Month: February 2022

  • बड़े बाबा का अगला महामस्तकाभिषेक होली के नौ साल बाद होगाःआचार्यश्री विद्यासागर जी

    बड़े बाबा का अगला महामस्तकाभिषेक होली के नौ साल बाद होगाःआचार्यश्री विद्यासागर जी


    महामस्तकाभिषेक से ही पाप का प्रक्षालन संभव

    कुंडलपुर 25 फरवरी(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)। दमोह जिले के कुंडलपुर में इन दिनों चल रहा बड़े बाबा भगवान आदिनाथ का महामस्तकाभिषेक अब हर नौ साल बाद होगा। भगवान आदिनाथ को ऊंची वेदी और भव्य जिनालय में प्रतिष्ठित करवाने के बाद आज आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज ने अपनी देशना में ये घोषणा की। वर्तमान महामस्तकाभिषेक होली के दिन तक चलता रहेगा,अगला आयोजन नौ साल बाद होगा। महामस्काभिषेक के इस अवसर पर देश विदेश से आए श्रद्धालुओं ने बढ़ चढ़कर भाग लिया।
    आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज ने कहा कि भगवान आदिनाथ के पुत्र भगवान बाहुबलि की प्रतिमा दक्षिण के श्रवणबेलगोला में है वहां महामस्तकाभिषेक हर बारह सालों में होता है। देश विदेश से धर्मावलंबी वहां पहुंचते हैं। भगवान बाहुबलि की ये प्रतिमा खड़गासन में है जबकि कुंडलपुर में उनके पिता भगवान आदिनाथ की विशाल प्रतिमा बैठी हुई अवस्था में है। कुंडलपुर में भगवान आदिनाथ की प्रतिमा समूचे विश्व में पुण्य के अर्जन के लिए पाप प्रक्षालन का निमित्त बनेगी। उन्होंने कहा कि आचार्यों के अनुसार पाप का प्रक्षालन करके ही पुण्य अर्जित किया जा सकता है। आगम में इसके सिवाय कोई दूसरा मार्ग नहीं बताया गया है। ये प्रभु की भक्ति और ध्यान से ही संभव हो सकता है। पुण्य का अर्जन स्थायी होता है ये किसी भी प्रकार नष्ट नहीं होता। शास्त्रों में 94 पदार्थ बताए गए हैं पर उनमें से केवल पुण्य ही ऐसा है जो अविनाशी है।
    आचार्यश्री ने कहा कि कुंडलपुर में महमस्तकाभिषेक का ये अवसर दुर्लभ है। मेरी शारीरिक अवस्था की वजह से मैं सोच रहा था कि शायद मैं पहाड़ चढ़कर बड़े बाबा के चरणों तक नहीं पहुंच पाऊंगा लेकिन बाबा ने मुझे बुला लिया। आज जहां महामस्तकाभिषेक चल रहा है वहां मैं भी पहुंच गया हूं। अब होली के बाद से हर नौ साल बाद महामस्तकाभिषेक की ये परंपरा चलती रहेगी। बड़े बाबा भगवान आदिनाथ पूरे विश्व के लिए पूज्यनीय हैं। यहां आकर लोग मुंडन कराते रहे हैं अब महामस्तकाभिषेक के माध्यम से वे पुण्य का अर्जन भी करते रहेंगे। इस लक्ष्य की पूर्ति के लिए वो जो जीवन शैली अपनाएंगे उससे सारे विश्व का कल्याण होगा।

  • धर्म सापेक्ष भारत के संविधान से धर्म निरपेक्षता शब्द हटाया जाएः आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज

    धर्म सापेक्ष भारत के संविधान से धर्म निरपेक्षता शब्द हटाया जाएः आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज

    कुंडलपुर पंचकल्याणक महोत्सव में जाकर केन्द्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया और प्रदेश भाजपा अध्यक्ष वीडी शर्मा ने बडे़ बाबा के दर्शन किए


    कुंडलपुर 22 फरवरी(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)। दमोह जिले के कुंडलपुर में चल रहे पंचकल्याणक महोत्सव में आज समवसरण में विराजमान आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज ने दो टूक शब्दों में कहा कि भारत धर्म सापेक्ष देश है। हमारे देश की सभी समस्याओं का समाधान धार्मिक परंपराओं से हो जाता है, ऐसे में देश को धर्म निरपेक्ष कहने की आयातित सोच से अब हमें बाहर निकलना होगा। समय आ गया है जब संविधान में डाला गया धर्मनिरपेक्ष शब्द हटाया जाए और उसकी जगह भारत को धर्म सापेक्ष देश घोषित किया जाए। धर्मसभा में उपस्थित जन समुदाय ने करतल ध्वनि से आचार्य़ श्री की बात का समर्थन किया।
    आचार्य श्री ने सबसे पवित्र समवसरण में विराजमान होकर ईश्वरीय वाणी के रूप में कहा कि भारत का जनमन जिस धार्मिकता से धरा का वैभव संवारता रहा है हमें उस पर गौर करना होगा। उन्होंने कहा कि राष्ट्र की रक्षा और उन्नति धर्म से विमुख होकर नहीं हो सकती। अंग्रेजों ने धर्म का अर्थ रिलीजन यानि साम्प्रदायिक होना गलत समझाया है। धर्म का सही अर्थ तो कर्तव्य का ठीक से पालन करना होता है। महोत्सव के खचाखच भरे विशाल पंडाल में जन समुदाय ने कई बार आचार्य श्री की बातों का जय जय उद्घोष करके समर्थन किया। पंचकल्याणक महोत्सव में आज केन्द्रीय विमानन मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया भी पहुंचे थे।
    कुंडलपुर महोत्सव में आज भगवान आदिनाथ का समवसरण सजाया गया था। इस समवसरण में आचार्यश्री अपने निर्यापक शिष्यों के साथ विराजमान थे। समवसरण में भगवान की देशना (धर्म उपदेश) के रूप में आचार्यश्री ने मंगल प्रवचन देते हुए कहा कि धर्म की विदेशी परिभाषा को स्वीकार करते हुए भारत को धर्म निरपेक्ष राष्ट्र कहा गया, यह बिल्कुल गलत है। धर्म का सही अर्थ समझा ही नहीं गया। धर्म हमें सन्मार्ग पर चलने की प्ररेणा देता है। धर्म हमारी आत्मा को पवित्र बनाता है। भारत की संस्कृति रही है कि धर्म पर चलने वाला राजा ही प्रजा को सुखी रख सकता है। धर्म से विमुख होकर जनता का हित कैसे हो सकता है? भारत के राजनेताओं को इस बारे में सोचना चाहिए। उन्होंने कहा कि भारत के नेताओं को इस पर गंभीरता से विचार करना चाहिए। आचार्यश्री ने धर्म के पांच गुण भी बताये। उन्होंने कहा कि जहां झूठ, चोरी, हिंसा, कुशील के साथ कम से कम परिग्रह (आवश्यकता के अनुसार वस्तुओं का संग्रह) की बात हो, वहां धर्म होता है।लोक के लिए धन का संग्रह तो किया जाए पर लोभवश संग्रह न किया जाए। दया का मूल ही धर्म है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में रहकर धर्म निरपेक्ष की बात करना, बिल्कुल गलत है। उन्होंने कहा कि मेरा यह संदेश केन्द्र सरकार तक पहुंचना चाहिए। आचार्यश्री के इस आव्हान पर लोगों ने तालियां बजाकर समर्थन किया।आचार्यश्री ने कहा कि हमारी मौलिक शिक्षा हर बच्चे को आत्मनिर्भर बना सकती है। हमें ऐसा आलोक चाहिए जो किसी भी ग्रहण की स्थिति में देश को अंधकार में भटकने से बचा सके।


    आचार्यश्री ने इस बात पर चिन्ता व्यक्त की कि आज षड्यंत्र पूर्वक तरीके से अंडे को शाकाहारी और दूध को मांसाहारी बताया जा रहा है। उन्होंने कहा कि इस धरती पर यदि साक्षात लक्ष्मी है तो वह गाय है। शास्त्रों में लिखा है कि भगवान आदिनाथ के पुत्र भरत चक्रवर्ती के समय वे तीन करोड़ गौशालाओं का संचालन करते थे। आचार्यश्री ने नकली दूध के प्रचलन पर चिन्ता व्यक्त करते हुए, त्यौहारों के समय दूध मावा से बनी नकली मिठाईयों पर रोक लगाने की जरूरत भी बताई।
    कुंडलपुर महोत्सव में आज सुबह से प्रतिष्ठाचार्य विनय भैया के निर्देशन में धार्मिक अनुष्ठान शुरू हुए। भगवान के अभिषेक, शांतिधारा व नित्य पूजन के बाद आचार्यश्री विद्यासागर जी महाराज की पूजा की गई। इसके बाद मुनि आदिसागर को केवल ज्ञान प्राप्त हुआ। आचार्यश्री के संघस्थ मुनियों ने लगभग 2000 प्रतिमाओं को सूर्यमंत्र देकर उनकी प्राण प्रतिष्ठा की। कुंडलपुर के बड़े बाबा मंदिर में विराजमान नवीन प्रतिमाओं को भी सूर्यमंत्र दिया गया।
    पंचकल्याणक में भगवान की प्रतिमाओं को पहनाये गये वस्त्र व सोने के आभूषण लेने भक्तों में होड मच गई। मूल विधि नायक भगवान के वस्त्र आभूषण की बोली 2 करोड़ 17 लाख में लगी।
    कुंडलपुर महोत्सव में भगवान के समवसरण के लोकार्पण का सौभाग्य दुनिया के सबसे बड़े मार्बल व्यापारी अशोक पाटनी परिवार को मिला। उन्होंने सपरिवार समवसरण का लोकार्पण किया।
    केन्द्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया और भाजपा प्रदेशाध्यक्ष वीडी शर्मा ने आज कुंडलपुर पहुंचकर बड़े बाबा आदिनाथ भगवानके दर्शन किए और छोटे बाबा आचार्यश्री विद्यासागर जी महाराज का आशीर्वाद लिया। सिंधिया ने प्रेस से चर्चा में कहा कि हम मप्र वासी सौभाग्यशाली हैं कि आचार्यश्री ने अपना अधिकांश समय मप्र में गुजारा है। उनका आशीर्वाद और मार्गदर्शन हमें मिलता रहता है। सिंधिया ने कहा कि प्रदेश की जनता की खुशहाली के लिये आशीर्वाद लेने कुंडलपुर आया हूं। वीडी शर्मा ने भी मीडिया से बात करते हुए कहा कि भगवान के दर्शन करने और आशीष लेने आया हूं।
    दस दिवसीय कुंडलपुर महोत्सव का समापन कल बुधवार को विशाल रथयात्रा फेरी के साथ होगा। फेरी के लिये देशभर से 27 रथ कुंडलपुर पहुंचकर चुके हैं। कल दोपहर में इन रथों पर भगवान को विराजमान कर मुख्य पांडाल की सात फेरियां लगाई जाएंगीं।

  • भारत के स्वाभिमान को जाग्रत करने का सबसे अनुकूल अवसरः आचार्य श्री विद्यासागर जी

    भारत के स्वाभिमान को जाग्रत करने का सबसे अनुकूल अवसरः आचार्य श्री विद्यासागर जी


    मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कुंडलपुर को पवित्र क्षेत्र घोषित किया

    कुंडलपुर 21 फरवरी (प्रेस इँफार्मेशन सेंटर)। दमोह जिले में स्थित जैन तीर्थ क्षेत्र कुंडलपुर में आज मुख्यमंत्री शिवराज सिंहासन चौहान ने धर्मसभा में आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज के सामने कहा कि तीर्थ क्षेत्र के आसपास के 7 किलोमीटर क्षेत्र को पवित्र स्थल के रूप में नोटिफाई किया जाएगा, यहां मांस मदिरा व अन्य अनैतिक गतिविधियों पर सख्ती से रोक रहेगी। चौहान आज सपत्नीक कुंडलपुर महोत्सव में शामिल होने पहुंचे थे।
    कुंडलपुर महोत्सव में आज ज्ञान कल्याणक (पूर्व) के धार्मिक अनुष्ठान प्रतिष्ठाचार्य विनय भैया के निर्देशन में किये गये। दोपहर में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान अपने मंत्रिमंडल सहयोगी गोपाल भार्गव व ओमप्रकाश सकलेचा के साथ महोत्सव स्थल पहुंचे। उनके साथ उनकी पत्नि श्रीमती साधना सिंह भी थीं। पूर्व वित्तमंत्री जयंत मलैया और रामकृष्ण कुसमरिया भी इस अवसर पर उपस्थित थे। कुंडलपुर कमेटी ने मुख्यमंत्री और श्रीमती साधना सिंह को चांदी का मुकुट पहनाकर, चांदी का प्रशस्ति पत्र सौंपा। चौहान ने आचार्यश्री विद्यासागर जी महाराज के चरणों में श्रीफल भेंटकर आचार्यश्री का संघ सहित आशीर्वाद लिया।

    आचार्यश्री विद्यासागर जी का आशीर्वाद लेने पहुंचे शिवराज सिंह चौहान और उनकी धर्मपत्नी


    आचार्यश्री ने प्रवचन में कहा कि भारत के गौरवशाली इतिहास को सामने लाना जरूरी है।ये तभी संभव है जब देश को इंडिया बनाने के बजाए भारत बनाया जाए। भारत की मुद्रा का अवमूल्यन केवल इसलिए हो रहा है क्योंकि हमने आत्मनिर्भरता की राह छोड़कर आयातित सोच को महत्व देना बंद नहीं किया है। आजादी के बाद संविधान निर्माताओं ने भगवान आदिनाथ का प्रतीक चिन्ह संविधान पर अंकित किया था। भगवान आदिनाथ ने समाज को आत्मनिर्भरता का संदेश दिया था। उन्होंने कहा कि कोरोना जैसी बीमारियों को दूर भगाना चाहते हो तो आयुर्वेद पर जोर देना होगा। आजादी के बाद साढ़े सात दशक बीत चुके हैं अब हमें तेजी से काम करना होगा।
    आचार्य श्री ने कहा कि देश की बुलंदी के लिए हमें भाषा की भूमिका की पहचान करनी होगी। संविधान में हमने बहुत सारी बातें शामिल की हैं लेकिन हमारी संस्कृति की सोच को हम अब तक केन्द्र में नहीं ला पाए हैं। हमारे न्यायालय जनता की भाषा में घोषणा नहीं करते हैं इसलिए जनता की आस्था लोकतंत्र में स्थापित नहीं हो पा रही है। अदालत में भाषा के महत्व पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने कहा कि मातृभाषा का असर पूरे समाज पर पड़ता है। पिता की भाषा(अंग्रेजी) देश के व्यक्तित्व का विकास अब तक नहीं कर पाई है। हम विदेशी विचार के प्रभाव में अपनी सहमति भले ही दे दें लेकिन इससे हमारी असफलता की इबारत ही लिखी जाती है। प्राणी की रक्षा तभी संभव है जब हम नकारात्मक भाव को तिलांजलि देंगे और हां की कूबत देखेंगे। सकारात्मकता का असर इतना प्रभावी होता है कि उसके नतीजे देखकर हम दंग रह जाते हैं।
    उन्होंने कहा कि कुंडलपुर के लोगों ने दस दिनों में विशाल पंचकल्याणक की तैयारियां करके साबित किया है कि यदि हम ठान लें तो सब संभव हो सकता है। भारतीयता को लागू करने में सरकारों को कोई शंका नहीं करनी चाहिए। जनता भी सब समझ रही है। आप आगे बढ़ें ,शंका न करें कि कुर्सी हिल जाएगी। जनता आपके सद्प्रयासों को हाथों हाथ लेगी, और आपकी कुस्री भी नहीं हिलेगी।हमें किसी पर अधिकार नहीं करना है,हमारी मंशा साफ है तो जाहिर है कि सबके अधिकार सुरक्षित रहेंगे। हमारी संस्कृति हमारे जीवन का अंग है, यही राष्ट्र के अंग अंग में ऊर्जा भरती है। हमारे देश में रामायण भी पढ़ी जाती है और महाभारत भी। आप इस संस्कृति पर चलेंगे तो देखेंगें कि जिस तरह आधी रात को विभीषण स्वयं चलकर राम की शरण में आया था और रावण राज का अंत हो गया था उसी तरह हम यदि आगे बढ़ेंगे तो सभी परेशानियों का अंत हो जाएगा। आज देश को सबसे उत्तम अवसर मिला है। हम फैसलें लेंगे तो दुनिया में कोई भी भारत को हिला नहीं पाएगा। उन्होंने मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के माध्यम से देश के नेताओं को संदेश दिया कि हम अपनी विचारधारा को मजबूत करेंगे तो उनकी राजनीति को कोई नुक्सान नहीं पहुंचेगा।


    कुंडलपुर महोत्सव में विशाल जनसमूह के सामने शिवराज सिंह ने 17 जनवरी 2006 की तारीख को याद करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री का पद संभाले सिर्फ दो महीने हुए थे, तभी आचार्यश्री ने बड़े बाबा को बड़े सिंहासन पर विराजमान करने का भाव किया। कलेक्टर एसपी और सभी कानूनविद चेतावनी दे रहे थे कि ऐसा हुआ तो सरकार जा सकती है। मैंने तय कर लिया सरकार जाए तो चली जाए, लेकिन आचार्यश्री की भावना के अनुसार बड़े बाबा को बड़े सिंहासन पर विराजमान करके रहेंगे। चौहान ने कहा कि पिछले चुनाव में हमारी सरकार चली गई थी। हमने सोचा अब पांच साल तक विपक्ष में बैठना है, लेकिन बडे बाबा आदिनाथ भगवान और छोटे बाबा आचार्यश्री की कृपा से मुझे फिर से मुख्यमंत्री पद मिला। मैं भाग्यशाली हूं कि बड़े बाबा के भव्य व दिव्य मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा मेरे कार्यकाल में हो रही है।
    मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार के संचालन में कभी कभी कुछ अड़चनें आती हैं। कुछ फैसले लेने में परेशानी होती है। ऐसे में मैं आचार्यश्री के चित्र के सामने ध्यान लगाने बैठता हूं और मेरी सारी समस्याओं का हल मुझे मिल जाता है। मुख्यमंत्री ने कहा कि आचार्यश्री को प्रणाम किये बिना वह घर से नहीं निकलते। चौहान ने पहली बार आचार्यश्री से कहा कि सभी के प्रति करूणा रखने वाले आचार्यश्री अपने शरीर के प्रति इतने निर्मोही क्यों हैं? मानवता के कल्याण के लिये आचार्य भगवन का हमारे बीच रहना बहुत जरूरी है।
    आचार्यश्री के प्रवचन से पहले निर्यापक मुनिश्री सुधासागर जी महाराज ने सुझाव दिया कि कुंडलपुर के 100 किलोमीटर क्षेत्र को पशुओं के लिये अभ्यारण्य घोषित किया जाए, जहां पशु निर्भय होकर विचरण कर सकें।
    कुंडलपुर महोत्सव में कल मंगलवार को भगवान आदिनाथ का ज्ञान कल्याणक महोत्सव मनाया जाएगा। सुबह से ही धार्मिक अनुष्ठान शुरू होंगे। दोपहर में आचार्यश्री समोशरन में बैठकर प्रवचन देंगे।

  • फतवों की बोली और संविधान से विरोधाभास

    फतवों की बोली और संविधान से विरोधाभास


    ( डॉ अजय खेमरिया)

    देश में लागू किशोर न्याय अधिनियम कहता है कि एक बालक 18 साल की आयु पूरा करने पर बालिग यानी वयस्क माना जायेगा।मताधिकार कानून भी यही परिभाषा देता है लेकिन उप्र के सहारनपुर स्थित देवबंद इस्लामी अध्ययन केंद्र कहता है कि 15 साल के बालक या बालिका को बालिग माना जाना चाहिये।हेग घोषणापत्र से बंधे भारत में बाल सरंक्षण और पुनर्वास के लिए किशोर न्याय अधिनियम को संसद ने पारित किया है लिहाजा इसके सभी उपबन्ध सभी नागरिकों पर लागू है।दत्तकग्रहण यानी बच्चों को गोद लेनें के लिए देश में एक विहित प्रक्रिया संस्थित है जो यह सुनिश्चित करती है कि गोद लिए जाने वाले हर बच्चे को अपने नए परिवार में वे सभी अधिकार हांसिल होगें जो उसे जैविक मातापिता से मिलते है यानी उत्तराधिकार से लेकर सम्पति तक।देवबंद की तालीमी दुनियां एक अलग फतवा जारी कर इस कानून को पलट रही है और यह निर्देश देती है कि गोद लिए गए किसी भी बालक को जैविक संतान की तरह किसी प्रकार के अधिकार नही मिल सकते है।यही नही यह फतवा कहता है कि ऐसा बालक परिवार के अन्य बच्चों के साथ 15 बर्ष की आयु के बाद कोई सुमेलन नही रखेगा।मसलन अगर किसी मुस्लिम दम्पति ने अपने दो पुत्रों के बाद किसी बेटी को विधिक प्रक्रिया के अनुरूप गोद लिया है तो वह बेटी अपने परिवार में पहले से मौजूद दो भाइयों के साथ बहन के रिश्ते में नही रह सकती है।यहां तक कि ऐसे बच्चे के साथ उसकी मां को भी पर्दा करना पड़ेगा।
    हाल ही में देवबंद उलूम के इन फतवों के विरुद्ध एक लिखित शिकायत राष्ट्रीय बाल सरंक्षण आयोग को प्राप्त हुई जिसकी जांच के बाद आयोग के अध्यक्ष प्रियंक कानूनगों ने एक पत्र उतरप्रदेश के मुख्य सचिव को भेजा है।इस पत्र में देवबंद के उन दस फतवों का उल्लेख है जो किशोर न्याय अधिनियम समेत भारतीय संविधान के अनुच्छेद 14,15,21 के अलावा आईटी एक्ट की धारा 69 के खुले उल्लंघन को रेखांकित करते हैं।आयोग के अध्यक्ष श्री कानूनगो इन फतवों को विधि के शासन के विरुद्ध भी निरूपित करते है।रोचक तथ्य यह है कि एक फतवा बालिकाओं की शिक्षा ऐसे स्कूलों में कराने को प्रतिबंधित करने की बात करता है जहां कक्षा 9 के बाद पढ़ाने का कार्य पुरुष शिक्षकों के द्वारा कराया जाता है।मुस्लिम बेटियों को सहशिक्षा देनें वाले स्कूलों में दाखिले को देवबंद के फतवे हराम घोषित कर रहे है।
    देश में लागू शिक्षा का अधिकार कानून बच्चों के शारीरिक दंड को निषिद्ध करता है लेकिन देवबंद के फतवे में इसे शरिया के अनुरूप बताकर उचित निरूपित किया गया है।यानी मदरसे में शिक्षक अगर चाहें तो बच्चों के साथ मारपीट कर सकते है।
    अगर किसी मुस्लिम परिवार की बेटियां किसी केंद्रीय विद्यालय या सहशिक्षा व्यवस्था वाले स्कूल में पढ़ती है तो क्या कक्षा 9 के बाद उन्हें इस स्कूल में पढ़ाया जा सकता है?इस विषय पर जारी देवबंद का फतवा स्पष्ट रूप से कहता है कि गैर इस्लामिक माहौल में जहां उस स्कूल की गणवेश पहनना अनिवार्य हो बेटियों को पढ़ाना हराम है और तत्काल किसी ऐसे स्कूल में उनका दाखिला कराया जाए जो इस्लामिक हो और शरिया के अनुसार वहाँ पुरुष शिक्षक न हो।
    देवबंद इस बात को भी प्रतिबंधित करता है कि अगर किसी स्कूल में ज्ञानवर्धन के उद्देश्य से भी मुस्लिम बच्चों को मंदिर,चर्च या अन्य धार्मिक पूजा स्थलों की सैर कराई जाए।ऐसे ही तमाम फतवों से देवबंद की आधिकारिक बेबसाइट भरी पड़ी है।खासबात यह है कि इन सवालों को उठाने वाले उच्च शिक्षित मुस्लिम है।देवबंद भारत में मुस्लिम दर्शन की बहावी धारा का सबसे प्रभावशाली और व्यापक अध्ययन केंद्र है।इसकी स्थापना बुनियादी रूप से खलीफा की धार्मिक सम्प्रभुता को वैचारिक रुप से मजबूत करने के उद्देश्य से की गई थी।सवाल यह है कि भारत में जिसे स्कॉलरों की संस्था कहा जाता है वहां नागरिकों के लिए संविधान प्रदत्त अधिकारों एवं संसद द्वारा निर्मित कानूनों की अनुपालना के लिए प्रेरित करने के स्थान पर शरियत के अबलंबन की शिक्षा क्यों दी जा रही है।इन फतवों से आखिर किसका भला हो सकता है इस सवाल के जबाब में कोई मुस्लिम स्कॉलर सामने नही आना चाहता है उल्टे बाल सरंक्षण आयोग पर साम्प्रदायिक नजरिये से काम के आरोप लगाए जा रहे है।इस्लामिक स्टूडेंट्स ऑर्गनाइजेशन ऑफ इंडिया एसआईओ के राष्ट्रीय सचिव फवाज शाहीन ने एक बयान जारी कर इस मामले का बचाव करते हुए कहा है कि ”फतवे, निजी एवं सामाजिक जीवन से जुड़े विभिन्न मुद्दों के संदर्भ में केवल धार्मिक विद्वानों के निजी विचार होते हैं”।यहां बुनियादी सवाल यह है कि जब नागरिकता संशोधन कानून पर देश भर में विरोध के स्वर अल्पसंख्यक समुदाय द्वारा बुलंद किये जा रहे थे तब संविधान को आगे रखा जा रहा था।नागरिक हितों को संवैधानिक सरंक्षण की दलील दी जा रहीं थी और देवबंद इसी संविधान द्वारा प्रदत्त समता और शिक्षा के अधिकार को छोड़कर शरिया की अनुपालना की वकालत कैसे कर सकता है।कैसे किशोर न्याय कानून से विपरीत गोद लिए जाने वाले बालकों के हकों के विरुद्ध धार्मिक आड़ लेकर क्रूरता और बाल शोषण की सलाह दे सकता है?फतवे अगर कानून नही है तो क्या इस बात की गारंटी है कि कोई भी इन्हें जीवन में अपनाता नही है।जिस व्यापकता के साथ देवबंद की आधिकारिक बेबसाइट पर कुलीनवर्गीय लोग इस विमर्श को आगे बढ़ा रहे है उससे स्पष्ट है कि भारत में संवैधानिक व्यवस्थाओं के प्रति एक बड़ा वर्ग सुविधाजनक अनुज्ञा की मानसिकता से जीना चाहता है।बेहतर हो देवबंद जैसे संस्थान जिनकी पहुँच भारत में करोड़ों मुसलमानों तक इस बात की शिक्षा का प्रसार करे कि देश के कानून ही सर्वोपरि है यह न केवल नागरिकों के हित में है अपितु उन मासूमों के रूप में अल्लाह की इबादत भी है जिसे खुदा का घर कहा गया है।दुनियां के घोषित इस्लामिक राष्ट्रों ने भी नवाचारों एवं नवोन्मेष के बल पर तकनीकी,प्रौधोगिकी औऱ आधुनिकता के सहारे खुद को बदला है लेकिन भारत में इस्लामिक कट्टरतावादी अभी भी करोड़ों बच्चों को आधुनिकता और शिक्षा की रोशनी से दूर रखना चाहते है।हजारों करोड़ के दान से चलने वाले देवबंद जैसे संस्थानों के कर्ताधर्ता खुद तो उन्नत जीवनशैली और संसाधनों के उपयोग में आगे है लेकिन करोड़ों बेटियों को शरीयत के नाम पर आगे बढ़ने से रोककर देश और कौम दोनों का नुकसान कर रहे है।
    (सदस्य किशोर न्याय बोर्ड मप्र )

  • कृषि को लाभदायी बनाने का मॉडल बना मध्यप्रदेश

    कृषि को लाभदायी बनाने का मॉडल बना मध्यप्रदेश

    सुरेश गुप्ता
    किसानों की अथक मेहनत से आज प्रदेश कृषि विकास के क्षेत्र में सर्वोपरि है। प्रदेश को कृषि उत्पादन तथा योजना संचालन क्षेत्र में बेहतर प्रदर्शन के लिए सात कृषि कर्मण अवार्ड प्राप्त हुए हैं। प्रदेश आज दलहन-तिलहन के क्षेत्र और उत्पादन में देश में प्रथम है। सोयाबीन, उड़द के क्षेत्र एवं उत्पादन में प्रदेश, देश में प्रथम है। गेहूँ, मसूर, मक्का एवं तिल फसल के क्षेत्र एवं उत्पादन में देश में दूसरे स्थान पर है। सम्पूर्ण खाद्यान्न फसलों के उत्पादन में प्रदेश का देश में तीसरा स्थान है।
    मध्यप्रदेश ने देश में सबसे पहले कृषि को लाभदायी बनाने की दिशा में कदम बढ़ाये थे। मुख्यत: पाँच आधार बिन्दु क्रमश: कृषि लागत में कमी, उत्पादन एवं उत्पादकता में वृद्धि, कृषि विविधीकरण, उत्पाद का बेहतर मूल्य और कृषि क्षेत्र में आपदा प्रबंधन पर संकल्पित होकर कार्य किया गया। वर्ष 2004-05 में प्रदेश का कुल कृषि उत्पादन मात्र 2 करोड़ 38 लाख मी.टन था जो वर्ष 2020-2021 में बढ़कर 6 करोड़ 69 मी. टन हो गया है।
    प्रदेश में जैविक खेती का कुल क्षेत्र लगभग 16 लाख 37 हजार हेक्टेयर है जो देश में सर्वाधिक है। जैविक उत्पाद का उत्पादन 14 लाख 2 हजार मी.टन रहा, जो क्षेत्रफल की भाँति ही देश में सर्वाधिक है। जैविक खेती को प्रोत्साहन स्वरूप प्रदेश में कुल 17 लाख 31 हजार क्षेत्र हेक्टेयर जैविक प्रमाणिक है, जिसमें से 16 लाख 38 हजार एपीडा से और 93 हजार हेक्टेयर क्षेत्र, पी.जी.एस. से पंजीकृत है।
    प्रदेश ने पिछले वित्त वर्ष में 2683 करोड़ रूपये के मूल्य के 5 लाख मी.टन से अधिक के जैविक उत्पाद निर्यात किये हैं। प्रदेश में जैविक वनोपज भी ली जा रही है। इस वर्ष प्रदेश में 99 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में प्राकृतिक खेती का लक्ष्य है। प्रदेश के कृषि विश्वविद्यालयों के पाठ्यक्रम में जैविक/ प्राकृतिक खेती को शामिल करने की योजना है। दोनों कृषि विश्वविद्यालय में कम से कम 25 हेक्टेयर भूमि को प्राकृतिक खेती प्रदर्शन श्रेत्र में बदला जायेगा।
    वर्ष 2016 से प्रारम्भ प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के लिए प्रदेश के वार्षिक बजट में 2200 करोड़ रूपये की राशि का प्रावधान है। प्रदेश में प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में कुल वर्षवार 4 करोड़ 43 लाख 61 हजार 570 किसान खरीफ 2016 से रबी 2021-22 तक (पाँच वर्षों में) पंजीकृत हुए। वर्तमान समय तक 73 लाख 69 हजार 614 किसानों को रबी 2019-20 तक की राशि 16 हजार 750 करोड़ 87 लाख रूपये का दावा राशि का वितरण किया गया है। यह प्रीमियम से दावा राशि का 93.41 प्रतिशत है।
    फसल बीमा का एंड-टू-एंड कम्‍प्‍युटराईजेशन प्रक्रियाधीन है। बीमा इकाई निर्धारण की प्रक्रिया भू-अभिलेख के साथ एकीकृत कर पूर्णत: ऑनलाईन है। औसत उपज उत्पादन के आकलन में रिमोर्ट सेंसिंग तकनीक के उपयोग की परियोजना प्रारंभ की गई है। पंजीयन की प्रक्रिया को आधार कार्ड से लिंक किया है, जिससे एक रकबे का एक ही बार बीमा हो सकेगा और दोहरीकरण की स्थिति निर्मित नहीं होगी।
    प्रदेश देश में बीज प्रमाणीकरण में अग्रणी है। बीज की गुणवत्ता के लिये क्यू.आर. कोड के प्रयोग का नवाचार किया गया है। किसानों की भागीदारी से संकर बीजों का उत्पादन कर प्रदेश को हाइब्रीड बीज उत्पादन का हब बनाया जा रहा है। प्रत्येक संभाग में एक के मान से दस उर्वरक और बीज परीक्षण प्रयोगशाला स्थापित की जा रही है। उन्नत बीजों की उपलब्धता बढ़ाने के लिए रोलिंग प्लान को अद्यतन किया गया है। तीन हजार नये बीज ग्राम विकसित किये जा रहे हैं।
    जिला स्तर पर 50 मृदा परीक्षण प्रयोगशाला स्थापित की गई हैं और विकासखण्ड स्तर पर 265 मृदा स्वास्थ्य परीक्षण प्रयोगशालाएँ स्थापित की जा रही हैं। प्रदेश के 90 लाख किसानों को नि:शुल्क स्वाईल हेल्थ कार्ड वितरित किये जा चुके हैं।
    कृषि अधोसंरचना में सुधार के क्रम को प्रोत्साहन और वित्तीय सहायता देने की भारत सरकार की कृषि अवसंरचना निधि के उपयोग में प्रदेश, देश में अग्रणी है। इस निधि के अंतर्गत बैंकों द्वारा 1558 करोड़ रूपये से अधिक की राशि के 2129 आवेदन सत्यापित कर 1107 करोड़ रूपये के ऋण वितरित कर दिये गये हैं।
    पिछले डेढ़ दशक में सिंचाई का बजट 1005 करोड़ से बढ़ाकर 10 हजार 928 करोड़ रूपये किया गया है। यही वजह है कि 7.5 लाख हेक्टेयर की सिंचाई क्षमता 6 गुना बढ़कर आज की स्थिति में 43 लाख हेक्टेयर है। इस क्षमता को अगले तीन वर्ष में 65 लाख हेक्टेयर तक करने का लक्ष्य है। अकेले पिछले 2 वर्ष में 2 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई क्षमता निर्मित की जा चुकी है। वर्तमान में 60 हजार करोड़ से अधिक की लागत की 361 सिंचाई योजनाएँ निर्माणाधीन हैं। आने वाले तीन साल में 30 हजार करोड़ की परियोजनाओं को स्वीकृति दी जायेगी। जिन क्षेत्रों में पारम्परिक माध्यमों से सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराना संभव नहीं है, वहाँ भी पर ड्राप मोर क्राप कार्यक्रम सिंचाई सुविधा उपलब्ध करायी जा रही है।
    ़ राज्य सरकार प्रदेश को आवंटित 18.25 एमए एफ नर्मदा जल का वर्ष 2024 तक उपयोग सुनिश्चित करने की दिशा में तेजी से काम कर रही है। वर्तमान में साढ़े 12 लाख हेक्टेयर में सिंचाई सुविधा के‍लिए 35 हजार करोड़ रूपये की परियोजनाओं का निर्माण प्रगति पर है।
    राज्य सरकार के प्रयासों से प्रदेश बिजली के क्षेत्र में आत्म-निर्भर है। प्रदेश की उपलब्ध क्षमता बढ़कर 21 हजार 451 मेगावॉट हो गयी है। कृषि उपभोक्ताओं को प्रतिदिन 10 घंटे बिजली दी जा रही है।
    अनुसूचित जाति एवं जनजाति के एक हेक्टेयर तक भूमि वाले 5 हार्सपावर तक के स्थायी कृषि पंप उपभोक्ताओं को मुफ्त बिजली दी जा रही है। योजना में 9 लाख 41 हजार कृषक लाभान्वित हो रहे हैं। इस वित्त वर्ष में इन्हें कृषि कार्यों के लिए 5 हजार करोड़ रूपये की नि:शुल्क बिजली उपलब्ध करायी गई।
    अटल किसान ज्योति योजना में 10 हार्सपावर तक के अनमीटर्ड स्थायी कषि पंप कनेक्शनों को 750 रूपये और 10 हार्सपावर से अधिक के अनमीटर्ड स्थायी पंप कनेक्शनों को 1500 रूपये प्रति हार्सपावर प्रतिवर्ष के फ्लेट दर से बिजली प्रदाय की जा रही है। साथ ही 10 एच.पी. के मीटर युक्त स्थायी, अस्थायी पंप कनेक्शनों को भी ऊर्जा प्रभार में रियायत दी गई है। योजना से लगभग 26 लाख कृषि उपभोक्ता लाभान्वित हो रहे हैं। योजना के लिए इस वित्त वर्ष में 11 हजार 300 करोड़ रूपये की सब्सिडी का प्रावधान है।
    किसानों के स्वावलंबन, आय और आत्म-निर्भरता बढ़ाने के लिए कुसुम योजना का लाभ भी किसानों को सुलभ कराया जा रहा है। योजना में प्रदेश को आवंटित 300 मेगावाट लक्ष्य के विरूद्ध 296 मेगावाट क्षमता के लिए 139 किसानों का चयन किया जा चुका है। कुसुम ‘घ’ में 1500 मेगावाट की परियोजना के लिए निविदा की कार्यवाही की जा रही है। योजना में किसान अपनी कम उपजाऊ या बंजर जमीन पर सोलर संयंत्र की स्थापना कर शासन अपने घर, सिंचाई के उपयोग के बाद बची बिजली शासन को बेच सकते हैं। मुख्यमंत्री सोलर पंप योजना में लगभग 25 हजार किसानों ने पंजीयन करवाया है। कुसुम ‘सी’ योजना में ग्रिड कनेक्टेड पंपों को सौर ऊर्जा से उर्जीकृत किया गया है।
    प्रदेश में किसानों को शून्य प्रतिशत ब्याज पर फसल ऋण दिया जा रहा है। वर्ष 2003-04 में कृषकों को खेती के लिए मात्र 1273 करोड़ का फसल ऋण मिला था। इस वर्ष किसानों को रुपये 14 हजार 428 करोड़ के ऋण उपलब्ध कराये जा चुके है। विगत दो वर्ष में किसानों को 26 हजार करोड़ के ऋण शून्य प्रतिशत ब्याज दर पर दिये गये हैं।
    समर्थन मूल्य पर इस साल 16 लाख 16 हजार 671 किसानों से 128 लाख 15 हजार 970 मी.टन गेहूँ और 6 लाख 61 हजार 619 धान उत्पादक किसानों से 45 लाख 85 हजार 512 मीट्रिक टन धान का उपार्जन किया गया है। इसके अलावा प्रदेश में ज्वार, बाजरा, चना, सरसों, मसूर, मूंग एवं उड़द का उपार्जन भी किया जा रहा है। वर्ष 2020 में लगभग 15 लाख 81 हजार किसानों से 1 करोड़ 29 लाख 42 हजार 131 मी.टन गेहूँ का उपार्जन कर पंजाब को पीछे छोड़ते हुए मध्यप्रदेश देश का नंबर वन राज्य बना था।
    अपेक्स एवं जिला सहकारी केन्द्रीय बैंकों की शाखाओं में कोर-बैंकिंग सेवाएँ प्रारंभ करने के साथ एनईएफटी, एसएमएस एवं डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर की सुविधा उपलब्ध कराई जा चुकी है। एटीएम की सुविधा भी है। प्राथमिकी कृषि सहकारी साख समितियों के सदस्य कृषकों को भी बैंकिंग से जोड़ा जा रहा है।
    अब तक प्रदेश में निजी क्षेत्र में लगभग 3150 कस्टम हायरिंग सेंटर की स्थापना की गई है। इससे किसानों को सस्ती दर पर आधुनिकतम कृषि यंत्र किराए पर सुलभ हो रहे हैं।
    प्रदेश में उद्यानिकी के विकास की विभिन्न योजनाओं के क्रियान्वयन के फलस्वरूप क्षेत्र विस्तार, उत्पादन एवं उत्पादकता में वृद्धि हुई है। उद्यानिकी फसल क्षेत्रफल वर्ष 2005 के 4 लाख 69 हजार से बढ़कर वर्ष 2020-21 में 23 लाख 43 हजार हेक्टेयर और उद्यानिकी फसलों का उत्पादन वर्ष 2005 के 42 लाख 9 हजार मी. टन से बढ़कर वर्ष 2020-21 में 340 लाख 31 हजार मी. टन तक पहुँच गया है। उद्यानिकी फसलों का क्लस्टर में विस्तार कराया जा रहा है। उत्पादन एवं उत्पादकता की वृद्धि को बनाये रखने के लिये उत्पादकों को गुणवत्ता युक्त पौध रोपण सामग्री प्राप्त होने पर विशेष ध्यान दिया जाकर उद्यानिकी नर्सरियों का उन्नयन किया जा रहा है। फसलोत्तर प्रबंधन के दिशा में विशेष प्रयास से आज प्रदेश में नश्वर उत्पादों के भण्डारण के लिये 8 लाख 81 हजार मी. टन शीत भण्डारण एवं 3 लाख 79 हजार मी. टन से ज्यादा प्याज भण्डारण क्षमता उपलब्ध है। वर्ष 2007-08 में प्याज भंडारण क्षमता मात्र 8530 मी. टन थी। उद्यानिकी में यंत्रीकरण को भी बढ़ावा दिया जा रहा है।
    कृषि एवं उद्यानिकी फसलों पर आधारित लघु एवं मध्यम प्र-संस्करण उद्योगों को बढ़ावा दिया जा रहा है। प्रदेश में तेजी से विकसित हो रहे खाद्य प्र-संस्करण उद्योग से नवीन रोजगार के अवसर भी सृजित हो रहे हैं।
    प्रदेश का दुग्ध उत्पादन पिछले वर्ष 7.52 प्रतिशत वृद्धि के साथ बढ़कर 17.1 मिलियन टन हो गया है। राष्ट्रीय स्तर पर यह वृद्धि लगभग साढ़े पाँच प्रतिशत है। प्रदेश दुग्ध उत्पादन और पशुधन में 4 करोड़ 6 लाख 37 हजार 375 की संख्या के साथ आज देश में तीसरे स्थान पर है। पशुओं की स्वास्थ्य रक्षा के लिये व्यापक तौर पर नि:शुल्क पशु टीकाकरण किया जा रहा है। बकरी दूध विक्रय की भी शुरूआत की गई है। पशुपालन के क्षेत्र में आत्म-निर्भर बनाने के लिये 7 हजार युवाओं को जागरूक किया गया। 25 हजार 124 पशुपालकों को क्रेडिट कार्ड उपलब्ध कराये गये हैं। राष्ट्रीय पशुधन मिशन में प्रदेश में सर्वाधिक 530 आवेदन स्वीकृति के लिये बैंकों को भेजे गये हैं, जो देश में सर्वाधिक है।
    प्रदेश के सिंचाई जलाशयों एवं ग्रामीण तालाबों के कुल उपलब्ध जल-क्षेत्र के 99 प्रतिशत से अधिक क्षेत्र में मछली पालन हो रहा है। किसानों की तरह मछुआरों को भी शून्य प्रतिशत ब्याज पर ऋण सुविधा उपलब्ध कराने फिशरमेन क्रेडिट कार्ड बनाये जा रहे हैं। अभी तक कुल 16 हजार 320 मछुआ क्रेडिट कार्ड बनाये जा चुके हैं। मत्स्योपादन में वृद्धि के लिये पंगेशियस एवं गिफ्ट तिलापिया जैसी आधुनिक पद्धति का उपयोग को बढ़ावा दिया जा रहा है।