Month: April 2023

  • जांबाज पत्रकार तारेक फतेह को नहीं तोड़ पाए जिया

    जांबाज पत्रकार तारेक फतेह को नहीं तोड़ पाए जिया

    के. विक्रम राव

    पाकिस्तान हमेशा से ही अपने इस मशहूर पत्रकार की मौत चाहता रहा। कल ( 24 अप्रैल 2023 ) तारेक फतेह चले गए। कैंसर से रुग्ण थे। टोरंटो (कनाडा) में खाके सिपुर्द हो गए। वे 73 साल के थे। भारतीय मुसलमान घोर नफरत करते थे तारेक फतेह से क्योंकि वे शरीयत में बदलाव के पक्षधर थे। कराची में जन्मे (20 नवंबर 1949) तारेक फतेह सदैव पाकिस्तान के खिलाफ रहे। वे अखंड भारत के समर्थक थे। उनकी मां सुन्नी थी, मुंबई की। पत्नी नरगिस शिया, गुजराती दाऊदी बोहरा। स्वयं को फतेह बड़ी साफगोई से किस्मत का शिकार बताते थे। उनके पिता भी अन्य मुसलमानों की तरह जिन्ना की बात मानकर नखलिस्तान की तलाश में इस्लामी पाकिस्तान आए। मगर वह “मृगमरीचिका” निकली। “मैं पाकिस्तानी था। अब कनाडा का हूं। पंजाबी मुस्लिम कुटुंब का था, जो पहले सिख था। मेरा अकीदा इस्लाम में है, जिसकी जड़े यहूदी मजहब में रहीं।” अपनी जवानी में फतेह मार्क्सवादी छात्र नेता रहे। जैव रसायन में स्नातक डिग्री ली। पत्रकार के रूप में कराची पत्रिका “सन” के रिपोर्टर थे। जनरल जियाउल हक की सैन्य सरकार ने उन्हें दो बार जेल में डाला। देशद्रोह का आरोप लगाया।

    तारेक फतेह भारतीय मुसलमानों को राय देते रहे : “अपनी आत्मा को इस्लामी बनाओ। दिमाग को नहीं। गरूर पर हिजाब डालो, न कि शकल पर। बुर्का से सर ढको, चेहरा नहीं।” तारेक ने एंकर रजत शर्मा को “आपकी अदालत” में बताया था कि बाबर तो भारतीय इतिहास का कबाड़ था। वह हिंदुस्तानियों को काला बंदर मानता था। इसीलिए जब राम मंदिर का निर्माण प्रारंभ हुआ तो तारेक हर्षित थे। उस आधी रात, अगस्त माह 2018, में फतेह बारह हजार किलोमीटर दूर टोरंटो में अपने बिस्तर पर तहमत पहने नाचे थे। तभी टीवी पर खबर आई थी कि उसी सुबह नई दिल्ली नगरपालिका ने सात दशकों बाद औरंगजेब रोड का नाम बदलकर डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम पर रख दिया था। एक ऐतिहासिक कलंक मिटा था, फतेह की राय में। अपने लोकप्रिय टीवी शो में फतेह हमेशा ब्रिटिशराज द्वारा मुगलों के महिमा मंडन के कठोर आलोचक रहे। वे कई बार कह भी चुके थे कि जालिम औरंगजेब का नामोनिशान भारत से मिटाना चाहिए । फिर उनके सुझाव को पूर्वी दिल्ली से लोकसभा के भाजपाई सदस्य महेश गिरी ने गति दी। अपने भाषण में फतेह ने कहा भी था : “आज केवल हिंदुस्तानी ही इस्लामिक स्टेट के आतंक को नेस्तनाबूद कर सकता है। अतः क्या शुरुआत में आप नई दिल्ली में औरंगजेब रोड का नाम दारा शिकोह रोड रख सकते हैं ?” उनका सवाल था। अपने सगे अग्रज दारा शिकोह को औरंगजेब ने लाल किले के निकट हाथी से रौंदवाया था। उनका सर काटकर तश्तरी में रखकर पिता शाहजहां को नाश्ते के साथ परोसवाया था। मोदी सरकार ने तीन साल लगा दिए औरंगजेब रोड का नाम बदलने में।

    तारेक फतेह अपने टीवी कार्यक्रम में अक्सर कहा करते थे कि वे बलूचिस्तान को आजाद राष्ट्र के रूप में देखना चाहते हैं। पाकिस्तान ने उसे गुलाम बना रखा है। वे कश्मीर पर पाकिस्तान के हिंसक हमलों की हमेशा भर्त्सना करते रहे। मूलतः वे विभाजन के विरुद्ध रहे। अपनी पुस्तक “यहूदी मेरे शत्रु नहीं हैं” में फतेह ने स्पष्ट लिखा था कि भ्रामक इतिहास के फलस्वरुप यहूदियों के साथ अत्याचार किया गया। वे मुंबई में 9 नवंबर 2008 के दिन यहूदी नागरिकों पर गोलीबारी से संतप्त थे। उन्होंने इस वैमनस्य की जड़ों पर शोध किया। उन्होंने पाया कि यहूदी से उत्कट घृणा ही इस्लाम का मूल तत्व है। वे समाधान के हिमायती थे।

    तारेक फतेह ने इस्लामी राष्ट्रों के द्वारा असहाय मुसलमानों की उपेक्षा को मजहबी पाखंड करार दिया था। वे मानते थे कि रोहिंग्या मुसलमान न्याय के हकदार हैं, उपेक्षा के पात्र नहीं। एक मानवीय त्रासदी आई है जहां एक पूरी आबादी पर सबसे जघन्य अत्याचार ढाये जा रहे हैं। वे एक जातीय और धार्मिक अल्पसंख्यक हैं। म्यांमार में दसियों हज़ार रोहिंग्या मुसलमान एक तानाशाह की सेना द्वारा क्रूर कार्रवाई में खदेड़े गये। वे शरण मांग रहे हैं, विशेषतः मुस्लिम देशों से। मगर ये सारे इस्लामी राष्ट्र खामोश हैं। तारेक फतेह ने तत्कालीन पाकिस्तानी राष्ट्रपति परवेज मुशर्रफ की इस्लामाबाद में लाल मस्जिद तथा उसके अंदर आतंकवादियों पर कार्रवाई के पीछे की राजनीति की जांच की मांग की थी। उनकी दृष्टि में यह साजिश थी। तारेक फतेह ने लिखा था : “जनरल मुशर्रफ़ और उन्हें सहारा देने वाले अमेरिकियों, दोनों को यह महसूस करना चाहिए कि मलेरिया से लड़ने के लिए दलदल को खाली करने की ज़रूरत है, न कि अलग-अलग मच्छरों को मारने की। पाकिस्तान में इस्लामी कट्टरवाद से लड़ने का सबसे अच्छा तरीका ही है कि फर्जी मतदाता सूचियों को खत्म करें और लोकतांत्रिक चुनाव आयोजित किया जाए। निर्वासित राजनेताओं को देश में लौटने दिया जाए।”

    मगर तारेक फतेह को देशद्रोही कहा गया। अखिल भारतीय फैजान-ए-मदीना परिषद ने एक निजी समाचार चैनल पर तारेक फतेह के आकर्षक टेलीविजन कार्यक्रम ‘फतेह का फतवा’ पर तत्काल प्रतिबंध लगाने की मांग की थी। बरेली- स्थित एक मुस्लिम संगठन ने कथित रूप से अपने टीवी कार्यक्रम के माध्यम से “गैर-इस्लामिक” विचारों को बढ़ावा देने के लिए तारेक फतेह का सिर कलम करने वाले को 10 लाख रुपये के “इनाम” की घोषणा की थी ।

    फतेह को श्रद्धांजलि देते हुये टीवी समीक्षक शुभी खान बोली : “थोड़ी देर तो समझ नहीं पाई कि क्या कहूँ ? क्या सोंचू ? टीवी चैनल्स पर हम दोनों का सच के लिए और बहुत बार एक दूसरे के लिए लड़ना तो याद आया। तारेकभाई आपकी मशाल बुझी नहीं हैं। अब यह मुस्लिम युवाओं द्वारा ज्यादा तेज जलेगी”, कहा खान ने। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के साप्ताहिक “पांचजन्य” ने लिखा : “उनके योगदान को हमेशा याद रखा जाएगा। तारेक फतेह इस्लामी कट्टरता के घोर विरोधी थे।” हम IFWJ के श्रमजीवी पत्रकार सदस्य साथी तारेक फतेह के सम्मान में अपने लाल झंडा झुकाते हैं। उनकी पत्रकार-पुत्री नताशा के लिए शोक संवेदनायें ! सलाम योद्धा तारेक ! तुम्हारी फतेह हो !!

    K Vikram Rao

    Mobile : 9415000909

    E-mail: k.vikramrao@gmail.com

  • जीपीएफ के धन से जेल में चला सट्टे का शेयर बाजार

    जीपीएफ के धन से जेल में चला सट्टे का शेयर बाजार

    उज्जैन,(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर) केंद्रीय भैरवगढ़ जेल की पूर्व अधीक्षक उषा राज, फर्जी मुंशी जगदीश परमार आदि का एक गिरोह जेल में समानांतर अर्थव्यवस्था चला रहा था.जीपीएफ के धन से काली कमाई के लिए इस गिरोह ने सट्टे का कारोबार चला रखा था। ऊषा ने जगदीश को जेल के कैदियों को तंबाकू, बीड़ी, सिगरेट, हशीश, गांजा, शराब और मटन मोटी कीमत पर बेचने का ठेका भी दिया था। तत्कालीन जेल अधीक्षक के संरक्षण में, जगदीश का वास्तव में जेल मामलों का पूरा कंट्रोल था एक तरह से वही पूरा जेल अधीक्षक बन गया था।
    उषा और जगदीश दोनों वर्तमान में क्रमशः जिला जेल, इंदौर और महिदपुर उप-जेल में बंद हैं। वे शुरू में केंद्रीय भैरवगढ़ जेल में अपनी शाखाओं को फैलाने वाले 15 करोड़ रुपये के डीपीएफ/जीपीएफ गबन मामले में मुख्य आरोपी के रूप में दोषी पाए गए हैं। 15 दिन की पुलिस रिमांड के दौरान इनके खिलाफ बंदियों से रंगदारी के दो और मामले भी दर्ज किए गए हैं।
    इस बीच, शहर का एक व्यवसायी, जो जेल में एक विचाराधीन कैदी था और हाल ही में रिहा हुआ था, ने बताया कि जेल में सक्रिय कॉकस ने अपनी आपराधिक शैली से जेल को नरक में बदल दिया था। जगदीश बलात्कार के आरोप में लगभग 18 महीने तक वहीं रहा था, हालांकि बाद में उसे सबूतों के अभाव में बरी कर दिया गया था। सितंबर 2021 में जब उषा राज ने पदभार संभाला, तो उसने यू ट्यूब समाचार चैनल रिपोर्टर होने के नाते धीरे-धीरे उनके साथ निकटता अर्जित की।
    बाद में उषा और जगदीश दोनों की करीबियां बढ़ती गईं । सूत्रों से पता चला है कि बाहर से जेल प्रहरियों के जरिए लाए गए तंबाकू, बीड़ी, सिगरेट, चरस, गांजा, शराब और मटन को बंद कर दिया गया . दरअसल, जगदीश को ऐसी प्रतिबंधित सामग्री का 40 हजार रुपए प्रतिदिन के हिसाब से ठेका मिला था। वह इन सामानों को अपने साथियों के जरिए जरूरतमंद कैदियों को बेचता था। बाजार में 5 रुपये में मिलने वाली तंबाकू की थैली 500 रुपये में बिक रही थी। इसी तरह बाजार में 200 रुपये में मिलने वाली मीडियम रेंज की व्हिस्की का एक चौथाई हिस्सा 2 हजार रुपये में बिक रहा था।
    सूत्रों के मुताबिक अगर किसी के पास पर्याप्त पैसा होता तो सब कुछ जेल के अंदर उपलब्ध होता। कॉकस ने टेलीफोन एक्सचेंज चलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई जिसके लिए 6 मिनट के लिए 100 रुपये लिए गए। जगदीश कैदियों और जेल में आने वाले नए बंदियों की पारिवारिक पृष्ठभूमि खंगालने में माहिर था।इसी वजह से वह उन्हें अच्छी बैरक दिलवाने के एवज में खासा धन वसूलता था।शुरुआत में बंदियों को उन्हें लगभग 4×6 कक्षों में रखा जाता था जहां लगभग हवा या धूप नहीं होती थी। उषा ऐसे लोगों के इलाज के लिए अंदर पर्ची भेजती थी जिन्हें बाद में चप्पलों से पिटवाकर बैरक से घसीट कर कोठरियों में ले जाया जाता था। जेल नियमों का सरेआम माखौल उड़ाते हुए जगदीश शाम के बाद भी अपना मोबाईल लेकर जेल के भीतर आता जाता रहता था। जेल महानिदेशक जेल अरविंद कुमार ने स्वीकार किया कि ऐसी सभी बातें संज्ञान में हैं. उन्होंने कहा, ‘दरअसल हमने पूरे मामले की जांच के लिए एक उच्च स्तरीय कमेटी का गठन किया है, लेकिन इससे पहले कि वे जेल जाते, डीपीएफ-जीपीएफ घोटाला सामने आ गया।’ उनके अनुसार, वे अनियमित तरीके से पैरोल देने संबंधी शिकायतों पर कार्रवाई कर रहे हैं। इसी तरह सेंट्रल जेल में लंबे समय से तैनात कुछ जेल कर्मचारियों के खिलाफ विभागीय जांच शुरू कर दी गई है. डीजी ने कहा कि उन्हें जल्द ही अन्यत्र स्थानांतरित कर दिया जाएगा।
    घोटाले की जांच कर रही एसआईटी के प्रमुख एएसपी इंद्रजीत बाकलवार ने कहा कि उषा राज के खिलाफ भ्रष्टाचार निरोधक अधिनियम के तहत मामला पहले ही दर्ज किया जा चुका है. उन्होंने कहा कि आवश्यक कार्रवाई करने के लिए आयकर विभाग को पत्र भेजे गए हैं।

  • सिविल सेवकों का जीवन सिर्फ अपने लिए नहीं, अपनों के लिए होता है : मुख्यमंत्री श्री चौहान

    सिविल सेवकों का जीवन सिर्फ अपने लिए नहीं, अपनों के लिए होता है : मुख्यमंत्री श्री चौहान

    भोपाल,21 अप्रैल(अशोक मनवानी )। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने सिविल सेवकों से कहा कि आपका जीवन सिर्फ अपने लिए नहीं अपनों के लिए होता है। जन-कल्याण सबसे बड़ी प्राथमिकता होती है। आम जनता से जुड़े छोटे-छोटे कार्य, वास्तव में बड़े-बड़े कार्य होते हैं। सिविल सेवक इन कार्यों को समय पर पूरा करवा लें, यही सुशासन है। मुख्यमंत्री श्री चौहान आज आर.सी.वी.पी. नरोन्हा प्रशासन एवं प्रबंधकीय अकादमी, भोपाल के सभा कक्ष में सिविल सर्विस-डे के शुभारंभ कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि हमारा मूल काम समाज सेवा है। हम जो भी कार्य करते हैं, आम नागरिकों के लिए ही होता है। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने टीम मध्यप्रदेश को सिविल सेवा दिवस की बधाई और शुभकामनाएँ दी। सिविल सेवा दिवस पर हुए इस विशेष कार्यक्रम के मुख्य अतिथि शिक्षाविद, लेखक इन्फोसिस के पूर्व सदस्य और वर्तमान में मणिपाल ग्लोबल एजुकेशनल के अध्यक्ष श्री मोहनदास पाई थे।

    मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि सिविल सर्विस-डे का अर्थ यही है कि हम लोक सेवक हैं और देश की सेवा हमारा मुख्य उद्देश्य है। लोकतंत्र में जनता का, जनता के लिए और जनता द्वारा शासन होता है। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि सिविल सेवा दिवस 2023 की थीम “विकसित भारत, नागरिकों को सशक्त करना और अंतिम व्यक्ति तक पहुँचना है।” उन्होंने टीम मध्यप्रदेश को बधाई देते हुए कहा कि उन्हें गर्व है कि सबने मिल कर मध्यप्रदेश को समृद्ध और विकसित बनाने में बहुत महत्वपूर्ण योगदान दिया है। टीम मध्यप्रदेश ने जुट कर कार्य किया है। मध्यप्रदेश में तेजी से सकारात्मक परिवर्तन आया है। सिंचाई की क्षमता को हमने आश्चर्यजनक रूप से साढ़े 7 लाख हेक्टयर से बढ़ा कर 45 लाख हेक्टेयर तक पहुँचा दिया है। इसे क्रास कर अब 65 लाख हेक्टेयर पर काम करेंगे। आज 4 लाख किलोमीटर सड़कें प्रदेश में बन चुकी हैं। किसी समय यह सिर्फ 71 हजार किलोमीटर हुआ करती थी और टूटी-फूटी हालत में होती थी। अब प्रदेश में शानदार सड़कें हैं। प्रदेश में ऊर्जा सहित विभिन्न क्षेत्रों में अद्भुत कार्य हुआ है। प्रदेश में अच्छे संसाधन हैं, इसलिए हम कार्य कर पा रहे हैं। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि प्रदेश में निर्माण विभाग भी सक्रिय रहे। मध्यप्रदेश की गिनती आज विकसित प्रांतों में है, मध्यप्रदेश बीमारू नहीं है। इसका श्रेय टीम मध्यप्रदेश के असाधारण परिश्रम को है। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि आम जन के बिना हमारा कार्य नहीं होता, हम हितग्राही तक पहुँच जाते हैं। प्रदेश में विकास यात्राएँ जन- कल्याण यात्राएँ बन गई।

    मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि प्रदेश में अधो-संरचना की बात करें तो यह देखने को मिलता है कि काफी सकारात्मक परिवर्तन आया है। कृषि उत्पादन में कई गुना वृद्धि हुई है। अनाज के भंडार भरे हैं। प्रति व्यक्ति आय बड़ी है। देश की जीएसडीपी में मध्यप्रदेश का योगदान बढ़ा है। वर्ष 2005-06 में प्रदेश में का बजट आकार 25 हजार करोड़ होता था, वो बढ़ कर वर्ष 2012-13 में एक लाख करोड़, वर्ष 2020-21 में दो लाख करोड़ और इस बार 3 लाख करोड़ को पार कर गया है, यह आसान बात नहीं है। असाधारण उपलब्धि है। मध्यप्रदेश ने तुलनात्मक रूप से लम्बी छलांग लगाई है, जिसका श्रेय टीम मध्यप्रदेश को जाता है।

    सुशासन से जनता और प्रशासन की दूरी हुई है समाप्त

    मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि प्रदेश में जनता और प्रशासन के बीच की दूरी समाप्त की गई है, जो सुशासन के प्रयासों से संभव हुआ है। मुख्यमंत्री जन-सेवा अभियान से केन्द्र और राज्य सरकार की योजनाओं से 83 लाख से अधिक हितग्राहियों को जोड़ने में सफलता मिली। हमारे कार्यक्रम जनता के कार्यक्रम बन गए। जनता की निर्णयों में भी भागीदारी हो गई है। आगामी 10 से 25 मई तक समस्याओं के निराकरण के लिए पुन: अभियान संचालित किया जाएगा। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि सिविल सेवकों को यह चुनौती स्वीकार करना है कि नागरिकों को अपने कामों के लिए भटकना न पड़े। गाँव और शहरों के वार्डों में शिविरों के माध्यम से समस्याएँ हल की जाएँ। सीएम हेल्प लाइन सहित सुशासन की दिशा में अनेक उपायों को लागू किया गया। जन सुनवाई, वन-डे गर्वेनेंस और समाधान ऑनलाइन ऐसे ही उपाय हैं। इनको तकनीकी से जोड़ कर कार्यों के निपटारे के साथ सामने आने वाली विसंगतियों को भी दूर करने पर ध्यान देना है। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने गीता के श्लोकों के माध्यम से सिविल सेवक की भूमिका कैसी हो, इसका विस्तारपूर्वक उल्लेख भी किया।

    मध्यप्रदेश में सुशासन और अधिकारियों की श्रेष्ठ भूमिका

    मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि मध्यप्रदेश में सुशासन के क्षेत्र में निरंतर कार्य हुआ है। बुरहानपुर में हर घर जल पहुँचाने और गति शक्ति प्रोजेक्ट के क्रियान्वयन के कार्य हुए हैं। प्रदेश में अनेक नवाचार भी प्रशासनिक स्तर पर हुए हैं। अधिकांश सिविल सेवक श्रेष्ठ भूमिका का निर्वहन करते हुए सरकार की जन-कल्याणकारी नीतियों को जमीन पर उतारने का कार्य कुशलता से कर रहे हैं। प्रदेश के सिविल सेवक तेजी से क्रियान्वयन का गुण भी रखते हैं, मुख्यमंत्री लाड़ली बहना योजना बनने के बाद दो माह में आवश्यक वातावरण निर्माण और एक करोड़ से अधिक पंजीयन इसका उदाहरण है।

    मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि सिविल सेवक एक लीडर भी हैं और उनका दायित्व सभी को सम दृष्टि से देख कर सबका उत्साह भी बढ़ाना है। व्यक्ति में अहंकार न हो। उत्साह में कमी न हो। धैर्य के साथ समस्याओं के समाधान का रास्ता निकाला जाए। मनोवृत्ति यह होना चाहिए कि किसी निराशा से घिरे व्यक्ति को भी उत्साहित कर दें। व्यक्ति जैसा सोचता है वैसा बन भी जाता है। सिविल सेवक सिर्फ अपने लिए कार्य नहीं करता बल्कि उसके कार्य से जनता और पूरा देश प्रभावित होता है। अप्रासंगिक कार्य को भी प्रासंगिक बनाने की कला होना चाहिए। एक व्यक्ति चाहे तो देश के प्रति विश्व की धारणा बदल सकता है। यह बात समस्त देशवासियों ने अनुभव की है। इसी तरह एक सिविल सेवक सही दिशा में कार्य कर विभाग को बदल सकता है। सिविल सेवक अधिकतम योगदान देने का प्रयास करें। इसलिए सिविल सेवाएँ सिर्फ व्यक्ति के लिए न होकर, राष्ट्र के लिए उपयोगी मानी गई हैं।

    आनंद और प्रसन्नता के साथ करें कार्य

    मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि स्वामी विवेकानंद ने मनुष्य को अनंत शक्तियों का भंडार बताया है। किसी कार्य में पूरी तरह प्रयत्न करना आवश्यक है। यदि एक बार सफल नहीं हुए तो पुन: प्रयास करना ही चाहिए। समय का भी सद्पयोग करना चाहिए। एक-एक क्षण कीमती है। जब तक व्यक्ति का जीवन है, दूसरों की जिन्दगी को बेहतर बनाने के लिए हर पल का उपयोग किया जाए। प्राय: धन-दौलत से सुख प्राप्त नहीं होता। ईमानदारी पूर्वक कार्य करने से अच्छे परिणाम निकलते हैं। कोरोना काल में अधिकारियों ने जिस जज्बे से कार्य किया वो गर्व करने लायक है। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने सिविल सेवकों से आहवान किया कि आनंद और प्रसन्नता से कार्य करें। परिवार में सभी सदस्यों का ध्यान रखते हुए मनोयोग पूर्वक अपने शासकीय दायित्वों को निभाना आसान होता है। ऐसा ही जीवन प्रासंगिक होता है। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि आत्म-निर्भर मध्यप्रदेश के लक्ष्य के लिए हम तेजी से कार्य करते हुए आगे बढ़ रहे हैं। इस कार्य को पूरी निष्ठा से पूर्ण करना है।

    योजनाएँ जनता के सुझावों पर बनी

    मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि मध्यप्रदेश की जनता भी विकास कार्यों में भागीदारी कर रही है। मध्यप्रदेश जन-अभियान परिषद हो या अन्य संगठन, सभी मिल कर योजनाओं के क्रियान्वयन में भागीदार हैं। मध्यप्रदेश में अनेक योजनाएँ आम जनता के सुझावों पर बनी हैं। प्रदेश में एक आदर्श कार्य-संस्कृति निर्मित हुई है। जिलों में जनता और कलेक्टर के बीच की दूरी खत्म हुई है।

    अपेक्षाओं पर खरे उतरे हैं सिविल सेवक

    मुख्य सचिव श्री इकबाल सिंह बैंस ने कहा कि सिविल सर्विसेज की लंबी परंपरा देश में रही है। विशेष परिस्थितियों और चुनौतीपूर्ण स्थितियों का हमारी प्रशासनिक व्यवस्था डट कर मुकाबला करती है। श्री बैंस ने कहा कि अपने लंबे कार्यकाल में उन्हें ऐसा अवसर याद नहीं आता जब हमें कोई विशेष दायित्व दिया गया हो और अपेक्षा पर खरे नहीं उतरे हों। मुख्य सचिव ने कहा कि ऐसी दक्ष टीम के साथ काम करने का सौभाग्य मिला है, इस बात का संतोष है और गर्व भी है। उन्होंने कहा कि चाहे कोरोना काल की बात हो या सिंहस्थ के आयोजन की बात हो या फिर माफिया के खिलाफ कार्रवाई का समय हो, अधो-संरचना का विकास हो या जनता की समस्याओं के निराकरण की व्यवस्था हो, मध्यप्रदेश में सभी प्रशासनिक आयामों पर अनेक उपलब्धियों का इतिहास रचा गया है। मुख्य सचिव ने कहा कि हम जो भी कार्य करते हैं उसका विश्लेषण भी किया जाता है। अनेक कमियाँ भी सामने आती हैं और बहुत सा अच्छा कार्य कमियों के आगे दब जाता है। अपने श्रेष्ठ कार्यों को प्रचारित करने और उनकी व्याख्या करने के प्रति भी हमें सजग रहना चाहिए।

    प्रारंभ में मुख्यमंत्री श्री चौहान और अतिथियों ने दीप जला कर सिविल सर्विस-डे का शुभारंभ किया। मुख्यमंत्री श्री चौहान का श्री अनिरुद्ध मुखर्जी ने स्वागत किया। मुख्य सचिव और अन्य अतिथियों का भी स्वागत पुष्प-गुच्छ से किया गया। पुलिस महानिदेशक श्री सुधीर कुमार सक्सेना, अपर मुख्य सचिव सामान्य प्रशासन श्री विनोद कुमार सहित बड़ी संख्या में भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारी, भारतीय पुलिस सेवा और वन सेवा के अधिकारी उपस्थित थे। कलेक्टर्स, कमिश्नर्स और मुख्य कार्यपालन अधिकारी भी वर्चुअली जुड़े।

  • छोटे उद्यमों से दूर होगी देश की बेरोजगारी

    छोटे उद्यमों से दूर होगी देश की बेरोजगारी


    समावेशी विकास के लिए एमएसएमई ही सबसे बेहतर विकल्प है। उसमें आ रही समस्याओं को नजरअंदाज नहीं कर सकते।डॉ. अरुणा शर्मा,प्रैक्टिशनर डेवलपमेंट इकोनॉमिस्ट और इस्पात मंत्रालय की पूर्व सचिव

    मध्यप्रदेश और भारत में अपने फौलादी इरादों से बदलाव की इबारत लिखने वाली देश की प्रख्यात आईएएस अरुणा शर्मा आर्थिक मुद्दों पर देश का मार्गदर्शन कर रहीं हैं। उन्होंने पांच ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने में भारत के आर्थिक सुधारों पर गहरा अध्ययन किया है। उनका कहना है कि भारत के कुल एमएसएमई में से 50% ग्रामीण क्षेत्र में संचालित होते हैं और वे कुल रोजगारों में 45% का योगदान देते हैं। एमएसएमई मंत्रालय के डाटा के अनुसार इस सेक्टर के कुल रोजगार का 97% हिस्सा माइक्रो सेगमेंट से प्राप्त होता है। एमएसएमई पर फोकस करने से देश की ग्रोथ बढ़ेगी।
    भारत की आबादी 1.4 अरब है, जिसमें से 65% आबादी 35 वर्ष से कम आयु की है। सेंटर फॉर मॉनिटरिंग इंडियन इकोनॉमी की 1 मार्च 2023 की रिपोर्ट के अनुसार 7.45% युवा ऐसे हैं, जिन्हें नौकरियां नहीं मिल रही हैं। इस कारण भारत की 3.7 ट्रिलियन डॉलर की इकोनॉमी की ग्रोथ समावेशी नहीं रह जाती है। हमारे सामने चुनौती है कि न केवल इस ग्रोथ स्टोरी को जारी रखें, बल्कि साथ ही रोजगार के अवसर भी पैदा करें। यह एमएसएमई यानी छोटे और मंझोले उद्योगों द्वारा ही किया जा सकता है। भारत में रोजगारों का जो परिदृश्य है, उसमें आज भी कृषि क्षेत्र द्वारा सबसे ज्यादा 42% रोजगार सृजित किए जाते हैं, सेवा क्षेत्र का योगदान 32% और उद्योग क्षेत्र का 25% का है। लेकिन केवल कृषि और सेवा से दीर्घकालीन और गुणवत्तापूर्ण रोजगार नहीं मिल सकते, इसके लिए उद्योग पर फोकस जरूरी है।
    बड़ी संख्या में एमएसएमई के बंद होने की समस्या : उद्यम पोर्टल में रजिस्टर्ड एमएसएमई की बात करें तो मौजूदा वित्त वर्ष में यह 18.04 लाख पंजीयनों तक पहुंच गई है, जबकि विगत वित्त वर्ष में कोई 10 हजार एमएसएमई बंद हुए हैं। मौजूदा वित्त वर्ष में बंद होने वाली एमएसएमई की संख्या 2016 से 2022 के दौरान बंद हुए एमएसएमई की कुल संख्या से भी अधिक है। सरकार द्वारा अनेक कदम उठाए जाने के बावजूद महामारी के उपरांत एमएसएमई को चुनौतियों का सामना करना पड़ा है। कुल पंजीयनों में से 0.59% यानी 30,997 ने रजिस्ट्रेशन रद्द करवा दिए, 67% ने अनियतकालीन रूप से अपने उद्यम को बंद कर दिया और एसआईडीबीआई के एक सर्वेक्षण के मुताबिक 50 हजार से ज्यादा ने नौकरियां गंवाईं। जो सेक्टर देश में युवाओं को रोजगार देने में सबसे ज्यादा सक्षम है, वही ऐसी समस्याओं से जूझ रहा है, जिनका सामना नहीं किया गया है।
    ऑटो मोड में एनपीए घोषित करने की समस्या : बड़ी कम्पनियों को कॉर्पोरेट टैक्स में कटौती का लाभ मिल जाता है, लेकिन एमएसएमई को करों में छूट नहीं दी जाती। महामारी के दौरान और उसके बाद कार्यशील पूंजी बड़ी समस्या बन गई थी और एक छोटे प्रतिशत को यह प्रदान की गई थी, लेकिन मौजूदा पूंजी/कार्यशील पूंजी ऋण और इस नए अतिरिक्त कर्ज की प्रणाली को सुधारने के बजाय एमएसएमई पर पुराने और नए कर्जों की किश्तों के भुगतान का बोझ लाद दिया गया। समस्या तब और बढ़ गई, जब रिटेलरों, सेलरों, ट्रेडरों आदि के 90 दिनों के अनपेड लोड को डिफॉल्टर्स घोषित करने के बजाय ऑटो मोड में एनपीए घोषित कर दिया गया।
    जीएसटी से सम्बंधित समस्याएं : जीएसटी के पांच वर्ष पूर्ण होने पर गुड्स एंड सर्विसेस टैक्स नेटवर्क की वित्त वर्ष 2021-22 की एक रिपोर्ट के मुताबिक जीएसटी के लिए रजिस्टर की गई कुल कम्पनियां 1.45 करोड़ हैं, जिनमें से 78% राजस्व संग्रह निजी और सार्वजनिक कम्पनियों, न्यासों, विदेशी और अन्य शासकीय संस्थाओं से प्राप्त होता है, जबकि स्वामित्व वाली फर्मों से प्राप्त होने वाला जीएसटी राजस्व संग्रह 13.28% और साझेदारी फर्मों से प्राप्त होने वाला जीएसटी राजस्व संग्रह 7.29% है। वहीं 69.80% कुल कर-संग्रह मंझोले और बड़े उद्योगों से प्राप्त होता है, 16.67% छोटे उद्योगों से और केवल 13.53% जीएसटी माइक्रो एंटरप्राइजेस से प्राप्त होता है। ऐसे में यह सुझाव दिया गया है कि माइक्रो और छोटी इकाइयों के लिए जीएसटी दरों में राहत दी जाए।
    डिजिटल भुगतान को हतोत्साहित करना : डिजिटल भुगतान की ओर शिफ्ट सुरक्षा कारणों से हुआ है, लेकिन आरटीजीएस और एनआईएफटी पर सेवा शुल्क लेकर इसे हतोत्साहित किया जा रहा है। एनपीसीआई का कहना है कि यूपीआई नि:शुल्क है, तब तो यही सिद्धांत किसी भी तरह के डिजिटल भुगतान पर लागू होना चाहिए, फिर वह आईएमपीएस हो, आरटीजीएस या एनआईएफटी हो। वैसे भी ये मुद्रा की छपाई में आरबीआई का लगने वाला पैसा बचा रहे हैं और नगदी के आदान-प्रदान में बैंकों का होने वाला व्यय भी कम कर रहे हैं। देश में समावेशी विकास को बढ़ावा देने के लिए एमएसएमई ही सबसे बेहतर विकल्प है। उसमें आ रही समस्याओं को नजरअंदाज करने से विकास एकतरफा होकर रह जाएगा। (ये लेखिका के अपने विचार हैं)