Month: December 2019

  • खनिज विभाग ने राजस्व वसूली का नया रिकार्ड बनाया

    खनिज विभाग ने राजस्व वसूली का नया रिकार्ड बनाया

    खनिज मंत्री प्रदीप जायसवाल बोले ठेकेदारों को सुरक्षा मुहैया कराएंगे

    भोपाल,27 दिसंबर(प्रेस सूचना केन्द्र)।खनिज मंत्री प्रदीप जायसवाल का कहना है कि कमलनाथ सरकार ने खनिज विभाग से टैक्स चोरी के सभी रास्ते बंद कर दिए हैं जिससे प्रदेश ने राजस्व वसूली की नई ऊंचाईंयां छू लीं हैं। राजस्व आय का ये आंकड़ा और बढ़ेगा। उन्होंने राजस्व देने वाले ठेकेदारों को आश्वासन दिया कि सरकार उन्हें खनिज माफिया से पर्याप्त सुरक्षा मुहैया कराएगी।

    कमलनाथ सरकार की साल भर की उपलब्धियों का लेखा जोखा प्रस्तुत करते हुए श्री जायसवाल ने बताया कि वित्त विभाग ने वर्ष 2018-19 के लिए 4528 करोड़ रुपयों का लक्ष्य दिया था जिसे पार करते हुए विभाग ने 4623.04 करोड़ रुपए जुटाए हैं। इसी तरह मौजूदा वित्तीय वर्ष 2019-20 में अप्रैल 2019 से नवंबर 2019 तक 2226.85 करोड़ रुपए का राजस्व इकट्ठा किया जा चुका है। पिछले साल की इसी अवधि की तुलना में ये राशि 34.35 करोड़ रुपए अधिक है।

    श्री जायसवाल ने बताया कि प्रदेश में खनिजों की खोज का काम निरंतर जारी है और इसके लिए राष्ट्रीय खनिज अन्वेषण न्यास ने भी पर्याप्त संसाधन उपलब्ध कराए हैं। पिछले साल राज्य को 54.81 करोड़ रुपए प्राप्त हुए थे इस साल नवंबर महीने तक 34.12 करोड़ रुपए मिल चुके हैं।

    उन्होंने कहा कि खनिज और रायल्टी चोरी को सरकार सख्ती से रोकना चाहती है। इस वित्तीय वर्ष में ही अब तक खनिजों के अवैध उत्खनन के 1330 प्रकरण,अवैध परिवहन के 8294 प्रकरण, अवैध भंडारण के 531प्रकरणों से 527.511 लाख रुपए और अवैध परिवहन से 2412.20 लाख रुपए की आय हुई है। खनिजों के अवैध भंडारण से भी सरकार ने 136.55 लाख रुपए का अर्थदंड वसूला है।

    खनिज मंत्री ने बताया कि छतरपुर की बक्सवाहा तहसील के बंदर डायमंड ब्लाक को सरकार ने लगभग अस्सी हजार करोड़ रुपयों में नीलाम कर दिया है। एस्सेल माईनिंग एंड इंडस्ट्रीज ने लगभग साढ़े तीस प्रतिशत अधिक बोली लगाकर इस खदान का आधिपत्य हासिल किया है। कंपनी को अभी पर्यावरण आदि की मंजूरियों के लिए दो साल का वक्त दिया गया है। सरकार ने कंपनी को पचास सालों के लिए लीज पर दिया है।

    रेत खदानों से हर साल लगभग बारह सौ करोड़ रुपए की आय को उल्लेखनीय कार्य बताते हुए श्री जायसवाल ने कहा कि पिछली सरकार रेत से मात्र 240 करोड़ तक आय करती थी बाकी खनिज चोरी हो जाता था। इस सरकार ने 36 जिलों की रेत खदानें नीलाम की हैं ठेकेदारों को अब खनिज बेचना अनिवार्य कर दिया गया है। इससे राज्य को भरपूर आय होगी.

    पत्रकार वार्ता में खनिज मंत्री के साथ प्रमुख सचिव नीरज मंडलोई, सचिव नरेन्द्र सिंह परमार, विनीत आस्टिन संचालक, भौमिकी तथा खनिक कर्म समेत विभाग के कई अन्य अधिकारी भी उपस्थित थे।

  • डूबकर उबरने का ख्वाब देखती कांग्रेस

    डूबकर उबरने का ख्वाब देखती कांग्रेस

    नागरिकता संशोधन विधेयक और राष्ट्रीय नागरिकता रजिस्टर को लेकर कांग्रेस ने जिस तरह अफवाहों की खेती करने की रणनीति अपनाई है उससे नई पीढ़ी के बीच बुढ़ाती कांग्रेस के पाप जोरदार ढंग से उजागर हो रहे हैं। कांग्रेस ने भाजपा पर देश को बांटने और धर्म के आधार पर साम्प्रदायिक ध्रुवीकरण करने का आरोप लगाया है लेकिन वह अपनी बोई जहर की खेती के बीच खुद घिर गई है। जिस नागरिकता संशोधन विधेयक को लेकर उसने देश भर में वितंडावात खड़ा किया। गैर कांग्रेस शासित राज्यों में दंगा फैलाने वालों का हाथ थामा उससे कांग्रेस की भद पिटी है। सोशल मीडिया के दौर में कांग्रेस और टुकड़े टुकड़े गैंग की असलियत उजागर हो गई है। रही सही कसर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने दिल्ली से दिए अपने लंबे भाषण से पूरी कर दी। उन्होंने जिस तरह भड़काने वालों की धुलाई की उससे तो पूरे देश में लोक शिक्षण का महाअभियान पूरा हो गया है। अब लोग इस कानून पर भड़काने वालों की लू उतार रहे हैं। जिस नागरिकता संशोधन विधेयक का देश के किसी भी नागरिक से वास्ता नहीं है उसे देश से मुसलमानों को भगाने वाला कानून बताया जा रहा है। जबकि ये कानून 31 दिसंबर 2014 तक भारत में शरण मांगने आए शरणार्थियों की मदद का कानून है। वे लोग जो जातिगत प्रताड़ना से मजबूरी में भारत आए थे और आजादी के बाद से नागरिकता से वंचित रहे उनके कष्ट निवारण के लिए लाए गए कानून को संविधान की मूल भावना के खिलाफ बताया जा रहा है। आज दिल्ली में कांग्रेस के आलाकमान ने इस कानून के विरोध में कथित सत्याग्रह किया। प्रदेशों की इकाईयों ने कानून के खिलाफ में बैठकें बुलाईं इसके बावजूद कांग्रेस के भीतर से जागरूक युवाओं का बड़ा तबका पार्टी की इस रणनीति से क्षुब्ध है। वह जानता है कि कांग्रेस केवल खिसियानी बिल्ली खंभा नोंचे वाले अंदाज में बोझिल राजनीति कर रही है। जो कानून नागरिकता देने का है उसे मुस्लिम भगाओ कानून बताकर कांग्रेस और उसके नेतागण देश में साम्प्रदायिक विद्वेष के बीज बो रहे हैं। वैसे तो देश का विभाजन स्वीकार करके कांग्रेस ने अंग्रेजों की ही राजनीति को आगे बढ़ाया था इसके बावजूद पिछले दरवाजे से भारत को धर्मनिरपेक्ष देश का तमगा देकर कांग्रेस खुद पर सहिष्णु होने का लेबल लगाती रही है। अब जबकि देश में भाजपा की सरकारें पंद्रह पंद्रह साल पूरे करके सामप्रदायिक सौमनस्य की मिसालें खड़ी कर चुकीं हैं तब कांग्रेस की राजनीति की असलियत उजागर हो गई है। एस बार तो राष्ट्रीय नागरिकता रजिस्टर पर कांग्रेस के दुष्प्रचार से उसकी जातिवादी राजनीति का खुलासा ही हो गया है। एनआरसी का कानून कांग्रेस सरकार ही लाई थी जिसे सुप्रीम कोर्ट ने असम के बंग्लादेशी घुसपैठियों की पहचान करने और उन्हें वापस खदेड़ने के लिए लागू किया। यह कानून शेष भारत में लागू नहीं है। इसके बावजूद दुष्प्रचार करने वाली टुकड़े टुकड़े गेंग ने कहना शुरु कर दिया है कि जब भाजपा अल्पमत में होने के बावजूद राज्यसभा में भी कानून पारित करा सकती है तो भविष्य में वह मुसलमानों को देश से बाहर निकालने का कानून भी बना सकती है। इससे भयभीत मुस्लिम लामबंद हो गए हैं। उनमें से कुछ असामाजिक तत्वों ने दंगा फैलाने और पुलिस पर हमले करने की कोशिशें भी करनी शुरु कर दीं हैं। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के अभियान के बाद देश भर में कानून के समर्थन में भी लोग सड़कों पर उतरने लगे हैं। कांग्रेस के नीति निर्धारक चाहते हैं कि देश में दंगा फसाद हो और भाजपा सरकार को बदनाम करने के साथ साथ देश में वोटों की खेती भी की जा सके। इसके विपरीत कांग्रेस का ये दांव उलटा पड़ रहा है। कांग्रेस ने मुस्लिमों को लामबंद करने की जो रणनीति अपनाई है उससे हिंदु मतों का ध्रुवीकरण भी हो रहा है। कांग्रेस के ये नेता जानते हैं कि सौ फीसदी मुस्लिम मत हासिल करके वह अपना खोया जनाधार फिर पा सकती है। मध्यप्रदेश में आदिवासी और मुस्लिम मतों से सत्ता में आने का सफल प्रयोग वह आजमा चुकी है। कांग्रेस के नेतागण इसी रणनीति पर चल रहे हैं। देश में उसने गठबंधन की रणनीति अपनाकर पिछले दरवाजे से सत्ता में आने का सफल राजनीतिक खेल खेला है।महाराष्ट्र के बाद अब झारखंड में भी उसने यही फार्मूला दोहराया है। इसके बावजूद सत्ता का ये खेल देश के सामजिक सद्भाव को तार तार कर रहा है। जिस संविधान की शपथ लेकर कमलनाथ जैसे उसके क्षत्रप सत्ता में पहुंचे हैं वे अब उसी संविधान के कानून का विरोध करके उस संविधान की औकात दो कौंड़ी की बता रहे हैं। कांग्रेस पुत्र राहुल गांधी तो कई मंचों पर कानूनी कागजों को फाड़कर अपने इरादे बता चुके हैं। अब इस कानून की दुहाई यदि भाजपा देती भी रहे तो क्या फर्क पड़ता है। भाजपा अभी तक कांग्रेस के बनाए राजमार्ग पर चलने की राजनीति करती रही है। पहली बार उसे महसूस हो रहा है कि उसका कैडर और कानून का पालन करने की सदाशयता कोई काम की नहीं है। वास्तव में देश को जनहित की राजनीति करने वाले राजनीतिक दल की जरूरत है। कांग्रेस और भाजपा दोनों कानून के आड़ में सत्ता चलाने का खेल खेलती रहीं हैं। निश्चित रूप से देश को सीरिया बनने से बचाने के लिए युवाओं को आगे आना होगा। विभाजनकारी राजनीतिक को धराशायी करना होगा। तभी हम बुलंद देश के अपने सपने को साकार होता देख सकेंगे। कांग्रेस को हक है कि वह नकारात्मक राजनीति करके डूबकर उबरने का ख्वाब देखे पर देश को आज सकारात्मक राजनीति की जरूरत है। जिसके लिए षड़यंत्रों की राजनीति को उसकी हैसियत बताना जरूरी है।

  • नागरिकता कानून विरोधियों के साथ खड़ी होगी कमलनाथ सरकार

    नागरिकता कानून विरोधियों के साथ खड़ी होगी कमलनाथ सरकार

    भोपाल,21 दिसंबर(प्रेस सूचना केन्द्र)। नागरिकता अधिनियम 1955 में हुए संशोधन के बाद लागू नए नागरिकता कानून का विरोध करने के लिए अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी ने पूरे देश में कानून का विरोध करने का फैसला लिया है। मध्यप्रदेश में भी कमलनाथ सरकार 25 तारीख को इस विरोध प्रदर्शन को अपना समर्थन देगी। संवैधानिक तौर पर चुनी हुई राज्य सरकार ने केन्द्रीय कानून का विरोध करने के लिए जो रणनीति अपनाई है उससे नए नागरिकता कानून को लेकर उठ रहीं भ्रांतियों को दूर करने में भी मदद मिलेगी।

    कांग्रेस के सूत्रों का कहना है कि वह कानून को लेकर जनमत संग्रह (Referendum) भी करेंगे. दिल्ली में केंद्र सरकार के नए कानून के खिलाफ (Protest against CAA) पार्टी के हल्लाबोल के बाद ऑल इंडिया कांग्रेस कमेटी ने कांग्रेस-शासित सभी राज्यों में प्रभावी तरीके से प्रदर्शन करने का निर्देश दिया है।

    CAA को लेकर कांग्रेस ने दिल्ली में केंद्र सरकार के खिलाफ हल्ला बोला था. अब दिल्ली के बाद कांग्रेस शासित राज्यों में नागरिकता संशोधन कानून के विरोध में प्रदर्शन की तैयारी है. एआईसीसी ने सभी राज्यों में इस कानून के विरोध में प्रदर्शन करने के लिए निर्देश दिए हैं. ऐसे में कांग्रेस शासित मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान जैसे हिंदी भाषी राज्यों में कांग्रेस सरकार का पूरा फोकस इस प्रदर्शन को प्रभावी बनाने में है. दिल्ली के बाद भोपाल में भी कमलनाथ सरकार इस कानून के विरोध के बहाने शक्ति प्रदर्शन करेगी.

    प्रमुख विपक्षी दल भारतीय जनता पार्टी ने सरकार के इस फैसले से असहमति जताई है। पार्टी का कहना है कि नागरिकता कानून देश के किसी भी नागरिक के खिलाफ नहीं है, इसके बावजूद विरोध को स्वर देकर कांग्रेस सरकार अपने संवैधानिक दायित्वों से मुंह मोड़ रही है।

    प्रदेश में जब अधिकतर लोग नए नागरिकता कानून से सहमति जताते हुए खुलकर बात रख रहे हैं तब कमलनाथ सरकार कानून के विरोध में खड़े होकर क्षुद्र राजनीतिक प्रतिद्वंदिता का उद्घोष करने जा रही है।

    नए नागरिकता कानून को समझना जरूरी

    कई लोग इस वजह से विरोध कर रहे हैं कि उन्हें लगता है इस कानून से उनकी नागरिकता खतरे में पड़ जाएगी. कुछ को लगता है कि असम में जिस तरह एनआरसी यानी राष्ट्रीय नागरिकता रजिस्टर (एनआरसी) के चलते लाखों लोगों की नागरिकता खतरे में पड़ गई है, वैसा ही उनके साथ भी होगा, लेकिन सचाई बिल्कुल अलग है. नागरिकता संशोधन कानून और एनआरसी अलग-अलग चीजें हैं.

    नागरिकता कानून 2019 भारत के तीन पड़ोसी देशों से धार्मिक उत्पीड़न ही वजह से भारत आने वाले अल्पसंख्यकों को सिटिजनशिप देने के लिए है. पाकिस्तान, अफगानिस्तान और बांग्लादेश जैसे भारत के पड़ोसी देशों में सिख, जैन, हिंदू, बौद्ध, इसाई और पारसी अल्पसंख्यक हैं. ये तीनों देश मुस्लिम राष्ट्र हैं, इस वजह से उनमें धार्मिक अल्पसंख्यक को उत्पीड़न का शिकार होना पड़ता है.नागरिकता संशोधन अधिनियम में प्रावधान है कि अगर इन तीन देशों के छह धर्म के लोग भारत में 31 दिसंबर 2014 तक आ चुके हैं तो उन्हें घुसपैठिया नहीं माना जाएगा. उन्हें इस कानून के तहत भारत की नागरिकता दी जाएगी.

    अगर इसे सीधे शब्दों में समझें तो एनआरसी जहां देश से अवैध घुसपैठियों को बाहर निकालने की कवायद है, वहीं नागरिकता कानून 2019 देश में आ चुके छह धर्म के लोगों को बसाने की कोशिश है.जिन लोगों के नाम एनआरसी में शामिल नहीं हैं, वह अवैध नागरिक कहलाए जाएंगे. एनआरसी के हिसाब से 25 मार्च 1971 से पहले असम में रह रहे लोगों को भारतीय नागरिक माना गया है.

    एनआरसी और सीएए में ये हैं मुख्य अंतर नागरिकता संशोधन कानून 2019 जहां धर्म पर आधारित है, वहीं राष्ट्रीय नागरिकता रजिस्टर (एनआरसी) का धर्म से कोई लेना-देना नहीं है. सीएए के तहत मुस्लिम बहुल आबादी वाले देश पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान में धार्मिक उत्पीड़न के कारण भागकर भारत आए हिंदू, सिख, ईसाई, जैन, बौद्ध और पारसी धर्म के लोगों को भारत की नागरिकता प्रदान करने का प्रावधान है. सीएए में मुस्लिमों को शामिल नहीं किया गया है. एनआरसी में अवैध अप्रवासियों की पहचान करने की बात कही गई है, चाहे वे किसी भी जाति, वर्ग या धर्म के हों. ऐसे लोगों की पहचान कर उन्हें देश से बाहर भेजने का प्रावधान है. एनआरसी फिलहाल सिर्फ असम में लागू है जबकि सीएए देशभर में लागू होगा. सीएए भारतीय मुसलमानों को किसी तरह का नुकसान नहीं पहुंचा सकता. सीएए को लेकर एक गलत धारणा बन गई है कि इस वजह से भारतीय मुसलमान अपने अधिकारों से वंचित हो जाएंगे. सच यह है कि अगर कोई ऐसा करना चाहे तो भी इस कानून के तहत यह संभव नहीं है. पूर्वोत्तर राज्यों में सीएए का विरोध इसलिए हो रहा है कि क्योंकि लोगों को आशंका है इससे उनके इलाके में अप्रवासियों की तादाद बढ़ जाएगी जिससे उनकी संस्कृति और भाषाई विशिष्टता को खतरा हो सकता है. केरल, पश्चिम बंगाल और दिल्ली में सीएए का विरोध इस कानून में मुसलमानों को शामिल नहीं किए जाने पर हो रहा है, उनका तर्क है कि यह संविधान के विरुद्ध है.

  • खनिज आय में पैंतीस करोड़ की बढ़त

    खनिज आय में पैंतीस करोड़ की बढ़त

    भोपाल,18 दिसंबर(प्रेस सूचना केन्द्र)। प्रदेश में इस वर्ष अप्रैल से नवम्बर तक मात्र 8 महीने में पिछले वर्ष की तुलना में 34 करोड़ 35 लाख रुपये से अधिक खनिज राजस्व संग्रहित किया गया। पिछले साल इस अवधि में 2192 करोड़ 50 लाख रुपये खनिज राजस्व संग्रहित की गयी थी। इस वर्ष 2226 करोड़ 85 लाख रुपये खनिज राजस्व अर्जित की गई। इसी के साथ, जिला खनिज प्रतिष्ठान नियम-2016 के अंतर्गत इस अवधि में 495 करोड़ रुपये से अधिक खनिज राजस्व संग्रहित किया गया। इस दौरान राष्ट्रीय खनिज अन्वेषण न्यास के अंतर्गत 34 करोड़ 12 लाख रुपये के राजस्व की प्राप्ति हुई।

    प्रदेश में पिछले 8 माह में अवैध खनिज उत्खनन के 1330, अवैध खनिज परिवहन के 8294 और अवैध खनिज भण्डारण के 531 प्रकरण अर्थात कुल 10,155 प्रकरण पंजीबद्ध कर कार्यवाही की गई। अवैध उत्खनन के प्रकरणों में 5 करोड़ 27 लाख, अवैध परिवहन के प्रकरणों में 24 करोड़ 12 लाख और अवैध भण्डारण के प्रकरणों में एक करोड़ 36 लाख रुपये अर्थात कुल 3076.26 लाख रुपये अर्थदण्ड वसूली की गई।

  • डिफाल्टर नीतियों वाला मुख्यमंत्री

    डिफाल्टर नीतियों वाला मुख्यमंत्री

    सत्ता संभालने के एक साल पूरा होने पर मुख्यमंत्री कमलनाथ ने अपनी डींगें हांकने के लिए विज्ञापनों का रेला पेल दिया है। जिस शिवराज सिंह सरकार को विज्ञापनों की सरकार बताकर कमलनाथ ने मीडिया पर लांछन लगाया आज उसी मीडिया की चौखट पर उनकी सरकार औंधे मुंह गिरी पड़ी है। करोड़ों के विज्ञापन कार्पोरेट मीडिया की झोली में डालकर वे प्रदेश की जनता के टूटते भरोसे को टिकाए रखना चाहते हैं। कर्ज माफी और इंदिरा ज्योति योजना जैसी वाहवाही लूटने वाले उनके ध्वजवाहक अभियान ही जनता को उनके वादे और हकीकत की पहचान कराने के लिए काफी हैं। तरह तरह की नई शर्तें कर्जमाफी को छलावा बता रहीं हैं तो बिजली कंपनियां अपना घाटा पाटने के लिए जिस तरह बिजली बिलों की रीडिंग लंबित करके उपभोक्ताओं से भारी भरकम बिल वसूल रही है उससे सरकार की कथनी और करनी की पोल खुल जाती है। बात बात में भाजपा सरकार पर खजाना खाली छोड़कर जाने का आरोप मढ़ने वाले मुख्यमंत्री कमलनाथ और उनके मंत्रिमंडलीय सहयोगी ये समझाने में असफल रहे हैं कि राज्य की मासिक आय क्यों घटती जा रही है। यदि उनका वित्तीय प्रबंधन बहुत अच्छा है तो साल भर में उन्हें उन्नीस हजार करोड़ का कर्ज क्यों लेना पड़ा है। छिंदवाड़ा माडल का शिगूफा छोड़कर कमलनाथ ने खुद को उद्योगपति बताने की कारीगरी तो कर ली लेकिन वे अब तक एक डिफाल्टर मुख्यमंत्री ही साबित हुए हैं। प्रदेश के बरसों पुराने बेशकीमती बांस जंगलों को मिट्टी मोल बेचने के लिए उन्होंने आईटीसी को कारखाना लगाने की छूट तो दे दी लेकिन इससे प्रदेश की कितनी संपदा कौड़ियों के मोल बेची जाएगी ये बताने को वे तैयार नहीं हैं। छतरपुर के बक्सवाहा की हीरा खदान सरकार ने अस्सी हजार करोड़ में बिड़ला को बेचकर ये बताने का प्रयास किया है कि वे प्रदेश के लिए आर्थिक संसाधन जुटाने में बहुत गंभीर हैं। जबकि हकीकत ये है कि भारत सरकार अभी अपने बहुमूल्य खनिजों को बेचने की नौबत नहीं आने देना चाहती। खनिज मंत्री प्रदीप जायसवाल कहते हैं कि केन्द्र से मंजूरियां लेने की जवाबदारी ठेका लेने वाली कंपनी की है। उसे हमने दो साल का वक्त दिया है। हालांकि केन्द्र के रुख को देखते हुए ये अनुमतियां मिल पाएंगी फिलहाल तो संभव नहीं दिखता। कमलनाथ सरकार ने तबादलों और पोस्टिंग का जो खुला खेल किया उसकी वजह से नौकरशाही पूरी तरह मनमर्जी की मालिक हो गई है। जिस अफसर ने करोड़ों रुपये देकर पोस्टिंग हड़पी है वह राजस्व उगाही आखिर कहां से करे। उसकी सहूलियत के लिए ही सरकार ने पहले शुद्ध के लिए युद्ध और फिर माफिया पर हमले जैसे लोकप्रियता बटोरने वाले अभियान चला दिए। शुद्ध के लिए युद्ध के नाम पर सरकार ने सात हजार से भी अधिक व्यापारियों के नमूने लिए। अस्सी से अधिक व्यापारियों को रासुका में जेल भेज दिया जबकि उनमें से अधिकतर की खाद्य सामग्री शुद्ध पाई गई है। इसके बाद जेल भेजे गए व्यापारियों को भी सरकार की कृपा के आधार पर ही छोड़ा जा रहा है। जो लोग सरकार की कृपा नहीं खरीद सके हैं वे बेगुनाह होते हुए भी जेलों में बंद हैं। उनके कारोबार बंद हैं और उनसे जुड़े हजारों कर्मचारी बेरोजगार हो गए हैं। ये बात सही है कि कांग्रेस ने लगभग हवा हवाई वादे करके सत्ता की चाभी छीनी है। किसानों को गुमराह किया गया आदिवासियों को बहकाया गया, आम नागरिकों को शिवराज सरकार की कमजोरियां दिखाकर बरगलाया गया और सत्ता तो हासिल कर ली लेकिन अब इसे बनाए रखना सरकार के लिए टेढ़ी खीर साबित हो रहा है। ये बात सही है कि शिवराज सिंह सरकार प्रशासनिक तौर पर इतनी असफल सरकार थी कि वह अपने अच्छे कार्यों की पैरवी करने लायक लोगों को भी तैयार नहीं कर सकी। भीड़ भंगार के बीच कर्ज लेकर योजनाओं की टाफिया बांटते शिवराज सिंह चौहान को पता ही नहीं था कि उन्होंने कैसे भाजपा के कर्मठ कार्यकर्ताओं को संगठन से बेदखल कर दिया है। उनकी सरकार लगभग जड़ विहीन थी यही वजह है कि आज जब कमलनाथ सरकार ने माफिया के नाम पर उनके चमचों को जूते की नोंक पर रखना शुरु कर दिया है तब भाजपा के पास सरकार का मुकाबला करने के लिए रक्षा पंक्ति तक नहीं है। पाखंडी अभियानों से शिवराज की भाजपा ये भ्रम फैलाने का प्रयास कर रही है कि वो कमलनाथ सरकार से मुकाबला कर रही है लेकिन उनके साथ रहे भ्रष्ट मंत्रियों और चापलूसों की भीड़ को कमलनाथ बहादुरी के साथ काबू में कर रहे हैं। अधिकतर तो सरकार के माफिया वाले अभियान से ही डरकर अपने घरों तक सिमट गए हैं।दरअसल कमलनाथ जिन कारोबारियों को माफिया का नाम देकर वसूलियां कर रहे हैं वे सरकारी तंत्र के ही संरक्षण में तो फले फूले हैं। असली माफिया तो टैक्स वसूली करने वाले भ्रष्ट अफसरों का तंत्र है। कमलनाथ जी उसी तंत्र से चुनावी चंदा वसूलकर माफिया के विरुद्ध संग्राम का ऐलान कर रहे हैं जो सिर्फ छलावा ही साबित हो रहा है। शिवराज सिंह चौहान सरकार भी योजनाओं के नाम पर कर्ज लेकर जनता को बांट रही थी और कमोबेश यही काम कमलनाथ कर रहे हैं। कमलनाथ सरकार के वित्तमंत्री तरुण भनोट ने तो अपने बजट में भारी भरकम वसूली के टारगेट तय किए थे लेकिन जब मध्यप्रदेश अपने हिस्से का जीएसटी ही नहीं वसूल कर पा रहा हो तो वह किस मुंह से केन्द्र से अपना हिस्सा मांग सकता है। बेशक केन्द्र ने देर सबेर सभी राज्यों को जीएसटी की भरपाई राशि दे दी है लेकिन जब तक कमलनाथ सरकार बेईमान सरकारी तंत्र के भरोसे वसूली के रिकार्ड बनाने का मुगालता पाले बैठी रहेगी तब तक उसे असफलता ही हाथ लगेगी। हंसना और गाल फुलाना एक साथ नहीं हो सकता। आप अफसरों से यदि पार्टी फंड वसूल रहे हों तब आपको ये मुगालता नहीं पालना चाहिए कि वे ये राज्य का खजाना भी अपनी जेब से भरेंगे। कांग्रेस सरकार ने पार्टी फंड वसूलने की जवाबदारी जब अफसरों को ही थमा दी है तो फिर राज्य के संसाधन जुटाने के लिए निश्चित रूप से वे जनता पर अत्याचार करेंगे। यही कार्य श्रीमती इंदिरा गांधी के लगाए आपातकाल के दौरान हुआ था। तब जमाखोरों, मिलावटियों और कथित शोषकों के विरुद्ध मुहिम चलाई गई थी। नतीजा ये हुआ कि आपातकाल की आड़ में सरकारी भ्रष्ट तंत्र ने अत्याचारों की बाढ़ ला दी। नतीजतन श्रीमती गांधी चुनाव हारीं और देश को आपातकाल जैसे सिरफिरे फैसले से निजात मिल सकी थी। आपातकाल का कलंक आज भी कांग्रेस के सिर पर लगा है इसके बावजूद कमलनाथ आपातकाल 2 लेकर मैदान में कूद पड़े हैं। अब तक जो कहानियां उजागर हो रहीं हैं उनसे सरकार के झूठ की पोल रोज खुल रही है। निश्चित रूप से ये कहानियां मीडिया की सुर्खियां नहीं बन पा रही हैं लेकिन आखिर कब तक सरकार मीडिया का मुंह बंद कर सकती है।रोते बच्चे के मुंह को हाथ से दबा दिया जाए तो उसके रोने की आवाज जरूर बंद हो जाती है लेकिन उसका रोना जारी रहता है और जैसे ही हाथ हटाया जाता है उसके रोने की आवाज बुक्का फाड़कर बाहर आ जाती है। सरकार विज्ञापनों के मायाजाल के सहारे आखिर कब तक जनता की घुटन को दबाकर रख सकती है। राजनैतिक वसूलियों से केन्द्र की नीतियों के विरुद्ध झूठे आंदोलन खड़े करने से जनता का पेट भरने वाला नहीं है। जनता के बीच आक्रोश पनप रहा है। अभी यूरिया की कालाबाजारी ने जिस तरह किसानों को आक्रोशित कर दिया है उसी तरह सरकार की जनविरोधी नीतियों की असलियत भी जल्दी ही सामने आ जाएगी। अभी भी वक्त है कांग्रेस के सलाहकार अपनी सरकार का मार्गदर्शन करें तो गलती सुधारी जा सकती है।

  • प्रदेश को समृद्ध बनाएगा रोडमैपःडॉ.मनमोहन सिंह

    प्रदेश को समृद्ध बनाएगा रोडमैपःडॉ.मनमोहन सिंह

    भोपाल, 17 दिसंबर(प्रेस सूचना केन्द्र)।भारत के पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह ने आज यहाँ मध्यप्रदेश सरकार द्वारा तैयार ‘विजन टू डिलीवरी रोड मैप 2020-25’ दस्तावेज का विमोचन करते हुए इसे मध्यप्रदेश की जनता की आकांक्षाओं और प्राथमिकताओं का दस्तावेज बताया।  उन्होंने  प्रदेश की त्वरित आर्थिक समृद्धि और विकास के लक्ष्यों को पूरा करने में विचारों की स्पष्टता और प्रतिबद्धता के लिए मुख्यमंत्री कमल नाथ की प्रशंसा की। डॉ. सिंह ने लोगों के आर्थिक विकास और समृद्धि लाने के लिए एक साल के कम समय में उठाए गए कदमों के लिए बधाई दी। मुख्य रूप से उद्योग के साथ मिलकर रोजगार के नये अवसरों का निर्माण करने की सराहना की।

    डॉ. मनमोहन सिंह ने रोडमैप को सूक्ष्म और वृहद  स्तर  पर अर्थ-व्यवस्था  को  आगे बढ़ाकर रोजगार उत्पन्न करने के प्रयासों पर फोकस करने की सराहना की। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य और शिक्षा के क्षेत्र और सतत विकास के लक्ष्यों को हासिल करने के लिए न सिर्फ  सुस्पष्ट दृष्टि-पत्र  बनाया गया है बल्कि इसको  लागू करने के लिए एक रोडमैप भी तैयार किया गया है। इसमें सभी विभागों का सहयोग  है।

    डॉ. सिंह ने कहा कि यह दृष्टि-पत्र आम नागरिकों, किसानों के कल्याण,  सतत विकास और सूक्ष्म स्तर पर अर्थ-व्यवस्था को मजबूत बनाने,  असंगठित क्षेत्र को गति देने,  अधोसंरचना का विकास करने जैसे विषयों पर केंद्रित है। उन्होंने एक साल में सरकार द्वारा उठाए गए कदमों की चर्चा करते हुए किसानों की जय किसान फसल ऋण माफी  योजना और असंगठित क्षेत्र के लिये नया सवेरा योजना, आयुष्मान भारत जैसी योजना का उल्लेख करते हुए  कहा कि इन  प्रयासों  में मुख्यमंत्री श्री कमल नाथ के विचारों और  विकास का संकल्प स्पष्ट दिखता है।

    डॉ. मनमोहन सिंह ने कहा कि दृष्टि-पत्र में 11 क्षेत्रों पर ध्यान केन्द्रित किया गया है। आर्थिक समृद्धि के लिए कृषि प्र-संस्करण उद्योग, अधोसंरचना विकास और सेवा क्षेत्र पर ध्यान देने से भविष्य में ज्यादा से ज्यादा संख्या में रोजगार निर्माण करने में मदद मिलेगी।

    पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. सिंह ने कहा कि स्कूल शिक्षा, उच्च शिक्षा, कौशल विकास और तकनीकी शिक्षा पर ध्यान केन्द्रित करने से गुणवत्तापूर्ण  मानव संसाधन तैयार करने की सरकार की सोच साफ़ दिखती है। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य के क्षेत्र में मेडिकल कॉलेजों की संख्या और सीटें बढ़ाने तथा स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार करने से भविष्य में प्रदेश में स्वास्थ्य पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा। उन्होंने कहा कि मैग्नीफिसेंट मध्यप्रदेश जैसे आयोजन से उद्योग क्षेत्र में घरेलू और विदेशी पूंजी निवेश बढ़ाने में मदद मिलेगी। डू-इट योरसेल्फ गवर्नेंस व्यवस्था को दूसरे चरण में ले जाने से प्रशासन में भी पारदर्शिता बढ़ेगी। पंचायत राज संस्थाओं और स्थानीय संस्थाओं के संसाधनों और क्षमता को मजबूत बनाने पर ध्यान देने से प्रशासन तंत्र मजबूत होगा और  दृष्टि पत्र को समय पर पूरा करने में मदद मिलेगी। डॉ. मनमोहन सिंह ने विजन टू डिलीवरी 2020-25 को सुगठित,  फोकस्ड और यथार्थवादी बताते हुए कहा कि यह लोगों की आकांक्षाओं का दस्तावेज है।

    मुख्यमंत्री श्री कमल नाथ ने पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह का स्वागत एवं आभार व्यक्त करते हुए कहा कि मुझे 10 साल तक डॉ. मनमोहन सिंह के नेतृत्व में केन्द्रीय मंत्री-मंडल में काम करने का सौभाग्य मिला। मुख्यमंत्री ने कहा कि हमने दढ़ इच्छाशक्ति के साथ 365 दिन में वचन पत्र के 365 बिन्दुओं को पूरा किया।

    मुख्य सचिव एस.आर. मोहंती ने सरकार का एक साल पूरा होने पर उठाए गए कल्याणकारी कदमों और निर्णयों का उल्लेख करते हुए लोगों के विकास के लिए तैयार किए गए विजन टू डिलीवरी 2020-25 की विशेषताओं की चर्चा की। अपर मुख्य सचिव योजना मोहम्मद सुलेमान ने आभार व्यक्त किया।

  • संदीप डाकोलिया बने प्रदेश अध्यक्ष

    संदीप डाकोलिया बने प्रदेश अध्यक्ष

    भोपाल,13 दिसंबर(प्रेस सूचना केन्द्र)। अखिल भारतीय जैन पत्रकार महासंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष प्रवीण कुमार खारीवाल की सहमति से राष्ट्रीय महासचिव संजय लोढ़ा ने संदीप डाकोलिया को प्रदेश अध्यक्ष नियुक्त किया है। डाकोलिया विगत वर्षों से मप्र में जैन समाज के पत्रकारों के माध्यम से समाज की एकता को लेकर रचनात्मक आंदोलन चला रहे हैं। समाज को जोड़ने की दिशा में उनकी सक्रियता को देखकर अब उन्हें ही प्रदेश अध्यक्ष पद की जवाबदारी सौंपी गई है।

    श्री डाकोलिया ने सभी पंथों और समाज के सभी वर्गों के साधुओं और गणमान्य नागरिकों से मिलकर सकल जैन समाज को शक्ति के रूप में उभारने का अभियान चलाया और उसमें बड़ी सफलताएं भी अर्जित कीं हैं। डाकोलिया की इस नियुक्ति से आने वाले दिनों में एकता के इस अभियान को और अधिक सफलता मिलेगी। श्री संदीप डाकोलिया की इस नियुक्ति से राजधानी के सभी जैन पत्रकार साथियों के बीच संतोष महसूस किया गया है। बरसों से जैन समाज के पत्रकार अलग अलग जिलों में अपनी विश्वसनीय खबरों से समाज का मार्गदर्शन करते रहे हैं।

    उन्होंने अपनी नियुक्ति को संगठन के लिए उपयोगी बताया है। उनका कहना है कि जिस तरह से अभियान में बड़ी संख्या में जैन पत्रकार जुड़े हैं उनसे निरंतर संवाद स्थापित करने के लिए ये नई भूमिका मददगार साबित होगी।

    संगठन के जिलाध्यक्ष आलोक सिंघई ने बताया कि श्री डाकोलिया की नियुक्ति से राजधानी के पत्रकारों ने संतोष व्यक्त किया है। सर्वश्री सनत जैन, रवीन्द्र जैन, राकेश सिंघई, विनोद भारिल्ल,प्रशांत जैन, संजय जैन, प्रवीण जैन, राजेन्द्र जैन, अंकित जैन, विकास जैन सभी ने उम्मीद की है कि संदीप डाकोलिया की नियुक्ति से जैन पत्रकारों का संगठन और भी मजबूती के साथ उभरेगा।

  • सिमी से जुड़े दो आतंकी गिरफ्तार

    सिमी से जुड़े दो आतंकी गिरफ्तार

    मध्‍यप्रदेश एटीएस को बड़ी सफलता, सिमी के दो सदस्‍य दो दिन के भीतर पकड़े

    भोपाल,13 दिसंबर (प्रेस सूचना केन्द्र)। मध्‍यप्रदेश पुलिस के आतंक विरोधी दस्‍ता (एटीएस) को बड़ी कामयाबी मिली है। एटीएस ने दो दिन के भीतर प्रतिबंधित संगठन सिमी के दो सस्‍दयों को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार किये गए सिमी सदस्‍यों में एजाज व इलियास शामिल हैं। आरोपी एजाज पिछले 13 वर्षों से एवं आरोपी इलियास पिछले 18 वर्षों से फरार था। विभिन्‍न राज्‍यों की गुप्‍तचर एजेंसियों को इन दोंनों आरोपियों की तलाश थी।

         अतिरिक्‍त पुलिस महानिदेशक एटीएस श्री राजेश गुप्‍ता ने बताया कि सिमी के सदस्‍य एजाज शेख पिता मोहम्‍मद अकरम निवासी जाकिर हुसैन मार्ग बुरहानपुर को एटीएस ने पुख्‍ता सूचना के आधार पर गत 12 दिसंबर को पाला बाजार बुरहानपुर से पकड़ा है। एजाज के खिलाफ एटीएस मुंबई में विधिविरूद्ध क्रियाकलाप निवारण अधिनियम की धारा 10,13 के तहत आरोप दर्ज है। गिरफ्तारी के बाद आरोपी एजाज को सीजेएम न्‍यायलय बुरहानपुर में पेश किया गया है। साथ ही महाराष्‍ट्र एटीएस को भी उसकी गिरफ्तारी के संबंध में सूचना दे दी गई है।

         मध्‍यप्रदेश एटीएस द्वारा इसी तरह दिल्‍ली स्‍पेशल सेल की मदद से आरोपी इलियास शेख पिता मोहम्‍मद अकरम निवासी शाहीन नगर ओखला दिल्‍ली को 13 दिसंबर को दिल्‍ली से गिरफ्तार किया गया है। इलियास के खिलाफ बुरहानपुर थाना कोतवाली में भारतीय दंड विधान की धारा 153ए एवं विधिविरूद्ध क्रियाकलाप निवारण अधिनियम की धारा 11,13 के तहत प्रकरण दर्ज है। साथ ही एटीएस थाना मुंबई में भी इलियास के खिलाफ विधिविरूद्ध क्रियाकलाप निवारण अधिनियम की धारा 11,13 के तहत प्रकरण कायम है।

         अतिरिक्‍त पुलिस महानिदेशक एटीएस श्री गुप्‍ता ने बताया कि इलियास को फिलहाल मुंबई एटीएस को सौंपा गया है। इसे बुरहानपुर कोतवाली में दर्ज प्रकरण में रिमांड पर लिया जाएगा। अन्य सूत्र बताते हैं कि दोनों आतंकी एहतेशाम सिद्दीकी और अब्दुल सुभान कुरैशी उर्फ तौकीर के साथ जुड़े थे.

  • माफिया से संग्राम का डरावना अध्याय

    माफिया से संग्राम का डरावना अध्याय

    मध्यप्रदेश में कांग्रेस सरकार किन हालात में आई सभी जानते हैं। प्रदेश के लोग शिवराज सिंह चौहान की प्रशासनिक असफलताओं से खफा थे और उन्होंने विकास के नाम पर लूट करने वाले फोकटियों को अपने पड़ौस में देखा था। नतीजतन वे खफा हुए और शिवराज सिंह चौहान की खरीदी हुई अतिलोकप्रियता धराशायी हो गई। अब कांग्रेस के गुटीय संतुलन को साधकर सत्ता में आए कमलनाथ ने शिवराज सिंह चौहान के नेतृत्व में जड़ विहीन कर दी गई भारतीय जनता पार्टी को फुटबाल बना दिया है। खुद भाजपा के नेता आश्चर्य से देख रहे हैं कि आखिर कमलनाथ की शक्ति का आधार क्या है। ऐसा क्या हो गया कि कमलनाथ कथित कैडर आधारित पार्टी को आए दिन ठोक रहे हैं और कोई बोलने वाला तक नहीं है। दरअसल शिवराज सिंह चौहान ने अपने नजदीक जैसै भ्रष्ट और नपुंसक लोगों की भीड़ जमा कर ली थी उनकी शक्ति का आधार केवल सरकार थी। सरकारी तंत्र का लाभ लेकर वे भ्रष्ट मंत्री अफसर विकास के नाम पर लिए गए कर्ज को जीमने में जुटे रहे। धनागमन के इस आंकड़े को बाहर बैठा कोई सामान्य शख्स भी अच्छी तरह समझ सकता है। शुरुआती दौर में उमा भारती ने जब राघवजी भाई को वित्तीय प्रबंधन की कमान थमाई तो उन्होंने प्रदेश की आय बढ़ाने में व्यावसायिक प्रबंधन का सहारा लिया। वे स्वयं टैक्स सलाहकार थे सो उन्होंने टैक्स प्रदाताओं से धन जुटाकर प्रदेश की बैलेंस शीट मजबूत की। जिससे भाजपा सरकार केन्द्र से अधिक धन प्राप्त कर सकी। मैचिंग ग्रांट भरपूर होने की वजह से तरह तरह की योजनाएं बनाईं गईं और प्रदेश के लिए वित्तीय प्रबंधन मजबूत किया गया। शिवराज सिंह चौहान इस वित्तीय प्रबंधन की वजह से भरपूर धन लुटाते रहे। हितग्राहियों के जो सम्मेलन भाजपा कर रही थी वह वास्तव में फुगावा था। दरअसल सत्ता के अंतिम मुहाने पर पंचायतों में बैठे दिग्विजय सिंह के समर्थक उस धन को आहरित कर रहे थे। वे गांव के लोगों को ठेलकर हितग्राही सम्मेलनों में भेज रहे थे और भाजपा उन्हें प्रदेश के विकास की धुरी मान रही थी। राजीव गांधी के पंचायती राज को माफिया राज में बदलने वाले इस षड़यंत्र की आहट जब पंचायत सचिव रहे आईएएस आरएस जुलानिया को लगी तो उन्होंने पंचायतों को जाने वाला फंड रोक दिया। इसके बावजूद इस दौरान जन धन का भारी अपव्यय हो चुका था। ठेकेदारों और अफसरों के जिस गठजोड़ ने राजनेताओं का संरक्षण पाकर विकास की कहानियां सुनाईं वे भी इस प्रक्रिया में भरपूर मजबूत हो चले थे। अब सत्ता की मलाई चाटने वाला ये माफिया इस बार कांग्रेस के साथ है, और कमलनाथ सरकार माफिया के विरुद्ध संग्राम का उद्घोष कर रही है। सरकार की निगाह में माफिया वो है जो टैक्स नहीं देता और कानूनी इबारतों को अनदेखा करके अनगढ़ तरीके से धन बनाने का काम कर रहा है। दरअसल प्रदेश और देश में धन बनाने वाला बड़ा वर्ग वो है जो बगैर किसी सरकारी मदद के अपना कारोबार करके धनार्जन करता है। निश्चित रूप से सरकारी तंत्र उसे अवैध कारोबारी कहता है। इसीलिए सरकार ने शुद्द के लिए युद्ध नाम का जो अभियान चलाया उसमें निरीह व्यापारियों की मौत हो गई। उन पर रासुका लाद दी गई और जेलों में ठूंस दिया गया। उनके उद्योग से जुड़े हजारों कर्माचारी बेरोजगार हो गए। इसके बावजूद कमलनाथ सरकार और उससे पोषित मीडिया इसे बेईमानों के विरुद्ध संग्राम बताता रहा। आज जब कमलनाथ माफिया के विरुद्ध शंखनाद करने के लिए सरकारी तंत्र को छूट दे रहे हैं तो वो कहर कांग्रेस के विरोधियों पर टूटने वाला है। जो अवैध कारोबार करने वाले कांग्रेस की गोदी में बैठे हैं या बैठ चुके हैं उन पर इस युद्ध का कोई असर पड़ने वाला नहीं है। इसके साफ संकेत कमलनाथ सरकार की कार्यप्रणाली को देखकर मिल जाता है। तबादले पोस्टिंग के कारोबार में जिस तरह खुलेआम नौकरियों की बोलियां लगाईँ गईं उससे साफ पता चलता है कि सरकार अपने विरोधियों को अपराधी बताने में कोई गुरेज नहीं कर रही है। जिस तरह कांग्रेस ने चुनाव के दौरान कर्ज माफी या सस्ती बिजली के वादे किए उसके लिए धन की जरूरत थी। ये धन इसी तरह बेरहमी से टैक्स वसूली से उगाया जा सकता है। साथ में बंदर हीरा खदान को नीलाम करके सरकार ने अपने धन की उगाही का एक अजस्र स्रोत भी तलाश लिया है। चुनावों को देखकर शिवराज सिंह चौहान ने रेत को टैक्स मुक्त करके अपने समर्थकों को खुश करने का खेल खेला था उसे भी कमलनाथ माफिया के विरुद्ध युद्ध बता रहे हैं। निश्चित रूप से सरकार और प्रदेश को चलाने के लिए धन की जरूरत होती है। यह धन टैक्स से ही जुटाया जाता है। जो सरकार अपनी आय का अस्सी फीसदी हिस्सा स्थापना खर्च में ही लुटा देती हो वह प्रदेश के लिए धन बनाने वाले कारोबारियों को माफिया कहे तो ये वास्तव में क्रूरता होगी। इसके बावजूद सरकार धड़ल्ले से फोकटियों को ये अधिकार दे रही है कि वे प्रदेश के लिए पैसा उत्पादन करने वाले या सेवाएं उपलब्ध कराने वालों को माफिया कहे क्योंकि वे सरकार से सहमत नहीं हैं। ये आपातकाल से भी ज्यादा नृशंस और निंदनीय कार्य कहा जाएगा। इतिहास में आपातकाल को इंदिराजी का सबसे घिनौना अत्याचार बताया जाता है लेकिन कमलनाथ का ये माफिया संग्राम सदियों तक डरावने अध्याय के रूप में जाना जाएगा।

  • माफिया से युद्ध को कमलनाथ ने दी खुली छूट

    माफिया से युद्ध को कमलनाथ ने दी खुली छूट

    मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में उच्च-स्तरीय बैठक कल

    भोपाल 11 दिसंबर(प्रेस सूचना केन्द्र)। कमल नाथ सरकार ने अपने मात्र एक साल के कार्यकाल में वर्षों से माफिया राज के आतंक का दंश झेल रही आम जनता को इससे मुक्त कराने की मुहिम को तेज करने के लिए 12 दिसंबर को उच्च स्तरीय बैठक बुलाई गई है। जनसम्पर्क मंत्री पी.सी. शर्मा ने कहा है कि मुख्यमंत्री के स्पष्ट निर्देश हैं कि अब प्रदेश में ‘लोगों के लिए लोगों की सरकार’ चलेगी न कि माफिया राज।

    जनसम्पर्क मंत्री श्री शर्मा ने कहा कि मात्र एक साल में माफिया राज की कमर तोड़ने का जो साहस मुख्यमंत्री ने दिखाया है, उससे जनता को राहत मिली है। उन्होंने कहा कि माफिया, शासन-प्रशासन को ताक पर रखकर पूरे प्रदेश में दशकों से  समानांतर सरकार चला रहे थे, जिसका खामियाजा प्रदेश की जनता भुगत रही थी और विकास अवरूद्ध हो रहा था।

    श्री शर्मा ने कहा कि माफिया के खिलाफ जनमानस के साथ कमर कसकर खड़ी कमल नाथ सरकार ने मिलावटखोरों के खिलाफ ‘शुद्ध के लिए युद्ध’ की शुरुआत की। आम जनता को जहर परोस रहे मिलावटखोर माफियाओं की धर-पकड़ से पूरे प्रदेश में बड़े पैमाने पर कार्यवाही हुई। अभियान के दौरान मिलावटखोरों के खिलाफ 94 एफआईआर दर्ज की गई और 31 कारोबारियों के खिलाफ रासुका के तहत कार्रवाई हुई।

    मंत्री श्री शर्मा ने कहा कि राज्य सरकार की नई रेत नीति बन जाने से अभी तक प्रदेश की रेत संपदा लूटने और प्रदेश की जनता के हितों से कुठाराघात करने वाले माफिया के हौसले पस्त हो गए हैं। शासन-प्रशासन पर हमले कर और राजनीतिक संरक्षण प्राप्त कर बेखौफ रेत माफिया को एक ही फैसले से मुख्यमंत्री श्री कमल नाथ ने ध्वस्त कर दिया है। यही नहीं, नई रेत नीति से प्रदेश को जो राजस्व करीब 200 करोड़ मिलता था, वह इस वर्ष बढ़कर 1234 करोड़ तक पहुँच गया है। पिछले 15 साल से 15 हजार करोड़ रुपए किसकी जेब में जा रहे थे, इसका खुलासा भी मुख्यमंत्री ने नई रेत नीति बनाकर किया है। अब ये पैसा निजी हाथों में जाने के बजाए प्रदेश के विकास और जनता के हितों के लिए उपयोग होगा। 

    जनसम्पर्क मंत्री ने कहा कि किसानों को मिलावटी खाद बेचने वाले माफियाओं से मुक्त कराने के लिए भी मुहिम पूरे प्रदेश में चल रही है। पिछले एक माह में 1313 उर्वरक विक्रेताओं और गोदामों का निरीक्षण कर लिए गए नमूनों में 110 प्रकरणों में मिलावट पाए जाने पर कार्रवाई की गई है।

    श्री पी.सी. शर्मा ने कहा कि इतना ही नहीं, कमल नाथ सरकार ने विभिन्न शहरों में अपने रसूख और माध्यमों का दुरुपयोग करके अनैतिक गतिविधियाँ चलाने, सरकारी और निजी जमीनों पर कब्जे कर अपना साम्राज्य बनाने वाले तथा इंदौर और ग्वालियर में भी माफिया के खिलाफ सारे दबावों के बावजूद सख्ती दिखाई है और कठोर कार्यवाही भी सुनिश्चित की है। इस दृढ़तापूर्ण कार्रवाई के पीछे एक ही लक्ष्य था कि अब माफिया को प्रदेश की जनता और यहाँ की सरकारी संपदा को लूटने की इजाजत नहीं होगी। 

    मंत्री श्री शर्मा ने कहा कि जो नेता प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से माफिया के समर्थन में बयान देकर उनका संरक्षण कर रहे हैं, उनकी गतिविधियों से यह स्पष्ट है कि 15 साल में ये माफिया किनके संरक्षण में पनपे हैं। श्री शर्मा ने कहा कि प्रदेश में माफिया राज को जड़ से उखाड़ फेकने के लिए मुख्यमंत्री श्री कमल नाथ की अध्यक्षता में 12 दिसंबर को उच्च स्तरीय बैठक होने जा रही है। इस बैठक में गृह मंत्री, मुख्य सचिव, पुलिस महानिदेशक, अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (गुप्त वार्ता) एवं एसआईटी, आईजी एवं कमिश्नर जबलपुर, इंदौर, ग्वालियर, भोपाल, कलेक्टर इंदौर एवं कमिश्नर इंदौर नगर निगम उपस्थित रहेंगे। 

  • एक करोड़ उपभोक्ताओं को मिली सस्ती बिजली बोले प्रियव्रत सिंह

    एक करोड़ उपभोक्ताओं को मिली सस्ती बिजली बोले प्रियव्रत सिंह

    भोपाल,9 दिसंबर(प्रेस सूचना केन्द्र)। ऊर्जा मंत्री प्रियव्रत सिंह ने दावा किया है मध्यप्रदेश सरकार ने अपने चुनावी वादे को पूरा करते हुए एक करोड़ बिजली उपभोक्ताओं को इंदिरा ज्योति योजना में सस्ती बिजली उपलब्ध कराई है। केवल सत्रह लाख उपभोक्ता इस सुविधा के दायरे में नहीं आए हैं। हितग्राही उपभोक्ताओं को अब तीस दिनों की बिजली खपत डेढ़ सौ यूनिट से कम होने पर सौ यूनिट का बिल मात्र सौ रुपए लिया जा रहा है।

    प्रेस वार्ता में श्री सिंह ने बताया कि उपभोक्ताओं को लाभ देने के लिए राज्य सरकार 3400 करोड़ रुपए की सब्सिडी दे रही है। इससे 90 फीसदी उपभोक्ता लाभान्वित हो रहे हैं। उन्होंने बताया कि जब नई सरकार सत्ता में आई तब बिजली कंपनियों पर 37963 करोड़ रुपए का कर्ज था और लगभग 44975 करोड़ का संचयी घाटा था।

    उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के उस बयान को गैर लोकतांत्रिक बताया जिसमें उन्होंने उपभोक्ताओं से अधिक बिजली बिल का भुगतान न करने का आव्हान किया है। उन्होंने कहा कि इस तरह के भड़काऊ बयानों से अराजकता फैल जाएगी जिसे नियंत्रण करने के लिए राज्य को अपने बहुमूल्य संसाधन खर्च करने होंगे।

    जुलाई महीने से लेकर अब तक ऊर्जा विभाग में कितने तबादले किए गए और इन तबादलों से विभाग को क्या लाभ हुआ पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि ये तबादले पांच साल की समयसीमा पूरी होने पर किए गए हैं। उन्होंने कहा कि तबादलों की निश्चित संख्या तो बता पाना फिलहाल संभव नहीं है लेकिन ये तबादले जरूरत के अनुसार ही किए गए हैं।

    नवंबर के महीने तक मीटर बदलने की समय सीमा बढ़ाए जाने की बात स्वीकार करते हुए श्री सिंह ने कहा कि ये समय सीमा मार्च 2020 तक तय की गई है।

  • माफिया के कब्जे में कमलनाथ सरकार

    माफिया के कब्जे में कमलनाथ सरकार

    लगभग चौदह साल का शिव राज प्रशासनिक तौर पर प्रदेश का सबसे लचर शासनकाल कहा जा रहा है। जबकि शिवराज सिंह चौहान ने प्रदेश को परिवार की तरह चलाया। सबको काम करने और आगे बढ़ने का अवसर दिया। शिवराज की इस शासनशैली से आम नागरिकों ने तो संतोष महसूस किया लेकिन कांग्रेस का कहना है कि शिव के राज में माफिया ताकतों ने अपना आतंक फैला रखा था । अब मुख्यमंत्री कमलनाथ की सरकार ने प्रदेश के लगभग बीस माफिया ताकतों को कथित तौर पर पहचाना है। वह अब माफिया के विरुद्ध संघर्ष का ऐलान कर रही है। इस कड़ी में उसने इंदौर से लोकस्वामी अखबार के संपादक जीतू सोनी को खलनायक की तरह पेश करने का अभियान चलाया है। उसके जीतू सोनी के लगभग छह ठिकाने धराशायी कर दिये गए हैं। होटल से लेकर घर और ऐसे तमाम परिसरों पर तोड़फोड़ की गई जिन पर जीतू सोनी का दावा रहा है। सरकार की इस कार्रवाई से प्रदेश के लोग हैरान हैं। प्रेस जगत के लोग भी खासे खफा हैं। जिन्होंने जीतू सोनी की कार्यशैली देखी है वे उसे एक सदाशयी पत्रकार के रूप में जानते हैं। ऐसा बहादुर जिसने सत्ता के बुलंद बुर्जों की काली करतूतें भी ठप्पे से अपने अखबार में प्रकाशित कीं। जीतू सोनी का साम्राज्य पिछले तीस सालों में तमाम झंझावातों के बीच लगातार बढ़ता चला। कांग्रेस की सरकारें हों या भाजपा की सभी ने उनकी पत्रकारिता को सलाम किया और उनके डांसबार को एक उपयोगी कारोबार माना। उनके होटल माईहोम को शराब पिलाने का लाईसेंस प्राप्त था। वह होटल पुलिस प्रशासन,अफसरों और अपराधियों सभी का लोकप्रिय स्थान रहा है। मुंबई की तर्ज पर न केवल इंदौर बल्कि प्रदेश और देश भर के बिगड़े नवाब इस डांस बार में आते रहे हैं। जीतू सोनी अच्छे व्यवस्थापक रहे और उन्होंने बार बालाओं समेत इस कारोबार से जुड़े लोगों को सुरक्षित ठिकाना उपलब्ध कराया। शराबखोरी के बीच होने वाली गुंडागर्दी को नियंत्रित करने के लिए उनके पास बाऊंसर्स की टीम थी। इसके बावजूद उन्होंने कभी प्रशासन से टकराव नहीं लिया। अब कमलनाथ सरकार खजाना खाली होने का शोर मचाकर समाज के सभी तबकों से वसूली अभियान चला रही है। शुद्ध के लिए युद्ध अभियान की आड़ में व्यापारियों के चंदा और टैक्स वसूली का अभियान चलाया गया। इसके बाद अब सरकार कथित तौर पर माफिया के विरुद्ध अभियान चला रही है। दरअसल सरकार का लक्ष्य प्रदेश से राजस्व संग्रहण की उगाही बढ़ाना तो है ही साथ में कांग्रेस का पार्टी फंड भी जुटाया जा रहा है। यह काम गुंडागर्दी के किया जा रहा है और इसके लिए आड़ जनता की ली गई है। शुद्ध के लिए युद्ध अभियान में जिन्होंने चंदा दिया और टैक्स भरना शुरु कर दिया उनके विरुद्ध तो कोई कार्रवाई नहीं की गई लेकिन जिन्होंने न चंदा दिया और न ही टैक्स भरने का तंत्र विकसित किया उनके विरुद्ध रासुका जैसी कार्रवाईयां की गईं। इस दौरान कई व्यापारियों के तो कारोबार बंद हो गए और उससे जुड़े कर्मचारी भी बेरोजगार हो गए। जीतू सोनी को पुलिस और प्रशासन गुंडातत्वों पर नियंत्रण पाने के लिए इस्तेमाल करता रहा है। जो काम पुलिस या निगम प्रशासन नहीं कर पाता वह जीतू सोनी के बाऊंसर्स की मदद से पूरे कराए जाते थे।पहली बार पुलिस ने अपने ही पाले पोसे इस तंत्र के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की है। जीतू सोनी पर तेईस मुकदमे लाद दिए गए हैं,तीस हजार रुपए का इनाम घोषित कर दिया गया है,विदेश भागने पर प्रतिबंध लगाने की तैयारी चल रही है। ऐसा करके कमलनाथ सरकार कानून के सहारे अपना आतंक का राज स्थापित करना चाह रही है। जीतू सोनी के अखबार लोकस्वामी ने हनी ट्रेप कांड की किस्तें छापनी शुरु कीं थीं। अफसरों और नेताओं के जिस गठजोड़ ने सरकार में रहकर प्रदेश के कर्ज के दलदल में धकेला और भ्रष्टाचार के माध्यम से भारी धन जुटाया वे अय्याशी में लिप्त हो गए। जीतू सोनी को पुलिस और प्रशासन ने जिस जिम्मेदारी के लिए तैयार किया था उन्होंने वह बखूबी निभाई। अय्याशियों की ये खबर उनके अखबार ने जैसे ही छापना शुरु की सत्ता शीर्ष के इंद्र का सिंहासन डोल गया। मंत्रालय के कई अफसरों को लगा कि यदि वे चुप रहे तो उनकी तो भद पिट जाएगी। नतीजतन उन्होंने पुलिस का इस्तेमाल करके जीतू सोनी को धराशायी करने की मुहिम चला दी। पिछले तीस सालों से जो जीतू सोनी समाज का उपयोगी उपकरण था वो आज कुख्यात माफिया बना दिया गया है। अखबारों के बीच भी आतंक फैल गया है। भारत सरकार के कार्पोरेट कार्य मंत्रालय से अरबों रुपयों का लोन जुटाकर जो कथित बड़े अखबार प्रकाशित हो रहे हैं उनकी तो औकात भी नहीं थी कि वे अपने समान भ्रष्टाचार की गंगा में नहाने वाले सत्ताधीशों पर कीचड़ उछाल सकें। यही वजह है कि वे कथित बड़े अखबार सरकार की कार्रवाई को सही ठहराने में जुट गए। अवसरवादी पत्रकारों के एक समूह ने भी इस अवसर को लपक लिया और वे जीतू सोनी को खलनायक बताने वाली कहानियां छापने दिखाने लगे। इसके बावजूद आज पत्रकारों का बड़ा तबका सरकार की कार्रवाई से खफा है। वह जानता है कि सरकार उन भ्रष्ट और अय्याश अफसरों नेताओं के नेटवर्क को बचाने का काम कर रही है जिन्होंने विकास के नाम पर प्रदेश को बेचने का काम किया है। जीतू सोनी को अपराधी बताने वालों को तय करना होगा कि समाज की वैचारिक गंदगी को साफ करने वाला लोकस्वामी ज्यादा बड़ा अपराधी है या फिर प्रदेश को अरबों रुपयों के कर्ज में डुबाने वाले गद्दार नेता, अफसर या ठेकेदार । आज मध्यप्रदेश विकास के पथ पर दौड़ रहा है। उसे काली अर्थव्यवस्था के पथ पर दौड़ाने वाले नेता, अफसर,ठेकेदार न केवल प्रदेश बल्कि देश की विकास यात्रा को भी क्षति पहुंचा रहे हैं। जब हिंदुस्तान पांच ट्रिलियन डालर की इकानामी बनने को अग्रसर है तब सत्ता माफिया प्रदेश के आय के संसाधनों पर कब्जा जमाने की जंग लड़ रहा है। कमलनाथ सरकार जाने अनजाने में इस वैश्विक माफिया का औजार बन रही है। सरकार के ये कार्यकलाप अवश्य ही निंदनीय हैं। कमलनाथ सरकार तब समानांतर अर्थव्यवस्था को फूलने फलने का अवसर दे रही है जब नोटबंदी के बाद भारत सरकार ने रुपये की ताकत बढ़ाने का अभियान चलाया था। देश की नीतियों से इस टकराव के बीच प्रदेश की विकास यात्रा क्षतिग्रस्त हो रही है। सरकार को अपने फैसले पर फिरसे चिंतन करना चाहिए। सरकार पर माफिया का शिकंजा इसी तरह बढ़ता रहा तो आने वाले समय में ब्राजील या इटली की तरह माफिया सरकार से भी बड़ी ताकत बन जाएगा जो घातक सिद्ध होगा।

  • सस्ती बिजली के पाखंड की आड़ में रिकार्डतोड़ वसूली

    सस्ती बिजली के पाखंड की आड़ में रिकार्डतोड़ वसूली

    भोपाल,4 दिसंबर(प्रेस सूचना केन्द्र)। प्रदेश के पावर सेक्टर के इतिहास में नवंबर 2019 का माह मील के पत्थर के रूप में दर्ज हो गया है। नवंबर में राजस्व संग्रह  2017 करोड़  रुपये का हुआ है, जो नवंबर 2018 की तुलना में 413 करोड़ अधिक है। इस प्रकार लगभग 26 प्रतिशत अधिक राजस्व मिला है जो अब तक का प्रदेश का एक माह का सर्वाधिक राजस्व संग्रह है। इसके लिये ऊर्जा मंत्री श्री प्रियव्रत सिंह ने बिजली उपभोक्ताओं और तीनों विद्युत वितरण कंपनी के स्टॉफ को बधाई दी है।

    गौरतलब है कि  वर्ष 2018 में जुलाई से नवंबर की तुलना इस वर्ष 2019  से की जाए तो इन महीनों में 1687 करोड़ का अधिक राजस्व संग्रह हुआ है। इसी प्रकार प्रति यूनिट नगद  राजस्व वसूली गत वर्ष 2 रुपये 34 पैसे की तुलना में इस वर्ष नवंबर में  4 रुपये 14 पैसे हो गई है। यह गत वर्ष के इसी माह से 77 प्रतिशत अधिक है। 

    प्रदेश की तीनों वितरण कंपनियों ने राजस्व संग्रह में अब तक का उत्कृष्ट योगदान दिया है। पूर्व क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी द्वारा नवंबर 2019 में 596 करोड़, मध्य क्षेत्र कंपनी द्वारा 587 करोड़ एवं पश्चिम क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी द्वारा 834 करोड़ रुपए का राजस्व संग्रह किया गया। पिछले वर्ष इसी अवधि में पूर्व क्षेत्र कंपनी द्वारा 452 करोड़, मध्य क्षेत्र कंपनी द्वारा 488 करोड  एवं पश्चिम क्षेत्र कंपनी द्वारा 664 करोड़ रुपए का राजस्व संग्रह किया गया था। इस नवंबर माह में पूर्व क्षेत्र कंपनी द्वारा  31.71 प्रतिशत, मध्य क्षेत्र कंपनी द्वारा 20.38 प्रतिशत व पश्चिम क्षेत्र कंपनी द्वारा 25.63 प्रतिशत अधिक राजस्व संग्रह किया गया। यह कंपनी गठन के बाद किसी एक माह में सर्वाधिक है। 

     ऊर्जा मंत्री  ने कहा है कि सरकार प्रदेश के शहरों और ग्रामों में 24 घंटे तथा किसानों को घोषित अवधि में 10 घंटे निर्बाध विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए कृत-संकल्पित है। 

  • आपातकाल की बूढ़ी कुढ़न

    आपातकाल की बूढ़ी कुढ़न

    लोकस्वामी अखबार पर तालाबंदी और संपादक जीतू सोनी पर दस हजार रुपए का इनाम घोषित करके कमलनाथ सरकार ने आपातकाल की यादें ताजा कर दीं हैं। एक बार फिर ये साबित हो गया है कि देश में केवल दो वर्ग हैं एक शोषक और दूसरा शोषित। पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने जिस एसके मिश्रा छोटू को आईएएस बनाया था वे शिवराज सिंह चौहान के प्रमुख सचिव रहे और भ्रष्टाचार के सबसे बड़े संरक्षक भी रहे। पूरी आईएएस बिरादरी लंबे समय तक केवल इसलिए सदमे में रही क्योंकि उसे छोटू मिश्रा के निर्देशों का पालन करना पड़ा। रिश्वत में सोने और रत्नों की रिश्वत लेने वाले छोटू मिश्रा को तमाम शिकायतों के बावजूद शिवराज ने अपने से दूर नहीं किया। तमाम झंझावातों के बीच छोटू मिश्रा संवाद की कड़ी बने रहे। दिग्विजय सिंह को सत्ता का लाभ दिलाते रहे छोटू कांग्रेस के गुटीय संतुलन में भी प्रमुख कड़ी बने रहे। मुकेश नायक के जीजा होने के कारण वे उनकी पवई से जीत के शिल्पकार भी बने। शिवराज सिंह चौहान के वित्तीय सलाहकार होने के कारण ये जीजा साले भारतीय जनता पार्टी के कार्यकाल में मलाई छानते रहे। वित्तीय प्रबंधन की यही एकमात्र कला आज भी उन्हें कमलनाथ सरकार की सबसे पावरफुल शख्सियत बना रही है। वे आज भी इतने ताकतवर हैं कि जैसे ही इंदौर के जांबाज जीतू सोनी ने अपने अखबार में उनकी अय्याशी की कहानी छापी तो मौजूदा सरकार में भूचाल आ गया। बात दरअसल हरभजन सिंह की ब्लैकमेलिंग की नहीं है। दरअसल जीतू सोनी ने मध्यप्रदेश की सत्ता की उस चाभी को घुमा दिया जिससे कई सत्ताधीशों की तिजोरियों का राजमार्ग जुड़ा हुआ है। जीतू सोनी के पास जो सबूत हैं उनकी अगली किस्तें यदि जारी हो जातीं तो प्रदेश और देश को कर्ज के दलदल में घसीटने वाले उन सफेदपोशों के चेहरों पर कालिख पुत जाती जो लंबे समय से गद्दारी की इबारत लिख रहे हैं। इसमें भाजपा और कांग्रेस के वे तमाम चेहरे हैं जिन्हें प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष तरीके से प्रदेश पर शासन करने का अवसर मिला। जीतू सोनी का अखबार जब कैलाश विजयवर्गीय के खिलाफ खबरें छापता था तो इंदौर में तनाव हो जाता था। आज सतही तौर पर ही सही कैलाश विजय वर्गीय लोकस्वामी पर पड़े छापे की निंदा कर रहे हैं।दरअसल जीतू सोनी और उनकी पत्रकारिता को लंबे समय से देखने वाले पत्रकार भी जानते हैं कि माई होम को कैसे पुलिस महकमे ने समाज के नाबदान की तरह इस्तेमाल किया। माईहोम एकमात्र ऐसा डांस बार है जहां हर वक्त पुलिस की निगरानी रहती थी। इंदौर के तमाम नवधनाड्य वहां आते जाते रहते हैं। ऐसा दो दशकों से ज्यादा समय से चल रहा था। ये सारा तमाशा समाज के लिए इतना उपयोगी था कि अनुराधा शंकर जैसी दबंग पुलिस अधिकारी ने भी कभी इसे छेडने की कोशिश नहीं की। कमलनाथ ने जिन मनगढ़ंत कहानियों से इस अड्डे को तबाह करने का प्रयास किया है उसके नतीजे इंदौर के लोग अच्छी तरह जानते हैं। इंदौर वही शहर है जहां अनिल धस्माना पर जानलेवा हमला हुआ था। खुद रुचिवर्धन मिश्रा को इस मामले की गंभीरता बता दी गई थी। इसके बावजूद उन्होंने सरकार के इशारे पर अपने ही विभाग की बरसों की मेहनत को पलीता लगाने का फैसला कर लिया। हालांकि इसका थोड़ा बहुत आभास उन्हें भी हो गया था तभी जब वे प्रेस वार्ता में सरकार की गढ़ी कहानी सुना रहीं थीं तब उनके हाथ कांप रहे थे। जीतू सोनी को फरार करने और दस हजार रुपए का इनाम घोषित करने के पीछे कमलनाथ सरकार की मंशा केवल आतंक फैलाने की है। जैसा कि वह खाद्य पदार्थों में मिलावट के नाम पर रासुका लगाने के अभियान में कर चुकी है।

    इंदिरा गांधी की जमाखोरों के खिलाफ चलाई गई मुहिम की नकल बरसों बाद दुहराने के बाद भी कमलनाथ को वांछित सफलता नहीं मिल पा रही है। आपातकाल का हश्र पूरे देश के सामने है। कमलनाथ तो इंदिरा गांधी के समान बेदाग भी नहीं हैं। इसके बावजूद वे उसी पिटी फिल्म को दुबारा सुपरहिट कराने का ख्वाब पाले बैठे हैं। देश के असली उद्यमियों के विरुद्ध चलाई गई इस मुहिम की कुढ़न कोई अच्छे नतीजे लाएगी ये नहीं कहा जा सकता। दरअसल ये फर्जी उद्योगपतियों या कहा जाए देश के लुटेरों से जनता के संग्राम की शुरुआत कही जा सकती है। जीतू सोनी को तो माईहोम जैसे प्रोजेक्ट की वजह से प्रताड़ित किया जा सकता है लेकिन सूचना क्रांति के इस दौर में सच्चाई को छुपाना मुश्किल ही नहीं नामुमकिन है। फर्जी उद्योगपतियों की उद्यमिता के कारनामे भी जल्दी ही जनता जान जाएगी।तब एक नहीं हजारों जीतू सोनी खड़े होंगे और प्रदेश की पुलिस भी उनका मुकाबला नहीं कर पाएगी।