदिन मनाने के निर्देश दिए। उनका प्रयास है कि सार्वजनिक तौर पर मना करने के बावजूद आचार्यश्री का जन्मदिन धूमधाम से मनाया जाएगा तो ये नैरेटिव गढ़ना सरल होगा कि आचार्य सुधासागर जी जैन समाज के सर्वमान्य संत नहीं हैं। आज शरदपूर्णिमा के अवसर पर जब प्रदेश के कुछ शहरों में आचार्यश्री का जन्मदिन मनाने की बात कही गई तो जैन समाज के बीच की अराजकता एक बार फिर उजागर हो गई है। इस तरह की गंदगी स्वयं आचार्यश्री विद्यासागर जी के समयकाल में भी छुटपुट तरीके से उजागर होती रही है। कई बार उनके शिष्यों ने इस विषय पर आचार्यश्री से भी शिकायत की थी। इस पर उन्होंने कहा कि हम लोग सामाजिक सहयोग से बड़े प्रकल्प शुरु कर रहे हैं। इतने विशाल कार्यों में जुड़े कुछ लोग गड़बड़ियां भी करते हैं इसकी जानकारी भी सामने आ जाती है। इसके बावजूद हमें अपना कार्य करते रहना है। जो पाप कर्म में लीन रहेगा उसका पाप ही उसकी गति सुनिश्चित करेगा। हम इस पर क्यों परेशान हों। वे अपने शिष्यों से कहते थे कि कई व्यक्ति अपने कर्म और भाव में सामंजस्य नहीं बिठा पाते हैं। इसलिए ऐसे व्यक्तियों की आलोचना उनके सामने एकांत में की जानी चाहिए । सार्वजनिक रूप से तो उसके अच्छे कार्यों का समर्थन किया जाना चाहिए। प्रख्यात दार्शनिक ओशो कहते थे कि जब कोई आत्मज्ञानी व्यक्ति अपना शरीर छोड़ता है तो वह जगह या तो मंदिर बन जाती है या फिर दूकान। उनका ये कथन इन दिनों जैन समाज के बीच कलंकित चेहरा लेकर सामने आ रहा है।मुनि संघ के सदस्य तो इन हालात को समझ रहे हैं। वे इस पर चर्चा भी कर रहे हैं। जैन मुनि विषद सागर जी ने तो सार्वजनिक तौर पर इस मुद्दे पर प्रकाश डाला और संघ के मन की व्यथा सार्वजनिक तौर पर बयान की है। इसके बावजूद कई दूकानदार अपना धंधा जारी रखे हुए हैं। आचार्यश्री का जन्मदिन मनाकर वे भक्तों की भावनाओं का दोहन करते रहते हैं। कई लोगों के लिए तो शरद पूर्णिमा पच्चीस लाख रुपयों से एक करोड़ रुपयों तक का धंधा दे जाती है। जाहिर है कि वे किसी तत्वज्ञानी की सलाह पर आखिर क्यों गौर करेंगे। मोक्ष किसने देखा है और हर कोई तो मोक्षगामी बनना भी नहीं चाहता। फिर पाप की गति क्या होगी ये तब देखा जाएगा जब इसके नतीजे आएंगे।
मुख्यमंत्री डॉ.मोहन यादव ने किया जनसंवेदना संस्था की स्मारिका का विमोचन
भोपाल, 28 सितंबर। गरीब परिवारों के मृत परिजनों और लावारिस लाशों का अंतिम संस्कार करने वाली सामाजिक संस्था जन संवेदना के स्मारिका अंक(मानव सेवा ही माधव सेवा) का विमोचन आज मुख्यमंत्री डॉ.मोहन यादव ने अपने कर कमलों से किया। भारतीय जनता पार्टी मुख्यालय में आयोजित एक संक्षिप्त समारोह में उन्होंने जरूरतमंदों की सहायता को उत्कृष्ट समाजसेवा बताया।
संस्था के संस्थापक अध्यक्ष राधेश्याम अग्रवाल ने बताया कि संस्था के सहयोगियों और हितग्राहियों के योगदान को याद करने के लिए हर साल इस स्मारिका का प्रकाशन किया जाता है। मानवसेवा के पुनीत कार्य के अक्षयपात्र में अपना योगदान देने वाले समाजसेवियों को देख सुनकर आम नागरिकों के मन में भी अपने सामाजिक दायित्वों का बोध हो सके इस उद्देश्य से संस्था ने अपनी वेवसाईट भी बनाई है। इसके बावजूद प्रमाणिक दस्तावेज के रूप में हम दानदाताओं और हितग्राहियों के नाम समाज के सामने लाते हैं।
श्री अग्रवाल ने बताया कि माननीय मुख्यमंत्री डाक्टर मोहन यादव ने कहा कि उन्हें संस्था के पुनीत कार्यों की जानकारी पहले से है। इस तरह के सामाजिक कार्य ही वसुधैव कुटुंबकम की भावना को मजबूती प्रदान करते हैं। भारतीय जनता पार्टी मुख्यालय में आयोजित मानव सेवा ही माधव सेवा कार्यक्रम में उन्होंने संस्था की स्मारिका को आम नागरिकों के लिए लोकार्पित किया। इस दौरान भोपाल मध्य विधानसभा क्षेत्र के विधायक और भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश महामंत्री भगवान दास सबनानी,भाजपा मीडिया प्रभारी आशीष अग्रवाल,एवं हिमांशु अग्रवाल भी मौजूद थे।
संस्था की ओर से पिछले सोलह सालों से लावारिस लाशों का अंतिम संस्कार किया जा रहा है। पुलिस को प्राप्त होने वाली लावारिस लाशें हों या फिर गरीबी से जूझते बेसहारा परिवारों के परिजनों का अंतिम संस्कार हो,संस्था आगे बढ़कर इस पुनीत कार्य को अपने हाथों से संपन्न कराती है। बीमारी से जूझते गरीब परिवारों और जरूरत मंदों को भी संस्था की ओर से भोजन कराया जाता है। आमतौर पर भोजन वितरण का कार्य एम्स या राजधानी के अन्य असपतालों में इलाज के लिए आने वाले मरीजों के परिजनों के बीच किया जाता है।
उन्होंने बताया कि राजधानी के अलावा प्रदेश के अन्य स्थानों के लोग सहयोग देकर इस पुनीत कार्य की ज्योति जलाए हुए हैं। विदेशों में नौकरियां करने वाले युवा और वहां बस चुके बुजुर्ग भी अपने परिजनों की याद में समाजसेवा करके अपना जन्म सार्थक करने का अवसर तलाशते हैं। संस्था ने समाजसेवा के इस कार्य को पूरी पारदर्शिता से करने के लिए दान राशि को आन लाईन प्राप्त करने की सुविधा विकसित की है। इस कार्य को स्थानीय पुलिस के रिकार्ड के अनुसार ही संपन्न कराया जाता है। संस्था की विश्वसनीयता बनी रहे इसके लिए डाक्टर्स क्लब परिसर स्थित जनसंवेदना के कार्यालय में समाजसेवियों से योगदान लिया जाता है। संस्था के भवन निर्माण और शव वाहन व एंबुलेंस सेवा के लिए भी विभिन्न संगठनों और नागरिकों की ओर से योगदान दिया जाता है।
देश और दुनिया के दूर दराज के देशों में भी आज भगवान श्रीकृष्ण का जन्मदिन धूमधाम से मनाया जा रहा है। मध्यप्रदेश में जबसे मुख्यमंत्री डॉ.मोहन यादव ने आव्हान किया उसके बाद से तो गली गली और गांव गांव में जन्माष्टमी का माहौल सुरम्य बन चला है। हमेशा की तरह इस बार भी श्री कृष्ण जन्माष्टमी पर प्रदेश भर में बारिश के छींटे पड़ रहे हैं। कई इलाकों में तो इतना अधिक पानी गिर रहा है कि मानों भगवान स्वयं नंदलाला के जन्म से आल्हादित हैं। ऐसे में कई विपक्षी नेताओं ने सरकार के आव्हान से असहमति जताते हुए बेसुरा राग अलापना शुरु कर दिया है। उन नेताओं का कहना है कि जन्माष्टमी जनता मनाए, धार्मिक संगठन मनाएं तो ठीक है लेकिन सरकार क्यों आव्हान कर रही है। दरअसल ये सभी वे आवाजें हैं जो विदेशी धर्मों की गोद में फलती फूलती रहीं हैं। आयातित सोच में रंगे इन नेताओं ने हमेशा सनातन को निशाना बनाया है। विदेशी सोच की नकल करने वाले ये नादान कहते हैं कि देश को आगे बढ़ना है तो किसी एक धर्म को बढ़ावा नहीं दिया जा सकता। उन लोगों को ये नहीं मालूम कि समूची वसुधा को अपना कुटुंब मानने वाला सनातन किसी भी खंडशः सोच से मीलों आगे सोचता है। आक्रांता बनकर भारत में आए जो विदेशी सोच कभी भी भारत के अस्तित्व को कुचल नहीं पाए वे आज संविधान की दुहाई देकर कह रहे हैं कि कृष्ण जनमाष्टमी मनाने से अन्य धर्मों को असमानता भरे माहौल का सामना करना पड़ेगा। ऐसे बयान देने वालों को श्रीमद भगवत गीता के उपदेशों की जानकारी मिल सके इसीलिए तो जन्माष्टमी का आयोजन धूमधाम से मनाया जा रहा है। जब युद्ध की तलवारें खिंची हुई हों तब कर्म का उपदेश देने वाले देवकीनंदन के मंत्र और भी ज्यादा सार्थक हो जाते हैं। रूस और यूक्रेन के बीच चल रहे युद्ध के दौरान यही ज्ञान देने के लिए तो प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी युद्धभूमि तक गए थे। हठी जेलेंस्की यदि इस भाषा को समझ जाते तो यूक्रेन एक बार फिर खुशहाल देश बन सकता था। रूस के राष्ट्रपति ब्लादीमीर पुतिन ने तो भारत के प्रयासों का समर्थन करते हुए युद्ध रोक दिया। रूस भी चाहता है कि शांति का कोई मार्ग निकले। ये संभव इसलिए नहीं हो सका कि किसी ने यूक्रेन या अमेरिका को पहले कभी गीता के उपदेश नहीं सुनाए। युद्ध भूमि की हुंकार के बीच उन उपदेशों को समझने का सामर्थ्य आम योद्धा में नहीं होता। यदि श्रीकृष्ण दुर्योधन से कहते कि अनीति और अधर्म की राह पर चलोगे तो कर्म फल तुम्हें छोड़ेगा नहीं ऐसे में तुम्हारा नाश हो जाएगा,तो वो नहीं मानता। । कुछ ऐसी ही चुनौतियों के बावजूद प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भारत का दर्शन युद्धभूमि तक पहुंचाकर अपना दायित्व निभाया। कमोबेश यही प्रयास मुख्यमंत्री डॉक्टर मोहन यादव कर रहे हैं। जब विदेशी घुसपैठियों, आक्रांताओं और षड़यंत्रों के साथ कांग्रेस की पारिवारिक परंपरा के अध्यक्ष राहुल गांधी देश में जातिगत जनगणना का वैमनस्य फैलाने का प्रयास कर रहे हैं तब उन्हें गीता के उपदेश अवश्य पढ़ने चाहिए। मध्यप्रदेश की धरती से गीता का कर्म सिद्धांत पूरे विश्व को एक बार फिर सत्य के मार्ग पर चलने का आग्रह कर रहा है। चाहे असददुद्दीन औवेसी हों या फिर कांग्रेस के चंपू टाईप नेता उन सभी को समझना होगा कि भारत का संविधान लागू हुए तो मात्र 74 वर्ष हुए हैं। ये देश तो हजारों सालों से भगवान श्रीकृष्ण और भगवान श्री राम के बनाए आदर्शों पर चल रहा है। तबसे यहां कभी किसी अन्य धर्म या विचार को पद दलित करने का विचार नहीं फैला। चंद लुटेरों ने भले ही भारत की अस्मिता को कुचलने का प्रयास किया हो पर भारत आज भी अविचल और अडिग है। स्थिर है और संपूर्ण है। कितने ही आक्रांता आए और आकर चले गए। हम अपने शाश्वत सिद्धांतों पर लगातार चलते जा रहे हैं। मध्यप्रदेश सरकार भी तो यही समझाने का प्रयास कर रही है कि केवल और केवल सत्य के मार्ग पर चलिए। अन्य विचारों से गुमराह होकर सत्कर्म के मार्ग से विमुख होंगे तो फिर दंड भी आपको ही भोगना पड़ेगा। भारत अभी घोषित युद्ध के दौर में नहीं पहुंचा है इसलिए शायद नंदलाला के जीवनदर्शन की ये पुकार भटके हुए नौजवानों और नागरिकों का पुण्य मार्ग प्रशस्त करेगी।
अ.भा.जैन पत्रकार संघ प्रदेश कार्यसमिति की बैठक महेश्वर में हुई संपन्न ,
महेश्वर,7अगस्त (प्रेस इनफॉर्मेशन सेंटर) अ.भा. जैन पत्रकार संघ मध्य प्रदेश की विशेष बैठक 6 अगस्त मंगलवार को महेश्वर (जिला खरगोन )में आयोजित की गई । बैठक की अध्यक्षता प्रदेश अध्यक्ष संदीप डाकोलिया ने की। प्रारंभ में सभी पधाधिकारियो ने मां सरस्वती के चित्र पर माल्यार्पण किया। मुख्य संरक्षक हिम्मत मेहता, ऋतुराज बुडावनवाला, संस्थापक अध्यक्ष संजय लोढ़ा, मुख्य सलाहकार जवाहर डोसी , राजेश नाहर, वरिष्ठ पत्रकार इंदर मल सांड आदि ने विशेष रूप से उपस्थित रह कर मार्गदर्शन प्रदान किया। प्रदेश महासचिव शिरीष सकलेचा ने बताया कि बैठक में प्रदेश के पदाधिकारी प्रदेश संयुक्त सचिव अरुण बुरड, प्रचार सचिव नेमीचंद कावड़िया, कार्यसमिति सदस्य विशाल वागमार, मनोज भंडारी, राजकुमार नाहर, अनिल जैन, ओमप्रकाश कोचर, देवेन्द्र जैन ,निलेश जैन, पियूष पटवा,पंकज खिंवसरा मोजूद रहे। सदस्यो ने अपने अपने सुझाव देकर संघटन को मजबूत बनाने पर जोर दिया। अध्यक्ष संदीप डाकोलिया ने कहा कि अ.भा.जैन पत्रकार संघ मप्र शासन द्वारा पंजीकृत संस्था होकर प्रदेश के जैन पत्रकारों को एकजुट कर उनके हितों के लिए संघर्षरत रहा हैं। संघटन द्वारा सदस्यो के लिए दो वर्ष के परिचय पत्र बनाने का काम इस वर्ष भी किया गया। आपने कहा कि हमारे सदस्यो को अन्य समानांतर संघटन की गतिविधियों व आयोजनों में शामिल होने से बचना होगा। क्योंकि हम यदि संघटित रहेंगे तो हमारा संघ और अधिक रचनात्मक कार्य करेगा।
बैठक में नवंबर माह में संघ का एक मिलन समारोह श्री नागेश्वर तीर्थ ,या सैलाना में आयोजित करने का निर्णय हुआ। स्थान का चयन कोर कमेटी की बैठक में होगा। सदस्यता अभियान को लेकर भी चर्चा हुई। डाकोलिया पुनः अध्यक्ष… कार्य समिति की बैठक में वरिष्ठ जनों की समिति से प्रदेश अध्यक्ष पद पर पुनः संदीप डाकोलिया (करही)के नाम की घोषणा की गई। जिसका सभी ने करतल ध्वनि से व माला पहनाकर स्वागत किया। डाकोलिया ने सभी का आभार माना और कहा कि आप सभी के सहयोग से मैं पूरी जिम्मेदारी का पूरी ईमानदारी से निर्वाह करूंगा।
इस अवसर पर संघ के प्रदेश उपाध्यक्ष पंकज जे.पटवा की सुपुत्री मुमुक्षु मीमांसा के संयम जीवन की राह पर चलने का निर्णय लेने पर पटवा का शाल ओढ़ाकर , श्री फल भेट कर बहुमान किया गया। राष्ट्र गीत के साथ बैठक का समापन हुआ। संचालन प्रदेश महासचिव शिरीष सकलेचा ने किया ।आभार अरुण बुरड ने माना। बैठक के बाद सभी पदाधिकारीयो ने महेश्वर भ्रमण किया।
भोपाल 08 अक्टूबर(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)।मध्यप्रदेश में अपनी आर्थिक सेवाओं के लिए तेजी से बढ़ता इक्विटास स्माल फाइनेंस बैंक अब सेवा के क्षेत्र में भी अपना दायित्व निभा रहा है। प्रदेश के करीबन डेढ़ हजार दिव्यांग बच्चों के खेल आयोजन में इक्विटास बैंक ने भी बढ़ चढ़कर अपनी भागीदारी निभाई है। दिव्यांग बच्चों ने समाज का स्नेह पाकर रविवार को भोपाल के टीटीनगर स्टेडियम में जो सतरंगा संसार रचा उसने सामान्य नागरिकों में संतोष का भाव जगाया है। शारीरिक चुनौतियों से जूझते इन बच्चों को उमंगों से भरने वाले संस्थानों के बीच इक्विटास बैंक ने भी अपनी पृष्ठभूमि से मिले संस्कारों का परिचय दिया है।
इक्विटास स्माल फाईनेंस बैंक के क्षेत्रीय व्यापार प्रबंधक अमित देशपांडे ने इस अवसर पर कहा कि बैंक अपनी स्थापना काल से सामाजिक दायित्वों के प्रति सजग रहा है। इस श्रंखला में बैंक ने इन स्पेशल बच्चों के खेलों और सांस्कृतिक कार्यक्रमों में उत्साह से भागीदारी निभाई है। उन्होंने कहा कि समाज जब दिव्यांग बच्चों और नागरिकों के प्रति अपना सामाजिक दायित्वों का बढ़ चढ़कर निर्वहन करता है तो समृद्धि के नए द्वार भी खुलने लगते हैं। यह आयोजन भोपाल का रोटरी क्लब मिडटाऊन पिछले इक्कीस सालों से कर रहा है। सामाजिक संस्थाओं की बढ़ती भागीदारी के बीच इस प्रदेश व्यापी आयोजन में भाग लेने वाले बच्चों की संख्या भी निरंतर बढ़ती जा रही है।शाखा प्रबंधक लोकेश जैन ने बताया कि बैंक के सभी कर्मचारियों ने इस आयोजन में शामिल होकर बच्चों को अपना दुलार दिया और आयोजन में सहयोग देने का अपना दायित्व निभाया।
इक्विटास स्माल फाईनेंस बैंक के क्षेत्रीय व्यापार प्रबंधक अमित देशपांडे और शाखा प्रबंधक लोकेश जैन ने दिव्यांग बच्चों के लिए पुरस्कार वितरित किए और उनके आयोजनों में अपनी सक्रिय भागीदारी भी की। इस कार्यक्रम में विभिन्न श्रेणी के 1500 स्पेशल बच्चे विदिशा, खरगोन, राजगढ़, होशंगाबाद, भोपाल, रीवा, जबलपुर, इंदौर, देवास, शुजालपुर , नरसिंहगढ़, नागदा से भाग लेने आए। स्पेशल ओलंपिक मापदंड के अनुसार दौड़, रिले दौड़, हिट द बाल, कैरम, पावर ऑफ रिस्ट, शॉटपुट के साथ सांस्कृतिक प्रस्तुतियां भी हुई।
इस बार भोपाल के सभी रोटरी क्लब के सहयोग से भोपाल में टाउन ने ड्राइंग एंड पेंटिंग प्रतियोगिता का आयोजन भी किया गया । यह आयोजन सभी दर्शकों के लिए खुला है। भोपाल रोटरी क्लब मिड टाउन के वर्तमान अध्यक्ष अध्यक्ष आभास जैन ने बताया कि भोपाल और मध्य प्रदेश के लोगों से आने वाले सभी प्रतिभागियों का विशेष रूप से ध्यान रखा गया यहां उन्हें आवास और परिवहन की सुविधा क्लब की ओर से उपलब्ध कराई गई। विंटर गेम प्रोग्राम के चेयरपर्सन संजय निगम ने बताया कि आयोजन में शामिल होने वाले सभी दिव्यांग प्रतिभागियों को अनिवार्य रूप से प्रमाण पत्र और रिटर्न गिफ्ट 20 क्लब की ओर से उपलब्ध कराए गए हैं सभी विद्यार्थियों को विभिन्न प्रतियोगिताओं के प्रथम द्वितीय और तृतीय पुरस्कार दिए गए इस कार्यक्रम में एशियाई दिव्यांग खेलों में भाग लेने वाले कई प्रतिभागी भी शामिल हुए।
आज के कार्यक्रम के मुख्य अतिथि मध्य प्रदेश शासन के अतिरिक्त मुख्य सचिव मोहम्मद सुलेमान, भोपाल जिला अस्पताल के अधीक्षक डॉक्टर प्रभाकर तिवारी, रोटरी डिस्ट्रिक्ट 3040 के डीजी ई अनीश मलिक, डीजीएन सुनील मल्होत्रा वर्तमान डीजी रितु ग्रोवर, पीजी डी गजेंद्र नारंग, आलोक बिल्लौर ,जितेंद्र जैन, कर्नल, महेंद्र मिश्रा और रोटेरियन धीरेंद्र दत्त प्रमुख रूप से उपस्थित थे । इस अवसर पर बिंटर गेम्स की स्मारिका का विमोचन की किया गया। कार्यक्रम में रोटरी क्लब भोपाल में टाउन के सुनील, भार्गव अमित तनेजा , राजेश नामदेव विनोद तिवारी , वीरेंद्र गुर्जर, हेम सिंह गुर्जर तरुण तनेजा, नीतू तिवारी, रूचिता अग्रवाल,श्रीमती शोभा भार्गव श्रीमती प्रीति उपाध्याय श्री शुभ्रांशु उपाध्याय सहित बड़ी संख्या में भोपाल के विभिन्न रोटरी क्लबो के सदस्य उपस्थित थे।
भोपाल, 03 जून(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर ). जिन लावारिस लाशों का पता ठिकाना पुलिस भी नहीं जानती राजधानी का एक आवारा मसीहा उन्हें सद्गति देकर पुण्य बटोर रहा है। उसके पुण्य भंडार को भरने में ऐसे सैकड़ों समाजसेवी जुटे हैं जिन्हें आम लोग नहीं जानते। हर दिन बीमार जरूरतमंदों को भोजन मुहैया कराना और लावारिस लाशों का अंतिम संस्कार करना उसकी दिनचर्या ही बन गई है। जनसंवेदना नाम की जिस संस्था को उन्होंने समाज में अनोखी पहचान दिलाई है उसमें कई चिकित्सक, पुलिस कर्मी, व्यापारी, उद्योगपति, इंजीनियर, लेखक और सामान्य लोग भी जुड़े हैं। हर दिन वे स्वेच्छा से संस्था को भोजन और कफन दफन की राशि मुहैया कराते हैं। लोगों का भरोसा जीतने में कामयाब राधेश्याम अग्रवाल नाम के ये समाजसेवी कहते हैं कि जनसहयोग ने मेरा जीवन सफल बना दिया है। गुमनाम लोगों की अंतिम यात्रा का बेहतर उपसंहार देखकर उन्हें लगता है कि यही एक समृद्ध समाज की गारंटी है। सत्तर वर्षीय राधेश्याम अग्रवाल हर दिन सुबह घर से नाश्ता करके निकलते हैं और जेल पहाड़ी स्थित अपनी संस्था के दफ्तर पहुंच जाते हैं। विभिन्न पुलिस थानों और अस्पतालों से जो जानकारियां आती हैं उसके अनुसार वे धनराशि मुहैया कराते हैं। ये दानराशि जुटाने के लिए वे दिन भर समाजसेवियों से जाकर मिलते हैं और उन्हें इस पुण्य कार्य से जोड़ते हैं। संस्था से जुड़े स्वयंसेवी और विभिन्न लोग इस दौरान दफ्तर आकर भी मिलते रहते हैं। संस्था के अभियान को जिस लगन से वे सफल बनाते रहे हैं उन्हें देखकर हर व्यक्ति नतमस्तक हो जाता है। आमतौर पर श्रेष्ठिवर्ग में पूजा, और अपने प्रतिष्ठान के प्रति लगाव देखा जाता है, लेकिन राधेश्याम अग्रवाल के लिए तो लाशों की अंतिम क्रिया ही पूजा है ।वे लगभग अठारह सालों से ये पुण्य कार्य कर रहे हैं और कभी विश्राम नहीं करते। वे कहते हैं कि हर दिन जरूरत मंदों को भूख लगती है और हर दिन कहीं न कहीं जीवन की डोर यमराज के हाथों में जा अटकती है। वे कहते हैं कि एक दुर्घटना में बाल बाल बचने के बाद उन्होंने संकल्प किया था कि वे किसी भी गुमनाम इंसान को लावारिस होकर नहीं जाने देंगे। उन्हें इस कार्य की प्रेरणा देने का काम मेडीकोलीगल एक्सपर्ट डॉक्टर डी.के.सत्पथी ने किया था। तब वे अपराध संवाददाता के रूप में उनके पास खबर लेने जाते थे। डाक्टर सत्पथी ने उन्हें बताया कि जिन लावारिस लाशों का वे पोस्टमार्टम करते हैं उनका अंतिम संस्कार पुलिस के लिए बड़ी समस्या होता है। यदि कोई समाजसेवी ये बीड़ा उठा ले तो बेगुनाह लोगों को भी बैकुंठयात्रा कराई जा सकती है। इसी विचार ने आगे चलकर जनसंवेदना संस्था को जन्म दिया और आज यह एक विशाल नेटवर्क का रूप ले चुकी है। हजारों दानदाता इससे जुड़कर अपना भी जन्म सफल बना रहे हैं और लावारिस मरने वालों के लिए आशा की किरण बन गए हैं।
नई दिल्ली ,23 मई(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)। त्रावणकोर देवस्वोम बोर्ड(टीडीबी) ने सर्कुलर जारी कर केरल में अपने अधीन आने वाले मंदिरों में आरएसएस के अलावा सभी राजनीतिक दलों के कार्यक्रमों पर रोक लगा दी है। टीडीबी ने सख्ती से उसके निर्देशों का पालन करने की बात कही है। दक्षिणी राज्य केरल में टीडीबी करीब 1200 मंदिरों का प्रबंधन देखता है। टीबीडी के सर्कुलर में कहा गया है कि उसके निर्देशों का सख्ती से सभी मंदिरों में पालन किया जाए और जो अधिकारी इसका पालन नहीं करेंगे, उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। यह पहली बार नहीं है जब टीबीडी ने आरएसएस के खिलाफ ऐसे फैसले लिए हैं। इससे पहले 2016 में भी टीबीडी ने मंदिर परिसरों में आरएसएस द्वारा हथियारों के प्रशिक्षण पर प्रतिबंध लगा दिया था। साथ ही त्रावणकोर देवस्वोम बोर्ड ने इससे पहले 30 मार्च, 2021 को एक आदेश जारी किया था कि मंदिर परिसर का उपयोग मंदिर के अनुष्ठानों और त्योहारों के अलावा किसी अन्य उद्देश्य के लिए नहीं किया जाना चाहिए।
त्रावणकोर देवास्वोम बोर्ड के अध्यक्ष के अनंतगोपन ने कहा, ‘आरएसएस की शाखाएं कई मंदिरों में चल रही थीं और वहां ड्रिल जारी था। यही वजह है कि ऐसा सर्कुलर जारी किया गया। मंदिर श्रद्धालुओं के लिए होते हैं, श्रद्धालुओं को कोई असुविधा नहीं होनी चाहिए। यही बोर्ड का स्टैंड है।’
देवस्वोम बोर्ड के अधिकारियों ने कहा कि सिर्फ आरएसएस ही नहीं, किसी भी संगठन या राजनीतिक दलों को अन्य उद्देश्यों के लिए मंदिर परिसर का उपयोग करने की अनुमति नहीं दी जाएगी। बोर्ड के उपायुक्तों, सहायक आयुक्तों, प्रशासनिक अधिकारियों और उप-समूह अधिकारियों को इस तरह की गतिविधियों पर प्रतिबंध लगाने के लिए कदम उठाने और मुख्यालय को रिपोर्ट करने के लिए कहा गया है।
जिसके कारण आज आपका अस्तित्व है उसके प्रति कृतज्ञता का भाव रखना जैन धर्म की मूल पहचान है।उदार हृदय होकर ईश्वर की आराधना करने वाले जैनियों की इसी साख की वजह से उन्हें समाज का खजांची माना जाता है। सामाजिक संस्कार के इस भाव की पूजा मंदिर में श्री जी के अभिषेक से पुष्पित पल्लवित होती है। राजधानी के जैन धर्मावलंबी भी इस भाव से अछूते नहीं हैं और इसी वजह से राजधानी के जैनियों को प्रदेश की जैन समाज का शीर्ष (अपेक्स ) प्रतिनिधि माना जाता रहा है। इसके बावजूद यहां कई बार जैनियों के बीच अप्रिय घटनाएं भी सामने आती रहती हैं जिसका कारण अज्ञानता, संकीर्णता और अहंकार का भाव होता है। कस्तूरबा नगर के धर्मावलंबियों के बीच कुप्रबंधन से जुड़ी कुछ इसी तरह की बैचेनी इन दिनों देखी जा रही है। कस्तूरबानगर, रचनानगर ,गौतम नगर, भारती निकेतन, शांतिनिकेतन जैसी कालोनियों में रहने वाले जैन धर्मावलंबियों के पुण्य की आराधना के बीच पनपा कटुता का भाव इन दिनों सु स्वादु भोजन के बीच आए कंकड़ की तरह खटक रहा है।
ये कहानी न केवल कस्तूरबानगर बल्कि देश भर की जैन संस्थाओं में देखी सुनी जा रही है। इसकी वजह समासेवा के नाम पर जुटने वाले अहंकारियों का कुप्रबंधन,मनमानी और अराजकता है। राजधानी के कस्तूरबानगर और रचनानगर के लोगों ने वर्ष 2002-03 में एक सार्वजनिक वाचनालय और भगवान सुपार्श्वनाथ के संदेशों का प्रसार करने के लिए मंदिर का निर्माण किया था। मंदिर के संधारण और निर्माण का कार्य श्री महावीर कुंदकुंद दिगंबर जैन वाचनालय एवं पुस्तकालय समिति जिसका रजिस्ट्रेशन 10249/2002 है इसके अधीनस्थ श्री 1008 सुपार्श्वनाथ दिगंबर जैन मंदिर समिति कस्तूरबा नगर(उपसमिति) करती रही । मंदिर की स्थापना करने वाले समाजसेवियों की बनाई इस उप समिति का कार्यकाल 30 अप्रैल 2023 को समाप्त हो गया। उसके चुनाव की नई तिथि अभी तक घोषित नहीं हुई है। इसकी घोषणा मंदिरजी की स्थापना करने वाली श्री महावीर कुंद कुंद दिगंबर जैन वाचनालय एवं पुस्तकालय समिति को करना है। इस उपसमिति के अध्यक्ष का पद काल दो वर्ष रखा गया है। जाहिर है कि दो साल बाद उप समिति का अध्यक्ष बदला जाता है। वाचनालय के लिए बनी मूल समिति ने लगभग इक्कीस सालों के अथक प्रयासों और जन सहयोग से सुंदर सार्वजनिक स्थल का निर्माण किया है। यही नहीं दानराशि का एक बड़ा फंड सामाजिक गतिविधियों के लिए भी एकत्रित किया है। फंड के दुरुपयोग की भी कोई शिकायत कभी सामने नहीं आई। ये काम मंदिर समिति से जुड़े तमाम जैन धर्मावलंबी बडी पारदर्शिता और लगन से करते रहे हैं। सभी का एकमेव लक्ष्य है कि वे रोज सुबह भगवान के दर्शन कर सकें और सामाजिक मानदंडों की उत्कृष्टता का संकल्प ले सकें।
ये सब गतिविधियां शुरुआती अवरोध के बाद से निर्बाध चल रहीं हैं और समाज के कई लोग इस अभियान से जुड़ते चले जा रहे हैं। इसमें न केवल जैन समाज बल्कि कई अन्य स्थानीय नागरिकों ने भी बढ़ चढ़कर अपनी हिस्सेदारी निभाई है। अदालतों के विभिन्न फैसलों की वजह से सरकार ने मंदिर स्थलों के निर्माण और नियमन को लंबे समय से रोक रखा है। यही वजह है कि कस्तूरबानगर जैन मंदिर को जमीन आबंटन की प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकी, मंदिर से जुड़े लोगों के सब्र का बांध अब टूटने लगा है। मंदिर की जिस उपसमिति का कार्यकाल हाल ही में 30 अप्रैल को समाप्त हुआ है, उसके अध्यक्ष रहे सुनील जैन(जैनाविन) ने मंदिर के नवनिर्माण पर पच्चीस लाख रुपए खर्च कर दिए। इस मनमानी पर श्री महावीर कुंदकुंद दिगंबर जैन वाचनालय एवं पुस्तकालय समिति के कई सदस्यों ने आपत्ति उठाई । उनका कहना था कि वाचनालय या मंदिर की जमीन आबंटन की प्रक्रिया पूरी नहीं हुई है इसलिए इस तरह की फिजूलखर्ची की अनुमति नहीं दी जा सकती। समिति के सदस्यों ने लोगों से प्राप्त धनराशि को पाई पाई करके जोड़ा है इसे बर्बाद नहीं किया जा सकता ।जिस तरह राम जन्मभूमि मंदिर का जमीन विवाद सुलझने के बाद ही मंदिर निर्माण शुरु किया गया उसी तरह यहां सरकार की मंजूरी का इंतजार किया जाना चाहिेए। इस पर व्यवस्था संभाल रहे कुछ लोगों और अध्यक्ष सुनील जैन ने आरोप लगाने शुरु कर दिये कि मूल समिति की जिद से मंदिर का नवनिर्माण नहीं हो पा रहा है। उन्होंने स्थानीय लोगों और समिति के सदस्यों को बरगलाया कि मंदिर के निर्माण में स्वर्गीय पंडित कस्तूरचंद जी का परिवार आड़े आ रहा है, इसलिए मंदिर का प्रबंधन उनके हाथ से छीन लिया जाए।ये भी कहा गया कि मूल समिति की स्थापना मुमुक्षु पंथ के लोगों ने की थी इसलिए मुनिभक्तों को उसे स्वीकार नहीं करना चाहिए। जबकि स्थापना से लेकर अभी तक इस तरह का कोई विवाद नहीं था।
मध्यप्रदेश फार्मेसी काऊंसिल के अध्यक्ष और समिति के वर्तमान अध्यक्ष संजय जैन का कहना था कि श्री महावीर कुंदकुंद दिगंबर जैन वाचनालय एवं पुस्तकालय समिति ने इस सार्वजनिक स्थल के निर्माण के लिए सरकार के विभिन्न मंचों पर सहमति बना ली है जिस दिन सरकार मंदिरों के बारे में कोई फैसला करेगी यहां का भी गतिरोध टूट जाएगा और वाचनालय के साथ मंदिर भी भव्य बन जाएगा। बताया जाता है कि कार्यकाल समाप्त होने की तिथि सामने देख सुनील जैन ने एक पुरानी बंद पड़ी मिलते जुलते नाम वाली समिति की खाना पूर्ति करवाई और उसे असली समिति बताने लगे। इस समिति का नाम श्री 1008 सुपार्शनाथ दिगंबर जैन समिति है जिसका रजिस्ट्रेशन क्रमांक 1402/1992है।इस समिति का कार्यालय चेतक ब्रिज की रचनानगर साईड है। ये समिति बी-83 के पते पर किसी अन्य व्यक्ति ने पंजीकृत करवाई थी और इस समिति का कस्तूरबा नगर जैन मंदिर से कोई भी लेना देना नहीं है।इसके रजिस्ट्रेशन के वक्त मंदिर का कोई अस्तित्व नहीं था।
मंदिर निर्माण की ललक रखने वाले भोले भाले श्रद्धालुओं की आंखों में धूल झोंककर जो समिति आनन फानन में तैयार की गई उसकी नकल की पोल पहली बैठक में ही खुल गई। आरटीआई से प्राप्त जानकारी में साफ दिख रहा है कि किस तरह एक ही व्यक्ति ने फर्जी दस्तखत करके समिति को अद्यतन किया है । इसकी आपराधिक जांच भी चल रही है। संजय जैन ने बैंक मैनेजर को जब सारी जानकारी दी तो उन्होंने खाता सीज कर दिया। समस्या ये थी कि ये बैंक खाता अस्थायी उपसमिति के नाम से खोला गया था और उसकी केवाईसी में श्री महावीर कुंदकुंद दिगंबर जैन वाचनालय एवं पुस्तकालय समिति का पैन नंबर दर्ज किया गया था। समिति के सभी सदस्य समिति और उपसमिति दोनों के भी सदस्य थे इसलिए पहले किसी को कोई आपत्ति नहीं थी। बताते हैं कि रोक लगवाए जाने के बाद सुनील जैनाविन ने बैंक मैनेजर को धमकाया और कहा कि वे खाते का संव्यवहार जारी ऱखें क्योंकि खाते में रखा लगभग सवा करोड़ रुपया सदस्यों के प्रयासों से ही एकत्रित हुआ है। मूल समिति के दस्तावेजों में हेरफेर करके एक फर्जी समिति खड़ी करके फंड पर कब्जा जमाने की ये कोशिश धोखाघड़ी के दायरे में आती है इसलिए संजय जैन ने इसकी शिकायत एसडीएम एमपीनगर श्री सतीश गुप्ता को भी की। पुलिस कमिश्नर प्रणाली चालू होने के बाद राजस्व संबंधी धोखाघड़ी पर भी राजधानी पुलिस गभीरता से निगरानी कर रही है। जाहिर है गोविंदपुरा पुलिस की जांच में चोर दरवाजे से फंड पर कब्जा और फिजूलखर्ची करने की असली कहानी लोगों के सामने आ जाएगी।
कस्तूरबानगर जैन मंदिर से जुड़े आम नागरिकों का कहना है कि सुनील जैन अपना रौब जमाने के लिए खुद को महापौर का खासमखास बताते हैं। जबकि वे नगर निगम के एक ब्लैकलिस्टेड ठेकेदार हैं जिन्हें घटिया बिजली का माल सप्लाई के कारण प्रतिबंधित किया गया था। बताते हैं कि वे मंदिर समिति के फंड से निर्माण का काम महापौर से जुड़े ठेकेदारों को दिलवाते रहे हैं। उनकी इस शैली का लाभ मंत्री और स्थानीय विधायक विश्वास सारंग के कई करीबी भी उठाते रहे हैं। पीड़ितों का कहना है कि सुनील खुद को एक बड़े समाचार पत्र समूह के मालिकों का फंड मैनेजर बताकर प्रभाव जमाते हैं। मंदिर समिति से जुड़े लोग ये सब जानते हैं लेकिन वे खुलकर विरोध नहीं कर पा रहे हैं। मंदिर के फंड पर कब्जा जमाने के लिए सुनील ने समानांतर बनाई गई समिति का चुनाव करवाने की तैयारी कर डाली जबकि मूल मंदिर समिति से इसकी कोई अनुमति नहीं ली गई। श्री महावीर कुंदकुंद दिगंबर जैन वाचनालय एवं पुस्तकालय समिति ने बाकायदा नोटिस चिपकाकर इस पर आपत्ति जताई और पुलिस से अनुरोध किया कि इस गैरकानूनी घुसपैठ को रोका जाए क्योंकि इससे शांति भंग होने की संभावना है। पुलिस ने आनन फानन में कार्रवाई की है। संजय जैन ने राजधानी में जैन समाज की प्रतिनिधि संस्था श्री चौक जैन मंदिर कमेटी ट्रस्ट से भी हस्तक्षेप करने का अनुरोध किया है। इस पर चौक कमेटी के अध्यक्ष मनोज जैन बांगा ने कहा कि दोनों पक्ष आपस में मिलजुलकर विवाद को सुलझा लें यदि समाज के लोग अनुरोध करेंगे तो चौक ट्रस्ट भी इसमें हस्तक्षेप करेगा। मामला अब पुलिस और अदालत की चौखट तक पहुंच गया है। जाहिर है इस विवाद ने न केवल जैन समाज बल्कि सभी धार्मिक संस्थाओं में पनप रही लूटपाट और अराजकता की ओर सरकार का ध्यान आकर्षित कराया है।
धार्मिक संस्थाओं में विधि का पालन न किए जाने से दान दाताओं की भी अनदेखी हो रही है। परमार्थिक दान को आयकर अधिनियम में कई प्रकार की छूट प्रदान की गई है। इसके बावजूद मंदिर के फंड में दान करने वाले नागरिकों को छूट का लाभ नहीं मिल पा रहा है। टैक्स की चोरी और अनियमित लेखों को देखकर चार्टर्ड एकाऊंटेंट श्री नागेन्द्र पवैया ने आपत्ति दर्ज कराई थी और अंकेक्षण का कार्य करने इंकार कर दिया था। उनका कहना था कि मंदिर की प्रभारी समिति के सदस्य नकद आठ लाख रुपए तक अपने पास रखते हैं जो नियमानुसार नहीं है। मंदिर समिति को हाथखर्च के लिए पच्चीस हजार रुपए तक रखने की छूट होती है क्योंकि दान राशि की सीमा बीस हजार रुपए तक निर्धारित है। जैसे ही दान प्राप्त हो उसे समिति के बैंक खाते में जमा कराया जाना चाहिए। मंदिर के खर्चों के बिल और वाऊचर भी आडिट में सामने रखे जाने चाहिए। इस तरह की वित्तीय अनियमिताओं की ओर जब समिति का ध्यान आकर्षित किया गया तो सुनील जैनाविन और उनके कुछ सहयोगी कहने लगे कि हमने कोई घोटाला थोड़ी कर लिया है। जब उनसे कहा गया कि दान का पैसा खाते में जमा क्यों नहीं किया गया था तो उनका कहना था कि वे भूल गए थे। एक सदस्य ने तो अहसान जताते हुए ये भी कहा कि उन्होंने अपनी व्यक्तिगत एफडी तुड़वाकर समिति के खाते में धनराशि जमा कराई है जबकि ऐसा करने की नौबत क्यों आई इस पर समिति के सदस्य खामोश हैं। जाहिर है कि ये खामोशी जैन समाज के भीतर खदबदाते आक्रोश की आहट भी दे रही है। ऩई पीढ़ी के धर्मानुरागी जिस तरह दान देने में उदार हैं उसी तरह वे किसी अनियमितता के भाव को तिरस्कार की नजर से देखते हैं। समय आ गया है कि जब समाज के जिम्मेदार लोगों को गड़बड़ियां सुधारने के लिए आगे आना होगा।उत्तर प्रदेश में तो योगी जी की सरकार जन धन के अतिक्रमणकारियों का मुफीद इलाज कर रही है लेकिन मध्यप्रदेश की नौकरशाही में अभी सुशासन का जज्बा भरने की सख्त जरूरत है।
पाकिस्तान हमेशा से ही अपने इस मशहूर पत्रकार की मौत चाहता रहा। कल ( 24 अप्रैल 2023 ) तारेक फतेह चले गए। कैंसर से रुग्ण थे। टोरंटो (कनाडा) में खाके सिपुर्द हो गए। वे 73 साल के थे। भारतीय मुसलमान घोर नफरत करते थे तारेक फतेह से क्योंकि वे शरीयत में बदलाव के पक्षधर थे। कराची में जन्मे (20 नवंबर 1949) तारेक फतेह सदैव पाकिस्तान के खिलाफ रहे। वे अखंड भारत के समर्थक थे। उनकी मां सुन्नी थी, मुंबई की। पत्नी नरगिस शिया, गुजराती दाऊदी बोहरा। स्वयं को फतेह बड़ी साफगोई से किस्मत का शिकार बताते थे। उनके पिता भी अन्य मुसलमानों की तरह जिन्ना की बात मानकर नखलिस्तान की तलाश में इस्लामी पाकिस्तान आए। मगर वह “मृगमरीचिका” निकली। “मैं पाकिस्तानी था। अब कनाडा का हूं। पंजाबी मुस्लिम कुटुंब का था, जो पहले सिख था। मेरा अकीदा इस्लाम में है, जिसकी जड़े यहूदी मजहब में रहीं।” अपनी जवानी में फतेह मार्क्सवादी छात्र नेता रहे। जैव रसायन में स्नातक डिग्री ली। पत्रकार के रूप में कराची पत्रिका “सन” के रिपोर्टर थे। जनरल जियाउल हक की सैन्य सरकार ने उन्हें दो बार जेल में डाला। देशद्रोह का आरोप लगाया।
तारेक फतेह भारतीय मुसलमानों को राय देते रहे : “अपनी आत्मा को इस्लामी बनाओ। दिमाग को नहीं। गरूर पर हिजाब डालो, न कि शकल पर। बुर्का से सर ढको, चेहरा नहीं।” तारेक ने एंकर रजत शर्मा को “आपकी अदालत” में बताया था कि बाबर तो भारतीय इतिहास का कबाड़ था। वह हिंदुस्तानियों को काला बंदर मानता था। इसीलिए जब राम मंदिर का निर्माण प्रारंभ हुआ तो तारेक हर्षित थे। उस आधी रात, अगस्त माह 2018, में फतेह बारह हजार किलोमीटर दूर टोरंटो में अपने बिस्तर पर तहमत पहने नाचे थे। तभी टीवी पर खबर आई थी कि उसी सुबह नई दिल्ली नगरपालिका ने सात दशकों बाद औरंगजेब रोड का नाम बदलकर डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम पर रख दिया था। एक ऐतिहासिक कलंक मिटा था, फतेह की राय में। अपने लोकप्रिय टीवी शो में फतेह हमेशा ब्रिटिशराज द्वारा मुगलों के महिमा मंडन के कठोर आलोचक रहे। वे कई बार कह भी चुके थे कि जालिम औरंगजेब का नामोनिशान भारत से मिटाना चाहिए । फिर उनके सुझाव को पूर्वी दिल्ली से लोकसभा के भाजपाई सदस्य महेश गिरी ने गति दी। अपने भाषण में फतेह ने कहा भी था : “आज केवल हिंदुस्तानी ही इस्लामिक स्टेट के आतंक को नेस्तनाबूद कर सकता है। अतः क्या शुरुआत में आप नई दिल्ली में औरंगजेब रोड का नाम दारा शिकोह रोड रख सकते हैं ?” उनका सवाल था। अपने सगे अग्रज दारा शिकोह को औरंगजेब ने लाल किले के निकट हाथी से रौंदवाया था। उनका सर काटकर तश्तरी में रखकर पिता शाहजहां को नाश्ते के साथ परोसवाया था। मोदी सरकार ने तीन साल लगा दिए औरंगजेब रोड का नाम बदलने में।
तारेक फतेह अपने टीवी कार्यक्रम में अक्सर कहा करते थे कि वे बलूचिस्तान को आजाद राष्ट्र के रूप में देखना चाहते हैं। पाकिस्तान ने उसे गुलाम बना रखा है। वे कश्मीर पर पाकिस्तान के हिंसक हमलों की हमेशा भर्त्सना करते रहे। मूलतः वे विभाजन के विरुद्ध रहे। अपनी पुस्तक “यहूदी मेरे शत्रु नहीं हैं” में फतेह ने स्पष्ट लिखा था कि भ्रामक इतिहास के फलस्वरुप यहूदियों के साथ अत्याचार किया गया। वे मुंबई में 9 नवंबर 2008 के दिन यहूदी नागरिकों पर गोलीबारी से संतप्त थे। उन्होंने इस वैमनस्य की जड़ों पर शोध किया। उन्होंने पाया कि यहूदी से उत्कट घृणा ही इस्लाम का मूल तत्व है। वे समाधान के हिमायती थे।
तारेक फतेह ने इस्लामी राष्ट्रों के द्वारा असहाय मुसलमानों की उपेक्षा को मजहबी पाखंड करार दिया था। वे मानते थे कि रोहिंग्या मुसलमान न्याय के हकदार हैं, उपेक्षा के पात्र नहीं। एक मानवीय त्रासदी आई है जहां एक पूरी आबादी पर सबसे जघन्य अत्याचार ढाये जा रहे हैं। वे एक जातीय और धार्मिक अल्पसंख्यक हैं। म्यांमार में दसियों हज़ार रोहिंग्या मुसलमान एक तानाशाह की सेना द्वारा क्रूर कार्रवाई में खदेड़े गये। वे शरण मांग रहे हैं, विशेषतः मुस्लिम देशों से। मगर ये सारे इस्लामी राष्ट्र खामोश हैं। तारेक फतेह ने तत्कालीन पाकिस्तानी राष्ट्रपति परवेज मुशर्रफ की इस्लामाबाद में लाल मस्जिद तथा उसके अंदर आतंकवादियों पर कार्रवाई के पीछे की राजनीति की जांच की मांग की थी। उनकी दृष्टि में यह साजिश थी। तारेक फतेह ने लिखा था : “जनरल मुशर्रफ़ और उन्हें सहारा देने वाले अमेरिकियों, दोनों को यह महसूस करना चाहिए कि मलेरिया से लड़ने के लिए दलदल को खाली करने की ज़रूरत है, न कि अलग-अलग मच्छरों को मारने की। पाकिस्तान में इस्लामी कट्टरवाद से लड़ने का सबसे अच्छा तरीका ही है कि फर्जी मतदाता सूचियों को खत्म करें और लोकतांत्रिक चुनाव आयोजित किया जाए। निर्वासित राजनेताओं को देश में लौटने दिया जाए।”
मगर तारेक फतेह को देशद्रोही कहा गया। अखिल भारतीय फैजान-ए-मदीना परिषद ने एक निजी समाचार चैनल पर तारेक फतेह के आकर्षक टेलीविजन कार्यक्रम ‘फतेह का फतवा’ पर तत्काल प्रतिबंध लगाने की मांग की थी। बरेली- स्थित एक मुस्लिम संगठन ने कथित रूप से अपने टीवी कार्यक्रम के माध्यम से “गैर-इस्लामिक” विचारों को बढ़ावा देने के लिए तारेक फतेह का सिर कलम करने वाले को 10 लाख रुपये के “इनाम” की घोषणा की थी ।
फतेह को श्रद्धांजलि देते हुये टीवी समीक्षक शुभी खान बोली : “थोड़ी देर तो समझ नहीं पाई कि क्या कहूँ ? क्या सोंचू ? टीवी चैनल्स पर हम दोनों का सच के लिए और बहुत बार एक दूसरे के लिए लड़ना तो याद आया। तारेकभाई आपकी मशाल बुझी नहीं हैं। अब यह मुस्लिम युवाओं द्वारा ज्यादा तेज जलेगी”, कहा खान ने। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के साप्ताहिक “पांचजन्य” ने लिखा : “उनके योगदान को हमेशा याद रखा जाएगा। तारेक फतेह इस्लामी कट्टरता के घोर विरोधी थे।” हम IFWJ के श्रमजीवी पत्रकार सदस्य साथी तारेक फतेह के सम्मान में अपने लाल झंडा झुकाते हैं। उनकी पत्रकार-पुत्री नताशा के लिए शोक संवेदनायें ! सलाम योद्धा तारेक ! तुम्हारी फतेह हो !!
भोपाल,31 मार्च( प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)।राष्ट्रीय स्वयंसेवक के सरसंघचालक मोहन भागवत ने कहा कि सिंधी समुदाय सब कुछ गँवा कर भी शरणार्थी नहीं बना, उसने पुरूषार्थी बन कर दिखा दिया। वे आज भोपाल में शहीद हेमू कालानी जन्म शताब्दी समारोह को संबोधित कर रहे थे। इस अवसर पर मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि अमर शहीद हेमू कालानी ने भारत को स्वतंत्र कराने के लिए अपने जीवन का बलिदान किया। उन्होंने गले में फाँसी का फंदा पहनते हुए कहा था कि मैं फिर से जन्म लूँगा और भारत को स्वतंत्र करवाऊँगा। आज यदि हम शहीदों को नहीं पूजेंगे, तो राष्ट्र के लिए जीवन का बलिदान करने के लिए कोई आगे नहीं आएगा। नई पीढ़ी के लिए शहीदों का जीवन प्रेरक है। वीर सेनानियों के साथ ही सिंध संतों की भूमि रही है। सिंधु नदी के किनारे वेदों की ऋचाएँ रची गईं। सिंध की संस्कृति काफी प्राचीन है। इस समाज ने अनेक समाज-सुधारक, सफल उद्यमी और अन्य प्रतिभाएँ देने का कार्य किया है। अपने धर्म, संस्कृति और सभ्यता के लिए मातृ-भूमि को छोड़ने के बाद भी पुन: स्थापित होकर दिखाने वाले सिंधी समाज ने व्यवसाय के क्षेत्र में तो बुद्धि और परिश्रम से योग्यता का संदेश दिया है। समाज की युवा पीढ़ी को कठोर परिश्रम के गुण के साथ ही अपनी संस्कृति, वेशभूषा और खान-पान को नहीं भूलना है। मुख्यमंत्री चौहान आज भेल दशहरा मैदान पर अमर बलिदानी हेमू कालानी जन्म-शताब्दी समारोह को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि पिछले दशक में इंदौर में बसे पाकिस्तान के सिंधु प्रांत से आए नागरिकों की वीसा अवधि समाप्त होने के बाद भी उन्हें वापसी के लिए विवश नहीं किया गया। यह समस्या संज्ञान में आते ही प्रधानमंत्री श्री मोदी ने नागरिकता संबंधी प्रावधानों को लागू करवाया। देश की स्वतंत्रता के बाद विभाजन के कारण नए भू-भाग में जाकर बसने वाले सिंधी नागरिकों सहित बाद के वर्षों में भारत आए सिंधी नागरिकों को कठिनाई उत्पन्न नहीं होने दी जाएगी। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने ऐसे नागरिकों के लिए कहा कि पूरा देश आपका ही है। मुख्यमंत्री ने अनेक सिंधी व्यंजनों का उल्लेख करते हुए सिंधी समाज के साथ स्थापित अपनेपन के रिश्तों का उल्लेख किया। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने सिंधी समाज के हित में अनेक घोषणाएँ भी की। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि भोपाल की मनुआभान टेकरी के साथ ही प्रदेश के जबलपुर और इंदौर में भी अमर शहीद हेमू कालानी की प्रतिमा की स्थापना की जाएगी। सिंधी संस्कृति प्राचीनतम संस्कृति है। इसकी विशेषताओं को दिखाने वाले एक संग्रहालय का निर्माण राजधानी भोपाल में किया जाएगा। सिंधी विस्थापितों को कम कीमत पर पट्टे प्रदान करने के लिए मापदंड निर्धारित किए गए हैं। इसके अनुसार प्रदेश के विभिन्न स्थानों पर पात्र सिंधी विस्थापितों को पट्टे प्रदान करने का कार्य किया जाएगा। विशेष शिविर लगा कर पात्र सिंधी विस्थापितों को जमीन का मालिकाना हक दिया जाएगा। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि लद्दाख स्थित सिंधु नदी के घाट पर प्रतिवर्ष जून माह में होने वाले सिंधु दर्शन उत्सव में प्रदेश के यात्रियों को भिजवाने की व्यवस्था राज्य सरकार ने प्रारंभ की थी। कोरोना और अन्य कारणों से इसे निरंतरता नहीं मिली। इस वर्ष मुख्यमंत्री तीर्थ-दर्शन योजना में प्रति यात्री 25 हजार रूपए की राशि सिंधु दर्शन उत्सव में ले जाने के लिए प्रदान की जाएगी। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि सिंधी साहित्य अकादमी के बजट को बढ़ाकर पाँच करोड़ रूपए वार्षिक किया जाएगा। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने समारोह में कहा कि सिंधी समाज की वर्षों पुरानी मांग पूरी करते हुए पट्टे प्रदान करने के लिए विधिवत प्रीमियम की दरों में विशेष छूट का निर्णय राज्य सरकार ने लिया है। इसके अनुसार 45 वर्ग मीटर तक नि:शुल्क पट्टा दिया जाएगा। वर्तमान में 150 वर्ग मीटर तक भूमि के क्षेत्र फल के लिए 5 प्रतिशत की दर लागू है, जिसे घटा कर एक प्रतिशत किया गया है। इसी तरह 150 वर्ग मीटर से 200 वर्ग मीटर तक प्रीमियम की वर्तमान 10 प्रतिशत की दर को घटा कर भी एक प्रतिशत करने का निर्णय लिया गया है। व्यावसायिक उपयोग के भूखंड के लिए 20 वर्ग मीटर तक वर्तमान में 25 प्रतिशत की दर प्रचलित है, इस श्रेणी में अब नई दर सिर्फ 5 प्रतिशत होगी। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि भोपाल, सीहोर मुख्य मार्ग पर भूखंड की स्थिति में 1614 वर्गफुट आवासीय क्षेत्र फल के लिए यदि एक करोड़ 8 लाख रूपए बाजार मूल्य है, तो देय राशि एक लाख 8 हजार रूपए मात्र होगी। इसी तरह 2152 वर्गफुट आवासीय केलिए यदि एक करोड़ चवालीस लाख बाजार मूल्य होने पर, एक लाख चवालीस हजार रूपए की राशि देय होगी। इसके अलावा 215 वर्ग फुट के व्यावसायिक दुकान के लिए 14 लाख 40 हजार बाजार मूल्य की स्थिति में प्रीमियम में छूट के प्रावधान के अंतर्गत मात्र 72 हजार रूपए की राशि देनी पड़ेगी। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने संबोधन का प्रारंभ सिंधी भाषा में उपस्थित नागरिकों, भांजे-भांजियों संबोधित कर किया। श्री चौहान ने विभिन्न सिंधी व्यंजनों की विशेषताएँ भी बताईं। मुख्यमंत्री ने गुरूवार को इंदौर में हुई बावड़ी की घटना में दिवंगत सिंधी भाषी और अन्य नागरिकों के असामयिक निधन पर दुख व्यक्त करते हुए श्रद्धांजलि अर्पित की। राष्ट्रीय स्वयंसेवक के सरसंघचालक श्री मोहन भागवत ने कहा कि सिंधी समुदाय द्वारा स्वतंत्रता आंदोलन में दिए गए महत्वपूर्ण योगदान का उल्लेख कम होता है। शहीद हेमू कालानी ने बलूचिस्तान जाने वाली शस्त्रों से लदी उस रेल को पलटाने का प्रयास किया था जो, क्रांतिकारियों की हलचल को दबाने के लिए जा रही थी। शहीद हेमू अपने कार्य के परिणाम भी जानते थे। पकड़े जाने के बाद उन्होंने अपने मित्रों के नाम उजागर नहीं किए। उनका मानना था कि जीवन की सार्थकता बलिदान देने में है। तरूण आयु में किए गए उनके बलिदान की गूँज मुम्बई रेसीडेंसी से लेकर विश्व के देशों में हुई। उन्होंने हमें जीवन की राह दिखा कर जीवन दे दिया। शहीदों ने प्रामाणिकता के साथ अपने स्व को बचाने के लिए जीवन समर्पित किया। स्वराज का अर्थ नागरिकों को समझाया। शहीद हेमू कालानी की अटूट देश-भक्ति को ध्यान में रख कर संकुचित स्वार्थ को छोड़ कर उनके जैसा होने का प्रयास और एक समाज, एक देश की भावना, हम सभी को आत्मसात करना है। श्री भागवत ने कहा कि हेमू जी का मानना था कि हम तो चले जाएंगे, हम रहेंगे नहीं लेकिन भारत जरूर रहेगा। इसी आदर्श को लेकर संत कंवरराम जैसे देशभक्त भी बलिदान के लिए आगे आए। उन्होंने कहा कि सिंधी समुदाय ने भारत नहीं छोड़ा था, वे भारत से भारत में ही आए थे। सिंधु संस्कृति में वेदों के उच्चारण होते थे। हमने तो भारत बसा लिया लेकिन वास्तव में राष्ट्र खंडित हो गया। आज भी उस विभाजन को कृत्रिम मानते हुए सिंध के साथ लोग मन से जुड़े हैं। सिंधु नदी के प्रदेश सिंध से भारत का जुड़ाव रहेगा। वहाँ के तीर्थों को कौन भूल सकता है। श्री भागवत ने कहा कि आज भी अखंड भारत को सत्य और खंडित भारत को दु:स्वप्न माना जा सकता है। सिंधी समुदाय दोनों तरफ के भारत को जानता है। आदिकाल से सिंध की परम्पराओं को अपनाया गया। भारत ऐसा हो जो संपूर्ण विश्व को सुख-शांति देने का कार्य करें। तमाम उतार-चढ़ाव होंगे, लेकिन हम मिटेंगे नहीं। हम विश्व के नेतृत्व के लिए सक्षम हैं। सारे समाज के साथ कदम से कदम मिला कर चलना है। यह चिंतन आज की पीढ़ी को भी करना चाहिए कि हम कौन हैं और हमें क्या बनना है। विविधता में एकता को देखें और स्व के सच्चे अर्थ को समझ कर जीवन की दिशा तय करें। श्री भागवत ने डॉ. हेडगेवार और अन्य विचारकों के माध्यम से संपूर्ण दुनिया को दिखाए गए कल्याण के मार्ग का भी उल्लेख किया। उन्होंने सिंधी समुदाय द्वारा सनातनी परम्परा में रहने और अपने रीति-रिवाजों को कायम रख कर अपनी खुदी को बनाने की आवश्यकता बताई। उन्होंने कहा कि ऐसे तत्वों को असफल करना है, जो लोगों को झगड़ों के लिए उकसाते हैं। जीवन के विभिन्न क्षेत्रों में सद्गुणों को उजागर करने की जरूरत है। श्री भागवत ने इंदौर में कल हुई दुर्घटना का उल्लेख करते हुए कहा कि उन्हें गंगाजी के दर्शन के समय यह खबर मिली और तभी गंगाजी को प्रणाम कर दिवंगत लोगों को श्रद्धांजलि भी दी। कार्यक्रम को महामंडलेश्वर श्री हंसराम उदासीन और भारतीय सिंधु सभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री लधाराम नागवानी ने भी संबोधित किया। समारोह के संयोजक भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश महामंत्री श्री भगवानदास सबनानी ने स्वागत उद्बोधन दिया। युवा कलाकारों ने शहीदों के बलिदान पर केन्द्रित नृत्य नाटिका प्रस्तुत की। मंच पर शदाणी दरबार रायपुर के प्रमुख श्री युद्धिष्ठिर लालजी, श्री अशोक सोहनी, साधु समाज के श्री प्रियादास, सांसद श्री शंकर लालवानी, विधायक श्री अशोक रोहाणी, प्रख्यात गायक श्री घनश्याम वासवानी, बालक मंडली कटनी के वरिष्ठ गायक कलाकार श्री गोवर्धन उदासी, श्री दिलीप उदासी, राष्ट्रीय सिंधी भाषा विकास परिषद के उपाध्यक्ष श्री मोहन मंगनानी बैंगलुरु, निदेशक डॉ. रवि टेकचंदानी नई दिल्ली, अखिल भारतीय सिंधी बोली साहित्य सभा की महासचिव श्रीमती अंजलि तुलसियानी, मध्यप्रदेश सहित छत्तीसगढ़, कर्नाटक, महाराष्ट्र, गुजरात, राजस्थान, उत्तरप्रदेश आदि से आए सिंधी पंचायतों के पदाधिकारी, भोपाल के विभिन्न संगठन के सदस्य और बड़ी संख्या में सिंधी समाज के नागरिक उपस्थित थे। मुख्यमंत्री श्री चौहान और श्री मोहन भागवत ने समारोह स्थल पर लगी स्वतंत्रता संग्राम में सिंधी समाज के योगदान पर केंद्रित प्रदर्शनी देखी। प्रदर्शनी में सिंधी संतों, महापुरूषों, स्वतंत्रता सेनानियों, साहित्यकारों, सेना के अधिकारियों और समाज सुधारकों के चित्रों के साथ सिंध की परम्पराओं पर केन्द्रित चित्र भी प्रदर्शित किए गए। मुख्यमंत्री श्री चौहान और अतिथियों ने भारत में रक्त कैंसर के उपचार में अस्थिमज्जा प्रत्यारोपण के क्षेत्र के विशेषज्ञ डॉ. सुरेश एच. आडवाणी मुम्बई सहित खेल, साहित्य, समाज सेवा, चिकित्सा, सिनेमा और कला क्षेत्र की प्रमुख विभूतियों को सम्मानित किया। इनमें सर्वश्री सी.पी. गुरनानी, इंदर जयसिंघानी, राम बख्शानी, गायक महेश चंदर, लेखक राम जवाहरानी, प्रसिद्ध अधिवक्ता महेश राम जेठमलानी, श्रीमती अनीता गुरनानी, सतराम रामानी और मनोहर तेजवानी शामिल हैं। अतिथियों ने डॉ. सुधीर आजाद की नाट्य कृति “शेरे सिंध हेमू कालानी”, श्री राजेश वाधवानी के संपादन में प्रकाशित “हेमू कालानी की गौरव गाथा” और श्री राजेन्द्र प्रेमचंदानी की पुस्तक “सिंध के क्रांतिकारी : कही-अनकही गौरव गाथा” का विमोचन किया। संचालन श्री राजेश कुमार वाधवानी और श्रीमती कविता ईसरानी ने किया।
भोपाल,19 दिसंबर (प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)। दिगंबर जैन समाज में झूठी शान और दिखावे की वजह से कराई गई शादियां तलाक की वजह बन रहीं हैं। भोपाल में चल रहे जैन समाज के परिचय सम्मेलन में ये बात प्रमुखता से नजर आ रही है। अधिक प्रविष्टियां दिखाने के प्रलोभन में आयोजन के संचालकों ने जिन लोगों के आवेदन बुलाए हैं उनमें लोफर और बदनाम लड़के लड़कियों की भीड़ इकट्ठा हो रही है। ये अपने बारे में बढ़ा चढ़ाकर जो बातें बोलते हैं उससे प्रभावित होकर शादियां तो हो जाती हैं लेकिन कुछ ही दिनों बाद मनमुटाव के चलते ये शादियां टूट जाती हैं।पत्रिका के तलाकशुदा युवाओं वाले सेक्शन में बढ़ती संख्या को देखकर पहली ही नजर में इस मामले की गंभीरता को समझा जा सकता है।ऐसे कई मामलों में लड़कियां घर के जेवर लेकर भाग गईं और अदालतों में मंहगे हर्जाने की मांग करते हुए मुकदमे दर्ज कराए हैं।
अदालत के मीडिएशन सेंटर से जुड़े वकीलों से बात करने पर इस मामले की भयावहता सामने आ रही है। वकील आभा जैन बताती हैं कि जरूरत से ज्यादा उम्मीद युवाओं में तलाक की प्रमुख वजह बन रही है। जैन समाज में लड़की को मायके से मिलने वाला स्त्री धन हो या ससुराल से मिलने वाली जायदाद ये दोनों झगड़े की वजह होती हैं। वर्ष 2005 में बना संपत्ति का अधिकार भी झगड़े की वजह बन रहा है।जो फेब्रिकेटेड शादियां परिचय सम्मेलन की झूठी शान बढ़ाने के लिए कराई जा रहीं हैं उनमें शादी की वजह प्रेम या सम्मान नहीं है बल्कि लड़के लड़की का ऊंचा पैकेज और धनाड्य परिवारों की प्रतिष्ठा प्रमुख देखी जा रही है। लड़की को भारी जेवरात चढ़ाए जाते हैं जो लड़की और उसके परिजनों का मानसिक संतुलन बिगाड़ देते हैं। कई मामलों में लड़कियां अपने भाईयों से ज्यादा जायदाद हड़पने के लिए स्वयं माता पिता से अधिक दहेज दिए जाने की मांग करती हैं। जो लड़कियां आत्म निर्भर हैं उन्हें ससुराल की परिस्थितियों और लड़के की संपदा दोनों में खोट नजर आती है। वे शादी करते ही पति से कहने लगती हैं कि तुम्हारी हैसियत ही क्या है। जबकि 25-28 साल से लड़के तब अपने जीवन की शुरुआत ही कर रहे होते हैं।
जब ये केस अदालत पहुंचते हैं तो वकीलों का धंधा शुरु हो जाता है। वकील न तो तलाक होने देते हैं और न ही शादी को सफल बनाने का उपाय करते हैं। लड़कियों की शारीरिक और मानसिक कमियों को छुपाकर की गई शादियों में भी वकील जब ज्यादा मुआवजा दिलाने का लालच दिखाकर ज्यादा फीस कमाने का उपाय तलाशते हैं तो लड़कियों का दिमाग ही फिर जाता है। फिर वे लड़कों पर ऐसे आरोप जड़ने लगती हैं जो हकीकत से कोसों दूर होते हैं।
परिचय सम्मेलन के तलाकशुदा लड़के लड़कियों के सेक्शन में जो युवा प्रस्तुत हुए हैं उन सभी की कमोबेश इसी तरह की समस्याएं सामने आई हैं। कई मामलों में एक्स्ट्रा मेरिटल अफेयर, एक दूसरे के प्रति सम्मान में कमी, कम्युनिकेशन की समस्या, प्यार और इंटिमेसी की कमी, प्रमुख कारण हैं। लड़कियां जिस तरह की संपदा मिलने की उम्मीद कर रहीं हैं उन शर्तों को कोई राजकुमार युवक नहीं बल्कि कोई डाकू ही पूरा कर सकता है। ये जैन समाज में जगाई गई झूठी शान और लालच भरी सोच की वजह से हो रहा है। परिचय सम्मेलन से जुड़े लोग समाजसेवा की भावना छोड़कर जिस तरह रिकार्ड बनाने की सोच से काम कर रहे हैं उससे ये समस्या बढ़ती जा रही है।
अखिल भारतवर्षीय दिगंबर जैन परिचय सम्मेलन का शुभारंभ
विदेशों से आए युवाओं ने कहा हमें संस्कारित जीवनसाथी चाहिेए,दो दिन चलेगी परिचय की बेला
भोपाल,03 दिसंबर,(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर ).नगर निगम भोपाल में सभापति किशन सूर्यवंशी का कहना है कि जिस तरह भगवान राम और माता सीता की जोड़ी आदर्श मानी जाती है उसी तरह भारतीय संस्कृति में संस्कारित युवा भी हमारे आदर्श हैं। चाहे परिस्थितियां कितनी भी विपरीत हों जीवनसाथी का हाथ पकड़कर चलने वाले युवाओं को हम ह्दय से आशीर्वाद देते हैं और उनके सफल जीवन की कामना करते हैं। अखिल भारतवर्षीय दिगंबर जैन समाज के परिचय सम्मेलन के शुभारंभ अवसर पर पहुंचे श्री सूर्यवंशी ने कहा कि जैन संतों की त्याग और तपस्या की आराधना करने वाला जैन समाज अपने नवाचारों के लिए पहचाना जाता है। जैन समाज ने परिचय की श्रंखला शुरु करके युवाओं की बड़ी समस्या का समाधान खोज निकाला है। इस परंपरा का अनुकरण समाज के हर तबके को करना चाहिए।
परिचय सम्मेलन का आज राजधानी भोपाल में भव्य शुभारंभ हुआ। देश विदेश और प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों से आए युवाओं ने इस प्रतिष्ठापूर्ण आयोजन में अपने जीवन साथी की तलाश करते हुए परिचय की प्रक्रिया शुरु कर दी है। ये आयोजन आज और कल दो दिन चलेगा। रविवार को अवकाश होने और भोपाल में आज गैस त्रासदी दिवस पर स्थानीय अवकाश होने से आयोजन स्थल पर खासी चहल पहल देखी जा रही है।सकल दिगंबर जैन समाज भोपाल का ये आयोजन तात्याटोपे नगर खेल परिसर के नजदीक श्री महावीर दिगंबर जैन मंदिर,स्मार्ट सिटी,टिन शेड भोपाल में चल रहा है।इस अवसर पर प्रकाशित चयन पत्रिका के विमोचन के अवसर पर श्री सूर्यवंशी के साथ पूर्व आईएएस श्री सुरेश जैन,पूर्व आईपीएस श्री आर.के.दिवाकर भी उपस्थित थे।सभी अतिथियों का शाल और श्रीफल से अभिनंदन भी किया गया।
श्री सूर्यवंशी ने कहा कि आयोजन समिति के अध्यक्ष प्रो.एन.सी.जैन कॉलेज में उनके शिक्षक रहे हैं।उनके दिए संस्कारों ने हमारी जीवनराह प्रशस्त की है। वे अब जैन युवक युवतियों का मार्गदर्शन कर रहे हैं।जाहिर है कि उनके मार्गदर्शन में हो रहा ये परिचय सम्मेलन समाज में नए प्रतिमान गढ़ेगा। उन्होंने कहा कि आमतौर पर शादियों को व्यक्तिगत आयोजन माना जाता है लेकिन ऐसे कुशल मार्गदर्शन में जुड़ने वाले परिवार, समाज का ताना बाना मजबूत करते हैं। ये परिचय सम्मेलन जिस तरह के संस्कार लेकर चल रहा है उसे देखकर मुझे पूरा विश्वास है कि यहां भगवान राम और माता सीता की तरह आदर्श जोड़ियां ही बनेंगी।इस तरह के आदर्श परिवार गढ़ने वाले समाजसेवी भी निश्चित रूप से आदर के पात्र हैं। समाज में बंधुत्व फैलाने वाला यह सम्मेलन नित नई ऊंचाईयां छुए हम यही कामना करते हैं।
परिचय सम्मेलन में आज युवक युवतियों के बायोडाटा वाली चयन पत्रिका का विमोचन किया गया.
आयोजन समिति के अध्यक्ष प्रो.डॉ.एन.सी.जैन ने बताया कि इस आयोजन में विदेशों में कारोबार और नौकरी करने वाले युवाओं ने अब तक की सर्वाधिक भागीदारी दर्ज कराई है। मध्यप्रदेश के भी विभिन्न इलाकों से युवाओं ने अपना बायोडाटा भेजकर स्वयं को उत्कृष्ट जीवनसाथी के रूप में रेखांकित किया है। युवाओं के बायोडाटा वाली परिचय पत्रिका में जिन युवाओं ने अपनी प्रविष्टियां भेजी हैं वे सभी ऊंची पढ़ाई करके सफल नागरिक के रूप में स्थापित हो चुके हैं। कई तो देश विदेश के प्रख्यात डॉक्टर,इंजीनियर और विदेशों में कारोबार करने वाले उद्यमी हैं। युवाओं का कहना है कि हम विदेशी मुद्रा भारत भेजते हैं लेकिन हमें भारतीय संस्कृति में पले बढ़े जीवनसाथी ही चाहिए।
राजधानी के विभिन्न क्षेत्रों में बसे जैन कारोबारी और नागरिक इस आयोजन की व्यवस्था संभाल रहे हैं। आगंतुकों के ठहरने, भोजन और अमानती सामानगृह रखने की व्यवस्था टिन शेड जैन मंदिर में की गई है। कई आगंतुक शहर के होटलों में और रिश्तेदारों के घरों पर भी रुके हुए हैं। आयोजन स्थल पर युवाओं का मेला सा लगा हुआ है।युवा लड़के और लड़कियां अपने परिजनों के साथ परिचय के इस दौर में शामिल हैं। रिश्तेदारों के सहयोग से युवाओं के व्यक्तित्व,पारिवारिक पृष्ठभूमि, कारोबारी उपलब्धियों,और युवाओं के भावी जीवन के बारे में जानकारी जुटाई जा रही है।
कोषाध्यक्ष प्रो.डॉ.विजय जैन ने बताया कि हमें इस बार पत्रिका के लिए 1624 प्रविष्टियां मिली हैं।युवाओं के बायोडाटा का प्रारंभिक विश्लेषण करने पर पाया गया कि डॉक्टर युवक 36 युवती 41,इंजीनियर युवक 298 युवती 189,प्रोफे/एडवोकेट युवक 17 युवती 14,सी ए/सी एस युवक 28 युवती 30 ,Govt युवक 21 प्राइवेट नौकरियां करने वाले युवक 99 युवती 146 ,व्यवसाय करने वाले युवक 318 युवती 39 ,अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कारोबार या नौकरी करने वाले युवक 20, युवती 12, व अन्य युवती 198 से अधिक हैं। परिचय की पत्रिका प्रकाशन होने के बाद आयोजन स्थल तक पहुंचने वाले इससे भी अधिक युवाओं की भागीदारी भी देखी जा रही है। पत्रिका में प्रकाशन के बाद भी जिन युवक युवतियों की जानकारियां प्राप्त हो रहीं हैं उऩ्हें अब आन लाईन जारी किया जाएगा। जो युवा अपनी प्रविष्टियां समय सीमा में नहीं भेज पाए हैं उनके लिए परिचय सम्मेलन का आयोजन एक महत्वपूर्ण मंच साबित हो रहा है।
आयोजन की व्यवस्था संभाल रहे मुख्य संयोजक अनिल जैन नयापुरा ने बताया कि पिछले 27 साल से जैन समाज के युवाओं के परिवार बसा रहे समिति सदस्यों ने इस बार कई तकनीकी सुधार किए हैं। चयन पत्रिका में युवाओं की सहूलियत के लिए रिश्तों को व्यवसायगत आधार पर पहले से छांट दिया गया है।ये सम्मेलन समाज का है इसे किसी व्यक्ति की बपौती नहीं बनाया जा सकेगा। हम आयोजन के पूरे आय व्यय का ब्यौरा शीघ्र ही सार्वजनिक कर देंगे। भविष्य में युवाओं के लिए और क्या सुविधाएं दिला सकते हैं इस पर भी विचार किया जाएगा।
प्रवक्ता आलोक सिंघई ने बताया कि आयोजन में अध्यक्ष प्रोफेसर डॉ.एन.सी.जैन,कार्याध्यक्ष और जैन समाज की सबसे पुरानी चौक जैन मंदिर कमेटी ट्रस्ट के अध्यक्ष श्री मनोज जैन बांगा,मुख्य संयोजक श्री अनिल जैन नयापुरा,स्वागताध्यक्ष और चौक मंदिर कमेटी के पूर्व अध्यक्ष श्री अशोक जैन पंचरत्न,इंजी.वीरेन्द्र जैन मंदाकिनी, श्री धीरेन्द्र जैन निवेश नगर, महामंत्री इंजी.राकेश लहरी,महामंत्री श्री जिनेन्द्र जैन, जैन रोडवेज, महामंत्री श्री चक्रेश शास्त्री, प्रधान संपादक मुकेश चौधरी,कोषाध्यक्ष प्रो.डॉ.विजय कुमार जैन,सह कोषाध्यक्ष श्री विनोद जैन भिंड, मीडिया प्रभारी श्री अखिलेश सेठी,संपादक प्रो.डॉ.प्रसन्न जैन,श्री विकास जैन(नितिन),त्रिशला महिला मंडल की अध्यक्ष श्रीमती विजय लक्ष्मी भारिल्ल,श्री आलोक जैन मेरठ,इंजी.सुरेश जैन, राजेन्द्र जैन(शाहगढ़), विकास गोधा, सेठ कमल टड़ैया, अमन जैन काला, निशंक जैन, समेत कई अन्य पदाधिकारी और देश विदेश से आए जैन युवाओं के अभिभावकगण भी उपस्थित थे।
भोपाल,3 दिसंबर(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर )। अखिल भारतवर्षीय दिगंबर जैन परिचय सम्मेलन के पहले दिन आज शाम को आयोजित सांस्कृतिक कार्यक्रम ने देश विदेश से आए युवाओं में उमंग और उल्लास का संचार कर दिया।आयोजन स्थल और सुदूर देशों में बैठे युवाओं के रिश्तेदारों ने भी इस कार्यक्रम का आनंद लिया।यह प्रस्तुति आयोजन की व्यवस्था संभाल रही त्रिशला महिला मंडल की ओर से दी गई थी। त्रिशला महिला मंडल की अध्यक्ष श्रीमती विजय लक्ष्मी भारिल्ल ने बताया कि लगभग एक महीने से आयोजन की व्यवस्थाओं में जुड़ी महिलाओं और युवतियों ने अपने कार्य के बीच समय निकालकर ये प्रस्तुतियां तैयार की थीं।इन कार्यक्रमों को जिस खूबसूरती के साथ लड़ी में पिरोया गया था उससे परिचय सम्मेलन में आए युवा भी आल्हादित हो उठे। आयोजन की व्यवस्थाएं संभाल रही गुणाली जैन ने …रेशम की है डोरी.. नृत्य से सभी का मन मोह लिया। एक नृत्य ….बड़े बाबा मेरे आदिनाथ…की प्रस्तुति से सुश्री शिवाली जैन ने पंडाल में मौजूद लोगों को भाव विभोर कर दिया। श्रीमती आरती जैन और नितिका ने जय हो रामेश्वरा नृत्य प्रस्तुत करके ओज भरा माहौल निर्मित कर दिया। मनस्वी जैन ने नमोकार मंत्र है प्यारा से जैन सांस्कृतिक चेतना का उद्घोष किया। इस बीच मंच संचालन में सहयोग दे रहे प्रसन्न जैन ने चुटकुले सुनाकर लोगों को लोटपोट कर दिया। त्रिशला महिला मंडल की सदस्य महिलाओं के बच्चों ने हम याद करें सती ब्राह्मी भजन पर भावपूर्ण प्रस्तुति दी। श्रीमती सोना विमित जैन ने बुंदेलखंडी विदाई गीत गाकर युवक युवतियों और उनके अभिभावकों की आंखें नम कर दीं। बुंदेलखंडी परिवेश में कन्या के जन्म से लेकर विदाई तक के विभिन्न पहलुओं को उन्होंने ढपली बजाकर बहुत सुंदर अंदाज में प्रस्तुत किया। श्रीमती आरती, नितिका, प्रिया और नेहा जी ने एक समूह नृत्य करके पनघट की संस्कृति को मनोहारी अंदाज में प्रस्तुत किया। नयापुरा जैन मंदिर से जुड़ी त्रिशला महिला मंडल की सदस्यों ने लुक छुप न जाओ जी की प्रस्तुति दी। त्रिशला महिला मंडल की सदस्यों ने अरे माता बहनों जरा ये तो बता दो कि मंदिर में श्रंगार भला किसलिए है कव्वाली गाकर जैन समाज में नियमित दर्शन जाने की प्रेरणा दी। उन्होंने मंदिर को ध्यान स्थल बताते हुए यहां होने वाली लापरवाहियों को भी रेखांकित किया। महिलाओं ने बताया कि मंदिर में जाकर शास्त्र पढ़े जाते हैं , कुछ लोग जिस तरह मंहगे वस्त्रों, आभूषणों के प्रदर्शन तक स्वयं को सीमित कर लेते हैं वह जैन आगम में भी निषिद्ध है और स्वयं के व्यक्तित्व विकास में भी बाधक होता है। कव्वाली के व्यंगात्मक लहजे के बीच उन्होंने बताया कि जैन धर्म ईश्वर के दर्शन और आराधना से अपनी इंद्रियों पर विजय का मार्ग प्रशस्त करना सिखाता है। अनुशासन ग्रुप की छात्राओं ने लव जिहाद नाटक की प्रस्तुति देकर जैन युवक युवतियों को जीवन साथी के चयन में सावधानी बरतने का संदेश दिया। उन्होंने बताया कि जो युवक युवतियां जवानी के उल्लास में पथ भ्रष्ट हो जाते हैं और अपने माता पिता का मार्गदर्शन ठुकरा देते हैं उन्हें कई अप्रिय परिस्थितियों का सामना करना पड़ता है। ये सभी छात्राएं विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं के माध्यम से अपना जीवन संवारने का प्रयास कर रहीं हैं। नाटिका की लेखक और निर्देशक सुश्री प्राची जैन ने बताया कि लव जिहाद बनाम चक्रवर्ती विवाह नामक इस लघु नाटिका के माध्यम से हमने दो परिवारों के संस्कारों के अंतर को समझाने का प्रयास किया है। एक जैन परिवार है जिसमें माता पिता की परवरिश और जैन संस्कारों के महत्व को रेखांकित किया गया है। जबकि दूसरे परिवार में एक पथ भ्रष्ट विजातीय परिवार है जिसके सदस्य अपनी चालबाजियों से धार्मिक ग्रंथों की आड़ में अनाचार और धोखाघड़ी करते हैं। उन्होंने कहा कि हम भारत के लोग अल्लाह ईशु सबको मानते हैं। कोई धर्म बुरा नहीं है जरूरत है कि हम अच्छाई और बुराई के मर्म को पहचानें। अनुशासन समूह की छात्राओं का यह संदेश महिला सशक्तिकरण में नई पीढ़ी की भूमिका को संबल प्रदान करता है। छात्राओं ने देश की जैन लड़कियों को नाटिका के माध्यम से संदेश देने का प्रयास किया है कि ….नहीं बचे अब देश में कोई ,लव जिहाद का भोगी। हर बेटे बेटी की शादी ,चक्रवर्ती विवाह से होगी।
प्रिय युवा साथियो दिगंबर जैन समाज की नई पीढ़ी के युवक युवतियों का परिचय सम्मेलन में स्वागत करते हुए हमें बहुत प्रसन्नता हो रही है। जो बच्चे हमारे देखते देखते दुनिया में आए वे आज विभिन्न क्षेत्रों में अपना परचम फहरा रहे हैं। हमें साल दर साल उनके लिए योग्य जीवनसाथी तलाशने का अवसर मिला है। अपने हिस्््से में आए इस पवित्र कार्य के लिए हम स्वयं को सौभाग्यशाली महसूस करते हैं। जो बात कुछ समय से मन को बैचेन कर रही है वह ये कि आज के युवाओं में अहम और संवादहीनता की वजह से परिवार के प्रति श्रद्धा का भाव घट रहा है। उनमें परिवार की गाड़ी को पटरियों पर चलाने का धैर्य कम होता जा रहा है। उपभोक्तावाद ने माईक्रोफैमिली बनाने की जो मुहिम छेड़ रखी है उसकी वजह से परिवार टूट रहे हैं। कहा जाता है ….सा विद्या या विमुक्तये…यानि विद्या वो जो मुक्ति प्रदान करती हो। जाहिर है कि ज्ञान के प्रसार के बाद बंधनों से आजादी की ललक परवान चढ़ती ही है। आज युवतियां जाति,राष्ट्रवाद और पुरुषवाद के घेरे से आजादी की तरफ भाग रहीं हैं । वे पितृसत्ता की गुलामी से आजादी की ओर भी भाग रहीं हैं।उन्हें कानून से मिले अधिकार बहुत लुभा रहे हैं। इन सबके बीच वे अपना कर्तव्यबोध भूल चली हैं।युवा लड़के परिवार की जिम्मेदारियों से बचने का हुनर तलाश रहे हैं। इन सब विकृतियों का कारण वोट की राजनीति के लिए परिवारवादी चिंतन को बढ़ावा देना रहा है। हमारी सामाजिक गतिविधियां भी व्यक्तिवाद के इर्द गिर्द सिमटी रहीं हैं। लोगों ने सामाजिक गतिविधियों को किन्हीं परिवार या व्यक्ति की बपौती बताना शुरु कर दिया।संस्थाओं में किसी व्यक्ति के नाम का लेबल लगाकर भरपूर अनियमितताएं की जाती हैं। गड़बड़ियों को छुपाने के लिए धर्म या धर्म गुरुओं के नाम की आड़ ले ली जाती है। फर्जी बिल लगाकर सामाजिक गतिविधियों को इस तरह एहसान थोपते हुए अंजाम दिया जाता है मानों वे महान दानी और भामाशाह हों। ये सब गतिविधियां युवा मन बड़ी जल्दी पकड़ लेता है। इसके बाद अनैतिकता के विचार धीरे धीरे अपनी जगह बनाने लगते हैं। नई पीढ़ी बराबरी चाहती है सौंदर्य चाहती है, प्रेम चाहती है यहां तक तो ठीक है लेकिन वह इसके लिए जब गैर जिम्मेदार हो जाती है तो निंदनीय हो जाती है। समाज को सुंदर और न्यायप्रिय बनाने के लिए विद्रोह जरूरी है। समाज को ढर्रे से आजाद करना जरूरी है। इंसानियत तभी खूबसूरत बनेगी जब हम गलत बातों का प्रतिकार करेंगे। परिवार के दायरे को आगे बढ़ाकर जब राष्ट्र और विश्व के स्तर पर ले जाया जाता है तभी चिंतन की व्यापकता सार्थक होती है। हमें सोचना होगा कि हम व्यापक तो हों पर धरातल पर भी अपने पैर जमाए रख सकें । युवाओं का एक बड़ा वर्ग अधिकार की आड़ में सब कुछ मुफ्त हड़पने की नियत रखता है। सामाजिक नियंत्रण और दंड विधान की निष्क्रियता या अक्षमता वजह से इस पाखंड को कई बार प्रश्रय भी मिल जाता है। इसके बावजूद दूरगामी परिणाम विषदायी साबित होते हैं। युवाओं को समझना होगा कि वे अपने जीवनसाथी का आकलन पैकेज के आधार पर नहीं बल्कि व्यक्तित्व की व्यापकता के आधार पर करें। जब वे आत्मनिर्भर सोच से निर्णय करेंगे तो फिर उन्हें हताशा नहीं होगी। जैन समाज को जागरूक माना जाता है। उसके ऊपर बड़ी जिम्मेदारी भी है। आईए हम प्रयास करें कि हमारे परिवार आदर्श बनें, हम समाज के उन घरों का अंधेरा दूर कर सकें जिनके घरों को दीपक भी मुश्किल से नसीब होता हो। जगत कल्याण के लिए हमें सूरज बनकर निरंतर जलते रहना होगा। निवेदक आभा जैन गोहिल, त्रिशला महिला मंडल,9424966247
भोपाल,15 नवंबर(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)। पिछले 27 सालों से चले आ रहे अखिल भारतीय दिगंबर जैन परिचय सम्मेलन भोपाल ने विवाह योग्य युवाओं को अपना जीवन साथी चुनने के लिए इस साल बहुत कम दामों पर मिलन पत्रिका मुहैया कराने और परिचय सम्मेलन का आयोजन करने की तैयारियां पूरी कर लीं हैं। श्री महावीर दिगंबर जैन मंदिर टिन शेड टीटी नगर भोपाल में 3 व 4 दिसंबर 2022 को ये सम्मेलन आयोजित किया जा रहा है। कुछ सालों से घोटालेबाजी के आरोपों का सामना कर रहे मनोहर लाल टोंग्या जी वाले परिचय सम्मेलन से अलग होकर जैन समाज की पूरी टीम ने ये आयोजन किया है। इसमें युवाओं को मात्र छह सौ रुपए में तमाम रिश्ते पत्रिका के माध्यम से तो दिलाए ही जाएंगे साथ में जोड़ों के आनलाईन चुनाव की सुविधा भी उपलब्ध रहेगी।यही देखते हुए जागरूक जैन समाज ने ज्यादा प्रविष्टियां देकर परिचय सम्मेलन को मजबूत मंच बना दिया है। सम्मेलन से जुड़े अन्य सूत्र बताते हैँ कि युवाओं से परिचय के नाम पर धन उगाही करके उससे धंधा करने वालों से मुक्ति के बाद अब समिति बहुत कम दरों पर सारी सुविधाएं दिला रही है.समिति का उद्देश्य जैन समाज के युवाओं को अच्छा जीवनसाथी उपलब्ध कराकर सामाजिक विकास के नए मानदंड स्थापित करना है।जनता के धन से कारोबार करने की परिपाटी अब नहीं चल पाएगी। हर साल युवाओं को परिचय से जुड़ी नई सौंगातें देने का प्रयास रहेगा। जैन समाज के जो जागरूक नागरिक पिछले 27 सालों से अधिक समय से अलख जगाए हुए हैं उन्होंने ही परिचय सम्मेलन को ढर्रे से बाहर निकालने का बीड़ा उठाया है। इस बार हम युवाओं को जो विकल्प उपलब्ध कराएंगे उससे जैन समाज का हर वर्ग लाभान्वित होगा। आयोजकों ने आगम और संतों की वाणी को साकार करने की दिशा में कदम बढ़ाया है. जिसका जागरूक जैन समाज ने आगे बढ़कर स्वागत किया है।अब तक आई प्रविष्ठियों से साफ दिख रहा है कि जैन समाज सुधार के लिए हरदम तैयार रहता है। समिति के पदाधिकारियों ने बताया कि देश विदेश में फैले परिचय सम्मेलन के सहयोगियों ने जिन युवाओं की जानकारियां जुटाई हैं उन्हें पत्रिका में सहेजा जा रहा है। पंजीयन कराने और फार्म जमा करने की अंतिम तिथि 21 नवंबर तय की गई है। पत्रिका में जो लोग विज्ञापन प्रकाशित कराना चाहते हैं वे www.djpsbhopal.com पर आन लाईन फार्म जमा कर सकते हैं। इस वेवसाईट से फार्म डाऊनलोड भी किया जा सकता है। सम्मेलन में प्रत्याशियों का पदवार और व्यवसाय वार विवरण रहेगा। आनलाईन फार्म भरने पर बायोडाटा अपलोड करने की सुविधा दी गई है। 3 दिसंबर से 31 दिसंबर तक बायोडाटा आनलाईन सर्च करने की सुविधा भी रहेगी। मिलन स्मारिका रंगीन पृष्ठों में छापी जा रही है। सम्मेलन मेँ लम्बे समय से सक्रिय रहे अन्य सूत्र बताते हैँ कि इस परिचय सम्मेलन में जैन युवाओं को आधुनिक जानकारियां दी जा रही हैं।टोंग्या जी वाली समिति से पिछले चार सालों से आय व्यय की जानकारी सार्वजनिक करने की अपील की जा रही थी लेकिन कुछ लोग जानकारियां छुपा रहे थे.इसी वजह से जैन समाज ने ये परिचय सम्मेलन अपने हाथ में ले लिया है। टोंग्या जी वाले परिचय सम्मेलन के कोषाध्यक्ष श्री सेठी और अन्य पदाधिकारी लगभग पच्चीस लाख रुपए से अधिक के आय व्यय की जानकारियां नहीं दे पा रहे थे। कई पदाधिकारियों ने पत्नी के नाम चैक भुगतान करके रकम निकाली थी। कई चहेते लोगों को समिति के फंड से लैपटाप जैसी महंगी गिफ्ट दी गईं.तीन सालों से कोरोना कार्यकाल में आन लाईन परिचय सम्मेलन होने के बावजूद टैंट, भोजन, परिवहन और ठहरने के नाम पर रकम निकाल ली गई थी। समिति के धन से रियल इस्टेट का कारोबार शुरु कर दिया गया था और पैसा मार्केट में फंसा दिखाकर गड़प लिया गया.अब तक लगभग 60 लाख रुपए उड़ाए गए हैँ.25लाख का तो हिसाब प्रारंभिक जांच मेँ पकड़ा गया है.इन्हीं सब ग़ड़बड़ियों को देखते हुए समिति ने नए पंजीकरण के साथ युवाओं को कम कीमत में ज्यादा सुविधाएं दिलाने का फैसला लिया है। इस सम्मेलन में शामिल होने के बाद जैन समाज के लोग खुद समझ जाएंगे कि यदि नियत साफ हो तो किस तरह समाज को ऊंचाईयों पर ले जाया जा सकता है।
उधर टोंग्या जी वाली समिति के इंजीनियर विनोद जैन का कहना है कि व्यय की जानकारी समिति के सदस्यों को दी गई थी लेकिन कुछ लोग उससे सहमत नहीं थे। उन्होंने अलग परिचय सम्मेलन शुरु कर लिया है।
भोपाल 06 नवंबर(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)। चंद्रमा या उसके ग्रहण का मन पर असर पूरे व्यक्तित्व को झिंझोड़कर रख देता है। कुंडली के अध्ययन से हर व्यक्ति के लिए अलग लोकव्यवहार और जीवनचर्या निर्धारित की जा सकती है। इससे सामाजिक उन्नति की राह भी प्रशस्त की जा सकती है। देश को ऐसे ज्योतिषियों की जरूरत है जो मनोविज्ञानी भी हों। वे लोगों का मार्गदर्शन करें ताकि समाज में सुख शांति और समृद्धि की स्थापना की जा सके। ये विचार रविवार को भोपाल के केन्द्रीय संस्कृत संस्थान में आयोजित राष्ट्रीय ज्योतिष सम्मेलन एवं सम्मान समारोह में प्रख्यात ज्योतिषी सुश्री हेमलता तिवारी ने व्यक्त किए। ये आयोजन ज्योतिष विचार मंच भोपाल की ओर से आयोजित किया गया था। इस अवसर पर देश भर से आए कई विद्वान ज्योतिषियों को सम्मानित भी किया गया। मानसिक रोगों पर चंद्रमा के असर का विश्लेषण करते हुए डॉ.हेमलता तिवारी ने कहा कि हमारे आसपास के लोगों के प्रति हमारा व्यवहार कुंडली में चंद्रमा की स्थितियों के अनुरूप निर्धारित होता है। यदि जातक का जन्म चंद्रमा की जिस स्थिति में हुआ है उसका व्यवहार उसी के मुताबिक होता है। हमारी मनोदशा से ही हमारे लोकव्यवहार निर्धारित होते हैं और यही भाग्य को संवारते भी हैं और बिगाड़ते भी हैं। समाज को बड़ी संख्या में ऐसे मनोविज्ञानी चाहिए जो ज्योतिष का मर्म समझते हों। जातक की कुंडली के अध्ययन से उसकी कई बीमारियों का निदान भी चुटकियों में किया जा सकता है। प्रोफेसर हंसराज ने कहा कि सूर्य की प्रतिनिधि आत्मा, और मन का प्रतिनिधि चंद्रमा लग्न के प्रतिनिधि शरीर के साथ मिलकर जीवन की दशा और दिशा तय करते हैं। आत्मा और मन राजा की तरह जीवन के आरोह अवरोह बनाते हैं। जो ग्रह हमारे जीवन पर असर डालते हैं हम केवल उन्हीं का अध्ययन कर पाते हैं। जैसे सूर्य और चंद्रमा का असर तो भौतिक जीवन पर स्पष्ट देखा जाता है लेकिन नवग्रहों और 27 नक्षत्रों के अध्ययन से कई समस्याओं का समाधान किया जाता है। ज्योतिष कर्म करने वाले साधक यदि अर्थलोलुपता के दुष्प्रभाव से बचे रहें तो इस विधा की शान दिन ब दिन बढ़ती जाएगी।
इस अवसर पर प्रमुख संरक्षक एमएस श्रीवास्तव ने चिकित्सा ज्योतिष के विभिन्न आयामों के आधार पर बताया कि देश के कई राज्यों में गंभीर बीमारियों का इलाज ज्योतिषीय मार्गदर्शन में किया जा रहा है। मंच के प्रमुख केसी कलानिधि ने कहा कि ज्योतिष शास्त्र में ऐसे लोगों की जरूरत नहीं है जो लोगों को ठगते रहते हैं। उन्होंने कहा कि कालसर्प दोष या तो होता है या नहीं होता लेकिन वह कभी आंशिक नहीं होता। जबकि कई ज्योतिषी भ्रांतियां फैलाकर लोगों को ठगने का काम करते रहते हैं। कार्यक्रम में न्यूसी समैया, राजेश सोनी, श्वेता विजयवर्गीय, पं.सुदर्शन लव पांडेय.समेत कई विद्वानों ने ज्योतिषीय घटनाओं पर प्रकाश डाला।
प्रधानमंत्री ने “श्री महाकाल लोक’’ के लोकार्पण के बाद जन समारोह को किया सम्बोधित
उज्जैन 11 अक्टूबर (प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा है कि भारत के सांस्कृतिक वैभव की पुर्नस्थापना का लाभ न केवल भारत को अपितु पूरे विश्व एवं समूची मानवता को मिलेगा। उज्जैन में ‘श्री महाकाल लोक’ की स्थापना इसी की कड़ी है। यह काल के कपाल पर कालातीत अस्तित्व का शिलालेख है। उज्जैन आज भारत की सांस्कृतिक अमरता की घोषणा और नये कालखण्ड का उद्घोष कर रहा है। हमारे लिये धर्म का अर्थ कर्त्तव्यों का सामूहिक संकल्प, विश्व का कल्याण एवं मानव मात्र की सेवा है। हमने आजादी के पहले जो खोया था, उसकी आज पुनर्स्थापना हो रही है। प्रधानमंत्री श्री मोदी आज उज्जैन में ‘श्री महाकाल लोक’ के लोकार्पण के बाद जन समारोह को सम्बोधित कर रहे थे। प्रधानमंत्री श्री मोदी ने कहा कि ‘श्री महाकाल लोक’ दिव्य है। यहाँ सब कुछ अलौकिक, अविस्मरणीय एवं अविश्वसनीय है। महाकाल की आराधना अन्त से अनन्त की यात्रा है, आनन्द की यात्रा है, इससे काल की रेखाएँ भी मिट जाती हैं। महाकाल लोक आने वाली कई पीढ़ियों को अलौकिक दिव्यता और सांस्कृतिक ऊर्जा की चेतना प्रदान करेगा। इस अदभुत कार्य के लिये मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान, उनकी सरकार और मन्दिर समिति का मैं हृदय से अभिनन्दन करता हूँ, जिन्होंने निरन्तर पूरे समर्पण से सेवा-यज्ञ किया है। प्रधानमंत्री श्री मोदी ने कहा कि भगवान महाकाल की नगरी उज्जैन वह नगरी है, जो प्रलय के प्रहार से भी मुक्त है। “प्रलयो न बाध्यते, तत् महाकाल पूज्यते”। उज्जैन न केवल काल गणना एवं ज्योतिषिय गणना का केन्द्र है, अपितु यह भारत की आत्मा का केन्द्र भी है। यह पवित्र सात पुरियों में एक है। यहाँ भगवान श्रीकृष्ण ने शिक्षा ग्रहण की। विक्रमादित्य के प्रताप से भारत के स्वर्णकाल की शुरूआत हुई। विक्रम संवत महाकाल की भूमि से ही शुरू हुआ। प्रधानमंत्री श्री मोदी ने कहा कि उज्जैन के क्षण-क्षण में इतिहास, कण-कण में आध्यात्म और कोने-कोने में ईश्वरीय ऊर्जा है। यहाँ कालचक्र के चौरासी कल्पों के प्रतीक चौरासी महादेव, चार महावीर, छह विनायक, आठ भैरव, अष्टमातृका, नौ ग्रह, दस विष्णु, ग्यारह रूद्र, बारह आदित्य, चौबीस देवियाँ एवं 88 तीर्थ हैं। इन सबके केन्द्र में कालाधिराज महाराज विराजमान हैं। पूरे ब्रह्माण्ड की ऊर्जा को ऋषियों ने प्रतीक रूप में समाहित किया। उज्जैन ने एक हजार वर्षों तक भारत की सभ्यता, संस्कृति, ज्ञान, गरिमा, साहित्य, कला का नेतृत्व किया। कालिदास एवं बाणभट्ट की रचनाओं में यहाँ की सभ्यता, संस्कृति, शिल्प और वैभव का वर्णन मिलता है। प्रधानमंत्री श्री मोदी ने कहा कि किसी राष्ट्र का सांस्कृतिक वैभव, उसकी पहचान उसकी सफलता की सबसे बड़ी निशानी है। भारत में हमारे धार्मिक एवं सांस्कृतिक केन्द्र का निरन्तर विकास किया जा रहा है। उज्जैन सहित सोमनाथ, केदारनाथ, बद्रीनाथ आदि केन्द्रों का समुचित विकास किया जा रहा है। चारधाम प्रोजेक्ट में ऑल वेदर रोड बनाये जा रहे हैं। हमने स्वदेश दर्शन एवं प्रसाद योजनाएँ चलाई हैं। हमारे धार्मिक एवं आध्यात्मिक केन्द्रों का गौरव पुनर्स्थापित हो रहा है। महाकाल लोक आज अतीत के गौरव के साथ भविष्य के स्वागत के लिये तैयार हो चुका है। प्रधानमंत्री श्री मोदी ने कहा कि हमारे प्राचीन मन्दिरों की दिव्यता, भव्यता, वास्तु और कला हमें आश्चर्यचकित करती है। कोणार्क का सूर्य मन्दिर, एलोरा का कैलाश मन्दिर, मोढेरा का सूर्य मन्दिर, तंजौर का ब्रह्मदेवेश्वर मन्दिर, कांचीपुरम का तिरूमल मन्दिर, रामेश्वरम मन्दिर, मीनाक्षी मन्दिर और श्रीनगर का शंकराचार्य मन्दिर बेजोड़ है। हमारे मन्दिरों का आध्यात्मिक सन्देश आज भी स्पष्ट रूप से सुनाई देता है। पीढ़ियाँ इसे देखती हैं, सुनती हैं। ये हमारी निरन्तरता और परम्परा के वाहक हैं। प्रधानमंत्री श्री मोदी ने कहा कि महाकाल लोक में हमारी सांस्कृतिक परम्परा को कला एवं शिल्प के रूप में उकेरा गया है। यहाँ शिव पुराण की कथाओं पर आधारित कलाकृतियाँ बनाई गई हैं। उन्होंने देशवासियों से अपील की कि वे यहाँ अवश्य आयें। यहाँ भगवान शिव के दर्शन के साथ ही उनकी महिमा और महत्व के दर्शन भी होंगे। यहाँ निर्मित पंचमुखी शिव, डमरू, अर्धचंद्र, सप्तऋषि मण्डल अद्वितीय हैं। शिव ही ज्ञान है। शिव दर्शन ब्रह्माण्ड दर्शन है। ज्योतिर्लिंगों का विकास भारत की आध्यात्मिक ज्योति ज्ञान एवं दर्शन का विकास है। भारत आज विश्व के मार्गदर्शन के लिये फिर तैयार है। प्रधानमंत्री श्री मोदी ने कहा कि श्री महाकालेश्वर में की जाने वाली भस्म आरती अवसान से पुनर्जीवन और अन्त से अनन्त की यात्रा का प्रतीक है। जहाँ महाकाल हैं, वहाँ विष भी कुंदन होता है। यह भारत की जीवटता और अपराजेय अस्तित्व की प्रतीक है। भारत सदियों से अजर-अमर है। हमारी सभ्यता, परम्परा, आत्मा-जागृत है। श्री महाकालेश्वर विश्व में एकमात्र दक्षिणमुखी ज्योतिर्लिंग है। मन्दिर हमारी आस्था के प्रमाणित केन्द्र हैं। इनके माध्यम से भारत पुनर्जीवित हो रहा है। प्रधानमंत्री श्री मोदी ने कहा कि भारत में हजारों वर्षों से कुंभ मेले की परम्परा है। हर बारह वर्ष में हम अमृत मंथन करते हैं और उसमें निकलने वाले अमृत पथ पर चलते हैं। पिछले कुंभ मेले में मैं उज्जैन आया था। उस समय मेरे मन में श्री महाकाल लोक सम्बन्धी संकल्प आया, जिसे आज संकल्प के रूप में मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने चरितार्थ किया है, मैं उन्हें धन्यवाद देता हूँ। आज प्राचीन मूल्यों पर नया भारत खड़ा हो रहा है। हमारी विज्ञान और शोध की परम्पराएँ जीवित हैं। खगोल विद्या के क्षेत्र में चंद्र यान, गगन यान मिशन महत्वपूर्ण सफलताएँ हैं। रक्षा के क्षेत्र में हम आत्म-निर्भर हैं। हमारे युवा स्किल, स्पोर्ट्स, स्टार्टअप्स के क्षेत्र में विश्व में भारत का डंका बजा रहे हैं। मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि भारत में ही सभ्यता के सूर्य का उदय हुआ। हमारी संस्कृति वसुधैव कुटुंबकम् एवं सर्वे भवन्तु सुखिन: भी है। हमारा सन्देश विश्व कल्याण का है। भारत के इसी सन्देश को स्वामी विवेकानन्द ने सारी दुनिया को दिया। एक नरेन्द्र ने जो किया दूसरा नरेन्द्र आज उसे पूरा कर रहा है। हमारा योग, उपनिषद, गीता-ज्ञान, आयुष वे दुनिया में लेकर गये। आज श्री नरेन्द्र मोदी गौरवशाली, वैभवशाली, शक्तिशाली भारत का निर्माण कर रहे हैं। श्री चौहान ने कहा कि 2016 के सिंहस्थ में विचार महाकुंभ भी हुआ था, जिसमें प्रधानमंत्री श्री मोदी आये थे। विचार महाकुंभ में 51 अमृत बिन्दु निकले, जिनमें से एक श्री महाकाल लोक की स्थापना का कार्य भी था। प्रधानमंत्री श्री मोदी की प्रेरणा से इस कार्य की शुरूआत की गई। वर्ष 2018 में केबिनेट ने इसे स्वीकृति दी, वर्ष 2019-20 में यह कार्य मंद हो गया, लेकिन वर्ष 2020 के बाद तेजी से हुआ। आज इसका लोकार्पण हो रहा है। भगवान शिव सबका कल्याण करने वाले हैं, थोड़ी-सी पूजा से वे प्रसन्न हो जाते हैं, जिसे दुनिया ठुकराती है, उसे अपनाते हैं। उन्होंने पूरी दुनिया को अमृत दिया और स्वयं जहर पिया। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि आज भौतिकता से दग्ध मानवता को शाश्वत शान्ति का अदभुत दर्शन प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भारत करायेगा। हम सभी भारत के नवनिर्माण में अपना सर्वश्रेष्ठ दें। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने उपस्थित सभी को विश्व एवं प्राणीमात्र के कल्याण का संकल्प दिलाया। प्रारम्भ में प्रधानमंत्री श्री मोदी को राज्यपाल श्री मंगुभाई पटेल एवं मुख्यमंत्री श्री चौहान ने नन्दी द्वार की प्रतिकृति भेंट की। श्री मोदी का मुख्यमंत्री श्री चौहान ने रूद्राक्ष की माला, अंग वस्त्र एवं पगड़ी पहना कर स्वागत किया। प्रसिद्ध भजन गायक श्री कैलाश खेर ने सुमधुर शिव-स्तुति प्रस्तुत की। समूचा वातावरण शिवभक्ति से ओत-प्रोत हो गया। उल्लेखनीय है कि श्री महाकाल लोक के लोकार्पण अवसर पर महाकाल मन्दिर सहित पूरे प्रदेश के प्रमुख मन्दिरों एवं देवस्थलों पर रोशनी की गई और स्थानीय लोगों ने स्क्रीन पर लोकार्पण समारेाह को देखा। मन्दिरों में भजन-कीर्तन सहित शिव आरती भी हुई। मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान के प्रयासों से न केवल मध्य प्रदेश के 52 जिले, बल्कि पूरे भारत सहित 40 से अधिक देश इस अदभुत समारोह के साक्षी बने। चारों ओर शिव महिमा की गूँज सुनाई दी। सभी लोग श्री महाकाल लोक के लोकार्पण से आनन्दित और भक्तिमय हो गये। धार्मिक और आध्यात्मिक रूप में विकसित किये गये श्री महाकाल लोक को देख कर भारत सहित अन्य देश के लोग भी मंत्रमुग्ध हो उठे। बनारस कॉरिडोर की तर्ज पर बने इस लोक के आकर्षण से कोई भी अछूता नहीं रहा। प्रधानमंत्री श्री मोदी ने भी श्री महाकाल लोक को देख कर मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान के प्रयासों पर प्रसन्नता जाहिर की। लोकार्पण समारोह में छत्तीसगढ़ की राज्यपाल सुश्री अनुसुइया उइके, झारखंड के राज्यपाल रमेश बैस, केन्द्रीय कृषि एवं कल्याण मंत्री नरेन्द्र सिंह तोमर, नागरिक उड्डयन एवं इस्पात मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया, केन्द्रीय सामाजिक न्याय एवं अध्यिाकारिता मंत्री वीरेंद्र कुमार खटीक, इस्पात राज्य मंत्री फग्गन सिंह कुलस्ते, केन्द्रीय जलशक्ति एवं खाद्य प्र-संस्करण उद्योग राज्य मंत्री प्रहलाद पटेल सहित मध्य प्रदेश के मंत्रीगण एवं बड़ी संख्या में साधु-सन्त, श्रद्धालु और नागरिक उपस्थित थे।
पर्यूषण यानि दसलक्षण पर्व का जैनधर्म में बहुत ही महत्व है। यह पर्व हमारे जीवन को परिवर्तित करने का कारण बन सकता है। यह ऐसा पर्व है जो हमारी आत्मा की कालिमा को धोने का काम करता है। दिगम्बर एवं श्वेतांबर जैन दोनों में यह पर्व भारी श्रद्धा के साथ मनाया जाता है।वास्तव में ये वह अभ्यास पाठशाला है जिसमें हम अपने विचारों को आधुनिक जीवन के साथ अपडेट और मूल जीवनचर्या के साथ रीसेट कर सकते हैं।
दिगम्बर, श्वेताम्बर दोनों सम्प्रदाय इसे एक समान तौर पर स्वीकार करते हैं और पूरी वैचारिकता के साथ मनाते हैं।विशेष यह है कि श्वेताम्बर समाज भाद्रपद कृष्णा त्रयोदशी से भाद्रपद शुक्ला पंचमी तक सिर्फ 8 दिन का मनाते हैं। जबकि दिगम्बर समाज में 10 दिन का प्रचलन है। यह एक मात्र आत्मशुद्धि और आत्म जागरण का पर्व है।इस वर्ष यह महापर्व श्वेतांबर परंपरा में 24 से 31 अगस्त एवं दिगम्बर जैन परंपरा में 31 अगस्त से 9 सितम्बर 2022 तक विधि विधान, त्याग-तपस्या, साधना के साथ मनाया जा रहा है।
आत्मा के दस मूलभूत गुणों की आराधना : इस पर्व में आत्मा के दस मूलभूत गुणों की आराधना की जाती है। इनका सीधा सम्बंध आत्मा के कोमल परिणामों से है। इस पर्व का वैशिष्ट्य है कि इसका सम्बन्ध किसी व्यक्ति विशेष से न होकर आत्मा के गुणों से है। इन गुणों में से एक गुण की भी परिपूर्णता हो जाय तो मोक्ष तत्व की उपलब्धि होने में किंचित् भी संदेह नहीं रह जाता है। जैन धर्म में अहिंसा एवं आत्मा की शुद्धि को सबसे महत्वपूर्ण स्थान दिया जाता है। प्रत्येक समय हमारे द्वारा किये गये अच्छे या बुरे कार्यों से कर्म बंध होता है, जिनका फल हमें अवश्य भोगना पड़ता है। शुभ कर्म जीवन व आत्मा को उच्च स्थान तक ले जाता है, वही अशुभ कर्मों से हमारी आत्मा मलिन होती जाती है।इसलिए जीवन को सार्थक बनाने में ये सभी दस गुण बहुत कारगर साबित होते हैं।
दस दिन तक प्रत्येक दिन एक एक धर्म की आराधना : पर्युषण पर्व के दौरान विभिन्न धार्मिक क्रियाओं से आत्मशुद्धि की जाती व मोक्षमार्ग को प्रशस्त करने का प्रयास किया जाता है, ताकि जनम-मरण के चक्र से मुक्ति पायी जा सके। जब तक अशुभ कर्मों का बंधन नहीं छुटेगा, तब तक आत्मा के सच्चे स्वरूप को हम नहीं पा सकते हैं।
इस पर्व के दौरान दस धर्मों- उत्तम क्षमा, उत्तम मार्दव, उत्तम आर्जव, उत्तम शौच, उत्तम सत्य, उत्तम संयम, उत्तम तप, उत्तम त्याग, उत्तम आकिंचन एवं उत्तम ब्रह्मचर्य को धारण किया जाता है। समाज के सभी पुरूष, महिलाएं एवं बच्चे पर्युषण पर्व को पूर्ण निष्ठा के साथ मनाते है। यह पर्व जीवन में नया परिवर्तन लाता है। दस दिवसीय यह पावन पर्व पापों और कषायों को रग -रग से विसर्जन करने का संदेश देता है।
आत्म जागरण का संदेश : संपूर्ण संसार में यही एक ऐसा उत्सव या पर्व है जिसमें आत्मरत होकर व्यक्ति आत्मार्थी बनता है व अलौकिक, आध्यात्मिक आनंद के शिखर पर आरोहण करता हुआ मोक्षगामी होने का सद्प्रयास करता है। पर्युषण आत्म जागरण का संदेश देता है और हमारी सोई हुई आत्मा को जगाता है। इस जाग्रत अवस्था से हमें आत्मा को पहचानने की शक्ति देता है।
यह पर्व जीवमात्र को क्रोध, मान,माया,लोभ, ईर्ष्या, द्वेष, असंयम आदि विकारी भावों से मुक्त होने की प्रेरणा देता है। हमारे विकार या खोटे भाव ही हमारे दु:ख का कारण हैं और ये भाव वाह्य पदार्थों या व्यक्तियों के संसर्ग के निमित्त से उत्पन्न होते हैं। आसक्ति—रहित आत्मावलोकन करने वाला प्राणी ही इनसे बच पाता है। इस पर्व में इसी आत्म दर्शन की साधना की जाती है। यह एक ऐसा अभिनव पर्व है कि जिसमें अपने ही भीतर छिपे सद्गुणों को विकसित करने का पुरुषार्थ किया जाता है। अपने व्यक्तित्व को समुन्नत बनाने का यह पर्व एक सर्वोत्तम माध्यम है।
इस दौरान व्यक्ति की संपूर्ण शक्तियां जग जाती हैं। पर्युषण का अर्थ है – ‘ परि ‘ यानी चारों ओर से , ‘ उषण ‘ यानी धर्म की आराधना। वर्ष भर के सांसारिक क्रिया – कलापों के कारण उसमें जो दोष चिपक गया है , उसे दूर करने का प्रयास इस दौरान किया जाता है। शरीर के पोषण में तो हम पूरा वर्ष व्यतीत कर देते हैं। पर पर्व के इन दिनों में आत्म के पोषण के लिए व्रत, नियम, त्याग, संयम को अपनाया जाता है।
विकृति का विनाश और विशुद्धि का विकास : सांसारिक मोह-माया से दूर मंदिरों में भगवान की पूजा-अर्चना, अभिषेक, आरती, जाप एवं गुरूओं के समागम में अधिक से अधिक समय को व्यतीत किया जाता है एवं अपनी इंद्रियों को वश में कर विजय प्राप्त करने का प्रयास करते हैं। दसलक्षण धर्म (पर्यूषण पर्व) के फल के बारे में आचार्य कार्तिकेय स्वामी ने लिखा है-
यह धर्म के दशभेद पाप कर्म को नाश करने वाले और पुण्य का प्रार्दुभाव करने वाले हैं। इसे इस रूप में भी कहा जा सकता है कि यह धर्म पुण्य के पालक और पाप के प्रक्षालक हैें।
इस पर्व में सभी अपने को अधिक से अधिक शुद्ध एवं पवित्र करने का प्रयास करते है। प्रेम, क्षमा और सच्ची मैत्री के व्यवहार का संकल्प लिया जाता है। खान-पान की शुद्धि एवं आचार-व्यवहार की शालीनता को जीवनशैली का अभिन्न अंग बनाये रखने के लिये मन को मजबूत किया जाता है। विकृति का विनाश और विशुद्धि का विकास करना ही इस पर्व का ध्येय है। पर्व पापों और कषायों को रग -रग से विसर्जन करने का संदेश देता है।