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  • धर्मस्थलों के अतिक्रमण हटाने में अव्वल रहे उज्जैनवासी

    धर्मस्थलों के अतिक्रमण हटाने में अव्वल रहे उज्जैनवासी

    उज्जैन24 मई(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर) उज्जैन के लोगों ने आपसी सामंजस्य और समन्वय से धर्मस्थलों के अतिक्रमण हटाने की मिसाल पेश की है। बरसों से शहर के विकास में रोड़े बने इन धर्मस्थलों को हटाने में प्रशासन के बजाए जनता ने खुद बड़ी भूमिका निभाई है। केडी मार्ग चौड़ीकरण में नागरिकों की इस पहल में जो साम्प्रदायिक सौहार्द्र देखने मिला आम तौर पर वैसा अन्य इलाकों में नहीं देखा जाता है।
    जिला प्रशासन, पुलिस एवं नगर निगम की संयुक्त टीम द्वारा गुरुवार और शुक्रवार को केडी गेट तिराहें से तीन इमली चौराहे के जद में आने वाले 18 धार्मिक स्थलों को जनसहयोग से शांतिपूर्वक ढंग से हटाने की कार्रवाई की गई हैं। जिसमें धार्मिक स्थलों के व्यवस्थापकों , पुजारियों और लोगों द्वारा भी सहयोग किया गया। 18 धार्मिक स्थलों में 15 मंदिर, 2 मस्जिद, एक मजार हैं, जिन्हें पीछे करने और अन्यत्र स्थापित करने की कार्यवाही की गई हैं। हटाई गई प्रतिमाओं को प्रशासन द्वारा धार्मिक स्थलों के व्यवस्थापकों द्वारा बताए गए निर्धारित स्थान पर विधि विधान से स्थापित किया गया। साथ ही 20 से अधिक भवन जिनका गलियारा आगे बढ़ा लिया गया था। ऐसे भवनों के उस हिस्से को भी भवन स्वामियों द्वारा स्वेच्छा से तोड़ने की कार्यवाही की गई।


    केडी मार्ग के विकास के लिए विभिन्न धार्मिक संप्रदाय न केवल आगे आए बल्कि उन्होंने स्वयं अपने धार्मिक स्थलों को हटाने में सहयोग किया। जिला प्रशासन द्वारा भी विभिन्न धार्मिक संप्रदायों से आपसी सामंजस्य और समन्वय बनाने में सक्रिय भूमिका निभाई गई। कलेक्टर उज्जैन श्री नीरज कुमार सिंह और पुलिस अधीक्षक श्री प्रदीप शर्मा द्वारा लगातार कार्यों की मॉनिटरिंग की गई।

    धार्मिक भावना आहत न हो इसका रखा गया विशेष ध्यान

    कलेक्टर श्री नीरज कुमार सिंह और पुलिस अधीक्षक श्री प्रदीप शर्मा के निर्देशानुसार धार्मिक स्थलों को हटाने से पूर्व और दौरान प्रत्येक संप्रदाय के व्यस्थापकों और प्रमुख लोगों से चर्चा की गई और समन्वय स्थापित किया गया। कलेक्टर श्री सिंह के निर्देशानुसार किसी भी संप्रदाय की धार्मिक भावना आहत न हो इस बात का विशेष ध्यान रखा गया।

    प्रशासन, पुलिस और नगर निगम के अमले ने निभाई सक्रिय भूमिका

    केडी मार्ग चौड़ीकरण के लिए कलेक्टर व एसपी के मार्गदर्शन में निगम आयुक्त श्री आशीष पाठक, एडीएम श्री अनुकूल जैन, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक श्री जयंत सिंह राठौर सहित अन्य अधिकारियों द्वारा विभिन्न धार्मिक संगठनों से समन्वय और सामंजस्य में सक्रिय भूमिका निभाई गई। लगभग डेढ़ किलोमीटर लंबे केडी मार्ग के लिए विभिन्न सेक्टर्स में कार्यपालिक मेजिस्ट्रेट्स की ड्यूटी लगाई गई। प्रशासन पुलिस एवं नगर निगम का अमला भी मुस्तैद रहा।

  • जेल के 15 करोड़ गबन करने वाली अधीक्षक ऊषा राज बयानों से बचने अस्पताल में भर्ती

    जेल के 15 करोड़ गबन करने वाली अधीक्षक ऊषा राज बयानों से बचने अस्पताल में भर्ती

    अधीक्षक के पद से हटाते ही जेलकर्मियों के परिजनों ने फोड़े पटाखे, मनवारे ने लिया चार्ज

    उज्जैन (प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)। केंद्रीय जेल भैरवगढ़ लगातार सुर्खियों में बनी हुई है। वजह डीपीएफ घोटाले में जेल अधीक्षक उषाराज को हटाने पर दोपहर में जेलकर्मियों के परिजनों ने पटाखे फोडक़र खुशियां मनाई। वहीं गबन केस में नोटिसों के बाद भी बयान नहीं देने पर शाम को पुलिस उन्हें जबरन भैरवगढ़ थाने ले गई। इस दौरान प्रभारी जेल अधीक्षक हिमानी मनवारे ने चार्ज लेकर काम शुरू कर दिया।

    भैरवगढ़ जेल के 68कर्मचारियों के भविष्य निधि खाते से करीब १५ करोड़ रुपए का घोटाले में जांच के बाद डीजी अरविंद कुमार ने जेल अधीक्षक उषाराज को वित्तीय अनियमितता का दोषी मानते हुए पद से हटाने के आदेश दे दिए। पता चलते ही कर्मचारी के परिजनों ने जेल परिसर में पटाखे फोड़े और ढोल बजाते हुए मिठाई बांटकर खुशी मनाई। इसी दौरान नवागत प्रभारी जेल अधीक्षक हिमानी मनवारे जेल पहुंचीं और उषा राज से चार्ज लिया।

    वहीं गबन मामले में लगातार तीन नोटिस के बाद भी बयान नहीं देने पर टीआई प्रवीण पाठक, जितेंद्र भास्कर, एसआई बल्लू मंडलोई जेल पहुंचे। बावजूद शाम तक इंतजार के बाद भी उषा राज सहयोग के लिए तैयार नहीं हुई। नतीजतन जेल पहुंचे सीएसपी अनिल मौर्य ने महिला थाना प्रभारी रेखा वर्मा और उनकी टीम को बुलाया और उषा राज को हिरासत में लेकर थाने ले गए,जहां रात तक एएसपी इंद्रजीत बाकलवाल, मौर्य व टीम उनसे पूछताछ करते रहे।

    आदेश आते ही सुविधा छीनी

    जेल अधीक्षक उषाराज को तबादला का मुख्यालय में पदस्थ करने का आदेश आते ही सुबह से ही जेलर सुनील शर्मा, डिप्टी जेलर सुरेश गोयल मातहतों के साथ परिसर में जमा हो गए। बताया जाता है कि कर्मचारियों को शक था कि उषा राज गबन से संबंधित दस्तावेज और ऑफिस का सामान ले जा सकती है। इसलिए उन्हें रोकने के लिए वह तैनात हो गए थे।

    यहीं नहीं जेल अधीक्षक की स्थिति ऐसी थी कि उनके घंटी बजाने पर भी कोई कर्मचारी सुनने को तैयार नहीं था। इसे लेकर उन्होंने मीडिया के सामने आपत्ति भी जताई कहा गाड़ी छीनकर ड्राईवर व कंप्यूटर ऑपरेटर तक को हटा दिया।

    पटाखे फोडक़र बांटी मिठाई

    खास बात यह है कि किसी अधिकारी का तबादला होने पर मातहत स मान पूर्वक बिदा करते है, लेकिन जेल पर आज नजारा दूसरा ही था। यहां दोपहर में जेलकर्मियों के परिजन पहुंचे और जमकर पटाखे फोडऩे के बाद ढोल बजाकर मिठाई बांटी। प्रहरी गोर्वधन सिंह रघुवंशी के पुत्र नितिन ने बताया कि डीपीएफ घोटाले से कर्मचारियों के घर में मातम मना हुआ है। मेडम ने घोटाले के साथ ही काफी भ्रष्टाचार किया है इसलिए उन्हें हटाने पर खुशी मना रहे है।

    नई जेल अधीक्षक सचेत

    प्रभारी जेल अधीक्षक हिमानी मनवारे फिलहाल देवास में पदस्थ हैं। उन्हें भैरवगढ़ का अस्थाई रुप से अतिरिक्त चार्ज दिया गया है। मरवारे ने चार्ज लेने के बाद बताया कि उन्हें जेल के वर्तमान हालात की जानकारी है। मुख्यालय ने उन्हें सजग रहने का कहा है। जेल का निरक्षण कर आगे की रुपरेखा बनाएगी।

    डीपीएफ कांड : अब तक कब-क्या

    • १० मार्च : दो कर्मचारियों के राशि निकालने के आवेदन में एक ही आईआईएफसी कोड नंबर होने से ट्रैजरी ऑफिसर को शक हुआ। कलेक्टर ने जेल से रिकार्ड तलब किया। प्रथम दृष्टया१० करोड़ रुपए घोटाले का पता चलते ही कलेक्टर कुमार पुरुषोत्तम ने शासन व जेल डीजी को सूचना दी। रात १० बजे लेखा-जोखा संभालने वाला प्रहरी रिपूदमन घोटाला उजागर होने पर जेल अधीक्षक के सामने रोया और देर रात परिवार सहित फरार हो गया।
    • ११ मार्च : मामले में जिला कोषालय अधिकारी सुरेंद्र भामर ने भैरवगढ़ थाने में रिपूदमन के खिलाफ केस दर्ज कराया।
    • १३ मार्च : जेल डीआईजी मंशाराम पटेल सात सदस्यीय टीम के साथ भैरवगढ़ जेल पहुंचे,जांच शुरू।
    • १४ मार्च : प्रहरी शैलेंद्र सिकरवार व धर्मेद्र लोधी के खाते में १० करोड का ट्रांजेक्शन सामने आते ही फरार हुए,,घोटाले की राशि १४ करोड़ पहुंची।
    • १५ मार्च : जेल अधीक्षक को हटाने की मांग करते हुए कर्मचारी परिवार सहित अनशन पर बैठे। विधायक महेश परमार ने विधानसभा में प्रश्र लगाकर गृहमंत्री को ज्ञापन सौंपा।
    • १६ मार्च : जांच रिपोर्ट जेल डीजी अरविंदकुमार के पास पहुंची।
    • १७ मार्च : डीजी ने जेल अधीक्षक उषाराज को वित्तीय अनियमितता के आरोप में पद से हटाने और मनवारे का प्रभारी बनाने के आदेश जारी किए।
    • १८ मार्च : जेलकर्मियों के परिजनों ने खुशियां मनाई, नई अधीक्षक ने चार्ज लिया, उषा राज हिरासत में ले ली गईं, पूछताछ के बाद उन्हें दूसरे दिन सुबह आने को कहा गया था लेकिन वे इंदौर के एक निजी अस्पताल में भर्ती हो गईं।
    • गौरतलब है कि ऊषा राज को अपने एक रिश्तेदार की हत्या करने के आरोप में सागर जेल की सजा काटनी पड़ी थी।लेकिन बाद में सबूतों के अभाव में वे बरी हो गईं। तत्कालीन जेल अधीक्षक लालजी मिश्र की कृपा से वे जेल की नौकरी में आ गईं और जेल विभाग की नारकीय परिपाटियों ने उन्हें प्रदेश की सबसे बड़ी जेल का अधीक्षक बना दिया। जेल विभाग ने उन्हें सुधरने का जो अवसर दिया था उसका उन्होंने बेजा लाभ उठाया और अरबों रुपयों की दौलत बनाई। रिश्तेदारों से अनबन ने उन्हें अलग थलग कर दिया। इस घटना के बाद जब वे देवास रोड स्थित एक रेस्टोरेंट में अपने किसी मित्र के साथ पहुंची थीं तो कुछ लोगों ने उनकी वीडियो फिल्म बना ली। इस पर उन्होंने आपत्ति की तो युवकों ने उन्हें पीट दिया। जिसकी शिकायत उन्होंने उज्जैन पुलिस से की है।
  • प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा महाकाल लोक भारत के सांस्कृतिक वैभव की पुर्नस्थापना का उद्घोष

    प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा महाकाल लोक भारत के सांस्कृतिक वैभव की पुर्नस्थापना का उद्घोष

    शिवराज और उनकी सरकार का हृदय से अभिनन्दन


    प्रधानमंत्री ने “श्री महाकाल लोक’’ के लोकार्पण के बाद जन समारोह को किया सम्बोधित


    उज्जैन 11 अक्टूबर (प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा है कि भारत के सांस्कृतिक वैभव की पुर्नस्थापना का लाभ न केवल भारत को अपितु पूरे विश्व एवं समूची मानवता को मिलेगा। उज्जैन में ‘श्री महाकाल लोक’ की स्थापना इसी की कड़ी है। यह काल के कपाल पर कालातीत अस्तित्व का शिलालेख है। उज्जैन आज भारत की सांस्कृतिक अमरता की घोषणा और नये कालखण्ड का उद्घोष कर रहा है। हमारे लिये धर्म का अर्थ कर्त्तव्यों का सामूहिक संकल्प, विश्व का कल्याण एवं मानव मात्र की सेवा है। हमने आजादी के पहले जो खोया था, उसकी आज पुनर्स्थापना हो रही है। प्रधानमंत्री श्री मोदी आज उज्जैन में ‘श्री महाकाल लोक’ के लोकार्पण के बाद जन समारोह को सम्बोधित कर रहे थे।
    प्रधानमंत्री श्री मोदी ने कहा कि ‘श्री महाकाल लोक’ दिव्य है। यहाँ सब कुछ अलौकिक, अविस्मरणीय एवं अविश्वसनीय है। महाकाल की आराधना अन्त से अनन्त की यात्रा है, आनन्द की यात्रा है, इससे काल की रेखाएँ भी मिट जाती हैं। महाकाल लोक आने वाली कई पीढ़ियों को अलौकिक दिव्यता और सांस्कृतिक ऊर्जा की चेतना प्रदान करेगा। इस अदभुत कार्य के लिये मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान, उनकी सरकार और मन्दिर समिति का मैं हृदय से अभिनन्दन करता हूँ, जिन्होंने निरन्तर पूरे समर्पण से सेवा-यज्ञ किया है।
    प्रधानमंत्री श्री मोदी ने कहा कि भगवान महाकाल की नगरी उज्जैन वह नगरी है, जो प्रलय के प्रहार से भी मुक्त है। “प्रलयो न बाध्यते, तत् महाकाल पूज्यते”। उज्जैन न केवल काल गणना एवं ज्योतिषिय गणना का केन्द्र है, अपितु यह भारत की आत्मा का केन्द्र भी है। यह पवित्र सात पुरियों में एक है। यहाँ भगवान श्रीकृष्ण ने शिक्षा ग्रहण की। विक्रमादित्य के प्रताप से भारत के स्वर्णकाल की शुरूआत हुई। विक्रम संवत महाकाल की भूमि से ही शुरू हुआ।
    प्रधानमंत्री श्री मोदी ने कहा कि उज्जैन के क्षण-क्षण में इतिहास, कण-कण में आध्यात्म और कोने-कोने में ईश्वरीय ऊर्जा है। यहाँ कालचक्र के चौरासी कल्पों के प्रतीक चौरासी महादेव, चार महावीर, छह विनायक, आठ भैरव, अष्टमातृका, नौ ग्रह, दस विष्णु, ग्यारह रूद्र, बारह आदित्य, चौबीस देवियाँ एवं 88 तीर्थ हैं। इन सबके केन्द्र में कालाधिराज महाराज विराजमान हैं। पूरे ब्रह्माण्ड की ऊर्जा को ऋषियों ने प्रतीक रूप में समाहित किया। उज्जैन ने एक हजार वर्षों तक भारत की सभ्यता, संस्कृति, ज्ञान, गरिमा, साहित्य, कला का नेतृत्व किया। कालिदास एवं बाणभट्ट की रचनाओं में यहाँ की सभ्यता, संस्कृति, शिल्प और वैभव का वर्णन मिलता है।
    प्रधानमंत्री श्री मोदी ने कहा कि किसी राष्ट्र का सांस्कृतिक वैभव, उसकी पहचान उसकी सफलता की सबसे बड़ी निशानी है। भारत में हमारे धार्मिक एवं सांस्कृतिक केन्द्र का निरन्तर विकास किया जा रहा है। उज्जैन सहित सोमनाथ, केदारनाथ, बद्रीनाथ आदि केन्द्रों का समुचित विकास किया जा रहा है। चारधाम प्रोजेक्ट में ऑल वेदर रोड बनाये जा रहे हैं। हमने स्वदेश दर्शन एवं प्रसाद योजनाएँ चलाई हैं। हमारे धार्मिक एवं आध्यात्मिक केन्द्रों का गौरव पुनर्स्थापित हो रहा है। महाकाल लोक आज अतीत के गौरव के साथ भविष्य के स्वागत के लिये तैयार हो चुका है।
    प्रधानमंत्री श्री मोदी ने कहा कि हमारे प्राचीन मन्दिरों की दिव्यता, भव्यता, वास्तु और कला हमें आश्चर्यचकित करती है। कोणार्क का सूर्य मन्दिर, एलोरा का कैलाश मन्दिर, मोढेरा का सूर्य मन्दिर, तंजौर का ब्रह्मदेवेश्वर मन्दिर, कांचीपुरम का तिरूमल मन्दिर, रामेश्वरम मन्दिर, मीनाक्षी मन्दिर और श्रीनगर का शंकराचार्य मन्दिर बेजोड़ है। हमारे मन्दिरों का आध्यात्मिक सन्देश आज भी स्पष्ट रूप से सुनाई देता है। पीढ़ियाँ इसे देखती हैं, सुनती हैं। ये हमारी निरन्तरता और परम्परा के वाहक हैं।
    प्रधानमंत्री श्री मोदी ने कहा कि महाकाल लोक में हमारी सांस्कृतिक परम्परा को कला एवं शिल्प के रूप में उकेरा गया है। यहाँ शिव पुराण की कथाओं पर आधारित कलाकृतियाँ बनाई गई हैं। उन्होंने देशवासियों से अपील की कि वे यहाँ अवश्य आयें। यहाँ भगवान शिव के दर्शन के साथ ही उनकी महिमा और महत्व के दर्शन भी होंगे। यहाँ निर्मित पंचमुखी शिव, डमरू, अर्धचंद्र, सप्तऋषि मण्डल अद्वितीय हैं। शिव ही ज्ञान है। शिव दर्शन ब्रह्माण्ड दर्शन है। ज्योतिर्लिंगों का विकास भारत की आध्यात्मिक ज्योति ज्ञान एवं दर्शन का विकास है। भारत आज विश्व के मार्गदर्शन के लिये फिर तैयार है।
    प्रधानमंत्री श्री मोदी ने कहा कि श्री महाकालेश्वर में की जाने वाली भस्म आरती अवसान से पुनर्जीवन और अन्त से अनन्त की यात्रा का प्रतीक है। जहाँ महाकाल हैं, वहाँ विष भी कुंदन होता है। यह भारत की जीवटता और अपराजेय अस्तित्व की प्रतीक है। भारत सदियों से अजर-अमर है। हमारी सभ्यता, परम्परा, आत्मा-जागृत है। श्री महाकालेश्वर विश्व में एकमात्र दक्षिणमुखी ज्योतिर्लिंग है। मन्दिर हमारी आस्था के प्रमाणित केन्द्र हैं। इनके माध्यम से भारत पुनर्जीवित हो रहा है।
    प्रधानमंत्री श्री मोदी ने कहा कि भारत में हजारों वर्षों से कुंभ मेले की परम्परा है। हर बारह वर्ष में हम अमृत मंथन करते हैं और उसमें निकलने वाले अमृत पथ पर चलते हैं। पिछले कुंभ मेले में मैं उज्जैन आया था। उस समय मेरे मन में श्री महाकाल लोक सम्बन्धी संकल्प आया, जिसे आज संकल्प के रूप में मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने चरितार्थ किया है, मैं उन्हें धन्यवाद देता हूँ।
    आज प्राचीन मूल्यों पर नया भारत खड़ा हो रहा है। हमारी विज्ञान और शोध की परम्पराएँ जीवित हैं। खगोल विद्या के क्षेत्र में चंद्र यान, गगन यान मिशन महत्वपूर्ण सफलताएँ हैं। रक्षा के क्षेत्र में हम आत्म-निर्भर हैं। हमारे युवा स्किल, स्पोर्ट्स, स्टार्टअप्स के क्षेत्र में विश्व में भारत का डंका बजा रहे हैं।
    मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि भारत में ही सभ्यता के सूर्य का उदय हुआ। हमारी संस्कृति वसुधैव कुटुंबकम् एवं सर्वे भवन्तु सुखिन: भी है। हमारा सन्देश विश्व कल्याण का है। भारत के इसी सन्देश को स्वामी विवेकानन्द ने सारी दुनिया को दिया। एक नरेन्द्र ने जो किया दूसरा नरेन्द्र आज उसे पूरा कर रहा है। हमारा योग, उपनिषद, गीता-ज्ञान, आयुष वे दुनिया में लेकर गये। आज श्री नरेन्द्र मोदी गौरवशाली, वैभवशाली, शक्तिशाली भारत का निर्माण कर रहे हैं।
    श्री चौहान ने कहा कि 2016 के सिंहस्थ में विचार महाकुंभ भी हुआ था, जिसमें प्रधानमंत्री श्री मोदी आये थे। विचार महाकुंभ में 51 अमृत बिन्दु निकले, जिनमें से एक श्री महाकाल लोक की स्थापना का कार्य भी था। प्रधानमंत्री श्री मोदी की प्रेरणा से इस कार्य की शुरूआत की गई। वर्ष 2018 में केबिनेट ने इसे स्वीकृति दी, वर्ष 2019-20 में यह कार्य मंद हो गया, लेकिन वर्ष 2020 के बाद तेजी से हुआ। आज इसका लोकार्पण हो रहा है। भगवान शिव सबका कल्याण करने वाले हैं, थोड़ी-सी पूजा से वे प्रसन्न हो जाते हैं, जिसे दुनिया ठुकराती है, उसे अपनाते हैं। उन्होंने पूरी दुनिया को अमृत दिया और स्वयं जहर पिया।
    मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि आज भौतिकता से दग्ध मानवता को शाश्वत शान्ति का अदभुत दर्शन प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भारत करायेगा। हम सभी भारत के नवनिर्माण में अपना सर्वश्रेष्ठ दें। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने उपस्थित सभी को विश्व एवं प्राणीमात्र के कल्याण का संकल्प दिलाया।
    प्रारम्भ में प्रधानमंत्री श्री मोदी को राज्यपाल श्री मंगुभाई पटेल एवं मुख्यमंत्री श्री चौहान ने नन्दी द्वार की प्रतिकृति भेंट की। श्री मोदी का मुख्यमंत्री श्री चौहान ने रूद्राक्ष की माला, अंग वस्त्र एवं पगड़ी पहना कर स्वागत किया। प्रसिद्ध भजन गायक श्री कैलाश खेर ने सुमधुर शिव-स्तुति प्रस्तुत की। समूचा वातावरण शिवभक्ति से ओत-प्रोत हो गया।
    उल्लेखनीय है कि श्री महाकाल लोक के लोकार्पण अवसर पर महाकाल मन्दिर सहित पूरे प्रदेश के प्रमुख मन्दिरों एवं देवस्थलों पर रोशनी की गई और स्थानीय लोगों ने स्क्रीन पर लोकार्पण समारेाह को देखा। मन्दिरों में भजन-कीर्तन सहित शिव आरती भी हुई। मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान के प्रयासों से न केवल मध्य प्रदेश के 52 जिले, बल्कि पूरे भारत सहित 40 से अधिक देश इस अदभुत समारोह के साक्षी बने। चारों ओर शिव महिमा की गूँज सुनाई दी। सभी लोग श्री महाकाल लोक के लोकार्पण से आनन्दित और भक्तिमय हो गये।
    धार्मिक और आध्यात्मिक रूप में विकसित किये गये श्री महाकाल लोक को देख कर भारत सहित अन्य देश के लोग भी मंत्रमुग्ध हो उठे। बनारस कॉरिडोर की तर्ज पर बने इस लोक के आकर्षण से कोई भी अछूता नहीं रहा। प्रधानमंत्री श्री मोदी ने भी श्री महाकाल लोक को देख कर मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान के प्रयासों पर प्रसन्नता जाहिर की।
    लोकार्पण समारोह में छत्तीसगढ़ की राज्यपाल सुश्री अनुसुइया उइके, झारखंड के राज्यपाल रमेश बैस, केन्द्रीय कृषि एवं कल्याण मंत्री नरेन्द्र सिंह तोमर, नागरिक उड्डयन एवं इस्पात मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया, केन्द्रीय सामाजिक न्याय एवं अध्यिाकारिता मंत्री वीरेंद्र कुमार खटीक, इस्पात राज्य मंत्री फग्गन सिंह कुलस्ते, केन्द्रीय जलशक्ति एवं खाद्य प्र-संस्करण उद्योग राज्य मंत्री प्रहलाद पटेल सहित मध्य प्रदेश के मंत्रीगण एवं बड़ी संख्या में साधु-सन्त, श्रद्धालु और नागरिक उपस्थित थे।

  • रामराज को अब महाकाल का भी आशीर्वाद

    रामराज को अब महाकाल का भी आशीर्वाद


    क्रांतिदीप अलूने
    शिव सर्वगत अचल आत्मा है, शिव की आराधना शक्ति की आराधना है। शिव अव्यक्त है, उनके सहस्त्रों रूप है। भारत की विशिष्ट सांस्कृतिक विरासत को “श्री महाकाल लोक” में जिस सुंदर ढंग से प्रदर्शित किया गया है वह अतुलनीय है। यहाँ शांति और निश्चिन्तता के साकार रूप शिव ही शिव है। “श्री महाकाल लोक” सनातन संस्कृति की पौराणिकता,ऐतिहासिकता और गौरवशाली परम्परा का अद्भुत संगम और अद्वितीय नूतन रूप है। इसे जिस भव्यता और सुंदरता से प्रदर्शित किया गया है, वह चमत्कृत कर देता है।

    दरअसल प्राचीन पुण्य सलिला माँ क्षिप्रा के तट पर बसी प्राचीनतम नगरी उज्जैन का “श्री महाकाल लोक” भगवान शिव के भक्तों के स्वागत के लिए तैयार है। महाकाल मंदिर के नवनिर्मित कॉरिडोर को 108 स्तंभ पर बनाया गया है, 910 मीटर का ये पूरा महाकाल मंदिर इन स्तंभों पर टिका होगा। महाकवि कालिदास के महाकाव्य मेघदूत में महाकाल वन की परिकल्पना को जिस सुंदर ढंग से प्रस्तुत किया गया था, सैकड़ों वर्षों के बाद उसे साकार रूप दे दिया गया है। दुनिया भर से उज्जैन आने वाले शिव भक्तों के लिए यह शिव महिमा का सम्पूर्ण अनुभव देने का अनूठा और अद्भुत प्रयास है।

    “श्री महाकाल लोक” आधुनिक व्यवस्थाओं और संसाधनों से भी परिपूर्ण बनाया गया है। इसकी व्यवस्था इतनी उत्कृष्ट है कि भक्तों और पर्यटकों को अभिभूत कर देगी। मंदिरों के साथ ही पूजा सामग्री और हार-फूल की दुकानों को भी विशिष्ट तरीके से लाल पत्थर से बनाया गया है,जिन पर सुंदर नक्काशी की गई है। “श्री महाकाल लोक” के निर्माण से भगवान शिव की जिन कथाओं का महाभारत, वेदों तथा स्कंद पुराण के अवंती खंड में उल्लेख है, उनका जीवंत अनुभव शिव भक्त धर्मनगरी उज्जैन में कर पाएंगे। महाकाल ज्योतिर्लिंग एक मात्र ज्योतिर्लिंग है जो दक्षिणमुखी है। सनातन धर्म में महाकाल के दर्शन जीवन का एक महत्वपूर्ण और आवश्यक भाग माना जाता है, जिससे शांति मिलती है। इसलिए लाखों भक्त नित्य इस देव स्थान पर आते हैं। “श्री महाकाल लोक” के जरिए शिव के सभी स्वरूप एक स्थान पर लाना मध्यप्रदेश की शिवराज सरकार का ऐसा दुर्लभ कार्य है जिसकी और कोई मिसाल नहीं हो सकती।

    शिव मंगल, शुभ और सौभाग्यसूचक देव है, वे सदाशिव है, जो ब्रह्मा से सृष्टि रचवाते है, विष्णु से उसका पालन करवाते है तथा रूद्र से उसका नाश करवाते है। “श्री महाकाल लोक” में शिव, शम्भू, शशिशेखर के सहस्त्रों रूप और उनकी महिमा को सुंदर ढंग से उकेरा गया है। शिवलिंग सार्वभौमिक रूप से सृजन का प्रतीक है और “श्री महाकाल लोक” भारतीय सांस्कृतिक विरासत को साक्षात् प्रतिबिम्बित कर रहा है। यहाँ शिव का मृत्युंजय रूप भी है, जिसकी उपासना से मृत्यु को भी मात दी जा सकती है। यहाँ महादेव भी है जिसकी उपासना से हर ग्रह नियंत्रित रहता है।

    मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान स्वयं शिव भक्त है, वे सावन माह की शाही सवारी में कई वर्षों से शामिल होते रहे है। उनके कार्यकाल में वर्ष 2016 में उज्जैन में ऐतिहासिक सिंहस्थ सम्पन्न हुआ था। व्यवस्थाओं और संसाधनों की दृष्टि से इसे भारत का अब तक का सबसे सफलतम धार्मिक आयोजन माना जाता है। वे उज्जैन को धार्मिक पर्यटन नगरी के रूप में उभारने को लेकर प्रतिबद्ध रहे और इसी के दृष्टिगत सिंहस्थ के ठीक बाद वर्ष 2017 में “श्री महाकाल लोक” की योजना बनी। यह करोड़ों भारतीयों का सौभाग्य है कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी भी शिव भक्त है और उनके नेतृत्व में देश भर में आध्यात्मिक और धार्मिक स्थानों का निरंतर कायाकल्प हो रहा है। इस प्रकार प्रधानमंत्री की दूरदर्शिता तथा मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान की कार्यकुशलता से ही “श्री महाकाल लोक” का सपना साकार हो सका है।

    हम सभी जानते हैं कि महाकाल दर्शन का बड़ा धार्मिक महत्व है। इसे मोक्ष प्रदान करने वाला स्थल माना जाता है। स्कंदपुराण के अनुसार इसे मंगल ग्रह की उत्पत्ति का स्थान माना जाता है। उज्जैन का इतिहास अनादि काल से माना जाता है और राजनीतिक, आध्यात्मिक और साहित्यिक दृष्टि से भी इसे उत्कृष्ट स्थान माना जाता है। भारत की पौराणिक और धार्मिक महत्व की सात प्रसिद्ध पुरियों या नगरियों में उज्जैन प्रमुख स्थान रखता है बल्कि यहाँ साक्षात दैवीय शक्तियों का आज भी वास है। उज्जयिनी को विशाला, प्रतिकल्पा, कुमुदवती, स्वर्णश्रंगा और अमरावती के नाम से भी जाना जाता है तथा यहाँ स्थित महाकालेश्वर मंदिर भारत के बारह ज्योतिर्लिंगों में से एक है। पुराणों, महाभारत और कालिदास जैसे महाकवियों की रचनाओं में इस मंदिर का मनोहर वर्णन मिलता है।

    उज्जैन में “श्री महाकाल लोक” के निर्माण का फायदा न केवल शिव भक्तों को मिलेगा बल्कि रोजगार और पर्यटन की दृष्टि से भी यह फलदायी होगा। “श्री महाकाल लोक” में लाखों लोग एक साथ भ्रमण कर सकते हैं और रुकने की दृष्टि से भी इसे सर्व सुविधायुक्त बनाया गया है। अब शिव भक्त यहाँ महाकाल के दर्शन के लिए आएंगे भी और आराम से वे रुक भी सकेंगे। ऐसे में रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे। उज्जैन के पास मंदसौर का प्रसिद्ध पशुपतिनाथ का मंदिर, मांडू और ओंकारेश्वर भी है। अत: मध्य प्रदेश में मालवा का यह सम्पूर्ण क्षेत्र धार्मिक कॉरिडोर के रूप में पहचान बनाने में निश्चित ही सफल होगा। मालवा के क्षेत्र को शांत और मौसम के लिहाज से उत्कृष्ट माना जाता है, अब “श्री महाकाल लोक” की लोकप्रियता और आकर्षण से इस क्षेत्र में नये-नये उद्योग भी बढ़ेंगे। बहरहाल उज्जैन में नवनिर्मित “श्री महाकाल लोक” भारत के धार्मिक और आध्यात्मिक स्थानों के लिए उत्कृष्ट उदाहरण बनने जा रहा है। सांस्कृतिक विरासत,रोजगार और पर्यटन के अदभुत केंद्र के रूप में दुनिया भर में अपना विशिष्ट स्थान बनाने में यह सफल होगा, इसकी स्वर्णिम संभावनाएं है।