
अगस्त का महीना हिंदुस्तान की लोकतांत्रिक व्यवस्था की उपलब्धियों के मंथन का समय होता है। विकास की हर इबारत बोध के बिना अधूरी है। ज्ञान प्रसारित करने वाले विद्यालयों को लोकतांत्रिक गिरावट ने तिजारत का अड्डा बना दिया है। सरकारी स्कूल और इसके शिक्षक छुटभैये नेताओं तक के सामने नाक रगड़ने को मजबूर हैं। मध्यप्रदेश की स्कूली शिक्षा प्रशासनिक मुखिया ने निजी हनक का इस्तेमाल करके शैक्षणिक तंत्र को सुधारने का उपाय निकाला है। स्कूल शिक्षा प्रमुख सचिव रश्मि अरुण शमी एक ऐसी अफसर हैं जो शिक्षा तंत्र को व्यवस्थित करने की कमान खुद संभालती हैं।
भोपाल,06 अगस्त(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर) सरकार का प्रयास है कि वह शासकीय स्कूलों के माध्यम से गांव गांव तक ज्ञान का प्रकाश निशुल्क पहुंचाए । शासन के सिवाय कोई दूसरा इतना बड़ा तंत्र नहीं जो दूर दराज के गांवों तक बच्चों को प्रमाणिक शिक्षा मुहैया कराता हो। लगभग तीन दशक पहले स्कूलों में राजनैतिक आधार पर शिक्षक नियुक्त करने की परंपरा शुरु की गई थी। दिग्विजय सिंह की असफल कांग्रेसी सरकार ने पंचायती राज का शिगूफा छेड़कर सत्ता का समानांतर ढांचा खड़ा करने का प्रयास किया था। तब गुंडे मवालियों तक को पंचायतों की शिक्षा समिति में चयनित कर लिया गया था। तभी से गांव गांव तक सरकारी अमले से चंदा वसूली का खेल शुरु हो गया। लोमड़ी की दाढ़ में इंसानी रक्त की खुशबू लग जाए तो वह आदमखोर हो जाती है।
सीधी विकासखंड की प्राथमिक शाला बुसिया टोला करवाही की शिक्षिका श्रीमती बबिता गुप्ता ने जब प्रमुख सचिव महोदया से अपनी जान की सुरक्षा करने की गुहार लगाई तो उन्होंने इसे गंभीरता से लिया। शिक्षिका की पूरी बात गौर से सुनने के बाद उन्होंने अपने अमले को मामले की जांच के निर्देश दिए हैं। प्रशासनिक जांच के अलावा उन्होंने पुलिस महकमे को भी जांच में सहयोग करने के लिए ताकीद किया है। पुलिस महकमे के तमाम आला अफसर प्रमुख सचिव महोदया को उनके पद के अलावा व्यवहार के कारण बहुत इज्जत देते हैं। उनके पतिदेव संजीव शमी मध्यप्रदेश कैडर के निर्भीक और प्रतिभाशाली आईपीएस हैं। प्रदेश के दस्यु प्रभावित इलाकों में उनका खौफ इतना ज्यादा रहा है कि डकैत गिरोह और उनकी आड़ में काम करने वाले बदमाश अपनी आपराधिक गतिविधियों से ही तौबा कर लेते हैं। उन्हें अपने कार्य का जुनून है और सूचना मिलते ही वे जूते पहिनकर घटनास्थल पर पहुंच जाते हैं। उनकी इसी पहचान की वजह से आपराधिक चरित्र के लोग खौफ खाते हैं और नहीं चाहते कि वे सीधे टकराव वाली किसी पोस्ट पर मौजूद रहें। हालांकि उनकी इसी खूबी की वजह से पुलिस महकमे में उनकी बहुत इज्जत की जाती है।उनकी इस छवि का लाभ जाने अनजाने में शिक्षा जगत को भी मिल रहा है।
शिक्षा विभाग में प्रमुख सचिव रश्मि अरुण शमी बहुत विनम्र अधिकारी हैं लेकिन शिक्षा माफिया के लोग उनकी सक्रिय भूमिका देखकर अपनी चालबाजियां भूल जाते हैं। जब श्रीमती बबिता गुप्ता ने बताया कि वे अपने स्कूल के बच्चों को अपने वेतन में से ड्रेस खरीदकर देती हैं पढाई का सामान देती हैं इस वजह से कलेक्टर महोदय उन्हें सम्मानित भी कर चुके हैं। उन्होंने पहल करके स्कूल की दीवारों पर रंगरोगन करवाया है और बच्चों की पढ़ाई को रुचिकर बना रहीं हैं। इसके विपरीत स्कूल के षड्यंत्रकारी ने उनके फर्जी हस्ताक्षर बनाकर शाला विकास समिति के फंड में से रुपए निकाल लिए हैं और झूठी शिकायत उनके ही विरुद्ध कर रहे हैं। श्रीमती गुप्ता ने इस मामले की शिकायत सीधी पुलिस को भी की है।
उन्होंने बताया कि उनके स्कूल के हेडमास्टर ने उन्हें और उनके बच्चों को जान से मारने की धमकी दी है। इससे वे बहुत भयभीत हैं और उन्होंने अपने स्वास्थ्य के कारणों की वजह से फिलहाल महीने भर की छुट्टी ले ली है। प्रमुख सचिव महोदया ने शिक्षिका की बात गौर से सुनी और उन्हें हरसंभव मदद दिलाने का आश्वासन देकर विदा कर दिया। इसके साथ ही उन्होंने स्कूल शिक्षा विभाग को सख्त निर्देश देकर मामले की जांच करवाने और दोषियों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं। वहीं सीधी पुलिस तक भी इस मामले की सूचना पहुंच गई है। इससे पुलिस अमला सक्रिय हो गया है। पुलिस ने कथित तौर पर धमकी देने वाले शिक्षक अंजनी गुप्ता को भी सख्त हिदायत दी है कि यदि उनके विरुद्ध शिकायत जांच में सही साबित होती है तो उनके विरुद्ध प्रकरण दर्ज कर लिया जाएगा।
स्कूल के एक अन्य शिक्षक धीरज सिंह ने बताया कि शिक्षिका के दयालु स्वभाव की वजह से गांव के लोगों और स्थानीय प्रशासन के बीच उनकी छवि अच्छी है। जबकि उन्होंने जो शिकायतें की हैं वे कागज पर खरी साबित नहीं हो रहीं हैं। ऐसे में प्रशासन ने उन्हें लिखित पत्र देकर अपनी बात प्रमाणित करने का निर्देश दिया है। वे अपना स्पष्टीकरण दे देंगी तो बहुत सी शिकायतों को निदान हो जाएगा।
अब तक शिक्षा विभाग में इस तरह के मामलों में फाईलों पर धीमी गति से कार्रवाई चलती रही है लेकिन प्रमुख सचिव महोदया की सक्रियता से शिक्षा विभाग की जांच गतिविधियों में पंख लग गए हैं।संकुल चौफाल जिला सीधी म.प्र. के प्रिंसिपल दोमनीक खाखा ने इस मामले में हस्तक्षेप करके प्रधानाध्यापक अंजनी कुमार गुप्ता का पक्ष लेने की कोशिश की है,जिनकी जांच चल रही है।सुदूर ग्रामीण इलाके में शासन की उपस्थिति से सीधी जिले में हड़कंप मचा है। इस समय जब प्रदेश में प्रशासनिक कसावट का दौर चल रहा है तब प्रमुख सचिव की सक्रियता और न्यायप्रियता चर्चा का विषय बन गई है।
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