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  •  मन में करुणा और दया हो तभी आती है क्षमा:आचार्य समय सागर जी

     मन में करुणा और दया हो तभी आती है क्षमा:आचार्य समय सागर जी

    भोपाल 06 अक्टूबर(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)। मध्यप्रदेश विधानसभा परिसर में आज मंगलवार को अनोखी धर्मसभा के बीच आचार्य श्री 108 समयसागर जी महाराज और उनके संघ के सभी साधुओं की उपस्थिति में सामूहिक क्षमावाणी महोत्सव का आयोजन किया गया। इस अवसर पर विधानसभा अध्यक्ष नरेन्द्र सिंह तोमर, मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, लघु एवं मध्यम उद्योग मंत्री चेतन काश्यप,विधायक भगवानदास सबनानी,पूर्व वित्तमंत्री जयंत मलैया,महापौर मालती राय, राहुल कोठारी,  सहित प्रदेश के अनेक जनप्रतिनिधि और गणमान्य लोग मौजूद रहे।

     कुंडल पुर के बड़े बाबा और आचार्य विद्या सागर महाराज के चित्र के समक्ष दीप प्रज्वलन के साथ शुरू हुए आयोजन में प्रदेश के मुख्य मंत्री विधान सभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर ने आचार्य श्री को शास्त्र भेट किए। डॉक्टरअंजुल दहाले और नीरू नांदगांवकर ने नृत्य के माध्यम से मंगलाचरण की भावपूर्ण प्रस्तुति दी।  जनप्रतिनिधियों ने आचार्यश्री को श्रीफल भेंट कर आशीर्वाद लिया।

    मुख्य मंत्री मोहन यादव ने आचार्यश्री की वंदना करने के बाद धर्मसभा के बीच कहा कि ये हमारा सौभाग्य है जो लोकतंत्र के सबसे बड़े मंदिर में गुरुवर के आने से दिवाली और होली जैसे त्यौहार एक साथ मनाए जा रहे हैं। मैं सरकार की ओर से उनका ससंघ स्वागत वंदन करता हूं। विधानसभा में इससे पहले आचार्य श्री विद्या सागर महाराज के चरण भी पड़ चुके हैं। ये सुखद संयोग है कि कल प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी के सेवाकाल के 25 वर्ष पूर्ण हो रहे हैं। माननीय प्रधान मंत्री ने अपने राजनैतिक जीवन में जीव दया और अहिंसा को आधार माना। शासन के मुखिया होने के नाते कई बार कठोर निर्णय भी लेने पड़ते हैं। मैं अपने ऐसे कर्मों के लिए भी सभी बांधवों से क्षमा मांगता हूं। क्षमा पर्व व्यक्ति के अंतर मन को मजबूत बनाता है। अहंकार का नाश कर क्षमा जीवन में सरलता सहजता लाती है।

     विधान सभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा धर्म के बिना जीवन अधूरा है। धर्म प्रकृति को देखा जाए तो जैन सिद्धांत त्याग, कठोरता,और समर्पण से सराबोर है।ये भावना सभी आमजन  के लिए भी अनुकरणीय है। लोग भिंड मुरैना को डकैत ग्रस्त इलाके के रूप में जानते रहे हैं।असलियत इस छवि से बिल्कुल अलग है। भिंड मुरैना में भी प्राचीन मंदिरों और आध्यात्मिक क्रियाओं माहौल रहा है। हम सभी का सौभाग्य है कि भारत भूमि संतों ऋषियों की तपस्या की भूमि रही है। संतो के आशीर्वाद ने इस भूमि को सोने की चिड़िया बनाया।आज ये देश एक बार फिर विश्व का नेतृत्व करने के लिए तैयार है। उन्होंने आचार्य श्री से कहा इस लोक तंत्र के मंदिर में पक्ष भी है और विपक्ष भी है। ऐसा आशीर्वाद दीजिए कि सभी में सकारात्मकता और देश भक्ति की भावना रहे।हम सभी का ये लोक भी सुधरे और परलोक भी संवर जाए।

    आचार्य श्री समय सागर महाराज ने कहा जैन धर्म जाति वाद का धर्म नहीं है यहां वैराग्य और जीव दया की भावना से अहिंसा की उपासना की जाती है। अहिंसा व्यक्ति विशेष का नहीं मानव मात्र का वैश्विक धर्म है। प्रत्येक जीव सुख शांति चाहता है। क्षमा धर्म की उपासना के बिना सुख शांति नहीं रह सकती। आचार्य श्री विद्यासागरजी  ने हमेशा भारत से मांस निर्यात का विरोध किया। सरकारों ने उनकी बात को सुना और उस पर बड़ी हद तक अमल भी किया। आचार्य श्री ने कहा रिश्तों में विचारों के अंतर से क्रोध की अग्नि जलती हे इसे हम क्षमा रूपी नीर से बुझा सकते हैं। इसमें संयम की औषधि का भी लेप जरूरी है। आत्मानुशासन के बिना विश्व पर शासन करना कठिन है। राम कृष्ण, गौतम, नानक ने भी अहिंसा को आधार मान कर विश्व कल्याण की भावना का संदेश दिया।लोकतंत्र के मंदिर में भी हमारी यही भावना है कि सभी लोग अहिंसा का महत्व समझें और अपना जीवन सुखी बनाएं।

    स्वागत अध्यक्ष अखिलेंद्र जैन ने बताया आचार्य श्री की अगवानी विधान सभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर ने स्वयं अपने सभी अधिकारियों के साथ की।  आयोजन में मौजूद श्रद्धालु जय हिंद जय जिनेंद्र के जयकारे लगा रहे थे। आयोजन समिति के प्रमुख अध्यक्ष पंकज  सुपारी मुख्य संयोजक मनोज बांगा समाज सेवी मनोज प्रधान स्वागत अध्यक्ष अखिलेंद्र जैन ने मुख्य मंत्री विधान सभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर का सम्मान किया।

    कार्यक्रम में श्री दिगंबर जैन पंचायत कमेटी ट्रस्ट के अध्यक्ष पंकज जैन सुपारी, विद्योदय वर्धिनी चातुर्मास समिति के मुख्य संयोजक मनोज जैन बांगा,स्वागत अध्यक्ष अखिलेन्द्र जैन, एमपीनगर मंदिर निर्माण कमेटी के देवेन्द्र जैन(रुचि),राकेश जैन ओएसडी,हेमलता कोठारी,मप्र हाऊसिंग बोर्ड के अध्यक्ष ओम जैन,समेत अन्य गणमान्य अतिथि भी उपस्थित थे। स्वागत भाषण पंकज जैन ओर आभार मनोज बांगा ने व्यक्त किया संचालन पूर्व प्रशासनिक अधिकारी नितिन नांदगांवकर ने किया।

  • धर्म सापेक्ष भारत के संविधान से धर्म निरपेक्षता शब्द हटाया जाएः आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज

    धर्म सापेक्ष भारत के संविधान से धर्म निरपेक्षता शब्द हटाया जाएः आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज

    कुंडलपुर पंचकल्याणक महोत्सव में जाकर केन्द्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया और प्रदेश भाजपा अध्यक्ष वीडी शर्मा ने बडे़ बाबा के दर्शन किए


    कुंडलपुर 22 फरवरी(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)। दमोह जिले के कुंडलपुर में चल रहे पंचकल्याणक महोत्सव में आज समवसरण में विराजमान आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज ने दो टूक शब्दों में कहा कि भारत धर्म सापेक्ष देश है। हमारे देश की सभी समस्याओं का समाधान धार्मिक परंपराओं से हो जाता है, ऐसे में देश को धर्म निरपेक्ष कहने की आयातित सोच से अब हमें बाहर निकलना होगा। समय आ गया है जब संविधान में डाला गया धर्मनिरपेक्ष शब्द हटाया जाए और उसकी जगह भारत को धर्म सापेक्ष देश घोषित किया जाए। धर्मसभा में उपस्थित जन समुदाय ने करतल ध्वनि से आचार्य़ श्री की बात का समर्थन किया।
    आचार्य श्री ने सबसे पवित्र समवसरण में विराजमान होकर ईश्वरीय वाणी के रूप में कहा कि भारत का जनमन जिस धार्मिकता से धरा का वैभव संवारता रहा है हमें उस पर गौर करना होगा। उन्होंने कहा कि राष्ट्र की रक्षा और उन्नति धर्म से विमुख होकर नहीं हो सकती। अंग्रेजों ने धर्म का अर्थ रिलीजन यानि साम्प्रदायिक होना गलत समझाया है। धर्म का सही अर्थ तो कर्तव्य का ठीक से पालन करना होता है। महोत्सव के खचाखच भरे विशाल पंडाल में जन समुदाय ने कई बार आचार्य श्री की बातों का जय जय उद्घोष करके समर्थन किया। पंचकल्याणक महोत्सव में आज केन्द्रीय विमानन मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया भी पहुंचे थे।
    कुंडलपुर महोत्सव में आज भगवान आदिनाथ का समवसरण सजाया गया था। इस समवसरण में आचार्यश्री अपने निर्यापक शिष्यों के साथ विराजमान थे। समवसरण में भगवान की देशना (धर्म उपदेश) के रूप में आचार्यश्री ने मंगल प्रवचन देते हुए कहा कि धर्म की विदेशी परिभाषा को स्वीकार करते हुए भारत को धर्म निरपेक्ष राष्ट्र कहा गया, यह बिल्कुल गलत है। धर्म का सही अर्थ समझा ही नहीं गया। धर्म हमें सन्मार्ग पर चलने की प्ररेणा देता है। धर्म हमारी आत्मा को पवित्र बनाता है। भारत की संस्कृति रही है कि धर्म पर चलने वाला राजा ही प्रजा को सुखी रख सकता है। धर्म से विमुख होकर जनता का हित कैसे हो सकता है? भारत के राजनेताओं को इस बारे में सोचना चाहिए। उन्होंने कहा कि भारत के नेताओं को इस पर गंभीरता से विचार करना चाहिए। आचार्यश्री ने धर्म के पांच गुण भी बताये। उन्होंने कहा कि जहां झूठ, चोरी, हिंसा, कुशील के साथ कम से कम परिग्रह (आवश्यकता के अनुसार वस्तुओं का संग्रह) की बात हो, वहां धर्म होता है।लोक के लिए धन का संग्रह तो किया जाए पर लोभवश संग्रह न किया जाए। दया का मूल ही धर्म है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में रहकर धर्म निरपेक्ष की बात करना, बिल्कुल गलत है। उन्होंने कहा कि मेरा यह संदेश केन्द्र सरकार तक पहुंचना चाहिए। आचार्यश्री के इस आव्हान पर लोगों ने तालियां बजाकर समर्थन किया।आचार्यश्री ने कहा कि हमारी मौलिक शिक्षा हर बच्चे को आत्मनिर्भर बना सकती है। हमें ऐसा आलोक चाहिए जो किसी भी ग्रहण की स्थिति में देश को अंधकार में भटकने से बचा सके।


    आचार्यश्री ने इस बात पर चिन्ता व्यक्त की कि आज षड्यंत्र पूर्वक तरीके से अंडे को शाकाहारी और दूध को मांसाहारी बताया जा रहा है। उन्होंने कहा कि इस धरती पर यदि साक्षात लक्ष्मी है तो वह गाय है। शास्त्रों में लिखा है कि भगवान आदिनाथ के पुत्र भरत चक्रवर्ती के समय वे तीन करोड़ गौशालाओं का संचालन करते थे। आचार्यश्री ने नकली दूध के प्रचलन पर चिन्ता व्यक्त करते हुए, त्यौहारों के समय दूध मावा से बनी नकली मिठाईयों पर रोक लगाने की जरूरत भी बताई।
    कुंडलपुर महोत्सव में आज सुबह से प्रतिष्ठाचार्य विनय भैया के निर्देशन में धार्मिक अनुष्ठान शुरू हुए। भगवान के अभिषेक, शांतिधारा व नित्य पूजन के बाद आचार्यश्री विद्यासागर जी महाराज की पूजा की गई। इसके बाद मुनि आदिसागर को केवल ज्ञान प्राप्त हुआ। आचार्यश्री के संघस्थ मुनियों ने लगभग 2000 प्रतिमाओं को सूर्यमंत्र देकर उनकी प्राण प्रतिष्ठा की। कुंडलपुर के बड़े बाबा मंदिर में विराजमान नवीन प्रतिमाओं को भी सूर्यमंत्र दिया गया।
    पंचकल्याणक में भगवान की प्रतिमाओं को पहनाये गये वस्त्र व सोने के आभूषण लेने भक्तों में होड मच गई। मूल विधि नायक भगवान के वस्त्र आभूषण की बोली 2 करोड़ 17 लाख में लगी।
    कुंडलपुर महोत्सव में भगवान के समवसरण के लोकार्पण का सौभाग्य दुनिया के सबसे बड़े मार्बल व्यापारी अशोक पाटनी परिवार को मिला। उन्होंने सपरिवार समवसरण का लोकार्पण किया।
    केन्द्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया और भाजपा प्रदेशाध्यक्ष वीडी शर्मा ने आज कुंडलपुर पहुंचकर बड़े बाबा आदिनाथ भगवानके दर्शन किए और छोटे बाबा आचार्यश्री विद्यासागर जी महाराज का आशीर्वाद लिया। सिंधिया ने प्रेस से चर्चा में कहा कि हम मप्र वासी सौभाग्यशाली हैं कि आचार्यश्री ने अपना अधिकांश समय मप्र में गुजारा है। उनका आशीर्वाद और मार्गदर्शन हमें मिलता रहता है। सिंधिया ने कहा कि प्रदेश की जनता की खुशहाली के लिये आशीर्वाद लेने कुंडलपुर आया हूं। वीडी शर्मा ने भी मीडिया से बात करते हुए कहा कि भगवान के दर्शन करने और आशीष लेने आया हूं।
    दस दिवसीय कुंडलपुर महोत्सव का समापन कल बुधवार को विशाल रथयात्रा फेरी के साथ होगा। फेरी के लिये देशभर से 27 रथ कुंडलपुर पहुंचकर चुके हैं। कल दोपहर में इन रथों पर भगवान को विराजमान कर मुख्य पांडाल की सात फेरियां लगाई जाएंगीं।