यौन आरोपी प्रकाश चंद्र गुप्ता की साजिश बेनकाब, पीड़िता को न्याय के लिए समन जारी

भोपाल, 22 सितंबर (प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)। बूटकॉम सिस्टम्स के प्रोप्राईटर प्रकाश चंद्र गुप्ता के खिलाफ नाबालिग से कथित यौन छेड़छाड़ के पॉक्सो प्रकरण में सुनवाई आगे बढ़ाने का रास्ता साफ हो गया है। विशेष पॉक्सो न्यायालय ने आरोपी की ओर से दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 91 और भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 94 के तहत प्रस्तुत आवेदन खारिज कर अभियोजन साक्ष्य के लिए समन जारी किए हैं। अदालत के इस आदेश से करीब चार साल पुराने मामले में पीड़िता के बयान दर्ज होने की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।

इस मामले में नाबालिग पीड़िता ने अपने परिवार के साथ जाकर गुप्ता के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई थी। मार्च 2024 से मामले में पीड़िता के बयान दर्ज नहीं हो पाए हैं। आरोपी के वकील हरीश मेहता की ओर से यह तर्क दिया जाता रहा कि प्रकरण के मूल दस्तावेज पुलिस के पास हैं और उनके उपलब्ध होने के बाद ही आगे की कार्रवाई होनी चाहिए। अदालत ने इस आधार को स्वीकार नहीं किया।

गुप्ता की ओर से यह भी दावा किया गया था कि पीड़िता के परिवार के साथ आर्थिक लेनदेन हुआ था और इसी विवाद के कारण उसके खिलाफ शिकायत की गई।इसमें उसने पीड़िता के पिता के फर्जी हस्ताक्षरों वाला एक दस्तावेज प्रस्तुत किया था। अदालत ने स्पष्ट किया कि किसी आपराधिक मामले की विवेचना और विचारण को किसी अलग सिविल विवाद के आधार पर रोका नहीं जा सकता। आर्थिक लेनदेन का विवाद है तो उसके लिए अलग कानूनी प्रक्रिया अपनाई जा सकती है।

प्रेस इंफार्मेशन सेंटर की उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार  गुप्ता के खिलाफ इससे पहले भी आर्थिक धोखाधड़ी से जुड़े मामले सामने आ चुके हैं। भोपाल के एक चर्चित व्यापारी परिवार को झांसा देकर गुप्ता ने लगभग चार करोड़ रुपयों की ठगी की थी जिसमें उसे जेल भेजा गया था। वर्ष 2024 में केनरा बैंक की कोहेफिजा शाखा से जुड़े एक अन्य मामले में 2.21 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी के आरोप में गुप्ता को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया था। वर्ष 2006-07 के पंजाब नेशनल बैंक से जुड़े 32 लाख रुपये के पुराने मामले का भी उल्लेख उपलब्ध रिपोर्टों में है।

हालांकि इन पुराने मामलों में लगाए गए आरोपों और वर्तमान पॉक्सो प्रकरण का अंतिम निर्णय संबंधित अदालतों द्वारा ही किया जाना है। वर्तमान मामले में अदालत का ताजा आदेश फिलहाल इतना स्पष्ट करता है कि दस्तावेजों और दूसरे विवादों के आधार पर कार्यवाही को लंबा खींचने की कोशिश स्वीकार नहीं की जाएंगी और अब अभियोजन साक्ष्य की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।   ये मामला लैंगिक अपराधों से बालकों का संरक्षण अधिनियम 2012 के विशेष न्यायाधीश की कोर्ट में विचारण के लिए चल रहा है। आरोपी का प्रयास है कि बालिका के बयान अदालत के समक्ष दर्ज न हो पाएं इसके लिए वह तरह तरह के आरोप लगाकर अदालत को गुमराह कर रहा है।

दरअसल आदतन अपराधी  प्रकाश चंद्र गुप्ता हुंडी का धंधा दिखाकर हवाला का कारोबार करता है। दुनिया की आंखों में धूल झोंकने के लिए यह भोपाल के एमपीनगर में बूटकाम सिस्टम नाम से कंप्यूटर की दूकान चलाता है। कंप्यूटर व्यवसाय में ठगी से लेकर इसके विरुद्ध ज्यादा ब्याज दिलाने का वादा करके रकम हड़पने के कई मामले एमपीनगर पुलिस थाने में और अन्य जगहों व शहरों में लंबित हैं। पुलिस के पास गुप्ता का पिछले 25 सालों का रिकार्ड है जिसमें उसने आम नागरिकों के अलावा कई प्रतिष्ठित लोगों से अरबों रुपयों की ठगी और धोखाधड़ी की है। उसके विरुद्ध महिलाओं के विरुद्ध किए गए अपराधों की भी लंबी फेरहिस्त है।

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