दिग्विजय सिंह की दिग्भ्रमित सरकार को 2003 में घाटी पर उतारकर उमाश्री भारती ने जिस भारतीय जनता पार्टी की सरकार को सत्ता दिलाई थी वह सत्ता में आते ही आत्मनिर्भर मध्यप्रदेश के फार्मूले पर काम करने लगी। वैश्विक सूदखोरों की लॉबी ने उमाजी के पंच ज अभियान को सत्ता से धकेलकर जिस कर्ज आधारित विकास की अर्थव्यवस्था को सत्तासीन कराया वह बीस सालों तक छायी रही । बिजली ,सड़क और पानी की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए वैश्विक संस्थाओं ने राज्य को भरपूर कर्ज मुहैया कराया। शिवराज जी को इस दौर के लिए सत्ता में भेजा गया था तो उन्होंने आधारभूत ढांचे का धन जनता के बीच बांटकर खूब वाहवाही बटोरी। आज शिवराज सिंह चौहान जनता के बीच बड़ा ब्रांड बन चुके हैं लेकिन अब राज्य उस अंधी गली में पहुंच गया है कि उसे विकास के नए प्रतिमान तलाशने पड़ रहे हैं। नए मुख्यमंत्री डॉक्टर मोहन यादव के सामने चुनौती है कि वे विकास के उत्पादक मॉडल को जमीन पर उतारें और राज्य की समस्याओं का उचित समाधान तलाशें । ऐसे में पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती ने रतलाम शहर के विधायक और डॉ.मोहन यादव केबिनेट के मंत्री चेतन काश्यप के माध्यम से जो संदेश दिया है वह गौर करने लायक है।
रतलाम शहर के विधायक चेतन काश्यप अपनी दानशीलता और जमीनी विकास को महत्व देने के लिए मॉडल बन चुके हैं। उनके बेटे कारोबार करते हैं जबकि चेतन काश्यप राजनीति की रीढ़ बने हुए हैं। उन्होंने जिन प्रकल्पों को साकार किया है वे आत्मनिर्भर समाज के लिए मार्गदर्शक बन गए हैं। उन्होंने सौ लोगों को ऐसे आवास बनवाकर दिए हैं जो आत्मिर्भरता की राह पर चलकर समृद्ध हो रहे हैं। प्रधानमंत्री आवास योजना के अंतर्गत उन्होंने रोजगार को जोड़कर सुखमय संसार की गारंटी सुनिश्चित की है। उनके विशाल आवास की भोजनशाला कार्यकर्ताओं और जरूरतमंदों को समाजसेवा का मंच देती है। पूरे नगर और आसपास के गांवों में चेतन काश्यप को लक्ष्मी पुत्र माना जाता है। लोग जानते हैं कि भाई जी यदि खड़े हैं तो वहां सुशासन खुद ब खुद हाथ बांधे खड़ा हो जाएगा। यही वजह है कि वे चुनाव में गली गली की धूल नहीं फांकते। जनता स्वयं उनके लिए चुनाव लड़ती है।ऐसे आदर्श लोक सेवक यदि हर विधानसभा को मिलने लगें तो एक पंचवर्षीय योजना में राज्य की काया ही पलट जाए।
कांग्रेस जिस भाजपा को सेठों और बनियों की पार्टी कहकर उपहास उड़ाती थी उस भाजपा ने उन्हें पार्टी का कोषाध्यक्ष बनाया। राज्य की अर्थव्यवस्था में किस ढांचे की जरूरत है वे अच्छी तरह जानते हैं। पिछले दो दशकों में भाजपा ढांचागत विकास पर कार्य कर रही थी तब चेतन काश्यप की भूमिका का उपयोग किया जा सकता था लेकिन शिवराज जी और उनके बटोरनाथ मंत्री अपने काम में किसी प्रकार का खलल नहीं चाहते थे। यही वजह है कि उन्होंने चेतन काश्यप की प्रतिभा का इस्तेमाल करने पर कोई गौर नहीं किया। चेतन काश्यप रतलाम में जो गोल्ड सोक (सोने का बाजार)बनवा रहे हैं। वह जब आकार ले लेगा तो रतलाम देश की प्रमुख सोने की मंडी बन जाएगा। यहां बनने वाले गोल्ड के आभूषण दुबई की तरह देश और विदेश के लिए आकर्षण का केन्द्र बन जाएंगे। सोने के कारोबार को इससे पहले इतनी कुशलता से दुनिया में कहीं नहीं खड़ा किया गया है।ऐसे ढेरों विचार काश्यप की झोली में हर वक्त मौजूद रहते हैं।
खुद चेतन काश्यप बताते हैं कि जैन साध्वी ने उन्हें प्रेरणा दी थी कि वे अपने हुनर और भाग्य की सौगात समाज के पिछड़े और दलित लोगों को मुख्यधारा में लाने के दें। तबसे काश्यप का लक्ष्य बन गया है कि वे विकास की दौड़ में पिछड़ चुके नागरिकों का जीवन संवारने में जुट गए हैं। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने जब मध्यप्रदेश में अपने चुनाव प्रचार अभियान की शुरुआत की तो उन्होंने रतलाम शहर को ही चुना। पहली चुनावी सभा में उनके साथ चेतन काश्यप और मंदसौर के सांसद सुधीर गुप्ता भी मौजूद थे। सुधीर गुप्ता संसद में लोक लेखा समिति, वित्त समिति, रसायन व उर्वरक समितिके अलावा लोकसभा आवास समिति की जवाबदारी भी संभालते हैं। वे प्रधानमंत्री के उन प्रमुख सहयोगियों में शामिल हैं जो भाजपा की विकास की अवधारणा की आधारशिला हैं।
चेतन काश्यप को मंत्री बनाकर डॉक्टर मोहन यादव सरकार ने जता दिया है कि मध्यप्रदेश अब भाजपा की उस सुविचारित विकास नीतियों पर अमल करने जा रहा है जो देश को न केवल पांच ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बना देंगे बल्कि इस लक्ष्य से भी कई गुना आगे निकल जाएंगे। ऐसे में पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती ने चेतन काश्यप को सलाह देकर विकास के इस मॉडल के प्रति अपनी सहमति जताई है।
उमा भारती अपने भाषणों में कहती रहीं हैं कि वे दलितों और पिछड़ों को विकसित तभी मानेंगी जब वे खुद शहरों के प्रमुख बाजारों में अपने प्रतिष्ठान खड़े करके देश की अर्थव्यवस्था में योगदान देने लगें। समाज में वैमनस्य फैलाती कांग्रेस और बहुजन समाज पार्टी जैसे दलों के लिए भाजपा ने जो प्रतिमान खड़े किए हैं वे हतप्रभ कर देने लायक हैं। पचहत्तर सालों के बाद मध्यप्रदेश की सरकारी नौकरियों में मात्र चार लाख दलितों और पिछड़ों को रोजगार मिल सके हैं जबकि भारतीय जनता पार्टी ने अकेले लाड़ली बहना योजना से चालीस लाख दलितों के घर में आय का दीपक जला दिया है। अन्य योजनाओं का आंकड़ा देखा जाए तो पिछड़ों और दलितों की राजनीति करने वाले तमाम राजनीतिक दल अवाक रह जाएंगे। विकास का वामपंथी मॉडल जिन श्रमिकों की बात करता है भाजपा ने उन्हें समाज की उत्पादकता में हिस्सेदार बनाकर सारे रिकार्ड तोड़ दिए हैं। सत्ता संभालते ही मुख्यमंत्री डॉक्टर मोहन यादव ने हुकुमचंद मिल और ग्वालियर की विनोद मिल के परिसमापन की जो पहल की वह भाजपा के श्रमिकों के प्रति समर्पण की आहट है।
नई सरकार राज्य में पूंजी उत्पादन का जो मॉडल खड़ा करना चाह रही है उसकी झलक अभी से मिल गई है। उमा भारती ने चेतन काश्यप के बहाने एक बड़ी बहस को जन्म दिया है। वे कह रहीं हैं कि चेतन काश्यप को वेतन लेना चाहिए और अपने कर कमलों से उसे समाज की बेहतरी के लिए खर्च करना चाहिए। उनके सेवा कार्य तभी भाजपा के समर्पण के प्रकाश स्तंभ बन पाएंगे। आने वाले समय में राज्य एक बड़ी बहस में शामिल होने जा रहा है जिसमें एक ओर राज्य को कर्जदार बनाकर वाहवाही लूटने वाली लॉबी खड़ी होगी वहीं दूसरी ओर वित्तीय संसाधनों का विकास करके देश को बुलंदी पर पहुंचाने वाले स्वयंसेवक खड़े होंगे। तब विकास की अवधारणा का अंतर साफ समझा जा सकेगा।
Month: December 2023
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उमाजी की अर्थनीति के असली हीरो चेतन काश्यप
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शिवराज सिंह का झांसा साबित हुई किसान मित्र योजना
भोपाल,26 दिसंबर(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)। चुनावी वैतरणी पार करने के लिए पूर्ववर्ती मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने आनन फानन में जो घोषणाएं की थीं उनकी असलियत अब सामने आने लगी है। राज्य के ऊर्जा विभाग ने शासन से दो टूक कह दिया है कि विभाग के पास बिजली और कोयला खरीदने का बजट समाप्त हो गया है। बिजली पर दी जा रही छूट की वजह से हालत ये हो गई है कि कई इलाकों में सौ रुपयों की लागत में से मात्र सत्रह पैसे ही प्राप्त हो रहे हैं। ऐसे में किसान मित्र योजना जैसी घोषणाओं को पूरा करना संभव नहीं है।
मुख्यमंत्री डॉक्टर मोहन यादव ने पदभार ग्रहण करते ही शासन के आला अधिकारियों को निर्देश दिए थे कि उन्हें राज्य की वित्तीय स्थिति से अवगत कराया जाए। पिछली सरकार की घोषणाओं को पूरा करने की जवाबदारी भी नई सरकार की है। ऐसे में अफसरों ने वाहवाही के लिए शुरु की गई योजनाओं की सच्चाई नए मुख्यमंत्री के सामने रख दी है। बिजली,सड़क और पानी की गारंटी देने वाली भाजपा सरकार असलियत जानकर असमंजस में पड़ गई है।
मुख्यमंत्री को बताया गया है कि पूर्ववर्ती सरकार ने ऊर्जा विभाग के मुनाफे में से ही इस योजना को चालू करने का प्रावधान किया था। योजना में शर्त डाली गई थी कि ट्रांसफार्मर, खंभे और वायर आदि तमाम सामान किसानों को बिजली कंपनियों से ही खरीदना पड़ेगा। जिसकी कीमतें पहले से ही बाजार भाव से ज्यादा तय कीं गईं थी।जाहिर है ऐसे में पचास फीसदी छूट तो महज कागजी थी। इसके बावजूद विभाग के पास योजना पूरी करने लायक धनराशि भी नहीं है।
सितंबर माह में जबसे इस योजना की घोषणा की गई थी तबसे किसानों ने उत्साह में भरकर कनेक्शन के लिए औपचारिकताएं पूरी कीं थीं। नए ट्रांसफार्मर के लिए जल स्रोत और भूमि का रिकार्ड सत्यापित करवाया जाना था। किसानों को कृषि विभाग से जलस्रोत सत्यापित करवाना था और पटवारी से भूमि का नक्शा भी प्रमाणित करवाना था।किसानों ने भारी मशक्कतके बाद फार्म में दी गई शर्तों के आधार पर दस्तावेज जमा करवाए थे।बिजली कंपनी ने किसान को पंजीयन क्रमांक जारी करके कहा था कि जब हमारी ओर से मूल्य आकलन करवाया जाएगा तब आपको डिमांड के अनुसार धनराशि जमा करवाना पड़ेगी।
इस योजना को दो सालों में पूरा किया जाना था। पहले साल दस हजार ट्रांसफार्मर रखे जाने थे। इस बीच सरकार चुनाव में चली गई और योजना पर अमल रोक दिया गया। अब जबकि भाजपा की ही नई सरकार सत्ता में आ गई है तब उसे योजना पर अमल शुरु करने में खासी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। बिजली कंपनी के सामने तो अभी सबसे बड़ा संकट बिजली खरीदने और बिजली उत्पादन के लिए कोयला खरीदने का है।कोयला कंपनियों ने अपनी उधारी वसूलने के लिए तकादा करना शुरु कर दिया है।
इस संबंध में जब ब्यावरा विधायक और राज्य मंत्री स्वतंत्र प्रभार नारायण पंवार से पूछा गया तो उन्होंने कहा कि सरकार की कोई योजना बंद नहीं की गई है। विभागों का आबंटन होने के बाद संबंधित मंत्रीगण जनता से किएगए वायदों पर अमल सुनिश्चित करेंगे। उन्होंने कहा कि शिवराज सिंह सरकार ने किसान मित्र योजना के लिए बजट शुरु किया था या नहीं इसकी उन्हें जानकारी नहीं है। यदि विभाग के अफसरों को कोई परेशानी महसूस हो रही है तो उनकी सरकार आवश्यक कदम उठाएगी।
गौरतलब है कि पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने अपनी वित्तीय क्षमताओं से भी ज्यादा कर्ज लेकर जिन योजनाओं की घोषणा की थीं वे अब नई सरकार के लिए जी का जंजाल बन गईं हैं। देखना है कि बदले हालात में नई सरकार योजनाओं के लिए धन कहां से और कैसे लाती है। मुख्यमंत्री डॉ.मोहन यादव को सिंहस्थ में कुशल वित्तीय प्रबंधन के लिए भरपूर प्रशंसा मिली थी लेकिन तब सरकार धड़ाधड़ कर्ज लेकर धन मुहैया करा रही थी पर अब कर्ज की सीमा निर्धारित दायरे को पार कर गई है ऐसे में नई सरकार ज्यादा कर्ज नहीं ले पाएगी और उसे योजनाओं के लिए धन की वसूली तेज करनी होगी। -

जनादेश की बेहतर डिलीवरी के लिए शिवराज की विदाई उचित फैसला
-आलोक सिंघई-
भारतीय जनता पार्टी की डॉक्टर मोहन यादव सरकार ने अभी तक अपना मंत्रिमंडल घोषित नहीं किया है। चुनाव नतीजों के इक्कीस दिन बीत चुके हैं लेकिन आगामी लोकसभा चुनावों को देखते हुए भाजपा कोई चूक नहीं करना चाह रही है। शिवराज की सत्ता के नजदीक रहकर उपकृत होता रहा एक बड़ा धड़ा ये कह रहा है कि शिवराज जी जैसे राजनेता को कमतर आंकना उचित नहीं है। वे एक आलराऊंडर खिलाड़ी थे उन्हें जबरन पेवेलियन में भेज दिया गया है। कांग्रेस के गुंडों की तरह शिवराज और उनके गुंडे बन चुके मंत्रियों ने भाजपा संगठन को आंखें दिखाना शुरु भी कर दी हैं। जबकि भाजपा का राष्ट्रीय संगठन जिस कार्पोरेट संस्कृति का अनुसरण कर रहा है उसमें चेहरे से ज्यादा अंकों का महत्व है । जिसने सेवा कार्य में ज्यादा अंक जीते हैं उसे कमान थमाई जा रही है। यही फार्मूला अपनाकर तीनों राज्यों में नए नेतृत्व को अवसर दिया गया है। कांग्रेस संस्कृति की घिसी पिटी परिवारवादी अवधारणा को छोड़कर ही भाजपा आज कार्यकर्ताओं की आशा का दल बनकर उभरी है। मध्यप्रदेश में तो कार्यकर्ताओं की एक बड़ी जमात बरसों से सत्ता की बाट जोह रही है ऐसे में शिवराज की विदाई हो या मंत्रियों की संभावित विदाई उसे देखने की दृष्टि बदलने का समय आ गया है।
दरअसल जब हम मानना शुरु कर देते हैं जो जानने की वैज्ञानिक दृष्टि लुप्त प्राय हो जाती है। महाभारत युद्ध में श्रीकृष्ण के कहने पर अर्जुन ने हनुमानजी का आवाहन कर उनको रथ के ऊपर पताका के साथ विराजित किया। अर्जुन का रथ श्रीकृष्ण चला रहे थे और शेषनाग ने पृथ्वी के नीचे से अर्जुन के रथ के पहियों को पकड़ा था, जिससे रथ पीछे न जाए। इतना सब कुछ अर्जुन के रथ की रक्षा के लिए भगवान ने व्यवस्था की थी।
महाभारत युद्ध समाप्ति के बाद अर्जुन ने भगवान से कहा पहले आप उतरिए मैं बाद में उतरता हूं, इस पर भगवान बोले नहीं अर्जुन पहले तुम उतरो। भगवान के आदेशनुसार अर्जुन रथ से उतर गए, थोड़ी देर बाद श्रीकृष्ण भी रथ से उतर गए, तभी शेषनाग पाताल लोक चले गए। हनुमानजी भी तुरंत अंतर्ध्यान हो गए। रथ से उतरते ही श्रीकृष्ण अर्जुन को कुछ दूर ले गए। इतने में ही अर्जुन का रथ तेज अग्नि की लपटों से धूं-धूं कर जलने लगा। अर्जुन बड़े हैरान हुए और श्रीकृष्ण से पूछा, भगवान ये क्या हुआ!
कृष्ण बोले- ‘हे अर्जुन- ये रथ तो भीष्मपितामह, द्रोणाचार्य और कर्ण के दिव्यास्त्रों के वार से बहुत पहले ही जल गया था, क्योंकि पताका लिए हनुमानजी और मैं स्वयं रथ पर बैठा था, इसलिए यह रथ मेरे संकल्प से चल रहा था। अब जब कि तुम्हारा काम पूरा हो चुका है, तब मैंने उसे छोड़ दिया, इसलिए अब ये रथ भस्म हो गया।’
व्यक्ति को लगता है कि उसके प्रभाव, बल, बुद्धि से सब हो रहा है, लेकिन जीवन में ऐसा बहुत कुछ होता है जो प्रभु कृपा या गुरु कृपा से हो रहा है, पर हमारा अहंकार कृपा को मानने को तैयार नहीं होता, जिस कारण अहंकार बढ़ता जाता है।ऐसा ही कुछ शिवराज सिंह चौहान और उनके समर्थकों के साथ हो रहा है। शिवराज जी के नेतृत्व में तो भाजपा सरकार पिछला चुनाव हार चुकी थी। खुद शिवराज जी सार्वजनिक तौर पर बोल चुके थे कि मैं मुक्त हुआ। ये अलग बात है कि किसी नए ब्रांड की तैयारी न होने की वजह से कांग्रेस की सरकार गिरने के बाद शिवराज जी को जवाबदारी सौंपी गई थी। ये शिवराज जी भी अच्छी तरह जानते थे कि उनके नेतृत्व में चुनाव लड़ा जरूर जा रहा है लेकिन उन्हें सत्ता की बागडोर पार्टी के सुपुर्द करनी है। यही वजह है कि वे प्रदेश के कर्ज लिए धन से चलाई जा रहीं योजनाओं का श्रेय बटोरने का प्रयास करने लगे थे उन्हें लगता था कि जनता में उनकी लोकप्रियता को देखकर भाजपा हाईकमान हमेशा की तरह एक बार फिर लाचार हो जाएगा और मजबूर होकर उन्हें ही एक बार फिर प्रदेश की बागडोर सौंप देगा।
यथार्थ तो ये है कि शिवराज की सत्ता काफी पहले ही विदा हो चुकी थी। वे तो सत्ता माफिया और चमचों की फौज के सहारे जैसे तैसे अपना काम चला रहे थे। शिवराज का कार्यकाल राज्य के इतिहास में मजबूरी का काल कहा जाएगा। जिस तरह से सत्ता पर शिव राज की ताजपोशी हुई और जिस तरह उन्होंने अपना एकछत्र साम्राज्य स्थापित करने के लिए पार्टी के स्वाभाविक नेतृत्व की नर्सरी को मटियामेट किया उससे पार्टी के भीतर बड़ा आक्रोश फैला चुका था।चुनाव जीतने की मजबूरी के चलते कार्यकर्ताओं ने चुप्पी साध रखी थी। भाजपा संगठन के सख्त तेवरों और उमा भारती की राजनीतिक दुर्दशा को देखकर कोई भी नया क्षत्रप खड़ा नहीं हो सका था। खुद मोहन यादव भी सत्ता सिंहासन के लिए अपनी जमात नहीं खड़ी कर पाए। आज भी उन्हें मालूम है कि यदि उन्होंने किसी लाबी का सहारा लेकर अपनी मनमानी की तो पार्टी के भीतर मजबूत हो चुके कई कार्यकर्ता उन्हें बर्दाश्त नहीं करेंगे। यही वजह है कि उन्हें अपना मंत्रिमंडल घोषित करने में देरी हो रही है। भाजपा हाईकमान ने राज्यों की सत्ता में मनमानी रोकने के लिए क्षेत्रीय स्तर पर प्रशासनिक अफसरों और पुलिस अफसरों की सत्ता का विकेन्द्रीकरण किया है। यही कुछ वह अपने मंत्रिमंडल में भी करने जा रही है। शिवराज और उनके मंत्रियों को सत्ता के मार्गदर्शन का अवसर जरूर मिलेगा। इससे ज्यादा की उम्मीद वे न रखें तो अच्छा होगा क्योंकि अब प्रदेश को सख्त सर्जरी की जरूरत भी है। -

Post Office Savings Account: न्यूनतम बैलेंस सिर्फ 500 रुपए,अमाऊंट कम रहेगा तो कटेंगे सिर्फ पचास रुपए
भोपाल 22 दिसंबर(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)। जबसे मोदी सरकार ने बैंक खाते खुलवाने की मुहिम चलाई है तबसे लोग बैंक में सेविंग्स अकाउंट खुलवाना पसंद करते हैं। छोटे वित्तीय लेनदेन करने वालों के लिए बैंक खाते कई बार मंहगा सौदा साबित होते हैं। पोस्ट ऑफिस में सेविंग अकाउंट खुलवाने के अपने अलग फायदे हैं. आईए जानते हैं कि पोस्ट ऑफिस सेविंग्स अकाउंट किस तरह उपयोगी साबित हो रहा है। ट्रांजैक्शन के अलावा कई तरह की स्कीम्स के फायदे भी सेविंग्स अकाउंट के जरिए ही मिलते हैं. सेविंग्स अकाउंट किसी भी बैंक या पोस्ट ऑफिस में खुलवा सकते हैं. आमतौर पर लोग बैंक में सेविंग्स अकाउंट खुलवाना पसंद करते हैं, लेकिन पोस्ट ऑफिस में सेविंग अकाउंट खुलवाने के अपने अलग फायदे हैं. पहला फायदा तो ये है कि इसमें आपको बहुत ज्यादा मिनिमम बैलेंस मेंटेन नहीं करना पड़ता. सिर्फ 500 रुपए का बैलेंस बनाए रखना भी काफी है. आइए आपको बताते हैं पोस्ट ऑफिस के सेविंग अकाउंट पर मिलने वाले तमाम फायदों के बारे में.
खाता खुलवाना बहुत सरल
कोई भी वयस्क व्यक्ति पोस्ट ऑफिस में खाता खुलवा सकता है. इसके अलावा दो लोग मिलकर भी अपना अकाउंट खुलवा सकते हैं. माइनर के लिए अकाउंट खुलवाना हो तो उसके माता-पिता या कानूनी अभिभावक उसकी ओर से अकाउंट खुलवा सकते हैं. वहीं 10 वर्ष से अधिक उम्र का नाबालिग अपने नाम से खाता खुलवा सकता है. नाबालिग को वयस्क होने के बाद अपने नाम में अकाउंट को ट्रांसफर करवाने के लिए संबंधित डाकघर में नया खाता खोलने का फॉर्म और अपने नाम के केवाईसी दस्तावेज जमा करने होते हैं.
कई सुविधाएं उपलब्ध
बैंक की तरह ही आपको पोस्ट ऑफिस सेविंग्स अकाउंट पर भी कई तरह की सुविधाएं मिलती हैं. अकाउंट खुलवाने पर आपको चेकबुक, एटीएम कार्ड, ईबैंकिंग/मोबाइल बैंकिंग, आधार लिंकिंग आदि की सुविधा मिलती है. इसके अलावा आप इस अकाउंट पर सरकार की ओर से चलाई जा रही अटल पेंशन योजना, प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना और प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना ,किसान सम्मान निधि, लाड़ली बहना योजना, का भी लाभ ले सकते हैं. इसमें आपको 4.0% प्रति वर्ष के हिसाब से ब्याज मिलता है.
कुछ सेवाओं पर लगेगा शुल्क
पोस्ट ऑफिस सेविंग्स अकाउंट में मिनिमम 500 रुपए होने जरूरी हैं. अमाउंट कम है और वित्तवर्ष खत्म होते-होते ये इस लिमिट से नीचे ही रहता है तो 50 रुपए मेंटेनेंस फीस काट लिया जाएगा.
डुप्लीकेट पासबुक जारी करवाने के लिए आपको 50 रुपए देने होते हैं.
अकाउंट स्टेटमेंट या डिपॉजिट रसीद जारी कराने के लिए 20-20 रुपए देने होते हैं.
सर्टिफिकेट खोने, खराब होने की दिशा में पासबुक जारी करवाने पर हर रजिस्ट्रेशन पर 10 रुपए देने होते हैं.
अकाउंट ट्रांसफर कराने पर और अकाउंट प्लेज कराने पर 100-100 रुपए लगते हैं.
नॉमिनी का नाम बदलवाने या कैंसल कराने के 50 रुपए लगते हैं.
चेक के दुरुपयोग पर आपको 100 रुपए चार्ज देना होता है.
एक साल में आप चेक बुक के 10 लीफ बिना किसी चार्ज के इस्तेमाल कर सकते हैं, और उसके बाद हर लीफ पर 2 रुपए का चार्ज लगता है. -

सत्ता माफिया से मुक्ति दिलाने एमपी आया जाणता राजा
कांग्रेस की अराजक सरकारों से मुक्ति के दो दशक बाद तक मध्यप्रदेश किताबी प्रयोगों से गुजरता रहा है। पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती ने जिस पंच ज अभियान की नींव रखी थी वह साकार हो पाती इसके पहले ही अंतर्राष्ट्रीय सूदखोरों के एजेंटों ने मध्यप्रदेश की सत्ता हथिया ली थी। बाबूलाल गौर हों या शिवराज सिंह चौहान और थोड़े समय के लिए आए कांग्रेस के कमलनाथ सभी कर्ज आधारित अर्थव्यवस्था के पक्षधर रहे हैं। यही वजह है कि सरकारों का आकलन करने में जनता को खासी परेशानी महसूस होती थी। भाजपाई उन्हें एक तरह से कांग्रेसी ही नजर आते थे। जाहिर है कि जब विकास की अवधारणा कर्ज लेकर घी पीने के सूत्रवाक्य पर टिकी हो तो राज्य की उत्पादकता बढ़ाने की ओर किसका ध्यान जाता।कर्ज लेना और फिर सत्ता के इर्द गिर्द जुटे माफिया के माध्यम से उसे हड़प लेना सरकार की शैली बन गई थी। पहली बार महाकाल ने एमपी में सुशासन के लिए अपने ऐसे भक्त को भेजा है जो सुशासन की पाठशाला में तपकर सामने आया है।
मुख्यमंत्री रहते हुए शिवराज सिंह चौहान ने किसानों का नाम जपना शुरु किया था। एमपी की कृषि ही एकमात्र ऐसा क्षेत्र है जो बगैर निवेश किए खासी उत्पादकता देता है। औद्योगिक विकास में तो भारी निवेश करने के बाद भी उत्पादकता की कोई गारंटी नहीं होती। फिर जब उद्योगों को जबरिया थोपा गया हो तब तो वे अपनी स्थापना के समय ही उपसंहार का अध्याय भी लिख देते हैं। ऐसे में प्रदेश को आत्मनिर्भरता की परंपरा की जरूरत लंबे समय से महसूस की जा रही थी। शिवराज सिंह चौहान के होनोलुलु शासन से हर कोई खफा था लेकिन कांग्रेस न आ जाए इस भय से सभी खामोश रहते थे। हवाई जहाजों में फुदककर गांव खेड़ों में जाना और मैं हूं न कहकर लोगों को हूल देना कोई शिवराज सिंह चौहान से सीख सकता है।अभी ये भ्रम फैलाया जा रहा है कि मामा के जाने से लाड़ली बहना योजना बंद कर दी जाएगी,जबकि ये तो शासन की योजना है। ये बात लाड़ली बहनों को थोड़े दिनों में जरूर समझ में आ जाएगी।
भाजपा के नेता रघुनंदन शर्मा ने तो शिवराज जी को घोषणावीर का तमगा देकर उनकी कार्यशैली पर सवालिया निशान लगा दिया था लेकिन अखिल भारतीय क्षत्रिय महासभा के समर्थन से उनकी नैया चलती रही। क्या भाजपा और क्या कांग्रेसी सभी उनके समर्थन में खामोश रहे। शिवराज सिंह चौहान विनम्र शासक रहे हैं और बीस सालों बाद भी उनमें अहंकार नहीं पनप पाया है इसी वजह से उनकी सारी नाकामियों पर पार्टी और संगठन दोनों परदा डालते रहे। खोखली ललकार के सहारे उन्होंने सत्ता चलाने की कोशिश जरूर की लेकिन वे शुरु से लेकर अंत तक नौकरशाही और पुलिस प्रशासन पर लगाम नहीं लगा सके।
भारतीय जनता पार्टी कार्यालय में जब विधायक दलकी बैठक हो रही थी तब पार्टी का संगठन और सरकार के नुमाइंदे सभी अपनी नाकामियों का सबूत पेश कर रहे थे। भारतीय जनता पार्टी संगठन ने कोई प्लान नहीं बनाया था कि जब नए नेता की घोषणा होगी तो किस तरह वो आने वाले नागरिकों, पदाधिकारियों या प्रेस को संबोधित करेंगे। बैठक समाप्त होते ही प्रेस के प्रतिनिधियों को जब फैसले की जानकारी मिली तो वे पार्टी कार्यालय में भीतर घुस गए। भारी धक्कामुक्की और अव्यवस्था के बीच जनता तक जानकारी पहुंचाने की कोई व्यवस्था नहीं थी।
नए नेता के चयन की सूचना जनता तक पहुंचाने के लिए प्रेस मीडिया को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा।
ऐसा लगता है कि ये अराजकता पार्टी के प्रदेश हाईकमान के निर्देश पर ही की गई थी। व्यवस्थित चुनाव प्रचार अभियान चलाने वाला भाजपा का संगठन फैसला सुनने के बाद ऐसा शून्य हो गया था कि उसने अव्यवस्था का लांछन नए नेता पर थोपने की तैयारी पहले से ही कर रखी थी। महिलाएं और युवा पत्रकार इसी धक्कामुक्की के बीच जनता को जानकारियां पहुंचा रहे थे। नाकाम पुलिस प्रशासन भी तैयार नहीं था। वह तय ही नहीं कर पाया कि किस तरह वह उत्साहित कार्यकर्ताओं के इस सैलाब का प्रबंधन कर पाएगा। माईक संभाले पुलिस के अधिकारी स्वयं अपनी अव्यवस्था के शिकार बने और भीड़ ने उन्हें धकेलकर गिरा दिया।
विदा होती सत्ता ने नए मुख्यमंत्री के चयन की सूचना के मार्ग में दरवाजा बंद करके कई बाधाएं खड़ी कर दीं थीं.
डॉ.मोहन यादव सख्त प्रशासक माने जाते हैं। वे स्वर्गीय वीरेन्द्र सखलेचा की तरह आदर्शवाद के तले दबने वाले व्यक्ति भी नहीं हैं। उन्हें अच्छी तरह मालूम है कि समाज और भीड़ का प्रबंधन कैसे करना होता है। उज्जैन में लगने वाले कुंभ की व्यवस्था संभालने का उन्हें लंबा अनुभव है। ऐसे में जनता को क्या सुविधाएं कब उपलब्ध करवाना है वे अच्छी तरह जानते हैं। किन पाखंडियों की सत्ता में घुसपैठ रोकना है वे ये भी अच्छी तरह समझते हैं।समर्पित भाव से जनसेवा करने का उनका लंबा इतिहास है। पार्टी को जाति या वर्ग के दायरे से बाहर निकलकर व्यवस्था संभालने में भी उनकी युक्तियां सदैव से चर्चित रहीं हैं।भारत सरकार की योजनाएं हों या फिर राज्य सरकार की उन्होंने अपने क्षेत्र के लोगों को मुहैया कराने में रिकार्ड स्थापित किया है। योजनाओं को जरूरतमंदों तक पहुंचाना और इनमें घोटाला करने वालों को उनकी हैसियत बताना उनका प्रिय शगल है। इसलिए अराजकता के दौर के आदी हो चुके मध्यप्रदेश के सत्ता माफिया को अब सावधान हो जाना चाहिए। सत्ता की आड़ में बजट की चोरी करने वालों का गिरोह भी अब सावधान हो जाए तो ही बेहतर होगा क्योंकि सत्ता के लुटेरों की खाल खींचने वाला जांबाज अब मैदान पर आ गया है। ऐसे ठग समझ लें कि उनका सामना अब तक शिवराज जी जैसे भलेमानस से पड़ा था। पहली बार उन्हें जाणता राजा मिला है। जो एमपी को नई ऊंचाईयों पर ले जाने के लिए कमर कसकर तैयार है।फिर मोदीजी का डबल इंजन तो पहले ही उनके साथ मौजूद है।
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कांग्रेस की विदाई में त्रिदेव ने निभाई बड़ी भू्मिका
कांग्रेस की विचारधारा और नीतियों को विदाई देकर तीन राज्यों में भाजपा की सरकार बनाकर देश के मतदाताओं ने स्पष्ट संदेश दिया है। भारतीय जनता पार्टी तो इस संदेश को बहुत हद तक समझ रही है लेकिन कांग्रेस के दिग्गज इसे लगातार नकारते दिख रहे हैं। कमलनाथ कांग्रेस के अधिकतर बुद्दिजीवी इसे ईवीएम की गड़बड़ी बताकर अपनी हार पर पर्दा डालने का असफल प्रयास कर रहे हैं। इस ऐतिहासिक हार से सबक लेना तो दूर वे जनता पर ही ओछी तोहमत लगा रहे हैं। कांग्रेसी और उनके पिछलग्गू भाजपाई इन चुनावी नतीजों को कमतर बताने के लिए इसे लाड़ली बहना की देन बता रहे हैं। नतीजों का इस तरह का सरलीकरण करके वे सत्ता की फिसलन भरी सीढ़ियों पर खुद को जमाए रखने का प्रयास ही कर रहे हैं।
भोपाल दक्षिण पश्चिम के नवनिर्वाचित विधायक और भाजपा के प्रदेश महामंत्री भगवान दास सबनानी बताते हैं कि जबसे चुनावी महासमर का मंथन शुरु हुआ था तभी से भारतीय जनता पार्टी संगठन ने अपनी भूमिका स्पष्ट रूप से तैयार कर ली थी। प्रदेश अध्यक्ष विष्णुदत्त शर्मा ने अमितशाह के दिए मंत्र के अनुसार बूथ अध्यक्ष,महामंत्री और बूथ लेवल एजेंट यानि बीएलए को मैदानी जवाबदारी सौंपी थी।इन्ही त्रिदेवों ने मतदाताओं को ई वी एम तक पहुंचा दिया।पन्ना प्रभारी, पन्ना समिति, और शक्ति केन्द्र टोली इसके साथ खड़ी थी। यही वजह है कि जिन चुनावी क्षेत्रों में षड़यंत्रों की इबारत लिखी गई वहां भी भाजपा का संगठन मजबूती से प्रत्याशी के समर्थन में खड़ा था।
यही वजह है कि भारतीय जनता पार्टी तमाम सर्वेक्षणों से आगे देखकर अपनी जीत पर आश्वस्त था। आज कांग्रेस को ये नतीजे भले ही अचंभित कर रहे हों लेकिन इसके पीछे भारतीय जनता पार्टी के संगठन की प्रतिबद्धता वह समझ ही नहीं पा रही है। इसकी वजह केवल यही कि कांग्रेस का संगठन तो नदारद था। कमलनाथ बयानबाजी को ही अपनी जीत का आधार मान रहे थे। कांग्रेस के प्रवक्ताओं को भी लगता था कि कमलनाथ कोई चमत्कार कर रहे हैं। लेकिन जब नतीजे सामने आए तो वे बौखला गए। जबसे इन पांच राज्यों की चुनावी बहसें शुरु हुईं थीं तबसे कम से कम मध्यप्रदेश में कहा जा रहा था कि जनता बदलाव चाहती है। राजस्थान में कहा जाता है कि वहां का मतदाता हर बार सत्ता बदल देता है।
मध्यप्रदेश में कहा जा रहा था कि जनता शिवराज सिंह चौहान के चेहरे से ऊब गई है इसलिए वह बदलाव चाहती है। जबकि हकीकत ये है कि जनता को ये नहीं मालूम था कि उसका खलनायक कौन है। मध्यप्रदेश में जनता की बैचेनी की वजह यहां की नौकरशाही रही है। कांग्रेस और फिर उसकी पूंछ पकड़कर चलने वाली शिवराज सिंह चौहान की भारतीय जनता पार्टी ने जिस दरियादिली से सरकारी नौकरियां बांटीं उससे प्रदेश की आय और व्यय में असंतुलन पैदा हो गया है। मध्यप्रदेश में दस लाख से अधिक परिवार ऐसे हैं जिनमें एक न एक सदस्य सरकारी नौकरी कर रहा है। सरकारी नौकरियों में भी वेतनमान इतने अधिक हो गये हैं कि उसकी तुलना में प्रदेश के उत्पादक कार्यों में लगे लगभग आठ करोड़ लोग नेपथ्य में चले गए थे। इन्हीं को भाजपा संगठन ने अपनी हितग्राही मूलक योजनाओं से अपना तारण हार बना लिया। कमलनाथ कांग्रेस ने अपनी हार होते देखकर चुनावी चर्चाओं के बीच वादा कर दिया था कि वह सत्ता में आकर पुरानी पेंशन लागू कर देगी। इसके बावजूद कांग्रेस की डेढ़ साल का अनुभव कर्मचारी भूले नहीं थे। उन्हें मालूम था कि सत्ता में आकर कांग्रेसी तबादले और पोस्टिंग के धंधे में मशगूल हो जाएंगे। यही वजह थी कि पुरानी पेंशन का फार्मूला भी फिसड्डी हो गया। सरकारी कर्मचारियों ने जो मिल रहा है वही स्वीकार करने का मन बना लिया। नतीजा सामने है सरकारी कर्मचारियों ने कोई बड़ा फेरबदल नहीं किया। हालांकि डाक मतपत्रों के नतीजों को देखकर लग रहा था कि कोई बड़ा फेरबदल होगा।
दरअसल में भारतीय जनता पार्टी ने जो हितग्राही मूलक योजनाएं चलाईं उनका लाभ लेने वाला इतना बड़ा वर्ग देश में तैयार हो गया है कि उसकी तुलना में जनधन की मलाई खाने वालों की भीड़ नगण्य रह गई है। भाजपा ने सत्ता का लाभ आम नागरिकों तक पहुंचाने के कई आयाम विकसित कर दिए हैं। चाहे लाड़ली बहना योजना हो, लाड़ली लक्ष्मी योजना हो, किसान सम्मान निधि हो, जलजीवन मिशन हो या फिर शौचालय निर्माण सभी ने देश के आम जनजीवन को प्रभावित किया है। यही वजह है कि कांग्रेस की फूट डालो राज करो की पूरी विचारधारा ही नेपथ्य में चली गई है।
कांग्रेस की नीतियां समाज के एक वर्ग को खलनायक बनाने और दूसरे वर्ग से उस पर पत्थर फिंकवाने की रही है। जिसे इस बार जनता ने साफ तौर पर नकार दिया है।पहली बार देश से कांग्रेस के सफाए की शुरुआत हुई है। इन चुनावी नतीजों ने कांग्रेस की पूंछ पकड़कर चल रही शिवराज भाजपा से आगे निकलकर एक राजमार्ग दिखा दिया है। आज की भारतीय जनता पार्टी के सामने कांग्रेस की नीतियों को बरकरार रखने की अनिवार्यता नहीं रही है। भाजपा अब अपनी सकारात्मक सोच को बेधड़क लागू कर सकती है।
पिछले दो दशकों में भाजपाईयों को नहीं मालूम था कि वे क्यों सत्ता में भेजे गए हैं। शिवराज सिंह चौहान ने भी केवल नौकरशाही के भरोसे रहकर सत्ता चलाई जिससे जनता को ये नहीं महसूस हुआ कि प्रदेश की राजनीति किस नई राह पर चल पड़ी है। इस बार जिस तरह नौकरशाही को जमीन दिखाई गई है वह अनोखी कवायद है। पहली बार सरकार नौकरशाही के चंगुल से बाहर निकली है। जाहिर है कि अब आने वाली मध्यप्रदेश की सरकार ब्लैकमेलिंग के जाल से बाहर निकल आई है। अब उसे न सरकारी तंत्र की ब्लैकमेलिंग के सामने मजबूर होकर खड़ा होना है न ही प्रेस के माध्यम से चलाई गई माफिया की मुहिम के सामने लाचार होना है। वह प्रदेश को विकास के राजपथ पर बेधड़क लेकर चल सकती है।
मुख्यमंत्री के चयन में हो रही देरी को देखकर लोगों को लगता है कि भाजपा किसी असमंजस में है।केन्द्र की भाजपा ने अमित शाह ने बच्चों के साथ शतरंज खेलते हुए दिखाकर बता दिया है कि वह शह और मात के खेल में नया अध्याय लिखने जा रही है। आगामी आम चुनावों में देश नतीजों पर अपना फैसला सुनाने वाला है और भाजपा लगातार अपनी सफलताओं के नतीजे जनता के सामने प्रस्तुत कर रही है। तीनों राज्यों में भाजपा ने न केवल अपनी सफलताओं की कहानी लिखी है बल्कि वह नतीजों का अहसास अपनी नीतियों से करवाने में भी सफल रही है। आज ठेठ गांव के निवासी हों या उद्योंगों से जुड़े मजदूर सभी को पता है कि किस तरह से भाजपा की सरकारें उनका जीवन बदलती जा रहीं हैं। ऐसे में कांग्रेस तो क्या किसी अन्य दल को भी अपना अस्तित्व बचाने का भरोसा नहीं रहा है। कांग्रेस के दिग्गजों को पता है कि कि वे पुरानी राजनीति की अपनी इबारत खो चुके हैं। भाजपा अब एक नई भाजपा बन रही है। भाजपा का ये नया संस्करण भाजपा को विस्थापित करके सत्ता में आने जा रहा है।ऐसे में कांग्रेस हो या सपा,या फिर आप पार्टी किसी की कोई गुंजाईश नहीं बची है। जाहिर है कि आम चुनावों की इबारत साफ है। भाजपा अब देश का चुनाव भी भारी बहुमत से जीतने जा रही है। तीन राज्यों की जीत ने बता दिया है कि जनता की राय में अब और भी तेज इजाफा होने जा रहा है।
भाजपा अब इन तीन राज्यों में सरकार का जो माडल पेश करने जा रही है वह परम्परावादी राजनीति के ऐसे अध्याय के रूप में सामने आ रहा है जो न किसी ने देखा न पढ़ा न सुना है। भारत अब न केवल विश्व गुरु बनने जा रहा है बल्कि वह पूरी दुनिया का अनूठा सेवक भी बनने जा रहा है। दुनिया की तमाम शक्तियों के बीच जो नया सूर्योदय होने जा रहा है उसके पक्ष में अब मध्यप्रदेश की जनता ने भी अपना फैसला सुना दिया है। भाजपा को इसी फैसले का इंतजार था और राष्ट्रवादियों ने भारतमाता के इसी श्रंगार का स्वप्न देखा था जो अब पूरा होने जा रहा है।संशय को बादल लगातार छंटते जा रहे हैं। राष्ट्रवादियों की कई पीढ़ियां इसी का इंतजार कर रहीं थीं। -

कम्युनिस्ट नेत्री साधना कार्णिक ने आरिफ नगर में चश्मे बांटे
भोपाल, 7 दिसंबर(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)। भोपाल गैस काण्ड की 40 वो बरसी के कार्यक्रमों श्रृंखला के अंतर्गत आज आरिफ नगर स्कूल में गैस पीड़ित बच्चो महिलाओं का स्वास्थ्य कैंप लगाया गया। इसमें गैस पीड़ितों की समस्याओं की आवाज उठाने वाली कम्युनिस्ट नेता और समाजसेवी साधना कार्णिक प्रधान ने आंखों के इलाज के लिए चिकित्सा शिविर का आयोजन किया और जरूरत मंदों को चश्मे भी वितरित किए।
भोपाल गैस पीड़ित संघर्ष सहयोग समिति की संयोजक साधना कर्णिक प्रधान ने बताया की भोपाल गैस काण्ड की 40 वीं बरसी के कार्यक्रमों के तहत पीड़ितो के परिवारों और उनके बच्चो के विभिन्न स्वास्थ्य , पुनर्वास , शिक्षा एवम जागरूकता कार्यक्रमों की शुरुआत की गई है। उसी श्रृंखला के तहत आज यूनियन कार्बाइड के पास जेपी नगर के सामने आरिफ नगर सरकारी स्कूल में गैस पीड़ित परिवारों के 300 बच्चो व 250 महिलाओं के आंखों की जांच कर उन्हे चश्मे प्रदान किए गए ।
उन्होंने बताया कि स्वास्थ्य कैंप में पहचान किए गए मोतियाबिंद के 20 मरीजों में से 10 मरीजों को ऑपरेशन के लिए गाड़ी से चिरायु अस्पताल भेजा गया । इसी के साथ कैंसर स्पेशलिस्ट डॉक्टर अलका चतुर्वेदी द्वारा गैस पीड़ित महिलाओं को कैंसर जागरूकता के संबंध में शिक्षाप्रद जानकारी भी प्रदान की गई । साधना कर्णिक ने बताया की स्वास्थ्य कैंप , जैन एकता मंच , सर्वोदय , चाइल्ड केयर काउंसिल के सहयोग से लगाया गया है।उन्होंने बताया कि गैस पीड़ितों की मदद के लिए इस तरह के आयोजन सालभर किए जाएंगे। -

आरएसएस से निष्कासित भाजपा नेता ने किया अतिक्रमण, एनजीटी ने मांगी राहत रिपोर्ट
एनजीटी ने दिया नागरिकों को राहत देने का निर्देश
भोपाल,06 दिसंबर(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)। भारतीय जनता पार्टी सरकार की आड़ में कतिपय असामाजिक तत्वों ने प्रशासन को कुछ इस तरह पंगु बना दिया है कि वह नागरिकों के प्रति अपने दायित्वों को ही भूल चला है। चुनावी प्रक्रियाओं के चलते अब तक खामोश रही प्रशासनिक मशीनरी ने प्रकाश नगर में कल दौरा किया और अवैध निर्माण के चलते चोक हुई सीवेज लाईनों को खोलने के निर्देश दिए हैं। एनजीटी के आदेश के अनुपालन में प्रशासन ने अवैध निर्माण गिराने की तैयारी भी की है। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि कि वे किसी राजनैतिक हस्तक्षेप को अब बर्दाश्त नहीं करेंगे और प्रशासन यदि अपना दायित्व नहीं निभाता है तो वे इस संबंध में वैकल्पिक तरीकों का भी इस्तेमाल करने से नहीं चूकेंगे।
मामला गोविंदपुरा विधानसभा क्षेत्र स्थित प्रकाश नगर का है।यहां अनैतिक आचरण के चलते राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से बर्खास्त किए गए एक असामाजिक तत्व ने सीवेट ट्रीटमेंट के प्लाट पर अवैध निर्माण खड़ा कर लिया है।नागरिकों के विरोध के बावजूद वह बेशर्मी से ढांचे का निर्माण करता जा रहा है। इस वजह से सीवेज ट्रीटमेंट के लिए छोड़े गए प्लाट की नालियां चोक हो गईं और कालोनी में पानी भर गया है।
नागरिकों ने इस समस्या के खिलाफ पुलिस व प्रशासन को भी शिकायत की लेकिन चुनावी प्रक्रियाओं में उलझी भाजपा सरकार और अधिकारियों ने नागरिकों की परेशानी पर गौर नहीं किया। उस चरित्रहीन असामाजिक तत्व जो खुद को नेता और पत्रकार बताता है ने अवैध निर्माण जारी रखा। अब ये हालत हो गई है कि परिसर की नालियां चोक हो गईं हैं और नागरिकों को खासी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। भाजपा सरकार की आड़ में पनप रही गंदगी का ये अनूठा उदाहरण है।
नागरिकों ने इस संबंध में जब एनजीटी की भोपाल बैंच को शिकायत की तो उसने प्रकरण क्रमांक ओए 139।2023 कृष्णारानी विरुद् मध्यप्रदेश शासन एवं अन्य के विरुद्ध 12 अक्टूबर 2023 को पारित आदेश के अनुपालन के निर्देश दिए हैं। एनजीटी के सदस्य सचिव आईएएस चंद्रमोहन ठाकुर ने नगर निगम कमिश्नर और भोपाल कलेक्टर को नागरिकों को राहत दिलाने के निर्देश दिए हैं। इस संबंध में एक कमेटी की भी स्थापना की गई है।इस आदेश के अनुपालन की रिपोर्ट 18 दिसंबर के पहले एनजीटी के समक्ष पेश की जानी है।
गौरतलब है कि अतिक्रमण के कारण प्रकाश नगर रहवासियों को जलभराव और मुसीबतों का सामना करना पड़ रहा है। वार्ड 70,गोविंदपुरा की प्रकाश नगर, बिजली कॉलोनी, #Bhopal जहां पर अधिकतर रिटायर्ड MPEB के अधिकारी, बुजुर्ग महिलाएं रहते हैं वहां पर एक #भाजपा नेता के द्वारा नाले पर अतिक्रमण कर लिया गया और निर्माण प्रारंभ कर दिया । उसने संलग्न भूमि जो सेप्टिक टैंक के लिए निर्धारित थी उस पर भी निर्माण शुरु कर दिया है ।जिसके कारण सारे सीवरेज चेंबर ओवरफ्लो हो गये टॉयलेट गंदगी फैल गई और कई पेड़ धराशाई हो गए ।पिछले 3 माह से की जा रही विभिन्न विभागों एवं नेताओं को की गई शिकायतों का कोई निराकरण नहीं हुआ । विधायक, क्षेत्रीय पार्षद यहां तक कि संभाग आयुक्त ,कलेक्टर और #प्रदूषण निवारण मंडल में भी इसकी शिकायत की गई कि ओपन में जल-मल-मूत्र बह रहा है और सेप्टिक टैंक का निर्माण नहीं हो रहा। कथित भाजपा नेता के निजी स्वार्थ के कारण प्रकाश नगर के बुजुर्ग, महिलाओं, पुरुषों को अत्यंत दुख तकलीफों का सामना करना पड़ रहा है। -

अपराध के आंकड़ों में पुलिस को मिली शाबासी
भोपाल, 04 दिसम्बर(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)। राष्ट्रीय अपराध अभिलेख ब्यूरो, नई दिल्ली ने देशभर के 2022 के अपराध के आंकड़े जारी किए हैं। जिनके अनुसार मध्य प्रदेश में पिछले वर्षों की तुलना में प्रदेश में हत्या, हत्या के प्रयास, लूट, गृहभेदन जैसे गंभीर अपराधों में उल्लेखनीय कमी आई है। वहीं कुल अपराध में 1.80 प्रतिशत की कमी आई है ।
वर्ष 2021 की तुलना में वर्ष 2022 में कुल भादवि अपराधों में 1.80 प्रतिशत की कमी
राष्ट्रीय अपराध अभिलेख द्वारा वर्ष 2022 के प्रकाशित आंकड़ों के अनुसार मप्र में वर्ष 2021 की तुलना में आईपीसी के अपराध घटे हैं। जहां वर्ष 2021 में प्रदेश में कुल 304066 अपराध घटित हुए थे, वहीं वर्ष 2022 में अपराध घटकर मात्र 298578 अपराध दर्ज किए गए। यानि वर्ष 2021 की तुलना में वर्ष 2022 में अपराधों में 1.80 प्रतिशत की कमी आई है। वर्ष 2021 की तुलना में वर्ष 2022 में जहां के मामलों में हत्या में 2.75 प्रतिशत की, हत्या के प्रयास में 3.19 प्रतिशत, डकैती में 20.24, लूट के मामलों में 5.41, गृह भेदन के मामलों में 2.46 और भारतीय दंड विधान के तहत आने वाले अन्य अपराधों में 1.42 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई हैं।
महिलाओं के प्रति अपराध वृद्धि दर घटकर एक तिहाई
मध्य प्रदेश में महिलाओं के प्रति होने वाले अपराधों की वृद्धि दर वर्ष 2020-21 में जहां 19.63 प्रतिशत थी, जो वर्ष 2021-22 में घटकर लगभग एक तिहाई यानी मात्र 6.82 प्रतिशत ही रह गई। वर्ष 2022 के प्रथम छ: माह में जहां 4160 दुष्कर्म के मामले सामने आए थे, वहीं 2023 में जनवरी से जून तक 17.07 प्रतिशत कमी के साथ 3450 मामले दर्ज किए गए हैं। इसी प्रकार पॉक्सो एक्ट (POCSO Act) के अंतर्गत घटित अपराधों में 1.22 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई है। मध्य प्रदेश पुलिस द्वारा महिलाओं को समय पर सहायता उपलब्ध करवाने और उन्हें सुरक्षा प्रदान करने के उद्देश्य से जहां सभी थानों में ऊर्जा महिला हेल्प डेस्क बनाई गई है, वहीं आशा, मुस्कान और अभिमन्यु जैसे विशेष अभियान भी संचालित किए जा रहे हैं।
अनुसूचित जाति के प्रति अपराध वृद्धि दर घटकर एक चाैथाई रही
अनुसूचित जाति के प्रति प्रदेश में हुए अपराधों की वृद्धि दर में उल्लेखनीय कमी दर्ज की गई। जहां 2019-20 में अनुसूचित जाति के प्रति अपराध वृद्धि दर 30 प्रतिशत थी, वहीं वर्ष 2021-22 में यह घटकर एक चौथाई यानी मात्र 7.19 प्रतिशत रह गई । इसी प्रकार वर्ष 2022 के प्रथम छ: माह से तुलना की जाए तो वर्ष 2023 में प्रथम छ: माह में प्रदेश में अनुसूचित जाति (एससी) के विरुद्ध होने वाले अपराधों में 5.29 प्रतिशत की कमी आई है। वर्ष 2022 के प्रथम प्रथम छ: माह में अनुसूचित जाति के विरुद्ध 2213 अपराध घटित हुए जबकि 2023 के प्रथम प्रथम छ: माह में 2096 अपराध घटित हुए हैं। मध्य प्रदेश में वर्ष 2022 में हॉट स्पॉट की संख्या 906 थी, जो वर्ष 2023 में 566 रह गई है। यानी इनमें 37 प्रतिशत की कमी आई है। इसी प्रकार हॉट स्पॉट क्षेत्रों में कुल घटित औसत मासिक अपराध वर्ष 2021 में 96 थे, जो वर्ष 2023 में घटकर 65 रह गए हैं, यानि इनमें 31 प्रतिशत की कमी आई है।
अनुसूचित जनजाति के प्रति अपराध वृद्धि दर 24 प्रतिशत से घटकर 13 प्रतिशत हुई
अनुसूचित जाति के विरुद्ध हुए अपराधों की वृद्धि दर के पिछले तीन वर्षों के आंकड़ों पर गौर करें तो निरंतर अपराधों में कमी दर्ज की गई। जहां वर्ष 2019-20 में अनुसूचित जाति के प्रति हुए अपराधों की वृद्धि दर 24 प्रतिशत थी, जो वर्ष 2021-22 में घटकर मात्र 13.40 प्रतिशत रह गई। इसी प्रकार वर्ष 2022 के प्रथम छ: माह से तुलना की जाए तो 2023 में अनुसूचित जनजाति (एसटी) के प्रति होने वाले अपराधों में 14.99 प्रतिशत की कमी आई है। वर्ष 2022 में अनुसूचित जनजाति के विरुद्ध घटित अपराधों की संख्या जहां 1094 थी, जबकि इस वर्ष प्रथम छ: माह में इन अपराधों की संख्या 930 दर्ज की गई है।
मध्य प्रदेश में अनुसूचित जनजाति के विरुद्ध घटित अपराध कुल 2979 रहे हैं। यहां यह उल्लेखनीय है कि मध्य प्रदेश में अनुसूचित जनजाति की कुल जनसंख्या (153 लाख)देश में सबसे अधिक है । मध्य प्रदेश में अनुसूचित जनजाति के विरुद्ध अपराध की दर देश में तीसरे नंबर पर है। यही दर केरल राज्य में 35.5 है तथा राजस्थान में 27.3 है जो कि मध्य प्रदेश में 19.4 है।
प्रतिबंधात्मक कार्रवाईयों में वृद्धि
वर्ष 2021 की तुलना में वर्ष 2022 में प्रतिबंधात्मक कार्यवाहियों में वृद्धि हुई है। जहां वर्ष 2021 में 907990 प्रतिबंधात्मक कार्रवाईयां की गई थी वहीं 2022 में पुलिस ने सक्रियता दिखाते हुए 937284 प्रतिबंधात्मक कार्रवाईयां की।