सौरभ शर्मा से जब्त गोल्ड और भूपेन्द्र सिंह का जहरीली शराब कांड से क्या रिश्ता

भोपाल, 21 सितंबर(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)। सागर के बंडा-शाहगढ़ इलाके में जहरीली और नकली शराब से हुई मौतों ने मध्यप्रदेश में अवैध शराब के कारोबार और उसके पीछे काम करने वाले पूरे तंत्र को कठघरे में खड़ा कर दिया है। शुरुआती तौर पर मामला कुछ गांवों में बिक रही जहरीली शराब का लगा था, लेकिन पुलिस की जांच आगे बढ़ने के साथ इसकी कड़ियां अंतरराज्यीय शराब तस्करी, स्पिरिट की आपूर्ति, नकली बोतल-लेबल और लाइसेंसी शराब दुकान तक पहुंच गईं। 19 सितंबर तक पुलिस ने 52 लोगों को आरोपी बनाया और 37 गिरफ्तारियां होने की जानकारी सामने आई। मौतों की संख्या 30 से अधिक बताई गई है, हालांकि सरकारी रिकॉर्ड और स्थानीय आंकड़ों में अंतर है।

जहरीली शराब कांड उजागर होने के बाद राजनीतिक हलकों में तरह तरह के कयास लगाए जाने लगे हैं। भोपाल में सौरभ शर्मा से जब्त 52 किलोग्राम सोना (गोल्ड) और लगभग 10 से 11 करोड़ रुपये नकद बरामद होने के मामले को इस शराब कांड से जोड़कर देखा जा रहा है। राजनीति के गलियारों में चर्चा है कि भूपेन्द्र सिंह और खाद्य मंत्री गोविंद राजपूत के बीच पारंपरिक अदावट शराब कांड के रूप में सामने आई है।

पुलिस की पूछताछ में सामने आई कहानी इस मामले को और गंभीर बनाती है। जांच के अनुसार बरेठी शराब दुकान से जुड़े लाइसेंसी मनीष लोधी का संपर्क उत्तर प्रदेश के शराब तस्कर रवि लखेरा से था। आरोप है कि इसी नेटवर्क ने नकली शराब बनाने की तकनीक और कच्चा माल उपलब्ध कराया। चंदू राजपूत के मक्के के खेत में स्पिरिट, खाली बोतल, नकली रैपर और पैकिंग सामग्री के सहारे करीब 50 पेटी नकली शराब तैयार किए जाने की जानकारी जांच में सामने आई। शराब को ‘सागर गोल्ड’ जैसे असली ब्रांड की शक्ल में बाजार तक पहुंचाया गया। पुलिस ने अलग-अलग स्थानों से शराब के साथ खाली क्वार्टर, ढक्कन, लेबल, पैकिंग सामग्री और शराब बनाने के उपकरण भी जब्त किए। रवि लखेरा के खिलाफ करीब 25 और मनीष लोधी के खिलाफ 11 आपराधिक मामले दर्ज होने की जानकारी पुलिस रिकॉर्ड के हवाले से सामने आई है।

मामले की एक महत्वपूर्ण कड़ी आबकारी आयुक्त दीपक सक्सेना का वो बयान है,जिसमें  उन्होंने बताया कि जब्त शराब का स्टॉक बरेठी के एक शराब ठेकेदार से खरीदा गया था। संबंधित खेप की जांच कर यह पता लगाने के निर्देश दिए गए कि वह कहां-कहां पहुंची और बाजार से उसे वापस मंगाने को कहा गया। इससे यह सवाल भी सामने आया कि यदि किसी लाइसेंसी दुकान से खरीदी गई शराब नकली नेटवर्क तक पहुंच रही थी तो निगरानी व्यवस्था कहां विफल हुई।

घटना के बाद आबकारी विभाग की भूमिका पर सरकार ने तत्काल कार्रवाई की। सहायक आबकारी आयुक्त कीर्ति दुबे, सहायक जिला आबकारी अधिकारी दिलीप खंडाते और बंडा की आबकारी उप निरीक्षक रोशनी उरेती को निलंबित किया गया, जबकि उपायुक्त एवं संभागीय उड़नदस्ता प्रभारी नीरजा श्रीवास्तव को ग्वालियर मुख्यालय अटैच किया गया। बाद में सागर में लंबे समय से पदस्थ सहायक जिला आबकारी अधिकारी मंजूषा सोनी को भी उनकी वर्तमान जिम्मेदारी से हटाया गया। घटना के बाद आबकारी आयुक्त ने प्रदेशभर में अवैध और जहरीली शराब के खिलाफ सर्चिंग तेज करने के निर्देश दिए। ग्वालियर में कार्रवाई के दौरान करीब 2300 लीटर एथेनॉल भी बरामद किया गया।

पुलिस स्तर पर बंडा थाना प्रभारी राजेंद्र सिंह कुशवाहा और चौकी प्रभारी को निलंबित किया गया। प्रभावित क्षेत्र की छह शराब दुकानें सील कर उनके नमूने जांच के लिए भेजे गए। पुलिस कार्रवाई के साथ यह भी जांच शुरू हुई कि अवैध शराब की सूचना पहले से किस-किस स्तर पर थी और उसके बावजूद कार्रवाई क्यों नहीं हुई। गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ में नेटवर्क के दूसरे लोगों की भूमिका खोजी जा रही है। फरार प्रमुख आरोपियों की गिरफ्तारी पर इनाम घोषित किया गया है।

स्वास्थ्य विभाग की भूमिका इस मामले में उपचार और बीमारी की पहचान तक सीमित दिखाई दी, लेकिन शुरुआती व्यवस्था की गति पर सवाल भी उठे। बड़ी संख्या में मरीजों को बंडा और सागर के अस्पतालों में भर्ती कराया गया। गंभीर मरीजों को बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज भेजा गया और कुछ को बेहतर उपचार के लिए बाहर भेजने की व्यवस्था की गई। उप मुख्यमंत्री और स्वास्थ्य मंत्री राजेंद्र शुक्ल ने बीएमसी पहुंचकर मरीजों का हाल जाना और 24 घंटे विशेषज्ञ डॉक्टरों तथा जरूरी दवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। प्रभावित गांवों में स्वास्थ्य दल भेजे गए। जहरीली शराब से आंखों पर पड़े प्रभाव की जांच के लिए बाद में स्वास्थ्य शिविर भी लगाए गए।

सरकार ने मामले को केवल विभागीय कार्रवाई तक नहीं रखा। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने न्यायिक जांच के आदेश दिए और सेवानिवृत्त हाईकोर्ट न्यायाधीश विष्णु प्रताप सिंह चौहान की अध्यक्षता में आयोग गठित किया गया। सागर संभाग में प्रशासनिक और पुलिस स्तर पर भी बदलाव किए गए। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को नीचे से ऊपर तक जिम्मेदारी की जांच करने और लापरवाही मिलने पर कार्रवाई के निर्देश दिए।

राजनीतिक संरक्षण का आरोप इस मामले का सबसे संवेदनशील हिस्सा है। विपक्ष ने आरोप लगाया है कि शराब कारोबार को राजनीतिक और प्रशासनिक संरक्षण के बिना इतने बड़े स्तर पर चलाना संभव नहीं था।अभी तक उपलब्ध रिपोर्टों में पूर्व मंत्री भूपेंद्र सिंह के खिलाफ सागर के इस जहरीली शराब कांड में संरक्षण देने का कोई पुलिस या न्यायिक निष्कर्ष सामने नहीं आया है।

भूपेंद्र सिंह का नाम इसलिए चर्चा में आया क्योंकि अगस्त 2025 में उनके सगे भतीजे रुद्र प्रताप सिंह के बामोरा स्थित फार्म हाउस से करीब 11.79 लाख रुपये की अवैध शराब बरामद हुई थी। आबकारी अधिनियम के तहत मामला दर्ज होने के बाद भूपेंद्र सिंह ने अपने अधिवक्ता के माध्यम से सार्वजनिक सूचना जारी कर कहा था कि उनके निकट परिवार के बाहर के रिश्तेदारों के कारोबार से उनका कोई संबंध नहीं है। हालांकि उनके इस वक्तव्य का असर बूमरेंग की तरह उलटा हुआ और जनता के बीच भूपेन्द्र सिंह संदेह की नजर से देखे जाने लगे।

अब सागर शराब कांड के बाद विपक्ष इसी पुराने घटनाक्रम को जोड़कर सवाल उठा रहा है कि प्रभावशाली लोगों से जुड़े शराब कारोबार पर प्रशासन की निगरानी कितनी प्रभावी रही। असली सवाल न्यायिक जांच के सामने यह है कि क्या स्थानीय शराब कारोबारियों, लाइसेंसी दुकानों, तस्करों और अधिकारियों के बीच ऐसा कोई संरक्षण तंत्र था जिसने अवैध कारोबार को लंबे समय तक चलने दिया।

सागर कांड की सबसे बड़ी अंतर्कथा यही है कि खेत में नकली शराब बनाने वाले कुछ लोगों की गिरफ्तारी से मामला खत्म नहीं होगा। यदि स्पिरिट दिल्ली से, बोतलें और पैकिंग सामग्री दूसरे शहरों से और तस्करी दूसरे राज्यों से जुड़ी थी तो स्थानीय स्तर पर इसकी निगरानी करने वाले तंत्र को इसकी भनक क्यों नहीं लगी। आबकारी आयुक्त की ओर से संबंधित खेप को वापस मंगाने का निर्देश और बाद में सामने आया बड़ा नेटवर्क बताता है कि जांच को केवल जहरीली शराब बनाने वालों तक सीमित रखने के बजाय सप्लाई चेन और उसकी निगरानी करने वालों तक ले जाना होगा। न्यायिक जांच अब यह तय करेगी कि मौतों के लिए केवल शराब बनाने और बेचने वाले जिम्मेदार थे या प्रशासनिक लापरवाही की भी कोई प्रमाणित भूमिका थी।

Comments

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *