देश और दुनिया के दूर दराज के देशों में भी आज भगवान श्रीकृष्ण का जन्मदिन धूमधाम से मनाया जा रहा है। मध्यप्रदेश में जबसे मुख्यमंत्री डॉ.मोहन यादव ने आव्हान किया उसके बाद से तो गली गली और गांव गांव में जन्माष्टमी का माहौल सुरम्य बन चला है। हमेशा की तरह इस बार भी श्री कृष्ण जन्माष्टमी पर प्रदेश भर में बारिश के छींटे पड़ रहे हैं। कई इलाकों में तो इतना अधिक पानी गिर रहा है कि मानों भगवान स्वयं नंदलाला के जन्म से आल्हादित हैं। ऐसे में कई विपक्षी नेताओं ने सरकार के आव्हान से असहमति जताते हुए बेसुरा राग अलापना शुरु कर दिया है। उन नेताओं का कहना है कि जन्माष्टमी जनता मनाए, धार्मिक संगठन मनाएं तो ठीक है लेकिन सरकार क्यों आव्हान कर रही है। दरअसल ये सभी वे आवाजें हैं जो विदेशी धर्मों की गोद में फलती फूलती रहीं हैं। आयातित सोच में रंगे इन नेताओं ने हमेशा सनातन को निशाना बनाया है। विदेशी सोच की नकल करने वाले ये नादान कहते हैं कि देश को आगे बढ़ना है तो किसी एक धर्म को बढ़ावा नहीं दिया जा सकता। उन लोगों को ये नहीं मालूम कि समूची वसुधा को अपना कुटुंब मानने वाला सनातन किसी भी खंडशः सोच से मीलों आगे सोचता है। आक्रांता बनकर भारत में आए जो विदेशी सोच कभी भी भारत के अस्तित्व को कुचल नहीं पाए वे आज संविधान की दुहाई देकर कह रहे हैं कि कृष्ण जनमाष्टमी मनाने से अन्य धर्मों को असमानता भरे माहौल का सामना करना पड़ेगा। ऐसे बयान देने वालों को श्रीमद भगवत गीता के उपदेशों की जानकारी मिल सके इसीलिए तो जन्माष्टमी का आयोजन धूमधाम से मनाया जा रहा है। जब युद्ध की तलवारें खिंची हुई हों तब कर्म का उपदेश देने वाले देवकीनंदन के मंत्र और भी ज्यादा सार्थक हो जाते हैं। रूस और यूक्रेन के बीच चल रहे युद्ध के दौरान यही ज्ञान देने के लिए तो प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी युद्धभूमि तक गए थे। हठी जेलेंस्की यदि इस भाषा को समझ जाते तो यूक्रेन एक बार फिर खुशहाल देश बन सकता था। रूस के राष्ट्रपति ब्लादीमीर पुतिन ने तो भारत के प्रयासों का समर्थन करते हुए युद्ध रोक दिया। रूस भी चाहता है कि शांति का कोई मार्ग निकले। ये संभव इसलिए नहीं हो सका कि किसी ने यूक्रेन या अमेरिका को पहले कभी गीता के उपदेश नहीं सुनाए। युद्ध भूमि की हुंकार के बीच उन उपदेशों को समझने का सामर्थ्य आम योद्धा में नहीं होता। यदि श्रीकृष्ण दुर्योधन से कहते कि अनीति और अधर्म की राह पर चलोगे तो कर्म फल तुम्हें छोड़ेगा नहीं ऐसे में तुम्हारा नाश हो जाएगा,तो वो नहीं मानता। । कुछ ऐसी ही चुनौतियों के बावजूद प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भारत का दर्शन युद्धभूमि तक पहुंचाकर अपना दायित्व निभाया। कमोबेश यही प्रयास मुख्यमंत्री डॉक्टर मोहन यादव कर रहे हैं। जब विदेशी घुसपैठियों, आक्रांताओं और षड़यंत्रों के साथ कांग्रेस की पारिवारिक परंपरा के अध्यक्ष राहुल गांधी देश में जातिगत जनगणना का वैमनस्य फैलाने का प्रयास कर रहे हैं तब उन्हें गीता के उपदेश अवश्य पढ़ने चाहिए। मध्यप्रदेश की धरती से गीता का कर्म सिद्धांत पूरे विश्व को एक बार फिर सत्य के मार्ग पर चलने का आग्रह कर रहा है। चाहे असददुद्दीन औवेसी हों या फिर कांग्रेस के चंपू टाईप नेता उन सभी को समझना होगा कि भारत का संविधान लागू हुए तो मात्र 74 वर्ष हुए हैं। ये देश तो हजारों सालों से भगवान श्रीकृष्ण और भगवान श्री राम के बनाए आदर्शों पर चल रहा है। तबसे यहां कभी किसी अन्य धर्म या विचार को पद दलित करने का विचार नहीं फैला। चंद लुटेरों ने भले ही भारत की अस्मिता को कुचलने का प्रयास किया हो पर भारत आज भी अविचल और अडिग है। स्थिर है और संपूर्ण है। कितने ही आक्रांता आए और आकर चले गए। हम अपने शाश्वत सिद्धांतों पर लगातार चलते जा रहे हैं। मध्यप्रदेश सरकार भी तो यही समझाने का प्रयास कर रही है कि केवल और केवल सत्य के मार्ग पर चलिए। अन्य विचारों से गुमराह होकर सत्कर्म के मार्ग से विमुख होंगे तो फिर दंड भी आपको ही भोगना पड़ेगा। भारत अभी घोषित युद्ध के दौर में नहीं पहुंचा है इसलिए शायद नंदलाला के जीवनदर्शन की ये पुकार भटके हुए नौजवानों और नागरिकों का पुण्य मार्ग प्रशस्त करेगी।
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संविधान से सदियों पुराना कर्म सिद्धांत
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जीपीएफ के धन से जेल में चला सट्टे का शेयर बाजार
उज्जैन,(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर) केंद्रीय भैरवगढ़ जेल की पूर्व अधीक्षक उषा राज, फर्जी मुंशी जगदीश परमार आदि का एक गिरोह जेल में समानांतर अर्थव्यवस्था चला रहा था.जीपीएफ के धन से काली कमाई के लिए इस गिरोह ने सट्टे का कारोबार चला रखा था। ऊषा ने जगदीश को जेल के कैदियों को तंबाकू, बीड़ी, सिगरेट, हशीश, गांजा, शराब और मटन मोटी कीमत पर बेचने का ठेका भी दिया था। तत्कालीन जेल अधीक्षक के संरक्षण में, जगदीश का वास्तव में जेल मामलों का पूरा कंट्रोल था एक तरह से वही पूरा जेल अधीक्षक बन गया था।
उषा और जगदीश दोनों वर्तमान में क्रमशः जिला जेल, इंदौर और महिदपुर उप-जेल में बंद हैं। वे शुरू में केंद्रीय भैरवगढ़ जेल में अपनी शाखाओं को फैलाने वाले 15 करोड़ रुपये के डीपीएफ/जीपीएफ गबन मामले में मुख्य आरोपी के रूप में दोषी पाए गए हैं। 15 दिन की पुलिस रिमांड के दौरान इनके खिलाफ बंदियों से रंगदारी के दो और मामले भी दर्ज किए गए हैं।
इस बीच, शहर का एक व्यवसायी, जो जेल में एक विचाराधीन कैदी था और हाल ही में रिहा हुआ था, ने बताया कि जेल में सक्रिय कॉकस ने अपनी आपराधिक शैली से जेल को नरक में बदल दिया था। जगदीश बलात्कार के आरोप में लगभग 18 महीने तक वहीं रहा था, हालांकि बाद में उसे सबूतों के अभाव में बरी कर दिया गया था। सितंबर 2021 में जब उषा राज ने पदभार संभाला, तो उसने यू ट्यूब समाचार चैनल रिपोर्टर होने के नाते धीरे-धीरे उनके साथ निकटता अर्जित की।
बाद में उषा और जगदीश दोनों की करीबियां बढ़ती गईं । सूत्रों से पता चला है कि बाहर से जेल प्रहरियों के जरिए लाए गए तंबाकू, बीड़ी, सिगरेट, चरस, गांजा, शराब और मटन को बंद कर दिया गया . दरअसल, जगदीश को ऐसी प्रतिबंधित सामग्री का 40 हजार रुपए प्रतिदिन के हिसाब से ठेका मिला था। वह इन सामानों को अपने साथियों के जरिए जरूरतमंद कैदियों को बेचता था। बाजार में 5 रुपये में मिलने वाली तंबाकू की थैली 500 रुपये में बिक रही थी। इसी तरह बाजार में 200 रुपये में मिलने वाली मीडियम रेंज की व्हिस्की का एक चौथाई हिस्सा 2 हजार रुपये में बिक रहा था।
सूत्रों के मुताबिक अगर किसी के पास पर्याप्त पैसा होता तो सब कुछ जेल के अंदर उपलब्ध होता। कॉकस ने टेलीफोन एक्सचेंज चलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई जिसके लिए 6 मिनट के लिए 100 रुपये लिए गए। जगदीश कैदियों और जेल में आने वाले नए बंदियों की पारिवारिक पृष्ठभूमि खंगालने में माहिर था।इसी वजह से वह उन्हें अच्छी बैरक दिलवाने के एवज में खासा धन वसूलता था।शुरुआत में बंदियों को उन्हें लगभग 4×6 कक्षों में रखा जाता था जहां लगभग हवा या धूप नहीं होती थी। उषा ऐसे लोगों के इलाज के लिए अंदर पर्ची भेजती थी जिन्हें बाद में चप्पलों से पिटवाकर बैरक से घसीट कर कोठरियों में ले जाया जाता था। जेल नियमों का सरेआम माखौल उड़ाते हुए जगदीश शाम के बाद भी अपना मोबाईल लेकर जेल के भीतर आता जाता रहता था। जेल महानिदेशक जेल अरविंद कुमार ने स्वीकार किया कि ऐसी सभी बातें संज्ञान में हैं. उन्होंने कहा, ‘दरअसल हमने पूरे मामले की जांच के लिए एक उच्च स्तरीय कमेटी का गठन किया है, लेकिन इससे पहले कि वे जेल जाते, डीपीएफ-जीपीएफ घोटाला सामने आ गया।’ उनके अनुसार, वे अनियमित तरीके से पैरोल देने संबंधी शिकायतों पर कार्रवाई कर रहे हैं। इसी तरह सेंट्रल जेल में लंबे समय से तैनात कुछ जेल कर्मचारियों के खिलाफ विभागीय जांच शुरू कर दी गई है. डीजी ने कहा कि उन्हें जल्द ही अन्यत्र स्थानांतरित कर दिया जाएगा।
घोटाले की जांच कर रही एसआईटी के प्रमुख एएसपी इंद्रजीत बाकलवार ने कहा कि उषा राज के खिलाफ भ्रष्टाचार निरोधक अधिनियम के तहत मामला पहले ही दर्ज किया जा चुका है. उन्होंने कहा कि आवश्यक कार्रवाई करने के लिए आयकर विभाग को पत्र भेजे गए हैं।