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  • एक्सिस बैंक में बीमा की आड़ में ठगी का खेल

    एक्सिस बैंक में बीमा की आड़ में ठगी का खेल


    पचास लाख रुपए की एफडी करने के बजाए राशि को बीमा में लाक कर दिया


    भोपाल,19 फरवरी(प्रेस इंफार्मेशन सेंटर) भारत के मुद्रा बाजार में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाने के लिए एक्सिस बैंक ने इन दिनों आम निवेशकों को लूटने का अभियान चला रखा है। अपना संचालन खर्च घटाने के लिए बैंक ने ऐसे नए युवाओं को फील्ड में उतार दिया है जो निवेशकों के भरोसे से खिलवाड़ करके उन्हें ठगने का काम कर रहे हैं। हाल ही में बैंक की बिलासपुर शाखा में ऐॅसी ही ठगी की शिकार प्रोफेसर ने पुलिस का दरवाजा खटखटाया है। उसके साथ पचास लाख रुपए की धोखाघड़ी की गई है।


    सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार रसायन शास्त्र की एक प्राध्यापिका ने अपनी बेटी का भविष्य सुरक्षित करने के लिए एक्सिस बैंक बिलासपुर में राजकिशोर नगर शाखा में पचास लाख रुपए जमा किए थे। बैंक के अधिकारियों का कहना था कि शाखा के आला अधिकारी इस राशि को कहीं निवेश कराने के लिए दबाव बना रहे हैं। इस पर प्राध्यापिका ने एफडी कराने के लिए सहमति दे दी। इस पर बैंक मैनेजर चेतन श्रीवास ने अपने कर्मचारी रोहिणी वल्लभ साहू को भेजकर प्रोफेसर से कहलवाया कि वे बैंक का एप डाऊनलोड करवा लें तो ओटीपी के माध्यम से एफडी की प्रक्रिया पूरी की जा सकेगी। बैंक कर्मचारी ने प्रोफेसर का मोबाईल लिया और कहा कि वह इस पर बैंक का एप डाऊनलोड कर रहा है। इस बीच उसने मैक्स लाईफ की पालिसी की सहमति के लिए ओटीपी बुला लिया और ओके करके मोबाईल वापस प्रोफेसर को लौटा दिया। प्रोफेसर को लगा कि उनकी रकम बैंक के कर्मचारी ने एफडी में लगा दी है।उन्हों इस बीमे के बारे में कोई जानकारी नहीं दी गई।


    कुछ हफ्तों बाद जब प्रोफेसर के घर के पते पर पालिसी डिलीवर हुई तो उन्हें पता चला कि उनकी रकम बैंक ने बीमा कंपनी में निवेश कर दी है। उन्होंने पता किया तो बैंक के कर्मचारी ने बताया कि मैक्स लाईफ इंश्योरेंस एक तरह से एक्सिस बैंक की ही सहयोगी फर्म है। उनका पैसा भले ही बीमे में रखा है लेकिन उन्हें ब्याज भी मिलेगा और जब चाहेंगी रकम मात्र पाच हजार रुपए का शुल्क चुकाकर वापस मिल जाएगी। इसके बाजवूद प्रोफेसर बैंक गई और कहा कि उन्होंने रकम एक्सिस बैंक की एफडी में निवेश की है मैक्स लाईफ में नहीं। इस पर बैंक मैनेजर ने कहा कि दोनों ही सहयोगी कंपनियां हैं इसलिए उनकी रकम पर एफडी की ही तरह ब्याज मिलता रहेगा।


    प्रोफेसर ने बैंक मैनेजर से कहा कि मुझे अपनी रकम बीमा में निवेश नहीं करनी, मैं तो अपनी आय पर पूरा कर देती हूं मुझे किसी प्रकार की छूट नहीं चाहिए। मैं तो ये रकम अपनी बेटी की शादी के लिए बचाकर रखना चाहती हूं। बैंक के अधिकारियों ने उन्हें कहा कि उन्हें अपना टारगेट पूरा करना पड़ता है। इसलिए हम खाते को बीमा राशि दिखाकर वापस ले लेते हैं। अब जबकि प्रोफेसर को अपनी बेटी की शादी की तैयारी के लिए रकम की जरूरत पड़ी तो उन्होंने बैंक से संपर्क किया। उन्हें बताया गया कि उनकी रकम लाक हो गई है और समय अवधि पूरा होने पर ही वापस मिलेगी। इस पर प्रोफेसर हतप्रभ रह गईं और उनकी मनःस्थिति गड़बड़ा गई। उन्हें लगा कि अब बेटी की पढ़ाई, रोजगार और शादी के लिए उन्हें कर्ज लेना पड़ेगा।


    प्रोफेसर ने अपने साथ हुई इस धोखाघड़ी की शिकायत बैंक मैनेजर के अलावा पुलिस महानिरीक्षक बिलासपुर को भी की है। उन्होने पुलिस से निवेदन किया है कि मुझे अंधेरे में रखकर बैंक के कर्मचारियों ने धोखाघड़ी की है। लोगों ने बताया कि इस तरह की धोखाघड़ी बैंक के लोग अपने सैकड़ों ग्राहकों से कर चुके हैं । पुलिस ने शिकायत मिलने के बाद जांच शुरु कर दी है। बैंक के अधिकारी अब कह रहे हैं कि वे बीमा कंपनी से बात कर रहे हैं ताकि प्रोफेसर की रकम वापस दिला सकें। बीमा कंपनी का कहना है कि उन्होंने बीमा राशि को बाजार में निवेश कर दिया है। इस संबंध में वह बैंक को उसका कमीशन भी दे चुके हैं,इसलिए पूरी राशि वापस करने के लिए हेड आफिस से अनुमति लेनी होगी।


    मैक्स लाईफ बीमा कंपनी के भोपाल रीजन के मैनेजर ललित कुदेसिया का कहना है कि ये मामला एक्सिस बैंक की शाखा में घटित हुआ है। हमारी कंपनी ने इसमें कोई कार्रवाई नहीं की है। बैंक ने कहा तो हमने बीमा कर दिया। इस संबंध में किसी भी कार्रवाई के लिए आपको बैंक से ही संपर्क करना चाहिए। इधर एक्सिस बैंक भोपाल के मैनेजर विपिन तिवारी का कहना है कि बैंक की बिलासपुर शाखा ने ये बीमा किया है। उसे एफडी करना थी या बीमा इस संबंध में केवल वहीं के मैनेजर कुछ बता सकते हैं। आपने हमें सूचना दी है तो हम अपने मुंबई मुख्यालय को सूचना भेज देंगे। जब उनसे पूछा गया कि एक्सिस बैंक में इस तरह की धोखाघड़ी क्यों की जा रही है तो उन्होंने साफ इंकार करते हुए कहा कि हमारी ब्रांच में इस तरह की धोखाघड़ी नहीं होती। जब उनसे इस ब्रांच में इसी तरह के एक प्रकरण के बारे में पूछा गया तो वे बगलें झांकने लगे।दरअसल एक्सिस बैंक प्रबंधन ने ही अपने कर्मचारियों और अधिकारियों को बीमा बेचने का टारगेट दे रखा है जिसे पूरा करने के लिए वे ग्राहकों को गुमराह करके उनकी पूंजी बीमा योजना में जमा करवा देते हैं।

    सूत्र बताते हैं कि एक्सिस बैंक अपनी जमा राशियों को टैक्स से बचाने के लिए और आय न दिखाने के लिए मैक्स लाईफ के अलावा अन्य बीमा कंपनियों में भी निवेश दिखाता है। इससे उसे टैक्स में छूट भी मिल जाती है और कम ब्याज पर रकम भी मिल जाती है।सेबी ने हालांकि इस तरह की धोखाघड़ी रोकने के लिए सख्त दिशा निर्देश जारी किए हैं। इस तरह की धोखाघड़ी को संज्ञान में लेते हुए रिजर्व बैंक ने भी गाईडलाईन जारी की हैं। जानकारी के अभाव में आम उपभोक्ता इस तरह की घोखाघड़ी के शिकार हो रहे हैं। यह प्रकरण सेबी और बैंकिंग लोकपाल की निगाह में भी लाया जा रहा है। देखना है कि धोखाघड़ी के इस साफ प्रकरण में पुलिस क्या कार्रवाई करती है और पीड़िता को न्याय कैसे दिलाएगी।

  • बीमा योजना से कर्मचारियों की चिकित्सा प्रतिपूर्ति बंद

    बीमा योजना से कर्मचारियों की चिकित्सा प्रतिपूर्ति बंद


    मंत्रि-परिषद के निर्णय 

    भोपाल,4 जनवरी(प्रेस सूचना केन्द्र)। कमल नाथ की अध्यक्षता में आज मंत्रालय में हुई मंत्रि-परिषद की बैठक में मुख्यमंत्री कर्मचारी स्वास्थ्य बीमा योजना को लागू करने का निर्णय लिया गया। योजना से लगभग 12 लाख 55 हजार कर्मचारी/अधिकारी लाभांवित होंगे।बीमा योजना लागू होने से कर्मचारियों को दी जाने वाली चिकित्सा प्रतिपूर्ति की व्यवस्था बंद कर दी जाएगी।

    इस योजना का लाभ प्रदेश के सभी नियमित शासकीय कर्मचारी, सभी संविदा कर्मचारी, शिक्षक संवर्ग, सेवानिवृत्त कर्मचारी, नगर सैनिक, आकस्मिक निधि से वेतन पाने वाले पूर्ण कालिक कर्मचारियों और राज्य की स्वशासी संस्थाओं में कार्यरत कर्मचारियों को मिलेगा। इसके अलावा निगम/मण्डलों में कार्यरत कर्मचारियों एवं अखिल भारतीय सेवा के अधिकारियों के लिए योजना वैकल्पिक होगी।

    मुख्यमंत्री कर्मचारी स्वास्थ्य बीमा योजना में बाहय रोगी ओपीडी के रूप में प्रतिवर्ष 10 हजार रूपये तक का नि:शुल्क उपचार अथवा नि:शुल्क दवाओं का वितरण किया जाएगा। सामान्य उपचारों के लिए प्रत्येक परिवार को प्रतिवर्ष 5 लाख रूपये और गंभीर उपचारों के लिए 10 लाख रूपये तक की नि:शुल्क चिकित्सा सुविधा प्राप्त होगी। दस लाख से अधिक के उपचार के लिए राज्य स्तरीय मेडिकल बोर्ड द्वारा विशेष अनुमति दी जा सकेगी।

    मंत्रि-परिषद ने महिला-बाल विकास विभाग द्वारा शत-प्रतिशत सहायित भारत सरकार की योजना वन स्टाप सेन्टर को प्रदेश के 51 जिलों में संचालित एवं निरंतर रखने की मंजूरी दी। इसके लिये 560 नये पद सृजित करने की भी मंजूरी दी गयी।

    मंत्रियों का स्वेच्छानुदान अब एक करोड़

    मंत्रि-परिषद ने मंत्रियों की वार्षिक स्वेच्छानुदान की राशि 50 लाख से बढ़ाकर एक करोड़ रूपये करने की मंजूरी दी। इसी प्रकार, राज्य मंत्रियों की वार्षिक स्वेच्छानुदान राशि को 35 लाख से बढ़ाकर 60 लाख किया गया है।