Month: January 2022

  • हाईब्रिड शिक्षा में सफल पीढ़ी बनाने की अपार संभावनाएं : राज्यपाल श्री पटेल

    हाईब्रिड शिक्षा में सफल पीढ़ी बनाने की अपार संभावनाएं : राज्यपाल श्री पटेल

    भोपाल 18 जनवरी(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)। राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने कहा है कि हाईब्रिड शिक्षा में व्यक्ति और क्षेत्रपरक, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और उसके विस्तार की असीम संभावनाएँ हैं। उन्होंने कहा है कि ऑनलाइन डिजिटल प्लेटफॉर्म और संस्था में शिक्षा के समन्वित स्वरूप हाईब्रिड शिक्षा के नए आयामों के बेहतर उपयोग पर विचार करना ज़रूरी है। श्री पटेल केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड के विद्यालयों के संगठन सहोदय के 27वें दो दिवसीय वार्षिक सम्मेलन के समापन समारोह को आभासी माध्यम से आज राजभवन में संबोधित कर रहे थे।
    राज्यपाल श्री मंगुभाई पटेल ने कहा कि पिछले दो सालों के दौरान कोरोना ने हमारे जीवन जीने का ढंग बदल दिया है। पढ़ाई-लिखाई से लेकर काम के तरीके और मनोरंजन के साधन सब बदल गए हैं। हाईब्रिड शिक्षा आपदा से मिला अवसर है। उन्होंने कहा कि ग्रामीण पहुँचविहीन क्षेत्रों के वंचित वर्गों तक गुणवत्तापूर्ण शिक्षा पहुँचाने की चुनौतियों के समाधान हाईब्रिड शिक्षा में खोजे जाने चाहिए। वंचित वर्गों और क्षेत्रों के छात्रों के लिए वर्चुअल रियलिटी के द्वारा शिक्षण की व्यवस्था की पहल की जानी चाहिए। वंचित वर्गों को शिक्षा के नए अवसर दिलाने और निवेश बढ़ाने के प्रयास भी जरूरी हैं।
    राज्यपाल श्री पटेल ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के द्वारा भारतीय सनातन संस्कृति की मूल भावनाओं और 21वीं सदी की जरूरतों के लिए उपयुक्त भावी पीढ़ी के निर्माण का अवसर दिया है। वैश्विक परिदृश्य में रोजगार की संभावनाओं के दृष्टिगत शिक्षा में कौशल उन्नयन पर विशेष ध्यान दिया जाना समय की मांग है। छात्र-छात्राओं में देश के वृहत्तर आर्थिक संदर्भों और वैश्विक अर्थ-व्यवस्था की समझ विकसित करना जरूरी है। पाठ्यक्रमों में सामाजिक व्यवहार और नेतृत्व क्षमता संबंधी कौशल को भी शिक्षा का अंग बनाया जाना आवश्यक है। पाठ्यक्रम में ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रमों और विषय-सामग्री को शामिल किया जाए जो विद्यार्थियों को हमारी गौरवशाली संस्कृति की विविधता में एकता को देखने का समग्र नजरिया प्रदान करें।
    कांफ्रेंस के प्रारम्भ में केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड के चेयरमैन श्री मनोज आहूजा ने स्वागत उद्बोधन दिया। बोर्ड के डायरेक्टर एकेडमिक श्री जोसेफ एमानुअल ने आभार माना।

  • दुष्कर्म के आरोपी राजेश विश्वकर्मा की अवैध प्रॉपर्टी जमींदोज

    दुष्कर्म के आरोपी राजेश विश्वकर्मा की अवैध प्रॉपर्टी जमींदोज

    भोपाल,17 जनवरी(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)। इंदौर जिले के थाना क्षिप्रा पर 15 जनवरी 2022 को एक महिला ने शिकायत की थी कि उसका पति राजेश विश्वकर्मा अपने अन्य साथियों अंकेश, विवेक, विपिन, और आनंद को लेकर उसके साथ सामूहिक दुष्कर्म और अप्राकृतिक कृत्य करता है। पीड़िता की रिपोर्ट पर थाना क्षिप्रा ने इन पांच आरोपियों के विरुद्ध अपराध क्रमांक 24/2022 पंजीबद्ध करके जांच शुरु की। पुलिस ने पाया कि महिला की शिकायत सही है और आरोपी गण अपने सामाजिक रसूख की आड़ में अन्य लोगों से भी अभद्रता करते हैं। उनकी हरकतें अशोभनीय और आततायी श्रेणी की हैं। पुलिस टीम ने सक्रियता से कार्रवाई करते हुए घटना के सभी आरोपियों की पहचान की और उन्हें गिरफ्तार भी कर लिया।
    महिला की दुर्दशा और प्रकरण की गंभीरता को देखते हुए पुलिस तथा जिला प्रशासन ने संयुक्त कार्रवाई की और आरोपी राजेश विश्वकर्मा की अवैध संपत्तियों की जानकारी निकाली। पुलिस और प्रशासन ने पाया कि उसने अवैध तरीकों से संपत्तियां बनाई हैं और इसी वजह से उसके हौसले बुलंद हो गए हैं। प्रशासन ने आरोपी राजेश विश्वकर्मा के अवैध फार्म हाऊस और मकान को आनन फानन में जमींदोज कर दिया।अन्य आरोपियों की संपत्तियों और उनसे प्रताड़ित महिलाओं की जानकारी भी प्राप्त की जा रही है।

  • घुसपैठियों को बसाने वालों को बख्शने पर  सतना डीएम को लोकायुक्त ने तलब किया

    घुसपैठियों को बसाने वालों को बख्शने पर सतना डीएम को लोकायुक्त ने तलब किया

    भोपाल,13 जनवरी(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)। सतना जिले की नयागांव ग्राम पंचायत में बंग्लादेशी घुसपैठियों को इंदिरा आवास देकर बसाने वाले अफसर पर कार्रवाई न किए जाने से लोकायुक्त जस्टिस एन के गुप्त खासे नाराज हैं। पिछले ढाई सालों से आरोपी सीईओ पर कार्रवाई न किए जाने पर लोकायुक्त ने सतना कलेक्टर और एसपी को अपने सम्मुख हाजिर होने के निर्देश दिए हैं।

    सतना कलेक्टर अनुराग वर्मा और एसपी धर्मवीर सिंह यादव को लोकायुक्त कार्यालय में 11 फरवरी को जांच प्रकरण 5032016 के संबंध में हाजिर होने के निर्देश दिए गए हैं। शिकायत प्राप्त होने पर ये प्रारंभिक जांच राजीव गांधी जल ग्रहण क्षेत्र प्रबंधन मिशन भोपाल के अतिरिक्त संचालक से कराई गई थी। जांच प्रतिवेदन में सतना जिलेके मझगंवा विकासखंड की वीरसिंह पुर तहसील के अंतर्गत नयागांव ग्रामपंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी संदीप शर्मा को दोषी पाया गया है। आरोप है कि श्री शर्मा ने इंदिरा आवास योजना के अंतर्गत हितग्राही अब्दुल कय्यूम, इरफान खान, मेहरून खान, सलीम खान,श्रीमती पुरवहिया खान,और रुबाब खान को वर्ष 2013-14 में आवास स्वीकृत किए थे और पहली किस्त के रूप में 35000 रुपए की राशि भी दे दी थी।

    शिकायत मिलने पर पाया गया कि ये सभी हितग्राही बंग्लादेशी हैं और अवैध रूपसे घुसपैठिए बनकर यहां रह रहे हैं। अतिरिक्त संचालक के जांच प्रतिवेदन के आधार पर लोकायुक्त कार्यालय ने लगभग ढाईसाल पहले सतना कलेक्टर से पूछा था कि इस संबंध में वे वस्तुस्थिति से अवगत कराएं। इसके बावजूद सतना कलेक्टर ने न तो कोई कार्रवाई की न ही संगठन को वस्तुस्थिति से अवगत कराया। इससे नाराज लोकायुक्त ने कलेक्टर और एसपी दोनों को 11 फरवरी को हाजिर होने के निर्देश दिए हैं।

    सूत्रों का कहना है कि सतना में कांग्रेस के विधायक सिद्धार्थ कुशवाहा  और चित्रकूट के कांग्रेसी विधायक नीलांशु चतुर्वेदी के संरक्षण की वजह से ये कार्रवाई नहीं हो पा रही है। वे अपने क्षेत्र में इसी तरह के घुसपैठियों को बसाकर वोट बैंक बढ़ा रहे हैं। घुसपैठियों के कारण विंध्य क्षेत्र के हालात पश्चिम बंगाल की तरह विस्फोटक बनते जा रहे हैं।

    जन न्याय दल के प्रदेश प्रवक्ता आलोक सिंघई ने आरोप लगाया है कि  मैहर के विधायक नारायण त्रिपाठी और अन्य कांग्रेसी नेता लंबे समय से विंध्य प्रांत की मांग उठाकर सरकार पर दबाव बना रहे हैं। इस वोट बैंक की राजनीति की आड़ लेकर वे सरकारी नौकरियां बेचने का कारोबार करते हैं और सरकारी बजट छीनने का षड़यंत्र भी रचते हैं। अवैध घुसपैठियों की वजह से देश की सुरक्षा पर खतरा तो बढ़ ही रहा है साथमें आम नागरिकों के टैक्स से प्राप्त संसाधनों का भी दुरुपयोग हो रहा है।

  • पंचायत चुनाव नहीं कराए तो आंदोलन करेगी कांग्रेस,कमलनाथ ने धमकाया

    पंचायत चुनाव नहीं कराए तो आंदोलन करेगी कांग्रेस,कमलनाथ ने धमकाया

    भोपाल,10 जनवरी(प्रेस इँफार्मेशन सेंटर)। मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने प्रदेश की शिवराज सिंह चौहान सरकार को चेतावनी देकर कहा है कि सरकार दो महीने के अंदर परिसीमन, रोटेशन और ओबीसी आरक्षण के साथ पंचायत चुनाव कराए, नहीं तो कांग्रेस आंदोलन करेगी।
    सोमवार को भोपाल में मीडियाकर्मियों से बातचीत में कमलनाथ ने बीजेपी को ओबीसी विरोधी बताया।

    उन्होंने कहा कि सरकार की ओबीसी और आरक्षण विरोधी नीति के कारण प्रदेश में सात साल से पंचायत चुनाव नहीं हो पा रहे हैं। कुछ महीने पहले शिवराज सरकार इसके लिए अध्यादेश लेकर आई थी। उन्होंने अध्यादेश को काला कानून बताते हुए कहा कि इसमें न रोटेशन का पालन किया गया, न परिसीमन का और न आरक्षण का। इसी वजह से चुनाव रद्द हो गए। अगर सरकार दो महीने के भीतर परिसीमन, रोटेशन और ओबीसी आरक्षण के साथ ग्राम पंचायत चुनाव नहीं कराएगी तो कांग्रेस पार्टी जिला से लेकर ग्राम पंचायत स्तर तक आंदोलन करेगी ।


    कमलनाथ ने कहा कि शिवराज सिंह चौहान 15 साल से मुख्यमंत्री हैं, लेकिन कभी ओबीसी को 27% आरक्षण देने का प्रस्ताव सदन में नहीं रखा। पिछले दो साल से ओबीसी स्कॉलरशिप का 1210 करोड़ रुपये बकाया है। छात्र परेशान हैं, लेकिन सरकार को कोई चिंता नहीं है।


    हाल में हुई ओलावृष्टि के सवाल पर उन्होंने कहा कि सरकार को तत्काल किसानों को मुआवजा देना चाहिए। इस बारे में मुख्यमंत्री शिवराज की घोषणा को धूठा बताते हुए कमलनाथ ने कहा कि किसानों को हुए नुकसान का आकलन अब तक शुरू नहीं हुआ। फसल बीमा की राशि के भुगतान में हुई देरी के लिए भी उन्होंने बीजेपी सरकार को जिम्मेदार ठहराया।

  • ग्रेडिंग के आधार पर पुरस्कृत होंगी प्रदेश की पंचायतें

    ग्रेडिंग के आधार पर पुरस्कृत होंगी प्रदेश की पंचायतें

    भोपाल,10 जनवरी(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)।मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा है कि प्रदेश की पंचायतों के कार्य की ग्रेडिंग की जायेगी तथा जो पंचायतें अच्छा कार्य कर रही हैं, उन्हें पुरस्कृत किया जायेगा। हर पंचायत की विकास योजना बनाई गई है, उस पर अमल कर ‘स्मार्ट विलेज’ बनाये जायेंगे।

    मुख्यमंत्री श्री चौहान आज मंत्रालय में पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के कार्यों की समीक्षा कर रहे थे। उन्होंने विभाग द्वारा गाँव-गाँव में कचरा संग्रहण एवं परिवहन के लिये बनाये गये ‘मोबाइल एप’ का लोकार्पण भी किया।

    पंचायत एवं ग्रामीण विकास राज्य मंत्री रामखेलावन पटेल, मुख्य सचिव इकबाल सिंह बैंस, सीईओ मध्यप्रदेश डे राज्य आजीविका मिशन एल.एम. बेलवाल तथा संबंधित अधिकारी उपस्थित थे।

    मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि प्रदेश में स्व-सहायता समूहों द्वारा 127 “दीदी कैफे” संचालित किये जा रहे हैं। ये स्वल्पाहार केन्द्रों के रूप में सफलतापूर्वक संचालित हो रहे हैं। आने वाले समय में वल्लभ भवन, विंध्याचल, सतपुड़ा आदि स्थानों पर भी “दीदी कैफे” खोले जायेंगे।

    मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि प्रदेश में प्लास्टिक कचरा निपटान के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य हो रहा है। गाँव-गाँव से प्लास्टिक कचरा संग्रहण की व्यवस्था की गई है, जहाँ से प्लास्टिक कचरा संग्रहण केन्द्रों तक पहुँचेगा और वहीं से इसकी बिक्री होगी। प्रदेश में 28 प्लास्टिक संग्रहण केन्द्र खोले जा रहे हैं, जिनका संचालन स्व-सहायता समूह की महिलाओं द्वारा किया जायेगा। प्रदेश में लगभग 9 हजार किलोमीटर सड़कों के निर्माण में वेस्ट प्लास्टिक का उपयोग किया जा रहा है।

    मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि प्रदेश में 42 हजार से अधिक पुरानी जल-संरचनाओं के पुनउर्द्वार का कार्य प्रारंभ किया गया है। यह कार्य मनरेगा एवं अन्य योजनाओं से कराया जा रहा है। इससे बड़े क्षेत्र में सिंचाई, मछली-पालन, सिंघाड़ा उत्पादन आदि गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा।

    मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि प्रदेश में समुदाय आधारित ग्रामीण पर्यटन में “होम-स्टे” योजना सफलता से संचालित की जा रही है। योजना के प्रति पर्यटकों में अच्छा उत्साह दिख रहा है। निवाड़ी जिले के लदपुरा ग्राम तथा पन्ना जिले के मदला ग्रामों में ‘होम-स्टे’ में बड़ी संख्या में पर्यटक रुक रहे हैं। योजना की सफलता के लिये मुख्यमंत्री श्री चौहान ने सभी संबंधितों को बधाई दी गई।

    मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि हर गाँव के इतिहास, गौरव, पहचान, संस्कृति, महापुरुषों आदि को पुन: स्थापित करने के लिये सरकार द्वारा निर्णय लिया गया है कि प्रत्येक गाँव में हर वर्ष “ग्राम स्थापना दिवस” मनाया जायेगा। उन्होंने आगामी अप्रैल माह से इस संबंध में कार्यवाही के निर्देश दिये।

    हमारे उत्पाद “जैम” और “अमेजन” पर बिकें

    मुख्यमंत्री श्री चौहान ने निर्देश दिये कि प्रदेश में महिला स्व-सहायता समूहों एवं अन्य द्वारा तैयार किये गये उत्पाद जैम पोर्टल एवं अमेजन जैसे मार्केटिंग प्लेटफार्म पर बिकें, इसके लिये सघन प्रयास किये जायें।

    समूहों को ऋण स्वीकृति में प्रदेश देश में प्रथम

    मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि स्व-सहायता समूहों को ऑनलाइन माध्यम से ऋण प्रकरण प्रस्तुत करने तथा ऋण स्वीकृति में मध्यप्रदेश देश में प्रथम रहा है। वर्ष 2021-22 में एक लाख 40 हजार 576 ऋण प्रकरण स्वीकृत किये गये। स्वीकृत प्रकरणों में ऋण वितरण की त्वरित कार्यवाही के लिये मुख्यमंत्री द्वारा निर्देश दिये।

    हर गाँव में हो ग्राम संगठन

    मुख्यमंत्री श्री चौहान ने निर्देश दिये कि राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन में हर गाँव में ग्राम संगठन बनें। वर्तमान में प्रदेश में 32 हजार 874 ग्राम संगठन हैं। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने सभी 45 हजार गाँवों में ग्राम संगठन बनाने के निर्देश दिये।

    74 प्रतिशत प्रधानमंत्री आवास पूर्ण

    मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि प्रधानमंत्री आवास योजना में वर्ष 2024 तक सभी को आवास दिये जाने का लक्ष्य है। योजना में प्रदेश को 30 लाख 39 हजार आवास का लक्ष्य मिला है, जिसके विरुद्ध प्रदेश में 29 लाख 78 हजार (97.3 प्रतिशत) आवास स्वीकृत किये जा चुके हैं तथा 22 लाख 65 हजार (74 प्रतिशत) आवास पूर्ण किये जा चुके हैं। प्रमुख सचिव श्री उमाकांत उमराव ने बताया कि प्रधानमंत्री आवास के हितग्राहियों को शासन की 36 प्रकार की योजनाओं का लाभ दिया जा रहा है। इनमें राशन प्रदाय, नल-बिजली कनेक्शन, गैस कनेक्शन, शिक्षा, स्वास्थ्य आदि योजनाएँ शामिल हैं।

    सभी गाँवों को ‘ओडीएफ-प्लस’ बनाना है

    मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि स्वच्छ भारत मिशन में वर्ष 2024-25 तक प्रदेश के सभी गाँवों को ‘ओडीएफ-प्लस’ बनाना है। इसमें सभी घरों में शौचालय, 80 प्रतिशत घरों में कम्पोस्ट पिट, 80 प्रतिशत घरों में तरल अपशिष्ट प्रबंधन तथा सभी ग्रामों में प्लास्टिक अपशिष्ट संग्रहण एवं पृथकीकरण कार्य किये जाने हैं। प्रदेश के 1154 गाँव को अभी तक ‘ओडीएफ-प्लस’ बनाया जा चुका है। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने निर्देश दिये हैं कि इस बात का पूरा ध्यान रखा जाये कि नये बनने वाले घर बिना शौचालय के न हो।

    ग्राम सड़क निर्माण में प्रदेश देश में प्रथम

    मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के क्रियान्वयन एवं गुणवत्तापूर्ण सड़कों के निर्माण में मध्यप्रदेश देश में शीर्ष पर है। योजना से प्रदेश की 17 हजार 541 बसाहटों को जोड़ा जाना था, जिसके विरुद्ध 17 हजार 506 (99.80 प्रतिशत) बसाहटों को सड़क से जोड़ा जा चुका है। प्रदेश के 250 एवं इससे अधिक जनसंख्या के जनजातीय ग्राम तथा 500 एवं अधिक जनसंख्या के अन्य सभी ग्राम प्रधानमंत्री सड़क से जुड़ गये हैं।

    मनरेगा के भुगतान में न हो विलंब

    मुख्यमंत्री श्री चौहान ने निर्देश दिये कि मनरेगा में कराये गये कार्यों के भुगतान में विलंब नहीं होना चाहिये। उन्होंने इस संबंध में केन्द्रीय मंत्री श्री गिरिराज सिंह से बातचीत कर लंबित भुगतान के लिये बजट की माँग की। केन्द्रीय मंत्री ने अश्वस्त कराया कि शीघ्र ही बजट दिया जायेगा।

    मुख्यमंत्री श्री चौहान ने मुख्यमंत्री भू-अधिकार योजना, पेसा अधिनियम के क्रियान्वयन, सॉलिड लिक्विड वेस्ट मैनेजमेंट, देवारण्य योजना के संचालन, पोषण-आहार संयंत्रों के हस्तांतरण आदि के संबंध में भी अधिकारियों को निर्देश दिये।

  • विकास का झूठ और कर्ज का पहाड़

    विकास का झूठ और कर्ज का पहाड़

    सरयूसुत मिश्र

    सरकारों द्वारा लिए जाने वाले कर्ज और विकास पर पक्ष विपक्ष के बीच बहस और बयानबाजी अक्सर होती रहती है| जहां सत्ता पक्ष का तर्क होता है कि ऋण लेकर प्रदेश का विकास किया गया है, वहीं विपक्ष आरोप लगाता है कि सरकार द्वारा कर्ज लेकर घी  पीने का काम किया जा रहा है|
    जैसे ही सत्ता और विपक्ष का स्थान बदलता है वैसे ही वक्तव्य भी बदल जाते हैं| इसकी वास्तविकता क्या है यह हमेशा राजनीतिक बयानों के बीच छिपा रहता है|
    वित्तीय आंकड़े और बजटीय भाषा कुछ इस तरह की होती है जो आम समझ के बाहर होती है| विशेषज्ञों के लिए राज्यों का कर्ज कोई महत्वपूर्ण विषय नहीं होता इसलिए उनकी आंखों से भी यह ओझल ही रहता है|
    कर्ज और विकास की सच्चाई सरकारें बताना नहीं चाहती|
    मध्यप्रदेश विधानसभा में 21 दिसंबर 2021 को एक प्रश्न में यह पूछा गया था कि सरकार द्वारा लिए गए ऋण से कौन-कौन से विकास कार्य कराए गए हैं?
    सरकार ने उत्तर में यह बताया कि कर्ज किसी योजना के लिए नहीं लिया जाता| इसलिए इससे कराए गए कार्यों की जानकारी नहीं दी जा सकती|
    विकास के लिए  कर्ज लिया जाना आवश्यक होता है| लेकिन आम लोगों को जानने का हक है कि  जो कर्ज लिया गया है उससे कौन-कौन से विकास कार्य कराए गये| यह सही है कि किसी योजना के लिए सरकार द्वारा कर्ज नहीं लिया जाता, सरकार तो अपने बजट के अंतर्गत विकास कार्यों के लिए धनराशि की कमी को पूरा करने के लिए लोन लेती है| वित्त विभाग के लिए यह कठिन नहीं है कि वह साफ-साफ बताए कि जो भी ऋण राज्य द्वारा लिया गया है उसके अंतर्गत मुख्य रूप से कौन-कौन से विकास के कार्य कराए गए हैं| यह समझ के बाहर है कि यह जानकारी सरकारें छुपाती क्यों है|
    मध्य प्रदेश सरकार पर 31 मार्च की स्थिति में 2 लाख 53 हजार करोड़ का कर्ज है|  इसके बाद  नवंबर 21 तक 14000 करोड का कर्ज और लिया गया है, यानि नवम्बर 2021 की स्थिति में कर्ज 267000 करोड हो चुका है|  पिछले साल लिए गए ऋण की प्रवृत्तियों के अनुसार, यदि लोन लिया जाता है तो चालू वित्तीय वर्ष में यह आंकड़ा तीन लाख करोड़ के ऊपर पहुंचने की संभावना है| 
    वर्ष 2003 में मध्यप्रदेश में कांग्रेस की सरकार के बाद उमा भारती के नेतृत्व में सरकार बनी थी तब सरकार द्वारा  राज्य की आर्थिक स्थिति पर एक श्वेत पत्र जारी किया गया था| इसके अनुसार मध्य प्रदेश गठन के बाद 2003 तक 33 हजार करोड़ का कर्ज था जो 20 सालों में बढ़कर 3 लाख करोड़ पंहुच रहा है| यानी 2003 के बाद सरकार द्वारा लिए गए लोन में से 33000 करोड रुपए घटा देने पर 18 सालों में 2 लाख 34 हज़ार करोड़ का कर्ज मध्य प्रदेश सरकार द्वारा लिया गया है|
    इनको अगर माह अनुसार बांटा जाए तो हर महीने 1083 करोड़ का कर्ज सरकार ने लिया है|
    विकास के लिए कर्ज जरूरी है इसलिए यह देखना भी जरूरी है कि जो भी कर्ज लिया गया है उसका क्या सदुपयोग विकास (पूंजीगत व्यय) में किया गया है?
    वैसे तो सरकार की आय और व्यय में भी पूंजीगत व्यय के लिए राशि दी जाना चाहिए| लेकिन अगर उसको छोड़ भी दें और केवल  कर्ज को ही विकास के लिए माना जाए तब भी आंकड़े ऐसा बताते हैं कि कर्ज की पूरी राशि शायद  पूंजीगत व्यय में खर्च नहीं की जाती है|
    पूंजीगत व्यय के अंतर्गत पुल पुलिया सड़क आदि स्थाई परिसंपत्तियों का निर्माण किया जाता है| जब तक स्थाई परिसंपत्तियों का निर्माण सही मात्रा में नहीं होगा तब तक विकास की सही परिकल्पना पूरी नहीं हो सकती है| नियंत्रक महालेखा परीक्षक द्वारा 31 मार्च 2020 को समाप्त हुए वर्ष के लिए दिए गए लेखा परीक्षा प्रतिवेदन में यह बताया गया है कि राज्य में पूंजीगत परिव्यय 15-16 से 20-21 तक इस प्रकार है|
    2015-16    16 835 करोड़2016-17    27 288 करोड़2017-18    30 913 करोड़2018-19    29 424 करोड़2019-20    29 241 करोड़2021-22    33 490 करोड़(बजट)

    लेखा प्रतिवेदन में यह बताया गया है कि पिछले 5 वर्षों के दौरान राज्य का पूंजीगत व्यय दो हजार अट्ठारह उन्नीस को छोड़कर 2015-16 से 2019-20 तक परिसंपत्तियों के सृजन पर आवंटित बजट का उपयोग नहीं किया जा सका|
    जितने भी छोटे-छोटे निर्माण कार्य होते हैं, उन पर योजना की लागत और निर्माण एजेंसी का नाम राज्य सरकार पारदर्शिता के लिए प्रदर्शित करती है|
    जब यह सामान्य भाषा में बताया जा सकता है तो सरकार स्तर पर वित्त विभाग सामान्य भाषा में यह क्यों नहीं बता सकता कि कुल बजट और कुल लिए गए कर्ज में से विकास के कौन-कौन से काम कराए गए और सामाजिक सेवाओं या अन्य प्रतिबद्ध खर्चों पर कितना व्यय किया गया|
    वैसे आजकल विकास का पैमाना भी बदल गया है| पहले विकास के हर काम सरकारों को स्वयं करने पड़ते थे| चाहे सड़क हो,बिजली संयंत्र हों या कोई भी विकास की योजना हो, सरकार ही पैसा खर्च करती थी और सरकार ही उनका निर्माण करती थी| अब तो विकास की प्रक्रिया बदल गई है| अब BOT जैसे प्रोसेस आ गए हैं| जिसमें सरकारी संपत्ति निर्माण के लिए प्राइवेट लोगों को दे दी जाती है और प्राइवेट लोग अपना पैसा खर्च कर निर्माण करते हैं| उस संपत्ति का उपयोग करने वालों से वह सेवा शुल्क प्राप्त करते हैं| इनके विकास पर अब सरकारें पैसा नहीं खर्च करती हैं| सड़कों को ही अगर देखा जाए तो आज अधिकांश सड़कें चाहे वह राजमार्ग हो या राष्ट्रीय राजमार्ग, उनका निर्माण BOT के अंतर्गत निजी लोगों द्वारा किया गया है, उन पर टोल वसूला जा रहा है| वैसे तो जो सड़क सरकार की संपत्ति थी, जिस पर चलने पर किसी को कोई टैक्स नहीं देना पड़ता था, वह अब लोगों को टैक्स देने के बाद ही आवागमन  के लिए मिलती है| अगर यात्री टोल की सड़कों पर 1000 किलोमीटर यात्रा करेगा तो कम से कम इतनी ही राशि उसे टोल टैक्स के रूप में देनी पड़ेगी| सड़कों के अलावा अन्य क्षेत्रों में भी अब इस तरह की नीतियां सरकारों द्वारा लागू कर दी गई हैं|
    आज सभी राज्यों में लोकतांत्रिक सरकारों द्वारा चुनाव जीतने के लिए निजी लाभ को ज्यादा प्रोत्साहित किया जाता है| ऐसी योजनाएं घोषित की जाती हैं, और लागू की जाती है जिससे लोगों को उनके खातों में पैसा या कोई न कोई लाभ मिल सके| जिससे कि उस सरकार के प्रति लोग उपकृत महसूस करें और चुनाव के समय राजनीतिक दलों को उसका लाभ मिले|
    सरकारों की निजी लाभ देने की  जो प्रवृत्ति आजकल दिखाई पड़ रही है वह चिंतित करती है| 
    सरकारें अनाप-शनाप ऐसे काम पर खर्च करती हैं जो पूरी तरह से अनुत्पादक हैं| उत्पादक खर्चों पर ध्यान नहीं दिया जाता|
    एक पहेली में एक मजदूर अपनी मजदूरी और खर्च बताते हुए कहता है कि उसे ₹4 की मजदूरी मिलती है उसमें से ₹1 वह अपने परिवार के भरण पोषण पर खर्च करता है, ₹1 कर्ज देता है(अर्थात अपने बच्चों के भविष्य निर्माण पर खर्च करता है), ₹1 कर्ज लौटाता है, अर्थात बूढ़े माता-पिता पर खर्च करता है, क्योंकि उन्होंने उसका पालन पोषण किया है, ₹1 फेंक देता है अर्थात सेवा में समाज के लिए दान में खर्च करता है| यह सामान्य पहेली किसी भी व्यक्ति और सरकार को अपनी आय और व्यय को संतुलित रखने का बहुत मार्मिक संदेश देती है| कोई भी सरकार अगर भविष्य निर्माण पर अपनी आय का एक चौथाई नहीं खर्च करेगी तो व्यवस्था गड़बड़ा जाएगी| इसी प्रकार सामाजिक सेवाओं के लिए मुफ्त में लोगों को लाभान्वित करने के लिए 25% से ज्यादा नहीं खर्च किया जाना चाहिए| सिस्टम पर खर्च भी लगातार बढ़ता जा रहा है| यह भी सरकार पर भारी पड़ रहा है| जबकि सरकारी कर्मचारियों की संख्या लगातार घटती जा रही है| आज के 15 साल पहले जहां लगभग 7 लाख कर्मचारी थे आज उनकी संख्या चार लाख के आसपास ही है|
    सरकार विज्ञापन निकालकर नए बजट के लिए आम लोगों से सुझाव मांगती है| क्या इसी विज्ञापन में यह नहीं दिया जा सकता कि पिछले साल हमने आम लोगों के लिए कितनी कितनी राशि किस बात पर किस विकास कार्य पर खर्च की| अगर यह दिया जाता तब लोग बजट के लिए सुझाव देने पर अधिक उत्साहित होते| आज तो यह औपचारिकता जैसी हो गई है| सरकार से जुड़े कुछ लोग सुझाव देकर इस औपचारिकता को पूरी कर देते हैं|
    सूचना के अधिकार कानून में जहां लोगों को सुरक्षा और कुछ महत्वपूर्ण विषयों को छोड़कर सभी चीजें जानने का हक है, तो फिर इस बात से क्यों वंचित किया जा रहा है, कि सरकार ने कर्ज लेकर उसके अंतर्गत कौन-कौन से विकास के काम किए हैं|
    भले ही इसके लिए विभाग को थोड़ी मेहनत कर विवरण तैयार कर देना पड़े लेकिन दिया जाना चाहिए| इससे सरकार की विश्वसनीयता बढ़ेगी और विकास की प्रमाणिकता भी स्थापित होगी|
    केवल बांटने से अहम की संतुष्टि हो सकती है, लेकिन राज्य का विकास नहीं हो सकता है| जनता  के टैक्स का पैसा खर्च करते समय उसकी उपयोगिता और प्रमाणिकता सबसे महत्वपूर्ण होती है| सरकारें इस पर ध्यान नहीं देंगी तो पक्ष विपक्ष के बीच में तर्क वितर्क होता रहेगा और राज्य के टैक्सपेयर चिंता व्यक्त करते रहेंगे|

    न्यूज पुराण से साभार