Tag: #Energy_Department

  • उपभोक्ताओं से मनमाना शुल्क वसूलने पर ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर की कान खिंचाई

    उपभोक्ताओं से मनमाना शुल्क वसूलने पर ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर की कान खिंचाई


    भोपाल, 21 दिसंबर(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)। ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर आज सरकार के दो साल पूरे होने पर उपलब्धियां गिनाने पहुंचे तो पत्रकारों ने बिजली बिलों में वसूले जाने वाले अनाप शनाप अधिभारों को लेकर उनकी खिंचाई कर दी। पत्रकारों ने उनसे पूछा कि बिजली सुधारों के नाम पर जब ऊर्जा विभाग ने हजारों करोड़ रुपयों का कर्ज लिया है तो फिर उपभोक्ताओं से ये अतिरिक्त शुल्क की वसूली क्यों की जा रही है। बिजली मंत्री ने अपनी सफाई देते हुए कहा कि बिजली की मांग बढ़ती जा रही है पर बिजली कंपनियां बिना कटौती बिजली सप्लाई करके देश में मिसाल कायम कर रहीं हैं। स्मार्टमीटर, सब्सिडी और कर्मचारियों की भर्ती करके व्यवस्था में सुधार किया गया है।


    मध्य प्रदेश सरकार में ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर ने कहा कि अभी 12 दिसंबर को 19,113 मेगावाट की बिजली मांग भी हमने बिना किसी कटौती के पूरी की है। इसके लिए सरकार ने ऊर्जा क्षेत्र में लगातार सुधार किए हैं और बिजली प्रबंधन मजबूत किया है।खेती के लिए अनियमित बिजली सप्लाई के मुद्दे पर श्री तोमर कोई स्पष्टीकरण नहीं दे पाए।


    उन्होंने बताया कि हम 25,081 मेगावाट बिजली खरीदने का अनुबंध करके बिजली की सप्लाई लगातार बनाए हुए हैं। यही वजह है कि मध्यप्रदेश सरप्लस बिजली वाला राज्य बन गया है। उन्होंने कहा कि वर्ष 2011 के बाद बिजली कंपनियों में नियमित भर्तियां नहीं हो रहीं हैं इससे हमें अपनी सेवाओं को किराए पर लेना पड़ता है। उन्होंने बताया कि अक्षमता की शिकायतें मिलने के बाद मंत्री परिषद ने बिजली कंपनियों में 50 हजार से अधिक नियमित पदों पर भर्ती को मंजूरी दी है।


    प्रद्युम्न सिंह तोमर ने स्मार्ट मीटर को उपभोक्ताओं के लिए उपयोगी बताया। उन्होंने कहा कि इनके माध्यम से समय पर और सही बिल उपलब्ध कराए जा रहे हैं। वितरण केन्द्रों के प्रभारी अधिकारी प्रतिदिन पांच उपभोक्ताओं से फोन पर सीधे संवाद कर रहे हैं। स्मार्ट मीटर के जरिए सुबह 9 बजे से शाम 5 बजे तक मिलने वाली सस्ती बिजली का लाभ उपभोक्ताओं को दिया जा रहा है। इस अवधि में की गई खपत पर 20 प्रतिशत तक की छूट दी जा रही है।


    ऊर्जा मंत्री ने दावा किया कि सरकार अलग अलग श्रेणियों के उपभोक्ताओं को बड़ी मात्रा में बिजली सब्सिडी दे रही है। हर माह करीब एक करोड़ घरेलू उपभोक्ताओं से पहले 100 यूनिट बिजली के लिए केवल 100 रुपये लिए जा रहे हैं। किसानों को देय राशि का मात्र 7 प्रतिशत भुगतान दो किस्तों में करना होता है. अनुसूचित जाति और जनजाति वर्ग के एक हेक्टेयर तक भूमि वाले और पांच एचपी पंपधारक किसानों को मुफ्त बिजली दी जा रही है। उनसे जब पूछा गया कि पांच हार्स पावर के पंप धारकों से आठ हार्स पावर का बिल क्यों वसूला जा रहा है तो उन्होंने कहा कि ऐसे मामले सामने आने पर हम कार्रवाई करेंगे।


    उन्होंने बताया कि घरेलू और कृषि उपभोक्ताओं को हर साल करीब 26 हजार करोड़ रुपये की सब्सिडी दी जा रही है। उद्योगों को भी रियायती दरों पर बिजली उपलब्ध कराई जा रही है। इससे सरकार को हर साल लगभग 2,000 करोड़ रुपये अतिरिक्त खर्च करना पड़ते हैं। उन्होंने कहा कि उद्योग और कई सरकारी प्रतिष्ठान तक समय पर बिजली का भुगतान नहीं करते इसलिए हमारी उधारी बढ़कर ग्यारह हजार करोड़ रुपए से अधिक हो गई है। इसकी भरपाई ऊर्जा विभाग को ही करनी पड़ती है।


    इस मौके पर विभाग के सचिव विशेष गढ़पाले, वित्तीय सलाहकार रंजीत सिंह चौहान,और अन्य प्रमुख अधिकारी भी उपस्थित थे।

  • शिवराज सिंह का झांसा साबित हुई किसान मित्र योजना

    शिवराज सिंह का झांसा साबित हुई किसान मित्र योजना


    भोपाल,26 दिसंबर(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)। चुनावी वैतरणी पार करने के लिए पूर्ववर्ती मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने आनन फानन में जो घोषणाएं की थीं उनकी असलियत अब सामने आने लगी है। राज्य के ऊर्जा विभाग ने शासन से दो टूक कह दिया है कि विभाग के पास बिजली और कोयला खरीदने का बजट समाप्त हो गया है। बिजली पर दी जा रही छूट की वजह से हालत ये हो गई है कि कई इलाकों में सौ रुपयों की लागत में से मात्र सत्रह पैसे ही प्राप्त हो रहे हैं। ऐसे में किसान मित्र योजना जैसी घोषणाओं को पूरा करना संभव नहीं है।


    मुख्यमंत्री डॉक्टर मोहन यादव ने पदभार ग्रहण करते ही शासन के आला अधिकारियों को निर्देश दिए थे कि उन्हें राज्य की वित्तीय स्थिति से अवगत कराया जाए। पिछली सरकार की घोषणाओं को पूरा करने की जवाबदारी भी नई सरकार की है। ऐसे में अफसरों ने वाहवाही के लिए शुरु की गई योजनाओं की सच्चाई नए मुख्यमंत्री के सामने रख दी है। बिजली,सड़क और पानी की गारंटी देने वाली भाजपा सरकार असलियत जानकर असमंजस में पड़ गई है।


    मुख्यमंत्री को बताया गया है कि पूर्ववर्ती सरकार ने ऊर्जा विभाग के मुनाफे में से ही इस योजना को चालू करने का प्रावधान किया था। योजना में शर्त डाली गई थी कि ट्रांसफार्मर, खंभे और वायर आदि तमाम सामान किसानों को बिजली कंपनियों से ही खरीदना पड़ेगा। जिसकी कीमतें पहले से ही बाजार भाव से ज्यादा तय कीं गईं थी।जाहिर है ऐसे में पचास फीसदी छूट तो महज कागजी थी। इसके बावजूद विभाग के पास योजना पूरी करने लायक धनराशि भी नहीं है।


    सितंबर माह में जबसे इस योजना की घोषणा की गई थी तबसे किसानों ने उत्साह में भरकर कनेक्शन के लिए औपचारिकताएं पूरी कीं थीं। नए ट्रांसफार्मर के लिए जल स्रोत और भूमि का रिकार्ड सत्यापित करवाया जाना था। किसानों को कृषि विभाग से जलस्रोत सत्यापित करवाना था और पटवारी से भूमि का नक्शा भी प्रमाणित करवाना था।किसानों ने भारी मशक्कतके बाद फार्म में दी गई शर्तों के आधार पर दस्तावेज जमा करवाए थे।बिजली कंपनी ने किसान को पंजीयन क्रमांक जारी करके कहा था कि जब हमारी ओर से मूल्य आकलन करवाया जाएगा तब आपको डिमांड के अनुसार धनराशि जमा करवाना पड़ेगी।
    इस योजना को दो सालों में पूरा किया जाना था। पहले साल दस हजार ट्रांसफार्मर रखे जाने थे। इस बीच सरकार चुनाव में चली गई और योजना पर अमल रोक दिया गया। अब जबकि भाजपा की ही नई सरकार सत्ता में आ गई है तब उसे योजना पर अमल शुरु करने में खासी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। बिजली कंपनी के सामने तो अभी सबसे बड़ा संकट बिजली खरीदने और बिजली उत्पादन के लिए कोयला खरीदने का है।कोयला कंपनियों ने अपनी उधारी वसूलने के लिए तकादा करना शुरु कर दिया है।


    इस संबंध में जब ब्यावरा विधायक और राज्य मंत्री स्वतंत्र प्रभार नारायण पंवार से पूछा गया तो उन्होंने कहा कि सरकार की कोई योजना बंद नहीं की गई है। विभागों का आबंटन होने के बाद संबंधित मंत्रीगण जनता से किएगए वायदों पर अमल सुनिश्चित करेंगे। उन्होंने कहा कि शिवराज सिंह सरकार ने किसान मित्र योजना के लिए बजट शुरु किया था या नहीं इसकी उन्हें जानकारी नहीं है। यदि विभाग के अफसरों को कोई परेशानी महसूस हो रही है तो उनकी सरकार आवश्यक कदम उठाएगी।


    गौरतलब है कि पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने अपनी वित्तीय क्षमताओं से भी ज्यादा कर्ज लेकर जिन योजनाओं की घोषणा की थीं वे अब नई सरकार के लिए जी का जंजाल बन गईं हैं। देखना है कि बदले हालात में नई सरकार योजनाओं के लिए धन कहां से और कैसे लाती है। मुख्यमंत्री डॉ.मोहन यादव को सिंहस्थ में कुशल वित्तीय प्रबंधन के लिए भरपूर प्रशंसा मिली थी लेकिन तब सरकार धड़ाधड़ कर्ज लेकर धन मुहैया करा रही थी पर अब कर्ज की सीमा निर्धारित दायरे को पार कर गई है ऐसे में नई सरकार ज्यादा कर्ज नहीं ले पाएगी और उसे योजनाओं के लिए धन की वसूली तेज करनी होगी।