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  • बीना में पचास हजार करोड़ रुपयों की एथिलीन क्रेकर परियोजना का काम शुरु

    बीना में पचास हजार करोड़ रुपयों की एथिलीन क्रेकर परियोजना का काम शुरु


    भोपाल,12 फरवरी (प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)।प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 14 सितंबर 2023 को बीना में लगभग 50 हजार करोड़ रुपये की लागत वाली जिस एथिलीन क्रैकर परियोजना की आधारशिला रखी थी उसके लिए नए केन्द्रीय बजट में आवश्यक प्रावधान कर दिया गया है। इंजीनियर्स इंडिया लिमिटेड की कंसल्टेंसी में प्रोजेक्ट का काम यहां जोरों शोरों से चालू है। राज्य सरकार इस परियोजना को सफल बनाने के लिए आवश्यक सुविधाएं जुटाने का प्रयास भी कर रही है।


    बीना रिफायनरी के सहयोगी प्रतिष्ठान के रूप में ये प्रोजेक्ट देश को दुनिया के पेट्रोकेमिकल क्षेत्र में प्रमुख स्थान दिलाएगा। केन्द्रीय बजट में बीना पेट्रोलियम क्रेकर्स परियोजना को लगभग पचास हजार करोड़ रुपए जुटाने की मंजूरी मिल गई है। भारत पेट्रोलियम कार्पोरेशन लिमिटेड BPCL की सागर जिले स्थित बीना रिफाइनरी (Bina Refinery) के विस्तार और वहां ₹49,000 करोड़ से अधिक की लागत से एक विश्वस्तरीय पेट्रोकेमिकल्स कॉम्प्लेक्स स्थापित करने का काम चल रहा है । यह परियोजना ‘मेक इन इंडिया’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ के तहत भारत को तैयार पेट्रोकेमिकल प्रोडेक्ट का आयात कम करने और निर्यात बढ़ाने में प्रमुख भूमिका निभाएगी।


    प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने जब इस परियोजना की आधारशिला रखी थी तब किसी को ये अनुमान नहीं था कि इतनी जल्दी ये परियोजना आकार ले लेगी। प्रदेश के कुछ सांसदों और विधायकों ने इस परियोजना को अन्यत्र स्थानांतरित किए जाने की लाबिंग भी की थी। शासन के कुछ अधिकारियों ने इसके लिए तमाम तर्क दिए थे,लेकिन प्रधानमंत्री कार्यालय ने कहा कि इस परियोजना का कच्चा माल नेप्था बीना रिफायनरी से ही प्राप्त होता है। यहां स्थित टाऊनशिप भी काफी सुविधाजनक है। जमीन उपलब्ध है। सरकार का अमला मुआवजे आदि की प्रक्रियाएं भी पूरी कर चुका है। ऐसे में परियोजना को जल्दी पूरा करने के अलावा कोई सोच विचार नहीं किया जा सकता।


    बीना पेट्रोकेमिकल परियोजना की मुख्य बातें:
    परियोजना लागत: लगभग ₹49,000 करोड़ (लगभग ₹52,000 करोड़ तक अनुमानित) के निवेश से 1.2 MTPA एथिलीन क्रैकर यूनिट स्थापित की जा रही है।
    क्षमता विस्तार: परियोजना में रिफाइनरी की क्षमता 7.8 MTPA से बढ़ाकर 11 MTPA करने का प्रावधान शामिल है।
    उत्पादन: यह परियोजना Linear Low-density Polyethylene (LLDPE), High-density Polyethylene (HDPE), Polypropylene (PP) और अन्य पेट्रोकेमिकल उत्पादों का उत्पादन करेगी।
    रोजगार: निर्माण चरण में 15,000 से अधिक और चालू होने के बाद 1 लाख से अधिक प्रत्यक्ष/अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर पैदा होंगे।


    इस परियोजना का उद्देश्य बुंदेलखंड क्षेत्र को औद्योगिक केंद्र बनाना और आयात पर निर्भरता कम करना है। परियोजना के लिए भारत सरकार (SBI के नेतृत्व में) और मध्य प्रदेश सरकार (औद्योगिक प्रोत्साहन के माध्यम से) वित्तीय सहायता व बुनियादी ढांचा प्रदान कर रही हैं। यह परियोजना 2028 तक चालू होने की उम्मीद है।

  • बीना रिफायनरी से ज्यादा धंधा कर रही रिलायंस

    बीना रिफायनरी से ज्यादा धंधा कर रही रिलायंस

    भोपाल,26 मई(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर)। भारत की सरकारी तेल रिफायनरियां नियमों से बंधे होने की वजह से बाजार की रपटीली राहों पर फिसड्डी साबित हो रहीं हैं।इसकी तुलना में निजी रिफायनरीज ज्यादा अच्छा धंधा कर रहीं हैं। मसलन भारत पेट्रोलियम या इंडियन ऑइल, कच्चे तेल से बने उत्पाद – माने पेट्रोल-डीज़ल निर्यात नहीं कर सकते. वहीं, निजी रिफाइनरीज़ पर ऐसा कोई प्रतिबंध नहीं है. उन्हें बस 65 हज़ार पेट्रोल पंप्स में से 10 हज़ार में तेल की सप्लाई देने की बाध्यता है. उसके बाद वो चाहे जहां तेल बेच सकती हैं. रूस-यूक्रेन जंग से पहले, रिलायंस और नायरा जैसी निजी रिफाइनरियों को इंटरनैशनल मार्केट से कच्चा तेल ख़रीदना पड़ता था, जो कि रूसी तेल की तुलना में काफी महंगा था. अब ये दोनों रिफाइनरियां रियायती दरों पर रूस से तेल आयात करती हैं. और विदेश में माल बेचकर भयानक मुनाफ़ा कमाती हैं.

    नायरा गुजरात में स्थित है, लेकिन अप्रत्यक्ष रूप से कंपनी का स्वामित्व, प्रमुख रूसी तेल कंपनी रॉसनेफ्ट के पास है. रॉसनेफ्ट ने 2017 में रुइया समूह से एस्सार रिफाइनरी को क़रीब 105 करोड़ रुपए में ख़रीद लिया था. विशेषज्ञ इस बात को भी रेखांकित करते हैं कि रिलायंस का पहले से ही रूसी कंपनियों से अच्छा संपर्क है.

    बीना रिफायनरीज के एक प्रमुख सूत्र ने बताया कि भारत सरकार रूस पर लगे अंतर्राष्ट्रीय प्रतिबंधों की वजह से न तो उसका तेल खरीद की अनुमति दे सकती है न ही वह खुद रशिया से कोई कारोबार कर सकती है। जबकि निजी कंपनियों के सामने ऐसी कोई बाध्यता नहीं है। भारत की निजी कंपनियों ने जिस तरह विदेशी परिवहन के क्षेत्र में अपने कदम बढ़ाए हैं उससे भारतीय कंपनियों का विदेशी कारोबार तेजी से बढ़ा है। यही वजह है कि चाहे रिलायंस हो या नायरा दोनों के कारोबार में भारत सरकार कोई दखल नहीं दे सकती है। यही नहीं उसे इन कंंपनियों के कारोबार को सफल बनाने के लिए सुरक्षा के प्रबंध भी करने हैं। यही वजह है कि मुक्त बाजार की अर्थव्यवस्था का ये मसला आज वैश्विक प्रतिबंधों पर भारी पड़ रहा है।